Atharva Veda· Atharvaveda Saṁhitā
9
अध्याय 9 / 20

Kanda 9

काण्ड 9

313 श्लोकभाग 2/2 · श्लोक 6.1–10.28WhatsApp

पूर्ण अध्याय पाठ171 श्लोक

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अध्याय ९

श्लोक 6.1

अतिथि-सत्कारः।१-६२ (षट् पर्यायाः) ब्रह्माः।अतिथिः, विद्या।(१) १-१७, नागीनाम त्रिपदा गायत्री, २ त्रिपदाऽर्षी गायत्री, ३,७ साम्नी त्रिष्टुप्, ४,९ आर्च्यनुष्टुप्, ५ आसुरी गायत्री, ६ त्रिपदा साम्नी जगती, ८ याजुषी त्रिष्टुप्, १० साम्नी भुरिग्बृहती, ११,१४-१६ साम्न्यनुष्टुप्, १२ विराड् गायत्री, १३ साम्नि निचृत्पङ्क्तिः, १७ त्रिपदा विराड् भुरिग्गायत्री।यो वि॒द्याद् ब्रह्म॑ प्र॒त्यक्षं॒ परूं॑षि॒ यस्य॑ संभा॒रा ऋचो॒ यस्या॑नू॒क्यऽम्

atithi-satkāraḥ| 1-62 (ṣaṭ paryāyāḥ) brahmāḥ| atithiḥ, vidyā| (1) 1-17, nāgīnāma tripadā gāyatrī, 2 tripadā'rṣī gāyatrī, 3,7 sāmnī triṣṭup, 4,9 ārcyanuṣṭup, 5 āsurī gāyatrī, 6 tripadā sāmnī jagatī, 8 yājuṣī triṣṭup, 10 sāmnī bhurigbṛhatī, 11,14-16 sāmnyanuṣṭup, 12 virāḍ gāyatrī, 13 sāmni nicṛtpaṅktiḥ, 17 tripadā virāḍ bhuriggāyatrī| yo vidyād brahma pratyakṣaṃ parūṃṣi yasya saṃbhārā ṛco yasyānūkya'm

हिन्दी अर्थ

काल गणना का सुचक है-इन पर विचार की .भ्रावर्यकता है । - पर्याय (३):ः-भतिधि पति भ्रतिथि से पूवं मोजन न करे (३१-३६) ¡ गोमांस न खाए; मांस का अभिप्राय (३७-३ ९)1. :

English

The droppings of the Odanas attending the Goat which I have lodged with priest or people May all this know us in the world of virtue, O Agni, at the meeting of the pathways.

अध्याय ९

श्लोक 6.1-2

(२) १८-३० (१-१३) १ विराट् पुरस्ताद्बृहती, २, १२ साम्नी त्रिष्टुप्, ३ आसुरी अनुषटुप्, ४ साम्नी उष्णिक्, ५,११ साम्नी बृहती (११ भुरिक्) ६ आर्च्यनुष्टुप्, ७ त्रिपदा स्वराडनुष्टुप्, ८ आसुरी गायत्री, ९ साम्नी अनुष्टुप्, १० त्रिपदाऽर्ची त्रिष्टुप्, १३ त्रिपदाऽर्ची पङ्क्तिः (७ पञ्चपदा विराट् पुरस्ताद्बृहती, ८ साम्न्यनुष्टुप् वा) य॒ज॒मा॒न॒ब्रा॒ह्म॒णं वा ए॒तदति॑थिपतिः कुरुते॒ यदा॑हा॒र्याऽणि॒ प्रेक्ष॑त इ॒दं भू॑या३ इ॒दा३मिति॑

(2) 18-30 (1-13) 1 virāṭ purastādbṛhatī, 2, 12 sāmnī triṣṭup, 3 āsurī anuṣaṭup, 4 sāmnī uṣṇik, 5,11 sāmnī bṛhatī (11 bhurik) 6 ārcyanuṣṭup, 7 tripadā svarāḍanuṣṭup, 8 āsurī gāyatrī, 9 sāmnī anuṣṭup, 10 tripadā'rcī triṣṭup, 13 tripadā'rcī paṅktiḥ (7 pañcapadā virāṭ purastādbṛhatī, 8 sāmnyanuṣṭup vā) yajamānabrāhmaṇaṃ vā etadatithipatiḥ kurute yadāhāryā'ṇi prekṣata idaṃ bhūyā3 idā3miti

हिन्दी अर्थ

कांऽ € । सु०:६. श्रथवेवेद॑-मष्य १ समानि यस्य रोमानि यनुहैद॑यमुच्यतं परिस्तरंणमिद्धविः ॥२॥ ...: (यस्य) जिस श्रतिथि' के (लोमानि) लोम ' (सामानि) सामवेद॑कै सामगान ई, श्रौर (हृदथम्) हदय (यजुः उच्यते) यजुर्वेद कहा जाता हैः लोमानि सामगान द्वारा लोमहर्षेण होता है हृदय, . रक्तप्रदान

English

The droppings of the Odanas attending the Goat which I have lodged with priest or people May all this know us in the world of virtue, O Agni, at the meeting of the pathways.

अध्याय ९

श्लोक 6.1-3

३०॥ (३) ३१-३९ (१-९) १-६, ९ त्रिपदा पिपीलिकमध्या गायत्री, ७ साम्नी बृहती, ८ पिपीलिकमध्योष्णिक्।इ॒ष्टं च॒ वा ए॒ष पू॒र्तं च॑ गृ॒हाणा॑मश्नाति॒ यः पूर्वोऽति॑थेर॒श्नाति॑

30|| (3) 31-39 (1-9) 1-6, 9 tripadā pipīlikamadhyā gāyatrī, 7 sāmnī bṛhatī, 8 pipīlikamadhyoṣṇik| iṣṭaṃ ca vā eṣa pūrtaṃ ca gṛhāṇāmaśnāti yaḥ pūrvo'titheraśnāti

हिन्दी अर्थ

९४ भ्रथवंवेद-भाष्य कां०.६। सुऽ ६ भ्रतिथिपति (यद् श्रभिवदति) अतिथयो को अभिवादन करता है मानो जल लाने की मांग करता है मानो (श्रपः) यज्ञ निमित्त उदक को (प्रण- यति) प्राप्त करता है ।

English

The droppings of the Odanas attending the Goat which I have lodged with priest or people May all this know us in the world of virtue, O Agni, at the meeting of the pathways.

अध्याय ९

श्लोक 6.1-4

३९॥ (४) ४०-४४ (१-१०) १-४ प्राजापत्यानुष्टुप्, २-५ त्रिपदा गायत्री, ९ भुरिक्, १० चतुष्पदा प्रस्तारपङ्क्तिः।स य ए॒वं वि॒द्वान् क्षी॒रमु॑प॒सिच्यो॑प॒हर॑ति

39|| (4) 40-44 (1-10) 1-4 prājāpatyānuṣṭup, 2-5 tripadā gāyatrī, 9 bhurik, 10 catuṣpadā prastārapaṅktiḥ| sa ya evaṃ vidvān kṣīramupasicyopaharati

हिन्दी अर्थ

लाए जते हँ (ताः एव ताः) वेही वेदँ जोकि भ्रतिथि यज्ञ के निमित्त (यः एव) जो ही (श्ररनीषोमीयः पशुः वध्यते) भग्नि भौर सोम देवताक पशु बान्धा जाता है (सः एव सः) वह ही वह है । भौर हवि के रखने के गृहो को ही (कल्पयन्ति) तय्यार करते है । ,

English

The droppings of the Odanas attending the Goat which I have lodged with priest or people May all this know us in the world of virtue, O Agni, at the meeting of the pathways.

अध्याय ९

श्लोक 6.1-5

४४॥ (५) ४५-४८ (१-१०) १ साम्नी उष्णिक्, २ पुर उष्णिक्, ३ साम्नी भुरिग्बृहती, ४ ६, ९ साम्नी अनुष्टुप्, ५ त्रिपदा निचृद्विषमा नाम गायत्री, ७ त्रिपदा विराड् विषमा नाम गायत्री, ८ त्रिपदा विराडनुष्टुप्।तस्मा॑ उ॒षा हिङ्कृ॑णोति सवि॒ता प्र स्तौ॑ति

44|| (5) 45-48 (1-10) 1 sāmnī uṣṇik, 2 pura uṣṇik, 3 sāmnī bhurigbṛhatī, 4 6, 9 sāmnī anuṣṭup, 5 tripadā nicṛdviṣamā nāma gāyatrī, 7 tripadā virāḍ viṣamā nāma gāyatrī, 8 tripadā virāḍanuṣṭup| tasmā uṣā hiṅkṛṇoti savitā pra stauti

हिन्दी अर्थ

(पुरा-परिवेषात्) मुरूय मोजन परोसने से पहिले (यद्) जो (खादम् क वस्तु (भ्राहरन्ति) भ्राहार रूप में लाति है ( तौ) वे दो (पुरोडाशौ परोडाशौ-तण्डल को पीस कर मटूरो को सी गोल- केदो (बरीहयः यवाः) घान श्रौर जौँ (ये) जौ (निसप्यन्ते) - निकाल कर लाए जति.है, (ते) वे (भ्ंशवः एव ) सोम ग्नोषधिं के र हीरहै।

English

The droppings of the Odanas attending the Goat which I have lodged with priest or people May all this know us in the world of virtue, O Agni, at the meeting of the pathways.

अध्याय ९

श्लोक 6.1-6

४८॥ (६) ४९-६२ (१-१४) १ आसुरी गायत्री, २ साम्नी अनुष्टुप्, ३,५ त्रिपदार्ची पङ्क्तिः, ४ एकपदा प्राजापत्या गायत्री, ६-११ आर्ची बृहती, १२ एकपदाऽऽसुरी जगती, १३ याजुषी त्रिष्टुप्, १४ एकपदाऽऽसुरी उष्णिक्।यत् क्ष॒त्तारं॒ ह्वय॒त्या श्रा॑वयत्ये॒व तत्

48|| (6) 49-62 (1-14) 1 āsurī gāyatrī, 2 sāmnī anuṣṭup, 3,5 tripadārcī paṅktiḥ, 4 ekapadā prājāpatyā gāyatrī, 6-11 ārcī bṛhatī, 12 ekapadā''surī jagatī, 13 yājuṣī triṣṭup, 14 ekapadā''surī uṣṇik| yat kṣattāraṃ hvayatyā śrāvayatyeva tat

हिन्दी अर्थ

(शपंम्) छाज है (पवित्रम्). सोमरस के छानने का सधन, (तुषाः) व्रीहि के कूटनें पर प्राप्तं छिलके हँ (ऋजीषा) सोम श्रोषधि के पीसने पर बच्चे छिलके, (भ्रापः) जल है (ग्रभिषवणीः) सोम भ्रोषधि पीसनेके लिये कुम्मियां हँ (द्रोणकलशः) सोमरस के कंाष्ठ-कलंसै, (पात्राणि) जल

English

The droppings of the Odanas attending the Goat which I have lodged with priest or people May all this know us in the world of virtue, O Agni, at the meeting of the pathways.

अध्याय ९

श्लोक 6.2

सामा॑नि॒ यस्य॒ लोमा॑नि॒ यजु॒र्हृद॑यमु॒च्यते॑ परि॒स्तर॑णा॒मिद्ध॒विः

sāmāni yasya lomāni yajurhṛdayamucyate paristaraṇāmiddhaviḥ

हिन्दी अर्थ

रथव. ६।४।७ में “स य एवं विद्धान् मांसमुपसिच्योपहरति" द्वारा मांसोप- सेचन द्वारा भी मांस के रस की . फ़लक्र मालूम पड़ती है । परन्तु इस मत्र ७.मे मु प्रामिक्षा का वर्णन प्रतीत होता है। गमं दूष. भ जब दधिं डाली . जाती है तनं दश्च फट कर ओ पनीर होता .है वह् “श्रामिक्षा"“ कहां जाता है । इस भ्रामिक्षा मे दो तत्तत होते है, (१) दुग्ध करा रस, (२) तथा पनीर। : भ्रामिक्षाःकाः उपसेचन है । इस के दारां - स्वादुं मी.बनजातादहै, श्रौर पौष्टिकपनीर (मांस) भी खाया, जाता, है। भरथवं० €।।४; तथा श्रा +मिंषु (सेचने, भ्वादिः) 1

English

He lives himself, etc. The man who knows the season called the Rising takes to him- self the rising fame, his hated

अध्याय ९

श्लोक 6.2-2

१८॥ यदाह॒ भूय॒ उद्ध॒रेति॑ प्रा॒णमे॒व तेन॒ वर्षी॑यांसं कुरुते

18|| yadāha bhūya uddhareti prāṇameva tena varṣīyāṃsaṃ kurute

हिन्दी अर्थ

' ११४ प्रथवेवेद-भाष्यं कां० ९ । सु० ६ प महत्त्व को जानता है, भरौर (सर्पिः) पिघला घृत (उपसिच्य) डाल कर (उपहरति) उपहारखूप मेँ भ्रननन देताहैः ८ करता है, या स्वाधिकार में कर लेता है, (तावत्) उतना फलं (भ्रनेन)

English

The man who knows the season called the Rising takes to him- self the rising fame, his hated rival’s rising fame.

अध्याय ९

श्लोक 6.2-3

३१॥ पय॑श्च॒ वा ए॒ष रसं॑ च॒ गृ॒हाणा॑मश्नाति॒ यः पूर्वोऽति॑थेर॒श्नाति॑

31|| payaśca vā eṣa rasaṃ ca gṛhāṇāmaśnāti yaḥ pūrvo'titheraśnāti

हिन्दी अर्थ

महत्त्वं को जानता है, भ्रौर (मधु) शहद या ० (उपसिच्य) संच कर, डाल कर (उपहरति) उपहाररूप में भ्रन्न प्रदान करता है, या स्वाधिकार मे कर लेता है (तावत ) उतना फल (श्रनेन) इस भ्रतिथि- :§ यही भावना भ्रन्य मन्त्रं म भी जाननी चाहिए ।

English

The Goat Panchaudana in this Rising season. The man who knows the season called Surpassing takes to him- self thé conquering fame, his

अध्याय ९

श्लोक 6.2-4

याव॑दग्निष्टो॒मेने॒ष्ट्वा सुस॑मृद्धेनावरु॒न्धे ताव॑देने॒नाव॑ रुन्धे

yāvadagniṣṭomeneṣṭvā susamṛddhenāvarundhe tāvadenenāva rundhe

हिन्दी अर्थ

को० ९। सु० ६ भयवेवेद्-माष्यु ९०५ डाल कर (उपहरति ) उपहारसूप मेँ ्रन्न प्रदान करता है (सः) वह । -करता या स्वाधिकार मेँ कर लेता है (तावत्) उतना फलं (श्रनेन ) इस

English

hated rival’s conquering fame. The Goat Panchaudana is this Conquering season.

अध्याय ९

श्लोक 6.2-5

बृह॒स्पति॑रू॒र्जयोद्गा॑यति॒ त्वष्टा॒ पुष्ट्या॒ प्रति॑ हरति॒ विश्वे॑ दे॒वा नि॒धन॑म्

bṛhaspatirūrjayodgāyati tvaṣṭā puṣṭyā prati harati viśve devā nidhanam

हिन्दी अर्थ

महत्त्व को जानता है, भौर (उदकम्, उपसिच्य ) उदकं सींच कर (उपह- अतिथिप्रति जो किक्षीर रादि के उपसेचन देने में भ्रसमरथ ह, वह् १. देखो पर्याय ३ 1 ९ २९ की व्याख्या । तथा मांसम्-- 16 68; १.

English

He lives himself, he verily burns up his hated rival’s fame Who gives the Goat Panchaudana illumined with a priestly fee.

अध्याय ९

श्लोक 6.2-6

४९॥ यत् प्र॑तिशृ॒णोति॑ प्र॒त्याश्रा॑वयत्ये॒व तत्

49|| yat pratiśṛṇoti pratyāśrāvayatyeva tat

हिन्दी अर्थ

का उतना ही भ्रभिप्राय सममना उचित होगा जितना कि इन केः यौगिकार्थो होनी चाहिए । यथा “श्रग्निनायक परमेदवर"” (यजुः ३२।१) के स्तावक प्रति भात्मसमपेण करके जितना फल प्राप्त होता है उतना फल भतिथि-

English

He cooks the Goat and the five boiled rice messes. May the uni- ted Quarters, all accordant, and intermediate points, accept him from thee.

अध्याय ९

श्लोक 6.3

यद् वा अति॑थिपति॒रति॑थीन् प्रति॒पश्य॑ति देव॒यज॑नं॒ प्रेक्ष॑ते

yad vā atithipatiratithīn pratipaśyati devayajanaṃ prekṣate

हिन्दी अर्थ

पूवक (दष्ट्वा) परभेदवरदेव के पुजन, उस. के संग तथा उस के प्रति कां० ९।.सु०.६. भरथर्ववेद-माष्य १७७. दरकट) का वहन करता है। इस भावना सहित चित्त को ब्रह्म म लीन

English

A glorification of hospitable reception of guests Whoso will know Prayer with immediate knowledge, whose mem- bers are the stuff, whose

अध्याय ९

श्लोक 6.3-2

१९॥ उप॑ हरति ह॒वींष्या सा॑दयति

19|| upa harati havīṃṣyā sādayati

हिन्दी अर्थ

का फल कहा है कि “श्रनडवान् दुहे सुकृतस्य लोके" (भ्रव ० ४।१६।४), अर्थात् संसार-शकट का वहन करने वाला उपासकं के लिये, “सुकरो के लोकं में “दुहे” फलप्रदान करता है, भ्रानन्द रस ॒का दोहन करता है" उपासना की रात्रियों के सम्बन्ध मे कहा कि- है। श्रौर.जिस में भूत जागते है.वह रात्रि है. ्रष्टा-मुनि के.लिये । इस २४ धण्टोंके दिनके लिये ्रयुक्त ह्राद इन दिनों की रात्रियोंमें

English

Whoso will know Prayer with immediate knowledge, whose mem- bers are the stuff, whose spine the verses:

अध्याय ९

श्लोक 6.3-3

३२॥ ऊ॒र्जां च॒ वा ए॒ष स्फा॒तिं च॑ गृ॒हाणा॑मश्नाति॒ यः पूर्वोऽति॑थेर॒श्नाति॑

32|| ūrjāṃ ca vā eṣa sphātiṃ ca gṛhāṇāmaśnāti yaḥ pūrvo'titheraśnāti

हिन्दी अर्थ

समर्पण करके जितना फल मिलता है, उतना फल भरतिथि की सेवा दारा भ्रतिथि सेवा सामाजिक धमं है । भतः इस के माहात्म्य का वणन हृभा है! वेद ते सामाजिक धमं को सर्वंधेष्ठ घमं माना है । . है । यथा ““भरहृ्व कृष्णमहरजुं नं च” .(ऋ० ६।६।१) मे निरक्त म काह किं

English

Whose hairs are psalms, whose heart is called the Yajus, whose coverlet is verily oblation— Verily when a host looks at his guests he looks at the place of sacrifice to the Gods.

अध्याय ९

श्लोक 6.3-4

४०॥ स य ए॒वं वि॒द्वान्त्स॒र्पिरु॑प॒सिच्यो॑प॒हर॑ति

40|| sa ya evaṃ vidvāntsarpirupasicyopaharati

हिन्दी अर्थ

(तस्म) उस भतिथिपति के लिये (उषाः) उषा-काल (हिङ्करोति ) - (बहस्पतिः ऊ्जंया उद्गायति) बृहस्पति का काल बल पूवक ऊंचागान भरतिहार करता. है, (विष्वेदेवाः). समप्रदेवो का काल (निधनम्) साम की

English

When he salutes them reverently he undergoes preparation for a religious ceremony: when he calls for water, he solemnly brings sacrificial water.

अध्याय ९

श्लोक 6.3-5

नि॒धनं॒ भूत्याः॑ प्र॒जायाः॑ पशू॒नां भ॑वति॒ य ए॒वं वेद॑

nidhanaṃ bhūtyāḥ prajāyāḥ paśūnāṃ bhavati ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

भरवयवों वाला सामगान होता ै, (छान्दोग्य उप० २।१-७) । हिङ्कार सामानं की सम्पुणेता ।.उषा-काल है दिन कां प्रारम्भ काल । सविता-काल् है जब किं चुलोकरमेतो प्रकाश हो भ्नौरं पृथिवी परं श्रभी तमसं । बृह॒स्पतिं काल है मध्याह्ञ काल, जब कि दिनं पूरे यौवन मेँ होता है । तवष्टाकाकाल

English

The water that is solemnly brought at a sacrifice is this same water. The libation which they bring; the sacrificial victim dedicated to Agni and Soma which is tied

अध्याय ९

श्लोक 6.3-6

५०॥ यत् प॑रिवे॒ष्टारः॒ पात्र॑हस्ताः॒ पूर्वे॒ चाप॑रे च प्र॒पद्य॑न्ते चम॒साध्व॑र्यव ए॒व ते

50|| yat pariveṣṭāraḥ pātrahastāḥ pūrve cāpare ca prapadyante camasādhvaryava eva te

हिन्दी अर्थ

विद्वेदेवाः का कालं है जबकि द्युलोक मे सब तारे चमक रहे हो । यथा- उषा का काल हिङ्कार । सविता का काल प्रस्ताव । बृहस्पति का करं ९। सु० ६ भ्रथववेद-भाष्य १०९

English

to the post, that, verily, is this man. When they arrange dwelling-rooms they arrange the sacred chamber and the shed for housing

अध्याय ९

श्लोक 6.4

यद॑भि॒वद॑ति दी॒क्षामुपै॑ति॒ यदु॑द॒कं याच॑त्य॒पः प्र ण॑यति

yadabhivadati dīkṣāmupaiti yadudakaṃ yācatyapaḥ pra ṇayati

हिन्दी अर्थ

मो मानो हैनिक काल, सामगान करता है । यह कालिकगान ह भर्थात् सुय भादि का “देवत सामगान” वणित होगा । : निधने भूत्याः अजाया; पशुनां मवति य पं वेदं ॥५॥ ४६

English

What they spread upon the floor is just Sacrificial Grass. With the couch that the men bring, he wins for himself the world of Svarga. The pillow-coverings that they bring are the green sticks that surround the sacrificial altar.

अध्याय ९

श्लोक 6.4-2

२०॥ तेषा॒मास॑न्नाना॒मति॑थिरा॒त्मन् जु॑होति

20|| teṣāmāsannānāmatithirātman juhoti

हिन्दी अर्थ

सुयं (हिङ्कृणोति) हिड् शन्द का उच्चारण करतां है, (संगवः) .ररिमयो सामगान कीः सम्पुणता करता है। . . (य एवं वेद). जो. यहस्थी या -भ्रतिथिपति इस प्रकारः जनिता है वहः

English

With the couch that the men bring, he wins for himself the world of Svarga. The pillow-coverings that they bring are the green sticks that surround the sacrificial altar.

अध्याय ९

श्लोक 6.4-3

३३॥ प्र॒जां च॒ वा ए॒ष प॒शूंश्च॑ गृ॒हाणा॑मश्नाति॒ यः पूर्वोऽति॑थेर॒श्नाति॑

33|| prajāṃ ca vā eṣa paśūṃśca gṛhāṇāmaśnāti yaḥ pūrvo'titheraśnāti

हिन्दी अर्थ

भवति निधिरूप हो जाता है। मन्त्र मे सूयं के सामगान काः वर्णन हूभरा है । (तस्म). उस अतिधिपति के लिये (श्रभ्नः भवन्) मेष होता हृभरा (निधनम्) सामगान को सम्पूणंता करतां है। ॥ न . (यः एवं विद्वान्) जो भ्रतिथिपति इस मकारः जानता है वह॒ ;

English

The ointment that they bring for injunction is just clarified liquid butter. The food they bring before the general distribution represents the two sacrificial cakes of rice

अध्याय ९

श्लोक 6.4-4

याव॑दतिरा॒त्रेणे॒ष्ट्वा सुस॑मृद्धेनावरु॒न्धे ताव॑देने॒नाव॑ रुन्धे

yāvadatirātreṇeṣṭvā susamṛddhenāvarundhe tāvadenenāva rundhe

हिन्दी अर्थ

पहिले “श्रतिहरति" का वर्णन या.तो भ्रथववेदपाटी द्वारा या छापे खाने दवारा हृश्रा प्रतीत होता है । यह स्थान विपर्यास है । । निषनं भूत्य; भरना; पदन. च भ॑वति य एवं वेद॑ ॥२०॥ ४. मानपूर्वेक देखता है (हिडकृणोति) वह हिड शब्द का उच्चारण करता

English

meal. When they call the man who prepares food they summon the preparer of oblation.

अध्याय ९

श्लोक 6.4-5

४५॥ तस्मा॑ उ॒द्यन्त्सूर्यो॒ हिङ्कृ॑णोति संग॒वः प्र स्तौ॑ति

45|| tasmā udyantsūryo hiṅkṛṇoti saṃgavaḥ pra stauti

हिन्दी अर्थ

मांग करता है वह (उद्गायति) उच्चैः गान (उद्गीथ) करता है । (उपहरति) उदक को जो उपहार सूप मेँ देता है वह॒ (प्रति हरति) प्रतिहार कंरता है; सामगान का उप संहार करता है, (उच्छिष्टम्) खाने के परचात् जो बच जाता है (स्थाली आदि वर्तन) वह. (निषनेम्) साम- गान की सम्पू्णेता है । . "1 1 सान्) सम्पत्ति का, ्रशुधों का (निधनम् भवति) .निधिरूप

English

The grains of rice and barley that are selected are just filaments of the Soma plant. The pestle and mortar are really the stones of the Soma press.

अध्याय ९

श्लोक 6.4-6

५१॥ तेषां॒ न कश्च॒नाहो॑ता

51|| teṣāṃ na kaścanāhotā

हिन्दी अर्थ

. १ मेष मे-जबः पानी मरा रहता है तो भारी होने से मेव वायुमण्डलं के नीचे उपरके स्तरो चढ़ जाता है। . श क ९", ऋ क्षता"=ग्रीहि से तण्डुले तय्यार कर, उन का . परिपाक करने वाला सेवक । उधोह श्रौर ॒समृह.को “क्षत्तारौ” कहा है (रथं ० ३।२४।७) ।

English

The winnowing-basket is the filter, the chaff the Soma dregs, the water, the pressing-gear. Spoon, ladle, fork, stirring-prong are the wooden Soma tubs; the earthen cooking-pots are the

अध्याय ९

श्लोक 6.5

या ए॒व य॒ज्ञ आपः॑ प्रणी॒यन्ते॒ ता ए॒व ताः

yā eva yajña āpaḥ praṇīyante tā eva tāḥ

हिन्दी अर्थ

. (यत्) जब. (परिष्टारः) . परोसने वाले, (पात्रहस्ताः) परोसने के भागे की भ्नोर जाते ह तब (ते) वे (चमसाध्वर्यवः एंव) यज्ञिय चमसो के .११२ . अथववेद-माष्य करा०. ९। सु९ ९

English

He brings oblations: he makes the men sit down. As the guest of the seated company he himself offers up sacrifice. With ladle, with hand, in life, at the sacrificial post, with cry of

अध्याय ९

श्लोक 6.5-2

२१॥ स्रु॒चा हस्ते॑न प्रा॒णे यूपे॑ स्रुक्का॒रेण॑ वषट्का॒रेण॑

21|| srucā hastena prāṇe yūpe srukkāreṇa vaṣaṭkāreṇa

हिन्दी अर्थ

(तेषाम्) उन परोसने बालो म (कः चन) कोई भी (ब्रहोतान) न द्मगनिहोत्र करने वाला नहीं होता । यो को खाना परोस कर (गृहान् उप उदेति) समीप के धरो पर् चृता है

English

utensils he says, More here t yet more here. When he says, Bring out more, he lengthens his life thereby.

अध्याय ९

श्लोक 6.5-3

३४॥ की॒र्तिं च॒ वा ए॒ष यश॑श्च गृ॒हाणा॑मश्नाति॒ यः पूर्वोऽति॑थेर॒श्नाति॑

34|| kīrtiṃ ca vā eṣa yaśaśca gṛhāṇāmaśnāti yaḥ pūrvo'titheraśnāti

हिन्दी अर्थ

उहैति, अवैति “उद्” का भ्रभिप्राय है ऊपर, भौर श्रव. का काला है, “श्रव से प्रतीत होता है कि स्नान गृह. निचारई पर है भ्रथवा उदु भ्रौर भव केवलः पादपूर्ति के लिये प्रयुक्त हुए है

English

He brings oblations: he makes the men sit down. As the guest of the seated company he himself offers up sacrifice.

अध्याय ९

श्लोक 6.5-4

४१॥ स य ए॒वं वि॒द्वान् मधू॑प॒सिच्यो॑प॒हर॑ति

41|| sa ya evaṃ vidvān madhūpasicyopaharati

हिन्दी अर्थ

भ्रतिथिपति (यत्). जो (सभागयति) -्रन्न बाटता है (दक्षिणाः सभा- गयति) मनो दक्षिणाए, बाटता है,. (यत्) जो (भ्रयुतिष्ठते) वापिस ' जाते हए प्रततिथियों के.पीछे या साथ स्थित होता है (तत्) वह (उदवस्यति एव) भ्रतिथियज्ञ का भ्रवसानः करता है, उसे समाप्त करता है । जो कुछ भट करता है वंह॒दक्षिणाए भेट करता है ।-यज्ञ मे द्क्षिणाए' तो

English

With ladle, with hand, in life, at the sacrificial post, with cry of Ladle! with exclamation of Vashat!

अध्याय ९

श्लोक 6.5-5

म॒ध्यन्दि॑न॒ उद्गा॑यत्यपरा॒ह्णः प्रति॑ हरत्यस्तं॒यन् नि॒धन॑म्।नि॒धनं॒ भूत्याः॑ प्र॒जायाः॑ पशू॒नां भ॑वति॒ य ए॒वं वेद॑

madhyandina udgāyatyaparāhṇaḥ prati haratyastaṃyan nidhanam| nidhanaṃ bhūtyāḥ prajāyāḥ paśūnāṃ bhavati ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

नानाविघ है, (उपहूतः; उपहूतः). ब्रार-बार . निमन्तित हुमा (मक्षयति) चुका है, रौर पृथिवी पर जीवन्मुक्तावस्था में वास कर रहा है । पृथिवी- वासी उसे बार-बार निमन्त्रित करते है भ्रौर वह उपहारख्पं मे दिये.उन रूपम्) नानाविध है, (उपहृतः, उपहूतः) बार-बार निमन्वित हुभरा (मक्ष- यति) भोगो का भक्षण करता है, भोग भोगता है ।

English

Now these guests, as priests beloved or not beloved, bring one to the world of Svarga. He who hath this knowledge should not eat hating, should not eat the food of one who hates

अध्याय ९

श्लोक 6.5-6

५२॥ यद् वा अति॑थिपति॒रति॑थीन् परि॒विष्य॑ गृ॒हानु॑पो॒दैत्य॑व॒भृथ॑मे॒व तदु॒पावै॑ति

52|| yad vā atithipatiratithīn pariviṣya gṛhānupodaityavabhṛthameva tadupāvaiti

हिन्दी अर्थ

(दिवि) ध लोक मे स्थित ॒हुभ्रा (सः) वह भरतिथिपति, (तस्मिन्) उस भोज के निमित्त (यद्) जो कि (दिवि) धुलोक में (विदवरूपम्) नाना विष है, (उपहूतः, उपहूतः) बार-बार निमन्तवित हृभ्रा (भक्षयति) भोगो का भक्षण करता है, भोगों को मोगता है । । : भोज के निमित्त (यद्) जोकि (देवेषु) देवौ मे (विश्वरूपम्) नानाविष है, (उपहूतः, उपहूतः) बार-बार ॒निम्रन्त्रित हरा ( भक्षयति) भोगो का भक्षण करता है, भोगों को भोगता है ।

English

him, nor of one who is doubt- ful, nor of one who is undecided. This man whose food they eat hath all his wickedness blotted out.

अध्याय ९

श्लोक 6.6

यत् तर्प॑णमा॒हर॑न्ति॒ य ए॒वाग्नी॑षो॒मीयः॑ प॒शुर्ब॒ध्यते॒ स ए॒व सः

yat tarpaṇamāharanti ya evāgnīṣomīyaḥ paśurbadhyate sa eva saḥ

हिन्दी अर्थ

(लोकेषु) विविध लोकों मँ स्थित हृभ्रा (सः) वह॒ श्रतिथि पति, (तरिमन्) उस भोज के निमित्त (यद्) जोकि (लोकेषु) विविध लोकों मेँ (विश्वरूपम्) नानाविध है, . (उपहृतः, उपहतः) बार-बार निमन्त्रित हृभ्रा (भक्षयति) भोगों का भक्षण करता है, भोगों को भोगता है । (सः) वह भरतिधिपति (उपहूतः, उपहूतः) सत्कार पूरवैक निमन्वित पराप्त होता है (भमुम्) उस लोक को ।

English

whereon they cook food is the South- ern Sacrificial Fire. Now that man who eats before the guest eats up the sacrifice and the merit of the house. He devours the milk and the sap:

अध्याय ९

श्लोक 6.6-2

२२॥ ए॒ते वै प्रि॒याश्चाप्रि॑याश्च॒र्त्विजः॑ स्व॒र्गं लो॒कं ग॑मयन्ति॒ यदति॑थयः

22|| ete vai priyāścāpriyāścartvijaḥ svargaṃ lokaṃ gamayanti yadatithayaḥ

हिन्दी अर्थ

लयौ तिंष्मतो छोकान् ज॑यति य एवं षेदं ॥१४॥ ६२ (वेद) जानता है तथा तदनुसार. भ्रतिथियज्ञ करता है वह (ज्योष्मतो . लोकान्) ज्योतिमंय लोकों पर (जयति) विजय पा लेता है उन मेँ यथेच्छ विचरता तथा संमान पाता है । लिङ्खी हृभा है, भौर मन्त्र १९-२४ मे गोजातीय बेल का वर्णेन हृभरा है।

English

prepared religious rites, and mental power to complete the arranged sacrifice. The arranged sacrifice of the man who offers food is a sacrifice to Prajāpati.

अध्याय ९

श्लोक 6.6-3

३५॥ श्रियं॑ च॒ वा ए॒ष सं॒विदं॑ च गृ॒हाणा॑मश्नाति॒ यः पूर्वोऽति॑थेर॒श्नाति॑

35|| śriyaṃ ca vā eṣa saṃvidaṃ ca gṛhāṇāmaśnāti yaḥ pūrvo'titheraśnāti

हिन्दी अर्थ

रेवतीः ग्रीवाः कृत्तिकाः स्कन्धः (३) विद्व को गोरूप कहने का प्रयोजन, ब्रह्माण्डे“ उक्ति का भी समथंनहोताहै। ॥

English

The man who offers food follows the steps of Prajāpati. The fire of the guests is the Āhavaniya, the fire in the dwelling is the Gārhapatya, that

अध्याय ९

श्लोक 6.6-4

याव॑त् सत्त्र॒सद्ये॑ने॒ष्ट्वा सुस॑मृद्धेनावरु॒न्धे ताव॑देने॒नाव॑ रुन्धे

yāvat sattrasadyeneṣṭvā susamṛddhenāvarundhe tāvadenenāva rundhe

हिन्दी अर्थ

रूपमे माना है, ओर गौ के भ्रवयवोंको विघेयरूप म । भ्रतः विदव को गोरूप कहा है, नकिं गौ को विइवरूप । “ददन भन्तरिकास्थानी है (निस्त ७।२।५) । भ्र॑तः यह विदत् है । " ५ बोलती है, मानो कड़कड़ाती है, मुख में । (३) लहररूप मे गतिशीला । इस तीसरे ११०८ भ्रथवंवेद-माष्य कां० ६॥ सु°७

English

whereon they cook food is the South- ern Sacrificial Fire. Now that man who eats before the guest eats up the sacrifice and the merit of the house.

अध्याय ९

श्लोक 6.6-5

४६॥ तस्मा॑ अ॒भ्रो भव॒न् हिङ्कृ॑णोति स्त॒नय॒न् प्र स्तौ॑ति

46|| tasmā abhro bhavan hiṅkṛṇoti stanayan pra stauti

हिन्दी अर्थ

नाद़ी.का रम्भ होता है । यह नाड़ी समग्र शरीर का नियमन करती है, ..‡ जाती है, अतः यह् मृत्युर्य भी है । सोमो रानां मरतिष्को. चौरुतरहवुः पथिभ्य धरहुतुः ॥२॥

English

He devours the milk and the sap: And the vigour and prosperity.

अध्याय ९

श्लोक 6.6-6

५३॥ यत् स॑भा॒गय॑ति॒ दक्षि॑णाः सभागयति॒ यद॑नु॒तिष्ठ॑त उ॒दव॑स्यत्ये॒व तत्

53|| yat sabhāgayati dakṣiṇāḥ sabhāgayati yadanutiṣṭhata udavasyatyeva tat

हिन्दी अर्थ

यलोक (उत्तरहनुः ) उपर का जबड़ा है, (पृथिवी भ्रधरहनुः ) पृथिवी ए विचुज्जिहवा परतो दन्तां रेवतीगीषाः छृिका स्कन्धः घमां वहः । ३ शकट का जुभ्रा (०६६०) रखा जाता है ।

English

And the progeny and the cattle: And the fame and reputation.

अध्याय ९

श्लोक 6.7

यदा॑वस॒थान् क॒ल्पय॑न्ति सदोहविर्धा॒नान्ये॒व तत् क॑ल्पयन्ति

yadāvasathān kalpayanti sadohavirdhānānyeva tat kalpayanti

हिन्दी अर्थ

मर्तः = ये ७८७ == ४९ प्रकार क मत् हैँ । यजुर्वेद १७।८०-५४५ ये म सति-सात मर्तो के नाम दिये है। महीधराचा्यं लिखते हँ “शुक्रज्था- २५) ।. रदिमियां नोकीली होती है । इस साम्य से मर्तो को मन्त्र ३ में

English

He who pours out mead and offers it wins for himself thereby as much as he gains by the performance of a very successful Sattrasadya sacrifice.

अध्याय ९

श्लोक 6.7-2

२३॥ स य ए॒वं वि॒द्वान् न द्वि॒षन्न॑श्नीया॒न्न द्वि॑ष॒तोऽन्न॑मश्नीया॒न्न मी॑मांसि॒तस्य॒ न मी॑मां॒समा॑नस्य

23|| sa ya evaṃ vidvān na dviṣannaśnīyānna dviṣato'nnamaśnīyānna mīmāṃsitasya na mīmāṃsamānasya

हिन्दी अर्थ

हि: का जुप्रा ०८० स्थापित किया जाता है कां० ९। सू० ७ , भ्रथवंवेद-माष्य ११९ ही पूर्वापिरभाव रेवतीः मीनराहि मे श्रौर कृत्तिकाः मेषराशि में

English

When the guest hath eaten he should eat. This is the rule for the animation of the sacrifice and the preservation of its continuity.

अध्याय ९

श्लोक 6.7-3

३६॥ ए॒ष वा अति॑थि॒र्यच्छ्रोत्रि॑य॒स्तस्मा॒त् पूर्वो॒ नाश्नी॑यात्

36|| eṣa vā atithiryacchrotriyastasmāt pūrvo nāśnīyāt

हिन्दी अर्थ

किया है किं भ्रथवंवेदानुसार राशि चक्र की श्रन्तिमि राशिमीनन हौ कर मेषराशि पडती है, क्योंकि भ्रंथवेवेदानुसार कृत्तिकाः या वृषराि सेः राशिचक्रका या वषंका भरारम्म माना दहै । यथा “सुहवमग्ने कृत्तिका मरनूभरूत होने लगती है, भौर शीतकाल के दोत्य.की संमाप्ति हो जाती है 1 प्रकार कृत्तिकाः नक्षत्र या वृषरारि, सौर रथ के वहन मे “वहः का कोम करती है । “वहः” है बेल का ककुद् ण जिस के. ्ग्रभाग पर शकट

English

Now the sweetest portion, the produce of the cow, milk, or flesh, that verily he should not eat. The man who having this knowledge pours out milk and offers it wins for himself as much

अध्याय ९

श्लोक 6.7-4

४२॥ स य ए॒वं वि॒द्वान् मां॒समु॑प॒सिच्यो॑प॒हर॑ति

42|| sa ya evaṃ vidvān māṃsamupasicyopaharati

हिन्दी अर्थ

गौ के लिये, (विधरणी) विस्तृतं पृथिवी दहै (निवेष्यः) गौके बैठने तथा विश्नाम करने का स्थान गोशाला । शयेनः क्रोडो रनतरिं पास्ये? बशपतिः कठद् तीः कीकसाः ।५।

English

thereby as he gains by the perfor- mance of a very successful Agnishtoma sacrifice. The man who having this knowledge pours out clarified butter and offers it wins for himself

अध्याय ९

श्लोक 6.7-5

वि॒द्योत॑मानः॒ प्रति॑ हरति॒ वर्ष॒न्नुद्गा॑यत्युद्गृह्णन् नि॒धन॑म्।नि॒धनं॒ भूत्याः॑ प्र॒जायाः॑ पशू॒नां भ॑वति॒ य ए॒वं वेद॑

vidyotamānaḥ prati harati varṣannudgāyatyudgṛhṇan nidhanam| nidhanaṃ bhūtyāḥ prajāyāḥ paśūnāṃ bhavati ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

(बृहतीः) बृहती ईह (कीकसाः ) रीढ् की भ्रस्थियां ए भी होता है जोकिं भन्तरिक्ष मे गति करता है, उड़ता है । विद्युत् भी फफड़े, जिन मे ्वास-्रह्वास रूपी वायु रहती है, (२) हृद्य; जिस में कि

English

thereby as much as he gains by the performance of a very successful Atirātra sacrifice. He who pours out mead and offers it wins for himself thereby as much as he gains by the

अध्याय ९

श्लोक 6.7-6

५४॥ स उप॑हूतः पृथि॒व्यां भ॑क्षय॒त्युप॑हूत॒स्तस्मि॒न् यत् पृ॑थि॒व्यां वि॒श्वरू॑पम्

54|| sa upahūtaḥ pṛthivyāṃ bhakṣayatyupahūtastasmin yat pṛthivyāṃ viśvarūpam

हिन्दी अर्थ

(श्रथवं ० १०।७।३२) । उदर स्वयं एक थैले जसा है, अन्तरिक्न सदश है, . १ 0 ““बुहुस्पतिः'' एक ग्रह है सौरमण्डल मे । यह ग्रह बड़ा है “बृहतः पतिः” भीगौकी पीठसे ऊपर उठा रहता है, सीगो को छोड़ कर गौ के सब रङ्गो

English

performance of a very successful Sattrasadya sacrifice.

अध्याय ९

श्लोक 6.8

यदु॑पस्तृ॒णन्ति॑ ब॒र्हिरे॒व तत्

yadupastṛṇanti barhireva tat

हिन्दी अर्थ

से ऊचां है । इस लिये बृहस्पति को गौ का कुकद् कहा है । “बृहतीः” यह .4 (निखक्त १०।१।११) । बड़ होने के कारण इसे बृहस्पति कहा है । का ललोतं.है । ज्ञानमय होने के कारणः इसे वेद कहते हँ (विद् ज्ञाने) ।

English

of cattle. He looks at the guests, he utters a gentle sound; he speaks, he signs the prelude; he calls for water, he chants the psalm; he offers the residue of the sacrifice, he takes up the conclusion.

अध्याय ९

श्लोक 6.8-2

२४॥ सर्वो॒ वा ए॒ष ज॒ग्धपा॑प्मा॒ यस्यान्न॑म॒श्नन्ति॑

24|| sarvo vā eṣa jagdhapāpmā yasyānnamaśnanti

हिन्दी अर्थ

फली हई है । सुषुम्णा न ड़ीज्ञान-साधिका है कीकसाः कहा है, भर्थात् गौ के कीकसं “ कां०९ 1 सु° ७: भथवेवेव-माष्य १२१ (देवानाम्) देवँ कौ (पलनीः) पलियां ( पृष्टयः) गौ बेल की पीठ

English

The man who having this knowledge pours out water and offers it obtains a resting-place for the procreation of living beings and becomes dear to living beings, even the man who having

अध्याय ९

श्लोक 6.8-3

३७॥ अ॒शि॒ताव॒त्यति॑थावश्नीयाद् य॒ज्ञस्य॑ सात्म॒त्वाय॑ य॒ज्ञस्यावि॑च्छेदाय॒ तद् व्र॒त॑म्

37|| aśitāvatyatithāvaśnīyād yajñasya sātmatvāya yajñasyāvicchedāya tad vratam

हिन्दी अर्थ

दिव्यगुणी-पतियों के लिये जसे उन की पत्नियां भाश्चय होती ईह वसे मारोद्वहन द्वारा प्राणिजगत् का उपकार करतीहै। : उपसदः है उपग्रह, जोक्रि निज ग्रहो के समीप स्थित हए उन की परि-

English

this knowledge pours out water and offers it. or him Dawn murmurs, and Savitar sings the prelude; Brihas- pati chants with vigour, and

अध्याय ९

श्लोक 6.8-4

याव॑द् द्वादशा॒हेने॒ष्ट्वा सुस॑मृद्धेनावरु॒न्धे ताव॑देनेनाव॑ रुन्धे

yāvad dvādaśāheneṣṭvā susamṛddhenāvarundhe tāvadenenāva rundhe

हिन्दी अर्थ

भरमा (दोषणी) दो सुजाए' ईः महादेव दो बाहृए" ह । करता है । “वरुणः पदनामं” . (निधं ० ५।४। ५।६) भ्रावृणोति रात्रिं स्व- १२२ भ्रथवेवेद-भाष्यं कां० € 1 सुऽ ७

English

Tvashtar joins in with increase; the Visve Devāh take up conclusion. He who hath this know ledge is the abiding-place of welfare, of progeny, and of cattle. For him the rising Sun murmurs, and Early Morning sings the prelude; Noon chants the

अध्याय ९

श्लोक 6.8-5

अति॑थी॒न् प्रति॑ पश्यति॒ हिङ्कृ॑णोत्य॒भि व॑दति॒ प्र स्तौ॑त्युद॒कं याच॒त्युद्गा॑यति

atithīn prati paśyati hiṅkṛṇotyabhi vadati pra stautyudakaṃ yācatyudgāyati

हिन्दी अर्थ

इसी प्रकार “श्रयंमा” भी माध्यमिकः हैवता है । ये दोनों “दोः” है, कन्धों मौर कोटनियों के मध्यवर्ती दौ भाग है । महादेव काः भ्रभिप्राय है देवो कां देव भ्र्थात् परमेदवर । सृष्टि रचना मेँ परमेव॑र-की दो बाहु कां वेणेन (यजु १६-१९.),.इन दो बाहों की शक्तियों कों, गौ की बाहृए" कटा है । बाह है .कोहनियो के-ग्रभाग, हाथों समेत । इसके द्वारा गौ की भ्रागे क्री.दो द्ग का कथन मन्त्रे हृब्राहै ˆ ,; : . इन्द्राणी है जवनमदेशा मसद्', वायु है पुछ बहती, वायु (पवमानः) है बाल धरछ' के, पवमानः गच्छन् वायुः (भ्रयरवं° ६।१९। १ सायण) !

English

psalm, Afternoon joins in; the setting Sun takes up the conclusion. He who hath this know ledge is the abiding place of welfare, of progeny, and of cattle. For him the Rain-cloud murmurs when present, sings the pre- lude when thundering, joins in

अध्याय ९

श्लोक 6.8-6

५५॥ स उप॑हूतो॒ऽन्तरि॑क्षे भक्षय॒त्युप॑हूत॒स्तस्मि॒न् यद॒न्तरि॑क्षे वि॒श्वरू॑पम्

55|| sa upahūto'ntarikṣe bhakṣayatyupahūtastasmin yadantarikṣe viśvarūpam

हिन्दी अर्थ

“ ;-्रह्य भौर कषतर दो कटिभ्रवेश श्रोणी है, बल है दो ऊद. दो घुटनों केऊपरके भागः. कटिग्रदेश तक ऊर = उर्वोरोजः (भ्रथर्व० १९।- ६०।२) । कटिप्रदेश-= गौ की पिछली टांगे जहां जुड़ी रहती हँ । कष्ठिकाः = ह + ्स्थिकाः ्रृति भ्दितिः है खुर फा । † देवमाता" (निरुक्त ४।४।२२), सूर्थादि देवो की माता प्रकृति श्रथवा “श्रदितिः -पृथिवी नाम” (निघं० १।१) । -पृथिवी को का त नाम निष 2६) (पृषती शर भ्रमा कहा है,

English

when lightening, chants the psalm when raining, and takes up the conclusion when it stays the downpour. He who hath this knowledge is the abiding- place of welfare, of progeny, and

अध्याय ९

श्लोक 6.9

यदु॑परिशय॒नमा॒हर॑न्ति स्व॒र्गमे॒व तेन॑ लो॒कमव॑ रुन्द्धे

yadupariśayanamāharanti svargameva tena lokamava runddhe

हिन्दी अर्थ

दूसरे के सामने, दो कषितिजों पर होते है, मानो यै उठे हए भरमि के दो स्कन्वस्प हं । (२) पूछकेदहिलतेही पूछ के बाल हिलते है मच्छर के निवारण के लिये । कां9.९।।.सु९.७ भ्रथरववेद-भाष्प् १२३

English

He, having been invited in air, regales, invited, in that which wears all various forms in air. He having been invited in the sky, regales, invited, in that which wears all various forms in the sky.

अध्याय ९

श्लोक 6.9-2

सर्वो॒ वा ए॒षोऽज॑ग्धपाप्मा॒ यस्यान्नं॒ नाश्नन्ति॑

sarvo vā eṣo'jagdhapāpmā yasyānnaṃ nāśnanti

हिन्दी अर्थ

दारा किभमि नापी जाती है" प्रमीयते यया सा प्रमा” । पादो द्वारा भूमि नापी जाती है", “फटे” को ०० (पाद) कहते हैँ! इसं प्रकारं भ्रदिति . (चेतः) चित्त है (हृदयम्). गौ का हृदय, (मेषा) ' प्राशु ग्रहणशंवित स्थूल-भान्त “ ०01071 , (पर्व॑ताः) पव॑त है (प्लारयः) एलारियां, मासि

English

water, he chants the psalm; he offers the residue of the sacrifice, he takes up the conclusion. When he summons the door-keeper he gives instruction.

अध्याय ९

श्लोक 6.9-3

३८॥ ए॒तद् वा उ॒ स्वादी॑यो॒ यद॑धिग॒वं क्षी॒रं वा॑ मां॒सं वा॒ तदे॒व नाश्नी॑यात्

38|| etad vā u svādīyo yadadhigavaṃ kṣīraṃ vā māṃsaṃ vā tadeva nāśnīyāt

हिन्दी अर्थ

„ कुक्षिः पशु की वह ली जिसमे कि. चनाया हुभ्रा चारा एकच्रित'होता १२४ भ्रथववेद-भाष्य काऽ ९ -सू०७ कोधो वृक्कौ मन्युराण्डौ भला शेः ॥१३॥ . . (कषः) कोष है (वृक्कौ) दो गुदे, (न्युः). मनयु है (भाण्डौ) दो

English

He (the door-keeper) pronounces the sacrificial formula in his answer to what he hears. When the attendants with vessels in their hands, foremost and hindmost, come in, they are

अध्याय ९

श्लोक 6.9-4

४३॥ स य ए॒वं वि॒द्वानु॑द॒कमु॑प॒सिच्यो॑प॒हर॑ति

43|| sa ya evaṃ vidvānudakamupasicyopaharati

हिन्दी अर्थ

- करोषमे भरज्ञानाय होता है, रौर मन्यु मे ज्ञानांश होता है । अ.दोनों (नदी) नदी है (सूत्री) नाभिनाल, (वषंस्य पतयः) वर्षा के पति है (स्तनाः ) स्तनः, (स्तनयित्नुः) गजता मेष है (ऊषः) दुगधाशय । रदिमयां या, अन्तरिक्ष है (चमं) गौ की चमडी, (श्रोषधयः लोमानि) भोषधियां हैँ गौ के लोम,

English

just the priests who manage the Soma cups.

अध्याय ९

श्लोक 6.9-5

४७॥ उप॑ हरति॒ प्रति॑ हर॒त्युच्छि॑ष्टं नि॒धन॑म्

47|| upa harati prati haratyucchiṣṭaṃ nidhanam

हिन्दी अर्थ

(देवजनाः) उन्मत्त जन हैँ (गुदाः) गौ की गुदा कँ ्रवयव, (मनुष्याः) परमेदवर को मी. मन्यु कहा है, भौर उससे मन्यु्ी प्रार्थना मीकी गर हं कां० ९। सुऽ७ भ्रथववेदं-भाष्य -१२५

English

Not one of them is incompetent to sacrifice. Or if the host, having offered food to his guest, goes up to the house, he virtually enters the

अध्याय ९

श्लोक 6.9-6

५६॥ स उप॑हूतो दि॒वि भ॑क्षय॒त्युप॑हूत॒स्तस्मि॒न् यद् दि॒वि वि॒श्वरू॑पम्

56|| sa upahūto divi bhakṣayatyupahūtastasmin yad divi viśvarūpam

हिन्दी अर्थ

देव पद “दिव्“धातुका रूपदहै। दिव् का भ्रथं “मद” मी होता है (दिवादिः) । भ्रतः देवजनाः उन्मत्त जन । ये गौ के गुदा के समान. है , (निरक्त ३।२।७) । मननपुवक कर्पट बनने या सीनेवाले व्यक्ति अपने देवजनों तथा मनुष्यो से भ्रतिरिक्त प्राणी केवल भोजनपरायण होते है, “्रत्राः होते है भरद् +राः, ग्रतः इन्द उदर कहा है ि

English

bath of purification. When he distributes food he distributes priestly fees; what he performs he asks as favour.

अध्याय ९

श्लोक 6.10

यत् क॑शिपूपबर्ह॒णमा॒हर॑न्ति परि॒धय॑ ए॒व ते

yat kaśipūpabarhaṇamāharanti paridhaya eva te

हिन्दी अर्थ

भोजन परस वाते है चमसाष्वयुः (५९); -परोसने वाल भरनम्नटोत्री न होने चाहिए (५२); अवभृथस्नान (५३) ; ऋत्विजो को दक्षिणा (५४).;. - , १. स्वगं की कामना वाला “यो विघातू" सूक्ते दारा जप करे । एेसा.वित्ियोग ; है । परन्तु सायणाचायं की हस विनियोग से विमति है । वे कहते है कि “यो विद्यात्” , । की सेवा का फल, तथा भ्रतिथियज्ञ की प्रशंसा परक है । -

English

This Unborn cleft apart in the beginning: his breast became the earth, his back was heaven. His middle was the air, his sides the regions; the hollows of his belly formed both oceans.

अध्याय ९

श्लोक 6.10-2

२६॥ स॒र्व॒दा वा ए॒ष यु॒क्तग्रा॑वा॒र्द्रप॑वित्रो॒ वित॑ताध्वर॒ आहृ॑तयज्ञक्रतु॒र्य उ॑पहर॑ति

26|| sarvadā vā eṣa yuktagrāvārdrapavitro vitatādhvara āhṛtayajñakraturya upaharati

हिन्दी अर्थ

यद् वा.भर्पियिपतिरपिथीन् भति पडय॑ति देव॒जैनं भेकते ॥३॥, (यद्). जो (भ्नतिथिपतिः) -अतिथियों की रक्षा करने वाला गृहस्थ तुतः. (देवयजनम् ) देवो के अरति जहां भराहुतियां दरी जाती है उसु यज्ञ- शाला कों (रक्षते) देखता है । ४ ्रति पद्यति=भ्रागत ्रतिथियों मे से प्रत्यक को मानपूवक देखन

English

This Unborn cleft apart in the beginning: his breast became the earth, his back was heaven. His middle was the air, his sides the regions; the hollows of his belly formed both oceans.

अध्याय ९

श्लोक 6.10-3

प्र॒जानां॑ प्र॒जन॑नाय गच्छति प्रति॒ष्ठां प्रि॒यः प्र॒जानां॑ भवति॒ य ए॒वं वि॒द्वानु॑द॒कमु॑प॒सिच्यो॑प॒हर॑ति

prajānāṃ prajananāya gacchati pratiṣṭhāṃ priyaḥ prajānāṃ bhavati ya evaṃ vidvānudakamupasicyopaharati

हिन्दी अर्थ

(यद् उपस्तृणन्ति) जो बिदछछौना विते ह, (तत बहिः एव) वह यज्ञ स्थल मँ कुशास्तरण हीहै। र कां० £ । सु° ६ . श्रथर्ववेद्-भाष्य ९५ न उपरिदश्यन = सोने के लिये ऊंची चारपाई ॥ मानो यह ऊर्ध्वा ॑ दिशा (यद्) जो (करिपूपबहैणम् भराहरन्ति) जो तकिया श्रौर मसनद ला ह 8 परिषयः एव.) वे परिषियां हौ ह । यज्ञ स्थल को (र के साधन र परिषयः=यज्ञ स्थल. को घेरने के लिये चारो प्रोर का चेरा

English

This Unborn cleft apart in the beginning: his breast became the earth, his back was heaven. His middle was the air, his sides the regions; the hollows of his belly formed both oceans.

अध्याय ९

श्लोक 6.10-4

नि॒धनं॒ भूत्याः॑ प्र॒जायाः॑ पशू॒नां भ॑वति॒ य ए॒वं वेद॑

nidhanaṃ bhūtyāḥ prajāyāḥ paśūnāṃ bhavati ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

(ग्रावाणः एव) सिल-वहा ही है । । ९६ श्रथरवेवेद-माष्य कां9 ६ । सूु-६ उलूखल भौर मुसल ब्रीहि (धाने) को कूट कर तण्डुल तय्यार करने के लिये होते है, श्नौर सिल-वट्रा पीठी पीसने तथा सोमं भोषधि पीस कर सोमरस निकालने के लिये होते है

English

This Unborn cleft apart in the beginning: his breast became the earth, his back was heaven. His middle was the air, his sides the regions; the hollows of his belly formed both oceans.

अध्याय ९

श्लोक 6.10-5

५७॥ स उप॑हूतो दे॒वेषु॑ भक्षय॒त्युप॑हूत॒स्तस्मिन् यद् दे॒वेषु॑ वि॒श्वरू॑पम्

57|| sa upahūto deveṣu bhakṣayatyupahūtastasmin yad deveṣu viśvarūpam

हिन्दी अर्थ

(कृष्णाजिनम्) कृष्णमृग की छाल । है । सोमयाग में वागुदेवताक पात्र होतें है, छोटी-छोटी प्यालियां जिनके हारा सोमरस प्रानी के पात्रों कोवायुकेपा््रोद्वारा शूपित इसलिये कियादहैकि पानी वर्षाहारा

English

This Unborn cleft apart in the beginning: his breast became the earth, his back was heaven. His middle was the air, his sides the regions; the hollows of his belly formed both oceans.

अध्याय ९

श्लोक 6.11

यदा॑ञ्जनाभ्यञ्ज॒नमा॒हर॒न्त्याज्य॑मे॒व तत्

yadāñjanābhyañjanamāharantyājyameva tat

हिन्दी अर्थ

कां9 ९ । सु भ्रथवेवेद-भाष्य :9 करता है (वै) निश्चय से (भ्रतिथिपतिः कुर्ते) भ्रतिथिपति वही करता पड़ताल करता है कि (इदम् भूयः) यहं प्रभूत मातरा में है (इदम् इति) या

English

Who gives the Goat Panchaudana illumined with a priestly fee. Let him not break the victim’s bones, let him not suck the marrow out.

अध्याय ९

श्लोक 6.11-2

२७॥ प्रा॒जा॒प॒त्यो वा ए॒तस्य॑ य॒ज्ञो वित॑तो॒ य उ॑प॒हर॑ति

27|| prājāpatyo vā etasya yajño vitato ya upaharati

हिन्दी अर्थ

श्रतिथिपरति सेवक को (यद् श्राह) जो कहता है कि. (भूयः उद्र) (वर्षीयांसम् कुरुते) प्रवृद्ध करतादहै। यथा “श्रन्तं वै प्राणिनां प्राणः" । कायं का कारण में उपचार हृभरा है

English

Who gives the Goat Panchaudana illumined with a priestly fee. Let him not break the victim’s bones, let him not suck the marrow out.

अध्याय ९

श्लोक 6.11-3

५८॥ स उप॑हूतो लो॒केषु॑ भक्षय॒त्युप॑हूत॒स्तस्मि॒न्य यल्लो॒केषु॑ वि॒श्वरू॑पम्

58|| sa upahūto lokeṣu bhakṣayatyupahūtastasminya yallokeṣu viśvarūpam

हिन्दी अर्थ

हवींषि = भ्रतिथिसेवा यतः यज्ञ है, इसलिये भोज्य पदार्थो को हवींषि कहा है । उपहरति = उपहार रूप मे देता है । भ्रात्मत् जुहोति) भरतिथि म्राहृतियां .अ्रपने मे देताहै। सचा हस्तेन भ्ाणे यूषै सुककारेणं वषट्कारेणं ॥५॥ २२

English

Who gives the Goat Panchaudana illumined with a priestly fee. Let him not break the victim’s bones, let him not suck the marrow out.

अध्याय ९

श्लोक 6.12

यत् पु॒रा प॑रि॒वेषात् स्वा॒दमा॒हर॑न्ति पुरो॒डाशा॑वे॒व तौ

yat purā pariveṣāt svādamāharanti puroḍāśāveva tau

हिन्दी अर्थ

१. यूप, य्ञियखम्भा . होता है जिस के साथ युज्ञियपदु बन्धाः जाता है की १ ग हन् त्तिक तुमु क च 11 ॥ २. ५--श्रथवेवेद-भाष्य कं२.६।-सु०.६

English

The five gold pieces, and the five new garments, and the five milch-kine yield him all his wishes.

अध्याय ९

श्लोक 6.12-2

२८॥ प्र॒जाप॑ते॒र्वा ए॒ष वि॑क्र॒मान॑नु॒विक्र॑मते॒ य उ॑प॒हर॑ति

28|| prajāpatervā eṣa vikramānanuvikramate ya upaharati

हिन्दी अर्थ

दवारा उसके जीवनं कौ निष्पाप कर देते है . २. सदुपदेशो दवारा गृहस्थियो को सन्मां दर्शा कर । कां० । सु०-६. भ्रयववेद-भाघ्य ०९६

English

The five gold pieces, and the five new garments, and the five milch-kine yield him all his wishes.

अध्याय ९

श्लोक 6.12-3

५९॥ स उप॑हूत॒ उप॑हूतः

59|| sa upahūta upahūtaḥ

हिन्दी अर्थ

वह् कुसंगी हो कर पापकर्मो मे प्रवृत्त हो सकता है । .-. : सवेदा षा एषं यक्तप्रावाद्रेपेवि नो विवताध्वेर माहूतयदवरतुधे (यः) ज (उपहरति) उपहार रूप मेँ भ्रनन देता है (वं) निश्चय से (एषः) यह संदा ). सब काल (युक्तप्रावा) सिलवटरी को तय्यार रखता

English

The five gold pieces, and the five new garments, and the five milch-kine yield him all his wishes.

अध्याय ९

श्लोक 6.13

यद॑शन॒कृतं॒ ह्वय॑न्ति हवि॒ष्कृत॑मे॒व तद्ध्व॑यन्ति

yadaśanakṛtaṃ hvayanti haviṣkṛtameva taddhvayanti

हिन्दी अर्थ

सेवा के लिये; तय्यार रहना मानो सभी.प्रकार के यज्ञो -ौरं क्तुधों को प्रजपिति सम्बन्धी यज्ञ (विततः) फला .“रहतां है (थः . उपहरति) उपहार रूप. मे.श्रघ्त प्रदान करता रहता है। रक्षा के लिये परमेश्वर रचित संसार-यज्ञ सवकालं होता रहता है ।-जोः द्मतिथिपति सर्वकाल; अंतिधिरयो की सेवा के लिये संनद्धः रहता वहः मानो प्राजापत्य यज्ञ कर रहौ हौता है. .

English

The twain shall not be parted if they give the Goat Panchaud- ana. One world with the re-wedded wife becomes the second hus- band’s home.

अध्याय ९

श्लोक 6.13-2

२९॥ योऽति॑थीनां॒ स आ॑हव॒नीयो॒ यो वेश्म॑नि॒ स गार्ह॑पत्यो॒ यस्मि॒न् पच॑न्ति॒ स द॑क्षिणा॒ग्निः

29|| yo'tithīnāṃ sa āhavanīyo yo veśmani sa gārhapatyo yasmin pacanti sa dakṣiṇāgniḥ

हिन्दी अर्थ

(यः). जो .(उपहरति) . उपहाररूपः मे ; भ्रन्न प्रदान करता है (वै) भ्र्थात् उस का पदानुयायी होता है । , (यः) जो (ग्रतिथिनाम्) भ्रतिथियों की जाठर रमि है (सः) वह्

English

The twain shall not be parted if they give the Goat Panchaud- ana. One world with the re-wedded wife becomes the second hus- band’s home.

अध्याय ९

श्लोक 6.13-3

६०॥ आ॒प्नोती॒मं लो॒कमा॒प्नोत्य॒मुम्

60|| āpnotīmaṃ lokamāpnotyamum

हिन्दी अर्थ

श्राहुतियां दी जाती है, (२) दूसरी भ्रम्नि होती है गाहपत्य, जो कि सदा (१ से ९) १-६, ९ न्रिषदा पिपीलिकमध्या गायत्री; ७ साम्नी बृहतीः; (यः) जो भरतिथिपति (प्रतिथेः) भ्रतिथि से (पुर्वः) पहले (भ्रदनाति) खा लेता है (वे) निद्चय से (एषः) यह (गृहाणाम्) गृहवासियों के

English

The twain shall not be parted if they give the Goat Panchaud- ana. One world with the re-wedded wife becomes the second hus- band’s home.

अध्याय ९

श्लोक 6.14

ये व्री॒हयो॒ यवा॑ निरु॒प्यन्तें॒ऽशव॑ ए॒व ते

ye vrīhayo yavā nirupyanteṃ'śava eva te

हिन्दी अर्थ

भ्रातिभ्यं वंरवदेवदव इष्टमित्यभिधीयते ॥ पुतम् = वापी कूषतडागावि देवतायतनानि च । . कां०.६ । स० ६ परयववेद्-माष्य' १०१. (यः) जो भ्रतिथिपति (भ्रतिथेः पूर्वः श्ररनाति) अतिथि से पहिले खा लेता है । (वै) निश्चय से (एषः गृहाणाम् पयः च, रस च भ्ररनाति) यह गृहवासियों के लिये दघ को भ्नौर रस. को खाता है, विनष्ट करता ह ।

English

A coverlet, a robe, or gold, go to the loftiest sphere of heaven. Himself, the father and the son, the grandson, and the father’s sire,

अध्याय ९

श्लोक 6.14-2

६१॥ ज्योति॑ष्मतो लो॒कान् ज॑यति॒ य ए॒वं वेद॑

61|| jyotiṣmato lokān jayati ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

जो श्रतिथिपति श्रतिथिसे पिले खालेताहै, निरचय से वह गृह वासियों की ऊर्जा को भ्रौर वृद्धि को खा. लेता है, विनष्ट करता है । जो श्रतिथिपति श्रतिथि से पहिले खा लेता है, निरुचय से, वह गृह- वासियों की प्रजा को श्रौर पशुभ्रोंकोखा लेता है, विनष्ट कर देता है1. कीपि चवा एष यदाश्च गृ्टाणांमहनति यः पूरवाऽतिथेर- जो भ्रतिथिपति अतिथि से पिले ला लेता है, निदचय से, वह गृह वासि्यो की. कीति भौर यच्ःको खा लेता है, विनष्ट कर देता है ।

English

A coverlet, a robe, or gold, go to the loftiest sphere of heaven. Himself, the father and the son, the grandson, and the father’s sire,

अध्याय ९

श्लोक 6.15

यान्यु॑लूखलमुस॒लानि॒ ग्रावा॑ण ए॒व ते

yānyulūkhalamusalāni grāvāṇa eva te

हिन्दी अर्थ

जो भ्रतिथिपति श्रतिथिसे पहिले खा लेता है वह कीश्री : मौर संविद् कोखालेता है, विनष्ट कर देता है। ऋ १३९. भ्रथेर्ववेद-याष्यः कां०.९ १ सुभ द खाना. दान्तो मरौर मुख. दवारा नहीं. हो सकता, इस लिये “विनाश्च करना यह् भ्रं सुसंगत प्रतीत होता है । ।

English

Mother, wife, her who bore his babes, all the beloved ones I call. The man who knows the season named the Scorching—the Goat

अध्याय ९

श्लोक 6.16

शूर्पं॑ प॒वित्रं॒ तुषा॑ ऋजी॒षाभि॒षव॑णी॒रापः॑

śūrpaṃ pavitraṃ tuṣā ṛjīṣābhiṣavaṇīrāpaḥ

हिन्दी अर्थ

भोजन से पष्िले भोजन करना सभ्यता भ्रौर शिष्टाचार फे विपरीत है। पति को यह निजत्रत. सममना चाहिए. किः वह भ्रतिधि से पुवं मोजनन करे । भ्रतिथिसेवा यज्ञ" रूप है । यज्ञ में देवता को भाहति देने के पहचात् पतद्रा उ. -स्पादीथो यदधिगवं क्षीरं वा. मसं वा तर्देवं

English

Pafichaudana is this scorching season He lives himself, he verily burns up his hated rival’s fame,

अध्याय ९

श्लोक 6.17

स्रुग् दर्वि॒र्नेक्ष॑णमा॒यव॑नं द्रोणकल॒शाः कु॒म्भ्योऽ वाय॒व्या॒ऽनि॒ पात्रा॑णी॒यमे॒व कृ॑ष्णाजि॒नम्

srug darvirnekṣaṇamāyavanaṃ droṇakalaśāḥ kumbhyo' vāyavyā'ni pātrāṇīyameva kṛṣṇājinam

हिन्दी अर्थ

(वैः उ). -निरवय से (एतत्) "यह -(स्वादवीयः)- भधिक, स्वादु है मांसधरा दूषी र-मास, "(तदेव ) . उसे ही. (न . भदनीयात्) श्रोत्रिय भ्रतिथि से पिल न'लंए । क कों -९।सु०६ भयवंवेदं-माष्य भ्रधिगवम् का.भरथं “पृथिवीं मे” भी सम्भव है । “गौः. पृथिवी. नाम (निषं० १1१) । वेदों मे. गौ कोः “श्रष्त्या' कंहा द - (निधं ° २।११) श्रत गोमांस की श्रनृन्ञा वेद नही दे सकता । “मांसं” का श्रथं प्राणिमांस मरौर भप्राणिमांस भी । दातप॒थ .१।२।३।८ मे. चावल श्रौर जौ की पोटी पुर

English

Who gives the Goat Panchaudana illumined with the priestly fee. The man who knows the season called the Working takes to himself the active fame, his

अध्याय ९

श्लोक 7.1

गौः १-२६ ( एकः पर्यायः) ब्रह्म।गौः।१ आर्ची बृहती, २ आर्च्युष्णिक्, ३, ५ आर्च्यनुष्टुप्, ४, १४-१६ साम्नी बृहती, ६,८ आसुरी गायत्री, ७ त्रिपदा पिपीलिकमध्या निचृद्गायत्री, ९, १३ साम्नी गायत्री, १० पुर उष्णिक्, ११-१२, १७, २५ साम्न्युष्णिक्, १८, २२ एकपदाऽसुरी जगती, १९ एकपदाऽसुरी पङ्क्तिः, २० याजुषी जगती, २१ आसुर्यनुष्टुप्, २३ एकपदाऽऽसुरी बृहती, २४ साम्नी भुरिग्बृहती, २६ साम्नी त्रिष्टुप्, (७, १८-१९, २२-२३ आभ्योऽतिरिक्ता द्विपदा)।प्र॒जाप॑तिश्च परमे॒ष्ठी च॒ शृङ्गे॒ इन्द्रः॒ शिरो॑ अ॒ग्निर्ल॒लाटं॑ य॒मः कृका॑टम्

gauḥ 1-26 ( ekaḥ paryāyaḥ) brahma| gauḥ| 1 ārcī bṛhatī, 2 ārcyuṣṇik, 3, 5 ārcyanuṣṭup, 4, 14-16 sāmnī bṛhatī, 6,8 āsurī gāyatrī, 7 tripadā pipīlikamadhyā nicṛdgāyatrī, 9, 13 sāmnī gāyatrī, 10 pura uṣṇik, 11-12, 17, 25 sāmnyuṣṇik, 18, 22 ekapadā'surī jagatī, 19 ekapadā'surī paṅktiḥ, 20 yājuṣī jagatī, 21 āsuryanuṣṭup, 23 ekapadā''surī bṛhatī, 24 sāmnī bhurigbṛhatī, 26 sāmnī triṣṭup, (7, 18-19, 22-23 ābhyo'tiriktā dvipadā)| prajāpatiśca parameṣṭhī ca śṛṅge indraḥ śiro agnirlalāṭaṃ yamaḥ kṛkāṭam

हिन्दी अर्थ

(रकनासि) राक्षसस्वभाव के लोग हँ (लोहितम्) गौ का खून, (इतर- जनाः) उपयु क्त कथितो से भिन्न लोग है, (उबघ्यम्) गौ का गोबररूप, राक्षस खूनी स्वभाव वाले होते है, रतः इहं खून कहा है (अभ्रम्) जल से भरा मेष है (पीवः) गौ का मोटा शरीर, (मज्जा)

English

He, having been invited among the gods, regales, invited in that which wears all various forms among the Gods.

अध्याय ९

श्लोक 7.2

सोमो॒ राजा॑ म॒स्तिष्को॒ द्यौरु॑त्तरह॒नुः पृ॑थि॒व्यऽधरह॒नुः

somo rājā mastiṣko dyauruttarahanuḥ pṛthivya'dharahanuḥ

हिन्दी अर्थ

(यः) जो (एवम् इस प्रकार (वेद) जानता है (एनम्) इये (विद्व- रूपाः) विद्वः केः रूप वाले; (स्वल्पाः). सर्वरूपी. (पशवः) पशु (उपति- दुषके लिये गौ का, कृषि के लिये बल का, सवारी के निये भ्रव का, गृहु- रक्षा के लिथे दवा का । इस प्रकारः विविघ प्रयोजनों के लिये. विविध पशु का संग्रह करता हैः।. - काण्ड ९ । सूक्त ७ । सम्पूर्णं

English

The All-embracing (Aditi) is the hide, the herbs are her hair,. and the Lunar Mansions her form. The hosts of Gods are her entrails, man are her bowels, and demons her abdomen.

अध्याय ९

श्लोक 7.3

वि॒द्युज्जि॒ह्वा म॒रुतो॒ दन्ता॑ रे॒वति॑र्ग्री॒वाः कृत्ति॑का स्क॒न्धा घ॒र्मो वहः॑

vidyujjihvā maruto dantā revatirgrīvāḥ kṛttikā skandhā gharmo vahaḥ

हिन्दी अर्थ

„.. बहिषिटं निदरैवतु काहाबाहं तवोदरात् । . १; "हरिमा" केः लिः भयव ५..१।२२।४ भं शुक भर्थात् तोते का दृष्टान्त विया है । तोता हरा हौतां है षीला नहीं । हरिमा रोग.19४०0न्६ का ही भेद है। जिगर । कौ र (भट पित्त यदि देर तक स्का रहे तो वहं हरा प्रकृ जातौ है, जिससे दस्तों में हरापन भरा जाता है जिगर रस स्वयं पीला -होता है । । १३४ भरथववेद-भाष्य कौ०.९। सु०८

English

All malady that wrings thy brow we charm away with this our spell. So that Consumption may depart forth from thine ears and from. thy mouth, All malady that wrings thy brow we charm away with this our spell.

अध्याय ९

श्लोक 7.4

विश्वं॑ वा॒युः स्व॒र्गो लो॒कः कृ॑ष्ण॒द्रं वि॒धर॑णी निवे॒ष्यः

viśvaṃ vāyuḥ svargo lokaḥ kṛṣṇadraṃ vidharaṇī niveṣyaḥ

हिन्दी अर्थ

हमा मूत्र, (तव उदरात्) तेरे उदर से, पेट से (बिलं बहिः) बस्तिछिद्र भहम्) निकालदेने को विधि गैनेकहंदीहै। (ते) तेरे (उदरात्). पेट से, (क्लोम्नः) फेफडे से, (नाभ्याः) नाभिं

English

The malady that makes one deaf, the malady that makes one blind, All malady that wrings thy brow we charm away with this our spell.

अध्याय ९

श्लोक 7.5

श्ये॒नः क्रो॒डो॒३ऽन्तरि॑क्षं पाज॒स्यं॑१ बृह॒स्पतिः॑ क॒कुद् बृ॑ह॒तीः कीक॑साः

śyenaḥ kroḍo3'ntarikṣaṃ pājasyaṃ1 bṛhaspatiḥ kakud bṛhatīḥ kīkasāḥ

हिन्दी अर्थ

ब्रपः. रक्तरूपी जलं (सोमानम्) सीमा कों (विरुजन्ति) विशेषतया खण क्रते है, वै. (भ्रहिसन्तीः, भ्रनामयाः) न हिसाः करने वाले, रोग रहित वन्तु) द्रवरूप में निकल जाय । .: का. निदरत्चक-ह :( भवं ०- १०।२।११). मर रक्त-ापः -मूर्घा.की शरोर गेति करतेःहएं अपने मेः विलीन यकष्म-क्रिमियो ७७65 को जे जाते है, भौर

English

The throbbing pain in all thy limbs that rends thy frame with fever-throes, All malady that wrings thy brow we charm away with this our spell. The malady whose awful look makes a man quiver with alarm,

अध्याय ९

श्लोक 7.6

दे॒वानां॒ पत्नीः॑ पृ॒ष्टय॑ उप॒सदः॒ पर्श॑वः

devānāṃ patnīḥ pṛṣṭaya upasadaḥ parśavaḥ

हिन्दी अर्थ

. सिरकी सीमा. . -पालाण९' करो रुण कर देते है 1. उपचार द्वारा ये १ मंस्तिंष्कावरणं । इस. के सुजन को पाश्णोपषपंऽ कहते है । क्रिमि मूत्ररूप+ में जब मूत्रमाग से, बाहर निकल जाति है, तब सिर हिसा रहित भ्रौर -रोगरहित हो जाते ई । क्रिमियों भर्थात् ७6705 के लिये देखो

English

Fever whom every Autumn brings we charm away with this our spell. Disease that creeps about the thighs and, after, reaches both the groins,

अध्याय ९

श्लोक 7.7

मि॒त्रश्च॒ वरु॑ण॒श्चांसौ॒ त्वष्टा॑ चार्य॒मा च॑ दो॒षणी॑ महादे॒वो बा॒हू

mitraśca varuṇaścāṃsau tvaṣṭā cāryamā ca doṣaṇī mahādevo bāhū

हिन्दी अर्थ

करते है, श्रौर (कीकसाः) हंसलि्यों तथा पफंसलियों के (श्नु) साथ-साथ (तन्वति). फैल जाते है, वे (अदिसन्तीः). न हिसा करने -वाले, (भरना- (याः) जो भ्राषः रक्त जल. (पाश्वे) दो पाद्व . के (उप) समीप (याः) जो (भ्रषंणीः) गतिः करने वाले भायः रक्त-जल (ते) तेरी

English

Consumption from thine inward parts we charm away with this our spell. If the disease originates from love, from hatred, from the heart, Forth from the heart and from the limbs we charm the wasting malady.

अध्याय ९

श्लोक 7.8

इ॒न्द्रा॒णी भ॒सद् वा॒युः पुच्छं॒ पव॑मानो॒ बालाः॑

indrāṇī bhasad vāyuḥ pucchaṃ pavamāno bālāḥ

हिन्दी अर्थ

समीप, (छषन्ति) गति करे है, वे. (भरहिसन्तीः) . न हिसा करे हए : (अनामयाः) रोग रहित भ्रापः रक्त-जल (बिलम्, बहिः) वस्ति के छिद्र से बाहर (निद्र॑वन्तु) व्रवरूप मे निकल जांयः । 1 । =“ (मावा (मन्त १३) । वक्षणाः =शरीरके दो पाश्वं मँ पेट के.अन्दर की भ्रोर के माग! तिरक्वीः-- (०७७86, . ,

English

The yellow Jaundice from thy limbs, and Colic from the parts within, And Phthisis from thine inward soul we charm away with this our spell.

अध्याय ९

श्लोक 7.9

ब्रह्म॑ च क्ष॒त्रं च॒ श्रोणी॒ बल॑मू॒रू

brahma ca kṣatraṃ ca śroṇī balamūrū

हिन्दी अर्थ

, (गाः) जो रापः रक्त-जल (गुदाः-नु) गुदा के श्रवयरवो के साथ (निन्त) पी जाति है. (च). श्रौरः परंषि) जोड़ को (विरुजन्ति) तौड़ देते हँ वे उपचार यां चिकित्सा द्वाराः (भ्रहिसन्तीः) न हिसा करते णको के,जोढ द्वारा मालारूप मे बना ह्राद, जिनुःमे सुषुम्णा नाड़ी सूत्र मे मज्जा होती है । -मज्जा = था छण - ; :.

English

Let wasting malady turn to dust, become the water of disease. I have evoked the poison-taint of all Consumptions out of thee. Forth from the hollow let it run, and rumbling sounds from thine inside.

अध्याय ९

श्लोक 7.10

धा॒ता च॑ सवि॒ता चा॑ष्ठी॒वन्तौ॒ जङ्घा॑ गन्ध॒र्वा अ॑प्स॒रसः॒ कुष्ठि॑का॒ अदि॑तिः श॒फाः

dhātā ca savitā cāṣṭhīvantau jaṅghā gandharvā apsarasaḥ kuṣṭhikā aditiḥ śaphāḥ

हिन्दी अर्थ

कहा है । भ्रदिविनौ है मेषरारिस्थ दो तारा । ये चुलोकमे ऊचे उठे हुए है, है 1 इन में तादात्म्य दर्चाया है । ४ . भ्रोर मुख कर 'खड़ा बेल । (यमः) -रदिमयों को .नियन्तंत किया हृभ्रा सूयं है

English

He, having been invited in the worlds, regales, invited, in that which wears all various forms in the worlds. He, having been invited hath been invited.

अध्याय ९

श्लोक 7.11

चेतो॒ हृद॑यं॒ यकृ॑न्मे॒धा व्र॒तं पु॑री॒तत्

ceto hṛdayaṃ yakṛnmedhā vrataṃ purītat

हिन्दी अर्थ

रिमरूपी रेश्वये वाला होता है, उधर मुख कर खडा बेल मानो सू्य॑रूप है। सूयं .पूवंदिश्ा से. जब. दक्षिण.की रोर जाता है तब रीतकाल होता है, मानो उस समय सूयं यमरूप होता है, यतः. वह् निज -रदिमयों को का सूर्यं, मानो दक्षिण को भोर मूख कर खड़ा बेल है । दक्षिण की भोर खड़ा बेल कहा है। इसके दारा. वर्चा दिया है कि सूयं वास्तव मे एक स्थानम खड़ादहै। उस में गति पृथिवी.की गति के कारण प्रतीतः होती है । तिष्ठन् = “श्ठा गतिनिवृत्तौ. . , ... ..

English

He gains this world and the world yonder. He who hath this knowledge wins the luminous spheres.

अध्याय ९

श्लोक 7.12

क्षुत् कु॒क्षिरिरा॑ वनि॒ष्ठुः पर्व॑ताः प्ला॒शयः॑

kṣut kukṣirirā vaniṣṭhuḥ parvatāḥ plāśayaḥ

हिन्दी अर्थ

की भ्रोर भुख कर खड़ा बैल, (सविता). उत्पादक तथा प्रेरक सूयं है (उदङ् तिष्ठन्) उत्तर की भ्रोर मुख कर खड़ा बल ।. - रहता है । तदनन्तर सूयं परिचमदिला की भ्रोरं ्रग्रसर होता, है 1. पदिचम दिशा का सूयं “वाता" है । इस काल में शीतकाल कीः वर्षा द्वारा लाद्यान्न पैदा होताहै, जिससे प्राणियों का घारण-पोषण . होता है । क्ाता-धा घारण-पोषणयीः : धता. की व्याख्या मे देखो निरुक्तः ११।१।१०) । उत्तर दिशा मेही प्राणियों की भरधिक उत्पत्ति है

English

A glorification of the typically bull and cow Prajapati and Parameshthin are the two horns, Indra is the head, Agni the forehead, Yama the joint of the neck.

अध्याय ९

श्लोक 7.13

क्रोधो॑ वृ॒क्कौ म॒न्युरा॒ण्डौ प्र॒जा शेपः॑

krodho vṛkkau manyurāṇḍau prajā śepaḥ

हिन्दी अर्थ

कां० € ।-सुऽ.७ : -द्थववेद-माष्य ९९५७ (सोमः राजा) सोम राजा है बैल, जब किं वहु . चारे के लिये धास भ्रादि तृणों को प्राप्त होतादहै। -. सोभ है महौषवः। भतः : यह वीरुधो , का ग्रधिपति है । यथा “सोमो

English

King Soma is the brain, Sky is the upper jaw, Earth is the lower jaw. Lightning is the tongue, the Maruts are the teeth, Revati is the neck, the Krittikās are the

अध्याय ९

श्लोक 7.14

न॒दी सू॒त्री व॒र्षस्य॒ पत॑य॒ स्तना॑ स्तनयि॒त्नुरूधः॑

nadī sūtrī varṣasya pataya stanā stanayitnurūdhaḥ

हिन्दी अर्थ

रहता है । श्रतः इसे ब॑लरूप मँ . वर्णित किया है जं कि बैल घास भोदि के तृणो के खाने के लिये तुणोँ को-प्राप्त् होता है १“ ॥ , (ईक्षमाणः) तुप्त होः कर जब बैल देख, रहा होता.है त बह (मितः) मित्र के सदु स्नेहभरी दृष्टि से. मानो देखता है 1. (आवृत्तः) जब.वापिसि मेँ होता है । मित्रः = तरिमिदा स्नेहने (म्वादिः) । - ...

English

shoulders, the Gharma s the shoulder-bar. His universe is Vāyu, Svarga is his world, Krishpadram is the tendons and Vertebrae. The Syena ceremony is the breast, Air is the region of the belly,.

अध्याय ९

श्लोक 7.15

वि॒श्वव्य॑चा॒स्चर्मौष॑धयो॒ लोमा॑नि॒ नक्ष॑त्राणि रू॒पम्

viśvavyacāscarmauṣadhayo lomāni nakṣatrāṇi rūpam

हिन्दी अर्थ

माणः), निरीक्षण करता है -(रदक्षमाणः) ईक्षण. करता हृभ्रा बैलरूप है । भद होता है भरावृत्त हए भानन्दस्वरूप बेल सदु है 1 (युज्यमानः) जोता जाता हृभ्रा बैल (वैदवदेवः) -वरि्वदेवों का है.

English

Brihaspati is the hump, Brihatī the breast-bone and cartilages of the ribs. The consorts of the Gods are the ribs, the attendants are ribs.

अध्याय ९

श्लोक 7.16

दे॒व॒ज॒ना गुदा॑ मनु॒ष्याऽ आ॒न्त्राण्य॒त्रा उ॒दर॑म्

devajanā gudā manuṣyā' āntrāṇyatrā udaram

हिन्दी अर्थ

(सर्वम्) भ्रात्मना “सरवंरूप" है । - (१). यह श्रंथं गौ बेल की .. दृष्टि से । .जोता .जाता हमरा बैल: मानो राष्ट्र के संब' देवों के.,लिये.उपकारो .है,- दुषार-गौभ्रों के उत्पादन तथा भास्वाही बड़ों के उत्पादन द्वारा, कषिकरममं दवारा, खाद के लिये “सवरूप“ है । भारोदरहन रादि कार्यों ' से विमुक्त हुः निजं “सर्वरूपं” मेँ

English

Mitra and Varuna are the shoulder-blades. Tvashtar and Arya- man the fore-arms, Mahādeva is the arms. Indrāni is the hinder parts, Vāyu the tail, Pavamāna the hair.

अध्याय ९

श्लोक 7.17

रक्षां॑सि॒ लोहि॑तमितरज॒ना ऊब॑ध्यम्

rakṣāṃsi lohitamitarajanā ūbadhyam

हिन्दी अर्थ

स्मरण कराया है । मानो भ्रात्मना “सवंरूप” भववस्था मे बेल एसा सुख दकट-वहन द्वारा बैल के “अनडवान्" स्वरूप को द्योतित किया है । (२) परभेदवर भी भनडवान् है, भनः विरवरूपम् शकटं वहतीति ।

English

Priestly rank and princely power are the hips, and strength is. the thigh. Dhātar and Savitar are the two knee-bones, the Gandharvas are the legs the Apsarases are bits

अध्याय ९

श्लोक 7.18

अ॒भ्रं पीबो॑ म॒ज्जा नि॒धन॑म्

abhraṃ pībo majjā nidhanam

हिन्दी अर्थ

दर्शाया है । मन्तो मै विश्व को गोरूप कहा है, गौ को विद्वरूप नहीं । गौ गौ मातृवत् पूजचीया है । परमेश्वरः यरा रचा “विद्व. मीः गोसदुश्च महो पकारी है यहं हमारे भ्रौरं सब प्राणियों के लिये.मोग रपव के लिये हैः । वाका 9 न नरपिननगयणणषपवककक्कक्काणणकशपकनक्याकामााषषष स

English

of the feet, Aditi is the hooves. Thought is the heart, intelligence is the liver, law the pericar- dium. Hunger is the belly, refreshing drink is the rectum, mountains. are the inward parts.

अध्याय ९

श्लोक 7.19

अ॒ग्निरासी॑न॒ उत्थि॑तो॒ऽश्विना॑

agnirāsīna utthito'śvinā

हिन्दी अर्थ

कां० ९ । सुऽ ७ भथववेद-भाष्य १९९ करते हैँ उसी प्रकार हमे महोपकारी परमेश्वर की भी पूजा भौर सेवा रूप है, (सवंरूपम्) सवंरूप है (मन्त्र २४), (गोरूपम्) गोरूप है । ..

English

Wrath is the kidneys, anger the testes, offspring the generative organ. The river is the womb, the Lords of the Rain are the breasts,. the thunder is the udder.

अध्याय ९

श्लोक 7.20

इन्द्रः॒ प्राङ् तिष्ठ॑न् दक्षि॒णा तिष्ठ॑न् य॒मः

indraḥ prāṅ tiṣṭhan dakṣiṇā tiṣṭhan yamaḥ

हिन्दी अर्थ

(२) मलेरिया का बहिष्करण (६) । (३) --यक्ष्म रोगो का बहिष्करण (७,.१०-१२, १९, २०1 .. (भ) हरापन, पीलाषन, पेट की .हवा, यक्ष्मभावना का बहिष्करण (९), (६) मूत्रमागं से यक्ष्मा का निराकरण १० 1 . (७) -हुदय.कम्पनं ९गा18110 , हृदयव्यथां का शमन ( ).।

English

Rākshasas are the blood, the Other Folk are the contents of the Stomach.

अध्याय ९

श्लोक 7.21

प्र॒त्यङ् तिष्ठ॑न् धा॒तोद॒ङ् तिष्ठ॑न्त्सवि॒ता

pratyaṅ tiṣṭhan dhātodaṅ tiṣṭhantsavitā

हिन्दी अर्थ

कर्णाभ्यां ते कडनषेभ्यः कर्णशूलं विसरपक यू । कां० ९।सु०न' श्रथरवेवेव-माष्य , १३१ रोगम्) शिरोगतं रोग की (बहिः निमेन्ैयामहे) हम पृथक् . करते है

English

The rain-cloud is her fat, her resting-place her marrow. Sitting he is Agni, when he hath stood up he is the Asvins. Standing east-wards he is Indra, standing southwards, Yama.

अध्याय ९

श्लोक 7.22

तृणा॑नि प्राप्तः॒ सोमो॒ राजा॑

tṛṇāni prāptaḥ somo rājā

हिन्दी अर्थ

१३ : भ्रथर्वेवेद-माष्य यस्यं भीमः भ॑ती काच उंदेपयंति पूरषम् । यस्य. जिस की प्रतीकाशः). चमक (भीमः) भयानक है, (पूरुषम् ) य ऊरू भनुसपेत्यथो - एति गवीनिके ।

English

Standing westwards he is Dhātar, standing northwards Savitar. When he hath got his grass he is King Soma.

अध्याय ९

श्लोक 7.23

मि॒त्र ईक्ष॑माण॒ आवृ॑त्त आन॒न्दः

mitra īkṣamāṇa āvṛtta ānandaḥ

हिन्दी अर्थ

(यः) जो (ऊर) दो पटो, 71028 के (नु सर्प॑ति) साथ-साथे । प्रतिनन्धिके नाड्यौ” अरथवे० १।११।५, सायण) . यदि कामोदपकामाद् पृ्दयाज्नायते परं ।

English

He is Mitra when he looks about him, and when he hath turned round he is joy. When he is yoking he belongs to the All-Gods, when yoked he is Prajāpati, when unyoked he is All.

अध्याय ९

श्लोक 7.24

यु॒ज्यमा॑नो वैश्वदे॒वो यु॒क्तः प्र॒जाप॑ति॒र्विमु॑क्तः॒ सर्व॑म्

yujyamāno vaiśvadevo yuktaḥ prajāpatirvimuktaḥ sarvam

हिन्दी अर्थ

(यदि) यदि (भ्रपकामात् कामात्) बुरी कामनामयी कामवासना से (हृदयात् परि) हृदय से (बलासम्) “बलास” रोग(जायते ) पैदा होता है भङ्गो से (बहिः निमत्वयामहे) हम चिकित्सक पृथक् कर देते है (१) - का०.९। सुगल -- -भधरवेवेद-माष्य १३३

English

This verily is omniform, wearing all forms, bovine-formed. Upon him wait omniform beasts, wearing every shape, each one who hath this knowledge.

अध्याय ९

श्लोक 7.25

ए॒तद् वै वि॒श्वरू॑पं॒ सर्व॑रूपं गोरू॒पम्

etad vai viśvarūpaṃ sarvarūpaṃ gorūpam

हिन्दी अर्थ

बलास रोगे बुरी कामवासना. से;.प्रथम, हृदयं मे प्रकट होता है, - तत्य- धारण किया हृभ्रा है” इस भावना को (बहिः निमेन्तंयामहे); हमं चिकित्सकं पृथक् कर देते है । : हरिमाणम्=-†8४10;48, फाण्डरोग, कामलारोगः 1 मप्वामू्- रप

English

A charm for the cure of various diseases connected with Consumption Each pain and ache that racks the head, earache, and erysipelas,.

अध्याय ९

श्लोक 7.26

उपै॑नं वि॒श्वरू॑पाः॒ सर्व॑रूपाः प॒शव॑स्तिष्ठन्ति॒ य ए॒वं वेद॑

upainaṃ viśvarūpāḥ sarvarūpāḥ paśavastiṣṭhanti ya evaṃ veda

हिन्दी अर्थ

आत .बकासौ मवतु मूत्रं भवेस्वामयं् । हे यक्ष्मरोगिन् ! तेरा (बलासः) बंलक्षयकारी रोग. (भरासः भवतु); मूत्र को, शरीर से बाहर निकाल देना चाहिए । भामयत् = श्रम रोगे (चुरा-.

English

All malady that wrings thy brow we charm away with this our spell. From both thine ears, from parts thereof, thine earache, and the throbbing pain,

अध्याय ९

श्लोक 8.1

यक्ष्मनिवारणम्।१-२२ भृग्वङ्गिराः।सर्वशीर्षामयाद्यपाकरणम्।अनुष्टुप्, १२ अनुष्टुब्गर्भा ककुम्मती चतुष्पदोष्णिक्, १५ विराडनुष्टुप्, २१ विराट् पथ्याबृहती, २२ पथ्यापङ्क्तिः।शी॒र्ष॒क्तिं शी॑र्षाम॒यं क॑र्णशू॒लं वि॑लोहि॒तम्।सर्वं॑ शीर्ष॒ण्यंऽ ते॒ रोगं॑ ब॒हिर्निर्म॑न्त्रयामहे

yakṣmanivāraṇam| 1-22 bhṛgvaṅgirāḥ| sarvaśīrṣāmayādyapākaraṇam| anuṣṭup, 12 anuṣṭubgarbhā kakummatī catuṣpadoṣṇik, 15 virāḍanuṣṭup, 21 virāṭ pathyābṛhatī, 22 pathyāpaṅktiḥ| śīrṣaktiṃ śīrṣāmayaṃ karṇaśūlaṃ vilohitam| sarvaṃ śīrṣaṇyaṃ' te rogaṃ bahirnirmantrayāmahe

हिन्दी अर्थ

मे निवास करती है । जोड़ों के जोड़ पर एक-एक गदी होती है, भ्रौर' मणकों . . भङ्गी को भ्रौर (रोपणाः) रोपणों को (मदयन्ति) मदयुक्त ५. 7 1 कां०.९।-सुऽ 5 भ्रथरववैद-माष्य १३० देते है, उन (सर्वेषां यक््माणांमं विषम्. सबं ्रकर..के येकम के विष को

English

I have evoked the poison-taint of all Consumptions out of thee. Forth from thy belly and thy lungs, forth from thy navel and thy heart.

अध्याय ९

श्लोक 8.2

कर्णा॑भ्यां ते॒ कङ्कू॑षेभ्यः कर्णशू॒लं वि॒सल्पकम्।सर्वं॑ शीर्ष॒ण्यंऽ ते॒ रोगं॑ ब॒हिर्निर्म॑न्त्रयामहे

karṇābhyāṃ te kaṅkūṣebhyaḥ karṇaśūlaṃ visalpakam| sarvaṃ śīrṣaṇyaṃ' te rogaṃ bahirnirmantrayāmahe

हिन्दी अर्थ

पैदा होते हए देखने वाला कोई न था । उस समय इस का द्रष्टा श्रौर ज्ञाता कैवल परमेरवर ही था । परन्तु इस रहस्य के जानने भ्रौर पुने के लिये उ समय कौन था जो कि .परभेदवर के समीप योग समाधि हारा पहुचा हो । इ ब्रघीतु य कभङ्ग वेदास्य वामस्य पदं वेः. ; सुन्दर (वेः) पक्षी क (पदम्) पद को (वेद) जानता है ॐ (इह) मह

English

children. The seven make the one-wheeled chariot ready: bearing seven names the single Courser draws it.

अध्याय ९

श्लोक 8.3

यस्य॑ हे॒तोः प्र॒च्यव॑ते॒ यक्ष्मः॑ कर्ण॒त आ॑स्य॒तः ।सर्वं॑ शीर्ष॒ण्यंऽ ते॒ रोगं॑ ब॒हिर्निर्म॑न्त्रयामहे

yasya hetoḥ pracyavate yakṣmaḥ karṇata āsyataḥ | sarvaṃ śīrṣaṇyaṃ' te rogaṃ bahirnirmantrayāmahe

हिन्दी अर्थ

१४४ , -्रथववेद-भाष्यं कीं० ९1 सुर कि (ग्रः); जो (इमा) इन (षट् रजांसि) ६ लोकों को (तस्तम्भ). थामे किं वेदिक “कित्” घातु है, जिसःका भथ प्रज्ञान है । षड़ रजांसि = “रजांसि वँ लोकाः" (निरक्त ४।३।२९ ) । सौरमण्डल के तीन लोक हँ, पृथिवीं लोक भन्तरिक्ष लोक, भरौरं सूयं लोकं । इन. से भ्रतिरिक्तः तीन लोकः है -चलोकः;

English

Where is the blood of earth, the life, the spirit? Who may ap- proach the man who knows, to ask it? Let him who knoweth presently declare it, this lovely Bird’s securely-founded station.

अध्याय ९

श्लोक 8.4

यः कृ॒णोति॑ प्र॒मोत॑म॒न्धं कृ॒णोति॒ पूरु॑षम्।सर्वं॑ शीर्ष॒ण्यंऽ ते॒ रोगं॑ ब॒हिर्निर्म॑न्त्रयामहे

yaḥ kṛṇoti pramotamandhaṃ kṛṇoti pūruṣam| sarvaṃ śīrṣaṇyaṃ' te rogaṃ bahirnirmantrayāmahe

हिन्दी अर्थ

नाकः” (यजु ° ३२।६) इस मन्त्र मे.यौः,. स्वः, प्रौर नाकः ये. तीन लोक कषःहैँ । येःभिलकरः ६ लोकै । “किमपि स्विदेकम्” प्रकृति तत्तव । (ऋते). जगत्. की यथार्थता के निमित्त (माता). प्रकृति माता-ते । ॑ (संजग्मे) -उस प्रकृति. ने परमेर्वर के साथःसंगम किया । (सा) वहः माता

English

Forth from his head the Cows draw milk, and wearing his ves- ture with their foot have drunk the water.

अध्याय ९

श्लोक 8.5

अ॒ङ्ग॒भे॒दम॑ङ्गज्व॒रं वि॑श्वा॒ङ्ग्यंऽ वि॒सल्प॑कम्।सर्वं॑ शीर्ष॒ण्यंऽ ते॒ रोगं॑ ब॒हिर्निर्म॑न्त्रयामहे

aṅgabhedamaṅgajvaraṃ viśvāṅgyaṃ' visalpakam| sarvaṃ śīrṣaṇyaṃ' te rogaṃ bahirnirmantrayāmahe

हिन्दी अर्थ

कों (उप ईयुः) प्राप्तं किया । १ रसा जगत् पैदा करने मेंपरमेश्वर के कामना ख्पी.रस को.गधं मे षारण से पैदा होते हैः 1:इसलिये परमेदवर कीः कामनाःकरो र्य कहा

English

Unripe in mind, in spirit undiscerning, I ask of these the Gods’ established places. High up above the yearling Calf the sages, to form a web, their own seven threads have woven.

अध्याय ९

श्लोक 8.6

यस्य॑ भी॒मः प्र॑तीका॒श उ॑द्वे॒पय॑ति॒ पूरु॑षम्।त॒क्मानं॑ वि॒श्वशा॑रदं ब॒हिर्निर्म॑न्त्रयामहे

yasya bhīmaḥ pratīkāśa udvepayati pūruṣam| takmānaṃ viśvaśāradaṃ bahirnirmantrayāmahe

हिन्दी अर्थ

का० । सु०् भ्रथवेवेद-भाष्य १४५ (माता) वेदमाता (दक्षिणायाः) वृद्धि की (धुरि) धुरा.मे (युक्ता स्थित हुमा । (त्रिषु योजनेषु) तीन के . योगयुक्त हो जाने पर, (वत्सः) दिया, तब वेदमाता प्रकट हुरई,भौर उस द्वारा मनुष्यो वा ऋषियों की समृद्धि

English

Here, ignorant, I ask the wise who know it, as one who knows not, for the sake of knowledge, What is That One, who in the Unborn’s image hath stablished and fixed firm this world’s six

अध्याय ९

श्लोक 8.7

य ऊ॒रू अ॑नु॒सर्प॒त्यथो॒ एति॑ ग॒वीनि॑के ।यक्ष्मं॑ ते अ॒न्तरङ्गे॑भ्यो ब॒हिर्निर्म॑न्त्रयामहे

ya ūrū anusarpatyatho eti gavīnike | yakṣmaṃ te antaraṅgebhyo bahirnirmantrayāmahe

हिन्दी अर्थ

किया । वेदवाणी प्रकट हो जने.पर ऋषियों ने वेदवाणी का उच्चारण हए । “वेद माता" यथा स्तुता भया वरदा वेद माता (म्रथर्वं ° १९।७१।१) ३।१५२, महषि दयानन्द) । ग राब्दे कथादिः) = गुरः । इसलिये योगजास्त्र मे कहा है “स एष पूर्वेषामपि गुः कालेनानवच्छेदात्” (१।२६) । वृजनीषुः

English

regions. The Mother gave the Sire his share of Order. With thought at first she wedded him in spirit. She, coyly loth, was filled with dew prolific. With adoration men approached to praise her.

अध्याय ९

श्लोक 8.8

यदि॒ कामा॑दपका॒माद्धृद॑या॒ज्जाय॑ते॒ परि॑ ।हृ॒दो ब॒लास॒मङ्गे॑भ्यो ब॒हिर्निर्म॑न्त्रयामहे

yadi kāmādapakāmāddhṛdayājjāyate pari | hṛdo balāsamaṅgebhyo bahirnirmantrayāmahe

हिन्दी अर्थ

वत्सः (उणा ० ३।६२) ,जोकि परमेरवर के गुणों का कथन करता रहतां है १४६ भरथरवैवेद-माष्य कां० ९। सु० ९ (तिस्रः मातुः) तीन मातां का, (त्रीन् पितृन्) तीन पिताोंका , विन्नाम्) सब को विदित नहीं होती ।

English

Yoked was the Mother to the boon Cow’s car-pole; in humid folds of cloud the infant rested. Then the Calf lowed and looked upon the Mother, the Cow who wears all shapes in three

अध्याय ९

श्लोक 8.9

ह॒रि॒माणं॑ ते॒ अङ्गे॑भ्यो॒ऽप्वाम॑न्त॒रोदरा॑त्।य॒क्ष्मो॒धाम॒न्तरा॒त्मनो॑ ब॒हिर्निर्म॑न्त्रयामहे

harimāṇaṃ te aṅgebhyo'pvāmantarodarāt| yakṣmodhāmantarātmano bahirnirmantrayāmahe

हिन्दी अर्थ

चायुः (निरक्त ७।७।२६) । इस प्रकार जन्तरिक्ष को भी माता कहा है) है भरतः यह चलता नहीं । इस मेँ गति, पृथिवी के निज भ्रक्ष पर घूमनेके कारण प्रतीत होती है । संसार में विरोधी शक्तिथां भी हँ जिन द्वारा बुद़ापो बीमारियां तथा मृत्युए होती है, मौर हष॑क्षय होता रहता है । परन्तु सूर्य

English

directions. Bearing three mothers and three fathers, single he stood erect: they never made him weary. On yonder heaven’s high ridge they speak together in speech not known to all, themselves

अध्याय ९

श्लोक 8.10

आसो॑ ब॒लासो॒ भव॑तु॒ मूत्रं॑ भवत्वा॒मय॑त्।यक्ष्मा॑णां॒ सर्वे॑षां वि॒षं निर॑वोचम॒हं त्वत्

āso balāso bhavatu mūtraṃ bhavatvāmayat| yakṣmāṇāṃ sarveṣāṃ viṣaṃ niravocamahaṃ tvat

हिन्दी अर्थ

के साथः जडो रहती हैः1. यक्षम.कीठणुभरो के लिये देखो (मन्त्र १३) (वातीकारस्य) उदर में वायुके प्रकोपके, (वा) तथा (अ्रलजेः) भ्रलजि से (निर्) निकाल देने की विधि (रह्म). ने (अवोचम्) कह दी है ।

English

I have evoked the poison taint of all Consumptions out of thee. The penetrating stabs of pain which rend asunder crown and head, Let them depart and pass away, free from disease and harming not.

अध्याय ९

श्लोक 8.11

ब॒हिर्बिलं॒ निर्द्र॑वतु॒ काहा॑बाहं॒ तवो॒दरा॑त्।यक्ष्मा॑णां॒ सर्वे॑षां वि॒षं निर॑वोचम॒हं त्वत्

bahirbilaṃ nirdravatu kāhābāhaṃ tavodarāt| yakṣmāṇāṃ sarveṣāṃ viṣaṃ niravocamahaṃ tvat

हिन्दी अर्थ

या (्थएपात८ कोड़ा भ्रथवा ण्ट 0 । तथा (कशीष्णैः) सिर के (रोगम्) रोग को (अरनीनशम्) मैने नष्ट कर १. परस्पर संनिकृष्ट नाना फु सियां, जो कि समय पा कर नानामूखी एक बड़ा

English

The pangs that stab the heart and reach the breast-bone and connected parts, Let them depart and pass away, free from disease and harming not.

अध्याय ९

श्लोक 8.12

उ॒दरा॑त् ते क्लो॒म्नो नाभ्या॒ हृद॑या॒दधि॑ ।यक्ष्मा॑णां॒ सर्वे॑षां वि॒षं निर॑वोचम॒हं त्वत्

udarāt te klomno nābhyā hṛdayādadhi | yakṣmāṇāṃ sarveṣāṃ viṣaṃ niravocamahaṃ tvat

हिन्दी अर्थ

१२८ भरथवंवेद-भाष्य कां -९:।-सु९ फ (त). तेरे (शीर्ष्णः) सिर के (कपालानि सम्) कपालो; के साय (शीष्णंः रोगम्) पररके रोगको, (च) तथा (हृदथस्थ) हदय का (यः) जो ( विषुः कम्पन. या बीधना हैः उसे (उदन् श्रादित्य)-है

English

The stabs that penetrate the sides and pierce their way along the ribs, Let them depart and pass away, free from disease and harming not. The penetrating pangs that pierce thy stomach as they shoot across,

अध्याय ९

श्लोक 8.13

याः सी॒मानं॑ विरु॒जन्ति॑ मू॒र्धानं॒ प्रत्य॑र्ष॒नीः ।अहिं॑सन्तीरनाम॒या निर्द्र॑वन्तु ब॒हिर्बिल॑म्

yāḥ sīmānaṃ virujanti mūrdhānaṃ pratyarṣanīḥ | ahiṃsantīranāmayā nirdravantu bahirbilam

हिन्दी अर्थ

विषुः वि+-षूञ् कम्पने, हदय की षडक, एमि) + काण्ड ९ । सुक्त ८ । सम्पूणं : (१) मन्न संस्याः २२। सात , प्रों वाने विर्पति काः दन (१);

English

Let them depart and pass away, free from disease and harming not. The pains that through the bowels creep, disordering the inward parts,

अध्याय ९

श्लोक 8.14

या हृद॑यमुप॒र्षन्त्य॑नुत॒न्वन्ति॒ कीक॑साः ।अहिं॑सन्तीरनाम॒या निर्द्र॑वन्तु ब॒हिर्बिल॑म्

yā hṛdayamuparṣantyanutanvanti kīkasāḥ | ahiṃsantīranāmayā nirdravantu bahirbilam

हिन्दी अर्थ

भनस्था, जीवात्मा (४); पक्षिरूपीं सूयं का पादं द्वारा उदकपान (५); सप्त तन्तु (६) ; अज भें भ्राधितंः एक तत्तव, ्रकृति (७); वेदमाता का देस की पीठ पर वेदवाणी के सम्बन्ध मे मन्त्रणा (१०); पांच अरो वाला (२) -यह “्रस्यवामीय” सक्त है 1 ऋण्वेद मेँ भी वतंमान है । (ऋ

English

Let them depart and pass away, free from disease and harming not. The pains that suck the marrow out, and rend and tear the bones apart, May they speed forth and pass away, free from disease and harming not.

अध्याय ९

श्लोक 8.15

याः पा॒र्श्वे उ॑प॒र्षन्त्य॑नु॒निक्ष॑न्ति पृ॒ष्टीः ।अहिं॑सन्तीरनाम॒या निर्द्र॑वन्तु ब॒हिर्बिल॑म्

yāḥ pārśve uparṣantyanunikṣanti pṛṣṭīḥ | ahiṃsantīranāmayā nirdravantu bahirbilam

हिन्दी अर्थ

(भ्रस्य) इस सूयं का (तृतीयः) तीसरा (ज्नाता) भाई. या .मतंच्तर ह वायु या बिद् तथा पाथिवागि ये तीन भाई-भाई हैःएक पित्ता परमेवर मेष.का भरण-पोषण.सू् रमिमयों दवारा होता है + पाथिवान्नि का भरणः पोष॑ण भी सये.की "ररिमियां ही करती ईद । वृक पैदा होतेह । सौराग्न

English

Consumptions with their Colic pains which make thy limbs insensible I have evoked the poison-taint of all Consumptions out of thee.

अध्याय ९

श्लोक 8.16

यास्ति॒रश्ची॑रुप॒र्षन्त्य॑र्ष॒णीर्व॒क्षणा॑सु ते ।अहिं॑सन्तीरनाम॒या निर्द्र॑वन्तु ब॒हिर्बिल॑म्

yāstiraścīruparṣantyarṣaṇīrvakṣaṇāsu te | ahiṃsantīranāmayā nirdravantu bahirbilam

हिन्दी अर्थ

दवारा उपासक कहता है कि “जने पाथिवाग्नि में विरपति का दशन किया परिणत होता है (वहति) सयं रथ का वहन करता है । (चक्रम् ) रथचक्र (त्रिनाभि) तीन नाभियों वाला है, (अजरम्) जीणं नहीं होता, (अरनवंम्) इसके साथ कोर भवं: भर्थात् प्राणी घोड़ा जुता हृ नहीं है । (यत्र भि) जिस रथ में (विष्वाः मुवना) सौर परिवार के सब सुवन (तस्थुः) स्थित है । सूयं चक्राकार है । यह एकचकरूपः रथ है । इसमे ७ भरर लगे हृष

English

Of piercing pain, of abscesses, rheumatic ache, ophthalmia— I have evoked the poison-taint of all Consumptions out of thee. I have dispelled the piercing pains from feet, knees, hips, and hinder parts,

अध्याय ९

श्लोक 8.17

या गुदा॑ अनु॒सर्प॑न्त्या॒न्त्राणि॑ मो॒हय॑न्ति च ।अहिं॑सन्तीरनाम॒या निर्द्र॑वन्तु ब॒हिर्बिल॑म्

yā gudā anusarpantyāntrāṇi mohayanti ca | ahiṃsantīranāmayā nirdravantu bahirbilam

हिन्दी अर्थ

होते है । वस्तुतः दस एक चक्षरथ् का एक वहनं एक भरद ही ------ रः व ए शकम का एत पहं एष भ शी राह कींऽ.६। सुर प्रथवेवेद-भाष्य ई४१ जोकि शुक्लरदिम समूह है 1 यह शुक्लरदिम ७ रदिमयो में " हो ी है 1 तीन नाभियां है -्रीष्म, वर्षा, तथा शरद् ऋतुं । कई “एक चक्र ॥ द्वारा “वषं चक्रः का कथन करते है ५ सात स्थत है, उन कां (वहन्ति) वहन करते है (सः भदवाः, उनं के सात भ्रदव, या सात सौराशव 4 . (सप्त स्वसारः) सात जोकि स्वसारः” , भर्थात् भ्रपने-भपने भागे मे.सरण.करते है वे (अभि) सूय के हृए (संनवन्तः); मिल -कर मानो सूयं कौ -स्तुतियां करते है, ०५ ). ५

English

And spine, and from the neck and nape the malady that racked the head. Sound are the skull-bones of thy head and thy heart’s beat is regular.

अध्याय ९

श्लोक 8.18

या म॒ज्ज्ञो नि॒र्धय॑न्ति॒ परूं॑षि विरु॒जन्ति॑ च ।अहिं॑सन्तीरनाम॒या निर्द्र॑वन्तु ब॒हिर्बिल॑म्

yā majjño nirdhayanti parūṃṣi virujanti ca | ahiṃsantīranāmayā nirdravantu bahirbilam

हिन्दी अर्थ

मंगल, बृहस्पति, तथा शनैरचरः ग्रह॒ । ये निज मार्गो प्र गति.करते हए ४ कीपरिक्रमाए कररहेह।ये परिक्रमाए मानो सूरे क स्तुति रूप ह 1 ह सात चक्र या ग्रह मानो भ्रदवरूप हए, सू्रथं का वहन कर रे हं। १४ स, ्रकार को रदविमयों मे परिणत हौ रही है । वर्षा छतु भं इन्द्र ्नुष भर, भी. को द॑दे भरयमं जायंमानमस्थन्वतं यदंनस्या बिभ॑तिं + ५५

English

Thou, Sun, arising with thy beams hast chased away the head’s disease, hast stilled the pain that racked the limbs. Enunciation of mystico-theological and cosmological doctrine

अध्याय ९

श्लोक 8.19

ये अङ्गा॑नि॒ म॒दय॑न्ति॒ यक्ष्मा॑सो रोप॒णास्तव॑ ।यक्ष्मा॑णां॒ सर्वे॑षां वि॒षं निर॑वोचम॒हं त्वत्

ye aṅgāni madayanti yakṣmāso ropaṇāstava | yakṣmāṇāṃ sarveṣāṃ viṣaṃ niravocamahaṃ tvat

हिन्दी अर्थ

वुल शरीर को (कः दद) किस ने देखा है, (यत्) जिस शरीर का क्रि (भरनस्था) भ्रस्थियो से रहित जीवात्मा (विमति) भरण-पोषण करता १४१ श्रथवेवेद-भाष्य कां०-९.1 सुऽ-९ परिणामरूप ह । परन्तु जीवात्मा भूमि का भरं नहीं । यह कटां -था, प्रौरं कहां सेभ्राया जोरि श्रस्थि्यों वाले शरीर का भरण-पोषणं करता ह

English

The second brother of this lovely Hotar, hoary with eld, is the voracious Lightning. The third is he whose back is balmed with butter. Here have I seen the King with seven male

अध्याय ९

श्लोक 8.20

वि॒स॒ल्पस्य॑ विद्र॒धस्य॑ वातीका॒रस्य॑ वाल॒जेः ।यक्ष्मा॑णां॒ सर्वे॑षां वि॒षं निर॑वोचम॒हं त्वत्

visalpasya vidradhasya vātīkārasya vālajeḥ | yakṣmāṇāṃ sarveṣāṃ viṣaṃ niravocamahaṃ tvat

हिन्दी अर्थ

(दहते) दोहती है, (व्र वसानाः) ख्य को श्रोढृती हुई । भरौर (पदा) पाद द्वारा (उदकम्) उदक को (श्रपुः) पीतीहै। . ५ सूये .को पक्षी कहा है जोकि श्राकाद मे मानो उड़ता है । इसे ही सिरं कहा है जोकिसिरंके सदृश गोल दह, जिसमेंकि. ८०4 कृ निवास है । इस सिर से निकलती हई रदिमयां चमकीली होती ह । कहा है । युम पर प्डने.वाली रदिमर्यों को “पदा” द्वाराः निदिष्ट किया है। जसे कि कटाह कि . (बालस्यापि रवैः पादाः पतन्ति शिरसि भृताम्" ॥ मी 'होगि । इसलिये मन्त्र मे “शीर्णः, रौर “पदा” का कथन इभा है ।

English

The wheel, three-naved, is sound and undecaying: thereon these worlds of life are all dependent.

अध्याय ९

श्लोक 8.21

पादा॑भ्यां ते॒ जानु॑भ्यां॒ श्रोणि॑भ्यां॒ परि॒ भंस॑सः ।अनू॑कादर्ष॒णीरु॒ष्णिहा॑भ्यः शी॒र्ष्णो रोग॑मनीनशम्

pādābhyāṃ te jānubhyāṃ śroṇibhyāṃ pari bhaṃsasaḥ | anūkādarṣaṇīruṣṇihābhyaḥ śīrṣṇo rogamanīnaśam

हिन्दी अर्थ

कां०.९1-सु० श्रथरवंवेद-भाष्य ९४३ पाकः पृछामि मन॒साऽ विजानन् देवानामेना निता पदानि । जहां कि (देवानाम्) . प्रथिवी श्रादि देवों के (एना. पदानि) ये परं म (कवयः) वेदकाव्य के कवि, उन. (सप्त) सात पदों को या ( को, (तन्तून) तन्तुर के रूप, (वितेनिरे) विस्तृत हृए.कहते है; जिनमेकि (भ्रोतवै) बाना डालने-के लिये ह । (उ) वितं, बाना के -लियेःवितकं ! भर्थात् वितकं करो कि बाना के तन्तु कौनसे

English

The seven who on this seven-wheeled car are mounted have horses, seven in tale, who draw them onward. Seven sisters utter songs of praise together, in whom the Cows’ seven names are held and

अध्याय ९

श्लोक 8.22

सं ते॑ शी॒र्ष्णः क॒पाला॑नि॒ हृद॑यस्य च॒ यो वि॒धुः ।उ॒द्यन्ना॑दित्य र॒श्मिभिः॑ शी॒र्ष्णो रोग॑मनीनशोऽङ्गभे॒दम॑शीशमः

saṃ te śīrṣṇaḥ kapālāni hṛdayasya ca yo vidhuḥ | udyannāditya raśmibhiḥ śīrṣṇo rogamanīnaśo'ṅgabhedamaśīśamaḥ

हिन्दी अर्थ

तन्तु. । श्रौर बाना, भरतव है . चौडाईके तन्तु । तानातो है बुष कर्म॑, तथा शुक्ल-भरौर-कृष्ण मिधित कमं । तानाः के होते भी, बाना के विनः; सदस का है । इस.के तय्यार करने के. लिये. ताना-बानाः दोनो की भाव- द्यकता है । प्राणियों के त्रिविध कमं जो कि “बाना रूप है - उनके विना, सौरपरिवार रूपी पटः किंस के लिये हैँ । समग्र जगत् भोग-भौर-भपवगे के लिये है, जोकि प्राणियों के कमो द्वारा अजितं होता है।

English

treasured. Who hath beheld at birth the Primal Being, when She who hath no bone supports the bony?

अध्याय ९

श्लोक 9.1

आत्मा।१-२२ ब्रह्मा।वामः, अध्यात्मं, आदित्यः।त्रिष्टुप्, १२, १४, १६, १८ जगती।अ॒स्य वा॒मस्य॑ पलि॒तस्य॒ होतु॒स्तस्य॒ भ्राता॑ मध्य॒मो अ॒स्त्यश्नः॑ ।तृ॒तीयो॒ भ्राता॑ घृ॒तपृ॑ष्ठो अ॒स्यात्रा॑पश्यं वि॒श्पतिं॑ स॒प्तपु॑त्रम्

ātmā| 1-22 brahmā|vāmaḥ, adhyātmaṃ, ādityaḥ| triṣṭup, 12, 14, 16, 18 jagatī| asya vāmasya palitasya hotustasya bhrātā madhyamo astyaśnaḥ | tṛtīyo bhrātā ghṛtapṛṣṭho asyātrāpaśyaṃ viśpatiṃ saptaputram

हिन्दी अर्थ

सूष्टि रचना काल से चमकं रहा है, मानो निज चमक में हंसता तथा हृषित सूयं की पीठ पर मुक्तात्मा रहते है, श्रौर वहां रह कर वेदवाणी के मी अतिसूक्ष्म कारण शरीर मेँ वास करते है, रतः उन के . शरीरो के भस्मी भूत होने की सम्भावना नहीं होती । परभेदवर की सत्ता भी भ्रादित्य मे कही है (यचु° ४०।१७) । वहां मुक्तात्माभ्रों को परमेदवर का सत्संग भी मिलता है। यचुरवद में नाक मेँ साध्य देवों की सत्ता भी कही है । यथा वेह '

English

all-knowing. Upon the five-spoked wheel revolving ever, whereon all crea- tures rest and are dependent,

अध्याय ९

श्लोक 9.2

स॒प्त यु॑ञ्जन्ति॒ रथ॒मेक॑चक्र॒मेको॒ अश्वो॑ वहति स॒प्तना॑मा ।त्रि॒नाभि॑ च॒क्रम॒जर॑मन॒र्वं यत्रे॒मा विश्वा॒ भुव॒नाधि॑ त॒स्थुः

sapta yuñjanti rathamekacakrameko aśvo vahati saptanāmā | trinābhi cakramajaramanarvaṃ yatremā viśvā bhuvanādhi tasthuḥ

हिन्दी अर्थ

रूपी विकृतियों से। ये ६ दारीर का नियमन करते ई, गति शोल है, श्रौर परमेश्वर देव से पदा हृए हँ । शरीर भं इन के भ्रभीष्ट स्थान निदिचत कर वयि गए है । ये शरीर में स्थित हुए जीवात्मा के भोगापवगे के लिये गतिमान् . होते है, श्रपने-भरपने नियत स्थानों भे रहते हए भी गति करते हैँ । महत्त्व तो मोक्षावस्था भें भी जीवात्मा के साथ रहता है, जिस दारा जीवात्मा मोक्षसुख का अनुभव करता है, ्रौर पुनरावतंन पर शेष ६, महस्तव से विकृतिरूप मेँ पुनः प्रकट हो जाते है ।

English

Two Birds with fair wings, knit with bonds of friendship, in the same sheltering tree have found a refuge, One of the twain eats the sweet Fig-tree’s berry: the other, eat- ing not, regardeth only.

अध्याय ९

श्लोक 9.3

इ॒मं रथ॒मधि॒ ये स॒प्त त॒स्थुः स॒प्तच॑क्रं स॒प्त व॑ह॒न्त्यश्वाः॑ ।स॒प्त स्वसा॑रो अ॒भि सं न॑वन्त॒ यत्र॒ गवां॒ निहि॑ता स॒प्त नामा॑

imaṃ rathamadhi ye sapta tasthuḥ saptacakraṃ sapta vahantyaśvāḥ | sapta svasāro abhi saṃ navanta yatra gavāṃ nihitā sapta nāmā

हिन्दी अर्थ

स्थान नीचे दिखाई देगे श्रौर पृथिवी ऊचे । जसे भ्रमरीका हमारे लिये पाद तलो की भ्रोर है, परन्तु श्रमरीका वासियों के लिये हम उन के पाद तलो . ¦ . पृथिवी वासिंथीं के कार्यो का सम्पादन कर रहे हैँ । रात्रिया विश्वम देती है, भ्रौर दिन कृत्यो मे व्यापृत करते हँ ।

English

Trishtup they fashioned the Trishtup forth: How on the Jagatī was based the Jagatī—they who know this have won themselves immortal life.

अध्याय ९

श्लोक 9.4

को द॑दर्श प्रथ॒मं जाय॑मानमस्थ॒न्वन्तं॒ यद॑न॒स्था बिभ॑र्ति ।भूम्या॒ असु॒रसृ॑गा॒त्मा क्वऽस्वित् को वि॒द्वांस॒मुप॑ गा॒त् प्रष्टु॑मे॒तत्

ko dadarśa prathamaṃ jāyamānamasthanvantaṃ yadanasthā bibharti | bhūmyā asurasṛgātmā kva'svit ko vidvāṃsamupa gāt praṣṭumetat

हिन्दी अर्थ

कां१ ९ घु० ६. प्रथववेद-माष्छ १५३ भ से.(अत्यः) एकः (पि्यलम्) उस वृक्ष के पके हुए फलः को (स्वादु) भां अमि चाकशीति) सब जोर देखता -रहता है, एेसे (सगजा) व्याप्य समान वतंमान जीव-प्रौर-ईश, (समानं वृक्षम्) समान नदवर-देह.-का (परिषस्वजाते ) अय करते हैः (तयोः): उनमें से (अन्यः) जीव पाप्पष्य

English

With Gāyatri he measures out the praise-song, Sāman with praise-song, triplet with the Trishtup,

अध्याय ९

श्लोक 9.5

इ॒ह ब्र॑वीतु॒ य ई॑म॒ङ्ग वेदा॒स्य वा॒मस्य॒ निहि॑तं प॒दं वेः ।शी॒र्ष्णः क्षी॒रं दु॑ह्रते॒ गावो॑ अस्य व॒व्रिं वसा॑ना उद॒कं प॒दापुः॑

iha bravītu ya īmaṅga vedāsya vāmasya nihitaṃ padaṃ veḥ | śīrṣṇaḥ kṣīraṃ duhrate gāvo asya vavriṃ vasānā udakaṃ padāpuḥ

हिन्दी अर्थ

हा उस भोगते हए जीव को (श्नमि चाकशीति) -देखताः उस का साक्षी होता है। म चाकशीति) सव मोर से.देवता धूर्थात् जैसे (मध्वदः) मधुर फल खाने वाले (सुपर्णाः) पक्षी (वक्षे कि (पितरम्) जगत् के पिता को (नवेद) नहीं जनता ।

English

The triplet with the two or four-foot measure, and with the syllable they form seven metres. With Jagatī the flood in heaven he stablished, and saw the Sun in the Rathantara Sāman. Gāyatri hath, they say, three logs for burning: hence it excels in majesty and vigour.

अध्याय ९

श्लोक 9.6

पाकः॑ पृच्छामि॒ मन॒सावि॑जानन् दे॒वाना॑मे॒ना निहि॑ता प॒दानि॑ ।व॒त्से ब॒ष्कयेऽधि॑ स॒प्त तन्तू॒न् वि त॑त्निरे क॒वय॒ ओत॒वा उ॑

pākaḥ pṛcchāmi manasāvijānan devānāmenā nihitā padāni | vatse baṣkaye'dhi sapta tantūn vi tatnire kavaya otavā u

हिन्दी अर्थ

सुपर्णाः सुपतना सुगमनाः “शोभन कर्मो . वाले". (म० दयानन्द) । एना इनः (ऋ० १।१६४।२१)। मन्त्र २०,२१,२२ के भ्रथ, ऋ० १।१६४ , काण्ड ९। सक्त ९ । सम्पूरणं -जो (पृत्रः) पुत्र (कविः) -मेवावी है, वेदकाव्य के : रहस्य को जानता है - (सः) वह (ईम्) - इस तथ्य को (भरा चिकेत) ठीक प्रकार.से जानता है । (यः) जो (ताः).उन स्रियो को (विजानात्) . विवेकःपूरवैकर जाने (सः) वह (पितुः पिता) पिता-के-पिता के सवृदा ध जनीय (भ्रसत्) हो जाय ।

English

I invocate this Milch-cow good at milking, so that the Milker, deft of hand, may milk her. May “Savitar give goodliest stimulation. The caldron is made hot: he will proclaim it.

अध्याय ९

श्लोक 9.7

अचि॑कित्वांस्चिकि॒तुष॑श्चि॒दत्र॑ क॒वीन् पृ॑च्छामि वि॒द्वनो॒ न वि॒द्वान्।वि यस्त॒स्तम्भ षडि॒मा रजां॑स्य॒जस्य॑ रू॒पे किमपि॑ स्वि॒देक॑म्

acikitvāṃscikituṣaścidatra kavīn pṛcchāmi vidvano na vidvān| vi yastastambha ṣaḍimā rajāṃsyajasya rūpe kimapi svidekam

हिन्दी अर्थ

सावंमौमः उन्नति मे सहयोग दे सकती है । निखक्तकार यास्काचायं की वृष्टि मँ-- . अपनी शरोर लीधते है 1 न्तर इन्दं “धुम्” शबद परा निदरिष्ट करतां है; जो

English

She, Lady of all treasures, hath come hither, yearning in spirit for her calf, and lowing. May this Cow yield her milk for both the Asvins, and may she prosper to our high advantage. The Cow hath lowed after her blinking youngling: she licks his forehead as she lows, to form

अध्याय ९

श्लोक 9.8

मा॒ता पि॒तर॑मृ॒त आ ब॑भाज धी॒त्यग्रे॒ मन॑सा॒ सं हि ज॒ग्मे।सा बी॑भ॒त्सुर्गर्भ॑रसा॒ निवि॑द्धा॒ नम॑स्वन्त॒ इदु॑पवा॒कमी॑युः

mātā pitaramṛta ā babhāja dhītyagre manasā saṃ hi jagme| sā bībhatsurgarbharasā nividdhā namasvanta idupavākamīyuḥ

हिन्दी अर्थ

श्वे . शयवेवेदमाष्य कां ९।सू० जीवन प्राण पर भ्राधित है वैसे जीवन शब्द श्रादि पर भी भराधित है। तः शब्द ्नादि का सदुपयोग करना चाहिए, दुरुपयोग नहीं । (निरुक्त भ्र ° को ्राप्तकरती हँ । (निखक्त भर° ५, पाऽ १, खं० २) । ऋग्वेद के भाष्यकार श्री वेकटमाघरव की वृष्टि मेँ- . -भथि स्त्री भौर पुम् विभाग शरीरकृत है । ्रनात्मविदोंके-लियेये

English

it. His mouth she fondly calls to her warm udder, and suckles him with milk while gently

अध्याय ९

श्लोक 9.9

यु॒क्ता मा॒तासि॑द्धु॒रि दक्षि॑णाया॒ अति॑ष्ठ॒द् गर्भो॑ वृज॒नीष्व॒न्तः ।अमी॑मेद् व॒त्सो अनु॒ गाम॑पश्यद् विश्वरू॒प्यंऽ त्रि॒षु योज॑नेषु

yuktā mātāsiddhuri dakṣiṇāyā atiṣṭhad garbho vṛjanīṣvantaḥ | amīmed vatso anu gāmapaśyad viśvarūpyaṃ' triṣu yojaneṣu

हिन्दी अर्थ

भरात्माजोकिशरीरो मेह वंह पुमान् ही है, पुल्लिङ्गही है (ऋ० महषि दयानन्द की वृष्टि भे- “जिन को (सतीः) विद्या तथा उत्तम रिक्षादि शुभ गुणौं.से. युक्त (स्त्रियः) स्त्रां कहती हैः (तामु) उ (पुसः) . पुरुष -जानो । कन्यां को करे" (भावाथं) ऋऽ. १।१६४।१६॥

English

lowing. He also snorts, by whom encompassed round the Cow lows as she closely clings to him who sheds the rain.

अध्याय ९

श्लोक 9.10

ति॒स्रो मा॒तॄस्त्रीन् पि॒तॄन् बिभ्र॒देक॑ ऊ॒र्ध्वस्त॑स्थौ॒ नेमव॑ ग्लापयन्त ।म॒न्त्रय॑न्ते दि॒वो अ॒मुष्य॑ पृ॒ष्ठे वि॑श्व॒विदो॒ वाच॒मवि॑श्वविन्नाम्

tisro mātṝstrīn pitṝn bibhradeka ūrdhvastasthau nemava glāpayanta | mantrayante divo amuṣya pṛṣṭhe viśvavido vācamaviśvavinnām

हिन्दी अर्थ

कां० ९1 सू० € भरथवेवेद-माष्य १४७ घूमने पर,-- (यस्मिन्) जिसमें किं (विरवा भुवनानि ) सब सौर परिवार है ग्रह, उपग्रह भ्रादि का वह (सनात् एव) सनातन काल से हो (सना- भिः) नाभि समेत (न तप्यते) न तप्त होता है, (न छिद्यते) न टूटता ही है, वह सनातन काल से ही विद्यमान है । -‹

English

The axle, heavy-laden, is not heated: the nave from ancient time remains unheated. They call him in the farther half of heaven the Sire five-footed, of twelve forms, wealthy in watery store.

अध्याय ९

श्लोक 9.11

पञ्चा॑रे च॒क्रे प॑रि॒वर्त॑माने॒ यस्मि॑न्नात॒स्थुर्भुव॑नानि॒ विश्वा॑ ।तस्य॒ नाक्ष॑स्तप्यते॒ भूरि॑भारः स॒नादे॒व न च्छि॑द्यते॒ सना॑भिः

pañcāre cakre parivartamāne yasminnātasthurbhuvanāni viśvā | tasya nākṣastapyate bhūribhāraḥ sanādeva na cchidyate sanābhiḥ

हिन्दी अर्थ

होता रहता है ! इसलिये राशिचक्र को घूमता हुध्रा कहा है । राचिचक्र के कार है, रौर राशिचक्र भी चक्राकार है । इन दोनों चक्रों को परस्पर जोड़ने एक हो जाने से, ५ ऋतुए पांच .भ्रे है (निक्त ४।४।२७) । १२ व ५ (पुरीषिणम्) जल के क(रणीभूत राशिचक्र ध की

English

These others, later still, say that he takes his stand upon a seven- wheeled car, six-spoked, whose sight is clear.

अध्याय ९

श्लोक 9.12

पञ्च॑पादं पि॒तरं॒ द्वाद॑शाकृतिं दि॒व आ॑हुः परे॒ अर्धे॑ पुरी॒षिण॑म्।अथे॒मे अ॒न्य उप॑रे विचक्ष॒णे स॒प्तच॑क्रे॒ षड॑र आहु॒रर्पि॑तम्

pañcapādaṃ pitaraṃ dvādaśākṛtiṃ diva āhuḥ pare ardhe purīṣiṇam| atheme anya upare vicakṣaṇe saptacakre ṣaḍara āhurarpitam

हिन्दी अर्थ

१४८ शभ्रधरवैवेद-भाष्य कां० ९। सू० है (मन्व ११ की व्याख्या देखो) । राशिचक्र की दो-दो राशियों मे पृथिवी या सुय की गृति द्वारा एक-एक ऋतु का निर्माण होता है । ९ वीं श्रौर १० वीं तथा १९१ वींभ्रौर १२ वींइन चार राशियोंमे पृथिवी या सूर्यकी गति के के कारण (निरक्त ४।४।२७) । “्रादशाकृतिम्"रारिचक्र दवादश श्राकृतियों

English

Formed with twelve spokes, too strong for age to weaken, this wheel of during Order rolls round heaven. Herein established, joined in pairs together, seven hundred sons and twenty stand, O Agni.

अध्याय ९

श्लोक 9.13

द्वाद॑शारं न॒हि तज्जरा॑य॒ वर्व॑र्ति च॒क्रं परि॒ द्यामृ॒तस्य॑ ।आ पु॒त्रा अ॑ग्ने मिथु॒नासो॒ अत्र॑ स॒प्त श॒तानि॑ विंश॒तिश्च॑ तस्थुः

dvādaśāraṃ nahi tajjarāya varvarti cakraṃ pari dyāmṛtasya | ā putrā agne mithunāso atra sapta śatāni viṃśatiśca tasthuḥ

हिन्दी अर्थ

भक्ति वाली है। यथा मेषाकृति, वृषाकृति, मिथुनाकृति, कन्याकरति, कर्काक़ृति, सिंहाङृति, तुलाकृति, वुर्चिकाृति, धनुषाङृति, मकराकृति, नाम” (निषं० १।१२) । रदिमिचक्र उदक वाला है ) सूयं जब ककैराशि मे तथा मकरराशि मेँ होता है तब-तब वर्षा होती है । राशिचक्र की दो-दो राशियों मे सूयं की गति के कारण एक ऋतु होती है, मरतः .१२ राशियों मे गति के कारण ६ ऋतुएं हर्द" । यह् वस्तुतः है । परन्तु हेमन्त भौर शिशिर की सर्दी में एकानुभूति होने के कारण ऋतुएं ५ भी कही जाती है । भरतः “पञ्चपादम्”, भौर “षडर” मे परस्पर विरोष नहीं । वार-वार घूमता है । (तत्) वह चक्र (जराय नहि) जीणं .होने के लिये

English

The wheel revolves, unwasting, with its felly: ten draw it, yoked to the far-stretching car pole. Girt by the region moves the eye of Sūrya, on whom dependent rest all living creatures.

अध्याय ९

श्लोक 9.14

सने॑मि च॒क्रम॒जरं॒ वि वा॑वृत उत्ता॒नायां॒ दश॑ यु॒क्ता व॑हन्ति ।सूर्य॑स्य॒ चक्षू॒ रज॑सै॒त्यावृ॑तं॒ यस्मि॑न्नात॒स्थुर्भुव॑नानि॒ विश्वा॑

sanemi cakramajaraṃ vi vāvṛta uttānāyāṃ daśa yuktā vahanti | sūryasya cakṣū rajasaityāvṛtaṃ yasminnātasthurbhuvanāni viśvā

हिन्दी अर्थ

१. सयं श्रौर राशिचक्र की स्थिति एक ही चुभाग मे होती है । क्योंकि सूयं कौ गति रारिचक् मँ होती है । भतः दोनों का एक चयूभागे में होना भरावक्यक है । कां९९।सु०९ भ्रथरवैवेद-माष्य १४६ ७ सौ श्रौर बीस (मिथुनासः) मिथुन रूप, नर-मादास्प (पुत्राः) सूयं के

English

They told me these were males, though truly females. He who hath eyes sees this, the blind discerns not. The son who is a sage hath comprehended: who knows this rightly is his father’s father.

अध्याय ९

श्लोक 9.15

स्त्रियः॑ स॒तीस्ताँ उ॑ मे पुं॒सः आ॑हुः॒ पश्य॑दक्ष॒ण्वान् न वि चे॑तद॒न्धः ।क॒विर्यः पु॒त्रः स ई॒मा चि॑केत॒ यस्ता वि॑जा॒नात् स पि॒तुष्पि॒तास॑त्

striyaḥ satīstā~ u me puṃsaḥ āhuḥ paśyadakṣaṇvān na vi cetadandhaḥ | kaviryaḥ putraḥ sa īmā ciketa yastā vijānāt sa pituṣpitāsat

हिन्दी अर्थ

दयादलारम् = १२ मासरूमी प्ररे । मिथुनासः == भिथुनख्प, स्तरी-पुरुष रूप, ३६० रात्रिया भ्रौर ३६० दिन । ये ३६० मिथुन हैँ । एक व श्रौर एक दिन एक मिथुन । इन के साथ प्रग का सम्बन्ध है । भ्रथवेवेदानूसार सनेमि चक्रमजरं विं्वात उत्तानायां दहं युक्ता वहन्ति । सु्॑स्य चू रज॑सेत्यातं यसमि्नात॒सथ॒व॑नानि विद्वां ॥१५॥ चक्रसमान गोलाकार सूयं (विवावृते) निज भ्रक्ष पर घूम रहा है, (उत्ता- (वहन्ति) सूं का वहन करती हैँ । (सूर्यस्य चकुः) सूरय॑रूपी आंख (

English

Of the co-born they call the seventh single-born: the six twin, pairs are called the Rishis, sons of Gods.

अध्याय ९

श्लोक 9.16

सा॒कं॒जानां॑ स॒प्तथ॑माहुरेक॒जं षडिद् य॒मा ऋष॑यो देव॒जा इति॑ ।तेषा॑मि॒ष्टानि॒ विहि॑तानि धाम॒श स्था॒त्रे रे॑जन्ते॒ विकृ॑तानि रूप॒शः

sākaṃjānāṃ saptathamāhurekajaṃ ṣaḍid yamā ṛṣayo devajā iti | teṣāmiṣṭāni vihitāni dhāmaśa sthātre rejante vikṛtāni rūpaśaḥ

हिन्दी अर्थ

सनेमि रथ के पिये की परिधि पर लोहे का चक्कर जिसे नेमि कहते ह, चढ़ा दिया जाता है जो कि -पहिये कीरक्षा करता है, उसे टूटने से बचाता है । सूयूपी पिये की रक्षा करता है बरह्म । इसलिये ब्रह्म को कृविये पुत्रः सं हमा चिकेत यस्ता विजानात स पिरुष्पिताऽस॑द् ॥१५ मु कहते हैँ (पुसः) कि ये पुमान है, (भक्षण्वान् ) भरांलों वाला (पद्यत)

English

Their good gifts sought of men are ranged in order due, and, various, form by form, move for 149 their guiding Lord.

अध्याय ९

श्लोक 9.17

अ॒वः परे॑ण प॒र ए॒नाव॑रेण प॒दा व॒त्सं बिभ्र॑ती॒ गौरुद॑स्थात्।सा क॒द्रीची॒ कं स्वि॒दर्धं॒ परा॑गा॒त् क्वऽस्वित्सूते न॒हि यू॒थे अ॒स्मिन्

avaḥ pareṇa para enāvareṇa padā vatsaṃ bibhratī gaurudasthāt| sā kadrīcī kaṃ svidardhaṃ parāgāt kva'svitsūte nahi yūthe asmin

हिन्दी अर्थ

नहीं कर सकता । (यः कविः) जो कविता की दृष्टि वाला (पत्रः) परमे- प्रकार से जानता है। (यः) जो (ताः) उन्दः (विजानत्) विशेषतया जाने (सः) वह (पितुष्पिता) पिता के पिता के सदश्च पूजनीय ( म्रसत्) मन्व १३ में मिथुनासः पुत्राः” का कथन हुभ्रा है । इस द्वारा ३६०

English

Beneath the upper realm, above this lower, bearing her Calf at foot, the Cow hath risen. Whitherward, to what place hath she departed? Where doth she calve? Not in this herd of

अध्याय ९

श्लोक 9.18

अ॒वः परे॑ण पि॒तरं॒ यो अ॑स्य॒ वेदा॒वः परे॑ण प॒र ए॒ना व॑रेण ।क॒वी॒यमा॑नः॒ क इ॒ह प्र वो॑चद् दे॒वं मनः॒ कुतो॒ अधि॒ प्रजा॑तम्

avaḥ pareṇa pitaraṃ yo asya vedāvaḥ pareṇa para enā vareṇa | kavīyamānaḥ ka iha pra vocad devaṃ manaḥ kuto adhi prajātam

हिन्दी अर्थ

है' भौर. इन्हें समानाधिकार दिये हँ । मनु की भी यही सम्मति है। यथा भविकेषेण पुत्राणां दायो भवति ध्मेतः। साकंजानां स॒प्तर्थसाहुरेकज षडिद्यमा क्रषयो देवजा एति । (यमाः) नियमनकर्ता है, (ऋषयः) जो कि गति करते. है तथा (देवजा इति)

English

cattle. Who, that the father of this Calf discerneth beneath the upper realm, above the lower, Showing himself a sage, may here declare him? Whence hath the godlike spirit had its rising?

अध्याय ९

श्लोक 9.19

ये अ॒र्वाञ्च॒स्ताँ उ॒ परा॑च आहु॒र्ये परा॑ञ्च॒स्ताँ उ॑ अ॒र्वाच॑ आहुः ।इन्द्र॑श्च॒ या च॒क्रथुः॑ सोम॒ तानि॑ धु॒रा न यु॒क्ता रज॑सो वहन्ति

ye arvāñcastā~ u parāca āhurye parāñcastā~ u arvāca āhuḥ | indraśca yā cakrathuḥ soma tāni dhurā na yuktā rajaso vahanti

हिन्दी अर्थ

नुसार (विदितानि) विहितं कयि है, निरिचत किये ह, वे (रूपदाः ) निज कां° € । सु०९ भ्रथववेद-भाष्य १५१ मे स्थित जीवात्मा के लिये (रेजन्ते). गति करते है । , साथ-साथ रहते हैँ । शरीरावस्था मेँ भी साथ-साथ रहते है, . भौर जन्म-

English

Those that come hitherward they call departing, those that depart they call directed hither. Whatever ye have made, Indra and Soma! steeds draw, as’ twere, yoked to the region’s car pole.

अध्याय ९

श्लोक 9.20

द्वा सु॑प॒र्णा स॒युजा॒ सखा॑या समा॒नं वृ॒क्षं परि॑ षस्वजाते ।तयो॑र॒न्यः पिप्प॑लं स्वा॒द्वत्त्यन॑श्नन्न॒न्यो अ॒भि चा॑कशीति

dvā suparṇā sayujā sakhāyā samānaṃ vṛkṣaṃ pari ṣasvajāte | tayoranyaḥ pippalaṃ svādvattyanaśnannanyo abhi cākaśīti

हिन्दी अर्थ

भ्रवराविद्या के साथ (परः) पराविद्या को निरुपित करने वाले (पदा) हई (गौः) वेदवाणी रूप वेद माता (उदस्थात् ) सदा उत्थान किये हए है । (सा) वह वेदवाणी रूप-माता (कद्रीची ) कहां से भी भ्राती हुई, (कस्वित्) किसी ही (भेम्) ऋद्धिशील को (परा गात्) उसके दुर रहते हृए भी करती है, (भ्रस्मिन् यूथे) परन्तु इस मानुष-समुदाय में (नहि) वह होता है, लेटे था बेठे वह् दूष नहीं पिला सकती । वेदमाता भी निज ज्ान- दुग .पिलाने के लिये सदा उत्थान कयि हृए है, सदा उद्यत है । मन्त्र की

English

The tree whereon the fine Birds eat the sweetness, where they all rest and procreate their offspring

अध्याय ९

श्लोक 9.21

यस्मि॑न् वृ॒क्षे म॒ध्वदः॑ सुप॒र्णा नि॑वि॒शन्ते॒ सुव॑ते॒ चाधि॒ विश्वे॑ ।तस्य॒ यदा॒हुः पिप्प॑लं स्वा॒द्वग्रे॒ तन्नोन्न॑श॒द् यः पि॒तरं॒ न वेद॑

yasmin vṛkṣe madhvadaḥ suparṇā niviśante suvate cādhi viśve | tasya yadāhuḥ pippalaṃ svādvagre tannonnaśad yaḥ pitaraṃ na veda

हिन्दी अर्थ

तथा जीवात्मा के उपकरणों का वणेन हृभ्रा है । ॑ १५२ श्रयववेवेद-माष्य कां € 1 सू० € अव; परेण पितरं यो अस्य वेदावः परण पर एनावरेण । कवीयमानः क इह परवोचद् देवं मनः कुतो अधि भातम् ॥१८॥

English

Upon the top, they say the fruit is luscious: none gaineth it who knoweth not the Father. Where the fine birds hymn ceaselessly their portion of life eter- nal, and the sacred synods. There is the Universe’s Guard and Keeper who, wise hath entered into me the simple.

अध्याय ९

श्लोक 9.22

यत्रा॑ सुप॒र्णा अ॒मृत॑स्य भ॒क्षमनि॑मेषं वि॒दथा॑भि॒स्वर॑न्ति ।ए॒ना विश्व॑स्य॒ भुव॑नस्य गो॒पाः स मा॒ धीरः॒ पाक॒मत्रा वि॑वेश

yatrā suparṇā amṛtasya bhakṣamanimeṣaṃ vidathābhisvaranti | enā viśvasya bhuvanasya gopāḥ sa mā dhīraḥ pākamatrā viveśa

हिन्दी अर्थ

के लोक के साथ (श्रवः) भ्रवर के लोक से सम्बद्ध (वेद) जानता है; तथा (श्रवः) भ्रवरके लोकको (परेण) परके लोकके साथ, श्रौरः (एना भ्रवरेण) इस श्रवर लोक के साथ (परः) परकेभोक कोभी परस्पर सम्बद्ध जानता है, एेसा (कः) कौन (कवीयमानः) श्रपने श्राप को वेद परे के लोक (ग्राहः) कहते ह, ये) प्रौर जो (पराञ्चः) परे के लोक है का (चक्रथुः) निर्माण करते हो, (तानि) वे (घुरा न युक्ताः) धुरि जुते हृए (रजसः) रञ्जक पृथिवी लोक के कायो का (वहन्ति) वहन करते है, सम्पादन करते हैँ । देते है, वे सापेक्ष दृष्टि से है, वस्तुतः न कोई नीचे है, न ऊपर । पृथिवी के यासियों को पृथिवी नीचे भ्रौर सूर्य, नक्षत्र, तारा ऊचे दिखाई देते है।

English

Continuation of Hymn 9 How on the Gāyatri the Gāyatri was based; how from the

अध्याय ९

श्लोक 10.1

आत्मा।१-२८ ब्रह्मा।गौः, विराट् अध्यात्मम्, २३ मित्रावरुणौ।त्रिष्टुप्, १,७,१४,१७-१८ जगती, २१ पञ्चपदातिशक्वरी, २४ चतुष्पदा पुरस्कृतिर्भुरिगतिजगती, २, २६-२७ भुरिक्।यद् गा॑य॒त्रे अधि॑ गाय॒त्रमाहि॑तं॒ त्रैष्टु॑भं वा॒ त्रैष्टु॑भान्नि॒रत॑क्षत ।यद् वा॒ जग॒ज्जग॒त्याहि॑तं प॒दं य इत् तद् वि॒दुस्ते अ॑मृत॒त्वमा॑नशुः

ātmā| 1-28 brahmā| gauḥ, virāṭ adhyātmam, 23 mitrāvaruṇau| triṣṭup, 1,7,14,17-18 jagatī, 21 pañcapadātiśakvarī, 24 catuṣpadā puraskṛtirbhurigatijagatī, 2, 26-27 bhurik| yad gāyatre adhi gāyatramāhitaṃ traiṣṭubhaṃ vā traiṣṭubhānniratakṣata | yad vā jagajjagatyāhitaṃ padaṃ ya it tad viduste amṛtatvamānaśuḥ

हिन्दी अर्थ

कृत श्रथां दवारा मान्य होःजाती है । ऋगवेद.के भ्नुवादक भि० विल्सन.का (२) षेनुः (४), श्रघ्न्या (४५), गौ (६) इन पदों द्वारा वेदमाता का जीवात्मा -( १५, १६).; विद्व के वटक, सातमअरघेगभं तत्त्व . ( १७) ; रूप (२४); शकमय घूम (२५); -क्रयः केरिनः- (२६); वाक् = चत्वारि

English

She with her shrilling cries hath humbled mortal men, and turn- ed to lightning, hath stripped off her covering robe.

अध्याय ९

श्लोक 10.2

गा॒य॒त्रेण॒ प्रति॑ मिमीते अ॒र्कम॒र्केण॒ साम॒ त्रैष्टु॑भेन वा॒कम्।वा॒केन॑ वा॒कं द्वि॒पदा॒ चतु॑ष्पदा॒क्षरे॑ण मिमते स॒प्त वाणीः॑

gāyatreṇa prati mimīte arkamarkeṇa sāma traiṣṭubhena vākam| vākena vākaṃ dvipadā catuṣpadākṣareṇa mimate sapta vāṇīḥ

हिन्दी अर्थ

यं ‰ च॒कार न. सो.अस्य वद य ददश हिरुगिन्वु तस्मात् । (यः) जो व्यक्ति (ईम्) इस गर्भाधान को (चकार) करता है (सः) वह (भ्रस्य) इस के परिणामं को (न वेद) नहीं जानता, (सः) वह् (मातुः योना) भेता की योनि मेँ (परिवीतः) धिर हृश्रा, या जरायुसे प्रवेद पातो रहता: है । , भौर -(यः) जो व्यक्तिः (ईम) इस गर्भाधान के

English

Ceaseless they move in opposite directions: men mark the one and fail to mark the other. Seven germs unripened yet are Heaven’s prolific seed: their functions they maintain by Vishnu’s ordinance.

अध्याय ९

श्लोक 10.3

जग॑ता॒ सिन्धुं॑ दि॒व्यऽस्कभायद् रथंत॒रे सूर्यं॒ पर्य॑पश्यत्।गा॒य॒त्रस्य॑ स॒मिध॑स्ति॒स्र आ॑हु॒स्ततो॑ म॒ह्ना प्र रि॑रिचे महि॒त्वा

jagatā sindhuṃ divya'skabhāyad rathaṃtare sūryaṃ paryapaśyat| gāyatrasya samidhastisra āhustato mahnā pra ririce mahitvā

हिन्दी अर्थ

सप्त भ्रंगर्भाः== वे सात, प्रकृति से पदा हृए है. भरतः काय॑रूप है, भौर भूत भौतिक संसार के उपादान है भ्रतुः कारणरूप भी । भतः इन सात मे कायंरूपता भ्रौर कारणरूपता प्रध॑-्रधं रूप में स्थित है । धीतिभिः कारिका) । जसे कि माता के पेट मे .५, ६ मासो . करा. शिशु, वीयं -का - कोयं भ्रौर ज्ञानबलक्िया च” ( इवेता० उप० ६।८), परमेदवर में “श्ञान बल क्रिया

English

Virāj is Speech, and Earth, and Air’s mid-region. He is Praja- pati, and he is Mrityu. He is the Lord Imperial of the Sādhyas. He rules what is and what shall be hereafter. May he make me lord of what is and shall be.

अध्याय ९

श्लोक 10.4

उप॑ ह्वये सु॒दुघां॑ धे॒नुमे॒तां सु॒हस्तो॑ गो॒धुगु॒त दो॑हदेनाम्।श्रेष्ठं॑ स॒वं स॑वि॒ता सा॑विषन्नो॒ऽभीऽद्धो घ॒र्मस्तदु॒ षु प्र वो॑चत्

upa hvaye sudughāṃ dhenumetāṃ suhasto godhuguta dohadenām| śreṣṭhaṃ savaṃ savitā sāviṣanno'bhī'ddho gharmastadu ṣu pra vocat

हिन्दी अर्थ

उत्पत्ति, स्थिति, प्रलय न करं सकता इसलिये वह विभु तथापि चेतन होने धीतिभिः द्वारा परमेश्वर की क्रियारभो का वणेन हुमा है । मनसा = परमेदवर "को अक्षरं परमे व्यो मन् यमन् देवा अधि रिदं निषि; । समस्त सूरय श्रादि दिव्य पदां (रषि तिषदुः) भषेयरूप से स्थित है,

English

I saw from far away the smoke of fuel with spires that rose on high o’er that beneath it. The heroes cooked and dressed the spotted bullock. These were the customs in the days

अध्याय ९

श्लोक 10.5

हि॒ङ्कृ॒ण्व॒ती व॑सु॒पत्नी॒ वसू॑नां व॒त्समि॒च्छन्ती॒ मन॑सा॒भ्यागा॑त्।दु॒हाम॒श्विभ्यां॒ पयो॑ अ॒घ्न्येयं सा व॑र्धतां मह॒ते सौभ॑गाय

hiṅkṛṇvatī vasupatnī vasūnāṃ vatsamicchantī manasābhyāgāt| duhāmaśvibhyāṃ payo aghnyeyaṃ sā vardhatāṃ mahate saubhagāya

हिन्दी अर्थ

वन्ति) सजीव हो रही ह । वन्ति) सजीवहोरही ह। - भवी बच्चे को कारण होता है, इस प्रकार वह विकृति. भौर. प्रकृति, ध्न दोनों शपो म होवा है 4 यदी भवस्था महदादि की है । = , न चअ तिव आ क = + मके अ गि शकाः श्न -श्का नयो "का दाः जणा गा इयः गवा कक प शय यक) जक सका = य याका शा भष) एनत (का व" पमः वा सल, एः अः क शा चौ आ श्र नं त वि आः क क जा" र

English

aforetime. Three with long tresses show in ordered season. One of them sheareth when the year is ended.

अध्याय ९

श्लोक 10.6

गौर॑मीमेद॒भि व॒त्सं मि॒षन्तं॑ मू॒र्धानं॒ हिङ्ङ॑कृणो॒न्मात॒वा उ॑ ।सृक्वा॑णं घ॒र्मम॒भि वा॑वशा॒ना मिमा॑ति मा॒युं पय॑ते॒ पयो॑भिः

gauramīmedabhi vatsaṃ miṣantaṃ mūrdhānaṃ hiṅṅakṛṇonmātavā u | sṛkvāṇaṃ gharmamabhi vāvaśānā mimāti māyuṃ payate payobhiḥ

हिन्दी अर्थ

कां° -1 सु० १९ भ्रथवेवेद-माष्य १६९ कथन कर दिया है। यथा-“पादोऽस्य विद्वा भुतानि त्रिपादस्यामृतं भोर त्रिपाद्” का कथन हुभा-है । साद् तु उत्तम-यवस का भक्षण करती है, (तृणम्) तु निःसार तरणो को

English

One with his powers the universe regardeth. Of one the sweep is seen, but not the figure. 151

अध्याय ९

श्लोक 10.7

अ॒यं स शि॑ङ्क्ते॒ येन॒ गौर॒भिवृ॑ता॒ मिमा॑ति मा॒युं ध्व॒सना॒वधि॑ श्रि॒ता।सा चि॒त्तिभि॒र्नि हि च॒कार॒ मर्त्या॑न् वि॒द्युद् भव॑न्ती॒ प्रति॑ व॒व्रिमौ॑हत

ayaṃ sa śiṅkte yena gaurabhivṛtā mimāti māyuṃ dhvasanāvadhi śritā| sā cittibhirni hi cakāra martyān vidyud bhavantī prati vavrimauhata

हिन्दी अर्थ

दिका है । इस के एेदवर्थवती होते हम भी देर्वयंवान् होते द । यह जब -वृच््पात करती. है तब उत्तम-यवसो क्तो भी खा जाती है, सस्मीभरत कर देती (तुःनिःसांर तूणो को ही साया कर, उन्हीं पर् ही तेरा वज्रपात हृभ्रा करे 1 ". . .हे. (अशनये) म हनन योग्य गौ के समान् व्रतंमान - विदुषी! तु (सुयव- :शवात्) सुल्दर सुखं को . भोगे वाली, (सगवती) बहुतः देवं वाली

English

Speech hath been measured out in four divisions: the Brāhmans who have wisdom comprehend them. Three, kept in close concealment, cause no motion. Of Speech men speak the fourth division

अध्याय ९

श्लोक 10.8

अ॒नच्छ॑ये तु॒रगा॑तु जी॒वमेज॑द् ध्रु॒वं मध्य॒ आ प॒स्त्याऽनाम्।जी॒वो मृ॒तस्य॑ चरति स्व॒धाभि॒रम॑र्त्यो॒ मर्त्ये॑ना॒ सयो॑निः

anacchaye turagātu jīvamejad dhruvaṃ madhya ā pastyā'nām| jīvo mṛtasya carati svadhābhiramartyo martyenā sayoniḥ

हिन्दी अर्थ

१७० भ्रथर्वेवेद-माष्य. कां७ ९.1 सू०:१५ (सूयाः) हो, कि (हि) जिस कारण (वयम्) हम. लोग (भगवन्तः ) बहुत एेचवयेगुक्त (स्याम) हों । जैसे करिः (तृणम्) तृण .कोखा (शुदढधम्) शुध भ्रौरःविद्यारस को (पिब)पी । मन्त मे वाचक लुप्तोपमालंकारं है (ऋ° (सभिलानि) जलो फा (तक्षती) निर्माण करती ह + गौः) माध्य हजारों जलं घाराप्नो को क्षरित कंरतीः हदः (भुवनस्य) जल का (पंक्तिः)

English

only. They call him Indra, Mitra, Varuna, Agni; and he is heavenly nobly-winged Garutmān.

अध्याय ९

श्लोक 10.9

वि॒धुं द॑द्रा॒णं स॑लि॒लस्य॑ पृ॒ष्ठे युवा॑नं॒ सन्तं॑ पलि॒तो ज॑गार ।दे॒वस्य॑ पश्य॒ काव्यं॑ महि॒त्वाद्य म॒मार॒ स ह्यः समा॑न

vidhuṃ dadrāṇaṃ salilasya pṛṣṭhe yuvānaṃ santaṃ palito jagāra | devasya paśya kāvyaṃ mahitvādya mamāra sa hyaḥ samāna

हिन्दी अर्थ

अलग-भ्रलग क्षरित होते है । पाथिवं समुद्र. वर्षाजनितदही है . - वियत् । निरव मे कहा है कि “एकपदी मध्यमेन. द्विपदी १ च तथा गौ-वेद वाक् (गौः वाङ्नाम, निधं ° ११ १). 1. यहं “एकवाद"

English

That which is One bards call by many a title: they call It Agni, Yama, Mātariswan. 152

अध्याय ९

श्लोक 10.10

य ईं॑ च॒कार॒ न सो अ॒स्य वे॑द॒ य ईं॑ द॒दर्श॒ हिरु॒गिन्नु तस्मा॑त्।स मा॒तुर्योना॒ परि॑वीतो अ॒न्तर्ब॑हुप्र॒जा निरृ॑ति॒रा वि॑वेश

ya īṃ cakāra na so asya veda ya īṃ dadarśa hiruginnu tasmāt| sa māturyonā parivīto antarbahuprajā nirṛtirā viveśa

हिन्दी अर्थ

१५८ भ्रथवेवेद-भाष्य कां० ९॥ सुऽ १० मोक्ष. को. (आनशुः) प्राप्त करते ई । .(ऋ०-१।१६४।२३) । साथ, जो कि लोक का देवता है. - मानां है। इस प्रकार इन तीन छन्दं

English

That which hath breath and life and speed and motion lies firmly stablished in the midst of houses. The living moves by powers of the departed: the immortal is the brother of the mortal.

अध्याय ९

श्लोक 10.11

अप॑श्यं गो॒पाम॑नि॒पद्य॑मान॒मा च॒ परा॑ च प॒थिभि॒श्चर॑न्तम्।सस॒ध्रीचीः॒ स विषू॑ची॒र्वसा॑न॒ आ व॑रीवर्ति॒ भुव॑नेष्व॒न्तः

apaśyaṃ gopāmanipadyamānamā ca parā ca pathibhiścarantam| sasadhrīcīḥ sa viṣūcīrvasāna ā varīvarti bhuvaneṣvantaḥ

हिन्दी अर्थ

कां० €।.सू० ,४ भ्रथववेद-माष्य १५९ वाकेन वाकं द्विपदा चतष्पदाऽक्षरेण मिमते सुप्त वाणीः ॥२॥ यजुवद को, (द्विपदा ) दो पादो वाले, (चतुष्पदा) -चार पादो वाले (भअक्ष- (सप्तं वाणीः) सात गायत्री भादि छन्दो से युक्त वेदवाणीयों को

English

The old hath waked the young Moon from his slumber, who runs his circling course with many round him.

अध्याय ९

श्लोक 10.12

द्यौर्नः॑ पि॒ता ज॑नि॒ता नाभि॒रत्र॒ बन्धु॑र्नो मा॒ता पृ॑थि॒वी म॒हीयम्।उ॒त्ता॒नयो॑श्च॒म्वो॒३र्योनि॑र॒न्तरत्रा॑ पि॒ता दु॑हि॒तुर्गर्भ॒माधा॑त्

dyaurnaḥ pitā janitā nābhiratra bandhurno mātā pṛthivī mahīyam| uttānayoścamvo3ryonirantaratrā pitā duhiturgarbhamādhāt

हिन्दी अर्थ

परमेदवर ने (जगता) जगत् के साथ (सिन्धुम्) नदीं, समुद्र को, तथा चमकते तारावभै है, (श्राहुः) यह कहते ह,.परन्तुं, परमेश्वर (ततः) उस द्वारा, यहं भी कहते ह । (चऋछ०. १।१६४।२५) 1 =, ˆ; . .

English

Behold the God’s high wisdom in its greatness: he who died yesterday to-day is living. He who hath made him doth not comprehend him: from him who saw him surely he is hidden.

अध्याय ९

श्लोक 10.13

पृ॒च्छामि॑ त्वा॒ पर॒मन्तं॑ पृथि॒व्याः पृ॒च्छामि॒ वृष्णो॒ अश्व॑स्य॒ रेतः॑ ।पृ॒च्छामि॒ विश्व॑स्य॒ भुव॑नस्य॒ नाभिं॑ पृ॒च्छामि॑ वा॒चः प॑र॒मं व्योऽम

pṛcchāmi tvā paramantaṃ pṛthivyāḥ pṛcchāmi vṛṣṇo aśvasya retaḥ | pṛcchāmi viśvasya bhuvanasya nābhiṃ pṛcchāmi vācaḥ paramaṃ vyo'ma

हिन्दी अर्थ

भानो तैरंते हए वैमानिक . गति.करते रहै .गायत्रस्य = गायतः, त्रातु (देखो (एताम्). इस (सुदुधोम्) सुगमता से.वोही जाने . वाली (षेनुम्) दुधार वेदवोणी रूपी गौ को (उपहूय) मै. भादर पूत्रक स्वीकार करताहू, (सुहस्तः) स्वच्छ हाथ वाला (गोधुग्). वेदवाणी रूपी गौ का दोहने वाला (एनाम् ) इसे (दोहत्) ' दौहंता-है ! (सविता) प्रेरणाप्रद परमेवर (नः)

English

He, yet enveloped in his mother’s bosom, source of much life, hath sunk into destruction. 150

अध्याय ९

श्लोक 10.14

इ॒यं वेदिः॒ परो॒ अन्तः॑ पृथि॒व्या अ॒यं सोमो॒ वृष्णो॒ अश्व॑स्य॒ रेतः॑ ।अ॒यं य॒ज्ञो विश्व॑स्य॒ भुव॑नस्य॒ नाभि॑र्ब्र॒ह्मायं वा॒चः प॑र॒मं व्योऽम

iyaṃ vediḥ paro antaḥ pṛthivyā ayaṃ somo vṛṣṇo aśvasya retaḥ | ayaṃ yajño viśvasya bhuvanasya nābhirbrahmāyaṃ vācaḥ paramaṃ vyo'ma

हिन्दी अर्थ

उत्तमतया (प्रवोचत्) प्रवचन करे । क 5 स र क दोहने के लिये दोग्धा के हाथ स्वच्छ होने चाहिए । वेदवाणी कौ दोहते के लिये भी हाथ शुभ कर्मोके करने वाले चार्य । धेनु =षेट् पने, दुष १।११) । वैंदवाणी भी चार वेदौ द्वारा चतुष्पाद् है, चतुषि पदों वाली

English

I saw the Herdsman, him who never stumbles, approaching by his pathways and departing. He clothed with gathered and diffusive splendours, within the worlds continually travels. Dyaus is our father, our begetter: kinship is here. This great

अध्याय ९

श्लोक 10.15

न वि जा॑नामि॒ यदि॑वे॒दमस्मि॑ नि॒ण्यः संन॑द्धो॒ मन॑सा चरामि ।य॒दा माग॑न् प्रथम॒जा ऋ॒तस्यादिद् वा॒चो अ॑श्नुवे भा॒गम॒स्याः

na vi jānāmi yadivedamasmi niṇyaḥ saṃnaddho manasā carāmi | yadā māgan prathamajā ṛtasyādid vāco aśnuve bhāgamasyāḥ

हिन्दी अर्थ

है, (सा) वहं (महते सौममायः) हमारे महासौमाम्य के लिये (वर्ताम) बढ, सर्व॑त्र उस का विस्तार हो । ४ 4 1 8 +: ० भ हिङ्कृण्वती इसं पद दारा ऋन्नाप्नों पर. सामगान को सूचितं किया ४ है “ऋच्यधिष्ढं साम गीयते” । सामगान कै ५ भवयव होते है, (१) हि, द्वारा प॑चर्विषःसामगरान का निदेश किया है जो.कि गेयरूपी वैदिक ऋचाभौं -पैर गाया जार्ता है । वसुपली = वेद मेँ .नाना विष् सुम्पत्तियों का वणन है तथा सुरूप सदपवेशौं का. वणन हैःग्रतः बहुः वसुप्ली. है । वेद् काः निलय

English

Earth is our kin and mother. Between the wide-spread world-halves is the birth-place. The

अध्याय ९

श्लोक 10.16

अपा॒ङ् प्राङे॑ति स्व॒धया॑ गृभी॒तोऽम॑र्त्यो॒ मर्त्ये॑ना॒ सयो॑निः ।ता शश्व॑न्ता विषू॒चीना॑ वि॒यन्ता॒ न्य॑१न्यं चि॒क्युर्न नि चि॑क्युर॒न्यम्

apāṅ prāṅeti svadhayā gṛbhīto'martyo martyenā sayoniḥ | tā śaśvantā viṣūcīnā viyantā nya1nyaṃ cikyurna ni cikyuranyam

हिन्दी अर्थ

कां०.९। सु° १० भर्ेवेद-साष्य १६१ (निषंऽ २।११) ; तथा पदनाम (निषं० ५।५) । गौ के सम्बन्ध मे हिङ्- को लक्ष्य कर. के (मायुम्) शाब्द (भिमाति) करती है, (वावशाना) वार बार शब्द करती है, (पयोभिः) भ्रौर स्तनोंमे दूष के साथ. (पयते)

English

Father laid the Daughter’s germ within it. I bid thee tell me earth’s extremest limit, about the Stallion’s genial flow I ask thee; I ask about the universe’s centre, and touching highest heaven where Speech abideth.

अध्याय ९

श्लोक 10.17

स॒प्तार्ध॑ग॒र्भा भुव॑नस्य॒ रेतो॒ विष्णो॑स्तिष्ठन्ति प्र॒दिशा॒ विध॑र्मणि ।ते धी॒तिभि॒र्मन॑सा॒ ते वि॑प॒श्चितः॑ परि॒भुवः॑ परि॑ भवन्ति वि॒श्वतः॑

saptārdhagarbhā bhuvanasya reto viṣṇostiṣṭhanti pradiśā vidharmaṇi | te dhītibhirmanasā te vipaścitaḥ paribhuvaḥ pari bhavanti viśvataḥ

हिन्दी अर्थ

है । मातवै = उसे जताने केरिये किरम ग्रा गई हुं, उसके सिर पर हम्भारती यायी के प्रति वेदवाणी निजस्वरूप को प्रकट करती है, भ्रौर उस के परि- १०।७१।५) मे वेदवाणी रूपी गौ के ज्ञानदुगघ को “पीतम्” शब्द दारा गौ के चार स्तनो हारा कुर प्रज्रवित होता है, वेदवाणी के भी ४ वेदरूपी स्तनो दारा ज्ञान दुग प्रस्वित होता है ।

English

The earth’s most distant limit is this altar: this Soma is the Stallion’s genial humour;

अध्याय ९

श्लोक 10.18

ऋ॒चो अ॒क्षरे॑ पर॒मे व्योऽम॒न् यस्मि॑न् दे॒वा अधि॒ विश्वे॑ निषे॒दुः ।यस्तन्न वेद॒ किमृ॒चा क॑रिष्यति॒ य इत् तद् वि॒दुस्ते अ॒मी समा॑सते

ṛco akṣare parame vyo'man yasmin devā adhi viśve niṣeduḥ | yastanna veda kimṛcā kariṣyati ya it tad viduste amī samāsate

हिन्दी अर्थ

१६२ भ्रथ्वेवेद-माष्य कां० € सू०;.१० है (येन) जिस मेष द्वारा (भ्रमीवृता) धिरी हई; भौर (ष्वसनौ अषि) (भ्रदादिः) । नि चकार = तरिकृतान् करोति, भ्रपमानित करती .है 1 वन्नः रूप

English

This sacrifice the universe’s centre: this Brāhman highest heaven where Speech abideth. What thing I truly am I know not clearly: mysterious, fettered in my mind I wander. When the first-born of holy Law approached me, then of this

अध्याय ९

श्लोक 10.19

ऋ॒चः प॒दं मात्र॑या क॒ल्पय॑न्तोऽर्ध॒र्चेन॑ चाक्लृपु॒र्विश्व॒मेज॑त्।त्रि॒पाद् ब्रह्म॑ पुरु॒रूपं॒ वि त॑ष्ठे॒ तेन॑ जीवन्ति प्र॒दिश॒श्चत॑स्रः

ṛcaḥ padaṃ mātrayā kalpayanto'rdharcena cāklṛpurviśvamejat| tripād brahma pururūpaṃ vi taṣṭhe tena jīvanti pradiśaścatasraḥ

हिन्दी अर्थ

योनि हूभ्रा (चरति) मातुगभँ मेँ जाता है । का० ९। सु १९ भ्रथर्ववेद-भाष्य , १६३ जाता है, खा नाता है, (देवस्य ). परमेश्व रदेव के (महित्वा). महिमा युक्त (ममार) मर गयां है,.जो कि (ह्यः) गुजरे कल (समान) प्राणः सहितः था, जाता है । पलितः. का श्रथं है “सिर के पके बाल अर्थात् बुदापा । यथा “न

English

Speech I first obtain a portion. Back, forward goes he, grasped by power inherent, immortal born the brother of the mortal.

अध्याय ९

श्लोक 10.20

सू॒य॒व॒साद् भग॑वती॒ हि भू॒या अधा॑ व॒यं भग॑वन्तः स्याम ।अ॒द्धि तृण॑मघ्न्ये विश्व॒दानीं॒ पिब॑ शु॒द्धमु॑द॒कमा॒चर॑न्ती

sūyavasād bhagavatī hi bhūyā adhā vayaṃ bhagavantaḥ syāma | addhi tṛṇamaghnye viśvadānīṃ piba śuddhamudakamācarantī

हिन्दी अर्थ

१६४. भ्रथववेद-भाष्य कां० ६। सू० १० के रक्षक, (भाच पराध) समीपके तथा दुरं के (पथिभिः ) मार्गो यारा है, देख लिया है । (सः) बह (सध्रीचीः) साथ-साथ चलने वाली, (सः) वह (विषूचीः) तथा विविध मार्गमे म्र्थात् आड़ चलने वाली नस-नाडियों के भीतर (आ वरीवत्ि) बार-बार भ्राता है। २

English

Endued with wisdom through intelligence and thought, present on every side they compass us about.

अध्याय ९

श्लोक 10.21

गौरिन्मि॑माय सलि॒लानि॒ तक्ष॒त्येक॑पदी द्वि॒पदी॒ सा चतु॑ष्पदी ।अ॒ष्टाप॑दी॒ नव॑पदी बभू॒वुषी॑ स॒हस्रा॑क्षरा॒ भुव॑नस्य प॒ङ्क्तिस्तस्याः॑ समु॒द्रा अधि॒ वि क्ष॑रन्ति

gaurinmimāya salilāni takṣatyekapadī dvipadī sā catuṣpadī | aṣṭāpadī navapadī babhūvuṣī sahasrākṣarā bhuvanasya paṅktistasyāḥ samudrā adhi vi kṣaranti

हिन्दी अर्थ

भरौर भनात्मा का विवेकञ्ञान । - । जन्मदाता पिता है, (रत्र) इस एक जन्मदाता के होते (नाभिः) हम सब का परस्पर सम्बन्ध है । (इयम्) यह (मही ) महनीया (पृथिवी) पृथिवी (माता) माता भी (नः बन्धुः) हमे परस्पर में बान्धने वाली है । भरन्तरिक् में सब भोर फला कर स्थापित करता है ।

English

Upon what syllable of holy praise-hymn, as ‘twere their highest heaven, the Gods repose them Who knows not this, what will he do with praise-hymn? But they who know it well sit here

अध्याय ९

श्लोक 10.22

कृ॒ष्णं नि॒यानं॒ हर॑यः सुप॒र्णा अ॒पो वसा॑ना॒ दिव॒मुत्प॑तन्ति ।तं आव॑वृत्र॒न्त्सद॑नादृ॒तस्यादिद् घृ॒तेन॑ पृथि॒वीं व्यूऽदुः

kṛṣṇaṃ niyānaṃ harayaḥ suparṇā apo vasānā divamutpatanti | taṃ āvavṛtrantsadanādṛtasyādid ghṛtena pṛthivīṃ vyū'duḥ

हिन्दी अर्थ

मन्व मेँ दो भावनाग्रोँ का युगपत् समावेश क्रिया हैः। इसलिये! इन दो इस प्रकार “गभं” का भ्यं “मेष भी है। कां € । सु १०५ भ्रथरववेद-भाष्य १६५ सब का पिता, द्यौः कहा है, श्रौर माता पृथिवी कही है । इस प्रकार इन से

English

assembled. They, ordering the verse’s foot by measure, with the half-verse arranged each thing that

अध्याय ९

श्लोक 10.23

अ॒पादे॑ति प्रथ॒मा प॒द्वती॑नां॒ कस्तद् वां॑ मित्रावरु॒णा चि॑केत ।गर्भो॑ भा॒रं भ॑र॒त्या चि॑दस्या ऋ॒तं पिप॒र्त्यनृ॑तं नि पा॑ति

apādeti prathamā padvatīnāṃ kastad vāṃ mitrāvaruṇā ciketa | garbho bhāraṃ bharatyā cidasyā ṛtaṃ pipartyanṛtaṃ ni pāti

हिन्दी अर्थ

किया है । दुसरे सन्द में पिता भौर दुहिता का कथन हरा है । सूयं पिता है भौर प्रथिवी दुहिता । पृथिवी सूये के शरीर से विभक्त हुई है, ्रतः दुहिता है । पिता का कर्तव्य है कि वह निज दुहिता के सम्बन्ध में स

English

moveth. Prayer was diffused in many forms three-footed thereby the world’s four regions have their being

अध्याय ९

श्लोक 10.24

वि॒राड् वाग् विरा॑ट् पृ॑थि॒वी वि॒राड॒न्तरि॑क्षं वि॒राट् प्र॒जाप॑तिः ।वि॒राण्मृ॒त्युः सा॒ध्याना॑मधिरा॒जो ब॑भूव॒ तस्य॑ भू॒तं भव्यं॒ वशे॒ स मे॑ भू॒तं भव्यं॒ वशे॑ कृणोतु

virāḍ vāg virāṭ pṛthivī virāḍantarikṣaṃ virāṭ prajāpatiḥ | virāṇmṛtyuḥ sādhyānāmadhirājo babhūva tasya bhūtaṃ bhavyaṃ vaśe sa me bhūtaṃ bhavyaṃ vaśe kṛṇotu

हिन्दी अर्थ

भोर फला हृश्मा मेष" । मेघ निज वर्षा रूपी वीयं दवारा इस दुहिता ध गमं वर्णन नहीं कि पिता ने दुहिता में गमम स्थापन किया । इस भ्रथं मे दुहितुः के स्थान में दुहितरि पाठ चाहिए । “उत्तानयोः” द्वारा पृथिवी श्रौर द्युलोक को ऊपर की भोर उभरे हृए दर्शाया है । इस द्वारा इन दोनों की भ्राक्रृति गोलाकार सुचित की है 9 गोल वस्तु सब भ्रोर उभरी हुई होती है । चम्बौ चावापृथिवीनाम" (निषं° ३। ३० । नाभिः नेह बन्धने । बन्धु का भी यौगिक भ्रथं बन्वन ही है । करे वाले श्रव का रेतस् वोयं कौन सा है ? (पृच्छामि) म पूता ह

English

Fortunate mayst thou be with goodly pasture, and may we also be exceeding wealthy. Feed on the grass, O Cow, through all the seasons, and coming hitherward drink limpid

अध्याय ९

श्लोक 10.25

श॒क॒मयं॑ धू॒ममा॒राद॑पश्यं विषू॒वता॑ प॒र ए॒नाव॑रेण ।उ॒क्षाणं॒ पृश्नि॑मपचन्त वी॒रास्तानि॒ धर्मा॑णि प्रथ॒मान्या॑सन्

śakamayaṃ dhūmamārādapaśyaṃ viṣūvatā para enāvareṇa | ukṣāṇaṃ pṛśnimapacanta vīrāstāni dharmāṇi prathamānyāsan

हिन्दी अर्थ

(पृच्छामि) म पूछता हूं (वाचः) वाणी का (परमं व्योम) परम रक्षक्र (इयम्, वेदिः) यह् वेदि ( पृथिव्याः) पृथिवी का (परः अन्तः) परला १९६ : भ्रथवेवेद-माष्य कां० ९ । सू9 १७

English

water. Forming the water-floods the Cow herself hath lowed, one-foot- ed or two-footed or four footed, she, Who hath become eight-footed or acquired nine feet, the uni- verse’s thousand-syllabled

अध्याय ९

श्लोक 10.26

त्रयः॑ के॒शिन॑ ऋतु॒था वि च॑क्षते संवत्स॒रे व॑पत॒ एक॑ एषाम्।विश्व॑म॒न्यो अ॑भि॒चष्टे॒ शची॑भि॒र्ध्राजि॒रेक॑स्य ददृशे॒ न रू॒पम्

trayaḥ keśina ṛtuthā vi cakṣate saṃvatsare vapata eka eṣām| viśvamanyo abhicaṣṭe śacībhirdhrājirekasya dadṛśe na rūpam

हिन्दी अर्थ

स्थान वेदि को पृथिवी का परम श्रन्त कहु दिया है । सोम है चन्रमा । उस .-की पूणता तथा कलाक्षय सूरव॑.पर निर्भर है 1. सूयं की एक रदिम “सुषुम्णः चन्द्रमा को पकादित कर उस के स्वरूप का. निर्माण करती है । यह र्म है सूयं का रेतस्, इस से मानो चन्रमा का जन्म होता है । हसलिये सोम को सूर्यं का रेतस् कहा है । यह सूये वर्षा का कारण.है, इसलिये इसे “वृष्णः”? कहा है, यह् रदिमयों से व्याप्त है, इसलिये भुवनः कीं नाभिः है यजः । गर्भस्थ शिशु नामि द्वारा माता से पुष्टि पाता

English

Pankti. From her descend in streams the seas of water. Dark the descent: the birds are golden-coloured. Robed in the floods they fly aloft to heaven.

अध्याय ९

श्लोक 10.27

च॒त्वारि॒ वाक् परि॑मिता प॒दानि॒ तानि॑ विदुर्ब्राह्म॒णा ये म॑नी॒षिणः॑ ।गुहा॒ त्रीणि॒ निहि॑ता॒ नेङ्ग॑यन्ति तु॒रीयं॑ वा॒चो म॑नु॒ष्याऽवदन्ति

catvāri vāk parimitā padāni tāni vidurbrāhmaṇā ye manīṣiṇaḥ | guhā trīṇi nihitā neṅgayanti turīyaṃ vāco manuṣyā'vadanti

हिन्दी अर्थ

न षि जानामि याद वेदमरिम निण्यः सन्न॑द्धो पना चरापि। (यद् इवं ) जिस प्रकार का (इदम्) यह (अस्मि) हं (न विजानामि). रिम धरतीति । सुषुम्णः = सु +-सुम्नंम् . (सुखनाम .निषं ० ३।६) । सयं की रषिम चन्द्रमा प्रर पठ कर सुखदायी हो जाती है । यमीं नदी.क्ती। ..-

English

Again from Order’s seat have they descended, and inundated all the earth with fatness. The footless Maid precedeth footed creatures. Who marketh, Mitra Varuna! this your doing?

अध्याय ९

श्लोक 10.28

इन्द्रं॑ मि॒त्रं वरु॑णम॒ग्निमा॑हु॒रथो॑ दि॒व्यः स सु॑प॒र्णो ग॒रुत्मा॑न्।ए॒कं सद् विप्रा॑ बहु॒धा व॑दन्त्य॒ग्निं य॒मं मा॑त॒रिश्वा॑नमाहुः

indraṃ mitraṃ varuṇamagnimāhuratho divyaḥ sa suparṇo garutmān| ekaṃ sad viprā bahudhā vadantyagniṃ yamaṃ mātariśvānamāhuḥ

हिन्दी अर्थ

कां०.९ । सु०. १५ , श्रयवंवेद-धाष्य :१६७ (सयोनिः) समान मातुयोनि मे जाने वाला, (स्वधया) निजनिहित संस्कारों वे (विधमंणि) विवि संसार के धारण मेँ (विष्णोः) सरव॑व्यापक पंरमेदवर है । (ते) वे सात (विपरिचतः) मेधावी परमेष्वर के (धीतिभिः) कमं के दवारा, . (ते) वे संत (मनसा) मेधावी परमेदवर के मनन या संकल्प के दरार (परिमुवः). सौर 'पृथिवियों के सब भ्रोर, तथा. (विद्वतः) -विदव के.(परि- भवन्ति) सब भ्रोर.विद्यमान है।.

English

The Babe unborn supporteth this world’s burthen, supporteth Right and watcheth Wrong and Falsehood.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Atharva Veda — Chapter 9
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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