अध्याय १८
श्लोक 1
॥ इति श्रीनरसिंहपुराणे अष्टाक्षरमन्त्रमाहात्म्यं नाम सप्तदशो ऽध्याय ॥ नर्प् १७ ॥ इति श्रुत्वा कथाः पुण्याः सर्वपापप्रणाशिनीः नानाविधा मुनिश्रेष्ठाः कृष्णद्वैपायनात् पुनः
|| iti śrīnarasiṃhapurāṇe aṣṭākṣaramantramāhātmyaṃ nāma saptadaśo 'dhyāya || narp 17 || iti śrutvā kathāḥ puṇyāḥ sarvapāpapraṇāśinīḥ nānāvidhā muniśreṣṭhāḥ kṛṣṇadvaipāyanāt punaḥ
हिन्दी अर्थ
क्षेमक हुआ। यह क्षेमक ही पाण्डववंशका अन्तिम राजा है, इसके बाद सोमवंश निवृत्त हो जाता है॥ २--१३॥ जो पुरुष इस उत्तम राजवंशका सदा श्रवण करता है, वह सब पापोंसे मुक्त एवं विशुद्धचित्त होकर विष्णु- लोकको प्राप्त होता है। जो इस पवित्र वंश-वर्णनको प्रतिदिन स्वयं पढ़ता अथवा श्राद्धकालमें पितृगणोंको
English
The story of birth of Manu, Yama and Yaml from the womb of Saihjna and birth of Manu, Sani and Tapatl from the womb of Chaya, and birth of