दृश्य, गति और थीम की सेटिंग(इस डिवाइस पर सहेजी जाती हैं)
दृश्य मोड
गति
थीम

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च

30 पद-समूह।

च आत्मनः अदृश्यत्वेन
  • और आत्मा के इंद्रियों द्वारा अदृश्य (साक्षी) होने से (श्लोक 12.2)
च किम् करोति
च प्रकृतिम् न पश्यतः
  • और अपने से अलग किसी प्रकृति (संसार) को न देखने वाले ज्ञानी के लिए (श्लोक 18.72)
च भाव-अभावौ कल्पितौ
  • और संसार के होने व न होने को केवल कल्पित जानकर (श्लोक 18.8)
च स्थितौ द्वेषः न
  • और न संसार के बने रहने से कोई चिढ़ या द्वेष होता है (श्लोक 17.7)
चकिताः शरण-अर्थिनः
चतुर्विधे भूतग्रामे
  • चार प्रकार के प्राणि-समूह में (श्लोक 4.5)
चरित-अर्थस्य योगिनः
  • और अपने जीवन के चरम लक्ष्य को पा चुके (कृतकृत्य) योगी के लिए (श्लोक 18.92)
चिति
चित्
चित्तम् मा क्षोभय
  • अपने चित्त को विचलित या अशांत मत करो (श्लोक 15.19)
चित्तवाते समुद्यते
चित्तस्वीकृतवर्जनम्
  • चित्त द्वारा स्वीकार किए गए विधि-निषेध और त्याग (श्लोक 12.5)
चिदाकाशे त्वयि
चिदात्मनः
चिद्रसः अमलः
चिद्रूपः सदा साक्षी असि
  • तुम चैतन्य स्वरूप और सर्वदा साक्षी हो (श्लोक 15.4)
चिद्रूपम्
चिन्तया
  • व्यर्थ की चिंता और मानसिक विकल्पों से ही (श्लोक 11.5)
चिन्तारूपम् भजति
  • एक विचार (चिंतन) का ही रूप धारण कर लेता है (श्लोक 12.7)
चिन्तासहः
  • मन के संकल्प-विकल्प और चिंतन को सहने में असमर्थ हुआ (श्लोक 12.1)
चिन्मय
चिन्मात्र-रूपिणः तव
चिन्मात्रः
  • वह केवल शुद्ध चैतन्य में स्थित होकर (श्लोक 11.8)
चिन्मात्रम् एव अहम्
चिन्मात्रवासनः
  • केवल चैतन्य में निष्ठा रखने वाला (श्लोक 1.17)
चिन्मूर्ते
चिरम् बद्धः
चेष्टमानम्
चेष्टा वृथा
  • शारीरिक चेष्टाएं बिना किसी कर्तापन के निष्प्रयोजन होती हैं (श्लोक 17.9)