अध्याय १३
श्लोक 1
इति श्रीकूर्मपुराणे षट्साहस्त्र्यां संहितायां पूर्वविभागे द्वादशो ऽध्यायः सूत उवाच प्रियव्रतोत्तानपादौ मनोः स्वायंभुवस्य तु ।धर्मज्ञौ सुमहावीर्यौ शतरूपा व्यजीजनत्
iti śrīkūrmapurāṇe ṣaṭsāhastryāṃ saṃhitāyāṃ pūrvavibhāge dvādaśo 'dhyāyaḥ sūta uvāca priyavratottānapādau manoḥ svāyaṃbhuvasya tu / dharmajñau sumahāvīryau śatarūpā vyajījanat
हिन्दी अर्थ
ब्रह्माके द्वारा इस प्रकार भलीभाँति प्रबुद्ध किये जानेपर विकसित कमलके समान नेत्रवाले, पीत वस्त्र धारण करनेवाले तथा असुरोंके द्वेषी भगवान् विष्णु बोले--अत्यन्त वीर्यशाली देवताओ! आपलोग प्रजापतियोके साथ इस स्थानपर किस कारणसे आये हैं अथवा में आप लोगोंका कौन-सा कार्य करूं ?
English
JVirdsrayd (having no support), Nirdhdrd (having no food), Nirankusapadodbhavd (born of that free curbless region).