अध्याय ८
श्लोक 1
इति श्रीमार्कण्डेयपुराणे द्रौपदेयोत्पत्तिर्नाम सप्तमो ऽध्यायः अष्टमो ऽध्यायः जैमिनिरुवाच भवद्भिरिदमाख्यातं यथाप्रश्नमनुक्रमात् ।महत् कौतूहलं मे ऽस्ति हरिश्चन्द्र कथां प्रति
iti śrīmārkaṇḍeyapurāṇe draupadeyotpattirnāma saptamo 'dhyāyaḥ aṣṭamo 'dhyāyaḥ jaiminiruvāca bhavadbhiridamākhyātaṃ yathāpraśnamanukramāt / mahat kautūhalaṃ me 'sti hariścandra kathāṃ prati
हिन्दी अर्थ
इन्द्रकी यह बात सुनकर महाराज हरिश्वन्द्रकी प्रसन्नताके लिये महातपस्वी विश्वामित्रने राजकुमार रोहिताश्वको परम रमणीय अयोध्यापुरीमें ला वहाँ राज्य- सिंहासनपर अभिषिक्त कर दिया। देवताओं, मुनियों और सिद्धोंके साथ रोहिताश्वका राज्याभिषेक करके राजासहित सभी बन्धु-बान्धव बहुत प्रसन्न
English
Ye have declared tliia in order according to my questions: great is my cui’iosity regai’ding the story of Haris-c'andra.