Atharva Veda· Atharvaveda Saṁhitā
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अध्याय 20 / 20

Kanda 20

काण्ड 20

975 श्लोकभाग 5/6 · श्लोक 125.1–138.3WhatsApp

पूर्ण अध्याय पाठ194 श्लोक

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अध्याय २०

श्लोक 125.1

अपे॑न्द्र॒ प्रा॑चो मघवन्न॒मित्रा॒नपापा॑चो अभिभूते नुदस्व ।अपोदी॑चो॒ अप॑ शूराध॒राच॑ उ॒रौ यथा॒ तव॒ शर्म॒न् मदे॑म

apendra prāco maghavannamitrānapāpāco abhibhūte nudasva | apodīco apa śūrādharāca urau yathā tava śarman madema

हिन्दी अर्थ

- साथ उपासनायज्ञ मे मिलकर उपासना की मस्ती मेँ ( तुविवाजाः ) बहुत कार २०1 सु° १२३ भ्रथर्ववेद-भाष्य २६१ इस कायं मं भ्राप भ्रपने-सदृश ही हँ । (न) जैसे बठरई, ( .चक्रथोः ).रथ के करनेवाले बना. देता है, वैसे ही भ्राप स्तोताओों में ज्ञान की धुरी डाल-

English

Agni is kindled as a Bull, like a horse bearer of the Gods; Men with oblations worship him.

अध्याय २०

श्लोक 125.2

कु॒विद॒ङ्ग यव॑मन्तो॒ यवं॑ चि॒द् यथा॒ दान्त्य॑नुपू॒र्वं वि॒यूय॑ ।इ॒हेहै॑षां कृणुहि॒ भोज॑नानि॒ ये ब॒र्हिषो॒ नमो॑वृक्तिं॒ न ज॒ग्मुः

kuvidaṅga yavamanto yavaṃ cid yathā dāntyanupūrvaṃ viyūya | ihehaiṣāṃ kṛṇuhi bhojanāni ye barhiṣo namovṛktiṃ na jagmuḥ

हिन्दी अर्थ

निदिचत है । भक्षम् =) 2418; ।९०५५०५०० (श्रापटे)। ऋणोः=ऋण् ७२8. आ यह् दुब; शतक्रतवा काभ जरितृणाम् । (शतक्रतो)हे सको भ्रदमूत कमोँवाले प्रभो ! भाप ही ( जरिवृणाम्

English

Thee will we kindle as a Bull, we who are bulls ourselves, O Bull, Thee, Agni, shining mightily.

अध्याय २०

श्लोक 125.3

न॒हि स्थूर्यृ॑तु॒था या॒तमस्ति॒ नोत श्रवो॑ विविदे संग॒मेषु॑ ।ग॒व्यन्त॒ इन्द्रं॑ स॒ख्याय॒ विप्रा॑ अश्वा॒यन्तो॒ वृष॑णं वा॒जय॑न्तः

nahi sthūryṛtuthā yātamasti nota śravo vivide saṃgameṣu | gavyanta indraṃ sakhyāya viprā aśvāyanto vṛṣaṇaṃ vājayantaḥ

हिन्दी अर्थ

स्तोतागों की (दुवः) सेवा को, भरौर (यद् कामम्) जोउनकां =. : कि बद्र (शचीभिः) भपनी कारीगरी के कमो दारा ( अक्षम्) रथकेदो चकर मे धुरी डालकर उन्दँ (भरा ऋणोः) परस्पर सम्बन्ध कर देता है ।. डवः दुवस्यति परिचरणकर्मां (निव० ३।५)। हाचौभिः--क्मनाम

English

Solicit with your hymns, for aid, Agni the God with piercing flame, For riches famous Agni, Purmilha ‘and ye men, Agni to light our dwelling well.

अध्याय २०

श्लोक 125.4

यु॒वं सु॒राम॑मश्विना॒ नमु॑चावासु॒रे सचा॑ ।वि॒पि॒पा॒ना शु॑भस्पती॒ इन्द्रं॒ कर्म॑स्वावतम्

yuvaṃ surāmamaśvinā namucāvāsure sacā | vipipānā śubhaspatī indraṃ karmasvāvatam

हिन्दी अर्थ

सहस्थान चुलोक से सूयं, ( हरितः ) भरोषधि-वनस्पतियों को हरा-भरा करने मानो भ्रपना भ्रावरण (तनुते) फलादेतीहै। है । परमेदवर जब संसार से भ्रपनी शक्तियां हर लेता है, तब प्रलय-रात्री समग्र-जगत् पर भ्रावरण डाल देती है ।

English

Agni, come hither with thy fires: we choose thee as our Hotai- priest. Let the extended ladle full of oil balm thee, best priest, to sit on sacred grass.

अध्याय २०

श्लोक 125.5

पु॒त्रमि॑व पि॒तरा॑व॒श्विनो॒भेन्द्रा॒वथुः॒ काव्यै॑र्दं॒सना॑भिः ।यत् सु॒रामं॒ व्यपि॑बः॒ शची॑भिः॒ सर॑स्वती त्वा मघवन्नभिष्णक्

putramiva pitarāvaśvinobhendrāvathuḥ kāvyairdaṃsanābhiḥ | yat surāmaṃ vyapibaḥ śacībhiḥ sarasvatī tvā maghavannabhiṣṇak

हिन्दी अर्थ

(सूर्यः) सूयं ( धोः ) चुलोक की ( उपस्थे.) गोद में स्थित हृभ्रा, (रूपम्) अपने रूप को (कृणुते) प्रकट करता है । यही सूयं (मित्रस्य) दिन करती ह, अपनी उपस्थिति तथा भ्नुपस्थिति द्वारा । उपस्थिति द्वारा दिन को परिपुष्ट (सम्¬+-भू) करती है, भौरये ही रदिमयां - जब संहृत (सम् +-हू) हो जाती है, तो रत्नि को प्रकट करती है । १-३ वामदेवः; ४-६ भुवनः । इन्द्रः । १-२ गायत्री; . ३ पादनिचुत्

English

For unto thee, O Angiras, O Son of Strength, move ladles in the sacrifice, To Agni, Child of Force, whose locks drop oil, we seek, fore- most in sacrificial rites.

अध्याय २०

श्लोक 125.6

इन्द्रः॑ सु॒त्रामा॒ स्ववाँ॒ अवो॑भिः सुमृडी॒को भ॑वतु वि॒श्ववे॑दाः ।बाध॑तां॒ द्वेषो॒ अभ॑यं नः कृणोतु सु॒वीर्य॑स्य॒ पत॑यः स्याम

indraḥ sutrāmā svavā~ avobhiḥ sumṛḍīko bhavatu viśvavedāḥ | bādhatāṃ dveṣo abhayaṃ naḥ kṛṇotu suvīryasya patayaḥ syāma

हिन्दी अर्थ

७९९. कया नत्र आ हैबदती . सदाः सल्ला । . वृषः) सदा बढ़ानेवाला (सखा) सखा है, वह ( कया ) किंस रक्षाविधिसे (नः भा भृवत्) हमारे सब भ्रोर विद्यमान है ? 1 उत्तर--(कया) सुखमयी.

English

Men skilled in holy hymns, bright with the hues of fire, have sung them with their lauds to thee. He with his might enhanced by Rishis thousand-fold, hath like an ocean spread himself.

अध्याय २०

श्लोक 125.7

स सु॒त्रामा॒ स्ववाँ॒ इन्द्रो॑ अ॒स्मदा॒राच्चि॒द् द्वेषः॑ सनु॒तर्यु॑योतु ।तस्य॑ व॒यं सु॑म॒तौ य॒ज्ञिय॒स्यापि॑ भ॒द्रे सौ॑मन॒से स्या॑म

sa sutrāmā svavā~ indro asmadārāccid dveṣaḥ sanutaryuyotu | tasya vayaṃ sumatau yajñiyasyāpi bhadre saumanase syāma

हिन्दी अर्थ

. कऽ २०) सू° १२४ श्रथर्ववेद-भाष्य २६३ ७३२. इमा चु कं यवना सीषधमिन्दरं विध च देवाः । हम ( इमा भुवना ) इन शारीरिक भवनों को, पैरो, जक्घागों (च) भौर (विदवे देवाः) सब दिव्धगुण तथा उच्चकोटि के दिव्य उपासकः,

English

His majesty is praised as true at solemn rites, his power where holy singers rule May Indra, who in every fight must be invoked, be near to us.

अध्याय २०

श्लोक 126.1

वि हि सोतो॒रसृ॑क्षत॒ नेन्द्रं॑ दे॒वम॑मंसत ।यत्राम॑दद् वृ॒षाक॑पिर॒र्यः पु॒ष्टेषु॒ मत्स॑खा॒ विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः

vi hi sotorasṛkṣata nendraṃ devamamaṃsata | yatrāmadad vṛṣākapiraryaḥ puṣṭeṣu matsakhā viśvasmādindra uttaraḥ

हिन्दी अर्थ

हमारी इस साधना को ( कम् ) सुखपूवंक सिद्ध करे । ( नः यज्ञं च ) ब्रह्मचारी उपासकों की सहायता द्वारा, (चीक्लृपाति) समथं करे । इत्यं देवा असुरान् यदाय॑ देका देबतवम॑भि रमाणाः ॥५॥

English

May the most mighty Vritra-slayer, meet for praise, come to libations and to hymns. Thou art the best of all in sending bounteous gifts, true art thou,. lordly in thine act. We claim alliance with the very Glorious One, yea, with the- mighty Son of Strength.

अध्याय २०

श्लोक 126.2

परा॒ ही॑न्द्र॒ धाव॑सि वृ॒षाक॑पे॒रति॒ व्यथिः॑ ।नो अह॒ प्र वि॑न्दस्य॒न्यत्र॒ सोम॑पीतये॒ विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः

parā hīndra dhāvasi vṛṣākaperati vyathiḥ | no aha pra vindasyanyatra somapītaye viśvasmādindra uttaraḥ

हिन्दी अर्थ

(इन्द्र) है परमेदवर ! राप अमी तकं (वृषाकपेः) वृषाकपि-सखा से (परा हि धावसि) परे ही रहते है, ( भ्रति व्यथिः ) इस से वृषाकपि अ्रति- भिन्न किसी को भ्र।प (सोमपीतये) भक्तिरस के पान के लिये, (अह) निद्चय दवर सर्वोत्कृष्ट है । ७४४. किमयं तवां वृषाकपिश्चकार हरितो मृगः । हे परमेदवर ! (अयं वृषाकपिः) इस वृषाकपि ने (त्वाम् ) आपके

English

Proudly we put our trust in thee in battles, when we behold great wealth the prize of combat. 304

अध्याय २०

श्लोक 126.3

किम॒यं त्वां वृ॒षाक॑पिश्च॒कार॒ हरि॑तो मृ॒गः ।यस्मा॑ इर॒स्यसीदु॒ न्व॑१र्यो वा॑ पुष्टि॒मद् वसु॒ विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः

kimayaṃ tvāṃ vṛṣākapiścakāra harito mṛgaḥ | yasmā irasyasīdu nva1ryo vā puṣṭimad vasu viśvasmādindra uttaraḥ

हिन्दी अर्थ

काल तक यह् सूर्योदय के साथ-साथ उदित होता रहता है । यह काल ३ जुलाई से ११ भ्रगस्त तक का होता है। यह काल वर्षाकाल है। , इस काल मे बादलों के कारण सूर्यं प्रायः छिपा रहता है । मानो “इवा” ने इसका कान काटाहै, भौर सूयं पीड़ाके.कारण ददन नहीं दे रहा। संस्कृत में 51116 ३०० -भथवेवेद-माष्य का० २०1 सू० १२६

English

Thou hath Brihaddiva the great Atharvan, spoken to Indra as himself in person. The Mātarisvarīs, the spotless sisters, with power exalt him and impel him onward. Bright, Presence of the Gods, the luminous herald, Siirya hath mounted the celestial regions.

अध्याय २०

श्लोक 126.4

यमि॒मं त्वं वृ॒षाक॑पिं प्रि॒यमि॑न्द्राभि॒रक्ष॑सि ।श्वा न्व॑स्य जम्भिष॒दपि॒ कर्णे॑ वराह॒युर्विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः

yamimaṃ tvaṃ vṛṣākapiṃ priyamindrābhirakṣasi | śvā nvasya jambhiṣadapi karṇe varāhayurviśvasmādindra uttaraḥ

हिन्दी अर्थ

तारे को “लुम्धक'" कहते है । लुञ्धक का अर्थं है "लोमी" जो कि कुत्ते की लोभवृत्ति को दर्शाता है । इसी मांसलोम के कारण “खवा ने “वृषाकपि” . सुविचारित मनोभावनार्रौ को (गदूदुषत्) विदेषतया दूषित कर दिया है । इसलिये (अस्य ) इस कपि भ्र्थात् वृषाकपि के (शिरः) शिर को, (नु) नहीं ई । (विदवरमात्०) पू्व॑वत् 1

English

Day’s maker, he hath shone away the darkness, and radiant passed o’er places hard to traverse.

अध्याय २०

श्लोक 126.5

प्रि॒या त॒ष्टानि॑ मे क॒पिर्व्य॑क्ता॒ व्यऽदूदुषत्।शिरो॒ न्वऽस्य राविषं॒ न सु॒गं दु॒ष्कृते॑ भुवं॒ विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः

priyā taṣṭāni me kapirvyaktā vya'dūduṣat| śiro nva'sya rāviṣaṃ na sugaṃ duṣkṛte bhuvaṃ viśvasmādindra uttaraḥ

हिन्दी अर्थ

है। गौर कहाहै किं इन्द्राणी ने जो सुविचारित निर्देश वृषाकपि को वि थे, उम्हँ वृषाकपि ने दूषित कर विया है । इसलिये वृषाकपि के विचार दूषित होने योग्य नहीं हं वृषाकपि को केवल कपि कह कर कपि अर्थात् बन्दर की सी भरादतवाला दर्शाया है। इस द्वारा कपि की कामुकता का निर्दे कर वृषाकपि अर्थात् जीवात्मा की. कामुकता को सूचित किया गया है 1 जीवात्मा की यहं कामुकता उसके विचारों को दूषित करके उसे दुष्कर्म इवेवंकः कपिरिवैकः कुमारः स्वेकेशकः।

English

The brilliant Presence of the Gods hath risen, the eye of Mitra, Varuna, and Agni. The soul of all that moveth not or moveth, Sūrya hath filled the earth and air and heaven.

अध्याय २०

श्लोक 126.6

न मत् स्त्री सु॑भ॒सत्त॑रा॒ न सु॒याशु॑तरा भुवत्।न मत् प्रति॑च्यवीयसी॒ न सक्थ्युद्य॑मीयसी॒ विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः

na mat strī subhasattarā na suyāśutarā bhuvat| na mat praticyavīyasī na sakthyudyamīyasī viśvasmādindra uttaraḥ

हिन्दी अर्थ

“कपिरिषेकः कुमारः" दारा कपि के सदुश कुत्सित “मार भर्थात् कामवासना का निदेश दियाहै। इसी प्रकार “शरुर्नां कपिरिव दूषणः” करनेवाला, कपि के समान कामी । ७४६ के पूवं के मर्््रो मे वृषाकपि का सात्विक भावनावाला अथं दर्लादिया गयादहै) हारा जीवात्मा -को दोः शक्तियां प्रादुभरूत होतो है (१) जीवात्मा का कहा गया है । योगद मे कहा है कि--ोम् के जप तथा ईश-चिन्तनं दारा , जीवात्मा को “प्रत्यक्-चेतना” का भरधिगम होतादहै, तथा परभेदवर

English

Even as a lover followeth a maiden, so doth the Sun the Dawn, refulgent Goddess: Where pious men extend their generations before the Gracious

अध्याय २०

श्लोक 126.7

उ॒वे अ॑म्ब सुलाभिके॒ यथे॑वा॒ङ्गं भ॑वि॒ष्यति॑ ।भ॒सन्मे॑ अम्ब॒ सक्थि॑ मे॒ शिरो॑ मे॒ वीऽव हृष्यति॒ विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः

uve amba sulābhike yathevāṅgaṃ bhaviṣyati | bhasanme amba sakthi me śiro me vī'va hṛṣyati viśvasmādindra uttaraḥ

हिन्दी अर्थ

यक्ष को जानने के लिये । उस समय “उमा” स्त्रीके रूपम भआ्कादामें मिलता है, जब कि जीवात्मा लोभ, भ्रचुचिता, काम-वासना से रदित ३०२ .' छ अयवेवेद-माष्य का०२०।सू. १२६

English

One for happy fortune. For, gracious Satakratu, thou hast ever been a mother and a sire to us, So now for bliss we pray to thee.

अध्याय २०

श्लोक 126.8

किं सु॑बाहो स्वङ्गुरे॒ पृथु॑ष्टो॒ पृथु॑जाघने ।किं शू॑रपत्नि न॒स्त्वम॒भ्यऽमीषि वृ॒षाक॑पिं॒ विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः

kiṃ subāho svaṅgure pṛthuṣṭo pṛthujāghane | kiṃ śūrapatni nastvamabhya'mīṣi vṛṣākapiṃ viśvasmādindra uttaraḥ

हिन्दी अर्थ

उत्तम शोभावाली (न) नहीं हैः (न) भौर न (सुयाशुतरा मवत्) कार्यो को उत्तम प्रकार से तथा शीघ्रता से समाप्त करनेवाली है । (न) ओौरन 'उमा' को स्व्री कहा गया है, रौर केनोपनिषद् मे यह भी कहा है कि वह बहुशोममानां तथा शुभ्रवणेवाली है । उमा" के प्रसङ्खं में स्तरीजाति मजो सदुगुण होने चांहिे,उन का संक्षिप्त वणंन ७४७ वें मन्त्र से किया गया है । (उवे भ्रम्ब ) है माता ! (सुलाभिके) है सुगमतासे लाभ पहुचाने- . वाली माता , (अङ्ग) है प्यारी माता! (यथा इव) जैसा श्राप चाहंगी वेसा ही (भविष्यति) होगा, अर्थात् वैसाहीर्मैकरूगी) है माता! प कन्या का. माता.के प्रति कंसा व्यवहार होना चाहिए.--इस का उत्तम वणन मन्त्र ते है ४ त

English

To thee, Strong, Much-invoked who showest forth thy strength, O Satakratu, do I speak:

अध्याय २०

श्लोक 126.9

अ॒वीरा॑मिव॒ माम॒यं श॒रारु॑र॒भि म॑न्यते ।उ॒ताहम॑स्मि वी॒रिणीन्द्र॑पत्नी म॒रुत्स॑खा॒ विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः

avīrāmiva māmayaṃ śarārurabhi manyate | utāhamasmi vīriṇīndrapatnī marutsakhā viśvasmādindra uttaraḥ

हिन्दी अर्थ

का० २०। सु०. १२६ भरथर्ववेद-माष्य , ३०३ वाली (पृथुष्टो) है महाकीत्तिवाली ! (पृथुजाधने) है बड़ी कटिवाली! क्यों (नः) हमारे ( वृषाकपिम् ) भक्तिरसवाले, मरौर पापों को कम्पा देने-

English

So grant thou us heroic might. The juice of Soma thus diffused, sweet to the taste, the bright Cows drink

अध्याय २०

श्लोक 126.10

सं॒हो॒त्रं स्म॑ पु॒रा नारी॒ सम॑नं॒ वाव॑ गच्छति ।वे॒धा ऋ॒तस्य॑ वी॒रिणीन्द्र॑पत्नी महीयते॒ विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः

saṃhotraṃ sma purā nārī samanaṃ vāva gacchati | vedhā ṛtasya vīriṇīndrapatnī mahīyate viśvasmādindra uttaraḥ

हिन्दी अर्थ

२६९४ . म्रथवेवेद-भाष्य का० २०1 सू° १२५ उपासना-यज्ञों के ऋत्विजो के द्वारा, ( सगणः ) इन कासंगी होकर शरीरो का (अविता भूतु) रक्षक हो--( यद् ) जब किं ( देवाः दिव्यः हृए, (सुरान् हत्वाय) भ्रासुरी-विचारों रौर भासुरी-कर्मों काः हनन करके जाते है । मदिः मख्तः ऋत्विङ् नाम (निघ० ३।१८) ।

English

Bring to your aid the Eternal One, who shoots and none may shoot at him, Inciter, swift, victorious, best of charioteers, Tugrya’s unvan- quished strengthener;

अध्याय २०

श्लोक 126.11

इ॒न्द्रा॒णीमा॒सु नारि॑षु सु॒भगा॑म॒हम॑श्रवम्।न॒ह्यऽस्या अप॒रं च॒न ज॒रसा॒ मर॑ते॒ पति॒र्विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः

indrāṇīmāsu nāriṣu subhagāmahamaśravam| nahya'syā aparaṃ cana jarasā marate patirviśvasmādindra uttaraḥ

हिन्दी अर्थ

अया वाजं देवितं सनेम मदेम शतर्दिमाः सुवीर; ॥६॥ (सनेम ) हम पाते है, . रौर (सुवी राः) रेष्ठसन्तार्नोवाले हम (चतं हिमाः) सौ केलिये । (अभिभूते) है पराभव करनेवाले ! (अपाचः) परिम दिशा के

English

That lofty energy of thine, thy strength and thine intelligence, Thy thunderbolt for which we long, our wish makes keen. O Indra, heaven and earth augment thy manly power and thy renown,

अध्याय २०

श्लोक 126.12

नाहमि॑न्द्राणि रारण॒ सख्यु॑र्वृ॒षाक॑पेरृ॒ते।यस्ये॒दमप्यं॑ ह॒विः प्रि॒यं दे॒वेषु॒ गच्छ॑ति॒ विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः

nāhamindrāṇi rāraṇa sakhyurvṛṣākaperṛte| yasyedamapyaṃ haviḥ priyaṃ deveṣu gacchati viśvasmādindra uttaraḥ

हिन्दी अर्थ

(अप) परे धकेलिये। (शूर) है पराक्रमी ! ( अघराचः ). दक्षिण दिदा के अमित्रं को (भ्रप) परे धकेलिये, ( यथा ) जिस प्रकार कि (.तवं ).भापके का ० २० ।सू० १ २५ अथर्ववेद-माष्य २९५ में (यवं चित्) जौ रादि को (दान्ति) काट लेते है, (थे) ओर जो. (बर्हिषः) एेसे लोगों के (भोजनानि) जनों की व्यवस्था भाप ( इह्-इह ) राष्ट मे

English

The waters and the mountains stir and urge thee on. Vishnu, the lofty Ruling Power, Varuna, Mitra sing thy praise:

अध्याय २०

श्लोक 126.13

वृषा॑कपायि॒ रेव॑ति॒ सुपु॑त्र॒ आदु॒ सुस्नु॑षे ।घस॑च॒ इन्द्र॑ उ॒क्षणः॑ प्रि॒यं का॑चित्क॒रं ह॒विर्विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः

vṛṣākapāyi revati suputra ādu susnuṣe | ghasaca indra ukṣaṇaḥ priyaṃ kācitkaraṃ havirviśvasmādindra uttaraḥ

हिन्दी अर्थ

( स्थूरि =स्थुरी ) बैलजुता हल (ऋतुथा) ऋतु के भनुसार, यदि खेतों मे (नहि) नहीं (यातम् अस्ति) चलता, तो भन्न के भ्रमाव से (संगमेषु) प्रजा मे परस्पर सखिभाव को बनाए रखने के लिये, ( वृषणम् ) जलो की (निष० २।९)। विना खेती के न गौए" मिल सकती है, न भ्रव । वृषणम् =

English

In thee the Maruts’ company hath great delight. Before his hot displeasure all the peoples, all the men bow down, As rivers bend them to the sea.

अध्याय २०

श्लोक 126.14

उ॒क्ष्णो हि मे॒ पञ्च॑दश सा॒कं पच॑न्ति विंश॒तिम्।उ॒ताहम॑द्मि॒ पीव॒ इदु॒भा कु॒क्षी पृ॑णन्ति मे॒ विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः

ukṣṇo hi me pañcadaśa sākaṃ pacanti viṃśatim| utāhamadmi pīva idubhā kukṣī pṛṇanti me viśvasmādindra uttaraḥ

हिन्दी अर्थ

( भासुरे ) मेघ-सम्बन्धी ( नमुचौ ) जल के मोचन न होने पर भान सेनापति (युवम्) तुम दोनों ( सचा ) परस्पर के सहयोग द्वारा . (सुरामम्) उत्तम तथा रमणीय राष्ट की पूणंतया रक्षा करो । तुम दोनों ( विपिपानौ विशेषतया राष्ट कौ रक्षा करनेवाले, तथा ( शुभस्पती )

English

This power of his shone brightly forth when Indra brought to- gether like A skin the worlds of earth and heaven.

अध्याय २०

श्लोक 126.15

वृ॒ष॒भो न ति॒ग्मशृ॑ङ्गो॒ऽन्तर्यू॒थेषु॒ रोरु॑वत्।म॒न्थस्त॑ इन्द्र॒ शं हृ॒दे यं ते॑ सु॒नोति॑ भाव॒युर्विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः

vṛṣabho na tigmaśṛṅgo'ntaryūtheṣu roruvat| manthasta indra śaṃ hṛde yaṃ te sunoti bhāvayurviśvasmādindra uttaraḥ

हिन्दी अर्थ

७६९. पुत्रमिव पितर वधिनोमनद्राबयुः कावयैद॑सनाभिः । (इव ) जसे (पितरौ) माता-पिता (पृत्) पुत्र की (भ्रवथुः) रशा (दंसनाभिः) राष्ट्िय-कमों दवारा (अवथः) भाप की रक्षा करते है । (यत्)

English

The fiercely-moving Vritra’s head he severed with his thunder- bolt, His hundred-knotted thunderbolt. In all the worlds That was the best and highest whence sprang the mighty God, of splendid

अध्याय २०

श्लोक 126.16

न सेशे॒ यस्य॒ रम्ब॑तेऽन्त॒रा स॒क्थ्या॒३ कपृ॑त्।सेदी॑शे॒ यस्य॒ रोम॒शं नि॑षे॒दुषो॑ वि॒जृम्भ॑ते॒ विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः

na seśe yasya rambate'ntarā sakthyā3 kapṛt| sedīśe yasya romaśaṃ niṣeduṣo vijṛmbhate viśvasmādindra uttaraḥ

हिन्दी अर्थ

तथा रमंणीय राष्ट को (व्यपिबः) जन. पिलाया है, भर्थात् जलपान.तथा कृषि आदि के लिये.जल की विशेष व्यवस्था कर दी है.॥ ( मघवन् ) हे की चिकित्सा करती रहे । = .. ७४०. हन्द सुत्रामा स्ववाँ अवोभिः सुमरडीको मवतु विश्ववेदा; । रकाशो द्वारा, (सुभृडीकः भवतु) उत्तम सुखदायक हो 1 वह (षः) हमारे दुदमनों का (बाधताम्) बाधक हो, (नः) गौरं हमें (अ्रमयं कृणोतु) निर्भय .: कर दे ।. हम (सुवीयंस्य) उत्तम वीरता के (पतयः स्याम ) स्वामी बरन ।

English

valour. As soon as born he overcomes his foemen, he in whom all who lend him aid are joyful.

अध्याय २०

श्लोक 126.17

न सेशे॒ यस्य॑ रोम॒शं नि॑षे॒दुषो॑ वि॒जृम्भ॑ते ।सेदी॑शे॒ यस्य॒ रम्ब॑तेऽन्त॒रा स॒क्थ्या॒३ कपृ॑द् विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः

na seśe yasya romaśaṃ niṣeduṣo vijṛmbhate | sedīśe yasya rambate'ntarā sakthyā3 kapṛd viśvasmādindra uttaraḥ

हिन्दी अर्थ

उस.सम्राट् की (सुमतौ) सुमति में (वयं स्याम) हम प्रजाजन. रहँ । (रपि) तथा उसकी (भद्रं सौमनसे) कल्याणकारी तथा सुखकारी प्रसन्नता मेँ रहे । ७४२. बि हि सोतोर््त नेन देवममंसत ।

English

Grown mighty in his strength, with ample vigour, he as a foe strikes fear into the Dāsa, Eager to win the breathing and the breathless. All sang thy praise at banquet and oblation. All concentrate on thee their mental vigour, what time these, twice or thrice, are thine

अध्याय २०

श्लोक 126.18

अ॒यमि॑न्द्र वृ॒षाक॑पिः॒ पर॑स्वन्तं ह॒तं वि॑दत्।अ॒सिं सू॒नां नवं॑ च॒रुमादेध॒स्यान॒ आचि॑तं॒ विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः

ayamindra vṛṣākapiḥ parasvantaṃ hataṃ vidat| asiṃ sūnāṃ navaṃ carumādedhasyāna ācitaṃ viśvasmādindra uttaraḥ

हिन्दी अर्थ

भ्रमंसत) नहीं मानते, वे (हि) निर्चय से, (सोतोः) भक्तिरस के 1 उपासना तथा समपण नहीं करते । वस्तुतः परमेशवर-देव वह द (यत्र) जिस वाला, तथा कामादि के मानो कम्पा देनेवाला, ( अर्यैः ) तथा इन्द्रियो रौर सोतोः = सु +- तोसुन्, तुमुन । मत्सखा = मु वृषाकपि का जीवात्मा का भ्रसली सखा परमेद्वर है, नकि प्रकृति। दसौ ०००२०

English

assistants. Blend what is sweeter than the sweet with sweetness: win quickly with our meath that meath

अध्याय २०

श्लोक 126.19

अ॒यमे॑मि वि॒चाक॑शद् विचि॒न्वन् दास॒मार्य॑म्।पिबा॑मि पाक॒सुत्व॑नो॒ऽभि धीर॑मचाकशं॒ विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः

ayamemi vicākaśad vicinvan dāsamāryam| pibāmi pākasutvano'bhi dhīramacākaśaṃ viśvasmādindra uttaraḥ

हिन्दी अर्थ

का असली सखा है जीवात्मा । दसी जीवात्मा के मोगों तथा मोक्ष के लिये परमेरवर जगद्रचना कर रहा है । योग (२।२.१) मे कहा है कि “तदर्थः ९५५२०) 1 सुपर्णा सुना सखाया०” ( अथववेद

English

in battle. Therefore in thee too, thou who winnest riches, at every banquet are the sages joyful With mighter power, bold God, extend thy firmness: let not malignant Yātudhānas harm thee.

अध्याय २०

श्लोक 126.20

धन्व॑ च॒ यत् कृ॒न्तत्रं॑ च॒ कति॑ स्वि॒त् ता वि योज॑ना ।नेदी॑यसो वृषाक॒पेऽस्त॒मेहि॑ गृ॒हाँ उप॒ विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः

dhanva ca yat kṛntatraṃ ca kati svit tā vi yojanā | nedīyaso vṛṣākape'stamehi gṛhā~ upa viśvasmādindra uttaraḥ

हिन्दी अर्थ

प्रतिः (कि चकार) क्या भ्रापराघ किया है ?, ( कि हरितः मृगः ) क्या यह विष्यो से हरा हृभ्रा जंगली पशु है ? ( यस्म इत् उ ) जिस वृषाकपि के का विजेता स्वामी है 1 (विदवस्मात्०) पूववत् । . मानो (रस्य कणे भि) इस के कान में भी (नु) निक्चय से ( श्वा ) कृत्ते

English

I with my words impel thy weapons onward, and sharpen with my prayer thy vital vigour. Worthy of praises many-shaped, most skilful, most energetic, Āptya of the Aptyas:

अध्याय २०

श्लोक 126.21

पुन॒रेहि॑ वृषाकपे सुवि॒ता क॑ल्पयावहै ।य ए॒ष स्व॑प्न॒नंश॒नोऽस्त॒मेषि॑ प॒था पुन॒र्विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः

punarehi vṛṣākape suvitā kalpayāvahai | ya eṣa svapnanaṃśano'stameṣi pathā punarviśvasmādindra uttaraḥ

हिन्दी अर्थ

का० २० सु० १२६ अथवंवेद-भाष्य .. , २९६ ने (जम्भिषत्) काट लिया है, ( वराहयुः ). जो कृत्ता कि वराह का पीछा करता है 1 (विषशवस्मात्°) पूरवंवत्। शवा का भं है - कृत्ता, भ्रौर वराह् का भरथं है-सु्रर । सुगर

English

He with his might destroys the seven Dānus, subduing many who were deemed his equals. Thou in that house which thy protection guardedh bestowest- wealth, the higher and the

अध्याय २०

श्लोक 126.22

यदुद॑ञ्चो वृषाकपे गृ॒हमि॒न्द्राज॑गन्तन ।क्व॑१स्य पु॑ल्व॒घो मृ॒गः कम॑गं जन॒योप॑नो॒ विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः

yadudañco vṛṣākape gṛhamindrājagantana | kva1sya pulvagho mṛgaḥ kamagaṃ janayopano viśvasmādindra uttaraḥ

हिन्दी अर्थ

भरनुगामी है सुखर का । इसलिये कृत्ते को . वराहयुः कहा है । वंराहयु का भ्रथ है--“वराहमनु याति,” जो कि वराह का अनुगामी है ।, वराहयुः बराह -।या-+करः; यथा मृगयुः (उणादि कोष १।३७) । कृत्ता लोभी होता है इसी लिये कृत्ते की भूख के लिये भ्र प्रेजी मेँ 6.11718 9091115 शब्द का प्रयोग होता है. ““कुत्ते ने काट लिया“ इस का यहां भरभिप्राय है- का। जो व्यक्ति श्रवण चीं करता, मानो कृत्ते ने उस का.कान काट लिया कामहै श्रवण करना। कान काटा गया, तो श्रवण नहीं हो सकता । मन्त्रम

English

lower. Thou stablishest the two much-wandering Mothers, and bringest many deeds to their completion.

अध्याय २०

श्लोक 126.23

पर्शु॑र्ह॒ नाम॑ मान॒वी सा॒कं स॑सूव विंश॒तिम्।भ॒द्रं भ॑ल॒ त्यस्या॑ अभू॒द् यस्या॑ उ॒दर॒माम॑य॒द् विश्व॑स्मा॒दिन्द्र॒ उत्त॑रः

parśurha nāma mānavī sākaṃ sasūva viṃśatim| bhadraṃ bhala tyasyā abhūd yasyā udaramāmayad viśvasmādindra uttaraḥ

हिन्दी अर्थ

प्रयोग मी हृभ्रा है । यथा--“श्वा इव" भरथर्वं° ४।३७।११; तथा “दवयातुम् (म्रथवं ° ८।४।३२)। जाधिदं विक दृष्टि मँ निरुक्त में "वृषाकपिः का अथं सूयं कहा है ( १२।३।२७ ) । ज्योतिषशास्त्र की दुष्ट से “इवा” का भ्रथं है 0005187 । ०७ज का पारिमाषिक नाम है 311४5 । . इसे 62016018 - भी कहते ह । द्युलोक में यह तारा सर्वाधिक. प्रकारामानमान भी कहते. । 0005187 का उदय, जब सूर्योदय समकालीन होता है, तो मानो ०0518 ने सूये भर्थात् वृषाकपि का कान काट लिया है । 0०0- 5 के उदय. की वुष्टि' से उतने काल को ००७-०९७ कहते ह, जितने

English

Brihaddiva, the foremost of light-winners, repeasts these holy prayers, this strength to Indra. He rules the great self-luminous fold of cattle, and all the doors of light hath he thrown open.

अध्याय २०

श्लोक 127.1

॥ अथ कुन्तापसूक्तानि ॥ खिलानि ।इ॒दं जना॒ उप॑ श्रुत॒ नरा॒शंस॒ स्तवि॑ष्यते ।ष॒ष्टिं स॒हस्रा॑ नव॒तिं च॑ कौरम॒ आ रु॒शमे॑षु दद्महे

|| atha kuntāpasūktāni || khilāni | idaṃ janā upa śruta narāśaṃsa staviṣyate | ṣaṣṭiṃ sahasrā navatiṃ ca kaurama ā ruśameṣu dadmahe

हिन्दी अर्थ

स्त्री उत्तर देती है किं (भयं शरारुः) यह शरारती वृषाकपि (माम्) मु (अ्रवीराम् इव भ्रमि मन्यते) एेसा समता है कि मानो मै भरवीरा हुः स्वर॑ण-स्वभाव के कारण वृषाकपि को फिर भी शरार कहती है । मत््रमे स््रेण-स्वभाव दर्शाया गया है 1 मलों मे ( गच्छति स्म ) नाती हं । वह (- ऋतस्य ) सच्चाई के जीवन की

English

Who for the sake of splendour close to mighty Indra’s side rejoice, good in their own supremacy.

अध्याय २०

श्लोक 127.2

उष्ट्रा॒ यस्य॑ प्रवा॒हणो॑ व॒धूम॑न्तो द्वि॒र्दश॑ ।व॒र्ष्मा रथ॑स्य॒ नि जि॑हीडते दि॒व ई॒षमा॑णा उप॒स्पृशः॑

uṣṭrā yasya pravāhaṇo vadhūmanto dvirdaśa | varṣmā rathasya ni jihīḍate diva īṣamāṇā upaspṛśaḥ

हिन्दी अर्थ

यस्म देवाः सदा बलि प्रयच्छन्ति विमितेऽमितं स्कम्भं तं ब्रूहि कतमः स्विदेव सः” ॥ (अथं ° १०।७।३९ ॥ तब चित्त कं भक्तिरस का प्रभाव समग्र रारीरपर होजाताह। पां मिलकर, जब परमेदवर पर भक्तिरस सीचतेर्है, तोये १५ उक्षारू्पहा

English

If, Indra, thou drink Soma by Vishnu’s or Trita Āptya’s side, Or with the Maruts take delight in flowing drops;

अध्याय २०

श्लोक 127.3

ए॒ष इ॒षाय॑ मामहे श॒तं नि॒ष्कान् दश॒ स्रजः॑ ।त्रीणि॑ श॒तान्यर्व॑तां स॒हस्रा॒ दश॒ गोना॑म्

eṣa iṣāya māmahe śataṃ niṣkān daśa srajaḥ | trīṇi śatānyarvatāṃ sahasrā daśa gonām

हिन्दी अर्थ

जाते है, -भक्तिरस के सिञ्चन में समथं हो जाग है, उक्ला=उक्षति सिञ्चतीति, ( उणादि कोष १।१५९ ) । जदं इन १५मे'दरीरकेर्पाच भक्तिरस हारा भ्रापूरित हो जाती है तब धममकायोँ मे-जो कि परमेदवर क प्रसाद क निमित्त किये जाते है,- भक्त शीतोष्ण तथा सुखदुःख की होति है । पिले एक भ्रामाशयकोवे भरले, पीछे .जुगाली. करते हृष्ट दूसरे भ्रामारशय को वे भरते है

English

Or, Sakra, if thou gladden thee afar or in the sea of air, Rejoice thee in this juice of ours, in flowing drops. Or, Lord of Heroes, if thou aid the worshipper who sheds the juice,

अध्याय २०

श्लोक 127.4

वच्य॑स्व रेभ॑ वच्यस्व वृ॒क्षे न प॒क्वे श॒कुनः॑ ।नष्टे॑ जि॒ह्वा च॑र्चरीति क्षु॒रो न भु॒रिजो॑रिव

vacyasva rebha vacyasva vṛkṣe na pakve śakunaḥ | naṣṭe jihvā carcarīti kṣuro na bhurijoriva

हिन्दी अर्थ

(न ) जैसे ( तिग्मण्णृङ्गः ) तेज सींगोवाला (वृषभः) व्ष॑क-बेल, काऽ २५ 1 सूऽ १२६. प्रथरवैवेद-भाष्य ३०७ हा, (रोरुवत्) गजंनाएं करता है, वसे ही है परमेश्वर ! भ्राप (वृषभः) दश इन्द्रियो, तथा पञ्चभूतों के समुहरूप शरीर म ( रोरुवत् ) बार-बार .

English

Or him whose laud delights thee, and his flowing drops. Whatever, Vritra-slayer! thou Sūrya, hast risen upon to-day,

अध्याय २०

श्लोक 127.5

प्र रे॒भासो॑ मनी॒षा वृषा॒ गाव॑ इवेरते ।अ॒मो॒त॒पुत्र॑का ए॒षाम॒मोत॑ गा॒ इवा॑सते

pra rebhāso manīṣā vṛṣā gāva iverate | amotaputrakā eṣāmamota gā ivāsate

हिन्दी अर्थ

मेरे हृदय के लिये (शम्) शान्तिदायक होता है, वैसे भक्तिरस (यम् ) जिसे कि बह भी (शम्) मेरे लिये शान्तिप्रद.होताहै। (भावयुः) माव्क-उपासक (ते ) आपके लिये (सुनोति) निष्पन्न करता है, विचरता है, अर्थात् सूं का ररिमसमुह । रदिमयों की गर्मोके कारण बादल

English

That, Indra, all is in thy power. When, Mighty One, Lord of the Brave, thou thinkest, I shall never die, That thought of thine is true indeed.

अध्याय २०

श्लोक 127.6

प्र रे॑भ॒ धीं भ॑रस्व गो॒विदं॑ वसु॒विद॑म्।दे॒व॒त्रेमां वाचं॑ स्रीणी॒हीषु॒र्नावी॑र॒स्तार॑म्

pra rebha dhīṃ bharasva govidaṃ vasuvidam| devatremāṃ vācaṃ srīṇīhīṣurnāvīrastāram

हिन्दी अर्थ

- ३। १५४) । कपृत् =क (जल) + पृत् (पु पूरणे) ; जल के अभावं कीं पुत्ति जिसे कि उपनिषदों मे हिरण्यकेश गौर हिरभ्यदमश्रू कहा है । सूर्यं की किरणे चलता नही, भयितु वह सौर-मण्डल में सापेक्ष स्थिति की दुष्टि से सदा एक 11. , मथरवेवेद-माष्य का०२०। सुर १२६

English

Thou, Indra, goest unto all Soma libations shed for thee, Both far away and near at hand.

अध्याय २०

श्लोक 127.7

राज्ञो॑ विश्व॒जनी॑नस्य॒ यो दे॒वोऽमर्त्यां॒ अति॑ ।वै॒श्वा॒न॒रस्य॒ सुष्टु॑ति॒मा सु॒नोता॑ परि॒क्षितः॑

rājño viśvajanīnasya yo devo'martyāṃ ati | vaiśvānarasya suṣṭutimā sunotā parikṣitaḥ

हिन्दी अर्थ

. “वृषाकपि दाब्द मे “वृषा पद स्पष्ट दा रहा है कि सुरथं वर्षाकाकारण है। वतमान मन्त्रे मे भी इसकी पुष्टि की गईहै। मेषमें गजंनाका. कारण विंदयत् है । यह प्रसिद्ध उक्ति है कि-- “जो गजंते है वे बरसते नही" . ७५८. न सेञचे यस्य. रोमृशं निषेदुषो विजम्भते ।

English

Both boons—may Indra hitherward turned, listen to this, prayer of ours, And, mightiest Maghavan with thought inclined to us come nigh to drink the Soma juice. For him, strong independent Ruler, Heaven and Earth have fashioned forth for power and

अध्याय २०

श्लोक 127.8

प॒रि॒च्छिन्नः॒ क्षेम॑मकरो॒त् तम॒ आस॑नमा॒चर॑न्।कुला॑यन् कृ॒ण्वन् कौर॑व्यः॒ पति॒र्वद॑ति जा॒यया॑

paricchinnaḥ kṣemamakarot tama āsanamācaran| kulāyan kṛṇvan kauravyaḥ patirvadati jāyayā

हिन्दी अर्थ

(सः) वहं वृषाकपि ( न ईशे ) वर्षा का भ्रधीदवर नहीं, ( निषेदुषः यस्य ) एक स्थान में स्थित जिस वृषाकपि का (रोमकाम्) लोमसमूह-सदृक रदिमसमूह, (विजृम्भते) विेषरूप म . स्वं त्र विचरता है, भ्रपितु ( सः ) वेह यह वज्ञानिक तथ्य है किं भन्तरिक्षमे वतंमान . मृदादि-कण जब जल-कण घनीभूत हो जाते ्है, तबभारी होजाने के कारण वर्षारूपमें पुथिवी पर गिरते है । सूयं की गर्मी द्वारा तो पृथिवीस्थ.जल वाष्पीभरूत होकर विद्यूत् के कारण उन पर वाष्पीय जलकण घनीभूत होकर बरसते है ¦

English

might. Thou seatest thee as first among thy peers in place, for thy soul longs for Soma juice.

अध्याय २०

श्लोक 127.9

क॒त॒रत् त॒ आ ह॑राणि॒ दधि॒ मन्थां॑ परि॒ श्रुत॑म्।जा॒याः पतिं॒ वि पृ॑च्छति रा॒ष्ट्रे राज्ञः॑ परि॒क्षितः॑

katarat ta ā harāṇi dadhi manthāṃ pari śrutam| jāyāḥ patiṃ vi pṛcchati rāṣṭre rājñaḥ parikṣitaḥ

हिन्दी अर्थ

मेव की (एधस्वानः) वृद्धि करता हृभा गौर इसे गजंवाता हरा (भ्रसिम्) खसे भूमि पर फंकना, ( सनाम् नई उत्पत्ति करना, तथा ( नवं चरम् ) का० २०। सु० १२६ अथवेवेद-भाष्य . ३०९ (पिबामि)पान करता हूंउसे स्वीकार करता हुंउसे मानो तुषित हृद्रा ग्रहण

English

O Indra, from all ancient time rivalless ever and companionless art thou: In war thou seekest comradeship. Thou findest not the wealthy man to be thy friend: those scorn thee who are flown with wine.

अध्याय २०

श्लोक 127.10

अ॒भीवस्वः॒ प्र जि॑हीते॒ यवः॑ प॒क्वः प॒थो बिल॑म्।जनः॒ स भ॒द्रमेध॑ति रा॒ष्ट्रे राज्ञः॑ परि॒क्षितः॑

abhīvasvaḥ pra jihīte yavaḥ pakvaḥ patho bilam| janaḥ sa bhadramedhati rāṣṭre rājñaḥ parikṣitaḥ

हिन्दी अर्थ

करती है । (विदवस्मात्०) पूववत् 1 ( नारियां प्रायः भावनाप्रधान होती ईै। इसलिये धा्मिक-कृत्यो तथा ३०४ भ्रयवंवेद-माष्य का०-२० । सु०° १२६

English

Craving his touch the dappled Kine mingle the Soma with their milk. The milch-kine dear to Indra send forth his death-dealing thun- derbolt, good in their own supremacy.

अध्याय २०

श्लोक 127.11

इन्द्रः॑ का॒रुम॑बूबुध॒दुत्ति॑ष्ठ॒ वि च॑रा॒ जन॑म्।ममेदु॒ग्रस्य॒ चर्कृ॑धि॒ सर्व॒ इत् ते॑ पृणाद॒रिः

indraḥ kārumabūbudhaduttiṣṭha vi carā janam| mamedugrasya carkṛdhi sarva it te pṛṇādariḥ

हिन्दी अर्थ

करती है । सामाजिक-जीवना म उन की विशेष श्रभिरुचि होती है--यह सव इस का (पति) क्षत्रिय पति, (जरसा) बुढपि से (नहि मरते). नहीं मरता वृषाकपि-सखा कं (ऋते) विना (न रारण) सुख-चैन नहीं पाता । यह वह हविः) -भपरने प्राणों की श्राहति, (देवेषु) देवकोटि के व्यक्तियों की सेवा के

English

With veneration, passing wise, honouring his victorious might, They follow close his many laws to win them due preeminence, good in their own

अध्याय २०

श्लोक 127.12

इ॒ह गावः॒ प्रजा॑यध्वमि॒हाश्वा इ॒ह पूरु॑षाः ।इ॒हो स॒हस्र॑दक्षि॒णोऽपि॑ पू॒षा नि षी॑दति

iha gāvaḥ prajāyadhvamihāśvā iha pūruṣāḥ | iho sahasradakṣiṇo'pi pūṣā ni ṣīdati

हिन्दी अर्थ

सखा कहता ह, ओर उसकी धामिक प्रवृत्तियों का कथन करता हँ । पति के वाली !, (भरात् उ) तदनन्तर (सुस्नुषे) है उत्तमपु्रवधूवाली, (वृषाकपायि) उक्षा को (चसत्) खाता है, जो कि परमेदवर को (श्रियं हविः) प्रिय हवि रूप ह, भौर जो हवि कि (काचित्करम्) जीवात्मा के सुखो को चयन करती

English

supremacy. For Indra, lover of carouse, loud be our songs about the juice: Let poets sing the hymn of praise.

अध्याय २०

श्लोक 127.13

नेमा इ॑न्द्र॒ गावो॑ रिष॒न् मो आ॒सां गोप॑ रीरिषत्।मासा॑म॒मित्र॒युर्जन॒ इन्द्र॒ मा स्ते॒न ई॑शत

nemā indra gāvo riṣan mo āsāṃ gopa rīriṣat| māsāmamitrayurjana indra mā stena īśata

हिन्दी अर्थ

वृषाकपायी =वृषाकपि,जिसका वणेन मन्त्र ७४२ से ७४४ मे हुमा ह, इस वृषाकपि की माता है, श्रद्धा । योगदरेन १।२० सूत्र के भष्यमे श्रद्धा, माता कं सदृश. कल्याणकारिणी होकर, योगी की रक्षा करती ह । द्वारा परमेदवर को सींचते रहते है; उक्ष= सेचने । घसत् == परमेरवर इन भक्तिरसो को खाना है, इनका भ्रास्वाद.लेता है । परमेदवर को “भत्ता खाजाताहै, मानो श्रपने पेटर्मेलौनकरलेताहं। उस का पेटहं-

English

We summon Indra to the draught, in whom all glories rest, in whom The seven communities rejoice.

अध्याय २०

श्लोक 127.14

उप॑ नो न रमसि॒ सूक्ते॑न॒ वच॑सा व॒यं भ॒द्रेण॒ वच॑सा व॒यम्।वना॑दधिध्व॒नो गि॒रो न रि॑ष्येम क॒दा च॒न

upa no na ramasi sūktena vacasā vayaṃ bhadreṇa vacasā vayam| vanādadhidhvano giro na riṣyema kadā cana

हिन्दी अर्थ

उपासक, या मन, बुद्धि, चित्त गौर 'भहंकार, (मे) मुक परमेदवर (साकम्) एक साथ (पचन्ति) परिपाक करते है । (उत) भ्रौर ( भरहम् ) मै (भ्रदिमि) उखा लेता हुं; (इत्) जंसे कि (पीवः) .मोटा या बलवान् पुष, (उभौ कुक्षी) मोजन द्वारा, भपने वोन पेटो को मर लेता हं, वैसे ३०६ भ्रथवेवेद-माष्य अन्तःकरण चतुष्टय जब भक्तिरस से भरा हमा हो, तो उस का प्रमाव

English

By the three Soma jars the Gods span sacrifice that stirs the mind: Let our songs aid and prosper it. 305

अध्याय २०

श्लोक 128.1

खिलानि ।यः स॒भेयो॑ विद॒थ्यः सु॒त्वा य॒ज्वाथ॒ पूरु॑षः ।सूर्यं॒ चामू॑ रि॒शादस॒स्तद् दे॒वाः प्राग॑कल्पयन्

khilāni | yaḥ sabheyo vidathyaḥ sutvā yajvātha pūruṣaḥ | sūryaṃ cāmū riśādasastad devāḥ prāgakalpayan

हिन्दी अर्थ

करता हूं । मरौर (धीरम्) मेधातव्री उपासक को (अचाकराम् ) पटिचानता हं । केभेदकोही सुचित करते रहँ । यदि यह भेद जातिपरक हो तो “कृण्वन्तो एक जाति को दूसरी जाति में बदला नहीं-जा सकता । गौ भेक नहीं बन सकती,गौर न भसं गौ बन सकती है । समग्र मनुष्य एक ही मनुष्य जाति के है । दासं है वे जोकिं उपक्षयकारी हैसमाज को हानि पहुचे ह । भौर भाय हवे.

English

What time thou thunderest and gatherest, then thou, even as a father, art invoked. I from my Father have received deep knowledge of the holy

अध्याय २०

श्लोक 128.2

यो जा॒म्या अप्र॑थय॒स्तद् यत् सखा॑यं॒ दुधू॑र्षति ।ज्येष्ठो॒ यद॑प्रचेता॒स्तदा॑हु॒रध॑रा॒गिति॑

yo jāmyā aprathayastad yat sakhāyaṃ dudhūrṣati | jyeṣṭho yadapracetāstadāhuradharāgiti

हिन्दी अर्थ

तथा पाप-शत्ररभो को कम्पां देनेवाने उपासक की माता के रूप मे; उत्तम- भ्रन्तर्नाद का व्णंन हुमा है । का श्राधिहैविक वर्णेन हभा है + . ६- भरन्त में ' १९-२३ मन्तो मे.उपसंहाररूपः मे, परमेश्वर भ्रौ

English

Increaser of our steeds and multiplying kine, a golden well, O God, art thou;

अध्याय २०

श्लोक 128.3

यद् भ॒द्रस्य॒ पुरु॑षस्य पु॒त्रो भ॑वति दाधृ॒षिः ।तद् वि॒प्रो अब्र॑वीदु॒ तद् ग॑न्ध॒र्वः काम्यं॒ वचः॑

yad bhadrasya puruṣasya putro bhavati dādhṛṣiḥ | tad vipro abravīdu tad gandharvaḥ kāmyaṃ vacaḥ

हिन्दी अर्थ

मौतिक--तीनों भथं संमंव है । ये तीनों अ्रथं गौण-मुख्यभाव से प्रायः भन्य सक्त केभी किये जा सकते है । अथवंवेद-भाष्य (कुन्ताप-सूक्त ३१३ भिलावट माना है । “चतु्वेद-विषय-सुची"(वैदिक यन्त्रालय अजमेर) मँ उन का केथन निम्नलिखित हैः-- . ।

English

For no one may impair the gifts laid up in thee, Bring me what- ever thing I ask. Indra for worship of the Gods, Indra while sacrifice proceeds, Indra as warriors in the battle-shock we call, Indra that we may win the spoil.

अध्याय २०

श्लोक 128.4

यश्च॑ प॒णि रघु॑जि॒ष्ठ्यो यश्च॑ दे॒वां अदा॑शुरिः ।धीरा॑णां॒ शश्व॑ताम॒हं तद॑पा॒गिति॑ शुश्रुम

yaśca paṇi raghujiṣṭhyo yaśca devāṃ adāśuriḥ | dhīrāṇāṃ śaśvatāmahaṃ tadapāgiti śuśruma

हिन्दी अर्थ

का वर्णन है । “श्रथवंवेद मे २० वां काण्ड समाप्त" । “यह भ्रथवंवेद का सूचीपत्र समाप्त हुभ्रा" । इत्यादि; “इदं राधो विभु प्रभु" ( भयं ° १३५।९ ) इत्यादि; - इति (३) तथा“अथरववेदीय वृहदनुक्रमणी"" मे भी “इदं जनासुक्त १२७) , दिप्पणी--( १) “भद्रं ण वचसा वयम्” से पूवं “इदं जना उप भुत" (भ्रथवं० १२७।१) यह पाठ भी चादिये था जो किसी कारण छूट गया है,

English

With might hath Indra spread out heaven and earth, with power hath Indra lighted up the Sun. In Indra are all creatures closely held; in him meet the distilling

अध्याय २०

श्लोक 128.5

ये च॑ दे॒वा अय॑ज॒न्ताथो॒ ये च॑ पराद॒दिः ।सूर्यो॒ दिव॑मिव ग॒त्वाय॑ म॒घवा॑ नो॒ वि र॑प्शते

ye ca devā ayajantātho ye ca parādadiḥ | sūryo divamiva gatvāya maghavā no vi rapśate

हिन्दी अर्थ

जनाः उप भुत” से होता है, न कि ““भग्रेण वचसा वयम्'" से 1 ३१४ अयेवेद-भाष्य (कुन्ताप-सूक्त) का० २० ।.सू° १२७ मन्व तकं का विषय निदेश कर दिया है परन्तु इन सक्तो के मध्य में

English

Soma drops. Though, Indra, thou art called by men eastward and westward, north and south, Thou chiefly art with Anava and Turvasa, brave Champion! urged by men to come.

अध्याय २०

श्लोक 128.6

योना॒क्ताक्षो॑ अनभ्य॒क्तो अम॑णि॒वो अहि॑र॒ण्यवः॑ ।अब्र॑ह्मा॒ ब्रह्म॑णः पु॒त्रस्तो॒ता कल्पे॑षु सं॒मिता॑

yonāktākṣo anabhyakto amaṇivo ahiraṇyavaḥ | abrahmā brahmaṇaḥ putrastotā kalpeṣu saṃmitā

हिन्दी अर्थ

सूची" मँ ्रौर मिलता है । यथा-“यद्वा वाणीत्यादि (सूक्त १४२्गन् ४); (जनाः ) है परजाजनो ! (ईदम्) यह (उप श्रुत) ध्यानपूवैक सुनो, - हम श्रादान करते है, ग्रहणं करते है । लंगभग ६० हजार हों । इस महासंख्या केदारा महात्मानो के -महासद्गुणों का कथन अभिप्रेत हो । थवा “षष्टि” पौर “सहसा"शब्दों को यौगिकाथं मान लिया जाय । षष्टिम् सांसारिक भोगो की दृष्टि से मानो सोए हृए रहना; गौर “सहला” अर्थात् योगाभ्ासं भे बलोपा्जन करते हए साहृस-

English

Or, Indra, when with Ruma, Rusama, Syāvaka, and Kripa thou rejoicest thee, Still do the Kanvas bring praises, with their prayers, O Indra, draw thee hither: come.

अध्याय २०

श्लोक 128.7

य आ॒क्ताक्षः॑ सुभ्य॒क्तः सुम॑णिः॒ सुहि॑र॒ण्यवः॑ ।सुब्र॑ह्मा॒ ब्रह्म॑णः पु॒त्रस्तो॒ता कल्पे॑षु सं॒मिता॑

ya āktākṣaḥ subhyaktaḥ sumaṇiḥ suhiraṇyavaḥ | subrahmā brahmaṇaḥ putrastotā kalpeṣu saṃmitā

हिन्दी अर्थ

का० २०। सू० १२७ -अथेवेद-माष्य (कुन्ताप-सुक्त) ७हैद. उष्टा यस्व ्बाहणें बुधुष॑न्तो दिहैषं । वहन करते, श्रौर उसे ( नि जिहीडते ) नितरां सक्रिय रखते है, जेसे कि (उपस्पृशः) सूर्य॑स्पर्शीं (दिवः) चयोतमान किरणे ( ईषमाणाः ) गति करती .

English

Over the three great distances, past the Five Peoples go thy way, O Indra, noticing our voice. Send forth thy ray like Sūrya: let my songs attract thee hither- ward.

अध्याय २०

श्लोक 128.8

अप्र॑पा॒णा च॑ वेश॒न्ता रे॒वां अप्रति॑दिश्ययः ।अय॑भ्या क॒न्या कल्या॒णी तो॒ता कल्पे॑षु सं॒मिता॑

aprapāṇā ca veśantā revāṃ apratidiśyayaḥ | ayabhyā kanyā kalyāṇī totā kalpeṣu saṃmitā

हिन्दी अर्थ

- हई, सूखूपी (रथस्य वर्मे) रथ के ढांचे को, (निजिहीडते) नितरां सक्रियः रखती रहै - (गले मन्व से सम्बन्ध) । (एषः) यहं वह महात्मा है जिखकी कि ( इषाय ) इच्छापूर्तिं के लिये (मामहे) हम प्रजाजन पूजासरूपःमे मटं देते है--( शतं निष्कान् (दाहे) + ताराः व संतरणे) । बधूमन्तः--वध् वहति सुखानि प्रापयति

English

Like waters gathering to the vale. With Indra splendid feasts be ours enriched with ample spoil, wherewith,

अध्याय २०

श्लोक 128.9

सुप्र॑पा॒णा च॑ वेश॒न्ता रे॒वान्त्सुप्रति॑दिश्ययः ।सुय॑भ्या क॒न्या कल्या॒णी तो॒ता कल्पे॑षु सं॒मिता॑

suprapāṇā ca veśantā revāntsupratidiśyayaḥ | suyabhyā kanyā kalyāṇī totā kalpeṣu saṃmitā

हिन्दी अर्थ

की शक्तियां । वष्मं = 80०५, 017) भ्ापटे ) । जिहीदते--हिडि गतौ । इषाय यदि प्रजाजनों के भले के लिये महात्मा लोग, उपयु क्त प्रकार की सुवणं, रजत, मोतियों त्रा भन्य रत्नो के हार । ७६८. वच्य॑सं रेभं वच्यख बके न पक्वे शकुनैः

English

Wealthy in food, we may rejoice. Like thee, thyself, the singers’ friend, thou movest as it were, besought, Bold One, the axle of the car.

अध्याय २०

श्लोक 128.10

परि॑वृ॒क्ता च॒ महि॑षी स्व॒स्त्या च यु॒धिंग॒मः ।अना॑शुर॑श्चाया॒मी तो॒ता कल्पे॑षु सं॒मिता॑

parivṛktā ca mahiṣī svastyā ca yudhiṃgamaḥ | anāśuraścāyāmī totā kalpeṣu saṃmitā

हिन्दी अर्थ

ईहवर सदृश सर्वोपकार करते हैँ । आयं: = ईंहवरपुत्रः (निर० .६।५।२६) । वासः = वस्यतेखय दासयति कर्माणि ( निर० २।५।१७ ) । भतः दास ओौर भ्रायं का भेद जन्ममूलक नहीं; अपितु गुणकर्ममूलक हं । वृषाकपिं भ्र्थात् उपासंक जीवात्मा कहता है कि है परमेदवर !

English

Law: I was born like unto the Sun. After the lore of ancient time I make, like Kanva, beauteous songs,

अध्याय २०

श्लोक 128.11

वा॒वा॒ता च॒ महि॑षी स्व॒स्त्या च यु॒धिंग॒मः ।श्वा॒शुर॑श्चाया॒मी तो॒ता कल्पे॑षु सं॒मिता॑

vāvātā ca mahiṣī svastyā ca yudhiṃgamaḥ | śvāśuraścāyāmī totā kalpeṣu saṃmitā

हिन्दी अर्थ

(वि योजना) वियोग (कति रिवत्). कितने युगो तक रहेगे ? । परमेश्वर ३१०. भरथवेवेद-माष्य का०.२०। सु० १२६ उत्तर देता है कि (वृषाकपे) है वृषाकपि ! तू (नेदीयसः गृहान्) नजदीकी . रि्तेदारो, भौर (भस्तम्). गृहकृत्यो मे ही (उप एहि) रहता ह इसलिये

English

And Indra’s self gains strength thereby. Whatever Rishis have not praised thee, Indra, or have lauded thee,

अध्याय २०

श्लोक 128.12

यदि॑न्द्रा॒दो दा॑शरा॒ज्ञे मानु॑षं॒ वि गा॑हथाः ।विरू॑पः॒ सर्व॑स्मा आसीत् सह य॒क्षाय॒ कल्प॑ते

yadindrādo dāśarājñe mānuṣaṃ vi gāhathāḥ | virūpaḥ sarvasmā āsīt saha yakṣāya kalpate

हिन्दी अर्थ

भ्रघूरा उपासक उपासना तो करता रहता है, परन्तु गृहबन्धुओों भौर गृह्यकृत्यों मे प्रायः ममन रहता है । इसलिये अधूरा उपासक चिरकाल से मरुभूमि बना पड़ा है, उस पर ब्राह्मी भानन्दरस को वर्षा नहीं होने पाई । वह परमेदवर मे पता है कि मेरा भ्रौर आपका पारस्परिक वियोग कबः .. तक रहेगा: । परमेदवर उसे उत्तर देता है कि जब तक तेरा मन गृहबन्धुभ्रों

English

By me exalted wax thou strong. O Vritra slayer, we were thought slow and unready for the fray: Yet once in thy great bounty may we have delight, O Hero, after praising thee.

अध्याय २०

श्लोक 128.13

त्वं वृ॑षा॒क्षुं म॑घव॒न्नम्रं॑ म॒र्याकरो॒ रविः॑ ।त्वं रौ॑हि॒णं व्यास्यो॒ वि वृ॒त्रस्याभि॑न॒च्छिरः॑

tvaṃ vṛṣākṣuṃ maghavannamraṃ maryākaro raviḥ | tvaṃ rauhiṇaṃ vyāsyo vi vṛtrasyābhinacchiraḥ

हिन्दी अर्थ

मरौर गृह्यकृत्यो मे मग्न रहेगा, गौर जब तक तूमेरी प्रोरमनको नहीं ७६२. पुनरेहि षुषाकपे सुविता कंरपयाबहै । (वृषाकपे) है वृषाक्रपि ! (पुनः) तू बार-बार (एहि). मुक परमे- ¦ इव्ररं की भ्रोर भ्रा, ताकि हम दोनों एक-दूसरे के ( सुविता सुवितानि ) सांसारिक-मोगो के स्वप्नो को विष्ट कर देगा, तत्र तू (पथा) -इस योग-

English

Drink Soma, Lord of Bays, and let it cheer thee: Indra, the stone, like a well-guided courser, Directed by the presser’s arms hath pressed it.

अध्याय २०

श्लोक 128.14

यः पर्व॑ता॒न् व्य॑दधा॒द् यो अ॒पो व्य॑गाहथाः ।इन्द्रो॒ यो वृ॑त्र॒हान्म॒हं तस्मा॑दिन्द्र॒ नमो॑ऽस्तु ते

yaḥ parvatān vyadadhād yo apo vyagāhathāḥ | indro yo vṛtrahānmahaṃ tasmādindra namo'stu te

हिन्दी अर्थ

का०२०। सू० १२६ भयर्ववेद-भाष्य , ३ ११ के चक्र । इन्दः ऊपर के घर कंहा गया है एक साथ, (विदतिम्) शारीरिक २० धटकों को ( ससूव ) जन्म देती है ।

English

So let the draught of joy, thy dear companion, by which, O Lord of Bays, thou slayest foemen, Delight thee, Indra, Lord of princely treasures.

अध्याय २०

श्लोक 128.15

पृ॒ष्ठं धाव॑न्तं ह॒र्योरौच्चैः॑ श्रव॒सम॑ब्रुवन्।स्व॒स्त्यश्व॒ जैत्रा॒येन्द्र॒मा व॑ह सु॒स्र॑म्

pṛṣṭhaṃ dhāvantaṃ haryorauccaiḥ śravasamabruvan| svastyaśva jaitrāyendramā vaha susram

हिन्दी अर्थ

जब तक कि जीवात्मा मुक्ति नहीं पा लेता । इसके द्वारा वृषाकपि को यह् - उपदेश दिया हं कि परमेकश्वरोय-देन को तू परमेदवरापितं करदे, तभी सकेगा । वंहिक भोग भ्रौर देह विनाशी है, इस लिये इनका भोग भौर अग्रसर होने मे सहायक हों ' तथा साथ ही है वृषाकपिं ! तु उस मातृश्क्ति का सदा कल्याण चाहा करः जिसने दुःख-कष्ट सहकर तुभ शारीरिक-जन्म दिया हं, ताकि तु कमो के फलों को भोगता हृभा मोक्ष पा सके । मन्त्र १

English

Mark closely, Maghavan; the words I utter, this eulogy recited by Vasishtha:

अध्याय २०

श्लोक 128.16

ये त्वा॑ श्वे॒ता अजै॑श्रव॒सो हार्यो॑ युञ्जन्ति॒ दक्षि॑णम्।पूर्वा॒ नम॑स्य दे॒वानां॒ बिभ्र॑दिन्द्र महीयते

ye tvā śvetā ajaiśravaso hāryo yuñjanti dakṣiṇam| pūrvā namasya devānāṃ bibhradindra mahīyate

हिन्दी अर्थ

निभालय=देख.।॥ तथा “मल्” परिभाषणे । पद्यु : पशुं का == 119 110 (भ्रापटे) । परशुका स्वायं कन्.)। .. कम्पा देनेवाला, तथा इन्दियो का स्वामी कहकर उस का वं्णेनं मोक्षाधि- . वह ह “वृषा” भर्थात् कामुकता के कारण वीयं की वर्षा करनेवाला, “कपि

English

Accept the prayers I offer at thy banquet. Indra with all thy saving helps give us assistance, Lord of Power For after thee we follow even as glorious bliss, thee, Hero, finder-out of wealth.

अध्याय २०

श्लोक 129.1

खिलानि ।ए॒ता अश्वा॒ आ प्ल॑वन्ते

khilāni | etā aśvā ā plavante

हिन्दी अर्थ

गान गा, (वच्यस्व) बार-बार गा; (न) जसे कि (शकुनः) पक्षी (पक्वे चहचहार्तीं बोली द्वारा मानो परमेरवर कैं गीत गाताहै। ( नष्टे) विनाशकालं के उपस्थित हो जाने पर तो (जिह्वा) जबान ( चर्चरीति ) लडखड़ा जाती है, (न) जसे कि (भुरिजोः) भरूरिवेगवाले रष्व के (क्षुरः) पर ( इव ) मानो लडखड़ा जाते है । भ्रभिप्राय यह है कि जब-तक मृत्युकाल उपस्थित नहीं होता, तब तकं जिह्वा से तु परमेरवर कै स्तुतिगान गा ले, विनादा-काल के उपस्थित हो जाने पर चाहते हृए मी जिह्वा स्तुत्तिगान में असमथं होती है । भुरिजोः = भूरि =भररि+जु गतौ, षष्ठ कवंचन 1 क्षुरः=खुर, अदव के अमोतुपुत्रका एषाम॒मोतं गाहसे ॥५॥

English

That, Satakratu, thou to grace and please thy praisers, as it were, Stirrest the axle with thy strength.

अध्याय २०

श्लोक 129.2

प्र॒ती॒पं प्राति॑ सु॒त्वन॑म्

pratīpaṃ prāti sutvanam

हिन्दी अर्थ

महाभारत के समकाल के है, तो भी वेदों पर कोई एतिहासिक आक्षेप नहीं परमेश्वर की वेदवाणियां हमे प्रप्त रहें । (यः पृर्षः) जो पुरुष (सभयः) समायो मे जाने योग्य तथा सभ्य

English

What then? As men whose fields are full of barley reap the ripe corn removing it in order, So bring the food of those men, bring it hither, who come not to prepare the grass for worship.

अध्याय २०

श्लोक 129.3

तासा॒मेका॒ हरि॑क्निका

tāsāmekā hariknikā

हिन्दी अर्थ

विदवासंघात रादि द्वारा हिसा करता है उसे, (यत् ज्येष्ठः) तथा जो बडा (अधराक् इति) नीच (राहुः) कहते है । पुरुष का (पुत्रः) पुत्र; ( दाधुषिः ) पापों का घर्षण करनेवाला ( भवति )

English

Indra for his friendship. Ye, Asvins, Lords of Splendour, drank full draughts of grateful Soma juice,

अध्याय २०

श्लोक 129.4

हरि॑क्नि॒के किमि॑च्छासि

hariknike kimicchāsi

हिन्दी अर्थ

होता हं-( यत् ) जो यह ( काम्यं वचः ) 'सुन्दर कथन है, ( तत् ) उसे ( विप्रः ) मेधावी पुरुष भी, ( भव्रवीत् उ ) निश्चयपूवंक कहते है, गौर (तत्) उसे, (गन्धवंः) वेदवाणी के विद्धान् भी कहते है । ७८२. यं पणि रषुंजिषठयो यथं देवा अद्रिः । (यःच) रौर जो (पणिः) व्यापारी है, परन्तु ( रधुजिष्ठयः ) हे

English

And aided Indra in his work with Namuchi of Asura birth. As parents aid a son, both Asvins, Indra, aided thee with their wondrous powers and wisdom

अध्याय २०

श्लोक 129.5

सा॒धुं पु॒त्रं हि॑र॒ण्यय॑म्

sādhuṃ putraṃ hiraṇyayam

हिन्दी अर्थ

श्नौर जो (देवान्) देवकोटि के महात्मा को ( श्रदादुरिः) दान नहीं देता, काल के बुद्धिमान के इस कथन को (भ्रहम्) ने तथा हमने ( शश्र म ) (ये च) भ्रौर जो (देवाः) देवकोटि के व्यापारी ( भरयजन्त ) यज्ञ-

English

When thou, with might, hadst drunk the draught that glad- dens, Sarasvati, O Maghavan refreshed thee. Indra is strong to save, rich in assistance: may he, possessing all, be kind and gracious.

अध्याय २०

श्लोक 129.6

क्वाह॑तं॒ परा॑स्यः

kvāhataṃ parāsyaḥ

हिन्दी अर्थ

यागक्रतेहै (येच) भरौरजो ( पराददिः) दूसरोंको दानदेतेहै, वे . ३२२ मरथरवेवेद-भाष्य(कुन्ताप-सूक्त) का० २ ०। सूु० रम ष (मघवानः) धनिकं पुरूष (वि रप्शते) कीतिमान् हो जाते है, (इव जेते .. (यः) जिसने (भनाक्ताक्षः) अपनी भांखो में पवित्रता का अञ्जन हृदयवाला नहीं, ( ब्रह्मणः ) तथा चारों वेदों के ज्ञाता का ( पृचरः ) पुत्र

English

May he disperse our foes and give us safety, and may we be the lords of hero vigour. May we enjoy his favour, his the holy: may we enjoy his blessed loving-kindness.

अध्याय २०

श्लोक 129.7

यत्रा॒मूस्तिस्रः॑ शिंश॒पाः

yatrāmūstisraḥ śiṃśapāḥ

हिन्दी अर्थ

ये सब (संमिता) एक समान माते गए है। माने गये है । सुभ्यक्तः = सु+ पभ्यक्तः । अभ्या ङन्या कटयाणी तोता कर्वेषु संमिता ॥८॥

English

May this rich Indra, as our good protector, drive off and keep afar all those who hate us. Men have abstained from pouring juice; nor counted Indra as a God.

अध्याय २०

श्लोक 129.8

परि॑ त्रयः

pari trayaḥ

हिन्दी अर्थ

ये सामाजिक उपयोगो के भ्रयोग्य है । कार. ९० । सू० १२८ अथववेद-साष्य (कुन्ताप-सूक्त) - ३२३ सुव॑स्वा कन्या. करथाणी तोता कलेषु संमिता ॥९॥ खन (कल्पेषु) कल्प-कल्पान्तरो मे ( संमिता ) एक समान माने गए है भर्थात् सामाजिकं उपयोग के भनुकूल है । ।

English

Where at the votary’s store my friend Vrishākapi hath drunk his fill. Supreme is Indra over all.

अध्याय २०

श्लोक 129.9

पृदा॑कवः

pṛdākavaḥ

हिन्दी अर्थ

(गुधिगमः) योद्धा, (च) भीर (भ्रनाशुरः) का्यो.को शीघ्र न करनेवाला श्ाद्धरंभायामी होता रपेष संमिर्ता ।॥११॥ (च) गौर (वावाता) वायु की सरह् सक्रिय (महिषो) महागण- महिषी = मन्त्र ७तठ मे दुराचारिणी 1 ‰0 पाका 8 ४८०)

English

Thou, Indra, heedless passest by the ill Vrishākapi hath wrought; Yet nowhere else thou findest place wherein to drink the Soma juice. Supreme is Indra over all.

अध्याय २०

श्लोक 129.10

शृङ्गं॑ ध॒मन्त॑ आसते

śṛṅgaṃ dhamanta āsate

हिन्दी अर्थ

(रेभासः) है स्तुति करनेवालो ! विनादकालं के उपस्थित हो जाने पर. (मनीषा) बुद्धि भी कभ्पित हो जाती है, (इव) जसे कि (वृषा) वर्षा दवारा (गावः) गौए' (प्र ईरते) कम्पित हो जाती है। तथा (एषाम्) इन सहाय होकर भरासते) बेठे रहते है, ( इव ) जैसे कि इन की ( गावः) . गौए, सेवाद्युश्रूषा के अभाव हो जाने के कारण, निःसहाय बैठी रहती है ।

English

This is the Godhead, this the might of Sūrya: he hath with- drawn what spread o’er work unfinished. When he hath loosed his horses from their station, straight over all night spreadeth out her

अध्याय २०

श्लोक 129.11

अ॒यन्म॒हा ते॑ अर्वा॒हः

ayanmahā te arvāhaḥ

हिन्दी अर्थ

देवत्रमां बाच भीणीदीषु्नां भीरस्तारम् ॥६॥ का० २० । सूु° १२७ भ्रथवेवेद-भाष्य (कुन्ताप-सूक्त) ३१७ प्रदान केर । तथा ( देवत्रा ) देवकोटि . के महात्माभो मे रहृत। हुभा तु (श्रीणीहि) परिपक्व करले, ( इषुः ) भ्रौर वाण जसे रात्रो का विना करतादहै, वसतू कामादि का विनाश करके, (वीरः ना) ओर धमंवीर नेता बन कर, (तारम्) मावसागर से तै रानेवाले परमेश्वर को प्राप्त कर ।

English

garment. In the sky’s lap the Sun this form assumeth for Mitra and for

अध्याय २०

श्लोक 129.12

स इच्छकं॒ सघा॑घते

sa icchakaṃ saghāghate

हिन्दी अर्थ

सवंजनहितकारी, (वैदवानरस्य) सब नर-नारियों मेँ वतमान, (परिक्षितः) भक्तिरस से भीनी स्तुतियां किया करो । (परिच्छिन्न) सांसारिक-भावनाभ्रों से पूणंतया कटा होकर उपासक

English

Vāruna to look on. His bay steeds well maintain his power eternal, at one time bright and darksome at another. With what help will he come to us, wonderful, ever-waxing

अध्याय २०

श्लोक 129.13

सघा॑घते॒ गोमी॒द्या गोग॑ती॒रिति

saghāghate gomīdyā gogatīriti

हिन्दी अर्थ

कृण्वेन्-) समग्र पृथिवी को भ्रपना धर बनाकर रहताहै। उसके ३१८ प्रथवंवेद-भाष्य (कुन्ताप-सूक्त) का० २०॥ सु° १२७ . अपने पति से (वि पृच्छति) विशेतया पूछती हँ कि है पति ! ( कतरत् ) कौनसी वस्तु मँ सेवाथं (तरे) भ्रापके लिये (भ्रा हराणि) लाऊ, (परिशुतम्) मानुष शासित राष्ट न होता हुभां परमेदवर द्वारा शासित राष्ट बन जाता है, जिसमे किं पति-पत्नी"ःका पारस्परिक व्यवहार प्रेममय रहता है । परमेदवर के नियमों द्वारां . चासित राष्ट की एकांकी महाभारते इस प्रकार मिलती है 1 यथा- ।

English

Friend, With what most mighty company?

अध्याय २०

श्लोक 129.14

पुमां॑ कु॒स्ते निमि॑च्छसि

pumāṃ kuste nimicchasi

हिन्दी अर्थ

पत्नी पत्तिं को कहती है कि है पति ! (वस्वः). घर की सब निवास- ७७५. इन्रः कारुम॑बूबुधदुतिष्ड वि च॑रा जनम् । ( इनदरः ) परमेदवर ( कारम् ) भपने स्तोता को ( भरबृबधत्ः

English

What genuine and most liberal draught will spirit thee with juice to burst. Open e’en strongly-guarded wealth? Do thou who art protector us thy friends who praise thee

अध्याय २०

श्लोक 129.15

पल्प॑ बद्ध॒ वयो॒ इति॑

palpa baddha vayo iti

हिन्दी अर्थ

भ्रथवेवेद-भाष्य ( कुन्ताप-सूक्त) ३१६ कायं को करता रह । (स्व॑ः इत्) सभी प्रजाजन (ते) तु (पृणात्) पालेगि, . भररिः = ईदवरः(निरु° ५।२।७)। काः स्तोता (निघ ० ३।१६)। ( पुरुषाः ) पौरुष-सम्पत् पुरुष पैदा हों । ( इह उ ) तथा इस रणष्टर मे

English

With hundred aids approach us. We will, with Indra and all Gods to help us, bring these existing worlds into subjection.

अध्याय २०

श्लोक 129.16

बद्ध॑ वो॒ अघा॒ इति॑

baddha vo aghā iti

हिन्दी अर्थ

परिपुष्ट वैश्य (अपि) भी (नि षीदति) रहँ, निवास करे । (इन्द्र) है परमेदवर !. आप द्वारा शासित राष्ट मे ( इमा गावः ) गौए (न रिषन् ) हिसित न हों, (उ) श्नौर ( भ्रासाम् ) इन गौभो का

English

Our sacrifice, our bodies, and our offspring shall Indra form together with the Ādityas. With the Ādityas, with the band of Maruts, may Indra be pro- tector of our bodies. As when the Gods came after they had slaughtered the Asuras, keeping safe their Godlike

अध्याय २०

श्लोक 129.17

अजा॑गार॒ केवि॒का

ajāgāra kevikā

हिन्दी अर्थ

के साथ (अ्रमित्रयुः) भ्रमित्ता चाहनेवाला (जनः)-जन ( मा ईदात ) इन हे परमेदवर ! ( नः ) हमसे श्राप ( न उप रमसि ) उपरत नहीं हम (सूक्त न) सत्य भौर प्रिय ( वचसा ) वचनोवाले हों । ( वयम् ) हम ३२० मथववेद-भाष्य (कृन्ताप-सूक्तं) का० २० । सू० १२०

English

nature, Brought the Sun hitherward with mighty powers, and looked about them on their vigorous

अध्याय २०

श्लोक 129.18

अश्व॑स्य॒ वारो॑ गोशपद्य॒के

aśvasya vāro gośapadyake

हिन्दी अर्थ

डालनेवासी (गिरः) वेदवाणियां (वनात्) हमे प्राप्त रह. ताकि हम (कदा . चन) कमी भी (न रिष्येम) दुःखों के भागी न बनें । महाभारत कालीन परीक्षित राजा कां वणन मानते है। यह उन की भूल

English

Godhead. With this may we obtain strength God-appointed, and joy with brave sons through a hundred winters.

अध्याय २०

श्लोक 129.19

श्येनी॒पती॑ सा

śyenīpatī sā

हिन्दी अर्थ

द्वारा, रेतिहासिक व्यक्ति,““कुरु के वंशजं कौरव" का वणंन मानते है, जो किं . पदं का बहुवचन है । “कुरवः का भ्रथं है 'ऋतिवजः'' (निच० ३।१८) । उणादि कोष १।२४ मे “कुर“की व्युत्पत्ति की है - "यः करोतिर्येन वासः -परीक्षित राजा के राज्य के सम्बन्ध मेहूुभामीदहै,यानहीं? फिरमी.

English

Drive all our enemies away, O Indra, the western, mighty Con- queror, and the eastern, Hero, drive off our northern foes and southern, that we in thy wide shelter may be joyful.

अध्याय २०

श्लोक 129.20

अ॒ना॒म॒योप॑जि॒ह्विका॑

anāmayopajihvikā

हिन्दी अर्थ

भक्तिरसवाला, (अथ) जीर (यज्वा) देव-कोटि के लोगों की पुजा-सत्कार करता, सत्संगी भौर दानी टै (तत्) उसे (च) भौर (सूर्यम्) सूयं को, (भमु रिलादसः ) दिस्रभावनाभ्रौं से रहित उन ( देवाः ) दिव्य पुरुषों ने धाक्) प्रथम कोटि का (गकल्पयन्) माना है । का० २० । सु° १२८ भ्रथवेवेद-माष्य (कुन्ताप-सूक्त) ३२१

English

Men come not with one horse at sacred seasons; thus they obtain no honour in assemblies. Sages desiring herds of kine and horses strengthen the mighty

अध्याय २०

श्लोक 130.1

खिलानि ।को अ॑र्य बहु॒लिमा॒ इषू॑नि

khilāni | ko arya bahulimā iṣūni

हिन्दी अर्थ

नाल (दीघर) +र; वर्थात् भतिकीच्र कायं करनेवाला । अयामी अ अम् (उपरमे) ।. उपरम = भराराम, का्वं-विमूखता । ॑ निरमुः सता जासीद् सह याय कर्पते ॥११॥ कर्मो के अनुसार, (वि गाहथाः) विविध ॒योनियो मे विलोड़ा हे, वह प्ले “मह् अकारान्त नपुसके; यथा-“अहानि"" अथवं° २०।११।६)। . जो वह भ्रव (सहं) आप का संगी बन कर, (यक्षाय ) आप-पूजनोय की प्राप्ति भ . ¦ ¦

English

What hath he done to injure thee, this tawny beast Vrishākapi, With whom thou art so angry now? What is the votary’s food- ful store? Supreme is Indra

अध्याय २०

श्लोक 130.2

को असि॒द्याः पयः॑

ko asidyāḥ payaḥ

हिन्दी अर्थ

का० २०।सु० १२९ भरषववेद-माष्य (कुन्ताप-ूक्त) ३१९ ू बद्ध) है शरीर में बन्धे हए ! ( वः ) तुम सन इसलिये ररीरोभें बन्धे हए हो, चूँकि तुम (अघा इति) पापको के करनेवाले हो । ८११. अजागर केषिका ॥१७॥ = (्रजागार)हि प्रकृति के बने घरवाले जीवात्मन् ! (केविका) प्रकृति तो तुम्हारी सेविका है, परन्तु तुम्हारी स्वामिनी बनी दई है । उप° ४।५) कविका = केव सेवने । ८१२. अश्व॑स्य वारो गोश्चपद्यके ॥१८॥ .

English

Never, Indrāni have I joyed without my friend Vrishākapi, Whose welcome offering here, made pure with water, goeth to the Gods. Supreme is Indra over all.

अध्याय २०

श्लोक 130.3

को अर्जु॑न्याः॒ पयः॑

ko arjunyāḥ payaḥ

हिन्दी अर्थ

रूपी रोगों से रदित व्यक्तयो को भी जिह्वा से चाट जनेवाली सर्पिणी है। ३३० भरथवेवेद-भाष्य (कृन्ताप-मूक्त) का० २० । सु० १३४ उपज्ञिह्धिका सम्भवतः ““उपजीकाः' बीमक , अथव ०.२।३१४

English

Supreme is Indra over all. Fifteen in number, then, for me a score of bullocks they prepare. And I devour the fat thereof: they fill my belly full with food.

अध्याय २०

श्लोक 130.4

कः का॒र्ष्ण्याः पयः॑

kaḥ kārṣṇyāḥ payaḥ

हिन्दी अर्थ

८१५. को अय॒ बहुकिम्" इषूनि ॥१।। कौन क्लेशो-कष्टो के ( बहुलिमा ) नानाविध ( इषूनि ) वाण तुक पर भञ्जनः शुक्लः (उणादि कोषं ३।५८, वेदिकं .यन्त्रालय, अजमेर) भरथवेवेदे-माष्य (कुन्ताप-सूक्त) ३३१

English

Supreme is Indra over all. Like as a bull with pointed horn, loud bellowing amid the herds,

अध्याय २०

श्लोक 130.5

ए॒तं पृ॑च्छ॒ कुहं॑ पृच्छ

etaṃ pṛccha kuhaṃ pṛccha

हिन्दी अर्थ

भरौर.उसं (कुहाकम्) विस्मय मे डाल देनेवाले सदगुरु से ( पृच्छ ) पुछ, जो किं (पक्वकम् परिपक्व बुदधिवाला है । कूहाकम् = कुहां विस्मापनं करोतीति । कृहथति विस्मयं कारथः तीति “कुहकः” (उणादि कोष २।३८), रामलाल कपूर टस्ट । भ्रौर एसे सद्गु से प्राथना करो कि है सदगुरो ! (कुभिः) पाधिव

English

Sweet to thine heart, O Indra, is the brew which she who tends thee pours. Supreme is Indra over all. Indrāni speaks. Non ille fortis (ad Venerem) est cujus mentula laxe inter femora dependet;

अध्याय २०

श्लोक 130.6

कुहा॑कं पक्व॒कं पृ॑च्छ

kuhākaṃ pakvakaṃ pṛccha

हिन्दी अर्थ

(यतिस्वभिः) जितने प्रकार के घन है, उन से (नः) हमे (यवा न= यव, यवय) दहि सदंगुरो ! राप (कूपायकुः) कुत्सित करमो से रक्षा करनेवाले है, सलिये (भ्रकुप्यन्तः) हम कोप-करोष भ्रादि से रहित हो गये है । कुपायकुः == कु (कुत्सित-कमं) + चाय (पा रक्षणे) कुः (करनेवाला

English

fortis vero estille cujus, quum sederit, membrum pilosum se extendit. Super omnia est Indra.

अध्याय २०

श्लोक 130.7

यवा॑नो यति॒ष्वभिः॑ कुभिः

yavāno yatiṣvabhiḥ kubhiḥ

हिन्दी अर्थ

- कायुः पाति रक्षति स पायुः रक्षकः (उणादि कोष ११), रामलाल कपर हे सदुगुरो ! श्राप (आमणकः) सवत्र सुपदे करते है, (मणत्सकः) (देव) है गुरुदेव ! (तु भ्रप्रतिसूर्यं) भप का मुकाबिला तो यं मोः

English

Indra speaks. Non fortis est ille cujus, quum sederit, membrum pilosum se extendit: fortis vero est ille cujus mentula laxe inter femora dependet. Super omnia est Indra. O Indra, this Vrishākapi hath found a slain wild animal,

अध्याय २०

श्लोक 130.8

अकु॑प्यन्तः॒ कुपा॑यकुः

akupyantaḥ kupāyakuḥ

हिन्दी अर्थ

सुवं तो प्राकृतिक-भकराश देकर भ्राखों का उपकार करता है, ओौर ८२५. एनंथिपक्तिका. इवि; ॥ ११।। हे गुख्देव ! भ्रापके सदुपदेशो द्वारा, हमारे (एनः-चि-पंक्तिका ) पाषों गई है.। हमारे संचित-पाप-विनष्ट हो गए हं) (नः) हम उपासको के ( सखा ) मित्रगण भी, (त्वा भरि) तेरे

English

Dresser, and new-made pan, and knife, and wagon with a load of wood. Supreme is Indra over all.

अध्याय २०

श्लोक 130.9

आम॑णको॒ मण॑त्सकः

āmaṇako maṇatsakaḥ

हिन्दी अर्थ

हमारे सखा (वशायाः) संसार को वद भे रखनेवाली जगन्माता के , श्रते है । वशा = परमात्म-माता ।(ञ्रथवं० . भ्रथं है - “सब संसार को वश मेँ रखनेवालाः पिता-परमे्व रः । मन्त्र ८२९ में “वशा” द्वारा परमेदवर को मातुरूप मे दर्शाया है 1 हे कामवासनागो ! (दरावेदुमयम्) सांसारिक भोगल्पी मदिरा की

English

Distinguishing the Dāsa and the Arya, viewing all, I go. I look upon the wise, and drink the simple votary’s Soma juice. Supreme is Indra over all.

अध्याय २०

श्लोक 130.10

देव॑ त्वप्रतिसूर्य

deva tvapratisūrya

हिन्दी अर्थ

के लिये (कल्पते) समर्थं हो गयादहै। । परमेदवर को हृदय में घारण कर, जंसे.कि विजयी व्यक्ति गले में (सुसजम्) दाशराज्ये-एक-एक इन्द्रिय का भी राज्य यदि जीवनमें जाता है, तो जीवन सुखी रौर पवित्र नहीं रहता । यदि १० इन्द्रियों का

English

over all. Soon may the hound who hunts the boar seize him and bite him in the ear, O Indra, that Vrishākapi whom thou protectest as a friend.

अध्याय २०

श्लोक 130.11

एन॑श्चिपङ्क्ति॒का ह॒विः

enaścipaṅktikā haviḥ

हिन्दी अर्थ

तब वहु .नामा जन्मों मे पूरवंकृत-कमो के फल भोग तेने के पदचात् शुद्ध-पवित्र ) है भुयो केस वृत्तिरयोवाले, तथा (भजैश्रवसः) रजोगुण भ्रौर तमोगुण दारा अजित कीति (वुक्स्य ) उपासक के पाप-वृत्र का (शिरः) सिर ( भरभिनत् )-भ महीयते) पू । । रौर दृन्दरियो को शरीररथ के “हय” भरात् भदवर कहा है । इसलिये मन या

English

Supreme is Indra over all.

अध्याय २०

श्लोक 130.12

प्रदुद्रु॑दो॒ मघा॑प्रति

pradudrudo maghāprati

हिन्दी अर्थ

। चित्त भी अदव है, भौर मन या चित्त की विविध-वृत्तियां “भदवाः” हें । न्निय जलो को ( व्यगाहथाः ) विलोदितं अर्थात् तरंगित किया भौर गर्जवाया 1 (यः) जिस परमेष्वर ने (वृत्रहा) पापवृत्ो का हनन किया,

English

Kapi hath marred the beauteous things, all deftly wrought, that were my joy. In pieces will I rend his head; the sinner’s portion shall be woe. Supreme is Indra over all.

अध्याय २०

श्लोक 130.13

शृङ्ग॑ उत्पन्न

śṛṅga utpanna

हिन्दी अर्थ

३२६ भयवंवेद-भाष्य (कुन्तोप-सूक्त) कार २० । सुऽ. १२९ ये चित्तवृत्तियां शरीर-रथोँ का वंहन करती हैँ । मनुस्मृति मेँ कहा है कि आवना मे (प्राति भर देती हैः प्रातिनन्त्रा पुरणे। हेरि किनका = हरि(मन को हर लेनेवाला परमेदवर) + कनी (दीप्ति

English

No dame hath ampler charms than I, or greater wealth of love’s delights. None with more ardour offers all her beauty to her lord’s embrace. Supreme is Indra over all.

अध्याय २०

श्लोक 130.14

मा त्वा॑भि॒ सखा॑ नो विदन्

mā tvābhi sakhā no vidan

हिन्दी अर्थ

सौन्दर्यं मे मनं या चित्ते भुरव हो जाता है। ७९२८, -इरिक्निके कि्निच्छापि ॥४।॥ ( हरिषिनिके ) हरि की कामनावाली सात्विक-चित्तवृत्ति !. त् भरजमेर) नि के व्यासभाष्य मे शद्धा को,--जो कि सात्विक चितवुं्ि ह,-- जननी. कषा है, जो कि भाता के सदुश .योगी की रक्षा कसती

English

Mother whose love is quickly won,I say what verily will be, My breast, O mother, and my head and both my hips seem quivering Supreme is Indra over all.

अध्याय २०

श्लोक 130.15

व॒शायाः॑ पु॒त्रमा य॑न्ति

vaśāyāḥ putramā yanti

हिन्दी अर्थ

पाति" (योग १।२०)। इसलिये जीवात्मा को था भरभ्यासी को सात्विक ६ चित्तवृत्ति का पुत्र कहा है । , (षरास्यः) जीवात्मा को पराङ्मुख .कर उसे विषयों मे फकनेवाली राजसिक भ्रौर तामसिक चिं्तवृत्तियो ! तुमने ( कद ) -कहां ( भ्राहतम् ) भ्राषात किया है, प्रहार किया दहै? हमने व॑हां आधात भर्थात् प्रहार किया है (य॑त्र) जहां कि अभूः

English

Dame with the lovely hands and arms, with broad hair-plaits and ample hips, Why, O thou hero’s wife, art thou angry with our Vrishākapi?

अध्याय २०

श्लोक 130.16

इरा॑वेदु॒मयं॑ दत

irāvedumayaṃ data

हिन्दी अर्थ

जो किं. (परि) जीवात्मा को घेरे हृए-है, भौर त्रयः.) संख्याम तीन है ।॥८॥ भौर जो ( पृदाकवः.) भ्रजंगर सांप. के सदं जीवात्मा को .मिन्र ८०१ मेके “तिल्लः शिया” को "पृदाकवः काःहै + भवेनाश्रो, काम-वासनामों को उहीप्त कर॑ते हुए. सते ) भासन जमाए

English

Supreme is Indra over all. This noxious creature looks on me as one bereft of hero’s love. Yet heroes for my sons have I, the Maruts’ friend and Indra’s

अध्याय २०

श्लोक 130.17

अथो॑ इ॒यन्निय॒न्निति॑

atho iyanniyanniti

हिन्दी अर्थ

उन्हे विषयो कीश्रोरलेजा रहेहै। - (सः) वह परमेदवर ( इच्छकम् ) सांसारिक इच्छां के वकावर्ती मनुष्य की ( सघाघते ) हिसा करता है, या उसकी उद् मूत द्ये-सकनेवाली आध्यात्मिक शक्तियों पर भरावरण डाल देता है । . . बअन्धनसूप ह, जिनके ारा संसार में फसा व्यक्ति दुःखों को मोगता है,-- शृङ्खला में जकड़ा हृश्रा हिसित होता रहता .है । साथ. ही मसिारिक-

English

Queen Supreme is Indra over all. From olden time the matron goes to feast and general sacrifice.

अध्याय २०

श्लोक 130.18

अथो॑ इ॒यन्निति॑

atho iyanniti

हिन्दी अर्थ

परमेदवर ( गोमीत् इन्द्रियों की चञ्वलताभों का विनाशक है, गोमीत् गो = इन्द्रियां (उणादि कोष २।६७, वैदिक प्रेख.्रजमेर) (पुमान्) है मनुष्य ! तु तो वृद्धिश्षील है, फिर भी (कत) हृति.

English

Mother of heroes, Indra’s Queen, the rite’s ordainer is extolled. Supreme is Indra over all. So have I heard Indrāni called most fortunate among these dames,

अध्याय २०

श्लोक 130.19

अथो॒ श्वा अस्थि॑रो भवन्

atho śvā asthiro bhavan

हिन्दी अर्थ

. है मासि के पुतले को पालनेवाले 1 ( बद् ) है भांसि के पिञ्जर 1 बन्वे हृए ! ( वय इति ) तू तो इस पिञ्जरे मं से उड़ जानेवाले पक्षी के सदृश्च है । पल्प==पललं मांसं पाति पालयतीति । . भवा पल्प ५/० ; ऽी 165॥ एा†. “पल्य पद द्वारा उसका वर्णन है जो किरीर को ही “भ्ात्मस्वरूप'" समता है । उसे चेतावनी.दी गई है कितु इस शरीर से पृथक् है, जो किं वांसनाओं के कारण इस .दारीर मे बन्धा हरां है, प्रौर

English

For never shall her Consort die in future time through length of days. Supreme is Indra over all.

अध्याय २०

श्लोक 130.20

उ॒यं य॒कांश॑लोक॒का

uyaṃ yakāṃśalokakā

हिन्दी अर्थ

वाला घुड़-सवार है, परन्तु (पोरपद्के) गौ के खुर से पिसा.जा रहा है । वारः रोकनेवाला, निवारण करनेवाला । गोापद्यके गो +-शफ है जीवात्मन् (सा) वहं प्रकृति तो (इ्येनीपती = ष्येनीपतिः) नाना- विघरूप-रंगोवाली वेद्या के समान है, जो तुं विमोहित कर रही है ।

English

Wealthy Vrishākapāyi, blest with sons and consorts of thy sons, Indra will eat thy bulls, thy dear oblation that effecteth much.

अध्याय २०

श्लोक 131.1

खिलानि ।आमि॑नोनि॒ति भ॑द्यते

khilāni | āminoniti bhadyate

हिन्दी अर्थ

१।८। १७) मन्त्रं मे “वच्च” का . का० २०.। सू० १३१ अथववेद-माष्य (कुन्ताप-सुक्त) ३३१ रा मद्य (उणादि कोष २।२९ ; +-बेदं विदल लाभे(विद् +-उ उणादि कोषं १।७; बाहुलकात्) +-मयद् =प्रचु राथं ।. दत == दो भवखण्डने; . , (भथ) भौर यह सांपारिकं भोगों की. मदिरा.मे स्थितिवालौ

English

The desert plains and steep descents, how many leagues in length they spread! Go to the nearest houses, go unto thine home, Vrishākapi.

अध्याय २०

श्लोक 131.2

तस्य॑ अनु॒ निभ॑ञ्जनम्

tasya anu nibhañjanam

हिन्दी अर्थ

को जड़ खोद देता ह् । निखातकम् खन् भरवदारणे । (ककंरिकः) जगत् की बार-बार रचना करनेवाला, या जन्म-मरण का बार-बार विधान करनेवाला परमेदवर ही (निखातकः) नितरां भविष्य की जड़-उच्ञेड देता है ।

English

List to Parikshit’s eulogy, the sovran whom all people love, The King who ruleth over all, excelling mortals as a God. 8’Mounting his throne, Parikshit, best of all, hath given us peace and rest,’

अध्याय २०

श्लोक 131.3

वरु॑णो॒ याति॒ वस्व॑भिः

varuṇo yāti vasvabhiḥ

हिन्दी अर्थ

मि) वन वम् ) ह कोई देवीशनित है, जो कि.( हवत् ). कतव्य कमोकी डं है, तो किस प्रकार का० २०। सू° १३२. प्रयवंवेद-भा्य (कुन्ताप-सूक्त) ३३४ (देवी हनत् ) कोई दिव्यशवित डौढी पीटती है, तो ( कृहनत् ) वह कहां पीटती है ? कुहनत् = कुह + हनत् । -

English

Thus the wife asks her husband in the realm which King Parikshit rules. Up as it were to heavenly light springs the ripe corn above the cleft.

अध्याय २०

श्लोक 131.4

श॒तं वा॒ भार॑ती॒ शवः॑

śataṃ vā bhāratī śavaḥ

हिन्दी अर्थ

बीटती रहती हे, भ्रौर बार-बार पीटती रहती हं । वह ईडी हैम अका भ्रौर लज्जाल्पी डौँडी; या सुखदुःख के तारतम्यकी डी बचनेवाने परमेदवर के (च्रीणि) तीन (नामानि) नामदहै। रि ( एके.) करई एक अर्थात् सास्विक-अ्ङति के उपासक कहते ह कि १७ । भर्थात् परमेहवर सब का “हित करता ह, “रमणीय” है, भौर “हृदयो मे रमता हं" वेद मे भी कटा हं किं “हिरण्यरूपः स हिरण्यसंवुक.”

English

Happily thrive the people in the land where King Parikshit reigns. Indra hath waked the bard and said, Rise, wander singing here and there.

अध्याय २०

श्लोक 131.5

श॒तमा॒श्वा हि॑र॒ण्ययाः॑ ।श॒तं र॒थ्या हि॑र॒ण्ययाः॑ ।श॒तं कु॒था हि॑र॒ण्ययाः॑ ।श॒तं नि॒ष्का हि॑र॒ण्ययाः॑

śatamāśvā hiraṇyayāḥ | śataṃ rathyā hiraṇyayāḥ | śataṃ kuthā hiraṇyayāḥ | śataṃ niṣkā hiraṇyayāḥ

हिन्दी अर्थ

. (वा) तथा (ये) जो (दवः) सिशुबुद्धि के लोग 8, वे कते ह किं (द्रौ) उसकेदो नाम ४ ३४० भ्रयवंवेद-माष्य ( कुन्ताप-सूक्त) भथ हं--“न उत्पन्न होनेवाली प्रकृति" लोहित = रजोगुण । शुक्ल

English

Praise me, the strong: each pious man will give thee riches in return, Here, cows! increase and multiply, here ye, O horses, here, O men. Here, with a thousand rich rewards, doth Pūshan also seat him- self.

अध्याय २०

श्लोक 131.6

अह॑ल कुश वर्त्तक

ahala kuśa varttaka

हिन्दी अर्थ

रजोगण का निदेश “शिखण्ड” . पद द्वारा किया गयां है। शिखण्ड का अर्थं है-मोरकी पुछ, जोकि रगनिरंगी होती है! रजोगुणी .ग्यक्ति संसारके -नानाविष रंग-बिरंगो को चाहता है। शिशुबुद्धिवले लोग कहते है कि परमे- र्व्र “नीलवाहन” है. तमोगुणवाले जगत् का वहन करता है; भौर वह “िखण्डवाहन” है, रजोगुणी जंगत् का वहन करता है । तमोगुणी व्यक्ति नेवं ढुमारि तत् तथा यथा मारि मन्य॑से ॥१॥ ( किरणौ ) विकोषक ( दरौ ) दो तत्त्व ( विततौ ) विदोषरूपं मे फले हए है' (तौ) उन दोनों कौ (पूदषः) परम पुरुष परमेदवर (भ्रा पिनष्टि) पृणतया पीसता है, विनष्ट करता है,-- (कुमारि) है कुमारी ! (वै) निश्चय हैकि( तत् ) वह तेराकथन.( न तथा ) तथ्य नहीं ( यथा) जसे किं

English

O Indra, let these cows be safe, their master free from injury. Let not the hostile-hearted or the robber have control of them.

अध्याय २०

श्लोक 131.7

श॒फेन॑ इ॒व ओ॑हते

śaphena iva ohate

हिन्दी अर्थ

(कुमारि मन्यसे) हि कुमारी !. तु मानती है । , किरणो = विक्षेपे बभुः (उणादि कोष २।८२ । रजस् गौरं कर देते है, इस से चित्त योगोपयोगी नहीं रहता । कुमारी मानती हैकिं ईन दोनों विक्षोपक तरवो को परभ पुरुष परमेश्वर ही पीस सकता है, -इन को पीसने के लिये भ्रस्मदादि पुरषो का प्रयत्न सफल नहं हो सकता । इस विचार का परतिषेच मन्त मँ किया है । पूरुषः, देखो--(मन्व्र ८५१) । इसन

English

Oft and again we glorify the hero with our hymn of praise, with prayer, with our auspicious prayer. Take pleasure in the songs we sing: let evil never fall on us.

अध्याय २०

श्लोक 131.8

आय॑ व॒नेन॑ती॒ जनी॑

āya vanenatī janī

हिन्दी अर्थ

“नील पद तंमोगुण का द्योतक है, ्नौर “रिखण्ड पद रजोगुण श्रथववेद-माष्य (कुन्ताप-सूक्त) ३४१ कन्यां को प्रोत्साहित करना चाहिए । यदि कंन्याभों की भभिरुचि ८७२. मातु किरणौ दौ निदः पराके । "न व भारि तत् तथा यथां कुमारि मन्यसे ॥॥२॥

English

Sacrificial formulas The worshipper who pours the juice, for gathering and assembly fit,

अध्याय २०

श्लोक 131.9

वनि॑ष्ठा॒ नाव॑ गृ॒ह्यन्ति॑

vaniṣṭhā nāva gṛhyanti

हिन्दी अर्थ

ये दोनों विक्षेपकं निवृत्त हो जाते है (कुमारि) है कुमारी ! (वं) निद्चय . ६ है कि (तत्) वह तेरा कथनं ( न तथा ) तथ्य नहीं है, ( यथा.) जंसेकि (करुभारि मन्यसे) है कुमारि ! तु मानती है।

English

And yonder foe-destroying Sun,—these have the Gods designed of old. He who defiles a sister, he who willingly would harm a friend, The fool who slights his elder, these, they say, must suffer down. below.

अध्याय २०

श्लोक 131.10

इ॒दं मह्यं॒ मदू॒रिति॑

idaṃ mahyaṃ madūriti

हिन्दी अर्थ

भ्रकृतिवाला हो जाता है.। ८३४. उयं यकांशचलेकका ॥२०॥ . शरौर जो ( भ्रामिनोनिति ). सांसारिक मोगो को त्याग देता है, कहं (भद्यते) कल्याणमय भ्रौर सुखी हो जाता है । सुखे च. ) । भ्रामिनोतिभ्रथवा. “मि” हिसायाम् । षांसारिकं मोमो का

English

Supreme is Indra over all. Turn thee again Vrishākapi; we twain will bring thee happiness. Thou goest homeward on thy way along this path which leads to sleep. Supreme is Indra over

अध्याय २०

श्लोक 131.11

ते वृ॒क्षाः स॒ह ति॑ष्ठति

te vṛkṣāḥ saha tiṣṭhati

हिन्दी अर्थ

३ ३४ भथरववंवेद-माष्य (कून्ताप्-सृक्त) का०. २० । बऽ १३१ (वा) तथा (शतं भारती शवः) भरण-पोषण करनेवाली जगन्भतिा . की सैकड़ों चक्तियां तस्य भनु.यान्ति उसके पीद्ये-पीले चलती है । शत कुथा हिरण्ययाः । श॒ते निप्का हिरण्ययाः ।९॥ रोही; (हिरण्ययाः) सुवणं-विभरुषितं (संतम्) सेकर्डो ( रथ्याः रथवाही

English

all. 309

अध्याय २०

श्लोक 131.12

पाक॑ ब॒लिः

pāka baliḥ

हिन्दी अर्थ

हाथी; (हिरण्ययाः) सुतैणं-निमितं (दतम्) सैकड़ों सि्वके तथा मालाए उन के नामो पर भौर उन की ्मृतियों मेँ उन के भ्रनुयायी .सम्पत्तियां . वारते, भौर शानदार जलूस निकालते हैः। मन्त्र में एेसी ही भावनाभों का

English

When, Indra and Vrishākapi, ye travelled upward to your home, Where was that noisome beast, to whom went it, the beast that troubles man? Supreme is Indra over all.

अध्याय २०

श्लोक 131.13

शक॑ ब॒लिः

śaka baliḥ

हिन्दी अर्थ

(शं तथा पांथिवे मोग मः शयन कयि हृए है व्यक्ति ! : (वत्तंक) भौर तेरे जैसा व्यक्ति तो 7से उखेड दिया जाता है (इव) जैसे कि (शफेन) गौ के खुर के स्पशंमात्र से.खुम्ब उचेड दी जाती है । हे संसारी मनुष्य ! (श्राय ) उपासना मागं की भोर भ्रा, (जनी) अयवेवेद-माष्य (कन्ताप-सूक्त) २३३

English

Daughter of Manu, Parsu bare a score of children at a birth. Her portion verily was bliss although her burthen caused her grief.

अध्याय २०

श्लोक 131.14

अश्व॑त्थ॒ खदि॑रो ध॒वः

aśvattha khadiro dhavaḥ

हिन्दी अर्थ

जगज्जननी ( वनेनती ) श्रद्धापुवंक भक्ति मे नत -हो जाती है, क जातीः है, जसे कि माता चिशु को भपना दूध पिलाने के लि रिदुकी भोर शुक जाती है । वने= वन संभक्तौ 1 यहं धारणा नहीं रखते कि- वनिष्ठाः = वन संभक्तौ । ¦

English

A hymn in praise of the good Government of King Kaurama Listen to this, ye men, a laud of glorious bounty shall be sung. Thousands sixty, and ninety we, O Kaurama, among the

अध्याय २०

श्लोक 131.15

अर॑दुपरम

araduparama

हिन्दी अर्थ

त्पादके तथां भ्रानेन्ददायक है । होकर समाधिस्थ हो जाते है, तब सदगुरु परमेश्वर ( सह ) उन के साथ (तिष्ठति) सदा रहता.है । गओौर वे सद्गुरु परमेदवर के प्रति, कहते हैँ कि (पाक) है परिपाकट्प , ३३६ भथवंवेदभाष्य (कुन्ताप-सूक्त) का० २०। सु १३१

English

Rusamas have received. Camels twice-ten that draw the car, with females by their side, he gave.

अध्याय २०

श्लोक 131.16

शयो॑ ह॒त इ॑व

śayo hata iva

हिन्दी अर्थ

भाप्के प्रति बलिरूप मेँ भेट कर दिया 8 । तदनन्तर सवृगुरुःमानो कहता है उपासक को, किं ( भद्वत्थ ). हे का विना कर लिया है, (धवः) तु धवल भर्थात् परिशदधं सात्विक चित्त- बुत्तिर्योवाला हो चुकां है । भरतः- खदिरः खदति हिनस्त्मीति उणादि कोष १। ५३) ।

English

Fain would the chariot’s top bow down escaping from the stroke of heaven. A hundred chains of gold, ten wreaths, upon thee Rishi he bestowed, And thrice-a-hundred mettled steeds, ten-times-a-thousand cows he gave.

अध्याय २०

श्लोक 131.17

व्याप॒ पूरु॑षः

vyāpa pūruṣaḥ

हिन्दी अर्थ

(अरन्) है समाधि को प्राप्त हृए उपासक ! तु (उपरम) सांसारिक एेसा हो जा. (इव ) जसे कि कोई (शयः) सोया दभ्रा होता है, भौर समाधि का निदश्च किया है । हतः = व्यक्ति जब मर जाता है तब न तो.वह् . है शिष्य ! तु एसा प्रतीत हो रहा ह कि. मानो (पूरुषः) परम पुर्व परमेश्वर, तेरे जीवन मे (व्याप) व्याप्त हो गया है ।

English

Glut thee, O Singer, glut thee like a bird on a ripe-fruited tree. Thy lips and tongue move swiftly like the sharp blades of a pair of shears.

अध्याय २०

श्लोक 131.18

अदू॑हमि॒त्यां पूष॑कम्

adūhamityāṃ pūṣakam

हिन्दी अर्थ

है शिष्य ! -मने (पूषकम्) पुष्टिदायक परमपुरुष परमेदवर ते तुभे का? २०॥ सु० १३२ थ्ववेद-माप्य (मुन्ताप.सूक्त ) - - ३३७ हे शिष्य ! (परस्वतः) परे से भी परे भ्रथति दुर से दुर वस्तुओं का

English

Quickly and willingly like kine forth come the singers and their hymns: Their little maidens are at home, at home they wait upon the cows. O Singer, bring thou forth the hymn that findeth cattle, findeth: wealth.

अध्याय २०

श्लोक 131.19

अत्य॑र्ध॒र्च प॑र॒स्वतः॑

atyardharca parasvataḥ

हिन्दी अर्थ

भर्चंना किया कर, स्तुतियां किया कर । (हस्तिनः) हा्थोवाने मनुष्य के (दौव) दो साधन, जोकि उस जन्म-मरण के बन्धनो को .(दुती) काट देते है । भवसागर से तैरानेवाला .(एककम्) एक ब्रह्म ही है ।

English

Even as an archer aims his shaft address this prayer unto the Gods.

अध्याय २०

श्लोक 131.20

दौव॑ ह॒स्तिनो॑ दृ॒ती

dauva hastino dṛtī

हिन्दी अर्थ

३८ भथवेद-भाष्य (ङनताप-सू्त) का० २० सुऽ १३२ (तव्) बह ब्रह्म (वातः) मानो कंफावात के. सदुश हीकर (उन्मथा- मति) प्रलयकाल के उपस्थिन होने परर-जगत् को मथ डालता ह । करे । वनिषत् = वन् संभक्तौ । ॥ + ६२. क एषां ककरी रिखत् ॥८॥ (कः ) कौन है वह् ( ककं री .) पुनः-यूनः जगत् का कर्ता, जो कि (एषाम्) इन जीवत्माभो के कमो का. (लिखत्) लेखा लिलता है? , (कः) कौन है जो कि (एषाम्) इन जीवात्मा के करतण्याकतं कीं (दुन्दुभिम्) डी (हनत्) पीता ह ? । द ८8४, यदीयं ईनत्. कर्थं इनव्.॥१०॥

English

Saith a Kauravya to his wife as he is ordering his house. 9’Which shall I set before thee, curds, gruel of milk, or barley- brew?’

अध्याय २०

श्लोक 132.1

खिलानि ।आदला॑बुक॒मेक॑कम्

khilāni | ādalābukamekakam

हिन्दी अर्थ

हम सब का पिताहै, रक्षक है । इसलिये रक्षक होने के कारण वहु हमारे रजस् तमस् को पीस डलेगा, ताकि - दुःखों से हमारी रक्षा हो सके । भरौर . मन्व ८७२ मेँ कुमारी का यह् भ्रभिप्राय है कि परमेदवर मातृरूप है । माता करुणामयी होती है, भरतः करुणामयी जगन्माता निज स्वाभाविकं करुणा प्रकट नहीं होनि देते । ते =भरनृते ८७३.. निगद्य कको दौ -निरायच्छमि मध्यमे । नतर कुमारि तत् तथा यथौ कुमारि मन्य॑से ॥६॥ (निरायच्छसि ) नियमन करना मानती है,- (कुमारि) है कुमारी ! (वै)

English

Whenever any good man’s son becometh bold and spirited, Then hath the wise Gandharva said this pleasant upward-point- ing word.

अध्याय २०

श्लोक 132.2

अला॑बुकं॒ निखा॑तकम्

alābukaṃ nikhātakam

हिन्दी अर्थ

मन्व मे कुमारी के दस विचार काभी निराकरणं कियागया है। समग्र सुक्त का भ्रमिप्राय यह है कि राजस ओौर तामस भावनाभ्रों कै निराकरण ददवरभ्रणिधान भ्रादि मुख्य साधन है । इनके परचात् ही उपासक ईदवरीय पाका पात्रं बनता है। भरतः रजसू-तमस् के परामवके लियेये दोनों ह--हदय । पुरुष की लोमवाली छांती के भीतर उस् का हदय होता है । इस हृदयरूपी हद के किनारे र्थात् छाती पर लोमरूपौ घास उगा रहता है । हृदय के मीतर “रक्त” मानो हृद काजल” है । मथवंवेद (१०।२।१ १) मेँ रक्त को “भाषः कहा है, भौर हृदय को “सिन्धु” 1 . . (भरालाक्) है कुटिल चालवालो ! (इह) इस पृथिवी मे (एत्थ ) मामो, जन्म लो। चाहे ( प्रार् ) पृथिवी के पूवंमाग में भराभो, चाहे

English

Kings’ fight, That was a guard for every man: for he is formed to stay disease.

अध्याय २०

श्लोक 132.3

क॒र्क॒रि॒को निखा॑तकः

karkariko nikhātakaḥ

हिन्दी अर्थ

माग में भारो; तुम भ्रपनी कुचालों को हटाने के लिये, ( उद् भरमत्संथ ) . तर्जेना किया करो, डंट-ढपट दिया करो 1 ्रभिम्राय यह है कि मनुष्य के चाल-चलनं पर पृथिवी के प्रदेशा मँ होते है । उन कुचल की निवृत्ति के लिये प्रत्येक को यतवान् होना चाहिय, भौर मनों भ प्रवल विरोधी-मावनार्भं को जागरित करना चाहिए ।

English

Easily conquering Maghavan, thou, Hero, bentest Raji down, Rentest asunder Rauhina, calvest in pieces Vritra’s head. Thou who didst separate the clouds and penetrate the water- floods,

अध्याय २०

श्लोक 132.4

तद्वात॒ उन्म॑थायति॒

tadvāta unmathāyati

हिन्दी अर्थ

६।४५।१ ) विद्ठेषतया विचार-योग्य है । यथा--“परोपेहि मनस्पाप किमशस्तानि शंससि । परेहि न त्वा कामये" । भर्थात् है मानसिक-पाप१ तर परं हट जा, तू क्यो भरभदस्त-विवार्यो की प्रशंसाः करता है1 परेहट जा, , तेरी कामना यै नहीं करंतां- इत्यादि 1. भ्ररालाक् =भरराल = ०५५1१०५, उदक्, भधराक् ) चाहे पृथिवी के पुर्वं आदि किसी भी प्रदेश मे, किसीभी समाग मे गायो, सरवर ( वत्साः ) कच्चे ( पुरषन्तः भ्रासते ) पुरुषं होकर , बच्चे उतमन्न होते है, इन पौर कमं का सम्बन्व किसी विशेष भुभागं क

English

To thee, great slayer of the foe, be glory, Indra, yea, to thee! They said to Auchchaihsravasa running as side-horse of the

अध्याय २०

श्लोक 132.5

कुला॑यं कृणवा॒दिति॑

kulāyaṃ kṛṇavāditi

हिन्दी अर्थ

८७९. इत्य ्रागपारुदगघराग्--्थारीपाको 1 सीते ॥६॥ (स्थालीपाकः) स्थालीपाक (विलीयते). अच्छी प्रकार पकाया.जाता है । . : स्थालीपाकः--च्ाने.के लिये थाली मे रखा पका. भोजन । तरैदिकः

English

Bays, Safely to victory, O Steed, bear Indra with the beauteous wreath. They yoke the white mares, on the Bay’s right harness Auchchai- hsravasa.

अध्याय २०

श्लोक 132.6

उ॒ग्रं व॑नि॒षदा॑ततम्

ugraṃ vaniṣadātatam

हिन्दी अर्थ

होना परत्यावदयके है । . यज्ञकर्म के लिये भी स्थालीपाकः पकाया; जाता है 1 -इस.से मन्त्र मे यज्ञकमो के करने का भी विधानं किया है । “विलीयते".का पिभा)०१9, .19।79 ०५५७ (जापटे) 1 अर्थात् गृहस्थ . को चाहिए किं दः" . आयु के नियत काल में स्थालीपाक भ्रादि क्रियाम का परित्याग कर, वनस्थ या संन्यास धारण कर, कन्दमूल फलो परं जीवन-निर्वाहि करे । .

English

He joyeth as he carrieth Indra the foremost of the Gods. 34. One of them is Hariknikā. Hariknikā, what seekest thou?

अध्याय २०

श्लोक 132.7

न व॑निष॒दना॑ततम्

na vaniṣadanātatam

हिन्दी अर्थ

उदक्, भरषराक्ो जाह एथिवी के प्रवं भादि किसी. मी. भूभाग भ जन्म लो । (सः) .वहे स्थालीपाक (वे) भिषग् से (पु). बहुंमातरा म सर्वत्र (लीयते) शरकाया जाता है स्थानीपाक, देखो मन्व ८७९।. . . , ऋ ५ न समाधि मेँ योगनिद्रा में "शयन" करना ( श्राः भारम्मसेही लाहणि = ला (भरादान, भप्त करना) +हणि हन् = हिसा, त्याग),

English

The excellent, the golden son: where now hast thou aban- doned him? 78. There where around those distant trees, three Sisus that are standing there, 910. Three adders, breathing angrily, are blowing loud the threatening horn.

अध्याय २०

श्लोक 132.8

क ए॑षां॒ कर्क॑री लिखत्

ka eṣāṃ karkarī likhat

हिन्दी अर्थ

से दी वेदो भ तेरे लिये यह मागं निदिष्ट है, अर्थात् गृहस्थकालः भे तथ भगृहस्य काल में तेरे लिये योग का विधान है । यथा-“पत्युरनुब्रता भूत्वा पद द्वारा पत्नी के लिये मोक्ष का विधान किया है ८८२. इत्य भागपागुदं गषरांग्--अदिली पुष्िकीयते । ६।। (आक्, भपाक्, उदक्, अषराक्) चाहे पृथिवी के धुवं .आदि किसी.भूमाग

English

Hither hath come a stallion: he is known by droppings on his way, 1314. As by their dung the course of kine. What wouldst thou in the home of men?

अध्याय २०

श्लोक 132.9

क ए॑षां दु॒न्दुभिं॑ हनत्

ka eṣāṃ dundubhiṃ hanat

हिन्दी अर्थ

दुन्दुभिमाइननाभ्यां जरितरोऽथांमो देव॥१॥ (मुग्.इति) जो भोगी है, वह (प्रभिगतः) भोगो की. भोर जाता है; .. (शल् इति). भोगो से जो भपना संवरण कर लेता है, भरपने प्रापको बचा लेता है वह (भ्रपक्रान्तः) भोगों से पीछे हंट जाता है. भोगों का परित्यागं

English

Barley and ripened rice I seek. On rice and barley hast thou fed, 1718. As the big serpent feeds on sheep. Cow’s hoof and horse’s tail hast thou, 1920. Winged with a falcon’s pinion is that harmless swelling of thy tongue.

अध्याय २०

श्लोक 132.10

यदी॒यं ह॑न॒त्कथं॑ हनत्

yadīyaṃ hanatkathaṃ hanat

हिन्दी अर्थ

. निचय से ( तत् ) वह तेरा कथन या मानना (न तथा ) तथ्य नहीं है, (यथा) जसे कि (कुमारि) है कुमारी ! (मन्यसे) तू मानती है । ॥ कणेकौ = किरणौ (कृ विक्षेपे), किरति विदिपतीति कर्णः (उणादि कोष ३। १०.) । मध्यमे जीवन का मध्यम मागं है-“त्यागपूर्वंक भोग" । ३४२ .. भ्रयववेद-माष्य. ( कुन्ताप-सूक्त) .का० २०। सू° १३३

English

The most unprofitable churl, the wealthy men who brings no. gift, These, verily, as we have heard, are cast away by all the wise.

अध्याय २०

श्लोक 132.11

दे॒वी ह॑न॒त्कुह॑नत्

devī hanatkuhanat

हिन्दी अर्थ

कवत्य-आप्ति । मध्यममागे.के लिये देखो-( योग १।३ ३.) । मध्यमे न व कूभारि तत् वथा यथां कुमारि मन्य॑से ॥४॥ न हे-कुमारी ! ( उत्तानायै ) पीठ पर केटी हई, ( शयानायै ) था नद्रावस्थाके रूप मे, (वा तिष्ठन्ती)या बंटी हई या खेड़ी हुई तु (भवगूहसि) चित्तवृत्तियों का निरोष करती है । (कुमारि ) है कुमारी (वं) निदचय से (तत्) तेरा वह कथने या मानना (न तथा ) तथ्य नहीं है, (यथा) जसे कि तू (कुमारि) है कुमारी ! (मन्यसे) मानती ह ।

English

But they who have adored the Gods, and they who have best- owed their gifts, Those liberal lords are filled with wealth like Sūrya risen up to heaven.

अध्याय २०

श्लोक 132.12

पर्या॑गारं॒ पुनः॑पुनः

paryāgāraṃ punaḥpunaḥ

हिन्दी अर्थ

योगश मँ चित्त की स्थिरता के सिये कई माग दरचाए है । उन तथा “यथाभिमतध्यान” को भी साघन माना है (योग १।३९) । कुमारी स्थिरता के लियेये साषन उपकारी तो हो सकते है, परन्तु राजसिक तथा नामिक वृत्तयो का पूणं निरोध तो .विना ध्यान भौर वैराग्य के

English

With unanointed eyes and limbs, wearing no gem or ring of gold. No priest, no Brāhman’s son is he: these things are ordered in the rules. With well-anointed limbs and eyes, wearing fair gem and golden, ring,

अध्याय २०

श्लोक 132.13

त्रीण्यु॒ष्ट्रस्य॒ नामा॑नि

trīṇyuṣṭrasya nāmāni

हिन्दी अर्थ

क “ध्यान की स्थिति सम्भव ह । इसलिये कुमारी का कथन टीक ८७१, श्टस्णायां इरिणकायां श्वाय गूदपि । नव कमारि तद् तथा यथां इमारि मन्य॑से ॥५॥ सुमारभावो को हौ ( भरवगहसि ) छिपाए रखती है । ( कुमारि ) कुमारी । (वै) निश्वेय से (तत्) वह तेरा कथन या मानना ( न तथा ) ७: (यथा) नैसेकितू ( कुमारि.) है कुमारी ! -मत्यसेः)

English

Good priest is he, the Brāhman’s son; these things are ordered in the rules. Pools with no place for drinking, and the wealthy man who. giveth naught,

अध्याय २०

श्लोक 132.14

हि॒र॒ण्य इत्येके॑ अब्रवीत्

hiraṇya ityeke abravīt

हिन्दी अर्थ

काञ २०। सू° १३३ अथवरत्रेद-माष्य (कुन्ताप-सूक्त) ३४३. कुमारी पुनः परमेइवरोय-मातृशक्ति को युक्तिरूप मेँ उपस्थित केरती है । वह स्याल् करती है कि सांसारिक मातृशक्ति्मे, है परमेदवरीय मातृशक्ति तु ने सुकूमार-भावनाभ्रों का प्रदान किया है; जिनके ढारा उन

English

The pretty girl you may not touch, these things are ordered in: the rules. Pools with good drinking places, and the wealthy man who freely gives, The pretty girl who may be touched, these things are ordered in the rules.

अध्याय २०

श्लोक 132.15

द्वौ वा॑ ये शिशवः

dvau vā ye śiśavaḥ

हिन्दी अर्थ

का दयाद्र -हदय बच्चों के कष्ट-निवारण मे सदा तत्पर रहता है । है परमे- सवर ! श्राप मी जगन्माता ह, तब भ्रापका भी तो हृदय भरपनी सन्तानो के इलक्णिकां = अनुकम्पायां “कः”, ( अष्टा° ५।३।७६ ) । भनुकम्पा दवारा मातृ-दाक्ति की भ्रतिसुकृमारताकाद्योतनकियादहै। नवै मारि तत् तथा यथां कुमारि मन्यसे ॥६॥ इव) सुकुमारता जसौ भावना ( भ्रव भ्रंशत् ) परमेश्वर ने डाल रखी है । (कुमारिः है कूमारी ! (वं) निरचय से (तत्) -वह तेरा कथन (न तथा) तथ्य नहीं है, (यथा ) जैसे किं ( कुमारि) है कुमारी! (मन्यसे) तू

English

The favourite wife neglected, and the man who safely shuns the fight, A sluggish horse whom none may guide, these things are order- ed in the rules.

अध्याय २०

श्लोक 132.16

नील॑शिखण्ड॒वाह॑नः

nīlaśikhaṇḍavāhanaḥ

हिन्दी अर्थ

इव = मन्त्र मेँ उपमा दी गई है। माता कीं सुक्मार-मावना को उपमान मानकर, पिता की सुकूमार-मावना की उपमेय मानकर यहु दर्शाया दहै कि पिता कौं सुकूमार-मावना, म.ताकी सुकूमार-मावना की गया है । पिता की सुकुमार-मावना नियन्त्रण से मिशित-होती है, परन्तु माता की सुकुमार-भावना दया स्नेह भ्रौर त्याग से भिभधित रहती है । कुमारी का विचार है क्रि परमेदवर की "मातृशक्ति की सुकुमार-भावना की १. वेद मेँ परमेश्वर का-माता भौर पिता इनः दोर्नो रूप भ वर्णन हरा है ।

English

The favourite wife most dearly loved, the man who safely goes to war, The fleet steed who obeys the rein, these things are ordered in the rules. When, Indra, thou, as no man could, didst plunge into the Ten

अध्याय २०

श्लोक 133.1

खिलानि ।वित॑तौ किरणौ॒ द्वौ तावा॑ पिनष्टि॒ पूरु॑षः ।न वै॑ कुमारि॒ तत्तथा॒ यथा॑ कुमारि॒ मन्य॑से

khilāni | vitatau kiraṇau dvau tāvā pinaṣṭi pūruṣaḥ | na vai kumāri tattathā yathā kumāri manyase

हिन्दी अर्थ

कृर देता है; (फल् इति) भरौर जो जीवन के फल को प्राप्त करना बाहवा का० २०। सु° १३५ भथववेवेद-माष्य (कुन्ताप-सूक्त) . . ३४७ (जरतः) है वेदो का स्तवन करनेवाले ! (दंव) देवाधिदेव परमेश्वर ! पटने के दण्डो दवारा हम पीटते है, भौर (गोयामः= भरा उथामः) प्रजां कां चत्थान करते हैँ । १ भ नि

English

Who carried off these stores of milk? Who took the dark cow’s milk away? 3, Who took away the white cow’s milk t Who took the black cow’s milk away?

अध्याय २०

श्लोक 133.2

मा॒तुष्टे कि॑रणौ॒ द्वौ निवृ॑त्तः॒ पुरु॑षानृते ।न वै॑ कुमारि॒ तत्तथा॒ यथा॑ कुमारि॒ मन्य॑से

mātuṣṭe kiraṇau dvau nivṛttaḥ puruṣānṛte | na vai kumāri tattathā yathā kumāri manyase

हिन्दी अर्थ

भरव॑रण डाल लेना, ताकि वे मोगीं के धिकार न बनसरके। यह भरावरणं भराग्यन्तरभ्रावरणदहै, जो करि मन पर डाला जाता है, यमःनियम, तप, स्वाध्याय भादि का भ्रावरण । ® हे .देवाधिदेव ! (मंन ५५३) ओप (उत्तमम् जनिम् ) उत्तमं निहित करते है, जसे कि (रजनि = रजन्याम् ) रारि के समय (कीदंबिले)

English

Question this man, Where do I ask? Where, whom that knoweth do I ask? 7, Not to the belly comes the grain. The patient ones are angry now. 9, Undecked with gems, and decked with gems: deity rivalling the Sun.

अध्याय २०

श्लोक 133.3

निगृ॑ह्य॒ कर्ण॑कौ॒ द्वौ निरा॑यच्छसि॒ मध्य॑मे ।न वै॑ कुमारि॒ तत्तथा॒ यथा॑ कुमारि॒ मन्य॑से

nigṛhya karṇakau dvau nirāyacchasi madhyame | na vai kumāri tattathā yathā kumāri manyase

हिन्दी अर्थ

खजजाने के पेट मे ग्रन्थेः ) धन की धेली को ( धानम् ) निधिरूपमे बहो म्र चित्तो ®ो एेसीं सुल मता के साथ निहित कर तेते है, जेसे.किं चलने के. लिये व्यक्ति.(.प्ावम् ) अपने पैर को ( उपानहि ) जूती मे. भासानी से ८८५. अलाूनि पुषात॑कान्यचत्यपठाष् ।: = - . ... (जलानि) जैसे तुम्बे नदी से पार करते है, वैसे है परमेषवर ! .

English

Dapple, Harinikā, and Bay ran forward to the liberal gifts. 13, When the horn’s blast hath sounded forth let not our friend discover thee.

अध्याय २०

श्लोक 133.4

उ॒त्ता॒नायै॒ शया॒नायै॒ तिष्ठ॑न्ती॒ वाव॑ गूहसि ।न वै॑ कमारि॒ तत्तथा॒ यथा॑ कुमारि॒ मन्य॑से

uttānāyai śayānāyai tiṣṭhantī vāva gūhasi | na vai kamāri tattathā yathā kumāri manyase

हिन्दी अर्थ

भ्रोपं मवसागडसे पार.कररते है.। ( प्रष्रातकरानि ) जसे. वायु वर्षा-जल- विन्दु दवारो पृथिवी. को सींचती है, बरसे भाष, भरानम्दरस की. बर मर ह -सींच रहे ह ।. ( भश्कृत्थ पलाशम् ) कालरूपी . भवः पर. पररमेदबरं डे भथववेद-माष्य (कुन्ताप-सुक्त) का० २० ।.सु० १३५ ( पिपीलिकावटक्वसः) वह॒ चीटियोँ के बिर्लो मेँ भी प्राणवायु पहुंबाता है ।

English

Hither to the cow’s son they come. Libation hath rejoiced the God. 311 17, Then cried they. Here he is, and, Here; again the cry was,

अध्याय २०

श्लोक 133.5

श्लक्ष्णा॑यां॒ श्लक्ष्णि॑कायां॒ श्लक्ष्ण॑मे॒वाव॒ गूहसि ।न वै॑ कुमारि॒ तत्तथा॒ यथा॑ कुमारि॒ मन्य॑से

ślakṣṇāyāṃ ślakṣṇikāyāṃ ślakṣṇamevāva gūhasi | na vai kumāri tattathā yathā kumāri manyase

हिन्दी अर्थ

वहं जङ् ह, मूल कारण है । (जरितः) है वेदों का स्तवन करनेवाले ! (हैव). अलाद्रनिं (द ०- मन्त. ०५५; ८५६) पृषातकानि पृषत न्त्पुषु सेचने=जलविन्दु, तथा “पुष्यो मरतोम्ः' ( निव० १११५ ) । दकः = भवत्य भर्व (काल्), यथा--“कालो सह्यो भवति" (भधवं ° १९।६३१

English

Here is he. 19, Then not defective be our steeds! A splinter so diminutive!

अध्याय २०

श्लोक 133.6

अव॑श्लक्ष्ण॒मिव॑ भ्रंशद॒न्तर्लोममति॑ ह्र॒दे।न वै॑ कुमारि॒ तत्तथा॒ यथा॑ कुमारि॒ मन्य॑से

avaślakṣṇamiva bhraṃśadantarlomamati hrade| na vai kumāri tattathā yathā kumāri manyase

हिन्दी अर्थ

१) +-स्थ । पलाशम् =पल1-भर् ( भोजने ).1. इसीलिये परमेरवर को यौ=-इन्धिया भूमि भादि (उणादि कोषः २।६४) । ¦ ८८दे. वीमे देवा अंकस॒ताध्वयो धिर प्रचर । ससत्यंमिद् गवामस्यिं प्रसुदासिं ॥४।

English

Varuna with the Vasus goes: the Wind-God hath a hundred reins. 5, A hundred golden steeds hath he, a hundred chariots wrought of gold. 7, A hundred bits of golden bronze, a hundred golden necklaces.

अध्याय २०

श्लोक 134.1

खिलानि ।इ॒हेत्थ प्रागपा॒गुद॑ग॒धरा॒ग् – अरा॑ला॒गुद॑भर्त्सथ

khilāni | ihettha prāgapāgudagadharāg – arālāgudabhartsatha

हिन्दी अर्थ

(इमे) ये (देवाः) सूयं चन्दर पुथिवी रादि दिव्य लोक-लोकान्तर, विशिष्ट क्रीडा लीलाकररहेरै। सुदं क्रीडायाम् । . ८८७. पत्नी यरइपते पत्नी यक््यमाणा अरितिरोऽथाम हैव । हेता विभ्टीमेन जरित्रोऽथामो हैव ॥५॥ , (जरितः ) है वेदों का स्तवन करनेवाले !, ( हैव ) है देवाधिदेव विवराहे-खंस्कार द्वारा सत्कृत हो रही होती है, ( भ्रा उषामः ) तव हमारा कां० २० ु° १३५ : भरथवेवेद-माष्य ( कुन्ताप-सूक्त) ३४६

English

Lover of Kusa grass, Unploughed! Fat is not reckoned in the hoof. 11, The ladle doth not hold apart the entrails and the clotted blood.

अध्याय २०

श्लोक 134.2

इ॒हेत्थ प्रागपा॒गुद॑ग॒धराग् – व॒त्साः पुरु॑षन्त आसते

ihettha prāgapāgudagadharāg – vatsāḥ puruṣanta āsate

हिन्दी अर्थ

( देव ) है देवाधिदेव्र परमेश्वर !. जब कि ( होता ) विवोह-संस्कारमें पत्नी को स्वीकार कर लेता है, तंमी ( भ्रोथामः = भ्रा उथामः हमारा. . उत्थान होता है, हमारी समून्नति होती है, ।

English

This O Mandūrikā, is mine. Thy trees are standing in a clum , The plain domestic sacrifice, the sacrifice with burning dung. 17, Asvattha, Dhava, Khadira, leaf taken from the Aratu.

अध्याय २०

श्लोक 134.3

इ॒हेत्थ प्रागपा॒गुद॑ग॒धराग् – स्थाली॑पाको॒ वि ली॑यते

ihettha prāgapāgudagadharāg – sthālīpāko vi līyate

हिन्दी अर्थ

संयोगे (अष्टा ०.४।१।१३३)। होता =हु.दाने, भराहुतियां देनेवाला । विष्टी- करनेवाली होगी । पति के. साथ मिलकर विवाह-संस्कार में यज्ञ क्रेशौ निषचंय से ( ताम् ) उस दक्षिणा को (जरितः) है वेदोपदेष्टा परमेष्वेर / प्रशिक्षणं भौर दिष्य के संरक्षणकेरूपमे। -

English

The man pervaded thoroughly lies on the ground as he were slain. 21, The biestings only have they milked: one-and-a half of the wild ass,

अध्याय २०

श्लोक 134.4

इ॒हेत्थ प्रागपा॒गुद॑ग॒धराग् – स वै॑ पृ॒थु ली॑यते

ihettha prāgapāgudagadharāg – sa vai pṛthu līyate

हिन्दी अर्थ

( जरितः.) है वेदोषदेष्ठा परमेद्वर ! जसे ( नः.) हिम् िष्यो की. है, बे (जरितः) है वेदोपदेष्टाः! ( ह उ ) -निरुबय से मः ताम् ) हम नहीं हो सकते, वैसे. ही (यज्ञानेतरसम्) उपासना भ्रादि यन्नो के विना (न. पुरोयवासः) हम् अध्यात्ममागं भे भागे नहीं बढ़ सक्रते ।

English

And two hides of an elephant. 1, Then too the single bottle-gourd, the bottle-gourd dug from the earth, 3, The lute dug up from out the ground: this the wind stirs and agitates.

अध्याय २०

श्लोक 134.5

इ॒हेत्थ प्रागपा॒गुद॑ग॒धराग् – आष्टे॑ लाहणि॒ लीशा॑थी

ihettha prāgapāgudagadharāg – āṣṭe lāhaṇi līśāthī

हिन्दी अर्थ

३५० भयरववेद-माष्य ( कन्ताप-सुक्त) का० २० । चु° १३५ (उत) तथा (षवेतः) शुभ करमोवाला ओर शुभ्र सात्विक वृत्तिर्योवाला करता है, (उत उ) गौर (पद्याभिः) पदयमयी-ऋचामो दवारा, उनके श्रवण- मनन द्वारा (यविष्ठः) योगमागे मे अति वेग प्राप्त कर लेता है । ( उतं ) भौर (भाष) शीघ्र. (ईम् मानम्) योगी होने के इस मान को, सत्कार कौ (वसवः) भ्रौर वसु ब्रह्मचारी भी (ते) है योगिन् ! तेरी ( इदं राघः ) इस योग-सम्पत्ति कां (भनु) अनुकरण करने लगते है । (भङ्किरः) है प्राणायामा-

English

Let him prepare a nest, they say: he shall obtain it strong and stretched. 7, He shall not gain it unspread out. Who among these will touch the lute?

अध्याय २०

श्लोक 134.6

इ॒हेत्थ प्रागपा॒गुद॑ग॒धराग् – अक्ष्लि॑ली॒ पुच्छिली॑यते

ihettha prāgapāgudagadharāg – akṣlilī pucchilīyate

हिन्दी अर्थ

(विसु) विभूतियों से सम्पन्न है, (प्रमु) तथा प्रमुता देनेवाली है । (दं राधः) यहः योग-सम्पत्ति जहत् ) वृदधिकारक भोर ५६१ महाविस्तारी है । ८९९. देवा ददतां तद् बं अस्तु सुचैतनग् 1: , ष्मा अस्तु दिवेदिवे प्येवं शमायत ॥१०॥

English

Who among these will beat the drum? How, if he beat it, will he beat? 11, Where beating will the Goddess beat again again about the house? 13, Three are the names the camel bears, Golden is one of them, he said.

अध्याय २०

श्लोक 135.1

खिलानि ।भुगि॑त्य॒भिग॑तः॒ शलि॑त्य॒पक्रा॑न्तः॒ फलि॑त्य॒भिष्ठि॑तः ।दु॒न्दुभि॑माहनना॒भ्यां जरितरोथा॑मो दै॒व

khilāni | bhugityabhigataḥ śalityapakrāntaḥ phalityabhiṣṭhitaḥ | dundubhimāhananābhyāṃ jaritarothāmo daiva

हिन्दी अर्थ

(वः) नहं योगमागं भँ (सुचेतनम्) सुचेत करनेवाला (रसु ) हो । बह सहित कायं नदीं होते, भरात् दिनौ के. कारोः के.होतेः शान-सम्यन्धी कायं होते है। काऽ २०1 सू० १३५ भथवेवेद-माष्य ( कुन्ताप-सृक्त) ३५१ करते रहो । आसुरम् =असु = (प्राण); भ्रसु = (ज्ञा; निध° ३।९) । क न

English

Glory and power, these are two. He with black tufts of hair shall strike. The Enigmatical Verses

अध्याय २०

श्लोक 135.2

को॒श॒बिले॑ रजनि॒ ग्रन्थे॑र्धा॒नमु॒पानहि॑ पा॒दम्।उत्त॑मां॒ जनि॑मां ज॒न्यानुत्त॑मां जनी॒न्वर्त्म॑न्यात्

kośabile rajani grantherdhānamupānahi pādam| uttamāṃ janimāṃ janyānuttamāṃ janīnvartmanyāt

हिन्दी अर्थ

सांसारिक खान-पान की (प्रह) ही (गा प्रशंसति) पूणंतया प्रशंसा करता, भौर (अनिराम्) सांसारिक खान-पान से विपरीतं भराध्यात्मिक-ततत्वो का , (भरप सेषति) निराकरण करता रहता है । (निघ०.२।७) ; इदा उदक (उणादि कोष व वा कोष २।२९)। भन्न, ंल, मच प्रादि सारि) ॥ । ब ज (यत् ) जो कोई ( हृषु ) नाट नौर ( स्यूलम् ) मोटा दष, ( ४ ) पापकर्मसे विमुख ( भ्स्याः ) इस ए अ ।

English

Here east and west and north and south adheres when touched. That water-drop. Here east and west and north and south in iron mayst thou not be caught. The cup.

अध्याय २०

श्लोक 135.3

अला॑बूनि पृ॒षात॑का॒न्यश्व॑त्थ॒पला॑शम्।पिपी॑लिका॒वट॒श्वसो॑ वि॒द्युत्स्वाप॑र्णश॒फो गोश॒फो जरित॒रोऽथामो॑ दै॒व

alābūni pṛṣātakānyaśvatthapalāśam| pipīlikāvaṭaśvaso vidyutsvāparṇaśapho gośapho jaritaro'thāmo daiva

हिन्दी अर्थ

५ उपातसत् विना करने को उदयत होता है, तो यह शरकेला ही क्या. ‰ से (एजतः) कांप जाते है, ( इव ) जैसे कि ( गोशफं ) गौ के खुर जितने गढ़ भे-पङ़ जल मै (शकुनौ ) दो मछलियां कांपतीं भोर तद़फती रहती है । भहभेद्याः- पापकर्म से जो अपने भाप को छिन्-भिन्नं हई मानती. काऽ ए ॥ सुर १३६ अथर्वैवेद-माष्य (कुन्ताप-सुक्त) ३५३.

English

Here east and west and north and south fain would it clasp what would not clasp. Emmet hole.

अध्याय २०

श्लोक 135.4

वीमे दे॒वा अ॑क्रंस॒ताध्व॒र्यो क्षि॒प्रं प्र॒चर॑ ।सु॒स॒त्यमिद्गवा॑म॒स्यसि॑ प्रखु॒दसि॑

vīme devā akraṃsatādhvaryo kṣipraṃ pracara | susatyamidgavāmasyasi prakhudasi

हिन्दी अर्थ

(उपावधीत्) लगमगं हनन कर देती है, तब ( अस्याः ) इस कमारी केवे अनः मनुष्याः (निघ० २।३)। . ८९८. -यदरिङा स्वण्पि्धा ककैनधकेव् प्ते । . बासंन्तिकामैव तेजने यन्त्य॒बाताय बित्य॑ति ॥६॥

English

Verses called Frustration, Abuse, the Gods’ Offering, and Dazzling Power 312 Bang! here he is. A dog,

अध्याय २०

श्लोक 135.5

प॒त्नी यदृ॑श्यते प॒त्नी यक्ष्य॑माणा जरित॒रोऽथामो॑ दै॒व।हो॒ता वि॑ष्टीमे॒न ज॑रित॒रोऽथामो॑ दै॒व

patnī yadṛśyate patnī yakṣyamāṇā jaritaro'thāmo daiva| hotā viṣṭīmena jaritaro'thāmo daiva

हिन्दी अर्थ

भ्रायुवाली हो,-( ककंन्धूका == ककंन्धूकानि. ) वह. पके.मीठे बेरो के सदृश मधुर स्वभाववाली होती हई भी,--बलात्कार की चेष्टा होने पर ( भरव उस समय, (वासन्तिकम्) वसन्तकाल के (तेजनम् इव ) तेज सथं के सदृश तेज धारण कंरलेती है। गौर तब बलात्कारी पर्ष (अवाताय यन्ति) निष्प्राण हो जाने.की भोर पग बढ़ा रहेहोतेर्है। कक न्धूक--यदरीफल ( उणादि कोष १।९३ . वैदिक यन्तालंय, भ्रवाताय =भ्रथवा राजनियमानुसार वे वायुरहितं कारागार मे जते ह । ८९९. यदू देवासो रुकामगुं प्रविष्टीमिनमाबिषु;ः ।

English

Swish! it is gone. Falling of leaves. Crunch! it is trodden on. A cow’s hoof.

अध्याय २०

श्लोक 135.6

आदि॑त्या ह जरितरङ्गि॑रोभ्यो॒ दक्षि॑णाम॒नय॑न्।तां ह॑ जरितः॒ प्रत्या॑यं॒स्तामु ह॑ जरितः॒ प्रत्या॑यन्

ādityā ha jaritaraṅgirobhyo dakṣiṇāmanayan| tāṃ ha jaritaḥ pratyāyaṃstāmu ha jaritaḥ pratyāyan

हिन्दी अर्थ

३४ भववेद-मषय (कताप-ूकत) का० २०। दू १३६ करते है, तब (नारी) विवाहिता स्त्री ( सकला ) कूलवाली हो गई है . एसा (देदिर्यते) निदिष्ट कर दिया जाता है" यह रेसी सच्चाई है (यथा)

English

These Gods have gone astray. Do thou, Adhvaryu, quickly do thy work. There is good resting for the cows. Take thy delight. O singer, the Ādityas brought rich guerdon to the Angirases.

अध्याय २०

श्लोक 135.7

तां ह॑ जरितर्नः॒ प्रत्य॑गृभ्णं॒स्तामु ह॑ जरितर्नः॒ प्रत्य॑गृभ्णः ।अहा॑नेतरसं न॒ वि चे॒तना॑नि य॒ज्ञानेत॑रसं न॒ पुरो॒गवा॑मः

tāṃ ha jaritarnaḥ pratyagṛbhṇaṃstāmu ha jaritarnaḥ pratyagṛbhṇaḥ | ahānetarasaṃ na vi cetanāni yajñānetarasaṃ na purogavāmaḥ

हिन्दी अर्थ

छर्वितकाननां स्व॑चमदीकं सक्तु पदयम ।।५॥ म सन्दीप्त रहती है, गौर ( मा) मुक पति कै प्रति, ( उ निद्चय से भरस्थान मे, जहां कि. उसे नहीं जाना चाहिए. वहां, चली जाती है । वह भौर अपनी शक्तियों को खाती रहती है, कमजोर करती जाती है,(भ्रचाकम्)

English

Singer, they went not near to it. Singer, they did not take the gift. Singer, they went not near to that; but, singer, they accepted this:

अध्याय २०

श्लोक 135.8

उ॒त श्वेत॒ आशु॑पत्वा उ॒तो पद्या॑भि॒र्यवि॑ष्ठः ।उ॒तेमाशु॒ मानं॑ पिपर्ति

uta śveta āśupatvā uto padyābhiryaviṣṭhaḥ | utemāśu mānaṃ piparti

हिन्दी अर्थ

हठो मे लगी रहती है, चिपकी रहती है । ९०६१. महानग्नयुहललमतिकरामंनतयनवीत् । (महानग्नी ) महा-भपटिता महामूर्खा सत्री, (उलूखलम् ) ऊव के

English

That days may not be indistinct, nor sacrifices leaderless. And quickly Both he fly away, the White Horse swiftest on his feet, And swiftly fills his measure up.

अध्याय २०

श्लोक 135.9

आदि॑त्या रु॒द्रा वस॑व॒स्त्वेनु॑ त इ॒दं राधः॒ प्रति॑ गृभ्णीह्यङ्गिरः ।इ॒दं राधो॑ वि॒भु प्रभु॑ इ॒दं राधो॑ बृ॒हत्पृथु॑

ādityā rudrā vasavastvenu ta idaṃ rādhaḥ prati gṛbhṇīhyaṅgiraḥ | idaṃ rādho vibhu prabhu idaṃ rādho bṛhatpṛthu

हिन्दी अर्थ

हे लकड़ी के बने ऊखल. ! (यथा) -जैसे (तव) तेरी, (निरघ्नन्ति) मुसली द्वारा निरन्तर पिटाई करते ह, (तथव इति) वैसी ही पिटाई मुफपरमभी का० २०। सू १३६ श्रथवंवेद-माष्य (कुन्ताप-सूक्त) ३५५ . : महानग्नी ) महा-भपठिता स्त्री ( उपब्रूते ) .उखल के समीप जाकर कहती है कि है ऊखल !. ( अथापि ) बार-बार पीटा जाकर तू बने ऊखल ! (यथेव) जेसी ही (ते) तेरो ( पिषप्पति ) गति हो रही दहै, (तथव इति) वैसी ही गतिमेरी भी होती जांःरहीहै।

English

Ādityas, Rudras, Vasus, all pay worship unto thee. Accept this liberal gift, O Angiras, This bounty excellent and rich, this ample bounty spreading far.

अध्याय २०

श्लोक 135.10

देवा॑ दद॒त्वासु॑रं॒ तद्वो॑ अस्तु॒ सुचे॑तनम्।युष्मां॑ अस्तु॒ दिवे॑दिवे प्र॒त्येव॑ गृभायत्

devā dadatvāsuraṃ tadvo astu sucetanam| yuṣmāṃ astu divedive pratyeva gṛbhāyat

हिन्दी अर्थ

बिप॑य सुवते वैसुबतिं दुरभवसे बंद ॥११।॥ , अवंराविदया के गुरुभ्रों से, (दामंरिणा) सुखदायी मागं द्वारा हमे . (हव्यम्) पहले श्रवण-भनभ से रहित था, परन्तु जो भरव ( विप्राय ) मेधावी बनकर ( स्तुवते ) भर्पेकी स्मुतियां करने लगा है, उसके लिये भी ( वसुवनिम्

English

Two rays of light are lengthened out, and the man gently touches them with the two beatings on the drum. Maiden, it truly is not so as thou, O maiden, fanciest.

अध्याय २०

श्लोक 135.11

त्वमि॑न्द्र श॒र्मरि॑णा ह॒व्यं पारा॑वतेभ्यः ।विप्रा॑य स्तुव॒ते व॑सु॒वनिं॑ दुरश्रव॒से व॑ह

tvamindra śarmariṇā havyaṃ pārāvatebhyaḥ | viprāya stuvate vasuvaniṃ duraśravase vaha

हिन्दी अर्थ

शमंरिणा =र्मरिणा+-भ्रा +-वह । श्मरिणा से “भरा” का छेद होकर “वह्” के साथ भ्रन्वित होता है । हए, (वञ्चते) भौर सव॑ विचरते हृए यायावर, (अस्मै) इस. धन्यासी .के भ्रारष्य चावल, (च) भौर (पक्वं षीलु) पके पीलु फलं, भौर (वाः) जल . (बः) बहत माता मँ (कृणोः) कर दिया है ।. -

English

Two are thy mother’s rays of light: the skin is guarded from the man. The Ajijnasenya Verses

अध्याय २०

श्लोक 135.12

त्वमि॑न्द्र क॒पोता॑य च्छिन्नप॒क्षाय॒ वञ्च॑ते ।श्यामा॑कं प॒क्वं पीलु॑ च॒ वार॑स्मा॒ अकृ॑णोर्ब॒हुः

tvamindra kapotāya cchinnapakṣāya vañcate | śyāmākaṃ pakvaṃ pīlu ca vārasmā akṛṇorbahuḥ

हिन्दी अर्थ

“भवसागर सेः पारः करनेवाले" ““परवतेम्यः"" भवत सदु कूप सदृक्ष गम्भीर गर ३१२ .. ,. भरयववेद-माष्य (कुन्ताप-सूकत) का० २० सू १३६ „. , जसे बैतसीवृत्ति भरौर वकवृत्ि भादि वृत्तियां है, वसे ही कोतवृत्त

English

Here are we sitting east and west and north and south, with waters. Bottle-gourd vessels. Here east and west and north and south sit the calves sprinkling Curds and oil.

अध्याय २०

श्लोक 135.13

अ॒रं॒ग॒रो वा॑वदीति त्रे॒धा ब॒द्धो व॑र॒त्रया॑ ।इरा॑मह॒ प्रशं॑स॒त्यनि॑रा॒मप॑ सेधति

araṃgaro vāvadīti tredhā baddho varatrayā | irāmaha praśaṃsatyanirāmapa sedhati

हिन्दी अर्थ

भी है, जिस का भाश्नय संन्यासियां को लेना चाहिए । वतमान समय मेँ “कपोतः शान्तिसुचक माना जाता है । ष + करामह पर्चसत्यनिरामप॑ं सेधति ॥१३॥ परन्तु संसारी मनुष्य, (भरगरः) जो कि सांसारिक-भोगों „ के विषों दुःखो मे या स्थूल सूक्ष्मं भौर कारण शरीरो मे (वदः ) .बन्धा हुमा है, वहू (वावदीति) सांसारिक-मोगों की ही बार-बार चर्चा करता है, तथा (इराम्)

English

Here east and west and north and south the offering of rice clings on. The leaf of the Asvattha tree.

अध्याय २०

श्लोक 136.1

खिलानि ।यद॑स्या अंहु॒भेद्याः॑ कृ॒धु स्थू॒लमु॒पात॑सत्।मु॒ष्काविद॑स्या एज॒तो गो॑श॒फे श॑कु॒लावि॑व

khilāni | yadasyā aṃhubhedyāḥ kṛdhu sthūlamupātasat| muṣkāvidasyā ejato gośaphe śakulāviva

हिन्दी अर्थ

जाकर. कहती है कि है ऊखल । ,-(-यथा ) जसे ( वयः ) पणं भ्रायु को जला दिया जाता है, - वैस ही (अथ पि) बार-बार कूटा-पीटा जाकरतू व्यक्ति का स्वर्गेवास हो गया है।

English

The Gods shall give the precious boon: let it be pleasant to your hearts. Let it be with you every day: accept our offerings in return. Vouchsafe us shelter, Indra, thou to be invoked from far away.

अध्याय २०

श्लोक 136.2

यदा॑ स्थू॒लेन॒ पस॑साणौ मु॒ष्का उपा॑वधीत्।विष्व॑ञ्चा व॒स्या वर्ध॑तः॒ सिक॑तास्वेव॒ गर्द॑भौ

yadā sthūlena pasasāṇau muṣkā upāvadhīt| viṣvañcā vasyā vardhataḥ sikatāsveva gardabhau

हिन्दी अर्थ

पति भी पत्नी का उद्धार उसके कष्टों में अवदय किया करे । श्र .कायुकीस्ती केदुगुणो का वर्णेन भा है। शुदम् =भागु+द १ शिरिम्बिटिः; २ बधः; ३ वामदेवः;.४-६ ययातिः; ७-११ तिरश्च

English

permolit). Arnica eum alloquitur: Tum etiam tu defecisti. Ut tua. Arbor! (verbera) Pinsunt, sic etiam nunc (me permole).

अध्याय २०

श्लोक 136.3

यदल्पि॑का॒स्वऽल्पिका॒ कर्क॑धू॒केव॒षद्य॑ते ।वास॑न्ति॒कमि॑व॒ तेज॑नं॒ यन्त्य॒वाता॑य॒ वित्प॑ति

yadalpikāsva'lpikā karkadhūkevaṣadyate | vāsantikamiva tejanaṃ yantyavātāya vitpati

हिन्दी अर्थ

देवाः; ३ दधिक्राः; ४-६ पवमानः सोमः; ७-१४ इनदरः तथा पवमानः सोमः 1 ९१९. यद्ध पराचीरजगन्तनोरो मण्डूरषाणिकीः । - (मण्डूरधाणिकीः) खनिज-लोहे की निधियां अर्थात् खाने, (यत् इ जोकि ˆ व ) पृथिवी की छाती मे, (प्राचीः ) । पूवं ध ह, भौर वे (स्वे) सव शत्रु (बुद्बुदयाशवः) पानी कै बुलबुलों के सदृश शीघ्र

English

Arnica eum alloquitur: Tum etiam tu defceisti. Ut silvae ignis. inflammatur, sic ardent mea membra.

अध्याय २०

श्लोक 136.4

यद्दे॒वासो॑ ललामगुं॒ प्रवि॑ष्टी॒मिन॑माविषुः ।स॒कु॒ला दे॑दिश्यते॒ नारी॑ स॒त्यस्या॑क्षि॒भुवो॑ यथा

yaddevāso lalāmaguṃ praviṣṭīminamāviṣuḥ | sakulā dediśyate nārī satyasyākṣibhuvo yathā

हिन्दी अर्थ

गृहस्थ कै-कणष्टों को दर करताः है । (महतः) गृहस्थ मे बड़ेकोही.( साधु) सूयं उदित होता रहता है । उत्तरायणे भौर दक्षिणायन तक फली भू-पेदी मे खनिज-लोहे की खाने प्रायः होती ह यह अभिप्राय यहां -प्रतीत. होता है । उरी = उरस् = उरांस; भर्थात् खनिज-लोहे की खाने न तो बहुत गहरी होती है श्रौरन पृथिवी के बाहरी स्तरे, भ्रपितु पृथिवीकी छातीरमे होती है । बुद्बुदयाद्वः बुद्बुद +-या-+ बाचु । . (कपृन्नरः) सुखो की पूत्ति करनेवाले है राष्टूनेताभो ! ( कपुथम् ).

English

Arnica eum alloquitur: Fauste infixus est penis; arboris fructu celeriter fruamur. Arnica cum fuste gallum circumcurrit. Nos nescimus quae bestia pudendum muliebre in capite gerat.

अध्याय २०

श्लोक 136.5

म॒हा॒न॒ग्न्यतृप्नद्वि॒ मोक्र॑द॒दस्था॑नासरन्।शक्ति॑का॒नना स्व॑च॒मश॑कं सक्तु॒ पद्य॑म

mahānagnyatṛpnadvi mokradadasthānāsaran| śaktikānanā svacamaśakaṃ saktu padyama

हिन्दी अर्थ

ऊ चे सिंहासन पर बिठाश्रो, (चोदयंत) भौर उसे राष्टर-रक्षा के लिये प्रेरित करो 1 (वाजसातये) राष्ट्रिय बल की प्राप्तिं के लिये ( खुदत ) खानों को उन्नति में कोई बाधा उपस्थित हो जाय, तब ( इह ) इस निमित्त (सोभ- रथं कोई निदिचत नहीं, प्रकरणानुसार भ्रथं “खोदना” प्रतीत्न होता है

English

Arnica post currentem amatorem currit: Has ejus boves custodi tu. Me futue: coctam oryzam ede.

अध्याय २०

श्लोक 136.6

म॒हा॒न॒ग्न्युलूखलमति॒क्राम॑न्त्यब्रवीत्।यथा॒ तव॑ वनस्पते॒ निर॑घ्नन्ति॒ तथै॑वति

mahānagnyulūkhalamatikrāmantyabravīt| yathā tava vanaspate niraghnanti tathaivati

हिन्दी अर्थ

को (जिष्णोः) जीत्तकर स्वाधिकार में करनेवाले, ( वाजिनः ) बलक्षाली भाषण तथा प्रियभाषण की रिक्षा देकर (नः) हमारे ( मुखा ) मुखो को , (खरम) सुरभित भर्थात् सुवासित (करत्). करे, भरौर (नः) हमारी(भायू षि) -भआयुग्रों करो (प्र तारिषत्) बढाए । तदथं परमेदवर की भक्तिपूंक उपासना करनी चाहिए, ताकि - भानुष-

English

Fortunatus, Arnica, te opprimit. Bona est magni viri fututio, Macrum pinguis. femina obtineat. Futue me, etc. Sine digito mulcta vacca vanankaram producit, Magna et bona est Aegle Marmelos. Futue

अध्याय २०

श्लोक 136.7

म॒हा॒न॒ग्न्युप॑ ब्रूते भ्र॒ष्टोथाप्य॑भूभुवः ।यथै॒व ते॑ वनस्पते॒ पिप्प॑ति॒ तथै॑वति

mahānagnyupa brūte bhraṣṭothāpyabhūbhuvaḥ | yathaiva te vanaspate pippati tathaivati

हिन्दी अर्थ

९१६. शन्दुरिनदरांय पवत॒ इतिं देवासो अनुबन् । मानो हैनिकं गतियां कर रहा. है, (इति) यह तथ्य, (देवासः) दिव्य व्यक्ति काऽ २०। सू १३७ अथवेवेद-माष्य ३६१ म्राध्यात्मिक-विभूति्यो का (पतिः) पति है" ओर ( दिवेदिवे ) दिन-प्रति-

English

me, etc. Infelix, Amice, te opprimit. Bona est magni viri fututio. Flava puollula, opere suo perfecto,

अध्याय २०

श्लोक 136.8

म॒हा॒न॒ग्न्युप॑ ब्रूते भ्र॒ष्टोथाप्य॑भूभुवः ।यथा॑ वयो॒ विदाह्य॑ स्व॒र्गे न॒मवद॑ह्यते

mahānagnyupa brūte bhraṣṭothāpyabhūbhuvaḥ | yathā vayo vidāhya svarge namavadahyate

हिन्दी अर्थ

(कृष्णः) काला तमोगुण, (दरभिः सहल : ) हेजारों काले कर्मो के हई, दूध को स्वानुरूप कर देती है । तब ( धमन्तम् ) भपने काले कर्मौँ के साथ साप-सदृश फूकारते हए (तम्) उस काले तमोगुण को, ( इन्द्रः ) हिस चित्तवुत्ति्यो को, (भप भ्रवत्त) दुर कर देता है ।

English

procurrit. Magna certe et bona est Aegle Marmelos. Bona est magna

अध्याय २०

श्लोक 136.9

म॒हा॒न॒ग्न्युप॑ ब्रूते स्वसा॒वेशि॑तं॒ पसः॑ ।इ॒त्थं फल॑स्य॒ वृक्ष॑स्य॒ शूर्पे॑ शूर्पं॒ भजे॑महि

mahānagnyupa brūte svasāveśitaṃ pasaḥ | itthaṃ phalasya vṛkṣasya śūrpe śūrpaṃ bhajemahi

हिन्दी अर्थ

८०४) 1 स्नेहितीः न्=स्मेहति वधकर्मा (निष० २।१९) । . , ३६२ „ भथवंवेद-भाष्य - का० २० । सु० १३७ वतमान काले तमोगुण को, (अपदयम्) जै परमेदवर ने देख लिया है, जो हों गया है । (वृषणः)हे भक्तिरस की वर्षा करनेवाले शक्तिशाली उपासको!

English

Ficus Glomerata. Magnus vir ubique opprimit. Bona est magni viri fututio. Quem macrum factum puella flava pinguisque capiat sicut pollicem ex olei cado fossorem

अध्याय २०

श्लोक 136.10

म॒हा॒न॒ग्नी कृ॑कवाकं॒ शम्य॑या॒ परि॑ धावति ।अ॒यं न वि॒द्म यो॑ मृ॒गः शी॒र्ष्णा ह॑रति॒ धाणि॑काम्

mahānagnī kṛkavākaṃ śamyayā pari dhāvati | ayaṃ na vidma yo mṛgaḥ śīrṣṇā harati dhāṇikām

हिन्दी अर्थ

(महानग्नी) महा-अपरठिता पत्नी (उषत्रूते) पति.को कहती है किः (मसौ) वह् है पति.! तूने गृह्णजीवन मे ( पसः ) कलह द्वारा विनाशं (सु गये ( फलस्य ) फलखूप में प्राप्त अनाज को, ( यूपं ) छाज मे रखकर, भ्मपना हिस्सा ब्रां लेते है। । अयन निग्न यों मृग. शीर्णा हरति षाणिकाम् ॥१०॥

English

Bring treasure hither to reward the far-famed bard who praises thee. Thou, Indra, to the trembling dove whose pinions had been rent and torn.

अध्याय २०

श्लोक 136.11

म॒हा॒न॒ग्नी म॑हान॒ग्नं धाव॑न्त॒मनु॑ धावति ।इ॒मास्तद॑स्य॒ गा र॑क्ष॒ यभ॒ माम॑द्ध्यौद॒नम्

mahānagnī mahānagnaṃ dhāvantamanu dhāvati | imāstadasya gā rakṣa yabha māmaddhyaudanam

हिन्दी अर्थ

६ भवववेद-माष्य (कुन्तापःपुक्त) का० २० ।सू० १३६ वाले पति की भ्रोर, (शम्यया) उसे शान्तं करनेवाली लाठी लेकर, (परि (इमाः गाः) इन + ८ १ (तद्) सो भस्य ) इस क गृहस्यधमं का ती + शाव । म न पालन कर, भौर खुशी से (भोदनम्) भात (भ्रा पिय ९०७. सुदेवस्त्ा मदान्राषत +

English

Gayest ripe grain and Pilu fruit, gavest him water when athirst. The ready praiser loudly speaks though fastened triply with a strap. Yea, he commends the freshening draught, deprecates languor of disease.

अध्याय २०

श्लोक 136.12

सुदे॑वस्त्वा म॒हान॑ग्नी॒र्बबा॑धते मह॒तः सा॑धु खो॒दन॑म्।कु॒सं पीव॒रो न॑वत्

sudevastvā mahānagnīrbabādhate mahataḥ sādhu khodanam| kusaṃ pīvaro navat

हिन्दी अर्थ

पति कहता कि हेपली ! ( सुदेवः ) . ४ सुदेवः ) शरेष्ठ परमेश्वर-देव कठोर कमं से रोक सकता है। ( महतः मै जो क बड़ा हृ उस की (साघु खोदनम्). काफी पिसाई हुई है,- दस प्रकार कहता प्रशंसा करने लग 4 भति, कुम् ) बड़बमकु पत्नी की ( नवत् ).

English

Erotica Si quis in hujus tenui rima praeditae feminae augustias fascinum intromittit, vaccae

अध्याय २०

श्लोक 136.13

व॒शा द॒ग्धामि॑माङ्गु॒रिं प्रसृ॑जतो॒ग्रतं॑ परे ।म॒हान्वै भ॒द्रो यभ॒ माम॑द्ध्यौद॒नम्

vaśā dagdhāmimāṅguriṃ prasṛjatogrataṃ pare | mahānvai bhadro yabha māmaddhyaudanam

हिन्दी अर्थ

, कार कान १०। दुर १३१ मन दमानक ,------- ०। सू १३६ भथर्ववेद-माष्य (कुन्ताप-सूक्त) , निदचय से, (भद्रः) भद्र व्यवहारोवाला ' होना. चाहिए इस पत्नी को, (प्र सृजत) तुम घरवाले छोड़ दो, इमेतंगन करो । (वला)

English

ungularum et Sakula. rum pisci- um more pudenda ejus agitantur. Quum magno pene parvula ejus pudenda vir percutit, huc et illuc ilia increscunt veluti duo asini in solo arenoso.

अध्याय २०

श्लोक 136.14

विदे॑वस्त्वा म॒हान॑ग्नी॒र्विबा॑धते मह॑तः सा॑धु खो॒दन॑म्।कु॒मा॒री॒का पि॑ङ्गलि॒का कार्द॒ भस्मा॑ कु॒ धाव॑ति

videvastvā mahānagnīrvibādhate mahataḥ sādhu khodanam| kumārīkā piṅgalikā kārda bhasmā ku dhāvati

हिन्दी अर्थ

यह तो सदा तुम्हारे वर मेँ है । क्योंकि ( महान् ) धरम बडेको, (व) हिये । पत्नी शुच हौकर कहने लगती है कि है पति! (मां यभोमेरे स तको (भ्रा भद्ध) प्रसन्नतापूवक भनौर मु द्वारा (भ्रोदनम्) पकाए गए मा कुमारिका पिज्ञलिका काद मस्म कु घाति .॥1१४॥

English

Quum parvum, admodum parvum, Ziziphi Jujubae quasi granum in eam incidit, ventris ejus partes interiores, velut verno tempore arundo, extentae videntur.

अध्याय २०

श्लोक 136.15

म॒हान्वै भ॒द्रो बि॒ल्वो म॒हान्भ॑द्र उदु॒म्बरः॑ ।म॒हां अ॑भि॒क्त बा॑धते मह॒तः सा॑धु खो॒दन॑म्

mahānvai bhadro bilvo mahānbhadra udumbaraḥ | mahāṃ abhikta bādhate mahataḥ sādhu khodanam

हिन्दी अर्थ

पत्नियों को, ( महतः साघु खोदनम् ) चर कर बड़ कीकटोरवाणी द्वार पिसाई से (विदेवः) कोई विशेषं देव ही ( वि बाघते ). हटायेगा । देख, (कुमारिका) कुत्सित कामवासनावाली, भ्रौर इसलिये ( पिङ्गलिका ) सवृश्च (क धावति) धरा-शायी हो जाती है, भ्रथवा उस की कुत्सित-गति पि.के प्रति न्य लोग . (परे, ६०८) कहते ह कि (महान्). गृहस्थ- , जीवन में जो बहा होता है, वह (वै) निश्चय से, ( बिल्वः) बिल्व के संदा (भद्रः) कल्याणकारी भौर सुखदाय होता है, (महान् ) गृहस्य मबड़ाहीं - (उदुम्बरः) गूलर के सदृश (भद्रः) कल्याणकारी भौर सुखदायी होता द 1

English

Si Dii mentulae intumescenti faverunt, cum femoribus suis se: ostentat femina tanquam vero testi. Magnopere delectata est arnica: ut equns solutus adveniens vocem edidit: Vaginam juvenis!

अध्याय २०

श्लोक 136.16

यः कु॑मा॒री पि॑ङ्गलि॒का वस॑न्तं पीव॒री ल॑भेत्।तैल॑कुण्ड॒मिमा॑ङ्गु॒ष्ठं रोद॑न्तं शुद॒मुद्ध॑रेत्

yaḥ kumārī piṅgalikā vasantaṃ pīvarī labhet| tailakuṇḍamimāṅguṣṭhaṃ rodantaṃ śudamuddharet

हिन्दी अर्थ

भच्छे प्रकार से (खोदनम्) कमाई आदि कामों मे पिसना होता है । - ९११. यः इमारी पिङ्गलिका वसन्तं पीवरी लंमेत् । . , (पिङ्गलिका) पीली णड़ी हृईः (पोवरी) मोटी (कुमारी) कुमारी, पत्नी भवश्य करे । (यः) इसी प्रकार जो प्रति;- पील। पड़ी, मोरी, नारी,

English

pene percute: medium. femur paratum est. Arnica, pilam superans, dixit: Ut tua, Arbor, ! (verbera) pinsunt, sic etiam nunc (hic me

अध्याय २०

श्लोक 137.1

यद्ध॒ प्राची॒रज॑ग॒न्तोरो॑ मण्डूरधाणिकीः ।ह॒ता इन्द्र॑स्य॒ शत्र॑वः॒ सर्वे॑ बुद्बु॒दया॑शवः

yaddha prācīrajagantoro maṇḍūradhāṇikīḥ | hatā indrasya śatravaḥ sarve budbudayāśavaḥ

हिन्दी अर्थ

(वः इष्यामि) यै परमेश्वर तुम्हें चाहता हूं, कि तुम (भ्राजौ ) इस देवासुर- चित्त का वर्णन योग-माष्य मेँ नदी रूप में भी हृ है । यथा- “चित्तनदी नामं उभयतो वाहिनी । बहति कल्याणाय वहति पापाय चः

English

ilium extrahat. A composite hymn in praise of Indra When, foul with secret spot and stain, ye hastened onward to the breast.

अध्याय २०

श्लोक 137.2

कपृ॑न्नरः कपृ॒थमुद्द॑धातन चो॒दय॑त खु॒दत॒ वाज॑सातये ।नि॒ष्टि॒ग्र्यः पु॒त्रमा च्या॑वयो॒तय॒ इन्द्रं॑ स॒बाध॑ इ॒ह सोम॑पीतये

kapṛnnaraḥ kapṛthamuddadhātana codayata khudata vājasātaye | niṣṭigryaḥ putramā cyāvayotaya indraṃ sabādha iha somapītaye

हिन्दी अर्थ

-का वहन कर रहा है । (ऋष्वः) वह् महान् है, ( भरस्तृतः) अविनाशी है । (यः इन्द्रः) जो परमेवर (्रोजसा) निज ओज कै कारण (महान्) (स्तोमैः) स्तुतिगानों द्वारा (वावुषे) उपासकं की वृद्धि वी

English

Indra with might longed for it as it panted: the hero-hearted laid aside his weapons. I saw the drop in the far distance moving, on the slope bank of Ansumati’s river,

अध्याय २०

श्लोक 137.3

द॒धि॒क्राव्णो॑ अकारिषं जि॒ष्णोरश्व॑स्य वा॒जिनः॑ ।सु॒र॒भि नो॒ मुखा॑ कर॒त्प्र ण॒ आयूं॑षि तारिषत्

dadhikrāvṇo akāriṣaṃ jiṣṇoraśvasya vājinaḥ | surabhi no mukhā karatpra ṇa āyūṃṣi tāriṣat

हिन्दी अर्थ

(बह्नयः) उपासना-यज्ञ कीं बुरा का वहन करनेवाे उपासक-नेत, ( यद् ) नब ( पिप्रतः ) जीवनपालकं भौर ज्रीवनो को पू्णं बननिवाले, का० २० 1 सू० १३६९ अथववेद -भाष्य ३६५ भरन्त) भ्रपने जीवनीं मे प्रकरषंरूप मे वहन करने लगते है, तब ( विप्राः वे मेधावी उपासक, (सत्यस्य ) सत्य-नियमों के भी ( वाहसा ) वाहक हो जाते है । भ्रभिप्राय यह किं जिनके जीवनो मै परमेदवर मार्गदशंकहो. जाता है, उन के जीवन सत्यमय हो जाते हैँ । पिप्रतः = प पालनपूरणयोः। साधक परभेदवर को, (यत्) जब (स्तोमः) स्तुतिगानों दवारा, (अक्रत) अपना बना लेते ह,.तब वे ( ब्रवत) कहते ह कि ( भ्रायुधम् ) कामादि-शतरुभरों के विना के लिये अन्य उपाय (जामि) व्यथं है । न

English

Like a black cloud that sank into the water. Heroes. I send you forth. Go, fight in battle. And then the drop in Ansumati’s bosom, splendid with light, assumed its proper body;

अध्याय २०

श्लोक 137.4

सु॒तासो॒ मधु॑मत्तमाः॒ सोमा॒ इन्द्रा॑य म॒न्दिनः॑ ।प॒वित्र॑वन्तो अक्षरन्दे॒वान्ग॑च्छ॑न्तु वो॒ मदाः॑

sutāso madhumattamāḥ somā indrāya mandinaḥ | pavitravanto akṣarandevāngacchantu vo madāḥ

हिन्दी अर्थ

१-५ क्षशकर्णंः । िवनौ । १, ४ बहती; २,३ गायत्री; ४ ककुप् । ९९९. आ नूनमंशचिना युवं व॒त्सस्य॑ गन्तम्से । (अदिवना) है नगराधिपति ! तथा है सेनाधिपति ! ( युवम् ) व्यवस्था करो, जो गृह. कि ( पृथु ) बड़े-बड़े हों, तथा (अवृकम्) जिन प्र

English

And Indra with Brihaspati to aid him, conquered the godless tribes that came against him. Then, at thy birth, thou wast the foeman, Indra, of those the seven who ne’er had met a rival. The hidden pair, the heaven and earth, thou foundest, and to the mighty worlds thou gavest

अध्याय २०

श्लोक 137.5

इन्दु॒रिन्द्रा॑य पवत॒ इति॑ दे॒वासो॑ अब्रुवन्।वा॒चस्पति॑र्मखस्यते॒ विश्व॒स्येशा॑न॒ ओज॑सा

indurindrāya pavata iti devāso abruvan| vācaspatirmakhasyate viśvasyeśāna ojasā

हिन्दी अर्थ

शतु है, उन्हे (युयुतम्) र्ट से पृथक् कर दयाकरो । १. घनौ के सम्बन्ध मे देलो-दिम्यणी, मन्त ९१८ । . ३६६ भरथवेवेद-माष्य का० २०1 सु १३६ ( भ्रषिविना ) है अदिवयो ! ( ये विप्रासः ) जो मेधावी मन्त्रीगण,

English

pleasure. So, Thunder-armed! thou with thy bolt of thunder didst boldly smite that power which none

अध्याय २०

श्लोक 137.6

स॒हस्र॑धारः पवते समु॒द्रो वा॑चमीङ्ख॒यः ।सोमः॒ पती॑ रयी॒णां सखेन्द्र॑स्य दि॒वेदि॑वे

sahasradhāraḥ pavate samudro vācamīṅkhayaḥ | somaḥ patī rayīṇāṃ sakhendrasya divedive

हिन्दी अर्थ

इन मेधावियों दवारा शासित प्रजाजन को. ( बोधतम् ) श्रवगत करा दिया करो । विप्राः=मेधाविनेः ( निघ० ३।१५ ) । कण्वः--मेधावौ ( निघ् ३।१५) । काण्व ==मेधावियो द्वारा शासित प्रजाजन । (अद्वरिना) है भ्रदिवयो (वाम्) आप दोनों का ( भ्रयं चमं: ) यह

English

might equal; With weapons broughtest low the might of Sushna, and, Indra, foundest by thy strength the cattle.

अध्याय २०

श्लोक 137.7

अव॑ द्र॒प्सो अं॑शु॒मती॑मतिष्ठदिया॒नः कृ॒ष्णो द॒शभिः॑ स॒हस्रैः॑ ।आव॒त्तमिन्द्रः॒ शच्या॒ धम॑न्त॒मप॒स्नेहि॑तीर्नृ॒मणा॑ अधत्त

ava drapso aṃśumatīmatiṣṭhadiyānaḥ kṛṣṇo daśabhiḥ sahasraiḥ | āvattamindraḥ śacyā dhamantamapasnehitīrnṛmaṇā adhatta

हिन्दी अर्थ

राष्टर-यज्ञ, (स्तोमेन) सदुपदेदामृत दवारा ( परि षिच्यते ) मेधावियों से सींचा जाता है । ( वाजिनीवसू) है भर्नोवाली तथा बल देनेवाली पुथिवीरूपी दुर्भक्ष-रोग को निवृत्त करते हैँ । भरथर्वेवेद-भाष्य ३ ६७ (पुरुदंससा भरदिवना) है नानाविध कर्मोवाले अदिवयो ! (यद्). जो कृतियां वनस्पतौ ) . वनस्पतियों के उगाने तथा -उनसे फल भ्रादि के

English

We make this Indra very strong to strike the mighty Vritra dead: A vigorous Hero shall he be.

अध्याय २०

श्लोक 137.8

द्र॒प्सम॑पश्यं॒ विषु॑णे॒ चर॑न्तमुपह्व॒रे न॒द्यो अंशु॒मत्याः॑ ।नभो॒ न कृ॒ष्णम॑वतस्थि॒वांस॒मिष्या॑मि वो वृषणो॒ युध्य॑ता॒जौ

drapsamapaśyaṃ viṣuṇe carantamupahvare nadyo aṃśumatyāḥ | nabho na kṛṣṇamavatasthivāṃsamiṣyāmi vo vṛṣaṇo yudhyatājau

हिन्दी अर्थ

९३४. यन्नासत्या भुरण्यथो यदवा देव भिषज्यथः । ( नासत्या) असत्य व्यवहारो से रहित है भरदिवयो ! ८ यद् ) यतः (यद् वा ) तथा ( देव=देवा-देवौ ) श्राप दोनों देव, राष्ट के अज्ञान;

English

Indra was made for giving, set, most mighty, o’er the joyous draught, Bright, meet for Soma, famed in song. By song, as ‘twere, the powerful bolt which none may parry was prepared:

अध्याय २०

श्लोक 137.9

अध॑ द्र॒प्सो अं॑शु॒मत्या॑ उ॒पस्थेऽधा॑रयत्त॒न्वं॑ तित्विषा॒णः ।विशो॒ अदे॑वीर॒भ्या॒३चर॑न्ती॒र्बृह॒स्पति॑ना यु॒जे॑न्द्रः॑ ससाहे

adha drapso aṃśumatyā upasthe'dhārayattanvaṃ titviṣāṇaḥ | viśo adevīrabhyā3carantīrbṛhaspatinā yujendraḥ sasāhe

हिन्दी अर्थ

दुभिक्ष, अनावृष्टि आदि रोगों की - ( भिषज्यथः: चिकित्सा समय-समय न विन्धते) ठीक-टीक नहीं जान सकता, उनकां मूल्याङ्कन ठीक-टीक नहीं भव्ररय (गच्छथः) राप दोनों जाते रहै । ९३९५.. आं ननंमभिनोक्रौषि स्तोभ चिकेत वाम्या ।

English

Lofty, invincible he grew. In praise of Indra

अध्याय २०

श्लोक 137.10

त्वं ह॒ त्यत्स॒प्तभ्यो॒ जाय॑मानोऽश॒त्रुभ्यो॑ अभवः॒ शत्रु॑रिन्द्र ।गू॒ल्हे द्यावा॑पृथि॒वी अन्व॑विन्दो विभु॒मद्भ्यो॒ भुव॑नेभ्यो॒ रणं॑ धाः

tvaṃ ha tyatsaptabhyo jāyamāno'śatrubhyo abhavaḥ śatrurindra | gūlhe dyāvāpṛthivī anvavindo vibhumadbhyo bhuvanebhyo raṇaṃ dhāḥ

हिन्दी अर्थ

(अध) तंदनन्तर (दरप्सः) खट्टी दधि के समान कृष्ण-तमोगुण (रंशु- . के प्रधिपति उपासक के सहयोग से, (अमभ्याचरन्तीः) भभिचार-क्रिया करने- बाजी (भ्रदेवीः) भ्रदिव्य मावनाभभ का (ससाहे) पराभव कर देता है, जो अदिव्य भावनाए" कि (विदः) ष्ण-तमोगुण.की प्रजाए" है ।

English

All Indra’s enemies were slain and passed away like froth and foam. Indra is he, O men, who gives us happiness: sport, urge the giver of delight to win the spoil.

अध्याय २०

श्लोक 137.11

त्वं ह॒ त्यद॑प्रतिमा॒नमोजो॒ वज्रे॑ण वज्रिन्धृषि॒तो ज॑घन्थ ।त्वं शुष्ण॒स्यावा॑तिरो॒ वध॑त्रै॒स्त्वं गा इ॑न्द्र॒ शच्येद॑विन्दः

tvaṃ ha tyadapratimānamojo vajreṇa vajrindhṛṣito jaghantha | tvaṃ śuṣṇasyāvātiro vadhatraistvaṃ gā indra śacyedavindaḥ

हिन्दी अर्थ

दानैः-शनं बढता जाता है, भौर भदिग्य चित्तवुत्तियों को जन्म देता रहता जाता है, तब परमेश्वर मनुष्य की सहायता करता है । बहस्पतिः = बृहती विनादंक (अ्रमवः) हो जाते है। भ्रापने ( गर्हे ) प्रकृति की गोद मे छिपे

English

Bring quickly down, O priests, hither to give us aid, to drink the Soma, Indra son of Nishtigri. So have I glorified with praise strong Dadhikrāvan, conquering steed. Sweet may he make our mouths; may he prolong the days we have to live.

अध्याय २०

श्लोक 137.12

तमिन्द्रं॑ वाजयामसि म॒हे वृ॒त्राय॒ हन्त॑वे ।स वृषा॑ वृष॒भो भु॑वत्

tamindraṃ vājayāmasi mahe vṛtrāya hantave | sa vṛṣā vṛṣabho bhuvat

हिन्दी अर्थ

रमणीयता (धाः) भ्रापने स्थापित कीहै। (धुषितः) पराभव करनेवाले पने (वच्ण) भरपने भ्रोजरूपी वज्र द्वारा (जघन्थ) कृष्ण तमोगुण का हनन कर दिया है । (त्वम् ) आपने (वघतरैः) देनेवाले कष्ण तमोगुणं कै सामथ्यं को (अवातिरः) विनष्ट कट द्विया है

English

The Somas very rich in sweets, for which the sieve is destined, flow, Effused, the source of Indra’s joy. May your strong juices reach the Gods.

अध्याय २०

श्लोक 137.13

इन्द्रः॒ स दाम॑ने कृ॒त ओजि॑ष्ठः॒ स मदे॑ हि॒तः ।द्यु॒म्नी श्लो॒की स सो॒म्यः

indraḥ sa dāmane kṛta ojiṣṭhaḥ sa made hitaḥ | dyumnī ślokī sa somyaḥ

हिन्दी अर्थ

(गाः) स्तुति-वाणियों को (अविन्दः) प्राप्त किया है।. । हुमा है । वीजयति --अचंतिकर्मा ( निव° ३।१४) । महावृत्र भवि, भरस्मिता, रागद्वेष, काम मोह प्रादि . ३६४ भरथवेवेद-भाष्य - काऽ २० । सू०. १३४ : (सः) वहु (इन्द्रः) . परमेदवर, हमने मानो (दामने) उपासना ओर

English

Indu flows on for Indra’s sake—thus have the deities declared. The Lord of Speech exerts himself, ruler of all, because of might. Inciter of the voice of song, with thousand streams the ocean flows,

अध्याय २०

श्लोक 137.14

गि॒रा वज्रो॒ न संभृ॑तः॒ सब॑लो॒ अन॑पच्युतः ।व॒व॒क्ष ऋ॒ष्वो अस्तृ॑तः

girā vajro na saṃbhṛtaḥ sabalo anapacyutaḥ | vavakṣa ṛṣvo astṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

(सः) वह परमेदवर ( मदे ). भरानन्द तथा परसत्नता के प्रदान र ( हितः हमारा हित करता है । ( सः ) वह परमेश्वर ( चुम्नी ) सम्पत्-शाली है, (वच्वः न) वहं परमेश्वर व्र के सदृरा दुष्कभियों का विनाशक है । लिया जाता है । (सबलः) वह बलवान् है.(भनपच्युतः) भ्रौर किसी भी शक्ति दारा न्याय-पक्ष से च्यत नहीं किया जा सकता । (ववक्ष ) वह संसार-मार

English

Even Soma, Lord of Opulence, the friend of Indra, day by day. The black drop sank in Ansumati’s bosom, advancing with ten thousand round about it.

अध्याय २०

श्लोक 138.1

म॒हाँ इन्द्रो॒ य ओज॑सा प॒र्जन्यो॑ वृष्टि॒माँ इ॑व ।स्तोमै॑र्व॒त्सस्य॑ वावृधे

mahā~ indro ya ojasā parjanyo vṛṣṭimā~ iva | stomairvatsasya vāvṛdhe

हिन्दी अर्थ

, , (ऋषिः) ऋषिकोटि का राष्ट्रपति, (वामया) निजं सुन्दर पत्नी के नानाविध कायो को, ( नूनम् ) -निदचंयपूर्वक, .( आ विकेत ) पूर्णरूपेण टीक-ठीक जानता है; तथा ( भ्रथवंणि ) उपद्रवो भ्रौर विप्लवो से रहित ३६८. मथववंतेद-माष्य का २० । सू० १४०

English

Indra, great in his power and might and, like Parjanya, rich in rain, Is magnified by Vatsa’s lauds, When the priests, strengthening the Son of holy Law, present their gifts,

अध्याय २०

श्लोक 138.2

प्र॒जामृ॒तस्य॒ पिप्र॑तः॒ प्र यद्भर॑न्त॒ वह्न॑यः ।विप्रा॑ ऋ॒तस्य॒ वाह॑सा

prajāmṛtasya piprataḥ pra yadbharanta vahnayaḥ | viprā ṛtasya vāhasā

हिन्दी अर्थ

सेनापति का वणन हृभ्राहै, भ्रौर “ऋषि पद द्वारा राष्टरपति का।. स्तोमम्--उणादिकोष में इस का अथं “संघात” भी दिया गया है । मन्त मुखिया । उस परमेरवर ने तेरा भ्राह्लवान किया है अपनी गदृदी पर, वहतू , (अशिवना) ह भ्रर्वियो ! तुम दोनों (रषुवतंनिम्) सुगमता से चलाये

English

Singers with Order’s hymn of praise. Since Kanvas with their lauds have made Indra complete the sacrifice,

अध्याय २०

श्लोक 138.3

कण्वाः॒ इन्द्रं॒ यदक्र॑त॒ स्तोमै॑र्य॒ज्ञस्य॒ साध॑नम्।जा॒मि ब्रु॑वत॒ आयु॑धम्

kaṇvāḥ indraṃ yadakrata stomairyajñasya sādhanam| jāmi bruvata āyudham

हिन्दी अर्थ

बेठो, भौर इसे चलाओ । (मम) मुक राष्टूपति के(हमे) ये (स्तोमाः) तुम्हारे कतंग्यों के स्तवन अर्थात् कथन परामश, (नमः न) मेध के जलों के सदुश, (चुच्यवीरत) शान्ति देते हुए, तथा उपकारी होते हए (वाम्) तुम्हारे लिये ९३७. यवु ब नासत्योक्थैर। चुच्युवीमहिं । . यदु वा वाणीभिरथिनेवेत् काण्वस्य बोधतम् ॥४॥ . वैदिक सूक्तो दवारा (वाम्) तुम दोनों को, हम सबने मिलकर ( प्रा चुच्यु- बीमहि ) तुम्हारे कर्तव्यो का निदेश किया है, या मेव के सदृश तुम दोनों

English

Words are their own appropriate arms. 314 A hymn to the Asvins

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता · Identifier:

Atharva Veda — Chapter 20

अथर्ववेद

संस्कृत संस्करण · Sanskrit Edition:

Imported text; printed edition not recorded

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