Atharva Veda· Atharvaveda Saṁhitā
7
अध्याय 7 / 20

Kanda 7

काण्ड 7

286 श्लोकभाग 2/2 · श्लोक 66.1–118.1WhatsApp

पूर्ण अध्याय पाठ134 श्लोक

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अध्याय ७

श्लोक 66.1

ब्रह्म।१ ब्रह्म।ब्रह्म।त्रिष्टुप्।यद्य॒न्तरि॑क्षे॒ यदि॒ वात॒ आस॒ यदि॑ वृ॒क्षेषु॒ यदि॒ वोल॑पेषु ।यदश्र॑वन् प॒शव॑ उ॒द्यमा॑नं॒ तद् ब्राह्म॑णं॒ पुन॑र॒स्मानु॒पैतु॑

brahma| 1 brahma| brahma| triṣṭup| yadyantarikṣe yadi vāta āsa yadi vṛkṣeṣu yadi volapeṣu | yadaśravan paśava udyamānaṃ tad brāhmaṇaṃ punarasmānupaitu

हिन्दी अर्थ

सौमनसः--मन की प्रसन्नता, प्रीत्यतिशय । (भूरिधनाः) बहुधनी, (स्वादुसंमुदः) स्वादु भोजनों में हषं का भ्रनुभव करने वाले (सखायः) सखा (उपहूताः) सत्कारपूवेक निमन्वित किये रहः (गृहाः) है गृहवासियों ! (मा अस्मत् विभौतन ) हमारे इस काम गृहपति प्रवास से बहुत घनोपाजन कर (मन्त्र १) घर श्राया है। ६ थरवंवेद-भाष्य को० ७. भनु ६ । मू० ६२ है । इस निमन्त्रण में वहत घनं का व्यय होगा, यह् जानकर गृहवासी पय- भीत हौ गये । गहपति उन्दः विश्वास दिलाता है कि तुम किसी प्रकार भी क्षुधा तृष्णा से पीडित न होभोगे, मँ पर्याप्त धनोपाजैन कर लाया हूं 1

English

These most auspicious offerings have ascended to thee: through, these may we be full of sweetness. Be kind and most auspicious, be gracious to us, Sarasvati, May we be ever in thy sight.

अध्याय ७

श्लोक 67.1

आत्मा।१ ब्रह्म।आत्मा।पुरःपरोष्णिग्बृहती।पुन॒र्मैत्वि॑न्द्रि॒यं पुन॑रा॒त्मा द्रवि॑णं॒ ब्राह्म॑णं च ।पुन॑र॒ग्नयो॒ धिष्ण्या॑ यथास्था॒म क॑ल्पयन्तामि॒हैव

ātmā| 1 brahma| ātmā| puraḥparoṣṇigbṛhatī| punarmaitvindriyaṃ punarātmā draviṇaṃ brāhmaṇaṃ ca | punaragnayo dhiṣṇyā yathāsthāma kalpayantāmihaiva

हिन्दी अर्थ

बकरियां ग्रौर भेड़ं (उपहूताः) लाई गई ह, (ग्रथ) तथा (अन्तस्य कौलालः) अन्न श्रौर अन्नो के विविध रस (नः गृहेषु) हमारे गृहों मेँ (उप- हताः) लाएगषुर्है। न गृहपति गृहवासियों को कहता है कि तुमह किसी भी' प्रकारं ' से भयं-' भीतन होना चाद्धिये । देखो, दूध के लिये गौर्, कृषि के लिये बेल, दूध के (गृहाः) है गृहवसियों ! (सूनृतावन्तः) परस्पर प्रिय तया सत्य वाणी गृह से बाहिर जाना चाहता है । इस प्रवास से होने वाले, गृहवाधियों के भय का परिहार गृहपति करता ह । इरा अश्ननाम (निषं० २।७) करो, भर्थात् मेरे साय प्रवास मे गमनन करो, (विश्वा रूपाणि) सव रूपा-

English

A prayer for prosperity May the wind kindly breathe on us, may the Sun warm us. pleasantly. May days pass happily for us, may night draw near delightfully, may dawn break joyfully for

अध्याय ७

श्लोक 68.1

सरस्वती।१-३ शन्तातिः।सरस्वती।१ अनुष्टुप्, २ त्रिष्टुप्, ३ गायत्री।सर॑स्वति व्र॒तेषु॑ ते दि॒व्येषु॑ देवि॒ धाम॑सु ।जु॒षस्व॑ ह॒व्यमाहु॑तं प्र॒जां दे॑वि ररास्व नः

sarasvatī| 1-3 śantātiḥ| sarasvatī| 1 anuṣṭup, 2 triṣṭup, 3 gāyatrī| sarasvati vrateṣu te divyeṣu devi dhāmasu | juṣasva havyamāhutaṃ prajāṃ devi rarāsva naḥ

हिन्दी अर्थ

कृतियो वालों का (पष्य) परिपोषण करते. रहो । (एष्यामि) मै लौट का० ७॥ श्ननु९.द । प्रु०-६३ भथववेर-भष्य २७ पोषण मेरे प्रीछठे करते रहना । भद्रेण मदि कट्धाणे यख च (्वादिः) । (यत् तपः) जो तप उपतप्यामहे ) तेरे समीप.रहुकर हम करते है उस दास सूक्त ६३ का विनियोग उपनयन कमं में हृश्रा है । योगदशेन (२।३२)

English

May, in accord with Death, Destruction ruin his offering before it gain fulfilment. For him may sorcerers, Destruction, demons strike and prevent fulfilment through their falsehood.

अध्याय ७

श्लोक 68.1-2

शि॒वा नः॒ शंत॑मा भव सुमृडी॒का स॑रस्वति ।मा ते॑ युयोम सं॒दृशः॑

śivā naḥ śaṃtamā bhava sumṛḍīkā sarasvati | mā te yuyoma saṃdṛśaḥ

हिन्दी अर्थ

वपः का फल कहा है “कायसिद्धिः' अणिमा प्रादि तथा ““इद्दियपिद्धिः'' अर्थात् “तप उतना ही करना चाहिए जिस सै शारीरिक धातुजं मे वेषम्य त्सापिपासे आदि (योग राद) । . . तप करते है, (उप) तेरे समीप गह कर "(तपः तप्यामहे) तप करते

English

May, in accord with Death, Destruction ruin his offering before it gain fulfilment. For him may sorcerers, Destruction, demons strike and prevent fulfilment through their falsehood.

अध्याय ७

श्लोक 68.2

इ॒दं ते॑ ह॒व्यं घृ॒तव॑त् सरस्वती॒दं पि॑तॄ॒णां ह॒विरा॒स्यं॑१ यत्।इ॒मानि॑ त उदि॒ता शंत॑मानि॒ तेभि॑र्व॒यं मधु॑मन्तः स्याम

idaṃ te havyaṃ ghṛtavat sarasvatīdaṃ pitṝṇāṃ havirāsyaṃ1 yat| imāni ta uditā śaṃtamāni tebhirvayaṃ madhumantaḥ syāma

हिन्दी अर्थ

द अथर्ववेद-माष्य का० ७। मनु ६। सू० ६५ कर हितकारी है, (रथी इव) रथयोद्धा के सदुश ( पत्तीन् ) पदाति-सैनिकों (अधस्पदम्) हमारे पादो तले (कृणुताम्) करे । पृतनाजितं सहमानमग्निमुक्येहैवामहे परमाव सधस्थात् । (पृतनाजितम्) सेनाविजयी, (सहमानम्) पराभवकारी अथवा सहन-

English

Let Gods, by Indra sent, destroy his butter, and let his sacrifice be ineffective. Let the two Sovrans, swift to come, like falcons swooping on their prey, Destroy the butter of the foe whoever plots to injure us.

अध्याय ७

श्लोक 69.1

सुखम्।१ शन्तातिः।सुखम्।पथ्यापङ्क्तिः।शं नो॒ वातो॑ वातु॒ शं न॑स्तपतु॒ सूर्यः॑ ।अहा॑नि॒ शं भ॑वन्तु नः॒ शं रात्री॒ प्रति॑ धीयतां॒ शमु॒षा नो॒ व्युऽच्छतु

sukham| 1 śantātiḥ| sukham| pathyāpaṅktiḥ| śaṃ no vāto vātu śaṃ nastapatu sūryaḥ | ahāni śaṃ bhavantu naḥ śaṃ rātrī prati dhīyatāṃ śamuṣā no vyu'cchatu

हिन्दी अर्थ

स्तुतिवचनं हारा (हवामहे) हम बुला लाते हैँ । (सः) वह (नः) हमे (विश्वा ' मः” (अष्टा० ८।२।५३) दसा क्त के (त को “म । “तत् करोति” का० ७1 अनु० ६।. सु०,६६ भ्रथर्ववेद-भाष्य ८६ (शकुनिः) शक्तिशाली (कृष्णः) काले तमोगुण ने (निष्पतन्) मन के गहरे स्तर से निकल कर, मानो उड़ कर (भ्रमि) मेरी ओर अते हुए,

English

I seize thine arms and draw them back, I bind a bandage on thy mouth. I with the anger of the God Agni have killed thy sacrifice. Behind thy back I tie thine arms, I bind a bandage on thy mouth:

अध्याय ७

श्लोक 70.1

शत्रुदमनम्।१-५ अथर्वा।श्येनः, देवाः।१ त्रिष्टुप्, २ अतिजगतीगर्भा जगती, ३-५ अनुष्टुप् (३ पुरःककुम्मती)।यत् किं चा॒सौ मन॑सा॒ यच्च॑ वा॒चा य॒ज्ञैर्जु॒होति॑ ह॒विषा॒ यजु॑षा ।तन्मृ॒त्युना॒ निरृ॑तिः संविदा॒ना पु॒रा स॒त्यादाहु॑तिं हन्त्वस्य

śatrudamanam| 1-5 atharvā| śyenaḥ, devāḥ| 1 triṣṭup, 2 atijagatīgarbhā jagatī, 3-5 anuṣṭup (3 puraḥkakummatī)| yat kiṃ cāsau manasā yacca vācā yajñairjuhoti haviṣā yajuṣā | tanmṛtyunā nirṛtiḥ saṃvidānā purā satyādāhutiṃ hantvasya

हिन्दी अर्थ

स्मात्) उस सब (दुरितात्) दृष्परिणामी (अंहसः) षाप से, (मापः) सवै- व्यापक परमेश्वर (मा) मुभ (पान्तु) सुरक्षित करे । अंहसः == अंहः” का अथं पाप होता है 1 काला पक्षी कौ, व्यक्ति को घायल तो कर सकता है, पाप में प्रवृत्त नहीं कर सकता । अतः “कृष्णः शकुनिः' का अभिप्राय “शक्तिशाली तमोगुण "प्रतीत होता है । तमोगुण को मतः तमोगुण शक्तिशाली है । मन सत्वगुणी मी होता है, रजोगुणी भी, जो (कृष्णः शकुनिः) शक्तिशाली काला तमोगुण (अवामृक्षत् ) मेरे निचले ६० प्रयरववेद-भाष्य का० ७। भ्रनु० ६। सू० ६७

English

With the terrific Agni’s wrath have I destroyed thy sacrifice. In praise of Agni We set thee round us as a fort, victorious Agni! thee a sage,

अध्याय ७

श्लोक 70.2

या॒तु॒धाना॒ निरृ॑ति॒रादु॒ रक्ष॒स्ते अ॑स्य घ्न॒न्त्वनृ॑तेन स॒त्यम्।इन्द्रे॑षिता दे॒वा आज्य॑मस्य मथ्नन्तु॒ मा तत् सं पा॑दि॒ यद॒सौ जु॒होति॑

yātudhānā nirṛtirādu rakṣaste asya ghnantvanṛtena satyam| indreṣitā devā ājyamasya mathnantu mā tat saṃ pādi yadasau juhoti

हिन्दी अर्थ

पत्ति नेहे तमोगुण ! तुभे प्रेरित किया है । अव = नीचे के अङ्ख = मूत्रा तथा जद्खा-पाद प्रादि ! पापकमं के लिये पापुस्थान पर चलकर जाना होतः है । अग्नि परमेष्वर (यजु ३२1१) । आपः द्वारा पाप मल धोया जाता लकार) + मृश आमशेने (छना) + क्सः (प्रष्टा ० ३।१।४५) । (अपामा ) है दोषशोधक ओषध ! (हि) यतः (त्वम्) तु (प्रतीचीन- फलः) प्रतीचीनफल हूरई (रुरोहिथ) प्रादुर्भूत हई है, (मत् अधि) मुस ।

English

Bold in thy colour day by day, destroyer of the treacherous foe. An invitation to Indra Rise up and look upon the share of Indra fixt by ritual use.

अध्याय ७

श्लोक 70.3

अ॒जि॒रा॒धि॒रा॒जौ श्ये॒नौ सं॑पा॒तिना॑विव ।आज्यं॑ पृतन्य॒तो ह॑तां॒ यो नः॒ कश्चा॑भ्यघा॒यति॑

ajirādhirājau śyenau saṃpātināviva | ājyaṃ pṛtanyato hatāṃ yo naḥ kaścābhyaghāyati

हिन्दी अर्थ

(सर्वान् शपथान्) सब शपथो को (इतः) इस फल द्वारा (वरीय यावय) मनोविकार है । सम्भवतः अपामा इस मनोविकार काशोधन कर देता हो । अपामागं अप+ मृजष् शुद्धौ (श्रदादिः) दोष कौ अपगत करके माजेन करने वाली, शुद्ध करने वली 1 अपामागे = 4कौधणलः 280८ । यह जौषध होम्योषेथिक ८0716 के समान गुणौ वाली है जिसका प्रयोग का० ७1 अनु० ६। सु० ६८ अथ्वेवेद-माष्य ९१ मलिन पाप, (यत् वा) याजो (पापया) पापिनस्तीके संग (चेरिम) हम विचरे है, (विश्वतोमुखः) है सव भ्रोर मुखवासी (जपामागं) श्रपामामे मौषध ! (त्वया) तुभ वारा (तत्) उस सब दोष को (अपमृज्महे) हम

English

Whether ye poured libation dressed or took delight in it un- cooked. Libation is prepared. Come to us, Indra: the Sun hath travelled over half his journey. Friends with their treasures sit around thee, waiting like heads of houses for their wandering

अध्याय ७

श्लोक 70.4

अपा॑ञ्चौ त उ॒भौ बा॒हू अपि॑ नह्याम्या॒स्यऽम्।अ॒ग्नेर्दे॒वस्य॑ म॒न्युना॒ तेन॑ तेऽवधिषं ह॒विः

apāñcau ta ubhau bāhū api nahyāmyāsya'm| agnerdevasya manyunā tena te'vadhiṣaṃ haviḥ

हिन्दी अर्थ

गलिताङ्ग वाले पुरूष के (सह्) साथ (यत्) जौ (आसिम या आशिम) हम उठट-बेठे या खाए-पिए है, (अपाम गं) है शोधन करने वाली श्रपामगं ग्रौषध मृज्महे) पृथक् कर शुद्ध कर देतेरहै। श्यावदता = श्याव ओर कृष्ण वणं मे भेद है 1“ श्याव नकु कालिमा का अभिप्राय है विभक्त हो जना, टटकर श्रलगहौ जाना, अङ्क काकट

English

chieftain. Dressed in the udder and on fire, I fancy; well dressed, I fancy, is this new oblation. Quaff thickened milk of noon’s libation, Indra, well pleased, O

अध्याय ७

श्लोक 70.5

अपि॑ नह्यामि ते बा॒हू अपि॑ नह्याम्या॒स्यऽम्।अ॒ग्नेर्घो॒रस्य॑ म॒न्युना॒ तेन॑ तेऽवधिषं ह॒विः

api nahyāmi te bāhū api nahyāmyāsya'm| agnerghorasya manyunā tena te'vadhiṣaṃ haviḥ

हिन्दी अर्थ

का होता है (आप्टे) । विगलत्कुष्ठ मे अंगुलियों तथा परो के अद्ध गलकर ट्ट जाते हँ । कुष्ठ रोग संक्रामक (0112860) भी होता है । अतः कुष्ठरोगी के साथ बैठना याखाना हानिकारक है। आशिम (सायण) । दांतों मे वणंविकृति तथा नखों की विकृति--यह भी एक प्रकार का कुष्ठ (यदि अन्तरिक्षे) यदि अन्तरिक्ष मे, (यदि वाते) यदि चलतीःवायुमें २ प्रथवेवेद-भाष्य . कौ० ७.1 अनु° ६1 सु० ६६ (यदि वृक्षेषु) यदि वृक्षों के समीप, (यदिवा) अथवा (उलपेषु) पासन तथा वेदपाठ भी कहते हैँ । सन्ध्योपासन एकान्त देणमे होना चाहिए । मनुस्मृति (२।१०४) मे कहा है कि “सावित्रीमप्यधीयीत गत्वा दरस मे कालातिपात नहीं होना चाहिए! उपासक कहीं भी हो उसे नियत

English

Thunderer, famed for many an exploit! An invitation to the Asvins 114

अध्याय ७

श्लोक 71.1

अग्निः।१ अथर्वा।अग्निः।अनुष्टुप्।परि॑ त्वाग्ने॒ पुरं॑ व॒यं विप्रं॑ सहस्य धीमहि ।धृ॒षद् व॑र्णं दि॒वेदि॑वे ह॒न्तारं॑ भङ्गु॒राव॑तः

agniḥ| 1 atharvā| agniḥ| anuṣṭup| pari tvāgne puraṃ vayaṃ vipraṃ sahasya dhīmahi | dhṛṣad varṇaṃ divedive hantāraṃ bhaṅgurāvataḥ

हिन्दी अर्थ

के समीप, चाहे गोशाला के समीप,--जब भी ब्रह्मयज्ञ का काल उपस्थित हो जाय सन्ध्योपासन, ओौर वेदपाठ के लिये बैठ जाना चाहिए । ओर यदि नहुञआहोतो “पुनः विघ्न-बाधासे रहित स्थानम ब्रहायज्ञ कर लेना २।६) । वाक वक्ता के अभिप्राय को प्रकाशित करती दहै व हाय भी इशारा कर अभिप्राय को प्रकाशित करतादहै 1 दाथ स ल

English

Inflamed is Agni, Heroes! charioteer of heaven. The caldron boils: the meath is drained to be your food. For we, O Asvins, singers sprung from many a house, invite you to be present at our

अध्याय ७

श्लोक 72.1

इन्द्रः।१-३ अथर्वा।इन्द्रः।१ अनुष्टुप्, २-३ त्रिष्टुप्।उत् ति॑ष्ठ॒ताव॑ पश्य॒तेन्द्र॑स्य भा॒गमृ॒त्विय॑म्।यदि॑ श्रा॒तं॑ जु॒होत॑न॒ यद्यश्रा॑तं म॒मत्त॑न

indraḥ| 1-3 atharvā| indraḥ| 1 anuṣṭup, 2-3 triṣṭup| ut tiṣṭhatāva paśyatendrasya bhāgamṛtviyam| yadi śrātaṃ juhotana yadyaśrātaṃ mamattana

हिन्दी अर्थ

सन्न व्यविति कौ अभिलाषा प्रकट कोहै । सर॑स्वति व्रतेषु ते दिव्येषु देवि धाम॑सु । जुपस्थ इव्यमाहूतं प्रजां हैवि ररास्व नः ॥१॥ ५ (सरस्वति देवि) है ज्ञान-विज्ञान १) देवि ! (ते) तेरे ( = कर, (देवि) भौर है देवी ! (नः) हम (अजाम् ) विार्थारूपी (ररास्व) प्रदान कर । शा

English

Pure with the Gods is sacrifice with cry of Hail! That is the Asvins’ cup whence Gods are wont to drink. Yea, the Immortal Ones accept it, one and all, and come to kiss that cup with the Gandharva’s

अध्याय ७

श्लोक 72.1-2

श्रा॒तं म॑न्य॒ ऊध॑नि श्रा॒तम॒ग्नौ सुशृ॑तं मन्ये॒ तदृ॒तं नवी॑यः ।माध्य॑न्दिनस्य॒ सव॑नस्य द॒ध्नः पिबे॑न्द्र वज्रिन् पुरु॒कृज्जु॑षा॒णः

śrātaṃ manya ūdhani śrātamagnau suśṛtaṃ manye tadṛtaṃ navīyaḥ | mādhyandinasya savanasya dadhnaḥ pibendra vajrin purukṛjjuṣāṇaḥ

हिन्दी अर्थ

। यहाँ स्थानार्थं का ग्रहण ह, 2 । निद्यालयों ओर महाविद्यालयों के सत्रारम्भमें 4 चाहिए, जिस मं वि्याधियों को विदयप्राप्ति त॒था गुरुसेवा अ 1 व्रत ग्रहण करने चाहिए 1 गुरुवगं इटं व्रत ८ कराए 1 ध करे । विद्यालयों भौर महाविद्यालयों को दिन्यधाम जान कर इन की पवि- तरता को बनाए रखना चाहिय । -रूपा है! सरो विज्ञानं विद्यते- यह् सरस्वती नदीरूपा नहा, अपितु वाग् त

English

Pure with the Gods is sacrifice with cry of Hail! That is the Asvins’ cup whence Gods are wont to drink. Yea, the Immortal Ones accept it, one and all, and come to kiss that cup with the Gandharva’s

अध्याय ७

श्लोक 72.2

श्रा॒तं ह॒विरो ष्वि॑न्द्र॒ प्र या॑हि ज॒गाम॒ सूरो॒ अध्व॑नो॒ वि मध्य॑म्।परि॑ त्वासते नि॒धिभिः॒ सखा॑यः कुल॒पा न व्रा॑जप॒तिं चर॑न्तम्

śrātaṃ haviro ṣvindra pra yāhi jagāma sūro adhvano vi madhyam| pari tvāsate nidhibhiḥ sakhāyaḥ kulapā na vrājapatiṃ carantam

हिन्दी अर्थ

वागरधिपति-परमेश्वरोदेश्यक ह 1 वह् वेदवाक् का अधिपति है ५ (५ । अथेवेद-भाष्य का० ७1 अन ६1 सूक्त, ७२ यृतमिश्ित (ते) तेरे लिये है, भौर (इदम्) यह् (हविः, घृतवत् ) घृतयरिः उन के मुख सम्बन्धी खनेके लियेहै। है सरस्वती! (ते) तेरे लिये (इमानि) ये (शंतमानि) शान्ति-या-सूखभ्रदायी वेदमन््ररूपी वचनं (उदिता =उदितानि) कहे है । (तेभिः) उन वचनोंद्वारा (वयम्) हम सारस्वत-यज्ञ करने वाले (मधुमन्तः) मधु वाले (स्याम) होँ। उच्चारण पूवक हवि की आहुतियां देनी चाहिए । यज्ञ की समाप्ति पर

English

mouth. Milk, molten butter offered when the mornings break,—this is your portion, Asvins! Come ye hitherward.

अध्याय ७

श्लोक 73.1

घर्मः।१-११ अथर्वा।घर्मः, अश्विनौ।त्रिष्टुप्, १, ४, ६ जगती, २ पथ्याबृहती।समि॑द्धो अ॒ग्निर्वृ॑षणा र॒थी दि॒वस्त॒प्तो घ॒र्मो दु॑ह्यते वामि॒षे मधु॑ ।व॒यं हि वां॑ पुरु॒दमा॑सो अश्विना॒ हवा॑महे सध॒मादे॑षु का॒रवः॑

gharmaḥ| 1-11 atharvā| gharmaḥ, aśvinau| triṣṭup, 1, 4, 6 jagatī, 2 pathyābṛhatī| samiddho agnirvṛṣaṇā rathī divastapto gharmo duhyate vāmiṣe madhu | vayaṃ hi vāṃ purudamāso aśvinā havāmahe sadhamādeṣu kāravaḥ

हिन्दी अर्थ

चाहिए । हविः हु दानादनयोः (जुहोत्यादिः) यज्ञाभ्नि के लिये हवि का दान शिवा न॒ः शंत॑मा भव सूश्रदीका सरस्वति (सरस्वति) है ज्ञान-विज्ञानवाली पारमेण्वरी मातः! (नः) हमारे लिये (शिवा) तू सुखरूपा, (शंतमा) अत्यन्त सुखरूपा; तथा (सुमृडीका) से अथवा तेरे सम्यक्-दशेन से (मा) न (युयोम) पथक् हो, वञ्चित हों ।

English

Lords of the brave, balm-lovers, guards of sacrifice, drink ye the warm libation in the light of heaven. Let the warm drink approach you with its Hotar-priest: let the

अध्याय ७

श्लोक 73.2

समि॑द्धो अ॒ग्निर॑श्विना त॒प्तो वां॑ घ॒र्म आ ग॑तम्।दु॒ह्यन्ते॑ नू॒नं वृ॑षणे॒ह धे॒नवो॒ दस्रा॒ मद॑न्ति वे॒धसः॑

samiddho agniraśvinā tapto vāṃ gharma ā gatam| duhyante nūnaṃ vṛṣaṇeha dhenavo dasrā madanti vedhasaḥ

हिन्दी अर्थ

९६ अंयवेवेद-भाष्य का० ७ भनु° ६। सू० ७३ का० ७॥ अनु० ६ ॥ सू० घं जयववेद-भाष्यं ६७ वचन । देवाः = दिवु करीडाविजिगीषा प्रादि (दिवादिः), अर्थात् विजिगीषु आज्यं पृतन्यतो तां यो नः करचाभ्यघायति ॥३॥ (अनजिराधिराजौ) अभिर अर्थात् शत्रुसेना का क्षेपण करने वाला सेना- पति, ओर अधिराज, (संपातिनौ) युगपत् शिकार पर पतन करने वाने (श्येनो) दो श्येनं कौ (इव) तरह, (पृतन्यतः) संग्राम-चाहने वाले शव के जो (कश्च) कोई भी शवु (नः)हमरे (जभि) भभिमुख होकर (ग्रषायति)

English

Dawn’s going-forth he sends his light abroad. I invocate this milch-cow good for milking, so that the milker, deft of hand, may milk her. May Savitar give goodliest stimulation. The caldron hath been warmed. Let him proclaim it.

अध्याय ७

श्लोक 73.3

स्वाहा॑कृतः॒ शुचि॑र्दे॒वेषु॑ य॒ज्ञो यो अ॒श्विनो॑श्चम॒सो दे॑व॒पानः॑ ।तमु॒ विश्वे॑ अ॒मृता॑सो जुषा॒णा ग॑न्ध॒र्वस्य॒ प्रत्या॒स्ना रि॑हन्ति

svāhākṛtaḥ śucirdeveṣu yajño yo aśvinoścamaso devapānaḥ | tamu viśve amṛtāso juṣāṇā gandharvasya pratyāsnā rihanti

हिन्दी अर्थ

हमारी हिसारूपी पापकम करना चाहता है, उस का भी हनन करे । (प्रजिरः-=मज गतिक्षेपणयोः (्वादिः) जो षीघ्रगतिक हो कर शत्रू- ह दल केक्षेपणमें समथं हो एेसा सेनापति। अधिराजः राज्ञामधिपति युद्ध में हनन करे, ्रजिर गौर भ्रधिराज मिलकर ।

English

She, sovran of all treasures, is come hither yearning in spirit for her calf, and lowing. May this cow yield her milk for both the Asvins, and may she prosper to our great advantage. As dear house-friend, guest welcome in the dwelling, to this our sacrifice come thou who

अध्याय ७

श्लोक 73.4

यदु॒स्रिया॒स्वाहु॑तं घृ॒तं पयो॒ऽयं स वा॑मश्विना भा॒ग आ ग॑तम्।माध्वी॑ धर्तारा विदथस्य सत्पती त॒प्तं घ॒र्मं पि॑बतं रोच॒ने दि॒वः

yadusriyāsvāhutaṃ ghṛtaṃ payo'yaṃ sa vāmaśvinā bhāga ā gatam| mādhvī dhartārā vidathasya satpatī taptaṃ gharmaṃ pibataṃ rocane divaḥ

हिन्दी अर्थ

है । श्रपाञ्चौ =अप (अपगत) +अञ्चु गतौ, गतिरहित । शत्र राजा की बाहुं ओौर मूख को बाघ देने से वह् स्वयं युद्ध करने मे असमथं हो जाता है, भौर युद्धकममे अज्ञादेने सेभी ररित हो जाता हे शत्र राजन् (ते) तेरी (बाहु) बाहुओं को (श्रपि नह्यामि) शै बांधता हूं" (स्यम्) तथा तेरे मुख को (स्रपि) भी (नह्यामि) मँ बांधता (ग्रवधिषम्) मैने वध कर दियाहै। विप्रम्) तुभ मेधावी को (वयम्) हम (पुरम् परि धीमहि) दुगं के सदृश

English

knowest. And, Agni, having scattered all assailants, bring to us the posses- sions of our foemen. Show thyself strong for mighty bliss, O Agni! Most excellent be thine effulgent splendours!

अध्याय ७

श्लोक 73.5

त॒प्तो वां॑ घ॒र्मो न॑क्षतु॒ स्वहो॑ता॒ प्र वा॑मध्व॒र्युश्च॑रतु॒ पय॑स्वान्।मधो॑र्दु॒ग्धस्या॑श्विना त॒नाया॑ वी॒तं पा॒तं पय॑स उ॒स्रिया॑याः

tapto vāṃ gharmo nakṣatu svahotā pra vāmadhvaryuścaratu payasvān| madhordugdhasyāśvinā tanāyā vītaṃ pātaṃ payasa usriyāyāḥ

हिन्दी अर्थ

ज. भयर्ववेद-भाष्य कै ७ । ़मु० ६ । सू० ७५ परिधिरूप करते है, (धृष् वणम्) तुभ धष्रकरूप को, (दिवेदिवे) प्रतिदिन (भङगुरावतः) नियम भद्घ करने वालों के. (हन्तारम्) हुननकर्ता को । हे सेवको ! (उत् तिष्ठत) उणो, तय्यारं होभो, ओर (ऋटिवयम्) देखभाल करो । (यदि श्रातम्) यदि भोजन पक गया है तो (जुहोतन) बलि-

English

Make easy to maintain our household lordship, and overcome the might of those who hate us. Fortunate mayst thou be with goodly pasture, and may we also be exceeding wealthy. Feed on the grass, O Cow, at every season, and, coming hither, drink the limpid water.

अध्याय ७

श्लोक 73.6

उप॑ द्रव॒ पय॑सा गोधुगो॒षमा घ॒र्मे सि॑ञ्च॒ पय॑ उ॒स्रिया॑याः ।वि नाक॑मख्यत् सवि॒ता वरे॑ण्योऽनुप्र॒याण॑मुषसो॒ वि रा॑जति

upa drava payasā godhugoṣamā gharme siñca paya usriyāyāḥ | vi nākamakhyat savitā vareṇyo'nuprayāṇamuṣaso vi rājati

हिन्दी अर्थ

गया है, अर्थात् भोजन का मध्याह्वं काल होने वाला है 1 (सखायः) आम- सन के (परि) चारों ग्रोर (रासते) उपविष्टहै, बठे हुए रहै, (न) जसे कि (चरन्तम्) भोजन करते हुए (त्राजपतिम्) गृहपति के चारों ओर का० ७ । अनु० ६ । सु.७४ श्रथवेवेद-माष्य ६६ ८।३७) । सखा हैँ आमस्त्रित वरुण नामक राजा 'लोग, या नागरिक सदस्य अथवा उभयविधः। चरन्तम् = चर गतिभक्षणयोः (भ्वादिः); यहां (चर मिलने जानाहोतो कुछ भेँट लेकर जाना चाहिए !

English

A charm to cure pustules, sores, or scrofulous swellings (apachitas) Black is the mother, we have heard, from whom the red-hued Pustules sprang.

अध्याय ७

श्लोक 73.7

उप॑ ह्वये सु॒दुघां॑ धे॒नुमे॒तां सु॒हस्तो॑ गो॒धुगु॒त दो॑हदेनाम्।श्रेष्ठं॑ स॒वं स॑वि॒ता सा॑विषन्नो॒ऽभीऽद्धो घ॒र्मस्तदु॒ षु प्र वो॑चत्

upa hvaye sudughāṃ dhenumetāṃ suhasto godhuguta dohadenām| śreṣṭhaṃ savaṃ savitā sāviṣanno'bhī'ddho gharmastadu ṣu pra vocat

हिन्दी अर्थ

म मानता हं (मग्नौ) अग्निम (श्रातम्) पके पदाथ को भी पका हुमा नवतर रहता है । (पुरुकृत्)र नानाविध कर्मा के करने वाले (वचन् इनदर) दोहे गए दूध कषम्बन्धी (दध्नः) दधि महं को (पिब) पीया कर । ज्ञान ! तीसरा पक्व सदा नवीन रहता है" यह कभी पुराना नहीं होता । पेय पदार्थो मे माध्यन्दिनि मे दोहे गए दूध की दधि से मथेगएु महु का पन

English

With the divine ascetic’s root I pierce and penetrate them all. I pierce the foremost one of these, I perforate the middlemost, And here I cut the hindermost asunder like a lock of hair.

अध्याय ७

श्लोक 73.8

हि॒ङ्कृ॒ण्व॒ती व॑सु॒पत्नी॒ वसू॑नां व॒त्समि॒च्छन्ती॒ मन॑सा॒ न्याग॑न्।दु॒हाम॒श्विभ्यां॒ पयो॑ अ॒घ्न्येयं सा व॑र्धतां मह॒ते सौभ॑गाय

hiṅkṛṇvatī vasupatnī vasūnāṃ vatsamicchantī manasā nyāgan| duhāmaśvibhyāṃ payo aghnyeyaṃ sā vardhatāṃ mahate saubhagāya

हिन्दी अर्थ

७६ में माध्यन्दिन मे भोजन कं साथ मुं केपानका भी विधानहुजदहै॥ (कुलपाः) कुलरक्षक पारिवारिक जन उपविष्ट होते हँ 1 बलि-वेश्वदेव-यज्ञ में श्राहूतियां दी जाती ह, अथवा "हविः" = हू दानादनयोः वयं हि वाँ पुरुदमांसो अच्िना हव!महे सधमादेषु कारवः ॥१॥ १. ““सत्यज्ञान” तीनों कालो मे एकरूप रहता है, ग्रतः वहै सदा नवीन है, कमी

English

With spell that Tvashtar sent to us I have dispelled thy jealousy. We mitigate and pacify the anger that thou feltest, Lord! Lord of religious rites, by law, anointed, shine thou forth here for ever friendly-minded.

अध्याय ७

श्लोक 73.9

जुष्टो॒ दमू॑ना॒ अति॑थिर्दुरो॒ण इ॒मं नो॑ य॒ज्ञमुप॑ याहि वि॒द्वान्।विश्वा॑ अग्ने अभि॒युजो॑ वि॒हत्य॑ शत्रूय॒तामा भ॑रा॒ भोज॑नानि

juṣṭo damūnā atithirduroṇa imaṃ no yajñamupa yāhi vidvān| viśvā agne abhiyujo vihatya śatrūyatāmā bharā bhojanāni

हिन्दी अर्थ

१०० म्रथववेद-माष्य दया००७ । अनु० ६ । सु° ७७ (अश्विना) अश्वविभाग कं दो श्रषिकारियो ! (वाम्) तुम दोनों के (इषे) मरन्न के लिये (मधु) मधर (तप्तः घमेः) गमं क्षरित दूष (दुह्यते) दोहा जा रह है । (पुरुदमासः) महगृहों वाले अथवा अन्नों से भरपुर गृहो वाले (हवामहे) आमन्त्रित करते है, ( सधमादेषु) हषेप्रद सहभोजों मे । “दमे गृहनाम (निषं० ३।४) । तप्तः = दोहा गया ताजा दूध गमं होता है ।" विभागों के दो ग्रधिकारी, मश्वारोही-सेना, तथा रथारोही-सेना विभाग के

English

So may we all with children, Jātavedas! worship and humbly wait on thee enkindled. A blessing on cows 115

अध्याय ७

श्लोक 73.10

अग्ने॒ शर्ध॑ मह॒ते सौभ॑गाय॒ तव॑ द्यु॒म्नान्यु॑त्त॒मानि॑ सन्तु ।सं जा॑स्प॒त्यं सु॒यम॒मा कृ॑णुष्व शत्रूय॒ताम॒भि ति॑ष्ठा॒ महां॑सि

agne śardha mahate saubhagāya tava dyumnānyuttamāni santu | saṃ jāspatyaṃ suyamamā kṛṇuṣva śatrūyatāmabhi tiṣṭhā mahāṃsi

हिन्दी अर्थ

अथवा कविता में वेदवाणी का वणन हुआ है । का०७॥ अनु० ६1 सू० ७३ अ्रथवेवेद-माष्य ६१ (वातः) वायु (नः) हमारे लिये (णम्) सुखकर (वातु) बरे, (सूं ) सूयं (नः) हमारे लिये (णम्) सुखकर (तपतु) -्पे (श्रहानि) दिन (नः ) (प्रति धीयताम्) प्रदान करे, (नः) हमारे लिथे (उषाः) उषा, (शम्) सुख

English

Adhvaryu come to you with store of milk. Come, O ye Asvins, taste the meath that hath been drained, drink of the milk provided by this radiant cow.

अध्याय ७

श्लोक 73.11

सू॒य॒व॒साद् भग॑वती॒ हि भू॒या अधा॑ व॒यं भग॑वन्तः स्याम ।अ॒द्धि तृण॑मघ्न्ये विश्व॒दानीं॒ पिब॑ शु॒द्धमु॑द॒कमा॒चर॑न्ती

sūyavasād bhagavatī hi bhūyā adhā vayaṃ bhagavantaḥ syāma | addhi tṛṇamaghnye viśvadānīṃ piba śuddhamudakamācarantī

हिन्दी अर्थ

(असौ) वह पररष्टृरूपी शत्रु (यत् कि च) जो कृ ( मनसा) सेना के साथ संग्राम करने वाले, भिडने वाले सेनां के प्रेरको दासं, (हविः पा) सैनिकरूपी हवि द्वारा, ¦ (यजुषा) तथा यजुवंदौक्त , अन्य साघनो या विधियो द्वारा (जुहोति) 'युद्ध-यज्ञ में ् तियां देता है, (अस्य) इस पर- जाने वाली आहूति को (सत्यात् बुरा) इन के'सदरूप होने से पहिले न मनसा=युद्ध के लिये मानसिक विचार । वाचा =युद्ध के लिये वाचिक घोषणा 1 (यज्ञैः) (यजु० १७४०) में "यज्ञःःसोम ' दवारा यन कों सोम अर्थात् यृद्धाधिकारी कहा है, जोकिसेनाके आगे-परागे चलता हुभा सेना का परेरक होता है, सोमः (प प्रेरणे") 1 “यज्नेः'. मे बहुवचन द्वारा युद्ध मे नाना सैनिकदलो को सूचित किया है, ओरं प्रत्येकः दल के भघिकारी को

English

Come hither, quickly come, thou milker of the kine; into the caldron pour milk of the radiant cow. Most precious Savitar hath looked upon the heaven. After

अध्याय ७

श्लोक 74.1

गण्डमालाचिकित्सा।१-४ अथर्वाङ्गिराः।मन्त्रोक्ताः, ४ जातवेदाः।अनुष्टुप्।अ॒प॒चितां॒ लोहि॑नीनां कृ॒ष्णा मा॒तेति॑ शुश्रुम ।मुने॑र्दे॒वस्य॒ मूले॑न॒ सर्वा॑ विध्यामि॒ ता अ॒हम्

gaṇḍamālācikitsā| 1-4 atharvāṅgirāḥ| mantroktāḥ, 4 jātavedāḥ| anuṣṭup| apacitāṃ lohinīnāṃ kṛṣṇā māteti śuśruma | munerdevasya mūlena sarvā vidhyāmi tā aham

हिन्दी अर्थ

हो गया है, (आ गतम्) श्राओ। (वृषणा) है सुखो या वाणों की वर्षा इस आमन्तित शाला मे (धेनवः) दुधार गौएं (दुह्यन्ते) दोही जाती ह (वेधसः) अन्य शतरुवेधक सेनिक भी (मदन्ति) यहां भ्राकर तुप्त होते है । का० ७1 अनु० ६। सू० ७७ अथवंवेद-भाष्य विशेषण साभिप्राय पठित है “दसु उपक्षये” (दिवादिः) । दस्रौ त उपक्षयितारौ अष्विनौ (सायण) । इस से भी प्रतीत होता है कि सूक्त (७७ राजनी तिविषयक है । वेधसः =व्यध् = ताडने, धना, बाणो द्वारा बेधने स्वाहाकृतः शचिहैवेषुं यन्नो यो भ्ध्िनोंमसो देवपानः ।

English

Let not a thief or wicked man possess you: let not the dart of Rudra come anear you, Prolific, shining in the goodly pasture, drinking at pleasant pools the limpid water.

अध्याय ७

श्लोक 74.2

विध्या॑म्यासां प्रथ॒मां विध्या॑म्यु॒त म॑ध्य॒माम्।इ॒दं ज॑घ॒न्याऽमासा॒मा च्छि॑नद्मि॒ स्तुका॑मिव

vidhyāmyāsāṃ prathamāṃ vidhyāmyuta madhyamām| idaṃ jaghanyā'māsāmā cchinadmi stukāmiva

हिन्दी अर्थ

खाने का साघन है ओर इन (देवपानः) दो देवौंकेपान कं लिये है, वह् (णुचिः) पवि यज्ञ (देवेषु) अन्य विजिगीषु श्रधिकारियों के निमित्त भी (अमृतासः) मरण-रहित विजिगीषु ग्नन्य अधिकारी भी (तम् उ ) उस सत्कार यज्ञ का (जुषाणाः) प्री तिपूरवैक सेवन करते हए, उसमे सम्मिलित (प्रतिरिहन्ति) खान-पान का ग्रास्वादन करते हैं । जैसे सेन्यविभाग के श्रश्वों के दो अधिकारियों का सत्कार खान-पान काभी सत्कार करना चाहिए । इस सत्कार के लिये राजा की मौखिक । स्वीकृति चाहिए । “जमृतासः"' दवारा सेनाधिकारियों का युद्धकौणल दर्शाया

English

Ye know the place and rest content, close-gathered, called by many a name. Come to me, Goddesses, with Gods Bedew with streams of fatness us, this cattle-pen, and all this place.

अध्याय ७

श्लोक 74.3

त्वा॒ष्ट्रेणा॒हं वच॑सा॒ वि त॑ ई॒र्ष्याम॑मीमदम्।अथो॒ यो म॒न्युष्टे॑ पते॒ तमु॑ ते शमयामसि

tvāṣṭreṇāhaṃ vacasā vi ta īrṣyāmamīmadam| atho yo manyuṣṭe pate tamu te śamayāmasi

हिन्दी अर्थ

वाम्) हेदो अस्वियो ! तुम दोनों के लिये है, (आ गतम्) आओ । (माध्वी) है धारण करने वालो ! (सत्पती) ह सच्चे रक्षको ! (दिवः रोचने) दिन के १०२ अथरवेवेद-माष्य का० ७। अनु० ६। सू० ७७ , मधोहैग्धस्याखिना तनायां वीतं पातं पय॑स उसियांयाः ॥५॥ तुम दोनों के सत्कार के लिये (प्र चरतु) विचरे । हँ अर्वियो ! (उस्रियायाः) गौ के, (तन।याः) ओर गोसन्तति के (मधो.)

English

A charm to cure scrofulous pustules and scrofula Rapidly dropping, quick to drop, more evil than the evil ones, More sapless than a dried-up bone, swifter than salt to melt away.

अध्याय ७

श्लोक 74.4

व्र॒तेन॒ त्वं व्र॑तपते॒ सम॑क्तो वि॒श्वाहा॑ सु॒मना॑ दीदिही॒ह।तं त्वा॑ व॒यं जा॑तवेदः॒ समि॑द्धं प्र॒जाव॑न्त॒ उप॑ सदेम॒ सर्वे॑

vratena tvaṃ vratapate samakto viśvāhā sumanā dīdihīha| taṃ tvā vayaṃ jātavedaḥ samiddhaṃ prajāvanta upa sadema sarve

हिन्दी अर्थ

का० ७ । भ्रनु० ६। सु° ७७ अथर्ववेद-भाष्य १०३ (सविता+) सविता ने (नाकम्) नक सहित युलोक को (वि अख्यत्) अनु) प्रयाग के अनन्तर (विराजति) विराजमान होतादहै। विधि उषाकाल में सविता के उदय होने से पूवं हो जानी चाहिए । आन्यः

English

Pustules that rise upon the neck, Pustules upon the shoulder- joints, Pustules that, falling of themselves, spring up on every twofold limb: I have expelled and banished all Scrofula harboured in the head,

अध्याय ७

श्लोक 75.1

अघ्न्याः।१-२ उपरिबभ्रबः।अघ्न्याः।१ त्रिष्टुप्, २ त्र्यवसाना पञ्चपदा भुरिक् पथ्यापङ्क्तिः।प्र॒जाव॑तीः सू॒यव॑से रु॒शन्तीः॑ शु॒द्धा अ॒पः सु॑प्रपा॒णे पिब॑न्तीः ।मा व॑ स्ते॒न ई॑शत॒ माघशं॑सः॒ परि॑ वो रु॒द्रस्य॑ हे॒तिर्वृ॑णक्तु

aghnyāḥ| 1-2 uparibabhrabaḥ| aghnyāḥ| 1 triṣṭup, 2 tryavasānā pañcapadā bhurik pathyāpaṅktiḥ| prajāvatīḥ sūyavase ruśantīḥ śuddhā apaḥ suprapāṇe pibantīḥ | mā va stena īśata māghaśaṃsaḥ pari vo rudrasya hetirvṛṇaktu

हिन्दी अर्थ

कालके प्रयाण के बाद का काल, सविताका काल है । उप॑ हये सुदुर्घौ घेतुमेतां सुहस्तो गोधुगुत दोंहैनाम् ! को (उपह्वये) मँ समीप बुलाता हूं । (सुहस्तः उत) ग्रौर दोहने में कुशल गतिकर्मा; व्याप्तिकर्मां (निघं० २।१४; २६८) । तनायाः= “तना” । का षष्ठ्य कवचन । तना तनयेन (अथवं० ८।४।१०; सायण) अभिप्राय यहु को सीच दिया है(६)। वह् सविताके कालमें परिपक्व हो गथा हैः इसकी सूचना प्राप्त हो गर्ईदहै। सविताके कालमे दी श्ररवी इसका पान करेगे

English

And that which bores the breast-bone through, and that which settles in the sole. Scrofula flies borne on by wings: it penerates and holds the man. Here is the cure of either kind, the chronic and the transient.

अध्याय ७

श्लोक 75.2

प॒द॒ज्ञा स्थ॒ रम॑तयः॒ संहि॑ता वि॒श्वना॑म्नीः ।उप॑ मा देवीर्दे॒वेभि॒रेत॑ ।इ॒मं गो॒ष्ठमि॒दं सदो॑ घृ॒तेना॒स्मान्त्समु॑क्षत

padajñā stha ramatayaḥ saṃhitā viśvanāmnīḥ | upa mā devīrdevebhireta | imaṃ goṣṭhamidaṃ sado ghṛtenāsmāntsamukṣata

हिन्दी अर्थ

मानो सविता ने यहु पेय उन्हं प्रदान कियाहै। . मे दुग्ध, दधि रूप ओर श्रामिक्षारूप जाना जा सकता है । । (गोधुक्) है गो दोहने वाले ! (्रोषम्==आ उषसम्) उषा काल तक १. उषा के प्रयाण के समनन्तर उद्वित सूयं सविता है । (पयसा) दोहे दुग्ध के साथ (उपद्रव) हमारे समीप भ्रा जा, भौर (उसि- ¦

English

We know thine origin, Scrofula! know whence thou, Scrofula, art born. How hast thou then struck this man here, him in whose house we sacrifice? Boldly drink Soma from the beaker, Indra! hero in war for treasure! Vritra-slayer.

अध्याय ७

श्लोक 76.1

गण्डमालाचिकित्सा।१-६ अथर्वा।१,२ अपचिद्भैषज्यं, ३-६ जायान्यः, इन्द्रः।अनुष्टुप्, आ सु॒स्रसः॑ सु॒स्रसो॒ अस॑तीभ्यो॒ अस॑त्तराः ।से हो॑रर॒सत॑रा लव॒णाद् विक्ले॑दीयसीः

gaṇḍamālācikitsā| 1-6 atharvā| 1,2 apacidbhaiṣajyaṃ, 3-6 jāyānyaḥ, indraḥ| anuṣṭup, ā susrasaḥ susraso asatībhyo asattarāḥ | se horarasatarā lavaṇād vikledīyasīḥ

हिन्दी अर्थ

१" स्वहोता == स्वयं प्रदाता; ह दाने (जुहोत्यादिः) ॥ , २. श्रथवा “तना धननाम'' (निघं० २।११), उसिया ब्र्थात् गौ घनरूप है । ३. भषम् -=श्रयवा तप्तम्, उष दाहे, ताजा दूष गमं होता है । "१ (सुदुघाम्) सुगमता से दोदटी जाने वाली (एताम्) इस (धेनुम्) गौ कथववेद-भाष्य का० ७ 1 धनु° ६ । सु० ७७ दुग्ध (दुहाम् ) दोहरूप मे, ग्रदान करे, (सा) वह॒ (महते सौभगाय) हमारे

English

Fill thyself full at the mid-day libation: thyself possessing riches grant us riches. An incantation against an enemy Ye Maruts, full of fiery heat, accept this offering brought for you

अध्याय ७

श्लोक 76.2

या ग्रैव्या॑ अप॒चितोऽथो॒ या उ॑पप॒क्ष्याः ।वि॒जाम्नि॒ या अ॑प॒चितः॑ स्वयं॒स्रसः॑

yā graivyā apacito'tho yā upapakṣyāḥ | vijāmni yā apacitaḥ svayaṃsrasaḥ

हिन्दी अर्थ

महसौ भ्य के लिये (वं्ाम्) समृद्ध हो । ८।२।६४) ह्यरा "गम्" धातु के मकार को नकार (सायण) ।. शम-दम सम्पन्न मन वालां (अतिथिः) अतिथि (दुरोणे) जसे गृहस्थी कं (विश्वाः अभियुजः) सब आक्रमणकारी परकीय सेनाओं का (विहत्य) विशेष हनन करके (शत्रूयताम्) हमारे साथ शतरृता चाहने वालों कं (भोज- नानि) भोजनों को (ग्राभरन्=्म्राहुर) छीनले।

English

To help us, ye who slay the foe. Maruts, the man who filled with rage against us beyond our thoughts would harm us, O ye Vasus,

अध्याय ७

श्लोक 76.3

यः कीक॑साः प्रशृ॒णाति॑ तली॒द्यऽमव॒तिष्ठ॑ति ।निर्हा॒स्तं सर्वं॑ जा॒यान्यं॒ यः कश्च॑ क॒कुदि॑ श्रि॒तः

yaḥ kīkasāḥ praśṛṇāti talīdya'mavatiṣṭhati | nirhāstaṃ sarvaṃ jāyānyaṃ yaḥ kaśca kakudi śritaḥ

हिन्दी अर्थ

का० ७। श्रनुऽ ९1 सू० ७७ अधरवैवेद-भाष्यं १०५ रथात् सुनियन्वित नहीं कर सकती, ओौर न शत्रुओं के तेजं का परामव ही शत्रुओं के तेजो का पराभव कर सकती है । तथा न वैवाहिक अग्निक साथ दयद्र॑ता का ही सम्बन्ध सम्भव है। (दि) निडचय से (मयाः) तु हो, (अधा) तदनन्तर (वयम्) हम (भगवन्तः). विचरती हुई (शुद्धम्) शुद्ध (उदकम्) जल को (पिब) पी । व्यविततहैजो कि शत्रुओं का हनन कर, उनकं भोजनों को छीनकर उन्हँ

English

May he be tangled in the toils of Mischief: smite ye him down with your most flaming weapon. Each year come, friends to man, the tuneful Maruts, dwelling in spacious mansions, trooped

अध्याय ७

श्लोक 76.4

प॒क्षी जा॒यान्यः॑ पतति॒ स आ वि॑शति॒ पूरु॑षम्।तदक्षि॑तस्य भेष॒जमु॒भयोः॒ सुक्ष॑तस्य च

pakṣī jāyānyaḥ patati sa ā viśati pūruṣam| tadakṣitasya bheṣajamubhayoḥ sukṣatasya ca

हिन्दी अर्थ

युजः = “हमारे संमुख जुटी हई" परसेनाणएु । (अग्ने) है अग्रणी । (महते सौभगय) हमारे महासौभाग्य के लिये तेजो को (ग्रभितिष्ठ) पदाक्रान्त कर, अभिभूत कर। ह सप्तम काण्ड करा षष्ठ अनुवाकं समाप्त

English

together. Exhilarating, gladdening full of fiery heat, may they deliver us from binding bonds of sin. A charm for a prince’s prosperity

अध्याय ७

श्लोक 76.5

वि॒द्म वै ते॑ जायान्य॒ जानं॒ यतो॑ जायान्य॒ जाय॑से ।क॒थं ह॒ तत्र॒ त्वं ह॑नो॒ यस्य॑ कृ॒ण्मो ह॒विर्गृ॒हे

vidma vai te jāyānya jānaṃ yato jāyānya jāyase | kathaṃ ha tatra tvaṃ hano yasya kṛṇmo havirgṛhe

हिन्दी अर्थ

१०६ अयववेद-माष्य का० ७॥ अनु० ७1 सू० ७८. (माता) माता (कृष्णा) काली गण्डमाला है, (इति शुश्रुम) यह हम ने सुना है । (ताः सर्वाः) उन सब को (ग्रहम्) मै (विध्यामि) वींधता हू विदारित करता हूं, (मूनेदेवस्य,) “वेणुदाभ्रं ष” संज्ञक वृक्ष कौ (मूलेन) सायणाचायं ने “वेणुदाभुं ष" वृक्ष की जड़ का कथन किया है । “चक्र रक्त की नाडियां अधिक सक्रिय हों, भौर कृष्ण गण्डमालाएं पहिले उभ- को माता कहा है । गण्डमालाओं के वणेन के लिये देखो अथव ० (६।८३),

English

I free thee from the cord, I loose the bond, I loose the fastening. Even here, perpetual, Agni, wax thou strong. I with celestial prayer appoint thee, Agni, maintainer of this man in princely powers.

अध्याय ७

श्लोक 76.6

धृ॒षत् पि॑ब क॒लशे॒ सोम॑मिन्द्र वृत्र॒हा शू॑र सम॒रे वसू॑नाम्।माध्य॑न्दिने॒ सव॑न॒ आ वृ॑षस्व रयि॒ष्ठानो॑ र॒यिम॒स्मासु॑ धेहि

dhṛṣat piba kalaśe somamindra vṛtrahā śūra samare vasūnām| mādhyandine savana ā vṛṣasva rayiṣṭhāno rayimasmāsu dhehi

हिन्दी अर्थ

(विध्यामि) मै बींधता हूं, विदारित करता हूं" (उत) तथा तदनन्तर (मध्य माला को फलने मे बन्ध लगा देता दहै, उसे फले नदीं देता । मू +-निः, कित् (उणा० ४।१२४), दीर्षोकारस्य हस्वोकारः । काऽ ७। श्रनु° ७। सू०७द८ अथववेवेद-भाष्य १०७ गुच्छे को सुगमता से काट दिया जाता है ।

English

Here brightly shine for us with wealth: declare thou to Gods this favoured giver of oblations. A hymn to the New Moon Night of the New-born Moon, whatever fortune the Gods who dwell with greatness have

अध्याय ७

श्लोक 77.1

शत्रुनाशनम्।१-३ अङ्गिराः।मरुतः।१ त्रिपदा गायत्री, २ त्रिष्टुप्, ३ जगती।सांत॑पना इ॒दं ह॒विर्मरु॑त॒स्तज्जु॑जुष्टन ।अ॒स्माको॒ती रि॑शादसः

śatrunāśanam| 1-3 aṅgirāḥ|marutaḥ| 1 tripadā gāyatrī, 2 triṣṭup, 3 jagatī| sāṃtapanā idaṃ havirmarutastajjujuṣṭana | asmākotī riśādasaḥ

हिन्दी अर्थ

मदरहित मने कर दिया है । (अथो) तथा (यःते मन्युः) जोतेरा कोध है, (तम्, उ ते) उस तेरे क्रोध को (शमयामसि) हम शान्त कर देते ह । तष्टा अर्थात् बढरई, तरखान, लकड़ी से वस्तुगों को घड निकलता है। (सुमनाः) सुप्रसन्नचित्त इभा (इह) इस घरमे (दीदिहि) चमक । भौर १०८ -अधववेर्द-भाष्य -का० ७३ भ्रनु० ७। सू० ७६ धर में प्रसन्नता से चमकता रह 1 ओर हम सब मिलकर, सन्तानों समेत,

English

assigned thee, Therewith fulfil our sacrifice, all-baunteous! Blessed One, grant us wealth with manly offspring.

अध्याय ७

श्लोक 77.2

यो नो॒ मर्तो॑ मरुतो दुर्हृणा॒युस्ति॒रश्चि॒त्तानि॑ वसवो॒ जिघां॑सति ।द्रु॒हः पाशा॒न् प्रति॑ मुञ्चतां॒ सस्तपि॑ष्ठेन॒ तप॑सा हन्तना॒ तम्

yo no marto maruto durhṛṇāyustiraścittāni vasavo jighāṃsati | druhaḥ pāśān prati muñcatāṃ sastapiṣṭhena tapasā hantanā tam

हिन्दी अर्थ

यज्ञिय जातवेदा-अग्नि के समीप बैठा करं । माला” का वणेन है, मौर शेष दो मन््ोमे परतिकी ईर्ष्या भौर मन्युके शमन का श्रौर तदनन्तर उसके “सुमनाः” होने का वणेन हुमा दहै। इस (प्रजावतीः) बड़ -बचछडियों वाली (सूयवसे) उत्तम घास वाले स्थाम

English

I am the New Moon’s Night, the good and pious are my in- habitants, these dwell within me. In me have Gods of both the spheres, and Sādhyas, with Indra as their chief, all met together. 116

अध्याय ७

श्लोक 77.3

संव॒त्स॒रीणा॑ म॒रुतः॑ स्व॒र्का उ॒रुक्ष॑याः॒ सग॑णा॒ मानु॑षासः ।ते अ॒स्मत् पाशा॒न् प्र मु॑ञ्च॒न्त्वेन॑सः सांतप॒ना म॑त्स॒रा मा॑दयि॒ष्णवः॑

saṃvatsarīṇā marutaḥ svarkā urukṣayāḥ sagaṇā mānuṣāsaḥ | te asmat pāśān pra muñcantvenasaḥ sāṃtapanā matsarā mādayiṣṇavaḥ

हिन्दी अर्थ

पिबन्तीः) शुद्ध जल पीती हुई (वः) तुम पर है गौमो (स्तेनः) चोर (मा ईशत) अधीश्वर न हो, (मा प्रशंस) न वधकारी म्रधीडवर हो, (वः) सुद्रकर्मा पुरुष तुम पर प्रहार न करे । पदज्ञा स्थ रमरतयुः संहिता विश्वनौम्नीः। उप पा देषीरहैवेभिरेतं । फ19.७। भ्रनु9 ७। सू०9 ८० अथवंवेद-भाष्प्र -१०६ हमारे गृहो या गोष्ठो मेँ रमण करने वाली, अथवा हमे प्रत्न करने वानी, । वाली (देवीः) है दिन्यगुणवालियो ! (देवेभिः) दिन्यगुणी सन्तानो के

English

The Night hath come, the gatherer of treasures, bestowing strength, prosperity, and riches. To New Moon’s Night let us present oblation: pouring out strength, with milk hath she come hither.

अध्याय ७

श्लोक 78.1

वन्दमोचनम्।१-२ अथर्वा।अग्निः।१ परोष्णिक्, २ त्रिष्टुप्।वि ते॑ मुञ्चामि रश॒नां वि योक्त्रं॒ वि नि॒योज॑नम्।इ॒हैव त्वमज॑स्र एध्यग्ने

vandamocanam| 1-2 atharvā| agniḥ| 1 paroṣṇik, 2 triṣṭup| vi te muñcāmi raśanāṃ vi yoktraṃ vi niyojanam| ihaiva tvamajasra edhyagne

हिन्दी अर्थ

सेहोररसत॑रा ख्व गाद् विक्छदीयसीः ॥१॥ (सुखसः) पीप का अतिस्राव करने वाली गण्डमाला कौ अपेक्षा (भ्रासु वस्तुओं को अपेक्षा भी (असत्तराः) अधिक रसद रूप गण्डमाला हो जाय । रसरदहित अर्थात् निःसार गण्डमाला हौ जांय, (लवणात्) नमक सेभरी

English

Night of New Moon! ne’er hath been born another than thou embracing all these forms and natures, May we have what we longed for when we brought thee obla- tions: may we be the lords of

अध्याय ७

श्लोक 78.2

अ॒स्मै क्ष॒त्राणि॑ धा॒रय॑न्तमग्ने यु॒नज्मि॑ त्वा॒ ब्रह्म॑णा॒ दैव्ये॑न ।दी॒दि॒ह्य॑१स्मभ्यं॒ द्रवि॑णे॒ह भ॒द्रं प्रेमं वो॑चो हवि॒र्दां दे॒वता॑सु

asmai kṣatrāṇi dhārayantamagne yunajmi tvā brahmaṇā daivyena | dīdihya1smabhyaṃ draviṇeha bhadraṃ premaṃ voco havirdāṃ devatāsu

हिन्दी अर्थ

भी स्वयं विलन्न होकर पीपरहित होकर सूख जाय । अथवा “लवणाद् विकले दीयसीः” का यह् अभिप्राय है करि गण्डमाला के फोड़ पर लवण तथा अन्यं योगो के साथ लवणकालेप करने से फोड़.पीपके स्राव द्वारा सूखकर शीघ्र ठीक हो जाते ह (चक्रदत्त गण्डमालाधिकार, श्लोक ५,१४,३५,५८,६०) । ११० प्रथवंवेद-माष्य का० ७1 अनु० ७1 सू ८०. स्वयंच्तसः = किसी प्रातिक ओौषध के विना, केवल मनोबल तथा यः कीकसाः प्रषूणांति व्यय मव तिष्ठंति ।

English

riches. A hymn to the Full Moon Full in the front, full rearward, from the middle the Full Moon’s

अध्याय ७

श्लोक 79.1

अमावास्या।१-४ अथर्वा।अमावास्या।त्रिष्टुप्, १ जगती।यत् ते॑ दे॒वा अकृ॑ण्वन् भाग॒धेय॒ममा॑वास्ये सं॒वस॑न्तो महि॒त्वा।तेना॑ नो य॒ज्ञं पि॑पृहि विश्ववारे र॒यिं नो॑ धेहि सुभगे सु॒वीर॑म्

amāvāsyā| 1-4 atharvā| amāvāsyā| triṣṭup, 1 jagatī| yat te devā akṛṇvan bhāgadheyamamāvāsye saṃvasanto mahitvā| tenā no yajñaṃ pipṛhi viśvavāre rayiṃ no dhehi subhage suvīram

हिन्दी अर्थ

जो कोई क्षयरोग (ककुदि) ककुद् में (धितः) आश्रय पा लेता उसे (निर्हाः) तू निःसारित कर। ; तलीद्यम् = अस्थि के समीप का मांस (सायण) । पैप्पलाद शाख। में तलाम्याम् पाठ रहै, जिसका अभिप्राय हैषैोंके तलुएु 1 “अवतिष्ठति” तलुए सूचित होते ह । "जायान्यम्'” निरन्तरं जायासंभोगेन जायमानं क्षय-

English

Night hath conquered in the battle. In her: may we, dwelling with Gods and greatness, feast in the height of heaven, on strengthening viands.

अध्याय ७

श्लोक 79.2

अ॒हमे॒वास्म्य॑मावा॒स्या॒३ मामा व॑सन्ति सु॒कृतो॒ मयी॒मे।मयि॑ दे॒वा उ॒भये॑ सा॒ध्याश्चेन्द्र॑ज्येष्ठाः॒ सम॑गच्छन्त॒ सर्वे॑

ahamevāsmyamāvāsyā3 māmā vasanti sukṛto mayīme| mayi devā ubhaye sādhyāścendrajyeṣṭhāḥ samagacchanta sarve

हिन्दी अर्थ

मानो उड़ता है, (सः) वह मानो उड़कर (पूरुषम्) पुरूष मे (श्राविशति) विवूम वैत जायान्य जानं यतों जायान्य जाय॑से । है जायान्य! इस निश्चय से तेरे जन्म को जानते है, जहां से है जायान्य! फा० ७ ॥ अनु ० ७ ।सू० ८० भ्रथवेवेद-भाष्य १९११. त्र जन्म लेता है पैदा होता है। उसे" कंसे तु ¡हन्न करे, जिसके शृह मे हम हविः प्रवान करते हैँ ।

English

To him, the Full Moon’s mighty Bull, we pay our solemn sacri- fice. May he bestow upon us wealth unwasting, inexhaustible. No one but thou, Prajāpati, none beside thee, pervading, gave to all these forms their being.

अध्याय ७

श्लोक 79.3

आग॒न् रात्री॑ सं॒गम॑नी॒ वसू॑ना॒मूर्जं॑ पु॒ष्टं वस्वा॑वे॒शय॑न्ती ।अ॒मा॒वा॒स्याऽयै ह॒विषा॑ विधे॒मोर्जं॒ दुहा॑ना॒ पय॑सा न॒ आग॑न्

āgan rātrī saṃgamanī vasūnāmūrjaṃ puṣṭaṃ vasvāveśayantī | amāvāsyā'yai haviṣā vidhemorjaṃ duhānā payasā na āgan

हिन्दी अर्थ

वतक ओषधियों की ्राहुतियों से उत्यघ्च धूमके सूषनेसेक्षयरोगया दारा, श्रोषधि-धूम फफडों मे जाकर रक्त को भ्रोषधि युक कर शरीरस्थ रोग का शीघ्र शमन कर देता है, ग्रोषषि के खाने से रोगशमन देर से होता है । जायान्यः == जायायाः आनेयः, श्रथवा जायायाः जन्यः, “जकार” कां हश्रा, (कलशे) शरीररूपी कलश मेँ स्थित (सोमम्) वीयं का (पिब) तू पान कर, (वृत्रहा) तु ने वत्र भावनाश्रों का हनन करदिया है, (शूर) हे के (सवने) सवन मे (श्रा वृषस्व) शरीर मे सोम सींच, (रयिष्ठानः) ओौर

English

Grant us our hearts’ desire when we invoke thee: may we have store of riches in possession. First was the Full Moon meet for adoration among the days and in the nights’ deep darkness. Into thy heaven, O Holy One, have entered those pious men who honour thee with worship.

अध्याय ७

श्लोक 79.4

अमा॑वास्ये न त्वदे॒तान्य॒न्यो विश्वा॑ रू॒पाणि॑ परि॒भूर्ज॑जान ।यत् का॑मास्ते जुहु॒मस्तन्नो॑ अस्तु व॒यं स्या॑म॒ पत॑यो रयि॒णाम्

amāvāsye na tvadetānyanyo viśvā rūpāṇi paribhūrjajāna | yat kāmāste juhumastanno astu vayaṃ syāma patayo rayiṇām

हिन्दी अर्थ

(रयिम्) सद्गुण सम्पत्ति (धेहि) धारण करा । “पुरुष निश्चय से यज्ञरूप है । २४ वर्षो कौ आयु तक उस का प्रातः वर्षोकी यु तक उसका तृतीय सवन है। इन भ्रायु कालोंमें यदि उसे १. भ्रयवा उसधरमेंतू किसीकोभी कंसे मारे जिसके कि घरमेंहुम हवि सवन है । ४४ वर्षों की मायु तके उसका माध्यन्दिनि सवन है; श्रौर ४.

English

A hymn to the New Moon Forward and backward by their wondrous power move these two youths, disporting, round the ocean.

अध्याय ७

श्लोक 80.1

पूर्णिमा।१-४ अथर्वा।पौर्णमासी, ३ प्रजापतिः।त्रिष्टुप्, २ अनुष्टुप्।पू॒र्णा प॒श्चादु॒त पू॒र्णा पु॒रस्ता॒दुन्म॑ध्य॒तः पौ॑र्णमा॒सी जि॑गाय ।तस्यां॑ दे॒वैः सं॒वस॑न्तो महि॒त्वा नाक॑स्य पृ॒ष्ठे समि॒षा म॑देम

pūrṇimā| 1-4 atharvā|paurṇamāsī, 3 prajāpatiḥ| triṣṭup, 2 anuṣṭup| pūrṇā paścāduta pūrṇā purastādunmadhyataḥ paurṇamāsī jigāya | tasyāṃ devaiḥ saṃvasanto mahitvā nākasya pṛṣṭhe samiṣā madema

हिन्दी अर्थ

११२ अथरववेद-माष्यं क”० ७। भनु० ७ 1 मू० ८१ सन व्यक्ति को संतप्त करर्खकते रह, ्रौरं “देषायुर-समर'” मं देव विजयीं अवशिष्ट जीवन मे, उसे देवासुर संग्राम के लिये संनद्ध किया है मन््रमें सोम हँ बीयं । उसका पान हं “उध्वैरेतस्"' होना । सोम ह वोयं,--इसं्क ज्िये देखो 1 अ्नन्थकार का अथषैवेदभाष्य ( १४।१।१-५) । सोमाः = सोमन् वीयं को “8611601” कहते हैँ । सोमन् ओौर इल) मे श्रुतिसाम्यमी है, (सांतपनाः) .संतप्त सूयं के सदृण जस्त्र-शस्् दारा यतमान (मरुतः) '

English

One views all living things, and thou, the other, art born again arranging times and seasons. Thou art re-born for ever new: thou marchest, ensign of days, in forefront of the mornings. Marching thou dealest to the Gods their portion. Thou lengthe- nest, Moon! the days of man’s

अध्याय ७

श्लोक 80.2

वृ॒ष॒भं वा॒जिनं॑ व॒यं पौ॑र्णमा॒सं य॑जामहे ।स नो॑ ददा॒त्वक्षि॑तां र॒यिमनु॑पदस्वतीम्

vṛṣabhaṃ vājinaṃ vayaṃ paurṇamāsaṃ yajāmahe | sa no dadātvakṣitāṃ rayimanupadasvatīm

हिन्दी अर्थ

कोतीः) हमं प्रजाजनों की र॑क्षा कं लिये (रिशादसः) हिसाकारी शत्रभों का ग्रतः मरुतः संनिफ प्रतीत होते है। “मरुत् मारयतीति वा मनुष्यजातिः" ॥ (वसवः) प्रशस्त (मरतः) है सैनिको ! (यः) जो (दुह णयुः) दृष्ट- का० ७ 1 ्बनु० ७। सू० ८१ अथर्वेवेद-मांभं १९३ हमारे (चित्तानि) चितौ को (जिघांसति) कूब करना चाहता टै, (सः) "मरूतः" के दो अथो को लेकर सूक्त मेँ द्विवि अथं हए हँ 1 मानसून

English

existence. O spray of Soma, Lord of Wars! all-perfect verily art thou. Make me all-perfect, Beauteous One! in riches and in progeny.

अध्याय ७

श्लोक 80.3

प्रजा॑पते॒ न त्वदे॒तान्य॒न्यो विश्वा॑ रू॒पाणि॑ परि॒भूर्ज॑जान ।यत् का॑मास्ते जुहु॒मस्तन्नो॑ अस्तु व॒यं स्या॑म॒ पत॑यो रयी॒णाम्

prajāpate na tvadetānyanyo viśvā rūpāṇi paribhūrjajāna | yat kāmāste juhumastanno astu vayaṃ syāma patayo rayīṇām

हिन्दी अर्थ

(यजु ° १७।४०) 1 “हृणि: क्रोधः कर्मा” (रिषं ०२1१३; २। १२) । दुहः दह् जिघांसायाम् (दिवादिः) । हत्या करने की इच्छा वाले राजा को फन्दों दवारा जकड़ कर, मार देना चाहिए । मर्तः को “मानुषासः (मन्व ३) में कहा है । इसलिये मनुष्य सैनिक भी सूक्त म अमित्रेत है ।तथा मरुत् = स्यते मारयतिवा स मरत्, मनुष्यजातिः, पवनो वा (उणा० संवत्सरीणां मरुतः स्वका उरुक्षयाः सगणा मानुषासः । महाक्षयं करने वाले, (सगणाः) गणो सहित, (मानुषासः ) मनुष्यों के संघ- शवर्नो का उपक्षयं करो ॥१।५. जुजुष्टन -जुषी प्रीतिसेवनयोः (तुदादिः) । ऊतिः

English

Thou art the New Moon, fair to see, thou art complete in every part. May I be perfect, fully blest in every way in steeds and kine, in children, cattle, home, and wealth.

अध्याय ७

श्लोक 80.4

पौ॒र्ण॒मा॒सी प्र॑थ॒मा य॒ज्ञिया॑सी॒दह्नां॒ रात्री॑णामतिशर्व॒रेषु॑ ।ये त्वां य॒ज्ञैर्य॑ज्ञिये अ॒र्धय॑न्त्य॒मी ते नाके॑ सु॒कृतः॒ प्रवि॑ष्टाः

paurṇamāsī prathamā yajñiyāsīdahnāṃ rātrīṇāmatiśarvareṣu | ye tvāṃ yajñairyajñiye ardhayantyamī te nāke sukṛtaḥ praviṣṭāḥ

हिन्दी अर्थ

वाले, (मादयिष्णवः) हमे प्रसन्न करने वाले (ते) वे (मरुतः) सेनिक, शण अ्ष्विवेद-भाष्य. का० ७ अनु° ७५ सूवुत ८२२ । ˆ पाशान् = शत्र ने हमासै कमजोरी या पायमयी प्रवृत्तियों के. कारण. जो फदे ह्म पर डाल दिये हन से छटकारा पाना । कर देता हूं, (नि योजनम्) नियोजन को (वि) पृथक् करता हं । (त्वम्) तु (इह एव) यहां ही (अनसः ) ग्रताडित हृजा (एधि)हो, विद्यमान रह ।

English

Inflate thee with his vital breath who hathes us and whom we detest. May we grow rich in steeds and kine, in children, cattle, houses, wealth. With that unwasting stalk which Gods, unwasting Gods, in- crease and eat,

अध्याय ७

श्लोक 81.1

सूर्याचन्द्रमसौ।१-६ अथर्वा।सावित्री, सूर्यः, चन्द्रमाः।त्रिष्टुप्, ३ अनुष्टुप्, ४ आस्तारपङ्क्तिः, ५ सम्राडास्तारपङ्क्तिः।पू॒र्वा॒प॒रं च॑रतो मा॒ययै॒तौ शिशू॒ क्रीड॑न्तौ॒ परि॑ यातोऽर्ण॒वम्।विश्वा॒न्यो भुव॑ना वि॒चष्ट॑ ऋ॒तूँर॒न्यो वि॒दध॑ज्जायसे॒ नवः॑

sūryācandramasau| 1-6 atharvā| sāvitrī, sūryaḥ, candramāḥ| triṣṭup, 3 anuṣṭup, 4 āstārapaṅktiḥ, 5 samrāḍāstārapaṅktiḥ| pūrvāparaṃ carato māyayaitau śiśū krīḍantau pari yāto'rṇavam| viśvānyo bhuvanā vicaṣṭa ṛtū~ranyo vidadhajjāyase navaḥ

हिन्दी अर्थ

होता है । “अग्निपद दवारा सम्भवतः अश्व की वेगशक्तिको सूचित किया है। जीवात्मा के तीन शरीर होते है, कारणशरीर, सूक्ष्मशरीर तथा स्थूलशरीर । स्थूलशरीर तो जीवात्माका रथ है, मरौर गवशिष्ट दो शरीरो कं तीन मन अधम पाश दहै, गौर शेष दो उत्तम तथा मध्यम पाण है । जीवात्मा मनरूपी पाश से वद्ध हुजा नाना योनियों तथा सांसारिक जीवनो मेँ विचरतां नियोजन द्वारा निदिष्ट किया है।

English

May Varuna, Brihaspati, and Indra, the Lords and Guardians of the world, increase us. In praise of Agni Sing with fair laud the combat for the cattle. Bestow upon us excellent possessions.

अध्याय ७

श्लोक 81.2

नवो॑नवो भवसि॒ जाय॑मा॒नोऽह्नां॑ के॒तुरु॒षसा॑मे॒ष्यग्र॑म्।भा॒गं दे॒वेभ्यो॒ वि द॑धास्या॒यन् प्र च॑न्द्रमस्तिरसे दी॒र्घमायुः॑

navonavo bhavasi jāyamāno'hnāṃ keturuṣasāmeṣyagram| bhāgaṃ devebhyo vi dadhāsyāyan pra candramastirase dīrghamāyuḥ

हिन्दी अर्थ

का०७। अनु ७।सु० ८३ भ्रथवंवेद-भाष्य ११५ है । यथा “निण्यः संनद्धो मनसा चरामि" (ऋ० १।१६४।३७) । मन्त्र मेँ का वणेन मन्त्र (२) में हुभा है । . यथा-- प्रदान किया कर करे, जिससे प्रजाजन सात्त्विक हो सके। देवतासु = ““विद्धांसो वं देवाः") । (अमावास्ये) हमारे हृदयगृहों में हमारे साथ बसने वाली पारमेश्वरी मातः ! (महित्वा) योगजन्य महिमा के कारण (संवसन्तः) तेरे साथ बसते हुए (देवाः) दिव्य उपासक, (ते) तेरे लिये (यत्) जो (भागधेयम्)

English

Lead to the Gods the sacrifice we offer: let streams of oil flow pure and full of sweetness. Agni I first appropriate with power, with splendour, and with might. I give myself children and lengthened life, with Hail! take Agni to myself.

अध्याय ७

श्लोक 81.3

सोम॑स्यांशो युधां प॒तेऽनू॑नो॒ नाम॒ वा अ॑सि ।अनू॑नं दर्श मा कृधि प्र॒जया॑ च॒ धने॑न च

somasyāṃśo yudhāṃ pate'nūno nāma vā asi | anūnaṃ darśa mā kṛdhi prajayā ca dhanena ca

हिन्दी अर्थ

पिपृहि प पालनपूरणयोः (जुहोत्यादिः) । पारमेश्वरीमाता के सहवासी योगी जन, सुवीर पृर्रेको मातासेप्राप्त कर, भूमिको स्वगे बना देते है! सुवीर = धरमंकृत्यो के करने मे सुवीर । । ृभेतया वते है, (मयि) प्नौर मु मे बसे ह । (मयि) मुभ मँ (उभये)

English

Even here do thou, O Agni, stablish wealth: let not oppressors injure thee by thinking of thee first. Light be thy task of ruling, Agni, with, thy power: may he who worships thee wax strong,

अध्याय ७

श्लोक 81.4

द॒र्शोऽसि दर्श॒तोऽसि॒ सम॑ग्रोऽसि॒ सम॑न्तः ।सम॑ग्रः॒ सम॑न्तो भूयासं॒ गोभि॒रश्वैः॑ प्र॒जया॑ प॒शुभि॑र्गृहैर्धने॑न

darśo'si darśato'si samagro'si samantaḥ | samagraḥ samanto bhūyāsaṃ gobhiraśvaiḥ prajayā paśubhirgṛhairdhanena

हिन्दी अर्थ

(सवं) वे सब (समगच्छन्त) संगत हुए, या होते) मयि आवसम्ति हारा। देवाः = साध्याः ऋषयः च । यथा (तेन देवाऽग्रय- का० ७। अनु ७) सु० ८३ अथर्ववेद-भाष्् ११७ परिचर्या प्रदान करे, यह माता (पयसा) दूध कं साथ वतंमान गौकं सदृश सम्बन्ध पैदा करने वाली शुभरात्री आई है जब कि उपासक कः निवास पारमेश्वरीमाता मे हयो जाता है 1 उपासना कं लिये रात्रीकाल' शुभकाल होता है । रात्रीकाल शान्तकाल होत, है, श्रतः उपासना कं लिये शुभकाल है । ऊर्जम् = ऊजं बलप्राणनयोः (चुरादिः) 1

English

invincible. 117 Agni hath looked upon the spring of Morning, looked on the days, the earliest Jātavedas.

अध्याय ७

श्लोक 81.5

यो॒३ऽस्मान् द्वेष्टि॒ यं व॒यं द्वि॒ष्मस्तस्य॒ त्वं प्रा॒णेना प्या॑यस्व ।आ व॒यं प्या॑सिषीमहि॒ गोभि॒रश्वैः॑ प्र॒जया॑ प॒शुभि॑र्गृ॒हैर्धने॑न

yo3'smān dveṣṭi yaṃ vayaṃ dviṣmastasya tvaṃ prāṇenā pyāyasva | ā vayaṃ pyāsiṣīmahi gobhiraśvaiḥ prajayā paśubhirgṛhairdhanena

हिन्दी अर्थ

भूतभौतिक वस्तुओं को (न जजान) नही पेदा किया, (परिभः) तुही इन सब के सब ओर विद्यमान है । (यत्कामाः) जिस कामना वाले (वयम्) हम (ते) तुभे (जुहुमः) आत्माहुति देते है, (नः) हमे (तत्) वंह काम्य परिभुः =जैसे दुर्गं की रक्षा के लिये, उसके चारों ग्रोर खाई होती है, वैसे भाप भूतभौतिक जगत् की रक्षा के लिये उसके सब ग्रोर विद्यमान पूरवो यजमानो वरीयान्" (ऋ० ५।७७।२) , भर्थात् उषाकाल से जितना पूं के काल मे उपासक उपासना करता है वहू उतना ही प्रधिक प्रेष्ठ होता है । त॑था भ्रव ११८ श्रथववेद-भाष्य का० ७। अनु ७ सू दर

English

So, following the gleams of Morning, Sūrya hath entered heaven and earth as his possession. Agni hath looked upon the spring of Mornings, looked on the days, the earliest Jātavedas. So he in countless places hath extended, full against heaven and earth, the beams of Sūrya.

अध्याय ७

श्लोक 81.6

यं दे॒वा अं॒शुमा॑प्या॒यय॑न्ति॒ यमक्षि॑त॒मक्षि॑ता भ॒क्षय॑न्ति ।तेना॒स्मानिन्द्रो॒ वरु॑णो॒ बृह॒स्पति॒रा प्या॑ययन्तु॒ भुव॑नस्य गो॒पाः

yaṃ devā aṃśumāpyāyayanti yamakṣitamakṣitā bhakṣayanti | tenāsmānindro varuṇo bṛhaspatirā pyāyayantu bhuvanasya gopāḥ

हिन्दी अर्थ

ह, “परि (सवे रोर) भूः ( सत्तायाम् )"" । “सव ग्रोर” का अभिप्राय दहै: (पौणंमासी) पौणंमासी के सदृश (पश्वात्) परिचम मे (पूर्णा) पुर्ण- त्मा-देवों के साथ मिल कर आनन्दरसकं पान द्वारा संमुदित रहते है । १. भ्रभिप्राय यह कि पौणंमासी का चन्द्रमा जव पूरं मे उदित होता, तो पुरणं से दी युक्त होता है । तथ पूवं भ्रौर पश्िम के मघ्याकाश मे गति करता दभा भी पूणं ,

English

Butter to thee in heaven thy home, O Agni! Manu this day hath kindled thee with butter. Let the Celestial Daughters bring thee butter: Let cows pour butter forth for thee, O Agni. A prayer for deliverance from sin and other evils

अध्याय ७

श्लोक 82.1

अग्निः।१-६ शौनकः (संपत्कामः)।अग्निः।त्रिष्टुप्, २ ककुम्मती बृहती, ३ जगती।अ॒भ्यऽर्चत सुष्टु॒तिं गव्य॑मा॒जिम॒स्मासु॑ भ॒द्रा द्रवि॑णानि धत्त ।इ॒मं य॒ज्ञं न॑यत दे॒वता॑ नो घृ॒तस्य॒ धारा॒ मधु॑मत् पवन्ताम्

agniḥ| 1-6 śaunakaḥ (saṃpatkāmaḥ)| agniḥ| triṣṭup, 2 kakummatī bṛhatī, 3 jagatī| abhya'rcata suṣṭutiṃ gavyamājimasmāsu bhadrā draviṇāni dhatta | imaṃ yajñaṃ nayata devatā no ghṛtasya dhārā madhumat pavantām

हिन्दी अर्थ

कलार से ही युक्त रहता है । परन्तु पौणेमाप्ी के उत्तरकाल से उसकी कलाभों भरं हास होने लगता है । परन्तु परमेश्वर फा प्रकाश पौण॑मासी के प्रकारा की तरु सवा एक सा रहता है, उसके प्रकाश में हास नहीं होता । का० ७ । भ्रनु०.७। सू० ८४ अधवंवेद-माष्य ११९ पृषमं वाजिनं वयं पा्णमासे यजामहे 1; - (वृषभम्) आनन्दरस की वर्षा करने वाले, (वाजिनम्) बलशाली,

English

Stablished amid the waters is, King Varuna, thy golden home. Thence let the Sovran who maintains the statutes loose all bind- ing cords. Hence free thou us, King Varuna, from each successive bond and tie.

अध्याय ७

श्लोक 82.2

मय्यग्रे॑ अ॒ग्निं गृ॑ह्णामि स॒ह क्ष॒त्रेण॒ वर्च॑सा॒ बले॑न ।मयि॑ प्र॒जां मय्यायु॑र्दधामि॒ स्वाहा॒ मय्य॒ग्निम्

mayyagre agniṃ gṛhṇāmi saha kṣatreṇa varcasā balena | mayi prajāṃ mayyāyurdadhāmi svāhā mayyagnim

हिन्दी अर्थ

। (वयं यजामहे ) हम यजन करते ह, उसकी पजा, उसका संग, ता उस वाजिनम् = वाजः बलनाम (निं २९) । यजामहे = यज देवपुजा- परमेश्वर को शीतल प्रकाश वाला कहा है, ओर यजु° ३१।१८ मे “आदित्य- फहा है । शेष का अर्थं मन्त्र ७।८३।४, क सदृश है । तथा (यजु° १०।२०; कालो में (पौणेमासी ) पौणेमासी के सदृश प्रकाशमयी पारमेश्वरी मता

English

As we have cried, O Varuna! have said, The Waters, they are kine, thence set us free, O Varuna. Loosen the bonds, O Varuna, that hold us, loosen the bond. above, between, and under.

अध्याय ७

श्लोक 82.3

इ॒हैवाग्ने॒ अधि॑ धारया र॒यिं मा त्वा॒ नि क्र॒न् पूर्व॑चित्ता निका॒रिणः॑ ।क्ष॒त्रेणा॑ग्ने सु॒यम॑मस्तु॒ तुभ्य॑मुपस॒त्ता व॑र्धतां ते॒ अनि॑ष्टृतः

ihaivāgne adhi dhārayā rayiṃ mā tvā ni kran pūrvacittā nikāriṇaḥ | kṣatreṇāgne suyamamastu tubhyamupasattā vardhatāṃ te aniṣṭṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

(बधघेथन्ति) निज हृदयो मे तेरी वृद्धि करते हँ (ते अमी). वे ये (सुकृतः) १२० भ्रथर्ववेद-भाष्य का० ७1 अनु ७।. सु° ० । मन्व मे “अतिशर्वरेषु" पाठ है न कि श्रतिशवेरीषु” । “शवरी क । समाप्ति, श हिसायाम् । "भह्लञाम् ४ का धथ है “दिनं 2 का पौणमासी की तरह पूणं प्रकाश होता है। परमेष्वर माता पूजनीया, संगतियोग्या, तथा आत्मसम्पैणयोग्था है (यज देवपूनासग = करणदानेषु) इस प्रक्रिया कं भनूसार ही, यजनकर्ता, माता कं 1

English

So before Aditi may we be sinless under thy favouring auspices, Āditya! Varuna, free us from all snares that bind us, Varuna’s bonds, the upper and the lower.

अध्याय ७

श्लोक 82.4

अन्व॒ग्निरु॒षसा॒मग्र॑मख्य॒दन्वहा॑नि प्रथ॒मो जा॒तवे॑दाः ।अनु॒ सूर्य॑ उ॒षसो॒ अनु॑ र॒श्मीननु॒ द्यावा॑पृथि॒वी आ वि॑वेश

anvagniruṣasāmagramakhyadanvahāni prathamo jātavedāḥ | anu sūrya uṣaso anu raśmīnanu dyāvāpṛthivī ā viveśa

हिन्दी अर्थ

के संग को प्राप्त करता है (यजु०° ३१।१६) ¡। १ का विधान करता हुभां । (तथा ्रथर्व० १४।१।२३; गृहस्थ) । ॥ का० ७। अनु० ७। सू० ८५ भ्रयर्ववेद-भाष्य नवोनवो मधि जार्यमानोऽ्द केतुर्पसापष्पग्र्॑ । = (जायमानः भवसि) पदा होता रहता है । (ब्रह्न केतुः) तु मनो दिनी तिथियों का ज्ञापक है (उषसाम्) उषाओं क (अग्रम्) आगे-अागे, पहिले (एषि)तु आता है । (आयन्) म्राता हृपरा (देवेभ्यः) देवों के लिये (भागम्) देय भाग का (विदधासि) तू विधान करता है, (चमः) है चन्द्रमा ! त् (आयुः) जायु को (दीर्घम्) दीर्घं (प्रतिरसे) करता है, बढाता है,

English

Drive from us evil dream, drive off misfortune: then let us pass into the world of virtue. A prayer for protection Holder of sway, shine here refulgent, Agni! invincible immortal

अध्याय ७

श्लोक 82.5

प्रत्य॒ग्निरु॒षसा॒मग्र॑मख्य॒त् प्रत्यहा॑नि प्रथ॒मो जा॒तवे॑दाः ।प्रति॒ सूर्य॑स्य पुरु॒धा च॑ र॒श्मीन् प्रति॒ द्यावा॑पृथि॒वी आ त॑तान

pratyagniruṣasāmagramakhyat pratyahāni prathamo jātavedāḥ | prati sūryasya purudhā ca raśmīn prati dyāvāpṛthivī ā tatāna

हिन्दी अर्थ

१४।९।८।२६) किह पृत्र तूमेराखूपहीदहै। पत्नी दिनि में उषाकाल से पूवं जाग जाती है। वह् सास-सधुररूपी देवों का सत्कार करती है । यथा “मातृदेवो भव, पितृदेवो भव । तथा अग्तिहोतर मे सूयं, अग्नि अदि देवों १४।१।२१), तथा ““गाहपत्यं सपर्यं" (भथवै० १४।२।१८) । गृहकरयो में (सोमस्य) वीयं के (अंशो) अंशुरूप, ज्योतिषूप, तथा (युं पते) १. कित संज्ञाने । २. ददशपौणंमास तथा भ्रष्टमी के यज्ञँ मे वायु

English

Jātavedas. With succours friendly to mankind, auspicious, driving away all maladies, guard our dwelling.

अध्याय ७

श्लोक 82.6

घृ॒तं ते॑ अग्ने दि॒व्ये स॒धस्थे॑ घृ॒तेन॒ त्वां मनु॑र॒द्या समि॑न्धे ।घृ॒तं ते॑ दे॒वीर्न॒प्त्य॑१आ व॑हन्तु घृ॒तं तुभ्यं॑ दुह्रतां॒ गावो॑ अग्ने

ghṛtaṃ te agne divye sadhasthe ghṛtena tvāṃ manuradyā samindhe | ghṛtaṃ te devīrnaptya1ā vahantu ghṛtaṃ tubhyaṃ duhratāṃ gāvo agne

हिन्दी अर्थ

ग्रादवि देवों के लियं यज्ञभाग प्रदान । १२२ सथ्ववेद-भाष्यं के†० ७ अनु०. ७1 सु० ८५ (अनूनः, नाम श्रसि) हद्गुणों मे न्यून तू नहीं है ¦ (दष) है दशेनीय नयूनतारहित (कृधि) कर । मन््ोक्ति पत्नी द्वारा हुई है । सोम = वीयं (अथवं० १४।१।१-५) । तथा सोम सोमन्, उणा० १।१४० तथा लाला (वीय) में श्रुति तथा ह क्षत्रिय ! यां सेनापति ! (दशैः असि) त् दशनीय है, (दशेतः ग्रसि) है, (समन्तः) त् सद्गणोंकी सीमा है) मैँभी (गोभिः) गौओं द्वारा,

English

Thou, Indra, lord and leader of the people, wast born for lovely strength and high dominion. Thou dravest off the folk who were unfriendly, and madest for the Gods wide room and freedom.

अध्याय ७

श्लोक 83.1

पाशमोचनम्।१-४ शुनःशेपः।वरुणः।अनुष्टुप्, २ पथ्यापङ्क्तिः, ३ त्रिष्टुप्, ४ बृहतीगर्भा त्रिष्टुप्।अ॒प्सु ते॑ राजन् वरुण गृ॒हो हि॑र॒ण्ययो॑ मि॒थः ।ततो॑ धृ॒तव्र॑तो॒ राजा॒ सर्वा॒ धामा॑नि मुञ्चतु

pāśamocanam| 1-4 śunaḥśepaḥ| varuṇaḥ| anuṣṭup, 2 pathyāpaṅktiḥ, 3 triṣṭup, 4 bṛhatīgarbhā triṣṭup| apsu te rājan varuṇa gṛho hiraṇyayo mithaḥ | tato dhṛtavrato rājā sarvā dhāmāni muñcatu

हिन्दी अर्थ

की सीमारूप (भूयासम्) हो जाऊं । समन्तः = संगतः श्रन्तेन । है, मतः एकवचन का प्रयोग हुभा है । का ग्रहण किया है, भरतः वह् सद्गुणी मी है। का० ७ । श्रनु० ७ सू० ८५ अथर्ववेद-माष्य १२३

English

Like a dread wild beast roaming on the mountain, may he. approach us from the farthest distance. Whetting thy bolt and thy sharp blade, O Indra, crush down our foes and scatter those who

अध्याय ७

श्लोक 83.2

धाम्नो॑धाम्नो राजन्नि॒तो व॑रुण मुञ्च नः ।यदापो॑ अ॒घ्न्या इति॒ वरु॒णेति॒ यदू॑चि॒म ततो॑ वरुण मुञ्च नः

dhāmnodhāmno rājannito varuṇa muñca naḥ | yadāpo aghnyā iti varuṇeti yadūcima tato varuṇa muñca naḥ

हिन्दी अर्थ

राजव, (बृहस्पतिः) सा्रज्य कौ बहती सेना का अ्रविपति (अस्मान्) वीय की वृद्धि एकदम नहीं होती, वृद्धि अंश-अंशसरूप मं होती रहती है, अतः इन अंशो की रक्षा देवजन करते हँ, ओर ब्रक्षितवीयं वाले ऊध्वं रेतस्-ब्रह्मचारी गृहस्थ मं इसका उपभोग करते हँ । अथवा इस को निज- सप्तम काण्ड का सप्तम अनुवाक समाप्त १२४ प्रथवेवेद-भाष्य का० ७ । भ्रनु० ८.) सुऽ ठ्द ताकि (घृतस्य) प्रकाशमयी (धाराः) धाराएं (मधुमत्) मधुररस से उपेत हई (नः) हम में (पवन्ताम्) प्रवाहित हों ।

English

hate us. A charm to ensure victory in battle This very mighty one whom Gods urge onward, the conqueror of cars, ever triumphant,

अध्याय ७

श्लोक 83.3

उदु॑त्त॒मं व॑रुण॒ पाश॑म॒स्मदवा॑ध॒मं वि म॑ध्य॒मं श्र॑थाय ।अधा॑ व॒यमा॑दित्य व्र॒ते तवाना॑गसो॒ अदि॑तये स्याम

uduttamaṃ varuṇa pāśamasmadavādhamaṃ vi madhyamaṃ śrathāya | adhā vayamāditya vrate tavānāgaso aditaye syāma

हिन्दी अर्थ

वाडनाम (निघं० १।११)1 प्राजिम् = देवाभूरसंग्राम। हम लोग पाप करते है, परन्तु पापरूपी असुर के साथ दव बनकर संग्रामं नहीं करते, इसलिये पापायुर के वशीभूतदहौ जाते हँ इसलिये “देवासूरसंग्रम के लिये याचना मन्त्रम कौ गई है) आजिः संभ्राम। । का० ७ । अनु० ८ । सू० ८६ अथवेवेद-भाष्य १२५ भायुको (दधामि) स्थापित करता हूं, (स्वाहा) स्वाहा के उच्चारण यजु० ३२।२) । अनग्निको जीवन में धारण करनेके लिये क्षात्रदृढता

English

Swift, fleet to battle, with uninjured fellies, even Tārkshya for our weal will we call hither. The same Indra the rescuer, Indra the helper, Indra the brave who hears each invocation,

अध्याय ७

श्लोक 83.4

प्रास्मत् पाशा॑न् वरुण मुञ्च॒ सर्वा॒न् य उ॑त्त॒मा अ॑ध॒मा वा॑रु॒णा ये ।दु॒ष्वप्न्यं॑ दुरि॒तं नि ष्वा॒स्मदथ॑ गच्छेम सुकृ॒तस्य॑ लो॒कम्

prāsmat pāśān varuṇa muñca sarvān ya uttamā adhamā vāruṇā ye | duṣvapnyaṃ duritaṃ ni ṣvāsmadatha gacchema sukṛtasya lokam

हिन्दी अर्थ

वीर्य! । परमेश्वर को अपनेमें धारण करनेके लिये वीर्यंशक्ति को जआव- रेषाम्"” (योग १।२०) । वी्ेनिग्रह से अयु भौ बढती ओर सुखदायी होती सम्पत् (अधि धारय) मुभ मे मेरे अधिकाररूप मे, स्थापित कर, (पूवे चित्ताः निकारिणः) पूवैकाल की विकृत मेरी चित्तवृत्तियां (त्वा) तुह भग्नि! (मानिक्रन्) विकरतन करे, मुभसे पराङमुख या विमुख न कर । उपासनाविधि से बैठने वाला (अनिष्टतः) श्रहिसित हूग्रा (वधताम) वृद्धि को प्राप्त ह्ये, बढ़ नहीं । यजुर्वेद (२७।४) में “पूरव चित्ताः” के स्थान मेँ शभूवेचितः'' पाठ है ¦ जिसका अभिप्राय सम्भव है “भूवं संचित” 1 अनिष्टृतः = काम, क्रोध, लोभ,

English

Sakra I call, Indra invoked of many. May Indra Maghavan pros- per and bless us. A prayer to Rudra as Agni To Rudra in the fire, to him who dwells in floods, to Rudra who hath entered into herbs and

अध्याय ७

श्लोक 84.1

क्षत्रभृदग्निः।१-३ भृगु।१ जातवेदाःअग्निः, २-३ इन्द्रः।त्रिष्टुप्, १ जगती।अ॒ना॒धृ॒ष्यो जा॒तवे॑दा॒ अम॑र्त्यो वि॒राड॑ग्ने क्षत्र॒भृद् दी॑दिही॒ह।विश्वा॒ अमी॑वाः प्रमु॒ञ्चन् मानु॑षीभिः शि॒वाभि॑र॒द्य परि॑ पाहि नो॒ गय॑म्

kṣatrabhṛdagniḥ| 1-3 bhṛgu| 1 jātavedāḥagniḥ, 2-3 indraḥ| triṣṭup, 1 jagatī| anādhṛṣyo jātavedā amartyo virāḍagne kṣatrabhṛd dīdihīha| viśvā amīvāḥ pramuñcan mānuṣībhiḥ śivābhiradya pari pāhi no gayam

हिन्दी अर्थ

१२६ अथववेद-माष्य का० ७ । धरनु० ८ । सु० ८ ह 1० ७। भनु० ८ । सु ७ अथवेनेद-माष्य उसने (द्यावापृथिवी) दौः ओौर पृथिवी को (आततान) फलाया है । । पुरुघा रष्मीन् = वेदानुसार सूयेरश्मियां सप्तविध हैँ, भतः पुरुषा है । प्रकाशित करता है । (देवीः) दिव्यगणों वाली (नप्त्यः) हमारी नाती-

English

plants, 118 To him who formed and fashioned all these worlds, to him this

अध्याय ७

श्लोक 84.2

इन्द्र॑ क्ष॒त्रम॒भि वा॒ममोजोऽजा॑यथा वृषभ चर्षणी॒नाम्।अपा॑नुदो॒ जन॑ममित्रा॒यन्त॑मु॒रुं दे॒वेभ्यो॑ अकृणोरु लो॒कम्

indra kṣatramabhi vāmamojo'jāyathā vṛṣabha carṣaṇīnām| apānudo janamamitrāyantamuruṃ devebhyo akṛṇoru lokam

हिन्दी अर्थ

समान प्रकाशमान उस अग्निने (उषसः) उषाओं को (अनु) प्रनुकूलषूपं प्रकाशित करने वाला परमेश्वर (चयावापथिवी) यलोक ओर परथिवी में पृथवी में पायिव प्रग्निको प्रकाशित कर रहा है। यह् सब कुछ हमारे जीवनो के लिये ्रनुकूलरूप है । क्योंकि यह् सव जगत् हमारे भोग प्रौर अपवगके लिये है, प्रतः हमारी उन्नति के लिये अनुकूल है । ' भोगापवर्गा परयम । इस प्रकार महीर ने भी श्रगिि द्वारा परमेश्वर ही माना है ।

English

Rudra, yea, to Agni, reverence be paid! A charm to cure a snake-bite Depart! thou art a foe, a foe. Poison with poison hast thou mixt, yea, verily poison hast thou

अध्याय ७

श्लोक 84.3

मृ॒गो न भी॒मः कु॑च॒रो गि॑रि॒ष्ठाः प॑रा॒वत॒ आ ज॑गम्या॒त् पर॑स्याः ।सृ॒कं सं॒शाय॑ प॒विमि॑न्द्र ति॒ग्मं वि शत्रू॑न् ताढि॒ वि मृघो॑ नुदस्व

mṛgo na bhīmaḥ kucaro giriṣṭhāḥ parāvata ā jagamyāt parasyāḥ | sṛkaṃ saṃśāya pavimindra tigmaṃ vi śatrūn tāḍhi vi mṛgho nudasva

हिन्दी अर्थ

२ जातवेदाः -=जातानि वेद । जातानि वनं विदुः । जाते जाते निघ दति वा । (दुष्टताम् ) दुग्धरूप मे प्रदान करें ¦ तथा ईश्वर सहवास करते ह, इकदुं रहते हैँ । हवियों में श्रेष्ठ हवि है, घृत । । (अथवे० ४।३६।६) । घृताहूति के लिये गोघृत चाहिए, भैस आदि का धृत

English

mixt. Go to the serpent: strike him dead. A prayer for purification and prosperity

अध्याय ७

श्लोक 85.1

अरिष्टनेमिः।१ अथर्वा (स्वस्त्ययनकामः)।तार्क्ष्यः।त्रिष्टुप्।त्यमू॒ षु वा॒जिनं॑ दे॒वजू॑तं॒ सहो॑वानं तरु॒तारं॒ रथा॑नाम्।अरि॑ष्टनेमिं पृतना॒जिमा॒शुं स्व॒स्तये॒ तार्क्ष्य॑मि॒हा हु॑वेम

ariṣṭanemiḥ| 1 atharvā (svastyayanakāmaḥ)| tārkṣyaḥ| triṣṭup| tyamū ṣu vājinaṃ devajūtaṃ sahovānaṃ tarutāraṃ rathānām| ariṣṭanemiṃ pṛtanājimāśuṃ svastaye tārkṣyamihā huvema

हिन्दी अर्थ

(ते) तेरा (हिरण्ययः) हिरण्यमय (गृहः) घर है, (मिथः) जो कि हम दोनों के निवास के लिये है (धृतव्रतः, राजा) व्रतधारी वहु वरुण राजा (ततः) उस गृह से (सर्वा धामानि) सन धामोंमे आश्चित पाशं को (मजञ्चतु) १२८ श्रथवेवेद-भाष्य का० ७। श्नु ८। सू० ८ १०।२।३६-३३) । मिथः = जौवात्मा ्रौर वरूण का सहवास का स्थान 1 जन्मानि” (निरुक्त ।२८) । पाणो के स्थान तीन है, (१) उत्तमपाश का कर देना । कई पाण्डुलिपियों मे “वामानि” के स्थान में "दामानि" पाठहै।

English

The heavenly Waters have I ranged: we have been sated with their dew. Here, Agni, bearing milk, am I. Endow me with the gift of strength. Endow me with the gift of strength, with children, and a length- ened life.

अध्याय ७

श्लोक 86.1

त्राता इन्द्रः।१ अथर्वा (स्वस्त्ययनकामः)।इन्द्रः।त्रिष्टुप्।त्रा॒तार॒मिन्द्र॑मवि॒तार॒मिन्द्रं॒ हवे॑हवे सु॒हवं॒ शूर॒मिन्द्र॑म्।हु॒वे नु श॒क्रं पु॑रुहू॒तमिन्द्रं॑ स्व॒स्ति न॒ इन्द्रो॑ म॒घवा॑न् कृणोतु

trātā indraḥ| 1 atharvā (svastyayanakāmaḥ)| indraḥ| triṣṭup| trātāramindramavitāramindraṃ havehave suhavaṃ śūramindram| huve nu śakraṃ puruhūtamindraṃ svasti na indro maghavān kṛṇotu

हिन्दी अर्थ

दाम = रस्सी, पाश । वह् पाठ उत्तम है (वरुण, राजन्) हि वरणीय राजा ! . (इतः) इस (धाम्नः, घाम्नः+। (वरुण इति) है वरगीय परमेए्वर ! इस प्रकार (ऊचिम) हमने तुभे पुकारा है, (ततः) उस कारण (वरुण) है वरणीय परमेश्वर ! (नः) हमारे पाशो परमेश्वर तो पाशो के मोचन काब्रतधारण किये हज है, परन्तु

English

May the Gods mark this prayer of mine, may Indra with the Rishis mark. Ye Waters, wash away this stain and whatsoever taint be here,

अध्याय ७

श्लोक 87.1

व्यापको देवः।१ अथर्वा।रुद्रः।जगती।यो अ॒ग्नौ रु॒द्रो यो अ॒प्स्व॑१न्तर्य ओष॑धीर्वी॒रुध॑ आवि॒वेश॑ ।य इ॒मा विश्वा॒ भुव॑नानि चाक्लृ॒प तस्मै॑ रु॒द्राय॒ नमो॑ अस्त्व॒ग्नये

vyāpako devaḥ| 1 atharvā| rudraḥ| jagatī| yo agnau rudro yo apsva1ntarya oṣadhīrvīrudha āviveśa | ya imā viśvā bhuvanāni cāklṛpa tasmai rudrāya namo astvagnaye

हिन्दी अर्थ

पुकार कर कहते है कि हमारे पाशो को खोल दे। मन्त मेंदो “इति""द्रा भी पाठ दहै । जिसका अथै प्रत्येफ़दामसे, रस्सीसे, पाशसे। : का० ७। श्रनु० ८4 सु० ८७ अथरववंवेद-भाष्य १२६ (ग्रदितये) अविनाश के लिये (स्याम) हो जाय । अविनाश पापजन्य शीघ्र नाश का प्रभाव, १०० वर्षोकौञआयुसे पुवंन मरना । वरुण का व्रत है पाशो का विमोचन । इत निमित्त व्यक्ति पपोंसे

English

Each sinful wrong that I have done and every harmless curse of mine. Thou art the wood, may I succeed! fuel, may I be glorified! splendour, give splendour unto me.

अध्याय ७

श्लोक 88.1

सर्पविषनाशनम्।१ गरुत्मान्।तक्षकः।त्र्यवसाना बृहती।अपे॒ह्यरि॑र॒स्यरि॒र्वा अ॑सि।वि॒षे वि॒षम॑पृक्था वि॒षमिद् वा अ॑पृक्थाः ।अहि॑मे॒वाभ्यपे॑हि॒ तं ज॑हि

sarpaviṣanāśanam| 1 garutmān| takṣakaḥ| tryavasānā bṛhatī| apehyarirasyarirvā asi| viṣe viṣamapṛkthā viṣamid vā apṛkthāḥ | ahimevābhyapehi taṃ jahi

हिन्दी अर्थ

पाश तीन है" उत्तम, मध्यम ओर अधम । सम्भवतः (१ ) त्रिविध दुःख आध्यात्मिक, भ्राधिदेविक तथा अःपिभौतिक । (२) त्रिविध भोग, मानसिक सब पाशो को (प्रमञ्च) छा दे, (ये) जो कि (उत्तमाः अधमाः ) उत्तम ओर अघम (ये वारुणाः) श्रौर जो वरणीय आप परमेश्वर द्वारा कर्मा- लोकम्) सुकमियो के लोक' में गच्छेम) हम जणएुं। निःष्व =निः, षू प्रेरणे १. सुकर्भियों के समाज में जाने के योग्य हम हयो सके । भ्रथवा “नाकलोक" मे जाने ॐ भ्रविकारी हो सकं (यज्ु° ३११६) ।

English

A charm against a rival in love Tear thou asunder, as of old, like tangles of a creeping plant. Demolish thou the Dāsa’s might.

अध्याय ७

श्लोक 89.1

दिव्या आपः।१-४ सिन्धुद्वीपः।अग्निः।अनुष्टुप्, ४ त्रिपदा निचृत् परोष्णिक्।अ॒पो दि॒व्या अ॑चायिषं॒ रसे॑न॒ सम॑पृक्ष्महि ।पय॑स्वानग्न॒ आग॑मं॒ तं मा॒ सं सृ॑ज॒ वर्च॑सा

divyā āpaḥ| 1-4 sindhudvīpaḥ| agniḥ| anuṣṭup, 4 tripadā nicṛt paroṣṇik| apo divyā acāyiṣaṃ rasena samapṛkṣmahi | payasvānagna āgamaṃ taṃ mā saṃ sṛja varcasā

हिन्दी अर्थ

१३० अथवववेद-भाष्य का० ७1 अनुप सू०ष्ठ मर्त्याः मनुष्यनाम (निधं २।३)। जातवेदा; = जातानां वेदिता (सायण)। ते त्राण करनेकी भावना को, शासक वे मे परिपुष्ट करने वाले ! भृत् अपानुदो जन॑ममिन्नायन्तमुं देवेभ्यां अकृणोरु लकम् ॥२॥ (उरुम्, लोकम्) विस्तृत लोक ( अकृणोः उ) कर ।

English

May we with Indra’s help divide the gathered treasure of the foe. I, by the law of Varuna, bring down thy pride and wantonness. Ut virga abeat et feminis innocua fiat, (virga) membri humidi, membri quod verberat

अध्याय ७

श्लोक 89.2

सं मा॑ग्ने॒ वर्च॑सा सृज॒ सं प्र॒जया॒ समायु॑षा ।वि॒द्युर्मे॑ अ॒स्य दे॒वा इन्द्रो॑ विद्यात् सह ऋषि॑भिः

saṃ māgne varcasā sṛja saṃ prajayā samāyuṣā | vidyurme asya devā indro vidyāt saha ṛṣibhiḥ

हिन्दी अर्थ

। का० ७ । श्रनु० ८। सू० ८६ अथववेद-भाष्य १३१ लिये 1 चर्षणयः मनुष्यनाम (निघं० २।३) । (मृगः न) सिह के सदृश (भीमः) भयद्भुर्, (कुचरः) पृथिवी पर विचरने वाला, (गिरिष्ठाः) तथा पवतो पर जाकर स्थित होने वाला सम्राट् पर (वितादि) प्रहार कर, श्रौर (मृधः) संग्रामकारियों को (विनुदस्व) साम्राज्य से परे धकेल ।

English

penetratque, id quod tentum est laxa, id quod sursum tentum est deorsum tende. A Prayer for protection May Indra with his help, Lord of all treasures, be unto us a careful protector.

अध्याय ७

श्लोक 89.3

इ॒दमा॑पः॒ प्र व॑हताव॒द्यं च॒ मलं॑ च॒ यत्।यच्चा॑भिदु॒द्रोहानृ॑तं॒ यच्च॑ शे॒पे अ॒भीरु॑णम्

idamāpaḥ pra vahatāvadyaṃ ca malaṃ ca yat| yaccābhidudrohānṛtaṃ yacca śepe abhīruṇam

हिन्दी अर्थ

पविः वज्रनाम. (निघं० २।२० । ताहि वधकर्मां (निषं° २।१९) । तड आघाते (चुरादिः) । अभिप्राय यह करि सम्राट् पद. के लिये योग्य व्यित, चाह कहीं भी रहता हो, उसे स्वीकृत करना चाहिए 1 स्यमृषु वाजिनं देवभूतं सहोवानं तर्ूतारं रथानाम् । (आहुवेम ) आदर पूर्व॑क हम आमन्त्रित करते हैँ ! वाजिनम्, वाजः बलनाम (निघं २।६) । देवजूतम् =देवभ्रीतं वा १३२ ध्रथवेवेद-भाष्य का० ७1 अनु० ८। सू० ६२

English

Drive off our foes and give us peace and safety. May we be lords of goodly store of heroes. A Prayer for protection May this rich Indra as our good protector keep even far away the men who hate us.

अध्याय ७

श्लोक 89.4

एधो॑ऽस्येधिषी॒य स॒मिद॑सि॒ समे॑धिषीय ।तेजो॑ऽसि॒ तेजो॒ मयि॑ धेहि

edho'syedhiṣīya samidasi samedhiṣīya | tejo'si tejo mayi dhehi

हिन्दी अर्थ

भीतर, (यः) जो (वीरुधः) विविध रूप में प्रादुर्भूत हमा (ओषधीः) ओषधियों में (आविवेश) प्रविष्ट है। (यः) जिसने (दमा=-दइमानि विष्वा = विश्वानि इन सब (भुवनानि) भुवनो को (चाक्लुपे) रचा है, (तस्मै रुद्रः रोदयतीति शद्रः । जो कि कर्मानुसार प्राणियों को सलाता है । का० ७॥ अनु० ८) सू० ६३ श्रथवेवेद-भाष्य हे गरुड ! (भपेदहि) तू जा, (अरिः प्रसि) सप का शत्रुतूहै, (अरिः वै असि) निश्चयसेतूशत्रुहै। (विषे) सपिके विषमे (विषम्) अपना विष (अपुक्थाः) तूने मिला दिया है, (विषम्, इत्, वे अदृक्थाः) निश्चय से अपना विषतू नेमिला दिया है। (श्रहिम्, एव) सपिकोही

English

May we enjoy his favour, his the holy: may we enjoy his blessed loving-kindness. A prayer for success in battle With Indra’s and with Manyu’s aid may we subdue our enemies, resistlessly destroying foes.

अध्याय ७

श्लोक 90.1

शत्रुबलनाशनम्।१-३ अङ्गिराः।मन्त्रोक्ताः।१ गायत्री, २ विराट् पुरस्ताद् बृहती, अपि॑ वृश्च पुराण॒वद् व्र॒तते॑रिव गुष्पि॒तम्।ओजो॑ दा॒स्यस्य॑ दम्भय

śatrubalanāśanam| 1-3 aṅgirāḥ| mantroktāḥ| 1 gāyatrī, 2 virāṭ purastād bṛhatī, api vṛśca purāṇavad vratateriva guṣpitam| ojo dāsyasya dambhaya

हिन्दी अर्थ

के विषमे भिलादेताहै, चोंचद्वारासांप को क्षत-विक्षत कर देना यह गरुडका विष है । इसके पश्चात् सांप मर जाता है । ७।५।१६) “गरणवान् का अथं है निगीणे करने वाला, (गृ निगरणे, तुदादिः) । परमेश्वर पाप-ग्रहि को निगलता है, मानो नष्ट करता है, ग्रत पाप-अहिकाअरिरहै, शत्र है वहु पाप-अहि के विष श्र्थात् दुरित को, विष कर अन्त में पाप-अहि को मार डालता है, पृथक् कर देता है । विषम् उदक- (दिव्याः) दिव्य (आपः) “आपः” नामक परमेश्वर की (अचायिषम्) मने पजा की है, (रसेन) आनन्दरस से (समपृक्ष्महि) हम सब पूजा करने वाले को (वचसा) तेज के सथ (संसुज) संयुक्त कर ।

English

A charm to ensure the obedience of subjects We laid the constant Soma on with constant sacrificial gift, That Indra may make all the tribes unanimous and only ours.

अध्याय ७

श्लोक 90.2

व॒यं तद॑स्य॒ सम्भृ॑तं॒ वस्विन्द्रे॑ण॒ वि भ॑जामहै ।म्ला॒पया॑मि भ्र॒जः शि॒भ्रं वरु॑णस्य व्र॒तेन॑ ते

vayaṃ tadasya sambhṛtaṃ vasvindreṇa vi bhajāmahai | mlāpayāmi bhrajaḥ śibhraṃ varuṇasya vratena te

हिन्दी अर्थ

आपः तथा अग्नि-परमेष्वर के नाम हँ (यजु° ३२।२) । प्रचायिषम् == चायु पूजानिशामनयोः (भ्वादिः) । पजा वस्तुतः चेतन कौ होती है, जड १३४ अथर्वैवेद-भाष्य का० ७। अनु० ८। सू० ६३ (श्रमे) है श्रम्नि” नामक परमेश्वर ! (मा) मुभे (वचसा) तेज के मे) इष मुभ की स्थिति को (देवाः) राष्ट के विद्वान् (विदयः) जानें, तथा

English

An incantation against an undetected thief To heaven, as ‘twere, have soared this man’s two vultures, staggering, dusky hued.

अध्याय ७

श्लोक 90.3

यथा॒ शेपो॑ अ॒पाया॑तै स्त्री॒षु चास॒दना॑वयाः ।अ॒व॒स्थस्य॑ क्न॒दीव॑तः शाङ्-कु॒रस्य॑ नितो॒दिनः॑ ।यदात॑त॒मव॒ तत् त॑नु॒ यदुत्त॑तं॒ नि तत् त॑नु

yathā śepo apāyātai strīṣu cāsadanāvayāḥ | avasthasya knadīvataḥ śāṅ-kurasya nitodinaḥ | yadātatamava tat tanu yaduttataṃ ni tat tanu

हिन्दी अर्थ

के होने चाहिए, धन लोलुप तथा पद लोलुप नहीं । (आपः) है जलो ! (इदम्) इसे (प्रवहत) प्रवाहित कर दो (यत् च) मानसिक तमोगुणरूपी मल है, (यत् च) ओर जो (ग्रभिदुदरोह्) मरक मे द्रोह- “प्रवाहित” करने द्वारा नदी के प्रवाह का वणेन अभिप्रेतहै । नदीके प्रौर शापके हेतुमूत क्रोध, द्वेषभावना का उपचार करने का विधान

English

The Parcher and the Drier-up, the pair who parch and dry his heart. I verily have stirred them up like oxen resting after toil. Like two loud-snarling curs, or like two wolves who watch to make their spring:

अध्याय ७

श्लोक 91.1

सुत्रामा इन्द्रः।१ अथर्वा।चन्द्रमाः (इन्द्रः)।त्रिष्टुप्।इन्द्रः॑ सु॒त्रामा॒ स्ववाँ॒ अवो॑भिः सुमृडी॒को भ॑वतु वि॒श्ववे॑दाः ।बाध॑तां॒ द्वेषो॒ अभ॑यं नः कृणोतु सु॒वीर्य॑स्य॒ पत॑यः स्याम

sutrāmā indraḥ| 1 atharvā| candramāḥ (indraḥ)| triṣṭup| indraḥ sutrāmā svavā~ avobhiḥ sumṛḍīko bhavatu viśvavedāḥ | bādhatāṃ dveṣo abhayaṃ naḥ kṛṇotu suvīryasya patayaḥ syāma

हिन्दी अर्थ

तो सवेशक्तिमान् की कृपा से सब बुराइयों का नश होना सवथा सम्भव का० ७। अनु० ८ सु° € ॒भ्रथर्ववेद-भाष्य मयि धेहि) तेज मुभ मे स्थापित कर) , (इव) जंसे (व्रततेः) लता के (गुष्पितम्) शुच्छेकोकाटाजाताहै उस

English

Like two that thrust, like two that pierce, like two that strike with mutual blows. I bind the conduit of the man or dame who hence hath taken aught. An incantation against an undetected thief

अध्याय ७

श्लोक 92.1

सुत्रामा इन्द्रः।१ अथर्वा।चन्द्रमाः (इन्द्रः)।त्रिष्टुप्।स सु॒त्रामा॒ स्ववाँ॒ इन्द्रो॑ अ॒स्मदा॒राच्चि॒द् द्वेषः॑ सनु॒तर्यु॑योतु ।तस्य॑ व॒यं सु॑म॒तौ य॒ज्ञिय॒स्यापि॑ भ॒द्रे सौ॑मन॒से स्या॑म

sutrāmā indraḥ| 1 atharvā| candramāḥ (indraḥ)| triṣṭup| sa sutrāmā svavā~ indro asmadārāccid dveṣaḥ sanutaryuyotu | tasya vayaṃ sumatau yajñiyasyāpi bhadre saumanase syāma

हिन्दी अर्थ

का भी वणेन हृजा है (७।६६।३) । जम्भय; जम्भयतिववेघकर्मा इति यास्कः; तथा (निघं० २।१९; सायण) वेदानुसार व्यभिचारी को एसा दण्ड, पुराण- विधि है । भोजः मलं प्रजननसमर्थं वीयं वा जम्भय विनाशय (सायण) । नियमानुसार (म्लापयामि) हषदयकारी कर देता हूं 1 १३६ प्रथवेवेद-भाष्य का० ७। अनु० ८ सु० €. का० ७ 1 अनु० € । सू० ६७ अथरवैद-भाष्य १३७ व ५५ त । वान् हौ । (दवेषः बाधताम्) हमारे द्ेषियों का हनन करे, भौर (नः) हम हिसा में स्थित, (क्नदीवतः = करदीवतः) कन्दन करने वाले, (शाड कुरस्य ¦ णड कु की तरह पीडित करने वाले, (नितोदिनः) नितरां मानसिक व्यथाप्रद

English

The kine are resting in the stall, home to her nest hath flown the bird, The hills are firmly rooted: I have fixed the kidneys in their place. Sacrificial formulas

अध्याय ७

श्लोक 93.1

शत्रुनाशनम्।१ भृग्वङ्गिराः।इन्द्रः।गायत्री।इन्द्रे॑ण म॒न्युना॑ व॒यम॒भि ष्या॑म पृतन्य॒तः ।घ्नन्तो॑ वृ॒त्राण्य॑प्र॒ति

śatrunāśanam| 1 bhṛgvaṅgirāḥ| indraḥ| gāyatrī| indreṇa manyunā vayamabhi ṣyāma pṛtanyataḥ | ghnanto vṛtrāṇyaprati

हिन्दी अर्थ

(भवतनु) है राजन् ! तु संकुचित कर, (यत्) ओर जो (उत्तमम्") समू- ; न्तत बल है (तत्) उसे (नि तनु) नीचा कर दे। । कर्मो के कारण रोने वाले (क्रदि रोदने च, भ्वादिः) 1 सप्तम काण्ड का आठवां अनुवाक समाप्त । सुमति मे, (अपि) तथा उसकी (सौमनसे) मानसिक प्रसन्नता में (वयं

English

As we have here elected thee, skilled Hotar! to-day as this our sacrifice proceedeth, Come to the firm place, mightiest! yea, come firmly. Knowing the sacrifice, approach the Soma.

अध्याय ७

श्लोक 94.1

सांमनस्यम्।१ अथर्वा।सोमः।अनुष्टुप्।ध्रु॒वं ध्रु॒वेण॑ ह॒विषाव॒ सोमं॑ नयामसि ।यथा॑ न॒ इन्द्रः॒ केव॑ली॒र्विशः॒ संम॑नस॒स्कर॑त्

sāṃmanasyam| 1 atharvā| somaḥ| anuṣṭup| dhruvaṃ dhruveṇa haviṣāva somaṃ nayāmasi | yathā na indraḥ kevalīrviśaḥ saṃmanasaskarat

हिन्दी अर्थ

निर्वाचित होता है। त्रियते इति वरणः । - । ं । का० ७। म्रनु । मू० € अथववरेद-भाष्य १३९ कर्, (वृत्राणि) राष्टरका ञावरण कैरने वाले, घेरा डालने वाले शएतरप्रों का (सोमम्) परकीय-सेनानायक का (अवेनयामपि) हम अवपात करते गत्रुरहित या पारस्परिक सेवा वासी, (संमनसः) श्रौर एकं मन वाली

English

With kine connect us, and with spirit, Indra! Lord of Bay Steeds, with princes and with favour, With the God-destined portion of the Brāhmans, and the good-will of Gods who merit

अध्याय ७

श्लोक 95.1

शत्रुनाशनम्।१-३ कपिञ्जलः।गृध्रौ।अनुष्टुप्, २-३ भुरिक्।उद॑स्य श्या॒वौ वि॑थु॒रौ गृध्रौ॒ द्यामि॑व पेततुः ।उ॒च्छो॒च॒न॒प्र॒शो॒च॒नाव॒स्योच्छोच॑नौ हृ॒दः

śatrunāśanam| 1-3 kapiñjalaḥ| gṛdhrau| anuṣṭup, 2-3 bhurik| udasya śyāvau vithurau gṛdhrau dyāmiva petatuḥ | ucchocanapraśocanāvasyocchocanau hṛdaḥ

हिन्दी अर्थ

हूविरूप हैँ । परकीय सेना का सेनाध्यक्ष जव ध्रु होकर युद्ध लड़ रहा हो. चाहिए, ताक्रि परकीय सेनानायक का अधोनयने करिया जा सकं । श्रथवेवेद-भाष्य॒को० ७ श्रनु०. 1 सू० ६४ (इव) जैसे (गृध्रौ) दो गीष (याम्) चयुलोक की ग्रोर (उत् पेततुः)

English

worship. The willing Gods whom, God, thou hast brought hither, send thou to their own dwelling place, O Agni. When ye have eaten and have drunk sweet juices, endow this man with precious wealth, ye

अध्याय ७

श्लोक 95.2

अ॒हमे॑ना॒वुद॑तिष्ठिपं॑ गावौ॑ श्रान्त॒सदा॑विव ।कु॒र्कु॒रावि॑व॒ कूज॑न्तावु॒दव॑न्तौ॒ वृका॑विव

ahamenāvudatiṣṭhipaṃ gāvau śrāntasadāviva | kurkurāviva kūjantāvudavantau vṛkāviva

हिन्दी अर्थ

उड़ द, वैसे (अस्य) इस पुमान् मनर ३ के (ष्यावौ) श्याववणे वाले, ओर, (हूदः) हदय से उडर्हैः जोकि (ग्रस्य) इस पुमान् के हृदको (उत् शोचनौ प्रशोचनौ) शोकित तया संतापिति कर देतेर्है, तयाजो लोभ-मोह (उच्छेचनौ) स्वभावतः शोर्पत तथा संतापित करने वालेर्हू। गोव वृक्षसे चूलोक की ओर उडतादहै। इसी प्रकार लोभ-माह् हदयस उठ कर सिरकी भ्रोर उडत, सिर के मस्तिष्क को विकृत करदेतेहैं। द्यौः द्वारासिरको सूचित किया है । यथा “शीर्ष्ण यौः समवतेत"' (यजु° इर! लोभ-मोह को भिधित वणं वाले सूचित क्रिया है । लोभ-मौह् तमोगुण ग्रौर रजोगण के भिश्रण के परिणाम होतेह । भाव कोस्पष्टकरनेकेलिये

English

Vasus. Gods, we have made your seats of easy access, who, pleased with me, have come to my libation.

अध्याय ७

श्लोक 95.3

आ॒तो॒दिनौ॑ नितो॒दिना॒वथो॑ संतो॒दिना॑वु॒त।अपि॑ नह्याम्यस्य॒ मेढ्रं॒ य इ॒तः स्त्री पुमा॑न् ज॒भार॑

ātodinau nitodināvatho saṃtodināvuta| api nahyāmyasya meḍhraṃ ya itaḥ strī pumān jabhāra

हिन्दी अर्थ

कुराविवु रूजन्तःवुदरधन्तौ वरकरंविव ॥२॥ (अहम्) मैन (एनौ) इन दोनों “लोभ. मोह" को (उदपिष्ठिपिम्) इस के हदय श्रौर मस्तिष्कसे उठादियादहै बहिष्कृत कर दिया है, (इव) जंसे कि (श्रान्तसदौ) थककर बरेठी (गवौ) दो गोभों को, (इव) जेसे (कजन्तौ) घुरघुराते (कुकूरौ, दो कुत्तो को, तथा (इव) जसे (उदवन्तौ) छाती में फफडो -में वायु तथा हृदय मेँ रक्तरूपी जल होता है । भ्रन्तरिक्षमेभी वायु ग्रौर मेघरूपी जल दीताहै। दम हदयरूपी अन्तरिक्ष से लोभ-मोहरूपी दो पक्षी, सिरया मस्तिष्करूपी यौःकीः -इतेहँ। वेदिक साहित्यानुधार सिर है दयौः, . पेट है श्रन्नाधारा पृथिवी । मुख में लाररूपी उदक वाले (वृकौ) दो भेड्यों को जबरदस्ती उठादिया

English

Bearing and bringing hitherward your treasures, after the rich warm beverage mount to heaven. Go to the sacrifiee, go to its master, Sacrifice! To thy birth- place go with Svāhā.

अध्याय ७

श्लोक 96.1

शत्रुनाशनम्।१ कपिञ्जलः।वयः।अनुष्टुप्।अस॑द॒न् गावः॒ सद॒नेऽप॑प्तद् वस॒तिं वयः॑ ।आ॒स्थाने॒ पर्व॑ता अस्थुः॒ स्थाम्नि॑ वृ॒क्काव॑तिष्ठिपम्

śatrunāśanam| 1 kapiñjalaḥ| vayaḥ| anuṣṭup| asadan gāvaḥ sadane'paptad vasatiṃ vayaḥ | āsthāne parvatā asthuḥ sthāmni vṛkkāvatiṣṭhipam

हिन्दी अर्थ

१४० अथरवेवेद-भाष्य का० ७। अनु० € । सूक्त १०० मनोभावना हारा लोभ-मोह् को हूदय ओर मस्तिष्क से बहिष्कृत कर देता है, उठा देता है । तीन दृष्टन्तं द्वारा लोभ-मोह के तारतम्य को सूचित कियाजातादहै। तथा वृकं के लोभ-लालच को “उदवन्तौ"” द्वारा मन्त्र मेँ. सुचित क्रिया है, जिस के मुख से खाने के लिये लार बहती रहती है। दिनी) नितराम् व्यथा दाई हैँ । (उत) .ओौर (संतोदिनौ) ये दोनों मिल

English

This is thy sacrifice with hole hymnal, Lord of the Rite, Svāhā! and fraught with vigour. Vashat to paid and yet unpaid oblations! Ye Gods who know the way, find and pursue it! Lord of the Mind, lay this our sacrifice in heaven among the

अध्याय ७

श्लोक 97.1

यज्ञः १-५ अथर्वा।इन्द्राग्नी।त्रिष्टुप्, ५ त्रिपदार्षी भुरिग्गायत्री, ६ त्रिपदा प्राजापत्या बृहती, ७ त्रिपदा साम्नी भुरिग्जगती, ८ उपरिष्टाद्बृहती।यद॒द्य त्वा॑ प्रय॒ति य॒ज्ञे अ॒स्मिन् होत॑श्चिकित्व॒न्नवृ॑णीमही॒ह।ध्रु॒वम॑यो ध्रु॒वमु॒ता श॑विष्ठ प्रवि॒द्वान् य॒ज्ञमुप॑ याहि॒ सोम॑म्

yajñaḥ 1-5 atharvā| indrāgnī|triṣṭup, 5 tripadārṣī bhuriggāyatrī, 6 tripadā prājāpatyā bṛhatī, 7 tripadā sāmnī bhurigjagatī, 8 upariṣṭādbṛhatī| yadadya tvā prayati yajñe asmin hotaścikitvannavṛṇīmahīha| dhruvamayo dhruvamutā śaviṣṭha pravidvān yajñamupa yāhi somam

हिन्दी अर्थ

(गावः) गौएं (सदने) गोशाला में (ग्रसदन्) बैठ गई ह, (वयः) पक्षी का०७। अनु । सू० १०१ श्रथवेवेद-भाष्य १४१ सायंकाल मे गौग्रों भौर पक्षियों का निजस्थानों में स्थित हो जाने, ओर निज स्थानों में करदेनेका निदेश हुश्रा है ।

English

Gods. Svāhā in heaven! Svāhā on earth! Svāhā in air! In wind have I paid offerings. Hail! Anointing the sacred grass

अध्याय ७

श्लोक 97.2

समि॑न्द्र नो॒ मन॑सा नेष॒ गोभिः॒ सं सू॒रिभि॑र्हरिव॒न्त्सं स्व॒स्त्या।सं ब्रह्म॑णा दे॒वहि॑तं॒ यदस्ति॒ सं दे॒वानां॑ सुम॒तौ य॒ज्ञिया॑नाम्

samindra no manasā neṣa gobhiḥ saṃ sūribhirharivantsaṃ svastyā| saṃ brahmaṇā devahitaṃ yadasti saṃ devānāṃ sumatau yajñiyānām

हिन्दी अर्थ

(त्वा) तुभे (अवृणीमहि) हप ने वरण क्रिया है, चुना है, तो (शविष्ठ)हे सोमयज्ञ को लक्षय कर (उप) हमारे समीप (याहि) प्राप्त हो । सं बरह्मणा देवहितं यदस्ति . देवान सुमतो य्खियानाम् ॥२॥ १५२ प्रथववेद-भाष्य का० ७। अनु० । सू०.१०१ । फा० ७। अनु० ९। सू० १०१ अथव॑वेद-भाष्य ॥ (मनसा) ज्ञान तथा अवबोधन, ओर (गोभिः) गौश्नो के साथ (संनेष)

English

Balmed is the Grass with butter and libation, with Indra. gracious Lord, and with the Maruts. Hail! let the sacrifice go forth anointed to Indra with the Gods and Visve Devas. The preparation of the altar

अध्याय ७

श्लोक 97.3

यानाव॑ह उश॒तो दे॑व दे॒वांस्तान् प्रेर॑य॒ स्वे अ॑ग्ने स॒धस्थे॑ ।ज॒क्षि॒वांसः॑ पपि॒वांसो॒ मधू॑न्य॒स्मै ध॑त्त वसवो॒ वसू॑नि

yānāvaha uśato deva devāṃstān preraya sve agne sadhasthe | jakṣivāṃsaḥ papivāṃso madhūnyasmai dhatta vasavo vasūni

हिन्दी अर्थ

कोटि के गुरुओ की नहीं । ये "वसु", विया, सदाचार, सक्कर्मो भौर योगा- त. वहमाना भरमाणा स्वा व्ुनि व्यु घमं दिवमा रोहुतावु ॥८॥ प्रित कर । (वसवः) ह वसुकरोटि के गृरुग्रों । (मधूनि) मधुर (जक्षिवांसः, ॥ धन (अस्मे) इस आश्रम कं लिये (धत्त) प्रदान करो आ अवह: --लड, लकार, वह प्रापणे (भ्वादिः ) । उषतः जिन्होने । सवेच्छपूवंक सेवा करना स्वीकार फिय। है, न्ह । वसवः =आश्रमकी

English

Strew thou the Grass, and spread it on the Altar: rob not the sister who is lying yonder. The Hotar’s seat is green and golden: these are gold necklets. in the plaee of him who worships.

अध्याय ७

श्लोक 97.4

सु॒गा वो॑ देवाः॒ सद॑ना अकर्म॒ य आ॑ज॒ग्म सव॑ने मा जुषा॒णाः ।वह॑माना॒ भर॑माणाः॒ स्वा वसू॑नि॒ वसुं॑ घ॒र्मं दिव॒मा रो॑ह॒तानु॑

sugā vo devāḥ sadanā akarma ya ājagma savane mā juṣāṇāḥ | vahamānā bharamāṇāḥ svā vasūni vasuṃ gharmaṃ divamā rohatānu

हिन्दी अर्थ

मिककोटिकं वघु-गरओों कौही भावश्यकता होती हैर श्रौरञदित्य १४४ श्रथवंवेद-भाष्य का० ७। श्रनु° € । सु° १०१ हम प्रतिदिन के यज्ञ.मे आहति देते है । परमेश्वरापित करते हुए उसका संचालन करना चाहिए । “यज्ञ'' परमेश्वर । यज्ञ (सहसूक्तवाकः) सूक्तो के कथन कं समेत, (ते) तेरे लिये समर्पित है ।

English

A charm against nightmare I turn away from evil dream, from dream of sin, from indigence.

अध्याय ७

श्लोक 97.5

यज्ञ॑ य॒ज्ञं ग॑च्छ य॒ज्ञप॑तिं गच्छ ।स्वां योनिं॑ गच्छ॒ स्वाहा॑

yajña yajñaṃ gaccha yajñapatiṃ gaccha | svāṃ yoniṃ gaccha svāhā

हिन्दी अर्थ

(सुवीयः) जिस मं कि वीयं का उत्तम पालन किया जाता है, (स्वाहा) यह् चारी वेदिक सूक्तो का उच्चारण करते हुए वेदों क अध्ययन करते ह । वषैददुतेभ्यो वष उहुतेभ्यः देवां गातुविदो गातुं वित्वा गातुर्पित ॥७ निज गन्तव्यस्थानों के जानने वाले (देवाः) है उभयविध दिव्यजनो । स्थान पर (इत) चले जभ्र विश्राम के लिये ।

English

I make the prayer mine inmost friend. Hence! torturing. dreamy phantasies! The same The food that in a dream I eat is not perceived at early morn.

अध्याय ७

श्लोक 97.6

ए॒ष ते॑ य॒ज्ञो य॑ज्ञपते स॒हसू॑क्तवाकः ।सु॒वीर्यः॒ स्वाहा॑

eṣa te yajño yajñapate sahasūktavākaḥ | suvīryaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

किया है, भौर नियुक्ति में जिनका सत्कार भोज्यो भौर पेयो द्वाराहो चुका, का० ७1 भ्रनु° । सू० १०२ अथवेवेद-भाष्य १४५ नहीं हुआ, ये अहुत देव ह, गौर नियुक्तवसु हुतदेव हँ । इन सब कं सहमोज कं लिये पृथक्-पृथक् स्थान निश्चित किये हए है, जिन कि “गातु कषा हारा पूराकरनाहै। यह् विधि कालान्तर मँ कौ जायेगी, उससे पूवं देवों मन॑सस्पत इष नो दिवि देवेषु यङ्गम्।

English

May all that food be blest to me because it is not seen by day. A charm to obtain pardon for an indecent act When I have worshipped Heaven and Earth, reverenced Firma- ment and Death,

अध्याय ७

श्लोक 97.7

वष॑ड् ढु॒तेभ्यो॒ वष॒डहु॑तेभ्यः ।देवा॑ गातुविदो गा॒तुं वि॒त्त्वा गा॒तुमि॑त

vaṣaḍ ḍhutebhyo vaṣaḍahutebhyaḥ | devā gātuvido gātuṃ vittvā gātumita

हिन्दी अर्थ

यज्ञ को (नः) हमारे (देवेषु) वसु नामक गृरुदेवों ओर ब्रह्मचारियो मे देवो श्रादिमें इस यज्ञ की स्थापनाकरदीहै। "१४६ -अथर्ववेद-भाष्य का०७। अनु० । सू० १०३ (स्वाहा) तदथं स्वाहाधूर्वक हवि का व्याग हो ।

English

I will make water standing up. Let not the Sovrans injure me. The cry of an unemployed priest What princely warrior, seeking higher fortune, will free us from this shameful fiend of

अध्याय ७

श्लोक 97.8

मन॑सस्पत इ॒मं नो॑ दि॒वि दे॒वेषु॑ य॒ज्ञम्।स्वाहा॑ दि॒वि स्वाहा॑ पृथि॒व्यां स्वाहा॒न्तरि॑क्षे॒ स्वाहा॒ वाते॑ धां॒ स्वाहा॑

manasaspata imaṃ no divi deveṣu yajñam| svāhā divi svāhā pṛthivyāṃ svāhāntarikṣe svāhā vāte dhāṃ svāhā

हिन्दी अर्थ

देवेभिः एते वे रश्मयो विश्वे देवाः (श० ब्रा० १२।४।४।६) । है । साथ ही वर्षकालीन यज्ञ का कथन कर उसे परमेषवरापित किया रै । का० ७ । श्रनु° € । सू० १०५ अथर्ववेद-माष्य १४७ चाहिए 1 निष्काः “निष्कः ०तल 6०7 ग कलिला ए1प्९३ साधन) । जिसे मद्रा ओौर सिक्का कहते है, ओर जिसे राज्य द्वारा निमित किया जाता है । निष्क का प्रथं सुवणं-हार भी होता दह। »

English

mischief? What friend of sacrifice? What guerdon-lover? Who winneth:

अध्याय ७

श्लोक 98.1

हविः।१ अथर्वा।इन्द्रः, विश्वे देवाः।विराट् त्रिष्टुप्।सं ब॒र्हिर॒क्तं ह॒विषा॑ घृ॒तेन॒ समिन्द्रे॑ण॒ वसु॑ना॒ सं म॒रुद्भिः॑ ।सं दे॒वैर्वि॒श्वदे॑वेभिर॒क्तमिन्द्रं॑ गच्छतु ह॒विः स्वाहा॑

haviḥ| 1 atharvā| indraḥ, viśve devāḥ| virāṭ triṣṭup| saṃ barhiraktaṃ haviṣā ghṛtena samindreṇa vasunā saṃ marudbhiḥ | saṃ devairviśvadevebhiraktamindraṃ gacchatu haviḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

मोषीः इस द्वारा सोई हई पत्नो कौ निद्रा के अपहरण करने को स्तेय कहा है “मुष स्तेये" (-क्रयादिः) । निद्रा भौ एक घन है, उस का अपहरण करने वाला मानो धन का ्रयहूरण करतादह, श्रतः चोर है। निष्कः. सिक्का । “नि” के न्" का लोप, शेष बचा, ““इष्क' = इ +स् 1क सिक होतृषदनं हारतं हिरण्ययं निष्का एते यज॑मानस्य टोके ॥१॥ हि (परि धेहि) गौर उसे परिधि दवारा घेर, (अमुया) उस वेवि कं समीप (शयानाम्) शयन की हुई (जामिम्) यजमान-पत्नी को (मा मोषीः ) कष्ट £ ॥

English

‘mid the Gods a long existence? A prayer for prosperity Who will prepare the dappled Cow, good milker, ne’er without calf, whom Varuna gave

अध्याय ७

श्लोक 99.1

वेदी।१ अथर्वा।वेदी।भुरिक् त्रिष्टुप्।परि॑ स्तृणीहि॒ परि॑ धेहि॒ वेदिं॒ मा जा॒मिं मो॑षीरमु॒या शया॑नाम्।हो॒तृ॒षद॑नं हरि॑तं हिर॒ण्ययं॑ नि॒ष्का ए॒ते यज॑मानस्य लो॒के

vedī| 1 atharvā| vedī| bhurik triṣṭup| pari stṛṇīhi pari dhehi vediṃ mā jāmiṃ moṣīramuyā śayānām| hotṛṣadanaṃ haritaṃ hiraṇyayaṃ niṣkā ete yajamānasya loke

हिन्दी अर्थ

(हिरण्ययम्) हिरण्यमय हौ । (यजमनस्य ) यजमान कं (लोके) घरमे नहीं होते । यह अनुभूत ह । (एते निष्काः) ये निष्क पर्याप्त है) देने चाहिए, ओर यज्ञवेदि को परिधियों वारा घेर दना चाहिए, ताकि कोई पशु यज्ञवेदि में प्रवेश न पा सके । यदि किसी व्रत को धारण कर, यजमान् की पत्नी, यज्ञ की पूवेरात्री में वेदि के समीप आकर शयन कर रहीहोतो, उसके शयन मेँ किसी प्रकार भी बाधाया विघ्न न हौना चाहिए । यजमान धनवान् है ग्रतः उसके होता का आसन, उसके सत्कारार्थं, सुवणंमय होना वम वर्म बुरे विचारोंको निवारण क्ररने वाला, उनसे रक्षा करने वाला, कवच ।

English

Atharvan, And, joying in Brihaspati’s alliance, arrange according to his will her body?

अध्याय ७

श्लोक 100.1

दुःष्वप्ननाशनम्।१ यमः।दुःष्वप्ननाशनम्।अनुष्टुप्।प॒र्याव॑र्ते दु॒ष्वप्न्या॑त् पा॒पात् स्वप्न्या॒दभू॑त्याः ।ब्रह्मा॒हमन्त॑रं कृण्वे॒ परा॒ स्वप्न॑मुखाः॒ शुचः॑

duḥṣvapnanāśanam| 1 yamaḥ| duḥṣvapnanāśanam| anuṣṭup| paryāvarte duṣvapnyāt pāpāt svapnyādabhūtyāḥ | brahmāhamantaraṃ kṛṇve parā svapnamukhāḥ śucaḥ

हिन्दी अर्थ

१४८ अथवेवेद-माष्य का० ७ । प्ननु० € सू० १०६ हो (हि) यतः (तत्) वह (दिवा) दिन के स्मय (न दृश्यते) नहीं प्रजापतिः । नाना देवताः! विराट् पुरस्ताद् बृहती । नमः करके, (उध्वं तिष्ठन्) उठ खडा होकर, (मोक्नामि) मै जो चलता हं देनिक कार्योके करनेके लिये तब (ईश्वराः) भूलोक की अधोए्वर शव्तियां (मा) मेरी (मा हिसिषुः) हिसा न करे, मुके किसी प्रकार का

English

An initiation formula Leaving humanity behind, making the heavenly word thy choice, With all thy friends address thyself to furthering and guiding men.

अध्याय ७

श्लोक 101.1

दुःष्वप्ननाशनम्।१ यमः।दुःष्वप्ननाशनम्।अनुष्टुप्।यत् स्वप्ने॒ अन्न॑म॒श्नामि॒ न प्रा॒तर॑धिग॒म्यते॑ ।सर्वं॒ तद॑स्तु मे शि॒वं न॒हि तद् दृ॒ष्यते॒ दिवा॑

duḥṣvapnanāśanam| 1 yamaḥ| duḥṣvapnanāśanam| anuṣṭup| yat svapne annamaśnāmi na prātaradhigamyate | sarvaṃ tadastu me śivaṃ nahi tad dṛṣyate divā

हिन्दी अर्थ

के मन्त्र २५) में परमेश्वर को “मृत्यु कहा है । ० ७। अनु० १० सू° १०७ श्रथवेवेद-माष्य मेक्षामि- यह् पद “मख या मखि गतौ" (भ्वादिः) का रूप प्रतीत होता छटा होकर मूत्र करूगा । इस अर्थं में “मेक्षामि"' पद को ह्िटनी ने १ रचने" का भविष्यत्-क।लिक रूप माना है । वेदानुयायी हिन्दुभो मे खड ्ौकर मूत्र करने की प्रथा नहो । वतमान में पेण्ट-घारी लोगों मे यह प्रथा अंग्रजी प्रथा से ्राईहै। सायण ने निम्नलिखित अथं किया है "तिष्ठन आसोनोऽदम् उध्वं

English

A prayer for pardon of sin Each thoughtless ill that we have done, O Agni, all error in our conduct, Jātavedas!

अध्याय ७

श्लोक 102.1

आत्मनोऽहिंसनम्।१ प्रजापतिः।द्यावापृथिवी, अन्तरिक्षम्, मृत्युः।विराट् पुरस्ताद् बृहती।न॒म॒स्कृत्य॒ द्यावा॑पृथि॒वीभ्या॑म॒न्तरि॑क्षाय मृ॒त्यवे॑ ।मे॒क्षाम्यू॒र्ध्वस्तिष्ठ॒न् मा मा॑ हिंसिषुरीश्व॒राः

ātmano'hiṃsanam| 1 prajāpatiḥ| dyāvāpṛthivī, antarikṣam, mṛtyuḥ| virāṭ purastād bṛhatī| namaskṛtya dyāvāpṛthivībhyāmantarikṣāya mṛtyave | mekṣāmyūrdhvastiṣṭhan mā mā hiṃsiṣurīśvarāḥ

हिन्दी अर्थ

भवामीति शेषः" । सायण ने मेक्षामि के स्थान में मेष्यामि पाठ माना है सप्तम काण्ड का नवम अनुवाक समाप्त को यज्ञकांमः कं उ पू्तिकाप्ः को देवेषु वनुते दीधेमायुं; ॥ ?' करेगा । (कः) कौन (यज्ञकामः) राष्ट्-यज्ञ कौ कामना वालारहै, (कः उ) भौर कोन (पूत्तिकामः) राष्टू-यज्ञ की पूति की कामना वाला है, (कः) कौन (देवेषु) राष्ट के देवों मे (दीषंम्, आयुः) दीधं प्राय (वनुते) चाहता है ।

English

Therefrom do thou, O sapient God, preserve us. May we thy friends, for bliss, have life eternal. A charm against Cough

अध्याय ७

श्लोक 103.1

क्षत्रियः।१ ब्रह्म।आत्मा।त्रिष्टुप्।को अ॒स्या नो॑ द्रु॒होऽव॒द्यव॑त्या॒ उन्ने॑ष्यति क्ष॒त्रियो॒ वस्य॑ इ॒च्छन्।को य॒ज्ञका॑मः॒ क उ॒ पूर्ति॑कामः॒ को दे॒वेषु॑ वनुते दी॒र्घमायुः॑

kṣatriyaḥ| 1 brahma| ātmā| triṣṭup| ko asyā no druho'vadyavatyā unneṣyati kṣatriyo vasya icchan| ko yajñakāmaḥ ka u pūrtikāmaḥ ko deveṣu vanute dīrghamāyuḥ

हिन्दी अर्थ

यदि कोई राष्ट, परकीय राष्टृपति की जिघांसा का शिकार बन जाय, लाभ द्वारा एतिहासिक दृष्टि से सदा जीवित रहना । (वनुते=न्वनु याचने १५० श्रथववेद-भाष्य का० ७ बनु० १० । सू १० ४ (बृहस्पतिना) बृहती वेदवाणी कं पति परमेश्वर फे स।थ (सस्यम्) सखि भाव का (जुषाणः) प्रतिपूर्व सेवन करने वाला, (यथावशम्) गिज कामनानुसार (तन्वः) निज तनुओं को (कल्पयाति) सामर््य॑युक्त करे पा हञा है । मौर हिरण्यय हिरण्यमय आसन या कोश है, हृदय (अथवं० १०।२।३१,३२) । इसे हिरण्ययी पुर् भी कटा है (ग्रथवं० १०।२।३३) !

English

The seven bright beams of Surya bring the waters downward from the sky, The streams of ocean: these have made the sting that pained thee drop away.

अध्याय ७

श्लोक 104.1

गौः।१ ब्रह्म।आत्मा।त्रिष्टुप्।कः पृश्निं धे॒नुं वरु॑णेन द॒त्तामथ॑र्वने सु॒दुघां॒ नित्य॑वत्साम्।बृह॒स्पति॑ना स॒ख्यंऽ जुषा॒णो य॑थाव॒शं त॒न्वः कल्पयाति

gauḥ| 1 brahma| ātmā| triṣṭup| kaḥ pṛśniṃ dhenuṃ varuṇena dattāmatharvane sudughāṃ nityavatsām| bṛhaspatinā sakhyaṃ' juṣāṇo yathāvaśaṃ tanvaḥ kalpayāti

हिन्दी अर्थ

क बृहती वाणी का पति बृहस्पति भी कहा है । वेदवाणी ज्ञान-दुग्ध प्रदानं दवारा वेदवाणोलूपी धेनु को सदा ज्ञान-दुगध प्रदात्री कहा है । यह धेनु धुगमः से दोही जा सकती है उस गोगधाद्वाराजो इस कौ नित्यसेवा करता ¶7° ७ । गरनु° १०। सू° ११० अथवेवेद-माष्य १५१ धनु सुदुघा है । वेद-धेनु नाना वर्णो वाली है, नानाविध पदार्थो का वणन

English

A prayer for protection 121 Whoso by stealth or openly would harm us, a friend who knows us, or a stranger, Agni!

अध्याय ७

श्लोक 105.1

दैव्यं वचः।१ अथर्वा।मन्त्रोक्ताः।अनुष्टुप्।।अ॒प॒क्राम॒न् पौरु॑षेयाद् वृणा॒नो दैव्यं॒ वचः॑ ।प्रणी॑तीर॒भ्याव॑र्तस्व॒ विश्वे॑भिः॒ सखि॑भिः स॒ह

daivyaṃ vacaḥ| 1 atharvā|mantroktāḥ| anuṣṭup|| apakrāman pauruṣeyād vṛṇāno daivyaṃ vacaḥ | praṇītīrabhyāvartasva viśvebhiḥ sakhibhiḥ saha

हिन्दी अर्थ

रतो है, जैसे कि चितकबरी धेनु नाना वर्णो वाली होती है। जो व्यक्ति रादा वेद-धेनु की सेवा करता, भौर वहस्पति के साय सखिभाव्रमें रहता है ६।येतनु है, स्थूल, सृष्ष्म तथा कारण शरीर । “यथावशं तन्वः कल्पयाति" का यह भी श्रभिप्रायहो सकता हैकि गी के यदि कोई ्रवणशिष्ट कमं हैँ जिन कि देहान्तरं मे भोगा जा सकता

English

May the strange she-fiend armed with teeth attack them: O Agni, theirs be neither home nor children!

अध्याय ७

श्लोक 106.1

अमृतत्वम्।१ अथर्वा।जातवेदा वरुणश्च।बृहतीगर्भा त्रिष्टुप्।यदस्मृ॑ति चकृ॒म किं चि॑दग्न उपारि॒म चर॑णे जातवेदः ।ततः॑ पाहि॒ त्वं नः॑ प्रचेतः शु॒भे सखि॑भ्यो अमृत॒त्वम॑स्तु नः

amṛtatvam| 1 atharvā| jātavedā varuṇaśca| bṛhatīgarbhā triṣṭup| yadasmṛti cakṛma kiṃ cidagna upārima caraṇe jātavedaḥ | tataḥ pāhi tvaṃ naḥ pracetaḥ śubhe sakhibhyo amṛtatvamastu naḥ

हिन्दी अर्थ

अपक्रामन पोरूषेयाद् हृणानो हैव्यं वच॑ः । वरण करता हुआ, (विश्वेभिः सखिभिः र तव ब्रह्मचारी सखाओं के साथ प्रविष्ट- ब्रह्मचारी के उपनयन काल में उसे उपदेश दिया है, (कौशिक यदस्ति चकम किचंदग्न उपारिम चरणे जातवेदः

English

Whoso oppresseth us O Jātavedas, asleep or waking, standing still or moving. Accordant with Vaisvānara thy comrade, O Jātavedas, meet them and consume them. A prayer for success in gambling

अध्याय ७

श्लोक 107.1

संतरणम्।१ भृगुः।सूर्यः आपः च।अनुष्टुप्।अव॑ दि॒वस्ता॑रयन्ति स॒प्त सूर्य॑स्य र॒श्मयः॑ ।आपः॑ समु॒द्रिया॒ धारा॒स्तास्ते॑ श॒ल्यम॑सिस्रसन्

saṃtaraṇam| 1 bhṛguḥ| sūryaḥ āpaḥ ca| anuṣṭup| ava divastārayanti sapta sūryasya raśmayaḥ | āpaḥ samudriyā dhārāstāste śalyamasisrasan

हिन्दी अर्थ

१५२ भ्रथवेवेद-भाष्य का० ७। अनु० १०। स्० ११ । किचित्) जो कुछ (चकृम) हम से कम॑ हो गया है, (चरणे) तथा आचार व्यवहार में (उपारम) नो त्रुटि हुई है, (ततः) उससे (प्रचेतः) है भरज्ञानी (त्वम्) तु (नः) हमारी (पाहि) रक्षा कर, (शुभे) ताकि शुभकमोँ म सखिभ्यः हम जोततेरे सखा है परमेश्वर ! । गुस्करुल शिक्षा 3 (समुद्रियाः धाराः) अ्रन्तरिक्ष सेधागा रूप में बरसते ह, (ताः) वे जल (सूयस्य) सूयं की (सप्त रश्मयः) साते रश्रिमियां (दिवः) दुलोक ते;

English

My homage to the strong, the brown, the sovran lord among the dice! Butter on Kali I bestow: may he be kind to one like me.

अध्याय ७

श्लोक 108.1

शत्रुनाशनम्।१-२ भृगुः।अग्निः।१ बृहतीगर्भा त्रिष्टुप्, २ त्रिष्टुप्।यो न॑स्ता॒यद् दिप्स॑ति॒ यो न॑ आ॒विः स्वो वि॒द्वानर॑णो वा नो अग्ने ।प्र॒तीच्ये॒त्वर॑णी द॒त्वती॒ तान् मैषा॑मग्ने॒ वास्तु॑ भू॒न्मो अप॑त्यम्

śatrunāśanam| 1-2 bhṛguḥ| agniḥ| 1 bṛhatīgarbhā triṣṭup, 2 triṣṭup| yo nastāyad dipsati yo na āviḥ svo vidvānaraṇo vā no agne | pratīcyetvaraṇī datvatī tān maiṣāmagne vāstu bhūnmo apatyam

हिन्दी अर्थ

रोगजन्य पीड़ाको दुर करता है । समुद्रः अन्तरिक्षन।म (निधं० ६1३) तथा का०७। अनु० १०। सू० ११२ भरथर्वेवेद-माष्य ३. (स्तायत्) छप कर (नः) हमारी (दिप्सति) दम्भपूरवंक हिसा करना चाहता है, (यः) भौर जो (नः) हमारी (आ्राविः) प्रकटरूप मे दम्भपूवंक हिसा करना चाहता है , वह (स्वः नः) हमारा भ्रपनाहो (विद्रान्) जौ कि हमारे भेद को जानता हो, (वा) या अरणः) प्राति हो, पराया हो, काष्ठनिमित सांपाकृतिक-सांपनी भ्रस्वरविशेषदहै, जो शत्रु कोकाट कर, उनमें विष कासंचारकर देताहै। एसे अन्य भरस्त्रोंके लिये देखो (अथर्वं० ०।८ १-२०) । अरणः =अ-+-रण (शब्दे), जिसके साथ हमारा शाल्दिक व्यवहार नहीं ।

English

Bear butter to the Apsarases, O Agni, and to the Dice bear dust and sand and water. The Gods delight in both oblations, joying in sacrificial gifts apportioned duly. The Apsarases take pleasure in the banquet between the Sun and. the libation-holder.

अध्याय ७

श्लोक 108.2

यो नः॑ सु॒प्ता॑न् जाग्र॑तो वाभि॒दासा॒त् तिष्ठ॑तो वा॒ चर॑तो जातवेदः ।वै॒श्वा॒न॒रेण॑ स॒युजा॑ स॒जोषा॒स्तान् प्र॒तीचो॒ निर्द॑ह जातवेदः

yo naḥ suptān jāgrato vābhidāsāt tiṣṭhato vā carato jātavedaḥ | vaiśvānareṇa sayujā sajoṣāstān pratīco nirdaha jātavedaḥ

हिन्दी अर्थ

(वा) या (चरतः) चलते हुप्रों को (मभिदासाद्. उपक्षीण करे, विनष्ट १. पदवाठ मे तायत्” पाठ ह । प्रथवं० (४।१६।१) में भी ““तायत् पाठ है; तथा “तायव: (अथवे० १३।२।१७; २०।४७।१४ में भी सकार रहित पाठ है) प्रपि तु रज्जुनिमित होती है, भ्रौर इसका मुखभाग दन्तवाले सांप के सदृश होता १५४ प्रथवेवेद-भाष्य का० ७। भ्रनु° १०। सू० १.१३ करे, (तान्) उन (प्रतीचः) वापिस लौटते हओं को (जातवेदः) है प्रज्ञानी

English

With butter let them fill my hands, and give me, to be my prey, the man who plays against me.

अध्याय ७

श्लोक 109.1

राष्ट्रभृतः।१-७ बादरायणिः।अग्निः।अनुष्टुप्, १ विराट् पुरस्ताद् बृहती, २,३,५-७ त्रिष्टुप्।इ॒दमु॒ग्राय॑ ब॒भ्रवे॒ नमो॒ यो अ॒क्षेषु॑ तनूव॒शी।घृ॒तेन॒ कलिं॑ शिक्षामि॒ स नो॑ मृडाती॒दृशे॑

rāṣṭrabhṛtaḥ| 1-7 bādarāyaṇiḥ| agniḥ| anuṣṭup, 1 virāṭ purastād bṛhatī, 2,3,5-7 triṣṭup| idamugrāya babhrave namo yo akṣeṣu tanūvaśī| ghṛtena kaliṃ śikṣāmi sa no mṛḍātīdṛśe

हिन्दी अर्थ

(सजोषाः) के साथ प्रीति रखने वाला तू (निदह्) निःशेषेण दग्ध कर । इदमुग्रायं ब्रव नमो थो इष्ेषं तनुवही । (उग्राय) न्याय करने म कठोर, (बभ्रवे) भरण-पोषण करने वाले पर- सत्सु ) इच्वियोंके होते हए (तनूवशी) शरीरोंको वशमें करनेकी शक्ति प्रदान) करता है। (कलिम्) कलिकाल मे, कलियुग मे (घृतेन)

English

Evil be mine opponent’s luck! Sprinkle thou butter over us. Strike, as a tree with lightning flash, mine adversary in the game. The God who found for us this wealth for gambling, to cast the dice and count the winning

अध्याय ७

श्लोक 109.2

घृ॒तम॑प्स॒राभ्यो॑ वह॒ त्वम॑ग्ने पां॒सून॒क्षेभ्यः॒ सिक॑ता अ॒पश्च॑ ।य॒था॒भ॒गं ह॒व्यदा॑तिं जुषा॒णा मद॑न्ति दे॒वा उ॒भया॑नि ह॒व्या

ghṛtamapsarābhyo vaha tvamagne pāṃsūnakṣebhyaḥ sikatā apaśca | yathābhagaṃ havyadātiṃ juṣāṇā madanti devā ubhayāni havyā

हिन्दी अर्थ

हु, (सः) वह् परमेश्वर (ईदृशे) एेसे कमं मे (नः) हमे (मृडाति) सुखी मं इन्द्रियां तो अण्व हँजो कि गरीर-रथको विषयों कीओर नेजातीरहै, तव भी.परमेश्वरार।धना हारा परमेश्वर शदित प्रदान करता है जिससे हेम तनुओं को वण मे करते, इन्हं विषयों में नहीं जाने देते । शिक्षामि = कलिकाल में शिक्षा की अत्यावश्यकता है, ताकि कलिकाल मे प्रजाजन कलि के प्रभाव से वचे रहँ । कलिकाल में प्रजा स्वा्थप्रधान हो जाती है, का० ७1 अनु० १०। सु° ११३१ अथववेद-भाष्य १५१ यथाभागं हव्यदातिं जुषाणा मदं न्ति देवा उमयानि ह्या ॥२॥

English

number, May he accept the sacrifice we offer, and with Gandharvas revel in the banquet.

अध्याय ७

श्लोक 109.3

अ॒प्स॒रसः॑ सध॒मादं॑ मदन्ति हवि॒र्धान॑मन्त॒रा सूर्यं॑ च ।ता मे॒ हस्तौ॒ सं सृ॑जन्तु घृ॒तेन॑ स॒पत्नं॑ मे कित॒वं र॑न्धयन्तु

apsarasaḥ sadhamādaṃ madanti havirdhānamantarā sūryaṃ ca | tā me hastau saṃ sṛjantu ghṛtena sapatnaṃ me kitavaṃ randhayantu

हिन्दी अर्थ

रिक्ष मे सरण करने वाली प्राकृतिक शक्तियों के लिये (घृतम्) घृताहुतियों हवि का (जुषाणाः) प्रीतिःू्वेकसेः क्रते हुए (उभयानि हव्या - हव्यानि ) कहा है कि अक्षमा दीव्यः" (ऋ० १०।३४।१३)' तु बक्षी दारा चूतक्रीडान है रेता, वजरी तय्यार करना रूपी कर्म सायणाचायै ने यह् भावना प्रकट कीट कि जिसे बिरोभ्री क्रितवोंका पराजय हौ सके उनके मुषौ मे

English

Fellow-inhabitants, such is your title, for Dice with looks of power support dominion. As such with offerings may we serve you, Indus! May we have riches in our own possession. As I invoke the Gods at need, as I have lived in chastity,

अध्याय ७

श्लोक 109.4

आ॒दि॒न॒वं प्र॑ति॒दीव्ने॑ घृ॒तेना॒स्माँ अ॒भि क्ष॑र ।वृ॒क्षमि॑वा॒शन्या॑ जहि॒ यो अ॒स्मान् प्र॑ति॒दीव्य॑ति

ādinavaṃ pratidīvne ghṛtenāsmā~ abhi kṣara | vṛkṣamivāśanyā jahi yo asmān pratidīvyati

हिन्दी अर्थ

के लिये देने चाहिए ! यथा ब्रीहि-यव, तथा ॥ जदि । (हविर्धानम्) हविियों के निधान भूलोक (च) ओर (सूर्यम्) सू्यंकं (मन्त्र २) अग्रणी कं (हस्ती) दोनों हाथों को (घुतेन) घृत आदि दारा । है । का (सपतनम्) शतु है उते (रन्धन्तु) हसित करे या मेरे वश मे करं। १५६ अथवेवेद-भाष्य का० ७। अनु० १० । सु ११२.

English

May these, when I have grasped the Dice, the brown, be kind to one like me. A prayer for success in battle

अध्याय ७

श्लोक 109.5

यो नो॑ द्यु॒वे धन॑मि॒दं च॒कार॒ यो अ॒क्षाणां॒ ग्लह॑नं॒ शेष॑णं च ।स नो॑ दे॒वो ह॒विरि॒दं जु॑षा॒णो ग॑न्ध॒र्वेभिः॑ सध॒मादं॑ मदेम

yo no dyuve dhanamidaṃ cakāra yo akṣāṇāṃ glahanaṃ śeṣaṇaṃ ca | sa no devo haviridaṃ juṣāṇo gandharvebhiḥ sadhamādaṃ madema

हिन्दी अर्थ

मानो राष्टरको भर देतीं हैँ । इससे कितवो को म अपने वशम कर लेता, यह वशीकरण उनके कितवपन की हिसा भी कर देता है 1 राष्ट्र में प्रभूत सामग्रीके कारण चूत हारा अन्य धन की प्राप्ति की अभिलाषा नहीं रहती, यूतम तो लाभ ओर हानि दोनों की सम्भावना रहती है । रन्बयन्तु--रघ लोपो व्योवंलि (अष्टा० ६।१।९६) इति वकरारलोपः। अमादेशो गणश्च यो नो धवे धन॑मिदं चकार यो अक्षाणां ग्टैनं शेषंणं च । सनोँदेवो हृषिरिदं ज॑षाणो ग॑न्र्वोभिः सधमादं मदेम ॥५।

English

Resistless, Agni, Indra, smite his foemen for the worshipper, For best foe-slayers are ye both. Agni I call, and Indra, foe-destroyers, swift moving, heroes,

अध्याय ७

श्लोक 109.6

संव॑सव॒ इति॑ वो नाम॒धेय॑मुग्रंप॒श्या रा॑ष्ट्रभृतो॒ ह्य॑१क्षाः ।तेभ्यो॑ व इन्दवो ह॒विषा॑ विधेम व॒यं स्या॑म॒ पत॑यो॒ रयी॒णाम्

saṃvasava iti vo nāmadheyamugraṃpaśyā rāṣṭrabhṛto hya1kṣāḥ | tebhyo va indavo haviṣā vidhema vayaṃ syāma patayo rayīṇām

हिन्दी अर्थ

लिये (इदम्) इस (घलम्) मूद्रा-धन को (चकार) निश्चित या निमित किया, (यः) तथा जिसने (अक्षाणाम्) यूतकमं के पाशो का, याउन द्वारा दयूतकमं करने वालों को (ग्लहनम्) पकड़ा (च) भौर (शेषणम्) उनका विनाश चकार किया, (सः) वह् (नः देव.) हमारा देव भ्रमति अग्रणी ¶° ७ श्रनु० १०। सू० ११३ अथवेवेद-माष्य १५७ प्रोर हम प्रजाएं (गन्धरवेभिः) पृथिवी के घारण करने वाले भूषतियों के साय मिलकर (सधमादम्, मदेम) पारस्परिक आनन्द मे आनन्दित हों । युवे = दिव् घातु, व्यवहाराथंक का चतुरण्येकवचन मँ रूप । दिवु “डा वि जिगीषाव्यवहार'' आदि (दिवादिः); दिव्, वकार को ऊट् च्छवोः शूडनुनासिके च; श्रष्टा० ६।४।१६ यण् (सायण ) +उवडः + भतुध्यकेवचन “ङ ” । अक्षाणां ग्लहनम् = चूत ने वालेके पाशोंकोले फा भरण-पोषण करते है, (वः) है अध्यक्षो ! तुम्हारा (नामधेयम्) नामहै सम्पत्तियं के (पतयः) स्वामी (स्याम) हों ।

English

Gods who wield the thunder, Through whom they won the light in the beginning, these who have made all worlds their

अध्याय ७

श्लोक 109.7

दे॒वान् यन्ना॑थि॒तो हु॒वे ब्र॑ह्म॒चर्यं॒ यदू॑षि॒म।अ॒क्षान् यद् ब॒भ्रूना॒लभे॒ ते नो॑ मृडन्त्वी॒दृशे॑

devān yannāthito huve brahmacaryaṃ yadūṣima| akṣān yad babhrūnālabhe te no mṛḍantvīdṛśe

हिन्दी अर्थ

£ । एसे अध्यक्षो का सत्कार करना चाहिए । १. भ्रथवा तुम॒ मिलकर राष्टरके वसुखूप हो, रत्नरूप हौ । संवसवः = संभूय १५८ अथवेवेद-भाष्य का० ७। अनु० १० सूक्त ११४ (नाधितः) उपतप्त-संतप्त. हुम (यत्) जो । देवान् हुवे) मै देवों का;

English

habitation. The God Brihaspati hath won thy friendly favour with the cup. With hymns, O Indra, enter us for the juice-pouring worshipper.

अध्याय ७

श्लोक 110.1

शत्रुनाशनम्।१-३ भृगुः।इन्द्राग्नी।१ गायत्री, २ त्रिष्टुप्, ३ अनुष्टुप्।अग्न॒ इन्द्र॑श्च दा॒शुषे॑ ह॒तो वृ॒त्राण्य॑प्र॒ति।उ॒भा हि वृ॑त्र॒हन्त॑मा

śatrunāśanam| 1-3 bhṛguḥ| indrāgnī| 1 gāyatrī, 2 triṣṭup, 3 anuṣṭup| agna indraśca dāśuṣe hato vṛtrāṇyaprati| ubhā hi vṛtrahantamā

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार के कमे-कलापमे, (ते) वे सब, (नः) हमे ( मृडन्तु) सुखी करे । , नहीं हो सकत। । प्रतः यह् समग्र सूक्त चूतवामं का विधायक नही, अपितु मार्गो पर चलना, प्रतिक्ल नहीं । कर देने वाले प्रजाजन के लिये, (अप्रति) किसी प्रतिपक्ष कै विना, (वृत्राणि) राष्ट का आवरण करने वालों, घेरा डालने वालों का (हतः) हनन करते हौ । (उभात=उभौ) दोनों (हि) ही (वृ्हन्तम। -वृव्रहुन्तमौ ) । मिलकर वृत्रं का अतिशय हनन करते है । (याभ्याम्) जिन दो की सहायता द्वारा (एव) ही प्रजाजनों ने

English

A prayer for offspring Belly of Indra art thou, Soma-holder! the very soul of Gods and human beings.

अध्याय ७

श्लोक 110.2

याभ्या॒मज॑य॒न्त्स्व॑१रग्र॑ ए॒व यावा॑त॒स्थतु॒र्भुव॑नानि॒ विश्वा॑ ।प्रच॑र्षणी॒ वृष॑णा॒ वज्र॑बाहू अ॒ग्निमिन्द्रं॑ वृत्र॒हणा॑ हुवे॒ऽहम्

yābhyāmajayantsva1ragra eva yāvātasthaturbhuvanāni viśvā | pracarṣaṇī vṛṣaṇā vajrabāhū agnimindraṃ vṛtrahaṇā huve'ham

हिन्दी अर्थ

(वृषणा) सुखो की वर्षा करते है (वबाहू) हाथां मे वचर अर्थात् आयुघ उपं त्वा दवो अंग्रभीच्चमसेन बृहस्पतिः । कियाहै,स्तारकियादहै,तू ( सृन्वते) सोमयाग आदि करने वाले (यज- भानाय) यज्ञणील प्रजाजन की रक्षा के लिये, (नः) हमारी (गीभिः ) स्तुति- वाणियों द्वारा स्तूयमान हुश्रा, (आविश) सहासन में प्रवेश कर। वृहस्पति है साम्राज्य की ब्रड़ी सेना काअधिपति। इसका सेना साथ

English

Here be the sire of offspring, thine here present! Here be they glad in thee who now are elsewhere. A prayer for protection and freedom from sin

अध्याय ७

श्लोक 110.3

उप॑ त्वा दे॒वो अ॑ग्रमीच्चम॒सेन॒ बृह॒स्पतिः॑ ।इन्द्र॑ गी॒र्भिर्न॒ आ वि॑श॒ यज॑मानाय सुन्व॒ते

upa tvā devo agramīccamasena bṛhaspatiḥ | indra gīrbhirna ā viśa yajamānāya sunvate

हिन्दी अर्थ

१६० श्रथवेवेद-भाष्य का० ७। भ्रनु° १० । सु° ११६ है, (सोमधानः) चन्द्रमा का तु निधान है) ( देवानाम्) देवकोटि के (उत) । (जनय) पेदा कर, भ्र्थात् (आसु) इन स्ति्थो में (याः) जो कि (ते) तेरो, है, तेरी उपासिका है, (ते) तेरी प्रजाए' (याः) जो (अन्यत्र) अन्य लोका- दारा परमेश्वर को सूये का आश्रय माना, जहां से कि सूर्यं उदित होता आपः सप्त सुसुबुदीस्ता नो सुञ्चन्तवहंसः ॥१॥

English

Radiant with light are Heaven and Earth, whose grace is nigh, whose sway is vast. Seven Goddesses have flowed to us: may they deliver us from woe;

अध्याय ७

श्लोक 111.1

आत्मा।१ ब्रह्मा।वृषभः।पराबृहती त्रिष्टुप्।इन्द्र॑स्य कु॒क्षिर॑सि सोम॒धान॑ आ॒त्मा दे॒वाना॑मु॒त मानु॑षाणाम्।इ॒ह प्र॒जा ज॑नय॒ यास्त॑ आ॒सु या अ॒न्यत्रे॒ह तास्ते॑ रमन्ताम्

ātmā| 1 brahmā| vṛṣabhaḥ| parābṛhatī triṣṭup| indrasya kukṣirasi somadhāna ātmā devānāmuta mānuṣāṇām| iha prajā janaya yāsta āsu yā anyatreha tāste ramantām

हिन्दी अर्थ

(चावापुथिवी) चुलोक ओर पुथिवी (शुम्भनी) शोभा युक्त है, (श्रन्ति वे सृखदायी होते है, (महिव्रते) वे महाव्रती हैँ । (सप्त) तथा ७ प्राण, (दवीः आपः) दिव्य जलों की तरह्, (सुसुवुः) खवित हृए हँ । (ताः) उन जलो के सदृश ७ स्राव (नः) हमे (अंहसः) पाप से ( मुञ्चन्तु) मुक्त कर । में उषाके प्रकाश में द्यौ ओर पृथिवी शोभायमान होतेह । ये दोनों पने अपने महाव्रतं मेँ सदा रहते ह, त्रतमंग नहीं करते । ७ प्राण रै प्राण, अपान, व्यान, समान, उदान, तथा पायु का नियमपूर्वंक सखराव, मौर उपस्थ । का० ७। प्रनु० १० । सु० ११७ अथर्ववेद-भाष्य । १६१

English

Release me from the curse’s bond and plague that comes from Varuna; 122

अध्याय ७

श्लोक 112.1

पापनाशनम्।१-२ वरुणः।आपः, वरुणश्च।अनुष्टुप्, १ भुरिक्।शुम्भ॑नी॒ द्यावा॑पृथि॒वी अन्ति॑सुम्ने॒ महि॑व्रते ।आपः॑ स॒प्त सु॑स्रुवुर्दे॒वीस्ता नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

pāpanāśanam| 1-2 varuṇaḥ| āpaḥ, varuṇaśca| anuṣṭup, 1 bhurik| śumbhanī dyāvāpṛthivī antisumne mahivrate | āpaḥ sapta susruvurdevīstā no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

अपः (मन्त्र १), जल (शपथ्यात्) णपय लेने के दोष से, (उत) मन्त्र मे जलचिकित्सा का वणेन है । शपथं सदा भूटी होती है, जो कि मानसिक विकृतिके कारण होतीर्है, जलविकित्सा से यह मानसिक विकृति ठीक हौ जाती है। वरुण है अपामधिपति ! यथा “वरुणोऽपामयि- पतिः” (अथवं० ५।२४।४) । जलोदर रोग जलसम्बन्धी है, श्रतः यह् से रहित हो जाता है । पड्वीशः = “पदि विशतोति"" लिये विषलूष ह) । उणादिकोष मे किल्विष को “किल्विष मान कर “किल् + १६२ वेद-भाष्य का० ७। अनु० १० सू ११७.

English

Free me from Yama’s fetter and from every sin against the Gods.

अध्याय ७

श्लोक 112.2

मु॒ञ्चन्तु॑ मा शप॒थ्या॒३दथो॑ वरु॒ण्याऽदु॒त।अथो॑ य॒मस्य॒ पड्वी॑शा॒द् विश्व॑स्माद् देवकिल्बि॒षात्

muñcantu mā śapathyā3datho varuṇyā'duta| atho yamasya paḍvīśād viśvasmād devakilbiṣāt

हिन्दी अर्थ

( भसः) हौ जा, भौर (अमूम्) उस शेष बची तृष्णा का भी (उत् छिन्धि). । योगमागे की जोर जाना च हृता है वह् अल्प विषयतृष्णा को भी योगमार्गं मे बाधिका मानता है, ओर वीर्यं की र्ना करता । वीये, योग मेँ साधक तृष्टासि ठृष्टिका विषा विंषातक्य सि । तथापि विषरूप। है, (विषातकी ) विषरूपा हर्द जीवन को कष्टमय करने वाली (असि) तुदहै। (यथा) जिस किसी प्रकार सेभी (परिवृक्ता)

English

A woman’s incantation against a rival Rough Plant, thou rough rude parasite, cut thou that man, O Rough and Rude,

अध्याय ७

श्लोक 113.1

शत्रुनाशनम्।१-२ भार्गवः।तृष्टिका।१ विराडनुष्टुप्, २ शंकुमती चतुष्पदा भुरिगुष्णिक्।तृष्टि॑के॒ तृष्ट॑वन्दन॒ उद॒मूं छि॑न्धि तृष्टिके ।यथा॑ कृ॒तद्वि॒ष्टासो॒ऽमुष्मै॑ शे॒प्याव॑ते

śatrunāśanam| 1-2 bhārgavaḥ| tṛṣṭikā| 1 virāḍanuṣṭup, 2 śaṃkumatī catuṣpadā bhuriguṣṇik| tṛṣṭike tṛṣṭavandana udamūṃ chindhi tṛṣṭike | yathā kṛtadviṣṭāso'muṣmai śepyāvate

हिन्दी अर्थ

(वशा) कामना! परित्यक्त कर दी जाती है । ' १. तृष्णा है विषय-भोग की पिपासा । तुष्णा के उर्भूत होने परर संयम दया उसके विषय के उपभोग से विरत रहते हुए, शनैः शनैः, तृष्णा.के वेग का क्षय ५ का० ७ अनु० १० । सू° ११८ श्रथरवेवेद-माष्य १६३ विषातकी = विषरूपा तृष्णा + तकि कृच्छ्रजीवने (भ्वादिः) । वशा ==

English

That thou mayst hinder from his act that man in all his manly strength. Thou, rugged Plant, art rude and rough, Vishā, Vishātaki art thou.

अध्याय ७

श्लोक 113.2

तृ॒ष्टासि॑ तृष्टि॒का वि॒षा वि॑षात॒क्यऽसि ।परि॑वृक्ता॒ यथास॑स्यृष॒भस्य॑ व॒शेव॑

tṛṣṭāsi tṛṣṭikā viṣā viṣātakya'si | parivṛktā yathāsasyṛṣabhasya vaśeva

हिन्दी अर्थ

दीप्तिका (भ्रा ददे) मै अपहरण करता हु, (ते) तेरे (हृदयात्) हृदयसे मुख की (संकाशात्) दीप्ति से तेज का (भ्रा) म श्रपहरण करता ह, (ते) तेरी (सवम् ) सब (वचः) दीप्ति का (आददे) भ पहरण करता ह । शत्रु जब परास्त हो गया तब मानो उसकी छाती का बल, हृदय की प्रावनाएं, तथा मूख का तेज प्रादि सब हर तिये गए । संकाशात् = सम् 1 स्वभाव वाली परकीय सेनागों का (हन्तु) हनन करे, (सोमः) सेनाध्यक्ष (दुरस्यतीः) दुरिच्छा्ओं वाली सेना करा (हन्तु) नाश करे ।

English

That thou mayest be cast off by him, as by a bull a barren cow. A woman’s incantation against a rival I have extracted from thy sides, I have extracted from thy heart,

अध्याय ७

श्लोक 114.1

शत्रुनाशनम्।१-२ भार्गवः।अग्नीषोमौ।अनुष्टुप्।आ ते॑ ददे व॒क्षणा॑भ्य॒ आ ते॒ऽहं हृद॑याद् ददे ।आ ते॒ मुख॑स्य॒ सङ्का॑शा॒त् सर्वं॑ ते॒ वर्च॒ आ द॑दे

śatrunāśanam| 1-2 bhārgavaḥ| agnīṣomau| anuṣṭup| ā te dade vakṣaṇābhya ā te'haṃ hṛdayād dade | ā te mukhasya saṅkāśāt sarvaṃ te varca ā dade

हिन्दी अर्थ

शत्रु के सव प्रकार के तेजो का जब अपहरण हो गया (मन्त्र १), तब अपने राष्ट की व्याधियो, आधियों, निन्दाम्रों भौर अपकीतियों ने जा । जसे किमनुनेकहादहै किन जातु कामः कामानामुपभोगेन शाम्यति । म १६४ भ्रथवेवेद“भाष्य का० ७। भ्रनु° १०। सु° ११९ (पापि लक्षिम)है पापरूपिणी लक्ष्मी ! (इतः) यहां से (पपत)तु उड़जा ।

English

I have extracted from thy face the strength and splendour that were thine. Let pain and suffering pass away, let cares and curses vanish. hence.

अध्याय ७

श्लोक 114.2

प्रेतो य॑न्तु॒ व्याऽध्यः॒ प्रानु॒ध्याः प्रो अश॑स्तयः ।अ॒ग्नी र॑क्ष॒स्विनी॑र्हन्तु॒ सोमो॑ हन्तु दुरस्य॒तीः

preto yantu vyā'dhyaḥ prānudhyāḥ pro aśastayaḥ | agnī rakṣasvinīrhantu somo hantu durasyatīḥ

हिन्दी अर्थ

(इतः) यहां से (नश्य) अदृष्ट हो जा, (अमुतः) उ दुर देण से भी (प्रपत) । अंकित कर देने वाले लोह निमित शल्य द्वारा उसके शरीर को अंकित करदियाजातारहै, वैसे है पापरूपिणी लक्ष्मी (त्वा) तुभे (सनामसि) ह्म शल्य हारा सम्बद्ध कर दते हैँ । ताकि तेरा विनाश हो जाय। दारा दृष्पथ दारा उपाजित लक्ष्मी पपरूपिणी है । इसका परित्याग करना (या) जो (पत्तयालूः) पतन कराने वाली, ( अचजुष्टा) इस लिये अप्रिया

English

Let Agni slay the fiendish hags, Soma kill bags who trouble us. A charm against Misfortune Hence. Evil Fortune! fly away, vanish from this place and from that.

अध्याय ७

श्लोक 115.1

पापलक्षणनाशनम्।१-४ अथर्वाङ्गिराः।सविता, जातवेदाः।अनुष्टुप्, २-३ त्रिष्टुप्।प्र प॑ते॒तः पा॑पि लक्ष्मि॒ नश्ये॒तः प्रामुतः॑ पत ।अ॒य॒स्मये॑ना॒ङ्केन॑ द्विष॒ते त्वा स॑जामसि

pāpalakṣaṇanāśanam| 1-4 atharvāṅgirāḥ| savitā, jātavedāḥ| anuṣṭup, 2-3 triṣṭup| pra patetaḥ pāpi lakṣmi naśyetaḥ prāmutaḥ pata | ayasmayenāṅkena dviṣate tvā sajāmasi

हिन्दी अर्थ

मं हिरण्य लेकर (नः) हमें (वभुरराणः) धन देने वाला हौ । प्रजुष्टा = भ + चुष्टां ¦ जुष प्रीतिसेवनयोः (तुदादिः) । सवितः जाताहैकिव्यविति जो अपने लिये चाहता है वहु अपने लिये चाहता हृजा यह् उसको प्रबल सामाजिक भावना का का० ७। अनु० १० । सू० ११६ भ्रथवेवेद-भाष्य तासां पापिष्ठा निरितः भ हिण्मः शिवा अस्मभ्य॑ जातवेदो नि

English

We fix thee with an iron hook unto the man who hateth us. Granting us riches, Savitar! golden-banded, send thou away from us to other regions

अध्याय ७

श्लोक 115.2

या मा॑ ल॒क्ष्मीः प॑तया॒लूरजु॑ष्टाभिच॒स्कन्द॒ वन्द॑नेव वृ॒क्षम्।अ॒न्यत्रा॒स्मत् स॑वित॒स्तामि॒तो धा॒ हिर॑ण्यहस्तो॒ वसु॑ नो॒ ररा॑णः

yā mā lakṣmīḥ patayālūrajuṣṭābhicaskanda vandaneva vṛkṣam| anyatrāsmat savitastāmito dhā hiraṇyahasto vasu no rarāṇaḥ

हिन्दी अर्थ

१०१ है, जोकि (तन्वा साकम्) शरीर के साथ (जनुषः प्रधि) जन्मसे (जाताः) पैदा हुई है । (तासाम्) उनम से (प।पिष्ठाः) अत्यन्त पापौ दारा “दा” को “यच्छ” देष । मनुष्य एक वषं लगमे माता के पेटमें वास करता है, ओर “शतायुष'' होने से १०० वषं श्रौर, उसका जीवन वेद कथित है। १०१ वर्षो को दृष्टि से उसकी लक्षिमियां १०१ कही ह । लक्षिमयां एता एना व्याकरं खिले गा विष्ठिताइव । (इव) जैसे कि (खिले?) खलियान में ( विष्ठिताः) विशेषतया स्थित (गाः) गौं को सायंकाल के समय ग्वाला अलग-प्रलग करं देता है । (पण्याः

English

That Fortune who, flying, abominable, hath, as a creeper climbs• a tree, assailed me. One and a hundred Fortunes all together are at his birth born with a mortal’s body. Of these we send away the most unlucky: keep lucky ones for us, O Jātavedas.

अध्याय ७

श्लोक 115.3

एक॑शतं ल॒क्ष्म्यो॒३मर्त्य॑स्य सा॒कं त॒न्वाऽज॒नुषोऽधि॑ जा॒ताः ।तासां॒ पापि॑ष्ठा॒ निरि॒तः प्र हि॑ण्मः शि॒वा अ॒स्मभ्यं॑ जातवेदो॒ नि यच्छ

ekaśataṃ lakṣmyo3martyasya sākaṃ tanvā'januṣo'dhi jātāḥ | tāsāṃ pāpiṣṭhā niritaḥ pra hiṇmaḥ śivā asmabhyaṃ jātavedo ni yaccha

हिन्दी अर्थ

१. खिल =खलिहान, जहां धान्यकोभूरूसे से भ्रलग कियाजाता है। वहां मूसे के विरे रहने से गौर एकत्रित हो जाती है । सायंकाल में ग्वाला उन्ह, षेर कट वापिस लाता है, श्नौर इन की व्याति कर देता है, इदँ श्रलमग-ग्रलग कर देता १६६ अथर्ववेद-माष्य का० ७। अनु० १०॥। सु० १२०¦ पापमागे से उपाजित्त होती हैँ (ताः) उन्हे (अनीनशम्) मैने नष्ट कर दिया, है, उनका उपार्जन परित्यक्त कर दिया है । (रूराय) गर्मी पैदा करने वाले, (च्यवनाय) पसीना बहाने वाले (नोद- नाय) विक्षिप्त करने वाले, (धृष्णवे) पराभव करने वाले ज्वर फे लिये 14 (नमः) मौषध-वजर हो । तथा (शीताय)सर्दी लगकर होने वाले, (पूवेकाम- ' कृत्वने) ज्वर से पूवं कौ गरई कामनाभ्रों को काट देने वालि ज्वरके लिये

English

I have disparted these and those like cows who stray on common land. Here let auspicious Fortunes stay: hence have I banished evil ones.

अध्याय ७

श्लोक 115.4

ए॒ता ए॑ना॒ व्याक॑रं खि॒ले गा विष्ठि॑ता इव ।रम॑न्तां॒ पुण्या॑ ल॒क्ष्मीर्याः पा॒पीस्ता अ॑नीनशम्

etā enā vyākaraṃ khile gā viṣṭhitā iva | ramantāṃ puṇyā lakṣmīryāḥ pāpīstā anīnaśam

हिन्दी अर्थ

ग्रीष्म मीर शीत ज्वर का वर्णन हमा है । (यः) जो (अग्रतः) अनियत काल का ज्वर, (अन्येद्युः) एक दिन के व्यवधान में (उभयद्युः) तथा दो दिनों के व्यवधान मे (अभ्येति ) आता है, जिन का “भकः घर है वे मण्डूक हैँ । "मण्ड का श्रथ है उदकः; यथा करने से, शरीर मे जल की म्रानुपातिक मात्रा बढ जाने पर, मलेरिया का

English

A charm against Fever Homage to him the burning one, shaker, exciter, violent! Homage to him the cold who acts according to his ancient will!

अध्याय ७

श्लोक 116.1

ज्वरनाशनम्।१-२ अथर्वाङ्गिराः।चन्द्रमाः।१ पुरोष्णिक्, २ एकावसाना द्विपदा आर्च्यनुष्टुप्।नमो॑ रू॒राय॒ च्यव॑नाय॒ नोद॑नाय धृ॒ष्णवे॑ ।नमः॑ शी॒ताय॑ पूर्वकाम॒कृत्व॑ने

jvaranāśanam| 1-2 atharvāṅgirāḥ| candramāḥ| 1 puroṣṇik, 2 ekāvasānā dvipadā ārcyanuṣṭup| namo rūrāya cyavanāya nodanāya dhṛṣṇave | namaḥ śītāya pūrvakāmakṛtvane

हिन्दी अर्थ

का० ७ । अननु० १० । सू० १२२ अथवेवेद-भाष्य १६७ माच्वाके चिद् वि थमन वि न पाशिनोऽति धन्वेव तँ इहि ॥१॥ कोई (त्वा) तु अते हुए को (मा) न (वि यमन्) रोके, (न) जैसे कि (पाशिनः) फन्दों वाले शिकारो (विम्) पक्षी को रोक लेते; (तान्) हरिभिः मे बहुवचन सेयातो रथमें जते नना अश्व अमिप्रेतर्हुः या बाल होते हँ जिनं कि अयाल 78९ कहते है, परन्तु वे मयूर के रोमों के सदृश चित्क्वरे नहीं होते। “ममूररोमभिः'' मे बहुव्रीहि समास न मानकर “सह” अथं में “तृतीया" प्रतीत होती है, जिसका भ्रं होगा “मोर के रोमौ से युक्त श्रश्व । यह् देखा भी गय। है कि घुडसवार अपने घोड़ों के सिरो पर णोभाके लिए मोर के पंख लगा लेतेर्है, तामे वाले भी घोड़ों के सिर पर

English

May he, the lawless one, who comes alternate or two following days, pass over and possess the frog.

अध्याय ७

श्लोक 116.2

यो अ॑न्ये॒द्युरु॑भय॒द्युर॒भ्येती॒मं म॒ण्डूकम॒भ्येऽत्वव्र॒तः

yo anyedyurubhayadyurabhyetīmaṃ maṇḍūkamabhye'tvavrataḥ

हिन्दी अर्थ

उरोवैरधो वरुणस्ते कृणोतु जथन्तं तवाऽतुं देवा म॑दन्तु ॥१॥ १६८ भ्यववेद-भाष्य का० ७। बनु० १०। सु° १२९ करे । (ते) तेरे सत्कार के लिये (वरुणः) राष्टकाराजा (उरोः वरीयः) ' । ¶ भौर विजय प्राप्त करते हुए (त्वा) तु (अनु) लक्षित करके (देवाः)

English

A charm to ensure prosperity Come hither, Indra, with bay steeds, joyous, with tails like pea- cock plumes. Let none impede thy way as fowlers stay the bird: pass o’er them as o’er desert lands.

अध्याय ७

श्लोक 117.1

शत्रुनिवारणम्।१ अथर्वाङ्गिराः।इन्द्रः।पथ्याबृहती।आ म॒न्द्रैरि॑न्द्र॒ हरि॑भिर्या॒हि म॒यूर॑रोमभिः ।मा त्वा॒ के चि॒द् वि य॑म॒न् विं न पा॒शिनोऽति॒ धन्वे॑व॒ ताँ इ॑हि

śatrunivāraṇam| 1 atharvāṅgirāḥ| indraḥ| pathyābṛhatī| ā mandrairindra haribhiryāhi mayūraromabhiḥ | mā tvā ke cid vi yaman viṃ na pāśino'ti dhanveva tā~ ihi

हिन्दी अर्थ

राष्ट्रं का अधिपति, जिसके अद्ख हैँ राष्टरायिपति वरुण नामक राजा । ममं ग्रधिपति । सोम है सेनानायक जो कि सेनाके भ्रागे होकर चलता है, (देखो साधन (मन्त्र १-५), ओौर बुढापे में ज्ञनोपदेश करने का परामशं उस शतु के पराजित हो जाने पर उस राष्ट का अधिपति वरुण राजा सम्राट् रचना करता है, जिस व्यूह मे सम्राट् आच्छादित रहता है ।

English

A benediction on a warrior Thy vital parts I cover with thine armour: with immortality

अध्याय ७

श्लोक 118.1

वर्मधारणम्।१ अथर्वाङ्गिराः।चन्द्रमाः, वरुणः, देवः।त्रिष्टुप्।मर्मा॑णि ते॒ वर्म॑णा छादयामि॒ सोम॑स्त्वा॒ राजा॒मृते॒नानु॑ वस्ताम्।उ॒रोर्वरी॑यो॒ वरु॑णस्ते कृणोतु॒ जय॑न्तं॒ त्वानु॑ दे॒वा म॑दन्तु

varmadhāraṇam| 1 atharvāṅgirāḥ| candramāḥ, varuṇaḥ, devaḥ| triṣṭup| marmāṇi te varmaṇā chādayāmi somastvā rājāmṛtenānu vastām| urorvarīyo varuṇaste kṛṇotu jayantaṃ tvānu devā madantu

हिन्दी अर्थ

४) प्रेयमागं भीमपथ है (मन्त्र १०) । भुरिग् महाबृहती; १४ एकावसाना द्विपदा साम्नी भुरिग् बहती । अन्त॑काय मृत्यवे नम॑ः पाणा अपाना शह ते रमन्ताम् । इहायपंस्तु पुरषः सहाघंना सूय॑स्य मागे अमृतस्य दके ॥१॥ (नमः) नमस्कारहो।! हैभयु की कामना वाले! (ते) तेरे (प्राणाः ग्रपानाः) प्राण ओर अपरान (इह) इस तेरे शरीर मे (रमन्ताम्) रमण

English

King Soma clothe thee! Varuna give thee what is more than ample, and in thy triumph let the Gods be joyful. 123

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Atharva Veda — Chapter 7
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

Digitised text taken from the archive linked below. It has not been collated against a printed edition by this site.

पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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