दृश्य, गति और थीम की सेटिंग
न
- न
- आत्मा में कोई विकार नहीं होता
- न अतिबोधः न मूढता
- न कोई अति-पांडित्य का घमंड है और न कोई मूर्खता
- न अरण्यम्
- और न जंगल की ओर (पलायन के लिए) भागता है
- न अहं कर्ता
- मैं कर्ता नहीं हूँ
- न अहं देहः
- मैं देह नहीं हूँ
- न अहम् देहः
- न मैं यह शरीर हूँ
- न आगन्ता
- कहीं से आने वाला नहीं
- न आत्मा भावेषु
- आत्मा देह आदि भावों में नहीं है
- न आश्चर्यम् न एव च क्षोभः
- न किसी घटना पर कोई आश्चर्य होता है और न कोई मानसिक क्षोभ
- न उद्विग्नम् न च सन्तुष्टम्
- न किसी दुख से उद्विग्न और न विषय-सुख से संतुष्ट
- न उन्मीलति न मीलति
- और न वह आँखें खोलता है न मूँदता है (वह तुरीय में रहता है)
- न एव प्रपश्यति
- वह तनिक भी नहीं देखता
- न औद्धत्यम् न च दीनता
- न कोई घमंडी उद्धतता होती है और न कायरता भरी दीनता
- न करोति सः करोति
- वह कर्म न करता हुआ भी कर्म का फल भोगने हेतु कर्ता ही है
- न कल्पते न जानाति
- वह न कोई कल्पना करता है और न ज्ञेय पदार्थों को जानता है
- न किं गुरुः
- क्या वह गुरु नहीं? (पुस्तक का शब्दार्थ: गुरु नहीं)
- न किञ्चन
- कुछ नहीं
- न किञ्चित्
- वास्तव में (पारमार्थिक रूप से) कुछ भी नहीं है
- न किञ्चित् इति निश्चयी
- वास्तव में इसका कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं है—ऐसा दृढ़ निश्चय रखने वाला
- न किञ्चित् इति निश्चितः
- जिसका यह दृढ़ निश्चय है कि 'संसार में कुछ भी स्वतंत्र सत्य नहीं है'
- न किञ्चित् इव शाम्यति
- परम मौन और शांति में विलीन हो जाता है
- न किञ्चित् न च किञ्चन
- वह न कुछ विशेष है और न कुछ भी नहीं है (वह समस्त विकल्पों से परे है)
- न कृतम्
- क्या नहीं किया गया?
- न गन्ता
- कहीं जाने वाला नहीं
- न च किञ्चन
- कुछ भी नहीं
- न च क्षतिः
- और न हानि
- न च सङ्कोचात्
- और न किसी संकुचन या कठिन प्रयास से मिलने वाला है
- न च स्तौति
- और न किसी की चापलूसी या स्तुति करता है
- न जागर्ति
- वह न तो संसारी अज्ञानियों की तरह जागता है
- न जानाति
- तनिक भी नहीं जानता (वह इन सबसे पार हो चुका है)
- न तुष्यति न कुप्यति
- न प्रसन्न होता है न क्रोध करता है
- न ते सङ्गः अस्ति केन अपि
- तेरा किसी के साथ भी संग नहीं है
- न त्यागः न ग्रहः लयः
- न त्याग, न ग्रहण, न लय
- न ददाति न गृह्णाति
- न अहंकार से कुछ देता है और न लोभ से कुछ लेता है
- न दुःखाय च तुष्टये
- न दुख के लिए है और न संतोष के लिए
- न दुष्टम् अपि निन्दति
- और न किसी दुष्ट मनुष्य की निंदा करता है
- न दूरम्
- न तो कहीं दूर है
- न द्वैतं पश्यतः
- द्वैत न देखते हुए
- न निद्राति
- न वह अज्ञान की नींद में सोता है
- न निन्दति
- वह न तो किसी की बुराई या निंदा करता है
- न भयम् तस्य कुत्रचित्
- उसे कहीं भी भय नहीं
- न भासते
- नहीं भासता
- न मम अस्ति
- मुझे नहीं है
- न मानः न अवमानता
- न कोई मान (सम्मान) होता है और न कोई अपमान
- न मुञ्चति न गृह्णाति
- न छोड़ता है न पकड़ता है
- न मुमुक्षुः न च इतरः
- वह न मुक्ति की इच्छा वाला है और न बद्ध (संसारी)
- न मुमुक्षुः न वा मुक्ता
- न वह मोक्ष चाहने वाला है और न मुक्त हुआ कोई व्यक्ति है
- न मृतः न च जीवति
- वह न तो मरा हुआ है और न साधारण रूप से जीवित है (वह इन दोनों के पार है)
- न मे देहः
- और न यह शरीर मेरा है
- देह मेरा नहीं है
- न मे वृद्धिः
- मेरी वृद्धि नहीं
- न लिप्यते
- कर्मफलों के बंधन में लिप्त नहीं होता
- न वा क्षतिः
- और न कोई हानि ही होती है
- न वा विषय-लोलुपः
- और न वह विषयों का लोलुप (आसक्त) होता है
- न वाञ्छति न शोचति
- न भविष्य की इच्छा करता है और न अतीत का शोक करता है
- न विक्षेपः न च एकाग्र्यम्
- न मन का कोई भटकाव (विक्षेप) है और न एकाग्रता का हठ
- न विरक्तः न रागवान्
- वह पुरुष न विरक्त है और न रागी (वह इन दोनों से परे है)
- न विरक्तः न सङ्गवान्
- न वह वैरागी है और न आसक्त (संगी) है
- न विश्रान्तम् अभूत् मनः
- मन विश्राम नहीं पा सका
- न विषादता
- और न (प्रतिकूलता में) विषाद (शोक) होता है
- न शक्ताः ते
- और जो भागने में असमर्थ होते हैं वे
- न शृणोति न पश्यति
- और न वह कान या आँख से विषयों में लिप्त होकर सुनता या देखता है
- न शोचति
- शोक नहीं करता
- न सन्देहः
- इसमें तनिक भी संशय नहीं है
- न सुखम् न च वा दुःखम्
- और न सांसारिक सुख है और न कोई दुख
- न सुखी न च वा दुःखी
- न वह सांसारिक रूप से सुखी है और न दुखी है
- न स्पृहा न विरक्तिः वा
- न उसके अंदर किसी वस्तु की चाह है और न किसी से कोई द्वेष या विरक्ति
- न स्मरति
- याद नहीं करता (उनका अहंकार या पश्चाताप नहीं पालता)
- न स्वर्गः न एव नरकः
- न स्वर्ग है और न नरक ही है
- न हर्षम् उपगच्छति
- हर्ष को प्राप्त नहीं होता
- न हिंसा न एव कारुण्यम्
- न तो किसी के प्रति हिंसा का भाव होता है और न अहंकार-युक्त दया
- न हृष्यति न कुप्यति
- न प्रशंसा पाकर खुश होता है और न अपमान पर क्रोधित होता है
- न हर्षित होता है न कुपित
- नरे नार्याम्
- पुरुष में और स्त्री में
- नष्टानि
- नष्ट हुए हैं
- नाना मतम्
- अनेक प्रकार के मत
- नाना-विचार-सुश्रान्तः
- अनेक प्रकार के मानसिक तर्कों और विचारों से भलीभाँति थककर
- नाना-शास्त्राणि अनेक-शः
- अनेक प्रकार के शास्त्रों का बार-बार
- नानाश्चर्यम् इदम् विश्वम्
- अनेक आश्चर्यों और विचित्रताओं से भरा यह विश्व
- नाम-मात्र-विजृम्भितम्
- केवल नामों और कल्पनाओं का ही फैलाव है
- नालाभेन अनुशोचति
- और न किसी हानि या अलाभ पर शोक करता है
- नाश-उल्लासौ विहाय
- हानि के शोक और लाभ के उल्लास को त्यागकर
- निःशङ्कः युक्त-मानसः
- संशय-रहित और अपनी आत्मा में नित्य समाहित ज्ञानी
- निःसङ्कल्पः
- समस्त संकल्प-विकल्पों से रहित होकर
- निःसङ्गः
- संग-रहित
- निःस्पृहम् मानसम्
- इच्छा-रहित मन
- निःस्वभावस्य योगिनः
- और जो किसी भी सीमित स्वभाव या गुण से रहित है, उस योगी के लिए
- निजम् रूपम्
- अपना स्वरूप
- नित्यम्
- सदा
- नित्यम् असंसक्त-मनाः
- वह सदा अनासक्त मन वाला होकर
- नित्यम् एकाकी रमते
- और जो नित्य अपने अद्वितीय आत्म-स्वरूप में ही रमण करता है
- नित्यानित्यविवेकिनः
- नित्य और अनित्य का विवेक करने वाले का
- निद्रितः बोधितः इव
- जैसे सोए हुए व्यक्ति को जगाने पर वह स्वप्न को तुरंत भूल जाता है
- निन्दायाम्
- निंदा में
- निन्दितम्
- निंदित
- निन्द्यमानः न कुप्यति
- और निंदा किए जाने पर तनिक भी क्रोधित नहीं होता
- निमेष-उन्मेषयोः अपि व्यापारे
- पलकों के खोलने-मूँदने मात्र के व्यापार में भी
- निम्ब-पल्लवाः
- कड़वे नीम के पत्तों से कभी आकर्षित नहीं होता
- निरञ्जनः
- निर्दोष
- निर्दोष, उपाधियों से रहित
- निर्दोष, निर्मल
- निरन्तरम्
- सदा
- निरपेक्षः
- अपेक्षा-रहित
- किसी की अपेक्षा या पराधीनता से रहित होकर
- निरपेक्षम् भवेत्
- अपेक्षा-रहित और निष्काम हो जाता है
- निरस्त-कल्पनाः धीराः
- समस्त मानसिक कल्पनाओं से मुक्त ज्ञानी पुरुष
- निरस्त-सर्व-आशम् चित्तम्
- समस्त आशाओं और कामनाओं से रहित हुआ चित्त ही
- निरहङ्कार-धीरेण
- किंतु अहंकार-शून्य ज्ञानी पुरुष द्वारा
- निरहङ्कारः
- अहंकार से रहित
- निराकारः
- आकार-रहित
- निराकारम्
- निराकार (आत्म-तत्त्व)
- निरायासः
- मानसिक तनाव और आंतरिक श्रम से रहित
- निरावरण-दृष्टयः
- जिनकी दृष्टि का अज्ञान रूपी पर्दा पूरी तरह हट चुका है, वे
- निराशः बुधः शोभते
- आशा-तृष्णा से रहित ज्ञानी पुरुष परम सुशोभित होता है
- निराशम् गत-सन्देहम्
- आशा-तृष्णा से मुक्त और समस्त संशयों से परे
- निराशिषः
- आशा-रहित का
- निराशेन गत-आर्तिना
- आशा-रहित और समस्त संतापों (पीड़ाओं) से मुक्त ज्ञानी द्वारा
- निरोध-आदीनि कर्माणि
- मन के निरोध और ध्यान आदि साधना के कर्मों को
- निरोध-ऐकाग्र्य-सिद्धये
- चित्त के निरोध और एकाग्रता की सिद्धि के लिए
- निर्द्वन्द्वः एवम् एव व्यवस्थितः
- द्वंद्वों से मुक्त होकर सहज रूप से स्थित रहता है
- निर्द्वन्द्वः छिन्न-संशयः
- द्वंद्वों से मुक्त और जिसके समस्त संशय कट चुके हैं
- निर्द्वन्द्वस्य
- द्वन्द्वों (सुख-दुख) से रहित का
- निर्ध्यातुम् चेष्टितुम् वा अपि
- ध्यान करने में अथवा लौकिक कर्म की चेष्टा करने में
- निर्ध्यायति विचेष्टते
- सहज ध्यानस्थ रहता है और सहज क्रियाएँ करता है
- निर्भरः
- चिद्घन, पूर्ण (पुस्तक में ‘चिद्घन-रूप’)
- निर्ममः
- ममता (मेरेपन के भाव) से सर्वथा रहित
- ममत्व (मेरे-पन) से रहित होकर
- निर्ममः निरहङ्कारः
- जो ममता (मेरापन) और अहंकार (मैं-भाव) से सर्वथा रहित है
- निर्ममः निरहङ्कारः निष्कामः
- ममता-रहित, अहंकार-शून्य और समस्त कामनाओं से मुक्त होकर
- निर्वासनः
- समस्त वासनाओं और कामनाओं से रहित होकर
- निर्वासनम् हरिम् दृष्ट्वा
- वासना-रहित ज्ञानी रूपी सिंह को देखकर
- निर्वासनात् ऋते कः अन्यः
- वासना-रहित ज्ञानी के सिवा दूसरा कौन ऐसा हो सकता है?
- निर्विकल्पः
- वह समस्त द्वैत और संशयों से रहित
- निर्विकल्पम् निरायासम्
- जो संकल्प-विकल्प से रहित, बिना किसी प्रयास के सिद्ध,
- निर्विकल्पे स्थितिः
- निर्विकल्प में स्थिति
- निर्विकारः
- वह विकारों से रहित
- विकार-रहित
- निर्विकारम् निरञ्जनम्
- विकाररहित और सर्वथा निर्मल है
- निर्विकारस्य धीरस्य
- निर्विकार और धैर्यवान ज्ञानी के लिए
- निर्विकाराः निरामयाः
- समस्त विकारों से रहित और समस्त दुखों से मुक्त हो चुके हैं
- निर्विचार-दशा-आस्पदम् वै
- स्पृहा समाप्त होने पर ही निर्विचार शांत अवस्था का वास होता है
- निर्वृत्तौ द्वेषः एव हि
- और हठपूर्वक कर्म त्यागने पर द्वेष पैदा होता है
- निर्वेदम् आपन्नः
- वैराग्य को प्राप्त हुआ
- निर्वेदसमतायुक्त्या
- वैराग्य, समता और युक्ति से
- निर्वेदात्
- विचारपूर्वक उपजे वैराग्य से
- निर्व्याज-आर्जव-भूतस्य
- कपट-रहित परम सरल स्वभाव वाले
- निवृत्ति-फल-भागिनी
- परम त्याग और शांति (निवृत्ति) का ही फल देने वाली होती है
- निश्चलम्
- निश्चल, स्थिर
- निश्चित्य शाम्यति
- ऐसा निश्चय कर शांत हो जाता है
- निषेद्धुम्
- रोकने के लिए
- निष्कामः किम् विजानाति
- वह निष्काम ज्ञानी अब क्या जाने?
- निष्कामः न शान्तम् स्तौति
- निष्काम ज्ञानी न तो किसी शांत (साधु) पुरुष की चापलूसी या स्तुति करता है
- निष्कृत्य
- काटकर
- निष्क्रियः
- क्रिया-रहित
- निष्प्रपञ्चम् निरामयम्
- जो प्रपंचरहित और समस्त विकारों से मुक्त है
- निस्तर्ष-मानसः
- जिसका मन समस्त तृष्णा और प्यास से सर्वथा मुक्त है
- नैराश्ये अपि
- मोक्ष में भी (आशा-रहितता में भी)
- नो भावः तत्र
- देह आदि उसमें नहीं हैं