अध्याय ३७
श्लोक 1
दे॒वस्य॑ त्वा सवि॒तुः प्र॑स॒वेऽश्विनो॑र्बा॒हुभ्यां॑ पू॒ष्णो हस्ता॑भ्याम् ।आ द॑दे॒ नारि॑रसि
devasya tvā savituḥ prasave'śvinorbāhubhyāṃ pūṣṇo hastābhyām | ā dade nārirasi
हिन्दी अर्थ
हम प्रभु के आदेश के अनुसार वस्तुओं का ग्रहण करें, स्वयं पुरुषार्थ से अर्जित वस्तु कोही लें। पोषण के लिए जितनी पर्याप्त है उतनी ही ले। एेसा करने पर वि होत्रा दधे वयुनाविदेकःऽडइन्मही देवस्य॑ सवितुः परिंष्टुतिः॥। २॥ पिले मन्त्र मेँ संसार के पदार्थो के ग्रहण मेँ तीन बातों का ध्यान करने के लिए कहा
English
com The Texts of the White Yajurveda, tr. Ralph T.H. Griffith, [1899], BOOK THE THIRTY-SEVENTH. By impulse of God Savitar I take thee, etc. Spade art thou. Woman art thou, etc., as in XI. 9, 10.