Atharva Veda· Atharvaveda Saṁhitā
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अध्याय 4 / 20

Kanda 4

काण्ड 4

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पूर्ण अध्याय पाठ25 श्लोक

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अध्याय ४

श्लोक 38.1

वाजिनीवान् ऋषभः।१-७ बादरायणिः।१-४ अप्सरसः, ५-७ ऋषभः।अनुष्टुप्, ३ षट् पदा त्र्यवसाना जगती, ५ भुरिगत्यष्टिः,…. त्रिष्टुप्,७ त्र्यवसाना पञ्चपदानुष्टुब्गर्भा पुरउपरिष्टाज्ज्योतिष्मती जगती।उ॒द्भि॒न्द॒तीं सं॒जय॑न्तीमप्स॒रां सा॑धुदे॒विनी॑म्।ग्लहे॑ कृ॒तानि॑ कृण्वा॒नाम॑प्स॒रां तामि॒ह हु॑वे

vājinīvān ṛṣabhaḥ| 1-7 bādarāyaṇiḥ| 1-4 apsarasaḥ, 5-7 ṛṣabhaḥ| anuṣṭup, 3 ṣaṭ padā tryavasānā jagatī, 5 bhurigatyaṣṭiḥ,…. triṣṭup,7 tryavasānā pañcapadānuṣṭubgarbhā puraupariṣṭājjyotiṣmatī jagatī| udbhindatīṃ saṃjayantīmapsarāṃ sādhudevinīm| glahe kṛtāni kṛṇvānāmapsarāṃ tāmiha huve

हिन्दी अर्थ

(या) जो अप्सरा अर्थात् रूपवती महिला , (अयैः) पादगतियों दारा (परिनृत्यति) घूम-घूमकर सब भोर प्रसन्नता में नाचत्ी हृरद, ओर आदान करती दहै, (सा) वह (नः) हमें (कृतानि) सुकृत-कर्मो का उपदेश

English

Hither I call that Apsaras, the joyous, the delightful one— Those nymphs who revel in the dice, who suffer grief and yield to wrath. Who follow in their course the rays of Sūrya, or as a particle of light attend him.

अध्याय ४

श्लोक 38.2

वि॒चि॒न्व॒तीमा॑कि॒रन्ती॑मप्स॒रां सा॑धुदे॒विनी॑म्।ग्लहे॑ कृ॒तानि॑ गृह्णा॒नाम॑प्स॒रां तामि॒ह हु॑वे

vicinvatīmākirantīmapsarāṃ sādhudevinīm| glahe kṛtāni gṛhṇānāmapsarāṃ tāmiha huve

हिन्दी अर्थ

दुगधवाली हूरई (आ एतु) आये, (नः) हमारे (इदम्, धनम्) इस धन पर अये: अय गतौ (भ्वादिः) । परिनृत्यति द्वारा अप्सरा के धूम- घूमकर चारों ओर नाचने का निदेश हुभा है । इस निमित्त भिन्न-भिन्न पादगतिर्यां करनी होती ह, इसलिए 'अयैः' मेँ बहुवचन का प्रयोग हुमा है । अथवेवेद मे नृत्यकला को उपादेय माना है। यथा “को नृतो दधौ" (१०।२।१७) । “न॒ तये हसाय” (१२।२।२२) । इस प्रकार अथवं मेँ अन्यत्र किया है । सन्तानोत्पन्न होने पर ही, उनके दुग्धपानके लिए, माताकौ छातीमेदुग्धका अवतरण होता है । धनम् = सन्तानरूपी धन । इस धन पर घातक रोग आदि विजय न पाएं, यहु अभिप्रायहै। विषयों मे (प्रमोदन्ते) मोद-प्रमोद तथा हषे अनुभव करती है, तथा जो

English

Whose leader from afar, with store of riches, compasses quickly all the worlds and guards them.

अध्याय ४

श्लोक 38.3

यायैः॑ परि॒नृत्य॑त्या॒ददा॑ना कृ॒तं ग्लहा॑त्।सा नः॑ कृ॒तानि॑ सीष॒ती प्र॒हामा॑प्नोतु मा॒यया॑ ।सा नः॒ पय॑स्व॒त्यैतु॒ मा नो॑ जैषुरि॒दं धन॑म्

yāyaiḥ parinṛtyatyādadānā kṛtaṃ glahāt| sā naḥ kṛtāni sīṣatī prahāmāpnotu māyayā | sā naḥ payasvatyaitu mā no jaiṣuridaṃ dhanam

हिन्दी अर्थ

तथा सामाजिक जीवन मे मोद-प्रमोद तथा हषं अनुभव करनेवाली (ताम्) कोई तो गृहस्थ की विषम परिस्थिति मेँ भो आनन्द, मोद-प्रमोद, तथा हषं मे रहती है, ओौर कोई शोक ओौर क्रोध को धारण किये रहती है । अक्षेषु =

English

Pleased, may he come to this our burnt oblation, together with the Air, enriched with treasure. Together with the Air, O rich in treasure, guard here the white cow and the calf, O mighty! Here are abundant drops for thee, come hither! Here is thy white calf, let thy mind be with us.

अध्याय ४

श्लोक 38.4

या अ॒क्षेषु॑ प्र॒मोद॑न्ते॒ शुचं॒ क्रोधं॑ च॒ बिभ्र॑ती ।आ॒न॒न्दिनीं॑ प्रमो॒दिनी॑मप्स॒रां तामि॒ह हु॑वे

yā akṣeṣu pramodante śucaṃ krodhaṃ ca bibhratī | ānandinīṃ pramodinīmapsarāṃ tāmiha huve

हिन्दी अर्थ

से (पर्येति) वापस आ जाता है । (सः) वह (वाजिनीवान्) पति (जुषाणः) ्ीतिपूवंक (नः) हमारे पारिवारिक जनों के (इमम् होमम्) इस अग्नि- टोत्रमें (आ एतु) आया करे, शामिल हुजा करे, (अन्तरिक्षेण सह) अन्तरिक्षस्थ सूये के साथ। प्रकाशित करे, तब, अतः यह होम प्रातःकालीन होम है । वा" समुच्चयार्थ १५२ भय्वेवेदभाष्य करण्ड ४। बनु० ८ । सूक्त ३८ इमे ते स्तोका वंहुला पर्वा तं ककींह ते मनोऽस्त॒ ॥६॥

English

Together with the Air, O rich in treasure, keep the white calf in safety here, O mighty! Here is the grass, here is the stall, here do we bind the calf. We are your masters, name by

अध्याय ४

श्लोक 38.5

सूर्य॑स्य र॒श्मीननु॒ याः स॒ञ्चर॑न्ति॒ मरी॑चीर्वा॒ या अ॑नुस॒ञ्चर॑न्ति ।यासा॑मृष॒भो दू॑र॒तो वा॒जिनी॑वान्त्स॒द्यः सर्वाँन् लो॒कान् प॒र्यैति॒ रक्ष॑न्।स न॒ ऐतु॒ होम॑मि॒मं जु॑षा॒णो॒३ऽन्तरि॑क्षेण स॒ह वा॒जिनी॑वान्

sūryasya raśmīnanu yāḥ sañcaranti marīcīrvā yā anusañcaranti | yāsāmṛṣabho dūrato vājinīvāntsadyaḥ sarvā~n lokān paryaiti rakṣan| sa na aitu homamimaṃ juṣāṇo3'ntarikṣeṇa saha vājinīvān

हिन्दी अर्थ

इस गोशाला में (रक्ष) रक्षा कर, (वाजिन्) है भन्नवाले पति ! ताकि (ते) तेरे लिए (इमे) ये (स्तोकाः) अल्प दुग्ध विन्दु (बहुलाः) बहत हयो जाएँ । (दयम्) यह (करकी) क्रियाशीला वत्सा (ते) तेरी है, अतः (इह) इस ॥ गोशाला में (ते) तेरा (मनः अस्तु) मन हो, रुचि हो ।

English

name. All Hail! A prayer to various deities for health, wealth, and prosperity Agni no earth kath had mine homage. May he bless me.

अध्याय ४

श्लोक 38.6

अ॒न्तरि॑क्षेन स॒ह वा॑जिनीवन् क॒र्कीं व॒त्सामि॒ह र॑क्ष वाजिन्।इ॒मे ते॑ स्तो॒का ब॑हु॒ला एह्य॒र्वाङि॒यं ते॑ क॒र्कीह ते॒ मनो॑ऽस्तु

antarikṣena saha vājinīvan karkīṃ vatsāmiha rakṣa vājin| ime te stokā bahulā ehyarvāṅiyaṃ te karkīha te mano'stu

हिन्दी अर्थ

करने मे, तुम दोनों, समथ हो । अन्तरिक्षस्थ सूयं के उदय होने के साथ अथात प्रातःकाल में तुम दोनों गौसेवा के लिए तैयार हृभा करो, ओर इस परिमाणमेंहो जाएँ । मन्त्रम वत्साकीरक्षाका कथन हुआ है । यह ही सुशिक्षित हुई गौ बनकर दुग्ध के परिमाण को बढ़ा देगी । 'घासः' कहा है, वत्सा के खाने के लिए । (निबध्नीमः) हम बाधते ह, (यथानाम ) जसे तुम्हारे नामरहै तदनुसारनाम ले-लेकर (वः) तुम्हारे हम (ईरमहे) अधीरवर बनते है, स्वामी बनते हैं ।

English

As I have bowed me down to Agni on the earth, so let the Favouring Graces bow them down to me.

अध्याय ४

श्लोक 38.7

अ॒न्तरि॑क्षेण स॒ह वा॑जिनीवन् क॒र्कीं व॒त्सामि॒ह र॑क्ष वाजिन्।अ॒यं घा॒सो अ॒यं व्र॒ज इ॒ह व॒त्सां नि ब॑ध्नीमः ।य॒था॒ना॒म व॑ ईश्महे॒ स्वाहा॑

antarikṣeṇa saha vājinīvan karkīṃ vatsāmiha rakṣa vājin| ayaṃ ghāso ayaṃ vraja iha vatsāṃ ni badhnīmaḥ | yathānāma va īśmahe svāhā

हिन्दी अर्थ

जातवेदसोऽग्निः । संनमः । पक्तिः; १-३; ५७ (संनमः) अभिलषित पदार्थो के ज्ुकाव (संनमन्तु) संनत हो, जूक, अथात् अग्नि देवता है, अधिपति है, पृथिवी मँ । इसलिषए पृथिवीस्य सब पदां इस अधिपति के लिए जुकतेर्है, इसे प्राप्त हीति है ध जौभी ५५ अग्नि" मे आहुत होते या इसे प्राप्त होते हैँ अग्नि उसे निज मुखम लकरः खाजातीहै। इसी प्रकार अभिलाषी चाहताहै कि उसे अभिलषित सब

English

Earth is the Cow, her calf is Agni. May she with her calf Agni yield me food, strength, all my wish, life first of all, and off- spring, plenty, wealth. All Hail! Vāyu in air hath had mine homage. May he bless me.

अध्याय ४

श्लोक 39.1

संनति १-१० अङ्गिराः, ९-१० ब्रह्म च।१-२ पृथिव्यग्नी, २-४ वाय्वन्तरिक्षे, ५-६ दिवादित्यौ, ७-८ दिक्-चन्द्रमसः, ९-१० जातवेदसोऽग्निः।संनतिः।पङ्क्तिः, १,२,५,७ त्रिपदा महाबृहती, २,४,६,८ संस्तारपङ्क्तिः, ९-१० त्रिष्टुप्।पृ॒थि॒व्याम॒ग्नये॒ सम॑नम॒न्त्स आ॑र्ध्नोत्।यथा॑ पृथि॒व्याम॒ग्नये॑ स॒मन॑मन्ने॒वा मह्यं॑ सं॒नमः॒ सं न॑मन्तु

saṃnati 1-10 aṅgirāḥ, 9-10 brahma ca| 1-2 pṛthivyagnī, 2-4 vāyvantarikṣe, 5-6 divādityau, 7-8 dik-candramasaḥ, 9-10 jātavedaso'gniḥ| saṃnatiḥ| paṅktiḥ, 1,2,5,7 tripadā mahābṛhatī, 2,4,6,8 saṃstārapaṅktiḥ, 9-10 triṣṭup| pṛthivyāmagnaye samanamantsa ārdhnot| yathā pṛthivyāmagnaye samanamannevā mahyaṃ saṃnamaḥ saṃ namantu

हिन्दी अर्थ

सा येऽग्निनां बत्सेनेषमूजं कारं दुहाम् । (पृथिवी) प्रथिवी है (धेनुः) दुग्ध देनेवाली गौ; (तस्याः ) न (वत्सः) वत्स है (अग्निः) अग्नि, (सा) वह पृथिवी न) सवकी प्राप्ति के लिए यन्न किये जाएं । प्राप्त होता है, अतः कहा द कि “भग्निवंनस्पतीनामधिपतिः'' (अथव ० ५।२४।२) ।

English

As I have bowed me down to Vāyu in the air, so let the Favour- ing Graces bow them down

अध्याय ४

श्लोक 39.2

पृ॒थि॒वी धे॒नुस्तस्या॑ अ॒ग्निर्व॒त्सः ।सा मे॒ऽग्निना॑ व॒त्सेनेष॒मूर्जं॒ कामं॑ दुहाम्।आयुः॑ प्रथ॒मं प्र॒जां पोषं॑ र॒यिं स्वाहा॑

pṛthivī dhenustasyā agnirvatsaḥ | sā me'gninā vatseneṣamūrjaṃ kāmaṃ duhām| āyuḥ prathamaṃ prajāṃ poṣaṃ rayiṃ svāhā

हिन्दी अर्थ

सा म॑ वयुनां वत्सेनेषमूे कामं दुहाम् । ता ध अन्तरिक्ष है (धेनुः) दुग्ध देनेवाली गौ, (तस्याः) श त्सः, वत्स है (वायुः) वायु । (सा) वह धेनु (मै) मुन्ञे (वायुना सवकौ प्राप्ति के लिए यन्न किये जाएँ । ॑ र 1 यलोक मे (आदित्याय) आदित्य के लिए (समनमन्) सब

English

The Sun in heaven hath had my homage. May he bless me. As I have bowed me down unto the Sun in heaven, so let the

अध्याय ४

श्लोक 39.3

अ॒न्तरि॑क्षे वा॒यवे॒ सम॑नम॒न्त्स आ॑र्ध्नोत्।यथा॒न्तरि॑क्षे वा॒यवे॑ स॒मन॑मन्ने॒वा मह्यं॑ सं॒नमः॒ सं न॑मन्तु

antarikṣe vāyave samanamantsa ārdhnot| yathāntarikṣe vāyave samanamannevā mahyaṃ saṃnamaḥ saṃ namantu

हिन्दी अर्थ

२५ । (यथा) जिस प्रकार (दिवि) बुलोकं मै (आदित्याय) (मह्यम) मेरे लिए (संनमः) अभिलषित पदार्थो के काव (सं नमन्तु) संनत हो, सुकं, अर्थात् मृजे प्राप्त हों । सा म॑ आदित्येन वत्सेनेषमूज कां दुहाम्

English

Favouring Graces bow them down to me. Heaven is the Cow, her calf Āditya. May she yield with her calf the Sun food, strength, and all my wish, life first of all, and offspring, plenty, wealth. All Hail!

अध्याय ४

श्लोक 39.4

अ॒न्तरि॑क्षं धे॒नुस्तस्या॑ वा॒युर्व॒त्सः ।सा मे॑ वा॒युना॑ व॒त्सेनेष॒मूर्जं॒ कामं॑ दुहाम्।आयुः॑ प्रथ॒मं प्र॒जां पोषं॑ र॒यिं स्वाहा॑

antarikṣaṃ dhenustasyā vāyurvatsaḥ | sā me vāyunā vatseneṣamūrjaṃ kāmaṃ duhām| āyuḥ prathamaṃ prajāṃ poṣaṃ rayiṃ svāhā

हिन्दी अर्थ

इनकी उत्पत्ति होकर, ये मुहे प्राप्त हीं । अर्थात् मृजे प्राप्त हों । दिशाओं को राष्टृभूमि ओर चन्दर को राष्टराधिपति कहा है, राजा ता मेँ चन्रं वत्सेनेषमूजं कामें दहम् । नमस्कारेण नम॑सा ते जुहोमि मा देवानां मिथुया क॑र्म मागम ॥९॥

English

To Chandra in the quarters have I bowed me. May he bless me. As unto Chandra in the quarters I have bent, so let the Favour- ing Graces bow them down to

अध्याय ४

श्लोक 39.5

दि॒व्याऽदि॒त्याय॒ सम॑नम॒न्त्स आ॑र्ध्नोत्।यथा॑ दि॒व्याऽदि॒त्याय॑ स॒मन॑मन्ने॒वा मह्यं॑ सं॒नमः॒ सं न॑मन्तु

divyā'dityāya samanamantsa ārdhnot| yathā divyā'dityāya samanamannevā mahyaṃ saṃnamaḥ saṃ namantu

हिन्दी अर्थ

करता है ऋषियों तथा अन्यो कौ । (नमस्कारेण) नमस्कार द्वारा देता हूं, (देवानाम्, भागम्) ताकि देवोंके भागको (मिथुया) मिथ्या परमेक्वर का वाचक अग्नि पदभी है (देखो यजु:० ३२।१), यथा

English

me. The quarters are the Cows, their calf is Chandra. May they yield with their calf the Moon food, strength and all my wish, life first of all, and offspring, plenty, wealth. All Hail!

अध्याय ४

श्लोक 39.6

द्यैर्धे॒नुस्तस्या॑ आदि॒त्यो व॒त्सः ।सा म॑ आदि॒त्येन॑ व॒त्सेने॑ष॒मूर्जं॒ कामं॑ दुहाम्।आयुः॑ प्रथ॒मं प्र॒जां पोषं॑ र॒यिं स्वाहा॑

dyairdhenustasyā ādityo vatsaḥ | sā ma ādityena vatseneṣamūrjaṃ kāmaṃ duhām| āyuḥ prathamaṃ prajāṃ poṣaṃ rayiṃ svāhā

हिन्दी अर्थ

जाकर, शुद्धिकायं करता है । जीवन में इस दिव्य कर्तैन्यसे म विमुखन होॐ--यह अभिप्रायहै। अग्निमें परमेदवर अग्निनामसे, वायुमें वायु इस दिशा कौ ओर मूख करने से दाहिनी ओर उत्तर, पीठ की ओर पूर्वं, जौर बाहं ओर दक्षिण दिशा होती है। इस प्रकार रात्रि-काल मे दिशां ' के परिज्ञानमें चन्दर कारण होता दहै, अतः चन्द्रको दिशाओं का अधिपति ॥ है । नमसा = नमः अन्ननाम (निषं० २।७) । हृदा पूतं मनसा जातवेदो विण्वांनि हैव वयुनानि विद्वान । परमेरवर (देव) देव ! तू (विदवानि) सब (वयुनानि) प्रजञानों को (विद्वान्) जानता है, (हृदा, मनसा) हमारी हादिक भावना द्वारा तथा मानसिक

English

Agni moves having entered into Agni, the Rishis’ son, who guards from imprecations, I offer unto thee with reverent worship. Let me not mar the

अध्याय ४

श्लोक 39.7

दि॒क्षु च॒न्द्राय॒ सम॑नम॒न्त्स आ॑र्ध्नोत्।यथा॑ दि॒क्षु च॒न्द्राय॑ स॒मन॑मन्ने॒वा मह्यं॑ सं॒नमः॒ सं न॑मन्तु

dikṣu candrāya samanamantsa ārdhnot| yathā dikṣu candrāya samanamannevā mahyaṃ saṃnamaḥ saṃ namantu

हिन्दी अर्थ

मँ वियमान ! तथा उनके ज्ञाता ! (तव) तेरे (सप्त आस्यानि ) सात मूख है, (तेभ्यः) उनके लिए (जुहोमि) र्म आहुतियाँ देता हं । ४ आहृतिर्यां अग्निम दी जाती हँ । अग्नि के मुख सात च । पथा-- काली कराली च मनोजवा च सुलोहिता याच सुधू ख्रवर्णा) अग्निकीये सात जिह्वां है, एक-एक जिह्वा एक-एक 9 मे, अतः अग्निके सात आस्यर्है, सात मुखँ । उन सात आस्यो मेदी गई आहुतियाँ परमेश्वर के सात आस्योंमेंदी गई जाननी चाटिषए । परमेदरवर जाननी चाहिए । वयुनानि न्=प्रज्ञानानि (निरुक्त ८।३।२०) । मनर € ओर

English

Gods’ appointed service. Skilled in all ways, O God, O Jātavedas, I offer what is cleansed by heart and spirit. To all thy seven mouths, O Jātavedas. Do thou accept with pleasure my libation.

अध्याय ४

श्लोक 39.8

दिशो॑ धे॒नव॒स्तासां॑ च॒न्द्रो व॒त्सः ।ता मे॑ च॒न्द्रेण॑ व॒त्सेनेष॒मूर्जं॒ कामं॑ दुहाम् ।आयुः॑ प्रथ॒मं प्र॒जां पोषं॑ र॒यिं स्वाहा॑

diśo dhenavastāsāṃ candro vatsaḥ | tā me candreṇa vatseneṣamūrjaṃ kāmaṃ duhām | āyuḥ prathamaṃ prajāṃ poṣaṃ rayiṃ svāhā

हिन्दी अर्थ

विचारणीय है । अथवा सूक्त के मन्त्र १ओररमेंअग्ति का वणन होने (ये) जो रोगकीटाणु, हलःऽ (पुरस्तात्) पूवं से (जुह्वति) हमे खाते (जुहोत्यादिः), अदन अर्षात् खा जाना, मार देना। रोगकीटाणुओंकेदो कामर्हुःयातो रोगी को मार देना, या उसे शक्तिहीन अर्थात् निबेल कर मेँ रोगनिवारक ओषधियों का होम करके, तदुत्थ धूम द्वारा, रोगकीटाणुभों

English

A charm against rival worshippers O Jātavedas, eastward sacrificers, as foes assail us from the eastern quarter.

अध्याय ४

श्लोक 39.9

अ॒ग्नाव॒ग्निश्च॑रति॒ प्रवि॑ष्ट॒ ऋषी॑णां पु॒त्रो अ॑भिशस्ति॒पा उ॑ ।न॒म॒स्का॒रेण॒ नम॑सा ते जुहोमि॒ मा दे॒वानां॑ मिथु॒या क॑र्म भा॒गम्

agnāvagniścarati praviṣṭa ṛṣīṇāṃ putro abhiśastipā u | namaskāreṇa namasā te juhomi mā devānāṃ mithuyā karma bhāgam

हिन्दी अर्थ

रोगकौटाणु, दक्षिण दिशा में हमे खाते है, ओौर दक्षिण दिशा से हमे साक्षात् प्रतीपमूख करके, प्रतिसारक साधनद्वारार्मै मारदेता हूं । कारण दहै । दक्षिण मे समुद्र का विस्तार है, पृथिवी काप्रायः अभावहै,

English

May they, turned back, be pained for harming Agni. I drive them backward with mine incantation. O Jātavedas, southward sacrificers as foes assail us from the southern quarter.

अध्याय ४

श्लोक 39.10

हृ॒दा पू॒तं मन॑सा जातवेदो॒ विश्वा॑नि देव व॒युना॑नि वि॒द्वान्।स॒प्तास्या॑नि॒ तव॑ जातवेद॒स्तेभ्यो॑ जुहोमि॒ स जु॑षस्व ह॒व्यम्

hṛdā pūtaṃ manasā jātavedo viśvāni deva vayunāni vidvān| saptāsyāni tava jātavedastebhyo juhomi sa juṣasva havyam

हिन्दी अर्थ

साध्य उद्ोगौं के लिए, तथा यज्ञो के लिए । 1 दाथ। कं ज्ुकाव (सं नमन्तु) संनत हो, सुकं अर्थात् वायु देवता है, अधिपति है, अन्तरिक्षम नि 4 रिक्ष में। इसलिए अन्तरिक्षस्य ध न दस अधिपति के लिए जुकते है, इसे प्राप्त होते हैँ । वे पदाथ ह हे, ओर जो वर्षाऋतु मे मेधो मेँ चमकती है

English

to me. Air is the Cow, her calf is Vāyu. May she with her calf Vāyu yield me food, strength, all my wish, life first of all, and off- spring, plenty, wealth. All Hail!

अध्याय ४

श्लोक 40.1

शत्रुनाशनम्।१-८ शुक्रः।ब्रह्म, १ अग्निः, २ यमः, ३ वरुणः, ४ सोमः, ५ भूमिः, ६ वायुः, ७ सूर्यः, ९ दिशः।त्रिष्टुप्, २ जगती, ८ पुरोऽतिशक्वरी पादयुग्जगती।ये पु॒रस्ता॒ज्जुह्व॑ति जातवेदः॒ प्राच्या॑ दि॒शोऽभि॒दास॑न्त्य॒स्मान्।अ॒ग्निमृ॒त्वा ते परा॑ञ्चो व्यथन्तां प्र॒त्यगे॑नान् प्रतिस॒रेण॑ हन्मि

śatrunāśanam| 1-8 śukraḥ| brahma, 1 agniḥ, 2 yamaḥ, 3 varuṇaḥ, 4 somaḥ, 5 bhūmiḥ, 6 vāyuḥ, 7 sūryaḥ, 9 diśaḥ| triṣṭup, 2 jagatī, 8 puro'tiśakvarī pādayugjagatī| ye purastājjuhvati jātavedaḥ prācyā diśo'bhidāsantyasmān| agnimṛtvā te parāñco vyathantāṃ pratyagenān pratisareṇa hanmi

हिन्दी अर्थ

कीटाण, परिचम दिशासे हमे खाते है, ओर परिचम दिशासे हमे साक्षात् करके, प्रतिसारक साधनद्वारार्म मारदेताहं। प्रतिसारक साधन हैँ '"वरूण' अर्थात् जलाधिपति । यथा “वरुणो- ऽपामधिपत्तिः'' (अथर्व ० ५।२४।४) । वर्षा द्वारा अति गमी का अभावहो जाने पर, ग्रीष्म ऋतु से प्रादुर्भूत रोगकीटाणुओं का विनाश हो जाता दहै। वरुण का सम्बन्ध परिम दिशा के साथ दर्शायाहै। कारण यह कि प्रथम- वष पदिचमी समुद्र के वष्पीभूत जल हारा होती है, कालान्तर मँ वर्षा को प्राप्त हों। इन रोगकीटाणुओं को प्रतिमुख करके, प्रतीपमूख करके,

English

May they, turned back, be pained for harming Yama. I smite them backward with mine incantation.

अध्याय ४

श्लोक 40.2

ये द॑क्षिण॒तो जुह्व॑ति जातवेदो॒ दक्षि॑णाया दि॒शोऽभि॒दास॑न्त्य॒स्मान्।य॒ममृ॒त्वा ते परा॑ञ्चो व्यथन्तां प्र॒त्यगे॑नान् प्रतिस॒रेण॑ हन्मि

ye dakṣiṇato juhvati jātavedo dakṣiṇāyā diśo'bhidāsantyasmān| yamamṛtvā te parāñco vyathantāṃ pratyagenān pratisareṇa hanmi

हिन्दी अर्थ

सोम है, सोम-ओोषधि । यहं वीरुधो का अधिपति है, यथा “सोमो वीरुधामधिपत्िः” (अथव ° ५।२४।७) । वेदों मेँ सोम-गोषधि की अद्भूत शवितयों का वर्णेन हभा है । ऋग्वेद (मण्डल ८) मे इस सोम का विस्तृत वर्णेन हृभा है, अतः यहं सोम अन्य ओषधियों का अधिपति है, मूखिया है । इसके सेवन से रोग-कीटाणुओं का नाश होता है। यह सोमदहीप्रतिसारक कौटाणु नीचे को दिशासे हमें खातिर, ओौर नीचे की दिशा में हमें साक्षात् उपक्षीण करते है, णवितहीन करते है, वे भूमिको प्राप्त होकर पराङ्मुख करके, प्रतिसारक साधनद्वारार्मै मारदेताहं। । रोगकीटाणु भूमि में पैदा होकर वायमण्डल में फलते ह । अतः इनका विनाश भी भूमिमेंहोना चाहिए । पशुओं ओर मनुष्यों द्वारा ॥

English

O Jātavedas, westward sacrificers as foes assail us from the western quarter. For harming Varuna be they turned and troubled! I smite them backward with mine incantation.

अध्याय ४

श्लोक 40.3

ये प॒श्चाज्जुह्व॑ति जातवेदः प्र॒तीच्या॑ दि॒शोऽभि॒दास॑न्त्य॒स्मान्।वरु॑णमृ॒त्वा ते परा॑ञ्चो व्यथन्तां प्र॒त्यगे॑नान् प्रतिस॒रेण॑ हन्मि

ye paścājjuhvati jātavedaḥ pratīcyā diśo'bhidāsantyasmān| varuṇamṛtvā te parāñco vyathantāṃ pratyagenān pratisareṇa hanmi

हिन्दी अर्थ

साधन है । तथा भूमिगत ओषधियां आदि भी इनके प्रतिसारण मे अर्थात । कौटाणु हमे अन्तरिक्षसे खातेर्हैः ओौर मागेहीन दिशामें हमें साक्षात करके प्रतिसारक साधनद्वारार्मै मार देता हूं खाते, भौरवायुसेही हमं शक्तिविहीन करते रहते है परन्तु भूमि की

English

Jātavedas, northward sacrificers as foes assail us from the northern quarter. For harming Soma be they turned and troubled! I smite them backward with mine

अध्याय ४

श्लोक 40.4

य उ॑त्तर॒तो जुह्व॑ति जातवेद॒ उदी॑च्या दि॒शोऽभि॒दास॑न्त्य॒स्मान्।सोम॑मृ॒त्वा ते परा॑ञ्चो व्यथन्तां प्र॒त्यगे॑नान् प्रतिस॒रेण॑ हन्मि

ya uttarato juhvati jātaveda udīcyā diśo'bhidāsantyasmān| somamṛtvā te parāñco vyathantāṃ pratyagenān pratisareṇa hanmi

हिन्दी अर्थ

तथा अन्य ग्रह-उपग्रह आदि विचर रह है कोप्राप्तहों। उन रोगकीटाणुओं को प्रतिमुख करके, प्रतौपमूख करके, पराडमुख तथा प्रतीपमूख का अभिप्राय दहै कि इन रोगकौटाणुभों का मुख हमारीओरनहो, हमारी ओर इनका आगमननहो, अपितुये हमारी ओर पीठ करके हमसे विपरीत दिशा की ओर चले जाए, उधरही

English

incantation. O Jātavedas, nether sacrificers, as foes assail us from the stead- fast quarter. For harming Earth let them be turned and troubled. I smite them backward with mine

अध्याय ४

श्लोक 40.5

ये॒३धस्ता॒ज्जुह्व॑ति जातवेदो ध्रु॒वाया॑ दि॒शोऽभिदास॑न्त्य॒स्मान्।भूमि॑मृ॒त्वा ते परा॑ञ्चो व्यथन्तां प्र॒त्यगे॑नान् प्रतिस॒रेण॑ हन्मि

ye3dhastājjuhvati jātavedo dhruvāyā diśo'bhidāsantyasmān| bhūmimṛtvā te parāñco vyathantāṃ pratyagenān pratisareṇa hanmi

हिन्दी अर्थ

का वणेन हृभा दहै । सूर्यं रोग-कीटाणुओं को पराङ्मुख करता है। यथा अस्त होता हृञा भी हनन करे, रदिमयों द्वारा । इन दोनों समयोंकी रहिमियों में क्रिमियों के विनाण कौ शक्ति अधिक प्रतीत होती रहै। क्रिमि है, हिख क्रिमि (कम् हिसायाम्, क्रचादिः) । कीटाणु, दिशाओं के अन्तराल-प्रदेशो से हमे खाते है" ओर सब दिशाओंसे

English

incantation. Those who pay sacrifice, O Jātavedas, from air assail us from the midway quarter.

अध्याय ४

श्लोक 40.6

ये॒३ऽन्तरि॑क्षा॒ज्जुह्व॑ति जातवेदो व्य॒ध्वाया॑ दि॒शोऽभि॒दास॑न्त्य॒स्मान्।वा॒युमृ॒त्वा ते परा॑ञ्चो व्यथन्तां प्र॒त्यगे॑नान् प्रतिस॒रेण॑ हन्मि

ye3'ntarikṣājjuhvati jātavedo vyadhvāyā diśo'bhidāsantyasmān| vāyumṛtvā te parāñco vyathantāṃ pratyagenān pratisareṇa hanmi

हिन्दी अर्थ

प्रतीपमूख करके प्रतिसारक साधनद्वारा्म मारदेताहूं। व्यथित, तथा इनका प्रतिसारण कियाहै। प्रकरण को एकताकीदुष्टिसे निवारक भौर पुष्टिदायक अन्नकेसेवनसे रोग-कीटाणु शरीर पर आक्रमण करने की शक्ति नहीं रखते, शरीर में णप अर्थात् रोग-प्रतिरोधक शक्ति पैदा हौ जाती है, जिससे रोग-कीटाणु शरीर पर आक्रमण नहीं कर

English

For harming Vāyu be they turned and troubled! I smite them backward with mine incantation. The sacrificers from above assail us, O Jātavedas, from the lofty quarter. For wronging Sūrya be they turned and troubled! I smite them backward with mine

अध्याय ४

श्लोक 40.7

य उ॒परि॑ष्टा॒ज्जुह्व॑ति जातवेद ऊ॒र्ध्वाया॑ दि॒शोऽभि॒दास॑न्त्य॒स्मान्।सूर्य॑मृ॒त्वा ते परा॑ञ्चो व्यथन्तां प्र॒त्यगे॑नान् प्रतिस॒रेण॑ हन्मि

ya upariṣṭājjuhvati jātaveda ūrdhvāyā diśo'bhidāsantyasmān| sūryamṛtvā te parāñco vyathantāṃ pratyagenān pratisareṇa hanmi

हिन्दी अर्थ

परमेश्वराथैक ही जानने चाहिष, ओर रोगकीटाणों के साथ-साथ, मासुरी तथा राक्षसी भावनां, आसुरी विचार तथा आसुर कर्म भी जानने चाहिए, जिनका कि प्रतिसारण करना है ।' परमेदवर अग्निवत् दाहक है । सव दिशाओं का कथन हुमा है । “सब दिशा" शब्द किसी एक स्थान की सब दिशाओं का सूचक नहीं, अपितु ब्रह्माण्ड की सब दिशाओं का सूचक दहै। रोग-कीटाणुओं तथा आसुरभावों आदि का विनाश कर देने की शित

English

incantation. Those from all points assail us, Jātavedas, who sacrifice from intermediate regions.

अध्याय ४

श्लोक 40.8

ये दि॒शाम॑न्तर्दे॒शेभ्यो॒ जुह्व॑ति जातवेदः सर्वा॑भ्यो दि॒ग्भ्योऽभि॒दास॑न्त्य॒स्मान्।ब्रह्म॒र्त्वा ते परा॑ञ्चो व्यथन्तां प्र॒त्यगे॑नान् प्रतिस॒रेण॑ हन्मि

ye diśāmantardeśebhyo juhvati jātavedaḥ sarvābhyo digbhyo'bhidāsantyasmān| brahmartvā te parāñco vyathantāṃ pratyagenān pratisareṇa hanmi

हिन्दी अर्थ

।॥ काण्ड चतुथं का भाष्य सम्पूणं हुजा ॥ पृथिवीवासियों पर हो सकना सम्भव है । २. परमेइवर के नाना नाम हैँ यथा “एकं सद् विप्रा बहुधा वदन्ति।” (ऋक् १।१६४।४६) । १०० नाम तौ सत्यार्थप्रकाश समुल्लास १ में भी दशयि है ।

English

For wronging Prayer let them be turned and troubled, I smite them backward with mine incantation. 53

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Atharva Veda — Chapter 4
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

Digitised text taken from the archive linked below. It has not been collated against a printed edition by this site.

पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.