Yajur Veda· Yajurveda Saṁhitā
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अध्याय 36 / 40

Adhyāya 36

अध्याय 36

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अध्याय ३६

श्लोक 1

ऋचं॒ वाचं॒ प्र प॑द्ये॒ मनो॒ यजु॒: प्र प॑द्ये॒ साम॑ प्रा॒णं प्र प॑द्ये॒ चक्षु॒: श्रोत्रं॒ प्र प॑द्ये ।वागोज॑: स॒हौजो॒ मयि॑ प्राणापा॒नौ

ṛcaṃ vācaṃ pra padye mano yaju: pra padye sāma prāṇaṃ pra padye cakṣu: śrotraṃ pra padye | vāgoja: sahaujo mayi prāṇāpānau

हिन्दी अर्थ

हमारे जीवन के चार ब्रत हों १. वाणी को ज्लानप्राप्ति मे लगाये रखकर इससे मधुर शब्द ही बोलेगे २. मन को खदा उत्तम कर्मो में लगाये रखकर कभी पराये दोषों को देखने में न लगार्पँगे। ३. जीवन में प्रभु को कभी विस्मृत न करेगे। ४. श्रोत्र से सदा ज्ञान १. यत्-जो मे=मेरा चक्षुषः =ओंख का, हदयस्य हदय का मनसो वाया मन का

English

com The Texts of the White Yajurveda, tr. Ralph T.H. Griffith, [1899], BOOK THE THIRTY-SIXTH. REFUGE I take in Speech as Rich: refuge in Mind as Yajus-text; refuge in Breath as Sâma-chant; refuge in Hearing and in Sight. Speech-energy endowed with strength, inbreath and outbreath are in me.

अध्याय ३६

श्लोक 2

यन्मे॑ छि॒द्रं चक्षु॑षो॒ हृद॑यस्य॒ मन॑सो॒ वाति॑तृण्णं॒ बृह॒स्पति॑र्मे॒ तद्द॑धातु ।शं नो॑ भवतु॒ भुव॑नस्य॒ यस्पति॑:

yanme chidraṃ cakṣuṣo hṛdayasya manaso vātitṛṇṇaṃ bṛhaspatirme taddadhātu | śaṃ no bhavatu bhuvanasya yaspati:

हिन्दी अर्थ

हम प्रभु के तेज को अपने जीवन मे धारण करे, जिससे प्रभु हमारी बुद्धियों ९. वे सदावृधः-सदा से बद हए सखाजीव के मित्र चित्रः-अद्धुत शक्ति व ज्ञानवाले प्रभु नः=हमारे ऊती=कल्याणमय रक्षण के द्वारा आभुवत्- चायो ओर विद्यमान है। जव मेँ प्रभु से आवृत हूँ, तब मुञ्ञे भय किस बात का? यह अभय प्राप्त उसी को होता

English

Whatever deeply-sunk defect I have of eye, or mind, or heart, that way Brihaspati amend! Gracious to us be he, Protector of the world.

अध्याय ३६

श्लोक 3

भूर्भुव॒: स्व॒: तत्स॑वि॒तुर्वरे॑ण्यं॒ भर्गो॑ दे॒वस्य॑ धीमहि ।धियो॒ यो न॑: प्रचो॒दया॑त्

bhūrbhuva: sva: tatsaviturvareṇyaṃ bhargo devasya dhīmahi | dhiyo yo na: pracodayāt

हिन्दी अर्थ

प्रभु ने हमें यह सोम दिया है, जिससे हम अपने जीवन मे वास्तविक आनन्द ् अनुभव कर पारण ओर इन्द्रियों, मन व बुद्धि को आसुरवृत्तियों का अधिष्ठान न बनने हे प्रमो! आप अभिन्दोनों ओर सु=उत्तमता से नः=हम सखीनाम्-समान ख्यानवाले, समान ज्ञानवाले जरितृणाम्=स्तोताओं का शतम्-सो-के-सौ वर्षपर्यन्त ऊत्तिथिः क्रियाओं

English

Earth! Ether! Heaven! May we attain that excellent, etc., as in III. 33. With what help will he come to us etc., as in XXVII. 39.

अध्याय ३६

श्लोक 4

कया॑ नश्चि॒त्र आ भु॑वदू॒ती स॒दावृ॑ध॒: सखा॑ ।कया॒ शचि॑ष्ठया वृ॒ता

kayā naścitra ā bhuvadūtī sadāvṛdha: sakhā | kayā śaciṣṭhayā vṛtā

हिन्दी अर्थ

हम ज्ञानी, भक्त व क्रियामय जीवनवाले बनकर प्रभु-रक्षा के अधिकारी बने। प्रभु का प्रवेश त प्रसाद कया त्वं न॑ऽ ऊत्याभि प्र म॑न्दसे वृषन् । कयां स्तोतृभ्य ऽआभर।॥७॥ १. वृषन्=हे शक्तिशालिन्! है सब सुखो के वर्षक प्रभो! जो निर्बल है वह तो दूसरे

English

What succour will he bring to us, wonderful, ever-prospering Friend? With what most mighty company?

अध्याय ३६

श्लोक 5

कस्त्वा॑ स॒त्यो मदा॑नां॒ मᳪहि॑ष्ठो मत्स॒दन्ध॑सः ।दृ॒ढा चि॑दा॒रुजे॒ वसु॑

kastvā satyo madānāṃ mahiṣṭho matsadandhasaḥ | dṛḍhā cidāruje vasu

हिन्दी अर्थ

हम प्रभु के स्तोता बनें, जिससे प्रभु की दिव्यता को अपने में भरकर सदा १. इन्द्रः=वह सर्वशक्तिमान्, सब असुरो को दूर भगानेवाला प्रभु -विश्वस्य=सारे ब्रह्माण्ड का तथा इस संसार मे प्रविष्ट (विश्) सब प्राणियों का राजति=शासन व व्यवस्था करता है। जिस दिन हम प्रभु के अध्यात्मशासन का अनुभव करेगे, उस दिन नः=हम

English

What, genuine and most liberal draught will spirit thee with juice to burst Open e'en strongly-guarded wealth?

अध्याय ३६

श्लोक 6

अ॒भी षु ण॒: सखी॑नामवि॒ता ज॑रितॄ॒णाम् ।श॒तं भ॑वास्यू॒तिभि॑:

abhī ṣu ṇa: sakhīnāmavitā jaritṝṇām | śataṃ bhavāsyūtibhi:

हिन्दी अर्थ

हम उस ईश के साम्राज्य का सर्वत्र अनुभव करे ओर सव प्राणियों के साथ शान्ति से चलने कौ मनोवृत्तिवाले बने। प्रस्तुत मन्त्र में प्रभु को मित्रादि सात नामों से स्मरण करके शान्ति-प्राप्ति की प्रार्थना कौ गई हे। भिन्न-भिन्न नामों से शान्ति की प्रार्थना का स्वारस्य इसमें है कि इन नामों के

English

Do thou who art, etc., as in XXVII. 41.

अध्याय ३६

श्लोक 7

कया॒ त्वं न ऊ॒त्याभि प्र म॑न्दसे वृषन् ।कया॑ स्तो॒तृभ्य॒ आ भ॑र

kayā tvaṃ na ūtyābhi pra mandase vṛṣan | kayā stotṛbhya ā bhara

हिन्दी अर्थ

मित्रादि सात साधनों से सच्ची शान्ति प्राप्त होती है। शन्नः कनिक्रवदेवः पर्जन्योंऽअभि वर्षतु।।९०॥ नः=हमारे लिए वातः=वायु शम्-शान्तिकर होकर पवताम्-बहे, नः हमारे लिए सूर्यः = सूर्य शम्-शान्तिवाला होकर तपतु-तपे। नः=हमारे लिए कनिक्रदत्-गर्जना करता

English

O Hero, with what aid dost thou delight us, with what succour bring Riches to those who worship thee?

अध्याय ३६

श्लोक 8

इन्द्रो॒ विश्व॑स्य राजति ।शं नो॑ अस्तु द्वि॒पदे॒ शं चतु॑ष्पदे

indro viśvasya rājati | śaṃ no astu dvipade śaṃ catuṣpade

हिन्दी अर्थ

वशीभूत प्राण, देदीप्यमान ज्ञानचक्षु तथा हृदयस्थ करुणा कौ भावना हमें शान्ति प्राप्त करानेवाली हों। १. अहानि=दिन नः=हमारे लिए शम् भवन्तु-शान्तिकारक हों। रात्रीः =रात्रियोँ शम्= शान्तिकारक होकर प्रतिधीयताम्-धारण की जार्प्। दिनि ओर रात दोनों हमारे लिए

English

Indra is king of all that is: may weal attend our bipeds and our quadrupeds.

अध्याय ३६

श्लोक 9

शं नो॑ मि॒त्र: शं वरु॑ण॒: शं नो॑ भवत्वर्य॒मा ।शं न॒ इन्द्रो॒ बृह॒स्पति॒: शं नो॒ विष्णु॑रुरुक्र॒मः

śaṃ no mitra: śaṃ varuṇa: śaṃ no bhavatvaryamā | śaṃ na indro bṛhaspati: śaṃ no viṣṇururukramaḥ

हिन्दी अर्थ

हमारे राष्ट में ब्राह्यणादि अपने-अपने कार्यो को राजव्यवस्था द्वारा ठटीक-ठीक करनेवाले हों, जिससे सर्वत्र शान्ति का विस्तार हो। लोगों के जीवन का सूत्र "दिन में कार्य शन्न देवीरभिष्टयऽआपो भवन्तु पीतये । शंयोरभिस्रवन्तु नः।९२॥ १. आपः शब्द सर्वव्यापक (आप्-व्याप्तौ) प्रभु के लिए भी प्रयुक्त होता है। ये दिव्य

English

Gracious he Mitra unto us, and Varuna and Aryaman; Indra, Brihaspati be kind, and Vishnu of the mighty stride.

अध्याय ३६

श्लोक 10

शं नो॒ वात॑: पवता॒ᳪ शं न॑स्तपतु॒ सूर्य॑: ।शं न॒: कनि॑क्रदद्दे॒वः प॒र्जन्यो॑ अ॒भि व॑र्षतु

śaṃ no vāta: pavatā śaṃ nastapatu sūrya: | śaṃ na: kanikradaddevaḥ parjanyo abhi varṣatu

हिन्दी अर्थ

जलों के ठीक प्रयोग से हम स्वस्थ बनकर शान्ति-लाभ करे। १. है पृथिवि=विस्तारवाली भूमिमातः! नः=हमारे लिए स्योना=सुखदा भव=हो। यहाँ "प्रथ विस्तारे" धातु से बने ' पृथिवी ' शब्द् का प्रयोग संकेत कर रहा है कि जितना विस्तृत व खुला हमारा निवासस्थान होगा उतना ही वह हमारे स्वास्थ्य आदि के लिए हितकर

English

Pleasantly blow the wind for us, may Sûrya warm us pleasantly. Pleasantly, with a roar, the God Parjanya send the rain on us.

अध्याय ३६

श्लोक 11

अहा॑नि॒ शं भव॑न्तु न॒: शᳪ रात्री॒: प्रति॑ धीयताम् ।शं न॑ इन्द्रा॒ग्नी भ॑वता॒मवो॑भि॒: शं न॒ इन्द्रा॒वरु॑णा रा॒तह॑व्या ।शं न॑ इन्द्रापू॒षणा॒ वाज॑सातौ॒ शमिन्द्रा॒सोमा॑ सुवि॒ताय॒ शं योः

ahāni śaṃ bhavantu na: śa rātrī: prati dhīyatām | śaṃ na indrāgnī bhavatāmavobhi: śaṃ na indrāvaruṇā rātahavyā | śaṃ na indrāpūṣaṇā vājasātau śamindrāsomā suvitāya śaṃ yoḥ

हिन्दी अर्थ

दुष्टिशक्ति को प्राप्त कराते है। जल्-रस-सेवन- पीने का प्रकार १. इन मन्त्रों के ऋषि सिन्धुद्वीप ' हैँ। ' स्यन्दन्ते इति सिन्धवः" बहने से जल “ सिन्धु! है। ये जल जिसके अन्द्र व बाहर उपयुक्त हए है, वह 'द्िर्गता आपो यस्मिन्' इस व्युत्पत्ति

English

May days pass pleasantly for us, may nights draw near delightfully. Befriend us with their aids Indra and Agni, Indra and Varuna who taste oblations. Indra and Pûshan be our help in battle, Indra and Soma give health, strength, and comfort.

अध्याय ३६

श्लोक 12

शं नो॑ दे॒वीर॒भिष्ट॑य॒ आपो॑ भवन्तु पी॒तये॑ ।शं योर॒भि स्र॑वन्तु नः

śaṃ no devīrabhiṣṭaya āpo bhavantu pītaye | śaṃ yorabhi sravantu naḥ

हिन्दी अर्थ

हम सदा जलों का सेवन आचमनरूप से करते हुए उनके रस का ग्रहण १. वः तस्मा (तस्मै) =हे जलो! आपके उस रस को हम अरम्-पर्याप्त रूप से गमाम प्राप्त हों , यस्य =जिस रस के कारण (यस्य हेतोः) आप हमें क्षयाय ( क्षिच्निवासगत्योः) निवास व गति के लिए जिन्वथनप्रीणित करते हो, बाते हो। जलो में एक रस हे, रस

English

May the celestial Waters, our helpers, be sweet for us to drink, And flow with health and strength to us.

अध्याय ३६

श्लोक 13

स्यो॒ना पृ॑थिवि नो भवानृक्ष॒रा नि॒वेश॑नी ।यच्छा॑ न॒: शर्म॑ स॒प्रथा॑:

syonā pṛthivi no bhavānṛkṣarā niveśanī | yacchā na: śarma saprathā:

हिन्दी अर्थ

इस जल-रस सेवन से हम उत्तम निवासवाले हों, गतिशील हों ओर हमारी सब शक्तियों का विकास होकर हमारा बन्ध्यापन दूर हो। १. प्रस्तुत मन्त्र “ शान्ति-पाठ' का मन्त्र कहलाता हे। सन यज्ञ-कार्यो कौ समाप्ति पर इस मन्त्र का पाठ किया जाता है। प्रारम्भ में लोकत्रयी से शान्ति की याचना इस प्रकार है

English

Pleasant be thou to us, O Earth, etc., as in XXXV. 21.

अध्याय ३६

श्लोक 14

आपो॒ हि ष्ठा म॑यो॒भुव॒स्ता न॑ ऊ॒र्जे द॑धातन ।म॒हे रणा॑य॒ चक्ष॑से

āpo hi ṣṭhā mayobhuvastā na ūrje dadhātana | mahe raṇāya cakṣase

हिन्दी अर्थ

सब प्राकृतिक देव मेरे अनुकूल हो, वे मेरे साथ शान्ति मे हों। उनके ठीक ज्ञान से मेरा उनके साथ सम्बन्ध मधुर हो। मै उनके प्रति आसक्त न होकर सदा उनका १. दृते=हे विदारण करनेवाले प्रभो! मा=मुञ्ञे दृंह दृढ बनाइए। किसी भी वस्तु को दृद बनाने का प्रकार यही है कि उसकी कमियों का विदारण कर दिया जाए। है प्रभो! आप

English

Ye, Waters, are, etc., as in XL 50.

अध्याय ३६

श्लोक 15

यो व॑: शि॒वत॑मो॒ रस॒स्तस्य॑ भाजयते॒ह न॑: ।उ॒श॒तीरि॑व मा॒तर॑:

yo va: śivatamo rasastasya bhājayateha na: | uśatīriva mātara:

हिन्दी अर्थ

मैं सभी को प्रेम से देखू ओर सभी सबको प्रेम से देखें। हे दुते!=सब बुराइयों का निवारण करनेवाले प्रभो! मा दृंह =मुञ्ञे दृढ बनाइए। मेरी कमियों को दूर करके मेरे जीवन को सुदुढ् कीजिए। मै कमियोँ से बचा रू इसके लिए मैं ज्योक् ते=सदा आपके संदृशि = सन्दर्शन में जीव्यासम्-जीवन धारण करूं। ( संदर्शनम्

English

Give us a portion, etc., as in XI. 51.

अध्याय ३६

श्लोक 16

तस्मा॒ अरं॑ गमाम वो॒ यस्य॒ क्षया॑य॒ जिन्व॑थ ।आपो॑ ज॒नय॑था च नः

tasmā araṃ gamāma vo yasya kṣayāya jinvatha | āpo janayathā ca naḥ

हिन्दी अर्थ

मै सदा प्रभु के संदर्शन में जीवन धारण करूं, जिससे मेरा जीवन कमियों सेन भरकर मै सभी के साथ स्नेह कर सककूं। नम॑स्ते हस्से शोचिषे नम॑स्तेऽअस्त्वर्चिषि। अन्यास्तेऽअस्मत्तपन्तु हेतयः पावकोऽअस्मभ्यैःशिवो भ॑व ॥२०॥

English

To you we gladly come, etc., as in XI. 52,

अध्याय ३६

श्लोक 17

द्यौ: शान्ति॑र॒न्तरि॑क्ष॒ᳪ शान्ति॑: पृथि॒वी शान्ति॒राप॒: शान्ति॒रोष॑धय॒: शान्ति॑: ।वन॒स्पत॑य॒: शान्ति॒र्विश्वे॑ दे॒वाः शान्ति॒र्ब्रह्म॒ शान्ति॒: सर्व॒ᳪ शान्ति॒: शान्ति॑रे॒व शान्ति॒: सा मा॒ शान्ति॑रेधि

dyau: śāntirantarikṣa śānti: pṛthivī śāntirāpa: śāntiroṣadhaya: śānti: | vanaspataya: śāntirviśve devāḥ śāntirbrahma śānti: sarva śānti: śāntireva śānti: sā mā śāntiredhi

हिन्दी अर्थ

का प्रकाश फैला्ँ। प्रभु हमारा कल्याण करे। “विद्युत्, स्तनयित्तु त भगवान्! नम॑स्तेऽअस्तु विद्युते नम॑स्ते स्तनयिल्नवे। नम॑स्ते भगवन्नस्तु यतः स्त्रः समीद॑से॥२९॥ १. विद्युते=विशेषरूप से चमकनेवाले ते=तेरे लिए नमः अस्तु-नमस्कार हो। वे प्रभु

English

Sky alleviation, Air alleviation, Earth alleviation, Plants alleviation, Trees alleviation, All-Gods alleviation, Brahma alleviation, Universe alleviation, just Alleviation alleviation—may that alleviation come to me!

अध्याय ३६

श्लोक 18

दृते॒ दृᳪह॑ मा मि॒त्रस्य॑ मा॒ चक्षु॑षा॒ सर्वा॑णि भू॒तानि॒ समी॑क्षन्ताम् ।मि॒त्रस्या॒हं चक्षु॑षा॒ सर्वा॑णि भू॒तानि॒ समी॑क्षे ।मि॒त्रस्य॒ चक्षु॑षा॒ समी॑क्षामहे

dṛte dṛha mā mitrasya mā cakṣuṣā sarvāṇi bhūtāni samīkṣantām | mitrasyāhaṃ cakṣuṣā sarvāṇi bhūtāni samīkṣe | mitrasya cakṣuṣā samīkṣāmahe

हिन्दी अर्थ

हम उस-उस समय ' एेश्वर्य-शक्ति, यश-श्री, ज्ञान-वैराग्य' से सुख को प्राप्त करे। हैवी प्रवृत्ति के लोग हमारी शान्ति का कारण बनें ओर आसुर पशुवृत्ति के लोगों से हमे भय प्राप्त न हो। १. मन्त्र का सरलार्थ इस प्रकार है-आपः ओषधयः-जल तथा ओषधि्याँ, अर्थात्

English

Caldron, strengthen me. May all beings regard me with the eye of a friend. May I regard all beings with the eye of a friend. With the eye of a friend do we regard one another.

अध्याय ३६

श्लोक 19

दृते॒ दृᳪह॑ मा ।ज्योक्ते॑ स॒न्दृशि॑ जीव्यासं॒ ज्योक्ते॑ स॒न्दृशि॑ जीव्यासम्

dṛte dṛha mā | jyokte sandṛśi jīvyāsaṃ jyokte sandṛśi jīvyāsam

हिन्दी अर्थ

भोजन सदा प्रसत्नतापूर्वक करना चाहिए्। हमारा भोजन ' आपः ओषधयः ' है, तच्चक्षर्देवहितं पुरस्ताच्छक्रमुच्च॑रत् । पश्येम शरद॑; शातं जीवेम शरद॑: शातः १. तत् वह चक्षुः=सब पदार्थो के तत्त्व का दर्शक वेदज्लान, जो देवहितम् देवों में निहित होता है ओर देवों के लिए हितकर होता है, जो शुक्रम्-(शुच् दीप्तौ) सर्वतः

English

Do thou, O Caldron, strengthen me. Long may I live to look on thee. Long may I live to look on thee.

अध्याय ३६

श्लोक 20

नम॑स्ते॒ हर॑से शो॒चिषे॒ नम॑स्ते अस्त्व॒र्चिषे॑ ।अ॒न्याँस्ते॑ अ॒स्मत्त॑पन्तु हे॒तय॑: पाव॒को अ॒स्मभ्य॑ᳪ शि॒वो भ॑व

namaste harase śociṣe namaste astvarciṣe | anyā~ste asmattapantu hetaya: pāvako asmabhya śivo bhava

हिन्दी अर्थ

प्रभु ने सृष्टि-आरम्भ मेँ इस वेदज्ञान का उच्चारण किया है। हमे इसी के पदढने-पद्धाने व सुनने-सुनाने मे लग जाना चाहिए ओर सदा अदीनतापूर्वक वर्तना चार्हिए।

English

Obeisance to thy wrath and glow, etc., as in XXII. 11.

अध्याय ३६

श्लोक 21

नम॑स्ते अस्तु वि॒द्युते॒ नम॑स्ते स्तनयि॒त्नवे॑ ।नम॑स्ते भगवन्नस्तु॒ यत॒: स्व॒: स॒मीह॑से

namaste astu vidyute namaste stanayitnave | namaste bhagavannastu yata: sva: samīhase

हिन्दी अर्थ

हम सब अपने-अपने दोषों को दूर करने का ध्यान करे। यही सबके गभूभुवः स्त्रः । "तत्संवितु्वरैण्यं भर्गो" देवस्य॑ धीमहि! धियो यो न॑: प्रचोदयांत्॥३॥ १. मानव-जीवन का उद्देश्य क्या होना चाहिए' इसका निर्देश प्रभु ने इन तीन महाव्याहतियों द्वारा किया है (क) भूः=( भू सत्तायाम् (० ७८) = स्वास्थ्य, होना अर्थात्

English

Through hundred autumns may we see that bright Eye, God-appointed, rise, A hundred autumns may we live. Through hundred autumns may we hear; through hundred autumns clearly speak: through hundred autumns live content; a hundred autumns, yea, beyond a hundred autumns may we see.

अध्याय ३६

श्लोक 22

यतो॑-यतः स॒मीह॑से॒ ततो॑ नो॒ अभ॑यं कुरु ।शं न॑: कुरु प्र॒जाभ्योऽभ॑यं नः प॒शुभ्य॑:

yato-yataḥ samīhase tato no abhayaṃ kuru | śaṃ na: kuru prajābhyo'bhayaṃ naḥ paśubhya:

हिन्दी अर्थ

नै उस सदा के साथी, मेरी सतत वृद्धि के कारणभूत प्रभु को अपने चारो ओर अनुभव करूं, जो प्रभु अत्यन्त शक्तिप्रद आवर्तन से मेरी रक्षा कर रहे है। त्रिपुर-दहन व देव-मन्दिर- निर्माण कस्त्वा सत्यो मदानां मदिष्ठ मत्सदन्ध॑सः । दृढा चिदारुजे वस॥५॥

English

From whatsoever trouble thou desirest, give us safety thence. Give to our children happiness and to our beasts security.

अध्याय ३६

श्लोक 23

सु॒मि॒त्रि॒या न॒ आप॒ ओष॑धयः सन्तु दुर्मित्रि॒यास्तस्मै॑ सन्तु॒ योऽस्मान् द्वेष्टि॒ यं च॑ व॒यं द्वि॒ष्मः

sumitriyā na āpa oṣadhayaḥ santu durmitriyāstasmai santu yo'smān dveṣṭi yaṃ ca vayaṃ dviṣmaḥ

हिन्दी अर्थ

हमारे मकान खुले-खुले स्थानों मे हो। मकानों के कमरे भी बडे खुले-खुले हो। नोट- वेद में ग्रामों का उल्लेख है, बडे-बडे नगर वेद को प्रिय नही। खुलापन ग्राम-सभ्यता में अधिक सम्भव हे। आपो हि ष्ठा म॑योभुवस्ता न॑ऽ ऊर्ज द॑धातन । महे रणाय चक्ष॑से॥॥९४॥

English

To us let Waters and let Plants be friendly, etc., as in VI. 23.

अध्याय ३६

श्लोक 24

तच्चक्षु॑र्दे॒वहि॑तं पु॒रस्ता॑च्छु॒क्रमुच्च॑रत् ।पश्ये॑म श॒रद॑: श॒तं जीवे॑म श॒रद॑: श॒तᳪ शृणु॑याम श॒रद॑: श॒तं प्र ब्र॑वाम श॒रद॑: श॒तमदी॑नाः स्याम श॒रद॑: श॒तं भूय॑श्च श॒रद॑: श॒तात्

taccakṣurdevahitaṃ purastācchukramuccarat | paśyema śarada: śataṃ jīvema śarada: śata śṛṇuyāma śarada: śataṃ pra bravāma śarada: śatamadīnāḥ syāma śarada: śataṃ bhūyaśca śarada: śatāt

हिन्दी अर्थ

हमारे मकान खुले-खुले स्थानों मे हो। मकानों के कमरे भी बडे खुले-खुले हो। नोट- वेद में ग्रामों का उल्लेख है, बडे-बडे नगर वेद को प्रिय नही। खुलापन ग्राम-सभ्यता में अधिक सम्भव हे। आपो हि ष्ठा म॑योभुवस्ता न॑ऽ ऊर्ज द॑धातन । महे रणाय चक्ष॑से॥॥९४॥

English

Through hundred autumns may we see that bright Eye, God-appointed, rise, A hundred autumns may we live. Through hundred autumns may we hear; through hundred autumns clearly speak: through hundred autumns live content; a hundred autumns, yea, beyond a hundred autumns may we see.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Yajur Veda — Chapter 36
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
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