अध्याय ४२
श्लोक 1
भगवतः विष्णोः ईशित्वस्य वर्णनम्, अद्भुततारकामयस्य सङ्ग्रामस्य कथा भगवान् विष्णुके ईश्वरत्वका वर्णन एवं अद्भुततारकामय सङ्ग्रामकी कथा विश्वत्वं शृणु मे विष्णोर्हरित्वं च कृते युगे ।वैकुण्ठत्वं च देवेषु कृप्णत्वं मानुषेषु च
bhagavataḥ viṣṇoḥ īśitvasya varṇanam, adbhutatārakāmayasya saṅgrāmasya kathā bhagavān viṣṇuke īśvaratvakā varṇana evaṃ adbhutatārakāmaya saṅgrāmakī kathā viśvatvaṃ śṛṇu me viṣṇorharitvaṃ ca kṛte yuge | vaikuṇṭhatvaṃ ca deveṣu kṛpṇatvaṃ mānuṣeṣu ca
हिन्दी अर्थ
ततः शरदि युक्तायां मौनकामेषु बर्दिषु। याचमाने खगे तोयं विप्लुतेषु प्लवेषु च “हम गौएँ सम्पूर्ण कामनाओंको देनेवाली हैं। अब हल या गाड़ीमें जोतने योग्य बलिषप्ठ बैल देकर हम किसानोंको संतुष्ट करेंगी। दूध-घीके द्वारा पवित्र हविष्य प्रस्तुत करके देवताओंकी तृप्ति करेंगी और गोबर देकर साक्षात् श्रीदेवीको संतुष्ट करती रहेंगी॥ ४२ ॥ प्रभो! आप महान् बलशाली प्रभु हमारा परित्राण करनेके कारण हमारे गुरुरूप हैं, अतः आजसे आप हम गौओंके राजा इन्द्र हो जायँ'॥४३॥ अत: (गौओंके इस अनुरोधके अनुसार) मेरे द्वारा हाथपर रखकर प्रस्तुत किये गये इन दिव्य जलसे भरे हुए सोनेके कलशोंद्वाए आप अपना अभिषेक करें ॥ ४४॥ मैं देवताओंका इन्द्र हूँ और आप गौओंके इन्द्र हो गये! आजसे इस भूतलपर सब लोग
English
¹⁸⁴ The usual practice is that at the time of installation sacred water is sprinkled on the head of a king. The meaning is that who has gone through the ceremony of installation.