Markandeya Purana· Mārkaṇḍeya Purāṇa
8
अध्याय 8 / 90

Adhyaya 8

269 श्लोकभाग 1/2 · श्लोक 1–181WhatsApp

पूर्ण अध्याय पाठ180 श्लोक

श्लोक पर जाएं:

अध्याय ८

श्लोक 1

इति श्रीमार्कण्डेयपुराणे द्रौपदेयोत्पत्तिर्नाम सप्तमो ऽध्यायः अष्टमो ऽध्यायः जैमिनिरुवाच भवद्भिरिदमाख्यातं यथाप्रश्नमनुक्रमात् ।महत् कौतूहलं मे ऽस्ति हरिश्चन्द्र कथां प्रति

iti śrīmārkaṇḍeyapurāṇe draupadeyotpattirnāma saptamo 'dhyāyaḥ aṣṭamo 'dhyāyaḥ jaiminiruvāca bhavadbhiridamākhyātaṃ yathāpraśnamanukramāt / mahat kautūhalaṃ me 'sti hariścandra kathāṃ prati

हिन्दी अर्थ

इन्द्रकी यह बात सुनकर महाराज हरिश्वन्द्रकी प्रसन्नताके लिये महातपस्वी विश्वामित्रने राजकुमार रोहिताश्वको परम रमणीय अयोध्यापुरीमें ला वहाँ राज्य- सिंहासनपर अभिषिक्त कर दिया। देवताओं, मुनियों और सिद्धोंके साथ रोहिताश्वका राज्याभिषेक करके राजासहित सभी बन्धु-बान्धव बहुत प्रसन्न

English

Ye have declared tliia in order according to my questions: great is my cui’iosity regai’ding the story of Haris-c'andra.

अध्याय ८

श्लोक 2

अहो महात्मना तेन प्राप्तं कृच्छ्रमनुत्तमम् ।कच्चित् सुखमनुप्राप्तं तादृगेव द्विजोत्तमाः

aho mahātmanā tena prāptaṃ kṛcchramanuttamam / kaccit sukhamanuprāptaṃ tādṛgeva dvijottamāḥ

हिन्दी अर्थ

हुए। उसके बाद वहाँके सब लोग अपने पुत्र, भृत्य और स्त्रियोंसहित स्वर्गलोकको चले। वे पग-पगपर एक विमानसे दूसरे विमानपर जा पहुँचते थे। विमानोंके सहित यह अनृपम ऐश्वर्य पाकर महाराज हरिश्वन्द्र बहुत प्रसन्न हुए। स्वर्गमें नगरके आकारवाले सुन्दर विमानोंमें, जो परकोटोंसे सुशोभित था,

English

Ah! passing great was the woe incurred by tliat magnanimous king; I trust he obtained a happiness fully commensurate,

अध्याय ८

श्लोक 3

पक्षिण ऊचुः विश्वामित्रवचः श्रुत्वा स राजा प्रययौ शनैः ।शैव्ययानुगतो दुः खी भार्यया बलापुत्रया

pakṣiṇa ūcuḥ viśvāmitravacaḥ śrutvā sa rājā prayayau śanaiḥ / śaivyayānugato duḥ khī bhāryayā balāputrayā

हिन्दी अर्थ

महाराज हरिश्वन्द्र विराजमान हुए। उनकी यह समृद्धि देखकर सब शास्त्रोंका तत्त्व जाननेवाले हैत्याचार्य महाभाग शुक्रने इस प्रकार उनका यशोगान किया --'अहो! क्षमाका कैसा माहात्म्य है। दानका कितना महान् फल है, जिससे हरिश्वन्द्र अमरावतीपुरीमें आये और इन्द्रपदको प्राप्त हुए।'

English

Hearing Visvamitra’s speech, the king' moved on slowly, full of sorrow, followed by his wife S^aivya with her young boy.

अध्याय ८

श्लोक 4

स गत्वा वसुधापालो दिव्यां वाराणसीं पुरीम् ।नैषा मनुष्यभोग्येति शूलपाणेः परिग्रहः

sa gatvā vasudhāpālo divyāṃ vārāṇasīṃ purīm / naiṣā manuṣyabhogyeti śūlapāṇeḥ parigrahaḥ

हिन्दी अर्थ

पक्षीगण कहते हैं--जैमिनिजी! राजा हरिकश्वन्द्रका यह सारा चरित्र मैंने आपसे वर्णन किया। दु:खमें पड़ा हुआ जो मनुष्य इसका श्रवण करता है, वह महान् सुख पाता है। इसके श्रवणसे पुत्रार्थीको पुत्र, सुखार्थीको सुख, स्त्रीकी इच्छा रखनेवालेको स्त्री और राज्यकी कामनावालेको राज्यकी प्राप्ति होती है।

English

The king having reached the divine city* of Benares — the choice of S'iva who pronouncsd that it was not to be enjoyed

अध्याय ८

श्लोक 5

जगाम पद्भ्यां दुः खार्तः सह पत्न्यानुकूलया ।पुरीप्रवेशे ददृशे विश्वामित्रमुपस्थितम्

jagāma padbhyāṃ duḥ khārtaḥ saha patnyānukūlayā / purīpraveśe dadṛśe viśvāmitramupasthitam

हिन्दी अर्थ

उसकी संग्राममें विजय होती है और वह कभी नरकमें नहीं पड़ता।

English

present. Seeing he had already arrived, Hari.S"c'andra bowed reverently and, joining his hands respectfully, addressed the

अध्याय ८

श्लोक 6

तं दृष्ट्वा समनुप्राप्तं विनयावनतो ऽभवत् ।प्राह चैवाञ्जलिं कृत्वा हरिश्चन्द्रो महामुनिम्

taṃ dṛṣṭvā samanuprāptaṃ vinayāvanato 'bhavat / prāha caivāñjaliṃ kṛtvā hariścandro mahāmunim

हिन्दी अर्थ

दातव्यं विप्रमुख्येभ्यो ये चान्ये कृशवृत्तय: । रक्ष्या भीता: सदा युद्ध कर्तव्यं

English

present. Seeing he had already arrived, Hari.S"c'andra bowed reverently and, joining his hands respectfully, addressed the

अध्याय ८

श्लोक 7

इमे प्राणाः सुतश्चायमियं पत्नी मुने ! मम ।येन ते कृत्यमस्त्याशु तद्गृहाणार्घ्यमुत्तमम्

ime prāṇāḥ sutaścāyamiyaṃ patnī mune ! mama / yena te kṛtyamastyāśu tadgṛhāṇārghyamuttamam

हिन्दी अर्थ

नात: परतरं धर्म वदन्ति पुरुषस्य तु । यादृशं पुरुषव्याप्र स्वसत्यपरिपालनम् ।।

English

great Muni: — " Here is my life, and this is my son, and this is my wife, 0 Muni! Take that as the choicest arghya offering

अध्याय ८

श्लोक 8

यद्वान्यत् कार्यमस्माभिस्तदनुज्ञातुमर्हसि

yadvānyat kāryamasmābhistadanujñātumarhasi

हिन्दी अर्थ

वाक्यमकारणम् ।। सत्यमत्यन्तमुदितं धर्मशास्त्रेषु धीमताम् तारणायानृतं तद्बत् पातनायाकृतात्मनाम् ।।

English

with which thou shouldst quickly deal. Whatever else "ftc should do, deign to excuse that."

अध्याय ८

श्लोक 9

विश्वामित्र उवाच पूर्णः स मासो राजर्षे दीयतां मम दक्षिणा ।राजसूयनिमित्तं हि स्मर्यते स्ववचो यदि

viśvāmitra uvāca pūrṇaḥ sa māso rājarṣe dīyatāṃ mama dakṣiṇā / rājasūyanimittaṃ hi smaryate svavaco yadi

हिन्दी अर्थ

सत्येनार्क: प्रतपति सत्ये तिष्ठति मेदिनी । सत्य चोक्तं परो धर्म: स्वर्ग: सत्ये प्रतिष्ठित: ।।

English

" Gone is the month, 0 Rajarshi!; let my fee be given me, if thy word regarding the Raja-suya sacrifice be remembered.^’

अध्याय ८

श्लोक 10

हरिश्चन्द्र उवाच ब्राह्मन्नद्यैव सम्पूर्णो मासो ऽम्लानतपोधन ।तिष्ठत्येतद् दनार्धं यत्तत् प्रतीक्षस्व माचिरम्

hariścandra uvāca brāhmannadyaiva sampūrṇo māso 'mlānatapodhana / tiṣṭhatyetad danārdhaṃ yattat pratīkṣasva māciram

हिन्दी अर्थ

देवराजाननुज्ञातः स्वामिना श्वपचेन वै । अगत्वा निष्कृतिं तस्य नारोक्ष्येडहं सुरालयम् ।।

English

" 0 brahman, rich in fadeless austerities! to-day the month will, in truth, be completed: await this half-day which remains, hut not long."

अध्याय ८

श्लोक 11

विश्वामित्र उवाच एवमस्तु महाराज आगमिष्याम्यहं पुनः ।शापं तव प्रदास्यामि न चेदद्य प्रदास्यसि

viśvāmitra uvāca evamastu mahārāja āgamiṣyāmyahaṃ punaḥ / śāpaṃ tava pradāsyāmi na cedadya pradāsyasi

हिन्दी अर्थ

देवराज नमस्तुभ्यं वाक्‍्यं चैतन्निबोध मे । प्रसादसुमुखं यत् त्वां ब्रवीमि प्रश्नयान्वित: ।। मच्छोकमग्नमनस: कोसलानगरे जना: । तिष्ठन्ति तानपोह्याद्य कथं यास्याम्यहं दिवम् ।। ब्रह्महत्या गुरोर्घातो गोवधः स्त्रीवधस्तथा । तुल्यमेभिमहापापं भक्तत्यागे5प्युदाह्मतम् ।।

English

"Bo it so, Maharaja! I will come again: unless to-day thou shall make the gift, I will pronounce a curse on thee."

अध्याय ८

श्लोक 12

पक्षिण ऊचुः इत्युक्त्वा प्रययौ विप्रो राजा चाचिन्तयत् तदा ।कथमस्मै प्रदास्यामि दक्षिणा या प्रतिश्रुता

pakṣiṇa ūcuḥ ityuktvā prayayau vipro rājā cācintayat tadā / kathamasmai pradāsyāmi dakṣiṇā yā pratiśrutā

हिन्दी अर्थ

बहूनि पुण्यपापानि तेषां भिन्नानि वै पृथक् कथं सड़घातभोग्य॑ त्वं भूय:

English

Thus having spoken the brahman departed: and the Raja then took thought — " Plow shall I give him the fee which has

अध्याय ८

श्लोक 13

कुतः पुष्टानि मित्राणि कुतोर्ऽथः साम्प्रतं मम ।प्रतिग्रहः प्रदुष्टो मे नाहं यायामधः कथम्

kutaḥ puṣṭāni mitrāṇi kutor'thaḥ sāmprataṃ mama / pratigrahaḥ praduṣṭo me nāhaṃ yāyāmadhaḥ katham

हिन्दी अर्थ

शक्र भुड्क्ते नृपो राज्यं प्रभावेण कुटुम्बिनाम्ू यजते च महायज्ञैः कर्म पौर्त करोति च ।। तच्च तेषां प्रभावेण मया सर्वमनुष्ठितम् उपकर्त्तुन् न सन्त्यक्ष्ये तानहं स्वर्गलिप्सया ।। तस्माद् यन्मम देवेश किज्चिदस्ति सुचेष्टितम् दत्तमिष्टमथो जप्तं सामान्यं तैस्तदस्तु

English

been promised P Whence can [ find powerful friends? Whence can £ get wealth at this moment? BlamewoiPhy is

अध्याय ८

श्लोक 14

किमु प्राणान् विमुञ्चामि कां दिशं याम्यकिञ्चनः ।यदि नाशं गमिष्यामि अप्रदाय प्रतिश्रुतम्

kimu prāṇān vimuñcāmi kāṃ diśaṃ yāmyakiñcanaḥ / yadi nāśaṃ gamiṣyāmi apradāya pratiśrutam

हिन्दी अर्थ

पिता-पुत्र-संवादका आरम्भ, जीवकी मृत्यु तथा नरक-गतिका वर्णन

English

my present: how can I escape going doYmward? How much more am 1 abandoning life! To what region shall I, who am nothing, go, if! perish without having performed my promise?

अध्याय ८

श्लोक 15

ब्रह्मस्वहृत्कृमिः पापो भविष्याम्यधमाधमः ।अथवा प्रेष्यतां यास्ये वरमेवात्मविक्रयः

brahmasvahṛtkṛmiḥ pāpo bhaviṣyāmyadhamādhamaḥ / athavā preṣyatāṃ yāsye varamevātmavikrayaḥ

हिन्दी अर्थ

जैमिनिने पूछा--श्रेष्ठ पक्षियो! प्राणियोंकी उत्पत्ति और लय कहाँ होते हैं? इस विषयमें मुझे सन्देह है। मेरे प्रश्के अनुसार आपलोग इसका समाधान करें। जीव कैसे जन्म लेता है? कैसे मरता है? और किस प्रकार गर्भमें पीड़ा सहकर माताके उदरमें निवास करता है? फिर गर्भसे बाहर निकलनेपर वह किस प्रकार

English

I sliall become a robber of brahmans, a worip, a wicked man, let me sell myself."

अध्याय ८

श्लोक 16

पक्षिण ऊचुः राजानं व्याकुलं दीनं चिन्तयानमधोमुखम् ।प्रत्युवाच तदा पत्नी बाष्पगद्गदया गिरा

pakṣiṇa ūcuḥ rājānaṃ vyākulaṃ dīnaṃ cintayānamadhomukham / pratyuvāca tadā patnī bāṣpagadgadayā girā

हिन्दी अर्थ

बुद्धिको प्राप्त होता है? और मृत्युकालमें किस तरह चैतन्यस्वरूपके द्वारा शरीरसे विलग होता है। सभी प्राणी मृत्युके पश्चात् पुण्य और पाप दोनोंका फल भोगते हैं; किन्तु वे पुण्य और पाप किस प्रकार अपना फल देते हैं? ये सारी बातें मुझे बताइये, जिससे मेरा सब सन्देह दूर हो जाय।

English

Then his wife in words broken with weeping answered the king, who was distressed, dejected, anxious, with downcast

अध्याय ८

श्लोक 17

त्यज चिन्तां महारजा स्वसत्यमनुपालय ।श्मशानवद् वर्जनीयो नरः सत्यबहिष्कृतः

tyaja cintāṃ mahārajā svasatyamanupālaya / śmaśānavad varjanīyo naraḥ satyabahiṣkṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

पक्षी बोले--महर्षे! आपने हमलोगोंपर बहुत बड़े प्रश्नचका भार रख दिया। इसकी कहीं तुलना नहीं है। महाभाग! इस विषयमें एक प्राचीन वृत्तान्त सुनिये। पूर्वकालमें एक परम बुद्धिमान् भृगुवंशी ब्राह्मण थे। उनके सुमति नामका एक पुत्र था। वह बड़ा ही शान्त और जड़रूपमें रहनेवाला था। उपनयन-संस्कार हो

English

face — " Leave oif care, 0 Maharaja; preserve thy truthfulness; a man destitute of truth should be avoided like a burning-

अध्याय ८

श्लोक 18

नातः परतरं धर्मं वदन्ति पुरुषस्य तु ।यादृशं पुरुषव्याघ्र स्वसत्यपरिपालनम्

nātaḥ parataraṃ dharmaṃ vadanti puruṣasya tu / yādṛśaṃ puruṣavyāghra svasatyaparipālanam

हिन्दी अर्थ

जानेके बाद उस बालकसे उसके पिताने कहा--'सुमते! तुम सभी वेदोंको क्रमश: आद्योपान्त पढ़ो, गुरुकी सेवामें लगे रहो और भिक्षाके अन्नका भोजन किया करो। इस प्रकार ब्रह्मचर्यकी अवधि पूरी करके गृहस्थाश्रममें प्रवेश करो और वहाँ उत्तम-उत्तम यज्ञोंका अनुष्ठान करके अपने मनके अनुरूप सन्तान

English

ground. There is no higher righteousness, they say, for a man than this, namely, maintaining his truthfulness, 0 noble

अध्याय ८

श्लोक 19

अग्निहोत्रमधीतं वा दानाद्याश्चाखिलाः क्रियाः ।भजन्ते तस्य वैफल्यं यस्य वाक्यमकारणम्

agnihotramadhītaṃ vā dānādyāścākhilāḥ kriyāḥ / bhajante tasya vaiphalyaṃ yasya vākyamakāraṇam

हिन्दी अर्थ

उत्पन्न करो। तदनन्तर वनकी शरण लो और वानप्रस्थके नियमोंका पालन करनेके पश्चात् परिग्रहरहित, सर्वस्वत्यागी संन्‍न्यासी हो जाओ। ऐसा करनेसे तुम्हें उस ब्रह्मकी प्राप्ति होगी, जहाँ जाकर तुम शोकसे मुक्त हो जाओगे।'

English

man! Oblations to consecrated fire, or study, or the whole circle of good deeds, such as liberality, &c., are fruitless in

अध्याय ८

श्लोक 20

सत्यमत्यन्तमुदितं धर्मशास्त्रेषु धीमताम् ।तारणायानृतं तद्वत् पातनायाकृतात्मनाम्

satyamatyantamuditaṃ dharmaśāstreṣu dhīmatām / tāraṇāyānṛtaṃ tadvat pātanāyākṛtātmanām

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार अनेकों बार कहनेपर भी सुमति जड़ होनेके कारण कुछ भी नहीं बोलता था। पिता भी स्नेहवश बारंबार अनेक प्रकारसे ये बातें उसके सामने रखते थे। उन्होंने पुत्रप्रेमके कारण मीठी वाणीमें अनेक बार उसे लोभ दिखाया। इस प्रकार उनके बार-बार कहनेपर एक दिन सुमतिने हँसकर कहा--'पिताजी!

English

him who speaks at random. Truthfulness is constantly declared in the Dharma-sastras to tend to the salvation of men of understanding; and falsehood to the overthrow of 'men of

अध्याय ८

श्लोक 21

सप्ताश्वमेधानाहृत्य राजसूयं च पार्थिवः ।कृतिर्नाम च्युतः स्वर्गादसत्यवचनात् सकृत्

saptāśvamedhānāhṛtya rājasūyaṃ ca pārthivaḥ / kṛtirnāma cyutaḥ svargādasatyavacanāt sakṛt

हिन्दी अर्थ

आज आप जो उपदेश दे रहे हैं, उसका मैंने बहुत बार अभ्यास किया है। इसी प्रकार दूसरे-दूसरे शास्त्रों और भाँति-भाँतिकी शिल्पकलाओंका भी सेवन किया है। इस समय मुझे अपने दस हजारसे भी अधिक जन्म स्मरण हो आये हैं। खेद, सन्तोष, क्षय, वृद्धि और उदयका भी मैंने बहुत अनुभव किया है। शत्रु, मित्र और

English

uneducated minds. A king named Kriti, after offering seven horse-sacrifices and a Raja-sfiya sacrifice, fell forthwith from

अध्याय ८

श्लोक 22

राजन् जातमपत्यं मे इत्युक्त्वा प्ररुरोद ह ।बाष्पाम्बुप्लुतनेत्रान्तामुवाचेदं महीपतिः

rājan jātamapatyaṃ me ityuktvā praruroda ha / bāṣpāmbuplutanetrāntāmuvācedaṃ mahīpatiḥ

हिन्दी अर्थ

पत्नीके संयोग-वियोग भी मुझे देखनेको मिले हैं। अनेक प्रकारके माता-पिताके भी दर्शन हुए हैं। मैंने हजारों बार सुख और दु:ख भोगे हैं। कितनी ही स्त्रियोंके विष्ठा और मूत्रसे भरे हुए गर्भमें निवास किया है। सहस्रों प्रकारके रोगोंकी भयानक पीड़ाएँ सहन की हैं। गर्भावस्‍थामें मैंने जो अनेकों प्रकारके दुःख भोगे

English

Bvarga for falsehood. 0 king, I have given birth to a child—’

अध्याय ८

श्लोक 23

हरिश्चन्द्र उवाच विमुञ्च भद्रे सन्तापमयं तिष्ठति बालकः ।उच्यतां वक्तुकामासि यद्वा त्वं गजगामिनि

hariścandra uvāca vimuñca bhadre santāpamayaṃ tiṣṭhati bālakaḥ / ucyatāṃ vaktukāmāsi yadvā tvaṃ gajagāmini

हिन्दी अर्थ

हैं, बचपन, जवानी और बुढ़ापेमें भी जो क्लेश सहन किये हैं, वे सब मुझे याद आ रहे हैं। ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्रोंकी योनियोंमें, फिर पशु, मृग, कीट और पक्षियोंकी योनियोंमें तथा राजसेवकों एवं युद्धमें पराक्रम दिखानेवाले राजाओंके घरोंमें भी मेरे कई बार जन्म हो चुके हैं। इसी तरह अबकी बार

English

" Cease, lady, thy agitation; here stands thy boy; pray, speak what thou desirest to say, 0 thou who art graceful in thy gait!"

अध्याय ८

श्लोक 24

पत्न्युवाच राजन् जातमपत्यं मे सतां पुत्रफलाः स्त्रियः ।स मां प्रदाय वित्तेन देहि विप्राय दक्षिणाम्

patnyuvāca rājan jātamapatyaṃ me satāṃ putraphalāḥ striyaḥ / sa māṃ pradāya vittena dehi viprāya dakṣiṇām

हिन्दी अर्थ

आपके घरमें भी मैंने जन्म लिया है। मैं बहुत बार मनुष्योंका भृत्य, दास, स्वामी, ईश्वर और दरिद्र रह चुका हूँ। दूसरोंने मुझे और मैंने दूसरोंको अनेक बार दान दिये हैं। पिता, माता, सुहृद, भाई और स्त्री इत्यादिके कारण कई बार संतुष्ट हुआ हूँ और कई बार दीन हो-होकर रोते हुए मुझे आँसुओंसे मुँह धोना पड़ा है।

English

" 0 king, I have given birth to a child: the wives of good men bear fruit in their sons. Do thou therefore, being such a man, give me in exchange for wealth, and pay the brahman

अध्याय ८

श्लोक 25

पक्षिण ऊचुः एतद्वाक्यमुपश्रुत्य ययौ मोहं महीपतिः ।प्रतिलभ्य च संज्ञां स विललापातिदुः खितः

pakṣiṇa ūcuḥ etadvākyamupaśrutya yayau mohaṃ mahīpatiḥ / pratilabhya ca saṃjñāṃ sa vilalāpātiduḥ khitaḥ

हिन्दी अर्थ

पिताजी! यों ही इस संसार-चक्रमें भटकते हुए मैंने अब वह ज्ञान प्राप्त किया है, जो मोक्षकी प्राप्ति करानेवाला है। उस ज्ञानको प्राप्त कर लेनेपर अब यह ऋक्, यजु और सामवेदोक्त समस्त क्रिया-कलाप गुणशून्य दिखायी देनेके कारण मुझे अच्छा नहीं लगता। अत: जब ज्ञान प्राप्त हो गया तब वेदोंसे मुझे क्या प्रयोजन

English

Hearing this proposal, the king lost his senses; and on re-

अध्याय ८

श्लोक 26

महद्दुः खमिदं भद्रे यत् त्वमेवं ब्रवीषि माम् ।किं तव स्मितसंलापा मम पापस्य विस्मृताः

mahadduḥ khamidaṃ bhadre yat tvamevaṃ bravīṣi mām / kiṃ tava smitasaṃlāpā mama pāpasya vismṛtāḥ

हिन्दी अर्थ

है। अब तो मैं गुरु-विज्ञानसे परितृप्त, निरीह एवं सदात्मा हूँ। अतः छ: प्रकारके भावविकार (जन्म, सत्ता, वृद्धि, परिणाम, क्षय और नाश), दुःख, सुख, हर्ष, राग तथा सम्पूर्ण गुणोंसे वर्जित उस परमपदरूप ब्रह्मको प्राप्त होऊँगा। पिताजी! जो राग, हर्ष, भय, उद्धेग, क्रोध, अमर्ष और वृद्धावस्थासे व्याप्त है तथा कुत्ते,

English

gaining consciousness lamented, sorely grieved: — " Dire is this grief, 0 lady, that thou thus raentionest to me: is thy joyous

अध्याय ८

श्लोक 27

हा हा कथं त्वया शक्यं वक्तुमेतत् शुचिस्मिते ।दुर्वाच्यमेतद्वचनं कर्तुं शक्नोम्यहं कथम्

hā hā kathaṃ tvayā śakyaṃ vaktumetat śucismite / durvācyametadvacanaṃ kartuṃ śaknomyahaṃ katham

हिन्दी अर्थ

मृग आदिकी योनिमें बाँधनेवाले सैकड़ों बन्धनोंसे युक्त है, उस दुःखकी परम्पराका परित्याग करके अब मैं चला जाऊँगा।'

English

intercourse with me, wretch that I am, forgotten? Ah! alas! how couldest thou suggest this, 0 sweet-smiler. Repugnant

अध्याय ८

श्लोक 28

इत्युक्त्वा स नरश्रेष्ठो धिग्धिगित्यसकृद् ब्रुवन् ।निपपात महीपृष्ठे मूर्च्छयाभिपरिप्लुतः

ityuktvā sa naraśreṣṭho dhigdhigityasakṛd bruvan / nipapāta mahīpṛṣṭhe mūrcchayābhipariplutaḥ

हिन्दी अर्थ

पुत्रकी यह बात सुनकर महाभाग पिताका हृदय प्रसन्नतासे भर गया। उन्होंने हर्ष और विस्मयसे गद्गदवाणीमें अपने पुत्रसे कहा--“बेटा! तुम यह क्या कहते हो? तुम्हें कहाँसे ज्ञान प्राप्त हो गया? पहले तुममें जड़ता क्यों थी और इस समय ज्ञान कहाँसे जग उठा? क्या यह मुनियों अथवा देवताओंके दिये हुए

English

is this plan: how can 1 execute it?" Thus having spoken,

अध्याय ८

श्लोक 29

शयानं भुवि तं दृष्ट्वा हरिश्चन्द्रं महीपतिम् ।उवाचेदं सकरुणं राजपत्नी सुदुः खिता

śayānaṃ bhuvi taṃ dṛṣṭvā hariścandraṃ mahīpatim / uvācedaṃ sakaruṇaṃ rājapatnī suduḥ khitā

हिन्दी अर्थ

शापका विकार था, जिससे पहले तुम्हारा ज्ञान छिप गया था और इस समय पुनः प्रकट हो गया? मैं यह सारा रहस्य सुनना चाहता हूँ। इसके लिये मेरे मनमें बड़ा कौतूहल है। बेटा! तुमपर पहले जो कुछ बीत चुका है, वह सब मुझे

English

ground overwhelmed by faintness. Seeing the king Hari^- c'andra prostrate on the earth, the queen full of sorrow, uttered these piteous words: —

अध्याय ८

श्लोक 30

पत्न्युवाच हा महारजा कस्येदमपध्यानमुपस्थितम् ।यत् त्वं निपतितो भूमौ राङ्कवास्तरणोचितः

patnyuvāca hā mahārajā kasyedamapadhyānamupasthitam / yat tvaṃ nipatito bhūmau rāṅkavāstaraṇocitaḥ

हिन्दी अर्थ

पुत्रने कहा--पिताजी! मेरा जो यह सुख और दु:ख देनेवाला पूर्व वृत्तान्त है, उसे सुनिये। इस जन्मके पहले पूर्वजन्ममें मैं जो कुछ था, वह सब बताता हूँ। पूर्वकालमें मैं परमात्माके ध्यानमें मन लगानेवाला एक ब्राह्मण था। आत्मविद्याके विचारमें मैं पराकाष्ठाको पहुँचा हुआ था। मैं सदा योगसाधनमें

English

" Alas! Maharaja! from whom has come this evil thought, that thou, who art accustomed to coverings made of the hair

अध्याय ८

श्लोक 31

येन कोट्यग्रगोवित्तं विप्राणामपवर्जितम् ।स एष पृथिवीनाथो भूमौ स्वपिति मे पतिः

yena koṭyagragovittaṃ viprāṇāmapavarjitam / sa eṣa pṛthivīnātho bhūmau svapiti me patiḥ

हिन्दी अर्थ

संलग्न रहता था। निरन्तर अभ्यासमें लगने, सत्पुरुषोंका सड़ करने, अपने स्वभावसे ही विचारपरायण होने, तत्त्वमसि आदि महावाक्योंके विचारने और तत्पदार्थंके शोधन करने आदिके कारण उस परमात्मतत्त्वमें ही मेरी परम प्रीति हो गयी। फिर मैं शिष्योंके सन्देहका निवारण करनेवाला आचार्य बन गया। फिर

English

of the spotted deer, hast fallen on the hare ground? Here sleeps the king, my lord, on the ground, — he, by whom ten thousands of choice cattle and wealth were dispensed among

अध्याय ८

श्लोक 32

हा कष्टं किं तवानेन कृतं देव ! महीक्षिता ।यदिन्द्रोपेन्द्रतुल्यो ऽयं नीतः प्रस्वापनीं दशाम्

hā kaṣṭaṃ kiṃ tavānena kṛtaṃ deva ! mahīkṣitā / yadindropendratulyo 'yaṃ nītaḥ prasvāpanīṃ daśām

हिन्दी अर्थ

बहुत समयके पश्चात् मैं एकान्तसेवी हो गया; किन्तु हैवात् अज्ञानसे सद्धावका नाश हो जानेके कारण प्रमादमें पड़कर मेरी मृत्यु हो गयी। तथापि मृत्युकालसे लेकर अबतक मेरी स्मरणशक्तिका लोप नहीं हुआ। मेरे जन्मोंके जितने वर्ष

English

brahmans. Ah! woe! what has this king done to thee, 0 brahman, that he, the equal of Indra and Vishnu, has been

अध्याय ८

श्लोक 33

इत्युक्त्वा सापि सुश्रोणी मूर्च्छिता निपपात ह ।भर्तृदुः खमहाभारेणासह्येन निपीडिता

ityuktvā sāpi suśroṇī mūrcchitā nipapāta ha / bhartṛduḥ khamahābhāreṇāsahyena nipīḍitā

हिन्दी अर्थ

बीत गये हैं, उन सबकी स्मृति हो आयी है। पिताजी! उस पूर्वजन्मके अभ्याससे ही जितेन्द्रिय होकर अब फिर मैं वैसा ही यत्न करूँगा, जिससे भविष्यमें फिर मेरा जन्म न हो। मैंने जो दूसरोंको ज्ञान दिया था, उसीका यह फल है कि मुझे पूर्वजन्मकी बातोंका स्मरण हो रहा है। केवल त्रयीधर्म (कर्मकाण्ड) का सहारा

English

reduced to a state of coma? " Having soliloquised thus, she, beautiful-hipped, fell swooning, crushed by the intolerable

अध्याय ८

श्लोक 34

तौ तथा पतितौ भूमावनाथौ पितरौ शिशुः ।दृष्ट्वात्यन्तं क्षुधाविष्टः प्राह वाक्यं सुदुः खितः

tau tathā patitau bhūmāvanāthau pitarau śiśuḥ / dṛṣṭvātyantaṃ kṣudhāviṣṭaḥ prāha vākyaṃ suduḥ khitaḥ

हिन्दी अर्थ

लेनेवाले मनुष्योंको इसकी प्राप्ति नहीं होती, अतः मैं इस प्रथम आश्रमसे ही संन्यास-धर्मका आश्रय ले एकान्तसेवी हो आत्माके उद्धारके लिये यत्न करूँगा। अतः महाभाग! आपके हृदयमें जो संशय है, उसे कहिये। मैं उसका समाधान करूँगा। इतनी-सी सेवासे भी आपकी प्रसन्नताका सम्पादन करके मैं पिताके

English

great weight of her husband’s misfortunes. The child seeing his parents lying thus helpless on the ground, being exces-

अध्याय ८

श्लोक 35

तात तात ! ददस्वान्नमम्बाम्ब ! भोजनं दद ।क्षुन्मे बलवती जाता जिह्वाग्रं शुष्यते तथा

tāta tāta ! dadasvānnamambāmba ! bhojanaṃ dada / kṣunme balavatī jātā jihvāgraṃ śuṣyate tathā

हिन्दी अर्थ

ऋणसे मुक्त हो सकूँगा।

English

sively hungry and very unhappy, spoke: — " Father, dear father, give me some food; mother, mother, give me somethiiiK

अध्याय ८

श्लोक 36

पक्षिण ऊचुः एतस्मिन्नन्तरे प्राप्तो विश्वामित्रो महातपाः ।दृष्ट्वा तु तं हरिश्चन्द्रं पतितं भुवि मूर्च्छितम्

pakṣiṇa ūcuḥ etasminnantare prāpto viśvāmitro mahātapāḥ / dṛṣṭvā tu taṃ hariścandraṃ patitaṃ bhuvi mūrcchitam

हिन्दी अर्थ

पक्षी कहते हैं--तब पुत्रकी बातपर श्रद्धा करते हुए पिताने उससे वही बात पूछी, जो आपने अभी संसारमें जन्म ग्रहण करनेके सम्बन्धमें हमलोगोंसे पूछी

English

At this interval arrived Vi^vamitra great in austerities; but, seeing Haris-c'andra lying on the ground in a swoon,

अध्याय ८

श्लोक 37

स वारिणा समभ्युक्ष्य राजानमिदमब्रवीत् ।उत्तिष्ठोतिष्ठ राजेन्द्र तां ददस्वेष्टदक्षिणाम्

sa vāriṇā samabhyukṣya rājānamidamabravīt / uttiṣṭhotiṣṭha rājendra tāṃ dadasveṣṭadakṣiṇām

हिन्दी अर्थ

पुत्रने कहा--पिताजी! जिस प्रकार मैंने तत्त्वका बारंबार अनुभव किया है, उसे बतलाता हूँ; सुनिये। यह क्षणभड्भुर संसार-चक्र प्रवाहरूपसे अजर है, निरन्तर चलते रहनेवाला है, कभी स्थिर नहीं रहता। तात! आपकी आज्ञासे मैं मृत्युकालसे लेकर अबतककी सब बातोंका वर्णन करता हूँ। शरीरमें जो गर्मी या

English

he sprinkled the king with water and addressed him thus: — " Rise up, rise up, 0 supreme king; give me the fee I desire.

अध्याय ८

श्लोक 38

ऋणं धारयतो दुः खमहन्यहनि वर्धन्ते ।आप्याय्यमानः स तदा हिमशीतेन वारिणा

ṛṇaṃ dhārayato duḥ khamahanyahani vardhante / āpyāyyamānaḥ sa tadā himaśītena vāriṇā

हिन्दी अर्थ

पित्त है, वह तीव्र वायुसे प्रेरित होकर जब अत्यन्त कुपित हो जाता है, उस समय बिना ईँधनके ही उद्दीप्त हुई अग्निकी भाँति बढ़कर मर्मस्थानोंको विदीर्ण कर देता है, तत्पश्चात् उदान नामक वायु ऊपरकी ओर उठता है और खाये-पीये हुए अन्न-जलको नीचेकी ओर जानेसे रोक देता है। उस आपत्तिकी अवस्थामें भी

English

A debtor’s misery increases from day to day." Then being

अध्याय ८

श्लोक 39

अवाप्य चेतनां राजा विश्वामित्रमवेक्ष्य च ।पुनर्मोहं समापेदे स च क्रोधं ययौ मुनिः

avāpya cetanāṃ rājā viśvāmitramavekṣya ca / punarmohaṃ samāpede sa ca krodhaṃ yayau muniḥ

हिन्दी अर्थ

उसीको प्रसन्नता रहती है, जिसने पहले जल, अन्न एवं रसका दान किया है। जिस पुरुषने श्रद्धासे पवित्र किये हुए अन्त:करणके द्वारा पहले अन्नदान किया है, वह उस रुग्णावस्थामें अन्नके बिना भी तृप्ति लाभ करता है। जिसने कभी मिथ्या भाषण नहीं किया, दो प्रेमियोंके पारस्परिक प्रेममें बाधा नहीं डाली तथा

English

refreshed with the snow-cold water, the king, recovering con- sciousness, and perceiving Vi4vamitra, again fell into a swoon,

अध्याय ८

श्लोक 40

स समाश्वास्य राजानं वाक्यमाह द्विजोत्तमः ।दीयतां दक्षिणा सा मे यदि धर्ममवेक्षसे

sa samāśvāsya rājānaṃ vākyamāha dvijottamaḥ / dīyatāṃ dakṣiṇā sā me yadi dharmamavekṣase

हिन्दी अर्थ

जो आस्तिक और श्रद्धालु है, वह सुखपूर्वक मृत्युको प्राप्त होता है। जो देवता और ब्राह्मणोंकी पूजामें संलग्न रहते, किसीकी निन्दा नहीं करते तथा सात््विक, उदार और लज्जाशील होते हैं, ऐसे मनुष्योंको मृत्युके समय कष्ट नहीं होता। जो कामनासे, क्रोधसे अथवा द्वेषके कारण धर्मका त्याग नहीं करता, शास्त्रोक्त

English

and the Muni gi ew angry. The brahman, making the king recover, spoke: — " Let my fee be given me, if thou regardest

अध्याय ८

श्लोक 41

सत्येनार्कः प्रतपति सत्ये तिष्ठति मेदिनी ।सत्यं चोक्तं परो धर्मः स्वर्गः सत्ये प्रतिष्ठितः

satyenārkaḥ pratapati satye tiṣṭhati medinī / satyaṃ coktaṃ paro dharmaḥ svargaḥ satye pratiṣṭhitaḥ

हिन्दी अर्थ

आज्ञाका पालन करनेवाला तथा सौम्य होता है, उसकी मृत्यु भी सुखसे होती है। जिन्होंने कभी जलका दान नहीं किया है, उन मनुष्योंको मृत्युकाल उपस्थित होनेपर अधिक जलन होती है तथा अन्नदान न करनेवालोंको उस समय भूखका भारी कष्ट भोगना पड़ता है। जो लोग जाड़ेके दिनोंमें लकड़ी दान करते हैं, वे

English

righteousness. By truth the sun sheds w^aimth; in truth

अध्याय ८

श्लोक 42

अश्वमेधसहस्रं च सत्यं च तुलया धृतम् ।अश्वमेधसहस्राद्धि सत्यमेव विशिष्यते

aśvamedhasahasraṃ ca satyaṃ ca tulayā dhṛtam / aśvamedhasahasrāddhi satyameva viśiṣyate

हिन्दी अर्थ

शीतके कष्टको जीत लेते हैं। जो चन्दन दान करते हैं, वे तापपर विजय पाते हैं

English

ousness: Svarga is based on truth. Also a hundred horse- sacrifices and truth are placed in the balance — truth verily

अध्याय ८

श्लोक 43

अथवा किं ममैतेन साम्ना प्रोक्तेन कारणम् ।अनार्त्ये पापसङ्कल्पे क्रूरे चानृतवादिनि

athavā kiṃ mamaitena sāmnā proktena kāraṇam / anārtye pāpasaṅkalpe krūre cānṛtavādini

हिन्दी अर्थ

तथा जो किसी भी जीवको उद्देग नहीं पहुँचाते, वे मृत्युकालमें प्राणघातिनी वेदनाका अनुभव नहीं करते। मोह और अज्ञान फैलानेवाले लोग महान् भयको प्राप्त होते हैं। नीच मनुष्य तीव्र वेदनाओंसे पीड़ित होते रहते हैं। जो झूठी गवाही देते, झूठ बोलते, बुरी बातोंका उपदेश देते और वेदोंकी निन्‍्दा करते हैं, वे सब

English

outweighs the hundred horse-sacrifices. Otherwise what motive is there for my speaking thus peaceably to thee^ base

अध्याय ८

श्लोक 44

त्वयि राज्ञि प्रभवति सद्भावः श्रूयतामयम् ।अद्य मे दक्षिणां राजन् न दास्यति भवान् यदि

tvayi rājñi prabhavati sadbhāvaḥ śrūyatāmayam / adya me dakṣiṇāṃ rājan na dāsyati bhavān yadi

हिन्दी अर्थ

लोग मूर्च्छाग्रस्त होकर मृत्युको प्राप्त होते हैं।

English

one, evil-intentioned, and cruel, false in speech? Since thou art powerful as king, let this my kindly feeling bo heeded. If

अध्याय ८

श्लोक 45

अस्ताचलं प्रयातेर्ऽके शप्स्यामि त्वां ततो ध्रुवम् ।इत्युक्त्वा स ययौ विप्रो राजा चासीद्भयातुरः

astācalaṃ prayāter'ke śapsyāmi tvāṃ tato dhruvam / ityuktvā sa yayau vipro rājā cāsīdbhayāturaḥ

हिन्दी अर्थ

ऐसे लोगोंकी मृत्युके समय यमराजके दुष्ट दूत हाथोंमें हथौड़ी एवं मुद्गर लिये आते हैं, वे बड़े भयडूकर होते हैं और उनकी देहसे दुर्गन्ध निकलती रहती है। उन यमदूतोंपर दृष्टि पड़ते ही मनुष्य काँप उठता है और भ्राता, माता तथा पुत्रोंका नाम लेकर बारंबार चिललाने लगता है। उस समय उसकी वाणी स्पष्ट

English

king, thou shalt not give me the fee to-day, when tho sun reaches the Western mountain, then I will assuredly curse thee."

अध्याय ८

श्लोक 46

कान्दिग्भूतो ऽधमो निः स्वो नृशंसधनिनार्दितः ।भार्यास्य भूयः प्राहेदं क्रियतां वचनं मम

kāndigbhūto 'dhamo niḥ svo nṛśaṃsadhaninārditaḥ / bhāryāsya bhūyaḥ prāhedaṃ kriyatāṃ vacanaṃ mama

हिन्दी अर्थ

समझमें नहीं आती। एक ही शब्द, एक ही आवाज-सी जान पड़ती है। भयके मारे रोगीकी आँखें झूमने लगती हैं और उसका मुख सूख जाता है। उसकी साँस ऊपरको उठने लगती है। दृष्टिकी शक्ति भी नष्ट हो जाती है, फिर वह अत्यन्त वेदनासे पीड़ित होकर उस शरीरको छोड़ देता है और वायुके सहारे चलता हुआ

English

remained, weak with terror, fugitive, vile, indigent, harassed by the malicious and the rich. His wife again spoke thus —

अध्याय ८

श्लोक 47

मा शापानलनिर्दग्धः पञ्चत्वमुपयास्यसि ।स तथा चोद्यमानस्तु राजा पत्न्या पुनः पुनः

mā śāpānalanirdagdhaḥ pañcatvamupayāsyasi / sa tathā codyamānastu rājā patnyā punaḥ punaḥ

हिन्दी अर्थ

वैसे ही दूसरे शरीरको धारण कर लेता है, जो रूप, रंग और अवस्थामें पहले शरीरके समान ही होता है। वह शरीर माता-पिताके गर्भसे उत्पन्न नहीं, कर्मजनित होता है और यातना भोगनेके लिये ही मिलता है। तदनन्तर यमराजके दूत शीघ्र ही उसे दारुण पाशोंसे बाँध लेते हैं और डंडोंकी मारसे

English

" Let my proposal bo complied with, lest consumed by the fire of his curse thou perish," But the king, thus urged

अध्याय ८

श्लोक 49

प्राह भद्रे करोम्येष विक्रयं तव निर्घृणः ।नृशंसैरपि यद् कर्तुं न शक्यं तत् करोम्यहम् ।४८।यदि मे शक्यते वाणी वक्तुमीदृक् सुदुर्वचः ।एवमुक्त्वा ततो भार्यां गत्वा नागरमातुरः ।बाष्पापिहितकण्ठाक्षस्ततो वचनमब्रवीत्

prāha bhadre karomyeṣa vikrayaṃ tava nirghṛṇaḥ / nṛśaṃsairapi yad kartuṃ na śakyaṃ tat karomyaham / 48/ yadi me śakyate vāṇī vaktumīdṛk sudurvacaḥ / evamuktvā tato bhāryāṃ gatvā nāgaramāturaḥ / bāṣpāpihitakaṇṭhākṣastato vacanamabravīt

हिन्दी अर्थ

व्याकुल करते हुए दक्षिण दिशाकी ओर खींच ले जाते हैं। उस मार्गपर कहीं तो कुश जमे होते हैं, कहीं काँटे फैले होते हैं, कहीं बाँबीकी मिट्टियाँ जमी होती हैं, कहीं लोहेकी कीलें गड़ी होती हैं और कहीं पथरीली भूमि होनेके कारण वह पथ अत्यन्त कठोर जान पड़ता है। कहीं जलती हुई आगकी लपटें मिलती हैं तो

English

do, that do I, if my voice be able to utter so hard a speech as this." Thereupon having so spoken to his wife, ho went unnerved to the city and then, his throat and eyes impeded with tears, uttered this speech; —

अध्याय ८

श्लोक 50

राजोवाच भो भो नागरिकाः सर्वे शृणुध्वं वचनं मम ।किं मां पृच्छथ कस्त्वं भो नृशंसो ऽहममानुषः

rājovāca bho bho nāgarikāḥ sarve śṛṇudhvaṃ vacanaṃ mama / kiṃ māṃ pṛcchatha kastvaṃ bho nṛśaṃso 'hamamānuṣaḥ

हिन्दी अर्थ

कहीं सैकड़ों गड्डोंके कारण वह मार्ग अत्यन्त दुर्गम प्रतीत होता है। कहीं सूर्य इतने तपते हैं कि उस राहसे जानेवाला जीव उनकी किरणोंसे जलने लगता है। ऐसे पथसे यमराजके दूत उसे घसीटकर ले जाते हैं। वे दूत घोर शब्द करनेके कारण अत्यन्त भयड्ूकर जान पड़ते हैं। जिस समय वे जीवको घसीटकर ले

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 51

राक्षसो वातिकठिनस्ततः पापतरो ऽपि वा ।विक्रेतुं दयितां प्राप्तो यो न प्राणांस्त्यजाम्यहम्

rākṣaso vātikaṭhinastataḥ pāpataro 'pi vā / vikretuṃ dayitāṃ prāpto yo na prāṇāṃstyajāmyaham

हिन्दी अर्थ

जाते हैं, सैकड़ों गीदड़ियाँ जुटकर उसके शरीरको नोच-नोचकर खाने लगती हैं। पापी जीव ऐसे ही भयंकर मार्गसे यमलोककी यात्रा करते हैं।

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 52

यदि वः कस्यचित् कार्यं दास्या प्राणेष्टया मम ।स ब्रीवीतु त्वरायुक्तो यावत् सन्धारयाम्यहम्

yadi vaḥ kasyacit kāryaṃ dāsyā prāṇeṣṭayā mama / sa brīvītu tvarāyukto yāvat sandhārayāmyaham

हिन्दी अर्थ

जो मनुष्य छाता, जूता, वस्त्र और अन्न-दान करनेवाले होते हैं, वे उस मार्गपर सुखसे यात्रा करते हैं। इस प्रकार अनेक प्रकारका कष्ट भोगता हुआ पापपीड़ित जीव विवश होकर बारह दिनोंमें धर्मराजके नगरतक पहुँचाया जाता है। उसके यातनामय शरीरके जलाये जानेपर जीव स्वयं भी अत्यन्त दाहका

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 53

पक्षिण ऊचुः अथ वृद्धो द्विजः कश्चिदागत्याह नराधिपम् ।समर्पयस्व मे दासीमहं क्रेता धनप्रदः

pakṣiṇa ūcuḥ atha vṛddho dvijaḥ kaścidāgatyāha narādhipam / samarpayasva me dāsīmahaṃ kretā dhanapradaḥ

हिन्दी अर्थ

अनुभव करता है, उसी प्रकार मारे और काटे जानेपर भी उसे अत्यन्त भयडूकर वेदना होती है। अधिक देरतक जलमें भिगोये जानेके कारण भी जीवको भारी

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 54

अस्ति मे वित्तमस्तोकं सुकुमारी च मे प्रिया ।गृहकर्म न शक्नोति कर्तुमस्मात् प्रयच्छ मे

asti me vittamastokaṃ sukumārī ca me priyā / gṛhakarma na śaknoti kartumasmāt prayaccha me

हिन्दी अर्थ

दुःख उठाना पड़ता है। इस प्रकार दूसरे शरीरको प्राप्त होनेपर भी उसे अपने कर्मोके फलस्वरूप कष्ट भोगने पड़ते हैं। उसके भाई-बन्धु जो तिल और जलकी अज्जलि देते तथा पिण्डदान करते हैं, वही उस मार्गपर जाते समय उसे खानेको मिलता है। भाई-बन्धु यदि अशौचके भीतर तेल लगावें और उबटन

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 55

कर्मण्यता-वयो-रूप-शीलानां तव योषितः ।अनुरूपमिदं वित्तं गृहाणार्पय मे ऽबलाम्

karmaṇyatā-vayo-rūpa-śīlānāṃ tava yoṣitaḥ / anurūpamidaṃ vittaṃ gṛhāṇārpaya me 'balām

हिन्दी अर्थ

मलवावें तो उसीसे जीवका पोषण किया जाता है अर्थात् वह मैल ही उन्हें खानी पड़ती है अतः ये वस्तुएँ वर्जित हैं। इसी प्रकार बान्धवगण जो कुछ खाते-पीते हैं, वह मृतक जीवको मिलता है; अतः उन्हें भोजनकी शुद्धिपर भी ध्यान रखना चाहिए। यदि भाई-बन्धु भूमिपर शयन करें तो उससे जीवको कष्ट नहीं होता

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 56

एवमुक्तस्य विप्रेण हरिश्चन्द्रस्य भूपतेः ।व्यदीर्यत मनो दुः खान्न चैनं किञ्चिदब्रवीत्

evamuktasya vipreṇa hariścandrasya bhūpateḥ / vyadīryata mano duḥ khānna cainaṃ kiñcidabravīt

हिन्दी अर्थ

और यदि वे उसके निमित्त दान करें तो उससे मृत जीवको बड़ी तृप्ति होती है। यमदूत जब उसे साथ लेकर जाते हैं तो वह बारह दिनोंतक अपने घरकी ओर देखता रहता है। उस समय पृथ्वीपर उसके निमित्त जो जल और पिण्ड दिये जाते हैं, उन्हींका वह उपभोग करता है।-

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 57

ततः स विप्रो नृपतेर्वल्कलान्ते दृढं धनम् ।बद्ध्वा केशेष्वथादाय नृपपत्नीमकर्षयत्

tataḥ sa vipro nṛpatervalkalānte dṛḍhaṃ dhanam / baddhvā keśeṣvathādāya nṛpapatnīmakarṣayat

हिन्दी अर्थ

मृत्युसे बारह दिन बीतनेके पश्चात् यमपुरीकी ओर खींचकर ले जाया जानेवाला जीव अपने सामने यमराजके नगरको देखता है, जो बड़ा ही भयानक है। उस नगरमें पहुँचनेपर उसे मृत्यु, काल और अन्तक आदिके बीचमें बैठे हुए यमराजका दर्शन होता है, जो कज्जलराशिके समान काले हैं और अत्यन्त

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 58

रुरोद रोहिताश्वो ऽपि दृष्ट्वा कृष्टां तु मातरम् ।हस्तेन वस्त्रमाकर्षन् काकपक्षधरः शिशुः

ruroda rohitāśvo 'pi dṛṣṭvā kṛṣṭāṃ tu mātaram / hastena vastramākarṣan kākapakṣadharaḥ śiśuḥ

हिन्दी अर्थ

क्रोधसे लाल-लाल आँखें किये रहते हैं। दाढ़ोंक कारण उनका मुख बड़ा विकराल दिखलायी पड़ता है। टेढ़ी भौंहोंसे युक्त उनकी आकृति बड़ी भयडूकर है। वे कुरूप, भीषण और टेढ़े-मेढ़े सैकड़ों रोगोंसे घिरे रहते हैं। उनकी भुजाएँ विशाल हैं। उनके एक हाथमें यमदण्ड और दूसरेमें पाश है। देखनेमें वे बड़े

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 59

राजपत्न्युवाच मुञ्चार्य मुञ्च तावन्मां यावत्पश्याम्यहं शिशुम् ।दुर्लभं दर्शनं तात पुनरस्य भविष्यति

rājapatnyuvāca muñcārya muñca tāvanmāṃ yāvatpaśyāmyahaṃ śiśum / durlabhaṃ darśanaṃ tāta punarasya bhaviṣyati

हिन्दी अर्थ

भयानक प्रतीत होते हैं। पापी जीव उन्हींकी बतायी हुई शुभाशुभ गतिको प्राप्त होता है। झूठी गवाही देने और झूठ बोलनेवाला मनुष्य रौरव नरकमें जाता है। अब मैं रौरवका स्वरूप बतलाता हूँ, आप ध्यान देकर उसे सुनें। रौरव नरककी लंबाई-चौड़ाई दो हजार योजनकी है। वह एक गढ़ेके रूपमें है, जिसकी गहराई

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 60

पश्यैहि वत्स मामेवं मातरं दास्यतां गताम् ।मां मा स्प्रार्क्षो राजपुत्र ! अस्पृश्याहं तवाधुना

paśyaihi vatsa māmevaṃ mātaraṃ dāsyatāṃ gatām / māṃ mā sprārkṣo rājaputra ! aspṛśyāhaṃ tavādhunā

हिन्दी अर्थ

घुटनोंतककी है। वह नरक अत्यन्त दुस्तर है। उसमें भूमिके बराबरतक अड्भजारराशि बिछी रहती है। उसके भीतरकी भूमि दहकते हुए अज्जारोंसे बहुत तपी होती है। सारा नरक तीव्रवेगसे प्रज्वलित होता रहता है। उसीके भीतर यमराजके दूत पापी मनुष्यको डाल देते हैं। वह धधकती हुई आगमें जब जलने

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 61

ततः स बालः सहसा दृष्ट्वा कृष्टां तु मातरम् ।समभ्यधावदम्बेति रुदन् सास्त्राविलेक्षणः

tataḥ sa bālaḥ sahasā dṛṣṭvā kṛṣṭāṃ tu mātaram / samabhyadhāvadambeti rudan sāstrāvilekṣaṇaḥ

हिन्दी अर्थ

लगता है तो इधर-उधर दौड़ता है, किन्तु पग-पगपर उसका पैर जल-भुनकर राख होता रहता है। वह दिन-रातमें कभी एक बार पैर उठाने और रखनेमें समर्थ होता है। इस प्रकार सहस्रों योजन पार करनेपर वह उससे छुटकारा पाता है। फिर दूसरे पापोंकी शुद्धिके लिये उसे वैसे ही अन्य नरकोंमें जाना पड़ता है। इस

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 62

तमागतं द्विजः क्रोधाद्वालमभ्याहनत् पदा ।वदंस्तथापि सो ऽम्बेति नैवामुञ्चत मातरम्

tamāgataṃ dvijaḥ krodhādvālamabhyāhanat padā / vadaṃstathāpi so 'mbeti naivāmuñcata mātaram

हिन्दी अर्थ

प्रकार सब नरकोंमें यातना भोगकर निकलनेके बाद पापी जीव तिर्यग्योनिमें

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 63

राजपत्न्युवाच प्रसादं कुरु में नाथ क्रीणीष्वेमं च बालकम् ।क्रीतापि नाहं भवतो विनैनं कार्यसाधिका

rājapatnyuvāca prasādaṃ kuru meṃ nātha krīṇīṣvemaṃ ca bālakam / krītāpi nāhaṃ bhavato vinainaṃ kāryasādhikā

हिन्दी अर्थ

जन्म लेता है। क्रमश: कीड़े-मकोड़े, पतड़, हिंसक जीव, मच्छर, हाथी, वृक्ष आदि, गौ, अश्व तथा अन्यान्य दुःखदायिनी पापयोनियोंमें जन्म धारण करनेके पश्चात् वह मनुष्ययोनिमें आता है। उसमें भी वह कुरूप, कुबड़ा, नाटा और चाण्डाल आदि होता है। फिर अवशिष्ट पाप और पुण्यसे युक्त हो, वह क्रमशः

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 64

इत्थं ममाल्पभाग्यायाः प्रसादसुमुखो भव ।मां संयोजय बालेन वत्सेनेव पयस्विनीम्

itthaṃ mamālpabhāgyāyāḥ prasādasumukho bhava / māṃ saṃyojaya bālena vatseneva payasvinīm

हिन्दी अर्थ

ऊँचे चढ़नेवाली योनियोंमें जन्म लेता--शूढ्र, वैश्य, क्षत्रिय, ब्राह्मण, देवता तथा इन्द्र आदिके रूपमें उत्पन्न होता है।

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 65

ब्राह्मण उवाच गृह्यतां वित्तमेतत् ते दीयतां बालको मम ।स्त्रीपुंसोर्धर्मशास्त्रज्ञैः कृतमेव हि वेतनम् ।शतं सहस्रं लक्षं च कोटिमूल्यं तथा परैः

brāhmaṇa uvāca gṛhyatāṃ vittametat te dīyatāṃ bālako mama / strīpuṃsordharmaśāstrajñaiḥ kṛtameva hi vetanam / śataṃ sahasraṃ lakṣaṃ ca koṭimūlyaṃ tathā paraiḥ

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार पाप करनेवाले जीव नरकोंमें नीचे गिरते हैं। अब पुण्यात्मा जीव जिस प्रकार यात्रा करते हैं उसको सुनिये; वे पुण्यात्मा मनुष्य धर्मराजकी बतायी हुई पुण्यमयी गतिको प्राप्त होते हैं। उनके साथ गन्धर्व गीत गाते चलते हैं, अप्सराएँ नृत्य करती रहती हैं तथा वे भाँति-भाँतिके दिव्य आभूषणोंसे

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 66

पक्षिण ऊचुः तथैव तस्य तद्वित्तं बद्ध्वोत्तरपटे ततः ।प्रगृह्य बालकं मात्रा सहैकस्थमबन्धयत्

pakṣiṇa ūcuḥ tathaiva tasya tadvittaṃ baddhvottarapaṭe tataḥ / pragṛhya bālakaṃ mātrā sahaikasthamabandhayat

हिन्दी अर्थ

सुशोभित हो सुन्दर विमानोंपर बैठकर यात्रा करते हैं। वहाँसे पृथ्वीपर आनेपर वे राजाओं तथा अन्य महात्माओंके कुलमें जन्म लेते और सदाचारका पालन करते हैं। वहाँ उन्हें श्रेष्ठ भोग प्राप्त होते हैं। तदनन्तर शरीर त्यागनेके बाद वे पुनः स्वर्ग आदि ऊपरके लोकोंमें जाते हैं। ऊपरके लोकोंमें होनेवाली गतिको

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 67

नीयमानौ तु तौ दृष्ट्वा भार्या-पुत्रौ स पार्थिवः ।विललाप सुदुः खार्तो निः श्वस्योष्णं पुनः पुनः

nīyamānau tu tau dṛṣṭvā bhāryā-putrau sa pārthivaḥ / vilalāpa suduḥ khārto niḥ śvasyoṣṇaṃ punaḥ punaḥ

हिन्दी अर्थ

“आरोहणी” कहते हैं। फिर वहाँसे पुण्यभोगके पश्चात् जो मृत्युलोकमें उतरना होता है, वह “अवरोहणी' गति है। इस अवरोहणी गतिको प्राप्त होनेपर मनुष्य फिर पहलेकी ही भाँति आरोहणी गतिको प्राप्त होते हैं। ब्रह्मरष! जीवकी जिस प्रकार मृत्यु होती है, वह सब प्रसड़ मैंने आपसे कह सुनाया। अब जिस तरह

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 68

यां न वायुर्न चादित्यो नेन्दुर्न च पृथग्जनः ।दृष्टवन्तः पुरा पत्नीं सेयं दासीत्वमागता

yāṃ na vāyurna cādityo nendurna ca pṛthagjanaḥ / dṛṣṭavantaḥ purā patnīṃ seyaṃ dāsītvamāgatā

हिन्दी अर्थ

जीव गर्भमें आता है, उस विषयका वर्णन सुनिये।

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 69

सूर्यवंशप्रसूतो ऽयं सुकुमारकराङ्गुलिः ।सम्प्राप्तो विक्रयं बालो धिङ्मामस्तु सुदुर्मतिम्

sūryavaṃśaprasūto 'yaṃ sukumārakarāṅguliḥ / samprāpto vikrayaṃ bālo dhiṅmāmastu sudurmatim

हिन्दी अर्थ

जीवके जन्मका वृत्तान्त तथा महारौरव आदि नरकोंका

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 70

हा प्रिये ! हा शिशो ! नत्स ! ममानार्यस्य दुर्नयैः ।दैवाधीनां दशां प्राप्तो न मृतो ऽस्मि तथापि धिक्

hā priye ! hā śiśo ! natsa ! mamānāryasya durnayaiḥ / daivādhīnāṃ daśāṃ prāpto na mṛto 'smi tathāpi dhik

हिन्दी अर्थ

पुत्र कहता है--पिताजी! मनुष्य स्त्री-सहवासके समय गर्भमें जो वीर्य स्थापित करता है, वह स्त्रीके रजमें मिल जाता है। नरक अथवा स्वर्गसे निकलकर आया हुआ जीव उसी रज-वीर्यका आश्रय लेता है। जीवसे व्याप्त होनेपर वे दोनों बीज (स्त्री और पुरुष दोनोंके रज-वीर्य) स्थिर हो जाते हैं। फिर वे क्रमश: कलल, बुद्बुद एवं मांसपिण्डके रूपमें परिणत

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 71

पक्षिण ऊचुः एवं विलपतो राज्ञः स विप्रो ऽन्तरधीयत ।वृक्षगेहादिभिस्तुङ्गैस्तावादाय त्वरान्वितः

pakṣiṇa ūcuḥ evaṃ vilapato rājñaḥ sa vipro 'ntaradhīyata / vṛkṣagehādibhistuṅgaistāvādāya tvarānvitaḥ

हिन्दी अर्थ

होते हैं। जैसे बीजसे अंकुर उत्पन्न होता है, उसी प्रकार उस मांसपिण्डसे विभागपूर्वक पाँच अड़ प्रकट होते हैं। फिर उन अड्ोंसे अँगुली, नेत्र, नासिका, मुख, कान आदि प्रकट होते हैं। इसी प्रकार अँगुली आदिसे नख आदिकी उत्पत्ति होती है। फिर त्वचामें रोम और मस्तकपर बाल उग आते हैं। जीवके शरीरकी वृद्धिके साथ ही स्त्रीका गर्भकोष भी बढ़ता है। जैसे

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 72

विश्वामित्रस्ततः प्राप्तो नृपं वित्तमयाचत ।तस्मै समर्पयामास हरिश्चन्द्रो ऽपि तद्धनम्

viśvāmitrastataḥ prāpto nṛpaṃ vittamayācata / tasmai samarpayāmāsa hariścandro 'pi taddhanam

हिन्दी अर्थ

नारियलका फल अपने आवरणकोषके साथ ही बढ़ता है, उसी प्रकार गर्भस्थ शिशु भी गर्भकोषके साथ ही वृद्धिको प्राप्त होता है। उसका मुख नीचेकी ओर होता है। दोनों हाथोंको घुटनों और पसलियोंके नीचे रखकर वह बढ़ता है। हाथके दोनों अँगूठे दोनों घुटनोंके ऊपर होते हैं और अँगुलियाँ उनके अग्रभागमें रहती हैं। उन घुटनोंके पृष्ठभागमें

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 73

तद्वित्तं स्तोकमालोक्य दारविक्रयसम्भवम् ।शोकाभिभूतं राजानं कुपितः कौशिको ऽब्रवीत्

tadvittaṃ stokamālokya dāravikrayasambhavam / śokābhibhūtaṃ rājānaṃ kupitaḥ kauśiko 'bravīt

हिन्दी अर्थ

दोनों आँखें रहती हैं और नासिका उनके मध्यभागमें होती है। दोनों चूतड़ एड़ियोंपर टिके होते हैं। दोनों बाँहें और पिंडलियाँ बाहरी किनारेपर रहती हैं। इसी स्थितिमें स्त्रीके गर्भमें रहनेवाला जीव क्रमश: वृद्धिको प्राप्त होता है। गर्भस्थ शिशुकी नाभिमें एक नाल बँधी होती है, जिसे आप्यायनी नाड़ी कहते हैं। इसी प्रकार वह नाल स्त्रीकी आँतके छिठद्रमें भी जुड़ी

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 74

क्षत्रबन्धो ! ममेमां त्वं सदृशीं यज्ञदक्षिणाम् ।मन्यसे यदि तत् क्षिप्रं पश्य त्वं मे बलं परम्

kṣatrabandho ! mamemāṃ tvaṃ sadṛśīṃ yajñadakṣiṇām / manyase yadi tat kṣipraṃ paśya tvaṃ me balaṃ param

हिन्दी अर्थ

होती है। स्त्री जो कुछ खाती-पीती है, वह उस नाड़ीके ही मार्गसे गर्भस्थ शिशुके भी उदरमें पहुँचता है। उसीसे शरीरका पोषण होते रहनेसे जीव क्रमशः वृद्धिको प्राप्त होता है। उस गर्भमें उसे अनेक जन्मोंकी बातें याद आती हैं, जिससे व्यथित होकर वह इधर-उधर फिरता और निर्वेद (खेद)-को प्राप्त होता है। अपने मनमें सोचता है, “अब इस उदरसे छुटकारा

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 75

तपसो ऽत्र सुतप्तस्य ब्राह्मण्यस्यामलस्य च ।मत्प्रभावस्य चोग्रस्य शुद्धस्याध्ययनस्य च

tapaso 'tra sutaptasya brāhmaṇyasyāmalasya ca / matprabhāvasya cograsya śuddhasyādhyayanasya ca

हिन्दी अर्थ

पानेपर मैं फिर ऐसा कार्य नहीं करूँगा, बल्कि इस बातके लिये चेष्टा करूँगा कि मुझे फिर गर्भके भीतर न आना पड़े।' सैकड़ों जन्मोंके दुःखोंका स्मरण करके वह इसी प्रकार चिन्ता करता है। हैवकी प्रेरणासे पूर्वजन्मोंमें उसने जो-जो क्लेश भोगे होते हैं, वे सब उसे याद आ जाते हैं। तत्पश्चात् कालक्रमसे वह अधोमुख जीव जब नवें या दसवें महीनेका होता है, तब

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 76

अन्यां दास्यामि भगवन् ! कालः कश्चित्प्रतीक्ष्यताम् ।साम्प्रतं नास्ति विक्रीता पत्नी पुत्रश्च बालकः

anyāṃ dāsyāmi bhagavan ! kālaḥ kaścitpratīkṣyatām / sāmprataṃ nāsti vikrītā patnī putraśca bālakaḥ

हिन्दी अर्थ

उसका जन्म हो जाता है। गर्भसे निकलते समय वह प्राजापत्य वायुसे पीड़ित होता है और मन-ही-मन दुःखसे व्यथित हो रोते हुए गर्भसे बाहर आता है। उदरसे निकलनेपर असहा पीड़ाके कारण उसे मूर्च्छा आ जाती है। फिर वायुके स्पर्शसे वह सचेत होता है। तदनन्तर भगवान् विष्णुकी मोहिनी माया उसको अपने वशमें कर लेती है। उससे मोहित हो जानेके

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 77

विश्वामित्र उवाच चतुर्भागः स्थितो यो ऽयं दिवसस्य नराधिप ।एष एव प्रतीक्ष्यो मे वक्तव्यं नोत्तरं त्वया

viśvāmitra uvāca caturbhāgaḥ sthito yo 'yaṃ divasasya narādhipa / eṣa eva pratīkṣyo me vaktavyaṃ nottaraṃ tvayā

हिन्दी अर्थ

कारण उसका पूर्वज्ञान नष्ट हो जाता है। इस प्रकार ज्ञानभ्रष्ट हो जानेपर वह जीव पहले तो

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 78

पक्षिण ऊचुः तमेवमुक्त्वा राजेन्द्रं निष्ठुरं निर्घृणं वचः ।तदादाय धनं तूर्णं कुपितः कौशिको ययौ

pakṣiṇa ūcuḥ tamevamuktvā rājendraṃ niṣṭhuraṃ nirghṛṇaṃ vacaḥ / tadādāya dhanaṃ tūrṇaṃ kupitaḥ kauśiko yayau

हिन्दी अर्थ

बाल्यावस्थाको प्राप्त होता है, फिर क्रमश: कौमारावस्था, यौवनावस्था और वृद्धावस्थामें प्रवेश करता है। इसके बाद मृत्युको प्राप्त होता और मृत्युके बाद फिर जन्म लेता है। इस प्रकार इस संसार-चक्रमें वह घटीयन्त्र (रहट) की भाँति घूमता रहता है। कभी स्वर्गमें जाता है, कभी नरकमें। कभी इस संसारमें पुनः जन्म लेकर अपने कर्मोंको भोगता है, कभी

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 79

विश्वामित्रे गते राजा भयशोकाब्धिमध्यगः ।सर्वाकारं विनिश्चित्य प्रोवाचोच्चैरधोमुखः

viśvāmitre gate rājā bhayaśokābdhimadhyagaḥ / sarvākāraṃ viniścitya provācoccairadhomukhaḥ

हिन्दी अर्थ

कर्मोका भोग समाप्त होनेपर थोड़े ही समयमें मरकर परलोकमें चला जाता है। कभी स्वर्ग और नरकको प्राय: भोग चुकनेके बाद थोड़ेसे शुभाशुभ कर्म शेष रहनेपर इस संसारमें जन्म लेता है।

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 80

वित्तक्रीतेन यो ह्यर्थो मया प्रेष्येण मानवः ।स ब्रवीतु त्वरायुक्तो यावत् तपति भास्करः

vittakrītena yo hyartho mayā preṣyeṇa mānavaḥ / sa bravītu tvarāyukto yāvat tapati bhāskaraḥ

हिन्दी अर्थ

नारकी जीव घोर दुःखदायी नरकोंमें गिराये जाते हैं। स्वर्गमें भी ऐसा दुःख होता है, जिसकी कहीं तुलना नहीं है। स्वर्गमें पहुँचनेके बादसे ही मनमें इस बातकी चिन्ता बनी रहती है कि पुण्य-क्षय होनेपर हमें यहाँसे नीचे गिरना पड़ेगा। साथ ही नरकमें पड़े हुए जीवोंको देखकर महान् दुःख होता है कि कभी हमें भी ऐसी ही दुर्गति भोगनी पड़ेगी। इस

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 81

अथाजगाम त्वरितो धर्मश्चण्डालरूपधृक् ।दुर्गन्धो विकृतो रूक्षः श्मश्रुलो दन्तुरो घृणी

athājagāma tvarito dharmaścaṇḍālarūpadhṛk / durgandho vikṛto rūkṣaḥ śmaśrulo danturo ghṛṇī

हिन्दी अर्थ

बातसे दिन-रात अशान्ति बनी रहती है। गर्भवासमें तो भारी दुःख होता ही है, योनिसे जन्म लेते समय भी थोड़ा क्लेश नहीं होता। जन्म लेनेके पश्चात् बाल्यावस्था और वृद्धावस्थामें भी दुःख-ही-दुःख भोगना पड़ता है। जवानीमें भी काम, क्रोध और ईर्ष्यामें बँधे रहनेके कारण अत्यन्त दुस्सह कष्ट उठाना पड़ता है। बुढ़ापेमें तो अधिकांश दुःख ही होता है।

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 82

कृष्णो लम्बोदरः पिङ्गरूक्षाक्षः परुषाक्षरः ।गृहीतपक्षिपुञ्जश्च शवमाल्यैरलङ्कृतः

kṛṣṇo lambodaraḥ piṅgarūkṣākṣaḥ paruṣākṣaraḥ / gṛhītapakṣipuñjaśca śavamālyairalaṅkṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

मरनेमें भी सबसे अधिक दु:ख है। यमदूतोंद्वारा घमीटकर ले जाये जाने और नरकमें गिराये जानेपर जो महान् क्लेश होता है, उसकी चर्चा हो चुकी है। यहाँसे लौटनेपर फिर गर्भवास, जन्म, मृत्यु तथा नरकका क्रम चालू हो जाता है। इस तरह जीव प्राकृत बन्धनोंमें बँधकर घटीयन्त्रकी भाँति इस संसारचक्रमें घूमते रहते हैं।

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 83

कपालहस्तो दीर्घास्यो भैरवो ऽतिवदन् मुहुः ।श्वगणाभिवृतो घोरो यष्टिहस्तो निराकृतिः

kapālahasto dīrghāsyo bhairavo 'tivadan muhuḥ / śvagaṇābhivṛto ghoro yaṣṭihasto nirākṛtiḥ

हिन्दी अर्थ

पिताजी! मैंने आपसे रौरव नामक प्रथम नरकका वर्णन किया है। अब महारौरवका वर्णन सुनिये--इसका विस्तार सब ओरसे बारह हजार योजन है। वहाँकी भूमि ताँबेकी है, जिसके नीचे आग धधकती रहती है। उसकी आँचसे तपकर वह सारी ताम्रमयी भूमि चमकती हुई बिजलीके समान ज्योतिर्मयी दिखायी देती है। उसकी ओर देखना और स्पर्श

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 84

चण्डाल उवाच अहमर्थो त्वया शीघ्रं कथयस्वात्मवेतनम् ।स्तोकेन बहुना वापि येन वै लभ्यते भवान्

caṇḍāla uvāca ahamartho tvayā śīghraṃ kathayasvātmavetanam / stokena bahunā vāpi yena vai labhyate bhavān

हिन्दी अर्थ

आदि करना अत्यन्त भयड्कर है। यमराजके दूत हाथ और पैर बाँधकर पापी जीवको उसके भीतर डाल देते हैं और वह लोटता हुआ आगे बढ़ता है। मार्गमें कौवे, बगुले, बिच्छू, मच्छर और गिद्ध उसे जल्दी-जल्दी नोच खाते हैं। उसमें जलते समय वह व्याकुल हो-होकर छटपटाता है और बारंबार “अरे बाप! अरे मैया! हाय भैया! हा तात!” आदिकी रट लगाता

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 85

पक्षिण ऊचुः तं तादृशमथालक्ष्य क्रूरदृष्टिं सुनिष्ठुरम् ।वदन्तमतिदुः शीलं कस्त्वमित्याह पार्थिवः

pakṣiṇa ūcuḥ taṃ tādṛśamathālakṣya krūradṛṣṭiṃ suniṣṭhuram / vadantamatiduḥ śīlaṃ kastvamityāha pārthivaḥ

हिन्दी अर्थ

हुआ करुण क्रन्दन करता है, किन्तु उसे तनिक भी शान्ति नहीं मिलती। इस प्रकार उसमें पड़े हुए जीव, जिन्होंने दूषित बुद्धिके कारण पाप किये हैं, दस करोड़ वर्ष बीतनेपर उससे छुटकारा पाते हैं। इसके सिवा तम नामक एक दूसरा नरक है, जहाँ स्वभावसे ही कड़ाकेकी सर्दी पड़ती है। उसका विस्तार भी महारौरवके ही बराबर है, किन्तु वह घोर अन्धकारसे

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 86

चण्डाल उवाच चण्डालो ऽहमिहाख्यातः प्रवीरेति पुरोत्तमे ।विख्यातो वध्यवधको मृतकम्बलहारकः

caṇḍāla uvāca caṇḍālo 'hamihākhyātaḥ pravīreti purottame / vikhyāto vadhyavadhako mṛtakambalahārakaḥ

हिन्दी अर्थ

आच्छादित रहता है। वहाँ पापी मनुष्य सर्दीसे कष्ट पाकर भयानक अन्धकारमें दौड़ते हैं और एक-दूसरेसे भिड़कर लिपटे रहते हैं। जाड़ेके कष्टसे काँपकर कटकटाते हुए उनके दाँत

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 87

हरिश्चन्द्र उवाच नाहं चण्डालदासत्वमिच्छेयं सुविगर्हितम् ।वरं सापाग्निना दग्धो न चण्डालवशं गतः

hariścandra uvāca nāhaṃ caṇḍāladāsatvamiccheyaṃ suvigarhitam / varaṃ sāpāgninā dagdho na caṇḍālavaśaṃ gataḥ

हिन्दी अर्थ

टूट जाते हैं। भूख-प्यास भी वहाँ बड़े जोरकी लगती है। इसी प्रकार अन्यान्य उपद्रव भी होते रहते हैं। ओलोंके साथ बहनेवाली भयड्कर वायु शरीरमें लगकर हड्डियोंको चूर्ण किये देती है और उनसे जो मज्जा तथा रक्त गिरता है, उसीको वे क्षुधातुर प्राणी खाते हैं। एक- दूसरेके शरीरसे सटकर वे परस्पर रक्त चाटा करते हैं। इस प्रकार जबतक पापोंका भोग

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 88

पक्षिण ऊचुः तस्यैवं वदतः प्राप्तो विश्वामित्रस्तपोनिधिः ।कोपामर्षविवृताक्षः प्राह चेदं नराधैपम्

pakṣiṇa ūcuḥ tasyaivaṃ vadataḥ prāpto viśvāmitrastaponidhiḥ / kopāmarṣavivṛtākṣaḥ prāha cedaṃ narādhaipam

हिन्दी अर्थ

समाप्त नहीं हो जाता, तबतक वहाँ भी मनुष्योंको अन्धकारमें महान् कष्ट भोगना पड़ता है।

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 89

विश्वामित्र उवाच चण्डालो ऽयमनल्पं ते दातुं वित्तमुपस्थितः ।कस्मान्न दीयते मह्यमशेषा यज्ञदक्षिणा

viśvāmitra uvāca caṇḍālo 'yamanalpaṃ te dātuṃ vittamupasthitaḥ / kasmānna dīyate mahyamaśeṣā yajñadakṣiṇā

हिन्दी अर्थ

इससे भिन्न एक निकृन्तन नामक नरक है, जो सब नरकोंमें प्रधान है। उसमें कुम्हारकी चाकके समान बहुत-से चक्र निरन्तर घूमते रहते हैं। यमराजके दूत पापी जीवोंको उन चक्रोंपर चढ़ा देते और अपनी अँगुलियोंमें कालसूत्र लेकर उसीके द्वारा उनके पैरसे लेकर मस्तकतक प्रत्येक अड़ काटा करते हैं। फिर भी उन पापियोंके प्राण नहीं निकलते। उनके

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 90

हरिश्चन्द्र उवाच भगवन् ! सूर्यवंशोत्थमात्मानं वेद्मे कौशिक ।कथं चण्डालदासत्वं गमिष्ये वित्तकामुकः

hariścandra uvāca bhagavan ! sūryavaṃśotthamātmānaṃ vedme kauśika / kathaṃ caṇḍāladāsatvaṃ gamiṣye vittakāmukaḥ

हिन्दी अर्थ

शरीरके सैकड़ों टुकड़े हो जाते हैं, किन्तु फिर वे जुड़कर एक हो जाते हैं। इस प्रकार पापी जीव हजारों वर्षोतक वहाँ काटे जाते हैं। यह यातना उन्हें तबतक दी जाती है, जबतक कि उनके सारे पापोंका नाश नहीं हो जाता। अब अप्रतिष्ठ नामक नरकका वर्णन सुनिये, जिसमें पड़े हुए जीवोंको असहा दुःखका अनुभव करना पड़ता है। वहाँ भी वे ही कुलालचक्र होते

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 91

विश्वामित्र उवाच यदि चण्डालवित्तं त्वमात्मविक्रयजं मम ।न प्रदास्यसि कालेन शाप्स्यामि त्वामसंशयम्

viśvāmitra uvāca yadi caṇḍālavittaṃ tvamātmavikrayajaṃ mama / na pradāsyasi kālena śāpsyāmi tvāmasaṃśayam

हिन्दी अर्थ

हैं; साथ ही दूसरी ओर घटीयन्त्र भी बने होते हैं, जो पापी मनुष्योंको दुःख पहुँचानेके लिये बनाये गये हैं। वहाँ कुछ मनुष्य उन चक्रोंपर चढ़ाकर घुमाये जाते हैं। हजारों वर्षोतक उन्हें बीचमें विश्राम नहीं मिलता। इसी प्रकार दूसरे पापी घटीयन्त्रोंमें बाँध दिये जाते हैं, ठीक उसी तरह, जैसे रहटमें छोटे-छोटे घड़े बँधे होते हैं। वहाँ बँधे हुए मनुष्य उन यन्त्रोंके साथमें

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 92

पक्षिण ऊचुः हरिश्चन्द्रस्ततो राजा चिन्तावस्थितजीवितः ।प्रसीदेति वदन् पादावृषेर्जग्राह विह्वलः

pakṣiṇa ūcuḥ hariścandrastato rājā cintāvasthitajīvitaḥ / prasīdeti vadan pādāvṛṣerjagrāha vihvalaḥ

हिन्दी अर्थ

जब घूमने लगते हैं, तो बारंबार रक्त वमन करते हैं। उनके मुखसे लार गिरती है और नेत्रोंसे अभश्रु झरते रहते हैं। उस समय उन्हें इतना दुःख होता है, जो जीवमात्रके लिये असहा है।

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 93

दासो ऽस्म्यार्तो ऽस्मि भीतो ऽस्मि त्वद्भक्तश्च विशेषतः ।कुरु प्रसादं विप्रर्षे कष्टश्चण्डालसङ्करः

dāso 'smyārto 'smi bhīto 'smi tvadbhaktaśca viśeṣataḥ / kuru prasādaṃ viprarṣe kaṣṭaścaṇḍālasaṅkaraḥ

हिन्दी अर्थ

हा है। पा हारे ( मी ना

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 94

भवेयं वित्तशेषेण सर्वकर्मकरो वशः ।तवैव मुनिशार्दूल ! प्रेष्यश्चित्तानुवर्तकः

bhaveyaṃ vittaśeṣeṇa sarvakarmakaro vaśaḥ / tavaiva muniśārdūla ! preṣyaścittānuvartakaḥ

हिन्दी अर्थ

अब असिपत्रवन नामक अन्य नरकका वर्णन सुनिये--जहाँ एक हजार योजनतककी भूमि प्रज्वलित अग्निसे आच्छादित रहती है तथा ऊपरसे सूर्यकी अत्यन्त भयड्कर एवं प्रचण्ड किरणें ताप देती हैं, जिनसे उस नरकमें निवास करनेवाले जीव सदा सन्तप्त होते रहते हैं। उसके बीचमें एक बहुत ही सुन्दर वन है, जिसके पत्ते चिकने जान पड़ते हैं; किन्तु

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 95

विश्वामित्र उवाच यदि प्रेष्यो मम भवान् चण्डालाय ततो मया ।दासभावमनुप्राप्तो दत्तो वित्तार्बुदेन वै

viśvāmitra uvāca yadi preṣyo mama bhavān caṇḍālāya tato mayā / dāsabhāvamanuprāpto datto vittārbudena vai

हिन्दी अर्थ

वे सभी पत्ते तलवारकी तीखी धारके समान हैं। उस वनमें बड़े बलवान कुत्ते भूंकते रहते हैं, जो दस हजारकी संख्यामें सुशोभित होते हैं। उनके मुख और दाढ़ें बड़ी-बड़ी होती हैं। वे व्याप्रोंके समान भयानक प्रतीत होते हैं। वहाँकी भूमिपर जो आग बिछी होती है, उससे जब दोनों पैर जलने लगते हैं तब वहाँ गये हुए पापी जीव “हाय माता! हाय पिता!” आदि कहते

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 96

पक्षिण ऊचुः एकमुक्ते तदा तेन श्वपाको हृष्टमानसः ।विश्वामित्राय तद्द्रव्यं दत्त्वा बद्ध्वा नरेश्वरम्

pakṣiṇa ūcuḥ ekamukte tadā tena śvapāko hṛṣṭamānasaḥ / viśvāmitrāya taddravyaṃ dattvā baddhvā nareśvaram

हिन्दी अर्थ

हुए अत्यन्त दुःखित होकर कराहने लगते हैं। उस समय तीव्र पिपासाके कारण उन्हें बड़ी पीड़ा होती है, फिर अपने सामने शीतल छायासे युक्त असिपत्रवनको देखकर वे प्राणी विश्रामकी इच्छासे वहाँ जाते हैं। उनके वहाँ पहुँचनेपर बड़े जोरकी हवा चलती है, जिससे उनके ऊपर तलवारके समान तीखे पत्ते गिरने लगते हैं। उनसे आहत होकर वे पृथ्वीपर

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 97

दण्डप्रहारसम्भ्रान्तमतीव व्याकुलेन्द्रियम् ।इष्टबन्धुवियोगार्तमनयन्निजपत्तनम्

daṇḍaprahārasambhrāntamatīva vyākulendriyam / iṣṭabandhuviyogārtamanayannijapattanam

हिन्दी अर्थ

जलते हुए अँगारोंके ढेरमें गिर पड़ते हैं। वह आग अपनी लपटोंसे सर्वत्र व्याप्त हो सम्पूर्ण भूतलको चाटती हुई-सी जान पड़ती है। इसी समय अत्यन्त भयानक कुत्ते वहाँ तुरंत ही दौड़ते हुए आते हैं और रोते हुए पापियोंके सब अज्लोंको टुकड़े-टुकड़े कर डालते हैं। पिताजी! इस प्रकार मैंने आपसे यह असिपत्रवनका वर्णन किया है।

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 98

हरिश्चन्द्रस्ततो राजा वसंश्चण्डालपत्तने ।प्रातर्मध्याह्नसमये सायञ्चैतदगायत

hariścandrastato rājā vasaṃścaṇḍālapattane / prātarmadhyāhnasamaye sāyañcaitadagāyata

हिन्दी अर्थ

अब इससे भी अत्यन्त भयडूकर तप्तकुम्भ नामक जो नरक है, उसका हाल सुनिये-- वहाँ चारों ओर आगकी लपटोंसे घिरे हुए बहुत-से लोहेके घड़े मौजूद हैं, जो खूब तपे होते हैं। उनमेंसे किन्हींमें तो प्रजलित अग्निकी आँचसे खौलता हुआ तेल भरा रहता है और किन्हींमें तपाये हुए लोहेका चूर्ण होता है। यमराजके दूत पापी मनुष्योंको उनका मुँह नीचे

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 99

बाला दीनमुखी दृष्ट्वा बालं दीनमुखं पुरः ।मां स्मरत्यसुखाविष्टा मोचयिष्यति नौ नृपः

bālā dīnamukhī dṛṣṭvā bālaṃ dīnamukhaṃ puraḥ / māṃ smaratyasukhāviṣṭā mocayiṣyati nau nṛpaḥ

हिन्दी अर्थ

करके उन्हीं घड़ोंमें डाल देते हैं। वहाँ पड़ते ही उनके शरीर टूट-फूट जाते हैं। शरीरकी मज्जाका भाग गलकर पानी हो जाता है। कपाल और नेत्रोंकी हड्डियाँ चटककर फूटने लगती हैं। भयानक गृध्र उनके अज्ञोंको नोच-नोचकर टुकड़े-टुकड़े कर देते हैं और फिर उन

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 100

उपात्तवित्तो विप्राय दत्त्वा वित्तमतो ऽधिकम् ।न सा मां मृगशावाक्षी वेत्ति पापतरं कृतम्

upāttavitto viprāya dattvā vittamato 'dhikam / na sā māṃ mṛgaśāvākṣī vetti pāpataraṃ kṛtam

हिन्दी अर्थ

टुकड़ोंको उन्हीं घड़ोंमें डाल देते हैं। वहाँ वे सभी टुकड़े सीझकर तेलमें मिल जाते हैं। मस्तक, शरीर, स्नायु, मांस, त्वचा और हड्डियाँ--सभी गल जाती हैं। तदनन्तर यमराजके दूत करछुलसे उलट-पुलटकर खौलते हुए तेलमें उन पापियोंको अच्छी तरह मथते हैं। पिताजी! इस प्रकार यह तप्तकुम्भ नामक नरककी बात मैंने आपको विस्तारपूर्वक

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 101

राज्यनाशः सुहृत्त्यागो भर्यातनयविक्रयः ।प्राप्ता चण्डालता चेयमहो दुः खपरम्परा

rājyanāśaḥ suhṛttyāgo bharyātanayavikrayaḥ / prāptā caṇḍālatā ceyamaho duḥ khaparamparā

हिन्दी अर्थ

जनक-यमदूत-संवाद, भिन्न-भिन्न पापोंसे विभिन्न नरकोंकी प्राप्तिका वर्णन

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 102

एवं स निवसन् नित्यं सस्मार दयितं सुतम् ।आर्याञ्चात्मसमाविष्टां हृतसर्वस्व आतुरः

evaṃ sa nivasan nityaṃ sasmāra dayitaṃ sutam / āryāñcātmasamāviṣṭāṃ hṛtasarvasva āturaḥ

हिन्दी अर्थ

पुत्र (सुमति) कहता है--पिताजी! इससे पहले सातवें जन्ममें मैं एक वैश्यके कुलमें उत्पन्न हुआ था। उस समय पौंसलेपर पानी पीनेको जाती हुई गौओंको मैंने वहाँ जानेसे रोक दिया था। उस पापकर्मके फलसे मुझे अत्यन्त भयड्ूकर नरकमें जाना पड़ा, जो आगकी लपटोंके कारण घोर दुःखदायी प्रतीत

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 103

कस्यचित्त्वथ कालस्य मृतचेलापहारकः ।हरिश्चन्द्रो ऽभवद्राजा श्मशाने तद्वशानुगः

kasyacittvatha kālasya mṛtacelāpahārakaḥ / hariścandro 'bhavadrājā śmaśāne tadvaśānugaḥ

हिन्दी अर्थ

होता था। उसमें लोहेकी-सी चोंचवाले पक्षी भरे पड़े थे। वहाँ पापियोंके शरीरको कोल्हूमें पेरनेके कारण जो रक्तकी धारा बहती थी, उससे कीचड़ जम गयी थी और काटे जानेवाले दुष्कर्मियोंके नरकमें पड़नेसे सब ओर घोर हाहाकार मचा रहता था। उस नरकमें पड़े मुझे सौ वर्षसे कुछ अधिक समय बीत गया। मैं

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 104

चण्डालेनानुशिष्टश्व मृतचेलापहारिणा ।शवागमनमन्विच्छन्निह तिष्ठ दिवानिशम्

caṇḍālenānuśiṣṭaśva mṛtacelāpahāriṇā / śavāgamanamanvicchanniha tiṣṭha divāniśam

हिन्दी अर्थ

महान् ताप और पीड़ासे सन्तप्त रहता था। प्यास और जलन बराबर बनी रहती

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 105

इदं राज्ञे ऽपि देयञ्च षड्भागन्तु शवं प्रति ।त्रयस्तु मम भागाः स्युर्द्वो भागौ तव वेतनम्

idaṃ rājñe 'pi deyañca ṣaḍbhāgantu śavaṃ prati / trayastu mama bhāgāḥ syurdvo bhāgau tava vetanam

हिन्दी अर्थ

मैं तप्तबालुका और तप्तकुम्भ नामक नरकोंके बीच था। उस शीतल वायुके सम्पर्कसे उन नरकोंमें पड़े हुए सभी जीवोंकी यातना दूर हो गयी। मुझे भी उतना ही आनन्द हुआ, जितना स्वर्गमें रहनेवालोंको वहाँ प्राप्त होता है। यह क्या बात हो गयी?” यों सोचते हुए हम सभी जीवोंने आनन्दकी अधिकताके

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 106

इति प्रतिसमादिष्टो जगाम शवमन्दिरम् ।दिशन्तु दक्षिणां यत्र वाराणस्यां स्थितं तदा

iti pratisamādiṣṭo jagāma śavamandiram / diśantu dakṣiṇāṃ yatra vārāṇasyāṃ sthitaṃ tadā

हिन्दी अर्थ

कारण एकटक नेत्रोंसे जब चारों ओर देखा, तब हमें बड़े ही उत्तम एक नररत्न दिखायी दिये। उनके साथ बिजलीके समान कान्तिमान् एक भयड्रकर यमदूत था, जो आगे होकर रास्ता दिखा रहा था और कहता था, “महाराज! इधरसे आइये' सैकड़ों यातनाओंसे व्याप्त नरकको देखकर उन पुरुषरत्नको बड़ी दया

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 107

श्मशानं घोरसंनादं शिवाशतसमाकुलम् ।शवमौलिसमाकीर्णं दुर्गन्धं बहुधूमकम्

śmaśānaṃ ghorasaṃnādaṃ śivāśatasamākulam / śavamaulisamākīrṇaṃ durgandhaṃ bahudhūmakam

हिन्दी अर्थ

आयी। उन्होंने यमदूतसे कहा।

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 108

पिशाच-भूत-वेताल-डाकिनी-यक्षसङ्कुलम् ।गृध्रगोमायुसङ्कीर्णं श्ववृन्दपरिवारितम्

piśāca-bhūta-vetāla-ḍākinī-yakṣasaṅkulam / gṛdhragomāyusaṅkīrṇaṃ śvavṛndaparivāritam

हिन्दी अर्थ

किया है, जिसके कारण अनेक प्रकारकी यातनाओंसे पूर्ण इस भयडूकर नरकमें मुझे आना पड़ा है? मेरा जन्म जनकवंशमें हुआ था! मैं विदेह देशमें विपश्चित् नामसे विख्यात राजा था और प्रजाजनोंका भलीभाँति पालन करता था। मैंने बहुत-से यज्ञ किये। धर्मके अनुसार पृथ्वीका पालन किया। कभी युद्धमें

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 109

अस्थिसंघातसङ्कीर्णं महादुर्गन्धसंकुलम् ।नानामृतसुहृन्नाद-रौद्रकोलाहलायुतम्

asthisaṃghātasaṅkīrṇaṃ mahādurgandhasaṃkulam / nānāmṛtasuhṛnnāda-raudrakolāhalāyutam

हिन्दी अर्थ

पीठ नहीं दिखायी तथा अतिथिको कभी निराश नहीं लौटने दिया। पितरों,

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 110

हा पुत्र ! मित्र ! हा बन्धो ! भ्रातर्वत्स ! प्रियाद्य मे ।हा पते ! भगिनि ! मातर्हा मातुल ! पितामह

hā putra ! mitra ! hā bandho ! bhrātarvatsa ! priyādya me / hā pate ! bhagini ! mātarhā mātula ! pitāmaha

हिन्दी अर्थ

नहीं किया। परायी स्त्री और पराये धन आदिकी अभिलाषा मेरे मनमें कभी नहीं हुई। जैसे गौएँ पानी पीनेकी इच्छासे स्वयं ही पौंसलेपर चली जाती हैं, उसी प्रकार पर्वके समय पितर और पुण्यतिथि आनेपर देवता स्वयं ही अपना भाग लेनेको मनुष्यके पास आते हैं। जिस गृहस्थके घरसे वे लंबी साँस लेकर निराश

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 111

मातामह ! पितः ! क्व गतो ऽस्येहि बान्धव ।इत्येवं वदतां यत्र ध्वनिः संश्रुयते महान्

mātāmaha ! pitaḥ ! kva gato 'syehi bāndhava / ityevaṃ vadatāṃ yatra dhvaniḥ saṃśruyate mahān

हिन्दी अर्थ

लौट जाते हैं, उसके इष्ट और पूर्त--दोनों प्रकारके धर्म नष्ट हो जाते हैं। पितरोंके दुःखपूर्ण उच्छवाससे सात जन्मोंका पुण्य नष्ट होता है और देवताओंका नि:श्वास तीन जन्मोंका पुण्य क्षीण कर देता है--इसमें तनिक भी सन्देह नहीं है;

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 112

ज्वलन्मांस-वसा-मेदच्छमच्छमितसंकुलम्

jvalanmāṃsa-vasā-medacchamacchamitasaṃkulam

हिन्दी अर्थ

इसलिये मैं देवकर्म और पितृकर्मके लिये सदा ही सावधान रहता था। ऐसी दशामें मुझे इस अत्यन्त दारुण नरकमें कैसे आना पड़ा?

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 113

अर्धदग्धाः शवाः श्यामा विकसद्दन्तपङ्क्तयः ।हसन्तीवाग्निमध्यस्थाः कायस्येयं दशा त्विति

ardhadagdhāḥ śavāḥ śyāmā vikasaddantapaṅktayaḥ / hasantīvāgnimadhyasthāḥ kāyasyeyaṃ daśā tviti

हिन्दी अर्थ

उन महात्माके इस प्रकार पूछनेपर यमराजका दूत देखनेमें भयड्कर होनेपर भी हमलोगोंके सुनते-सुनते विनययुक्त वाणीमें बोला।

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 114

अग्नेश्चटचटाशब्दो वयसामस्थिपङ्क्तिषु ।बान्धवाक्रान्दशब्दश्च पुक्कसेषु प्रहर्षजः

agneścaṭacaṭāśabdo vayasāmasthipaṅktiṣu / bāndhavākrāndaśabdaśca pukkaseṣu praharṣajaḥ

हिन्दी अर्थ

यमदूतने कहा--महाराज! आप जैसा कहते हैं, वह सब ठीक है। उसमें तनिक भी सन्देहके लिये स्थान नहीं है। किन्तु आपके द्वारा एक छोटा-सा पाप भी बन गया है। मैं उसे याद दिलाता हूँ। विदर्भराजकुमारी पीवरी, जो आपकी पत्नी थी, एक समय ऋतुमती हुई थी; किन्तु उस अवसरपर केकयराजकुमारी

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 115

गायतां भूत-वेताल-पिशाचगणः रक्षसाम् ।श्रूयते सुमहान् घोरः कल्पान्त इव निः स्वनः

gāyatāṃ bhūta-vetāla-piśācagaṇaḥ rakṣasām / śrūyate sumahān ghoraḥ kalpānta iva niḥ svanaḥ

हिन्दी अर्थ

सुशोभनामें आसक्त होनेके कारण आपने उसके ऋतुकालको सफल नहीं बनाया। वह आपके समागमसुखसे वज्चित रह गयी। ऋतुकालका उल्लड्घन करनेके कारण ही आपको ऐसे भयड्कर नरकतक आना पड़ा है। जो धर्मात्मा पुरुष काममें आसक्त होकर स्त्रीके ऋतुकालका उललड्घन करता है, वह

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 116

महामहिषकारीष-गोशकृद्राशिसङ्कुलम् ।तदुत्थभस्मकूटैश्च वृतं सास्थिभिरुन्नतैः

mahāmahiṣakārīṣa-gośakṛdrāśisaṅkulam / tadutthabhasmakūṭaiśca vṛtaṃ sāsthibhirunnataiḥ

हिन्दी अर्थ

पितरोंका ऋणी होनेसे पापको प्राप्त हो नरकमें पड़ता है। राजन! इतना ही

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 117

नानोपहारस्त्रग्दीप-काकविक्षेपकालिकम् ।अनेकशब्दबहुलं श्मशानं नरकायते

nānopahārastragdīpa-kākavikṣepakālikam / anekaśabdabahulaṃ śmaśānaṃ narakāyate

हिन्दी अर्थ

आपका पाप है। इसके अतिरिक्त और कोई पाप नहीं है। इसलिये आइये, अब पुण्यलोकोंका उपभोग करनेके लिये चलिये।

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 118

सवह्निगर्भैरशिवैः शिवारुतैर् निनादितं भीषणरावगह्वरम् ।भयं भयस्याप्युपसञ्जनैर्भृशं श्मशानमाक्रन्दविरावदारुणम्

savahnigarbhairaśivaiḥ śivārutair nināditaṃ bhīṣaṇarāvagahvaram / bhayaṃ bhayasyāpyupasañjanairbhṛśaṃ śmaśānamākrandavirāvadāruṇam

हिन्दी अर्थ

राजा बोले--देवदूत! तुम जहाँ मुझे ले चलोगे, वहाँ चलूँगा; किन्तु इस समय कुछ पूछ रहा हूँ, उसका तुम्हें ठीक-ठीक उत्तर देना चाहिए। ये वज्रके समान चोंचवाले कौए, जो इन पुरुषोंकी आँखें निकाल लेते हैं और फिर उन्हें नये नेत्र प्राप्त हो जाते हैं, इन लोगोंने कौन-सा निन्दित कर्म किया है? इस

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 119

स राजा तत्र सम्प्राप्तो दुः खितः शोचनोद्यतः ।हा भृत्या मन्त्रिणो विप्राः तद्राज्यं विधे गतम्

sa rājā tatra samprāpto duḥ khitaḥ śocanodyataḥ / hā bhṛtyā mantriṇo viprāḥ tadrājyaṃ vidhe gatam

हिन्दी अर्थ

बातको बताओ। मैं देखता हूँ, कौए इनकी जीभ उखाड़ लेते हैं, किन्तु फिर नयी जीभ उत्पन्न हो जाती है। इनके सिवा ये दूसरे लोग क्यों आरेसे चीरे जाते हैं और अत्यन्त दुःख भोगते हैं? कुछ लोग तपायी हुई बालुकामें भूने जाते हैं और कुछ लोग खौलते हुए तेलमें पड़कर पक रहे हैं। लोहेके समान चोंचवाले पक्षी जिन्हें

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 120

हा शैव्ये पुत्र हा बाल मां त्यक्त्वा मन्दभाग्यकम् ।विश्वामित्रस्य दोषेण गताः कुत्रापि ते मम

hā śaivye putra hā bāla māṃ tyaktvā mandabhāgyakam / viśvāmitrasya doṣeṇa gatāḥ kutrāpi te mama

हिन्दी अर्थ

नोच-नोचकर खींच रहे हैं, वे कैसे लोग हैं? ये बेचारे शरीरकी नस-नाड़ियोंके कटनेसे पीड़ित हो बड़े जोर-जोरसे चीखते और चिल्लाते हैं। लोहेकी चोंचकी आधघातसे इनके सारे अड़्ेंमें घाव हो गया है, जिससे इन्हें बड़ा कष्ट होता है। इन्होंने ऐसा कौन-सा अनिष्ट किया है, जिसके कारण ये रात-दिन सताये जा रहे

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 121

इत्येवं चिन्तयंस्तत्र चण्डालोक्तं पुनः पुनः ।मलिनो रूक्षसर्वाङ्गः केशवान् गन्धवान् ध्वजी

ityevaṃ cintayaṃstatra caṇḍāloktaṃ punaḥ punaḥ / malino rūkṣasarvāṅgaḥ keśavān gandhavān dhvajī

हिन्दी अर्थ

हैं? ये तथा और भी जो पापियोंकी यातनाएँ देखी जाती हैं, वे किन कर्मोके परिणाम हैं? ये सब बातें मुझे पूर्णरूपसे बतलाओ।

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 122

लकुटी कालकल्पश्च धावंश्चापि ततस्ततः ।अस्मिन् शव इदं मूल्यं प्राप्तं प्राप्स्यामि चाप्युत

lakuṭī kālakalpaśca dhāvaṃścāpi tatastataḥ / asmin śava idaṃ mūlyaṃ prāptaṃ prāpsyāmi cāpyuta

हिन्दी अर्थ

यमदूतने कहा--राजन्! मनुष्यको पुण्य और पाप बारी-बारीसे भोगने पड़ते हैं। भोगनेसे ही पाप अथवा पुण्यका क्षय होता है। लाखों जन्मोंके सज्चित पुण्य और पाप मनुष्योंके लिये सुख-दुःखका अंकुर उत्पन्न करते हैं। जैसे बीज जलकी इच्छा रखते हैं, उसी प्रकार पुण्य और पाप देश-काल,

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 123

इदं मम इदं राज्ञे मुख्यचण्डालके त्विदम् ।इति धावन् दिशो राजा जीवन् योन्यन्तरं गतः

idaṃ mama idaṃ rājñe mukhyacaṇḍālake tvidam / iti dhāvan diśo rājā jīvan yonyantaraṃ gataḥ

हिन्दी अर्थ

अन्यान्य कर्म और कर्ताकी अपेक्षा करते हैं। जैसे राह चलते समय काँटेपर पैर पड़ जानेसे उसके चुभनेपर थोड़ा दुःख होता है, उसी प्रकार किसी भी देश- कालमें किया हुआ थोड़ा पाप थोड़े दुःखका कारण होता है; किन्तु वही पाप जब बहुत अधिक मात्रामें हो जाता है तब पैरमें शूल अथवा लोहेकी कील

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 124

जीर्णकर्पण्टसुग्रन्थि-कृतकन्थापरिग्रहः चिताभस्मरजोलिप्त-मुखबाहूदराङिघ्रकः

jīrṇakarpaṇṭasugranthi-kṛtakanthāparigrahaḥ citābhasmarajolipta-mukhabāhūdarāṅighrakaḥ

हिन्दी अर्थ

गड़नेके समान अधिक दुःख प्रदान करता है--सिरदर्द आदि दुस्सह रोगोंका कारण बनता है। जैसे अपथ्य भोजन और सर्दी-गर्मीका सेवन श्रम और ताप आदिका जनक होता है, उसी प्रकार भिन्न-भिन्न पाप भी फलकी प्राप्ति करानेमें एक-दूसरेकी अपेक्षा रखते हैं। ऐसे ही बड़े-बड़े पाप दीर्घकालतक रहनेवाले रोग

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 125

नानामेदो-वसा-मज्जा लिप्तपाण्यङ्गुलिः श्वसन् ।नानाशवोदनकृता-हारतृप्तिपरायणः

nānāmedo-vasā-majjā liptapāṇyaṅguliḥ śvasan / nānāśavodanakṛtā-hāratṛptiparāyaṇaḥ

हिन्दी अर्थ

और विकारोंके उत्पादक होते हैं। उन्हींसे शस्त्र और अग्निका भय प्राप्त होता है। वे ही असहा पीड़ा और बन्धन आदि फल प्रदान करते हैं। इस प्रकार जीव अनेक जन्मोंके सज्चित पुण्य और पापोंके फलस्वरूप सुख और दु:खोंको भोगता हुआ इस लोकमें स्थित रहता है।

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 126

तदीयमाल्यसंश्लेषकृतमस्तकमण्डनः ।न रात्रौ न दिवा शेते हा हेति प्रवदन् मुहुः

tadīyamālyasaṃśleṣakṛtamastakamaṇḍanaḥ / na rātrau na divā śete hā heti pravadan muhuḥ

हिन्दी अर्थ

राजन! जैसे नरकोंमें पड़े हुए जीव अपने घोर महापापका फल भोगते हैं, उसी प्रकार ये स्वर्गलोकमें देवताओंके साथ रहकर गन्धर्व, सिद्ध और अप्सराओंके संगीत आदिका सुख उठाते हुए पुण्योंका उपभोग करते हैं। देवता, मनुष्य और पशु-पक्षियोंकी योनिमें जन्म लेकर जीव अपने पुण्य-पापजनित

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 127

एवं द्वादशमासास्तु नीताः शतसमोपमाः ।स कदाचिन्नृपश्रेष्ठः श्रान्तो बन्धुवियोगवान्

evaṃ dvādaśamāsāstu nītāḥ śatasamopamāḥ / sa kadācinnṛpaśreṣṭhaḥ śrānto bandhuviyogavān

हिन्दी अर्थ

सुख-दुःखरूप शुभाशुभ फलोंको भोगता है। राजन! आप जो यह पूछ रहे हैं कि किस-किस पापसे पापियोंको कौन-कौन-सी यातनाएँ मिलती हैं, वह सब मैं आपको बतला रहा हूँ। जो नीच मनुष्य कामना और लोभके वशीभूत हो दूषित दृष्टि एवं कलुषित चित्तसे परायी स्त्री और पराये धनपर आँखें गड़ाते हैं, उनकी

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 128

निद्राभिभूतो रूक्षाङ्गो निश्चेष्टः सुप्त एव च ।तत्रापि शयनीये स दृष्टवानद्भुतं हमत्

nidrābhibhūto rūkṣāṅgo niśceṣṭaḥ supta eva ca / tatrāpi śayanīye sa dṛṣṭavānadbhutaṃ hamat

हिन्दी अर्थ

दोनों आँखोंको ये वज्रतुल्य चोंचवाले पक्षी निकाल लेते हैं और पुन:-पुनः इनके नये नेत्र उत्पन्न हो जाते हैं। इन पापी मनुष्योंने जितने निमेषतक पापपूर्ण दृष्टिपात किया है, उतने ही हजार वर्षोतक ये नेत्रकी पीड़ा भोगते हैं। जिन लोगोंने असत्-शास्त्रका उपदेश किया है तथा किसीको बुरी सलाह दी है,

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 129

श्मशानाभ्यासयोगेन दैवस्य बलवत्तया ।अन्यदेहेन दत्त्वा तु गुरवे गुरुदक्षिणाम्

śmaśānābhyāsayogena daivasya balavattayā / anyadehena dattvā tu gurave gurudakṣiṇām

हिन्दी अर्थ

जिन्होंने शास्त्रका उलटा अर्थ लगाया है, मुँहसे झूठी बातें निकाली हैं तथा वेद,

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 130

तदा द्वादश वर्षाणि दुः खदानात्तु निष्कृतिः ।आत्मानं स ददर्शाथ पुक्कसीगर्भसम्भवम्

tadā dvādaśa varṣāṇi duḥ khadānāttu niṣkṛtiḥ / ātmānaṃ sa dadarśātha pukkasīgarbhasambhavam

हिन्दी अर्थ

चोंचवाले भयड्कर पक्षी उखाड़ते हैं और वह जिह्ठा नयी-नयी उत्पन्न होती रहती है। जितने निमेषतक उनके द्वारा जिह्लाजनित पाप हुआ होता है, उतने वर्षोतक उन्हें यह कष्ट भोगना पड़ता है। जो नराधम दो मित्रोंमें फ़ूट डालते हैं, पिता-पुत्रमें, स्वजनोंमें, यजमान और पुरोहितमें, माता और पुत्रमें, सजद्भी-

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 131

तत्रस्थश्चाप्यसौ राजा सो ऽचिन्तयदिदं तदा ।इतो निष्क्रान्तमात्रो हि दानधर्मं करोम्यहम्

tatrasthaścāpyasau rājā so 'cintayadidaṃ tadā / ito niṣkrāntamātro hi dānadharmaṃ karomyaham

हिन्दी अर्थ

साथियोंमें तथा पति और पत्नीमें वैर डालते हैं, वे ही ये आरेसे चीरे जा रहे हैं। आप इनकी दुर्गति देखिये। जो दूसरोंको ताप देते, उनकी प्रसन्नतामें बाधा पहुँचाते, पंखे, हवादार स्थान, चन्दन और खसकी ट्ट्टी आदिका अपहरण करते हैं तथा निर्दोष व्यक्तियोंको भी प्राणान्तक कष्ट पहुँचाते हैं, वे ही ये अधम पापी

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 132

अनन्तरं स जातस्तु तदा पुक्कसबालकः ।श्मशानमृतसंस्कार-करणेषु सदोद्यतः

anantaraṃ sa jātastu tadā pukkasabālakaḥ / śmaśānamṛtasaṃskāra-karaṇeṣu sadodyataḥ

हिन्दी अर्थ

हैं जो तपायी हुई बालूमें पड़कर कष्ट भोगते हैं। जो ब्राह्मण किसी देवकार्य या पितृकार्यमें दूसरेके द्वारा निमन्त्रित होकर भी दूसरे किसीके यहाँ श्राद्धझ-भोजन कर लेता है, उसके यहाँ आनेपर ये पक्षी दो टुकड़े कर डालते हैं। जो अपनी अनुचित बातोंसे साधु पुरुषोंके मर्मपर आघात पहुँचाता है, उसको ये पक्षी

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 133

प्राप्ते तु सप्तमे वर्षे श्मशाने ऽथ मृतो द्विजः ।आनीतो बन्धुभिर्दृष्टस्तेन तत्राधनो गुणी

prāpte tu saptame varṣe śmaśāne 'tha mṛto dvijaḥ / ānīto bandhubhirdṛṣṭastena tatrādhano guṇī

हिन्दी अर्थ

अत्यन्त पीड़ा देते हैं। इन्हें ऐसा करनेसे कोई रोक नहीं सकता। जो झूठी बातें कहकर और विपरीत धारणा बनाकर किसीकी चुगली खाते हैं, उनकी जिह्नाके इस प्रकार तेज किये हुए छूरोंसे दो टुकड़े कर दिये जाते हैं।

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 134

मूल्यार्थिना तु तेनापि परिभूतास्तु ब्राह्मणाः ।ऊचुस्ते ब्राह्मणास्तत्र विश्वामित्रस्य चेष्टितम्

mūlyārthinā tu tenāpi paribhūtāstu brāhmaṇāḥ / ūcuste brāhmaṇāstatra viśvāmitrasya ceṣṭitam

हिन्दी अर्थ

जिन्होंने उद्ण्डतावश माता, पिता तथा गुरुजनोंका अनादर किया है, वे ही ये पीब, विष्ठा और मूत्रसे भरे हुए गढ़ोंमें नीचे मुख करके डुबाये जा रहे हैं। जो लोग देवता, अतिथि, अन्यान्य प्राणी, भृत्यवर्ग, अभ्यागत, पितर, अग्नि तथा पक्षियोंको अन्नका भाग दिये बिना ही स्वयं भोजन कर लेते हैं, वे ही दुष्ट यहाँ

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 135

पापिष्ठमशुभं कर्म कुरु त्वं पापकारक ।हरिश्चन्द्रः पुरा राजा विश्वामित्रेण पुक्कसः

pāpiṣṭhamaśubhaṃ karma kuru tvaṃ pāpakāraka / hariścandraḥ purā rājā viśvāmitreṇa pukkasaḥ

हिन्दी अर्थ

पीब और गोंद चाटकर रहते हैं। उनका शरीर तो पहाड़के समान विशाल होता है, किन्तु मुख सूईकी नोकके बराबर रहता है। देखिये, यही वे लोग हैं। जो लोग ब्राह्मण अथवा किसी अन्य वर्णके मनुष्यको एक पद्धक्तिमें बिठाकर भोजनमें भेद करते हैं, उन्हें यहाँ विष्ठा खाकर रहना पड़ता है। जो लोग एक समुदायमें

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 136

कृतः पुण्यविनाशेन ब्राह्मणस्वापनाशनात् ।यदा न क्षमते तेषां तैः स शप्तो रुषा तदा

kṛtaḥ puṇyavināśena brāhmaṇasvāpanāśanāt / yadā na kṣamate teṣāṃ taiḥ sa śapto ruṣā tadā

हिन्दी अर्थ

साथ-साथ आये हुए अर्थार्थी मनुष्यको निर्धन जानकर छोड़ देते और अकेले अपना अन्न भोजन करते हैं, वे ही यहाँ थूक और खँँखार भोजन करते हैं। राजन! जिन लोगोंने जूठे हाथोंसे गौ, ब्राह्मण और अग्नियोंका स्पर्श किया है, उन्हींमेंसे ये लोग यहाँ मौजूद हैं, जो जलते हुए लोहेके खंभोंपर हाथ रखकर

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 137

गच्छ त्वं नरकं घोरमधुनैव नराधम ।इत्युक्तमात्रे वचने स्वप्नस्थः स नृपस्तदा

gaccha tvaṃ narakaṃ ghoramadhunaiva narādhama / ityuktamātre vacane svapnasthaḥ sa nṛpastadā

हिन्दी अर्थ

उन्हें चाट रहे हैं। जिन्होंने स्वेच्छापूर्वक जूठे मुँह होकर भी सूर्य-चन्द्रमा और तारोंपर दृष्टिपात किया है, उनकी आँखोंमें आग रखकर यमराजके दूत उसे धौंकते हैं। गौ, अग्नि, माता, ब्राह्मण, ज्येष्ठ भ्राता, पिता, बहिन, कुटु॒म्बकी स्त्री,

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 138

अपश्यद्यमदूतान् वै पाशहस्तान् भयावहान् ।तैः संगृहीतमात्मानं नीयमानं तदा बलात्

apaśyadyamadūtān vai pāśahastān bhayāvahān / taiḥ saṃgṛhītamātmānaṃ nīyamānaṃ tadā balāt

हिन्दी अर्थ

गुरु तथा बड़े-बूढ़ोंका जो पैरोंसे स्पर्श करते हैं, उनके दोनों पैर यहाँ आगमें तपायी हुई लोहेकी बेड़ियोंसे जकड़ दिये जाते हैं और उन्हें अँगारोंके ढेरमें खड़ा कर दिया जाता है। उसमें उनके पैरसे लेकर घुटनेतकका भाग जलता रहता है। जो नराधम अपने कानोंसे गुरु, देवता, द्विज और वेदोंकी निन्दा सुनते हैं और

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 139

पश्यति स्म भृशं खिन्नो हा मातः पितरद्य मे ।एवंवादी स नरके तैलद्रोण्यां निपातितः

paśyati sma bhṛśaṃ khinno hā mātaḥ pitaradya me / evaṃvādī sa narake tailadroṇyāṃ nipātitaḥ

हिन्दी अर्थ

उसे सुनकर प्रसन्न होते हैं, उन पापियोंके कानोंमें ये यमराजके दूत आगमें तपायी हुई लोहेकी कीलें ठोंक देते हैं। विलाप करनेपर भी उन्हें छुटकारा नहीं मिलता। जो लोग क्रोध और लोभके वशमें होकर पौंसले, देवमन्दिर, ब्राह्मणके घर तथा देवालयके सभाभवन तुड़वाकर नष्ट करा देते हैं, उनके यहाँ आनेपर ये

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 140

क्रकचैः पाट्यमानस्तु क्षुरधाराभिरप्यधः ।अन्धे तमसि दुः खार्तः पूयशोणितभोजनः

krakacaiḥ pāṭyamānastu kṣuradhārābhirapyadhaḥ / andhe tamasi duḥ khārtaḥ pūyaśoṇitabhojanaḥ

हिन्दी अर्थ

अत्यन्त कठोर स्वभाववाले यमदूत इन तीखे शस्त्रोंसे शरीरकी खाल उधेड़ लेते हैं। उनके चीखने-चिल्लानेपर भी ये दया नहीं करते। जो मनुष्य गौ, ब्राह्मण तथा सूर्युकी ओर मुँह करके मल-मूत्रका त्याग करते हैं, उनकी आँतोंको कौए गुदामार्गसे खींचते हैं। जो किसी एकको कन्या देकर फिर दूसरेके साथ उसका

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 141

सप्तवर्षं मृतात्मानं पुक्कसत्वे ददर्श ह ।दिनं दिनन्तु नरके दह्यते पच्यते ऽन्यतः

saptavarṣaṃ mṛtātmānaṃ pukkasatve dadarśa ha / dinaṃ dinantu narake dahyate pacyate 'nyataḥ

हिन्दी अर्थ

विवाह कर देता है, उसके शरीरमें बहुत-से घाव करके उसे खारे पानीकी नदीमें बहा दिया जाता है। जो मनुष्य दुर्भिक्ष अथवा सड्कटकालमें अपने पुत्र, भृत्य, पत्नी आदि तथा बन्धुवर्गको अकिज्चन जानकर भी त्याग देता और केवल अपना पेट पालनेमें लग जाता है, वह भी जब इस लोकमें आता है तो

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 142

खिद्यते क्षोभ्यते ऽन्यत्र मार्यते पाट्यते ऽन्यतः ।क्षार्यते दीप्यते ऽन्यत्र शीतवाताहतो ऽन्यतः

khidyate kṣobhyate 'nyatra māryate pāṭyate 'nyataḥ / kṣāryate dīpyate 'nyatra śītavātāhato 'nyataḥ

हिन्दी अर्थ

यमराजके दूत भूख लगनेपर उसके मुखमें उसके ही शरीरका मांस नोचकर डाल देते हैं और वही उसे खाना पड़ता है। जो अपनी शरणमें आये हुए तथा अपनी ही दी हुई वृत्तिसे जीविका चलानेवाले मनुष्योंको लोभवश त्याग देता है, वह भी यमदूतोंद्वारा इसी प्रकार कोल्हूमें पेरे जानेके कारण यन्त्रणा भोगता है।

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 143

एवं दिनं वर्षशत-प्रमाणं नरके ऽभवत् ।तथा वर्षशतं तत्र श्रीवितं नरके भटैः

evaṃ dinaṃ varṣaśata-pramāṇaṃ narake 'bhavat / tathā varṣaśataṃ tatra śrīvitaṃ narake bhaṭaiḥ

हिन्दी अर्थ

जो मनुष्य अपने जीवनभरके किये हुए पुण्यको धनके लोभसे बेच डालते हैं, वे इन्हीं पापियोंकी तरह चक्कियोंमें पीसे जाते हैं। किसीकी धरोहर हड़प लेनेवाले लोगोंके सब अड़ रस्सियोंसे बाँध दिये जाते हैं और उन्हें दिन-रात कीड़े, बिच्छू तथा सर्प काटते-खाते रहते हैं। जो पापी दिनमें मैथुन करते और

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 144

ततो निपातितो भूमौ विष्ठाशी श्वा व्यजायत ।वान्ताशी शीतदग्धश्च मासमात्रे मृतो ऽपि सः

tato nipātito bhūmau viṣṭhāśī śvā vyajāyata / vāntāśī śītadagdhaśca māsamātre mṛto 'pi saḥ

हिन्दी अर्थ

परायी स्त्रीको भोगते हैं, वे यहाँ भूखसे दुर्बल रहते हैं, प्यासकी पीड़ासे उनकी जीभ और तालू गिर जाते हैं और वे वेदनासे व्याकुल हो जाते हैं। यह देखिये, सामने लोहेके बड़े-बड़े काँटोंसे भरा हुआ सेमरका वृक्ष खड़ा है। इसपर चढ़ाये हुए पापियोंके सब अड़ विदीर्ण हो गये हैं और अधिक मात्रामें गिरते हुए खूनसे

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 145

अथापश्यत् खरं देहं हस्तिनं वानरं पशुम् ।छागं विडालं कङ्कञ्च गामविं पक्षिणं कृमिम्

athāpaśyat kharaṃ dehaṃ hastinaṃ vānaraṃ paśum / chāgaṃ viḍālaṃ kaṅkañca gāmaviṃ pakṣiṇaṃ kṛmim

हिन्दी अर्थ

ये लथपथ हो रहे हैं। नरश्रेष्ठ) इधर दृष्टि डालिये, ये परायी स्त्रियोंका सतीत्व नष्ट करनेवाले लोग हैं। इन्हें यमराजके दूत घरियामें रखकर गला रहे हैं। जो उद्दण्ड मनुष्य गुरुको नीचे बिठाकर और स्वयं ऊँचे आसनपर बैठकर अध्ययन करता अथवा शिल्पकलाकी शिक्षा ग्रहण करता है, वह इसी प्रकार अपने मस्तकपर

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 146

मत्स्यं कूर्मं वराहञ्च श्वाविधं कुक्कुटं शुकम् ।शारिकां स्थावरांश्चैव सर्पमन्यांश्व देहिनः

matsyaṃ kūrmaṃ varāhañca śvāvidhaṃ kukkuṭaṃ śukam / śārikāṃ sthāvarāṃścaiva sarpamanyāṃśva dehinaḥ

हिन्दी अर्थ

शिलाका भारी भार ढोता हुआ क्लेश पाता है। यमलोकके मार्गमें वह अत्यन्त पीड़ित एवं भूखसे दुर्बल रहता है और उसका मस्तक दिन-रात बोझ ढोनेकी पीड़ासे व्यथित होता रहता है। जिन्होंने जलमें मूत्र, थूक और विष्ठाका त्याग

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 147

दिवसे दिवसे जन्म प्राणिनः प्राणिनस्तदा ।अपश्यद् दुः खसन्तप्तो दिनं वर्षशतं तथा

divase divase janma prāṇinaḥ prāṇinastadā / apaśyad duḥ khasantapto dinaṃ varṣaśataṃ tathā

हिन्दी अर्थ

किया है, वे ही लोग इस समय थूक, विष्ठा और मूत्रसे भरे हुए दुर्गन्धयुक्त नरकमें पड़े हैं। ये लोग जो भूखसे व्याकुल होनेपर एक-दूसरेका मांस खा रहे हैं, इन्होंने पूर्वकालमें अतिथियोंको भोजन दिये बिना ही भोजन किया है। जिन लोगोंने अग्निहोत्री होकर भी वेदों और वैदिक अग्नियोंका परित्याग किया है, वे

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 148

एवं वर्षशतं पूर्णं गतं तत्र कुयोनिषु ।अपश्यच्च कदाचित् स राजा तत् स्वकुलोद्भवम्

evaṃ varṣaśataṃ pūrṇaṃ gataṃ tatra kuyoniṣu / apaśyacca kadācit sa rājā tat svakulodbhavam

हिन्दी अर्थ

ही ये पर्वतोंकी चोटीसे बारंबार नीचे गिराये जाते हैं। जो लोग दूसरी बार ब्याही जानेवाली स्त्रीके पति होकर जीवन बिता चुके हैं, वे ही इस समय यहाँ कीड़े हुए हैं, जिन्हें चींटियाँ खा रही हैं। पतितोंका दिया हुआ दान लेने, उनका यज्ञ कराने तथा प्रतिदिन उनकी सेवामें रहनेसे मनुष्य पत्थरके भीतर कीड़ा होकर सदा

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 149

तत्र स्थितस्य तस्यापि राज्यं द्यूतेन हारितम् ।भार्या हृता च पुत्रश्च स चैकाकी वनं गतः

tatra sthitasya tasyāpi rājyaṃ dyūtena hāritam / bhāryā hṛtā ca putraśca sa caikākī vanaṃ gataḥ

हिन्दी अर्थ

निवास करता है। जो कुटुम्बके लोगों, मित्रों तथा अतिथिके देखते-देखते अकेले ही मिठाई उड़ाता है, उसे यहाँ जलते हुए अँगारे चबाने पड़ते हैं। राजन! इस पापीने लोगोंकी पीठका मांस खाया है--पीठ-पीछे सबकी बुराई की है, इसीलिये भयड्कर भेड़िये प्रतिदिन इसका मांस खा रहे हैं।+

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 150

तत्रापश्यत स सिंहं वै व्यादितास्यं भयावहम् ।बिभक्षयिषुमायातं शरभेण समन्वितम्

tatrāpaśyata sa siṃhaṃ vai vyāditāsyaṃ bhayāvaham / bibhakṣayiṣumāyātaṃ śarabheṇa samanvitam

हिन्दी अर्थ

इस नीचने उपकार करनेवाले लोगोंके साथ कृतघ्नता की है; अतएव यह भूखसे व्याकुल तथा अंधा, बहरा और गूँगा होकर भटक रहा है। इस खोटी बुद्धिवाले कृतघ्नने अपने मित्रोंकी बुराई की है, इसीलिये यह तप्तकुम्भ नरकमें गिर रहा है। इसके बाद चक्कियोंमें पीसा जायगा, फिर तपायी हुई बालूमें भूना

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 151

पुनश्च भक्षितः सो ऽपि भार्यां शोचितुमुद्यतः ।हा शैव्ये ! क्व गतास्यद्य मामिहापास्य दुः खितम्

punaśca bhakṣitaḥ so 'pi bhāryāṃ śocitumudyataḥ / hā śaivye ! kva gatāsyadya māmihāpāsya duḥ khitam

हिन्दी अर्थ

जायगा। उसके बाद कोल्हूमें पेरा जायगा। तत्पश्चात् असिपत्रवनमें इसे यातना दी जायगी। फिर आरेसे यह चीरा जायगा। तदनन्तर कालसूत्रसे काटा जायगा। इसके बाद और भी बहुत-सी यातनाएँ इसे भोगनी पड़ेंगी। इसपर भी मित्रोंके साथ विश्वासघात करनेके पापसे इसका उद्धार कैसे होगा-यह मैं भी नहीं

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 152

अपश्यत् पुनरेवापि भार्यां स्वं सहपुत्रकाम् ।त्रायस्व त्वं हरिश्चन्द्र किं द्यूतेन तव प्रभो

apaśyat punarevāpi bhāryāṃ svaṃ sahaputrakām / trāyasva tvaṃ hariścandra kiṃ dyūtena tava prabho

हिन्दी अर्थ

जानता। जो ब्राह्मण एक-दूसरेसे मिलकर सदा श्राद्धान्न भोजन करनेमें ही आसक्त रहते हैं, उन्हें दुष्ट सर्पोके सर्वाड़्से निकला हुआ फेन पीना पड़ता है। सुवर्णकी चोरी करनेवाले, ब्रह्महत्यारे, शराबी तथा गुरुपत्नीगामी--ये चारों प्रकारके महापापी नीचे और ऊपर धधकती हुई आगके बीचमें झोंककर सब

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 153

पुत्रस्ते शोच्यतां प्राप्तो भर्यंया शैव्यया सह ।स नापश्यत् पुनरपि धावमानः पुनः पुनः

putraste śocyatāṃ prāpto bharyaṃyā śaivyayā saha / sa nāpaśyat punarapi dhāvamānaḥ punaḥ punaḥ

हिन्दी अर्थ

ओरसे जलाये जाते हैं। इस अवस्थामें उन्हें कई हजार वर्षोतक रहना पड़ता है। तदनन्तर वे मनुष्ययोनिमें उत्पन्न होते तथा कोढ़ एवं यक्ष्मा आदि रोगोंसे युक्त रहते हैं। वे मरनेके बाद फिर नरकमें जाते हैं और पुनः उसी प्रकार नरकसे लौटनेपर रोगयुक्त जन्म धारण करते हैं। इस प्रकार कल्पके अन्ततक उनके

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 154

अथापश्यत् पुनरपि स्वर्गस्थः स नराधिपः ।नीयते मुक्तकेशी सा दीना विवसना बलात्

athāpaśyat punarapi svargasthaḥ sa narādhipaḥ / nīyate muktakeśī sā dīnā vivasanā balāt

हिन्दी अर्थ

आवागमनका यह चक्र चलता रहता है। गौकी हत्या करनेवाला मनुष्य तीन जन्मोंतक नीच-से-नीच नरकोंमें पड़ता है। अन्य सभी उपपातकोंका फल भी ऐसा ही निश्चय किया गया है। नरकसे निकले हुए पापी जीव जिन-जिन पातकोंके कारण जिन-जिन योनियोंमें जन्म लेते हैं, वह सब मैं बतला रहा हूँ;

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 155

हाहावाक्यं प्रमुञ्चन्ती त्रायस्वेत्यसकृत्स्वना ।अथापश्यत् पुनस्तत्र धर्मराजस्य शासनात्

hāhāvākyaṃ pramuñcantī trāyasvetyasakṛtsvanā / athāpaśyat punastatra dharmarājasya śāsanāt

हिन्दी अर्थ

आप ध्यान देकर सुनें।

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 156

आक्रान्दन्त्यन्तरीक्षस्था आगच्छेह नराधिप ।विश्वामित्रेण विज्ञप्तो यमो राजंस्तवार्थतः

ākrāndantyantarīkṣasthā āgaccheha narādhipa / viśvāmitreṇa vijñapto yamo rājaṃstavārthataḥ

हिन्दी अर्थ

३. अपदिद्धास्तु यैवेंदा वह्ययश्नवाहिताग्निभि: । त इमे शैलशज्ग्रात् पात्यन्ते5ध: पुनः

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 157

इत्युक्त्वा सर्पपाशैस्तु नीयते बलवद्विभुः ।श्राद्धदेवेन कथितं विश्वामित्रस्य चेष्टितम्

ityuktvā sarpapāśaistu nīyate balavadvibhuḥ / śrāddhadevena kathitaṃ viśvāmitrasya ceṣṭitam

हिन्दी अर्थ

२. वृकैर्भयड्करै: पृष्ठ नित्यमस्योपभुज्यते । पृष्ठमांसं नृपैतेन यतो लोकस्य भक्षितम् ।।

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 158

तत्रापि तस्य विकृतिर्नाधर्मोत्था व्यवर्धत ।एताः सर्वा दशास्तस्य याः स्वप्ने सम्प्रदर्शिताः

tatrāpi tasya vikṛtirnādharmotthā vyavardhata / etāḥ sarvā daśāstasya yāḥ svapne sampradarśitāḥ

हिन्दी अर्थ

पापोंके अनुसार भिन्न-भिन्न योनियोंकी प्राप्ति तथा विपश्चितके पुण्यदानसे पापियोंका उद्धार

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 159

सर्वास्तास्तेन सम्भुक्ता यावद्वर्षाणि द्वादश ।अतीते द्वादशे वर्ष नीयमानो भटैर्बलात्

sarvāstāstena sambhuktā yāvadvarṣāṇi dvādaśa / atīte dvādaśe varṣa nīyamāno bhaṭairbalāt

हिन्दी अर्थ

यमदूत कहता है--राजन्! पतितसे दान लेनेपर ब्राह्मण गदहेकी योनिमें जाता है। पतितका यज्ञ करानेवाला द्विज नरकसे लौटनेपर कीड़ा होता है। अपने गुरुक साथ छल करनेपर उसे कुत्तेकी योनिमें जन्म लेना पड़ता है तथा गुरुकी पत्नी और उनके धनको मन- ही-मन लेनेकी इच्छा होनेपर भी उसे निस्सन्देह यही दण्ड मिलता है। माता-पिताका

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 160

यमं सो ऽपश्यदाकारादुवाच च नराधिपम् ।विश्वामित्रस्य कोपो ऽयं दुर्निवार्यो महात्मनः

yamaṃ so 'paśyadākārāduvāca ca narādhipam / viśvāmitrasya kopo 'yaṃ durnivāryo mahātmanaḥ

हिन्दी अर्थ

अपमान करनेवाला मनुष्य उनके प्रति कटु वचन कहनेसे मैनाकी योनिमें जन्म लेता है। भाईकी स्त्रीका अपमान करनेवाला कबूतर होता है और उसे पीड़ा देनेवाला मनुष्य कछुएकी योनिमें जन्म लेता है। जो मालिकका अन्न तो खाता है, किन्तु उसका अभीष्ट साधन नहीं करता, वह मोहाच्छन्न मनुष्य मरनेके बाद वानर होता है। धरोहर हड़पनेवाला

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 161

पुत्रस्य ते मृत्युमपि प्रदास्यति स कौशिकः ।गच्छ त्वं मानुषं लोकं दुः खशेषञ्च भुङ्क्ष्व वै ।गतस्य तत्र राजेन्द्र श्रेयस्तव भविष्यति

putrasya te mṛtyumapi pradāsyati sa kauśikaḥ / gaccha tvaṃ mānuṣaṃ lokaṃ duḥ khaśeṣañca bhuṅkṣva vai / gatasya tatra rājendra śreyastava bhaviṣyati

हिन्दी अर्थ

मनुष्य नरकसे लौटनेपर कीड़ा होता है और दूसरोंका दोष देखनेवाला पुरुष नरकसे निकलकर राक्षस होता है। विश्वासघाती मनुष्यको मछलीकी योनिमें जन्म लेना पड़ता है।

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 162

व्यतीते द्वादशे वर्षे दुः खस्यान्ते नराधिपः ।अन्तरीक्षाच्च पतितो यमदूतैः प्रणोदितः

vyatīte dvādaśe varṣe duḥ khasyānte narādhipaḥ / antarīkṣācca patito yamadūtaiḥ praṇoditaḥ

हिन्दी अर्थ

गेहूँ तीसी तथा दूसरे-दूसरे अनाजोंकी चोरी करता है, वह नेवलेके समान बड़े मुँहका चूहा होता है। परायी स्त्रीके साथ सम्भोग करनेसे मनुष्य भयड्कर भेड़िया होता है। उसके बाद क्रमश: कुत्ता, सियार, बगुला, गिद्ध, साँप तथा कौएकी योनिमें जन्म लेता है। जो खोटी बुद्धिवाला पापी मनुष्य अपने भाईकी स्त्रीके साथ बलात्कार करता है, वह नरकसे

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 163

पतितो यमलोकाच्च विबुद्धो भयसम्भ्रमात् ।अहो कष्टमिति ध्यात्वा क्षते क्षारावसेवनम्

patito yamalokācca vibuddho bhayasambhramāt / aho kaṣṭamiti dhyātvā kṣate kṣārāvasevanam

हिन्दी अर्थ

लौटनेपर कोयल होता है। जो पापी कामके अधीन होकर मित्र तथा राजाकी पत्नीके साथ सहवास करता है, वह सूअर होता है।

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 164

स्वप्ने दुः खं महद्दृष्टं यस्यान्तो नोपलभ्यते ।स्वप्ने दृष्टं मया यत्तु किं नु मे द्वादशाः समाः

svapne duḥ khaṃ mahaddṛṣṭaṃ yasyānto nopalabhyate / svapne dṛṣṭaṃ mayā yattu kiṃ nu me dvādaśāḥ samāḥ

हिन्दी अर्थ

यज्ञ, दान और विवाहमें विघ्न डालनेवाला तथा कन्याका दुबारा दान करनेवाला पुरुष कीड़ा होता है। जो देवता, पितर और ब्राह्मणोंको दिये बिना ही अन्न भोजन करता है, वह नरकसे निकलनेपर कौआ होता है; जो पिताके समान पूजनीय बड़े भाईका अपमान करता है, वह नरकसे निकलनेपर क्रौज्च पक्षीकी योनिमें जन्म लेता है। ब्राह्मणकी स्त्रीके साथ

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 165

गतेत्यपृच्छत् तत्रस्थान् पुक्कसांस्तु स सम्भ्रमात् ।नेत्युचुः केचित् तत्रस्था एवमेवापरे ऽब्रुवन्

gatetyapṛcchat tatrasthān pukkasāṃstu sa sambhramāt / netyucuḥ kecit tatrasthā evamevāpare 'bruvan

हिन्दी अर्थ

सहवास करनेवाला शूद्र भी कीड़ेकी योनिमें जन्म लेता है। यदि उसने ब्राह्मणीके गर्भसे सन्तान उत्पन्न कर दिया हो तो वह काठके भीतर रहनेवाला कीड़ा होता है। उसके बाद क्रमश: सूअर, कृमि, विष्ठाका कीड़ा और चाण्डाल होता है। जो नीच मनुष्य अकृतज्ञ एवं कृतघ्न होता है, वह नरकसे निकलनेपर कृमि, कीट, पतड़, बिच्छू, मछली, कौआ, कछुआ

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 166

श्रुत्वा दुः खी तदा राजा देवान् शरणमीयिवान् ।स्वस्ति कुर्वन्तु मे देवाः शैव्याया बालकस्य च

śrutvā duḥ khī tadā rājā devān śaraṇamīyivān / svasti kurvantu me devāḥ śaivyāyā bālakasya ca

हिन्दी अर्थ

और चाण्डाल होता है। शस्त्रहीन पुरुषकी हत्या करनेवाला मनुष्य गदहा होता है। स्त्री और बालकोंकी हत्या करनेवालेका कीड़ेकी योनिमें जन्म होता है। भोजनकी चोरी करनेसे मक्खीकी योनिमें जाना पड़ता है। उसमें भी जो भोजनके विशेष भेद हैं, उन्हें चुरानेके पृथक्-पृथक् फल सुनिये। साधारण अन्न चुरानेवाला मनुष्य नरकसे छूटनेपर बिल्लीकी

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 167

नमो धर्माय महते नमः कृष्णाय वेधसे ।परावराय शुद्धाय पुराणायाव्ययाय च

namo dharmāya mahate namaḥ kṛṣṇāya vedhase / parāvarāya śuddhāya purāṇāyāvyayāya ca

हिन्दी अर्थ

योनिमें जन्म लेता है। तिलचूर्णमिश्रित अन्नका अपहरण करनेसे मनुष्यको चूहेकी योनिमें जाना पड़ता है। घी चुरानेवाला नेवला होता है। नमककी चोरी करनेपर जलकागकी और दही चुरानेपर कीड़ेकी योनिमें जन्म होता है। दूधकी चोरी करनेसे बगुलेकी योनि मिलती है। जो तेल चुराता है, वह तेल पीनेवाला कीड़ा होता है। मधु चुरानेवाला मनुष्य डाँस और

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 168

नमो बृहस्पते तुभ्यं नमस्ते वासवाय च ।एवमुक्त्वा स राजा तु युक्तः पुक्कसकर्मणि

namo bṛhaspate tubhyaṃ namaste vāsavāya ca / evamuktvā sa rājā tu yuktaḥ pukkasakarmaṇi

हिन्दी अर्थ

पूआ चुरानेवाला चींटी होता है। हविष्यात्नकी चोरी करनेवाला बिसतुइया होता है।

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 169

शवानां मूल्यकरणे पुनर्नष्टस्मृतिर्यथा ।मलिनो जटिलः कृष्णो लकुटी विह्वलो नृपः

śavānāṃ mūlyakaraṇe punarnaṣṭasmṛtiryathā / malino jaṭilaḥ kṛṣṇo lakuṭī vihvalo nṛpaḥ

हिन्दी अर्थ

लोहा चुरानेवाला पापात्मा कौआ होता है। काँसेका अपहरण करनेसे हारीत (हरियल) पक्षीकी योनि मिलती है और चाँदीका बर्तन चुरानेसे कबूतर होना पड़ता है। सुवर्णका पात्र चुरानेवाला मनुष्य कीड़ेकी योनिमें जन्म लेता है। रेशमी वस्त्रकी चोरी करनेपर चकवेकी योनि मिलती है तथा रेशमका कीड़ा भी होना पड़ता है। हरिणके रोएँसे बना हुआ वस्त्र,

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 170

नैव पुत्रो न भार्या तु तस्य वै स्मृतिगोचरे ।नष्टोत्साहो राज्यनाशात् श्मशाने निवसंस्तदा

naiva putro na bhāryā tu tasya vai smṛtigocare / naṣṭotsāho rājyanāśāt śmaśāne nivasaṃstadā

हिन्दी अर्थ

महीन वस्त्र, भेड़ और बकरीके रोएँसे बना हुआ वस्त्र तथा पाटंबर चुरानेपर तोतेकी योनि मिलती है। रूईका बना हुआ वस्त्र चुरानेसे क्रौोड्य और अग्निके अपहरणसे बगुला अथवा गदहा होना पड़ता है। अड़राग और पत्तियोंका साग चुरानेवाला मोर होता है। लाल वस्त्रकी

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 171

अथाजगाम स्वसुतं मृतमादाय लापिनी ।भार्या तस्य नरेन्द्रस्य सर्पदष्टं हि बालकम्

athājagāma svasutaṃ mṛtamādāya lāpinī / bhāryā tasya narendrasya sarpadaṣṭaṃ hi bālakam

हिन्दी अर्थ

चोरी करनेवालेको चकवेकी योनि मिलती है। उत्तम सुगन्धयुक्त पदार्थोकी चोरी करनेपर छछूँदर और वस्त्रका अपहरण करनेपर खरगोशकी योनिमें जाना पड़ता है। फल चुरानेवाला नपुंसक और काष्ठकी चोरी करनेवाला घुन होता है। फूल चुरानेवाला दरिद्र और वाहनका अपहरण करनेवाला पद्जू होता है। साग चुरानेवाला हारीत और पानीकी चोरी

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 172

हा वत्स ! हा पुत्र ! शिशो ! इत्येवं वदती मुहुः ।कृशा विवर्णा विमनाः पांशुध्वस्तशिरोरुहा

hā vatsa ! hā putra ! śiśo ! ityevaṃ vadatī muhuḥ / kṛśā vivarṇā vimanāḥ pāṃśudhvastaśiroruhā

हिन्दी अर्थ

आदि नरकोंमें जाकर वहाँसे लौटनेके बाद क्रमश: तृण, झाड़ी, लता, बेल और बाँसका वृक्ष होता है। फिर थोड़ा-सा पाप शेष रहनेपर वह मनुष्यकी योनिमें आता है। जो बैलके अण्डकोषका छेदन करता है, वह नपुंसक होता है और इसी रूपमें इक्कीस जन्म बितानेके पश्चात् वह क्रमश: कृमि, कीट, पतज़्, पक्षी, जलचर जीव तथा मृग होता है। इसके बाद

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 173

राजपत्न्युवाच हा राजन्नद्य बालं त्वं पश्य सोमं महीतले ।रममाणं पुरा दृष्टं दुष्टाहिना मृतम्

rājapatnyuvāca hā rājannadya bālaṃ tvaṃ paśya somaṃ mahītale / ramamāṇaṃ purā dṛṣṭaṃ duṣṭāhinā mṛtam

हिन्दी अर्थ

बैलका शरीर धारण करनेके बाद चाण्डाल और डोम आदि घृणित योनियोंमें जन्म लेता है। मनुष्य-योनिमें वह पद्ु, अंधा, बहरा, कोढ़ी, राजयक्ष्मासे पीड़ित तथा मुख, नेत्र एवं गुदाके रोगोंसे ग्रस्त रहता है। इतना ही नहीं, उसे मिरगीका भी रोग होता है तथा वह शूद्रकी योनिमें भी जन्म लेता है। गाय और सोनेकी चोरी करनेवालोंकी दुर्गतिका भी यही क्रम है। गुरुको

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 174

तस्या विलापशब्दं तमाकर्ण्य स नराधिपः ।जगाम त्वरितो ऽत्रेति भविता मृतकम्बलः

tasyā vilāpaśabdaṃ tamākarṇya sa narādhipaḥ / jagāma tvarito 'treti bhavitā mṛtakambalaḥ

हिन्दी अर्थ

दक्षिणा न देकर उनकी विद्याका अपहरण करनेवाले छात्र भी इसी गतिको प्राप्त होते हैं। जो मनुष्य किसी दूसरेकी स्त्रीको लाकर दूसरेको दे देता है, वह मूर्ख नरककी यातनाओंसे छूटनेपर नपुंसक होता है। जो मनुष्य अग्निको प्रज्वलित किये बिना ही उसमें हवन करता है, वह अजीर्णताके रोगसे पीड़ित एवं मन्दाग्निकी बीमारीसे युक्त होता है।

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 175

स तां रोरुदतीं भार्यां नाभ्यजानात्तु पार्थिवः ।चिरप्रवाससन्तप्तां पुनर्जातामिवाबलाम्

sa tāṃ rorudatīṃ bhāryāṃ nābhyajānāttu pārthivaḥ / cirapravāsasantaptāṃ punarjātāmivābalām

हिन्दी अर्थ

दूसरेकी निन्‍दा करना, कृतघ्नता, दूसरोंके गुप्त भेदको खोलना, निष्ठुरता दिखाना, निर्दय होना, परायी स्त्रीका सेवन करना, दूसरेका धन हड़प लेना, अपवित्र रहना,

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 176

सापि तं चारुकेशान्तं पुरा दृष्ट्वा जटालकम् ।नाभ्यजानान्नृपसुता शुष्कवृक्षोपमं नृपम्

sāpi taṃ cārukeśāntaṃ purā dṛṣṭvā jaṭālakam / nābhyajānānnṛpasutā śuṣkavṛkṣopamaṃ nṛpam

हिन्दी अर्थ

लेना तथा और भी जितने निषिद्ध कर्म हैं, उनमें निरन्तर प्रवृत्त रहना--ये सब नरक भोगकर लौटे हुए मनुष्योंकी पहचान हैं, ऐसा जानना चाहिए। जीवोंपर दया करना, अच्छे वचन बोलना, परलोकके लिये पुण्यकर्म करना, सत्य बोलना, सम्पूर्ण भूतोंके लिये हितकारक वचन कहना, वेद स्वत: प्रमाण हैं--ऐसी दृष्टि रखना, गुरु, देवता, ऋषि, सिद्ध

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 177

सो ऽपि कृष्णपटे बालं दृष्ट्वाशीविषपीडितम् ।नरेन्द्रलक्षणोपेतं चिन्तामाप नरेश्वरः

so 'pi kṛṣṇapaṭe bālaṃ dṛṣṭvāśīviṣapīḍitam / narendralakṣaṇopetaṃ cintāmāpa nareśvaraḥ

हिन्दी अर्थ

और महात्माओंका सत्कार करना, साधु पुरुषोंके सड़में रहना, अच्छे कर्मोंका अभ्यास करना, सबके प्रति मित्रभाव रखना तथा और भी जो उत्तम धर्मसे सम्बन्ध रखनेवाले कार्य हैं, वे सब स्वर्गसे लौटे हुए पुण्यात्मा पुरुषोंके चिह्न हैं--ऐसा विद्वान् पुरुषोंको समझना

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 178

अहो कष्टं नरेन्द्रस्य कस्याप्येष कुले शिशुः ।जातो नीतः कृतान्तेन कामप्याशां दुरात्मना

aho kaṣṭaṃ narendrasya kasyāpyeṣa kule śiśuḥ / jāto nītaḥ kṛtāntena kāmapyāśāṃ durātmanā

हिन्दी अर्थ

राजन्! अपने-अपने कर्मोंका फल भोगनेवाले पुण्यात्मा और पापियोंसे सम्बन्ध रखनेवाली ये सब बातें मैंने आपको संक्षेपसे बतायी हैं। अच्छा, अब आप आइये; अन्यत्र चलें। इस समय यहाँ सब कुछ आपने देख लिया।

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 179

एवं दृष्ट्वा हि मे बालं मातुरुत्सङ्गशायिनम् ।स्मृतिमभ्यागतो बालो रोहिताश्वो ऽब्जलोचनः

evaṃ dṛṣṭvā hi me bālaṃ māturutsaṅgaśāyinam / smṛtimabhyāgato bālo rohitāśvo 'bjalocanaḥ

हिन्दी अर्थ

पुत्र कहता है--पिताजी! तदनन्तर राजा विपश्चित् यमदूतको आगे करके वहाँसे जानेको उद्यत हुए। यह देख यातनामें पड़े हुए सभी मनुष्योंने चिल्लाकर कहा--“महाराज! हमपर कृपा कीजिये। दो घड़ी और ठहर जाइये। आपके शरीरको छूकर बहनेवाली वायु हमारे चित्तको आनन्द प्रदान करती है और समस्त शरीरोंमें जो सन्‍्ताप, वेदना और बाधाएँ

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 180

सो ऽप्येतामेव मे वत्सो वयो ऽवस्थामुपागतः ।नीतो यदि न घोरेण कृतान्तेनात्मनो वशम्

so 'pyetāmeva me vatso vayo 'vasthāmupāgataḥ / nīto yadi na ghoreṇa kṛtāntenātmano vaśam

हिन्दी अर्थ

हैं, उनका नाश किये देती है; अतः नरश्रेष्ठ महीपते! हमपर अवश्य कृपा कीजिये।” उनकी यह बात सुनकर राजाने यमदूतसे पूछा--“मेरे रहनेसे इन्हें आनन्द क्योंकर प्राप्त होता है? मैंने मर्त्पलोकमें रहकर कौन-सा महान् पुण्यकर्म किया है, जिससे इन लोगोंपर आनन्ददायिनी वायुकी वृष्टि हो रही है? इस बातको बताओ।/

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

अध्याय ८

श्लोक 181

राजपत्न्युवाच हा वत्स ! कस्य पापस्य अपध्यानादिदं महत् ।दुः खमापतितं घोरं यस्यान्तो नोपलभ्यते

rājapatnyuvāca hā vatsa ! kasya pāpasya apadhyānādidaṃ mahat / duḥ khamāpatitaṃ ghoraṃ yasyānto nopalabhyate

हिन्दी अर्थ

यमदूतने कहा--राजन! आपका यह शरीर पितरों, देवताओं, अतिथियों और भृत्यजनोंसे बचे हुए अन्नके सेवनसे पुष्ट हुआ है तथा आपका मन भी इन्हींकी सेवामें संलग्न रहा है। इसीलिये आपके शरीरको छूकर बहनेवाली वायु आनन्ददायिनी जान पड़ती है और इसके लगनेसे इन पापियोंको नरककी यातना कष्ट नहीं पहुँचाती। आपने अश्वमेध

English

" Ho! ho! citizens, listen ye all to my word. Why do ye agk me, ‘ ho! who art thou?’ I am mischievous, inhuman’

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_mArkaNDeyapurANa1-93.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Markandeya Purana — Chapter 8
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

Digitised text taken from the archive linked below. It has not been collated against a printed edition by this site.

पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.