दृश्य, गति और थीम की सेटिंग
ज
- जगत्
- संसार
- जगत् भाति
- संसार भासता है
- जगत्पोतः
- जगत्-रूपी नौका (शरीर)
- जगदीश्वरम्
- जगत् के ईश्वर (आत्मा) को
- जगद्वीचिः
- जगत्-रूपी लहर
- जडम् विश्वम् असत्
- संसार जड़ और असत् (मिथ्या) है
- जन-आकीर्णम् न धावति
- न तो लोगों से भरी भीड़ की ओर (संग के लिए) दौड़ता है
- जनसमूहे अपि
- लोगों की भीड़ में भी
- जले वीचिः
- जल में लहर
- जागरे अपि न जागर्ति
- और जाग्रत अवस्था में भी साधारण लोगों की तरह नहीं जागता (संसार को सत्य नहीं मानता)
- जाड्ये अपि न जडः
- जड़ता (मौन या निष्क्रियता) में भी वह अज्ञानी या जड़ नहीं होता
- जानन् अपि न जानाति
- जानता हुआ भी (ज्ञाता के अहंकार से) नहीं जानता
- जानानः
- जानने वाला
- जिघ्रन् अश्नन्
- सूँघता हुआ और खाता हुआ
- सूँघते और खाते हुए भी
- जिघ्रन् अश्नन् गृह्णन्
- सूँघते, खाते, हाथ से ग्रहण करते
- जीवः न
- जीव (अहंकारी) नहीं
- जीवने न अभिनन्दति
- और जीने के प्रति कोई विशेष आसक्ति या अभिनंदन नहीं करता
- जीवन्मुक्तः सुखी श्रीमान्
- वह जीवन्मुक्त, सुखी और आत्म-वैभव से संपन्न पुरुष
- जीवन्मुक्तिः च न एव हि
- और जीवन्मुक्ति भी वास्तव में नहीं है
- जीववणिजः
- जीव-रूपी व्यापारी का
- जीववीचयः
- जीव-रूपी तरंगें
- जीविते स्पृहा
- जीने की इच्छा
- ज्ञः स-चिन्तः अपि निश्चिन्तः
- तत्त्वज्ञानी चिंतायुक्त दिखने पर भी भीतर से सर्वथा निश्चिंत है
- ज्ञात-तत्त्वः महाशयः
- जिस उदारचेता महापुरुष ने परम सत्य तत्त्व को जान लिया है
- ज्ञानखड्गेन
- ज्ञानरूपी तलवार से
- ज्ञानदुर्मित्रम्
- ज्ञान के शत्रु (काम) को
- ज्ञानम् अवाप्नोति
- ज्ञान प्राप्त होता है
- ज्ञानम् ज्ञेयम् ज्ञाता
- ज्ञान, ज्ञेय (जानने योग्य) और ज्ञाता
- ज्ञानात् गलित-कर्मा यः
- ज्ञान के कारण जिसके समस्त कर्म विलीन हो चुके हैं