Atharva Veda· Atharvaveda Saṁhitā
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अध्याय 4 / 20

Kanda 4

काण्ड 4

331 श्लोकभाग 2/3 · श्लोक 18.1–37.12WhatsApp

पूर्ण अध्याय पाठ155 श्लोक

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अध्याय ४

श्लोक 18.1

अपामार्गः।१-८ शुक्रः।अपामार्गो वनस्पतिः।अनुष्टुप्, ६ बृहतीगर्भा।स॒मं ज्योतिः॒ सूर्ये॒णाह्ना॒ रात्री॑ स॒मावती॑ ।कृ॒णोमि॑ स॒त्यमू॒तये॑ऽर॒साः स॑न्तु॒ कृत्व॑रीः

apāmārgaḥ| 1-8 śukraḥ| apāmārgo vanaspatiḥ| anuṣṭup, 6 bṛhatīgarbhā| samaṃ jyotiḥ sūryeṇāhnā rātrī samāvatī | kṛṇomi satyamūtaye'rasāḥ santu kṛtvarīḥ

हिन्दी अर्थ

(शतेन) सौ रक्नोपायों हारा (मा) मेरी (परि) सव ओरसे (पाहि) रक्षा कर, (सहचरेण) तथा निज हजार शक्तियों दवारा (अभि) साक्षात (मा रक्ष) मेरी रक्षा कर । (वीरुधांपते) है वि रोहण करनेवाली लताओों या को स्थापित करे । परमेव र-भेषज का वर्णन मन्त्र मेँ नहीं हुजा । उस सव- निज स्वाभाविक शविति द्वारा अपामार्ग" है, बुराइयों को अप" अर्थत दिव॑मन्तरिक्षमाद् भूरिं सव तद देवि पश्यति ॥ १

English

As once when time began the Gods with thee expelled the Asuras,

अध्याय ४

श्लोक 18.2

यो दे॑वाः कृ॒त्यां कृ॒त्वा हरा॒दवि॑दुषो गृ॒हम्।व॒त्सो धा॒रुरि॑व मा॒तरं॒ तं प्र॒त्यगुप॑ पद्यताम्

yo devāḥ kṛtyāṃ kṛtvā harādaviduṣo gṛham| vatso dhāruriva mātaraṃ taṃ pratyagupa padyatām

हिन्दी अर्थ

(आ पश्यति) सबको एक दृष्टिपात मे देखता है, (प्रति परयति प्रतिवस्तु को पृथक्-पृथक् रूप मे भी देखता दहै, (परा ॥ दुरकी ८८ को भी देखता हे, (प्यति) समीप की नस्तु कौ भी देखत है, (देनि)" ह भूमि को (तत् सर्व॑म्) उस सबको (पश्यति) वह देखता हे देवी है दिव्यगुणवती 'सदंपुष्पा' (सायण) । सद॑पुष्पा का अर्थ है, “सदा जिसके फूल खिले रहते है", इसी प्रकार द्रष्टा-योगी को चक्षुः सदा फूल के सदृश विकसित रहती है, देखने के लिए । त्वयारै सवौ भतानि पश्यानि देव्योषधे ॥२॥

English

Even thence, O Plant, wast thou produced as one who wipes and sweeps away. Thy father’s name was Cleaver. Thou with thousand branches cleavest all. Do thou, turned backward, cleave and rend the man who treateth us as foes.

अध्याय ४

श्लोक 18.3

अ॒मा कृ॒त्वा पा॒प्मानं॒ यस्तेना॒न्यं जिघां॑सति ।अश्मा॑न॒स्तस्यां॑ द॒ग्धायां॑ बहु॒लाः फट् क॑रिक्रति

amā kṛtvā pāpmānaṃ yastenānyaṃ jighāṃsati | aśmānastasyāṃ dagdhāyāṃ bahulāḥ phaṭ karikrati

हिन्दी अर्थ

(देवि ओषधे !) दिव्यगुणवती है ओषधि ! (तिः दिवः) तीन दौः को, (तिस्रः पृथिवीः) तीन पृथिवियों को, (च) जौर (पृथक्) पृथक्-पृथक् तिखः पृथिवीः तिखः दिवः = “इस जगत् मेँ उत्तम, मध्यम भौर अधम तीन प्रकार की भूमि ओर अग्नि है" (ऋ० २।२७।८; दयानन्द) । यलोक की विषुवत् रेखा एवणप्०५९8। 1४८ , जिसपर सूर्यं के आते दिन- रात बराबर कालके हो जततिर्हु; तथा इस रेखा से उत्तरकाभाग ओर दक्षिण काभाग। इस प्रकार भी द्युलोक तीन भागों में विभक्तहो जाता है । पटी, शीतोष्ण पटरी तथा शीत पटरी में तीन विभाग ।

English

The evil sprang from earth; it mounts to heaven and spreads to vast extent. Reverted, shaking him with might, thence on its maker let it fall.

अध्याय ४

श्लोक 18.4

सह॑स्रधाम॒न् विशि॑खा॒न् विग्री॑वां छायया॒ त्वम्।प्रति॑ स्म च॒क्रुषे॑ कृ॒त्यां प्रि॒यां प्रि॒याव॑ते हर

sahasradhāman viśikhān vigrīvāṃ chāyayā tvam| prati sma cakruṣe kṛtyāṃ priyāṃ priyāvate hara

हिन्दी अर्थ

जली है, इन्दं पृथक्-पृथक् सीमाओं मेँ विभक्त कर पहिचानना । भूतानि = पंचभूत तथा भौतिक जगत् । दिव्यस्यं पणस्य तस्यं हासि कनीनिका । सा भूमिमा रुरोहिथ वह्यं श्रान्ता वधूरिव ॥३॥

English

For thou hast grown reverted, and turned backward also is thy fruit. Remove all curses far from me, keep most remote the stroke of death. Preserve me with a hundred, yea, protect me with a thousand aids.

अध्याय ४

श्लोक 18.5

अ॒नया॒हमोष॑ध्या सर्वाः॑ कृ॒त्या अ॑दूदुषम्।यां क्षेत्रे॑ च॒क्रुर्यां गोषु॒ यां वा॑ ते॒ पुरु॑षेषु

anayāhamoṣadhyā sarvāḥ kṛtyā adūduṣam| yāṃ kṣetre cakruryāṃ goṣu yāṃ vā te puruṣeṣu

हिन्दी अर्थ

(सा) वह् तू कनीनिका (भूमिम्) भूमि पर (मा रुरोहिथ) मारूढ हुई है, (इव) जसेकि (श्रान्ता वधूः) थकी वधू (वह्यम्) वहन साधनरूपी रथ में , अथवेवेदभाष्य काण्कं ४। अनु०° ४। सूक्त २० कनीनिका -€लकणण। । वेदों में सूयं को चक्षुः कहा 9 अतः सूयं की मुच्चरत्'” (यजुः० ३६।२४) में सूयं को चक्षु: कहा है ।

English

May mighty Indra, Lord of Plants! give store of strength and. power to thee. A charm for the acquisition of superhuman powers of sight

अध्याय ४

श्लोक 18.6

यश्च॒कार॒ न श॒शाक॒ कर्तुं॑ श॒श्रे पाद॑म॒ङ्गुरि॑म्।च॒कार॑ भ॒द्रम॒स्मभ्य॑मा॒त्मने॒ तप॑नं॒ तु सः

yaścakāra na śaśāka kartuṃ śaśre pādamaṅgurim| cakāra bhadramasmabhyamātmane tapanaṃ tu saḥ

हिन्दी अर्थ

(सहस्राक्षः देवः) हजारों आंखोंवाले देव ने (ताम्) उस ओषधि को (मे) मेरे (दक्षिणे हस्ते) दाहिने हाथ में (आ दधत्) स्थापित किया (यः च) जो (शद्रः) शृद्र है, (उत) तथा (आर्यः) आयं है । सहाक्षः देवः परमेर्व र-पुरुषः, यथा “सहस्रशीर्षा पुरूषः मणिबन्धन कलार्ईमेहोतादहै,या बाहू मे, हाथ में नहीं । इसलिए मन्त्रमें आधान का कथन हु है, बन्धन का नहीं ।

English

It sees in front, it sees behind, it sees afar away, it sees The sky, the firmament, and earth: all this, O Goddess, it beholds. Through thee, O godlike Plant, may I behold all creatures that exist,

अध्याय ४

श्लोक 18.7

अ॒पा॒मा॒र्गोऽप॑ मार्ष्टु क्षेत्रि॒यं श॒पथ॑श्च॒ यः ।अपाह॑ यातुधा॒नीरप॒ सर्वा॒ अरा॒य्यः

apāmārgo'pa mārṣṭu kṣetriyaṃ śapathaśca yaḥ | apāha yātudhānīrapa sarvā arāyyaḥ

हिन्दी अर्थ

विचार, यथा, (१ ) "उत शूद्र उतायं" यह अथववेद का वचन है । आर्यो नाम अनायं अर्थात्, अनाडी है, (सण प्र०, समु० ८; पु० ३५२; रामलाल १. वेदो मे सयं कौ चक्षुः कहा है, अतः, सूयं में चकषुिष्ठ कनीनिका का वणन हुआ है । कनीनिका दारा वस्तुदशंन होता है । इस द्वारा सूयं मानो सबको देखता है । दिष्य दृष्टि वाला योगी कहता है कि वह कनीनिका मानो भूमि पर आणू हुई मेरी चक्ष हाथ भाग्यशाली है, अधिक शक्तिशाली है । । +

English

Three several heavens, three several earths, and these six regions one by one. The pupil, verily, art thou of that celestial Engle’s eye.

अध्याय ४

श्लोक 18.8

अ॒प॒मृज्य॑ यातु॒धाना॒नप॒ सर्वा॑ अरा॒य्यः ।अपा॑मार्ग॒ त्वया॑ व॒यं सर्वं॒ तदप॒ मृज्महे

apamṛjya yātudhānānapa sarvā arāyyaḥ | apāmārga tvayā vayaṃ sarvaṃ tadapa mṛjmahe

हिन्दी अर्थ

(३) जिसको पठने-पढाने से कुछ भी न अवे, वह निर्वृद्धि भौर मूखं होने से श्र कहातादहै (सण प्र०, समु० ३, पुर १२६; रामलाल कषर हे सहस्रचक्षुरूप परमेश्वर ! । रूपाणि) अपने स्वरूपों को गूहथाः) ढके रख, छिपाये र्व । ( अथो) अपिच (सहस्रचक्षो") हजार आंखों वाले है परमेवर ! (त्वम्) त (किमीदिनः) भेद लेनेवालो मं से (प्रति- परया) प्रत्येक को दृष्टि में रख । प्रह्न करके भेद लेने वाले । पश्याः = दृशेः लेटि अडागमः ।

English

On earth hast thou alighted as a weary woman seeks her couch. The God who hath a thousand eyes give me this Plant in my right hand! I look on every one therewith, each Sūdra and each Āryan man.

अध्याय ४

श्लोक 19.1

अपामार्गः।१-८ शुक्रः।अपामार्गो वनस्पतिः।अनुष्टुप्, २ पथ्यापङ्क्तिः।उ॒तो अ॒स्यब॑न्धुकृदु॒तो अ॑सि॒ नु जा॑मि॒कृत्।उ॒तो कृ॑त्या॒कृतः॑ प्र॒जां न॒डमि॒वा छि॑न्धि॒ वार्षि॑कम्

apāmārgaḥ| 1-8 śukraḥ| apāmārgo vanaspatiḥ| anuṣṭup, 2 pathyāpaṅktiḥ| uto asyabandhukṛduto asi nu jāmikṛt| uto kṛtyākṛtaḥ prajāṃ naḍamivā chindhi vārṣikam

हिन्दी अर्थ

(मा) मुञ्चे (यातुधानान्) यातनाएं धारण करनेवालौं को (दशंय) दिखा, (यातुधान्यः) यातना धारण करने वालियौं को (दशय) दिखा । (सर्वान् पिशाचान्) सव मांसभक्षकों को (दशय) दिखा, (इति) इसलिए (ओषधे) है ओषधिरूप परमेङवर ! (त्वा आ रभे) र्म तेरा अवलम्बन करता हँ । तुजे प्राप्त कर्ता हूं । वप्रे सूयैमिव सर्पन्तं मा पिशाचं तिरस्करः ॥७॥ है कि “मा आट्मानम् अपगृहयाः 1 (निरुक्त ६।३।२७), जो कि दाह का पान करती है, ताप-सन्ताप को विनष्ट करती है। परमेश्वर योगी के ताप-सन्ताप को नष्ट करता है, अतः वहं ओपधिरूप है ।

English

Make manifest the forms of things; hide not their essences from sight. And, thou who hast a thousand eyes, look the Kimidins in the face.

अध्याय ४

श्लोक 19.2

ब्रा॒ह्म॒णेन॒ पर्यु॑क्तासि॒ कण्वे॑न नार्ष॒देन॑ ।सेने॑वैषि॒ त्विषी॑मती॒ न तत्र॑ भ॒यमस्ति॒ यत्र॑ प्रा॒प्नोष्यो॑षधे

brāhmaṇena paryuktāsi kaṇvena nārṣadena | senevaiṣi tviṣīmatī na tatra bhayamasti yatra prāpnoṣyoṣadhe

हिन्दी अर्थ

पिक्चाचों को, जोकि मुम छिये रहकर मुभ यातनां दे रद है, मुभे भी दर्शा । वे ह काम, क्रोध, लोभ आदि । तर् अथवेवेदभाष्य काण्ड ४। अनु° ४ । सूक्त २० (असि, तु है, (च) ओौर (चतुरक््याः° शुन्याः) चार आंखोवाली कुतियाकी (सूयम् इव सूयं के सदृश,(पिशाचम् ) मांसभक्षक को (मा) मत (तिरस्करः ) अन्तहित कर, छुपने न दे ।

English

Make me see Yātudhānas, make thou Yātudhānis visible. Make me see all Pisāchas With this prayer, O Plant, I hold thee fast. Thou art the sight of Kasyapa and of the hound who hath four eyes.

अध्याय ४

श्लोक 19.3

अग्र॑मे॒ष्योष॑धीनां॒ ज्योति॑षेवाभिदी॒पय॑न्।उ॒त त्रा॒तासि॒ पाक॒स्याथो॑ ह॒न्तासि॑ र॒क्षसः॑

agrameṣyoṣadhīnāṃ jyotiṣevābhidīpayan| uta trātāsi pākasyātho hantāsi rakṣasaḥ

हिन्दी अर्थ

कद्यप = पदयतीति कडयपः, उदित हभ सूर्य॑, जोकि सबको देखता यह सवंदष्टिगोचर है, इसी प्रकार है ओषधि ! तू पिशाच को भी अन्तर्हित न होने दे, छिपने न दे । तिरः तिरोऽन्तधौ' (अष्टा० १।४।७६९) । करः = करोतेर्माडि लुडि च्लेरङ् (सायण)। पिशाच है मांसभक्नण करनेवाला, उसे क्षीण कर देने वाला रोगकीटाणु श्य । ये शरीर में प्रविष्ट होकर शारीरिक रुधिर-मांस को क्षीण कर देते हँ । पिशाच = पिशितं मांसम् अचति मे विद्यमान रहते है, ओर वर्हे हमारे शरीरो में प्रविष्टहो जति (परिपाणात्) सव प्रकारके पेयसे (यातुधानम्) यातनाएं धारण करनेवाले, या प्रदान करनेवाले पिशाच को (उदग्रभम्) मैने पकड़ लिया

English

Make the Pisācha manifest as Sūrya when he rides at noon. Kimidin, Yātudhāna from their hiding-places have I dragged.

अध्याय ४

श्लोक 19.4

यद॒दो दे॒वा असु॑रां॒स्त्वयाग्रे॑ नि॒रकु॑र्वत ।तत॒स्त्वमध्यो॑षधेऽपामा॒र्गो अ॑जायथाः

yadado devā asurāṃstvayāgre nirakurvata | tatastvamadhyoṣadhe'pāmārgo ajāyathāḥ

हिन्दी अर्थ

पर्वंक भेद लेनेवाले को पकड़ लिया जाता है । (तेन) उस पकड़ के कारण १. सूर्य आकाशम निर्वाधरूप मेँ चलता है, नियमपूवंक । एेसा चलना बिना चक्षु के सम्भव नहीं, अतः दहे परमेदवर ! तुहीउसकाचक्षुहै,तू ही उसका चक्षु बनकर य॒लोकस्थहै, रात्रिम दृष्टिगोचर होतीदहै, दिनमे सौर प्रकाशकै कारण छिपी रहती है । मानो रात्रिकाले तुम चक्षुके्ारा रात्रिक दुश्योंको वह देती है । नियमपू्वंक चला रहा है, परन्तु सूयं जो दिन मे चलतारहै, ओर चतुरक्षी शुनी जो रातिम देखती रहै, ये दो केवल दृष्टान्तरूप मे कथित क्य है अथवं० १८।२।११ मे दोश्वानों का वर्णन हृ ठै जिन्हे कि “सारमेयौ "चतुरक्षी रबलौ" कहा है । सम्भवतः इन दो 'इवानौ' को शुनीमण्डल' कहा है, जिसेकिं “शगुन्याइदच चतुरश्याः" कहा है । दो !हवानौ' कौ चार मांखं होती ह ।

English

I look on every one with this, Sūdra and Aryan man alike. Make that Pisācha visible, the fiend who flies in middle air, The fiend who glides across the sky, and him who deems the earth his help.

अध्याय ४

श्लोक 19.5

वि॒भि॒न्द॒ती श॒तशा॑खा विभि॒न्दन् नाम॑ ते पि॒ता।प्र॒त्यग् वि भि॑न्धि॒ त्वं तं यो अ॒स्माँ अ॑भि॒दास॑ति

vibhindatī śataśākhā vibhindan nāma te pitā| pratyag vi bhindhi tvaṃ taṃ yo asmā~ abhidāsati

हिन्दी अर्थ

परिपाणात् = सव प्रकार के पेय तथा खाद्य पदार्थो से। पिशाच उनके पकड़ लेने से दृष्टि पूववत् देखने मे सक्षम हो जाती है। शूद्र ओर आयं (देखो मन्त्र ४ की व्याख्या) । करता है, (च यः) ओर जो (दिवम्, अति, सर्पति) चुलौक ओौर उसको लाघकर भी (सपति) सपण करतार । (यः) जो (भूमिम्) भूमि को मे “सद॑पुष्पा' नामक ओषधि का वणेन है, परन्तु सूक्त मेँ इस ओषधि का

English

Glorification and benediction of cows The kine have come and brought good fortune: let them rest in the cow-pen and be happy

अध्याय ४

श्लोक 19.6

अस॒द् भूम्याः॒ सम॑भव॒त् तद् यामे॑ति म॒हद् व्यचः॑ ।तद् वै ततो॑ विधू॒पाय॑त् प्र॒त्यक् क॒र्तार॑मृच्छतु

asad bhūmyāḥ samabhavat tad yāmeti mahad vyacaḥ | tad vai tato vidhūpāyat pratyak kartāramṛcchatu

हिन्दी अर्थ

होता, अपितु यह अध्यात्म-भोषधि" है । यथा-- (४) तथा "प्रातिभ-आदशं (योग० विभूतिपादः, सूत्र ३६), अर्थात् स्थल, जिसमें कि फफ मे वायु कातथा हृदय में रक्तरूपी आपः का संचार होता गला" कहते हैँ । इन शारीरिक अवयवो मेँ रोग-कीटाणुओं द्वारा जनित रोगतो

English

near us. Here let them stay prolific, many-coloured, and yield through many morns their milk for Indra.

अध्याय ४

श्लोक 19.7

प्र॒त्यङ् हि सं॑ब॒भूवि॑थ प्रती॒चीन॑फल॒स्त्वम्।सर्वा॒न् मच्छ॒पथाँ॒ अधि॒ वरी॑यो यावया व॒धम्

pratyaṅ hi saṃbabhūvitha pratīcīnaphalastvam| sarvān macchapathā~ adhi varīyo yāvayā vadham

हिन्दी अर्थ

अथवा अन्तरिक्ष है उदर (अथवं० १०।७।३२) मौर भूमि है पाद (टाँगों ८४ अधववंबेदभाष्य काण्ड ४1 अनु० ४) सुक्त २० उषसः) उषाकाल के प्रारम्भ होते (दुहानाः) दोही जाये । इन्द्राय = परमैशवर्यवान् राजा के लिए । ये गोशालाएं राजकीय गोदाता राजा की इस निमित्त प्रशंसा करनेवाले के लिए (इत्) ही (उप ददाति) गौं उपदानरूप मे (ददाति) देता है, (स्वम्) इसके गोधन को ना (3 । (न मुषायति) इससे छीन नहीं नेता, अपितु (अस्य) इस प्रबन्धक कौ

English

Indra aids him who offers sacrifice and praise: he takes not what is his, and gives him more thereto.

अध्याय ४

श्लोक 19.8

श॒तेन॑ मा॒ परि॑ पाहि स॒हस्रे॑णा॒भि र॑क्ष मा ।इन्द्र॑स्ते वीरुधां पत उ॒ग्र ओ॒ज्मान॒मा द॑धत्

śatena mā pari pāhi sahasreṇābhi rakṣa mā | indraste vīrudhāṃ pata ugra ojmānamā dadhat

हिन्दी अर्थ

करते हैः भौर इनकी प्रयोगक्षालाओं को सम्भवतः “असुरभवनं"” कटा है । उदाहरणा्ं योगी तौ योगप्रक्रियानुसार सशरीर आकाश-गमन के लिए यत करते व ५ दा काद चुट ववुः भत हनो चाहिए, ताकि टट कर गौओं पर इसका प्रहार न हो । है, भौर वतमान में वेज्ञानिक, विज्ञान साधनों द्वारा, वा युयानों द्वारा आकाशगमन । निधं 4 । शिक्षते शिक्षति दानकर्मा (निधं० ३।२० ) । (५) २०वेँ सक्त के भाष्य में सायणाचार्य ने 'सदंपुष्पा' का कथन किया है, जिसेकि सूक्त में देवी गोषधि, अर्थात् दिव्य गु्णोवाली ओषधि कहा है । योगदशेन में भी “जन्मौषधिमन्त्रतपः समाधिजाः सिद्धयः" (योग ० ४।१) दवारा ओषधियों को भी सिद्धिजनक कहा है । इस सम्बन्ध मे योगभाष्यकार व्यासमूनि ने कहा है कि “ओषधिभिः असुर'-भवनेषु रसायनेनेत्येवमादि"" ।

English

Increasing ever more and ever more his wealth, he makes the pious dwell within unbroken bounds. These are ne’er lost, no robber ever injures them: no evil-minded foe attempts to harass them.

अध्याय ४

श्लोक 20.1

पिशाचक्षयणम्।१-९ मातृनामा।मातृनामा।अनुष्टुप्, १ स्वराट्, ९ भुरिक्।आ प॑श्यति॒ प्रति॑ पश्यति॒ परा॑ पश्यति॒ पश्य॑ति ।दिव॑म॒न्तरि॑क्ष॒माद् भूमिं॒ सर्वं॒ तद् दे॑वि पश्यति

piśācakṣayaṇam| 1-9 mātṛnāmā| mātṛnāmā| anuṣṭup, 1 svarāṭ, 9 bhurik| ā paśyati prati paśyati parā paśyati paśyati | divamantarikṣamād bhūmiṃ sarvaṃ tad devi paśyati

हिन्दी अर्थ

सम्भवतः किसी ओषधि के सेवन से दुष्टिशवित में तीव्रता आ जाती जसेकि योगशक्ति द्वारा योगी इनका दशंन कर सकता है । वतमान समय दरुरबीन रूपी कृत्रिम यन्वरद्वारा भी दररदुर की वस्तुओं का दशेन होताहै। कर रहे है तथा चन्द्रमा तक मी सरीर यात्राहो चुकी है ।

English

The master of the kine lives a long life with these, the Cows whereby he pours his gifts and serves the Gods.

अध्याय ४

श्लोक 20.2

ति॒स्रो दिव॑स्ति॒स्रः पृ॑थि॒वीः षट् चे॒माः प्र॒दिशः॒ पृथ॑क्।त्वया॒हं सर्वा॑ भू॒तानि॒ पश्या॑नि देव्योषधे

tisro divastisraḥ pṛthivīḥ ṣaṭ cemāḥ pradiśaḥ pṛthak| tvayāhaṃ sarvā bhūtāni paśyāni devyoṣadhe

हिन्दी अर्थ

देवांश्च याभियजते ददाति च ज्योगित्ताभिः सचते गोप॑तिः सह ॥३। (ताःन नशन्ति) वे गौं नष्ट नहीं होती, (न तस्करः दभाति) न चोर, न डाक दम्भपूवेकं इनका चौर्यं कर पाताहै, (आमित्रः--भमित्रः ) डश्मन (व्यथिः ) पीड़ादायक होकर (आसाम्) इन गौओं का (न आ दधषति) धर्षण नहीं करता । (याभिः) जिन गौं दारा (गोपतिः) गो रक्षक बना रहता है । दभाति = लेट् लकार, आट् आगम । नता अर्व रेणुककाोऽगनुत न संस्कृतत्रमुप यन्तिता अमि। रेणुककाटः -= रेणु (मृत्कण)-। कक (लौल्ये, भ्वादिः) अगत (कृती) छेदने, काटना, (तुदादिः, रुधादिः) + त्र + अल्, (सप्तम्येकवचन)

English

The charger with his dusty brow o’ertakes them not, and never to the shambles do they take 44 their way.

अध्याय ४

श्लोक 20.3

दि॒व्यस्य॑ सुप॒र्णस्य॒ तस्य॑ हासि क॒नीनि॑का ।सा भूमि॒मा रु॑रोहिथ व॒ह्यं श्रा॒न्ता व॒धूरि॑व

divyasya suparṇasya tasya hāsi kanīnikā | sā bhūmimā rurohitha vahyaṃ śrāntā vadhūriva

हिन्दी अर्थ

(निघं० ३।४) । अथवा गायम् गाने का स्थान, वेदमन्त्र के गाने का स्थान, यज्ञगाला, “गायति अ्चतिकर्मा'' (निवं० ३।१४) । (मे) मेरे लिए (गावः इच्छात् ) गौं चाहे, (गावः ) गौं अर्थात् उनका दुघ भक्षणीय है । (इमाः याः गावः) ये जो गौं हैँ मानो (सः इनदरः) वे एेदवर्य- सम्पन्न राजाकेहीरूपरहै, अतः (हृदा) हृदय द्वारा, (मनसा) ओर मन (गावः) हि गौभो ! (यूयम्) तुम (कृशम् चित्) कमजोर को भी (मेदयथा) मोटा कर देती हौ, (अश्रीरम्, चित्) शोभासेरर्हितकोभी (सृप्रतीकम् ) उत्तम शोभायुक्त अवयवोंवाला (कृणुथ) कर देती हो। (भद्रवाचः) कल्याणकारिणी तथा सुखप्रद आवाजों रम्भारव वालीहै

English

These Cows, the cattle of the pious worshipper, roam over wide- spread pasture where no danger is.

अध्याय ४

श्लोक 20.4

तां मे॑ सहस्रा॒क्षो दे॒वो दक्षि॑णे॒ हस्त॒ आ द॑धत्।तया॒हं सर्वं॑ पश्यामि॒ यश्च॑ शू॒द्र उ॒तार्यः॑

tāṃ me sahasrākṣo devo dakṣiṇe hasta ā dadhat| tayāhaṃ sarvaṃ paśyāmi yaśca śūdra utāryaḥ

हिन्दी अर्थ

कर देती हो, (वः वयः) तुम्हारा अन्न (सभासु) सभाम (वृहत्) महत्व- शाली या वृद्धिकारक (उच्यते कहा जाता है । भरजाव॑ती; सूयव॑से रुशन्तीः शुद्धा श्रपः संभपाणे पिबन्तीः । (प्रजावतीः) वचछडे-बछछडियोंवाली, (सूयवसे) उत्तम घासवाले प्रदेश (मा ईशत) चुरानेमें अधिकारयुक्त नहो, (मा अघणंसः) न हत्यारा तुम्हारा

English

To me the Cows seem Bhaga, they seem Indra, they seem a portion of the first poured Soma. These present Cows, they, O ye men, are Indra. I long for Indra with my heart and spirit. O Cows, ye fatten e’en the worn and wasted, and make the unlovely beautiful to look on.

अध्याय ४

श्लोक 20.5

आ॒विष्कृ॑णुष्व रू॒पाणि॒ मात्मान॒मप॑ गूहथाः ।अथो॑ सहस्रचक्षो॒ त्वं प्रति॑ पश्याः किमी॒दिनः॑

āviṣkṛṇuṣva rūpāṇi mātmānamapa gūhathāḥ | atho sahasracakṣo tvaṃ prati paśyāḥ kimīdinaḥ

हिन्दी अर्थ

(परि वृणक्तु) परिवजंन करे, तुमपर न भिरे। की वर्षा करनेवाला (कृणु) कर । (अस्य अमित्रान्) ओर इसके वि रोधियों उन सव वि रोधियों को (अस्म) इसके लिए (रन्धय) निज वण में कर, (अह्- मन्त्र मे भे" द्वारा, दलके मुखिया ने अपने उम्मीदवार को चुनाव के लिए प्रस्तुत किया है, जेसे कि वतमान मे राजनंतिक चुनावों मे प्रथा चालू

English

Prosper my home, ye with auspicious voices! Your power is magnified in our assemblies. In goodly pasturage, bright-hued, prolific, drinking pure water at fair drinking-places,

अध्याय ४

श्लोक 20.6

द॒र्शय॑ मा यातु॒धाना॑न् द॒र्शय॑ यातुधा॒न्यः ।पि॒शा॒चान्त्सर्वा॑न् दर्श॒येति॒ त्वा र॑भ ओषधे

darśaya mā yātudhānān darśaya yātudhānyaḥ | piśācāntsarvān darśayeti tvā rabha oṣadhe

हिन्दी अर्थ

सम्राड वरुणश्च राजा" (यजुः° ८।३७) । “अहमृत्तरेषु"' दारा चुनाव में मे नियुक्त कर, ओर (तम्) उसे (निर् भज) सेवक रूप से पृथक् कर, (यः) केवल नगरवासियों की ही सेवा करनेवाला न हो, अपितु राष्ट के प्रत्येक ग्राम में प्रजाओं की सेवा करने वाला हो । आभज=ञजा + भज सेवायाम् (द्यावापृथिवी) है द्यौः तथा पृथिवी ! तुम दोनों (अस्मे) इस राजा के लिए (भूरि) प्रभूत तथा (वामम्) संभजनीय या याचनीय धन का (दुहाथाम्) दोहन करो, प्रदान करो, (इव) जंसेकि (घर्मदुघे) धारोष्ण दुग्ध का दोहन करने वाली (धेनू) दो दुधार-गौषएं दूध का दोहन अथति्

English

Never be thief or sinful man your master, and may the dart of Rudra still avoid you! A benediction on a newly consecrated king

अध्याय ४

श्लोक 20.7

क॒श्यप॑स्य॒ चक्षु॑रसि शु॒न्याश्च॑ चतुर॒क्ष्याः ।वी॒ध्रे सूर्य॑मिव॒ सर्प॑न्तं॒ मा पि॑शा॒चं ति॒र॒स्क॑रः

kaśyapasya cakṣurasi śunyāśca caturakṣyāḥ | vīdhre sūryamiva sarpantaṃ mā piśācaṃ tiraskaraḥ

हिन्दी अर्थ

ओर अन्य पशुओं का भी (प्रियः) प्रिय यह ह प्रति, धन प्रदान करती है, वैसे गौ, ओषधियां ओर मन्य पशु, इस राजा ही वसुन्धरा, वह राजा के लिए नानाविध वस्तुओं को प्रदान कररहीहै यो; भी ताप, प्रकाश, शुद्ध वायु तथा वषरूपी धन का प्रदान स्वयमेव ६० अथर्वेवेदमाष्य काण्ड ४। अनु° ५। सूक्तं २१

English

Exalt and strengthen this my Prince, O Indra, Make him sole lord and leader of the people. Scatter his foes, deliver all his rivals into his hand in struggles for precedence.

अध्याय ४

श्लोक 20.8

उद॑ग्रभं परि॒पाणा॑द् यातु॒धानं॑ किमी॒दिन॑म्।तेना॒हं सर्वं॑ पश्याम्यु॒त शू॒द्रमु॒तार्य॑म्

udagrabhaṃ paripāṇād yātudhānaṃ kimīdinam| tenāhaṃ sarvaṃ paśyāmyuta śūdramutāryam

हिन्दी अर्थ

इसके प्रति कर रही है। वामम् =वन षण संभक्तौ (भ्वादिः) तथा वनुं को (ते) तेरे लिए (युनज्मि) सहयोगी रूप मे नियुक्त करता हं, (येन) जिसके सहयोग द्वारा (जयन्ति) तेरे सैनिक विजयी होते ह, (न पराजयन्ते) भौर (ते) तेरे (सपत्नाः) शत्रू (अधरे) तेरे नीचेहुएहै, (येकेच) जो कोई कि है, (शत्रूयताम्) शत्रुता चाहने--करनेवालों की (भोजनानि) भोजन- सामग्रियों को (आभर), आहरण करले, छीन नले।

English

Give him a share in village, kine, and horses, and leave his enemy without a portion. Let him as King be head and chief of Princes, Give up to him, O Indra, every foeman.

अध्याय ४

श्लोक 20.9

यो अ॒न्तरि॑क्षेण॒ पत॑ति॒ दिवं॒ यश्चा॑ति॒सर्प॑ति ।भूमिं॒ यो मन्य॑ते ना॒थं तं पि॑शा॒चं॑ प्र द॑र्शय

yo antarikṣeṇa patati divaṃ yaścātisarpati | bhūmiṃ yo manyate nāthaṃ taṃ piśācaṃ pra darśaya

हिन्दी अर्थ

सिहमतीको विशो अद्धि सवा व्याघ्रपतीकोऽव॑वाधस्व शतन । (सिहप्रतीकः) शेर के सदृश (सर्वाः विशः) शत्रू कौ सव प्रजाओं को भेदिये के सदृश (शत्रून्) शत्रुओं को (अव बाधस्व) तू पिलोडित कर। (यम्) जिसेकि (वहुधा) बहुत प्रकार से (इन्धते) उपासक निज हृदयो

English

Let him be treasure-lord of goodly treasures, let him as King be master of the people. Grant unto him great power and might, O Indra, and strip his enemy of strength and vigour.

अध्याय ४

श्लोक 21.1

गावः।१-७ ब्रह्मा ।गावः ।त्रिष्टुप्, २-४ जगती आ गावो॑ अग्मन्नु॒त भ॒द्रम॑क्र॒न्त्सीद॑न्तु गो॒ष्ठे र॒णय॑न्त्व॒स्मे।प्र॒जाव॑तीः पुरु॒रूपा॑ इ॒ह स्यु॒रिन्द्रा॑य पू॒र्वीरु॒षसो॒ दुहा॑नाः

gāvaḥ| 1-7 brahmā | gāvaḥ | triṣṭup, 2-4 jagatī ā gāvo agmannuta bhadramakrantsīdantu goṣṭhe raṇayantvasme| prajāvatīḥ pururūpā iha syurindrāya pūrvīruṣaso duhānāḥ

हिन्दी अर्थ

हए को (ईमहे) हम प्राप्त होते है, (सः) वह॒ अग्नि (नः) हमे (अंहसः) पाप से (मुञ्चतु) छृडाए् । लिए कहा है कि ये पांच पंचकों से उत्पन्न हूए हँ, (१) प्रकृति तथा अन्तः पंचक । (३) तीसरा पंचक है, पञ्चभरुत । (४) चौथा पंचकं है पञ्च की उपासना से पापसे मोचन होता है।

English

Like milch-kine yielding milk for warm libations, pour, Heaven and Earth! on him full many a blessing. May he as King be Indra’s well-beloved, the darling of the kine, the plants, the cattle.

अध्याय ४

श्लोक 21.2

इन्द्रो॒ यज्व॑ने गृण॒ते च॒ शिक्ष॑त॒ उपेद् द॑दाति॒ न स्वं मु॑षायति ।भूयो॑भूयो र॒यिमिद॑स्य व॒र्धय॑न्नभि॒न्ने खि॒ल्ये नि द॑धाति देव॒युम्

indro yajvane gṛṇate ca śikṣata uped dadāti na svaṃ muṣāyati | bhūyobhūyo rayimidasya vardhayannabhinne khilye ni dadhāti devayum

हिन्दी अर्थ

यथां हव्यं वहसि जातवेदो यथां यज्ञं करपय सि प्रजानन् । एवा देवेभ्यः; सुमति नआ वहस नौं मुञ्चत्वंहसः ॥२॥ करता है, (एवा) इसी प्रकार (देवेभ्यः) दिव्यगरुणी आचाय आदि देवों से (नः) हमे (सुमतिम्) सुमति को (आ वह) प्राप्त करा, (सः) वह अग्नि (नः) हमे पाप से (मुञ्चतु) छ्डाए । करता हूं, (सः) वह (नः) हमें (अंहसः) पाप से (मृञ्चतु) छडाए । उ" (अथवं ० ४।३६।६) । परमेश्वराग्नि ही पाप करने से छृड़ा सकती है, जड़ या्ञिकाग्नि नहीं । सायणाचायं आदि भी याज्ञिक पद्धतिमे, भमग्नि आदि को चेतनाधिष्ठित ही मानते हैं ।

English

I join in league with thee victorious Indra, with whom men conquer and are ne’er defeated. He shall make thee the folk’s sole lord and leader, shall make thee highest of all human

अध्याय ४

श्लोक 21.3

न ता न॑शन्ति॒ न द॑भाति॒ तस्क॑रो॒ नासा॑मामि॒त्रो व्य॒थिरा द॑धर्षति ।दे॒वांश्च याभि॒र्यज॑ते॒ ददा॑ति च॒ ज्योगित् ताभिः॑ सचते॒ गोप॑तिः स॒ह

na tā naśanti na dabhāti taskaro nāsāmāmitro vyathirā dadharṣati | devāṃśca yābhiryajate dadāti ca jyogit tābhiḥ sacate gopatiḥ saha

हिन्दी अर्थ

मेहम आह्वान करते ह, (सः) वह् (नः) हमे (अंहसः) पापसे (मुञ्चतु) (सुजातम् ) परमेदवराग्ति जब हृदय में प्रकट होती है तब उसका जातवेदसम = “जातवेदाः, जातानि वेद, जातानि वैनं विदुः, जाते (येन यजा) जिसके सहयोग द्वारा (ऋषयः ) ऋषियों ने (बलम्) निजबल को (अद्योतयन्) चमकाया, (येन) जिसके सहयोग द्वारा (असुराणाम्) देवासुर-संग्राम में आसुरभावों की (मायाः) छल-कपट कौ

English

rulers. Supreme art thou, beneath thee are thy rivals, and all, O King, who were thine adversaries. Sole lord and leader and allied with Indra, bring, conqueror, thy foremen’s goods and

अध्याय ४

श्लोक 21.4

न ता अर्वा॑ रे॒णुक॑काटोऽश्नुते॒ न सं॑स्कृत॒त्रमुप॑ यन्ति॒ ता अ॒भि।उ॒रु॒गा॒यमभ॑यं॒ तस्य॒ ता अनु॒ गावो॒ मर्त॑स्य॒ वि च॑रन्ति॒ यज्व॑नः

na tā arvā reṇukakāṭo'śnute na saṃskṛtatramupa yanti tā abhi| urugāyamabhayaṃ tasya tā anu gāvo martasya vi caranti yajvanaḥ

हिन्दी अर्थ

निज दुर्व्यवहारों को (जिगाय) जीता, (सः) वह् परमेरवराग्नि (नः) हमें हसः) पाप से (मूञ्चतु) छृडाए । न यन 36 = (अदादिः) । पणीन् =पण व्यवहारे येन॑ देवा ज्रमृत॑मन्वविन्दन येनो ष॑थीमषुंमतीरपण्वन । 8 जिसके सहयोग द्वारा, (देवाः) साध्यो-तथा-छषियं ने, किया, (येन ) जिसके सहयोग द्वारा (देवाः) व्यवहार-कुशल व्यक्तियों ने (ओषधीः) ओषधियों को ( मधुमतीः) मक्षु रसवाली (अक्रण्वन्) किया; (येन) जिसके सहयोग द्वारा ( देवाः) दिव्य गुणियों ने (स्वः) सुखविशेष या

English

treasures. Consume, with lion aspect, all their hamlets, with tiger aspect, drive away thy foemen.

अध्याय ४

श्लोक 21.5

गावो॒ भगो॒ गाव॒ इन्द्रो॑ म इच्छा॒द् गावः॒ सोम॑स्य प्रथ॒मस्य॑ भ॒क्षः ।इ॒मा या गावः॒ स ज॑नास॒ इन्द्र॑ इ॒च्छामि॑ हृ॒दा मन॑सा चि॒दिन्द्र॑म्

gāvo bhago gāva indro ma icchād gāvaḥ somasya prathamasya bhakṣaḥ | imā yā gāvaḥ sa janāsa indra icchāmi hṛdā manasā cidindram

हिन्दी अर्थ

-) हमे (अंहसः) पाप से (मूञ्चतु) छृडाए । ५ कु 4 री सम्बन्ध अभिप्रेत है। देवाः=“साध्याः कृषक जल सेचन कर यव-त्रीहि भादि ओषधियों को मधुर रसवती करते दुढा येन स्व स्तभितं येन नाकः (यजुः० ३२।६) में अन्य लोकों के समवाय में स्वः" का कथन हुमा है, अतः स्व" भी एक लोक ही प्रतीत होता है । ऋषि दयानन्द 'स्वः' द्वारा 'सुखविशेष' अथं मानते हँ । मधुमतीः == मधु उदकनाम (निं ० १।१२), मधुर उदक सेचन कर, ओोषधियौं को मधुररस्- ६४ अथरवेवेदभाष्य काण्ड ४। अनु° ५। सूक्त २४

English

Sole lord and leader and allied with Indra, seize, conqueror, thine enemies’ possessions. Magnification of Agni and prayer for his protection I fix my heart on wise and ancient Agni, the Five Tribes’ Lord, in many a place enkindled.

अध्याय ४

श्लोक 21.6

यू॒यं गा॑वो मेदयथ कृ॒शं चि॑दश्री॒रं चि॑त् कृणुथा सु॒प्रती॑कम्।भ॒द्रं गृ॒हं कृ॑णुथ भद्रवाचो बृ॒हद् वो॒ वय॑ उच्यते स॒भासु॑

yūyaṃ gāvo medayatha kṛśaṃ cidaśrīraṃ cit kṛṇuthā supratīkam| bhadraṃ gṛhaṃ kṛṇutha bhadravāco bṛhad vo vaya ucyate sabhāsu

हिन्दी अर्थ

(इदम्) यह (यत् ) जो (विरोचते) विविधरूपों मेँ चमकत है, (यत् मँ स्तुति करता ह, (नाधितः) उस स्वामीवाला हआ मँ (जोहवीमि) बार- नार उसका आह्वान करता हूं, (सः) वहु (नः) हमे (अंहसः) पापसे को लक्ष्य करके (एति) आता है, प्रकट होता है (सः) वह (नः) हमें (अंहसः) पाप से (मुञ्चतु) छडाए । सूक्त २३से २६ तक के सूक्तों मेँ पाप-मोचन का वर्णन हमा है ।

English

We seek him who hath entered all our houses. May he deliver us from grief and trouble. As thou conveyest offerings, Jātavedas! and fashionest the sacri- fice with knowledge,

अध्याय ४

श्लोक 21.7

प्र॒जाव॑तीः सू॒यव॑से रु॒शन्तीः॑ शु॒द्धा अ॒पः सु॑प्रपा॒णे पिब॑न्तीः ।मा व॑ स्ते॒न ई॑शत॒ माघशं॑सः॒ परि॑ वो रु॒द्रस्य॑ हे॒तिर्वृ॑णक्तु

prajāvatīḥ sūyavase ruśantīḥ śuddhā apaḥ suprapāṇe pibantīḥ | mā va stena īśata māghaśaṃsaḥ pari vo rudrasya hetirvṛṇaktu

हिन्दी अर्थ

रस ऋषिद्वाराप्रकटहुएहैँ तो भी तद्धिन्न ऋषियोंको भी काल-काल प्राप्त होते है, यह “उपमा इमे आ अगुःद्रारा सूचित होता है । सेनाओं को (ययुः) हमसे पृथक् करता है, (यः) जिसने (दानवानाम्) ं के (बलम्) बल को (आरस्रोज) पूणंतया भग्न कियारहै, (येन) जिसने ( ५ तथा (गावः) गौमं को (जिताः) जीत लिया है, (सः) वह इन्द्र (नः) हमें (अंहसः) पापसे (मुञ्चतु) छडाए ।

English

So bear thou to the Gods the prayer we utter. May he deliver us from grief and trouble. I pray to Agni in each act successful, employed in every sacrifice, the strongest, Fiend-slayer, served with fatness, strengthening worship. May he deliver us from grief and

अध्याय ४

श्लोक 22.1

अमित्रक्षयणम्।१-७ वसिषठः, अथर्वा वा।क्षत्रियो राजा, इन्द्रश्च।त्रिष्टुप्।इ॒ममि॑न्द्र वर्धय क्ष॒त्रियं॑ म इ॒मं वि॒शामे॑क वृ॒षं कृ॑णु॒ त्वम्।निर॒मित्रा॑नक्ष्णुह्यस्य॒ सर्वां॒स्तान् र॑न्धयास्मा अहमुत्त॒रेषु॑

amitrakṣayaṇam| 1-7 vasiṣaṭhaḥ, atharvā vā| kṣatriyo rājā, indraśca| triṣṭup| imamindra vardhaya kṣatriyaṃ ma imaṃ viśāmeka vṛṣaṃ kṛṇu tvam| niramitrānakṣṇuhyasya sarvāṃstān randhayāsmā ahamuttareṣu

हिन्दी अर्थ

वः (उणा० १।१५५), नाशक काम-कोध आदि । (सिन्धवः = स्यन्दन (यः) जो इन्द्र (चषेणिप्रः) मनुष्यों की अभिलापाओों को पूणे होता) सात होताओं द्वारा निष्पन्न होता है, जो (मदिष्ठः) अति हषकारी है (सः) वह इन्द्र (नः) हमे (अंहसः) पाप से (मृञ्चतु) छ्डाए । ध चषेणिप्रः= चषेणयः मनुष्यनाम (निघं० २।३), प्रा पूरणे

English

trouble. We invoke the oblation-bearer, well-born Agni Jātavedas,

अध्याय ४

श्लोक 22.2

एमं भ॑ज॒ ग्रामे॒ अश्वे॑षु॒ गोषु॒ निष्टं भ॑ज॒ यो अ॒मित्रो॑ अ॒स्य।वर्ष्म॑ क्ष॒त्राणा॑म॒यम॑स्तु॒ राजेन्द्र॒ शत्रुं॑ रन्धय॒ सर्व॑म॒स्मै

emaṃ bhaja grāme aśveṣu goṣu niṣṭaṃ bhaja yo amitro asya| varṣma kṣatrāṇāmayamastu rājendra śatruṃ randhaya sarvamasmai

हिन्दी अर्थ

नाम (निघं० २।१०); बलनाम (निघं० २।९) । सप्तहोतारः== सात "होता" ऋत्विक्") । द (वशासः) गौ, (ऋषभासः) बेल, (उक्षणः) सेचन समर्थं अर्थात् युवा वैल (यस्य) जिसके है, (स्वविदे) सुखविशेष को शा या स्वलोक (मीयन्ते) फंके जते दृष्कर्मियों के विनाश के लिए, (यस्मै) जिसकी शक्ल चन्द्रमा (पवते) गति करता है, (सः) वह् (नः) हमे (अंहसः) पापसे

English

Him, Vaisvānara, almighty. May he set us free from trouble. With whom as friend the Rishis gave their power new splendour, with whom they kept aloof the Asuras’ devices,

अध्याय ४

श्लोक 22.3

अ॒यम॑स्तु धन॑पति॒र्धना॑नाम॒यं वि॒शां वि॒श्पति॑रस्तु॒ राजा॑ ।अ॒स्मिन्नि॑न्द्र॒ महि॒ वर्चां॑सि धेह्यव॒र्चसं॑ कृणुहि॒ शत्रु॑मस्य

ayamastu dhanapatirdhanānāmayaṃ viśāṃ viśpatirastu rājā | asminnindra mahi varcāṃsi dhehyavarcasaṃ kṛṇuhi śatrumasya

हिन्दी अर्थ

९६ अथर्वेवेदभाष्य काण्ड ४। अनु° ५। सूक्त २४ (हवन्ते) आह्वान करते हैँ; (यस्मिन्) जिसमे (अकः) अचेना का साधनभूत (ओजः) सब ओज आशय पाये हुए हँ, (सः) वह (नः) हमे (अंहसः मुञ्चतु हुजा है । सोमयाजी सोमयज्ञ द्वारा उसकी प्रीतिकीदही कामनाकरतेहं।

English

Agni, with whom Indra subdued the Panis. May he deliver us. from grief and trouble. Through whom the Gods discovered life eternal, through whom they stored the plants with

अध्याय ४

श्लोक 22.4

अ॒स्मै द्यावा॑पृथिवी॒ भूरि॑ वा॒मं दु॑हाथां घर्म॒दुघे॑ इव धे॒नू।अ॒यं राजा॒ प्रि॒य इन्द्र॑स्य भूयात् प्रि॒यो गवा॒मोष॑धीनां पशू॒नाम्

asmai dyāvāpṛthivī bhūri vāmaṃ duhāthāṃ gharmadughe iva dhenū| ayaṃ rājā priya indrasya bhūyāt priyo gavāmoṣadhīnāṃ paśūnām

हिन्दी अर्थ

भवति यदनेनाचंन्ति"' (निरुक्त ५।१।४) तथा अकं: सूयः । मन्त्र में कृष्यादि की इच्छा से जल की याचना । (उद्यतः वजः) उठाया हभ व (अहिम्) मेघ या पाप-सपं को (अभ्यायत) साक्षात् हिसा करता है, (स नो मुञ्चतु अंहसः) वह हमे पाप-सपं से छ्डाए । है, उत्पतत्यर्थक नहीं, देखो (अथर्व ° १३।४ (४) । ३०-- ३६) । ˆ

English

pleasant juices, Through whom they brought to men the light of heaven. May he deliver us from grief and 45

अध्याय ४

श्लोक 22.5

यु॒नज्मि॑ त उत्त॒राव॑न्त॒मिन्द्रं॒ येन॒ जय॑न्ति॒ न प॑रा॒जय॑न्ते ।यस्त्वा॒ कर॑देकवृ॒षं जना॑नामु॒त राज्ञा॑मुत्तमं मा॑न॒वाना॑म्

yunajmi ta uttarāvantamindraṃ yena jayanti na parājayante | yastvā karadekavṛṣaṃ janānāmuta rājñāmuttamaṃ mānavānām

हिन्दी अर्थ

रूप मे (नयति) हमारा नेता बनता दहै, (यः) ओौर जो (द्वयानि) दोनों अर्थात् देवों ओर असुरो के (पृष्टानि) परिपुष्ट बलों मे (संसृजति) संसं वैदा करता है, उन्ह परस्पर भिडाता है, (नाथितः) उस स्वामीवालार्म उसे बार-वार पुकारता हं सहायतार्थं , (स नौ मुञ्चतु अंहसः) वह हमें पापासुर से मुक्त करे) स्तौमि, जोहवीमि द्वारा, स्तोता ओर आह्वाता एकं ही, सबके लिए मंगल कामना करता है । ओर (यौ) जो कि तुम दो (रक्षथः) उस जगत् की रक्षाकरतेहो। (यौ) कियाटैकि जड जगत् भौर परमेश्वरम शरीरात्मभाव दहै। जगत् परमेदवरका शरीरदहै, ओर परमेडवर इस शरीर में आत्मरूपहै । जसे शरीर द्वारा कयि काम

English

trouble. I, suppliant, praise and ever call on Agni, sole Lord of all this world, of all that shineth,

अध्याय ४

श्लोक 22.6

उत्त॑र॒स्त्वमध॑रे ते स॒पत्ना॒ ये के च॑ राज॒न् प्रति॑शत्रवस्ते ।ए॒क॒वृ॒ष इन्द्र॑सखा जिगी॒वां छ॑त्रूय॒तामा भ॑रा॒ भोज॑नानि

uttarastvamadhare te sapatnā ye ke ca rājan pratiśatravaste | ekavṛṣa indrasakhā jigīvāṃ chatrūyatāmā bharā bhojanāni

हिन्दी अर्थ

समे जाते, वैसे इस अंहसः मोचन" प्रकरण मे भी "वायु-सविता' आदि द्वारा किये गये अंहसः मोचन' भी परमेश्वर ह्वारा ही करिये गये समने चादिं । अंहः से छडाते हँ । यक्ष्मरोग पृथिवीस्थ मनुष्यों को होता है, अतः (ययोः) जिन दोके (पाथिवानि) प्रथिवी सम्बन्धी (वरिमा (कश्चन) कोई भी (न अन्वानशे) नहीं प्राप्त हृभा, (तौ) वे दो (नः) हमें (अंहसः) पापजन्य कष्ट से (मुञ्चतम्) छृडाएं ।

English

Of what exists and shall exist hereafter. May he deliver us from grief and trouble. A hymn of prayer and praise to Indra I think of Indra, only him for ever, fiend-slayer, May these lauds of mine come near him.

अध्याय ४

श्लोक 22.7

सिं॒हप्र॑तीको॒ विशो॑ अद्धि॒ सर्वा॑ व्या॒घ्रप्र॑ती॒कोऽव॑ बाधस्व॒ शत्रू॑न्।ए॒क॒वृ॒ष इन्द्र॑सखा जिगी॒वां छ॑त्रूय॒तामा खि॑दा॒ भोज॑नानि

siṃhapratīko viśo addhi sarvā vyāghrapratīko'va bādhasva śatrūn| ekavṛṣa indrasakhā jigīvāṃ chatrūyatāmā khidā bhojanāni

हिन्दी अर्थ

गतौ (भ्वादिः) । वायु=शुद्धवायु तथा “सविता” अर्थात् उदित सू्ंकी ररिमर्या, पवित्र करके, पापजन्य कष्टों से छृडाती हैँ । (जनासः) प्रजाजन (नि विशन्ते) निजकार्यो मेँ नियमपूवेक प्रवेश करते रहै, उदय होने पर (प्रेरते) वे निजकार्यो मे प्रेरित होते है; (वायो) है वायु प्राणियों कौ (रक्षथः) रक्षा करते हो, (तौ) वे तुम दोनों (नः अंहसः

English

He cometh to the pious offerer’s calling. May he deliver us from grief and trouble. Who with strong arms o’ercame his strong opponents, who broke and crushed the power of

अध्याय ४

श्लोक 23.1

पाप-मोचनम्।१-७ मृगारः।प्रचेता अग्निः।त्रिषटुप्, ३ पुरस्ताज्ज्योतिष्मती, ४ अनुष्टुप्, ६ प्रस्तारपङ्क्तिः।अ॒ग्नेर्म॑न्वे प्रथ॒मस्य॒ प्रचे॑तसः॒ पाञ्च॑जन्यस्य बहु॒धा यमि॒न्धते॑ ।विशो॑ विशः प्रविशि॒वांस॑मीमहे॒ स नो मुञ्च॒त्वंह॑सः

pāpa-mocanam| 1-7 mṛgāraḥ| pracetā agniḥ| triṣaṭup, 3 purastājjyotiṣmatī, 4 anuṣṭup, 6 prastārapaṅktiḥ| agnermanve prathamasya pracetasaḥ pāñcajanyasya bahudhā yamindhate | viśo viśaḥ praviśivāṃsamīmahe sa no muñcatvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

अपेता वाया सविता च॑ दुष्कृतमप् रक्षांसि शिभिंदां च सेधतम् (वायो) है वायु (च) ओर (सविता) सविता तुम दोनों (इतः) इस पृथिवी से (दष्कृतम्) दुष्कमं को, अप सेधतम् अपगत करो दुर करो, हटाओ, (रक्षांसि) दष्कर्मरूपी राक्षसी भावों को, (च) ओर (हि) निर्चय से (ऊजेया) वल ओर प्राणदायक ऊर्जा के साथ (सं सुजथः) टमारा संसगं करते हो; (वलेन) ओर वल के साथ (सम्) हमारा संसगं करते हो, (तौ) वे तुम दोनों (नः अंहसः मुञ्चतम्) हमे पापजन्य कष्टों से छेडाओ--मुक्त करो ।

English

the demons, Who won the rivers and the kine in battle. May he deliver us from grief and trouble. Ruler of men, finder of light, the hero: the pressing-stones declare his valour, master.

अध्याय ४

श्लोक 23.2

यथा॑ ह॒व्यं वह॑सि जातवेदो॒ यथा॑ य॒ज्ञं क॒ल्पय॑सि प्रजा॒नन्।ए॒वा दे॒वेभ्यः॑ सुम॒तिं न॒ आ व॑ह॒ स नो॑ मुञ्च॒त्वंह॑सः

yathā havyaṃ vahasi jātavedo yathā yajñaṃ kalpayasi prajānan| evā devebhyaḥ sumatiṃ na ā vaha sa no muñcatvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

जव दुष्करम ओर राक्षसी भाव ओौर शिमिदा अपगतहौ गये, तो पापों से चुटकारा स्वयमेव हौ गया। शिमिदा==शिमि-+-दाप् लवणे (सवितः वायो) है सविता है वायु! (ऊतये) रक्षा के लिप् (मादयाथः) तुम हमे हषं प्रदान करो, अथवा तृप्त करो । (वामस्य) वननीय सुमति की प्राप्ति हो जाने से पाप-कमं नहीं होते, ओर पाप करने सेचटकाराहोजातादहै। मत्सर दहै सोम, जोकि तुप्तिकरताहैन कि मद।

English

Of sweetest sacrifice with seven Hotars. May he deliver us from grief and trouble. The lord of barren cows and bulls and oxen, finder of light for whom the posts are planted,

अध्याय ४

श्लोक 23.3

याम॑न्याम॒न्नुप॑युक्तं॒ वहि॑ष्ठं॒ कर्म॑न्कर्म॒न्नाभ॑गम् ।अ॒ग्निमी॑डे र॒क्षो॒हणं॑ यज्ञ॒वॄधं॑ घृ॒ताहु॑तं॒ स नो॑ मुञ्च॒त्वंह॑सः

yāmanyāmannupayuktaṃ vahiṣṭhaṃ karmankarmannābhagam | agnimīḍe rakṣohaṇaṃ yajñavṝdhaṃ ghṛtāhutaṃ sa no muñcatvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

१०० अधर्ववेदभाष्य काण्ड) अनु० ५) सूक्तं २५ स्तौमि देवं सवितारं च वायुं तो नों मृश्चतम॑हसः ॥७॥ (देवयोः) दिन्यगणोँवाले सविता ओर वायु के (धामन्) अपने-अपने सविता भौर वायु कौ (स्तौमि) म स्तुति करता हूं, उनके गुणों का कथन करता हूं । (तौ नो मुञ्चतम् अंहसः) अथै, पूववत् । तथा सविता का स्थानद द्युलोक वायु के स्थान से शुद्धवायु हमारे इवास- प्रवास काहैतु है, तथा जल ओर मेघकामी। सविताके स्थानसेताप

English

For whom the bright juice flows cleansed by devotion. May he deliver us from grief and trouble. Whose favour those desire who offer Soma, whom, arrow-bearer, men invoke in battle,

अध्याय ४

श्लोक 23.4

सुजा॑तं जा॒तवे॑दसम॒ग्निं वै॑श्वान॒रं वि॒भुम्।ह॒व्य॒वाहं॑ हवामहे॒ स नो॑ मुञ्च॒त्वंह॑सः

sujātaṃ jātavedasamagniṃ vaiśvānaraṃ vibhum| havyavāhaṃ havāmahe sa no muñcatvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

द्वारा पाप प्राप्त होते ह। । , (द्यावापृथिवी) है द्यौः ओर पृथिवी (वाम्) तुम दोनों का (मन्वे) मै मनन करता ह, तुम दोनों की महत्ता को मँ जानता हू तुम दोनों (सचेतसौ) एकचित्त हुए (सुभोजसौ) उत्तम पालक तथा उत्तम भोजन अंहसः) अर्थं पूरवेवत् । भोजसौ = भूज पालनाभ्यवहारयोः (रुधादिः ) । मन्वे प्रतिष्ठे ह्यभवतं वसूनां षरदधे देवी सुभगे उरूची ।

English

On whom the hymn depends, in whom is power, May he deliver us from grief and trouble. Why was born, first, for active operation, whose valour as the first hath been awakened,

अध्याय ४

श्लोक 23.5

येन॒ ऋष॑यो ब॒लमद्यो॑तयन् यु॒जा येनासु॑राणा॒मयु॑वन्त मा॒याः ।येना॒ग्निना॑ प॒णीनिन्द्रो॑ जि॒गाय॒ स नो॑ मुञ्च॒त्वंह॑सः

yena ṛṣayo balamadyotayan yujā yenāsurāṇāmayuvanta māyāḥ | yenāgninā paṇīnindro jigāya sa no muñcatvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

स्थिति-स्थान, (प्रवद्ध) परिमाणं मे बहत बढ़ी हुई, (देवी) दान देनेवाली वसुओं का दान , (सुभगे) सौभाग्यप्रद, (उरूची) सदा विस्तारवाली देवी ==देवो दानाद्वा, दीपना, द्योतनाद्वा, दयुस्थानो भवतीति वा तामस भोजनों से सदा पापकम मे प्रवृत्ति होती है । इसीलिए का है कि “रजस्तमो

English

Who raised his bolt when he encountered Ahi. May he deliver us from grief and trouble. Strong Lord, who leadeth hosts to meet for battle, who sendeth riches both of earth and heaven,

अध्याय ४

श्लोक 23.6

येन॑ दे॒वा अ॒मृत॑म॒न्ववि॑न्द॒न् येनौष॑धी॒र्मधु॑मती॒रकृण्वन्।येन॑ दे॒वाः स्व॑१राभ॑र॒न्त्स नो॑ मुञ्च॒त्वंह॑सः

yena devā amṛtamanvavindan yenauṣadhīrmadhumatīrakṛṇvan| yena devāḥ sva1rābharantsa no muñcatvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

जा ओर न द्िसित हो । सर्वोत्तम सास्तविकं मोजन है “दूष मौर मौषभियौ कं रस" । १०२ भथरवेवेदभाष्य काण्ड ४। अनु ° ६ । सूरत २६ (असन्तापे) क्षुधा तथा पिपासा-जन्य सन्ताप से रहित करता हूं । (द्यावापृथिवी भवतं मे स्योने) द्यौ ओौर पृथिवी मेरे लिए

English

I, suppliant, praise and ever call on Indra. May he deliver us from grief and trouble. A hymn of prayer and praise to Vāyu and Savitar

अध्याय ४

श्लोक 23.7

यस्ये॒दं प्र॒दिशि॒ यद् वि॒रोच॑ते॒ यज्जा॒तं ज॑नित॒व्यंऽ च॒ केव॑लम्।स्तौम्य॒ग्निं ना॑थि॒तो जो॑हवीमि॒ स नो॑ मुञ्च॒त्वंह॑सः

yasyedaṃ pradiśi yad virocate yajjātaṃ janitavyaṃ' ca kevalam| staumyagniṃ nāthito johavīmi sa no muñcatvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

करते रह, द्यावापृथिवी मे मातु तथा पितु-बुद्धिसे प्रेरित होकर; जैसे कि ह ओर उसी द्वारा प्रेरित तथा चेष्टावालेहौ रहे है, जैसेकि जीवित शरीर जीवात्मा द्वारा प्रेरित होताहै। तभी कहाहैकि “योऽसावादित्ये पुरुषः विद्यमान परमेश्वर को ही, तथा द्यावापृथिवी मेँ विद्यमान परमेदवर को ही नमस्कार करतादहै, न कि जड़ द्यावापृथिवी आदिको। कविभिः--कविः; ये तमृते विभूथो ये हवीषि ये खघोत्या बिभृथो न मनुष्या न ।

English

I think on Vāyu’s and Savitar’s holy rites, ye twain who penetrate and guard the living world: Ye who have come to be this All’s pervaders, deliver us, ye two from grief and trouble. Ye who have counted up the earth’s expanses, and in the sky smoothed out the air’s mid region,

अध्याय ४

श्लोक 24.1

पापमोचनम्।१-७ मृगारः।इन्द्रः।त्रिष्टुप्, १ शाक्वरीगर्भा पुरःशक्वरी।इन्द्र॑स्य मन्महे॒ शश्व॒दिद॑स्य मन्महे वृत्र॒घ्न स्तोमा॒ उप॑ मे॒म आगुः॑ ।यो दा॒शुषः॑ सु॒कृतो॒ हव॒मेति॒ स नो॑ मुञ्च॒त्वंह॑सः

pāpamocanam| 1-7 mṛgāraḥ| indraḥ| triṣṭup, 1 śākvarīgarbhā puraḥśakvarī| indrasya manmahe śaśvadidasya manmahe vṛtraghna stomā upa mema āguḥ | yo dāśuṣaḥ sukṛto havameti sa no muñcatvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

हे द्यावापृथिवी ! (ये) जोतुम दो (अमृतम्) अमृत को (बिभृथः) धारणः करती हो, (ये) जो तुम दो (हवींषि) हविष्यान्नों को (ये) जो तुम को (विभुधः) धारण करती, मौर पोषित करतीहो, वे तुम दो (मे) मेरे अमृतम् अविनाशी परमेरवर को, मोक्ष को, या जल को। अमृतम् उदकनाम (निघं० १।१२) । अमृतम् अविनाशी परमेदवर को । इस द्वारा मुक्त हो जाना । हविष्यान्नं के सेवन सेपापसे भी छटकारा हो जाता है । जल-चिकित्सा भी पापजन्य रोगौ से छुटकारा देती है ।

English

Whose going-forth hath ne’er been reached by any, deliver us, ye two, from grief and trouble. Beauteously bright! men rest in thy dominion when thou hast risen up and hastened onward.

अध्याय ४

श्लोक 24.2

य उ॒ग्रीणा॑मु॒ग्रबा॑हुर्य॒युर्यो दा॑न॒वानां॒ बल॑मारु॒रोज॑ ।येन॑ जि॒ताः सिन्ध॑वो॒ येन॒ गावः॒ स नो॑ मुञ्च॒त्वंह॑सः

ya ugrīṇāmugrabāhuryayuryo dānavānāṃ balamāruroja | yena jitāḥ sindhavo yena gāvaḥ sa no muñcatvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

(ये दावापृथिवी) जो तुम है दयौः ओौर पृथिवी । (उलियाः ) रिम- को (विभुथः) धारित-पोषित करती हौ, अथवा (ययोः, वां, अन्तः) जिन दो य भीतर (विश्वा भुवनानि) सव भुवन है; वे तुम (मे) मेरे लिए (स्योने) उखा = रदिमयां, उलियाः = रदिमिवाले । अंहसः = अन्धकार ओर कधारूपी पाप से । वनस्पतियों ओर रदिमयों का परस्पर सम्बन्ध है । ये कीछाकैन त्य॑थो ये घृतेन या््यामृते न किञ्चन शंक्नुवन्ति ।

English

Ye, Vāyu, Savitar, preserve all creatures. Deliver us, ye, twain, from grief and trouble. Hence, Vāyu, Savitar drive evil action, chase Simidā away, drive off the demons. Ye give us store of energy and power. Deliver us, ye twain, from grief and trouble.

अध्याय ४

श्लोक 24.3

यश्च॑र्षणि॒प्रो वृ॑ष॒भः स्व॒र्विद् यस्मै॒ ग्रावा॑णः प्र॒वद॑न्ति नृ॒म्णम्।यस्या॑ध्व॒रः स॒प्तहो॑ता॒ मदि॑ष्ठः॒ स नो॑ मुञ्च॒त्वंह॑सः

yaścarṣaṇipro vṛṣabhaḥ svarvid yasmai grāvāṇaḥ pravadanti nṛmṇam| yasyādhvaraḥ saptahotā madiṣṭhaḥ sa no muñcatvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

(ये) जो तुम दो (कीलालेन) अन्न द्वारा (तपयथः) तृप्त करते टो, (ये) जो (घृतेन) घृत दवारा तप्त करते हो, (याभ्याम्, ऋते) जिनदोके विना (किम् चन) कुछभी (न एवनुवन्ति) नहीं कर सकते, वे (यावा- कीलालम् अन्ननाम (निघं० २।७) । कील बन्धने (भ्वादिः) + यन्येदमंभिश्चोचति येनयेन वा कृतं पोरुषेयान्न हैवात् ।

English

Of their own selves let Savitar and Vāyu send favourable strength and wealth and plenty. Here give us perfect freedom from consumption. Deliver us, ye twain, from grief and trouble.

अध्याय ४

श्लोक 24.4

यस्य॑ व॒शास॑ ऋष॒भास॑ उ॒क्षणो॒ यस्मै॑ मी॒यन्ते॒ स्व॒र॑वः स्व॒र्विदे॑ ।यस्मै॑ शु॒क्रः पव॑ते॒ ब्रह्म॑शुम्भितः॒ स नो॑ मुञ्च॒त्वंह॑सः

yasya vaśāsa ṛṣabhāsa ukṣaṇo yasmai mīyante svaravaḥ svarvide | yasmai śukraḥ pavate brahmaśumbhitaḥ sa no muñcatvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

विष्ट करता है, (येन येन वा) अथवा जिस-जिस भी पापद्रारा मै शोकाविष्ट होता ह्, जो पापकि (पौ रुषेयात् ) पुरुष की शक्ति से, (न) इसी प्रकार, ) द्यौः मौर पृथिवी की (स्तौमि) मै स्तुति करता ह दनके सद्गुणो का कथन कर्ता ह जौर (नाथितः) परमेश्वर को निजं १०४ अथर्वेषैदभाष्य काण्ड ४। भनु ° ६ । सक्तं २७

English

Ye, Savitar and Vāyu, to assist us, enjoy the hymn and the delightful cheerer. Come hither downward from the stream of blessing. Deliver us, ye twain, from grief and trouble.

अध्याय ४

श्लोक 24.5

यस्य॒ जुष्टिं॑ सो॒मिनः॑ का॒मय॑न्ते॒ यं हव॑न्त॒ इषु॑मन्तं॒ गवि॑ष्टौ ।यस्मि॑न्न॒र्कः शि॑श्रि॒ये यस्मि॒न्नोजः॒ स नो॑ मुञ्च॒त्वंह॑सः

yasya juṣṭiṃ sominaḥ kāmayante yaṃ havanta iṣumantaṃ gaviṣṭau | yasminnarkaḥ śiśriye yasminnojaḥ sa no muñcatvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

स्वामी मानता हभ (जोहवीमि) उसका बार-बार आह्वान करताहुं (ते मानुषसुलभ निबंलतासे या किसी प्रबल शक्ति से प्रेरित हुभा यदि बार-बार पापकरताहै, तो वह वार-बार निज स्वामी परमेदवरसे बल की प्रार्थना करे जिसने कि द्यौः ओौर प्रथिवी को निष्पाप रचा है, जिसके रचे इन दोनों मेपापकालेश भी नहीं, जिनके वासी पुरुष ही पापकर्मो द्वारा इनके साथ पापका सम्पकं करते रहते हँ । ठेसी भावनाएें पापको मिटा देती है, ओर पापरहित द्ौः-प्रथिवी में रहता हुम भी, आपनाथकी कृपा से, पाप- (मरुताम्) मानसूनवायुजो का (मन्वे) मँ मनन करता हूं, या उनके

English

Like noblest benisons they have stayed in the God loving man’s abode. I glorify bright Savitar and Vāyu. Deliver us, ye twain, from grief and trouble.

अध्याय ४

श्लोक 24.6

यः प्र॑थ॒मः क॑र्म॒कृत्या॑य ज॒ज्ञे यस्य॑ वी॒र्यंऽ प्रथ॒मस्यानु॑बुद्धम्।येनोद्य॑तो॒ वज्रो॒ऽभ्याय॒ताहिं॒ स नो॑ मुञ्च॒त्वंह॑सः

yaḥ prathamaḥ karmakṛtyāya jajñe yasya vīryaṃ' prathamasyānubuddham| yenodyato vajro'bhyāyatāhiṃ sa no muñcatvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

विद्यमानता का कथन करे, उसे सूचित करे, (इमम् ) इस (वाजम्,) अन्न गामी अर्व कौ तरह सुयम्य मानसून वायुओं का ( अह्व) मै आह्वान करता हे वसे मानसून वायुं की गतियो को भी यथेष्ट नियन्त्रित किया जा सकता कषतिरूप पाप-फल से मोचन । अति तथा कम वर्षा प्रजाके पापों ही

English

A hymn to Heaven and Earth O Heaven and Earth, I think on you, wise, givers of abundant gifts, ye who through measureless expanses have spread forth.

अध्याय ४

श्लोक 24.7

यः सं॑ग्रा॒मान्नय॑ति॒ सं यु॒धे व॒शी यः पु॒ष्टानि॑ संसृ॒जति॑ द्व॒यानि॑ ।स्तौमीन्द्रं॑ नाथि॒तो जो॑हवीमि॒ स नो॑ मुञ्च॒त्वंह॑सः

yaḥ saṃgrāmānnayati saṃ yudhe vaśī yaḥ puṣṭāni saṃsṛjati dvayāni | staumīndraṃ nāthito johavīmi sa no muñcatvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

१- अथवा “'पौरुषेयात्, न कि देवात्" । जल-सघ्रोत का (व्यचन्ति) विस्तार करतीरहै, (ये ) जो (ओषधीषु) व वर्णो वाली परृयिवीकौीजो मातुरूपरहै उन (मरूतः ) मानसून वायुं (रोदधे) त अत संमुख, सामने, लध्यरूप में 4 निं हू, स्थापित सायण, (ऋ० भाष्य १।२३। १०) मानसून वायु परथिवी के लिए, मे उसे उदक-दुग्ध पिलाती ह, जिससे पृथिवी कौ नदियां तथा स्रोत प्रसवित होते रहते है, अथवा “'पृदिन'', अर्थात् भूमि मानसून वायुओं कौ मातुरूप है मानसूनवायुओं की उत्पत्ति पार्थिव 8 सेही ९. १

English

For ye are seats and homes of goodly treasures. Deliver us, ye twain from grief and trouble. Yea, seats and homes are ye of goodly treasures, grown strong, divine, blessed, and far 46

अध्याय ४

श्लोक 25.1

पापमोचनम्।१-७ मृगारः।सविता, वायुः।त्रिष्टुप्, ३ अतिशक्वरी, ७ पथ्याबृहती।वा॒योः स॑वि॒तुर्वि॒दथा॑नि मन्महे॒ यावा॑त्म॒न्वद् वि॒शथो॒ यौ च॒ रक्ष॑थः ।यौ विश्व॑स्य परि॒भू ब॑भू॒वथु॒स्तौ नो॑ मुञ्चत॒मंह॑सः

pāpamocanam| 1-7 mṛgāraḥ| savitā, vāyuḥ| triṣṭup, 3 atiśakvarī, 7 pathyābṛhatī| vāyoḥ saviturvidathāni manmahe yāvātmanvad viśatho yau ca rakṣathaḥ | yau viśvasya paribhū babhūvathustau no muñcatamaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

पयः) दुधार गौजों के दूघ को, (ओषधीनाम्, रसम्) के व र (अर्वताम् , जवम्) अदवों के वेग को (इन्वथ) उनमें यपि ४४: न (मरुतः) वे मानसून वायुरं (नः) हमें (णग्माः) 1. 1) भी शब्द करतीं, तथा मेघरूप में स्थित हु गजना भी ५ करती हं; + द्वारा घास-चाराके सेवन से गौओ में दूध, ओषधियों मे रस, तथा वेग भी पैदा होते है । इन्वथ इवि व्याप्तौ (भ्वादिः) । । १०६ भथर्वेवेदभाष्यं केण्ड ४। भनु° ६। सुक्त २७ वहन्ति) ऊपर को प्रवाहित करती ह, (दिवः) ओर चय॒लोक से (प्रथिवीम्,

English

extending, To me, O Heaven and Earth, be ye auspicious. Deliver us, ye twain, from grief and trouble. I call on you who warm and cause no sorrow, deep, spacious, meet to be adored by poets.

अध्याय ४

श्लोक 25.2

ययोः॒ संख्या॑ता॒ वरि॑मा॒ पार्थि॑वानि॒ याभ्यां॒ रजो॑ युपि॒तम॒न्तरि॑क्षे ।ययोः॑ प्रा॒यं नान्वा॑न॒शे कश्च॒न तौ नो॑ मुञ्चत॒मंह॑सः

yayoḥ saṃkhyātā varimā pārthivāni yābhyāṃ rajo yupitamantarikṣe | yayoḥ prāyaṃ nānvānaśe kaścana tau no muñcatamaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

अभि) प्रथिवी की ओर (ये) जो (सृजन्ति) जल को विसजि ये कीलाकैन तर्पयन्ति ये मृतेन ये वा वयो मेद॑सा सं सजन्ति । (ये) जो मानसून वायु (कीलालेन) अन्न द्वारा (तरप 1 , (ये। जौ (घृतेन) घृत या जल द्वारा तृप्त करती है, (वा) (

English

To me, O Heaven and Earth, be ye auspicious. Deliver us, ye twain, from grief and trouble. Ye who maintain Amrit and sacrifices, ye who support rivers and human beings,

अध्याय ४

श्लोक 25.3

तव॑ व्र॒ते नि वि॑शन्ते॒ जना॑स॒स्त्वय्युदि॑ते॒ प्रेर॑ते चित्रभानो ।यु॒वं वा॑यो सवि॒ता च॒ भुव॑नानि रक्षथ॒स्तौ नो॑ मुञ्चत॒मंह॑सः

tava vrate ni viśante janāsastvayyudite prerate citrabhāno | yuvaṃ vāyo savitā ca bhuvanāni rakṣathastau no muñcatamaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

यु यन्ति। वषा करती ह, (ते, नो, मुञ्चन्तु अंहसः यं ५५१ है, (ते, नो, मुञ्चन्तु अंहसः) अर्थ, कोलालम् = अन्ननाम (निषं० २।७) धतम् निधं यदीषिदं म॑रुतो मास्तेन यदि देवा हैव्यैनेदगारं । (मरुतः, है मानसून वायुभो ! (यदि) यदि (इदम्) दुःख (मारुतेन, इत्) मरुतो-जन्य ही है, (देवाः) ह अन्य देवो (दि)

English

To me, O Heaven and Earth, be ye auspicious, Deliver us, ye twain, from grief and trouble. Ye by whom cows and forest trees are cherished within whose range all creatures are included,

अध्याय ४

श्लोक 25.4

अपे॒तो वा॑यो सवि॒ता च॑ दुष्कृ॒तमप॒ रक्षां॑सि॒ शिमि॑दां च सेधतम्।सं ह्यू॒३र्जया॑ सृ॒जथः॒ सं बले॑न॒ तौ नो॑ मुञ्चत॒मंह॑सः

apeto vāyo savitā ca duṣkṛtamapa rakṣāṃsi śimidāṃ ca sedhatam| saṃ hyū3rjayā sṛjathaḥ saṃ balena tau no muñcatamaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

मा ह है व भौर देवो ! तुम ही (वसवः) है वसाने लो ¦ (तस्य, उस दुःखके (निष्करतेः) परिहारके क ) परिहार के (ईशिध्वे) अधीश्वर होताहै अतिवर्षा द्वारा तथा वर्षा कै अभाव द्रारा। मय ह ह विदत्, सूयं जदि । प्रचण्ड वायु, मलिन वायु, विचयच््पात, सूयं की र वल के सदृश, (मारुतम्) मानसून वायुज का (र्धः) बल (तिग्मम्) परमेदवररूपी स्वामीवाला मँ (मरुतः) मानसून वायुओों की (स्तौमि) स्तुति करता हुं, उनके गुणो का कथन करता ह, (जोहवीमि) ओर परमेश्वर का वार-बार आल्वान करता हूं ताकि उप्तकौ कृपा से , (ते) वे मरुतः (नः)

English

To me, O Heaven and Earth, be ye auspicious. Deliver us, ye twain, from grief and trouble. Ye who delight in nectar and in fatness, ye without whom men have no strength or power,

अध्याय ४

श्लोक 25.5

र॒यिं मे॒ पोषं॑ सवि॒तोत वा॒युस्त॒नू दक्ष॒मा सु॑वतां सु॒शेव॑म्।अ॒य॒क्ष्मता॑तिं॒ मह॑ इ॒ह ध॑त्तं॒ तौ नो॑ मुञ्चत॒मंह॑सः

rayiṃ me poṣaṃ savitota vāyustanū dakṣamā suvatāṃ suśevam| ayakṣmatātiṃ maha iha dhattaṃ tau no muñcatamaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

यह्, (यत्) जोकि (विरोचते) विविध रूपों मेँ चमकता है। (यौ) जो तुम दो (अस्य द्विपदः) इस दो-पाये जगत् के (ईशाय) अधीङ्वर हो, (यो) तुम दो (चतुष्पदः) चौ-पाये जगत् के अधीश्वर हो, (तौ) वे तुम दोनों ( हमे (अंहसः) पाप से (मुञ्चतम्) मुक्त करो, छडाओ । भवाशवौं ये दोनों नाम एक ही परमेश्वर के है । बह सृष्टि का न उत्पत्ति ओर विनाशरूपी परिणाम हो रहै, इसलिए भी परमेश्वर भव ओर शर्व है । उत्पत्ति ओर विनाश, इन दो गुणोवाला एक ही परमेश्वर है । भवाशवौः में द्विवचन दो गुणों कौ दृष्टि सेदहै। भव ओर शवंनामी परमेश्वर, साक्षात्, पाप से मुक्त कर सकता है, इसके लिए सदा उसका १०६ अथ्वेवेदमाष्य फ़ाण्डं ४। अनु० ६। सूक्तं २८

English

To me, O Heaven and Earth, be ye auspicious. Deliver us, ye twain, from grief and trouble. The grief that pains me here, whoever caused it, not sent by fate, hath sprung from human action.

अध्याय ४

श्लोक 25.6

प्र सु॑म॒तिं स॑वितर्वाय ऊ॒तये॒ मह॑स्वन्तं मत्स॒रं मा॑दयाथः ।अ॒र्वाग् वा॒मस्य॑ प्र॒वतो॒ नि य॑च्छतं॒ तौ नो॑ मुञ्चत॒मंह॑सः

pra sumatiṃ savitarvāya ūtaye mahasvantaṃ matsaraṃ mādayāthaḥ | arvāg vāmasya pravato ni yacchataṃ tau no muñcatamaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

(अभ्यध्वे) अभिमुख के मागेमें, अर्थात् समीपे, (उत) तथा (यद्, द्रे, चित्) जौ दूरमेभीहैष १ च ठ, अर्थात् चलाने मे सरवंशरेष्ठ (विदितौ) जाने गये हँ । (यौ) तथा जो तुम ' दोनों (अस्य द्विपदः) इस दो-पाए जगत् के, (यौ) जो तुम दोनों

English

I, suppliant, praise Heaven, Earth, and oft invoke them. Deliver us, ye twain, from grief and trouble.

अध्याय ४

श्लोक 25.7

उप॒ श्रेष्ठा॑ न आ॒शिषो॑ दे॒वयो॒र्धाम॑न्नस्थिरन्।स्तौमि॑ दे॒वं स॑वि॒तारं॑ च वा॒युं तौ नो॑ मुञ्चत॒मंह॑सः

upa śreṣṭhā na āśiṣo devayordhāmannasthiran| staumi devaṃ savitāraṃ ca vāyuṃ tau no muñcatamaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

चौ-पाए जगत् के (ईशाथे) अधीश्वर हो, (तौ) वे तुम दोनों 1 (अंहसः पाप ४५ (मुञ्चतम्) मुक्त करो, छृडाओ । भव ओर श्वं, दो गुणों से विशिष्ट एक व्रां का हनन करनेवाले, (दरे) दुर तक (गव्यूती) ५८ उग्ररूप, भव ओर शवं का (अहम्) मँ (हुवे) आह्वान करता हं, ओर (स्तुवन् ) भव व शवं कौ स्तुति करता हुजा (एमि) आता-जाता हू । (यौ) जौ तुम दोनों (अस्य) इस (द्विपदः) दोपाये, (यौ) जो तुम दोनों 1 छ ह के ४५४ ) अधीश्वर हो, इनका शासन करते 4 4 तु (नः) हमें (अंहसः) पाप से (मुञ्चतम्) मुक्त करो,

English

A hymn to the Maruts I think upon the Maruts: may they bless me, may they assist me to this wealth in battle. I call them like swift well-trained steeds to help us. May they deliver us from grief and

अध्याय ४

श्लोक 26.1

पाप-मोचनम्।१-७ मृगारः।द्यावापृथिवी।त्रिष्टुप्, १ अष्टिः, २-३ जगती, ७ शाक्वरगर्भातिमध्येज्योतिः।म॒न्वे वां॑ द्यावापृथिवी सुभोजसौ॒ सचे॑तसौ॒ ये अप्र॑थेथा॒ममि॑ता॒ योज॑नानि ।प्र॒ति॒ष्ठे ह्यभ॑वतं॒ वसू॑नां॒ ते नो॑ मुञ्चत॒मंह॑सः

pāpa-mocanam| 1-7 mṛgāraḥ| dyāvāpṛthivī| triṣṭup, 1 aṣṭiḥ, 2-3 jagatī, 7 śākvaragarbhātimadhyejyotiḥ| manve vāṃ dyāvāpṛthivī subhojasau sacetasau ye aprathethāmamitā yojanāni | pratiṣṭhe hyabhavataṃ vasūnāṃ te no muñcatamaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

पद पठित दहै (अथवं० १६।३।६; १८।१।५०) । गव्यति: गो गावः १. परमेश्वर का दषु तो सवंसंहारी है, यह् विदित है, यहु जानागयाह। “अव रक्षण-गति-कान्ति"” आदि (म्वादिः)। "गव्यूत मे वेनू-गौर-अव' दोनों के ठेन्दियिके विषयों का विस्तार करनेवाले भव ओर शवं । एेन्द्रियिक विषयों का विस्तार कियाहै हमारे जीवनो के लिए नकि उनमें लिप्त होकर पाप-

English

trouble. Those who surround the never-failing fountain for ever, and bedew the plants with moisture,

अध्याय ४

श्लोक 26.2

प्र॒ति॒ष्ठे ह्यभ॑वत॒ वसू॑नां॒ प्रवृ॑द्धे देवी सुभगे उरूची ।द्यावा॑पृथिवी॒ भव॑तं मे स्यो॒ने ते नो॑ मुञ्चत॒मंह॑सः

pratiṣṭhe hyabhavata vasūnāṃ pravṛddhe devī subhage urūcī | dyāvāpṛthivī bhavataṃ me syone te no muñcatamaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

यावरिभाये वह् साकमगरे भ चेदशाप्टरूमभिमां जनेषु (साकम्) एक साथ (बहू) वहतो का (आरेभाये) प्रारम्भ किया, निर्माण (द्विपदः) दो-पाये जगत् के (यी ) जो तुम दो (चतुष्पदः) चौ-पाये जगत् के (ईशाथे) अधीकशवर हौ, इनका शासन करते हो, (तौ) वे तुम दोनों (नः, हमे (अंहसः) पापों से (मूञ्चतम्) मुक्त करो, छडाओ । सुष्टिके प्रारम्भ में बहुत पदाथं एक साथ पैदा हृए, ओर मानुष

English

The Maruts, Prini’s sons, I chiefly honour. May they deliver us from grief and trouble. Bards, who invigorate the milk of milch-kine, the sap of growing plants, the speed of coursers To us may the strong Maruts be auspicious. May they deliver us from grief and trouble.

अध्याय ४

श्लोक 26.3

अ॒स॒न्ता॒पे सु॒तप॑सौ हुवे॒ऽहमु॒र्वी ग॑म्भी॒रे क॒विभि॑र्नम॒स्येऽ।द्यावा॑पृथिवी॒ भव॑तं मे स्यो॒ने ते नो॑ मुञ्चत॒मंह॑सः

asantāpe sutapasau huve'hamurvī gambhīre kavibhirnamasye'| dyāvāpṛthivī bhavataṃ me syone te no muñcatamaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

सृष्टि काप्रारम्भ भव'द्वारा हंजा। भव मौर शवे एक ही परभेदवर के दो स्वरूप दोस्वरूपोंको दशनिके लिए 'वशवौ ' मे द्विवचनान्त का प्रयोग हआ द । दोनों स्वरूपो दवारा अभिधेय एक परमेरवर ही है ययोधान्नापपद्यते कश्चनान्तदेवेषुत मावुषेषु । (ययोः) जिन दो के (वधात्) वध से (देवेषु अन्तः) देवों के मध्य मे, (उत) तथा (मानुषेषु) मनुष्यो के मध्य मेँ (कः च) कोई भी (न) नहीं (जपपद्यते) अपगत होता, (यौ) जौ दो कि (अस्य द्विपदः) इस दो-पाये जगत् के, (यौ) जो दो कि (चतुष्पदः) चौ-पाये जगत् के ( ईशाथे) तुम सधीरवर हो, इनका शासन करते हो, (तौ) वे तुम दोनों (नः) हमें (अंहसः) "मननशीलः । पशुओं मे मनन नहीं होता । यह् मनुष्यों तथा पशुओं में भेद

English

They who raised water from the sea to heaven and send it from the sky to earth in showers, The Maruts who move mighty with their waters, may they deliver us from grief and trouble.

अध्याय ४

श्लोक 26.4

ये अ॒मृतं॑ बिभृ॒थो ये ह॒वींषि॒ ये स्रो॒त्या बि॑भृ॒थो ये म॑नु॒ष्याऽन्।द्यावा॑पृथिवी॒ भव॑तं मे स्यो॒ने ते नो॑ मुञ्चत॒मंह॑सः

ye amṛtaṃ bibhṛtho ye havīṃṣi ye srotyā bibhṛtho ye manuṣyā'n| dyāvāpṛthivī bhavataṃ me syone te no muñcatamaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

(यः यातुधानः) जो यातनाभों का धारण-पोषण मूलभूत, जड्रूप, हमारे पुत्रों का कतेन करतार, (तस्मिन्) उसके वध नधत्तम्) नितरां स्थापित करो, या उस पर फक । शावस्य, तनाचु) देवासुर संग्रामो में (उग्रौ) उग्ररूप भव ओौर शवं

English

They who delight in nectar and in fatness, they who bestow upon us health and vigour. The Maruts who rain mighty with their waters, may they deliver us from grief and trouble. Whether with stormy might the Maruts established this All, or

अध्याय ४

श्लोक 26.5

ये उ॒स्रिया॒ बिभृ॒थो ये वन॒स्पती॒न् ययो॑र्वां॒ विश्वा॒ भुव॑नान्य॒न्तः ।द्यावा॑पृथिवी॒ भव॑तं मे स्यो॒ने ते नो॑ मुञ्चत॒मंह॑सः

ye usriyā bibhṛtho ye vanaspatīn yayorvāṃ viśvā bhuvanānyantaḥ | dyāvāpṛthivī bhavataṃ me syone te no muñcatamaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

(क ) हमें (अधित्रूतम्) कहँ अर्थात् जतलाएं (यः) जोकि ( (क कमीदी असुर है, अब कया पाप करू जो निज से पुता है (वज्रेण) को अपना स्वामी मानता हमा, (भवाशवौ) तेरे भव ओौर श्वरूपं की (स्तौमि) ओ स्तुति करता हुं, (जोहवीमि) ओौर वार-बार उनका आह्वान करता हुं, (तौ) वे दोनों रूप (नः) हम सबको (अंहसः) पापसे (मुञ्चतम्) ॥ संग्राम मे किस समय, किस पापी असुरने, उसेआ घेरना है व परमेश्वर से उसका पूवे ज्ञान वह् चाहता है, ताकि उसके साथ संघषं के

English

Gods with their celestial power, Ye, kindly Gods, are able to restore it. May they deliver us from grief and trouble.

अध्याय ४

श्लोक 26.6

ये की॒लाले॑न त॒र्पय॑थो॒ ये घृ॒तेन॒ याभ्या॑मृ॒ते न किं च॒न श॑क्नु॒वन्ति ।द्यावा॑पृथिवी॒ भव॑तं मे स्यो॒ने ते नो॑ मुञ्चत॒मंह॑सः

ye kīlālena tarpayatho ye ghṛtena yābhyāmṛte na kiṃ cana śaknuvanti | dyāvāpṛthivī bhavataṃ me syone te no muñcatamaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

१. अथवा शत्रु" है, कामादि तथा उस-उसका वरं । काम, कोध आदिक आसुर भावो को सम्भवतः सेनारूपमें वणित कियाहै, जोकि मनुष्यो र करता है, उन्हँ सदा काटता रहता है । यह् वभ आावालवद्धो ओर युवाभों स शत्रु है। इसके निवारणाथं भव भौर शवं रूपों वाले परमेश्वर का स्तवन ५ है, ओर उस हारा दर्शाए जीवन-मागं करो अपना लेता है। काम का वर्ग-- व सहकारियों तथा उदहीपको का वगं । यया 'ट्षुः कामस्यया भीमात सत्याधप्रकाश समुल्लास ६; मनु ° ७।४५)

English

Potent in battles is the Maruts’ army, impetuous train, well- known, exceeding mighty. I, suppliant, praise and oft invoke the Maruts. May they deliver us from grief and trouble. A hymn to Bhava and Sarva

अध्याय ४

श्लोक 26.7

यन्मे॒दम॑भि॒शोच॑ति॒ येन॑येन वा कृ॒तं पौरु॑षेया॒न्न दैवा॑त्।स्तौमि॒ द्यावा॑पृथि॒वी ना॑थि॒तो जो॑हवीमि॒ ते नो॑ मुञ्चत॒मंह॑सः

yanmedamabhiśocati yenayena vā kṛtaṃ pauruṣeyānna daivāt| staumi dyāvāpṛthivī nāthito johavīmi te no muñcatamaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

पर सत्यावानमवथो मरेषु तो नँ मुश्चतमं्टसः ॥१॥। (ऋतावृधौ) सत्य के वर्धक, (सचेतसौ) सचेत अर्थात् सावधान रहनेवाले, अथवा एक चित्तवाले (मित्रावरुणौ ) है स्नेही-तथा-शतुनिवारक ! (वाम्) तुम दोनों को (मन्वे) मँ राजा जानता (यौ) जोतुमदो कि मे अथवा भरण-पोषण मे, (तौ) वे तुम दोनों (नः) हम सबको (अंहसः) पाप से (मुञ्चतम्) मुक्त करो, या छुडाभो । सेनाध्यक्ष 1 वरुणः निवारकः । राजा इन दोनों को कहता है कि तुम दोनो को भँ जानता हूं कि तुम दोनों प्रजाजनों के साथ स्नेह करनेवाले हो, ओर शत्रू के निवारणमें कशल हौ । रष्टद्रोही को राष्ट से निकाल देना चाहिए, ओर सत्याचारी की सवेदा रक्षा करनी चाहिए । शासन का मख्य उहेदय है राष्टि प्रजाजन को पापों से मुक्त करना । मन्वे मनु अववोधने

English

I Reverence you—mark this—Bhava and Sarva, ye under whose control is this that shineth. Lords of this world both quadruped and biped. Deliver us, ye twain, from grief and trouble.

अध्याय ४

श्लोक 27.1

पापमोचनम् ।१-७ मृगारः।मरुतः।त्रिषटुप्।म॒रुतां॑ मन्वे॒ अधि॑ मे ब्रुवन्तु॒ प्रेमं वाजं॒ वाज॑साते अवन्तु ।आ॒शूनि॑व सु॒यमा॑नह्व ऊ॒तये॑ ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

pāpamocanam | 1-7 mṛgāraḥ| marutaḥ| triṣaṭup| marutāṃ manve adhi me bruvantu premaṃ vājaṃ vājasāte avantu | āśūniva suyamānahva ūtaye te no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

सचैतसौ ूर्हणो यो नुदेथे पर सत्यावानमवथो भरेषु । (यौ) जो दो तुम (सचेतसौ) सचेत अर्थात् सावधान रहनेवाले राष्टद्रोही को (नुदेथे) राष्टरसे धकेल देते हो, निकाल देते हो, ओर (भरेषु) यदधो मे, या भरण-पोषण मे, अथवा परस्पर के विवादा मे (सत्यावानम्) ११२ मथवेवेदभाष्यृ काण्ड ४। अनु०° ६ । सुक्त २९

English

Lords of all near and even of what is distant, famed as the best and skilfullest of archers, Lords of this world both quadruped and biped, Deliver us, ye twain, from grief and trouble. Thousand-eyed foe-destroyers, I invoke you, still praising you the strong, of wide dominion:

अध्याय ४

श्लोक 27.2

उत्स॒मक्षि॑तं॒ व्यच॑न्ति॒ ये सदा॒ य आ॑सि॒ञ्चन्ति॒ रस॒मोष॑धीषु ।पु॒रो द॑धे मरुतः॒ पृश्नि॑मातृंस्ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

utsamakṣitaṃ vyacanti ye sadā ya āsiñcanti rasamoṣadhīṣu | puro dadhe marutaḥ pṛśnimātṛṃste no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

पोषण करनेवालेके द्वारा (युतम्) अभिषुत सोमयज्ञ में, अथवा नवोत्पादित उद्योग में (गच्छथः) जाते हो, शामिल होते हो, (तौ) वे तुम दोनों (नः) हम सबको (अंहसः) पापकमं से (मुञ्चतम्) मुक्त करो, या चछृडाओ । अंहसः मुञ्चतम् = पाप करने से मुक्त करो । हो, (तौ) वे तुमदो (नः) हम सबको (अंहसः) पापकमं से (मुञ्चतम्) (मित्रावरुणा) है मित्र! ओर है वरुण (यौ) जौ तुम दो (यौ) जो तुम दो (विमदम्) मादकद्रव्यों के सेवन से रहित को, (सप्त- वध्िम्) सातो शवितियों से क्लीव को (अवथः) सुरक्षित करते हो, (तौ)

English

Lords of this world both quadruped and biped, Deliver us, ye twain, from grief and trouble. Ye who of old wrought many a deed in concert, and showed among mankind unhappy

अध्याय ४

श्लोक 27.3

पयो॑ धेनू॒नां रस॒मोष॑धीनां ज॒वमर्व॑तां कवयो॒ य इन्व॑थ ।श॒ग्मा भ॑वन्तु म॒रुतो॑ नः स्यो॒नास्ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

payo dhenūnāṃ rasamoṣadhīnāṃ javamarvatāṃ kavayo ya invatha | śagmā bhavantu maruto naḥ syonāste no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

वे तुम दो (नः) हम सबको (अंहसः) पाप से (मुञ्चतम्) मुक्त करो, छुडामो । दयामल अर्थात् नातिकृष्ण वणंवाला, अथवा “दयेडः गतौ" (अदादिः), मुखम्; सप्त खानि शीषंणि'' (अथे ० १०।२।६) । वधि होना पाप का परिणाम है, अंहः का परिणाम है । श्यावारव' आदि की रक्षा के साथ- (यौ) जो तुमदो (वरुण भित्र) ह वरूण है मित्र ! (भरद्वाजम्) भरण-पोषणकारी अन्न या बलवाले की, (यौ) जो तुमदो (गविष्ठिरम्)

English

omens; Lords of this world both quadruped and biped, Deliver us, ye twain, from grief and trouble. Ye from the stroke of whose destroying weapon not one among the Gods or men escapeth,

अध्याय ४

श्लोक 27.4

अ॒पः स॑मु॒द्राद् दिव॒मुद् व॑हन्ति दि॒वस्पृ॑थि॒वीम॒भि ये सृ॒जन्ति॑ ।ये अ॒द्भिरीशा॑ना म॒रुत॒श्चर॑न्ति ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

apaḥ samudrād divamud vahanti divaspṛthivīmabhi ye sṛjanti | ye adbhirīśānā marutaścaranti te no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

जो तुम दो (कक्षीवन्तम्) बाहुमूल बलवाले को, अथवा जिसने अपनी कमर कसी हुई है उसकी, (उत) तथा (कण्वम्) मेधावी की (प्र अवथः) प्रकष रूपमे रक्षा करते हो, (तौ) वे तुम दो, (नः) हम सबको (अंहसः) पापसे (मुञ्चतम्) मुक्त करो, छडाभो । यौ मेधांतिथिमव॑यो यौ त्रिशोकं मितरंवरुणावुशनों काव्यं यो । ११४ अथर्वेवेदभाष्य काण्ड ४। अनु° ६1 सूक्त २६ (मित्रावरुणौ) है मित्र! ओर दहे वरुण! (यौ) जो तुम दो

English

Lords of this world both quadruped and biped, Deliver us, ye twain, from grief and trouble. Hurl your bolt, strong Gods, at the Yātudhāna, him who makes ready roots and deals in

अध्याय ४

श्लोक 27.5

ये की॒लाले॑न त॒र्पय॑न्ति ये घृ॒तेन॒ ये वा॒ वयो॒ मेद॑सा संसृ॒जन्ति॑ ।ये अ॒द्भिरीशा॑ना म॒रुतो॑ व॒र्षय॑न्ति॒ ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

ye kīlālena tarpayanti ye ghṛtena ye vā vayo medasā saṃsṛjanti | ye adbhirīśānā maruto varṣayanti te no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

(मेधातिथिम्) मेधावी-अतिथियोंवाले की, (यौ) जो तुम दो (त्रिशोकम्) त्रिविध शोकवाले की, (उशनाम्) कान्तिमती महिला की, (यौ) जो तुम सांसारिक मोदप्रमोद को खा जानेवाले, नष्ट कर देनेवाले की (प्र अवथः) प्रकषेरूपमें रक्षा करते हो (तौ) वे तुम दो (नः) हुम सबको (अंहसः) पाप से (मुञ्चतम्) मुक्त करो, छुडाओ । आधिभौतिक, भाधिहैविक; जो इन त्रिविध दुःखों से दुःखित हुमा, शोक- प्रस्त हौकर, सांसारिक जीवनसे उपरतहो गयाहै वह है श्रिशोकः। मुद्गलम् = सांसारिक मोदप्रमोदों को विवेक = जञानपू्वक त्याग देनेवाला ।

English

magic: Lords of this world both quadruped and biped, Deliver us, ye twain, from grief and trouble.

अध्याय ४

श्लोक 27.6

यदीदि॒दं मरु॑तो॒ मारु॑तेन॒ यदि॑ देवा॒ दैव्ये॑ने॒दृगार॑ ।यू॒यमी॑शिध्वे वसव॒स्तस्य॒ निष्कृ॑ते॒स्ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

yadīdidaṃ maruto mārutena yadi devā daivyenedṛgāra | yūyamīśidhve vasavastasya niṣkṛteste no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

कर्तव्य है, यह् राष्टर-धमं है । (ययोः) जिन दो का (रथः) रथ (सत्यवर्मा) सचा के मा्मवाला है, ( ऋजुररिमः) भौर जिस रथ के अश्व को लगाम ऋज् अर्थात सीधे तथा सरलमागपर चलाती है, जो रथ (मिथुया चरन्तम्) मिथ्याचारी को (दषयन् ) दुषित अर्थात् अपराधी घोषित करता हुमा (अभियाति) अभियान करता है, उसपर आक्रमण करता है, दण्ड देने के लिए; (नाधितः) परमेश्वर प्राप्त होता । जब शरीर ही न मिला तौ उसका मरना मौर जीर्ण दोना सम्भवही शत्रओं का निवारण करनेवाले सेनाध्यक्ष रूप हैँ । इन दो शासको के अतिरिक्त, राष्ट काएक ओौर भी शासक दहै जिसे नाथितः' पददारा सूचित कियाहै, जोकि राष्ट काराजाहै। वह् परमेश्वर को अपना स्वामी मानता है, उसके आज्ञानुवर्ती हुमा वह राष्ट का शासन करता है, वहु भी निरंकुश नहीं । जैसे मित्र ओर वरुण पर राजा का अंकुश है, वैसे

English

Comfort and aid us, ye strong Gods, in battles, at each Kimidin send your bolt of thunder. I, suppliant, praise and ever call on Bhav and Sarva. Set us free from grief and trouble.

अध्याय ४

श्लोक 27.7

ति॒ग्ममनी॑कं विदि॒तं सह॑स्व॒न्मारु॑तं॒ शर्धः॒ पृत॑नासू॒ग्रम्।स्तौमि॑ म॒रुतो॑ नाथि॒तो जो॑हवीमि॒ ते नो॑ मुञ्च॒न्त्वंह॑सः

tigmamanīkaṃ viditaṃ sahasvanmārutaṃ śardhaḥ pṛtanāsūgram| staumi maruto nāthito johavīmi te no muñcantvaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

प्रजा का अकश ओर परमेश्वर का अंकुश । उशना --उणादिकोशों मे "उशनाः" के दो अर्थं दियेर्है, शुक्राचायं वृत्तिः, ६।९६) । परन्तु अथववेद में 'उषनाम्' पाठ है (४।२६।६) । अथव के पदपाठ में भी 'उशनाम्' पाठ है, जिसका प्रातिपदिक स्वरूप होता है अथे ही उचित प्रतीत होता है । सायणाचायं ने उशना" पद को 'उशनसम्' मे परिवत्तित कर अथं कियादहै, जो परिवतंन कि वेदपाठ ओर पदपाठ के

English

A hymn to Mitra-Varuna You twain, O Mitra, Varuna, I honour, Lawstrengtheners, wise, who drive away oppressors. Ye who protect the truthful in his battles, deliver us, ye twain, from grief and trouble.

अध्याय ४

श्लोक 28.1

पापमोचनम् ।१-७ मृगारोऽथर्वा वा ।भवाशर्वौ रुद्रो वा ।त्रिष्टुप्, १ अतिजागतगर्भा भुरिक्।भवा॑शर्वौ म॒न्वे वां॒ तस्य॑ वित्तं॒ ययो॑र्वामि॒दं प्र॒दिशि॒ यद् वि॒रोच॑ते ।याव॒स्ये॑शा॑थे द्वि॒पदो॒ यौ चतु॑ष्पद॒स्तौ नो॑ मुञ्चत॒मंह॑सः

pāpamocanam | 1-7 mṛgāro'tharvā vā | bhavāśarvau rudro vā | triṣṭup, 1 atijāgatagarbhā bhurik| bhavāśarvau manve vāṃ tasya vittaṃ yayorvāmidaṃ pradiśi yad virocate | yāvasyeśāthe dvipado yau catuṣpadastau no muñcatamaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

रं रद्रेमिवेसुमिशराम्यहमांदिव्थेरुत विश्वदेवैः । (अहम्) मै वाक्,--पारमेर्वरी माता (वसुभिः) वसुओंके संग (चरामि) चलती हूं, (अहम्) मँ (आदित्यैः) आदित्यो के संग, (उत) तथा (विद्वदेवैः) अन्य सब देवों के संग चलती हुं (अहम्) मँ (मित्रावरुणा उभा) मित्र ओर वरुण, दोनों का (विभर्मि) भरण-पोषणं करती हू, दोनों अरिवयों का भरण-पोषण करती हू । का अभिप्राय है । वस्वः आदि, यथा--

English

Ye the wise Gods who drive away oppressors, ye who protect the truthful in his battles, Who come, men’s guards, to juice pressed forth by Babhru,. deliver us, ye twain, from grief

अध्याय ४

श्लोक 28.2

ययो॑रभ्यभ्व॒ उ॒त यद् दू॒रे चि॒द् यौ वि॑दि॒तावि॑षु॒भृता॒मसि॑ष्ठौ ।याव॒स्येशा॑थे द्वि॒पदो॒ यौ चतु॑ष्पद॒स्तौ नो॑ मुञ्चत॒मंह॑सः

yayorabhyabhva uta yad dūre cid yau viditāviṣubhṛtāmasiṣṭhau | yāvasyeśāthe dvipado yau catuṣpadastau no muñcatamaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

वाली (ताम्, मा) उस मञ्चको;ः-- (भूरि आवेशयन्तः) निज बहुरूपो में विविध रूपों में (व्यदधुः) विविध प्रकार से-धारण किया हुभाहै। पारमेदवरी माता सूर्यादि मे, सूर्यादि विविध नामों सेप्रविष्टदहै, मानुषी माता व शिशुओं को लेकर उन्दँ चलाने के लिए उनके , संग-संग चलती है । वसु आदि पारमेरवरी माता के शिशुरूपर्है, यह् मन्त्र.

English

and trouble. Mitra and Varuna who help Agasti, Atri, and Angiras, and Jamadagni,

अध्याय ४

श्लोक 28.3

स॒ह॒स्रा॒क्षौ वृ॑त्र॒हना॑ हुवे॒हं दू॒रेग॑व्यूती स्तु॒वन्ने॑म्यु॒ग्रौ।याव॒स्येशा॑थे द्वि॒पदो॒ यौ चतु॑ष्पद॒स्तौ नो॑ मुञ्चत॒मंह॑सः

sahasrākṣau vṛtrahanā huvehaṃ dūregavyūtī stuvannemyugrau| yāvasyeśāthe dvipado yau catuṣpadastau no muñcatamaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

कण्डि ४। अनु° ६1 सूक्त ३५ अंथर्ववेदमीष्ये ११७ अहमेव स्वयमिदं व॑दामि जुष्टं देवानामुत मानुषाणाम् (अहम्, एव, स्वयम्) भँ ही अपने-आप (इदम्) इसे (वदामि) कहती है, जोकि (देवानाम्, उत, मानुषाणाम् ) देवों के लिए तथा मनुष्यों के लिए विद्वानों को, मानुषाणाम् =सवेसाधारण मनुष्यों को । ऋषि = वेदवक्ता या

English

Ye who help Kasyapa, who help Vasishtha, deliver us, ye twain, from grief and trouble. Mitra and Varuna, who help Syāvāsva, Atri, and Purumilha, and Vadhryasva,

अध्याय ४

श्लोक 28.4

यावा॑रे॒भाथे॑ ब॒हु सा॒कमग्रे॒ प्र चेद॑स्रा॑ष्ट्रमभि॒भां जने॑षु ।याव॒स्येशा॑थे द्वि॒पदो॒ यौ चतु॑ष्पद॒स्तौ नो॑ मुञ्चत॒मंह॑सः

yāvārebhāthe bahu sākamagre pra cedasrāṣṭramabhibhāṃ janeṣu | yāvasyeśāthe dvipado yau catuṣpadastau no muñcatamaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

(श्रुत) है श्रवण-शक्तिवाले ! (श्रुधि) तु सुन, (ते) तेरे लिए (वि पश्यति) विविध दृश्यों को देखता है, (यः) जो (प्राणति) प्राण धारण अत्ति) अन्नकोही खातादहै; ओौर (ते)वे (माउप) मेरे आश्रयमेँही को, नहीं मानते । वे अमन्तवः मननशील नहीं ह--यह अभीप्सित अर्थं

English

Ye who help Vimada and Saptavadhri, deliver us, ye twain, from grief and trouble. Ye, Varuna, Mitra, who give aid to Kutsa, Gavishthira, Bharadvāja, Visvāmitra,

अध्याय ४

श्लोक 28.5

ययो॑र्व॒धान्नाप॒पद्य॑ते॒ कश्च॒नान्तर्दे॒वेषू॒त मानु॑षेषु ।याव॒स्येशा॑थे द्वि॒पदो॒ यौ चतु॑ष्पद॒स्तौ नो॑ मुञ्चत॒मंह॑सः

yayorvadhānnāpapadyate kaścanāntardeveṣūta mānuṣeṣu | yāvasyeśāthe dvipado yau catuṣpadastau no muñcatamaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

मया = गृहुजीवन में माता ही अन्न-५रिपाक कर सबको अन्न देती है। अहे जनाय समदं कृणोम्यहं द्यावापृथिवी आ विवेच ॥५॥ ११८ भयर्वेयेदमाष्यं काण्ड ४। धनु° ६ । सूक्सं १ (धनुः भातनोमि) धनुष् कौ डोरी को विस्त॒त करती हु, धनुष् पर चढाती ¦

English

Who help Kakshivan and give aid to Kanva, deliver us, ye twain, from grief and trouble. Ye, Mitra, Varuna, who help Trisoka, Medhātithi, and Usanā son of Kavi,

अध्याय ४

श्लोक 28.6

यः कृ॑त्या॒कृन्मू॑ल॒कृद् या॑तु॒धानो॒ नि तस्मि॑न् धत्तं॒ वज्र॑मु॒ग्रौ।याव॒स्येशा॑थे द्वि॒पदो॒ यौ चतु॑ष्पद॒स्तौ नो॑ मुञ्चत॒मंह॑सः

yaḥ kṛtyākṛnmūlakṛd yātudhāno ni tasmin dhattaṃ vajramugrau| yāvasyeśāthe dvipado yau catuṣpadastau no muñcatamaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

जौर रेनन के लिए । (अहम्) म (जनाय) जनसमूह के लिए (समदम्) । संग्राम (कृणोमि) तैयार करती हूं, (अहम्) मँ (चावापरृथिवी) दुलोक ओर मे छोट-बडे संग्राम होते रहे है, हो भी रहैरहै। पृथिवीवासी जव दुष्कर्मा हो जाते दह, तत्फलखूप मे उनके संहार के लिए, पारमेश्वरी माता के नियमा- . पूषा का, जौर (भगम्) भग का विभि भरण-पोषण करती ह (अहम्) म (हविष्मते) हविःवाले, (सुन्वते, यजमानाय) सोमयाजी यजमान के लिए

English

Ye, Gotama’s and Mudgala’s protectors, deliver us, ye twain, from grief and trouble. Whose straight-reined car that keeps the track of goodness assails and ruins him who walks perversely

अध्याय ४

श्लोक 28.7

अधि॑ नो ब्रूतं॒ पृत॑नासूग्रौ॒ सं वज्रे॑ण सृजतं॒ यः कि॑मी॒दी।स्तौमि॑ भवाश॒र्वौ ना॑थि॒तो॑ जो॑हवीमि॒ तौ नो॑ मुञ्चत॒मंह॑सः

adhi no brūtaṃ pṛtanāsūgrau saṃ vajreṇa sṛjataṃ yaḥ kimīdī| staumi bhavāśarvau nāthito johavīmi tau no muñcatamaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

आहनसम् = आ + हन हिसागत्योः (अदादिः), चन्द्रमा रारि में उदित होता है मौर अन्धकार का हनन करता दहै, तथा पर्चिम मे उदित होकर (मम योनिः) मेरा घर है (अप्सु अन्तः) जलो के भीतर, (समुद्र) तथा अन्तरिक्ष मे; (ततः) वरहा से (विश्वा भुवनानि) सब भुवनो मेँ (वि तिष्ठे) + पितरम् =सूरयं को । सूयं सब ग्रहं का पिता है, भूमण्डल का भी पिताके शरीरसे वी्ंरूप मे फटकर उत्पन्न होती र्ह। मूर्घाहै शिरः स्थानीय द्यलोक का अधोभाग । द्युलोक के इस भाग से ऊपर चयुलोक है । योनि का अर्थ है गृह । यथा योनिः गृहनाम (निघं० ३।४ ) । अप्सु अन्तः जलो में रहनेवाले जलचरो में, तथा जलो मेँ । समूद्रे = समूद्रः अन्तरिक्षनाम

English

I, suppliant, praise with constant invocation Mitra and Varuna. Save us from affliction.

अध्याय ४

श्लोक 29.1

पापमोचनम् ।१-७ मृगारः ।मित्रावरुणौ।त्रिष्टुप्, ७ शक्वरीगर्भातिजगती।म॒न्वे वां॑ मित्रावरुणावृतावृधौ॒ सचे॑तसौ॒ द्रुह्व॑णो॒ यौ नु॒देथे॑ ।प्र स॒त्यावा॑न॒मव॑थो॒ भरे॑षु॒ तौ नो॑ मुञ्चत॒मंह॑सः

pāpamocanam | 1-7 mṛgāraḥ | mitrāvaruṇau| triṣṭup, 7 śakvarīgarbhātijagatī| manve vāṃ mitrāvaruṇāvṛtāvṛdhau sacetasau druhvaṇo yau nudethe | pra satyāvānamavatho bhareṣu tau no muñcatamaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

्रमपूरवेक स्पशं, आलि द्घन शरीरो कौ अति समीपता सेहीहो सकताहै। अहम् एव) यै पारमेश्वरी माता ही (वात इव) श्ं्ञा वायु के सदुश क हो रही ह, (विश्वा भुवनानि) सब भवनों को (आरभमाणा) प्रारम्भ करती हु । (दिवा परः) द्यूलोक से परे, (एना पृथिव्या परः) इस पृथिवी से ॥ महू, ॥ इतनी बड़ी (महिम्ना) किनारे ह, परन्तु परमेश्वर इन किनारोंको लाँघकर, अतीत कर, बस प्रकृति से सष्टि पैदा होने लगती है, इसे उपनिषदो मेँ 'जकामयत द्वारा

English

A glorification of vāk or speech I travel with the Rudras and the Vasus, with the Ādityas and All-Gods I wander.

अध्याय ४

श्लोक 29.2

सचे॑तसौ॒ द्रुह्व॑णो॒ यौ नु॒देथे॒ प्र स॒त्यावा॑न॒मव॑थो॒ भरे॑षु ।यौ गच्छ॑थो नृ॒चक्ष॑सौ ब॒भ्रुणा॑ सु॒तं तौ नो॑ मुञ्चत॒मंह॑सः

sacetasau druhvaṇo yau nudethe pra satyāvānamavatho bhareṣu | yau gacchatho nṛcakṣasau babhruṇā sutaṃ tau no muñcatamaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

१. परमेदवर सरव्यापक है, अतः वह् सन ऊंचाष्यों को निज ऊषा दवारा स्पशं किये (मरुत्वन् ) मारु-संनिकोंवाले (मन नि ् न्यो) है बोधयुक्त" क्रोध ! (८ र (५6 के साथ, (सरथम्) रथोंवाले शत्रु को--(हषंमानाः) अ ष ॥ 4 ) ओर प्रजाजन को प्रसन्न करते हृए--हम सेनिक (अ 1 ५५ ह ॥ (संशिशानाः) सम्यक् तेज करते हप हों रूपाः) अभ्निरूप हुए (नरः) सैनि 6. समीप (प्र यन्तु) प्रयाणकरें। ॥ मरुत्वन् = मारयतीति वा स मरत्, मनुष्य 1 मरुतावाला मन्युः; तथा मरुतः=सनिकाः थि 1

English

I hold aloft both Varuna and Mitra, I hold aloft Indra and both the Asvins. I am the Queen, the gatherer-up of treasures, most thoughtful, first of those who merit

अध्याय ४

श्लोक 29.3

यावङ्गि॑रस॒मव॑थो॒ याव॒गस्तिं॒ मित्रा॑वरुणा ज॒मद॑ग्नि॒मत्रिम्।यौ क॒श्यप॒मव॑थो॒ यौ वसि॑ष्ठं॒ तौ नो॑ मुञ्चत॒मंह॑सः

yāvaṅgirasamavatho yāvagastiṃ mitrāvaruṇā jamadagnimatrim| yau kaśyapamavatho yau vasiṣṭhaṃ tau no muñcatamaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

हत्वाय सनरन पि्भजस्व वेद ओजो मिमानो पि ग्रधोँ सुदस्व ॥॥ (मन्यो) है बोधयुक्त क्रोध ! (अग्निः इव ध टा (सहस्व) शत्रुसेना का पराभव १५ क 1 १ सेनानीः) हमारी सेना का नायक हो, हेज तु (हूतः) र 1 हो । (शून हत्वाय) शत्रुओं का हनन करके (वेद 9 ( भजस्व) हममे विभक्त करदे, बाटदे, (ओजः) 4 क १ क्ष मौर शतृपक्ष के बलाबल का विचार करफे किया गया क्रोध कण्डं इ । जैनु० ७ । सूक्त ३१ अथ्ववेदभाष्य १२१

English

worship. The Gods, making me enter many places, in diverse spots have set mine habitation. I, verily, myself announce and utter the word that Gods, and men alike shall welcome.

अध्याय ४

श्लोक 29.4

यौ श्या॒वाश्व॒मव॑थो वाध्र्य॒श्वं मित्रा॑वरुणा पुरुमी॒ढमत्रिम्।यौ वि॑म॒दमव॑थः स॒प्तव॑ध्रिं॒ तौ नो॑ मुञ्चत॒मंह॑सः

yau śyāvāśvamavatho vādhryaśvaṃ mitrāvaruṇā purumīḍhamatrim| yau vimadamavathaḥ saptavadhriṃ tau no muñcatamaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

सेना मे दहन-शक्ति भी होनी चाहिए । इस शक्ति को “नरः अग्निरूपाः दारा भी कथित किया है (मन्त्र १) । वेदः धननाम (निघं° २।१०) । (मन्यो) है बोधयुक्त क्रोध ! (अस्मै) इस राजा के लिए (अरभि- भग्न करता हुमा, (मृणन्) मारता हुभा, (प्र मृणन्) कुचलता हृभा तु (शतरन्) शत्रुओं को ओर प्रेहि) जा। हिमन्यु! (ते) तेरा (पाजः) बल तू (वशी) शत्रुजों को वश में करनेवाला है, (एकज) ह अकेला उत्पन्न ¦ (त्वम्) तू (वशम् नयासा) शत्रुजों कोवशमे ला)

English

I make the man I love exceeding mighty, make him a sage, a Rishi, and a Brāhman.

अध्याय ४

श्लोक 29.5

यो भ॒रद्वा॑जमव॑थो॒ यौ ग॒विष्ठि॑रं वि॒श्वामि॑त्रं वरुण मित्र॒ कुत्स॑म्।यौ क॒क्षीव॑न्त॒मव॑थः प्रोत कण्वं॒ तौ नो॑ मुञ्चत॒मंह॑सः

yo bharadvājamavatho yau gaviṣṭhiraṃ viśvāmitraṃ varuṇa mitra kutsam| yau kakṣīvantamavathaḥ prota kaṇvaṃ tau no muñcatamaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

एकज =-सम्बोधन में है । अकेले मन्यु की ग्र शक्ति का कथन हुमा है । निःसहाय, अकेला-- मन्यु भौ शतु की पराजय कर सकता है--यह् दर्शाया है । मन्यु के बिना सेना भी निःशक्त है । पाजः बलनाम (निघंर २।६); पा + अजः जोकि निज पक्ष का पालक है, ओर शत्रु का प्रक्षेपक है (अज गतिक्षेपणयोः (भ्वादिः ) । नयासा = नयासे, लेट्, आय् । एकों वहूनाम॑सि मन्य ईडिता विशैविशे युद्धाय सं रिशापि। (मन्यो) है बोधयुक्त क्रोध (एकः) अकेला चू (बहूनाम्) बहत (वयम्) हम (विजयाय) विजय के लिए (च॒मन्तम्) दीप्तिवाले सवं-

English

Through me alone all eat the food that feeds them, each man who sees, breathes, hears, the word out-spoken. They know it not, but yet they dwell beside me. Hear, one and all, the truth as I declare it.

अध्याय ४

श्लोक 29.6

यौ मेधा॑तिथि॒मव॑थो॒ यौ त्रि॒शोकं॒ मित्रा॑वरुणावु॒शनां॑ का॒व्यं यौ।यौ गोत॑म॒मव॑थः प्रोत मुद्ग॑लं तौ नो॑ मुञ्चत॒मंह॑सः

yau medhātithimavatho yau triśokaṃ mitrāvaruṇāvuśanāṃ kāvyaṃ yau| yau gotamamavathaḥ prota mudgalaṃ tau no muñcatamaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

विज्ञात (चोषम्) सिंहनाद (कृण्मसि ) करते ह। हे बोधयुक्त क्रोध ¦ तू (इह) इस संग्राम १२२ अथर्वंवेदभाष्य काण्ड ४। अनु० ७। सूक्त ३१ (सहुरे) है पराभव करनेवाले ! (ते) तेरे (प्रियं नाम) प्रियनाम मन्यु

English

I bend the bow for Rudra that his arrow may strike and slay the hater of devotion. I rouse and order battle for the people, and I have penetrated

अध्याय ४

श्लोक 29.7

ययो॒ रथः॑ स॒त्यव॑र्त्म॒र्जुर॑श्मिर्मिथु॒या चर॑न्तमभि॒याति॑ दू॒षय॑न्।स्तौमि॑ मि॒त्रावरु॑णौ नाथि॒तो जो॑हवीमि॒ तौ नो॑ मुञ्चत॒मंह॑सः

yayo rathaḥ satyavartmarjuraśmirmithuyā carantamabhiyāti dūṣayan| staumi mitrāvaruṇau nāthito johavīmi tau no muñcatamaṃhasaḥ

हिन्दी अर्थ

उस स्रोत को (विद्य) हम जानते ह, (यतः) जहाँ से तू (आबभूथ) आ प्रकट अन् अव नूज. व्यक्तायां वाचि (अदादिः) । अभिप्राय यहकिजैसे आपः, का खत ह = जहां से मन्यु की उत्पत्ति होती है । हृदय रक्तरूपी आपः का स्रोत है, यथा (अथवं० १०।२।११) । (वज्र) है वरूप ! (सायक) है शत्रुओं के लिए अन्तकारिन् !

English

Earth and Heaven. I cherish and sustain high-swelling Soma, and Tvashtar I support, Pashan, and Bhaga.

अध्याय ४

श्लोक 30.1

राष्ट्रदेवी ।१- ८ अथर्वा।सर्वरूपा सर्वात्मिका सर्वदेवमयी वाक्।त्रिष्टुप्, ६ जगती।अ॒हं रु॒द्रेभि॒र्वसु॑भिश्चराम्य॒हमा॑दि॒त्यैरु॒त वि॒श्वदे॑वैः ।अ॒हं मि॒त्रावरु॑णो॒भा बि॑भर्म्य॒हमि॑न्द्रा॒ग्नी अ॒हम॒श्विनो॒भा

rāṣṭradevī | 1- 8 atharvā| sarvarūpā sarvātmikā sarvadevamayī vāk| triṣṭup, 6 jagatī| ahaṃ rudrebhirvasubhiścarāmyahamādityairuta viśvadevaiḥ | ahaṃ mitrāvaruṇobhā bibharmyahamindrāgnī ahamaśvinobhā

हिन्दी अर्थ

क्रोध ! (क्त्वो सह) निज कमं के साथ, (नः) हमारा (मेदी) स्नेह करने- वाला (एधि) तरु हो जा, (पुरुहृत) है बहुत सैनिकों द्वारा आहृत ! (महा- धनस्य ) जिसमे महाधन कौ उपलब्धि होती है उस संग्राम के (संसृजि) सजंन मे, अर्थात् उसकी उपस्थिति हो जाने पर । सायक सायः अन्तकारी कर्म॑, “षो” अन्तकमंणि (दिवादिः ) क मन्व ६, (समाकृतम्) तथा उसके राष्ट मे पूवेतः एकत्रित किया धन, (उभयम्) यह द्विविध धन, (वरुणः च मन्युः) वरुण राजा जोर बोधयुक्त प्रदान कर दे; (पराजितासः, शत्रवः) पराजित हुए शत्रू ( हृदयेषु) हदयो मे (भिथः) भयो को (दधानाः) धारण करते हूए (अप ) संग्रामभूमि से अपगत होकर (निलयन्ताम्) निलीन हो जाए, छप जाए । त युद्ध में प्राप्त धन प्रजाजनों में बाट देना चाहिए, या राजकोष में जमा करना चाहिए । वरुणः = प्रजा द्वारा वरा हुजा, चुना हृ, रष्टरका

English

I load with wealth the zealous sacrificer who pours the juice and offers his oblation. On the world’s summit I bring forth the Father: my home is in the waters, in the ocean.

अध्याय ४

श्लोक 30.2

अ॒हं राष्ट्री॑ सं॒गम॑नी॒ वसू॑नां चिकि॒तुषी॑ प्रथ॒मा य॒ज्ञिया॑नाम्।तां मा॑ दे॒वा व्य॑दधुः पुरु॒त्रा भूरि॑स्थात्रां॒ भूर्या॑वे॒शय॑न्तः

ahaṃ rāṣṭrī saṃgamanī vasūnāṃ cikituṣī prathamā yajñiyānām| tāṃ mā devā vyadadhuḥ purutrā bhūristhātrāṃ bhūryāveśayantaḥ

हिन्दी अर्थ

(मन्यो) है बोधयुक्त क्रोध 1 (यः) जो पुरूष (ते) तेरी (अविधत्) सेवा करता है (वचर ! सायक ) है वरूप ! तथा शत्नुओं के लिए (ओजः) ओज को (आनुषक्) निरन्तर (पुष्यति) परिपृष्ट करता है । हम (दासम्, आर्य॑म्) दास ओर आयं का (साह्याम) पराभव करे ।

English

Thence I extend o’er all existing creatures, and touch even yonder heaven with my forehead. 48 I breathe a strong breath like the wind and tempest, the while I hold together all existence.

अध्याय ४

श्लोक 30.3

अ॒हमे॒व स्व॒यमि॒दं व॑दामि॒ जुष्टं॑ दे॒वाना॑मुत मानु॑षाणाम्।यं का॒मये॒ तन्त॑मु॒ग्रं कृ॑णोमि॒ तं ब्र॒ह्माणं॒ तमृषिं॒ तं सु॑मे॒धाम्

ahameva svayamidaṃ vadāmi juṣṭaṃ devānāmuta mānuṣāṇām| yaṃ kāmaye tantamugraṃ kṛṇomi taṃ brahmāṇaṃ tamṛṣiṃ taṃ sumedhām

हिन्दी अर्थ

आक्रमण करताहै, यहु जानकर कि अमूक आयं राजा मेरे राष्ट्को हथियाना चाहता है । अविधत् = विधेम परिचरणकर्मा (निषं° ३।५) । ही स्तुति करती है, उसका गुणगान करती है, (तपसा) ताप अर्थात् जोश २।१०) । तथा जातवेदाः == “जातवित्तौ वा जातधनः । जातविचो वा जातप्रजञानः" १२४ अथवैवेदभाष्य कं्डं ४। अनु° ७ । सूक्तं ३२ , के साथ (सजोषाः) प्रीतिवाले (मन्यो) है मन्यु ! (नः पाहि) हमारी पालना

English

Beyond this wide earth and beyond the heavens I have become so mighty in my grandeur. A hymn to Manyu or Wrath

अध्याय ४

श्लोक 30.4

मया॒ सोऽन्न॑मत्ति॒ यो वि॒पश्य॑ति॒ यः प्रा॒णति॒ य ईं शृ॒णोत्यु॒क्तम्।अ॒म॒न्तवो॒ मां त उप॑ क्षियन्ति श्रु॒धि श्रु॑त श्रु॒द्धेयं॑ ते वदामि

mayā so'nnamatti yo vipaśyati yaḥ prāṇati ya īṃ śṛṇotyuktam| amantavo māṃ ta upa kṣiyanti śrudhi śruta śruddheyaṃ te vadāmi

हिन्दी अर्थ

होता देवानाम् बाह्लाता अग्निः। सजोषाः ==जुषी प्रीतिसेवनयोः सूचित किया है । सैनिकों ओर अधिकारियों के मनं में यदि मन्यु की उग्रता न होतो युद्धम सफलता नहीं हो सकती । इस प्रकार युद्धमें मन्युहो (मन्यो) है मन्यु ! (अभीहि) अभिमुख जा; (तवस तवीयान्) तू

English

Borne on with thee, O Manyu girt by Maruts, let our brave men, impetuous, bursting forward, March on, like flames of fire in form, exulting, with pointed arrows, sharpening their weapons.

अध्याय ४

श्लोक 30.5

अ॒हं रु॒द्राय॒ धनु॒रा त॑नोमि ब्रह्म॒द्विषे॒ शर॑वे॒ हन्त॒वा उ॑ ।अ॒हं जना॑य स॒मदं॑ कृणोम्य॒हं॑ द्यावा॑पृथि॒वी आ वि॑वेश

ahaṃ rudrāya dhanurā tanomi brahmadviṣe śarave hantavā u | ahaṃ janāya samadaṃ kṛṇomyahaṃ dyāvāpṛthivī ā viveśa

हिन्दी अर्थ

रूपी सहयोगी के साथ (शत्रून् वि जहि) शत्रुओं का त विह्नन कर, विनाश कर; (अमित्रहा) अमित्रो का हनन करनेवाला, (वृत्रहा) हमारे राष्ट पर घेरा डालनेवाले का हनन करनेवाला (च दस्युहा) ओर उपक्षयकारी का हनन करनेवालातू है, (विश्वा वसूनि) शत्रुके सब्र धनों का (आभर) आहरण कर (त्वम्) तू (नः) हमारे लिए । रूप मन्यु को विजेता कहा है । युद्ध में इन्द्रादि का अपलाप किया है, निरसन किया है । इस प्रकार युद्ध में मन्यु को प्रधानता दी है। तवसः= करोधरूप, (अभिमातिषाहः) अभिमानियों का पराभव करनेवाला; (विर्व- को सहनेवाला, (सहीयान्) अति सहनशील है, (अस्मासु) हम अधिकारियों

English

Flashing like fire, be thou, O conquering Manyu, invoked, O victor, as our army’s leader. Slay thou our foes, distribute their possession: show forth thy vigour, scatter those who hate

अध्याय ४

श्लोक 30.6

अ॒हं सोम॑माह॒नसं॑ बिभर्म्य॒हं त्वष्टा॑रमु॒त पू॒षणं॒ भग॑म्।अ॒हं द॑धामि॒ द्रवि॑णा ह॒विष्म॑ते सुप्रा॒व्या॒३ यज॑मानाय सुन्व॒ते

ahaṃ somamāhanasaṃ bibharmyahaṃ tvaṣṭāramuta pūṣaṇaṃ bhagam| ahaṃ dadhāmi draviṇā haviṣmate suprāvyā3 yajamānāya sunvate

हिन्दी अर्थ

या प्रजाजनाों में, तथा (पृतनासु) हमारी सेनाभों में (भोजः) ओज (धेहि) चुरादिः) । विश्वचर्षणिः = “चषेणयः मनुष्यनाम'' (निघं० ३।३), विश्वे (तुदादिः); यह् वह् शक्ति है जिसे जानकर शतु ऋजुमागगामी होकर आक्रमण का साहस नहीं करता । ऋजुमागं सत्यमागं होता है “तयोयत् सत्यं

English

us. O Manyu, overcome those who assail us. On! breaking, slaying, crushing down the foemen. They have not hindered thine impetuous vigour: mighty! sole born! reduce them to

अध्याय ४

श्लोक 30.7

अ॒हं सु॑वे पि॒तर॑मस्य मू॒र्धन् मम॒ योनि॑र॒प्स्व॑१न्तः स॑मु॒द्रे।ततो॒ वि ति॑ष्ठे॒ भुव॑नानि॒ विश्वो॒तामूं द्यां व॒र्ष्मणोप॑ स्पृशामि

ahaṃ suve pitaramasya mūrdhan mama yonirapsva1ntaḥ samudre| tato vi tiṣṭhe bhuvanāni viśvotāmūṃ dyāṃ varṣmaṇopa spṛśāmi

हिन्दी अर्थ

बनाने के लिए मन्यु का प्रयोग करना चाहिए, स्वाथसाधन के लिए नहीं । कारक के (क्रत्वा)कममं से (अभागः सन् = भागरहितः सन्) भागरहित (अप) युद्ध से अपगत होकर (परेतः) परागत (अस्मि) म हआ हु; (मन्यो) (जिहीड) कद्ध या अनादृत किया है, (बलदावा) तु बलदाताहै, (स्वा तनूः) तेरी अपनी तन्, तेरा जो निज स्वरूप है (नः एदि) उस निजस्वरूप मे अचेतन हमा राष्टरवल्चित हौ जाता है । परेतः ==परागतः, पराजितः।

English

subjection. Alone of many thou art worshipped, Manyu: sharpen the spirit of each clan for combat.

अध्याय ४

श्लोक 30.8

अ॒हमे॒व वात॑ इव॒ प्र वा॑म्या॒रभ॑माणा॒ भुव॑नानि॒ विश्वा॑ ।प॒रो दि॒वा प॒र ए॒ना पृ॑थि॒व्यौताव॑ती महि॒म्ना सं ब॑भूव

ahameva vāta iva pra vāmyārabhamāṇā bhuvanāni viśvā | paro divā para enā pṛthivyautāvatī mahimnā saṃ babhūva

हिन्दी अर्थ

क्ध्यतिकर्मा (निषं ० २।१३; २।१२); हेड अनादरे (भ्वादिः) । बलदावा = (सहुरे) है सहनशील या पराभवकारी (विङवदावन्) तथा हे कृतियों को जाननेवाला, या जनानेवाला । अचेतन मन्यु को चेतनासम्पन्न मानकर

English

With thee to aid, O thou of perfect splendour, we raise the glorious battle-shout for conquest. Unyielding, bringing victory like Indra, O Manyu be thou here our sovran ruler. To thy dear name. O victor, we sing praises: we know the spring from which thou art come

अध्याय ४

श्लोक 31.1

सेनानिरीक्षणम्।१-७ ब्रह्म स्कन्दः।मन्युः।त्रिष्टुप्, २, ४ भुरिक्, ५-७ जगती।त्वया॑ मन्यो स॒रथ॑मारु॒जन्तो हर्ष॑माणा हृषि॒तासो॑ मरुत्वन्।ति॒ग्मेष॑व॒ आयु॑धा सं॒शिशा॑ना॒ उप॒ प्र य॑न्तु॒ नरो॑ अ॒ग्निरू॑पाः

senānirīkṣaṇam| 1-7 brahma skandaḥ| manyuḥ| triṣṭup, 2, 4 bhurik, 5-7 jagatī| tvayā manyo sarathamārujanto harṣamāṇā hṛṣitāso marutvan| tigmeṣava āyudhā saṃśiśānā upa pra yantu naro agnirūpāḥ

हिन्दी अर्थ

१२६ अथवेवेदभाष्य काण्ड ४। अनु० ७ । सूक्त ३३ । ओर हु (नः उप) हमारे समीप (एहि) आया कर; (विन्) है शतर- । वजेक आयुध याबलको धारण करनेवाले (मन्यो) मन्यु ! (नः अभि) हमारे अभिमुख (आववृत्स्व) लौट आया कर, (दस्यून् हनाव) ताकि हम दोनों मिलकर भविष्यमेंभी उपक्षयकारियों का हनन कर पा (उत) । ।

English

hither. Twin-borne with power, destructive bolt of thunder the highest conquering might is thine,

अध्याय ४

श्लोक 31.2

अ॒ग्निरि॑व मन्यो त्विषि॒तः स॑हस्व सेना॒नीर्नः॑ सहुरे हू॒त ए॑धि ।ह॒त्वाय॒ शत्रू॒न् वि भ॑जस्व॒ वेद॒ ओजो॒ मिमा॑नो॒ वि मृधो॑ नुदस्व

agniriva manyo tviṣitaḥ sahasva senānīrnaḥ sahure hūta edhi | hatvāya śatrūn vi bhajasva veda ojo mimāno vi mṛdho nudasva

हिन्दी अर्थ

अपना जान म तेरा अपना हूं, यह् जान ।'' है मन्यु ! (अभिप्रेहि) हमारे अभिमुख गमन कर, आ, (नः) (वृत्राणि) राष्ट का आवरण करनेवाले, घेरा डालनेवाने शन्रूमो का (जद्धनाव) हम दोनों हनन करे; (ते) है मन्यु तेरे लिए (धरुणम् ) पोषक,

English

subduer! Be friendly to us in thy spirit, Manyu! O much-invoked, in shock of mighty battle! For spoil let Varuna and Manyu give us the wealth of both sides gathered and collected;

अध्याय ४

श्लोक 31.3

सह॑स्व मन्यो अ॒भिमा॑तिम॒स्मै रु॒जन् मृ॒णन् प्र॑मृ॒णन् प्रेहि॒ शत्रू॑न्।उ॒ग्रं ते॒ पाजो॑ न॒न्वा रु॑रुध्रे व॒शी वशं॑ नयासा एकज॒ त्वम्

sahasva manyo abhimātimasmai rujan mṛṇan pramṛṇan prehi śatrūn| ugraṃ te pājo nanvā rurudhre vaśī vaśaṃ nayāsā ekaja tvam

हिन्दी अर्थ

(पिबाव) सोमपान करें । दक्षिणतः युद्ध मेँ दाहिना हाथ कार्यकारी होता है मन्यु को सेनापति ने अपना दाहिना हाथ माना है। मान्य व्यक्ति को दाहिनी ओर रखना, यह शिष्टाचार भी है--यह भी उपदिष्ट किया है। युद्ध से पूवं सोमरस का सेवन करना ओर शुभकार्यारम्भ में यज्ञ करना, इसकी सूचना (अप शोशुचत्) तेरी कृपा से अपगत हो जाय, ओर तैरी शोचि हमे पवित्र पापरहित मागे द्वारा रयि का उपार्जन करना उसकी पवित्रता है । णोशुचत् पूजन, सत्संग, तथा उसके प्रति दान या आत्मसमर्पण करते है, ताकि (अघम्, अप) पाप को अपगत करके (नः शोशुचत्) तुञ्च अग्नि कौ शोचि

English

And let our enemies with stricken spirits, o’er-whelmed with. terror, sling away defeated. A hymn to Manyu

अध्याय ४

श्लोक 31.4

एको॑ बहू॒नाम॑सि मन्य ईडि॒ता विशं॑विशं यु॒द्धाय॒ सं शि॑शाधि ।अकृ॑त्तरु॒क् त्वया॑ यु॒जा व॒यं द्यु॒मन्तं॒ घोषं॑ विज॒याय॑ कृण्मसि

eko bahūnāmasi manya īḍitā viśaṃviśaṃ yuddhāya saṃ śiśādhi | akṛttaruk tvayā yujā vayaṃ dyumantaṃ ghoṣaṃ vijayāya kṛṇmasi

हिन्दी अर्थ

क्षेत्र है शरी र-“इदं शरीरं कौन्तेय ्षेमित्यभिधीयते ( गीता १३।१ / ॥ शरीर में कर्म-बीज बोये जाते है, अतः शरीरक्षेत्र है। इसमें उत्तम कम- बीज बोये जाने चाह, तब यह शरीरक्षेत्र क्षेत्र होतादहै। यजामहै = शरीर द्वारा परमेशवर का यजन करना चाहिए । भर यदू मन्दिष्ट एषां भरास्माकासश्च सुरयः।

English

He who hath reverenced thee, Manyu, destructive bolt! breeds. for himself forthwith all conquering energy. Arya and Dāsa will we conquer with thine aid, with thee the conqueror, with conquest

अध्याय ४

श्लोक 31.5

वि॒जे॒ष॒कृदिन्द्र॑ इवानवब्र॒वो॒३ऽस्माकं॑ मन्यो अधि॒पा भ॑वे॒ह।प्रि॒यं ते॒ नाम॑ सहुरे गृणीमसि वि॒द्मा तमुत्सं॒ यत॑ आब॒भूथ॑

vijeṣakṛdindra ivānavabravo3'smākaṃ manyo adhipā bhaveha| priyaṃ te nāma sahure gṛṇīmasi vidmā tamutsaṃ yata ābabhūtha

हिन्दी अर्थ

प्रकृष्ट है, इसलिए (अघम्) पाप को (अप) ५४० करके (नः शोशुचत्) मक अग्नि की शोचियातु अग्नि-परमेश्वर हमे पवित्र करता है । । होना चादिए, ओौर समाज के प्रेरक विद्वानों को भी कत्याणमार्गी होना चाहिए, तब हम सबको परमेदवर पवित्र कर टै । परमेरवर अग्निहै, अग्निवत् दाहक गुणवाला है । वहं हम सके पापों को दग्ध कर हमें पवित्र कर देता है । भन्दिष्ठः= भदि कल्याणे सुखे च (भ्वादिः) । सूरयः = । प्रजाजन भी कल्याणमार्गी हो जाते है । (ते) तेरी प्रजा बन जते हैँ तव (अप नः शोशुचत् अघम्) पाप को अपगत करके तुक्च अग्निक णौचियातु अग्नि-परमेशवर हमें पवित्र करता है ।

English

conquest-sped. Manyu was Indra, yea, the God was Manyu; Manyu was Hotar

अध्याय ४

श्लोक 31.6

आभू॑त्या सह॒जा व॑ज्र सायक॒ सहो॑ बिभर्षि सहभूत॒ उत्त॑रम्।क्रत्वा॑ नो मन्यो स॒ह मे॒द्येऽधि महाध॒नस्य पुरुहूत सं॒सृजि॑

ābhūtyā sahajā vajra sāyaka saho bibharṣi sahabhūta uttaram| kratvā no manyo saha medye'dhi mahādhanasya puruhūta saṃsṛji

हिन्दी अर्थ

निज स्वामी या राजा मानकर, उसकी प्रेरणानुसार जीवनचर्या करते है, तव वस्तुतः परमेडव राग्नि उनके अघो को दश्ध कर उनको पवित्र कर देता है, अतः (अपन शोशुचत् अघम्) परमेर्वरागिनि पापों को अपगत करके, दग्ध करके, उसकी शोचि या स्वयं परमेर्वरागनि हमें पवित्र कर देती है । को जानकर, कहीं भी पाप नहीं करता, ओर पापसे अपगत होकर पवित्र

English

Varuna, Jātavedas. The tribes of human lineage worship Manyu. Accordant, with thy fervour, Manyu! guard us. Come hither, Manyu, mightier than the mighty: smite, with thy fervour, for ally, our foemen.

अध्याय ४

श्लोक 31.7

संसृ॑ष्टं धन॑मु॒भयं॑ स॒माकृ॑तम॒स्मभ्यं॑ धत्तां॒ वरु॑णश्च म॒न्युः ।भियो॒ दधा॑ना॒ हॄदये॑षु॒ शत्र॑वः॒ परा॑जितासो अप॒ नि ल॑यन्ताम्

saṃsṛṣṭaṃ dhanamubhayaṃ samākṛtamasmabhyaṃ dhattāṃ varuṇaśca manyuḥ | bhiyo dadhānā hṝdayeṣu śatravaḥ parājitāso apa ni layantām

हिन्दी अर्थ

(विश्वतोमूख) है सब मुखोंवाले परमेव राग्नि ! (त्वम्) तू करके, उसकी शोचि या परमेदवराग्नि हमें पविध्र कर देती है । परमेरवर विदवतोमुख है, परमेश्वर की सत्ता को पवित्र जानकर, उसकी प्रत्येक रचना द्वारा उपासक, उसके सदपदेशों को मानो सुनता है, अतः प्रत्येक रचना को मूख कहा है । इन सदुपदेशों को सुननेवालों के पाप दग्ध हो जाते है, भौर वे पवित्र हो जाते हँ। परिभूः =परि+भ सत्तायाम् अथरवेवेदभाष्य काण्ड ४। अनु° ७ । सूक्त ३३

English

Slayer of foes, of Vritra, and of Dasyu, bring thou to us all kinds of wealth and treasure. For thou art, Manyu, of surpassing vigour, fierce, queller of the foe, and self-existent,

अध्याय ४

श्लोक 32.1

सेनासंयोजनम्।१-७ ब्रह्म स्कन्दः।मन्युः।त्रिष्टुप्, १ जगती।यस्ते॑ म॒न्योऽवि॑धद् वज्र सायक॒ सह॒ ओजः॒ पुष्य॑ति॒ विश्व॑मानु॒षक्।सा॒ह्याम॒ दास॒मार्यं॒ त्वया॑ यु॒जा व॒यं सह॑स्कृतेन॒ सह॑सा॒ सह॑स्वता

senāsaṃyojanam| 1-7 brahma skandaḥ| manyuḥ| triṣṭup, 1 jagatī| yaste manyo'vidhad vajra sāyaka saha ojaḥ puṣyati viśvamānuṣak| sāhyāma dāsamāryaṃ tvayā yujā vayaṃ sahaskṛtena sahasā sahasvatā

हिन्दी अर्थ

(विश्वतोमुख) है सव्र ओर मुखोवालि परमेर्वराग्नि ! (नः) हमें (द्विषः) देष-नद से अति (पारय) पार कर, (नावा इव ) जसेकि नौका द्रारा नदीयासमृद्रको पार कियाजातादहै। (जपनः शोशुचत् अघम्) के करनेसे छट जाताहै, ओर पवित्र विचारोंवाला हो जाता है । एतदयं (सः) वह तू है पस्मेरवराग्नि (नः) हमे (नावा) नौका द्वारा

English

Shared by all men, victorious, subduer: vouchsafe to us superior strength in battles. I have departed still without a portion, wise God! according to thy will, the mighty. I, feeble man, was wroth with thee, O Manyu. Come in thy proper form and give us vigour.

अध्याय ४

श्लोक 32.2

म॒न्युरिन्द्रो॑ म॒न्युरे॒वास॑ दे॒वो म॒न्युर्होता॒ वरु॑णो जा॒तवे॑दाः ।म॒न्युर्विश॑ ईडते॒ मानु॑षी॒र्याः पा॒हि नो॑ मन्यो॒ तप॑सा स॒जोषाः॑

manyurindro manyurevāsa devo manyurhotā varuṇo jātavedāḥ | manyurviśa īḍate mānuṣīryāḥ pāhi no manyo tapasā sajoṣāḥ

हिन्दी अर्थ

पष लेट् लकार, सिप् । “सिव् बहुलं लेटि (अष्टा० ३।१।३४)। वननीय या सुन्दरस्वरूप परमेश्वर का वणेन करनेवाला सामवेद, (पक्षौ ) से (जातः) प्रादुर्भूत हुआ है, या होता है। वाली है, अतः यह परिमाण में बडे ऋग्वेदरूपा है । ऋग्वेद ज्ञानप्रधान वेद

English

Come hither, I am all thine own: advancing, turn thou to me, victorious, all-bestowing. Come to me, Manyu, wielder of the thunder: bethink thee of thy friend, and slay the Dasyus.

अध्याय ४

श्लोक 32.3

अ॒भीऽहि मन्यो त॒वस॒स्तवी॑या॒न् तप॑सा यु॒जा वि ज॑हि॒ शत्रू॑न्।अ॒मि॒त्र॒हा वृ॑त्र॒हा द॑स्यु॒हा च॒ विश्वा॒ वसू॒न्या भ॑रा॒ त्वं नः॑

abhī'hi manyo tavasastavīyān tapasā yujā vi jahi śatrūn| amitrahā vṛtrahā dasyuhā ca viśvā vasūnyā bharā tvaṃ naḥ

हिन्दी अर्थ

गृहस्थी वैक छन्दो के सदुपदेशों के अनुसार जीवन व्यतीत करता हुमा योग साधननौँद्वारा पक्षी के सदृश दुलोक को भी अतिक्रान्त कर संचार कर सकता है । यह संचार आकाशगमन रूपी विभूति है (योग ० विभूतिपाद ४२) नैषां शिश्नं भ ठंहति जातवेदाः स्व लोके वहु स्रणमेपाम् ॥२॥ (पूताः) आचारं से पवित्र ह, (पवनेन) प्रवाहित तथा पवित्र वागुद्वारा (शाः) शरीर से शुद्ध है । (शुचयः) विचारों हवाराशुचिर्हैः वेही

English

Approach, and on our right hand hold thy station, then let us slay a multitude of foemen. The best of meath I offer to support thee: may we be first to drink thereof in quiet. A prayer to Agni for protection and prosperity

अध्याय ४

श्लोक 32.4

त्वं हि म॑न्यो अ॒भिभू॑त्योजाः स्वयं॒भूर्भामो॑ अभिमातिषा॒हः ।वि॒श्वच॑र्षणिः॒ सहु॑रिः॒ सही॑यान॒स्मास्वोजः॒ पृत॑नासु धेहि

tvaṃ hi manyo abhibhūtyojāḥ svayaṃbhūrbhāmo abhimātiṣāhaḥ | viśvacarṣaṇiḥ sahuriḥ sahīyānasmāsvojaḥ pṛtanāsu dhehi

हिन्दी अर्थ

कै पडचात् पत्नी पतिलोक अर्थात् पतिगृह मेँ जाती दहै, न कि मृतपति के भगिनी, चाची, ताई, बेटी, बहुए आदि । इन सबके होते हए, तपसे प्रादुर्भूत केसाथही गृहस्थ धमं का व्यवहार करतादहै ओर दुराचारी नहीं होता । नहीं करता, शिद्न का निर्वरयं हो जाना, तथा अन्य घृणित रोगों द्वारा रूण

English

Chasing our pain with splendid light, O Agni, shine thou wealth on us. His lustre flash our pain away.

अध्याय ४

श्लोक 32.5

अ॒भा॒गः सन्नप॒ परे॑तो अस्मि॒ तव॒ क्रत्वा॑ तवि॒षस्य॑ प्रचेतः ।तं त्वा॑ मन्यो अक्र॒तुर्जि॑हीडा॒हं स्वा त॒नूर्ब॑ल॒दावा॑ न॒ एहि॑

abhāgaḥ sannapa pareto asmi tava kratvā taviṣasya pracetaḥ | taṃ tvā manyo akraturjihīḍāhaṃ svā tanūrbaladāvā na ehi

हिन्दी अर्थ

कोशः हृदय । हृदय है स्वग, जिसमे कि ब्रह्मका निवासदहै, स्थितिहै (ये) जो (विष्टारिणम्) विस्तारवाले (ओदनम्) ओदन को (पचन्ति) पकाते है, (एनान्) इनको (कदा चन) कभी भी (अविः) वृत्ति परिपाकौ (यमे) यम-नियमों में (आस्ते) वास करता है, (देवान्) दिन्य- गरणोवाले सत्पुरुषो के (उप) समीप (याति) जाता है, उनका सत्संग करता

English

For goodly fields, for pleasant homes, for wealth we sacrifice to thee. His lustre flash our pain away!

अध्याय ४

श्लोक 32.6

अ॒यं ते॑ अ॒स्म्युप॑ न॒ एह्य॒र्वाङ् प्र॑तीची॒नः स॑हुरे विश्वदावन्।मन्यो॑ वज्रिन्न॒भि न॒ आ व॑वृत्स्व॒ हना॑व॒ दस्यूं॑रुत बो॑ध्या॒पेः

ayaṃ te asmyupa na ehyarvāṅ pratīcīnaḥ sahure viśvadāvan| manyo vajrinnabhi na ā vavṛtsva hanāva dasyūṃruta bodhyāpeḥ

हिन्दी अर्थ

वालों के (सम्) साथ (मदते) मोद-प्रमोद प्राप्त करतादहै। है वेदवाक्, वेदवाणी 1 विष्टारी ओदन, यथा-- अहं पचाम्यहुं ददामि ममेदं कमन् करुणेऽधि जाया । “मै पकाता हू, ्मैदेता हूं, मेरेदही करुणामय कमं में मेरी जाया है।

English

Best praiser of all these be he, and foremost be our noble chiefs. His lustre flash our pain away!

अध्याय ४

श्लोक 32.7

अ॒भि प्रेहि॑ दक्षिण॒तो भ॑वा॒ नोऽधा॑ वृ॒त्राणि॑ जङ्घनाव॒ भूरि॑ ।जु॒होमि॑ ते ध॒रुणं॒ मध्वो॒ अग्र॑मु॒भावु॑पां॒शु प्र॑थ॒मा पि॑बाव

abhi prehi dakṣiṇato bhavā no'dhā vṛtrāṇi jaṅghanāva bhūri | juhomi te dharuṇaṃ madhvo agramubhāvupāṃśu prathamā pibāva

हिन्दी अर्थ

(वयः) जीवन को (अन्वारभेथाम्) तुम पति-पत्नी आरम्भ करो " यहु है विस्तारवाला ओदन, जिस द्वारा कि समग्र भूलोक को निज कौमार-पुत्र जानकर पति-पत्नी पालते ह इसी प्रकार गृहस्थी को पञ्चमहायज्ञ भी करने होतेह, जो पठनेवाले, पितर माता-पिता आदि, वृद्धज्ञानी, ओर परमयोगियों की सेवा । (सत्यारथप्रकाश, घतुथं समुल्लास से उद्ृत) ।

English

So that thy worshipper and we, thine, Agni! in our sons may live. His lustre flash our pain away! As ever conquering Agni’s beams of splendour go to every side,

अध्याय ४

श्लोक 33.1

पाप-नाशनम् १-८ ब्रह्म।पाप्मनाशनोऽग्निः।गायत्री।अप॑ नः॒ शोशु॑चद॒घमग्ने॑ शुशु॒ग्ध्या र॒यिम्।अप॑ नः॒ शोशु॑चद॒घम्

pāpa-nāśanam 1-8 brahma| pāpmanāśano'gniḥ| gāyatrī| apa naḥ śośucadaghamagne śuśugdhyā rayim| apa naḥ śośucadagham

हिन्दी अर्थ

“कुत्तो, पतितो, इवपाकियों, पापरोगियों, कौओं, कृमियों को पका परमेरवर (एनान्) इनको (रेतः न परिमृष्णाति) वीयं से वच्नचित नहीं , होकर (रथयाने) रथ द्वारा जाने योग्य भूलोक मेँ (ईयते) संचार करता है, याति" द्वारा गृहस्थी के सद्गणों का कथन हुमा है । उन सद्गुणोवाला

English

His lustre flash our pain away. To every side thy face is turned, thou art triumphant everywhere.

अध्याय ४

श्लोक 33.2

सु॒क्षे॒त्रि॒या सु॑गातु॒या व॑सू॒या च॑ यजामहे ।अप॑ नः॒ शोशु॑चद॒घम्

sukṣetriyā sugātuyā vasūyā ca yajāmahe | apa naḥ śośucadagham

हिन्दी अर्थ

अतः वह् वीयंवान् ही बना रहता है । रथयाने ईयते =-इसकी व्याख्या में शभरूलोके' (सायण) । इस द्वारा । आकाशगमन' विभति प्राप्त कर (विभूतिपाद, ४२), दुलोक ओर उससे भी परे के लोकों मे निवास करनेवालों के साथ सशरीर संगति प्राप्त करता

English

His lustre flash our pain away! O thou whose face looks every way, bear off our foes as in a ship. His lustre flash our pain away!

अध्याय ४

श्लोक 33.3

प्र यद् भन्दि॑ष्ठ एषां॒ प्रास्माका॑सश्च सू॒रयः॑ ।अप॑ नः॒ शोशु॑चद॒घम्

pra yad bhandiṣṭha eṣāṃ prāsmākāsaśca sūrayaḥ | apa naḥ śośucadagham

हिन्दी अर्थ

है, इसमे उसे कोई बाधा उपस्थित नहीं होती, जंसेकि अन्तरिक्ष में उड़ने वाले पक्षियों को बाधा नहीं होती । एतदर्थं देखें यजुवद (१७।६७) ऋषि दयानन्द पृथिवी से अतिरिक्त लोक-लोकान्तरों मे भी मनुष्योंका निवास मानते हँ (सत्या्थप्रकाश, समुल्लास ८) ।

English

As in a ship across the flood, transport us to felicity. His lustre flash our pain away Glorification of the Vishtāri sacrifice

अध्याय ४

श्लोक 33.4

प्र यत् ते॑ अग्ने सू॒रयो॒ जाये॑महि॒ प्र ते॑ व॒यम्।अप॑ नः॒ शोशु॑चद॒घम्

pra yat te agne sūrayo jāyemahi pra te vayam| apa naḥ śośucadagham

हिन्दी अर्थ

उव्वट तथा महीधर भाष्य भी इस विचार को अपने ढंग से परिपुष्ट आण्डीकं कुमुदं सं त॑नोति विसं शाकं शफको म॒लाली ओदन को (पक्वा) पकाकर, (दिवम्) द्युलोक मे, पाक करनेवाला

English

The head of this is prayer, its back the Brihat, Odanas’s belly is the Vāmadevya; Its face reality, its sides the metre, Vishtāri sacrifice produced from fervour. Boneless, cleansed, purified by him who cleanseth, they go res- plendent to the world of

अध्याय ४

श्लोक 33.5

प्र यद॒ग्नेः सह॑स्वतो वि॒श्वतो॒ यन्ति॑ भा॒नवः॑ ।अप॑ नः॒ शोशु॑चद॒घम्

pra yadagneḥ sahasvato viśvato yanti bhānavaḥ | apa naḥ śośucadagham

हिन्दी अर्थ

करतिवाले गोल (कुमुदम्) कमल डोडे का (सं तनोति) सम्यक्-विस्तार करता है, (शफकः) वृक्षों की जडो को वैदा करनेवाला, ओर (मूलाली, विततः == वि + तनु विस्तारे +क्तः । बहिष्टः=वह प्रापणे + खिलता है (आप्टे) । शालूकम् शाला उच समवाये, चकार को ककार, वर्णविकार द्वारा । शफकः-- शफ (वृक्षों की जड़; आप्टे) + कर ड पिन्वमानाः = पिवि सेचने च (भ्वादिः) । पृष्करिणी =कमलह्द तथा कमल पौधा (आष्ट) । पुष्करम् =नीमकमल (आप्टे) ।

English

splendour. Fire burneth not their organ of enjoyment: much pleasure have they in the world of Svarga.

अध्याय ४

श्लोक 33.6

त्वं हि वि॑श्वतोमुख वि॒श्वतः॑ परि॒भूरसि॑ ।अप॑ नः॒ शोशु॑चद॒घम्

tvaṃ hi viśvatomukha viśvataḥ paribhūrasi | apa naḥ śośucadagham

हिन्दी अर्थ

यृतहंदा मर्धुकूलाः सुरोदकाः क्षीरेण पणां उदकेन दध्ना । १३ अथर्वेवेदभाष्यं काण्ड ४। अनु० ७। सूक्त ३४ (घृतह्ठदाः) घृत के तालाव-सद्ण महाकाय मटक (मधघुक्लाः) मधु हारा कूलो अर्थात् किनारों तक भरे मटके, (सुरोदकः ) आयुर्वेदिक अरिष्टं तथा आसवोवाले महाकाय मट्के, तथा (क्षीरेण) दूध द्वारा, (उदकेन) उदक द्वारा, (दध्ना) दधि द्वारा (पूर्णाः) भरपूर मटके, (एताः)

English

Never doth want or evil fortune visit those who prepare oblation called Vishtāri. He goes unto the Gods, he dwells with Yama, he joys among Gandharvas meet for Soma.

अध्याय ४

श्लोक 33.7

द्विषो॑ नो विश्वतोमु॒खाति॑ ना॒वेव॑ पारय ।अप॑ नः॒ शोशु॑चद॒घम्

dviṣo no viśvatomukhāti nāveva pāraya | apa naḥ śośucadagham

हिन्दी अर्थ

सुरोदकाः = सुरा उदकनाम (निघं० १।१२), अर्थात् सन्धान-विधि आदिवाला उदके । पुष्करिणी" हैँ कमलोवाली भूमियां मधुमक्िखर्यां कमलो के फूलों से मधु अर्थात् शहद का संग्रह करती है, कमलो के फूलो से संगृहीत मधु अधिक गुणकारी प्रतीत होता है । (ददामि) म परमेद्वर देता हूँ है गृहस्थी ! तुजे (क्षीरेण) दूध द्रारा, बहुवचनान्त इन तीनों को, एकविध मानकर, इन्हुं चतुथं कुम्भ कहा है ।

English

Yama robs not of generative vigour the men who dress oblation called Vishtāri. Borne on his car, a charioteer, he travels: endowed with wings he soars beyond the heavens.

अध्याय ४

श्लोक 33.8

स नः॒ सिन्धु॑मिव ना॒वाति॑ पर्ष स्व॒स्तये॑ ।अप॑ नः॒ शोशु॑चद॒घम्

sa naḥ sindhumiva nāvāti parṣa svastaye | apa naḥ śośucadagham

हिन्दी अर्थ

(नि दधे) म निधिषूप मेँ स्थापित करता हु; (स्वधया) निज धारणशक्ति द्वारा (पिन्वमानः) सवका धारण करनेवाला, (सः) वह ओदन-नामक मने निजप्रकाश प्रदान करता रहे । (विदवरूपा) विर्व को रूप देनेवाली, (कामदुघा) कामनाओं का दोहन करनेवाली परमेश्वर -माता (धेनुः) दुधार- गौ के सदृश (मे अस्तु) मेरे लिए हो। । ३४ की एकविषयता का प्रदशेन किया है । सूक्त ३५ मे ओदन दारा परमेश्वर ही अभिप्रेत है, इसके लिए सूक्त ३५ कौ व्याख्या देखो, भौर विशेषरूप मेँ

English

Strongest is this, performed, of sacrifices: he hath reached heaven who hath prepared Vishtāri. The oval-fruited lotus spreads his fibre: there bloom the nelo- phar and water-lilies.

अध्याय ४

श्लोक 34.1

ब्रह्मौदनम्।१-८ अथर्वा।ब्रह्मौदनं।त्रिष्टुप्, ४ उत्तमा भुरिक्, ५ व्यवसाना सप्तपदा …………, ब्रह्मा॑स्य शी॒र्षं बृ॒हद॑स्य पृ॒ष्ठं वा॑मदे॒व्यमु॒दर॑मोद॒नस्य॑ ।छन्दां॑सि प॒क्षौ मुख॑मस्य स॒त्यं वि॑ष्टा॒री जा॒तस्तप॒सोऽधि॑ य॒ज्ञः

brahmaudanam| 1-8 atharvā| brahmaudanaṃ| triṣṭup, 4 uttamā bhurik, 5 vyavasānā saptapadā …………, brahmāsya śīrṣaṃ bṛhadasya pṛṣṭhaṃ vāmadevyamudaramodanasya | chandāṃsi pakṣau mukhamasya satyaṃ viṣṭārī jātastapaso'dhi yajñaḥ

हिन्दी अर्थ

ही ब्राहानिधि को सुरक्षित रख सकते है इस भाव को दर्शने के लिए ऽपचत्), तथापि ओदन पद के समान होने से ओदनत्वरूप मे समानविषयता दोनों सक्तो मे विद्यमान है । यो लोकान विधुंतिर्नाभिरेषा् तेनौदनेनाति तराणि मृत्युम् ।१॥ जिस ओदन-परमेश्वर को, (तपसा) तपस्या द्वारा (अपचत्) निज जीवन

English

Abundant with their overflow of sweetness, these streams shall reach thee in the world of Svarga, whole lakes with lotus- blossom shall approach thee.

अध्याय ४

श्लोक 34.2

अ॒न॒स्थाः पू॒ताः पव॑नेन शु॒द्धाः शुच॑यः॒ शुचि॒मपि॑ यन्ति लो॒कम्।नैषां शि॒श्नं प्र द॑हति जा॒तवे॑दाः स्व॒र्गे लो॒के ब॒हु स्त्रैण॑मेषाम्

anasthāḥ pūtāḥ pavanena śuddhāḥ śucayaḥ śucimapi yanti lokam| naiṣāṃ śiśnaṃ pra dahati jātavedāḥ svarge loke bahu straiṇameṣām

हिन्दी अर्थ

१२६ अधर्ववेदमाष्य काण्ड ४। अनु० ७ । सूक्त ६५ मे परिपक्व किया, तथा (यः) जो ओदन (लोकानाम्) लोकलोकान्तरों का (विधृतिः) विशेषेण धारक है, (न भभिरेषात्) वह मेरे लिए नष्टनहो, (तेन ओदनेन) उस भोदन हारा (मृत्युम् अति) मृत्यु का अतिक्रमण कर, (तरामि) मै तैर जाऊ भवसागर को (विधृतिः=-अथवा जो पृथक्-पृथक् वर्तमान लोकों का धारक है!

English

Full lakes of butter with their banks of honey, flowing with wine, and milk and curds and water Abundant with their overflow of sweetness, these streams shall reach thee in the world of

अध्याय ४

श्लोक 34.3

वि॒ष्टा॒रिण॑मोद॒नं ये पच॑न्ति॒ नैना॒नव॑र्तिः सचते क॒दा च॒न।आस्ते॑ य॒म उप॑ याति दे॒वान्त्सं ग॑न्ध॒र्वैर्मदते सो॒म्येभिः॑

viṣṭāriṇamodanaṃ ye pacanti nainānavartiḥ sacate kadā cana| āste yama upa yāti devāntsaṃ gandharvairmadate somyebhiḥ

हिन्दी अर्थ

किया परमेव रौदन नष्ट नहीं होता । अथवा प्राना कौ गई है कि तपरचर्या न हो जाय । यद्यपि गृह-परिपक्व ओदन भी मृत्यु से बचाता है, दीधं जीवन मृत्यु कौ (अति अतरन्) तैर जति है, (यम्) जिस ओदन को (तपसा) जिस जोदन को (पपाच) जीवन मे परिपक्व करता है, (तेन ओदनेन) उस ओदम द्वारा (मृत्युम्) मृत्यु को (अति तराणि) जै तैर जाङं।

English

Svarga, whole lakes with lotus- blossom shall approach thee. I give four pitchers, in four several places, filled to the brim with milk and curds and water.

अध्याय ४

श्लोक 34.4

वि॒ष्टा॒रिण॑मोद॒नं ये पच॑न्ति॒ नैना॑न् य॒मः परि॑ मुष्णाति॒ रेतः॑ ।र॒थी ह॑ भू॒त्वा र॑थ॒यान॑ ईयते प॒क्षी ह॑ भू॒त्वाति॒ दिवः॒ समे॑ति

viṣṭāriṇamodanaṃ ye pacanti nainān yamaḥ pari muṣṇāti retaḥ | rathī ha bhūtvā rathayāna īyate pakṣī ha bhūtvāti divaḥ sameti

हिन्दी अर्थ

तेरने के कारण, मृत्यु है भवसागर । (विद्वभोजसम्, पृथिवीम्) सबको भोजन देनेवाली, या सबका पालन करनेवाली पृथिवी को (यः) जिस ओदनने (दाधार) धारण किया उदक हारा (आपणात्) स्वेत्र भरपुर किया है; (यः) जिस मोदन ने (ऊर्वः)

English

Abundant with their overflow of sweetness, these streams shall reach thee in the world of Svarga, whole lakes with lotus- blossom shall approach thee. I part this Odana among the Brāhmans, Vishtāri, conquering worlds and reaching heaven.

अध्याय ४

श्लोक 34.5

ष॒ य॒ज्ञानां॒ वित॑तो॒ वहि॑ष्ठो विष्टा॒रिणं॑ प॒क्त्वा दि॒वमा विवे॑श ।आ॒ण्डीकं॑ कुमु॑दं॒ सं त॑नोति॒ बिसं॑ शा॒लूकं॒ शफ॑को मुला॒ली।ए॒तास्त्वा॒ धारा॒ उप॑ यन्तु॒ सर्वाः॑ स्व॒र्गे लो॒के मधु॑म॒त् पिन्व॑माना॒ उप॑ त्वा तिष्ठन्तु पुष्क॒रिणीः॒ सम॑न्ताः

ṣa yajñānāṃ vitato vahiṣṭho viṣṭāriṇaṃ paktvā divamā viveśa | āṇḍīkaṃ kumudaṃ saṃ tanoti bisaṃ śālūkaṃ śaphako mulālī| etāstvā dhārā upa yantu sarvāḥ svarge loke madhumat pinvamānā upa tvā tiṣṭhantu puṣkariṇīḥ samantāḥ

हिन्दी अर्थ

अतितराणि, मे मृ्युको तैर जाड। क भोजसम् == मृज पालनाभ्यवहारयोः (रुधादिः) । रसेन = रसः (यस्मात्) जिस ओदन से (त्रिशत् अराः) तीस अरोंवाले (मासाः निमिता) मास निर्मित हए ह, (यस्मात्) जिस ओदन से (द्वादशारः ) १२ की परिक्रमा करते हए (अहोरात्राः) दिन ओर रात (यम्) जिस ओदन को (न आपुः) नहीं प्राप्त हुई, (तेन ओदनेन अति तराणि मृत्युम्) उस ओदन द्वारा मृत्यु कोम तैर जाऊ।

English

Let me not lose it: swelling by its nature, be it my perfect Cow to grant all wishes! Magnification of the Odana or oblation of milk and rice

अध्याय ४

श्लोक 34.6

घृ॒तह्र॑दा॒ मधु॑कूलाः॒ सुरो॑दकाः क्षी॒रेण॑ पू॒र्णा उ॑द॒केन॑ द॒ध्ना।ए॒तास्त्वा॒ धारा॒ उप॑ यन्तु॒ सर्वाः॑ स्व॒र्गे लो॒के मधु॑म॒त् पिन्व॑माना॒ उप॑ त्वा तिष्ठन्तु पुष्क॒रिणीः॒ सम॑न्ताः

ghṛtahradā madhukūlāḥ surodakāḥ kṣīreṇa pūrṇā udakena dadhnā| etāstvā dhārā upa yantu sarvāḥ svarge loke madhumat pinvamānā upa tvā tiṣṭhantu puṣkariṇīḥ samantāḥ

हिन्दी अर्थ

अराः अराः तथा “परियन्तः' द्वारा कालचक्रं को सुषित किया संवत्सर के १२ मास दशयि ह । राशिचक्रमें १२ राशियां हतीरहैः प्रत्येक राशिमें सूर्यं के एक-एक मास वास द्वारा १२ मास होते रहै। परथिवी आदि लोक (घृतवन्तः) घृतवाने हुए , (क्षरन्ति) क्षरित होते है;

English

Odana which Prajāpati, the firstborn of Order, dressed with fervour for the Brāhman, which guards the worlds from breaking atIthe centre,—I with this Odana will conquer Mrityu.

अध्याय ४

श्लोक 34.7

च॒तुरः॑ कु॒म्भांश्च॑तु॒र्धा द॑दामि क्षी॒रेण॑ पू॒र्नाँ उ॑द॒केन॑ द॒ध्ना।ए॒तास्त्वा॒ धारा॒ उप॑ यन्तु॒ सर्वाः॑ स्व॒र्गे लो॒के मधु॑म॒त् पिन्व॑माना॒ उप॑ त्वा तिष्ठन्तु पुष्क॒रिणीः॒ सम॑न्ताः

caturaḥ kumbhāṃścaturdhā dadāmi kṣīreṇa pūrnā~ udakena dadhnā| etāstvā dhārā upa yantu sarvāḥ svarge loke madhumat pinvamānā upa tvā tiṣṭhantu puṣkariṇīḥ samantāḥ

हिन्दी अर्थ

है वे मानो घृत रहै, घृत के सदुश पृष्टिदायिका हैँ । सब प्रदिशा, यलोक के धथरववेवेदभाष्य काण्ड ४। भनु ° ७ । सूक्त ३१ . हआ, (यः) जो (गायत्याः) गायत्री" मन्त्र का (अधिपतिः बभूव), अधि- वाले (वेदाः निहिताः) वेद निहित है, (तेन ओदनेन अति तराणि मृत्युम्) उस मोदन द्वारा रमै मृत्यु को भवसागर को तैर जाञॐ।

English

Whereby the World-Creators vanquished Mrityu, that which they found by fervour, toil and trouble,

अध्याय ४

श्लोक 34.8

इ॒ममो॑द॒नं नि द॑धे ब्राह्म॒णेषु॑ विष्टा॒रिणं॑ लोक॒जितं॑ स्व॒र्ग॑म्।स मे॒ मा क्षे॑ष्ट स्व॒धया॒ पिन्व॑मानो वि॒श्वरू॑पा धे॒नुः का॑म॒दुघा॑ मे अस्तु

imamodanaṃ ni dadhe brāhmaṇeṣu viṣṭāriṇaṃ lokajitaṃ svargam| sa me mā kṣeṣṭa svadhayā pinvamāno viśvarūpā dhenuḥ kāmadughā me astu

हिन्दी अर्थ

स्वलीन ध्यानियों के लिए अन्नरूप है, परमेदवर मे लीन हए ध्यानी परमे- वरीय आनन्दरस का पान करके तृप्त रहते है, इसलिए परमेश्वर को अघ बाधे दविषन्तं देवपीयुं सपत्ना ये मेऽपरते म॑वन्तु जो असुर हैँ (ते) वे (अप भवन्तु) अपगत हो जाएँ ( विर्वजितम्) विश्व-

English

That which prayer first made ready for the Brāhman,—I with this Odana will conquer Mrityu. 50 That which upholds the Earth, the all-sustainer, that which hath filled air’s middle realm with

अध्याय ४

श्लोक 35.1

मृत्युसंतरणम्।१-७ प्रजापतिः।अतिमृत्युः।त्रिष्टुप्, ३ भुरिग्जगती।बयमो॑द॒नं प्र॑थम॒जा ऋ॒तस्य॑ प्र॒जाप॑ति॒स्तप॑सा ब्र॒ह्मणेऽप॑चत्।यो लो॒कानां॒ विधृ॑ति॒र्नाभि॒रेषा॒त् तेनौ॑द॒नेनाति॑ तराणि मृ॒त्युम्

mṛtyusaṃtaraṇam| 1-7 prajāpatiḥ| atimṛtyuḥ| triṣṭup, 3 bhurigjagatī| bayamodanaṃ prathamajā ṛtasya prajāpatistapasā brahmaṇe'pacat| yo lokānāṃ vidhṛtirnābhireṣāt tenaudanenāti tarāṇi mṛtyum

हिन्दी अर्थ

श्रत् सत्यनाम (निषं० ३।१०) धा (धारणे) । घीमदि । धियो यो नः प्रचोदयात्" (यजुः० ३।३१५; २२।९; ३०।२) । इसद्रारा जप्य गायत्री कौ विशेष महिमा सूचित होती है । ( सत्यौजाः ) सत्य के स्थापन मे भोजवाला, (वेशवानरः) त नारियों का हितकारी, (वृषा) तथा उनपर सुखवर्षा ६५१ ध ४

English

moisture, Which, raised on high in grandeur, stablished heaven,—I with this Odana will conquer

अध्याय ४

श्लोक 35.2

येनात॑रन् भूत॒कृतोऽति॑ मृ॒त्युं यम॒न्ववि॑द॒न् तप॑सा॒ श्रमे॑ण ।यं प॒पाच॑ ब्र॒ह्मणे॒ ब्रह्म॒ पूर्वं॒ तेनौ॑द॒नेनाति॑ तराणि मृ॒त्युम्

yenātaran bhūtakṛto'ti mṛtyuṃ yamanvavidan tapasā śrameṇa | yaṃ papāca brahmaṇe brahma pūrvaṃ tenaudanenāti tarāṇi mṛtyum

हिन्दी अर्थ

(नः) हमे (दुरस्यात्) दुष्ट जानकर ५ ध 1 ष दम्भ अर्थात् छल-कपट का व्यवहार क 1 हमे तियात्) शत्रू जानकर हमारे साथ शतु क ह र ष तो सर्वोपिकारी है, सबका सुख चाहता है त ध भी जो अन्यदेशीय राजा उसकी प्रजा केसाथ वृरा ० उ देने की स्वीकृति प्रदान करे। राजा स्वय प्र ५ भ र करने की स्वीकृति प्रदान करता ट परदहन तो 41 ह (५ । सत्यीजाः-यथा “सत्यं कृणुहि चित्तमेषाम् ' ( ० र

English

Mrityu. From which the months with thirty spokes were moulded, from which the twelve-spoked year was formed and fashioned.

अध्याय ४

श्लोक 35.3

यो दा॒धार॑ पृथि॒वीं वि॒श्वभो॑जसं॒ यो अ॒न्तरि॑क्ष॒मापृ॑णा॒द् रसे॑न ।यो अस्त॑भ्ना॒द् दिव॑मू॒र्ध्वो म॑हि॒म्ना तेनौ॑द॒नेनाति॑ तराणि मृ॒त्युम्

yo dādhāra pṛthivīṃ viśvabhojasaṃ yo antarikṣamāpṛṇād rasena | yo astabhnād divamūrdhvo mahimnā tenaudanenāti tarāṇi mṛtyum

हिन्दी अर्थ

करे, दम्भ करे, शत्रुता करे (लेटि आड् आगम ) । नौ व ष शत्र, (अदिप्सतः नः) दम्भ न करना चाहते हए ५ हुए क) (दिप्सत्) दम्भ करना प 1 (व भ करना चाहते हुए या ¢ 1 1 चाहता है या करे, (तम्) उन दोन (८ त नर-नारियों का हित करनेवाले (अग्नेः) राष्टराग्रणी पर = (दयोः) दो द॑ष्टाओं मे (अपि दधामि) पिहित करताहू १४० भथर्ववेदमाध्य काण्ड ४। अनुं° = सूक्तं ३६

English

Which circling day and night have ne’er o’ertaken,—I with this Odana will conquer Mrityu.

अध्याय ४

श्लोक 35.4

यस्मा॒न्मासा॒ निर्मि॑तास्त्रिं॒शद॑राः संवत्स॒रो यस्मा॒न्निर्मि॑तो॒ द्वाद॑शारः ।अ॒हो॒रा॒त्रा यं प॑रि॒यन्तो॒ नापुस्तेनौ॑दनेनाति॑ तराणि मृ॒त्युम्

yasmānmāsā nirmitāstriṃśadarāḥ saṃvatsaro yasmānnirmito dvādaśāraḥ | ahorātrā yaṃ pariyanto nāpustenaudanenāti tarāṇi mṛtyum

हिन्दी अर्थ

(सहसा) साहसपूरवैक या बल द्वारा (सहे) मै सेनापति पराभव करता हुं । सहः बलनाम (निघं० ३।६) । सहै अभिभवामि (सायण), पराभव करता हूं । कव्यादः =-शननुसं निक । युद्ध मे हत्या करना, मानुषमांस

English

Which hath become breath-giver, life-bestower; to which the worlds flow full of oil and fatness, To whom belong all the refulgent regions,—I with this Odana will conquer Mrityu.

अध्याय ४

श्लोक 35.5

यः प्रा॑ण॒दः प्रा॑ण॒दवा॑न् ब॒भूव॒ यस्मै॑ लो॒का घृ॒तव॑न्तः॒ क्षर॑न्ति ।ज्योति॑ष्मतीः प्र॒दिशो॒ यस्य॒ सर्वा॒स्तेनौ॑द॒नेनाति॑ तराणि मृ॒त्युम्

yaḥ prāṇadaḥ prāṇadavān babhūva yasmai lokā ghṛtavantaḥ kṣaranti | jyotiṣmatīḥ pradiśo yasya sarvāstenaudanenāti tarāṇi mṛtyum

हिन्दी अर्थ

सहे पिशाचान्त्सहसेषां द्रविणं ददे । पिशाचान्) मांसभक्षकों का (सहसा सहे) मँ बल द्वारा पराभव दुरस्यतः) सबसे दुव्यंवहार करना चाहते हृए को (हन्मि) मँ मार देता हू । है । अथवा युद्ध में सेनिक हिसकों को पिशाच ओर क्रव्याद कहा है ।

English

From which, matured, sprang Amrit into being, which hath become Gāyatris lord and ruler, In which the perfect Vedas have been treasured,—I with this

अध्याय ४

श्लोक 35.6

यस्मा॑त् प॒क्वाद॒मृतं॑ संब॒भूव॒ यो गा॑य॒त्र्या अधि॑पतिर्ब॒भूव॑ ।यस्मि॒न् वेदा॒ निहि॑ता वि॒श्वरू॑पा॒स्तेनौ॑द॒नेनाति॑ तराणि मृ॒त्युम्

yasmāt pakvādamṛtaṃ saṃbabhūva yo gāyatryā adhipatirbabhūva | yasmin vedā nihitā viśvarūpāstenaudanenāti tarāṇi mṛtyum

हिन्दी अर्थ

(ये) जो हमारे (देवाः) विजिगीषु सैनिक तथा सेनाधिकारी (सूर्यंण) सूर्यं के साथ (जवम्) निज वेगको (मिमते) मापते है, तुलना करते ह (ये) जो महात्माजन (नदीषु) नदियों के तटे पर या नदियों के संगमो पर, (परवंतेषु) बौर पवतो मे निवास करते है, उन्हे; (तेन) उस १- अमावास्या के रात्रिकाल में अधेरा होने से, शत्रुदल को, छिपे-छिपे खोज का स्व- वसर मिल जाता है । मुगयन्ते = मृग अन्वेषणे (चुरादिः ), भन्वेषण खोज करना,

English

Odana will conquer Mrityu, I drive away the hostile God-despiser: far off be those who are mine adversaries, I dress Brahmaudana that winneth all things. May the Gods hear me who believe and trust

अध्याय ४

श्लोक 35.7

अव॑ बाधे द्वि॒षन्तं॑ देवपी॒युं स॒पत्ना॒ ये मेऽप॒ ते भ॑वन्तु ।ब्र॒ह्मौ॒द॒नं वि॑श्व॒जितं॑ पचामि शृ॒ण्वन्तु॑ मे श्र॒द्दधा॑नस्य दे॒वाः

ava bādhe dviṣantaṃ devapīyuṃ sapatnā ye me'pa te bhavantu | brahmaudanaṃ viśvajitaṃ pacāmi śṛṇvantu me śraddadhānasya devāḥ

हिन्दी अर्थ

जोकि इन्दं उपहास कराने में प्रयोजक बनेरहैः उनके होतेभीमे त कहता हूँ किर्मेतो (तैः पशुभिः) उन नर-पणुओं के साथ (सं विदे) संवेदन न जनम् मिमते--जो पदति अतिशीघ्र वेगवालेर्है, या सूयं के अथवा सूर्यं को रदिमयों के समान अत्तिवेगवाले है, शीघ्रगामी विमानों द्वारा । के प्रधानमन्त्री तथा सेनापतिः; प्रकरणानुसार । अरणेभिः जिनके साथ हमारी बोलचाल नहीं, अ+रण (शब्दे, भ्वादिः) । हासन्ते-= हासयन्ति ध हासयन्ति, उपहास कराने के कारण बनते हँ । शत्रु राजाके दृष्कृत्य हँ

English

them. A charm against fiends, human enemies, and other pests

अध्याय ४

श्लोक 36.1

सत्यौजा अग्निः।१-१० चातनः।सत्यौजा अग्निः।अनुष्टुप्, ९ भुरिक्।तान्त्स॒त्यौजाः॒ प्र द॑हत्व॒ग्निर्वै॑श्वान॒रोवृषा॑ ।यो नो॑ दुर॒स्याद् दिप्सा॒च्चाथो॒ यो नो॑ अराति॒यात्

satyaujā agniḥ| 1-10 cātanaḥ| satyaujā agniḥ| anuṣṭup, 9 bhurik| tāntsatyaujāḥ pra dahatvagnirvaiśvānarovṛṣā | yo no durasyād dipsāccātho yo no arātiyāt

हिन्दी अर्थ

क्रीडा-विजिमीषा-व्यवहार'' आदि (दिवादिः) । होता है, (दव) जैसे (सिहं दष्ट्वा) सिह को देखकर (रवानः) कुत्ते छिपने का समय नहीं पाते वैसे (ते) वे पिशाच मृञ्ञे देखकर (न्यञ्चनम्) छिपने के स्थान को (न विन्दन्ते) नहीं पाते । तं पिशाचाः पिशाच अमानुष-जाति के नही, अपितु वे मांस-भक्षक मनुष्य ही है व्याघ्र गौओंको मारकर खा जाताहै, अतः गोस्वामियों का लहै, ओर अरः प्रबल है । इसलि शाम

English

Endowed with true strength, let the Bull, Agni Vaisvānara, burn them up. Him who would pain and injure us, him who would treat us as a foe. Him who, unharmed, would injure us, and him who, harmed, would do us harm,

अध्याय ४

श्लोक 36.2

यो नो॒ दिप्स॒ददि॑प्सतो॒ दिप्स॑तो॒ यश्च॒ दिप्स॑ति ।वै॒श्वा॒न॒रस्य॒ दंष्ट्र॑योर॒ग्नेरपि॑ दधामि॒ तम्

yo no dipsadadipsato dipsato yaśca dipsati | vaiśvānarasya daṃṣṭrayoragnerapi dadhāmi tam

हिन्दी अर्थ

येमां क्रोधयन्ति लपिता हस्तिनं मशका इव (ये) जौ (लपिताः) बकवासी (मा) मुञ्च सेनाध्यक्ष को (करोधयन्ति) निज व्यवहारो द्वारा करद्धकरतेहैः (इव) जेसेकि (मशकाः) मच्छर सडक पर सोये हुए क्षुद्र कड की तरह ।

English

Flesh-eaters, others who would harm,—all these I overcome with might. I conquer the Pisāchas with my power, and take their wealth away. All who would injure us I slay. Let mine intention have success.

अध्याय ४

श्लोक 36.3

य आ॑ग॒रे मृ॒गय॑न्ते प्रतिक्रो॒शेऽमावा॒स्ये।क्र॒व्यादो॑ अ॒न्यान् दिप्स॑तः॒ सर्वां॒स्तान्त्सह॑सा सहे

ya āgare mṛgayante pratikrośe'māvāsye| kravyādo anyān dipsataḥ sarvāṃstāntsahasā sahe

हिन्दी अर्थ

"लपिताः'' है, वै घुं की आवाजे कानों मेँ करते ह सेनाध्यक्ष को करद करता है, (सः) वह (उ) निर्वय से (पाशात्) पाशसे । (न मुच्यते नहीं मुक्त होता, रस्सियो से वाध दिया जाता है । १४२ मथर्ववेदभाष्य काण्ड ४। अनु० ८ । सूक्त ६६ (ओषधे) है जोषधि ! (पूवम्) पूरवैकाल से, अर्थात् अनादिकालसे

English

With Gods who flee with him, and match their rapid motion with the Sun, I with those animals who dwell in rivers and on hills am found.

अध्याय ४

श्लोक 36.4

सहे॑ पिशा॒चान्त्सह॑सैषां॒ द्रवि॑णं ददे ।सर्वा॑न् दुरस्य॒तो ह॑न्मि॒ सं म॒ आकू॑तिरृद्यताम्

sahe piśācāntsahasaiṣāṃ draviṇaṃ dade | sarvān durasyato hanmi saṃ ma ākūtirṛdyatām

हिन्दी अर्थ

रोग-कीटाणुजों ल्प का (जघ्नुः) हनन किया, (त्वया) तुज्ञ दारा (कश्यपः) रोगपरीक्षक ने (जघान) उनका हनन किया, (त्वया) तुक्च र (कण्वः) कण समान क्षुद्र रोग-कीटाणुओं को जाननेवाले मेधावी ने, मेधाविनाम (निघं० ३।१५) 1 अगस्त्यः = रोग-कीटाणुके कारण शरीरमें रोग कीटाणओं का (चातयामहे) नाश करते ह; (अशुद्धि) है अजशुद्खी

English

I trouble the Pisāchas as the tiger plagues men rich in kine. They, even as dogs when they have seen a lion, find no hiding- place. Naught with Pisāchas can I do, with thieves, with roamers of the wood.

अध्याय ४

श्लोक 36.5

ये दे॒वास्तेन॒ हास॑न्ते॒ सूर्ये॑ण मिमते ज॒वम्।न॒दीषु॒ पर्व॑तेषु॒ ये सं तैः प॒शुभि॑र्विदे

ye devāstena hāsante sūryeṇa mimate javam| nadīṣu parvateṣu ye saṃ taiḥ paśubhirvide

हिन्दी अर्थ

अप्सरसः अप्सु सारिण्यः; मादा रोग-कीटाणु । जलो मे सरण करनेवाले मलेरिया तथा हैजे के मादा रोग कोटाणु । गन्धर्वान् “= ञ अर्वा (अवं हिसायाम्, भ्वादिः) नर रोग-कोटाणु । गन्धेन नाशय=-अज- अथवा नर-मादा दोनों प्रकार के रोग-कीटाणुओं को नष्ट करना । १४४ अथर्वेवेदभाष्य काण्ड ४। अनु° ८ । सूक्त ३७ (अप्सरसः) है अप् अर्थात् जलों मेँ सरण करनेवाले मादा-कीटाणुभ ! (तत्) उस जलप्राय' स्थान को (परेत) हमसे पराङ्मुख होकर तुम चले ।

English

Pisāchas flee and vanish from each village as I enter it. Into whatever village this mine awful power penetrates,

अध्याय ४

श्लोक 36.6

तप॑नो अस्मि पिशा॒चानां॑ व्या॒घ्रो गोम॑तामिव ।श्वानः॑ सिं॒हमि॑व दृ॒ष्ट्वा ते न वि॑न्दन्ते॒ न्यञ्च॑नम्

tapano asmi piśācānāṃ vyāghro gomatāmiva | śvānaḥ siṃhamiva dṛṣṭvā te na vindante nyañcanam

हिन्दी अर्थ

गन्ध रोग-कीटाणुओं का विनाशके है। प्रतिबुद्धा अभूतन तुम जाने पहिचान हो गये हो, अतः तुम्हारा विनाश समीप है-यह अभिप्रायहै। पीला आदि ओषधिर्या सुगन्धवाली हैँ । परेत परा + इत । अरवत्थ आदि महाकाय वृक्ष तथा मयूर हैँ (तत्) उस स्थान में (परा इत) सरण करनेवाले मादा-कीटाणुओ । (प्रतिबुद्धाः अभूतन) तुम जाने-पहिचाने

English

Thence the Pisāchas flee away, and plot no further mischief there. Those who enrage me with their prate, as flies torment an elephant, I deem unhappy creatures, like small insects troublesome to man.

अध्याय ४

श्लोक 36.7

न पि॑शा॒चैः सं श॑क्नोमि॒ न स्ते॒नैर्न व॑न॒र्गुभिः॑ ।पि॒शा॒चास्तस्मा॑न्नश्यन्ति॒ यम॒हं ग्राम॑मावि॒शे

na piśācaiḥ saṃ śaknomi na stenairna vanargubhiḥ | piśācāstasmānnaśyanti yamahaṃ grāmamāviśe

हिन्दी अर्थ

गिरकर, तथा मृत्यु के पश्चात् प्राणियों के शरीर गल-सड़कर रोगकीटाणृभों को पदा करते रहते है, अतः मादा-कोटाणृभओं के स्थानर्है। मादा इसलिए कि मादा-कीटाणुही मादा ओर नर दोनो प्रकारके कीटाणुओं कोपेदा करते हैँ । अभूतन = तनप् प्रत्यय । १. जलप्राय स्थानों में मलेरिया भौर हैजे के रोग-कीटाणु पनपते हैँ । (२) “"गृल्गुल्वा- उत) हरे ओर रवेत वर्णोवाते पप्रेह्भाः) सूले है (यत्र

English

Destruction seize upon the man, as with a cord they hold a horse, The fool who is enraged with me! He is not rescued from the noose.

अध्याय ४

श्लोक 36.8

यं ग्राम॑मावि॒शत॑ इ॒दमु॒ग्रं सहो॒ मम॑ ।पि॒शा॒चास्तस्मा॑न्नश्यन्ति॒ न पा॒पमुप॑ जानते

yaṃ grāmamāviśata idamugraṃ saho mama | piśācāstasmānnaśyanti na pāpamupa jānate

हिन्दी अर्थ

(आघाटः) संघट् मेँ वतमान (ककंयेः) कडकड़ शब्द करनेवाले ज्लींगुर' (सम् वदन्ति) परस्पर मिलकर संवाद या शोर-गुल करते है, (तत् परेता- मानो परस्पर भाषण करते हए षींगर, "संवदन्ति" । अजशुङ्गय राटकी ती्ष्णशुङ्गी व्यु षतु ।।६॥

English

A charm against Gandharvas and Apsarases With thee, O Plant, in olden time Atharvans smote and slew the fiends. Kasyapa smote with thee, with thee did Kanava and Agastya smite.

अध्याय ४

श्लोक 36.9

ये मा॑ क्रो॒धय॑न्ति लपि॒ता ह॒स्तिनं॑ म॒शका॑ इव ।तान॒हं म॑न्ये॒ दुर्हि॑ता॒न् जने॒ अल्प॑शयूनिव

ye mā krodhayanti lapitā hastinaṃ maśakā iva | tānahaṃ manye durhitān jane alpaśayūniva

हिन्दी अर्थ

(व्यषतु) रोग के कीटाणुओं का हिसन करे । अराटिका नाम है ओषधि का। शेष दो नाम, अराटिकाके भिनद्मि मृष्कावपिं यामि शपः ।५॥ (आनृत्यतः) घूम-घूमकर नाचते हुए (शिखण्डिनः) मयूरो के सदृश

English

With thee we scare and drive away Gandharvas and Apsarases. O Ajasringi, chase the fiends. Cause all to vanish with thy smell.

अध्याय ४

श्लोक 36.10

अ॒भि तं निरृ॑तिर्धत्ता॒मश्व॑मिवाश्वाभि॒धान्या॑ ।म॒ल्वो यो मह्यं॒ क्रुध्य॑ति॒ स उ॒ पाशा॒न्नमु॑च्यते

abhi taṃ nirṛtirdhattāmaśvamivāśvābhidhānyā | malvo yo mahyaṃ krudhyati sa u pāśānnamucyate

हिन्दी अर्थ

(न) न (पिशाचैः) मांस-भक्षकों के साथ (सम् शक्नोमि) मेँ सन्धि कर सकता हं, (न स्तेनैः) न चोरों के साथ, (न वनर्गृभिः) न वनम छिपे (आविशे) प्रवेश पाता हूँ (तस्मात्) उस ग्रामसे (पिशाचाः) पिशाच आदि ¦ जानते) जानते तक नहीं पापकर्म का करना तो सम्भव ही नहीं । प्रत्येक ग्रामको पाप तथा पापियोंसे रहित कर देना, वैदिकं सदाचार का उदेश्य है, केवल नागरिक सदाचार पर्याप्त नहीं । ।

English

I lay between the doubled fangs of Agni, of Vaisvānara. Those who, what time the moon is dark, hunt with loud cry and answering shout,

अध्याय ४

श्लोक 37.1

कृमिनाशनम्।१२ बादरायणिः।अजशृङ्गी, १ अप्सरसः, १-२, ६-१० औषधी अजशृङ्गी, ३-५ अप्सरसः, ७-१२ गन्धर्वाप्सरसः।अनुष्टुप्, ३ त्र्यवसाना षट् पदा त्रिष्टुप्, ५ प्रस्तारपङ्क्तिः, ७ परोष्णिक्, ११ षट् पदा जगती, १२ निचृत्।त्वया॒ पूर्व॒मथ॑र्वाणो ज॒घ्नू रक्षां॑स्योषधे ।त्वया॑ जघान क॒श्यप॒स्त्वया॒ कण्वो॑ अ॒गस्त्यः॑

kṛmināśanam| 12 bādarāyaṇiḥ| ajaśṛṅgī, 1 apsarasaḥ, 1-2, 6-10 auṣadhī ajaśṛṅgī, 3-5 apsarasaḥ, 7-12 gandharvāpsarasaḥ| anuṣṭup, 3 tryavasānā ṣaṭ padā triṣṭup, 5 prastārapaṅktiḥ, 7 paroṣṇik, 11 ṣaṭ padā jagatī, 12 nicṛt| tvayā pūrvamatharvāṇo jaghnū rakṣāṃsyoṣadhe | tvayā jaghāna kaśyapastvayā kaṇvo agastyaḥ

हिन्दी अर्थ

नाचते हए, (अप्सरापतेःः) जल मेँ सरण करनेवाले मादा रोग-कोटाण के १. सम्भवतः भींगुर ऋग्वेदोक्त 'चिच्चिक' द । यथा “वृषारवाय वदते यदुपावति दिदाओं मे व्यापी गज॑न। इस गर्जन को उपलक्ष्य करके मानो जल-याचन के लिए "चिच्विक' चि-चि आवारं करता है । अवति == अव याचने (स्वादिः) चि-चि आवाज सम्भवतः गुरो का संवदन ठै, संवाद करना है।

English

Let the Apsarases, puffed away, go to the river, to the ford,— Guggulū, Pīlā, Naladi, Aukshagandhi, Pramandini. 51

अध्याय ४

श्लोक 37.2

त्वया॑ व॒यम॑प्स॒रसो॑ गन्ध॒र्वांस्चा॑तयामहे ।अज॑शृ॒ङ्ग्यज॒ रक्षः॒ सर्वा॑न् ग॒न्धेन॑ नाशय

tvayā vayamapsaraso gandharvāṃscātayāmahe | ajaśṛṅgyaja rakṣaḥ sarvān gandhena nāśaya

हिन्दी अर्थ

उनमें निजविष का संचार कर देते । इसी प्रकार अवकोको खाते हुए जल १. अपि यामि --अमियामि, अभियान है आक्रमण करना । जोकि दवा ओर कपि के सदृ योगी होकर, कुमारकारूप धारण कर, स्त्रियोंका

English

Wearing the tuft of hair, I take all manhood and virility. With those dread hundred iron spears, the darts of Indra, let it pierce. The Blyxa-fed Gandharvas, those who bring no sacrificial gift.

अध्याय ४

श्लोक 37.3

न॒दीं य॑न्त्वप्स॒रसो॒ऽपां ता॒रम॑वश्व॒सम्।गु॒ल्गु॒लूः पीला॑ नल॒द्यौ॒३क्षग॑न्धिः प्रमन्द॒नी।तत् परे॑ताप्सरसः॒ प्रति॑बुद्धा अभूतन

nadīṃ yantvapsaraso'pāṃ tāramavaśvasam| gulgulūḥ pīlā naladyau3kṣagandhiḥ pramandanī| tat paretāpsarasaḥ pratibuddhā abhūtana

हिन्दी अर्थ

संभोग करता है, जिसे कि विनाश का दण्ड दिया है, राजव्यवस्थानुसार । को विकृत करदेतेर्है, ओर रोगों को फलाते हँ । इनका विनाशसम्राट् के ताभिैविरदान गन्धर्वान॑वकादान स्यु पतु ॥९॥ वकादान॑भिशोचानप्सु ज्योतय मापकान ।

English

With those dread hundred golden spears, the darts of Indra, let it pierce. The Blyxa-fed Gandharvas, those who bring no sacrificial gift.

अध्याय ४

श्लोक 37.4

यत्रा॑श्व॒त्था न्य॒ग्रोधा॑ महावृ॒क्षाः शि॑ख॒ण्डिनः॑ ।तत् परे॑ताप्सरसः॒ प्रति॑बुद्धा अभूतन

yatrāśvatthā nyagrodhā mahāvṛkṣāḥ śikhaṇḍinaḥ | tat paretāpsarasaḥ pratibuddhā abhūtana

हिन्दी अर्थ

सूयं की ज्योति द्वारा जला दे; (ओषधे) है ओषधि ! (सर्वान्) सब (पिशाचान्) मांसभक्षकों को (प्र मृणीहि) मार डाल, (च) ओर (सहस्व) जलस्थ ही रोग-कीटाणुभओं को समाप्त कर देना । (२) ओषधि के प्रयोग दवारा या उसके सुगन्धित धूम द्वारा उन्हँ मार देना । रोग-कोटाणु, रोग पदा कर रोगीके मांस को सुखा देतह, उसे कमजोर कर देते ह, इसलिषए मांसयाचक, अतः मांसभक्षकः; मांसयाचना भक्षणके लिएही होती है।'

English

O Plant, be thou victorious, crush the Pisāchas, one and all, Blyxa-fed, shining in the floods, illumining the selfish ones. Youthful, completely decked with hair, one monkey-like, one like a dog,—

अध्याय ४

श्लोक 37.5

यत्र॑ वः प्रे॒ङ्खा हरि॑ता॒ अर्जु॑ना उ॒त यत्रा॑घा॒ताः क॑र्क॒र्यः सं॒वद॑न्ति ।तत् परे॑ताप्सरसः॒ प्रति॑बुद्धा अभूतन

yatra vaḥ preṅkhā haritā arjunā uta yatrāghātāḥ karkaryaḥ saṃvadanti | tat paretāpsarasaḥ pratibuddhā abhūtana

हिन्दी अर्थ

एवेवेकः कपिरिवेक॑ः कुमारः संवकेशकः । (र्वा इव) कुत्ते के सदृश (एकः) एक, (कपिः इव) कपि के सदृश ¦ एकः) एक, (कुमारः) कुत्सित कामवाला युवा-कुमार, (सर्वकेशकः) जो १४८ अथवेदभाष्य काण्ड ४। बनु० ८। सूक्त ३७ बरह्मणा) शक्ति-प्रदाता परमेदवर की सहायता द्वारा (इतः नाशयामसि)

English

So the Gandharva, putting on a lovely look, pursues a dame. Him with an efficacious charm we scare and cause to vanish hence.

अध्याय ४

श्लोक 37.6

एयम॑ग॒न्नोष॑धीनां वी॒रुधां॑ वी॒र्याऽवती ।अ॒ज॒शृ॒ङ्ग्यऽराट॒की ती॑क्ष्णशृ॒ङ्गी व्यृऽषतु

eyamagannoṣadhīnāṃ vīrudhāṃ vīryā'vatī | ajaśṛṅgya'rāṭakī tīkṣṇaśṛṅgī vyṛ'ṣatu

हिन्दी अर्थ

इस प्रथिवीसे हम परस्पर मिलकर नष्ट करते है, तो भी नर-कोटाणुके सदृ युवा-कुमार का भी प्रसद्धवश वणेन हमा है । यह कुमार है “कुत्सित कामवासनावाला, तथा मारः' = मार देनेवाले अतिकामवाला युवा कुमार । सवेकेशकः = सर्वेभ्यः केशं क्लेशं करोतीति ।

English

Your wives are the Apsarases, and ye, Gandharvas, are their lords. Run ye, immortal ones, away: forbear to interfere with men! A charm for success in gambling

अध्याय ४

श्लोक 37.7

आ॒नृत्य॑तः शिख॒ण्डिनो॑ गन्ध॒र्वस्या॑प्सराप॒तेः ।भि॒नद्मि॑ मु॒ष्कावपि॑ यामि॒ शेपः॑

ānṛtyataḥ śikhaṇḍino gandharvasyāpsarāpateḥ | bhinadmi muṣkāvapi yāmi śepaḥ

हिन्दी अर्थ

धास्यतीति (सायण; ४।३७।७) । इवा ओर कपि अतिकामी होते है । (गन्धर्वाः) है गन्ध हारा हिसनीय नर-कीटाणुओ ! (अप्सरसः) जलों मे सरण करनेवाले मात्-कीराणु (वः) तुम्हारी (जायाः इत्) जाया हीह पत्न्यां ही है, (यूयम्) तुम (पतयः) उनके पति हो। (अमर््याः ) हे (अप धावत) उनसे अपगत होकर दौड़ जाओ, भाग जाओ। नर-रोग कोटाणुओं के प्रति उपचार-कर्ता द्वारा कथन हृञा है,

English

Hither I call the Apsaras, victorious, who plays with skill, Her who comes freely fort to view, who wins the stakes in games of dice.

अध्याय ४

श्लोक 37.8

भी॒मा इन्द्र॑स्य हे॒तयः॑ श॒तमृ॒ष्टीर॑य॒स्मयीः॑ ।ताभि॑र्हविर॒दान् ग॑न्ध॒र्वान॑वका॒दान् व्यृऽषतु

bhīmā indrasya hetayaḥ śatamṛṣṭīrayasmayīḥ | tābhirhaviradān gandharvānavakādān vyṛ'ṣatu

हिन्दी अर्थ

हिसायाम् (भ्वादिः) । अमवयं हँ नर रोग-कीटाणु, ये अमनुष्य है, मनुष्य को आकृति के नहीं हैँ । मत्ये हैँ मनुष्य जाति के। धावत=दौडइ जाओ, अन्यथा उपचार-कर््ता तुम्हारा विनाश करदेगा। नर-रोगकीटाणुओं के न रहने से, मादा रोग-कीटाणुओं में वीर्याधानकेन होनेसे, रोग कीटाणु- कंश स्वयं समाप्त हौ जायेगा । सब वणेन कवितामे हा है । का वणन हुआ है, ओर इसके दो मृष्कों ओर शेप के भेदन का कथन हा आदि पौराणिक भाष्यकारो के अनुसार अप्सराएं ओर गन्धव, देवजाति

English

Hither I call that Apsaras who scatters and who gathers up. The Apsaras who plays with skill and takes her winnings in the game. Dancing around us with the dice, winning the wager by her play.

अध्याय ४

श्लोक 37.9

भी॒मा इन्द्र॑स्य हे॒तयः॑ श॒तमृ॒ष्टीर्हि॑र॒ण्ययीः॑ ।ताभि॑र्हविर॒दान् ग॑न्ध॒र्वान॑वका॒दान् व्युऽषतु

bhīmā indrasya hetayaḥ śatamṛṣṭīrhiraṇyayīḥ | tābhirhaviradān gandharvānavakādān vyu'ṣatu

हिन्दी अर्थ

तीन अङ्गो के भेदन के लिएदेव जाति का ही कोई सर्जन है? विजय प्राप्त करती हृरद, (साधुदेविनीम्) ओर साधु-व्यवहारोंवाली, (कृतानि) सुकृत क्मोँ को (कृण्वानाम्) करती हुई (ताम्) उस महिला को (इह हुवे) यहां मँ आमन्वित करता हूं । पद ४७; उ्वंशी;) साधु देविनीम् = दिवु क्रीडा-विजिगीषा-व्यवहार आदि

English

May she obtain the stake for us and gain the victory with skill. May she approach us full of strength: let them not win this wealth of ours.

अध्याय ४

श्लोक 37.10

अ॒व॒का॒दान॑भिशो॒चान॒प्सु ज्यो॑तय माम॒कान्।पि॒शा॒चान्त्सर्वा॑नोषधे॒ प्र मृ॑णीहि॒ सह॑स्व च

avakādānabhiśocānapsu jyotaya māmakān| piśācāntsarvānoṣadhe pra mṛṇīhi sahasva ca

हिन्दी अर्थ

१४६ मयरवेवेदभाष्य काण्ड ४ । अनु° ८ 1 सूक्त ३७ पर (अपि! यामि) आक्रमणकरताहूं अभिप्राय है काट देता ह" । श्णऽ अतिशय हिलते-डलते दीखते हैँ, जिनकी इस क्रिया को नाचना । कहा है । मयूर नाचता है, मोरनी को अपनी ओर कामाथ आकर्षित करन भी, मादा रोग-कौटाण् का आकषेक वणित कियाहै। नररोगकीटाणु,

English

Ye have become attentive since the Apsarases have past away. Where great trees are, Asvatthas and Nyagrodhas with their leafy crests,

अध्याय ४

श्लोक 37.11

स्वेवैकः॑ क॒पिरि॒वैकः॑ कुमा॒रः स॑र्वकेश॒कः ।प्रियो दृश इ॑व भू॒त्वा ग॑न्ध॒र्वः स॑चते॒ स्त्रिय॑स्त॑मि॒तो ना॑शयामसि॒ ब्रह्म॑णा वी॒र्याऽवता

svevaikaḥ kapirivaikaḥ kumāraḥ sarvakeśakaḥ | priyo dṛśa iva bhūtvā gandharvaḥ sacate striyastamito nāśayāmasi brahmaṇā vīryā'vatā

हिन्दी अर्थ

तरलांश का आधान करता दहै तभी रोग-कीटाणुञों को वंशपरम्परा चालू होती है । इस परम्परा का उच्छेद तभी सम्भव है जवकि नर रोग-कीटाणु के अण्डो का भेदन कर दिया जाय, भौर उसकी प्रजननेन्द्रियि को काट । दिया जाय । इसके लिए निष्णात वैज्ञानिक डाक्टर अपेक्षित रहै । भेदन

English

There where your swings are green and bright, and lutes and cymbals sound in tune, ‘Ye have become attentive since the Apsarases have past away. Hither hath come this one, the most effectual of herbs and plants.

अध्याय ४

श्लोक 37.12

जा॒या इद् वो॑ अप्स॒रसो॒ गन्ध॑र्वाः॒ पत॑यो यू॒यम्।अप धावतामर्त्या॒ मर्त्या॒न् मा स॑चध्वम्

jāyā id vo apsaraso gandharvāḥ patayo yūyam| apa dhāvatāmartyā martyān mā sacadhvam

हिन्दी अर्थ

ओषधि (मन्त्र २) हारा रोग-कीटाणुओों को मारदेनेका निर्देश भी किया है । इसमे भेदन ओर काटने की भावर्यकता नहीं होती । ओषधि के प्रयोक्ताभों का वणन (मन्रर)मेहै। ताभिैविरदान म॑न्धव।नैवकाद)न् च्य पतु ॥८॥ (शतमृष्टीः) जोकि सौ धाराओंवाले है, ओर (अयस्मयीः) लौहनिितरह, (ताभिः) उन दारा (हविः अदान्) हवि के खानेवाले, ओर (अवकादान्) गन्धव हँ नर रोग-कोटाणु, जोकि गन्ध द्रारा हिसितहोतेदहैं। ये हवियों

English

Let Ajasringi penetrate, Arāaki with sharpened horn. From the Gandharva, dancing near, the lord of the Apsarases,

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Atharva Veda — Chapter 4
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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