दृश्य, गति और थीम की सेटिंग
द
- दंशितः
- डसा हुआ
- दक्षः
- चतुर, कुशल
- दया
- करुणा
- दिनानि त्रीणि पञ्च वा
- तीन या पाँच दिन के
- दीनः इव धावसि
- दीन की तरह क्यों दौड़ते हो
- दीनाः
- दीन होते हुए
- दुःखम्
- दुख
- दुःखम् आयासदम् कर्म
- दुखदायी और परिश्रम देने वाला कर्म
- दुःखम् जायते
- दुःख उत्पन्न होता है
- दुर्लभम्
- दुर्लभ (कठिन) है
- दृश्यमाना अपि संगतिः न
- दिखाई देता हुआ भी वास्तविक सम्बन्ध नहीं
- दृश्यम्
- जो दिखाई देता है
- दृश्यम् एतत्
- यह दृश्य
- दृष्टिः शून्या
- दृष्टि किसी स्वार्थ या वासना से रहित (शून्य) होती है
- दृष्ट्वा
- देखकर
- दृष्ट्वा संपूज्य
- देखकर और उनका यथायोग्य सत्कार-पूजन करके भी
- देहः कल्पान्तम् तिष्ठतु
- यह शरीर कल्प के अंत तक बना रहे
- देहः पततु उदेतु वा
- यह शरीर गिर जाए (नष्ट हो जाए) अथवा उठ खड़ा रहे
- देहम्
- देह को
- देहम् पृथक्कृत्य
- देह को अलग करके (अलग समझकर)
- देहवान् अपि
- देहधारी होते हुए भी
- देहस्थ-योगिनः
- स्वयं को शरीर मानने वाले साधक
- देहाभिमानपाशेन
- देह के अभिमानरूपी पाश (फंदे) से
- देहे विगलित-आशस्य
- जिसकी अपने शरीर से ही सारी आसक्ति और आशा गल चुकी है
- दैवात् एव
- प्रारब्ध और ईश्वरीय विधान से ही आते हैं
- प्रारब्ध और प्राकृतिक विधान के अधीन हैं
- दौहित्रैः गोत्रजैः च अपि
- और नातियों तथा कुल के संबंधियों द्वारा
- द्रष्टारम् इतरम्
- दूसरे को देखने वाला
- द्राक्
- अत्यन्त, शीघ्र
- द्वन्द्वानि
- सुख-दुख जैसे जोड़े
- द्वैतमूलम्
- द्वैत है मूल जिसका