Atharva Veda· Atharvaveda Saṁhitā
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अध्याय 20 / 20

Kanda 20

काण्ड 20

975 श्लोकभाग 3/6 · श्लोक 63.1–91.12WhatsApp

पूर्ण अध्याय पाठ183 श्लोक

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अध्याय २०

श्लोक 63.1

इ॒मा नु कं॒ भुव॑ना सीषधा॒मेन्द्र॑श्च॒ विश्वे॑ च दे॒वाः ।य॒ज्ञं च॑ नस्त॒न्वं च प्र॒जां चा॑दि॒त्यैरिन्द्रः॑ स॒ह ची॑क्लृपाति

imā nu kaṃ bhuvanā sīṣadhāmendraśca viśve ca devāḥ | yajñaṃ ca nastanvaṃ ca prajāṃ cādityairindraḥ saha cīklṛpāti

हिन्दी अर्थ

यः घ॑न्बते स्तवते काम्यं वहं सदेव महते ।३॥' क्रियां कर, (यः) जो ; परमेव र "कि (सुन्वते) मक्तिरसवाले (स्तुवते). स्तीता को, (सहल ण इव) मानो हजारों प्रकार से . (काम्यं वसु) अभीष्ट- ६, (तानीका =-शतानीकानि ) जसे कि संक सेना्भो के धेर दुलंङ्व्य हति है । भौर (भरस्य इन्द्रस्य ). इस परमेदवर की (महीः दषः) महती . इन्छाएं (सम् तराः) -सम्यकू तंरानेवालीः हँ. परमेश्वर . (भिरिः.न ) .

English

Song is bestowed upon the Bird. It reigns supreme throughout thirty realms Throughout the days at break of morn.

अध्याय २०

श्लोक 63.2

आ॒दि॒त्यैरिन्द्रः॒ सग॑णो म॒रुद्भि॑र॒स्माकं॑ भूत्ववि॒ता त॒नूना॑म्।ह॒त्वाय॑ दे॒वा असु॑रा॒न् यदाय॑न् दे॒वा दे॑व॒त्वम॑भि॒रक्ष॑माणाः

ādityairindraḥ sagaṇo marudbhirasmākaṃ bhūtvavitā tanūnām| hatvāya devā asurān yadāyan devā devatvamabhirakṣamāṇāḥ

हिन्दी अर्थ

का०.२०। सु०५ अथवेवेद-माष्य १३४ ३२६. व॒यं षं ता मुतावैन्त॒ अपो न वृक्तवहिवः । ( सुतावन्तः) भक्तिरस कां निष्पादित कयि हूये हँ, ओर भक्तिरस (भाषः. भासन लगाये (परि) सब भोर (आसत) बे हये है ।

English

When voices, fain to win mid-air, ascended to the Mighty One, The vigorous God was filled with joy.

अध्याय २०

श्लोक 63.3

प्र॒त्यञ्च॑म॒र्कम॑नयं॒ छची॑भि॒रादित् स्व॒धामि॑षि॒रां पर्य॑पश्यन्।अ॒या वाजं॑ दे॒वहि॑तं सनेम॒ मदे॑म श॒तहि॑माः सु॒वीराः॑

pratyañcamarkamanayaṃ chacībhirādit svadhāmiṣirāṃ paryapaśyan| ayā vājaṃ devahitaṃ sanema madema śatahimāḥ suvīrāḥ

हिन्दी अर्थ

- (वसो) है विदववासी. ! (सुते) भक्तिरस के उत्पन्न हो जाने पर, रौर सांसारिक वृत्तियौं की दृष्टि से (निरेके) चित्तके रिक्त हो जने स्तुतियां करते ह, भौर कहते है कि “(इन्द्र ) है परमेदवर !. आप (सुतम्). उपासक के हृदय-गृह मे (भ्रा गमत्) भाएगे, (इव). जंसे कि (वंसगः).

English

Praise with the voice the Mighty, praise the awful with the voice: in heaven He, the most bounteous, hath been glad.

अध्याय २०

श्लोक 63.4

य एक॒ इद् वि॒दय॑ते॒ वसु॒ मर्ता॑य दा॒शुषे॑ ।ईशा॑नो॒ अप्र॑तिष्कुत॒ इन्द्रो॑ अ॒ङ्ग

ya eka id vidayate vasu martāya dāśuṣe | īśāno apratiṣkuta indro aṅga

हिन्दी अर्थ

३९८. कर्मिण पृषद् बा दरिं सदुतिण॑म् 1 = (चुष्णो ) पापों का पराभव . करनेवाले है परमेश्वर! (कण्वेभिः) का निमीलन करनेवलि ध्यानावस्थित उपासक द्वारा चाहां गया (घृषद् बल कि (सहस्निगम्) हजारो का उपकार करनेवाला : हो 1 (मधवन् ).हे

English

Praise with the voice the Mighty: he rules in each realm. In transport he Hath set upon the sacred grass.

अध्याय २०

श्लोक 63.5

क॒दा मर्त॑मरा॒धसं॑ प॒दा क्षुम्प॑मिव स्फुरत्।क॒दा नः॑ शुश्रव॒द् गिर॒ इन्द्रो॑ अ॒ङ्ग

kadā martamarādhasaṃ padā kṣumpamiva sphurat| kadā naḥ śuśravad gira indro aṅga

हिन्दी अर्थ

बलरूपी,चन के स्वामी ! (विचर्षणे) है सवंद्रष्टा ! (ईमहे) हम भाष कण्वेभिः =मेधाव्रिनः (सायण) 1. कण्व = केण +-व . (वाला), ३६९. इ ई वेद सते घचा पिबन्तं कवु वरयो दषे ,

English

As cows low to their calf in stalls, so with our songs we glorify This Indra, even your wondrous God who checks attack, who joys in the delightful juice.

अध्याय २०

श्लोक 63.6

यश्चि॒द्धि त्वा॑ ब॒हुभ्य॒ आ सु॒तावां॑ आ॒विवा॑सति ।उ॒ग्रं तत् प॑त्यते॒ शव॒ इन्द्रो॑ अ॒ङ्ग

yaściddhi tvā bahubhya ā sutāvāṃ āvivāsati | ugraṃ tat patyate śava indro aṅga

हिन्दी अर्थ

(सुते ). उपासक मेँ मक्तिरस के उत्पन्न हो जाने पर, है परमेरहैवर ! (सचा) साथ-साथ, भर्थात् उपासक जब आपके भ्रानन्दरस का पान करता . 8, तो उसके भक्तिरस को (पिबन्तम्) पीते हुये भ्रापको (कः) कौन उपासनारहित व्यक्ति (वेद) जान सकता है ? उस भरापक्रो तो उपासक -ही" उस भ्रवस्था में जान सकता है; उपासक (कत्) किंस प्रकार के वयः) भानन्दरसरूपी भन्न को (दषे) निज भ्ात्मा भे धारण-क॑र रहा -होत है, -.( ईम्) इसे. भी उपासनार हित -कौन व्यक्ति.जान सकता. ? की (चिभिनत्ति) तोड-फोड़ देते है, जसे किं (युधिग्री). तेजस्विं-मुखवाना "सेनापति, (अन्धसः). भर्म से भरे शत्रु के पुरः) किलो भौर नगौ कौं का० २० ॥सू० भ अथर्वंवेद-माष्य १२३७

English

Celestial, bounteous Giver, God, with power and might, rich, mountain-like, in precious things.

अध्याय २०

श्लोक 63.7

य इ॑न्द्र सोम॒पात॑मो॒ मदः॑ शविष्ठ॒ चेत॑ति ।येना॒ हंसि॒ न्य॑१त्त्रिणं॒ तमी॑महे

ya indra somapātamo madaḥ śaviṣṭha cetati | yenā haṃsi nya1ttriṇaṃ tamīmahe

हिन्दी अर्थ

(न) जसे (मृगः वारणः) जङ्खली हाथी, जङ्गल में (दाना दानानि) तोड़-फोड़ . (दधे) करता है, भौर (पुरुत्रा) बहुत स्थानों में विचरने मे (नकिः) कोई नहीं (त्वा) तुं (नियमत्) नियन्वित कर सकता है । (सुते) इस उत्पन्न जगत् मँ (श्रा गमः). तु फिर लौट कर

English

Him soon we see for foodful booty rich in kine, brought hundredfold and thousandfold. I crave of thee that hero strength—that thou mayst first regard this prayer

अध्याय २०

श्लोक 63.8

येना॒ दश॑ग्व॒मध्रि॑गुं वे॒पय॑न्तं॒ स्वर्णरम्।येना॑ समु॒द्रमावि॑था॒ तमी॑महे

yenā daśagvamadhriguṃ vepayantaṃ svarṇaram| yenā samudramāvithā tamīmahe

हिन्दी अर्थ

. होकर (भोजसा) निज शक्ति द्वारा (चरसि) विचरता है । भन्वर ३२९ मे उपासक के आनन्दरसपान का वर्णन हा है । भ्रानन्दरसपान कर जब जीवात्मा मुक्तं हो जातादहै, उसका वणन ३३ दवारा भच्छादित नहीं हो पाता । तब (यदि) भ्रगर (मघवा इन्द्रः) एेदवयं- को (शुणवत्) सुन लेता है, तब. वह स्तुतिकर्ता (योषति न ) जन्म-मरण के बन्धन मे भराकर हिसित नहीं होता, अपितु (श्रा गमत्) परमेदवर कीशरणमे ही भ्रा जाता है। अनिष्टृतः=अ+नि-+स्तु (आच्छा-

English

Wherewith thou helpest Bhrigu and the Yatis and Praskanva when the prize was staked. Wherewith thou sentest mighty waters to the sea—Indra, that manly strength of thine.

अध्याय २०

श्लोक 63.9

येन॒ सिन्धुं॑ म॒हीर॒पो रथां॑ इव प्रचो॒दयः॑ ।पन्था॑मृ॒तस्य॒ यात॑वे॒ तमी॑महे

yena sindhuṃ mahīrapo rathāṃ iva pracodayaḥ | panthāmṛtasya yātave tamīmahe

हिन्दी अर्थ

३३२. विश्वाः पृत॑ना अभिभूतरं नर सजस्ततथुरिन्द्र जज राजसे । १३८ ' अरथर्ववेद-माष्य का०२०५। सुं ५४ (विदवाः पृतनाः) काम क्रोध श्रादि की सबं सेनां का.(भ्रभि-

English

For ever unattainable is this power of him to whom the worlds have cried aloud. What newest of imploring hymns shall, then, the zealous mortal sing?

अध्याय २०

श्लोक 64.1

एन्द्र॑ नो गधि प्रि॒यः स॑त्रा॒जिदगो॑ह्यः ।गि॒रिर्न वि॒श्वत॑स्पृ॒थुः पति॑र्दि॒वः

endra no gadhi priyaḥ satrājidagohyaḥ | girirna viśvataspṛthuḥ patirdivaḥ

हिन्दी अर्थ

को वर लेने पर (भरामुरिम्) उसकी भरविद्या का पणंतया विना करनेवाले करं लेते है, (राजसे) ताकि परमेदवर उन पर राज्य करे, भ्रौर उनके (रेभासः) भर्चनाएं करनेवाले उपासक, (सोमस्य पीतये) परभेदवर है कि परमेदवंर (हि) निद्वय से, (भरोजसा) निजं. : भोजं दारा, तथा

English

For have not they who laud his might and Indra-power won for themselves the light of heaven?

अध्याय २०

श्लोक 64.2

अ॒भि हि स॑त्य सोमपा उ॒भे ब॒भूथ॒ रोद॑सी ।इन्द्रासि॑ सुन्व॒तो वृ॒धः पति॑र्दि॒वः

abhi hi satya somapā ubhe babhūtha rodasī | indrāsi sunvato vṛdhaḥ patirdivaḥ

हिन्दी अर्थ

धुतब्रतः) मानो ब्रतघारण क्ये हुये है । रेमः= स्तोता (निघ० ३।१६) । भूका लेते हं । तथा है अभिनव उपासको ! -- (सुदीतयः) प्रपने भविद्यादि . का० २० । सू9 ५१५ अथवेवेद-भोष्य वि १३९.

English

When shall they keep the Law and praise thee mid the Gods? Who counts as Rishi and as sage?

अध्याय २०

श्लोक 64.3

त्वं हि शश्व॑तीना॒मिन्द्र॑ द॒र्ता पु॒रामसि॑ ।ह॒न्ता दस्यो॒र्मनो॑र्वृ॒धः पति॑र्दि॒वः

tvaṃ hi śaśvatīnāmindra dartā purāmasi | hantā dasyormanorvṛdhaḥ patirdivaḥ

हिन्दी अर्थ

आदि से रहित उच्च कोटि के उपासक,- (तरस्विनः) उत्साहपूर्वंक,- (वः) भ्रौर बार-बार आत्मोहुतियां प्रदान करता हु, जो कि. (मघवानम्) .ेरवयोँ नाना बलों को (दधानम्) घारण कंरता, (प्रतिष्कुतम्) जौ विरोधी राक्तियों द्वारा भुकायां . नहीं जा सकता । (मंहिष्ठः) जो पूजनीय भ्रौर महादानी है, (यज्ञियः) यज्ञो में एकमात्र पुजनीय वह परमेरवर, (गीर्भिः)

English

When wilt thou ever, Indra, Bounteous Lord, come nigh to presser’s or to praiser’s call? For you will I sing Indra’s praise who gives good gifts as well we know;

अध्याय २०

श्लोक 64.4

एदु॒ मध्वो॑ म॒दिन्त॑रं सि॒ञ्च वा॑ध्वर्यो॒ अन्ध॑सः ।एवा हि वी॒र स्तव॑ते स॒दावृ॑धः

edu madhvo madintaraṃ siñca vādhvaryo andhasaḥ | evā hi vīra stavate sadāvṛdhaḥ

हिन्दी अर्थ

लिये (- विष्वा सुपथा) सब मार्गोःको सुमागं ओर सुगम (कृणोतु) करे 1 सामग्री के भण्डारी ह । भाप (असुरेभ्यः) असुरो से, अपने प्राणपोषण- मात्र मे जो रत ह .उनसे, (याः) जो उनकी ( सृजः) भोग-सामभ्रियां हं १४० भथर्वेवेद-माष्य का० २०. सु० ५६

English

Praise of the Bounteous Lord who, rich in treasure, aids his singers with wealth thousandfold. As with a hundred hosts he rushes boldly on, and for the offerer slays his foes.

अध्याय २०

श्लोक 64.5

इन्द्र॑ स्थातर्हरीणां॒ नकि॑ष्टे पू॒र्व्यस्तु॑तिम्।उदा॑नंश॒ शव॑सा॒ न भ॒न्दना॑

indra sthātarharīṇāṃ nakiṣṭe pūrvyastutim| udānaṃśa śavasā na bhandanā

हिन्दी अर्थ

निम्नलिखित . किया है,“ तस्मादष्यचयेहाददानमधद्दधानमयंजमानमाहुर- वालेशश्द्धाहीन,भ्रौर यज्ञो को न करनेवाले को"असुर' कहते हें । ये मृत के मी विचारसे कि इन करमो दारा प्रेत परलोक पर विजय पालेगा” । श्रत सांसारिक भोग ही ्रसुरों के लिये जीवन का ध्येय होता है! एसे विचारोवाले है,:वै परोपकार परसेवा की भावनावाले होते हँ । एेसों के पास आई सम्पत्ति परसेवारथं होती है ।

English

As from a mountain flow the water-brooks, thus flow his gifts who feedeth many a one. Sakra I praise, for victory, far-famed, exceeding bountiful.

अध्याय २०

श्लोक 64.6

तं वो॒ वाजा॑नां॒ पति॒महू॑महि श्रव॒स्यवः॑ ।अप्रा॑युभिर्य॒ज्ञेभि॑र्वावृ॒धेन्य॑म्

taṃ vo vājānāṃ patimahūmahi śravasyavaḥ | aprāyubhiryajñebhirvāvṛdhenyam

हिन्दी अर्थ

भरदव तथा गौ भादि, भौर (अव्ययम्) अविना (भागम्) सेवनीय मोक्ष- रूपी सम्पत्ति को (दधिषे) धारण करते है, इनके स्वामी है, (तम्) उस -भ्रगति चाहनेवाले मँ (षेहि) स्थापित तथा पोषित कीजिये, (पणौ मा) कजूस व्यापारी में उस सम्पत्ति को स्थापित न कीजिये । उपासको के पापौ का हनन करता है, भौर (ववृषे) उनकी वृद्धि करता,

English

Who gives, as ‘twere in thousands, precious wealth to him who sheds the juice and worships him.

अध्याय २०

श्लोक 65.1

ए॒तो न्विन्द्रं॒ स्तवा॑म॒ सखा॑य॒ स्तोम्यं॒ नर॑म्।कु॒ष्टीर्यो विश्वा॑ अ॒भ्यस्त्येक॒ इत्

eto nvindraṃ stavāma sakhāya stomyaṃ naram| kuṣṭīryo viśvā abhyastyeka it

हिन्दी अर्थ

मे, ( उत ) भौर (अभ) छोटे देवासुर-संग्रामों मे (तम् इत् इम्) उसी .. परमेरवर का (हवामहे) . हम भाह्वान करते ह । (सः). वह परमेश्वर बड़ संग्राम वे जब किकाम, क्रोघ, लोभ, मोह भ्रादि इकट्ठे होकर संग्राम में उपस्थित होतेर्है, तथा छोटे संग्राम वे जबकि इनमेसे किसी एक के साथ संग्राम लड़ना होता है । ३३९. असि हि बीर सेन्योऽसि भूरिं पराददिः (वीर) है प्रेरणा के देनेवाले परमेदवर ! भ्राप (हि) ही (सेन्यः) सद्गुणो की सेना के नायकः (भसि). । भ्ापटही (भूरि) बहुमात्रामें (पराददिः) भरासुरी-भावनाभ्रों को परास्तं कर हैवी-मावना्भो के दाता है । (दन्नस्य) छोटे या भरभिनव उपासक को. (चित्) भी (वृधः रसि) भ्राप बढ़ते ह । (यजमानाय) उपासना-यज्ञ के रयिता, तथा (सुन्वते)

English

Arrows with hundred points, unconquerable, are this Indra’s mighty arms in war. He streams on liberal worshippers like a hill with springs, when juices poured have

अध्याय २०

श्लोक 65.2

अगो॑रुधाय ग॒विषे॑ द्यु॒क्षाय॒ दस्म्यं॒ वचः॑ ।घृ॒तात् स्वादी॑यो॒ मधु॑नश्च वोचत

agorudhāya gaviṣe dyukṣāya dasmyaṃ vacaḥ | ghṛtāt svādīyo madhunaśca vocata

हिन्दी अर्थ

. (यद्) जब जीवन मे (राजयः) देवासुर-संग्राम (उदीरते) उठते बन (धीयते) स्थापित किया जाता है। .(मदच्युता) जिनसे मदमस्ती १४२ शथवववेद-मष्य - का० २०1 सु० ५६ का० २० । सू० ५७ अ 1 5. नववद्जाश्च अथवेवेद-माष्य १४३

English

gladdened him. We compass thee like waters, we whose grass is trimmed and

अध्याय २०

श्लोक 65.3

यस्यामि॑तानि वी॒र्या॒ न राधः॒ पर्ये॑तवे ।ज्योति॒र्न विश्व॑म॒भ्यस्ति॒ दक्षि॑णा

yasyāmitāni vīryā na rādhaḥ paryetave | jyotirna viśvamabhyasti dakṣiṇā

हिन्दी अर्थ

, है परमेदवर ! (मदेमदे) जब-जब भ्राप प्रसन्न हों तब तब भ्राप (नः) हम उपासको को (गवाम्) सुखसामभ्री के . (गथा) समूहं (ददिः) उभया हस्त्या) दोनों हाथ (संगुमाय) भरकर (पुरुवसु ) प्रभूत धन ५ है, वैसे ही राप भी है (दता वसु) सेकंड प्रकार के घन (शिशीहि) प्रदान कीजिये, भौर हमें घनो से (आ भर) भर दीजिये । गवाम् गौः ३४९, मादथख सुते सचा श्व्रसे श्चर राधसे ।

English

Soma pressed. Here where the filter pours its stream thy worshipper round thee, O Vritra-slayer, sit.

अध्याय २०

श्लोक 66.1

स्तु॒हीन्द्रं॑ व्यश्व॒वदनू॑र्मिं वा॒जिनं॒ यम॑म्।अ॒र्यो गयं॒ मंह॑मानं॒ वि दा॒शुषे॑

stuhīndraṃ vyaśvavadanūrmiṃ vājinaṃ yamam| aryo gayaṃ maṃhamānaṃ vi dāśuṣe

हिन्दी अर्थ

सरके, नौर , (रात्रसे) सिद्धां प्राप्त कर सकं । (हि) निदचयपूरवेक -पृरमेदवर क्री कामना है--भक्तिरस, उपासकदवारा समपंण, भौर उपासक को जल्मं-मरण -की शृङ्खला से छुडाना । इन दोन की कामना का संसं यहां भरभीष्ट है । . "छनि स्थो बनौनामयो वेदो अदां तेवा नो ेदः भा भ२।।६

English

Men, Vasu! by the Soma, with lauds call thee to the foremost place. When comest thou athirst unto the juice as home, O Indra, like a bellowing bull?

अध्याय २०

श्लोक 66.2

ए॒वा नू॒नमुप॑ स्तुहि॒ वैय॑श्व दश॒मं नव॑म्।सुवि॑द्वांसं च॒र्कृत्यं॑ च॒रणी॑नाम्

evā nūnamupa stuhi vaiyaśva daśamaṃ navam| suvidvāṃsaṃ carkṛtyaṃ caraṇīnām

हिन्दी अर्थ

ससृज्महे) संसग करते हं । (अथा) तदनन्तर श्राप (नः) हमारे ( भविता) पोषण करते हूं । (जनानाम्) इन जन्मधारी उपासको के (भरन्तः) हृदयो अदानियों कीः (वेदः) सम्पत्तिषां (नः) हम उपासको को (भ्रामर) प्रदान संसार मे विषमतां ह, इनका अपलाप नहीं किया जां सकता । शारीरिक विषमताएं हँ-कोई लम्बा कोई नाटा, कोई सुरूप, कोई कुरूप,

English

Who knows what vital power he wins, drinking beside the flowing juice? This is the fair-cheeked God who, joying in the draught, breaks down the castles in his

अध्याय २०

श्लोक 66.3

वेत्था॒ हि निरृ॑तीनां॒ वज्र॑हस्त परि॒वृज॑म्।अह॑रहः शु॒न्ध्युः प॑रि॒पदा॑मिव

vetthā hi nirṛtīnāṃ vajrahasta parivṛjam| aharahaḥ śundhyuḥ paripadāmiva

हिन्दी अर्थ

भ्राथिक विषमतां सामालिक-जीवन मे भ्रधिक दुष्परिणामी होती है।' इन भायिक विषमताभ्रों को दुर करना वेदानुमोदित है । वेदों मेँ इसका. (यजु° ४०।१), भरौरधनको जमाकरनेकी गर्धाका त्याग। इसीलिये न होना चाहिए ; भ्रौर परोपकारी, परमेदवर के उपासको को सम्पत् का स्वामी होना चाहिए, ताकि वे समग्र प्रजोजन का परिपोषण कर

English

strength. As a wild elephant rushes on, this way and that way, mad with heat.

अध्याय २०

श्लोक 67.1

सव॒नोति॒ हि सु॒न्वन् क्षयं॒ परी॑णसः सुन्वा॒नो हि ष्मा॒ यज॒त्यव॒ द्विषो॑ दे॒वाना॒मव॒ द्विषः॑ ।सु॒न्वा॒न इत् सि॑षासति स॒हस्रा॑ वा॒ज्यवृ॑तः ।सु॒न्वा॒नायेन्द्रो॑ ददात्या॒भुवं॑ र॒यिं द॑दात्या॒भुव॑म्

savanoti hi sunvan kṣayaṃ parīṇasaḥ sunvāno hi ṣmā yajatyava dviṣo devānāmava dviṣaḥ | sunvāna it siṣāsati sahasrā vājyavṛtaḥ | sunvānāyendro dadātyābhuvaṃ rayiṃ dadātyābhuvam

हिन्दी अर्थ

(ऊतये) आत्मरक्ना के लिये हम, (विद्यवि) प्रतिदिन, ( सुरूप- जौर आत्मसमर्पण की भ्राहुतियां देते है, (इव) जैसे कि (गोदुहे) गौ के दोहने के लिये, (सुदृषाम्) सुगमता से दोही जानेवाली, तथा उत्तम॑-दुरष देनेवाली गौ के प्रति, प्रतिदिन, (जहुमसि) हम उत्तम चारा.देते है । सुरूपकत्तुम्-- इसके दो अभिभ्राय हें । . एक तो यह कि परमैदवर १४४ भथरवेवेद-माष्य का० २० । सु०-५७

English

None may restrain thee; yet come hither to the draught: thou movest mighty in thy power. When he, the mighty, ne’er o’erthrown, stedfast, made ready for the fight.

अध्याय २०

श्लोक 67.2

मो षु वो॑ अ॒स्मद॒भि तानि॒ पौंस्या॒ सना॑ भूवन् द्यु॒म्नानि॒ मोत जा॑रिषुर॒स्मत् पु॒रोत जा॑रिषुः ।यद् व॑श्चि॒त्रं यु॒गेयु॑गे॒ नव्यं॒ घोषा॒दम॑र्त्यम्।अ॒स्मासु॒ तन्म॑रुतो॒ यच्च॑ दु॒ष्टृरं॑ दिधृ॒ता यच्च॑ दु॒ष्टर॑म्

mo ṣu vo asmadabhi tāni pauṃsyā sanā bhūvan dyumnāni mota jāriṣurasmat purota jāriṣuḥ | yad vaścitraṃ yugeyuge navyaṃ ghoṣādamartyam| asmāsu tanmaruto yacca duṣṭṛraṃ didhṛtā yacca duṣṭaram

हिन्दी अर्थ

, ने जगत् मेँ जो रचनाएं रची है, वे सब भ्रपने भे सृन्दररू्पवाली है । इस परमेदवर के ज्ञान मेँ सौन्दयं की मावंनाएं है । इसी. कारण परमेश्वर द्वारा के दुगुंणों को हटाकर उसमें सुन्दर गुणो कौ स्थापना करता है । ..

English

When Indra, Bounteous Lord, lists to his praiser’s call, he will not stand aloof, but come. Of one accord they made and formed for kingship Indra, the

अध्याय २०

श्लोक 67.3

अ॒ग्निं होता॑रं मन्ये॒ दास्व॑न्तं॒ वसुं॑ सू॒नुं सह॑सो जा॒तवे॑दसं॒ विप्रं॒ न जा॒तवे॑दसम्।य ऊ॒र्ध्वया॑ स्वध्व॒रो दे॒वो दे॒वाच्या॑ कृ॒पा।घृ॒तस्य॒ विभ्रा॑ष्टि॒मनु॑ वष्टि शो॒चिषा॒जुह्वा॑नस्य स॒र्पिषः॑

agniṃ hotāraṃ manye dāsvantaṃ vasuṃ sūnuṃ sahaso jātavedasaṃ vipraṃ na jātavedasam| ya ūrdhvayā svadhvaro devo devācyā kṛpā| ghṛtasya vibhrāṣṭimanu vaṣṭi śociṣājuhvānasya sarpiṣaḥ

हिन्दी अर्थ

(सोमपाः) है परमेदवरं ! श्राप भक्तिरस चाहते हैँ । (नः) हमारे -श्रौर (सोमस्य) .मक्तिरस को (पिब) स्वीकार कीजिये। (रेवतः) सब .. ज्ञान प्रकाश देती है । गो किरणे =प्रकाद ¬+ दा । (रथ ) ज्ञानप्रकाश प्राप्त करलेने परः है परमे्वर ! , वेदो मे

English

Hero who in all encounters overcometh, Most eminent for power, destroyer in the conflict, fierce and exceeding strong, stalwart and

अध्याय २०

श्लोक 67.4

य॒ज्ञैः समि॑श्लाः॒ पृष॑तीभिरृ॒ष्टिभि॒र्यामं॑ छु॒भ्रासो॑ अ॒ञ्जिषु॑ प्रि॒या उ॒त।आ॒सद्या॑ ब॒र्हिर्भ॑रतस्य सूनवः पो॒त्रादा सोमं॑ पिबता दिवो नरः

yajñaiḥ samiślāḥ pṛṣatībhirṛṣṭibhiryāmaṃ chubhrāso añjiṣu priyā uta| āsadyā barhirbharatasya sūnavaḥ potrādā somaṃ pibatā divo naraḥ

हिन्दी अर्थ

सुमतिथों को (विद्याम) हम जाने, भौर प्राप्त करं । है परमेदवर् ! इस (नः ऊतये) हमारी रक्षा के लिये, (नः सोमम्) हमारे भक्तिरस की (पाहि) . . करता, तथा उपासक को भरपने कमोँ मे सदा (जागृविम्) सावधान रखता

English

full of vigour. Bards joined in song to Indra so that he might drink the Soma juice,

अध्याय २०

श्लोक 67.5

आ व॑क्षि दे॒वां इ॒ह वि॑प्र॒ यक्षि॑ चो॒शन् हो॑त॒र्नि ष॑दा॒ योनि॑षु त्रि॒षु।प्रति॑ वीहि॒ प्रस्थि॑तं सो॒म्यं मधु॒ पिबाग्नी॑ध्रा॒त् तव॑ भा॒गस्य॑ तृष्णुहि

ā vakṣi devāṃ iha vipra yakṣi cośan hotarni ṣadā yoniṣu triṣu| prati vīhi prasthitaṃ somyaṃ madhu pibāgnīdhrāt tava bhāgasya tṛṣṇuhi

हिन्दी अर्थ

का० २०१ सू० ४५७ अथर्ववेद-भाष्य 4 १४५ बतः इन स्थानों मे भी “पाहि के अथं-में “पिब शब्द का वैदिकं ६४८. इन्धिपाणिं तको या ते जनेषु पशष । प्रजाजनं मे, (ते) आपको दौ हई (या) जो (इन्द्रियाणि). इन्ियां है, वे स्वस्थ बनी ररह, -यह मँ (ते) आपसे (आ वृणे) वर मागता हुं । ि

English

The Lord of Light, that he whose laws stand fast might aid with power and with help he gives.

अध्याय २०

श्लोक 67.6

ए॒ष स्य ते॑ त॒न्वो नृम्ण॒वर्ध॑नः॒ सह॒ ओजः॑ प्र॒दिवि॑ बा॒ह्वोर्हि॒तः ।तुभ्यं॑ सु॒तो म॑घवन् तुभ्य॒माभृ॑त॒स्त्वम॑स्य॒ ब्राह्म॑णा॒दा तृ॒पत् पि॑ब

eṣa sya te tanvo nṛmṇavardhanaḥ saha ojaḥ pradivi bāhvorhitaḥ | tubhyaṃ suto maghavan tubhyamābhṛtastvamasya brāhmaṇādā tṛpat piba

हिन्दी अर्थ

जसे प्राथंना की. है कि--“पश्येम शरवः शतम्, शुणुयाम शरदः दातम्, रूप है, (दधिष्व) इन्हे राप हममे धारण.कीजिये । (दुष्टरम्) इनं अपराभवनीय बनाये । ताकि (ते) भ्ापके (शुष्मम्) पाप-शोषक बल को पराप्त कर, गौर. (उत्) उत्कृष्ट बनकर - (तिरामसि) हम पापों को तिरोहित तथा तिरस्कृत कर दं । उ लोको -यस्तै अद्रिव इन्द तत अं - गदि ॥७॥

English

The holy sages form a ring, looking and singing to the Ram. Your very bright inciters, void of all deceit, are with the chan- ters nigh to hear.

अध्याय २०

श्लोक 67.7

यमु॒ पूर्वमहु॑वे॒ तमि॒दं हु॑वे॒ सेदु॒ हव्यो॑ द॒दिर्यो नाम॒ पत्य॑ते ।अ॒ध्व॒र्युभिः॒ प्रस्थि॑तं सो॒म्यं मधु॑ पो॒त्रात् सोमं॑ द्रविणोदः॒ पिब॑ ऋ॒तुभिः॑

yamu pūrvamahuve tamidaṃ huve sedu havyo dadiryo nāma patyate | adhvaryubhiḥ prasthitaṃ somyaṃ madhu potrāt somaṃ draviṇodaḥ piba ṛtubhiḥ

हिन्दी अर्थ

(भरथो) या (परावतः) पराविद्यावाले (नः) हम उपासकों की भ्रोर (श्रा गहि) भाप कृपा-दृष्टि कीजिये, उनकी ओर भरावजित हृजिये । (अद्रिवः) जो (उ). वह (लोकः) तुरीय-घाम है, (ततः) वं से (इह) मेरे इसंः (मङ्ख) है श्रिय !, (इनदरः) परमेचवर (महद् भयम् ) महामय चुच्यवत्) भरर उसे दुर कर देता है । (सः हि) वह परमेश्वर हीः (स्थिरः).

English

Oft, oft I call that Indra, Maghavan the mighty, who evermore possesses power, ever resistless.

अध्याय २०

श्लोक 68.1

सु॒रू॒प॒कृ॒त्नुमू॒तये॑ सु॒दुघा॑मिव गो॒दुहे॑ ।जु॒हू॒मसि॒ द्यवि॑द्यवि

surūpakṛtnumūtaye sudughāmiva goduhe | juhūmasi dyavidyavi

हिन्दी अर्थ

कूटस्थ है, (विचषंणिः) भौर सब विविध जगत् का द्रष्टा है । सामग्री देता है। उसी की पां सै (नः) हमे (पश्चात्) भ्रनजाने भी. है, अर्थात् हमारी दुष्टि में सदा सुख भौर कल्याण का मागं रहता है । ३५३. इनदर आ्ास्यस्परि सौम्यो अभयं करत् ।

English

Holy, most liberal, may he lead us on to riches, and, thunder armed, make all our pathways pleasant for us.

अध्याय २०

श्लोक 68.2

उप॑ नः॒ सव॒ना ग॑हि॒ सोम॑स्य सोमपाः पिब ।गो॒दा इद् रे॒वतो॒ मदः॑

upa naḥ savanā gahi somasya somapāḥ piba | godā id revato madaḥ

हिन्दी अर्थ

सुखदायी ओौर कल्याणप्रद हैँ । (सः) वह परमेदवर (अस्य विधतः) इस उपासक के (मनः) मन को (दानाय) दानं करने के लिये (चोदयन्) ररित करता हुमा, (भरस्य) इस उपासक की (कामम्) मोक्षकामना को त परभेद्वर के सभी दान पवित्र ह । मनुष्य पनी दूषित मनोभाव- नाज से उन्हं दूषित कर देता है 1 रूप, रंग,आकृतियां,स्त्री पुरुष,--इत्यादि

English

Grant to the worshipper who presses Soma and gives guerdon, not unto the churl. Strengthening even the feeble, thou aidest the sacrificer, thou givest the worshipper ample

अध्याय २०

श्लोक 68.3

अथा॑ ते॒ अन्त॑मानां वि॒द्याम॑ सुमती॒नाम्।मा नो॒ अति॑ ख्य॒ आ ग॑हि

athā te antamānāṃ vidyāma sumatīnām| mā no ati khya ā gahi

हिन्दी अर्थ

, रहता है । भ्राथिक-सम्पत्तियां भी परमैदवर ही देता है । परन्तु -इनका विषम विभाग कर हम ही इन सम्प्रत्तियों को दष्परिणामी बना देते है । प्रकार त्यागपूरवंक भ्रौर. गरा से हीन.मोभी होकर मोषं की ओर प्रगति महस्त सतो महिमा पनस्पतेऽद्धा देव मो असि ॥६॥ . महान् है । (ते). आपः (महः) महान् की ही (महिमा पनस्यते) महिमा

English

wealth. When war and battles are on foot, booty is laid before the bold.

अध्याय २०

श्लोक 68.4

परे॑हि॒ विग्र॒मस्तृ॑त॒मिन्द्रं॑ पृच्छा विप॒श्चित॑म्।यस्ते॒ सखि॑भ्य॒ आ वर॑म्

parehi vigramastṛtamindraṃ pṛcchā vipaścitam| yaste sakhibhya ā varam

हिन्दी अर्थ

परमेश्वर की महिमा के द्योतन कै लिये परमेदवर का स्मरण तीन नामों दवारा किया गया है । “सूर्यं” के उदय होने पर सूर्यं से किरणे निकलती है । इसी प्रकार परमेश्वर जब सुष्टि-रचना के लिये उद्यत होता है, तब इसं परमेदवर जब प्रलय में सृष्टि का “भ्रादान" करता है तब वह आदित्य है । है । जगत् की तोनों परिस्थितियां परमेदवर की महिमा को. सुचित

English

Yoke thou thy wildly rushing Bays. Whom wilt thou slay and whom enrich? Do thou, O Indra, make us rich,

अध्याय २०

श्लोक 68.5

उ॒त ब्रु॑वन्तु नो॒ निदो॒ निर॒न्यत॑श्चिदारत ।दधा॑ना॒ इन्द्र॒ इद् दुवः॑

uta bruvantu no nido niranyataścidārata | dadhānā indra id duvaḥ

हिन्दी अर्थ

. ३८३. बट् सूयं. भरव॑सा मर्ष आसि स॒त्रा देव महौ असि । महया देवारनामसये ! पुरोहितो विश ज्योपिरदाम्यम् ॥४॥ (महान् असि) महान् है-(सता) यह सत्य है । (देव) है प्रकरा्यमान प्राण हें, (पुरोहितः) आप दिव्य. चक्तियों के मुखिया ह, (विमु) सवंव्यापक

English

He, righteous-hearted, at each time of rapture gives us herds of kine. Gather in both thy hands for us treasures of many hundred sorts. Sharpen thou us, and bring

अध्याय २०

श्लोक 68.6

उ॒त नः॑ सु॒भगां॑ अ॒रिर्वो॒चेयु॑र्दस्म कृ॒ष्टयः॑ ।स्यामेदिन्द्र॑स्य॒ शर्म॑णि

uta naḥ subhagāṃ arirvoceyurdasma kṛṣṭayaḥ | syāmedindrasya śarmaṇi

हिन्दी अर्थ

सत्रा-=सत्यम् (निघ० २।१०)।. - प्रति (ईरते) प्रेरितं किये जा रहे हे, (इव ) जंसेः कि (सत्राजितः) वस्तुतः विजय करानेवाले, (धनसाः) व्यापार द्वारा घन की प्राप्ति करनेवाले, १५० भ्रथवेवेद-माष्य का० २० । सु० ५९

English

us wealth. Refresh thee, Hero, with the juice outpoured for bounty and for strength.

अध्याय २०

श्लोक 68.7

एमा॒शुमा॒शवे॑ भर यज्ञ॒श्रियं॑ नृ॒माद॑नम्।प॒त॒यन्म॑न्द॒यत्स॑खम्

emāśumāśave bhara yajñaśriyaṃ nṛmādanam| patayanmandayatsakham

हिन्दी अर्थ

- गति भ्रौर वेग के साधनभूत (रथाः) विमान-रथ, (उद् ईरते) आकाश मे प्रेरित किंये.जाते हं । । (कण्वाः) जिनकी चित्तवृत्तियां निमीलित हो गर्द ह, भौर जि तमोमयी वृत्तियों को मानो जिन्होंने भून दिया दहै ेसे उपासक भी, प्रकादामान हो जाते हं । जबकि (भ्रायवः) सर्वंसाधारण मनुष्य, , तथा

English

We know thee Lord of ample store, to thee have sent our heart’s desires: be therefore our protector thou.

अध्याय २०

श्लोक 68.8

अ॒स्य पी॒त्वा श॑तक्रतो घ॒नो वृ॒त्राणा॑मभवः ।प्रावो॒ वाजे॑षु वा॒जिन॑म्

asya pītvā śatakrato ghano vṛtrāṇāmabhavaḥ | prāvo vājeṣu vājinam

हिन्दी अर्थ

शनैः-शनः, (उद् दत् नु रिच्यते) निर्वय से बढता ही जाता है, (न) जंसे कि (जग्युषः) विजयी राजा का (धनम्) धन. (उद् रिच्यते) बढता का० २०॥ सु° ६०. अथवेद-म।ष्य - १५१ है योगिजनो ! तुम,-(भ्रखवंम्) निरभिमानता कां उपदेदा देनेवाले (सुधितम्) पू्णंतया हित करनेवाले, (सुपेशसम्) रौर स्वरो तथां वर्णो

English

These people, Indra, keep for thee all that is worthy of thy choice. Discover thou, as Lord, the wealth of men who offer up no gifts: bring thou to us this wealth

अध्याय २०

श्लोक 68.9

तं त्वा॒ वाजे॑षु वा॒जिनं॑ वा॒जया॑मः शतक्रतो ।धना॑नामिन्द्र सा॒तये॑

taṃ tvā vājeṣu vājinaṃ vājayāmaḥ śatakrato | dhanānāmindra sātaye

हिन्दी अर्थ

जो कि (यज्ञियेषु) उपासना-यज्ञों के अधिकारी .है। (ये) जो मन्त्रधारी है । अखवंम् = भ्र + खवर (दपं) । पेश्ः-्=कोमल । हे परमेरवर ! अप (वीरयुः एव) धमवीरों को ही चाहते (असि) है, (हि) यह निर्चित है ।. (शरः) भ्राप प॑ंराक्रमशील है, (उत) भौर भ्राप

English

of theirs. Come thou to our libations, drink of Soma, Soma-drinker thou!

अध्याय २०

श्लोक 68.10

यो रा॒यो॒३ऽवनि॑र्म॒हान्त्सु॑पा॒रः सु॑न्व॒तः सखा॑ ।तस्मा॒ इन्द्रा॑य गायत

yo rāyo3'vanirmahāntsupāraḥ sunvataḥ sakhā | tasmā indrāya gāyata

हिन्दी अर्थ

विजय पाये हये है . (विचर्षणिः) वेह सब विविध जगत् का द्रष्टा है । ३५४. क ई वेदं -सते सचा पिन्तं कद् भयो दषे । का०२०। स ५८ पथरवेवेद-माष्य १४७. ३५९. कर्वैभपम्णवा पृषद् बाज दपि सहतिणम् । परमेश्वर का भ्राश्रय लेकर तुम सब परमेदवर की (विवव ) सब (वसूनि)

English

Indra, what joys as Lord of Light thou broughtest from the

अध्याय २०

श्लोक 68.11

आ त्वेता॒ नि षी॑द॒तेन्द्र॑म॒भि प्र गा॑यत ।सखा॑य॒ स्तोम॑वाहसः

ā tvetā ni ṣīdatendramabhi pra gāyata | sakhāya stomavāhasaḥ

हिन्दी अर्थ

। सम्पत्तियों का (इत्) भी (भक्षत) भोग किया करो, भौर (भोजसा) , इई सन्तान, भौर (जायमाने) उत्पन्न हो रही सन्तान मे, माता-पिता की रखकर नियत किया जाता है, वैसे हम सब के लिये, भर्थात् प्रत्येक के

English

Asuras, Prosper therewith, O Maghavan, him who lauds that deed, and those whose grass is trimmed

अध्याय २०

श्लोक 68.12

पु॒रू॒तमं॑ पुरू॒णामीशा॑नं॒ वार्या॑णाम्।इन्द्रं॒ सोमे॒ सचा॑ सु॒ते

purūtamaṃ purūṇāmīśānaṃ vāryāṇām| indraṃ some sacā sute

हिन्दी अर्थ

श्४्व भ्रथर्ववेद-माष्य का० २० सु°० ५८ लिये, परमेदवर की सम्पत्तियो का विभाग (दीधिम) नियत विधिसे सो अस्य॒ कार्म विध॒तो न रोषति मनो दानाय॑ चोदयन् ॥२॥ ४ (अनश रातिम् ) अदलीलता की ओर न प्रेरित करनेवाले पवित्र दान कै दाता, (वसुदाम्) तथा सदा सम्पत्तियं के दाता परमेश्वर की,-- हे उपासक ! तु (उप स्तुहि) उपासना की विधिं से स्तुतियां किमा कर.

English

for thee. The wasteless share of steeds and kine which, Indra, thou hast fast secured.

अध्याय २०

श्लोक 69.1

स घा॑ नो॒ योग॒ आ भु॑व॒त् स रा॒ये स पुरं॑ध्याम्।गम॒द् वाजे॑भि॒रा स नः॑

sa ghā no yoga ā bhuvat sa rāye sa puraṃdhyām| gamad vājebhirā sa naḥ

हिन्दी अर्थ

(एव) ही (स्थिरः) सदा रहनेवाले कूटस्थ हँ । (ते) आपका (एव) ही (तुवीमघ) है महा-रे्वयंशाली महेदवर ! (विश्वेभिः) धारणा- ध्यानवाले सब योगिजन, (रातिः) भ्राप द्वारा दी गई विभूतियों को (धायि) धारण करते ई (एव) यह निचित है । (अधा चित्) तदनन्तर . है महेदवर ! भाप (मे) मेरे (सचा). साथी अर्थात् सखा ब्रनते है

English

The rich One’s rapture giveth kine. So may we be acquainted with thine innermost benevolence:

अध्याय २०

श्लोक 69.2

यस्य॑ सं॒स्थे न वृ॒ण्वते॒ हरी॑ स॒मत्सु॒ शत्र॑वः ।तस्मा॒ इन्द्रा॑य गायत

yasya saṃsthe na vṛṇvate harī samatsu śatravaḥ | tasmā indrāya gāyata

हिन्दी अर्थ

३७३. एवा ध॑ख काम्या सोम॑ उक्थं च स्या । : (सोमपीतये) हमारे भक्तिरसो की रक्षा, तथा उने स्वीकार वेदिक-स्तुतियां (च) भरौर (स्तोमः) सामगान (शंस्या) उच्चारितं करते ..

English

We make thy might perpetual. Come to us either from anear, or, Sakra, come from far away.

अध्याय २०

श्लोक 69.3

सु॒त॒पाव्ने॑ सु॒ता इ॒मे शुच॑यो यन्ति वी॒तये॑ ।सोमा॑सो॒ दध्या॑शिरः

sutapāvne sutā ime śucayo yanti vītaye | somāso dadhyāśiraḥ

हिन्दी अर्थ

रहना चाहिए 1 काम्या काम्यो । शस्या शंस्यौ । 'वषक (तम्) उस (मदम्) सन्नता की (गृणीमसि) हम स्तुतिया। करते है, (हरिश्ियम् ) ऋग्वेद भरौर.सामवेद भें जिसकी शोभा है 1. ३७५. येन् न्योतीध्यायते मवे चं विवेदिथ ।

English

Indra, wherever be thy home, come thence, O Caster of the Stone.

अध्याय २०

श्लोक 69.4

त्वं सु॒तस्य॑ पी॒तये॑ स॒द्यो वृ॒द्धो अ॑जायथाः ।इन्द्र॒ ज्यैष्ठ्या॑य सुक्रतो

tvaṃ sutasya pītaye sadyo vṛddho ajāyathāḥ | indra jyaiṣṭhyāya sukrato

हिन्दी अर्थ

प्रौर.. ७५ श्रवण-मनन-निदिष्यासन करनेवाले उपासक के क्तिये, (ज्योतींषि). विवेकज लञानरूपी ज्योतियां (विवेदिथ) प्रकट करतेहै, वे कादा मे (वि राजसि) विराजमान होतेर्है। करते है । अतः (वृषपत्नीः) भक्तिरसवर्षी उपासक द्वारा परिपालितं .

English

Verily Indra, conquering all, driveth even mighty fear away. For firm is he and swift to act.

अध्याय २०

श्लोक 69.5

आ त्वा॑ विशन्त्वा॒शवः॒ सोमा॑स इन्द्र गिर्वणः ।शं ते॑ सन्तु॒ प्रचे॑तसे

ā tvā viśantvāśavaḥ somāsa indra girvaṇaḥ | śaṃ te santu pracetase

हिन्दी अर्थ

हे उपासको ! (पुचृतम्) बहतो द्वारा सहायताथं पुकारे गये, (गीभिः) वेदवाणियोँ की स्तुतियोँ द्वारा, उसकी ही (अभि) साक्षात् (विवासत) परस्त्य किथा करो । । ३७८. यस्य॑ द्विबहैमो बृहत् सहो दाधार रोदसी । निःश्रेयस की दुष्टि से बढ़नेवाले (यस्य ) जिस परमेदवर के (बृहत् सहः) भहाबलःने (रोदसी) दलोक रौर भूलोक को (दाधार) वारण्या

English

Indra be gracious unto us: sin shall not reach us afterward, And good shall be before us still.

अध्याय २०

श्लोक 69.6

त्वां स्तोमा॑ अवीवृध॒न् त्वामु॒क्था श॑तक्रतो ।त्वां व॑र्धन्तु नो॒ गिरः॑

tvāṃ stomā avīvṛdhan tvāmukthā śatakrato | tvāṃ vardhantu no giraḥ

हिन्दी अर्थ

जलो को धारण किया है-- भ्रगले मन्त्र के साथ भरन्वय । परमेदवर ! (सः) वे आप (एकः) अकेले ही (राजसि) संसार पर ५. डालनेवाले पापो का (जिध्नसे) पूणंतया हनन करते हँ । है परमेश्वर !

English

From all the regions of the world let Indra send security. The foe-subduer, swift to act.

अध्याय २०

श्लोक 69.7

अक्षि॑तोतिः सनेदि॒मं वाज॒मिन्द्रः॑ सह॒स्रिण॑म्।यस्मि॒न् विश्वा॑नि॒ पौंस्या॑

akṣitotiḥ sanedimaṃ vājamindraḥ sahasriṇam| yasmin viśvāni pauṃsyā

हिन्दी अर्थ

, नियन्वरण करने के लिये उन पर राज्य करः रहे है । रस की भेटं लाते हुये (्रकवंस्यवः) अपनी रक्ाएं चाहते है, भौर (वाजे) बल को प्राप्तिके निमित्तः तथा देवासुर-संग्राम में (हवामहे) आपकी सहायता की पुकारंकरतेर्है, (न) जसे किं भात्मरेक्षाएं चाहनेवाले पुकारते है । वानः बल (निषऽ २।९) ; संग्राम (निध० २1१७) होते है । (सः ) वह भ्राप (नः) हमारी भोर (चक्राम) कदम. बढादये। .

English

We compass thee like waters, we whose grass in trimmed and Soma pressed.

अध्याय २०

श्लोक 69.8

मा नो॒ मर्ता॑ अ॒भि द्रु॑हन् त॒नूना॑मिन्द्र गिर्वणः ।ईशा॑नो यवया व॒धम्

mā no martā abhi druhan tanūnāmindra girvaṇaḥ | īśāno yavayā vadham

हिन्दी अर्थ

भप (धृषत्) .. भरासुरी मावो का सदा. पराभव करते द, इसलिये (त्वाम् ह । (सखायः) हम पके सखा है, (सानसिम्) श्राप सब के दाता है । हे उपासको ! (यः) जो परमेदव॑र, (नः) हम सबके लिये, (पुरा)

English

Here where the filter pours its stream thy worshippers round thee, O Vritra-slayer, sit.

अध्याय २०

श्लोक 69.9

यु॒ञ्जन्ति॑ ब्र॒ध्नम॑रु॒षं चर॑न्तं॒ परि॑ त॒स्थुषः॑ ।रोच॑न्ते रोच॒ना दि॒वि

yuñjanti bradhnamaruṣaṃ carantaṃ pari tasthuṣaḥ | rocante rocanā divi

हिन्दी अर्थ

(प्र आनिनाय) लाता रहा है, (वः) तुम्हारे ज्ञान के लिये (तम् उ) उस दही परमेश्वर का (स्तुषे) यँ कथन करता हूं । (सखायः) दहे सवंभूत-मेत्री से का (स्तुषे) मै कथन करता हं । 5 „ (स्तुषे, ३८२) म स्तुति करता हं । वहं परमेदवर (सः हि) वह दही है, जो श्रकार के सुखं (आ व्रयति) पहुंचा रहाहै। हिः हरतीति सूर्य॑ः (उणा० कोष ४1११९ ).1 वयति वय गतौ । अदव सूर्यं । सूयं सबं सौरमण्डल को नियन्त्रित करता है, भौर सूर्यं का नियन्त्रण परमेदवर कर रहा है । मानो परमेरवर सूर्याइ्व का

English

Men, Vasu, by the Soma with lauds call thee to the foremost place. When comest thou athirst unto the juice as home, O Indra, like a bellowing bull?

अध्याय २०

श्लोक 69.10

यु॒ञ्जन्त्य॑स्य॒ काम्या॒ हरी॒ विप॑क्षसा॒ रथे॑ ।शोणा॑ धृ॒ष्णू नृ॒वाह॑सा

yuñjantyasya kāmyā harī vipakṣasā rathe | śoṇā dhṛṣṇū nṛvāhasā

हिन्दी अर्थ

। १५२ भथरववेद-माष्य का० २० सू० ६० , ३७०. मो षु जदेवं तन्द्र वाजानां पते । . बलों के प्रदान मेँ (तन््रयुः) लसी (मा उ भूवः) कमो न हूजिये, अपितु के दात्त देनेमें भ्रापभी (मुवः) सक्रिय हंजिये । भ्रौर (गोमतः) वेदवाणी

English

Neglect us not, come hitherward. Drink for our help the Soma bright, vigilant, and exceeding strong,

अध्याय २०

श्लोक 69.11

के॒तुं कृ॒ण्वन्न॑के॒तवे॒ पेशो॑ मर्या अपे॒शसे॑ ।समु॒षद्भि॑रजायथाः

ketuṃ kṛṇvannaketave peśo maryā apeśase | samuṣadbhirajāyathāḥ

हिन्दी अर्थ

काराथं वेदविद्या का दान कररता है, वसे आप योगेहवर भी योगविद्या तिमिक-बल रूप होती है! यथा न्ते समावादुपसर्गा वयुत्यनि सिद्धयः. योग्य (सुवृता) श्रिय तथा सत्यरूपा वेदवाणी (भरस्व एव हि) इसं ही.

English

O Indra, Lord of Hundred Powers. O Satakratu, powers which thou mid the Five Races hast dis- played,

अध्याय २०

श्लोक 69.12

आदह॑ स्व॒धामनु॒ पुन॑र्गर्भ॒त्वमे॑रि॒रे।दधा॑ना॒ नाम॑ य॒ज्ञिय॑म्

ādaha svadhāmanu punargarbhatvamerire| dadhānā nāma yajñiyam

हिन्दी अर्थ

के लिये .(पर्ववा शाखा) पक्के फर्लोवालीः शाखा (न ) के समान है । . (उणा० कोष २।६७), दिक पुस्तकालय, अनमेर)1 = भन) ४ छ (1 जसे (दाशुषे) दानी भ्रौर ६ उपस्थित हो जाती हैँ । ॥ द ४4.

English

These, Indra, do I claim of thee. Indra, great glory hast thou gained. Win splendid fame which none may mar.

अध्याय २०

श्लोक 70.1

वी॒लु चि॑दारुज॒त्नुभि॒र्गुहा॑ चिदिन्द्र॒ वह्नि॑भिः ।अवि॑न्द उ॒स्रिया॒ अनु॑

vīlu cidārujatnubhirguhā cidindra vahnibhiḥ | avinda usriyā anu

हिन्दी अर्थ

हे उपासको ! (विप्राय) सर्वत्र परिपू, (बृहते) महतो महान्, का० २०। सूु० ६२ अथववेवेद-माष्य ह १५७ परमेदवर के गुण उपासक में भ्राते है, जिससे उपासक की समुन्नति होती .

English

Boldly, bold Hero, bring us spoil in thousands for the Kanvas’ sake. O active Maghavan, with eager prayer we crave the yellow-hued with store of kine.

अध्याय २०

श्लोक 70.2

दे॒व॒यन्तो॒ यथा॑ म॒तिमच्छा॑ वि॒दद् व॑सुं॒ गिरः॑ ।म॒हाम॑नूषत श्रु॒तम्

devayanto yathā matimacchā vidad vasuṃ giraḥ | mahāmanūṣata śrutam

हिन्दी अर्थ

हये है, इसलिये (तम्) उस भ्राप को (ईमहे) हम प्राप्त होते हें । दुढृतापूवंकं प्रगति करता रहता ठै, वह् नर स्वर्गाय नरदहोजातादहै, ओौर परमेरवर उसकी रक्षा करता है । वेषः कमं (निघ० २।१)। भाविथं घव (रक्षा तथा प्रवेद) । समुद्र सिन्धु हृदय (भथवं ° १०।२।११) । -समुद्र की महा जलराशि को एेसी भ्रासानी से (भरचोदयः) प्रेरित कर रहे

English

Now joying in!!this sacred grass thou beamest forth. This day to singers of the hymn praise, as of old, this, might of thine.

अध्याय २०

श्लोक 70.3

इन्द्रे॑ण॒ सं हि दृक्ष॑से संजग्मा॒नो अबि॑भ्युषा ।म॒न्दू स॑मा॒नव॑र्चसा

indreṇa saṃ hi dṛkṣase saṃjagmāno abibhyuṣā | mandū samānavarcasā

हिन्दी अर्थ

सवंविजयी है, (भगोह्यः) बाह्य दृष्टि से चिप हूये भी भाप अन्तदृ ष्टि द्वारा छिपे हये नही, भाप (गिरिः न) भाकाकन्यापी मेष के सदृशा (विद्वः पृथुः) सब भ्रोर विस्तृत है, (दिवः पतिः) द्युलोक कै भी . भाप पतिर, स्वामीर्है, रक्षकर्है। (सत्य) है सत्यस्वरूप ! (षि) निष्चय है कि आप (सोमपाः )

English

Invite the potent Indra with your songs of praise; Whose lofty might—for doubly strong is he—supports the heaven and earth.

अध्याय २०

श्लोक 70.4

अ॒न॒व॒द्यैर॒भिद्यु॑भिर्म॒खः सह॑स्वदर्चति ।ग॒णैरिन्द्र॑स्य॒ काम्यैः॑

anavadyairabhidyubhirmakhaḥ sahasvadarcati | gaṇairindrasya kāmyaiḥ

हिन्दी अर्थ

.(वृधः भसि) बढ़ाते है, (दिवः पतिः) भ्राप द्युलोक के पति है, स्वामी रक्षक है बभूथ बभूविथ 1 . = नगरियों का (दर्ता भसि) विदारण करनेवाले है, आप ही उपासको के ि श्रवण मनन निदिध्यासनं. करनेवाले-को (वृधः) बढ़ते है, (दिवः पतिः)

English

And hills and plains and floods and light with manly power. 288

अध्याय २०

श्लोक 70.5

अतः॑ परिज्म॒न्ना ग॑हि दि॒वो वा॑ रोच॒नादधि॑ ।सम॑स्मिन्नृञ्जते॒ गिरः॑

ataḥ parijmannā gahi divo vā rocanādadhi | samasminnṛñjate giraḥ

हिन्दी अर्थ

ह नौर द्युलोकं के पति स्वामी गौर रक्षकरै। (वा) भवा (भ्रष्वर्यो ) हिसारहित . उपासनायज्ञ . को जुटानेवाले हे उपासक ! तु (ष्वः भनवसः) मधुर भन्न से भी (मदिन्तरम्). भषिक “ न्यौछावर कियाकर। (एवा हि) इस प्रकारही (वीरः) प्रेरणाप्रद परमेदवर (स्त्रवते) मार्गोपदेद करता है, भौर (सदावृषः ) सदा बढाता है ।

English

Such, praised by many! thou art King: alone thou smitest foe- men dead, To gain, O Indra, spoils of war and high renown.

अध्याय २०

श्लोक 70.6

इ॒तो वा॑ सा॒तिमीम॑हे दि॒वो वा॒ पार्थि॑वा॒दधि॑ ।इन्द्रं॑ म॒हो वा॒ रज॑सः

ito vā sātimīmahe divo vā pārthivādadhi | indraṃ maho vā rajasaḥ

हिन्दी अर्थ

का०२०।सु० ६५. अथवेवेद-म।ष्य १६३ दी गई (पूव्यस्तुतिम्) पूवंकालीन वैदिक स्तुतियों तक (नकिः ) कोई कवि नहीं (उदानंश) पहुंच पाया, (न) न (शवसा) बल की दृष्टि सेश्रौरनं मी कवि की एेसी रचना नहीं हो सकती जो कि वैदिक रचनाम से बठृकर शक्ति प्रदान कर सके रौरं कल्याण. तथा सुख के माग का उपदेश दे सके ।

English

To Indra sing a Sāman, sing to the high Sage a lofty song, To him who keeps the Law, inspired and fain for praise.

अध्याय २०

श्लोक 70.7

इन्द्र॒मिद् गा॒थिनो॑ बृ॒हदिन्द्र॑म॒र्केभि॑र॒र्किणः॑ ।इन्द्रं॒ वाणी॑रनूषत

indramid gāthino bṛhadindramarkebhirarkiṇaḥ | indraṃ vāṇīranūṣata

हिन्दी अर्थ

चाहुनेवालि हमं गुरुगों ने, (वाजानाम्) विभूतियों बलों भ्रौर शक्तियों के को, (ब्महूमसि) तुम्हारी भोर आवर्जित किया ह । (सखायः) है उपासक मित्रो ! (एत उ) भवष्य भ्रागो, (यु) र (अमि भरस्ति) विजय पाये हृभा है ।

English

Thou, Indra, art preeminent: thou gavest splendour to the Sun. Maker of all things, thou art mighty and All-God.

अध्याय २०

श्लोक 70.8

इन्द्र॒ इद्धर्योः॒ सचा॒ संमि॑श्ल॒ आ व॑चो॒युजा॑ ।इन्द्रो॑ व॒ज्री हि॑र॒ण्ययः॑

indra iddharyoḥ sacā saṃmiśla ā vacoyujā | indro vajrī hiraṇyayaḥ

हिन्दी अर्थ

१६४ अथर्ववेद-माष्य का० २०. सू० ६६ (अगोरुधाय ) भअग्रगमन भर्थात् भ्मागे बढ़ने मँ जो रुकावट नहीं डालता, अपितु (गविषे) भागे बद्ने को जो चाहता है; (दक्षाय) लोक तथा प्रकाश मे जिस का निवास है, उसके भ्रति, (दस्म्यं वचः) दशनीय स्तुतिगीतं (वोचत) मधुर स्वरों से गाया करो, जो स्तुतिगीत कि (घृतात्) धृत से (च ) रौर (मधुनः) शहद से भी (स्वादीयः) अधिक स्वादु अर्थात् . भित है, रौर जिसका (राधः) ेदवयं (पर्येतवे न) कभी क्षीण नहीं. होता,

English

Radiant with light thou wentest to the sky, the luminous realms: of heaven. The Gods, O Indra, strove to win thee for their friend.

अध्याय २०

श्लोक 70.9

इन्द्रो॑ दी॒र्घाय॒ चक्ष॑स॒ आ सूर्यं॑ रोहयद् दि॒वि।वि गोभि॒रिन्द्र॑मैरयत्

indro dīrghāya cakṣasa ā sūryaṃ rohayad divi| vi gobhirindramairayat

हिन्दी अर्थ

(श्मभि भ्रस्ति) विजय पाये हुई है, वेसे जिसका (दक्षिणां) दान, सब दानो पर विजय पाये हुये -है--उसके -प्रति मधुर गान गाया करो (मन्त (व्यदववत्) अष्वविहीन रथ के सदृश, है उपासक ! तुः शरीर (दाशुषे ) तथा भात्मसमपंक को (वि) विशेष शक्तियों . के. ( मंहमानम् )

English

Sing forth to him whom many men invoke, to him whom many laud: Invite the potent Indra with your songs of praise;

अध्याय २०

श्लोक 70.10

इन्द्र॒ वाजे॑षु नोऽव स॒हस्र॑प्रधनेषु च ।उ॒ग्र उ॒ग्राभि॑रू॒तिभिः॑

indra vājeṣu no'va sahasrapradhaneṣu ca | ugra ugrābhirūtibhiḥ

हिन्दी अर्थ

है । परमेदवर चाहता है कि उपासक की समून्नति हो, ओर उसका उपाय है परमेदवरीय गुणो का ध्यानभ्रौर उन गुणों को भ्राचरणे में लाना। इसीलिये परमेश्वरं स्तुत्यभिलोषी होता है । विश्वकर्मा बिश्वदंबो महँ असि ॥द॥

English

Him who is Indra, Lord of Bays, no foes subdue. He gives the Soma-pourer strength.

अध्याय २०

श्लोक 70.11

इन्द्रं॑ व॒यं म॑हाध॒न इन्द्र॒मर्भे॑ हवामहे ।युजं॑ वृ॒त्रेषु॑ व॒ज्रिण॑म्

indraṃ vayaṃ mahādhana indramarbhe havāmahe | yujaṃ vṛtreṣu vajriṇam

हिन्दी अर्थ

देवास हनद्र सख्याय येमिरेः ॥७॥ - उपतापी सूयं को (विश्नाजम्) प्रदीप्त करते हये, (दिवः) शलोक के हुये है । (देवाः). दिव्यगुणी उपासक (ते) आपके (सख्याय) सखिभाव को , प्राप्ति के लिये (येमिरे) यम-नियमों का पालन करते है ।

English

Make for the holy Gods a hymn that is not mean, but well arranged and fair in form. Full many snares and bonds subdue not him who dwells with

अध्याय २०

श्लोक 70.12

स नो॑ वृषन्न॒मुं च॒रुं सत्रा॑दाव॒न्नपा॑ वृधि ।अ॒स्मभ्य॒मप्र॑तिष्कुतः

sa no vṛṣannamuṃ caruṃ satrādāvannapā vṛdhi | asmabhyamapratiṣkutaḥ

हिन्दी अर्थ

१५८ भरर्ववेद-माष्य . का० २०1 सू० ६३ ३८९. स राजसि पुरुष्टुतं एको वत्राणिं जिघ्नते । ३९०. इमा नु क शवना सीषधामेन्द्रश्च विश्च च देवा, हम (इमा भुवना)ईइन शारीरिक भूवनों को, - पैरो,जङ्घाश्रों, उदर,

English

Indra through his sacrifice. For so thou art the hero’s Friend, a Warrior too art thou, and strong:

अध्याय २०

श्लोक 70.13

तु॒ञ्जेतु॑ञ्जे॒ य उत्त॑रे॒ स्तोमा॒ इन्द्र॑स्य व॒ज्रिणः॑ ।न वि॑न्धे अस्य सुष्टु॒तिम्

tuñjetuñje ya uttare stomā indrasya vajriṇaḥ | na vindhe asya suṣṭutim

हिन्दी अर्थ

छाती, मस्तिष्क, तथा इन्दियादि को -; (नु सीषधाम) सावनाभ्रौं दारा (विश्वे च देवाः) सब दव्यगुण हमारी इन साधनाभ्रों को (कम्) सुख- पूवक सिद्ध करे । (च) भौर (नः यज्ञम्) हमारी यज्ञिय भावनां को परधिक वणेन हठयोग की पृस्तकों मे मिलता -है । ( द्र-पातञ्जलयोग-

English

So may thy heart be won to us. So hath the offering; wealthiest Lord, been paid by all the worshippers:

अध्याय २०

श्लोक 70.14

वृषा॑ यू॒थेव॒ वंस॑गः कृ॒ष्टीरि॑य॒र्त्योज॑सा ।ईशा॑नो॒ अप्र॑तिष्कुतः

vṛṣā yūtheva vaṃsagaḥ kṛṣṭīriyartyojasā | īśāno apratiṣkutaḥ

हिन्दी अर्थ

इत्वायं देवा अरान् यदायन् देवा -हैवत्वम॑भिरशमाणा; ॥९॥ का० २०1 सू० ६३ अथववेद-भःष्य १५६ गण के (सगणः) साथ वतमान होकर (अस्माकम्) हमारे (तनूनाम्) शरीरों का (भ्रविता) रक्षक (भूतु) होता है। परमेदवर इन गणोके द्वारा'हमारे रारीरों का तब रक्षक होता है, (यर्) जबकि (देवाः) हमारे दिव्यगुण

English

So dwell thou, Indra, even with me. Be not thou, like a slothful priest, O Lord of wealth and spoil: rejoice.

अध्याय २०

श्लोक 70.15

य एक॑श्चर्षणी॒नां वसू॑नामिर॒ज्यति॑ ।इन्द्रः॒ पञ्च॑ क्षिती॒नाम्

ya ekaścarṣaṇīnāṃ vasūnāmirajyati | indraḥ pañca kṣitīnām

हिन्दी अर्थ

समान भ्रौर उदान वायु्मौ के सामञ्जस्य का नि्दंहा किया है) आदित्ये मान, तथा भ्रचनीय परमेदवर को, उपासक लोग, (शचीभिः) प्रज्ञालोकों . भ्रौर (सुवीराः). भ्राध्यात्मिक जीवन में वीर बनकर (दातंहिमाः) सौ वषों तक (मदेम) आनन्दित रहते है ।

English

In the pressed Soma blent with milk. So also is his excellence, great copious, rich in cattle, like

अध्याय २०

श्लोक 70.16

इन्द्रं॑ वो वि॒श्वत॒स्परि॒ हवा॑महे॒ जने॑भ्यः ।अ॒स्माक॑मस्तु॒ केव॑लः

indraṃ vo viśvataspari havāmahe janebhyaḥ | asmākamastu kevalaḥ

हिन्दी अर्थ

गमोऽप्यन्तरायाभावश्थ (योग १।२९) मे कहा है कि 'ईवर-प्रणिधान साक्षात्कार हो जाता है, ओर परमेदवर का भीं भरधिगम हो जाता है, भौर योगाभ्यासः मं भ॑त्तय्यो का मी भभाव हो जाता है। मे दान करता है (भङ्ग) है प्रिय उपासक ! (ईरानः) वह॒ सर्वाधीश द्वारा भ्ुकायां नहीं जा सकता ।

English

A ripe branch to the worshipper. For verily thy mighty powers, Indra, are saving helps at once

अध्याय २०

श्लोक 70.17

एन्द्र॑ सान॒सिं र॒यिं स॒जित्वा॑नं सदा॒सह॑म्।वर्षि॑ष्ठमू॒तये॑ भर

endra sānasiṃ rayiṃ sajitvānaṃ sadāsaham| varṣiṣṭhamūtaye bhara

हिन्दी अर्थ

रवर (अराधसं मतम्) भआराधनाहीन मनुष्य को (कदा) कब (स्पुरत्) उखाड़ फंके, (इव) जसे कि कोई (पदा). पैर द्वारा (रुम्पम्) खुम्ब को उखाड़ फकता है । तथा वह॒ (कदा) कब (नः) हमारी (गिरः) प्रा्थना- बाणियों को (श्रवत्) सुन ले । स्फुरति वधकर्मा (निघ० २।१९)1.

English

Unto a worshipper like me. So are his lovely gifts: let laud be said and praise to Indra sung.

अध्याय २०

श्लोक 70.18

नि येन॑ मुष्टिह॒त्यया॒ नि वृ॒त्रा रु॒णधा॑महै ।त्वोता॑सो॒ न्यर्व॑ता

ni yena muṣṭihatyayā ni vṛtrā ruṇadhāmahai | tvotāso nyarvatā

हिन्दी अर्थ

, (बहुभ्यः) बहुत मनृष्यो मेसे (यः चित् हि) जो ही मनुष्य (सुता- विवासति) पूणं रूप. से सेवा करता है, उसके लिये, (भङ्ग) है प्रिय उपासक. ¦ भक्तिरसं के भ्रधिक पान करने का .-(यः). जो. (भदः) हषं भरौर उल्लास, , (चेतति) हमें भने कर्तव्यो के पालन में सचैतं कर देतां है, भौर. (येन) जिस चेतनता के जामरित हो जाने पर भ्नाप, (भत्रिणम्) खा जानेवाले

English

That he may drink the Soma juice. We sing this strong and wild delight of thine which conquers in the fray,

अध्याय २०

श्लोक 70.19

इन्द्र॒ त्वोता॑स॒ आ व॒यं वज्रं॑ घ॒ना द॑दीमहि ।जये॑म॒ सं यु॒धि स्पृधः॑

indra tvotāsa ā vayaṃ vajraṃ ghanā dadīmahi | jayema saṃ yudhi spṛdhaḥ

हिन्दी अर्थ

का० २०॥ सू० ६४ अथवेवेद-भाष्य , १६१ पापं का (निहंसि). सर्वथा विना कर देते है, (तम्) उस हषं उल्लास, भौर चेतना की (ईमहे) हम भ्रापसे प्रार्थना करते है ।

English

Which, Caster of the Stone, gives room and shine like gold. Wherewith thou also foundest lights for Āyu and for Manu’s sake:

अध्याय २०

श्लोक 70.20

व॒यं शूरे॑भि॒रस्तृ॑भि॒रिन्द्र॒ त्वया॑ यु॒जा व॒यम्।सा॒स॒ह्याम॑ पृतन्य॒तः

vayaṃ śūrebhirastṛbhirindra tvayā yujā vayam| sāsahyāma pṛtanyataḥ

हिन्दी अर्थ

है (इव) जसे कि (रथान्) अदवरथों तथा विमानरथों को भासानी से प्रेरित किया जाता है ओर भरापने (यातवे) जीवन यात्रा के लिये, (ऋतस्य ) (इन्द्र) है परमेदवर ! (या गधि) हमारे हृदयो भेःभ्रा विराजिये ४ १६२ भरथर्ेवेद-माष्य का० २०। सु० ६४

English

Win thou the waters, day by day, thralls of the strong. Sing forth to him whom many men invoke, to him whom many laud:

अध्याय २०

श्लोक 71.1

म॒हां इन्द्रः॑ प॒रश्च॒ नु म॑हि॒त्वम॑स्तु व॒ज्रिणे ।द्यौर्न प्र॑थि॒ना शवः॑

mahāṃ indraḥ paraśca nu mahitvamastu vajriṇe | dyaurna prathinā śavaḥ

हिन्दी अर्थ

. का० २०। सू० ६६. भरथवेवेद-भाष्य १६५ के संकल्प-विकर््पों से विगत हये है उपासक ! तु (नूनम्) निरचयपूरवंक. . (वखरहस्त) वश्चसमानघातक-निजशक्तियों दारा पापनवृत्रों का हनन करनेवाले है परभेद्वरं ! भ्राप (हि) ही (निकछःतीनाम्) शारीरिक

English

Whose lofty might—for doubly strong is he—supports the heaven and earth, And hills and plains and floods and light with manly power.

अध्याय २०

श्लोक 71.2

स॒मो॒हे वा॒ य आश॑त॒ नर॑स्तो॒कस्य॒ सनि॑तौ ।विप्रा॑सो वा धिया॒यवः॑

samohe vā ya āśata narastokasya sanitau | viprāso vā dhiyāyavaḥ

हिन्दी अर्थ

दुही गई गौ से सोम क्षरित होता है। (मघवन्) है रेष्वयंशाली परमेश्वर. (ते): आपके लिये, (एषः स्यः) यह वह भक्तिरस है, जो कि (तन्वः) मेरे शरीर से प्रकट हग है । ..

English

When verily will Indra hear our songs of praise? He who with Soma juice prepared among the many harbours. thee,

अध्याय २०

श्लोक 71.3

यः कु॒क्षिः सो॑म॒पात॑मः समु॒द्र इ॑व॒ पिन्व॑ते ।उ॒र्वीरापो॒ न का॒कुदः॑

yaḥ kukṣiḥ somapātamaḥ samudra iva pinvate | urvīrāpo na kākudaḥ

हिन्दी अर्थ

यह .सक्तिरस (नृम्णवर्धनः) मेरे बल -को बदाता, (सहः) काम भादिका का०-२०। सु० ६० भथवेवेद-माष्य १६९ दिन (बाह्वोः) यश भ्रौर बल के लिये (हितः) हितकारी है । यह भक्तिरस ४१७. यमु पेम तमिदं इवे सेदु इव्यों ददियो नाम् पत्यते ।

English

Verily Indra gains thereby tremendous might. Joy, mightiest Indra, known and marked, sprung most from

अध्याय २०

श्लोक 71.4

ए॒वा ह्य॑स्य सू॒नृता॑ विर॒प्शी गोम॑ती म॒ही।प॒क्वा शाखा॒ न दा॒शुषे॑

evā hyasya sūnṛtā virapśī gomatī mahī| pakvā śākhā na dāśuṣe

हिन्दी अर्थ

हृ" (इदम्) भव भी (तम्) उसका. (हवे) मै आह्वान करता हं । क्योंकि , (स इत् उ) बह ही (हव्यः) सहायता के लिये आह्वान के योग्य है,. (यः) जो कि (ददिः) सबकादाताहै, भौर जो. (नामः) स्॑प्रसिद्ध है, तथा (पत्यते) .एेदवयेवान् है । (व्रविणोदः) है घन गौर बल के दाता (रध्व- यु भिः) हिसारहित उपासना-यज्ञो के रचयिताओों द्वारा भौर (पोतरात्) (मधु) मधुर (सोमम्) भक्तिरस का (पिब) पान कीजिये, (ऋतुभिः) प्रत्येक ऋतु मे स्मपित भक्तिरस का पान कीजिये । , है उपासक! तु (परेहि) विषयों गे परे हट जा, श्रौर (विप्रम्)

English

Soma draughts, wherewith Thou smitest down the greedy fiend, for that we pray.

अध्याय २०

श्लोक 71.5

ए॒वा हि ते॒ विभू॑तय ऊ॒तय॑ इन्द्र॒ माव॑ते ।स॒द्यश्चि॒त् सन्ति॑ दा॒शुषे॑

evā hi te vibhūtaya ūtaya indra māvate | sadyaścit santi dāśuṣe

हिन्दी अर्थ

ताछ कर, (यः) जो परमेदवर कि (ते) तुर तथा (सलिभ्यः). तेरी ख्याति के समान ल्यातिवाले अन्य उपासको को मी (वरम्) वर (भा) प्रदान करता है । । , ष यथा स्तृणाति बधकर्मां (निघ० २।१९) । आ गादधाति (मन्त्र ४२२ मे “दधाना” के साथ सम्बन्ध )1 परमेदवर म ही. (दुवः) भ्रपनी परिचर्याए, अर्थात् सेवाएं सममपित करते रह । निर् +भ्रारत (ऋ, रेषणे) , यथा -निऋ ति (कृच्छापत्ति)) (उत) तथा (दस्म) पापक्षयकारी है ४-५- परमेदवर ! (्ररिः) दुदमनः

English

Wherewith thou helpest Adhrigu, the great Dasagva, and the God

अध्याय २०

श्लोक 71.6

ए॒वा ह्य॑स्य॒ काम्या॒ स्तोम॑ उ॒क्थं च॒ शंस्या॑ ।इन्द्रा॑य॒ सोम॑पीतये

evā hyasya kāmyā stoma ukthaṃ ca śaṃsyā | indrāya somapītaye

हिन्दी अर्थ

शाली (वोचेयुः) कहा करं 1 हम .उपासकं तौ (इन्द्रस्य) परमेदवर के .. का० २०।सु० ६८ अथर्वेवेद-माष्य १७१. भ्रौर कष्ट न पहूुानेवाले उपासक सौभाग्यशाली हो जाते है ।

English

Who stirs the sunlight, and Sea, for that we pray. Wherewith thou dravest forth like cars Sindhu and all the mighty floods.

अध्याय २०

श्लोक 71.7

इन्द्रेहि॒ मत्स्यन्ध॑सो॒ विश्वे॑भिः सोम॒पर्व॑भिः ।म॒हां अ॑भि॒ष्टिरोज॑सा

indrehi matsyandhaso viśvebhiḥ somaparvabhiḥ | mahāṃ abhiṣṭirojasā

हिन्दी अर्थ

्रानन्दित करनेवाले (ईम्) इस परमेदवर को, - (भारवे) शीघ्र सफल होने के लिये, (भ्रा भर) भ्रपनी भोर भुका ले। आाभर=भाहर । . इस भक्तिरस का (पीत्वा) पान करके, इस उपासक के (वुत्राणाम्) प्राप-वृत्रों के (घनः भ्रभवः) हनन करनेवाले हूय है । भाप (वाजेषु) के (प्र भावः) पूणंतया रक्षक हुए है ।

English

To go the way ordained by Law, for that we pray. Come unto us, O Indra, dear, still conquering, unconcealable,

अध्याय २०

श्लोक 71.8

एमे॑नं सृजता सु॒ते म॒न्दिमिन्द्रा॑य म॒न्दिने॑ ।चक्रिं॒ विश्वा॑नि॒ चक्र॑ये

emenaṃ sṛjatā sute mandimindrāya mandine | cakriṃ viśvāni cakraye

हिन्दी अर्थ

भे (गजिनम्) महाबली (तम् त्वा) उस आपको, हम उपासक (वाजयामः) की (भ्रवनिः) उपनाऊ भरमि हैः. वहं (महान् सुपारः) महान् है भौर मव- १७२ - . भय्ववेद-माष्य का० २० । सु० ६९

English

Vast as a mountain spread on all sides, Lord of heaven. O truthful Soma-drinker, thou art mightier than both the worlds.

अध्याय २०

श्लोक 71.9

मत्स्वा॑ सुशिप्र म॒न्दिभि॒ स्तोमे॑भिर्विश्वचर्षणे ।सचै॒षु सव॑ने॒ष्वा

matsvā suśipra mandibhi stomebhirviśvacarṣaṇe | sacaiṣu savaneṣvā

हिन्दी अर्थ

सागर से सुगमतापूर्वक पार कर देता है, तथा (सुन्वतः). भक्तिरसवाते उपासक का (सखा) सखा बन जाता.है, (तस्म इन्द्राय) उस परमेदवर , "की प्रसन्नता के लिये (गायत) भक्तिपूर्वंक सामगान गाया करो । उत्तम गान गादये । (स्तोमवाहसः) श्राप स्तुति गीतों के वहन करनेवाले है, स्तुति गीतों केज्ञातार्है। . (सः) वह्. परमेश्वर, (च) निच्वय से, (नः) हमारी (योगे) योगसाधना मे, (भ्रा मुवत्) भ्रा प्रकट होता है। (सः) १ वहु (राये) म प्रकट होता है। (सः) वह (वाजेभिः) शक्तियों बलों तथा

English

Thou strengthenest him who pours libation, Lord of heaven. For thou art, he, O Indra, who stormest all castles of the foe,

अध्याय २०

श्लोक 71.10

असृ॑ग्रमिन्द्र ते॒ गिरः॒ प्रति॒त्वामुद॑हासत ।अजो॑षा वृष॒भं पति॑म्

asṛgramindra te giraḥ pratitvāmudahāsata | ajoṣā vṛṣabhaṃ patim

हिन्दी अर्थ

दिन, (परिपदाम्) सब भ्रोर से भ्राक्रमण .करनेवाले रोग कीटाणुभों का (परिवृजम्) पूरण॑तया-वजंन भ्र्थात् परिहार करता है । ॥ि देवानामव द्विष; । सुन्वान इत् सिषासति सदलं वाज्य; । , (सुन्वन्) भक्तिरस निष्पादन करता हभ उपासक, (हि) निचय याचना करता है । (सुन्वानः हि) भक्तिरसवाला उपासक ही (द्विषः)

English

Such, praised by many! thou art King. Alone thou smitest foe- men dead, To gain, O Indra, spoils of war and high renown.

अध्याय २०

श्लोक 71.11

सं चो॑दय चि॒त्रम॒र्वाग् राध॑ इन्द्र॒ वरे॑ण्यम्।अस॒दित् ते॑ वि॒भु प्र॒भु

saṃ codaya citramarvāg rādha indra vareṇyam| asadit te vibhu prabhu

हिन्दी अर्थ

: कर पातः है । (सुन्वानः इत्) भक्तिरसवाला उपासक ही (सहस्रा) हजारों रकार की दिक्षाएं (सिषासति) प्रदान करता है । भक्तिरसवाला. उप्रासक (वाजी) बलक्ाली हो जाता है, (भ्रवृतः). भौर भरासुरी-मावनाभरौ दवारा कि उसके साथ सदा भौर सवव रहती है, (ददाति भामूवम्) हां, एेसी का० २०1 सू. ६७ -प्रथवैवेद-माष्य १६७.

English

We will, with Indra, and all Gods to aid us, bring these existing. worlds into subjection. Our sacrifice, our bodies, and our offspring, let Indra form to- gether with the Ādityas.

अध्याय २०

श्लोक 71.12

अ॒स्मान्त्सु तत्र॑ चोद॒येन्द्र॑ रा॒ये रभ॑स्वतः ।तुवि॑द्युम्न॒ यश॑स्वतः

asmāntsu tatra codayendra rāye rabhasvataḥ | tuvidyumna yaśasvataḥ

हिन्दी अर्थ

से चलीभ्रा रहो (माजारिषुः) जीर्ण-शीणं न होने पाए, - (उत ) भौर (पुरा) पुराकालीन वे ्राध्यात्मिक सम्पत्तियां (मा. जारिषुः) कमी उसे तुम (दिवृत) धारण करो, हां, वह (यत् दुष्टरम्) जो अरपराभवनीय सम्पत्ति है उसे भ्रवश्य घारण करो । जातेदमम् । य ऊ्वेयां स्व्वरो देवो देवाव्यं कूपा ।

English

With the Ādityas with the band of Maruts, may Indra be pro- tector of our bodies; As when the Gods came, after they had slaughtered the Asuras,. keeping safe their godlike

अध्याय २०

श्लोक 71.13

सं गोम॑दिन्द्र॒ वाज॑वद॒स्मे पृ॒थु श्रवो॑ बृ॒हत्।वि॒श्वायु॑र्धे॒ह्यक्षि॑तम्

saṃ gomadindra vājavadasme pṛthu śravo bṛhat| viśvāyurdhehyakṣitam

हिन्दी अर्थ

म मानता हूं, (दास्वन्तम्) उसे ही यँ -सब का दाता मानता हूं; (वसुम्) सदृश (जातवेदसम्) विद्यावान् मानता हं । (यः) जो. (देवः) परमेश्वर देवं कि (ऊ्वंया -देवाच्या कृपा) ऊपर द्युलोकं में सूर्यादि देवों मेँ पहुचे ४१४. यहे सरिस्लाःपव॑वीमितष्िभिर्यािन्डुरासो गिं धिया उत।

English

nature, Brought the Sun hitherward with mighty powers, and looked! about them on their vigorous

अध्याय २०

श्लोक 71.14

अ॒स्मे धे॑हि॒ श्रवो॑ बृ॒हद् द्यु॒म्नं स॑हस्र॒सात॑मम्।इन्द्र॒ ता र॒थिनी॒रिषः॑

asme dhehi śravo bṛhad dyumnaṃ sahasrasātamam| indra tā rathinīriṣaḥ

हिन्दी अर्थ

(भरतस्य). सब का भरण-पोषण -करनेवाले पृरमेष्वर के (सूनवः) हे-पुत्रो ! (दिवः नरः) तथा है दिभ्य नर-नार्यो 1 “तुम. (मं्ैः) यज्ञकमो १६८ अथवेवेद-माप्य का० २०॥ सु° ६७ कमो के करने मेँ (प्रियाः) सर्वंप्रियं होते हुये, (बहिः) भौर उपासना-यज्ञ (सोमम्) प्रकट हुये भानन्दरस. का (पिबत) पान किया करो ।

English

God-head. With this may we obtain strength God-appointed, and brave sons gladden us through a

अध्याय २०

श्लोक 71.15

वसो॒रिन्द्रं॒ वसु॑पतिं गी॒र्भिर्गृ॒णन्त॑ ऋ॒ग्मिय॑म्।होम॒ गन्ता॑रमू॒तये॑

vasorindraṃ vasupatiṃ gīrbhirgṛṇanta ṛgmiyam| homa gantāramūtaye

हिन्दी अर्थ

पृषतीभि = पृषु सेचने, तथा नानाविध । ऋष्टिभिः == भ्राध्यात्मिक (विप्र) है मेधावी उपासक ! (इह) इस उपासना-यज्ञ मे पु (देवान्) भआामन्तरित करके उपासना-यज्ञ र्वा या किया कर । ( होतः ) उपासना-यज्ञ

English

hundred winters. He who alone bestoweth might on mortal man who offereth gifts,

अध्याय २०

श्लोक 71.16

सु॒तेसु॑ते॒ न्योऽकसे बृ॒हद् बृ॑ह॒त एद॒रिः ।इन्द्रा॑य शू॒षम॑र्चति

sutesute nyo'kase bṛhad bṛhata edariḥ | indrāya śūṣamarcati

हिन्दी अर्थ

पूवक (तरिषु योनिषु) च्छक्-साम-यजुरूपी तीन .माताश्नो के गं में (निषदा) , स्नान पौष्टिक भौर मचुर भ्रानन्दरस का (पिन) पान किया कर, गौर. (तव) तेरा. जो (भागस्य) भानन्दरस का भाग है, उसके. लिये सदा (तृष्णुदि ) तृषित हृभा कर । . - क , . वेद = माता यथा-“स्तूता भया बरवा वेदमाता" (भ्रथवं ०१९।

English

The ruler of resistless power, is Indra, sure. When will he trample like a weed the man who hath no gift for him?

अध्याय २०

श्लोक 72.1

विश्वे॑षु॒ हि त्वा॒ सव॑नेषु तु॒ञ्जते॑ समा॒नमेकं॒ वृष॑मण्यवः॒ पृथ॒क् स्वः सनि॒ष्यवः॒ पृथक्।तं त्वा॒ नावं॒ न प॒र्षणिं॑ शू॒षस्य॑ धु॒रि धी॑महि ।इन्द्रं॒ न य॒ज्ञैश्च॒तय॑न्त आ॒यव॒ स्तोमे॑भि॒रिन्द्र॑मा॒यवः॑

viśveṣu hi tvā savaneṣu tuñjate samānamekaṃ vṛṣamaṇyavaḥ pṛthak svaḥ saniṣyavaḥ pṛthak| taṃ tvā nāvaṃ na parṣaṇiṃ śūṣasya dhuri dhīmahi | indraṃ na yajñaiścatayanta āyava stomebhirindramāyavaḥ

हिन्दी अर्थ

का० २०-। सू० ६९ भ्रथवेवेद-माष्य १७३ + के लिये, (गायत) है उपासको ! तुम भक्तिभरे गीत गाया भौर. (शुचयः) पित्र (सोमासः) भक्तिरस, (वीतये) परमेश्वर की

English

Slayer of Dasyus, man’s supporter, Lord of heaven. O ministering priest, pour out of the sweet juice what gladdens most.

अध्याय २०

श्लोक 72.2

वि त्वा॑ ततस्रे मिथु॒ना अ॑व॒स्यवो॑ व्र॒जस्य॑ सा॒ता गव्य॑स्य निः॒सृजः॒ सक्ष॑न्त इन्द्र निः॒सृजः॑ ।यद् ग॒व्यन्ता॒ द्वा जना॒ स्व॑१र्यन्ता॑ स॒मूह॑सि ।आ॒विष्करि॑क्र॒द् वृष॑णं सचा॒भुवं॒ वज्र॑मिन्द्र सचा॒भुव॑म्

vi tvā tatasre mithunā avasyavo vrajasya sātā gavyasya niḥsṛjaḥ sakṣanta indra niḥsṛjaḥ | yad gavyantā dvā janā sva1ryantā samūhasi | āviṣkarikrad vṛṣaṇaṃ sacābhuvaṃ vajramindra sacābhuvam

हिन्दी अर्थ

(भा पूर्णतया + श्रा==पके)। त (सुक्रतो इन्द्र) हमारे उपासना-कमं को सुफल करनेवाले है परमे- (भजायथाः) प्रकट हो जते हैँ। । (गि्वंणः) .है वेदवाणियों द्वारा भजनीय (इन्द्र ) परमेश्वर . !

English

So is the Hero praised who ever prospers us.

अध्याय २०

श्लोक 72.3

उ॒तो नो॑ अ॒स्या उ॒षसो॑ जु॒षेत॒ ह्य॑१र्कस्य॑ बोधि ह॒विषो॒ हवी॑मभिः॒ स्व॑र्षाता॒ हवी॑मभिः ।यदि॑न्द्र॒ हन्त॑वे॒ मृघो॒ वृषा॑ वज्रिं॒ चिके॑तसि ।आ मे॑ अ॒स्य वे॒धसो॒ नवी॑यसो॒ मन्म॑ श्रुधि॒ नवी॑यसः

uto no asyā uṣaso juṣeta hya1rkasya bodhi haviṣo havīmabhiḥ svarṣātā havīmabhiḥ | yadindra hantave mṛgho vṛṣā vajriṃ ciketasi | ā me asya vedhaso navīyaso manma śrudhi navīyasaḥ

हिन्दी अर्थ

१७४ . भ्रथर्ववेद-माष्य का० २०.। सु० ६६ (शतक्रतौ) है संकड़ों अद्मृत कर्मोवाले परमेदवर ! (स्तोमाः) वैदिक सामगानो ने (त्वा) भरापके यश को (भवीवृधन्) बढाया है । (उक्था ) वेदिक सूक्तों नँ (त्वा) भ्रापके यद को बढ़ाया है (नः) हमारी रवेर, (इमं वाजम्) हमे एेसी शक्ति (सनेत्) प्रदान करे कि हम ५ ५.३

English

Indra whom tawny coursers bear, praise such a thine,. preeminent None by his power or by his goodness hath attained

अध्याय २०

श्लोक 73.1

तुभ्येदि॒मा सव॑ना शूर॒ विश्वा॒ तुभ्यं॒ ब्रह्मा॑णि॒ वर्ध॑ना कृणोमि ।त्वं नृभि॒र्हव्यो॑ वि॒श्वधा॑सि

tubhyedimā savanā śūra viśvā tubhyaṃ brahmāṇi vardhanā kṛṇomi | tvaṃ nṛbhirhavyo viśvadhāsi

हिन्दी अर्थ

विश्वानि ) सब प्रकार की (पौस्या) शक्तियां ह । (गिर्व॑णः) वेदवाणियों दवारा भजनीय (इन्द्र) है परमेदवर ! (मर्ताः) मरणधर्मा मनुष्यों मे रहनेवाले राग-देष आदि, भापकी कृपासे (नः). के. (ईरानः) भधीदवर हो गये ह । इसलिये (वधम्) रागद्वेष आदिसे चारो भोर स्थित जगत् मे विचरनेवाले परमेश्वर . को, ध्यानी उपासक,

English

We seeking glory, have invoked this Master of all power and’ might. Who must be glorified by constant sacrifice.

अध्याय २०

श्लोक 73.2

नू चि॒न्नु ते॒ मन्य॑मानस्य द॒स्मोद॑श्नुवन्ति महि॒मान॑मुग्र ।न वीर्यऽमिन्द्र ते॒ न राधः॑

nū cinnu te manyamānasya dasmodaśnuvanti mahimānamugra | na vīrya'mindra te na rādhaḥ

हिन्दी अर्थ

है, जिसके कि सामथ्यं द्वारा (दिवि) बुलोक मे (रोचना) इचिकर चमकीले तारा गण (रोचन्ते) चमक रहै है । (काम्या) योगसाधना के लिये चाही ग (हर) चित्त को भ्न्त- मु ख कर देनेवाल, (विपक्षसा) सुषुम्णा के दो पक्षों मेँ भलग-भ्रलगः लगी योगसाघना में नेतरूप उपासको को उनके उद्श्य की भोर ले जानेवाली इडा भौर पिगला नाडयो को, (स्य) इस परमेदवर के (रथे) रमणीय

English

Come, sing we praise to Indra, friends! the Hero who deserves the laud, Him who with none to aid o’ercomes all tribes of men.

अध्याय २०

श्लोक 73.3

प्र वो॑ म॒हे म॑हि॒वृधे॑ भरध्वं॒ प्रचे॑तसे॒ प्र सु॑म॒तिं कृ॑णुध्वम्।विशः॑ पू॒र्वीः प्र च॑रा चर्षणि॒प्राः

pra vo mahe mahivṛdhe bharadhvaṃ pracetase pra sumatiṃ kṛṇudhvam| viśaḥ pūrvīḥ pra carā carṣaṇiprāḥ

हिन्दी अर्थ

. इडा, पिंगला, सुषुम्णा = सुषुम्णा नाड़ी गदा के निकट से मेरुदण्ड के मीतर होती हुई मस्तिष्क के ऊपर तक चली गई है। गुदा के स्थानके निकटसेही सुषुम्णा के वाममागसे इडा, भौर दक्षिण भाग से पिङ्गला, नासिका कै मूलपयंन्त चली गई है । भ्रूमध्य में ये तीनों नादयां मिल जाती है । इडा को चन्द्र, तथा पिङ्गला को सूपं भी कहते है । “पिङ्गला” नाड़ी दिन मेँ सक्रिय रहती है, इसलिये यंह॒ रजःप्रधान नाडी है; भ्रौर रातके .

English

To him who wins the kine, who keeps no cattle back, celestial God,

अध्याय २०

श्लोक 73.4

य॒दा वज्रं॒ हिर॑ण्य॒मिदथा॒ रथं॒ हरी॒ यम॑स्य॒ वह॑तो॒ वि सू॒रिभिः॑ ।आ ति॑ष्ठति म॒घवा॒ सन॑श्रुत॒ इन्द्रो॒ वाज॑स्य दी॒र्घश्र॑वस॒स्पतिः॑

yadā vajraṃ hiraṇyamidathā rathaṃ harī yamasya vahato vi sūribhiḥ | ā tiṣṭhati maghavā sanaśruta indro vājasya dīrghaśravasaspatiḥ

हिन्दी अर्थ

समय “इडा” नाड़ी सक्रिय रहती है, इसलिये यह तमप्रधान है (देखो- अजमेर) । गोणा इडा का वणं शुभ्र, तथा. पिङ्गला का वर्णं पीतिमा लिये होता है, शौणू वणं । (भस्य) इस परमेदवर द्वारा. (काम्या) चौही गई, तथा (रथे)

English

Speak wondrous speech more sweet than butter and than mead. Whose hero powers are measureless, whose bounty ne’er may be surpassed,

अध्याय २०

श्लोक 73.5

सो चि॒न्नु वृ॒ष्टिर्यू॒थ्या॒३ स्वा सचां॒ इन्द्रः॒ श्मश्रू॑णि॒ हरि॑ता॒भि प्रु॑ष्णुते ।अव॑ वेति सु॒क्षयं॑ सु॒ते मधूदिद् धू॑णोति॒ वातो॒ यथा॒ वन॑म्

so cinnu vṛṣṭiryūthyā3 svā sacāṃ indraḥ śmaśrūṇi haritābhi pruṣṇute | ava veti sukṣayaṃ sute madhūdid dhūṇoti vāto yathā vanam

हिन्दी अर्थ

शरो र-रथ म (विपक्षसा) दोनों पादो में . लगी हुई, (हरी) प्रत्याहार- (धृष्णू) पापधषेक तथा.(नृवाहसा) शरीर-रथ मेँ शरीर-रथ के नेता जीवा- .. त्मा का ब्रहन करने लगती है । ह दोनो भोर है, चक्षु दोनो ओर है, नासाछद्र दोनों भोर है, जिह्वा बोलने -ओौर कर्मेन्द्रिय काभी। हाथ दोनों ओर ह इत्यादि । शोणाशोणे

English

Whose liberality, like light, is over all. Thou knowest, Indra, thunder-armed, how to avoid destructive

अध्याय २०

श्लोक 73.6

यो वा॒चा विवा॑चो मृ॒ध्रवा॑चः पु॒रू स॒हस्राशि॑वा ज॒घान॑ ।तत्त॒दिद॑स्य॒ पौंस्यं॑ गृणीमसि पि॒तेव॒ यस्तवि॑षीं वावृ॒धे शवः॑

yo vācā vivāco mṛdhravācaḥ purū sahasrāśivā jaghāna | tattadidasya pauṃsyaṃ gṛṇīmasi piteva yastaviṣīṃ vāvṛdhe śavaḥ

हिन्दी अर्थ

४४०. केत कृण्हक्ेतवे पेशो म्यां अपश । (मर्याः) है उपासक जनो ! तुम परमेश्वर के प्रति कहो किटि. लिये (पेक्षः) नया खूप प्रकट कृरते हुये, (उषद्धिः) उषाकालो के साथ-

English

Powers, As one secure from pitfalls each succeeding day.

अध्याय २०

श्लोक 74.1

यच्चि॒द्धि स॑त्य सोमपा अनाश॒स्ता इ॑व॒ स्मसि॑ ।आ तू न॑ इन्द्र शंसय॒ गोष्वश्वे॑षु शु॒भ्रिषु॑ स॒हस्रे॑षु तुवीमघ

yacciddhi satya somapā anāśastā iva smasi | ā tū na indra śaṃsaya goṣvaśveṣu śubhriṣu sahasreṣu tuvīmagha

हिन्दी अर्थ

(आ खुजल्नुभिः) पूणंतया मग्न कर देनेवाले, (वह्लिभिः) तथा योगमागं पर ले चलनेवाले, अवैर ज्ञानप्रकाश से प्रकाशित उपासक-शि रोमणियों दारा, (गुहा चित्) हृवय-गुहामे चपि हुये मी (इन्द्र) है परमभेक्वर । ४४३. देवयन्तो यथा म॒तिमच्छ। विदद् बुं गिर॑ः। =. का० २०। सु° ७० परथ्ववेद-माष्य. . १७७ (देवयन्तः) है परमेद्वर ! भ्राप देव को चाहते हये उपासको ने,

English

The pourer of oblations gains the home of wealth pouring his gift conciliates hostilities, yea, the hostilities of Gods.

अध्याय २०

श्लोक 74.2

शिप्रि॑न् वाजानां पते॒ शची॑व॒स्तव॑ दं॒सना॑ ।आ तू न॑ इन्द्र शंसय॒ गोष्वश्वे॑षु शु॒भ्रिषु॑ स॒हस्रे॑षु तुवीमघ

śiprin vājānāṃ pate śacīvastava daṃsanā | ā tū na indra śaṃsaya goṣvaśveṣu śubhriṣu sahasreṣu tuvīmagha

हिन्दी अर्थ

(भ्रनूषत) सब के प्रति स्तवन किया है। हे उपासक ! तु हि) निचुवय से, (अबिभ्युषा) स्वयं निर्भय भ्रौर उपासको को निर्भय कर देनेवलि (इरण) परमेदवर के साथ (सम्) . (अन्दर) भरानन्दित ओर (समानवचंसा ) समानकान्तिवाले हो ।

English

Pouring he strives, unchecked and strong, to win him riches thousandfold. Indra gives lasting wealth to him who pours forth gifts; yea, wealth he gives that long shall

अध्याय २०

श्लोक 74.3

नि ष्वा॑पया मिथू॒दृशा॑ स॒स्तामबु॑ध्यमाने ।आ तू न॑ इन्द्र शंसय॒ गोष्वश्वे॑षु शु॒भ्रिषु॑ स॒हस्रे॑षु तुवीमघ

ni ṣvāpayā mithūdṛśā sastāmabudhyamāne | ā tū na indra śaṃsaya goṣvaśveṣu śubhriṣu sahasreṣu tuvīmagha

हिन्दी अर्थ

परमेदवर ! भ्राप (अतः) इस हृदय से (म्मा गहि). प्रकट हूजिये, ह्मे (इतः पाथिवात् भ्रधि). इस पुथिवीलोकसे, (वा) भौर (दिवः रवर से (सातिम्) दान की (ईमहे) हम प्रार्थना करते हैँ । साति षणु दाने । पृथिवी से अन्न, भ्रोषधि, निवासस्थान का

English

last. Ne’er may those manly deeds of yours for us grow old, never may your bright glories fall into

अध्याय २०

श्लोक 74.4

स॒सन्तु॒ त्या अरा॑तयो॒ बोध॑न्तु शूर रा॒तयः॑ ।आ तू न॑ इन्द्र शंसय॒ गोष्वश्वे॑षु शु॒भ्रिषु॑ स॒हस्रे॑षु तुवीमघ

sasantu tyā arātayo bodhantu śūra rātayaḥ | ā tū na indra śaṃsaya goṣvaśveṣu śubhriṣu sahasreṣu tuvīmagha

हिन्दी अर्थ

. दान, चुलोक से प्रकाश मौर ताप का दान, भन्तरिक्षलोक से वायु गौर मेधीयजल का दान । वाच (भ्रौर) ; यथा “भरणापिं समुच्जयार्थे भवति ४४८. इनदरमिद् गाथिनो वृहदिन्द्रर्केभिंरिणः जिनसे प्राप्त हो जाती है, एसे महायुद्धं में भी भाप (उग्राभिः ऊतिभिः)

English

decay, never before your time decay. What deed of yours, new every age, wondrous, surpassing man,. rings forth,

अध्याय २०

श्लोक 74.5

समि॑न्द्र गर्द॒भं मृ॑ण नु॒वन्तं॑ पा॒पया॑मु॒या।आ तू न॑ इन्द्र शंसय॒ गोष्वश्वे॑षु शु॒भ्रिषु॑ स॒हस्रे॑षु तुवीमघ

samindra gardabhaṃ mṛṇa nuvantaṃ pāpayāmuyā| ā tū na indra śaṃsaya goṣvaśveṣu śubhriṣu sahasreṣu tuvīmagha

हिन्दी अर्थ

वेदिक भावना युद्ध का विरोधः करती है। यथा-संनानामहै का० २० सु ७० भरथववेद-माष्य १७९ हों । इस दिव्यविचारोवाले मन से हम वियुक्तन हों। बहुघाती-युद्धो भे उठनेवाले आर्तनाद न उट । युद्धदिन के उपस्थित हो जाने पर भी राजाधों ०५८ ह भराह्लान करते ह, जबकि (वृत्रेषु) कामादि दुर्वसिनाएं हमे

English

Whatever, Maruts may be difficult to gain grant us whate’er is hard to win. I think on Agni, Hotar, the munificent, the gracious Son of strength, who knoweth all that

अध्याय २०

श्लोक 74.6

पता॑ति कुण्डृ॒णाच्या॑ दू॒रं वातो॒ वना॒दधि॑ ।आ तू न॑ इन्द्र शंसय॒ गोष्वश्वे॑षु शु॒भ्रिषु॑ स॒हस्रे॑षु तुवीमघ

patāti kuṇḍṛṇācyā dūraṃ vāto vanādadhi | ā tū na indra śaṃsaya goṣvaśveṣu śubhriṣu sahasreṣu tuvīmagha

हिन्दी अर्थ

को (भ्रपावृधि) हटा दीजिये । (धस्मभ्यम्) हमारे इस .कायं ®े.लिये (अप्रतिष्कुतः) भाप कीं से भी प्रतिरोध नहीं पा सकते । - नहीं जानता । तुञ्जः वचं (निव०.२।२०)। १८० भअथरववेद-भाष्य काऽ २५ । सुऽ ७०

English

live, as holy Sage who knoweth all. Lord of fair rites, a God with form erected turning to the Gods.

अध्याय २०

श्लोक 74.7

सर्वं॑ परिक्रो॒शं ज॑हि ज॒म्भया॑ कृकदा॒श्वऽम्।आ तू न॑ इन्द्र शंसय॒ गोष्वश्वे॑षु शु॒भ्रिषु॑ स॒हस्रे॑षु तुवीमघ

sarvaṃ parikrośaṃ jahi jambhayā kṛkadāśva'm| ā tū na indra śaṃsaya goṣvaśveṣu śubhriṣu sahasreṣu tuvīmagha

हिन्दी अर्थ

(वंसगः) रोब-दाब की. चालवाला सेनापति, (दव) - जसे (यूथा) संनिक-समूहों को, (भोजसा)श्रपने प्रमाव के कारण, (दयति) भज्ञाद्रारा ्रेरितं करता है, (ईशानः) ओर उन पर शासन करता है, व॑से (वषा) सुखो .. की वर्षा करनेवाला जंगन्नेता, (ओजसा) भ्रपने सर्वोपरि भोज ऊ कारण, (कृष्टीः) प्रजाजनों को (इयति) प्रेरित कर रहा है, (ईशानः) मौर .

English

He, when the flame hath sprung forth from the holy oil, the offered fatness, longeth for it with his glow.

अध्याय २०

श्लोक 75.1

वि त्वा॑ ततस्रे मिथु॒ना अ॑व॒स्यवो॑ व्र॒जस्य॑ सा॒ता गव्य॑स्य निः॒सृजः॒ सक्ष॑न्त इन्द्र निः॒सृजः॑ ।यद् ग॒व्यन्त॒ द्वा जना॒ स्व॑१र्यन्ता॑ स॒मूह॑सि ।आ॒विष्करि॑क्र॒द् वृषणं सचा॒भुवं॒ वज्र॑मिन्द्र सचा॒भुव॑म्

vi tvā tatasre mithunā avasyavo vrajasya sātā gavyasya niḥsṛjaḥ sakṣanta indra niḥsṛjaḥ | yad gavyanta dvā janā sva1ryantā samūhasi | āviṣkarikrad vṛṣaṇaṃ sacābhuvaṃ vajramindra sacābhuvam

हिन्दी अर्थ

सब पर सुशासन कर रहा है, (भप्रतिष्कुतः) इस सम्बन्ध मँ उसका .कहीं से भी प्रतिरोध नहीं होता । "क = वंसगः--वननीयगतिः । कृष्टीः = मनुष्याः (निष०.२।३) (यः) जो (एकः) एक (चषंणीनाम्) सब मनुष्यों का, (वसूनाम्) सब वसुं का, तथां (पञ्च ) पांच या विस्तृत (क्षितीनाम्) पृथिविरयो यां ग्रहों का (इरज्यति) अधीदवर है, . (इन्द्रः) वंह पररमेदवर है । .

English

Busied with sacrifice, with spotted deer and spears, gleaming. upon your way with ornaments, yea, our friends,

अध्याय २०

श्लोक 75.2

वि॒दुष्टे॑ अ॒स्य वी॒र्यऽस्य पू॒रवः॒ पुरो॒ यदि॑न्द्र॒ शार॑दीर॒वाति॑रः सासहा॒नो अ॒वाति॑रः ।शास॒स्तमि॑न्द्र॒ मर्त्य॒मय॑जुं शवसस्पते ।म॒हीम॑मुष्णाः पृथि॒वीमि॒मा अ॒पो म॑न्दसा॒न इ॒मा अ॒पः

viduṣṭe asya vīrya'sya pūravaḥ puro yadindra śāradīravātiraḥ sāsahāno avātiraḥ | śāsastamindra martyamayajuṃ śavasaspate | mahīmamuṣṇāḥ pṛthivīmimā apo mandasāna imā apaḥ

हिन्दी अर्थ

है,- दसिये इन दो का ग्रहण नहीं किया । (0 अस्माकमस्तु केक; ॥१६॥ वि , (बः) है उपासको ! तुम्हारे लिये, तथा (जनेभ्यः) सभी भरन्य महे) हम आह्वान करते है । वह परभेदवरः (भ्रस्माकम्) हम सब का सब का सेवनीय हो.। केवलः केवृ सेवने । . -

English

Sitting on sacred grass, ye sons of Bharata, drink Soma from the Potar’s bowl, O Men of heaven.

अध्याय २०

श्लोक 75.3

आदित् ते॑ अ॒स्य वी॒र्यऽस्य चर्किर॒न् मदे॑षु वृषन्नु॒शिजो॒ यदावि॑थ सखीय॒तो यदावि॑थ ।च॒कर्थ॑ का॒रमे॑भ्यः॒ पृत॑नासु॒ प्रव॑न्तवे ।ते अ॒न्याम॑न्यां न॒द्यं सनिष्णत श्रव॒स्यन्तः॑ सनिष्णत

ādit te asya vīrya'sya carkiran madeṣu vṛṣannuśijo yadāvitha sakhīyato yadāvitha | cakartha kāramebhyaḥ pṛtanāsu pravantave | te anyāmanyāṃ nadyaṃ saniṣṇata śravasyantaḥ saniṣṇata

हिन्दी अर्थ

(दन््र) है परमेदवर ! (अतये) हमारी स्के तिये हभ (रयिम्) का० २०। सु° ७० अथवेवेद-भ।घ्य ४ ८१ . विजय प्राप्त कराये, (सदासहम्) सदा काम, भविचा तथा राग-ढेष भ्रादि

English

Bring the Gods hither, Sage, and offer sacrifice. At the three altars seat thee willingly .O Priest.

अध्याय २०

श्लोक 76.1

वने॒ न वा॒ यो न्य॑धायि चा॒क्रं छुचि॑र्वां॒ स्तोमो॑ भुरणावजीगः ।यस्येदिन्द्रः॑ पुरु॒दिने॑षु॒ होता॑ नृ॒णां नर्यो॒ नृत॑मः क्ष॒पावा॑न्

vane na vā yo nyadhāyi cākraṃ chucirvāṃ stomo bhuraṇāvajīgaḥ | yasyedindraḥ purudineṣu hotā nṛṇāṃ naryo nṛtamaḥ kṣapāvān

हिन्दी अर्थ

.(नि अर्व॑ता) पाप-वुत्रों का नितरां हनन करनेवाले (येन ) जिस श्रापकी सहायता द्वारा, -- (वृत्रा) पाप-वृर्रों का (निरुणधामहै) हम निरोध करते है, तथा उनका (नि) नितरां हनन करते है, जैसे कि (मुष्टिहत्यया) मुट्टी हेम, (धना = धनानि) पापःवृत्रों के हनन के साधनों का (भ्रा ददीमहि) जादान करते है, भौर (वचम्) पाप-ुर््रो के लिये वच््ररूप भ्राप का आदि भ्रासुरी भावनां को (सं जयेम) हम सम्यक् जीतंलेतेर्है। .

English

Accept for thy delight the proffered Soma mead: drink from the Kindler’s bowl and sate thee with thy share.

अध्याय २०

श्लोक 76.2

प्र ते॑ अ॒स्या उ॒षसः॒ प्राप॑रस्या नृ॒तौ स्या॑म॒ नृत॑मस्य नृ॒णाम्।अनु॑ त्रि॒शोकः॑ श॒तमाव॑ह॒न्नॄन् कुत्से॑न॒ रथो॒ यो अस॑त् सस॒वान्

pra te asyā uṣasaḥ prāparasyā nṛtau syāma nṛtamasya nṛṇām| anu triśokaḥ śatamāvahannṝn kutsena ratho yo asat sasavān

हिन्दी अर्थ

(इन्दर) है परमेदवर ! (अस्तृभिः). पापों को परास्त करनेवाले, (शरेभिः) धमंशुर उपासक नेतार्गौ, रौर (त्वया) भ्राषके (युजा) सहयोग दवारा (वयम्) हम उपासक, (पृतन्यतः). कामादि की सेनार्भो को (सास- ह्याम) पूर्णतया पराभव करते है । : न्वरे “वयम्” दो बार पठित है । (इन्द्रः) परमेरवर (महान्) महान् है, (नु) निदचय से वह (परः) परमेश्वर की (स्तु) है । उसका (शवः) बल विस्तार कौ दृष्टि से (चौ; न) दुलोक के सदृश फलां हुभा है । - ह

English

This is the strengthener of thy body’s manly might: strength,. victory for all time are laid within thine arms.

अध्याय २०

श्लोक 76.3

कस्ते॒ मद॑ इन्द्र॒ रन्त्यो॑ भू॒द् दुरो॒ गिरो॑ अ॒भ्यु॑१ग्रो वि धा॑व ।कद् वाहो॑ अ॒र्वागुप॑ मा मनी॒षा आ त्वा॑ शक्यामुप॒मं राधो॒ अन्नैः॑

kaste mada indra rantyo bhūd duro giro abhyu1gro vi dhāva | kad vāho arvāgupa mā manīṣā ā tvā śakyāmupamaṃ rādho annaiḥ

हिन्दी अर्थ

(तोकस्य). सृन्तान की (सनितौ) प्राप्ति हो जाने पर, (नरः) साधारण नरनारिपं, (समोहे) मोहमय गृहस्थ मे (भारत) पड़ , रहते है । परन्तु (ये) जो (विप्राः) मेघावी नर-नारियां है, वे . (धियायवः) रज्ञा जते रहते है धियायवः == धिया--अय् (गतौ) । वा = समुच्चयाथः। का० २० सु० ७१. अथरववेद-माष्य १८३ रवर की वेदवाणी है, जो कि (हि) निर्चय से (सूनृता).प्रिय भौर सत्य

English

Pressed for thee, Maghavan, it is offered unto thee: drink from the chalice of this Brāhman, 290

अध्याय २०

श्लोक 76.4

कदु॑ द्यु॒म्नमि॑न्द्र॒ त्वाव॑तो॒ नॄन् कया॑ धि॒या क॑रसे॒ कन्न॒ आग॑न्।मि॒त्रो न स॒त्य उ॑रुगाय भृ॒त्या अन्ने॑ समस्य॒ यदस॑न् मनी॒षाः

kadu dyumnamindra tvāvato nṝn kayā dhiyā karase kanna āgan| mitro na satya urugāya bhṛtyā anne samasya yadasan manīṣāḥ

हिन्दी अर्थ

. रूपा है, (विरप्डी) जो विवि पदाथ का व्यक्त वर्णन करती है, (गोमती) ज्ञानमयी किरणों से सम्पन्न, गौर (मही) महावाणी है। वह वेदवाणी ( दाशुषे) ब्रह्मदान करनेवाले के लिये (पक्वा शाखा न) पके-फलोवाली विस्तृत मन्त्र ४६४ (ते) आप की (विभतयः). विभूतियां ई, .जोकि

English

drink thy fill. Him whom of old I called on, him I call on now. He is to be invoked: his name is He who

अध्याय २०

श्लोक 76.5

प्रेर॑य॒ सूरो॒ अर्थं॒ न पा॒रं ये अ॑स्य॒ कामं॑ जनि॒धा इ॑व॒ ग्मन्।गिर॑श्च॒ ये ते॑ तुविजात पू॒र्वीर्नर॑ इन्द्र प्रति॒शिक्ष॒न्त्यन्नैः॑

preraya sūro arthaṃ na pāraṃ ye asya kāmaṃ janidhā iva gman| giraśca ye te tuvijāta pūrvīrnara indra pratiśikṣantyannaiḥ

हिन्दी अर्थ

(मावते). भेरे जैसे उपासक के लिये (ऊतये) रक्षारूप है, भौर (दाशुषे) - इन विभूतियो के दानं करनेवाले के लिये ये विभूतियां (सद्यः चित्) शीघध. ही . पुनः उपस्थित हो जातीर्है। न (सोमपातमः) भभिषुत.जल का श्रत्यधिक पान करता है, जौर जी (समुद्र इव ) समुद्र के सदृश सदा प्रीणित, -रहता है, वे गाप (काकुदः) विस्तृत वेदवाणी के भी प्रदाता है (उर्वीः 'गापः न) जैसे कि गापने समुद्रस्य महां- जल प्रदान किया है । सोमन्=जलः; ४०19 (भरापटे) । कुक्षिः उदर =

English

Gives. Here brought by priests in Soma mead. Granter of Wealth, drink Soma with the Seasons from

अध्याय २०

श्लोक 76.6

मात्रे॒ नु ते॒ सुमि॑ते इन्द्र पू॒र्वी द्यौर्म॒ज्मना॑ पृथि॒वी काव्ये॑न ।वरा॑य ते घृ॒तव॑न्तः सु॒तासः॒ स्वाद्न॑न् भवन्तु पी॒तये॒ मधू॑नि

mātre nu te sumite indra pūrvī dyaurmajmanā pṛthivī kāvyena | varāya te ghṛtavantaḥ sutāsaḥ svādnan bhavantu pītaye madhūni

हिन्दी अर्थ

काकूत् + दः 1. काषुत् = वाक् (निव ० १।११).। छान्दस ्” का लोप । जीवात्मा कीं कामना के योग्य है, भरौर (शंस्या) प्रशंसनीय ह । तथा (हृन्राय) जीवात्मा के लिये (सोमपीतये). ज्ञानदृग्व धने के लिये ह ।.

English

the Hotar’s Cup. Go to the wise unconquered One, ask thou of Indra, skilled in song,

अध्याय २०

श्लोक 76.7

आ मध्वो॑ अस्मा असिच॒न्नम॑त्र॒मिन्द्रा॑य पू॒र्णं स हि स॒त्यरा॑धाः ।स वा॑वृधे॒ वरि॑म॒न्ना पृ॑थि॒व्या अ॒भि क्रत्वा॒ नर्यः॒ पौंस्यै॑श्च

ā madhvo asmā asicannamatramindrāya pūrṇaṃ sa hi satyarādhāḥ | sa vāvṛdhe varimannā pṛthivyā abhi kratvā naryaḥ pauṃsyaiśca

हिन्दी अर्थ

भर्थात् दुही गई गोगो से सोम ( दुग्ध) क्षरित हा है। - (इनदर) है परमेदवरः। (एहि) कट हृणियेः सोमपवंभिः -निदेभिः) ०४ भयवेवेद-माष्य , का० २०। सू० ७१ ह, मौर (भ्रभिष्टिः). भाप हमारे प्रभीष्टदहै। ि

English

Him who is better than thy friends. Whether the men who mock us say, Depart unto another place,

अध्याय २०

श्लोक 76.8

व्या॑न॒लिन्द्रः॒ पृत॑नाः॒ स्वोजा॒ आस्मै॑ यतन्ते स॒ख्याय॑ पू॒र्वीः ।आ स्मा॒ रथं॒ न पृत॑नासु तिष्ठ॒ यं भ॒द्रया॑ सुम॒त्या चो॒दया॑से

vyānalindraḥ pṛtanāḥ svojā āsmai yatante sakhyāya pūrvīḥ | ā smā rathaṃ na pṛtanāsu tiṣṭha yaṃ bhadrayā sumatyā codayāse

हिन्दी अर्थ

वसन्त ऋतु भक्तियज्ञ के पव है । र लिये (श्रा सुंजत) पूणंतया समपित कर दो । , (इन्द्र) है परमेश्वर !. ति) आपकी (गिरः) वेदवाणियों का, भ्राप.

English

Ye who serve Indra and none else; Or whether, God of wondrous deeds, all our true people call us blest,

अध्याय २०

श्लोक 77.1

आ स॒त्यो या॑तु म॒घवां॑ ऋजी॒षी द्रव॑न्त्वस्य॒ हर॑य॒ उप॑ नः ।तस्मा॒ इदन्धः॑ सुषुमा सु॒दक्ष॑मि॒हाभि॑पि॒त्वं क॑रते गृणा॒नः

ā satyo yātu maghavāṃ ṛjīṣī dravantvasya haraya upa naḥ | tasmā idandhaḥ suṣumā sudakṣamihābhipitvaṃ karate gṛṇānaḥ

हिन्दी अर्थ

रूप मे पहूंची ह, जैसे किं (भ्रजोषा ) गमुक्ता नव-विवाहिता पत्नी (वृषभं का० २० .॥.सु° ७१ अथ्वेवेद-माष्य = अ . १८१५ ४७२. सं चोदय चि्रमवाग् रषं शर करण्यम् । षन (विभु) विभरुतिरूप है (असु) भौर भमाव्ाली (भसत् इत्) है ।

English

Still may we dwell in Indra’s care. Unto the swift One bring the swift, man-cheering, grace of sacrifice.

अध्याय २०

श्लोक 77.2

अव॑ स्य शू॒राध्व॑नो॒ नान्ते॒ऽस्मिन् नो॑ अ॒द्य सव॑ने म॒न्दध्यै॑ ।शंसा॑त्यु॒क्थमु॒शने॑व वे॒धाश्चि॑कि॒तुषे॑ असु॒र्याऽय मन्म॑

ava sya śūrādhvano nānte'smin no adya savane mandadhyai | śaṃsātyukthamuśaneva vedhāścikituṣe asuryā'ya manma

हिन्दी अर्थ

. (इन्र) है परमेदवर ! (राये) भाष्यात्मिक-घन (मन्व ४७२ की प्राप्ति द्वारा हमे यशस्वी कीजिये । . . स 4 ५ । (बृहत् श्रवः) महाधन को, भराष्यात्मिक महाधन को, (विदवायुः) हमारी

English

That to the Friend gives wings and joy. Thou, Satakratu, drankest this and wast the Vritras’ slayer; thou.

अध्याय २०

श्लोक 77.3

क॒विर्न नि॒ण्यं वि॒दथा॑नि॒ साध॒न् वृषा॒ यत् सेकं॑ विपिपा॒नो अर्चा॑त्।दि॒व इ॒त्था जी॑जनत् स॒प्त का॒रूनह्ना॑ चिच्चक्रुर्व॒युना॑ गृ॒णन्तः॑

kavirna niṇyaṃ vidathāni sādhan vṛṣā yat sekaṃ vipipāno arcāt| diva itthā jījanat sapta kārūnahnā ciccakrurvayunā gṛṇantaḥ

हिन्दी अर्थ

है । (रथिषीः) भौर शरीर-रथ कं रथी जीवात्मा की (ताः) "उनः भरसिद्ध. भ्ाध्यात्मिक (दषः). भ्रभिलाषाों को सफल कीजिये । .. - सर्वगत परमेदवर को ( गीभिः गृणन्तः) वेदवाणियो द्वाराः स्तुतियां करते : हये, (ऊतये) म्रात्मरक्ना्थं (होम) उसका आह्वान करते हँ । ४७७. सृतेडते न्योकसे बद् बहत ण्द्रिः । . (सते-सुते) समय-समय पर भक्तिरस के उत्पन्न होने पर, (न्योकसे)

English

Helpest the warrior in the fray. We strengthen, Satakratu, thee, yea, thee the powerfull in fight,

अध्याय २०

श्लोक 77.4

स्व॑१र्यद् वेदि॑ सु॒दृशी॑कम॒र्कैर्महि॒ ज्योती॑ रुरुचु॒र्यद्ध॒ वस्तोः॑ ।अ॒न्धा तमां॑सि॒ दुधि॑ता वि॒चक्षे॒ नृभ्य॑श्चकार॒ नृत॑मो अ॒भिष्टौ॑

sva1ryad vedi sudṛśīkamarkairmahi jyotī rurucuryaddha vastoḥ | andhā tamāṃsi dudhitā vicakṣe nṛbhyaścakāra nṛtamo abhiṣṭau

हिन्दी अर्थ

, नितरां सब कं निवासभूत, (बृहते) सब से महान् (इन्द्राय ) परमेदवरः कं अर्चैनारूप मे पूर्णतया भेट करता है, बोकर यह परमेदवर ( इत् ) दी. (अरिः) सबकास्वामीहै। न्योकसे नि + ओकस् निवासनाम + चसु्येकवचन (निर० ३।१।२) ।

English

That, Indra, we may win us wealth. To him the mighty stream of wealth, prompt Friend of him who pours the juice,

अध्याय २०

श्लोक 77.5

व॒व॒क्ष इन्द्रो॒ अमि॑तमृजि॒ष्यु॑१भे आ प॑प्रौ॒ रोद॑सी महि॒त्वा।अत॑श्चिदस्य महि॒मा वि रे॑च्य॒भि यो विश्वा॒ भुव॑ना ब॒भूव॑

vavakṣa indro amitamṛjiṣyu1bhe ā paprau rodasī mahitvā| ataścidasya mahimā vi recyabhi yo viśvā bhuvanā babhūva

हिन्दी अर्थ

, है परभेदवर ! (वुषमंण्यवः) सुखवर्षी पापका भनन निदिध्यासन करनेवाले उपासक, (विष्वेषु हि) सब ही (सवनेषु) भक्तिरस के यज्ञो का० २० । सु ७२ भरथवेवेद-भाष्य .. १५७. भे (समानम्) समानलूप मेँ प्रकट होनेवाले, (त्वा एकम्) टक भाप को ज्योतिर्मय आप की (सनिष्यवः) भक्ति चाहनेवाले उपासक, -( १

English

Yea, to this Indra sing your song. O come ye hither, sit ye down: to Indra sing ye forth your song,

अध्याय २०

श्लोक 77.6

विश्वा॑नि श॒क्रो नर्या॑णि वि॒द्वान॒पो रि॑रेच॒ सखि॑भि॒र्निका॑मैः ।अश्मा॑नं चि॒द् ये बि॑भि॒दुर्वचो॑भिर्व्र॒जं गोम॑न्तमु॒शिजो॒ वि व॑व्रुः

viśvāni śakro naryāṇi vidvānapo rireca sakhibhirnikāmaiḥ | aśmānaṃ cid ye bibhidurvacobhirvrajaṃ gomantamuśijo vi vavruḥ

हिन्दी अर्थ

है है परमेश्वर ! (नावं न) नौकाः के समान, (पषंणिम्) भवसागर से पार न . (8 त्वा) उस भ्रापको ही, हम उपासक, (शूषस्य घुरि की धुरामें (धीमहि) स्थापित करते है, भर्थात् आपको ही ५.५4 सुखप्रदाता समते ईह, भरौर दस रूपमे भरापका ध्यान करते. है। तथा का व ; (च है, इसी प्रकार (आयवः) उपासनारत ..

English

Companions, bringing hymns of praise. To him the richest of the rich, the Lord of treasures excellent,

अध्याय २०

श्लोक 77.7

अ॒पो वृ॒त्रं व॑व्रि॒वांसं॒ परा॑ह॒न् प्राव॑त् ते॒ वज्रं॑ पृथि॒वी सचे॑ताः ।प्रार्णां॑सि समु॒द्रिया॑ण्यैनोः॒ पति॒र्भवं॒ छव॑सा शूर धृष्णो

apo vṛtraṃ vavrivāṃsaṃ parāhan prāvat te vajraṃ pṛthivī sacetāḥ | prārṇāṃsi samudriyāṇyainoḥ patirbhavaṃ chavasā śūra dhṛṣṇo

हिन्दी अर्थ

परमेक्वर कां चिन्तनं करते है । ५). "1 . - तुङ्नति = दानकर्मा (निष० २।२०)। स्वः स्वुतः भासा (निर० परभेदवर का मनन करनेवाले ; वृष+-मन्-+-क्यच्-1-उ+ जस् । करनेवाले (मिथुना ) गृहस्थजन, (त्वा) भाप को (वि तस्र ) सतुतियों सुख की प्राप्ति चाहते ह, तब्र॒ आप उन दोनों का (समूहसि) संहार कर त है । भौर न) है भरमेरवर (षणम्). धा तिश

English

Indra, with Soma juice outpoured. May he stand by us in our need and in abundance for our wealth:

अध्याय २०

श्लोक 77.8

अ॒पो यदद्रिं॑ पुरुहूत॒ दर्द॑रा॒विर्भु॑वत् स॒रमा॑ पू॒र्व्यं ते॑ ।स नो॑ ने॒ता वाज॒मा द॑र्षि॒ भूरिं॑ गो॒त्रा रु॒जन्नङ्गि॑रोभिर्गृणा॒नः

apo yadadriṃ puruhūta dardarāvirbhuvat saramā pūrvyaṃ te | sa no netā vājamā darṣi bhūriṃ gotrā rujannaṅgirobhirgṛṇānaḥ

हिन्दी अर्थ

की वर्षा करनेवाले, (वच्जम्) वश्रङप होकर भने पापों का संहार करने- 1. , भरथर्वेवेद-मष्य का० २०।-सूु० ७२ . वाले, तथा ( स॒चामूवम्) अप केसाथ संग करनेवाले, (सवागुवम्)

English

With riches may he come to us; Whose pair of tawny horses yoked in battles foemen challenge not:

अध्याय २०

श्लोक 78.1

तद् वो॑ गाय सु॒ते सचा॑ पुरुहू॒ताय॒ सत्व॑ने ।शं यद् गवे॒ न शा॒किने॑

tad vo gāya sute sacā puruhūtāya satvane | śaṃ yad gave na śākine

हिन्दी अर्थ

च्च; तथा सक्षति गतिकर्मा (निल ० २।१४)। । ‡ भाता इमौमभिः। यदिन इन्त षो इषा षि चिकेतति । (उत उ) तथा परमेहवर (नः) हमारे ( अस्या उषसः) जीवनो के इन उषाकालों को ( जुषेत ) प्रीतिपूरव॑क स्वीकार करता है, मरौर (हवीमभिः)

English

To him, to Indra, sing your song. Nigh to the Soma-drinker come, for his enjoyment, these bright drops,

अध्याय २०

श्लोक 78.2

न घा॒ वसु॒र्नि य॑मते दा॒नं वाज॑स्य॒ गोम॑तः ।यत् सी॒मुप॒ श्रव॒द् गिरः॑

na ghā vasurni yamate dānaṃ vājasya gomataḥ | yat sīmupa śravad giraḥ

हिन्दी अर्थ

हमारी पुकारो के कारण, (हि) निद्चय से, (अकंस्य ) हमारी स्तुतिरयो भौर दर ! भ्राप (मृषः) संग्रामकारी कामादि के (हन्तवे) हनन के लिये, समुचित साधनों को, (चिकेतसि) सम्यक् प्रकार से जानते है (वृषा) (मे भरस्य) मु इस (नवीयसः) नवीन (वेषसः) मेषोवी उपासक की (मन्भ) मननीय-स्तुतियों को (भ्राश्रुषि) पूणंतया सुनिये, (नवीयसः). मुक

English

The Somas mingled with the curd. Thou, grown at once to perfect strength, wast born to drink the

अध्याय २०

श्लोक 78.3

कु॒वित्स॑स्य॒ प्र हि व्र॒जं गोम॑न्तं दस्यु॒हा गम॑त्।शची॑भि॒रप॑ नो वरत्

kuvitsasya pra hi vrajaṃ gomantaṃ dasyuhā gamat| śacībhirapa no varat

हिन्दी अर्थ

. नवीन उपासक की स्तुतियों को भ्रव सुनिये । . (निर० ५।१।४) ! उषसः जीवनः का उषाकाल, जबकि उपासक प्रथम बार उपासनामागं पर पदापंण कर भान्तर-प्रकाश्च पाता है । . का० २० । सु० ७३ भथर्ववेद-माष्य - १९९ (शुर. है पराक्रमी परमेष्र ॥ (दमा). ये (विष्वा सदशी) सब

English

Soma juice, strong Indra, for preeminence. O Indra, lover of the song, may these quick Somas enter thee:

अध्याय २०

श्लोक 79.1

इन्द्र॒ क्रतुं॑ न॒ आ भ॑र पि॒ता पु॒त्रेभ्यो॒ यथा॑ ।शिक्षा॑ णो अ॒स्मिन् पु॑रुहूत॒ याम॑नि जी॒वा ज्योति॑रशीमहि

indra kratuṃ na ā bhara pitā putrebhyo yathā | śikṣā ṇo asmin puruhūta yāmani jīvā jyotiraśīmahi

हिन्दी अर्थ

विद्व के विधाता, धर्ता, तथा पुष्टिदाता है । तिकयीश्रूत (ते) भ्रापकी (महिमानम्) . महिमा को, (नूचित् नु) पुराण. -परमेदवर ! (न) न (ते) आपके -(वीयंम्) सामथ्यं को, भ्रौर (न). न

English

May they bring bliss to thee the Sage. 06. O Lord of Hundred Powers, our chants of praise and lauds have strengthened thee:

अध्याय २०

श्लोक 79.2

मा नो अज्ञा॑ता वृ॒जना॑ दुरा॒ध्यो॒३माशि॑वासो॒ अव॑ क्रमुः ।त्वया॑ व॒यं प्र॒वतः॒ शश्व॑तीर॒पोऽति॑ शूर तरामसि

mā no ajñātā vṛjanā durādhyo3māśivāso ava kramuḥ | tvayā vayaṃ pravataḥ śaśvatīrapo'ti śūra tarāmasi

हिन्दी अर्थ

(राः) एवं भौर सम्पत्ति को ही व्याप सकते है । प म, भ्रौर भरतीत सुष्टर्यो तथा नवीन सुष्टयों में। 1 .. है मनुष्यो ! (वः) तुम्हारी. (मदिवृषे) महावृदध करनेवाले, (मै) १९० = - भयर्ववेद-माष्य का० २०॥। सु०७३

English

So strengthen thee the songs we sing! Indra, whose succour never fails, accept this treasure thousand- fold,

अध्याय २०

श्लोक 80.1

इन्द्र॒ ज्येष्ठं॑ न आ भ॑रं॒ ओजि॑ष्ठं॒ पपु॑रि॒ श्रवः॑ ।येने॒मे चि॑त्र वज्रहस्त॒ रोद॑सी॒ ओभे सु॑शिप्र॒ प्राः

indra jyeṣṭhaṃ na ā bharaṃ ojiṣṭhaṃ papuri śravaḥ | yeneme citra vajrahasta rodasī obhe suśipra prāḥ

हिन्दी अर्थ

योगाभ्यास मेँ परिपूर्णं (विशः) उपासकजनों गै (प्रचर) विन्नरिये, उनके हृदयो मे विचरिये। भ्राप (चर्षणिप्राः) सब मनुष्यो को सुखो से भरपुर दारा इन्दि को विषयों से हरना, हटाना । पूर्वौ =पूवं पूरणे. । (यदो ) जब ( यमस्य ) यमन्नियमों का पालन करनेवाले उपासक

English

Wherein all manly powers abide. O Indra, thou who lovest song, let no man hurt our bodies, keep.

अध्याय २०

श्लोक 80.2

त्वामु॒ग्रमव॑से चर्षणी॒सहं॒ राज॑न् दे॒वेषु॑ हूमहे ।विश्वा॒ सु नो॑ विथु॒रा पि॑ब्द॒ना व॑सो॒ऽमित्रा॑न् सु॒षहा॑न् कृधि

tvāmugramavase carṣaṇīsahaṃ rājan deveṣu hūmahe | viśvā su no vithurā pibdanā vaso'mitrān suṣahān kṛdhi

हिन्दी अर्थ

-स्तोतार्भ्रो की प्रेरणां के अनुसार, (रथं वहतः) उपासक के गरीर-रथ का वहन करने लगते है, (रथ ) तदनन्तर (दत्) ही यह शरीर-रथ (वचनः शक्तियो रौरं (दीघं श्रवसः) दीघंकाल से चली भ्रा महाकीत्ति का (पतिः) होता है । दीघं = भ्नांदिकाल । पवर, (हरिता) हरा-भरा करनेवाली (श्मश्रूणि) सूर्य की किरणों को

English

Slaughter far from us, for thou canst. Thereafter they, as is their wont, threw off the state of babes urborn,

अध्याय २०

श्लोक 81.1

यद् द्याव॑ इन्द्र ते श॒तं श॒तं भूमि॑रु॒त स्युः ।न त्वा॑ वज्रिन्त्स॒हस्रं॒ सूर्या॒ अनु॒ न जा॒तम॑ष्ट॒ रोद॑सी

yad dyāva indra te śataṃ śataṃ bhūmiruta syuḥ | na tvā vajrintsahasraṃ sūryā anu na jātamaṣṭa rodasī

हिन्दी अर्थ

, (भववेति) वर्षा करता है । ओौर भक्तिहीन पापि्यो को (धूनोति) एेसे कम्पा देता ह (यथा) जसे कि (वातः) फंफावात (र्नम् ) समग्रवन को. कम्पा देतीः . "का० २ ह । सु9 ७४ सथवेवेद-भाष्य १९१ ,.

English

Taking their sacrificial name. Thou, Indra, with the Tempest-Gods, the breakers down of what is firm,

अध्याय २०

श्लोक 81.2

आ प॑प्राथ महि॒ना वृष्ण्या॑ वृष॒न् विश्वा॑ शविष्ठ॒ शव॑सा ।अ॒स्मां अ॑व मघव॒न् गोम॑ति व्र॒जे वज्रिं चि॒त्राभि॑रू॒तिभिः॑

ā paprātha mahinā vṛṣṇyā vṛṣan viśvā śaviṣṭha śavasā | asmāṃ ava maghavan gomati vraje vajriṃ citrābhirūtibhiḥ

हिन्दी अर्थ

४८६. यो काचा विवाचो मृध्रवाचः पुरू सदलाधचिवा जषान॑ । (यः) जो परमेदवर, ( वाचा ) निज. वेदवाणी के उपदेशों हारा, सहसरा) हजारों प्रकार की -नानाचिध ( अशिवा ) भररिव-मावनाभों का शक्तिशाली कमं की (गृणीमसि ) हम स्तुतियां करते है, जो परमेश्वर कि (पिता इव ) सांसारिकं पितां के सद्

English

Foundest the kine even in the cave. Worshipping even as they list, singers laud him who findeth wealth,

अध्याय २०

श्लोक 82.1

यदि॑न्द्र॒ याव॑त॒स्त्वमे॒ताव॑द॒हमीशी॑य ।स्तो॒तार॒मिद् दि॑धिषेय रदावसो॒ न पा॑प॒त्वाय॑ रासीय

yadindra yāvatastvametāvadahamīśīya | stotāramid didhiṣeya radāvaso na pāpatvāya rāsīya

हिन्दी अर्थ

सामर्थ्यो को (वाव) बढ़ाता' रहता है । . (सोपाः) भक्तिरसः का पान करते ह, इसलिये हम उपासक ( भ्रनादस्ताः इव.) संसारिक भ्राचंसाभों भ्र्थात् अभिलाषा से रहित-से ( स्मसि हो -चुकरे है श्रौर भ्रापको भक्तिरस समपित कर रहे । (सहलं षु) हनारों (गोपु) इनदरो, गौर हवारो (भचवेषु) मनो के (श्प

English

The far-renowned, the mighty One.

अध्याय २०

श्लोक 82.2

शिक्षे॑य॒मिन्म॑हय॒ते दि॒वेदि॑वे रा॒य आ कु॑हचि॒द्विदे॑ ।न॒हि त्वद॒न्यन्म॑घवन् न॒ आप्यं॒ वस्यो॒ अस्ति॑ पि॒ता च॒न

śikṣeyaminmahayate divedive rāya ā kuhacidvide | nahi tvadanyanmaghavan na āpyaṃ vasyo asti pitā cana

हिन्दी अर्थ

शरधिभितं- बे. । हमारा जीवन सात्विक है, इसलिये हमे पाप उपासना-मागं का आ त् न॑श्र क॑सय गोष्वश्वेषु पुभिषुं सहसेषु तुवीमघ ॥॥ परमेदवर नही, जीवात्मा नहीं, इत्यादि विचाररोवाले नास्तिक, ४९१. खमिन गहैभं यण नुबन्ते पापयामुया ।

English

Then, faring on by Indra’s side, the fearless, let thyself be seen,. Both gracious and in splendour peers.

अध्याय २०

श्लोक 83.1

इन्द्र॑ त्रि॒धातु॑ शर॒णं त्रि॒वरू॑थं स्वस्ति॒मत्।छ॒र्दिर्य॑च्छ म॒घव॑द्भ्यश्च॒ मह्यं॑ च या॒वया॑ दि॒द्युमे॑भ्यः

indra tridhātu śaraṇaṃ trivarūthaṃ svastimat| chardiryaccha maghavadbhyaśca mahyaṃ ca yāvayā didyumebhyaḥ

हिन्दी अर्थ

(इन्द्र) है परमेदवर ! (अमुया) उस ( पापया ) पापमथी मिथ्या- (पापया) पापमयी वृत्ति के साथ, (नुवन्तम्) सांसारिकं भोगों के गीत गाने- बालि (गदंभम्) गदंभ-मनुष्य को (संमूण) विनष्ट कीजिये । (जातू नः०)

English

With Indra’s well-beloved hosts, the blameless, tending heaven- ward, The sacrificer cries aloud.

अध्याय २०

श्लोक 83.2

ये ग॑व्य॒ता मन॑सा॒ शत्रु॑माद॒भुर॑भिप्र॒घ्नन्ति॑ धृष्णु॒या।अघ॑ स्मा नो मघवन्निन्द्र गिर्वणस्तनू॒पा अन्त॑मो भव

ye gavyatā manasā śatrumādabhurabhipraghnanti dhṛṣṇuyā| agha smā no maghavannindra girvaṇastanūpā antamo bhava

हिन्दी अर्थ

भिरो देता है, जसे. कि (वनात् भरधि) जलते हुए वेन से भाती हई (वातः) . जलती-वायु (दरुरम्) दुरस्थ पदार्थो को जला कर (पताति) गिरा देती है । कुण्डणाची = कुडि दाहे +-भञ्च् (गति, व्यवहार)। ४९३. सवै परिकरो ज॑हि जम्भया ककदाशच् 1

English

Come from this place, O wanderer, or downward from the light of heaven! Our songs of praise all yearn for this.

अध्याय २०

श्लोक 84.1

इन्द्रा या॑हि चित्रभानो सु॒ता इ॒मे त्वा॒यवः॑ ।अण्वी॑भि॒स्तना॑ पू॒तासः॑

indrā yāhi citrabhāno sutā ime tvāyavaḥ | aṇvībhistanā pūtāsaḥ

हिन्दी अर्थ

तथा हभारे आन्तरिक (करोंशम्) शोरगुल को ( जहि ) हम से षरे कीजिये । (इन्दर) है परदवर ! (पूरवः) मनुष्यं (पुरः) अपने सामने ही, भर्थात् (विदुः) जान लेते है--(१) (यत्) जब किं जीवनो की (शारदीः) शरत्का-

English

Or Indra we implore for help from here, from heaven above the earth, Or from the spacious firmament.

अध्याय २०

श्लोक 84.2

इन्द्रा या॑हि धि॒येषि॒तो विप्र॑जूतः सु॒ताव॑तः ।उप॒ ब्रह्मा॑णि वा॒घतः॑

indrā yāhi dhiyeṣito viprajūtaḥ sutāvataḥ | upa brahmāṇi vāghataḥ

हिन्दी अर्थ

जीवनो का (भवातिरः) संहार कर. देते है, (सासहानः) सहसा (भरवातिरः) संहार कर देते है; (२) तथा (शवसस्पते इन्द्र) है बलो के पति परमेदवर ! . मनुष्य-समूदाय का ( शासः ) शासन करते ह, उस षर दण्डविषान करते है; .(३) तथा जब ( मन्दसानः ) निज प्रसन्नता मेही भाप ( महीं की इस महा.जलराशि को, तथा . इन क्रियमाण नानाविध कर्म॑कलापों को (भमृष्णाः) प्रलय मेँ मानो चुरा-से लेते है, प्रपने मे लीनं कर लेते है, (दमाः भ्रपः) इन जलो को भ्रपने मे लीन करलेतेहै। जाती है । इसी प्रकार जीवन की शरद्-ऋतु जरावस्था है,जिस की समाप्ति परे जीवन की समाप्ति हो जाती है) भ्रः जलः; कर्म ( निघं० २।१)।

English

Indra the singers with high praise, Indra reciters with their lauds, Indra the choirs have glorified.

अध्याय २०

श्लोक 84.3

इन्द्रा या॑हि॒ तूतु॑जान॒ उप॒ ब्रह्मा॑णि हरिवः ।सु॒ते द॑धिष्व न॒श्चनः॑

indrā yāhi tūtujāna upa brahmāṇi harivaḥ | sute dadhiṣva naścanaḥ

हिन्दी अर्थ

लीयतो यदाविथ । चकं कारमेभ्यः भ एत॑नासु प्रनत । (वृषन्) है आनन्दरसंवर्षी परमेदवर ! (यद्) जब शःप, (उषिजः) है (यद् सखीयतः) भौर जब सखिभरत इन उपासकों कीः ( प्रावि ) रक्षा ..

English

Indra hath ever close to him his two bay steeds and word-yoked car, Indra the golden, Thunder-armed.

अध्याय २०

श्लोक 85.1

मा चि॑द॒न्यद् वि शं॑सत॒ सखा॑यो॒ मा रि॑षण्यत ।इन्द्र॒मित् स्तो॑ता॒ वृष॑णं॒ सचा॑ सु॒ते मुहु॑रु॒क्था च॑ शंसत

mā cidanyad vi śaṃsata sakhāyo mā riṣaṇyata | indramit stotā vṛṣaṇaṃ sacā sute muhurukthā ca śaṃsata

हिन्दी अर्थ

सवत्र चर्चा करते है । (पृतनासु) देवासुर-संग्रामो के उपस्थित हो जने पर का० २० सु9 ७६ प्रथर्ेवेद-भाष्य च. शामा , १९५ (यःवा) जौ नरया नारी उपासक, (न ) मानो ( वने) वनमें (चाकन्) वनी को देखता हृभरा, ( न्यधायि ईदवर-पणिधान करता है, हे नर-नारी उपासको (वाम्) तुम् दोनों का (शुचिः) पवित्र ( स्तोमः) . सामगान, -तन (मुरणौ) भरण-पोषण करनेवलि परमेदवर मे ( अजीगः )

English

Indra hath raisedjthe Sun on high in heaven, that he may see afar: He burst the mountain for the kine.

अध्याय २०

श्लोक 85.2

अ॒व॒क्र॒क्षिणं॑ वृष॒भं य॑था॒जुरं॒ गां न च॑र्षणी॒सह॑म्।वि॒द्वेष॑णं सं॒वन॑नोभयंक॒रं मंहि॑ष्ठमुभया॒विन॑म्

avakrakṣiṇaṃ vṛṣabhaṃ yathājuraṃ gāṃ na carṣaṇīsaham| vidveṣaṇaṃ saṃvananobhayaṃkaraṃ maṃhiṣṭhamubhayāvinam

हिन्दी अर्थ

इत्) जिस ही उपासक का (होता) शक्तिप्रदाता हो जाता है, वह उपासक है, (क्षपावान्) गौर क्षमाशील बन जाता है । हे परमेश्वर ! (अस्याः) भाज की इस ( उषसः ) उषवेलार्मे,या

English

Help us, O Indra, in the frays, yea, frays where thousand spoils are gained, With awful aids, O awful One.

अध्याय २०

श्लोक 85.3

यच्चि॒द्धि त्वा॒ जना॑ इ॒मे नाना॒ हव॑न्त ऊ॒तये॑ ।अ॒स्माकं॒ ब्रह्मे॒दमि॑न्द्र भूतु॒ तेहा॒ विश्वा॑ च॒ वर्ध॑नम्

yacciddhi tvā janā ime nānā havanta ūtaye | asmākaṃ brahmedamindra bhūtu tehā viśvā ca vardhanam

हिन्दी अर्थ

हम सदा वतमान रहें । (भनु ) भाप कै नेतृत्व मेँ रहने के परचात् (त्रिद्योकः) (रतम्) संकड़ों (नृन्) नरनारियों को (श्रा वहतू) सन्मां पर जे चलता है, जैसे कि (कृत्सेन) विद्युत् फी सहायता द्वारा ( रथः ) रथ, संकडों नर- नारियों का वहन करता है । ( यः जो मनुष्य ( ससवान् ) सोया पड़ा (असत्) होता है, उसे भी त्रिरोक सन्मां पर ले चलता है । ससवान् सस्ति स्वपितिकर्मा (नि्ं० ३।२२)। . १९६ प्रथर्वनेद-माष्य का१२०॥। सू० ७६

English

In mighty battle we invoke, Indra, Indra in lesser fight, The friend who bends his bolt at fiends.

अध्याय २०

श्लोक 85.4

वि त॑र्तूर्यन्ते मघवन् विप॒श्चितो॒ऽर्यो विपो॒ जना॑नाम्।उप॑ क्रमस्व पुरु॒रूप॒मा भ॑र॒ वाजं॒ नेदि॑ष्ठमू॒तये॑

vi tartūryante maghavan vipaścito'ryo vipo janānām| upa kramasva pururūpamā bhara vājaṃ nediṣṭhamūtaye

हिन्दी अर्थ

कद् वाहे। अर्वायुषं मा मनीषा आ त्वा ्क्यापुपमं राधो अके; ॥६॥ (इन्द्र) है परमेदवंर ! (ते) राप का( कः) कौनसा ( मदः ) वाणि कै.घर भ्राप.मे (विधाव) विशेषतया प्रकट हो रहा है? बथा

English

Unclose, our manly Hero, thou for ever bounteous, yonder cloud, For us, thou irresistible.

अध्याय २०

श्लोक 86.1

ब्रह्म॑णा ते ब्रह्म॒युजा॑ युनज्मि॒ हरी॒ सखा॑या सध॒माद॑ आ॒शू।स्थि॒रं रथं॑ सु॒खमि॑न्द्राधि॒तिष्ठ॑न् प्रजा॒नन् वि॒द्वां॑ उप॑ याहि॒ सोम॑म्

brahmaṇā te brahmayujā yunajmi harī sakhāyā sadhamāda āśū| sthiraṃ rathaṃ sukhamindrādhitiṣṭhan prajānan vidvāṃ upa yāhi somam

हिन्दी अर्थ

५ पाकी ध्रोर, भौर ( उप ) भ्राप कै समीप, (भ्रमि वाहः) ले जायगी 7 (द्र) है परमेदवर ! ( त्वावतः ) भ्राप को चाहनेवाले ( नृन् ) . होगी ? तथा (कया धिया) किस विचार से आप (चुम्नं करसे) निज उपा- . कमे द्युति प्रकट करते है? (कत् नः). कंन हम नवीन उपासको करै यह भ्राप की युति (भागने) प्राप्त होगी ? ।.( उरुगाय ) ह महाकीत्तिवाले !

English

Still higher, at each strain of mine, thunder-armed Indra’s, praises rise: I find no laud worthy of him.

अध्याय २०

श्लोक 87.1

अध्व॑र्यवोऽरु॒णं दु॒ग्धमं॒शुं जु॒होत॑न वृष॒भाय॑ क्षिती॒नाम्।गौ॒राद् वेदी॑यां अव॒पान॒मिन्द्रो॑ वि॒श्वाहेद् या॑ति सु॒तसो॑ममि॒च्छन्

adhvaryavo'ruṇaṃ dugdhamaṃśuṃ juhotana vṛṣabhāya kṣitīnām| gaurād vedīyāṃ avapānamindro viśvāhed yāti sutasomamicchan

हिन्दी अर्थ

के भीतर निज द्युति प्रकट करेगे, भौर सब के सच्चे मित्र हो जांयगे । ५०१. प्रेर॑य॒ ठरो अथे न पारं ये अस्य का जनिषा इव रमन् । (ये) जो उपासक (अस्य) इस परमेदवर की (कासम्) कामना को ¦ (ग्मन्). पूरा करते है. (इव) नसे कि (जनिषाः) जन्मदाता पिता-पूव कीः

English

Even as the bull drives on the herds, he drives the people with his might, The ruler irresistible:

अध्याय २०

श्लोक 87.2

यद् द॑धि॒षे प्र॒दिवि॒ चार्वन्नं॑ दि॒वेदि॑वे पी॒तिमिद॑स्य वक्षि ।उ॒त हृ॒दोत मन॑सा जुषा॒ण उ॒शन्नि॑न्द्र॒ प्रस्थि॑तान् पाहि॒ सोमा॑न्

yad dadhiṣe pradivi cārvannaṃ divedive pītimidasya vakṣi | uta hṛdota manasā juṣāṇa uśannindra prasthitān pāhi somān

हिन्दी अर्थ

देकर करते है, उन की अभ्य्थंनामौं को भ्राप पूणं करदेतेहै। १ भरं न पारम् जैसे सांसारिकः-धन सांसारिक कष्टो से पार करता . ५०२. मतरे चते घुमित द्रप बौभन्मना। एथिवी काव्येन । प्वंकाल से प्रकट हृभ्रा ( चयौः ) चयुलोक, तथा भ्रापके बल से पूरवंकाल से

English

Indra who rules with single sway men, riches, and the fivefold race. Of those who dwell upon the earth.

अध्याय २०

श्लोक 87.3

ज॒ज्ञा॒नः सोमं॒ सह॑से पपाथ॒ प्र ते॑ मा॒ता म॑हि॒मान॑मुवाच ।एन्द्र॑ पप्राथो॒र्व॑१न्तरि॑क्षं यु॒धा दे॒वेभ्यो॒ वरि॑वश्चकर्थ

jajñānaḥ somaṃ sahase papātha pra te mātā mahimānamuvāca | endra paprāthorva1ntarikṣaṃ yudhā devebhyo varivaścakartha

हिन्दी अर्थ

(ते) भ्राप.ारा.(वराय) -वरण कंरने.योग्यं हौ जांय, तथा भ्राप के (मधूनि) मधुर मानन्दरसों के (.पीतये ) पीने के योग्य ( भवन्तु ) हो -नांय,-- यहं हमारी प्रार्थनाहै। ५०१. आ मध्वो अस्मा असिचमरमतरमिनद्राय पृणेस हि सत्यराधाः । उपासको ने (अस्मै इन्द्राय ) इस परभेदवर के परति, (मध्वः) मधुर

English

For your sake from each side we call Indra away from other men: Ours, and none others’, may he be.

अध्याय २०

श्लोक 87.4

यद् यो॒धया॑ मह॒तो मन्य॑माना॒न् साक्षा॑म॒ तान् बा॒हुभिः॒ शाश॑दानान्।यद् वा॒ नृभि॒र्वृत॑ इन्द्राभि॒युध्या॒स्तं त्वया॒जिं सौ॑श्रव॒सं ज॑येम

yad yodhayā mahato manyamānān sākṣāma tān bāhubhiḥ śāśadānān| yad vā nṛbhirvṛta indrābhiyudhyāstaṃ tvayājiṃ sauśravasaṃ jayema

हिन्दी अर्थ

रूप मेँ सीच दिया है । (हि) क्योंकि (सः) वह् परमेदवर (-सत्यराधाः ). १९८ दन भका कार ११।१ १ अथवेवेद-मास्य का० २० सं° ७७. आसा रथे न पुत॑नाघु तिष्ठ यं भद्रया सुमत्या चोदयासे ॥८॥ , परमेदवर के साथ इसके सखिभाव की प्राप्ति कै लिये, (भरा यतन्ते) पूर्णतया

English

Indra, bring wealth that gives delight, the victor’s ever-conquer- ing wealth, Most excellent, to be our aid;

अध्याय २०

श्लोक 87.5

प्रेन्द्र॑स्य वोचं प्रथ॒मा कृ॒तानि॒ प्र नूत॑ना म॒घवा॒ या च॒कार॑ ।य॒देददे॑वी॒रस॑हिष्ट मा॒या अथा॑भव॒त् केव॑लः॒ सोमो॑ अस्य

prendrasya vocaṃ prathamā kṛtāni pra nūtanā maghavā yā cakāra | yadedadevīrasahiṣṭa māyā athābhavat kevalaḥ somo asya

हिन्दी अर्थ

( भद्रया ). सुखदायिनी गौर कल्याणकारिणी ( सुमत्यां ) कुमति द्वारा, (चोदयासे) प्रेरित करते रहते है, उस १ ( पृतनासु ) देवायुर-संग्रामो मै, भ्राप उसकी सहायतार्थं, ( आ तिष्ठ ) दुढतापूवंक स्थित हूजिये, ( न ) जसे किं रथ-योद्धा यु्धोमे ( रथम् ) भ्रषने.रथको वुढृतापृ्वंक स्थित .. ५०५. आ सत्यो यातु मघव ऋजीषी ्व॑न्त्रस्य इरंय उप॑ नः ॥

English

By means of which we may repel our foes in battle hand to hand. By thee assisted with the car.

अध्याय २०

श्लोक 87.6

तवे॒दं विश्व॑म॒भितः॑ पश॒व्यं॑१ यत् पश्य॑सि॒ चक्ष॑सा॒ सूर्य॑स्य ।गवा॑मसि॒ गोप॑ति॒रेक॑ इन्द्र भक्षी॒महि॑ ते॒ प्रय॑तस्य॒ वस्वः॑

tavedaṃ viśvamabhitaḥ paśavyaṃ1 yat paśyasi cakṣasā sūryasya | gavāmasi gopatireka indra bhakṣīmahi te prayatasya vasvaḥ

हिन्दी अर्थ

भिलाषी, (मघवा) रेदवयंशाली परमेश्वर ( आ यातु.) हमारे हृदयो मेँ , प्रकट हो । ( भरस्य ) इस परमेदवर की ( हरयः ) कामादि की भ्रपहारी- भक्तिरसरूपी भरन्त ( सुषुभ ) हम ने त्यार किया है । ( गृणानः ) गुरुवत् भबितिरस का पान (करते) करताहै। का २०। सू ७७ अथववेवेद-माष्य द १९९

English

Aided by thee, the Thunder-armed, Indra; may we lit up the bolt, And conquer all our foes in fight.

अध्याय २०

श्लोक 87.7

बृह॑स्पते यु॒वमिन्द्र॑श्च॒ वस्वो॑ दि॒व्यस्ये॑शाथे उ॒त पार्थि॑वस्य ।ध॒त्तं र॒यिं स्तु॑व॒ते की॒रये॑ चिद् यू॒यं पा॑त स्व॒स्तिभिः॒ सदा॑ नः

bṛhaspate yuvamindraśca vasvo divyasyeśāthe uta pārthivasya | dhattaṃ rayiṃ stuvate kīraye cid yūyaṃ pāta svastibhiḥ sadā naḥ

हिन्दी अर्थ

डाला है एेसा उपासक, इवः) मानो, ( उशना ) श्रापकी प्राप्ति की उग्र भरभिलाषावाला है, वह ( चिकितुषे ) संज्ञ भौर ( असुर्याय प्रांणिरयो के (शंसति) कथन कर रहा है । उशना = वष्टेः कान्तिकर्मणः । ५०७. कवि निण्यं विदथानि साघन् वृषा यत सेक विपिपानो अची!

English

With thee, O Indra, for ally, with missile-darting heroes may We conquer our embattled foes.

अध्याय २०

श्लोक 88.1

यस्त॒स्तम्भ॒ सह॑सा॒ वि ज्मो अन्ता॒न् बृह॒स्पति॑स्त्रिषध॒स्थो रवे॑ण ।तं प्र॒त्नास॒ ऋष॑यो॒ दीध्या॑नाः पु॒रो विप्रा॑ दधिरे म॒न्द्रजि॑ह्वम्

yastastambha sahasā vi jmo antān bṛhaspatistriṣadhastho raveṇa | taṃ pratnāsa ṛṣayo dīdhyānāḥ puro viprā dadhire mandrajihvam

हिन्दी अर्थ

(विदथानि) वेदों के गुप्त रहस्यो का परिजान (साधन्) देता हरा उपासक, (वृषा) भक्तिरस की वर्षा-करता हुभरा, (यत्) जब, सेकम्) परमेऽवरीय ग्रानन्दरस की वर्षा का ( विपिपानः ) तृष्णापूवंक पान करता है, तब वहं रदिमयों को (जीजनत्) जन्म दिया है, जो सौर-रदिमयां कि ( मह्ना) दिनों को (चक्रुः) पैदा करती है, (चित्) भ्रौर जो मानो ( वयुना ) ज्ञानो का भी (गृणन्तः) उपदेश दे रही होती है । £. (परमेश्वर ने वैदिकज्ञान भी दियाहै, भौर सौरप्रकारा भी, सौर-प्रकाशसे दिनोंका निर्माणहोताहै, भ्रौर वह हमारेज्ञानों काभी हा कि उसी के सामथ्यं हारा, (वस्तोः) दिन की (यद् ह महि ज्योतिः) जो महाज्योति भर्थात् सुयं है वह तथा रात्रि के तारागण (रुरुचुः चमक

English

Mighty is Indra, yea, supreme; greatness becomes the Thunderer!

अध्याय २०

श्लोक 88.2

धु॒नेत॑यः सुप्रके॒तं मद॑न्तो॒ बृह॑स्पते अ॒भि ये न॑स्तत॒स्रे।पृष॑न्तं सृ॒प्रमद॑ब्धमू॒र्वं बृह॑स्पते॒ रक्ष॑तादस्य॒ योनि॑म्

dhunetayaḥ supraketaṃ madanto bṛhaspate abhi ye nastatasre| pṛṣantaṃ sṛpramadabdhamūrvaṃ bṛhaspate rakṣatādasya yonim

हिन्दी अर्थ

। रहे है । भ्रौर ( विचक्षे ) मै विेषरूप मेँ कहता हः भौर देख रहा हुं कि. ५१०. विश्वानि शक्रो नर्याणि बिदवानपो रिरिच सलिभिनिकामिः ॥ (चकार) जगत् की रचना की है ।

English

Wide as the heaven extends his power; Which aideth those to win them sons who come as heroes to the fight,

अध्याय २०

श्लोक 88.3

बृह॑स्पते॒ या प॑र॒मा प॑रा॒वदत॒ आ त॑ ऋत॒स्पृशो॒ नि षे॑दुः ।तुभ्यं॑ खा॒ता अ॑व॒ता अद्रि॑दुग्धा॒ मध्व॑ श्चोतन्त्य॒भितो॑ विर॒प्शम्

bṛhaspate yā paramā parāvadata ā ta ṛtaspṛśo ni ṣeduḥ | tubhyaṃ khātā avatā adridugdhā madhva ścotantyabhito virapśam

हिन्दी अर्थ

रहा है । (मरहित्वां ) निज महिमा से परमेश्वर (उभे रोदसी) चयुलोक भौर भूलोक दोनों मँ - (श्रा पप्रौ) भरपूर हृभरा-हृभा है । (रतः चित्) इस संसार से (अस्य महिमा) इस ईइवर की महिमा (वि रेचि) प्रवाहित हो रही है, (यः) जो परमेश्वर कि (विद्वा भुवना ) सब भुवनो पर ( भरमि बभुव ). विजय पाए हुए हं । १, य" = करती है 1 परमेदवर (निकामैः) भाध्यात्मिकं कामनावाले (सखिभिः) उपासक-सखाों के साथ सदा रहता है, (ये ) जो सखा कि (-वचोभिः ) भ्मपने कथनमात्र से (अदमानं चित्) भविद्या के किलो को मी .( बिभिदुः ). छिन्न-भिन्न कर देते है; भौर जो ( उशिजः.) प्रभु को चाहनैवाले प्रभुके. का० २०। सू ७८ अथर्ववेद-भाष्य. २०१ ।

English

Or singers loving holy thoughts. His belly drinking deepest draughts of Soma like an ocean swells,

अध्याय २०

श्लोक 88.4

बृह॒स्पतिः॑ प्रथ॒मं जाय॑मानो म॒हो ज्योति॑षः पर॒मे व्योऽमन्।स॒प्तास्य॑स्तुविजा॒तो रवे॑ण॒ वि स॒प्तर॑श्मिरधम॒त् तमां॑सि

bṛhaspatiḥ prathamaṃ jāyamāno maho jyotiṣaḥ parame vyo'man| saptāsyastuvijāto raveṇa vi saptaraśmiradhamat tamāṃsi

हिन्दी अर्थ

वाले (वृत्रम्) पापवृत्र का (पराहन् ) हननं किय है । अतः ( पृथिवी समग्र पृथिवीवासी (सचेताः) सचेत होकर ( ते ) भाप के (वच्रम्) दिये रहे है ।. (शूर) है पराक्रमी ! (धृष्णो) है पाप-धषंक ! ( शवसा ) निजं स्वाभाविक शक्ति के कारण आप (पतिः. भवन्) जगत् के पति हृए है । धुख्त) ह बहतो ढारा या बहुत नामं द्वारा पुकारे गए परमेश्वर!

English

Like wide streams from the cope of heaven. Come, Indra, and delight thee with the juice at all the Soma feasts,

अध्याय २०

श्लोक 88.5

स सु॒ष्टुभा॒ स ऋक्व॑ता ग॒णेन॑ व॒लं रु॑रोज फलि॒गं रवे॑ण ।बृह॒स्पति॑रु॒स्रिया॑ हव्य॒सूदः॒ कनि॑क्रद॒द् वाव॑शती॒रुदा॑जत्

sa suṣṭubhā sa ṛkvatā gaṇena valaṃ ruroja phaligaṃ raveṇa | bṛhaspatirusriyā havyasūdaḥ kanikradad vāvaśatīrudājat

हिन्दी अर्थ

कमो के (शरद्रिम्) न विदी्णं होनेवाले पवत को (ददः) विदीणं कर देते, . प्रकट होतीः है । तदनन्तर (सः) वे राप (नः) हमारे ( नेताः ) मागंदर्बी नेता बनते है, भौर (भरि) प्ररत ( वाजम् ) शक्ति ( भ्रा दधि ) समादरं पूवकदेतेै। भौर. ( भरङ्कगिरोभिः ) प्राणाभ्यासिर्यो के हारा ( गृणानः उपदेश देते हृए आपं (गोत्रा) हमारे पापों के गढ़ को (रजन् ) -तोड़-फोड देते है सरमा - वाक (गऽ सं° ४।६।४)। गोतः 1710698)) (भराषटे)। , (सुते) भक्तिरस के उत्पन्न हो जाने पर, है उपासको ! (वः) तुम सब्र (सचा) मिलकर, (पुख्टूताय) बहू द्वारा या बहूत नामों हारा पुकारे.

English

Protector, mighty in thy strength. To Indra pour ye forth the juice, the active gladdening juice, to him

अध्याय २०

श्लोक 88.6

ए॒वा पि॒त्रे वि॒श्वदे॑वाय॒ वृष्णे॑ य॒ज्ञैर्विधेम॒ नम॑सा ह॒विर्भिः॑ ।बृह॑स्पते सुप्र॒जा वी॒रव॑न्तो व॒यं स्या॑म॒ पत॑यो रयी॒णाम्

evā pitre viśvadevāya vṛṣṇe yajñairvidhema namasā havirbhiḥ | bṛhaspate suprajā vīravanto vayaṃ syāma patayo rayīṇām

हिन्दी अर्थ

गाए, ( सत्वने ॥ बलशाली परमेदवर .के लिये, ( तत् ) उस सामानः क्री (गाय) गाया करो, जो सामगान कि (गवे न) गानेवाले के सदश्च (शाकिने) शक्तिशाली परमेदवर को भी प्रसन्न करे । २०२ , भर्ववेद-भाष्य का० २० । सु०७६

English

The gladdening omnific God. 292

अध्याय २०

श्लोक 89.1

अस्ते॑व॒ सु प्र॑त॒रं लाय॒मस्य॒न् भूष॑न्निव॒ प्र भ॑रा॒ स्तोम॑मस्मै ।वा॒चा वि॑प्रास्तरत॒ वाच॑म॒र्यो नि रा॑मय जरितः॒ सोम॒ इन्द्र॑म्

asteva su prataraṃ lāyamasyan bhūṣanniva pra bharā stomamasmai | vācā viprāstarata vācamaryo ni rāmaya jaritaḥ soma indram

हिन्दी अर्थ

( न नियमते ) नियमित नंहीं करता, अर्थात् इन का दान प्रभरूतमात्रामे . बाणियों को (उप) हमारे हृदयो के समीप होकर (वत्) सुन नेता है ।. . शरीर के प्रति, (दस्युहा) क्षयरकारी-पापों का हनन करनेवाला परमेदवर, ॥ । .(शचीभिः) अपने स्वाभाविक कमो दारा ( नः ). हम उपासको के ( भप.

English

O Lord of all men, fair of cheek, rejoice thee in the gladdening buds, Present at these drink-offerings.

अध्याय २०

श्लोक 89.2

दोहे॑न॒ गामुप॑ शिक्षा॒ सखा॑यं॒ प्र बो॑धय जरितर्जा॒रमिन्द्र॑म्।कोशं॒ न पू॒र्णं वसु॑ना॒ न्यृ॑ष्ट॒मा च्या॑वय मघ॒देया॑य॒ शूर॑म्

dohena gāmupa śikṣā sakhāyaṃ pra bodhaya jaritarjāramindram| kośaṃ na pūrṇaṃ vasunā nyṛṣṭamā cyāvaya maghadeyāya śūram

हिन्दी अर्थ

. हि परमेश्वर ! (भरज्ञाता वृजना) भज्ञात-पाप ( नः) हम पर (मा सहायता वारा, वयम् ) हम, ( शश्वतीः ) ला्वत काल से ( प्रवतः ) भ्वाहरूप मं बहते हुए (अपः) कमंगतिरूप. नद को (भ्रति तरामसि) पुणंतया

English

O Indra, stimulate thereto us emulously fain for wealth. And glorious, O most splendid One.

अध्याय २०

श्लोक 89.3

किम॒ङ्ग त्वा॑ मघवन् भो॒जमा॑हुः शिशी॒हि मा॑ शिश॒यं त्वा॑ शृणोमि ।अप्न॑स्वती॒ मम॒ धीर॑स्तु शक्र वसु॒विदं॒ भग॑मि॒न्द्रा भ॑रा नः

kimaṅga tvā maghavan bhojamāhuḥ śiśīhi mā śiśayaṃ tvā śṛṇomi | apnasvatī mama dhīrastu śakra vasuvidaṃ bhagamindrā bharā naḥ

हिन्दी अर्थ

५१८. श्द्रज्यहेन आ भरं ओन्रिषटं पपुरि भवैः । जिस बेद-धवण द्वारा. ज्ञत होता है किभरापनेही ( इमे उभे रोदसी ) किया हमा है -। पपुरि पुर भग्रगमने । सुशिप्र =सु+िपि (रष्मि) +र ५१९. स्वमसे वेषीद राजय दे एने , , =.

English

Give, Indra, wide and lofty fame, wealthy in cattle and in strength, Lasting our life-time, failing not.

अध्याय २०

श्लोक 89.4

त्वां जना॑ ममस॒त्येष्वि॑न्द्र संतस्था॒ना वि ह्व॑यन्ते समी॒के।अत्रा॒ युजं॑ कृणुते॒ यो ह॒विष्मा॒न्नासु॑न्वता स॒ख्यं व॑ष्टि॒ शूरः॑

tvāṃ janā mamasatyeṣvindra saṃtasthānā vi hvayante samīke| atrā yujaṃ kṛṇute yo haviṣmānnāsunvatā sakhyaṃ vaṣṭi śūraḥ

हिन्दी अर्थ

, भ्रथर्वेवेद-माष्य का०२० । सू ८१ जाति पर आपकाही प्रभाव छाया हूभ्राहै। ( वसो ) हि विदववासिन् ! ( नः) हमारे लिये भ्राप ( सुकृधि ) यह सुगमता कर दीजिये किं हम (विथ॒राः) व्यथादायी, (पिन्दनाः) हमारी शक्तयो को पी जाने में दानव- भाप के सेको चुलोक हो, (उत) गौर (शतं भमः) संकटों भरभियां (स्युः)

English

Grant us high fame, O Indra, grant riches bestowing thousands, those Fair fruits of earth borne home in wains.

अध्याय २०

श्लोक 89.5

धनं॒ न स्प॒न्द्रं ब॑हु॒लं यो अ॑स्मै ती॒व्रान्त्सोमां॑ आसु॒नोति॒ प्रय॑स्वान्।तस्मै॒ शत्रू॑न्त्सु॒तुका॑न् प्रा॒तरह्नो॒ नि स्वष्ट्रा॑न् यु॒वति॒ हन्ति॑ वृ॒त्रम्

dhanaṃ na spandraṃ bahulaṃ yo asmai tīvrāntsomāṃ āsunoti prayasvān| tasmai śatrūntsutukān prātarahno ni svaṣṭrān yuvati hanti vṛtram

हिन्दी अर्थ

भूलोक हो, ये सब मिल .करमभी, (त्वा) भ्रापकी विमूताका (भ्रनु भ्रष्ट) भुकाबिला (न) नहीं कर सकते, (न) नहीं कर सक्ते, जवं कि भ्राप (जातम्) विभुरूप मे प्रकट होते है। (महिना ) निज महिमा के कारण, तथा (शवसा) निज स्वाभाविक दाक्ति

English

Praising with songs the praise-worthy who cometh to our aid, we call Indra, the Treasure-Lord of wealth.

अध्याय २०

श्लोक 89.6

यस्मि॑न् व॒यं द॑धि॒मा शंस॒मिन्द्रे॒ यः शि॒श्राय॑ म॒घवा॒ काम॑म॒स्मे।आ॒राच्चि॒त् सन् भ॑यतामस्य॒ शत्रु॒र्न्यऽस्मै द्यु॒म्ना जन्या॑ नमन्ताम्

yasmin vayaṃ dadhimā śaṃsamindre yaḥ śiśrāya maghavā kāmamasme| ārāccit san bhayatāmasya śatrurnya'smai dyumnā janyā namantām

हिन्दी अर्थ

(इन्द्र) है परमेदवर ! (यावतः) जितने एेषवयं के -( त्वम् ) आप भ्र॑धीदवर है, (एतावत्) इतने एेदवयं का (यद्) यदि (ईशीय) मै मधीष्वर . . षेय) धारण-पोषण -करू- । (रदावसो ) है संम्पत्तियो के दाता ! यै म्रापकीः , दी हई सम्पत्ति को ( पापत्वाय पापी को पापकर्मकरनेके लिये .

English

To lofty Indra, dweller by each libation, the pious man Sings forth aloud a strengthening hymn.

अध्याय २०

श्लोक 89.7

आ॒राच्छत्रु॒मप॑ बाधस्व दू॒रमु॒ग्रो यः शम्बः॑ पुरुहूत॒ तेन॑ ।अ॒स्मे धे॑हि॒ यव॑म॒द् गोमदिन्द्र कृ॒धी धियं॑ जरि॒त्रे वाज॑रत्नाम्

ārācchatrumapa bādhasva dūramugro yaḥ śambaḥ puruhūta tena | asme dhehi yavamad gomadindra kṛdhī dhiyaṃ jaritre vājaratnām

हिन्दी अर्थ

इन्द्र ) है परमेहवर ! (त्रिधातु) तीनों लोर्को का धारण करनेवाला, २५६ भयववेद-माष्य का०२० सण कण उपासक को (छदिः) एेसा शरीर-गृह (यच्छ). प्रदान कीजिये, ( त्रिधातु ) धारण-पोषण करनेवाले हों तथा ( त्रिवरूथम् ) जिस केः तीन-षेरे भर्थात् स्थूल शरी र,सूक्ष्म शरीर, कारण शरीर रूपी तीन प्रकार के संतापो से रदित

English

In all libations men with hero spirit urge thee, Universal, One, each seeking several light, each fain to win the light apart.

अध्याय २०

श्लोक 89.8

प्र यम॒न्तर्वृ॑षस॒वासो॒ अग्म॑न् ती॒व्राः सोमा॑ बहु॒लान्ता॑स॒ इन्द्र॑म्।नाह॑ दा॒मानं॑ म॒घवा॒ नि यं॑स॒न् नि सु॑न्व॒ते व॑हति॒ भूरि॑ वा॒मम्

pra yamantarvṛṣasavāso agman tīvrāḥ somā bahulāntāsa indram| nāha dāmānaṃ maghavā ni yaṃsan ni sunvate vahati bhūri vāmam

हिन्दी अर्थ

(दिद्य म्) सब प्रकार के संतापं को (यावय) पृथक् कीजिये। है, (अघ) तदनन्तर ( मघवन् गिर्व॑णः इन्दर ) है देदवयंशाली, तथा वेद- .. वांणियों हारा भजनीय परमेदवर ! श्राप, ( नः ). एेसे हम उपासको के

English

Thee, furthering like a ship, will we set to the chariot pole of strength, As men who win with sacrifices Indra’s thought, men who win

अध्याय २०

श्लोक 89.9

उ॒त प्र॒हामति॑दीवा जयति कृ॒तमि॑व श्व॒घ्नी वि चि॑नोति काले।यो दे॒वका॑मो॒ न धनं॑ रु॒णद्धि॒ समित् तं रा॒यः सृ॑जति स्व॒धाभिः॑

uta prahāmatidīvā jayati kṛtamiva śvaghnī vi cinoti kāle| yo devakāmo na dhanaṃ ruṇaddhi samit taṃ rāyaḥ sṛjati svadhābhiḥ

हिन्दी अर्थ

(तनूपाः) शरीरो के रक्षक हो जाते है भौर (अन्तमः) अधिक समीप तथा प्रकट हूजिये । (दमे ) ये (सुताः) गाप के उपासक पुत्र ( त्वायवः ) भाप . कीः-ही कामनावाले है.1 ये.(तकाः) आप की सन्ताने, (अण्वीमिः उपासनाः धम .की सूक्ष्म दष्टियों दवारा, (पूतासः) पवित्र हो चुकी 1 . का०२० सु० ८५ , भथववेद-माष्य , २०७

English

Indra with their lauds. Couples desirous of thine aid are storming thee, pouring their presents forth to win a stall of

अध्याय २०

श्लोक 89.10

गोभि॑ष्टरे॒माम॑तिं दु॒रेवां॒ यवे॑न वा॒ क्षुधं॑ पुरुहूत॒ विश्वे॑ ।व॒यं राज॑सु प्रथ॒मा धना॒न्यरि॑ष्टासो वृज॒नीभि॑र्जयेम

gobhiṣṭaremāmatiṃ durevāṃ yavena vā kṣudhaṃ puruhūta viśve | vayaṃ rājasu prathamā dhanānyariṣṭāso vṛjanībhirjayema

हिन्दी अर्थ

वरत्) भ्र्ञानमय परदे कोहटादेताहै। १९६. श्र करदः. आ भैर पितो पु्यो वा । प्रर ह = + प्रदान कीजिये, (यथा) जसे (पिता). पिता (पुत्रम्यः)

English

Songs have outpoured themselves to thee, Indra, the strong, the guardian Lord. And raised themselves unsatisfied.

अध्याय २०

श्लोक 89.11

बृह॒स्पति॑र्नः॒ परि॑ पातु प॒श्चादु॒तोत्त॑रस्मा॒दध॑रादघा॒योः ।इन्द्रः॑ पु॒रस्ता॑दु॒त म॑ध्य॒तो नः॒ सखा॒ सखि॑भ्यो॒ वरी॑यः कृणोतु

bṛhaspatirnaḥ pari pātu paścādutottarasmādadharādaghāyoḥ | indraḥ purastāduta madhyato naḥ sakhā sakhibhyo varīyaḥ kṛṇotu

हिन्दी अर्थ

। तो को उपयुक्त शक्ति देता है । ( पुचृत ) है बहत नामो द्वारा स्मरण ॥ -का० २०। सू9 ८6 परथवेमेद-ाम्य ह ९११ किये गए पंरमे्वर ! ( अस्मिन् यामनि ) जीवन की इस घड़ी मेँ ( नः . शिक्ष ) आप हरमे रिक्षा दरीलिये । ताकि (जीवाः) इस वत्तंमान जीवन में

English

Send to us bounty manifold, O Indra, worthy of our wish, For power supreme is only thine.

अध्याय २०

श्लोक 90.1

यो अ॑द्रि॒भित् प्र॑थम॒जा ऋ॒तावा॒ बृह॒स्पति॑राङ्गिर॒सो ह॒विष्मा॑न्।द्वि॒बर्ह॑ज्मा प्राघर्म॒सत् पि॒ता न॒ आ रोद॑सी वृष॒भो रो॑रवीति

yo adribhit prathamajā ṛtāvā bṛhaspatirāṅgiraso haviṣmān| dvibarhajmā prāgharmasat pitā na ā rodasī vṛṣabho roravīti

हिन्दी अर्थ

है । इस लिये (सुतावतः) भक्तिरस से सम्पन्त (वाघतः) उपासना-यज्ञ के ५२८. इन्द्रा यहि तृठंजानः उप॒ व्रह्माणि हरिवः (इन्द्र) है परमेदवर ! भाप (भ्रा याहि) प्रकट हृजिये । . (तूतुजानः)

English

kine, pouring gifts, Indra, seeking thee. When two men seeking spoil or heaven thou bringest face to face in war,

अध्याय २०

श्लोक 90.2

जना॑य चि॒द् य ईव॑ते उ लो॒कं बृह॒स्पति॑र्दे॒वहू॑तौ च॒कार॑ ।घ्नन् वृ॒त्राणि॒ वि पुरो॑ दर्दरीति॒ जयं॒ छत्रूं॑र॒मित्रा॑न् पृ॒त्सु साह॑न्

janāya cid ya īvate u lokaṃ bṛhaspatirdevahūtau cakāra | ghnan vṛtrāṇi vi puro dardarīti jayaṃ chatrūṃramitrān pṛtsu sāhan

हिन्दी अर्थ

स्तुत्ियों के (उप) समीप प्रकट हृजिये । ओर (नः) हमारी (सुते) -सन्तानों किसी को .(विशंसत मा). विशिष्टु-स्तुतियांःन करो, ( मा रिषण्यत ओौर इस प्रकार विनष्ट न होभ्रो ।. ( सुते ) भक्तिरस के आवेश मे, (. सचा ) ही (स्तोत)स्तुतियां करो 1 (च) भौर (भृहुः) बार-बार (उक्था) बदिक-सूक्तौ का (शंसत) प्रलंसारूप मेंउच्चारंण किया करोः।

English

Thou showest Indra, then the bolt thy constant friend, the bull that ever waits on thee, Also this morn may he be well inclined to us, mark at our call our offerings and our song of

अध्याय २०

श्लोक 90.3

बृह॒स्पतिः॒ सम॑जय॒द् वसू॑नि म॒हो व्र॒जान् गोम॑तो दे॒व ए॒षः ।अ॒पः सिषा॑स॒न्त्स्व॑१रप्र॑तीतो॒ बृह॒स्पति॒र्हन्त्य॒मित्र॑म॒र्कैः

bṛhaspatiḥ samajayad vasūni maho vrajān gomato deva eṣaḥ | apaḥ siṣāsantsva1rapratīto bṛhaspatirhantyamitramarkaiḥ

हिन्दी अर्थ

२०८ भ्रथववैद-माष्य का० २० सु० ८५ ५६३०. अवक्रधिणं इषुं यथाजुरं गां न शरषणीसहैम् । . विदरेषणं संबर्ननोष्यकरं म॑दहिष्टपुभया विनम् ॥२॥ बैल जंसे कृषि करते समय मूमि को हल दवारा उखाड देता हैवैसेःदुष्कभियों

English

praise, our call that we may win the light. As thou, O Indra Thunder-armed, wilt, as the Strong One, slay the foe,

अध्याय २०

श्लोक 91.1

इ॒मां धियं॑ स॒प्तशी॑र्ष्णीं पि॒ता न॑ ऋ॒तप्र॑जातां बृह॒तीम॑विन्दत्।तु॒रीयं॑ स्विज्जनयद् वि॒श्वज॑न्यो॒ऽयास्य॑ उ॒क्थमिन्द्रा॑य॒ शं॑सन्

imāṃ dhiyaṃ saptaśīrṣṇīṃ pitā na ṛtaprajātāṃ bṛhatīmavindat| turīyaṃ svijjanayad viśvajanyo'yāsya ukthamindrāya śaṃsan

हिन्दी अर्थ

षणम्) देषभावना्ओं से रहित, ( संवनना ) अनुग्रह्, तथा ( उभयंकरम् ५२९) बार-बार प्रशंसा किया करो । का विनाश करनेवाले,क्षय करनेवाले (क्षिण् हिसायाम्) । तथा “वृषमं यथा जरम्” = गाड़ी मे जुते बेल के सदुश प्रगति देनेवाले .। बढ़ोतरी का (भूतु) वर्णन करनेवाला होता है । ६१३१. बिं व॑हैरयन्ते मधवन्. विपुरचिताऽथो विपो जनानाम् ।

English

Listen, thou to the prayer of me a later sage, hear thou a later sage’s prayer. Never do men attain, O Wonder-worker, thy greatness, Mighty

अध्याय २०

श्लोक 91.2

ऋ॒तं शंस॑न्त ऋ॒जु दीध्या॑ना दि॒वस्पु॒त्रासो॒ असु॑रस्य वी॒राः ।विप्रं॑ प॒दमङ्गि॑रसो॒ दधा॑ना य॒ज्ञस्य॒ धाम॑ प्रथ॒मं म॑नन्त

ṛtaṃ śaṃsanta ṛju dīdhyānā divasputrāso asurasya vīrāḥ | vipraṃ padamaṅgiraso dadhānā yajñasya dhāma prathamaṃ mananta

हिन्दी अर्थ

(दधिषे) तू धारण करता है, (दिवे दिवे) प्रतिदिन (इत्) ही तू(भ्रस्य ) इस , हृदा) मानो भ्रपनी हादिक भावना से, (उत) ओर (मनसा) इच्छापुवक, भव्रितरसों की (पाहि) रक्षा किया कीजिये, अर्थात् आपं की कृपा से हमारे है, जिसे (तारक-विवेकज-ज्ञानः कहते है । यह तारक-विवेकज-ज्ञान योगी

English

Controller’s car Which his two tawny coursers draw, then Indra is the Sovran

अध्याय २०

श्लोक 91.3

हं॒सैरि॑व॒ सखि॑भि॒र्वाव॑दद्भिरश्म॒न्मया॑नि॒ नह॑ना॒ व्यस्य॑न्।बृह॒स्पति॑रभि॒कनि॑क्रद॒द् गा उ॒त प्रास्तौ॒दुच्च॑ वि॒द्वां अ॑गायत्

haṃsairiva sakhibhirvāvadadbhiraśmanmayāni nahanā vyasyan| bṛhaspatirabhikanikradad gā uta prāstauducca vidvāṃ agāyat

हिन्दी अर्थ

को भवसागरसेतरादेताहै। इस तारक-विवेकज-जञान मे सब विषयों का, सब प्रकार से युगपत् ज्ञान हौ जाता.ह। (योगदशंन ३।४९, ५२, ५४; ५३६. जन्नानः सोमं सहसे पपाथ प्र तं माता महिमानमुवाच ।

English

Lord of power whose fame spreads far and wide. With him too is this rain of his that comes like herds: Indra throws drops of moisture on his

अध्याय २०

श्लोक 91.4

अ॒वो द्वाभ्यां॑ प॒र एक॑या॒ गा गुहा॒ तिष्ठ॑न्ती॒रनृ॑तस्य॒ सेतौ॑ ।बृह॒स्पति॒स्तम॑सि॒ ज्योति॑रि॒च्छन्नुदु॒स्रा आक॒र्वि हि ति॒स्र आवः॑

avo dvābhyāṃ para ekayā gā guhā tiṣṭhantīranṛtasya setau | bṛhaspatistamasi jyotiricchannudusrā ākarvi hi tisra āvaḥ

हिन्दी अर्थ

एनद्र॑पप्रा्ोषैशन्तरिंं युधा देवेभ्यो बरिवथकयं ॥३॥ हे परमेश्वरः ! (जज्ञानः) प्रकट हए भाप, जब. ( सहसे ) उपासक के बल तथा साहस की वुद्धि के निमित्त, उस के ( सोमम्. ) भित्तरस कीः माता, (ते) भाप की (महिमानम्) महिमा का (प्र उवाच) कथन, उपासक

English

yellow beard. When the sweet juice is shed he seeks the pleasant place, and stirs the worshipper as the wind

अध्याय २०

श्लोक 91.5

वि॒भिद्या॒ पुरं॑ श॒यथे॒मपा॑चीं॒ निस्त्रीणि॑ सा॒कमु॑द॒धेर॑कृन्तत्।बृह॒स्पति॑रु॒षसं॒ सूर्यं॒ गाम॒र्कं वि॑वेद स्त॒नय॑न्निव॒ द्यौः

vibhidyā puraṃ śayathemapācīṃ nistrīṇi sākamudadherakṛntat| bṛhaspatiruṣasaṃ sūryaṃ gāmarkaṃ viveda stanayanniva dyauḥ

हिन्दी अर्थ

अन्तरिक्ष मेँ (प्राथ) भरपुर हृए-हुए है । भौर भ्राप ही देवासुर-तंगरामों भे, (यषा) असुरो कं साथं भानो युद्ध करके, ( देवेभ्यः ) दिव्य-उपासकों के लिये, (वरिवः) मोक्षघन (चकथं ) प्रकट करते हैँ ।

English

disturbs the wood. We laud and praise his several deeds of valour who, fatherlike,. with power hath made us

अध्याय २०

श्लोक 91.6

इन्द्रो॑ व॒लं र॑क्षि॒तारं॒ दुघा॑नां क॒रेणे॑व॒ वि च॑कर्ता॒ रवे॑ण ।स्वेदा॑ञ्जिभिरा॒शिर॑मि॒च्छमा॒नोऽरो॑दयत् प॒णिमा गा अ॑मुष्णात्

indro valaṃ rakṣitāraṃ dughānāṃ kareṇeva vi cakartā raveṇa | svedāñjibhirāśiramicchamāno'rodayat paṇimā gā amuṣṇāt

हिन्दी अर्थ

चित्तवृत्तिं ने परमेकश्वरीय महिमा का कथन किया है । ॑ (मन्थमानान् ) भ्रपनी शक्तियों के भरभिमानवाले, ( महतः ) महा- शक्तिशाली कामादि के साथ यद् योधय) युद्ध मे, जब भ्रापने हमे भिडा दिया है, तब, बाहुभिः) मानो निज बाहों क दवारा, बलों दारा; (शाशदानान्) हमारा विनाश करते हुए (तान्) उन कामादि का (साक्षाम) हम पराभव कर देते है (यद् वा) अथवा (नुभिः) उपासक-नेताश्रों द्वारा (वृतः) वरण किये गए ( इन्द्र ) है परमेदवर ! जब भ्राप, ( अभियुध्याः ) कामादि पद

English

293 stronger;

अध्याय २०

श्लोक 91.7

स ईं॑ स॒त्येभिः॒ सखि॑भिः शु॒चद्भि॒र्गोधा॑यसं॒ वि ध॑न॒सैर॑दर्दः ।ब्रह्म॑ण॒स्पति॒र्वृष॑भिर्व॒राहै॑र्घ॒र्मस्वे॑देभि॒र्द्रवि॑णं॒ व्याऽनट्

sa īṃ satyebhiḥ sakhibhiḥ śucadbhirgodhāyasaṃ vi dhanasairadardaḥ | brahmaṇaspatirvṛṣabhirvarāhairgharmasvedebhirdraviṇaṃ vyā'naṭ

हिन्दी अर्थ

भ्राजिम् ) उस देवासुर-संप्राम पर ( जयेम ) हम विजय पा लेते है । रौर यदेददेीरसंदिष्ट माया अर्थाभबत् केवलः सोमो अस्य ॥९॥ (मघवा) देदवयंशाली परमेश्वर ने (चकार) किया है । ( यदा इत् ) जब

English

Who with his voice slew many thousand wicked ones who spake in varied manner with contemptuous cries.

अध्याय २०

श्लोक 91.8

ते स॒त्येन॒ मन॑सा॒ गो॑पतिं॒ गा इ॑या॒नास॑ इषणयन्त धी॒भिः ।बृह॒स्पति॑र्मि॒थोअ॑वद्यपेभि॒रुदु॒स्रिया॑ असृजत स्व॒युग्भिः॑

te satyena manasā gopatiṃ gā iyānāsa iṣaṇayanta dhībhiḥ | bṛhaspatirmithoavadyapebhirudusriyā asṛjata svayugbhiḥ

हिन्दी अर्थ

ही परमेवर ने (श्रदेवीः माया) भदिव्य-मायां-नाल का (भ्रसदिष्ट) परा- २१२. भ्रथववेद-माष्य का० २० ।सू० व . भव कर दिया, (भथ) तभी से (सोमः) हमारा भक्तिरस, ( केवलः.) केवल हे परमेकवर ! ( भरभितः) सब भ्रोर, ( इदं विदवम् ) यह सब, जो

English

O Soma-drinker, ever true, utterly hopeless though we be, Do thou, O Indra, give us hope of beauteous horses and of kine,

अध्याय २०

श्लोक 91.9

तं व॒र्धय॑न्तो म॒तिभिः॑ शि॒वाभिः॑ सिं॒हमि॑व॒ नान॑दतं स॒धस्थे॑ ।बृह॒स्पतिं॒ वृष॑णं॒ शूर॑सातौ॒ भरे॑भरे॒ अनु॑ मदेम जि॒ष्णुम्

taṃ vardhayanto matibhiḥ śivābhiḥ siṃhamiva nānadataṃ sadhasthe | bṛhaspatiṃ vṛṣaṇaṃ śūrasātau bharebhare anu madema jiṣṇum

हिन्दी अर्थ

आप ही (पर्यसि) निरीक्षण कर रहे है, गौर जिसे हम उपासक भी, भाप परमेदवर (एकः) भाप भ्रकेले ही (गवाम् ) समग्र भूवनों के ( गोपतिः.) भूवनपति (भसि) ह । है परमेदवर ! (प्रयतस्य) भाप द्वारा दी गई पवित्र

English

In thousands, O most wealthy One. O Lord of strength, whose jaws are strong, great deeds are thine, the powerful:

अध्याय २०

श्लोक 91.10

य॒दा वाज॒मस॑नद् वि॒श्वरू॑प॒मा द्यामरु॑क्ष॒दुत्त॑राणि॒ सद्म॑ ।बृह॒स्पतिं॒ वृष॑णं व॒र्धय॑न्तो॒ नाना॒ सन्तो॒ बिभ्र॑तो॒ ज्योति॑रा॒सा

yadā vājamasanad viśvarūpamā dyāmarukṣaduttarāṇi sadma | bṛhaspatiṃ vṛṣaṇaṃ vardhayanto nānā santo bibhrato jyotirāsā

हिन्दी अर्थ

( मंचवन्-) है ेष्वय॑शालिन् ( विपदिचतः ) मेधावी उपासक, प्रापणीय है, श्रौर श्राप हो ( जनानाम् ) सब जनों भँ ( विपः) . (ऊतये) . हमारी रक्षा के लिये, (पूरुरूपम्) नानारूप (वाजम्) शारीरिक,

English

One who must be lauded, Nor, Indra, thine heroic power and bounty.

अध्याय २०

श्लोक 91.11

स॒त्यमा॒शिषं॑ कृणुता वयो॒धै की॒रिं चि॒द्ध्यव॑थ॒ स्वेभि॒रेवैः॑ ।प॒श्चा मृधो॒ अप॑ भवन्तु॒ विश्वा॒स्तद् रो॑दसी शृणुतं विश्वमि॒न्वे

satyamāśiṣaṃ kṛṇutā vayodhai kīriṃ ciddhyavatha svebhirevaiḥ | paścā mṛdho apa bhavantu viśvāstad rodasī śṛṇutaṃ viśvaminve

हिन्दी अर्थ

करादये । विपः मेधावी (निघ ० ३।१५). । जनानां विपः न्=अर्थात् मनुष्यो . म गाप जसा कोर्द मेघावी नहीं है । लग गई हैँ ।. वे मानो भरव सखा वन कर ( सधमादे ) मेरे भौर भापके इए, (सोमम्) मेरे भक्तिरस के (उपर) समीप (याहि) प्राप्त हृजिये ।

English

Bring to the Wise, the Great who waxeth mighty your offerings and make ready your devotion:

अध्याय २०

श्लोक 91.12

इन्द्रो॑ म॒ह्ना म॑ह॒तो अ॑र्ण॒वस्य॒ वि मू॒र्धान॑मभिनदर्बु॒दस्य॑ ।अह॒न्नहि॒मरि॑णात् सप्त सिन्धू॑न् दे॒वैर्द्या॑वापृथिवी॒ प्राव॑तं नः

indro mahnā mahato arṇavasya vi mūrdhānamabhinadarbudasya | ahannahimariṇāt sapta sindhūn devairdyāvāpṛthivī prāvataṃ naḥ

हिन्दी अर्थ

के प्रति (बषमाय). सुखो की वर्षा करनेवाले परमेश्वर कै परति, (जुहोतन ) २१० भ्रय्ववेद-माष्य का० २० । सु०८७ व्यक्ति से अवपानम् ) उसके हृदय में ्रवतरण कर मक्तिरसपःनको

English

To many clans he goeth, man’s Controller. When, with the Princes, Maghavan, famed of old, comes nigh the thunderbolt of gold and the

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता · Identifier:

Atharva Veda — Chapter 20

अथर्ववेद

संस्कृत संस्करण · Sanskrit Edition:

Imported text; printed edition not recorded

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