Atharva Veda· Atharvaveda Saṁhitā
17
अध्याय 17 / 20

Kanda 17

काण्ड 17

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अध्याय १७

श्लोक 1.1

अभ्युदयाय प्रार्थना।१-३० ब्रह्मा।आदित्यः।१ जगती; १-८ त्र्यवसाना; १-३ अतिजगती; ६-७, १९ अत्यष्टिः; ८, ११, १६ अतिधृतिः; ९ पञ्चपदा शक्वरी; १०-१३, १६, १८-१९, २४ त्र्यवसाना; १० अष्टपदा धृतिः; १२ कृतिः; १३ प्रकृतिः; १४-१५ पञ्चपदा शक्वरी; १७ पञ्चपदा विराडतिशक्वरी; १८ भुरिगष्टिः; २४ विराडत्यष्टिः; १-५ षट्-पदा; ११-१३,१६,१८-१९,२४ सप्तपदा; २० ककुप्; २१ चतुष्पदा उपरिष्टाद्बृहती; २२ याजुषी अनुष्टुप्; २३ निचृद् बृहती (२२-२३ द्विपदा) ; २५-२६ अनुष्टुप्; २७, ३०जगती; २८-२९ त्रिष्टुप्।वि॒षा॒स॒हिं सह॑मानं सासहा॒नं सही॑यांसम्।सह॑मानं सहो॒जितं॑ स्व॒र्जितं॑ गो॒जितं॑ संधना॒जित॑म्।ईड्यं॒ नाम॑ ह्व॒ इन्द्र॒मायु॑ष्मान् भूयासम्

abhyudayāya prārthanā| 1-30 brahmā| ādityaḥ| 1 jagatī; 1-8 tryavasānā; 1-3 atijagatī; 6-7, 19 atyaṣṭiḥ; 8, 11, 16 atidhṛtiḥ; 9 pañcapadā śakvarī; 10-13, 16, 18-19, 24 tryavasānā; 10 aṣṭapadā dhṛtiḥ; 12 kṛtiḥ; 13 prakṛtiḥ; 14-15 pañcapadā śakvarī; 17 pañcapadā virāḍatiśakvarī; 18 bhurigaṣṭiḥ; 24 virāḍatyaṣṭiḥ; 1-5 ṣaṭ-padā; 11-13,16,18-19,24 saptapadā; 20 kakup; 21 catuṣpadā upariṣṭādbṛhatī; 22 yājuṣī anuṣṭup; 23 nicṛd bṛhatī (22-23 dvipadā) ; 25-26 anuṣṭup; 27, 30jagatī; 28-29 triṣṭup| viṣāsahiṃ sahamānaṃ sāsahānaṃ sahīyāṃsam| sahamānaṃ sahojitaṃ svarjitaṃ gojitaṃ saṃdhanājitam| īḍyaṃ nāma hva indramāyuṣmān bhūyāsam

हिन्दी अर्थ

तथा देवकोटि के विद्वानों का (प्रियः भूयासम्) म प्रिय हो जाऊ । ,.रमाएु. रन, तथा शुम कार्यो में उस से सहायता की प्रार्थना करना (विषासहिम्) सदा से पराभवकारीˆ"“ शेषाथं मन्व १,- नाम्) ्रजाजनो का (प्रियः भूयासम्) प्रिय ्मै-हो जाऊ, पररमेद्वर का सच्चा उपासक सब प्रजाजतोँ का उपकार करता, ्रौर उने (विषासदहिमू) सदा से पराभवकारी.“"“" शेषाय मन्व ,१,-

English

A prayer to Indra, Identified with Vishnu and the Sun, for the love of Gods, men, and beasts, general protection and prosperity, and all earthly and heavenly blessings Vanquishing, overpowering, a conqueror, exceeding strong,

अध्याय १७

श्लोक 1.2

वि॒षा॒स॒हिं सह॑मानं सासहा॒नं सही॑यांसम्।सह॑मानं सहो॒जितं॑ स्वर्जितं॑ गो॒जितं॑ संधना॒जित॑म्।ईड्यं॒ नाम॑ ह्व॒ इन्द्रं॑ प्रि॒यो दे॒वानां॑ भूयासम्

viṣāsahiṃ sahamānaṃ sāsahānaṃ sahīyāṃsam| sahamānaṃ sahojitaṃ svarjitaṃ gojitaṃ saṃdhanājitam| īḍyaṃ nāma hva indraṃ priyo devānāṃ bhūyāsam

हिन्दी अर्थ

(कठोपनि० बल्लीः २ । मं०. १५) में “सबं वेदा यत्पदमामनन्ति तत्त “प्रथ वेद विषय विचारः“ मेँ लिखते हँ कि “जिसके नामभश्रोम् श्रादि ह उसी मे सव वेदो का मुख्य तात्पयं है" ।. तथा ईश्वर का, -एक भी वेद-स्रोत को परमेदवर व्याप्त कर रहा है मेश्वर को परिभ्रः भी कहते है । नियमों का मागं, सनातन 1.2 ग गतः - स्तवेद् विष्णो बहुधा षीयाणि । त्वै न॑ः पृणीहि पाभ विं्व-

English

In heaven and on the earth thou art uninjured, none reach thy greatness in the air’s mid region. Increasing by inviolate devotion as such in heaven grant us pro- tection, Indra.

अध्याय १७

श्लोक 1.3

वि॒षा॒स॒हिं सह॑मानं सासहा॒नं सही॑यांसम्।सह॑मानं सहो॒जितं स्व॒र्जितं॑ गो॒जितं॑ संधना॒जित॑म्।ईड्यं॒ नाम॑ ह्व॒ इन्द्रं॑ प्रियः प्र॒जानां॑ भयासम्

viṣāsahiṃ sahamānaṃ sāsahānaṃ sahīyāṃsam| sahamānaṃ sahojitaṃ svarjitaṃ gojitaṃ saṃdhanājitam| īḍyaṃ nāma hva indraṃ priyaḥ prajānāṃ bhayāsam

हिन्दी अर्थ

का० १७ । सू° १ अथर्वेवेद-माष्य ३१९ मेरा क्या हो। (सत्रा) स्प्यहै कि (रहः) दिन से (मा) मुम मन्त २४ मेँ संयनी-उपासक मेँ रादित्य वर्स परयेदधर के उदयही (यजु° ३१।१५) मे ब्रह्माण्डनपुरी तथा शरीर-पुरो मेँ बे परमेदवर को है “सूरं के तुल्य प्रकाशस्वरूप । प॑रमेरवर के प्रकट हौ जाने पर उपासक परमेश्वर भेरी शरीर-नौका पर सवार हो गया है । ्रतः परमेदवर से प्राना करता है करितूने मे दिनः मरै होने वाली भ्रासुरी-तर््ख मे पार कर दिया, रातरिमें.उठने वाली भसु री-तरङ्गोसे भी मु पार कर। इस शरीर नौकाके साथ लगे हए ह । इन च्प्यर््रो को “प्रखर कटा

English

To him far-shining, him the self-refulgent, to him the Sovran Lord and King be glory! Worship to him when he is turning westward, to him when set- ting, and when set be

अध्याय १७

श्लोक 1.4

वि॒षा॒स॒हिं सह॑मानं सासहा॒नं सही॑यांसम्।सह॑मानं सहो॒जितं॑ स्व॒र्जितं॑ गो॒जितं॑ संधना॒जित॑म्।ईड्यं॒ नाम॑ ह्व॒ इन्द्रं॑ प्रि॒यः प॑शू॒नां भू॑यासम्

viṣāsahiṃ sahamānaṃ sāsahānaṃ sahīyāṃsam| sahamānaṃ sahojitaṃ svarjitaṃ gojitaṃ saṃdhanājitam| īḍyaṃ nāma hva indraṃ priyaḥ paśūnāṃ bhūyāsam

हिन्दी अर्थ

भ्राथनाए करनो चाहिए, मरौर इन प्राथ नाभं के.म्रनुकुल जीवन डालना के रक्षक सूयं के (ज्यो तिषा) प्रकाश से, तथा (वचं स्रा) तेज से (्रावृतः) (विहायाः) वि्ेष गति सम्पन्न, (सुकृतः) तथा उत्तमं कमं करता हभ समा, भजमेर.के छपे प्रथवेवेद मे वर्मणा के स्थानम वर्मणा छपा है । सुय । कदयप रोग शामकर है; इस सम्बन्ध. मेँ निम्नलिखित प्रमाण. है,. (भधर्वे० २।३३।७), भर्यातु है रोगो ! 'तेरो त्वचा म फन यदम रोग को, करयप के.वीवरं भरात् विनष्ट करने के साधन शरुतः रिमयों द्वाराः का० १७. सु° १ भथववेद-भाष्य ३२१

English

With all his fiery fervour this Āditya hath gone up on high, Giving my foes into my hand. Let me not by my foeman’s prey. Manifold are thy great deeds, thine, O Vishnu. Sate us with cattle of all varied colours. Set me in happiness, in loftiest heaven.

अध्याय १७

श्लोक 1.5

वि॒षा॒स॒हिं सह॑मानं सासहा॒नं सही॑यांसम्।सह॑मानं सहो॒जितं॑ स्व॒र्जितं॑ गो॒जितं॑ संधना॒जित॑म्।ईड्यं॒ नाम॑ ह्व॒ इन्द्रं॑ प्रि॒यः स॑मा॒नानां॑ भूयासम्

viṣāsahiṃ sahamānaṃ sāsahānaṃ sahīyāṃsam| sahamānaṃ sahojitaṃ svarjitaṃ gojitaṃ saṃdhanājitam| īḍyaṃ nāma hva indraṃ priyaḥ samānānāṃ bhūyāsam

हिन्दी अर्थ

सहस्रायुः=खहस्र+-भायुः (जीवन काल; भ्रन्न, निषं° २।७); गायवः तथा हजारो मनुष्यो का उपकारी मा मरा प्रापभिषैवो हैव्या या मा मादुषीरवंखष्या बुधाय ॥२८॥ (ब्रह्मणा) वेदरूपो या परमेरवरलूपो ( वर्मणा) कवच से, श्रौर (वधाय) वधं के लिये, (भवसृष्टाः) छोडे गये है वे (मा) मुके (मा) न. जो मनुष्य . भपने भ्राप क्रो वैदिकं भावना तथा कमं दारा सुरक्षित करता, तथा सदा श्रयने-प्राप को परमेदवर द्वारा विरा हा

English

Thou for our weal, Āditya, hast mounted thy ship with hundred oars. Thou hast transported me to day: so bear me evermore to night. Thou for our weal, O Sūrya, hast mounted thy ship with hundred oars.

अध्याय १७

श्लोक 1.6

उदि॒ह्युदि॑हि सूर्य॒ वर्च॑सा मा॒भ्युदि॑हि ।द्वि॒षंश्च॒ मह्यं॒ रध्य॑तु॒ मा चा॒हं द्वि॑ष॒ते र॑धं॒ तवेद् वि॑ष्णो बहु॒धा वी॒र्याऽनि ।त्वं नः॑ पृणीहि प॒शुभि॑र्वि॒श्वरू॑पैः सु॒धायां॑ मा धेहि पर॒मे व्योऽमन्

udihyudihi sūrya varcasā mābhyudihi | dviṣaṃśca mahyaṃ radhyatu mā cāhaṃ dviṣate radhaṃ taved viṣṇo bahudhā vīryā'ni | tvaṃ naḥ pṛṇīhi paśubhirviśvarūpaiḥ sudhāyāṃ mā dhehi parame vyo'man

हिन्दी अर्थ

ईर्ष्या रादि भरसर नहीं करते। तथा साथ ही जो भ्रपने जीवन को प्राकृतिक १. वीव =वि +-वहं (परिभाषरिसाच्छाबनेषु); बहे का भरं “हिसा यहां अभिप्रेत £ । हिसा भर्थात् विनाच ।. - रदिमभिः । (भयवं ° २।६१२।१) मे कहा ै कि उदय होता हृभा सूयं क्रिमिर्यो का हनन करे, तथा भ्रस्त होता हृभा भी प्रपनी रदिम्यौं हारा हनन करे । वैदिक परिभाषा मे क्रिमि का परभिप्राय है हदा)8 1 उदित ते हए तथा भरस्व होते हृए र्ये की चमकीली रदिमयों मँ रोय॑जनेक क्रिमिर्यो के हनन का विरेक सामथ्यं नियमों के भ्रनुसार निभाता, रौर सयं के प्रका भ्रीर ताप का तथा दारा उत्पन्न होने वाले रोग भी. भ्रसर नदीं कर्ते भ्रौर (मा) न (मृत्युः) प्राप्त हो । (वाचः) वेदवाणी कै (सनिलेन ) जल- इस के लिये सत्य वे दिकधमं का पालनं, बीते जीवन में किये कमो काः

English

Thou hast transported me to night: so bear me evermore to day. Encompassed by Prajāpati’s devotion as shield, with Kasyapa’s bright light and splendour, Reaching old age, may I made strong and mighty live through a thousand years with happy fortune.

अध्याय १७

श्लोक 1.7

उदि॒ह्युदि॑हि सूर्य॒ वर्च॑सा मा॒भ्युदि॑हि ।यांश्च॒ पश्या॑मि॒ यांश्च॒ न तेषु॑ मा सुम॒तिं कृ॑धि॒ तवेद् वि॑ष्णो बहु॒धा वी॒र्याऽनि ।त्वं नः॑ पृणीहि पशुभि॑र्वि॒श्वरू॑पैः सु॒धायां॑ मा धेहि पर॒मे व्योऽमन्

udihyudihi sūrya varcasā mābhyudihi | yāṃśca paśyāmi yāṃśca na teṣu mā sumatiṃ kṛdhi taved viṣṇo bahudhā vīryā'ni | tvaṃ naḥ pṛṇīhi paśubhirviśvarūpaiḥ sudhāyāṃ mā dhehi parame vyo'man

हिन्दी अर्थ

वाले कमो पर विचार, तथा वेदवाणी के शान्तिप्रद सदुपवे्शौ के प्ननुसार भ्राचरण करना चाहिए । भौर ऋतुचर्या के भ्नुसार जीवन व्यतीत करना चाहिय । मृत्युं = जन्म-मरण की परम्परा -सब भ्रोर से (मा) मुके (परि पातु) पूशंतया सुरक्षित करे, (उद्यन्) उदय मेरे जीवन मेँ प्रयत्नश्षीलःरहै। ¦ का० ६७ । सु° १ ग्रथववेद-माष्य 1 ३२३ म समर्थं है । तथा परमेइवर ही हदयाकाक्च मेँ उदित होकर, निज ज्योति छुटकारा दे सक्ता हैँ । यथा “तमेव विदित्वाति मृष्युमेति (यजु° ३११८) । उषसः -=उषाकाल का सात्विक समय, तथा पवंतीय शुद्ध वायु का सेवन, भ्रौर इन हारा प्राणो का जुदध होना,-इन उपायों दारा जीवन

English

Compassed am I with prayer, my shield and armour; compassed with Kasyapa’s bright light and splendour. Let not shafts reach me shot from heaven against me, nor those sent forth by men for my

अध्याय १७

श्लोक 1.8

मा त्वा॑ दभन्त्सलि॒ले अ॒प्स्व॑१न्तर्ये पा॒शिन॑ उप॒तिष्ठ॒न्त्यत्र॑ ।हि॒त्वाश॑स्तिं॒ दिव॒मारु॑क्ष ए॒तां स नो॑ मृड सुम॒तौ ते॑ स्याम॒ तवेद् वि॑ष्णो बहु॒धा वी॒र्याऽनि ।त्वं नः॑ पृणीहि प॒शुभि॑र्वि॒श्वरू॑पैः सु॒धायां॑ मा धेहि पर॒मे व्योऽमन्

mā tvā dabhantsalile apsva1ntarye pāśina upatiṣṭhantyatra | hitvāśastiṃ divamārukṣa etāṃ sa no mṛḍa sumatau te syāma taved viṣṇo bahudhā vīryā'ni | tvaṃ naḥ pṛṇīhi paśubhirviśvarūpaiḥ sudhāyāṃ mā dhehi parame vyo'man

हिन्दी अर्थ

को संहखरमू कहा है । इत्रास-प्रवास भी प्राण हैँ । जीवन मे.इन की राख्या पवनाः धवाः =्प्रैतकेदो श्रथ है, (१).मेव (निषं० १।१०); तथा पार्थिव परवत । पाथिव पर्व॑त ध् व है. मेधं भघ्रुव है। है । इन प्रातिक शक्त्यो के साथ साथं उषाकाल का सेवन;तथां पर्वतवास भादि द्वारां प्राणशुद्धि ्रादि मो भरायुवृद्धि मेँ सहायक होते है सज्रहवां काण्ड समाप्त ि ९ ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका-सं"-युन्मी । १००,०० ५. ऋग्वेद की ऋवसंख्या- युधिष्ठिर मीमांसक ५.०० ७. माध्यन्दिनिपदपाठः (यजुर्वेद-पदपाठ) २००.००

English

destruction. Guarded am I by Order and the Seasons, protected by the past and by the future. Let not distress, yea, let not Death come nigh me: with water of my speech have I o’erwhelmed them.

अध्याय १७

श्लोक 1.9

त्वं न॑ इन्द्र मह॒ते सौभ॑गा॒याद॑ब्धेभिः॒ परि॑ पाह्य॒क्तुभि॒स्तवेद् वि॑ष्णो बहु॒धा वी॒र्याऽनि ।त्वं नः॑ पृणीहि प॒शुभि॑र्वि॒श्वरू॑पैः सु॒धायां॑ मा धेहि पर॒मे व्योऽमन्

tvaṃ na indra mahate saubhagāyādabdhebhiḥ pari pāhyaktubhistaved viṣṇo bahudhā vīryā'ni | tvaṃ naḥ pṛṇīhi paśubhirviśvarūpaiḥ sudhāyāṃ mā dhehi parame vyo'man

हिन्दी अर्थ

११. अथर्ववेदीया बृहत्सर्वानुक्रमणिका- भूमिका तथा १३. वैदिक-निषण्ु-संग्रह- डः धर्मवीर १००.०० १४. वैदिक-सिद्धान्त-मीमांसा- युधिष्ठिर मीमांसक- वेदविषयक सत्रह निबन्धो का संग्रह प्रथमभाग ७५.०० द्वितीयभाग १००.०० ९६. वेद्-श्रुति-आम्नाय-संजञामीमांसा- युधिष्ठिर मीमांसक ५.०० पद प्र नियुक्त तथा सन् १९४२ मेँ वहाँ से सेवामुक्त हृए। अनुसन्धान- सन् १९२३-२४ मे परोपकारिणी सभा अजमेर मे। सन् ऋ २९५६ ५७ आर्य सारवदेशिक वाटिका मे साथ ही "वैदिक अनुसन्धान ' त्रैमासिक (1 (व पत्रिका का सम्पादन भी। . उपाधियां एवं पुरस्कार - विदयालकार, विद्यामातण्ड मानोपाधि, वेदवेदाग रहने के कारण आपको ४ स्वर्णपदक ओर एक रजतपदक प्राप्त हआ।

English

On every side let Agni guard and keep me; the rising Sun drive off the snares of Mrityu! Let brightly flushing Mornings, firm-set mountains, and lives a thousand be with me united. 228

अध्याय १७

श्लोक 1.10

त्वं न॑ इन्द्रो॒तिभिः॑ शि॒वाभिः॒ शंत॑मो भव ।आ॒रोहं॑स्त्रिदि॒वं दि॒वो गृ॑णा॒नः सोम॑पीतये प्रि॒यधा॑मा स्व॒स्तये॒ तवेद् वि॑ष्णो बहु॒धा वी॒र्याऽणि।त्वं नः॑ पृणीहि प॒शुभि॑र्वि॒श्वरू॑पैः सु॒धायां॑ मा धेहि पर॒मे व्योऽमन्

tvaṃ na indrotibhiḥ śivābhiḥ śaṃtamo bhava | ārohaṃstridivaṃ divo gṛṇānaḥ somapītaye priyadhāmā svastaye taved viṣṇo bahudhā vīryā'ṇi| tvaṃ naḥ pṛṇīhi paśubhirviśvarūpaiḥ sudhāyāṃ mā dhehi parame vyo'man

हिन्दी अर्थ

परमेद्वर का (ह्व ) यै भ्राह्वान करता हूं, ताकि (पदुनामु) पदर का परमेश्वर का.सच्वा उपासृक श्रहिसा धमं का पालन करता है, अतः वह पदुर्भो का भौ प्रिय बन जाता है, यथां. “अहिंसा प्रतिष्ठायां जाने पर भर्हिसा-त्रती के संग में पचपन. का भी परस्पर केर्-विरोष छटा जाता है। जो यौगार्ढ्, मंनसा-वाचा-क्मेणा किसी के मन -को नहीं दु.खातताश्रौरन उसे शोरोरिक कश्टहो षहुंवाता है, उस का संप्रिय होः जाना स्वाभाविक है। हिन्त पडुभी उसके. लिए प्रदिस्ौ जाति ।

English

Victorious, winner of the light, winner of cattle and of spoil,. Indra by name, adorable, I call: a long, long life be mine! Vanquishing etc.

अध्याय १७

श्लोक 1.11

त्वमि॑न्द्रासि विश्व॒जित् स॑र्व॒वित् पु॑रुहू॒तस्त्वमि॑न्द्र ।त्वमि॑न्द्रे॒मं सु॒हवं॒ स्तोम॒मेर॑यस्व॒ स नो॑ मृड सुम॒तौ ते॑ स्याम॒ तवेद् वि॑ष्णो बहु॒धा वी॒र्याऽणि ।त्वं नः॑ पृणीहि प॒शुभि॑र्वि॒श्वरू॑पैः सु॒धायां॑ मा धेहि पर॒मे व्योऽमन्

tvamindrāsi viśvajit sarvavit puruhūtastvamindra | tvamindremaṃ suhavaṃ stomamerayasva sa no mṛḍa sumatau te syāma taved viṣṇo bahudhā vīryā'ṇi | tvaṃ naḥ pṛṇīhi paśubhirviśvarūpaiḥ sudhāyāṃ mā dhehi parame vyo'man

हिन्दी अर्थ

वेर को त्याग देते हैँ (वाचस्पतिमिश्च, टोका) समालोचना ही जवसे प्रेमे भवं" नहीं रहता । परन्तु जो तुल्य गणो वाले; सच्चे पस्मेदवरोपासिक. होते ईः वे परस्पर में एक-दूसरे कै मुर्णो की प्रशंसा ही करते हैः प्रतः उन मेँ भ्र मभावः बना रहता है (सूरय) है सूर्यं ! है सरवप्रेरक ज्योतिर्मय !, (उदिहि) रदित हौ मेरे हृदय भे , (उदिहि) श्रवदय उदित, हो; (वचसा) निज ज्योति के मेन दो. (दविष्णो) है सवव्यापक परमेरवर ! (तव, इद्) तेरे ही बहु- पालना कर (विश्वरूपे) विद्व को निरूपित करने वाले (पशुभिः) इन्द्रिय ३०२ मथववेद-भाष्य का० १७ । सू० १

English

Indra by name, adorable I call: May I be dear to Gods. Vanquishing, etc. Indra by name, adorable, I call: may creatures love me well.

अध्याय १७

श्लोक 1.12

अद॑ब्धो दि॒वि पृ॑थि॒व्यामु॒तासि॒ न त॑ आपुर्महि॒मान॑म॒न्तरि॑क्षे ।अद॑ब्धेन॒ ब्रह्म॑णा वावृधा॒नः स त्वं न॑ इन्द्र दि॒वि संछर्म॑ यच्छ॒ तवेद् वि॑ष्णो बहु॒धा वी॒र्याऽणि ।त्वं नः॑ पृणीहि प॒शुभि॑र्वि॒श्वरू॑पैः सु॒धायां॑ मा धेहि पर॒मे व्योऽमन्

adabdho divi pṛthivyāmutāsi na ta āpurmahimānamantarikṣe | adabdhena brahmaṇā vāvṛdhānaḥ sa tvaṃ na indra divi saṃcharma yaccha taved viṣṇo bahudhā vīryā'ṇi | tvaṃ naḥ pṛṇīhi paśubhirviśvarūpaiḥ sudhāyāṃ mā dhehi parame vyo'man

हिन्दी अर्थ

(चेहि) स्थापित कर । ् छ मूके सूयं =परमेदवर को सूर्यं भौ कठा है। यथा “सोऽयंमा स वरणः स खरः स महादेवः", “सो अग्निः स उ सुर्ंः स उ एव महायमः'' (भ्रयर्व० जिन में विचरती हं । श्रतः इन्दि को “गावः” भी र है। जो या मनुष्य को विषयों की ्रोर प्रेरित करतो, वेहो परमेद्वरकी कृपा से सात्विक बन कर मनुष्य की रक्षा श्रौर पालन करने लगती ह । सुषा= टि लोपो वातोरुपावकारयोरूट्, प्रवति रक्नादिकं करोतीति भ्रम” तेषु मा सुमति कृधि तवेद् विष्णो बहुधा वीर्याणि । लं नः (सूरय) है सूयं ! है सर्वश्ेरक ज्योतिर्मय ! (उदिहि) उदित हो मेरे हृदयाकाश मेँ, (उदिहि) , भवद्य उदित होः. (वचंसा) निज ज्योति के के साथ (मा, भ्रमि) .भेरे संमुख (उदिहि) उदित हो।-(यान् च) जिह (पदयामि) म देखता हं, जानता हं (यान् च भ्रौर चिन्ह नहीं देखता,

English

Vanquishing, etc. Indra by name, adorable, I call: may cattle hold me dear. Vanquishing, etc.

अध्याय १७

श्लोक 1.13

या त॑ इन्द्र त॒नूर॒प्सु या पृ॑थि॒व्यां यान्तर॒ग्नौ या त॑ इन्द्र॒ पव॑माने स्व॒र्विदि॑ ।यये॑न्द्र त॒न्वा॒३ऽन्तरि॑क्षं व्यापि॒थ तया॑ न इन्द्र त॒न्वा॒३शर्म॑ यच्छ॒ तवेद् वि॑ष्णो बहु॒धा वी॒र्याऽणि ।त्वं नः॑ पृणीहि प॒शुभि॑र्वि॒श्वरू॑पैः सु॒धायां॑ मा धेहि पर॒मे व्योऽमन्

yā ta indra tanūrapsu yā pṛthivyāṃ yāntaragnau yā ta indra pavamāne svarvidi | yayendra tanvā3'ntarikṣaṃ vyāpitha tayā na indra tanvā3śarma yaccha taved viṣṇo bahudhā vīryā'ṇi | tvaṃ naḥ pṛṇīhi paśubhirviśvarūpaiḥ sudhāyāṃ mā dhehi parame vyo'man

हिन्दी अर्थ

का० १७ । सु० १ प्रथववेद-भाष्य ३०३ खूप से परमेश्वर का, तथा गौणरूप से सूयं का भी वंन है सुमतिः पदयन् न वदं वाचम्” (ऋ० १०७६४) मेँ वाणी को देखने का भ्रभि- प्रायहै, वाणी को. जानना हे परमेदवर ! (भत्र) इस जोवन में (सलिले) जल प्रधान शरीर म; (रप्सु मन्तः) श्रौर रक्त के भीतर ये) जो (पाशिनः) फदा डालने.वाले (सः) वह तु (नः) हमे (मृड) सुखीः.कर, (ति) तेरी (सुमतौ) सुमति काम-क्रोघ प्रादि कौ दुर्वासनाभ्रों से दूषित है, ये मानो हम पर फदा डालने को सदा उद्यत रहते ह, परन्तु है जगदीदवर ! श्राप हृदय वासी होते हए भीइनकेफंदों से सदा मूक्तहै। प्राप ने कृपा करके हमे इन फंदोसे

English

Indra by name, adorable, I call: may equals love me well. Rise up, O Sūrya, rise thou up; with strength and splendour rise on me. Let him who hates me be my thrall; let me not be a thrall to him.

अध्याय १७

श्लोक 1.14

त्वामि॑न्द्र॒ ब्रह्म॑णा व॒र्धय॑न्तः स॒त्रं नि षे॑दु॒रऋष॑यो॒ नाध॑माना॒स्तवेद् वि॑ष्णो बहु॒धा वी॒र्याऽणि ।त्वं नः॑ पृणीहि प॒शुभि॑र्वि॒श्वरू॑पैः सु॒धायां॑ मा धेहि पर॒मे व्योऽमन्

tvāmindra brahmaṇā vardhayantaḥ satraṃ ni ṣeduraṛṣayo nādhamānāstaved viṣṇo bahudhā vīryā'ṇi | tvaṃ naḥ pṛṇīhi paśubhirviśvarūpaiḥ sudhāyāṃ mā dhehi parame vyo'man

हिन्दी अर्थ

दिया है । इस प्रकार भ्रापने ह्मे सुखी किया है । हम निष्वय करते है कि ३०४ भ्रथववेदभमाष्य काऽ १७ सु० १ सलिले सलिलः : क्रा - अथं. है,-जल । शरीर का संगठन जल्, प्रधान द्वैशारीरिक संगठन मेजल का भाग ‡ है। “यसा व्ययदेशो भवति --इस न्याय के श्रनुसार शरीर कोसलिलकहाहै। हुए है, जो स्वाद मे तीध्र, चमकते हृए, लाल तथा लोहमिशित, ताम्बे के “ज्वाला नीले वणं की दो जातो है। इस द्वारा ४००5 भर्थात् शिरां

English

Manifold are thy great deeds, thine, O Vishnu. Sate us with cattle of all forms and colours: set me in happiness, in loftiest heaven. Rise up, O Sūrya, rise thou up; with strength and splendour rise on me.

अध्याय १७

श्लोक 1.15

त्वं तृ॒तं त्वं पर्ये॒ष्युत्सं॑ स॒हस्र॑धारं वि॒दथं॑ स्व॒र्विदं॒ तवेद् वि॑ष्णो बहु॒धा वी॒र्याऽणि ।त्वं नः॑ पृणीहि प॒शुभि॑र्वि॒श्वरू॑पैः सु॒धायां॑ मा धेहि पर॒मे व्योऽमन्

tvaṃ tṛtaṃ tvaṃ paryeṣyutsaṃ sahasradhāraṃ vidathaṃ svarvidaṃ taved viṣṇo bahudhā vīryā'ṇi | tvaṃ naḥ pṛṇīhi paśubhirviśvarūpaiḥ sudhāyāṃ mā dhehi parame vyo'man

हिन्दी अर्थ

नमः'' (म्रथवं० १०।७।३२ मे दिवम् को मूर्धा भर्थातु सिर कहा है अध्या ५1. खं०.2), में कहा. है कि पांचवी श्राहुति अ.५भरापर अर्थात शलिन या जल) पुरुष संज्ञाः वाने हो जते है, थत् पूरष-शरीर यैः परिणत हौ का० १७ । सु० १ भयर्ववेद-भाष्य ३०५ यद्रासौमाग्य के किये, (परि पाहि) हमारी सब भ्रोरसे रक्षा कर। उपासक योगी को, जब परमेदवर की भ्रनदरवर ज्योति का दर्शन को पुशंतया सुरक्षित भ्रनुभव करने लगता है । भ्रकनुभिः यहं शब्द

English

Make me the favourite of all, of those I see and do not see. Manifold are thy great deeds, thine, O Vishnu. Let not the fowlers who are standing ready injure thee in the flood, within the waters.

अध्याय १७

श्लोक 1.16

त्वं र॑क्षसे प्र॒दिश॒श्चत॑स्र॒स्त्वं शो॒चिषा॒ नभ॑सी॒ वि भा॑सि ।त्वमि॒मा विश्वा॒ भुव॒नानु॑ तिष्ठस ऋ॒तस्य॑ पन्थाम॒न्वे॑षि वि॒द्वांस्तवेद् वि॑ष्णो बहु॒धा वी॒र्याऽणि ।त्वं नः॑ पृणीहि प॒शुभि॑र्वि॒श्वरू॑पैः सु॒धायां॑ मा धेहि पर॒मे व्योऽमन्

tvaṃ rakṣase pradiśaścatasrastvaṃ śociṣā nabhasī vi bhāsi | tvamimā viśvā bhuvanānu tiṣṭhasa ṛtasya panthāmanveṣi vidvāṃstaved viṣṇo bahudhā vīryā'ṇi | tvaṃ naḥ pṛṇīhi paśubhirviśvarūpaiḥ sudhāyāṃ mā dhehi parame vyo'man

हिन्दी अर्थ

कल्याण कारिणी (ऊतिभिः) निज रक्षाभ्रौ कै द्वारा. (नः) हमे (शंतमः) (गरुणानः भव) हरमे. उपदे देता हृश्रा बन । (तवेद् विष्णो)". ˆ“ देष के क्षितिज से.ऊपर की भ्रोर, भारोहण. केरताहै। च.लोककेभी तीन भाग ह । . उत्तरका भाग, तथा दक्षि का भाग । इस प्रकार “त्रिदिवं दिवः का कथन ३०६ श्रथवेवेद भाष्य का० १७ । सुऽ १ विभाग (१) (ल्यल्छनापा ग ऽथा एका, जिते लषु मस्तिष्क

English

Ascend this heaven, leaving each curse behind thee, Favour us: let thy gracious love attend us. Manifold are thy great deeds, thine, O Vishnu.

अध्याय १७

श्लोक 1.17

प॒ञ्चभिः॒ परा॑ङ् तप॒स्येक॑या॒र्वाङश॑स्तिमेषि सु॒दिने॒ बाध॑मान॒स्तवेद् वि॑ष्णो बहु॒धा वी॒र्याऽणि ।त्वं नः॑ पृणीहि प॒शुभि॑र्वि॒श्वरू॑पैः सु॒धायां॑ मा धेहि पर॒मे व्योऽमन्

pañcabhiḥ parāṅ tapasyekayārvāṅaśastimeṣi sudine bādhamānastaved viṣṇo bahudhā vīryā'ṇi | tvaṃ naḥ pṛṇīhi paśubhirviśvarūpaiḥ sudhāyāṃ mā dhehi parame vyo'man

हिन्दी अर्थ

कहते है । इस बृहत्-मस्तिष्क के दो विभाग है, दक्षिण गोलाधं तथा वाम लारचक्र मेँ परमेरवरीय ज्योति का दर्शन होताः है । सोमपीदये==सोमरस ब्र्थात् वीयं के.षान के लिये, ऊ्वंरेताः होने प्रसम्प्रज्ञातसभाधि का उपाय कहा है रुवं स्तोममेरयस्व स ने मृड सुमतौ तं स्याम तवेद् मेरवर ! (त्वमु) तु (पुणुहतः) बहतो दारा या नाना नामों दवारा पुकारा

English

Do thou, O Indra, for our great good fortune, with thine in- violable rays protect us. Manifold are thy great deeds, thine, O Vishnu. Be thou most gracious unto us, Indra, with favourable aid,

अध्याय १७

श्लोक 1.18

त्वमिन्द्र॒स्त्वं म॑हे॒न्द्रस्त्वं लो॒कस्त्वं प्र॒जाप॑तिः ।तुभ्यं॑ य॒ज्ञो वि ता॑यते॒ तुभ्यं॑ जुह्वति॒ जुह्व॑त॒स्तवेद् वि॑ष्णो बहु॒धा वी॒र्याऽणि ।त्वं नः॑ पृणीहि प॒शुभि॑र्वि॒श्वरू॑पैः सु॒धायां॑ मा धेहि पर॒मे व्योऽमन्

tvamindrastvaṃ mahendrastvaṃ lokastvaṃ prajāpatiḥ | tubhyaṃ yajño vi tāyate tubhyaṃ juhvati juhvatastaved viṣṇo bahudhā vīryā'ṇi | tvaṃ naḥ pṛṇīhi paśubhirviśvarūpaiḥ sudhāyāṃ mā dhehi parame vyo'man

हिन्दी अर्थ

गति करता है, तथापि सूर्यं निज किरणो वारा दुलोक के तीनों भागो मै व्याप्त होता है । सुय भं भँ “सोमपीतये” का भरथं है ““जलपान" के लिये । सूर्यं उदित हो कर समूद्र प्रादि के जलौका पान करता है । सूयं पक्ष में “शुषा” का प्रथं है, जल, मधु क्था नानाविधरस । सुषा प्र९थ ण 00; 11106, कर्थः (भाष्डे) का० १७ । सु० १ भरथववेद-भाष्य ३०७ हमारे प्रति प्रेरित कर । (सः) वहं तु (नः) हमे (मृड) सुखी कर, (ते) तेरी (सुमतौ) सुमति मँ (स्याम) हम होँ। (तवेद् विष्णो ““-दोष श्रं हे परमेश्वयंवानु परमेश्वर ! (दिवि) युलोक मे (उत) प्रौर (पृथि- (भ्रापुः, न) विज्ञानी नहीं पा सके, जान सके । (श्रदन्धेन) न दबाए गये महिमा मँ बढ़ाया गया । (सः, त्वमू) वह तु (इन्र) है परमेइत्रयंवान् परमे- प्रदान कर, ्रपनी शरण. मँ ला ।. शमं = शरणम् (नि० १२।४।४६;९।३॥

English

Rising to heaven’s third sphere, invoked with song to quaff the Soma juice, loving thy home to make us blest. Manifold are thy great deeds, thine, O Vishnu.

अध्याय १७

श्लोक 1.19

अस॑ति॒ सत् प्रति॑ष्ठितं स॒ति भू॒तं प्रति॑ष्ठितम्।भू॒तं ह॒ भव्य॒ आहि॑तं॒ भव्यं॑ भू॒ते प्रति॑ष्ठितं॒ तवेद् वि॑ष्णो बहु॒धा वी॒र्याऽणि ।त्वं नः॑ पृणीहि प॒शुभि॑र्वि॒श्वरू॑पैः सु॒धायां॑ मा धेहि पर॒मे व्योऽमन्

asati sat pratiṣṭhitaṃ sati bhūtaṃ pratiṣṭhitam| bhūtaṃ ha bhavya āhitaṃ bhavyaṃ bhūte pratiṣṭhitaṃ taved viṣṇo bahudhā vīryā'ṇi | tvaṃ naḥ pṛṇīhi paśubhirviśvarūpaiḥ sudhāyāṃ mā dhehi parame vyo'man

हिन्दी अर्थ

ति (स्विदि) सुख प्राप्त कराने वाली (पवमाने). पवित्र वायुमेंहै। मने पूजन या पङ परवने। मन्व मेँ परमेदवरसे प्राथंनाकी गरई्है कि रान्ति तथा निजाश्वय. प्रदान कोजिये तथा (नाधमानाः) मोक्ष की याचना करते. हुए (ऋषयः) ऋषि लाग (सत्र) दीषरंकालीन उपासनायज्ञ या योगयज्ञ मेँ (निषेदुः) बठे हैँ । (तवेद् ४ वंदथानि वेदनानि (निर० ६।२।७); विदथे येदने (निर० १।३।६) 1 मेघा से तीरणंतम् वह न्यक्त हैजो कि सांसारिक धिषयोंमे लिप्तनहो कर,

English

Thou art the vanquisher of all, O Indra, omniscient Indra, and invoked of many. Indra, send forth this hymn that fitly lauds thee. Favour us let thy gracious love attend us. Manifold are thy great deeds, thine, O Vishnu.

अध्याय १७

श्लोक 1.20

शु॒क्रोऽसि भ्रा॒जोऽसि ।स यथा॒ त्वं भ्राज॑ता भ्रा॒जोऽस्ये॒वाहं भ्राज॑ता भ्राज्यासम्

śukro'si bhrājo'si | sa yathā tvaṃ bhrājatā bhrājo'syevāhaṃ bhrājatā bhrājyāsam

हिन्दी अर्थ

हे सूयं ! (पराङ्) दरस दुर वतंमानतू (पञ्चभिः) पाच ग्रहौँके साथ (तपसि) सप रहा हैया रेरवय॑वानु हो रहा है, रौर (एकया) एक डाल्ता श्रा, उमे दर करता हभ तु (सुदिने) उत्तम-दिन के समय (एषि) सुयं ! (वहुधा) बहुविध (वीर्याणि) साम्यं इन ग्रहों मे प्रकट हो रहै है । (त्वभू).त् (नः) हमें (पृणीहि) पाल (विददख्पैः पशुभिः) नानांखूपी पशुर्भो द्वारा (मा). ममे (सूषायामु) सूपृष्टि में तथा (परमे व्योमन) परम रक्षा मँ (षेहि) स्थापित कर ये ५ प्रहह। सूयकी गर्मी सेये तपते है, इनके साथ साय सूर्यं मीतप रहा होता है ' पृथिवी भी प्रह है, इस का “एकया द्वारा भलग वंन हे परमेदवर् ! (पञ्चमिः) पांच इन्दिर्यो के ५ विषयों के-सेवन क का० १७ । सू०१. भ्रथवंवेद-माष्य ३११

English

Manifold are thy great deeds, thine, O Vishnu. Grant us protection, Indra, with that body of thine that is on earth, in fire, in waters, That dwells within light-finding Pavamana, wherewith thou hast pervaded air’s mid region.

अध्याय १७

श्लोक 1.21

रुचि॑रसि रो॒चोऽसि ।स यथा॒ त्वं रुच्या॑ रो॒चोऽस्ये॒वाहं प॒शुभि॑श्च ब्राह्मणवर्च॒सेन॑ च रुचिषीय

rucirasi roco'si | sa yathā tvaṃ rucyā roco'syevāhaṃ paśubhiśca brāhmaṇavarcasena ca ruciṣīya

हिन्दी अर्थ

अ्रधररस्त-प्रविद्या का (वाधमानः) निराकरण करता हरा, (सुदिने) भ्रौर प्राप्ति के लिए (यज्ञ) (वि तायते) विशेषतया फलाया जाता हैः भ्राहुतियां देने वले (जहृति) ्राहृतियां देते है । (तवेद् विष्णो). ““““ "अर्थं आहितं भव्यं मूते परतिष्ठते तवेद विष्णो बहुषा वीर्याणि । (भ्रसति) जिसकी - सत्ता भ्रनुभव में नहीं भा रही उसं -भअव्याकृत ३१२ भ्रथववेद-भाष्य का० १७। सू° १

English

Manifold are thy great deeds, thine, O Vishnu. Indra, exalting thee with prayer, imploring, Rishis have sat them down in holy Session. Manifold are thy great deeds, thine, O Vishnu,

अध्याय १७

श्लोक 1.22

उ॒द्य॒ते नम॑ उदाय॒ते नम॒ उदि॑ताय॒ नमः॑ ।वि॒राजे॒ नमः॑ स्व॒राजे॒ नमः॑ स॒म्राजे॒ नमः॑

udyate nama udāyate nama uditāya namaḥ | virāje namaḥ svarāje namaḥ samrāje namaḥ

हिन्दी अर्थ

सकता है । यथाः - मिदट्दी से घड़ा बना । सतु-षड़ा मिट्टी रूप कारण मे प्रष्ठ जसे मिट्टी से बने षडे मे, घडे का पूर्ंरूप जो मिटटी है वह् स्थित रहती का-मी-स्वरूप भरुतरवरू मिटा तथा घटर्मे स्थित होता है, इसी प्रहार -५ मयं वाला श्वरूप भी, भूतरूप - प्रकृति में तथा उस के पूर्वं हृए परिणामों मे भी. स्थित इत्र प्रकार एक उप्रादान-प्रजृति को विविधं नामरूपों मे परिणत करना, धामर्य्यरूप कहा है । . इस भावना को “नामरूपे व्याकरवारि” ( छान्दो० उप०

English

Round Trita, round the spring with thousand currents thou goest, round the light-finding assembly. 227

अध्याय १७

श्लोक 1.23

अ॒स्तं॒य॒ते नमो॑ऽस्तमेष्य॒ते नमोऽस्त॑मिताय॒ नमः॑ ।वि॒राजे॒ नमः॑ स्व॒राजे॒ नमः॑ स॒म्राजे॒ नमः॑

astaṃyate namo'stameṣyate namo'stamitāya namaḥ | virāje namaḥ svarāje namaḥ samrāje namaḥ

हिन्दी अर्थ

स्वरूप मे उस के पूववतीं परिणामों तथा भविष्यत् मं होने वले परिणामों की चित्तद्वोरायोगीकोहो बाता है। बण्वा जब पैदा होता है. ठब उस के वत्तंमान चित्त भ भी पूवंजन्म के शूतकान के परिणाम संस्कार. स्पे -रहते है, तथा कायंदहै। कायं की स्थिति उपादान-कारण मेँ दर्चाई् । इस दारा मेँभी उसका भूतरूप भ्र्थात् बीता-रूप निहित रहता है, “तथा भ्रूत पदाथं मे उस का भ।वोरूप भी स्थित होता है । तभी महायोगी त्रिकाल- दर्शी हय सकेता है ! इसी लिये योग मेँ कहा है कि “परिणामन्रयसंयमाद- तीतानागतनज्ञानम्” (योग० २।१६) भर्थात् तीनो परिणामो में संयम करने पदा्थंमेउसकाजोजो खूप प्रथम उत्पन्न हो चुकादहै, भौरजो जो भविष्यत् मँ होना है, इन सब मे क्रम नियत है। क्रमकांमेदही परिणाम. के मदमे हेतुहै, नियामक, भ्रतःजो योगी वस्तु की उत्पत्तिके इस

English

Manifold are thy great deeds, thine, O Vishnu. Thou guardest well the four celestial regions, pervading heaven, and earth with light and splendour.

अध्याय १७

श्लोक 1.24

उद॑गाद॒यमा॑दि॒त्यो विश्वे॑न॒ तप॑सा स॒ह।स॒पत्ना॒न् मह्यं॑ र॒न्धय॒न् मा चा॒हं द्वि॑ष॒ते र॑धं॒ तवेद् वि॑ष्णो बहु॒धा वी॒र्याऽणि ।त्वं नः॑ पृणीहि प॒शुभि॑र्वि॒श्वरू॑पैः सु॒धायां॑ मा धेहि पर॒मे व्योऽमन्

udagādayamādityo viśvena tapasā saha| sapatnān mahyaṃ randhayan mā cāhaṃ dviṣate radhaṃ taved viṣṇo bahudhā vīryā'ṇi | tvaṃ naḥ pṛṇīhi paśubhirviśvarūpaiḥ sudhāyāṃ mā dhehi parame vyo'man

हिन्दी अर्थ

नियतक्रम कोजान लेताहैि व॑ह उस वस्तुके भूत॑रशू्पो भ्रौर मावीरूपों २१४ भरथरवेवेद-भाष्य का० १७। सु० १ हेये. (शुक्रः) पवतर (भसि) तु है, (प्रानः) दीप्तिमान् (असि) ( मुण्डक २।१०) । उपासक इच्छा प्रकट करतादहै किरम मी परमेषवर. से सूयं कावणंनहृश्रादहै, भ्रौर साथ ही, सूयं को प्रदीप्तःकरने वालि परमेषवरःका शी वणन हृश्रा है । भ्राजता नाज दीप्तौ +रातु (कतरि) । भिश्च ्ाक्षणव्चेसेन च रुविषीय ॥२१॥

English

Thou givest help to all these living creatures, and, knowing,. followest the path of Order. Manifold are thy great deed, thine, O Vishnu. With five thou sendest heat: with one removing the curse thou comest in bright sunshine

अध्याय १७

श्लोक 1.25

आदि॑त्य॒ नाव॒मारु॑क्षः श॒तारि॑त्रां स्व॒स्तये॑ ।अह॒र्मात्य॑पीपरो॒ रात्रिं॑ स॒त्राति॑ पारय

āditya nāvamārukṣaḥ śatāritrāṃ svastaye | aharmātyapīparo rātriṃ satrāti pāraya

हिन्दी अर्थ

(एव = एवम्) दसी प्रकार (पशुभिः च) प्ञयुभ्रों के कारण (च) भौर है, दयाश्रौरप्रेमकां प्रदानै) ॥ उपासक भी खब का प्रेमपात्र बनना चाहता है । इस के लिये वह परमेदवर से पशुः भौर ब्राह्मराव्चेस की याचना करता है ताकि वह. (उयते) उदयार्थ-यल करते हये के लिथै (नभः) पर्न हो, (उद्रायते) उदयाथं श्रागमन करते हए क लिये (नमः) भन्न हौ, (उदिताय) उदित हो चुके. के लिये (नमः) अ्नन्न हो, (विराजे) भ्र्थातु विरहित-दीप्ति वाले के कै उदय की ३ ग्रवस्थायं दर्शाई है । (१) जब वह उदय होने के यत्न मे है, (२) जब वह क्षितिज प्रण से कु -ऊपर भ्राया प्रौर कुठ

English

hither. Manifold are thy great deeds, thine, O Vishnu. Indra art thou, Mahendra thou, thou art the world, the Lord of

अध्याय १७

श्लोक 1.26

सूर्य॒ नाव॒मारु॑क्षः श॒तारि॑त्रां स्व॒स्तये॑ ।रात्रिं॒ मात्य॑पीप॒रोऽहः॑ स॒त्राति॑ पारय

sūrya nāvamārukṣaḥ śatāritrāṃ svastaye | rātriṃ mātyapīparo'haḥ satrāti pāraya

हिन्दी अर्थ

"उदायत" दारा, तथा तृतीय को “उदिताय” द्वारा निदिष्टक्रिथ्राहै) की दोप्ति इष्टिगोचर नहीं होती, उस को सत्ता उषादहारा भ्रनुमितत होतो म उस की सभ्यक-दीप्ति दृष्टिगोचर हो जाती है । किया गया है,- “उहिते जुहोतिः, तथा “अदिते लुहोति' प्र्थात् सूरय के.उदित हयेन पर भ्रग्निहोत्र करे, चाहे भनूदित अवस्था भें करे । “ उचते" ३१६ भ्रथवेवेद-माष्य का० १७। सु» १ योगी जब परमेवर केष्यान मँ बेऽता है तत्र प्रारम्म भें उष

English

Life. To thee is sacrifice performed: worshippers offer gifts to thee. Manifold are thy great deeds, thine, O Vishnu.

अध्याय १७

श्लोक 1.27

प्र॒जाप॑ते॒रावृ॑तो॒ ब्रह्म॑णा॒ वर्म॑णा॒हं क॒श्यप॑स्य ज्योति॑षा॒ वर्च॑सा च ।ज॒रद॑ष्टिः कृ॒तवी॑र्यो॒ विहा॑याः स॒हस्रा॑युः॒ सुकृ॑तश्चरेयम्

prajāpaterāvṛto brahmaṇā varmaṇāhaṃ kaśyapasya jyotiṣā varcasā ca | jaradaṣṭiḥ kṛtavīryo vihāyāḥ sahasrāyuḥ sukṛtaścareyam

हिन्दी अर्थ

की भ्रमिव्यक्ति होती है। यथाः- ध लि तथा जब . परमेदवर की ज्योति, भ्र्धोदित सूयं की ज्योति के सदश, योगी को दृष्टिगोचर होत्ती है तब यह भ्रवस्था. ““उदायते'' होता है तब परमेरवर. उदितावस्था मे होता है! विराजे. स्वराजे, है । विराजे या उद्यतेकाल मँ ध्यान मे बेठकरः समन्नाजे या उदिताय की ग्रवस्था तक्र ध्यान करते हये परमेदवर को नमः करते रहने का विधान मन्व में हरा है । जसे कि कहा है “भुयिष्ठां ते नम उक्तिं विषेम का० १७ । सू० १ भरथर्वविद-माष्यः . ३१७ मन्व २२ भँ सूयं के उदित या श्ननुदित कानमे "नमः? शब्द द्वारा

English

What is based on what is not: the present lies on that which is.. Present on future is imposed and future on the present based. Manifold are thy great deeds, thine, O Vishnu.

अध्याय १७

श्लोक 1.28

परी॑वृतो॒ ब्रह्म॑णा॒ वर्म॑णा॒हं क॒श्यप॑स्य॒ ज्योति॑षा॒ वर्च॑सा च ।मा मा॒ प्राप॒न्निष॑वो॒ दैव्या॒ या मा मानु॑षी॒रव॑सृष्टाः व॒धाय॑

parīvṛto brahmaṇā varmaṇāhaṃ kaśyapasya jyotiṣā varcasā ca | mā mā prāpanniṣavo daivyā yā mā mānuṣīravasṛṣṭāḥ vadhāya

हिन्दी अर्थ

होता है, रतः तब सूयं विराट् श्रवस्था मेंःहो जाता है, निज दीप्त से योगी जब शनेः शनः ध्यानावस्था से विरत हो रहा होता तब भी भेश्वर के प्रति “नम उक्तिं” भेट करता है । परमेश्वर सायंकाल की हमा उपासना कौ समाप्ति क समय मानो भ्रस्तमित हौ जाता) विणान है । छमयाध्युषित सायंकाल जब कि सूयं भरौर तारे दोनो न दीखें । ३१० - परथग्वेद-माष्य का १७। सु° १

English

Sate us with cattle of all varied colour. Set me in happiness, in loftiest heaven. Bright art thou, and refulgent: as thou shinest with splendour so I fain would shine with splendour.

अध्याय १७

श्लोक 1.29

ऋ॒तेन॑ गु॒प्त ऋ॒तुभि॑श्च॒ सर्वै॑र्भू॒तेन॑ गु॒प्तो भव्ये॑न चा॒हम्।मा मा॒ प्राप॑त् पा॒प्मा मोत मृ॒त्युर॒न्तर्द॑धे॒ऽहं स॑लि॒लेन॑ वा॒चः

ṛtena gupta ṛtubhiśca sarvairbhūtena gupto bhavyena cāham| mā mā prāpat pāpmā mota mṛtyurantardadhe'haṃ salilena vācaḥ

हिन्दी अर्थ

पति के भ्रश्य मँ.रहने कले । ये दोनों प्रकार के मतव एक पति मनके मेँ रहते है. मौर मन् कोयुद्धभूमिर्मे इनका प्राम चलता रहता है 1 रात्रिकोसोतेहृए मासिक भावों पर नियन्त्रण नहीं रहता । भतः भ्रपते भावो को संयम मेँ र्व सकता है । इसी. लिये संयमी. उदितस्य क प्रति कहता है फिमेरे संयम के कारण दिनम द्ेषो-भासुरमाव मेरे वशे रह रौर उनके वामेन होऊ । इसी प्रकार संयमी के चितया जाता है तब संयमी परमेदवर से शक्ति की प्राथेना करता है ताकि वह द्रेषी- ब्रह्म इन दोनो का वर्णन हुभा है .. मं परमेषवर को “भ्रादितयव्णंम् कहा है 1 „१. “वेदाहमेतं पुषं महान्तनदित्यवनं तमसः परस्तातु' (मच ३११०८

English

Lustre art thou, illuming: as thou glowest with lustre so I too would shine with cattle, with all the lustre of a Brāhman’s station. Glory to him when rising, when ascending! Glory to him when he hath reached the zenith!

अध्याय १७

श्लोक 1.30

अ॒ग्निर्मा॑ गो॒प्ता परि॑ पातु वि॒श्वतः॑ उ॒द्यन्त्सूर्यो॑ नुदतां मृत्युपा॒शान्।व्यु॒च्छन्ती॑रु॒षसः॒ पर्व॑ता ध्रु॒वाः स॒हस्रं॑ प्रा॒णा मय्या य॑तन्ताम्

agnirmā goptā pari pātu viśvataḥ udyantsūryo nudatāṃ mṛtyupāśān| vyucchantīruṣasaḥ parvatā dhruvāḥ sahasraṃ prāṇā mayyā yatantām

हिन्दी अर्थ

वालि । प्रासुरी-माव श्रि दहै, शत्रु है । इन की उठती तरङ्ग सेः उपासक श्रपनी रक्षा चाहता .है । सत्रा ==सत्यनाम (निघं० ३।१०) तू (श्तारिघ्रामु) सौ च्यु वाली (नावम्) मेरी शरीर-नौका पर यह सत्य ह ! (रहः) दिन खे भी (रति, पारय) मु पार करदे। १. भर्थाति है परमेश्वर तुदी मेरी शरीर-नौका का नाविक 11 ज जत जतसनौजा को नाधि (गलता) बन.कर, इस नौका फरो चला रहा है, इस नौका का ख्ेग्या हो रहा है । उपासकने मन्व रश्म रात्री मेँ होने वाले देवायुर सं्रामसे बचने की प्रार्थनापरमेश्रर से कीहै। उपासकने श्रनुभवकियाहै कि धनः प्रार्थना करता है फिनए दिनम भौ परमेच्छर उसे इन संग्रामो

English

worship! To him far-shining, him the self-refulgent, to him the Sovran Lord and King be glory!

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता · Identifier:

Atharva Veda — Chapter 17

अथर्ववेद

संस्कृत संस्करण · Sanskrit Edition:

Imported text; printed edition not recorded

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