Atharva Veda· Atharvaveda Saṁhitā
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अध्याय 5 / 20

Kanda 5

काण्ड 5

376 श्लोकभाग 2/3 · श्लोक 17.1–28.14WhatsApp

पूर्ण अध्याय पाठ167 श्लोक

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अध्याय ५

श्लोक 17.1

ब्रह्मजाया।१-१८ मयोभूः।ब्रह्मजाया।अनुष्टुप्, १-६ त्रिष्टुप्।तेऽवदन् प्रथ॒मा ब्र॑ह्मकिल्बि॒षेऽकू॑पारः सलि॒लो मा॑त॒रिश्वा॑ ।वी॒डुह॑रा॒स्तप॑ उ॒ग्रं म॑यो॒भूरापो॑ दे॒वीः प्र॑थम॒जा ऋ॒तस्य॑

brahmajāyā| 1-18 mayobhūḥ| brahmajāyā| anuṣṭup, 1-6 triṣṭup| te'vadan prathamā brahmakilbiṣe'kūpāraḥ salilo mātariśvā | vīḍuharāstapa ugraṃ mayobhūrāpo devīḥ prathamajā ṛtasya

हिन्दी अर्थ

पुनव देवा अददुः पुन॑मनप्या अददुः राजानः सत्यं गन्नाना ब्र्॑यजायां पुन॑दंदुः ॥१०॥ ( जाया को (वै) निडचय से (पुनः) फिर (अददुः) वापस देदिया, कर दिया, (मनुष्याः) सर्वसाधारण मनुष्यों ने (पुनः) फिर (अददुः) वापस दे दिया, कर दिया । (सत्यं गृह्णानाः) सत्यग्राही (राजानः) राजाभों ने (पनः) फिर (ददुः) वापस दे दिया, कर दिया।

English

A charm against witchcraft An eagle found thee: with his snout a wild boar dug thee from the earth.

अध्याय ५

श्लोक 17.2

सोमो॒ राजा॑ प्रथ॒मो ब्र॑ह्मजा॒यां पुनः॒ प्राय॑च्छ॒दहृ॑णीयमानः ।अ॒न्व॒र्ति॒ता वरु॑णो मि॒त्र आ॑सीद॒ग्निर्होता॑ हस्त॒गृह्या नि॑नाय

somo rājā prathamo brahmajāyāṃ punaḥ prāyacchadahṛṇīyamānaḥ | anvartitā varuṇo mitra āsīdagnirhotā hastagṛhyā nināya

हिन्दी अर्थ

हनन कर देता है, (आरब्धः) सव ओर लगी हुई (अग्निः इव) अग्निके ही (मन्यते) मानता है (सः) वह् (तंमातस्य) जल में घुले (विषस्य) विष का (पिबति) मानो पान कर्ता है। ॥ य प॑ने हन्ति मदं मन्य॑मानो देवपीयुधेनकामो न चित्तात् ।

English

As one who flies from bonds, go back, O Witchcraft, to the sorcerer. Even as the timid antelope or hind from her assailant flees,

अध्याय ५

श्लोक 17.3

हस्ते॑नै॒व ग्रा॒ह्यऽआ॒धिर॑स्या ब्रह्मजा॒येति॒ चेदवो॑चत्।न दू॒ताय॑ प्र॒हेया॑ तस्थ ए॒षा तथा॑ रा॒ष्ट्रं गु॑पि॒तं क्ष॒त्रिय॑स्य

hastenaiva grāhya'ādhirasyā brahmajāyeti cedavocat| na dūtāya praheyā tastha eṣā tathā rāṣṭraṃ gupitaṃ kṣatriyasya

हिन्दी अर्थ

ब्राह्मण-देवों की हिसा करनेवाला तथा (धनकामः) धन को कामनावाला विचरते हुए (एनम्) इसके साथ (उभे नभसी) दोनं युलोक-पृथिवीलोक (द्विष्टः) द्वेष करते है, दोनों लोकों के निवासी द्वेष करते है । अपनाने से रोकता है, इसपर राष्टूपति, ब्राह्मण की हत्या करने पर उतारू नहीं, यह (प्रियतनोः) प्रिय तनु की (अग्निः इव ) अग्निके सदुश है। (हि)

English

So swiftly let the sorcery o’ertake and reach the sorcerer. Straighter than any arrow let it fly against him, Heaven and

अध्याय ५

श्लोक 17.4

यामा॒हुस्तार॑कै॒षा वि॑के॒शीति॑ दु॒च्छुनां॒ ग्राम॑मव॒पद्य॑मानाम्।सा ब्र॑ह्मजा॒या वि दु॑नोति रा॒ष्ट्रं यत्र॒ प्रापा॑दि श॒श उ॑ल्कु॒षीमा॑न्

yāmāhustārakaiṣā vikeśīti ducchunāṃ grāmamavapadyamānām| sā brahmajāyā vi dunoti rāṣṭraṃ yatra prāpādi śaśa ulkuṣīmān

हिन्दी अर्थ

अग्निः = शरीर का तापमान, या जाठराग्नि । शरीरके तापमान के अभावसेशरीरमृतहो जाताहै, जाठराग्नि के विकृतहौ जाने से क्षरीर (शतापाष्ठाम्) सौ कीलोवाली इषु को वह राजा (निगिरति) निगलता है, परन्तु (निः विदन्) उसे हैन्यावस्था में करके,

English

Earth. So let that witchcraft seize again the wizard like a beast of chase.

अध्याय ५

श्लोक 17.5

ब्र॒ह्म॒चा॒री च॑रति॒ वेवि॑ष॒द् विषः॒ स दे॒वानां॑ भव॒त्येक॒मङ्ग॑म्।तेन॑ जा॒या मन्व॑विन्द॒द् बृह॒स्पतिः॒ सोमे॑न नी॒तां जु॒ह्वं१ न दे॑वाः

brahmacārī carati veviṣad viṣaḥ sa devānāṃ bhavatyekamaṅgam| tena jāyā manvavindad bṛhaspatiḥ somena nītāṃ juhvaṃ1 na devāḥ

हिन्दी अर्थ

यह मानता है कि इसे (स्वादु) स्वादुरूप में (अद्मि) मँ खाता हुं । निः खिदम् =निःखिदन्; खिद हैन्ये; परिघातने (दिवादिः; तुदादिः। † ह, (वाक्) वाणोहो न (कुल्मलम्, नाडीकाः) बाणका मूलभाग र दत, वाण के अग्रभागे लगे ५ अथर्व० ११।१२।३ (ऋ० १९१०।७१।११), (निस्क्त १।३।८) धनु्सिः मेँ बहुवचन धनुषो के बहुत्व का सूचक है । दन्ताः. -अथवा मृगौ अस्या दन्ताः' (ऋ ° ६।७५।११ ) मे मृगब्णुङ्ख का बना दति।

English

Let it go contrary like flame, like water following its course. Let witchcraft, like a well-naved car, roll back upon the sorcerer.

अध्याय ५

श्लोक 17.6

दे॒वा वा ए॒तस्या॑मवदन्त॒ पूर्वे॑ सप्तऋ॒षय॒स्तप॑सा॒ ये नि॑षे॒दुः ।भी॒मा जा॒या ब्रा॑ह्म॒णस्याप॑नीता दु॒र्धां द॑धाति पर॒मेव्योऽमन्

devā vā etasyāmavadanta pūrve saptaṛṣayastapasā ye niṣeduḥ | bhīmā jāyā brāhmaṇasyāpanītā durdhāṃ dadhāti paramevyo'man

हिन्दी अर्थ

हाय) पीरे-पीचे जाकर, (उत) तथा (दूरात्) दूरसे (एनम्) इस राजा अन्नखाने से भी वच्चित कर दिये गये ओर पराभूत भी हए, राज्य सेभी वल्चित कर दिये गये । गौः वाङ्नाम (निषं० १।११)। वैतहव्याः = विगत काजभिप्रायहै सौ-सौ की संख्या में दस वार पराभूत हुए (मन्त्र १२) ।

English

A charm for general prosperity Plant! I have those who shall avert the threatened danger, ten and one.

अध्याय ५

श्लोक 17.7

ये गर्भा॑ अव॒पद्य॑न्ते॒ जग॒द् यच्चा॑पलु॒प्यते॑ ।वी॒रा ये तृ॒ह्यन्ते॑ मि॒थो ब्र॑ह्मजा॒या हि॑नस्ति॒ तान्

ye garbhā avapadyante jagad yaccāpalupyate | vīrā ye tṛhyante mitho brahmajāyā hinasti tān

हिन्दी अर्थ

मरे केसरधावम्धायाथर माजामपंचिरन ॥११॥ दिया है, (ये) जिन्होने कि (केसरप्राबरन्धायाः ) शिरोधायं परामणेवाणी कौ पराबन्धायाः=-के (सिरमे) ।सर (विचरने) वाले मुकुट को + प्राबन्धायाः (बाँधनेवाली परामशंवाणी को । चरमाजाम् चरम (अन्तिम) अजाम् (अज गतौ, भ्वादिः) क्रियाशक्ति को । अपेचिरन् == विकृत कर दिया है नष्ट हो जाता है, विकृत हौ जाता है

English

O sacred Plant, produced aright! make sweetness, sweet thy self, for me. Twenty and two, O Plant, have I who shall avert the threatened ill.

अध्याय ५

श्लोक 17.8

उत यत् पत॑यो॒ दश॑ स्त्रि॒याः पूर्वे॒ अब्रा॑ह्मणाः ।ब्र॒ह्माचेद्धस्त॒मग्र॑ही॒त् स ए॒व पति॑रेक॒धा

uta yat patayo daśa striyāḥ pūrve abrāhmaṇāḥ | brahmāceddhastamagrahīt sa eva patirekadhā

हिन्दी अर्थ

२५२ अयवेवेदभाष्यं कण्ठ ५। अनू० ४। सूर्क्त १८ असम्भवनीय (पराभवन्) पराजय को प्राप्त हुए । द्ष्टिमें मनुष्यकी आयु १०१ वर्षोकीदहै) एक वषे माताके उदर में, ओर

English

O sacred Plant, produced aright! make sweetness, sweet thyself, for me. A charm for the increase of cattle

अध्याय ५

श्लोक 17.9

ब्रा॒ह्म॒ण ए॒व पति॒र्न रा॑ज॒न्यो॒३ न वैश्यः॑ ।तत् सूर्यः॑ प्रब्रु॒वन्ने॑ति प॒ञ्चभ्यो॑ मान॒वेभ्यः॑

brāhmaṇa eva patirna rājanyo3 na vaiśyaḥ | tat sūryaḥ prabruvanneti pañcabhyo mānavebhyaḥ

हिन्दी अर्थ

१०१ कहा" हो । अथवा "एक सौ' यथा "दशशता" (मन्त्र १०); इस अथं वाणीकेनमिलनेसे भूमि जनताओं के राजाओं को पराभूत करदेतीहै (देवपीयुः) ब्राह्मण देवों की हिसा करनेवाला राजा (गरगीणंः) ब्रह्मज ओौर वेदज्ञ की (हिनस्ति) हिसा करता है, (सः) वहु राजा (पितुयाणम्) साता-पिता आदि हारा प्रापणीय (लोकम्) गृहस्थलोक को (अपि) भी (न एति) नहीं प्राप्त करता ।

English

Bull! if thou art the single bull, beget. Thou hast no vital sap.

अध्याय ५

श्लोक 17.10

पुन॒र्वै दे॒वा अ॑ददुः॒ पुन॑र्मनु॒ष्या अददुः ।राजा॑नः स॒त्यं गृ॑ह्णा॒ना ब्र॑ह्मजा॒यां पुन॑र्ददुः

punarvai devā adaduḥ punarmanuṣyā adaduḥ | rājānaḥ satyaṃ gṛhṇānā brahmajāyāṃ punardaduḥ

हिन्दी अर्थ

किदेव आदिने फिर वापस्दे दिया, कर दिया तथा मन्त्र १० मेँ देवाः, ब्रह्मजाया का विवाह नाना देवों, नाना मनुष्यो, नाना राजां के साय हआ ओर उन्होने विचार करकी ब्रह्मजाया को पुनः-पुनः वापस कर दिया, अतः प्रतीत यह होता है कि गुणकम से योग्य पतिन मिलनेके कारण बार- जाया के गुणकर्मोसे रहित जानकर, विवाह-प्रस्ताव वापसकर दिये। मे वणेन कथानक रूपमे ह, वास्तविक नहीं । पुनरदायं ब्रह्मजायां कृत्वा देवेनिकिरिबिषम् ।

English

Harm thou, O Plant, the mischievous, and drive the sorcerer away. Beat thou the Yātudhānas back, drive thou away the sorcerer;

अध्याय ५

श्लोक 17.11

पु॒न॒र्दाय॑ ब्रह्मजा॒यां कृ॒त्वा दे॒वैर्नि॑किल्बि॒षम्।ऊर्जं॑ पृथि॒व्या भ॒क्त्वोरु॑गा॒यमुपा॑सते

punardāya brahmajāyāṃ kṛtvā devairnikilbiṣam| ūrjaṃ pṛthivyā bhaktvorugāyamupāsate

हिन्दी अर्थ

बलदायक भौर प्राणदायक अन्न का (भक्त्वा) यथोचित विभाग करके (उरुगायम्) बहुत दारा गाये गये परमेदवर की (उपासते) वे उपासना उसके गुर उसे फिर उसके सम्बन्धियो के प्रति वापस कर देते 4 । जिस

English

And chase afar, O Plant, the man who fain would do us injury. As ‘twere a strip cut round from skin of a white-footed an- telope,

अध्याय ५

श्लोक 17.12

नास्य॑ जा॒या श॑तवा॒ही क॑ल्या॒णी तल्प॒मा श॑ये ।यस्मि॑न् रा॒ष्ट्रे नि॑रु॒ध्यते॑ ब्रह्मजा॒याचि॑त्त्या

nāsya jāyā śatavāhī kalyāṇī talpamā śaye | yasmin rāṣṭre nirudhyate brahmajāyācittyā

हिन्दी अर्थ

का विभाजन, गुरुकुल के आचार्यं तथा भूमिपति मिलकरकर लेते है, ताकि गुरुकुल का भी पालन-पोषण हौ सके ओर भूमिपतियों मौर ग्रामनिवासियों काभी पालन-पोषण हो सके । इस प्रकार वे सब जीवनचर्या निभाते हए, (शतवाही) सैकड़ों सैनिकों की वाहिनी का वहन करनेवाली, (कल्याणी) ओर कल्याणकारिणी (अस्य) इस राजा की (जाया) पत्नी, इसकी (तल्पम्) शय्या पर (न आशये) नहीं आकर शयन करती :0 ब्रह्मजाया को प्रचार से रोकने के विरोधमे राजाकी जायाभी राजासे रुष्ट हो जाती है। ५ न विकरणः पुषुकषिरास्तस्मिन वेश्मनि जायते ।

English

Bind, like a golden chain, O God, his witchcraft on the sorcerer. Take thou his sorcery by the hand, and to the sorcerer lead it back.

अध्याय ५

श्लोक 17.13

न वि॑क॒र्णः पृ॒थुशि॑रा॒स्तस्मि॒न् वेश्म॑नि जायते ।यस्मि॑न् रा॒ष्ट्रे नि॑रु॒ध्यते॑ ब्रह्मजा॒याचि॑त्त्या

na vikarṇaḥ pṛthuśirāstasmin veśmani jāyate | yasmin rāṣṭre nirudhyate brahmajāyācittyā

हिन्दी अर्थ

राजाके उस घर मे (विकणेः) विशिष्ट † ; त्मिक प्रचार द्वारा प्रजाजनों के जीवनो से आध्यात्मिकता हौ सके, परन्तु राजा इसे नीं चाहता, अतः उसकी (निष्कम्रीवः) सुवणं-मूद्रा-निमित हार को ग्रीवामें धारण करने । वाला, (अस्य क्षत्ता) इस राजा के रथ का वाहन करनेवाला रथी, (सूना- ॥

English

Lay it before him, face to face, that it may kill the sorcerer. Back on the wizard fall his craft, upon the curser light his curse!

अध्याय ५

श्लोक 17.14

नास्य॑ क्ष॒त्ता नि॒ष्कग्री॑वः सू॒नाना॑मेत्यग्र॒तः ।यस्मि॑न् रा॒ष्ट्रे नि॑रु॒ध्यते॑ ब्रह्मजा॒याचि॑त्त्या

nāsya kṣattā niṣkagrīvaḥ sūnānāmetyagrataḥ | yasmin rāṣṭre nirudhyate brahmajāyācittyā

हिन्दी अर्थ

नाम्) सूनारूप युद्धभूमिं मेँ (अग्रतः) अगेकी री वेदिक दृष्टिमेयुद्धभूमियां सूनारूपर्है, ब्चडखाने ह, जिनमें कि मानुष वध क्रिये जाते है, मानुष जीवन उच्च उदेश्य के लिए है (शवेतः) सफेद (कृष्णकणंः) ओर काले कानोंवाला अं

English

Let witchcraft, like a well-naved car, roll back upon the sorcerer. Whoso, for other’s harm hath dealt-woman or man-in magic arts,

अध्याय ५

श्लोक 17.15

नास्य॑ श्वे॒तः कृ॑ष्ण॒कर्णो॑ धु॒रि यु॒क्तो म॑हीयते ।यस्मि॑न् रा॒ष्ट्रे नि॑रु॒ध्यते॑ ब्रह्मजा॒याचि॑त्त्या

nāsya śvetaḥ kṛṣṇakarṇo dhuri yukto mahīyate | yasmin rāṣṭre nirudhyate brahmajāyācittyā

हिन्दी अर्थ

व राजा के (धुरि) रथ की धुरी में (युक्तः) जृता हुजा 1 (न) न (अस्य) इस राजा के (क्षेत्रं) वेतमें ( ं कमलफ़ल जिसमें कि कमलडोडे लगे रहते हँ । विसम् कमल की जड, जिसे अग्निपरिपक्व कर खाया जाताहै, जिसे कि "भिस" याभे कहते हैँ ।

English

To him we lead the sorcery back, even as a courser with a rope. Now whether thou hast been prepared by Gods or been pre- pared by men,

अध्याय ५

श्लोक 17.16

नास्य॒ क्षेत्रे॑ पुष्क॒रिणी॒ नाण्डीकं॑ जायते॒ बिस॑म्।यस्मि॑न् रा॒ष्ट्रे नि॑रु॒ध्यते॑ ब्रह्मजा॒याचि॑त्त्या

nāsya kṣetre puṣkariṇī nāṇḍīkaṃ jāyate bisam| yasmin rāṣṭre nirudhyate brahmajāyācittyā

हिन्दी अर्थ

(ये) जो (अस्याः ) इस पृथिवी की (दोहम्) उपज को (उपासते) भोगते है, वे (अस्म) इस राजा के लिए (पृरिनम्) पृथिवी का (न विदुहुन्ति) प्राय यहु है कि कर्मकर-कृषक मादि पथिवी के भोगों को स्वयं भोगते रहते ह, जिस राष्ट मेंब्रह्म ओर वेद के प्रचार को रोकं दिया जाता है, पृथिवी- पति--राजाको वे उसका भाग नहीं देते । (अस्य) इस राजा की (कल्याणी) कल्याणक्रारिणी (धेनुः) दुधार गौ (न) दूध नहीं देती, (न) ओर न (अनड्वान् ) शकट का वहन करनेवाला बैल (धुरम्) शकट की धरी को (सहते) सहता है, (यत्र) जिस राष्ट्र में (ब्राह्मणः) ब्राह्मण, (विजानिः) विवाहित जाया से रहित हुमा, (पापया) पापिन के साथ (रात्रि वसति) रात्रिवास करता है । जिस राष्ट मेब्रह्म ओर वेद का प्रचार रोक दिया जातादहै, उस राष्ट में अधिक दुर्व्यवस्थाहौ जानेस, पशुओं को घास-चारा नहीं मिलता, अतः दूध देनेवाल गौं भी दूध नही देतीं ओर न शकट वहन करनेवाले बैल, कमजोरो के कारण, शकट कै वहन के भारं को सहन कर सकते है

English

We, with our Indra at our side to aid us, lead thee back again. Agni, victorious in fight, subdue the armies of our foes!

अध्याय ५

श्लोक 17.17

नास्मै॒ पृश्निं॒ वि दु॑हन्ति॒ येऽस्या॒ दोह॑मु॒पास॑ते ।यस्मि॑न् रा॒ष्ट्रे नि॑रु॒ध्यते॑ ब्रह्मजा॒याचि॑त्त्या

nāsmai pṛśniṃ vi duhanti ye'syā dohamupāsate | yasmin rāṣṭre nirudhyate brahmajāyācittyā

हिन्दी अर्थ

नेता ते देवा अददुस्तुभ्यं रेपे अत्तवे । (नृपते) दे नरपति ! (ते देवाः) उन ब्राह्मण-देवो ने (तुभ्यम्) तुचे (अत्तवे) खाने के लिए (एताम्) इस परामशं वाणी को (न अददुः) के देव है । इनके दिये परामशे कौ अवहेलना ही गोभक्षण' है ।

English

Back on the sorcerer we cast his sorcery, and beat it home. Thou who hast piercing weapons, pierce him who hath wrought it; conquer him.

अध्याय ५

श्लोक 17.18

नास्य॑ धे॒नुः क॑ल्या॒णी नान॒ड्वान्त्स॑हते॒ धुर॑म्।विजा॑नि॒र्यत्र॑ ब्रह्म॒णो रात्रिं॒ वस॑ति पा॒पया॑

nāsya dhenuḥ kalyāṇī nānaḍvāntsahate dhuram| vijāniryatra brahmaṇo rātriṃ vasati pāpayā

हिन्दी अर्थ

२४८ अथर्ववेदमाष्य करण्ड ५। अनु° ४ । सक्त १७५, । यदिखाते, तदनुसार शासन न करे, तो वह जाने कि (अद्य) आजतौ। (जीवानि) सम्भवतः मै जीवित रह सकं (मा श्वः) कल नहीं । । कर देना), परामशंवाणी को नष्ट कर देना, उसका उपयोग न करना । (एषा) यह् (गौः) परामशंवाणी, (चर्मणा आतिष्टिता) चमडं द्वारा घिरी हई, (अघविषा) हत्यारे विषवाली, (पृदाकू; इव) पृदाक्-सरपिणी के सदृश है, (सा गौः) वह परामर्णवाणी (तृष्टा) जब रक्त की प्यासी हो जातीषहै, (अनादा) तत्र अदन-योग्या अति विनष्ट करने योग्य नहीं होती, शासन मे उपेक्षणीया नहीं होती ।

English

We do not sharpen thee to slay the man who hath not practised it. Go as a son goes to his sire: bite as a trampled viper bites.

अध्याय ५

श्लोक 18.1

ब्रह्मरावी १-१५ मयोभूः।ब्रह्मगवी।अनुष्टुप्, ४ भुरिक् त्रिष्टुप्, ५,८-९,१३ त्रिष्टुप्।नैतां ते॑ दे॒वा अ॑ददु॒स्तुभ्यं॑ नृपते॒ अत्त॑वे ।मा ब्रा॑ह्म॒णस्य॑ राजन्य॒ गां जि॑घत्सो अना॒द्याम्

brahmarāvī 1-15 mayobhūḥ| brahmagavī| anuṣṭup, 4 bhurik triṣṭup, 5,8-9,13 triṣṭup| naitāṃ te devā adadustubhyaṃ nṛpate attave | mā brāhmaṇasya rājanya gāṃ jighatso anādyām

हिन्दी अर्थ

पितृयाणम् पितृयाणम् पद के साथ प्रायः पथ' शब्द का कथन होता कियाहुजाभीहो तो दण्डरूप में वह् गृहस्थ जीवन से वञ्चित कर दिया (वै) निङ्चय से (नः) हमारा (पदवायः) पथ-प्रदशेक है (अग्निः) यज्ञियाग्नि, ओर (सोमः) सोमयज्ञ है (दायादः) दाय का अदन करनेवाला उत्तराधिकारी पुत्र । (हन्ता) हमारे शत्र का टंनन करनेवाला ओर

English

The abduction and restoration of a Brāhman’s wife These first, the boundless Sea, and Mātarisvan, fierce glowing

अध्याय ५

श्लोक 18.2

अ॒क्षद्रु॑ग्धो राज॒न्यः पा॒प आ॑त्मपराजि॒तः ।स ब्रा॑ह्म॒णस्य॒ गाम॑द्याद॒द्य जी॑वानि॒ माश्वः

akṣadrugdho rājanyaḥ pāpa ātmaparājitaḥ | sa brāhmaṇasya gāmadyādadya jīvāni māśvaḥ

हिन्दी अर्थ

हई, (सा) वहं (यावत्) जब तक (अभि विजद्धहै) इधर-उधर विलोडित हनन करती रहती है ओर राष्ट मे (वीरः) वीर-सन्तानया वीर योद्धातब तक (वृषा) सुखवर्षी (न जायते) नहीं उत्पन्न होता । (अस्याः) इस गवी गोः का (आशसनम्) काटना (क्ररम्) करर पिशितम्) मास (तुष्टम्) तृषाजनक है जबकि खाने के लिए (अस्यते) इसका आदान किया जाता है; (यद्) जो (अस्याः) इसका (क्षीरम्) दूध (पीयते) दिसते किया जाताहै, गौओं की हिसा करके

English

Through him Brihaspati obtained his consort, as the Gods gained the ladle brought by Soma. Thus spake of her those Gods of old, Seven Rishis, who sate them down to their austere

अध्याय ५

श्लोक 18.3

आवि॑ष्टिता॒घवि॑षा पृदा॒कूरि॑व॒ चर्म॑णा ।सा ब्रा॑ह्म॒णस्य॑ राजन्य तृ॒ष्टैषा गौर॑ना॒द्या

āviṣṭitāghaviṣā pṛdākūriva carmaṇā | sā brāhmaṇasya rājanya tṛṣṭaiṣā gauranādyā

हिन्दी अर्थ

२५६ अथवेवेदभाध्य काण्ड ५। अनु० ४। सुक्त १६ दूध में कमी कर दी जाती है, (तत्) वह त्रिविधकमं (वै) निश््चयसे संसदों मे (किल्बिषम्) पाप मानाहै।

English

devotion: Dire is a Brāhman’s wife led home by others: in the supremest heaven she plants confusion.

अध्याय ५

श्लोक 18.4

निर्वै क्ष॒त्रं नय॑ति॒ हन्ति॒ वर्चो॒ऽग्निरि॒वार॑ब्धो॒ वि दु॑नोति॒ सर्व॑म्।यो ब्रा॑ह्म॒णं मन्य॑ते॒ अन्न॑मे॒व स वि॒षस्य॑ पिबति तैमा॒तस्य॑

nirvai kṣatraṃ nayati hanti varco'gnirivārabdho vi dunoti sarvam| yo brāhmaṇaṃ manyate annameva sa viṣasya pibati taimātasya

हिन्दी अर्थ

हिसाकर्मा (निरुक्त ४।४।२५; तथा शब्द चयसे' (५८) ।' पितृषु = पिताओं मे, यथा “चारु वदानि पितरः संगतेषु" (अथवं ० ७।१३।१) इस प्रकार वेदोंमेगौका काटना, उसके मांसको खाना ओर गौभोंकी संख्या को कम कर उनके दध्मे क्षति पहूंचाना वेद-विरुद्ध दर्शाया है । (यः) जो (उग्रः राजा) उग्र राजा (मन्यमानः) अभिमानी होकर ५ पहुंचानेवाले राजा करे (राष्टरम्) राष्टरको (अव धूनुते) कपा वही परामशंवाणी कहेगा जोकि वेदवाणी के अनुकूल हो । अतः इन दोनों

English

When infants die, untimely born, when herds of cattle waste away, When heroes strike each other dead, the Brāhman’s wife destroyeth them.

अध्याय ५

श्लोक 18.5

य ए॑नं॒ हन्ति॑ मृ॒दुं मन्य॑मानो देवपी॒युर्धन॑कामो॒ न चि॒त्तात्।सं तस्येन्द्रो॒ हृद॑ये॒ऽग्निमि॑न्धे उ॒भे ए॑नं द्विष्टो॒ नभ॑सी॒ चर॑न्तम्

ya enaṃ hanti mṛduṃ manyamāno devapīyurdhanakāmo na cittāt| saṃ tasyendro hṛdaye'gnimindhe ubhe enaṃ dviṣṭo nabhasī carantam

हिन्दी अर्थ

मे तादात्म्य उचित दही है। वेदवाणी अष्टापदी है। यथा “वाचमष्टापदी- अर्थात् निरर्थक निपात भी कहे जोकि वेदे अनथक नहीं माने जा सकते । आठ पैरोंवाली, चार आंखोवाली, चार कानौंवाली, चार हनुभोवाली, दविमृंही तथा हिजिह्व नहीं हो सकती । एक व्यास्याकारने गौ को गर्भवती

English

Even if ten former husbands—none a Brāhman—had espoused a dame, And then a Brāhman took her hand, he is her husband, only he,

अध्याय ५

श्लोक 18.6

न ब्रा॑ह्म॒णो हिं॑सित॒व्यो॒३ऽग्निः प्रि॒यत॑नोरिव ।सोमो॒ ह्यऽस्य दाया॒द इन्द्रो॑ अस्याभिशस्ति॒पाः

na brāhmaṇo hiṃsitavyo3'gniḥ priyatanoriva | somo hya'sya dāyāda indro asyābhiśastipāḥ

हिन्दी अर्थ

है, यह् कथन सर्वथा असंगत प्रतीत हीता दे । वेदवाणी अष्टापदी है, इसकी व्याख्या हौ चुकी दहै । वह चतुरक्षी बह आती है, (इव) जैसेकि (भिन्नम्) विदौणे हुई (नावम्) नोकामें (हन्ति) हनन करती है, (द्च्छना) दुर्गति ।

English

Not Vaisya, not Rājanya, no, the Brāhman is indeed her lord: This Sūrya in his course proclaims to the Five Races of man- kind.

अध्याय ५

श्लोक 18.7

श॒तापा॑ष्ठां॒ नि गि॑रति॒ तां न श॑क्नोति निः॒खिद॑म्।अन्नं॒ यो ब्र॒ह्मणां॑ म॒ल्वः स्वा॒द्व॑१द्मीति॒ मन्य॑ते

śatāpāṣṭhāṃ ni girati tāṃ na śaknoti niḥkhidam| annaṃ yo brahmaṇāṃ malvaḥ svādva1dmīti manyate

हिन्दी अर्थ

२. चतुरहं नुः == अथवा "काम, क्रोध, लभ, मोह, --ये चार् वजंनीयंरहु, हन्तव्य वेद के चार सदपदेश ष्टु" रूप हुः = हन हिसायाम् (अदादिः), वे इन हनन करता है लोभकाओौर यथाथ ज्ञान हनने करताहै मोह का। २५८ अथर्ववेदमाष्य काण्ड ५।अनु° ४। सूक्त १६

English

So then the Gods restored her, so men gave the woman back again. Princes who kept their promises restored the Brāhman’s wedded wife.

अध्याय ५

श्लोक 18.8

जिह्वा॒ ज्या भव॑ति॒ कुल्म॑लं॒ वाङ्ना॑डी॒का दन्ता॒स्तप॑सा॒भिदि॑ग्धाः ।ते भि॑र्ब्रह्मा वि॑ध्यति देवपी॒यून् हृ॑द्ब॒लैर्धनु॑र्भिर्दे॒वजू॑तैः

jihvā jyā bhavati kulmalaṃ vāṅnāḍīkā dantāstapasābhidigdhāḥ | te bhirbrahmā vidhyati devapīyūn hṛdbalairdhanurbhirdevajūtaiḥ

हिन्दी अर्थ

तं वृक्षा अप॑ सेधन्ति छायां नो मोप॑गा इति । (नारद) है जापः" के सदृश शान्तिदायक परमेश्वर ¦ (यः) जो सेधन्ति) परे हटा देते ह (इति) यह् कहकर कि (नः छायाम् ) हमारी छाया के (उप) समीप (मागाः) त् गमननकेर। ==मन स्तम्भे (चुरादिः) । स्तम्भः = रोक देना, का्यंकारी न होने देना । वणन कविता की भाषामें है, वृक्ष बोल नहीं सकते ।

English

Having restored the Brāhman’s wife, and freed them, with Gods’ aid, from sin, They shared the fulness of the earth and worn themselves ex- tended sway.

अध्याय ५

श्लोक 18.9

ती॒क्ष्णेष॑वो ब्राह्म॒णा हे॑ति॒मन्तो॒ यामस्य॑न्ति शर॒व्यां॒३ न सा मृषा॑ ।अ॒नु॒हाय॒ तप॑सा म॒न्युना॑ चो॒त दू॒रादव॑ भिन्दन्त्येनम्

tīkṣṇeṣavo brāhmaṇā hetimanto yāmasyanti śaravyāṃ3 na sā mṛṣā | anuhāya tapasā manyunā cota dūrādava bhindantyenam

हिन्दी अर्थ

(राजा, वरुणः, अब्रवीत्) राजा वरुण बौला कि (एतत्) यह परामशंवाणीरूपी गौ को (जग्ध्वा) खाकर विनष्ट कर, उपेक्षित कर (राष्ट) राष्ट मे (कश्चन) कोर््भी राजा (न जागार) नहीं जागा, वनीय (पराभवन्) पराजय को प्राप्त हुई ।

English

No lovely wife who brings her dower in hundreds rests upon his bed, Within whose kingdom is detained, through want of sense, a

अध्याय ५

श्लोक 18.10

ये स॒हस्र॒मरा॑ज॒न्नासन् दशश॒ता उ॒त।ते ब्रा॑ह्म॒णस्य॒ गां ज॒ग्ध्वा वै॑तह॒व्याः परा॑भवन्

ye sahasramarājannāsan daśaśatā uta| te brāhmaṇasya gāṃ jagdhvā vaitahavyāḥ parābhavan

हिन्दी अर्थ

प्रकार (तत्) उसे (वेधसः) मेधावी पुरुष (विदुः) जानते है। १. वस्तुतः एकतम् = एक सौ, यथा दशकताः = दससौ (सन्त १०) । इस प्रकार दोनों पदों के अर्थो मे अनुरूपता हौ जाती है । वेधाः मेधाविनाम (निषं° ३।१ ५) 1 निरीहं ओर परोपकारी (नृपते) है नरो के पति ! (दषुः दव) बाण की तरह (दिग्धा) विष

English

Fire, the Strong, the Bliss-bestower, And heavenly Floods, first-born by holy Order, exclaimed against the outrage on a Brāhman.

अध्याय ५

श्लोक 18.11

गौरे॒व तान् ह॒न्यमा॑ना वैतह॒व्याँ अवा॑तिरत्।ये केस॑रप्राबन्धायाश्चर॒माजा॒मपे॑चिरन्

gaureva tān hanyamānā vaitahavyā~ avātirat| ye kesaraprābandhāyāścaramājāmapeciran

हिन्दी अर्थ

सम्पृक्तः; तथा (गोपते) है पृथिवी के पतिया गौओं के पति ! राजन् वहं परामश वाणी, (घोरा) र है, (तया) उस द्वारा (पीयतः ) हिसक क ( विध्यति) वह ब्राह्मण बींधता ह ।

English

King Soma first of all, without reluctance, made restitution of the Brāhman’s consort. Mitra and Varuna were the inviters: Agni as Hotar took her hand and led her.

अध्याय ५

श्लोक 18.12

एक॑शतं॒ ता ज॒नता॒ या भूमि॒र्व्यऽधूनुत ।प्र॒जां हिं॑सि॒त्वा ब्राह्म॑णीमसंभ॒व्यं परा॑भवन्

ekaśataṃ tā janatā yā bhūmirvya'dhūnuta | prajāṃ hiṃsitvā brāhmaṇīmasaṃbhavyaṃ parābhavan

हिन्दी अर्थ

को गोपति कहा है, गौओं का रक्षक, न कि भक्षक, अततः सूक्त मेग । परामश उत, इव) मानो न केवल इतनी वृद्धि हं । अपितु (दिवम्) यलोक का हव्याः) खाच अन्न सेभी विगत होकर, (पराभवन्) पराभूत हो गये, 4 9 4 व भृगु है भृञ्यमान, अर्थात् परिपक्व हुञा, 4 ध मं शविः का अभिप्रायहैज्ञानाचिः, ज्ञान-

English

The man, her pledge, must by the hand be taken when he hath cried, She is a Brāhman’s consort.

अध्याय ५

श्लोक 18.13

दे॒व॒पी॒युश्च॑रति॒ मर्त्ये॑षु गरगी॒र्णो भ॑व॒त्यस्थि॑भूयान्।यो ब्रा॑ह्म॒णं दे॒वब॑न्धुं हि॒नस्ति॒ न स पि॑तृ॒याण॒मप्ये॑ति लो॒कम्

devapīyuścarati martyeṣu garagīrṇo bhavatyasthibhūyān| yo brāhmaṇaṃ devabandhuṃ hinasti na sa pitṛyāṇamapyeti lokam

हिन्दी अर्थ

ठव गये । यह कथन काल्पनिक नहीं, अपितु यथाथ है। वैज्ञानिक दारा युलौक तक पहुंच शये । वतेमान में भौ (वैज्ञानिक! कोह तकं सशरीर पहुंच चुके हँ भौर ग्रहों तथा ग्रहों के ऊपर आकाशगङ्गा तक परिचय कलायन्त्रों हारा प्राप्त कर रहे हँ । + व ५. जो (जनाः) प्रजा के जन या अधिकारीजन (बृहत्सामानम्)

English

She stayed not for a herald to conduct her: thus is the kingdom of a ruler guarded. She whom they call the star with loosened tresses, descending as. misfortune on the village,

अध्याय ५

श्लोक 18.14

अ॒ग्निर्वै नः॑ पदवा॒यः सोमो॑ दाया॒द उ॑च्यते ।ह॒न्ताभिश॒स्तेन्द्र॒स्तथा॒ तद् वे॒धसो॑ विदुः

agnirvai naḥ padavāyaḥ somo dāyāda ucyate | hantābhiśastendrastathā tad vedhaso viduḥ

हिन्दी अर्थ

कर देनेवाले-राजा को तथा (तोकानि) उसके अपत्योंको ब्राहमण है । तोकानिन्=अपस्यानि “तोकम् अपत्यनाम' (निघं० २।२ ) ४ = स्वभाववाला ओौर प्रजाजन तथा अधिकारीजनों को क्रोधी स्वभाववाल है, जोकि प्रजाजन ओर अधिकारियों के स्वाथ के अनुकूल नही, अतः वे

English

The Brāhman’s consort, she disturbs the kingdom where hath appeared the hare with fiery flashing.

अध्याय ५

श्लोक 18.15

इषु॑रिव दि॒ग्धा नृ॑पते पृदा॒कूरि॑व गोपते ।सा ब्रा॑ह्म॒णस्येषु॑र्घो॒रा तया॑ विध्यति॒ पीय॑तः

iṣuriva digdhā nṛpate pṛdākūriva gopate | sā brāhmaṇasyeṣurghorā tayā vidhyati pīyataḥ

हिन्दी अर्थ

(अस्मिन्) इसपर (शल्कम्) "कर (ईषिरे) लगाना चाहते है, (ते) वे खादन्तः) परस्पर के केशो को नोचते हुए (आसते) रहते है । करना है तथा जिनका दायाद (१८।१४ ) सोमयज्ञ है, जिनका धन प्रजा के उपकार के लिए है, उनपर "कर लगाना-ये दोनों अपराधरूप रह । प्रजा इसे सहन न कर अधिकारियों कै विरोध में विप्लव पर उतारू होकर, पारस्परिक युद्ध में रुधिर प्रवाहित करती ओर क्लेण भोगती रहती है ।

English

Active in duty serves the Brahmachāri: he is a member of the Gods’ own body.

अध्याय ५

श्लोक 19.1

ब्रह्मगवि १-१५ मयोभूः।ब्रह्मगवि।अनुष्टुप्, २ विराट्-पुरस्ताद्बृबती, ७ उपरिष्टाद्बृहती।अ॒ति॒मा॒त्रम॑वर्धन्त॒ नोदि॑व॒ दिव॑मस्पृशन्।भृगुं॑ हिंसि॒त्वा सृञ्ज॑या वैतह॒व्याः परा॑भवन्

brahmagavi 1-15 mayobhūḥ| brahmagavi| anuṣṭup, 2 virāṭ-purastādbṛbatī, 7 upariṣṭādbṛhatī| atimātramavardhanta nodiva divamaspṛśan| bhṛguṃ hiṃsitvā sṛñjayā vaitahavyāḥ parābhavan

हिन्दी अर्थ

देखो अथर्व० (५।१८।१२), इसमे १०१ संख्या का कथन हुआ है नव नवत्यः = (नव नरई-नई, परमेश्वर की सत्ता से, न+ वत्यः' इन्कार करनेवालीं, नास्तिक जनतां । इन्हे भूमि ने कपा दिया । नवत्यः (क्यम् ) कुत्सित आवाज करनेवाली, (पदयोपनीम्) परो को संजञा- शन्थ कर देनेवाली (याम्) जिस वेडी को (मृताय) मृत्युदण्ड के लिए (अनु) हानि पहुंचानेवाले है राजन् ! (देवाः) राष्ट के दिव्य न्यायाधीशौने (व)

English

Brāhman’s dame. No broad-browed calf with wide-set ears is ever in his homestead born.

अध्याय ५

श्लोक 19.2

ये बृ॒हत्सा॑मानमाङ्गिर॒समार्प॑यन् ब्राह्म॒णं जनाः॑ ।पेत्व॒स्तेषा॑मुभ॒याद॒मवि॑स्तो॒कान्या॑वयत्

ye bṛhatsāmānamāṅgirasamārpayan brāhmaṇaṃ janāḥ | petvasteṣāmubhayādamavistokānyāvayat

हिन्दी अर्थ

(य॒थे) गौओों के समूह मे (सहसा वल द्रारा (विदानः) जाने गये (वषा इव) बैल के सदश जाना गया तु है दन्दुभि 1 , 3 (गव्यन्) शत्रुओं की पथिवौ को चाहता हुभा तथा (संधनाजित्) उनके धनौं कौ जीतता हुमा (रुव) शब्द कर । (परेषाम्) णत्रओं के (हृदयम्) हृदय को (शुचा) शौक ग्रामो को छोडकर (मन्तु) चले जाएँ । गव्यन् = गौः पृथिवी नाम (निघं० १।१) । संधना = सं धनानि, उनका परस्पर मिला-धन, समग्र धन । (उरध्यमायुः) ऊंची आवाजवाला तू (पृतनाः ) सेनाभों को (संजयन्) गरं चाहनेवाली गौके मूत्र से विदोष प्रकारकी गन्ध आतीरै, इसे सुंघकर बल

English

In whose dominion is detained, through senseless love, a Brāhman’s dame.

अध्याय ५

श्लोक 19.3

ये ब्रा॑ह्म॒णं प्र॒त्यष्ठी॑व॒न् ये वा॑स्मिञ्छु॒ल्कमी॑षि॒रे।अ॒स्नस्ते मध्ये॑ कु॒ल्यायाः॒ केशा॒न् खाद॑न्त आसते

ye brāhmaṇaṃ pratyaṣṭhīvan ye vāsmiñchulkamīṣire| asnaste madhye kulyāyāḥ keśān khādanta āsate

हिन्दी अर्थ

२६२ अथर्व॑वेदभाष्य काण्ड ५। अनु० ४1 सूक्त २० जीतता हअ, (गृह्या ) पकड़ने योग्य सेनाओं को (गृह्भमनः) पकडता हुमा, हे दुन्दुभि ! (देवीम्) विजिगीषृओं को (वाचम्) वाणीको (आ गुरस्व) के (वेदः) धन को (उप) अपने समीप (भरस्व हरस्व) ते-मा।

English

His milch-cow doth not profit one, his draught-ox masters not the yoke,

अध्याय ५

श्लोक 19.4

ब्र॒ह्म॒ग॒वी प॒च्यमा॑ना॒ याव॒त् साभि वि॒जङ्ग॑हे ।तेजो॑ रा॒ष्ट्रस्य॒ निर्ह॑न्ति॒ न वी॒रो जा॑यते॒ वृषा॑

brahmagavī pacyamānā yāvat sābhi vijaṅgahe | tejo rāṣṭrasya nirhanti na vīro jāyate vṛṣā

हिन्दी अर्थ

विजिगीषा आदि (दिवादिः), युद्धम दुन्दुभि" विजिगीषाकी ध्वनिवाला होना चाहिए जिसमे योद्धाओं मे जोश कासंचारटहो। गुरस्व गुरी उद्यमने (तुदादिः) वेदः धनम् (निघं० २।१०) । मायुःन्=माङ् माने शब्दे च (जुहो- (वदन्तीं वाचम् ) गर्जती हुई वाणी को (आशुण्वती) लगातार सुनती हुई, (नाथिता) सहायता चाहनैवाली, (घौपबृद्धा) दृन्दुभिके या युद्ध के घोष केकारण जागी हूर, (वधानां समरे भीता) आयुधो के युद्ध में भयभीत हुई, (दुन्दुभे) है दुन्दुभि ! (पूरवः) पहले तू (वाचम्) सौम्य वाणी को

English

Wherever, severed from his wife, a Brāhman spends the mourn- ful night. The wickedness of oppressing and robbing Brāhmans

अध्याय ५

श्लोक 19.5

क्रू॒रम॑स्या आ॒शस॑नं तृ॒ष्टं पि॑शि॒तम॑स्यते ।क्षी॒रं यद॑स्याः पी॒यते॒ तद् वै पि॒तृषु॒ किल्बि॑षम्

krūramasyā āśasanaṃ tṛṣṭaṃ piśitamasyate | kṣīraṃ yadasyāḥ pīyate tad vai pitṛṣu kilbiṣam

हिन्दी अर्थ

सत्य मौर प्रिय (वद) वाणी बोल । पूवं दुन्दुभि की आवाज; यह् शत्रु को चेताने कै लिएुहै। (२) युद्धभूमिमें की गई आवाज; युद्धकेप्रारम्भटहौ जाने पर निज सेनिकौंको जोश दिलने वाली आवाज । (३) विजय पाकर प्रसन्नता की आवाज जोकि प्रिय लगे, ओर विजय कौ सचाई को सूचित क्ररे। द्युमत् दिव क्रीडा, विजिगीषा,

English

The Gods, O Prince, have not bestowed this cow on thee to eat thereof. Seek not, Rājanya, to devour the Brāhman’s cow which none may eat.

अध्याय ५

श्लोक 19.6

उ॒ग्रो राजा॒ मन्य॑मानो ब्राह्म॒णं यो जिघ॑त्सति ।परा॑ तत् सि॑च्यते रा॒ष्ट्रं ब्रा॑ह्म॒णो यत्र॑ जी॒यते॑

ugro rājā manyamāno brāhmaṇaṃ yo jighatsati | parā tat sicyate rāṣṭraṃ brāhmaṇo yatra jīyate

हिन्दी अर्थ

(दमे नभसी) इन दोनों यलोक आर पथिवी लोक के (अन्तः) भीतर शोषण करता हुभा, या स्वजनों को रक्षा करता हज) (लोककृत्) निज विजय के यणशको बढाता हुञा, (स्वर्धी ) निज सेनिकों की ऋद्धि करनेवाला (मित्रतूर्याय) मित्र राजां की सहायता हारा शत्रुओं के विनाशाथ । २।१५), विजय होने पर विजय की ध्वनियां तत्काल होनी चाहिए ।

English

A base Rājanya, spoiled at dice, and ruined by himself, may eat. The Brāhman’s cow and think, To-day and not tomorrow, let me live!

अध्याय ५

श्लोक 19.7

अ॒ष्टाप॑दी चतुर॒क्षी चतुः॑श्रोत्रा॒ चतु॑र्हनुः ।द्व्याऽस्या॒ द्विजि॑ह्वा भू॒त्वा सा रा॒ष्ट्रमव॑ धूनुते ब्रह्म॒ज्यस्य॑

aṣṭāpadī caturakṣī catuḥśrotrā caturhanuḥ | dvyā'syā dvijihvā bhūtvā sā rāṣṭramava dhūnute brahmajyasya

हिन्दी अर्थ

(अमित्रान्) शत्रुम का (अवर ज द्धुनीहि) यवहनन कर । वाली सेनावाला, (प्रवेदक़ृत्) ठीक सूचनां देनेवाला, (ग्रामघोषी) ग्राम- ग्राममेंमद्धकी घोषणा करनेवाला (प्रवदः) ठीक प्रकारसे कथन करने- २६४ अयर्वेवेदमाष्य काण्ड ५। जनु० ४। सूक्त २० (श्रेयः केतः) श्रेय को जाननेवाला, (वसुजित्) धन विजयी, (सही-

English

The Brāhman’s cow is like a snake, charged with due poison, clothed with skin. Rājanya! bitter to the taste is she, and none may eat of her.

अध्याय ५

श्लोक 19.8

तद् वै रा॒ष्ट्रमा स्र॑वति॒ नावं॑ भि॒न्नामि॑वोद॒कम्।ब्र॒ह्माणं॒ यत्र॒ हिंस॑न्ति॒ तद् रा॒ष्ट्रं ह॑न्ति दु॒च्छुना॑

tad vai rāṣṭramā sravati nāvaṃ bhinnāmivodakam| brahmāṇaṃ yatra hiṃsanti tad rāṣṭraṃ hanti ducchunā

हिन्दी अर्थ

वेदोक्रतविधि द्वारा है दुन्दुभिः (संशितः असि) तू तेज कियागयाहै ऊची ध्वनिसे वुक्त किया गयादहै। (अधिषवणे) पीसकर सोमरस निकालनेवाली शिला पर, (अंशून् इव) जसे सोमांशुञों को (अद्रिः) विदीर्ण विजय-प्राप्ति पर ढोलची विजय-नाच करताहै, उसके साथही, (शतरषाट्) प्रात्रुमों का पराभव करनेवाला, (नीषाट्) नितरां परा- भव करनेवाला, (अभिमातिषाहः) अभिमानियों का पराभव करनेवाला (गवेषणः) एत्र की प्रथिवी को चाहनेवाला, (सहमानः) शत्रकृत आक्रमण को सहनेवाला, (उद्भित्) उसका उद्भेदन करनेवाला तूहे दुन्दुभि !

English

She takes away his strength, she mars his splendour, she ruins everything like fire enkindled. That man drinks poison of the deadly serpent who counts the Brāhman as mere food to feed him.

अध्याय ५

श्लोक 19.9

तं वृ॒क्षा अप॑ सेधन्ति छा॒यां नो॒ मोप॑गा॒ इति॑ ।यो ब्रा॑ह्म॒णस्य॒ सद् धन॑म॒भि ना॑रद॒ मन्य॑ते

taṃ vṛkṣā apa sedhanti chāyāṃ no mopagā iti | yo brāhmaṇasya sad dhanamabhi nārada manyate

हिन्दी अर्थ

वाला, (समदः) मोद-प्रमोदवाला, (गमिष्ठः) शत्रू की भर जानेवाला, (मृधः जेता) संग्राम का जीतनेवाला, (पुर एता) आगे-जागे जानेवाला दुन्दुभि के सदृश उच्च घोषणा करनेवाले सेनापति का मिश्ित वणेन हुजा उपचारमात्रही हुमा है, वेदों मे ओौपचारिक वणेन बहुत्र हैँ । यथा “चेतना- (विह्दयम्) हदो का फटाव तथा (वेमनस्यम्) मनो का फटाव

English

Whoever smites him, deeming him a weakling-blasphemer, coveting his wealth through folly Indra sets fire alight within his bosom. He who acts thus is loathed by Earth and Heaven.

अध्याय ५

श्लोक 19.10

वि॒षमे॒तद् दे॒वकृ॑तं॒ राजा॒ वरु॑णोऽब्रवीत्।न ब्रा॑ह्म॒णस्य॒ गां ज॒ग्ध्वा रा॒ष्ट्रे जा॑गार॒ कश्च॒न

viṣametad devakṛtaṃ rājā varuṇo'bravīt| na brāhmaṇasya gāṃ jagdhvā rāṣṭre jāgāra kaścana

हिन्दी अर्थ

दण्डरूप मे कहा है । इससे अतिरिक्त ओर बिना नही । इन्हे सभाचरः, तथा न्यायालय को सभा कहा है । यथा धर्माय सभाचरम्! (यजु: ३०।६); धमं है न्यायव्यवस्था; सभा है व्याय करनेवालों की, तंवेव्र॑ह्यञ्यते देवा अपां मागम॑धारयन ॥१३॥

English

Within whose kingdom is detained, through want of sense, a Brāhman’s dame.

अध्याय ५

श्लोक 19.11

नवै॒व ता न॑व॒तयो॒ या भूमि॒र्व्यऽधूनुत ।प्र॒जां हिं॑सि॒त्वा ब्राह्म॑णीमसंभ॒व्यं परा॑भवन्

navaiva tā navatayo yā bhūmirvya'dhūnuta | prajāṃ hiṃsitvā brāhmaṇīmasaṃbhavyaṃ parābhavan

हिन्दी अर्थ

(कृपमाणस्य) कृपा के पात्र बने, (जीतस्य) जीवनहानि पहुंचाये गये बराह्मण के जीवन को हानि पहुंचानेवाले है राजन् ! (वे) निश्चय से (तम् अपां भागम्) उस अश्रूरूप जल-भाग को (ते) तेरे लिए (देवाः) दिष्य, तं वर ब्र॑ह्मज्य ते देवा अपां मागम॑धारमन ।१५॥ (येन) जिस जल द्वारा (मृतम्) मरे हए को (नपयन्ति) स्नान कराते रै, (येन) जिस द्वारा (दमभ्रूणि) मृदो क वालों रोम को व्यक्ति

English

No steward, golden-necklaced, goes before the meat-trays of the man. Within whose kingdom is detained, through want of sense, a

अध्याय ५

श्लोक 19.12

यां मृ॒ताया॑नुब॒ध्नन्ति॑ कू॒द्यंऽ पद॒योप॑नीम्।तद् वै ब्र॑ह्मज्य ते दे॒वा उ॑प॒स्तर॑णमब्रुवन्

yāṃ mṛtāyānubadhnanti kūdyaṃ' padayopanīm| tad vai brahmajya te devā upastaraṇamabruvan

हिन्दी अर्थ

वाले ह राजन् ! (वै) निश्चय से (तम्, अपां भागम्) उस जल-भागको (ते) तेरे लिए देवाः) दिव्य न्यायाधीशों ने (अधारयन्) निर्धारित कियाहै। नास्मै समितिः कर्पते न भित्र न॑यते वश॑म् ॥१५॥

English

Brāhman’s dame. No black-eared courser, white of hue, moves proudly, harnessed to his car,

अध्याय ५

श्लोक 19.13

अश्रू॑णि॒ कृप॑मानस्य॒ यानि॑ जी॒तस्य॑ वावृ॒तुः ।तं वै ब्र॑ह्मज्य ते दे॒वा अ॒पां भा॒गम॑धारयन्

aśrūṇi kṛpamānasya yāni jītasya vāvṛtuḥ | taṃ vai brahmajya te devā apāṃ bhāgamadhārayan

हिन्दी अर्थ

सुख-वर्षा (न वषेति) नहीं बरसती, नहीं होती , (न) ओर न (अस्मे) इसके लिए (समितिः) अपनी राजसभा (कल्पते) सामर्थ्यवती होती है, (न) तथा न (मित्रम्) मित्र-राजाको (वशम्) वशमें (नयते) ला सकता दह स्वानुकूल कर सकता है । यथा “शा 811४ 116 7९ पलंहाफणणा त ८108." (आप्टे), अर्थात् साथी, जोकि ओर राजा का वणेन, राजनीतिक तत्त्वों कै परिज्ञानाथं हज है। ऊची आवाजवाल। (दुन्दुभिः) ढोल है, (सत्वनायन्') बली सेन्यदलके साथ

English

In whose dominion is detained, through want of sense, a Brāhman’s dame.

अध्याय ५

श्लोक 19.14

येन॑ मृ॒तं स्न॒पय॑न्ति॒ श्मश्रू॑णि॒ येनोन्दते॑ ।तं वै ब्र॑ह्मज्य ते दे॒वा अ॒पां भा॒गम॑धारयन्

yena mṛtaṃ snapayanti śmaśrūṇi yenondate | taṃ vai brahmajya te devā apāṃ bhāgamadhārayan

हिन्दी अर्थ

१. युद्धस्थली मं ढोल को विशेष प्रकार को अवाज से योद्धाओं में जोश वैदा हौ जातारै, यह् ही सत्व है, ग्ल है। २६० अयर्ववेदभाष्य काण्ड ५। अनु° ४। सूक्त २० यद्ध मेँ जाता हुमा (वाचम्) वाणी या जावाज को (क्षुणुवानः ) करता हुमा,

English

No lily grows with oval bulbs, no lotus-pool is in his field, In whose dominion is detained, through senseless love, a

अध्याय ५

श्लोक 19.15

न व॒र्षं मै॑त्रावरु॒णं ब्र॑ह्म॒ज्यम॒भि व॑र्षति ।नास्मै॒ समि॑तिः कल्पते॒ न मि॒त्रं न॑यते॒ वश॑म्

na varṣaṃ maitrāvaruṇaṃ brahmajyamabhi varṣati | nāsmai samitiḥ kalpate na mitraṃ nayate vaśam

हिन्दी अर्थ

करता हुआ, (सिंहः इव ) सिह के सदृश (तंस्तनी हि) गजं (स्तनयित्नूवत् ) । के साथ आत्ता हुजा । क्षुणुवानः= टुक्षु शब्दे (जदादिः) । सिह इवास्तानीद् दरवयो विवद्धाऽभिकरन्दर॑नूषभो वासितामिव । (दरवयः) काष्ठनिर्मित, (विबद्धः) विशेषरूपमें चमं आदिद्ारा बेधा हआ दुन्दुभि (सिंहः इव) सिह के सदृश (अस्तानीत्) गर्जाहै, मौर (वासिताम्) विशेष गन्धवाली! गौ के (अभि) सम्मुख (ऋषभः इव) जंसे वैल (कन्दन्) शब्द करता हुमा जाता है वेरोत् शतु कीओरजा। हे विदयत् का है, (अभिमातिषाहः) जोकि अभिमानियो का पराभव करता है ।

English

Brāhman’s dame. The men whose task it is to milk drain not the brindled cow for him,

अध्याय ५

श्लोक 20.1

शत्रुसेनात्रासनम्।१-१२ ब्रह्मा।वनस्पतिः, दुन्दुभिः।त्रिष्टुप्, १ जगती।उ॒च्चैर्घो॑षो दुन्दु॒भिः स॑त्वना॒यन् वा॑नस्प॒त्यः संभृ॑त उ॒स्रिया॑भिः ।वाचं॑ क्षुणुवा॒नो द॒मय॑न्त्स॒पत्ना॑न्त्सिं॒ह इ॑व जे॒ष्यन्न॒भि तंस्तनीहि

śatrusenātrāsanam| 1-12 brahmā| vanaspatiḥ, dundubhiḥ| triṣṭup, 1 jagatī| uccairghoṣo dundubhiḥ satvanāyan vānaspatyaḥ saṃbhṛta usriyābhiḥ | vācaṃ kṣuṇuvāno damayantsapatnāntsiṃha iva jeṣyannabhi taṃstanīhi

हिन्दी अर्थ

भय (अमित्रेषु) दुर्मनो मे (निदध्मसि) हम सैनिक स्थापित करते ह 1 (दुन्दुभे) है इन्दुभि ! (एनान् अवजहि) इनका तु अवहूनन कर, नाश शत्रूषाट् ---णनरन् सहते, नकार का लोप । गवेषणः =नगौः प्रथिवी २६६ अध्वेवेदमाष्य काण्ड ५। अनु०° ४ । सुक्त २१

English

No Brāhman must be injured, safe as fire from him who loves himself. For Soma is akin to him and Indra guards him from the curse. The fool who eats the Brāhmans’ food and thinks it pleasant to the taste,

अध्याय ५

श्लोक 20.2

सिं॒ह इ॑वास्तानीद् द्रु॒वयो॒ विब॑द्धोऽभि॒क्रन्द॑न्नृष॒भो वा॑सि॒तामि॑व ।वृषा॒ त्वं वध्र॑यस्ते स॒पत्ना॑ ऐ॒न्द्रस्ते॒ शुष्मो॑ अभिमातिषा॒हः

siṃha ivāstānīd druvayo vibaddho'bhikrandannṛṣabho vāsitāmiva | vṛṣā tvaṃ vadhrayaste sapatnā aindraste śuṣmo abhimātiṣāhaḥ

हिन्दी अर्थ

सर्वै देवा अतित्रसन ये संग्रामस्येशते ।७॥ (दृन्दुभिना) दु्दुभि द्वारा, (च) गौर (हरिणस्य) हरिण के (अजि- भयभीत कर दियाहै, (ये) जो देव क्रि (संग्रामस्य) संग्रामके (ईशते)

English

Pursuing him with fiery zeal and anger, they pierce the foeman even from a distance. They who, themselves ten hundred, were the rulers of a thousand men, The Vaitahavyas, were destroyed for that they ate a Brāhman’s cow.

अध्याय ५

श्लोक 20.3

वृषे॑व यू॒थे सह॑सा विदा॒नो ग॒व्यन्न॒भि रु॑व संधनाजित्।शु॒चा वि॑ध्य॒ हृद॑यं॒ परे॑षां हि॒त्वा ग्रामा॒न् प्रच्यु॑ता यन्तु॒ शत्र॑वः

vṛṣeva yūthe sahasā vidāno gavyannabhi ruva saṃdhanājit| śucā vidhya hṛdayaṃ pareṣāṃ hitvā grāmān pracyutā yantu śatravaḥ

हिन्दी अर्थ

येदेवरहैँ सम्राट् की सेनाकी देखभाल करनेवाले मधिकारी। सस्रा के दुन्दुभि का घोष परसेना को भयभीत कर देता है, परन्तु हरिणो के अजिन, पर सेना को अत्तिभयभीत करदेतेर्हैँ। येह भजिनोंमेंच्िे सैनिक । शत्र तो जानते है किये हरिण, इन्द आसानीतेमाराजा सक्ता है, परन्तु ये हरिण भी जव लइते हँ तो शत्रुसेना अतिभयभीत हो जाती के साथ लडना तो अतिशय दुष्कर हो गया । हरिणो के अजिन अजिनं मे ढके सम्राट् के सेनिक। भूमि में मानो क्रीडा करतार, (तैः) उन पद्घोषौंकेद्वारा (नः) हमारे २६८ अथर्वैवेदमाष्य काण्ड ५। भनु०° ४ । सूक्त २१

English

The cow, indeed, when she was slain o’erthrew those Vaitahavyas, who Cooked the last she-goat that remained of Kesaraprābandhā’s flock.

अध्याय ५

श्लोक 20.4

सं॒जय॒न् पृत॑ना ऊ॒र्ध्वमा॑यु॒र्गृह्या॑ गृह्णा॒नो ब॑हु॒धा वि च॑क्ष्व ।दैवीं॒ वाचं॑ दुन्दुभ॒ आ गु॑रस्व वे॒धाः शत्रू॑णा॒मुप॑ भरस्व॒ वेदः॑

saṃjayan pṛtanā ūrdhvamāyurgṛhyā gṛhṇāno bahudhā vi cakṣva | daivīṃ vācaṃ dundubha ā gurasva vedhāḥ śatrūṇāmupa bharasva vedaḥ

हिन्दी अर्थ

(अनीकशः) नाना सेनाहूप मँ (यन्ति) यद्धभूमि में विचरतेरह। अतः महाणक्तिशालौ है। शव्रसेना उसके लिए मानो कछायारूप है, निःशक्त है छायावत । इन्द्रकी सेना के पद्घोषोंके दही भयसे शत्र की सेनाएं भय- जिसे सेनिक प्रसन्नता से खेलते है, निज क्षात्रधमे जानकर ।

English

One and a hundred were the folk, those whom the earth shook off from her: When they had wronged the Brāhman race they perished incon- ceivably. Among mankind the Gods’ despiser moveth: he hath drunk poison, naught but bone is left

अध्याय ५

श्लोक 20.5

दु॒न्दु॒भेर्वाचं॒ प्रय॑तां॒ वद॑न्तीमाशृण्व॒ती ना॑थि॒ता घोष॑बुद्धा ।नारी॑ पु॒त्रं धा॑वतु हस्त॒गह्या॑मि॒त्री भी॒ता स॑म॒रे व॒धाना॑म्

dundubhervācaṃ prayatāṃ vadantīmāśṛṇvatī nāthitā ghoṣabuddhā | nārī putraṃ dhāvatu hastagahyāmitrī bhītā samare vadhānām

हिन्दी अर्थ

सेनाः पराजिता यतीरमित्राणामनीकशः ९॥ (याः दिशः) जो दिशाएं हैँ उन्हें, (ज्याघोषाः) हमारे धनुषो की । दुन्दुभयः प्रथम वार बहुवचन में ।' सेनाः-शत्रुओं की नाना सेनाएं । अनीकणः = पदाति्योँ, अश्वा रोहियों, रथियों, हस्तिपको तथा खाद सामग्री पहुंचानेवालों की भिन्न-भिन्न श्रेणियां । चक्षुओं को छीन ले, (मरीचयः) है रदिमियो ! (अनु) आदित्य की अनुकूलता मे या उसके पीषे-पीछ (धावत) दौड़ो । (पत्संगिनीः) शत्रूओं के पैरोकी सङ््खिन-साथिन बेडियां (जासजन्तु) इनके पैरों में आसक्त रहें, लगी रहँ, (बाहुवीर्ये) इन शत्रु सेनाओं की बाहों कौ वीरता के (विगते) चले जाने पर, अर्थात् जव उनकी बाहुभों मे लड़ने कौ शक्ति न रहे ।

English

him. Who wrongs the kinsman of the Gods, the Brāhman, gains not the sphere to which the

अध्याय ५

श्लोक 20.6

पूर्वो॑ दुन्दुभे॒ प्र व॑दासि॒ वाचं॒ भूम्याः॑ पृ॒ष्ठे व॑द॒ रोच॑मानः ।अ॒मि॒त्र॒से॒नाम॑भि॒जञ्ज॑भानो द्यु॒मद् व॑द दुन्दुभे सू॒नृता॑वत्

pūrvo dundubhe pra vadāsi vācaṃ bhūmyāḥ pṛṣṭhe vada rocamānaḥ | amitrasenāmabhijañjabhāno dyumad vada dundubhe sūnṛtāvat

हिन्दी अर्थ

प्रदान करती दह, विनादहून दोके चक्षु देख नहीं सकते, अतः अभिप्राय. दुन्दुभि भी भेज, जोकि स्वजातीय सैनिकों मे जोडा पदा कर सके । कै चक्षओं पर डाला जाए, ताकि उनमें देखने कौ शक्ति न रहे, जैसे टाचं

English

Fathers travelled. Agni, in sooth, is called our guide, Soma is called our next of kin. Indra quells him who curses us. Sages know well that this is so.

अध्याय ५

श्लोक 20.7

अ॒न्त॒रेमे नभ॑सी॒ घोषो॑ अस्तु॒ पृथ॑क् ते ध्व॒नयो॑ यन्तु॒ शीभ॑म्।अ॒भि क्र॑न्द स्त॒नयो॒त्पिपा॑नः श्लोक॒कृन्मि॑त्र॒तूर्या॑य स्व॒र्धी

antareme nabhasī ghoṣo astu pṛthak te dhvanayo yantu śībham| abhi kranda stanayotpipānaḥ ślokakṛnmitratūryāya svardhī

हिन्दी अर्थ

सामो राजा वरणो राजां महादेव उत मृत्युरिनद्रः ॥११॥ (प्ररिनमातरः) निज राष्टृभूमि को माता जाननेवाले, (उग्राः) उग्र, के सहयोग द्वारा (शत्रून्) णवुओं को (प्रमृणीत मारो। (सोमः राजा) तेनाध्यक्ष राजा, (वरुणः राजा) राष्टरपति राजा, (महादेवः) देवाधिदेव मरुतः (यज् १७।४० । महादेवः (अथव ° १ ३।४( १)।४) । एता देवसेनाः सू्ैकेतवः सच॑तसः । मकेतवः ङ्किति कण्डोवाली, (सचेतसः) एकचित्तवाली, (सू्ेकेतवः) सूर्याद्धुिति क्लण्डोवाली, ध (एताः) ये मन्त्र ११ मे कथित (देवसेनाः) देवों की सेनाण (नः) हमारे

English

Prince! like a poisoned arrow, like a deadly snake, O lord of kine! Dire is the Brāhman’s arrow: he pierces his enemies therewith.

अध्याय ५

श्लोक 20.8

धी॒भिः कृ॒तः प्र व॑दाति॒ वाच॒मुद्ध॑र्षय॒ सत्व॑ना॒मायु॑धानि ।इन्द्र॑मेदी॒ सत्व॑नो॒ नि ह्व॑यस्व मि॒त्रैर॒मित्राँ॒ अव॑ जङ्घनीहि

dhībhiḥ kṛtaḥ pra vadāti vācamuddharṣaya satvanāmāyudhāni | indramedī satvano ni hvayasva mitrairamitrā~ ava jaṅghanīhi

हिन्दी अर्थ

जहतियां --युद्धयज्ञ मे सैनिको कौ आत्माहृतियां । न मं सूयैकेतवः कहा है । एता देवसेनाः” मे महादेव अर्थात् परमेश्वर को देवसेनाओं का अद्धीभूत दर्शाया है। वह्भी ४ है, सूये उसका केतु ¶ ज्ञापक है । यथा-- 1) पुरुषः सोऽसावहम् । ओरेम खं ब्रह्म ।। (यजुः° ४०।१७) । अर्थात् वह॒ जो आदित्य मे पुरुष है वह मँ हूं, जिसका कि नाम

English

The wickedness of robbing or insulting Brāhmans The sons of Vitahavya, the Srinjayas, waxed exceeding strong. They well-nigh touched the heavens, but they wronged Bhrigu and were overthrown.

अध्याय ५

श्लोक 20.9

सं॒क्रन्दनः॑ प्रव॒दो धृ॒ष्णुषे॑णः प्रवेद॒कृद् ब॑हु॒धा ग्रा॑मघो॒षी।श्रेयो॑ वन्वा॒नो व॒युना॑नि वि॒द्वान् की॒र्तिं ब॒हुभ्यो॒ वि ह॑र द्विरा॒जे

saṃkrandanaḥ pravado dhṛṣṇuṣeṇaḥ pravedakṛd bahudhā grāmaghoṣī| śreyo vanvāno vayunāni vidvān kīrtiṃ bahubhyo vi hara dvirāje

हिन्दी अर्थ

वेदिवदः समिधः शोडुचाना अप् द्रेषास्यञुया भवन्तु ॥१॥ (पूतदक्षाः वरुणः) पवित्रकारी बलवाला उत्तम जल (इतः) इस रोगी या (वेदिः बहिः) वेदी ओर कुंशास्तरण, (समिधः) यज्ञिय वृक्षो की समिधाएं (शोशुचानाः) अग्नि हारा चमकती हृरद (भवन्तु) हों, अमुया उस विधिसे (बरेषांसि) देषकारी रोगकीटाणु (अप) अपगत हों ।

English

When men pierced Brihatsāman through, the Brāhman, son of Angiras,

अध्याय ५

श्लोक 20.10

श्रेयः॑केतो वसु॒जित् सहीयान्त्संग्राम॒जित् संशि॑तो॒ ब्रह्म॑णासि ।अं॒शूनि॑व॒ ग्रावा॑धि॒षव॑णे॒ अद्रि॑र्ग॒व्य॑न् दु॑न्दु॒भेऽधि॑ नृत्य॒ वेदः॑

śreyaḥketo vasujit sahīyāntsaṃgrāmajit saṃśito brahmaṇāsi | aṃśūniva grāvādhiṣavaṇe adrirgavyan dundubhe'dhi nṛtya vedaḥ

हिन्दी अर्थ

करमशम् = कश (गतौ, चञ्चलता, गड़बड़) मश ॒(रोषङृते धावन्तु विभ्य॑तो ऽपि; प्रजासेनाञ्यं हते ॥२॥ (मनसा, चक्षुषा, हृदयेन, च) मनसे, चक्षु से गौर हदय से (उद्रेप- मानाः) कापते हुए (अमित्राः) शत्रु, (बिभ्यतः) भयभीत हुए (धावन्तु) (उस्ियाभिः) गौबों के चमं ओर स्नायुओंद्वारा (संभृतः) तैयार.

English

Eats, but can ne’er digest, the cow that bristles with a hundred barbs, His voice an arrow’s neck, his tongue a bowstring, his windpipes fire-enveloped heads of

अध्याय ५

श्लोक 20.11

श॒त्रू॒षाण् नी॒षाड॑भिमातिषा॒हो ग॒वेष॑णः॒ सह॑मान उ॒द्भित्।वा॒ग्वीव॒ मन्त्रं॒ प्र भ॑रस्व॒ वाचं॒ सांग्रा॑मजित्या॒येष॒मुद् व॑दे॒ह

śatrūṣāṇ nīṣāḍabhimātiṣāho gaveṣaṇaḥ sahamāna udbhit| vāgvīva mantraṃ pra bharasva vācaṃ sāṃgrāmajityāyeṣamud vadeha

हिन्दी अर्थ

वानस्पत्यः (२०।१) । अभिघारितः= घु सेचने (भ्वादिः) । (यथा) जिस प्रकार (मारण्याः मृगाः) अरण्यके मग (पुरुषात् अधि) पुरुष से (संविजन्ते) भयभीत होते है, (एवा) इस प्रकार (दुन्दुभे) को मोहय कतव्याकत्तंग्य के ज्ञान से रहित कर।

English

arrows, With these the Brāhman pierces through blasphemers, with God-sped bows that quell the hearts within them.

अध्याय ५

श्लोक 20.12

अ॒च्यु॒त॒च्युत् स॒मदो॒ गमि॑ष्ठो॒ मृधो॒ जेता॑ पुरए॒तायो॒ध्यः ।इन्द्रे॑ण गु॒प्तो वि॒दथा॑ नि॒चिक्य॑द्धृ॒द्द्योत॑नो द्विष॒तां या॑हि॒ शीभ॑म्

acyutacyut samado gamiṣṭho mṛdho jetā puraetāyodhyaḥ | indreṇa gupto vidathā nicikyaddhṛddyotano dviṣatāṃ yāhi śībham

हिन्दी अर्थ

(यथा) जिस प्रकार (वृकात्) भेद्य से (बहुविभ्यतीः) बहुत भय करती हुई (अजावयः) बकरिर्या-भेडं (धावन्ति) दौड जाती है, (एवा) इस (यथा) जिस प्रकार (अहदिवि) दिनके प्रकाश मे (पतत्रिणः) पक्षी (सहस्य स्तनथोः) शेर की गजंनासे पश् भय करतेर्हु, (एवा) इस

English

Keen arrows have the Brāhmans, armed with missiles: the shaft, when they discharge it, never faileth.

अध्याय ५

श्लोक 21.1

शत्रुसेनात्रासनम्।१-१२ ब्रह्म।वनस्पतिः, दुन्दुभिः, १०-१२ आदित्यादयः।अनुष्टुप्, १, ४-५ पथ्यापङ्क्तिः, ६ जगती, ११ बृहतीगर्भा त्रिष्टुप्, १२ त्रिपदा यवमध्या गायत्री।विहृ॑दयं वैमन॒स्यं वदा॒मित्रे॑षु दुन्दुभे ।वि॒द्वे॒षं कश्म॑शं भ॒यम॒मित्रे॑षु॒ नि द॑ध्म॒स्यवैनान् दुन्दुभे जहि

śatrusenātrāsanam| 1-12 brahma| vanaspatiḥ, dundubhiḥ, 10-12 ādityādayaḥ| anuṣṭup, 1, 4-5 pathyāpaṅktiḥ, 6 jagatī, 11 bṛhatīgarbhā triṣṭup, 12 tripadā yavamadhyā gāyatrī| vihṛdayaṃ vaimanasyaṃ vadāmitreṣu dundubhe | vidveṣaṃ kaśmaśaṃ bhayamamitreṣu ni dadhmasyavainān dundubhe jahi

हिन्दी अर्थ

शुद्धजल, जलचिकित्सा के लिए । अमुया अमुना (सुपां सुलुक्, अष्टा० ७।१।३६ ) दवारा “या” । वेदिः ओर बर्हिः = यज्ञनिमित्त बैठने के लिए। समिधः यज्ञिय वृक्षों की । यज्ञिय वृक्ष-=-आम, पलाश, शमी, पीपल, बड़,

English

The ram with teeth in both his jaws, the sheep, devoured their progeny. 63 If men have spat upon, or shot their rheum upon a Brāhman, they.

अध्याय ५

श्लोक 21.2

उ॒द्वेप॑माना॒ मन॑सा॒ चक्षु॑षा॒ हृद॑येन च ।धाव॑न्तु॒ बिभ्य॑तो॒ऽमित्राः॑ प्रत्रा॒सेनाज्ये॑ हु॒ते

udvepamānā manasā cakṣuṣā hṛdayena ca | dhāvantu bibhyato'mitrāḥ pratrāsenājye hute

हिन्दी अर्थ

२७२ अथवंवेदभाष्य काण्ड ५। अनु०° ५। सूक्त २२ कों अरस्य मूजवन्त ओको अर्य महावृषाः । (अस्य) इस तक्मा-ज्वर का (ओकः) घर है (मूजवन्तः) मंजकी ।

English

She grows eight-footed, and four-eyed, four-eared, four-jawed, two-faced, two-tongued, And shatters down the kingdom of the man who doth the Brāhman wrong.

अध्याय ५

श्लोक 21.3

वा॒न॒स्प॒त्यः संभृ॑त उ॒स्रिया॑भिर्वि॒श्वगो॑त्र्यः ।प्र॒त्रा॒सम॒मित्रे॑भ्यो व॒दाज्ये॑ना॒भिघा॑रितः

vānaspatyaḥ saṃbhṛta usriyābhirviśvagotryaḥ | pratrāsamamitrebhyo vadājyenābhighāritaḥ

हिन्दी अर्थ

हमा है (तावान्) उतना ही (असि) तु है, अब (वल्हिकिषु) जल-प्रधान न्योचरः-=नि-+आ-।उ-+चरः, चरतीति चरः। अभिप्राय यह् कि तक्मा-ज्वर वहां होता है जर्हा मूँज पैदा होती है, तथा महावर्षा होती है । ही वह रह गया है, बढ़ने नहीं पाया । उसकी प्रधानता उन्हीं प्रदेशों मे है गृह सब ओर से भाच्छादित रहतेर्है ओौर उनमेनतोशुद्धवायुका संचार होतादहै, न सूर्ररिमयों का । निवासगृह एसे होने चाहिए जिनमें बहुत प्रकाशवाली रदिमर्या' माए (ऋ ० १।१५४।६), निरुक्त (२।२।८) । 'वल्हि- केषु" पद संज्ञावाची नहीं, अपितु यौ गिकार्थंक है

English

As water swamps a leaky ship so ruin overflows that realm. Misfortune smites the realm wherein a Brāhman suffers scath and harm.

अध्याय ५

श्लोक 21.4

यथा॑ मृ॒गाः सं॑वि॒जन्त॑ आर॒ण्याः पुरु॑षा॒दधि॑ ।ए॒वा त्वं दु॑न्दुभे॒ऽमित्रा॑न॒भि क्र॑न्द॒ प्र त्रा॑स॒याथो॑ चि॒त्तानि॑ मोहय

yathā mṛgāḥ saṃvijanta āraṇyāḥ puruṣādadhi | evā tvaṃ dundubhe'mitrānabhi kranda pra trāsayātho cittāni mohaya

हिन्दी अर्थ

(व्याल) विशेषरूप में समाप्त कर देनेवाले !, (वि गद) व्यक्त वाणी बोलने से विगत कर देनेवाले ! (व्यङ्ग) अङ्गं को विकृत कर देनेवाल! व्यालः=वि + आ +-अल ('भलम्' कर देनेवाला, समाप्त कर गौर शारीरिक परिश्रम नहीं करतीं, अतः वे तक्मासे पराभूत हो जाती है । (देखिये मन्त्र ७) ।

English

The very trees repel the man, and drive him from their sheltering shade, Whoever claims, O Nārada, the treasure that a Brāhman owns. That wealth, King Varuna hath said, is poison by the Gods prepared.

अध्याय ५

श्लोक 21.5

यथा॒ वृका॑दजा॒वयो॒ धाव॑न्ति ब॒हु बिभ्य॑तीः ।ए॒वा त्वं दु॑न्दुभे॒ऽमित्रा॑न॒भि क्र॑न्द॒ प्र त्रा॑स॒याथो॑ चि॒त्तानि॑ मोहय

yathā vṛkādajāvayo dhāvanti bahu bibhyatīḥ | evā tvaṃ dundubhe'mitrānabhi kranda pra trāsayātho cittāni mohaya

हिन्दी अर्थ

गृहो को, (वा) या (परस्तराम्) उनसे भी परेके प्रदेशों कोतुजा। शोक से गति करनेवाली कन्या को (इच्छ) तू चाह, (ताम्) उसे (वि, इव, धूनुहि) तू विकम्पित सद्रुश कर । । ॑ किं शोकान्विता है, “शुचा द्रवतीति शद्रा । वह पीवरीहे, मोटी है, कफ- जिन्हे महावृषान् कहा है (मन्व ४, ५, ८) ।

English

None hath kept watch to guard his realm who hath devoured a Brāhman’s cow.

अध्याय ५

श्लोक 21.6

यथा॑ श्ये॒नात् प॑त॒त्रिणः॑ संवि॒जन्ते॒ अह॑र्दिवि सिं॒हस्य॑ स्त॒नथो॒र्यथा॑ ।ए॒वा त्वं दु॑न्दुभे॒ऽमित्रा॑न॒भि क्र॑न्द॒ प्र त्रा॑स॒याथो॑ चि॒त्तानि॑ मोहय

yathā śyenāt patatriṇaḥ saṃvijante ahardivi siṃhasya stanathoryathā | evā tvaṃ dundubhe'mitrānabhi kranda pra trāsayātho cittāni mohaya

हिन्दी अर्थ

उनका भक्षण कर । (एतानि) इन महावृष आदि प्रेषो को (तक्मने) प्रदेशों मे (न रमसे) यदित रमण नहीं करता, उनमें यदि तू नहीं रहना चाहता तो (वशी सन्) हमारे वश में होकर (नः) हमे (मृडयासि) तरू योजनवाला", यहाँ के प्रदेशों से (अभूत्) हौ गया है, (सः) वह् (गमिष्यति) चला जायगा (बल्हिकान्) बल्हिक प्रदेशों को ।

English

Those nine-and-ninety people whom Earth shook and cast away from her, When they had wronged the Brāhman race were ruined incon- ceivably. Oppressor of the Brāhmans! thus the Gods have spoken and declared,

अध्याय ५

श्लोक 21.7

परा॒मित्रा॑न् दुन्दु॒भिना॑ हरि॒णस्या॒जिने॑न च ।सर्वे॑ दे॒वा अ॑तित्रस॒न् ये सं॑ग्रा॒मस्येशते

parāmitrān dundubhinā hariṇasyājinena ca | sarve devā atitrasan ye saṃgrāmasyeśate

हिन्दी अर्थ

अतः इन भिन्न क्षेत्रों मे वह रमण नहीं कर पाता, अतः इन प्रदेशों के लोग सुखी रहते हैँ । इन प्रदेशों मे तक्मा का निवास निष्प्रयोजन हो गया जहां कि उसे मौका मिल सके निज वृद्धिका । वेदिक वणेन बहुधा कवियों कीशेली में हुए है, अतः अचेतन तक्मा को चेतन कल्पित कर उसमें चेतन यत् त्वं शीतोऽथों रूरः सह कासवेंपयः । तथा (रूरः) गमेरूप है, ओर (कासा, सह्) खासी के साथ (अवेपयः) तूने

English

The step-effacing wisp they bind upon the dead shall be thy couch. Oppressor of the Brāhmans! tears wept by the man who suffers wrong,

अध्याय ५

श्लोक 21.8

यैरिन्द्रः॑ प्र॒क्रीड॑ते पद्घो॒षैश्छा॒यया॑ स॒ह।तैर॒मित्रा॑स्त्रसन्तु नो॒ऽमी ये यन्त्य॑नीक॒शः

yairindraḥ prakrīḍate padghoṣaiśchāyayā saha| tairamitrāstrasantu no'mī ye yantyanīkaśaḥ

हिन्दी अर्थ

(भीमाः) भयानकरहै,(तार्भिः) उन अस्त्रो के साथतु (नः)हमे (परिवृडग्धि) पुणेतया परित्यक्त कर दे । मा स्मेतान्त्सखीन कुरुथा बलासं कासमुंयुगम् । ओर हिचकी को (सखीन् ) साथी (मास्मकुरुथाः) तुन कर, (अतः) इस रुण व्यक्तिसे (अर्वाङ) इधर हमारी मोर (मा.स्म,आ,षएैः)तूनओआ, १. इन प्रदेशों मे वह् निवासियो वे वशम रहता है, परवश होकर रहता है, निज

English

These are the share of water which the Gods have destined to be thine. The share of water which the Gods have destined to be thine, is that, Oppressor of the priest! wherewith men lave the corpse and wet the beard.

अध्याय ५

श्लोक 21.9

ज्या॒घो॒षा दु॑न्दु॒भयो॒ भि क्रो॑शन्तु॒ या दिशः॑ ।सेनाः॒ परा॑जिता य॒तीर॒मित्रा॑णामनीक॒शः

jyāghoṣā dundubhayo bhi krośantu yā diśaḥ | senāḥ parājitā yatīramitrāṇāmanīkaśaḥ

हिन्दी अर्थ

प्रभाव-प्रदशोन नहीं कर पाता । उसका रहना अब निष्प्रयोजन हौ गया है, अतः वह् बल्हिकं आदि प्रदेशो में घला जाएगा, यह् निरिचत है । कफ । बलगम 1 उदयगम् = उद् (ऊपर की ओर) युजिर् योगे (रुधादिः); तक्मा ज्वर में बलास, खासी ओर हिचकी हो जातेरह। (स्वस्रा कासिकया) ओर बहिन खसिी के (सह) साथ, तथा (पाप्मा) पापी जनम्) उस जन को (गच्छ) तु प्राप्त हो, उसकीबोरतू जा।

English

The rain of Mitra-Varuna falls not on him who wrongs the priest. To him no counsel brings success: he wins, no friend to do his will.

अध्याय ५

श्लोक 21.10

आदि॑त्य॒ चक्षु॒रा द॑त्स्व॒ मरी॑च॒योऽनु॑ धावत ।प॒त्स॒ङ्गिनी॒रा स॑जन्तु॒ विग॑ते बाहुवी॒र्येऽ

āditya cakṣurā datsva marīcayo'nu dhāvata | patsaṅginīrā sajantu vigate bāhuvīrye'

हिन्दी अर्थ

(अयम्) यह तु (यः) जोकि (उच्छोचयन्) रक्तको सुखात हभ, सबको (हरितान्) हरे रद्गवाले (कृणोषि) कर देता है, (अधा) अव अथ १. सूक्तमें तक्मा का वर्णन पुरुषविध में हुआ । कविता सलीमे तक्मा को चेतन “जीवन को कृच्छुमय कर देनेवाला ज्वर'', चाहे वह मलेरिया हौ, सिरका ज्वर हो, अन्य प्रकारका ञ्यर हो ।

English

Sit in the middle of a stream running with blood, devouring hair. While yet the Brāhman’s cow which men are dressing quivers in her throe:

अध्याय ५

श्लोक 21.11

यू॒यमु॒ग्रा म॑रुतः पृश्निमातर॒ इन्द्रे॑ण यु॒जा प्र मृ॑णीत॒ शत्रू॑न्।सोमो॒ राजा॒ वरु॑णो॒ राजा॑ महादे॒व उ॒त मृ॒त्युरिन्द्रः॑

yūyamugrā marutaḥ pṛśnimātara indreṇa yujā pra mṛṇīta śatrūn| somo rājā varuṇo rājā mahādeva uta mṛtyurindraḥ

हिन्दी अर्थ

कृच्छं बनानेवालि है ज्वर ! (अरसः) रसरहित अर्थात् शकतिरहित ( हि) ही (भूयाः) तू हो जा, (अधा) तदनन्तर (न्यक्) नीचे को ओर से, (वा) या (अधराक्) शरीर केकिसी भी भाग से उतर जानेवाला होकर, (परेहि) हरितान् = लालरक्त के सूख जाने पर अशुद्ध रक्त काहरा वण। (यः) जो (परुषः) कठोर ओर (पारुषेयः) कठोर शरीर से उत्पन्न, तथा (अवध्वंसः) पदिचमदिशा मेँ नीचे पतित होते हए (इव) सयं कै सदुश (अरुणः) लाल है (तक्मानम्) उस तकमा-ज्वर को, (विरवधावीर्य) है सब

English

She mars the kingdom’s splendour: there no vigorous hero springs to life. Terrible is her cutting-up: her bitter flesh is cast away, And it is counted sin among the Fathers if her milk is drunk.

अध्याय ५

श्लोक 21.12

ए॒ता दे॑वसे॒नाः सूर्य॑केतवः॒ सचे॑तसः ।अ॒मित्रा॑न् नो जयन्तु॒ स्वाहा॑

etā devasenāḥ sūryaketavaḥ sacetasaḥ | amitrān no jayantu svāhā

हिन्दी अर्थ

ज्वर के साथ जव पसीना नहीं आता तव वह परुष ओौर पारुषेय होता है । अवध्वंसः = भव - ध्वंसु अवस्रंसने, गतौ च (भ्वादिः ) । सूयं जब भस्त होतादहैतो लाल होता द । परूप-तक्मा मुख को लाल कर देता ह, अत्युष्णता के कारण । पसीना आने पर शरीर रण्डा हो जातादहै, लाल नहीं (तक्मने) जीवन को कृच्छं करनेवाले ज्वर के विनाशार्थं , (नमः वाले, उतर जानेवाले ज्वर को (प्रहिणोमि) मैँदूर करता हूं । (शकम्भरस्य) शवित धारण करनेवाले, ज्वर की भी (मूष्ट्हा) पसे हत्या करदेताहू, +भ (धारणे, पोषणे च) । महावृषान् = महावर्षाविाले प्रदेशो में मलेरिया

English

If any King who deems himself mighty would eat a Brāhman up, Rent and disrupted is that realm wherein a Brāhman is oppres- sed.

अध्याय ५

श्लोक 22.1

तक्मनाशनम्।१-१४ भृग्वङ्गिराः।तक्मनाशनः।अनुष्टुप्, १ भुरिक् त्रिष्टुप्, २ त्रिष्टुप्, ५ विराट्, पथ्याबृहती।अ॒ग्निस्त॒क्मान॒मप॑ बाधतामि॒तः सोमो॒ ग्रावा॒ वरु॑णः पू॒तद॑क्षाः ।वेदि॑र्ब॒र्हिः स॒मिधः॒ शोशु॑चाना॒ अप॒ द्वेषां॑स्यमु॒या भ॑वन्तु

takmanāśanam| 1-14 bhṛgvaṅgirāḥ| takmanāśanaḥ| anuṣṭup, 1 bhurik triṣṭup, 2 triṣṭup, 5 virāṭ, pathyābṛhatī| agnistakmānamapa bādhatāmitaḥ somo grāvā varuṇaḥ pūtadakṣāḥ | vedirbarhiḥ samidhaḥ śośucānā apa dveṣāṃsyamuyā bhavantu

हिन्दी अर्थ

मे सहचारी रोगों को सखा कहा है । मन्त्र १२ मे इन्दं भाई, स्वसाओौर (यजुः० १।१७) । मन्त्र मेँ भ्ातुन्यके वध का निदेश हुआ हे, पापया पापौ भावना प्रतीत नहीं होती । जायदाद की बाट के सम्बन्ध मे भादयोमेंतो

English

A hymn to the War-drum to secure victory Formed out of wood, compact with straps of leather, loud is the: War-drum as he plays the hero.

अध्याय ५

श्लोक 22.2

अ॒यं यो विश्वा॒न् हरि॑तान् कृ॒णोष्यु॑च्छो॒चय॑न्न॒ग्निरि॑वाभिदु॒न्वन्।अधा॒ हि त॑क्मन्नर॒सो हि भू॒या अधा॒ न्यऽङ्ङध॒राङ् वा॒ परे॑हि

ayaṃ yo viśvān haritān kṛṇoṣyucchocayannagnirivābhidunvan| adhā hi takmannaraso hi bhūyā adhā nya'ṅṅadharāṅ vā parehi

हिन्दी अर्थ

सूयं ओर पाथिव अग्नि (मे) मेरे कुमार के लिए, मन्व २ (ओतौ) उन मे भोत-परोत है, (इति) इस निमित्त कि (क्रिमिम्) वरमार वगं के क्रिमि- समूह" का वे (जम्भयताम्) हनन करे, विनाश करं ।

English

Thou, first of all, O Drum, thy voice shalt utter: over the ridge of earth speak forth exultant. Crunching with might the army of the foemen, declare thy message pleasantly and clearly. Loud be thy roar between the earth and heaven. Swift let thy sounds go forth in all directions.

अध्याय ५

श्लोक 22.3

यः प॑रु॒षः पा॑रुषे॒योऽवध्वं॒स इ॑वारु॒णः ।त॒क्मानं॑ विश्वधावीर्याध॒राञ्चं॒ परा॑ सुवा

yaḥ paruṣaḥ pāruṣeyo'vadhvaṃsa ivāruṇaḥ | takmānaṃ viśvadhāvīryādharāñcaṃ parā suvā

हिन्दी अर्थ

चिकित्सा प्रारम्भ हो जाती है । :। । चिकित्सालय होते है वैसे कुमार चिकित्सालय भी होने ही चाहिए । इन्दं . कुमारभृत्य चिकित्सालय" भी कह सकते हँ जिनमें कि कुमारो का भरण- ।,॥ १. क्रिमि कृन् हिसायाम् (करूयादिः) , हिल कीट ।

English

Neigh at them, thunder, set in opposition, song-maker, good ally that friends may conquer. He shall send forth his voice whom art hath fashioned. Make thou the weapons of our

अध्याय ५

श्लोक 22.4

अ॒ध॒राञ्चं॒ प्र हि॑णोमि॒ नमः॑ कृ॒त्वा त॒क्मने॑ ।श॒क॒म्भ॒रस्य॑ मुष्टि॒हा पुन॑रेतु महावृ॒षान्

adharāñcaṃ pra hiṇomi namaḥ kṛtvā takmane | śakambharasya muṣṭihā punaretu mahāvṛṣān

हिन्दी अर्थ

है (कृष्णाः, शितिबाहवः) काले परन्तु वेत बाहुओंवाले, (ये, के, च) मौर यो अक्ष्यो परिसपैति यो नासे परिसर्पति । (यः) जो (अक्ष्यौ ) आंखो म (परिसर्पति) परिसपंण करता है, (यः) जो (नासे) नथनों मे (परिसर्पति) परिसर्पण करता है, (यः ) जो (दताम्,

English

warriors bristle. With Indra for ally call out our heroes, and with thy friends scatter and chase the foemen

अध्याय ५

श्लोक 22.5

ओको॑ अस्य॒ मूज॑वन्त॒ ओको॑ अस्य महावृ॒षाः ।याव॑ज्जा॒तस्त॑क्मं॒स्तावा॑नसि॒ बल्हि॑केषु न्योच॒रः

oko asya mūjavanta oko asya mahāvṛṣāḥ | yāvajjātastakmaṃstāvānasi balhikeṣu nyocaraḥ

हिन्दी अर्थ

क्रिमि को (जम्भयामसि) हम नष्ट करतेहँ। . आंखों मे लालिमा, सूजन, पीड़ा होना--यह् क्रिमि अर्थात् शल रोग-जीव-कीटाणु द्वारा होता है। नथनों में बार-बार जुकार्म होना भी अन्य प्रकारके रोग जीव-कोटाणुद्वारा होता है। दातं की जड़ का खोला ओर काला पड़ जाना अर उसमें पीडा होना अन्य जीव-कीटाणु द्वारा होता है । ये त्रिविध क्रिमि ह जीव-कीटाणु, जोकि आंखों द्वारा दृष्टिगोचर नहीं रूपोंवाले दो, (कृष्णौ! दौ) काले दो, (रोहितौ द्वौ) लाल दो, (बभ्रुः च, ्रौ' द्वारा "जोडा रूपाकृति, क्रिमियों का वणेन किर्या है, जोकि

English

Resonant, roaring, with thy powerful weapons, warning, and heard by troops in many places, Knowing all rules and winning us advantage, deal fame to many where two kings are

अध्याय ५

श्लोक 22.6

तक्म॒न् व्याऽल॒ वि ग॑द॒ व्यऽङ्ग॒ भूरि॑ यावय ।दा॒सीं नि॒ष्टक्व॑रीमिछ॒ तां वज्रे॑ण॒ सम॑र्पय

takman vyā'la vi gada vya'ṅga bhūri yāvaya | dāsīṃ niṣṭakvarīmicha tāṃ vajreṇa samarpaya

हिन्दी अर्थ

मांस ओर रुधिर चाहनेवाला क्रिमि, न कि गीधपक्षी । कोकः नकुकं वृकं को (जम्भयामसि) हम नष्ट करते ह । ये जीवाण् क्रिमि-हिसक है, अतः इनके नाश का कथन हुआ है । ये क्रिमि जीवाणुरूप रहै, जिनका कि रूगणकुमार के साथ सम्बन्धहै, यह

English

fighting. Bent on advantage, mightier, gaining treasures, victor in war, the spell hath made thee keener. As, in the press, the stone to stalks of Soma, thus, Drum! go dancing to our foes’ possessions.

अध्याय ५

श्लोक 22.7

तक्म॒न् मूज॑वतो गच्छ॒ बल्हि॑कान् वा परस्त॒राम्।शू॒द्रामि॑च्छ प्रफ॒र्व्यं॑१ तां त॑क्म॒न् वीऽव धूनुहि

takman mūjavato gaccha balhikān vā parastarām| śūdrāmiccha prapharvyaṃ1 tāṃ takman vī'va dhūnuhi

हिन्दी अर्थ

वृदिचक आदि हिल क्रिमियों का विनाश दृष्टिगोचर नहीं हे, अतः मन्त्र प्रतीत होता है जिनका कि हनन उदीयमान सूर्यं की रदिमियो द्वारा होना (जथर्वं ० २।३२।१), अर्थात् उदित होता हुमा सूयं क्रिमियो का हनन करे तथा अस्त होता हुमा रदिमयों द्वारा हनन करे। यहां रदिमियों द्वारा क्रिमियों का हनन कहा है, वह भी उदीयमान तथा अस्तंगम्यमान सूर्यकी

English

Foe-conqueror, victor, vanquishing opponents, seeker of booty, mastering, destroying. Speak out as a skilled speaker tells his counsel, speak strength to us that we may win the

अध्याय ५

श्लोक 22.8

म॒हा॒वृ॒षान् मूज॑वतो॒ बन्ध्व॑द्धि प॒रेत्य॑ ।प्रैतानि॑ त॒क्मने॑ ब्रूमो अन्यक्षे॒त्राणि॒ वा इ॒मा

mahāvṛṣān mūjavato bandhvaddhi paretya | praitāni takmane brūmo anyakṣetrāṇi vā imā

हिन्दी अर्थ

कालों में सूर्यं रदिमयां लाल होती है, ये क्रिमि-हुनन में अत्युपयोगी है । इन रक्त ररिमियों द्वारा कीटाणुओों अर्थात् जीव-कोटाणुओं कातो विनाश ॥ सम्भव है, स्प-वृरिचक आदि का ओौर कीडों-मकोडों आदि का नहीं तथा येवांपासः क्क॑षास एजत्काः शिपवित्तुकाः । ध (ये क्रिमयः) जो क्रिमि ह (शितिकक्षाः) श्वेत कोखोंवाले, (ये) जो

English

battle. Shaker of things unshaken, readiest corner to battles; conquer- ing foes, resistless leader, Guarded by Indra, watching our assemblies, go quickly, breaker of their hearts who hate us.

अध्याय ५

श्लोक 22.9

अ॒न्य॒क्षे॒त्रे न र॑मसे व॒शी सन्मृ॑डयासि नः ।अभू॑दु॒ प्रार्थ॑स्त॒क्मा स ग॑मिष्यति॒ बल्हि॑कान्

anyakṣetre na ramase vaśī sanmṛḍayāsi naḥ | abhūdu prārthastakmā sa gamiṣyati balhikān

हिन्दी अर्थ

१. कृष्णौ द्री = सम्भवतः नादियों के काले खून को पीनेवाले नर-मादा रूप दो कौटाणु । रोहितौ द्वौ =: सम्भवतः नादियों के लाल खून को पीनेवाले नर-मादा खूप दो कीटाणु । नर-मादा रूप म दो-दो ये द्विविध कीटाणु, रक्त को शौषित कर, रक्ता- ल्पता नामक (अनीमिया) रौगकोपेदाकरदेतेरहै) ये दो-दो क्रिमि नर-मादारूप २८० अथर्ववेदमाष्य काण्ड ५। अनु° ५। सुक्तं २३ अर्थात् सूयं फी मही दृषत्! है, रदिमसमूह । अकरम् = “मने हसित कर दिया है"",--यदह कथन किसी मनुष्य द्वारा हुमा है, वह् सूयं कौ रदिमसमूह पदों मे 'षासः' पद समान दहै । षस स्वप्ने (अदादिः); तथा येवा" ==यु

English

A hymn to the War-drum and various deities for victory Speak to our enemies, O Drum, discouragement and wild dismay.

अध्याय ५

श्लोक 22.10

यत् त्वं शी॒तोऽथो॑ रू॒रः स॒ह का॒सावे॑पयः ।भी॒मास्ते॑ तक्मन् हे॒तय॒स्ताभिः॑ स्म॒ परि॑ वृङ्ग्धि नः

yat tvaṃ śīto'tho rūraḥ saha kāsāvepayaḥ | bhīmāste takman hetayastābhiḥ sma pari vṛṅgdhi naḥ

हिन्दी अर्थ

भी सम्भव है, जैसे किं कौरवो ओर पाण्डवो में हृजा ओर इस कारण इन २७६ भयवेवेदभाष्य काण्ड ५।अनु० ५1 सुक्त॒ २३ (तृतीयकम्) तीसरे दिन के, (वितृतीयम्) तीसरे दिन से विभिन्न दिनों के, (सदन्दिम्) सदा क्षीणकारी या अवखण्डितकारी, (उत) तथा । ज्वर को (नाशय) नष्ट कर है परमेश्वर ।

English

Whetting thy voice and vanquishing opponents, roar at them like a lion fain to conquer! The fastened frame hath roared as ‘twere a lion, like a bull bel- lowing to meet the heifer.

अध्याय ५

श्लोक 22.11

मा स्मै॒तान्त्सखी॑न् कुरुथा ब॒लासं॑ का॒समु॑द्यु॒गम्।मास्मातो॒ऽर्वाङैः पुन॒स्तत् त्वा॑ तक्म॒न्नुप॑ ब्रुवे

mā smaitāntsakhīn kuruthā balāsaṃ kāsamudyugam| māsmāto'rvāṅaiḥ punastat tvā takmannupa bruve

हिन्दी अर्थ

कौण्डै ५।अनु० ५। सूक्ते २३ अथवेवेदभाष्यं २७७ पर, पेट-क्रिमि तथा रोग-कीटाणु (शल) आक्रमण करते है, क्योंकि उनका खाना-पीना भौर रहन-सहन प्राकृतिक नियमों के अनुकूल नहीं

English

Thou art a bull, thine enemies are weaklings: thine is the foe- subduing strength of Indra. Like a bull marked by strength among the cattle, roar seeking kine and gathering up the booty.

अध्याय ५

श्लोक 22.12

तक्म॒न् भ्रात्रा॑ ब॒लासे॑न॒ स्वस्रा॒ कासि॑कया स॒ह।पा॒प्मा भ्रातृ॑व्येण स॒ह गछा॒मुमर॑णं॒ जन॑म्

takman bhrātrā balāsena svasrā kāsikayā saha| pāpmā bhrātṛvyeṇa saha gachāmumaraṇaṃ janam

हिन्दी अर्थ

का कथन हृजा है । जंसेकरि पट के निर्माण मेँ तन्तुमों में पारस्परिक अनु- कृलता होती है वसी अनुकूलता संसार में प्राकृतिक तत्त्वो मँ दर्शायी है । ॥ कूमारवगं के जीवनो मे भौ प्राकृतिक नियमों के अनुरूप निज जीवनचर्या सुक्त मेँ क्रिमिविनाशका व्णनहै। कुमारो के पेटमे तथा शरीर कु मारव के (क्रिमीन्) क्रिमियों का (जहि) हनन कर । (विर्वा: अरातयः)

English

Pierce through our adversaries’ heart with sorrow, and let our routed foes desert their hamlets.

अध्याय ५

श्लोक 22.13

तृती॑यकं वितृती॒यं स॑द॒न्दिमु॒त शा॑र॒दम्।त॒क्मानं॑ शी॒तं रू॒रं ग्रैष्मं॑ नाशय॒ वार्षि॑कम्

tṛtīyakaṃ vitṛtīyaṃ sadandimuta śāradam| takmānaṃ śītaṃ rūraṃ graiṣmaṃ nāśaya vārṣikam

हिन्दी अर्थ

कर कुमारो के क्रिमियों का हनन नहीं करना, उसकी केवल स्वीकृति होनी १ शाली वचनो के कारण मानों क्रिमि हत हो गये। धनकीतो कमी नहीं । सरकारी कुमार चिक्रत्सालयो' की स्थापनाएं हो जाती रह, ओर क्रिमि- प्रदेशों मे भी मलेरिया होता है । मगेम्यः= मगध परिवेष्टने (कण्डवादिः) ।

English

Victorious in the battle, loudly roaring, seizing what may be seized, look all around thee. Utter, O Drum, thy heavenly voice with triumph. Bring, as a priest, our enemies’ possessions. Hearing the Drum’s far-reaching voice resounding, let the foe’s dame, waked by the roar,

अध्याय ५

श्लोक 22.14

ग॒न्धारि॑भ्यो॒ मूज॑व॒द्भ्योऽङ्गे॑भ्यो म॒गधे॑भ्यः ।प्रै॒ष्यन् जन॑मिव शेव॒धिं त॒क्मानं॒ परि॑ दद्मसि

gandhāribhyo mūjavadbhyo'ṅgebhyo magadhebhyaḥ | praiṣyan janamiva śevadhiṃ takmānaṃ pari dadmasi

हिन्दी अर्थ

ओतं मे द्यावापृथिवी ओता देवी सर॑स्वती । (मे) मेरे कुमार के लिए, मन्त्र १ (चयावापुथिवी) युलोक ओर पथिवी (ओते) परस्पर ओत-प्रोत है, (देवी सरस्वती) दिव्या, उदकवती मेषीय वैत गजना (ओता) उनमें ओत-प्रोत है । (इन्द्रः च, अग्निः च)

English

afflicted, Grasping her son, run forward in her terror amid the conflict of the deadly weapons.

अध्याय ५

श्लोक 23.1

क्रिमिघ्नम्।१-१३ कण्वः।इन्द्रः।अनुष्टुप्, १३ विराट्।ओते॑ मे॒ द्यावा॑पृथि॒वी ओता॑ दे॒वी सर॑स्वती ।ओतौ॑ म॒ इन्द्र॑श्चा॒ग्निश्च॒ क्रिमिं॑ जम्भयता॒मिति॑

krimighnam| 1-13 kaṇvaḥ| indraḥ| anuṣṭup, 13 virāṭ| ote me dyāvāpṛthivī otā devī sarasvatī | otau ma indraścāgniśca krimiṃ jambhayatāmiti

हिन्दी अर्थ

जुगप्सायाम् (चुरादिः); कष्क-=कष हिसा्थैः (भ्वादिः), अतः दो पदों के को कंस या मणि" द्वारा केन्द्रित कर क्रिमियों की हिसा करता है। कस या मणि (निरुक्त ७।६।२३), वैड्वानर प्रकरण । मष्मषा अथवा “मष्मष् + तृतीयैकवचन', हिसित करनेव्राले रदिमसमूह रूपी "दृषदा । नदनिमा = कानों मे नाद अर्थात् गंज पेदा कर देनेवाला क्रिमि । यह स्वानु-

English

We bring upon our foemen fear and discord and discomfiture. Drum! drive these enemies away. When sacrificial butter hath been offered, let our foemen flee.

अध्याय ५

श्लोक 23.2

अ॒स्येन्द्र॑ कुमा॒रस्य॒ क्रिमी॑न् धनपते जहि ।ह॒ता विश्वा॒ अरा॑तय उ॒ग्रेण॒ वच॑सा॒ मम॑

asyendra kumārasya krimīn dhanapate jahi | hatā viśvā arātaya ugreṇa vacasā mama

हिन्दी अर्थ

१. सृष्टि काल मे परमेइवर आदित्य के सजन हारा क्रिमियों का नादा करता है, अतः परमेश्वर क्रिमयो का महानाहक है (मन्त्र ८) । वैदिक वैद्य भी इन्हें पीसतादहै। वनरूप मे करनेवाला सू । सूर्यं के ताप ओर प्रकाश हारा तथा तत्त (हतः) मार दिया है (क्रिमीणाम्, राजा) क्रिमियों का राजा, (उत) तथा (एषाम्) इनका (स्थपतिः) स्थानिकपति (हृतः) मार दिया है। (क्रिमिः हतः) क्रिमि मार दिया है, (हतमाता ) इसकी मातामारदीरहै, (हतध्राता) इसका भाई मार दिया है, (हतस्वसा) इसको बहिन मार

English

Even so do thou, O Drum, roar out against our foes to frighten them, and then bewilder thou their thoughts.

अध्याय ५

श्लोक 23.3

यो अ॒क्ष्यौऽपरि॒सर्प॑ति॒ यो नासे॑ परि॒सर्प॑ति ।द॒तां यो मध्यं॒ गच्छ॑ति॒ तं क्रिमिं॑ जम्भयामसि

yo akṣyau'parisarpati yo nāse parisarpati | datāṃ yo madhyaṃ gacchati taṃ krimiṃ jambhayāmasi

हिन्दी अर्थ

से ही सन्तानं पैदा होती दह । मातामार दी गई तो सन्तानो का भी अभाव हो गया । क्रिमियों के पिताका वणन राजा ओर स्थपति द्वारा हुआ है, है कासिका, ध्रातुव्य है पाप्मा (अथवे० ५।२२।१३ ) । ष २२मेंतक्मा (अस्य) इस राजारूप क्रिमि के (वेशसः) समीप बैठनेवाले क्रिमि

English

May all the deities whose might controls the fortune of the fray Frighten away our enemies with Drum and skin of antelope. Let those our enemies who go yonder in their battalions shake.

अध्याय ५

श्लोक 23.4

सरू॑पौ॒ द्वौ विरू॑पौ॒ द्वौ कृ॒ष्णौ द्वौ रोहि॑तौ॒ द्वौ।ब॒भ्रुश्च॑ ब॒भ्रुक॑र्णश्च॒ गृध्रः॒ कोक॑श्च॒ ते ह॒ताः

sarūpau dvau virūpau dvau kṛṣṇau dvau rohitau dvau| babhruśca babhrukarṇaśca gṛdhraḥ kokaśca te hatāḥ

हिन्दी अर्थ

रत मभवेवेदमाष्य काण्ड ५। अनु० ५। सूक्त २४ (हतासः) मर गये हैँ मौर (परिवेशसः) इसे पेरकर दूर वैर्नेवाले भी (हताः, मर गये हँ । (अथो) तथा (ये) जो (क्षूल्लकाः इव) क्षुद्र के सदुश ओीर परिवेशसः हैँ सभा के सभासद् तथा क्षुल्लकाः है नौकर-चाकर, जोकि घटना के द्वारा शासन-तत्त्वों का भी कथन हुमा है ।

English

In fear at shadows and the sounds of feet which Indra sporteth with. To all the quarters of the sky let clang of bowstrings and our

अध्याय ५

श्लोक 23.5

ये क्रिम॑यः शिति॒कक्षा॒ ये कृ॒ष्णाः शि॑ति॒बाह॑वः ।ये के च॑ वि॒श्वरू॑पा॒स्तान् क्रिमी॑न् जम्भयामसि

ye krimayaḥ śitikakṣā ye kṛṣṇāḥ śitibāhavaḥ | ye ke ca viśvarūpāstān krimīn jambhayāmasi

हिन्दी अर्थ

साम्, क्रिमीणाम् ) सव मादा क्रिमियों के (शिरः) सिरो को (अमना) मखो को (अग्निना) अग्नि द्वारा (दहामि) म दग्ध करता हूं । ये क्रिमि कणसदृश सुक्म हँ (मन्त्र १०) इनके सिर तथा मुख भी

English

Drums. Cry out to hosts of foes that go discomfited in serried ranks. Āditya, take their sight away! Follow them close, ye motes of light.

अध्याय ५

श्लोक 23.6

उत् पु॒रस्ता॒त् सूर्य॑ एति वि॒श्वदृ॑ष्टो अदृष्ट॒हा।दृ॒ष्टांश्च॒ घ्नन्न॒दॄष्टां॑श्च॒ सर्वां॑श्च प्रमृ॒णन् क्रिमी॑न्

ut purastāt sūrya eti viśvadṛṣṭo adṛṣṭahā| dṛṣṭāṃśca ghnannadṝṣṭāṃśca sarvāṃśca pramṛṇan krimīn

हिन्दी अर्थ

(सविता प्रसवानाम् ) सविता प्रेरणाभों का (अधिपतिः) अधिपति काष्ठ ५। धनु० ५। सूक्त २४ अभर्बवेदभाष्य २८१५ कथन हुआ है । स्वाहा =सु + आह् । है, (सः) वह (मा) मेरी (अवतु) रक्षा करे। (अस्मिन्), दिः भथ

English

Let them cleave fast to foot-bound hosts when strength of arm hath past away. Do ye, O mighty Maruts, sons of Prisni, crush down, with

अध्याय ५

श्लोक 23.7

येवा॑षासः॒ कष्क॑षास एज॒त्काः शि॑पवित्नु॒काः ।दृ॒ष्टांश्च॑ ह॒न्यतां॑ क्रिमि॑रु॒तादृष्ट॑श्च हन्यताम्

yevāṣāsaḥ kaṣkaṣāsa ejatkāḥ śipavitnukāḥ | dṛṣṭāṃśca hanyatāṃ krimirutādṛṣṭaśca hanyatām

हिन्दी अर्थ

(द्यावापृथिवी) यौः तथा पृथिवी (दातणाम्) दाताभों की न पत्नी) स्वामिनी है, (ते) वे दोनों (मा) मेरी (अवताम्) रक्षा कर। । 6 को व दयौः तथा पृथिवी से प्राप्तहो रही है। यह् दोनों महादानी हैँ । (जस्मिन्" आदि अथं पूववत्) । वरुण जलो का अधिपति है, वह मेरी रक्षा करे । (भस्मिन्' आदि

English

Indra for ally, our foemen. King Soma. Varuna, great God and sovran, Indra too, aye, Death,—

अध्याय ५

श्लोक 23.8

ह॒तो येवा॑षः॒ क्रिमी॑णां ह॒तो न॑दनि॒मोत।सर्वा॒न् नि म॑ष्म॒षाक॑रं दृ॒षदा॒ खल्वाँ॑ इव

hato yevāṣaḥ krimīṇāṃ hato nadanimota| sarvān ni maṣmaṣākaraṃ dṛṣadā khalvā~ iva

हिन्दी अर्थ

२८६ जधर्ववेदभाष्य काण्ड ५। घनु० ५। सूक्त २४ (निघं० १।१०) । तथा मरुतः न-मारने मेँ कुशल सेनिक (यजुः० १७।४०), वे पवेतीय युद्धो के मधिपति हैँ । सोम ओषध विरोहणशील लता-वनस्पतियों का अधिपतिरहै, वह मेरी रक्षा करे । (अस्मिन्' आदि अथं पूववत्) । सूयं चक्षुओं का अधिपति है, वह मेरी रक्षा करे । (अस्मिन्! आदि

English

May these embattled Gods, brilliant as Sūrya—All hail!—one- minded conquer those who hate us.

अध्याय ५

श्लोक 23.9

त्रि॒शी॒र्षाणं॑ त्रिक॒कुदं॒ क्रिमिं॑ सा॒रङ्ग॒मर्जु॑नम्।शृ॒णाम्य॑स्य पृ॒ष्टीरपि॑ वृश्चामि॒ यच्छिरः॑

triśīrṣāṇaṃ trikakudaṃ krimiṃ sāraṅgamarjunam| śṛṇāmyasya pṛṣṭīrapi vṛścāmi yacchiraḥ

हिन्दी अर्थ

मेरी रक्षा करे । (अस्मिन्" भादि अथं पूववत्) । मरणशील-प्राणियों का पिता परमेश्वर पशुओं" का अधिपति है पशव-ः-- गावः, अवाः, पुरुषाः, अजावयः (अथव ० ११।२।६) । मरत् = भ्रियते मारयति वा स मरुत्, मनुष्यजातिः, पवनो वा (उणा० १।६४)

English

A charm against fever 65 Hence, filled with holy strength let Agni, Soma, and Varuna, the Press-stone, and the Altar.

अध्याय ५

श्लोक 23.10

अ॒त्रि॒वद् वः॑ क्रिमयो हन्मि कण्व॒वज्ज॑मदग्नि॒वत्।अ॒गस्त्य॑स्य॒ ब्रह्म॑णा॒ सं पि॑नष्म्य॒हं क्रिमी॑न्

atrivad vaḥ krimayo hanmi kaṇvavajjamadagnivat| agastyasya brahmaṇā saṃ pinaṣmyahaṃ krimīn

हिन्दी अर्थ

जिन्होने अभी रोगरूप में निज प्रभाव नहीं दर्शाया । मै हिसा करत। हं, (अस्य) इसकी (पृष्टीः अपि) पसलियों को भी, (यत् शिरः) ओरजोसिर टै उसे भी (वृश्चामि) र्मे काटताहूं। ज्वर-रोगोत्पादक क्रिमि का वणेन पुरुषरूप या पशृरूप रमँ हभ प्रायः, कविता शैली मे, होता है (देवें निरुक्त अ० ७।२ पा०। खण्ड ६, ¶ ७) । इस दृष्टि से तक्माके तीन सिर, तीन ककुद्, वणे, पृष्टीः, शिरः

English

Through consternation, terrified, trembling in mind and eye and heart. Wrought out of wood, compact with straps of leather, dear to all the clan,

अध्याय ५

श्लोक 23.11

ह॒तो राजा॒ क्रिमी॑णामु॒तैषां॑ स्थ॒पति॑र्ह॒तः ।ह॒तो ह॒तमा॑ता॒ क्रिमि॑र्ह॒तभ्रा॑ता ह॒तस्व॑सा

hato rājā krimīṇāmutaiṣāṃ sthapatirhataḥ | hato hatamātā krimirhatabhrātā hatasvasā

हिन्दी अर्थ

का दार्यां गोलाधं मौर बार्यां गोलाधे तथा इनके पिछली ओर लगा छोटा सिर । एन तीनों को “¶५० प्लपशाल तथा व्नलण्नाण”” कहते है । दिये जाएं । एजत्का: भौर शिपविल्नुकाः में क' या कर' स्वाथंमेहै।ये (हतः) मार दिया है, (उत) तथा (नदनिमा) नाद करनेवाला अर्थात्

English

Bedewed with sacrificial oil, speak terror to our enemies. As the wild creatures of the wood flee in their terror from a man, Even so do thou, O Drum, roar out against our foes to frighten them, and then bewilder thou

अध्याय ५

श्लोक 23.12

ह॒तासो॑ अस्य वे॒शसो॑ ह॒तासः॒ परि॑वेशसः ।अथो॒ ये क्षु॑ल्ल॒का इ॑व॒ सर्वे॒ ते क्रिम॑यो ह॒ताः

hatāso asya veśaso hatāsaḥ pariveśasaḥ | atho ye kṣullakā iva sarve te krimayo hatāḥ

हिन्दी अर्थ

. है । ज्वर (तक्मा) है अचेतन, तो भी अचेतन का वणेन चेतनवत्, वेदो मे ५।४।२७; पदसंख्या ७६) । अर्थात् काकुद है तालु गौर जिह्वा है कोकुवा, व को( मष्मपा, नि + अकरम् मैने नितरां हिसित कर क है, (इव) । र १. वर्णं के पाच व॑ र्है--कवगं, चवं, टवं, तवगं, पवर्ग । कवगं का उच्चारणं होतार कण्ठसे भौर पवगं का उच्चारण होता है दो-गोष्ठोंसे। चवगं, टवं २८२ अथववंवेदभाष्य काण्ड ५। अनु० ५। सुक्छ २३

English

their thoughts. As, when the wolf approaches, goats and sheep run sorely terrified,

अध्याय ५

श्लोक 23.13

सर्वे॑षां च॒ क्रिमी॑णां॒ सर्वा॑सां च क्रि॒मीना॑म्।भि॒नद्म्यश्म॑ना॒ शिरो॒ दहा॑म्य॒ग्निना॒ मुख॑म्

sarveṣāṃ ca krimīṇāṃ sarvāsāṃ ca krimīnām| bhinadmyaśmanā śiro dahāmyagninā mukham

हिन्दी अर्थ

२०।९२।९) । अर्थात् है वरुण ! तू उत्तम देव है, जिसके कि सात सिन करता है, भक्षण करता है। इसलिए इसे अत्ता ओर अन्नाद भी कहते ह । प्रलयकाल मेँ जगत् इसके लिए अन्नरूप हौ जाता है, जिससे परमे्वर हो जाते दँ । इस अत्रिने (दिवम्) द्युलोक को या चुतिमान् सूयं को (उन्निनाय) ऊध्वं दिशा में स्थापित किया है (अथवं० १३।२।४) । मानुष- शक्ति ऊध्वेदिशा मे चयुलोकं या सूयं को स्थापित नहीं कर सकती । अत्रि, तक्मा आदि रोगों तथा तदुत्पादकक्रिमियों को भी पीस डालता है, निवा- रित करता है। इसलिए वह॒ भेषज! भी है (यज्:० ३।५९) । वेदिक वेद्य

English

Even so do thou, O Drum, roar out against our foes to frighten them, and then bewilder thou their thoughts. As birds of air, day after day, fly in wild terror from the hawk, as from a roaring lion’s voice,

अध्याय ५

श्लोक 24.1

ब्रह्मकर्म १-१७ अथर्वा।ब्रह्मकर्मात्मा, १ सविता, २ अग्निः, ३ द्यावापृथिवी, ४ वरुणः, ५ मित्रावरुणौ, ६ मरुतः, ७ सोमः, ८ वायुः, ९ सूर्यः, १० चन्द्रमाः, ११ इन्द्रः, १२ मरुतां पिता, १३ मृत्युः, १४ यमः, १५ पितरः, १६ तताः, १७ ततामहाः।अतिशक्वरी, १-१०, १२-१४ चतुष्पदातिशक्वरी, ११ शक्वरी, १५-१६ त्रिपदा भुरिग्जगती, १७ त्रिपदा विराट् शक्वरी।स॒वि॒ता प्र॑स॒वाना॒मधि॑पतिः॒ स मा॑वतु ।अ॒स्मिन् ब्रह्म॑ण्य॒स्मिन् कर्म॑ण्य॒स्यां पु॑रो॒धाया॑म॒स्यां प्र॑ति॒ष्ठाया॑म॒स्यां चित्त्या॑म॒स्यामाकू॑त्याम॒स्यामा॒शिष्य॒स्यां दे॒वहू॑त्यां॒ स्वाहा॑

brahmakarma 1-17 atharvā| brahmakarmātmā, 1 savitā, 2 agniḥ, 3 dyāvāpṛthivī, 4 varuṇaḥ, 5 mitrāvaruṇau, 6 marutaḥ, 7 somaḥ, 8 vāyuḥ, 9 sūryaḥ, 10 candramāḥ, 11 indraḥ, 12 marutāṃ pitā, 13 mṛtyuḥ, 14 yamaḥ, 15 pitaraḥ, 16 tatāḥ, 17 tatāmahāḥ| atiśakvarī, 1-10, 12-14 catuṣpadātiśakvarī, 11 śakvarī, 15-16 tripadā bhurigjagatī, 17 tripadā virāṭ śakvarī| savitā prasavānāmadhipatiḥ sa māvatu | asmin brahmaṇyasmin karmaṇyasyāṃ purodhāyāmasyāṃ pratiṣṭhāyāmasyāṃ cittyāmasyāmākūtyāmasyāmāśiṣyasyāṃ devahūtyāṃ svāhā

हिन्दी अर्थ

यम पितरो का अधिपति है, वह मेरी रक्षा करे । (अस्मिन्' नादि; यम नियन्ता राजा । पितरः=सभा के सभासद् (अथवं० तताः जो तात कहलाने योग्य अवर" अर्थात् छोटी आयु के पितर तताः ताताः, पिता भादि, जोकि परिवार का विस्तार करतेहँ

English

And Grass, and glowing Fuel banish Fever. Let hateful things stay at a distance yonder. And thou thyself who makest all men yellow, consuming them with burning heat like Agni,

अध्याय ५

श्लोक 24.2

अ॒ग्निर्वन॒स्पती॑ना॒मधि॑पतिः॒ स मा॑वतु ।अ॒स्मिन् ब्रह्म॑ण्य॒स्मिन् कर्म॑ण्य॒स्यां पु॑रो॒धाया॑म॒स्यां प्र॑ति॒ष्ठाया॑म॒स्यां चित्त्या॑म॒स्यामाकू॑त्याम॒स्यामा॒शिष्य॒स्यां दे॒वहू॑त्यां॒ स्वाहा॑

agnirvanaspatīnāmadhipatiḥ sa māvatu | asmin brahmaṇyasmin karmaṇyasyāṃ purodhāyāmasyāṃ pratiṣṭhāyāmasyāṃ cittyāmasyāmākūtyāmasyāmāśiṣyasyāṃ devahūtyāṃ svāhā

हिन्दी अर्थ

शारीरिक परिश्रम करना, वीरता के क्म करना भौर वीर्यवान् होना-ये शतं हैँ गृहस्थ कमं के लिए । अदुष्टे देवाः पुत्रं सोयपा उभयाविन॑ग् ॥९॥ योनिम्) तेरी योनिर्मे (आशये") पूणेतया सोता रहे । (सोमपाः देवाः) सोम-ओषधि के पीनेवाले दिव्य पुरुषों ने (ते) तेरे लिए (पत्रम्, अदुः) पुत्र दिया है, जोकि (उभयाविनम्) तुम दोनोंकी रक्षा करनेवाला या अभ्युदय ओर निःश्रेयस का रक्षक है।

English

Cough. And with thy nephew Herpes, go away unto that alien folk. Chase Fever whether cold or hot, brought by the summer or the rains,

अध्याय ५

श्लोक 24.3

द्यावा॑पृथि॒वी दा॑तॄ॒णामधि॑पत्नि ते मा॑वताम् ।अ॒स्मिन् ब्रह्म॑ण्य॒स्मिन् कर्म॑ण्य॒स्यृं पु॑रो॒धाया॑म॒स्यां प्र॑ति॒ष्ठाया॑म॒स्यां चित्त्या॑म॒स्यामाकू॑त्याम॒स्यामा॒शिष्य॒स्यां दे॒वहू॑त्यां॒ स्वाहा॑

dyāvāpṛthivī dātṝṇāmadhipatni te māvatām | asmin brahmaṇyasmin karmaṇyasyṛṃ purodhāyāmasyāṃ pratiṣṭhāyāmasyāṃ cittyāmasyāmākūtyāmasyāmāśiṣyasyāṃ devahūtyāṃ svāhā

हिन्दी अर्थ

पतिभोगसे विरतहो गईटहै। उसे कहादहैकरिं अवतु पतिभोगसे विरत रह, ताकि शिशु आरामसेतेरी योनिमे सोया रहै, उसे कोई नुकसान न पहुंचे । सोमपाः! दवारा यह सूचित कियादहैकि ये सोमपायी देव, तुञ्चेभी सोम-मोषधि का पान कराते रहे ह, अतः इनकी छपा से तृक्े पुत्र मिला है गर्भकरणं पिव, (मन्व ६) । विजिहीष्वन्-वि ओहाड गतौ (जृहो- घान कर, (दशमे मासि) दसवें मास मे (सूतवे) उत्पन्न होने के लिए । गवीनिका दो गभेस्थ नादयां हैँ जिन द्वारा वीयं गुजरकर, २. अथवा पहासाम, या बृहत् नामक साम कौ गायिका । (अधि स्कन्द) अधिकं शारीरिक परिश्रम कर ! (वीरयस्व) वीरता ,

English

Tertian, intermittent, or autumnal, or continual. We to Gandhāris, Mūjavans, to Angas and to Magadhas.

अध्याय ५

श्लोक 24.4

वरु॑णो॒ऽपामधि॑पतिः॒ स मा॑वतु ।अ॒स्मिन् ब्र॑ह्मण्य॒स्मिन् कर्म॑ण्य॒स्यां पु॑रो॒धाया॑म॒स्यां प्र॑ति॒ष्ठाया॑म॒स्यां चित्त्या॑म॒स्यामाकू॑त्याम॒स्यामा॒शिष्य॒स्यां दे॒वहू॑त्यां॒ स्वाहा॑

varuṇo'pāmadhipatiḥ sa māvatu | asmin brahmaṇyasmin karmaṇyasyāṃ purodhāyāmasyāṃ pratiṣṭhāyāmasyāṃ cittyāmasyāmākūtyāmasyāmāśiṣyasyāṃ devahūtyāṃ svāhā

हिन्दी अर्थ

२६२ भयर्ववेदमाष्य काण्ड ५।अनु° ५। सूस २६ गर्भाय में जाता है । इन्दे (६भाण़भा १०८५) कहते हैँ । गवीनिके योनेः (सायण) । इन्हे 'गवीनिका' सम्भवतः इसलिए कहते हैँ कि ४ वीये को

English

Hand over Fever as it were a servant and a thing of price. A charm against parasitic worms I have called Heaven and Earth to aid, have called divine

अध्याय ५

श्लोक 24.5

मि॒त्रावरु॑णौ वृ॒ष्ट्याधि॑पती॒ तौ मा॑वताम्।अ॒स्मिन् ब्रह्म॑ण्य॒स्मिन् कर्म॑ण्य॒स्यां पु॑रो॒धाया॑म॒स्यां प्र॑ति॒ष्ठाया॑म॒स्यां चित्त्या॑म॒स्यामाकू॑त्याम॒स्यामा॒शिष्य॒स्यां दे॒वहू॑त्यां॒ स्वाहा॑

mitrāvaruṇau vṛṣṭyādhipatī tau māvatām| asmin brahmaṇyasmin karmaṇyasyāṃ purodhāyāmasyāṃ pratiṣṭhāyāmasyāṃ cittyāmasyāmākūtyāmasyāmāśiṣyasyāṃ devahūtyāṃ svāhā

हिन्दी अर्थ

तो पतिनेहो करना है, परन्तु इसकी सफलता परमेश्वर की कृपा से होनी है, अतः धाता को वीर्याधायक कहा है । (सवितः) है प्रेरक या उत्पादक परमेदवर !, (शवेष्ठेन रूपेण ) मादि, ३ त्रिपदा विरा गायत्री; £ त्रिपदा पिपीलिकामघ्या पुरउष्णिक्; १-११ एकावसाना; 17€ फ॑लपड 11 16 पाधा पुल्ल (ग णलालौी व्लातणाडु कालना) :

English

Sarasvati, Indra and Agni have I called: Let these destroy the worm, I prayed.

अध्याय ५

श्लोक 24.6

म॒रुतः॒ पर्व॑ता॒नामधि॑पतय॒स्ते मा॑वन्तु ।अ॒स्मिन् ब्रह्म॑ण्य॒स्मिन् कर्म॑ण्य॒स्यां पु॑रो॒धाया॑म॒स्यां प्र॑ति॒ष्ठाया॑म॒स्यां चित्त्या॑म॒स्यामाकू॑त्याम॒स्यामा॒शिष्य॒स्यां दे॒वहू॑त्यां॒ स्वाहा॑

marutaḥ parvatānāmadhipatayaste māvantu | asmin brahmaṇyasmin karmaṇyasyāṃ purodhāyāmasyāṃ pratiṣṭhāyāmasyāṃ cittyāmasyāmākūtyāmasyāmāśiṣyasyāṃ devahūtyāṃ svāhā

हिन्दी अर्थ

नियुक्त करे । अग्निः =प्रजञानी परमेश्वर (यजुः० ३२।१) । मन्त्र १ से १२ मे यज्ञकमं के साधनों का वणेन हमा है, जिन द्वारा यह कि सूक्त मेँ केवल यज्ञाङ्गो का वणेन हभ है ।

English

O Indra, Lord of Treasures, kill the worms that prey upon this boy. All the malignant spirits have been smitten by my potent spell. p. a185 We utterly destroy the worm, the worm that creeps around the eyes.

अध्याय ५

श्लोक 24.7

सोमो॑ वी॒रुधा॒मधि॑पतिः॒ स मा॑वतु ।अ॒स्मिन् ब्रह्म॑ण्य॒स्मिन् कर्म॑ण्य॒स्यां पु॑रो॒धाया॑म॒स्यां प्र॑ति॒ष्ठाया॑म॒स्यां चित्त्या॑म॒स्यामाकू॑त्याम॒स्यामा॒शिष्य॒स्यां दे॒वहू॑त्यां॒ स्वाहा॑

somo vīrudhāmadhipatiḥ sa māvatu | asmin brahmaṇyasmin karmaṇyasyāṃ purodhāyāmasyāṃ pratiṣṭhāyāmasyāṃ cittyāmasyāmākūtyāmasyāmāśiṣyasyāṃ devahūtyāṃ svāhā

हिन्दी अर्थ

है, चेतन है, प्रातःकालीन सूयं नहीं। मन्त्र मेँ कथित यज्ञा्ख ह, (१) सविता देव दवारा प्रेरणा; (२) तथा स्वाहा" शब्द का उच्चारण कर हविं मे (युनक्तु) संयुक्त करे, (स्वाहा) ओर स्वाहापूरवेक हविसो मेँ दी जाने- कर यह सुचित किया है कि यज्ञकर्ता को, फलरूप मे, यज्ञ हारा होनेवाला (निरुक्त ८।३।२१), यजो में बार-बार आहूतिर्यां देने के लिए उच्चायमाण

English

The worm that crawls about the nose, the worm that gets bet- ween the teeth. Two of like colour, two unlike, two coloured black, two coloured red.

अध्याय ५

श्लोक 24.8

वा॒युर॒न्तरि॑क्ष॒स्याधि॑पतिः॒ स मा॑वतु ।अ॒स्मिन् ब्रह्म॑ण्य॒स्मिन् कर्म॑ण्य॒स्यां पु॑रो॒धाया॑म॒स्यां प्र॑ति॒ष्ठाया॑म॒स्या॑ चित्त्या॑म॒स्यामाकू॑त्याम॒स्यामा॒शिष्य॒स्यां दे॒वहू॑त्यां॒ स्वाहा॑

vāyurantarikṣasyādhipatiḥ sa māvatu | asmin brahmaṇyasmin karmaṇyasyāṃ purodhāyāmasyāṃ pratiṣṭhāyāmasyā cittyāmasyāmākūtyāmasyāmāśiṣyasyāṃ devahūtyāṃ svāhā

हिन्दी अर्थ

कमं से फल-प्राप्ति यज्ञकमं मेँप्रेरिका है। १६४ ¦ अयर्ववेदभाष्य काण्ड ५। मनु० ५। सूक्त २६ द्वारा निर्देशों को प्राप्त कर तथा (युवता) उनके सहित है यजमानो ! (दह) इस यज्ञकमें का (वहत) वहन करो।

English

The tawny and the tawny-eared, Vulture and Wolf, all these are killed. Worms that are white about the sides, those that are black with black-hued arms, All that show various tints and hues, these worms we utterly destroy.

अध्याय ५

श्लोक 24.9

सूर्य॒श्चक्षु॑षा॒मधि॑पतिः॒ स मा॑वतु ।अ॒स्मिन् ब्रह्म॑ण्य॒स्मिन् कर्म॑ण्य॒स्यां पु॑रो॒धाया॑म॒स्यां प्र॑ति॒ष्ठाया॑म॒स्यां चित्त्या॑म॒स्यामाकू॑त्याम॒स्यामा॒शिष्य॒स्यां दे॒वहू॑त्यां॒ स्वाहा॑

sūryaścakṣuṣāmadhipatiḥ sa māvatu | asmin brahmaṇyasmin karmaṇyasyāṃ purodhāyāmasyāṃ pratiṣṭhāyāmasyāṃ cittyāmasyāmākūtyāmasyāmāśiṣyasyāṃ devahūtyāṃ svāhā

हिन्दी अर्थ

म पतनी का साथ होना,-ये भी यज्ञाङ्घ है।। (स्वाहा) स्वाहा कमं हो, (इह) इस यज्ञकमं मे (युवता: ) परस्पर मिले हुए तुम (पिपत) यज्ञकमं कौ पालना करो, (इव ) जसेकि (माता पुत्रम्) माता जायत" (यज्ः० ३१।७) में परिशेष हारा छन्दांसि है अथववेद या उसके १०।७।२०) । अतः जैसे यजूंषि (मन्त्र ६) मेँ यजुर्वेद का जर (मन्त २) मे

English

Eastward the Sun is mounting, seen of all, destroying thing unseen, Crushing and killing all the worms invisible and visible.

अध्याय ५

श्लोक 24.10

च॒न्द्रमा॒ नक्ष॑त्राणा॒मधि॑पतिः॒ स मा॑वतु ।अ॒स्मिन् ब्रह्म॑ण्य॒स्मिन् कर्म॑ण्य॒स्यां पु॑रो॒धाया॑म॒स्यां प्र॑ति॒ष्ठाया॑म॒स्यां चित्त्या॑म॒स्यामाकू॑त्याम॒स्यामा॒शिष्य॒स्यां दे॒वहू॑त्यां॒ स्वाहा॑

candramā nakṣatrāṇāmadhipatiḥ sa māvatu | asmin brahmaṇyasmin karmaṇyasyāṃ purodhāyāmasyāṃ pratiṣṭhāyāmasyāṃ cittyāmasyāmākūtyāmasyāmāśiṣyasyāṃ devahūtyāṃ svāhā

हिन्दी अर्थ

ततः तताः, अर्थात् तात आदि (मन्त्र १६), तथा 'ततामहा अर्थात तात आदि कँ पिता आदि, वेमेरी रक्षाकरं । (अस्मिन् आदि अथं पूर्ववत्) । "तताः, ततः "तन्' धातुके रूप हँ जिसका अथं है विस्तार । सन्तान' पद मे भी 'तन्' धातु है । सन्ताने पूवं पुरुषों का विस्ताररूप होती ह, उनके वीर्यं का विस्तार रूप ही होती है । (पर्वतात्) पर्वत की ओषधियो से, (दिवः योनेः) द्युलोक की

English

Thou, Fever! then be weak and ineffective. Pass hence into the realms below or vanish. Endowed with universal power! send Fever down-ward, far away, The spotty, like red-coloured dust, sprung from a spotty ancestor.

अध्याय ५

श्लोक 24.11

इन्द्रो॑ दि॒वोऽधि॑पतिः॒ स मा॑वतु ।अ॒स्मिन् ब्रह्म॑ण्य॒स्मिन् कर्म॑ण्य॒स्यां पु॑रो॒धाया॑म॒स्यां प्र॑ति॒ष्ठाया॑म॒स्यां चित्त्या॑म॒स्यामाकू॑त्याम॒स्या॒माशिष्य॒स्यां दे॒वहू॑त्यां॒ स्वाहा॑

indro divo'dhipatiḥ sa māvatu | asmin brahmaṇyasmin karmaṇyasyāṃ purodhāyāmasyāṃ pratiṣṭhāyāmasyāṃ cittyāmasyāmākūtyāmasyāmāśiṣyasyāṃ devahūtyāṃ svāhā

हिन्दी अर्थ

मात॒योनि मेँ वीर्याघान करे, (इव) जसेकि धनुर्धारी , (सरी) सरण करनेवाले इषु मेँ (पर्णम्) पंख का (आ दधत्) आधान करता है । वेदान्तशास्त्र १।१।२), वैसे वह चयुलोक कौ भी योनिहै। णवा द॑धामिते गर्भ तस्मे त्वामव॑से हुवे ॥२॥ (यथा) जैसे (इयम् मही पृथिवी) यह महती या मंहनीयां पृथिवी

English

When I have paid obeisance to Fever I send him downward forth. So let Sakambhara’s boxer go again to the Mahāvrishas.

अध्याय ५

श्लोक 24.12

म॒रुतां॑ पि॒ता प॑शू॒नामधि॑पतिः॒ स मा॑वतु ।अ॒स्मिन् ब्रह्म॑ण्य॒स्मिन् कर्म॑ण्य॒स्यां पु॑रो॒धाया॑म॒स्यां प्र॑ति॒ष्ठाया॑म॒स्यां चित्त्या॑म॒स्यामाकू॑त्याम॒स्यामा॒शिष्य॒स्यां दे॒वहू॑त्यां॒ स्वाहा॑

marutāṃ pitā paśūnāmadhipatiḥ sa māvatu | asmin brahmaṇyasmin karmaṇyasyāṃ purodhāyāmasyāṃ pratiṣṭhāyāmasyāṃ cittyāmasyāmākūtyāmasyāmāśiṣyasyāṃ devahūtyāṃ svāhā

हिन्दी अर्थ

दधे) अपने मे आदित करती है, (एवम् एव) इसी प्रकार है पत्नी ! (ते) तेरे लिए (गर्भम्) गभ का (आ दधामि) मै आधान करता हूं ओौर (तस्मे) आहूत करता हं । बीज से बीजान्न की उत्पत्ति, उसके भक्षण से वीये की धेहि) तू गभं का धारण कर, (सरस्वति) है ज्ञान विज्ञानवाली !

English

His mansions are the Mūjavans, and the Mahāvrishas his home, Thou, Fever, ever since thy birth hast lived among the Bahlikas. Fever, snake, limbless one, speak out! Keep thyself far away fi om us.

अध्याय ५

श्लोक 24.13

मृ॒त्युः प्र॒जाना॒मधि॑पतिः॒ स मा॑वतु ।अ॒स्मिन् ब्रह्म॑ण्य॒स्मिन् कर्म॑ण्य॒स्यां पु॑रो॒धाया॑म॒स्यां प्र॑ति॒ष्ठाया॑म॒स्यां चित्त्या॑म॒स्यामाकू॑त्याम॒स्यामा॒शिष्य॒स्यां दे॒वहू॑त्यां॒ स्वाहा॑

mṛtyuḥ prajānāmadhipatiḥ sa māvatu | asmin brahmaṇyasmin karmaṇyasyāṃ purodhāyāmasyāṃ pratiṣṭhāyāmasyāṃ cittyāmasyāmākūtyāmasyāmāśiṣyasyāṃ devahūtyāṃ svāhā

हिन्दी अर्थ

सजन करनेवाले, (उभौ) दोनों (अरिवनौ) सूयं भौर चन्द्रमा (ते, गभम्, धत्ताम्) तेरे गभं का धारण-पोषण कर । सिनम् = अन्नम् (निरक्त ५।१।५; पद २८) । वालन-केश । अदिवनौ पद-संख्या (१) । इन दारा अन्नोत्पादन होता है, अतः ये पुष्टि- कारक अन्न के स्रष्टाहं । गर्भ ते मित्रावरुणौ गर्भ देवो बहस्पतिः ।

English

Seek thou a wanton Dāst girl and strike her with thy thunder- bolt. Go, Fever, to the Mūjavans, or, farther, to the Bahlikas.

अध्याय ५

श्लोक 24.14

य॒मः पि॑तॄ॒णामधि॑पतिः॒ स मा॑वतु ।अ॒स्मिन् ब्रह्म॑ण्य॒स्मिन् कर्म॑ण्य॒स्यां पु॑रो॒धाया॑म॒स्यां प्र॑ति॒ष्ठाया॑म॒स्यां चित्त्या॑म॒स्यामाकू॑त्याम॒स्यामा॒शिष्य॒स्यां दे॒वहू॑त्यां॒ स्वाहा॑

yamaḥ pitṝṇāmadhipatiḥ sa māvatu | asmin brahmaṇyasmin karmaṇyasyāṃ purodhāyāmasyāṃ pratiṣṭhāyāmasyāṃ cittyāmasyāmākūtyāmasyāmāśiṣyasyāṃ devahūtyāṃ svāhā

हिन्दी अर्थ

प्राकृतिक तथा आध्यात्मिक शक्तियां गभं के अनुकूल रहे । अहो- विष्णु्यौनि करपयतु त्वष्टां रूपाणि पितु । (रूपाणि) गभं की नानाविध रूपाकृतियों का (पिशतु) अवयवो मे सम्पादन करे । (प्रजापततिः) प्रजाओं का रक्षकं परमेदवर (आ सिञ्चतु) गभे में रुधिर तथा रसो कौ सींचे, (धाता) गभेका धारण-पोषण करनेवाला परमेश्वर (ते) तेरे (गर्भम्) गभ का (दधातु) धारण-पोषण करे । पिशतु

English

Seek a lascivious Sara girl and seem to shake her through and through. Go hence and eat thy kinsmen the Mahāvrishas and Mūjavans. These or those foreign regions we proclaim to Fever for his home.

अध्याय ५

श्लोक 24.15

पि॒तरः॒ परे॒ ते मा॑वन्तु ।अ॒स्मिन् ब्रह्म॑ण्य॒स्मिन् कर्म॑ण्य॒स्यां पु॑रो॒धाया॑म॒स्यां प्र॑ति॒ष्ठाया॑म॒स्यां चित्त्या॑म॒स्यामाकू॑त्याम॒स्यामा॒शिष्य॒स्यां दे॒वहू॑त्यां॒ स्वाहा॑

pitaraḥ pare te māvantu | asmin brahmaṇyasmin karmaṇyasyāṃ purodhāyāmasyāṃ pratiṣṭhāyāmasyāṃ cittyāmasyāmākūtyāmasyāmāśiṣyasyāṃ devahūtyāṃ svāhā

हिन्दी अर्थ

करोतिकर्मणः (निरुक्त ८।२।१४) । २. यथा, मुखरस, पेट तथा ओतो के रस, पित्तरसं आदि ॥ यद् वेद् राजा वरुणो यद् वां देवी सर॑स्वती । (राजा) राजमान अर्थात् विवाहकाल में शोभायमान, (वरुणः) वरण करनेवाला "वर (यद् ) जिस मौषध को (वेद) जानता है, (वा) अथवा (यद्) जिस ओषध को (सरस्वती) विज्ञानवती विदुषी तु वेद

English

In a strange land thou joyest not; subdued, thou wilt be kind to us. Fever is eager to depart, and to the Bahlikas will go,

अध्याय ५

श्लोक 24.16

त॒ता अव॑रे॒ ते मा॑वन्तु ।अ॒स्मिन् ब्रह्म॑ण्य॒स्मिन् कर्म॑ण्य॒स्यां पु॑रो॒धाया॑म॒स्यां प्र॑ति॒स्ठाया॑म॒स्यां चित्त्या॑मस्यामाकू॑त्याम॒स्यामा॒शिष्य॒स्यां दे॒वहू॑त्यां॒ स्वाहा॑

tatā avare te māvantu | asmin brahmaṇyasmin karmaṇyasyāṃ purodhāyāmasyāṃ pratisṭhāyāmasyāṃ cittyāmasyāmākūtyāmasyāmāśiṣyasyāṃ devahūtyāṃ svāhā

हिन्दी अर्थ

है, (गभेकरणम्) गभेकारी (तत्) उस भौषध को (पिव) तू पी, या पिया कहता है । गभेकरण ओौषध = “यानि भद्राणि बीजान्युषभा जनयन्ति च । --ऋषभ ओषधिं । प्रसूः =पृत्र प्रसव करनेवाली । धेनुका =दुधारगौ

English

Since thou now cold, now burning hot, with cough besides, hast made us shake, Terrible, Fever, are thy darts: forbear to injure us with these. Take none of these to be thy friends, Cough, or Consumption or Decline:

अध्याय ५

श्लोक 24.17

तत॑स्तताम॒हास्ते मा॑वन्तु ।अ॒स्मिन् ब्रह्म॑ण्य॒स्मिन् कर्म॑ण्य॒स्यां पु॑रो॒धाया॑म॒स्यां प्र॑तिष्ठाया॑मस्यां चित्त्या॑म॒स्यामाकू॑त्याम॒स्यामा॒शिष्य॒स्यां दे॒वहू॑त्यां॒ स्वाहा॑

tatastatāmahāste māvantu | asmin brahmaṇyasmin karmaṇyasyāṃ purodhāyāmasyāṃ pratiṣṭhāyāmasyāṃ cittyāmasyāmākūtyāmasyāmāśiṣyasyāṃ devahūtyāṃ svāhā

हिन्दी अर्थ

(ओषधीनाम्) ओषधियों मे (गभः) गर्भं-धारणकर््ता (असि) तूरहै, भूतस्य) सव भूत-भोतिक, या सव सत्तावान् जगत् मेँ (गभः) गभे-धारण- किइसमेरीपत्नीमेभो गभेधारणकरने की इच्छा कर । अगिनिहै परमेर्वर, अपः स प्रजापतिः (यजुः० ३२।१) । परमेर्वरीय इच्छा सेही सब ।

English

Never come thence again to us! O Fever, thus I counsel thee. Go, Fever, with Consumption, thy brother, and with thy sister,

अध्याय ५

श्लोक 25.1

गर्भाधानम्।१-१३ ब्रह्म।योनिगर्भः, पृथिव्यादयो देवताः।अनुष्टुप्, १३ विराट्-पुरस्ताद्बृहती।पर्व॑ताद् दि॒वो योने॒रङ्गा॑दङ्गात् स॒माभृ॑तम्।शेपो॒ गर्भ॑स्य रेतो॒धाः सरौ॑ प॒र्णमि॒वा द॑धत्

garbhādhānam| 1-13 brahma| yonigarbhaḥ, pṛthivyādayo devatāḥ| anuṣṭup, 13 virāṭ-purastādbṛhatī| parvatād divo yoneraṅgādaṅgāt samābhṛtam| śepo garbhasya retodhāḥ sarau parṇamivā dadhat

हिन्दी अर्थ

एयमगन् व॒र्षा भोक्षणीमिरवहं त॑ानादि तिः स्वाहा ॥६॥ सेचन-जल के साथ (आ अगत्) आई है 1 बहिः = वेदी के आस्तरण गौर हविष्पा्रौ के स्थापनां कुशा घास।

English

Let the Yevāshas, Kaskashas, Ejatkas, Sipavitnukas, Let both the worm that we can see, and that we see not, be destroyed. Slain the Yevāsha of the worms, slain too is the Nadaniman.

अध्याय ५

श्लोक 25.2

यथे॒यं पृ॑थि॒वी म॒ही भू॒तानां॒ गर्भ॑माद॒धे।ए॒वा द॑धामि ते॒ गर्भं॒ तस्मै॒ त्वामव॑से हुवे

yatheyaṃ pṛthivī mahī bhūtānāṃ garbhamādadhe| evā dadhāmi te garbhaṃ tasmai tvāmavase huve

हिन्दी अर्थ

“बृहती साम्राज्य सेना का अधिपति" (यज्ः० १७।४० । अरिविनौ भौर शब्द का उच्चारण कर, यज्ञ मे आहुति्यां देते है, मानो यजमान बनकर सहयोग का बणेने हज है, यज्ञकमों में । छः (अस्य अन्तैः) इस महानग्नि की (समिधः) समिधां (भवन्ति)

English

Of every worm and insect, of the female and the male alike, I crush the head to pieces with a stone and burn the face with fire.

अध्याय ५

श्लोक 25.3

गर्भं॑ धेहि सिनीवालि॒ गर्भं॒ धेहि सरस्वति ।गर्भं॑ ते अ॒श्विनो॒भा ध॑त्तां॒ पुष्क॑रस्रजा

garbhaṃ dhehi sinīvāli garbhaṃ dhehi sarasvati | garbhaṃ te aśvinobhā dhattāṃ puṣkarasrajā

हिन्दी अर्थ

रूपी तनू को गिरने नहीं देता आकाशम थामे हुआ है (असुरः) प्रज्ञा- वान् है, (भूरिपाणिः) महाहस्त है दान देने मे संसार का वर्णेन यज्ञरूपमें किया है । अग्निहै महानग्नि परमेइवर। है ओर इसकी आत्मा है परमेश्वर, ““योऽसावादित्ये पुरुषः सोऽसा वहम् ।

English

A priest’s prayer for protection and assistance Savitar, Lord of furthering aids, protect me, in this my prayer, in this mine act, in this my sacerdotal charge, in this perfor- mance, in this thought, in this my plan and wish, in this my

अध्याय ५

श्लोक 25.4

गर्भं॑ ते मि॒त्रावरु॑णौ॒ गर्भं॑ दे॒वो बृह॒स्पतिः॑ ।गर्भं॑ त॒ इन्द्र॑श्चा॒ग्निश्च॒ गर्भं॑ धा॒ता द॑धातु ते

garbhaṃ te mitrāvaruṇau garbhaṃ devo bṛhaspatiḥ | garbhaṃ ta indraścāgniśca garbhaṃ dhātā dadhātu te

हिन्दी अर्थ

देवो देवषुं देषः पथो अनाकित मध्वां वृतेन ॥२॥ (देवेषु देवः) देवाधिदेव (देवः) परमेकव र-देव (घृतेन) क्षरित तथा काष्ड ५। अनु० ६ । सूक्त २७ अधवेवेवमाष्यं २६६ प्रदीप्त हुए (मध्वा) मधुरं रदिमसमूह दवारा (पथः) हमारे मार्गों को (अनक्ति) अभिव्यक्त कर रहा है । वारः) तथा विश्व द्वारा वरणीय परमेश्वर, (मध्वा) मधुर सौर ररिमि-

English

calling on the Gods! All hail! May Agni, Lord of forest trees, protect, me, in, etc.

अध्याय ५

श्लोक 25.5

विष्णु॒र्योनिं॑ कल्पयतु॒ त्वष्टा॑ रू॒पाणि॑ पिंशतु ।आ सि॑ञ्चतु प्र॒जाप॑तिर्धा॒ता गर्भं॑ दधातु ते

viṣṇuryoniṃ kalpayatu tvaṣṭā rūpāṇi piṃśatu | ā siñcatu prajāpatirdhātā garbhaṃ dadhātu te

हिन्दी अर्थ

यहु परमेदवर, (नमसा) नमस्कार दारा (ईडानः) स्तुत्य हुभा, (शवसा) बल के साथ (वृता) भौर दीप्ति के साथ, (अच्छा) हमारे अभिमुख (एति ३०० -- दः काण्ड ५। भनु० ६ । सूक्त २७ महिमा का (यक्षत्) यजन करती है, (सुचः) इसी प्रकार सुच भी घृताहुतियो द्वारा इसकी महिमा का यजन कर्ती हैँ ।

English

May Heaven and Earth, the Queens of bounties, save me. May Varuna, the Lord of waters, save me. May Mitra-Varuna, Lords of rain, preserve me.

अध्याय ५

श्लोक 25.6

यद् वेद॒ राजा॒ वरु॑णो॒ यद् वा॑ दे॒वी सर॑स्वती ।यदिन्द्रो॑ वृत्र॒हा वेद॒ तद् ग॑र्भ॒कर॑णं पिब

yad veda rājā varuṇo yad vā devī sarasvatī | yadindro vṛtrahā veda tad garbhakaraṇaṃ piba

हिन्दी अर्थ

यज्ञो मे, (तरी) तैरानेवाली नौका रूप में परमेश्वर, (वसवः च) ओौर वसु जादित्यकक्षा । वसुकक्षा २४ वर्षोकी आयु में पूणं होतीरहै जोकि सब सब (द्वारः) दरवार, (विवह) सब दिनों, (अनु) निरन्तर, (अस्य) इस कान्तिगतिषु (दिवादिः) । व्रतं कमंनाम (निघं० २।१) । विद्वहा = विदवानि अहानि । अभिप्राय यह कि यज्ञशालाके सब दवि प्रतिदिन

English

Lords of the mountains, may the Maruts save me. May, Soma, Lord of plants and herbs, protect me.

अध्याय ५

श्लोक 25.7

गर्भो॑ अ॒स्योष॑धीनां॒ गर्भो॒ वन॒स्पती॑नाम्।गर्भो॒ विश्व॑स्य भू॒तस्य॒ सो अ॑ग्ने॒ गर्भ॒मेह धाः॑

garbho asyoṣadhīnāṃ garbho vanaspatīnām| garbho viśvasya bhūtasya so agne garbhameha dhāḥ

हिन्दी अर्थ

(उरु्यचसा?=उरुन्यचसः काठक ) ये विस्तारवाले (अग्नेः) भआाकाश में उड़ती हुई, (मा सुष्वयन्ती) सबको प्रेरित करती ह, १. अथव "उरुव्यचसा" विशेषण है, "उषासानक्ता" का ।

English

May Vāyu, Lord of middle air, protect me. May Sūrya, sovran Lord of eyes, protect me. May the Moon, Lord of constellations, save me.

अध्याय ५

श्लोक 25.8

अधि॑ स्कन्द वी॒रय॑स्व॒ गर्भ॒मा धे॑हि॒ योन्या॑म्।वृषा॑सि वृष्ण्यावन् प्र॒जायै॒ त्वा न॑यामसि

adhi skanda vīrayasva garbhamā dhehi yonyām| vṛṣāsi vṛṣṇyāvan prajāyai tvā nayāmasi

हिन्दी अर्थ

जोकि हिसारहित है, (अवताम्) रक्षा करं। उपासानक्ता = उषा-काल ओर सायंकाल । इन दो सन्धिकालोंमे अथवा हमारे शारीरिक स्वास्थ्य की रक्षा करके हमे हिसा से बचते्हु। यश्नकमं में प्रेरित करती हुईं उषासानक्ता ।

English

May Indra who is Lord of heaven protect me. The Maruts’ father, Lord of cattle, save me.

अध्याय ५

श्लोक 25.9

वि जि॑हीष्व बार्हत्सामे॒ गर्भ॑स्ते॒ योनि॒मा श॑याम्।अदु॑ष्टे दे॒वाः पु॒त्रं सो॑म॒पा उ॑भया॒विन॑म्

vi jihīṣva bārhatsāme garbhaste yonimā śayām| aduṣṭe devāḥ putraṃ somapā ubhayāvinam

हिन्दी अर्थ

नः चि ष्टये । तिस देवीवैषिरेदं स॑दन्तामिडा सर॑स्वती मही (हैवाः होतारः) है दिव्य होता ! (गृणाताःतगृणानाः) उपदेश या सुफला दृष्टि के लिए । (तिल्लः देवीः) तीन देवियां (इदम्) इस (बर्हिः)

English

May Mrityu, Lord of living creatures, save me. May Yama, Regent of the Fathers, save me. May the Forefathers of old time protect me.

अध्याय ५

श्लोक 25.10

धातः॒ श्रेष्ठे॑न रू॒पेणा॒स्या नार्या॑ गवी॒न्योः ।पुमां॑सं पु॒त्रमा धे॑हि दश॒मे मा॒सि सूत॑वे

dhātaḥ śreṣṭhena rūpeṇāsyā nāryā gavīnyoḥ | pumāṃsaṃ putramā dhehi daśame māsi sūtave

हिन्दी अर्थ

जीवनचर्या करनी होती है तथा तदनुसार उत्तम योजनाएं करनी होती रहै, जिससे कि तपोभंगनहो। ये भी यज्ञाङ्धरहै। यज्ञे) इस यज्ञ में (बहुधा) बहुत प्रकार कौ (रूपाः = रूपाणि) रूप-आकृतियों को (युनक्तु) संयुक्त करे, सम्बद्ध करे । काष्ठसे नानाविध उपकरणों में नानाविध रूप-आकरततियों का निर्माण की नानाविध वस्तुभों की नानाविध रूप-आकृतियों का निर्माण करता है ।

English

I have reduced them all to dust like vetches with the pounding- stone. The worm Sāranga, white of hue, three-headed, with a triple hump,

अध्याय ५

श्लोक 25.11

त्वष्टः॒ श्रेष्ठे॑न रू॒पेणा॒स्या नार्या॑ गवी॒न्योः ।पुमां॑सं पु॒त्रमा धे॑हि दश॒मे मा॒सि सूत॑वे

tvaṣṭaḥ śreṣṭhena rūpeṇāsyā nāryā gavīnyoḥ | pumāṃsaṃ putramā dhehi daśame māsi sūtave

हिन्दी अर्थ

(यजुः० १७।२०) । यज्ञ में यज्ञशाला के निर्माण भौर उसे सजाने के लिए नानाविध योजनाएं करनी होती है, अतः ये रूप-आकृतिर्यां तथा योजनाषं के लिए (आशिषः) आशीवदिों को (युनक्तु) संयुक्त करे, सम्बद्ध करे तथा भग इतीरणा ॥ यज्ञ की समाप्ति पर यजमानं को आशीर्वाद दिया जाता

English

I split and tear his ribs away, I wrench off every head he has. I kill you, worms, as Atri, as Kanva and Jamadagni killed.

अध्याय ५

श्लोक 25.12

सवि॑तः॒ श्रेष्ठे॑न रू॒पेणा॒स्या नार्या॑ गवी॒न्योः ।पुमां॑सं पु॒त्रमा धे॑हि दश॒मे मा॒सि सूत॑वे

savitaḥ śreṣṭhena rūpeṇāsyā nāryā gavīnyoḥ | pumāṃsaṃ putramā dhehi daśame māsi sūtave

हिन्दी अर्थ

२६६ अथवैवेवमाष्य काण्ड ५१ नु० ५ । सूक्त २६ सफल होता है । यजमान षडविध भगो से सम्पन्न हो, यह भग नामक परमेश्वर द्वारा दिया आशीर्वाद है। (सोमः) सोम-ओौषध (अस्मिन् यज्ञे) इस यज्ञ मे (बहुधा) बहुत प्रकार के (पयांसि) पेय ओषधि-रसों को (युनक्तु) सम्बद्ध करे, (सुयुजः) “सोमो वीरुधामधिपतिः'” (अथवं ° ५।२४।७) । सोम ओषध के अद्भुत गुणों का वणेन मन्त्रों मे हभ है, अतः वीरुधो मेँ इसे मुख्य मौषध माना है ओर वीरुधो का अधिपति कहा है ।

English

I crush the worms to pieces with a spell that erst Agastya used. The King of worms hath been destroyed, he who was lord of these is slain.

अध्याय ५

श्लोक 25.13

प्रजा॑पते॒ श्रेष्ठे॑न रू॒पेणा॒स्या नार्या॑ गवी॒न्योः ।पुमां॑सं पु॒त्रमा धे॑हि दश॒मे मा॒सि सूत॑वे

prajāpate śreṣṭhena rūpeṇāsyā nāryā gavīnyoḥ | pumāṃsaṃ putramā dhehi daśame māsi sūtave

हिन्दी अर्थ

दवारा निर्वाचित मुखिया है सम्राट्; यह राजाभो पर भी राज्य करता (अरिवना) है दो अरिविनौ ! तुम (ब्रह्मणा) वेदमन्व के साथ यह यज्ञ (यजमानाय) यज्ञकर्ता के लिए (स्वः) सुखदायक, या जीवन के

English

Slain is the worm whose mother, whose brother and sister have been slain. Destroyed are his dependants, who those dwell around him are destroyed, And all the worms that seem to be the little ones are done to death

अध्याय ५

श्लोक 26.1

नवशालायां घृतहोमः।१२ ब्रह्म।वास्तोष्पतिः, १ अग्निः, २ सविता, ३,११ इन्द्रः, ४ निविदः, ५ मरुतः, ६ अदितिः, ७ विष्णुः, ८ त्वष्टा, ९ भगः, १० सोमः, १२ अश्विनौ, बृहस्पतिः।१, ५ द्विपदार्षी उष्णिक्, २,४,६,७,८,१०,११ द्विपदा प्राजापत्या बृहती, ३ त्रिपदा विराड् गायत्री, ९ त्रिपदा पिपीलिकमध्या पुरउष्णिक्,(१-११ एकावसाना) १२ परातिशक्वरपी चतुष्पदा जगती।यजूं॑षि य॒ज्ञे स॒मिधः॒ स्वाहा॒ग्निः प्र॑वि॒द्वानि॒ह वो॑ युनक्तु

navaśālāyāṃ ghṛtahomaḥ| 12 brahma| vāstoṣpatiḥ, 1 agniḥ, 2 savitā, 3,11 indraḥ, 4 nividaḥ, 5 marutaḥ, 6 aditiḥ, 7 viṣṇuḥ, 8 tvaṣṭā, 9 bhagaḥ, 10 somaḥ, 12 aśvinau, bṛhaspatiḥ| 1, 5 dvipadārṣī uṣṇik, 2,4,6,7,8,10,11 dvipadā prājāpatyā bṛhatī, 3 tripadā virāḍ gāyatrī, 9 tripadā pipīlikamadhyā purauṣṇik,(1-11 ekāvasānā) 12 parātiśakvarapī catuṣpadā jagatī| yajūṃṣi yajñe samidhaḥ svāhāgniḥ pravidvāniha vo yunaktu

हिन्दी अर्थ

महूनीया तथा उपदेश देनेवाली विज्ञानवती वेदवाणी, (भारती) तथा होता रह, यज्ञियाग्नि मे आहुति देने मे सहायक हँ । होता दाने (जृहो- सुफला तब होती है जब यज्ञोत्य धूम आदिस्य कौ ओर गति करता दहै, यथा २।७), या वाक् (निघं० १।११) । यह् मानुषीवाक्. है, यजमान भादि

English

May Fathers of succeeding ages save me. Next may the Fathers of our fathers save me, in this my prayer,. in this mine act, in this my

अध्याय ५

श्लोक 26.2

यु॒नक्तु॑ दे॒वः स॑वि॒ता प्र॑जा॒नन्न॒स्मिन् य॒ज्ञे म॑हि॒षः स्वाहा॑

yunaktu devaḥ savitā prajānannasmin yajñe mahiṣaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

जीवात्माओं के णरीररूप है, परन्तु हैँ “जन्तःसंज्ञा मौर सुख-दुःख से विव- शरीरैः” (अथवं० १८।२।७)। वृक्ष हैँ अन्तःसंज्ञाः' परन्तु "सुखदुःख से रहित अग्ने स्वाहां कृणुहि जातवेदः । पूवक किये (यज्ञम्) यज्ञ को (कृणुहि) सफल कर, (विश्वे देवाः) तेरी

English

with lotuses, bestow the germ. Let Mitra-Varuna and God Brihaspati lay the germ in thee.

अध्याय ५

श्लोक 26.3

इन्द्र॑ उक्थाम॒दान्य॒स्मिन् य॒ज्ञे प्र॑वि॒द्वान् यु॑नक्तु सु॒युजः॒ स्वाहा॑

indra ukthāmadānyasmin yajñe pravidvān yunaktu suyujaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

(जुषन्ताम्) सेवन करे, अनुष्ठान करे । (नव प्राणान्) € प्राणों को (नवभिः) € हारा (सं भिमीते) संगत करता है, (दीर्घायुत्वाय, शतशारदाय) दीर्घाय के लिए, सौ शरदुतुओों के लिए । (हरिते त्रीणि) मनोहारी या पीले सुवणे में तीन, (रजते त्रीणि) मनोरञ्जक चांदी में तीन, (अयसि ्रीणि) लोहे में तीन बल (तपसा) अमिके तापद्रारा (आविष्टितानि) प्रविष्ट हो जति । पर ही आश्रित हैँ । युवणे, रजत भौर अयस्-- इनमें से प्रत्येक में तीन-तीन

English

Indra and Agni lay the germ, Dhātar bestow the germ in thee. Let Vishnu form and mould the womb, let Tvashtar duly shape the forms, Prajāpati infuse the stream, and Dhātar lay for thee the germ.

अध्याय ५

श्लोक 26.4

प्रै॒षा य॒ज्ञे नि॒विदः॒ स्वाहा॑ शि॒ष्टाः पत्नी॑भिर्वहते॒ह यु॒क्ताः

praiṣā yajñe nividaḥ svāhā śiṣṭāḥ patnībhirvahateha yuktāḥ

हिन्दी अर्थ

ह । प्रत्येक में तीन-तीन बल हैँिविधशरीरो' के त्रिविध रोगों की निवृत्ति के लिए । संमिमीते = सम्+ मी गतौ (च॒रादिः)। अग्नि से दिशः' तक के € तत्तव तथा (आतेवाः) ऋतुभों के मवयव अर्थात् मास, (ऋतुभिः) ऋतुभों के साथ (संविदानाः) एकमत हुए, (अनेन अभिप्राय यह् कि रोगोंसे छटकारे के लिए, त्रिवृत् (सुवणं, रजत, लोह की भस्मों) दारा चिकित्सा के साथ-साथ, विशुद्ध प्राकृतिक जीवन

English

Drink thou the procreative draught well-known to Varuna the King,

अध्याय ५

श्लोक 26.5

छन्दां॑सि य॒ज्ञे म॑रुतः॒ स्वाहा॑ मा॒तेव॑ पु॒त्रं पि॑पृते॒ह यु॒क्ताः

chandāṃsi yajñe marutaḥ svāhā māteva putraṃ pipṛteha yuktāḥ

हिन्दी अर्थ

वारिक पुरुषों की बहुतायत, (पशूनाम् भूमा) गौ भादि पशुभों को बहुतायत (ते) ये तीन बहुतायतें, (इह) इस गृह में (श्रयन्ताम्) आश्रय पाएं । यज्ञियाग्नि ! (वावृधानः) बढृती हू्ई तु (इमम्) इस मनुष्य को (वधय) (विरुवभत्) सवका भरण-पोषण करनेवाली (भूमिः) भूमि, (हरितेन)

English

Known to divine Sarasvati, and Indra slayer of the foe. 67 Thou art the germ of plants and herbs, thou art the germ of forest trees,

अध्याय ५

श्लोक 26.6

एयम॑गन् ब॒र्हिषा॒ प्रोक्ष॑णीभिर्य॒ज्ञं त॑न्वा॒नादि॑तिः॒ स्वाहा॑

eyamagan barhiṣā prokṣaṇībhiryajñaṃ tanvānāditiḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

(सजोषाः) प्रीति ओर सेवा करनेवाली (अग्निः) अग्नि (अयसा) लोह मनवाने तुक्षको, (ते) तथा तेरे लिए (दक्षम्) बल को (दधातु ) धारित करे शद्धचांदी का प्रयोग चदीके वकेमेभी किया जाताहै। वीरुद्भिः द्वारा अनुपान अभिप्रेत है, वीरुधो के विचूणे या रस । हिसित हृए (सोमस्य) वीये के एकांश रूपमे (परापतत्) परे गिरा है । (एकम्) एकं को (वेधसाम् ) विधातुरूप (अपाम्) जलो का (रेतः) रेतस् (आहुः) कहते हँ । (ते) तेरी (आयुषे) आयु के लिए (मन्व १), (त्रिवृत्

English

The germ of each existing thing, so here, O Agni, lay the germ. Rise up, put forth thy manly strength, and lay thy germ within the womb.

अध्याय ५

श्लोक 26.7

विष्णु॑र्युनक्तु बहु॒धा तपां॑स्य॒स्मिन् य॒ज्ञे सु॒युजः॒ स्वाहा॑

viṣṇuryunaktu bahudhā tapāṃsyasmin yajñe suyujaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

भस्म' (मन्त्र १, तपसा) दसरा हिरण्य है--सोम, वी्येरूप' यह शरीर से एकाशरूपं मे हिसित होकर, कटकर परे अथात् स्त्रीयोनि मेँ गिरता १: अथवा, “अपामेक वेधसां रेत आहुः" == आपः दँ शरीरस्थ, आपः, अर्थात् शरीरस्थ

English

A bull art thou with vigorous strength: for progeny we bring thee near. Prepare thee, Bārhatsāmā, let the germ be laid within thy side. The Soma-drinking Gods have given a son to thee, thy son and mine.

अध्याय ५

श्लोक 26.8

त्वष्टा॑ युनक्तु बहु॒धा नु रू॒पा अ॒स्मिन् य॒ज्ञे सु॒युजः॒ स्वाहा॑

tvaṣṭā yunaktu bahudhā nu rūpā asmin yajñe suyujaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

है । वेषाः == “विधान वेघ च" (उणा० ४।२२६) । ही मिला रहता है वहं हिरण्यरूप है, शुद्ध हिरण्य के रूप मे दाविति प्रदान करतां है । हे । सोम है वीर्यं (जथर्व० १४।१।१-५) । तुतीय हिरण्य ह "अपां रेतस् । अर्थात् अ्िसित वीं है अपां रेतः' । मन्त्र में हिसित वीयं को सोम कहा है ओर जहिसित वीर्यं को “जपां वेधसां रेतस् । अपाम् को वेधसाम् कहा है । “वेधाः मेधाविनाम'' (निघं० ३।१ ५) 1 वैदिक वणेन शेली मे अपाम् को

English

O Dhātar, thou Disposer, lay within the body of this dame. A male germ with the noblest form, for her, in the tenth month, to bear.Tvashtar, celestial

अध्याय ५

श्लोक 26.9

भगो॑ युनक्त्वा॒शिषो॒ न्व॑१स्मा अ॒स्मिन् य॒ज्ञे प्र॑वि॒द्वान् यु॑नक्तु सु॒युजः॒ स्वाहा॑

bhago yunaktvāśiṣo nva1smā asmin yajñe pravidvān yunaktu suyujaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

तीन आयुधो का समूह्, (अमृतस्य) अविनाशी परमेदवर की (त्रेधा) त्रिविध निवल सोमी के प्रति तीन धातुओं के प्रयोक्ता का कथन है । जयं; सुपणालिदटता यदाय॑नेकराघ्ठरमं मिसेभूयं शक्रा ।

English

artist, lay within the body of this dame. A male germ with the noblest form for her in the tenth month to bear. Savitar, vivifier, lay within the body of this dame A male germ with the noblest form for her

अध्याय ५

श्लोक 26.10

सोमो॑ युनक्तु बहु॒धा पयां॑स्य॒स्मिन् य॒ज्ञे सु॒युजः॒ स्वाहा॑

somo yunaktu bahudhā payāṃsyasmin yajñe suyujaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

मनुष्य के साथ है, यह् मानुषीवाक् है । ३०२ अथर्वेवेदभाष्य काण्ड ६। अनु० ६ सूक्त २७ दवारा की गर देवस्तुति। सरस्वती है विज्ञानवती वेदवाणी । भारतीरहै

English

sacerdotal charge, in this perfor- mance, in this thought, in this my plan and wish, in this my calling on the Gods! All hail! A charm to facilitate conception

अध्याय ५

श्लोक 26.11

इन्द्रो॑ युनक्तु बहु॒धा वी॒ऽर्याण्य॒स्मिन् य॒ज्ञे सु॒युजः॒ स्वाहा॑

indro yunaktu bahudhā vī'ryāṇyasmin yajñe suyujaḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

प्रभा” (निरुक्त ८।२।१०) । आ सदन्ताम् =- वटे । यह भौपचारिक वरणेन है, अभिप्राय है यन्न में इन तीनों का उपयोग, स्थिति । कि (अस्य) इस नवजात शिशु की (नाभिम्) ना्भिको नाभिनालसे विमुक्त किया जाता है। हे रूप-आकृतियों के निर्माता परमेश्वर ! तु समग्र अन्नों ओौर धनौं कास्वामीदहै। इनदो निधियोंकोत् हमारे लिएु विमुक्त करदे । पुरुक्षु है, इसके खाति ही शरीर की पालना होती है, यह शीध्रतासेशरीरमें शव्िति प्रदान करता है।

English

Let the man, sower of the germ, lay, as a feather on a shaft. Limb drawn from limb, whate’er is culled from cloud and from the womb of heaven.

अध्याय ५

श्लोक 26.12

अश्वि॑ना॒ ब्रह्म॒णा या॑तम॒र्वाञ्चौ॑ वषट्का॒रेण॑ य॒ज्ञं व॒र्धय॑तौ ।बृह॑स्पते॒ ब्रह्म॒णा या॑ह्य॒र्वाङ् य॒ज्ञो अ॒यं स्वऽरि॒दं यज॑मानाय॒ स्वाहा॑

aśvinā brahmaṇā yātamarvāñcau vaṣaṭkāreṇa yajñaṃ vardhayatau | bṛhaspate brahmaṇā yāhyarvāṅ yajño ayaṃ sva'ridaṃ yajamānāya svāhā

हिन्दी अर्थ

(वनस्पते) है वनस्पति ! (रराणः) इध्म प्रदान करता हात (अव प्रकार उन्हँ शान्ति प्रदान करे)। राणः =रा दाने (अदादिः); रा-। कानच् । हव्यम् --ह अदने (जुहोत्यादिः) । कविता में वनस्पति को सम्बोधित किया हे, परन्तु वैदिक

English

Even as this broad earth received the germ of all the things that be, Thus within thee I lay the germ. I call thee, Earth, to strengthen it. O Sinivāli, set the germ, set thou the germ, Sarasvati! In thee let both the Asvins, crowned

अध्याय ५

श्लोक 27.1

अग्निः।१-१२ ब्रह्म।अग्निः।१ बृहतीगर्भा त्रिष्टुप्, २ द्विपदा साम्नी भुरिगनुष्टुप्, ३ द्विपदार्ची बृहती, ४ द्विपदा साम्नी भुरिग्बृहती, ५ द्विपदा साम्नी त्रिष्टुप्, ६ द्विपदा विराण्नाम गायत्री, ७ द्विपदा साम्नी बृहती, ७ संस्तारपङ्क्तिः, ९ षट्-पदानुष्टुब्गर्भा परातिजगती, १०-१२ पुरउष्णिक् (२-७ एकावसाना)।ऊ॒र्ध्वा अ॑स्य स॒मिधो॑ भवन्त्यू॒र्ध्वा शु॒क्रा शो॒चीष्य॒ग्नेः ।द्यु॒मत्त॑मा सु॒प्रती॑कः॒ ससू॑नु॒स्तनू॒नपा॒दसु॑रो॒ भूरि॑पाणिः

agniḥ| 1-12 brahma| agniḥ| 1 bṛhatīgarbhā triṣṭup, 2 dvipadā sāmnī bhuriganuṣṭup, 3 dvipadārcī bṛhatī, 4 dvipadā sāmnī bhurigbṛhatī, 5 dvipadā sāmnī triṣṭup, 6 dvipadā virāṇnāma gāyatrī, 7 dvipadā sāmnī bṛhatī, 7 saṃstārapaṅktiḥ, 9 ṣaṭ-padānuṣṭubgarbhā parātijagatī, 10-12 purauṣṇik (2-7 ekāvasānā)| ūrdhvā asya samidho bhavantyūrdhvā śukrā śocīṣyagneḥ | dyumattamā supratīkaḥ sasūnustanūnapādasuro bhūripāṇiḥ

हिन्दी अर्थ

सूक्ष्म, कारणरूपी , (चिवृता) तीन धातुओं के सेवन द्वारा (शक्रः) शवितिशाली हृए, (संभूय) परस्पर मिलकर (यत्) जो (एकाक्षरम् अभि) एक अक्षीण परमेरवर के संमुख (मायन्) आ जातेर्है, होजतेहै, तोवे तीनों शरीर (अम॒तेन साकम्) अमर परमेदवर के साथ हए, (मल्युम्) मृत्यु कमो को (अन्तदंधानाः) अन्तदित क्र देते तिरोहित कर देतेरह। भूम्या अयस्मयं पातु परागांर् देवपुरा अयम् ॥९॥

English

in the tenth month to bear. O Lord of Life, Prajāpati, within this woman’s body lay

अध्याय ५

श्लोक 27.2

दे॒वो दे॒वेषु॑ दे॒वः प॒थो अ॑नक्ति॒ मध्वा॑ घृ॒तेन॑

devo deveṣu devaḥ patho anakti madhvā ghṛtena

हिन्दी अर्थ

मे हभ है । यह इस सूक्त की रचना में वैशिष्ट्य है। (अयमा) न्यायकारी अथवा अरियों का नियन्ता, (पूषा) पृष्टिप्रद, हमारी ओर नमनहो, तब (तैन) उस नमन-काल कै साथ, अर्थात् उस काल मे, (त्वा) तुके (अति चृतामसि) पू्ण॑तया परमेश्वर के साथ हुम ग्रथित करते रहै, सम्बद्ध करते हें । अर्यमा आदि तीनों पदों हारा एक परमेश्वर ही अभिप्रेत है, यतः

English

Let Vishnu in this rite in varied manner—All hail! use well- yoked steeds, his fervours. Let Tvashtar in this rite in varied manner—All hail!—use forms, his well-yoked coursers.

अध्याय ५

श्लोक 27.3

मध्वा॑ य॒ज्ञं न॑क्षति प्रैणा॒नो नरा॒शंसो॑ अ॒ग्निः सु॒कृद् दे॒वः स॑वि॒ता वि॒श्ववा॑रः

madhvā yajñaṃ nakṣati praiṇāno narāśaṃso agniḥ sukṛd devaḥ savitā viśvavāraḥ

हिन्दी अर्थ

तथा “अरीन् नियच्छति" (निरुक्त ११।३।२३; अदिति पद) । अहर्जति' का ग्रथन हुआ है । चृततु, चृतामसि! == चती हिसाग्रन्थनयोः (तुदादिः) । करतुभिष्ट्वातेवेरायुषे वच॑से त्वा ।

English

Let Bhaga in this rite use prayers, foreknowing—All hail! for this use well-yoked coursers. Let Soma in this rite in varied manner—All hail!—use milk- streams, well-yoked coursers. Let Indra in this rite in varied manner—All hail!—use powers,. his well-yoked coursers.

अध्याय ५

श्लोक 27.4

अछा॒यमे॑ति॒ शव॑सा घृ॒ता चि॒दीडा॑नो॒ वह्नि॒र्नम॑सा

achāyameti śavasā ghṛtā cidīḍāno vahnirnamasā

हिन्दी अर्थ

(त्वा) तुङ्ञे (ऋतुभिः) ऋतुओं के द्वारा, (आतवः) ऋतुओं के अव- १ घृत साध्य-यज्ञिय कर्मोसे उठे हुए तथा लुप्तदशंन हुए यवखूप मासो या ऋतुओों के समह् द्वारा भौर (संवत्स ज क उस तेज द्वारा (त्वा) तुन्षे ( आयुषे) दीषं आयुके लिए, ( क ओं ५ की प्राप्तिके लिए, (संहनु) मिले जबाड़ोवाला अर्थात मौन- धारी (कृण्मसि) हम करते ह अभिप्राय यह कि एक वषं भर तू मौन रह्

English

Hitherward come ye with the prayer, O Asvins, exalting sacrifice with cry of Vashat! Brihaspati!—All hail!—with prayer come hither. Here is the rite, here heaven for him who

अध्याय ५

श्लोक 27.5

अ॒ग्निः स्रुचो॑ अध्व॒रेषु॑ प्र॒यक्षु॒ स य॑क्षदस्य महि॒मान॑म॒ग्नेः

agniḥ sruco adhvareṣu prayakṣu sa yakṣadasya mahimānamagneḥ

हिन्दी अर्थ

संहनु क्रियाविशेषण है कृण्मसि" का। (पारयिष्णु) भवसागरसे पार करनेवाले, (सपत्नान्) कामादि शत्रमौ को से अरव पर आरोहण करता है, इसी प्रकार है जीवन्मुक्त ! तू मुञ्च परमे- रवर पर आरोहण कर, ताक्रि शरीर चछृटने पर मोक्षस्थानमे म तुजञे पहुंचा

English

worships. An Apri or Propitiatory hymn Uplifted be this sacrificer’s fuel: lofty and brilliant be the flames of Agni!

अध्याय ५

श्लोक 27.6

त॒री म॒न्द्रासु॑ प्र॒यक्षु॒ वस॑व॒श्चाति॑ष्ठन् वसु॒धात॑रश्च

tarī mandrāsu prayakṣu vasavaścātiṣṭhan vasudhātaraśca

हिन्दी अर्थ

(१-१५) । चातनः । जातवेदाः तथा मन्तोक्साः । तिष्टप्; ३१० अधर्ववेदमाष्य काण्ड ५।अनु° ६। सूक्त २९ अस्व ओर पुरुष को (सनेम) हम प्राप्त करे । भेषजमसि भेषजम्, यजुः० ३।५६) वह साक्षात् भेषजरूप है भौर भेषजो, ओषधों का कर्ता है, उत्पादक है ।

English

Splendidly bright, fair-faced, with all his offspring, Tanūnapāt the Asura, many-handed. God among Gods, the God bedews the paths with fatness and’ with mead.

अध्याय ५

श्लोक 27.7

द्वारो॑ दे॒वीरन्व॑स्य॒ विश्वे॑ व्र॒तं र॑क्षन्ति वि॒श्वहा॑

dvāro devīranvasya viśve vrataṃ rakṣanti viśvahā

हिन्दी अर्थ

तथा तदग्ने कृणु जातवेद विष्वं भिर्हवेः सह संविदानः । यो नो रिहैवं यतमो जघास यथासो अस्य परिधिष्पताति ॥२॥ को (तथा) उस प्रकारका (कृणु) करदे करि (यः) जिस पिशाचने (नः) ह्मे (दिदेव) ज्वर् आदि द्वारा परितप्त किया है, (यतमः) उन पिशाचौँमेसे जिसने (जघास) हमारे मांस को खाया है, (यथा) जिस प्रकार कि (अस्य) इस पिशाच का (परिधिः) रक्ा-का-घेरा (पताति) टूटकर गिर जाए । वत् ।) विइवेदेवाः सूरय, वायु, यज्ञियाग्नि आदि । संविदानः इन सबकी

English

With store of mead to sacrifice comes Agni, comes Narāsansa Agni, friendly-minded, comes Savitar, righteous God who brings all blessings. Hither he comes with power and fatness also, the luminous,. implored with adoration.

अध्याय ५

श्लोक 27.8

उ॒रु॒व्यच॑सा॒ऽग्नेर्धाम्ना॒ पत्य॑माने ।आ सु॒ष्वय॑न्ती यज॒ते उ॒पाके॑ उ॒षासा॒नक्ते॒मं य॒ज्ञम॑वतामध्व॒रं नः

uruvyacasā'gnerdhāmnā patyamāne | ā suṣvayantī yajate upāke uṣāsānaktemaṃ yajñamavatāmadhvaraṃ naḥ

हिन्दी अर्थ

किला, मकान, कवच, घेरा आदि परिधि है। मन्त्रम यहु अर्भिप्रायहं कि पिशाच मरता नही, जिस परिधिमें भी यह् सुरक्षित हुमा है उसे परमेर्वरतु गिरादे, ताकि हम उसका हनन कर सकं । यथा सो शरस्य प॑रिपिष्पतांति तथा तदण्ने कुण जातवेदः । विश्वेमिहैवेः सह संविदानः २ १. वेदानुसार आदित्य ररिमर्या, तेग कीटाण॒ओं का हनन करती द मानो आदित्यस्थ परमेरवर ही इसका हनन करता है, अतः वह् चिकित्सक ह । जिस प्रकार इस पिशाचकी परिधि टटकर गिरः ज ए, उस प्रक (यतमः) जिस (पिशाचः) पिशाच ने (अस्य) इस शर्ण के मांस को (जघास) खाया है, (यविष्ठ अग्ने) है युवतम अग्नि! उसकी (अध्यौ) दोनों आंखों को (नि विध्य) नितरां वीध, (ह्दयं नि विध्य) हृदय को नितरां वंध, (जिह्वाम्) जिल्लाको (नितन्दि) नितरां काट डाल, (दतः) दातो को (प्र मृणोहि) पूणैतया तोड़ डाल, (तम्) उसे (प्रति

English

At holy rites and offerings Agni loveth the scoops: let this man worship Agni’s greatness. He is the furtherer at glad oblations: there stood the Vasus and the treasure-givers.

अध्याय ५

श्लोक 27.9

दैवा॒ होता॑र ऊ॒र्ध्वम॑ध्व॒रं नो॒ऽग्नेर्जि॒ह्वया॒भि गृ॑णत गृ॒नता॑ नः॒ स्विऽष्टये ।ति॒स्रो दे॒वीर्ब॒र्हिरेदं स॑दन्ता॒मिडा॒ सर॑स्वती म॒ही भार॑ती गृणा॒ना॑

daivā hotāra ūrdhvamadhvaraṃ no'gnerjihvayābhi gṛṇata gṛnatā naḥ svi'ṣṭaye | tisro devīrbarhiredaṃ sadantāmiḍā sarasvatī mahī bhāratī gṛṇānā

हिन्दी अर्थ

प्रकरण की दृष्टि से पिशाच है मनुष्यको रूण करनेवाला रोग- जीवाणु, अर्थात् जम (शल), परन्तु उये पुरुषविध-कल्पित कर उसके मे भी स्वीकृत की गई है (७।२।६, ७) । मन्त्र में “जातवेदाः अग्निः" का का। इसके सम्बन्धमेंही "समिधः काभी कथन हुआ है (मन्त्र १४, १५) । यज्ञियाग्नि से उत्थित धूम" रोग-जीवाणुओं का विनाश करता है ।

English

Ever the Doors divine, and all protect this worshipper’s holy work. Far-reaching, ruling by the Law of Agni, May Dawn and Night, the holy, speeding near us, aid this our sacrificial ceremony.

अध्याय ५

श्लोक 27.10

तन्न॑स्तु॒रीप॒मद्भु॑तं पुरु॒क्षु।देव॑ त्वष्टा रा॒यस्पोषं॒ वि ष्य॒ नाभि॑म॒स्य

tannasturīpamadbhutaṃ purukṣu| deva tvaṣṭā rāyaspoṣaṃ vi ṣya nābhimasya

हिन्दी अर्थ

(दिवः) द्युलोक से (त्वा) तुके (हरितम्) मनोहारी पीतवर्णीं ह यह् (देवपुराः रियों ै य को ज ) देवपुरियों को (प्रागात्) चला गयाहै, , देवपुराः==देवो की परियां, दिव्य व्यक्तियों की परियां । यथा पुरम् (अथवं० १०।२।२८-३०) । इनकी व्याख्या के लिए देखो मत्त

English

A male germ with the noblest form for her in the tenth month to bear. A hymn of invitation to the gods In sacrifice for you may sapient Agni—All hail!—use Yajus texts and fuel.

अध्याय ५

श्लोक 27.11

वन॑स्प॒तेऽव॑ सृजा॒ ररा॑णः ।त्मना॑ दे॒वेभ्यो॑ अ॒ग्निर्ह॒व्यं श॑मि॒ता स्व॑दयतु

vanaspate'va sṛjā rarāṇaḥ | tmanā devebhyo agnirhavyaṃ śamitā svadayatu

हिन्दी अर्थ

(इमाः तिः देवपुराः) ये तीन देवपुरियां ह (ताः) वै (६ मे ८ देष करनेवालो से (उत्तरः) श्रेष्ठ तथा अधिक शक्तिवाला (भव) तिस्रः देवपुराः= त्रिविध शरीर । वे तीनों मृत्युवि भोर से तुक सुरक्षित करे । विभ्रत् =उन तीनों को र च ण

English

May Savitar the God—All hail!—foreknowing, chief in this sacrifice, employ them. In this great rite—All hail!—may sapient Indra use lauds, rejoicings, well-yoked coursers.

अध्याय ५

श्लोक 27.12

अग्ने॒ स्वाहा॑ कृणुहि जातवेदः ।इन्द्रा॑य य॒ज्ञं विश्वे॑ दे॒वा ह॒विरि॒दं जु॑षन्ताम्

agne svāhā kṛṇuhi jātavedaḥ | indrāya yajñaṃ viśve devā haviridaṃ juṣantām

हिन्दी अर्थ

३०८ अयवैवेदभाष्य काण्डं ५।अनु० ६ । सक्त २८ पुरं देवानाममृतं हिरण्यं य अविष प्रथमो देवो अग्र । वाधता है, निजशरीर में दृढ-बद्ध कर लेता है, (तस्म) उसके लिए (नमः) नमस्कार, (दश प्राचीः) १० आगे बढी अंगुलियों को करके अर्थात् दोनों

English

Bring Praishas in the rite—All hail!—and Nivids, learned, con- nected, with the Consorts. As a dame brings her son—All hail! O Maruts, connected, in the rite bring measures. Here Aditi is come—All hail!—preparing the rite with grass and lustral waters.

अध्याय ५

श्लोक 28.1

दीर्घायुः।१-१४ अथर्वा।त्रिवृत्, अग्न्यादयः।त्रिष्टुप्, ६ पञ्चपदातिशक्वरी, ७,९-१०,१२ ककुम्मत्यनुष्टुप् १३ पुरउष्णिक्।नव॑ प्रा॒णान् न॒वभिः॒ सं मि॑मीते दीर्घायु॒त्वाय॑ श॒तशा॑रदाय ।हरि॑ते॒ त्रीणि॑ रज॒ते त्रीण्यय॑सि॒ त्रीणि॒ तप॒सावि॑ष्ठितानि

dīrghāyuḥ| 1-14 atharvā| trivṛt, agnyādayaḥ| triṣṭup, 6 pañcapadātiśakvarī, 7,9-10,12 kakummatyanuṣṭup 13 purauṣṇik| nava prāṇān navabhiḥ saṃ mimīte dīrghāyutvāya śataśāradāya | harite trīṇi rajate trīṇyayasi trīṇi tapasāviṣṭhitāni

हिन्दी अर्थ

(मस्य) इस रूषण का (यत्) जौ (मांसम्) मांस (हृतम्) किसी स्थानसे (पिशाचैः) मांसभक्षक रोगजीवाणुमों ने हरण कर लियारहै, (विहतम्) विविध स्थानोसे हरण कर लिया है, (यत्) जो (पराभृतम्) भरने से परागत हो गया-सा है, तथा (आत्मनः) शरीर का ( यत्तमत्) जो मे प्रेरित कर देते हु । असुः प्रज्ञानाम (निधं० ३।९) । पान करने से सूक्ष्म जषध साक्षात् रत मे मिलकर रोगोपचार करती हँ । ३१२ अथरवेवेदमाष्य काण्ड ५।अनु० ९1 सूक्त २६

English

Celestial Hotars, with the tongues of Agni praise and extol our lofty ceremony, so that our sacrifice be well conducted!

अध्याय ५

श्लोक 28.2

अ॒ग्निः सूर्य॑श्च॒न्द्रमा॒ भूमि॒रापो॒ द्यौर॒न्तरि॑क्षं प्र॒दिशो॑ दिश॑श्च ।आ॒र्त॒वा ऋ॒तुभिः॑ संविदा॒ना अ॒नेन॑ मा त्रि॒वृता॑ पारयन्तु

agniḥ sūryaścandramā bhūmirāpo dyaurantarikṣaṃ pradiśo diśaśca | ārtavā ṛtubhiḥ saṃvidānā anena mā trivṛtā pārayantu

हिन्दी अर्थ

धर्षण अर्थात् रोग-जीवाणुओ का पराभव करनेवाली है, (मस्य) इस का हुनन करती हैँ । अग्नि=परमेश्वर (यजु: ३२।१) । सोमः वीयं (अथवं० १४।१।१-५) । शिरः =पुरुषविधवणेन, मन्त्र ४। रुधिरम् = (अग्ने) है अग्नि! (सनात्) सनातन काल से (यातुधानान्) यातनाओं के निधिभूत राक्षसो को (मृणसि) त् मारतारहारहै, (पृतनासु) (अनु) निरन्तर (दह) तु दग्ध करता रह, (ते) तेरे (देन्यायाः हत्याः)

English

between them, And Parts of Years accordant with the Seasons by this three- threaded Amulet preserve me.

अध्याय ५

श्लोक 28.3

त्रयः॒ पोषा॑स्त्रि॒वृति॑ श्रयन्ताम॒नक्तु॑ पू॒षा पय॑सा घृ॒तेन॑ ।अन्न॑स्य भू॒मा पुरु॑षस्य भू॒मा भू॒मा प॑शू॒नां त इ॒ह श्र॑यन्ताम्

trayaḥ poṣāstrivṛti śrayantāmanaktu pūṣā payasā ghṛtena | annasya bhūmā puruṣasya bhūmā bhūmā paśūnāṃ ta iha śrayantām

हिन्दी अर्थ

देवासुरसंग्राम भी अभिप्रेत, तभी हेति को देव्या कहा है समाहर जातवेदो यदू धृतं यत् परांभरतम् है, (यत्) जो (पराभृतम्) परे फक दिया है । (अस्य) इस सगण के (गात्राणि) शरीरावयव (वधेन्ताम्) वदु, (अयम्) यह रूण (अंशुः, इव ) सोम ओषधि के अंकुरों के सदृश (आप्यायताम्) पुणंतया प्रवद्ध हो ।

English

In three-threaded Charm rest triple fulness! Let Pūshan cover it with milk and butter. Here rest abundant store of food and people, may ample store of cattle rest within it. Enrich this charm, Ādityas, with your treasure; magnify this, when magnified, O Agni.

अध्याय ५

श्लोक 28.4

इ॒ममा॑दित्या॒ वसु॑ना॒ समु॑क्षते॒मम॑ग्ने वर्धय ववृधा॒नः ।इ॒ममि॑न्द्र॒ सं सृ॑ज वी॒र्येऽणा॒स्मिन् त्रि॒वृच्छ्र॑यतां पोषयि॒ष्णु

imamādityā vasunā samukṣatemamagne vardhaya vavṛdhānaḥ | imamindra saṃ sṛja vīrye'ṇāsmin trivṛcchrayatāṃ poṣayiṣṇu

हिन्दी अर्थ

सोमस्येव जातवेदो अश्रा प्यायतामयम् । अग्नि ! (सौमस्य अंशुः इव ) सोम ओषधि के अंकुरों के सदृण (अयम्) यह हमा तथा युखपू वंक शयन करनेवाला । तास्त्वं जुषस्व प्रति चैना गृण जातवेदः ।९५४॥

English

Endow it with heroic strength, O Indra: therein be lodged a triple power of increase. With gold let Earth protect thee, and with iron, accordant, all- sustaining Agni save thee!

अध्याय ५

श्लोक 28.5

भूमि॑ष्ट्वा पातु॒ हरि॑तेन विश्व॒भृद॒ग्निः पि॑प॒र्त्वय॑सा स॒जोषाः॑ ।वी॒रुद्भि॑ष्टे अर्जु॑नं संविदा॒नं दक्षं॑ दधातु सुमन॒स्यमा॑नम्

bhūmiṣṭvā pātu haritena viśvabhṛdagniḥ pipartvayasā sajoṣāḥ | vīrudbhiṣṭe arjunaṃ saṃvidānaṃ dakṣaṃ dadhātu sumanasyamānam

हिन्दी अर्थ

रोग-जीवाणुओं का विनाश करनेवाली (समिधः) समिधाएं (ते) तेरे लिए है (ताः) न्ह (त्वम्) तु (जुषस्व) सेवन कर, (च) भौर (एनाः) इर य्ञियाग्नि की रोगनाशक समिधाएं जोकि रोग-जीवाणुओं का हारी समिधां का कथन क्रिया है, प्रकरण रोग सम्बन्धी है

English

And in accordance with the plants may silver, regarding thee with favour, grant thee vigour. This gold, born threefold at its first production, grew the one thing that Agni loved most dearly: it fell away, one part of injured Soma.

अध्याय ५

श्लोक 28.6

त्रे॒धा जा॒तं जन्म॑ने॒दं हिर॑ण्यम॒ग्नेरेकं॑ प्रि॒यत॑मं बभूव॒ सोम॒स्यैकं॑ हिंसि॒तस्य॒ परा॑पतत्।अ॒पामेकं॑ वे॒धसां॒ रेत॑ आहु॒स्तत् ते हिर॑ण्यं त्रि॒वृद॒स्त्वायु॑षे

tredhā jātaṃ janmanedaṃ hiraṇyamagnerekaṃ priyatamaṃ babhūva somasyaikaṃ hiṃsitasya parāpatat| apāmekaṃ vedhasāṃ reta āhustat te hiraṇyaṃ trivṛdastvāyuṣe

हिन्दी अर्थ

३१६ = काण्ड ५। अनु० ६। सूक्त ३० राजा के नर-पिशाच सैनिक । जातवेदः जातपरज्ञ, अर्थात् युद्धनीति का हनन करनेवाली (समिधः) समिधाओं को (अचिषा) ज्वाला द्वारा (प्रति- (अस्य) इस रुग्ण के (मांसम्) मांस का (जिहीषति) हरण करना चाहता

English

One part they call seed of the sapient Waters. This gold bring thee long life when triply threaded!

अध्याय ५

श्लोक 28.7

त्र्या॒यु॒षं ज॒मद॑ग्नेः क॒श्यप॑स्य त्र्यायु॒षम्।त्रे॒धामृत॑स्य॒ चक्ष॑णं॒ त्रीण्यायूं॑षि ते ऽकरम्

tryāyuṣaṃ jamadagneḥ kaśyapasya tryāyuṣam| tredhāmṛtasya cakṣaṇaṃ trīṇyāyūṃṣi te 'karam

हिन्दी अर्थ

राष्टराधिपति के पक्ष मे, ताषष्टधीः समिधः=-शत्रु के रुधिरपान की तृष्णावाली मौर उसका हनन करनेवाली निज सेनाए- ये समिधां ह युदढध- यज्ञाग्नि के लिए । अग्निहै सेनाग्रणी, सेना के आगे-ागे चलनेवाला, उसका नयन करनेवाला सेनानी, सेनाध्यक्ष । अविः है सेनानी की क्रोध-ज्वाला । हे रुग्ण ब्रह्मचारिन् ! (भावतः) समीप के गुरुजन तो (आवतः) तेरे समीप विद्यमान् हही, (परावतः) दूरके भी (ते) तेरे लिए (आवतः) समीपकेही हैं । (इह एव) इस माश्रममे ही (भव) तु रह, (मानु गाः)

English

Three lives of Jamadagni, thrice the vital force of Kasyapa, Three sights of immortality, three lives have I prepared for thee. When with the three-stringed charm came three strong eagles, sharing the Sacred Syllable

अध्याय ५

श्लोक 28.8

त्रयः॑ सुप॒र्णास्त्रि॒वृता॒ यदाय॑न्नेकाक्ष॒रम॑भिसं॒भूय॑ श॒क्राः ।प्रत्यौ॑हन् मृ॒त्युम॒मृते॑न सा॒कम॑न्त॒र्दधा॑ना दुरि॒तानि॑ विश्वा॑

trayaḥ suparṇāstrivṛtā yadāyannekākṣaramabhisaṃbhūya śakrāḥ | pratyauhan mṛtyumamṛtena sākamantardadhānā duritāni viśvā

हिन्दी अर्थ

यत् त्वामिचेरुः पुरुषः स्वो यद्रंणो जन॑; । दोनो को (वाचा) वेदवाणी द्वारा (ते) तेरे लिए (वदामि) मँ कहता हं । अज्ञान से (यत्) जो (दुद्रोहिथ) तूने द्रोह किया है ओौर (शेपिषे) शाप दिया यदेनसो माकरं ताच्छेषै पितकुंतास्च यत् ।

English

and mighty, With immortality they drove off Mrityu, obscuring and conceal- ing all distresses.

अध्याय ५

श्लोक 28.9

दि॒वस्त्वा॑ पातु॒ हरि॑तं॒ मध्या॑त् त्वा पा॒त्वर्जु॑नम्।भूम्या॑ अय॒स्मयं॑ पातु॒ प्रागा॑द् देवपु॒रा अ॒यम्

divastvā pātu haritaṃ madhyāt tvā pātvarjunam| bhūmyā ayasmayaṃ pātu prāgād devapurā ayam

हिन्दी अर्थ

(मातृकृतात्) माता द्वारा किये (एनसः) पाप से (यत्) जो रोग रोग प्राप्त कर, (शेषे) तू सोया षड़ारहै, (उन्मोचन-प्रमोचने) उस रोग से (वाचा) वेदवाणी द्वारा (ते) तैरे लिए (वदामि) म कहता हँ ।

English

The golden guard thee from the sky, the silvern guard thee from the air, The iron guard thee from the earth! This man hath reached the forts of Gods. May these three castles of the Gods keep thee secure on every side.

अध्याय ५

श्लोक 28.10

इ॒मास्ति॒स्रो दे॑वपु॒रास्तास्त्वा॑ रक्षन्तु स॒र्वतः॑ ।तास्त्वं बिभ्र॑द् वर्च॒स्व्युत्त॑रो द्विष॒तां भ॑व

imāstisro devapurāstāstvā rakṣantu sarvataḥ | tāstvaṃ bibhrad varcasvyuttaro dviṣatāṃ bhava

हिन्दी अर्थ

लियाहै, जो विविध भागों में विभक्तकर दिया है, जिस अद्ध की क्षतिपूति नहीं हो सकती, उसे युद्ध-विद्या के जाननेवाला तू अग्निरूप' सेनापति, राष्ट केशरीरमेंभरपूरकरदे, ओर राष्टृशरीरमेप्राणशक्ति का पुनः संचार हम राष्टाधिकारी कर देतेर्ह। राष्ट भी शरीररूप है जिसका पालन- (आमे) कच्चे, (सुपक्वे) उत्तमपके, (शबले) अधपके, (विपक्वे) विशेषतया पके अर्थात् अधिक पके (अशने) भोजन में (यः पिशाचः) जिस सन्तानो से; वियुक्त कर दिया जाए् (पिशाचाः) भौरवे सवर इसके मांसभक्षक रोग-जीवाणु भी (वियातयन्ताम् ) वियुक्त कर दिये जाए, ताकि (जयम्) यह रूण भी (अगदः) रोगरदहित (अस्तु) हो जाए पुनःरूणन

English

Three Goddesses upon this grass, be seated, Idā, Sarasvati, Mahi, and Bhārati adored with praise. 68

अध्याय ५

श्लोक 28.11

पुरं॑ दे॒वाना॑म॒मृतं॒ हिर॑ण्यं॒ य आ॑बे॒धे प्र॑थ॒मो दे॒वो अग्रे॑ ।तस्मै॒ नमो॒ दश॒ प्राचीः॑ कृणो॒म्यनु॑ मन्यतां त्रि॒वृदा॒बधे॑ मे

puraṃ devānāmamṛtaṃ hiraṇyaṃ ya ābedhe prathamo devo agre | tasmai namo daśa prācīḥ kṛṇomyanu manyatāṃ trivṛdābadhe me

हिन्दी अर्थ

ददम्भ = दभ्नोति वधकर्मा (निघं० २।१६) । पिशाचः = पिशित जो रोग-जीवाणु उत्पन्न होकर रोग का प्रसार करते उनका बीजनाश कर देना चाहिए, ताफि वे पुनः उस रोग का प्रसार नकर सके । राष्टाधिपति कहता है किं जिस या जिन पर-राष्टर के नरपिशाचों ने मेरे भोजन मे दम्भ अर्थात् छल-कपट से विष मिला दिया है उनके राजा ओर उसकी सन्तानो को यातनाभों द्वारा नष्ट कर देना चाहिए १. योद्धाओों को अग्निरूप कहा भी है । यथा “नरो अग्निरूपाः” (ऋ० १०।८४।१) ।

English

This our nutritious genial flow, God Tvashtar! and growth of wealth, pour down on this man’s kindred.

अध्याय ५

श्लोक 28.12

आ त्वा॑ चृतत्वर्य॒मा पू॒षा बृह॒स्पतिः॑ ।अह॑र्जातस्य॒ यन्नाम॒ तेन॒ त्वाति॑ चृतामसि

ā tvā cṛtatvaryamā pūṣā bṛhaspatiḥ | aharjātasya yannāma tena tvāti cṛtāmasi

हिन्दी अर्थ

(क्षीरे) दूध मे, (मन्थे) मठे मे, (अकृष्टपच्ये ) अनजुते खेत में पके अन्न में, (धान्ये) तथा जुते वेत के धान्य मे (अशने) मेरे इस भोजन में (यतमः) जिस किसी रोग-जीवाणु ने (मा) मुञ्ञे (ददम्भ) हिसित किया दहै, रुण किया है (तत्) तो वह् पिशाच अर्थात् रोग-जीवाणु तथा (पिशाचाः ) अन्य सब मांस-भक्षक रोग-जीवाणु भी (आत्मना) निज स्वरूप से, तथा यह र्ण (अगदः) रोगरहित हो जाए । राष्टराधिपति के सम्बन्धे, म सोते हुए, या (अपाम् पाने) जलपान मेँ (मा ददम्भ) मृज्ञे हसित किया

English

Vanaspati, rejoicing, of thyself send God-ward! Let Agni, Im- molator, sweeten our libation. Pay sacrifice to Indra, Jātavedas Agni, with Hail! Let all the Gods accept the gifts we offer.

अध्याय ५

श्लोक 28.13

ऋ॒तुभि॑ष्ट्वार्त॒वैरायु॑षे॒ वर्च॑से त्वा ।सं॒व॒त्स॒रस्य॒ तेज॑सा॒ तेन॒ संह॑नु कृण्मसि

ṛtubhiṣṭvārtavairāyuṣe varcase tvā | saṃvatsarasya tejasā tena saṃhanu kṛṇmasi

हिन्दी अर्थ

से (वियातयन्ताम्) वियुक्त कर दिये जाएं मौर (अयम्) यह रूण (अगदः) नार्थक हैँ । कच्चा मांस है शरीरस्थ मांस, जिसे कि रोग-जीवाणु रुग्ण करते सब रोग-जीवाणु भी, (आत्मना) निज स्वरूप से, तथा (प्रजया) सन्तानं ३१४ द काण्ड ५। गनु० ६ । सुक्सं २६

English

A charm to ensure general protection and prosperity For lengthened life, to last through hundred autumns, they equalize with nine the nine

अध्याय ५

श्लोक 28.14

घृ॒तादुल्लु॑प्तं॒ मधु॑ना॒ सम॑क्तं भूमिदृं॒हमच्यु॑तं पारयि॒ष्णु।भि॒न्दत् स॒पत्ना॒नध॑रांश्च कृ॒ण्वदा मा॑ रोह मह॒ते सौभ॑गाय

ghṛtādulluptaṃ madhunā samaktaṃ bhūmidṛṃhamacyutaṃ pārayiṣṇu| bhindat sapatnānadharāṃśca kṛṇvadā mā roha mahate saubhagāya

हिन्दी अर्थ

रोग-जीवाणुओं द्वारा विषाक्त 1९५९4 हो जाती हँ तो इन वस्तुओं के सेवन से रोग-जीवाणु रुग्ण कर देते है । क्रव्याद् मग्ने रुधिरं पिशाचं म॑नो हनं जहि जातवेदः । स्वास्थ्यनिरोधक, (मनोहनम्) मन का हनन करनेवाले विचार शविति का मांस-भक्षकं रोग-जीवाणु का (जहि) हनन कर । (तम्) उसे (वाजी)

English

aspirations. Three in gold, three in silver, three in iron by heat are stablished in their several places. May Agni, Sun, and Moon, and Earth, and Waters, Sky, Air, the Quarters and the Points

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Atharva Veda — Chapter 5
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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