Bhagavad Gita
श्रीमद्भगवद्गीता
(Śrīmadbhagavadgītā)The divine song of Lord Krishna, spoken on the battlefield of Kurukshetra. It teaches the paths of Karma, Bhakti, and Jnana Yoga. Chapter and verse totals on this site are counted from the library files.
Attributed to Vyasa
मार्गदर्शित अध्ययन
Bhagavad Gita
श्रीमद्भगवद्गीता
भगवद्गीता बताती है कि कर्तव्य, भय और आसक्ति के बीच मनुष्य स्पष्टता से कैसे कर्म करे। कृष्ण अर्जुन को निष्काम कर्म, भक्ति और आत्मज्ञान की ओर ले जाते हैं।
18
अध्याय
701
श्लोक
सूची में दर्ज: 700 श्लोक
श्लोक पाठ पुस्तकालय में
itihasa
स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण
धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।
सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)
६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्थाअपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)
मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।
पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)
व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।
आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)
प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।
भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)
आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।
समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)
दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)
पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।
Bhagavad Gita
श्रीमद्भगवद्गीता
Gita Press Edition (गोरखपुर संवत् 2080)
Gorakhpur Recension with Sridhara Swami Subodhini & Shankaracharya Advaita Bhashya collations.
Gita Press, Gorakhpur / Muktabodha Digital Archive
डिजिटल पुरालेख देखेंStandard 700-verse canonical recension across 18 chapters. Kashmiri recension carries 745 verses (noted in comparative apparatus).
Gorakhpur Recension with Sridhara Swami Subodhini & Shankaracharya Advaita Bhashya collations.
Standard 700-verse canonical recension across 18 chapters. Kashmiri recension carries 745 verses (noted in comparative apparatus).