Atharva Veda· Atharvaveda Saṁhitā
20
अध्याय 20 / 20

Kanda 20

काण्ड 20

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पूर्ण अध्याय पाठ184 श्लोक

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अध्याय २०

श्लोक 92.1

अ॒भि प्र गोप॑तिं गि॒रेन्द्र॑मर्च॒ यथा॑ वि॒दे।सू॒तुं स॒त्यस्य॒ सत्प॑तिम्

abhi pra gopatiṃ girendramarca yathā vide| sūtuṃ satyasya satpatim

हिन्दी अर्थ

(वस्वः) सम्पत् का (भक्षीमहि) हम मोग कर रहे ह। (बृहस्पते) है महती-वेदवाणी के पति आप, (च) भ्रौर ( इनदरः ) नः पात). सदाः हमारी रक्षा करते रहो । बृहस्पतिः = बृहती वाक् तस्याः पतिः। कीरि स्तोता निघ०

English

Do thou, O Indra, give us hope of beauteous horses and of kine, In thousands, O most wealthy One.

अध्याय २०

श्लोक 92.2

आ ह॑रयः ससृज्रि॒रेऽरु॑षी॒रधि॑ ब॒र्हिषि॑ ।यत्रा॒भि सं॒नवा॑महे

ā harayaḥ sasṛjrire'ruṣīradhi barhiṣi | yatrābhi saṃnavāmahe

हिन्दी अर्थ

५५०. सां जनां मममुत्येयिनद्र संतस्थाना वि हवन्ते समीके । संस्थाभरों के रूपमे खड् हो जतेरहै, ओर दन ( समीके) वागृ-युद्धोमे सहायतथं (त्वाम्) भ्रपको (वि) विशेषरूप में, हथन्ते) सहायतां पुकारते समपंणरूपौ हविवाला होता है । (शूरः) भाप शुर (श्रसुन्वता ) भक्तिरस

English

autumnal forts, brakest them down with conquering might. Thou hast chastised. O Indra, Lord of strength, the man who worships not,

अध्याय २०

श्लोक 92.3

इन्द्रा॑य॒ गाव॑ आ॒शिरं॑ दुदु॒ह्रे व॒ज्रिणे॒ मधु॑ ।यत् सी॑मुपह्व॒रे वि॒दत्

indrāya gāva āśiraṃ duduhre vajriṇe madhu | yat sīmupahvare vidat

हिन्दी अर्थ

दूर रहता हुआ मी (दात्रुः) कामादि, (अस्य) इस परमेदवर की उपस्थिति मँ (जयताम्) भयभीतः-रहता है, (स्म) एसे परमेदवर कै प्रति (जन्या ) दे देनी चाहिए । शिश्राय श्रा पाके;- कामम् = मोक्ष-कामना । (ुष्डूत) बहतो द्वारा या बहुत नामो दवारा पुकारे ग॑एहे परमेववर! आपका (यः) जो ( श्वः ) शान्त कर देनेवाला ( प ) उग्र बल है, स्तोता के लिये (धियम्) ठेसी बुद्धि (कृधि) प्रदान कीजिये जो किं (वाज-

English

One stream after another have they gained from thee, eager for glory have they gained. As sits the young bird on the tree rejoicing, ye, swift pair, have been roused by clear

अध्याय २०

श्लोक 92.4

उद् यद् ब्र॒ध्नस्य॑ वि॒ष्टपं॑ गृ॒हमिन्द्र॑श्च॒ गन्व॑हि ।मध्वः॑ पी॒त्वा स॑चेवहि॒ त्रिः स॒प्त सख्युः॑ प॒दे

ud yad bradhnasya viṣṭapaṃ gṛhamindraśca ganvahi | madhvaḥ pītvā sacevahi triḥ sapta sakhyuḥ pade

हिन्दी अर्थ

परमेदेवर, उपासकं पर, (अह) निर्य से, (दामानम्) कमो की रस्सी के . (प्रहाम्). दुःख-प्रहाण करनेवाले परमेदवर पर ( जयति ) विजय पा लेता -फदे को. (म) -नहीं ( नियंसत् ) जकड़ता, अपि तु ( सुन्वते ) मक्तिरष क ॥

English

laudation, Whose Hoter-priest through many days is Indra, earth’s guardian, friend of men, the best of

अध्याय २०

श्लोक 92.5

अर्च॑त॒ प्रार्च॑त॒ प्रिय॑मेधासो॒ अर्च॑त ।अर्च॑न्तु पुत्र॒का उ॒त पुरं॒ न धृ॒ष्ण्वऽर्चत

arcata prārcata priyamedhāso arcata | arcantu putrakā uta puraṃ na dhṛṣṇva'rcata

हिन्दी अर्थ

का०.२० । सू० ८६ अथवंवेद-भाष्य । २१ ९ ५५५. उन प्रहामतिदीवा जयि कृतमिव न्नी वि चिमोति काले। - योदेतकामो न धरम रुणद्धि समित् तं रायः सुजि सधा ।॥९॥ (उत) तथा (भ्रतिदीवा) शरत्यधिकःस्तुतियां करनेवाला उपासक, यथोचित समय मे, (कृतम्) नए कमे-क्ेत्र को (वि चिनोति) निर्वय करके चुन लेता है,्रौर (जयति) उस पर विजय पा लेता है (देवकामः) परमे्वंर- देव की कामनावाला (यः) जो मनुष्य (घनम्) धन को ( रुणद्धि न ) रोके

English

heroes. May we, when this Dawn and the next dance hither, be thy best servants, most heroic Hero!

अध्याय २०

श्लोक 92.6

अव॑ स्वराति॒ गर्ग॑रो गो॒धा परि॑ सनिष्वणत्।पिङ्गा॒ परि॑ चनिष्कद॒दिन्द्रा॑य॒ ब्रह्मोद्य॑तम्

ava svarāti gargaro godhā pari saniṣvaṇat| piṅgā pari caniṣkadadindrāya brahmodyatam

हिन्दी अर्थ

नहीं रखता, उस क। संग्रह नहीं करता रहता, ।108/0119 नहीं करतां रहता, (तम् इत्) उस के साथ ही, परमेदबर ( स्वधाभिः ) निज धारक- शति + दिष् ( स्तुतौ ) + कनिन् ( उणा० कोष १।१५६ ) । (“कृतमिव (गोभिः) वेदवाणियों छी नौका द्वारा (विवे) हम सब (दुरेवाम्) .

English

Let the victorious car with triple splendour bring hitherward the hundred chiefs with Kutsa. What was the gladdening draught that pleased thee, Indra?

अध्याय २०

श्लोक 92.7

आ यत् पत॑न्त्ये॒न्यः सु॒दुघा॒ अन॑पस्फुरः ।अ॒प॒स्फुरं॑ गृभायत॒ सोम॒मिन्द्रा॑य॒ पात॑वे

ā yat patantyenyaḥ sudughā anapasphuraḥ | apasphuraṃ gṛbhāyata somamindrāya pātave

हिन्दी अर्थ

गए परमेदवर ! ( वयम् ) हम ( अरिष्टासः ) रोगादि से रहित होकर, २२०. भ्रथववेद-भाष्य . का०२०। सू० ६० “वयं राजसु" का प्राधिभौतिक श्रभिप्राय यह् है कि राजालोग योग निज भोगों मेँ करते है, तो प्रजा को चाहिए कि (वृजनीभिः) सेनाग्रं मेँ

English

Speed to our doors, our songs, for thou art mighty.

अध्याय २०

श्लोक 92.8

अपा॒दिन्द्रो॒ अपा॑द॒ग्निर्विश्वे॑ दे॒वा अ॑मत्सत ।वरु॑ण॒ इदि॒ह क्ष॑य॒त् तमापो॑ अ॒भ्यऽनूषत व॒त्सं सं॒शिश्व॑रीरिव

apādindro apādagnirviśve devā amatsata | varuṇa idiha kṣayat tamāpo abhya'nūṣata vatsaṃ saṃśiśvarīriva

हिन्दी अर्थ

. विप्लव तथा विद्रोह जागरित कर, उन धनों पर विजय पाकर, उन काः: उपयोग प्रजा की भलाई के निमित्त करर । वैदिक समाजवाद का यह् एक चाहनेवाला कामादि हमारी हत्या न करे । बृहस्पति-इन्द्र (सखा) सखा बन ˆ कर, (सखिभ्यः) सखिरूप हम उपासको के लिये, (वरिवः) सांसारिक घन

English

Why comest thou to me, what gift attracts thee? Fain would I bring thee food most meet to offer.

अध्याय २०

श्लोक 92.9

सु॒दे॒वो अ॑सि वरुण॒ यस्य॑ ते स॒प्त सिन्ध॑वः ।अ॒नु॒क्षर॑न्ति का॒कुदं॑ सू॒र्यं सुषि॒रामि॑व

sudevo asi varuṇa yasya te sapta sindhavaḥ | anukṣaranti kākudaṃ sūryaṃ suṣirāmiva

हिन्दी अर्थ

“कृणौतु"" मे .एकवच्न है, अतः बृहस्पति श्रौर इनदर, एक ही कर्ता है, दो नहीं ॥ ये दो पद परभेदवर केदो गणो केप्रेद्शंकरै' सत्) भरौर भतप्त सूर्यादिलोको मे स्थित है, वह ( नः पिता ) हमारा पिता,. (प्रथमजाः) प्रथम भ्रकट होकर, ( रोद्तौ ) सिर से लेकर पैरों तक.को -का० २०। सू० €० श्रथवेवेद-माष्य २२१ ५५९. जनाय चिव् य दव॑त उ. लोकं बहुस्पीपदेबहतौ चकारं ।

English

Indra, what fame hath one like thee mid heroes? With what plan wilt thou act? Why hast thou sought us?

अध्याय २०

श्लोक 92.10

यो व्यतीं॒रफा॑णय॒त् सुयु॑क्तां॒ उप॑ दा॒शुषे॑ ।त॒क्वो ने॒ता तदिद् वपु॑रुप॒मा यो अमु॑च्यत

yo vyatīṃraphāṇayat suyuktāṃ upa dāśuṣe | takvo netā tadid vapurupamā yo amucyata

हिन्दी अर्थ

का० २० ।सु० ८ अथववंवेद-म।ष्य । २१३ के पति ने, (सहसा) निज स्वाभाविक बल के कारण, ( रवेण ) केवलमात्र विशेष सुदुढ़ कर दिया है, ( प्रतनासः ) भ्रनादिकांल के ( ऋषयः विप्राः )

English

Lull thou asleep, to wake no more, the pair who on each other look: Do thou, O Indra, give us hope of beauteous horses and of kine,

अध्याय २०

श्लोक 92.11

अतीदु॑ श॒क्र ओ॑हत॒ इन्द्रो॒ विश्वा॒ अति॒ द्विषः॑ ।भि॒नत् क॒नीन॑ ओद॒नं प॒च्यमा॑नं प॒रो गि॒रा

atīdu śakra ohata indro viśvā ati dviṣaḥ | bhinat kanīna odanaṃ pacyamānaṃ paro girā

हिन्दी अर्थ

उस परमेश्वर का (दीध्यानाः) सतत ध्यान करते हुए, ( पुरः ) सदा उसे. म्रपने समक्ष (दधिरे) रखते है । त । ( बृहस्पते ) है महाब्रह्माण्ड के पति ! (नः ) हममेसे(भे)जो (धृनेतयः) कामादि को कम्पने में नेतृरूप उपासक,--( सुप्रकेतम् ) सुविज्ञ. उपासको के, (भ्रस्य ) भौर इस मु उपासक के ( योनिम् ) शरीर-गृहों की योनि = गृह (निध० ३।४); अर्थात् जौ मातृयोनि से पदा होते है,

English

In thousands, O most wealthy One. Hero, let hostile spirits sleep, and every gentler Genius wake:

अध्याय २०

श्लोक 92.12

अ॒र्भ॒को न कु॑मार॒कोऽधि॑ तिष्ठ॒न्नवं॒ रथ॑म्।स प॑क्षन्महि॒षं मृ॒गं पि॒त्रे मा॒त्रे वि॑भु॒क्रतु॑म्

arbhako na kumārako'dhi tiṣṭhannavaṃ ratham| sa pakṣanmahiṣaṃ mṛgaṃ pitre mātre vibhukratum

हिन्दी अर्थ

मथवा “तिः” कर्तरि, निपातनात्) । ग - ५४६. बुदस्पते या प॑रमा परावदत आ तं शतस्पृशो निकेदुः। आपकी (यापरमा) जो परम-विभूति है, (भरतः). इस विभति से यत्-

English

Do thou, O Indra, give us hope of beauteous horses and of kine, In thousands, O most wealthy One.

अध्याय २०

श्लोक 92.13

आ तू सु॑शिप्र दंपते॒ रथं॑ तिष्ठा हिर॒ण्यय॑म्।अध॑ द्यु॒क्षं स॑चेवहि स॒हस्र॑पादमरु॒षं स्व॑स्ति॒गाम॑ने॒हस॑म्

ā tū suśipra daṃpate rathaṃ tiṣṭhā hiraṇyayam| adha dyukṣaṃ sacevahi sahasrapādamaruṣaṃ svastigāmanehasam

हिन्दी अर्थ

( शद्वदुगधाः तथा मेष से प्रज्नवित जल कं सदृश पवित्र ये उपासक,-- (खाताः) समाधि में मानो गडसेगएर्है, निखातहोगएहैँ। ये उपासक (शचोतन्ति) प्रवाहित कर रहे है । द . 4 सदृश तमोजन्य राग-द षं भ्रादि को भस्मीभ्रूत कर देता है । महो ज्योतिषः-- “विशोका वा ज्योतिष्मती" (योग० १।३६) के ..

English

Destroy this ass, O Indra, who in tones discordant brays to thee: Do thou, O Indra, give us hope of beauteous horses and of kine,

अध्याय २०

श्लोक 92.14

तं घे॑मि॒त्था न॑म॒स्विन॒ उप॑ स्व॒राज॑मासते ।अर्थं॑ चिदस्य॒ सुधि॑तं॒ यदेत॑व आव॒र्तय॑न्ति दा॒वने॑

taṃ ghemitthā namasvina upa svarājamāsate | arthaṃ cidasya sudhitaṃ yadetava āvartayanti dāvane

हिन्दी अर्थ

प्रादि रूप. की -भ्राकृतिवाला भान होता है” । इसे ही ““महाज्योतिवाला ५४५. घ सुष्टुभा स शरक्वता गणेनं चलं करोज फलिग रतरेण कार २०1 सु० ८९ भ्रथवंवेद-माष्य =. २१५

English

In thousands, O most wealthy One. Far distant on the forest fall the tempest in a circling course;

अध्याय २०

श्लोक 92.15

अनु॑ प्र॒त्नस्यौक॑सः प्रि॒यमे॑धास एषाम्।पूर्वा॒मनु॒ प्रय॑तिं वृ॒क्तब॑र्हिषो हि॒तप्र॑यस आशत

anu pratnasyaukasaḥ priyamedhāsa eṣām| pūrvāmanu prayatiṃ vṛktabarhiṣo hitaprayasa āśata

हिन्दी अर्थ

-( कनिक्रदत् , योगमागं की भ्रगली-भरगली भूमिका््रोकी भोरयोमीका रर्मियों को (उदाजत्) उदित करता रहा है । विम = कान्तिकंर्मा (निघः २।६) । व् = 10 51115 (जापटे)। ५४६. एवा पित्रे विश्वदाय शे यहैवियेग नम॑सा हविर्भिः ।

English

Do thou, O Indra, give us hope of beauteous horses and of kine, In thousands, O most wealthy One.

अध्याय २०

श्लोक 92.16

यो राजा॑ चर्षणी॒नां याता॒ रथे॑भि॒रध्रि॑गुः ।विश्वा॑सां तरु॒ता पृत॑नानां॒ ज्येष्ठो॒ यो वृ॑त्र॒हा गृ॒णे

yo rājā carṣaṇīnāṃ yātā rathebhiradhriguḥ | viśvāsāṃ tarutā pṛtanānāṃ jyeṣṭho yo vṛtrahā gṛṇe

हिन्दी अर्थ

(पित्रे) हम सब के पिता, (विदवदेवाय ) विव के देवता, (वृष्णे) हम निज सेवाएः स॒मपित करते हँ । ( बृहस्पते ) है महाब्रह्याण्डपति । ठीक विधि से, ( स्तोमम्) सामगानों का मानो (प्रभर) प्रहार किया कर ।

English

Slay each reviler and destroy him who in secret injures us: Do thou, O Indra, give us thope of beauteous horses and of kine,

अध्याय २०

श्लोक 92.17

इन्द्रं॒ तं शु॑म्भ पुरुहन्म॒न्नव॑से॒ यस्य॑ द्वि॒ता वि॑ध॒र्तरि॑ ।हस्ता॑य॒ वज्रः॒ प्रति॑ धायि दर्श॒तो म॒हो दि॒वे न सूर्यः॑

indraṃ taṃ śumbha puruhanmannavase yasya dvitā vidhartari | hastāya vajraḥ prati dhāyi darśato maho dive na sūryaḥ

हिन्दी अर्थ

२१६. ; थवंवेद-माष्य का० २०। सु० ८९. वाजम्) देवासुर-संग्राम पर (तरत) विजय पारो । है (जरितः) स्तुति भं (- ) सोम्य उपासक ( मर्यः ) भ्रपने चित्त का मरधीइवर उपासक ! ( गाम् ) वेदवाणो से ( दोहेन ) दहे ज्ञान द्वारा तु ( ॥ ) अपने साथी उपासक को (उप शिक्ष ) उपासना की शिक्षा दिया शोषय) मनी परार सदा जागरूक रखा कर । (न ) जंसे (वसुना पूणम्)

English

In thousands, O most wealthy One. Couples desirous of thine aid are storming thee, pouring their presents forth to win a stall of

अध्याय २०

श्लोक 92.18

नकि॒ष्टं कर्म॑णा नश॒द् यश्च॒कार॑ स॒दावृ॑धम्।इन्द्रं॒ न य॒ज्ञैर्वि॒श्वगू॑र्त॒मृभ्व॑स॒मधृ॑ष्टं धृ॒ष्ण्वोऽजसम्

nakiṣṭaṃ karmaṇā naśad yaścakāra sadāvṛdham| indraṃ na yajñairviśvagūrtamṛbhvasamadhṛṣṭaṃ dhṛṣṇvo'jasam

हिन्दी अर्थ

व मेश्वरर् को मघदेयभ्य ) लिया जाताहै, वक्षे ( शूरम् ) दानशूर परमत क, ( मघदेय, ए के देने के लिये, ( भ्रा च्यावय ). ब्रपनी भ्रोर पुणतया न. , श्राप (भोजम्) भोज है, सब कं प्रतिपालक है,-(त्वा) "ठ सम्बन्धं मे यह (किम्) क्यो (राहुः) लोग कहते ? (मा).

English

king pouring gifts, Indra, seeking thee. When two men seeking spoil or heaven thou bringest face to face in war,

अध्याय २०

श्लोक 92.19

अषा॑ल्हमु॒ग्रं पृत॑नासु सास॒हिं यस्मि॑न् म॒हीरु॑रु॒ज्रयः॑ ।सं धे॒नवो॒ जाय॑माने अनोनवु॒र्द्यावः॒ क्षामो॑ अनोनवुः

aṣālhamugraṃ pṛtanāsu sāsahiṃ yasmin mahīrurujrayaḥ | saṃ dhenavo jāyamāne anonavurdyāvaḥ kṣāmo anonavuḥ

हिन्दी अर्थ

४८० कृपा कीजिये कि (मम). मेरी ( घीः ) बुद्धि (गप्नस्वती) (नः) हम (आ मर) प्राप्त कराये । - . (विप्रा है मेधावी उपासको ! (वाचा) वेदवाणी द्वारा भोक्त विधि द्वारा ॥ का० २० सु० ८8 श्रथवंवेद-माष्य - २१७

English

Thou showest, Indra, then the bolt, thy constant friend, the bull that ever waits on thee. This thine heroic power full well the people knew, wherewith thou brakest down, Indra,

अध्याय २०

श्लोक 92.20

यद् द्याव॑ इन्द्र ते श॒तं श॒तं भूमी॑रु॒त स्युः ।न त्वा॑ वज्रिन्त्स॒हस्रं॒ सूर्या॒ अनु॒ न जा॒तम॑ष्ट॒ रोद॑सी

yad dyāva indra te śataṃ śataṃ bhūmīruta syuḥ | na tvā vajrintsahasraṃ sūryā anu na jātamaṣṭa rodasī

हिन्दी अर्थ

विहीन के साथ (संख्यम्) मंत्री (न वष्टि) नहीं चाहते । ममसत्यम् = संप्राम (निष २।१७) । समीके ग्राम (२।१७) (भ्रा सुनोति) पू्णंतया समपित कर देता है, (तस्म ) उस उपासक के लिये, -जीवन मे व्याप्त (शात्रून्) कामादि शतरभों को, -( सुतुकान ) ओर उन से. (वृत्रम्) उस वृत्रवगृं का (हन्ति) हनन कर देता है ।

English

And made thine own this great earth and these water-floods, with joyous heart these water floods. And they have bruited far this hero might, when thou, O Strong

अध्याय २०

श्लोक 92.21

आ प॑प्राथ महि॒ना वृष्ण्या॑ वृष॒न् विश्वा॑ शविष्ठ॒ शव॑सा ।अ॒स्मां अ॑व मघव॒न् गोम॑ति व्र॒जे वज्रिं॑ चि॒त्राभि॑रू॒तिभिः॑

ā paprātha mahinā vṛṣṇyā vṛṣan viśvā śaviṣṭha śavasā | asmāṃ ava maghavan gomati vraje vajriṃ citrābhirūtibhiḥ

हिन्दी अर्थ

५५१, यान्मिन् वं. दं चिम छसुमिन्रे यः शिभयं मघवा काममस्मे । २११८. मथवंवेद-माष्य -का० २० सूर ८९ (शंखम्) प्रशंसित-स्तुतियां ( दधिम ) धारण करते है, भेट करते ह; रौर.

English

One, in thy joy helpest thy suppliants who sought to win thee for their Friend. Their battle-cry thou madest sound victorious in the shocks of war.

अध्याय २०

श्लोक 93.1

उत् त्वा॑ मन्दन्तु॒ स्तोमाः॑ कृणु॒ष्व राधो॑ अद्रिवः ।अव॑ ब्रह्म॒द्विषो॑ जहि

ut tvā mandantu stomāḥ kṛṇuṣva rādho adrivaḥ | ava brahmadviṣo jahi

हिन्दी अर्थ

( देवहूतौ ) बृहस्पति-३ेव का जब भ्राह्न किया जाता है, तब ( यंः उपासक-जन के लिये, (उ ) निश्चय से ( लोकम् ). भालोक या प्ज्ञालोक को (वि ददंरीति। विदी्णं कर देता है, उन्हं मोक्ष दिना देतां है

English

Speed happily those, as Sūrya ends his journey, who meet his wish as bridegrooms meet their spouses;

अध्याय २०

श्लोक 93.1-2

अ॒भि प्र गोप॑तिं गि॒रेन्द्र॑मर्च॒ यथा॑ वि॒दे।सू॒तुं स॒त्यस्य॒ सत्प॑तिम्

abhi pra gopatiṃ girendramarca yathā vide| sūtuṃ satyasya satpatim

हिन्दी अर्थ

५६०. "बृहस्पतिः सम॑जयद् वचन म॒हो व्र॒जान् गोम॑तो देव एषः । प्राणों तथा (स्वः) सुखो का (सिषासन्) महादान करता हभ, ( भरकः) .निज गोः=इन्वियां (उणा० कोष २।६७), वैदिक यन्तालय, -अजमेर । ( महः २२२ म्मथववेद-माध्य का०.२० । सु०९१

English

Speed happily those, as Sūrya ends his journey, who meet his wish as bridegrooms meet their spouses;

अध्याय २०

श्लोक 93.2

प॒दा प॒णींर॑रा॒धसो॒ नि बा॑धस्व म॒हां अ॑सि ।न॒हि त्वा॒ कश्च॒न प्रति॑

padā paṇīṃrarādhaso ni bādhasva mahāṃ asi | nahi tvā kaścana prati

हिन्दी अर्थ

(ते) उन उपासक-सखाभो ने ( गाः वेदवाणियो को प्राप्त करने की ( इषणयन्त) इच्छा की, भौर ( सत्येन मनसा ) सच्चे मनसे की गई (घीभिः) ध्यानविधिरयो दारा उन्होने ( गोपतिम् ) वेदवाणियो के पति से वाणियों के पति ने, ( स्वयुग्भिः ) अपने मँ योगयुक्त, तथा ( अवद्यपेभिः ) सूयं रदिमियो के . सदृश ज्ञानप्रकाशवाली वेदवाणियों को (मिथः) एक साथ,

English

heaven. E’en beyond this his majesty extendeth who hath exceeded all the worlds in greatness,

अध्याय २०

श्लोक 93.2-2

आ ह॑रयः ससृज्रि॒रेऽरु॑षी॒रधि॑ ब॒र्हिषि॑ ।यत्रा॒भि सं॒नवा॑महे

ā harayaḥ sasṛjrire'ruṣīradhi barhiṣi | yatrābhi saṃnavāmahe

हिन्दी अर्थ

भ्रभिप्रायः योगोपयोगी कर्मो से ह. । हए हम उपासक-सखा, (शूरसातौ). शूर बने-कामादि के विना के निमित्त धारण करते हुए, ( भसा ) भषने मौखिक उपदेशो द्वारा; ( वृषणम् ) का० २५ । सु० ९१. भ्रथवेवेव-माष्य

English

heaven. E’en beyond this his majesty extendeth who hath exceeded all the worlds in greatness,

अध्याय २०

श्लोक 93.3

त्वमी॑शिषे सु॒ताना॒मिन्द्र॒ त्वमसु॑तानाम्।त्वं राजा॒ जना॑नाम्

tvamīśiṣe sutānāmindra tvamasutānām| tvaṃ rājā janānām

हिन्दी अर्थ

दोनो सुनोः। सुनने का व्यवहार चेतनो मँ ही सम्मव हैःमचेतनों मे नहीं । (इन्द्रः) परमेदवर ने ( मह्ला ) निज-महिमा मे, सूयं के तापद्वारा मे पदा हृए (भिम्) भन्तरिक्षगामी मेष का ( अहन् ) हनन किया, तथा

English

thee. Hymned by Angirases, bursting the cowstalls, thou foundest ample strength for us as leader.

अध्याय २०

श्लोक 93.3-2

इन्द्रा॑य॒ गाव॑ आ॒शिरं॑ दुदु॒ह्रे व॒ज्रिणे॒ मधु॑ ।यत् सी॑मुपह्व॒रे वि॒दत्

indrāya gāva āśiraṃ duduhre vajriṇe madhu | yat sīmupahvare vidat

हिन्दी अर्थ

दसं प्रकार (देवैः) दिव्यराक्तियों हारा ( द्यावापृथिवी ) चुलोक भौर पृथिवी- . लोक (नः) हमारी (भावतम्) पूरी रक्षा करतेदहै। कप० २० । सुऽ ९२ स, अथर्ववेद-भाष्यः । २२६ हे उपासक । तू ( यथाविदे ) परमेरवर के यथाथ स्वरूप के जानने के लिये, (गिरा) वै दिक-स्तुतिवाणियों यरा, (गोपतिम्) संसारके स्वामी या

English

thee. Hymned by Angirases, bursting the cowstalls, thou foundest ample strength for us as leader.

अध्याय २०

श्लोक 93.4

ई॒ङ्खय॑न्तीरप॒स्युव॒ इन्द्रं॑ जा॒तमुपा॑सते ।भे॒जा॒नासः॑ सु॒वीर्य॑म्

īṅkhayantīrapasyuva indraṃ jātamupāsate | bhejānāsaḥ suvīryam

हिन्दी अर्थ

(श्रि बर्हिषि) हमारे हदयाकाशो मे,--(यत्र) जिन हृदयाकाशों । मे ( अभि) परमेश्वर को साक्षात् करके ( सं नवामहे ) हम इकटूठे मिलकर सम्यक्-स्तुतियां करते है, उन हृदयाकासों में ( भरुषीः ) प्रकाशमयी तथा व ॥ 4: व ( आ ससूच्िरे ) पुणंल्प में प्रकट लिये, हमारे (मषु) मघुर तथा ( आशिरम् ) परिपक्व भक्तिरसो को (दुदुहे)

English

He, excellent, withholdeth not his gift of power and wealth in kine, When he hath listened to our songs.

अध्याय २०

श्लोक 93.4-2

उद् यद् ब्र॒ध्नस्य॑ वि॒ष्टपं॑ गृ॒हमिन्द्र॑श्च॒ गन्व॑हि ।मध्वः॑ पी॒त्वा स॑चेवहि॒ त्रिः स॒प्त सख्युः॑ प॒दे

ud yad bradhnasya viṣṭapaṃ gṛhamindraśca ganvahi | madhvaḥ pītvā sacevahi triḥ sapta sakhyuḥ pade

हिन्दी अर्थ

मर्व; पीत्वा सचेवहि त्रिः सुप्त सरूपः पदे ॥४॥ गन्वहि ) इकटूठे हो जाते है, तब ( मध्वः पीत्वा ) परमेश्वर मेरे मधुर. भक्तिरस को, ओौर नै उपासक परमेषवर के भानन्दरस को पीकर एक-दूसरे के संगी साथी हो जतिहै। शरीरके ५ पद, ५ तन्मात्रो के सूक्ष्मरीरके ५ पद,

English

He, excellent, withholdeth not his gift of power and wealth in kine, When he hath listened to our songs.

अध्याय २०

श्लोक 93.5

त्वमि॑न्द्र॒ बला॒दधि॒ सह॑सो जा॒त ओज॑सः ।त्वं वृ॑ष॒न् वृषेद॑सि

tvamindra balādadhi sahaso jāta ojasaḥ | tvaṃ vṛṣan vṛṣedasi

हिन्दी अर्थ

। सनयं ५ पद, ५ ज्ञानेन्द्रियो के ५.पद । २ १ वां पद न॑ व । म श्रन्तःकरण मे लीन हो जाता है, तब इस २१बें स्थानम, पद भ, - परमेष्वर भ्रौर उपासक मे सखिभाव स्थापित हो जाता है । ह वंच तन्मात्रा - शीत, उष्ण, सुख, दुःख की भनुभुतियां ५ का

English

To which the Dasyu-slayer goes. Bring us, O Indra, name and fame, enriching, mightiest, excellent,

अध्याय २०

श्लोक 93.5-2

अर्च॑त॒ प्रार्च॑त॒ प्रिय॑मेधासो॒ अर्च॑त ।अर्च॑न्तु पुत्र॒का उ॒त पुरं॒ न धृ॒ष्ण्वऽर्चत

arcata prārcata priyamedhāso arcata | arcantu putrakā uta puraṃ na dhṛṣṇva'rcata

हिन्दी अर्थ

खवा” ( गीता २।१४ ) 1 थिमोसोफिरूट जिसे 51181 ००५४ कहते है, बह यह पञ्चतन्मात्रिंक शरीर ही है। अथैन्तु प्रका उत पुरं नं ध्व वेत ॥५॥ (प्रियमेषासः) है उपासना-यज्ञ के प्याो ( भवंत ) परमेक्वर कीं पर्चना किया करो, (रावत) प्रकृष्ट विधि से ओर प्रभूतः भरचना । द ल बार-बार भ्रचना किया करो । (- उत ) भौर ( पृत्रकाः )

English

To which the Dasyu-slayer goes. Bring us, O Indra, name and fame, enriching, mightiest, excellent,

अध्याय २०

श्लोक 93.6

त्वमि॑न्द्रासि वृत्र॒हा व्य॑१न्तरि॑क्षमतिरः ।उद् द्याम॑स्तभ्ना॒ ओज॑सा

tvamindrāsi vṛtrahā vya1ntarikṣamatiraḥ | ud dyāmastabhnā ojasā

हिन्दी अर्थ

छोटे पुत्र तथा छोटी पुत्रियां .भी (अर्चन्तु) अच॑ना किया करे । (न) जैसे (पुरम्) तुम भने देह की भरचना करते हो, वैसे (धृष्णु) ाप-बक क क्री (अचत) श्रना किया करो । 1 1 न

English

We call on thee, O King, mighty among the Gods, ruler of men, to succour us, All that is weak in us, excellent God, make firm: make our foes easy to subdue.

अध्याय २०

श्लोक 93.6-2

अव॑ स्वराति॒ गर्ग॑रो गो॒धा परि॑ सनिष्वणत्।पिङ्गा॒ परि॑ चनिष्कद॒दिन्द्रा॑य॒ ब्रह्मोद्य॑तम्

ava svarāti gargaro godhā pari saniṣvaṇat| piṅgā pari caniṣkadadindrāya brahmodyatam

हिन्दी अर्थ

की देखमाल मे, तथा पालन-पोषण मे लगे रहते है, इसी लगन से परमेदवर की. भर्चना म भी लगना ची । मेषः=-यज्ञः (निधं ३।१७) धु. . (ग्रः) श्भत स्तुतियां . करनेवाला उपासक, जब ( अवस्वराति आमे स्वर भें स्वरपू्वेक स्तुतियां करता है, तब, गोषा - उपासको का

English

We call on thee, O King, mighty among the Gods, ruler of men, to succour us, All that is weak in us, excellent God, make firm: make our foes easy to subdue.

अध्याय २०

श्लोक 93.7

त्वमि॑न्द्र स॒जोष॑सम॒र्कं बि॑भर्षि बा॒ह्वोः ।वज्रं॒ शिशा॑न॒ ओज॑सा

tvamindra sajoṣasamarkaṃ bibharṣi bāhvoḥ | vajraṃ śiśāna ojasā

हिन्दी अर्थ

का० २०। सु० ९२ भ्रथवेवेद-माष्य २३१ गरः = गृशब्दे, यड लुक्; गृणाति भचंतिकर्मा (निघ० ३1 १४) । अपटे ने १०५५500५, ४७०५४९0 ; तथा 58101 दिये है ।. लालिमा न्निय शरुरे या केसरी रंग के कपड् धारण करनेवाली प्रचांरिका-

English

Thou, Hero, hast performed thy hero needs with might, yea, all+ with strength, O Strongest One.

अध्याय २०

श्लोक 93.7-2

आ यत् पत॑न्त्ये॒न्यः सु॒दुघा॒ अन॑पस्फुरः ।अ॒प॒स्फुरं॑ गृभायत॒ सोम॒मिन्द्रा॑य॒ पात॑वे

ā yat patantyenyaḥ sudughā anapasphuraḥ | apasphuraṃ gṛbhāyata somamindrāya pātave

हिन्दी अर्थ

बढ़ापे में ज्ञानोपवेद करने का भ्रधिकार वेद ने दिया है । यथा-“भ्रय जीधिः - विदथमावदाति"( भ्रथवं ० १४।१।२१ )» अर्थात् है विवाहित पत्नी ! बढी होकर तु ज्ञानोपदेश किथा कर; जीषिः-जीर्णा। मुनियो के सम्बन्ध में ऋग्वेद मे कहा है कि--““मुनयो वातरशनाः “पिशङ्खा"" वसते मला" मर्थं 06०५5॥1-0०५00 किय है । सम्भवतः, मुनि-स्तियों भौर मुनि-ृरषों के लिये पिशङ्गं वस्व धारण करने का उपदेदा वेदव्रिहित हो । उपरि- एक स्थान मेँ टिकी हुई होकर, (सुदाः) ये सुगमता से दुही जने योग्य होती है, इसी प्रकारः है उपासको ! तुम (इन्द्राय पातवे) परमेदवर के पान -. २ ३२ क । भयवंवेद-माष्य का० २० ।सु० ६२

English

Thou, Hero, hast performed thy hero needs with might, yea, all+ with strength, O Strongest One.

अध्याय २०

श्लोक 93.8

त्वमि॑न्द्राभि॒भूर॑सि॒ विश्वा॑ जा॒तान्योज॑सा ।स विश्वा॒ भुव॒ आभ॑वः

tvamindrābhibhūrasi viśvā jātānyojasā | sa viśvā bhuva ābhavaḥ

हिन्दी अर्थ

कर ्रनेवाली कहां है,परन्तु ये नानावर्णोवाली गौएु तब सुगमता से दुही जा सकती है, जब दोहते समय ये एक स्थान मं टिकी रह 1 इसी प्रकार भक्तिरस को परमेश्वर स्वीकार नहीं करता 1 - एन्यः ५७1698186 वण इदिह धयत् तमाय अम्पनुषत वत्से. य॑शरिश्वरीरिव ॥८॥

English

I should support the singer, God who scatterest wealth! and! not abandon him to woe. Each day would I enrich the man who sang my praise, in what- soever place he were.

अध्याय २०

श्लोक 93.8-2

अपा॒दिन्द्रो॒ अपा॑द॒ग्निर्विश्वे॑ दे॒वा अ॑मत्सत ।वरु॑ण॒ इदि॒ह क्ष॑य॒त् तमापो॑ अ॒भ्यऽनूषत व॒त्सं सं॒शिश्व॑रीरिव

apādindro apādagnirviśve devā amatsata | varuṇa idiha kṣayat tamāpo abhya'nūṣata vatsaṃ saṃśiśvarīriva

हिन्दी अर्थ

, (अपात्) स्थिर तथा. निद्वल भक्तिरस का पान कर लेता है, तबं ( विवे) लगते है, (इव) जैसे ( संशि्वरीः ) भिल कर शिचु कौ वृद्धि करनेवाली ५८१. सुदेवो असि बरुण॒ यस्य॑ ते सप्त सिन्धवः । अनुक्षरन्ति काङ्ं॒सूम्यंषिराभिव ॥९॥। (वरुण) है उपासकः का वरण करनेवाले, या उपासक द्वारा वरणं किये जानेवाने परमेदवर ! श्राप (सुदेवः भसि) सर्वोत्तम देव है, (यस्य तै

English

I should support the singer, God who scatterest wealth! and! not abandon him to woe. Each day would I enrich the man who sang my praise, in what- soever place he were.

अध्याय २०

श्लोक 93.9

सु॒दे॒वो अ॑सि वरुण॒ यस्य॑ ते स॒प्त सिन्ध॑वः ।अ॒नु॒क्षर॑न्ति का॒कुदं॑ सू॒र्यं सुषि॒रामि॑व

sudevo asi varuṇa yasya te sapta sindhavaḥ | anukṣaranti kākudaṃ sūryaṃ suṣirāmiva

हिन्दी अर्थ

का० २०।सू० ९२ अथवंवेद-भ।ष्य २३३ (सिन्धवः) मानो स्यन्दन करती पासकों क 1 , हुई (काकुदम्) उ के तालुश्रों को

English

No kinship is there better, Maghavan, than thine: a father even) is no more. O Indra marvellously bright, come, these libations long for thee,

अध्याय २०

श्लोक 93.10

यो व्यतीं॒रफा॑णय॒त् सुयु॑क्तां॒ उप॑ दा॒शुषे॑ ।त॒क्वो ने॒ता तदिद् वपु॑रुप॒मा यो अमु॑च्यत

yo vyatīṃraphāṇayat suyuktāṃ upa dāśuṣe | takvo netā tadid vapurupamā yo amucyata

हिन्दी अर्थ

वेदवाणी को, (नः पिता) हम सब के पिता परमेदवर ने, ( भरविन्दत् ) हमे द्विया है (विदवजन्यः) विदवजन हितकारी परमेश्वर ने (अयास्यः) विना तुरीयम् यजुर्वेद के -पुरुषसुक्त मेँ परमेदवर-पुरुष का वर्णेन ..

English

Men who support, O Indra strong by nature, with food the many songs that tell thy praises. Thine are two measures, Indra, wide, well-meted, heaven for thy majesty, earth for thy

अध्याय २०

श्लोक 93.11

अतीदु॑ श॒क्र ओ॑हत॒ इन्द्रो॒ विश्वा॒ अति॒ द्विषः॑ ।भि॒नत् क॒नीन॑ ओद॒नं प॒च्यमा॑नं प॒रो गि॒रा

atīdu śakra ohata indro viśvā ati dviṣaḥ | bhinat kanīna odanaṃ pacyamānaṃ paro girā

हिन्दी अर्थ

त्रिपादंखूप मे परमेदवर जगत् से उध्वं है, रौर इस का एकं पाद ही पुनः- है, तुर्य तुरीय । अयास्यः --परमेरवर से चारों वेद प्रकट हुए । इनक : प्रकारान में परमेदवेर को कोई प्रयास नहीं करना पडता, जसे कि र्वास- स्वभावतः विना प्रयास. केहो रही है, जागते सोते यह क्रिया विना परिश्रम ओौर प्रयत्न केहोरहीदहै। इसी प्रकार चारों वेद परमेदवर के

English

wisdom. Here for thy choice are Somas mixed with butter: may the sweet meath be pleasant for thy

अध्याय २०

श्लोक 93.12

अ॒र्भ॒को न कु॑मार॒कोऽधि॑ तिष्ठ॒न्नवं॒ रथ॑म्।स प॑क्षन्महि॒षं मृ॒गं पि॒त्रे मा॒त्रे वि॑भु॒क्रतु॑म्

arbhako na kumārako'dhi tiṣṭhannavaṃ ratham| sa pakṣanmahiṣaṃ mṛgaṃ pitre mātre vibhukratum

हिन्दी अर्थ

पति ने,-(वावदद्िः) कलरव करते हुए (हंसैः) नीर-क्षीर विवेकी हंसो के सदृ वतमान विवेकी-परमहंस (सखिभिः)ऋषि-सखाश्रो द्वारा, (वावदद्धिः) .(उत च) भ्रौर तदनन्तर इन ऋषि-सखाभों द्वारा वेदवाणियों का ( उद् को वेदवाणियों का मौखिक उपदेश कराया । 8 ५ . इस विषय का प्रसङ्खं भरथवंवेद मे अन्यत्र भी हमरा है । यथा--

English

drinking. They have poured out a bowl to him, to Indra, full of sweet juice, for faithful is his bounty.

अध्याय २०

श्लोक 93.13

आ तू सु॑शिप्र दंपते॒ रथं॑ तिष्ठा हिर॒ण्यय॑म्।अध॑ द्यु॒क्षं स॑चेवहि स॒हस्र॑पादमरु॒षं स्व॑स्ति॒गाम॑ने॒हस॑म्

ā tū suśipra daṃpate rathaṃ tiṣṭhā hiraṇyayam| adha dyukṣaṃ sacevahi sahasrapādamaruṣaṃ svastigāmanehasam

हिन्दी अर्थ

कां उपदेश दिया (भथ ° १०।७।१४) । २२४ भथर्वेवैव-भाष्य का०.२० । सुऽ ९१ -के चतुथंपादसे “वि” भरौर “भा का श्नन्वय होता है । पद्यरचना भ्रौर म्बित है, “चऋच्यधिरूढं साम गीयते" । तथा "चऋकसामाभ्याम्”'. इस वंदिक

English

O’er earth’s expanse hath he grown great by wisdom, the friend of man, and by heroic exploits.

अध्याय २०

श्लोक 93.14

तं घे॑मि॒त्था न॑म॒स्विन॒ उप॑ स्व॒राज॑मासते ।अर्थं॑ चिदस्य॒ सुधि॑तं॒ यदेत॑व आव॒र्तय॑न्ति दा॒वने॑

taṃ ghemitthā namasvina upa svarājamāsate | arthaṃ cidasya sudhitaṃ yadetava āvartayanti dāvane

हिन्दी अर्थ

हारा गद्यरंचना का नि्वंश किया है । तथा इन्हीं तीन रचनाभ्नो को मन्त के चतुर्थपाद में “तिस्लः” पद द्वारा निदिष्ट किया है । ५६८. वि मिया पूरं ज्ययेमपांचीं निसप्रीणि साकरुदषेरङृम्तत् । साथ, ( त्रीणि ) तीन रचनाओं को,. ( उदषेः ) निज ज्ञान-सागरसे (निः . ..

English

Indra hath conquered in his wars the mighty: men strive in multitudes to win his friendship. Ascend thy chariot as it were in battle, which thou shalt drive to us with gracious favour,

अध्याय २०

श्लोक 93.15

अनु॑ प्र॒त्नस्यौक॑सः प्रि॒यमे॑धास एषाम्।पूर्वा॒मनु॒ प्रय॑तिं वृ॒क्तब॑र्हिषो हि॒तप्र॑यस आशत

anu pratnasyaukasaḥ priyamedhāsa eṣām| pūrvāmanu prayatiṃ vṛktabarhiṣo hitaprayasa āśata

हिन्दी अर्थ

गर्जती हुई जल प्राप्त करातीहै। है । जपाचीम् = इस पद द्वारा प्रलयावस्था को सूचित किया है । भपाची, णं ४5०९, फननत्की०6 (भ्रापटे) । उदधेः = जेमे समुद्रं से, सूयंताप का २०।घु० ९१ अथववेद-माष्य २२५

English

For him have we pressed juice exceeding potent: here, praised with song, let him effect his visit.

अध्याय २०

श्लोक 93.16

यो राजा॑ चर्षणी॒नां याता॒ रथे॑भि॒रध्रि॑गुः ।विश्वा॑सां तरु॒ता पृत॑नानां॒ ज्येष्ठो॒ यो वृ॑त्र॒हा गृ॒णे

yo rājā carṣaṇīnāṃ yātā rathebhiradhriguḥ | viśvāsāṃ tarutā pṛtanānāṃ jyeṣṭho yo vṛtrahā gṛṇe

हिन्दी अर्थ

. द्वारा, भापहूप मेँ जल काट कर भ्रलग कर दिग्रा जाता है" वसे बुहस्पति के ज्ञानोदधि से तीन रचनाए' मानो कट कर उस से पृथक् हुई" । सृष्टिक्रमं ५६६. द्रौ वलं र्ितारं॑दुषांनां ऋरणेव वि चकर्ता खण ।

English

Unyoke, as at thy journey’s end, O Hero, to gladden thee to-day at this libation. Like Usanā, the priest a laud shall utter, a hymn to thee, the

अध्याय २०

श्लोक 93.17

इन्द्रं॒ तं शु॑म्भ पुरुहन्म॒न्नव॑से॒ यस्य॑ द्वि॒ता वि॑ध॒र्तरि॑ ।हस्ता॑य॒ वज्रः॒ प्रति॑ धायि दर्श॒तो म॒हो दि॒वे न सूर्यः॑

indraṃ taṃ śumbha puruhanmannavase yasya dvitā vidhartari | hastāya vajraḥ prati dhāyi darśato maho dive na sūryaḥ

हिन्दी अर्थ

भ्राकाद को घेरे हुए, (रक्षितारम्) भौर भपने जल की अपने मं रक्षा करते (विच॑कतं ) काट गिराया, (इव) जसे कोई (करेण) हाथ द्वारा किसी वृक्ष रादि को काटं गिराता है। तथा (स्वेदाञ्जिभिः) जल के अद्धि -कणोढारा चाहते हए परमेदवर ने, (पणिम्) - व्यवहार के साधनभूत मेव को (अ्ररोद- व्यवहारे । गाः गौः (जलम्), उणादि कोष २।६७; वैदिक यन्त्रालय,

English

Lord Divine, who markest. When the Bull quaffing praises our libation, as a sage paying holy rites in secret,

अध्याय २०

श्लोक 93.18

नकि॒ष्टं कर्म॑णा नश॒द् यश्च॒कार॑ स॒दावृ॑धम्।इन्द्रं॒ न य॒ज्ञैर्वि॒श्वगू॑र्त॒मृभ्व॑स॒मधृ॑ष्टं धृ॒ष्ण्वोऽजसम्

nakiṣṭaṃ karmaṇā naśad yaścakāra sadāvṛdham| indraṃ na yajñairviśvagūrtamṛbhvasamadhṛṣṭaṃ dhṛṣṇvo'jasam

हिन्दी अर्थ

५६७. ख € सत्येभिः सखिभिः पुवक्गिगोषांयसं वि धनसैरदर्दः । जद॑णस्पतिषमिवेरदेस्वेदेभिदरविणे व्यानट् ॥७।। ( धनसैः ) भाध्यात्मिक-धनों के प्रदाता, ( वृषभिः ) उपदेशामृतव्षी, २२६ भरथवेवेद-भाष्य का०२० 1 सु० ९१

English

Seven singers here from heaven hath he begotten, who e’en by day have wrought their works while singing.

अध्याय २०

श्लोक 93.19

अषा॑ल्हमु॒ग्रं पृत॑नासु सास॒हिं यस्मि॑न् म॒हीरु॑रु॒ज्रयः॑ ।सं धे॒नवो॒ जाय॑माने अनोनवु॒र्द्यावः॒ क्षामो॑ अनोनवुः

aṣālhamugraṃ pṛtanāsu sāsahiṃ yasmin mahīrurujrayaḥ | saṃ dhenavo jāyamāne anonavurdyāvaḥ kṣāmo anonavuḥ

हिन्दी अर्थ

या ब्रह्याण्डपति ने, ( गोधायसम् ) पुथिवीवासियों के घारण-पोषण करने- वाले वैदिक-रहस्यो को ( चि अवदः ) -विशेषरूप मे खोल दिया, भौर सखिभिः- सखा का भथ है “समान ख्यातिवाले, समान ध्मवाले । ज्ञीय-कमों की दृत्टि से, परमेदवंर के लिये समानधर्मा हो जाते रहै, तब परमेश्वर उन्हँ सखारूप जानता है । घनसैः-= घन +षणु दनि । वराहैः श्रेष्ठाहारवद्धिः । अथवा “वराहैः वृषभिः मेघो के समान, विना भेदभाव के सर्वत्र उपदेशामृतों की वर्षा करनेवाले । घमं = यज्ञ (निव० ३।१७)। . ५६८. ते सत्येन मनसु गोप॑तिं गा इयानास इषणयन्त धीभिः ।

English

When heaven’s fair light by hymns was made apparent. (they made great splendour shine at break of morning),

अध्याय २०

श्लोक 93.20

यद् द्याव॑ इन्द्र ते श॒तं श॒तं भूमी॑रु॒त स्युः ।न त्वा॑ वज्रिन्त्स॒हस्रं॒ सूर्या॒ अनु॒ न जा॒तम॑ष्ट॒ रोद॑सी

yad dyāva indra te śataṃ śataṃ bhūmīruta syuḥ | na tvā vajrintsahasraṃ sūryā anu na jātamaṣṭa rodasī

हिन्दी अर्थ

गुदा के समीप मूलाधार चक्रहोतादहै, उसके ऊपर की ओर उत्तरोत्तर ५७१. सत्यामाशिषं ृथुता बयोषै करं चिद्धथक्थ सेभिरेयैः । हे उपासको ! - तुम ( वयोधै; ) वयोवृद्ध-उपासकीं द्वारा प्रदर्शित

English

Sakra who knoweth well all human actions hath with his eager friends let loose the waters. They with their songs cleft e’en the mountain open, and willingly disclosed the stall of cattle.

अध्याय २०

श्लोक 93.21

आ प॑प्राथ महि॒ना वृष्ण्या॑ वृष॒न् विश्वा॑ शविष्ठ॒ शव॑सा ।अ॒स्मां अ॑व मघव॒न् गोम॑ति व्र॒जे वज्रिं॑ चि॒त्राभि॑रू॒तिभिः॑

ā paprātha mahinā vṛṣṇyā vṛṣan viśvā śaviṣṭha śavasā | asmāṃ ava maghavan gomati vraje vajriṃ citrābhirūtibhiḥ

हिन्दी अर्थ

कथन को. ध्यानपुरवंक सुनो । । „ + रोदसी का भथ है-चुलोक भ्रौर भूलोक । वेदो मे पुरुष को धौ; तथा स्त्री को पृथिवी कहा गया है । यथा- “द्यौरहं पुथिवी त्वं, ताविह सं भवाव, प्रजामा जनयावहै" (प्रथवें ० १४।२।७१) मन्त्र मे कहा है कि तुम ..

English

He smote away the flood’s obstructer Vritra: Earth conscious lent her aid to speed thy thunder.

अध्याय २०

श्लोक 94.1

आ या॒त्विन्द्रः॒ स्वप॑ति॒र्मदा॑य॒ यो धर्म॑णा तूतुजा॒नस्तुवि॑ष्मान्।प्र॒त्व॒क्षा॒णो अति॒ विश्वा॒ सहां॑स्यपा॒रेण॑ मह॒ता वृष्ण्ये॑न

ā yātvindraḥ svapatirmadāya yo dharmaṇā tūtujānastuviṣmān| pratvakṣāṇo ati viśvā sahāṃsyapāreṇa mahatā vṛṣṇyena

हिन्दी अर्थ

चली भूमि की भ्रोर निरन्तर प्रवाहित होती रंहती ह ॥ नषि त् नीतः (निरु० ५।४।२७) । काकुदम् = जिह्वा कोकुवा, साऽस्मिन् धीयते (निर० ५।४।२७ ) सुषिरा दो पव॑त के. बीच की संड्ड 1 ।1०॥०५५, ०७५४५ (प्रापे) । , तको नेता तदिद् वपुरुपमा यो अर्धुच्यत॥१०॥

English

Thus by fine fingers purified. Urged by the holy singer, sped by song, come, Indra, to the prayers.

अध्याय २०

श्लोक 94.2

सु॒ष्ठामा॒ रथः॑ सु॒यमा॒ हरी॑ ते मि॒म्यक्ष॒ वज्रो॑ नृप॑ते॒ गभ॑स्तौ ।शीभं॑ राजन् सु॒पथा या॑ह्य॒र्वाङ् वर्धा॑म ते प॒पुषो॒ वृष्ण्या॑नि

suṣṭhāmā rathaḥ suyamā harī te mimyakṣa vajro nṛpate gabhastau | śībhaṃ rājan supathā yāhyarvāṅ vardhāma te papuṣo vṛṣṇyāni

हिन्दी अर्थ

“न्नोदन” पद क्म॑मोग के लिये लाक्षणिक है । कमो का भी परिपाक होता है । कनीनः कनि ( कान्ति ) + इनः. ( स्वामी ) = कान्ति का स्वामी = भ्रतिकान्तिमान् । - 4 ५८४. अर्भको न डमारकोऽविं पिष्टक रथ॑म् । ,. करता है, जन्म लेता है, वह बड़ा होकर यदि (कुमारकः न) कुत्सित काम- बृत्तिरयोवाले युवा के सदृदा हो जाता है, तो ( सः ) वह.( महिषं मृगम् ) भसे तथा मृग ध्रादि पचु्ओं को ( पित्र मात्रे ) पिता भ्रौर मातारूपमें जीवात्मा मानुष शरीर धारण करके भी, यदि युवा होकर, कामादि-

English

Even him, eternal, like a bull who rushes down, men’s con- queror, bounteous like a cow; Him who is cause of both, of enmity and peace, to both sides most munificent.

अध्याय २०

श्लोक 94.3

एन्द्र॒वाहो॑ नृ॒पतिं॒ वज्र॑बाहुमु॒ग्रमु॒ग्रास॑स्तवि॒षास॑ एनम्।प्रत्व॑क्षसं वृष॒भं स॒त्यशु॑ष्म॒मेम॑स्म॒त्रा स॑ध॒मादो॑ वहन्तु

endravāho nṛpatiṃ vajrabāhumugramugrāsastaviṣāsa enam| pratvakṣasaṃ vṛṣabhaṃ satyaśuṣmamemasmatrā sadhamādo vahantu

हिन्दी अर्थ

वासनारओों से वासित हो जाता है, तो. उते फिर पाशविक शरीरो मँ जाकर विविध प्रकारके पादाविक कमो कै भोग मोगने पडते है । अध॑ दक्षं सचेवहि सह॑पादमसुवं स्व॑ततिगाम॑नेहसंम् ॥१६॥ परमेरवर का (सचेवहि) संग किया करेगे ।

English

Although these men in sundry ways invoke thee to obtain thine aid. Be this our prayer, addressed, O Indra, unto thee, thine exalta- tion every day.

अध्याय २०

श्लोक 94.4

ए॒वा पतिं॑ द्रोण॒साचं॒ सचे॑तसमू॒र्ज स्क॒म्भं ध॒रुण॒ आ वृ॑षायसे ।ओजः॑ कृष्व॒ सं गृ॑भाय॒ त्वे अप्यसो॒ यथा॑ केनि॒पाना॑मि॒नो वृ॒धे

evā patiṃ droṇasācaṃ sacetasamūrja skambhaṃ dharuṇa ā vṛṣāyase | ojaḥ kṛṣva saṃ gṛbhāya tve apyaso yathā kenipānāmino vṛdhe

हिन्दी अर्थ

धुक्षम् = दयूलोक की विभरतियों भौर धुलोक के असंख्येय तारागणं की दुष्टि से उन के नियामकरूप मेँ, परमेश्वर को “चुलोकवासी कहा है । कहा है । परोंका कम है एक स्थान से दूसरे स्थान में ले जाना । इस द्वारा परमेश्वर को सर्वंगतरूप मँ वणित किया है । तथा पैरों का काम “प्रतिष्ठा,

English

Those skilled in song, O Maghavan, among these men o’ercome with might the foeman’s 296

अध्याय २०

श्लोक 94.5

गम॑न्न॒स्मे वसू॒न्या हि शंसि॑षं स्वा॒शिषं॒ भर॒मा या॑हि सो॒मिनः॑ ।त्वमी॑शिषे॒ सास्मिन्ना स॑त्सि ब॒र्हिष्य॑नाधृ॒ष्या तव॒ पात्रा॑णि॒ धर्म॑णा

gamannasme vasūnyā hi śaṃsiṣaṃ svāśiṣaṃ bharamā yāhi sominaḥ | tvamīśiṣe sāsminnā satsi barhiṣyanādhṛṣyā tava pātrāṇi dharmaṇā

हिन्दी अर्थ

मे ककम के . दुष्परिणाम का वर्णन है, श्रौर मन्व (५८५) मे सुकमो का (इत्था) यह सत्य है किं उपासक (नमस्विनः) नमस्कार करते हए धन को (एते) प्राप्त करके, वे उपासक, (दावने) दान के निमित्त उस धन सम्पत्तियो का दान, ये दो उपाय हैँ परमेश्वर के समीप भ्रासीन होने के 4 इत्या सत्यम् (चिव० ३।१०) । ।

English

songs, Come hither, bring us strength in many a varied form most near that it may succour us.

अध्याय २०

श्लोक 94.6

पृथ॒क् प्राय॑न् प्रथ॒मा दे॒वहू॑त॒योऽकृ॑ण्वत श्रव॒स्याऽनि दु॒ष्टरा॑ ।न ये शे॒कुर्य॒ज्ञियां॒ नाव॑मा॒रुह॑मी॒र्मैव ते न्य॑विशन्त॒ केप॑यः

pṛthak prāyan prathamā devahūtayo'kṛṇvata śravasyā'ni duṣṭarā | na ye śekuryajñiyāṃ nāvamāruhamīrmaiva te nyaviśanta kepayaḥ

हिन्दी अर्थ

(एषाम्) इन उपासर्को मँ से जो उपासक (्रियमेधासः) उपासना- ् . (यः) जो परमेदवर (चषंणीनाम्) सब मनुष्यों का (राजा) राजा है, जो ( रथेभिः ) हमारे शरीर-रथों ढारा, तथा गतिशील भ्रौर रमणीय जिस की गतिविधि को कोई रोक नदीं सकता । ( यः ) जो ( विश्वासा पृतनानाम् )- सब विरोधी शक्तियो को .( तरुता ) पराजित किया हमा,

English

Those who are yoked by prayer with prayer I harness, the two. fleet friendly Bays who joy together.

अध्याय २०

श्लोक 94.7

ए॒वैवापा॒गप॑रे सन्तु दू॒ढ्योऽश्वा॒ येषां॑ दु॒र्युज॑ आयुयु॒ज्रे।इ॒त्था ये प्रागुप॑रे॒ सन्ति॑ दा॒वने॑ पु॒रूणि॒ यत्र॑ व॒युना॑नि॒ भोज॑ना

evaivāpāgapare santu dūḍhyo'śvā yeṣāṃ duryuja āyuyujre| itthā ye prāgupare santi dāvane purūṇi yatra vayunāni bhojanā

हिन्दी अर्थ

है, (गुणे) उसके मँ स्तुतिगान गाता हूं । ४ - इस्ता॑य षल्नः परति धायि दशतो महो दिते न ध्यै! ॥१७। , (पुर्हन्मत्) है पापों का भ्रति हनन करनेवाले उपासक ! (अवसे ) स्तुतियोँ प्रौर कीतैनों द्वारा शोभा बढ़ाया कर, ( यस्य ) जिसकंकि (विधतंरि ) विक्ेष-धा रण-सामथ्यं पर (द्विता) दो प्रकार के- चयुलोक तथा तथा भूलोक, इहलोक तथा परलोक स्थित है; तथा जिस परभेदवर ने (हस्ताय) पापियों भौर पापों के हनन कं लिये, ( दशतः) दरंनीय (वचनः) ज्ञानरूपी वच ( प्रतिधायि ) धारण किया हृभ्रा है, (न ) जैसे. कि उसने

English

Mounting thy firm and easy car, O Indra, wise and all-knowing come thou to the Soma. No wild bull knows his drinking-place like Indra who ever seeks him who hath pressed the

अध्याय २०

श्लोक 94.8

गि॒रींरज्रा॒न् रेज॑मानां अधारय॒द् द्यौः क्र॑न्दद॒न्तरि॑क्षाणि कोपयत्।स॒मी॒ची॒ने धि॒षणे॒ वि ष्क॑भायति॒ वृष्णः॑ पी॒त्वा मद॑ उ॒क्थानि॑ शंसति

girīṃrajrān rejamānāṃ adhārayad dyauḥ krandadantarikṣāṇi kopayat| samīcīne dhiṣaṇe vi ṣkabhāyati vṛṣṇaḥ pītvā mada ukthāni śaṃsati

हिन्दी अर्थ

( दिवे ) अका के लिये भर्थात् अन्धकार के हनन के लिये ( महः सूर्यः ) प्रकाशमय महा सूयं घारण किया हमा है ।. ५९०. नकिष्टे कमणा नश् यश्वकारं सदादषम् ।

English

Soma. Thou dost desire to drink, each day that passes, the pleasant food which thou hast had

अध्याय २०

श्लोक 94.9

इ॒मं बि॑भर्मि॒ सुकृ॑तं ते अङ्कु॒शं येना॑रु॒जासि॑ मघवं छफा॒रुजः॑ ।अ॒स्मिन्त्सु ते॒ सव॑ने अस्त्वो॒क्त्यं सु॒त इ॒ष्टौ म॑घवन् बो॒ध्याभ॑गः

imaṃ bibharmi sukṛtaṃ te aṅkuśaṃ yenārujāsi maghavaṃ chaphārujaḥ | asmintsu te savane astvoktyaṃ suta iṣṭau maghavan bodhyābhagaḥ

हिन्दी अर्थ

(कर्मणा) किसी भी कर्म द्वारा (नकिः) कोई भी नहीं . (तम्) उस परमेदवर की सदहिमा को ( नशत् ) प्राप्त कर सकता, (यः) जो परमेद्वर कि (सद।वृधम् ) से की सदा वृद्धि (चकार) करता हौ । ( विहवगूर्तम् ) यज्ञ-यागादि द्वारा, (नकिः नशत्) कोई नहीं पहुंच सकता 1. . ( यस्मिन् ) जिस परमेदवर के ( जायमाने ) प्रकट होते हृए+-

English

aforetime. O Indra, gratified in heart and spirit, drink eagerly the Soma set before thee.

अध्याय २०

श्लोक 94.10

गोभि॑ष्टरे॒माम॑तिं दु॒रेवां॒ यवे॑न॒ क्षुधं॑ पुरुहूत॒ विश्वा॑म्।व॒यं राज॑भिः प्रथ॒मा धना॑न्य॒स्माके॑न वृ॒जने॑ना जयेम

gobhiṣṭaremāmatiṃ durevāṃ yavena kṣudhaṃ puruhūta viśvām| vayaṃ rājabhiḥ prathamā dhanānyasmākena vṛjanenā jayema

हिन्दी अर्थ

उपासको को ( भ्रफाणयत् ) योगमागं में गधी निवा, ५ ( (षान ) सुगमता से योगयुक्त किरा, तथा ( उपयुक्तान् ) योगमा के समरपंक के लिये, (नेता) मागं प्रददोन करता है, वह ( उपमा ) उपमारूपं है, (यः) जो कि उपासक के ( तत् इत् ) उसी वत्तं

English

Of the libation-pouring priest. Approach, O Indra, hasting thee, Lord of Bay Horses, to the prayers:

अध्याय २०

श्लोक 94.11

बृह॒स्पति॑र्नः॒ परि॑ पातु प॒श्चादु॒तोत्त॑रस्मा॒दध॑रादघा॒योः ।इन्द्रः॑ पु॒रस्ता॑दु॒त म॑ध्य॒तो नः॒ सखा॒ सखि॑भ्यो॒ वरि॑वः कृणोतु

bṛhaspatirnaḥ pari pātu paścādutottarasmādadharādaghāyoḥ | indraḥ purastāduta madhyato naḥ sakhā sakhibhyo varivaḥ kṛṇotu

हिन्दी अर्थ

(अमुच्यत) डा देता, ्रौर उसे मुक्त ५ देता ह। 1 विहीन 1 = चित्त की तं से 8 भरफाणयत् फणति गतिकर्मा ( निघ० २।१४ ) । तक्व = तक् द्विषः) सब प्रकार की दवेष-मावनाभो से ( अति प्तिकानत ८ । (" ग (उ) ५५ = का (भ्रति भोहते) बि तो । ) उसे बर छा देता ह । (कनीनः) कान्तिमान् ( परः ) परब्रह् (गिरा) वेदवाणियों के कथनानुसार, ( पच्यमानम् ०५४५ व रहे कर्म- मोगों को (भिनत्) छिन्न-भिन्न करदेताहै। । न ऋ कनीनः == कन् वीप्तिकान्तिगतिषु । भोदनम् = जैसे “भात का

English

Take pleasure in the juice we pour. Praise only mighty Indra when the juice is shed, and say your lauds repeatedly:

अध्याय २०

श्लोक 95.1

त्रिक॑द्रुकेषु महि॒षो यवा॑शिरं तुवि॒शुष्म॑स्तृ॒पत् सोम॑मपिब॒द् विष्णु॑ना सु॒तं यथाव॑शत्।स ईं॑ ममाद॒ महि॒ कर्म॒ कर्त॑वे म॒हामु॒रुं सैनं॑ सश्चद् दे॒वो दे॒वं स॒त्यमिन्द्रं॑ स॒त्य इन्दुः॑

trikadrukeṣu mahiṣo yavāśiraṃ tuviśuṣmastṛpat somamapibad viṣṇunā sutaṃ yathāvaśat| sa īṃ mamāda mahi karma kartave mahāmuruṃ sainaṃ saścad devo devaṃ satyamindraṃ satya induḥ

हिन्दी अर्थ

कामादि के.नाना वर्गों के उपस्थित हो जाने पर भी ( सासहिम् ) उनका लोकलोकान्तर मिलकर कर रहे है, (चेनवः) वेदवाणियां भी उसी परमेश्वर महापरिमाणी. (क्षामः) -पृथिवी भी उसी की स्तुत्तियां कर रहे है ।

English

Thou, newly-born, for strength didst drink the Soma; thy mother told thee of thy future greatness.

अध्याय २०

श्लोक 95.2

प्रो ष्व॑स्मै पुरोर॒थमिन्द्रा॑य शू॒षम॑र्चत ।अ॒भीके॑ चिदु लोक॒कृत् सं॒गे स॒मत्सु॑ वृत्र॒हास्माकं॑ बोधि चोदि॒ता नभ॑न्तामन्य॒केषां॑ ज्या॒का अधि॒ धन्व॑सु

pro ṣvasmai purorathamindrāya śūṣamarcata | abhīke cidu lokakṛt saṃge samatsu vṛtrahāsmākaṃ bodhi coditā nabhantāmanyakeṣāṃ jyākā adhi dhanvasu

हिन्दी अर्थ

(भरद्रिवः) है भविदीणं शक्ति्योवाले परमेश्वर ! (स्तोमाः) हमारे सम्बन्धी विरोधी जावनाभ्रो का (भव जहि) हनन कीजिये । है परमेद्वर ! ( राधसः) भ्रांराधना-विहीन (पणीन्) हमारी व्याव- हारिक-भावनाओों को (षदा) मानो पैर की ठोकर हारा भ्राप (नि बाधस्व) (स्वा) भ्राप का (अतिन) प्रतिरोध नदीं करं सकती ।

English

O Indra, thou hast filled mid-air’s wide region, and given the Gods by battle room and freedom.

अध्याय २०

श्लोक 95.3

त्वं सिन्धूं॒रवा॑सृजोऽध॒राचो॒ अह॒न्नहि॑म्।अ॒श॒त्रुरि॑न्द्र जज्ञिषे॒ विश्वं॑ पुष्यसि॒ वार्यं॒ तं त्वा॒ परि॑ ष्वजामहे॒ नभ॑न्तामन्य॒केषां॑ ज्या॒का अधि॒ धन्व॑सु

tvaṃ sindhūṃravāsṛjo'dharāco ahannahim| aśatrurindra jajñiṣe viśvaṃ puṣyasi vāryaṃ taṃ tvā pari ṣvajāmahe nabhantāmanyakeṣāṃ jyākā adhi dhanvasu

हिन्दी अर्थ

के (ईरिषे) अधीरवर है, (त्वम्) भ्राप ( भसुतानाम् ) न पदां कं ४ का २०. सू० ९३ अथवेवेद-माष्य . २३९ ( सहसः ) मानसिक साहस, तथा ( भोजसः ) भआ्राध्यात्मिक कोमल

English

When thou hast urged the arrogant to combat, proud in their strength of arm, we will subdue them.

अध्याय २०

श्लोक 95.4

वि षु विश्वा॒ अरा॑तयो॒ऽर्यो न॑शन्त नो॒ धियः॑ ।अस्ता॑सि॒ शत्र॑वे व॒धं यो न॑ इन्द्र॒ जिघां॑सति॒ या ते॑ रा॒तिर्द॒दिर्वसु॒ नभ॑न्तामन्य॒केषां॑ ज्या॒का अधि॒ धन्व॑सु

vi ṣu viśvā arātayo'ryo naśanta no dhiyaḥ | astāsi śatrave vadhaṃ yo na indra jighāṃsati yā te rātirdadirvasu nabhantāmanyakeṣāṃ jyākā adhi dhanvasu

हिन्दी अर्थ

(इन्र) है परमेश्वर ! आप ( वृत्रहा भसि ) पापों का हनन कर (भरकंम्) सूयं को विना बाहू के ही ( बिभर्षि ) धारण कर रहे ह, भौर समान सूयं को (शिशानः) ताप से तीखा कर रहै है । ६०१. स्वमिनद्राभिमूरंसि मिष्वा जातान्योजसा 1

English

Or, Indra, when thou fightest girt by heroes, we in the glorious fray with thee will conquer. I will declare the earliest deeds of Indra, and recent acts which

अध्याय २०

श्लोक 96.1

ती॒व्रस्या॒भिव॑यसो अ॒स्य पा॑हि सर्वर॒था वि हरी॑ इ॒ह मु॑ञ्च ।इन्द्र॒ मा त्वा॒ यज॑मानासो अ॒न्ये नि री॑रम॒न् तुभ्य॑मि॒मे सु॒तासः॑

tīvrasyābhivayaso asya pāhi sarvarathā vi harī iha muñca | indra mā tvā yajamānāso anye ni rīraman tubhyamime sutāsaḥ

हिन्दी अर्थ

( इन्द्र ) है प्रमेदवर ! . प्रापने. ( भोजसा ) निजं भरोजं के कारण २४० भ्रथ्ववेद-भाष्य का० २० । सु° ९४ है। (सः) वे आप ( विद्वाः भुवः ) सब भुवनो में (आभवः) पूणंतया

English

Maghavan hath accomplished. When he had conquered godless wiles and magic, Soma became his own entire possession.

अध्याय २०

श्लोक 96.2

तुभ्यं॑ सु॒तास्तुभ्य॑मु॒ सोत्वा॑स॒स्त्वां गिरः॒ श्वात्र्या॒ आ ह्व॑यन्ति ।इन्द्रे॒दम॒द्य सव॑नं जुषा॒णो विश्व॑स्य वि॒द्वां इ॒ह पा॑हि॒ सोम॑म्

tubhyaṃ sutāstubhyamu sotvāsastvāṃ giraḥ śvātryā ā hvayanti | indredamadya savanaṃ juṣāṇo viśvasya vidvāṃ iha pāhi somam

हिन्दी अर्थ

दलदली लहर पवतो के रूप भे भूपुष्ठ पर स्थिर होः गई । लहरो की . दलदली ्रवस्था में वाग के प्रबल वेगो के कारण चलायमान तथा अपना- शब्दों दवारा सूचित किया है । इसी भाव कौ "येन द्यौरग्रा पुथिवी च दढा" (यजु ३२।६) दारा भी सूत्रित किया है । (२) पृथिवी प्रर भ्रभीजलनथा। पृथिवी के त्रायुमण्डल में दूर

English

Vala. Brihaspati thundering drave forth the cattle, the lowing cows who make oblations ready.

अध्याय २०

श्लोक 96.3

य उ॑श॒ता मन॑सा॒ सोम॑मस्मै सर्वहृ॒दा दे॒वका॑मः सु॒नोति॑ ।न गा इन्द्र॒स्तस्य॒ परा॑ ददाति प्रश॒स्तमिच्चारु॑मस्मै कृणोति

ya uśatā manasā somamasmai sarvahṛdā devakāmaḥ sunoti | na gā indrastasya parā dadāti praśastamiccārumasmai kṛṇoti

हिन्दी अर्थ

अभीके चिदु जोकुङ़व संगे खमस्य वुत्रहास्मा् बोधि चोदिता , संमपित करदो) क्योंकि परमेदवर ( भभीके चित् हृदय के समीपवतीं होकर (उ) गव्य लोककृत्) भालोक पेदा कर देता ह 1 (संगे) भौर खसके मेल हो जाने पर (समत्सु) देवासुर-संग्रामों मे वह (वृत्रहा) हमारे वाप-वुत्रो का हूनन कर देता है, भरौर ( चोदित। हमे भ्ररणाए देता है, प्रौर (भरस्माकम्) हमारी कामना को (बोधि) भववगत कर लेता है, ये .

English

Standing, in battle for their rights, together, the people, Indra, in the fray invoke thee. Him who brings gifts the Hero makes his comrade: with him who pours no juice he seeks not

अध्याय २०

श्लोक 96.4

अनु॑स्पष्टो भवत्ये॒षो अ॑स्य॒ यो अ॑स्मै रे॒वान् न सु॒नोति॒ सोम॑म्।निर॑र॒त्नौ म॒घवा॒ तं द॑धाति ब्रह्म॒द्विषो॑ ह॒न्त्यना॑नुदिष्टः

anuspaṣṭo bhavatyeṣo asya yo asmai revān na sunoti somam| niraratnau maghavā taṃ dadhāti brahmadviṣo hantyanānudiṣṭaḥ

हिन्दी अर्थ

(धन्वसु) धनुषो पर चदी ज्याकाः) डोरियां (नमन्ताम्) दूट-फूट जाय । का० २०।सू० ९५ अथवंवंद-भ्।ष्य २४७ का (भ्रवासुजः) नीचे को भ्रोर संन किया है, भौर उन्दँ (भ्रधराचः) नीचे

English

friendship. Whoso with plenteous juice for him expresses strong Somas as much quickly-coming

अध्याय २०

श्लोक 96.5

अ॒श्वा॒यन्तो॑ ग॒व्यन्तो॑ वा॒जय॑न्तो॒ हवा॑महे॒ त्वोप॑गन्त॒वा उ॑ ।आ॒भूष॑न्तस्ते सुम॒तौ नवा॑यां व॒यमि॑न्द्र त्वा शु॒नं हु॑वेम

aśvāyanto gavyanto vājayanto havāmahe tvopagantavā u | ābhūṣantaste sumatau navāyāṃ vayamindra tvā śunaṃ huvema

हिन्दी अर्थ

करते रहते है । इसलिये -( तं त्वा ) उसं भ्रापका ( परिष्वजामहे ) हम उपासक समाधि मे, शरीर की सुघनबुध से. रहित होकर जब निज भरात्मरूप से परमेइवर में लीन हो जाताह, तब यह लीन. होना ही भ्रादि कौ परिपोषषण परमेदवर करता ह 1 हे परमेश्वर! (विद्वा भररातयः) शब प्रकार की भ्रदान-भावनाए

English

treasure, For him he everthrows in early morning his swift well-weapon- ed foes and slays the tyrant.

अध्याय २०

श्लोक 96.6

मु॒ञ्चामि॑ त्वा ह॒विषा॒ जीव॑नाय॒ कम॑ज्ञातय॒क्ष्मादु॒त रा॑जय॒क्ष्मात्।ग्राहि॑र्ज॒ग्राह॒ यद्ये॒तदे॑नं तस्या॑ इन्द्राग्नी॒ प्र मु॑मुक्तमेनम्

muñcāmi tvā haviṣā jīvanāya kamajñātayakṣmāduta rājayakṣmāt| grāhirjagrāha yadyetadenaṃ tasyā indrāgnī pra mumuktamenam

हिन्दी अर्थ

( वि नष्न्त.) हंम से विगत हो जाय, दुरः हट जाय, भौर ( नः ) हमारी (नः). हमारी (जिघांसति) हिसा करने मे उन्मुखं होता हं, उस (शत्रवे) हं । है परमेदवर । (ते) आपका (या) जो .( रातिः) दान है. वह (वसु)

English

He unto whom we offer praises, Indra, Maghavan, who hath joined to ours his wishes Before him even afar the foe must tremble: low before him must bow all human glories.

अध्याय २०

श्लोक 96.7

यदि॑ क्षि॒तायु॒र्यदि॑ वा॒ परे॑तो॒ यदि॑ मृ॒त्योर॑न्ति॒कं नीऽत ए॒व।तमा ह॑रामि॒ निरृ॑तेरु॒पस्था॒दस्पा॑र्शमेनं श॒तशा॑रदाय

yadi kṣitāyuryadi vā pareto yadi mṛtyorantikaṃ nī'ta eva| tamā harāmi nirṛterupasthādaspārśamenaṃ śataśāradāya

हिन्दी अर्थ

रय अयर्ववेद-माष्य का० २० । सू० ६९६ श्राप रक्षा कीजिये, ओर ( सवरथा ) सब के रशरीर-रथोमेंजुते हुए (हरी) विषयों मे" हरण करनेवलि द्विविध इन्द्रियादवों को, (इह) मेरे इस जीवन मे, (वि मुञ्च) विषयों मे हरण करने से वियुक्त कर दीजिये, डा दीजिये 1 है परमेदवर ! (भन्ये) मूक से भिन्न, ( यजमानासः ) उपासना- यज्ञो के यजन करनेवाले उपासक भी, (त्वौ = त्वां क. आपका त्याग विदववेतता है, (दह) इस. जीवन में (घोमम्) हमारे भक्तिरस की (वीहि) का (जुषाणः) प्रीतिपूर्वेक सेवन कीजिये ।

English

With thy fierce bolt, O God invoked of many, drive to a distance from afar the foeman. O Indra, give us wealth in corn and cattle, and make the singer’s prayer gain strength and

अध्याय २०

श्लोक 96.8

स॒ह॒स्रा॒क्षेण॑ श॒तवी॑र्येण श॒तायु॑षा ह॒विषाहा॑र्षमेनम्।इन्द्रो॒ यथै॑नं श॒रदो॒ नया॒त्यति॒ विश्व॑स्य दुरि॒तस्य॑ पा॒रम्

sahasrākṣeṇa śatavīryeṇa śatāyuṣā haviṣāhārṣamenam| indro yathainaṃ śarado nayātyati viśvasya duritasya pāram

हिन्दी अर्थ

का० २०1 सू० ९५ अथववंवेद-माष्य २४६ ६१९. यं ठद्चता मन॑सा सोम॑मस्मे सवेहृदा देवकामः सुनोति । (देवकामः) परमेदवर-देव की प्राप्ति की कामनावाला ( यः.) जो न्धक्ति, (उदता मनसा) उत्कट-अभिलाषावाले मन से, तथा ( सत्रहृदा )

English

riches. Indra the swallower of strong libations with their thick residue, the potent Somas,

अध्याय २०

श्लोक 96.9

श॒तं जी॑व श॒रदो॒ वर्ध॑मानः श॒तं हे॑म॒न्तान्छ॒तमु॑ वस॒न्तान्।श॒तं त॒ इन्द्रो॑ अ॒ग्निः स॑वि॒ता बृह॒स्पतिः॑ श॒तायु॑षा ह॒विषाहा॑र्षमेनम्

śataṃ jīva śarado vardhamānaḥ śataṃ hemantānchatamu vasantān| śataṃ ta indro agniḥ savitā bṛhaspatiḥ śatāyuṣā haviṣāhārṣamenam

हिन्दी अर्थ

(गाः) प्राथंना-वाणियों का ( न.पराददाति ) तिरस्कार नहीं करता, भ्रपि नीय फन, (कृणोति) प्रदान करता है । - (यः) जो (रेवान्) धनिक व्यक्ति, (रस्मै ). इस परभेरवर के लिये, नहीं ( भवति ) होता; ( मघवा ) रेदवयंशाली परमेदवर ( तम् ) उसे

English

He, Maghavan, will not restrict his bounty: he brings much wealth unto the Soma-presser. Yea, by superior play he wins advantage when he, a gambler, piles his gains in season.

अध्याय २०

श्लोक 96.10

आहा॑र्ष॒मवि॑दं त्वा॒ पुन॒रागाः॒ पुन॑र्णवः ।सर्वा॑ङ्ग॒ सर्वं॑ ते॒ चक्षुः॒ सर्व॒मायु॑श्च तेऽविदम्

āhārṣamavidaṃ tvā punarāgāḥ punarṇavaḥ | sarvāṅga sarvaṃ te cakṣuḥ sarvamāyuśca te'vidam

हिन्दी अर्थ

(स्वपतिः) समग्॑श्वयो का पति परमेदत्रर ( मदाय ) उपासको की . श्रसन्नता गौर तृप्ति के लिये (गा यातु) हम उपासको मेँ प्रकट हो । (यः) वेदिक घमं के द्वारा (तूतुजानः) हमारा पालन कर रहा है 1 वह (अपरारेण) तूतुजानः == तुजि पालने + कानच् । तत्वक्ष् = तनूकरणे ।

English

Thine is this world of flocks and herds around thee, which with the eye of Surya thou beholdest.

अध्याय २०

श्लोक 96.11

ब्रह्म॑णा॒ग्निः स॑म्विदा॒नो र॑क्षो॒हा बा॑धतामि॒तः ।अमी॑वा॒ यस्ते॒ गर्भं॑ दु॒र्णामा॒ योनि॑मा॒शये॑

brahmaṇāgniḥ samvidāno rakṣohā bādhatāmitaḥ | amīvā yaste garbhaṃ durṇāmā yonimāśaye

हिन्दी अर्थ

हे परमेदवर ! (रथः) मेरा यह शरीर रथ ( सुष्ठामां ) चञ्चलता सै रहित होकर भरवःउत्तम स्थिरता को प्राप्त हो गयादहै, भौर .( हरी) भ्रज्ञानान्धकार-निवारक किरणों मे.( वचनः ) मानो एक वच्रदहै, जो किं आदये, प्रकट हृजिये, (पधुषः) पुष्टि करनेवाले (ते) आपके ( वृष्ण्यानि

English

Thou, Indra, art alone the Lord of cattle: may we enjoy the treasure which thou givest. Ye twain are Lords of wealth in earth and heaven, thou, O

अध्याय २०

श्लोक 96.12

यस्ते॒ गर्भ॒ममी॑वा दु॒र्णामा॒ योनि॑मा॒शये॑ ।अ॒ग्निष्टं ब्रह्म॑णा स॒ह निष्क्र॒व्याद॑मनीनशत्

yaste garbhamamīvā durṇāmā yonimāśaye | agniṣṭaṃ brahmaṇā saha niṣkravyādamanīnaśat

हिन्दी अर्थ

।१५८०) वैदिक पुस्तकालय, भ्रजमेर । .का० २० । सुग.€४. श्रथवेवेद-माष्य २४१ . ( इन्द्रवाहः ) परमेदवर को अपने शरीर -रथों मे वहन करनेवाले (उग्रासः) कतंव्यों में सुदृढ, (सधमादः) परमेदवर के साथ रहं कर भ्रानन्द मोगनेवाले, (तविषासः) महान् भ्रात्माए"-( नृपतिम् ) नर-नासियो के कराए; उस का प्रत्यक्ष दशन कराए ।

English

Brihaspati, and thou, O Indra . Mean though he be, give wealth to him who lauds you. Preserve us evermore, ye Gods, with

अध्याय २०

श्लोक 96.13

यस्ते॒ हन्ति॑ प॒तय॑न्तं निष॒त्स्नुं यः स॑रीसृ॒पम्।जा॒तं यस्ते॒ जिघां॑सति॒ तमि॒तो ना॑शयामसि

yaste hanti patayantaṃ niṣatsnuṃ yaḥ sarīsṛpam| jātaṃ yaste jighāṃsati tamito nāśayāmasi

हिन्दी अर्थ

बाहुः=-बाध्यन्ते विलोडघन्ते पदार्था येन सः ( उणादि कोष, १।२७ ६०९. एवा परति द्रोणसाचं सचैतसमूजे स्कम्भे धरुण आ वृषायसे । ओज॑ः कृषवु सं शमाय त्वे अप्यसो यथां केनिपानामिनो वृषे॥४॥

English

blessings. Him who with might hath propped earth’s ends, who sitteth in threefold seat, Brihaspati, with

अध्याय २०

श्लोक 96.14

यस्त॑ ऊ॒रू वि॒हर॑त्यन्त॒रा दम्प॑ती॒ शये॑ ।योनिं॒ यो अ॒न्तरा॒रेल्हि॒ तमि॒तो ना॑शयामसि

yasta ūrū viharatyantarā dampatī śaye | yoniṃ yo antarārelhi tamito nāśayāmasi

हिन्दी अर्थ

साथी, या हदय-गृह के साथी, (सचेतसम्) सदा-चेतन, (उजंः) श्राध्यात्मिक- परमेदवर को धारण करने के स्थान हृदय मे (आ वृषायसे) अपने भक्ति- रस से सीचता' है । (ओजः कृष्व) है उपासक ! तू प्रपना गोज प्रकट कर, धनौर ( संगृभाय ) भरोज का अधिक संग्रह कर, ( त्वे=त्वयि ) तुभे (इनः). स्वामी परमेदवर (कंनिपानाम्). मेघावी-उपासकों का (वृष) बरद्धि को लिये हं । ब्रोण=प्रणाति वघकर्मा (निच० २।१६९).भरथवा द्रोण =दुरीण ८ गृहः निघ° ३।४ ) । केनिपाः = मेधाविनः ( निघ० ३।१५ ) । के साषारिकं सुखो मे रहते हए भी जो, निपाः= भक्तिरस का निरन्तर पान प्रकट करदीहै किह परमेदवर ! (सोमिनः) भक्तिरस की मेँटवाले मुक

English

thunder, Him of the pleasant tongue have ancient sages, deep thinking,. holy singers, set before them.

अध्याय २०

श्लोक 96.15

यस्त्वा॒ भ्राता॒ पति॑र्भू॒त्वा जा॒रो भू॒त्वा नि॒पद्य॑ते ।प्र॒जां यस्ते॒ जिघां॑सति॒ तमि॒तो ना॑शयामसि

yastvā bhrātā patirbhūtvā jāro bhūtvā nipadyate | prajāṃ yaste jighāṃsati tamito nāśayāmasi

हिन्दी अर्थ

याभ्रापको धारण कर लेने के कारण (अनाधृष्या) भरब पापों द्वारा पराभव न ये शेकुयंियां नाव॑माद॑मीमव ते न्य॑बि्न्त॒ केय॑यः ।६।। - (प्रथमाः. देवहूतयः) दिव्य-उपासकों की शष्ठ पुकारे, ( पृथक् )

English

Wild in their course, in well-marked wise rejoicing were they,. Brihaspati, who pressed around us

अध्याय २०

श्लोक 96.16

यस्त्वा॒ स्वप्ने॑न॒ तम॑सा मोहयि॒त्वा नि॒पद्य॑ते ।प्र॒जां यस्ते॒ जिघां॑सति॒ तमि॒तो ना॑शयामसि

yastvā svapnena tamasā mohayitvā nipadyate | prajāṃ yaste jighāṃsati tamito nāśayāmasi

हिन्दी अर्थ

बार-बार प्रविष्ट होते रहते है । लोग (पाक्) पिषठढ़ रहते (सन्ति) है (येषाम्) जिनके करि (भवाः) इन्द्रयाइव उन के साय (प्रायं). सदा चते रहे है, भौर (दयु; ) दुःखदायीरूप मे जुते रहते. है । (इत्था) इसी प्रकार (ये) जो (परे) इन से

English

Preserve, Brihaspati, the stall uninjured,r,this company’s raining. ever-moving birth-place. Brihaspati, from thy remotest distance have they sat down who love the law eternal.

अध्याय २०

श्लोक 96.17

अ॒क्षीभ्यां॑ ते॒ नासि॑काभ्यां॒ कर्णा॑भ्यां॒ छुबु॑का॒दधि॑ ।यक्ष्मं॑ शीर्ष॒ण्यं म॒स्तिष्का॑ज्जि॒ह्वाया॒ वि वृ॑हामि ते

akṣībhyāṃ te nāsikābhyāṃ karṇābhyāṃ chubukādadhi | yakṣmaṃ śīrṣaṇyaṃ mastiṣkājjihvāyā vi vṛhāmi te

हिन्दी अर्थ

शूपी ( भोजना ) भोजन ( पुरूणि ) बहुमाघा मे होता है, वे ( दावने ) भरमेवर के भरति सवंस्व-दान भे, (प्राक् सन्ति) भागे बढ़े हए होते है । - (कोपयत्) प्रकुपित किया । परमेदवर (धिषणे) च लोक भ्रौर भूलोक को

English

For thee were dug wells springing from the mountain, which murmuring round about pour streams of sweetness.

अध्याय २०

श्लोक 96.18

ग्री॒वाभ्य॑स्त उ॒ष्णिहा॑भ्यः॒ कीक॑साभ्यो अनू॒क्याऽत्।यक्ष्मं॑ दोष॒ण्य॑१मंसा॑भ्यां बा॒हुभ्यां॒ वि वृ॑हामि ते

grīvābhyasta uṣṇihābhyaḥ kīkasābhyo anūkyā't| yakṣmaṃ doṣaṇya1maṃsābhyāṃ bāhubhyāṃ vi vṛhāmi te

हिन्दी अर्थ

(विष्कभायति) थाम रहा है, (समीचीने ) भरतः ये दोनों समीचीन अवस्था के प्रति (उक्थानि) वं दिक-सूक्तों का (शंसति) कथन परमेदवर करता है । रौर. जगत् के समीचीन अवस्था मेँ भा जाने पर भादि-ऋषिर्यो को वेदज्ञान भ्रभिप्राय है कि-(१) पृथिवी सूयं से पदा हू । तब पृथिवी भ्ग्निमय थी,

English

Brihaspati, when first he had his being from mighty splendour in supremest heaven. Strong, with his sevenfold mouth, with noise of thunder, with his seven rays blew and

अध्याय २०

श्लोक 96.19

हृद॑यात् ते॒ परि॑ क्लो॒म्नो हली॑क्ष्णात् पा॒र्श्वाभ्या॑म्।यक्ष्मं॒ मत॑स्नाभ्यां प्ली॒ह्नो य॒क्नस्ते॒ वि वृ॑हामसि

hṛdayāt te pari klomno halīkṣṇāt pārśvābhyām| yakṣmaṃ matasnābhyāṃ plīhno yaknaste vi vṛhāmasi

हिन्दी अर्थ

जैसे कि सूर्यं भ्रमी तक प्रायः भग्निमय है । सूयं के भाकषंणः आर पृथिवी के भम्निमयं होने 4 के कारण पृथिवी पर ऊंची-ऊ "ची भरागेग्र लहर उठती थीं । पृथिवी शनः-शनैः ठण्ड होती गई भौर द्रवावस्था में राई, तब पृथिवी स दवावस्था के पायितत्त्वों की लहर उठती रही, जसे कि जलीय-समुद्र से जलीय-लहरं उठा करती है । पृथिवी भौर टण्डी हई भौर दलदल की भ्रवस्था में भाई । तब ससे दलदल की -सी घनी लहर उठती रहीं । ये गई, भरर भूपुष्ठ भी अधिकाधिक ठण्डा होता गया, भौर . समयानुसार

English

dispersed the darkness. With the loud-shouting band who sang his praises, with thunder, he destroyed malignant

अध्याय २०

श्लोक 96.20

आ॒न्त्रेभ्य॑स्ते॒ गुदा॑भ्यो वनि॒ष्ठोरु॒दरा॒दधि॑ ।यक्ष्मं॑ कु॒क्षिभ्यां॑ प्ला॒शेर्नाभ्या॒ वि वृ॑हामि ते

āntrebhyaste gudābhyo vaniṣṭhorudarādadhi | yakṣmaṃ kukṣibhyāṃ plāśernābhyā vi vṛhāmi te

हिन्दी अर्थ

चमकती थीं । इस् कारण भ्राक्सीजन तथा हादइडोजन का परस्पर रासायनिक मेल होता रहा, ओर वायुमण्डल में जल-संग्रह होता रहा । रन्दो हारा मन्त्र मे हुमा है 1 । (३) पुथिवी के वायुमण्डल मेँ जब जल की भाप घनी होती गई, तौ प्रभूत मात्रा में मेष बने गौर इनसे सत॒त-धारार्भो के रूप मँ वर्षा होती

English

Serve we with sacrifices, gifts, and homage even thus the Steer of all the Gods, the Father.

अध्याय २०

श्लोक 96.21

ऊ॒रुभ्यां॑ ते अष्ठी॒वद्भ्यां॒ पार्ष्णिभ्यां॒ प्रप॑दाभ्याम्।यक्ष्मं॑ भस॒द्यं॑१ श्रोणि॑भ्यां॒ भास॑दं॒ भंस॑सो॒ वि वृ॑हामि ते

ūrubhyāṃ te aṣṭhīvadbhyāṃ pārṣṇibhyāṃ prapadābhyām| yakṣmaṃ bhasadyaṃ1 śroṇibhyāṃ bhāsadaṃ bhaṃsaso vi vṛhāmi te

हिन्दी अर्थ

. (४)- उग्र वर्षा के कारण पुथिवी ठण्डी होती गह । पृथिवी पर मे “समीचीने धिषणे” शब्दों द्वारा सूचित किया है । (५) कालान्तर में जब मनुष्य-सृष्टि हुई, तब परमेदवर ने मानसिक पुत्रों को पदा किया, जो कि आदि के कर ऋषि थेऽ्रौर इनके हारा वैदिकं

English

Brihaspati, may we be lords of riches, with noble progeny and, store of heroes. Quell with your voice the wicked’s voice, O sages, Singer, make

अध्याय २०

श्लोक 96.22

अ॒स्थिभ्य॑स्ते म॒ज्जभ्यः॒ स्नाव॑भ्यो ध॒मनि॑भ्यः यक्ष्मं॑ पा॒णिभ्या॑म॒ङ्गुलि॑भ्यो न॒खेभ्यो॒ वि वृ॑हामि ते

asthibhyaste majjabhyaḥ snāvabhyo dhamanibhyaḥ yakṣmaṃ pāṇibhyāmaṅgulibhyo nakhebhyo vi vṛhāmi te

हिन्दी अर्थ

हे परमेदवरर ! (सुकृतम्) प्रजा कोः सुकर्मी करनेवाले, (ते) भापके १२३. त्रिकुकेषु महियो वारं ठविशस्तृपत् सोममिव सद देषो व स्वमिन सत्य शृन्दुः ।1१॥.

English

Indra rest beside the Soma. Draw thy Friend to thee like a cow at milking: O singer, wake up Indra as a lover.

अध्याय २०

श्लोक 96.23

अङ्गे॑अङ्गे॒ लोम्नि॑लोम्नि॒ यस्ते॒ पर्व॑णिपर्वणि ।यक्षं॑ त्वच॒स्यं ते व॒यं क॒श्यप॑स्य वीब॒र्हेण॒ विष्व॑ञ्चं॒ वि वृ॑हामसि

aṅgeaṅge lomnilomni yaste parvaṇiparvaṇi | yakṣaṃ tvacasyaṃ te vayaṃ kaśyapasya vībarheṇa viṣvañcaṃ vi vṛhāmasi

हिन्दी अर्थ

साव (चिकद्र.केषु) पृथिवी के तीन स्थानो--जलं, स्थल, पवेत मे, भपय धिष शरीर के शरीर-मन-गात्मा मे ( विष्णुना ) व्यापक परमेश्वर की कि. रागद्वेष की भावनाभ्रो से रहित होकर वुढ़भ्थास गौर वैराग्य की भावनां द्वारा परिपक्व किया गया है -उस भक्तिरस कों ( महिषः). व्यापक परमेदवर को-‡ ममाद ) प्रसन्न करे दिया है ( मदि "कमं कतंवे ) ताकि परमेरवर पाप-वूत्र के वध का. महाक्मँ वा मोक्षप्रदानरूपी कमं करे ।

English

Make thou the Hero haste to give us riches even as a vessel filled brimful with treasure. Why, Maghavan, do they call thee bounteous Giver? Quicken me: thou, I hear, art he who

अध्याय २०

श्लोक 96.24

अपे॑हि मनसस्प॒तेऽप॑ क्राम प॒रश्च॑र ।प॒रो निरृ॑त्या॒ आ च॑क्ष्व बहु॒धा जीव॑तो॒ मनः॑

apehi manasaspate'pa krāma paraścara | paro nirṛtyā ā cakṣva bahudhā jīvato manaḥ

हिन्दी अर्थ

२४६ भथववंवेद-भाष्य का०.२० 1 सु° ९५ क्रमा कर रही है सूयं की । इस परिक्रमा की अनुभूति हमे नहीं हो रही । भारिर श्रा पाके । सस्यः=सत्सु तायते ( निर० ३।३। १३) ।

English

quickens. Sakra, let my intelligence be active, and bring us luck that finds great wealth, O Indra.

अध्याय २०

श्लोक 97.1

व॒यमे॑नमि॒दा ह्योपी॑पेमे॒ह व॒ज्रिण॑म्।तस्मा॑ उ अ॒द्य स॑म॒ना सु॒तं भ॒रा नू॒नं भू॑षत श्रु॒ते

vayamenamidā hyopīpemeha vajriṇam| tasmā u adya samanā sutaṃ bharā nūnaṃ bhūṣata śrute

हिन्दी अर्थ

किये (हन्ति) स्वयं हनन करता है । न्यक्ति, जो कि आजीविका के लिये दिनभर लगा रहता है,भौ र थकामान्दा जिसे कि भ्राजीविकार्जंन की चिन्ता नही, वह मी.यदि भक्तिके लिये तत्पर नहीं होता, तो परमेदवर उस के प्रति प्रकट नहीं होता, उसे पने से

English

Celestial-natured, he o’erwhelms with riches the devotee who keeps not back his money. O much-invoked, may we subdue all famine and evil want with store of grain and cattle.

अध्याय २०

श्लोक 97.2

वृक॑श्चिदस्य वार॒ण उ॑रा॒मथि॒रा व॒युने॑षु भूषति ।सेमं नः॒ स्तोमं॑ जुजुषा॒ण आ ग॒हीन्द्र॒ प्र चि॒त्रया॑ धि॒या

vṛkaścidasya vāraṇa urāmathirā vayuneṣu bhūṣati | semaṃ naḥ stomaṃ jujuṣāṇa ā gahīndra pra citrayā dhiyā

हिन्दी अर्थ

कृ दरुर ही रखता है । परन्तु जो मन्दरेषी हैःभौर भनाचारमें लिप्त, ड+ स्पष्ट! निररत्नौ =भररलिन पमाना है,-कोहनी से लेकर खुले हाथ . कीछोटी भ्रगुली तक अ्भित्राय है “कुछ दर नकि . बहुत दूर । देसे , २५० थववेद-माष्य का० २० । सु० ९६ ( अदवायन्तः ) अश्व चाहते हए, ( गव्यन्तः ) गौए. चाहते हुए,

English

May we allied, as first in rank, with princes,:obtain possessions by our own exertion Brihaspati protect us from the rearward, and from above and from below, from sinners.

अध्याय २०

श्लोक 97.3

कदू॒ न्व॑१स्याकृ॑त॒मिन्द्र॑स्यास्ति॒ पौंस्य॑म्।केनो॒ नु कं॒ श्रोम॑तेन॒ न शु॑श्रुवे ज॒नुषः॒ परि॑ वृत्र॒हा

kadū nva1syākṛtamindrasyāsti pauṃsyam| keno nu kaṃ śromatena na śuśruve januṣaḥ pari vṛtrahā

हिन्दी अर्थ

का (हवामहे) आह्वान करते ई, ताकि हम ( उप गन्तवे ) जाप के समीप पटु सके । ( ते) आप कौ ( नवायाम् ) सदाः नवीन ( सुमतौ ) वैदिक सुमति मे (आभषन्तः) पने भ्राप को विभ्रुषित करते हए हम ( इन्र ) हे भी हई है । शुनम् सुखम् (निष ३।६)1

English

May Indra from the front and from the centre, as friend to friends, vouchsafe us room and freedom.

अध्याय २०

श्लोक 98.1

व॒यमे॑नमि॒दा ह्योपी॑पेमे॒ह व॒ज्रिण॑म्।तस्मा॑ उ अ॒द्य स॑म॒ना सु॒तं भ॒रा नू॒नं भू॑षत श्रु॒ते

vayamenamidā hyopīpemeha vajriṇam| tasmā u adya samanā sutaṃ bharā nūnaṃ bhūṣata śrute

हिन्दी अर्थ

है रोगी ! (जीवनाय ) तेरे जीने के लिये, ( त्वा ) तुफं ( भन्ञात्- हवि द्वारा, ( मुञ्चामि ) छडाता हूं । है सम्बन्धी-जनो ! ( यदि ) , नै (जग्राह ) पकड लिया है, जकड लिया है,. तोभी (एतत्) इस हवि द्वारा, ५ यक्ष्मा-रोग-निवारक भ्रोषधियों की हवि भगिनि मेँ देते रहने से

English

Served with oblations, first-born, mountain-render, Angiras’ Son, Brihaspati the holy.

अध्याय २०

श्लोक 98.2

वृक॑श्चिदस्य वार॒ण उ॑रा॒मथि॒रा व॒युने॑षु भूषति ।सेमं नः॒ स्तोमं॑ जुजुषा॒ण आ ग॒हीन्द्र॒ प्र चि॒त्रया॑ धि॒या

vṛkaścidasya vāraṇa urāmathirā vayuneṣu bhūṣati | semaṃ naḥ stomaṃ jujuṣāṇa ā gahīndra pra citrayā dhiyā

हिन्दी अर्थ

प्रार्थनाए' भी परमेदवर से करनी चंिये 1 ( यदि क्ितायुः ) यदि रोगी समक्ता है किं उस की भरायु भर्थात् जीवन-काल समाप्त हो गया है, ( यदि वा भ्रथवा ( परेतः ) जीवन से रोगी यदि पराडःमूख हो गया है, .भ्रौर (यदि) भ्रगर (- मृत्योः ) मृत्यु के (अन्तिकम् ) समीप वह (नीत एव) पहुंच ही गयां है, तब भी मै चिकित्सक (्राहरामि) छीन लाता हं; मैने (एनम्) इस रोगी को, (शतशारदाय) सौ वषोँ तक जीने के लिये, (भरस्पा्म् ) हस्तरपद्रं कर दिया है ।

English

With twice-firm path, dwelling in light, our Father, roars loudly, as a bull, to earth and heaven.

अध्याय २०

श्लोक 98.3

कदू॒ न्व॑१स्याकृ॑त॒मिन्द्र॑स्यास्ति॒ पौंस्य॑म्।केनो॒ नु कं॒ श्रोम॑तेन॒ न शु॑श्रुवे ज॒नुषः॒ परि॑ वृत्र॒हा

kadū nva1syākṛtamindrasyāsti pauṃsyam| keno nu kaṃ śromatena na śuśruve januṣaḥ pari vṛtrahā

हिन्दी अर्थ

, (१) उचित भोषधि्यों को भग्न मे डाल कर, निकने धूम्र कां पान । इसके शीघ्लः विना करता है। साथ ही गृहशुद्धि भी हौ जाती है।. (२) परमे- “अयं से हस्तो भगवानयं मे भगवसतरः । रोगी कौ रोगोन्मक्ति के भादवासन भो वेते चाये । मन्त्र ६२३ मे.यह भी

English

Brihaspati who made for such a people wide room and verge when Gods were invocated— Slaying his foe he breaketh down their cattles, quelling his enemies and those who hate him.

अध्याय २०

श्लोक 99.1

अ॒भि त्वा॑ पू॒र्वपी॑तय॒ इन्द्र॒ स्तोमे॑भिरा॒यवः॑ ।स॒मी॒ची॒नास॑ ऋ॒भवः॒ सम॑स्वरन् रु॒द्रा गृ॑णन्त॒ पूर्व्य॑म्

abhi tvā pūrvapītaya indra stomebhirāyavaḥ | samīcīnāsa ṛbhavaḥ samasvaran rudrā gṛṇanta pūrvyam

हिन्दी अर्थ

दर्शाया है किं जीवन की कोई नियत अवधि नहीं होती । स्वास्थ्य के - नियमों के पालनं से तथा यथोचित उपचार दारा भायु १०० -वर्षोकी २५२ भ्रथवंवेद-माष्य का० २०। सू० ९६

English

Brihaspati in war hath won rich treasures, hath won, this God, the great stalls filled with cattle. Striving to win waters and light, resistless, Brihaspati with light- ning smites the foeman.

अध्याय २०

श्लोक 99.2

अ॒स्येदिन्द्रो॑ वावृधे॒ वृष्ण्यं॒ शवो॒ मदे॑ सु॒तस्य॒ विष्ण॑वि ।अ॒द्या तम॑स्य महि॒मान॑मा॒यवोऽनु॑ ष्टुवन्ति पू॒र्वथा॑

asyedindro vāvṛdhe vṛṣṇyaṃ śavo made sutasya viṣṇavi | adyā tamasya mahimānamāyavo'nu ṣṭuvanti pūrvathā

हिन्दी अर्थ

( सहन्नाक्षेण ) हजारों रोगो का क्षयं करनेवाली, ( चतायुषा .) करनेवाली (हविषा) हवि ढारा, (एनम्) इस रोगी को ( गाहाषंम् ) मै मृत्यु के फ़ंदे से छीन लाया हु । ( यथा ताकि (इन्द्रः) परमेदवर (एनम्) . इसे (शरदः) सौ वषोँ तक (नयाति) पहुंचा दे, भौर इसे (विइवस्य. दुरितस्य) सब कष्टो के (पारम् अति) पारकेरदे। . भति=भ्रति नयाति । “सह्नाक्षेण” द्वारा यह भी सूचित किया है कि हवि-चिकित्सा हारा एक साथ हजारों रोगियों के समान-रोग की रोगियों के समीप एक साथ पहुंच सकते टै ।

English

This holy hymn sublime and seven-headed, sprung from eternal Law, our sire discovered.

अध्याय २०

श्लोक 100.1

अधा॒ ही॑न्द्र गिर्वण॒ उप॑ त्वा॒ कामा॑न् म॒हः स॑सृ॒ज्महे॑ ।उ॒देव॒ यन्त॑ उ॒दभिः॑

adhā hīndra girvaṇa upa tvā kāmān mahaḥ sasṛjmahe | udeva yanta udabhiḥ

हिन्दी अर्थ

छीन लाया हु, (त्वा) तुफं (भ्रविदम्) मैने पुनः पा लिया है; (पुनरागाः) षु फिरसंसारर्मेभ्रा गयादहै, (पुनर्णवः) तू फिरनयाहोगयाहै; (ते) का० २०1 सु० €६ भअथवेवेद-भाष्य २५३

English

Ayāsya, friend of all men, hath engendered the fourth hymn as he sang his laud to Indra. Thinking aright, praising eternal Order, the sons of Dyaus the Asura, those heroes,

अध्याय २०

श्लोक 100.2

वार्ण त्वा॑ य॒व्याभि॒र्वर्ध॑न्ति शूर॒ ब्रह्मा॑णि ।वा॒वृ॒ध्वांसं॑ चिदद्रिवो दि॒वेदि॑वे

vārṇa tvā yavyābhirvardhanti śūra brahmāṇi | vāvṛdhvāṃsaṃ cidadrivo divedive

हिन्दी अर्थ

(योनिम्) योनि मे (आदये) गुप्तखूप में रायन कर रहा रै, प्रविष्ट हृभा- हृभा है उसे, ( इतः ) इस स्थान से, (रक्षोहा) कृमिरूप राक्षस का हनन उदुम्बर के साथ (संविदानः) मिल कर, (बाघताम् ) हटाए, नष्ट करे । चित्रकः भ्रनलनामा ( भावप्रकाश) । भ्रमीवा भरम (रोगे) 1 बदा करनेवाला कृमि, ( ते ) तेरे ( गमम् ) गर्भस्थ बच्चे, तथातेरी ( योनिम् ) योनिम (भाशये ) गुप्तरूप मँ शयन कर रहा है, प्रविष्ट

English

Angirases, holding the rank of sages, first honoured sacrifice’s holy statute.

अध्याय २०

श्लोक 100.3

यु॒ञ्जन्ति॒ हरी॑ इषि॒रस्य॒ गाथ॑यो॒रौ रथ॑ उ॒रुयु॑गे ।इ॒न्द्रवाहा॑ वचो॒युजा॑

yuñjanti harī iṣirasya gāthayorau ratha uruyuge |indravāhā vacoyujā

हिन्दी अर्थ

कर (निः भरनीनदत्) पुर्णंतया नष्ट कर निकाल दियाहै। मष्ट करता है, भौर (यः) जो कृमि (सरीसृपम्). ग्मादाय मे सरकते हए २५४ प्रय्ववेद-भाष्य का०.२०॥ सु० ९६

English

Girt by his friends who cried with swanlike voices, bursting the stoney barriers of the prison, Brihaspati spake in thunder to the cattle, and uttered praise and. song when he had found them.

अध्याय २०

श्लोक 101.1

अ॒ग्निं दू॒तं वृ॑णीमहे॒ होता॑रं वि॒श्ववे॑दसम्।अ॒स्य य॒ज्ञस्य॑ सु॒क्रतु॑म्

agniṃ dūtaṃ vṛṇīmahe hotāraṃ viśvavedasam| asya yajñasya sukratum

हिन्दी अर्थ

ग को नष्ट करता है, भ्ीर(गः) यो छृमि (तै) हेर(नातम्) उलन्न हृ अच्वे की (जिघांसति) हिसा करता है, उसे (इतः) यहां से (नाश्चयामसि) हम नष्ट करतेह। . र न में (भराक्षये ) भाकर मानो कुकाल तक सोया सा रहता, श्रौर देता है,.(तम्) उस कृमि को (इतः) इन उपय क्त ओषधियों द्वारा (नाश्या- मसि) हम चिकित्सक विनष्ट करते है । =

English

Apart from one, away from two above him, he draye the kine that stood in bonds of falsehood.

अध्याय २०

श्लोक 101.2

अ॒ग्निम॑ग्निं॒ हवी॑मभिः॒ सदा॑ हवन्त वि॒श्पति॑म्।ह॒व्य॒वाहं॑ पुरुप्रि॒यम्

agnimagniṃ havīmabhiḥ sadā havanta viśpatim| havyavāhaṃ purupriyam

हिन्दी अर्थ

हस्ती. (यः) जो (जारः) व्यभिचारी पुरुष, ( भ्राता भूत्वां ) धोखे का भाई बन कर, भौर ( प्रतिः भत्वा ) धोखे का पति बेन कर, (त्वा निपद्यते) तुक पर बलात्कार करता है, ओर इस प्रकार ( यः) -जो हनन करता है,(तम्) उसे. (इतः) इख जीवन से (नाशयामसि) हम राज्याधि- कारीं विनष्ट.कर देते है ।

English

Brihaspati, seeking light amid the darkness, draye forth the bright cows: three he made apparent. When he had cleft the lairs and western castle, he cut off three from him who held the waters.

अध्याय २०

श्लोक 101.3

अग्ने॑ दे॒वां इ॒हा व॑ह जज्ञा॒नो वृ॒क्तब॑र्हिषे ।असि॒ होता॑ न॒ ईड्यः॑

agne devāṃ ihā vaha jajñāno vṛktabarhiṣe | asi hotā na īḍyaḥ

हिन्दी अर्थ

करके (निपद्यते) तु -पर बलात्कार करता है, भ्रौर इस प्रकार ( यः ) हनन करना चाहता है, या हनन करता है, (तम्) -उसे (इतः) इस जीवन से (नाशयामसि) हम राज्याःघकारी विनष्ट कर देते है। ६३३. अश्ीम्य ते नासिकाभ्यां कणीम्यां हुषुंकादधिं । हे रोगी ! (ते) तेरी ( भक्षीभ्याम् ) दोनो भांखो से, ( नासिका-

English

Brihaspati discovered, while he thundered like Dyaus, the dawn,. the sun, the cow, the lightning.

अध्याय २०

श्लोक 102.1

ई॒लेन्यो॑ नम॒स्यऽस्ति॒रस्तमां॑सि दर्श॒तः ।सम॒ग्निरि॑ध्यते॒ वृषा॑

īlenyo namasya'stirastamāṃsi darśataḥ | samagniridhyate vṛṣā

हिन्दी अर्थ

(वि वृहामि) म चिकित्सक निकालता हं । छुबुक = चिबुक । चिवृक-यक्ष्मा = निचले जबादडे का गल जाना, हे रोगी ! (ते) तेरे (परीवाभ्यः) गते के भार्गो से; (उष्मिहाभ्यः)

English

As with a hand, so with his roaring Indra cleft Vala through,. the guardian of the cattle. Seeking the milk-draught with sweat-shining comrades he stole: the Pani’s kine and left him weeping.

अध्याय २०

श्लोक 102.2

वृषो॑ अ॒ग्निः समि॑ध्य॒तेऽश्वो॒ न दे॑व॒वाह॑नः ।तं ह॒विष्म॑न्तः ईलते

vṛṣo agniḥ samidhyate'śvo na devavāhanaḥ | taṃ haviṣmantaḥ īlate

हिन्दी अर्थ

२५६ प्रथववेद-माष्य का०२०। सु० ६९६ हे रोमी ! (ते) तेरे ( हृदयात् ) हृदय से, (क्लोम्नः परि ) दाहिने ( सुश्रुत शरीर० ४।३७ ) । मतस्नाभ्याम् =मद से शोधन करनेवाले, दोनों कोखों से, ( प्लाशषेः ) प्लाशि से, ( नाभ्याः ) नाभिसे (ते) तेरे

English

He with bright faithful friends, winners of booty, hath rent the milker of the cows asunder. Brihaspati with wild boars strong and mighty sweating with heat hath gained a rich

अध्याय २०

श्लोक 102.3

वृष॑णं त्वा व॒यं वृ॑ष॒न् वृष॑णः॒ समि॑धीमहि ।अग्ने॒ दीद्य॑तं बृ॒हत्

vṛṣaṇaṃ tvā vayaṃ vṛṣan vṛṣaṇaḥ samidhīmahi | agne dīdyataṃ bṛhat

हिन्दी अर्थ

- प्लाशि-- 981, या मूत्राराय । (भथरवंवेदीय चिकित्सादास्व, 9 उमबनध (ते) तेरे रोगों को (वि वृहामि) मँ चिकरित्पक दूर करता हं । .. का०२० । सू ९६ अथर्वेवेद-माष्य २५७

English

possession. They, longing for the kine, with faithful spirit incited with their hymns the Lord of cattle. Brihaspati freed the radiant cows with comrades self-yoked,. averting shame from one

अध्याय २०

श्लोक 103.1

अ॒ग्निमी॑लि॒ष्वाव॑से॒ गाथा॑भिः शी॒रशो॑चिषम्।अ॒ग्निं रा॒ये पु॑रुमील्ह श्रु॒तं नरो॒ऽग्निं सु॑दी॒तये॑ छ॒र्दिः

agnimīliṣvāvase gāthābhiḥ śīraśociṣam| agniṃ rāye purumīlha śrutaṃ naro'gniṃ sudītaye chardiḥ

हिन्दी अर्थ

(स्नावभ्यः) मांस-बन्धनियों से, (धमनिभ्यः) धमनि-नाडियों से, (पाणि- . स्नाव =वे मांस-तन्तु जिनके द्वारा मांसपेशियाँ हडिढयों के साथ के ( वीबर्हेण ) जड़ काट देनेवाले साधन द्वारा ( वि वृहामसि ) दूर . .. “कद्यप का वीबर्हे” क्या है, यह विचारणीय ह । अथर्ववेदीय

English

another. In our assembly with auspicious praises exalting him who roareth. like a lion.

अध्याय २०

श्लोक 103.2

अग्न॒ आ या॑ह्य॒ग्निभि॒र्होता॑रं त्वा वृणीमहे ।आ त्वाम॑नक्तु॒ प्रय॑ता ह॒विष्म॑ती॒ यजि॑ष्ठं ब॒र्हिरा॒सदे॑

agna ā yāhyagnibhirhotāraṃ tvā vṛṇīmahe | ā tvāmanaktu prayatā haviṣmatī yajiṣṭhaṃ barhirāsade

हिन्दी अर्थ

चन्द्रमा रौर सूयं को ““कदयप” कहा है, भ्रौर उनक किरणों को “वीवरह" मनके स्वामी बने हृष् पाभ ! तू ( भपेहि ) जुदा हो जा, ( भ्रप क्रामः) चक्ष्व) . तु दृद़-संकल्प से कह कि (परः) तर भी परे हो जां; यद्यपि (जीवतः) जीवित् मनुष्य का (मनः) मन (बहधा) बहुत प्रकार का होता है ।

English

May we in every fight where heroes conquer rejoice in strong. Brihaspati the victor. When he had won him strength of every nature and gone to heaven and its most lofty

अध्याय २०

श्लोक 103.3

अच्छा॒ हि त्वा॑ सहसः सूनो अङ्गिरः॒ स्रुच॒श्चर॑न्त्यध्व॒रे।ऊ॒र्जो नपा॑तं घृ॒तके॑शमीमहे॒ऽग्निं य॒ज्ञेषु॑ पू॒र्व्यम्

acchā hi tvā sahasaḥ sūno aṅgiraḥ srucaścarantyadhvare| ūrjo napātaṃ ghṛtakeśamīmahe'gniṃ yajñeṣu pūrvyam

हिन्दी अर्थ

२९ . भथर्वेवेद-भाष्य का० २० 1 सू० ६७ चिकित्सक रोगी से कहता है कि यद्यपि जीवित मनुष्य कामन बहुत प्रकार का होता है, वहःकमी पापकी भोर मूकता है भौरकंभी पुष्यकीभ्रोर, तबमभी है रोगी! तु मनोनिष्ठ पापके साय.लङ्, इस आसुरी प्रवृत्ति को हटाने के लिये दृढ़ संकल्प का भराश्रय ले, मानसिक.पाप की जड़ उचखेडने कै लिये पाप को मानसिक भूमिसे उलाड् फक । दसी प्रकार पापजन्य कष्टो भौर रोगों को दूर करने के लिये.भी तु कटिबद हो जा । उनके प्रति भी तू उपयु क्त दढ भावना को भ्रषने मं जागरित कर । परेहि न त्वा कामये" ॥। (अथवं ० ६।४५।१) । ।

English

mansions, Men praised Brihaspati the mighty, bringing the light within their mouths from sundry places.

अध्याय २०

श्लोक 104.1

इ॒मा उ॑ त्वा पुरूवसो॒ गिरो॑ वर्धन्तु॒ या मम॑ ।पा॒व॒कव॑र्णाः॒ शुच॑यो विप॒श्चितो॒ऽभि स्तोमै॑रनूषत

imā u tvā purūvaso giro vardhantu yā mama | pāvakavarṇāḥ śucayo vipaścito'bhi stomairanūṣata

हिन्दी अर्थ

होम्योपेथिक- चिकित्सा मेँ रोगो की चिकित्सा के लिये,. रोगी की मानसिक अवस्थ्रो-पर भी विशेषः बल दिया है' क्योंकि मानसिक-भवस्था, भिन्न-भिन्न रोगों के उत्पादन मे, एक विंदेष कारण है । का वणन किया है, भौर उसे भ्रौर उस से प्रकट होनेवाले कष्टों भ्रौर रोगों के हटाने में जो “दुढ-संकल्प" का वर्णेन किया है, इस से स्वभावतः यह सूचित किया है किं “कदयप का वीबहं" दढ़्-संकल्प है, जो कि कश्यप (वयम्) हम उपासको ने (इह) इस उपासना-यज्ञ मे, (वच्िणम्)

English

Fulfil the prayer that begs for vital vigor: aid in your wonted manner e’en the humble. Let all our foes be turned and driven backward. Hear this, O Heaven and Earth, ye all-producers.

अध्याय २०

श्लोक 104.2

अ॒यं स॒हस्र॒मृषि॑भिः॒ सह॑स्कृतः समु॒द्र इ॑व पप्रथे ।स॒त्यः सो अ॑स्य महि॒मा गृ॑णे॒ शवो॑ य॒ज्ञेषु॑ विप्र॒राज्ये॑

ayaṃ sahasramṛṣibhiḥ sahaskṛtaḥ samudra iva paprathe | satyaḥ so asya mahimā gṛṇe śavo yajñeṣu viprarājye

हिन्दी अर्थ

भक्तिरस पिलायाहै) है उपासक ! तू ( समनाः मनोभावनाभ्रों के स्तुतियों द्वारा इस की शोभा को बढ्ाभ्नो । केनो. च कं भोम॑तेन न शुवे जलुष; परि शत्रहा ॥६॥ (कद् उनुन ) कब नहीं ( भराशयुश्रुवे ) सववेत्र सुने गए ? ( श्रोमतेन )

English

Indra with mighty strength hath cleft asunder the head of Arbuda the watery monster, Slain Ahi, and set free the Seven Rivers. O Heaven and Earth, with all the Gods, protect us.

अध्याय २०

श्लोक 104.3

आ नो॒ विश्वा॑सु॒ हव्य॒ इन्द्रः॑ स॒मत्सु॑ भूषतु ।उप॒ ब्रह्मा॑णि॒ सव॑नानि वृत्र॒हा प॑रम॒ज्या ऋची॑षमः

ā no viśvāsu havya indraḥ samatsu bhūṣatu | upa brahmāṇi savanāni vṛtrahā paramajyā ṛcīṣamaḥ

हिन्दी अर्थ

. परमेश्वर ने नहीं सुना ?. (जनुषः) किस जन्मधारी उपासक के (वृच्रहा). पाप-वुत्रों का हनन, (परि) पूर्णरूप से, परमेहवर ने (न कृतम्) नहीं किया? उपासको के पापों का हनन परमेश्वर पृणतथा कर देता है

English

Praise, even as he is known, with song Indra the guardian of the kine, The Son of Truth, Lord of the brave. Hither his bay steeds have been sent, red steeds are on the sacred grass.

अध्याय २०

श्लोक 104.4

त्वं दा॒ता प्र॑थ॒मो राध॑साम॒स्यसि॑ स॒त्य ई॑शान॒कृत्।तु॒वि॒द्यु॒म्नस्य॒ युज्या वृ॑णीमहे पु॒त्रस्य॒ शव॑सो म॒हः

tvaṃ dātā prathamo rādhasāmasyasi satya īśānakṛt| tuvidyumnasya yujyā vṛṇīmahe putrasya śavaso mahaḥ

हिन्दी अर्थ

६४४. त्वामिद्धि हवामहे. साता वाज॑स्य कारवः । ( कारवः ) हमः कमंयोगी उपासक, ( वाजस्य ) राक्ति भौर. परमेदवर ! श्राप का ही (हवामहे) आह्वान करते हैँ । (इन्द्र) है परमेदवर! पतिकाही हम आह्वान करते हँ । ( प्रवतः नरः) दुःखी नर-नारियां.

English

Where we in concert sing our songs. For Indra thunder-armed the kine have yielded mingled milk and meath.

अध्याय २०

श्लोक 105.1

त्वमि॑न्द्र॒ प्रतू॑र्तिष्व॒भि विश्वा॑ असि॒ स्पृधः॑ ।अ॒शस्ति॒हा ज॑नि॒ता वि॑श्व॒तूर॑सि॒ त्वं तू॑र्य तरुष्य॒तः

tvamindra pratūrtiṣvabhi viśvā asi spṛdhaḥ | aśastihā janitā viśvatūrasi tvaṃ tūrya taruṣyataḥ

हिन्दी अर्थ

(रथ्यम् ) शरींर-रथ के वहन करने योभ्य अदवम् ) भदवसदुक बलिष्ठ मन, ह्मे (सं किर) प्रदान कोजिये, ( न ) जैसे कि ( जिग्युषे ) प्राथमिक पान के लिये, (भायवः) उपासक-जन-(स्तोमेभिः) सामगानां दारा (समीचीनासः) सम्यक्रूप से दिल्प-कायोँ का सम्पादन करनेवाले (ऋभवः)

English

What time he found them in the vault. When I and Indra amount on high up to the bright One’s place and home, We, having drunk of meath, will reach his seat whose Friends are three-times-seven.

अध्याय २०

श्लोक 105.2

अनु॑ ते॒ शुष्मं॑ तु॒रय॑न्तमीयतुः क्षो॒णी शिशुं॒ न मा॒तरा॑ ।विश्वा॑स्ते॒ स्पृधः॑ श्नथयन्त म॒न्यवे॑ वृत्रं यदि॑न्द्र॒ तूर्व॑सि

anu te śuṣmaṃ turayantamīyatuḥ kṣoṇī śiśuṃ na mātarā | viśvāste spṛdhaḥ śnathayanta manyave vṛtraṃ yadindra tūrvasi

हिन्दी अर्थ

का० ६० । सू० १०० अथ्ववेद-माष्य २६१. भ्रापका स्वरपूर्वंक गान करते है। पूवंपीतये = उपासनामा्गं का भ्रवलम्बन करने पर, अन्य किसी भक्ति करनी चाहिए, भौर इस के प्रति ही अपने भक्तिरस की .मेट देनी

English

Sing, sing ye forth your songs of praise, ye Priyamedhas, sing your songs: Yea, let young children sing their lauds: as a strong castle praise ye him.

अध्याय २०

श्लोक 105.3

इ॒त ऊ॒ती वो॑ अ॒जरं॑ प्रहे॒तार॒मप्र॑हितम्।आ॒शुं जेता॑रं॒ हेता॑रं रथीत॑म॒मतू॑र्तं तुग्र्या॒वृध॑म्

ita ūtī vo ajaraṃ prahetāramaprahitam| āśuṃ jetāraṃ hetāraṃ rathītamamatūrtaṃ tugryāvṛdham

हिन्दी अर्थ

निष्पादित भक्तिरस की (मदे) मस्ती चढ़ जाती है, ( अस्य ) इस उपासक (भ्रायवः) उपासक-जन, ( प्रस्य ) इस परमेदवर की . ( तं महिमानम् ) उस द४८. अघा हीन्र शिण उप॑ त्वा कामान् महः संसृल्हं । उदेव यन्त॑ उदभिः ॥१॥

English

Now loudly let the viol sound, the lute send out its voice with might, Shrill be the music of the string. To Indra is the hymn upraised. When hither speed the dappled cows, unflinching, easy to be milked,

अध्याय २०

श्लोक 105.4

यो राजा॑ चर्षणी॒नां याता॒ रथे॑भि॒रध्रि॑गुः ।विश्वा॑सां तरु॒ता पृत॑नानां॒ ज्येष्ठो॒ यो वृ॑त्र॒हा गृ॒णे

yo rājā carṣaṇīnāṃ yātā rathebhiradhriguḥ | viśvāsāṃ tarutā pṛtanānāṃ jyeṣṭho yo vṛtrahā gṛṇe

हिन्दी अर्थ

( गि्व॑ण ) हे. वेदवाणियों हारा भजनीय ( इन्द्र ) परमेदवर । (भ्रधा) भवं (हि) निद्चय से . (महः कामान् ) हम अपनी महा-कामना््ों का (उप ससृज्महे त्वा) संसग, भाप के साथ, कर देते है, ( इव )-जसे कि (उदभिः) जलो के साथ (उदा उदान उदकानि) जल (यन्त) मिल जाते भ्रौर.एकरस हो जते्है। भर्थातु हम भ्रपनी कामना का संसगं संसार के साथन कर, श्राप के साथ करते्है। बादृध्वांसं चिदद्विवो विनेदिके ॥२॥

English

Seize quickly, as it bursts away, the Soma juice for Indra’s drink. Indra hath drunk; Agni hath drunk all Deities have drunk their fill.

अध्याय २०

श्लोक 105.5

इन्द्रं॒ तं शु॑म्भ पुरुहन्म॒न्नव॑से॒ यस्य॑ द्वि॒ता वि॑ध॒र्तरि॑ ।हस्ता॑य॒ वज्रः॒ प्रति॑ धायि दर्श॒तो म॒हो दि॒वे न सूर्यः॑

indraṃ taṃ śumbha puruhanmannavase yasya dvitā vidhartari | hastāya vajraḥ prati dhāyi darśato maho dive na sūryaḥ

हिन्दी अर्थ

२६२ त भरथववेद-भाष्य का० २०। सू° १०१ (वाः) जल (न) जैसे ( यव्याभिः) नदियों दारा ( वर्धन्ति ) हमें बढ़त है, वैसे (शूर). है पराक्रमरील ! तथा है भ्रद्रिवः ) पापविनाश्क

English

Here Varuna shall have his home, to whom the floods have sung aloud as mother-kine unto their calves. 299

अध्याय २०

श्लोक 106.1

तव॒ त्यदि॑न्द्रि॒यं बृ॒हत् तव॒ शुष्म॑मु॒त क्रतु॑म्।वज्रं॑ शिशाति धि॒षणा॒ वरे॑ण्यम्

tava tyadindriyaṃ bṛhat tava śuṣmamuta kratum| vajraṃ śiśāti dhiṣaṇā vareṇyam

हिन्दी अर्थ

दायक श्रापकी महिमा को, (दिवेदिवे) प्रतिदिन (वर्षन्ति) बढ़ाते है इषिरस्य ) अभीरष्टो को सिद्ध करनेवाले परमेदवर् के ( गाथया ) करने लगते है, भौर ( वचोयुजा. ) वेदवचनों को विधियो द्वारा योगयुक्त गोलोकों को शरीर-रथ कै युग" कहा है ।

English

Thou, Varuna, to whom belong the Seven Streams, art a glorious God.

अध्याय २०

श्लोक 106.2

तव॒ द्यौरि॑न्द्र॒ पौंस्यं॑ पृथि॒वी व॑र्धति॒ श्रवः॑ ।त्वामापः॒ पर्व॑तासश्च हिन्विरे

tava dyaurindra pauṃsyaṃ pṛthivī vardhati śravaḥ | tvāmāpaḥ parvatāsaśca hinvire

हिन्दी अर्थ

(दूतम्) कामादि दुर्वासनाभों को मस्म कर देनेवाले, ( होतारम् ) परमेदवर का (वृणीमहे) हम बरण करते रहै का० २०। सू० १०२ अ्रथरववेद-भाष्य २६३

English

The waters flow into thy throat as’twere a pipe with ample mouth. He who hath made the fleet steeds spring, well-harnessed, to the worshipper, He, the swift guide, is that fair form thot loosed the horses near at hand.

अध्याय २०

श्लोक 106.3

त्वां विष्णु॑र्बृ॒हन् क्षयो॑ मि॒त्रो गृ॑णाति॒ वरु॑णः ।त्वां शर्धो॑ मद॒त्यनु॒ मारु॑तम्

tvāṃ viṣṇurbṛhan kṣayo mitro gṛṇāti varuṇaḥ | tvāṃ śardho madatyanu mārutam

हिन्दी अर्थ

रथ का भगला डण्डा, जिसके साथ बलो को बान्धा जाता है। इन्द्रिय सवग्रिणी का, (हवीमभिः) ्राह्वान-मन्तों दवारा, उपासक ( सदा हवन्त ) सदा श्राह्वान करते है । कराइये । (होता) राक्तिप्रदातंा श्राप ही ( नः ) हमारे अब (ईडः प्रसि) स्तुत्य भ्रौर उपास्य है । अनज्ञानान्धकार तथा तज्जन्य कामादि. भौर तमोगुण के परिणामों को (तिरः) तिरस्कृत करनेवाला, (दशतः) द्ंनीय, भौर ( वृषा ) सुखो की

English

Indra, the very mighty, holds his enemies in utter scorn. He, far away, and yet a child, cleft the cloud smitten by his voice.

अध्याय २०

श्लोक 107.1

सम॑स्य म॒न्यवे॒ विशो॒ विश्वा॑ नमन्त कु॒ष्टयः॑ ।स॒मु॒द्राये॑व॒ सिन्ध॑वः

samasya manyave viśo viśvā namanta kuṣṭayaḥ | samudrāyeva sindhavaḥ

हिन्दी अर्थ

है५७१. वषो अधिः समिध्यतेऽश्वो न देववाहनः । (वृषा उ सुखो की वर्षा करनेवाला ( मग्नः) जगन्नेता ( समिध्यते ) हदय मेँ सम्यक् प्रदीप्त किया जाता है । (अवः न) जसे ररव वहन-कायं करता है वैसे जगन्नेता दिव्यंगुणों का वहन करता है । ( हवित्मन्तः)

English

He, yet a boy exceeding small, mounted his newly-fashioned car. He for his Mother and his Sire cooked the wild mighty buffalo. Lord of the Home, with beauteous cheeks, ascend thy chariot wrought of gold.

अध्याय २०

श्लोक 107.2

ओज॒स्तद॑स्य तित्विष उ॒भे यत् स॒मव॑र्तयत्।इन्द्र॒श्चर्मे॑व॒ रोद॑सी

ojastadasya titviṣa ubhe yat samavartayat| indraścarmeva rodasī

हिन्दी अर्थ

महाधनिक (पुत्रस्य) पुत्र के घन का (वृणीमहे) हम वरण करते है" उपयोग करते है वैसे (महः शवसः) भ्रापके महाबलं तथाः महा-भराध्यात्मिक घन का कर देते हँ; (अशस्तिहा) इन भ्रप्रशस्त भावनागों का हनन कर देते ह; सवंविघ पापों के विनाशक हँ । है परमेदवर ! ( तरुष्यतः ) इन हिसिक- वृत्तियों कों राप (तूयं) विनष्ट कीजिये॥: हे परमेदवर (ते) आपके (तुरयन्तम् ) संहारकारी (शुष्मम् अनु)

English

O Indra, if a hundred heavens and if a hundred earths were thine No, not a thousand suns could match thee at thy birth, not both the worlds, O Thunderer.

अध्याय २०

श्लोक 107.3

वि चिद् वृ॒त्रस्य॒ दोध॑तो॒ वज्रे॑ण श॒तप॑र्वणा ।शिरो॑ बिभेद् वृ॒ष्णिना॑

vi cid vṛtrasya dodhato vajreṇa śataparvaṇā | śiro bibhed vṛṣṇinā

हिन्दी अर्थ

बल का मानो भ्रनुचिन्तन करके .(क्षोणी) चुलोक भ्रौर भूलोक. (अनु ईयतुः) भ्रापके अनुगामीहो रहे है, (न) जैसे किं (मातरा) माता-पिता ( शिशु भनु ईयतुः) रि्यु की सुरक्षा का भनुचिन्तन करके उसं के अनुगामी होते.

English

Thou, Hero, hast performed thy hero deeds with might, yea, all with strength, O Strongest One. Maghavan, help us to a stable full of kine, O Thunderer, with wondrous aids.

अध्याय २०

श्लोक 107.4

तदिदा॑स॒ भुव॑नेषु॒ ज्येष्ठं॒ यतो॑ ज॒ज्ञ उ॒ग्रस्त्वे॒षनृ॑म्णः ।स॒द्यो ज॑ज्ञा॒नो नि रि॑णाति॒ शत्रू॒ननु॒ यदे॑नं॒ मद॑न्ति॒ विश्व॒ ऊमाः॑

tadidāsa bhuvaneṣu jyeṣṭhaṃ yato jajña ugrastveṣanṛmṇaḥ | sadyo jajñāno ni riṇāti śatrūnanu yadenaṃ madanti viśva ūmāḥ

हिन्दी अर्थ

है, उसके पीचे-पीचे चलते है । ( स्पृषः † स्पर्धा आदि ( विदवाः ) सबं विनादा करनेवले हँ । कषोणी == चावापुथिवी नाम (निष० ३।३०)। , है उपासको ! (इतः). इन लेशो से ( वः ) तुम्हारी रक्षा के लिये रक्तो के वधंक परमेदवर कं (गृणे) गुण वर्णन करता हं

English

May our hymns give thee great delight. Display thy bounty, Thunderer.

अध्याय २०

श्लोक 107.5

वा॒वृ॒धा॒नः शव॑सा॒ भूर्यो॑जाः॒ शत्रु॑र्दा॒साय॑ भि॒यसं॑ दधाति ।अव्य॑नच्च व्य॒नच्च॒ सस्नि॒ सं ते॑ नवन्त॒ प्रभृ॑ता॒ मदे॑षु

vāvṛdhānaḥ śavasā bhūryojāḥ śatrurdāsāya bhiyasaṃ dadhāti | avyanacca vyanacca sasni saṃ te navanta prabhṛtā madeṣu

हिन्दी अर्थ

वुप्र या उदकम् (निष० १।१२) । मन्व मेँ शारौरिक जल का (यः) जो परमेश्वर (चर्षणीनाम् ) सब मनूष्यों का ( राजा ) राजा . है, ( भध्धिगुः ) जो अप्रतिबद्ध गतिवाला, ( रथेभिः ) उपासको कं शारीर- , रथँ का प्रेरक बनकर मानो उन र्थो द्वारा ( याता ) गतिमान् होता हैः उपासको कं व्यवहारो को सिद्ध करता है ! जो (विदवासाम्) सब (पृतना-

English

Drive off the enemies of prayer. Crush with thy foot the niggard churls who bring no gifts. Might art thou:

अध्याय २०

श्लोक 107.6

त्वे क्रतु॒मपि॑ पृञ्चन्ति॒ भूरि॒ द्विर्यदे॒ते त्रिर्भव॒न्त्यूमाः॑ ।स्वा॒दोः स्वादी॑यः स्वा॒दुना॑ सृजा॒ सम॒दः सु मधु॒ मधु॑ना॒भि यो॑धीः

tve kratumapi pṛñcanti bhūri dviryadete trirbhavantyūmāḥ | svādoḥ svādīyaḥ svādunā sṛjā samadaḥ su madhu madhunābhi yodhīḥ

हिन्दी अर्थ

नाम्) काम, क्रोष, लोभ, मोहादि की सेना का (तरुता) विनाशं करता. पर भरावंरण डलं देनेवाले पोप का हनन करता है, उस परमेरवर का (गृणे) मै वर्णेन करता हूं । ड. ९६८. इनदरं व धम्म पुरहन्मलवैसे यस्यं द्विता विंषतेरिं ।

English

There is not one to equal thee. Thou art the Lord of Soma pressed, Soma unpressed is also thine,

अध्याय २०

श्लोक 107.7

यदि॑ चि॒न्नु त्वा॒ धना॒ जय॑न्तं॒ रणे॑रणे अनु॒मद॑न्ति॒ विप्राः॑ ।ओजी॑यः शुष्मिन्त्स्थि॒रमा त॑नुष्व॒ मा त्वा॑ दभन् दु॒रेवा॑सः क॒शोकाः॑

yadi cinnu tvā dhanā jayantaṃ raṇeraṇe anumadanti viprāḥ | ojīyaḥ śuṣmintsthiramā tanuṣva mā tvā dabhan durevāsaḥ kaśokāḥ

हिन्दी अर्थ

. . (पुद्हन्मन्) पापो का स्वयं हनन करनेवले है उपासक तूं (भरवसे) सतुतय द्वारा, (विधतंरि) जगत् के धारण करने मे यस्य ) जिस के कि , (निता) वो हप ह । उसः परमेदवर ने ( हस्ताय ) पापों के हनन के लिये

English

Thou art the Sovran of the folk. Swaying about the active Ones came nigh to Indra at his birth, And shared his great heroic might.

अध्याय २०

श्लोक 107.8

त्वया॑ व॒यं शा॑शद्महे॒ रणे॑षु प्र॒पश्य॑न्तो यु॒धेन्या॑नि॒ भूरि॑ ।चो॒दया॑मि त॒ आयु॑धा॒ वचो॑भिः॒ सं ते॑ शिशामि॒ ब्रह्म॑णा॒ वयां॑सि

tvayā vayaṃ śāśadmahe raṇeṣu prapaśyanto yudhenyāni bhūri | codayāmi ta āyudhā vacobhiḥ saṃ te śiśāmi brahmaṇā vayāṃsi

हिन्दी अर्थ

है, (न) जैसे कि (दिवे) भकार के लिये (महः सूरयः) तेजस्वी सूये को, उसने दविता परमभेख्वर के दो रूप है--शनुगरह करनेवाला रूप, बौर . -कुकमियों पर निरहं रुपवाला है । हस्ताय =हन् हिसायाम् । भर्थात् सुखा देनेवाला बल.पापियों का शोषण करनेवाला बल । कतुः = परज्ञा

English

Based upon strength and victory and power, O Indra is thy birth. Thou, Mighty One, art strong indeed.

अध्याय २०

श्लोक 107.9

नितद् द॑धि॒षेऽव॑रे॒ परे॑ च॒ यस्मि॒न्नावि॒थाव॑सा दुरो॒णे।आ स्था॑पयत मा॒तरं॑ जिग॒त्नुमत॑ इन्वत॒ कर्व॑राणि॒ भूरि॑

nitad dadhiṣe'vare pare ca yasminnāvithāvasā duroṇe| ā sthāpayata mātaraṃ jigatnumata invata karvarāṇi bhūri

हिन्दी अर्थ

(निघ० ३।९) ; कर्मं (निघ० २।१) । धिषणा = वाक् (निघ ० १।११) ; बल की महिमा (वर्धति) बढ़ता है, भौर (पृथिवी श्वरः वंति) पृथिवी श्रापकी कीति बढ़ती है। (भ्रापः) सामुद्रिक जल, वर्षा के तथा नदी-नालों

English

Thou art the Vritra-slayer, thou, Indra, hast spread the firmament: Thou hast with might upheld the heavens. Thou, Indra, bearest in thine arms the lightning that accords with thee,

अध्याय २०

श्लोक 107.10

स्तु॒ष्व व॑र्ष्मन् पुरु॒वर्त्मा॑नं॒ समृभ्वा॑णमि॒नत॑ममा॒प्तमा॒प्त्याना॑म्।आ द॑र्शति॒ शव॑सा॒ भूर्यो॑जाः॒ प्र स॑क्षति प्रति॒मानं॑ पृथि॒व्याः

stuṣva varṣman puruvartmānaṃ samṛbhvāṇaminatamamāptamāptyānām| ā darśati śavasā bhūryojāḥ pra sakṣati pratimānaṃ pṛthivyāḥ

हिन्दी अर्थ

समर्णों की हविवाले उपासक (तम्) उसकी (ईलते) स्तुत्तियां करते है । . (समिधीमहि) हदयों भं सम्यक् प्रदीप्त करते है । ६५७. अग्निमीलिष्वावैसे गाथाभिः शीरशोचिषम् । हे उपासक ! तु (शीरसोचिषम्) सोई हुई ज्योति के रूपमे सब में

English

We will attend the heavenly One; the thousand-footed, red of hue, matchless, who blesses where he goes.

अध्याय २०

श्लोक 107.11

इ॒मा ब्रह्म॑ बृ॒हद्दि॑वः कृणव॒दिन्द्रा॑य शू॒षम॑ग्नि॒यः स्व॒र्षाः ।म॒हो गो॒त्रस्य॑ क्षयति स्व॒राजा॒ तुर॑श्चि॒द् विश्व॑मर्णव॒त् तप॑स्वान्

imā brahma bṛhaddivaḥ kṛṇavadindrāya śūṣamagniyaḥ svarṣāḥ | maho gotrasya kṣayati svarājā turaścid viśvamarṇavat tapasvān

हिन्दी अर्थ

सतुतियां कियाः कर † (पुरुभील्ह) है पालक रौर परिपुणं प्रमु के स्तोता . की स्तुतियां किया कर, (श्रुतम्) जो किं वेदों मे विश्रुत है! ( नरः) हे किया करो, जो किः (सुदीतये) क्लेों क क्षय. करने के लिये (छदिः) छत- बाले घर के सदृश है . छदिः गृहनाम (निंष० ३।४)1

English

With reverence they come hitherward to him as to a sovran lord, That they may bring him near for this man’s good success, to prosper and bestow his gifts. The Priyamedhas have observed the offering of the men of old,

अध्याय २०

श्लोक 107.12

ए॒वा म॒हान् बृ॒हद्दि॑वो॒ अथ॒र्वावो॑च॒त् स्वां त॒न्व॑१मिन्द्र॑मे॒व।स्वसा॑रौ मात॒रिभ्व॑री अरि॒प्रे हि॒न्वन्ति॑ चैने॒ शव॑सा व॒र्धय॑न्ति च

evā mahān bṛhaddivo atharvāvocat svāṃ tanva1mindrameva| svasārau mātaribhvarī aripre hinvanti caine śavasā vardhayanti ca

हिन्दी अर्थ

का० २०। सु० १०४ भरथवंवेद-माष्य २६५ दानी का (वृणीमहे) हम वरण करते हँ । (प्रयता) संयम-सम्प॑न्न हमारी है, विचरते हँ 1. . (ऊर्जः) बल भौर प्राण को न पातम् ) न गिरने देने- तथा पूवंकाल से विद्यमान अनादि परमेश्वर से ईमहे ) हंम याचनाए करते है, या उसे हम प्राप्त होते है ।

English

Of ancient custom, while they strewed the sacred grass and spread their sacrificial food. He who as sovran Lord of men moves with his chariots unrestrained,

अध्याय २०

श्लोक 107.13

चि॒त्रं दे॒वानां॑ के॒तुरनी॑कं॒ ज्योति॑ष्मान् प्र॒दिशः॒ सूर्य॑ उ॒द्यन्।दि॒वा॒क॒रोऽति॑ द्यु॒म्नैस्तमां॑सि॒ विश्वा॑तारीद् दुरि॒तानि॑ शु॒क्रः

citraṃ devānāṃ keturanīkaṃ jyotiṣmān pradiśaḥ sūrya udyan| divākaro'ti dyumnaistamāṃsi viśvātārīd duritāni śukraḥ

हिन्दी अर्थ

सुनो =सु प्रेरणे । अजिरः अङ्गो के रसरूप प्राण । ईमहे याञ्चाकर्मा (निष० ३।१९) ; थवा "ई" गतौ । . . ( पृख्वसो ) ह महासम्पतृशालिन्, या पालन करनेवाले,. तथा

English

The Vritra-slayer, queller of all fighting hosts, preeminent, is praised in song. Honour that Indra, Puruhanman! for his aid, in whose sustain- ing hand of old. The splendid bolt of thunder was deposited, as the great Sun was set in heaven.

अध्याय २०

श्लोक 107.14

चि॒त्रं दे॒वाना॒मुद॑गा॒दनी॑कं॒ चक्षु॑र्मि॒त्रस्य॒ वरु॑णस्या॒ग्नेः ।आप्रा॒द् द्यावा॑पृथि॒वी अ॒न्तरि॑क्षं॒ सूर्य॑ आ॒त्मा जग॑तस्त॒स्थुष॑श्च

citraṃ devānāmudagādanīkaṃ cakṣurmitrasya varuṇasyāgneḥ | āprād dyāvāpṛthivī antarikṣaṃ sūrya ātmā jagatastasthuṣaśca

हिन्दी अर्थ

सम्पत्तियां से परिपूर्णं संसार में बसे हृए परमेदवर ! (इमाः) ये ( याः ) जो (मम) भेरी (भरः) वाणियां है, वे (त्वा उ). आपकी ही महिमा कौ ( बरषन्तु ) बढ़ाया करे । ( पावकवर्णाः ) पवित्र करनेवाले आपका. दा . सत्यः सो अस्य महिमा शृणे शवो येषं निप्राज्ये ॥२॥ ( सहस्कृतः ) साहस भौर धयेपर्वक साक्षात् किया जाता है । यह (समूद इव) जलीय-समूद्र या आकारा के सदृश (पप्रथे) फला हभ है 1 ( भस्य )

English

No one by deed attains to him who works and strengthens evermore: No, not by sacrifice, to Indra praised of all, resistless, daring, bold in might;

अध्याय २०

श्लोक 107.15

सूर्यो॑ दे॒वीमु॒षसं॒ रोच॑मानां॒ मर्यो॒ न योषा॑म॒भ्येति प॒श्चात्।यत्रा॒ नरो॑ देव॒यन्तो॑ यु॒गानि॑ वितन्व॒ते प्रति॑ भ॒द्राय॑ भ॒द्रम्

sūryo devīmuṣasaṃ rocamānāṃ maryo na yoṣāmabhyeti paścāt| yatrā naro devayanto yugāni vitanvate prati bhadrāya bhadram

हिन्दी अर्थ

इस परमेदवर की (सः) वह (महिमा) महिमा (सत्यः) यंथाथं है,- (गृणे) - (नः) हम .उपासकों के (विच्वासु समत्सु) सव देवासुर-संग्रामो मे (हव्यः) सहायताथं पुकारा गया (इन्रः) परमेदवर, (भ्रा भूषतु) भसुर- भावनाओं के पराभव द्वारा हमे विभूषित करे । (- वृत्रहा ) पाप-वुत्रोंका (ऋऋबीषमः) उसका ऋचाभ्रों मे समरूप से वर्णेन हुश्रा है ।

English

The potent Conqueror, invincible in war, him at whose birth the mighty ones, The kine who spread afar, sent their loud voices out, heavens, earths sent their loud voices out.

अध्याय २०

श्लोक 108.1

त्वं न॑ इ॒न्द्रा भ॑रं॒ ओजो॑ नृ॒म्णं श॑तक्रतो विचर्षणे ।आ वी॒रं पृ॑तना॒षह॑म्

tvaṃ na indrā bharaṃ ojo nṛmṇaṃ śatakrato vicarṣaṇe | ā vīraṃ pṛtanāṣaham

हिन्दी अर्थ

६७१. लर नेप्णुवहन् क्षयो मित्रो पाति बरंणः । (गृणाति) भरवंनाए कर रहे है । (मारतं शर्ध॑ः) मानसून तथा ्रन्तरिकस्थ वायु, -का बल (त्वाम्) भाप की (भनु) निरन्तर (मदति) स्तुतियां कर रहा है । (अस्य) इस परमेरवर के (मन्यवे) मन्यु के प्रति, (विवाः विशः)

English

Whetting thy thunderbolt with might. Thou, Indra, art pre-eminent over all creatures in thy strength:

अध्याय २०

श्लोक 108.2

त्वं हि नः॑ पि॒ता व॑सो॒ त्वं मा॒ता श॑तक्रतो ब॒भूवि॑थ ।अधा॑ ते सु॒म्नमी॑महे

tvaṃ hi naḥ pitā vaso tvaṃ mātā śatakrato babhūvitha | adhā te sumnamīmahe

हिन्दी अर्थ

स्वभावतः नत हो रही है, मुक रहीं है, (इव). जसे कि ( सिन्धवः ) बहती नदियां (समूद्राय) समुद्र के प्रति मुकी रहती है (तित्विषे) चमकता है, (यत्) जब कि ( इन्द्रः ) परमेदवर रोदसी ) द्यलोके भर भ्रूलोक,- (उभे) इन दोनों को, प्रलय कालं में, (सम् भरवतं- यत्) भ्रासानी.से लपेट लेता है, (इव) जैसे कि कई (चमं ) मृगछाला को

English

Thou hast pervaded every place. 300 Firm-seated is thy car, thy steeds are docile: thy hand, O King, holds, firmly grasped, the

अध्याय २०

श्लोक 108.3

त्वां शु॑ष्मिन् पुरुहूत वाज॒यन्त॒मुप॑ ब्रुवे शतक्रतो ।स नो॑ रास्व सु॒वीर्य॑म्

tvāṃ śuṣmin puruhūta vājayantamupa bruve śatakrato | sa no rāsva suvīryam

हिन्दी अर्थ

पापवृत्र के (शिरः) मानो शिर को, (वृष्णिना) शक्तिशाली .तथा(शतपवंणा) मनुष्य की सौ वषं की आयु तकं उस का पालन कर संकनेवाले (वसखरोण) ज्ञान-वच्र वारा, (बिभेद) काट दिया है । पाप का विनाश ज्ञानरूपी वचर द्वारा होता है । परमेश्वर ने वेद- . ज्ञान दिया है, जो किं मनुष्य के १०५. वषो के जीवन-काल मे, उस की पापों .

English

thunder. On thy fair path, O Lord of men, come quickly: we will increase thy power when thou hast

अध्याय २०

श्लोक 109.1

स्वा॒दोरि॒त्था वि॑षू॒वतो॒ मध्वः॑ पिबन्ति गौ॒र्यः ।या इन्द्रे॑ण स॒याव॑री॒र्वृष्णा॒ मद॑न्ति शो॒भसे॒ वस्वी॒रनु॑ स्व॒राज्य॑म्

svādoritthā viṣūvato madhvaḥ pibanti gauryaḥ | yā indreṇa sayāvarīrvṛṣṇā madanti śobhase vasvīranu svarājyam

हिन्दी अर्थ

. का० २०॥ सु० १०७ यववेद-माष्य २७१ सवमे बड़ी चक्तिरूप में ( रास ) सदा रहा है, ( यतः ) जिस ब्रह्मसे कि पाप-शत्रभ्रो की (नि रिणाति) नितरां हविसा कर देता है, ( विवे ऊमाः )

English

drunken. Let strong and mighty steeds who bear this mighty Indra, the Lord of men, whose arm wields thunder,

अध्याय २०

श्लोक 109.2

ता अ॑स्य पृशना॒युवः॒ सोमं॑ श्रीणन्ति॒ पृश्न॑यः ।प्रि॒या इन्द्र॑स्य धे॒नवो॒ वज्रं॑ हिन्वन्ति॒ साय॑कं॒ वस्वी॒रनु॑ स्व॒राज्य॑म्

tā asya pṛśanāyuvaḥ somaṃ śrīṇanti pṛśnayaḥ | priyā indrasya dhenavo vajraṃ hinvanti sāyakaṃ vasvīranu svarājyam

हिन्दी अर्थ

( शवसा ) ्रपने बल के कारण ( वावृधानः सबसे बढ़ा हुभ्रा, हे परमेदवर ! मनुष्य विवाह करके ( यद् जब द्विः मवन्ति ) दो होः जति है, भौर सन्तानोत्पन्न हो जाने पर जब (त्रिः) तीन दहो जाते ओर (ऊमाः) सब प्राणियों को रक्ना का ब्रत धारण करते है, तब (एते) स्वादु स्वरूप कं साथ ( सं सृज ) हमारा संसं कीजिये । ( अ्रदः मघु जीवात्मा कं उस मधुर स्वरूप को -(मधूना) .भ्रपने, मधुर स्वरूप कं, साथ २७२ भयर्ववेद-माष्य का० २०.॥ सू० १०७

English

Bring unto us, as shares of our banquet, the Bull of conquering might, of real vigour. So like a bull thou rushest to the Lord who loves the trough, the Sage, the prop of vigour, in

अध्याय २०

श्लोक 109.3

ता अ॑स्य॒ नम॑सा॒ सहः॑ सप॒र्यन्ति॒ प्रचे॑तसः ।व्र॒तान्य॑स्य सश्चिरे पु॒रूणि॑ पू॒र्वचि॑त्तये॒ वस्वी॒रनु॑ स्व॒राज्य॑म्

tā asya namasā sahaḥ saparyanti pracetasaḥ | vratānyasya saścire purūṇi pūrvacittaye vasvīranu svarājyam

हिन्दी अर्थ

स्वाद्रीयः--उपासक सांसारिक रसास्वादन की शअरेक्षा, परभेदवरीय हे उपासक (रणे-रणे) प्रत्येकं देवासुर-संग्राम मे (घना) ाघ्या- चित् नु) यदि (विप्राः) मेधावी उपासक, (भ्रनुमदन्ति) अनुमोदन करते हैः

English

the vat. Prepare thine energies, collect them in thyself: be for our profit as the Master of the wise. May precious treasures come to us,— so will I pray. Come to the votary’s gift offered with

अध्याय २०

श्लोक 110.1

इन्द्रा॑य॒ मद्व॑ने सु॒तं परि॑ ष्टोभन्तु नो॒ गिरः॑ ।अ॒र्कम॑र्चन्तु का॒रवः॑

indrāya madvane sutaṃ pari ṣṭobhantu no giraḥ | arkamarcantu kāravaḥ

हिन्दी अर्थ

पूर्वक (भरोजीयः) अधिकाधिक ओज (तनुष्व) योगाभ्यास में फलाता जा, ताकि (दुरेवासः) दुष्परिणाम पेदा करनेवाले ( कशोकाः कुत्सित-शोक- दुरेवासः = दुर् +-इ ¬+- वनिप् + भ्रसुन् । कशोकाः क + शोकाः हे परमेदवर ! (रणेषु). देवासुर-सं्रामों म, (गषेन्यानि) युद्ध करने

English

beauteous laud. Thou art the Lord, as such sit on this holy grass: thy vessels are inviolate as Law commands.

अध्याय २०

श्लोक 110.2

यस्मि॒न् विश्वा॒ अधि॒ श्रियो॒ रण॑न्ति स॒प्त सं॒सदः॑ ।इन्द्रं॑ सु॒ते ह॑वामहे

yasmin viśvā adhi śriyo raṇanti sapta saṃsadaḥ | indraṃ sute havāmahe

हिन्दी अर्थ

( वयम् ) हम, ( त्वया ) भ्राप की सहायता हारा ( शाशद्महे ) उन का .. विना करते है, भौर ( वचोभिः ) वेदिक वचनो के अनुसार (ते ) भाप द्वारा दर्शि गये ( भरायुधा ) आयुधो को ( चोवयामि ) प्रित करता हूं विधि द्वारा (सं शिशामि) सम्यक् प्रकार से तेज.करता हं ।

English

Far went our earliest invocations of the Gods, and won us glories that can never be surpassed. They who could not ascend the ship of sacrifice sink down in desolation, trembling with alarm.

अध्याय २०

श्लोक 110.3

त्रिक॑द्रुकेषु॒ चेत॑नं दे॒वासो॑ य॒ज्ञम॑त्नत ।तमिद् व॑र्धन्तु नो॒ गिरः॑

trikadrukeṣu cetanaṃ devāso yajñamatnata | tamid vardhantu no giraḥ

हिन्दी अर्थ

३) 1 तथा “तीक्मेषयो बराह्मणा हैतिमन्तः०” (भ्रथवं ० ५।१०८।९) । . , है परमेश्वर ! (श्वरे) मवरकालीन (च) श्रौर (परे) पूर्वकालीन ( यस्मिन् दुरोणे ) जिस हूदय-गृह मे, ( वसा ) उपासक की रक्षाकी दृष्टि से (भराविथ)्राप प्रवेश कर लेते ह ( तत् ) उस उपासक का भाप (नि दधिषे) पूणंतया धारण-पोषण करते हैँ । इसलिये है उपासको ! तुम

English

So be the others, evil-hearted, far away, whose horses difficult to harness have been yoked. Here in advance man stand anear to offer gifts, by whom full many a work that brings reward

अध्याय २०

श्लोक 111.1

यत् सो॑ममिन्द्र॒ विष्ण॑वि॒ यद् वा॑ घ त्रि॒त आ॒प्त्ये।यद् वा॑ म॒रुत्सु॒ मन्द॑से॒ समिन्दु॑भिः

yat somamindra viṣṇavi yad vā gha trita āptye| yad vā marutsu mandase samindubhiḥ

हिन्दी अर्थ

कर । (भूर्योजाः) महाप्रतापी वह परमेश्वर ( शवसा ) निज स्वाभाविक दाक्ति द्वारा ( आ दरदोंति ). तुके जीवन-मागं दशति है, तेरे लिमरे भाद पुरुवत्मनिम् = पृथिवी, चांद, ग्रह, सूयं तथा तारागणों .के भ्रपने- पने घूमने के मागं नियतः है, उन सब मागो का नियन्ता परमेदवर है । प्रतिमानम् = जसे पृथिवी के भ्राधार पर हम रहते है, रौर पृथिवी हमारा पालन-पोषण करती है, वैसे परमेदवर हमारा भ्राधार है, भ्रौर हम सबका धारण-पोषण कर रहा है । = (स्वर्षाः) सुखदायी परमेरवर ने, ( इनदराय' शुषम् ) जीवात्मा के लिये सुख

English

is done. He firmly fixed the plains and mountains as they shook. Dyaus thundered forth and made the air’s mid-region quake.

अध्याय २०

श्लोक 111.2

यद् वा॑ शक्र परा॒वति॑ समु॒द्रे अधि॒ मन्द॑से ।अ॒स्माक॒मित् सु॒ते र॑णा॒ समिन्दु॑भिः

yad vā śakra parāvati samudre adhi mandase | asmākamit sute raṇā samindubhiḥ

हिन्दी अर्थ

(तुरः चित्). वह शीघ्यकारी है । (निष० १।११) त्र (समूहा) । क्षयति =-एेदवर्यकर्मा (निघ० २,२१) जगत् के निर्माण मेँ विभरुतिमान् है, तथा ( अरिप्रे ) पाप-रहित हँ । बेद- (वधेयन्ति) इन दोनों के महत्त्व को बढ़ती हँ । .

English

He stays apart the two confronting bowls; he sings lauds in the potent Soma’s joy when he hath drunk.

अध्याय २०

श्लोक 111.3

यद् वासि॑ सुन्व॒तो वृ॒धो यज॑मानस्य सत्पते ।उ॒क्थे वा॒ यस्य॒ रण्य॑सि॒ समिन्दु॑भिः

yad vāsi sunvato vṛdho yajamānasya satpate | ukthe vā yasya raṇyasi samindubhiḥ

हिन्दी अर्थ

, काऽ ० 1 सू० १०७ अथववैवेद-माष्य , २७१५ (दिवाकरः) मुक उपासक म प्रका पैदा कर दिया है, भौर (शुक्रः) शुचि हटा कर, उन के (चिदवा दृरितानि) समग्र दृष्परिणामों से ( तारीत् ) मुम तंरादियादहै, बचा दियाहै।

English

I bear this deftly-fashioned goad of thine wherewith thou, Maghavan, shalt break the strikers with the hoof. At the libation mayst thou be well satisfied. Partake the juice, partake the banquet, Bounteous

अध्याय २०

श्लोक 112.1

यद॒द्य कच्च॑ वृत्रहन्नु॒दगा॑ अ॒भि सू॑र्य ।सर्वं॒ तदि॑न्द्र ते॒ वशे॑

yadadya kacca vṛtrahannudagā abhi sūrya | sarvaṃ tadindra te vaśe

हिन्दी अर्थ

भ्रनीकम् समूह । केतुः =प्रजञानम् ( निर० १२।१।७ सथं के ५८६. चित्रदेवानामुद॑गाद नीकं चधुरमित्रस्य वदंणस्याभरः । रूप परमेश्वर (उदगात्) मेरे हृदयाकाश मेँ उदित हुमा है । यह् परमेद्वर आंख है । यह (द्यावापृथिवी) द्युलोक गौर ९.9 मे, + म्न्त-

English

Lord. O Much-invoked, may we subdue all famine and evil want with store of grain and cattle.

अध्याय २०

श्लोक 112.2

यद् वा॑ प्रवृद्ध सत्पते॒ न म॑रा॒ इति॒ मन्य॑से ।उ॒तो तत् स॒त्यमित् तव॑

yad vā pravṛddha satpate na marā iti manyase | uto tat satyamit tava

हिन्दी अर्थ

चक्षुः भां मार्गददोक् है । परमेरवर अरन्यादि का मागं दकं है । रहना, यह सब कु परमेदवरीय निदंशों के भ्रधीन है । भ्रात्मा प्राणियों का जीवन तन तक रहता है, जब तक उन मे जीवीत्मा का निवास है । पर भ्रवलम्बित है । । ६८६. श्यौ देवीमुषसं रोच॑मानां मयो न योषामभ्येति पश्चात् ।

English

May we allied, as first in rank, with princes, obtain possessions by our own exertions. Brihaspati protect us from the rearward, and from above, and from below, from sinners! May Indra from the front and from the centre, as friend to friends, vouchsafe us room and

अध्याय २०

श्लोक 112.3

ये सोमा॑सः परा॒वति॒ ये अ॑र्वा॒वति॑ सुन्वि॒रे।सर्वां॒स्तां इ॑न्द्र गच्छसि

ye somāsaḥ parāvati ye arvāvati sunvire| sarvāṃstāṃ indra gacchasi

हिन्दी अर्थ

पीले-पीचे ( भरभ्येति ) भ्राता है, चलता है, वसे ही (सुः) सू्योँ ल भराता है ! (देवयन्तः) परमेद्वर-देव कीं कामनावाले (नरः) उपासक-नेता ( यत्र )- जिस टैसी अवस्था मे ( युगानि ) मानों नवीन युगो का ( प्रति योगमा पर भ्ारढ़ हए योगी को, परमेदवर के साक्षात्कार से भराध्यात्मिक जीवन के रचिकर उषःकाल की ज्योतियां है। यथा--

English

freedom. From the three jars the Great and Strong hath drunk drink blent with meal. With Vishnu hath

अध्याय २०

श्लोक 113.1

उ॒भयं॑ शृ॒णव॑च्च न॒ इन्द्रो॑ अ॒र्वागि॒दं वचः॑ ।स॒त्राच्या॑ म॒घवा॒ सोम॑पीतये धि॒या शवि॑ष्ठ॒ आ ग॑मत्

ubhayaṃ śṛṇavacca na indro arvāgidaṃ vacaḥ | satrācyā maghavā somapītaye dhiyā śaviṣṭha ā gamat

हिन्दी अर्थ

त्कार के पूर॑रूप हैँ । इन दिव्य रुचिकर ज्योतियों के पदवत् परमेदवर का (शतक्रतो) है सैकड़ों कमोवाते महाभर्ञ ! ( विचर्षणे ) दे.विश्व- सन्तान (भ्रा) दीजिये, जो कि ( पृतनाषहम् ) काम क्रोधं इ की सेनाभीं

English

he quaffed the flowing Soma juice, all that he would. That hath so heightened him the Great, the Vast, to do his mighty work. So may the God attend the God, true Indu Indra who is true.

अध्याय २०

श्लोक 113.2

तं हि स्व॒राजं॑ वृष॒भं तमोज॑से धि॒षणे॑ निष्टत॒क्षतुः॑ ।उ॒तोप॒मानां॑ प्रथ॒मो नि षी॑दसि॒ सोम॑कामं॒ हि ते॒ मनः॑

taṃ hi svarājaṃ vṛṣabhaṃ tamojase dhiṣaṇe niṣṭatakṣatuḥ | utopamānāṃ prathamo ni ṣīdasi somakāmaṃ hi te manaḥ

हिन्दी अर्थ

(त्वम्) भ्राप (माता बभूविथ) हमारी मातां भीरहै। ( अधा) .अतः (ते) (शुष्मिन्) है बलशाली ! , ( पृखहूत ) है बहुत उपासको द्वारा या बहुत नामो द्वारा पुकारे गपु, ( शतक्रतो ) हि सैकड़ों कममोवाले महाप्रज्ञ ! धमका्यो मेँ उत्तम वीरता (रास्व) प्रदान कीजिये । (भनु) लक्ष्य बनाकर (शोभसे) शोभायमान होती है ।

English

Sing strength to Indra that shall set his chariot in the foremost place. Giver of room in closest fight, slayer of foes in shock of war, be thou our great encourager.

अध्याय २०

श्लोक 114.1

अ॒भ्रा॒तृ॒व्यो अ॒ना त्वमना॑पिरिन्द्र ज॒नुषा॑ स॒नाद॑सि ।यु॒धेदा॑पि॒त्वमि॑च्छसे

abhrātṛvyo anā tvamanāpirindra januṣā sanādasi | yudhedāpitvamicchase

हिन्दी अर्थ

(भस्य) इस उपासक की चित्तवृत्तियां, जो पहिले (पृदनयः) नाना- इन नानारूपों को चाहती थीं, ( ताः) वे अब शुक्ल अर्थात् सात्विक बनकर परमेदवंर की ( प्रियाः ) प्रिय बन जाती हैः ( षेनवः ) भौर उपासक को

English

Let the weak bowstrings break upon the bows of feeble enemies. Thou didst destroy the Dragon: thou sentest the rivers down to earth. Foeless, O Indra, wast thou born. Thou tendest well each choicest thing. Therefore we draw

अध्याय २०

श्लोक 114.2

नकी॑ रे॒वन्तं॑ स॒ख्याय॑ विन्दसे॒ पीय॑न्ति ते सुरा॒श्वः ।य॒दा कृ॒णोषि॑ नद॒नुं समू॑ह॒स्यादित् पि॒तेव॑ हूयसे

nakī revantaṃ sakhyāya vindase pīyanti te surāśvaḥ | yadā kṛṇoṣi nadanuṃ samūhasyādit piteva hūyase

हिन्दी अर्थ

भ्आानन्दरसङूपी दुग्ध पिलाने लगती है, भौर सायकम् ) राजसिक तथा के (भ्ननु) अनुकूल होती हँ । - . सास्विक चित्तवृत्तियां, ( नमसा ) परमेदवर को नमस्कार करती हूर, (सहः) उपासक को साहस तथा शक्ति (सपयंन्ति) श्रदान करती ह, ओौर (भरस्य ) इस उपासक कै . (पुरूणि व्रतानि) नानाविध व्रतो को (सदिचरे) है । (वस्वीरनु०) मन्त्रे ६९१ के भ्रनुसार।

English

us close to thee. Let the weak bowstrings break upon the bows of feeble enemies. Destroyed be all malignities and all our enemy’s designs.

अध्याय २०

श्लोक 115.1

अ॒हमिद्धि पि॒तुष्परि॑ मे॒धामृ॒तस्य॑ ज॒ग्रभ॑ ।अ॒हं सूर्य॑ इवाजनि

ahamiddhi pituṣpari medhāmṛtasya jagrabha | ahaṃ sūrya ivājani

हिन्दी अर्थ

रस उत्पन्न हो चुका है ।. अब (नः) हमारी (गिरः) स्तुति-वाणियां ( परि भरत्र॑नीय परमेश्वर की (भरचेन्तु) भचंनाए करे । . (यस्मिनं भधि ) जिस परमेदवर में (.विदवाः ). सब होमाएु" भ्रौर

English

Thy bolt thou castest at the foe, O Indra, who would smite us dead: thy liberal bounty gives us wealth. Let the weak bow- strings break upon the bows of feeble enemies. 301

अध्याय २०

श्लोक 115.2

अ॒हं प्र॒त्नेन॒ मन्म॑ना॒ गिरः॑ शुम्भामि कण्व॒वत्।येनेन्द्रः॒ शुष्म॒मिद् द॒धे

ahaṃ pratnena manmanā giraḥ śumbhāmi kaṇvavat| yenendraḥ śuṣmamid dadhe

हिन्दी अर्थ

का० २ ० । सू० १११ भ्रथवेवेद-माष्य 9 0 । २७६९ (सृते) भक्तिरस के उत्पन्न होने पर (हवामहे) हम आ्राह्वान करते है । तपोलोक तथा सत्यलोक । ६९५. त्रिकद्रुकेषु वेतनं देवासो यद्मरनत । (देवासः) दिव्य उपासक, (त्रिकद्र केषु) पृथिवी के तीन स्थानों मे,--

English

Taste this strong draught that gives thee vital vigour: with all thy chariot here unyoke thy coursers.

अध्याय २०

श्लोक 115.3

ये त्वामि॑न्द्र॒ न तु॑ष्टु॒वुर्ऋष॑यो॒ ये च॑ तुष्टु॒वुः ।ममेद् व॑र्धस्व॒ सुष्टु॑तः

ye tvāmindra na tuṣṭuvurṛṣayo ye ca tuṣṭuvuḥ | mamed vardhasva suṣṭutaḥ

हिन्दी अर्थ

परमेरवर की (वर्धन्तु) बड़ाई करती है, (नः गिरः) हमारी स्तुतियां 1 द्र. (गति), भर्थात् जो गति कर रही है, परन्तु जिस की गति काभान नहीं होता । भ्रतः वह् कुत्सित गतिवाली है । यदू वां मरुत्सु मन्दसे समिन्दुभिः ॥१॥

English

Let not those other sacrificers stay thee, Indra: these juices shed for thee are ready. Thine is the juice effused, thine are the juices yet to be pressed: our resonant songs invite thee.

अध्याय २०

श्लोक 116.1

मा भू॑म॒ निष्ट्या॑ इ॒वेन्द्र॒ त्वदर॑णा इव ।वना॑नि॒ न प्र॑जहि॒तान्य॑द्रिवो दु॒रोषा॑सो अमन्महि

mā bhūma niṣṭyā ivendra tvadaraṇā iva | vanāni na prajahitānyadrivo duroṣāso amanmahi

हिन्दी अर्थ

ग्रौर जो (त्रिते) तीसरे लोक चुलोक मेँ (सोमं मन्दसे) भक्तिरस है उसका सोमं मन्दसे ) जो भक्तिरस है उसका श्राप ्रानन्द सेते रहै) (वा) तथा इन्दुभिः = उनततर्वा. ( निर० १०।४।४२)। "इन्दु" शब्द की २८० भयर्वेवेद-माष्य का० २०। सू० ११२

English

O Indra, pleased to-day with this libation, come, thou who knowest all, and drink the Soma. Whoso, devoted to the God, effuses Soma for him with yearning heart and spirit,

अध्याय २०

श्लोक 116.2

अम॑न्म॒हीद॑ना॒शवो॑ऽनु॒ग्रास॑श्च वृत्रहन्।सु॒कृत्सु ते॑ मह॒ता शू॑र॒ राध॒सानु॒ स्तोमं॑ मुदीमहि

amanmahīdanāśavo'nugrāsaśca vṛtrahan| sukṛtsu te mahatā śūra rādhasānu stomaṃ mudīmahi

हिन्दी अर्थ

क्लेदन, अर्थात् गीला करना । मन्व मे कवितारूप मे कहा गया है कि इनं . हैकि सभी संसार मानो परमेश्वर के प्रति भक्तिरस मे उमड़ा हुभ्रा, परमे- इवर के प्रति श्रात्म-समपंण कर रहा है । ६९७. -यद् बा शक्र परावति समुद्रे अधि मन्द॑से । (वा) तथा ( शक्र ) है शक्तिशाली परमेदवर ! ( परावति समुद्रे

English

Never doth Indra give away his cattle: for him he makes the lovely Soma famous. He looks with loving favour on the mortal who, like a rich man, pours for him the Soma. Maghavan in his bended arm supports him: he slays, unasked, the men who hate devotion.

अध्याय २०

श्लोक 117.1

पिबा॒ सोम॑मिन्द्र॒ मन्द॑तु त्वा॒ यं ते॑ सु॒षाव॑ हर्य॒श्वाद्रिः॑ ।सो॒तुर्बा॒हुभ्यां॒ सुय॑तो॒ नार्वा॑

pibā somamindra mandatu tvā yaṃ te suṣāva haryaśvādriḥ | soturbāhubhyāṃ suyato nārvā

हिन्दी अर्थ

सम्यक् रमण कीजिये, प्रसन्न हूजिये । 9 भविति-यज्ञवाले (यजमानस्य) उपासक को भाप ( वृधः श्रसि ) बढ़ाते हैः (वा) तथा जिसकी (उक्थे) स्तुतियों मे राप (रण्यसि) रमण करते है- उसके इन्दुभिः ) भवितरसों द्वारा भी भ्राप ( सम् रण ). रमण कीजिये, (वृत्रहन् ) है भज्ञानावरण का हनन करनेवाले ! (सूयं) है सूयो के सूयं ! ( भरद्य ) प्रतिदिन (भभि) हमारे सामने ( यद् कत् च ) जो कोई

English

We call on thee to come to us, desirous of booty, and of cattle, and of horses. For thy new love and favour are we present: let us invoke thee,

अध्याय २०

श्लोक 117.2

यस्ते॒ मदो॒ युज्य॒श्चारु॒रस्ति॒ येन॑ वृ॒त्राणि॑ हर्यश्व॒ हंसि॑ ।स त्वामि॑न्द्र प्रभूवसो ममत्तु

yaste mado yujyaścārurasti yena vṛtrāṇi haryaśva haṃsi | sa tvāmindra prabhūvaso mamattu

हिन्दी अर्थ

मन्त भे सूयं ओौर इनदर, दोनों शब्द परमात्मवाचक है । का० २०। सु० ११३ अथवेवेद-भाष्य २८१ ७००. यदा प्रब्द सत्यते न म॑रा इति मन्य॑से ।

English

Indra, as our welfare. For life I set thee free by this oblation from the unknown decline and from consumption; Or, if the grasping demon have possessed him, free him from her, O Indra, thou and Agni.

अध्याय २०

श्लोक 117.3

बोधा॑ सु मे॑ मघव॒न् वाच॒मेमां यां ते॒ वसि॑ष्ठो॒ अर्च॑ति॒ प्रश॑स्तिम्।इ॒मा ब्रह्म॑ सध॒मादे॑ जुषस्व

bodhā su me maghavan vācamemāṃ yāṃ te vasiṣṭho arcati praśastim| imā brahma sadhamāde juṣasva

हिन्दी अर्थ

(वृद्ध) है पुराण पूरुष या सद्गुणो मे बढ़ हुए. ! (सत्पते) है सच्चे- भाप (न मरा) मरते नदीं कि भ्राप भ्रजर अमर दहः (उत उ तत्) वह् तो च) जो (सोमासः) भक्तिरस (पराव्रति) पराविद्यावालों मे हैमौर (गच्छसि) प्राप्त होते है । 8 ॐ 3

English

Be his days ended, be he how departed, be he brought very near to death already, Out of Destruction’s lap again I bring him, save him for life to last a hundred autumns.

अध्याय २०

श्लोक 118.1

श॒ग्ध्यू॒३षु श॑चीपत॒ इन्द्र॒ विश्वा॑भिरू॒तिभिः॑ ।भगं॒ न हि त्वा॑ य॒शसं॑ वसु॒विद॒मनु॑ शूर॒ चरा॑मसि

śagdhyū3ṣu śacīpata indra viśvābhirūtibhiḥ | bhagaṃ na hi tvā yaśasaṃ vasuvidamanu śūra carāmasi

हिन्दी अर्थ

. अभिप्राय यह है कि परमेदवर को स्वाभिमुख करने के लिये विच्युदध भक्तिरस चाहिए, चाहे वह भक्तिरस पराविद्यावालो में हो, या अपराविद्ा दवारा की गई स्तुतियों तथा सामगानों वारा किये गये स्तुति-वचनों को (मदणवत्) सुनता है । (च) भौर वह (मघवा ) एेश्वयंशाली (शविष्ठ; ) भौर भरतिबलशाली परमेश्वर, ( सत्राच्या ) सदा सत्य क बर भुकी ह (धिया) निज करुणामयी .घारणा द्वारा, (सोमपीतये) भक्तिरस के पान के लिये (भा. गमत्) प्रकट हो जाताहै। . २८२ भ्रथवेवेद-भाष्य का० २० । सु० ११४

English

With thousand-eyed oblation, hundred-autumned, bringing a hundred lives, have 1 restored him. That Indra for a hundred years may lead him safe to the farther shore of all misfortune.

अध्याय २०

श्लोक 118.2

पौ॒रो अश्व॑स्य पुरु॒कृद् गवा॑म॒स्युत्सो॑ देव हिर॒ण्ययः॑ ।नकि॒र्हि दानं॑ परि॒मर्धि॑ष॒त् त्वे यद्य॒द्यामि॒ तदा भ॑र

pauro aśvasya purukṛd gavāmasyutso deva hiraṇyayaḥ | nakirhi dānaṃ parimardhiṣat tve yadyadyāmi tadā bhara

हिन्दी अर्थ

७०३. तं हि खरां ृषमं तमोज॑से धिषणे निषत्तः । उतोप्मानौ प्रथमो नि दधि सोम॑कामं हि ते मन॑ः ॥२॥ वर्षी (तं तंहि) उसे भ्रौर उसे ही,-- ( धिषणे ) उपयु क्त दो प्रकार की तदनन्तर हमे ज्ञान होता है कि भ्नापदही.( उपमानाम् ) सब उपमान मे रूप से स्थितै! हम यह भी जान गयेर्हैकि (ते) भ्रापकी (-मनः).

English

Live waxing in thy strength a hundred autumns, live through a hundred springs, a hundred winters.

अध्याय २०

श्लोक 118.3

इन्द्र॒मिद् दे॒वता॑तय॒ इन्द्रं॑ प्रय॒त्यऽध्व॒रे।इन्द्रं॑ समी॒के व॒निनो॑ हवामह॒ इन्द्रं॒ धन॑स्य सा॒तये॑

indramid devatātaya indraṃ prayatya'dhvare| indraṃ samīke vanino havāmaha indraṃ dhanasya sātaye

हिन्दी अर्थ

इच्छा, (हि) निश्चय से, (सोमकामम्) उपासक के भक्तिरस की कामना- ही, भाप (अन्नातृव्यः) माई भतीजे तथा रात्र से भ ३ है, (अना) भापका . कोई नेता नी, मागेंददेक नीं, ( त्वम् ) भ्राप ( ‡ ) जन्मजात (इच्छसे) भ्रापं चाहते हैँ । । ।

English

Through hundred-lived oblation Indra, Agni, Brihaspati, Savitar yield him for a hundred! So have I found and rescued thee: thou hast returned with youth renewed. Whole in thy members! I have found whole sight and all thy life for thee.

अध्याय २०

श्लोक 118.4

इन्द्रो॑ म॒ह्ना रोद॑सी पप्रथ॒च्छव॒ इन्द्रः॒ सूर्य॑मरोचयत्।इन्द्रे॑ ह॒ विश्वा॒ भुव॑नानि येमिर॒ इन्द्रे॑ सुवा॒नास॒ इन्द॑वः

indro mahnā rodasī paprathacchava indraḥ sūryamarocayat| indre ha viśvā bhuvanāni yemira indre suvānāsa indavaḥ

हिन्दी अर्थ

भरयवा प्राप नर-नारी का शरीर धारण नहीं करते , यदा कृणोषि नदं समूहस्यादित् पितेव हयसे ॥२॥ हे परमेदवर ! भाप (रेवन्तम्) घनलोलुप को (सस्याय) सखिभाव के लिये (नकिः) नहीं ( विन्दसे) स्वीकार करते । ( ते ) वे धन-लोलुप गंजंना ( कृणोषि ) करते है, भौर भ्राप समूहसि ) संहार करने लगते है,

English

May Agni yielding to our prayer, the Rakshas-killer, drive away. The malady of evil name that hath beset thy labouring womb.

अध्याय २०

श्लोक 119.1

अस्ता॑वि॒ मन्म॑ पू॒र्व्यं ब्रह्मेन्द्रा॑य वोचत ।पू॒र्वीरृ॒तस्य॑ बृह॒तीर॑नूषत स्तो॒तुर्मे॒घा अ॑सृक्षत

astāvi manma pūrvyaṃ brahmendrāya vocata | pūrvīrṛtasya bṛhatīranūṣata stoturmeghā asṛkṣata

हिन्दी अर्थ

कहकर (हुयसे) पुकारे जाते हैँ । 7 (अहम्) मै उपासक ने, (इत् हि) अव्य (पितुः) परमपिता परमेश्वर की शोभा बढ़ाते है! ( येन) जिनं मननीय वैदिक मन्त्रौ हारा ( इन्द्रः जीवात्मा, (शुष्मम्) पाप-शोषक बल (दषे) भपनेमे धारण करताहै। ..

English

Agni, concurring in the prayer, drive off the eater of thy flesh, The malady of evil name that hath attacked thy babe and womb. That which destroys the sinking germ, the settled, moving embryo,

अध्याय २०

श्लोक 119.2

तु॒र॒ण्यवो॒ मधु॑मन्तं घृत॒श्चुतं॒ विप्रा॑सो अ॒र्कमा॑नृचुः ।अ॒स्मे र॒यिः प॑प्रथे॒ वृष्ण्यं॒ शवो॒ऽस्मे सु॑वा॒नास॒ इन्द॑वः

turaṇyavo madhumantaṃ ghṛtaścutaṃ viprāso arkamānṛcuḥ | asme rayiḥ paprathe vṛṣṇyaṃ śavo'sme suvānāsa indavaḥ

हिन्दी अर्थ

( न तुष्टुवुः ) स्तुतियां नहीं करते, भ्राप का गुण-गान नहीं करते, ( चं ) २ठ४. प्रथरवैवेद-माष्य का० २०। सूज ११९६ मन्त्र में ्रनृषि, ऋषि, भौर महषि का वणन है । अनूषितो परमेदवर के गुणों को जानते ही नही, इसलिये वे परमेदवर की स्तुतियां

English

That which would kill the babe at birth, even this will we drive far away. That which divides thy legs that it may lie between the married pair,

अध्याय २०

श्लोक 120.1

यदि॑न्द्र॒ प्रागपा॒गुद॒ङ्न्यग् वा हू॒यसे॒ नृभिः॑ ।सिमा॑ पु॒रू नृषू॑तो अ॒स्यान॒वेऽसि॑ प्रशर्ध तु॒र्वशे॑

yadindra prāgapāgudaṅnyag vā hūyase nṛbhiḥ | simā purū nṛṣūto asyānave'si praśardha turvaśe

हिन्दी अर्थ

निरतिश्षयरूप मेँ होती है । परमेदवर के गुण निःसीम रहै, निरतिशय है । . इस लिये महषि कोटि का व्यक्ति ही परमेदवर के गुणों गौर स्वरूप को -. (शु+स्तुत) हो सकता है । महि ढारा परमेइवर के गुणो का वर्णेन सुनकर ही ज्ञात हो सकता है कि परमेइवर परमेदरवरीय प्रत्येकं गुण मे, सब से बढ़ा हभ है, वह महतो महान् है ।

English

That penetrates and licks thy side, even this will we exterminate. What rests by thee in borrowed form of brother, lover, or of lord, And would destroyed the progeny,—even this will we exter- minate.

अध्याय २०

श्लोक 120.2

यद् वा॒ रुमे॒ रुश॑मे॒ श्याव॑के॒ कृप॒ इन्द्र॑ मा॒दय॑से॒ सचा॑ ।कण्वा॑सस्त्वा॒ ब्रह्म॑भि॒ स्तोम॑वाहस॒ इन्द्रा य॑च्छ॒न्त्या ग॑हि

yad vā rume ruśame śyāvake kṛpa indra mādayase sacā | kaṇvāsastvā brahmabhi stomavāhasa indrā yacchantyā gahi

हिन्दी अर्थ

रेमणन करनेवाले भी हम न हों । ( श्रद्विवः) है पापविंदारक-साघनोंसे नहीं किया । ८ दुरोषासः ) रागद्वेष, ई्प्या भ्रादि के जलन से पुथक् होकर . (अमन्महि) हम भ्राप का मनन कर रहे ह । का०२०॥ सू० ११७. अथवंवेद-माष्य २८५

English

That which through sleep or darkness hath deceived thee and lies down by thee, And will destroy thy progeny,—even this will we exterminate.

अध्याय २०

श्लोक 121.1

अ॒भि त्वा॑ शूर नोनु॒मोऽदु॑ग्धा इव धे॒नवः॑ ।ईशा॑नम॒स्य जग॑तः स्व॒र्दृश॒मीशा॑नमिन्द्र त॒स्थुषः॑

abhi tvā śūra nonumo'dugdhā iva dhenavaḥ | īśānamasya jagataḥ svardṛśamīśānamindra tasthuṣaḥ

हिन्दी अर्थ

(वृत्रहन्) है पाप-वरत्रों का हनन करनेवाले परमेश्वर 1. (अ्ननारवः) करते रहते हैँ । (शूर ) है विक्रमदील परमेश्वर! (ते) आपकी (य्न) जिस भक्तिरस को कि ( ते ) आपके लिये उपासक नै ( सुषाव

English

From both thy nostrils, from thine eyes, from both thine ears and from thy chin, Forth from thy head and brain and tongue I drive thy malady away. From the neck-tendons and the neck, from the breast-bones and from the spine,

अध्याय २०

श्लोक 121.2

न त्वावां॑ अ॒न्यो दि॒व्यो न पार्थि॑वो॒ न जा॒तो न ज॑निष्यते ।अ॒श्वा॒यन्तो॑ मघवन्निन्द्र वा॒जिनो॑ ग॒व्यन्त॑स्त्वा हवामहे

na tvāvāṃ anyo divyo na pārthivo na jāto na janiṣyate | aśvāyanto maghavannindra vājino gavyantastvā havāmahe

हिन्दी अर्थ

(बाहुभ्याम्) बाहृशरो द्वारा (न) जसे (भर्वा) भरव (सुयतः) वश में हो जाता है, त्र॑से भाप उपासक के वशवर्ती हो जाये, भ (चारः) भाप के लिये रुचिकर (अस्ति) है, (येन ) जिसके द्वारा किं भराप (वृत्राणि) हमपरे पारो का ( हंसि ) हनन करते ह, ( परभ्ुवसो ) ह परभूत २८६ अ्थवेवेद-माष्य । काऽ २०५.। सु० ११८

English

From shoulders, upper, lower arms, I drive thy malady away. From viscera and all within, forth from the rectum, from the heart,

अध्याय २०

श्लोक 122.1

रे॒वती॑र्नः सध॒माद॒ इन्द्रे॑ सन्तु तु॒विवा॑जाः ।क्षु॒मन्तो॒ याभि॒र्मदे॑म

revatīrnaḥ sadhamāda indre santu tuvivājāḥ | kṣumanto yābhirmadema

हिन्दी अर्थ

इस (वाचम्) स्तुति-वाणी को (सु बोध ) ठीक प्रकार जानिये, (याम्) (ते). भ्राप के लिये ( भर्चंति ) भर्चनामे भेटकर रहा है । ( सधमादे हम ( त्वा रनु चरामसि ) भ्रापकैश्रनुचरहो गए आपकी भरज्ञाके व्यवर्ती हो गये है । ५ हि ॥

English

From kidneys, liver and from spleen, I drive thy malady away. From thighs, from knee-caps, and from heels, and from the forepart of the feet, From hips, from stomach, and from groin, I drive thy malady away.

अध्याय २०

श्लोक 122.2

आ घ त्वावा॒न् त्मना॒प्त स्तो॒तृभ्यो॑ धृष्णविया॒नः ।ऋ॒णोरक्षं॒ न च॒क्र्योः

ā gha tvāvān tmanāpta stotṛbhyo dhṛṣṇaviyānaḥ | ṛṇorakṣaṃ na cakryoḥ

हिन्दी अर्थ

बढ़ते ह ! (उत्सः) भाप शक्तियो के सोत ह । (देव) है दिव्यगुरणोवाले । का०२०। सुण ११६ भ्रथवेवेद-भाष्य २८७ (नकिः) कोई भी शर्त नहीं (परि मर्धिषत्) टाल सकती । है परमेदवर! मै राप का उपासक (यद् यद् यामि) जो-जो श्राप से याचना करता हं (तत्) वह (भ्रा भर) प्रदान कीजिये । ओ

English

From what is voided from within, and from thy hair, and from thy nails, From all thyself, from top to toe, I drive thy malady away.

अध्याय २०

श्लोक 122.3

आ यद् दुवः॑ शतक्रत॒वा कामं॑ जरितॄ॒णाम्।ऋ॒णोरक्षं॒ न शची॑भिः

ā yad duvaḥ śatakratavā kāmaṃ jaritṝṇām| ṛṇorakṣaṃ na śacībhiḥ

हिन्दी अर्थ

यामि = याञ्चाकर्मा (निच° २१९) । इनदरं समाके वनिन हवामहे इन्द्रं धन॑स्य सातये ॥३। सहायताथं परमेश्वर का ही ( हवामहे ) भाह्वान कंरते ह ( भ्र॑ध्वरे )

English

From every member, every hair, disease that comes in every joint, From all thyself, from top to toe, I drive thy malady away. 302

अध्याय २०

श्लोक 123.1

तत् सूर्य॑स्य देव॒त्वं तन्म॑हि॒त्वं म॒ध्या कर्तो॒र्वित॑तं॒ सं ज॑भार ।य॒देदयु॑क्त ह॒रितः॑ स॒धस्था॒दाद् रात्री॒ वास॑स्तनुते सि॒मस्मै॑

tat sūryasya devatvaṃ tanmahitvaṃ madhyā kartorvitataṃ saṃ jabhāra | yadedayukta haritaḥ sadhasthādād rātrī vāsastanute simasmai

हिन्दी अर्थ

परमेदवर का ( हवामहे ) भाह्वान करते ह। ( वनिनः) परमेश्वर का सहायतां परमेदवर का आह्वान करते ह । (. धनस्य ) धन की (सातये) समीके संग्रामनाम (निच० २।१७) । वनिन"==दन संभक्तौ । (इन्द्रः) परमेदवर ने (मल्ला) निज महिमा से ( रोदसी ) दयुलोक श्रौर

English

Avaunt, thou Master of the Mind, I Depart and vanish far away. Look on Destruction far from us. The live man’s mind is manifold.

अध्याय २०

श्लोक 123.2

तन्मि॒त्रस्य॒ वरु॑णस्याभि॒चक्षे॒ सूर्यो॑ रू॒पं कृ॑णुते॒ द्योरु॒पस्थे॑ ।अ॒न॒न्तम॒न्यद् रुश॑दस्य॒ पाजः॑ कृ॒ष्णम॒न्यद्ध॒रितः॒ सं भ॑रन्ति

tanmitrasya varuṇasyābhicakṣe sūryo rūpaṃ kṛṇute dyorupasthe | anantamanyad ruśadasya pājaḥ kṛṣṇamanyaddharitaḥ saṃ bharanti

हिन्दी अर्थ

लोक-लोकान्तर (इन्द्र ह) परमेकवरमें ही भ्राधित होकर ( येमिरे ) परमे- + भथवंवेद-भाष्य का०२०॥। सु° १२० हे उपासको ! -(अस्तावि) उपासना आरम्भ हुई है, तुम (इन्द्राय )

English

So in like manner, offer him the juice to day. Now range you. by the Glorious One. Even the wolf, the savage beast that rends the sheep, follows the path of his decrees. So, India, graciously accepting this our praise, with wondrous. thought come forth to us.

अध्याय २०

श्लोक 124.1

कया॑ नश्चि॒त्र आ भु॑वदू॒ती स॒दावृ॑धः॒ सखा॑ ।कया॒ शचि॑ष्ठया वृ॒ता

kayā naścitra ā bhuvadūtī sadāvṛdhaḥ sakhā | kayā śaciṣṭhayā vṛtā

हिन्दी अर्थ

वाणियों ने (अनूषत) परमेदवर का स्तवन किया है, कथन किया है, भौर असे रयिः प॑प्रथे शष्ण्यं शवोऽसे छंवानास इन्दवः. ॥९॥ ( तुरण्यवः ) उपासना-मागं में त्वरा करनेवाले, शीघ्रता करनेवाले दवर की (भ्रानृचुः) अचंनाए करते ह । परिणाम मेँ ( भस्मे हम भव॑ना

English

What manly deed of vigour now remains that Indra hath not done? Who hath not heard his glorious title and his fame, the Vritra- slayer from his birth?

अध्याय २०

श्लोक 124.2

कस्त्वा॑ स॒त्यो मदा॑नां॒ मंहि॑ष्ठो मत्स॒दन्ध॑सः ।दृ॒ल्हा चि॑दा॒रुजे॒ वसु॑

kastvā satyo madānāṃ maṃhiṣṭho matsadandhasaḥ | dṛlhā cidāruje vasu

हिन्दी अर्थ

करनेवालो के लिये ( रयिः ) परमेइवर कीं कृपा से भाध्यात्मिक-सम्पत्ति धृतम् = उदकम् ( निघ० १।१२ ) ! ध्रकंम् = ्रकंः देवो भवति ७६२०. यदिन रागागुदन्य गबा दूयसे दभि; ।

English

The Ribhus in accord have lifted up their voice and Rudras. sung thee as the First. Indra increased his manly strength at sacrifice, in the wild rapture of this juice; And living men to-day, even as of old, sing forth their praises to his majesty.

अध्याय २०

श्लोक 124.3

अ॒भी षु णः॒ सखी॑नामवि॒ता ज॑रितॄ॒णाम्।श॒तं भ॑वास्यू॒तिभिः॑

abhī ṣu ṇaḥ sakhīnāmavitā jaritṝṇām| śataṃ bhavāsyūtibhiḥ

हिन्दी अर्थ

सवंत, (नृभिः) मनुष्यों दारा जाप ( हृयसे ) सहायताथं पुकारे जाते है, भौर का० २० । सुऽ १२१ अथवंवेद-माष्य २८९ ७२१. यद् वा कमे रवमे श्यावके छप नतर मादयसे स॑ । (यद् वा) तथा (इन्दर) है परमेदवर !. भाप (रुमे) स्तुतिशब्दो की

English

As rivers swell the ocean, so, Hero, our prayers increase thy might, Though of thyself, O Thunderer, waxing day by day.

अध्याय २०

श्लोक 124.4

इ॒मा नु कं॒ भुव॑ना सीषधा॒मेन्द्र॑श्च॒ विश्वे॑ च दे॒वाः ।य॒ज्ञं च॑ नस्त॒न्वं च प्र॒जां चा॑दि॒त्यैरिन्द्रः॑ स॒ह ची॑क्लृपाति

imā nu kaṃ bhuvanā sīṣadhāmendraśca viśve ca devāḥ | yajñaṃ ca nastanvaṃ ca prajāṃ cādityairindraḥ saha cīklṛpāti

हिन्दी अर्थ

भ्रौरजो अव मनमेंभ्राप कास्तुतिगान करताहै उसमें, ( श्यावके ) जो गतिक्लील है, गौर भ्रभ्यासमगं मेँ संवेगी है उस मे, ( कपे ) जो कपादील . भौर दयालु है उस मे, (सचा) अर्थात् इन सब के साथ (मादयसे) परस्पर है, स्वाभिमुखं कर लेते ईै,-एेसे उपासक ही भ्राप से प्राथंना कर सक्ते है कि (भा गहि) श्राप भाष्ये, हमारे हृदयो मेँ सदा निवास करते रहिये ।

English

With holy song they bind to the broad wide-yoked car the bay steeds of the rapid God, Bearers of India, yoked by prayer. With calls they ever invocate Agni, Agni, Lord of the House,

अध्याय २०

श्लोक 124.5

आ॒दि॒त्यैरिन्द्रः॒ सग॑णो म॒रुद्भि॑र॒स्माकं॑ भूत्ववि॒ता त॒नूना॑म्।ह॒त्वाय॑ दे॒वा असु॑रान् यदाय॑न् दे॒वा दे॑व॒त्वम॑भि॒रक्ष॑माणाः

ādityairindraḥ sagaṇo marudbhirasmākaṃ bhūtvavitā tanūnām| hatvāya devā asurān yadāyan devā devatvamabhirakṣamāṇāḥ

हिन्दी अर्थ

ेकानमस्य जगतः खद्शमीशचानमिनद्र तसः ॥२॥ (शूर) है पराक्रमशील परमेवर ! हम ( त्वा अमि ) गाप के प्रति २९० । म्रथवं वेद-भाष्य का० २० । सु° १२२ (नोनुमः) वार-वार स्तुत्तिवचन उच्चारित करते (शव) जैसे कि (अदुग्घाः) . न दुही गई ( घेनवः ) गौए" ्रपने बच के प्रति हम्भारव करती है । हे

English

Oblation-bearer, much-beloved. Bring the Gods hither, Agni, born for him who strews the sacred grass.

अध्याय २०

श्लोक 124.6

प्र॒त्यञ्च॑म॒र्कम॑नयं॒ छची॑भि॒रादित् स्व॒धामि॑षि॒रां पर्य॑पश्यन्।अ॒या वाजं॑ दे॒वहि॑तं सनेम॒ मदे॑म श॒तहि॑माः सु॒वीराः॑

pratyañcamarkamanayaṃ chacībhirādit svadhāmiṣirāṃ paryapaśyan| ayā vājaṃ devahitaṃ sanema madema śatahimāḥ suvīrāḥ

हिन्दी अर्थ

का पदाथं नहीं, (न ) भौर न.( पाथिवः ) पृथिवी का पदाथ है। भापके सदृश (न जातः ) न कोई ष॑दा हुमा है, भ्रौर ( न जनिष्यते ) न कोई पेदा , अश्व =मन । गौः इन्द्रियां (उणादिकोष २।६८) रामलाल कपुर

English

Thou art our herald, meet for praise. Meet to be lauded and adored, showing in beauty through the= dark, Agni the Bull is kindled well,

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता · Identifier:

Atharva Veda — Chapter 20

अथर्ववेद

संस्कृत संस्करण · Sanskrit Edition:

Imported text; printed edition not recorded

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प्रकाशक अथवा पुरालेखागार · Archive:

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