Atharva Veda· Atharvaveda Saṁhitā
18
अध्याय 18 / 20

Kanda 18

काण्ड 18

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अध्याय १८

श्लोक 3.1

पितृमेधः।१-७३ अथर्वा।यमः, ४४, ४६ मन्त्रोक्ताः, ५-६ अग्निः, ५० भूमिः, ५४ इन्दुः, ५६ आपः।त्रिष्टुप्, ४, ८, ११, २३ सतः पङ्क्ति, ५ त्रिपदा निचृद्गायत्री, ६, ५६, ६८, ७०, ७२ अनुष्टुप् (५६ आर्षी), १८ २५-२९, ४४, ४६ जगती, (१८ भुरिक्, २९ विराट्) ३० पञ्चपदा अतिजगती, ३१ विराट् शक्वरी, ३२-३५, ४७, ४९, ५२ भुरिक्, ३६ एकावसाना आसुरी अनुष्टुप्, ३७ अकावसाना आसुरी गायत्री, ३९ परा त्रिष्टुप् पङ्क्तिः, ५० प्रस्तारपङ्क्तिः, ५४ पुरोऽनुष्टुप्, ५८ विराट्, ६० त्र्यवसाना षट्-पदा जगती, ६४ भुरिक् पथ्यापङ्क्तिः, ६७ पथ्याबृहती, ६९, ७१ उपरिष्टाद् बृहती।इ॒यं नारी॑ पतिलो॒कं वृ॑णा॒ना नि प॑द्यत॒ उप॑ त्वा मर्त्य॒ प्रेत॑म्।धर्मं॑ पुरा॒णम॑नुपा॒लय॑न्ती॒ तस्यै॑ प्र॒जां द्रवि॑णं चे॒ह धे॑हि

pitṛmedhaḥ| 1-73 atharvā| yamaḥ, 44, 46 mantroktāḥ, 5-6 agniḥ, 50 bhūmiḥ, 54 induḥ, 56 āpaḥ| triṣṭup, 4, 8, 11, 23 sataḥ paṅkti, 5 tripadā nicṛdgāyatrī, 6, 56, 68, 70, 72 anuṣṭup (56 ārṣī), 18 25-29, 44, 46 jagatī, (18 bhurik, 29 virāṭ) 30 pañcapadā atijagatī, 31 virāṭ śakvarī, 32-35, 47, 49, 52 bhurik, 36 ekāvasānā āsurī anuṣṭup, 37 akāvasānā āsurī gāyatrī, 39 parā triṣṭup paṅktiḥ, 50 prastārapaṅktiḥ, 54 puro'nuṣṭup, 58 virāṭ, 60 tryavasānā ṣaṭ-padā jagatī, 64 bhurik pathyāpaṅktiḥ, 67 pathyābṛhatī, 69, 71 upariṣṭād bṛhatī| iyaṃ nārī patilokaṃ vṛṇānā ni padyata upa tvā martya pretam| dharmaṃ purāṇamanupālayantī tasyai prajāṃ draviṇaṃ ceha dhehi

हिन्दी अर्थ

है, (यत्न) जिस माँ म (ते) वे सुकर्मीं लोग (ईयुः) चले है" (तत्र) उस मां सँ (सविता देवः) सर्वोत्पादफ देव (त्वा) तुभे ( दधातु ) स्थापित करे, हे सद्गृहस्थ ! (दमौ) इन दो को, भर्थात् (ते) तेरे माता-पिता को प्रौर नवीन जीवन की प्राप्ति के लिये, (वोढवे) सन्मागं पर चलाया जा सके । (ताभ्याम्) उन दोनों के सहयोग द्वारा तू (यमस्य) यमनियमों के भाचायं के (सादनम्) आश्म में.भरौर उस श्राश्रम मेँ होने वाली (समितीः च)

English

Round thee auspiciously I wrap the vesture of our Mother Earth:

अध्याय १८

श्लोक 3.2

उदी॑र्ष्व नार्य॒भि जी॑वलो॒कं ग॒तासु॑मे॒तमुप॑ शेष॒ एहि॑ ।ह॒स्त॒ग्रा॒भस्य॑ दधि॒षोस्तवे॒दं पत्यु॑र्जनि॒त्वम॒भि सं ब॑भूथ

udīrṣva nāryabhi jīvalokaṃ gatāsumetamupa śeṣa ehi | hastagrābhasya dadhiṣostavedaṃ patyurjanitvamabhi saṃ babhūtha

हिन्दी अर्थ

परमेदवर के लिए रोचकरूप म हो जा, भर्थात् परमेदवर की स्वीकरुति के मन्वरमे उस मूक्ति का वणेन है जिसमे कि जीवात्मा, शरीर तत्त्व को साथ लिये, परमेदवर मेँ प्रवेश पाता है । भौर इसी कारेण शरीर त (पितृभिः) माता-पिता भादि बन्धुभों के साथ. (सुविदानः) एेकमत्य को

English

Choosing her husband’s world, O man, this woman lays herself down beside thy lifeless body. Preserving faithfully the ancient custom. Bestow upon here both wealth and offspring.

अध्याय १८

श्लोक 3.3

अप॑श्यं युव॒तिं नी॒यमा॑नां जी॒वां मृ॒तेभ्यः॑ परिणी॒यमा॑नाम्।अ॒न्धेन॒ यत् तम॑सा॒ प्रावृ॒तासी॑त् प्रा॒क्तो अपा॑चीमनयं॒ तदे॑नाम्

apaśyaṃ yuvatiṃ nīyamānāṃ jīvāṃ mṛtebhyaḥ pariṇīyamānām| andhena yat tamasā prāvṛtāsīt prākto apācīmanayaṃ tadenām

हिन्दी अर्थ

सिन्धोः सिन्धुसृत्याय जाताः” (भथवं १०।२।११ ) मे सिन्धु = ७४ भथववेद-माष्य काण १८ । सु० ३ सत्संगी कीजिये । (भर्वाणः) हमारी भोर भाने वाले (सुविदत्राः कवयः) (ये) जो भराप (शक्यः) धिविष दुःखों से रहित (भरङ््िरसः) प्राण-

English

Posts exalt me! May Indra balm my hands with strength and splendour. A long, long life may Savitar

अध्याय १८

श्लोक 3.4

प्र॒जा॒न॒त्यऽघ्न्ये जीवलो॒कं दे॒वानां॒ पन्था॑मनुसं॒चर॑न्ती ।अ॒यं ते॒ गोप॑ति॒स्तं जु॑षस्व स्व॒र्गं लो॒कमधि॑ रोहयैनम्

prajānatya'ghnye jīvalokaṃ devānāṃ panthāmanusaṃcarantī | ayaṃ te gopatistaṃ juṣasva svargaṃ lokamadhi rohayainam

हिन्दी अर्थ

प्थिवी चयामिं्ोपरिं । लोककृतः पथिकृतो यजामहे ये देवान (घरुवायां त्वा दिशि) है ध्रुव दिला भर्थात् पृथिवीतल पर रहने वाले! १५९१ से १५६ तक के मन्त्रो दारा यह कहा गया है किं मनृष्य चाहे पृथिवी की किसी भी. दिशा भं रहता हो, पृथिवीतल पर रहता हो,या का० १८; भु०३ ध्रथववेद-भाष्य ८१

English

Brightening Agni and exalting Indra, they came encompassing the stall of cattle. Strong One! he marked them, and the gods before them, like herds of cattle in a foodful pasture.

अध्याय १८

श्लोक 3.5

उप॒ द्यामुप॑ वेत॒समव॑त्तरो न॒दीना॑म्।अग्ने॑ पि॒त्तम॒पाम॑सि

upa dyāmupa vetasamavattaro nadīnām| agne pittamapāmasi

हिन्दी अर्थ

राज्याधिकारियों के साथ (सरथम्) एक रथ में बैठ कर. जाते-भ्रते है (घरमसद्धिः) तपोनिष्ठ (ऋषिभिः) ऋषियों के साथ (श्रग्ने) हि उनके का होना चाहिए, भासुर वा राक्षसकोटि का नहीं । हे जीव ! तू (मातरम्) पुनजन्मार्थं माता के (उप) समीप (सपं) तथा (उरूब्यचसम्) बह विस्तारवाली (पृथिवीम्) पृथिवी के सदुश (सुशे- वाम् ) उत्तम-सुखदायिनी है । ( दक्षिणावते ) उत्साहं वाले भुमिपति के लिये जैसे (ऊर्णं ्रदाः ) हलं भादि द्वारा ऊन के सदृश मृदु हुई (पृथिवी) पृथिवी (पातु) रक्षिका होती है, वैसे (एषा) यह् (ऊणंन्रदराः) ऊन के सदृश मृदु हृदयवाली माता (पुरस्तात्) तुं सदा भ्रपनी दुष्टि के -सामने

English

gifts we offer. Thou art the Bull, Supporter, and Upholder,

अध्याय १८

श्लोक 3.6

यं त्वम॑ग्ने स॒मद॑ह॒स्तमु॒ निर्वा॑पया॒ पुनः॑ ।क्याम्बू॒रत्र॑ रोहतु शाण्डदू॒र्वा व्य॒ऽल्कशा

yaṃ tvamagne samadahastamu nirvāpayā punaḥ | kyāmbūratra rohatu śāṇḍadūrvā vya'lkaśā

हिन्दी अर्थ

मराञ्जनेनभञ्जु कान्तौ । सपिषा डदकेन ( निघं० १।१२)। गृहम् (निषं० ३।४) । भ्रारोहन्तु = सी दिर्योवाले घर, जिन की मीके जमीन से ऊंची उटी हई है, उन पर भ्रारोहण करर, चदु । मात्ता-पिता भादि के साथ (सं गच्छस्व) संगत हो; (यमेन) यमनियमों परोपकार के कमो के (सम) साथ संगत हौ. ।

English

Come to us, Agni, with the gracious Fathers who dwell in glow- ing light, the very Sages, Who thirsted mid the Gods, who hasten hither, oblation-winners, theme of singers’ praises. Come, Agni, come with countless ancient Fathers, dwellers in light, primeval, God-adorers,

अध्याय १८

श्लोक 3.7

इ॒दं त॒ एकं॑ प॒र ऊ॑ त॒ एकं॑ तृ॒तीये॑न॒ ज्योति॑षा॒ सं वि॑शस्व ।सं॒वेश॑ने त॒न्वा॒३ चारु॑रेधि प्रि॒यो दे॒वानां॑ पर॒मे स॒धस्थे॑

idaṃ ta ekaṃ para ū ta ekaṃ tṛtīyena jyotiṣā saṃ viśasva | saṃveśane tanvā3 cāruredhi priyo devānāṃ parame sadhasthe

हिन्दी अर्थ

परवश होना चाहिए । गृहस्थ सुकभियों के लिये है, दुष्कभियों के लिये नहीं ॥ शारीरिकं मानसिक आध्यात्मिक मलों का संलोघन करना चाहिए । . चऋ्वेद मं कहा है कि “भ्रतप्ततनूनं तदामो भरते” (ऋक् ९।८३।१) तथा प्रणायामाग्ति का वर्णेन है । हे सदुगहस्थ ! (ये) जो (ते) तेरे (पूरवे) पूवं बुजुगो के (पितरः) पिता पितामह भादि, भ्रौर (ये) जो (भरपरे) उन से इषर के =-अवरकाल के, तेरे निज (पितरः) पिता पितामह प्रादि (परागताः) गृहस्थ छोड़ कर परले भाश्वमो मे चले गए हृए ह, (तेम्थः) उनके लिये (व्युन्दती ) उनके चेतो, उद्यानो भौर भ्राश्रमो को सींचती हई (शतधाराः) सेकड़ौ भराधमों

English

Let these unwidowed dames with goodly husbands adorn them- selves with fragrant balm and unguent.

अध्याय १८

श्लोक 3.8

उत् ति॑ष्ठ॒ प्रेहि॒ प्र द्र॒वौकः॑ कृणुष्व सलि॒ले स॒धस्थे॑ ।तत्र॒ त्वं पि॒तृभिः॑ संविदा॒नः सं सोमे॑न॒ मद॑स्व॒ सं स्व॒धाभिः॑

ut tiṣṭha prehi pra dravaukaḥ kṛṇuṣva salile sadhasthe | tatra tvaṃ pitṛbhiḥ saṃvidānaḥ saṃ somena madasva saṃ svadhābhiḥ

हिन्दी अर्थ

(यन्ति) चलते है, (तेभिः प्रथिभिः) उन योगमार्गो वारा (स्वगंम) वि्ेष सांसारिक सुखो रौर सुखाभाव से रहित्त भ्रानन्दरसमय (तृतीये) तीसरे १०)। धाम का थं है तेज । एक तो प्रकृति का तेज है, जिस पर सांसा- रिक पतङ्गे न्यौछावरहो रहे है । दुसरा तेज है जीवात्मा का । योगिजन म लीन होते हँ । तृतीय तेज है परमेदवर, जिस में ईदवरप्रणिघानी योगी

English

Vivasvān make us free from fear and peril, good rescuer, quick- pouring, bounteous giver! Many in number be these present heroes! Increase of wealth be mine in kine and horses! In immortality Vivasvān set us! Go from us Death, come to us life eternal!

अध्याय १८

श्लोक 3.9

प्र च्य॑वस्व त॒न्वं॑१ सं भ॑रस्व॒ मा ते॒ गात्रा॒ वि हा॑यि॒ मो शरी॑रम्।मनो॒ निवि॑ष्टमनु॒संवि॑शस्व॒ यत्र॒ भूमे॑र्जु॒षसे॒ तत्र॑ गच्छ

pra cyavasva tanvaṃ1 saṃ bharasva mā te gātrā vi hāyi mo śarīram| mano niviṣṭamanusaṃviśasva yatra bhūmerjuṣase tatra gaccha

हिन्दी अर्थ

का० शद सुऽ भरयवंवेद-माष्यः १०१५ मे (श्रिताः) भाश्चय पये रहते हँ । जसे किं (उपरस्य) मेघ का. (मायु) (दुहाम् ) दोहते है, प्रदान करते हं । ष सुपर्णाः जीवात्मा को भी "सुपर्ण" कहते हं । यथा “वा सुपर्णा सयुजा सखाया" (भ्रथवं० ९।९।२०) में जीवात्मा भ्रौर परमात्मा हन दोनों को “सुपणं' कहा है । श्रयः = मन्त्र १६५ से १९७ में पितुयाण देवयान प्रौर मान होता है । परमेदवर का पूणं साक्षात्कार नहीं होता '। परमेदवर का परमेश्वर के सम्बन्ध मेँ युदुढ़ भावना कै उपरान्त ही होता है । उप-

English

To good old age may he protect these people: let not their spirits pass away to Yama. The Sage of Fathers, guardian of devotions who holds thee up with might in air’s mid region,—

अध्याय १८

श्लोक 3.10

वर्च॑सा॒ मां पि॒तरः॑ सो॒म्यासो॒ अञ्ज॑न्तु दे॒वा मधु॑ना घृ॒तेन॑ ।चक्षु॑षे मा प्रत॒रं ता॒रय॑न्तो ज॒रसे॑ मा ज॒रद॑ष्टिं वर्धन्तु

varcasā māṃ pitaraḥ somyāso añjantu devā madhunā ghṛtena | cakṣuṣe mā prataraṃ tārayanto jarase mā jaradaṣṭiṃ vardhantu

हिन्दी अर्थ

इस गृहस्थाश्चम भै (पुरा) पहिले (भ्रबिभः) तूने धारण क्रिया हमा धा। ६२ भ्रथर्ववेद-माष्य का० १८।सू०२ रहित भरना मँ (बहुधा) बहुत प्रकार का (ते) तेरा (दत्तम्) दानकायं वेदवाणियों के सदुपदेशो द्वारा भरमेः) जगदग्रणी परमेर्वररूपी (वमं) कवच को (परिण्ययस्व ) प्रपने चारों भोर पहन ले, प्रौर (गोभिः) गोभों

English

Be bliss among the living mine, oblation mid the Fathers thine! Ye have prepared, pathmakers, Agni-Soma, a fair world for the Gods to be the it treasure.

अध्याय १८

श्लोक 3.11

वर्च॑सा॒ मां सम॑नक्त्व॒ग्निर्मे॒धां मे॒ विष्णु॒र्न्यऽनक्त्वा॒सन्।र॒यिं मे॒ विश्वे॒ नि य॑च्छन्तु दे॒वाः स्यो॒ना मापः॒ पव॑नैः पुनन्तु

varcasā māṃ samanaktvagnirmedhāṃ me viṣṇurnya'naktvāsan| rayiṃ me viśve ni yacchantu devāḥ syonā māpaḥ pavanaiḥ punantu

हिन्दी अर्थ

ताकि (षृष्णुः) परामवकारी, ( हरसा जह षाणः) भपनी हरणशर्व्ति है । पीवसा पीव स्थौल्ये । शरीरगत चर्बी शरीर को स्थूल करती है। गोभिः गौ के यहां दो भं है वेदवाणी (निघं० १।११), तथा प्रसिद्ध गौ। "गोभिः, का भयं है-गौ के दुव घृत प्रादि दारा । बह षाणः-= ह +-सन्+ विवादों को श्चवण करने के अधिकार, राजकीय तेज, भ्रौर सेना बल के साथ-साथ (दण्डम्) दण्डधर के अधिकार को (्राददानः) भरादान करता

English

Go to that world and send us Pūshan hither to bear us on the paths the goat hath trodden. Guard of the world, whose cattle ne’er are injured, may Pūshan bear thee hence, for he hath

अध्याय १८

श्लोक 3.12

मि॒त्रावरु॑णा॒ परि॒ माम॑धातामादि॒त्या मा॒ स्वर॑वो वर्धयन्तु ।वर्चो॑ म इन्द्रो॑ न्यनक्तु॒ हस्त॑योर्ज॒रद॑ष्टिं मा सवि॒ता कृ॑णोतु

mitrāvaruṇā pari māmadhātāmādityā mā svaravo vardhayantu | varco ma indro nyanaktu hastayorjaradaṣṭiṃ mā savitā kṛṇotu

हिन्दी अर्थ

रौर (इह) इती राष्ट म (वयम्) राज्याधिकारी भी रहै । रौर (सुवीराः) उत्तम संनिकं वीरो वले होकर हम ( विच्वाः) सभी (अभिमातीः) अभिमानी (मृधः) संप्रामोत शत्रुसेनां पर (जयेम) विजय पाये । निबेल पड़ जाय, भौर राज्यशासन के लिये भ्रशक्त हो जाय, तब नवनिर्वा- चन हारा नया राजा बना लेना चाहिए । १२९१. षनुहैस्वादाद्दानो मृतस्य स सत्रेण वैसा बेतेन । राष्ट्र घन, राजकीय तेज भौर सेनाबल के साथ-साथ (धनुः) शस्वास्तों

English

knowledge. May he consign thee to these Fathers’ keeping, and to the gracious Gods let Agni give hee. Lord of all life, let Ayu guard thee, Pūshan convey thee forward on the distant pathway.

अध्याय १८

श्लोक 3.13

यो म॒मार॑ प्रथ॒मो मर्त्या॑नां॒ यः प्रे॒याय॑ प्रथ॒मो लो॒कमे॒तम्।वै॒व॒स्व॒तं सं॒गम॑नं॒ जना॑नां य॒मं राजा॑नं ह॒विषा॑ सपर्यत

yo mamāra prathamo martyānāṃ yaḥ preyāya prathamo lokametam| vaivasvataṃ saṃgamanaṃ janānāṃ yamaṃ rājānaṃ haviṣā saparyata

हिन्दी अर्थ

(अर्वाक्) भ्रोर (उप एहि) भया कर। ६४ अथरवंवेद-माष्य का० १८॥।सू०३ सनःतन घमं का ( अनु पालयन्ती ) पूनः पालन करती हुई ( दयं नारी विधवा चे (द्रविणम् ) उत्तम धन वीयं का ( षेहि) आधान कर ।

English

May Savitar the God conduct thee thither where dwell the pious who have gone before thee. For thee I yoke these carriers twain to bear thee to the spirit. world.

अध्याय १८

श्लोक 3.14

परा॑ यात पितर॒ आ च॑ याता॒यं वो॑ य॒ज्ञो मधु॑ना॒ सम॑क्तः ।द॒त्तो अ॒स्मभ्यं॒ द्रवि॑णे॒ह भ॒द्रं र॒यिं च॑ नः॒ सर्व॑वीरं दधात

parā yāta pitara ā ca yātāyaṃ vo yajño madhunā samaktaḥ | datto asmabhyaṃ draviṇeha bhadraṃ rayiṃ ca naḥ sarvavīraṃ dadhāta

हिन्दी अर्थ

'ऋग्वेदादिभोष्यभ्रूमिका' के नियोगकरणं मेँ महषि दयानन्द छत वीरय द्रवणक्षील है, भतः द्रविण है। इसग्राभस्यं दधथिषोस्तवेदं पत्युजनितवममि सं ब॑भूथ ॥२।। दस पति को छोड़कर (उदीष्वं ) तू उठ, (जीवलोकम् भ्रमि) भौर जीवित

English

Hasten with them to Yama’s home and join his gathered. companies. This is the robe that first was wrapped about thee: cast off the robe thou worest here among

अध्याय १८

श्लोक 3.15

कण्वः॑ क॒क्षीवा॑न् पुरुमी॒ढो अ॒गस्त्यः॑ श्या॒वाश्वः॒ सोभ॑र्यर्च॒नानाः॑ ।वि॒श्वामि॑त्रो॒ऽयं ज॒मद॑ग्नि॒रत्रि॒रव॑न्तु नः क॒श्यपो॑ वा॒मदे॑वः

kaṇvaḥ kakṣīvān purumīḍho agastyaḥ śyāvāśvaḥ sobharyarcanānāḥ | viśvāmitro'yaṃ jamadagniratriravantu naḥ kaśyapo vāmadevaḥ

हिन्दी अर्थ

तेरा पाणि-प्रहण किया था उस पति की, ( दधिषोः ) तेरा घारण-पोषण करनेवाले इस नवीन पति की, तथा (तव) तू भ्रपनी (इदम्) इस (जात्वम्) का० १८।पु०३ धथरववेद-माघष्य ६१५ (नीयमानाम् ) शवयात्रा भे लेजाई जाती हुई, भौर (मृतेभ्यः) भुन्को से (परि) पृथक् कर (नीयमानाम् ) वापिस लाई जाती हुई (नीवास् ) सीवित पहिले पति की मत्यु के कारण (अन्धेन) गहरे (तमसा) शोकान्धक्रारसे

English

us. Go, knowing, to the meed of virtuous action, thy many gifts. bestowed upon the friendless.

अध्याय १८

श्लोक 3.16

विश्वा॑मित्र॒ जम॑दग्ने॒ वसि॑ष्ठ॒ भर॑द्वाज॒ गोत॑म॒ वाम॑देव ।श॒र्दिर्नो॒ अत्रि॑रग्रभी॒न्नमो॑भिः॒ सुसं॑शासः॒ पित॑रो मृ॒डता॑ नः

viśvāmitra jamadagne vasiṣṭha bharadvāja gotama vāmadeva | śardirno atriragrabhīnnamobhiḥ susaṃśāsaḥ pitaro mṛḍatā naḥ

हिन्दी अर्थ

मन्त मेँ कथन “दधिषः पत्युः" का है ( संख्या १२३ ) । परिणीय- °परिणीयमानाम्' में श्लेषविधया "नियोगविधि द्वारा पुनविवादहित होती हई” भी सम्भव है । महषि के सिद्धन्तानुसार पुनविवाह भनुमोदित है। परन्तु पुनविवाह् को महषि ने शूद्र-विवाह् कहा है । , रीति-रिवाज को (प्रजानती ) जानती हृ, गौर (देवानाम्) देवकोटि कै हुई, (तम ) उस का (जुषस्व) प्रीति से सेवन कर, जो कि ( श्रयम् ) यह (ते गोपतिः) तेरी इन्द्रियों का पति बनाहै। गौर तु (एनम्) इस मृत-पति

English

Mail thee with flesh against the flames of Agni; encompass thee about with fat and marrow; So will the bold One eager to attack thee with fierce glow fail to girdle and consume thee. From his dead hand I take the staff he carried, together with his lore and strength and

अध्याय १८

श्लोक 3.17

क॒स्ये मृ॒जाना॒ अति॑ यन्ति रि॒प्रमायु॒र्दधा॑नाः प्रत॒रं नवी॑यः ।आ॒प्याय॑मानाः प्र॒जया॑ धने॒नाध॑ स्याम सुर॒भयो॑ गृ॒हेषु॑

kasye mṛjānā ati yanti ripramāyurdadhānāḥ prataraṃ navīyaḥ | āpyāyamānāḥ prajayā dhanenādha syāma surabhayo gṛheṣu

हिन्दी अर्थ

चिताधिरूढ् करने की स्वीकृति दे । विघवा सदा प्रर्न्या है । मृतपति कै परचात् उसे जीवित रहने का पूर्णं धिकार है1 देवकोटिकेलो्गोका मागं यहीहै। विधवा चहेतो नियोग या पुनविवाह करर सकती है । यह मागं देवो द्वारा अनुमोदित है। सुख मोगने कै लिये । भथवा इसत नवपति को तु स्वर्गीय सुख पर भरारूढ़् कर, निज प्रेममय व्यवहारो द्वारा । . ६६ . भरवेवेद-भाष्य का० १८। सू०३

English

splendour. There art thou, there; and here with good men round us may we o’ercome all enemies and

अध्याय १८

श्लोक 3.18

अ॒ञ्जते॒ व्यऽञ्जते॒ सम॑ञ्जते॒ क्रतुं॑ रिहन्ति॒ मधु॑ना॒भ्यऽञ्जते ।सिन्धो॑रुच्छ्वा॒से प॒तय॑न्तमु॒क्षणं॑ हिरण्यपा॒वाः प॒शुमा॑सु गृह्णते

añjate vya'ñjate samañjate kratuṃ rihanti madhunābhya'ñjate | sindhorucchvāse patayantamukṣaṇaṃ hiraṇyapāvāḥ paśumāsu gṛhṇate

हिन्दी अर्थ

की (तरः) निचली भूमि मेँ प्लुतियों के साथ गिरते प्रवाहो मे (श्रवत्) का दिया हमरा है । सम्बोधन कवित्वशेली का है । भौर सूयं प्रादि मे चमक रही है । बेत प्रादि, जोकि जल मे षैदा होते है, उन में भी भरग्नि विद्यमान है । नदियों के प्रवाह निचली भूमि पर जब वेग से गिरते है, उन जलप्रपातों मे भी भ्रमति छिपी पडो रहती हि, क्योंकि को (समदहः) जलाया है, (निर् वापय पुनः तभ् उ) उप्र भूभाग से निकल कर उसे फिर बोने योग्य कर दे । (भ्रत्र) इस शमष्ान मेँ या भूभाग में

English

foemen. From his dead hand I take the bow he carried, together with his. power and strength and splendour.

अध्याय १८

श्लोक 3.19

यद् वो॑ मु॒द्रं पि॑तरः सो॒म्यं च॒ तेनो॑ सचध्वं॒ स्वय॑शसो॒ हि भू॒त।ते अ॑र्वाणः कवय॒ आ शृ॑णोत सुविद॒त्रा वि॒दथे॑ हू॒यमा॑नाः

yad vo mudraṃ pitaraḥ somyaṃ ca teno sacadhvaṃ svayaśaso hi bhūta| te arvāṇaḥ kavaya ā śṛṇota suvidatrā vidathe hūyamānāḥ

हिन्दी अर्थ

घास, तथा (व्यल्कशा) भूमि को विविष प्रकार ते भलंकृत करनेवाली जौर पृथिवी पर मानो शयन करनेवाली, बिष्ठी हुई घास प्राुभरूत हो । उसके पदचात् जल सेचन द्वारा उस भूभाग को टठण्डा कर वहां बास प्रादि का प्ररोहण कर देना चाहिए । सेवेशने तन्वा२ चाश्रेषि प्रिथ देवानी परमे सधं ॥७॥। है । (परः) इससे परे मन (ऊ) निश्चय से (ते) तेरी (एकम्) एक अर्थात्

English

Having collected wealth and ample treasure, come hither to the- world of living beings. A funeral hymn, taken partly from the Rigveda

अध्याय १८

श्लोक 3.20

ये अत्र॑यो॒ अङ्गि॑रसो॒ नव॑ग्वा इ॒ष्टाव॑न्तो राति॒षाचो॒ दधा॑नाः ।दक्षि॑णावन्तः सु॒कृतो॒ य उ॒ स्थासद्या॒स्मिन् ब॒र्हिषि॑ मादयध्वम्

ye atrayo aṅgiraso navagvā iṣṭāvanto rātiṣāco dadhānāḥ | dakṣiṇāvantaḥ sukṛto ya u sthāsadyāsmin barhiṣi mādayadhvam

हिन्दी अर्थ

गर्भश्रहण का वर्णेन किया गया है। ६८ अथर्ववेद-माष्य का० १८१ घु०३ सेतू विहीनन हो, (माठशरीरम्) गौरनतु शारीरिक विकृति को प्राप्त हो । (मनः) जहां तेरे मन का (निविष्टम्) लगाव है, (णनु) तदनुकूल (सं विशस्व ) मातुयोनि में पवेश कर । (भूमेः) भूमि के (यत्र) जिस भाग में (जुषते) तेरी श्रीति है (तत्र) उस भाग मे (गच्छ)त्जा। मोक्ष से वापिस तो फिर पृथिवी परध्रानाहोता है, भौरशरीर धारण करना पड़ता है । किंस योनिम, भौर पृथिवी के किंस भूभागे जन्म होना है, यहु कारणशरीर सहित जीवात्मा के पूरवंजन्म के संस्कारों

English

Rise, come unto the world of life, O woman: come, he is lifeless by whose side thou liest. Wifehood with this thy husband was thy portion who took thy hand and wooed thee as a

अध्याय १८

श्लोक 3.21

अधा॒ यथा॑ नः पि॒तरः॒ परा॑सः प्र॒त्नासो॑ अग्न ऋ॒तमा॑शशा॒नाः ।शुचीद॑य॒न् दीध्य॑त उक्थ॒शासः॒ क्षामा॑ भि॒न्दन्तो॑ अरु॒णीरप॑ व्रन्

adhā yathā naḥ pitaraḥ parāsaḥ pratnāso agna ṛtamāśaśānāḥ | śucīdayan dīdhyata ukthaśāsaḥ kṣāmā bhindanto aruṇīrapa vran

हिन्दी अर्थ

कारणशरीर मे धनुद्भूत प्रवस्था मँ लीन रहती, जैसे कि बीजमें चधषे मां प्रतरं तारथ॑न्तो जरसे मा जरद॑ष्टि बधन्तु ॥१०॥ करे, (देवाः) सौम्य स्वभाववाले दिव्य कोटि के भ्राचायै मुके (मधुना) भ्रादि के नद से तैराते हए, ( जरसे ) परमेदवर की स्तुति-प्राथंना उपासना

English

lover. I looked and saw the youthful dame escorted, the living to the dead: I saw them, bear her. When she with blinding darkness was enveloped, then did I turn her back and lead her

अध्याय १८

श्लोक 3.22

सु॒कर्मा॑नः सु॒रुचो॑ देव॒यन्तो॒ अयो॒ न दे॒वा जनि॑मा॒ धम॑न्तः ।शु॒चन्तो॑ अ॒ग्निं वा॑वृ॒धन्त॒ इन्द्र॑मु॒र्वीं गव्यां॑ परि॒षदं॑ नो अक्रन्

sukarmānaḥ suruco devayanto ayo na devā janimā dhamantaḥ | śucanto agniṃ vāvṛdhanta indramurvīṃ gavyāṃ pariṣadaṃ no akran

हिन्दी अर्थ

मन्तरोक्त पितर तथा हैव मृतात्माए" हो सक्ती है ? रयिं भे विश्वे नि व॑च्छन्तु देवाः खोना मापः पवनैः. पुनन्तु ॥११ प्रदान करे । (स्योनाः) सुखकारी (भापः) जल (पवनैः) बदेती हुई पवित्र वायुभ्नों समेत (मा) मुभे (पुनन्तु) पवित्र करे । रहना शारीरिक वचस का कारण होता है । यज्ञियाग्तियां वायु को शुद्ध कर शारीरिक ज्योति को बनाए रखती है ।“ विष्णुः यज्ञः” (श. न्ना. १३।१।

English

homeward. Knowing the world of living beings, Aghnyā! treading the path. of Gods which lies before

अध्याय १८

श्लोक 3.23

आ यू॒थेव॑ क्षु॒मति॑ प॒श्वो अ॑ख्यद् दे॒वानां॒ जनि॒मान्त्यु॒ग्रः ।मर्ता॑सश्चिदु॒र्वशी॑रकृप्रन् वृ॒धे चि॑द॒र्य उप॑रस्या॒योः

ā yūtheva kṣumati paśvo akhyad devānāṃ janimāntyugraḥ | martāsaścidurvaśīrakṛpran vṛdhe cidarya uparasyāyoḥ

हिन्दी अर्थ

किया है । इसो के दारा मेधाजनकं वेदवाणी का वास मूख में सम्भव है। संपिचो नास ते देवा ये स॑मारान्त्समम॑रन । सर्वं सृ्तिच्यु मत्यं देवाः पुरवमाविं्षन् ॥ पयव ० ११।८।१३ ॥ गृहं कुत्वा म्यं देवाः पुरवभाविं्न् ।। भ्रव ० ११।८।१८ ७० भथर्ववेद-भाष्य का० १८ । सुर ३

English

thee, This is thy husband: joyfully receive him and let him mount into the world of Svarga. The speed of rivers craving heaven and cane, thou, Agni, art the waters’ gall.

अध्याय १८

श्लोक 3.24

अक॑र्म ते॒ स्वप॑सो अभूम ऋ॒तम॑वस्रन्नु॒षसो॑ विभा॒तीः ।विश्वं॒ तद् भ॒द्रं यदव॑न्ति दे॒वा बृ॒हद् व॑देम वि॒दथे॑ सु॒वीराः॑

akarma te svapaso abhūma ṛtamavasrannuṣaso vibhātīḥ | viśvaṃ tad bhadraṃ yadavanti devā bṛhad vadema vidathe suvīrāḥ

हिन्दी अर्थ

मस्त में“ जय" का धरभिप्राय है क्मसाफल्य । राज की ( हविषा ) यज्ञिय हवियो दवारा, तथा प्रात्मसमपंणरूपी हवियों हारा (सपयंत) परिचर्या सेवा तथा पुजा किया करो। ह;. “प्रियाय तं लोकम्" नहीं । यदि “तम्” पाठ होता, तब तो “परलोक” भयं होता, भौर समक्रा जाता कि “यम वहू व्यक्ति है,जोकि इस-लोक में सरव॑प्रथम अनुष्यज्प मे पैदा होकर, घब मनुष्यों से पहिले मर कर परलोक भँ गथा, भौर तमी से मृत्यु का भ्रधिष्ठाता बना। परन्तु इसके विपरीत का०. १८। सु इं भथर्ववेद-माष्य ७१

English

Cool, Agni, and again refresh the spot which thou hast scorched and burnt. Here let the water-lily grow, and tender grass and leafy plant.

अध्याय १८

श्लोक 3.25

इन्द्रो॑ मा म॒रुत्वा॒न् प्राच्या॑ दि॒शः पा॑तु बाहु॒च्युता॑ पृथि॒वी द्यामि॑वो॒परि॑ ।लो॒क॒कृतः॑ पथि॒कृतो॑ यजामहे॒ ये दे॒वानां॑ हु॒तभा॑गा इ॒ह स्थ

indro mā marutvān prācyā diśaḥ pātu bāhucyutā pṛthivī dyāmivopari | lokakṛtaḥ pathikṛto yajāmahe ye devānāṃ hutabhāgā iha stha

हिन्दी अर्थ

(पितरः) है पितरो! पितुयज्ञ म सत्कार स्वीकार कर भ्राप (परा यात) जाया करो, (च) भ्रौर निमन्त्रण पर पुनः (भा यात) अने की कृपा किया दवारा (समक्तः) जुटाया जाता है । प्राप पधार कर (इह) स पितृयज्ञ में हम मेँ स्थापित कीजिये, जिस से (नः) हमारी (सवंवीरम् ) सब सन्ताने लुरवीर भ्रौर धर्मवीर बनें मधुना--मधुर भन्न सात्विक होता है! १३७. विश्वामित्र जम॑द्े वरिष्ठ भरदा गोत॑म बाभदेव ।

English

Here is one light for thee, another yonder: enter the third and be therewith united. Uniting with a body be thou lovely, dear to the Gods in their sublimest mansion. Rise up, advance, run forward: make thy dwelling in water that shall be thy place to rest in

अध्याय १८

श्लोक 3.26

धा॒ता मा॒ निरृ॑त्या॒ दक्षि॑णाया दि॒शः पा॑तु बाहु॒च्युता॑ पृथि॒वी द्यामि॑वो॒परि॑ ।लो॒क॒कृतः॑ पथि॒कृतो॑ यजामहे॒ ये दे॒वानां॑ हु॒तभा॑गा इ॒ह स्थ

dhātā mā nirṛtyā dakṣiṇāyā diśaḥ pātu bāhucyutā pṛthivī dyāmivopari | lokakṛtaḥ pathikṛto yajāmahe ye devānāṃ hutabhāgā iha stha

हिन्दी अर्थ

हे वामदेव, ( सुसंशाखः पितरः) हि सुप्रदस्त पितरो ! अप सब (नः) हमं (मृडत) सुखी कीजिये । (धतिः) भरत्रि मे (नमोभिः) हमारी नज्नतार्भो के रोक दिया है । शदिः. शदिम् (विभक्ति-विपरिणाम) । ७२ अयर्ववेद-भाष्य का० १८॥सु० इ का्थक रन्दो भें होती है । इसलिये कण्व भ्रादि नाम यौगिका्थेक होने

English

There dwelling in accordance with the Fathers delight thyself with Soma and libations. Prepare thy body: speed thou on thy journey: let not thy limbs,. thy frame be left behind thee.

अध्याय १८

श्लोक 3.27

अदि॑तिर्मादि॒त्यैः प्र॒तीच्या॑ दि॒शः पा॑तु बाहु॒च्युता॑ पृथि॒वी द्यामि॑वो॒परि॑ ।लो॒क॒कृतः॑ पथि॒कृतो॑ यजामहे॒ ये दे॒वानां॑ हु॒तभा॑गा इ॒ह स्थ

aditirmādityaiḥ pratīcyā diśaḥ pātu bāhucyutā pṛthivī dyāmivopari | lokakṛtaḥ pathikṛto yajāmahe ye devānāṃ hutabhāgā iha stha

हिन्दी अर्थ

क्लेशो को तनूङ्ृत करके उन का भ्रपहार करनेवाला, (शो तनूकरणे) +-मरि (हरि; हरण करने वाला, यावो अन्तकं णि" । अर्वनानाः = भवना +-अनव् सब से मित्रता का हेतुशब्दज्ञान कराने वाला कान (दयानन्द, यजुः १३।५७)। पितरों के स्वरूपो का वर्णन किया है । का० १८ । सु० ३ भरयववेद-साष्य ७३३

English

Follow to its repose thy resting spirit: go to whatever spot of earth thou lovest. With splendour may the Fathers, meet for Soma, with mead and. fatness may the Gods anoint me.

अध्याय १८

श्लोक 3.28

सोमो॑ मा॒ विश्वै॑र्दे॒वैरुदी॑च्या दि॒शः पा॑तु बाहु॒च्युता॑ पृथि॒वी द्यामि॑वो॒परि॑ ।लो॒क॒कृतः॑ पथि॒कृतो॑ यजामहे॒ ये दे॒वानां॑ हु॒तभा॑गा इ॒ह स्थ

somo mā viśvairdevairudīcyā diśaḥ pātu bāhucyutā pṛthivī dyāmivopari | lokakṛtaḥ pathikṛto yajāmahe ye devānāṃ hutabhāgā iha stha

हिन्दी अर्थ

(कस्ये) प्रजापतिंरूप छाज मेँ भरपने भाप को (मृजानाः) शुद्ध करते ओर (प्रतरम्) चिलकूल (नवीयः) पहिले से भ्रधिक नवीनं (श्रायुः) जौवन कि “ (श्रध) भब (गृहेषु) गृह-जीवननों मँ (सुरभयः) चम्बेली के पुष्पों को तरह सुगन्ध फंलानेवाले (स्याम) हम हो गएरहै। कः “को वै नाम प्रजापतिः” (एेत०३।२ १) । स्ये = ५स्यं चुं स्यतेः" यथा “स्यात् लाजानावपति" (निर० ६।२।९) । भमिप्राय यह है कि शूपं भ्र्थात् छाज मे पड़े धान, छट कर जसे अवाच्नछित मल से भरलग होकर

English

Lead me on farther to extended vision, and prosper me through life of long duration. May Agni balm me thoroughly with splendour; may Vishnu. touch my lips with

अध्याय १८

श्लोक 3.29

ध॒र्ता ह॑ त्वा ध॒रुणो॑ धारयाता ऊ॒र्ध्वं भा॒नुं स॑वि॒ता द्यामि॑वो॒परि॑ ।लो॒क॒कृतः॑ पथि॒कृतो॑ यजामहे॒ ये दे॒वानां॑ हु॒तभा॑गा इ॒ह स्थ

dhartā ha tvā dharuṇo dhārayātā ūrdhvaṃ bhānuṃ savitā dyāmivopari | lokakṛtaḥ pathikṛto yajāmahe ye devānāṃ hutabhāgā iha stha

हिन्दी अर्थ

उपासक पापमलों से पृथक् होकर शुद्ध हो जाते है । १३९. अञ्जते व्यते संम॑डते करत रिदन्ति मधुना जते । के मीठे फल चखते ह । (हिरण्यपावाः) विशुद्ध सुवणं के सदृश भने आपं कर लेते है, उसे साक्षात् कर जेते. है ।

English

understanding. May all the Deities vouchsafe me riches, and pleasant Waters purify and cleanse me. Mitra and Varuna have stood about me. Ādityas, Sacirifical

अध्याय १८

श्लोक 3.30

प्राच्यां॑ त्वा दि॒शि पु॒रा सं॒वृतः॑ स्व॒धाया॒मा द॑धामि बाहु॒च्युता॑ पृथि॒वी द्यामि॑वो॒परि॑ ।लो॒क॒कृतः॑ पथि॒कृतो॑ यजामहे॒ ये दे॒वानां॑ हु॒तभा॑गा इ॒ह स्थ

prācyāṃ tvā diśi purā saṃvṛtaḥ svadhāyāmā dadhāmi bāhucyutā pṛthivī dyāmivopari | lokakṛtaḥ pathikṛto yajāmahe ye devānāṃ hutabhāgā iha stha

हिन्दी अर्थ

प्रजामात्र का धारण-पोषण करने वाले,(उ) तथा (ये) जो प्राप ( दक्षिणा- माता-पिता आदि ने (यथा) जसे (दीष्यतः) ध्यानयोग मे देदीप्यमान हो- कर, (क्षामा ,मिरन्वन्तः) पाथिव शरीर-पूरियों का भेदन कर, (भरणीः) का० १८1 सु०.३ मथर्ववेद-भाष्य ७५ से (प्रयन्) प्राप्त किया, वसे गपभीकरो

English

vouchsafe me. Worship with sacrificial gift King Yama, Vivasvān’s son who gathers men together, Yama who was the first to die of mortals, the first who travelled to the world before us.

अध्याय १८

श्लोक 3.31

दक्षि॑णायां त्वा दि॒शि पु॒रा सं॒वृतः॑ स्व॒धाया॒मा द॑धामि बाहु॒च्युता॑ पृथि॒वी द्यामि॑वो॒परि॑ ।लो॒क॒कृतः॑ पथि॒कृतो॑ यजामहे॒ ये दे॒वानां॑ हु॒तभा॑गा इ॒ह स्थ

dakṣiṇāyāṃ tvā diśi purā saṃvṛtaḥ svadhāyāmā dadhāmi bāhucyutā pṛthivī dyāmivopari | lokakṛtaḥ pathikṛto yajāmahe ye devānāṃ hutabhāgā iha stha

हिन्दी अर्थ

१४१. सूकमीणः सुरुचो देवयन्तो अयो न दवा जनिमा धम॑न्तः । (न) जेते सुवणंकार (अयः) - सुवणं को (धमन्तः) भग्निसंयोय (देवयन्तः) परमेदवर देव की कामना वाले (देवाः) देवकोटि के लोग, भवाम्,गौः== वाक् (निषं० -१।११) । “परिषदम्” को वेदो मे “विदथ भी कह है, विदथ विद्या-गोष्ठियां, देखो मन्त्र (१४०) ।

English

Depart, O Fathers, and again come hither; this sacrifice of yours is balmed with sweetness. 235

अध्याय १८

श्लोक 3.32

प्र॒तीच्यां॑ त्वा दि॒शि पु॒रा सं॒वृतः॑ स्व॒धाया॒मा द॑धामि बाहु॒च्युता॑ पृथि॒वी द्यामि॑वो॒परि॑ ।लो॒क॒कृतः॑ पथि॒कृतो॑ यजामहे॒ ये दे॒वानां॑ हु॒तभा॑गा इ॒ह स्थ

pratīcyāṃ tvā diśi purā saṃvṛtaḥ svadhāyāmā dadhāmi bāhucyutā pṛthivī dyāmivopari | lokakṛtaḥ pathikṛto yajāmahe ye devānāṃ hutabhāgā iha stha

हिन्दी अर्थ

१४४. आ ययेवं शुभतिं पश्बो असूयत देवानां जनिमान्त्युग्र; । ग्वाला (इत्र) जैसे (क्षुमति) घास वाते चरागाहं मेँ (पश्वः) पदयुओों के (यूथा) ४ प्र (भा) पूणंतया (भख्यत् ) वुष्टि रखता है, वै (मर्तासः) साधारण मनुष्य ( चित् ) भी (वृके) व्यवहारो की ५ कल्याणकारी होता है । उस कर्मकलाप को करते हृएु हम ( सुवीराः) .उत्तम धर्मवीर बन कर, (विदथे) ज्ञान-गोष्ठियों म (बृहद् वदेम) एस कमंकलाप की महा महिमा का कथन किया करे ।

English

Enrich us here with gift of great possessions; grant blessed wealth with ample store of heroes. Kanva, Kakshivān, Purumidha, Agastya, Syāvāsva Sobhari, and Archanānas,

अध्याय १८

श्लोक 3.33

उदी॑च्यां त्वा दि॒शि पु॒रा सं॒वृतः॑ स्व॒धाया॒मा द॑धामि बाहु॒च्युता॑ पृथि॒वी द्यामि॑वो॒परि॑ ।लो॒क॒कृतः॑ पथि॒कृतो॑ यजामहे॒ ये दे॒वानां॑ हु॒तभा॑गा इ॒ह स्थ

udīcyāṃ tvā diśi purā saṃvṛtaḥ svadhāyāmā dadhāmi bāhucyutā pṛthivī dyāmivopari | lokakṛtaḥ pathikṛto yajāmahe ye devānāṃ hutabhāgā iha stha

हिन्दी अर्थ

दिक्षा से (पातु) सुरक्षित करे, (इव ) जसे कि (बाहृच्युता) परमेश्वर के बल प्रौर पराक्रम से प्रेरित हृई-हुरई (पृथिवी) पृथिवी(उपरि) भ्रपने ऊपर पड़ श्राप ( इह ) इस भ्रमि में (हृतभागाः) यज्ञाहृतियां देकर यज्ञरोष भाग का सेवन करते (स्थ) हो, उन में से (देवानाम्) उन दिव्य मनुष्यो की (यजा- महे ) हम पुजा सत्संगति तथा. दान द्वारा सत्कार करते है, जोकिं (लोकतः) लोगो का कल्याण करते, भ्रौर उन्ह (पथिङृतः) सत्पथ पर चलाते है । उपरस्य मेष (निषं० .१।१०) ) भायुः मनुष्यनाम (निषं०२।३) का० १८॥। सू०.३ प्रथवेवेद-साष्य ७७ भरपने घाप प्रकाशस्वरूप (पतत्रैः) क्रियाशील परमाणु आदि से, (चावाभूमी) सूयं भौर पृथिवीलोक को ( सं जनयन् ) कार्यरूप में प्रकट करता हुभा

English

This Visvāmitra, Jamadagni, Atri, Kasyapa, Vāmadeva be our helpers! Vasishtha, Jamadagni, Visvāmitra, Gotama, Vāmadeva, Bhara- dvaja!

अध्याय १८

श्लोक 3.34

ध्रु॒वायां॑ त्वा दि॒शि पु॒रा सं॒वृतः॑ स्व॒धाया॒मा द॑धामि बाहु॒च्युता॑ पृथि॒वी द्यामि॑वो॒परि॑ ।लो॒क॒कृतः॑ पथि॒कृतो॑ यजामहे॒ ये दे॒वानां॑ हु॒तभा॑गा इ॒ह स्थ

dhruvāyāṃ tvā diśi purā saṃvṛtaḥ svadhāyāmā dadhāmi bāhucyutā pṛthivī dyāmivopari | lokakṛtaḥ pathikṛto yajāmahe ye devānāṃ hutabhāgā iha stha

हिन्दी अर्थ

१९।६०।१) ; भौर “को भरस्य बाहू समभरद् वीयं करवादिति” ( भथरवं० करती हुई, व्यवहारो को सिद्ध कर हमारी रक्षा कर रही है । याम् = धौः भ्रहर्नमि (निघं० १।९) । प्रथवा कवितारूप मेँ प्रथं है कि- “मानो विधाता की बाहुभों की पकड़ से च्युत हूरई पृथिवी, ऊपर रहने वाले द्युतिमान् सूय

English

Atri hath won your favour with homage. Gracious to us be ye praiseworthy Fathers. They, making for themselves a new existence, wash off defilement in the brazen vessel. May we be fragrant in our houses, ever increasing in our children and our riches.

अध्याय १८

श्लोक 3.35

ऊ॒र्ध्वायां॑ त्वा दि॒शि पु॒रा सं॒वृतः॑ स्व॒धाया॒मा द॑धामि बाहु॒च्युता॑ पृथि॒वी द्यामि॑वो॒परि॑ ।लो॒क॒कृतः॑ पथि॒कृतो॑ यजामहे॒ ये दे॒वानां॑ हु॒तभा॑गा इ॒ह स्थ

ūrdhvāyāṃ tvā diśi purā saṃvṛtaḥ svadhāyāmā dadhāmi bāhucyutā pṛthivī dyāmivopari | lokakṛtaḥ pathikṛto yajāmahe ye devānāṃ hutabhāgā iha stha

हिन्दी अर्थ

चांवोपरिं। लोकतः पथितं यजामह ये देवाना दुतमागा (धाता) सब का घारण-पोषण करने वाला परमेदवर (मा) शुभ (निक्छः त्याः) पृथिवी की (दक्षिणायाः दिः) दक्षिण दिचासे (पातु) दयामिबोपरिं । लोकढृतं; पथिकृतो यजामहे ये देवानां ७८ । भ्रथर्ववेद-माष्य का० १८। सु० ३ दिला से (पातु) सुरक्षित करे । "बाहुच्युता'--ध्रादि पूववत् ( १४६) ।

English

They balm him, balm him over, balm him thoroughly, caress the mighty power and balm it with the mead,

अध्याय १८

श्लोक 3.36

ध॒र्तासि॑ ध॒रुणो॑ऽसि॒ वंस॑गोऽसि

dhartāsi dharuṇo'si vaṃsago'si

हिन्दी अर्थ

सूयं रदिम्यो के भभाव मेँ सव को, भ्रपने-भपने व्यवहारो को समाप्त कर देने ामिंवोपरिं । सोक; पथिष्त। यजामहे ये देवानां इतमाभा ( सोमः ) विविध जगत् का उत्पादक परमेश्वर (विद्वः देवः ) विविध भूमि, जो किं विविध दिव्य पदार्थों से समन्वित है

English

They seize the flying steer at the stream’s breathing-place: cleansing with gold they grasp the animal herein. Fathers, be glorious in yourselves, and follow all that is glad in you and meet for Soma.

अध्याय १८

श्लोक 3.37

उ॒द॒पूर॑सि मधु॒पूर॑सि वात॒पूर॑सि

udapūrasi madhupūrasi vātapūrasi

हिन्दी अर्थ

पारं । ठोकङृतं; पथितं यजामहे ये देवानां हुतभागा इह (धर्ता) सबक्रा धारण केरने वाला (धरुणः) सर्वाधार परभेद्वर (त्वा) तेरा (ऊर्वम्) ऊपर कै लोको मे (धारयाते ) धारण करे । (सविता) (द्याम्) चुलोक का (उपरि) ऊपर मेँ घारण कर रहा है । "लोक्कृतः- काऽ १८।सु०३ भ्रथ्ववेद-भाष्य ७९ रहता है, जब तक कि उसं का पुनर्जन्म नहीं होत्ता +

English

Give ear and listen, swiftly-moving Sages, benevolent, invoked in our assembly. Atris, Angirases, Navagvas, givers of liberal gifts, continual sacrificers,

अध्याय १८

श्लोक 3.38

इ॒तश्च॑ मा॒मुत॑श्चावतां य॒मे इ॑व॒ यत॑माने॒ यदै॒तम्।प्र वां॑ भर॒न् मानु॑षा देव॒यन्तो॒ आ सी॑दतां॒ स्वमु॑ लो॒कं विदा॑ने

itaśca māmutaścāvatāṃ yame iva yatamāne yadaitam| pra vāṃ bharan mānuṣā devayanto ā sīdatāṃ svamu lokaṃ vidāne

हिन्दी अर्थ

पृथिवी द्यामिवोपरि । लोकत; पथिद्तों यजामहे ये देवानो जीवनलीला कै संवरण होने से पूरव, गँ (त्वा) तुमे (स्वधायाम्) भत्म- पृथिवौ आत्म-घारण करती है ¦ "लोककृतः" - प्रादि पूर्ववत् ( १४६) । संवृत्तः = संवरण का ्षभिप्राय है-जीवन की समाप्ति । जीवन की समाप्ति से पूवं ही व्यक्ति को भोगमय जीवन छोड़ कर त्यागमय जीवन ग्यतीत करना चाहिए । त्यागमय जीवन के लिये सदा स्वधान्न का सेवन

English

Devout and pious, granting guerdon freely, sit on this holy grass and be ye joyful. As in the days of old our ancient Fathers, speeding the work of sacred worship, Agni! Sought pure light and devotion, singing praises, they cleft the ground and made red Dawns

अध्याय १८

श्लोक 3.39

स्वास॑स्थे भवत॒मिन्द॑वे नो यु॒जे वां॒ ब्रह्म॑ पू॒र्व्यं नमो॑भिः ।वि श्लोक॑ एति प॒थ्येऽव सू॒रिः शृ॒ण्वन्तु॒ विश्वे॑ अ॒मृता॑स ए॒तत्

svāsasthe bhavatamindave no yuje vāṃ brahma pūrvyaṃ namobhiḥ | vi śloka eti pathye'va sūriḥ śṛṇvantu viśve amṛtāsa etat

हिन्दी अर्थ

भ्रापको “धा धारण मात्रके लिये होना चाहिए, भोग भोगने के लिये नहीं । स्वधा भरन्ननाम (निषं० २।७) । “स्वधा” को पितु-भर्त कहा है, पृथिवी द्यामिवोपरि । लोककृतः पथिकृते यजामहे ये देवानां (प्रतीच्यां त्वा दिशि) है पश्िम दिला मे रहनेवाले ¦ -शेष पृथिवी चयामिंवोपरिं । लोकङतं; पथिकृतो यजामहे ये देवान ( उदीच्यां त्वा दिदि ) है उत्तर दिशा में रहनेवाले! - शेष पूववत्

English

apparent. Gods, doing holy acts, devout, resplendent, smelting like ore their human generation,

अध्याय १८

श्लोक 3.40

त्रीणि॑ प॒दानि॑ रु॒पो अन्व॑रोह॒च्चतु॑ष्पदी॒मन्वैतद् व्र॒तेन॑ ।अ॒क्षरे॑ण॒ प्रति॑ मिमीते अ॒र्कमृ॒तस्य॒ नाभा॑व॒भि सं पु॑नाति

trīṇi padāni rupo anvarohaccatuṣpadīmanvaitad vratena | akṣareṇa prati mimīte arkamṛtasya nābhāvabhi saṃ punāti

हिन्दी अर्थ

हे परमेश्वर! आप (धर्ता भ्रसि) सबकाधारण करते, ( धरुणः म्रसि) आप सर्वाधार है, (वंसगः प्रसि) आपकी गतिविधि संमजनीयहैः पूजनीय है, श्रादर के योग्य है। वंसगः वननीग्रगतिः। हे परमेक्वर! भ्रापने पृथित्री को (उवपूः भरसि)जल से भरपूर किया है, (मधुपः प्रसि) भ्रापने पृथिवी को माधुयं श्रौर मधुर पदार्थो से भरपूर किया है, (वातपूः असि) श्राप ने पृथिवी को प्राणवायु से भरपूर किया है १५९. इतश्च मासुष्॑ावतां यमे ईष यत॑माने यहैतम् । भरवां मरन् मानुषा देवयन्तो आ सीदतां स्वध लोकं विदाने ।३८॥ प्रजाजन की श्राप दोनों (इतः च) इहलोक से (च) भौर (भ्रमतः) उस परलोक से ( श्रवताम् ) रक्षा कीजिये। ( इव) जसे कि (यमे) मेश्वर देव कौ कामनावाले (मानुषाः) प्रजाजन (वाम्) श्राप दोनी को

English

There man moaned forth their strong desires, to strengthen even the true; the nearest One, the living.

अध्याय १८

श्लोक 3.41

दे॒वेभ्यः॒ कम॑वृणीत मृ॒त्युं प्र॒जायै॒ किम॒मृतं॒ नावृ॑णीत ।बृह॒स्पति॑र्य॒ज्ञम॑तनुत॒ ऋषिः॑ प्रि॒यां य॒मस्त॒न्व॑१मा रि॑रेच

devebhyaḥ kamavṛṇīta mṛtyuṃ prajāyai kimamṛtaṃ nāvṛṇīta | bṛhaspatiryajñamatanuta ṛṣiḥ priyāṃ yamastanva1mā rireca

हिन्दी अर्थ

ठरे भरथर्ववेद-माष्य का० १८ ।सु०३ वान् र्हँ। यमे = यमदव यमा च यमे। एकशेषे स्त्री का हेष हुभा। जपे कि “पितरा” भर्थात् “पिता च माता च" पिता का देष होता है। भ्रौर"मातरा" भर्यात् “माता च पिता चमे माताका शेष होतादहै। पितरा मातरा भरदाधिच्; तथा यमा यमनियमवती भावचार्या । शिक्षा की दृष्टि से यम भारस्तिक हो, तभी प्रजावगं अपने अधिकारियों का समुचित चुनाव कर

English

We have worked for thee, we have toiled and laboured: bright Dawns have shed their light upon our worship. All that the Gods regard with love is blessed. Loud may we speak, with heroes, in assembly.

अध्याय १८

श्लोक 3.42

त्वम॑ग्न ईडि॒तो जा॑तवे॒दोऽवा॑ड्ढ॒व्यानि॑ सुर॒भीणि॑ कृ॒त्वा।प्रादाः॑ पि॒तृभ्यः॑ स्व॒धया॒ ते अ॑क्षन्न॒द्धि त्वं दे॑व॒ प्रय॑ता ह॒वींषि॑

tvamagna īḍito jātavedo'vāḍḍhavyāni surabhīṇi kṛtvā| prādāḥ pitṛbhyaḥ svadhayā te akṣannaddhi tvaṃ deva prayatā havīṃṣi

हिन्दी अर्थ

सदा सत्पथ में ही विद्यमान रहता है, वंसे वेदपथ मे विद्यमान प्राप दोनों वेदिक पथानुगामी सब प्रजाजन (एतत्) मेरे इस कथन को (शुण्वन्तु) सुने । का० १८ । सूु०३ भ्रथ्वविद-भाष्य ८३ के नामों के तीन चिक भभिप्रेत ह । “अद्वारा (१) विराट्, भरग्नि, भौर (३) के स्वरूपो पर भी अनुक्रम से आरोहण करना होता है 1 इन स्वरूपो

English

From eastward Indra, Lord or Maruts, guard me, as in her arms Earth guards the heaven above us!

अध्याय १८

श्लोक 3.43

आसी॑नासो अरु॒णीना॑मु॒पस्थे॑ र॒यिं ध॑त्त दा॒शुषे॒ मर्त्या॑य ।पु॒त्रेभ्यः॑ पितर॒स्तस्य॒ वस्वः॒ प्र य॑च्छत॒ त इ॒होर्जं॑ दधात

āsīnāso aruṇīnāmupasthe rayiṃ dhatta dāśuṣe martyāya | putrebhyaḥ pitarastasya vasvaḥ pra yacchata ta ihorjaṃ dadhāta

हिन्दी अर्थ

सांसारिक भोर्गो के मोह पे विरत होकर, परमेश्वर के साथ विशेष मोह १६२. देवेभ्यः कर्मवरृणीत मस्य प्रजायं किममतं नाव॑बृणीत । सुखदायी मृत्यु को (किम्) क्यो (न) नहीं (अवृणीत) स्वीकार किया? रिरेच ) आत्माप्रों से विहीन करता रहता है । उनका बार-बार जन्म-मरण

English

Those who give room, who made the paths, we worship, you, mid the Gods, who share the gifts we offer. Dhātar with Nirriti save me from southward, etc. (as in stanza

अध्याय १८

श्लोक 3.44

अग्नि॑ष्वात्ताः पितर॒ एह ग॑च्छत॒ सदः॑सदः सदत सुप्रणीतयः ।अ॒त्तो ह॒वींषि॒ प्रय॑तानि ब॒र्हिषि॑ र॒यिं च॑ नः॒ सर्व॑वीरं दधात

agniṣvāttāḥ pitara eha gacchata sadaḥsadaḥ sadata supraṇītayaḥ | atto havīṃṣi prayatāni barhiṣi rayiṃ ca naḥ sarvavīraṃ dadhāta

हिन्दी अर्थ

नहीं देता,जबतकं कि वे वेदप्रतिपादित यज्ञिय कर्मकलापो के भनुसार भरपनां ने वेदों मे यश्ञिय कमंकलाप का विस्तृत वणेन किया है । प्रमेइवर भ्रजाजनों को बार-बारजन्म देकर भौर उन की बार-बार मृत्युए' कर, उन्ह वेदिक १६६. लर्मन ईडितो बतवेदोऽनाइदव्यानिं सुरजीणिं कृत्व । ( भवाद् ) लाया है। भौर उन मोज्य पदाथ को (पितरुभ्यः) पितरों भ्रौर (प्रयता) दिये गए (हवींषि) हविरूप इन अन्नो को (स्वधया ) भरपने

English

). From westward Aditi was Ādityas save me! etc.

अध्याय १८

श्लोक 3.45

उप॑हूता नः पि॒तरः॑ सो॒म्यासो॑ बर्हि॒ष्येऽषु नि॒धिषु॑ प्रि॒येषु॑ ।त आ ग॑मन्तु॒ त इ॒ह श्रु॑व॒न्त्वधि॑ ब्रुवन्तु॒ तेऽवन्त्व॒स्मान्

upahūtā naḥ pitaraḥ somyāso barhiṣye'ṣu nidhiṣu priyeṣu | ta ā gamantu ta iha śruvantvadhi bruvantu te'vantvasmān

हिन्दी अर्थ

पितरों का भोजन करना सुचित करता है किये पितर जीवित है, दयानन्द के भाष्य के आधार पर किया गया है (यज्° १९।६६)। ईडितः हे पितरो ! (भ्ररुणीनाम्) चमकती-उषाप्रों की (उपस्थे) गोद में करने वाले मनुष्य को (रयि धत्त) कुछ धन दे दो । है पितरो (तस्य) छसं (वस्वः) शेष धन का दायभाग निदिचत करके, ( पुरेभ्यः) पूरौ को

English

From westward with the All-Gods save me Soma! etc. May the strong firm Sustainer bear thee upright, as Savitar bears light above the heaven. Those who give room, who made the paths, we worship, you mid the Gods, whe share the

अध्याय १८

श्लोक 3.46

ये नः॑ पि॒तुः पि॒तरो॒ ये पि॑ताम॒हा अ॑नूजहि॒रे सो॑मपी॒थं वसि॑ष्ठाः ।तेभि॑र्य॒मः सं॑ररा॒णो ह॒वींष्यु॒शन्नु॒शद्भिः॑ प्रतिका॒मम॑त्तु

ye naḥ pituḥ pitaro ye pitāmahā anūjahire somapīthaṃ vasiṣṭhāḥ | tebhiryamaḥ saṃrarāṇo havīṃṣyuśannuśadbhiḥ pratikāmamattu

हिन्दी अर्थ

गहस्थियो को उपदेश दिया गयाहै किवेडउषा की रदिमर्यो का सेवन किया करर । भरौर इस सात्विक काल में सत्पत्रों को सात्विक दान दिया करे । ओौर वानप्रस्थ होते समय इस सात्विक काल में पुरो के प्रति खाने वले (पितरः) है पितरो (इह) इन हमारे गृहो मेँ (भा गच्छत) करने वले पितरो (सदः सदः) राप इन नाना स्थानों मे (सदत) विराज- मान हृजिये । (बहिषि) इन कुशासनों पर बेठ कर, (प्रयतानि हवींषि) (रयिम्) एेसे सदुपदेश-धन (दधात) दीजिये, जिस से (सवंवोरम्) हमारी सब सन्तानं धर्मवीर बने । वनस्थो को यज्ञ करने का विधान है.। यथा-- पितरों का भ्राना, कुलासनों पर बैठना, सब के साथ प्रणय-प्रददन,

English

gifts we offer. Toward the eastward region I supply thee before thou goest homeward, with oblation, as in

अध्याय १८

श्लोक 3.47

ये ता॑तृ॒षुर्दे॑व॒त्रा जेह॑माना होत्रा॒विदः॒ स्तोम॑तष्टासो अ॒र्कैः ।आग्ने॑ याहि स॒हस्रं॑ देवव॒न्दैः स॒त्यैः क॒विभि॒र्ऋषि॑भिर्घर्म॒सद्भिः॑

ye tātṛṣurdevatrā jehamānā hotrāvidaḥ stomataṣṭāso arkaiḥ | āgne yāhi sahasraṃ devavandaiḥ satyaiḥ kavibhirṛṣibhirgharmasadbhiḥ

हिन्दी अर्थ

हविष्यान्न खाना,तथा सदुपदेश देनाये सब्र जीवित पितरों में सम्भव हैमो मे नहीं । सुप्रणीतयः वा उत्तम तथा प्रकृष्ट मागं पर चलने वाले पितरो। नीति = नी नये । वां खदाचारनीति के विज्ञ पितरो ! (सोम्यासः) सोम्य स्वभाव के (पितरः) पितरोंको, हम ने (नः) हमारे कथनो को सूरन, ओर (भध ब्रुवन्तु ) प्रधिकारपूरवंक हमे तदनुरूप पितरों का भ्राना.गृहस्थो के कथनो को सुनना,उन्हेँ तदनुरूप उपदेश देकः उन की रक्षा करना, मृत पितरो मे सम्भव नदीं । बहिष्येषु =

English

her arms, etc. (as in stanza 25). Toward the southern region, etc. Toward the western region, etc.

अध्याय १८

श्लोक 3.48

ये स॒त्यासो॑ हवि॒रदो॑ हवि॒ष्पा इन्द्रे॑ण दे॒वैः स॒रथं॑ तु॒रेण॑ ।आग्ने॑ याहि सुवि॒दत्रे॑भिर॒र्वाङ् परैः॒ पूर्वै॒र्ऋषि॑भिर्घर्म॒सद्भिः॑

ye satyāso havirado haviṣpā indreṇa devaiḥ sarathaṃ tureṇa | āgne yāhi suvidatrebhirarvāṅ paraiḥ pūrvairṛṣibhirgharmasadbhiḥ

हिन्दी अर्थ

का० १८। सु ३ भ्रथर्ववेद-माष्य ८७ तेभिर्यमः संरराणो हर्वीप्युशुशङ्धिः रतिकामम॑तु ॥४बे॥ है, भौर (ये) जो उस के (वसिष्ठाः पितामहाः) शरेष्ठ पितामह है, जोकिं (सोमपीथम्) वी्य॑रक्षा के (श्नु) अनुकूल (जदहिरे) भावार-च्यवहार करते है, (उद्धिः) भ्रात्मिकोन्नति चाहने वाले (तैः) उन पितरों के साथ, उन शी (उशन्) भरात्मिकोन्नति चाहने वाला (यमः) यमनियमो का पालनं करने वाला श्राचायं भी (संरराणः) उन पितरो के साथरमाहम्राहो करः जहिरे = भरोहाङ् गतौ । सोम उत्पत्ति का साधन वीये;55०7500) मानो घड़ हए पितर, (तातृषुः ) भिात्मोन्नति भ्रौर परोपकार करने में अधिक

English

Toward the northern region, etc. Toward the stedfast region, etc.

अध्याय १८

श्लोक 3.49

उप॑ सर्प मा॒तरं॒ भूमि॑मे॒तामु॑रु॒व्यच॑सं पृथि॒वीं सु॒शेवा॑म्।ऊर्ण॑म्रदाः पृथि॒वी दक्षि॑णावत ए॒षा त्वा॑ पातु॒ प्रप॑थे पु॒रस्ता॑त्

upa sarpa mātaraṃ bhūmimetāmuruvyacasaṃ pṛthivīṃ suśevām| ūrṇamradāḥ pṛthivī dakṣiṇāvata eṣā tvā pātu prapathe purastāt

हिन्दी अर्थ

कवियों प्रौर (ऋषिभिः) ऋषियों के साथ भ्राप आराष्टये । १६९. ये सस्पासो हविरदो इविष्या शद्र॑ण देवैः सरथं तुरेणं । दल. भ्रथरवेवेद-माष्य काण० १८ सुऽ ३ खानेवाले,(हविष्पाः) हविष्य रसो के पीनेवाले (ये. जो पितर (तुरेण)

English

Toward the upmost region I supply thee, before thou goest homeward, with oblation, as in her arms Earth bears the heaven above us. Those who give room, who made the paths, we worship, you, mid the Gods, who share the

अध्याय १८

श्लोक 3.50

उच्छ्व॑ञ्चस्व पृथिवि॒ मा नि बा॑धथाः सूपाय॒नास्मै॑ भव सूपसर्प॒णा।मा॒ता पु॒त्रं यथा॑ सि॒चाभ्येऽनं भूम ऊर्णुहि

ucchvañcasva pṛthivi mā ni bādhathāḥ sūpāyanāsmai bhava sūpasarpaṇā| mātā putraṃ yathā sicābhye'naṃ bhūma ūrṇuhi

हिन्दी अर्थ

गभ में सदा श्रलक्षित गति से घ्राता है । सू 70 01980, ५०/) का० १८ । सुऽ ३ भ्रथ्वंवेद-माष्य ६ (सूषायना) उत्तमोत्तम मंट देनेवाली (भव) तू बन । (सुपसपंणा) उस के लियं सुगमता से विचरने योग्य वनं । (माता यथा) माता जैसे (त्रम्)

English

Who purifiest wind and mead and water. From this side and from that let both assist me. As, speeding, ye have come like two twin

अध्याय १८

श्लोक 3.51

उ॒च्छ्वञ्च॑माना पृथि॒वी सु ति॑ष्ठतु स॒हस्रं॒ मित॒ उप॒ हि श्रय॑न्ताम्।ते गृ॒हासो॑ घृत॒श्चुतः॑ स्यो॒ना वि॒श्वाहा॑स्मै शर॒णाः स॒न्त्वत्र॑

ucchvañcamānā pṛthivī su tiṣṭhatu sahasraṃ mita upa hi śrayantām| te gṛhāso ghṛtaścutaḥ syonā viśvāhāsmai śaraṇāḥ santvatra

हिन्दी अर्थ

वगे को.निज मेटो द्वारा भाच्छादितं कर । पृथिवी मँ समन्नति प्राणिवगें के द्वारा होती है कृषि, उद्यान, सडक, यातायात के सान, विविध प्रकार के मकान, व्यापार, डक का भराना- जाना, रेले, तार, हवार्दजहाज, नहर प्रादि के कारण पृथिवी समुन्नत होती है । इस समून्नति भ प्राणिवगं ही कारण है । इस समुन्नति मँ विष्न-बाधा द्वारा कृषि विनाश, भूचाल, भ्राग्नैय पवतो का फटावं भ्रादि । सुपायना सु+ उपायन ( भेट )। यह -पृथिवी सोना, लोहा, तैल, भन्न, फल-फूल,. विविध भरौषधियां, स्वच्छ जल, प्राणवायु रादि की मेटे प्राणिवगं कोदे रही है सुपसपंणा सड़कों करा निर्माण, तथा जद्गलो को काटना-भादि वासं पृथिवी भ्रासानी से विचरने योग्य हौ जाती है। यह् पृथिवी उपयुक्त भटो (भितः) षमा मेँ बने चर (उप हि श्रयन्ताम् ) पृथिवी पर भराश्रय पते है। (ते) वे (गृहासः) पैमातै भें मपि हुए घर (घृतश्चुतः). इष्ध-वुर्तो के प्रनाहों (भध) इस भूमि भ (भस्मे) इस जीवित प्राणिवगं के लिये (शरणाः सन्तु)

English

sisters, Religious-hearted votaries brought you forward. Knowing your several places be ye seated.

अध्याय १८

श्लोक 3.52

उत् ते॑ स्तभ्नामि पृथि॒वीं त्वत् परी॒मं लो॒गं नि॒दध॒न्मो अ॒हं रि॑षम्।ए॒तां स्थूणां॑ पि॒तरो॑ धारयन्ति ते॒ तत्र॑ य॒मः साद॑ना ते कृणोतु

ut te stabhnāmi pṛthivīṃ tvat parīmaṃ logaṃ nidadhanmo ahaṃ riṣam| etāṃ sthūṇāṃ pitaro dhārayanti te tatra yamaḥ sādanā te kṛṇotu

हिन्दी अर्थ

भ्रत्र==यह पद दर्ता है कि इन गृहो का वणन इस पृथिवी पर बने गृहों का वर्णन है, परलोक के गृहो का नहीं । भथवंवेद के. भरंग्रेजी भ्रनूवादक “द्भिटनी" ने त्र" का भरथं किया है ¶1न9७' जो कि नितान्त भ्रनुचित है । “1 916 प्रथं करके “ह्िटनी” ने सूचित किया है कि मन्त्र मेँ परलोक हे सन्तान ! (ते) तेरे लिये (पृथिवीम्) मिद्व. से निरिति (उत्- परे हट कर (इमं लोगं निदधन्) इस लकंड़ी के धर की नीव रखता हृभा माता-पिता (धारयन्ति) नीवरूप मे स्थापित करते ह । (यमः) रांज्य का

English

Sit near, sit very near beside our Soma: for you I fit the ancient prayer with homage. The praise-song, like a chieftain on his pathway, spreads far and wide. Let all Immortals hear it.

अध्याय १८

श्लोक 3.53

इ॒मम॑ग्ने चम॒सं मा वि जि॑ह्वरः॑ प्रि॒यो दे॒वाना॑मु॒त सो॒म्याना॑म्।अ॒यं यश्च॑म॒सो दे॑व॒पान॒स्तस्मि॑न् दे॒वा अ॒मृता॑ मादयन्ताम्

imamagne camasaṃ mā vi jihvaraḥ priyo devānāmuta somyānām| ayaṃ yaścamaso devapānastasmin devā amṛtā mādayantām

हिन्दी अर्थ

सुचित किया है । वेदों में ई'टों को “इष्टका” कहा है; (यजु १७।२) । परां” तक की ईंटों का वर्णेन हुभा है । पदाधं संख्या == १००१०००, ०००, - (चाला-सुक्त)। यमः = प्रत्येक नवगृह का निर्माण भौर उस पर अधिकार, नि- यन्ता राजा द्वारा प्राप्त करै का वणेन है । जसे कि वतमान में मी गृहका का०१य सुऽ ३ भरथर्ववेद-माष्य ९१ १७४. इमभरे चमसं मा वि जिधर; श्रियो देवानामुत सोम्यानाम् ।

English

Three paces hath the stake gone up, and followed her, the four- footed, with devout observance.

अध्याय १८

श्लोक 3.54

अथ॑र्वा पू॒र्णं च॑म॒सं यमिन्द्रा॒याबि॑भर्वा॒जिनी॑वते ।तस्मि॒न् कृणोति सुकृ॒तस्य॑ भ॒क्षं तस्मि॒निन्दुः॑ पवते विश्व॒दानी॑म्

atharvā pūrṇaṃ camasaṃ yamindrāyābibharvājinīvate | tasmin kṛṇoti sukṛtasya bhakṣaṃ tasmininduḥ pavate viśvadānīm

हिन्दी अर्थ

चमस को (मा वि जिह्वरः) भपनी ज्वाला द्वारा विकृत न कर । यह (प्रियः) श्रिय है! (यः भ्यं चमसः) जो यह यज्ञिय-चमस (देवपानः) देवो के भी खान-पान का साधन है, (तस्मिन्) उस. मे (अमृताः देवाः) मोक्षाभिलाषी देव भी (मादयन्ताम्) कामना वलि हों । घ्यानं रखना चाहिए कि भरग्नि की ज्वाला से यह् चमस विकृत न हो जाय । करते ई; रौर सोम(=वीये)का सदुपयोग करनेवाले गृहस्थी भी सदा भग्ि- होर करते है, यह भरग्निहोत्र इन दोनों के लिये प्रिय है । देवलोग भी बिना

English

He with the Syllable copies the praise-song; he thoroughly purifies at Order’s centre. Chose he then, death for Gods to be their portion? Why chose he not for men a life eternal? Brihaspati span sacrifice, the Rishi; and Yama yielded up his own dear body.

अध्याय १८

श्लोक 3.55

यत् ते॑ कृ॒ष्णः श॑कु॒न आ॑तु॒तोद॑ पिपी॒लः स॒र्प उ॒त वा॒ श्वाप॑दः ।अ॒ग्निष्टद् वि॒श्वाद॑ग॒दं कृ॑णोतु॒ सोम॑श्च॒ यो ब्रा॑ह्म॒णां आ॑वि॒वेश॑

yat te kṛṣṇaḥ śakuna ātutoda pipīlaḥ sarpa uta vā śvāpadaḥ | agniṣṭad viśvādagadaṃ kṛṇotu somaśca yo brāhmaṇāṃ āviveśa

हिन्दी अर्थ

पान करतेहैँ। देववे है,जो कि मोक्षाभिलाषी होकर वानप्रस्थी हो (चमसम्) चमस को (अबिभः) मर दिया है, (तस्मिन् ) उस्र चमस में करता है । (तस्मिन्) उस चमस मे (इन्दुः) भमृतरस (विदवदानीम् ) सदा (पवते) प्रवाहित हो रहा है । सब प्रकार का ज्ञान-धन निहित है, उसमे निवास करते ह--“इकटुं ७ ऋषि, के श्रधोमागमेंटेढाचि्र है, जिसमें से सुषुम्णा-दण्ड निकल कर, पीठ में

English

Thou, Agni Jātavedas, when entreated, didst bear our offerings, having made them fragrant. And give them to the Fathers who consumed them with Svadhā.

अध्याय १८

श्लोक 3.56

पय॑स्वती॒रोष॑धयः॒ पय॑स्वन्माम॒कं पयः॑ ।अ॒पां पय॑सो॒ यत् पय॒स्तेन॑ मा स॒ह शु॑म्भतु

payasvatīroṣadhayaḥ payasvanmāmakaṃ payaḥ | apāṃ payaso yat payastena mā saha śumbhatu

हिन्दी अर्थ

द्रव भरा रहता है, जिस का किं योगिजन पान करते है । यह योगिजनो कां गोलक, १ जिह, १ नासिकां (भ्रव १०।२।६) । तथा सप्त ऋषयः ने (यत्) जो. (ते) तेरे किसी भ्रगको (म्मा तुतोद) व्यथा पहुचाई है, का० १८1 सुऽ ३ प्रथववेद-माष्य ९३

English

Eat, thou God, the gifts we bring thee. Lapped in the bosom of the purple Mornings, give riches to the man who brings oblations. Grant to your sons a portion of that treasure, and, present, give them energy, O Fathers.

अध्याय १८

श्लोक 3.57

इ॒मा नारी॑रविध॒वाः सु॒पत्नी॒राञ्ज॑नेन स॒र्पिषा॒ सं स्पृ॑शन्ताम्।अ॒न॒श्रवो॑ अनमी॒वाः सु॒रत्ना॒ आ रो॑हन्तु॒ जन॑यो॒ योनि॒मग्रे॑

imā nārīravidhavāḥ supatnīrāñjanena sarpiṣā saṃ spṛśantām| anaśravo anamīvāḥ suratnā ā rohantu janayo yonimagre

हिन्दी अर्थ

के तत्काल मे ही होना चाहिए । (२) श्रम्नि मे तदुपयोगी श्रोषधियो को भ्राहुतियां डाल कर तदुत्थित धूमो के गन्ध लेने,तथा उस घूम के जल-मिश्रण द्वारा ग्यथा-स्थान को लिप्त करने से-भी वह रंग रोग-रहित किया जा सकता है 1 गुखकुलं कांगड़ी विदवविद्यालयमें इस विधि का प्रयोग कई कांगड़ी से प्रकारित “वैदिक-मैग्जीन" मे प्रकारित हुए ये। (३) जलो सम्भवतः एेसे उपचारो मेँ विद्युत् का प्रयोग.लाभकारी हो। सोमः सोमका भर्थ“जल्“भी होता है।जलों मे सब भेषज विद्यमान है, (२) सोम का अथं “सोम भोषधि” भी है । सोम श्रोषधि के विचित्र गुण

English

Fathers whom Agni’s flames have tasted, come ye nigh: in per- fect order take ye each your proper place.

अध्याय १८

श्लोक 3.58

सं ग॑च्छस्व पि॒तृभिः॒ सं य॒मेने॑ष्टापू॒र्तेन॑ पर॒मे व्योऽमन्।हि॒त्वाव॒द्यं पुन॒रस्त॒मेहि॒ सं ग॑च्छतां त॒न्वाऽ सु॒वर्चाः॑

saṃ gacchasva pitṛbhiḥ saṃ yameneṣṭāpūrtena parame vyo'man| hitvāvadyaṃ punarastamehi saṃ gacchatāṃ tanvā' suvarcāḥ

हिन्दी अर्थ

मै,परमेरवरीय कृपा का होना, रोगनिवारण मेँ एक मह्त्वपूणें भङ्ग है । (ञ्रोषधयः) भ्रोषधियां पयस्वतीः रसखूप-सार वाली है, (मामकम्) मेरा (पयः) रस-रक्त (पयस्वत्) सारवाला है, (अपाम्) जनों के (पयसः) सार का (यत्) जो (पयः) सार है, (तेन ) उन तीनो प्रकार के सारो के (सह) साथ परमेश्वरीय कृपा (मा) मुभे जुद्ध कर के (शुम्भवु) शोभा- भरोषधि्यो का सार भ्र्थात् रस शरीर के रसरक्त रूपी सार को सार है-मेघीय जल, भौर मेधीय जल का सार है-वर्षाजल ॥ वर्षाजल सब

English

Eat sacrificial food presented on the grass: grant riches with a multitude of hero sons. May they, the Fathers who deserve the Soma, invited to their favourite oblations. Laid on the sacred grass, come nigh and listen. May they be gracious unto us and bless us.

अध्याय १८

श्लोक 3.59

ये नः॑ पि॒तुः पि॒तरो॒ ये पि॑ताम॒हा य आ॑विवि॒शुरु॒र्व॑१न्तरि॑क्षम्।तेभ्यः॑ स्व॒राडसु॑नीतिर्नो अ॒द्य व॑थाव॒शं त॒न्वः कल्पयाति

ye naḥ pituḥ pitaro ye pitāmahā ya āviviśururva1ntarikṣam| tebhyaḥ svarāḍasunītirno adya vathāvaśaṃ tanvaḥ kalpayāti

हिन्दी अर्थ

९४ अथर्ववेद-माष्य का० १८१ सु०३ रसो के पान हारा सपं भ्रादि के विष का अपहरण होता है । शरीर का रुद्ध रस-रक्त स्वयं भी भ्रोषधिरूप है । सन्तानो वाली (दमाः नारीः) ये नारियां, (भ्राञ्जनेन) मुख भ्रादि की रोने-धोने से रहित हृरद हृद (भ्रवमीवाः ) तथां रोगों से रहित हई-हुईं (सुरत्ना) उत्तम रत्नौ को धारण करे ।

English

Our Father’s Fathers and their sires before them who came, most noble, to the Soma banquet, With these let Yama, yearning with the yearning, rejoicing eat our offerings at his pleasure.

अध्याय १८

श्लोक 3.60

शं ते॑ नीहा॒रो भ॑वतु॒ शं ते॑ प्रु॒ष्वाव॑ शीयताम्।शीति॑के॒ शीति॑कावति॒ ह्लादि॑के॒ ह्लादि॑कावति ।म॒ण्डू॒क्य॑१प्सु शं भु॑व इ॒मं स्व॑१ग्निं श॑मय

śaṃ te nīhāro bhavatu śaṃ te pruṣvāva śīyatām| śītike śītikāvati hlādike hlādikāvati | maṇḍūkya1psu śaṃ bhuva imaṃ sva1gniṃ śamaya

हिन्दी अर्थ

का० १८1 सुऽ ३ भ्रथर्ववेद-भाष्य ९५ श्रव्यम् =जिन का कथत भी न करना चाहिए, एसे पापकमं- “कथापि खलु पापानामलमशेथसे यतः" । तेभ्यः स्वराडसुंनीतिनो अच य॑थावशचं तन्व ; कर्पयाति ।५९॥ ( वर) करता है, मुक्तिकाल के उपभोग के पश्चात् उसे उस.कामना के सदृश शरीर भौर शारीरिक-सामथ्यं प्राप्त होता है । 1 शीतिके शीतिकावति हादिके इादिंकावति । हे शवाग्नि ! (ते) तुभे ( नीहारः) कोहरा ( शम् भवतु ) शान्त

English

Eaters and drinkers of oblation, truthful, who travel with the Deities and Indra.

अध्याय १८

श्लोक 3.61

वि॒वस्वा॑न्नो॒ अभ॑यं कृणोतु॒ यः सु॒त्रामा॑ जी॒रदा॑नुः सु॒दानुः॑ ।इ॒हेमे वी॒रा ब॒हवो॑ भवन्तु॒ गोम॒दश्व॑व॒न्मय्य॑स्तु पु॒ष्टम्

vivasvānno abhayaṃ kṛṇotu yaḥ sutrāmā jīradānuḥ sudānuḥ | iheme vīrā bahavo bhavantu gomadaśvavanmayyastu puṣṭam

हिन्दी अर्थ

रौर ( भ्रवशौयताम् ) मेष से नीचे गिरकर तुे भ्रावृत करदे । ( शीतिकावति ) है रशीतलं कमलिनियों वाली ( शीतिके ). शीतलं सरसी ! (ह्लादिकावति) है ्राह्लाददायक कमलिनियों वाली (ञांदिके) ६६ भ्रथवंवेद-भाष्य का० १८ । सु०३ प्रकार (शमय) तु शान्त कर दे (अप्सु) जलो में रहनेवाली (मण्डूकि ) हे मण्डूकी ! तू भी (शं मुवः) भग्न को शान्त करनेवाली बन । शवाग्नि को शान्त करने तथा उस समग्र स्थान को सुरम्य बनाने के लिये वहां तालाब बनवा कर उसे सजल करने का विधान किया है 1 मण्ड्की के वर्णन दारा यह् सूचित किया है कि मण्डूकी-संन्तति के जीवित रहने 'के लिये उस हुभ्रा परमेश्वर (नः) हमे (शरमयम्) निर्भय (कृणोतु) करे, (यः जो पर-

English

Betake thee to the lap of Earth, our mother, of Earth far-spread- ing, very kind and gracious. May she, wool-soft unto the guerdon-giver, guard thee in front upon the distant pathway. Heave thyself, Earth, nor press him downward heavily: afford him easy access pleasant to

अध्याय १८

श्लोक 3.62

वि॒वस्वा॑न् नो अमृत॒त्वे द॑धातु॒ परै॑तु मृ॒त्युर॒मृतं॑ न॒ ऐतु॑ ।इ॒मान् र॑क्षतु॒ पुरु॑षा॒ना ज॑रि॒म्णो मो ष्वेऽषा॒मस॑वो य॒मं गुः॑

vivasvān no amṛtatve dadhātu paraitu mṛtyuramṛtaṃ na aitu | imān rakṣatu puruṣānā jarimṇo mo ṣve'ṣāmasavo yamaṃ guḥ

हिन्दी अर्थ

दानी है । (इह) इस गृहश्य जीवन मे (इमे) ये (वीराः ) वीर सन्ताने विवस्वान् == विवासयति दूरीकरोति । वि = विविध --वस् (बसना ) १८६. विवस्वान् नो अग्रृतसे दधातु परत मृ्युरशतं न रेत॑ । पोषण करे । (मृत्युः) जन्म-मरण-परम्परा (परंतु) परे चली नाय, हमै को. (आ जरिम्णः) जरावस्था तक (रक्षतु) सुरक्षित रे । (एषाम. ) इन

English

approach, Cover him as a mother wraps her skirt about her child, O

अध्याय १८

श्लोक 3.63

यो द॒ध्रे अ॒न्तरि॑क्षे॒ न म॒ह्ना पि॑तॄ॒णां क॒विः प्रम॑तिर्मती॒नाम्।तम॑र्चत वि॒श्वमि॑त्रा ह॒विर्भिः॒ स नो॑ य॒मः प्र॑त॒रं जी॒वसे॑ धात्

yo dadhre antarikṣe na mahnā pitṝṇāṃ kaviḥ pramatirmatīnām| tamarcata viśvamitrā havirbhiḥ sa no yamaḥ prataraṃ jīvase dhāt

हिन्दी अर्थ

सु गुः) सुगमता से प्राप्तं न हों । यमम्=यम उपरमे । का० १८.1 प्ु० ३ भ्रधर्ववेद-भाष्य ७ (यः) जो परमेश्वर (मल्ला) निज महिमासे हम प्राणियों को णाम्) हमारे पितृ-कवियो मे (कविः) सर्व॑शरेष्ठ कवि है, गौर (मतीनाम्)

English

Earth! Now let the heaving earth be free from motion: yea, let a thousand clods remain above him. Be they to him a home distilling fatness: here let them ever be his place of refuge.

अध्याय १८

श्लोक 3.64

आ रो॑हत॒ दिव॑मुत्त॒मामृष॑यो॒ मा बि॑भीतन ।सोम॑पाः॒ सोम॑पायिन इ॒दं वः॑ क्रियते ह॒विरग॑न्म॒ ज्वोति॑रुत्त॒मम्

ā rohata divamuttamāmṛṣayo mā bibhītana | somapāḥ somapāyina idaṃ vaḥ kriyate haviraganma jvotiruttamam

हिन्दी अर्थ

दारा (तम्) उसकी (भ्रचंत) भ्च॑नाएं किया करी ।(संः) वहू (यमः) जगन्नियन्ता (नः) हमारा (धात्)धारण-पोषण करे । (प्रतरं जीवसे ) ताकि हम दीघंकाल तक जीवित रह सर्के पितर कवि = मनुष्यकवि । प्रकार (बिमीतन मा) जन्म-मरण के भय से रहित हो जाभौ ! (सोमपाः) हे वीये की रक्षा करनेवाले ! तथा (सोमपायिनः) ऊर्ध्वरेता होकर उसका पान करनेवाले ऋषियो । (इदम्) यह (हविः) ज्ञानमय हवि (वः) भ्राप के बन्धन से छूट नहीं सकते । जन्म-मरण के बन्धन से छृटने का मागे एक भराणिधान । इसलिये योगसाघना द्वारा तुम सहस्रारचक्र तक भ्रारोहण कर १८६. प्र केतुन बहता मात्यभिरा रोद॑सी इृषभो रोरकीति ।

English

I stay the earth from thee, while over thee I place this piece of earth. May I be free from injury.

अध्याय १८

श्लोक 3.65

प्र के॒तुना॑ बृह॒ता भा॑त्य॒ग्निरा रोद॑सी वृष॒भो रो॑रवीति ।दि॒वश्चि॒दन्ता॑दुप॒मामुदा॑नड॒पामु॒पस्थे॑ महि॒षो व॑वर्ध

pra ketunā bṛhatā bhātyagnirā rodasī vṛṣabho roravīti | divaścidantādupamāmudānaḍapāmupasthe mahiṣo vavardha

हिन्दी अर्थ

परमेदवर (रोदसी भ्रा) शिरसे लेकर पेरोंतकको भ्रोइम् की ध्वनियों उपरथे) रक्तरूपीं जलो के स्थिति-स्थान हदय में (महिषः) महान् परमेदवर (ववं ). निज ज्योति मं बढता है । केतु = प्रज्ञा (नि०३।९)। रोदसी रोरवीति =-प्रथवा वर्षा करने वाला परमेदवरीय ज्योति के मानो रूप है ।

English

The Fathers firmly fix this pillar here for thee; and there let Yama make thee an abiding-place. Forbear, O Agni, to upset this chalice: the Gods and they who merit Soma love it.

अध्याय १८

श्लोक 3.66

नाके॑ सुप॒र्णमुप॒ यत् पत॑न्तं हृ॒दा वेन॑न्तो अ॒भ्यच॑क्षत त्वा ।हिर॑ण्यपक्षं॒ वरु॑णस्य दू॒तं य॒मस्य॒ यो नौ॑ शकु॒नं भु॑र॒ण्युम्

nāke suparṇamupa yat patantaṃ hṛdā venanto abhyacakṣata tvā | hiraṇyapakṣaṃ varuṇasya dūtaṃ yamasya yo nau śakunaṃ bhuraṇyum

हिन्दी अर्थ

परमेदवर ! (नके) सांसारिक सुखो भ्रौर सुखामावों से रहित निज भ्रानन्द का० १८ । सु०३ प्रथ्वविद-भाष्य ९९ विषौ णो भसिमन् शरुत याम॑नि जीवा ज्योतिरशीमहि ॥है७॥। (भ्रामर) त कीजिये, (यथा) जैसे (पिता पत्रेभ्यः) पिता पूरो को धर्षा प्रदान करता है । (पुख्ूत) बहुत वार समादरपूर्वंक धकारे गए ह (शिक्ष) शिक्षा प्रदान कोजिये । ताकि (जीवाः) इस जीवन के जीवित कालं

English

This cup, yea this which serves the Gods to drink from,—in this let the Immortals take their pleasure.

अध्याय १८

श्लोक 3.67

इन्द्र॒ क्रतुं॑ न॒ आ भ॑र पि॒ता पु॒त्रेभ्यो॒ यथा॑ ।शिक्षा॑ णो अ॒स्मिन् पु॑रुहूत॒ याम॑नि जी॒वा ज्योति॑रशीमहि

indra kratuṃ na ā bhara pitā putrebhyo yathā | śikṣā ṇo asmin puruhūta yāmani jīvā jyotiraśīmahi

हिन्दी अर्थ

मनर १८८ मे परमेश्वर के ठपासक परज्ञा की प्ररथना कर रटे है । (भरधारयन्) सुरक्षित रख लिया है, (ते) वे (मधुमन्तः) मधुर तथा म्नौर समय-समय पर ये मेंट देते रह, ताकि ब्रह्मचारी पपरसन्न होकर विद्याध्ययन कर सकं । 1 । १०० अथर्वेवेद-माष्य का० १८ ।सू०३

English

The chalice brimming o’er which erst Atharvan offered to Indra, Lord of wealth and treasure, Indu therein sets draught of virtuous action, and ever purifies himself within it.

अध्याय १८

श्लोक 3.68

अ॒पू॒पापि॑हितान् कु॒म्भान् यांस्ते॑ दे॒वा अधा॑रयन्।ते ते॑ सन्तु स्व॒धाव॑न्तो॒ मधु॑मन्तो घृत॒श्चुतः॑

apūpāpihitān kumbhān yāṃste devā adhārayan| te te santu svadhāvanto madhumanto ghṛtaścutaḥ

हिन्दी अर्थ

(तिलमिश्राः) तिलमिश्चित (धानाः) घान्यों को (अनुकिरामि) ऋत्वनुसार म देताहुं, (ताः) वे (तेरे) तेरे लिये (विभ्वीः) प्रभूत माच्रामें हो, रौर (भ्वी) शक्ति देने वाले हो । (यमः) यम-नियमों का भ्रधिष्ठाता (राजा) समुस्नति करता रहेगा । धानाः मने जौ तथा चावल, सत्तु तथा जो (एषः) यह ब्रह्मचारी (त्वयि) भ्राप को (निहितः) सौपा गया है, उसे (पुनः) फिर (देहि) हमारे सुपुदं कर दीजियेगा । (यथाः) ताकिं (यमस्य) म्नौ र वन्य उपलो पर उस-उस आचाय का भविकार हो, ताकि वन्य फलों भौर भ्राचायों का ही नियन्त्रण होना चाहिए ।

English

What wound soe’er the dark bird hath inflicted, the emmet, or the serpent, or the jackal, May Agni who devoureth all things heal it, and Soma, who hath passed into the Brāhmans.

अध्याय १८

श्लोक 3.69

यास्ते॑ धा॒ना अ॑नुकि॒रामि॑ ति॒लमि॑श्रा स्व॒धाव॑तीः ।तास्ते॑ सन्तु वि॒भ्वीः प्र॒भ्वीस्तास्ते॑ य॒मो राजानु॑ मन्यताम्

yāste dhānā anukirāmi tilamiśrā svadhāvatīḥ | tāste santu vibhvīḥ prabhvīstāste yamo rājānu manyatām

हिन्दी अर्थ

का० १८। सु०३ भथवंवेद-भाष्य १०१ रीरमख सं दशनं घेदि सुवाम लोके ॥७१॥। तदनन्तर इसे (सुकृताम्) सूक्मि्यों के (लोके) गृहस्थ-लोक मँ (धेहि) भाचार्यं छेसा होना चाहिए कि वह् भ्रपने पापहारी-तेज द्वारा बरह्मचारी की पापमयी वासनाभ्रों को दग्ध कर उसे सुकर्म बना सके । वेद

English

The plants of earth are rich in milk, and rich in milk is this my milk. 237 With all the milky essence of the Waters let them make me clean.

अध्याय १८

श्लोक 3.70

पुन॑र्देहि वनस्पते॒ य ए॒ष निहि॑त॒स्त्वयि॑ ।यथा॑ य॒मस्य॒ साद॑न॒ आसा॑तै वि॒दथा॒ वद॑न्

punardehi vanaspate ya eṣa nihitastvayi | yathā yamasya sādana āsātai vidathā vadan

हिन्दी अर्थ

का घारण-पोषण करनेवाली, तथा सैकड़ों घारा्भोवाली (घृतस्य कृस्या). जल की नहर (एतु) प्राप्तं हो । घृतम् उदकम् (निधं १।१२) (एतद) इस गृह प्र (भरारोह) तु भारोहण कर, (वयः) भपनी यु मत छोड जाना । गृहस्थाश्रम (पिदणां लोकम्) माता-पिता बनने का

English

Decked with fair jewels, tearless, free, from trouble, first let the dames go up to where he lieth. Meet Yama, meet the Fathers, meet the merit of virtuous action in the loftiest heaven.

अध्याय १८

श्लोक 3.71

आ र॑भस्व जातवेद॒स्तेज॑स्व॒द्धरो॑ अस्तु ते ।शरी॑रमस्य॒ सं द॒हाथै॑नं धेहि सु॒कृता॑मु लो॒के

ā rabhasva jātavedastejasvaddharo astu te | śarīramasya saṃ dahāthainaṃ dhehi sukṛtāmu loke

हिन्दी अर्थ

"बच्र' का अथं ह्भिटनी ने किया है “1196; “करना चाहिए- 616." । “96 प्रथं इस लिये किया है कि मन्त्र परलोक-वर्णेन का विधान है। इसीलिये वे दिकशाला को ““हृत्तिनीव पती" द्वारा उपमित किया है (भ्रथर्वं० ९€।३।१७) । वयः सायण ने इस पद का भरं १९५. आ रोहत जनित्रीं जातवेदसः पितृयाणैः सं ब॒ आ रोहयामि। अबाइव्येषितो इव्यवाई देजानं युक्ताः सुकृतां त्त लोके॥१॥ (जातवेदसः) है भष्यात्मविद्या के जाननेवाले सदृगहस्थो ! तुम (पितृयाणैः) पितरृयाण मागो दवारा (जननीम्) जगज्जननी की प्राप्ति को सम्यक् विधि से (भारोहयामि) इस मागं पर प्रारूढ़ कराता हु । (हन्य वाहः) तुम्हारी भत्मसमपंणरूपी हवियो को स्वीकार करनेवाले परमेरवर ने

English

Leave sin and evil, seek anew thy dwelling: so bright with glory let him join his body. Our Father’s Fathers and their sires before them, they who have entered into air’s wide

अध्याय १८

श्लोक 3.72

ये ते॒ पूर्वे॒ परा॑गता॒ अप॑रे पि॒तर॑श्च॒ ये।तेभ्यो॑ घृ॒तस्य॑ कु॒ल्यैऽतु श॒तधा॑रा व्युन्द॒ती

ye te pūrve parāgatā apare pitaraśca ye| tebhyo ghṛtasya kulyai'tu śatadhārā vyundatī

हिन्दी अर्थ

किया है, स्वीकृत किया है । (युक्ताः) है योगयुक्त योगीजनो ! (ईजानम्) पंचमहायज्ञों ॐ करनेवाले को (सुकृतां लोके ) सुकभियों के समाज में (धत्त) स्थापित करो । मनोर पग बढ़ाते जाना । भौर इस निमित्त योगिजनों की सेवाएं करना, यह सद्गहस्थी का लक्ष्य होना चाहिए । प्रादे से बनी टिक्कौ का, भ्रनिमे घी की भ्राहुति डालने के चमचो का,.

English

region, For them shall self-resplendent Asuniti form bodies now accord- ing to her pleasure. Let the hoar-frost be sweet to thee. sweetly on thee the rain descend!

अध्याय १८

श्लोक 3.73

ए॒तदा रो॑ह॒ वय॑ उन्मृजा॒नः स्वा इ॒ह बृ॒हदु॑ दीदयन्ते ।अ॒भि प्रेहि॑ मध्य॒तो माप॑ हास्थाः पितॄ॒नां लो॒कं प्र॑थ॒मो यो अत्र॑

etadā roha vaya unmṛjānaḥ svā iha bṛhadu dīdayante | abhi prehi madhyato māpa hāsthāḥ pitṝnāṃ lokaṃ prathamo yo atra

हिन्दी अर्थ

तथा यशो के भरन्य नानाविध उपकरणों का । है यजमान ! (देवयानः) - धा्चिक देवों के (तेभिः) उन (पथिभिः) मागो हयार तु (स्वर्गं लोकम्) (ईजानाः) यज्ञ करनेवाले यजमान (सवर्ग लोकं यन्ति) स्वगं लोक को निरदिचत प्राप्त होते है । ऋतवः भिन्न-मिन्न ऋतु के भनुसार किये जानेवाले चातुर्मास्य वृद्धि होने पर सुखविकेष होता है । (साधु) मोक्षसाघक (भनुपल्य) भौर भ्रनुकूल जानकर, (सुकृतः) सुकरमी

English

O full of coolness, thou cool Plant, full of fresh moisture, fresh- ening Herb, Bless us in waters, female Frog: calm and allay this Agni here.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता · Identifier:

Atharva Veda — Chapter 18

अथर्ववेद

संस्कृत संस्करण · Sanskrit Edition:

Imported text; printed edition not recorded

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