अध्याय ५
श्लोक 1
इति श्रीमार्कण्डेयपुराणे चतुर्व्यूहावतारो नाम द्वितीयो ऽध्यायः पञ्चमो ऽध्यायः पक्षिण ऊचुः त्वष्टृपुत्रे हते पूर्वं ब्रह्मन्निन्द्रस्य तेजसः ।ब्रह्महत्याभिभूतस्य परा हानिरजायत
iti śrīmārkaṇḍeyapurāṇe caturvyūhāvatāro nāma dvitīyo 'dhyāyaḥ pañcamo 'dhyāyaḥ pakṣiṇa ūcuḥ tvaṣṭṛputre hate pūrvaṃ brahmannindrasya tejasaḥ / brahmahatyābhibhūtasya parā hānirajāyata
हिन्दी अर्थ
विश्वामित्रने कहा--वीरवर! तुम समुद्र, पर्वत, ग्राम और नगरोंसहित यह सारी पृथ्वी मुझे दे दो। रथ, घोड़े, हाथी, कोठार और खजानेसहित सारा राज्य भी मुझे समर्पित कर दो। इसके अतिरिक्त भी जो कुछ तुम्हारे पास है, वह मुझे दे दो। केवल अपनी स्त्री, पुत्र और शरीरको अपने पास रख लो। साथ ही अपने
English
"Of old, 0 brahman! when the son of Tvash^fi was slain,