दृश्य, गति और थीम की सेटिंग(इस डिवाइस पर सहेजी जाती हैं)
दृश्य मोड
गति
थीम

आपके डिवाइस की “कम गति” सेटिंग हमेशा मानी जाती है। “केवल पाठ” मोड में कोई सजावटी चित्र या गति नहीं रहती।

ज

29 पद-समूह।

जगत्
जगत् भाति
जगत्पोतः
जगदीश्वरम्
जगद्वीचिः
जडम् विश्वम् असत्
जन-आकीर्णम् न धावति
  • न तो लोगों से भरी भीड़ की ओर (संग के लिए) दौड़ता है (श्लोक 18.100)
जनसमूहे अपि
जले वीचिः
जागरे अपि न जागर्ति
  • और जाग्रत अवस्था में भी साधारण लोगों की तरह नहीं जागता (संसार को सत्य नहीं मानता) (श्लोक 18.94)
जाड्ये अपि न जडः
  • जड़ता (मौन या निष्क्रियता) में भी वह अज्ञानी या जड़ नहीं होता (श्लोक 18.97)
जानन् अपि न जानाति
  • जानता हुआ भी (ज्ञाता के अहंकार से) नहीं जानता (श्लोक 18.90)
जानानः
जिघ्रन् अश्नन्
जिघ्रन् अश्नन् गृह्णन्
जीवः न
जीवने न अभिनन्दति
  • और जीने के प्रति कोई विशेष आसक्ति या अभिनंदन नहीं करता (श्लोक 18.99)
जीवन्मुक्तः सुखी श्रीमान्
  • वह जीवन्मुक्त, सुखी और आत्म-वैभव से संपन्न पुरुष (श्लोक 18.26)
जीवन्मुक्तिः च न एव हि
  • और जीवन्मुक्ति भी वास्तव में नहीं है (श्लोक 18.80)
जीववणिजः
जीववीचयः
जीविते स्पृहा
ज्ञः स-चिन्तः अपि निश्चिन्तः
  • तत्त्वज्ञानी चिंतायुक्त दिखने पर भी भीतर से सर्वथा निश्चिंत है (श्लोक 18.95)
ज्ञात-तत्त्वः महाशयः
  • जिस उदारचेता महापुरुष ने परम सत्य तत्त्व को जान लिया है (श्लोक 18.68)
ज्ञानखड्गेन
ज्ञानदुर्मित्रम्
ज्ञानम् अवाप्नोति
ज्ञानम् ज्ञेयम् ज्ञाता
  • ज्ञान, ज्ञेय (जानने योग्य) और ज्ञाता (श्लोक 2.15)
ज्ञानात् गलित-कर्मा यः
  • ज्ञान के कारण जिसके समस्त कर्म विलीन हो चुके हैं (श्लोक 18.77)