अध्याय १९
श्लोक 2.6.1
॥ पशुषु पञ्चविधँ सामोपासीताजा हिंकारोऽवयः प्रस्तावो गाव उद्गीथोऽश्वाः प्रतिहारः पुरुषो निधनम्
|| pashuShu pa~nchavidha{\m+} sAmopAsItAjA hiMkAro.avayaH prastAvo gAva udgItho.ashvAH pratihAraH puruSho nidhanam
हिन्दी अर्थ
यक्कि च वाचो हूमिति स हिंकारो यत्प्रेति स प्रस्तावो अव सृप्तविध सामकी उपासनाका प्रकरण आरम्भ किया जाता है-वाणीमें सक्तविध सामकी उपासना करनी चाहिये । वाणीम जो कुछ “है' एेसा स्वरूप है वह हिंकार है,जो कुक शभ एेसा स्वरूप है वह भ्म्ताव अथानन्तरं सप्रविधस्य सम- अव इसके पश्चात्-यह सपतविध समस्त सामकी साधु उपासना आरम्भ की जाती है । श्रुतम वाचि इस पद्-
English
Let a man meditate on the fivefold Sâman in animals. The hiṅkâra is goats, the prastâva sheep, the udgîtha cows, the pratihâra horses, the nidhana man.