अध्याय १३
श्लोक 1
एकत्रिंशत्तमः कल्पः पीतवासा इति स्मृतः ब्रह्मा यत्र महाभागः पीतवासा बभूव ह
ekatriṃśattamaḥ kalpaḥ pītavāsā iti smṛtaḥ brahmā yatra mahābhāgaḥ pītavāsā babhūva ha
हिन्दी अर्थ
ब्राह्मणका धन हरण करनेवाला, गोहत्यारा, माता- पिताकी हत्या करनेवाला, देवताओंको मूर्ति खण्डित करनेवाला, शिवलिङ्ग ध्वस्त करनेवाला तथा हजारों प्रकारके अन्य मानसिक-वाचिक-शारीरिक पाप करनेवाला द्विज शीघ्र ही पापमुक्त हो जाता है। इतना ही नहीं, इस विधिके करनेसे सैकड़ों जन्म-जन्मान्तरके पापोंसे मुक्ति मिल जाती है। मैंने अघोरेशवर भगवान् शिवके प्रसंगसे इस रहस्यका वर्णन किया है। अतएव द्विज अर्थात्
English
The thirty first kalpa is known as Pitavasas. Therein, the blessed Brahma was clad in yellow garbs.