अध्याय १४
श्लोक 1
इति श्रीकूर्मपुराणे षट्माहस्त्र्यां संहितायां पूर्वविभागे त्रयोदशो ऽध्यायः नैमिषीया ऊचुः देवानां दानवानां च गन्धर्वोरगरक्षसाम् ।उत्पत्तिं विस्तरात् सूत ब्रूहि वैवस्वते ऽन्तरे
iti śrīkūrmapurāṇe ṣaṭmāhastryāṃ saṃhitāyāṃ pūrvavibhāge trayodaśo 'dhyāyaḥ naimiṣīyā ūcuḥ devānāṃ dānavānāṃ ca gandharvoragarakṣasām / utpattiṃ vistarāt sūta brūhi vaivasvate 'ntare
हिन्दी अर्थ
तथापि महेश्वर! भक्तवत्सलताके कारण नरकोंमें जानेवाले इन सभीकी हमारे द्वारा रक्षा की जानी चाहिए ऐसा उचित प्रतीत होता है। इसलिये वृषभध्वज! वेदबाह्य पापियोंकी रक्षा करने एवं उन्हें मोहित करनेके लिये मैं शास्त्रोंकी रचना करूँगा। इस प्रकार मुरारि माधवसे प्रेरित किये गये रुद्रने मोहित करनेवाले शास्त्रोंकी बनाया और उसी प्रकार शिवसे प्रेरणा प्राप्त केशवने भी ऐसे ही शास्त्रोंकी रचना को। कापाल,
English
Hiranyarajani (golden night),Haima {go\den),Hema- hharanabhiifita (bedecked in golden ornaments), Vibhrajamana (shining), Durjneya (incomprehensible), Jyotiftomaphalaprada (bestower of the fruits of sacrifice Jyotistoma).