दृश्य, गति और थीम की सेटिंग
ह
- हरिः वा कमलजः अपि
- अथवा भगवान् विष्णु (हरि) या ब्रह्मा जी (कमलज) ही क्यों न हों
- हर्ष-अमर्ष-विनिर्मुक्तः
- हर्ष और क्रोध (अमर्ष) से सर्वथा मुक्त होकर
- हर्षः क्व विषादिता क्व
- हर्ष कहाँ है और विषाद कहाँ है?
- हर्षविषादयोः अभावात्
- हर्ष और विषाद के अभाव से
- हानम् क्व च
- और किसी वस्तु की हानि (छूट जाना) कहाँ?
- हि निराकुलः
- सर्वथा व्याकुलता-रहित और परम शांत रहता है
- हृदि किञ्चित् मा धारय
- हृदय में किसी भी विचार या संकल्प को मत पकड़ो
- हृदि किञ्चित् वासना न
- जिसके हृदय में तनिक भी कोई वासना या कामना नहीं है
- हृष्यति कुप्यति
- प्रसन्न होता है, दुखी या क्रुद्ध होता है
- हेय-उपादेय-कल्पना
- त्याग करने योग्य या ग्रहण करने योग्य की कल्पना हो सकती है?
- हेय-उपादेयता न हि
- त्यागने (हेय) या पकड़ने (उपादेय) की कोई भावना नहीं होती
- हेयम्
- त्याज्य (छोड़ने योग्य)
- हेयोपादेयकल्पना
- त्यागने योग्य और ग्रहण करने योग्य की कल्पना
- हेयोपादेयविरहात्
- त्यागने योग्य (हेय) और ग्रहण करने योग्य (उपादेय) के अभाव से
- हेलया
- सहज भाव से, खेल-खेल में