Garuda Purana· Garuḍa Purāṇa
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अध्याय 16 / 317

Book 1 - Adhyaya 16

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अध्याय १६

श्लोक 1

इति श्रीगारुडे महापुराणे पूर्वखण्डे प्रथमांशाख्ये आचारकाण्डे श्रीविष्णुसहस्रनामस्तोत्रनिरूपणं नाम पञ्चदशो ऽध्यायः श्रीगरुडमहापुराणम्- १६ रुद्र उवाच ।पुनर्ध्यानं समाचक्ष्व शङ्खचक्रगदाधर ।विष्णोरीशस्य देवस्य शुद्धस्य परमात्मनः

iti śrīgāruḍe mahāpurāṇe pūrvakhaṇḍe prathamāṃśākhye ācārakāṇḍe śrīviṣṇusahasranāmastotranirūpaṇaṃ nāma pañcadaśo 'dhyāyaḥ śrīgaruḍamahāpurāṇam- 16 rudra uvāca / punardhyānaṃ samācakṣva śaṅkhacakragadādhara / viṣṇorīśasya devasya śuddhasya paramātmanaḥ

हिन्दी अर्थ

'ॐ हां हीं हूं हैं हौं हः शिवसूर्याय नमः ।' बृहस्पतये नमः, 3३ भं भार्गवाय नमः, ३» शं ' ॐ हं खखोल्काय सूर्यमूर्तये नमः।' ' ॐ हां हीं शनैश्चराय नमः, ३ रं राहवे नमः, ३५ कं केतवे

English

O Lord, the holder of conch, discus and club, please narrate to me further the process of contemplation on Lord Vi;nu, the pure and the Supreme soul.

अध्याय १६

श्लोक 2

हरिरुवाच ।शृणु रुद्र ! हरेर्ध्यानं संसारतरुनाशनम् ।दृशिरूपमनन्तं च सर्वव्याप्यजमव्ययम्

hariruvāca / śṛṇu rudra ! harerdhyānaṃ saṃsāratarunāśanam / dṛśirūpamanantaṃ ca sarvavyāpyajamavyayam

हिन्दी अर्थ

--इस पूजाके बाद क्रमशः नामके आदि और इस प्रकार सूर्यदेव आदिकी पूजा करके साधकको अन्तमें 'ॐ नमः' शब्दका प्रयोग करके दण्डी आचमन करना चाहिए उसके बाद वह कनिष्ठिका तथा पिङ्गल आदि भूतनायकोंका स्मरण करे। आदि अंगुलियोंमें करन्यास तथा पुनः निम्नाङ्कित तदनन्तर अग्नि आदि कोणोंमें ' ३ विमलायै नमः, मन्त्रोंसे अङ्गन्यास करे-

English

The fust of the five vital ain enumerated as Pripi, e/des, remdae, and udina. has Its seat In the beings, benee it means the breath.

अध्याय १६

श्लोक 3

अक्षरं सर्वगं नित्यं महब्द्रह्मास्ति केवलम् ।सर्वस्य जगतो मूलं सर्वगं परमेशवरम्

akṣaraṃ sarvagaṃ nityaṃ mahabdrahmāsti kevalam / sarvasya jagato mūlaṃ sarvagaṃ parameśavaram

हिन्दी अर्थ

3» ईशानायै नमः '--आदि मन्त्रोंसे क्रमशः विमला ' ॐ हां हृदयाय नमः, ॐ हीं शिरसे स्वाहा, और ईशानादि शक्तियोंकी स्थापना करके पूजा २ हूं शिखायै वौषट्, 3 हैं कवचाय हुम्, ३ करनी चाहिए। ऐसा करनेसे उपासकको परम हाँ नेत्रत्रयाय वौषट्, ३ हः अस्त्राय फट्।'

English

One of the five vital airs which comet out of the arms.

अध्याय १६

श्लोक 4

सर्वभूतहृदिस्थं वै सर्वभूतमहेश्वरम् ।सर्वाधारं निराधारं सर्वकारणकारणम्

sarvabhūtahṛdisthaṃ vai sarvabhūtamaheśvaram / sarvādhāraṃ nirādhāraṃ sarvakāraṇakāraṇam

हिन्दी अर्थ

सुखकी प्राप्ति होती है। इन शक्तियोंकी पूजाके तदनन्तर भूतशुद्धि करे तथा पुनः न्यास करे। लिये पृथक्-पृथक् बीजमन्त्र निर्दिष्ट हैं। यथा अर्घ्यस्थापन करके उसी जलसे अपने शरीरका

English

Orft khakhclkSjanamaft (Om salutation to the Sun, the meteoric planet of the sky). This is the MSlamantra (the bask mystic vers that gives worldly enjoyment and 6nal beatitude (Mukti),

अध्याय १६

श्लोक 5

अलेपकं तथा मुक्तं मुक्तयोगिविचितितम् ।स्थूलदेहविहीनं च चक्षुषा परिवर्जितम्

alepakaṃ tathā muktaṃ muktayogivicititam / sthūladehavihīnaṃ ca cakṣuṣā parivarjitam

हिन्दी अर्थ

प्रोक्षण करना चाहिए। उसके बाद वह साधक यह नाम दिया गया है। शिवसहित नन्दी आदिको पूजा करे। ' ॐ हौं शिवाय इस प्रकार शिवपूजन पूर्ण करनेके पश्चात् नमः मन्त्रसे पद्ममें स्थित शिवकी पूजा करके नन्दी, साधकको अग्नि आदि चतुर्दिक् कोणों, मध्यभाग महाकाल, गङ्गा, यमुना, सरस्वती, श्रीवत्स, वास्तुदेवता, तथा पूर्वादि दिशाओंमें अग्रि आदि दिग्देवताओं

English

[Special Surya mantra] Om obeisance to lord Khakholka. Om in the rays that spread (vici) (ha (ha obeis* ance to the head.

अध्याय १६

श्लोक 6

वागिन्द्रियविहीनं च प्राणिधर्ंमविवर्जितम् ।पादेन्द्रियविहीनं च वाग्धर्मपरिवर्जितम् ।पायूपस्थविहीनं च सर्वैंन्द्रिय विवर्जितम्

vāgindriyavihīnaṃ ca prāṇidharṃmavivarjitam / pādendriyavihīnaṃ ca vāgdharmaparivarjitam / pāyūpasthavihīnaṃ ca sarvaiṃndriya vivarjitam

हिन्दी अर्थ

ब्रह्मा, गणपति तथा गुरुकी पूजा करे। तथा इन्द्रादि दिक्पालोंकी पूजा करनी चाहिए । तत्पश्चात् साधकको पद्मके मध्यमें शक्ति एवं तदनन्तर उसको उन देवोंके मध्य स्थित चण्डेश्वरकी अनन्त देवकी पूजा करके पूर्व दिशामें धर्म, पूजाकर उनके लिये निर्माल्य समर्पित करना दक्षिणमें ज्ञान, पश्चिममें वैराग्य, उत्तरमें ऐश्वर्य, चाहिए । उसके बाद वह निम्राङ्कित स्तुतिसे क्षमापन

English

Orh fka fka to the lord of all brilliance, obeisance to the weapon. Orh burn, burn, blaze, blaze fha (ha obeisance.

अध्याय १६

श्लोक 7

मनोविरहितं तद्वन्मनोधर्ंमविवर्जितम् ।बुद्ध्या विहीनं देवेशं चेतसा परिवर्जितम्

manovirahitaṃ tadvanmanodharṃmavivarjitam / buddhyā vihīnaṃ deveśaṃ cetasā parivarjitam

हिन्दी अर्थ

अग्निकोणमें अधर्म, नैर्ऋ्रत्यमें अज्ञान, वायव्यमें ( क्षमा-याचना) करके उनका विसर्जन करे-- अवैराग्य, ईशानमें अनैश्वर्य, पद्मकी कर्णिकामें गुह्यातिगुह्यगोस्ता त्वं गृहाणास्मत्कृतं जपम्। वामा और ज्येष्ठा उसके बाद पूर्व आदि दिशाओंमें सिद्ध्विर्भवतु मे देव त्वत्प्रसादात् त्वयि स्थिति: ॥ रौद्री, काली, शिवा तथा असिता आदि शक्तियोंकी यत्किञ्चित् क्रियते कर्म सदा सुकृतदुष्कृतम्।

English

With this Giyatrl (a particular metre) of the sun the worshipper should perform the Sakali'karai?a{symmmg up). Then the salutation (special gesture with joined palms) to Dharma in the east, to Yama in the south.

अध्याय १६

श्लोक 8

अहङ्कारविहीनं वै बुद्धिधर्ंमविवर्जितम् ।प्राणेन रहितं चैव ह्यपानेन विवर्जितम्

ahaṅkāravihīnaṃ vai buddhidharṃmavivarjitam / prāṇena rahitaṃ caiva hyapānena vivarjitam

हिन्दी अर्थ

पूजा करनी चाहिए । तन्मे शिवपदस्थस्य रुद्र क्षपय शङ्कर॥ तदनन्तर साधकको शिवके आगे स्थित पीठके शिवो दाता शिवो भोक्ता शिवः सर्वमिदं जगत्। मध्यमें “३० हौं कलक्रिकरिण्यै नमः, ३७ हौं शिवो जयति सर्वत्र यः शिवः सोऽहमेव च॥ बलविकरिण्यै नमः, ॐ हौं बलप्रमथिन्यै नमः, यत्कृतं यत् करिष्यामि तत् सर्व सुकृतं तव।

English

To Dandanayaka and then to Vaivarna in the north. The darkiawny (form) in the north-east and the Dikita in the south-east to be worshipped.

अध्याय १६

श्लोक 9

व्यानाख्यवायुहीनं वै प्राणधर्ंमविवर्जितम् ।हरिरुवाच ।पुनः सूर्यर्चनं वक्ष्ये यदुक्तं भृगवे पुरा

vyānākhyavāyuhīnaṃ vai prāṇadharṃmavivarjitam / hariruvāca / punaḥ sūryarcanaṃ vakṣye yaduktaṃ bhṛgave purā

हिन्दी अर्थ

शक्तियोंकी पूजा करनी चाहिए। साधक भगवान् है प्रभो! आप गुह्य-से-गुह्य तत्त्वोंके संरक्षक शिवके लिये आसन प्रदानकर महामूर्तिकी स्थापना हैं। आप मेरे किये हुए जपको स्वीकार करें। हे करे। तदनन्तर मूर्तिके मध्यमें शिवको उद्दिष्ट करके देव! मुझे सिद्धि प्राप्त हो। आपकी कृपासे आपमें आवाहन-स्थापन-सन्निधान-सन्निरोध-सकलीकरण मेरी निष्ठा बनी रहे। है रुद्र! है भगवान् शङ्कर ! मेरे

English

To Indra, the holder of thunderbolt in the hand, is to be worshipped in the South-west and the mystic syllables ShGrbhuvab svafi in the north-west.

अध्याय १६

श्लोक 10

ॐ खखोल्काय नमः ।सूर्यस्य मूलमन्त्रो ऽयं भुक्तिमुक्तिप्रदायकः

oṃ khakholkāya namaḥ / sūryasya mūlamantro 'yaṃ bhuktimuktipradāyakaḥ

हिन्दी अर्थ

आदि मुद्रा दिखाये और अर्घ्य, पाद्य, आचमन, द्वारा सर्वदा पाप-पुण्यरूप जो कर्म किया जाता है, अभ्यङ्ग, उद्वर्तन तथा स्नानीय जल समर्पित करे उसे आप नष्ट करें। मैं आपके इन कल्याणकारी एवं अरणि-मन्थन करके पूज्य देवको वस्त्र, गन्ध, चरणोंमें पड़ा हूँ। है शिव! आप अपने भक्तोंको पुष्प, दीप और नैवेद्यमें चरु समर्पित करे । नैवेद्यके सर्वस्व देनेवाले हैं। आप ही भोक्ता हैं, है शिव!

English

th obeisance to AnurukaK Orh obeisance to the Lord otPrmatha (goblins attending on Siva). Om obeisance to the enlightened.

अध्याय १६

श्लोक 11

ॐ खखोल्काय त्रिदशाय नमः ।ॐ विचि ठठ शिरसे नमः ।ॐ ज्ञानिने ठठ शिखायै नमः ।ॐ सहस्ररश्मये ठठ कवचाय नमः

oṃ khakholkāya tridaśāya namaḥ / oṃ vici ṭhaṭha śirase namaḥ / oṃ jñānine ṭhaṭha śikhāyai namaḥ / oṃ sahasraraśmaye ṭhaṭha kavacāya namaḥ

हिन्दी अर्थ

अनन्तर आचमन दे करके मुखशुद्धिके लिये ताम्बूल, यह दृश्यमान सम्पूर्ण जगत् भी तो आप ही हैं । हे करोद्वर्तन, छत्र, चामर, पवित्रक (यज्ञोपवीत) शङ्कर! आपकी विजय हो। सर्वत्र जब शिव ही हैं प्रदानकर परमीकरण (अर्चनीय देवमें सर्वोत्कृष्टताका तो मैं भी वही हूँ। जो कुछ मैंने किया है और जो भाव) करे। तदनन्तर साधक आराध्यके साथ कुछ भविष्यमें करूँगा, वह सब आपके द्वारा ही

English

O Lord! having rays measured all round, O Lord of the entire universe, having seven horses for vehicles, the four-armed one, giver of the great siddhifi tawny in colour due to the flames, the gentle one! Come on. Gome on. This is wateroffcring. Salutation unto the head. Take back the terrific form, O the un-naked, bum, burn tka fha obeisance.

अध्याय १६

श्लोक 12

ॐ सर्वतेजो ऽधिपतये ठठ अस्त्राय नमः ।ॐ ज्वलज्वल प्रज्वलप्रज्वल ठठ नमः

oṃ sarvatejo 'dhipataye ṭhaṭha astrāya namaḥ / oṃ jvalajvala prajvalaprajvala ṭhaṭha namaḥ

हिन्दी अर्थ

तदाकार होकर उनका जप करे तथा विनम्रभावसे किया हुआ है। आप रक्षक हैं। आप विश्वनायक स्तुतिकर उन्हें प्रणाम करे। इसी हृदयादिन्यास हैं। है शिव! आपके अतिरिक्त मेरा कोई स्वामी आदिके साथ पूर्ण की गयी पूजाको ' षडङ्गपूजा' नहीं है।

English

With this mantra he should invoke the sun. He should discharge him with the mantra. Om salutation to the lord Adilya (sun) of thousand rays, go as you please, to come again.

अध्याय १६

श्लोक 13

अग्निप्राकारमन्त्रो ऽयं सूर्यस्याघविनाशनः ।ॐ आदित्याय विद्महे,विश्वभा वाय धीमहि, तन्नः सूर्य प्रचोदयात्

agniprākāramantro 'yaṃ sūryasyāghavināśanaḥ / oṃ ādityāya vidmahe,viśvabhā vāya dhīmahi, tannaḥ sūrya pracodayāt

हिन्दी अर्थ

काण्ड भगवती त्रिपुरा तथा गणेश आदि देवोंकी पूजा-विधि ४९

English

With this mantra he should invoke the sun. He should discharge him with the mantra. Om salutation to the lord Adilya (sun) of thousand rays, go as you please, to come again.

अध्याय १६

श्लोक 14

सकलीकरणं कुर्याद्रायत्र्या भास्करस्य च ।धर्ंमात्मने च पूर्वस्मिन्यमा येति च दक्षिणे

sakalīkaraṇaṃ kuryādrāyatryā bhāskarasya ca / dharṃmātmane ca pūrvasminyamā yeti ca dakṣiṇe

हिन्दी अर्थ

( हरिने पुनः कहा--हे रुद्र!) इसके बाद मैं अनुस्यूत है, उसको जानकर ज्ञानी साधक जीवन्मुक्त शिवपूजाकी दूसरी विधि कह रहा हँ-- होकर शिवरूप हो जाता है। इन तत्त्वोमें जो

English

With this mantra he should invoke the sun. He should discharge him with the mantra. Om salutation to the lord Adilya (sun) of thousand rays, go as you please, to come again.

अध्याय १६

श्लोक 15

दण्डनायकाय ततो दैवतायेति चोत्तरे ।श्यामपिङ्गलमैशान्यामाग्नेय्यां दीक्षितं यजेत्

daṇḍanāyakāya tato daivatāyeti cottare / śyāmapiṅgalamaiśānyāmāgneyyāṃ dīkṣitaṃ yajet

हिन्दी अर्थ

इस विधिके अनुसार गणेश-सरस्वती-नन्दी- शिवतत्त्व है, वही विष्णु है, वही ब्रह्मा है और महाकाल-गङ्गा-यमुना,अस्त्र तथा वास्तुपतिदेवकी पूजा वही ब्रह्मतत्त्व है । मण्डलके द्वारपर करनी चाहिए और साधक पूर्वादि भगवान् सदाशिवका मङ्गलमय ध्यानस्वरूप दिशाओंमें इन्द्रादि सभी दिक्पालोंकी पूजा करे। उसके इस प्रकार है--वे देव पद्मासनपर विराजमान रहते

English

With this mantra he should invoke the sun. He should discharge him with the mantra. Om salutation to the lord Adilya (sun) of thousand rays, go as you please, to come again.

अध्याय १६

श्लोक 16

वज्रपाणिं च नैरृत्यां भूर्भुवःस्वश्च वायवे ।ॐ चन्द्राय नक्षत्राधिपतये नमः ।ॐ अङ्गारकाय क्षितिसुताय नमः ।ॐ बुधाय सोमसुताय नमः ।ॐ वागीश्वराय सर्वविद्याधिपतये नमः ।ॐ शुक्राय महर्षये भृगुसुताय नमः ।ॐ शनैश्चराय सूर्यात्मजाय नमः ।ॐ राहवे नमः ।ॐ केतवे नमः

vajrapāṇiṃ ca nairṛtyāṃ bhūrbhuvaḥsvaśca vāyave / oṃ candrāya nakṣatrādhipataye namaḥ / oṃ aṅgārakāya kṣitisutāya namaḥ / oṃ budhāya somasutāya namaḥ / oṃ vāgīśvarāya sarvavidyādhipataye namaḥ / oṃ śukrāya maharṣaye bhṛgusutāya namaḥ / oṃ śanaiścarāya sūryātmajāya namaḥ / oṃ rāhave namaḥ / oṃ ketave namaḥ

हिन्दी अर्थ

बाद कारणभूत समस्त तत्त्वोंकी पूजा करे। हैं। उनका वर्ण शुक्ल है। सहैव सोलह वर्षकी

English

With this mantra he should invoke the sun. He should discharge him with the mantra. Om salutation to the lord Adilya (sun) of thousand rays, go as you please, to come again.

अध्याय १६

श्लोक 17

पूर्वादीशानपर्यन्ता एते पूज्या वृषध्वज ।ॐ अनूकाय नमः ।ॐ प्रथमनाथाय नमः ।ॐ बुद्धाय नमः

pūrvādīśānaparyantā ete pūjyā vṛṣadhvaja / oṃ anūkāya namaḥ / oṃ prathamanāthāya namaḥ / oṃ buddhāya namaḥ

हिन्दी अर्थ

उन तत्त्वोंमें 'पृथिवी, जल, तेज, वायु और आयुमें स्थित रहते हें । वे पाँच मुखोंवाले हैं । उनके आकाश '-- ये पञ्चमहाभूत हैं । गन्ध, रस, रूप, दसों हाथोंमें क्रमशः दक्षिणभागकी ओर अभयमुद्रा, स्पर्श तथा शब्द--ये उनकी पाँच तन्मात्राएँ हैं । प्रसादमुद्रा, शक्ति, शूल तथा खट्वाङ्ग और वामभागकी

English

With this mantra he should invoke the sun. He should discharge him with the mantra. Om salutation to the lord Adilya (sun) of thousand rays, go as you please, to come again.

अध्याय १६

श्लोक 18

ॐ भगवन्नपरिमितमयूखमालिन् ! सकलजगत्पते ! सप्ताश्ववाहन ! चतुर्भुज ! परमसिद्धिप्रद ! विस्फुलिङ्गपिङ्गल ! तत एह्येहि इदमर्घ्यं मम शिरसि गतं गृह्णगृह्ण तेजोग्ररूपम् अनग्न ! ज्वलज्वल ठठ नमः

oṃ bhagavannaparimitamayūkhamālin ! sakalajagatpate ! saptāśvavāhana ! caturbhuja ! paramasiddhiprada ! visphuliṅgapiṅgala ! tata ehyehi idamarghyaṃ mama śirasi gataṃ gṛhṇagṛhṇa tejograrūpam anagna ! jvalajvala ṭhaṭha namaḥ

हिन्दी अर्थ

कर्मेन्द्रियाँ और श्रोत्र, त्वक्, चक्षु, जिह्वा तथा बीजपूरक (बिजौरा नीबू) स्थित रहता है । इच्छा, घ्राण--ये पाँच ज्ञानेन्द्रियाँ हैं। इनके अतिरिक्त ज्ञान और क्रिया नामक तीन शक्तियाँ उनके तीन मन, बुद्धि, चित्त और अहंकार-ये अन्तःकरणचतुष्टय नेत्र हैं। ऐसे वे देव सर्वदा कल्याणकी भावनामें हैं। इनसे ऊपर 'पुरुष' की स्थिति है। इन्हीं अवस्थित रहते हैं, इसीलिये इन्हें सदाशिव कहा

English

With this mantra he should invoke the sun. He should discharge him with the mantra. Om salutation to the lord Adilya (sun) of thousand rays, go as you please, to come again.

अध्याय १६

श्लोक 19

अनेनावाह्य मन्त्रेण ततः सूर्यं विसर्जयेत् ।ॐ नमो भगवते आदित्याय सहस्र किरणाय गच्छ सुखं पुनरागमनायेति

anenāvāhya mantreṇa tataḥ sūryaṃ visarjayet / oṃ namo bhagavate ādityāya sahasra kiraṇāya gaccha sukhaṃ punarāgamanāyeti

हिन्दी अर्थ

(पुरुष)-को शिव कहा जाता है। गया है।

English

With this mantra he should invoke the sun. He should discharge him with the mantra. Om salutation to the lord Adilya (sun) of thousand rays, go as you please, to come again.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_garuDapurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता · Identifier:

Garuda Purana — Chapter 16

गरुडपुराण

संस्कृत संस्करण · Sanskrit Edition:

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