Atharva Veda· Atharvaveda Saṁhitā
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अध्याय 6 / 20

Kanda 6

काण्ड 6

453 श्लोकभाग 1/3 · श्लोक 1.1–47.3WhatsApp

पूर्ण अध्याय पाठ145 श्लोक

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अध्याय ६

श्लोक 1.1

अमृतप्रदाता १-३ अथर्वा।सविता।उष्णिक्, १ त्रिपदा पिपिलिकमध्या साम्नी जगती, २-३ पिपीलिकमध्या पुरउष्णिक्।दो॒षो गा॑य बृ॒हद् गा॑य द्यु॒मद् धे॑हि ।आथ॑र्वण स्तु॒हि दे॒वं स॑वि॒तार॑म्

amṛtapradātā 1-3 atharvā| savitā| uṣṇik, 1 tripadā pipilikamadhyā sāmnī jagatī, 2-3 pipīlikamadhyā purauṣṇik| doṣo gāya bṛhad gāya dyumad dhehi | ātharvaṇa stuhi devaṃ savitāram

हिन्दी अर्थ

का० ६। अनु० १। सूु०२ अथवेवेद-भाष्य रै इससे प्रतीत होता है कि मन्त्र मे “सोम द्वारा सोम॒ ओषधि भौर उसका रस ही नही, अपितु प्रकरणानुसार सोम के अन्याथं भी हते ईहै। पृथिवी भोगी = पाथिव भोगों में भासक्त पुरुष । वाली, (मृधः) तथा संग्रामकारौ हमरो दुर्भावनां का (विजहि) विक्ष- युवा जेतेशानः स पुरुष्टुतः ॥३॥ (पुरुष्टूतः) बहुत स्तुत हुभा (जता) विजय प्राप्त करता है । वह (युवा) सदा युवा है, (ईशानः) ओर अधीश्वर है ।

English

In praise of Savitar Sing, Atharvana, at eve, sing loudly, bring a splendid present: hymn God Savitar with praises. Yea, praise him whose home is in the river, Son of Truth, the youthful, gracious friend whose

अध्याय ६

श्लोक 1.2

तमु॑ ष्टुहि॒ यो अ॒न्तः सिन्धौ॑ सू॒नुः ।स॒त्यस्य॒ युवा॑न॒मद्रो॑घवाचं सु॒शेव॑म्

tamu ṣṭuhi yo antaḥ sindhau sūnuḥ | satyasya yuvānamadroghavācaṃ suśevam

हिन्दी अर्थ

परमेश्वर को “युवा ओर जेता” कहा है । ४ अथववेद-भाष्यं का० ६। अनु° १।सु०३ (अदितिः) पृथिवी ओौर. (मरुतः) मानसून वा्रुएं (पान्तु) रक्षा कर) रक्षा करे, (विष्णुः) किरणों से व्याप्त सूये (उत) तथा (यौः) चुलोक (नः) हमारी (पातु) रक्षा करे। अतः उसी से इन आदिद्वारा रक्षा की प्राथना की गई दहै ।

English

word is guileless. Savitar our God shall send us many everlasting treasures, that both paths may well be travelled.

अध्याय ६

श्लोक 1.3

स घा॑ नो दे॒वः स॑वि॒ता सा॑विषद॒मृता॑नि॒ भूरि॑ ।उ॒भे सु॑ष्टुती सु॒गात॑वे

sa ghā no devaḥ savitā sāviṣadamṛtāni bhūri | ubhe suṣṭutī sugātave

हिन्दी अर्थ

करती है 1 मरुतः हँ मानसून वायुएं । यथा “ उदीरयत मरुतः समुद्रात्” (अथव ४।१५५), “हे मरुतो ¦ तुम समुद्र से ऊपर की ओर गति करो” । तथा (अथर्वे० ५।२७।४,५) । अपांनपात् = यह है मेघ . मे चमकती तथा काठ ६ ।-अनु० १। सु० ३ अथवेवेद-भाष्य ५ पातुं नो देवी सुभगा सर॑स्वती पात्वभ्निः शिवा गे अस्य पायवः ।।२॥ ओौर पृथिवी (नः) हमारे (पाताम्) रक्षा करे, (ग्रावा). सोप्न. ओषधि के पीसने की शिलां (नः) हमारी (अंहसः) हत्या से (पाचु) रक्षा करे, मौर

English

In praise of Indra For Indra, ministering priests! run ye and press the Soma juice, That he may hear his praiser’s word, and this my call.

अध्याय ६

श्लोक 2.1

आत्मगोपनम्।१-३ अथर्वा।सोमः, वनस्पतिः।परोष्णिक्।इन्द्रा॑य॒ सोम॑मृत्विजः सु॒नोता च॑ धावत ।स्तो॒तुर्यो वचः॑ शृ॒णव॒द्धवं॑ च मे

ātmagopanam| 1-3 atharvā| somaḥ, vanaspatiḥ| paroṣṇik| indrāya somamṛtvijaḥ sunotā ca dhāvata | stoturyo vacaḥ śṛṇavaddhavaṃ ca me

हिन्दी अर्थ

(सोमः) सोम ओषधि (पातु) हत्या से रक्ता करे) (सुभगा) उत्तम, भृगो य्ञियाग्नि के (ये) जो (शिवाः) कल्याणकारो (पायवः) रक्षक गुण हँ वै हमारी रक्षा करे । माहूत सोम ओषधि ओर सोमरस तया शब्दमयी वेदवाणो की शिक्षा । माहुतियो द्वारा उत्थित धूम पृथिवी मौर पृथिवी के वागुमण्डल में फल प्रकाश ओर ताप दसम सहायक होता है । रोगनिवारण भौर स्वास्थ्य प्रदानं मे सोम ओषधि, तथा सोमरस के अद्भूत गुण वेदों मे वणित हए षड्विध भगो का वर्णन है, अतः वेदवाणी को सुभगा कहा है ।

English

Thou into whom the drops find way as sap pours life into a tree, Drive off in thine abundant might our demon foes. For Indra, thunder-armed, who drinks the Soma press the Soma out:

अध्याय ६

श्लोक 2.2

आ यं वि॒शन्तीन्द॑वो॒ वयो॒ न वृ॒क्षमन्ध॑सः ।विर॑प्शि॒न् विमृधो॑ जहि रक्ष॒स्विनीः॑

ā yaṃ viśantīndavo vayo na vṛkṣamandhasaḥ | virapśin vimṛdho jahi rakṣasvinīḥ

हिन्दी अर्थ

(अभिधा ती) कुटिलता अर्थात् विकृति मे (पानात्) मेघीय वियुत (सवंतातये) सब सुखां के विस्तार के लिये (वधय) हमारो वृद्धि कर । ६ अयववेद-भाष्य का० ६। अनु० १।सु०४ पद ६९) । अपांनपात् =जलं का अपत्य है मेध, ओरं मेष का मपत्य है है भौमो विद्युत्", इस द्वारा प्राण को विषति का इलाज होता है। अपा.

English

He, youthful, conqueror, and Lord is praised by all. A prayer to various deities for protection and prosperity Guard us the Maruts! Guard us well, O Indra, Piishan, Aditi.

अध्याय ६

श्लोक 2.3

सु॒नोता॑ सोम॒पाव्ने॑ सोम॒मिन्द्रा॑य व॒ज्रिणे॑ ।युवा॒ जेतेशा॑नः॒ स पु॑रुष्टु॒तः

sunotā somapāvne somamindrāya vajriṇe | yuvā jeteśānaḥ sa puruṣṭutaḥ

हिन्दी अर्थ

द्वारा बह स्वस्य रहता ओौरशरीरका पोषण करताहै। यहु है ऋ 1 थक है । निरक्त में कहा है कि “सवतत सर्वासु कमंततिषु ॥ (११।२३।२४; पद २३ अदितिः) इस प्रकार “ताता =तातौ, तनु, विस्तारे" सार्थक हो स्तुति-वचन समूह को (पातु) रक्षा करे ओर (्रातुर्भिः) परस्पर रातू रूप मे वतंमान (पुवः) पुरो वालो (अदितिः) अदीना अर्थात् भक्षया का० ६ । अनु° १। सू० ४ अथर्वेवेद-भाष्य ७ त्राण करने वाले (सहः) तथा शतुपराभवकारी बल कौ रक्षा करे ।

English

Guard us, O Waters’ Child, and Rivers Seven. May Vishnu guard us, and the Sky. May Heaven and Earth take care of us for victory, may Pressing Stone and Soma save us from distress. Sarasvati, auspicious Goddess, guard us well: preserve us Agni and his kind protecting

अध्याय ६

श्लोक 3.1

आत्मगोपनम्।१-३ अथर्वा।१ इन्द्रपूषणौ, अदितिः, मरुतः, अपां नपात्, सिन्धवः, विष्णुः, द्यौः,२ द्यावापृथिवी, ग्रावा, सोमः, सरस्वती, अग्निः,३ अश्विनौ, उषासानक्ता, अपां नपात्, त्वष्टा।जगती, पथ्याबृहती।पा॒तं न॑ इन्द्रापूष॒णादि॑तिः॒ पान्तु॑ म॒रुतः॑ ।अपां॑ नपात् सिन्धवः स॒प्त पा॑तन॒ पातु॑ नो॒ विष्णु॑रु॒त द्यौः

ātmagopanam| 1-3 atharvā| 1 indrapūṣaṇau, aditiḥ, marutaḥ, apāṃ napāt, sindhavaḥ, viṣṇuḥ, dyauḥ,2 dyāvāpṛthivī, grāvā, somaḥ, sarasvatī, agniḥ,3 aśvinau, uṣāsānaktā, apāṃ napāt, tvaṣṭā| jagatī, pathyābṛhatī| pātaṃ na indrāpūṣaṇāditiḥ pāntu marutaḥ | apāṃ napāt sindhavaḥ sapta pātana pātu no viṣṇuruta dyauḥ

हिन्दी अर्थ

अदितिः अदोना देवमाता (निरुक्त ४।४।२३; अदिति पद ४६) । मिटा देना । पूत्रैः भ्रातृभिः = परमेश्वर माता के हम सब पुत्र है भतः (अंशः) अन्नादि का आंशिक विभागकर््ता “अधिकारी', (भगः) (मित्रः) परराष्ट्रं के साथ मैत्री बढ़ाने वाला “विदेशनीति का दूतः, (अयमा) मूख्य न्यायाधीश, (अदितिः) राजनीति को शिक्षा देने वाली वेदवाणी, (मरुतः) तथा सेनिक (पान्तु) ये सब हम प्रजाजनों कीरक्षा करे । (तस्य) उस शत्रुका (अभिहतः) कुटिल द्वेषः) हमारे साय “अंशा धिकारी” इसे विभक्ता भी कहा है यथा “विभक्तारछ हवामहे वसो-

English

powers. Preserve us both the Asvins, Gods and Lords of Light, and let the Dawns and Night bring us deliverance.

अध्याय ६

श्लोक 3.2

पा॒तां नो॒ द्यावा॑पृथि॒वी अ॒भिष्ट॑ये॒ पातु॒ ग्रावा॒ पातु॒ सोमो॑ नो॒ अंह॑सः ।पातु॑ नो दे॒वी सु॒भगा॒ सर॑स्वती॒ पात्व॒ग्निः शि॒वा ये अ॑स्य पा॒यवः॑

pātāṃ no dyāvāpṛthivī abhiṣṭaye pātu grāvā pātu somo no aṃhasaḥ | pātu no devī subhagā sarasvatī pātvagniḥ śivā ye asya pāyavaḥ

हिन्दी अर्थ

।. अयर्वेवेद-भाष्य का० ६॥ अनु १। सूु० ५ (अश्विना) पुण्यकर्म वाले दो राजा (नः ) हमारी (सम् ४ ) किये ( नः उरुष्य) हमारी रक्षा कर । (दयौः, पितः) है द्युलोक त के सदृश सदा चतिसम्पन्न सव के पिता परमेश्वर ! (या दुच्छुना जो दुःखः दायिसुख को ओर हमारे प्रवृत्ति है उसे (यावय) हम से पृथक् कर । अरिविना पण्यकरतौ राजानौ (निरुक्त २।११; अश्नी पद १), सम्भवतः सम्राट् ओर वण राजा (यजु° ८।३७ । ये दोनों भरना को वेदों में एकराट् तथा जनराट् भी कहा है '(अथव० ३।४।१; २ ध

English

The Waters’ Child protect our house from every harm. Do thou, God Tvashtar, make us strong for health and wealth. A hymn to various deities for protection

अध्याय ६

श्लोक 4.1

१-३ अथर्वा।१ त्वष्टा, पर्जन्यः, ब्रह्मणस्पतिः, अदितिः, २ अंशः, भगः, वरुणः, मित्रः, अर्यमा, अदितिः, मरुतः,३ अश्विनौ, द्यौष्पिता।पथ्याबृहती, २ संस्तारपङ्क्तिः, ३ त्रिपदा विराड्गायत्री।त्वष्टा॑ मे॒ दैव्यं॒ वचः॑ प॒र्जन्यो॒ ब्रह्म॑ण॒स्पतिः॑ ।पु॒त्रैर्भ्रातृ॑भि॒रदि॑ति॒र्नु पा॑तु नो दु॒ष्टरं॒ त्राय॑माणं॒ सहः॑

1-3 atharvā| 1 tvaṣṭā, parjanyaḥ, brahmaṇaspatiḥ, aditiḥ, 2 aṃśaḥ, bhagaḥ, varuṇaḥ, mitraḥ, aryamā, aditiḥ, marutaḥ,3 aśvinau, dyauṣpitā| pathyābṛhatī, 2 saṃstārapaṅktiḥ, 3 tripadā virāḍgāyatrī| tvaṣṭā me daivyaṃ vacaḥ parjanyo brahmaṇaspatiḥ | putrairbhrātṛbhiraditirnu pātu no duṣṭaraṃ trāyamāṇaṃ sahaḥ

हिन्दी अर्थ

बुद्धि “दुच्छुना प्रवृत्ति” को विरोधिनी है । कै०६। अनु० १। सु० ५ अथवेवेद-भाष्य ३ व उन्नति के मागं परले चल । (एनम्) इमे (वचसा) तेज के साथ ( सम् । भज) संयुक्त कर, (च) भौर (प्रजया) इन्द्रम भतरं कपि सजातानांमसद् व॒शी ।

English

May Tvashtar, Brāhmanaspati, Parjanya hear my holy prayer. May Aditi with all her sons, the brothers, guard us, invincible, protecting power. May Ansa, Bhaga, Varuna, and Mitra, Aryaman, Aditi, and

अध्याय ६

श्लोक 4.2

अंशो॒ भगो॒ वरु॑णो मि॒त्रो अ॑र्य॒मादि॑तिः॒ पान्तु॑ म॒रुतः॑ ।अप॒ तस्य॒ द्वेषो॑ गमेदभि॒ह्रुतो॑ यावय॒च्छत्रु॒मन्ति॑तम्

aṃśo bhago varuṇo mitro aryamāditiḥ pāntu marutaḥ | apa tasya dveṣo gamedabhihruto yāvayacchatrumantitam

हिन्दी अर्थ

ताकि समान षर मे उत्पन्न हुओं को (वशी) वश मँ करने वाला (सत्) यह हो जाय । ..(सयस्पोषेण) धन की सम्पुष्टि के साथ (संसुज) इस का संसग कर । (शातते) जीने के लिये इसे (जरसे) जरावस्था तक (नय) प्राप्त करा, पहुंचा । रखने के लिये बड़ भाई की “जाधथिक समृद्धि” चाहिए ताकि वहू परिवार के सव व्यक्तियों का पालन-पोषण कर सके । इसलिये “धन की पुष्टि” के साथ उसका संसं भो मावश्यक है । - १० अथर्ववेद-भाष्य का० ६। अनु° १। सू ६ का०६। जनु° १। सु° ७ अथववेद-भाष्य ११ (यस्य) जिस के (गृहे) घर में (हविः कृण्मः) हविर्न हम करते है ¦ भपमानित पुरूष (नः) हम (सुशंसिनः) उत्तम कीति वालों अर्थात् सुमा-

English

Maruts guard us. May we be freed from that oppressor’s hatred. May he keep off that foeman who is near us. May both the Asvins further our devotion. With ceaseless care deliver us, Wide-Ranger! O

अध्याय ६

श्लोक 4.3

धि॒ये सम॑श्विना॒ प्राव॑तं न उरु॒ष्या ण॑ उरुज्म॒न्नप्र॑युछन्।द्यौ॒३ष्पित॑र्या॒वय॑ दु॒च्छुना॒ या

dhiye samaśvinā prāvataṃ na uruṣyā ṇa urujmannaprayuchan| dyau3ṣpitaryāvaya ducchunā yā

हिन्दी अर्थ

मापः स प्रजापतिः” (यजु° ३२१) । “गृहस्थी व्यक्ति” को राजनैतिक ध्यक (यजु° १७।४०) ओर वैदिक विदान् का कथन भी मन््रमे हुमा है, ताकि इन दोनो का सहयोग यज्ञकर्ता को मिल सके । मन्त्र॒२मे पारि. को, (भुन्वते) भक्तिरस वाले, (यजमानाय) देवपुजा, सङ्गति करने वाले तथा दानी (मे) मेरे लिये (रन्धयासि) तू वशमें कर दे। = यज देवपूजासंगतिकरणदानेषु (भ्वादिः) ।

English

Father Heaven, keep from us all misfortunes. A prayer to Agni and Indra for the well being of a princely patron Agni, adored with sacred oil, lift up this man to high estate.

अध्याय ६

श्लोक 5.1

वर्चः प्राप्तिः १-३ अथर्वा।१ अग्निः, २ इन्द्रः, ३ अग्निः, सोमः, ब्रह्मणस्पतिः।अनुष्टुप्, २ भुरिक्।उदे॑नमुत्त॒रं न॒याग्ने॑ घृ॒तेना॑हुत ।समे॑नं॒ वर्च॑सा सृज प्र॒जया॑ च ब॒हुं कृ॑धि

varcaḥ prāptiḥ 1-3 atharvā| 1 agniḥ, 2 indraḥ, 3 agniḥ, somaḥ, brahmaṇaspatiḥ| anuṣṭup, 2 bhurik| udenamuttaraṃ nayāgne ghṛtenāhuta | samenaṃ varcasā sṛja prajayā ca bahuṃ kṛdhi

हिन्दी अर्थ

योनः सोम सृशंसिनों दु.शंसं आदिहैशति; (सोम) है सेनाध्यक्ष ! (यः) जो (दुःशंसः) बुरी कीति वाला अर्थात् । नितों को (आदिदेशति) आदेश देता है; (अस्य) इस के (मूख) मुख पर दारा सम्यक् रूप से पिसा हआ (अपायति) संसार से विगत हौ जाय । सोम = यजु° (१७४०) । शंसु स्तुतौ (भ्वादिः) स्तुति = कीति । । भपायति--अप (अलग होकर) +-अय (गतौ, भ्वादिः) ।

English

Endow him with full store of strength and make him rich in progeny. 72 Advance him, Indra! Let him be ruler of all akin to him.

अध्याय ६

श्लोक 5.2

इन्द्रे॒मं प्र॑त॒रं कृ॑धि सजा॒ताना॑मसद् व॒शी।रा॒यस्पोषे॑ण॒ सं सृ॑ज जी॒वात॑वे ज॒रसे॑ नय

indremaṃ prataraṃ kṛdhi sajātānāmasad vaśī| rāyaspoṣeṇa saṃ sṛja jīvātave jarase naya

हिन्दी अर्थ

(सोम) है सेनाध्यक्ष ! (यः) जो (सनाभिः) समान नाभिवाला अर्थात् पराया, (नः) हमारा (अभिदासति) क्षय करता हैया हमे दास बनाता ्, (तस्य) उसके (बलम्) बल को तथा सैनिक बल को (अप तिर) नष्ट कर, (दव) जसे (मही यौः) विस्तृत चुलोक (वधत्मना ) निज बाधक या । धातक स्वरूप द्वारा अन्धकार को नष्ट करता है । भी । “लोक” सूरय, नक्षत्रों तथा तारां दवारा सदा जगमग्राता है, ओर

English

Grant him sufficiency of wealth: guide him to life and length of days. Prosper this man, O Agni, in whose house we offer sacrifice. May Soma bless him, and the God here present, Brāhmanaspati.

अध्याय ६

श्लोक 5.3

यस्य॑ कृ॒ण्मो ह॒विर्गृ॒हे तम॑ग्ने वर्धया॒ त्वम्।तस्मै॒ सोमो॒ अधि॑ ब्रवद॒यं च॒ ब्रह्म॑ण॒स्पतिः॑

yasya kṛṇmo havirgṛhe tamagne vardhayā tvam| tasmai somo adhi bravadayaṃ ca brahmaṇaspatiḥ

हिन्दी अर्थ

(सोम) है सेनाध्यक्न ! (येन यथा) जिस मागं से (अदितिः) माता है, (तेन अवसा) उस पारस्परिक रक्षा करने वाले मां दारा मदिति=पृथिवो, वाक्, गौः (निषं० १।१; १।११; २।११) । वेद की रथात् वेदमाता (अथवं° १९।७१।१) । गौः तो माता प्रसिद्ध ही है)! इस भकार अदिति द्वारा इन तीनोंका भो प्रहूण हो सके इसलिये अदिति का अथं “अदीना देवमाता” (निस्त ४५४।१३) न होकर संकुचिताथं ही, :

English

A prayer to Brāhmanaspati for protection from wicked men The godless man whoever plots against us, Brāhmanaspati, Thou shalt give up as prey to me the worshipper who pour the juice.

अध्याय ६

श्लोक 6.1

शत्रुनाशनम्।१-३ अथर्वा।१ ब्रह्मणस्पतिः, २-३ सोमः।अनुष्टुप्।यो॒३स्मा॑न् ब्र॑ह्मणस्प॒तेऽदे॑वो अभि॒मन्य॑ते ।सर्वं॒ तं र॑न्धयासि मे॒ यज॑मानाय सुन्व॒ते॑

śatrunāśanam| 1-3 atharvā| 1 brahmaṇaspatiḥ, 2-3 somaḥ| anuṣṭup| yo3smān brahmaṇaspate'devo abhimanyate | sarvaṃ taṃ randhayāsi me yajamānāya sunvate

हिन्दी अर्थ

"मानुषी माता” अथं भी मन्व मे “अदिति"का क्रियाजा सकता है। “मानुषो माता” स्तेह की सूचिका है, अपनी सब सन्तानो के प्रति । इस ॥ प्रजाजनों की गोर आ, हमारे शासक रूपमे आ । जिस सेनिक वल द्वारा त् (गसुरान्) असुरो को (नः) हमारे (रन्ध- यासि) वशम कर देता है, (तेन = तम्) उस बल को (नः) हमारे प्रति (मधिवोचत्त) अधिकार पूर्वक कहु । के कारण उसे अधिकार प्राप्त है कि वहु वेदोपदेश दे सके 1 येनं देवा असुराणामोजांस्यदंगीध्वम् ।

English

If, Soma, any spiteful man hath aimed at us whose thoughts are kind, Smite with thy bolt upon his face: he, crushed to pieces, vani- sheth. Soma, whoever troubleth us, be he a stranger or akin,

अध्याय ६

श्लोक 6.2

यो नः॑ सोम सुशं॒सिनो॑ दुः॒शंस॑ आ॒दिदे॑शति ।वज्रे॑णास्य॒ मुखे॑ जहि॒ स संपि॑ष्टो॒ अपा॑यति

yo naḥ soma suśaṃsino duḥśaṃsa ādideśati | vajreṇāsya mukhe jahi sa saṃpiṣṭo apāyati

हिन्दी अर्थ

पोषक गौर धनलोनुप शत्रुजों के (गोजांसि) बलों को ( अवृणीध्वम्) तुम ने आवृत कर दिया है, घेर लिया है या निवारित कर दियाहै, (तेन) उस सैनिक बल द्वारा (नः) हम (शम) सुख (यच्छत) प्रदान करो । अथवेवेद-भा।ष्य का० ६। अनु० १।सू ७, । ०६ । अनु०° १। सु० ८ अयववेद-भाष्य १३ (देवाः) “दिवु क्रीडाविजिगीषा” आदि (दिवादिः), विजिगीषु सेनिक

English

Deprive him of the strength he hath: slay him thy-self like mighty Dyaus! Hymn 7 is missing A man’s love-charm

अध्याय ६

श्लोक 6.3

यो नः॑ सोमाभि॒दास॑ति॒ सना॑भि॒र्यश्च॒ निष्ट्यः॑ ।अप॒ तस्य॒ बलं॑ तिर म॒हीव॒ द्यौर्व॑ध॒त्मना॑

yo naḥ somābhidāsati sanābhiryaśca niṣṭyaḥ | apa tasya balaṃ tira mahīva dyaurvadhatmanā

हिन्दी अर्थ

। पवा परिष्वजस्व मां यथा मां कामिन्यसो यथा मन्नापंगा असः॥१। (कामिनी) कामना वाली (असः) तू हो, (यथा) ताकि (मत् अपगाः) मुञ्च से अलग हो जाने वाली (न असः) नहो। मन््रमे “ह जाये" द्वारा पत्नी को सम्बोधित किया है (सायण) 1 रुष्ट हृरद जाया को मनाने का वर्णेन हमा है 1 एवा निहन्मि ते मनो यथां मां कामिन्यसो यथा मन्नापंगा

English

Like as the creeper throws, her arms on every side around the tree, So hold thou me in thine embrace that thou mayst be in love with me, my darling, never to depart.

अध्याय ६

श्लोक 7.1

असुरक्षयणम्।१-३ अथर्वा।सोमः, अदितिः, ३ देवाः।गायत्री, १ निचृत्।येन॑ सो॒मादि॑तिः प॒था मि॒त्रा वा॒ यन्त्य॒द्रुहः॑ ।तेना॒ नोऽव॒सा ग॑हि

asurakṣayaṇam| 1-3 atharvā| somaḥ, aditiḥ, 3 devāḥ| gāyatrī, 1 nicṛt| yena somāditiḥ pathā mitrā vā yantyadruhaḥ | tenā no'vasā gahi

हिन्दी अर्थ

(मुम्याम्) पृथिवी पर (पक्षौ) दोना पंखो को (निहन्ति) रातिरदित कर देता ह है (एवा) इसीः प्रकार है पतनी (ते) तेरे (मनः) मन को (निहन्मि) मै गत्तिरहित कर देता हूं, (यथा) ताकि (माम्) मृक्षे (कामिनी). चाहने वाली (भसः) तु हो, (यथा) ताकि (मत्) मृक्षसे (अपगाः) अलग दहो गड पक्षी अधिक्र वेगवाला भौर शक्तिशाली होता है। पृथिवी पर प्रपात करने पर वहं निज पक्षों को गतिरहित करदेतादहै, इसी प्रकार कि कर चले जानेकोसोचभोन सके । यहु पति का, रुष्ट पत्नी के साथ सदृ-व्यवहार ओर प्रेम का परिणाम है । एवा पर्येमि ते मनो यथा मां कामिन्यसो यथा मन्नापंगा अस॑ः

English

As, when he mounts, the eagle strikes his pinions downward on the earth, So do I strike thy spirit down that thou mayst be in love with me, my darling, never to depart. As in his rapid course the Sun encompasses the heaven and: earth,

अध्याय ६

श्लोक 7.2

येन॑ सोम साह॒न्त्यासु॑रान् र॒न्धया॑सि नः ।तेना॑ नो॒ अधि॑ वोचत

yena soma sāhantyāsurān randhayāsi naḥ | tenā no adhi vocata

हिन्दी अर्थ

(यया) जसे (सूरयः) सूयं (सदः) शीघ्र (इमे, चावापृथिवी) इन दुलोक जोर पृथिवी का (परि एति) परिक्रमण कर लेता है, (एवा) इसी प्रकार (ते) तेरे (मनः) मन का (पर्येमि) यै परिक्रमण करता हूं । “यथा” परिक्रमण करना =मन के चारो ओर घेरा डालना, पति केषेरे में रहना, इस घेरे से वादहिर पत्नी कोन जानेदेना। यहुभो पत्नी के साथ भ, मन्त्र २ के सदुश, सूयं की भी शीघ्र गति को दर्शाया है, जो कि लगभग १२ षण्टों मे महाकाश को पार कर जाता है । (मे) मेरे (तन्वम्) शरीर को,(पादौ) पैरो को, है पत्नी (वाञ्छ) को चाहती हृद के, (ते) अर्थात् तेरी (अक्ष्यौ) दोनो आंखें, (केशाः) ओर केश (माम् कामेन) मेरे प्रति कामना के कारण (शुष्यन्तु) सुख जांय ।

English

So do I compass round thy mind that thou mayst be in love with. me, my darling, never to depart. A man’s love-charm

अध्याय ६

श्लोक 7.3

येन॑ देवा॒ असु॑राणा॒मोजां॒स्यवृ॑णीध्वम्।तेना॑ नः॒ शर्म॑ यच्छत

yena devā asurāṇāmojāṃsyavṛṇīdhvam| tenā naḥ śarma yacchata

हिन्दी अर्थ

पति कहता है रुष्ट हुई पत्नौ के प्रति, कि विवाह से पूवं तूने मुज्ञ पसन्द कर लिया धा भौरमेरे शरीर ओर शरीर के प्रत्येक अङ्गं को तूने . ६ । अनु° १। सु० € अभववेद-भाष्य पक्षं लिया था । अब भी तदनुसार तुमेरे शरीर गौर शरीर के प्रत्येक अङ्ग की षाह, मेरे किसी अङ्गं को विकृत हुमा जानकर, मुञ्च से रुष्ट होकर ह भिरक्त न हो । तेरी विरक्ति के कारण, तुके त्याग कर, भै कहीं चला शी तेरी आख तथा केश सुख जीय । पति के वियोग मेंदुःख के कारण भतिशय रोती हुई को आंखे सुख जाय, ओर तेल न लगाने से केश सुख भंय । जिनके परिणामभरुत मेरा पुनरागमन हो गौर हम पुनः सुखपूरवेक की अगले दो मन्त्रों में स्पष्ट किया है, यथा-

English

Desire my body, love my feet, love thou mine eyes, and love my legs. Let both thine eyes and hair, fond girl! be dried and parched. through love of me. I make thee hang upon mine arm, I make thee lie upon my heart.

अध्याय ६

श्लोक 8.1

कामात्मा १-३ जमदग्निः।कामात्मा, २ सुपर्णः, ३ द्यावापृथिवी, सूर्यः।पथ्यापङ्क्तिः।यथा॑ वृ॒क्षं लिबु॑जा सम॒न्तं प॑रिषस्व॒जे।ए॒वा परि॑ ष्वजस्व॒ मां यथा॒ मां का॒मिन्यसो॒ यथा॒ मन्नाप॑गा॒ असः॑

kāmātmā 1-3 jamadagniḥ| kāmātmā, 2 suparṇaḥ, 3 dyāvāpṛthivī, sūryaḥ| pathyāpaṅktiḥ| yathā vṛkṣaṃ libujā samantaṃ pariṣasvaje| evā pari ṣvajasva māṃ yathā māṃ kāminyaso yathā mannāpagā asaḥ

हिन्दी अर्थ

(मम) मेरो (दोषणिधिषम्) गजा में आश्रय पाई (त्वा) तुक्च को, . , जिस प्रकार कि (मम) मेरी (क्रतौ) प्रज्ञा गौर कमम (असः) तुहोज (ह. भोर (मम) मेरे (चित्तम् उप) चित्त के समीप (अयसि) तु जाजा। ह यह कितु मेरे विचार ओौर कमं के अनुकूल वर्ताव कर (कृतम्) परमेश्वर ने स्थापित किया है, वे (गावः) गौगों की तरह (धृतस्य)

English

Thou yieldest to my wish, that thou mayst be submissive to my will. May they whose kisses are a bond, a love-charm laid within the heart, Mothers of butter, may the cows incline that maid to love of me.

अध्याय ६

श्लोक 8.2

यथा॑ सुप॒र्णः प्र॒पत॑न् प॒क्षौ नि॒हन्ति॒ भूम्या॑म्।ए॒वा नि ह॑न्मि ते॒ मनो॒ यथा॒ मां का॒मिन्यसो॒ यथा॒ मन्नाप॑गा॒ असः॑

yathā suparṇaḥ prapatan pakṣau nihanti bhūmyām| evā ni hanmi te mano yathā māṃ kāminyaso yathā mannāpagā asaḥ

हिन्दी अर्थ

को गृह की अन्य देवियां (मे) मेरी (संवानयन्तु) भक्तिमे या वशी- १६ अथवेवेद-भाष्य का०६। अनु०.१। सूु° १० हि है । मन्त्र मे गावः पद मे उपमावाचक पद विलुप्त है । अभिप्राय है “गावः. ५८ मन्त्रो में गोधमों का प्रवेश वधु मे वणित कर वधू को गोरूपता दी रहै, अर्थात् गृहस्थ जीवन मेँ वधू को गोषूप में वणित किया है। अतः धमः १।११) + अतः “गावः संवानयन्तु मे” का अर्भिप्राय है “वेदवाणियां भेरे

English

A thanksgiving for life, hearing, and sight All hail for hearing to the Earth, to Trees, to Agni, sovran Lord!

अध्याय ६

श्लोक 8.3

यथे॒मे द्यावा॑पृथि॒वी स॒द्यः प॒र्येति॒ सूर्यः॑ ।ए॒वा पर्ये॑मि ते॒ मनो॒ यथा॒ मां का॒मिन्यसो॒ यथा॒ मन्नाप॑गा॒ असः॑

yatheme dyāvāpṛthivī sadyaḥ paryeti sūryaḥ | evā paryemi te mano yathā māṃ kāminyaso yathā mannāpagā asaḥ

हिन्दी अर्थ

उपदेशो को स्मरण कर पतिके प्रति स्नेहभावना परायणा हदौ,-यह विचार भी मन्प्रमें प्रकट कियाहै। : “पुधिवी के लिये, श्रोत्र, के लिये, वनस्पतियों के लिये, अधिपति अभिनि के लिये स्वाहा हो हविः की भआहृतियां हौं" । पक्षियों के लिये, अधिपति वायु केलिये स्वाहाहौ हविःको आहुति्यां लिये स्वाहा हये हविः की आहुतियां ह “ । द्धक लिये यज्चोका वणेन हृभा है । षष्ठ काण्ड, प्रय सानुवाक सम्पूणं

English

All hail for breath to Air, for power to life to Vāyu, sovran Lord! All hail for vision to the Stars, to Heaven, to Sūrya, sovran

अध्याय ६

श्लोक 9.1

कामात्मा १-३ जमदग्निः।कामात्मा, ३ गावः।अनुष्टुप्।वाञ्छ॑ मे त॒न्वं॑१ पादौ॒ वाञ्छा॒क्ष्यौ॒३वाञ्छ॑ स॒क्थ्यौऽ।अ॒क्ष्यौऽ वृष॒ण्यन्त्याः॒ केशा॒ मां ते॑ कामे॑न शुष्यन्तु

kāmātmā 1-3 jamadagniḥ| kāmātmā, 3 gāvaḥ| anuṣṭup| vāñcha me tanvaṃ1 pādau vāñchākṣyau3vāñcha sakthyau'| akṣyau' vṛṣaṇyantyāḥ keśā māṃ te kāmena śuṣyantu

हिन्दी अर्थ

१८ अथवेवेद-भाष्य का०,६। अनु०° २।सू० १९१ सम्पादित करते हँ रेतस् को स्थापित करते है, म्र २ बहुवचन है । इस द्वारा भिन्न-भिन्न परिवार फी नाना पत्तियों भौर नाना पतियों को सूचित किया है । (पुंसि) पुमान् मे (वै) निश्चय से (रेतस्) वीर्यं (भवति) होता है, दवारा पति की एकता को सूचित किया है ।

English

Lord! An epithalamian charm to ensure the birth of a boy Asvattha on the Sami-tree. There a male birth is certified.

अध्याय ६

श्लोक 9.2

मम॑ त्वा दोषणि॒श्रिषं॑ कृ॒णोमि॑ हृदय॒श्रिष॑म्।यथा॒ मम॒ क्रता॒वसो॒ मम॑ चि॒त्तमु॒पाय॑सि

mama tvā doṣaṇiśriṣaṃ kṛṇomi hṛdayaśriṣam| yathā mama kratāvaso mama cittamupāyasi

हिन्दी अर्थ

(प्रजापतिः) प्रजाभों के पति परमेश्वर ने, (अनुमतिः)पति के अनुकूल् हि मति वाली पत्नी ने, (सिनीवाली). अस्नवालो तथा सुन्दर केशौ वालो प्रत्नीकै गृहमे यदि खाद्य ओर पेय की यथोचितमात्रानहौतौ माता ओर सन्तानो का यथेष्ट पालन-पोषण न हो सकने से भो सन्ताने निर्बल अनुमति ओौर सिनीवाली चन्द्रकला-विशेष नहीं, अपितु देवपत्नियां जौर पति के शमी आकृतिक अर्थात् निर्बल होने पर ।

English

There is the finding of a son: this bring we to the women-folk. 73 The father sows the genial seed, the woman tends and fosters it.

अध्याय ६

श्लोक 9.3

यासां॒ नाभि॑रा॒रेह॑णं हृ॒दि सं॒वन॑नं कृ॒तम् ।गावो॑ घृ॒तस्य॑ मा॒तरो॒ ऽमूं सं वा॑नयन्तु मे

yāsāṃ nābhirārehaṇaṃ hṛdi saṃvananaṃ kṛtam | gāvo ghṛtasya mātaro 'mūṃ saṃ vānayantu me

हिन्दी अर्थ

जनिम्) सापो की जाति के समौप (आगमम्) मै विषवैद्य आ गया व्यापलेती है वसे मैने उसे घेर लिया है (तेन) उस विष को (वारये) र निवारित करता हं । जातियों को पेया हुमा दहै, तो भी इनके विष से रहित हूः मुञ्च पर् विप्वास कारको दुर करता है, वैसे तेरे निराशान्धकार कोम दूर कर दुगा । जसे तुञ्ने व्याप्त नहीं करेगा । उस हंस

English

This is the finding of a son: thus hath Prajāpati declared. Prajāpati, Anumati, Sinivāli have ordered it. Elsewhere may he effect the birth of maids, but here prepare a boy.

अध्याय ६

श्लोक 10.1

संप्रोक्षणम्।१-३ शन्तातिः।१ पृथिवि, श्रोत्रं, वनस्पतिः, अग्निः, २ प्राणः, अन्तरिक्षं, वयः, वायुः, ३ द्यौः, चक्षुः, नक्षत्राणि, सूर्यः।द्वैपदम्, १ साम्नी त्रिष्टुप्, २ प्राजापत्या बृहती, ३ साम्नी बृहती।पृ॒थि॒व्यै श्रोत्रा॑य॒ वन॒स्पति॑भ्यो॒ऽग्नयेऽधि॑पतये॒ स्वाहा॑

saṃprokṣaṇam| 1-3 śantātiḥ| 1 pṛthivi, śrotraṃ, vanaspatiḥ, agniḥ, 2 prāṇaḥ, antarikṣaṃ, vayaḥ, vāyuḥ, 3 dyauḥ, cakṣuḥ, nakṣatrāṇi, sūryaḥ| dvaipadam, 1 sāmnī triṣṭup, 2 prājāpatyā bṛhatī, 3 sāmnī bṛhatī| pṛthivyai śrotrāya vanaspatibhyo'gnaye'dhipataye svāhā

हिन्दी अर्थ

(तनादिः) । सूरय की प्रातःकाल भौर सायंकाल की लाल-रश्मियों मे रोग- रपिमरयां प्रकट होती है । एकःअश्वः एक गुक्ल रङ्मिः। वहु ही है केद्धारार्म तेरेविष को निवारित । ॥ क्षा० ६। अनु०२। सू० १२ अथवेवेद-भाष्य विषम् विषको (वारये) भँ निवारित करता हूं ।

English

A charm against venomous serpents I, As the Sun goes round the heaven, have travelled round the Serpents’ race. I ward thy poison off, as Night parts all else living from the Sun.

अध्याय ६

श्लोक 10.2

प्रा॒णाया॒न्तरि॑क्षाय॒ वयो॑भ्यो वा॒यवेऽधि॑पतये॒ स्वाहा॑

prāṇāyāntarikṣāya vayobhyo vāyave'dhipataye svāhā

हिन्दी अर्थ

आसन्वत् विषम् -सपं के मुख वाला विष, सपं के मूख में रहने वाला (मध्वा) उदक द्वारा (पुञ्चे) मै तेरा सम्पकं करतां हूं, (नयः ) नदियां रूप हँ । (परुष्णी ) बहतो को स्नान कराने वाली नदी (मधु) उदकरूवा है, (शीपाला) ओर शएयनावस्था से पालने वालो अर्थात् सुरक्षा करने वालो है। जल समूह तेरे (आस्न) मूख के लिये (शम्) सुखरूप ओर (हृदे) हृदय के लिये (शम्) सुखरूप (अस्तु) हो । मन्त्र मे सपं विषाक्त रोगी को सम्बोधित कर कटा है किं तेरे विष कौ चिकित्सा के लिये रमँ विषवैद्य तेरे साथ उदक का सम्पकं करता हू दर्शया है। सिक्न-भिस्न प्रकार के उदको सें विष के निवारण को

English

With this, discovered in the days of old by Brāhmans, Rishis, Gods, With this I ward thy poison off, thou Biter! formed and form- ing now. With mead I mingle flowing streams: the hills and mountains shall be mead.

अध्याय ६

श्लोक 10.3

दि॒वे चक्षु॑षे॒ नक्ष॑त्रेभ्यः॒ सूर्या॒याधि॑पतये॒ स्वाहा॑

dive cakṣuṣe nakṣatrebhyaḥ sūryāyādhipataye svāhā

हिन्दी अर्थ

चिकित्सा करने से शरीरगत विष प्रवाह के साथ प्रवाहित हो जाता है । भिन्न-भिन्न होती है । अतः इन द्विविध प्रकार के मेघोंका कथन फिया है । पर्णी है “पुरुष्णी"” वहतो को युगपत् स्नान करा सकने वालो, दरावती बहूदका नदी ( निरुक्त ९ ३।२५) । यह परुष्णी शीपाला है, विषका निवारण करफे विषाक्तकौो शयन करनेसे वचा देती है। स्वै विषाक्त रोगी मे शयन करते को प्रवृत्तिहो जातीदहै, जोकि २२ अथववेद-भाष्य का० ६। अनु०२। सू° १३ उस के लिये घातक होती है । जसे किं कहा टै कि “सपकटा सोए ओर जलचिकित्सा करनी चाहिए । जलचिकित्सासे मूख के तथा हदय के रोग शान्त होकर सुखप्रदान करते हैँ । पवतः मेवनाम (निषं० ११०) ।

English

Parushni and Sipālā mead. May it be well with mouth and heart. Homage to death Worship to weapons of the Gods! worship to weapons of the

अध्याय ६

श्लोक 11.1

पुंसवनम्।१-३ प्रजापतिः।रेतः, ३ प्रजापतिः, अनुमतिः, सिनीवाली।अनुष्टुप्।श॒मीम॑श्व॒त्थ आरू॑ढ॒स्तत्र॑ पुं॒सु॑व॑नं कृ॒तम्।तद् वै पु॒त्रस्य॒ वेद॑नं॒ तत् स्त्री॒ष्वा भ॑रामसि

puṃsavanam| 1-3 prajāpatiḥ| retaḥ, 3 prajāpatiḥ, anumatiḥ, sinīvālī| anuṣṭup| śamīmaśvattha ārūḍhastatra puṃsuvanaṃ kṛtam| tad vai putrasya vedanaṃ tat strīṣvā bharāmasi

हिन्दी अर्थ

(देववधेभ्यः) शत्रु के सेनिकरोके वधोंके लिये (नमः) वज्रायुध हो, (राजवधेभ्यः) उनके राजाओंके वधोंके लिये (नमः) वच्रायुध हो । (अथो) तथा (विश्यानाम्) वेष्यो के (ये वधाः) जौ वध दँ (तेभ्यः) उनः के लिये (मृत्यो) है मूलय! (ते) वेनो कि तेरे, (नमः) वचगुध तथा (सायण) । अतः जय-युद्ध मे परकीय सेनाओं उनके राजाओं तथा वैश्यो के वघ के लिये वच््रागरुध आवश्यक हँ नमः वेखनाम' (निधं० है । "देव" हँ विजिगीषा की भावना वले परराष्ट् संनिकं, यथा “दिवु क्रीडाविजिगीषा'” आदि (दिवादिः) युद्धम संनिको, राजव्े, तथा वैप्यवर्भ आदि का वधहोता ही है, अतः इनका कथन हुभा है । नम॑स्ते अधिवाकायं परावाकायं ते नम॑ः ।

English

Kings! Then worship to the people’s arms! worship, O Death, be paid to thee! Let worship be to thy defence and to thine accusation paid.

अध्याय ६

श्लोक 11.2

पुं॒सि वै रेतो॑ भवति॒ तत् स्त्रि॒यामनु॑ षिच्यते ।तद् वै पु॒त्रस्य॒ वेद॑नं॒ तत् प्र॒जाप॑तिरब्रवीत्

puṃsi vai reto bhavati tat striyāmanu ṣicyate | tad vai putrasya vedanaṃ tat prajāpatirabravīt

हिन्दी अर्थ

(मृत्यो) है गृद्ध होने वाली मुतु ! (ते) तेरे स्वरूप के (अधिवाकाय) अधिकृत वक्ता के लिये (नमः) नमस्कार हौ, (ते) ते का० ६। अनु० २। सू० १३ अथवेवेद-भाष्य २३ (परावाकाय) पराविद्या के वक्ता के लिये (नमः) नमस्कार दौ । (ते) तेरे (सुमत्यै) सुमति वाने दूत के लिये (नमः) नमस्कार हो, (ते) तेरे सायण के अनुसार मन्त्र में “दूतो” का वणेन है (१३।२) । अधि-

English

Death! be this worship paid to thy good-will and thy malevo- lence! Worship to thy physicians, to thy sorcerers be worship paid! Death! let this reverence be done unto thy Brāhmans and thy roots.

अध्याय ६

श्लोक 11.3

प्र॒जाप॑ति॒रनु॑मतिः सिनीवा॒ल्यऽचीक्लृपत्।स्त्रषू॑यम॒न्यत्र॒ दध॒त् पुंमां॑समु दधदि॒ह

prajāpatiranumatiḥ sinīvālya'cīklṛpat| straṣūyamanyatra dadhat puṃmāṃsamu dadhadiha

हिन्दी अर्थ

“ निज दूतावास का अधिकृताधिकारी है, मौर “परावाक'' है युद्धच्छुं पर निज दूतावास का अधिङृताधिकारी है । युद्धकाल मेँ भी इन दूतो पर आ्टे कोश में अधिवचनम् का अथं है ‰0५०५६९४ । एतदनुसार अधिवाक का अर्थं होगा ५५४००81८ कौ योग्यता वाजा अधिवक्ता । दूतावासों में दूत ५0५०८४७७ की योग्यता वाले होने चाहिए, यहं (मृत्यो) है मृत्यु ! (ते) तेरे (यातुधानेभ्यः) यातुधानो के लिये (नमः) नमस्कार हो, (ते) तेरे (भेषजेभ्यः) भेषज) के लिये (नमः) नमस्कारं हो । (ते) तेरे (मूलेभ्यः) मूलो के लिये (नमः) नमस्कार हो, तथा मे “यातनामों के निधान” अथं नहीं, अपितु युद्धमे सेवा के लिये, जाने- आने वाले सेवको का वर्णन है । यातु =जाने-आने वाले, धान = धारण- पोषण करने वाले । इस अर्थ में यातु पद -यातवःके लिये, अथववेद में

English

A charm against consumption Remove thou all Decline that lurks within the members and the joints, The firmly-settled heart-disease that racks the bones and rends the limbs.

अध्याय ६

श्लोक 12.1

सर्प-विष-निवारणम्।१-३ गरुत्मान्।तक्षकः।अनुष्टुप्।परि॒ द्यामि॑व॒ सूर्योऽही॑नां॒ जनि॑मागमम्।रात्री॒ जग॑दिवा॒न्यद्धं॒सात् तेना॑ ते वारये वि॒षम्

sarpa-viṣa-nivāraṇam| 1-3 garutmān| takṣakaḥ| anuṣṭup| pari dyāmiva sūryo'hīnāṃ janimāgamam| rātrī jagadivānyaddhaṃsāt tenā te vāraye viṣam

हिन्दी अर्थ

दारा करने वाले, अर्थात् १०१००७७ ०५९४१ वालो के लिये, मूलेभ्यः वेदवेत्ताओं के लिये । इन चार प्रकारके पुरूषो पर वच्प्रहार यु मेन होना चाहिए, ये चारों रक्नाके योग्य ई। इस नमस्कार द्वारा कथित किया है । यही तभी सम्भव है जब कि इन चार वेत्ता मनुष्य युद्धकाल मँ भौ नमस्कार के (परख सम्) जडो कौ टीला कर बलास रोग को, तथा (आस्थितम्) स्थिर हर (हदयामयम्) (नाशय) नष्ट कर, तथा (यः) जो (अङ्खं ष्ठाः) शरीर के किसी स्थित (च) ओर (पवस) जोड़ोमें रोग है उसे नष्ट कर रोग जो कि शारीरिक वल को नष्ट कर देता है, “बल+ निव लासं बलासिन॑ः क्षिणोमि मुष्करं यंथ। (बलासिनः) बलासरोग वालि रोगौ के (बलासम्) बलास रोग को ध । १. मूलबलभतेभ्पः पुरुषेभ्यः । सायण) ।

English

From the consumptive man I pluck Decline as ‘twere a severed part. I cut the bond that fetters him, even as a root of cucumber. Begone, Consumption, hence away, like a young foal that runs. at speed.

अध्याय ६

श्लोक 12.2

यद् ब्र॒ह्मभि॒र्यदृषि॑भि॒र्यद् दे॒वैर्वि॑दि॒तं पु॒रा।यद् भू॒तं भव्य॑मास॒न्वत् तेना॑ ते वारये वि॒षम्

yad brahmabhiryadṛṣibhiryad devairviditaṃ purā| yad bhūtaṃ bhavyamāsanvat tenā te vāraye viṣam

हिन्दी अर्थ

अथरवैवेद-भाष्य का०६। अनु०२। सु° १४ हृद्रो को स्वस्थान से च्यत कर देने वले, (( निः क्षिणोमि) निःशेषतय। ओ क्षीण करता हूं, (यथा) जसे कि (मृष्करम्) शरीरी करने वाले चोर का निःशेषतया बर्थात् पूर्णतया क्षय कर दिया जाता का ६। अनु० २। सू० १५ अथववेद-भाष्य मामृतात्" (ऋ० ७।५६।१२); इसो प्रकार बलास के बन्धन को मँ (वेद्य) । भासानीसे काटदेताहूं। चोरको चोरीके लिये उग्र दण्डका विधान हमा है । उप्रदण्डके विना सामाजिक जीवन का परिश्ोधत वहींह

English

Then, not pernicious to our men, flee, yearly visitant like grass! A charm for power and preeminence Most excellent of all the plants art thou: thy vassals are the trees.

अध्याय ६

श्लोक 12.3

मध्वा॑ पृञ्चे न॒द्यः॑१ पर्व॑ता गि॒रयो॒ मधु॑ ।मधु॒ परु॑ष्णी॒ शीपा॑ला॒ शमा॒स्ने अ॑स्तु॒ शं हृ॒दे

madhvā pṛñce nadyaḥ1 parvatā girayo madhu | madhu paruṣṇī śīpālā śamāsne astu śaṃ hṛde

हिन्दी अर्थ

निर्वलासेतः प पंताञुंगः रिश्ुको य॑या । (वलास) है बलास रोग ! (इतः) इस शरीर से (निःपत) निकल चलाजा, (यथा) जसे कि (आशुंगः+) शीघ्रगामी (शिशुकः) मृग ! । (अथो ) तथा (इटः) चला गया (हायनः) वषेकाल (इव) जसे फिर नही लोरता वैसे (उप द्राहि) त्रु शरीरसे अलग होकर चला जा गौर (अवीरहा) इस वीर का हननेन कर । “टः = इट गतौ (भ्वादिः) । (ओषधीनाम्) गषधियों मे (उत्तमः असि) तु उत्तम भोषधि है, , (यः) जो (अस्मान्) हमे (अभिदासति) उपलक्ष्य करके हमारी

English

Let him be subject to our power, the man who seeks to injure us. Whoever seeks to injure us, with kinsmen or no kin to aid, May I be uppermost of all, even as this Plant is queen of trees.

अध्याय ६

श्लोक 13.1

मृत्युजयः।१-३ अथर्वा।(स्वस्त्ययनकामः)।मृत्युः।अनुष्टुप्।नमो॑ देवव॒धेभ्यो॒ नमो॑ राजव॒धेभ्यः॑ ।अथो॒ ये विश्या॑नां व॒धास्तेभ्यो॑ मृत्यो॒ नमो॑ऽस्तु ते

mṛtyujayaḥ| 1-3 atharvā| (svastyayanakāmaḥ)| mṛtyuḥ| anuṣṭup| namo devavadhebhyo namo rājavadhebhyaḥ | atho ye viśyānāṃ vadhāstebhyo mṛtyo namo'stu te

हिन्दी अर्थ

्ऽपुवयस्को मृगः, अन्यो वा प्राणी । दारा करने वाले, अर्थात् २९५५7038 5००९» वालों ==पुरुषजाति के मूलभूत बच्चों ' के लिप “ब्राहयणेभ्यः वेदवेत्ताओं के लिये । इन चार प्रकार । होना चाहिए, ये चारों रक्षा के योग्य ईह । इस सिद्धान्त को नमः (४. नमस्कार द्वारा कथित किया है । यही तभी सम्भव है जब कि र चा वेत्ता मनुष्य युद्धकाल मे भो नमस्कार मेभीरहते हों, उन पर प्रहारन होना चाहिए । ( 0 ) जौडों कौ ढोला कर दः वाले, (सवेम्) सव (वलासम्,) (नाशय) चष्ट कर, तथा (यः ) जो (अङ्गष्ठाः) शरीर के किसी अंग स्थित (च) ओर (पेसु) जोड़ मे रोग दहै उसे नष्ट कर

English

As Soma hath been made the best of all oblations ‘mid the plants, So, as Talāsā is the queen of trees, may I be chief of all. A medical charm

अध्याय ६

श्लोक 13.2

नम॑स्ते अधिवा॒काय॑ परावा॒काय॑ ते॒ नमः॑ ।सु॒म॒त्यै मृ॑त्यो ते॒ नमो॑ दुर्म॒त्यै त॑ इ॒दं नमः॑

namaste adhivākāya parāvākāya te namaḥ | sumatyai mṛtyo te namo durmatyai ta idaṃ namaḥ

हिन्दी अर्थ

बलास रोग जो कि शारीरिक वल को नष्ट कर देता है, “बल + पीड़ा); (५) पवसु जोड़ों का ददं, ाधा॥18 (2० ग्या) । निरासं बलासिनः कषिणोगि सुष्करं यंथ। (बलासिनः) बलासरोग वालि रोगी के (बलासम्) बलास रोगको १. सूलबलमूतेम्पः पुरुषेभ्यः । सायण) ।

English

O Ābayu, non-Ābayu, dire is thy juice, O Ābayu; we eat the gruel made of thee. Vihalha is thy father’s name, thy mother’s is Madāvati. Yea, verily thou art not he, thou who hast well protected life.

अध्याय ६

श्लोक 13.3

नम॑स्ते यातु॒धाने॑भ्यो॒ नम॑स्ते भेष॒जेभ्यः॑ ।नम॑स्ते मृत्यो॒ मूले॑भ्यो ब्राह्म॒णेभ्य॑ इ॒दं नमः॑

namaste yātudhānebhyo namaste bheṣajebhyaḥ | namaste mṛtyo mūlebhyo brāhmaṇebhya idaṃ namaḥ

हिन्दी अर्थ

के योग्य रहै, चाहेवेशतु के राज्य ही को स्वस्थान से च्युत कर देने वाले, . अयववेद-भाष्य का०६। अनु०२। सू० १४ का० ६। अनु° २। सू० १५ अयवेवेद-भाष्य २५ ओर हि (निः क्षिणोमि) निःशेषतय। मै क्षीण करता ः, (यथा) असे ि ब्रहावेत्तामों ओौर ( ) रता हूं, (यथा) जसे किं (मृष्करम्)

English

Go thou to rest, Tauvilikā! This noisy cry hath sunk to rest. Go hence, depart, Nirāla, thou! the tawny and the tawny- eared. 74

अध्याय ६

श्लोक 14.1

बलासनाशनम्।१-३ बभ्रुपिङ्गलः।बलासः।अनुष्टुप्।अ॒स्थि॒स्रं॒सं प॑रुस्रं॒समास्थि॑तं हृदयाम॒यम्।ब॒लासं॒ सर्वं॑ नाशयाङ्गे॒ष्ठा यश्च॒ पर्व॑सु

balāsanāśanam| 1-3 babhrupiṅgalaḥ| balāsaḥ| anuṣṭup| asthisraṃsaṃ parusraṃsamāsthitaṃ hṛdayāmayam| balāsaṃ sarvaṃ nāśayāṅgeṣṭhā yaśca parvasu

हिन्दी अर्थ

के पुरुषो पर वज्रप्रहार पु मेन चोरी करने वाले चोर का निःशेषतया अर्थात् पूर्णतया क्षय कर दिया जाता मूलकारण को (छिन) मँ उच्छिन्न कर देत। हू, (इव) जसे कि (उर्वावाः) फकड़ी का बन्धन कट जाता है । भासानीसेकाटदेताहूं।चोरको चोरी के लिये उग्र दण्डका विधान ¦ हमा है । उग्रदण्डके विना सामाजिक जीवन का परिक्षोधन नहींदहो

English

A charm to ensure conception Even as this mighty Earth conceived the germ of all the things that be, So may the germ of life be laid in thee that thou mayst bear a son.

अध्याय ६

श्लोक 14.2

निर्ब॒लासं॑ बला॒सिनः॑ क्षि॒णोमि॑ मुष्क॒रं य॑था ।छि॒नद्म्य॑स्य॒ बन्ध॑नं॒ मूल॑मुर्वा॒र्वा इ॑व

nirbalāsaṃ balāsinaḥ kṣiṇomi muṣkaraṃ yathā | chinadmyasya bandhanaṃ mūlamurvārvā iva

हिन्दी अर्थ

निर्वैखासेतः भ पंतासुंगः रिशो यया । (वलास) है बलास रोग ! (इतः) इस शरीर से (निःपत) निकल चलाजा, (यथा) जसे कि (आशुगः) शीघ्रगामी (किद्युकः) मृग! (अथो ) तथा (इटः) चला गया (हायनः) वषंकाल (इव) जेसे फिर नहीं ह तौटता वैसे (उप द्राहि) तु शरीरसे अलग होकर चला जा ओौर (अवीरहा) इस वीर का हनन न कर । “ट: = इट गतौ (भ्वादिः) ” ।

English

Even as this mighty Earth hath borne and bears the stately forest trees, So may the germ of life be borne in thee that thou mayst bear a son. Even as this mighty Earth hath borne and bears the mountains and the hills,

अध्याय ६

श्लोक 14.3

निर्ब॑लासे॒तः प्र प॑ताशु॒ङ्गः शि॑शु॒को य॑था ।अथो॒ इट॑ इव हाय॒नोप॑ द्रा॒ह्यवी॑रहा

nirbalāsetaḥ pra patāśuṅgaḥ śiśuko yathā | atho iṭa iva hāyanopa drāhyavīrahā

हिन्दी अर्थ

(ओषधीनाम्) मोषधियों मे (उत्तमः असि) तु उत्तम भोषधि है, (वृक्षाः) वृक्ष (तव) तैर (उपस्तयः) आश्य रूप हैँ तुउन पर आरूढ ह, (यः) जो (अस्मान्) हभ (भभिदासति) उपलक्ष्य करके हमारी २६ सथववेद-भाष्य का० ६ अनु० २ सू° १ हिसा करता है, या हरम दास बनाता है (सः) वह ( जस्माकम्) हमारे । प्रतिरूपकं नाम पद 1 अस्तिः के अकार कालोप । दासति+-दसु उपक्षये (दिवादिः) । उत्तमपद पृलिङ्ख है, अतः ओषधि पद का प्रयोग भी पुंलिङ्ख (सबन्धुः) समान नाभिवग्धन वाला, (च) ओर (असवन्धुः) परकीय

English

So may the germ of life be borne in thee that thou mayst bear a son. p. a207 Even as this mighty Earth supports the moving world that dwells thereon, So may the germ of life be borne in thee that thou mayst bear a son.

अध्याय ६

श्लोक 15.1

शत्रुनिवारणम्।१-३ उद्दालकः।वनस्पतिः।अनुष्टुप्।उ॒त्त॒मो अ॒स्योष॑धीनां॒ तव॑ वृ॒क्षा उ॑प॒स्तयः॑ ।उ॒प॒स्तिर॑स्तु सो॒३स्माकं॒ यो अ॒स्मां अ॑भि॒दास॑ति

śatrunivāraṇam| 1-3 uddālakaḥ| vanaspatiḥ| anuṣṭup| uttamo asyoṣadhīnāṃ tava vṛkṣā upastayaḥ | upastirastu so3smākaṃ yo asmāṃ abhidāsati

हिन्दी अर्थ

(यथा) जेसे (गोषधीनाम् हविषाम्) हविष्य ओषधयो मेँ (सोमः) सोम (उत्तमः) उत्तम (कृतः) विधाता ने किया है, तथा (वृक्षाणाम्) वृक्षो मे (तलाशा) तलाश भोषधि उत्तम को गई है, (इव) इसौ प्रकारं "पलाश" वृक्ष किया है । “तलाशा स्त्रीलिङ्गं ओषधि है (मनर १ मराघधाररूप करके ओर उन्हे भ्याप्त करके, शयन करने वाली मोषधि । वृक्ष की ओर बदृते हैँ भौर स्वप्नावस्था में होते है, शयन करते ह ४५ का०. ६१ अनु०२। ° १६ अयवेवेद-भाष्य

English

A charm to banish jealousy The first approach of Jealousy, and that which followeth the first, The pain, the fire that burns within thy heart we quench and drive away.

अध्याय ६

श्लोक 15.2

सब॑न्धु॒श्चास॑बन्धुश्च॒ यो अ॒स्मां अ॑भि॒दास॑ति ।तेषां॒ सा वृ॒क्षाणा॑मिवा॒हं भू॑यासमुत्त॒मः

sabandhuścāsabandhuśca yo asmāṃ abhidāsati | teṣāṃ sā vṛkṣāṇāmivāhaṃ bhūyāsamuttamaḥ

हिन्दी अर्थ

तलाशा स्त्रीलिङ्गं एक वचन। सायणने तलाशा का अर्थं (आवयः) ह परमेश्वर ! तू प्रलयकाल मेँ सुष्टिका भक्षण" करं । लेता है (अशनावयः) भौर सुष्टिकाल मेतु सृष्टि का भक्षणं नहीं करता" (आचयः) है भक्षण करने. वाले ! प्रलय कालभ (ते) तेरा दीप्त हुए उस रसः का (आ अद्मसि) हम पूणेतया भोग करते ह ।

English

Even as the earth is dead to sense, yea, more unconscious than the dead, Even as a corpse’s spirit is the spirit of the jealous man. The thought that harbours in thy heart, the fluttering doubt that dwells therein.

अध्याय ६

श्लोक 15.3

यथा॒ सोम॒ ओष॑धीनामुत्त॒मो ह॒विषां॑ कृ॒तः ।त॒लाशा॑ वृ॒क्षाणा॑मिवा॒हं भू॑यासमुत्त॒मः

yathā soma oṣadhīnāmuttamo haviṣāṃ kṛtaḥ | talāśā vṛkṣāṇāmivāhaṃ bhūyāsamuttamaḥ

हिन्दी अर्थ

। कौशिक सूत्रों मौर तदनुसार सायणभाष्य मे सूक्तं का विनियोग अक्षिरोग, की वर्णन शैली कवितामय प्रायः होती है अतः उसके “कर” अर्थात् हीथ का वर्णन भी हृ है । वस्तुतः वह् “अपाणिपादो जवनौ ग्रहीता है । (ते) तेरा (पिता) पिता है, (मदावतौ) मदमस्त कर देने वालो प्रकृति (ते माता) तेरी माता द (सः) वह तु (हिन) स्वयम् अपनी वृद्धि कर, १. इसलिये पर्मेएवर “अक्नाद"” है । देती है, तब वह सुखदायक पिता से विमुख हो जाता है । इसलिये उसे हो। तुतो प्रकृति से पृथक् है, चाहे तेरा शरीर प्रकृतिजन्य है । तूने निज आत्म-स्वरूप को भुला दिया है । आवयः = आवयतिः अतिकर्मा (सायण), या+ वी (गतिव्याप्तिप्रननका्त्यसन'खादनेषु" (अदादिः) “नाम! पद

English

Yea, all thy jealousy, like heat born of the dance, I banish thence. A prayer for purification Let the Gods purify me, let men purify me with a prayer.

अध्याय ६

श्लोक 16.1

अक्षिरोगभैषजम्।१-४ शौनकः।चन्द्रमाः, मन्त्रोक्तदेवताः, अनुष्टुप्, १ निचृत्त्रिपदा गायत्री, ३ बृहतीगर्भा ककुम्मत्यनुष्टुप्, ४ त्रिपदा प्रतिष्ठा।आब॑यो॒ अना॑बयो॒ रस॑स्त उ॒ग्र आ॑बयो ।आ ते॑ कर॒म्भम॑द्मसि

akṣirogabhaiṣajam| 1-4 śaunakaḥ| candramāḥ, mantroktadevatāḥ, anuṣṭup, 1 nicṛttripadā gāyatrī, 3 bṛhatīgarbhā kakummatyanuṣṭup, 4 tripadā pratiṣṭhā| ābayo anābayo rasasta ugra ābayo | ā te karambhamadmasi

हिन्दी अर्थ

तौविंलिकेभवेरयावायरमैलव रेयीत् । (तौविलिके) है हिसाकारिणी प्रकृति ! (अवेलय अव, इलय) तु हुआ जीवात्मा (अव, एेलयीत्) तेरे स्वरूप को अवगत करके तुञ् से विमुख प्रेरित हो चुका) (च) तथा (वब्न्:) शरीर का भरण-पोषण करने वाना जीवात्मा (च) भौर (बभ्र.कणः) शरीर का भरण-पोषण करने. वालां कणे आदि इन््रियसमूह दोनों ही तुक्च से विमुख हौ चुके, ओौर “ठ” को इक् आदेश); “र् को “ल्” रलयोरभेदः, रकार भौर वकार वणो का ग्यत्यास । अवेलय अव +-इल (क्षेपणे, तुदादिः) । जान लिया कि प्रकृति हिसाकारिणी है, तब वह प्रकृति से विमृषहो

English

Cleanse me all creatures that exist! may Pavamāna make me pure. May Pavamāna make me pure for wisdom and for power and life, and unassailed security. God Savitar, byboth of these, filter and pressing out this juice, purify us that we may see.

अध्याय ६

श्लोक 16.2

वि॒हह्लो॒ नाम॑ ते पि॒ता म॒दाव॑ती॒ नाम॑ ते मा॒ता।स हि॑न॒ त्वम॑सि॒ यस्त्वमा॒त्मान॒माव॑यः

vihahlo nāma te pitā madāvatī nāma te mātā| sa hina tvamasi yastvamātmānamāvayaḥ

हिन्दी अर्थ

१. यथा ““सुरिरसि वर्चोधा असि तनुपानो असि जीवात्मा के लिये (अथर्व अथवंवेद-भाष्य काऽ ६। अनु०२। सू० १६ (अलसाला, असि, पूर्वा) है प्रकृति ! क्रम मे पहली तूहै, भूषण के सदृश शोभायमाना, चमकीलो है; (सिलाञ्जाला, असि, उत्तरा) तदुत्तर तु बन्धनकारिणी, गतिशीला भौर जालखूपा है; तदुत्तर त् (नीलागल- साला) नीलवणेवाली, गत्यभाववाली हूर शोभायमाना होती है । शालते इति, जो किं भूषण के रूप मेँ चमकती है वह प्रकृति । अल भूषण- बन्धनकारिणी, गतिशोला, भौर जालखूपा है 1 यह् रूप प्रकृति का,

English

A charm against fever He goes away as ‘twere from this fierce burning fire, inebriated and lamenting he departs. Let him, the lawless, seek another and not us. Worship be paid to Fever armed with fiery

अध्याय ६

श्लोक 16.3

तौवि॑लि॒केऽवे॑ल॒यावा॒यमै॑ल॒ब ऐ॑लयीत्।ब॒भ्रुश्च॑ ब॒भ्रुक॑र्ण॒श्चापे॑हि॒ निरा॑ल

tauvilike'velayāvāyamailaba ailayīt| babhruśca babhrukarṇaścāpehi nirāla

हिन्दी अर्थ

(अथव ८।२।१) । यह् “रजस्” रूपा प्रकृति दहै, जो कि शरीर के जाल में (गतिरहित वाला) + साला (शालते इति); एतद् रूपा प्रकृति, तमोरूपा भाव रूप वाली हुई “साला” शालते । यह् तमोरूपा है । इस प्रकार मन्त का० ६। अनु° २। सु° १७ अथवेवेद-भाष्य ( अथववेद-भाष्य का० ६।अनु० २ । भु° १७ (यथा, इयम्, मही पृथिवी) जसे यह महती या महिमा वालो .पृथिवौ (भूतानाम्) शरुतो की उत्पत्ति के लिये (गभं आदधे) शर्माघान करती है,

English

heat. To Rudra and to Fever be our worship paid: worship be paid to Varuna the splendid King! Worship to Dyaus, to Earth, worship be paid to Plants!

अध्याय ६

श्लोक 16.4

अ॒ल॒साला॑सि॒ पूर्व॑ सि॒लाञ्जा॑ला॒स्युत्त॑रा ।नी॒ला॒ग॒ल॒साला॑

alasālāsi pūrva silāñjālāsyuttarā | nīlāgalasālā

हिन्दी अर्थ

हो, स्थित हो, (अनुमूतुम् ) उत्पत्ति विधि के अनुसार (सवितवे) पदा होने मे “भूतयज्ञः ' तथा पञ्च महाभूतो मे “भूत शब्द । ¦ पृथिवी ६ सूये से फट कर अलग हई तव इस पर कोई प्राणी तथा कालान्तर प्राणी मूत भी पृथिवी के गभं से पैदा हृएु । पाथिव पदार्थ जप जल. तेज पाथिवाग्ति, तथा वायुमण्डल भो पृथिवोसे ही पेदा हुए । (यथा) जेते (इयम्, मह, पृथिवी ) इस 9 महती पृथिबी ने (दमान्, वनस्पतीन्) इन वनस्पतियां को गर्भरूप में ( दाधार) धारण किया पृथिवी बीजरूप में गभं धारण करती है, ओर उसे नियत समय

English

Thou who, aglow with heat, makest all bodies green, to thee, red, brown, I bow, the Fever of the wood. A charm to strengthen hair and promote its growth

अध्याय ६

श्लोक 17.1

गर्भदृंहणम्।१-४ अथर्वा।गर्भदृंहणम्, पृथिवि।अनुष्टुप्।यथे॒यं पृ॑थि॒वी म॒ही भू॒तानां॒ गर्भ॑माद॒धे।ए॒वा ते॑ ध्रियतां॒ गर्भो॒ अनु॒ सूतुं॒ सवि॑तवे

garbhadṛṃhaṇam| 1-4 atharvā| garbhadṛṃhaṇam, pṛthivi| anuṣṭup| yatheyaṃ pṛthivī mahī bhūtānāṃ garbhamādadhe| evā te dhriyatāṃ garbho anu sūtuṃ savitave

हिन्दी अर्थ

यथा) जैसे (दयम्, मही, पृथिवो) इस महती । पृथिवी ने (पर्वतान्, त तो ौर पवंतीय प्रान्तों को गर्भरूप म (दाधार) धारण पर्वतो गौर गिरयो का पवरूप पृथिवी के गभं भे पिघला हृभा तरल गिरिों का पूर्वरूप है, जो कि पर्वतो ओौर भिरियोंकेषखूपमें पृथिवी को फाड़ कर बाहर आता है 1 । "नैगमा" कीचड़, धुआं, उष्णवाष्प, गस, लावा, तथा चटनी पदा्थो का समूह् होता है । . कां० ६.। अनु०.२। स० १८ अथवेवेद-भाष्य ३१

English

Of all the three terrestrial realms the ground is verily the best. I from the skin that covers these gather a healing medicine. Thou art the best of medicines, most excellent of Plants art thou,

अध्याय ६

श्लोक 17.2

यथे॒यं पृ॑थि॒वी म॒ही दा॒धारे॒मान् वन॒स्पती॑न्।ए॒वा ते॑ ध्रियतां॒ गर्भो॒ अनु॒ सूतुं॒ सवि॑तवे

yatheyaṃ pṛthivī mahī dādhāremān vanaspatīn| evā te dhriyatāṃ garbho anu sūtuṃ savitave

हिन्दी अर्थ

(यथा) जिस प्रकार (इयम्, मही, पृथिवी) इस महती पृथिवी ने तथा स्थावर वस्तुओं को (दाधार) धारण किया हुमा है, (एवा = ८: हो, (अनु सूतुम्) उत्पत्तिविधि के अनुसार (सवितवे) पदा होने कर उसके हदय को सन्तप्त न करते रहे । (यथा) जसे (भूमिः) भूमि (मृतमनाः) मरे मन वाली है, (मृतात्) मृत की अपेक्षा भी (मृतमनस्तरा) अतिशयदूप मेँ मरे मन वाली है, (यथा उत) भौर जसे (मन्न.षः) मर गये पुरुष का (मनः) मन होता

English

As Soma ‘mid the wandering stars, as Varuna among the Gods. Endowed with wealth, denying not, give freely fain to give your gifts! Ye stay the hair from falling off: ye strengthen and increase its growth.

अध्याय ६

श्लोक 17.3

यथे॒यं पृ॑थि॒वी म॒ही दा॒धार॒ पर्व॑तान् गि॒रीन्।ए॒वा ते॑ ध्रियतां॒ गर्भो॒ अनु॒ सूतुं॒ सवि॑तवे

yatheyaṃ pṛthivī mahī dādhāra parvatān girīn| evā te dhriyatāṃ garbho anu sūtuṃ savitave

हिन्दी अर्थ

जाता है, उसकी मनन शक्ति मर जात्ती है । .. चलते-फिरते भूमि पर पादप्रहार होते, कृषि आदि द्वारा इस के शरीर को चीरा-फाड़ा जाता, हस पर मलमूत्र का व्याग किया जाता, परन्तु भूमि प्रतिक्रिया नहीं करती, क्योंकि यहं मानो मतमना है, मृत के शरीरकी अपेक्षा भी अनुभूति तथा विचार से अधिक शून्या है। मृतका शरोर तो भूति आदि से रहित रही है । ई््यालु को एेसौ अवस्था उस के जीवित (ते) तेरे (हृदि) हदय में (श्रितम्) आश्वय पाया हमा (यत्) जो ् निःरेषरूप में पृथक् कर देता ह (दतः) लुहार की धौकनी से (इव)

English

To the Maruts or Storm-Gods 75 Dark the descent; the strong-winged birds are golden: they fly aloft to heaven, enrobed in

अध्याय ६

श्लोक 17.4

यथे॒यं पृ॑थि॒वी म॒ही दा॒धार॒ विष्ठि॑तं॒ जग॑त्।ए॒वा ते॑ ध्रियतां॒ गर्भो॒ अनु॒ सूतुं॒ सवि॑तवे

yatheyaṃ pṛthivī mahī dādhāra viṣṭhitaṃ jagat| evā te dhriyatāṃ garbho anu sūtuṃ savitave

हिन्दी अर्थ

निकाल दिया जाता है । दृति == चमड़ कौ थेली । (१-३) । शन्ताति: । नाना देवलाः, तथा चन्द्रमाः । गायत्री; १ अनु- पनन्त मा देवजनाः पुनन्तु मन॑वो धिया । दारा (पुजन्तु) पवित्र कर । (विश्वा भूतानि) सब भूत (पुनन्तु) मुस पवित्र करर, (पवमानः) पवित्र करने वाला परमेश्वर (मा) मुके (पुनातु) देवजनाः = “देवाऽअयजन्त साश्याऽऋषयरच ये" (यजू० ३१।६) ।

English

waters. They have come hither from the seat of Order, and inundated earth with streams of fatness. Ye make floods rich in milk, make plants propitious, what time ye stir, O golden-breasted

अध्याय ६

श्लोक 18.1

ईर्ष्याविनाशनम्।१-३ अथर्वा।ईर्ष्याविनाशनम्।अनुष्टुप्।ई॒र्ष्याया॒ ध्राजिं॑ प्रथ॒मां प्र॑थ॒मस्या॑ उ॒ताप॑राम्।अ॒ग्निं हृ॑द॒य्यं॑१ शोकं॒ तं ते॒ निर्वा॑पयामसि

īrṣyāvināśanam| 1-3 atharvā| īrṣyāvināśanam| anuṣṭup| īrṣyāyā dhrājiṃ prathamāṃ prathamasyā utāparām| agniṃ hṛdayyaṃ1 śokaṃ taṃ te nirvāpayāmasi

हिन्दी अर्थ

कही है 1 मनवः द्वारा मानसिक पवित्रता कहो ह । भूतानि द्वारा शारीरिक पवित्रता, ओर पवमान द्वारा सवेतोमुखी पवित्रता कही है । भूतानि दास का० ६ । अनु० २। सु° १९ अथवेवेद-भाष्य ३२ प्थिवी, आपः, तेज, वायु, आकाश का कथन इजा है । ये पांचों भूत शोधघक हँ । पव्रमान द्वारा वायु का ग्रहण नहीं, वायु । “भूत'' है, अतः वह “विश्वा भूतानि" के अन्तरगत है। धिया धीः कर्मनामः ्रज्ञानाम (निषं०

English

Maruts! Pour down your showers of vigorous strength and favour there where ye sprinkle mead, O Maruts, heroes!

अध्याय ६

श्लोक 18.2

यथा॒ भूमि॑र्मृ॒तम॑ना मृ॒तान्मृ॒तम॑नस्तरा ।यथो॒त म॒म्रुषो॒ मन॑ ए॒वेर्ष्योर्मृ॒तं मनः॑

yathā bhūmirmṛtamanā mṛtānmṛtamanastarā | yathota mamruṣo mana everṣyormṛtaṃ manaḥ

हिन्दी अर्थ

पवंपानः पुनातु मा करत्वे दक्षाय जीवसं । (पवमानः) पवित्र करने वाला परमेश्वर (मा ) मृस्ल (पुनातु ) पवित्र (दक्षाय ) बुद्धि के लिये, (जीवसे) पवित्र जीवनके लिये, अथो) ओर (अरिष्टतातये) हिसा के विस्तार के लिये । (“शिवशमरिष्टस्य करे", अष्टा० ४।४।१४३) अधिक पवित्रता के लिये । पुनः परमेश्वर से प्रार्थना की गई है ।

English

O Maruts, send ye down, streaming with water rain which, may, filling all the sloping valleys, Leap like a bold girl in a man’s embraces, or like a matron tumbled by her husband.

अध्याय ६

श्लोक 18.3

अ॒दो यत् ते हृ॒दि श्रि॒तं म॑न॒स्कं प॑तयिष्णु॒कम्।तत॑स्त ई॒र्ष्यां मु॑ञ्चामि॒ निरू॒ष्माणं॒ दृते॑रिव

ado yat te hṛdi śritaṃ manaskaṃ patayiṣṇukam| tatasta īrṣyāṃ muñcāmi nirūṣmāṇaṃ dṛteriva

हिन्दी अर्थ

उभाभ्यां देव सवितः पवित्रैण सेनं च । अस्मान् पुनीहि चक्ष॑से ॥३॥ वेदों के स्वाध्याय दवारा निज जोवन को पवित्र कर, तथा 1, बयववेद-भाष्य का० ६॥ अनु० २) सू°० २० (दहतः) दहन करने वाली (अग्नेः इव) अग्नि के दाह के सदृश, (मस्य शुष्मिणः) सुखा देने वाले इस ज्वर का दाह (एति) भाताहै शरीर इधर-उधर जाता-आाता है । (अव्रतः) ज्वर कर्मरहित कर देने वाला दहै, यह्

English

To the Waters Here flow the restless ones, they flow unceasing through the day and night, Most excellently wise I call the Goddess Waters hitherward.

अध्याय ६

श्लोक 19.1

पावमानम्।१-३ शन्तातिः।चन्द्रमाः, १ देवजनाः, मनवः विश्वा भूतानि, पवमानः, २ पवमानः, ३ सविता।गायत्री, १ अनुष्टुप्।पु॒नन्तु॑ मा देवज॒नाः पु॒नन्तु॒ मन॑वो धि॒या।पु॒नन्तु॒ विश्वा॑ भू॒तानि॒ पव॑मानः पुनातु मा

pāvamānam| 1-3 śantātiḥ| candramāḥ, 1 devajanāḥ, manavaḥ viśvā bhūtāni, pavamānaḥ, 2 pavamānaḥ, 3 savitā| gāyatrī, 1 anuṣṭup| punantu mā devajanāḥ punantu manavo dhiyā| punantu viśvā bhūtāni pavamānaḥ punātu mā

हिन्दी अर्थ

(तपुवधाय ) शरीर को तपा देना जिस का घातुक भायुघ है उस (तक्मने) पित्तज्वर के लिये (नमः अस्तु) नमः हो । शुष्मिणः = शुष्म बलनाम (निधं ० २।६) । पित्तज्वर शोषक है, ओर प्रबल वेग के साथ आक्रमण करता है । यह रक्त को सुखा हैता है । तक्मने == तकि छृच्छृजीवने (भ्वादिः), यह् जीवन को कष्टमय कर देता है। बुद्धि मौर करमो मे पवित्र जीवन वाले (जथवं० ६।१६।१-३) । अन्यम् = अपवित्र जीवन वाले को। 'नमः' के दो अथं मर्भिप्रेत है अन्न भौर वज नष्ट हो जाता है । विनियोगकारों ने सूक्त का देवता “यक्षमनाशन'' कहा - रक्तं के सुख जाने से कमजोरी के कारण यक्ष्म आक्रमण करता हो ।

English

Let the deft Waters, summoned, give permission that we bear them off, And quickly set us on our way. Let all the people celebrate the rite of Savitar the God.

अध्याय ६

श्लोक 19.2

पव॑मानः पुनातु मा॒ क्रत्वे॒ दक्षा॑य जी॒वसे॑ ।अथो॑ अरि॒ष्टता॑तये

pavamānaḥ punātu mā kratve dakṣāya jīvase | atho ariṣṭatātaye

हिन्दी अर्थ

(खद्राय) पाप के फलरूप में रलाने वाले परमेश्वर के लिये (नमः) नमस्कार हो, (तक्मने) जीवन को कष्टमय करने वाले ज्वर के लिये की दीप्तिवाले, (राज्ञे) राजा (वरुणाय)मेष के लिये (नमः) अघ्राहुतियं । हो, (दिवे) चुलोक के लिये नमः) अघ्नाहूतियां हों, (पृथिव्य) पृथिवी कौ शुद्धि के लिये (नमः) अक्षाहूवियां हो, (ओषधीभ्यः) अओषधियों ख (तमः) अन्न की प्राप्ति हो, खाच अन्न ही नही भपितु यज्ञाणिवि दास खाद्य अन्न भी है, अतः स का वारण करता है, अतः यह सब प्राणियों का राजा है । इस में दीप्ति ह मेघीय विद्युत् । वरुण है मेष, एतदथं देखो निरक्त (१०।१।५) .मे वरुण

English

Sweet unto us be Waters, Plants propitious! To the Rivers Forth from the Hills of Snow they stream, and meet in Sindhu here or there.

अध्याय ६

श्लोक 19.3

उ॒भाभ्यां॑ देव सवितः प॒वित्रे॑ण स॒वेन॑ च ।अ॒स्मान् पु॑नीहि॒ चक्ष॑से

ubhābhyāṃ deva savitaḥ pavitreṇa savena ca | asmān punīhi cakṣase

हिन्दी अर्थ

(अयम्, यः) यह जोत (अभिशोचयिष्णुः) शरीरके सब मोर उप- । ताप पेदा करने वाला, (विश्वा रूपाणि) शरीर के सब सूपो को (हरिता । हरितानि) हरे-पीले (कृणोषि)कर देता है, (तस्मै) उस (अरुणाय) लाल (नमः) पञ्यान्न तथा मौषध-वच प्रहार (कृणोमि) म करता हूं । पित्तज्वर में पित्त के विगड़ जानेके कारण शरीर हरा-पीला, मख- १. व्याख्या के लिये निरुक्तकार ने “नीचीनवारं वरुणः" मन्त (ऋ० ५।८५।३) पपस्थित किया है जिसमेंवृष्टिकाभी वर्णनदहै, ओौर वरुणको राजा भी षहा

English

To me the sacred Waters gave the balm that heals the heart’s disease. Whatever rupture I have had that injured eyes or heels or toes. All this the Waters, skilfullest physicians, shall make well again,

अध्याय ६

श्लोक 20.1

यक्ष्मनाशनम्।१-३ भृग्वङ्गिराः।यक्ष्मनाशनम्।१ अतिजगती, २ ककुम्मतीप्रस्तारपङ्क्तिः, ३ सतः पङ्क्तिः।अ॒ग्नेरि॑वास्य॒ दह॑त एति शु॒ष्मिण॑ उ॒तेव॑ म॒त्तो वि॒लप॒न्नपा॑यति ।अ॒न्यम॒स्मदि॑च्छतु॒ कं चि॑दव्र॒तस्तपु॑र्वधाय॒ नमो॑ अस्तु त॒क्मने॑

yakṣmanāśanam| 1-3 bhṛgvaṅgirāḥ| yakṣmanāśanam| 1 atijagatī, 2 kakummatīprastārapaṅktiḥ, 3 sataḥ paṅktiḥ| agnerivāsya dahata eti śuṣmiṇa uteva matto vilapannapāyati | anyamasmadicchatu kaṃ cidavratastapurvadhāya namo astu takmane

हिन्दी अर्थ

रै । साथ ही वरुण अन्तरिक्षस्थानी देवता मीदटहै। ( ६ अथर्ववेद-भाष्य का०६। अनु० २। सू० ९० कहा है । जैसे पिण्ड गौर पिण्डके अवयवो का शासन, जीवात्मा दासय के फलरूप मे सलाने वाले परम-आत्मा वारा होता है जैसे जीवित देह- आत्मा का वर्णन इसलिये पुरुष-रूप मे भी होता है । इस पुरुष के शरीरा-

English

All Rivers who have Sindhu for your Lady, Sindhu for your Queen, Give us the balm that heals this ill: this boon let us enjoy from you.

अध्याय ६

श्लोक 20.2

नमो॑ रु॒द्राय॒ नमो॑ अस्तु त॒क्मने॒ नमो॒ राज्ञे॒ वरु॑णाय॒ त्विषी॑मते ।नमो॑ दि॒वे नमः॑ पृथि॒व्यै नम॒ ओष॑धीभ्यः

namo rudrāya namo astu takmane namo rājñe varuṇāya tviṣīmate | namo dive namaḥ pṛthivyai nama oṣadhībhyaḥ

हिन्दी अर्थ

वयव का भी वणैन यजुवद के पुरुष सूक्त ३१ मे हमा है (३१।१०,१३) (३१।१०,१३) 1 तथापि यह् सप्रयोजन ओर सार्थक रै, यह् दशनि के लिये कि जैसे जीवित मनुष्य का देह सात्मक हैः निरात्मक नही, वेसे परम- उनमेस्ने (ह) निश्चय से (भूमिः) समतल भूमि (उत्तमा) उक्तम है, किया जाता है । समतल भूमिसे ञओषधि का संग्रह प्रभूतमात्रा में होता है (वीरुधानाम्) विरोहण करने वाली लता-वनस्पतियों मेतु ( वसिष्ठम्)

English

A charm to remove pustules or scrofulous swellings (apachitas) May all the five-and-fifty which meet round the tendons of the neck. Depart and vanish hence away like plaguing insects buzz and hum!

अध्याय ६

श्लोक 20.3

अ॒यं यो अ॑भिशोचयि॒ष्णुर्विश्वा॑ रू॒पाणि॒ हरि॑ता कृ॒णोषि॑ ।तस्मै॑ तेऽरु॒णाय॑ ब॒भ्रवे॒ नमः॑ कृणोमि॒ वन्या॑य त॒क्मने॑

ayaṃ yo abhiśocayiṣṇurviśvā rūpāṇi haritā kṛṇoṣi | tasmai te'ruṇāya babhrave namaḥ kṛṇomi vanyāya takmane

हिन्दी अर्थ

म तू (सोमः) चन्द्रमा मौर (भगः द्व) सूयं के सदृश है, (देवेषु) देवो मे (यथा) जसे (वरुणः) वरणीय परमेश्वर सर्वोत्तम है, वेसे भेषजो मेत् उत स्थ कैशददणीरथा ह केशवधैनीः ॥३॥ (सिषासथ) तुम लाभ प्रदान करो । (उत) तथा (स्थ) तुम हो (केशद् - हणीः) केशो को दृढ करने वाली (अथो ह) मौर (केशवधेनीः) केशो को (सुपर्णाः) उत्तम वर्णो वाले पक्षियों के सदृश उड़ने वाली, (हरयः) जल का हरण करने वाली, मादित्य र्मया (अपः वसानाः) जल को की उड़ान आदित्य कौ ओर कटी दहै । आदित्य उदक भरी रर्मियोका सदन है । ऋतम् उदकनाम (निषं० ११२); धृतम् उदकनाम (निषं०

English

Those seventy-and-seven which meet round the upper vertebrae, Let them all vanish hence away like plaguing insects’ buzz and hum! Those nine-and-ninety which, combined, attack the shoulder round about,

अध्याय ६

श्लोक 21.1

केशवर्धनी औषधिः।१-३ शन्तातिः।चन्द्रमाः।अनुष्टुप्।इ॒मा यास्ति॒स्रः पृ॑थि॒वीस्तासां॑ ह॒ भूमि॑रुत्त॒मा।तासा॒मधि॑ त्व॒चो अ॒हं भे॑ष॒जं समु॑ जग्रभम्

keśavardhanī auṣadhiḥ| 1-3 śantātiḥ| candramāḥ| anuṣṭup| imā yāstisraḥ pṛthivīstāsāṃ ha bhūmiruttamā| tāsāmadhi tvaco ahaṃ bheṣajaṃ samu jagrabham

हिन्दी अर्थ

इसलिये वर्षाजल को घृत कहा है । अथरववेद-भाष्य कां० ६। अनु० ३। ू० २२ शर्ईहो, तो विवाहंकौ विधिसे.वह “पुनः” विवाहसंस्कार के योग्य कां० ६। अनु० ३ । सु० २२ अथवेवेद-भाष्य ३६ (मर्तः) है मानसून वायुओ ! (रुक्मवक्षसः) सुवणं सदृश चमकीली

English

Let them all vanish hence away like plaguing insects’ buzz and hum! To Affliction Let me go free, O Misery: do thou, the mighty, pity us.

अध्याय ६

श्लोक 21.2

श्रेष्ठ॑मसि भेष॒जानां॒ वसि॑ष्ठं॒ वीरु॑धानाम्।सोमो॒ भग॑ इव॒ यामे॑षु॒ दे॒वेषु॒ वरु॑णो॒ यथा॑

śreṣṭhamasi bheṣajānāṃ vasiṣṭhaṃ vīrudhānām| somo bhaga iva yāmeṣu deveṣu varuṇo yathā

हिन्दी अर्थ

' विद्युत् को छाती में धारण करती हई तुम (यद्) जो (एजथ) चलती हो, ।, तो (अपः) क्षीण हए जलो को (पयस्वतीः) प्रभूत जल समेत, ओर (ओषधीः) ओषधियों को (शिवाः) सुखमयी तथा कल्याण करने वाली को, (च) भौर (सुमतिम्) सुमति को (पिन्वत) परिपृष्ट कर देती हो (यत्र) जहां कि (मरुतः) है मानसुन वायु ! तुम॒ (मधु) मधुर जल (सिञ्त्रथ) सीचती हो, (नरः) जैसे कि किंसान-पुरुष निज क्षेत्रों को (उदभ्रतः) उदक से आप्लुत अर्थात् भरी हुई (मरूतः) है मानसून वायुमो ! (ता ताम्) उसे (दयतं) प्रेरित करो (या वृष्टिः) जौ वृष्टि । कि (विश्वाः निवतः) सब निम्नगामिनी नदियों को (पृणाति) पूरित कर

English

Set me uninjured in the world of happiness, O Misery. From thee, from thee who fliest not from us, O Misery, we fly. Then at the turning of the paths let Misery fall on someone else.

अध्याय ६

श्लोक 21.3

रेव॑ती॒रना॑धृषः सिषा॒सवः॑ सिषासथ ।उ॒त स्थ के॑श॒दृंह॑णी॒रथो॑ ह केश॒वर्ध॑नीः

revatīranādhṛṣaḥ siṣāsavaḥ siṣāsatha | uta stha keśadṛṃhaṇīratho ha keśavardhanīḥ

हिन्दी अर्थ

वृष्टि (एजाति) किसानों को केम्पा देती है तथा (इव) जैसे (तुन्ना) चुरादिः) + उ (मौणादिक १।७।२१), णिजथं अन्तर्भावित = गमन कराने ¦ वाला, निजकन्या को वैवाहिक विधिपूवेक, पतिगृह मे भेजनेवाला पिता वैवाहिकेन विधिना पुनः संस्कारमर्ति ॥ सा पृद्री-कन्या यदि अक्षतयोनि हो, या पतिगृह जाकर वापिस आ

English

May the immortal, thousand eyed, dwell otherwhere apart from us. Let him afflict the man we hate: smite only him who is our foe. A charm to avert misfortune foreshown by the coming of a dove

अध्याय ६

श्लोक 22.1

भैषज्यम्।१-३ शन्तातिः।१ आदित्यरश्मिः, २-३ मरुतः।त्रिष्टुप्, २ चतुष्पदा भुरिग्जगती।कृ॒ष्णं नि॒यानं॒ हर॑यः सुप॒र्णा अ॒पो वसा॑ना॒ दिव॒मुत् प॑तन्ति ।त आव॑वृत्र॒न्त्सद॑नादृ॒तस्यादिद् घृ॒तेन॑ पृथि॒वीं व्यूऽदुः

bhaiṣajyam| 1-3 śantātiḥ| 1 ādityaraśmiḥ, 2-3 marutaḥ| triṣṭup, 2 catuṣpadā bhurigjagatī| kṛṣṇaṃ niyānaṃ harayaḥ suparṇā apo vasānā divamut patanti | ta āvavṛtrantsadanādṛtasyādid ghṛtena pṛthivīṃ vyū'duḥ

हिन्दी अर्थ

अथववेद-भाष्य कां० ६1 अनु०३। सू २३ होती है । "पुनः" शब्द दारा सूचित होता है अक्षतयोनि 2 प्रत्यागता क्षतयोनि का पहिले विवाह हौ चका है। मन न यथावस्थित है, परन्तु पतिगृह दारा व्यथित हुई वह पितुगृहं व 4 । इसी प्रकार जाया भी पतिद्धारा “तुन्ना” होकर पवृ क इस द्वारा पिता तो व्यथित होगा दी, (तुन्दाना) । पति 0 घकेले जाने का वरणेन अथर्ववेद मं अन्यत्र भीहुभादहै। पथा नुततेव कर्तारं वन्ध्वच्छतु" ( १०।१।३) । वरेण्यकर तुरहमपो देवीरुप हये ॥१॥। कृकर ; प्रवाहित होती हुई, (तदपसः) वहं प्रवाहं ॥ हई (देवीः अपः) दिव्य नदियों के जलो को (अम्) ्रष्ट-यज्ञिय कर्मो वाला (उप) समाप (हवये) बुलाता हू ।

English

Gods! whatsoe’er the Dove came hither seeking, sent to us as the envoy of Destruction, For that let us sing hymns and make atonement, Well be it with our quadrupeds and bipeds! Auspicious be the Dove that hath been sent us, a harmless bird,

अध्याय ६

श्लोक 22.2

पय॑स्वतीः कृणुथा॒प ओष॑धीः शि॒वा यदेज॑था मरुतो रुक्मवक्षसः ।ऊर्जं॑ च॒ तत्र॑ सुम॒तिं च॑ पिन्वत॒ यत्रा॑ नरो मरुतः सि॒ञ्चथा॒ मधु॑

payasvatīḥ kṛṇuthāpa oṣadhīḥ śivā yadejathā maruto rukmavakṣasaḥ | ūrjaṃ ca tatra sumatiṃ ca pinvata yatrā naro marutaḥ siñcathā madhu

हिन्दी अर्थ

कम यासां ता आपः। करतुः = यज्ञिय कम, कृष्यादि । उपह्वये = कु (कर्मण्यः) कर्मो के साधक (भापः) जल (ओताः) कर्मोमें क भरोत ह, ये जल (इतः) यहां से (मुञ्चन्तु) ० शु करे, त्यागे, (्रणीतये) शीघ्र ले जानिके लिये । अर् (सद्यः (एतवे) ग॑ति के लिये (कृण्वन्तु) दन्टं करे। रा०६। अनु ३॥ सु° २४ अथवेवेद-भाष्य ४१ हम उसे प्रकृष्ट गति के साथ अपने स्थान तके जाय, ओर हमारी सहायता करोकि शीघ्रही जल हमे प्राप्त हो जाय । एतदे = इण् मतो, कौ है । “दीप्यते, सुषुम्णः सूयेररिमिः'" ।

English

O Gods, that seeks our dwelling! May Agni, Sage, be pleased with our oblation, and may the missile borne on wings avoid us. Let not the arrow that hath wings distract us. Beside the fire- place, on the hearth it settles.

अध्याय ६

श्लोक 22.3

उ॒द॒प्रुतो॑ म॒रुत॒स्तां इ॑यर्त वृ॒ष्टिर्या विश्वा॑ नि॒वत॑स्पृ॒णाति॑ ।एजा॑ति॒ ग्लहा॑ क॒न्येऽव तु॒न्नैरुं॑ तुन्दा॒ना पत्ये॑व जा॒या

udapruto marutastāṃ iyarta vṛṣṭiryā viśvā nivataspṛṇāti | ejāti glahā kanye'va tunnairuṃ tundānā patyeva jāyā

हिन्दी अर्थ

देवस्यं खवितुः सवे क्म ग्न्त मानुषाः । (सवितुः देवस्य प्रेरकं परमेष्वर-देव की (सवे) प्रेरणा में (मानुषाः) मनुष्य (कमं कृण्वन्तु) म कृषि कमं आदि कमं करे, तब (ओषधीः) जषधियां (अपः) जलो को प्राप्त कर (नः) हमारे लिये (षम्) शान्ति दायक ओर (शिवाः) कल्याणकारिणी (भवन्तु) होती है, या हों । मनुष्य जव परमेश्वर क प्रेरणानुसार कृषि कर्म आदि करते ह, तब वर्षा ठीक प्रकार से होती, ओर ओषधियां जल प्राप्त कर रसवती होतो, ओर हमारे लिये शम् आर शिवरूपा होती है । अपाँ ह मघं तद् देवीदद॑न् हृदुग्योत भेषजम् ॥१॥ (हिमवतः) हिम वाले परव॑तसे (प्र स्रवन्ति) प्रवाहित होती है, (संगमः) उन का संगम होता है, एसे (आपः) जल या जलवाली नदियां,

English

May it bring welfare to our men and cattle: here let the Dove, ye Gods, forbear to harm us. A charm to avert misfortune foreshown by the coming of a dove Drive forth the Dove, chase it with holy verses: rejoicing bring we hither food and cattle,

अध्याय ६

श्लोक 23.1

अपां भैषज्यम्।१-३ शन्तातिः।आपः।१ अनुष्टुप्, २ त्रिपदा गायत्री, ३ परोष्णिक्।स॒स्रुषी॒स्तद॒पसो॒ दिवा॒ नक्तं॑ च स॒स्रुषीः॑ ।वरे॑ण्यक्रतुर॒हम॒पो दे॒वीरुप॑ ह्वये

apāṃ bhaiṣajyam| 1-3 śantātiḥ| āpaḥ| 1 anuṣṭup, 2 tripadā gāyatrī, 3 paroṣṇik| sasruṣīstadapaso divā naktaṃ ca sasruṣīḥ | vareṇyakraturahamapo devīrupa hvaye

हिन्दी अर्थ

वाली होती है, उनमें बैठकर जलचिकित्सा द्वारा हृदयरोग शान्त होते ह। संगम सादर, हृषेपूवेक होता ही है । । (यत्) जिस रोग ने (मे) मेरी (अक्ष्योः) दोनों मांखों को (मादिदयोत) दाहं युक्त किया है (यत्) गौर जिसने (पायोः) दोनों एडो (भपदोर्च) की (आपः) जल (निष्करन्) निगंत कर देते ह, अङ्गो से निकाल दतर

English

Obliterating traces of misfortune. Most fleet may it fly forth and leave us vigour. These men have strengthened Agni’s might, these men have brought the kine to us. They have sung glory to the Gods. Who is the man that con- quers them?

अध्याय ६

श्लोक 23.2

ओता॒ आपः॑ कर्म॒ण्याऽमु॒ञ्चन्त्वि॒तः प्रणी॑तये ।स॒द्यः कृ॑ण्व॒न्त्वेत॑वे

otā āpaḥ karmaṇyā'muñcantvitaḥ praṇītaye | sadyaḥ kṛṇvantvetave

हिन्दी अर्थ

आपः द्वारा जल चिकित्सा का वणेन हुमा है का राजा है एेसी (याः सर्वाः) जो सब (नः) नदियां (स्थन) तुम हदो, अथरववेद-भाष्य॒का० ६1 बनु० ३ सू०२५. प्रदान करो, (वः) तुम्हारी (तेन) उस ओषध दारा ( भूनजामहै) हम सिन्धु का अभिप्राय है समुद्र, न कि सिन्ध नदौ । कविता मे जल- ॥ चिकित्सा द्वारा रोगनिवत्तंक; “आपः मौषध'' का कथन .है । भुनजामहै

English

Be reverence paid to him who, while exploring the path for many, first approached the river, Lord of this world of quadrupeds and bipeds; to him be rever- ence paid, to Death, to Yama! A charm to avert misfortune foreshown by the coming of a dove and an owl

अध्याय ६

श्लोक 23.3

दे॒वस्य॑ सवि॒तुः स॒वे कर्म॑ कृण्वन्तु॒ मानु॑षाः ।शं नो॑ भवन्त्व॒प ओष॑धीः शि॒वाः

devasya savituḥ save karma kṛṇvantu mānuṣāḥ | śaṃ no bhavantvapa oṣadhīḥ śivāḥ

हिन्दी अर्थ

भुज पालनाभ्यवहारयोः (रुधादिः) । तस्ताः सर्वा नदयन्तु वाका अपचितामिव ॥१॥ का०६। अनु०२। सू० २६ अथवेवेद-भाष्य ४६३ साथ लगी हई ह, (ताः सर्वाः) वे सव (इतः) इस प्रयोग से (नष्यन्तु) (वाकाः) वचन या कथन (इव) जैसे (नश्यन्तु) नष्ट हो जावे ह सत्य न होने के कारण स्थिरता प्राप्त नहीं करते यनः वे मविश्वसनीप होते हँ

English

On these men yonder fall the winged missile: the screeching of the Owl is ineffective, And that the Dove beside the fire hath settled. Thine envoys who came hither, O Destruction, sent or not sent by thee unto our dwelling,

अध्याय ६

श्लोक 24.1

अपां भैषज्यम्।१-३ शन्तातिः।आपः।अनुष्टुप्।हि॒मव॑तः॒ प्र स्र॑वन्ति॒ सिन्धौ॑ समह सङ्ग॒मः ।आपो॑ ह मह्यं॒ तद् दे॒वीर्दद॑न् हृद्द्योतभेष॒जम्

apāṃ bhaiṣajyam| 1-3 śantātiḥ| āpaḥ| anuṣṭup| himavataḥ pra sravanti sindhau samaha saṅgamaḥ | āpo ha mahyaṃ tad devīrdadan hṛddyotabheṣajam

हिन्दी अर्थ

सायण ने मन्या" का अथं गण्डमाला किया है। छोटी-छोटो ये प्रन्ियां परस्पर मिलकर गण्डमाला हो जाती ह । षृतस्ताः सर्वां नदयन्त वाका अंप्रचितांपिव ॥२॥ इतस्ताः सवं नश्यन्तु वाका अपचितामिव ।॥३॥ (वाका अपचितामिव) पूववत् 1 नश्यन्तु =नश = णश अदर्शने (दिवादिः), अदृष्ट हो जाय, सुखकर मेहा तु (नः) हमे (मृडयासि) सुखी कर (मा) मुक्षे (पाप्मन्) है

English

The Dove and Owl, effectless be their visit! Oft may it fly to us to save our heroes from slaughter, oft perch here to bring fair offspring, Turn thee and send thy voice afar: cry to the region far away;

अध्याय ६

श्लोक 24.2

यन्मे॑ अ॒क्ष्योरा॑दि॒द्योत॒ पार्ष्ण्योः॒ प्रप॑दोश्च॒ यत्।आप॒स्तत् सर्वं॒ निष्क॑रन् भि॒षजां॒ सुभि॑षक्तमाः

yanme akṣyorādidyota pārṣṇyoḥ prapadośca yat| āpastat sarvaṃ niṣkaran bhiṣajāṃ subhiṣaktamāḥ

हिन्दी अर्थ

पाप ¦ (भद्रस्य) कल्याणी ओर सुखी (लोके) समाज मे (अवि. तम्) कुटिल कर्मो से रहित करके (आधेहि) स्थापितं कर । मा, नः अस्मदो द्वयोश्च (अष्टा० १।२।५९) दवारा एकवचन के स्थान में बहुवचन । पाप जब वशीभ्रुत हो जाता है, तव व्यक्ति कुटिलकम नहीं करता मौर कल्याणी तथा सुखो सामाजिक जीवन व्यतीत करता है । (पाप्मन्) है पाप ! (यः) जोत (नः) हमे (न जहासि) न त्यागता, “वयम्” द्वारा यहं सूचित .कियादहैकि हम सत्पथ पर चलते हृए, केरने पर व्यक्ति पापको त्याग देता है ।

English

That I may see thee in the home of Yama reft of all thy power, that I may see thee impotent. A charm to promote the growth of hair Over a magic stone, beside Sarasvati, the Gods Ploughed in this barley that was blent with

अध्याय ६

श्लोक 24.3

सिन्धु॑पत्नीः॒ सिन्धु॑राज्ञीः॒ सर्वा॒ या न॒द्य॑१स्थन॑ ।द॒त्त न॒स्तस्य॑ भेष॒जं तेना॑ वो भुनजामहै

sindhupatnīḥ sindhurājñīḥ sarvā yā nadya1sthana | datta nastasya bheṣajaṃ tenā vo bhunajāmahai

हिन्दी अर्थ

नितराम् समवाय सम्बन्ध मे चिपटा रहै। (यम्) जिस पापी केसाथ हे पापत् नष्ट कर. उसका ही हनन कर। सथवेवेद-भाष्य का ६। बनु०३। रऽ २६ कण ६। अनु० ३ । सु० २७ अथषवेद-भाष्य ४५ का वहुत्व है, ओर अप्रिय का एकत्व । सामाजिक जीवन मे समाज, जिस पापी को समाज में रहने से आपत्तिजनक समक्षे उसे मृत्युदण्ड दे सकता ह । मानो पाप ही पापी का हनन कर रहा है ।

English

mead. Lord of the plough was Indra, strong with hundred powers: the ploughers were the Maruts they who give rich gifts.

अध्याय ६

श्लोक 25.1

मन्याविनाशनम् १-३ शुनःशेपः।मन्याविनाशनम्।अनुष्टुप्।पञ्च॑ च॒ याः प॑ञ्चा॒शच्च॑ सं॒यन्ति॒ मन्या॑ अ॒भि।इ॒तस्ताः सर्वा॑ नश्यन्तु वा॒का अ॑प॒चिता॑मिव

manyāvināśanam 1-3 śunaḥśepaḥ| manyāvināśanam| anuṣṭup| pañca ca yāḥ pañcāśacca saṃyanti manyā abhi| itastāḥ sarvā naśyantu vākā apacitāmiva

हिन्दी अर्थ

देव कपोतं हृषितो यदिच्छन दूतो निकत्या इद मांज॒गामं । (देवाः) है राष्ट के दिव्य अधिकारियो ! (इषितः) परराष्टर द्वारा हस हमारे राष्ट्र मे भाया है (तस्म) उस के लिये (अचमि) हम अचेना ' करते है, ओर (निष्कृतिम्) हर्जाना (कृणवाम) भेट करते है, ताकि (नः) (चतुष्पदे) चौपायौं के लिये (शम्) सुख-शान्ति हो । दूतः = दुदु जपतापे - शिवः कृषपोतं षितो नो अस्त्वनागा हैवाः शकुनो गृहं नैः ।

English

Thy joy in hair that falleth or is scattered, wherewith thou sub- jectest a man to laughter To other trees, far from thee will I drive it. Grow up, thou Samī, with a hundred branches.

अध्याय ६

श्लोक 25.2

स॒प्त च॒ याः स॑प्त॒तिश्च॑ सं॒यन्ति॒ ग्रैव्या॑ अ॒भि।इ॒तस्ताः सर्वा॑ नश्यन्तु वा॒का अ॑प॒चिता॑मिव

sapta ca yāḥ saptatiśca saṃyanti graivyā abhi| itastāḥ sarvā naśyantu vākā apacitāmiva

हिन्दी अर्थ

(देवाः) है राष्ट के दिव्य अधिकारियो ! (इषितः) परराष्ट् दारा प्रेषित (कपोतः) वायुयान (शकुनः) जो कि शक्तिशाली है, (नः गृहम्) ओर हमारे राष्टर-गृह के प्रति प्रेषित है, (शिवः) कल्याणकारी, (अनागाः) प्री तिपूवेक सेवन करे, ओर (हेतिः) मायुधरूप, (पक्षिणी) पक्षो के कृति । वाला अल्पकाय बायुयान (नः परिवृणक्तु) हमें छोड़ जाय । निर्धारित समयानुसारं कर प्रदान नहीं कर सका । उसे सचेत करने के लिये सशस्त्र वायुयान प्रेषित हमा है, भौर नियत कर लेकर वह् वापिस

English

Auspicious, bearing mighty leaves, holy one, nurtured by the rain, Even as a mother to her sons, be gracious, Samī to our hair. To Sūrya the Sun-God

अध्याय ६

श्लोक 25.3

नव॑ च॒ या न॑व॒तिश्च॑ सं॒यन्ति॒ स्कन्ध्या॑ अ॒भि।इ॒तस्ताः सर्वा॑ नश्यन्तु वा॒का अ॑प॒चिता॑मिव

nava ca yā navatiśca saṃyanti skandhyā abhi| itastāḥ sarvā naśyantu vākā apacitāmiva

हिन्दी अर्थ

स्वेच्छा पूवक हविः खूप में “कर” दिया जाया करे । यथा “विर्न: सजाताः" ' कहु कर राष्ट्यज्ञ कौ धा्िकता सूचित की है । "पक्षिणो-वायुयान, हेलो- कोप्टर'” सदृश अल्पक्राय है । उडते समय यह दो पंखों वाली पक्षिणी की आजति वाला दीखत। है । सायण ने कपोत द्वारा कब्रूतर पक्षी माना है, वायुयान (अस्मान्) हमे (न) नहीं (दभाति) ईहिसित करता है, (मष्ट) संश्राम भूमि में (पदम्) निज चरण को (न) नहीं (कृणुते) स्थापित करता

English

This spotted Bull hath come and sat before his mother in the east. Advancing to his father Heaven. p. a214 As expiration from his breath his radiance penetrates within.

अध्याय ६

श्लोक 26.1

पाप्मनाशनम्।१-३ ब्रह्म।पाप्मा।अनुष्टुप्।अव॑ मा पाप्मन्त्सृज व॒शी सन् मृ॑डयासि नः ।आ मा॑ भ॒द्रस्य॑ लो॒के पा॑प्मन् धे॒ह्यवि॑ह्रुतम्

pāpmanāśanam| 1-3 brahma| pāpmā| anuṣṭup| ava mā pāpmantsṛja vaśī san mṛḍayāsi naḥ | ā mā bhadrasya loke pāpman dhehyavihrutam

हिन्दी अर्थ

है । (नः) वह हमारी (गोभ्यः) गौभों के लिये (उत) तथा (पुरुषेभ्यः) पुरुषों के लिये (शिवः) कल्याणकारी (अस्तु) हो, (देवाः) है दिव्य मधि- कारियो ! (कपोतः) वा वरुयानं (दह्) यहां अर्थात् हमारे राष्ट में (नः) ह्मे (मा हिसीत्). न हिसित करे । अथ्वेवेद-माष्य का० ६। अनु० ३ । सू° २७ २।२०) । पक्षिणी =मल्पकाय वाला वापुयान, दो पक्षों को फलाए, उड़ते है जिसमे परराष्टू.का दूत है, जोकि दूत्यकर्म के लिये हमारे राष्टरमे भाया है, नकिहमारी हिसा के लिये। एसी भावना मन्त्र में प्रकट कीटहै। धापरुयान जब भूमि पर उतरते है तो निज स्थान.में उन्हैले जाने के लिये उन के पद अर्थात् चरण भी होते है । मधिकारियोंसे कहादहैकितुम इस प्रकार वायुयान के अधिकारियों के साथ वर्तव करो ताकिवे युद्धन करने का० ६ । भनु०३। सु० २८ अथर्ववेव-भाष्य ४७

English

The Bull shines out through all the sky. He rules supreme through thirty realms—One winged with song hath made him mount Throughout the days at break of morn.

अध्याय ६

श्लोक 26.2

यो नः॑ पाप्म॒न् न जहा॑सि॒ तमु॑ त्वा जहिमो व॒यम्।प॒थामनु॑ व्या॒वर्त॑ने॒ऽन्यं पा॒प्मानु॑ पद्यताम्

yo naḥ pāpman na jahāsi tamu tvā jahimo vayam| pathāmanu vyāvartane'nyaṃ pāpmānu padyatām

हिन्दी अर्थ

हे जलीय-यान के चलाने वालो (ऋचा) ऋक्-परोक्त विष्ि.दारा ट्षित होते हृए (गाम्, पररि = परितः) पृथिवी के सव ओर (नयामः) इस कपोत को हम ने जाते ह, (दुरिता =दुरितानि) दुष्परिणामी (पदानि) पदन्यासों को (संलोभयन्तः) संलुप्त करते हए । ताकि (पथिष्ठंः) पथ में प्राप्ति के लिये चला जाय । । =

English

A charm against fiends and goblins With butter, in his hall vhere fire is burning, perform that sacri- fice which quells the goblins.

अध्याय ६

श्लोक 26.3

अ॒न्यत्रा॒स्मन्न्युऽच्यतु सहस्रा॒क्षो अम॑र्त्यः ।यं द्वेषा॑म॒ तमृ॑च्छतु॒ यमु॑ द्वि॒ष्मस्तमिज्ज॑हि

anyatrāsmannyu'cyatu sahasrākṣo amartyaḥ | yaṃ dveṣāma tamṛcchatu yamu dviṣmastamijjahi

हिन्दी अर्थ

२७ में “पक्षिणी” द्वारा कपोत को अत्पकाय तथा वायुयान रूप कहा है । जाता है । जतः 'यह् जलीययान है ।.. कपोत =कं (जल) + पोतं (यान) । देवेष्वक्रत श्रवः क इमां आ दघषति ॥२॥ 1. (परिन्=परिवः)पृथिवी के सब ओर (अषेत) ले गये र्है,(दमे) ये जो, (गाम् परि परितः) पृथिवी के. सब आर कपोतः अलीद्य-यान को (अनेषत) जो (शरवः) निजः यण (अक्रत) ,फल्नाया . है, (मान्) इनं , (कः) , कौन (आदधषंति) पराभरत करेगा ।

English

Burn from afar against the demons Agni! Afflict not in thy fury us who praise thee. Let Rudra break your necks, O ye Pisāchas, and split your ribs asunder, Yātudhānas! Your herb of universal power with Yama hath allied itself.

अध्याय ६

श्लोक 27.1

अरिष्टक्षयणम्।१-३ भृगुः।यमः, निर्ऋतिः।जगती, २ त्रिष्टुप्।देवाः॑ क॒पोत॑ इषि॒तो यदि॒छन् दू॒तो निरृ॑त्या इ॒दमा॑ज॒गाम॑ ।तस्मा॑ अर्चाम कृ॒णवा॑म॒ निष्कृ॑तिं॒ शं नो अस्तु द्वि॒पदे॒ शं चतु॑ष्पदे

ariṣṭakṣayaṇam| 1-3 bhṛguḥ| yamaḥ, nirṛtiḥ| jagatī, 2 triṣṭup| devāḥ kapota iṣito yadichan dūto nirṛtyā idamājagāma | tasmā arcāma kṛṇavāma niṣkṛtiṃ śaṃ no astu dvipade śaṃ catuṣpade

हिन्दी अर्थ

अथरवेवेद-भाष्य का० ६ । अनु०३। सुऽ २० भौर जोवन को बढ़ातीहै। जो इस का प्रकार पृथिवी भरमे करते; निज . जालीय-यानों का पृथिवीके स्र ओर निभयहो कर यातायात करते; धर्षण कर सकता, न कोई उन पराभूत कर सकता । जिधृषा प्रागल्भ्ये पथ को (अनु) निरन्तर (पश्यशानः) दर्शारहा है। (यः) जो (अस्य

English

Here, Mitra-Varuna! may we dwell safely: with splendour drive the greedy demons backward, Let them not find a surety or a refuge, but torn away go down to Death together.

अध्याय ६

श्लोक 27.2

शि॒वः क॒पोत॒ इषि॒तो नो॑ अस्त्वना॒गा दे॑वाः शकु॒नो गृ॒हं नः॑ ।अ॒ग्निर्हि विप्रो॑ जु॒षतां॑ ह॒विर्नः॒ परि॑ हे॒तिः प॒क्षिणी॑ नो वृणक्तु

śivaḥ kapota iṣito no astvanāgā devāḥ śakuno gṛhaṃ naḥ | agnirhi vipro juṣatāṃ havirnaḥ pari hetiḥ pakṣiṇī no vṛṇaktu

हिन्दी अर्थ

द्विपदः) इस दोपाए मनुष्य का, (यः) जो (चतुष्पदः) चौपाए पशु का मृत्यु नामक के प्रति (नमः अस्तु) नमस्कार हो । धात्वथं जाना जाता है, वतिः का कोई अथं नहीं रहता । यथा उदरतः- का वर्णेन हुमा है, परमेश्वर तमोगुण से रहित है, अतः वह पप से हटा "तमोमागं को त्याग दो तो तुम पापपथ से व्यावृत्त हो जाभौगे । समग्र वेद

English

A prayer to Indra for riches He who controls this air and men who aid his strength, and wood, and heaven, the lofty seat which Indra loves.

अध्याय ६

श्लोक 27.3

हे॒तिः प॒क्षिणी॒ न द॑भात्य॒स्माना॒ष्ट्री प॒दं कृ॑णुते अग्नि॒धाने॑ ।शि॒वो गोभ्य॑ उ॒त पुरु॑षेभ्यो नो अस्तु॒ मा नो॑ देवा इ॒ह हिं॑सीत् क॒पोतः॑

hetiḥ pakṣiṇī na dabhātyasmānāṣṭrī padaṃ kṛṇute agnidhāne | śivo gobhya uta puruṣebhyo no astu mā no devā iha hiṃsīt kapotaḥ

हिन्दी अर्थ

है, इसलिथे वहं यमहै'वहहौ कर्मानुसार जन्ममृत्यु का प्रदाता है अतः वह मृत्यु है । यया -“स एव मुदु" सो ¢ मृतं सो 4 भ्वं स रक्षः" (अथवं० सथ पर चलने पर्, मौर उत्करे प्रति सदा नमस्कारं करने पर, कपोत , अर्थात् वायुयान तथा जलीययान सदा उपकारी होते है, कभौ युद्धकी मोर कां०६। अनु०३। सू० २९ मयवेवेद-भाष्य ४६ मून हेतिः पतत्रिगी न्येऽतु यदुेको वदंति मोघमेतत् । (पतत्रिणी) पंख वाली पक्षिणी के सदशं अल्पकाय (हेतिः) अस्प रूप हमारा वागरुयान; (अमून्) उन शक्रुभों की भोर (न्येतु) नितरां

English

The bold whose overpowering might the boldest never hath defied,— p. a215 As erst still, unassailable is Indra’s wrath, and fame, and force. May he bestow on us that wealth, far-spreading, bright with yellow hue.

अध्याय ६

श्लोक 28.1

अरिष्टक्षयणम्।१-३ भृगुः।यमः, निर्ऋतिः।१ त्रिष्टुप्, २ अनुष्टुप्, ३ जगती।ऋ॒चा क॒पोतं॑ नुदत प्र॒णोद॒मिषं॒ मद॑न्तः॒ परि॒ गां न॑यामः ।सं॒लो॒भय॑न्तो दुरि॒ता प॒दानि॑ हि॒त्वा न॒ ऊर्जं॒ प्र प॑दा॒त् पथि॑ष्ठः

ariṣṭakṣayaṇam| 1-3 bhṛguḥ| yamaḥ, nirṛtiḥ| 1 triṣṭup, 2 anuṣṭup, 3 jagatī| ṛcā kapotaṃ nudata praṇodamiṣaṃ madantaḥ pari gāṃ nayāmaḥ | saṃlobhayanto duritā padāni hitvā na ūrjaṃ pra padāt pathiṣṭhaḥ

हिन्दी अर्थ

कहता है कि (कपोतः) हमारा वायुयान (अग्नौ) युद्धाग्नि में (पदम्, कृणोति) पर पसतार रहा है यह् भी व्यथं है । उलूक का अभिप्राय उल्लू-पक्षी नही, अपितु वहु मनुष्यै जोकि व मकार का कथन करता ह । अज्ञानी ओर बेवकूफ को उल्ल् कहते भी (नि ते) है ङृच्छापत्ति ! (ते) तेरे (यौ) जोदो (दूतौ) उपतापी है, उन (कपोतोलूकाभ्याम्) वायुयान भौर उसके सञ्चालक के लिये अ-¬-पद गतौ = आने-जाने को स्थाननदहो।

English

Indra is mightiest Lord among the folk. To Agni for protection from enemies Send forth thy voice to Agni, to the manly hero of our homes,

अध्याय ६

श्लोक 28.2

परी॒मे॒३ग्निम॑र्षत॒ परी॒मे गाम॑नेषत ।दे॒वेष्व॑क्रत॒ श्रवः॒ क इ॒माँ आ द॑धर्षति

parīme3gnimarṣata parīme gāmaneṣata | deveṣvakrata śravaḥ ka imā~ ā dadharṣati

हिन्दी अर्थ

गए या स्वयमेव भेद लेने के लिए आए, वायुयान भौर उसके सञ्चालक को.निज रषष्टू मेः आश्रयनदेना चाहिए । वायुयान के सञ्चालक को १० अथववेवेद-भाष्य कां ६॥ अनु० ३। सू० ३० उल्लू कहा है । क्योंकि हमारी शिति को जाने विना वह् हमारे राष्ट में आया दहै) हमारी शक्ति का कथन (मन्त्र द) मेंहभा है । निं तिः = परासेव परां वद परांचीमतुं संवत॑प्र । हे परराष्ट के दूत (अवेरहत्याय) अवैर अर्थात् वैर के अभाव

English

So may he bear us past our foes. That Agni who with sharpened flame of fire consumes the Rākshasas,

अध्याय ६

श्लोक 28.3

यः प्र॑थ॒मः प्र॒वत॑मास॒साद॑ ब॒हुभ्यः॒ पन्था॑मनुपस्पशा॒नः ।यो॒३स्येशे॑ द्वि॒पदो॒ यश्चतु॑ष्पद॒स्तस्मै॑ य॒माय॒ नमो॑ अस्तु मृ॒त्यवे॑

yaḥ prathamaḥ pravatamāsasāda bahubhyaḥ panthāmanupaspaśānaḥ | yo3syeśe dvipado yaścatuṣpadastasmai yamāya namo astu mṛtyave

हिन्दी अर्थ

(आ पपत्यात्) उड़कर आया कर, ( ) तथा निज सुवीरता के परदशेन के लिये (इदम्) इस वायुयान पर (आससद्यात्) तु मा बटठाकर । (पराचीम्) पूवंकाल से आई (संवतम्) क हमारी संगति अर्थात् मेल फो लक्ष्य कर के (पराङ् एव) दूर-दूर के प्रदेशों मेँ (परावद) तू कहा कर । (यथा) जिससे कि (यमस्य) नियन्ता राजा के (गृहे) रष्टरूमेया अथं संगत है । आपपत्यात् = कपोत मल्पकाय वायुयान दारा शीघ्रा जाना । अरसम् शक्तिशाली परराष्ट् दूत का रस है शौयं । जव ५ राष्ट के दुत सेनापति को युद्ध न करना रहै तो मानो सेनापत्ति शौय से कां० ६1 अनु० २। सू० ३ ० अथर्ववेद-भाष्य ५१ (देवाः) प्राकृत दिग्य तत्त्वो ने (मधुना) माघुये अथवा मधुर-जल से हल जोतने वाला (आसीत्) था, (सुदानवः) उतम जल के दाता (मरुतः) मानसून वायुएं (कीनाश्षाः) किसान (आसन्) ये ।

English

So may he bear us past our foes. He who from distance far remote shineth across the tracts of land, May he transport us past our foes.

अध्याय ६

श्लोक 29.1

अरिष्टक्षयणम्।१-३ भृगुः।यमः, निर्ऋतिः।(बृहती) १-२ विराण्नाम गायत्री, ३ त्र्यवसाना सप्तपदा विराडष्टिः।अ॒मून् हे॒तिः प॑त॒त्रिणी॒ न्येऽतु॒ यदुलू॑को॒ वद॑ति मो॒घमे॒तत्।यद् वा॑ क॒पोत॑ प॒दम॒ग्नौ कृ॒णोति॑

ariṣṭakṣayaṇam| 1-3 bhṛguḥ| yamaḥ, nirṛtiḥ| (bṛhatī) 1-2 virāṇnāma gāyatrī, 3 tryavasānā saptapadā virāḍaṣṭiḥ| amūn hetiḥ patatriṇī nye'tu yadulūko vadati moghametat| yad vā kapota padamagnau kṛṇoti

हिन्दी अर्थ

सरस्वत्यामधि --जलवाली नदी के समीप कौ भूमि मे। सरस्वतो सामान्य नदी है जिसमेंकि प्रभूत जल है, सरस्वती = (जल) +-वती यह एतिहासिक सरस्वती नदी नहं । खाने मे यव मधुर रसवाला है अतः वह मधु मिश्रित है, मथवा सरस्वती के मघुर जल से मिधितहै, (मधु उदकनाम, निधं. १।१२) । सरस्वती के समीप की भूमि सु-उपजाञ है, चलाने वाला कहा है । न इसमें कूषादि द्वारा जल सीचा जाता है । वर्षा दाराही जल सींचा जाता है, अतः मानसून वायृएं ही कीनाश, मानुष किसान कहीं हँ । कीनाशाः =कीशानाः = किसान । सरस्वती नदी यवादि यस्ते मदोवफेशो वेकशो येनांमिहस्यं पुरुषं कृणोषि । मादकं स्वरूप है, (येन) जिस द्वारा (अवकेशः) जो मुण्डितं केशों वाला ओर (विकेशः) विकोणे केशों बाला है उस (पुरुषम्) पुरुष कोभीतू तेरे समीवपर्ती जो (अन्या वनानि) भौर संभोग याचक हँ उन को (वृक्षि)

English

He who beholds all creatures, who observes them with a careful eye, May he transport us past our foes. That brilliant Agni who was born beyond this region of the air,

अध्याय ६

श्लोक 29.2

यौ ते॑ दू॒तौ नि॑रृत इ॒दमे॒तोऽप्र॑हितौ॒ प्रहि॑तौ वा गृ॒हं नः॑ ।क॒पो॒तो॒लू॒काभ्या॒मप॑दं॒ तद॑स्तु

yau te dūtau nirṛta idameto'prahitau prahitau vā gṛhaṃ naḥ | kapotolūkābhyāmapadaṃ tadastu

हिन्दी अर्थ

(शतवल्शा) सैकड़ों शाखा वाली लता के सदृश (विरोह) विविध रूप ५२ अथरववेद-भाष्य कां० ६ गनु० ३ । सुर ३५ शमी द्वारा शान्त स्वभाव वाली गृहिणी काभी वणेन होता रै (अथव ६।११। १) । अवकेश है संन्यासी, भर विकणकेश है मुनि, सम्भवतः वानप्रस्थी । पूणंसंयमी न होने की अवस्थामे येभी एेन्दरियिक भोग के वशीभूत हो जाते है । एेसी अवस्था मे संभोग-याचकों का छेदन आवश्यक ही होता है 1 वनानि वनु याचने (तनादिः) । एसे लोग अवाञ्छनीय है कि “वलवानिन्द्रियग्रामो विद्वांसमपि कषति (मनु २।२१५) केशवधेन भी एक प्रकार का मद है जिसका सम्बन्ध शमीके साथ दहै), केशों को बढ़ा कर् य॒दि पुरुष अवकेश हौ जाता है, अर्थात् केशों को नीचे की ओर लटकाए रखतादहै, या विकेश लूपमे केशोंको विकीर्णखूपमें रखता हैःतो सर्वसाधारण की दृष्टि मेँ वह् उपहास-योग्य हो जाता हे। वेदिक दृष्टि में मण्डित केशो वाला मूख शोभा योग्य होता है । यथा --

English

May he transport us past our foes! To Agni Vaisvānara Forth from the distance far away Vaisvānara come to succour us! Agni approach our

अध्याय ६

श्लोक 29.3

अ॒वै॒र॒ह॒त्याये॒दमा प॑पत्यात् सुवी॒रता॑या इ॒दमा स॑सद्यात्।परा॑ङे॒व परा॑ वद॒ परा॑ची॒मनु॑ सं॒वत॑म्।यथा॑ य॒मस्य॑ त्वा गृ॒हेऽर॒सं प्र॑ति॒चाक॑शाना॒भूकं॑ प्रति॒चाक॑शान्

avairahatyāyedamā papatyāt suvīratāyā idamā sasadyāt| parāṅeva parā vada parācīmanu saṃvatam| yathā yamasya tvā gṛhe'rasaṃ praticākaśānābhūkaṃ praticākaśān

हिन्दी अर्थ

यत् क्षुरेण मचेयता सूतेजसा वप्ता वपसि केशरमथु । मन्त्र उपनयन-कमं सम्बन्धी है । बरहैत्पछाशे सुभगो वर्षद्ध ऋतावरि । मातेव पुत्रेभ्यो मृड केशेभ्यः शमि ॥२॥ (वृहत्यलाश्ञे) बडे या॒ वहत पत्तो घाली, (सुभगे) सौभाग्यकारिणी, (वर्षवद्धे) वर्षा वारा बढ़ने वाली, (ऋतावरि) यज्ञकमें वाली (शमि) हे शमी ! (केशेभ्यः) हमारे ऊेशो के लिये (मृड) सुखकारी हो, (इव) जंसे (माता पूब्रेभ्यः) पृषो के लिये सुखकारी होतो है।

English

eulogies! Vaisvānara with friendly thoughts hath come to this our sacrifice, Agni who saves from woe, to lauds.

अध्याय ६

श्लोक 30.1

पापशमनम्।१-३ उपरिबभ्रवः।शमी।जगती, २ त्रिष्टुप्, ३ चतुष्पाच्छंकुमत्यनुष्टुप्।दे॒वा इ॒मं मधु॑ना॒ संयु॑तं॒ यवं॒ सर॑स्वत्या॒मधि॑ म॒णाव॑चर्कृषुः ।इन्द्र॑ आसी॒त् सीर॑पतिः श॒तक्र॑तुः की॒नाशा॑ आसन् म॒रुतः॑ सु॒दान॑वः

pāpaśamanam| 1-3 uparibabhravaḥ| śamī| jagatī, 2 triṣṭup, 3 catuṣpācchaṃkumatyanuṣṭup| devā imaṃ madhunā saṃyutaṃ yavaṃ sarasvatyāmadhi maṇāvacarkṛṣuḥ | indra āsīt sīrapatiḥ śatakratuḥ kīnāśā āsan marutaḥ sudānavaḥ

हिन्दी अर्थ

कि षमी लताषटप है । केशों के लिये शमी का सुखकारी होने का केवल यह् (२) मे मवकेश भौर विकेश पुरुष को उपहास-योग्य कहा है । ऋत = यज्ञ ५।२।१०६; तथा “वनो र च", अष्टा ० ४।१।७ मन्व के ऋषि हैँ “उपरि । कां० ६। अनु० ३। सु ३१ अथवेवेद-भाष्य वश्रवः'' ऊपर अर्थात् ऊपर के लोकों मे स्थित भरण-पौषण करने वाले,

English

Vaisvānara hath formed the hymn and laud of the Angirases. To these may he bring glorious right. In praise of Agni Vaisvānara

अध्याय ६

श्लोक 30.2

यस्ते॒ मदो॑ऽवके॒शो वि॑के॒शो येना॑भि॒हस्यं॒ पुरु॑षं कृ॒णोषि॑ ।आ॒रात् त्वद॒न्या वना॑नि वृक्षि॒ त्वं श॑मि श॒तव॑ल्शा॒ वि रो॑ह

yaste mado'vakeśo vikeśo yenābhihasyaṃ puruṣaṃ kṛṇoṣi | ārāt tvadanyā vanāni vṛkṣi tvaṃ śami śatavalśā vi roha

हिन्दी अर्थ

(अयम्) यह (गौः) पृथिवीलोक, (पृश्निः) जो कि नाना वर्णीहै (सायण ऋ० १।२३।१०) , पृथिवीलोक नानाद्पों से रज्जित है अतः अन्तरिक् मे गति करतौ है, ओर वदती है, फेलती है । यथा “मातरिश्वा ७।७।२६) । पित्तरम् = पृथिवी लोक सूर्यं से पदा हुआ है अतः सूर्यं पुथिवी का प्रयोग है । इस द्वारा यह -दर्शाया है कि पूर्थिवीलोक जवसे पिता से पदा हुआ है तभीसे पिता की ओर वहु पाद बढ़ा रहारहै।

English

Holy Vaisvānara we seek, the Lord of light and endless life, the burning One who fadeth not. He hath directed all things; he sends forth the Seasons in his might, furthering sacrifice’s power.

अध्याय ६

श्लोक 30.3

बृह॑त्पलाशे॒ सुभ॑गे॒ वर्ष॑वृद्ध॒ ऋता॑वरि ।मा॒तेव॑ पु॒त्रेभ्यो॑ मृड॒ केशे॑भ्यः शमि

bṛhatpalāśe subhage varṣavṛddha ṛtāvari | māteva putrebhyo mṛḍa keśebhyaḥ śami

हिन्दी अर्थ

आदि को प्रकाशित कर रहा है, (मस्य) इस सूयं की (रोचना) दीप्ति १. अनिति गतिकर्मा (निषंर २।१४) । अर्थात् प्रकाश (अन्तः ) पृथिवीलोक के भीतर (चरति) विचरती है, हो जाने से पृथिवी आदि मेंसूयंके प्रकाणका प्रवेश होना प्राणक्छिया धामानि) स्थानों मे (विराजति) विराजमान रहती है, प्रदीप्त होती

English

Agni Kāma in other homes shines forth the sole imperial Lord of all that is and is to be. 78 A charm to divert Imprecation personified

अध्याय ६

श्लोक 31.1

गौः।१-३ उपरिबभ्रवः।गौः।गायत्री।आयं गौः पृश्नि॑रक्रमी॒दस॑दन्मा॒तरं॑ पु॒रः ।पि॒तरं॑ च प्र॒यन्त्स्वः

gauḥ| 1-3 uparibabhravaḥ| gauḥ| gāyatrī| āyaṃ gauḥ pṛśnirakramīdasadanmātaraṃ puraḥ | pitaraṃ ca prayantsvaḥ

हिन्दी अर्थ

का आश्रय है । (महः) दिन (बुभिः) युतिमान् सौर-रश्मियो द्वारा (अशि- धियत्) आश्रय पाता है । राजति = राज् दीप्तौ (भ्वादिः) । ३० धाम हैः ३० महतं । अहोरात्र में ३० महतं होते है । इक मुहूतं मे ४८ मिनिट, गतः ३० बहर्तो मे १४४० भागम होती है उसे एक “धाम कहा है । इस प्रकार ३० मुहूतं के ३० धाम होते है । वाक् है मनुष्यों तथा पश पक्षियों की ध्वनियां । ये पृथिवी , के ३० धामो की इष्टि से कहीं न कहीं सदा विराजमान रहती ही हैँ । इन का आश्रय चसूर्यं + सूर्यं भी ३० महतो की दुष्टि से ३० धामो में कहीं न

English

Hitherward, having yoked his steeds, came Imprecation, thousand-eyed, Seeking my curser, as a wolf the home of one who owneth sheep. Avoid us, Imprecation! as consuming fire avoids the lake.

अध्याय ६

श्लोक 31.2

अ॒न्तश्च॑रति रोच॒ना अ॒स्य प्रा॒णाद॑पान॒तः ।व्यऽख्यन्महि॒षः स्वः

antaścarati rocanā asya prāṇādapānataḥ | vya'khyanmahiṣaḥ svaḥ

हिन्दी अर्थ

कहीं चमकता ही रहता है । “महः के भी दो रूप है, अदृष्च कृष्णम्, अह- अथरववेद-भाष्य कां० ६। अनु° ३ सू० ३१ (अन्तः) जीवन के भीतर, (दावे) दावाग्नि के सदुश दर्ष्यां आदि ठैने वाले कुसंस्कारो का क्षय करने वाले मनरूपी हवि को (सु) उत्तम विधि (घतेन) निजशक्ति के अनुसार, (जुहुत ) परमेश्वराग्नि भे आहृति- राक्षसी भाव को दग्ध कर, (नः) हमारे (गृहाणाम्) शरीर गृह को (न) न (उपतीतपासि) तू उपतापकारी हो ।

English

Smite thou the man who curses us, as the sky’s lightning strikes the tree. Who curses us, himself uncursed, or, cursed, who curses us again, Him cast I as a sop to Death, as to a dog one throws a bone.

अध्याय ६

श्लोक 31.3

त्रिं॒शद् धामा॒ वि रा॑जति॒ वाक् प॑त॒ङ्गो अ॑शिश्रियत्।प्रति॒ वस्तो॒रह॒र्द्युभिः॑

triṃśad dhāmā vi rājati vāk pataṅgo aśiśriyat| prati vastorahardyubhiḥ

हिन्दी अर्थ

सायण ने दावाग्नि मे धुत सहित हवि की जहृति देने का कथन भौ वीयं को समाधिम कारण माना । यथा “श्वद्धावीर्यस्मृतिसमाधि- प्रज्ञापुवक इतरेषाम्” (योग० १।२०) । . हृविः से अभिप्रेत है मन राजस । भौर तामस मन कुसंस्कारों को पैदा करता, गौर सात्त्विक मन उन का क्षय करता है । इसलिये कहा है किं “मन एव मनुष्याणां कारणं बन्ध- ५६ अथर्ववेद-भाष्य॒कां० ६1 अनु० ४। सू० ३२ यातना के निधानो ! (वः) तुम्हारी (पृष्टीः) पसलियो को (अपि) भी, भेषज (वः) तुमह (यमेन) मुत्थु के साथ (सम् अजीगमत्) पपत कर दे

English

A prayer for surpassing strength and energy What energy the lion hath, the tiger, adder, and burning fire,

अध्याय ६

श्लोक 32.1

यातुधानक्षयणम्।(१-३) १-२ चातनः, ३ अथर्वा।१ अग्निः, २ रुद्रः, ३ मित्रावरुणौ।त्रिष्टुप्, २ प्रस्तारपङ्क्तिः।अ॒न्त॒र्दा॒वे जु॑हुता॒ स्वे॒३तद् या॑तुधान॒क्षय॑णं घृ॒तेन॑ ।आ॒राद् रक्षां॑सि॒ प्रति॑ दह॒ त्वम॑ग्ने॒ न नो॑ गृ॒हाणा॒मुप॑ तीतपासि

yātudhānakṣayaṇam| (1-3) 1-2 cātanaḥ, 3 atharvā| 1 agniḥ, 2 rudraḥ, 3 mitrāvaruṇau| triṣṭup, 2 prastārapaṅktiḥ| antardāve juhutā sve3tad yātudhānakṣayaṇaṃ ghṛtena | ārād rakṣāṃsi prati daha tvamagne na no gṛhāṇāmupa tītapāsi

हिन्दी अर्थ

शरोरकेमासकोख। जानि वनि तवा यातना देने वाने काम, क्रोध, इर्ष्वा आदि दुर्मावों ओर दुष्कर्मा का विनाश कर देता है । परमेश्वर ही है, स ¦ जोष, जोकि इने विनाश में स्वेतोवीर्या है । यथा - ॥ मेषजमसि भेषजं गवेऽश्वाय पुरुषाय भेषजम् । पिशाचो ओर यातुधानो के शरोर नही, न उनकी प्रावापुं ओर पृष्टयां है, तथापि उन पुरुष मान कर उनके पौर प्रविधि अंगों का वर्णन कविता! य (सित्रावणो) हँ मित्र जोर वण ! (इह) इस जन्म म (नः) हमं (भयम्) मभय (अस्तु) हो, (अचिषा) तेज दारा (अक्रिणः) भक्षको को (प्रतोचः) पराङ्धुव करके (नुरतम्) तुम धकेलदो, निरस्त करदो। ये ¦

English

Brāhman, or Sūrya, And the blest Goddess who gave birth to Indra, come unto us conjoined with strength and vigour!

अध्याय ६

श्लोक 32.2

रु॒द्रो वो॑ ग्री॒वा अश॑रैत् पिशाचाः पृ॒ष्टीर्वोऽपि॑ शृणातु यातुधानाः ।वी॒रुद् वो॑ वि॒श्वतो॑वीर्या य॒मेन॒ सम॑जीगमत्

rudro vo grīvā aśarait piśācāḥ pṛṣṭīrvo'pi śṛṇātu yātudhānāḥ | vīrud vo viśvatovīryā yamena samajīgamat

हिन्दी अर्थ

एक-दूसरे को हनन करते हए (मृत्युम्, उवयन्तु) मुत्यु के समीप चते सवं स्नेही परमेश्वर भित्र है, मिदि स्नेहने (चुरादिः), ओर पापो से निवारण करते वाला वह् वध्णदहै। गुण-कर्मं भेदसे ही परमेश्वरकेदो कण ६। अनु० ४। सु° ३३ अथवेवेद-भाष्य १७ तीन ही देवता मानते है, यथा “तिस + “तिस्र एव देवता इति नैरुक्ताः” न 1 ५५. 1 अन्तरिक्ष ओर दयौः । वेदोक्त अन्य व न के । भिन्न-भिस्न स्वरूप वाते मानते ् । । व रौद्ररूप के कारण उसे रद्र कहा त्र वि

English

All energy of elephant and panther, all energy of gold, men, kine, and waters, p. a217 And the blest Goddess who gave birth to Indra come unto us conjoined with strength and

अध्याय ६

श्लोक 32.3

अभ॑यं मित्रावरुणावि॒हास्तु॑ नो॒ऽर्चिषा॒त्त्रिणो॑ नुदतं प्र॒तीचः॑ ।मा ज्ञा॒तारं॒ मा प्र॑ति॒ष्ठां वि॑दन्त मि॒थो वि॑घ्ना॒ना उप॑ यन्तु मृ॒त्युम्

abhayaṃ mitrāvaruṇāvihāstu no'rciṣāttriṇo nudataṃ pratīcaḥ | mā jñātāraṃ mā pratiṣṭhāṃ vidanta mitho vighnānā upa yantu mṛtyum

हिन्दी अर्थ

रूप होता हआ भी उनके प्रति मि ह ३, 4 क्यो ५ 7 ह पठ, के इस शट्ररू इष्कर्मी सत्पथगामी हो जाते है । मन्वरमे ? त म र मत्र भौर वरुण के ब अचिषा" मे एकवचन है, नहीं तो द्विवचन का न भदस ह ह । अधिक मत्री अर्थात् स्नेह भी (१-३) । जाटिकायनः । इद्धः । गायश्रो; २ अनुष्टुभ् । (जनाः) है प्रजाजनो ! (आयुजः) सवं म » (तुजे) ईर्ष्या भादि की £ के लिये, (स्वः) सुख स्वरूप (वनम्) याचनोय है, प्राथनीय है। +.

English

vigour. Might in car, axles, in the strong bull’s courage, in Varuna’s breath, in Vāta, in Parjanya, In Warrior, in the war-drum stretched for battle, in the man’s roar and in the horse’s mettle,

अध्याय ६

श्लोक 33.1

इन्द्रस्तवः।१-३ जाटिकायनः।इन्द्रः।गायत्री, २ अनुष्टुप्।यस्ये॒दमा रजो॒ युज॑स्तु॒जे जना॒ वनं॒ स्वः ।इन्द्र॑स्य॒ रन्त्यं॑ बृ॒हत्

indrastavaḥ| 1-3 jāṭikāyanaḥ| indraḥ| gāyatrī, 2 anuṣṭup| yasyedamā rajo yujastuje janā vanaṃ svaḥ | indrasya rantyaṃ bṛhat

हिन्दी अर्थ

बुद्ध पूर्वक होतो है, ओर उनमें क्रम विशेष आर 8 समन्वय ५८ अथववेद-भाष्य का० ६ । अनु० ४। सू० ३२ होता है 1 ईर्ष्या भादिके विनाश के लिये परमेश्वर के सुख स्वरूप फो याचना करनी चाहिए । तुजे= तुज हिसायाम् (भ्वादिः) ॥ नाधृष आ हैधृषते धृषाणो ध्रपितः शव॑ः । (धुषाणः) घरषण करने वाला (शवः) इन्द्र का बल (आ दधृषते) सथ का धषेण करता है, (धृषितः) धषण किया जाता हृजा भी (न आधृषे) धर्षित होने योग्य नहीं होता । ‹पुरा) पुराकालौ में (यथा) जैसे (व्यधिः)

English

May the blest Goddess who gave birth to Indra come unto us conjoined with strength and vigour.

अध्याय ६

श्लोक 33.2

नाधृ॑ष॒ आ द॑धृषते धृषा॒णो धृ॑षि॒तः शवः॑ ।पु॒रा यथा॑ व्य॒थिः श्रव॒ इन्द्र॑स्य॒ नाधृ॑षे॒ शवः॑

nādhṛṣa ā dadhṛṣate dhṛṣāṇo dhṛṣitaḥ śavaḥ | purā yathā vyathiḥ śrava indrasya nādhṛṣe śavaḥ

हिन्दी अर्थ

परमैश्वयंवान् परमेश्वर का (शवः) बल (आाधूषे न) अव भी धषित होने धारण भौर प्रलय में उस का वल ही मानते। वे अचेतन प्रकृति कोही उत्पादिका धारणकर््री मानते है-यह ही परमेश्वर भौर उसके बल का परमेश्वरङृत धर्षण का ही तो परिणाम ह । “श्रावः बलनाम (निंघं० २।६); तथा “भावति तिकर्मा (निघं० २।१२); तथा ‹ शव गतो” (भ्वादिः) इस सम्बन्ध मे निरुक्तकार ““शवतिेतिकर्मा कम्बोजेष्वेव भाष्यते ।

English

A priest’s prayer for power and glory Let sacrifice, like fame, thrive sped by Indra, inspired, well- ordered, with a thousand powers. To highest rank raise me who bring oblation, me who move forth to far-extended vision.

अध्याय ६

श्लोक 33.3

स नो॑ ददातु॒ तां र॒यिमु॒रुं पि॒शङ्ग॑संदृशम्।इन्द्रः॒ पति॑स्तु॒विष्ट॑मो॒ जने॒ष्वा

sa no dadātu tāṃ rayimuruṃ piśaṅgasaṃdṛśam| indraḥ patistuviṣṭamo janeṣvā

हिन्दी अर्थ

संस्कृत साहित्य के सम्बन्ध मे जानना चाहिए प्रदान करे । (जनेषु आ) सरवर फले जनो मं इन्द्र (तुविष्टमः) भति कां० ६ । अनु° ४। सू० ३४ अथववेद-माष्य ५६ न (५ कर, (सः) वह् परमेश्वर (द्विषः) देष भावनाओं के र नः अति पषेत्) हमें पार करे अथवा द्वेष भावनाओं से हमे परिपालित करे । ग भावों की, (तिग्मेन शोचिषा) तिम प्रकाश द्वारा (निजुवेति) नितरां हिसा करता है (सः) वह पूर्ववत् (मन्त्र १) । 1

English

We will pay sacrifice and serve with worship our glorious Indra, famous for his glories. Give thou us sway which Indra hath promoted, and in this boon of thine may we be famous.

अध्याय ६

श्लोक 34.1

शत्रुनाशनम्।१-५ चातनः।अग्निः।गायत्री।प्राग्नये॒ वाच॑मीरय वृष॒भाय॑ क्षिती॒नाम्।स नः॑ पर्ष॒दति॒ द्विषः॑

śatrunāśanam| 1-5 cātanaḥ| agniḥ| gāyatrī| prāgnaye vācamīraya vṛṣabhāya kṣitīnām| sa naḥ parṣadati dviṣaḥ

हिन्दी अर्थ

प्रकट र 4 निकृष्ट भावों का विनाश करता दहै। ५५ मे (0 प्रकाश वाली अभ्नि द्वारा रोगजनक कौटाणुञओं के विनाशको भी है । ज॒वंति वधकर्मा (निघं० २।१६) । ++ ६० मथवेवेद-भाष्य रकां० ६। अनु० ४। सूु० ३५ सव भुवनो को (अभि वि पश्यति) साक्षात् एक-एक करके देखता है, (च) ओर (सपश्यति) एक दृष्टि में सव को युगपत् देखता है । (सः) वह पूवे- है (सः) वह्, पू्वंवेत् (मन््र १) । सात्विक चित्त में प्रकट होता है, - यह् भाव भी सुचित होता है ।

English

Indra was glorious at his birth; Agni, Soma were born renowned. And glorious am I, the most illustrious of all that is. A prayer for peace and security

अध्याय ६

श्लोक 34.2

यो रक्षां॑सि नि॒जूर्व॑त्य॒ग्निस्ति॒ग्मेन॑ शो॒चिषा॑ ।स नः॑ पर्ष॒दति॒ द्विषः॑

yo rakṣāṃsi nijūrvatyagnistigmena śociṣā | sa naḥ parṣadati dviṣaḥ

हिन्दी अर्थ

(वैश्वानरः) सव नर-नारियों का हितकारी (अग्निः) जगदग्रणो परः मेश्वर, (नः ऊतये) हमारो रक्षा के लिये, (नः) हमारी (युष्टुतीः) उत्तम अर्थात् भक्तिभरी स्तुतिभों के (उप) समीप, (परावतः) दूर सेभो (आ ३. “तदेव शुक्रं तदृब्रह्य ता आपः स प्रजापतिः" (यजु ° ३२।१) । ¶ं० ९1 अनु० ४1 सू° ३५ अथववेवेद-भाष्य ९१ गत सूक्त ३४ के प्रकरणानुकूल आध्यात्मिक अथं किया है । परमे- एवर सवव्यापक है, परन्तु अदृष्ट होने से वह हम से दुर दहै, अतः परावत्

English

Here may we dwell, O Heaven and Earth, in safety. May Savitar and Soma send us safety. Our safety be the wide air: ours be safety through the oblation of the Seven Rishis. p. a218

अध्याय ६

श्लोक 34.3

यः पर॑स्याः परा॒वत॑स्ति॒रो धन्वा॑ति॒रोच॑ते ।स नः॑ पर्ष॒दति॒ द्विषः॑

yaḥ parasyāḥ parāvatastiro dhanvātirocate | sa naḥ parṣadati dviṣaḥ

हिन्दी अर्थ

गई है । अग्निरग्रणी भवति (निरुक्त ७।४।१४) । ( वैश्वानरः) सब नर-नारियों का हितकारी (अग्निः) जगदग्रणी पर- मेए्वर, (अंहसु) पापनाशक (उक्थेषु) स्तुति मन्त्रो तथा सामगानौं में म (उप) समीप (आ अगमत्) आ गया है । ४, ओर मन्व २ में “आ अगमत्” द्वारा वह हमारे उपासना यज्ञ में समीप आ गया है, पहिले वह् अदृष्ट था, अव दष्ट हौ गया है। अंहसु =आह- भ्तोति अंहः" ( निरक्त ४।४।२५) । जो पापी का हनन कर देता है, परन्तु वतमान मन्त मे “अंहः का अथं है “जो पाप का हनन कर देतादे)' "अंहः" का केवल अर्थं मन्त्र मे है “हनन करने वाला" । ( वैश्वानरः) सब नर-नारियोंका हितकारी परमेश्वर (अंगिरसाम्)

English

May the Four Quarters give this hamlet power: Savitar favour us and make us happy! May Indra make us free from foes and danger: may wrath of Kings be turned to other places.

अध्याय ६

श्लोक 34.4

यो विश्वा॒भि वि॒पश्य॑ति॒ भुव॑ना॒ सं च॒ पश्य॑ति ।स नः॑ पर्ष॒दति॒ द्विषः॑

yo viśvābhi vipaśyati bhuvanā saṃ ca paśyati | sa naḥ parṣadati dviṣaḥ

हिन्दी अर्थ

। सामगानों को (अक्लृपत्) समथित करता है। (एषु) ओर इन साम- ६२ मथवेवेद-भाष्य कां० ९॥ अनु° ४। सु° ३६ नरम्) सब नर-नारियों के हितकारी या विश्व के नेता परमेश्वर से (ईमहे), । हम सदा याचन। करते हु । प्रत्येक १ को (चाक्लपे) पदा किया, (वशौ) जो वशयिता (ऋतून्) ऋतुओं का (उत्सृजते) उत्करषे रूप मे सजन करता है, वहं (यज्ञस्य) हमारे , जीवन यज्ञ की (वयः) भायु को (उत्तिरन्) बढ़ातादहै। ॑ यदि जीवन यज्ञमयदहोतो भयु बढ़ जाती है । “पुष्षो वाव यज्ञः अभ्रिः परेषु धाम॑घु कामों मृतस्य भव्यस्य । सम्नाडेको वि राजति ॥३॥

English

Make thou us free from enemies both from below and from above. O Indra, give us perfect peace, peace from behind and from be- fore.

अध्याय ६

श्लोक 34.5

यो अ॒स्य पा॒रे रज॑सः शु॒क्रो अ॒ग्निरजा॑यत ।स नः॑ पर्ष॒दति॒ द्विषः॑

yo asya pāre rajasaḥ śukro agnirajāyata | sa naḥ parṣadati dviṣaḥ

हिन्दी अर्थ

दूर-दूर के (धामसु) स्थानो मे (विराजति) विराजमान है, (एकः) वहू फं०६। अनु० ४। सु० ३७ अथवेवेद-भाष्य । जड़ जगत् का भी काम्य है--यह कवि शली के अनुसार कहा है । यथा-- वाला परमेश्वर (शपथः) शाप बनकर, (रथम् युक्त्वा) मानो रथ जोत कर (उप प्रागात्) शापकर्ता के समीप शीघ्रतासे आ गया है, (मम) मेरे । (शप्तारम्) शाप देने वाले को (अनु इच्छन्) टूंडता हुभा; (इव) जैसे कि

English

A prayer for protection, long life, and various blessings For mind, for intellect, for thought, for purpose, for intelligence,. For sense, for hearing, and for sight, let us adore with sacrifice.

अध्याय ६

श्लोक 35.1

वैश्वानरः।१-३ कौशिकः।वैश्वानरः।गायत्री।वै॒श्वा॒न॒रो न॑ ऊ॒तय॒ आ प्र या॑तु परा॒वतः॑ ।अ॒ग्निर्नः॑ सुष्टु॒तीरुप॑

vaiśvānaraḥ| 1-3 kauśikaḥ| vaiśvānaraḥ| gāyatrī| vaiśvānaro na ūtaya ā pra yātu parāvataḥ | agnirnaḥ suṣṭutīrupa

हिन्दी अर्थ

(वृकः) भेडिया (अविमतः) भेड़ो वाले के (गृहम्) घर आ जाता है 1 का हनन करता है । जैसे कि भेडिया भेड का हनन कर देता है । इस निमित्त परमेश्वर स्वयं शपथ रूप हो जाता है ओर शापदाता कौ शपथ देकर उसका विनाश करता है, इसमे वह देर नहीं करता, भतः शीघ्र पहुंचने के लिये मानो वह॒ रथ परसवारहो शप्ताके हननाथं उसके (शपथ) है शपथरूपधारो परमेश्वर ! (नः) हमे, (परिवङ्धि) हम मे बसा हृभा भी तु, हमे परिवजित कर दे, त्याग दे, (इव) जंसे (अग्निः)

English

For expiration, vital air, and breath that amply nourishes, Let us with sacrifice adore Sarasvatī whose reach is wide.

अध्याय ६

श्लोक 35.2

वै॒श्वा॒न॒रो न आग॑मदि॒मं य॒ज्ञं स॒जूरुप॑ ।अ॒ग्निरु॒क्थेष्वंह॑सु

vaiśvānaro na āgamadimaṃ yajñaṃ sajūrupa | agniruktheṣvaṃhasu

हिन्दी अर्थ

दाता का (जहि) हनन कर (इव) जसे (दिवः) द्युलोक कौ (अशनिः) विचयुत् चुलोक का हनन न करती हुई (वृक्षम्) वृक्ष का ठेनन करती है। ६४ अथववेद-भाष्य कां० ६। अनु० ४। सु० ३८ । हद मे पानी होता है, उस पानीमे भी भग्नि विद्युत् ष्पे रहती: है, परन्तु पानो का दहन नहीं करतो, दिव् को अशनि दिवृमें रहती है परन्तु दिव् का हनन नहीं करती, इसो प्रकारहे परमेश्वर ! शपथ रूपमे हममे बसादहुमाभीतू हमारा हनन न कर (च) ओर (यः) जो प्रतिक्तियारूप में (शपतः) शप देते हुए (नः) हमें म फेक देता हू, (इव) जसे (क्षमम्) सूखी (पेष्टम्) पोटी को (अव) नीचे भूमि पर (शुने) कृत्तं के लिपे फंक दिया जाता है ।

English

Let not the Rishis, the divine, forsake us, our own, our very selves, our lives’ protectors. Do ye, immortal, still attend us mortals, and give us vital power to live the longer.

अध्याय ६

श्लोक 35.3

वै॒श्वा॒न॒रोऽङ्गि॑रसां॒ स्तोम॑मु॒क्थं च॑ चाक्लृपत्।ऐषु॑ द्यु॒म्नं स्वऽर्यमत्

vaiśvānaro'ṅgirasāṃ stomamukthaṃ ca cāklṛpat| aiṣu dyumnaṃ sva'ryamat

हिन्दी अर्थ

परमेश्वर का भक्त परमेश्वर को कहताहै कि हम शाप देने की दुषप्रवृत्ति से रहित है, परन्तु मानुष दुबलता के कारण शापदेने वाले को यदि हम प्रतिक्रिया रूपमे शापदेदेते ह, मौर इस हमारी प्रतिक्रियामें शाप देने वाला पुनः हमे शापदेताहैतो हम प्रतिक्रिया मे उसे पुनः शाप न देकर तेरे प्रति फक देते्है,त् ही मृत्युरूप हुमा उसे यथोचित दण्डदे। ह्रे या देवी स॒मगां जनान सान रतु वचैषठा संबिदाना॥१॥ सूयं मे (त्विषिः) दीप्तिदहै, तथा (या सुभगा) जो सौभाग्य वाली कू०६। अनु०४। सु० ३८ अथवेवेद-भाष्य द (जजानप्रकृट करती है (सा) वहु (वचसा) वर्च॑ष् के साथ (संविदाना) मेल को प्राप्त हुई नः) हमे (एतु) प्राप्त हो।

English

A charm to reconcile estranged friends I loose the anger from thy heart as ‘twere the bowstring from a bow,

अध्याय ६

श्लोक 36.1

वैश्वानरः।१-३ अथर्वा (स्वस्त्ययनकामः)।अग्निः।गायत्री।वऋ॒तावा॑नं वैश्वान॒रमृ॒तस्य॒ ज्योति॑ष॒स्पति॑म्।अज॑स्रं घ॒र्ममी॑महे

vaiśvānaraḥ| 1-3 atharvā (svastyayanakāmaḥ)| agniḥ| gāyatrī| vaṛtāvānaṃ vaiśvānaramṛtasya jyotiṣaspatim| ajasraṃ gharmamīmahe

हिन्दी अर्थ

या हस्तिनि द्वीपिनि या हिरण्ये खिषिरप्छ गोषु या पुरुषेषु । जां (हिरण्ये ) सुरण मे (अप्सु जल में, ( गोषु) गौओं मे, ( या) जा (पुरूपरेषु) पुरषो मे है (शेष पूर्ववत्) । हाथो मे बलोत्कषं, चीते मे आक्रमण, हिरण्य में रमणीयता, जल में इनदरं यादेवी सुमगां जनानसान् तु वचैसा सं विदाना ।॥२॥ (रथे) रथमें (मक्षु) रथोंकौ धूरियों मे, (ऋषभस्य) बैल कां (वाजे) चालमें, ०.4५ वाधुं मे, (पजेन्ये) मेव मे, (वकूणस्य) वण के (शुष्मे) बलमे जो दीप्ति है, सा एतु वह (नः) हमे प्राप्त हो) रमणीयता; अक्षेषु =घुरिथों मे आधारता; वृषभस्यच््वैल को चाल में

English

That we, one-minded now, may walk together as familiar friends. Together let us walk as friends: thy wrathful feeling I remove. Beneath a heavy stone we cast thy wrath away and bury it.

अध्याय ६

श्लोक 36.2

स विश्वा॑ प्रति॑ चाक्लृप ऋ॒तूंरुत् सृ॑जते व॒शी।य॒ज्ञस्य॒ वय॑ उत्ति॒रन्

sa viśvā prati cāklṛpa ṛtūṃrut sṛjate vaśī| yajñasya vaya uttiran

हिन्दी अर्थ

परमेश्वर ! परमेश्वर पाप काशोषगकर देताहैः विनाश कर देगाहै, ६६ अथर्वेवेद-भाष्य का० ६। अनु०४। सू° ३९ अनुराग वाला होता है तो वह् “राजन्य कहाता है । प्रजाओं मे अनुराग. । के कारण वहु प्रजाओं की अनुकूलता में राज्य करता है । अतः राजन्य मे दीप्ति है-प्रजाओं म अनुराग ओर प्रजाओों शौ अनुकलक्ता मं शासन करना । दुन्दुभि = ढोल जव बजता है तव लोगो का ध्यान उसकी गोर. भयका कारण होता है। अतः भय प्रदत्व उसकी दीप्ति दहि। अश्वकी चाल मे शान यह् अश्व की चालमें दीप्ति है। वाजे==वज ब्रज गतौ ।

English

I trample on thine anger thus, I tread it down with heel and toe: So dost thou yield thee to my will, to speak no more rebelliously.

अध्याय ६

श्लोक 36.3

अ॒ग्निः परे॑षु॒ धाम॑सु॒ कामो॑ भू॒तस्य॒ भव्य॑स्य ।स॒म्राडेको॒ वि रा॑जति

agniḥ pareṣu dhāmasu kāmo bhūtasya bhavyasya | samrāḍeko vi rājati

हिन्दी अर्थ

हआ है । मन्त्र मे पुरुषकी "मायु" मकौ दीप्तिका कथन हुमा है। ॥ होता है यह् उसकी दीप्ति दहै। ॥ (१-३) । अथर्वा (वचंस्कामः) । त्विषिः; बृहस्पतिः। १ लगती; २ का० ६ । अनु° ४। सू० ३६ अथववैवेद-भाष्य ६७ दारा भजित है वह (दीर्घाय चक्षसे) दोघे दुष्ट क लिए (अनु) निरन्तर

English

The same For stranger and for friend alike this Darbha-grass removeth wrath. Soother of Anger is it called because it calms the angry man.

अध्याय ६

श्लोक 37.1

शापनाशनम्।१-३ अथर्वा (स्वस्त्ययनकामः)।चन्द्रमाः।अनुष्टुप्।उप॒ प्रागा॑त् सहस्रा॒क्षो यु॒क्त्वा श॒पथो॒ रथ॑म्।श॒प्तार॑मन्वि॒छन् मम॒ वृक॑ इ॒वावि॑मतो गृ॒हम्

śāpanāśanam| 1-3 atharvā (svastyayanakāmaḥ)| candramāḥ| anuṣṭup| upa prāgāt sahasrākṣo yuktvā śapatho ratham| śaptāramanvichan mama vṛka ivāvimato gṛham

हिन्दी अर्थ

दृष्टि सेकरे,जोकि दीर्घंकालतक लागूहो सकं, इस से उसका यश नमस्कार करते हण (विधेम) हम उसको परिचर्या करे । (सः) वह् तुह राजां का अधिपति । संयुक्त माण्डलिक राजा नाना ह, इसलिये “नः, । स्याम, विघेम"” मे बहुवचन है । माण्डलिक राजा ओर सम्राट् जब का्थै- वश एक दूसरे के अभिमुख होते. है, तब मण्डलिक राजा, सम्राट् को नम- १. यक्ञियाग्नि में आहुत हविः वु्रषूप होकर, बढ़ कर, जसे अन्तरिक्न में

English

This Plant that hath abundant roots spreads to the place where waters meet. Soother of anger is the name Darbha-grass that springs from earth.

अध्याय ६

श्लोक 37.2

परि॑ णो वृङ्ग्धि शपथ ह्र॒दम॒ग्निरि॑वा॒ दह॑न्।श॒प्तार॒मत्र॑ नो जहि दि॒वो वृ॒क्षमि॑वा॒शनिः॑

pari ṇo vṛṅgdhi śapatha hradamagnirivā dahan| śaptāramatra no jahi divo vṛkṣamivāśaniḥ

हिन्दी अर्थ

प्रसृत हो जाती है, फल जाती है, वैसे हमारायश भी राज्य ओौर साम्राज्य में ६८ अथर्वेवेद-भाष्य का० ६। भनु० ४ सु° ४० पेना प्ररक, सेनःध्यक्ष, यथा -- बृहती सेना कए पति है वृहस्पतिः 8 जोकि सेनाके दक्षिण पाव मं अधिकारियों का पूजक, उनका संग करने वाला ओर् ष्ताथं आत्म समपंण कर देता है देव सेनाएं ह विजिगीषु सेनां “दिवु करोडाविजि-

English

We draw thine obstinacy forth, set in thy mouth and in thy jaw: So dost thou yield thee to my will. to speak no more rebelli- ously. A charm to remove disease

अध्याय ६

श्लोक 37.3

यो नः॒ शपा॒दश॑पतः॒ शप॑तो॒ यश्च॑ नः॒ शपा॑त्।शुने॑ पेष्ट्र॑मि॒वाव॑क्षामं॒ तं प्रत्य॑स्यामि मृ॒त्यवे॑

yo naḥ śapādaśapataḥ śapato yaśca naḥ śapāt| śune peṣṭramivāvakṣāmaṃ taṃ pratyasyāmi mṛtyave

हिन्दी अर्थ

गीष आदि (दिवादिः ४।१) । मरूतः है शत्रु को मारने में सिदधदस्व (१-३) ! अथय (१, २ अभयकामः, ३ प्वस्त्ययनकामः) + १,२ २. यजञ॒देदपूजाघंमतिकरणदानेषु (भ्वादिः) । खाकाफुथिवो है द्युलोक तथा पूथिवी (इह) यह् (अभयम्, अरतु) करे, (नः) हमारे लिये (सविता) सूरये अथय करे । (उर) विरतृत (बन्त-

English

Firm stood the heaven, firm stood the earth, firm stood this universal world. Firm stood the trees that sleep erect: let this thy malady be still.

अध्याय ६

श्लोक 38.1

वर्चस्यम्।१-४ अथर्वा (वर्चस्कामः)।त्विषिः।(बृहस्पतिः)।त्रिष्टुप्।सिं॒हे व्या॒घ्र उ॒त या पृदा॑कौ॒ त्विषि॑र॒ग्नौ ब्रा॑ह्म॒णे सूर्ये॒ या।इन्द्रं॒ या दे॒वी सु॒भगा॑ ज॒जान॒ सा न॒ ऐतु॒ वर्च॑सा संविदा॒ना

varcasyam| 1-4 atharvā (varcaskāmaḥ)| tviṣiḥ| (bṛhaspatiḥ)| triṣṭup| siṃhe vyāghra uta yā pṛdākau tviṣiragnau brāhmaṇe sūrye yā| indraṃ yā devī subhagā jajāna sā na aitu varcasā saṃvidānā

हिन्दी अर्थ

पराम दाता, राजाके ऋधिकोटि ॐ सप्त सचिव इस परामशे को रिव अभय नः) हमारे लिये (कृणोतु) करे, (राज्ञाम्) राजाओं का से भिन्नोंके (अभि) ग्रति (यातु) जाय) हनद्रौनमित्ं नेः पञचाद्नमित्रं १२२करधि 1३1) ७० अथवेवेद-भाष्य का०६। अनु०.४। सू० ४१

English

Of all thy hundred remedies, a thousand remedies combined. This is the surest cure for flux, most excellent to heal disease. Thou art the stream that Rudra pours, the closest kin of Amrita.

अध्याय ६

श्लोक 38.2

या ह॒स्तिनि॑ द्वी॒पिनि॒ या हिर॑ण्ये॒ त्विषि॑र॒प्सु गोषु॒ या पुरु॑षेषु ।इन्द्रं॒ या दे॒वी सु॒भगा॑ ज॒जान॒ सा न॒ ऐतु॒ वर्च॑सा संविदा॒ना

yā hastini dvīpini yā hiraṇye tviṣirapsu goṣu yā puruṣeṣu | indraṃ yā devī subhagā jajāna sā na aitu varcasā saṃvidānā

हिन्दी अर्थ

रहित कर, (पुरः) पूरवैदिश्रा से (अनमित्रम् ) शवुरहित कर । मन॑से चेतसे धिय आक्गतय उत चित्तये । मत्ये श्रताय चक्षसे विधेम हविषां वय् ॥१। (मनसे) मनन के लिये, (चेतसे) सम्यक्-ल्ञान के लिये, (धिये) ध्यान के लिये, (आकृतये) संकल्प के लिये, (चित्तये) स्मरण शक्ति के लिये, दारा (विवेम) यज्ञ केरे या इन सव्र को परिचर्या करं । अपानाय व्यानायं प्राणायु भूरिंधायसे ।

English

Thy name is called Vishānakā: thou sprangest from the Fathers’ root, removing illness caused by wind.

अध्याय ६

श्लोक 38.3

रथे॑ अ॒क्षेष्वृ॑ष॒भस्य॒ वाजे॒ वाते॑ प॒र्जन्ये॒ वरु॑णस्य॒ शुष्मे॑ ।इन्द्रं॒ या दे॒वी सु॒भगा॑ ज॒जान॒ सा न॒ ऐतु॒ वर्च॑सा संविदा॒ना

rathe akṣeṣvṛṣabhasya vāje vāte parjanye varuṇasya śuṣme | indraṃ yā devī subhagā jajāna sā na aitu varcasā saṃvidānā

हिन्दी अर्थ

अपानाय आदि मे तादथ्यं चतुर्थी है । प्राण का विशेषण है भरि- जय इन्द्रियों तथा मानसिक शक्तियो का धारक तथा पोषक है । भपानदहै का० ६ । अनु०४। सु० ४१ अथर्ववेद-भाष्य ७१ उपवेद तथा भाष्यों अआदिकेस्पोंमें वेदवाणी फली हुई है । व्यचस् (ये) जो (देन्याः) देवों सम्बन्धी (ऋषयः) ऋषिरहैँषे (नः) हमारा (हासिषुः मा) परित्यागन करर (ये) जो ऋषि कि (तनूपा) शरीरके रक्षक हँ (ये) जो (नः) हमारे (तन्वः) शरीर से (तनूजाः) शरीर मेही मरणशीलों को (अभि सचध्वम्) प्राप्त होमो, (नः) हमारे (जीवसे) जीवित होने केलिये (प्रतरम्) रेष्ठ तथा दीघं (आयुः) ञायु (धत्त)

English

A prayer for preservation from mental sin and evil promptings Sin of the Mind, avaunt! begone! Why sayest thou what none should say? Go hence away, I love thee not. Go to the forests and the trees.

अध्याय ६

श्लोक 38.4

रा॒ज॒न्येऽदुन्दु॒भावाय॑ताया॒मश्व॑स्य॒ वाजे॒ पुरु॑षस्य मा॒यौ।इन्द्रं॒ या दे॒वी सु॒भगा॑ ज॒जान॒ सा न॒ ऐतु॒ वर्च॑सा संविदा॒ना

rājanye'dundubhāvāyatāyāmaśvasya vāje puruṣasya māyau| indraṃ yā devī subhagā jajāna sā na aitu varcasā saṃvidānā

हिन्दी अर्थ

तथा (यजु० ३४।५५) । ये ऋषि अमत्यं हँ, शरीर की मृत्यु हो जाने पर भीयेकारण शरीरम आत्मा के साथ पुनर्जन्ममें भी जतेर्ह। इन का इन बाह्य देवो के कारण सात्. ऋषियों की स्थिति शरीर मे होती है । (प्रपदेन) पर के अगले भाग द्वारा (अभि तिष्ठामि) मँ कुचल देतोहू, को (अद) उतार दि जादे वेर पत्ते धि हृदः) चेरे हृद्य से (मन्पूम्) छो को कद तनोरि)उत्र देती हृ, पृयङ् कर देती ह (था) ताकि (संभनसौ भूत्वा हम दोनो एक चित्त हौोङर स्कायौ, द) दो (यया) जिससे किं (अवशः) अपने आप को वशमें न रखता हृतु (न वादिषः) कुछ न कह सके, ओर (मम चित्तम्) मेरे चित्त के (उप

English

My heart is in our homes and cows. Whatever wrong we have committed, sleeping or waking, by ill-wish, dislike, or slander,

अध्याय ६

श्लोक 39.1

वर्चस्यम्।१-३ अथर्वा (वर्चस्कामः)।(बृहस्पतिः), २ इन्द्रः, ३ इन्द्रः, अग्निः, सोमः,।१ जगती, २ त्रिष्टुप्, ३ अनुष्टुप्।यशो॑ ह॒विर्व॑र्धता॒मिन्द्र॑जूतं स॒हस्र॑वीर्यं॒ सुभृ॑तं॒ सह॑स्कृतम्।प्र॒सर्स्रा॑ण॒मनु॑ दी॒र्घाय॒ चक्ष॑से ह॒विष्म॑न्तं मा वर्धय ज्ये॒ष्ठता॑तये

varcasyam| 1-3 atharvā (varcaskāmaḥ)| (bṛhaspatiḥ), 2 indraḥ, 3 indraḥ, agniḥ, somaḥ,| 1 jagatī, 2 triṣṭup, 3 anuṣṭup| yaśo havirvardhatāmindrajūtaṃ sahasravīryaṃ subhṛtaṃ sahaskṛtam| prasarsrāṇamanu dīrghāya cakṣase haviṣmantaṃ mā vardhaya jyeṣṭhatātaye

हिन्दी अर्थ

अभितिष्ठामि, जैसे किसो बस्तु परपैरों द्वारा स्थित होकर उसे कुचल दिय्रा जाता दहै, उसी तरह तेरे मन्यु कोर्मे कुचल देती हूं । वादिषः । लिये (च) ओर (अरणाय) विदेशी के लिए (विमन्धुकः) मन्यु का विगत करने वाला है । ( विमन्थुकस्य ) विगतमन्यु वाले के आपाततः हए (मन्योः) के साथ हमारा वोलचाल नहीं अर्थात् विदेशी । दभः -द विदारणे (कयादिः), घास-विश्चेष जो कि अनावृत पैर को, या ने पर गङ्खको कतिचिदेव पदानि गत्वा (शाकुन्तल नाटक) । यह् कुश-घास टै, जिसका उपर का भाग कटार होताहैः तेज होता है। इसीलिये कुणाग्रबुदधि शब्द का प्रयोग विषयशोध्रगाही के लिये होता दहै। कुश-घास कारस (सापो इव दो सिशरो के सदु (रचाव) टम दोनो मल् जोय, इपलिये (ते) दरे मन्पुम्) सन्धुको (अव ट्नामि)। उतार देती

English

All these offences, which deserve displeasure, may Agni take from us and keep them distant. Indra and Brāhmanaspati! whatever foolish deed we plan, May provident Angirasa preserve us from the sin and woe.

अध्याय ६

श्लोक 39.2

अच्छा॑ न॒ इन्द्रं॑ य॒शसं॒ यशो॑भिर्यश॒स्विनं॑ नमसा॒ना वि॑धेम ।स नो॑ रास्व रा॒ष्ट्रमिन्द्र॑जूतं॒ तस्य॑ ते रा॒तौ य॒शसः॑ स्याम

acchā na indraṃ yaśasaṃ yaśobhiryaśasvinaṃ namasānā vidhema | sa no rāsva rāṣṭramindrajūtaṃ tasya te rātau yaśasaḥ syāma

हिन्दी अर्थ

है, जे फ पत्र के चोचे किरी वस्तु क्ले फक दिया कातरा है (मः) बो पत्थर कि (गरः) भारीहै) उफास्पामसि मैं वहुवचन है ! पत्नी के साथ मिल कर अन्य 9 ० ६। जनु०५। मु० ४२ अयववेद-भाष्य ७३ ७४ अयववेद-भाष्य कां० ६। अनु० ५। ० ५४ (अयम्) यह (यः) जो (वभः) दर्भं (भूरिमूलः) नाना जडोंवाला । स्थित होता है, भौर (पृथिव्याः)पृथिवी से (उत्थितः) उपर की ओर स्थित टोता है, उठता है, वहु (मन्युशमन उच्यते) «मन्युशमन कहा जाता है ।

English

A charm against evil dreams Thou, neither quick nor dead, O Sleep, art fraught with Amrit of the Gods.

अध्याय ६

श्लोक 39.3

य॒शा इन्द्रो॑ य॒शा अ॒ग्निर्य॒शाः सोमो॑ अजायत ।य॒शा विश्व॑स्य भू॒तस्या॒हम॑स्मि य॒शस्त॑मः

yaśā indro yaśā agniryaśāḥ somo ajāyata | yaśā viśvasya bhūtasyāhamasmi yaśastamaḥ

हिन्दी अर्थ

करोधमयी वाणी को (विनयामसि) हुम विनययुक्त अर्थात् विनीत करते है बोलते समय आवाज मुखे बोली जाती है भौर निचली हनु साथ साथ हिलती दहै । अतः वोलने का सम्बन्ध दानां के साथ है, मख के साथ तथा हनु के साथ । शरणिम् = हिसायाम् (कथादिः) । के वशमें हुमा तु (न वादिषः) चित्तम्) मेरे चित्त के (उप)

English

Thy name is Araru: thy sire is Yama; Varunāni bare thee. We know thy birth, O Sleep, thou art son of the sisters of the Gods; the minister of Yama thou, thou art Antaka, thou art

अध्याय ६

श्लोक 40.1

अभयम्।१-३ अथर्वा।१ द्यावापृथिवी, सोमः, सविता, अन्तरिक्षं, सप्तऋषयः, २ सविता इन्द्रः, ३ इन्द्रः।१-२ जगती, ३ अनुष्टुप्।अभ॑यं द्यावापृथिवी इ॒हास्तु॒ नोऽभ॑यं॒ सोमः॑ सवि॒ता नः॑ कृणोतु ।अभ॑यं नोऽस्तू॒र्व॑१न्तरि॑क्षं सप्तऋषी॒णां च॑ ह॒विषाभ॑यं नो अस्तु

abhayam| 1-3 atharvā| 1 dyāvāpṛthivī, somaḥ, savitā, antarikṣaṃ, saptaṛṣayaḥ, 2 savitā indraḥ, 3 indraḥ| 1-2 jagatī, 3 anuṣṭup| abhayaṃ dyāvāpṛthivī ihāstu no'bhayaṃ somaḥ savitā naḥ kṛṇotu | abhayaṃ no'stūrva1ntarikṣaṃ saptaṛṣīṇāṃ ca haviṣābhayaṃ no astu

हिन्दी अर्थ

कां० ६ । अनु० ५ । सू० ४८४ अथरवंवरेद-भाष्य ७१५ सायण ने रुधिर-स्राव रोग कहा है । मनर मे “अस्थात् द्वारा “मति- रुधिर भी हृदयसे नाद्यो में लवण करते केलिये है, यह ही उसको नियत स्थिति है, इस स्थिति में हौ उसकी स्थिति चाहिए, खाव के लिये । च) ओर (सहस्रम्) हजार ओषधं (संगतानि) एकत्रित कौ है" उनमें से (आसखावभेषजम्) आस्राव कौ भौषधर जो (ते) तेरे ( रोगनाशनम्) भाग रूप म बसा हुमा है, शेष भाग में अन्य तत्तव ह । अथवा वसिष्ठः

English

Death. So well we know thee who thou art. Sleep, guard us from the evil dream.

अध्याय ६

श्लोक 40.2

अ॒स्मै ग्रामा॑य प्र॒दिश॒श्चत॑स्र॒ ऊर्जं॑ सुभू॒तं स्व॒स्ति स॑वि॒ता नः॑ कृणोतु ।अ॒श॒त्र्विन्द्रो॒ अभ॑यं नः कृणोत्व॒न्यत्र॒ राज्ञा॑म॒भि या॑तु म॒न्युः

asmai grāmāya pradiśaścatasra ūrjaṃ subhūtaṃ svasti savitā naḥ kṛṇotu | aśatrvindro abhayaṃ naḥ kṛṇotvanyatra rājñāmabhi yātu manyuḥ

हिन्दी अर्थ

वासयितृतमः (सायण) शरीर मे जीवात्मा को वसाने कां यह् सर्वाति- प्राय साधनदहै। शरीरम उदकमात्राके कम हो जाने पर मृ्युको सम्भावना हो जातो है । उदकमात्रा के कम हो जने को षहप्त- (नाभिः) बन्धक है, स्थापकरहै। (व्रिषाणका") रोग को शरीर से विभक्त करने वाली गोषधि (नाम वै) नाम वाली निश्चय से (असि) तु है,(पित्- (वातीकृतनाशनी) प्रकूगित वातसे किये गये रोगका नाश करने वाली णह् बन्धने (दिवादिः) । विषाणका = विशेषेण रोगनिवतेनस्य संभक्वी

English

As men discharge a debt, as they pay up an eighth and half-an- eighth, So the whole evil dream do we pay and assign unto our foe.

अध्याय ६

श्लोक 40.3

अ॒न॒मि॒त्रं नो॑ अध॒राद॑नमि॒त्रं न॑ उत्त॒रात्।इन्द्रा॑नमि॒त्रं नः॑ प॒श्चाद॑नमि॒त्रं पु॒रस्कृ॑धि

anamitraṃ no adharādanamitraṃ na uttarāt| indrānamitraṃ naḥ paścādanamitraṃ puraskṛdhi

हिन्दी अर्थ

(सायण) । जल ओषधि है, ओषधि पद स्त्रोलिद्खीरहै। अतः मन््रमें स््रीलिद्धी प्रयोगहृए है जो कि जलकाही कथनकरते हँ । वैदिक साहित्य में “पितरः” का प्रयोग ऋतुजों के लिये भी हुभा दहै । है, उस मे भौमतत्तव मिले नहीं होते । इसलिये वहु जल चिकित्सा के लिये पृथिवी की एक विश्षिष्ट गति के कारण जिसे कि “?166688101 ° 6वणा- 1025" कहते ह । समय-समय पर भिघ्न-भिस्न ऋतुजों से संवत्सर-काल २. जिस ऋतु से संवत्सर या वषंकाप्रारम्म हमा, वह् रतु मूलरूप है ।

English

To accompany the three daily libations Dear to all men, all-prosperer, all-creating, may Agni, guard us• at the morn’s libation.

अध्याय ६

श्लोक 41.1

दीर्घायुःप्राप्तिः।१-३ ब्रह्म।१ चन्द्रमाः, २ सरस्वती, ३ दैव्या ऋषयः।१ भुरिक्, २ अनुष्टुप्, ३ त्रिष्टुप्।मन॑से॒ चेत॑से धि॒य आकू॑तय उ॒त चित्त॑ये ।म॒त्यै श्रु॒ताय॒ चक्ष॑से वि॒धेम॑ ह॒विषा॑ व॒यम्

dīrghāyuḥprāptiḥ| 1-3 brahma|1 candramāḥ, 2 sarasvatī, 3 daivyā ṛṣayaḥ| 1 bhurik, 2 anuṣṭup, 3 triṣṭup| manase cetase dhiya ākūtaya uta cittaye | matyai śrutāya cakṣase vidhema haviṣā vayam

हिन्दी अर्थ

‰१€5॥ अर्थात् जिन स्थानौ पर सूयं के आगमन पर दिन-रात बराबरष्टोते ह, उन अथवेवेद-भाष्य कां० ६॥ अनु० ५ । सू०्ण्थः कां० ६ 1 अनु० ५1 सू० ४५ अथववरेद-माष्य ७७ परेहि न तवां कायये वृक्षान वनांनि सं च॑र गृहेषु गोष मे मन॑ः ॥१॥ (मनस्पाप) है मानसिक पाप! (परः अप इहि) परे हट जा, (किम्)

English

May he, the brightly pure one, give us riches: may we have life enjoying food together. At this our second offering may Indra, Maruts, and Visve Devas never fail us. Still may the favour of the Gods be with us, blest with long life and speaking words that

अध्याय ६

श्लोक 41.2

अ॒पा॒नाय॑ व्या॒नाय॑ प्रा॒णाय॒ भूरि॑धायसे ।सर॑स्वत्या उरु॒व्यचे॑ वि॒धेम॑ ह॒विषा॑ व॒यम्

apānāya vyānāya prāṇāya bhūridhāyase | sarasvatyā uruvyace vidhema haviṣā vayam

हिन्दी अर्थ

हि) परे चला जा, (त्वा न कामये तुक्ञे नहीं मै चाहता, (वृक्षान्, वनानि) वृक्षो ओर वनो मे (संचर) संचार कर, विचर (मे) मेश (मनः) मन (गृहेषु) गृहकायों मे, (गोषु) ओर गोपालन मे विचरे। ओर उसके हटाने का संकल्प है देव । मानसिक-पाप ही वास्तविक पाप है । एेद्धियिक ओर शारीरिक पाप तो मानसिक-पाप के परिणाम होते ह, अतः संकल्पो ओर विचारों को शिव बनाना चाहिए । मानसिक-पाप को कामना को वजित करना चाहिए । वृक्षों भौर वनो मे पाप विचरता है ' वृक्षो का वास होता है । तभी इन्हें “ऊध्वेस्वप्नाः'' कहा है (मथवं० ६।४४।१)। स्थानों का पूवं से पश््विम कौ ओर बदल जना । तथा-- रविमायं मे उन दो स्थानों का, जहा किं विन-रात बराबर हो जति ह, माषं १ तथा सितम्बर २३ को दिन मौर रात के स्यानोका पौछेकी ओर शनः-शनं

English

please them. We pour this third libation of the Sages who fashioned forth the cup in proper order.

अध्याय ६

श्लोक 41.3

मा नो॑ हासिषु॒र्ऋष॑यो॒ दैव्या॒ ये त॑नू॒पा ये न॑स्त॒न्वऽस्तनू॒जाः ।अम॑र्त्या॒ मर्त्यां॑ अ॒भि नः॑ सचध्व॒मायु॑र्धत्त प्रत॒रं जी॒वसे॑ नः

mā no hāsiṣurṛṣayo daivyā ye tanūpā ye nastanva'stanūjāḥ | amartyā martyāṃ abhi naḥ sacadhvamāyurdhatta prataraṃ jīvase naḥ

हिन्दी अर्थ

होने पर होता है, जिस से भूमध्य रेखा पर सूर्य के आने फा समय पुवपिक्षया कम ७८ अयर्ववेद-भाष्य कां० ६। अनु० ५। सूु० ४५. स्वप्न ओौर जागरण जीवधासियों को होते र्है,जड़ो को नहीं । मन को खाली न रखना चाहिय, इसलिये कहा है “गृहेषु गोषु” “मे मनः" । जीवात्मा के लिये कहा “जोष धिषु प्रतितिष्ठा शरी रेः” (अथवं० १८।२।७) । शरीरे; = . बार-बार शरीर रहण करना ओषधियो म । मतः शरीरः बहुवचन है, या सूम जोर कारण शरोर सहित स्यृल शरीर रूप में मौषधि, वनस्पति,

English

Winners of heaven, may they, Sudhanvan’s children, lead our fair sacrifice to happy fortune. Formulas to be used at the three daily libations Thou art the Hawk, Gāyatri’s lord: I hold thee fast. Happily bear me to the goal of this my

अध्याय ६

श्लोक 42.1

परस्परचित्तैकीकरणम्।१-३ भृग्वङ्गिराः।(परस्परचित्तैकीकरणकामः)।मन्युः।१-२ भुरिक्,३ अनुष्टुप्।अव॒ ज्यामि॑व॒ धन्व॑नो म॒न्युं त॑नोमि ते हृ॒दः ।यथा॒ संम॑नसौ भू॒त्वा सखा॑याविव॒ सचा॑वहै

parasparacittaikīkaraṇam| 1-3 bhṛgvaṅgirāḥ| (parasparacittaikīkaraṇakāmaḥ)| manyuḥ| 1-2 bhurik,3 anuṣṭup| ava jyāmiva dhanvano manyuṃ tanomi te hṛdaḥ | yathā saṃmanasau bhūtvā sakhāyāviva sacāvahai

हिन्दी अर्थ

वृक्षो भौर वनो मे शरीरग्रहणं करना, अभिप्रेत है । हम से (अप) अपगत कर्के (आरे) दुर (दधातु) स्थापित करे। अन्धकारमय दुष्क्मो को हेम से दुर करे । एवर्यैवान् परमेश्वर ! (यद् अपि) जो भी (मुषा हम करते हैँ आप कौ प्रेरणा से ( आङ्किरसः) प्राणायामादि योगाङ्ग (अंहसः) पाष से (पातु) सुरक्षित करे :

English

sacrifice. All hail! Thou art the Ribhu, lord of Jagatī: I hold thee fast. Happily bear me to the goal of this my

अध्याय ६

श्लोक 42.2

सखा॑याविव सचावहा॒ अव॑ म॒न्युं त॑नोमि ते ।अ॒धस्ते॑ अश्म॑नो म॒न्युमुपा॑स्यामसि॒ यो गु॒रुः

sakhāyāviva sacāvahā ava manyuṃ tanomi te | adhaste aśmano manyumupāsyāmasi yo guruḥ

हिन्दी अर्थ

स्वकर्माणि भस्मसात्कुरुतेऽ्जुन"' (गीता ४।३७) । उपारिम उप + आट् +- ऋ (गतौ ) + उत्तम ॒ पुरुष , बहुवचन । गतेस्त्रयो- कां० ६ । .अनु०.५। सू० ४६ अथवेबेद-भाष्य ७६ यो न जीषीसि न मतो देवानामगृतग मं सि स्वप्न । (स्वप्न) है स्वप्न ! (यः) जो (न जोवः मसि) न जौविततु है, (न मृतः) न मुत है, अपितु (देवानाम् ) इन्द्रियों का (अमृतगभेः असि) न मरने वाला गरभंरूप है, पुत्ररूप है । (वरुणानी) रात्री (ते) तैरी (माता) माता है, (यमः) नियन्तादिन तेरा (पिता) पितादहै, (अररः) अरु (नाम) नाम वाला (असि) तूदहै। . स्थिर रहता है । वरुणानी है रात्री, यथा “अहोराच्ौ मित्रावरुणौ” (तां०

English

sacrifice. Al I hail! Thou art the Bull, the Trishtup’s lord: I hold thee fast. Happily bear me to the goal of this my sacrifice. All hail!

अध्याय ६

श्लोक 42.3

अ॒भि ति॑ष्ठामि ते म॒न्युं पार्ष्ण्या॒ प्रप॑देन च ।यथा॑व॒शो न वादि॑षो॒ मम॑ चि॒त्तमु॒पाय॑सि

abhi tiṣṭhāmi te manyuṃ pārṣṇyā prapadena ca | yathāvaśo na vādiṣo mama cittamupāyasi

हिन्दी अर्थ

के अनुभवो के संस्कारों के कारण स्वप्न की स्थिति होती है, अतः दिन भय मे "रेषण” कष्टानुभव करता, विचलित होता रहता . है, मतः स्वप्न विदम ते खप्न जनि दंवजामीना प्रो सि प॒मस्य करणः । १. “नैनद् देवा आप्नुयुः" (यञु० ४०।४), देवाः इ्दरियाणि (महीषर) ।, तू पुरर है, (यमस्य) दिन का यम-नियमषूपौ चित्तवृत्तियों कात (करणः) .

English

In praise of Agni O Agni, in thy body man hath never found a wounded part.

अध्याय ६

श्लोक 43.1

मन्युशमनम्।१-३ भृग्वङ्गिराः (परस्परचित्तैकीकरणकामः)।मन्युशमनम्।अनुष्टुप्।अ॒यं द॒र्भो विम॑न्युकः॒ स्वाय॒ चार॑णाय च ।म॒न्योर्विम॑न्युकस्या॒यं म॑न्यु॒शम॑न उच्यते

manyuśamanam| 1-3 bhṛgvaṅgirāḥ (parasparacittaikīkaraṇakāmaḥ)| manyuśamanam| anuṣṭup| ayaṃ darbho vimanyukaḥ svāya cāraṇāya ca | manyorvimanyukasyāyaṃ manyuśamana ucyate

हिन्दी अर्थ

कमं है । (अन्तकः मसि) तू दुःस्वप्नं भौर उनके परिणामों को भन्तकर देता है, (मृटुः असि) तु उनके लिए मृत्युरूप है । उस तुक्षको (तथा) उन गुणो वालाह शैली से ्ै। इस प्रकरण की विशेष व्याख्या अथवं० कां. १६) सूक्त ५।८-१० म, तया अथवं १६।५ के समग्र सूक्त मेँ सामान्यखूप से कर दी ग्ई्है, एक करके सूर्यरप्मियां अमावास्या मे (सं नयन्ति) ले जातौ है, लीन कर् देती ईह (यथा) जिस प्रकार लोहकार (शफम्) अश्व ओर बेल के रको लोरे की खरी लगने के लिए (सं नयन्ति) तरासते तथा छटील कर अपगत करते है, (यथा) जिस प्रकार ऋणी परुष ¦ ऋणम्) ऋण की

English

The Ape devours the arrow’s shaft as a cow eats her after- birth. Thou like a fleece contractest and expandest thee what time the upper stone and that below devour.

अध्याय ६

श्लोक 43.2

अ॒यं यो भूरि॑मूलः समु॒द्रम॑व॒तिष्ठ॑ति ।द॒र्भः पृ॑थि॒व्या उत्थि॑तो मन्यु॒शम॑न उच्यते

ayaṃ yo bhūrimūlaḥ samudramavatiṣṭhati | darbhaḥ pṛthivyā utthito manyuśamana ucyate

हिन्दी अर्थ

राशि को शनैः शनेः (संनयन्ति) सम्प्रदान द्वारा समीकृत करते है, को (द्विषते) अप्रियपक्ष के लिये (संनयामसि) ह राजसिक गौर तामसिक स्वप्न । जिस अनुपात से जीवन में सात्विक स्वप्न उत्पन्न होते रहते है, उसो अनुपात से राजसिक मौर तामसिक अथवेवेद-भाष्य कां ६। अनु०° ५। सु० ४६ ह का०६। अनु० १ । सुऽ ४७ अथक्त्रेद-भाष्य ,

English

Closely compressing head with head and breast with breast he crunches up the tendrils with his yellow jaws.

अध्याय ६

श्लोक 43.3

वि ते॑ हन॒व्यां श॒रणिं॒ वि ते॒ मुख्यां॑ नयामसि ।यथा॑व॒शो न वादि॑षो॒ मम॑ चि॒त्तमु॒पाय॑सि

vi te hanavyāṃ śaraṇiṃ vi te mukhyāṃ nayāmasi | yathāvaśo na vādiṣo mama cittamupāyasi

हिन्दी अर्थ

(वैश्वानरः) सव नर-नारी खूप प्राणियों का हितशारी, (विश्वकृत्) चारियों की (पातु) रक्षा करे। (सः) वहु (पावकः ) पवित्र करने वाला परमेश्वर (नः) हमे (द्रविणे) शारीरिक वलमे, तथा वीयं यां प्राणरूपी धन में (दधातु) धारित-पोषित करे, ( आयुष्मन्तः) ताकि हम दीर्घाय से अ धभौतिक अथं निम्नलिखित प्रमाणके आधार पर किया गया है । अतीव शुभ गुणो से संगत ओर सत्कतव्य है । इस को अवश्य है कि २४ वषं प्रहण करे। तो उसके शरीरम प्राण बलवान् होकर सअ शुभ गणो के वास कराने वाले होते हैँ ॥१॥

English

The Eagles have sent forth their voice aloud to heaven: in the sky’s vault the dark impetuous ones have danced. When they come downward to repair the lower stone, they, dwellers with the Sun, have

अध्याय ६

श्लोक 44.1

रोगनाशनम्।१-३ विश्वामित्रः।वनस्पतिः।अनुष्टुप्, ३ त्रिपदा महाबृहती।अस्था॒द् द्यौरस्था॑त् पृथि॒व्यस्था॒द् विश्व॑मि॒दं जग॑त्।अस्थु॑र्वृ॒क्षा ऊ॒र्ध्वस्व॑प्ना॒स्तिष्ठा॒द् रोगो॑ अ॒यं तव॑

roganāśanam| 1-3 viśvāmitraḥ| vanaspatiḥ| anuṣṭup, 3 tripadā mahābṛhatī| asthād dyaurasthāt pṛthivyasthād viśvamidaṃ jagat| asthurvṛkṣā ūrdhvasvapnāstiṣṭhād rogo ayaṃ tava

हिन्दी अर्थ

८२ वभर्वेवेद-भास्थ का० ६॥ जनु० भ । सु° ४७ पक्त हो के सव दुष्टों को रलाने ओर भेष्ठों का पालन करने हारे विद्याओं.का ग्रहण करते द ) 1 सत्यारथप्रकास, तृतीय समृल्लास, दयानन्द आयुष्मन्तः भयमेषां वद॑न्तो वयं देवानां सुमतो स्याप ॥२॥ (वदन्तः) बोलते हए (वयम्) देम (देवानाम्) गुरुदेवो की (सुमतौ)सुमति

English

gained abundant seed. A charm for the destruction of vermin

अध्याय ६

श्लोक 44.2

श॒तं या भे॑ष॒जानि॑ ते स॒हस्रं॒ संग॑तानि च ।श्रेष्ठ॑मास्रावभेष॒जं वसि॑ष्ठं रोग॒नाश॑नम्

śataṃ yā bheṣajāni te sahasraṃ saṃgatāni ca | śreṣṭhamāsrāvabheṣajaṃ vasiṣṭhaṃ roganāśanam

हिन्दी अर्थ

-- "एषाम् सताम्” इन के विद्यमान रहते । ओर उदर भागम मानो बड़े विल वाला हता है । यहो अवस्था मस्तिष्क जोर सुपुम्णादण्ड कौ होती है । चमचेमे भी उसे पकड़ने के लिये हत्था होतादहै,जोकरि दण्डरूपहोताहै। मस्तिष्क उर्वभाग में उभरा हु होता है, ओर निचले भाग में छिद्र वासा होताहै, जिसमेंसे सुषुम्मादण्ड निकल कर पीठम फला होता है । इस मस्तिष्क मे ज्ञानरूपी यश्च निहित मे भौ पठित है (१०।८।६) तथा (यजु ३४।५५) । वपोयः; ईयस् के ईकार का लोप। तैत्तिरीय में “वसीयः'' पाठ है । थ अथवेवेद-भाध्य का० ६। अनु ५। सुर ्८

English

Destroy the rat, the mole, the boring beetle, cut off their heads and crush their ribs, O Asvins. Bind fast their mouths; let them not eat our barley: so guard, ye twain, our growing corn from danger.

अध्याय ६

श्लोक 44.3

रु॒द्रस्य॒ मूत्र॑मस्य॒मृत॑स्य॒ नाभिः॑ ।वि॒षा॒ण॒का नाम॒ वा अ॑सि पितॄ॒णां मूला॒दुत्थि॑ता वातीकृत॒नाश॑नी

rudrasya mūtramasyamṛtasya nābhiḥ | viṣāṇakā nāma vā asi pitṝṇāṃ mūlādutthitā vātīkṛtanāśanī

हिन्दी अर्थ

उपनयन" करके आचार्यं उसे दण्डप्रदान करता है । कौशिक सूत्र भवितपूर्वक उपासित परमेश्वर शोध सफलता प्रदान कर्ता है, अतः भाष्य) ) उदूचि--वसुकाल में जतनी ऋचाणएं पाठ्य हँ उन की समाप्ति पवर की उपासना करनी चाहिए इसी लिये कहा है “गायत्रं प्रातः सव- १. उपनयन उप (समीप भे +- नयन (ले आना, अर्थात् निज भाश्चम मे

English

Ho! boring beetle, ho! thou worm, ho! noxious grub and grasshopper! As a priest leaves the unfinished sacrifice, go hence devouring not, injuring not this corn.

अध्याय ६

श्लोक 45.1

दुःष्वप्ननाशनम्।१-३ अङ्गिराः प्रचेता, यमश्च।दुःष्वप्ननाशनम्।१ पथ्यापङ्क्तिः, २ भुरिक् त्रिष्टुप्, ३ अनुष्टुप्।प॒रोऽपे॑हि मनस्पाप॒ किमश॑स्तानि शंससि ।परे॑हि॒ न त्वा॑ कामये वृ॒क्षां वना॑नि॒ सं च॑र गृ॒हेषु॑ गोषु॑ मे॒ मनः॑

duḥṣvapnanāśanam| 1-3 aṅgirāḥ pracetā, yamaśca| duḥṣvapnanāśanam| 1 pathyāpaṅktiḥ, 2 bhurik triṣṭup, 3 anuṣṭup| paro'pehi manaspāpa kimaśastāni śaṃsasi | parehi na tvā kāmaye vṛkṣāṃ vanāni saṃ cara gṛheṣu goṣu me manaḥ

हिन्दी अर्थ

से साना । यहु आश्षमरहै ब्रहाचर्या्नम)। । कां० ६। अनु ५।सू० ४८ अथयबवेद-भाष्य 4 श्वर कौ उपासना करनी चाहिए (छान्दोग्य ३।१६।३) । तथा तुतोय सवन करनी चाहिए (छान्दोग्य ३।१६।५) । इस भावना के अनुसार सूक्त ४८ के त्वाऽऽरभे त्वा” द्वारा परमेश्वर को कहा है, अतः उपासनामें प को “आलम्बन रूप में वणित किया दहै । सूक्त ४७ के मन्त्रम (जगच्छन्दाः) जगती छन्द वाली ऋचा द्वारा उपासनीय है, (अनु) तद-

English

Hearken to me, lord of the female borer, lord of the female grub! ye rough-toothed vermin! Whate’er ye be, dwelling in woods, and piercing, we crush and mangle all those piercing insects.

अध्याय ६

श्लोक 45.2

अ॒व॒शसा॑ निः॒शसा॒ यत् प॑रा॒शसो॑पारि॒म जाग्र॑तो॒ यत् स्व॒पन्तः॑ ।अ॒ग्निर्वि॑श्वा॒न्यप॑ दुष्कृ॒तान्यजु॑ष्टान्या॒रे अ॒स्मद् द॑धातु

avaśasā niḥśasā yat parāśasopārima jāgrato yat svapantaḥ | agnirviśvānyapa duṣkṛtānyajuṣṭānyāre asmad dadhātu

हिन्दी अर्थ

११।२।१६; ऋभवः १० )। वसु काल से परमेश्वर मे ध्यानाभ्यास द्रा हे परमेश्वर ! (वृषा) सखो की वर्षा करने वाला (गसि) तुः है, जथवेवेद-भाष्य कां० ६। अनु० ५। सू० ४६ तक अर्याति शद्रकलि ॐ बध्रे में पठनीय चाभ की समाप्ति तक, कल्याग मा से (संवह) सम्यक् प्रकार सेने की समाप्ति मे आहृतियां विष्टुप् छन्द के

English

A prayer for purification and forgiveness of sins 81

अध्याय ६

श्लोक 45.3

यदि॑न्द्र ब्रह्मणस्प॒तेऽपि॒ मृषा॒ चरा॑मसि ।प्रचे॑ता न आङ्गिर॒सो दु॑रि॒तात् पा॒त्वंह॑सः

yadindra brahmaṇaspate'pi mṛṣā carāmasi | pracetā na āṅgiraso duritāt pātvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

की (3 र को (मत्यः) मरणधर्मा" मनुष्य ( नहि ) नही . , (जानंश) प्राप्त होता । (कपिः) उदक का पान करने वाले आदित्य सदृशं देता है, (दव) जैषे (गौः) गौ (जरा) जरायुज वत्स को (बभस्ति) अग्नि को ही "कपि" कहा है । कपिः = कम्, उदकम्, पिबतीति (सायण) मन्व म "जरायुः" पद जरायुज "वत्स" अभिप्रेत है । यथा “सृण्येव नभर (ऋ० १०।१०६।६) मन्त्र मे जायु है ““जरावरुजं शरीरम्" (निरुक्त १३ । क० ६। अनु० ५। सू° ४६ अथवेवेद-भाष्य ७

English

Cleansed by the filter of the Wind comes Soma past all our enemies, meet friend of Indra. May the maternal Waters make us ready: cleanse us with fat- ness they who cleanse with fatness!

अध्याय ६

श्लोक 46.1

दुःष्वप्ननाशनम्।१-३ अङ्गिराः प्रचेता, यमश्च।दुःष्वप्ननाशनम्।१ विष्टारपङ्क्तिः, २ त्र्यवसाना शक्वरीगर्भा पञ्चपदा जगती, ३ अनुष्टुप्।यो न जी॒वोऽसि॒ न मृ॒तो दे॒वाना॑ममृतग॒र्भोऽसि स्वप्न ।व॒रु॒णा॒नी ते॑ मा॒ता य॒मः पि॒तार॑रु॒र्नामा॑सि

duḥṣvapnanāśanam| 1-3 aṅgirāḥ pracetā, yamaśca| duḥṣvapnanāśanam|1 viṣṭārapaṅktiḥ, 2 tryavasānā śakvarīgarbhā pañcapadā jagatī, 3 anuṣṭup| yo na jīvo'si na mṛto devānāmamṛtagarbho'si svapna | varuṇānī te mātā yamaḥ pitārarurnāmāsi

हिन्दी अर्थ

मेष ईववसंच॒ वि चोवच्यसे यदुतरदराडुष॑रञ्च खाद॑तः। हे परमेश्वर ! (मेषः) की (इव) तरहत्ु (व) निश्चय से (सम्, मच्यसे) सगत होतादहै, (वि च बच्यसे) ओर संगति से विरहित होतादहै, (च) मौर तु आदित्यरूप मे अर्थात् तुम दोनों (खादतः) खाते हो । को उपमित करता हआ परमेश्वर (हरितेभिः मासभिः) हरे वृक्षो रूपी मृखों इरा (अंशून्) रश्मयो को (अर्दयन्) हसित करता हुमा, चबाता हआ (बभस्ति) खाता है । मेष द्वारा मेषराश्षि बरभिप्रेत है । मेषराशि का संगम सूयं के साथ

English

The Goddesses bear off each blot and tarnish: I come forth from the waters cleansed and stainless.

अध्याय ६

श्लोक 46.2

वि॒द्म ते॑ स्वप्न ज॒नित्रं॑ देवजामी॒नां पु॒त्रोऽसि य॒मस्य॒ कर॑णः ।अन्त॑कोऽसि मृ॒त्युर॑सि।तं त्वा॑ स्वप्न॒ तथा॒ सं वि॑द्म॒ स नः॑ स्वप्न दु॒ष्वप्न्या॑त् पाहि

vidma te svapna janitraṃ devajāmīnāṃ putro'si yamasya karaṇaḥ | antako'si mṛtyurasi| taṃ tvā svapna tathā saṃ vidma sa naḥ svapna duṣvapnyāt pāhi

हिन्दी अर्थ

का संगम सूयं से रहित हो जाता है, भौर सूर्यं व॒षराशिमे चलाजातादहै। घाता यथापूवेमकल्पयत्"” (क्र ० १०।१९०।३) । इस प्रकार उगिमिषित जगत् को मेष कहा है। तदनन्तर प्रलय काल मे परमेश्वर का संगम मृष्ट जगत् से छट जातादहै, भौर “मेष निमिषित जगत्” परमेश्वर कै संगम से रहित हो जाता है । ८८ अथवेवेद-भाष्य का० ६1 अनु० ५। भू ५९ उपर" अर्थात् मेघ (उपरः मेवनाम; निधं ११०) भौर मादित्य, जल- । रूपी अन्न खाते ह । आ्त्य है परमेश्वर का शरीर. जिस में परमेश्वर . बसा हुआ, जपे शरोर में 1 षुसलिये आदित्य द्वारा य आदित्यस्थ परमेश्वर का खाना जसे शरीर द्वाराखानादहैश ४ जीवात्मा का खाना । मतः कहा है “योऽसा वादित्ये पुरुषः ८ खाता ही है, गौर आदित्य भी निज रर्मियों द्वारा जल कापान क रहता है, यह् है आदित्य का जलाच्च का खाना।

English

O Varuna, whatever the offence may be, the sin which men commit against the heavenly folk, When, through our want of thought we violate thy laws, punish us not, O God, for that iniquity.

अध्याय ६

श्लोक 46.3

यथा॑ क॒लां यथा॑ श॒फं यथ॒र्णं सं॒नय॑न्ति ।ए॒वा दु॒ष्वप्न्यं॒ सर्वं॑ द्विष॒ते सं न॑यामसि

yathā kalāṃ yathā śaphaṃ yatharṇaṃ saṃnayanti | evā duṣvapnyaṃ sarvaṃ dviṣate saṃ nayāmasi

हिन्दी अर्थ

परमेश्वर-पुरुष के काल्पनिक (यजु० ३१।१ २ कल्पयन् ) ' ५ दयौः शिरः प्रकट हू दहै । यौः कोब्रह्याण्डका शिरः कहा है । १ परमेश्वर का आस्य दहै, मूख है । हरितेभिः मे बहुवचन ठै, अतः आसाभः लाकर अर्यात् निज स्वरूप मे विलीन कर हरा + रै । वृक्ष, ६ स्पत्तियों मे हरापन सूये को रष्पियों के कारण होता है । यथा अ व षः नाम देवता ऋतेनास्ते परीवृता । तस्या रूपेणेमे वक्षा हरिता हरितखनः (अथव ० १२।८।३१), अर्थात् “अविः” सूर्य॑परिवार का र्षक भुय, च अर्थात जल के आवरण द्वारा धिरा भा है, उसे सूप ॥ दारा ये वृक्ष हः को रश्मियों को खाता है ' ऋतम् उदकनाम् (निध० १।१ २) , १. है जीवो ! जगदीष्वर ने ड जनो जगदीप्वर ने (अश्वतये)कल वदरा या नशी रस सनित्य संसा

English

A charm against noxious reptiles and insects Slaying the Rākshasas, the Sun mounts upward in the front of heaven,

अध्याय ६

श्लोक 47.1

दीर्घायुः प्राप्तिः।१-३ अङ्गिराः प्रचेताः।१ अग्निः, २ विश्वे देवाः, ३ सुधन्वा।त्रिष्टुप्।अ॒ग्निः प्रा॑तःसव॒ने पा॑त्व॒स्मान् वै॑श्वान॒रो वि॑श्व॒कृद् वि॒श्वशं॑भूः ।स नः॑ पाव॒को द्रवि॑णे दधा॒त्वायु॑ष्मन्तः सहभ॑क्षाः स्याम

dīrghāyuḥ prāptiḥ| 1-3 aṅgirāḥ pracetāḥ| 1 agniḥ, 2 viśve devāḥ, 3 sudhanvā| triṣṭup| agniḥ prātaḥsavane pātvasmān vaiśvānaro viśvakṛd viśvaśaṃbhūḥ | sa naḥ pāvako draviṇe dadhātvāyuṣmantaḥ sahabhakṣāḥ syāma

हिन्दी अर्थ

शरीर मे (वः) तुम्हारी (वसतिः) निवास (हृत) ) किया है (दयानन्द) ।, का०६। अनु° ५। सू० ४६ अथवेवेद-माष्य ८९ है 1 भक्षण में भक्ष्यको मुखम डाल कर उसकै स्वरूप को हिसा को जातो अशुभो, सूयं को रश्मियों को मानो प्रयम चवाता, ओर उन के स्वरूपो को शक्ति में विकृत कर, हरे वृक्षों के शरीरो मे विलोन करलेतादहै। हरे गतिशोल हुई (आषरे) अन्तरिक्न मे (अनतिधुः) नाच करती हैँ। सूर्य रष्मियां (यत् यदा/ जब (नियन्ति) नोचे भरमि तफ़ नियम से पहुंवती

English

Āditya, from the mountains, seen of all, destroying things unseen. The kine had settled in their pen, wild animals sought their lairs The wavelets of the brooks had passed away, and were beheld no more.

अध्याय ६

श्लोक 47.2

विश्वे॑ दे॒वा म॒रुत॒ इन्द्रो॑ अ॒स्मान॒स्मिन् द्वि॒तीये॒ सव॑ने॒ न ज॑ह्युः ।आयु॑ष्मन्तः प्रि॒यमे॑षां॒ वद॑न्तो व॒यं दे॒वानां॑ सुम॒तौ स्या॑म

viśve devā maruta indro asmānasmin dvitīye savane na jahyuḥ | āyuṣmantaḥ priyameṣāṃ vadanto vayaṃ devānāṃ sumatau syāma

हिन्दी अर्थ

सरथं मे आश्रय पाई हई रष्मियां (पुरु रेनः) बहुत शक्ति को, या बहुत जल को (दधिरे) धारण करती है । होती है, ये ८ भिनिटों मे लगभग १० करोड मीलकेवेग से गति करती अष्टा २।४।८०) । आखर है अन्तरिक्ष, आखर सव ओर खृदाहुभासा ६० अथवेवेद-माध्य कां ६। अनु० ५।सु०५० . का० ६। अनु०५। सू० ५० अथववेद-भाष्य ९१ तद॑ है पत॑ङ्ग है जभ्य हा उपक्वस ।

English

I have brought Kanva’s famous Plant, life-giving, and itself inspired, The medicine that healeth all: may it suppress my hidden foes.

अध्याय ६

श्लोक 47.3

इ॒दं तृ॒तीयं॒ सव॑नं कवी॒नामृ॒तेन॒ ये च॑म॒समैर॑यन्त ।ते सौ॑धन्व॒नाः स्वऽरानशा॒नाः स्विऽष्टिं नो अ॒भि वस्यो॑ नयन्तु

idaṃ tṛtīyaṃ savanaṃ kavīnāmṛtena ye camasamairayanta | te saudhanvanāḥ sva'rānaśānāḥ svi'ṣṭiṃ no abhi vasyo nayantu

हिन्दी अर्थ

हिसायाम् + डः। अनतिषुः= जैसे वेगवती नदी की, तथा समुद्रकीतरङ्ख ¦ मे तर्त हई नाचतो सीह! ये रश्मियां मेघका निर्माण करती रहै, समद्रादिसे जल का आकषं करके 1 ये रप्मियां जव स्थूलपदाथं के साय टकराती है तव प्रकाशमयी हो जाती हैँ । रेतः उदकनाम (निघं० १।१२), तथा वीं शक्ति, वीयंवान् पुरुष ही शक्ति वाला होता है । उपरः मेघनाम (१-३) । अथर्वा (अभयकामः) । माश्विनम् । १ विराड् जगती; (अश्विनौ) है दो अश्वियो ! (तदम्) धान्य की हिसा करने वाले,

English

A prayer for recovery and preservation of health and security May Heaven and Earth, wise pair, may lofty Sukra grant me this thing by reason of the guerdon.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Atharva Veda — Chapter 6
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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