अध्याय २१
श्लोक 1
विस्तार एष कथितः पृथिव्या मुनिसत्तमाः सप्ततिस् तु सहस्राणि तदुच्छ्रायो ऽपि कथ्यते
vistāra eṣa kathitaḥ pṛthivyā munisattamāḥ saptatis tu sahasrāṇi taducchrāyo 'pi kathyate
हिन्दी अर्थ
ब्रह्माजी कहते हैं-- अमित तेजस्वी महादेवजीका अपराजित हैं, जो क्लेशोंका नाश करके शुभ विवाह हो जानेपर इन्द्र आदि देवताओंके हर्षको सम्पत्ति प्रदान करते हैं, उन भगवान् शङ्करको सीमा न रही। उन्होंने भगवान् शङ्करको प्रणाम नमस्कार है नीले रंगको चोटी धारण करनेवाले किया और इस प्रकार स्तुति आरम्भ की। अम्बिकापतिको नमस्कार है; वायु जिनका स्वरूप
English
O excellent sages, the mttent of the Earth has been related. Its heht (above the lowermost of the nether worlds) is said to be seventy-thousand Yojanas.