Yajur Veda· Yajurveda Saṁhitā
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अध्याय 32 / 40

Adhyāya 32

अध्याय 32

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अध्याय ३२

श्लोक 1

तदे॒वाग्निस्तदा॑दि॒त्यस्तद्वा॒युस्तदु॑ च॒न्द्रमा॑: ।तदे॒व शु॒क्रं तद्ब्रह्म॒ ता आप॒: स प्र॒जाप॑तिः

tadevāgnistadādityastadvāyustadu candramā: | tadeva śukraṃ tadbrahma tā āpa: sa prajāpatiḥ

हिन्दी अर्थ

हम अग्नि आदि नामों से प्रभु का स्मरण करते हुए स्वयं अग्नि आदि बनने ऋषि :- स्वयम्भु ब्रह्म। देवता-परमात्मा। छन्दः-अनुष्टुप्। स्वरः- गान्धारः। सर्वेः निमेषा ज॑जिरे विद्युतः पुरुषादधि १. सर्वे=सारे निमेषाः = ओंखों के पलक गिरने आदि छोटे-से-छछोटे व्यापार भी

English

com The Texts of the White Yajurveda, tr. Ralph T.H. Griffith, [1899], BOOK THE THIRTY-SECOND. AGNI is That; the Sun is That; Vâyu and Chandramâs are That. The Bright is That; Brahma is That, those Waters, that Prajâpati.

अध्याय ३२

श्लोक 2

सर्वे॑ निमे॒षा ज॑ज्ञिरे वि॒द्युत॒: पुरु॑षा॒दधि॑ ।नै॑नमू॒र्ध्वं न ति॒र्यञ्चं॒ न मध्ये॒ परि॑ जग्रभत्

sarve nimeṣā jajñire vidyuta: puruṣādadhi | nainamūrdhvaṃ na tiryañcaṃ na madhye pari jagrabhat

हिन्दी अर्थ

पत्ता-पत्ता उस प्रभु के प्रशासन में हिल रहा हे। वे प्रभु कण-कण मेँ व्याप्त है, किसी देशविशेष में स्थित नहीं है. इसी से सारे ब्रह्माण्ड को गति दे रहे है। प्रभु का प्रतिरूप-विनीतता+नामस्मरणा तस्य=उस प्रभु की प्रतिमाः=मूर्ति, नाप, सादृश्य, तुल्यता न अस्ति-नहीं टे। २. प्रभु

English

All twinklings of the eyelid sprang from Purusha, resplendent One. No one hath comprehended him above, across, or in the midst.

अध्याय ३२

श्लोक 3

न तस्य॑ प्रति॒मा अ॑स्ति॒ यस्य॒ नाम॑ म॒हद्यश॑: ।हि॒र॒ण्य॒ग॒र्भ इत्ये॒षः मा मा॑ हिᳪसी॒दित्ये॒षा यस्मा॒न्न जा॒त इत्ये॒ष:

na tasya pratimā asti yasya nāma mahadyaśa: | hiraṇyagarbha ityeṣaḥ mā mā hisīdityeṣā yasmānna jāta ityeṣa:

हिन्दी अर्थ

ईश्वर की मूर्तिं नहीं हे। हम निराकार प्रभु का स्मरण करे, जिससे हमारा एषो ह देवः प्रदिशोऽनु सर्वाः पूर्वो" ह जातः सञऽडउ गर्भऽअन्तः। १. एषः=ये प्रभु ह निश्चय से देवः देव हेँ। देव के अर्थ यास्कानुसार निम्न हैँ -(क) देवो दानात् =वे प्रभु देनेवाले है। प्रभु ने जीव के हित करे लिए उसे क्या नहीं दिया? वे

English

There is no counterpart of him whose glory verily is great. In the beginning rose Hiranyagarbha, etc. Let not him harm me, etc. Than whom there is no other born, etc.

अध्याय ३२

श्लोक 4

ए॒षो ह॑ दे॒वः प्र॒दिशोऽनु॒ सर्वा॒: पूर्वो॑ ह जा॒तः स उ॒ गर्भे॑ अ॒न्तः ।स ए॒व जा॒तः स ज॑नि॒ष्यमा॑णः प्र॒त्यङ् जना॑स्तिष्ठति स॒र्वतो॑मुखः

eṣo ha devaḥ pradiśo'nu sarvā: pūrvo ha jātaḥ sa u garbhe antaḥ | sa eva jātaḥ sa janiṣyamāṇaḥ pratyaṅ janāstiṣṭhati sarvatomukhaḥ

हिन्दी अर्थ

हम देव, सब दिशाओं में व्याप्त, अनादि, अनन्त, सृष्टि-प्रलय-चक्र को चलानेवाले, हदय मे विद्यमान, सर्वतोमुख प्रभु का ध्यान करे। तीन ज्योतिर्यौँ : रमणा करता दा षोडशी १. यस्मात्-जिससे पुरा=पहले किञ्चन एवन्कुक भी न जातम्=-नहीं हआ, जो

English

This very God pervadeth all the regions; yea, born aforetime, in the womb he dwelleth. He verily born and to be born hereafter meeteth his offspring, facing all directions.

अध्याय ३२

श्लोक 5

यस्मा॑ज्जा॒तं न पु॒रा किं चनै॒व य आ॑ब॒भूव॒ भुव॑नानि॒ विश्वा॑ ।प्र॒जाप॑तिः प्र॒जया॑ सᳪररा॒णस्त्रीणि॒ ज्योती॑ᳪषि सचते॒ स षो॑ड॒शी

yasmājjātaṃ na purā kiṃ canaiva ya ābabhūva bhuvanāni viśvā | prajāpatiḥ prajayā sararāṇastrīṇi jyotīṣi sacate sa ṣoḍaśī

हिन्दी अर्थ

हमारा मस्तिष्क दीप्त हो, शरीर दृढ हो, हम यज्ञादि कर्मो से स्वर्गं का लाभ करे, कामना से ऊपर उठकर मोक्ष को प्राप्त करे। कभी भी विकर्म में फैसकर लोक- लोकान्तरो मे भटके नहीं। प्रभु की भाँति दानशील बनकर प्रभु के उपासक ने। यत्राधि सूर ऽउदि'तो विभाति कस्मै देवाय हविषां विधेम।।७॥

English

Before whom naught whatever sprang to being; who with his presence aids all living creatures, Prajâpati, rejoicing in his offspring, he, Shodasî, maintains the Three great Lustres.

अध्याय ३२

श्लोक 6

येन॒ द्यौरु॒ग्रा पृ॑थि॒वी च॑ दृ॒ढा येन॒ स्व॒ स्तभि॒तं येन॒ नाक॑: ।यो अ॒न्तरि॑क्षे॒ रज॑सो वि॒मान॒: कस्मै॑ दे॒वाय॑ ह॒विषा॑ विधेम

yena dyaurugrā pṛthivī ca dṛḍhā yena sva stabhitaṃ yena nāka: | yo antarikṣe rajaso vimāna: kasmai devāya haviṣā vidhema

हिन्दी अर्थ

प्रभु-प्राप्ति के उपाय निम्न दहै ९. प्रभु को पुकारना, प्रभु की प्रार्थना करनी। २. इच्धियों का दमन। ३. मन को निर्मल करना। ४. दानपूर्वक अदन। ५. पापों का स्वीकार १. "वेन ' शब्द वेन् धातु से बना हे। इसके अर्थ है (क) क्रियाशील-!७ ०. 10 111०0५९. (ख) ज्ञान प्राप्त करनेवाला-10 ।८०५५. (ग) प्रभु का पुजारी 0 ५0181101 एवं, वेनः =

English

By whom the heavens are strong and earth stands firmly, by whom light's realm and sky-vault are supported; By whom the regions in mid-air were measured. What God shall we adore with our oblation?

अध्याय ३२

श्लोक 7

यं क्रन्द॑सी॒ अव॑सा तस्तभा॒ने अ॒भ्यैक्षे॑तां॒ मन॑सा॒ रेज॑माने ।यत्राधि॒ सूर॒ उदि॑तो वि॒भाति॒ कस्मै॑ दे॒वाय॑ ह॒विषा॑ विधेम ।आपो॑ ह॒ यद्बृ॑ह॒तीर्यश्चि॒दाप॑:

yaṃ krandasī avasā tastabhāne abhyaikṣetāṃ manasā rejamāne | yatrādhi sūra udito vibhāti kasmai devāya haviṣā vidhema | āpo ha yadbṛhatīryaścidāpa:

हिन्दी अर्थ

प्रभु-दर्शन के लिए ज्ञान, क्रिया व भक्ति का समुच्चय आवश्यक हे। वे प्रभु हदय मेँ ही निहित है, सर्वव्यापक है। “अजमरत-ध्ाम-सत्' : पिता का भी पिता त्रीणि पदानि निदिता गुहास्य यस्तानि वेद स पितुः पितासत् ॥९॥

English

To whom, supported by his help, two armies embattled look while trembling in their spirit, Where over them the risen Sun is shining. What God shall we adore with our oblation? What time the mighty waters, etc. He in his might surveyed, etc.

अध्याय ३२

श्लोक 8

वे॒नस्तत्प॑श्य॒न्निहि॑तं॒ गुहा॒ सद्यत्र॒ विश्वं॒ भव॒त्येक॑नीडम् ।तस्मि॑न्नि॒दᳪ सं च॒ वि चै॑ति॒ सर्व॒ᳪ स ओत॒: प्रोत॑श्च वि॒भूः प्र॒जासु॑

venastatpaśyannihitaṃ guhā sadyatra viśvaṃ bhavatyekanīḍam | tasminnida saṃ ca vi caiti sarva sa ota: protaśca vibhūḥ prajāsu

हिन्दी अर्थ

उस ' अमृत, सत्, धाम" का प्रवचन ज्ञानी लोग करे। हम प्रभु के इन पदों को जानकर पिताओं के पिता- ज्ञानियों के भी ज्ञानी बनें। स नो बन्धुर्जनिता स विधाता धामानि वेद भुव॑नानि विश्वा। यत्र॑ देवाऽअमृत॑ंमानशानास्तृतीये धामंन्नध्यैर॑यन्त।। ९०॥

English

The Sage beholdeth That mysterious Being wherein this All hath found one only dwelling. Therein unites the Whole, and thence it issues: far-spread it is the warp and woof in creatures.

अध्याय ३२

श्लोक 9

प्र तद्वो॑चेद॒मृतं॒ नु वि॒द्वान् ग॑न्ध॒र्वो धाम॒ विभृ॑तं॒ गुहा॒ सत् ।त्रीणि॑ प॒दानि॒ निहि॑ता॒ गुहा॑स्य॒ यस्तानि॒ वेद॒ स पि॒तुः पि॒ताऽस॑त्

pra tadvocedamṛtaṃ nu vidvān gandharvo dhāma vibhṛtaṃ guhā sat | trīṇi padāni nihitā guhāsya yastāni veda sa pituḥ pitā'sat

हिन्दी अर्थ

मनोविन्लान व विज्ञान के अध्ययन, श्रमण तथा स्वाध्याय से हम अपने मन को प्रभु की ओर जानेवाला बनार्। परि द्यावापृथिवी सद्यऽ इत्वा परि लोकान्परि दिशः परि स्त्रः। १. यहाँ पिछले मन्त्र के " भूतानि" पद का स्थान ' द्यावापृथिवी" ने ले-लिया हे।

English

Knowing Eternity, may the Gandharva declare that station, parted, kept in secret. Three steps thereof in mystery are hidden: he who knows these shall be the father's father.

अध्याय ३२

श्लोक 10

स नो॒ बन्धु॑र्जनि॒ता स वि॑धा॒ता धामा॑नि वेद॒ भुव॑नानि॒ विश्वा॑ ।यत्र॑ दे॒वा अ॒मृत॑मानशा॒नास्तृ॒तीये॒ धाम॑न्न॒ध्यैर॑यन्त

sa no bandhurjanitā sa vidhātā dhāmāni veda bhuvanāni viśvā | yatra devā amṛtamānaśānāstṛtīye dhāmannadhyairayanta

हिन्दी अर्थ

हम ठीक व्यवहार से मन को शान्त, वस्तुओं के ठीक प्रयोग से शरीर को नीरोग, भ्रमण से दृष्टि को विशाल, सूर्य-दर्शन से प्रभु-महिमा का दर्शन करके उस ऋत के वितत तन्तु का विश्लेषण करे ओर प्रभु का दर्शन कर प्रभु-जैसे ही बन जारपं। सद॑सस्पतिमद्धंतं प्रियमिन्द्र॑स्य काम्य॑म्। सनिं मेधाम॑यासिष स्वाह।॥। ९३

English

He is our kin, our Father and Begetter: he knows all beings and all Ordinances, In whom the Gods obtaining life eternal have risen upward to the third high station.

अध्याय ३२

श्लोक 11

प॒रीत्य॑ भू॒तानि॑ प॒रीत्य॑ लो॒कान् प॒रीत्य॒ सर्वा॑: प्र॒दिशो॒ दिश॑श्च ।उ॒प॒स्थाय॑ प्रथम॒जामृ॒तस्या॒त्मना॒ऽऽत्मान॑म॒भि सं वि॑वेश

parītya bhūtāni parītya lokān parītya sarvā: pradiśo diśaśca | upasthāya prathamajāmṛtasyātmanā''tmānamabhi saṃ viveśa

हिन्दी अर्थ

प्रभु मुञ्ञे बुद्धि दे, जिससे मे देव व पितर ' रक्षक बन पाऊं। सदा उन्नति के १. मेत मु वरुणः वरुण मेधाम्-बुद्धि को ददातुदे। वरुण का अर्थ है जो वरण करता है (०१८ ५1० €1€८15) ओर इस प्रकार श्रेष्ट ( वरुण= वरश्रेष्ठ) बनता है। संसार मेँ "प्रेय व श्रेय' में यदि मन्दबुद्धिता से मैने प्रेय का वरण कर लिया तो लक्ष्य तक न पंच

English

Having encompassed round existing creatures, the world; and all the Quarters and Mid-quarters, Having approached the first-born Child of Order he with his Self into The Self hath entered.

अध्याय ३२

श्लोक 12

परि॒ द्यावा॑पृथि॒वी स॒द्य इ॒त्वा परि॑ लो॒कान् परि॒ दिश॒: परि॒ स्व॒: ।ऋ॒तस्य॒ तन्तुं॒ वित॑तं वि॒चृत्य॒ तद॑पश्य॒त्तद॑भव॒त्तदा॑सीत्

pari dyāvāpṛthivī sadya itvā pari lokān pari diśa: pari sva: | ṛtasya tantuṃ vitataṃ vicṛtya tadapaśyattadabhavattadāsīt

हिन्दी अर्थ

में "वरुण, अग्नि, प्रजापति, इन्द्र, वायु व धाता" इन नामो से सूचित मार्ग को अपना्ॐँ। मेरी बुद्धि श्रेष्ट हो ओर ठीक मार्ग को अपनाकर मेँ अपना धारण कर सककरं। श्री चितय (८ ब्रह्यश्री, क्षत्रश्री, देवश्री ) ज्ञान+व्रलल+विनय मयि देवा द॑धतु श्रियमुत्त॑मां तस्यै ते स्वाह।॥॥ ९६॥

English

Having gone swiftly round the earth and heaven, around the worlds, around the sky, the Quarters, Having spread out the lengthened thread of Order, he views, and he becomes and is That Being.

अध्याय ३२

श्लोक 13

सद॑स॒स्पति॒मद्भु॑तं प्रि॒यमिन्द्र॑स्य॒ काम्य॑म् ।स॒निं मे॒धाम॑यासिष॒ᳪस्वाहा॑

sadasaspatimadbhutaṃ priyamindrasya kāmyam | saniṃ medhāmayāsiṣasvāhā

हिन्दी अर्थ

इस शरीर में हम तमोगुण व रजोगुण से ऊपर उठकर सत्त्वगुण मे विचरते हुए प्रकृति व जीव से परे उस तृतीय धाम प्रभु में विचरे। इसी से हम अमृतत्त्व क्रा लाभ परीत्य॑ भूतानि परीत्य॑ लोकान् परीत्य सर्वौः प्रदिशो दिश॑श्च। १. आत्मना=मन से आत्मानम् अभि सम् विवेश परमात्मा मे प्रवेश करता हे।

English

To the Assembly's wondrous Lord, to Indra's lovely Friend who gives Wisdom. have I drawn near in prayer.

अध्याय ३२

श्लोक 14

यां मे॒धां दे॑वग॒णाः पि॒तर॑श्चो॒पास॑ते ।तया॒ माम॒द्य मे॒धयाऽग्ने॑ मे॒धावि॑नं कुरु॒ स्वाहा॑

yāṃ medhāṃ devagaṇāḥ pitaraścopāsate | tayā māmadya medhayā'gne medhāvinaṃ kuru svāhā

हिन्दी अर्थ

हमारे जीवन में बुद्धिवाद के परिणामस्वरूप विश्वप्रेम, अद्धुत उन्नति, देवगण त पितरों से उपासित बुद्दधि-मेध्रावी यां मेधां देवगणाः पित्र श्चोपासं ते। १. याम्-जिस मेधाम्=बुद्धि कौ देवगणाः =देवगण पितरः च=ओर रक्षक लोग

English

That wisdom which the Companies of Gods, and Fathers, recognize, Even with that intelligence, O Agni, make me wise to-day. All-hail!

अध्याय ३२

श्लोक 15

मे॒धां मे॒ वरु॑णो ददातु मे॒धाम॒ग्निः प्र॒जाप॑तिः ।मे॒धामिन्द्र॑श्च वा॒युश्च॑ मे॒धां धा॒ता द॑दातु मे॒ स्वाहा॑

medhāṃ me varuṇo dadātu medhāmagniḥ prajāpatiḥ | medhāmindraśca vāyuśca medhāṃ dhātā dadātu me svāhā

हिन्दी अर्थ

ज्ञान के द्वारा हमारी श्री उत्कृष्ट हो, ज्ान+बल के द्वारा वह उत्कृष्टतर हो, ओर ज्ञान+बल+दिव्यता से बह उत्कृष्टतम हो। इस श्री कौ प्राप्ति के लिए हम प्रभु के प्रति अपना अर्पण करे। हम वह चित्र हों, जिसके चित्रकार प्रभु हो।

English

Varuna grant me wisdom! grant it Agni and Prajâpati! Wisdom may Indra, Vâyu grant. May the Creator grant it me. All-hail!

अध्याय ३२

श्लोक 16

इ॒दं मे॒ ब्रह्म॑ च क्ष॒त्रं चो॒भे श्रिय॑मश्नुताम् ।मयि॑ दे॒वा द॑धतु॒ श्रिय॒मुत्त॑मां॒ तस्यै॑ ते॒ स्वाहा॑

idaṃ me brahma ca kṣatraṃ cobhe śriyamaśnutām | mayi devā dadhatu śriyamuttamāṃ tasyai te svāhā

हिन्दी अर्थ

ज्ञान के द्वारा हमारी श्री उत्कृष्ट हो, ज्ान+बल के द्वारा वह उत्कृष्टतर हो, ओर ज्ञान+बल+दिव्यता से बह उत्कृष्टतम हो। इस श्री कौ प्राप्ति के लिए हम प्रभु के प्रति अपना अर्पण करे। हम वह चित्र हों, जिसके चित्रकार प्रभु हो।

English

Let these the Priests and Nobles both enjoy the splendour that is mine. Best splendour may the Gods bestow on me. To thee, that splendour, hail!

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Yajur Veda — Chapter 32
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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