अध्याय ६
श्लोक 1
इति श्रीमार्कण्डेयपुराणे इन्द्रविक्रियानाम पञ्चमो ऽध्यायः षष्ठो ऽध्यायः पक्षिण ऊचुः रामः पार्थे परां प्रीतिं ज्ञात्वा कृष्णस्य लाङ्गली ।चिन्तयामास बहुधा किं कृतं सुकृतं भवेत्
iti śrīmārkaṇḍeyapurāṇe indravikriyānāma pañcamo 'dhyāyaḥ ṣaṣṭho 'dhyāyaḥ pakṣiṇa ūcuḥ rāmaḥ pārthe parāṃ prītiṃ jñātvā kṛṣṇasya lāṅgalī / cintayāmāsa bahudhā kiṃ kṛtaṃ sukṛtaṃ bhavet
हिन्दी अर्थ
ईर्ष्या और द्वेष भी नहीं होगा। तुम पुनः काम-क्रोधसे मुक्त होकर देवत्वको प्राप्त कर लोगे।” तदनन्तर वे विश्वेदेव अपने अंशसे कुरुवंशियोंके घरमें अवतीर्ण हुए। वे ही द्रौपदीके गर्भसे उत्पन्न पाँचों पाण्डवकुमार थे। महामुनि विश्वामित्रके शापसे ही उनका विवाह नहीं हुआ। जैमिनि! इस प्रकार हमने पाण्डवकुमारोंकी
English
The plough-armed Rdma, knowing the perfect affection of Kfish^a for Arjuna, deliberated much — " Can what has been