Yajur Veda· Yajurveda Saṁhitā
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अध्याय 35 / 40

Adhyāya 35

अध्याय 35

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अध्याय ३५

श्लोक 1

अपे॒तो य॑न्तु प॒णयोऽसु॑म्ना देवपी॒यव॑: । अ॒स्य लो॒कः सु॒ताव॑तः ।द्युभि॒रहो॑भिर॒क्तुभि॒र्व्य॒क्तं य॒मो द॑दात्वव॒सान॑मस्मै

apeto yantu paṇayo'sumnā devapīyava: | asya lokaḥ sutāvataḥ | dyubhirahobhiraktubhirvyaktaṃ yamo dadātvavasānamasmai

हिन्दी अर्थ

जो व्यक्ति (क) पणिवृत्ति से दूर रहते है, (ख) प्रभु-स्तवन को अपनाते हे, (ग) देवत्व कौ वृद्धि के लिए प्रयत्नशील होते हैँ, (घ) जो दिन व रात्रि को स्वाध्याय से ज्योतिर्मय बनाये रखते हे, ये लोग उत्तमताओं का निरन्तर आदान करते हुए आदित्य ' कहलाते है ओर देवत्व की वृद्धि करने से "देव ' होते है। ये “ आदित्या देवाः' ही इन मन्त्रों

English

com The Texts of the White Yajurveda, tr. Ralph T.H. Griffith, [1899], BOOK THE THIRTY-FIFTH. BEGONE the Panis, hence away, rebellious, scorners of the Gods! The place is his who poured the juice.

अध्याय ३५

श्लोक 2

स॒वि॒ता ते॒ शरी॑रेभ्यः पृथि॒व्याँल्लो॒कमि॑च्छतु ।तस्मै॑ युज्यन्तामु॒स्रिया॑:

savitā te śarīrebhyaḥ pṛthivyā~llokamicchatu | tasmai yujyantāmusriyā:

हिन्दी अर्थ

“चरो में रोगों का प्रवेश न हो', इसके लिए यह अत्यन्त आवश्यक है कि उनमें सूर्य की किरणों का प्रवेश अव्याहतरूप सेदहो। वायु, सूर्य, अग्नि व गौवें १. स्वस्थ गृहो का वर्णन करते हए कहते है कि वायुः पुनातु=वायु पवित्र करे

English

Let Savitar approve a spot upon the earth for thy remains: And let the bulls be yoked for it.

अध्याय ३५

श्लोक 3

वा॒युः पु॑नातु स॑वि॒ता पु॑नात्व॒ग्नेर्भ्राज॑सा॒ सूर्य॑स्य॒ वर्च॑सा ।वि मु॑च्यन्तामु॒स्रिया॑:

vāyuḥ punātu savitā punātvagnerbhrājasā sūryasya varcasā | vi mucyantāmusriyā:

हिन्दी अर्थ

संसार नश्वर है, मांस खाना हमें जीवन व स्वाद मे आसक्त करता है , अतः इसे छोडकर वेदवाणियो का सेवन करें ओर प्रभु को प्राप्त करे। सूचना-गीता के "छन्दासि यस्य पर्णानि" इन शब्दौ के अनुसार संसारवृक्ष के पर्ण-पत्ते छन्द वेदमन्त्र है। उन्हीं मे प्रभु ने हमारा निवास निश्चय किया है , अर्थात् हमें

English

Let Vâyu purify. Let Savitar purify. With Agni's glitter. With Savitar's lustre. Let the bulls be unyoked.

अध्याय ३५

श्लोक 4

अ॒श्व॒त्थे वो॑ नि॒षद॑नं प॒र्णे वो॑ वस॒तिष्कृ॒ता ।गो॒भाज॒ इत्किला॑सथ॒ यत्स॒नव॑थ॒ पूरु॑षम्

aśvatthe vo niṣadanaṃ parṇe vo vasatiṣkṛtā | gobhāja itkilāsatha yatsanavatha pūruṣam

हिन्दी अर्थ

सूर्य-किरणों के सम्पर्क से हमारे सब शरीर प्रफुल्लित हों ओर हमे शान्ति प्रजाप॑तौ त्वा देवतांयामुपोदके लोके निद॑धाम्यसर । अप॑ नः शोशुचदघम् ॥६॥ पिच्छले मन्त्र मे “शान्त जीवन' का संकेत किया है। जीवन मे अशान्ति के तीन बड़े-बड़े कारण है १. राष्ट में अराजकता हो, मात्स्य न्याय चल रहा हो, 'शक्ति ही

English

The Holy Fig Tree is your home, your mansion is the Parna Tree: Winners of cattle shall ye be if ye regain for me this man.

अध्याय ३५

श्लोक 5

स॒वि॒ता ते॒ शरी॑राणि मा॒तुरु॒पस्थ॒ आ व॑पतु ।तस्मै॑ पृथिवि॒ शं भ॑व

savitā te śarīrāṇi māturupastha ā vapatu | tasmai pṛthivi śaṃ bhava

हिन्दी अर्थ

हम जीवन के मार्ग को उत्तम करें, देवयान मार्ग से चले। सन्तानो को प्रभु कौ सन्ताने समद्यते हए उत्तम बनाने का प्रयत्न करे। हमारे असंयम से वे नष्ट न हों। शं वातः शरहि ते घृणिः शं त भवन्त्विष्ट॑काः। गतमन्त्र के अनुसार जब मनुष्य देवयानमार्ग पर चलता है तब उसे किसी प्रकार की

English

Let Savitar lay down thy bones committed to the Mother's lap. Be pleasant to this man, O Earth.

अध्याय ३५

श्लोक 6

प्र॒जाप॑तौ त्वा दे॒वता॑या॒मुपो॑दके लो॒के नि द॑धाम्यसौ ।अप॑ न॒: शोशु॑चद॒घम्

prajāpatau tvā devatāyāmupodake loke ni dadhāmyasau | apa na: śośucadagham

हिन्दी अर्थ

हम सातवें मन्त्र के अनुसार मन को मार लेने- (पूर्णरूप से काबू कर लेने) -वाले मृत्यु बनेंगे ओर देवयानमार्गं को अपनार्णैे तो सब देव हमारे लिए शान्तिकर होगे। २. तुभ्यम्-तेरे लिए आपः=जल शिवतमाः = अत्यन्त कल्याणकर हों। ३. तुभ्यम्-तेरे लिए सिन्धवः =नदियोँ व समुद्र शिवतमाः भवन्तु-कल्याणकर हों। ४. अन्तरिक्षम् -द्यावापृथिवी

English

Here in the God Prajâpati, near water, Man, I lay thee down: May his light drive mishap from us.

अध्याय ३५

श्लोक 7

परं॑ मृत्यो॒ अनु॒ परे॑हि॒ पन्थां॒ यस्ते॑ अ॒न्य इत॑रो देव॒याना॑त् ।चक्षु॑ष्मते शृण्व॒ते ते॑ ब्रवीमि॒ मा न॑: प्र॒जाᳪ री॑रिषो॒ मोत वी॒रान्

paraṃ mṛtyo anu parehi panthāṃ yaste anya itaro devayānāt | cakṣuṣmate śṛṇvate te bravīmi mā na: prajā rīriṣo mota vīrān

हिन्दी अर्थ

हम धर्माचरण करेगे तो आधिहैविक आपत्तियों से बचे रहेगे। १. यह संसार एक नदी के समान है, जिसमें नानाविध प्रलोभन नुकीले पत्थरों के समान है। यह अश्मन्वती प्रलोभनमय पाषाणोँवाली संसार-नदी रीयते तीव्र गति से चल रही है। इसको हमे पार करना है, इस संसार-नदी मे डूबना नहीं है। प्रभु कहते है कि २.

English

Go hence, O Death, pursue thy special pathway apart from that which Gods are wont to travel. To thee I say it who hast eyes and hearest: Touch not our offspring, injure not our heroes.

अध्याय ३५

श्लोक 8

शं वात॒: शᳪ हि ते॒ घृणि॒: शं ते॑ भव॒न्त्विष्ट॑काः ।शं ते॑ भवन्त्व॒ग्नय॒: पार्थि॑वासो॒ मा त्वा॒ऽभि शू॑शुचन्

śaṃ vāta: śa hi te ghṛṇi: śaṃ te bhavantviṣṭakāḥ | śaṃ te bhavantvagnaya: pārthivāso mā tvā'bhi śūśucan

हिन्दी अर्थ

-हम उत्तम कार्यो को प्रारम्भ करे, आलस्य छोड उठ खड हों, मित्रता की भावना को अपनाकर इस अश्मन्वती नदी को तैर जाएँ। अशिव को छोड शिव को प्राप्त १. (अप=०५५२१. दूर तथा मार्ग (मृज शुद्धौ ) शोधन करनेवाला) अपामार्ग=हमसे पापों को दूर करके हमे शुद्ध करनेवाले है प्रभो! त्वम्-आप अधघम्=हिंसादि पापों को

English

Pleasant to thee be wind and sun, and pleasant be the bricks to thee. Pleasant to thee be the terrestrial fires: let them not scorch thee in their flames.

अध्याय ३५

श्लोक 9

कल्प॑न्तां ते॒ दिश॒स्तुभ्य॒माप॑: शि॒वत॑मा॒स्तुभ्यं॑ भवन्तु॒ सिन्ध॑वः ।अ॒न्तरि॑क्षᳪ शि॒वं तुभ्यं॒ कल्प॑न्तां ते॒ दिश॒: सर्वा॑:

kalpantāṃ te diśastubhyamāpa: śivatamāstubhyaṃ bhavantu sindhavaḥ | antarikṣa śivaṃ tubhyaṃ kalpantāṃ te diśa: sarvā:

हिन्दी अर्थ

प्रभु अपामार्ग है, वे हमारे अघो, किल्विषों, कृत्याओं ओर रपस् को हमसे दूर करते हें। संक्षेप में बुरे स्वप्नं कौ कारणभूत सब बातों को वे प्रभु हमसे दूर करते हेै। छठे मन्त्र में उत्कृष्ट मार्ग पर चलने का उल्लेख था ओर परिणामतः आधिहैविक कष्टोंकेन होने का वर्णन आठवें व नववें मन्त्र में भा। ग्यारहवें मन्त्र में पापों को दूर करने

English

Prosper for thee the regions and the waters, and let the seas for thee be most propitious. Auspicious unto thee be Air. Prosper all Quarters well for thee!

अध्याय ३५

श्लोक 10

अश्म॑न्वती रीयते॒ सᳪ र॑भध्व॒मुत्ति॑ष्ठत॒ प्र त॑रता॒ सखा॑यः ।अत्रा॑ जही॒मोऽशि॑वा॒ ये अस॑ञ्छि॒वान्व॒यमुत्त॑रेमा॒भि वाजा॑न्

aśmanvatī rīyate sa rabhadhvamuttiṣṭhata pra taratā sakhāyaḥ | atrā jahīmo'śivā ye asañchivānvayamuttaremābhi vājān

हिन्दी अर्थ

हम प्रभु को ही जीवन-सज्चालक जानें। वे हमारे जीवन को पवित्र बनार्फेगे, वे हमें इस संसार-नदी को तैरने के योग्य करेगे। उत्तम ज्योति क्रो प्राप्त करना उद्यं तम॑सस्परि स्तु: पश्य॑न्तऽ उत्त॑रम्। देवं देवत्रा सूर्यमगन्म ज्योतिंरुत्तमम्।॥। ९४॥

English

On flows the stony flood: hold fast each other, keep yourselves up, my friends, and pass the river. Here let us leave the powers that brought no profit, and cross the flood to Powers that are auspicious.

अध्याय ३५

श्लोक 11

अपा॒घमप॒ किल्वि॑ष॒मप॑ कृ॒त्यामपो॒ रप॑: ।अपा॑मार्ग॒ त्वम॒स्मदप॑ दु॒:ष्वप्न्य॑ᳪ सुव

apāghamapa kilviṣamapa kṛtyāmapo rapa: | apāmārga tvamasmadapa du:ṣvapnya suva

हिन्दी अर्थ

हम "उत्, उत्तर व उत्तम" शब्दों से व्यक्त होनैवाले प्रकृति, जीव व परमात्मा पिछले मन्त्र कौ समाप्ति इन शब्दों पर थी कि हम उत्तम ज्योति परमात्मा को प्राप्त करते हैँ, जो प्रभु "सूर्य" है, हमें कर्मो में प्रेरित कर रहे ै। इस प्रेरणा का स्वरूप प्रस्तुत को दधामिधारण करता हूं। जीव को सर्वप्रथम तो यह चाहिए कि वह मर्यादा में चले।

English

Drive away evil, drive away fault, sorcery, and guiltiness. Do thou, O Apâmârga, drive the evil dream away from us.

अध्याय ३५

श्लोक 12

सु॒मि॒त्रि॒या न॒ आप॒ ओष॑धयः सन्तु दुर्मित्रि॒यास्तस्मै॑ सन्तु॒ योऽस्मान्द्वेष्टि॒ यं च॑ व॒यं द्वि॒ष्मः

sumitriyā na āpa oṣadhayaḥ santu durmitriyāstasmai santu yo'smāndveṣṭi yaṃ ca vayaṃ dviṣmaḥ

हिन्दी अर्थ

मलों को भस्म करके हम उत्तम जीवनवाले बनें, यज्ञ के द्वारा वृद्धि करके ज्ञान दीप्त हों, शरीर स्वस्थ हो। गोघृत का प्रयोग करनेवाला तू बन। दिव्य गुणों की अपने परीमे गाम॑नेषत पर्यग्निम॑हषत । देवेष्व॑क्रत श्रवः कऽ डमा २।ऽआ द॑धर्षति ॥९८॥ पिछले मन्त्र का वैखानस=काम-क्रोधादि को उखाडकर शक्तिशाली बना है, अतः

English

To us let waters and the plants be friendly, to him who hates us, whom we hate, unfriendly.

अध्याय ३५

श्लोक 13

अ॒न॒ड्वाह॑म॒न्वार॑भामहे॒ सौर॑भेयᳪ स्व॒स्तये॑ ।स न॒ इन्द्र॑ इव दे॒वेभ्यो॒ वह्नि॑: स॒न्तार॑णो भव

anaḍvāhamanvārabhāmahe saurabheya svastaye | sa na indra iva devebhyo vahni: santāraṇo bhava

हिन्दी अर्थ

(क) हमारे घरों मे कोई छोटी उम्र मे न चला जाए, (ख) हमारा प्रत्येक बालक आर्चायकुल में शिक्षा प्राप्त करे (ग) विदान् उपाध्यायो से शिक्षित होकर वह यहाँ ही हो, अर्थात् घर का निर्माण करनेवाला हो, (घ) अपने जीवन के अन्तकाल में ओरों में उस ज्ञान को फैलानेवाला बने।

English

For our prosperity we touch the ox the son of Surabhi. Be bearer and deliverer to us as Indra to the Gods.

अध्याय ३५

श्लोक 14

उद्व॒यं तम॑स॒स्परि॒ स्व: पश्य॑न्त॒ उत्त॑रम् ।दे॒वं दे॑व॒त्रा सूर्य॒मग॑न्म॒ ज्योति॑रुत्त॒मम्

udvayaṃ tamasaspari sva: paśyanta uttaram | devaṃ devatrā sūryamaganma jyotiruttamam

हिन्दी अर्थ

विषयव्यावृत्त विद्वान् आचार्यो की सेवा मे श्रम से हमारी चरी दल जाए ओर हम उनके सत्य आशीर्वादों के पात्र हो। हमारा प्रारम्भिक जीवन “विद्धान्, व्रती आचार्यो की सेवा में, उनके चरणों मेँ बीते ' यह गतमन्त्र का विषय था। यदि यही नियम व्यापकरूप धारण कर ले, सभी बालक

English

Looking upon the loftiest light, etc., as in XX. 21.

अध्याय ३५

श्लोक 15

इ॒मं जी॒वेभ्य॑: परि॒धिं द॑धामि॒ मैषां॒ नु गा॒दप॑रो॒ अर्थ॑मे॒तम् ।श॒तं जी॑वन्तु श॒रद॑: पुरू॒चीर॒न्तर्मृ॒त्युं द॑धतां॒ पर्व॑तेन

imaṃ jīvebhya: paridhiṃ dadhāmi maiṣāṃ nu gādaparo arthametam | śataṃ jīvantu śarada: purūcīrantarmṛtyuṃ dadhatāṃ parvatena

हिन्दी अर्थ

जिस राष्ट में लोग मेधातिथि समङ्जदार 8८०७।४७।५८ होते हे, वे राष्ट को बड़ा सुखद बनाते है, उनमें परस्पर घात-पात नहीं होते रहते, उनके मकान विशाल होते देँ ओर खुले स्थानों मे बने होते है। इन घरों मे पाप व पीडा का प्रवेश नहीं होता। अस्मातत्मधिं जातोऽ सि त्वदयं जायतां पुन॑ः। असौ स्वर्गाय॑ लोकाय स्वाहा॥। २२॥

English

Here I erect this rampart for the living: let none of these, none other, reach this limit. May they survive a hundred lengthened autumns, and may they bury Death beneath this mountain.

अध्याय ३५

श्लोक 16

अग्न॒ आयू॑ᳪषि पवस्व॒ आ सु॒वोर्ज॒मिषं॑ च नः ।आ॒रे बा॑धस्व दु॒च्छुना॑म्

agna āyūṣi pavasva ā suvorjamiṣaṃ ca naḥ | āre bādhasva ducchunām

हिन्दी अर्थ

हम अपने जीवन में प्रभु की भावना को जागरित करें, स्वार्थ-त्यागवाले हो, जिससे स्वर्गं का निर्माण कर सको।

English

Agni, thou pourest life, etc., as in XIX. 38.

अध्याय ३५

श्लोक 17

आयु॑ष्मानग्ने ह॒विषा॑ वृधा॒नो घृ॒तप्र॑तीको घृ॒तयो॑निरेधि ।घृ॒तं पी॒त्वा मधु॒ चारु॒ गव्यं॑ पि॒तेव॑ पु॒त्रम॒भि र॑क्षतादि॒मान्त्स्वाहा॑

āyuṣmānagne haviṣā vṛdhāno ghṛtapratīko ghṛtayoniredhi | ghṛtaṃ pītvā madhu cāru gavyaṃ piteva putramabhi rakṣatādimāntsvāhā

हिन्दी अर्थ

हमारे घरों मेँ वायु का प्रवाह दीक बहे, सूर्य-किरणें हमारे घर के वातावरण क प्राणतत्तव से परिपूर्ण करनेवाली हों, हमारे घर कौ गोवें प्रतिदिन सूर्य-किरणों के सम्पर्क करे हेतु खृँटे से खोलकर बाहर भ्रमण के लिए भेजी जारप। दूसरे व तीसरे मन्त्र मेँ वर्णित स्वास्थ्यप्रद घरों मेँ निवास करते हए हम संसार की

English

Waxing with sacrifice live long, O Agni, with butter on thy face and homed in fatness. When thou hast drunk the cows’ fair savoury butter, guard, as a father guards his son, these people.

अध्याय ३५

श्लोक 18

परी॒मे गाम॑नेषत॒ पर्य॒ग्निम॑हृषत ।दे॒वेष्व॑क्रत॒ श्रव॒: क इ॒माँ२ आ द॑धर्षति

parīme gāmaneṣata paryagnimahṛṣata | deveṣvakrata śrava: ka imā~2 ā dadharṣati

हिन्दी अर्थ

- संसार नश्वर है, मांस खाना हमें जीवन व स्वाद मे आसक्त करता है , अतः इसे छोडकर वेदवाणियो का सेवन करें ओर प्रभु को प्राप्त करे। सूचना-गीता के "छन्दासि यस्य पर्णानि" इन शब्दौ के अनुसार संसारवृक्ष के पर्ण-पत्ते छन्द वेदमन्त्र है। उन्हीं मे प्रभु ने हमारा निवास निश्चय किया है , अर्थात् हमें

English

These men have led about the ox, have duly carried Agni round, And raised their glory to the Gods. Who will attack them with success?

अध्याय ३५

श्लोक 19

क्र॒व्याद॑म॒ग्निं प्र हि॑णोमि दू॒रं य॑म॒राज्यं॑ गच्छतु रिप्रवा॒हः ।इहै॒वायमित॑रो जा॒तवे॑दा दे॒वेभ्यो॑ ह॒व्यं व॑हतु प्रजा॒नन्

kravyādamagniṃ pra hiṇomi dūraṃ yamarājyaṃ gacchatu ripravāhaḥ | ihaivāyamitaro jātavedā devebhyo havyaṃ vahatu prajānan

हिन्दी अर्थ

पापों को दूर करके हम देवों के प्रिय हो, जलौषधि हमारे लिए हितकर होँ। स नऽडइन्दर॑ऽ इव देवेभ्यो वद्धिः सन्तार॑णो भव।।९३॥ दसवें मन्त्र में ' अश्मन्वती नदी ' के तैरने का उल्लेख था। उसी सन्तरण के लिए प्रभु से शक्तियोग का निश्चय करते है कि अनड्वाहम्=इस संसार शकट ( अनन्गाडी) के

English

I drive Corpse-eating Agni to a distance: sin-laden let him go to Yama's kingdom. Here let this other, Jâtavedas, carry oblation to the Deities, foreknowing.

अध्याय ३५

श्लोक 20

वह॑ व॒पां जा॑तवेदः पि॒तृभ्यो॒ यत्रै॑ना॒न्वेत्थ॒ निहि॑तान् परा॒के ।मेद॑सः कु॒ल्या उप॒ तान्त्स्र॑वन्तु स॒त्या ए॑षामा॒शिष॒: सं न॑मन्ता॒ᳪ स्वाहा॑

vaha vapāṃ jātavedaḥ pitṛbhyo yatrainānvettha nihitān parāke | medasaḥ kulyā upa tāntsravantu satyā eṣāmāśiṣa: saṃ namantā svāhā

हिन्दी अर्थ

प्रभु कौ प्रेरणा इस रूप में है कि १. मर्यादा में चलो, २. पुरुषार्थ से कमाओ, ३. सौ वर्षं अवश्य जीना है, ४. तुम्हारी प्रत्येक क्रिया पालन व पूरणवाली हो, ५. पूरण के दृष्टिकोण से ही प्रभु के “रुद्र' रूप को हृदयस्थ करना, मृत्यु को नहीं भूलना। “ादित्यदेवों' क्री प्रार्थना

English

Carry the fat to Fathers, Jâtavedas, where, far away, thou knowest, them established. Let rivulets of marrow flow to meet them, and let their truthful wishes be accomplished. All-hail!

अध्याय ३५

श्लोक 21

स्यो॒ना पृ॑थिवि नो भवानृक्ष॒रा नि॒वेश॑नी । यच्छा॑ न॒: शर्म॑ स॒प्रथा॑: ।अप॑ न॒: शोशु॑चद॒घम्

syonā pṛthivi no bhavānṛkṣarā niveśanī | yacchā na: śarma saprathā: | apa na: śośucadagham

हिन्दी अर्थ

हमारे जीवन पवित्र हों, हमें प्रेरणा व शक्ति प्राप्त हो, दुरित हमसे दूर रहे। आयुंष्मानग्ने हविषा वृधानो घृतप्र॑तीको धृतयोंनिरेधि। गतमन्त्र मे अच्छाई का आदान करने की वृत्तिवाले ' आदित्यदेव' ने प्रभु से कहा था कि ' मुञ्चसे दुरित को दूर रोक दीजिए। इन शब्दों में वस्तुतः उसने यही निश्चय किया था

English

Pleasant be thou to us, O Earth, without a thorn, our resting-place. Vouchsafe us shelter reaching far. May thy light drive mishap from us.

अध्याय ३५

श्लोक 22

अ॒स्मात्त्वमधि॑ जा॒तो॒ऽसि॒ त्वद॒यं जा॑यतां॒ पुन॑: ।अ॒सौ स्व॒र्गाय॑ लो॒काय॒ स्वाहा॑

asmāttvamadhi jāto'si tvadayaṃ jāyatāṃ puna: | asau svargāya lokāya svāhā

हिन्दी अर्थ

हमारे जीवन पवित्र हों, हमें प्रेरणा व शक्ति प्राप्त हो, दुरित हमसे दूर रहे। आयुंष्मानग्ने हविषा वृधानो घृतप्र॑तीको धृतयोंनिरेधि। गतमन्त्र मे अच्छाई का आदान करने की वृत्तिवाले ' आदित्यदेव' ने प्रभु से कहा था कि ' मुञ्चसे दुरित को दूर रोक दीजिए। इन शब्दों में वस्तुतः उसने यही निश्चय किया था

English

Born art thou, Agni, from this man: let him again be born from thee, For Svarga's world, the man I name. All-hail!

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Yajur Veda — Chapter 35
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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