Atharva Veda· Atharvaveda Saṁhitā
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अध्याय 6 / 20

Kanda 6

काण्ड 6

453 श्लोकभाग 3/3 · श्लोक 97.1–142.3WhatsApp

पूर्ण अध्याय पाठ157 श्लोक

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अध्याय ६

श्लोक 97.1

अभिभूर्वीरः -३ अथर्वा।१,३ देवाः, २ मित्रावरुणौ।१ त्रिष्टुप्, २ जगती, ३ भुरिक्।अ॒भि॒भूर्य॒ज्ञो अ॑भि॒भूर॒ग्निर॑भि॒भूः सोमो॑ अभि॒भूरिन्द्रः॑ ।अ॒भ्य॑हं विश्वाः॒ पृत॑ना॒ यथासा॑न्ये॒वा वि॑धेमा॒ग्निहो॑त्रा इ॒दं ह॒विः

abhibhūrvīraḥ -3 atharvā| 1,3 devāḥ, 2 mitrāvaruṇau| 1 triṣṭup, 2 jagatī, 3 bhurik| abhibhūryajño abhibhūragnirabhibhūḥ somo abhibhūrindraḥ | abhyahaṃ viśvāḥ pṛtanā yathāsānyevā vidhemāgnihotrā idaṃ haviḥ

हिन्दी अर्थ

हृदय होकर बन्द करने के दण्ड का प्रयोग करं, विद्वेष भावना से नहीं। ¶ “जग्रणी्भेवति" (निसक्त ७।४।१४) । सोमः=सेनाध्यक्ष (यजु ० १७।४०। (१-३) । उर्मोखमः। कासा । अनुष्टुम् । १. जस र्मे बम्द कर्ने का दष्ट ।

English

Whatever deadly missile launched to-day flies forth to slaughter us. We take both arms of Indra to encompass us on every side. We draw about us both the arms of Indra, our deliverer. May they protect us thoroughly.

अध्याय ६

श्लोक 97.2

स्व॒धास्तु॑ मित्रावरुणा विपश्चिता प्र॒जाव॑त् क्ष॒त्रं मधु॑ने॒ह पि॑न्वतम्।बाधे॑थां दू॒रं निरृ॑तिं परा॒चैः कृ॒तं चि॒देनः॒ प्र मु॑मुक्तम॒स्मत्

svadhāstu mitrāvaruṇā vipaścitā prajāvat kṣatraṃ madhuneha pinvatam| bādhethāṃ dūraṃ nirṛtiṃ parācaiḥ kṛtaṃ cidenaḥ pra mumuktamasmat

हिन्दी अर्थ

१८४ अथववेद-भाष्यं का० ६। अनु° ११। सु० १०५ यथा तनो मनस्केतैः प॑रापतंत्याभुमत् । (यथा) जैसे (आगमत्) वेगयुक्त (मनः) मन, (मनस्केतंः); निज मानसिक ज्ञानों द्वारा (परापतति) दूर के प्रदेशों तक गति करता है, गति कर, पहुंच । पत =पत्लु गतौ (भ्वादिः) । प्रतीत होता । “कासा'' का अथं “शासन व्यवस्था ' भौ सम्भव है जोकि सक्त मे अधिक समन्वित होता है । “कासा = कसि गतिशासनयोः, कस लाग् है, वैते उप दूर कौ उच्वेदिशामें भी शासन-न्यवस्या लागू होनी चाहिय जहां तक कि मनुष्य पहुंच सकता है ओौर मन की वास्तविक गति या पहुंच सम्भव है । ताकि मनुष्यों में वहां तक पहुंच कर भी युद्धन हो सके, यह् मन्ध का अभिप्राय है। वतंमान काल के 1 अ)

English

O Savitar, thou God, O royal Soma, make thou me pious- minded for my welfare. 91

अध्याय ६

श्लोक 97.3

इ॒मं वी॒रमनु॑ हर्षध्वमु॒ग्रमिन्द्रं॑ सखायो॒ अनु॒ सं र॑भध्वम्।ग्रा॒म॒जितं॑ गो॒जितं॒ वज्र॑बाहुं॒ जय॑न्त॒मज्म॑ प्रमृ॒णन्त॒मोज॑सा

imaṃ vīramanu harṣadhvamugramindraṃ sakhāyo anu saṃ rabhadhvam| grāmajitaṃ gojitaṃ vajrabāhuṃ jayantamajma pramṛṇantamojasā

हिन्दी अर्थ

पवा त्वं कसे प्र पतं पृथिव्या अचु संवतम् ॥२॥ (यथा) जैसे (सु संशितः) उत्तम-साधित (वाणः) शब्द ( आशुमत्) शीघ्र (परा पतति) दर कै प्रदेशों तक गति करता टै, पंच जाता है, (एव - एवम्, इस प्रकार (कासे) पृथिवी की (संवतम्) संप्रोप्ति कौ (अनु) अनुकूलता तक (प्रपत) गति पहुंच जाती है, जैसे कि टैलीफोन तथा रेडियो ओर टेलीविजन द्वारा वतं- कां ६.1 .अनुर १११ सू १४३ सष्रतेवेद-भाष्य १८१

English

A charm against poison The Gods and Sūrya gave the gift, the Earth and Heaven best- owed the boon. The three Sarasvatis in full accord bestowed the antidote.

अध्याय ६

श्लोक 98.1

अजरं क्षत्रम्।१-३ अथर्वाः।इन्द्रः।त्रिष्टुप्, २ बृहतीगर्भास्तारपङ्क्तिः।इन्द्रो॑ जयाति॒ न परा॑ जयाता अधिरा॒जो राज॑सु राजयातै ।च॒र्कृत्य॒ ईड्यो॒ वन्द्य॑श्चोप॒सद्यो॑ नम॒स्योऽभवे॒ह

ajaraṃ kṣatram| 1-3 atharvāḥ| indraḥ| triṣṭup, 2 bṛhatīgarbhāstārapaṅktiḥ| indro jayāti na parā jayātā adhirājo rājasu rājayātai | carkṛtya īḍyo vandyaścopasadyo namasyo'bhaveha

हिन्दी अर्थ

पृथिवी पर, जहां तक पृथिवी कृःम्यक्-पराप्ति' है लागू करना चाहिए । से (परापतन्ति) दुर के प्रदेशों तक गति करती दह, (एवा = एवम्) इसी (प्र पत) शीघ्रता सेः पहुंच, वहां, तक गति कर । . सूक्त मे, पृथिवी की उध्वैदिशा मे, समूदों से घिरी पृथिवी पर, तथा हे शाला ! (ते) तेरे (गायने) भाने के मागे मे, (परायणे) भौर जाने के मागे मे (पृष्पिणीः) फलो से पुष्पित (दूर्वाः) घास (रोहम्तु) उगें, (तश्र) वहां अथात् शालामें (वा) या तो (उत्सः) फुभआरा (जायताम्) हो, (वा) या -(पुण्डरीकवान्) कमलो से युक्त (हदः) तालाब । शाला (मन्त ३) आने गौर जाने के मागं अलग-भलग होने चाहिए,

English

That water, Upajīkās! which Gods poured for you on thirsty land, With that same water sent by Gods, drive ye away this poison here. p. a247

अध्याय ६

श्लोक 98.2

त्वमि॑न्द्राधिरा॒जः श्र॑व॒स्युस्त्वं भू॑र॒भिभू॑ति॒र्जना॑नाम्।त्वं दैवी॒र्विश॑ इ॒मा वि रा॒जायु॑ष्मत् क्ष॒त्रम॒जरं॑ ते अस्तु

tvamindrādhirājaḥ śravasyustvaṃ bhūrabhibhūtirjanānām| tvaṃ daivīrviśa imā vi rājāyuṣmat kṣatramajaraṃ te astu

हिन्दी अर्थ

१. पृथिवी सबमोरसे समृदोसे धिरी हदे, इन समदो के भीतर पृथिवी वलि को “एकराट्” तथा “जन राट्" कषत हैँ । १८४ अथर्ववेद-भाष्यं का०६। अनु० ११। सू० १५५ यथा तनो मनस्केतेः प॑रापत॑त्याशुमत् ।

English

The daughter of the Asuras art thou, and sister of the Gods. Thou who hast sprung from heaven and earth hast robbed the poison of its power. A charm to promote virile vigour

अध्याय ६

श्लोक 98.3

प्राच्या॑ दि॒शस्त्वमि॑न्द्रासि॒ राजो॒तोदी॑च्या दि॒शो वृ॑त्रहन्छत्रु॒होऽसि ।यत्र॒ यन्ति॑ स्रो॒त्यास्तज्जि॒तं ते॑ दक्षिण॒तो वृ॑ष॒भ ए॑षि॒ हव्यः॑

prācyā diśastvamindrāsi rājotodīcyā diśo vṛtrahanchatruho'si | yatra yanti srotyāstajjitaṃ te dakṣiṇato vṛṣabha eṣi havyaḥ

हिन्दी अर्थ

(यथा) जसे (आशुमत्) वेगयुक्त (मनः) मन, (मनस्केतेः); निज मानसिक ज्ञानो द्वारा (परापतति) दूर के प्रदेशों तके गति करतादहै, गति कर, पहुंच । पत -पत्लु गतौ (भ्वादिः) । मन्व में "कासा" का वर्णन है "कासा" का प्रसिद्ध अथं है “खासी; प्रतीत होता । “कासा'" का अथे “शासन व्यवस्था! भौ सम्भवदहै जोकि लाग् है, वेते उस दर को उध्वेदिशामें भी शासनव्यवस्था लागू होनी चाहर जहां तक कि मनुष्य पहुंच सकता है मौर मन की वास्तविक गति या पहूंच सम्भव है । ताकि मनुष्यों मेँ वहां तक पहुंच कर भी गृद्धन हो सके, यह मन्व का अभिप्राय है। वतमान काल के “ऽवा” को (यथा) जैसे (सु संशितः) उत्तम-साधित (वाणः) शब्द (आशुम्) शीघ्र (परा पतति) दर कै प्रदेशों तक गति करता है, पंच जाता है, (एव

English

Taurum age, palpita, incresce et teipsum extende: per totum membrum increscat penis: hoc tu caede feminam.

अध्याय ६

श्लोक 99.1

संग्रामजयः।१-३ अथर्वा।इन्द्रः, सोमः, सविता च।अनुष्टुप्, ३ भुरिग्बृहती (सौम्या सावित्री)।अ॒भि त्वे॑न्द्र॒ वरि॑मतः पु॒रा त्वां॑हूर॒णाद्धु॑वे ।ह्वया॑म्यु॒ग्रं चे॒त्तारं॑ पु॒रुणा॑मानमेक॒जम्

saṃgrāmajayaḥ| 1-3 atharvā| indraḥ, somaḥ, savitā ca| anuṣṭup, 3 bhurigbṛhatī (saumyā sāvitrī)| abhi tvendra varimataḥ purā tvāṃhūraṇāddhuve | hvayāmyugraṃ cettāraṃ puruṇāmānamekajam

हिन्दी अर्थ

पृथिवी की (संवतम्) संप्रप्ति की (अनु) अनुकूलतां तक (प्र पत) गति पच जाती है, जैसे कि टेलीफोन तथा रेडियो गौर टेलीविजन द्वारा वतं- कां ६.1. अनुर ११॥ सु? १४३ भषववेद-भाष्य 4; : से (परापतन्ति) दुर के प्रदेशों तक गति करती ह, (एवा = एवम्) इसी

English

Quo debilem stimulant, quo aegrum excitant (homines), hoc, O Brahmanaspatis, hujus penem in arcus modum extende. Velut nervum in arcu ego tuum fascinum extendo. Aggredere

अध्याय ६

श्लोक 99.2

यो अ॒द्य सेन्यो॑ व॒धो जिघां॑सन् न उ॒दीर॑ते ।इन्द्र॑स्य॒ तत्र॑ बा॒हू स॑म॒न्तं परि॑ दद्मः

yo adya senyo vadho jighāṃsan na udīrate | indrasya tatra bāhū samantaṃ pari dadmaḥ

हिन्दी अर्थ

(प्र पत ) शीघ्रता से. पहुंच, वदां तक गति कूर । . सूक्त मे, पृथिवी कीः उष्वंदिशा मे, समूद्रों से घिरी पृथिवी पर, तथा हे शाला ! (ते) तेरे (मायने) जाने के मागमे, (परायणे) मौर जाने के मागं में (पुष्पिणीः) फुलोंसे पुष्पितं (दूर्वाः) धास (रोहसम्तु) उगे, हो, (वा) या - (पुण्डरीकवान्) कमलो से युक्त (हदः) तालाब ।

English

(mulierem) semper indefessus velut cervus damam. A man’s love charm

अध्याय ६

श्लोक 99.3

परि॑ दद्म॒ इन्द्र॑स्य बा॒हू स॑म॒न्तं त्रा॒तुस्त्राय॑तां नः ।देव॑ सवितः॒ सोम॑ राजन्त्सु॒मन॑सं मा कृणु स्व॒स्तये॑

pari dadma indrasya bāhū samantaṃ trātustrāyatāṃ naḥ | deva savitaḥ soma rājantsumanasaṃ mā kṛṇu svastaye

हिन्दी अर्थ

शाला (मन्त्र ३) आने भौर जाने के मागे अलग-अलग होने चाहिए, ताकि एक मागं द्वारा शालामे आ सके, ओौर दुसरे मागंद्रारा शाला से १. पृथिषीसव्र गौरे समु से धिरी हई ह इन समुद के मीतर पृथिवी पृथिवी षले को “एकराट्” तथा “जन राद्” कहते है ।

English

Even as this ox, O Asvins, steps and turns together with his mate, So let thy fancy turn itself, come nearer, and unite with me. I, as the shaft-horse draws the mare beside him, draw thee to myself.

अध्याय ६

श्लोक 100.1

विषदूषणम्।१-३ गरुत्मान्।वनस्पतिः।अनुष्टुप्।दे॒वा अ॑दुः॒ सूर्यो॑ अदाद् द्यौर॑दात् पृथि॒व्यऽदात्।ति॒स्रः सर॑स्वतिरदुः॒ सचि॑त्ता विष॒दूष॑णम्

viṣadūṣaṇam| 1-3 garutmān| vanaspatiḥ| anuṣṭup| devā aduḥ sūryo adād dyauradāt pṛthivya'dāt| tisraḥ sarasvatiraduḥ sacittā viṣadūṣaṇam

हिन्दी अर्थ

१८६ अथवेवेद-भाष्य का० ६। भनु० ११। मूु १०७ शाला के समीप (१) या तो (इदम्) षह (पाम्) जल का समुद्र॒ की (निवेशनम्) स्थिति हो; (३) या (नः) हमारे (गृहाः) धर (दस्य तालाब के (मध्ये) मध्यमे हों । (मुखा = मृखानि) घरों मं मूख (पराचीना पराचीनानि) परस्पर पराक्मुख (कृधि) है गृहस्थी तू कर । कियाहै। मूखानि का अभिप्राय है खिडकिथां भौर दरवाजे । ये परस्पर पराङ्मुख होने चाहिए, विरोधी दिशाओं मे अर्थात् मामने-सामनै को दिशाभौं में होने चाहिए । निवेशनम् अथवा सामुद्रिक जल का पृथ्वीम (शाते) -हे शाला ! (त्वा) तु्ञे (हिमस्य) बफं के (कशयुणा) गभ

English

Like grass that storm and wind have rent, so be thy mind at- tached to me! Swiftly from Bhaga’s hands I bear away a love-compelling charm

अध्याय ६

श्लोक 100.2

यद् वो॑ दे॒वा उ॑पजीका॒ आसि॑ञ्च॒न् धन्व॑न्युद॒कम्।तेन॑ दे॒वप्र॑सूतेने॒दं दू॑षयता वि॒षम्

yad vo devā upajīkā āsiñcan dhanvanyudakam| tena devaprasūtenedaṃ dūṣayatā viṣam

हिन्दी अर्थ

ठै, (नः) हमारे लिये (हि) निश्चय से (शीतहदा ) ठण्ड तालाब के सदृश तदथं बफं जमा सकना वक्ञानिकता का सूचक है । (विएवजित् ) है विष्वविजयी परमेश्वर ! (रायमाणाये ) निज पालक शविति के प्रति (मा) मूक्षे (परिदेहि) प्रदान कर, सुपुदं कर, समपित कर ।

English

Of ointment and of sugar-cane, of Spikenard and the Kushtha plant. A charm to check the approach of a hostile army Brihaspati and Savitar prepare a rope to bind you fast!

अध्याय ६

श्लोक 100.3

असु॑राणां दुहि॒तासि॒ सा दे॒वाना॑मसि॒ स्वसा॑ ।दि॒वस्पृ॑थि॒व्याः संभू॑ता॒ सा च॑कर्थार॒सं वि॒षम्

asurāṇāṃ duhitāsi sā devānāmasi svasā | divaspṛthivyāḥ saṃbhūtā sā cakarthārasaṃ viṣam

हिन्दी अर्थ

का० ६1 अनु° ११। सु° १०७ अथ्ववेद-भाष्य १८७ नादि सम्पत्ति है उस की (रक्ष रक्षा कर। परमेश्वर को नाना शक्तियां है, न्यायानृकूल कर्मफल देने की, तथा धन-अन्न आदिके हो जाने पर मनुष्य परिपालितं होकर प्रायः निज पालक परमेश्वरं को भूल जाते है, उस से पराङ्मुख हो जाते ह। विप्रवजित् के भाधीन ही रखे, उससे विमुख न होने दे।

English

Let Bhaga, Mitra, Aryaman, and both the Asvins make the bond. I bind together all of them, the first, the last, the middlemost.

अध्याय ६

श्लोक 101.1

वाजीकरणम्।१-३ अथर्वाङ्गिराः।ब्रह्मणसपतिः।अनुष्टुप्।आ वृ॑षायस्व श्वसि॒हि वर्ध॑स्व प्र॒थय॑स्व च ।य॒था॒ङ्गं व॑र्धतां॒ शेप॒स्तेन॑ यो॒षित॒मिज्ज॑हि

vājīkaraṇam| 1-3 atharvāṅgirāḥ| brahmaṇasapatiḥ| anuṣṭup| ā vṛṣāyasva śvasihi vardhasva prathayasva ca | yathāṅgaṃ vardhatāṃ śepastena yoṣitamijjahi

हिन्दी अर्थ

शक्ति के प्रति (मा) मस्ते (परिदेहि) प्रदान कर, सुधुदं कद, समपित कर । चलने का अभिलाषो दहै) मन्वमे यहु भी दर्शायाहै कि कल्याण भामं मोर गृहुस्थ-जीवन मे विरोध नहीं । सन्तानो, पशुगों, तथा घन सम्पत की कियादहै, गौर उसकी शक्तियों को त्रायमाण तथा कल्याणी पदों द्वारा प्रति समपित कर दे, गौर कल्याण मार्ग पर चलता हुआ सवेविद् परभे- एवर के प्रति अपने-आप को समर्पित कर दे।

English

Indra hath girded these with cord: bind them together, Agni, thou! Those yonder who approach to fight, with banners raised along their ranks, Indra hath girded these with cord: bind them together, Agni, thou!

अध्याय ६

श्लोक 101.2

येन॑ कृ॒षं वा॒जय॑न्ति॒ येन॑ हि॒न्वन्त्यातु॑रम्।तेना॒स्य ब्र॑ह्मणस्पते॒ धनु॑रि॒वा ता॑नया॒ पसः॑

yena kṛṣaṃ vājayanti yena hinvantyāturam| tenāsya brahmaṇaspate dhanurivā tānayā pasaḥ

हिन्दी अर्थ

उपादेया है, त् (गोभिः अश्वः) गौजों भौर अश्वोंके साथ (भआा गहि) मेघा है धारणाशक्ति । जो गुरमुख से सुना ओर स्वयं पठा उसे यह् सात्विक काल दहै । गृहस्य जीवनके लिये गभो ओर अश्वोकाभो उभा्जन करना आवश्यक है । अथयववेद-भाष्य कां० ६। अनु० ११ सु०श्०्व का०६। भनु ११। सू० १०८ अथववेद-भाष्य १८९

English

The same We bind our foemen with a bond that binds them close and holds them fast.

अध्याय ६

श्लोक 101.3

आहं त॑नोमि ते॒ पसो॒ अधि॒ ज्यामि॑व॒ धन्व॑नि ।क्रम॒स्वर्श॑ इव रो॒हित॒मन॑वग्लायता॒ सदा॑

āhaṃ tanomi te paso adhi jyāmiva dhanvani | kramasvarśa iva rohitamanavaglāyatā sadā

हिन्दी अर्थ

भरता ब्रह्मचारिभिर्देवानाम्से हुवे ॥२॥ ज्ताम् = जवति गतिकर्मा (निघं० २।१४), तथा जूतिः गतिः (याम् मेधाम्) जिस मेधा को (ऋभवः) ऋशरलोग (विदुः) जानते है, (याम् मेधाम्) जिस मेधा को (असुराः) असुर (विदुः) जानते ह मेधा को (मयि) मृन्ञ म (मावेणयामसि) हम प्रविष्ट करते ह

English

Their breath and respiration I dissever, and their lives from life. This bond, made keen by Indra, I have formed with heat of holy zeal. Securely bind our enemies, O Agni, who are standing here.

अध्याय ६

श्लोक 102.1

अभिसांमनस्यम्।१-३ जमदग्निः।अश्विनौ।अनुष्टुप्।यथा॒यं वा॒हो अ॑श्विना स॒मैति॒ सं च॒ वर्त॑ते ।ए॒वा माम॒भि ते॒ मनः॑ स॒मैतु॒ सं च॑ वर्तताम्

abhisāṃmanasyam| 1-3 jamadagniḥ| aśvinau| anuṣṭup| yathāyaṃ vāho aśvinā samaiti saṃ ca vartate | evā māmabhi te manaḥ samaitu saṃ ca vartatām

हिन्दी अर्थ

समूह में बेठ मेधार्थी ह (आवेशयामसि); उन में से प्रत्येक (मयि) मेधागेशन का इच्छक है । ऋभवः --शित्पी लोग, तथा सत्यानुष्ठान को (भूतङ्ृतः) सत्यकर्मो के करने वाले (ऋषयः) ऋषि, तथा (मेधा- विनः) मेधावाले प्रजञानी; (याम् मेधाम्) जिस मेधा को (विदुः) जानते है अथवेवेद-भाष्य कां ६। अनु° ११। सु° १०९. तदेवाग्निस्तदादित्यः” (यजु०।३२१)।

English

Indra and Agni bind them fast, Soma the King, and both the Friends!

अध्याय ६

श्लोक 102.2

आहं खि॑दामि ते॒ मनो॑ राजा॒श्वः पृ॒ष्ट्यामि॑व ।रे॒ष्मच्छि॑न्नं॒ यथा॒ तृणं॒ मयि॑ ते वेष्टतां॒ मनः॑

āhaṃ khidāmi te mano rājāśvaḥ pṛṣṭyāmiva | reṣmacchinnaṃ yathā tṛṇaṃ mayi te veṣṭatāṃ manaḥ

हिन्दी अर्थ

(मेधाम्) मेधा को (सायम्) सायंकाल मे, (मेधाम्) मेधा को (प्रात) आस-पास, (मेधाम्) मेषा को (सुयंस्य) (आवेशयामहे ) !हम चित्त मे आविष्ट करते ह, स्थापित करते है । तां देवाः सम॑करयन्नियं जीवितया अलप ॥१॥

English

May Indra, girt by Maruts, make a bond to bind our enemies. A charm to cure cough 92

अध्याय ६

श्लोक 102.3

आञ्ज॑नस्य म॒दुघ॑स्य॒ कुष्ठ॑स्य॒ नल॑दस्य च ।तु॒रो भग॑स्य॒ हस्ता॑भ्यामनु॒रोध॑न॒मुद् भ॑रे

āñjanasya madughasya kuṣṭhasya naladasya ca | turo bhagasya hastābhyāmanurodhanamud bhare

हिन्दी अर्थ

के विक्षेप अर्थात् हिलते-जुलते रहने की, (उत) तथा (अतिविद्धभेषजी ) वाण आदि द्वारा गहरा वेध हो जाने की.मौषध है । (देवाः) दिष्यगुणी (हयम्) यहं (जी वितवे) जीने के लिये (अलम्) पर्याप्त है। जीवितवे = तुमर्थे “तवे” प्रत्ययः । जीवित रखने के लिये । सम् अक- कां० ६1 अनु ११। सू० ११० अथवेवेद-भाष्य १६१ वह (पूरुषः) पुरुष (न रिष्याति) न हसित हो !

English

Rapidly as the fancy flies forth with conceptions of the mind. So following the fancy’s flight, O Cough, flee rapidly away.

अध्याय ६

श्लोक 103.1

शत्रुनाशनम्।१-३ उच्छोचनः।इन्द्राग्नी, १ बृहस्पतिः, सविता, मित्रोः, अर्यमा, भगः,अश्विनौ, २-३ इन्द्रः, अग्निः।अनुष्टुप्।सं॒दानं॑ वो॒ बृह॒स्पतिः॑ सं॒दानं॑ सवि॒ता क॑रत्।सं॒दानं॑ मि॒त्रो अ॑र्य॒मा सं॒दानं॒ भगो॑ अ॒श्विना॑

śatrunāśanam| 1-3 ucchocanaḥ|indrāgnī, 1 bṛhaspatiḥ, savitā, mitroḥ, aryamā, bhagaḥ,aśvinau, 2-3 indraḥ, agniḥ| anuṣṭup| saṃdānaṃ vo bṛhaspatiḥ saṃdānaṃ savitā karat| saṃdānaṃ mitro aryamā saṃdānaṃ bhago aśvinā

हिन्दी अर्थ

पिप्पल्यः = बहुवचन द्वारा पिप्यली के नाना भेद सूचित कयि है। आयतीः “जनन स्थान से आती हृद" द्वारा पिप्पलियों के ताजापन को सूचित किया है । पुरानी पिप्पली की अपेक्षया ताजी पिप्पली गुणाधिकं है ! हसित होना = विनष्ट होना, मरना । क्षवपन्) उत्तम बीज को उत्तम विधसेबोया। मन्व भे पिप्पली के षिकमं फा वर्णेन है । बलवान् मजदूर तो भूमि को घोदते ह, ओर मूमिस्वामी बीज बोते ह । उदवपन् = उद् + डवपु बीज-

English

Rapidly as an arrow flies away with keenly-sharpened point, So swiftly flee away, O Cough, over the region of the earth! Rapidly as the beams of light, the rays of Sūrya, fly away,

अध्याय ६

श्लोक 103.2

सं प॑र॒मान्त्सम॑व॒मानथो॒ सं द्या॑मि मध्य॒मान्।इन्द्र॒स्तान् पर्य॑हा॒र्दाम्ना॒ तान॑ग्ने॒ सं द्या॒ त्वम्

saṃ paramāntsamavamānatho saṃ dyāmi madhyamān| indrastān paryahārdāmnā tānagne saṃ dyā tvam

हिन्दी अर्थ

(हि) निश्चय से अग्निः, परमेश्वर (अध्वरेषु) हिसारहित आं- चै विद्यमान है ( (सनात् ज) शौर सनातन काल का (नव्यः च) तथा भभिचवकाल का (होता) दाता है। (सत्सि) तू हमारे हृदयो में स्थित ११२ अथवैवेद-भाष्य का० ६। भनु ११। सू०११० उ इति" (निरुक्त १।३।६) । अथवा “कम्” सुखस्वरूप परमेश्वर “डच”

English

So, Cough! fly rapidly away over the current of the sea! A charm to protect a house from fire

अध्याय ६

श्लोक 103.3

अ॒मी ये युध॑मा॒यन्ति॑ के॒तून् कृ॒त्वानी॑क॒शः ।इन्द्र॒स्तान् पर्य॑हा॒र्दाम्न॒ तान॑ग्ने॒ सं द्या॒ त्वम्

amī ye yudhamāyanti ketūn kṛtvānīkaśaḥ | indrastān paryahārdāmna tānagne saṃ dyā tvam

हिन्दी अर्थ

यज देवपूजासंगतिकरणदानेषु (भ्वादिः) । (मूल 'हंणात्) मूल पुरूष कौ हिप्ता से (परि पाहि) है परमेश्वर ! मन्त किजेठका हनन क्रिादहै। उतने पृत्र पदा हुभा है1 उसकी सुरक्षा ““ज्येष्ठा-नक्षत्र' किया जा सके

English

Let flowery Dūrvā grass grow up about thine exit and approach. There let a spring of water rise, or lake with blooming lotuses. This is the place where waters meet, here is the gathering of the flood.

अध्याय ६

श्लोक 104.1

शत्रुनाशनम्।१-३ प्रशोचनः।इन्द्राग्नी, ३ इन्द्रानी, सोम इन्द्रश्च।अनुष्टुप्।आ॒दाने॑न सं॒दाने॑ना॒मित्रा॒ना द्या॑मसि ।अ॒पा॒ना ये चै॑षां प्रा॒णा असु॒नासू॒न्त्सम॑च्छिदन्

śatrunāśanam| 1-3 praśocanaḥ| indrāgnī, 3 indrānī, soma indraśca| anuṣṭup| ādānena saṃdānenāmitrānā dyāmasi | apānā ye caiṣāṃ prāṇā asunāsūntsamacchidan

हिन्दी अर्थ

हुमा वह (जायमानः) पदा होता हुआ (सुवीरः) उत्तम-वीर होता है। (सः) वह (मा वधोत्) न वध करे (पितरम्) पिता का (वधंमानः) आयु (मन्त्र २), जिससेकिवीरया सुवीर पेदा हुञा है । सम्भवतः निज जः दात्री माताका बदलालेने की दुष्टिसे वीरपृत्रउस के वध कैलिषए तय्यार हौ जाय, अतः उसे कहा कि जन्मदात्रोमाता को तू हिसा कर, ओर न पितृ समान सम्बन्धा किपौ पिताका ही वध कर। नक्षत्रजा; 86727, जायमानः सुवीरः =अक्षतवीयं पिता से उत्न्न होता हआ ही वह् सुवोर रूपमे पदा होता है, वधमान होता हु वहु निज सुवोरताको मन्त २, ३ के प्रसिद्धार्था मेः- (२) विचृतौ येदोतारे हँ (काण्ड २।८।१; ३।७।४; ६।१२१।३) । इनं को व्याष्याएुं भी यंयास्थानकरदी जार्यगी। ये दोतारे दुरविक

English

Our home is set amid the lake: turn thou thy jaws away from it. O House, we compass thee about with coolness to envelop thee.

अध्याय ६

श्लोक 104.2

इ॒दमा॒दान॑मकरं॒ तप॒सेन्द्रे॑ण॒ संशि॑तम्।अ॒मित्रा॒ येऽत्र॑ नः॒ सन्ति॒ तान॑ग्न॒ आ द्या॒ त्वम्

idamādānamakaraṃ tapasendreṇa saṃśitam| amitrā ye'tra naḥ santi tānagna ā dyā tvam

हिन्दी अर्थ

मे स्थित है । काण्ड ६।२ मे “विचृतोः" का, ओौर “विचृतौ दौ ताराय का परस्पर अथेमे मेददहै। १. जथववेद मे २८ नक्षत्र माने ह ! तथा “अष्टाविशानि शिवानि णासासिः १६४ मथवेवेद-भाष्य का० ६। अनु° ११। सु° १११ इमं म अग्ने पुरुषं मुमुगध्ययं यो बद्र सुस॑तो लालपीति 1

English

Cool as a lake be thou to us. Let Agni bring us healing balm! A charm to protect men and cattle Entrust me, Visvajit, to Trāyamānā.

अध्याय ६

श्लोक 104.3

ऐना॑न् द्यतामिन्द्रा॒ग्नी सोमो॑ राजा॑ च मे॒दिनौ॑ ।इन्द्रो॑ म॒रुत्वा॑ना॒दान॑म॒मित्रे॑भ्यः कृणोतु नः

ainān dyatāmindrāgnī somo rājā ca medinau | indro marutvānādānamamitrebhyaḥ kṛṇotu naḥ

हिन्दी अर्थ

जकंड़ा हुञा (लालपीति) प्रलाप करता रहता है । (अतः अधि) अब से (ते) तेरे लिये है अग्नि! (भागधेयम्) भाग (कृणवत्) दिया करेगा, (यदा) जबकि (अनुन्मदितः) यहं उन्माद से रहित (असति) हो अग्नि! यहुतेरे लिये हविर्भाग देने मे असमर्थं ह। उम्मादसे रहितो कर पट् उन ओषधों से भाहूतियां तेरे प्रति नियमतः दिया करेगा जिससे उन्माद फा पुनः आक्रमणन हो सके। बौषधों कौ आहूतियों से उत्थित धूम फफडो मेँ जाकर रक्त मे मिल जाता है, जिससे उन्माद आदि रोग ओौषध (कृणोमि) तय्यार करता हू, (यथा) जिस प्रकार कि (अनुन्म- दितः) उन्मादसे रहित (अससि) तूहो जाय ।

English

Guard, Trāyamānā, all our men, guard all our wealth of quadrupeds. To Visvajit entrust me, Trāyamānā.

अध्याय ६

श्लोक 105.1

कासशमनम्।१-३ उन्मोचनः।कासा।अनुष्टुप्।यथा॒ मनो॑ मनस्के॒तः॑ प॑रा॒पत॑त्याशु॒मत्।ए॒वा त्वं कासे॒ प्र प॑त॒ मन॒सोऽनु॑ प्रवा॒य्यऽम्

kāsaśamanam| 1-3 unmocanaḥ| kāsā| anuṣṭup| yathā mano manasketaḥ parāpatatyāśumat| evā tvaṃ kāse pra pata manaso'nu pravāyya'm

हिन्दी अर्थ

सहायता दारा भौष्घ तय्यार करनी है। वह है अग्नि मे मौषधकी आहृतियों से उत्थित धूम रूप ओौषघ । इस धूम को नासिका के एवासां दारा गृहीत करनादहै। इस से धूम विशुद्धरूप में गौर शीघ्र रक्तमे मिल कर उन्माद को शौघ्र निवृत्तकर देता है । का०६। अनु० ११। सु० १११ अथर्ववेद-भाष्य १६९५ देवेन पादन्म॑दितमुन्म॑सं रक्ष॑सस्परिं । -=यथा) जिस प्रकार (अनुन्मदितः) उन्माद रहित (असति) वहु हो

English

O Visvajit, guard all our men, etc. To Visvajit entrust me, O Kalyāni. Guard, O Kalyāni, all our men, etc. p. a250

अध्याय ६

श्लोक 105.2

यथा॒ बाणः॒ सुसं॑शितः परा॒पत॑त्याशु॒मत्।ए॒वा त्वं कासे॒ प्र प॑त पृथि॒व्या अनु॑ सं॒वत॑म्

yathā bāṇaḥ susaṃśitaḥ parāpatatyāśumat| evā tvaṃ kāse pra pata pṛthivyā anu saṃvatam

हिन्दी अर्थ

मनुष्य को सुपथ पर चलाता है, इस प्रकार वह् रक्षा करता है । देवाः) सब देवों ने (पुनः) फिर (त्वा) तुक्षे (दुः) मेरे प्रति दिया, से रहित होने का कथन हुभा दहै । अप्सरसः = “अग्निः गन्धः, ओषधयः काल, यह प्रभात कालदहै। इस कालमें श्रमण करनेसे भी उन्मादसे १९६ लथवेवेद-भाष्य कैं० ६! अनु० ११। सु० १ १२

English

To Sarvavid entrust me, O Kalyāni. O Sarvavid, guard all our men, guard all our wealth of quadrupeds.

अध्याय ६

श्लोक 105.3

यथा॒ सूर्य॑स्य र॒श्मयः॑ परा॒पत॑न्त्याशु॒मत्।ए॒वा त्वं कासे॒ प्र प॑त समु॒द्रस्यानु॑ विक्ष॒रम्

yathā sūryasya raśmayaḥ parāpatantyāśumat| evā tvaṃ kāse pra pata samudrasyānu vikṣaram

हिन्दी अर्थ

हो कर पाप प्रवत्तिसे प्रमुक्त कर देते हैँ (अथवेऽ ४।२४३-४८)। उन्माद पापः काही तो परिणाम है (मन्बर ३) “सप्त आपः” के लिये वधन करे, अतः (मूलव्हुणात्) वंश परम्पराके मूलभूत भाई को हिसा को जानता हृतु है प्रधानमन्तिन् दस प्रकारकरकि (सः) वहतू

English

A prayer for wisdom Intelligence, come first to us with store of horses and of kine! Thou with the rays of Sūrya art our worshipful and holy one.

अध्याय ६

श्लोक 106.1

दूर्वाशाला १-३ प्रमोचनः।दूर्वाशाला।अनुष्टुप्।आय॑ने ते प॒राय॑णे दूर्वा॑ रोहतु पु॒ष्पिणीः॑ ।उत्सो॑ वा॒ तत्र॒ जाय॑तां ह्रदो वा॑ पु॒ण्डरी॑कवान्

dūrvāśālā 1-3 pramocanaḥ| dūrvāśālā| anuṣṭup| āyane te parāyaṇe dūrvā rohatu puṣpiṇīḥ | utso vā tatra jāyatāṃ hrado vā puṇḍarīkavān

हिन्दी अर्थ

विशेपतया ग्रथित कर, संगठित कर, (तुभ्यम्) इस कायं में तु्षे (विष देवाः) सव दिव्य अधिकारी (अनुजानन्तु) अनुज्ञा दे, स्वीकृति दे । आज्ञा ह्वारा छोटे भाईको पाशो मे वान्ध दिया द। माता-पिता के स्वगे- वासो जाने पर गृह प्रबन्ध ज्येष्ठ भाईके अधिकारमेंहोताहै, इसे सहन न कर छोटा भाई उस कौहत्या करना चाहता है, इस लिये उसे पाशोंभें वाध दिया है । परिपाहि = सुरक्षित करने का भभिप्रायहैकि इसे वन्दोगृह मे सुरक्षित कर, ताकि छोटा भाई यह दृष्कमं न कर सके । का०६। अनु° ११। सू० ११२ मथवेषेद-माष्य १६७ वहतु (ग्राह्याः पाशान्) जक्रडन के फदोँ को (विचृतत) काट दे, (पिता- + चती हिसायाम्, हिसा है पाशो को काट देना ।

English

The first, devout Intelligence, lauded by sages, sped by prayer, Drunk by Brahmachāris, for the favour of the Gods I call.

अध्याय ६

श्लोक 106.2

अ॒पामि॒दं न्यय॑नं समु॒द्रस्य॑ नि॒वेश॑नम्।मध्ये॑ ह्र॒दस्य॑ नो गृ॒हाः प॑रा॒चीना॒ मुखा॑ कृधि

apāmidaṃ nyayanaṃ samudrasya niveśanam| madhye hradasya no gṛhāḥ parācīnā mukhā kṛdhi

हिन्दी अर्थ

(परिवित्तः) परिवेदना वाला (येभिः पाशैः) जिन पाश द्वारा हो जांय, (विमुचः हि सन्ति) क्योंकि तु विमूक्त करदे बाले राजनियम दण्डनीया है । भ्रण ध्र. +ऊन -भरण-पोषणमेंजो अभी न्यूनहै एसा गर्भस्थ शिशु । छोटा भाई वन्धा हना था सम्भावनीय बधक के रूपमें। उसे निरपराधौ जानकर विमृक्तकरदियाहै। १९८ मथवववेद-भाष्य कां० ६। अनु० ११) सू० ११३

English

That excellent Intelligence which Ribhus know, and Asuras, Intelligence which sages know, we cause to enter into me. Do thou, O Agni, make me wise this day with that Intelligence.

अध्याय ६

श्लोक 106.3

हि॒मस्य॑ त्वा ज॒रायु॑णा॒ शाले॒ परि॑ व्ययामसि ।शी॒तह्र॑दा॒ हि नो॒ भुवो॒ऽग्निष्कृ॑णोतु भेष॒जम्

himasya tvā jarāyuṇā śāle pari vyayāmasi | śītahradā hi no bhuvo'gniṣkṛṇotu bheṣajam

हिन्दी अर्थ

तरि देवा अपृनतैतदेन॑स्तित एनन्मनुष्येषु मृजे । (ममृजे) श्षाड कर अपने को विशुद्ध कर लिया । (ततः) उन मनुष्यों मँ से (यदि) यदि (ग्राहिः) पापको जकड़न ने (त्वा) तुक्ञे(भा नशे) भावषेरा नष्ट फर दिया, ओौर कहा कि पाप प्रकृति तत्त्व का परिणाम है। जीवात्मा तो विशुद्ध है, उस के साथ जब प्रकृति-तत्व का ने, पाप करने मे अपराधो मनुष्यों फो माना । प्रकृतितत्त्व तो जड है । जब चेतन का सम्पकं जड प्रकृति-तत््व के साथ होता है तबहोपापहो सकता है । इस प्रकार पाप करने वले मनुष्यो के साथजब संसार में नवागत मनुष्य का सम्पकं होता है तब उसे भी पापग्राही आ घेरती है । कां ६। जमु० ११ सु° ११३ अथववेद-भाष्य १६६

English

Which the creative ishis, which the men endowed with wisdom knew. Intelligence at eve, at morn, Intelligence at noon of day,

अध्याय ६

श्लोक 107.1

विश्वजित्।१-४ शन्तातिः।विश्वजित्।अनुष्टुप्।विश्व॑जित् त्रायमा॒णायै॑ मा॒ परि॑ देहि ।त्राय॑माणे द्वि॒पाच्च॒ सर्वं॑ नो॒ रक्ष॒ चतु॑ष्पा॒द् यच्च॑ नः॒ स्वम्

viśvajit| 1-4 śantātiḥ| viśvajit| anuṣṭup| viśvajit trāyamāṇāyai mā pari dehi | trāyamāṇe dvipācca sarvaṃ no rakṣa catuṣpād yacca naḥ svam

हिन्दी अर्थ

(उत वा) अथवा (नीहारान्) नोहार्यो कोजा। (नदीनाम्) नदियोंके (पूषन्) है पुष्टिदाजक परमेश्वर ! (दुरितानि) सब के दुष्फल पापों हनन करने वाली स्वी में (मृक्ष्व धो उल । इस द्वारा “धरण हूनन” को महापाप सूचित कियादहै। ( बनाएं हैँ । यथा नीहारधूमार्कानलानिलानां खद्योतविदुत्स्फटिकश-

English

With the Sun’s beams, and by our speech we plant in us Intelligence. A charm to heal punctured wounds

अध्याय ६

श्लोक 107.2

त्राय॑माणे विश्व॒जिते॑ मा॒ परि॑ देहि ।विश्व॑जिद् द्वि॒पाच्च॒ सर्वं॑ नो॒ रक्ष॒ चतु॑ष्पाद् यच्च॑ नः॒ स्वम्

trāyamāṇe viśvajite mā pari dehi | viśvajid dvipācca sarvaṃ no rakṣa catuṣpād yacca naḥ svam

हिन्दी अर्थ

“भरोघीः, धूम, नीहार घटनाएं समान हैँ । मन्वरगत मरीचो जौर उप- जाते हँ यह् वस्तुतः सत्य है । परन्तु कामनावश गभपात करना एसा पापहैजौ कि वेदिक दुष्टि में विनष्ट नहीं होता । इस दुरित को तो गभे- षातिनी को भुगतना ही पड़ता है ! फेनान् = फेनवत् अल्पकालावस्यायी । किये गए पापकम, भौर पापकर्मजन्य रोग--इन सब की निवृत्ति के धराृतिक उपायो का भी निर्देश क्ियाहै। "मरीचीः" द्वारा सूयैररिमि १. उदाराम् == उदारचेतस् मष्टात्माभों के पासतू जा, पाप विनाश के लिये । २०० अथरववेद-भाष्य कां०६। अनु° ११। सू० ११४ सेवन का, मौर "नीहार" द्वारा जल कौ सूचित कर जलविक्रित्सा का

English

The Berry heals the missile’s rent, it heals the deeply-piercing wound. The Gods prepared and fashioned it. This hath sufficient power for life.

अध्याय ६

श्लोक 107.3

विश्व॑जित् कल्या॒ण्यैऽ मा॒ परि॑ देहि ।कल्या॑णि द्वि॒पाच्च॒ सर्वं॑ नो॒ रक्ष॒ चतु॑ष्पाद् यच्च॑ नः॒ स्वम्

viśvajit kalyāṇyai' mā pari dehi | kalyāṇi dvipācca sarvaṃ no rakṣa catuṣpād yacca naḥ svam

हिन्दी अर्थ

अद का जकडन को सूचित कर “गद्या राका निद क्रिया है। ट्स नो निवृत्तिके उपाय भी मरीचौःआदिहीषहं) इत उपाया के साथ उदारचेतप् वैद्यो का परामशं भी आवश्यक है ) ग्राहिः, आनशे) यदि पाप को जकडन प्राप्त है, तो (ते) तेरो (ताम्) वेदोपदेश द्वारा (नाशयन्तु) विनष्ट कर । नक्षत्र भौर ताराओं तथा आकाश गङ्गा आदि सूपो फला हजा है । तरितः चि+-तन् (विस्तारे) +डः (अओौणादिक्ः), डित् होने से टिका

English

When from their origin they came, the Berries spake among themselves: The man whom we shall find alive shall never suffer injury. p. a251 Asuras buried thee in earth: the Gods again uplifted thee.

अध्याय ६

श्लोक 107.4

कल्या॑णि सर्व॒विदे॑ मा॒ परि॑ देहि ।सर्व॑विद् द्वि॒पाच्च॒ सर्वं॑ नो॒ रक्ष॒ चतु॑ष्पाद् यच्च॑ नः॒ स्वम्

kalyāṇi sarvavide mā pari dehi | sarvavid dvipācca sarvaṃ no rakṣa catuṣpād yacca naḥ svam

हिन्दी अर्थ

यवु हैवा देवहेडनं देषांसश्चकमा वयम् । (देवाः) है विद्वानों (देवासः वयम्) हम विद्वानों ने (यत्) जो याहुम करते ¢ (आदित्याः) है आदित्य कोटि के विद्रानो (गयम्) तुम (नः) हमे (तस्मात्) उस अनादरकमं से (ऋतस्य ऋतेन ) सत्य देवाः = विद्रंसः । हेडनम् = अनादर; हेद् अनादरे (स्वादिः) । , यज्ञो करने से जहूएं स्निग्ध हो गई हँ । माता, पिता, आचायं तथा महा-

English

Healer of sickness caused by wounds and healer of the missile’s rent. 93

अध्याय ६

श्लोक 108.1

मेधावर्धनम्।१-५ शौनकः।मेधा, ४ अग्निः।अनुष्टुप्, २ उरोबृहती, ३ पथ्यबृहती।त्वं नो॑ मेधे प्रथ॒मा गोभि॒रश्वे॑भि॒रा ग॑हि ।त्वं सूर्य॑स्य र॒श्मिभि॒स्त्वं नो॑ असि य॒ज्ञिया॑

medhāvardhanam| 1-5 śaunakaḥ| medhā, 4 agniḥ| anuṣṭup, 2 urobṛhatī, 3 pathyabṛhatī| tvaṃ no medhe prathamā gobhiraśvebhirā gahi | tvaṃ sūryasya raśmibhistvaṃ no asi yajñiyā

हिन्दी अर्थ

२०१ अथधर्वेवेद-माष्य॒का० ६। अनु० १२ । सु° १ १५ हम (न उपशेकिम) उसे कर सकने में समर्थं नही हा सके । कामा विश्वे वो हैवाः शिक्षन्तो नोपं शेकिम ।३॥ ‡ देते हुए, जो (कामाः) निष्काम हो कर,(विश्वे देवाः")है सब देवो ! (बः)

English

A benediction on a new-born child Yea, ancient, meet for praise at sacrifices, ever and now thou sittest down as Hotar. And now, O Agni, make thy person friendly, and win felicity for us by worship.

अध्याय ६

श्लोक 108.2

मे॒धाम॒हं प्र॑थ॒मां ब्रह्म॑ण्वतीं॒ ब्रह्म॑जूता॒मृषि॑ष्टुताम्।प्रपी॑तां ब्रह्मचा॒रिभि॑र्दे॒वाना॒मव॑से हुवे

medhāmahaṃ prathamāṃ brahmaṇvatīṃ brahmajūtāmṛṣiṣṭutām| prapītāṃ brahmacāribhirdevānāmavase huve

हिन्दी अर्थ

उपेकिम) हम निष्काम यज्ञानुष्ठान करने में शक्त नदी हुए उस.पाप से फिर भी यज्ञानुष्ठान हुम सकामदहोकरदही करते हैँ । इन माता आदि के 1 सदुपदेशों का भग करना पापदहै । इस पापसे हम दुटकारा चाहते. । (यद्) जिस पाप को (विद्वांसः) जानते हृए, (यद्) जिस पाप क (अविद्वांसः) न जानते हृए, (वयम्) हम ने (चकृम) क्या है, । एनांसि) ।

English

Neath Jyaishthaghni and Yama’s Two Releasers this child was born: preserve him from uprooting.

अध्याय ६

श्लोक 108.3

यां मे॒धामृ॒भवो॑ वि॒दुर्यां मे॒धामसु॑रा वि॒दुः ।ऋष॑यो भ॒द्रां मे॒धां यां वि॒दुस्तां मय्या वे॑शयामसि

yāṃ medhāmṛbhavo viduryāṃ medhāmasurā viduḥ | ṛṣayo bhadrāṃ medhāṃ yāṃ vidustāṃ mayyā veśayāmasi

हिन्दी अर्थ

उन सब पापो को (विशवे देवाः) है सब देवों ! (सजोषसः) हमारे साय ह १, विण्वेष्ैवाः मातृदेव, पितृदेव, मायं देव, मतियिदेव, भादित्यदेव धादि 1 का०,६.॥ अनु १२। ० ११५ बयर्ववेद-पाष्य २०३ भोति करने वाले (यूयम्) वम, (नः) हभ (तस्मात्) उस पपिसे

English

He shall conduct him safe past all misfortunes to lengthened life that lasts a hundred autumns. Born on the Tiger’s day was he, a hero, the Constellations’ child, born brave and manly. Let him not wound, when grown in strength, his father, nor disregard his mother, her who

अध्याय ६

श्लोक 108.4

यामृष॑यो भूत॒कृतो॑ मे॒धां मे॑धा॒विनो॑ वि॒दुः ।तया॒ माम॒द्य मे॒धयाग्ने॑ मेधा॒विनं॑ कृणु

yāmṛṣayo bhūtakṛto medhāṃ medhāvino viduḥ | tayā māmadya medhayāgne medhāvinaṃ kṛṇu

हिन्दी अर्थ

सदुपदेशो द्वारा भविष्य में एसे पापों के करने से बचाभो । वस्थामे (एनस्यः) पापी र्भैने (एनः) पाप (खकरम्) कियाहै, तो (यूयम्) तुम है विष्वे देवो ! (मा) मृ्ञे (तस्मात्) उस पापसे (च) भौर दव) जैसे क्रि काष्टनि्मित पादबन्धनसे पाद मृक्त हौ जातादहै। यदि =“एनस्थ को स्मरण नहींफि उस्र तेजागतेया सोते कोर पाप किया है, परन्तु फिर भो कोई पाप अनजनेहो गयाहोगया भविष्य मेहोजाय,तोरएेत्ते पापसरेभो मून्े वचाभो । दुपदात् -पापकेकारण शासक वगं से यदिमेरे पादे पादबन्धन लगगयादहौ तो दण्डावधि स्नान करके (इव) जैसे (स्विन्नः) पसीने से पसीजा हुभा, तया ( पवित्रेण) कर शोभायमान करदो, या शुद्ध कर दो।

English

bare him. A charm for insanity

अध्याय ६

श्लोक 108.5

मे॒धां सा॒यं मे॒धां प्रा॒तर्मे॒धां म॒ध्यन्दि॑नं॒ परि॑ ।मे॒धां सूर्य॑स्य र॒श्मिभि॒र्वच॒सा वे॑शयामहे

medhāṃ sāyaṃ medhāṃ prātarmedhāṃ madhyandinaṃ pari | medhāṃ sūryasya raśmibhirvacasā veśayāmahe

हिन्दी अर्थ

२०४ अयववेदन्भाष्य॒कां० ६। अनु० १२। सु° ११६ (१-३) । जाटिकायनः । वेवस्वतः। लगती; २ वरिष्ट्म् । (जुहोमि) मै आहुति पूवक समपित करता हू, (अथ) तदनन्तर (यज्ञियम्) दवारा भूमि का विदारण । कार्षीवणाः “कृषि वनन्ति सम्भजन्ते" इति

English

Unbind and loose for me this man, O Agni, who bound and well restrained is chattering folly. p. a252 Afterward he will offer thee thy portion when he hath been delivered from his madness.

अध्याय ६

श्लोक 109.1

पिप्पली-भैषज्यम्।१-३ अथर्वा।पिप्पली-भैषज्यं, आयुः।अनुष्टुप्।पि॒प्प॒ली क्षि॑प्तभेष॒ज्यू॒३ताति॑विद्धभेष॒जी।तां दे॒वाः सम॑कल्पयन्नि॒यं जीवि॑त॒वा अल॑म्

pippalī-bhaiṣajyam| 1-3 atharvā| pippalī-bhaiṣajyaṃ, āyuḥ| anuṣṭup| pippalī kṣiptabheṣajyū3tātividdhabheṣajī| tāṃ devāḥ samakalpayanniyaṃ jīvitavā alam

हिन्दी अर्थ

तम कृषक यम सम्बन्धी दण्डसे मक्त हो जातेदह। भूमि काविदारण करते सभय भूमिष्ठ कीटो का हनन होता है, हनन पाप कमं है, अतः वरण्ड, नीय है । परमेश्वर “महायमः है (मयववं० १३।४।५ ) । वैवस्वतः करवद् भागयेयं मघुंमागो मदना से खनामि । पत्) हमे प्रदान किया है, यह॒ भाग (मधुभागः) मधुर भाग हो णया है परमेश्वर (मधुना) इस मधुर अन्न भाय के साय (सं मुजाति) हमारा संसगं करता रहे । (मातुः) माता से (इषितम्) प्रेषित हमा (यत्) जो (एनः) पाप (नः) हमे (मागन्) प्राप्त हमा है (वा) या (यत्) जो ¦ पाप (अपराद्धः) अपराधौ (पिता) पिता ने (जिहीडे) कोधपू्वक प्रेषित कां० ६) शनु० १९ सू० ११६ अथववेद-भाष्य २०५ मातासेप्राप्बहो था पिता से,-है पापयुक्त । उस अन्न को, व ल परवशियों ने ग्रहण करना स्वो कृत नहीं किया तव पिता करद ४ ४५ पिता अपराद्धी है, क्योंकि पिनाने परमेश्वर के प्रति समवित किय वना अन्न का मोग किया है । यही अभिप्राय मन्त्र (३) काभी है) जिहीडे

English

Let Agni gently soothe thy mind when fierce excitement troubles it. Well-skilled I make a medicine that thou no larger mayst be mad.

अध्याय ६

श्लोक 109.2

पि॒प्प॒ल्यः॑१ सम॑वदन्ताय॒तीर्जन॑ना॒दधि॑ ।यं जी॒वम॒श्नवा॑महै॒ न स रि॑ष्याति॒ पूरु॑षः

pippalyaḥ1 samavadantāyatīrjananādadhi | yaṃ jīvamaśnavāmahai na sa riṣyāti pūruṣaḥ

हिन्दी अर्थ

अभिप्राय है "पापयुक्त अन्न" आयादहै। पापपद का प्रयोग पापी ककः याऽमुया"” (अथवें० २०।७४।५) मे “पापिन स्त्री” को “पापा कहा ॥ “पापा द्वारा “रजस्वला पनी” का कथन हुमा है । अयत् पाप है रजस्, दुद्रारा पापा है रजस्वला पत्नी । (यदि) यदि (दम्) यह (एनः) पापयुक्त भस्न (चेतसः) ८. (मातुः) माता से, (यदिवा) मथवा (पितुः ) पिता से, (परि भादः)

English

Insane through sin against the Gods, or maddened by a demon’s power— Well-skilled I make a medicine to free thee from insanity. May the Apsarases release, Indra and Bhaga let thee go.

अध्याय ६

श्लोक 109.3

असु॑रास्त्वा॒ न्यऽखनन् दे॒वास्त्वोद॑वप॒न् पुनः॑ ।वा॒तीकृ॑तस्य भेष॒जीमथो॑ क्षि॒प्तस्य॑ भेष॒जीम्

asurāstvā nya'khanan devāstvodavapan punaḥ | vātīkṛtasya bheṣajīmatho kṣiptasya bheṣajīm

हिन्दी अर्थ

हृ है, (यावस्तः) जितने भी (पितरः') रक्षक अर्थात हमारे पा हो, अर्थात् हमारे लिये दुःखदायकन हो । १. यह कथन स्वमावसिद्है। वे हमारे पितर, रक्षक रहै, अतः उनका २०६ मथवेवेद-भाष्य का० ६। षमु० १२।.सू० ११४. चेतस! का सम्बन्ध माता, पिता, भाई, पत्र, इन सव के साथरहै, ने जानते हए भौ समपण नहीं किया । अतः इन द्वारा प्राप्त अन्न एनः है, पापयुक्त है । एसा अनरे न ग्रहण करने पर्, अन्नके लिए परवशो हम, इन सव के मन्युके पात्र बने है । शिवम् सुश्षनाम (निषं० ३।६) ।

English

May all the Gods deliver thee that thou no longer mayst be mad. A health-charm for man, woman, and son

अध्याय ६

श्लोक 110.1

दीर्घायुः प्राप्तिः।१-३ अथर्वा।अग्निः।त्रिष्टुप्, १ पङ्क्तिः।प्र॒त्नो हि कमीड्यो॑ अध्व॒रेषु॑ स॒नाच्च॒ होता॒ नव्य॑श्च सत्सि ।स्वां चा॑ग्ने त॒न्वं पि॒प्राय॑स्वा॒स्मभ्यं॑ च॒ सौभ॑ग॒मा य॑जस्व

dīrghāyuḥ prāptiḥ| 1-3 atharvā| agniḥ| triṣṭup, 1 paṅktiḥ| pratno hi kamīḍyo adhvareṣu sanācca hotā navyaśca satsi | svāṃ cāgne tanvaṃ piprāyasvāsmabhyaṃ ca saubhagamā yajasva

हिन्दी अर्थ

(१-३) कोशिकः (अनृणकामः) अग्निः । च्रिष्टुम् । नहीं दिया एसे ऋण वाला (यदस्मि) जो महं, (येन बलिना) भौर जिस बलवान् ऋण के कारण (यमस्य) यमके वशमें हमा (चरामि) र्म (अनृणः भवामि) ऋण रदित र्म होता हं ऋण प्रदान करता हूं, ह दा + क्तः । धातोः तकारादेशः (अच उपसर्गात्तः, अष्टा० ७।४।४७); उप-

English

Let not this one, O Agni, wound the highest of these: preserve thou him from utter ruin. Knowing the way do thou untie the nooses of the she-fiend: let all the Gods approve thee. Rend thou the; bonds of these asunder, Agni! the, threefold noose whereby the three were

अध्याय ६

श्लोक 110.2

ज्ये॒ष्ठ॒घ्न्यं जा॒तो वि॒चृतो॑र्य॒मस्य॑ मूल॒बर्ह॑णा॒त् परि॑ पाह्येनम्।अत्ये॑नं नेषद् दुरि॒तानि॒ विश्वा॑ दीर्घायु॒त्वाय॑ श॒तशा॑रदाय

jyeṣṭhaghnyaṃ jāto vicṛtoryamasya mūlabarhaṇāt pari pāhyenam| atyenaṃ neṣad duritāni viśvā dīrghāyutvāya śataśāradāya

हिन्दी अर्थ

हसे वापिस न करने पर मुकदमें हो जाते, गौर् उत्तमणं द्वारा लडाई तथा मारपीट दहो जाती है । (षह एव) यहां हो (सन्तः) वियमान रहते (एनत्) इस च्छण को जीवित ऋण दःताओों के लिए (एनत्) हस ऋण को (निहरामः) नियम का० ६। अनु० १२। सू० ११८. कभनविष्ष्मा पूर्वक अपात करके (अहम्) ममे (यत्) जो धान्य (जघस) खाया है

English

fastened. Knowing the way untie the she-fiend’s nooses: free all, the son, the father, and the mother.

अध्याय ६

श्लोक 110.3

व्या॒घ्रेऽह्न्य॑जनिष्ट वी॒रो न॑क्षत्र॒जा जाय॑मानः सु॒वीरः॑ ।स मा व॑धीत् पि॒तरं॒ वर्ध॑मानो॒ मा मा॒तरं॒ प्र मि॑नी॒ज्जनि॑त्रीम्

vyāghre'hnyajaniṣṭa vīro nakṣatrajā jāyamānaḥ suvīraḥ | sa mā vadhīt pitaraṃ vardhamāno mā mātaraṃ pra minījjanitrīm

हिन्दी अर्थ

नृणा अस्मिसैनृणाः परस्मिन तृतीयं सेके .धनृणाः स्याम । ये देवानां; पितृषाणांश्च लोकाः स मि अनृणा माक्षियम ॥२ (तृतीये) तीसरे लोक में, वानप्रस्याश्रम मे (अनृणाः)ऋण रहित 4८ हुम हो । ये) जो (देवयानाः पितृयाणाः च लोकाः) जो देवयान मं हए (आ क्षियेम) अगले-गते माश्नम मे कर हम वास कर । अभिप्राय यहदहैकि किसी भी आश्रम मे हम किसीसेच्छण प्रहणन करे । पितृयाण-पथ है गृहस्थाश्रम, रेष आश्रम ह देवयानपथ '। अनृणाः दो प्रकारके ऋण होते ह लौकिक भौर वैदिक । लौकिक ण ह धान्यादि काया नकद सपयों का । वैदिक ऋण तीन हैँ ऋषिऋण देव ऋण तथा (१-३) कौशिकः। अनुणकामः । जग्निः । श्रिष्टुम् ।

English

The elder brother’s bonds, still left unwedded, fettered in every limb and bound securely, Loose these, for they are bonds for loosing: Pūshan, turn woes away upon the babe-destroyer. A charm to banish the fiend Grāhi

अध्याय ६

श्लोक 111.1

उन्मत्ततामोचनम्।१-४ अथर्वा।अग्निः।अनुष्टुप्, १ परानुष्टुप् त्रिष्टुप्।इ॒मं मे॑ अग्ने॒ पुरु॑षं मुमुग्ध्य॒यं यो ब॒द्धः सुय॑तो॒ लाल॑पीति ।अतोऽधि॑ ते कृणवद् भाग॒धेयं॑ य॒दानु॑न्मदि॒तोऽस॑ति

unmattatāmocanam| 1-4 atharvā| agniḥ| anuṣṭup, 1 parānuṣṭup triṣṭup| imaṃ me agne puruṣaṃ mumugdhyayaṃ yo baddhaḥ suyato lālapīti | ato'dhi te kṛṇavad bhāgadheyaṃ yadānunmadito'sati

हिन्दी अर्थ

२०८ भथरवेवेद-भाष्य का०६। अनु° १२। सु० ११८ दिन (नः) हमारे (ऋणम्) ऋण को (अनु) राजकोय नियमानुसार (दत्ताम्) मन््रभें दो अप्सराओोंकावणेनदहै।येर्ह दो रूपवतो महिला्एु। काएं है दोनों मिलकर फंसला करती ह, दोनों न्यायसभा रूप ८0४ विशेषण है । इसी प्रकार उग्रजितौ भो “अप्सरसौ” का विशेषण है । चत

English

This sin the Gods wiped off and laid on Trita, and Trita wiped it off on human beings. Thence if the female fiend hath made thee captive, the Gods by prayer shall banish her and

अध्याय ६

श्लोक 111.2

अ॒ग्निष्टे॒ नि श॑मयतु॒ यदि॑ ते॒ मन॒ उद्यु॑तम्।कृ॒णोमि॑ वि॒द्वान् भे॑ष॒जं यदानु॑न्मदि॒तोऽस॑सि

agniṣṭe ni śamayatu yadi te mana udyutam| kṛṇomi vidvān bheṣajaṃ yadānunmadito'sasi

हिन्दी अर्थ

सत्यनाम (निघं० ३।१०) । ये दो महिलाएं ऋण के दाता ओद ग्रहीता म ऋण सम्बन्धी विवाद में सत्यकोदेव कर फंसला कर देतीदठै, भतः सव्य के कारण इन की सदा विजय होती है, इनके दिये फैसले को मस्तिम फसला माना जाता दहै, भौर कहीं अपील नहीं होती । “अनुदत्तामृणम्” का यह अभिप्राय है कि फंसले को ऋणराशि को अदाललतमे जमा कय दिया जाता है ओर न्यायाधीश स्वयं छणराशि उत्तमणंकोदेदेते हँ । उ्तमर्णं है ऋणदाता ओर अधमणं है ऋण ग्रहीता । मन्वरमे विषयोपलन्धि, पाप प्राप्त धन का भी, पापकम मे प्रयोग करदेताहै। १), (किल्बिषाणि) ऋण सम्बन्धी पापों के (अनु) अनुसार जो पप

English

free thee. Enter the particles of light and vapours, go to the rising fogs or mists, O Evil! Hence! vanish in the foams of rivers. Pūshan, wipe woes away upon the babe-destroyer!

अध्याय ६

श्लोक 111.3

दे॒वै॒न॒सादुन्म॑दित॒मुन्म॑त्तं॒ रक्ष॑स॒स्परि॑ ।कृ॒णोमि॑ वि॒द्वान् भे॑ष॒जं यदानु॑न्मदि॒तोऽस॑ति

devainasādunmaditamunmattaṃ rakṣasaspari | kṛṇomi vidvān bheṣajaṃ yadānunmadito'sati

हिन्दी अर्थ

(यत्) जो ऋण सम्बन्धी पाप हमने किया है, (नः) हमारे (एतत्) इस तथा णोभा से युक्त (ऋणम्) सूद को चाहता हुआ उत्तमणे, (यमस्य) कां० ६। अनु° १२। सू ११६ अथवबेद-माष्य २०९ एच्छंमानः (सायण) । ्रथवा ईर क्षेपे (चुरादिः) +तीस भूष अलङ्कारे यपां उटगं यस्य॑ जायामुपैमि यं याच॑पानो अभ्पैभिं देवाः ।

English

Stored in twelve separate places lies what Trita hath wiped away, the sins of human beings. Thence if the female fiend hath made thee captive, the Gods by prayer shall banish her and

अध्याय ६

श्लोक 111.4

पुन॑स्त्वा दुरप्स॒रसः॒ पुन॒रिन्द्रः॒ पुन॒र्भगः॑ ।पुन॑स्त्वा दु॒र्विश्वे॑ दे॒वा यथानु॑न्मदि॒तोऽस॑सि

punastvā durapsarasaḥ punarindraḥ punarbhagaḥ | punastvā durviśve devā yathānunmadito'sasi

हिन्दी अर्थ

(यस्म) जिस प्रयोजन के लिये (याचमानः) ऋण की याचना करता हे, (यस्य) जि को (जायाम्) पत्नी के (उप) पास (एमि) मँ जाता ह तथा (देवाः) है व्यवहार! कुशल ग्यापारियों ! (यम्) जिस पुरुष के (ग्रभि) संमुल (एमि) म जाता हूं, (ते) वे देव (मान्=माम्) मुभे लक्ष्य करके पाचकसे कथित इस कथन को (देवपत्नी) है देवों को पतनी ( म्रप्सरसौ) म जिस भी प्रयोजन के लिये, जिस किसो महिला से, या जिस किती परशंसाही करे कि अपनी उन्नतिके लिए ही यह् छण याचना कर रहा है । यह मेरा निजकतेग्यहै किरम भपनी ओर भ्रपने परिवार की उन्नति के लिये ऋण लेता हूं । यदि कोई इस सम्बन्धमे मेरी निन्दा करतादहैतो वह् दण्डनीय हो,--यह् सदा स्मरण रजनो ।

English

free thee. A prayer for pardon of faults and errors in sacrificing Whatever God-provoking wrong we priests have done, O

अध्याय ६

श्लोक 112.1

पाशमोचनम्।१-३ अथर्वा।अग्निः।त्रिष्टुप्।मा ज्ये॒ष्ठं व॑धीद॒यम॑ग्न ए॒षां मू॑ल॒बर्ह॑णा॒त् परि॑ पाह्येनम्।स ग्राह्याः॒ पाशा॒न् वि चृ॑त प्रजा॒नन् तुभ्यं॑ दे॒वा अनु॑ जानन्तु॒ विश्वे॑

pāśamocanam| 1-3 atharvā| agniḥ| triṣṭup| mā jyeṣṭhaṃ vadhīdayamagna eṣāṃ mūlabarhaṇāt pari pāhyenam| sa grāhyāḥ pāśān vi cṛta prajānan tubhyaṃ devā anu jānantu viśve

हिन्दी अर्थ

(१-३) । फो्िकः । प्रनृणकामः । अगिनिः। त्रिष्टुभ् । १. उत्तमणे दारा दिये गये ऋण भौर उस परमके सुदको उत्तमणंको वापिस कर देना, यह राजकीय नियम तथा सामाजिक प्रथा द्वारा स्वतः सिद्ध है। २. देवाः == दिवु क्रोडाविजिगीषा “शन्यवहार भादि (दिवादिः), व्यवहार २१० -भ्रयववेद-माष्य कां०६। ्रनु १२। सू° ११६ हआ कि इसे वापिस न कर सक्गा, फिर भौ (संगृणामि) प्रतिज्ञा कर देता हं कि वापिस कर दुगा, (वैश्वानरः) सब नर-नारियों का हित करने

English

Deities. 94

अध्याय ६

श्लोक 112.2

उन्मु॑ञ्च॒ पाशां॒स्त्वम॑ग्न ए॒षां त्रय॑स्त्रि॒भिरुत्सि॑ता॒ येभि॒रास॑न्।स ग्राह्याः॒ पाशा॒न् वि चृ॑त प्रजा॒नन् पि॑तापु॒त्रौ मा॒तरं॑ मुञ्च॒ सर्वा॑न्

unmuñca pāśāṃstvamagna eṣāṃ trayastribhirutsitā yebhirāsan| sa grāhyāḥ pāśān vi cṛta prajānan pitāputrau mātaraṃ muñca sarvān

हिन्दी अर्थ

लेताहै, भौर ऋणदाताके प्रति प्रतिज्ञा करताहै किम ऋर राक्षि को वापिस करदूगा, यद्यपि वह जानताहै किश्चायदर्मे वापिसन कर सङ्, वैश्वानराय प्रतिवेदयामि य्यणं सगरो देवतासु । (यदि) यदि (देवतासु) देवताओं के नामों पर (ऋणम्) छण के उदर्य से (संगरः) प्रतिज्ञार्मैनेकोहै तो उते (वेश्वानराय) सव नर-नारियों का

English

Therefrom do ye deliver us, Ādityas! by the right of Law. Here set us free, O holy ones, Ādityas, by the right of Law. When striving, bringing sacrifice, we failed to offer it aright.

अध्याय ६

श्लोक 112.3

येभिः॒ पाशैः॒ परि॑वित्तो॒ विब॒द्धोऽङ्गे॑अङ्ग॒ आर्पि॑त॒ उत्सि॑तश्च ।वि ते मु॑च्यन्तं वि॒मुचो॒ हि सन्ति॑ भ्रूण॒घ्नि पू॑षन् दुरि॒तानि॑ मृक्ष्व

yebhiḥ pāśaiḥ parivitto vibaddho'ṅgeaṅga ārpita utsitaśca | vi te mucyantaṃ vimuco hi santi bhrūṇaghni pūṣan duritāni mṛkṣva

हिन्दी अर्थ

हित करने वाले परमेष्वर के लिये (प्रतिवेदयामि) म विज्ञापित कर देता परिपक्व फल के (सह) साथ (संभवेम) हम संगत हों । वैश्वानर सब पाञोँकोकाटना तोजानता है, परन्तु है वह न्याय- कारी। कर्मो काफल वहू न्यायपू्रकदेताहै। जो हम ने देवताग्नों के नामों उन्हीं के श्राघार पर हम कमफल देगा, अतः हमे निजाजित कमफलों को पाकर संतुष्ट रहना चाहिए, यह् प्रिप्रायहै। कां० ६। प्रनु १२। सु० १२० अयेवेद-भाष्य २११

English

With ladle full of fatness we, worshippers, pouring holy oil, Striving, have failed, O all ye Gods, against our will, to offer it.

अध्याय ६

श्लोक 113.1

पापनाशनम्।१-३ अथर्वा।पूषा।त्रिष्टुप्, ३ पङ्क्तिः।त्रि॒ते दे॒वा अ॑मृजतै॒तदेन॑स्त्रि॒त ए॑नन्मनु॒ष्येऽषु ममृजे ।ततो॒ यदि॑ त्वा॒ ग्राहि॑रान॒शे तां ते॑ दे॒वा ब्रह्म॑णा नाशयन्तु

pāpanāśanam| 1-3 atharvā| pūṣā| triṣṭup, 3 paṅktiḥ| trite devā amṛjataitadenastrita enanmanuṣye'ṣu mamṛje | tato yadi tvā grāhirānaśe tāṃ te devā brahmaṇā nāśayantu

हिन्दी अर्थ

(पतिता) पवित्र करने वाला (वश्वानरः) सब नरनारियों का हित करने वाला परमेश्वर (मा) मुक (पुनातु) पवित्र करे, (यत्) जो कि (संग- को आशा को (अभि) लक्ष्य करके (घावामि) दोड्धूप म कर्ता हुं) (मनसा) मन से (भ्रनाजानन्) पूणतया न जानता हृभा मी कि मैँकच्छण को षापिस करूगाया नहीं नो र्मेँ(याचमानः) ऋण याचना करता इ (तत्र) अप सुवामि =म्रप-+-ष् प्र रणे (तुदादिः), “भनाजानन्" होते हए मी, “वापिस कर दू गा'' यह् प्रतिज्ञा करके ऋणग्रहणं करना, ऋणदाता को पोखादेनाटै, ह पापरहै। इसे मविष्यमेन करने का सकल्प ण मेश्वर से मानसिकं पवित्रता की प्रभिलाषा करतार । भ

English

A prayer for forgiveness of sins Whatever wrong we wittingly or in our ignorance have done, Do ye deliver us therefrom, O all ye Gods, of one accord.

अध्याय ६

श्लोक 113.2

मरी॑चीर्धू॒मान् प्र वि॒शानु॑ पाप्मन्नुदा॒रान् गच्छो॒त वा॑ नीहा॒रान्।न॒दीनां॒ फेनाँ॒ अनु॒ तान् वि न॑श्य भ्रूण॒घ्नि पू॑षन् दुरि॒तानि॑ मृक्ष्व

marīcīrdhūmān pra viśānu pāpmannudārān gacchota vā nīhārān| nadīnāṃ phenā~ anu tān vi naśya bhrūṇaghni pūṣan duritāni mṛkṣva

हिन्दी अर्थ

(१-३) । कौशिकः । मभ्त्रोक्त हैवता । १ जगतो; २ पंक्तिः; ३ (पृथिवीम्) पृथिवी सदश्च (मातरम्) निर्माण करने वाली माता को, (उत) इत् नयाति) पाप कमं से उठाकर प्रवश्यले जाये, यालेजातारहै, पहुंचा दे, या पहुंचा देता है । , हमारे क्षसेर पाथिव्र ई, पृथिवो से निमित हूए ह, हमारे शषरीरोका निर्माण भी मात्रो के शरीरोसे ह्राद) स निर्माण मे बीज, पिताओं,

English

If I, a sinner, when awake or sleeping have committed sin, Free me therefrom as from a stake, from present and from future guilt.

अध्याय ६

श्लोक 113.3

द्वा॒द॒श॒धा निहि॑तं त्रि॒तस्याप॑मृष्टं मनुष्यैन॒सानि॑ ।ततो॒ यदि॑ त्वा॒ ग्राहि॑रान॒शे तां ते॑ दे॒वा ब्रह्म॑णा नाशयन्तु

dvādaśadhā nihitaṃ tritasyāpamṛṣṭaṃ manuṣyainasāni | tato yadi tvā grāhirānaśe tāṃ te devā brahmaṇā nāśayantu

हिन्दी अर्थ

२१२ अथवेवेद-भाष्य कां० ६ । भ्रनु० १२ । सू० १२० से मिलता है । भरयवे° (१५।२।७१) में “चौरह्ं पृथिवी त्वम्" द्वारा वर, वघ कोकहताहैकिर्मेद्यौःहूंभ्रौरतु पृथिवी है। इसकाभी अभिप्राय यहुहै किरम बोज प्रदाता, भ्रौरतू बीजका ग्रहृण करने वाली है। (भूमिः भाता) भूमि सहश वालिका माता, जो कि (नः) हमे (जनि- भ्रम्) शारीरिक जन्म देने वाली (मदितिः) तथा दीनता के मावों से रहित सायण सुरक्षित करे । (द्यौः) यलोक के सदश (पिता) पिता हरमे (पिव्यात्) पिता से प्राप्त होने वाले दोषसे हटा कर (शम् भवाति) सुखदायक हो ।

English

As one unfastened from a stake, or cleansed by bathing after toil, As butter which the sieve hath cleansed, so all shall purge me from the sin. A prayer for pardon of sin against mother, father, son, or brother

अध्याय ६

श्लोक 114.1

उन्मोचनम्।१-३ ब्रह्म।विश्वे देवाः।अनुष्टुप्।यद् दे॑वा देव॒हेड॑नं॒ देवा॑सश्चकृ॒मा व॒यम्।आदि॑त्या॒स्तस्मा॑न्नो यू॒यमृ॒तस्य॒र्तेन॑ मुञ्चत

unmocanam| 1-3 brahma| viśve devāḥ| anuṣṭup| yad devā devaheḍanaṃ devāsaścakṛmā vayam| ādityāstasmānno yūyamṛtasyartena muñcata

हिन्दी अर्थ

विवाह विधिसे प्राप्त करकेतु (लोकात्) सुकर्मी वगंके लोकसे (मा) न करता है । जामिः "स्वसा कुलस्त्रौ वा” (उणा० ४।४४, दयानन्द) माता मौर भाई का समूचितभ्रादरन करना, भौर प्रकृति के राजस-तामस भोगों कर, (सुहादः) उत्तम हृदयो वाले, (सुकृतः) सुकर्मी (यत्र) जहां (मदन्ति) १. भन्तरानुसार तन् के रोगियों, भौर विकृत अद्ख॒ वालों कौ गृहस्थ का निपेघ कां० ६। प्रनु० १२। सू० १२१ भ्रथववेद-भाष्य २१३

English

The wealth which husbandmen aforetime, digging, like men who find their food with knowledge, buried,

अध्याय ६

श्लोक 114.2

ऋ॒तस्य॒र्ते॑ना॑दित्या॒ यज॑त्रा मु॒ञ्चते॒ह नः॑ ।य॒ज्ञं यद् य॑ज्ञवाहसः॒ शिक्ष॑न्तो॒ नोप॑शेकि॒म

ṛtasyartenādityā yajatrā muñcateha naḥ | yajñaṃ yad yajñavāhasaḥ śikṣanto nopaśekima

हिन्दी अर्थ

से रह ता.५) प्रकुटिल हए, (तत्र) उस (स्वगं) स्वगं मे (पितरौ) माता- पिता का (च) मौर (पुत्रान्) पुत्रों को (पश्येम) हम देखे 1 सुहादः--जिनके हृदयो मे भक्ति, श्रद्धा, प्रम का निवासहै। सुकरतः =परोपक्रार, यञ्च याग श्रादि करने वाले। “माता, पिता, तथा पूर्रों क कहा है । महषि दयानन्द के भ्रनुसार पृथिवोलोक से अतिरिक्त लोकलोक है, (ये) जो (वारुणाः) वरुण परमेश्वर ने हमारे कमोँ के श्रनुसार हम

English

This to the King, Vivasvān’s son, I offer, Sweet be our food and fit for sacrificing! May he, Vaivasvata, prepare our portion; May he whose share is mead with mead besprinkle. Our sin in hasty mood against our mother, or guilt whereby a sire is wronged and angered.

अध्याय ६

श्लोक 114.3

मेद॑स्वता॒ यज॑मानाः स्रु॒चाज्या॑नि॒ जुह्व॑तः ।अ॒का॒मा वि॑श्वे वो देवाः॒ शिक्ष॑न्तो॒ नोप॑ शेकि॒म

medasvatā yajamānāḥ srucājyāni juhvataḥ | akāmā viśve vo devāḥ śikṣanto nopa śekima

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर (सुकृतस्य) सुकमियो के (लोकम्) लोक को (गच्छेम) हम जाप, १, मन्त्रानुसार तनू के रोगियों, मौर विकृत अद्ध वालोंको गृहस्थ का निपरध २१४ प्रथवंवेद भाष्य कां० ६। अनु० १२। सू० १२१ विषाणा == वि +-षो अन्तकर्मणि (दिवादिः) वर्ण श्रौर उसके पाशों पाथिव-मोगों में (बध्यसे) तू बन्धा हुआ है, (यत् च) भ्रौर जौ (वाचा)

English

Whether this sin into our heart hath entered regarding mother, father, son or brother, Auspicious be to us the zeal and spirit of all the fathers who are here among us.

अध्याय ६

श्लोक 115.1

पापमोचनम्।१-३ ब्रह्मा।विश्वे देवाः।अनुष्टुप्।यद् वि॒द्वांसो॒ यदवि॑द्वांस॒ एनां॑सि चकृ॒मा व॒यम्।यू॒यं न॒स्तस्मा॑न्मुञ्चत॒ विश्वे॑ देवाः सजोषसः

pāpamocanam| 1-3 brahmā| viśve devāḥ| anuṣṭup| yad vidvāṃso yadavidvāṃsa enāṃsi cakṛmā vayam| yūyaṃ nastasmānmuñcata viśve devāḥ sajoṣasaḥ

हिन्दी अर्थ

लोकम्) सुक्रृत के लोक कीभ्रोर (नयाति) ले चले, या ले जाती है । अथवा है । अमृत है मोक्ष, जन्म-मरण से मृक्त हौ जाना, छूट जाना । उदगातां भग॑वती विचृतौ साम् तारकरे । ेहामृत॑स्य यच्छता पतु बरद्धकरमो चनम् २॥ (सगवती) सौभाग्य वाने (विचृतौ) दो विचृत (नाम) नाम (तारके)

English

A prayer for freedom from debt That which I eat, a debt which still is owing, the tribute due to Yama, which supports me, p. a255

अध्याय ६

श्लोक 115.2

यदि॒ जाग्र॒द् यदि॒ स्वप॒न्नेन॑ एन॒स्योऽक॑रम्।भू॒तं मा॒ तस्मा॒द् भव्यं॑ च द्रुप॒दादि॑व मुञ्चताम्

yadi jāgrad yadi svapannena enasyo'karam| bhūtaṃ mā tasmād bhavyaṃ ca drupadādiva muñcatām

हिन्दी अर्थ

कां ६ । प्रन्० १२ । सु° १२१ बयवंवेद-भाष्य २१५ तारे (उदगाताम्) उदित हूए है" वे (इह) हस जीवन में (ग्रमृतस्य) न मरने भगवती == भगवत्यौ; यतः “तारके” द्विवचने है। विचृतौदो विचृत् इति संज्ञा (सायण); (अथवं० १६१७३) में मी “मूल'' नक्षत्र कहा को भगवती कहा है, सौभाग्य वाली । यहु ""वद्धकमोचन"' है, प्रतः जोवा-

English

Thereby may I be free from debt, O Agni. Thou knowest how to rend all bonds asunder. Still dwelling here we give again this present; we send it forth, the living from the living.

अध्याय ६

श्लोक 115.3

द्रु॒प॒दादि॑व मुमुचा॒नः स्वि॒न्नः स्ना॒त्वा मला॑दिव ।पू॒तं प॒वित्रे॑णे॒वाज्यं॒ विश्वे॑ शुम्भन्तु॒ मैन॑सः

drupadādiva mumucānaḥ svinnaḥ snātvā malādiva | pūtaṃ pavitreṇevājyaṃ viśve śumbhantu mainasaḥ

हिन्दी अर्थ

परन्तु “विचृतौ का पुवदिकश्ामें उद्यतो प्रतिवषंहाताहै, तबतो भूमिष्ठ सब जीवित प्राणियोकी मुक्ति हो जानी चाहिय, परन्तुएेसाहो नहीं रहा । अत्तः '“विचृतो'' तारों काकु ओर दही श्रमिप्राय दहै । योगदशन मे "तारक का वणेनहै। यथा “तारके सवंविषयं सवथा विषयमक्रम चेति" (विभूतिपाद ४४) । “तारके ज्ञान भवसामरसेतेरादेतादहै। मन्त्र विचृतौ कहा है । विचृतौ वि (विशेषेण) चृत (हिसाग्रन्यनयोः), हिसाथं जाना, श्रौर जीवात्मा का कंवल्यहौ जाना, उस भ्रकेलेकाबचा रहूना। उदगातां भगवतो विच॒तो नाम तारके,

English

Throwing away the grain whence I have eaten, thereby shall I be free from debt, O Agni. May we be free in this world and that yonder, in the third world may we be unindebted. May we, debt-free, abide in all the pathways, in all the worlds which Gods and Fathers visit.

अध्याय ६

श्लोक 116.1

मधुमदन्नम्।१-३ जाटिकायनः।विवस्वान्।जगती, २ त्रिष्टुप्।यद् या॒मं च॒क्रुर्नि॒खन॑न्तो॒ अग्रे॒ कार्षी॑वणा अन्न॒विदो॒ न वि॒द्यया॑ ।वै॒व॒स्व॒ते राज॑नि॒ तज्जु॑हो॒म्यथ॑ य॒ज्ञियं॒ मधु॑मदस्तु॒ नोऽन्न॑म्

madhumadannam| 1-3 jāṭikāyanaḥ| vivasvān| jagatī, 2 triṣṭup| yad yāmaṃ cakrurnikhananto agre kārṣīvaṇā annavido na vidyayā | vaivasvate rājani tajjuhomyatha yajñiyaṃ madhumadastu no'nnam

हिन्दी अर्थ

होने पर स्थूल शरी रसित कालिक मोचनदहो जाताहै। परन्तु शेष दो शरीरोंमें २. तारकमभी द्िविषह, भौरतारकेभीदोरह, दोनों का अथं है “तेराने वाले" २१६ अथवंवेद-भाष्य कां० ६। अनु १२। सु° १२१ प्रम् ये दिवि सुमगे विचृतौ नाम तारके । । इन दो मन्त्रो सेदो पाशोंसे मूक्तिका कथन हआ है) अ्रधमपाश है

English

A prayer for pardon of cheating at play If we have sinned with both our hands, desiring to take the host of dice for our possession,

अध्याय ६

श्लोक 116.2

वै॒व॒स्व॒तः कृ॑णवद् भाग॒धेयं॒ मधु॑भागो॒ मधु॑ना॒ सं सृ॑जाति ।मा॒तुर्यदेन॑ इषि॒तं न॒ आग॒न् यद् वा॑ पि॒ताप॑राद्धो जिही॒डे

vaivasvataḥ kṛṇavad bhāgadheyaṃ madhubhāgo madhunā saṃ sṛjāti | māturyadena iṣitaṃ na āgan yad vā pitāparāddho jihīḍe

हिन्दी अर्थ

(विजिहीष्व) है भविद्या ! तु विगत हो जा, हट जा, (लोकम्, कृणु) निवास कर, (इव) जसे कि (योन्याः) माता कौ योनिसे (प्रच्युतः) च्युत हप्रा, पदा हुआ (गरेः) नवजात शिशु भ्रनिश्डगति से हिलता जुलता है । जसे नवजात शिशु स्वयमेव ्रनिख्दध गति करताहैषवसेतु भौ प्रनि- नक्षत्र आदि की गतियो के पथ नानाह, इन पथांमेत्रु गमन करं । मुक्त का०६। भनु° १२। सू० १२२ गवबववेद-भाष्य २१७

English

May both Apsarases to-day forgive us that debt, the fiercely- conquering, fiercely-looking. Stern viewers of their sins who rule the people, forgive us what hash happened as we gambled.

अध्याय ६

श्लोक 116.3

यदी॒दं मा॒तुर्यदि॑ पि॒तुर्नः॒ परि॒ भ्रातुः॑ पु॒त्राच्चेत॑स॒ एन॒ आग॑न्।याव॑न्तो अ॒स्मान् पि॒तरः॒ सच॑न्ते॒ तेषां॒ सर्वे॑षां शि॒वो अ॑स्तु म॒न्युः

yadīdaṃ māturyadi piturnaḥ pari bhrātuḥ putrāccetasa ena āgan| yāvanto asmān pitaraḥ sacante teṣāṃ sarveṣāṃ śivo astu manyuḥ

हिन्दी अर्थ

बातस्याहवो वायोः ससा । उनो समुद्रावा केति, वायु इसका प्रश्व है, वायु का यह सखाहै। यह दोनो सभूद्रो परा इस माग को (परिददामि) तेरेनामपर मैदानमेदेता हु ।(भ्रस्माभिः) हम पारिवारिकजनों दवारा (दत्तम्) दिया गया यह भाग, (जरसः परस्तात्) परिवार शौ आामदनो का एक निर्चित भाग, परिवार का मुखिया भौ शेष पारिवारिकजन अच्दछिश्लरूपमें दान देने को पारिवारिक प्रथा को जारी रखते है, भोर जरापल्न व्यक्ति गृहत्याग करय गृह मेही रहते हए, मोक्ष साधक जोन चर्या कर्, भवसागरसे तेर जाने के अभिलाषीर्ह।

English

Not urging us to pay the debt we owed him, he with a cord hath gone to Yama’s kingdom. My creditor, the man whose wife I visit, he, Gods! whom I approach with supplication,

अध्याय ६

श्लोक 117.1

आनृण्यम्।१-३ कौशिकः।अग्निः।त्रिष्टुप्।अ॒प॒मित्य॒मप्र॑तीत्तं॒ यदस्मि॑ य॒मस्य॒ येन॑ ब॒लिना॒ चरा॑मि ।इ॒दं तद॑ग्ने अनृ॒णो भ॑वामि॒ त्वं पाशा॑न् वि॒चृतं॑ वेत्थ॒ सर्वा॑न्

ānṛṇyam| 1-3 kauśikaḥ| agniḥ| triṣṭup| apamityamapratīttaṃ yadasmi yamasya yena balinā carāmi | idaṃ tadagne anṛṇo bhavāmi tvaṃ pāśān vicṛtaṃ vettha sarvān

हिन्दी अर्थ

ततं तन्तुमन्षेके तरन्ति येषां दत्तं पिरय॒माय॑नेन । २९ कथवेवेद-भाष्य का० ६1 भनु° १२) सू० १२२ दे दिया है। (एके) गौर कई (श्रबन्घु) जो कि बन्धुरहितरहँवे (ददतः)पेतृक जिस गृहस्थर्मे रहते हँ वह गृहस्थ स्वगंहीहै।

English

Let not these men dominate me in speaking. Mind this, ye two Apsarases, Gods’ Consorts! A prayer for release from debts incurred without intention of payment

अध्याय ६

श्लोक 117.2

इ॒हैव सन्तः॒ प्रति॑ दद्म एनज्जी॒वा जी॒वेभ्यो॒ नि ह॑राम एनत्।अ॒प॒मित्य॑ धा॒न्यं॑१ यज्ज॒घसा॒हमि॒दं तद॑ग्ने अनृ॒णो भ॑वामि

ihaiva santaḥ prati dadma enajjīvā jīvebhyo ni harāma enat| apamitya dhānyaṃ1 yajjaghasāhamidaṃ tadagne anṛṇo bhavāmi

हिन्दी अर्थ

घनोपा्जन में समथं है, या नही, इसलिये इनके सम्बन्धमे “दातु चेत् शिक्षन्” इन पदों का प्रयोग हभ्राहै। ६७) इति ुकारलोपः लेटलकार, "राट् प्रागम (सायण) (अनु संरभेथाम्) तदनुल दोनों मिलकर जीवनचयां बारम्भ करो, (श्रह्- करते ह, या इस लोक के साय श्रपना सम्बन्ध करते ह । (वाम्) तुम दोनों तियां गृह्याग्नि में देनी होती है,भरौर साय ही ब्राह्ममोज कराने का भी निश

English

The debt which I incur, not gaming, Agni! and, not intending to repay, acknowledge, p. a256

अध्याय ६

श्लोक 117.3

अ॒नृ॒णा अ॒स्मिन्न॑नृ॒णाः पर॑स्मिन् तृ॒तीये॑ लो॒के अ॑नृ॒णाः स्या॑म ।ये दे॑व॒यानाः॑ पितृ॒याणा॑श्च लो॒काः सर्वा॑न् प॒थो अ॑नृ॒णा आ क्षि॑येम

anṛṇā asminnanṛṇāḥ parasmin tṛtīye loke anṛṇāḥ syāma | ye devayānāḥ pitṛyāṇāśca lokāḥ sarvān patho anṛṇā ā kṣiyema

हिन्दी अर्थ

कां० ६। अनु° १२। सु° १२९ भयववेद-भाष्य २१६ किया हो । सचन्ते षच् समवाये, सेवने च (म्वादिः) उपहूता अग्ने जरस॑; परस्तात् तृतीये नाके सधमादं मदेष ॥४॥ (सारोहामि) मै स्वर्गीय जीवनके पथ पर ञारूढ होता हृ.ग्रौर (सयोनिः)

English

That may Vaisvānara, the best, our sovran, carry away into the world of virtue. I cause Vaisvānara to know, confessing the debt whose payment to the Gods is promised. He knows to tear asunder all these nooses: so may we dwell with him the gentle-minded.

अध्याय ६

श्लोक 118.1

आनृण्यम्।१-३ कौशिकः।अग्निः।त्रिष्टुप्।यद्धस्ता॑भ्यां चकृ॒म किल्बि॑षाण्य॒क्षानां॑ ग॒त्नुमु॑प॒लिप्स॑मानाः ।उ॒ग्रं॒प॒श्ये उ॑ग्र॒जितौ॒ तद॒द्याप्स॒रसा॒वनु॑ दत्तामृ॒णं नः॑

ānṛṇyam| 1-3 kauśikaḥ| agniḥ| triṣṭup| yaddhastābhyāṃ cakṛma kilbiṣāṇyakṣānāṃ gatnumupalipsamānāḥ | ugraṃpaśye ugrajitau tadadyāpsarasāvanu dattāmṛṇaṃ naḥ

हिन्दी अर्थ

(जरसः परस्तात्) जरावस्था के परवत् (उपहूताः) तुक दारा समीप दवारा गृहस्थ जीषषन के "पञ्चमहायज्ञ" सूचित होते हँ । सयोनिः योनि है जगद् को योनिः “ब्रह्म । तृततोये नाके =नाक का अथं है'"कमिति सुखनाम, विभूतिपादः, सूत्र २६, सम्भवतः “बाह्यः विभरमिको लोकः" = तृतीयलोक रथात् तृतीय नाक । इस लोक में केवल ब्रहमहौहै, प्राकृतिक जगत् की सत्ता नहीं । ये विंकत्प केवल विचाराथं लिखे हैं । भ भरयववेद-माष्य का० ६। श्रनु, १२ सु० १२३ (इमाः) हन (शुद्धाः) शरीर से शुद्ध, (पूताः) विचारो पवित्र, (यज्ञियाः) विवाह यज्ञ के योग्य,! (योषितः) प्रीति तथा सेवा करने वाली

English

Vaisvānara the Purifier purge me when I oppose their hope and break my promise, Unknowing in my heart. With supplication, whatever guilt there is in that, I banish.

अध्याय ६

श्लोक 118.2

उग्रं॑पश्ये॒ राष्ट्र॑भृ॒त् किल्बि॑षाणि॒ यद॒क्षवृ॑त्त॒मनु॑ दत्तं न ए॒तत्।ऋ॒णान्नो॒ नर्णमेर्त्स॑मानो य॒मस्य॑ लो॒के अधि॑रज्जु॒रा॑यत्

ugraṃpaśye rāṣṭrabhṛt kilbiṣāṇi yadakṣavṛttamanu dattaṃ na etat| ṛṇānno narṇamertsamāno yamasya loke adhirajjurāyat

हिन्दी अर्थ

(इदम्) यहु या जल (सभिषिञ्चामि) अभिषेक रूप में सीचताह, ववाह कर देना चाहता है 1 पुत्रियां शारीरिक-मोगषको दुष्टिसे शुद्धरहू। चिटकना होता है । पिता की कामना है विवाहानन्तर पतियों के गृहो मे पुत्रियों का सुखपवंक निबास । योषिता=-जुष प्रीतिसेवनयोः (उणा० १। ९७) । इदम् उदकनाम (निषं° १।१२) । महत् = मनुष्यजातिः (उणा एतं संधस्थाः परि ष ददामि यं जैवेधिपावहाज्जातवेदाः।

English

A prayer for pardon of sins and felicity hereafter If we have injured Air, or Earth, or Heaven, if we have wronged our Mother or our Father, May Agni Gārhapatya here absolve us, and bear us up into the world of virtue.

अध्याय ६

श्लोक 118.3

यस्मा॑ ऋ॒णं यस्य॑ जा॒यामु॒पैमि॒ यं याच॑मानो अ॒भ्यैमि॑ देवाः ।ते वाचं॑ वादिषु॒र्मोत्त॑रां॒ मद्देव॑पत्नी॒ अप्स॑रसा॒वधी॑तम्

yasmā ṛṇaṃ yasya jāyāmupaimi yaṃ yācamāno abhyaimi devāḥ | te vācaṃ vādiṣurmottarāṃ maddevapatnī apsarasāvadhītam

हिन्दी अर्थ

कां०६। श्रनु १२। सू० १२३ अथवंवेद-भाष्य २२१ (वः) तुम्हारे लये (परिददामि) पणंतया रम प्रदान करताहूं (भ्रनु) परमरक्षक परमेदवर में स्थित हुआ (जानीत) तुम जानो । शेवधि;--दाता, रोवधि को ग्ध्यात्म मागं मे बाघक अनुमव करताहै। निषद् अघ्याय १, बल्ली २, खण्ड १०) । जातवेदा. “जातानि वेद, जते

English

Earth is our Mother, Aditi our birth-place: our brother Air save us from imprecation! Dyaus, Father, save us, from the world of Fathers! My world not lost, may I approach my

अध्याय ६

श्लोक 119.1

आनृण्यम्।१-३ कौशिकः।वैश्वानरोऽग्निः।त्रिष्टुप्।यददी॑व्यन्नृ॒णम॒हं कृ॒णोम्यदा॑स्यन्नग्न उ॒त सं॑गृ॒णामि॑ ।वै॒श्वा॒न॒रो नो॑ अधि॒पा वसि॑ष्ठ॒ उदिन्न॑याति सुकृ॒तस्य॑ लो॒कम्

ānṛṇyam| 1-3 kauśikaḥ| vaiśvānaro'gniḥ| triṣṭup| yadadīvyannṛṇamahaṃ kṛṇomyadāsyannagna uta saṃgṛṇāmi | vaiśvānaro no adhipā vasiṣṭha udinnayāti sukṛtasya lokam

हिन्दी अर्थ

जानीत स्मर॑नं परमे व्योमन देवाः सधस्था विद लोकम । (सस्थाः देवाः) है दिष्यगुणी सधस्थो ! (एनम्) इस यजमान को इस परमेरकद मे (लोकम्) हसका लोक (विद = विव्य) जानो । (यज- देवाः पित॑रः पितरो देवाः । यो अस्मि सो अस्मि ॥३॥

English

kindred. There where our virtuous friends, who left behind them their bodily infirmities, are happy, Free from distortion of the limbs and lameness, may we behold, in heaven, our sons and

अध्याय ६

श्लोक 119.2

वै॒श्वा॒न॒राय॒ प्रति॑ वेदयामि॒ यद्यृ॒णं सं॑ग॒रो दे॒वता॑सु ।स ए॒तान् पाशा॑न् वि॒चृतं॑ वेद॒ सर्वा॒नथ॑ प॒क्वेन॑ स॒ह सं भ॑वेम

vaiśvānarāya prati vedayāmi yadyṛṇaṃ saṃgaro devatāsu | sa etān pāśān vicṛtaṃ veda sarvānatha pakvena saha saṃ bhavema

हिन्दी अर्थ

(देवाः) देव हैँ (पितरः) मात्ता-पिता मादि, (पितरः) माता-पिता १, या जिसे कि परमेरवर प्राप्त कराता हं, लेट् लकार, आद् आगम । २९२ सथवेवेद-भाष्य का० ६ । जनु° १२। सू० १२३ पादि । मातृदेवो थव, पितृदेवो भेव्रप्रतियिदेवो भव, प्राचायंदेयो भव मादि में "देव" पद द्वारा जोवित देवों का अमिप्रायहै। यजमान श्रमी गृहस्थ आधममे निवास कररहाहै। इसलिये वह कहताहैकिजो गगृहुस्थी (सः) वह (पामि) मै पकाताहूं, (सः) वह (ददामि) र्ग दान

English

parents. A prayer for happiness in heaven

अध्याय ६

श्लोक 119.3

वै॒श्वा॒न॒रः प॑वि॒ता मा॑ पुनातु॒ यत् सं॑ग॒रम॑भि॒धावा॑म्या॒शाम्।अना॑जान॒न् मन॑सा॒ याच॑मानो॒ यत् तत्रैनो॒ अप॒ तत् सु॑वामि

vaiśvānaraḥ pavitā mā punātu yat saṃgaramabhidhāvāmyāśām| anājānan manasā yācamāno yat tatraino apa tat suvāmi

हिन्दी अर्थ

करनेकाकयन मन्वमेंहूप्राहै। यदि गृहमे प्रती नही, तौ भी गृहस्थी (राजम्) ह परिवार के शासक ! (नाके) मोक्षसाघनमें (प्रतितिष्ठ) मे कथित कमकलाप भो प्रतितिष्ठतु) स्थिर रहै । (राजन्) है शाघक ¦ (नः) हमारे (पूरतंस्य) पर्तकमं को भी (विद्धि) जानता रह, (देव) है पित्- देव ! (सः) षह तु (सुमनाः) प्रसन्नचित्त (मव) हो। मोक्षामिलाषी ममीतक घरमेहीहै। उसे पारिवारिकजन श्राषवा-

English

Spreading them out, untie the snares that hold us, Varuna’s bonds, the upper and the lower. Drive from us evil dream, drive off misfortune; then let us go in- to the world of virtue. If thou art bound with cord or tied to timber, fixt in the earth, or by a word imprisoned,

अध्याय ६

श्लोक 120.1

सुकृतस्य लोकः।१-३ कौशिकः।अन्तरिक्षं, पृथिवी, द्यौः, अग्निः।१ जगती, २ पङ्क्तिः, ३ त्रिष्टुप्।यद॒न्तरि॑क्षं पृथि॒वीमु॒त द्यां यन्मा॒तरं॑ पि॒तरं॑ वा जिहिंसि॒म।अ॒यं तस्मा॒द् गार्ह॑पत्यो नो अ॒ग्निरुदिन्न॑याति सुकृ॒तस्य॑ लो॒कम्

sukṛtasya lokaḥ| 1-3 kauśikaḥ| antarikṣaṃ, pṛthivī, dyauḥ, agniḥ| 1 jagatī, 2 paṅktiḥ, 3 triṣṭup| yadantarikṣaṃ pṛthivīmuta dyāṃ yanmātaraṃ pitaraṃ vā jihiṃsima| ayaṃ tasmād gārhapatyo no agnirudinnayāti sukṛtasya lokam

हिन्दी अर्थ

कां ६1 प्रन० १२। सु० १२४ मथरवंवेद-माष्य २२३ येण) धन से, (पयसा) दूष से, (छन्दोभिः) वेदिक छन्दो से, (यज्ञः) यज्ञो से, (सुकताम्. कतेन) सुकमियों के कम से भथतवा उत्तम कमाकेकरनेसे भोना चाहिए । राष्टरमे वर्षा नहोने केकारण प्रजादुःखीहै। इसलिये वनस्पतियों मे नानाविष रसो का संचारटोतारै, भौर धनसम्पत्ति बढती, यजुक्रदानुसार “राजा' अपने शरीर तथा शरीराङ्ींके सदुक्ष राष्ट मौर प्रजा को जानकर शासन करतार) यथा "पृष्टों राष्टूमुदरमूथः

English

Our Agni Gārhapatya here shall free thee, and lead thee up into the world of virtue. The two auspicious stars whose name is called Releasers have gone up.

अध्याय ६

श्लोक 120.2

भूमि॑र्मा॒तादि॑तिर्नो ज॒नित्रं॒ भ्राता॒न्तरि॑क्षम॒भिश॑स्त्या नः ।द्यौर्नः॑ पि॒ता पित्र्या॒च्छं भ॑वाति जा॒मिमृ॒त्वा माव॑ पत्सि लो॒कात्

bhūmirmātāditirno janitraṃ bhrātāntarikṣamabhiśastyā naḥ | dyaurnaḥ pitā pitryācchaṃ bhavāti jāmimṛtvā māva patsi lokāt

हिन्दी अर्थ

इसलिये राजा मन्त्रम राष्ट भौर प्रजाका निदंश “मे” दवारा करतादहै। उसे सूचना मिलती रहे कि परिवार मे पूतंकमं यथावत् हो रहा है । पूतस्य मृतो मेंःरक्षा शक्ति नहीं होती अतःवे पितरः नहीं। उन्ह पितरः कहाजाताह ““मूत पृषं रक्षक होने से" । २२४ प्रववेद-भाष्य कां ६। अनु० १२। सू० १२४

English

Send Amrit hither, let it come freeing the captive from his bonds! Open thyself, make room: from bonds thou shalt release the prisoner. Freed, like an infant newly born, dwell in all pathways where thou wilt.

अध्याय ६

श्लोक 120.3

यत्रा॑ सु॒हार्दः॑ सु॒कृतो॒ मद॑न्ति वि॒हाय॒ रोगं॑ त॒न्वः॑१ स्वायाः॑ ।अश्लो॑णा॒ अङ्गै॒रह्रु॑ताः स्व॒र्गे तत्र॑ पश्येम पि॒तरौ॑ च पु॒त्रान्

yatrā suhārdaḥ sukṛto madanti vihāya rogaṃ tanvaḥ1 svāyāḥ | aśloṇā aṅgairahrutāḥ svarge tatra paśyema pitarau ca putrān

हिन्दी अर्थ

(वायुः एव) प्राणप्रदवायुके सदशङहौहै। तथा (तन्वः) शरीरके (यत्र) फल का गिरना उसकी परिपक्वावस्थाका सूचक है । उसका सेवत प्राणप्रद भी व।युसबान प्राणप्रद है। वर्षाजल शुद्ध होता है, ओर मूमि पर गिरकर वहु धशुद्ध हो जात है, उसमे भूमिके तत्त्वो का मिश्रणहोजाताहै। स १. कृत्रिम विधिप्ते पकार फल उतने गुणकारी नहीं होते जितने किं शाखा पर परे गुणकारी होते हँ । प्रजाजनोंका मिघ्रमूततु (प्रतरणः) कष्टों से तेराने षाला,

English

A prayer for happiness in heaven This portion I who understand deliver to Visvakarman first-born son of Order.

अध्याय ६

श्लोक 121.1

सुकृतलोकप्राप्तिः -४ कौशिकः।अग्निः, ३ तारके।१-२ त्रिष्टुप्, ३-४ अनुष्टुप्।वि॒षाणा॒ पाशा॒न् वि ष्याध्य॒स्मद् य उ॑त्त॒मा अ॑ध॒मा वा॑रु॒णा ये।दु॒ष्वप्न्यं॑ दुरि॒तं नि ष्वा॒स्मदथ॑ गच्छेम सुकृ॒तस्य॑ लो॒कम्

sukṛtalokaprāptiḥ -4 kauśikaḥ| agniḥ, 3 tārake| 1-2 triṣṭup, 3-4 anuṣṭup| viṣāṇā pāśān vi ṣyādhyasmad ya uttamā adhamā vāruṇā ye| duṣvapnyaṃ duritaṃ ni ṣvāsmadatha gacchema sukṛtasya lokam

हिन्दी अर्थ

कां०६। गनु° १३। सु° १२५ बथववेद-भाष्यं २२५ हिरण्यः सुवणं भस्म । यह् रीगो का विनाश करके शरीरकौ नीरतुग करती है, नीरोगता ही पवित्रता है । शारीदिक नीरोगता से शारीरिक तब या बल ब़ताहै + शारोरिक बलैकोवृद्धिसे रागशरीरं परभरक्रमश

English

So may we follow to the end, unbroken, beyond old age, the thread which we have given. This long-drawn thread some follow who have offered in order- ed course oblation to the Fathers:

अध्याय ६

श्लोक 121.2

यद् दारु॑णि ब॒ध्यसे॒ यच्च॒ रज्ज्वां॒ यद् भूम्यां॑ ब॒ध्यसे॒ यच्च॑ वा॒चा।अ॒यं तस्मा॒द् गार्ह॑पत्यो नो अ॒ग्निरुदिन्न॑याति सुकृ॒तस्य॑ लो॒कम्

yad dāruṇi badhyase yacca rajjvāṃ yad bhūmyāṃ badhyase yacca vācā| ayaṃ tasmād gārhapatyo no agnirudinnayāti sukṛtasya lokam

हिन्दी अर्थ

दबाते हैन कंजूषो जादि मानवि दुर्भावनां दबाती ह । तारीत् =अति- तथा उत्तमवीर योद्धाभ्रों वालातु है) (गोभिः) व्नोंसे न वाला सेनापति (जेत्वानि) जेतव्य परकीय संन्यों पर (जयतु) विजय पाए, १. ोम्योपेथी में विशुद्ध हिरण्य का भी प्रयोगं होता ह जिसे फि ति २२६ मथववेद-भाष्य॒कां० ६1 अनु० १३। सु° १२५

English

Some, offering and giving to the friendless, if they can give: herein they find their heaven. 3, Stand on my side and range yourselves in order, ye two! The faithful reach this world of

अध्याय ६

श्लोक 121.3

उद॑गातां॒ भग॑वती वि॒चृतौ॒ नाम॒ तार॑के ।प्रेहामृत॑स्य यच्छतां॒ प्रैतु॑ बद्धक॒मोच॑नम्

udagātāṃ bhagavatī vicṛtau nāma tārake | prehāmṛtasya yacchatāṃ praitu baddhakamocanam

हिन्दी अर्थ

सहायता से होता है । वनस्पति का बीज पृथिवी में भ्रङ्कुरित होता, मे अचिक वेग वालाहोनेसे, प्रौरशत्रर्मके विनाशम सहायकहोनेसे रथ वदयुतवच्रूप है । यज =देवपुजासङ्खतिकरणदानेषु मे सङ्खंति करण वनस्पतियां किन तत्त्वों से पदा होती तथा बदृती है, इसका भी परि समां नं हव्यद्ाति जुषाणो देवं रथ॒ भरति हव्या खरंमाय ॥३॥

English

Svarga. p. a258 When your dressed food hath been bestowed on Agni, to guard it, wife and husband, come together!

अध्याय ६

श्लोक 121.4

वि जि॑हीष्व लो॒कं कृ॑णु ब॒न्धान्मु॑ञ्चासि॒ बद्ध॑कम्।योन्या॑ इव॒ प्रच्यु॑तो॒ गर्भः॑ प॒थः सर्वां॒ अनु॑ क्षिय

vi jihīṣva lokaṃ kṛṇu bandhānmuñcāsi baddhakam| yonyā iva pracyuto garbhaḥ pathaḥ sarvāṃ anu kṣiya

हिन्दी अर्थ

का०। ९ अनु० १३। सु° १२६ अथवेवेद-भाष्य २२७ का (श्रोजः) भोजखूप है, (मरताम्) शत्रुओं के मारने वाले योद्धाभों का मातूनाभिवत् पालन करने वालाहै। (सः) वहतुहेसैन्यरथ ! (नः)्मारे (हव्यदातिम्)जीवनसूपौ ह्यो के दान का (जुषाणः) सेवन करता हअ (हषा = हव्यानि) हमारे जोवनरूपी हव्यो को (प्रति गृभाय) ग्रहण कर, फा मधिपति । प्रतः यह शक्तिशाली है । भोजः उब्ज प्रायवे (तुदादिः). मण करने का साहस नहीं करता । मरुताम् =शत्रभों को मारनेमें कशल

English

Dwelling with zeal I mount in spirit after the lofty sacrifice as it departeth. Agni, may we, beyond decay, invited, in the third heaven, feast and enjoy the banquet.

अध्याय ६

श्लोक 122.1

तृतीयो नाकः।१-५ भृगुः।विश्वकर्मा।त्रिष्टुप्।४-५ जगती।ए॒तं भा॒गं परि॑ ददामि वि॒द्वान् विश्व॑कर्मन् प्रथम॒जा ऋ॒तस्य॑ ।अ॒स्माभि॑र्द॒त्तं ज॒रसः॑ प॒रस्ता॒दच्छि॑न्नं॒ तन्तु॒मनु॒ सं त॑रेम

tṛtīyo nākaḥ| 1-5 bhṛguḥ| viśvakarmā| triṣṭup| 4-5 jagatī| etaṃ bhāgaṃ pari dadāmi vidvān viśvakarman prathamajā ṛtasya | asmābhirdattaṃ jarasaḥ parastādacchinnaṃ tantumanu saṃ tarema

हिन्दी अर्थ

जीवतीति, अनीकमू(उणा० ४।१८, दयानन्द । संन्यरथ संनिकों के जीवन काहेतु है, सेन्यरथों द्वारा मुद्ध करने वाते. रथारोही-संनिक, इरन जीव. रक्षक होता है । वरुणस्य =वरुण है राष्टराधिपति जोक सम्राट के फरतोहै जसे किमाताका गभनाल गभेस्थिशयुका पालन करता है। नाभिः == नह बन्धने । नाभिनाल से शिशु बन्धा रहता है जिस द्वाराकिशिशुको जोवनोय रस मिलता रहता है ।

English

These women here, cleansed, purified, and holy, I place at rest singly, in hands of Brāhmans. May Indra, Marut-girt, grant me the blessing I long for as I pour you this libation. A prayer for happiness in heaven

अध्याय ६

श्लोक 122.2

त॒तं तन्तु॒मन्वेके॑ तरन्ति॒ येषां॑ द॒त्तं पित्र्य॒माय॑नेन ।अ॒ब॒न्ध्वेके॒ दद॑तः प्र॒यच्छ॑न्तो॒ दातुं॒ चेच्छिक्षा॒न्त्स स्व॒र्ग ए॒व

tataṃ tantumanveke taranti yeṣāṃ dattaṃ pitryamāyanena | abandhveke dadataḥ prayacchanto dātuṃ cecchikṣāntsa svarga eva

हिन्दी अर्थ

२. ओजसम् है सिहमे, गौर बल है हाथीमे। भथववेद-भाष्य कां० ६ प्रनु° १३। सु० १२९ साथ तजा (वेवेः) विजिगीषु सेनिकों ॐ (सजूः) साथं मिलकर (शाच्रन्) शुभ्रो को (दूराद् दवीयः) दरूरसे दूर (अपसेध) घकेलदे, भगा दे) अपसेव षिधु गत्याम् (म्वादिः) । सैनिकरथ ओर .संनिक दुन्दुभि सेनिक श्रं है (निरुक्त अ €, पा०२, खण्ड ११,१२) । ललकार, (नः) हमारे लिये या हम में (बलम्, श्रोजः, श्राधाः) बलः प्रौर

English

Ye who are present, unto you I offer this treasure brought to us by Jātavedas Happily will the sacrificer follow: do ye acknowledge him in highest heaven.

अध्याय ६

श्लोक 122.3

अ॒न्वार॑भेथामनु॒संर॑भेथामे॒तं लो॒कं श्र॒द्दधा॑नाः सचन्ते ।यद् वां॑ प॒क्वं परि॑विष्टम॒ग्नौ तस्य॒ गुप्त॑ये दम्पती॒ सं श्र॑येथाम्

anvārabhethāmanusaṃrabhethāmetaṃ lokaṃ śraddadhānāḥ sacante | yad vāṃ pakvaṃ pariviṣṭamagnau tasya guptaye dampatī saṃ śrayethām

हिन्दी अर्थ

दुष्परिणामों को (बाधमानः) हटाता हृश्रा (ग्भिष्टन) तू गजं। (इतः) (वीडयस्व) तु बलकृति या वीरता कर । यद्यपि है तो संन्यढोल का वणेन, परन्तु है यथार्थं वणेन । ढोल गोल का. मुखिया । उसके सेन्यदढोल का ग्ना मानों शत्रुसेना को ललकारनारै, मौर निज सेना में बल ओर भोजस् कास्यापन करनाहै। शत्रु, गजना सुनते, अपगत हो जाते हैँ ओर युद्धजन्य किसी दुष्परिणाम को पदा क्ररने

English

Do ye acknowledge him in highest heaven: ye know the world here present in assembly. In peace will he who sacrifices follow: show him the joy which comes from pious actions.

अध्याय ६

श्लोक 122.4

य॒ज्ञं यन्तं॒ मन॑सा बृ॒हन्त॑म॒न्वारो॑हामि॒ तप॑सा॒ सयो॑निः ।उप॑हूता अग्ने ज॒रसः॑ प॒रस्ता॑त् तृ॒तीये॒ नाके॑ सध॒मादं॑ मदेम

yajñaṃ yantaṃ manasā bṛhantamanvārohāmi tapasā sayoniḥ | upahūtā agne jarasaḥ parastāt tṛtīye nāke sadhamādaṃ madema

हिन्दी अर्थ

२. बल होताहै हाथी मे, मौर;ओजम् होता है ।सह् मे। हि कं० ६ गनु० १२। मु० १२७ अथ्वेद-भाष्य मूं न॑याभी मे जयन्तु केतुमत् दुन्ुभिरवादीतु । हमारे सेनिक (श्रि) प्रभिमुख हुई शत्रूसेनाको (जयन्तु) जीत से। इस विजय को (केतुमत्) मण्डं समेत (दुन्दुभिः) संन्यढोल (वावदोतु) बारवार उद्घौषित करे । (नः) हमारे (नरः) घुहसवार नर (श्रश्वपणः) कहा हे, अश्व मानों उनके पद है । वे मानों वेग से उडकर् , शत्रयेना पर्

English

Gods are the Fathers, and the Fathers Gods. I am the very man I am.

अध्याय ६

श्लोक 122.5

शु॒द्धाः पू॒ता यो॒षितो॑ य॒ज्ञिया॑ इ॒मा ब्र॒ह्मणां॒ हस्ते॑षु प्रपृ॒थक् सा॑दयामि ।यत्का॑म इ॒दम॑भिषि॒ञ्चामि॑ वो॒ऽहमिन्द्रो॑ म॒रुत्वा॒न्त्स ददातु॒ तन्मे॑

śuddhāḥ pūtā yoṣito yajñiyā imā brahmaṇāṃ hasteṣu prapṛthak sādayāmi | yatkāma idamabhiṣiñcāmi vo'hamindro marutvāntsa dadātu tanme

हिन्दी अर्थ

। शब्दों हृजाहै। इन दोनों का सम्बन्ध राजा ऊ साथरै। ये दोनों युद्ध के उपकरण रह, साधनहै। “राजसंयोत् युद्धोपकरणानि । तेषां रथ; प्रथमा- गामी भवति" (निरुक्त ६।२,११)। रथ के परचात् निरुक्त मेँ दुदुभिः, २३० घयरवेवेद-भाष्य का० ९1 अनु" १३। सू० १२७ (पिक्षितम् चन) मांस कोभी (मा उच्छिषः) न शेष रहने दे । । रोगों के स्वरूप सायणा वायं के भाष्य न प्रनुसार कथित कये रह । पिशितम् = मासि रागोकादेहौरूप र वणित ध उनके व 1 9 कथनहुश्राहै। ्रभिप्राय यह कि कयित वनस्पति ओषधि रो ध (5 गक्ष को भी देष न रहने दे, सव श्रंशोका विनाश करदे। अथवा पशि.

English

I cook, I give, I offer up oblation. From what I gave let me not be disparted. O King, take thou thy stand in heaven, there also let that gift be placed. p. a259 Recognize, King, the gift which we have given, and be gracious,

अध्याय ६

श्लोक 123.1

सौमनसम्।१-५ भृगुः।विश्वे देवाः।त्रिष्टुप्, ३ द्विपदा साम्म्यनुष्टुप्, ४ एकावसाना द्विपदा प्राजापत्या भुरिगनुष्टु।ए॒तं स॑धस्थाः॒ परि॑ वो ददामि॒ यं शे॑व॒धिमा॒वहा॑ज्जा॒तवे॑दाः ।अ॒न्वा॒ग॒न्ता यज॑मानः स्व॒स्ति तं स्म॑ जानीत पर॒मे व्योऽमन्

saumanasam| 1-5 bhṛguḥ| viśve devāḥ| triṣṭup, 3 dvipadā sāmmyanuṣṭup, 4 ekāvasānā dvipadā prājāpatyā bhuriganuṣṭu| etaṃ sadhasthāḥ pari vo dadāmi yaṃ śevadhimāvahājjātavedāḥ | anvāgantā yajamānaḥ svasti taṃ sma jānīta parame vyo'man

हिन्दी अर्थ

तम् = पिज्च ्रवयवे (तुदादिः), इन रोगो के किसीभौ प्रवपव को, ग्र॑श को वेदाहं तस्य॑ मेषं चीपुद्रररमिचक्षणम् ॥२॥ (बलास) है बलक्षयकारी रोग खासी तथा श्वास रोग (ते) तेरे ो दो विकार (कक्षे) कोख अर्थात् बाहूमूल ॥ ( ५ ह रर (शु भ दो अण्डोंमे (भ्रपधितौ) ्राश्चित रहते है, (तस्य) उस विकार की (भेषजम्) ओषध को (अहम्, पेद) ग जानता ह, बह है यो अङ्कयो यः कर्यो यो अश्ष्योविसरप॑कः।

English

God! An Omen from the sky

अध्याय ६

श्लोक 123.2

जा॒नी॒त स्मै॑नं पर॒मे व्योऽम॒न् देवाः॒ सध॑स्था वि॒द लो॒कमत्र॑ ।अ॒न्वा॒ग॒न्ता यज॑मानः स्व॒स्तीऽष्टापू॒र्तं स्म॑ कृणुता॒विर॑स्मै

jānīta smainaṃ parame vyo'man devāḥ sadhasthā vida lokamatra | anvāgantā yajamānaḥ svastī'ṣṭāpūrtaṃ sma kṛṇutāvirasmai

हिन्दी अर्थ

का° ६। अनु १३। पू० १२७ शथवंवेद-माष्य २२१ करते ष प्रेरणो (तुदादिः ) । विसल्पकम् = विसपकम्, रलयोरभेदः। दायक तथा कल्याणकारी दिनो वाला (रसात् इति) हो जाय, इसलिये । इस धरूमकेप्रकटदहो जाने के पश्चातु ही शेष रूप सूयं प्रादि प्रकट होते

English

From the high firmament, yea, out of heaven a water-drop with dew on me hath fallen. I, Agni! share the merit of the pious, with vigour, milk, and hymns and sacrifices. If from a tree that fruit hath fallen downward if, aught from air that is vāyu.

अध्याय ६

श्लोक 123.3

देवाः॒ पित॑रः॒ पित॑रो॒ देवाः॑ ।यो अस्मि॒ सो अ॑स्मि

devāḥ pitaraḥ pitaro devāḥ | yo asmi so asmi

हिन्दी अर्थ

के दबानेपरमी प्रकटहो जाता है। अतः यह यौगाम्पासमें प्रङ्खनही। जिस योगाभ्यासी को “धूम प्रकृटहो जाता है मानो उसके लिये भद्र दिन २३२ मयववेद-भाष्य कां० ६1 अनु° १३17. १२८ ॥ (भद्राहम् ) सुखदायक प्रौर कल्याणकारी दिन हौ (नः) हमारे लिये ' लिये (सायम्) सायकालमे । (भद्राम्) मद्रदिन हो (नः) हमारे लिये ॥ यो नो भद्रादषकरः सायं नक्तपथो द्विव ।

English

Where it hath touched my body or my garment, thence may the Waters drive Destruction backward.

अध्याय ६

श्लोक 123.4

स प॑चामि॒ स द॑दामि॒ ।स य॑जे॒ स द॒त्तान्मा यू॑षम्

sa pacāmi sa dadāmi | sa yaje sa dattānmā yūṣam

हिन्दी अर्थ

(नक्षत्रराज) टे खद्योतो के राजा (शकवृम) शक्तिशानी घूम ! (यः) से सुखदायक तथा कल्पाणकारी दिन, है शकघूम ! तु हमरे लिये कर् । आष्या- , आध्यात्मिक चन्द्रमा है शशी" ° उप० २।११) । के लि भाकृतिक शक्तियों द्वारा सुल प्रदान करा. तकता है (योग ३।४४; ४८ ४६)।

English

It is a fragrant ointment, happy fortune, sheen all of gold, yea, purified from blemish. Spread over us are all purifications. Death and Malignity shall not subdue us. Glorification of a war-chariot

अध्याय ६

श्लोक 123.5

नाके॑ राज॑न् प्रति॑ तिष्ठ॒ तत्रै॒तत् प्रति॑ तिष्ठतु ।वि॒द्धि पू॒र्तस्य॑ नो राज॒न्त्स दे॑व सु॒मना॑ भव

nāke rājan prati tiṣṭha tatraitat prati tiṣṭhatu | viddhi pūrtasya no rājantsa deva sumanā bhava

हिन्दी अर्थ

कां० ६। अनु० १३। सू° १२६ अयववेद-भाष्य २३३ जिस तूने (नः) हमारे लिये (सायम्, नक्तम्, अथो दिवा) सायंकाल, रात्री २३४ अथववेद-भाष्य का०६। अनु १३० । सू० १३० होते है । शौशम बहुमूल्य वृक्ष होता है। श्रतः शीकशमरूपी रश्व की है, (तेन) उसद्रा(मा) मभ(ममिनप्)एेद्वयं वाला (कृण्)कर,(अरातयः

English

Mayst thou, O Tree, be firm indeed in body, our friend that furthers us, a goodly hero. Put forth thy strength, compact with thongs of leather, and let thy rider win all spoils of

अध्याय ६

श्लोक 124.1

निर्ऋत्यपस्तरणम्।१-३ अथर्वा।दिव्या आपः।त्रिष्टुप्।दि॒वो नु मां बृ॑ह॒तो अ॒न्तरि॑क्षाद॒पां स्तो॒को अ॒भ्यऽपप्तद् रसे॑न ।समि॑न्द्रि॒येण॒ पय॑सा॒हम॑ग्ने॒ छन्दो॑भिर्य॒ज्ञैः सु॒कृतां॑ कृ॒तेन॑

nirṛtyapastaraṇam| 1-3 atharvā| divyā āpaḥ| triṣṭup| divo nu māṃ bṛhato antarikṣādapāṃ stoko abhya'paptad rasena | samindriyeṇa payasāhamagne chandobhiryajñaiḥ sukṛtāṃ kṛtena

हिन्दी अर्थ

रेरे, तथा (यः) जो (पुनः सरः) (त सरण करता हूना प्राताहै, जो (वृक्षेषु) वृक्षो मे (आहितः) स्थित होता है, (तेन) उस द्वारा (मा). मृं (मगिनम्) रवय वाला (कृणु) कर, (अप द्रान्तु अरातयः) अथे पूवं यह मर्ह्पी मगदहै, नानाविध फल । ये रेश्वयरूष ह, ओर बार- वार सरण करते हए प्रतिवषं वृक्षों पर भतिदहैँ। वंके पदचात् भ्रातेरहै, अतः इनके आने कौ गतिको सरणकरनाकहाहै। सरण है शनैःशनैः प्राणने +“ घा” धारणपोषणयोः जिस द्वारा प्राणकाश्रीर मेघारण कां० ६। मअनु० १३। मू० १३० प्रयवंवेद-माष्य २३५

English

battle. Its mighty strength was borrowed from the heaven and earth: its conquering force was brought from sovrans of the wood.

अध्याय ६

श्लोक 124.2

यदि॑ वृ॒क्षाद॒भ्यप॑प्त॒त् फलं॒ तद् यद्य॒न्तरि॑क्षा॒त् स उ॑ वा॒युरे॒व।यत्रास्पृ॑क्षत् त॒न्वो॒३यच्च॒ वास॑स॒ आपो॑ नुदन्तु॒ निरृ॑तिं परा॒चैः

yadi vṛkṣādabhyapaptat phalaṃ tad yadyantarikṣāt sa u vāyureva| yatrāspṛkṣat tanvo3yacca vāsasa āpo nudantu nirṛtiṃ parācaiḥ

हिन्दी अर्थ

देवाः प्रहिणुत स्मरमपो मामनु शोचतु ॥१॥ शरीर रथ पय विजय पाने वालोको सम्बन्धिनी, (अप्सरसाम्) सूपवती के कारण पति रुष्ट होकर गृह ल्यागकर चला गयादहै, तव पर्नीके उदुगारोंका वणेन इन तीन सूक्तं मे कियागप्राहै। वेदिक पत्तियां अपने कारणवश् पत्ति वियौगमें पत्तिके वापिस जनेकी कामना करतो रहती ह! दूपवती होती हूरईदमभी पर पुरुष को कामना नहीं करती, देवाः प्रहिणुत स्मरमसौ मामनु शोचतु ॥२॥

English

Honour with sacrifice the Car like Indra’s bolt, the Car girt round with straps, the vigour of the floods.

अध्याय ६

श्लोक 124.3

अ॒भ्यञ्ज॑नं सुर॒भि सा समृ॑द्धि॒र्हिर॑ण्यं॒ वर्च॒स्तदु॑ पू॒त्रिम॑मे॒व।सर्वा॑ प॒वित्रा॒ वित॒ताध्य॒स्मत् तन्मा ता॑री॒न्निरृ॑ति॒र्मो अरा॑तिः

abhyañjanaṃ surabhi sā samṛddhirhiraṇyaṃ varcastadu pūtrimameva| sarvā pavitrā vitatādhyasmat tanmā tārīnnirṛtirmo arātiḥ

हिन्दी अर्थ

(असौ) ताकि वह् (माम् भनु) मेरा भ्रनुस्मरण करके (शोचतु) श'का- १ सूक्तम देवाः = मतः, मानसून वाग्रुएं आदि (सूक्त १३०।४) । कवि वियोगी पति-पत्नी को ग्पाकरुलित कर उत में सांमनस्य पैदाकरदेतेर्है। देवाः का २३६ मधर्ववेद-माप्य का० ९। अन्° १३। सू० १३

English

Thou bolt of Indra, vanguard of the Maruts, close knit to Varuna and child of Mitra, As such, accepting gifts which here we offer, receive, O godlike

अध्याय ६

श्लोक 125.1

वीरस्य रथः।१-३ अथर्वा।वनस्पतिः।त्रिष्टुप्, २ जगती।वन॑स्पते वी॒ड्वऽङ्गो॒ हि भू॒या अ॒स्मत्स॑खा प्र॒तर॑णः सु॒वीरः॑ ।गोभिः॒ संन॑द्धो असि वी॒डय॑स्वास्था॒ता ते॑ जयतु॒ जेत्वा॑नि

vīrasya rathaḥ| 1-3 atharvā| vanaspatiḥ| triṣṭup, 2 jagatī| vanaspate vīḍva'ṅgo hi bhūyā asmatsakhā prataraṇaḥ suvīraḥ | gobhiḥ saṃnaddho asi vīḍayasvāsthātā te jayatu jetvāni

हिन्दी अर्थ

देवाः महिणत स्मरमसौ मामनु शोचतु ॥२॥ मन्तमेंहै। पत्नी नहीं चाहती कि स्मर का उद्रेक उसमे हौ ताकि वह पति कास्मरण करे। इसमे वह॒ अपनी पराजय समती है। इसलिये वह (उन्मादय) पति को उन्मत्त कर, ताकि (असौ) वह पति (माम्) मेरा (भ्रनु) अनुस्मरण करके (शोचतु) शोकाग्रस्त हो जाय । कविसम्प्रदायानुसार वर्षा ऋतु स्मरोटीपिका है । अतः विरहिता पत्नी मरुतः को सम्बोधित करती है, पति के वापिस लौट श्राने के लिए।

English

Chariot, these oblations. Glorification of the war drum

अध्याय ६

श्लोक 125.2

दि॒वस्पृ॑थि॒व्याः पर्योज॒ उद्भृ॑तं॒ वन॒स्पति॑भ्यः॒ पर्याभृ॑तं॒ सहः॑ ।अ॒पामो॒ज्मानं॒ परि॒ गोभि॒रावृ॑त॒मिन्द्र॑स्य॒ वज्रं॑ ह॒विषा॒ रथं॑ यज

divaspṛthivyāḥ paryoja udbhṛtaṃ vanaspatibhyaḥ paryābhṛtaṃ sahaḥ | apāmojmānaṃ pari gobhirāvṛtamindrasya vajraṃ haviṣā rathaṃ yaja

हिन्दी अर्थ

देवाः प्र हिणुत स्मरमसौ मामनु शोचतु ॥१५ (शीषतः) है पति ! मेरे सिरमे (आध्यः) चिन्ताओं को (नि का ६। श्रनु० १३ सु० १३२ अथवेवेद-भाष्य २३७ के ्रधोमाग में (नि) नितरां चिन्ताएं पराप्त कराती हूं । (देवाः शोचतु)

English

Send forth thy voice aloud through earth and heaven, and let the world in all its breadth regard thee. O Drum, accordant with the Gods and Indra, drive thou afar, yea, very far, our foemen.

अध्याय ६

श्लोक 125.3

इन्द्र॒स्यौजो॑ म॒रुता॒मनी॑कं मि॒त्रस्य॒ गर्भो॒ वरु॑णस्य॒ नाभिः॑ ।स इ॒मां नो॑ ह॒व्यदा॑तिं जुषा॒णो देव॑ रथ॒ प्रति॑ ह॒व्या गृभाय

indrasyaujo marutāmanīkaṃ mitrasya garbho varuṇasya nābhiḥ | sa imāṃ no havyadātiṃ juṣāṇo deva ratha prati havyā gṛbhāya

हिन्दी अर्थ

स्मरोदीषन की याचनाद्वारा स्मरोद्रेक कर पति को वापिसभाजाने मे बाधित करतो है । तिरामि=“तिरः मत इति प्राप्तस्य" (निरुक्त देवाः प्रहिणुत स्म्रमसो मामनु शोचतु ॥२॥ कुल, मति वालाहोजा, ग्राकूते) है पतिनिष्ठ संकल्प (इदम्) इस (यत्) जो (त्रियोजनम्) तीन योजनो मे परिमित दुर देश में (धावसि) तु' चला गया है, (पञ्च योजनम्) या पांच योजनो में परिमित दूरदेश मे, मथवा (आरिवनम्) भ्रव घ्रारा प्रापणीय दुर देशमेतु चला गयारहै, तो भी (ततः) वहं से (त्वम्) है पति ! तुः (पृनःआ श्रधसि) फिर वापस

English

Thunder out strength and fill us full of vigour, yea, thunder forth and drive away misfortunes. Drive hence, O Drum, drive thou away mischances. Thou art the fist of Indra, show thy

अध्याय ६

श्लोक 126.1

दुन्दुभिः।१-३ अथर्वा।दुन्दुभिः।भुरिक् त्रिष्टुप्, ३ पुरोबृहतीगर्भा त्रिष्टुप्।उप॑ श्वासय पृथि॒वीमु॒त द्यां पु॑रु॒त्रा ते॑ वन्वतां॒ विष्ठि॑तं जग॑त्।स दु॑न्दुभे स॒जूरिन्द्रे॑ण दे॒वैर्दू॒राद् दवी॑यो॒ अप॑ सेध॒ शत्रू॑न्

dundubhiḥ| 1-3 atharvā| dundubhiḥ| bhurik triṣṭup, 3 purobṛhatīgarbhā triṣṭup| upa śvāsaya pṛthivīmuta dyāṃ purutrā te vanvatāṃ viṣṭhitaṃ jagat| sa dundubhe sajūrindreṇa devairdūrād davīyo apa sedha śatrūn

हिन्दी अर्थ

पञ्च योजन == ४० या ४५ मील । धावसि चला गया हैया दौड़ गयाहै। हारा (तपासि) मँ पत्नी परन्तापक्रारो करती हूं यह् जन साधारण जल नहीं, श्रपितु शारीरिक जल है,--रक्तं रूपी जन। वह निज संतापके श्लासनके लिये पत्नी के पास लौट अए। वरुणा रक्त रूपौ जल कामी प्रधिपतिहै, मौर विरह मे इस जल द्वारा संतापितत करना

English

firmness. Conquer those yonder and let these be victors. Let the Drum speak aloud as battle’s signal. Let our men, winged with horses, fly together. Let our car- warriors, Indra! be triumphant.

अध्याय ६

श्लोक 126.2

आ क्र॑न्दय॒ बल॒मोजो॑ न॒ आ धा॑ अ॒भि ष्ट॑न दुरि॒ता बाध॑मानः ।अप॑ सेध दुन्दुभे दु॒च्छुना॑मि॒त इन्द्र॑स्य मु॒ष्टिर॑सि वी॒डय॑स्व

ā krandaya balamojo na ā dhā abhi ṣṭana duritā bādhamānaḥ | apa sedha dundubhe ducchunāmita indrasya muṣṭirasi vīḍayasva

हिन्दी अर्थ

गृहस्थ धमं को श्रङ्गीभुत स्वाभाविक भावना है 1. ततं तपामि वरूणस्य धर्मणा ॥२॥ (विवे देवाः) संसार के प्रन्य॒“मादक-तत्व' जो कि जीवन के घटक (दिवादिः) । ये हैव णक्तियां है । जिसका प्रतिधादन कोडा आदि दाय + दे । शभ्सु अन्तः" दारा शारीरिक जल भी अभिप्रेत हो सकते रहै । यथा- जधरतरेद-माष्पर कार ६। बनु° १३। भू, १३२.

English

A charm to banish various diseases Of abscess, of decline, of inflammation of the eyes. O Plant,

अध्याय ६

श्लोक 126.3

प्रामूं ज॑या॒भी॒३मे ज॑यन्तु केतु॒मद् दु॑न्दुभिर्वा॑वदीतु ।समश्व॑पर्णाः पतन्तु नो॒ नरो॒ऽस्माक॑मिन्द्र र॒थिनो॑ जयन्तु

prāmūṃ jayābhī3me jayantu ketumad dundubhirvāvadītu | samaśvaparṇāḥ patantu no naro'smākamindra rathino jayantu

हिन्दी अर्थ

का ६।.श्रनु° १३।. सूर १३२ अयवंवेद-भाष्य ---- जीवात्मा कौ चेतनता शरीर को चेत्न सा बनाए रखती है, जीवा. त्माजव शरोरका त्याग कर देताहैतो क्षरीर में चेत्तनता भी नहीं रहती । शरीर को चेतनता की सत्ता, शरीरम स्मर की भी सत्ता होती है । शेष पूर्ववत मन्त्र (१) सञ्चार करती हँ । शेषशपूववत् मन्द्र()। प्राण है बाह्रकीवायु का नासिक द्वारा फफ ओर शरीर में प्रवेश। तयाप्रपानदहैशशरीर से उसका श्रपगत होना। प्रपानद्वारा शरीरके मल के निकल जाने से शरीर की शुद्धि होती रहती.है। इस द्ष्टिसे गुदादवाराः वायु भौ ग्रपगत हुई्पेटको शुद्ध करतीहै १ १८ इ8 वायु कोभी अपान

English

Of penetrating pain, thou Herb, let not a particle remain. Those nerves of thine, Consumption! which stand closely hidden in thy groin 97

अध्याय ६

श्लोक 127.1

यक्ष्मनाशनम्।१-३ भृग्वङ्गिराः।यक्ष्मनाशनम्, वनस्पतिः।अनुष्टुप्, ३ त्र्यवसाना षट्-पदा जगती।वि॒द्र॒धस्य॑ ब॒लास॑स्य॒ लोहि॑तस्य वनस्पते ।वि॒सल्प॑कस्योषधे॒ मोच्छि॑षः पिशि॒तं च॒न

yakṣmanāśanam| 1-3 bhṛgvaṅgirāḥ| yakṣmanāśanam, vanaspatiḥ| anuṣṭup, 3 tryavasānā ṣaṭ-padā jagatī| vidradhasya balāsasya lohitasya vanaspate | visalpakasyoṣadhe mocchiṣaḥ piśitaṃ cana

हिन्दी अर्थ

मुक्त १३०. १३१, १३२ मँ किसो ठेतिह्।सिक वृत्त का कथन नही, स्थित हो जाती है, उसी का कथन इन सूक्तोमे हुजाहै। २४० श्रथववेद-माष्य कां ६। अनु° १३ । सु° १३१. (यः देवः) जिस प्राचार्य देवने (इमाम् मेखलाम्) इस मेखला को (आबबन्ध) हमसे पूवेकेब्रह्मतरारियों को बान्धा, (यः) जिसने (सं ननाह) वतमान में सन्द किया, तयग्रार किया, भौर (यः) जिसने (उ)

English

I know the balm for that disease: the magic cure is Sipudru. We draw from thee piercing pain that penetrates and racks thy limbs,

अध्याय ६

श्लोक 127.2

यौ ते॑ बलास॒ तिष्ठ॑तः॒ कक्षे॑ मु॒ष्कावप॑श्रितौ ।वेदा॒हं तस्य॑ भेष॒जं ची॒पुद्रु॑रभि॒चक्ष॑णम्

yau te balāsa tiṣṭhataḥ kakṣe muṣkāvapaśritau | vedāhaṃ tasya bheṣajaṃ cīpudrurabhicakṣaṇam

हिन्दी अर्थ

ही (नः) हमारे साय (युयोज) उसे संयुक्त किया; (यस्य) गौरजिस (इच्छात्) चाहे, (सःउ) वहं दही (नः) हमें (विमुञ्चात्) मेखलासे कौशिक सूत्र ५७।१ मौ उपनयन कर्मभे सूक्तका विनियोग किथाहै। स मेखले ; 1 ( प्रभिहुतः) ब्रह्माचारी के प्रति गर षु 9 (अहूता ) । ।

English

That pierces ears, that pierces eyes, the abscess, and the heart’s disease. Downward and far away from thee we banish that unknown. decline. A charm for fair weather

अध्याय ६

श्लोक 127.3

यो अङ्ग्यो॒ यः कर्ण्यो॒ यो अ॒क्ष्योर्वि॒सल्प॑कः ।वि वृ॑हामो वि॒सल्प॑कं विद्र॒धं हृ॑दयाम॒यम्।परा॒ तमज्ञा॑तं॒ यक्ष्म॑मध॒राञ्चं॑ सुवामसि

yo aṅgyo yaḥ karṇyo yo akṣyorvisalpakaḥ | vi vṛhāmo visalpakaṃ vidradhaṃ hṛdayāmayam| parā tamajñātaṃ yakṣmamadharāñcaṃ suvāmasi

हिन्दी अर्थ

तू (मेवलं) है मेखना । (व्रीरघ्नी) वौरोको प्राप्त होने वाली (भष) हो । ¦ का०६। अनु० १३। सू° १३३- अथवेपेद-भाष्य २४१ प्याय करते रहै, इसमें वाधक हैब्रह्मचयेका विप्लुत होना। मेखला का म हं, (अहम्) वह॒ र्म (यमाय) यम-नियमों के पालन के लिये, (भूतात्) पयदशंक मानता है। मृत्यु है परमेश्वर, यया “स एव म॒युः

English

What time the heavenly bodies chose the Weather Prophet as their King, They brought him favouring weather, and, Let this be his do- main, they said.

अध्याय ६

श्लोक 128.1

राजा १-४ अङ्गिराः।सोमः, शकधूमः।अनुष्टुप्।श॒क॒धूमं॒ नक्ष॑त्राणि॒ यद् राजा॑न॒मकु॑र्वत ।भ॒द्रा॒हम॑स्मै॒ प्राय॑च्छन्नि॒दं रा॒ष्ट्रमसा॒दिति॑

rājā 1-4 aṅgirāḥ| somaḥ, śakadhūmaḥ| anuṣṭup| śakadhūmaṃ nakṣatrāṇi yad rājānamakurvata | bhadrāhamasmai prāyacchannidaṃ rāṣṭramasāditi

हिन्दी अर्थ

१. देखो धचिकेता ओर मृत्यु का संवाद ( कठ-उपनिषद् ) । रेभ्रे भ्रथवेवेद-माष्य कां० ६। श्रनु° १३. सूर १३३ इसलिये मन्त्र मे “पुरषम्” पद पठित है । श्रद्धाय दृदिता तपसोऽधिं जाता स्वस छ्ौणां भूटदरता वभूव । (बभूव) हुई है । (सा) वहतु (मेखले) है मेखला (नः) हमारे लिये या हम मेँ (मतिम्) मननशक्ति का (ब्राघहि) ञाधान कर, (मेवाम्) मेधा

English

May we have weather fair at noon, May we have weather fair at eve, Fair weather when the morning breaks, fair weather when the night is come. Fair weather to the day and night, and to the stars and sun and moon.

अध्याय ६

श्लोक 128.2

भ॒द्रा॒हं नो॑ म॒ध्यंदि॑ने भद्रा॒हं सा॒यम॑स्तु नः ।भ॒द्रा॒हं नो॒ अह्नां॑ प्रा॒ता रात्री॑ भद्रा॒हम॑स्तु नः

bhadrāhaṃ no madhyaṃdine bhadrāhaṃ sāyamastu naḥ | bhadrāhaṃ no ahnāṃ prātā rātrī bhadrāhamastu naḥ

हिन्दी अर्थ

ग्रात्मिक बल का (नः)हमारे लिये याहममें (षेहि) आधान कर। मेखला मानो दुहिता के सच्श ब्रहाचारियों की कामनाश्रों को पूरं कर सकती है; दुहिता नदह प्रपूरणे (श्रदादिः)। मेखला ऋषियों कौ स्वसा ऋषियों को श्नोरसरण करने वासी । भूतकृताम् “मध्यपदलोपी समास", (याम् त्वा) जिस तुको (पूते) पूवेकाल के, (भूतकृतः) सत्स्वरूप परमेडवर द्वारा निदिष्ट कतव्य का पालन करने वाले (षयः) ऋषियों

English

Give favourable weather thou, King, Weather Prophet, unto us. Be worship ever paid to thee, O Weather Prophet, King of

अध्याय ६

श्लोक 128.3

अ॒हो॒रा॒त्राभ्यां॒ नक्ष॑त्रेभ्यः सूर्याचन्द्र॒मसा॑भ्याम्।भ॒द्रा॒हम॒स्मभ्यं॑ राज॒न्छक॑धूम॒ त्वं कृ॑धि

ahorātrābhyāṃ nakṣatrebhyaḥ sūryācandramasābhyām| bhadrāhamasmabhyaṃ rājanchakadhūma tvaṃ kṛdhi

हिन्दी अर्थ

का० ६। अनु० १३। सू० १३४ भयवेवेद-भाष्य २४३ (मेखले) दे मेवल। ! (माम्) मुभे (परिष्वजस्व) कटिमागके चारों ओर् भरालिद्कित कर, (दोर्वाधुल्वाय) मेरी दीधे श्रायु के लिये। पूरके ऋषयः --पूर्वं सृष्टि के क्षि, या मुभे पूवंकालः के ऋषि,। सूचित करतो है । वरह्मवधंसे शरीर बलवान् ओर नीरोग होकर दीर्घायु वाला होत! है । मेखला = तडाग, कटिबन्वं । ।

English

Star s, Who gavest us oo weather in the evening and by night and day! A charm for success and happiness

अध्याय ६

श्लोक 128.4

यो नो॑ भद्रा॒हमक॑रः सा॒यं नक्त॒मथो॒ दिवा॑ ।तस्मै॑ ते नक्षत्रराज॒ शक॑धूम॒ सदा॒ नमः॑

yo no bhadrāhamakaraḥ sāyaṃ naktamatho divā | tasmai te nakṣatrarāja śakadhūma sadā namaḥ

हिन्दी अर्थ

वासनाओं से वविध्यत, ग्रत एव विषय जाल वाली प्रशुद्धि, विनातपके चित्त-भिश्र नहीं डो सक्ती, इसलिये.तप का कथनत कियादहै। वहु तप वहीं तकं करना चाहिए जहां तक कि चित्त की प्रसन्नता बनी रहे ।'", इशारे द्वायाभो पिज प्रसिपरायको प्रकाशितन करना।. प्राकरारमोौन = (ग्रीवाः) श्रु की ग्रीवाकी अस्थियों को (शृणोतु ३: ,०९ मौर रक्तस्नात नादो को (प्र शृणातु) काट है, वु) ५ , (उष्णिहः) नाम (निधं ३।१०) 1 चाहिए । ऋतम् सत्य-

English

With fortune of the Sisu tree—with Indra as my friend to aid I give myself a happy fate. Fly and begone, Malignities!

अध्याय ६

श्लोक 129.1

भगप्राप्तिः १-३ अथर्वाङ्गिराः।भगः।अनुष्टुप्।भगे॑न मा शांश॒पेन॑ सा॒कमिन्द्रे॑ण मे॒दिना॑ ।कृ॒णोमि॑ भ॒गिनं॒ माप॑ द्रा॒न्त्वरा॑तयः

bhagaprāptiḥ 1-3 atharvāṅgirāḥ| bhagaḥ| anuṣṭup| bhagena mā śāṃśapena sākamindreṇa medinā | kṛṇomi bhaginaṃ māpa drāntvarātayaḥ

हिन्दी अर्थ

नीच यह शत्र राजा (गूढः) पृथिवी से ठका हमा, (उत्) ऊपर (सुपतु मा) सपण न करे) (वचं । माराहुग्रा (भ्रव) पृथिवी के नीचे (शयाम् त (न (हतः) (यः) जो (जिनाति) हमारी वयोहानि करता है छ श्र (इत्) ही या अवदय (जहि) मार । (वच) है व (वम्) त् (जिनतः) वयोहानि करने वाले के (सीमन्तम्) सिरके मध्यदेश को ९ ञ्चम्) नौचे की मोर शुका कर (भनु पातय) तदनुसार गिरा दे, (ष का० ६। अनु० १३। सु० १३५ भथवेवेड-भाष्य २४५

English

That splendour and felicity wherewith thou hast excelled the trees Give me therewith a happy fate. Fly and begone, Malignities Blind fortune, with reverted leaves that is deposited in trees—

अध्याय ६

श्लोक 129.2

येन॑ वृ॒क्षाँ अ॒भ्यभ॑वो॒ भगे॑न॒ वर्च॑सा स॒ह।तेन॑ मा भ॒गिनं॑ कृ॒ण्वप॑ द्रा॒न्त्वरा॑तयः

yena vṛkṣā~ abhyabhavo bhagena varcasā saha| tena mā bhaginaṃ kṛṇvapa drāntvarātayaḥ

हिन्दी अर्थ

मन्घ मेँ पुरुषविधि में शलु का वर्णन हुमा है, पुरुषविध क। अभिप्राय आरोपित करना । इस विधि को वेदों में प्रायः अपनायाहै। तथा देखो नहीं चो सकते, वे काल्पनिक ही हँ । इसी प्रकार काम, क्रोध, मोह रादि नाएं । इन वासनाओं को पीने का श्रभिप्राय है.इन वासनाभों का भो नियन््रण करना्नष्ट करना। एन वासनाश्रों के नष्टहौो जाने पर इन वासनाओं के विषय (गीता) । निराहारस्य इन्द्रियों द्वारा विषयों का सेवन न करने वाले के

English

Give me therewith a happy fate. Fly and begone, Malignities. A woman’s love-charm

अध्याय ६

श्लोक 129.3

यो अ॒न्धो यः पु॑नःस॒रो भगो॑ वृ॒क्षेष्वाहि॑तः ।तेन॑ मा भ॒गिनं॑ कृ॒ण्वप॑ द्रा॒न्त्वरा॑तयः

yo andho yaḥ punaḥsaro bhago vṛkṣeṣvāhitaḥ | tena mā bhaginaṃ kṛṇvapa drāntvarātayaḥ

हिन्दी अर्थ

रहती हँ, जिन का विनिवतंन केवल आध्यात्मिक उपायों द्वागाही होता है । स पिबः पिवतेः कतरि ““शः'--पिबादेशः । २४४ अयवेवेद-भाष्य का० ६। अनु° १३। सू० १३४ जीर रक्तस्नात नाडियोंको (प्र शृणातु) काट दे, (इव) जेते (शचीपतिः) वणन, श्रधवा कवितां वका ही वर्णन जानन) चाहिए । ऋतम् सत्य-

English

This is the Apsarases’ love-spell, the conquering, resistless ones’. Send the spell forth, ye Deities! Let him consume with love of me. I pray, may he remember me, think of me, loving and beloved.

अध्याय ६

श्लोक 130.1

स्मरः।१-४ अथर्वाङ्गिराः।स्मरः।अनुष्टुप्, १ विराट् पुरस्ताद्बृहती।र॒थ॒जितां॑ राथजिते॒यीना॑मप्स॒रसा॑म॒यं स्म॒रः ।देवाः॒ प्र हि॑णुत स्म॒रम॒सौ मामनु॑ शोचतु

smaraḥ| 1-4 atharvāṅgirāḥ| smaraḥ| anuṣṭup, 1 virāṭ purastādbṛhatī| rathajitāṃ rāthajiteyīnāmapsarasāmayaṃ smaraḥ | devāḥ pra hiṇuta smaramasau māmanu śocatu

हिन्दी अर्थ

नीच यह शत्र राजा (गूढः) पृथिवी से ठका हुभ्र, (पृथिव्याः) पृथिवी से (उत्) उपर (सूपत् मा) सपंण न करे । (व्रण) व्दारा (हतः) माराहृम्रा (भ्रव) पृथिवी के नीचे (शयाम् शेताम्) सोया पड़े । (यः) जो (जिनाति) हमारी वयोहानि करता है (तम्) उसे (प्रन्विच्च) त द्ड, (यः) जो (जिनाति) हृमारो वयोहानि करता है (तम्) उसको (इत्) ही या अवश्य (जहि) मार । (वच) है वच्रधारी ! (वम्) तु ञ्चम्) नीचे की मोर रुका कर (भ्रनु पातय) तदनुसारगिरादे। का०६। अनु० १३। सू० १३५ भथववेद-भाष्य २५५ मन्ध में पुरुषविषि में शतु का वणन हृभा है, पुरुषविषि का अभिप्राय

English

Send forth the spell, ye Deities! Let him consume with love of me. That he may think of me, that I may never, never think of him,.

अध्याय ६

श्लोक 130.2

अ॒सौ मे॑ स्मरता॒दिति॑ प्रि॒यो मे॑ स्मरता॒दिति॑ ।देवाः॒ प्र हि॑णुत स्म॒रम॒सौ मामनु॑ शोचतु

asau me smaratāditi priyo me smaratāditi | devāḥ pra hiṇuta smaramasau māmanu śocatu

हिन्दी अर्थ

भारोपितत करना । इस विधि को वेदों में प्रायः अपनाया है। तथा देखो नहीं हो सकते, वे काल्पनिक ही हं । इस प्रकार काम, क्रोध, मोह श्रादि हम (ग्रमुम्) उसे मी (सं पिबामः) सम्यक् रूपमे या मिलकर पी जाते नाएं । इन वासनाओं को पीने का अभिप्राय है.इन वासनाभों का भो नियन्त्रण करना,नष्ट करना! इन वासनभ्रों के नष्ट हो जाने पर इन वासनाओं के विषय

English

Send forth the spell, ye Deities! Let him consume with love of me. Madden him, Maruts, madden him. Madden him, madden him, O Air.

अध्याय ६

श्लोक 130.3

यथा॒ मम॒ स्मरा॑द॒सौ नामुष्या॒हं क॒दा च॒न।देवाः॒ प्र हि॑णुत स्म॒रम॒सौ मामनु॑ शोचतु

yathā mama smarādasau nāmuṣyāhaṃ kadā cana| devāḥ pra hiṇuta smaramasau māmanu śocatu

हिन्दी अर्थ

(गीता) । निराहारस्य = इन्द्रियों द्वारा विषयों का सेवन न करने वाले के रहती है, जिन का विनिवतंन केवल आध्यात्मिक उपायों दइागही होता है । स पिबः पिवतेः कतरि “शः -पिबादेशः । ९४६ अथवदेद-भाष्य काण ६। मनु° १३ । सू° १३६ कां० ९: अनु° १३) सू० १३७ अथवत्रेद-भाष्य 2४७ यद गिरति तं लिगाधि तय रंगिरं “ „4 (1 कथनरोताङ, श्रोषधिके नामं का निद नीं दौता। गणघर्मो के नुसार ए ५ , . त्रोपनिकाज्ञान करनाहोलाह । प्रथा "देवी" रा श्रोषधिके नाम

English

Madden him, Agni, madden him. Let him consume with love of me. A woman’s love-charm

अध्याय ६

श्लोक 130.4

उन्मा॑दयत मरुत॒ उद॑न्तरिक्ष मादय ।अग्न॒ उन्मा॑दया॒ त्वम॒सौ मामनु॑ शोचतु

unmādayata maruta udantarikṣa mādaya | agna unmādayā tvamasau māmanu śocatu

हिन्दी अर्थ

ख्पमेंया मिलकर निगलजतेदहैँ। , , . अदनामि, पिवामि, जिरामिद्धारा मोजनकेखाने के प्रकारं का वर्णन हुमा है । “श्रह्नामि'” खानाहै चबाना प्रौर “गिरासि' है गले. द्वारा पेट ये ग्रन्न पहुंचाता, ओर इमफे लिये ““पित्रामि” है जल पौना। कामादि को खाना, पीना, निगलना, निरुक्त प्रदशित ''पौरुषविधि"" दवारा उपपन्न । यमते केशोंऽवुप्यते समूलो यच वृश्चत ! (ते) तेरा (यः) जो (केशः) केश, (श्रव पदति) टूट कर नोचे गिर जाताहै, (यःच) ओौरजो (समूलः) जड़ समेत (वुदचते) कट जाता है, (इदम्) इसे गौर (तम्) उसे (विदवभेषज्या) केशां केस रोगोंकी

English

Down upon thee, from head to foot, I draw the pangs of long- ing love. Send forth the charm, ye Deities! Let him consume with love of me. Assent to this, O Heavenly Grace! Celestial Purpose, guide it well!

अध्याय ६

श्लोक 131.1

स्मरः।१-३ अथर्वाङ्गिराः।स्मरः।अनुष्टुप्।नि शी॑र्ष॒तो नि प॑त्त॒त आ॒ध्यो॒३ नि ति॑रामि ते ।देवाः प्र हि॑णुत स्म॒रम॒सौ मामनु॑ शोचतु

smaraḥ| 1-3 atharvāṅgirāḥ| smaraḥ| anuṣṭup| ni śīrṣato ni pattata ādhyo3 ni tirāmi te | devāḥ pra hiṇuta smaramasau māmanu śocatu

हिन्दी अर्थ

चायं नैकहाहै कि “शान्तौषवीं" 'लमोम्'" दा । "्राभि।पजञ्चासि' इरा “विश्वभेषजी"" वीरुध के रस द्वारा केशों को सींचने का कथन हुजादटै (१-३) । मथर्वा (केशवधनकामः) वौतहव्थः । मनुष्टुम् 8 ध (केशवधनीम्) केशो कौ बद्ने वली (याम्) जिष ्रोषधि कौ २ एकावसाना द्विपदा सस्नी ब्रहती तास्वा नितिन केभ्यो दृंहणाय खनामसि ॥९॥

English

Send forth the charm, ye Deities! Let him consume with love of me. If thou shouldst run three leagues away, five leagues, a horse’s daily stage,

अध्याय ६

श्लोक 131.2

अनु॑म॒तेऽन्वि॒दं म॑न्य॒स्वाकू॑ते॒ समि॒दं नमः॑ ।देवाः॒ प्र हि॑णुत स्म॒रम॒सौ मामनु॑ शोचतु

anumate'nvidaṃ manyasvākūte samidaṃ namaḥ | devāḥ pra hiṇuta smaramasau māmanu śocatu

हिन्दी अर्थ

गुणों वाली पृथिवी में (जाता शर्ि). परवा हुई है, (नितत्नि). है नित्यं कालि सापोंके (गृहेभ्यः) घरों प्र्थातु जङ्गलो से, भी वनो में रहते हँ । उदारहूदय परोपकारी वानप्रस्थी केशवर्धनी ओषधि । को कन्याश्नो के केश रोगके निवारण के जिये खोद रखते है, मौर परोष- कारो संन्यासी जब प्रचाराय गृहस्थो के घरोमेजाति हतो उस श्रोषधि

English

Thence thou shalt come to me again and be the father of our sons. The same 98

अध्याय ६

श्लोक 131.3

यद् धाव॑सि त्रियोज॒नं प॑ञ्चयोज॒नमाश्वि॑नम्।तत॒स्त्वं पुन॒राय॑सि पु॒त्राणां॑ नो असः पि॒ता

yad dhāvasi triyojanaṃ pañcayojanamāśvinam| tatastvaṃ punarāyasi putrāṇāṃ no asaḥ pitā

हिन्दी अर्थ

को कन्याश्रों मे बांट देते ह। भपितस्य-- म सित (खेत), कानारसाप।. हे । कन्याभोंके यदि केशनहो, वे गजञ्जी सकता । अतः केशवधंनी भोषधि को खोद कर, उसका संग्रह कर रखना, शरोर उसका वितरण करना सौमाजिक अत्युपकार है। वानप्रस्थियों के लिये यज्ञ करने को विधिहै,. संन्यासो वीतहृभ्य हीते है, हवियों से विगत होते केशा नडा ईव वर्धन्तां शीष्णंस्तं भसिताः परि ॥२॥ (केशाः) जौ केश (अमीगुना) प्रङ्गुलियो दवारा (मेधाः) मापते योग (मेयाः) मापने योग्यहो गए) (ते) तेरे (शीष्णेः परि) सिरके चारों ओर (श्रसिताः) कालि केश (नडाः इव) नड की तरह (वधन्ताम्) बढ़ । न्काला सांप (मन्त्र र), मौर ्रसिताः काले केश ।

English

The Philter, burning with the pangs of yearning love, which Gods have poured within the bosom of the floods,

अध्याय ६

श्लोक 132.1

स्मरः।१-५ अथर्वाङ्गिराः।स्मरः।अनुष्टुप्, १ त्रिपदा अनुष्टुप्, २,४,५ बृहती, ३ भुरिक्।यं दे॒वाः स्म॒रमसि॑ञ्चन्न॒प्स्व१न्तः शोशु॑चानं स॒हाध्या।तं ते॑ तपामि॒ वरु॑णस्य॒ धर्म॑णा

smaraḥ| 1-5 atharvāṅgirāḥ| smaraḥ| anuṣṭup, 1 tripadā anuṣṭup, 2,4,5 bṛhatī, 3 bhurik| yaṃ devāḥ smaramasiñcannapsva1ntaḥ śośucānaṃ sahādhyā| taṃ te tapāmi varuṇasya dharmaṇā

हिन्दी अर्थ

केशा नडा ईव वधरन्तां शौर्प्णस्तं असिताः परि ,३॥ (भ्रोषधे) है प्रोषधि ! (मूलम्) केशोंकीजडको (रह्) तु दढ कर, नडा ह्व परि), म्रथं, मन्त्र (र) की तरह + भथर्वतरेद-भाष्य कां० ६। प्रनु° १२३ सु० १३७ का० ६। श्रनु० १३। सू° १३८ अथर्वतेद-भाष्य २४६

English

That spell for thee I heat by Varuna’s decree. The charm which, burning with the pangs of love, the General Gods have poured within the bosom of the floods,

अध्याय ६

श्लोक 132.2

यं विश्वे॑ दे॒वाः स्म॒रमसि॑ञ्चन्न॒प्स्व१न्तः शोशु॑चानं स॒हाध्या।तं ते॑ तपामि॒ वरु॑णस्य॒ धर्म॑णा

yaṃ viśve devāḥ smaramasiñcannapsva1ntaḥ śośucānaṃ sahādhyā| taṃ te tapāmi varuṇasya dharmaṇā

हिन्दी अर्थ

ओष्रधि शोघ्र प्रभावकरिणी है जौकरि एकही दिनम सफलता दे सक्ती दे । भोपर है स्तियो के सिर का आभरूषण । व्यभिचारी पुरुष के क्लीव हो जाने पर उसे गोपथ पहना दिया जाय ताकि सर्वसाधारण को यह् जोषि व्य कानाश कर देतह । वोयं ॐ नाशहोनेसे पौष शक्ति वाला पुरुष क्लीब हौ जाता है। कोवं कृष्योपृशिनपयों कुरी स्णिं कृषि । व्यधिचारी को (क्लौवम्) नपु सक (कृधि) कर दे, (अथो) ओर (ओपनिनम्) योपश वाला, -(कुरोरिणम्) कुरोरुक्त (कृधि) करदे, इसके (उने अण्डयौ) दोनों अण्डोंके भीतरी भायों को ( भिनत्तु) तोड दे ।

English

That spell for thee I heat by Varuna’s decree. The Philter, burning with the pangs of longing, which Indrāni hath effused within the waters’

अध्याय ६

श्लोक 132.3

यमि॑न्द्रा॒णी स्म॒रमसि॑ञ्चद॒प्स्व॑१न्तः शोशु॑चानं स॒हाध्या।तं ते॑ तपामि॒ वरु॑णस्य॒ धर्म॑णा

yamindrāṇī smaramasiñcadapsva1ntaḥ śośucānaṃ sahādhyā| taṃ te tapāmi varuṇasya dharmaṇā

हिन्दी अर्थ

ओपश ओर कुरीर स्व्रियोके आभुषणरहैँ। व्यभिचारी के दोनों सम्राट् (यनु ८।३७) । भण्डमेदन राजाज्ञा के विना नहीं हना चाहे, २५० अथववेद-भाष्य कां० ६। अनु १२३। सु° १३८ (भकरम्) मेने कर दियाहै, (अरस) है वीयंरस विहन ! (त्वा) तुचे (अरसम्) दस रस से विहीन (अक्षरम्) मैने कर दिया । (भस्य)

English

depth, That spell for thee I heat by Varuna’s decree. The charm, aglow with longing, which Indra and Agni have effused within the bosom of the

अध्याय ६

श्लोक 132.4

यमि॑न्द्रा॒ग्नी स्म॒रमसि॑ञ्चताम॒प्स्व॑१न्तः शोशु॑चानं स॒हाध्या।तं ते॑ तपामि॒ वरु॑णस्य॒ धर्म॑णा

yamindrāgnī smaramasiñcatāmapsva1ntaḥ śośucānaṃ sahādhyā| taṃ te tapāmi varuṇasya dharmaṇā

हिन्दी अर्थ

(निदध्मसि) हम स्थापित करते हँ । ये तं नाडयो देव करते ययो स्तिष॑ति दरष्ण्यम् । (ते) तेरो (ये) जो (देवकृते) परमेश्वर तिमित (नाड्यौ) दो नाड्यां हे, (ते) तेरी (ते) उन दोनों का, (शम्यया) शम्या काम वाली शम्याकील संलगन (ते) तेरी (ते) उन दो नाडयो का (भिनच्धि) मै भेदनकरताहूं।

English

floods, That spell for thee I heat by Varuna’s decree.

अध्याय ६

श्लोक 132.5

यं मि॒त्रावरु॑णौ स्म॒रमसि॑ञ्चताम॒प्स्व॑१न्तः शोशु॑चानं स॒हाध्या।तं ते॑ तपामि॒ वरु॑णस्य॒ धर्म॑णा

yaṃ mitrāvaruṇau smaramasiñcatāmapsva1ntaḥ śośucānaṃ sahādhyā| taṃ te tapāmi varuṇasya dharmaṇā

हिन्दी अर्थ

शमी वृक्ष के काष्ठ द्वारा निमित, मथवा भोगवासना को शान्त करदेन स्पष्टीकरण मन्त्र (५) में हुआ दहै। का० ६। भ्रनु० १३। सू० १३६ अथववेद -भष्य २५१ संलग्न (ते शेपः) तेरी प्रजननेन्िय का (भिनयि) मै भेदन करताहूं

English

The charm aglow with longing which Mitra and Varuna have poured within the bosom of the floods, That spell for thee I heat by Varuna’s decree.

अध्याय ६

श्लोक 133.1

मेखलाबन्धनम्।१-५ अगस्त्यः।मेखला।१ भुरिक् २, ५ अनुष्टुप्, ३ त्रिष्टुप्, ४ जगती।य इ॒मां दे॒वो मेख॑लामाब॒बन्ध॒ यः सं॑न॒नाह॒ य उ॑ नो यु॒योज॑ ।यस्य॑ दे॒वस्य॑ प्र॒शिषा॒ चरा॑मः॒ स पा॒रमि॑च्छा॒त् स स उ॑ नो॒ वि मु॑ञ्चात्

mekhalābandhanam| 1-5 agastyaḥ| mekhalā| 1 bhurik 2, 5 anuṣṭup, 3 triṣṭup, 4 jagatī| ya imāṃ devo mekhalāmābabandha yaḥ saṃnanāha ya u no yuyoja | yasya devasya praśiṣā carāmaḥ sa pāramicchāt sa sa u no vi muñcāt

हिन्दी अर्थ

स्युसितिका रुरोहिथ सुमगंकरणी मम॑ । हे पारमेश्वरी माता ! (न्यस्तिका) तु नितरां काम, क्रोध, लोभ, मोह आदिको फँकदेतोहै, उन्हँ निरस्त कर देती है, (रुरोहिथ) तु हदय मे आरोहण क्रिय हृर्ईहै, (मम, सुभगंकरणी) मेरे सौभाग्यो को उप्पघ्च करने वालीदहै। (तव) तेरे (प्रतानाः) ऊपरको ओर विस्तार है, (सहस्रपर्ण्या) हजारों का पालन करने वाली (तया) उस माता द्वारा (ते) है पत्ती ! तेरे (हदयम्) हृद्य को (शोषयामि) मेँ पति, सांसा- रिफ विषय भोगों के लिये सूखा देता हू । मेए्वर माता भी है, वह् उपासक के कामादि को, मातुस्नेह वाली होकर, लौर प्रजापतिः । वेद मे "तिक्तः दिवः" द्वारा ३ चुलोक कहै हं । एक दृरयमान, तथा दो इस दु्यमान चुलोक से ऊपर के दुलोक ।

English

A glorification of the sacred girdle By the direction of that God we journey, he will seek means to save and he will free us;

अध्याय ६

श्लोक 133.2

आहु॑तास्य॒भिहु॑त॒ ऋषी॑णाम॒स्यायु॑धम्।पूर्वा॑ व्र॒तस्य॑ प्राश्न॒ती वी॑र॒घ्नी भ॑व मेखले

āhutāsyabhihuta ṛṣīṇāmasyāyudham| pūrvā vratasya prāśnatī vīraghnī bhava mekhale

हिन्दी अर्थ

द्वारा सूचित किया हौ । यह् विषय अनुखन्धान योग्य है। २५२ भ्रयर्वतेद-भाष्य कां५ ६। अनु० १३ । सु° १३९ बुरकरदेती हँ । सदा हूदयवासिनी है। दलोक मे उसके विस्तार सक्डों ह, युलोक से नीचे की भोर उसके विस्तार ३१ हैँ। बुध, चक्र, पति के सौभाग्यो को पैदाकर ची है । सौभाग्यद षड्विध, एेएयर्य, धमं,

English

The God who hath engirt us with this Girdle, he who hath fast- ened it, and made us ready. Thou, weapon of the Rishis, art adored and served with sacrifice. First tasting of the votive milk, Zone, be a hero-slayer thou!

अध्याय ६

श्लोक 133.3

मृ॒त्योर॒हं ब्र॑ह्मचा॒री यदस्मि॑ नि॒र्याच॑न् भू॒तात् पुरु॑षं य॒माय॑ ।तम॒हं ब्रह्म॑णा॒ तप॑सा॒ श्रमे॑णा॒नयै॑नं॒ मेख॑लया सिनामि

mṛtyorahaṃ brahmacārī yadasmi niryācan bhūtāt puruṣaṃ yamāya | tamahaṃ brahmaṇā tapasā śrameṇānayainaṃ mekhalayā sināmi

हिन्दी अर्थ

को ओर लाना चाहतादहै, ओर हजारो का पालन करने वानी माता के दाराः पत्नी के हृदय को सूखा देत। है, विषयः भोगों के लिये प्रमरस् से , रित करदेता है । पर्णी=प पालनपूरणयोः (जुद्राव्यादिः) । (मयि) मेरे सम्बन्धमें भी (ते) तेरा (हदय, शुष्यतु) हदय प्रम रस की षट से सूख जाय, (अथो) तथा (आस्यम्) मूख भो (रुष्यतु) रसीलो वाते करने कौ दष्टिसे सुख जाय ! (जथो) मौर (कामेन) काम- वासना को दृष्टिसे (माम्) मृ्षको (निशुष्य') नितरां सुखा कर, (अथी) तदनन्तर (शुष्कास्या) रसीली वातो से रहित हुई (चर) गृहकायोमेतु (ब्र) है भरण-पोषण करने वालो ! (कल्याणि) है कल्याण करे

English

As I am now Death’s Brahmachāri claiming out of the living world a man for Yama, So with Austerity and Prayer and Fervour I bind this Girdle round the man before me.

अध्याय ६

श्लोक 133.4

श्र॒द्धाया॑ दुहि॒ता तप॒सोऽधि॑ जा॒ता स्वस॒ ऋषी॑णां भूत॒कृतां॑ ब॒भूव॑ ।सा नो॑ मेखले म॒तिमा धे॑हि मे॒धामथो॑ नो धेहि॒ तप॑ इन्द्रि॒यं च॑

śraddhāyā duhitā tapaso'dhi jātā svasa ṛṣīṇāṃ bhūtakṛtāṃ babhūva | sā no mekhale matimā dhehi medhāmatho no dhehi tapa indriyaṃ ca

हिन्दी अर्थ

चाहती है, (सथृष्पला) सम्यक् रूपमे कामादि का दहन कर है गति कर । (अमूम् च) उसमेरी पत्नोको, (माम् च) मौर मञ्च पिको (सं हरयो को “एक” करदे, या समान भावनाओं वाते करदे । कां० ६। अनु० १६ सू १४० अ्रथववेद-माष्य ।

English

She hath become, Faith’s daughter, sprung from Fervour, the sister of the world-creating Rishis; As such, O Girdle, give us thought and wisdom, give us religious zeal and mental vigour.

अध्याय ६

श्लोक 133.5

यां त्वा॒ पूर्वे॑ भूत॒कृत॒ ऋष॑यः परिबेधि॒रे।सा त्वं परि॑ ष्वजस्व॒ मां दी॑र्घायु॒त्वाय॑ मेखले

yāṃ tvā pūrve bhūtakṛta ṛṣayaḥ paribedhire| sā tvaṃ pari ṣvajasva māṃ dīrghāyutvāya mekhale

हिन्दी अर्थ

न रप्र शा (मेना ुज्करस्या चर् ॥ ८) (यथा) जेसे (उद्यम्) जलको (अप्पृषः) न पिये पिपासु पर (आस्यम्) मुख (अप युध्यति) सू जता (षरा, एवम्) दषो भकार (कामेन) कामवाकषना का दुष्ट स (माम्) भूल ५६६, क निगुय) नितरां सुखा कर, (अथा) तदनन्तर पयुष्कास्या) दुध छद तरालो हुई तु (चर) जघ पति की कापरशमना सुख गई पर पत्नीने निज वेराग्य- ्नावना मे इश्च वाना का सूचा हिया, उष उने दहत् र दिया, तव म्बन्धो वच नहं बोलती ओर परे दनः धृदहुनोवेत मात्रके लिये गृह मे टकडों मे करके (पुनः) फिर, तदनन्तर (सदनात) अवते-भापका समा हित अर्थात शान्त कर लेता द. (एव) इत प्रका (वो्रपवति) है शक्ति

English

Thou whom primeval Rishis girt about them, they who made the world, As such do thou encircle me, O Girdle, for long days of life.

अध्याय ६

श्लोक 134.1

शत्रुनाशनम्।१-३ शक्रः।वज्रः।१ परानुष्टुप् त्रिष्टुप्, २ अनुष्टुप्, ३ भुरिक् त्रिपदा गायत्री।अ॒यं वज्र॑स्तर्पयतामृ॒तस्यावा॑स्य रा॒ष्ट्रमप॑ हन्तु जीवि॒तम्।शृ॒णातु॑ ग्री॒वाः प्र शृ॑णातू॒ष्णिहा॑ वृ॒त्रस्ये॑व॒ शची॒पतिः॑

śatrunāśanam| 1-3 śakraḥ| vajraḥ| 1 parānuṣṭup triṣṭup, 2 anuṣṭup, 3 bhurik tripadā gāyatrī| ayaṃ vajrastarpayatāmṛtasyāvāsya rāṣṭramapa hantu jīvitam| śṛṇātu grīvāḥ pra śṛṇātūṣṇihā vṛtrasyeva śacīpatiḥ

हिन्दी अर्थ

१, छिदिर् द्वैषीकरणे 1:7६ :) । , ४ भथवेवेद-भाष्य का०६। अनु १३। मू १४० । । (अवरूढौ) उपर के हनु मे अवाङ्धुख होकर उलन्न हरर, (च) भौर. त्सतः) खाने की इच्छा करते, (तौ दन्तौ) उनदो दान्तो को,

English

A priest’s prayer for power to punish wrong-doers This Thunderbolt shall take its fill of Order, scare life away and overthrow the kingdom. Tear necks in pieces. rend napes asunder, even as the Lord of

अध्याय ६

श्लोक 134.2

अध॑रोऽधर॒ उत्त॑रेभ्यो गू॒ढः पृ॑थि॒व्या मोत् सृपत्।वज्रे॒णाव॑हतः शयाम्

adharo'dhara uttarebhyo gūḍhaḥ pṛthivyā mot sṛpat| vajreṇāvahataḥ śayām

हिन्दी अर्थ

।काटना सामनेकेदो दान्तो द्वारा होता है ओर प्रथमोतन्न ऊपर पराणि-पशुपक्षियो को काटकरखाने केलिए नहीं दिये, अपितु , मन्त्र (२) में कथित वस्तुओं को काट करखानेके लिये परमेश्वर ने दिये है । दन्तारोहण के काल में शिश पीडा अनुभव करते मौर रूण हो जाते है र 0 से प्राथनारहैकि वह इस काल को शिशु के लिये सुखकारी जौँ ाभो, (म्रथो) मौर (माषम्) माषको, ( अथो) भौर (तिलम्) तिल को खाओ । (दन्तौ) है दो दान्तो ! (रत्नधेयाय) रमणीय फल को धारण करने के लिये, (वाम्) तुम दो के लिये, (एषः, भागः; )यह् भाग (निहितः)

English

Might the neck of Vritra. Down, down beneath the conquerors, let him not rise, concealed in earth, but lie down smitten with the bolt.

अध्याय ६

श्लोक 134.3

यो जि॒नाति॒ तमन्वि॑च्छ यो जि॒नाति॒ तमिज्ज॑हि ।जि॒न॒तो व॑ज्र॒ त्वं सी॒मन्त॑म॒न्वञ्च॒मनु॑ पातय

yo jināti tamanviccha yo jināti tamijjahi | jinato vajra tvaṃ sīmantamanvañcamanu pātaya

हिन्दी अर्थ

(सयुजौ) साथ साय लगे हृए, (स्योनौ) सुखकर, (सुमङ्गलौ) उत्तम. मङ्ञलकारी (दन्तौ) दो दान्त (उपहतौ) मानो उत्सुकता पूवक बुलाए गए हैं । (दन्तौ) हेदो दान्तो ! (वाम्) तुमदोका ( घोरम्) करर-कममं कां०६। अनु° १३। ति १४१ अथववेद-भाष्य २५५

English

Seek out the fierce oppressor, yea, strike only the oppressor dead. p. a265 Down on the fierce oppressor’s head strike at full length, O Thunderbolt!

अध्याय ६

श्लोक 135.1

बलप्राप्तिः।१-३ शुक्रः।वज्रः।अनुष्टुप्।यद॒श्नामि॒ बलं॑ कुर्व इ॒त्थं वज्र॒मा द॑दे ।स्क॒न्धान॒मुष्य॑ शा॒तय॑न् वृ॒त्रस्ये॑व॒ शची॒पतिः॑

balaprāptiḥ| 1-3 śukraḥ| vajraḥ| anuṣṭup| yadaśnāmi balaṃ kurva itthaṃ vajramā dade | skandhānamuṣya śātayan vṛtrasyeva śacīpatiḥ

हिन्दी अर्थ

प्राणियों की (मा हिसिष्टम्) हिसा न करो । पिता उत्सुकता पूर्वक करते रहते है, इसलिये मानो माता-पितानेइन दा दान्तो का स्वय आह्वान किया दहै । (वायुः) वागुसमान शोधक अधिकारी (एनाः) इन प्रजाओं को (समा- (अधि) अधिकार पूवक (ब्रवत्) जीवनमागं का उपदेश ॥ दे. कथन करे, की चिकित्सा अर्थात् रोगापनयन करे । वायु सदा गति करती है, भौर निजगति द्वारा शुद्ध करतो रहती है भरतः शुद्धिकर्ता अधिकारीको वायु कहादहै । तष्टा सूय. जौ किं मेधों

English

A priest’s fulmination against an enemy Whate’er I eat I turn to strength, and thus I grasp the Thunder- bolt,

अध्याय ६

श्लोक 135.2

यत् पिबा॑मि॒ सं पि॑बामि समु॒द्र इ॑व संपि॒बः ।प्रा॒णान॒मुष्य॑ सं॒पाय॒ सं पि॑बामो अ॒मुं व॒यम्

yat pibāmi saṃ pibāmi samudra iva saṃpibaḥ | prāṇānamuṣya saṃpāya saṃ pibāmo amuṃ vayam

हिन्दी अर्थ

मे “चिकित्सतु" पद का प्रयोग हृभा है । चिकिततु = कित निवासे रोगाप इसके साथो भो, शासन कमं मे. मनुष्प हनि चाहे, अतः वायु भादि के अथं तदनुरूप किये है । हे वैच ! (लोहितेन स्वरधितिना) सुवर्ण के, लोहे के, या लाल ताम्बर के शस्त्र द्वारा (कणयोः) दोन कानों का (मिथुनम्) वेध (कृधि) कर ।

English

Rending the shoulders of that man as Indra shattered Vritra’s neck. I drink together what I drink, even as the sea that swallows all. Drinking the life-breath of that man, we drink that man and swallow him.

अध्याय ६

श्लोक 135.3

यद् गिरा॑मि॒ सं गि॑रामि समु॒द्र इ॑व संगि॒रः ।प्रा॒णान॒मुष्य॑ सं॒गीर्य॒ सं गि॑रामो अ॒मुं व॒यम्

yad girāmi saṃ girāmi samudra iva saṃgiraḥ | prāṇānamuṣya saṃgīrya saṃ girāmo amuṃ vayam

हिन्दी अर्थ

सख्या द्वारा (बहु) वहुसख्यक हो । वेध बाल-दालिका दोनो का हाना चाद्ये । कर्णवेध मै नानासेग निवृत्त हो जते.है। वाल ओर वालिकाके कानके किस-किक्त स्यान में वेध करना नाद्ये इत दरुणल वयहौ जान सक्त । कर्णवेध तोसरेया पांचवे वधं होने का विधान है कणेवेध के सम्बन्ध भरं विशेष ज्ञान के क्षत्रिय, ओौर हैष्य, (उत) कणेवेध करते रहे है, 'एवा=-एवम्) दसी प्रकार (सहसरपोपःय) कणवध देव पद बाणीं को गुचित करता । ब्राह्मणों कौ “"मुदेवाः"' तथा “भुयुराः” कहते है, अर्थात् कृधिवी के देव । अतुराः के दो अर्थं हँ,(१) भषु है, ओौरकणवेध द्वारा नानाविध रोगोंके निवर्तन दवाय शरीर पुष्टि सम्भव है, तब ".सहु्तपोषाय"' पद सार्थक ही है ।

English

Whate’er I eat I swallow up, even as the sea that swallows all. Swallowing that man’s vital breath, we swallow him completely up.

अध्याय ६

श्लोक 136.1

केशदृंहणम्।१-३ वीतहव्यः।नितत्नि वनस्पतिः।अनुष्टुप् २ एकावसाना द्विपदा साम्नी बृहती।दे॒वी दे॒व्यामधि॑ जा॒ता पृ॑थि॒व्याम॑स्योषधे ।तां त्वा॑ नितत्नि॒ केशे॑भ्यो॒ दृंह॑णाय खनामसि

keśadṛṃhaṇam| 1-3 vītahavyaḥ| nitatni vanaspatiḥ| anuṣṭup 2 ekāvasānā dvipadā sāmnī bṛhatī| devī devyāmadhi jātā pṛthivyāmasyoṣadhe | tāṃ tvā nitatni keśebhyo dṛṃhaṇāya khanāmasi

हिन्दी अर्थ

अथववेद-भाष्य कां० ६। अनु? १३ । सू० १४१ ४५ उत्पादन काबीजमभीदहै,कारणमभीदहै। कां० ६। मनु० १३। सु? १४२ अथववेद-भाष्य २५७ उन्छयस्व वहुरभव स्वेन म्टसा यव ।

English

A charm to promote the growth of hair Born from the bosom of wide Earth the Goddess, godlike Plant, art thou:

अध्याय ६

श्लोक 136.2

दृंह॑ प्र॒त्नान् ज॒नयाजा॑तान् जा॒तानु॒ वर्षी॑यसस्कृधि

dṛṃha pratnān janayājātān jātānu varṣīyasaskṛdhi

हिन्दी अर्थ

देव तथा सुनने वाला कहा है, मौर उस फै प्रति बोलने अर्थात् कथन करने काभो निर्देश हुआ है. इसमे प्रतोत होता है कि “यव' "चेतन" है, न कि जड "जीं" । सायणाचायंनेमोरएपतादही मान कर व्याख्याकोहै। यथा उत्पत्ति होतो है तब जौँ के साथ मिट, जल आदि का मिघ्रग होताहै, मौर जौँ के तिज तत्तां का अमिश्रण अर्यात् उषते अलग होकर अंकुर मेष्वर है । इसलिये उसे “यत कहाहै। तथा परमेश्वर संसार के पष्यति नो सक्ताय, केवलाघो भवति केवलादी ॥ (ऋ० ११७।६) । तभा “भुञ्जते २, मेघीय दिन्य वखपात यवधान्प फा तो वध करता है, तुञ्च परमेए्वर ख्व

English

So we, Nitatnī! dig thee up to strengthen and fix fast the hair. Make the old firm, make new hair spring, lengthen what has already grown.

अध्याय ६

श्लोक 136.3

यस्ते॒ केशो॑ऽव॒पद्य॑ते॒ समू॑लो॒ यश्च॑ वृ॒श्चते॑ ।इ॒दं तं वि॒श्वभे॑षज्या॒भि षि॑ञ्चामि वी॒रुधा॑

yaste keśo'vapadyate samūlo yaśca vṛścate | idaṃ taṃ viśvabheṣajyābhi ṣiñcāmi vīrudhā

हिन्दी अर्थ

पाज्नाणि= पा ष्टन् (उणा० ४।१६०)। पा पाने, पा रक्षणे । जो केवल मपनी ही रक्षा के लिये खाते-पीते हं । पात्राणि पातुणि। अ शृण्वन्तं यवं देवं यत्रं खाऽच्छावद।-सि। तथा अमिश्रण करने वाले, (यत्र) जिस किसी हृदये प्रकट होने वाले, (त्वा देवम्) तुक्ष देव को (अन्छा वदामसि) अभिमृष होकर हेम कहूष है भकाश वाला हमा (एषि) तु हो, तथा (समुद्रः इव) समूद्र फी तेश्तं परमेष्वेर सब की वाति को सृनता है, यथां द्री निष यभ्मन्- येते राजा तद् वेद व रुणस्तृतीयः'” (भथर्वं० २।१६।३ ) अ्थात्ं दो बैठकर जो मन्ध्रणा करते हँ राजा वरुण उसे जानता है. तीसरा हो कर । तथां

English

Thy hair where it is falling off, and with the roots is torn away, I wet and sprinkle with the Plant, the remedy for all disease. A charm to promote the growth of hair

अध्याय ६

श्लोक 137.1

केशवर्धनम्।१-३ वीतहव्यः।वनस्पतिः।अनुष्टुप्।यां ज॒मद॑ग्नि॒रख॑नद् दुहि॒त्रे के॑श॒वर्ध॑नीम्।तां वी॒तह॑व्य॒ आभ॑र॒दसि॑तस्य गृ॒हेभ्यः॑

keśavardhanam| 1-3 vītahavyaḥ| vanaspatiḥ| anuṣṭup| yāṃ jamadagnirakhanad duhitre keśavardhanīm| tāṃ vītahavya ābharadasitasya gṛhebhyaḥ

हिन्दी अर्थ

मौर सव सम्पतियोकौदृष्टिसेमक्षीणदहै! हे परमेश्वर ! (ते) तैर (उपसदः) उपासक । अक्षिताः) क्षीण नहः काग करने वाले (अक्षिताः) क्षीणनहों दो उपसदः “उप सदः" भथ ति उपासकः “उप +आसंकाः” (आसं उपवेशने, अदादिः) । पृणन्तः=पृ पासे (करयादिः) । अत्तार; परमेश्वर (१) जसे यौः परकाश की दृष्टिते क्षीण, वैसे है परमेश्वर तु हमरे

English

The Plant which Jamadagni dug to make his daughter’s locks. grow long, This same hath Vitahavya brought to us from Asita’s abode.

अध्याय ६

श्लोक 137.2

अ॒भीशु॑ना॒ मेया॑ आसन् व्या॒मेना॑नु॒मेयाः॑ ।केशा॑ न॒डा इ॑व वर्धन्तां शी॒र्ष्णस्ते॑ असि॒ताः परि॑

abhīśunā meyā āsan vyāmenānumeyāḥ | keśā naḍā iva vardhantāṃ śīrṣṇaste asitāḥ pari

हिन्दी अर्थ

अपबेवेद-भाष्य कां०६। अनु ११। ° १४९ .. का० ६। अनु० १३। सू० १४२ अ.वेद-माभ्य अन्न' है भोर अक्नाद' है । उपासक उसके भद्ररूप का भोग करते है, उस के आनन्द रसकापानकरसेहै, यह् परनहो भन्नमोग है । प्रलथ कावमें परमेश्वर जगत् का मानो प्राणन करता है। अतः बह अन्नादहै। ववा यव =कृष्यत्न जौ । पूणिवीर्मे वोप गयायव्ं का बोज अंकरुसि हो कर उत्थान करता है, निजं तेजया महिफाके करण बदुषंख्पक यव जोकः प्रदानः करताहै। यतर इतना पेदादहो जतादहै कि कुसूल, कोष्ठ दिको दइतनाभरदेतादहै कि यवके दवाकके कारण ये पाक्त फटने सगते ै(मूणोदि), कविता में वणेन । दम्य अशनिः = इद्र का वज्रपात ।

English

They might be measured with a rein, meted with both extended arms. Let the black locks spring thick and strong and grow like reeds upon thy head. Strengthen the roots, prolong the points, lengthen the middle part, O Plant.

अध्याय ६

श्लोक 137.3

दृंह॑ मूल॒माग्रं॑ यच्छ॒ वि मध्यं॑ यामयौषधे ।केशा॑ न॒डा इ॑व वर्धन्तां शी॒र्ष्णस्ते॑ असि॒ताः परि॑

dṛṃha mūlamāgraṃ yaccha vi madhyaṃ yāmayauṣadhe | keśā naḍā iva vardhantāṃ śīrṣṇaste asitāḥ pari

हिन्दी अर्थ

(२). यजुर्वेद ५।२६ मे मी “यव का प्रयोग अष्पात्मिकः अयं मे हुआः है ॥ ह, पृथक् करने वाला है, पृथक् करहमसेः देष को, पृथक् कर अरातीः अर्थात अदन भावनार्भो को, कंजूसी कफो ॥ दोषः वाः (अरातीः). शवुरमो को (यवव). दुर कर" (दयानन्व) ॥ तथाः “यवानां अदे, जो कि पृक्त के प्रव मर्व. मेः एकवाश्यताः केः उपपादक है ॥ एता ते शेषः संहसायमरको न ङ ससं कं कृणोतु ।१॥ (यथा) जेसे (असितः) सीमारहित च.ल।क, (वणान् अनु) परमेश्वर

English

Let the black locks spring thick and strong and grow like reeds upon thy head. A woman’s imprecation on her unfaithful lover

अध्याय ६

श्लोक 138.1

क्लबत्वम्।१-५ अथर्वा।वनस्पतिः।अनुष्टुप्, ३ पथ्यापङ्क्तिः।त्वं वी॒रुधां॒ श्रेष्ठ॑तमाभिश्रु॒तास्यो॑षधे ।इ॒मं मे॑ अ॒द्य पुरु॑षं क्ली॒बमो॑प॒शिनं॑ कृधि

klabatvam| 1-5 atharvā| vanaspatiḥ| anuṣṭup, 3 pathyāpaṅktiḥ| tvaṃ vīrudhāṃ śreṣṭhatamābhiśrutāsyoṣadhe | imaṃ me adya puruṣaṃ klībamopaśinaṃ kṛdhi

हिन्दी अर्थ

शरीरावयवो का (कृण्वन्) निर्माण करता हुआ, (असुरस्य मायया) करता दहै, (एवा) हसी, प्रकार (अयम्) यह (अकः) सूये सदुश प्रताप वाला अङ्ग को, (समू, सम्, अकम्) परस्पर संगत (कृणोतु) करे । च.लोक असीम दहै, सीमारदित है, बन्धन. रहित है, फलता घाता है

English

O Plant, thy fame is spread abroad as best of all the herbs that grow. Unman for me to-day this man that he may wear the horn of hair. Make him a eunuch with a horn, set thou the crest upon his- head.

अध्याय ६

श्लोक 138.2

क्ली॒बं कृ॑ध्योप॒शिन॒मथो॑ कुरी॒रिणं॑ कृधि ।अथा॒स्येन्द्रो॒ ग्राव॑भ्यामु॒भे भि॑नत्त्वा॒ण्ड्यौऽ

klībaṃ kṛdhyopaśinamatho kurīriṇaṃ kṛdhi | athāsyendro grāvabhyāmubhe bhinattvāṇḍyau'

हिन्दी अर्थ

, फलता जा रहा है । फलता-फेलता एतना फल जायगा कि परस्पर के ध शाकषेणसे रहित हो कर ध्वत्तहो जायगा, प्रलय हो जामी । संसम- (२) यलोक के नएतारा आदि जोकि “मैलक्सीज" से निमित होते रहते है, ये चयुलोकके बपूषिषू्परै, ओौर दयूलोवसूपी महाणशरीर के शरीरावयव सूप का५९। अनु ७। सू० ७२ अयवबेद-पाष्य परिशिष्ट) २६१ जैसे गव्वारा या ब्रैलूत । (यावत् ) जितने परिणाम वाला (परस्वतः)

English

Let Indra with two pressing-stones deprive him of his manly strength. I have unmanned thee, eunuch! yea, impotent! made thee- impotent, and robbed thee,

अध्याय ६

श्लोक 138.3

क्लीब॑ क्ली॒बं त्वा॑करं॒ वध्रे॒ वध्रिं॑ त्वाकर॒मर॑सार॒सं त्वा॑करम्।कु॒रीर॑मस्य शी॒र्षणि॒ कुम्बं॑ चाधि॒निद॑ध्मसि

klība klībaṃ tvākaraṃ vadhre vadhriṃ tvākaramarasārasaṃ tvākaram| kurīramasya śīrṣaṇi kumbaṃ cādhinidadhmasi

हिन्दी अर्थ

बणविकार, गणेनाश द्वारा परस्वतः= पारावत्तः 1 अगीनम् = जितने अंग वाला, परिमाण वःल परस्वान् आद का परे अर्थात् दूरके द्युलोक में स्थित है। (२) कपोत == कवूतर, ?9€011, ५०५९ । कपोत को पारावत भौ फरते ई! सण्डल। चिन के उर को रेक को संख्या ५-६ मंसो ॐ नीक समाप्ति.

English

weakling! of thy strength. Upon his head we set the horn, we set the branching ornament. Duas tuas venas, a Diis factas, in quibus stat vigor virilis, paxillo ligneo in testiculis ob istam

अध्याय ६

श्लोक 138.4

ये ते॑ ना॒ड्यौऽदे॒वकृ॑ते॒ ययो॒स्तिष्ठ॑ति॒ वृष्ण्य॑म्।ते ते॑ भिनद्मि॒ शम्य॑या॒मुष्या॒ अधि॑ मु॒ष्कयोः॑

ye te nāḍyau'devakṛte yayostiṣṭhati vṛṣṇyam| te te bhinadmi śamyayāmuṣyā adhi muṣkayoḥ

हिन्दी अर्थ

, गादिभम् =गदभमण्डलः , गदभ-तारा रविम मे स्थित है । रिमा्ं सविमा्योमेः गदभतारा कीः स्थिक्ति है + यथा "रविमा्ंः ९8865 तणप्ौ, ताः ए१ फल ऽका स्वाहा, अनिलः, "दभ" स्याति, चित्रा गदेभ-ता ताः का प्रदेशः ग दभ-मण्डलः हैः, चित्र मेः गादभ-मण्डल को नही ३ करै नीचे दर्यो है । यहु आ्विन-मण्डल हैः चोटः (६ दिया गया चि; 700 ततप 45 माजा " सेः कवा गयाहैः मौर चिोकौ ग्याख्या भीः इसी पुस्तक के अनुसारः कीः

English

mulierem tibi findo. Ut mulieres mattam (tegetem) facturae arundinem lapide findunt, sic fascinum tuum cum

अध्याय ६

श्लोक 138.5

यथा॑ न॒डं क॒शिपु॑ने॒ स्त्रियो॑ भि॒न्दन्त्यश्म॑ना ।ए॒वा भि॑नद्मि ते॒ शेपो॒ऽमुष्या॒ अधि॑ मु॒ष्कयोः॑

yathā naḍaṃ kaśipune striyo bhindantyaśmanā | evā bhinadmi te śepo'muṣyā adhi muṣkayoḥ

हिन्दी अर्थ

मति, चप्रापी । अतिदूरता केः कार्ण; अल्पता देः. जसे करि. सूर्यः मरतिमहाः परिमाण वाला होताः हुः भो, जगभग १०.करोड़ मीलौं कीदूुरता के. कारण स्थालो-परिमाणवाल। प्रतीत ह्येत है । रामलाल करं द्स्ट दारो परकोरिते वां प्र॑सासितिं प्रीणि प्न्य ४. ते्तिरोय-से हिता.पद्पाठेः- ५०्वधं से दुलभ ग्रन्थ क पूनः प्रकाशनं, ३०-००, १८-१६ कोण्डं २५-००, बीसंवां कृाणड २५.००

English

testiculis ob istam mulierem findo. A woman’s love-charm Thou hast grown up, a source of joy to bless me with pros- perity.

अध्याय ६

श्लोक 139.1

सौभाग्यवर्धनम्।१-५ अथर्वा।वनस्पतिः।अनुष्टुप्, १ त्र्यवसाना षट् पदा विराड् जगती।न्य॒स्ति॒का रु॑रोहिथ सुभगं॒कर॑णी॒ मम॑ ।श॒तं तव॑ प्रता॒नास्त्रय॑स्त्रिंशन्निता॒नाः ॥ तया॑ सहस्रप॒र्ण्या हृद॑यं शोषयामि ते

saubhāgyavardhanam| 1-5 atharvā| vanaspatiḥ| anuṣṭup, 1 tryavasānā ṣaṭ padā virāḍ jagatī| nyastikā rurohitha subhagaṃkaraṇī mama | śataṃ tava pratānāstrayastriṃśannitānāḥ || tayā sahasraparṇyā hṛdayaṃ śoṣayāmi te

हिन्दी अर्थ

६. ऋण्वेशाविभाष्यं भूमिकां -पंऽ युधिष्ठिरे मीमांसक द्वारां संपादितं एवं शतशः टिप्पशि्यो से युक्त । साधौरर जिह्द ३०.०७, पूरे केप की कै ग्रन्थकार दारां विये उत्तर । ४०.००५ १०. वेदिकं सिद्धोत-मी्मासा- पण युधिष्ठिरं मीमांसकं लिखित वेद. विरचित सेस्कृतटीकां सहित । ठीके! कां धूरो पाठ प्रथं बार द्यावा मयां है । विद्छृत भूमिका शरोर भनेक परिशिष्टो से युक्त । १०००० डा० विजयपाल जी विद्यावारिचि। उत्तम संस्करण ३५-०० साधारण

English

A hundred are thy tendrils, three-and-thirty thy descending shoots. With this that bears a thousand leaves I dry thy heart and wither it.

अध्याय ६

श्लोक 139.2

शुष्य॑तु॒ मयि॑ ते॒ हृद॑य॒मथो॑ शुष्यत्वा॒स्यऽम्।अथो॒ नि शु॑ष्य॒ मां कामे॒नाथो॒ शुष्का॑स्या चर

śuṣyatu mayi te hṛdayamatho śuṣyatvāsya'm| atho ni śuṣya māṃ kāmenātho śuṣkāsyā cara

हिन्दी अर्थ

१३ वेदिक-साहित्य-सोदामिनी -स्व° श्री पं० वागीश्वर वेदालंकार, ॥ १४. ऋग्वेव को ऋष्संखया यूविष्ठिर मोमांसक । ५-०० १५. वेद-भुति-आम्नाय सज्ञा मोमांसा , संस्कृ त -हिन्दी)--यु°मी ° २-५० ॥ १६. वदिक-छन्दोमीमांसा -यु° मौ । नया संस्करण २५-० १७. वेदिक-स्वर-मीमांसा -यु- मी नया संस्करण २०-०० १८. वंदिक वाडःमय में प्रयुक्त विविध स्वराकन-परकार -यु° मौ°।

English

Let thy heart wither for my love and let thy month be dry for me. Parch and dry up with longing, go with lips that love of me hath dried. Drive us together, tawny! fair! a go-between who wakens love.

अध्याय ६

श्लोक 139.3

सं॒वन॑नी समुष्प॒ला बभ्रु॒ कल्या॑णि॒ सं नु॑द ।अमूं च॒ मां च॒ सं नु॑द समा॒नं हृद॑यं कृधि

saṃvananī samuṣpalā babhru kalyāṇi saṃ nuda | amūṃ ca māṃ ca saṃ nuda samānaṃ hṛdayaṃ kṛdhi

हिन्दी अर्थ

१९. वेदो का महच्च तथा उनके प्रचार के उपाय, वेवाथं की विषिक प्रक्रियां को एतिहासिक मीमांसा -(पस्कृन-हिन्दो) यु° मी०। ८.०७ २०. देवापि मौर शन्तनु के आख्यान का वास्तविक स्वरूप - लेखक-- श्री पं० धर्मदेवनी निरुक्ताचा््रं २८. ऋग्देद-परिचय - श्रो पं विदवनायजौी वि्लामातेण्ड । ऋग्वेद २९. वेविक-पौयुष धारा -लेखक -श्री देवेन्द्र कुमार जी कपूर चने गीतां से युक्त । उत्तम जित्द १५-००, साधारण १०-०५।

English

Drive us together, him and me, and give us both one heart and mind. Even as his mouth is parched who finds no water for his burn- ing thirst,

अध्याय ६

श्लोक 139.4

यथो॑द॒कमप॑पुषोऽप॒शुष्य॑त्या॒स्यऽम्।ए॒वा नि शु॑ष्य॒ मां कामे॒नाथो॒ शुष्का॑स्या चर

yathodakamapapuṣo'paśuṣyatyāsya'm| evā ni śuṣya māṃ kāmenātho śuṣkāsyā cara

हिन्दी अर्थ

लेषक- श्री वेद्य रामगोपाल नजो शास्त्री । १२-०५ ९३१. उर-ज्योति-डा० बासुदेवशरण भग्रवाल लिखित देदविषयक ३२. वेदो को प्रामाणिकता -डा० श्रीनिवास शास्त्री । १-१ २४. बोधायन-भोत-सृत्रम्-(दशंपुणंमास प्रकरण) -मवस्वाभी तथा

English

So parch and burn with longing, go with lips that love of me hath dried. Even as the Mungoose bites and rends and then restores the wounded snake, So do thou, Mighty one, restore the fracture of our severed love.

अध्याय ६

श्लोक 139.5

यथा॑ नकु॒लो वि॒च्छिद्य॑ सं॒दधा॒त्यहिं॒ पुनः॑ ।ए॒वा काम॑स्य॒ विच्छि॑न्नं॒ सं धे॑हि वीर्यावति

yathā nakulo vicchidya saṃdadhātyahiṃ punaḥ | evā kāmasya vicchinnaṃ saṃ dhehi vīryāvati

हिन्दी अर्थ

३५. बोघायन-धोत-सूत्रम्- (बाघान-प्रकरण)- सुबोधिनी वुत्ति सहित ३६. दशपुणंमास-पद्ति -पं भीमसेन कृत, भाषां सहित । पर हमने इसे प्रथम बारदछापाहै, २५-०० का आधर, उनका विकास, परिवर्तन, पञुयज्ञ आदि म्रनेक विषयोंकी णियां, १२ परिशिष्ट । मूल्य लागतमात्र २०-००, रानसंस्करण २५-००, सस्ता संस्करण ६-००, अच्छा कागज सजित्द १२-००।

English

A blessing on a child’s first two teeth 100

अध्याय ६

श्लोक 140.1

सुमङ्गलौ दन्तौ।१-३ अथर्वा।ब्रह्मणस्पतिः, दन्ताः।(अनुष्टुप् १) १ उरोबृहती, २ उपरिष्टाज्ज्योतिष्मती त्रिषटुप्, ३ आस्तारपङ्क्तिः।यौ व्या॒घ्रवव॑रूढौ जिघ॑त्सतः पि॒तरं॑ मा॒तरं॑ च ।यौ दन्तौ ब्रह्मणस्पते शि॒वौ कृ॑णु जातवेदः

sumaṅgalau dantau| 1-3 atharvā| brahmaṇaspatiḥ, dantāḥ| (anuṣṭup 1) 1 urobṛhatī, 2 upariṣṭājjyotiṣmatī triṣaṭup, 3 āstārapaṅktiḥ| yau vyāghravavarūḍhau jighatsataḥ pitaraṃ mātaraṃ ca | yau dantau brahmaṇaspate śivau kṛṇu jātavedaḥ

हिन्दी अर्थ

मूल मराठी मे लिखे गये ग्रन्थ का हिन्दी-भ्नुवाद। हसी का गुजराती भ्रनुवाद संशोधित संस्कार-विधि का प्राधार बना। सोमयाग चातुर्य श्नौर वाजपेय भादि यागो का वेशं है । “(दोनो मागः के मस्र कौ पदाथं तया भावाथं व्याख्या संहित ¶ यु मीरगे दरण बोंदिं विचि वृहद् हवन के भन्ो सहित ।

English

Two tigers have grown up who long to eat the mother and the sire: Soothe, Brāhmanaspati, and thou, O Jātavedas, both these teeth. Let rice and barley be your food, eat also beans and sesamum.

अध्याय ६

श्लोक 140.2

व्री॒हिम॑त्तं॒ यव॑मत्त॒मथो॒ माष॒मथो॒ तिल॑म्।ए॒ष वां॑ भा॒गो निहि॑तो रत्न॒धेया॑य दन्तौ॒ मा हिं॑सिष्टं पि॒तरं॑ मा॒तरं॑ च

vrīhimattaṃ yavamattamatho māṣamatho tilam| eṣa vāṃ bhāgo nihito ratnadheyāya dantau mā hiṃsiṣṭaṃ pitaraṃ mātaraṃ ca

हिन्दी अर्थ

५५. निरत ध्लोकदालतिकम् - केरलदेशीय नीलकण्ठ गरं विरचित मे ताडपत्र पर लिखित दुलेभ प्रतिके भ्राघारं फेतिह्य दिया गया है (संस्छृत)) उत्तम कागज बुद्ध छपाई तथा सुन्दर जिल्द सहित । ५ १२५-०० ५८. धातुपाठ -- घात्वादिसूची सहित, शुद्ध संस्करण 1;: ,. , ५१

English

This is the share allotted you, to be your portion, ye two Teeth. Harm not your mother and your sire.

अध्याय ६

श्लोक 140.3

उप॑हूतौ स॒युजौ॑ स्यो॒नौ दन्तौ॑ सुम॒ङ्गलौ॑ ।अ॒न्यत्र॑ वां घो॒रं त॒न्वः॑१ परै॑तु दन्तौ॒ मा हिं॑सिष्टं पि॒तरं॑ मा॒तरं॑ च

upahūtau sayujau syonau dantau sumaṅgalau | anyatra vāṃ ghoraṃ tanvaḥ1 paraitu dantau mā hiṃsiṣṭaṃ pitaraṃ mātaraṃ ca

हिन्दी अर्थ

1 वामो कृत । पाणिनीय धातुपाठ की सवम ्रदादत्त जिननासु वहन भागं १५९. दसय कय -- युधिष्ठिरं सीमं ् इ अग्रजो अनुवाद है। गरग्रजौ भाषा ,के.माध्यम्न से पाणिरीय कर ! प्रवेशः करने. -वालौ.े-लियेः यह् ग्राधिकारिक पुस्तक है। कागज: आर छपाई सुन्दर । सजि २४ 1 ८ उणाविक्ोयः--ऋःषिदधानन्द करत व्याख्या तथापं० यु° मौ० कृत

English

Both fellow teeth have been invoked, gentle and bringing happi- ness. Else whither let the fierceness of your nature turn away, O Teeth! Harm not your mother or your sire.

अध्याय ६

श्लोक 141.1

गोकर्णयोर्लक्ष्यकरणम्।१-३ विश्वामित्रः।अश्विनौ।अनुष्टुप्।वा॒युरे॑नाः स॒माक॑र॒त् त्वष्टा॒ पोषा॑य ध्रियताम्।इन्द्र॑ आभ्यो॒ अधि॑ ब्रवद् रु॒द्रो भू॒म्ने चि॑कित्सतु

gokarṇayorlakṣyakaraṇam| 1-3 viśvāmitraḥ| aśvinau| anuṣṭup| vāyurenāḥ samākarat tvaṣṭā poṣāya dhriyatām| indra ābhyo adhi bravad rudro bhūmne cikitsatu

हिन्दी अर्थ

सतरत उपराद्घात एवं सूव्रसूची शन्दसूची श्रादि के सहित) । ५० ० ९७. दवम् पुरूषकारवात्तिकोपेतम्- लोलागुकमूनि कृत । .. १२-०० ध ४ रटे शब्दसूपों काज्ञान करनेवाली ३-५० स स्कृत-धातु-कोष- पाणिनीय घातुभ्रों का हिन्दी मे भरथंनिदंश्च छपाई, उत्तम कागज, बहिया जिहर सहित । ॑ १०.०५

English

A blessing on cattle Vayu collected these: to find their sustenance be Tvashtar’s care:

अध्याय ६

श्लोक 141.2

लोहि॑तेन॒ स्वधि॑तिना मिथु॒नं कर्ण॑योः कृधि ।अक॑र्ताम॒श्विना॒ लक्ष्म॒ तद॑स्तु प्र॒जया॑ ब॒हु

lohitena svadhitinā mithunaṃ karṇayoḥ kṛdhi | akartāmaśvinā lakṣma tadastu prajayā bahu

हिन्दी अर्थ

विषय परपू्णं महत्त्वपूरं भूमिका पौ ५०-०० ग्रग्रजी व्याख्या सहित । ईश८ २-००, केनो ° २-००, फकटो० ४-०० करमे वाला टार्धनिक ग्रन्थं । ४०.०७ ८०. अनासक्तियोग -लेखक- धो पं०गश्नाथ पथिक । तया संस्करण ।

English

May Indra bless and comfort them, and Rudra look that they increase. Take thou the iron axe and make a pair by marks upon their ears. This sign the Asvins have impressed: let these increase and multiply.

अध्याय ६

श्लोक 141.3

यथा॑ च॒क्रुर्दे॑वासु॒रा यथा॑ मनु॒ष्याऽउ॒त।ए॒वा स॑हस्रपो॒षाय॑ कृणु॒तं लक्ष्मा॑श्विना

yathā cakrurdevāsurā yathā manuṣyā'uta| evā sahasrapoṣāya kṛṇutaṃ lakṣmāśvinā

हिन्दी अर्थ

पद पर नियुक्त तथा सन् १९४२ मेँ वहां से सेवामुक्त हुए। अनुसन्धान- सन् १९२३-२४ मे परोपकारिणी सभा अजमेर में। सन् हि १९५६ ५,७ आर्य सावदेशिक वाटिका मे साथ ही ' वैदिक अनुसन्धान ' त्रैमासिक हि पत्रिका का सम्पादन भी। अन्य लेखन- ९. सामवेद का आध्यात्मिक भाष्य, रहने के कारण आपको ४ स्वर्णपदक ओर एक रजतपदक प्राप्त हुआ। १- धो जयदयाल कपुर, हैदरानाद ००१-०० सके अतिरिक्त कु भौर महानुभावो कौ मौ सहायता ह्मे प्राप्त हुई है, जिसे हमने काण्ड ४-५ के प्रकादनमे लगा दिया है।

English

Even as Gods and Asuras, even as mortal men have done, Do ye, that these may multiply in thousands, Asvins! make the mark.

अध्याय ६

श्लोक 142.1

अन्नसमृद्धिः।१-३ विश्वामित्रः।वायुः।अनुष्टुप्।उच्छ्र॑यस्व ब॒हुर्भ॑व॒ स्वेन॒ मह॑सा यव ।मृ॒णी॒हि विश्वा॒ पात्रा॑णि॒ मा त्वा॑ दि॒व्याशनि॑र्वधीत्

annasamṛddhiḥ| 1-3 viśvāmitraḥ| vāyuḥ| anuṣṭup| ucchrayasva bahurbhava svena mahasā yava | mṛṇīhi viśvā pātrāṇi mā tvā divyāśanirvadhīt

हिन्दी अर्थ

हन महानु मावों फा हम कृतक्ञतापू्वेक धन्यवाद करते ह ओरभ्राशा करते ह कि वेदभक्त आयेजन इस महक्त्वपूणं कायं को पूर्णं॑करने में हरे यथोचित सहयोग प्रदान करेगे । हस भाग पर केवल कागज ओर छपाई पर ही १२ सहल रपरया व्वय पुस्तक लागत १८ रुपये पडती है । रभो काण्ड ५-४ छप रहे ह गौर ३-२-१३ काण्ड छापने है) प्रथम

English

A blessing on cattle Spring high, O Barley, and become much through thine own magnificence: p. a269 Burst all the vessels; let the bolt from heaven forbear to strike thee down.

अध्याय ६

श्लोक 142.2

आ॒शृ॒ण्वन्तं॒ यवं॑ दे॒वं यत्र॑ त्वाच्छा॒वदा॑मसि ।तदुच्छ्र॑यस्व॒ द्यौरि॑व समु॒द्र इ॑वै॒ध्यक्षि॑तः

āśṛṇvantaṃ yavaṃ devaṃ yatra tvācchāvadāmasi | taducchrayasva dyauriva samudra ivaidhyakṣitaḥ

हिन्दी अर्थ

स्मून ४० सहस्र रुपया व्यय होगा, जो हमारे लिये एक बडी समस्या है । करने में मुक्तहस्त होकर सहायता करं प्रदान कियाहै। हमारी परमपिता परमेद्वरसे यही प्राथनादहै कि प्रम , अ्रन्थकत्ताका संलिप्त परिचेय एक हैष्ड' कौ मानोपाधि से विभूषित ह) सन् १९१९ के दीक्षारत समारोह

English

As we invite and call to thee, Barley, a God who heareth us, Raise thyself up like heaven on high and be exhaustless as the sea.

अध्याय ६

श्लोक 142.3

अक्षि॑तास्त उप॒सदोऽक्षि॑ताः सन्तु रा॒शयः॑ ।पृ॒णन्तो॒ अक्षि॑ताः सन्त्व॒त्तारः॑ स॒न्त्वक्षि॑ताः

akṣitāsta upasado'kṣitāḥ santu rāśayaḥ | pṛṇanto akṣitāḥ santvattāraḥ santvakṣitāḥ

हिन्दी अर्थ

दष भोर रसायन शास्म (केमिस्टी) मे, तथा स्वयोग में प्रथम , १ भापको ४ सुवणेपदक श्रौर १ र॑जतपदकप्राप्त हुए । आप । ॥ ॥॥॥॥ की विप्रवविद्यालयमे समय-समय पर माप रसायन, ॥॥॥॥ न घास्य पढ़ते र मौर सन् १६४२ माच मे वहां , अयवेवेद-भाष्य काण्ड २८; १८-१६; १४-१५-१६-१७; ११.१२-१३; ६-१०; ७-८; छः खण्ड । सात्तवां खण्ड काण्ड ६ । १२. ऋग्देदाधिभष्यमूमिका सरल अध्ययन

English

Exhaustless let thine out-turns be, exhaustless be thy gathered heaps, Exhaustless be thy givers, and exhaustless those who eat of thee. 101

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Atharva Veda — Chapter 6
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.