Atharva Veda· Atharvaveda Saṁhitā
18
अध्याय 18 / 20

Kanda 18

काण्ड 18

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पूर्ण अध्याय पाठ89 श्लोक

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अध्याय १८

श्लोक 4.1

पितृमेधः।१-८९ अथर्वा।यमः, मन्त्रोक्ताः, ८१ पितरः, ८८ अग्निः, ८९ चन्द्रमाः।त्रिष्टुप्, १, ४, ७, १४, ३६, ६० भुरिक्, २, ५, ११, २९, ५०-५१, ५८ जगती, ३ पञ्चपदा भुरिगतिजगती, ६, ९, १३ पञ्चपदा शक्वरी (९ भुरिक्, १३ त्र्यवसाना), ८ पञ्चपदाऽतिशक्वरी, १२ महाबृहती, १६-२४ त्रिपदा भुरिङ् महाबृहती, २६, ३३, ४३ उपरिषटाद्बृहती (२६ विराट्), २७ याजुषी गायत्री, २५, ३१-३२, ३८, ४१-४२, ५५-५७, ५९, ६१ अनुष्टुप् (५६ककुम्मती), ३९, ६२-६३ आस्तारपङ्क्तिः, ( ३९ पुरोविराट्, ६२ भुरिक्, ६३ स्वराट्), ४९ अनुष्टुब्गर्भा त्रिष्टुप्, ५३ पुरोविराट् सतः पङ्क्तिः, ६६ त्रिपदा स्वराड् गायत्री, ६७ द्विपदाऽर्ची अनुष्टुप्, ६८, ७१ आसुरी अनुष्टुप्, ७२-७४, ७९ आसुरी पङ्क्तिः, ७५ आसुरी गायत्री, ७६ आसुरी उष्णिक्, ७७ दैवी जगती, ७८ आसुरी त्रिष्टुप्, ८० आसुरी जगती, ८१ प्राजापत्याऽनुष्टुप्, ८२ साम्नी बृहती, ८३-८४ साम्नी त्रिष्टुप्, ८५ आसुरी बृहती, (६७-६८, ७१-८६ एकावसाना), ८६-८७ चतुष्पदा उष्णिक् (८६ ककुम्मती, ८७ शंकुमती), ८८ त्र्यवसाना पथ्यापङ्क्तिः, ८९ पञ्चपदा पथ्यापङ्क्तिः।आ रो॑हत॒ जनि॑त्रीं जा॒तवे॑दसः पितृ॒याणैः सं व॒ आ रो॑हयामि ।अवा॑ड्ढ॒व्येषि॒तो ह॑व्य॒वाह ईजा॒नं यु॒क्ताः सु॒कृतां॑ धत्त लो॒के

pitṛmedhaḥ| 1-89 atharvā| yamaḥ, mantroktāḥ, 81 pitaraḥ, 88 agniḥ, 89 candramāḥ| triṣṭup, 1, 4, 7, 14, 36, 60 bhurik, 2, 5, 11, 29, 50-51, 58 jagatī, 3 pañcapadā bhurigatijagatī, 6, 9, 13 pañcapadā śakvarī (9 bhurik, 13 tryavasānā), 8 pañcapadā'tiśakvarī, 12 mahābṛhatī, 16-24 tripadā bhuriṅ mahābṛhatī, 26, 33, 43 upariṣaṭādbṛhatī (26 virāṭ), 27 yājuṣī gāyatrī, 25, 31-32, 38, 41-42, 55-57, 59, 61 anuṣṭup (56kakummatī), 39, 62-63 āstārapaṅktiḥ, ( 39 purovirāṭ, 62 bhurik, 63 svarāṭ), 49 anuṣṭubgarbhā triṣṭup, 53 purovirāṭ sataḥ paṅktiḥ, 66 tripadā svarāḍ gāyatrī, 67 dvipadā'rcī anuṣṭup, 68, 71 āsurī anuṣṭup, 72-74, 79 āsurī paṅktiḥ, 75 āsurī gāyatrī, 76 āsurī uṣṇik, 77 daivī jagatī, 78 āsurī triṣṭup, 80 āsurī jagatī, 81 prājāpatyā'nuṣṭup, 82 sāmnī bṛhatī, 83-84 sāmnī triṣṭup, 85 āsurī bṛhatī, (67-68, 71-86 ekāvasānā), 86-87 catuṣpadā uṣṇik (86 kakummatī, 87 śaṃkumatī), 88 tryavasānā pathyāpaṅktiḥ, 89 pañcapadā pathyāpaṅktiḥ| ā rohata janitrīṃ jātavedasaḥ pitṛyāṇaiḥ saṃ va ā rohayāmi | avāḍḍhavyeṣito havyavāha ījānaṃ yuktāḥ sukṛtāṃ dhatta loke

हिन्दी अर्थ

भ्रौर अमृतरस से भरे प्रतीत होने लगते ह, ओर उन की सात्विक भ्रमि लाषाएं पुरणं हो जाती है, बल भ्रौर प्राणशक्तियां बढ़ जाता ६१। १०९६ भथरववेद-माष्य कार १८ ।सु०४ (जुहः) चुहू ने (द्याम ) चुलोक को रूप (दाधार) धारण कर लिया, त्मिक कामना को (दुहाम) पूणं करते, सफल करते हं ।

English

Praise him ye Visvāmitras, with oblation. To lengthened life shall be, this Yama, lead us. Mount and ascend to highest heaven, O Rishis: be ye not afraid. Soma-drinkers to you is paid this Soma-lover’s sacrifice. We have attained the loftiest light.

अध्याय १८

श्लोक 4.2

दे॒वा य॒ज्ञमृ॒तवः॑ कल्पयन्ति ह॒विः पु॑रो॒डाशं॑ स्रु॒चो य॑ज्ञायु॒धानि॑ ।तेभि॑र्याहि प॒थिभि॑र्देव॒यानै॒र्यैरी॑जा॒नाः स्व॒र्गं यन्ति॑ लो॒कम्

devā yajñamṛtavaḥ kalpayanti haviḥ puroḍāśaṃ sruco yajñāyudhāni | tebhiryāhi pathibhirdevayānairyairījānāḥ svargaṃ yanti lokam

हिन्दी अर्थ

नीचेकीभ्रोरसे से (तप) तपाये, तपदचर्या मे डालिये, जिस से नीचे मे पराप (तरेषा) त्रिविष स्वरूपों मँ (विदितः) कथित हए ह । है परमेश्वर सुकमियों के भराश्रममे या समाज्नमें (षेहि) स्थापित कीजिये । ११२ प्रयवेवेद-माष्य का० शद । सु० ४ त्रैवा-भ्रोरेम के “ध,उ.म् " दवारा कथितं तीन-तीन स्वरूप, यथा

English

Tread thou God-travelled paths whereby the righteous, payers of sacrifices, go to Svarga. 238

अध्याय १८

श्लोक 4.3

ऋ॒तस्य॒ पन्था॒मनु॑ पश्य सा॒ध्वङ्गि॑रसः सु॒कृतो॑ येन॒ यन्ति॑ ।तेभि॑र्याहि प॒थिभिः॑ स्व॒र्गं यत्रा॑दि॒त्या मधु॑ भ॒क्षय॑न्ति तृ॒तीये॒ नाके॒ अधि॒ वि श्र॑यस्व

ṛtasya panthāmanu paśya sādhvaṅgirasaḥ sukṛto yena yanti | tebhiryāhi pathibhiḥ svargaṃ yatrādityā madhu bhakṣayanti tṛtīye nāke adhi vi śrayasva

हिन्दी अर्थ

का० १८ । सु०४ अथवेवेद-माष्य ११९ (सन्तु) हो । भर्थात् इन का उपभोग तु इस तरह कर कि ये तेरे भरात्मधारण भ्रौर पोषण के लिये उपयुक्त हों । हे सद्गृहस्थ ! (तिलमिश्राः) तिलो से मिध्ित (याः धानाः) जौ लिये ( स्वधावतीः ) भ्रात्मधारण तथा पोषण के उपयोगी हौं ।

English

Happily lit, let fires, each Jātavedas, seize on Prajāpati’s appoint- ed victim. Let them not cast it down while here they cook it. Sacrifice, duly offered, comes preparing the sacrificer for the. world of Svarga,

अध्याय १८

श्लोक 4.4

त्रयः॑ सुप॒र्णा उप॑रस्य मा॒यू नाक॑स्य पृ॒ष्ठे अधि॑ वि॒ष्टपि॑ श्रि॒ताः ।स्व॒र्गा लो॒का अ॒मृते॑न वि॒ष्ठा इष॒मूर्जं॒ यज॑मानाय दुह्राम्

trayaḥ suparṇā uparasya māyū nākasya pṛṣṭhe adhi viṣṭapi śritāḥ | svargā lokā amṛtena viṣṭhā iṣamūrjaṃ yajamānāya duhrām

हिन्दी अर्थ

लाल वणं वाली (घेनवः) दुधार गौए' (भरस्य ते सन्तु) है सदृगृहस्थ ! तेरी (सादरम्) हजारों का पालन-पोषण करने वले, (शतधारम्) को, (वेरवानरे ) सब नरनारियों कै हितंषी परमेश्वर के प्रसादन के निमित्त, मै (हविः) हविरूप मे. (जुहोमि) समर्पित करता हूं । क्योंकि (सः) वही पितामहो का (बिमत्ति) भरण-पोषण करता है, प्रौर (प्रपितामहान्) प्रपितामहं का (बिभति) भरण-पोषण करता है ।. साहम् = एकं एक गौ हजारों का पालन-पोषण किस प्रकार करती है, इस के लिये देलो-“गोकरुणानिधि" (दयानन्द) । जो परमेद्वर मेरे वनस्थ तथा संन्यस्त पिता भादि का, तथा विद्व का पालन-पोषण करता है, उसी कै प्रसादन के निमित्त गोधन को समपित्त कर, तद् वारा सबका पालन दूष, घृत, दधि, लस्सी भ्रादिसे करना चाहिए । उत्वः-=कूषः

English

On all the earth, to heaven, the drop descended, on this place and on that which was before it. I offer up, throughout the seven oblations, the drop which still to one same place is moving.

अध्याय १८

श्लोक 4.5

जु॒हूर्दा॑धार॒ द्यामु॑प॒भृद॒न्तरि॑क्षं ध्रु॒वा दा॑धार पृथि॒वीं प्र॑ति॒ष्ठाम्।प्रती॒मां लो॒का घृ॒तपृ॑ष्ठाः स्व॒र्गाः कामं॑कामं॒ यज॑मानाय दुह्राम्

juhūrdādhāra dyāmupabhṛdantarikṣaṃ dhruvā dādhāra pṛthivīṃ pratiṣṭhām| pratīmāṃ lokā ghṛtapṛṣṭhāḥ svargāḥ kāmaṃkāmaṃ yajamānāya duhrām

हिन्दी अर्थ

ऋत्विजो की भरावदयकता नहीं होती । ये महायज्ञ गृहस्थी को स्वयं करने होते है इन महायज्ञो ® साथ . दक्षिणा का कोद सम्बन्ध नहीं। भावदयकता पडती है, भ्रौर इनमे ऋत्विजो को दक्षिणंाएं देनी होती रोगरहित करने के लिये किये जाते ह । इन यज्ञो में कुष्षासनों पर बैठने (सरस्वति) है ज्ञानमय, सरसहृदये, जगन्मातंः (या) जो भ्राप (सरथम्) जीवात्मा कै साथ एक हृदयरथे, या ध्षरीररथमें भाखूढ़ हई

English

Be here, even here, acquiring wealth, here be thou thoughts here be thou strength. Be stronger here in manly power, life-giver, never beaten back. Giving the son and grandson satisfaction, let these the present

अध्याय १८

श्लोक 4.6

ध्रुव॒ आ रो॑ह पृथि॒वीं वि॒श्वभो॑जसम॒न्तरि॑क्षमुपभृदा क्र॑मस्व ।जुहु॒ द्यां ग॑च्छ॒ यज॑मानेन सा॒कं स्रु॒वेण॑ व॒त्सेन॒ दिशः॒ प्रपी॑नाः॒ सर्वा॑ धु॒क्ष्वाहृ॑ण्यमानः

dhruva ā roha pṛthivīṃ viśvabhojasamantarikṣamupabhṛdā kramasva | juhu dyāṃ gaccha yajamānena sākaṃ sruveṇa vatsena diśaḥ prapīnāḥ sarvā dhukṣvāhṛṇyamānaḥ

हिन्दी अर्थ

वेयक्तिक निवासगृहो के निर्माण के लिये भी सहोद्योग होना चाहिए, ताकि प्रत्येक परिवार को निवासगृह मिल सके । खगे य॒तः पितुहैस्तं निभि दरषिंणम् ॥५६॥ की (बिभृहि) परिपुष्ट कर । (ते) तेरे (पिता) पिताने (पुरा) पहले को (निमृ डिढ) परिमाजित करं, निमंल कर, यरास्वी कर । प्रमृत है, हिरण्य है । यह मेरे लिये कामदुधा गौहै) इसधन कोम ब्रह्म वेत्तारो को देता हृं, ओर उस मागं का भवलम्बन करता हु, जो कि स्वर्गरूप है, भौर पितरोमेजो स्थितै" थ. प्रकार पके ध्रोदन को “हिरण्य

English

Dead among the Fathers. Depart ye two: wipe ye away whatever omens of evil fortune here have told you.

अध्याय १८

श्लोक 4.7

ती॒र्थैस्त॑रन्ति प्र॒वतो॑ म॒हीरिति॑ यज्ञ॒कृतः॑ सु॒कृतो॒ येन॒ यन्ति॑ ।अत्रा॑दधु॒र्यज॑मानाय लो॒कं दिशो॑ भू॒तानि॒ यदक॑ल्पयन्त

tīrthaistaranti pravato mahīriti yajñakṛtaḥ sukṛto yena yanti | atrādadhuryajamānāya lokaṃ diśo bhūtāni yadakalpayanta

हिन्दी अर्थ

देव, मातृदेव, भरतिथिदेव । जो गृहस्थी देव बनना चाहते है, उन्हें भी हवि- ष्यान्नं का सेवन करना चाहिए । श्रम मँ श्रपने मनोंको लगाए रखती । (भूमे) है मिटीकौ रोपड़ी का० १८। सूु०४ प्रथवंवेद-माष्य १४३ से सुरक्षा करती है । वानप्रस्थियों तथा संन्यासि्यो के वासगृहं सादे होने चाहिए । ककुत्सल ककुत् (©, 168५ ;. श्नापटे ) +-सल ( ४४७न;

English

Breath of the rivers he hath roared into the jars, and through his wisdom entered into Indra’s heart. Let thy bright smoke envelop thee, spread forth, O Bright One, in the sky.

अध्याय १८

श्लोक 4.8

अङ्गि॑रसा॒मय॑नं॒ पूर्वो॑ अ॒ग्निरा॑दि॒त्याना॒मय॑नं॒ गार्ह॑पत्यो॒ दक्षि॑णाना॒मय॑नं दक्षिणा॒ग्निः ।म॒हि॒मान॑म॒ग्नेर्विहि॑तस्य॒ ब्रह्म॑णा॒ सम॑ङ्गः॒ सर्व॒ उप॑ याहि श॒ग्मः

aṅgirasāmayanaṃ pūrvo agnirādityānāmayanaṃ gārhapatyo dakṣiṇānāmayanaṃ dakṣiṇāgniḥ | mahimānamagnervihitasya brahmaṇā samaṅgaḥ sarva upa yāhi śagmaḥ

हिन्दी अर्थ

मे गमन करने वाले वैमानिक (?1०15) अन्तरिक्षसद पितर है । तथा 9०80७ (पितरः) है पितरो ! (वः) भ्राप की (अजं) बलशक्ति तथा प्राणन- (पितरः) है पितरो (वः) भाप के (रसाय) जीवनीय भ्रानन्द रस की (पितरः) है पितरो ! (वः) राप की (भामाय) प्रभादीप्तिकी के लिये (नमः) हम भराप को नज्रमावे से प्राप्त होते ै। भामः दीप्तिः

English

Then may we live a hundred autumn seasons guarded by thee, O King, by thee protected.

अध्याय १८

श्लोक 4.9

पूर्वो॑ अ॒ग्निष्ट्वा॑ तपतु॒ शं पु॒रस्ता॒च्छं प॒श्चात् त॑पतु॒ गार्ह॑पत्यः ।द॒क्षि॒णा॒ग्निष्टे॑ तपतु॒ शर्म॒ वर्मो॑त्तर॒तो म॑ध्य॒तो अ॒न्तरि॑क्षाद् दि॒शोदि॑शो अग्ने॒ परि॑ पाहि घो॒रात्

pūrvo agniṣṭvā tapatu śaṃ purastācchaṃ paścāt tapatu gārhapatyaḥ | dakṣiṇāgniṣṭe tapatu śarma varmottarato madhyato antarikṣād diśodiśo agne pari pāhi ghorāt

हिन्दी अर्थ

रहते हो, जो किं नौकारों दारा किये जानेवाले व्यापार मेँ सहायक हों । इन वायुभों को श्रग्रेजी भाषा मेँ 11906 ५105" कहते हैँ । साथ दही. मं० १, सु० ११६, मन्त्र ३-४ मे “नौभिः का विशेषण “पतङ्खैः" दिया मं “संसताव्य-हविः” के उत्पादन की योग्येता नहीं ।

English

Ye Lightnings with your golden wheels, men find not your abid- ing-place. Hear this my call, O Heaven and Earth. 242

अध्याय १८

श्लोक 4.10

यू॒यम॑ग्ने॒ शंत॑माभिस्त॒नूभि॑रीजा॒नम॒भि लो॒कं स्व॒र्गम्।अश्वा॑ भू॒त्वा पृ॑ष्टि॒वाहो॑ वहाथ॒ यत्र॑ दे॒वैः स॑ध॒मादं॒ मद॑न्ति

yūyamagne śaṃtamābhistanūbhirījānamabhi lokaṃ svargam| aśvā bhūtvā pṛṣṭivāho vahātha yatra devaiḥ sadhamādaṃ madanti

हिन्दी अर्थ

जाताहै। इसे ध्रुवा इसलिये कहते है, चू कि इस में घृत भरकर इसे भ्रपने नियत स्थान में स्थित रहने दिया जाता है। इस के समीप उपमृत्-बात्र रखा चृत दवारा इसे भरा जाता है । तदनन्तर जुहू-पात्र में चृत ठपभृत्-पात्र से लिया जाता है ओौर जुहू केषृतसे सुव द्वारा भ्रग्निमे घृताहृतियांदी तथा धन्य यज्ञो का विधान नहीं रहता । उस सभय उस् के लिये द.लोकः अन्तरिक्षलोक,्रौर पृथिवीलोक ही जह उपभृत् भौर घुवारूप हो जते है। होती थीं । संन्यास ग्रहण करने के प्चात् उस की पहिली कामनाए ट कामनाभ्रों की पत्ति परमेदवरीय कृपा पे, परमेश्व र-संचालित तीनो लोकों द्वारा अनायासं होती रहती है । पृथिवी सर्वाधार है, चू कि सब ओषधयो,

English

Agni is shining forth with lofty banner: the Bull is bellowing to earth and heaven. From the sky’s limit even hath he stretched near us: the Steer hath waxen in the waters’

अध्याय १८

श्लोक 4.11

शम॑ग्ने प॒श्चात् त॑प॒ शं पु॒रस्ता॒च्छमु॑त्त॒राच्छम॑ध॒रात् त॑पैनम्।एक॑स्त्रे॒धा विहि॑तो जातवेदः स॒म्यगे॑नं धेहि सु॒कृता॑मु लो॒के

śamagne paścāt tapa śaṃ purastācchamuttarācchamadharāt tapainam| ekastredhā vihito jātavedaḥ samyagenaṃ dhehi sukṛtāmu loke

हिन्दी अर्थ

ताप श्रादि की स्थिति का स्थान पृथिवीदहीदहै। का० १८। सुर प्रथरवेवेद-माष्य १०७ ९२००. भरव आ रोह एथिवीं विश्मोजसमन्तरिवयुपृदा करमस्व । जुहु धां गच्छ यजमानेन साकं सवेण वत्सेन दिश प्रपीनाः वाली (पृथिवीम्) पृथिवी पर (भ्रा रोह) भ्रारोहण कर; (उपभृतं ) है उप-

English

bosom. They gaze on thee with longing in their spirit, as on an eagle that is mounting skyward; On thee with wings of gold, Varuna’s envoy, the Bird that hasteth to the home of Yama.

अध्याय १८

श्लोक 4.12

शम॒ग्नयः॒ समि॑द्धा॒ आ र॑भन्तां प्राजाप॒त्यं मेध्यं॑ जा॒तवे॑दसः ।शृ॒तं कृ॒ण्वन्त॑ इ॒ह माव॑ चिक्षिपन्

śamagnayaḥ samiddhā ā rabhantāṃ prājāpatyaṃ medhyaṃ jātavedasaḥ | śṛtaṃ kṛṇvanta iha māva cikṣipan

हिन्दी अर्थ

(गच्छ) जा । गौर है यजमान! तू (सवेण वत्सेन ) सुवरूपी जुह् के बड़ दोहन कर, (भरहणीयमानः) विना किसी संकोच के । लोक भौर यलोक का। मन्त्र २०० भं संन्यासी के शरीरत्याग का वणन ने द्युलोक की भर उत्करमण करना है, जिस लोकें कि परमेव रीय ज्योति ब्राह्मी रूप ही चमक रहा है । तथा “यस्य ते उपरि गृहाः?” (यजु ०१८ ४४) हे ब्रह्म! भ्रापकेहीये ऊपर कै द्युलोक के घर रह, जिनमें भाष निवास कर

English

O Indra, bring us wisdom as a sire gives wisdom to his sons. Guide us, O much-invoked in this our way: may we still living look upon the Sun.

अध्याय १८

श्लोक 4.13

य॒ज्ञ ए॑ति॒ वित॑तः॒ कल्प॑मान ईजा॒नम॒भि लो॒कं स्व॒र्गम्।तम॒ग्नयः॒ सर्व॑हुतं जुषन्तां प्राजाप॒त्यं मेध्यं॑ जा॒तवे॑दसः

yajña eti vitataḥ kalpamāna ījānamabhi lokaṃ svargam| tamagnayaḥ sarvahutaṃ juṣantāṃ prājāpatyaṃ medhyaṃ jātavedasaḥ

हिन्दी अर्थ

संसार का मून जो चुलोक है, उस मे विविध स्थानों में स्थितं नक्षत्र-तारा- -कोगौ के थनोंके साथ लगानेसे गौ के थन दधसे भ्राप्यायितहो जाते भर् जाति है, प्रौर गोस्वामी दष दोह लेता है, वैतेहीलुव दारा चृताहुतियों के देने पर दिशाएं घृत के सूुरमांशो से भ्राप्यायित हो कर-भर कर प्रा्ञिक करतो ह । मानो याज्ञिक यजमान इन दिशार्भो से इन फलों का दोहन करते

English

Let these which Gods have held for thee, the beakers covered o’er with cake, Be full of sacred food for thee, distilling fatness, rich in mead. Grains which for thee I scatter, mixt with Sesamum, as holy food,

अध्याय १८

श्लोक 4.14

ई॒जा॒नश्चि॒तमारु॑क्षद॒ग्निं नाक॑स्य पृ॒ष्ठाद् दिव॑मुत् पति॒ष्यन्।तस्मै॒ प्र भा॑ति॒ नभ॑सो॒ ज्योति॑षीमान्त्स्व॒र्गः पन्थाः॑ सु॒कृते॑ देव॒यानः॑

ījānaścitamārukṣadagniṃ nākasya pṛṣṭhād divamut patiṣyan| tasmai pra bhāti nabhaso jyotiṣīmāntsvargaḥ panthāḥ sukṛte devayānaḥ

हिन्दी अर्थ

१०८ छथर्ववेद-माष्य का० १८ । सुर जंसे सामुद्रिकं यात्री (तीर्थः) तेराने वानी नौका भ्रादिके ढारा (भवतः) दुर-दूर के (महीः) भूखण्डों से (तरन्ति) पारहो जाते दहै, वैसे मनुष्य भविष्य की (महीः) महा विपत्तियों भ्रोर धापदाभों से (तरन्ति) पारहो लोग (येन) जिस सुपथ द्वारा (यन्ति) चलते है उस सुषथ द्वारावे मावनाभों भर सुकर्म दवारा (दिशः) दिशाभों भौर वायुमण्डल को, भ्रौर

English

May they for thee be excellent and potent: King Yama look on them as thine with favour! O Tree, give back again this man who is deposited on thee.

अध्याय १८

श्लोक 4.15

अ॒ग्निर्होता॑ध्व॒र्युष्टे॒ बह॒स्पति॒रिन्द्रो॑ ब्र॒ह्मा द॑क्षिण॒तस्ते॑ अस्तु ।हु॒तोऽयं संस्थि॑तो य॒ज्ञ ए॑ति॒ यत्र॒ पूर्व॒मय॑नं हु॒ताना॑म्

agnirhotādhvaryuṣṭe bahaspatirindro brahmā dakṣiṇataste astu | huto'yaṃ saṃsthito yajña eti yatra pūrvamayanaṃ hutānām

हिन्दी अर्थ

लिये (लोकम्) विशेष भालोक तथा विदहोष दुष्टि (प्रदधुः) पदान कर वत्स द्वारा हमारी कामनार््रो क्री पुतिहो-रही है । यथा- का० १द। सूर्य भयवंवेद-माष्य १०९ २०२. अङ्गिसामय॑नं पूवी अभिरादिानंमंय॑ं गाहैपत्यो दर्िणा-

English

That he may dwell in Yama’s home addressing the assemblies there. Seize hold O Jātavedas; let thy flame be full of fervent heat. Consume his body: to the world of pious ones transport this man.

अध्याय १८

श्लोक 4.16

अ॒पू॒पवा॑न् क्षी॒रवां॑श्च॒रुरेह सी॑दतु ।लो॒क॒कृतः॑ पथि॒कृतो॑ यजामहे॒ ये दे॒वानां॑ हु॒तभा॑गा इ॒ह स्थ

apūpavān kṣīravāṃścarureha sīdatu | lokakṛtaḥ pathikṛto yajāmahe ye devānāṃ hutabhāgā iha stha

हिन्दी अर्थ

म्रग्नियों की (महिमानम्) मह्धिमा को (उप याहि) उपासनापूवंक तु रसः (बुह° उप० भर १, ब्रा० ३, खं० १९ )। प्राण यतः शरीर .के निग्रहात्" (मनु° ३।७२ ) । यह नासिका-प्राण जब मूख मे उतरता है, तब भागमेदहै। उदर का मुख, डिभ्ोढोनम, धा्न्ते, यजत् ये पाचक भग ११० भचवेवेद-माष्य का० १८ ॥ सुभ

English

To these, thy Fathers who have passed away at first and after- ward, Let the full brook of butter run, o’erflowing with a hundred streams.

अध्याय १८

श्लोक 4.17

अ॒पू॒पवा॒न् दधि॑वांश्च॒रुरेह सी॑दतु ।लो॒क॒कृतः॑ पथि॒कृतो॑ यजामहे॒ ये दे॒वानां॑ हु॒तभा॑गा इ॒ह स्थ

apūpavān dadhivāṃścarureha sīdatu | lokakṛtaḥ pathikṛto yajāmahe ye devānāṃ hutabhāgā iha stha

हिन्दी अर्थ

चाहिए, भौर उदे पचा सकने की क्ति भराप्त करनी चाहिए) तभी वे गृहस्थ कर शान्ति भौर सुख का भागी बनता है। से (त्वा) तुभे (तपतु) तपाए, भौर इस प्रकार तैरे मल को दुरं कर (पदचात्) तेरे पर्विम माग चे तुफे (तपतु) तपाए, इस प्रकार तेरे मल

English

Mount to this life, removing all defilement: here thine own kindred shine with lofty splendour. Depart thou; be not left behind: go forward, first of those here, unto the world of Fathers.

अध्याय १८

श्लोक 4.18

अ॒पू॒पवा॑न् द्र॒प्सवां॑श्च॒रुरेह सी॑दतु ।लो॒क॒कृतः॑ पथि॒कृतो॑ यजामहे॒ ये दे॒वानां॑ हु॒तभा॑गा इ॒ह स्थ

apūpavān drapsavāṃścarureha sīdatu | lokakṛtaḥ pathikṛto yajāmahe ye devānāṃ hutabhāgā iha stha

हिन्दी अर्थ

पाचकाग्नि (तपतु) तुमे तपाए, भौर (ते) तेरे लिये यह अग्नि (शमं गृहः का सुख देवे, तथा (वमं ) तेरे लिये कवचरूप बने । (भग्ने) प्रग्निरूप म हे की (चोरात्) घोर रोगो से (परि पाहि) पू्णंतया रक्षा करो । तथा रक्त म मिल कर उसके नीलपनकोदरुरकर रक्तके लालकर्णो का होने प्रे रोग नहीं. होने पाते। शमं गृह (निषं° ३।४) तथा सुख ( निघं० ३।६) । तथा उत्तरतः=शिरो माग; भरन्तरिक्षात् == छाती, जिस के (१) श्चरीर के ऊपर के हिस्से को “वं काय” कहते ह । स लिये शरीर का

English

A funeral hymn, composed partly of verses from the Rigveda Rise to your mother, flames of Jātavedas! I send you up by paths which Fathers traverse.

अध्याय १८

श्लोक 4.19

अ॒पू॒पवा॑न् घृ॒तवां॑श्च॒रुरेह सी॑दतु ।लो॒क॒कृतः॑ पथि॒कृतो॑ यजामहे॒ ये दे॒वानां॑ हु॒तभा॑गा इ॒ह स्थ

apūpavān ghṛtavāṃścarureha sīdatu | lokakṛtaḥ pathikṛto yajāmahe ye devānāṃ hutabhāgā iha stha

हिन्दी अर्थ

नीचे भ्रौर टांगों से ऊपर का भाग, भर्थात् उदर । २०४. युय. ्ंत॑मामिस्तनूभिरीजानममि लोकं सेब । चलो, उस भ्राश्नम मेँ ले चलो, (यत्र) जिस मे कि यजमान लोग (देवैः) एकसत्रेषा विदितो जातवेदः सम्येनं घेदि सुषृतामु लोके ॥११॥

English

With headlong speed the Oblation bearer bore our gifts: toil ye, and place the offerer where the righteous dwell. The Seasons, Deities, form and order Worship, butter, cake, ladles, sacrificial weapons.

अध्याय १८

श्लोक 4.20

अ॒पू॒पवा॑न् मां॒सवां॑श्च॒रुरेह सी॑दतु ।लो॒क॒कृतः॑ पथि॒कृतो॑ यजामहे॒ ये दे॒वानां॑ हु॒तभा॑गा इ॒ह स्थ

apūpavān māṃsavāṃścarureha sīdatu | lokakṛtaḥ pathikṛto yajāmahe ye devānāṃ hutabhāgā iha stha

हिन्दी अर्थ

कर गृहस्थ को शान्ति प्रदान करतो हँ । जातवेदसः = नवजातः, तदनन्तरं है, इसलिये परमेदवर को प्रजापति कहते हैँ । प्रजापति ने यद्र पवित्र संसार-यज्ञ रचाया हृभ्रा है । ओर खान-पान तथा जीवनोपयोगीं अन्य दसलिये विवाहानन्तर पति को भी प्रजापनि बन कर तीनों आाश्चमियों का, तथा भूतयज्ञ मे सब भूतो भर्थात् प्राणियों का पालन-पोषण करना

English

Carefully look on Sacrifice’s pathway whereon the Angirases, the righteous, travel. By those same pathways go thou up to Svarga where the Ādityas take their fill of sweetness, There make thy home in the third vault of heaven,

अध्याय १८

श्लोक 4.21

अ॒पू॒पवा॒नन्न॑वांश्च॒रुरेह सी॑दतु ।लो॒क॒कृतः॑ पथि॒कृतो॑ यजामहे॒ ये दे॒वानां॑ हु॒तभा॑गा इ॒ह स्थ

apūpavānannavāṃścarureha sīdatu | lokakṛtaḥ pathikṛto yajāmahe ye devānāṃ hutabhāgā iha stha

हिन्दी अर्थ

रहता है । प्रथर्वंवेद के भरतिथिसूक्त मेक्हाहै कि- हमा है " यह सदगृहस्थ निदचय से प्रजापति-परमेदवर का पदानुगामी होता है, जो उपहाररूप मेँ खानपान भेट करता है ॥ अग्नयः समिद्धाः=अयर्ववेदमे कहा है कि- घर के वासियों का पालन-पोषण करना मानो गाहुपत्याग्नि की सेवा करना दक्षिणाग्नि कहा है- “दक्ष गतौ वृद्धौ"

English

Three eagles in the region’s roar are standing high on heaven’s ridge in their appointed station.

अध्याय १८

श्लोक 4.22

अ॒पू॒पवा॒न् मधु॑मांश्च॒रुरेह सी॑दतु ।लो॒क॒कृतः॑ पथि॒कृतो॑ यजामहे॒ ये दे॒वानां॑ हु॒तभा॑गा इ॒ह स्थ

apūpavān madhumāṃścarureha sīdatu | lokakṛtaḥ pathikṛto yajāmahe ye devānāṃ hutabhāgā iha stha

हिन्दी अर्थ

जिस घरमे न अतिथिसेवा हो, न गृहवासिर्यो का पालनपोषण हो. सके मरौर इस व्रत के परिपालन के लिये सद्गृहस्थ भर्थोपा्जंन के लिये सदा यत्नवान् रहता है ! दुतम् = चु पाके +क्त । २०७. यज्ञ पति वित॑तः करयंमान जानमि. लोकं खरम् । एति) ग्रोर ले जाता है, तदमिमूख कर देता है । (जातवेदसः श्रग्नयः)

English

The worlds of Svarga shall, filled full of Amrit, yield food and power to him who sacrificeth. Upabhrit stablished air, Juhū the heaven, Dhruva supported earth securely founded. As meed, the Svarga worlds, o’erspread with fatness shall yield the sacrificer all his wishes.

अध्याय १८

श्लोक 4.23

अ॒पू॒पवा॒न् रस॑वांश्च॒रुरेह सी॑दतु ।लो॒क॒कृतः॑ पथि॒कृतो॑ यजामहे॒ ये दे॒वानां॑ हु॒तभा॑गा इ॒ह स्थ

apūpavān rasavāṃścarureha sīdatu | lokakṛtaḥ pathikṛto yajāmahe ye devānāṃ hutabhāgā iha stha

हिन्दी अर्थ

पत्येष्टि करनी होती है, जो इस बात को सूचित करती है कि मुक व्यक्ति का १८.। ० ४ भ्रथर्ववेद-माष्य . ११५ सित (देवयानः) परमेदवर देव तक ले जानेवाला, (ज्योतिषीमान्) ज्योति- पंखोवाला । उस के उत्तमकमं ही उत्तम पंख है । “सुकृते” पद की यही दिवि" (यजु० ३१।३) मेँ “दिवि” का भरथं है-““दयोतनात्मकभपने अर्थात् परमेष्वर के निज स्वरूप मे (दयानन्द भाष्य) 1 नभसः-=न ¬+ भसः

English

Dhruvā, ascend thou earth the all sustainer: go thou, O Upa- bhrit, to air’s mid-region. Juhu, go skyward with the sacrificer; go, and with Sruva be thy calf beside thee drain all the

अध्याय १८

श्लोक 4.24

अ॒पू॒पवा॒नप॑वांश्च॒रुरेह सी॑दतु ।लो॒क॒कृतः॑ पथि॒कृतो॑ यजामहे॒ ये दे॒वानां॑ हु॒तभा॑गा इ॒ह स्थ

apūpavānapavāṃścarureha sīdatu | lokakṛtaḥ pathikṛto yajāmahe ye devānāṃ hutabhāgā iha stha

हिन्दी अर्थ

लोककृतः पथिक्तौ यजाम ये देवानां तमाम इइ स्थ ।।१६॥ दुघ समेत (चरः) चावल, जौ भ्रादि (श्रा सीदतु) बने रहँ । तथा देवा- यज्ञदेष का भाग ग्रहण करनेवाले (इह) इस भूमण्डल पर (स्थ) भरभी जीवित हो, भौर (लोककृतः) लोकोप्रकार करनेवाले भौर (पथिकृतः) लोकों को सत्पथ में चलानेवाले हो, उन भ्राप का (यजामहे) भरतिथियज्ञ दारा हम सत्कार कर सकं । संन्यासी भात्मयाजी होते है, वे हुतभागी नहीं होते । गृहस्थी तथा वानप्रस्थी अतिथि हृतभागी होते है । चरुःचर भक्षणे !

English

swelling unreluctant quarters. They ford the mighty rivers by the pathway which they who sacrifice, the righteous, travel. There they gave room unto the sacrificer when they made regions and existing creatures.

अध्याय १८

श्लोक 4.25

अ॒पू॒पापि॑हितान् कु॒म्भान् यांस्ते॑ दे॒वा अधा॑रयन्।ते ते॑ सन्तु स्व॒धाव॑न्तो॒ मधु॑मन्तो घृत॒श्चुतः॑

apūpāpihitān kumbhān yāṃste devā adhārayan| te te santu svadhāvanto madhumanto ghṛtaścutaḥ

हिन्दी अर्थ

सोकं पथिष्तों यजामहे ये देवानां हुतभागा इह स्थ ॥१७॥ ्राजापत्ययाजी के जीवन-यज्ञ की समाप्ति के परचात् भी (इह) इस घर मँ (चरः) चावल, जौ भादि, तथा उसके साथ (श्रपूपवान्) पृडे, मौर लोककृतंः पथिकृतो यजामहे ये देवानां हुतभागा इह स्थ ।१८॥ घर मे (चरः) चावलं, जौ भादि, तथा उसके साथ (अपूपवान्) पूडं भ्रौर लोकषत॑ः पथितं यजामह ये देवानां हुतभागा इ स्य ॥१९॥ धर मे (चरः) चावल, जौ भ्रादि तथा उस के साथ श्रपूपवान्) पड़ रौर (घृतवान्) घुत (भ्रा सीदतु) विद्यमान रहै, शेष पूववत् ।

English

The Angirases’ pathway is the eastern Agni, the Ādityas’ path- way is the Gārhapatya: The southward Agni is the way of Southerns.

अध्याय १८

श्लोक 4.26

यास्ते॑ धा॒ना अ॑नुकि॒रामि॑ ति॒लमि॑श्राः स्व॒धाव॑तीः ।तास्ते॑ सन्तू॒द्भ्वीः प्र॒भ्वीस्तास्ते॑ य॒मो राजानु॑ मन्यताम्

yāste dhānā anukirāmi tilamiśrāḥ svadhāvatīḥ | tāste santūdbhvīḥ prabhvīstāste yamo rājānu manyatām

हिन्दी अर्थ

लोककृतः पथिकृतो यजामहे ये देवानां हूतमागा इह स्थ ॥२०॥ इस घर में (्रपुपवान् ) पडो समेत रौर (मांसवान् ) भां समेत (चरः) मांसवान् = मांस का भरथं पश्युहिसाजन्य मांस है- यह सर्वंदा नहीं । मांस काभ्रथंफलकागुहा भी है। मांस=-1116 .196ी एश 9 8 १५1 (आपटे) । तथा रोहणी भोषधि के वर्णन मे निम्नलिखित मन्व है-- , मापन रोहतु ॥ (भथवं० ४।१२।४) ॥ भर्थात् है रोगी ! रोहणी -(लाखं,

English

To Agni’s greatness whom the prayer divideth go powerful, un- scathed with all thy members. Eastward let east fire happily consume thee, and westward happily the Gārhapatya.

अध्याय १८

श्लोक 4.27

अक्षि॑तिं॒ भूय॑सीम्

akṣitiṃ bhūyasīm

हिन्दी अर्थ

लाक्षा) की मज्ज्ञा (17)8॥0५४) दवारा तेरी मज्जा का संधान हो, रोहणी तथा अस्थि वारा तेरा रक्त तथा तेरी ही स्वस्थ हो । तथा रोहणी के मासि मांस का वर्णेन है । मज्जा 11 णं ग 01815 (भ्रापटे), तथा 1108 “मांस” का भथ “फल का गुहा" प्रतीत होता है । क्योंकि मर्व मे मसिः लोकढृतं; पथिषतों यजामहे ये देवाना हूतभांगा इह स्थ ।२१॥

English

Burn southern fire, thine armour and protection: from air’s- mid-region from the north and centre, on all sides, Agni, guard thou him from horror.

अध्याय १८

श्लोक 4.28

द्र॒प्सश्च॑स्कन्द पृथि॒वीमनु॒ द्यामि॒मं च॒ योनि॒मनु॒ यश्च॒ पूर्वः॑ ।स॒मा॒नं योनि॒मनु॑ सं॒चर॑न्तं द्र॒प्सं जु॑हो॒म्यनु॑ स॒प्त होत्राः॑

drapsaścaskanda pṛthivīmanu dyāmimaṃ ca yonimanu yaśca pūrvaḥ | samānaṃ yonimanu saṃcarantaṃ drapsaṃ juhomyanu sapta hotrāḥ

हिन्दी अर्थ

११०८ अथवेवेहै-माष्य का० १८ । सु०४ भात मादि (इह ). इस चर मे, प्राजापत्ययाजी के जीवन-यज्ञ की समाप्ति के पदचात् भी (श्रा सीदतु) विद्यमान रहे, दोष पू्वंवत् 1. भन्नवान् = वेदों में कई प्रकार के भरनो का वर्णन है । यथा-- हमः == मसूर, मसर (यज्० १८।१२) । इसी प्रकार कष्टपच्याः

English

Do ye, with your most kindly forms, O Agni, waft, turned to rapid steeds whose ribs bear burthens, The sacrificer to the world of Svarga where with the Gods they banquet and are joyful.

अध्याय १८

श्लोक 4.29

श॒तधा॑रं वा॒युम॒र्कं स्व॒र्विदं॑ नृ॒चक्ष॑स॒स्ते अ॒भि च॑क्षते र॒यिम्।ये पृ॒णन्ति॒ प्र च॒ यच्छ॑न्ति सर्व॒दा ते दु॑ह्रते॒ दक्षि॑णां स॒प्तमा॑तरम्

śatadhāraṃ vāyumarkaṃ svarvidaṃ nṛcakṣasaste abhi cakṣate rayim| ye pṛṇanti pra ca yacchanti sarvadā te duhrate dakṣiṇāṃ saptamātaram

हिन्दी अर्थ

लोकढ़ृतंः षथिृतौ यजामहे ये देवानां हुतभागा इ स्थ ॥२२॥ लोककृतः पथिकृतो यजामहे ये देवानाँ हुत्ांगा इद स्थ ॥२३॥ == भरोषधियों कै रस, फलरस, सब्जी के रस, गन्ने भ्रादि के रस । लोकडृत॑ः पथिकृतो यजामहे ये देवानां दुतमांगा इह स्थ ॥२४॥ भराजापत्ययाजी के जीवन-यज्ञ की समाप्ति के पदचात् भी (दह) इसः

English

Happily from the rear burn this man, Agni, happily from before, above, and under. One, triply parted, Jātavedas, place him happily in the world that holds the righteous.

अध्याय १८

श्लोक 4.30

कोशं॑ दुहन्ति क॒लशं॒ चतु॑र्बिल॒मिडां॑ धे॒नुं मधु॑मतीं स्व॒स्तये॑ ।ऊर्जं॒ मद॑न्ती॒मदि॑तिं॒ जने॒ष्वग्ने॒ मा हिं॑सीः पर॒मे व्योऽमन्

kośaṃ duhanti kalaśaṃ caturbilamiḍāṃ dhenuṃ madhumatīṃ svastaye | ūrjaṃ madantīmaditiṃ janeṣvagne mā hiṃsīḥ parame vyo'man

हिन्दी अर्थ

छाश), ञ्ननुमन्यताम् == उपज के निदिचत भाग को राज्यकर के रूपमे चूका देने क पदचात् खेत का स्वामी उपज का उपभोग कर सकता है, उस से पुवं नहीं । यदी राज-स्वीकृति है । १२० परथर्ववेद-माष्य का० १८॥ ०४ च योनि, यदच पूर्वः भनु) वतमान सृष्टि की कारणभूत प्रकृति मे, तथा (समानम्) एकरस रूप मे (योनिम्) कारणभूत प्रकृति मं (भनु) निरन्तर (सप्त होत्राः अनु) छान्दोमयी वेदवाणि्यों के अनुसार (जुहोमि) निज

English

Let all the fires, each Jatavedas, welcome Prajāpati’s completely offered victim. Let them not cast it down while here they cook it.

अध्याय १८

श्लोक 4.31

ए॒तत् ते॑ दे॒वः स॑वि॒ता वासो॑ ददाति॒ भर्त॑वे ।तत् त्वं य॒मस्य॒ राज्ये॒ वसा॑नस्ता॒र्प्यंऽ चर

etat te devaḥ savitā vāso dadāti bhartave | tat tvaṃ yamasya rājye vasānastārpyaṃ' cara

हिन्दी अर्थ

भ्रात्मस्वरूप मे भाहूत करता हू । परमेश्वरीय भ्रानन्दर कीः मात्रा के कारण है । (नृचक्षसः) नर-नारियों के उपकार मेँ दृष्टिवाले (ते) वे योगीजन (शतधारम्) संकडां भ्रङ्गोपाङ्गों तथा नस-नादियों के धारण-पोषण

English

Fain to fly up from the sky’s ridge to heaven, the worshipper hath mounted visible Agni. Lucid from out the mist to him, the pious, gleams the God- travelled path that leads to Svarga.

अध्याय १८

श्लोक 4.32

धा॒ना धे॒नुर॑भवद् व॒त्सो अ॑स्यास्ति॒लोऽभवत्।तां वै य॒मस्य॒ राज्ये॒ अक्षि॑ता॒मुप॑ जीवति

dhānā dhenurabhavad vatso asyāstilo'bhavat| tāṃ vai yamasya rājye akṣitāmupa jīvati

हिन्दी अर्थ

(अभिचक्षते) कहते है । (ये) जो योगीजन (सवदा) सदा (पृणन्ति) प्रजा करते है, ते) वे (सप्तमातरम्) सत लोकों की माता परमेश्वर को (दक्षिणाम्) दक्षिणारूप मे (दोहते) दोह लेते है । मूर्धा, मस्तिष्क । भरकम == सहसारचक्र, सू्ंसदृ्च भकाश वाला है । . उस के हजार अरे सूर्यं की हजारों रदिमियों के सदृश ह । सप्तमातरम् तथा योगरूपी यज्ञ की दक्षिणा मिलती है-परमेदवर का स्वरूप दर्न । ९४. कोशं ददन्ति करञ्ं चठुबिलमिडां वें मधरमतीं सस्त । उल मदन्तीमदिंतिं जनेभ्करे मा हिंसीः परे ष्योमनू ॥६०॥

English

On thy right hand let Indra be thy Brāhman, Brihaspati Adh- varyu Agni Hotar. This ordered sacrifice goes offered thither whither presented gifts have gone aforetime.

अध्याय १८

श्लोक 4.33

ए॒तास्ते॑ असौ धे॒नवः॑ काम॒दुघा॑ भवन्तु ।एनीः॒ श्येनीः॒ सरू॑पा॒ विरू॑पास्ति॒लव॑त्सा॒ उप॑ तिष्ठन्तु॒ त्वात्र॑

etāste asau dhenavaḥ kāmadughā bhavantu | enīḥ śyenīḥ sarūpā virūpāstilavatsā upa tiṣṭhantu tvātra

हिन्दी अर्थ

क(० १८ । पु० ४ धथर्ववेद-भाष्य , १२१ वाले (कोचम्) हृदय-कोर से, (स्वस्तये) कल्याण के लिये, योगीजन ध्यायी जन . (मधुमतीम्) मधुर ज्ञन-दुगध वाली (इडाम्) वेदवाणीरूप दायक, ज्ञान-रस का (मदन्तीम्) स्तवन करनेवाली, तथा जनो की

English

Enriched with cake and milk here let the Charu rest. World-makers, makers of the path we worship you of the Gods who here partake oblations. Enriched with cake and curds, etc. (as in stanza 16).

अध्याय १८

श्लोक 4.34

एनी॒र्धा॒ना हरि॑णीः॒ श्येनी॑रस्य कृ॒ष्णा धा॒ना रोहि॑णीर्धे॒नव॑स्ते ।ति॒लव॑त्सा॒ ऊर्ज॑म॒स्मै दुहा॑ना वि॒श्वाहा॑ सन्त्वनप॒स्फुर॑न्तीः

enīrdhānā hariṇīḥ śyenīrasya kṛṣṇā dhānā rohiṇīrdhenavaste | tilavatsā ūrjamasmai duhānā viśvāhā santvanapasphurantīḥ

हिन्दी अर्थ

कां (मा हिसीः) परित्याग न कर" । कोक्षम्-- हृदय । यथा- “्रष्टचक्रा नवहारा देवानां पूरयोध्या । चतुबिलम् = हृदय के बाह्य-स्तर मेँ चार बिले हँ । एक बिलं द्वारा शरीर के ऊपरी भाग का भ्रौर भ्रधोभाग का गन्दा खून हृदय में भ्राता है । दूसरे बिल दवारा हृदय का यह गन्दा खनः फेफड़ों मे जाकर शुद्ध होता है । तीसरे बिल दारा फेफडों का शुद्ध खून हृदय में भाता है चौथे बिल द्वारा हृदय का जुद्ध (निरुक्त ११।१।१२) । ये कलाए' या मात्राए भानन्दमच्राए है, जो किं हृदय भं प्रसुप्त रहती है, जिन्हें योगी भनु मव करता है । इडाम ईन = सीलों,श्रौर सामान्य जनों के कवव्यों का वर्णन हुभा है । योगिजन तों हृदय

English

Enriched with cake and drops, etc. Enriched with cake and butter, etc.

अध्याय १८

श्लोक 4.35

वै॒श्वा॒न॒रे ह॒विरि॒दं जु॑होमि साह॒स्रं श॒तधा॑र॒मुत्स॑म्।स बि॑भर्ति पि॒तरं॑ पिताम॒हान् प्र॑पिताम॒हान् बि॑भर्ति॒ पिन्व॑मानः

vaiśvānare haviridaṃ juhomi sāhasraṃ śatadhāramutsam| sa bibharti pitaraṃ pitāmahān prapitāmahān bibharti pinvamānaḥ

हिन्दी अर्थ

१, मनश्छमेमौकोा भी वर्णन प्रतीत होता है । कोल--गौ का मुहाना, लेवा ८५०७ 1 कलश्चम == जिसमे दुरषमाधा यनं करती है । चतुबिलम =-चार स्तन । -=भरखण्डनीया, भबध्या । हिसीः = हिसा करना । ऊम् == बलदायक दुर इडा == १२२ अथववेवेद-माष्य का० १८1 सु०४ ज्ञान-लाभ करते; तथा सामान्यजन भी वेदोपदेरो के श्रवण द्वारा बलशाली

English

Enriched with cake and flesh, etc. Enriched with cake and food, etc. Enriched with cake and mead, etc.

अध्याय १८

श्लोक 4.36

स॒हस्र॑धारं श॒तधा॑र॒मुत्स॒मक्षि॑तं व्य॒च्यमा॑नं सलि॒लस्य॑ पृ॒ष्ठे।ऊर्जं॒ दुहा॑नमनप॒स्फुर॑न्त॒मुपा॑सते पि॒तरः॑ स्व॒धाभिः॑

sahasradhāraṃ śatadhāramutsamakṣitaṃ vyacyamānaṃ salilasya pṛṣṭhe| ūrjaṃ duhānamanapasphurantamupāsate pitaraḥ svadhābhiḥ

हिन्दी अर्थ

२२५. एतत् तै देवः स॑बिता वासो ददाति भेत्रे । हे सद्गृहस्थ ! (सविता) प्रेरणाए' देने वाला (देवः) दिव्ययुणी पुष्टि करने वाले भ्रन्न का (चर) मक्षण किया कर, सेवन किया कर । राष्ट के नियम राना निदिचत करता है । वस्त्र भ्रादि का यथोचित चाहिए । तभी वेद मेँ वासः का विदोषण दहै-"“मद्रम्” । यथासुर्याया

English

Enriched with cake and juice, etc. Here, mixt with cake and water rest the Charu!

अध्याय १८

श्लोक 4.37

इ॒दं कसा॑म्बु॒ चय॑नेन चि॒तं तत् स॑जाता॒ अव॑ पश्य॒तेत॑ ।मर्त्यो॒ऽयम॑मृत॒त्वमे॑ति॒ तस्मै॑ गृ॒हान् कृ॑णुत याव॒त्सब॑न्धु

idaṃ kasāmbu cayanena citaṃ tat sajātā ava paśyateta | martyo'yamamṛtatvameti tasmai gṛhān kṛṇuta yāvatsabandhu

हिन्दी अर्थ

(यमस्य राज्ये ) नियामक राजा के राज्य में (घानाः) धानं (भरमवत्) होती है, (धेनुः भ्रमवत्) दुघार गौए होती है । (भ्रस्याः) इन गौरं के (वत्सः) बच्ड़ होते ह, भौर (तिलः) तिल. (भ्रमवत्) होते है । (व) निदचय से (ताम्) उस धाना तिल भौर गौ के भरा्रय,-जो धाना तिलं नहीं होने पाती,- (जीवति) प्रजाजन जीवित रहता है । चं मी एकवचन भ्रयुक्त हुभा है । मन्त्र मेँ धानाकोगो रूप, तथा तिलको का० १८ । सु० ४ अथरवेवेद-माष्य १२३

English

World-makers, makers of the path, we worship those Gods of you who here partake oblations. Let these which Gods have held for thee, these beakers covered o’er with cake,

अध्याय १८

श्लोक 4.38

इ॒हैवैधि॑ धन॒सनि॑रि॒हचि॑त्त इ॒हक्र॑तुः ।इ॒हैधि॑ वी॒र्यऽवत्तरो वयो॒धा अप॑राहतः

ihaivaidhi dhanasanirihacitta ihakratuḥ | ihaidhi vīrya'vattaro vayodhā aparāhataḥ

हिन्दी अर्थ

वत्सरूप मानकर भरथं किया जाता है। इस दष्टिमें भरमिप्राय यह रैं कि जैसे बछ्डे केहोते गौ पष्टिकर दूषदेती है, वैसे तिलो कै साथ घाना का सेवन करने से धाना पुष्टि देती 1 “वानाः'' पद नित्यबहु- वचनान्त होता है! जैसे भ्रोषधि्ो. के भ्रनुपान, भोषधियोंके गुरो के तेरे लिये (कामदुधाः) कामना-कामना पर दुघ देने वाली (भवन्तु) हों । छोटे बृं वाली वे गौए' (त्वा) तुके (भत्र) यहां = इस गृहस्थ में तिलवत्साः = जैसे वाना भौर तिल का पारिमाणिक सम्बन्ध है, वैसे “तिक्त परिमाण का कहा है । बडे जैसे-जैसे बड़े होते जाते है, वैसे-वैते गौभो का दूष भीकम होता जाता है । बछ्डों की तिलावस्था में गौभो मे दूष की मात्रा भ्रधिक होती है। भअरत्र=यहां, नकि वहां । ह्धिटनी ने परलोक की भावना को सिद्ध करने के लिये “श्रत्र का

English

Be full of sacred food for thee, distilling fatness, rich in mead. Grains which for thee I scatter, mixt with Sesamum, as holy food.

अध्याय १८

श्लोक 4.39

पु॒त्रं पौत्र॑मभित॒र्पय॑न्ती॒रापो॒ मधु॑मतीरि॒माः ।स्व॒धां पि॒तृभ्यो॑ अ॒मृतं॒ दुहा॑ना॒ आपो॑ दे॒वीरु॒भयां॑स्तर्पयन्तु

putraṃ pautramabhitarpayantīrāpo madhumatīrimāḥ | svadhāṃ pitṛbhyo amṛtaṃ duhānā āpo devīrubhayāṃstarpayantu

हिन्दी अर्थ

उत्तम नसल के होते हों, जिन के कि मस्तक पर तिल का सा चिह्भ हौ । करने वाली, (हरिणीः) क्षुघाहारिणी या हिरनी कै समान लघुकाय, (येनः) श्यामवणं वाली या सुद, वेत, . (कृष्णाः) काले वणं वाली, (धानाः) सदा दध, घी रादि द्वारा घारण-पोषण करने वाली, (रोहिणीः). १२४ भ्रथर्ववेद-भाष्य का० १८। सु०४

English

May they for thee be excellent and potent. King Yama look on, them as thine with favour! More immortality!

अध्याय १८

श्लोक 4.40

आपो॑ अ॒ग्निं प्र हि॑णुत पि॒तॄंरुपे॒मं य॒ज्ञं पि॒तरो॑ मे जुषन्ताम्।आसी॑ना॒मूर्ज॒मुप॒ ये सच॑न्ते॒ ते नो॑ र॒यिं सर्व॑वीरं॒ नि य॑च्छान्

āpo agniṃ pra hiṇuta pitṝṃrupemaṃ yajñaṃ pitaro me juṣantām| āsīnāmūrjamupa ye sacante te no rayiṃ sarvavīraṃ ni yacchān

हिन्दी अर्थ

(सहस्रारम्) हजारो का धारण-पोषण करने वाले, (शतधारम्) का० १८ 1 सु०४ भ्रथ्ववेद-भाष्य १२५ भ्रौर प्राणम्रदायक दुगधरस (दुहानम् ) देने वाले गोमू के (उप) समीप (भासते) निवास करते है (पितरः) गृहस्थी माता-पित्रा; (स्वधाभिः)

English

Those who observe men look on wealth as Vāyu with countless. streams, and as light-finding Arka; Those drain out Guerdon sprung from seven mothers, who satis- fy and evermore give

अध्याय १८

श्लोक 4.41

समि॑न्धते॒ अम॑र्त्यं हव्य॒वाहं॑ घृत॒प्रिय॑म्।स वे॑द॒ निहि॑तान्नि॒धीन् पि॒तॄ॒न् प॑रा॒वतो॑ ग॒तान्

samindhate amartyaṃ havyavāhaṃ ghṛtapriyam| sa veda nihitānnidhīn pitṝn parāvato gatān

हिन्दी अर्थ

भदेश मे सुलम हरे घास के कारण । यथा “भ्रनूपे गोमान् गोभिरक्षाः सोमो गौभों के साथ निवासं करता है, तब सोम प्रथत दूष गौगों से वित होता ९६१. इदं कसाम्ब चर्यनेन चितं तत् संजाता अव॑ प्यतेतं । (इदम्) यह (कसाम्बु) कसाम्बु (चयनेन) ई टो के चयन हारा दिया गया है । (सजाताः) है सम्बन्धियो 1 (तत्) उस घाट को (अव

English

presents. They for their weal drain out the cask, the beaker four-holed,. the milch-cow Idā full of

अध्याय १८

श्लोक 4.42

यं ते॑ म॒न्थं यमो॑द॒नं यन्मां॒सं नि॑पृ॒णामि॑ ते ।ते ते॑ सन्तु स्व॒धाव॑न्तो॒ मधु॑मन्तो घृत॒श्चुतः॑

yaṃ te manthaṃ yamodanaṃ yanmāṃsaṃ nipṛṇāmi te | te te santu svadhāvanto madhumanto ghṛtaścutaḥ

हिन्दी अर्थ

कृणुत) नए धरो वा कमरों का निर्माण करो, ( यावतृसबन्वु ) सभी बन्ध का भवलम्बन करता है ! उसके लिये सभी बन्धु मिलकर नए भरा्षम के लिये यथोचित निवास के निमित्त नए कमरे बनाए" । साथही पानी के भ्रबन्ध के लिये “कसाम्बु" पर ईटोंकाघाटभी बना देः । कसाम्बु=कव (गतौ) + भम्ब (जल) अर्थात् नदी का चलता जल । या कस (कासार

English

sweetness, Injure not, Agni, in the loftiest heaven Aditi heightening strength among the people. On thee doth Savitar the God bestow this vesture for thy wear.

अध्याय १८

श्लोक 4.43

यास्ते॑ धा॒ना अ॑नुकि॒रामि॑ ति॒लमि॑श्राः स्व॒धाव॑तीः ।तास्ते॑ सन्तू॒द्भ्वीः प्र॒भ्वीस्तास्ते॑ य॒मो राजानु॑ मन्यताम्

yāste dhānā anukirāmi tilamiśrāḥ svadhāvatīḥ | tāste santūdbhvīḥ prabhvīstāste yamo rājānu manyatām

हिन्दी अर्थ

शौर उस पर ्ईटोंका घाट । भयवा कस = कसी (कष्या)उन के द्वारा कूप खोद कर जल निकालनाभ्रौरकूप को ईटों द्वारा चिन देना। कसन्= १२६ भरथरववेद-माष्य का० १८। सुऽ ४ त्मिकधन का भागी बन । ( इहचित्तः ) इस आश्रम में चित्त को लगा । रक्तियां (एधि) प्राप्त कर । (वयोधाः) नवजीवन घारण कर, भ्रौर धारण-पोषण करनेवाला भन्न, तथा (भमृतम्) मोक्ष (दुहानाः) प्रदान

English

Clothe thee herein, and find meet robe in Yama’s realm to cover thee. The grains of corn have now become a cow, the Sesamum her calf.

अध्याय १८

श्लोक 4.44

इ॒दं पूर्व॒मप॑रं नि॒यानं॒ येना॑ ते॒ पूर्वे॑ पि॒तरः॒ परे॑ताः ।पु॒रो॒ग॒वा ये अ॑भि॒शाचो॑ अस्य॒ ते त्वा॑ वहन्ति सु॒कृता॑मु लो॒कम्

idaṃ pūrvamaparaṃ niyānaṃ yenā te pūrve pitaraḥ paretāḥ | purogavā ye abhiśāco asya te tvā vahanti sukṛtāmu lokam

हिन्दी अर्थ

होकरभयोगाभ्यास द्वारा मोक्ष काः लाम कर । तथा उनके पदानुगामी होकर प्रवृद्ध करो, ताकि (मे) मेरे (पितरः) पिताः दि (हमं यज्ञम्) इष का० १८। सुर प्रथवंवेद-माष्य १२७ निज यज्ञकर्म म उत्साहपूरवं क लगे रहते है ।

English

He in the realm of Yama lives on her the inexhaustible. Let these become thy milch-kine, man! supplying all thy heart’s desires. There, speckled, white, like-hued and various-coloured, with calves of Sesamum let them

अध्याय १८

श्लोक 4.45

सर॑स्वतीं देव॒यन्तो॑ हवन्ते॒ सर॑स्वतीमध्व॒रे ता॒यमा॑ने ।सर॑स्वतीं सु॒कृतो॑ हवन्ते॒ सर॑स्वती दा॒शुषे॑ वार्यं॑ दात्

sarasvatīṃ devayanto havante sarasvatīmadhvare tāyamāne | sarasvatīṃ sukṛto havante sarasvatī dāśuṣe vāryaṃ dāt

हिन्दी अर्थ

को चाहनेवाले परमेदव राग्नि को (समिन्धते) हृदयो में संदीप्त करते है, प्रकट करते है । (सः) वह परमेदवर (निहितान् निधीन्) मनुष्यो मँ निहित भर्थात् छिपी हई योगजन्य विभरुतियों को (वेद) जानता है) श्रौर उन (पिदृन् ) पितरों को भी जानता है, पहिचानता है, जो कि गृहस्थ-जीवन त्याग कर (परावतः गतान्) दुर परे चले गणएर्है। विना्ली है । परमेदवराग्नि भमत्यं है, अमर है, अविनाशी है । साथ ही परमेदवर ही जानता है कि किस मनुष्य में कौन-कौन सी योगजन्य विभू- तियां निहित है । इसलिये इन विभरूतियोँ की प्राप्ति के लिये परमेदवर की उपासना करनी चाहिए । घुतप्रियम्,घृत = रेतः = वीर्यं । यथा-रेतः कूत्वा- का पुत्र (निपृणामि) थ भाप के पालनाथं भेट करता हूं, (ते) बै सब भटे (ते) भाप के (स्वधावन्तः) घारण-पोषण करनेवाली सात्विक हों, (मधु-

English

stand beside thee. Let the green grains become thy white, and speckled, The dusky corns become thy ruddy

अध्याय १८

श्लोक 4.46

सर॑स्वतीं पि॒तरो॑ हवन्ते दक्षि॒णा य॒ज्ञम॑भि॒नक्ष॑माणाः ।आ॒सद्या॒स्मिन् ब॒र्हिषि॑ मादयध्वमनमी॒वा इष॒ आ धे॑ह्य॒स्मे

sarasvatīṃ pitaro havante dakṣiṇā yajñamabhinakṣamāṇāḥ | āsadyāsmin barhiṣi mādayadhvamanamīvā iṣa ā dhehyasme

हिन्दी अर्थ

116 06७0४ ०8१ 0 8 णी ( भ्रापटे ) । वेदो में यत्र-तत्र प्वादि के मांस के भक्षण का निषेध है । मास-देखो मन्त्र (२१४) । मिश्रित, (स्वधावतीः) तथा घार्ण-पोषण करनेवाले, (याः) जिन (घानाः) भूने जौ भरादिके कारणभूत बीजों को (भ्रनु) ऋत्वनुसार (किराभि) मै खेतों में फकता हू, बोता ह, ( ते) भापके लिये (ताः) वे बीज (उद् बापके उपभोग के लिये (ताः) उन उपजों की (यमः) राष्टूनियन्ता (राजा) राजा (अनुमन्यताम् ) भनुमति दे, स्वीकृति प्रदान करे । गृहस्थ पुरषो का कर्तव्य होना चाहिए कि वे पितरो की भरूभियों तथा वनो म ऋत्वनुसार बीज बोकर, भौर खेतियां काट कर पितरों की सेवा किया करं । भनुमन्यताम् == राजा उपज का नियतांद कर रूपमे लेता है, परन्तु वेदिक प्रथानुसार विना कर लिये विरक्तं को उन की उपज के उप- मोग के लिये राजनियम अनुमति प्रदान करे

English

milch-kine. Let those with calves of Sesamum for ever yield strength to him and never flinch from milking.

अध्याय १८

श्लोक 4.47

सर॑स्वति॒ या स॒रथं॑ य॒याथो॒क्थैः स्व॒धाभि॑र्देवि पि॒तृभि॒र्मद॑न्ती ।स॒ह॒स्रा॒र्घमि॒डो अत्र॑ भा॒गं रा॒यस्पोषं॒ यज॑मानाय धेहि

sarasvati yā sarathaṃ yayāthokthaiḥ svadhābhirdevi pitṛbhirmadantī | sahasrārghamiḍo atra bhāgaṃ rāyaspoṣaṃ yajamānāya dhehi

हिन्दी अर्थ

पुरोगबा ये अभिश्चाचं अख ते ता वहन्ति सुृ्तायु लोकम् ।४४॥ काल का (इदम्). यहु (नियानम्) नियत मागं है, (येन) निस नियत भागं ते (ते) तेरे (पूवं पितरः पूर्वपुरुष (परेताः) गृहस्थं जीवन परिष्यार्ग कर, “परे के आश्रमो मे जति रहेहै। (यि) जो (भस्य) इस नियतमा्गं के का० य । सुर४ प्रथववेद-भाष्य १२९ (पुरोगवः) भ्रग्रणी है, मेता है, वे (जभावः) इस नियत मागं के साक्षात्

English

I offer in Vaisvānara this oblation, thousandfold spring that pours a hundred steamlets. This with a swelling flow supports the Father, supports grand- fathers and their sires before

अध्याय १८

श्लोक 4.48

पृ॒थि॒वीं त्वा॑ पृथि॒व्यामा वे॑शयामि दे॒वो नो॑ धा॒ता प्र ति॑रा॒त्यायुः॑ ।परा॑परैता वसु॒विद् वो अ॒स्त्वधा॑ मृ॒ताः पि॒तृषु॒ सं भ॑वन्तु

pṛthivīṃ tvā pṛthivyāmā veśayāmi devo no dhātā pra tirātyāyuḥ | parāparaitā vasuvid vo astvadhā mṛtāḥ pitṛṣu saṃ bhavantu

हिन्दी अर्थ

२३९. सर॑खतीं देव॒यन्तो हवन्ते सरखतीमण्वरे तायमीने । मयी तथा सरसहृदया जगन्माता का (हवन्ते) सहायताथं आह्न करते सक सहायतां (सरस्वतीम्) श्ञाममयी तथा सरसहृदया जगन्माता का (हवन्ते) आह्वान करते हँ । (सुकृत) परोपकार भादि उत्तम-क्मों के

English

them. Beside the spring with hundred, thousand currents, expanding on the summit of the water, Exhaustless, yielding strength, never reluctant, the Fathers with their sacred food are seated.

अध्याय १८

श्लोक 4.49

आ प्र च्य॑वेथा॒मप॒ तन्मृ॑जेथां॒ यद् वा॑मभि॒भा अत्रो॒चुः ।अ॒स्मादेत॑म॒घ्न्यौ तद् वशी॑यो दा॒तुः पि॒तृष्वि॒हभो॑जनौ॒ मम॑

ā pra cyavethāmapa tanmṛjethāṃ yad vāmabhibhā atrocuḥ | asmādetamaghnyau tad vaśīyo dātuḥ pitṛṣvihabhojanau mama

हिन्दी अर्थ

के लिये (सरस्वती) ज्ञानमयी तथा सरसहूदया जगन्माता (कायम्) उसके भरमीष्टों को (दात्) देती है, पूणं करती है । रूपका भावाहन करना चाहिए । सरस् म== विज्ञानम् (उणा० ४।१९०) जगन्माता का, सहायतां हवन्ते) भराह्वान करते ह 1 है गृहस्य पितरो । १३० प्रथ्वेवेद-भाष्य का० १८। सु यध्वम्) हम सब को प्राप हित कीजिये । भ्रौर अनमीवाः) रोगरदहित (इषः) भ्र. (भ्रस्मे) हभ (आषेहि) प्रदान कीजिये ।

English

This pile of wood, collected, heaped together, regard it, O ye, kinsmen, and come near it. To immortality this mortal goeth: prepare a home for him, all ye his kindred.

अध्याय १८

श्लोक 4.50

एयम॑ग॒न् दक्षि॑णा भद्र॒तो नो॑ अ॒नेन॑ द॒त्ता सु॒दुघा॑ वयो॒धाः ।यौव॑ने जी॒वानु॑प॒पृञ्च॑ती ज॒रा पि॒तृभ्य॑ उप॒संप॑राणयादि॒मान्

eyamagan dakṣiṇā bhadrato no anena dattā sudughā vayodhāḥ | yauvane jīvānupapṛñcatī jarā pitṛbhya upasaṃparāṇayādimān

हिन्दी अर्थ

( पितृभिः) रक्षा तथा पालन करनेवाले माता-पिता भ्रादि सम्बन्धी देकर (मदन्ती) हमे भानन्दित तथा मुदित-प्रमुदित कर रही ह, वह आप (भरत) इस हमारे पाथिव जीवन मे (यजमानाय ) भ्त्येक यजन-कर्ता के लिये (इडः) वेदिक स्तुतिरयों मेँ कथित (सहस्राधंमू्) महामूल्य तथा (भागम्) जगन्माता भ्रत्येक के हृदय मेँ तथा शरीर मेँ बसी हुई उसकै है । यह तब तक ही जब तक कि जीवात्मा हस शरीर के साथ कमाोँ दारा का० १८ सु ४ भथर्ववेद-माष्य १३१. २४२. पृथिवी त्वा एथिव्यामा बैठयामि देवो ने। घाता प्र तिरात्पयुः।

English

Waters full of sweetness, Pouring forth food and Amrit for the Fathers, refresh both these and those, the Goddess

अध्याय १८

श्लोक 4.51

इ॒दं पि॒तृभ्यः॒ प्र भ॑रामि ब॒र्हिर्जी॒वं दे॒वेभ्य॒ उत्त॑रं स्तृणामि ।तदा रो॑ह पुरुष॒ मेध्यो॒ भव॒न् प्रति॑ त्वा जानन्तु पि॒तरः॒ परे॑तम्

idaṃ pitṛbhyaḥ pra bharāmi barhirjīvaṃ devebhya uttaraṃ stṛṇāmi | tadā roha puruṣa medhyo bhavan prati tvā jānantu pitaraḥ paretam

हिन्दी अर्थ

हे मृत मनुष्य ! (पृथिवीं त्वा) पृथिवीरूप तुको, म पुरोहित धारण-पोषणकर्तां (देवः) परमेष्वर - देव (नः) हमारी (भायुः) भायु (प्रतिराति) बढाए ! (परापरेवा ) परे से परे पहंचा हृभा सर्वव्यापक परभे- करनेवाला (अस्तु) हो । (अधा) श्रौर : (मुताः) शरीरत्याग क्ये हुए शरीरम्" (५।९।७) भर्थात् शरीर पृथिवीमय है, मिटरीरूप है । (0५45

English

Waters. 4040. Waters, send Agni forward to the Fathers: let them accept the sacrifice I offer. May they who follow Vigour that abideth there send us down wealth with full store of heroes.

अध्याय १८

श्लोक 4.52

एदं ब॒र्हिर॑सदो॒ मेध्यो॑ऽभूः॒ प्रति॑ त्वा जानन्तु पि॒तरः॒ परे॑तम्।य॒था॒प॒रु त॒न्वं॑१ सं भ॑रस्व॒ गात्रा॑णि ते॒ ब्रह्म॑णा कल्पयामि

edaṃ barhirasado medhyo'bhūḥ prati tvā jānantu pitaraḥ paretam| yathāparu tanvaṃ1 saṃ bharasva gātrāṇi te brahmaṇā kalpayāmi

हिन्दी अर्थ

पुरोहित कहता है कि परमेश्वरं हमारी प्रायुओं को बढाए, भौर स्व॑ग्यापक मृत व्यक्तियों के जीवात्मा को पूनजन्म वैकर नए. माता-पिता भादि सम्बम्धियों के दक्षन कराए. । परापरैता-=परा+-परा-+भरा-+दइ--त । पापकर्म को पू्णंतया छोड़ दो, उवे ( अप मूजेथाम् ) माजंनविषि दवारा १३२ भथर्वंवेद-भाष्य का०.१८।सू०४ (पितृषु) पितरो के बीच म (दातुः) सदुषदेश देनेवाले (मम) मु पुरो- हित के तुम (दहभोजनौ) इस जीवन मेँ पालक बनो ।

English

Lover of butter, deathless, him, Oblation-bearer, they inflame. He knoweth well the treasured stores gone to the Fathers, far away.

अध्याय १८

श्लोक 4.53

प॒र्णो राजा॑पि॒धानं॑ चरू॒णामू॒र्जो बलं॒ सह॒ ओजो॑ न॒ आग॑न्।आयु॑र्जी॒वेभ्यो॒ विद॑धद् दीर्घायु॒त्वाय॑ श॒तशा॑रदाय

parṇo rājāpidhānaṃ carūṇāmūrjo balaṃ saha ojo na āgan| āyurjīvebhyo vidadhad dīrghāyutvāya śataśāradāya

हिन्दी अर्थ

सत्रीपुरुषौ । द्मशानभूमि में दिये उपदेश का वर्णन हषा है । प्रदान करनेवाली है । जब यौवने) युवाकाल में (जीवान्) जीवितो के गहरा -सम्पकं कर लेते है, तब बुढापा (इमान्) इन बीवितो को (पितृभ्यः) जीवित पितरीं घे पृथक् कर (उप संपराणयात्) मृत्यु के समीप शीघ्र भ्रथवा--जब यौवनकाल मेँ जीवितो कै साथ (जरा) स्तुति वा भक्ति

English

The mingled draught, the mess of rice, the flesh which I present to thee, May these be full of food for thee, distilling fatness, rich in sweets. Grains which for thee I scatter, mixt with Sesamum as sacred food,

अध्याय १८

श्लोक 4.54

ऊ॒र्जो भा॒गो य इ॒मं ज॒जानाश्मान्ना॑ना॒माधि॑पत्यं ज॒गाम॑ ।तम॑र्चत वि॒श्वमि॑त्रा ह॒विर्भिः॒ स नो॑ य॒मः प्र॑त॒रं जी॒वसे॑ धात्

ūrjo bhāgo ya imaṃ jajānāśmānnānāmādhipatyaṃ jagāma | tamarcata viśvamitrā havirbhiḥ sa no yamaḥ prataraṃ jīvase dhāt

हिन्दी अर्थ

का० १८।यु०४ प्रथवंत्ेद-माष्य १३३ २४५. इदं पितृम्यः श्र भ॑रामि बरहि्जीवं देवेभ्यः उषरं स्तृणामि । (जीवं = जीवन्) जीवित मै (पितृभ्यः) पितरों के लिए (दवम्) यह (बहिः) कुशासन (प्रभरामि) लाता हुं, भौर (स्तृणामि) बिछाता हूं । भासन लाता ौर बिछाता हुं । (पुरुष) है भाश्चमं परिवर्तन करनेवाले (भवन्) होता हृभा (वद्) उस ऊंचे कु्ासनः पर (भरा रोहे). भाखूढ् हो ।

English

May these for thee be excellent and potent. King Yama look on, them, as thine, with favour. This is the ancient, this the recent pathway, by which thy sires of olden time departed.

अध्याय १८

श्लोक 4.55

यथा॑ य॒माय॑ ह॒र्म्यमव॑प॒न् पञ्च॑ मान॒वाः ।ए॒वा व॑पामि ह॒र्म्यं यथा॑ मे॒ भूर॒योऽस॑त

yathā yamāya harmyamavapan pañca mānavāḥ | evā vapāmi harmyaṃ yathā me bhūrayo'sata

हिन्दी अर्थ

भ्रासन बिकछाए जाते है, बैठते कै लिये .। सुक्ष्म शरीरो वाले मृत- पितरो के लिथेश्राखनों की भरावर्यकता नही. होती । तथा भृत-पितरों के सुक्ष्म शरीर तथा भीवात्मा न जाने किस-किस योनि में तथा किस-किस शरीर में निवास कर रहे है । अतः गृहस्थी के घर मेँ उनका भानाभी सम्भव नहीं । साथदही पितरोकीदोभागोंमेःबांटा है, साधारण पितर तथा देव पितर । सद्गृहस्थ जब भराश्रम परिवतंन करना चाहता है, तो षह कां संस्कार कर, अपने भ्राश्रमों मे भाने की स्वीकृति इसे देते है ।

English

They who first travelled it, and they who followed, convey thee to the world where dwell the righteous. The pious call Sarasvati: they worship Sarasvati while sacrifice proceedeth.

अध्याय १८

श्लोक 4.56

इ॒दं हिर॑ण्यं बिभृहि॒ यत् ते॑ पि॒ताबि॑भः पु॒रा।स्व॒र्गं य॒तः पि॒तुर्हस्तं॒ निर्मृ॑ड्ढि॒ दक्षि॑णम्

idaṃ hiraṇyaṃ bibhṛhi yat te pitābibhaḥ purā| svargaṃ yataḥ piturhastaṃ nirmṛḍḍhi dakṣiṇam

हिन्दी अर्थ

हे भाश्चम परिवतंन करनेवाले षद्गृहस्थ । तु (इदम्) इस (विः) कुशासन पर (भदः) बेठा है । भ्रौर (मेष्यः) यज्ञाधिकारी तथा पवित्र भरवेश की स्वीकृति प्रदान करे । है भाश्चम परिवतंन करनेवाले .! (यथाः शरीर को भ्रति तपरधर्या वारा सुखाना न चाहिए । अपितु शरीर के ताकि भाश्रम के कर्तव्यो का पालन हो सके । राजा राष्ट का राजा (पणः) प्रजा की पालना करता, -ओौरं उसे सुख-सामग्री द्वारा परिपूरणं करता है । वह (चरूणाम्) खान-पान को सामग्री का (पिधानम्) भी निधान है, निधिरूप है । उसके कारण (नः) हम भराधमवासियों को (ऊर्जः) भन्न (बलम्) बल (सहः) साहस भ्रौर

English

The righteous doers of good deeds invoke her: Sarasvati send bliss to him who giveth! Approaching on the south our solemn worship, the Fathers call Sarasvati to hear them.

अध्याय १८

श्लोक 4.57

ये च॑ जी॒वा ये च॑ मृ॒ता ये जा॒ता ये च॑ य॒ज्ञियाः॑ ।तेभ्यो॑ घृ॒तस्य॑ कु॒ल्यैऽतु॒ मधु॑धारा व्युन्द॒ती

ye ca jīvā ye ca mṛtā ye jātā ye ca yajñiyāḥ | tebhyo ghṛtasya kulyai'tu madhudhārā vyundatī

हिन्दी अर्थ

जीवित सब प्राणियों के लिये (भरायुः) भन्न का (विदधत्) विधान करता हृषा (दीर्घायुत्वाय) दीषं भाय भौर (शतशारदाय) १०० वर्षों की प्रौसतन भरायु का विधान करता है । वस्तुतः (ऊज) भन्न का (भागः) यथोचित विभाग करनेवाला. वंह है; (थः) निने कि (दमम्) इस प्राणिवगं को (जजान) पंदा किया है।. जगाम) -भाचिपत्य को प्रप्त कयि हुए है । (विदवमित्राः) हि संब भूतो के

English

Sit on this holy grass and be ye joyful: give thou us strengthen- ing food that brings no sickness.

अध्याय १८

श्लोक 4.58

वृषा॑ मती॒नां प॑वते विचक्ष॒णः सूरो॒ अह्नां॑ प्र॒तरी॑तो॒षसां॑ दि॒वः ।प्रा॒णः सिन्धू॑नां क॒लशाँ॑ अचिक्रद॒दिन्द्र॑स्य॒ हार्दि॑मावि॒शन् म॑नी॒षया॑

vṛṣā matīnāṃ pavate vicakṣaṇaḥ sūro ahnāṃ pratarītoṣasāṃ divaḥ | prāṇaḥ sindhūnāṃ kalaśā~ acikradadindrasya hārdimāviśan manīṣayā

हिन्दी अर्थ

-का० १८ । सुऽ ४ भ्रथवंवेद-माष्य १३५ की (भ्रचंत) भ्र्चनाएं स्तुतियां किया करो । (सः यमः) वह नियामक परमेश्वर (प्रतरं जीवसे) भधिक जीने के लिये (नः) . हमारा (षात्) , “सुखो के निवास के हेतु, भ्राश्च्य॑स्वरूप घन का विभाग करनेहारे, देखनेहारे परमात्मा की हम लोग प्रदंसा करं” (दुयानन्द-माष्य ) । तथा रमणीय पदार्थो का विभाग करनेवाले है" वांठने वले है।

English

Sarasvati, who tamest with them, joying in hymns and food, O Goddess, with the Fathers,

अध्याय १८

श्लोक 4.59

त्वे॒षस्ते॑ धू॒म ऊ॑र्णोतु दि॒वि षंच्छु॒क्र आत॑तः ।सूरो॒ न हि द्यु॒ता त्वं कृ॒पा पावक॒ रोच॑से

tveṣaste dhūma ūrṇotu divi ṣaṃcchukra ātataḥ | sūro na hi dyutā tvaṃ kṛpā pāvaka rocase

हिन्दी अर्थ

विदंवभित्रा"==सवब के भित्र, या सब प्राणी जिन के..भिन्न बन गएहै। हविर्भिः ह दाने, देय भन्न । यमः-=पौराणिक यम मृत्यु का भरधिष्ठाता है, जीवनदाता प्रौर धारण्पोषण का परधिष्ठाता नहीं । (यथा) जैसे (पञ्च मानवाः) पांच प्रकार के मनुष्य भिलकर (यमाय) यम-नियमों के परिपालक भचायं के लिये (हर्म्यम्) निवासगृह का (प्रवपन्) निर्माण करते है, (एवा) धैसे इन सब के सहयोग द्रा (मे) यै भरपने (हम्यम्). निवासगृहं का (वपामि) निर्माण करता दुभाशीर्बाद वारा, कोई सुरक्षा प्रदान द्वारा, कोई धन की सहायता द्वारा, तथा कोई धरमदान द्वारा गृह-निर्माण में सहायक होते ह । अभिप्राय नगर के वासियों को निवासगृह बनवाने चाहिए, जिन में कि वानप्रस्थी भाचायं ग्रामो पौर नगरों के विद्याथिरयो को शिक्षा. ्रदान कर सकें।ये निवासगृह ग्राम तथा नगरवासिथों क सहोद्योगो हारा निमित होनें चाहिए ।

English

Here give the Sacrificer growth of riches, a portion, worth a thousand, of refreshment. As Prithivī rests on earth, so do I seat thee. May the God Dhātar lengthen our existence. For you may he who parts in turn find treasures, but let the

अध्याय १८

श्लोक 4.60

प्र वा ए॒तीन्दु॒रिन्द्र॑स्य॒ निष्कृ॑तिं॒ सखा॒ सख्यु॒र्न प्र मि॑नाति संगि॒रः ।मर्य॑ इव॒ योषाः॒ सम॑र्षसे॒ सोमः॑ क॒लशे॑ श॒तया॑मना प॒था

pra vā etīndurindrasya niṣkṛtiṃ sakhā sakhyurna pra mināti saṃgiraḥ | marya iva yoṣāḥ samarṣase somaḥ kalaśe śatayāmanā pathā

हिन्दी अर्थ

कहा गया है । .ह्भिटनी ने इसे 0108 (191) कहा है इसी -प्रकार भ्रथवं १२।३।१-६० भे “स्वगोदन का हि । मन्त्र ५० का चतुर्थं षाद ै- कारक (दक्ष गतिवृद्भ्योः)। दक्षिण = 019,9141।1५॥. ०७७७1910 ५9 (भापटे)। अतः =भ्नए ्राश्षम यां परलोक दोनों भरभिप्राय सम्मव है । भविक काऽ श्व । सुऽ भयवंवेद-माष्य १३७

English

Go from this man, both Steers, to him who wills it: ye are my joys here by the giver’s Fathers. From a good quarter have we gained this guerdon, gift of this man, strength giving, plenteous

अध्याय १८

श्लोक 4.61

अक्ष॒न्नमी॑मदन्त॒ ह्यव॑ प्रि॒यां अ॑धूषत ।अस्तो॑षत॒ स्वभा॑नवो॒ विप्रा॒ यवि॑ष्ठा ईमहे

akṣannamīmadanta hyava priyāṃ adhūṣata | astoṣata svabhānavo viprā yaviṣṭhā īmahe

हिन्दी अर्थ

२५१. ये च जीवाये च-मताये जाताये च य्॒ियाः ै, य) जो (जाताः) नवदीक्षित हुए है, (ये च) भौर जो पहिले ते दीक्षित होकर हमारी पुजा भौर सत्कार के भाजन है, (तेम्यः) उन सब पितरों के नाम (मधुधारा) मघुरधारा वाली, (व्युन्दती) प्रौर उने के चेतो पथा बागीचों को सींचती हुई (धुतस्य कुल्या) जल की छोटी नहर (एतु) इस निमित्त श्रमदान तथा धनदान करे । घृतस्य = घृतम् उदकनाम (निषं० दारा पूनः नवीन जन्म लिये हये । प्रसिद्धाथं म “जाता का भथ “मातृगमं से नवजात" करना होगा 1 इस भ्र्थं मे नवजात बच्चों को भी “पितर” दारा सत्यज्ञानों की - (वृषा) र्षा करता, भौर तद्-ढारा (पवते) जीवनीं को पवित्र करता है । वह॒ (भल्लाम्) दिनो के निर्माता (सूरः) सूयं के

English

milker. Bringing in youth old age unto the living, may she bear these together to the Fathers.

अध्याय १८

श्लोक 4.62

आ या॑त पितरः सो॒म्यासो॑ गम्भी॒रैः प॒थिभिः॑ पितृ॒याणैः॑ ।आयु॑र॒स्मभ्यं॒ दध॑तः प्र॒जां च॑ रा॒यश्च॒ पोषै॑र॒भि नः॑ सचध्वम्

ā yāta pitaraḥ somyāso gambhīraiḥ pathibhiḥ pitṛyāṇaiḥ | āyurasmabhyaṃ dadhataḥ prajāṃ ca rāyaśca poṣairabhi naḥ sacadhvam

हिन्दी अर्थ

समान ज्योतिर्मय है,भौर प्रेरक है । वहु(उषसां दिवः) उषाकालो भौर दिनों १३८ अयर्वैवेद-माष्य का० १८ ॥ सु० ४ सूर्यं, तथा प्रेरक । दिवः दिन, सूयं जो उषाकालों भौर दिनों को घटाता- का भरथं है- जीवात्मा । इसीलिये जीवात्माकी शक्तियों को ""इद्दिय

English

I bring this clipped grass hither for the Fathers: grass living,. higher, for the Gods I scatter. Mount this, O man, as victim: let the Fathers recognize thee: when thou hast travelled yonder.

अध्याय १८

श्लोक 4.63

परा॑ यात पितरः सो॒म्यासो॑ गम्भी॒रैः प॒थिभिः॑ पू॒र्याणैः॑ ।अधा॑ मा॒सि पुन॒रा या॑त नो गृ॒हान् ह॒विरत्तुं॑ सुप्र॒जसः॑ सु॒वीराः॑

parā yāta pitaraḥ somyāso gambhīraiḥ pathibhiḥ pūryāṇaiḥ | adhā māsi punarā yāta no gṛhān havirattuṃ suprajasaḥ suvīrāḥ

हिन्दी अर्थ

रो नहि दयुता त्वं कूपा पावक रोच॑से ॥५९॥ है परमेषवर ! प्राप का (धूमः) धूमल' (त्वेषः) प्रकाश (ऊर्णोतु) मु भाच्छादित कयि हये है" घेरे हुये है । यह धूमलं प्रकारा (दुक्रः सन्) सूयं के सदृश हुये हँ । (पावक) है पवित्र करनेवाले ! (कृपा) भ्राप निज मथ इव योषाः सम॑षसे सोम॑ः कल श॒तयाभना पथा ॥६०॥ का० १८ सु० अथर्ववेद -भाष्य १३६

English

Set on this grass thou hast become a victim. Fathers shall know thee yonder when they meet thee.

अध्याय १८

श्लोक 4.64

यद् वो अ॒ग्निरज॑हा॒देक॒मङ्गं॑ पितृलो॒कं ग॒मयं॑ जा॒तवे॑दाः ।तद् व॑ ए॒तत् पुन॒रा प्या॑ययामि सा॒ङ्गाः स्व॒र्गे पि॒तरो॑ मादयध्वम्

yad vo agnirajahādekamaṅgaṃ pitṛlokaṃ gamayaṃ jātavedāḥ | tad va etat punarā pyāyayāmi sāṅgāḥ svarge pitaro mādayadhvam

हिन्दी अर्थ

है । (सखा) परमेद्वर-सखा ( सख्युः ) जीवात्म-सला के साथ की गरई (संगिरः) प्रतिज्ञा का(न प्रमिनाति ) मंग नदीं करता । (इव ) जसे (मर्यः) पति (योषाः) निज पत्नी कै प्रति गमन करता है, वैसे (सोमः) सर्वोत्पादक फेंका है 1 (स्वभानवः) निज सद्गुणो से प्रकाशमान, (विप्राः) विभो नेः किया है । (्यविष्ठाः) हम युवा गृहस्थी (ईमहे ) इनसे सदुपदेशो की याचना विप्राः मेधाविनः (निध०३।१५) । ईमहे = याञ्चाकर्मां (निं ०३।१६) भोजन करना, तुप्त प्रौर प्रसन्न होना, तथा सदुपदेश देना, ये जीवित

English

Gather thy body, limb by limb, together: I by the power of prayer arrange thy members. The royal Parna is the caldrons’ cover: strength have we gained, force, power, and might, and vigour.

अध्याय १८

श्लोक 4.65

अभू॑द् दू॒तः प्रहि॑तो जा॒तवे॑दाः सा॒यं न्यह्न॑ उप॒वन्द्यो॒ नृभिः॑ ।प्रादाः॑ पि॒तृभ्यः॑ स्व॒धया॒ ते अ॑क्षन्न॒द्धि त्वं दे॑व॒ प्रय॑ता ह॒वींषि॑

abhūd dūtaḥ prahito jātavedāḥ sāyaṃ nyahna upavandyo nṛbhiḥ | prādāḥ pitṛbhyaḥ svadhayā te akṣannaddhi tvaṃ deva prayatā havīṃṣi

हिन्दी अर्थ

है । छ्टुः== शशी (श्वेता० २।११)। प्नौर ये भ्रन सबके समानख्पमे पितरहो गये दहै (पितरः) है पितरो ! (पितृयाणैः) पितरों के निमित्त भेजे गये यानो पर्थात् रथों दवारा, भाप (गम्भीरः) गहन भौर वुरगंम (पथिभिः) मार्गो से भी भोर उत्तम सन्तानोत्पादन का उपदेश । दधतः) देते हए, श्राप ( रायः च पोषैः) हमारी परिपुष्ट सम्पत्तियां के कारण (नः) हमारे साथ (अभि) त्मिक विभतियों से हमे सम्पृक्तं कीजिये ।

English

Bestowing length of life upon the living, for long existence through a hundred autumns. The share of vigour which gave this man being, the stone won lordship over foods that

अध्याय १८

श्लोक 4.66

अ॒सौ हा इ॒ह ते॒ मनः॒ ककु॑त्सलमिव जा॒मयः॑ ।अ॒भ्येऽनं भूम ऊर्णुहि

asau hā iha te manaḥ kakutsalamiva jāmayaḥ | abhye'naṃ bhūma ūrṇuhi

हिन्दी अर्थ

(सोम्थाखः) है सोम्य स्वभाव वाले, मधुर स्वभाव वाले (पितरः) से आप (परायात) भ्रपने दूर-दूर के स्थानों मेँ चले जादे । (श्रधा) तदनन्तर . (मासि) मासं के ब्दात् (पुनः) फिर (नः गृहान्) हमारे घरों मेँ (भा यात) जाना, गृहस्थो के चर भ्राकर हविष्यान्न का खाना, जीवित पितरों मेही

English

nourish. Hymn this with your oblations, Visvāmitras: may he, may Yama, lengthen our existence. As the Five Races of mankind for Yama set apart a house.

अध्याय १८

श्लोक 4.67

शुम्भ॑न्तां लो॒काः पि॑तृ॒षद॑नाः पितृ॒षद॑ने त्वा लो॒क आ सा॑दयामि

śumbhantāṃ lokāḥ pitṛṣadanāḥ pitṛṣadane tvā loka ā sādayāmi

हिन्दी अर्थ

२५८. यद् बो अभिरजजहादेकमङ्गं पितृलोकं गमयं जातवेदा, । हे पितरो ¡ (जातवेदाः अग्निः) जातवेदा ध्रगिनि ने ( पित्तूलोकं गम- यन्) पितृलोक की ओर गमन कराते हए (वः) तुम्हारे (यद् ) .जिस (पुनः) फिर (भ्रा प्याययामि) पुणं करता हूं । ताकि (पितरः)-हे पितरो ! का० १८! सु०४ भ्रथर्ववेद-भाष्य् १४१ सामग्री को साथ नहीं लें जाना होता। इस निमित्त प्रजापति परमात्मा

English

Even so I set a house apart that greater numbers may be mine. Take thou and wear this piece of gold, the gold thy father used to wear.

अध्याय १८

श्लोक 4.68

ये॒३स्माकं॑ पि॒तर॒स्तेषां॑ ब॒र्हिर॑सि

ye3smākaṃ pitarasteṣāṃ barhirasi

हिन्दी अर्थ

मु° ६८२) की व्याख्या मे । लोकम् लोक ददने; दशं नीय । पापों को परितप्त करनेवाला, उन जला देनेवाला, तथा (प्रहितः) धति- दिनोदगम के समय (नुभिः) नर-नारियों द्वारा (उपवन्यः) उपासना विधि १४२ अथवेवेद-माष्य का० १८ ।सु०४

English

Wipe tenderly the right hand of thy sire who goes away to heaven. To all, the living and the dead, all that are born, the worshipful. Let the full brook of fatness run, o’erflowing, with stream of mead.

अध्याय १८

श्लोक 4.69

उदु॑त्त॒मं व॑रुण॒ पाश॑म॒स्मदवा॑ध॒मं वि म॑ध्य॒मं श्र॑थाय ।अधा॑ व॒यमा॑दित्य व्र॒ते तवाना॑गसो॒ अदि॑तये स्याम

uduttamaṃ varuṇa pāśamasmadavādhamaṃ vi madhyamaṃ śrathāya | adhā vayamāditya vrate tavānāgaso aditaye syāma

हिन्दी अर्थ

किया है, जिस काकि (ते) वे पितर (स्वधया) आत्मधारण-पोषण की जातवेदाः मन्त्र २५०मे'जातवेदाः'दारा भ्राहवनीय भ्रादि अगिनियों का परमेदवर को मी जाततेदा कहा है 1 जे कि दमन में स्थित परमेश्वर को भ्राहवनीयादि अग्नियां नहीं हौ सकतीं । जातप्रज्ञ तो परमेरवर ही है (निर° ७।५।१९) । तथा “जातवेदस इति जातमिदं सवं सचराचरं स्थित्युत्पत्ति- सनातन भौर सृष्टिकर्ता आदि विशेषण लिखे है, वहीं-वहीं इन नामों से परमेदवर का ग्रहण होता है" 1

English

Far-seeing he flows on, the Bull, the Lord of hymns, promoter of the Sun, of Days, of Dawns, of Heaven.

अध्याय १८

श्लोक 4.70

प्रास्मत् पाशा॑न् वरुण मुञ्च॒ सर्वा॒न् यैः स॑मा॒मे ब॒ध्यते॒ यैर्व्या॒मे।अधा॑ जीवेम श॒रदं॑ श॒तानि॒ त्वया॑ राजन् गुपि॒ता रक्ष॑माणाः

prāsmat pāśān varuṇa muñca sarvān yaiḥ samāme badhyate yairvyāme| adhā jīvema śaradaṃ śatāni tvayā rājan gupitā rakṣamāṇāḥ

हिन्दी अर्थ

२६१. शम्भ॑न्तां लोकाः पितषरदनाः पितृषदने त्वा लोक.आ (पितुषदनाः) पितर अर्थात पिता पितामह भौर प्रपितामह जहां रहते है, वे (लोकाः) वदँनीय आश्रम (चुम्भन्ताम्) पितरों के निवास तथा उद्यान आदि द्वारा सदा सुशोभित रहँ । है पिता ! (पितृषदने) पितरों के रहने के एेसे (लोके) ददयंनीय प्राश्चरम मेँ (त्वा) भापको (भ्रा सादयामि) मै पुत्र स्थापित करता हूं । भाप निवास के लिये सदन का निर्माण कर- ज्ञानी लोगों का स्थान (यजु° ५।२६; दयानन्दमाष्य ) । मध्यकैे फदे को (विश्वथाय) शिथिल दीला. भौर विनष्ट कर भ्रलग १४४ भ्रथर्ववेद-माष्य क० १८ । पु० ४

English

For, Purifier, like the Sun thou shinest with thy radiant glow. Indu is moving forth to Indra’s destined place, and slights not as a friend the promise of his

अध्याय १८

श्लोक 4.71

अ॒ग्नये॑ कव्य॒वाह॑नाय स्व॒धा नमः॑

agnaye kavyavāhanāya svadhā namaḥ

हिन्दी अर्थ

मन्त्रां महि दथानन्द के प्रथं की छाया म किया है (ऋ १। २४।१५) । पाशम् = जीवात्मा पर तीन फे पड़े हुए ह । वे ह--कारणः- दारीररूपी पाश ढीला पड़ जातादहै-। तथा विवेकख्याति हौ जाने पर इसमें भी परवैराग्यहो जाने पर कारणशरीर का पाश्च भीष्डीला पडकृर छट जाता है, भौर जीवान्मा नीवन्धुक्त होकर मोक्ष पालेता है । । जिन-जिन पाप-फंो द्वारा यह जोवात्मा (समामे व्याम) लम्बे-चौड़

English

friend. Thou, Soma, comest nigh as bridegroom meets the bride, reach- ing the beaker by a course of hundred paths.

अध्याय १८

श्लोक 4.72

सोमा॑य पि॒तृम॑ते स्व॒धा नमः॑

somāya pitṛmate svadhā namaḥ

हिन्दी अर्थ

का० १८।सू०४ प्रथर्ववेद-माष्य १४५ (अग्नये) प्रजाजन को जीवनमागं पर भ्रा ले जनेवाले (कव्य- वाहनाय ) मेधावियों के. लिये मेधाव्धंक ज्ञान के वाहनमूत विद्धान् के वाले शि्यु को, (स्वघा नमः) .भात्म-धारणं-पोषणकारी सवत्विक भन्न देना १, सोम" का भर्थं “दूष” भी होता है । यथा “सोमो बुर्वाभिरकाः'' ( ऋ० ६। भर्थात् दुगरवपायी नवजात िषु । इस नवजात शिशु को सात्विक दुष देना चादिये

English

Well have they eaten and rejoiced: their dear ones have they shaken off. Sages, self-luminous, have praised: we who are youngest supplicate.

अध्याय १८

श्लोक 4.73

पि॒तृभ्यः॒ सोम॑वद्भ्यः स्व॒धा नमः॑

pitṛbhyaḥ somavadbhyaḥ svadhā namaḥ

हिन्दी अर्थ

सात्विक दुष मिल सकष निमित्त माता को भी सातिविकाहार वाली होना चाहिए । वाली हो सकेगीं । भरध्वं ° ९।१६।२ का मत्त्राधं निम्नलिखित हैजोकिसोमके परिधातवा ड” । -भर्थात् वेदवाणी कै विदान् पुरोहित ते सोमजा के परहिनने के लिये यह षरं दिय है । नवनात शिशु के संस्कार मे पुरोहित शिशु के लिये जिस प्रकार के वस्त्र का विषान करता ह, शिदयु को कटी वस्र पहिनाना चाहिए । नवि को राजा कडा है स्वस्थ नवलिदरु का मूख कान्तिमान् होता है, इसलिये उसे राजा १४६ भयर्ववेद-माष्य का० १८। सु०४ चाहिए । भर्थात् एसे शिशु को गरिष्ठ तथा भरधिक मसालों वाले भ्रनन न

English

Come hither, Fathers, who deserve the Soma, by the deep path- ways which the Fathers travel. Bestow upon us life and store of children, and favour us with increase of our riches.

अध्याय १८

श्लोक 4.74

य॒माय॑ पि॒तृम॑ते स्व॒धा नमः॑

yamāya pitṛmate svadhā namaḥ

हिन्दी अर्थ

(पितृमते) पिता के सदृश रक्षक धाचायं वाले, (यमाय) यमनियमों के पालकं तथा सरंयमवाले ब्रह्मचारी के लिये (स्वधा नमेः) भात्म-घारण- पोषणकारी सात्विक अन्न देना चाहिए। । स्वधान्न है, भात्म-धारण-पोषणकारी बन्न है.। (च) भौर (ये) जो पितर (त्वामनु) आप कै बाद कै होगे, उनके लिये भी यह स्व॑धान्न है । प्रततामह = प्रपितामह! ततामह मँ “तन्” घातु है, जिसका प्रथं है-- का विस्तार करते है, इसलिये “तन्” का प्रयोग है । त्वामनु भाप कै बाद वानप्रस्थ तथा संन्यासे जो गए है, या जाएंगे । (ततामह) है पितामह 1 (ते) भ्राप के लिये ( एतत्) यह (स्वधा)

English

Depart, O Fathers, ye who merit Soma, by the deep pathways which the Fathers travel; But in a month, rich in fair sons and heroes, come back into our homes to eat oblation.

अध्याय १८

श्लोक 4.75

ए॒तत् ते॑ प्रततामह स्व॒धा ये च॒ त्वामनु॑

etat te pratatāmaha svadhā ye ca tvāmanu

हिन्दी अर्थ

२. इसी भ्रकार यमनियमो के पालन करने बाले ब्रह्मचारी को भी सात्विकाहार बाला होना चाहिए । सात्विक-प्राहार ब्रह्मचयं के पालन में सहायक होता है । उन के वनस्थ गुरभ्रों को भी सात्विकाहारी होना चाहिए । का० १८ सुग. प्रथवेवेद-भाष्यं १४७ मनु) भ्ापके बाद के ठोगि, उनके लिये भी यह स्वधान्न है ।

English

If Agni Jātavedas, as he bore you hence to the Fathers’ world, hath left one single. 241 Limb of your bodies, here do I restore it. Fathers, rejoice in heaven with all your members!

अध्याय १८

श्लोक 4.76

ए॒त् ते॑ ततामह स्व॒धा ये च॒ त्वामनु॑

et te tatāmaha svadhā ye ca tvāmanu

हिन्दी अर्थ

(तत) है पिता ! (एतत्) यह (ते) भ्राप के लिये (स्ववा) स्व- घाप है, भरात्म-घारण-पोषणकारी भन्न है । ५४०1५ ०७७५ 0 0111 ताश । 08५ चन्द “तत” का विकृतसूप है 1 तत. पितुमेव मे इन्हीं तीन का, भर्थात् पिता पितामह भौर पितामहं का करने होति हं । २४ वर्षोकीञायु मँ स्नातक बनकर, २५ वें वषं भे सन्तान हो जाने के समय इस नवपिता के पिता की वायु ५० वर्षों की पितामह की ७५ वषौँ की, तथा प्रपितामह की १०० वर्षो की सम्भावितः है । इससे प्रतीत होता है कि पितृयज्ञ आदि मे इन तीनों के ही जीवित होने के कारण इन्हीं तीन का यजन भर्थात् सत्कार होता है ।

English

Meet for men’s praises, Agni Jātavedas was sent as envoy when the day was closing. Thou gavest to the Fathers with oblation. They ate; eat, God, our offered sacrifices.

अध्याय १८

श्लोक 4.77

ए॒तत् ते॑ तत स्व॒धा

etat te tata svadhā

हिन्दी अर्थ

की साधना मे स्थित (पितृभ्यः) पितरों कै लिये (स्वधा) ब्रातम-घारण- पोषणकारी अन्न होना चाहिए । , १४८ भरथवेवेद-माष्य का० १८॥ सू०४ के लिये (स्वधा) भरात्म-घारण-पोषणकारी भ्रनन होना चाहिए । वक्षःस्थल के फेफड़ोंमे वायुका निवासदहै, नौर हृदयम रक्तरूपी जलं

English

Here hast thou left thy heart; O man, as sisters leave their little pet. Do thou, O earth, envelop him. Bright be to thee those worlds where dwell the Fathers! I seat thee in that sphere which they

अध्याय १८

श्लोक 4.78

स्व॒धा पि॒तृभ्यः॑ पृथिवि॒षद्भ्यः॑

svadhā pitṛbhyaḥ pṛthiviṣadbhyaḥ

हिन्दी अर्थ

“कीर्णो द्योः समवतंतः' ( यजु ३१।१३ ) । भतः दिव् =मूर्धा, सिर । वणन योगदान में किया है । यथा--“कायाकाकायोः. चम्बन्धसंयमाल्लघ वायु में जाकर स्थित हो जाने की सिद्धि का वर्णन हमा है । यथा--“ुनयो वातरशनाः" (ऋ० १०१३६।२); भर्थात् मुनिलोग “वायु की रस्सी"” द्वारा मुनिलोग बहती बायु के भनुकूल शन्तरिक्ष मेँ गति कर॑ते है । “उन्मदिता हए हम वायुभों में प्राकर स्थित हो गये ह । “मन्तरिकेण पतति विश्वा

English

inhabit. Thou art the grass whereon our Fathers seat them.

अध्याय १८

श्लोक 4.79

स्व॒धा पि॒तृभ्यो॑ अन्तरिक्ष॒सद्भ्यः॑

svadhā pitṛbhyo antarikṣasadbhyaḥ

हिन्दी अर्थ

का० १द। सु ४ भरथरवंवेद-माष्य १४९ स्थान-स्थानं के विविध रूपो को देखता है । “बातस्यादवः” (१०।१३६।५) ==मूनि का भरव है वायु ।"उभौ समुत्रा वा क्षेति यज पुवं उतापरः” ( १०। १३६।५); मुनि दोनों समूद्रोंकी सैर करता है, पूवं समुद्रकी भौर परिचम समुद्र की भी, या भाकारीय समुद्र की भी भौर पाथिव समूद्रकी रिक्ष से भी ऊपर महाका्गामी योगी दिधिषब् पितर है । जसे कि वतमान मेँ 98०९ नर्व दवारा चन्द्रलोक भादि में गमन करते है, भौर वहांजा स्थित होते है । सद् गतौ भवसादने च । , पृथिवी में रह कर लोकोपकार करने वाले व्रानप्रस्थी, संन्यासी

English

Loosen, O Varuna, the bond that binds us; loosen the bond above, between, and under. Then under thy protection, O Āditya, may we be sinless and restored to freedom. From all those bonds, O Varuna, release us, wherewith a man is bound at length and cross wise.

अध्याय १८

श्लोक 4.80

स्व॒धा पि॒तृभ्यो॑ दिवि॒षद्भ्यः॑

svadhā pitṛbhyo diviṣadbhyaḥ

हिन्दी अर्थ

१५० भरथरववेद-साष्य का० १८।सू०४ (पित्तरः) हि पितरो ! (वः) प्राप का (यद्) जो (चोरम्) पापहनन का बलं है, (तस्मै) उस की प्राप्ति के लिये (नमः) हम भाप को नन्नभाव पापों के छेदन-मेदन का बल है, (तस्म) उसकी प्राप्ति के लिये (नमः). हम राप को नम्नभाव से प्राप्त होते है।

English

To Agni, bearer of oblation to the Manes, be Hail! and homage! To Soma connected with the Fathers Hail! and homage! To the Fathers connected with Soma Hail! and homage!

अध्याय १८

श्लोक 4.81

नमो॑ वः पितर ऊ॒र्जे नमो॑ वः पितरो॒ रसा॑य

namo vaḥ pitara ūrje namo vaḥ pitaro rasāya

हिन्दी अर्थ

(पितरः) है पितरो ! (वः) भ्राप का (यत्) जो (शिवम) शिव भावसेभ्रापको प्राप्त होते दहै । (पितरः) है पितरो ! (वः) भ्राप को (नमः) नमस्कार हो । (पितरः) हे पितरो ! (वः) भाप को (स्वधा) हम स्वघारण-पोषणकारी श्रन्न भेंट (श्रत्र) इस भूमिः पर (ये) जो (पितरः) हम पितर रहै, भौर (पितरः) हे पितरो ! (भत्र) इस भूमिम (ये) जो (गयम्) तुम (स्थ) हो, (ते) का०.१द ।सूऽ.४ भरथरवेवेद-माष्य १५१

English

To Yama connected with the Fathers Hail! and homage! To thee, O Great-grandfather, and those with thee be this cry of

अध्याय १८

श्लोक 4.82

नमो॑ वः पितरो॒ भामा॑य॒ नमो॑ वः पितरो म॒न्यवे॑

namo vaḥ pitaro bhāmāya namo vaḥ pitaro manyave

हिन्दी अर्थ

(इह) इस भूमि पर ये) जो (जीवाः) जीवित (पितरः) पितर है, भौर जो (वयम्) हम पितर (इह) इस भूमि पर (स्मा). हई, (ते) वे “11096""; यह् सूचित करने के लिये कि मन्त्र मे परलोकगत पितरों का किया गया है । मन्त्र २८० भ्रौर २८१ में सामाजिक ६ सुधार का निदश॒ बच्चों म भी ये दोनों भवृत्तियां सुतरां बद्धमूलं हो जाती है ।

English

Hail To thee, Great-grandfather, and to those with thee be this cry of Hail!

अध्याय १८

श्लोक 4.83

नमो॑ वः पितरो॒ यद् घोरं तस्मै॒ नमो॑ वः पितरो॒ यत् क्रू॒रं तस्मै॑

namo vaḥ pitaro yad ghoraṃ tasmai namo vaḥ pitaro yat krūraṃ tasmai

हिन्दी अर्थ

२८२. आ त्वाप इधीमहि धमन्तं देवाजर् । तथा (अ्रजरम्) कभी भी जीर्णं न होनेवाले (त्वा) भाप को (भा इधीमहि) हम अपने हृदयो मे प्रदीप्त करते है, (यस्य ते) जिस भराप की (पनीयसी) सहस्रारचक्रं । भ्रथर्ववेद भँ.सिर को तृतीय लोक कहा दहै । यथा--शीषं- लोक तृतीयकम् ( १९।२९।१०), अर्थात् सिर तीसरा लोकं है । भाधिहैविक १५२ परथर्ववेद-माष्य का० १८1 सू ४ मर्षा तथा सिर को क्रमदः दिवं तंथा द्यौः कहू है ।

English

To thee, O Fathers, be this cry of Hail! Hail to the Fathers who inhabit earth!

अध्याय १८

श्लोक 4.84

नमो॑ वः पितरो॒ यच्छि॒वं तस्मै॒ नमो॑ वः पितरो॒ यत् स्यो॒नं तस्मै॑

namo vaḥ pitaro yacchivaṃ tasmai namo vaḥ pitaro yat syonaṃ tasmai

हिन्दी अर्थ

जैसे (चन्द्रमाः) - चन्रमा (सुपर्णः) मानो उड़ता हृभासा, (दिवि) उड़ता हा (श्रा घावते) दौडता ४५ । है मनुष्यो ! (वः) तुम्हारे मनौ की पदम् ) गतियो, चञ्चलताभ्रों को ( हिरण्यनेमयः) सुवणंसदृ् चमक-धमक वाली, या हिरण्य के सदृश ॒चमकते वच्ववाली (विद्युतः) विजुलियां भी गतियो को, चञ्चलतां को (रोदसी) है चुलोकं तथा पृथिवीलोक २८२-२८३ मे हृदयो भे, परोर्पकाररत परमेदवेर कै 'समिन्धन भ्रौर उसके स्तवन; तथो मनोवेगो भौर मौनसिंक चञ्चलतां के संयर्भन का उपदेश

English

Hail to the Fathers who inhabit the firmament! Hail to the Fathers who dwell in heaven! Hail, Fathers, to your energy! Hail, Fathers, to your sap!

अध्याय १८

श्लोक 4.85

नमो॑ वः पितरः स्व॒धा वः॑ पितरः

namo vaḥ pitaraḥ svadhā vaḥ pitaraḥ

हिन्दी अर्थ

किया है । ॥ चतुरं ्नुवाकं सभ॑ष्त । "व्रथर्वचेद के भठारहेवें काण्डं क" यह्वमिमं व॑र्षयता गिरः संस्राथ्येण हविषां जुहोमि ॥१॥ भावता से राज्य की वृद्धि करना चाहता है। इस लिये वेदवाणी क रहस्याथं- १५४ भथवेवेद-भाष्य का० १९1 सू० १

English

Hail Father; to your wrath! Hail, Fathers, to your ardour! Hail, Fathers, to what is awful! Hail to what is terrible in you!’

अध्याय १८

श्लोक 4.86

येऽत्र॑ पि॒तरः॑ पि॒तरो॒ येऽत्र॑ यू॒यं स्थ यु॒ष्मांस्तेऽनु॑ यू॒यं तेषां॒ श्रेष्ठा॑ भूयास्थ

ye'tra pitaraḥ pitaro ye'tra yūyaṃ stha yuṣmāṃste'nu yūyaṃ teṣāṃ śreṣṭhā bhūyāstha

हिन्दी अर्थ

घन का प्रवाह करते हैँ । पिघला कर शुद्धं क्यिघीके दूषके भौर उदक प्रवाहो दवारा हम सब मिलकर राज्यमेँधन को बहा लाते हैँ । यह् धन से ान्यस्य॒ या स्फातिः स॑खान्येण हविषा होमि ॥॥. यज्ञ का सम्पादन करता हूं ॥ मै राज्य-पति राज्य मेँ योदुरध सींचता हूं,भौर गौभों के घृत ह्वार भ्रजाजन मेँ बल भौर रस-रक्त सीचता हूं । हमारे शुर

English

Hail, Fathers, to all that is propitious! Hail to all that is plea- sant in you! Homage to you Fathers! Hail to you, Fathers! All Fathers who are here, the Fathers here are you: let then- follow you. May ye be the most

अध्याय १८

श्लोक 4.87

य इ॒ह पि॒तरो॑ जी॒वा इ॒ह व॒यं स्मः॑ ।अ॒स्मांस्तेऽनु॑ व॒यं तेषां॒ श्रेष्ठा॑ भूयास्म

ya iha pitaro jīvā iha vayaṃ smaḥ | asmāṃste'nu vayaṃ teṣāṃ śreṣṭhā bhūyāsma

हिन्दी अर्थ

करता हःधान्य प्रौर नानाविध रसो को उपस्थित करता हं । हमारे बुर.-वीर विराजमान रहँ ॥ मन्त्र मं जिन-जिन वस्तुओं का वणेन हृभा दहै, वे सब “संसाग्य हविः” रूप है, जिनके दारा कि राज्य-यज्ञ को वृद्धि होनी है । २. इमं होमा यह्म॑वतें संस्बणा उत । का० १६1 सू० १ परथ्ववेद-माष्य १५५ इहैव हवमा याव म इद सखादणा उतिमं वंधेयता गिरः ।

English

excellent of these. All living fathers who are here are we here: let them follow us.

अध्याय १८

श्लोक 4.88

आ त्वा॑ग्न इधीमहि द्यु॒मन्तं॑ देवा॒जर॑म्।यद् घ॒ सा ते॒ पनी॑यसी स॒मिद् दी॒दय॑ति॒ द्यवि॑ ।इषं॑ स्तो॒तृभ्य॒ आ भ॑र

ā tvāgna idhīmahi dyumantaṃ devājaram| yad gha sā te panīyasī samid dīdayati dyavi | iṣaṃ stotṛbhya ā bhara

हिन्दी अर्थ

(भायात) मेरे समीप प्राया करो । तथा (निरः) है वेदवाणियो कै रहस्या के विज्ञो. तुम भी (इहैव) इसी राज्य मेँ रहते हए ( इमम्) इस राज्य की (व्यत) वृद्धि करते रहो । (यः) जो हमारा (पञ्चः) पञुसंघ है, वह (सवः) सब (इह एतु) इस राज्य मेँ रहे । (या रथिः) राज्य को जो सम्पत्ति दारा प्राप्य (हविषा) धन को हविरूप जान कर, इस हविं द्वारा (जुहोसि) के खनिज पदां तथा वन, राज्य के भवन तथा उपजः भ्रादि राउ्य के विविध रूप है । वयोवयः=वयः का र्थं है बायुः । मन्व मेँ “वयः” द्वारा १५६ यर्ववेद-माष्य का० १६ । सु०र

English

May we be the most excellent of these. Bright Agni, we will kindle thee, rich in thy splendour, fading. not. So that this glorious fuel may send forth to heaven its light for thee. Bring food to those who

अध्याय १८

श्लोक 4.89

च॒न्द्रमा॑ अ॒प्स्व॑१न्तरा सु॑प॒र्णो धा॑वते दि॒वि।न वो॑ हिरण्यनेमयः प॒दं वि॑न्दन्ति विद्युतो वि॒त्तं मे॑ अ॒स्य रो॑दसी

candramā apsva1ntarā suparṇo dhāvate divi| na vo hiraṇyanemayaḥ padaṃ vindanti vidyuto vittaṃ me asya rodasī

हिन्दी अर्थ

राज्य में यज्ञभावन होने पर प्रजाजन ओर अधिकारी, धनलालसा तथा पदनालसा से राज्य मे शासन नहीं करते, प्रपितु राज्यको यज्ञ जानकर, धर्मं-मावनां से प्रेरित होकर राज्यवधंन करते ह । विह्ेष वक्तव्यः-- (१) नदियों के प्रवाहो से नहर निकाल कर उपज- वृद्धि कर, तथा नगरवासियो को जल देकर, इन प्रवाहो मे नौकाश्रं दवारा व्यापार कर, घन की वृद्धिकी जा सकती है । (२) (वाताः) वायुभों की भ्रनुकूलतः मँ पतवारो द्वारा चलाई जानेवाली समूद्रिय नौकाभ्रों तथा हवाई जहाजौ द्वारा धन कमाया जु सकता है । हवाई जहाजों द्वारा षनोपार्जन के धनमाहराणि"(भयववं ०३।१५।२)। मन्त मे र देवयानाः पन्थानः” का भ्रं है ३।१५।१)। (३) अथवंवेदीय बृहत्सर्वानृक्रमणिका मेँ १६१ सूक्त केदो

English

sing thy praise. Within the waters runs the Moon, the strong-winged Eagle soars. in heaven.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता · Identifier:

Atharva Veda — Chapter 18

अथर्ववेद

संस्कृत संस्करण · Sanskrit Edition:

Imported text; printed edition not recorded

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प्रकाशक अथवा पुरालेखागार · Archive:

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गणना पद्धति टिप्पणी · Numbering System:

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