Yajur Veda· Yajurveda Saṁhitā
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अध्याय 37 / 40

Adhyāya 37

अध्याय 37

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अध्याय ३७

श्लोक 1

दे॒वस्य॑ त्वा सवि॒तुः प्र॑स॒वेऽश्विनो॑र्बा॒हुभ्यां॑ पू॒ष्णो हस्ता॑भ्याम् ।आ द॑दे॒ नारि॑रसि

devasya tvā savituḥ prasave'śvinorbāhubhyāṃ pūṣṇo hastābhyām | ā dade nārirasi

हिन्दी अर्थ

हम प्रभु के आदेश के अनुसार वस्तुओं का ग्रहण करें, स्वयं पुरुषार्थ से अर्जित वस्तु कोही लें। पोषण के लिए जितनी पर्याप्त है उतनी ही ले। एेसा करने पर वि होत्रा दधे वयुनाविदेकःऽडइन्मही देवस्य॑ सवितुः परिंष्टुतिः॥। २॥ पिले मन्त्र मेँ संसार के पदार्थो के ग्रहण मेँ तीन बातों का ध्यान करने के लिए कहा

English

com The Texts of the White Yajurveda, tr. Ralph T.H. Griffith, [1899], BOOK THE THIRTY-SEVENTH. By impulse of God Savitar I take thee, etc. Spade art thou. Woman art thou, etc., as in XI. 9, 10.

अध्याय ३७

श्लोक 2

यु॒ञ्जते॒ मन॑ उ॒त यु॑ञ्जते॒ धियो॒ विप्रा॒ विप्र॑स्य बृह॒तो वि॑प॒श्चित॑: ।वि होत्रा॑ दधे वयुना॒विदेक॒ इन्म॒ही दे॒वस्य॑ सवि॒तुः परि॑ष्टुति॒: स्वाहा॑

yuñjate mana uta yuñjate dhiyo viprā viprasya bṛhato vipaścita: | vi hotrā dadhe vayunāvideka inmahī devasya savituḥ pariṣṭuti: svāhā

हिन्दी अर्थ

हम मन व बुद्धियों को प्रभु मेँ लगार्णँ, जिससे इस योग से- चित्तवृत्तिनिरोध से इस संसार में विचरे, परन्तु उल नहीं। । च देवीं द्यावापृथिवी म॒खस्य॑ वामद्य शिरो राध्यासं देवयज॑ने पृथिव्याः। द्यावापृथिवी" का अर्थं अध्यात्म. में मस्तिष्क ओर शरीर है। “मूर्ध्नो द्यौः, पृथिवी

English

The priests of him the lofty Priest, etc., as in V. 14.

अध्याय ३७

श्लोक 3

देवी॑ द्यावापृथिवी म॒खस्य॑ वाम॒द्य शिरो॑ राध्यासं देव॒यज॑ने पृथि॒व्याः ।म॒खाय॑ त्वा म॒खस्य॑ त्वा शी॒र्ष्णे

devī dyāvāpṛthivī makhasya vāmadya śiro rādhyāsaṃ devayajane pṛthivyāḥ | makhāya tvā makhasya tvā śīrṣṇe

हिन्दी अर्थ

मेरा शरीर व मस्तिष्क मुञ्चे यज्ञ के शिखर पर पहुंचा देव्यो वश्यो भूतस्य॑ प्रथमजा मखस्य वो ऽद्य शिरो राध्यासं देवयजने पथिव्याः। वम्री' शब्द वम् धातु से बना. है, जिसका अर्थ है उद्गिरण=बाहर फैकना। शरीर में . . बह शक्ति जो मल को शरीर .-से बाहर फेकती है, ' व्री कहलाती है।. यही अपानशक्ति

English

O Heaven and Earth divine, may I duly prepare for you this day the head of Makha on the place of earth where the Gods sacrificed. For Makha thee, thee for the head of Makha!

अध्याय ३७

श्लोक 4

देव्यो॑ वम्र्यो भू॒तस्य॑ प्रथम॒जा म॒खस्य॑ वो॒ऽद्य शिरो॑ राध्यासं देव॒यज॑ने पृथि॒व्याः ।म॒खाय॑ त्वा म॒खस्य॑ त्वा शी॒र्ष्णे

devyo vamryo bhūtasya prathamajā makhasya vo'dya śiro rādhyāsaṃ devayajane pṛthivyāḥ | makhāya tvā makhasya tvā śīrṣṇe

हिन्दी अर्थ

मेरी अपानशक्तिर्यो मुद्ध स्वस्थ बनाकर यस्च में समर्थ करे। इयत्यग्र॑ऽआसीन्मखस्यं ते ऽद्य .शिरों राध्यासं देवयज॑ने पृथिव्याः। इयति=इतनी ही अग्रे=सवबसे प्रथम स्थान मे आसीत्-मनुष्य कौ साधना थी। यह यज्ञ ही मनुष्य का मौलिक कर्तव्य था। यज्ञान्तर्गत देवपूजा, सङ्गतिकरण व दान' ही मुख्य धर्म॑

English

Ye who were born the earliest of creation, Ants divine, may I duly prepare for you this day the head of Makha on the place of earth where the Gods sacrificed. For Makha thee, thee for the head of Makha!

अध्याय ३७

श्लोक 5

इय॒त्यग्र॑ आसीन्म॒खस्य॑ ते॒ऽद्य शिरो॑ राध्यासं देव॒यज॑ने पृथि॒व्याः ।म॒खाय॑ त्वा म॒खस्य॑ त्वा शी॒र्ष्णे

iyatyagra āsīnmakhasya te'dya śiro rādhyāsaṃ devayajane pṛthivyāḥ | makhāya tvā makhasya tvā śīrṣṇe

हिन्दी अर्थ

मेरा जीवन सदा इस बात का ध्यान करके चले कि “देवपूजा, सङ्खतिकरण व दान' ही मेरे सबसे प्रथम व मुख्य कर्तव्य है। ये ही कर्तव्यो के अग्रभाग में स्थित है इन्द्रस्यौज: स्थ म॒खस्य॑ वोऽद्य शिरो राध्यासं देवरयज॑ने पृथिव्याः। इन्द्रस्य-जितेन्द्रिय पुरुष के ओजः ओज (शक्ति) स्थ=हो। वः= तुम्हारे द्वारा अद्य =आज

English

Only so large was it at first. Duly may I prepare for you this day the head of Makha on earth's place where the Gods sacrificed. For Makha thee, thee for the head of Makha!

अध्याय ३७

श्लोक 6

इन्द्र॒स्यौज॑ स्थ म॒खस्य॑ वो॒ऽद्य शिरो॑ राध्यासं देव॒यज॑ने पृथि॒व्याः ।म॒खाय॑ त्वा म॒खस्य॑ शी॒र्ष्णे । म॒खाय॑ त्वा म॒खस्य॑ त्वा शी॒र्ष्णे । म॒खाय॑ त्वा म॒खस्य॑ त्वा शी॒र्ष्णे

indrasyauja stha makhasya vo'dya śiro rādhyāsaṃ devayajane pṛthivyāḥ | makhāya tvā makhasya śīrṣṇe | makhāya tvā makhasya tvā śīrṣṇe | makhāya tvā makhasya tvā śīrṣṇe

हिन्दी अर्थ

जितेन्द्रिय पुरुष कौ शक्तियों यज्ञ की सिद्धि के लिए विनियुक्तं होती है। परेतु ब्रह्मणस्पतिः प्र देव्येतु सूनृता। अच्छं वीरं नर्य॑ पड्धिरांधसं देवा. यज्ञं प्रस्तुत मन्त्र का ऋषि कण्व" मेधावी है। इसकी प्रार्थना है कि १. ब्रह्मणःपतिः= ज्ञान का स्वामी प्रभु हमें प्रएतु=प्रकर्षण प्राप्त हो। इस ज्ञान के स्वामी कौ प्राप्ति से हमारा

English

Indra's effective might are ye. Duly may I prepare for you this day the head of Makha on earth's place where the Gods sacrificed. For Makha thee, thee for the head of Makha! For Makha thee, thee for the head of Makha! For Makha thee, thee for the head of Makha!

अध्याय ३७

श्लोक 7

प्रैतु॒ ब्रह्म॑ण॒स्पति॒: प्र दे॒व्ये॒तु सू॒नृता॑ । अच्छा॑ वी॒रं नर्यं॑ प॒ङ्क्तिरा॑धसं दे॒वा य॒ज्ञं न॑यन्तु नः ।म॒खाय॑ त्वा म॒खस्य॑ त्वा शी॒र्ष्णे । म॒खाय॑ त्वा म॒खस्य॑ त्वा शी॒र्ष्णे । म॒खाय॑ त्वा म॒खस्य॑ त्वा शी॒र्ष्णे

praitu brahmaṇaspati: pra devyetu sūnṛtā | acchā vīraṃ naryaṃ paṅktirādhasaṃ devā yajñaṃ nayantu naḥ | makhāya tvā makhasya tvā śīrṣṇe | makhāya tvā makhasya tvā śīrṣṇe | makhāya tvā makhasya tvā śīrṣṇe

हिन्दी अर्थ

जिस घर में पिता, पुत्र व माता सभी उत्तम कर्मोवाले तथा भद्र मनोवृत्तिवाले, स्वस्थ, शक्तिसम्पन्न तथा -यज्ञप्रवृत्त' होते है, वही धर स्वर्ग बन पाता है प्रस्तुत मन्त्र के देवता ‹ विद्वांसः "= ज्ञानी है। ये प्रभु से प्रार्थना करते है कि त्वा=तुञ्ञे हम ग्रहण करते है, अर्थात् प्रातः-सायं आपका स्मरण करते है। किसलिए? ऋजवे-ऋजुता के

English

May Brahmanaspati draw nigh, etc., as in XXXIII. 89. For Makha thee, thee for the head of Makha, etc., as in verse 6.

अध्याय ३७

श्लोक 8

म॒खस्य॒ शिरो॑ऽसि । म॒खाय॑ त्वा म॒खस्य॑ त्वा शी॒र्ष्णे ।म॒खस्य॒ शिरो॑ऽसि । म॒खाय॑ त्वा म॒खस्य॑ त्वा शी॒र्ष्णे ।म॒खस्य॒ शिरो॑ऽसि । म॒खाय॑ त्वा म॒खस्य॑ त्वा शी॒र्ष्णे ।म॒खाय॑ त्वा म॒खस्य॑ त्वा शी॒र्ष्णे म॒खाय॑ त्वा म॒खस्य॑ त्वा शी॒र्ष्णे म॒खाय॑ त्वा म॒खस्य॑ त्वा शी॒र्ष्णे

makhasya śiro'si | makhāya tvā makhasya tvā śīrṣṇe | makhasya śiro'si | makhāya tvā makhasya tvā śīrṣṇe | makhasya śiro'si | makhāya tvā makhasya tvā śīrṣṇe | makhāya tvā makhasya tvā śīrṣṇe makhāya tvā makhasya tvā śīrṣṇe makhāya tvā makhasya tvā śīrṣṇe

हिन्दी अर्थ

हम कुटिलता को अपने से दूर रक्खें, दुर्जनता से दूर रहे ओर संसार में ऋषिः-दध्यङ््डनथर्वणः। देवता-सविता। छन्दः- त्रिष्टुप्। स्वरः-थैवतः। यमाय॑ त्वा मखाय॑ त्वा सूर्यस्य त्वा तप॑से। देवस्त्वां सविता मध्वानक्तु प्रस्तुत मन्त्र मे 'दध्यङः" से प्रभु कहते है कि ९. त्वातुञ्े मैने इस संसार में यमाय

English

Thou art the head of Makha. Thee for Makha, thee for Makha's head! Thou art the head of Makha. Thee for Makha, thee for Makha's head! Thou art the head of Makha, thee for Makha, thee for Makha's head! For Makha thee, thee for the head of Makha, etc., as in verse 6.

अध्याय ३७

श्लोक 9

अश्व॑स्य त्वा॒ वृष्ण॑: श॒क्ना धू॑पयामि देव॒यज॑ने पृथि॒व्याः । म॒खाय॑ त्वा म॒खस्य॑ त्वा शी॒र्ष्णे ।अश्व॑स्य त्वा॒ वृष्ण॑: श॒क्ना धू॑पयामि देव॒यज॑ने पृथि॒व्याः । म॒खाय॑ त्वा म॒खस्य॑ त्वा शी॒र्ष्णे ।अश्व॑स्य त्वा॒ वृष्ण॑: श॒क्ना धू॑पयामि देव॒यज॑ने पृथि॒व्याः । म॒खाय॑ त्वा म॒खस्य॑ त्वा शी॒र्ष्णे ।म॒खाय॑ त्वा म॒खस्य॑ त्वा शी॒र्ष्णे । म॒खाय॑ त्वा म॒खस्य॑ त्वा शी॒र्ष्णे । म॒खाय॑ त्वा म॒खस्य॑ त्वा शी॒र्ष्णे

aśvasya tvā vṛṣṇa: śaknā dhūpayāmi devayajane pṛthivyāḥ | makhāya tvā makhasya tvā śīrṣṇe | aśvasya tvā vṛṣṇa: śaknā dhūpayāmi devayajane pṛthivyāḥ | makhāya tvā makhasya tvā śīrṣṇe | aśvasya tvā vṛṣṇa: śaknā dhūpayāmi devayajane pṛthivyāḥ | makhāya tvā makhasya tvā śīrṣṇe | makhāya tvā makhasya tvā śīrṣṇe | makhāya tvā makhasya tvā śīrṣṇe | makhāya tvā makhasya tvā śīrṣṇe

हिन्दी अर्थ

हम “संयमी, यज्ञमय, क्रियाशील, माधुर्य से परिपूर्ण, पार्थिव भोगो के प्रति अनासक्तं तथा प्रभुपूजक , पवित्र व तपस्वी बने। , । पत्नी क जीवन की पोच बातें।. । प्रजां म वाः। सुषदा पश्चादेवस्य॑ सवितुराधिपत्ये चक्षमे दाऽआश्रुतिरुत्तरतो

English

Thee on Gods’ sacrificial ground with stallion's dung I fumigate. For Makha thee, thee for the head of Makha! For Makha thee, thee for the head of Makha! For Makha thee, thee for the head of Makha! For Makha thee, thee for the head of Makha!

अध्याय ३७

श्लोक 10

ऋ॒जवे॑ त्वा सा॒धवे॑ त्वा सुक्षि॒त्यै त्वा॑ ।म॒खाय॑ त्वा म॒खस्य॑ त्वा शी॒र्ष्णे ।म॒खाय॑ त्वा म॒खस्य॑ त्वा शी॒र्ष्णे ।म॒खाय॑ त्वा म॒खस्य॑ त्वा शी॒र्ष्णे

ṛjave tvā sādhave tvā sukṣityai tvā | makhāya tvā makhasya tvā śīrṣṇe | makhāya tvā makhasya tvā śīrṣṇe | makhāya tvā makhasya tvā śīrṣṇe

हिन्दी अर्थ

आदर्शं पत्नी में त्याग, प्राणशक्ति, पुरुषार्थ व माधुर्य का निवासः होता है। गर्भो" देवानो पिता म॑तीनां पतिः प्रजानाम्। सं देवो देवेन सवित्रा ग॑त सः सूर्येण रोचते।।९४॥ ... पिता के जीवन पर ही बहुत कु बच्चों का जीवन निर्भर करता है, अतः आदर्श पिताः

English

Thee for the True. Thee for the Good. Thee for the place of happy rest. For Makha thee, thee for the head of Makha! For Makha thee, thee for the head of Makha! For Makha thee, thee for the head of Makha!

अध्याय ३७

श्लोक 11

य॒माय॑ त्वा म॒खाय॑ त्वा॒ सूर्य॑स्य त्वा॒ तप॑से ।दे॒वस्त्वा॑ सवि॒ता मध्वा॑नक्तु पृथि॒व्याः स॒ᳪस्पृश॑स्पाहि ।अ॒र्चिर॑सि शो॒चिर॑सि॒ तपो॑ऽसि

yamāya tvā makhāya tvā sūryasya tvā tapase | devastvā savitā madhvānaktu pṛthivyāḥ saspṛśaspāhi | arcirasi śocirasi tapo'si

हिन्दी अर्थ

आदर्श पिता वह है जो १. दिव्य-गुणों को धारण करता है २. ज्ञान को महत्त्व देता है ३. सन्तान- निर्माण को अपना प्रारम्भिक कर्तव्य. समञ्जता है ४. प्रभु से मेल को टूटने नहीं देता ओर ५. इसी कारण सूर्य के समान चमकता है। । पति-पत्नी के कर्तव्य ।

English

For Yama thee. For Makha thee. For Sûrya's fervent ardour thee. May Savitar the God with balm anoint thee. Guard thou the touches of the earth. Flame art thou; thou art radiance; thou art heat.

अध्याय ३७

श्लोक 12

अना॑धृष्टा पु॒रस्ता॑द॒ग्नेराधि॑पत्य॒ आयु॑र्मे दाः पु॒त्रव॑ती दक्षिण॒त इन्द्र॒स्याधि॑पत्ये प्र॒जां मे॑ दाः ।सु॒षदा॑ प॒श्चाद्दे॒वस्य॑ सवि॒तुराधि॑पत्ये॒ चक्षु॑र्मे दा आस्रु॑तिरुत्तर॒तो धा॒तुराधि॑पत्ये रा॒यस्पोषं॑ मे दाः ।विधृ॑तिरु॒परि॑ष्टा॒द्बृह॒स्पते॒राधि॑पत्ये॒ ओजो॑ मे दा विश्वा॑भ्यो मा ना॒ष्ट्राभ्य॑स्पाहि मनो॒रश्वा॑सि

anādhṛṣṭā purastādagnerādhipatya āyurme dāḥ putravatī dakṣiṇata indrasyādhipatye prajāṃ me dāḥ | suṣadā paścāddevasya saviturādhipatye cakṣurme dā āsrutiruttarato dhāturādhipatye rāyaspoṣaṃ me dāḥ | vidhṛtirupariṣṭādbṛhaspaterādhipatye ojo me dā viśvābhyo mā nāṣṭrābhyaspāhi manoraśvāsi

हिन्दी अर्थ

गृहपति व गृहपत्नी का यह कर्तव्य है कि (१) वे.आलस्य को छोडकर तपस्वी जीवन. बना ओर यज्ञादि उत्तम कर्मो मे लगे रहें (२) प्रभु के साथ अपना सम्पकं अवश्यं 'बनापँ। (३) जान के सूर्य से दीप्त होने का प्रयत्न करे। “स्वाहा ' ओर “अग्नि' का प्रभु-चिन्तन ।

English

Unconquerable, eastward, in Agni's overlordship, give me life. Rich in sons, southward, in Indra's overlordship give me offspring. Fair-seated, westward, in God. Savitar's overlordship, give me sight. Range of hearing, northward, in Dhâtar's overlordship, give me increase of wealth. Arrangement, upward, in Brihaspati's overlordship, give me energy. From all destructive spirits guard us. Thou art Manu's mare.

अध्याय ३७

श्लोक 13

स्वाहा॑ म॒रुद्भि॒: परि॑ श्रीयस्व दि॒वः स॒ᳪस्पृश॑स्पाहि ।मधु॒ मधु॒ मधु॑

svāhā marudbhi: pari śrīyasva divaḥ saspṛśaspāhi | madhu madhu madhu

हिन्दी अर्थ

प्रभु प्रकाश के पुञ्ज है। उनके सम्पक मे. हम उस प्रकाश को पानेवाले हों। प्रभु का चिन्तन करता हुआ स्वाहा के साथ अग्नि (अपनी. पत्नी के साथ पति) कहता है कि (१) मैं गोपाम् =सब वेदवाणियों के रक्षक उस प्रभु को अपश्यम्-देखता, ह वे प्रभु "गोपा है.-रक्षक है। वे गौओं के पालक हतो मैँ.उनकी गौ हँ (२).

English

All-hail! By Maruts be thou compassed round. Guard the sky's touches. Mead, mead, mead.

अध्याय ३७

श्लोक 14

गर्भो॑ दे॒वानां॑ पि॒ता म॑ती॒नां पति॑: प्र॒जाना॑म् ।सं दे॒वो दे॒वेन॑ सवि॒त्रा ग॑त॒ सᳪसूर्ये॑ण रोचते

garbho devānāṃ pitā matīnāṃ pati: prajānām | saṃ devo devena savitrā gata sasūryeṇa rocate

हिन्दी अर्थ

वे प्रभु ही रक्षक है, सब लोकों को अपने में धारण किये हुए है, सर्वत्र देवश्रु्त्वं दव घर्म देवो देवान् पात्र प्रावीरनुं वां देववींतये। मधु माध्वीभ्यां मधु पति-पत्नी प्रभु की स्तुति करते हुए कहते है कि (९) विश्वासां भुवां पतेहे प्रभो! आप सब भूलोकों के पति हो। वे सब लोक जिनमे प्राणी हैं वे, भू' कहलाते है-- “भवन्ति

English

Germ of the Gods, Father of hymns, all living creatures’ guardian Lord, Radiant, with radiant Savitar united, with the Sun he shines.

अध्याय ३७

श्लोक 15

सम॒ग्निर॒ग्निना॑ गत॒ सं दैवे॑न सवि॒त्रा सᳪ सूर्ये॑णारोचिष्ट ।स्वाहा॒ सम॒ग्निस्तप॑सा गत॒ सं दैव्ये॑न सवि॒त्रा सᳪसूर्ये॑णारूरुचत

samagniragninā gata saṃ daivena savitrā sa sūryeṇārociṣṭa | svāhā samagnistapasā gata saṃ daivyena savitrā sasūryeṇārūrucata

हिन्दी अर्थ

प्रभु के अनुगमन के तीन लाभ है १. दिव्य गुणों कौ प्राप्ति, २. मधुविद्या का ग्रहण, ३. माधुर्य का सञ्चार। 1: हदे त्वा मन॑से त्वा दिवे त्वा सूर्याय त्वा। ऊर्ध्वोऽअ॑ध्वरं दिवि देवेषुं धेहि। ९९॥ म्दध्यडः'=' ध्यान के मार्ग पर चलनेवाला' प्रभु से कहता है कि (९) हृदे त्वामै

English

Agni combined with flaming fire, combined with Savitar divine, hath shone together with the Sun.

अध्याय ३७

श्लोक 16

ध॒र्ता दि॒वो वि भा॑ति॒ तप॑सस्पृथि॒व्यां ध॒र्ता दे॒वो दे॒वाना॒मम॑र्त्यस्तपो॒जाः ।वाच॑म॒स्मे नि य॑च्छ देवा॒युव॑म्

dhartā divo vi bhāti tapasaspṛthivyāṃ dhartā devo devānāmamartyastapojāḥ | vācamasme ni yaccha devāyuvam

हिन्दी अर्थ

-हमारा हृदय प्रभु का स्मरण करे, मन प्रभु का चिन्तनं करे, हमारा मस्तिष्क प्रकाशमय हो; जीवन क्रियाशील हो, हम ज्ञानी बनकर यज्ञ को अपने जीवन का.अ्ख बना, संसार मे किसी से द्वेष न करे। गृहपत्नी विशेषरूप से प्रभु प्रार्थना करती है कि (९) है प्रभो! पिता नः असि-आप

English

He shines on earth upholder of the sky and heat, the Gods upholder, God, immortal, born of heat. To him address a speech devoted to the Gods.

अध्याय ३७

श्लोक 17

अप॑श्यं गो॒पामनि॑पद्यमान॒मा च॒ परा॑ च प॒थिभि॒श्चर॑न्तम् ।स स॒ध्रीची॒: स विषू॑ची॒र्वसा॑न॒ आ व॑रीवर्त्ति॒ भुव॑नेष्व॒न्तः

apaśyaṃ gopāmanipadyamānamā ca parā ca pathibhiścarantam | sa sadhrīcī: sa viṣūcīrvasāna ā varīvartti bhuvaneṣvantaḥ

हिन्दी अर्थ

प्रभु को पिता जानते हुए हम उससे ज्ञान प्राप्त करे। ज्ञानवाले होकर प्रभु के उपासक बने। इहिलौकिक साफल्य के साथ हम इस भवसागर को तैरने का भी ध्यान करे। ऋषिः-आथर्वणः। देवता-ईशूवरः। छन्दः- अनुष्टुप्। स्वरः गान्धारः। ; रात्रिः केतुना जुषता सुज्योतिर्ज्योतिंषा स्वाह।॥ २९॥

English

I saw the Herdsman, him who never stumbles, approaching by his pathways and departing. He, clothed with gathered and diffusive splendour, within the worlds continually travels.

अध्याय ३७

श्लोक 18

विश्वा॑सां भुवां पते॒ विश्व॑स्य मनसस्पते॒ विश्व॑स्य वचसस्पते॒ सर्व॑स्य वचसस्पते ।दे॒व॒श्रुत्त्वं दे॑व घर्म दे॒वो दे॒वान् पा॒ह्यत्र॒ प्रावी॒रनु॑ वां दे॒ववी॑तये ।मधु॒ माध्वी॑भ्यां॒ मधु॒ माधू॑चीभ्याम्

viśvāsāṃ bhuvāṃ pate viśvasya manasaspate viśvasya vacasaspate sarvasya vacasaspate | devaśruttvaṃ deva gharma devo devān pāhyatra prāvīranu vāṃ devavītaye | madhu mādhvībhyāṃ madhu mādhūcībhyām

हिन्दी अर्थ

क्या दिन ओर क्या“ रात, हम सदा प्रकाश मे विचरनेवाले बनें। उत्तम ज्योतिवाले होते हुए सदा न्यायमार्गं से चले

English

Lord of all earths, Lord of all mind, Lord of all speech, thou Lord of speech entire. Heard by the Gods, Caldron divine, do thou, a God, protect the Gods. Here, after, let it speed you twain on to the banquet of the Gods. Sweetness for both the sweetness-lovers! Sweetness for those the twain who take delight in sweetness!

अध्याय ३७

श्लोक 19

हृ॒दे त्वा॒ मन॑से त्वा दि॒वे त्वा॒ सूर्या॑य त्वा ।ऊ॒र्ध्वो अ॑ध्व॒रं दि॒वि दे॒वेषु॑ धेहि

hṛde tvā manase tvā dive tvā sūryāya tvā | ūrdhvo adhvaraṃ divi deveṣu dhehi

हिन्दी अर्थ

मेरा ज्ञान, मेरी सूनृतवाणी, मेरे उत्तम कर्म-ये सभी मुञ्चे यज्ञमय बनार्ण। . "दध्यङ् आत्मप्ररणा देते हुए कहते है कि मखस्य शिरः असितू यज्ञ का शिखर हे, अर्थात् तूने यज्ञ के पर्वत पर आरोहण किया है, तराई में वैठा नहीं रह गया। मेखला तक पहचकर तू शिखर तक पहँचा है। तुञ्चमे यज्ञ ने पूर्णरूप से मूर्तरूप धारण किया हे।

English

Thee for the heart, thee for the mind, thee for the sky, for Sûrya thee. Standing erect lay thou the sacrifice in heaven among the Gods.

अध्याय ३७

श्लोक 20

पि॒ता नो॑ऽसि पि॒ता नो॑ बोधि॒ नम॑स्ते अतु॒ मा मा॑ हिᳪसीः ।त्वष्टृ॑मन्तस्त्वा सपेम पु॒त्रान्प॒शून्मयि॑ धेहि प्र॒जाम॒स्मासु॑ धे॒ह्यरि॑ष्टा॒ऽहᳪ स॒ह प॑त्या भूयासम्

pitā no'si pitā no bodhi namaste atu mā mā hisīḥ | tvaṣṭṛmantastvā sapema putrānpaśūnmayi dhehi prajāmasmāsu dhehyariṣṭā'ha saha patyā bhūyāsam

हिन्दी अर्थ

(क) हमें शरीर के दृष्टिकोण से यज्ञ के शिखर पर पहँचना है, अर्थात् अपनी शारीरिक शक्ति को निर्बलों कौ रक्षा के लिए विनियुक्त करना है। (ख) मन के दृष्टिकोण से भी यज्ञ के शिखर पर पहुंचना है, अर्थात् मन मे कभी भी किसी का द्रोह-चिन्तन न करके सबके लिए मङ्गल -कौ कामना करनी है। (ग) हमें बुद्धि के

English

Thou art our Father, father-like regard us. Obeisance be to thee. Do not thou harm us. May we, accompanied by Tvashtar, win thee. Vouchsafe me sons and cattle. Grant us offspring. Safe may I be together with my husband.

अध्याय ३७

श्लोक 21

अह॑: के॒तुना॑ जुषताᳪ सु॒ज्योति॒र्ज्योति॑षा॒ स्वाहा॑ ।रात्रि॑: के॒तुना॑ जुषताᳪ सु॒ज्योति॒र्ज्योति॑षा॒ स्वाहा॑

aha: ketunā juṣatā sujyotirjyotiṣā svāhā | rātri: ketunā juṣatā sujyotirjyotiṣā svāhā

हिन्दी अर्थ

(क) हमें शरीर के दृष्टिकोण से यज्ञ के शिखर पर पहँचना है, अर्थात् अपनी शारीरिक शक्ति को निर्बलों कौ रक्षा के लिए विनियुक्त करना है। (ख) मन के दृष्टिकोण से भी यज्ञ के शिखर पर पहुंचना है, अर्थात् मन मे कभी भी किसी का द्रोह-चिन्तन न करके सबके लिए मङ्गल -कौ कामना करनी है। (ग) हमें बुद्धि के

English

May Day together with his sheen, pair-lighted with his light, accept. All-hail! May Night together with her sheen, fair lighted with her. light, accept. All-hail!

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Yajur Veda — Chapter 37
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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