Yajur Veda· Yajurveda Saṁhitā
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अध्याय 33 / 40

Adhyāya 33

अध्याय 33

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अध्याय ३३

श्लोक 1

अ॒स्याजरा॑सो द॒माम॒रित्रा॑ अ॒र्चद्धू॑मासो अ॒ग्नय॑: पाव॒काः ।श्वि॒ती॒चय॑: श्वा॒त्रासो॑ भुर॒ण्यवो॑ वन॒र्षदो॑ वा॒यवो॒ न सोमा॑:

asyājarāso damāmaritrā arcaddhūmāso agnaya: pāvakāḥ | śvitīcaya: śvātrāso bhuraṇyavo vanarṣado vāyavo na somā:

हिन्दी अर्थ

षिः विष्वरूपः। देवता-अग्नयः। छन्द: गायत्री। स्वरः-षड्जः। हर॑यो धूमकेतवो वात॑जूताऽ उप द्यवि । यतन्ते वृथ॑ग॒ग्नय॑: ।। २॥ ९. गतमन्त्र- वर्णित प्रभुभक्त हरयः ओरों के दुःखों को हरण करनेवाले होते हे वस्तुतः ये ओरों के दुःखों को अपना बना लेते हैँ ओर उसे दूर किये चिना शान्ति अनुभव

English

com The Texts of the White Yajurveda, tr. Ralph T.H. Griffith, [1899], BOOK THE THIRTY-THIRD. His be the fires, eternal, purifying, protectors of our homes, whose smoke is shining, White, waxing in their strength, for ever stirring, and seated in the wood: like winds are Somas.

अध्याय ३३

श्लोक 2

हर॑यो धू॒मके॑तवो॒ वात॑जूता॒ उप॒ द्यवि॑ ।यत॑न्ते॒ वृथ॑ग॒ग्नय॑:

harayo dhūmaketavo vātajūtā upa dyavi | yatante vṛthagagnaya:

हिन्दी अर्थ

हम स्वयं अग्नि बनकर ओरों को भी अग्नि बनाने का प्रयत्न करे। यजा नो मित्रावरुणा यजां देवाँ २।ऽ ऋतं बुहत्। अग्ने यक्षि स्वं दम॑म्॥३॥ १. गतमन्त्र मेँ वर्णित आग्नि" बनने के लिए हम प्रभु से प्रार्थना करते है कि दहे अग्ने आगे ले-चलनेवाले प्रभो! आप अग्नि है. आपकर सम्पर्क से हम भी अग्नि बन

English

Gold-coloured, bannered with the smoke, urged by the wind, aloft to heaven Rise, lightly borne, the flames of fire. Bring to us Mitra-Varuna, bring the Gods to the great sacrifice; Bring them, O Agni, to thine home.

अध्याय ३३

श्लोक 3

यजा॑ नो मि॒त्रावरु॑णा॒ यजा॑ दे॒वाँ२ ऋ॒तं बृ॒हत् ।अग्ने॒ यक्षि॒ स्वं दम॑म्

yajā no mitrāvaruṇā yajā devā~2 ṛtaṃ bṛhat | agne yakṣi svaṃ damam

हिन्दी अर्थ

प्रभु के स्वागत कौ तैयारी का स्वरूप यदी है कि हम १. स्वास्थ्य के द्वारा शरीर को रोगरूप मलों से दूर करते हैं २. दिव्य गुणों के द्वारा द्वेषरूप मानसमल को दूर करते है ३. ऋत के द्वारा उन्नति के विघ्नो को समाप्त करते हैँ ओर ४. आत्मदमन से अपने सब मलों को दूर करने का प्रयत्न करते है।

English

To fair goals travel Two unlike in semblance: each in succession nourishes an infant.

अध्याय ३३

श्लोक 4

यु॒क्ष्वा हि दे॑व॒हूत॑माँ॒२ अश्वाँ॑२ अग्ने र॒थीरि॑व ।नि होता॑ पू॒र्व्यः स॑दः

yukṣvā hi devahūtamā~2 aśvā~2 agne rathīriva | ni hotā pūrvyaḥ sadaḥ

हिन्दी अर्थ

इन्द्रियों को परिशुद्ध करके हम अपने हदयों मे प्रभु का आह्वान करे। १. ३श्वें अध्याय की समाप्ति पर ' श्रीश्च ते लक्ष्मीश्च पत्न्यौ ' इन शब्दों मे कहा था कि "धन व ज्ञान' वे दो तेरी पत्नियों टै। इसी बात को "यत्र ब्रह्मच क्त्रं च' इन शब्दों में दुहराया गया है ( क्षत्रमिति धननाम -नि० २।१०)। यहाँ "ब्रह्य ' ज्ञान का वाचक टै ओर

English

Yoke, Agni, as a charioteer, thy steeds who best invoke the Gods: As ancient Hotar take thy seat.

अध्याय ३३

श्लोक 5

द्वे विरू॑पे चरत॒: स्वर्थे॑ अ॒न्याऽन्या॑ व॒त्समुप॑ धापयेते ।हरि॑र॒न्यस्यां॒ भव॑ति स्व॒धावा॑ञ्छु॒क्रो अ॒न्यस्यां॑ ददृशे सु॒वर्चा॑:

dve virūpe carata: svarthe anyā'nyā vatsamupa dhāpayete | hariranyasyāṃ bhavati svadhāvāñchukro anyasyāṃ dadṛśe suvarcā:

हिन्दी अर्थ

हम कर्मनिष्ठ, तपस्वी, जानी बनकर प्रभु के प्रिय बने, उपासक बनकर ज्ञान प्राप्त करे, सबके साथ अद्वैत का अनुभव करते हुए शक्तिशाली वने, प्रभु की शक्ति का देवो क्री जनुक्रूत्तता त्रीणि शाता त्री सहस्राण्यग्निं त्रिच्शच्चं देवा न॑ चासपर्यन् ।

English

One bears a Godlike Babe of golden colour: bright and fair-shining is be with the other.

अध्याय ३३

श्लोक 6

अ॒यमि॒ह प्र॑थ॒मो धा॑यि धा॒तृभि॒र्होता॒ यजि॑ष्ठो अध्व॒रेष्वीड्य॑: ।यमप्न॑वानो॒ भृग॑वो विरुरु॒चुर्वने॑षु चि॒त्रं वि॒भ्वं॒ वि॒शे-वि॑शे

ayamiha prathamo dhāyi dhātṛbhirhotā yajiṣṭho adhvareṣvīḍya: | yamapnavāno bhṛgavo virurucurvaneṣu citraṃ vibhvaṃ viśe-viśe

हिन्दी अर्थ

सब प्राकृतिक देवों की अनुकूलता होने पर हमें स्वास्थ्य, नैर्मल्य व दीप्ति प्राप्त होती है ओर हमारा हृदय प्रभु का आसन बनता है। देकरत ग्नि क्रा चिक्ास कवि सम्राजमतिथिं जनानामासन्ना पात्र जनयन्त देवाः ।॥८॥

English

Here by ordainers was this God appointed first Invoker, best at worship, to be praised at rites, Whom Apnavâna and the Bhrigus caused to shine, bright-coloured in the wood, spreading to every house.

अध्याय ३३

श्लोक 7

त्रीणि॑ श॒ता त्री स॒हस्रा॑ण्य॒ग्निं त्रि॒ᳪशच्च॑ दे॒वा नव॑ चासपर्यन् ।औक्ष॑न् घृ॒तैरस्तृ॑णन् ब॒र्हिर॑स्मा॒ आदिद्धोता॑रं॒ न्य॒सादयन्त

trīṇi śatā trī sahasrāṇyagniṃ triśacca devā nava cāsaparyan | aukṣan ghṛtairastṛṇan barhirasmā ādiddhotāraṃ nyasādayanta

हिन्दी अर्थ

देवों कौ कृपा से हमारा जीवन मन्त्र-वर्णित बातों से युक्त होकर नव (नवीन) ही बन जाए ओर सबका स्तुत्य (नू स्तुतौ) हो सके। १. अग्निः=हमारी सव उन्नतियों के साधक वे प्रभु वृत्राणिसान पर पर्दा डालनेवाली कामादि वासनाओं को जंघनत्=नष्ट करते है। जीव स्वयं वासना के विजय में समर्थ नही।

English

Three times a hundred Gods, and thrice a thousand, and three times ten, and nine have worshipped Agni, For him spread sacred grass, balmed him with butter, and stablished him as Priest and Sacrificer.

अध्याय ३३

श्लोक 8

मू॒र्धानं॑ दि॒वो अ॑र॒तिं पृ॑थि॒व्या वै॑श्वान॒रमृ॒त आ जा॒तम॒ग्निम् ।क॒विᳪ स॒म्राज॒मति॑थिं॒ जना॑नामा॒सन्ना पात्रं॑ जनयन्त दे॒वाः

mūrdhānaṃ divo aratiṃ pṛthivyā vaiśvānaramṛta ā jātamagnim | kavi samrājamatithiṃ janānāmāsannā pātraṃ janayanta devāḥ

हिन्दी अर्थ

हम प्रभु के प्रति अपना अर्पण करने का प्रयत्न करे. इसी उदेश्य से धनां का यज्ञो में विनियोग करे, जिससे प्रभु हमपर आक्रमण करनेवाले वृत्रो का विनाश करे। १९. है अग्ने=(अगि गतौ) निरन्तर प्रभु की ओर चलनेवाले। उन्नतिपथ पर आगे बद्नेवाले जीव! तू सित्रस्य=अपने मित्र प्रभु के धामभिः=तेजों के उदेश्य से सोम्यम् मधु

English

Him, messenger of earth and head of heaven, Agni Vaisvânara, born in holy Order, The Sage, the King, the Guest of men, a vessel fit for their mouths, the Gods have generated.

अध्याय ३३

श्लोक 9

अ॒ग्निर्वृ॒त्राणि॑ जङ्घनद्द्रविण॒स्युर्वि॑प॒न्यया॑ ।समि॑द्धः शु॒क्र आहु॑तः

agnirvṛtrāṇi jaṅghanaddraviṇasyurvipanyayā | samiddhaḥ śukra āhutaḥ

हिन्दी अर्थ

हम महान् सौभग के लिए प्रयत्न कर, हमारे द्युम्न उत्तम हों। हमारा दाम्पत्य संयमवाला ठो ओर ठम क्रोधादि के वेग को समाप्त कर दे। इन्द्रं न त्वा शव॑सा देवता वायुं पुंणन्ति राध॑सा नृत॑माः ।॥९३॥ १. गत मन्त्र के आशीर्वाद को सुनकर अग्नि प्रभु से कहता है कि मन्द्रतमम्- अत्यन्त

English

May Agni slay the foemen,—fain for riches, through the love of song Kindled, bright, served with sacrifice.

अध्याय ३३

श्लोक 10

विश्वे॑भिः सो॒म्यं मध्वग्न॒ इन्द्रे॑ण वा॒युना॑ ।पिबा॑ मि॒त्रस्य॒ धाम॑भिः

viśvebhiḥ somyaṃ madhvagna indreṇa vāyunā | pibā mitrasya dhāmabhiḥ

हिन्दी अर्थ

- हम ' सूरि, यन्ता, मघवा व इन्द्रियो कौ रक्षा करनेवाले ' बनकर प्रभु कर प्रिय श्रुधि श्रुत्कर्ण वद्धिभिरदँवैर॑स्ने स॒याव॑भिः। १. है श्रुत्कर्ण ज्ञान का विकर्ण करनेवाले (-श्रुतचज्ञान, कर्ण=विकीर्ण करना) ओर इस प्रकार अग्ने=अग्रेणी प्रभो! श्रुधि=आप हमारी प्रार्थना को सुनिए। प्रभु ज्ञान को सहैव

English

With the All-Gods, with Indra and with Vâyu drink the Soma mead, O Agni, after Mitra's laws.

अध्याय ३३

श्लोक 11

आ यदि॒षे नृ॒पतिं॒ तेज॒ आन॒ट् शुचि॒ रेतो॒ निषि॑क्तं॒ द्यौर॒भीके॑ ।अ॒ग्निः शर्ध॑मनव॒द्यं युवा॑नᳪ स्वा॒ध्यं॒ जनयत् सू॒दय॑च्च

ā yadiṣe nṛpatiṃ teja ānaṭ śuci reto niṣiktaṃ dyaurabhīke | agniḥ śardhamanavadyaṃ yuvāna svādhyaṃ janayat sūdayacca

हिन्दी अर्थ

हमारे हृदयो में स्नेह, दान व यज्ञोपस्थान कौ वृत्तियाँ हों। विश्वैषामदितिर्यज्ञियानां विश्वेंषामतिंथिर्मानुंषाणाम्। अन्निर्देवानामव॑ऽआचरृणानः सुमृडीको भ॑वतु जातवेदाः ९६॥ १. (क) गत मन्त्र मे हम यन्नो मे जानैवाले हों ', इन शब्दों से प्रार्थना समाप्त हई

English

When splendour reached the Lord of men to speed him, down from the heaven was shed the brilliant moisture. Agni brought forth to light and filled with spirit the youthful host benevolent and blameless.

अध्याय ३३

श्लोक 12

अग्ने॒ शर्ध॑ मह॒ते सौ॑भगाय॒ तव॑ द्यु॒म्नान्यु॑त्त॒मानि॑ सन्तु ।सं जा॑स्प॒त्यᳪ सु॒यम॒मा कृ॑णुष्व शत्रूय॒ताम॒भि ति॑ष्ठा॒ महा॑ᳪसि

agne śardha mahate saubhagāya tava dyumnānyuttamāni santu | saṃ jāspatya suyamamā kṛṇuṣva śatrūyatāmabhi tiṣṭhā mahāsi

हिन्दी अर्थ

हम रेतस् रक्ता द्वारा अपना आप्यायन करनेवाले, शक्तिशाली ज्ञानेन्दरियोवाले, ऋत को प्राप्त, वायु की भति नियत कर्मो में व्याप्त, प्रज्ञानों व कर्मो से शक्ति व धनों को १. गावः=ठे वेदवाणियो! अवतम्-हदयान्तरिक्ष के, मेरी हदयरूप गुहा को उपावतम्- (अवनभाग, बृद्धि) अपना भाग बनाओ-उसका सेवन करो ओर उसका वर्धन करो।

English

Show thyself strong for mighty bliss, O Agni; most excellent be thine effulgent splendours. Make easy to maintain our household lordship and trample down the might of those who hate us.

अध्याय ३३

श्लोक 13

त्वाᳪ हि म॒न्द्रत॑ममर्कशो॒कैर्व॑वृ॒महे॒ महि॑ न॒: श्रोष्य॑ग्ने ।इन्द्रं॒ न त्वा॒ शव॑सा दे॒वता॑ वा॒युं पृ॑णन्ति॒ राध॑सा॒ नृत॑माः

tvā hi mandratamamarkaśokairvavṛmahe mahi na: śroṣyagne | indraṃ na tvā śavasā devatā vāyuṃ pṛṇanti rādhasā nṛtamāḥ

हिन्दी अर्थ

हमारे हृदयो में वेदवाणी का प्रादुर्भाव हो। इन वेदवाणियों से हमारे हदय विशाल बनें व यक्िय भावनावाले हौ। हमारे कान सदा इन वाणियो के श्रवण से पचित्र व कपिः वसिष्ठः। देवता-सविता। छन्दः. निचृद्गायत्री । स्वर ः-षड्जः।। गतमन्त्र मं वेदवाणियों से दोनों कानों के ज्योतिर्मय होने का उल्लेख था। उसी से

English

We have elected thee as most delightful for thy beams’ glow: hear our great laud, O Agni. The best men praise thee as the peer of Indra in strength, mid Gods, like Vâyu in thy bounty.

अध्याय ३३

श्लोक 14

त्वे अ॑ग्ने स्वाहुत प्रि॒यास॑: सन्तु सू॒रय॑: ।य॒न्तारो॒ ये म॒घवा॑नो॒ जना॑नामू॒र्वान् दय॑न्त॒ गोना॑म्

tve agne svāhuta priyāsa: santu sūraya: | yantāro ye maghavāno janānāmūrvān dayanta gonām

हिन्दी अर्थ

धन का दान देनेवाला व्यक्ति सर्वत्र यश प्राप्त करता है। भै क्रो विस्तृत करना-विुवरूप नना १, आतिष्ठन्तम्-जो केवल अपने में स्थित न टोकर सनमें स्थित है (०1८ ५110 15 7७1 ७९।६८७१४९०) , उस सबमे- विश्व में ' मै" की भावना करनेवाले को , विश्वे=सब दिव्य

English

O Agni who art worshipped well, dear let our princes be to thee, Our wealthy patrons who are governors of men, who part in gifts their stalls of kine.

अध्याय ३३

श्लोक 15

श्रु॒धि श्रु॑त्कर्ण॒ वह्नि॑भिर्दे॒वैर॑ग्ने स॒याव॑भिः ।आ सी॑दन्तु ब॒र्हिषि॑ मि॒त्रो अ॑र्य॒मा प्रा॑त॒र्यावा॑णो अध्व॒रम्

śrudhi śrutkarṇa vahnibhirdevairagne sayāvabhiḥ | ā sīdantu barhiṣi mitro aryamā prātaryāvāṇo adhvaram

हिन्दी अर्थ

हम अपनी "मै" को विस्तृत करके विश्वरूप वने ओर परिणामतः अमर हो विरुवरूप प्रभु च्री उपासना ९. गतमन्त्र का विषय "विश्वरूप ' बनना था। प्रस्तुत मन्त्र मे कहते है कि विश्वरूप बनने करे लिए उस विश्वरूप प्रभु कौ उपासना करो। वः तुम्हारे महे महनीय, पूजनीय व

English

Hear, Agni who hast ears to hear, with all thy train of escort Gods. Let Mitra, Aryaman, seeking betimes our rite, seat them upon the sacred grass.

अध्याय ३३

श्लोक 16

विश्वे॑षा॒मदि॑तिर्य॒ज्ञिया॑नां॒ विश्वे॑षा॒मति॑थि॒र्मानु॑षाणाम् ।अ॒ग्निर्दे॒वाना॒मव॑ आवृणा॒नः सु॑मृडी॒को भ॑वतु जा॒तवे॑दाः

viśveṣāmaditiryajñiyānāṃ viśveṣāmatithirmānuṣāṇām | agnirdevānāmava āvṛṇānaḥ sumṛḍīko bhavatu jātavedāḥ

हिन्दी अर्थ

हम विश्वरूप प्रभु कौ उपासना करे ओर स्वयं विश्वरूप बनकर अमरता ९. येषाम्-जिनके युवादुरितों से दूर करके (यु-अमिश्रण) भद्रं से सम्युक्त कराने- वाले (यु-मिश्रण) इन्द्रः परमैश्वर्यशाली प्रभु सखामित्र होते है एषाम्-इनकी इध्मः =लानदीप्ति इत्-निश्चय से बृहत्-बहत अधिक वदी दुई ढोती है। प्रभु ज्ञान के पुञ्ज है, प्रभुका मित्र

English

The Freedom of all Gods who merit worship, freely received as Guest in all men's houses, Agni who hath secured the Gods’ high favour, may he be gracious to us, Jâtavedas.

अध्याय ३३

श्लोक 17

म॒हो अ॒ग्नेः स॑मिधा॒नस्य॒ शर्म॒ण्यना॑गा मि॒त्रे वरु॑णे स्व॒स्तये॑ ।श्रेष्ठे॑ स्याम सवि॒तुः सवी॑मनि॒ तद्दे॒वाना॒मवो॑ अ॒द्या वृ॑णीमहे

maho agneḥ samidhānasya śarmaṇyanāgā mitre varuṇe svastaye | śreṣṭhe syāma savituḥ savīmani taddevānāmavo adyā vṛṇīmahe

हिन्दी अर्थ

सुरक्षित वीर्यवाला व्यक्ति सदा प्रफुल्लित वदन (1111118 1०९€ ) होता ठै. यह महान् बनता है, इसका दिल छोटा नहीं होता तथा साथ ही यह प्रभु का पुजारी होता हे ओर शक्ति से रोगों पर आक्रमण करनेवाला होता है। १, राजनीति में उन्नति के विघातक तत्त्वं को "वृत्र" कहते है। जैसे सूर्यं के प्रकाश

English

In great enkindled Agni's keeping and, for bliss, free from all sin before Mitra and Varuna, May we share Savitar's best animating help. We crave this gracious favour of the Gods to-day.

अध्याय ३३

श्लोक 18

आप॑श्चित्पिप्यु स्त॒र्यो न गावो॒ नक्ष॑न्नृ॒तं ज॑रि॒तार॑स्त इन्द्र ।या॒हि वा॒युर्न नि॒युतो॑ नो॒ अच्छा॒ त्वᳪ हि धी॒भिर्दय॑से॒ वि वाजा॑न्

āpaścitpipyu staryo na gāvo nakṣannṛtaṃ jaritārasta indra | yāhi vāyurna niyuto no acchā tva hi dhībhirdayase vi vājān

हिन्दी अर्थ

राजा के पाँच कर्तव्य है। इन कर्तव्यो का पालन करनेवाला राजा ही राजा कहलाने के योग्य होता है। कुतस्त्वमिन्द्र माहिनः सन्नेको यासि सत्पते किं त॑ऽ इत्था । सं पुच्छसे समराणः शभानैर्वोचेस्तन्नः हरिवो यत्तऽअस्मे ॥ २७॥

English

Like barren cows, moreover, swelled the waters: singers approached thy holy cult, O Indra. Come thou to us as to his team comes Vâyu. Thou through our solemn hymns bestowest bounty.

अध्याय ३३

श्लोक 19

गाव॒ उपा॑वताव॒तं म॒ही य॒ज्ञस्य॑ र॒प्सुदा॑ ।उ॒भा कर्णा॑ हिर॒ण्यया॑

gāva upāvatāvataṃ mahī yajñasya rapsudā | ubhā karṇā hiraṇyayā

हिन्दी अर्थ

राजा को कभी स्वच्छन्द न होना चाहिए्। मन्त्रीपरिषद् से सलाह करके ही जितेन्द्रियता त वेद-दोहन “इन्द्र शब्द का अर्थ राजा भी होता है, तो प्रसंगवश रद व रवे मन्त्रम राजा का उल्लेख करके फिर आत्मा के विषय में कहते ठै कि ९. है इन्द्र-सर्वशक्तिमन्,

English

Ye Cows, protect the fount. The two mighty Ones bless the sacrifice. The handles twain are wrought of gold.

अध्याय ३३

श्लोक 20

यद॒द्य सूर॒ उदि॒तेऽना॑गा मि॒त्रो अ॑र्य॒मा ।सु॒वाति॑ सवि॒ता भग॑:

yadadya sūra udite'nāgā mitro aryamā | suvāti savitā bhaga:

हिन्दी अर्थ

प्रभु की उपासना "जितेन्द्रियता" व “ वेद-दोहन' से हआ करती हे। तमुत्सवे च॑ प्रसवे च॑ सासहिमिन्द्रं देवासः शव॑ंसामदन्ननु ।। २९॥ १. है महः=महान् प्रभो! इमाम्=इस ते=तेरी महीम्=महिमा. को प्राप्त करानेवाली धियम्=वुद्धि को, प्रज्ञा व कर्मो की प्रतिपादक वेदवाणी को प्रभरे-मेैं प्रकर्षेण अपने में

English

Now when the Sun hath risen to-day may sinless Mitra, Aryaman, Bhaga, and Savitar speed us forth.

अध्याय ३३

श्लोक 21

आ सु॒ते सि॑ञ्चत॒ श्रिय॒ᳪ रोद॑स्योरभि॒श्रिय॑म् ।र॒सा द॑धीत वृष॒भम् ।।तं प्र॒त्नथा॒ ऽयं वे॒न:

ā sute siñcata śriya rodasyorabhiśriyam | rasā dadhīta vṛṣabham ||taṃ pratnathā 'yaṃ vena:

हिन्दी अर्थ

में वेदवाणी को अपने अन्दर भरनेवाला बनं, जिससे सम -दु :ख- सुख बनकर आनन्दमय जीवनवाला हो सकर। विभ्राड् बृहत्विलतु सोम्यं मध्वायुर्दधंद्यज्ञप॑तावविंहुतम् । १. पिच्छलो मन्त्र मँ वेदवाणी कौ अपने मेँ भरने का वर्णन धा। यह पुरुष विभ्राट्-विशिष्ट

English

Pour on the juice the ornament which reaches both the heaven and earth; Supply the liquid to the Bull. Thou in the first old time. See, Vena.

अध्याय ३३

श्लोक 22

आ॒तिष्ठ॑न्तं॒ परि॒ विश्वे॑ अभूष॒ञ्छ्रियो॒ वसा॑नश्चरति॒ स्वरो॑चिः ।म॒हत्तद्वृष्णो॒ असु॑रस्य॒ नामा वि॒श्वरू॑पो अ॒मृता॑नि तस्थौ

ātiṣṭhantaṃ pari viśve abhūṣañchriyo vasānaścarati svarociḥ | mahattadvṛṣṇo asurasya nāmā viśvarūpo amṛtāni tasthau

हिन्दी अर्थ

उदु, त्यं जातवेदसं देवं व॑हन्ति केतवः । दुरो विरूवांय सूर्य"म्।। ३९॥ पिले मन्त्र का “विराट् ' यर्हौँ ' प्रस्कण्व ' अत्यन्त मेधावी ' इस नाम से कहा गया है। यह ९. उत्-निश्चय से प्रकृति से ऊपर उठता है। उत्-०५५। यह प्रकृति के अन्दर उलज्ञा नदीं रहता। २. प्रकृति से ऊपर उठकर केतवः =ये ज्ञानी लोग त्यम्=उस अव्यक्त प्रभु को

English

As he was rising up they all revered him: self-luminous he travels, clothed in splendour. That is the Bull's, the Asura's lofty nature: he, Omniform, hath reached the eternal waters.

अध्याय ३३

श्लोक 23

प्र वो॑ म॒हे मन्द॑माना॒यान्ध॒सोऽर्चा॑ वि॒श्वान॑राय विश्वा॒भुवे॑ ।इन्द्र॑स्य॒ यस्य॒ सुम॑ख॒ᳪ सहो॒ महि॒ श्रवो॑ नृ॒म्णं च॒ रोद॑सी सप॒र्यत॑:

pra vo mahe mandamānāyāndhaso'rcā viśvānarāya viśvābhuve | indrasya yasya sumakha saho mahi śravo nṛmṇaṃ ca rodasī saparyata:

हिन्दी अर्थ

हम प्रकृति से ऊपर उदे, प्रभु को धारण कर, जिससे विश्व का दर्शन कर १. प्रभु पावक पवित्र करनेवाले है। गतमन्त्र मेँ ब्रह्मज्ञान का उल्लेख था। यह ब्रह्मज्ञान मनुष्य करे जीवन को पवित्र करता दे। ब्रह्मदर्शन करने पर पाप सम्भव ही नहीं। पापौ को दूर करके वे प्रभु अपने सखा जीव के जीवन को सुन्दर बनाते हैँ. प्रभु वरुण है, क्योंकि

English

I laud your Mighty One who joyeth in the juice, him who is good to all men, who pervadeth all; Indra whose conquering strength is powerful in war, whose fame and manly vigour Heaven and Earth revere.

अध्याय ३३

श्लोक 24

बृ॒हन्निदि॒ध्म ए॑षां॒ भूरि॑ श॒स्तं पृ॒थुः स्वरु॑: ।येषा॒मिन्द्रो॒ युवा॒ सखा॑

bṛhannididhma eṣāṃ bhūri śastaṃ pṛthuḥ svaru: | yeṣāmindro yuvā sakhā

हिन्दी अर्थ

लान से हम अपने जीवन को पवित्र करें, लोकधारण करनेवाले बनेँ। तब वह प्रभु हमारा उसी प्रकार धारण व ध्यान करगे जैसे माता पुत्र का। हैव्यावध्वर्यूऽआ ग॑त रथैन सूर्यत्वचा । मध्वां यज्ञ: समंञ्जाथे।।३३॥ पिले मन्त्र में प्रस्कण्वनेप्रभुसेप्रार्थनाकौ है कि है प्रभो! आप मेरा ध्यान कौजिए।

English

Great is their fuel, strung their laud, wide is their sacrificial post Whose Friend is Indra, ever young.

अध्याय ३३

श्लोक 25

इन्द्रेहि॒ मत्स्यन्ध॑सो॒ विश्वे॑भिः सोम॒पर्व॑भिः ।म॒हाँ२ अ॑भि॒ष्टिरोज॑सा

indrehi matsyandhaso viśvebhiḥ somaparvabhiḥ | mahā~2 abhiṣṭirojasā

हिन्दी अर्थ

दिव्यता, अहिंसा, स्वास्थ्य व माधुर्य मनुष्य को प्रभु-प्राप्ति के योग्य बनाते आ नऽइडायिर्विंदथं सुषटास्ति विषवानरः सविता देवऽ एतु । ९. विद थे ज्ञानयज्ञो मे इडाभिः =वाणियों के द्वारा सुशस्ति-( सप्तमी का लुक ) उत्तम शंसन होने पर विश्वानरः=सबको उन्नतिपथ पर लै-चलनेवाला सवित्ता=सवका प्रेरक

English

Come, Indra, and delight thee with the juice at all the Soma feasts, Conqueror, mighty in thy strength.

अध्याय ३३

श्लोक 26

इन्द्रो॑ वृ॒त्रम॑वृणो॒च्छर्ध॑नीति॒: प्र मा॒यिना॑ममिना॒द्वर्प॑णीतिः ।अह॒न् व्य॒ᳪसमु॒शध॒ग्वने॑ष्वा॒विर्धेना॑ अकृणोद्रा॒म्याणा॑म्

indro vṛtramavṛṇocchardhanīti: pra māyināmaminādvarpaṇītiḥ | ahan vyasamuśadhagvaneṣvāvirdhenā akṛṇodrāmyāṇām

हिन्दी अर्थ

हम अपने घर के सदस्यों को सानयसों में प्रवृत्त करे ओर उनमें प्रभु की, ऋषियों की वाणिर्याँ पदं तो हमारा काव ९. प्रभु कौ ओर रहेगा २. जीवन ममदन हो पाएगा तथा ३. प्रत्येक स्थिति मे हम समज्ञ से चलेगे। १. प्रभु ज्ञानयज्ञो का विस्तार करनेवालों से कहते हैः कि है वृत्रहन्-वासना को नष्ट

English

Leading his band, Indra encompassed Vritra; weak grew the wily leader of enchanters. He who burns fierce in forests slaughtered Vyamsa, and made the milch-kine of the nights apparent.

अध्याय ३३

श्लोक 27

कुत॒स्त्वमि॑न्द्र॒ माहि॑न॒: सन्नेको॑ यासि सत्पते॒ किं त॑ इ॒त्था ।सं पृ॑च्छसे समरा॒णः शु॑भा॒नैर्वो॒चेस्तन्नो॑ हरिवो॒ यत्ते॑ अ॒स्मे ।म॒हाँ२ इन्द्रो॒ य ओज॑सा क॒दा च॒न स्त॒रीर॑सि क॒दा च॒न प्र यु॑च्छसि

kutastvamindra māhina: sanneko yāsi satpate kiṃ ta itthā | saṃ pṛcchase samarāṇaḥ śubhānairvocestanno harivo yatte asme | mahā~2 indro ya ojasā kadā cana starīrasi kadā cana pra yucchasi

हिन्दी अर्थ

हम जीविका के कार्यो का उपसंहार करके सधस्थ प्रभु से ज्ञान प्राप्त करे, जिससे हमपर अनलान का पर्दा न पड़ा रहे। १. सूर्यः =ज्ञान- सूर्य को अपने अन्दर उदित करनेवाला यह व्यक्ति द्योः=उस प्रकाशमय प्रभु के उपस्थे-समीप, उसकौ गोद में व्रेठता हुआ मित्रस्यचस्नेह की भावना को तथा

English

Whence comest thou alone, thou who art mighty, Indra, Lord of the Brave? What is thy purpose? Thou greetest us, encountering us the Bright Ones. Lord of Bay Steeds, say what thou hast against us. Indra, great in his power and might. Ne’er art thou fruitless. Never art thou neglectful.

अध्याय ३३

श्लोक 28

आ तत्त॑ इन्द्रा॒यव॑: पनन्ता॒भि य ऊ॒र्वं गोम॑न्तं॒ तितृ॑त्सान् ।स॒कृ॒त्स्वं ये पु॑रुपु॒त्रां म॒हीᳪ स॒हस्र॑धारां बृह॒तीं दुदु॑क्षन्

ā tatta indrāyava: panantābhi ya ūrvaṃ gomantaṃ titṛtsān | sakṛtsvaṃ ye puruputrāṃ mahī sahasradhārāṃ bṛhatīṃ dudukṣan

हिन्दी अर्थ

हम प्रभु का उपस्थान करते हुए ज्ञान प्राप्त करें ओर सभी के साथ स्नेह करनेवाले बनें। तेजस्वी बन ओर ओरों को भी ज्ञान देनेवाले बने। जगदग्नि का प्रभु-स्तवनन्द्रष्टा व श्रोता महस्त सतो महिमा प॑नस्यतेऽ द्धा देव महाँ २।।ऽअसि॥ ३९॥

English

Those men extolled that deed of thine, O Indra, those who would fain burst through the stall of cattle, Fain to milk her who bare but once, great, lofty, whose sons are many and her streams a thousand.

अध्याय ३३

श्लोक 29

इ॒मां ते॒ धियं॒ प्र भ॑रे म॒हो म॒हीम॒स्य स्तो॒त्रे धि॒षणा॒ यत्त॑ आन॒जे ।तमु॑त्स॒वे च॑ प्रस॒वे च॑ सास॒हिमिन्द्रं॑ दे॒वास॒: शव॑सामद॒न्ननु॑

imāṃ te dhiyaṃ pra bhare maho mahīmasya stotre dhiṣaṇā yatta ānaje | tamutsave ca prasave ca sāsahimindraṃ devāsa: śavasāmadannanu

हिन्दी अर्थ

में देव वनँ, जिससे प्रभु मुञ्लमें प्राणशक्ति का सच्चार करे ओर मै एक श्राय॑न्तऽ इव सूर्य विश्वेदिन्द्र॑स्य भक्षत । १. प्रस्तुत मन्त्र का ऋषि 'नृ-मेध' है. जो सव नरो से मिलकर चलता है (मेध संगम) । ' यह अकेला खाएगा' यह कैसे हो सकता है! इसका विचार है कि सूर्यम् इव=

English

To thee the Mighty One I bring this mighty hymn, for thy desire hath been gratified by my laud. In Indra, yea, in him victorious through his might, the Gods have joyed at feast and when the Soma flowed.

अध्याय ३३

श्लोक 30

वि॒भ्राड् बृ॒हत्पि॑बतु सो॒म्यं मध्वायु॒र्दध॑द्य॒ज्ञप॑ता॒ववि॑ह्रुतम् ।वात॑जूतो॒ यो अ॑भि॒रक्ष॑ति॒ त्मना॑ प्र॒जाः पु॑पोष पुरु॒धा वि रा॑जति

vibhrāḍ bṛhatpibatu somyaṃ madhvāyurdadhadyajñapatāvavihrutam | vātajūto yo abhirakṣati tmanā prajāḥ pupoṣa purudhā vi rājati

हिन्दी अर्थ

सूर्य की भाँति हम श्रमशील हौ, उत्पन्न धनां को सबके साथ बोँरकर खा, धनों को प्रभु का समञ्चे। अद्या देवाऽ उदिता सूर्य॑स्य निरश्टसः पिपृता निर्वद्यात् । १. प्रस्तुत मन्त्र का ऋषि "कुत्स ' है। यह वासनाओों को (कुथ हिसायाम्) कुचल

English

May the Bright God drink glorious Soma-mingled mead, giving the sacrifice's lord uninjured life; He who, wind-urged, in person guard our offspring well, hath nourished them with food and shone o’er many a land.

अध्याय ३३

श्लोक 31

उदु॒ त्यं जा॒तवे॑दसं दे॒वं व॑हन्ति के॒तव॑: ।दृ॒शे विश्वा॑य॒ सूर्य॑म्

udu tyaṃ jātavedasaṃ devaṃ vahanti ketava: | dṛśe viśvāya sūryam

हिन्दी अर्थ

कुत्स ऋषि वह है जो स्नेह व निद्रता, स्वास्थ्य, सोम, उदारता व प्रकाश का पुञ्ज बनने का प्रयत करता हे। इसी से वह पञ्जजन ' कहलाएगा। हिरण्ययेन सविता रथेना देवो याति भुव॑नानि पश्य॑न् ।॥४३॥ १. गतमन्त्र के अनुसार अपनी पाच वस्तुओं का विकास करके. विकास ही नहीं

English

His bright rays bear him up aloft, the God who knoweth all that lives, Sûrya, that all may look on him.

अध्याय ३३

श्लोक 32

येना॑ पावक॒ चक्ष॑सा भुर॒ण्यन्तं॒ जनाँ॒२ अनु॑ ।त्वं व॑रुण॒ पश्य॑सि

yenā pāvaka cakṣasā bhuraṇyantaṃ janā~2 anu | tvaṃ varuṇa paśyasi

हिन्दी अर्थ

-हम हिरण्यस्तूप बनकर शरीर व आत्मा को स्वस्थ रखते हुए प्रजा मे भी स्वास्थ्य कौ फैलाने का प्रयत्न करते हुए प्रभु की ओर चले। प्रस्तुत मन्त्र का ऋषि वसिष्ठ है, उत्तम निवासवाला। इसके जीवन कौ निम्न बाते ध्यान देने योग्य हें --९. प्रवावृजे-यह वासनाओं का स्वयं ही वर्जन करता है, काम-क्रोध

English

Pure Varuna, with that same eye wherewith thou lookest upon one Actively stirring mid the folk—

अध्याय ३३

श्लोक 33

दैव्या॑वध्वर्यू॒ आ ग॑त॒ᳪ रथे॑न॒ सूर्य॑त्वचा । मध्वा॑ य॒ज्ञᳪ सम॑ञ्जाथे ।तं प्र॒त्नथा॒ ऽयं वे॒नश्चि॒त्रं दे॒वाना॑म्

daivyāvadhvaryū ā gata rathena sūryatvacā | madhvā yajña samañjāthe | taṃ pratnathā 'yaṃ venaścitraṃ devānām

हिन्दी अर्थ

लोकसंग्रह करता हुआ लोगों के हृदयं तक पद्ंचने का प्रयत्न करूं। प्रातः-सायं यही आराधना करूं कि मै क्रियाशील, पोषण करनेवाला व उत्तम इन्द्रियोवाला बनकर उत्तम १. पिछले मन्त्र की समाप्ति पर कहा था कि रत्रिव उषा के प्रारम्भ मे प्रथम पुकार (प्रार्थना) के समय “वायु व पूषा" को पुकारते है। उसी प्रार्थना को कु विस्तार से प्रस्तुत

English

Ye two divine Adhvaryus, come hither upon a sun-bright car: Bedew our sacrifice with stead. Thou in the first old time. See, Vena. The brilliant presence.

अध्याय ३३

श्लोक 34

आ न॒ इडा॑भिर्वि॒दथे॑ सुश॒स्ति वि॒श्वान॑रः सवि॒ता दे॒व ए॑तु ।अपि॒ यथा॑ युवानो॒ मत्स॑था नो॒ विश्वं॒ जग॑दभिपि॒त्वे म॑नी॒षा

ā na iḍābhirvidathe suśasti viśvānaraḥ savitā deva etu | api yathā yuvāno matsathā no viśvaṃ jagadabhipitve manīṣā

हिन्दी अर्थ

हम प्रभु से अपना सजात्य अन॒भव करें ओर वासनाओं में फंसने को अपनी शान के विरुद्ध समञ्धे। अग्नऽ इन्द्र॒ वरूण मित्र देवाः शर्धः प्र य॑न्त मारूतोत विष्णो । उभा नासत्या रुद्रोऽअध ग्नाः पूषा भगः सर॑स्वती जुषन्त । ४८॥।

English

Loved of all men, may Savitar through praises offered as sacred food come to our synod, That ye too, through our hymns, ye ever youthful, may gladden at your visit all our people.

अध्याय ३३

श्लोक 35

यद॒द्य कच्च॑ वृत्रहन्नु॒दगा॑ अ॒भि सू॑र्य ।सर्वं॒ तदि॑न्द्र ते॒ वशे॑

yadadya kacca vṛtrahannudagā abhi sūrya | sarvaṃ tadindra te vaśe

हिन्दी अर्थ

प्रभुकृपा से मेँ ज्ञानी बनं ओर इस ज्ञान से एश्वर्य का सदुपयोग करनेवाला ऋषि. वत्सारः। देवता--विष्वेदेवाः। छन्द :-निचूज्जगती। स्वरः-निषादः। भी कहा जाता है। यह सारभूत वस्तु सोम कौ रक्षा करे कारण “अवत्सार' हआ है। यह अवत्सार हुवे आवाहन करता है , पुकारता' है, किनको १. इन्द्राग्नी=इन्द्र ओर अग्नि को।

English

Whatever, Vritra-slayer! thou Surya hast risen on to-day, That, Indra, all is in thy power.

अध्याय ३३

श्लोक 36

त॒रणि॑र्वि॒श्वद॑र्शतो ज्योति॒ष्कृद॑सि सूर्य ।विश्व॒मा भा॑सि रोच॒नम्

taraṇirviśvadarśato jyotiṣkṛdasi sūrya | viśvamā bhāsi rocanam

हिन्दी अर्थ

-हम सदा यक्षशील बनें ओर यजो द्वारा वासनाओं से दर रहे। प्राण, अग्नि, देव, धन व शक्ति विश्व नो देवाऽअवसा ग॑मन्तु विश्व॑मस्तु द्रविणं वाजोंऽअस्मे ॥५२॥ प्रस्तुत मन्त्र का ऋषि ' लुश' है " लुनाति, श्यति ' वासना का केदन-भेदन करता है ओर

English

Swift, visible to all art thou, O Sûrya, maker of the light, Illuming all the radiant realm.

अध्याय ३३

श्लोक 37

तत्सूर्य॑स्य देव॒त्वं तन्म॑हि॒त्वं म॒ध्या कर्तो॒र्वित॑त॒ᳪ सं ज॑भार ।य॒देदयु॑क्त ह॒रित॑: स॒धस्था॒दाद्रात्री॒ वास॑स्तनुते सि॒मस्मै॑

tatsūryasya devatvaṃ tanmahitvaṃ madhyā kartorvitata saṃ jabhāra | yadedayukta harita: sadhasthādādrātrī vāsastanute simasmai

हिन्दी अर्थ

हम अपने जीवन को प्राणसाधना से प्रारम्भ करें, इससे हममे स्वास्थ्य, प्रेम व ज्ञान की अग्निर्यो समिद्ध होँगी। ये हमें दिव्य बनार्फँगी ओर हम जीवन के लिप् आवश्यक धन का अर्जन करते हुए उसमें आसक्त न होगे। विश्वेदेवाः श्रृणुतेमः हव॑ मे येऽअन्तरिक्षे यऽउप द्यवि ष्ठ ।

English

This is the Godhead, this the might of Sûrya: he hath withdrawn what spread o’er work unfinished. When he hath loosed his horses from their station, straight over all Night spreadeth out her garment.

अध्याय ३३

श्लोक 38

तन्मि॒त्रस्य॒ वरु॑णस्याभि॒चक्षे॒ सूर्यो॑ रू॒पं कृ॑णुते॒ द्योरु॒पस्थे॑ ।अ॒न॒न्तम॒न्यद्रुश॑दस्य॒ पाज॑: कृ॒ष्णम॒न्यद्ध॒रित॒: सं भ॑रन्ति

tanmitrasya varuṇasyābhicakṣe sūryo rūpaṃ kṛṇute dyorupasthe | anantamanyadruśadasya pāja: kṛṣṇamanyaddharita: saṃ bharanti

हिन्दी अर्थ

हम "सुहोत्र" बनकर अग्निकुण्ड में सब वासनाओं को भस्म कर दे ओर अपने हदय को देवासन बनाकर आनन्द का लाभ करे। वामदेव को प्रभु करा प्रसाद देवेभ्यो हि प्रथमं यज्ञियेभ्यो ऽमृतत्वः सुवसि भागमुत्तमम् ।

English

Approach ye, and be near to us. Drink, O ye Asvins, of the mead. Draw forth the milk, ye mighty, rich in genuine wealth! Injure us not, and come to us.

अध्याय ३३

श्लोक 39

बण्म॒हाँ२ अ॑सि सूर्य॒ बडा॑दित्य म॒हाँ२ अ॑सि ।म॒हस्ते॑ स॒तो म॑हि॒मा प॑नस्यते॒ऽद्धा दे॑व म॒हाँ२ अ॑सि

baṇmahā~2 asi sūrya baḍāditya mahā~2 asi | mahaste sato mahimā panasyate'ddhā deva mahā~2 asi

हिन्दी अर्थ

हम वामदेव बनें ताकि प्रभु से प्रसाद के रूप में अमृतत्वतस्वास्थ्य, उत्तम धन, संयम व अनुकूल जीवन प्राप्त कर सकरे। निःश्रेयस+अभ्युदय=धर्मः १. गतमन्त्र का वामदेव सदा सरल मार्ग से चलता है, अतः वह प्रस्तुत मन्त्रो में

English

Verily, Sûrya, thou art great; truly, Âditya, thou art great. As thou art great indeed thy greatness is admired: yea, verily thou, God, art great.

अध्याय ३३

श्लोक 40

बट् सू॑र्य॒ श्रव॑सा म॒हाँ२ अ॑सि स॒त्रा दे॑व म॒हाँ२ अ॑सि ।म॒ह्ना दे॒वाना॑मसु॒र्य॒: पु॒रोहि॑तो वि॒भु ज्योति॒रदा॑भ्यम्

baṭ sūrya śravasā mahā~2 asi satrā deva mahā~2 asi | mahnā devānāmasurya: purohito vibhu jyotiradābhyam

हिन्दी अर्थ

हम ' ऋजिश्व' ऋजुमार्ग से चलनेवाले बनकर, आत्मतत्त्व कौ ओर चलनेवाले नें। सुपथ से ही धन कमा्पँ। ज्योतिर्मय बनकर, कर्तव्य पालन करते हए यज्ञमय जीवन -बनारपँ ओर कवि बनकर उस कवि को प्राप्त करें। १. मन्त्र का सरलार्थ यह है -इन्द्रवायू=इन्द्र ओर वायु इमे=ये इन्दवः=सोमकण

English

Yea, Sûrya, thou art great in fame: thou, evermore, O God, art great. Thou by thy greatness art the Gods’ Home-Priest, divine, far-spread, unconquerable light.

अध्याय ३३

श्लोक 41

श्राय॑न्त इव॒ सूर्यं॒ विश्वेदिन्द्र॑स्य भक्षत ।वसू॑नि जा॒ते जन॑मान॒ ओज॑सा॒ प्रति॑ भा॒गं न दी॑धिम

śrāyanta iva sūryaṃ viśvedindrasya bhakṣata | vasūni jāte janamāna ojasā prati bhāgaṃ na dīdhima

हिन्दी अर्थ

हम सात्विक अन्न के सेवन से इच्दरियों के अधिष्ठाता बने तथा निरन्तर क्रिया में लगे रहने से सोम के प्रिय बरन, अर्थात् शक्ति की रक्षा करनेवाले हो। ९. सोमकणों की रक्षा के लिए ' मानस स्वास्थ्य ' की अत्यन्त आवश्यकता है। मनुष्य का मन क्षुब्ध होगा तो सोमरक्षा सम्भव न होगी, अतः ' मधुच्छन्दा प्रार्थना करता है कि

English

Turning, as ’twere, to meet the Sun, enjoy from Indra all good things. When he who will be horn is born with power we look to treasures as our heritage.

अध्याय ३३

श्लोक 42

अ॒द्या दे॑वा॒ उदि॑ता॒ सूर्य॑स्य॒ निरᳪह॑सः पिपृ॒ता निर॑व॒द्यात् ।तन्नो॑ मि॒त्रो वरु॑णो मामहन्ता॒मदि॑ति॒: सिन्धु॑: पृथि॒वी उ॒त द्यौ:

adyā devā uditā sūryasya nirahasaḥ pipṛtā niravadyāt | tanno mitro varuṇo māmahantāmaditi: sindhu: pṛthivī uta dyau:

हिन्दी अर्थ

मधुच्छन्दा! की मधुर इच्छां निम्न शब्दों मे व्यक्त हुई ठै (क) मित्रत्मे सबके साथ स्नेहं करनेवाला बनँं। (ख) वरुणनमैं द्वेष का सदा वारण करनेवाला हो। (ग) मलों के क्षरण" से मेँ दीप्त बुद्धि को सिद्ध करूं (घृताचीं धियं) ओौर (ख) सव के प्रति स्नेहवाला बनकर द्वेष से सदा दूर रहता हुआ मैं सोमरक्षक बनूं।

English

To-day, ye Gods, when Sûrya hath ascended, deliver us front trouble and dishonour. This boon may Varuna and Mitra grant us, and Aditi and Sindhu, Earth and Heaven.

अध्याय ३३

श्लोक 43

आ कृ॒ष्णेन॒ रज॑सा॒ वर्त॑मानो निवे॒शय॑न्न॒मृतं॒ मर्त्यं॑ च ।हि॒र॒ण्यये॑न सवि॒ता रथे॒ना दे॒वो या॑ति॒ भुव॑नानि॒ पश्य॑न्

ā kṛṣṇena rajasā vartamāno niveśayannamṛtaṃ martyaṃ ca | hiraṇyayena savitā rathenā devo yāti bhuvanāni paśyan

हिन्दी अर्थ

प्रस्तुत मन्त्र मे मधुच्छन्दा की मधुर इच्छा यह है कि मेरे प्राण प्रभु का आदर्शं पत्नी के कर्तव्य-आदर्शं गृहिणी का गुणदशक १. मन्त्र का ऋषि कुशिक टै (कुशा+इक) का घोडे कौ लगाम, इक = वाला। इन््रियरूपी घोड़ों कौ लगामवाला। जिसने मनरूपी लगाम से इन्द्रियरूप घोड़ो को वश में

English

Throughout the dusky firmament advancing, laying to rest the immortal and the mortal, Borne on his golden chariot he cometh, Savitar, God, beholding living creatures.

अध्याय ३३

श्लोक 44

प्र वा॑वृजे सुप्र॒या ब॒र्हिरे॑षा॒मा वि॒श्पती॑व॒ व्वीरि॑ट इयाते ।वि॒शाम॒क्तोरु॒षस॑: पू॒र्वहू॑तौ वा॒युः पू॒षा स्व॒स्तये॑ नि॒युत्वा॑न्

pra vāvṛje suprayā barhireṣāmā viśpatīva vvīriṭa iyāte | viśāmaktoruṣasa: pūrvahūtau vāyuḥ pūṣā svastaye niyutvān

हिन्दी अर्थ

हम प्रभु को अपना मार्गदर्शक बनाषं। एेसा करने पर हम भटकेगे नही। संसार संग्राम में पराजित नहीं होगे ओर सभी के साथ स्नेह करनेवाले बरनेँगे। पत्ति-पत्नी, राजा-रानी अथवा राजा व सेनापति ९. प्रस्तुत मन्त्र का देवता " इन्द्राग्नी ' है । “ इन्द्र" पति है उसने शक्तिशाली होना है ओर

English

Soft to the tread the sacred grass is scattered: these go like Kings amid the band around them, At the folk's early call on Night and Morning,—Vâyu, and Pûshan with his team to bless us.

अध्याय ३३

श्लोक 45

इ॒न्द्र॒वा॒यू बृह॒स्पतिं॑ मि॒त्राग्निं पू॒षणं भग॑म् ।आ॒दि॒त्यान् मारु॑तं ग॒णम्

indravāyū bṛhaspatiṃ mitrāgniṃ pūṣaṇaṃ bhagam | ādityān mārutaṃ gaṇam

हिन्दी अर्थ

प्रभु-उपासन के तीन लाभ है-पवित्रता, शक्ति व दिव्यता" विप्र का लक्षण विप्र बनने का उपाय १. प्रस्तुत मन्त्र का ऋषि विश्वामित्र है। यह सभी से प्रेम करता है। ह विश्वामित्र पहला काम ' अहि-हत्या' के रूप में करता हे। “ अहि" वृत्र है। ये दोनों शब्द समानार्थकः

English

Indra, Vâyu, Brihaspati, Mitra, Agni, Pûshan, Bhaga, Âdityas, and the Marut host.

अध्याय ३३

श्लोक 46

वरु॑णः प्रावि॒ता भु॑वन्मि॒त्रो विश्वा॑भिरू॒तिभि॑: ।कर॑तां नः सु॒राध॑सः

varuṇaḥ prāvitā bhuvanmitro viśvābhirūtibhi: | karatāṃ naḥ surādhasaḥ

हिन्दी अर्थ

विप्र वह दहै जो काम पर विजय पाता है, ईर्ष्या को नष्ट करता है, ज्लानय्ञ का विस्तार करता है, प्रभु प्राप्ति मे आनन्दानुभव करता है। विप्र बनने के लिए वह जितेन्द्रिय बनकर प्राणसाधना के द्वारा वीर्य की ऊर्ध्वगति के लिए प्रसत्नशील होता है। जनिंष्ठाऽ उग्रः सहसे तुराय॑ मन्द्रऽओजिंष्ठो बहुलाभि॑मानः।

English

Be Varuna our chief defence, let Mitra guard us with all aids: Both make us rich exceedingly!

अध्याय ३३

श्लोक 47

अधि॑ न इन्द्रैषां॒ विष्णो॑ सजा॒त्या॒नाम् । इ॒ता मरु॑तो॒ अश्वि॑ना ।तं प्र॒त्नथा॒ ऽयं वे॒नो ये दे॑वास॒ आ न॒ इडा॑भि॒र्विश्वे॑भिः सो॒म्यं मध्वोमा॑सश्चर्षणीधृतः

adhi na indraiṣāṃ viṣṇo sajātyānām | itā maruto aśvinā | taṃ pratnathā 'yaṃ veno ye devāsa ā na iḍābhirviśvebhiḥ somyaṃ madhvomāsaścarṣaṇīdhṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

हम जितेन्द्रिय बनें ओर अशुभ को दूर करके अपने जीवन को श्रीसम्पन्न जितेद्दरिय के लिए सव्र अनुकूल १. मनुष्य कर वार प्रतिकूलता कौ शिकायत करता टै ओर कहता है कि "ये लोग मेरे विरोधी है" या "यहाँ कौ जल-वायु मेरे अनुकूल नहीं ' ये दोनों ही बातें ठीक नहीं है।

English

Regard us, Indra, Vishnu, here, ye Asvins, and the Marut host, us who are kith and kin to you. Thou in the first old time. See, Vena. O ye eleven Gods. Loved of all men, may Savitar. With the All-Gods. Ye Visvedevas who protect.

अध्याय ३३

श्लोक 48

अग्न॒ इन्द्र॒ वरु॑ण॒ मित्र॒ देवा॒: शर्ध॒: प्र य॑न्त॒ मारु॑तो॒त वि॑ष्णो ।उ॒भा नास॑त्या रु॒द्रो अध॒ ग्नाः पू॒षा भग॒: सर॑स्वती जुषन्त

agna indra varuṇa mitra devā: śardha: pra yanta mārutota viṣṇo | ubhā nāsatyā rudro adha gnāḥ pūṣā bhaga: sarasvatī juṣanta

हिन्दी अर्थ

किया हुआ यज्ञ सुख के रूप में परिवर्तित होकर यज्ञकर्ता के प्रति लौट हिर॑ण्यजिह्वः सुविताय नव्य॑से रक्षा माक्छि्नोऽअघश॑सऽ ईत ।॥६९॥ १. "आदित्य ब्रह्मचारी लोगों को कल्याणी मति प्राप्त करानेवाले हों ', इन शब्दों पर पिछला मन्त्र समाप्त हुआ भा। वह आदित्य ब्रह्मचारी स्वयं अपने जीवन को सुन्दर बनाने

English

O Agni, Indra, Varuna, and Mitra, give, O ye Gods, and Marut host, and Vishnu. May both Nâsatyas, Rudra, heavenly Matrons, Pûshan, Sarasvatî, Bhaga accept us.

अध्याय ३३

श्लोक 49

इ॒न्द्रा॒ग्नी मि॒त्रावरु॒णादि॑ति॒ᳪ स्व॑: पृथि॒वीं द्यां म॒रुत॒: पर्व॑ताँ२ अ॒पः ।हु॒वे विष्णुं॑ पू॒षणं॒ ब्रह्म॑ण॒स्पतिं॒ भगं॒ नु शᳪस॑ᳪ सवि॒तार॑मू॒तये॑

indrāgnī mitrāvaruṇāditi sva: pṛthivīṃ dyāṃ maruta: parvatā~2 apaḥ | huve viṣṇuṃ pūṣaṇaṃ brahmaṇaspatiṃ bhagaṃ nu śasa savitāramūtaye

हिन्दी अर्थ

हम अपने जीवनो में शक्ति भरके ओरौ में भी शक्ति का सञ्चार करनैवाले वह॑ वायो नियुतो याह्यच्छा पिबा सुतस्यान्ध॑सो मदाय ॥७०॥ १. पिछले मन्त्र मे भारद्वाज ने प्रभु से प्रार्थना की थी कि प्रभु उसको रक्षा करे। प्रस्तुत कौ प्रेरणा देते है। २. प्रभु एक गृहस्थ से कहते है कि वाम्-पति-पत्नी तुम दोनों के मलों

English

Indra, Agni, Mitra, Varuna, Aditi, the Waters, Mountains, Maruts, Sky, and Earth and Heaven, Vishnu I call, Pûshan and Brahmanaspati, and Bhaga, Samsa, Savitar that they may help.

अध्याय ३३

श्लोक 50

अ॒स्मे रु॒द्रा मे॒हना॒ पर्व॑तासो वृत्र॒हत्ये॒ भर॑हूतौ स॒जोषा॑: ।यः शᳪस॑ते स्तुव॒ते धायि॑ प॒ज्र इन्द्र॑ज्येष्ठा अ॒स्माँ२ अ॑वन्तु दे॒वाः

asme rudrā mehanā parvatāso vṛtrahatye bharahūtau sajoṣā: | yaḥ śasate stuvate dhāyi pajra indrajyeṣṭhā asmā~2 avantu devāḥ

हिन्दी अर्थ

सोमपान द्वारा हम सब मलों का विदीर्ण करनेवाले वनँ तथा उल्लासयुक्त होकर लक्ष्य की ओर बते चले। गावऽ उपावतावतं मही य॒ज्ञस्य॑ रप्सुद। । उभा कर्णी हिरण्यर्या॥।७९॥ वसिष्ठ वेदबाणियों को सम्बोधित करते हए कहता है कि गावः=हे वेदवाणियो

English

With us are raining Rudras, clouds accordant in call to battle at the death of Vritra, The strong, assigned to him who sings and praises. May Gods with Indra as their chief protect us.

अध्याय ३३

श्लोक 51

अ॒र्वाञ्चो॑ अ॒द्या भ॑वता यजत्रा॒ आ वो॒ हार्दि॒ भय॑मानो व्ययेयम् ।त्राध्वं॑ नो देवा नि॒जुरो॒ वृक॑स्य॒ त्राध्वं॑ क॒र्ताद॑व॒पदो॑ यजत्राः

arvāñco adyā bhavatā yajatrā ā vo hārdi bhayamāno vyayeyam | trādhvaṃ no devā nijuro vṛkasya trādhvaṃ kartādavapado yajatrāḥ

हिन्दी अर्थ

हम अपने सधस्थघर को "दक्ष का दुरोण" बनाने का प्रयत्न करे। हैव्यांवध्वर्यूऽआ ग॑त रथेन सूर्यत्वचा । मध्वा यज्ञ सम॑ञ्जाथे।।७३॥ प्रस्तुत मन्त्र का ऋषि भी "दक्ष" हे। पिछले मन्त्र के पति-पत्नी का ही यहाँ भी उल्लेख हे। वे ९. हैव्यौ =देवस्य इमौप्रभु के हों, अर्थात् इनका स्ुकाव प्रकृति की ओर

English

Turn yourselves hitherward this day, ye Holy, that fearing in my heart I may approach you. Protect us, Gods, let not the wolf destroy us. Save us, ye Holy, from the pit and falling.

अध्याय ३३

श्लोक 52

विश्वे॑ अ॒द्य म॒रुतो॒ विश्व॑ ऊ॒ती विश्वे॑ भवन्त्व॒ग्नय॒: समि॑द्धाः ।विश्वे॑ नो दे॒वा अव॒सा ग॑मन्तु॒ विश्व॑मस्तु॒ द्रवि॑णं॒ वाजो॑ अ॒स्मे

viśve adya maruto viśva ūtī viśve bhavantvagnaya: samiddhāḥ | viśve no devā avasā gamantu viśvamastu draviṇaṃ vājo asme

हिन्दी अर्थ

पति-पत्नी अपने कर्तव्यो को समञ्च ओर उनका पालन करे। १. एषाम्=इन प्रजाओं की, जिनके लिए गतत मन्त्र मे हैव्य व अध्वर्यु! बनने का उल्लेख है, रश्मिः-वासना, सांसारिक वस्तुओं के प्रति रस तिरश्चीन: विततः=आर पार (ल०५5५७९) कैला हुआ है। किसी की किसी लोक को प्राप्त करने की कामना है ओर

English

This day come all the Maruts, etc., as in XVIII. 31.

अध्याय ३३

श्लोक 53

विश्वे॑ देवाः शृणु॒तेमᳪ हवं॑ मे॒ ये अ॒न्तरि॑क्षे॒ य उप॒ द्यवि॒ ष्ठ ।ये अ॑ग्निजि॒ह्वा उ॒त वा॒ यज॑त्रा आ॒सद्या॒स्मिन्ब॒र्हिषि॑ मादयध्वम्

viśve devāḥ śṛṇutema havaṃ me ye antarikṣe ya upa dyavi ṣṭha | ye agnijihvā uta vā yajatrā āsadyāsminbarhiṣi mādayadhvam

हिन्दी अर्थ

हमारी वासनां नीचे कौ ओर न जाकर ऊपर उठे ओर हम प्रजापति बन -विशूवासित्र का स्वर्ग-निर्माण-प्रेम+कर्मस्वर्ग १. प्रस्तुत मन्त्र का ऋषि विश्वामित्र है। यह सभी से स्नेह करता हे, इसका किसी से भी द्वेष नही। रोदसीजद्युलोक व पृथिवीलोक को, अर्थात् सभी प्राणियों को आसर्वभा

English

Listen, All-Gods, to this mine invocation, ye who inhabit heaven and air's mid-region. All ye; O Holy Ones, whose tongue is Agni, seated upon this sacred grass be joyful.

अध्याय ३३

श्लोक 54

दे॒वेभ्यो॒ हि प्र॑थ॒मं य॒ज्ञिये॑भ्योऽमृत॒त्वᳪ सु॒वसि॑ भा॒गमु॑त्त॒मम् ।आदिद्दा॒मान॑ᳪ सवित॒र्व्यू॒र्णुषेऽनूची॒ना जी॑वि॒ता मानु॑षेभ्यः

devebhyo hi prathamaṃ yajñiyebhyo'mṛtatva suvasi bhāgamuttamam | ādiddāmāna savitarvyūrṇuṣe'nūcīnā jīvitā mānuṣebhyaḥ

हिन्दी अर्थ

आदर्श गृह मे पति “इन्द्र' होता है आओौर पत्नी "अग्नि" पुत्रों के त्निए पवित्र कामना उप॑ नः सूनवो गिर॑: शृण्वन्त्वमृतस्य ये । सुमृडीका भ॑वन्तु नः।।७७॥ पिच्छले मन्त्र में वर्णित पति-पत्नी प्रार्थना करते है कि-ये=जो नः हमारे सूनवः =पुत्र

English

For thou at first producest for the holy Gods the noblest of all portions, immortality. Thereafter as a gift to men, O Savitar, thou openest existence, life succeeding life.

अध्याय ३३

श्लोक 55

प्र वा॒युमच्छा॑ बृह॒ती म॑नी॒षा बृ॒हद्र॑यिं वि॒श्ववा॑रᳪ रथ॒प्राम् ।द्यु॒तद्या॑मा नि॒युत॒: पत्य॑मानः क॒विः क॒विमि॑यक्षसि प्रयज्यो

pra vāyumacchā bṛhatī manīṣā bṛhadrayiṃ viśvavāra rathaprām | dyutadyāmā niyuta: patyamānaḥ kaviḥ kavimiyakṣasi prayajyo

हिन्दी अर्थ

हमारी सन्तान स्वाध्याय-रुचि बने, जिससे उनके जीवन उत्तम रहे । आ शांसते प्रति हर्यन्त्युक्थेमा हरीं वहतस्ता नोऽअच्छ।।७८॥ १. मे=मेरी मतयः= मतिर्या, इच्छा, विचारपूर्वक निश्चित कौ गई कामना ब्रह्माणि (ब्रह्य वेदः, तपः, तत्त्वम्) =वेद, तप व तत्तव (वास्तविक सत्ता) को आशासते चाहती है

English

I with a lofty song call hither Vâyu all-bounteous, filler of his car, most wealthy. Thou, Sage, with bright path, Lord of harnessed horses, impetuous, promptly honourest the prudent.

अध्याय ३३

श्लोक 56

इन्द्र॑वायू इ॒मे सु॒ता उप॒ प्रयो॑भि॒रा ग॑तम् ।इन्द॑वो वामु॒शन्ति॒ हि

indravāyū ime sutā upa prayobhirā gatam | indavo vāmuśanti hi

हिन्दी अर्थ

अगस्त्यत=पाप-समूह का संहार करनेवाला बनने का उपाय यह है कि हम बुद्धि को ज्ञानोपार्जन में लगार्प, शरीर को सोमरक्षा से नीरोग बना ओर इन्द्रियों को प्रभु-स्तवन में प्रेरित करं। अगस्त्य का प्रभ्रुवन्दन

English

These, Indra-Vâyu, have been shed, etc., as in VII. 8.

अध्याय ३३

श्लोक 57

मि॒त्रᳪ हु॑वे पू॒तद॑क्षं॒ वरु॑णं च रि॒शाद॑सम् ।धियं॑ घृ॒ताची॒ᳪ साध॑न्ता

mitra huve pūtadakṣaṃ varuṇaṃ ca riśādasam | dhiyaṃ ghṛtācī sādhantā

हिन्दी अर्थ

प्रभु सर्वप्ररक हे, सर्वज्ञ है, सर्वमहान् है। उनका स्तवन करता हुआ मै जपने जीवन- निर्माण का भार भी उन्दीं पर छोड्ता दू ९. तत्= वह दूर-से-दूर भी वर्तमान, ( तत्") सर्वव्यापक प्रभु (तनु विस्तारे) इत्= निश्चय से भुवनेषु=सारे लोकों में ज्येष्ठम्-बडे जआसहै। प्रभु सर्वव्यापक हैँ, सर्वमहान् है।

English

Mitra of holy strength I call, and foe-destroying Varuna, Who make the oil-fed rite complete.

अध्याय ३३

श्लोक 59

दस्रा॑ यु॒वाक॑वः सु॒ता नास॑त्या वृ॒क्तब॑र्हिषः । आ या॑तᳪ रुद्रवर्तनी ।। तं प्र॒त्नथा॒ ऽयं वे॒नः ।। ५ ८ ।।वि॒दद्यदी॑ स॒रमा॑ रु॒ग्णमद्रे॒र्महि॒ पाथ॑: पू॒र्व्यᳪ स॒ध्र्य॒क्कः ।अग्रं॑ नयत्सु॒पद्यक्ष॑राणा॒मच्छा॒ रवं॑ प्रथ॒मा जा॑न॒ती गा॑त्

dasrā yuvākavaḥ sutā nāsatyā vṛktabarhiṣaḥ | ā yāta rudravartanī || taṃ pratnathā 'yaṃ venaḥ || 5 8 || vidadyadī saramā rugṇamadrermahi pātha: pūrvya sadhryakkaḥ | agraṃ nayatsupadyakṣarāṇāmacchā ravaṃ prathamā jānatī gāt

हिन्दी अर्थ

हम प्रभु की ज्येष्ठता को अनुभव करे, प्रभु के सम्पर्क सखे दीप्तबलवाले चनें, शत्रुजों का संहार करे, आनन्द का लाभ करनेवाले हों। ९. ' मेधातिथि ' वह व्यक्ति है जो इस संसार में बुद्धिपूर्वक चलता है। समञ्चदार व्यक्ति सर्वत्र प्रभु की शक्ति को अनुभव करता है ओर निम्न शब्दो में प्रभु का स्तवन करता हे

English

When Saramâ had, found the mountain's fissure, that vast and ancient place she plundered thoroughly . In the floods’ van she led them forth, light-footed: she who well knew came first unto their lowing.

अध्याय ३३

श्लोक 60

न॒हि स्पश॒मवि॑दन्न॒न्यम॒स्माद्वै॑श्वान॒रात्पु॑र ए॒तार॑म॒ग्नेः ।एमे॑नमवृधन्न॒मृता॒ अम॑र्त्यं वैश्वान॒रं क्षै॑त्रजित्याय दे॒वाः

nahi spaśamavidannanyamasmādvaiśvānarātpura etāramagneḥ | emenamavṛdhannamṛtā amartyaṃ vaiśvānaraṃ kṣaitrajityāya devāḥ

हिन्दी अर्थ

हम सदा प्रभु- स्तवन करनेवाले हों। हमारी कोई भी क्रिया प्रभु को भूलकर नहो तो हम स्वस्थ बनेगे, निर्देष होगे ओर तीव्र बुद्धि का सम्पादन कर पार्णँगे। १. मेधातिथि ‹ विपश्चित्" बनकर अनुभव करता है कि प्रभु तो वे है यस्य-जिसका अयम् विश्वः यह सारा संसार है, चाहे वे आर्यः =ब्राह्यण है (आर्यो ब्राह्यणकु मारयो : )

English

For nowhere did they find another envoy to lead the way than this Vaisvânara Agni. The Gods immortal strengthened the immortal Vaisvânara to win the land in battle.

अध्याय ३३

श्लोक 61

उ॒ग्रा वि॑घ॒निना॒ मृध॑ इन्द्रा॒ग्नी ह॑वामहे ।ता नो॑ मृडात ई॒दृशे॑

ugrā vighaninā mṛdha indrāgnī havāmahe | tā no mṛḍāta īdṛśe

हिन्दी अर्थ

सभी व्यक्ति प्रभुके है। सर्वत्र प्रभु की ज्योति ही दीप्तिका कारण बन रही सत्यः सोऽअ॑स्य महिमा गुणे शवो यज्ञेषुं विप्रराज्ये ।॥८३॥ १. संसार मे कभी-कभी इस प्रकार के व्यक्ति भी दिख जाते है, जिनके लिए वेद कहता है कि “तितिश्चन्ते अथिशस्तिं जनानाम् "= लोगो के अपशब्दं को मुस्कराते हए सह

English

The strong, dispellers of the foe, Indra and Agni, we invoke: May they be kind to one like me.

अध्याय ३३

श्लोक 62

उपा॑स्मै गायता नर॒: पव॑माना॒येन्द॑वे ।अ॒भि दे॒वाँ२ इय॑क्षते

upāsmai gāyatā nara: pavamānāyendave | abhi devā~2 iyakṣate

हिन्दी अर्थ

प्रभु का रक्षण अदब्ध व शिव है। प्रभु की प्रेरणा हितरमणीय है। उसका सुननेवाला शुभमार्ग से विचलित नहीं होता ओर दुष्टो कौ बातों से बहक नहीं जाता। ऋषि :-जमदग्निः। देवता- वायुः। छन्दः-विराडवृहती। स्वरः मध्यमः॥ आ नो यज्ञं दिविस्पृशं वायो याहि सुमन्म॑भिः।

English

Sing forth to Indu, O ye men, to him as he is purified, Fain to pay worship to the Gods.

अध्याय ३३

श्लोक 63

ये त्वा॑ऽहि॒हत्ये॑ मघव॒न्नव॑र्ध॒न्ये शा॑म्ब॒रे ह॑रिवो॒ ये गवि॑ष्टौ ।ये त्वा॑ नू॒नम॑नु॒मद॑न्ति॒ विप्रा॒: पिबे॑न्द्र॒ सोम॒ᳪ सग॑णो म॒रुद्भि॑:

ye tvā'hihatye maghavannavardhanye śāmbare harivo ye gaviṣṭau | ye tvā nūnamanumadanti viprā: pibendra soma sagaṇo marudbhi:

हिन्दी अर्थ

हमारा जीवन "जमदग्नि, तापस, जमदग्नि" का जीवन हो। १. प्रस्तुत मन्त्र का देवता ' अश्वनौ ' प्राणापान ठैँ। इनकी साधना करके इनको अपने शमे करनेवाला " वशिष्ठ" प्रस्तुत मन्त्र का ऋषि है। यह प्रार्थना करता ठै-२. हे अश्विना=प्राणापानो! आयातम् सर्वत्र प्राप्त होवो। “ अश् व्याप्तौ ' से आश्विनी शब्द् बना

English

Drink Soma, Indra, handed with the Maruts who, Boon Lord! strengthened thee at Ahi's slaughter, ’Gainst Sambara, Lord of Bays! in winning cattle, and now rejoice in thee, the holy singers.

अध्याय ३३

श्लोक 64

जनि॑ष्ठा उ॒ग्रः सह॑से तु॒राय॑ म॒न्द्र ओजि॑ष्ठो बहु॒लाभि॑मानः ।अव॑र्ध॒न्निन्द्रं॑ म॒रुत॑श्चि॒दत्र॑ मा॒ता यद्वी॒रं द॒धन॒द्धनि॑ष्ठा

janiṣṭhā ugraḥ sahase turāya mandra ojiṣṭho bahulābhimānaḥ | avardhannindraṃ marutaścidatra mātā yadvīraṃ dadhanaddhaniṣṭhā

हिन्दी अर्थ

प्राणापान कौ साधना द्वारा वसिष्ठ बनकर हम कण कण करक्र अच्छायो का संग्रह करनेवाले बनें। हमारा मस्तिष्क ब्रह्मणस्पति का निवास-स्थान हो. हदय सूनृता देवी का तथा हाथ यज्ञो के आश्रय बने। १. पिछले मन्त्र का कण्व ' सान, सत्य व यक्ल' का विस्तार करके “त्रीन् तनोती इति

English

Thou vast born mighty for victorious valour, exulting, strongest, full of pride and courage. There, even there the Maruts strengthened Indra when his most rapid Mother stirred the Hero.

अध्याय ३३

श्लोक 65

आ तू न॑ इन्द्र वृत्रहन्न॒स्माक॑म॒र्धमा ग॑हि ।म॒हान्म॒हीभि॑रू॒तिभि॑:

ā tū na indra vṛtrahannasmākamardhamā gahi | mahānmahībhirūtibhi:

हिन्दी अर्थ

इस त्रित के जीवन मे तीन बातें है (क) यह प्रसत्रतापूर्वक कर्मो मे लगा रहता है (ख) ज्ञान में अपना शोधन करता है, ज्ञान- सम्पत्ति को बद्धाता है (ग) सदा देवंदेवं वोऽव॑से देवं देवमभिष्य्ये। देवदेवः हवेम वाज॑सातये गृणन्तो देव्या धिया ।॥९९॥

English

O thou who slewest Vritra, come, O Indra, hither to our side, Mighty One with thy mighty aids.

अध्याय ३३

श्लोक 66

त्वमि॑न्द्र॒ प्रतू॑र्तिष्व॒भि विश्वा॑ असि॒ स्पृध॑: ।अ॒श॒स्ति॒हा ज॑नि॒ता वि॑श्व॒तूर॑सि॒ त्वं तू॑र्य तरुष्य॒तः

tvamindra pratūrtiṣvabhi viśvā asi spṛdha: | aśastihā janitā viśvatūrasi tvaṃ tūrya taruṣyataḥ

हिन्दी अर्थ

मनु'-एक समञ्जदार व्यक्ति दिव्यगुणों को धारण करता है, जिससे उसका शरीर नीरोग हो पाए, उसका मन वासनाओं पर आक्रमण कर, उन्हें पराजित कर सके ओर वह ५ का धारण कर पाए। इसी उदेश्य से वह बुद्धिपूर्वक प्रभु नाम-स्मरण में प्रवृत्त ९. पिछले मन्त्र का मनु इस मन्त्र मे "मेध ' (मेध संगमे) लोगों से सम्पर्क करनेवाला

English

Thou in thy battles, Indra, art subduer of all hostile bands. Father art thou, all-conquering, cancelling the curse: vanquish the men who fight with us.

अध्याय ३३

श्लोक 67

अनु॑ ते॒ शुष्मं॑ तु॒रय॑न्तमीयतुः क्षो॒णी शिशुं॒ न मा॒तरा॑ ।विश्वा॑स्ते॒ स्पृध॑: श्नथयन्त म॒न्यवे॑ वृ॒त्रं यदि॑न्द्र॒ तूर्व॑सि

anu te śuṣmaṃ turayantamīyatuḥ kṣoṇī śiśuṃ na mātarā | viśvāste spṛdha: śnathayanta manyave vṛtraṃ yadindra tūrvasi

हिन्दी अर्थ

हम अपने जीवन को "मेध" का जीवन बना ओर संसार में प्रकाश १. ' इन्द्राग्नी ' शब्द द्विवचन हे, परन्तु मन्त्रके अगले “ अपात्", “इयं ' आदि सब शब्द एकवचन हैँ, अतः “इन्द्र॒ ओर अग्नि" अर्थ न करके हम “इन्द्र कौ अग्नि" अर्थ लेगे। घर में पुरुष ने “इन्द्र' होना, अर्थात् पति को सदा जितेन्द्रिय होना। इसकी पत्नी अग्नि हे, घर

English

Heaven and Earth cling close to thy victorious might As sire and mother to their child.

अध्याय ३३

श्लोक 68

य॒ज्ञो दे॒वानां॒ प्रत्ये॑ति सु॒म्नमादि॑त्यासो॒ भव॑ता मृड॒यन्त॑: ।आ वो॒ऽर्वाची॑ सुम॒तिर्व॑वृत्याद॒ᳪहो॑श्चि॒द्या व॑रिवो॒वित्त॒रास॑त्

yajño devānāṃ pratyeti sumnamādityāso bhavatā mṛḍayanta: | ā vo'rvācī sumatirvavṛtyādahościdyā varivovittarāsat

हिन्दी अर्थ

हमे देवताओं का सम्पर्कं प्राप्त हो ओर हम ज्ञानरूप धन को प्राप्त करनेवाले देवास्त॑ऽ इन्द्र स॒ख्याय॑ येपिरे बृहद्भानो मरुद्गण ।॥ ९८५॥ ९. गत मन्त्र का मनु देवों से देवत्व प्राप्त करके अव नृमेध बनता है, ओरों के सम्पर्क मे आकर उनके हित में प्रवृत्त होता है। २. यह नृमेध अभिश्णस्तीः-सब प्रकार की दिसाओ

English

The sacrifice obtains the Gods’ acceptance, etc., as in VIII. 4.

अध्याय ३३

श्लोक 69

अद॑ब्धेभिः सवितः पा॒युभि॒ष्ट्वᳪ शि॒वेभि॑र॒द्य परि॑ पाहि नो॒ गय॑म् ।हिर॑ण्यजिह्वः सुवि॒ताय॒ नव्य॑से॒ रक्षा॒ माकि॑र्नो अ॒घश॑ᳪस ईशत

adabdhebhiḥ savitaḥ pāyubhiṣṭva śivebhiradya pari pāhi no gayam | hiraṇyajihvaḥ suvitāya navyase rakṣā mākirno aghaśasa īśata

हिन्दी अर्थ

ठम दिसा से दूर रटे, बुराइयों को नष्ट करे, लानधन को प्राप्त करे, प्राणसाधना से देवों कौ अनुकूलता का सम्पादन करके प्रभु के सखा बने। प्राणों का ब्रह्मार्चन-छातपर्व वचर ९. है मरुतः=प्राणो! वः=अपने बृहते=लान का वर्धन करनेवाले इन्द्राय इन्द्रियों क

English

Protect our habitation, Savitar, this day with guardian aids around, propitious, ne’er beguiled. God of the golden tongue, keep us for newest bliss: let not the evil-wisher have us in his power.

अध्याय ३३

श्लोक 70

प्र वी॑र॒या शुच॑यो दद्रिरे वामध्व॒र्युभि॒र्मधु॑मन्तः सु॒तास॑: ।वह॑ वायो नि॒युतो॑ या॒ह्यच्छा॒ पिबा॑ सु॒तस्यान्ध॑सो॒ मदा॑य

pra vīrayā śucayo dadrire vāmadhvaryubhirmadhumantaḥ sutāsa: | vaha vāyo niyuto yāhyacchā pibā sutasyāndhaso madāya

हिन्दी अर्थ

हम प्रभु के बने, शक्तिशाली हों, प्रभु का स्तवन करे ओौर उन्नत हो।

English

For you have flowed, through noble ministration, pressed by Adhvaryus, bright sweet-flavoured juices. Drive on thy team and come thou hither, Vâyu: drink for thy rapture of the sap of Soma.

अध्याय ३३

श्लोक 71

गाव॒ उपा॑वताव॒तं म॒ही य॒ज्ञस्य॑ र॒प्सुदा॑ ।उ॒भा कर्णा॑ हिर॒ण्यया॑

gāva upāvatāvataṃ mahī yajñasya rapsudā | ubhā karṇā hiraṇyayā

हिन्दी अर्थ

लक्ष्मी व श्रीरूप धात्रियों का दुग्धपान करके हम हरि, स्वाधावान्, शुक्र व सुवर्चाः" बनें। हम सब दुःखों से दूर हो, अपना धारण करने में समर्थ हो, देदीप्यमान व प्रभु के प्रिय कौन? (प्रभु का प्रकाश क्िनमे?) अयपिह प्रथमो धायि धातुभिर्होता यजिंष्टोऽअध्वरेष्वीङ्यंः ।

English

Ye Cows, protect, etc., as in verse 14.

अध्याय ३३

श्लोक 72

काव्य॑योरा॒जाने॑षु॒ क्रत्वा॒ दक्ष॑स्य दुरो॒णे ।रि॒शाद॑सा स॒धस्थ॒ आ

kāvyayorājāneṣu kratvā dakṣasya duroṇe | riśādasā sadhastha ā

हिन्दी अर्थ

हम जितेन्द्रियता व प्राणसाधना के द्वारा "सौम्य मधु' (वीर्य) का पान करनेवाले बनें, जिससे अपने मित्र उस प्रभु के तेजों से तेजस्वी बन सकं। आ यदिषे नुपत्तिं तेजऽआनट् शुचि रेतो निषिक्तं द्यौरभीके। अग्निः श्ध॑मनवद्यं युवान स्वाध्यं जनयत्सुद य॑च्च।। ९९॥

English

Come ye foe-slayers to the place of meeting, to the birth-places of the two great Sages, With force of intellect unto the dwelling.

अध्याय ३३

श्लोक 73

दै॑व्यावध्वर्यू॒ आ ग॑त॒ᳪ रथे॑न॒ सूर्य॑त्वचा । मध्वा॑ य॒ज्ञᳪ सम॑ञ्जाथे ।तं प्र॒त्नथा॒ ऽयं वे॒नः

daivyāvadhvaryū ā gata rathena sūryatvacā | madhvā yajña samañjāthe | taṃ pratnathā 'yaṃ venaḥ

हिन्दी अर्थ

प्रभु प्रेरणा से जितेन्द्रिय बन हम ऊर्ध्वरेतस् वनँ. लानाग्नि को दीप्त कर प्रभु-दर्शन करे। वासनाओं को सुदूर विशरण करनेवाला व्यक्ति ही "पराशर" हे। प्रभु का आशीर्वाद व देश सं जास्पत्य: सुयममा करणुष्व शत्रूयतामभि तिष्ठा महाश्परसि ॥९२॥

English

Ye two divine Adhvaryus, etc., as in verse 33. Thou in the time of old. See, Vena.

अध्याय ३३

श्लोक 74

ति॒र॒श्चीनो॒ वित॑तो र॒श्मिरे॑षाम॒धः स्वि॑दा॒सी३दु॒परि॑ स्विदासी३त् ।रे॒तो॒धा आ॑सन्महि॒मान॑ आसन्त्स्व॒धा अ॒वस्ता॒त्प्रय॑तिः प॒रस्ता॑त्

tiraścīno vitato raśmireṣāmadhaḥ svidāsī3dupari svidāsī3t | retodhā āsanmahimāna āsantsvadhā avastātprayatiḥ parastāt

हिन्दी अर्थ

(क) हम उपासना व ज्ञानदीप्ति से आनन्दमय प्रभु को आराधित करके हदय कौ महत्ता व बुद्धि को प्राप्त कररे। ये ही दो वस्तु हमारे जीवन को आनन्दमय बनाती है। (ख) हम देव बनकर बल कौ साधना से उस सर्वशक्तिसम्पन्न इन्द्र का आराधन करें तथा (ग) सदा क्रियाशील प्रभु को पौरुषमय जीवन से प्राप्त करे।

English

Transversely was the severing line extended: was it above, or was it, haply, under? There were begetters, there were mighty forces, free action here and energy up yonder.

अध्याय ३३

श्लोक 75

आ रोद॑सी अपृण॒दा स्व॑र्म॒हज्जा॒तं यदे॑नम॒पसो॒ अधा॑रयन् ।सो अ॑ध्व॒राय॒ परि॑ णीयते क॒विरत्यो॒ न वाज॑सातये॒ चनो॑हितः

ā rodasī apṛṇadā svarmahajjātaṃ yadenamapaso adhārayan | so adhvarāya pari ṇīyate kaviratyo na vājasātaye canohitaḥ

हिन्दी अर्थ

हम यज्िय वनेगे तो प्रभु हमारे लिए "अदिति" होगे। हम मानुष बनें प्रभु अतिथि होगे। हम देव बनें प्रभु हमारा रक्षण कररेगे। वे जातवेद प्रभु हमें सदा सुख देते है। श्रेष्ठे स्याम सवितुः सवीमनि तदेवानामवोऽ अद्या वुंणीमहे ॥ ९७॥ १. महः अग्नेः=उस महान्, अग्निवत् प्रकाशमय, दोषों के दहन करनेवाले प्रभु के

English

He hath filled heaven and earth and the great realm of light, when at his birth the skilful held him in their hold. He like a steed is led forth to the sacrifice, Sage, graciously inclined, that he may win us wealth.

अध्याय ३३

श्लोक 76

उ॒क्थेभि॑र्वृत्र॒हन्त॑मा॒ या म॑न्दा॒ना चि॒दा गि॒रा ।आ॒ङ्गू॒षैरा॒विवा॑सतः

ukthebhirvṛtrahantamā yā mandānā cidā girā | āṅgūṣairāvivāsataḥ

हिन्दी अर्थ

हम निष्पाप बनें, कल्याण प्राप्त करे, प्रभु प्रेरणा में चलें, देवरक्षण को वरे। याहि वायुर्न नियुतो नोऽअच्छा त्वः हि धीभिर्दय॑से वि वाजान् ॥९८॥ १. जव हम देववरण करके वासनाओं को दूर भगाते है तव आपः=रेतस (आपः रेतो भूत्वा) चित्=निश्चय से पिष्युः= हमारा आप्यायन करते है। वीर्यशक्ति के द्वारा रोग कम्पित

English

Call hither with the song and lauds the two best slayers of the foe, Delighting even in our hymn.

अध्याय ३३

श्लोक 77

उप॑ नः सू॒नवो॒ गिर॑: शृ॒ण्वन्त्व॒मृत॑स्य॒ ये ।सु॒मृ॒डी॒का भ॑वन्तु नः

upa naḥ sūnavo gira: śṛṇvantvamṛtasya ye | sumṛḍīkā bhavantu naḥ

हिन्दी अर्थ

-हम रेतस् रक्ता द्वारा अपना आप्यायन करनेवाले, शक्तिशाली ज्ञानेन्दरियोवाले, ऋत को प्राप्त, वायु की भति नियत कर्मो में व्याप्त, प्रज्ञानों व कर्मो से शक्ति व धनों को १. गावः=ठे वेदवाणियो! अवतम्-हदयान्तरिक्ष के, मेरी हदयरूप गुहा को उपावतम्- (अवनभाग, बृद्धि) अपना भाग बनाओ-उसका सेवन करो ओर उसका वर्धन करो।

English

All Sons of Immortality shall listen to the songs we sing, And be exceeding good to us.

अध्याय ३३

श्लोक 78

ब्रह्मा॑णि मे म॒तय॒: शᳪ सु॒तास॒: शुष्म॑ इयर्ति॒ प्रभृ॑तो मे॒ अद्रि॑: ।आ शा॑सते॒ प्रति॑ हर्यन्त्यु॒क्थेमा हरी॑ वहत॒स्ता नो॒ अच्छ॑

brahmāṇi me mataya: śa sutāsa: śuṣma iyarti prabhṛto me adri: | ā śāsate prati haryantyukthemā harī vahatastā no accha

हिन्दी अर्थ

ान- सूर्योदय से हम निष्पाप, स्नेहमय व दातृत्व कौ भावनावाले बनकर प्रमु से दीयमान भग करे पात्र बने। गतमन्त्र मे भावना थी कि दो ओर पाओ। दोगे, प्रभु तुम्हें देगे। वही भावना प्रस्तुत मन्त्र में इस प्रकार कही जा रही है कि सुते=इस उत्पन्न जगत् मे एश्वर्य का लाभ होने पर

English

Mine are devotions, hymns, sweet are libations. Strength stirs, and hurled forth is my rocky weapon. They call for me, for me their lauds are longing. To their libations these my Bay Steeds bear me.

अध्याय ३३

श्लोक 79

अनु॑त्त॒मा ते॑ मघव॒न्नकि॒र्नु न त्वावाँ॑२ अस्ति दे॒वता॒ विदा॑नः ।न जाय॑मानो॒ नश॑ते॒ न जा॒तो यानि॑ करि॒ष्या कृ॑णु॒हि प्र॑वृद्ध

anuttamā te maghavannakirnu na tvāvā~2 asti devatā vidānaḥ | na jāyamāno naśate na jāto yāni kariṣyā kṛṇuhi pravṛddha

हिन्दी अर्थ

ज्ञान से हमारा मस्तिष्क दीप्त हो, पोषक कर्म हमारे हाथों को प्रशस्त करें ओर त्याग का भाव हमारे हदयों को निष्कलंक बनाये। सोमसरे सोप की प्राप्ति प्रभु जीव को उपदेश देते है कि १. इन्द्र-हे इन्द्रियो के अधिष्ठाता जीव! तू इहि

English

Nothing, O Bounteous Lord, stands firm before thee: among the Gods not one is found thine equal. None born or springing into life comes near thee. Do what thou hast to do, exceeding mighty!

अध्याय ३३

श्लोक 80

तदिदा॑स॒ भुव॑नेषु॒ ज्येष्ठं॒ यतो॑ ज॒ज्ञ उ॒ग्रस्त्वे॒षनृ॑म्णः ।स॒द्यो ज॑ज्ञा॒नो नि रि॑णाति॒ शत्रू॒ननु॒ यं विश्वे॒ मद॒न्त्यूमा॑:

tadidāsa bhuvaneṣu jyeṣṭhaṃ yato jajña ugrastveṣanṛmṇaḥ | sadyo jajñāno ni riṇāti śatrūnanu yaṃ viśve madantyūmā:

हिन्दी अर्थ

- सुरक्षित वीर्यवाला व्यक्ति सदा प्रफुल्लित वदन (1111118 1०९€ ) होता ठै. यह महान् बनता है, इसका दिल छोटा नहीं होता तथा साथ ही यह प्रभु का पुजारी होता हे ओर शक्ति से रोगों पर आक्रमण करनेवाला होता है। १, राजनीति में उन्नति के विघातक तत्त्वं को "वृत्र" कहते है। जैसे सूर्यं के प्रकाश

English

In all the worlds That was the Best and Highest whence sprang the mighty God of splendid valour. Quickly when born he overcomes his foemen, he in whom all who lend him aid are joyful.

अध्याय ३३

श्लोक 81

इ॒मा उ॑ त्वा पुरूवसो॒ गिरो॑ वर्धन्तु॒ या मम॑ ।पा॒व॒कव॑र्णा॒: शुच॑यो विप॒श्चितो॒ऽभि स्तोमै॑रनूषत

imā u tvā purūvaso giro vardhantu yā mama | pāvakavarṇā: śucayo vipaścito'bhi stomairanūṣata

हिन्दी अर्थ

- प्रभु की उपासना "जितेन्द्रियता" व “ वेद-दोहन' से हआ करती हे। तमुत्सवे च॑ प्रसवे च॑ सासहिमिन्द्रं देवासः शव॑ंसामदन्ननु ।। २९॥ १. है महः=महान् प्रभो! इमाम्=इस ते=तेरी महीम्=महिमा. को प्राप्त करानेवाली धियम्=वुद्धि को, प्रज्ञा व कर्मो की प्रतिपादक वेदवाणी को प्रभरे-मेैं प्रकर्षेण अपने में

English

May these my songs of praise exalt thee, Lord, who hast abundant wealth. Men skilled in holy hymns, pure, with the hues of fire, have sung them with their lauds to thee.

अध्याय ३३

श्लोक 82

यस्या॒यं विश्व॒ आर्यो॒ दास॑: शेवधि॒पा अ॒रिः ।ति॒रश्चि॑द॒र्ये रु॒शमे॒ पवी॑रवि॒ तुभ्येत्सो अ॑ज्यते र॒यिः

yasyāyaṃ viśva āryo dāsa: śevadhipā ariḥ | tiraścidarye ruśame pavīravi tubhyetso ajyate rayiḥ

हिन्दी अर्थ

- में वेदवाणी को अपने अन्दर भरनेवाला बनं, जिससे सम -दु :ख- सुख बनकर आनन्दमय जीवनवाला हो सकर। विभ्राड् बृहत्विलतु सोम्यं मध्वायुर्दधंद्यज्ञप॑तावविंहुतम् । १. पिच्छलो मन्त्र मँ वेदवाणी कौ अपने मेँ भरने का वर्णन धा। यह पुरुष विभ्राट्-विशिष्ट

English

Good Lord of wealth is he to whom all Âryas, Dâsas here belong. E’en over unto thee, the pious Rusama Pavîru, is that wealth brought nigh.

अध्याय ३३

श्लोक 83

अ॒यᳪ स॒हस्र॒मृषि॑भि॒: सह॑स्कृतः समु॒द्र इ॑व पप्रथे ।स॒त्यः सो अ॑स्य महि॒मा गृ॑णे॒ शवो॑ य॒ज्ञेषु॑ विप्र॒राज्ये॑

aya sahasramṛṣibhi: sahaskṛtaḥ samudra iva paprathe | satyaḥ so asya mahimā gṛṇe śavo yajñeṣu viprarājye

हिन्दी अर्थ

हम अपनी इच्छा ज्ञानप्राप्ति कौ वना, उससे वासना का विनाश करके प्रभु की ओर चले ओर प्रभु को पाकर ब्रह्माण्ड को वश मं करनेवाले हो। १. गतमन्त्र में “वृत्रहन् व "सूर्य! से प्रभु कहते हैँ कि ब्रह्माण्ड तेरे वश मेँ हो गया, दूसरे शब्दों में तूने सब-कुक पा लिया, तूने अपने जीवन कौ साधना कर ली, परन्तु इतने

English

He, with his might advanced by Rishis thousandfold, hath like an ocean spread himself. His majesty is praised as true at solemn rites, his power where holy singers rule. 84. Protect our habitation, Savitar, etc., as in verse 69.

अध्याय ३३

श्लोक 84

अद॑ब्धेभिः सवितः पा॒युभि॒ष्ट्वᳪ शि॒वेभि॑र॒द्य परि॑ पाहि नो॒ गय॑म् ।हिर॑ण्यजिह्वः सुवि॒ताय॒ नव्य॑से॒ रक्षा॒ माकि॑र्नो अ॒घश॑ᳪस ईशत

adabdhebhiḥ savitaḥ pāyubhiṣṭva śivebhiradya pari pāhi no gayam | hiraṇyajihvaḥ suvitāya navyase rakṣā mākirno aghaśasa īśata

हिन्दी अर्थ

हम ज्ञान प्राप्त करे, उदार हदय बनें, तेजस्विता की साधना करें, ओर दिव्य गुणों को अपनाने के लिए प्रयत्नशील हों। मह्ना देवानांमसूर्यः पुरोहितो विभु ज्योतिरद।भ्यम्।।४०॥ १. स्तवन करते हुए जमदग्नि कहते है कि है श्रवसा सूर्य=ज्ञान से सूर्य के समान

English

Come, Vâyu, drawn by fair hymns, to our sacrifice that reaches heaven.

अध्याय ३३

श्लोक 85

आ नो॑ य॒ज्ञं दि॑वि॒स्पृशं॒ वायो॑ या॒हि सु॒मन्म॑भिः ।अ॒न्तः प॒वित्र॑ उ॒परि॑ श्रीणा॒नोऽयᳪ शु॒क्रो अ॑यामि ते

ā no yajñaṃ divispṛśaṃ vāyo yāhi sumanmabhiḥ | antaḥ pavitra upari śrīṇāno'ya śukro ayāmi te

हिन्दी अर्थ

- सूर्य की भाँति हम श्रमशील हौ, उत्पन्न धनां को सबके साथ बोँरकर खा, धनों को प्रभु का समञ्चे। अद्या देवाऽ उदिता सूर्य॑स्य निरश्टसः पिपृता निर्वद्यात् । १. प्रस्तुत मन्त्र का ऋषि "कुत्स ' है। यह वासनाओों को (कुथ हिसायाम्) कुचल

English

Poured on the middle of the straining-cloth and dressed, this bright drink hath been offered thee.

अध्याय ३३

श्लोक 86

इ॒न्द्र॒वा॒यू सु॑स॒न्दृशा॑ सु॒हवे॒ह ह॑वामहे ।यथा॑ न॒: सर्व॒ इज्जनो॑ऽनमी॒वः स॒ङ्गमे॑ सु॒मना॒ अस॑त्

indravāyū susandṛśā suhaveha havāmahe | yathā na: sarva ijjano'namīvaḥ saṅgame sumanā asat

हिन्दी अर्थ

- कुत्स ऋषि वह है जो स्नेह व निद्रता, स्वास्थ्य, सोम, उदारता व प्रकाश का पुञ्ज बनने का प्रयत करता हे। इसी से वह पञ्जजन ' कहलाएगा। हिरण्ययेन सविता रथेना देवो याति भुव॑नानि पश्य॑न् ।॥४३॥ १. गतमन्त्र के अनुसार अपनी पाच वस्तुओं का विकास करके. विकास ही नहीं मैं प्राणसाधना के द्वारा इन्द्र, वायु. बृहस्पति, मित्र, अग्नि, पूषन्, भग व आदित्य को अपने अन्दर धारण करता ह वरुणः प्राविता भुवन्मित्रो विश्वाभिरूतिभिः । कर॑तां नः सुराध॑सः।।४९॥ १. "वरूण ' देवता वारण करती है, द्वेषादि को हदयं मे उत्पन्न नहीं होने देती। द्वेषादि

English

Indra and Vâyu, fair to see and swift to hear, we call to us, That in assembly all, yea, all the folk may be benevolent to us and free from malady.

अध्याय ३३

श्लोक 87

ऋध॑गि॒त्था स मर्त्य॑: शश॒मे दे॒वता॑तये ।यो नू॒नं मि॒त्रावरु॑णाव॒भिष्ट॑य आच॒क्रे ह॒व्यदा॑तये

ṛdhagitthā sa martya: śaśame devatātaye | yo nūnaṃ mitrāvaruṇāvabhiṣṭaya ācakre havyadātaye

हिन्दी अर्थ

-प्रभुकृपा से मेँ ज्ञानी बनं ओर इस ज्ञान से एश्वर्य का सदुपयोग करनेवाला ऋषि. वत्सारः। देवता--विष्वेदेवाः। छन्द :-निचूज्जगती। स्वरः-निषादः। भी कहा जाता है। यह सारभूत वस्तु सोम कौ रक्षा करे कारण “अवत्सार' हआ है। यह अवत्सार हुवे आवाहन करता है , पुकारता' है, किनको १. इन्द्राग्नी=इन्द्र ओर अग्नि को।

English

Yea, specially that mortal man hath toiled for service of the Gods, Who quickly hath brought near Mitra and Varuna to share his sacrificial gifts.

अध्याय ३३

श्लोक 88

आ या॑त॒मुप॑ भूषतं॒ मध्व॑: पिबतमश्विना ।दु॒ग्धं पयो॑ वृषणा जेन्यावसू॒ मा नो॑ मर्धिष्ट॒मा ग॑तम्

ā yātamupa bhūṣataṃ madhva: pibatamaśvinā | dugdhaṃ payo vṛṣaṇā jenyāvasū mā no mardhiṣṭamā gatam

हिन्दी अर्थ

इन्द्र ओर अग्नि आदि देवताओं का आवाहन करता हुआ भै अपने जीवन की रक्षा करनेवाला बनता हँ यः शसं ते स्तुवते धायि प्चऽ इन्द्र॑ज्येष्ठाऽअस्मांँ २।।ऽअवन्तु देवाः॥५०॥ का पूरण हो। रुद्र तपस्या का प्रतीक है। रुद्र प्राण दे। इनकी साधना करनेवाला भी रुद्र हम तपस्वी बनें। धन को एकदम हेय न समञ्ञ लेँ। धनी बनकर तप को न छोड दे (विलासी न बन जार्पँ) । यह मार्ग हमें वह शक्ति प्राप्त कराएगा जिससे हम वासना क्राम, ऋ्रोध, त्नोभ व अभिमान का विजय त्राध्वै नो देवा निजुरो वृक॑स्य त्राध्व॑ कर््ताद॑वपदो। यजत्राः।५९॥

English

Within the Waters runs the Moon, he with the beauteous wings, in heaven.

अध्याय ३३

श्लोक 89

प्रैतु॒ ब्रह्म॑ण॒स्पति॒: प्र दे॒व्ये॒तु सू॒नृता॑ ।अच्छा॑ वी॒रं नर्यं॑ प॒ङ्क्तिरा॑धसं दे॒वा य॒ज्ञं न॑यन्तु नः

praitu brahmaṇaspati: pra devyetu sūnṛtā | acchā vīraṃ naryaṃ paṅktirādhasaṃ devā yajñaṃ nayantu naḥ

हिन्दी अर्थ

आदर्श पत्नी वह है जो १. सरमा= पति के साथ आनन्द का अनुभव करती ै। २. विघ्नो से न घबराकर उने दूर करती है (विदत् रुग्णमद्रे) ३. घर की नीति का निर्धारण पति के साथ विचार कर करती है (सध्यक्) ४. इसकौ नीति में पूजा को प्रथम स्थान दिया जाता ह (महि), ५. इसका प्रत्येक कार्य पालन व पूरण के लिए होता है

English

May Brahmanaspati draw nigh, may Sûnritâ the Goddess come, And Gods bring to our rite which gives the fivefold gift the Hero, lover of mankind.

अध्याय ३३

श्लोक 90

च॒न्द्रमा॑ अ॒प्स्वन्तरा सु॑प॒र्णो धा॑वते दि॒वि ।र॒यिं पि॒शङ्गं॑ बहु॒लं पु॑रु॒स्पृह॒ᳪ हरि॑रेति॒ कनि॑क्रदत्

candramā apsvantarā suparṇo dhāvate divi | rayiṃ piśaṅgaṃ bahulaṃ puruspṛha harireti kanikradat

हिन्दी अर्थ

पति-पत्नी उदात्त स्वभाव करे व काम-क्रोध को जीतनेवाले हो। उपास्मै गायता नर: पव॑मानायेन्द॑वे । अभि देवाँ २।।ऽ इयक्षते ॥६२॥ १. प्रस्तुत मन्त्र का ऋषि देवल है-देवों का लेनेवाला-दिव्य गुणों को अपने अन्दर -बद्धानेवाला। यह अपने को दिव्य गुणों का पुञ्ज बना पाया हे, क्योंकि इसने प्रभु का प्रभु इन्द्र है. वृत्रहन् है. महान् है। वे प्रभु हमें प्राप्त हो। १. वामदेव ने गतमन्त्र मे प्रभु से वृत्र-विनाश की याचना कौ थी। प्रस्तुत मन्त्र का ऋषि "नृमेध" है जो अन्य मनुष्यों के साथ मिलकर चलता है। वस्तुतः ' सबके प्रति प्रेम होना' ही वृत्र के नाश का उपाय है। प्रेम ही संकुचित होते-होते ' वृत्र" बन जाता है। २.

English

To yellow-hued abundant wealth, object of many a man's desire, loud-neighing goes the tawny Steed.

अध्याय ३३

श्लोक 91

दे॒वं-दे॑वं॒ वोऽव॑से दे॒वं-दे॑वम॒भिष्ट॑ये ।दे॒वं-दे॑वᳪ हुवेम॒ वाज॑सातये गृ॒णन्तो॑ दे॒व्या धि॒या

devaṃ-devaṃ vo'vase devaṃ-devamabhiṣṭaye | devaṃ-deva huvema vājasātaye gṛṇanto devyā dhiyā

हिन्दी अर्थ

हम वृत्र का विनाश करे, हमारे लान का सूर्य चमके ओर सब शत्रु नष्ट हो यज्ञो देवानां प्रत्यैति सुम्नमादित्यासो भव॑ता मृडयन्त॑ः। १. यज्ञः=यज्ञ देवानाम्=देवों के प्रति-ओर सुम्नम्-सुख के रूप मे होकर एति-वापस आ जाता है, अर्थात् यन्न का परिणाम जीवन का सुखी होना है। “नायं लोकोऽस्त्ययज्ञस्य

English

Singing their praise with godlike hymn let us invoke each God for grace, Each God to bring you help, each God to strengthen you.

अध्याय ३३

श्लोक 92

दि॒वि पृ॒ष्टो अ॑रोचता॒ग्निर्वै॑श्वान॒रो बृ॒हन् ।क्ष्मया॑ वृधा॒न ओज॑सा॒ चनो॑हितो॒ ज्योति॑षा बाधते॒ तम॑:

divi pṛṣṭo arocatāgnirvaiśvānaro bṛhan | kṣmayā vṛdhāna ojasā canohito jyotiṣā bādhate tama:

हिन्दी अर्थ

वेदवाणियों के अध्ययन से निम्न लाभ है (क) हृदय वासनारूप मलों का स्थान नही बनता, (ख) मन प्रभु प्रवण होता है, (ग) यज्ञमय कर्मो में रुचि बढती हे, (घ) कान ज्योतिर्मय होते है, अर्थात् ज्ञान बढता है। काव्य॑योराजानेषु क्रत्वा दक्ष॑स्य दुरोणे । रिशाद॑सा खधस्थऽआ॥॥७२॥ हमारा जीवन प्रेम व कर्म के समन्वय से स्वर्ग का निर्माण करनेवाला हो। षिः -वसिष्ठः। देवता-इन्द्राग्नी। छन्द :-गायत्री। स्वरः-षडजः॥। १. प्रस्तुत मन्त्र का ऋषि वशिष्ठ है जो वशियों में श्रेष्ठ है, अतएव उत्तम निवासवाला है। जिस घर में पति-पत्नी का जीवन बडा संयमवाला होता है, वह घ्र "वशिष्ठ" का घर

English

Agni Vaisvânara, set in heaven, with mighty splendour hath shone forth. Increasing in his power on earth, benevolent, he quells the darkness with his light.

अध्याय ३३

श्लोक 93

इन्द्रा॑ग्नी अ॒पादि॒यं पूर्वागा॑त् प॒द्वती॑भ्यः ।हि॒त्वी शिरो॑ जि॒ह्वया॒ वाव॑द॒च्चर॑त्त्रि॒ᳪशत्प॒दा न्य॑क्रमीत्

indrāgnī apādiyaṃ pūrvāgāt padvatībhyaḥ | hitvī śiro jihvayā vāvadaccarattriśatpadā nyakramīt

हिन्दी अर्थ

प्रभु को हम अपनी ढाल बना प्रभु को धारण करक्रे यज्ञशील व दीप्तिमय हिरण्यजिह्वः सुविताय नव्य॑से रक्षा माक्िर्नोऽअघश॑सऽ ईशत ॥ ८४॥ १. पिछले मन्त्र मेँ कहा गया था कि ऋषि लोग प्रभु को ही अपना सहस्=-बल मानते है। प्रभु को अपनी शक्ति बनानेवाला यह ' भरद्वाज" बनता है, अपने में शक्ति को भर लेता

English

First, Indra Agni! hath this Maid come footless unto those with feet. Stretching her head and speaking loudly with her tongue, she hath gone downward thirty steps.

अध्याय ३३

श्लोक 94

दे॒वासो॒ हि ष्मा॒ मन॑वे॒ सम॑न्यवो॒ विश्वे॑ सा॒कᳪ सरा॑तयः ।ते नो॑ अ॒द्य ते अ॑प॒रं तु॒चे तु नो॒ भव॑न्तु वरिवो॒विद॑:

devāso hi ṣmā manave samanyavo viśve sāka sarātayaḥ | te no adya te aparaṃ tuce tu no bhavantu varivovida:

हिन्दी अर्थ

जमदग्नि के जीवन मेँ यज्ञ, ज्ञान, पवित्रता, तप, क्रियाशीलता व दीप्ति कौ साधना निरन्तर चलती है। १. “इनद्र' वह है जो इन्द्रियों का अधिष्ठाता टै, दूसरे शब्दों मे जितेन्द्रिय हे। इद््र्या उसके प्योड़े है, वह उनपर दृढता से आरूढ है। आत्मवश्य इन्द्रियो से वह इस विषयात्मकः हमारे जीवनो मे जितेन्द्रियता के साथ क्रियाशीलता हो, जिससे कि हम ऋध॑गित्था स मर्त्य; श्ामे देवतातये । १. गतमन्त्र मे कहा था कि-हम "इन्द्र॒ ओर वायु ' न दोनों तत्त्वो को अपने जीवन में अपनाें। ' इन्द्र" जितेन्द्रियता का सूचक है, तो “ वायु ' क्रियाशीलता का। इत्था=इस प्रकार

English

For of one spirit are the Gods with mortal man, co-sharers all of gracious gifts. May they increase our strength hereafter and to-day, providing ease and ample room.

अध्याय ३३

श्लोक 95

अपा॑धमद॒भिश॑स्तीरशस्ति॒हाथेन्द्रो॑ द्यु॒म्न्याभ॑वत् ।द॒वास्त॑ इन्द्र स॒ख्याय॑ येमिरे॒ बृह॑द्भानो॒ मरु॑द्गण

apādhamadabhiśastīraśastihāthendro dyumnyābhavat | davāsta indra sakhyāya yemire bṛhadbhāno marudgaṇa

हिन्दी अर्थ

प्राणसाधना से हम पूर्णं नीरोगता का लाभ करे। कण्व करा संग्रह-मस्तिष्क, हदय, हाथ-ज्ञान, सत्य, यन्न प्रतु ब्रह्मणस्पतिः प्र देव्येतु सूनृतां । अच्छा वीरं नर्य' पद्धिराधसं देवा यज्ञं न॑यन्तु नः।।८९॥

English

Indra who quells the curse blew curses far away, and then in splendour came to us. Indra, refulgent with the Marut host! the Gods eagerly strove to win thy love.

अध्याय ३३

श्लोक 96

प्र व॒ इन्द्रा॑य बृह॒ते मरु॑तो॒ ब्रह्मा॑र्चत ।वृ॒त्रᳪ ह॑नति वृत्र॒हा श॒तक्र॑तु॒र्वज्रे॑ण श॒तप॑र्वणा

pra va indrāya bṛhate maruto brahmārcata | vṛtra hanati vṛtrahā śatakraturvajreṇa śataparvaṇā

हिन्दी अर्थ

- प्राणापान कौ साधना द्वारा वसिष्ठ बनकर हम कण कण करक्र अच्छायो का संग्रह करनेवाले बनें। हमारा मस्तिष्क ब्रह्मणस्पति का निवास-स्थान हो. हदय सूनृता देवी का तथा हाथ यज्ञो के आश्रय बने। १. पिछले मन्त्र का कण्व ' सान, सत्य व यक्ल' का विस्तार करके “त्रीन् तनोती इति पत्नी र में रहकर निरन्तर क्रियाशीलता से घर को बड़ा सुन्दर बना पाती हे। यह समङ्ञदारी से प्रत्येक काम को करती हे। प्रभु को नहीं भूलती। प्रभु का अनुकरण करने का प्रयत्न करती है ओर अपने घर को देवं का निवासस्थान बनाकर प्रभु को देवासो हि ष्मा मन॑वे सम॑न्यवो -विश्व साक सरांतयः।

English

To Indra, to your mighty Chief, Maruts, sing forth a mighty prayer. Let Satakratu, Vritra-slayer, kill the fiend with hundred-knotted thunderbolt.

अध्याय ३३

श्लोक 97

अ॒स्येदिन्द्रो॑ वावृधे॒ वृष्ण्य॒ᳪ शवो॒ मदे॑ सु॒तस्य॒ विष्ण॑वि ।अ॒द्या तम॑स्य महि॒मान॑मा॒यवोऽनु॑ ष्टुवन्ति पू॒र्वथा॑ ।इ॒मा उ॑ त्वा यस्या॒यम॒यᳪ स॒हस्र॑मू॒र्ध्व ऊ॒ षु ण॑:

asyedindro vāvṛdhe vṛṣṇya śavo made sutasya viṣṇavi | adyā tamasya mahimānamāyavo'nu ṣṭuvanti pūrvathā | imā u tvā yasyāyamaya sahasramūrdhva ū ṣu ṇa:

हिन्दी अर्थ

हमारे प्राण ब्रह्यार्चन में लगे। ब्रह्य की मित्रता से शक्तिशाली बनकर हम वृत्र का विनाश करे। "सतत क्रियाशीलता" वृत्र-विनाश के लिए हमारा साघन वने। ऋषि :-मेधातिधथिः। देवता--महेन्द्रः। छन्दः- स्वराट् सतोवृहती। स्वरः-पध्यमः।। १. इन्द्रः इन्द्रियों का अधिष्ठाता जीव अस्य इत्-निश्चय से इस प्रभु का होता है। यह

English

Indra increased his manly strength at sacrifice, in the wild rapture of this juice; And living men to-day, even as of old, sing forth their praises to his majesty. May these. Good Lord of wealth. He with his might. Stand up erect.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Yajur Veda — Chapter 33
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
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