Atharva Veda· Atharvaveda Saṁhitā
12
अध्याय 12 / 20

Kanda 12

काण्ड 12

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पूर्ण अध्याय पाठ118 श्लोक

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अध्याय १२

श्लोक 1.1

भूमिसूक्तम्।१-६३ अथर्वा।भूमिः।त्रिष्टुप्, २ भुरिक्, ४-६, १०,३८ त्र्यवसाना षट्-पदा जगती, ७ प्रस्तारपङ्क्तिः, ८, ११ त्र्यवo षट्o विराडष्टिः, ९ परानुष्टुप्, १२-१३, १५ पञ्चपदा शक्वरी (१२-१३ त्र्यवo), १४ महाबृहती, १६, २१ एकावo साम्नी त्रिष्टुप्, १८ त्र्यवo षट्o त्रिष्टुबनुष्टुब्गर्भातिशक्वरी, १९, २० पुरोबृहती (२० विराट्) २२ त्र्यवo षट्o विराडतिजगती, २३ पञ्चपदा विराडतिजगती, २४ पञ्चo अनुष्टुब्गर्भा जगती, २५ त्र्यवo सप्तo उष्णिगनुष्टुब्गर्भा शक्वरी, २६-२८, ३३, ३५, ३९-४१, ५०,५३-५४, ५६, ५९, ६३ अनुष्टुप् (५३ पुरोबार्हता), ३० विराड् गायत्री, ३२ पुरस्ताज्ज्योतिः, ३४ त्र्यवo षट्o त्रिष्टुब्बृहतीगर्भातिजगती, ३६ विपरीतपादलक्ष्मा पङ्क्तिः ३७ त्र्यवo पञ्चo शक्वरी, ४१ षट्o ककुम्मती शक्वरी, ४२ स्वराडनुष्टुप्, ४३ विराडास्तारपङ्क्तिः, ४४-४५, ४९ जगती, ४६ षट् पo अनुष्टुब्गर्भा परा शक्वरी, ४७ षट् पo उष्णिगनुष्टुब्गर्भा परातिशक्वरी, ४८ पुरोऽनुष्टुप्, ५१ त्र्यवo षट्o अनुष्टुब्गर्भा ककुम्मती शक्वरी, ५२ पञ्च॰ अनुष्टुब्गर्भा परातिजगती, ५७ पुरोतिजागता जगती, ५८ पुरस्ताद् बृहती, ६१ पुरोबार्हता, ६३ परा विराट्।स॒त्यं बृ॒हदृ॒तमु॒ग्रं दी॒क्षा तपो॒ ब्रह्म॑ य॒ज्ञः पृ॑थि॒वीं धा॑रयन्ति ।सा नो॑ भू॒तस्य॒ भव्य॑स्य॒ पत्न्यु॒रुं लो॒कं पृ॑थि॒वी नः॑ कृणोतु

bhūmisūktam| 1-63 atharvā| bhūmiḥ|triṣṭup, 2 bhurik, 4-6, 10,38 tryavasānā ṣaṭ-padā jagatī, 7 prastārapaṅktiḥ, 8, 11 tryavao ṣaṭo virāḍaṣṭiḥ, 9 parānuṣṭup, 12-13, 15 pañcapadā śakvarī (12-13 tryavao), 14 mahābṛhatī, 16, 21 ekāvao sāmnī triṣṭup, 18 tryavao ṣaṭo triṣṭubanuṣṭubgarbhātiśakvarī, 19, 20 purobṛhatī (20 virāṭ) 22 tryavao ṣaṭo virāḍatijagatī, 23 pañcapadā virāḍatijagatī, 24 pañcao anuṣṭubgarbhā jagatī, 25 tryavao saptao uṣṇiganuṣṭubgarbhā śakvarī, 26-28, 33, 35, 39-41, 50,53-54, 56, 59, 63 anuṣṭup (53 purobārhatā), 30 virāḍ gāyatrī, 32 purastājjyotiḥ, 34 tryavao ṣaṭo triṣṭubbṛhatīgarbhātijagatī, 36 viparītapādalakṣmā paṅktiḥ 37 tryavao pañcao śakvarī, 41 ṣaṭo kakummatī śakvarī, 42 svarāḍanuṣṭup, 43 virāḍāstārapaṅktiḥ, 44-45, 49 jagatī, 46 ṣaṭ pao anuṣṭubgarbhā parā śakvarī, 47 ṣaṭ pao uṣṇiganuṣṭubgarbhā parātiśakvarī, 48 puro'nuṣṭup, 51 tryavao ṣaṭo anuṣṭubgarbhā kakummatī śakvarī, 52 pañca॰ anuṣṭubgarbhā parātijagatī, 57 purotijāgatā jagatī, 58 purastād bṛhatī, 61 purobārhatā, 63 parā virāṭ| satyaṃ bṛhadṛtamugraṃ dīkṣā tapo brahma yajñaḥ pṛthivīṃ dhārayanti | sā no bhūtasya bhavyasya patnyuruṃ lokaṃ pṛthivī naḥ kṛṇotu

हिन्दी अर्थ

६. समग्रपृथिवी को माता जान कर् इसे नमस्कार करना चाहिए, इस के प्रति नतमस्तक होना चाहिए (२६) । उक्छृष्ट बनाते रहँ (३०) ताकि इनका पतन न हो (३१) 1 ८ पृथिवी पर महावंष तथा महाघाती शस्त्रास्त्र न होने चाहिए . पृथिवी परम-पेच्वयं वाले व्यक्ति का, श्चासक रूप मे,.वरण

English

A hymn of prayer and praise to Prithivī or deified Earth Truth, high and potent Law, the Consecrating Rite, Fervour,

अध्याय १२

श्लोक 1.2

अ॒सं॒बा॒धं ब॑ध्य॒तो मा॑न॒वानां॒ यस्या॑ उ॒द्वतः॑ प्र॒वतः॑ स॒मं ब॒हु।नाना॑वीर्या॒ ओष॑धी॒र्या बिभ॑र्ति पृथि॒वी नः॑ प्रथतां॒ राध्य॑तां नः

asaṃbādhaṃ badhyato mānavānāṃ yasyā udvataḥ pravataḥ samaṃ bahu| nānāvīryā oṣadhīryā bibharti pṛthivī naḥ prathatāṃ rādhyatāṃ naḥ

हिन्दी अर्थ

२३० भरथवेवेद-माष्य कां १२।सु०. १. जैसे कि भिन्न भिन्न जल परस्पर मिल कर एकीभूतं हो जाते है । . इस एकी- भाव को “सामञ्जस्य कहा हैँ । का एकीभूतं हृदय परमेश्वरः के प्रति लगा हृभ्रा होना चाहिए, सांसारिक' भोगो मे नही, भौर “सत्येनावृतम्” सच्चाई.से धिरा होना चाहिए । पेखा एकीभूत हृदय भ्रमृत होता है, मरा हृभ्रा सा नहीं होता, सदा उन्नतिशील,

English

Indra, give us great possessions May Earth, may Prithivī, always protected with ceaseless care by

अध्याय १२

श्लोक 1.3

यस्यां॑ समु॒द्र उ॒त सिन्धु॒रापो॒ यस्या॒मन्नं॑ कृ॒ष्टयः॑ संबभू॒वुः ।यस्या॑मि॒दं जिन्व॑ति प्रा॒णदेज॒त् सा नो॒ भूमिः॑ पूर्व॒पेये॑ दधातु

yasyāṃ samudra uta sindhurāpo yasyāmannaṃ kṛṣṭayaḥ saṃbabhūvuḥ | yasyāmidaṃ jinvati prāṇadejat sā no bhūmiḥ pūrvapeye dadhātu

हिन्दी अर्थ

२३६ । अथववेद-माष्व कां १२॥. सुर श (सस्यम्) तु पर याथ-साय' कैटने को स्थान. (महत्) बड़ा है, (गहत तु परिमाम भें बड़ी (बभूविथ) हई है, (ते) तेरा (वेगः) सूय भरधिष्ठाता 1 (मन्तं ११) भूमि के निवासियों के फारस्परिक व्यवहारे. ष (रश्षति) रक्षा करता है (अप्रमादम्) सवा सावधान हो कर । (भूमे) हे होने चाहिए जिन से कि वे परस्पर एक दुसरे के प्रति. रच्किर हो जश्, भर.

English

Earth, Earth is my Mother. Parjanya is my Sire; may he promote me.

अध्याय १२

श्लोक 1.4

यस्या॒श्चत॑स्रः प्र॒दिशः॑ पृथि॒व्या यस्या॒मन्नं कृ॒ष्टयः॑ संबभू॒वुः ।या बिभ॑र्ति बहु॒धा प्रा॒णदेज॒त् सा नो॒ भूमि॒र्गोष्वप्यन्ने॑ दधातु

yasyāścatasraḥ pradiśaḥ pṛthivyā yasyāmannaṃ kṛṣṭayaḥ saṃbabhūvuḥ | yā bibharti bahudhā prāṇadejat sā no bhūmirgoṣvapyanne dadhātu

हिन्दी अर्थ

पृथिवी.पर एेसा राज्य होना चाहिए फि किसी अवस्था मे भी, किसी से, हमे व्यथां न प्राप्त हो कां १२१ सुऽ भथववेवेद-माष्य २४३ (वि्रतीम्) धारण करती हई (भूमिम्) उत्वादिकां पुथिवी के प्रति

English

Lover of fatness, bearer of oblation, men enkindle him. Dark-kneed, invested with a fiery mantle, Prithivī sharpen me and give me splendour!

अध्याय १२

श्लोक 1.5

यस्यां॒ पूर्वे॑ पूर्वज॒ना वि॑चक्रि॒रे यस्यां॑ दे॒वा असु॑रान॒भ्यव॑र्तयन्।गवा॒मश्वा॑नां॒ वय॑सश्च वि॒ष्ठा भगं॒ वर्चः॑ पृथि॒वी नो॑ दधातु

yasyāṃ pūrve pūrvajanā vicakrire yasyāṃ devā asurānabhyavartayan| gavāmaśvānāṃ vayasaśca viṣṭhā bhagaṃ varcaḥ pṛthivī no dadhātu

हिन्दी अर्थ

है ¦. पृथिवी जब द्रवावस्था भें थौ उस समय पृथिवी स्वयं प्रकाल रूपा थी । उस समय पृथिवी में भराग्नेय ज्वालापं उठती थी--दन्हं “मम्नेयः" के लिये है। देव कोटिके लोग मोक्ष.के भ्रधिकारीषहेतेर्हैः वृत्र कोटि के पृथि वृत्रो का परादान अर्थात् संहार करती रहे, भरौर देवो का उदार. १. सपं भर्थात् सरपंभ है मन्दगति से चलना । पृथिवी गरचपि महावेग से बबती है (मन्व १०) , परन्तु इख के वेग पूवक. चलने की अनुभूति ह्मे नहीं होती, इष लिये इस के चलने. को सपं भर्यात् सरपं कटा है । द्य । अथववेद-भाष्य काऽ १२ । सू° १

English

With our right foot and with our left we will not reel upon the earth. I speak to Prithivī the purifier, to patient Earth who groweth strong through Brahma.

अध्याय १२

श्लोक 1.6

वि॒श्वं॒भ॒रा व॑सु॒धानी॑ प्रति॒ष्ठा हिर॑ण्यवक्षा॒ जग॑तो नि॒वेश॑नी ।वै॒श्वा॒न॒रं बिभ्र॑ती॒ भूमि॑र॒ग्निमिन्द्र॑ऋषभा॒ द्रवि॑णे नो दधातु

viśvaṃbharā vasudhānī pratiṣṭhā hiraṇyavakṣā jagato niveśanī | vaiśvānaraṃ bibhratī bhūmiragnimindraṛṣabhā draviṇe no dadhātu

हिन्दी अर्थ

कर्मो वाले (जनम्) जनसमुदाय का (बिभ्रती) भरंण-पोषण करती हई, कदन करती हई (षेनुः) दुषार गौ, (सहस्र धाराः दुहाम्) दूषकौ . जाना, तथा विचार-भेद के कारण धर्मो भौर कर्मो मेंभेदकाहो जाना - भनिवायं है,-दइन का पूर्वं विचार कर के मन्त्र मे “विवाचसंम्, तथां नाना- . धर्माणम्” का कथन हृभा है, भौर सदुपदेश दिया है "यथौकरसम्" द्वस ।

English

The purifier, shrinking from the Serpent, she who held fires that lie within the waters, Who gives as prey the God-blaspheming Dasyus, Earth choosing

अध्याय १२

श्लोक 1.7

यां रक्ष॑न्त्यस्व॒प्ना वि॑श्व॒दानीं॑ दे॒वा भूमिं॑ पृथि॒वीमप्र॑मादम्।सा नो॒ मधु॑ प्रि॒यं दु॑हा॒मथो॑ उक्षतु॒ वर्च॑सा

yāṃ rakṣantyasvapnā viśvadānīṃ devā bhūmiṃ pṛthivīmapramādam| sā no madhu priyaṃ duhāmatho ukṣatu varcasā

हिन्दी अर्थ

किया है । पृथिवी को बेटी कहा है भौर सूयं को पिता । बेटियां पिताको भिलने या उस की सेवा के लिये पित्रगृह मे जाया दही करती है । उं हकं पृथिवि दुच्छुना मित. कहस्षीकां रको अपं बाघयास्मत्॥४९॥ (पृथिवि) है पृथिवि! (ते) तेरे यि जो (भरारण्याः पशवः) अरण्यवासी पशु है, तथा (वने हिताः मृगाः) वन मे निहिते मुग ईँ, तथा. ल हृशरा है (उशा० ३।४२; ३।द४) 1

English

May Bhaga share and aid the task and Indra come to lead the way. May she, the Earth, whereon men sing and dance with varied shout and noise,

अध्याय १२

श्लोक 1.8

यार्ण॒वेऽधि॑ सलि॒लमग्र॒ आसी॒द् यां मा॒याभि॑र॒न्वच॑रन् मनी॒षिणः॑ ।यस्या॒ हृद॑यं पर॒मे व्योऽमन्त्स॒त्येनावृ॑तम॒मतं॑ पृथि॒व्याः।सा नो॒ भूमि॒स्त्विषिं॒ बलं॑ रा॒ष्ट्रे द॑धातूत्त॒मे

yārṇave'dhi salilamagra āsīd yāṃ māyābhiranvacaran manīṣiṇaḥ | yasyā hṛdayaṃ parame vyo'mantsatyenāvṛtamamataṃ pṛthivyāḥ| sā no bhūmistviṣiṃ balaṃ rāṣṭre dadhātūttame

हिन्दी अर्थ

श्रषवा .दुःशनी करु कुतिया के सदुश 4 कां०.१२ 1 सूर भ्रथरवेवेद-माष्य २५५ स्वभाव वाले मनुष्य को है पृथिवी ! (ईतः) इस हमरि निवासस्थान से (अ्रपवाधय) दुरःकरदे। .. पशूरभरो, तथा वेतो को खा जाने मृगो को, तथा चोरों दाकुभौ रादि मनुष्यों

English

Whereon men meet in battle, and the war-cry and the drum resound, May she drive off our foemen, may Prithivī rid me of my foes.

अध्याय १२

श्लोक 1.9

यस्या॒मापः॑ परिच॒राः स॑मा॒नीर॑होरा॒त्रे अप्र॑मादं॒ क्षर॑न्ति ।सा नो॒ भूमि॒र्भूरि॑धारा॒ पयो॑ दुहा॒मथो॑ उक्षतु॒ वर्च॑सा

yasyāmāpaḥ paricarāḥ samānīrahorātre apramādaṃ kṣaranti | sā no bhūmirbhūridhārā payo duhāmatho ukṣatu varcasā

हिन्दी अर्थ

जने वनम मृगो का वणेन है, भरतः वन भद्र नीं । वनन्=वनु याचने, तथा वन संभक्तौ । वानप्रस्थी वन की याचन करते है, तथा इन (थै) जौ (गन्र्वाः) हिसा करने के निमित्त घूमते रहते है, (भप्सं- रसः) तथां धमपितगतिवाले है, (ये च) भौर जो (भरायाः) भदानी, किमिदं किंमिदमितिः वा (निर ६।३।१.१), कि “भब क्या होगा,-यह्-क्या है,.यह क्या है""--इस प्रकार प्रष्नपू्ंक दूसरों की गतिविधि की टोह मे समग्र पृथिवी के अ्रधिष्ठाता (मन्व ११) से यह याचना की गई नहीं । क्योंकि इन का मी “ये” पद हासा निदे किया है) भरायाः भय

English

On whom is food, barley and rice, to whom these Races Five belong, Homage to her, P arjanya’s wife, to her whose marrow is the rain!

अध्याय १२

श्लोक 1.10

याम॒श्विना॒वमि॑मातां॒ विष्णु॒र्यस्यां॑ विचक्र॒मे।इन्द्रो॒ यां च॒क्र आ॒त्मने॑ऽनमि॒त्रां शची॒पतिः॑ ।सा नो॒ भूमि॒र्वि सृ॑जतां मा॒ता पु॒त्राय॑ मे॒ पयः॑

yāmaśvināvamimātāṃ viṣṇuryasyāṃ vicakrame| indro yāṃ cakra ātmane'namitrāṃ śacīpatiḥ | sā no bhūmirvi sṛjatāṃ mātā putrāya me payaḥ

हिन्दी अर्थ

करती ह, वच्च करा नहीं (३७) । १०. पृथिवी पर नाचनागाना श्रादि मी होते रहने चाहिए (४१) । - ११. दिव्यकोटि के रिल्ि्यो द्वारा नगरों का निर्माण करना चाहिए (४३), तथा दि्ा्रो को रमणीय बनाना चाहिए (४३) । १२. भिन्न-भिन्न भाषाभाषिथो तथा नाना षरमियों को एक परि-

English

Brahma, and Sacrifice uphold the Earth. May she, the Queen of all that is and is to be, may Prithivī make ample space and room for

अध्याय १२

श्लोक 1.11

गि॒रय॑स्ते॒ पर्व॑ता हि॒मव॒न्तोऽर॑ण्यं ते पृथिवि स्यो॒नम॑स्तु ।ब॒भ्रुं कृ॒ष्णां रोहि॑णीं वि॒श्वरू॑पां ध्रु॒वां भूमिं॑ पृथि॒वीमिन्द्र॑गुप्ताम्।अजी॒तोऽह॑तो॒ अक्ष॒तोऽध्य॑ष्ठां पृथि॒वीम॒हम्

girayaste parvatā himavanto'raṇyaṃ te pṛthivi syonamastu | babhruṃ kṛṣṇāṃ rohiṇīṃ viśvarūpāṃ dhruvāṃ bhūmiṃ pṛthivīmindraguptām| ajīto'hato akṣato'dhyaṣṭhāṃ pṛthivīmaham

हिन्दी अर्थ

वार के संदुष परस्परं प्रमपूरवंक रहना चाहिए (यथौकसम्, ४५) । १३- पृथिवी पर के मागं भद्र भ्रौर पापी दोनों के विचरने के लिये हँ १४. पृथित्री माता ङ सब पुत्रो -पुतियो को पृथिवी माता को सम्पत्ति के भरोग में समानाधिकार है (६०) । व १५. राज्य-कर स्वेच्छापुवंक देना चाहिए (६२) । भुर : कोलो, सत्यासत्य की परीक्षा कर के बोलो (८) । । कर्° १२। सू १ परथ्वेवेद-माष्य २२५ सत्यं बृहदृतमुग्रं दी्रा तपो बहम यगः पृथिवीं धारयन्ति ।

English

us. Not over awded by the crowd of Manu’s sons, she who hath many heights and floods and

अध्याय १२

श्लोक 1.12

यत् ते॒ मध्यं॑ पृथिवि॒ यच्च॒ नभ्यं॒ यास्त॒ ऊर्ज॑स्त॒न्वः संबभू॒वुः ।ता सु॑ नो धेह्य॒भि नः॑ पवस्व मा॒ता भूमिः॑ पु॒त्रो अ॒हं पृ॑थि॒व्याः।प॒र्जन्यः॑ पि॒ता स उ॑ नः पिपर्तु

yat te madhyaṃ pṛthivi yacca nabhyaṃ yāsta ūrjastanvaḥ saṃbabhūvuḥ | tā su no dhehyabhi naḥ pavasva mātā bhūmiḥ putro ahaṃ pṛthivyāḥ| parjanyaḥ pitā sa u naḥ pipartu

हिन्दी अर्थ

.सखमग्र पृथिवी की सेवा के लिये व्रतग्रहण, (तपः) तपदचर्या.का जवन, तथा दिन्यजनों की पुजा, उन का सत्संग, तथा त्यागभावना (पृथिवीम्) समग्र पृथिवी क्रा (धारगरन्ति) .घारण कदे ह । (सा). वहु पृथिवो (नः) . काण्ड १२। सूक्त. १ भूमि माता का वर्णेन करता है, संकुचित राषटर- = शरुमियों का नदीं । मात्रा निज समग्र शरीर रूप मेँ माता है, उस का ्रत्येक्

English

level plains; She who bears plants endowed with many varied powers, may

अध्याय १२

श्लोक 1.13

यस्यां॒ वेदिं॑ परिगृ॒ह्णन्ति॒ भूम्यां॒ यस्यां॑ य॒ज्ञं त॒न्वते॑ वि॒श्वक॑र्माणः ।यस्यां॑ मी॒यन्ते॒ स्वर॑वः पृथि॒व्यामू॒र्ध्वाः शु॒क्रा आहु॑त्याः पु॒रस्ता॑त्।सा नो॒ भूमि॑र्वर्धय॒द् वर्ध॑माना

yasyāṃ vediṃ parigṛhṇanti bhūmyāṃ yasyāṃ yajñaṃ tanvate viśvakarmāṇaḥ | yasyāṃ mīyante svaravaḥ pṛthivyāmūrdhvāḥ śukrā āhutyāḥ purastāt| sā no bhūmirvardhayad vardhamānā

हिन्दी अर्थ

, २२६ ्रथ्वेवेद-माष्य कार १२। सु° १ मे है॥ इस समग्र पृथिवी के भारण के लिये प्रजाभ्नो ्रौर शासको मे जिन- परस्पर विरोध तथा संकुचित राष्टर-मावनाभ् के रहते, पूथिवी, युद्धो तथा परस्पर विद्धो की स्थली बन कर, विनारा का कारण बनी रहती है । परिस्थितियों के क्रारण उसउस प्रदेशा के निवासियों के भूत तथा भावी जीवनो मे मेद तथा वेषम्य का होना स्वाभाविक है ।

English

Prithivī for us spread wide and favour us. In whom the sea, and Sindhu, and the waters, in whom our food and corn-lands had their

अध्याय १२

श्लोक 1.14

यो नो॒ द्वेष॑त् पृथिवि॒ यः पृ॑त॒न्याद् योऽभि॒दासा॒न्मन॑सा॒ यो व॒धेन॑ ।तं नो॑ भूमे रन्धय पूर्वकृत्वरि

yo no dveṣat pṛthivi yaḥ pṛtanyād yo'bhidāsānmanasā yo vadhena | taṃ no bhūme randhaya pūrvakṛtvari

हिन्दी अर्थ

(मानवानाम्) मननशील मनुष्यो करी (असंबाघम्) अरत्य-भी -सामूहिक-व्राधा का (वष्यतः) वध करने वाली, हटा देने वाली (यस्याः) जिस पृथिवी के (उद्वतः) ऊचे (प्रवतः) इलंवे, तथो (समम्) समतल प्रदे (बहु) बहत है । (या) जो (नानावीर्याः श्रोषधीः) विविध शक्तियों वाली ्ोषधियों को (नमति) धारण करती है (पृथिवी) वह 'पुथिवी, (नः) सिद्ध तथा सफल करे । ॥ि , जो मननशील मनुष्य है, उन के सामूहिक प्रयत्नो मे यदि कोई बाषा उपस्थित होती है तो वे, निज मनन राक्ति हारा, उस बाधा का निरा- करण कर सकेते है, रोर पाथिव सानो के सहारे सफलता श्राप्त कर सकते है । इस दृष्टि से पृथिवी, उन की वाघाभों के निराकरण मे, हायक होती तथा भन्न में (दधातु) स्थापित करे। कां० १२। सु १ भथवेवेद-माष्य , २२७;

English

being, In whom this all that breathes and moves is active, this Earth. assign us foremost rank and

अध्याय १२

श्लोक 1.15

त्वज्जा॒तास्त्वयि॑ चरन्ति॒ मर्त्या॒स्त्वं बि॑भर्षि द्वि॒पद॒स्त्वं चतु॑ष्पदः ।तवे॒मे पृ॑थिवि॒ पञ्च॑ मान॒वा येभ्यो॒ ज्योति॑र॒मृतं॒ मर्त्ये॑भ्य उ॒द्यन्त्सूर्यो॑ र॒श्मिभि॑रात॒नोति॑

tvajjātāstvayi caranti martyāstvaṃ bibharṣi dvipadastvaṃ catuṣpadaḥ | taveme pṛthivi pañca mānavā yebhyo jyotiramṛtaṃ martyebhya udyantsūryo raśmibhirātanoti

हिन्दी अर्थ

धारी जगत् (जिन्वति) संतुष्ट हा विचरता है. (सा भूमिः) वह उत्पादिका नाना विध कृषि कमं (संबभुः) होते रहे है, (सां) वह (बहुधा) बहुत प्रकारं करती है, (सा भूमिः) वहः भूमि लनः) हमे (गोषु) गौभरोमें (भपि भ्रन्ने) , (यस्याम्) जिस पुथिवी मेँ (पूर्वे) पूर्वं काल मे (पवंजनाः). पूरवंजो

English

station! She who is Lady of the earth’s four regions, in whom our food and corn-lands had their

अध्याय १२

श्लोक 1.16

ता नः॑ प्र॒जाः सं दु॑ह्रतां सम॒ग्रा वा॒चो मधु॑ पृथिवि धेहि॒ मह्य॑म्

tā naḥ prajāḥ saṃ duhratāṃ samagrā vāco madhu pṛthivi dhehi mahyam

हिन्दी अर्थ

पृथिवी भँ (देवाः) दिव्यकोटि के मनुष्य (भरसुरान्) भासुर स्वभाव वाले हमे (भगम्) पेदव तथा (वच॑ः) तेज (दधातु) प्रदान करे 1 १. -तथा इष्टयः मनुष्यनाम (निधं. १।३) , सम्मबतः षकाः ॥ (विदवम्मरा) सव का भरंण-पोषण करने वाली, (वसुधानी ).

English

being, Nurse in each place of breathing, moving creatures, this Earth. vouchsafe us kine with milk

अध्याय १२

श्लोक 1.17

वि॒श्व॒स्वं मा॒तर॒मोष॑धीनां ध्रु॒वां भूमिं॑ पृथि॒वीं धर्म॑णा धृ॒ताम्।शि॒वां स्यो॒नामनु॑ चरेम वि॒श्वहा॑

viśvasvaṃ mātaramoṣadhīnāṃ dhruvāṃ bhūmiṃ pṛthivīṃ dharmaṇā dhṛtām| śivāṃ syonāmanu carema viśvahā

हिन्दी अर्थ

(जगतः) जंगम प्राणियों को (निवेशनी ) वसाने वाली, (वैदवानरम्, हई, ( इन्द्रऋषमा) रऽ सूय वाली, (शरुमिः) उत्पादिका पृथिवी (नः) हमे (द्रविणे) धन तथा बल भें (दधातु). स्थापितं करे । (भग्रमादम्) प्रमादं रहित हो कर, (विदेवदानीम्) सदा या सब कों निजं सम्पत्तियां कां दान करने वाली (याम) जिसं (भरमिम्) उत्पादिका तथा (पृथिवीम्) विकलं प्रथिवी की (रन्ति) र्ना करते है, (सां) वेह तरह देती रहे, (भरथो) भ्रौर (वच॑सा). तेज से (उक्षतु) सींचती रहे । (या) जो पृथिवी (भमर) -पुराकालं भे; (अणवेऽभिः) जलवत् अकी

English

that fails not! On whom the men of old before us battled, on whom the Gods attacked the hostile demons,

अध्याय १२

श्लोक 1.18

महत् स॒धस्थं॑ मह॒ती ब॑भूविथ म॒हान् वेग॑ ए॒जथु॑र्वे॒पथु॑ष्टे ।म॒हांस्त्वेन्द्रो॑ रक्ष॒त्यप्र॑मादम्।सा नो॑ भूमे॒ प्र रो॑चय॒ हिर॑ण्यस्येव सं॒दृशि॒ मा नो॑ द्विक्षत॒ कश्च॒न

mahat sadhasthaṃ mahatī babhūvitha mahān vega ejathurvepathuṣṭe | mahāṃstvendro rakṣatyapramādam| sā no bhūme pra rocaya hiraṇyasyeva saṃdṛśi mā no dvikṣata kaścana

हिन्दी अर्थ

कां० -१२। सू १ भ्रयर्वबेद-माष्य २२९. (याम्) जिस पृथिवी में ( मनीषिणः ) मननशील मनुष्य ( मायाभिः ) पृथिव्याः) जिस पृथिवी . के प्रजाजनो का (हृदयम्) एकीभूत हृदय, श्रा था, (सा भूमिः) वह उपजाऊ पृथिवी (नः) हमारे (उत्तमे राष्ट)

English

The varied home of bird, and kine and horses, this Prithivī vouchsafe us luck and splendour! Firm standing-place, all-bearing, store of treasures, gold-breasted, harbourer of all that

अध्याय १२

श्लोक 1.19

अ॒ग्निर्भूम्या॒मोष॑धीष्व॒ग्निमापो॑ बिभ्रत्य॒ग्निरश्म॑सु ।अ॒ग्निर॒न्तः पुरु॑षेषु॒ गोष्वश्वे॑ष्व॒ग्नयः॑

agnirbhūmyāmoṣadhīṣvagnimāpo bibhratyagniraśmasu | agnirantaḥ puruṣeṣu goṣvaśveṣvagnayaḥ

हिन्दी अर्थ

कीहै। यचुर्वेद मं भी. कदा है कि “तद् दरे तदन्तिके” (४०।५) इस थो । कालान्तर मे सलिल रूपा पृथिवी दुढावस्था में राई । “येन चौरग्रा पुयिवी च दढा" (यजु ० २२।६) श्रथवं० १२।१।६० में मी पृथिवो का जल मे भवेश “शरणे रजसि" द्वारा दर्शाया है । -मायासिः; माया प्रज्ञानाम् (निघंऽ .३९)' 1 यह अद्रैतवादियो की माया नहः. न ही प्रकृतिरूपा । हृदयम = पृथिवी जड़ है चेतन नीं । जड़ में हृदय नहीं होताः ॥ यह हृदय, - पृथिवी से उत्पन्न मनुष्य जाति .का. हृदय ..है. ।. जब पृथिवी निवासो मनुष्य जाति . के हंवय, हृदय” कों सूचित किया है । तथा हृदय ५५३ किस प्रकार होने . चाहिए दसं क लिये कहा है कि "समञ्जन्तु 7: समोषो हदयानि नौ" (ऋ० १०।८५।४७), भ्र्थात् हदय, इसे प्रकारे शशोभूत होने चोदये

English

moveth. May Earth who bears Agni Vaisvānara, Consort of mighty

अध्याय १२

श्लोक 1.20

अ॒ग्निर्दि॒व आ त॑पत्य॒ग्नेर्दे॒वस्यो॒र्व॑१न्तरि॑क्षम्।अ॒ग्निं मर्ता॑स इन्धते हव्य॒वाहं॑ घृत॒प्रिय॑म्

agnirdiva ā tapatyagnerdevasyorva1ntarikṣam| agniṃ martāsa indhate havyavāhaṃ ghṛtapriyam

हिन्दी अर्थ

त्विषि भौर बलं प्रदानं करे । इस से प्रतीत होता है किः “सावं मौमश्चासन” संधष, तथा युद्ध समाप्त हो सकते है । भ्रभूत जल धारार्भोः वाली या. भरमूतरूप में धारण-पोषण करने वाली (मूमिः) भूमि, (नः) हमे; (पयः) दृष प्रादि (वृहाम्) प्रदान करे, (भ्रथो) नविरो के शूप मे रात्-दिन प्रवाहित होते रहते है । - कां० २ । सु° १ भथववेद-माष्य २३१

English

Gods who never slumber, May she pour out for us delicious nectar, may she bedew us with a flood of splendour.

अध्याय १२

श्लोक 1.21

अ॒ग्निवा॑साः पृथि॒व्यऽसित॒ज्ञूस्त्विषी॑मन्तं॒ संशि॑तं मा कृणोतु

agnivāsāḥ pṛthivya'sitajñūstviṣīmantaṃ saṃśitaṃ mā kṛṇotu

हिन्दी अर्थ

(याम्) जिस भूमि को (भ्रदिवनौ) रात-भौर-दिनिने (भ्रमिमा- . (विचक्रमे) विशेषतया या विविध स्थानों मे पादविक्षेप' किया है 1 (राची- पदाथं .(विसुजताम्) प्रदान करे । चक्कर लगा रटे ह मानो भूमि को माप रहे है। भूमिः माता=समग्र भ्र ,

English

She who at first was water in the ocean, whom with their wond- rous powers the sages followed,

अध्याय १२

श्लोक 1.22

भूम्यां॑ दे॒वेभ्यो॑ ददति य॒ज्ञं ह॒व्यमरं॑कृतम्।भूम्यां॑ मनु॒ष्याऽ जीवन्ति स्व॒धयान्ने॑न॒ मर्त्याः॑ ।सा नो॒ भूमिः॑ प्रा॒णमायु॑र्दधातु ज॒रद॑ष्टिं मा पृथि॒वी कृ॑णोतु

bhūmyāṃ devebhyo dadati yajñaṃ havyamaraṃkṛtam| bhūmyāṃ manuṣyā' jīvanti svadhayānnena martyāḥ | sā no bhūmiḥ prāṇamāyurdadhātu jaradaṣṭiṃ mā pṛthivī kṛṇotu

हिन्दी अर्थ

जा सकतीं । भ्रखण्डित भूमि का -सावंमौमदासन ही भूमि माता के प्रत्येक . पुत्र को दुग्ध रादि पदार्थं प्रदान कर सकता है । दष पिलाने वाली माता, निज समग्र शरीर ख्य में माता है, निज खण्डित भवयवों मे माता नहीं । है । शचीपतिः; शची प्रज्ञा वथा कमं (निषं० ३।९; तथा ८।१ । श्रदिवनौ =भ्रर्वारोही दों भण५९ ०9०४, -जो कि भूमि को नापते (पृथिवि) है पृथिवी ! (ते) तेरे (गिरयः) पहाड़, तथा (हिमवन्त: नम् भ्रस्तु) सुखकारी हो । (बभरम्) भरण-पोषण करने वाली या भूरे रग-

English

May she whose heart is in the highest heaven, compassed about wit h truth, and everlasting, May she, this Earth, bestow upon us lustre, and grant us power in loftiest dominion.

अध्याय १२

श्लोक 1.23

यस्ते॑ ग॒न्धः पृ॑थिवि संब॒भूव॒ यं बिभ्र॒त्योष॑धयो॒ यमापः॑ ।यं ग॑न्ध॒र्वा अ॑प्स॒रस॑श्च भेजि॒रे तेन॑ मा सुर॒भिं कृ॑णु॒ मा नो॑ द्विक्षत॒ कश्च॒न

yaste gandhaḥ pṛthivi saṃbabhūva yaṃ bibhratyoṣadhayo yamāpaḥ | yaṃ gandharvā apsarasaśca bhejire tena mā surabhiṃ kṛṇu mā no dvikṣata kaścana

हिन्दी अर्थ

रूपाम्) इस प्रकार विविधरूपों वाली, (षुवाम्) धुव, निदचल (भूमिम्) का, (भ्रजीतः) हानि रहित, (अहत हननरदित, (अरक्षतः) घावरहित नहीं हो सकत्रा, अपितु इन गुणो वाली . समग्र पृथिवी ही हो सकती है। “आावेमौमशासन” चाहिए । इस के क्षासक-को “इन्द्रेन” का है (्रयरवे. ३।४।६) ।

English

On whom the running universal waters flow day and night with never-ceasing motion, May she with many streams pour milk to feed us, may she bedew us with a flood of

अध्याय १२

श्लोक 1.24

यस्ते॑ ग॒न्धः पुष्क॑रमावि॒वेश॒ यं सं॑ज॒भ्रुः सू॒र्याया॑ विवा॒हे।अम॑र्त्याः पृथिवि ग॒न्धमग्रे॒ तेन॑ मा सुर॒भिं कृ॑णु॒ मा नो॑ द्विक्षत॒ कश्च॒न

yaste gandhaḥ puṣkaramāviveśa yaṃ saṃjabhruḥ sūryāyā vivāhe| amartyāḥ pṛthivi gandhamagre tena mā surabhiṃ kṛṇu mā no dvikṣata kaścana

हिन्दी अर्थ

अवे ३।४।१) भी कहा है, तथा “विरपति" भी । कां०.१२। सु १ अव्ववेद-बाष्य २३३ समतल के नीचे, (यव् च) भौर जो (कम्बम्) केनद जाग मे खनिज पदां है, तथ (अः ऊरः) जो अल-खथा-प्राणपदर शन्न (ते तन्वः) तेरे विस्त सम्रतल मप्रम से (संबभूवुः) पदा होते है, (तासु) उनमें (दः) हमे (बेहि) भविनी (माता) माता , (्रहष्) यै (शृयिव्याः धुक्र) पृथिवी का भूच हु शरीर, नव भीर भ्रात्मा को पवित्र बनाना चाहिए

English

splendour. She whom the Asvins measured out, o’er whom the foot of

अध्याय १२

श्लोक 1.25

यस्ते॑ ग॒न्धः पुरु॑षेषु स्त्री॒षु पुं॒सु भगो॒ रुचिः॑ ।यो अश्वे॑षु वी॒रेषु॒ यो मृ॒गेषू॒त ह॒स्तिषु॑ ।क॒न्याऽयां॒ वर्चो॒ यद् भू॑मे॒ तेना॒स्मां अपि॒ सं सृ॑ज॒ मा नो॑ द्विक्षत॒ कश्च॒न

yaste gandhaḥ puruṣeṣu strīṣu puṃsu bhago ruciḥ | yo aśveṣu vīreṣu yo mṛgeṣūta hastiṣu | kanyā'yāṃ varco yad bhūme tenāsmāṃ api saṃ sṛja mā no dvikṣata kaścana

हिन्दी अर्थ

=्स्येक पृथिववाञ्ीः को, नादिये कि वह् पृथिवी को निज भाता जान कर, पविन्र भावना से, पृश्चिवी माता की. सेवां तथा रक्षा करत्र कं तत्पर रहे । पृथिवी मावा. है, इस के पायिव भ्रंशो से प्रत्येक शबर छरीर असा है तश यही भाता खाद्य-पेय पदार्थे दे कर हमारी रक्षा कर.रहो है । इस पुभिवी शाता मे पर्जन्य भर्थात् मेष निज जल रूपी वीयं सचता है, इव रहने का सन्दे दिया है । निज राष्ट्िय आत्रनाधो को, सावभौम यवनां क खा सजन्विब करना चहिये । ¢

English

Vishnu strode, Whom Indra, Lord of Power and Might, freed from all foemen for himself,

अध्याय १२

श्लोक 1.26

शि॒ला भूमि॒रश्मा॑ पां॒सुः सा भूमिः॒ संधृ॑ता धृ॒ता।तस्यै॒ हिर॑ण्यवक्षसे पृथि॒व्या अ॑करं॒ नमः॑

śilā bhūmiraśmā pāṃsuḥ sā bhūmiḥ saṃdhṛtā dhṛtā| tasyai hiraṇyavakṣase pṛthivyā akaraṃ namaḥ

हिन्दी अर्थ

, (विष्वकर्माणः). विविष प्रकार के कमो को करने. वाले कारोग् २३४ भरथरव॑वेद-भाष्य कां०. १२५॥सु० १ युषस्तम्भ (मीयन्ते) गाड़े या निमित कयि जाते' है, (सा) वह पृथिवी (पृथिवि) है पृथिवि.) (यः) जो राजाः (नः दवेषत्).हमारेःसाथ देष करता है, (यः) जो (पृततन्यात्) सेना द्वारा आक्रमण करता है, (यः) जो हमारे उस शत्रु को (रन्धय) वशीभूत कर 1

English

May Earth pour out her milk for us, a mother unto me her son. O Prithivī, auspicious be thy woodlands, auspicious be thy hills and snow-clad mountains.

अध्याय १२

श्लोक 1.27

यस्यां॑ वृ॒क्षा वा॑नस्प॒त्या ध्रु॒वास्तिष्ठ॑न्ति वि॒श्वहा॑ ।पृ॒थि॒वीं वि॒श्वधा॑यसं धृ॒ताम॒च्छाव॑दामसि

yasyāṃ vṛkṣā vānaspatyā dhruvāstiṣṭhanti viśvahā | pṛthivīṃ viśvadhāyasaṃ dhṛtāmacchāvadāmasi

हिन्दी अर्थ

धर भ्राक्रमण भादि करे तो .सावंमौम-संगठंन उसे भ्रपने वंश में रखे । रन्व- (पृथिवि) है पृथिवि ! (त्वत् जाताः) तुक से षदं हए (मर्त्या 1 ° १, देलो भथर्वं० (१२।१।१) २-- पृथिवी बासियों को चाहिए.कि जो कामे करना हौ उसे दीघर करं, भालस्य भौर प्रमाद न करे ।

English

Unslain, unwounded, unsubdued, I have set foot upon the Earth,

अध्याय १२

श्लोक 1.28

उ॒दीरा॑णा उ॒तासी॑ना॒स्तिष्ठ॑न्तः प्र॒क्राम॑न्तः ।प॒द्भ्यां द॑क्षिणस॒व्याभ्यां॒ मा व्य॑थिष्महि॒ भूम्या॑म्

udīrāṇā utāsīnāstiṣṭhantaḥ prakrāmantaḥ | padbhyāṃ dakṣiṇasavyābhyāṃ mā vyathiṣmahi bhūmyām

हिन्दी अर्थ

का०.१२।. सु १ भथवंवेद-भाष्य २३५ दो परो वाले मनुष्यों भौर पक्षियों का.धारण-पोषण करती है, (त्वम्) तु ( चतु» ष्पदः चार पैरो वाले पशुं का.धारण-पोषण करती है । (इमे) ये (पञ्च मनुष्यो केः लिये (उद्यन् सूर्यः) उदित होता. हमरा सूरय, (रदिमभिः) रदिभयों (ताः समग्राः प्रजाः वे सब प्रजा, (नः) हम सबं के लिये, (सं दुहताम्) परस्पर मिल कर, है पृथिवी ! तेरा दोहन करर, (पृथिवि) हे पृथिवी. ! . :(मह्यम्ः) मु प्रत्येक को (वाचः मधू) वाणी का मिरस (षेदि) सभी मनुष्य परस्पर मिल कर, सहोद्ोग द्वारा, पृथिवी का दोहन

English

On earth brown, black, ruddy and every-coloured, on the firm earth that Indra guards from danger.

अध्याय १२

श्लोक 1.29

वि॒मृग्व॑रीं पृथि॒वीमा व॑दामि क्ष॒मां भूमिं॒ ब्रह्म॑णा वावृधा॒नाम्।ऊर्जं॑ पु॒ष्टं बिभ्र॑तीमन्नभा॒गं घृ॒तं त्वा॒भि नि षी॑देम भूमे

vimṛgvarīṃ pṛthivīmā vadāmi kṣamāṃ bhūmiṃ brahmaṇā vāvṛdhānām| ūrjaṃ puṣṭaṃ bibhratīmannabhāgaṃ ghṛtaṃ tvābhi ni ṣīdema bhūme

हिन्दी अर्थ

कर । प्रत्येक मनुष्य में वाणो का माधुर्यं होना चाहिए, तमी संगठन सुदृढ हो. सकता है ॥ परस्पर-की निन्दा; कटु आलोचना, तथा तीखी वाणी होने पर दिल फट जाते, मनोमालिन्य हो जाता है, संगठन टट जाता है । विद्वस्वं (मातरमोषधीनां धुवाँ भूमिः पृथिवीं धर्मणा भरताम् । शिवां स्योनामत्चुं चरेमं विश्वहा ॥१७॥ विस्तृत पुथिवी पर, (विश्वहा ) सब दिन, (रनु) परस्पर की अनुकूलता, में घर्म॑णा =भ्रथवं ° .(१२।१।१) । धर्मं का परिणाम हैः पृथिवी का- चिवल्पा तंथा स्योनरूधा होना । :विष्वहा = विच्वाहा ।

English

O Prithivī, thy centre and thy navel, all forces that have issued from thy body Set us amid those forces; breathe upon us. I am the son of

अध्याय १२

श्लोक 1.30

शु॒द्धा न॒ आप॑स्त॒न्वेऽ क्षरन्तु॒ यो नः॒ सेदु॒रप्रि॑ये॒ तं नि द॑ध्मः ।प॒वित्रे॑ण पृथिवि॒ मोत् पु॑नामि

śuddhā na āpastanve' kṣarantu yo naḥ sedurapriye taṃ ni dadhmaḥ | pavitreṇa pṛthivi mot punāmi

हिन्दी अर्थ

है, (भ्रग्निम्) अम्नि को (आपः) जल करते "५ : १ चदोषदं कपा भूवार्लो के सूचक है, वे। इतत का कोई भन्य. १ यदो पद काः सूनानो क सूचक ह, इत का कई मत्य जम्निन ह है ह्म, १२1 सु१ भ्रथ्ववेद-भाष्य २३७ बसी हुई है, (श्रसितन्ूः) यह पृथिवी बन्वन को -नहीं जानती, पृथिवी (मा)

English

Earth on whose surface they enclose the altar, and all-performers spin the thread of worship; In whom the stakes of sacrifice, resplendent, are fixed and raised on high before the oblation,

अध्याय १२

श्लोक 1.31

यास्ते॒ प्राचीः॑ प्र॒दिशो॒ या उदी॑ची॒र्यास्ते॑ भूमे अध॒राद् याश्च॑ प॒श्चात्।स्यो॒नास्ता मह्यं॒ चर॑ते भवन्तु॒ मा नि प॑प्तं॒ भुव॑ने शिश्रिया॒णः

yāste prācīḥ pradiśo yā udīcīryāste bhūme adharād yāśca paścāt| syonāstā mahyaṃ carate bhavantu mā ni paptaṃ bhuvane śiśriyāṇaḥ

हिन्दी अर्थ

सम्यक् उत्ररूपः (कृणोतु) करे । । । ष्रोयः भरकर होती है । भ्रोषधियों मे निहित अग्नि भ्रोषधियो के जलाने पर बिदवशम्मुवम्--सब .रोगं : को शान्त" करति वाली ग्नि । अदमा..अरथातु वियत् रूप म श्रनि भकटं होती है । पूरो, अष्वों तथां गौभों मं जाठ- राग्नि तथा क्षारीरिक तापमान .के रूप में ण्ट ्रन्नियां होती हँ एद भरथरवेवेद-माष्य कर. १२। सु १

English

may she, this Earth, prospering, make us prosper. The man who hates us, Earth! who fights against us, who threaten us with thought or deadly

अध्याय १२

श्लोक 1.32

मा नः॑ प॒श्चान्मा पु॒रस्ता॑न्नुदिष्ठा॒ मोत्त॒राद॑ध॒रादु॒त।स्व॒स्ति भू॑मे नो भव॒ मा वि॑दन् परिप॒न्थिनो॒ वरी॑यो यावया व॒धम्

mā naḥ paścānmā purastānnudiṣṭhā mottarādadharāduta| svasti bhūme no bhava mā vidan paripanthino varīyo yāvayā vadham

हिन्दी अर्थ

(श्ररंकृतम्, हव्यम्) तथा भलत हवियां (ददति) भेटं देते है । (भू- लरदष्टिम्) जरावस्था तक पहुंबने वाला (कुणोतु) करे । परस्पर सम्बन्ध दर्वाया है । यथा--. गीता म मी इस पारस्परिक सम्बन्ध को निम्नलिखित रलोक दाराः दर्चाया है । यथा- निः . जवान्मावयतानेन ते देवा भावयन्तु बः ।

English

weapon, make him our thrall as thou hast done aforetime. Produced from thee, on thee move mortal creatures: thou bearest them, both quadruped and

अध्याय १२

श्लोक 1.33

याव॑त् तेऽभि वि॒पश्या॑मि॒ भूमे॒ सूर्ये॑ण मे॒दिना॑ ।ताव॑न्मे॒ चक्षु॒र्मा मे॒ष्टोत्त॑रामुत्तरां॒ समा॑म्

yāvat te'bhi vipaśyāmi bhūme sūryeṇa medinā | tāvanme cakṣurmā meṣṭottarāmuttarāṃ samām

हिन्दी अर्थ

भूभिः, पृथिवी = उत्मादंन की दृष्टि से पृथिवी भूमि है, भौर विस्तार होती टै । स्वधया, भ्रन्नेन = दीषंजीवन के लिये एेसे रन्न का सेवन करना चाहिए जिस से.श्षरीर का दीर्घकाल तक धारण हो सके तथा शरीर भ्रौर भन परिपुष्ट ह सके, तथा कुरीरं मे प्राणो -का ठीक संचार होता रहे; मांस मदिरा भादि का प्रयोग विचातक् है । स्वधया स्व +धा (धारणपोषणयोः . १ तथा “भि जँ; भतिन वेवं के ति यज्ञ भरात् पूजा-संस्कार तथा दान कां ०१२। सु° १ अथ्वेवेद-माष्य २३९ (पृथिवी) है विस्टृत परथिवी ! (यः गन्धः) जो गन्व (ते) वेरा (संबमूव) तुक मँ मिश्रित सत्ता वाला हैः (यम्) जिस को ग्रोषषयः) भ्रोषधियां, (यम्) भौर जिस को (भ्रापः) जलं (बिभ्नति) धारण करते

English

biped. Thine, Prithivī, are these Five human Races, for whom, though mortal, Sūrya as he rises

अध्याय १२

श्लोक 1.34

यच्छया॑नः प॒र्याव॑र्ते॒ दक्षि॑णं स॒व्यम॒भि भू॑मे पा॒र्श्वम् ।उ॒त्ता॒नास्त्वा॑ प्र॒तीचीं॒ यत् पृ॒ष्टीभि॑रधि॒शेम॑हे ।मा हिं॑सी॒स्तत्र॑ नो भूमे॒ सर्व॑स्य प्रतिशीवरि

yacchayānaḥ paryāvarte dakṣiṇaṃ savyamabhi bhūme pārśvam | uttānāstvā pratīcīṃ yat pṛṣṭībhiradhiśemahe | mā hiṃsīstatra no bhūme sarvasya pratiśīvari

हिन्दी अर्थ

(भेजिरे) सेवन कर्ती है, (तेन) उस गेन्ध हारा (मा) मु प्रत्येक पृथिवी- वासी को (सुरभिम्) सुरभितः (कण्) कर, ताकि (नः) हम मे से (कदचन) कोई भी (मा द्विक्षत). परस्परं द्वेषः न करे। . पृथि करा -स्वामाविकृ गुण, है गन्ध । गन्धवती पृथिवी (तकं जलचर प्राणियों म जो गन्ध है वे.भी. उन के पृथिवी से पंदाहौनेके कारण है । प्रत्येक पृथिवोत्रासी -पृथिवी से यद्ुःखौरभ, की याचना करता है, जो यःसौरम पृथिवीद्रस्ी के क्षमा्ील होवेःके कारण होता है, रौर जिस गन्ध भी है, वह है क्षमा शीलवता, सहन शीलवता, इसी लिये पृथिवी का नामं है क्षमा । क्षमा परथिवीनाम (निषं० १।१) ।

English

spreads with his rays the light that is immortal. In concert may these creatures yield us blessings. With honey of discourse, O Earth, endow

अध्याय १२

श्लोक 1.35

यत् ते भूमे वि॒खना॑मि क्षि॒प्रं तदपि॑ रोहतु ।मा ते॒ मर्म॑ विमृग्वरि॒ मा ते॒ हृद॑यमर्पिपम्

yat te bhūme vikhanāmi kṣipraṃ tadapi rohatu | mā te marma vimṛgvari mā te hṛdayamarpipam

हिन्दी अर्थ

यस्तं गन्धः पुष्करमाविषेश य ५ सूयायां विवाहे । उस भतं द्रा (भा) गुमः परत्यक पृथिवीवासी को -(सुरभिम् ). यशःसौरभ से सुरभितं (छृणु) कर, ताकि (नः). हम में से (कच्चन) कोई भी (मा द्विक्षत). २४० . भषवेवेद-माष्य कार १२1 ०.१ पृरचात् प्रकाित होता है । इस घटना को सूर्या का विवाह कहा है, मानो -रदिमरूपी सूरयेकन्या विवाहित हो कर. चन्द्रमा के घर गई है । इस षटना को निम्नलिखित मन्व मे मो ददायि है । यथा--

English

me. Kind, ever gracious be the Earth we tread on, the firm Earth,

अध्याय १२

श्लोक 1.36

ग्री॒ष्मस्ते॑ भूमे व॒र्षाणि॑ श॒रद्धे॑म॒न्तः शिशि॑रो वस॒न्तः ।ऋ॒तव॑स्ते॒ विहि॑ता हाय॒नीर॑होरा॒त्रे पृ॑थिवि नो दुहाताम्

grīṣmaste bhūme varṣāṇi śaraddhemantaḥ śiśiro vasantaḥ | ṛtavaste vihitā hāyanīrahorātre pṛthivi no duhātām

हिन्दी अर्थ

हत्या चरनमसो यहे । (० १।८४। १५) ॥ मं भाङ़ृतिकदृष्य भतिसुहाने हो जाते है । वृक्षों मे चव किसलय तथा पुष्प चिकित होति श्रौर पृष्पों की गन्धं को लेकर वागु प्रवाहित होने लगती है-- . यह दुय पृथिवी कै कारण होता है । इस लिये मानुष्यं तथा सूर्या के विबाह के ६स काल मे सर्वत्र पृथिवौ के सौरम का विस्तार दीता है 4

English

Prithivī, borne up by Order, mother of plants and herbs, the all-producer. A vast abode hast thou become, the Mighty. Great stress is on thee, press and agitation, but

अध्याय १२

श्लोक 1.37

याप॑ स॒र्पं वि॒जमा॑ना वि॒मृग्व॑री॒ यस्या॒मास॑न्न॒ग्नयो॒ ये अ॒प्स्व॑न्तः ।परा॒ दस्यू॒न् दद॑ती देवपी॒यूनिन्द्रं॑ वृणा॒ना पृ॑थि॒वी न वृ॒त्रम्।श॒क्राय॑ दध्रे वृष॒भाय॒ वृष्णे॑

yāpa sarpaṃ vijamānā vimṛgvarī yasyāmāsannagnayo ye apsvantaḥ | parā dasyūn dadatī devapīyūnindraṃ vṛṇānā pṛthivī na vṛtram| śakrāya dadhre vṛṣabhāya vṛṣṇe

हिन्दी अर्थ

भगः) तय मग रौर (रुचिः) दीप्ति या रोचकता है, (यः) जो (श्रदवेषु) शर्वो ड. (करेषु) वोर बाोद्धाभो मे, (थः) जो (मुगेषु) मूग त उत) शौर (हस्व) हाियो मँ टै, (यद्) बो (उचः) दीपिकायाम्) क्य चं है, (मे) ह उत्पादिका पृथिवी ! (तेन) उसके साथ (स्मान् भपि) हमारा भी. (संसृज) शंसं कर, ताकि (चः) हमरे सश कटबन) कोद

English

with unceasing care great Indra guards thee. So make us shine, O Earth, us with the splendour of gold. Let no man look on us with hatred.

अध्याय १२

श्लोक 1.38

यस्यां॑ सदोहविर्धा॒ने यूपो॒ यस्यां॑ निमी॒यते॑ ।ब्र॒ह्माणो॒ यस्या॒मर्च॑न्त्यृ॒ग्भिः साम्ना॑ यजु॒र्विदः॑।यु॒ज्यन्ते॒ यस्या॑मृ॒त्विजः॒ सोम॒मिन्द्रा॑य॒ पात॑वे

yasyāṃ sadohavirdhāne yūpo yasyāṃ nimīyate | brahmāṇo yasyāmarcantyṛgbhiḥ sāmnā yajurvidaḥ| yujyante yasyāmṛtvijaḥ somamindrāya pātave

हिन्दी अर्थ

का निदंश नहीं करता, भवितु सामान्य रूष से उस के “अश्च का निर्दे करता है इसे लिये भगः, रकिः, तथा यचंः--इन का समन्वय सम्मद ह मादि गुणो का भी -पा्थक्य है । कन्ध थी एक पुरूष ये इन भित्-भिन्न गुणों दत्तिर्यो के संशयं कौ जो इच्छा प्रकट की यई है उस क यह अभिषाये है वचस् = वचं दीप्तौ । रचि मे रोचका; चथा वचस् मे कान्ति की विशेषः

English

Agni is in the earth, in plants; the waters hold Agni in them, in the stones is Agni. Agni abideth deep in men: Agnis abide in cows and steeds.

अध्याय १२

श्लोक 1.39

यस्यां॒ पूर्वे॑ भूत॒कृत॒ ऋष॑यो॒ गा उ॑दानृ॒चुः ।स॒प्त स॒त्रेण॑ वे॒धसो॑ य॒ज्ञेन॒ तप॑सा स॒ह

yasyāṃ pūrve bhūtakṛta ṛṣayo gā udānṛcuḥ | sapta satreṇa vedhaso yajñena tapasā saha

हिन्दी अर्थ

तस्ये हिर॑ण्यदक्षसे पृथिव्या अकरं नमः ॥२९॥ (किला) पत्थर, (भ्रदमा) कीमती पत्थर, (पसु) रेवा रौर धूल, (भ्रमिः) भूमि है।. (सा भूमिः) बह भूमि (संधुता) सम्यक् साधनों द्वारा धारित हई (षता) धारित होती है । (हिरण्यवक्षसे) ऊती मे . सुवर्णं २४२ भ्रथवेवेद-माष्य कां०,१२१सू० १. भूमिः यह शब्द ०५७ की उत्पादक शक्ति को सुचित करता । पृथिवीं विन्वधांयसे पृतामच्छावंदामसि ॥२५७)। वनो के पेड़ या फलदार वृक्ष (घवाः) स्थिररूप में (विदवहा) सदा (तिष्ठ-

English

Agni gives shine and heat in heaven: the spacious air is his, the God’s

अध्याय १२

श्लोक 1.40

सा नो॒ भूमि॒रा दि॑शतु॒ यद्धनं॑ का॒मया॑महे ।भगो॑ अनु॒प्रयु॑ङ्क्ता॒मिन्द्र॑ एतु पुरोग॒वः

sā no bhūmirā diśatu yaddhanaṃ kāmayāmahe | bhago anuprayuṅktāmindra etu purogavaḥ

हिन्दी अर्थ

. (आवहामि) भादरपुवंक भ कहता हूं कि (भूमे) है भूमिं ! (त्वा) तुक पर (अभि नि षीदेम) हम सव एक-दूसरे के भभिगुख हो कर सदा बंठे ॥ =पुथिवी सूरये की प्रदक्षिणा करती हुई भी हम में हलचल पैदा नहीं करती श्रमं सूचित होता है । प्रच्छाभी भराभिमूख्ये । - शुद्धा न. आंपस्तनवेषरन्तु यो नः सेदुरषषे तं नि द॑ष्पः।

English

On earth they offer sacrifice and dressed oblation to the Gods. Men, mortals, live upon the earth by food in their accustomed way.

अध्याय १२

श्लोक 1.41

यस्यां॒ गाय॑न्ति॒ नृत्य॑न्ति॒ भूम्यां॒ मर्त्या॒ व्यैऽलबाः ।यु॒ध्यन्ते॒ यस्या॑माक्र॒न्दो यस्यां॒ वद॑ति दुन्दु॒भिः ।सा नो॒ भूमिः॒ प्र णु॑दतां स॒पत्ना॑नसप॒त्नं मा॑ पृथि॒वी कृ॑णोतु

yasyāṃ gāyanti nṛtyanti bhūmyāṃ martyā vyai'labāḥ | yudhyante yasyāmākrando yasyāṃ vadati dundubhiḥ | sā no bhūmiḥ pra ṇudatāṃ sapatnānasapatnaṃ mā pṛthivī kṛṇotu

हिन्दी अर्थ

. (कुढाः भ्रः) शुद्ध जल (नः तन्वे) हमारे छरीर के लिये (क्षरन्तु) बहे, (नः) हमारा (यः) जो (सेदुः) अपवित्र विनाशकारी कमं नामि) बै पवित्र करता ह, भौर उक्कष्ट बनता हृं । भनुराग न क, उन के प्रति उपेक्षा करनी चाहिए १ सेदुः =षद्लु विश्षरण- , (याः) जो (ते) तेरी (भाचीः प्रदिशः) पूवं की फली दिच्ार् है (याः उदीचीः) जो उत्तर की, (सूम) है पुथिवी ! (याः ते .भषराद) जो

English

May that Earth grant us breath and vital power. Prithivī give me life of long duration! Scent that hath risen from thee, O Earth, the fragrance which. growing herbs and plants and

अध्याय १२

श्लोक 1.42

यस्या॒मन्नं॑ व्रीहिय॒वौ यस्या॑ इ॒माः पञ्च॑ कृ॒ष्टयः॑ ।भूम्यै॑ प॒र्जन्य॑पत्न्यै॒ नमो॑ऽस्तु व॒र्षमे॑दसे

yasyāmannaṃ vrīhiyavau yasyā imāḥ pañca kṛṣṭayaḥ | bhūmyai parjanyapatnyai namo'stu varṣamedase

हिन्दी अर्थ

„. तेरी दक्षिण कीं (च याः पश्चात्) भौर जो कि परिविम की फैली दिशां है, (ताः) बे खब.(चरते मह्यम्) चलते फिरते मेरे. लिये (स्योनाः भवन्तु) . । हि, 11 अथववेद-माष्य . कार १२१०१ का = स्योनं सुखनामं (निषे ३।६ । या प्राचीः प्राची आदि दारा पतन का वर्भन मन्त्र मे नहीं ।

English

waters carry, Shared by Apsarases, shared by Gandharvas therewith make thou me sweet: let no man hate

अध्याय १२

श्लोक 1.43

यस्याः॒ पुरो॑ दे॒वकृ॑ताः॒ क्षेत्रे॒ यस्या॑ विकु॒र्वते॑ ।प्र॒जाप॑तिः पृथि॒वीं वि॒श्वग॑र्भा॒माशा॑माशां॒ रण्यां॑ नः कृणोतु

yasyāḥ puro devakṛtāḥ kṣetre yasyā vikurvate | prajāpatiḥ pṛthivīṃ viśvagarbhāmāśāmāśāṃ raṇyāṃ naḥ kṛṇotu

हिन्दी अर्थ

(मूमे) दे एथिवी ! (पङ्का) परिचम् से (नः) हमे (मा नुदिष्ठाः) युद्धो भ पजाजनों को सुरद्छित स्थान के लिये अपना विला पृथिवी पर गृद्ध न हों ताकि सब पृथिवीवासिर्मो का कल्याण हो सके, रौर न ही पृथिवीवासि्यों मे चोरश्रौर डाकू ही विद्यमान हों । करमीरस्थ कंसा उक्तम भ्रादर्धं राज्य है अरवषदि का ।

English

me. Thy scent which entered and possessed the lotus, the scent which they prepared at Sūryā’s

अध्याय १२

श्लोक 1.44

नि॒धिं बिभ्र॑ती बहु॒धा गुहा॒ वसु॑ म॒णिं हिर॑ण्यं पृथि॒वी द॑दातु मे ।वसू॑नि नो वसु॒दा रास॑माना दे॒वी द॑धातु सुमन॒स्यमा॑ना

nidhiṃ bibhratī bahudhā guhā vasu maṇiṃ hiraṇyaṃ pṛthivī dadātu me | vasūni no vasudā rāsamānā devī dadhātu sumanasyamānā

हिन्दी अर्थ

कां० १२1 सु० १ भथर्वेवेद-माष्य १. प्राय यह है कि चक्षु यदि विवेकी जीवन में सहायक है तो इस की सत्ता शुम दृद्यो का दोन हमे कराता है, परन्तु उनकी उपादेयता भौर अनुपादेयता में हमे विवेकदुष्टि का प्रयोग करना चाहिए, तभी दृष्टि की सार्थकता होगी । . अथवा “हे भूमि ! स्नेही सूर्यं की सहायता से तेरे भ्रभिमुख हो कर, तेरे जितने भाग को विविध रूपौ में देख रहा हं तेरे उतने भाग को देखने के लिये यह स्वात्मबोधन ( 4णण-ण्डहन्धणा ) है। विः ।

English

bridal, Scent which Immortals Earth! of old collected, therewith make thou me sweet: let no man

अध्याय १२

श्लोक 1.45

जनं॒ बिभ्र॑ती बहु॒धा विवा॑चसं॒ नाना॑धर्माणं पृथि॒वी य॑थौक॒सम्।स॒हस्रं॒ धारा॒ द्रवि॑णस्य मे दुहां ध्रु॒वेव॑ धे॒नुरन॑पस्फुरन्ती

janaṃ bibhratī bahudhā vivācasaṃ nānādharmāṇaṃ pṛthivī yathaukasam| sahasraṃ dhārā draviṇasya me duhāṃ dhruveva dhenuranapasphurantī

हिन्दी अर्थ

(भूमे) है मूमि ! -(शयानः).सोता हा मँ (यत्) जो (दक्षिणं सव्यं. ऊ्वमूख हो कर (यत्) जो (प्रतीचीं त्वा) पीठ की.ओर वतमान तु पर (षृष्टीभिः) पीठ की भरस्थियों द्वारा (अरधिशेमहे) हम सोते है, (तत्र) उसं (नः) हमारी (मा हिसीः) तुहिसानकर 1. गति ठीक नहीं रहती, भौर छाती के दबे रहने से .फेफडों का संकोच-विकास

English

hate me. Thy scent in women and in men, the luck and light that is in. males,

अध्याय १२

श्लोक 1.46

यस्ते॑ स॒र्पो वृश्चि॑कस्तृ॒ष्टदं॑श्मा हेम॒न्तज॑ब्धो भृम॒लो गुहा॒ शये॑ ।क्रिमि॒र्जिन्वत् पृथिवि॒ यद्य॒देज॑ति प्रा॒वृषि॑ तन्नः॒ सर्प॒न्मोप॑ सृप॒द् यच्छि॒वं तेन॑ नो मृड

yaste sarpo vṛścikastṛṣṭadaṃśmā hemantajabdho bhṛmalo guhā śaye | krimirjinvat pṛthivi yadyadejati prāvṛṣi tannaḥ sarpanmopa sṛpad yacchivaṃ tena no mṛḍa

हिन्दी अर्थ

२४६ अथदेवेद-माष्य का० १२। सूर १ हणपोग्ं हो जाय । (विमृग्वरि). है विभृगखरी (मन्त्र २९) मूमि 1 (ति) तेरे (मर्म) ममं को (मा) न (प्रषिपम्)् हानि पहुंचा, (ते) तेरे (हृदयम्) हृदय को (मा) न हानि पहुवाऊ। हलं चला कर बीज बोया जाता है । बोज. भूमि के उत्पादक तत्त्वो की सहायता से भ्र कुरित होता, तथा कालान्तर मे फल प्राप्ति होतो है । उचित खाद के द्वारा उस क्षति की .पूति करते रहना चाहिए । यह उत्पादकः तत्त्व भूमि का ममं है, इस की . हानि न होनी चाहिए । जलस्ोत पृथिवी का हृदयरूप है । जैसे कि हृदय ढारा शरीर, रक्त से सींचा जाता है, वैसे जल स्नोत द्वारा भूमि सीची जाती है । खाद भौर. जलस्नोत भूमि के ममं भौर हदयसूप है । . हि

English

That is in heroes and in steeds in sylvan beasts and elephants, The splendid energy of maids, therewith do thou unite us,.

अध्याय १२

श्लोक 1.47

ये ते॒ पन्था॑नो ब॒हवो॑ ज॒नाय॑ना॒ रथ॑स्य॒ वर्त्मान॑सश्च॒ यात॑वे ।यैः सं॒चर॑न्त्यु॒भये॑ भद्रपा॒पास्तं पन्था॑नं जयेमानमि॒त्रम॑तस्क॒रं यच्छि॒वं तेन॑ नो मृड

ye te panthāno bahavo janāyanā rathasya vartmānasaśca yātave | yaiḥ saṃcarantyubhaye bhadrapāpāstaṃ panthānaṃ jayemānamitramataskaraṃ yacchivaṃ tena no mṛḍa

हिन्दी अर्थ

. (भरूमे पृथिवी) है .उत्पादिक्रा पृथिवी ! (विहिताः) विधि पूत्रंक कालो की वर्षाए, (भ्रहोरात्रे) तथा दिनं भरौर राते (नः) हमें (दृहाताम्) भ्त भ्रादि का दोहन करते रहँ । प आदिन भौर .कात्तिक । हेमन्त = मागं सष भ्रौर पौष । रिलिर =माघश्रौर फाल्गुण । बसन्त = चै भौर वशाल । हायनीः = स+भ्रयनीः; स के स्थान सरपंण करती हई (विजमाना) मानो भयपूवंक चलती है, (यस्याम्) जिस

English

Earth! Let no man look on us with hate. Rock earth, and stone, and dust, this Earth is held together,. firmly bound.

अध्याय १२

श्लोक 1.48

म॒ल्वं बिभ्र॑ती गुरु॒भृद् भ॑द्रपा॒पस्य॑ नि॒धनं॑ तिति॒क्षुः ।व॒रा॒हेण॑ पृथि॒वी सं॑विदा॒ना सू॑क॒राय॒ वि जि॑हीते मृ॒गाय॑

malvaṃ bibhratī gurubhṛd bhadrapāpasya nidhanaṃ titikṣuḥ | varāheṇa pṛthivī saṃvidānā sūkarāya vi jihīte mṛgāya

हिन्दी अर्थ

करा १२। सूऽ.१. भरथर्ववेद-माष्य २४७ जलो मे ह । (देवपीयून् दस्यून्) देवों की. हिसा करने वाले, उपक्षयकारी लोगों को (परा ददती ) दुर करती हुई (पृथिवी ) पुथिवी, (इन्द्रम्) एेदवय- वान् पुरष का (वृणाना) वरण करती है, (वचनम् न) उति पर भरावरण' डालने वाले का नहो । वह पृथिवी (दक्राय) शक्तिशाली, (वृषभाय) परमेदवर द्वारा धारित की हुई है । त

English

To this gold-breasted Prithivī mine adoration have I paid. Hither we call the firmly held, the all-supporting Prithivī,

अध्याय १२

श्लोक 1.49

ये त आ॑र॒ण्याः प॒शवो॑ मृ॒गा वने॑ हि॒ताः सिं॒हा व्या॒घ्राः पु॑रु॒षाद॒श्चर॑न्ति ।उ॒लं वृकं॑ पृथिवि दुच्छुना॑मि॒त ऋ॒क्षीकां॒ रक्षो॒ अप॑ बाधया॒स्मत्

ye ta āraṇyāḥ paśavo mṛgā vane hitāḥ siṃhā vyāghrāḥ puruṣādaścaranti | ulaṃ vṛkaṃ pṛthivi ducchunāmita ṛkṣīkāṃ rakṣo apa bādhayāsmat

हिन्दी अर्थ

समय श्रागे की भोर बढती हृदं पृथिवी बीच-बीचः में पीछे की भ्रोरहट जा जाती है; श्रौर पुनः प्रागे की भ्रोर वदती है,--पीछे की भ्रोर हटते रहना विजमाना=“विजी भयचलनयोः” पृथिवी के- चलने में भयका होना इसलिये कहा है क्योंकि लगातार पृथिवी भ्रागे को नहीं बदृती जाती, बह बीच-बीच मरं पीछेकी श्रोर हट-हट कर त्रलती है मानो भागे बदृते रहने मँ उसे भय प्रतीतः होता है । भयपूवेक परिक्रमा का वर्णन कविता- इसी प्रकार पुथिवी सू की परिक्रमा -करती हुई कभी तो सूर्यं के समीप हो जाती है, भौर कभी उस से दुर हट जाती है। शीतकाल म सूर्ये समीप होती है, भौर ्रीष्मकाल भें उस से परे हट कर दूर हो जाती है,

English

On whom the trees, lords of the wood, stand evermore immov- able. Sitting at ease or rising up, standing or going on our way.

अध्याय १२

श्लोक 1.50

ये ग॑न्ध॒र्वा अ॑प्स॒रसो॒ ये चा॒रायाः॑ किमी॒दिनः॑ ।पि॒शा॒चान्त्सर्वा॒ रक्षां॑सि॒ तान॒स्मद् भू॑मे यावय

ye gandharvā apsaraso ye cārāyāḥ kimīdinaḥ | piśācāntsarvā rakṣāṃsi tānasmad bhūme yāvaya

हिन्दी अर्थ

(यस्याम्) जिस भूमि मे (सदः-हविधनि). परस्पर मिलकर बैठने तथा भतिथि देवौ के लिये कमरे, भ्रौर खाचं-पेय वस्तुं के .रखने का कं लिये (सोमम्) खोमरसः को (युज्यन्ते) जटाते है । भ्रथवा “यजुरवंद कै . जानने वाले नियुक्त किये जाते है, इन्द्र को खोमरख पिलाने क लिये” । णानुसार तथा राजनैतिक दृष्टि से भी (१२।१) भी इन्द्र दवारा सम्नाटका

English

O Earth, may we recline on thee who bearest strength, increase, portioned share of food, and fatness.

अध्याय १२

श्लोक 1.51

यां द्वि॒पादः॑ प॒क्षिणः॑ सं॒पत॑न्ति हं॒साः सु॑प॒र्णाः श॑कु॒ना वयां॑सि ।यस्यां॒ वातो॑ मात॒रिश्वेय॑ते॒ रजां॑सि कृ॒ण्वंश्च्या॒वयं॑श्च वृ॒क्षान्।वात॑स्य प्र॒वामु॑प॒वामनु॑ वात्य॒र्चिः

yāṃ dvipādaḥ pakṣiṇaḥ saṃpatanti haṃsāḥ suparṇāḥ śakunā vayāṃsi | yasyāṃ vāto mātariśveyate rajāṃsi kṛṇvaṃścyāvayaṃśca vṛkṣān| vātasya pravāmupavāmanu vātyarciḥ

हिन्दी अर्थ

इम सम्बन्ध में प्रकार डालता हें । यथा-- . . . “हविर्षानमग्निलालं पत्नीनां सवनं सदः । सदो देवाताभसि देवि पाक के लिमि कर्रराः या. यज्ञाला, पत्नीनां सदः, तथा . देवानां सदः का चिस्यामू) जिस पृथिवी मे (पव) अनादि फाल से (शतक्त) सत्यायुष्ठाता (सप्त) सात (वेषसः) श्षरीर' के विधाता, (ऋषयः) ऋषि

English

Purified for our bodies flow the waters: we bring distress on him who would attack us. I cleanse myself, O Earth, with that which cleanseth.

अध्याय १२

श्लोक 1.52

यस्यां॑ कृ॒ष्णम॑रु॒णं च॒ संहि॑ते अहोरा॒त्रे विहि॑ते॒ भूम्या॒मधि॑ ।व॒र्षेण॒ भूमिः॑ पृथि॒वी वृ॒तावृ॑ता॒ सा नो॑ दधातु भ॒द्रया॑ प्रि॒ये धाम॑निधामनि

yasyāṃ kṛṣṇamaruṇaṃ ca saṃhite ahorātre vihite bhūmyāmadhi | varṣeṇa bhūmiḥ pṛthivī vṛtāvṛtā sā no dadhātu bhadrayā priye dhāmanidhāmani

हिन्दी अर्थ

कोटि के हो कर (सवेण) .जीवन-सत्र द्वारा (यजेत, तपसा, सह) यज्ञ भ्रौर कां० १२। सूर १ भथवेवेद-माष्य २४६ सानो श्ूमिरा दित यद्धनं कामयामहे । (सा भूभिः) वह भूमि (नः) हमे (भ्रादिदतु) दे, (यत् धनम्, काम- यामहे) जिम घन की हम कामना करते है । (भगः) भगरूपी घनं (अनुप्र-

English

Earth, be thine eastern and thy northern regions, those lying southward and those lying 186

अध्याय १२

श्लोक 1.53

द्यौश्च॑ म इ॒दं पृ॑थि॒वी चा॒न्तरि॑क्षं च मे॒ व्यचः॑ ।अ॒ग्निः सूर्य॒ आपो॑ मे॒धां विश्वे॑ दे॒वाश्च॒ सं द॑दुः

dyauśca ma idaṃ pṛthivī cāntarikṣaṃ ca me vyacaḥ | agniḥ sūrya āpo medhāṃ viśve devāśca saṃ daduḥ

हिन्दी अर्थ

१ मन, भौर बुद्धि । ये जब सत्यमायं के भ्रनुगामी हो जावेदहैतोये७ ऋषिरूप हो कर, यज्ञ भौर तपदचर्या के साथ, जीवन-सत्र के द्वारा, वेद- वाणि्यो का उत्कृष्टरूप मे गन कर, परमेश्वर की भ्राराघना करते है 4 ये सात भ्रसत्यमागे के अनुगामी होकर न तो शरीर के विधाता बनते, "आर न ऋषि पदवी को पते हैँ । उस भवस्था में ये वृत्रर्य हो जाते है । ये.७ ऋषि शरीर की ही ७ शक्तया है, यह निम्न लिखित मन्त दारा ३४।५५) । सत्र भी एक प्रकार के यज्ञ हैँ जोकि १३ दिनों से ज्ञे कर १००. दिनो मे” सम्पादितः होते हैं । पुष का १०० वर्षो का धार्भिक जीवन भी यज्ञ- रूप है, “पुरषो बाव यज्ञः" (छान्दोग्य ३।१६)। १०० वषो का जीवन दीषसत्र

English

westward. Propitious unto me in all my movements. Long as I tread the ground let me not stumble.

अध्याय १२

श्लोक 1.54

अ॒हम॑स्मि॒ सह॑मान॒ उत्त॑रो॒ नाम॒ भूम्या॑म्।अ॒भी॒षाड॑स्मि विश्वा॒षाडाशा॑माशां विषास॒हिः

ahamasmi sahamāna uttaro nāma bhūmyām| abhīṣāḍasmi viśvāṣāḍāśāmāśāṃ viṣāsahiḥ

हिन्दी अर्थ

.उत््रष्ट स्तवन. करना चाहिए । .मूतक्ृतः; भूत =-7ए8॥६,. एणएला, पण . भूमिवासियों के लिये. काम्य घन अदान. करतो है, ..वह् काम्य षन है भग; ण्णां भग इतीरणा ॥ ये ६ भग है, जिस धन की कामना मन्त्र मे कथित होना चाहिए, तव रजाजन भी इनं भगो के भ्रगुसार जीवनीं को दल ।

English

Drive us not from the west or east, drive us not from the north or south, Be gracious unto us, O Earth: let not the robbers find us; keep the deadly weapon far away.

अध्याय १२

श्लोक 1.55

अ॒दो यद् दे॑वि॒ प्रथ॑माना पु॒रस्ता॑द् दे॒वैरु॒क्ता व्यस॑र्पो महि॒त्वम्।आ त्वा॑ सुभू॒तम॑विशत् त॒दानी॒मक॑ल्पयथाः प्र॒दिश॒श्चत॑स्रः

ado yad devi prathamānā purastād devairuktā vyasarpo mahitvam| ā tvā subhūtamaviśat tadānīmakalpayathāḥ pradiśaścatasraḥ

हिन्दी अर्थ

राष्ट । सत्रे १०१९ दिनो दवाय भी सम्पादित होते है । २५० भर्ववेद-माष्य कां० १२। सु १ तथा खुरी के समग्र नगाडे.बजते है, (सा शरूमिः) वहु भूमि (नः सपत्नान्) हमारे शच्रुभों को (्रणुदताम्) परे धकेल, भ्रौर (मा) मुर (पृथिवी) पुथिवी (भसपत्नम्) शत्रुरहित करे ।

English

Long as, on thee, I look around, possessing Sūrya as a friend, So long, through each succeeding year, let not my power of vision fail.

अध्याय १२

श्लोक 1.56

ये ग्रामा॒ यदर॑ण्यं॒ याः स॒भा अधि॒ भूम्या॑म्।ये सं॑ग्रा॒माः समि॑तय॒स्तेषु॒ चारु॑ वदेम ते

ye grāmā yadaraṇyaṃ yāḥ sabhā adhi bhūmyām| ye saṃgrāmāḥ samitayasteṣu cāru vadema te

हिन्दी अर्थ

सज्नाट् भपने लिये पृथिवी को शत्रुरहित चाहता है ! व्येलवाः=विं+ एला (विनासे) ¬+-बाः (वाले), यथा एला केला खेला विलासे (कण्डवादिगण).1 भुम्यै पजेन्य॑पल्नये नमोऽस्तु वषेमेदसे ॥४२॥ धान भौर जौँ होते है, (यस्याः) जिस के (इमाः पञ्च कृष्टयः) विस्तृत ये है मेध जल रूपी वीरय का सिञ्चन पुथिवी मेँ करता है जिस से भक्त

English

When, as I lie, O Earth, I turn upon my right side and my left, When stretched at all our length we lay our ribs on thee who meetest us.

अध्याय १२

श्लोक 1.57

अश्व॑ इव॒ रजो॑ दुधुवे॒ वि तान् जना॒न् य आक्षि॑यन् पृथि॒वीं यादजा॑यत ।म॒न्द्राग्रेत्व॑री॒ भुव॑नस्य गो॒पा वन॒स्पती॑नां॒ गृभि॒रोष॑धीनाम्

aśva iva rajo dudhuve vi tān janān ya ākṣiyan pṛthivīṃ yādajāyata | mandrāgretvarī bhuvanasya gopā vanaspatīnāṃ gṛbhiroṣadhīnām

हिन्दी अर्थ

, १. यथुर्वेद १८।१२ भँ भिबिष भर््नो-का वर्णेन हमा है । वेह “श्रीहयः यवाः, माषाः, तिलाः, मूदमाः, खल्वाः, प्रियङ्गवः, भगवः, श्यामाकाः, नीवाराः, गोधूमा कां १२। सू° १ -भथर्वेवेद-माष्य २५१ समग्र पुथिवी कों ग्रहण होता है । समग्र पृथिवी को माता मान कर उसके यस्याः पुरौ देवढक़ताः केतने यस्यां विक्षतं ।. (यस्याः) जिस पूथिवी के (पुरः) नगर (देवङृताः) दिग्यलषित्पियों

English

Do us no injury there, O Earth who furnishest a bed for all. Let what I dig from thee, O Earth, rapidly spring and grow again.

अध्याय १२

श्लोक 1.58

यद् वदा॑मि॒ मधु॑म॒त् तद् व॑दामि॒ यदीक्षे॒ तद् व॑नन्ति मा ।त्विषी॑मानस्मि जूति॒मानवा॒न्यान् ह॑न्मि॒ दोध॑तः

yad vadāmi madhumat tad vadāmi yadīkṣe tad vananti mā | tviṣīmānasmi jūtimānavānyān hanmi dodhataḥ

हिन्दी अर्थ

पृथिवी को शोभा सम्पन्न करे । पृथिवी पर नगर उत्तमशिल्पियौ हारा वसुनि नो वसुदा रास॑माना देवी द॑धातु सुमनस्यमाना ॥४४॥ (गृहा) खानों म (बहुधा) बहुत प्रकार कौ (निधिम्) निषियों को (बिभ्रती) वारण करती हुई (पृथिवी) पृथिवी, (मे) मुम (वसु) धन, (मणिम्) रतन, (हिरण्यम् ) सुवणं (ददातु) प्रदान करे । (वसुदा) घन देने वाली (वसूनि) घनो को (रासमाना) देती हई, (सुमनस्यमाना; प्रसन्तमन हर, (देवी ) दिव्यगूणो वाली पृथिवी (ना) हमारा (दधातु) धारण-पोषण

English

O Purifier, let me not pierce through thy vitals or thy heart. Earth, may thy summer, and thy rains, and autumn, thy winter, and thy dewy frosts, and

अध्याय १२

श्लोक 1.59

श॒न्ति॒वा सु॑र॒भिः स्यो॒ना की॒लालो॑ध्नी॒ पय॑स्वती ।भूमि॒रधि॑ ब्रवीतु मे पृथि॒वी पय॑सा स॒ह

śantivā surabhiḥ syonā kīlālodhnī payasvatī | bhūmiradhi bravītu me pṛthivī payasā saha

हिन्दी अर्थ

से, भौर भ्रवकिष्ट प्रजाजनो के निघंन होने से पृथिवी पर सौमनस्य नहीं सुक्त मे पृथिवी को माता कहा है (मन्त्र १२), भ्रतः कविता में इस पर चित होनें पर पृथिवी माता प्रसन्नरचित्त होती है यह गौण वर्णनं है । शहा =गुाल्प खाने, ८70०8 । रासमाना-=रासति दानकर्मा (निषं० ३।२० । : (यथौकसम्) जैसे एक घर मे रहने वालो क्रा समानरूप मँ भरेण- पोषण होता है , वैसे (पृथिवी) पृथिवी (बहुधा) बहूतं प्रकार के (विवा-

English

spring-time. May thy years, Prithivī! and ordered seasons, and day and night pour out for us abundance.

अध्याय १२

श्लोक 1.60

याम॒न्वैच्छद्ध॒विषा॑ वि॒श्वक॑र्मा॒न्तर॑र्ण॒वे रज॑सि॒ प्रवि॑ष्टाम्।भु॒जि॒ष्यं॑१ पात्रं॒ निहि॑तं॒ गुहा॒ यदा॒विर्भोगे॑ अभवन्मातृ॒मद्भ्यः॑

yāmanvaicchaddhaviṣā viśvakarmāntararṇave rajasi praviṣṭām| bhujiṣyaṃ1 pātraṃ nihitaṃ guhā yadāvirbhoge abhavanmātṛmadbhyaḥ

हिन्दी अर्थ

-वृदिचकः) सांप भ्रौर विच्छ (वे गृहा) तेरी: गुफा मे - (शये). शयन करता जो (जिन्वत) असन्न. होता (क्रिमिः) कीड़ा (एजति) चलता-फिरती है , (वद्) बह (खपंत्). खपंण करतां दभा (नः उप हमारे समीप (मा सूपत्) कां १२। सुर भरयवेवेद-माष्यं २३ उख द्वारां (नः) हमें (मृड) सुखी कर ।

English

Indra for her Lord, not Vritra, hath clung to Sakra, to the Strong and Mighty.

अध्याय १२

श्लोक 1.61

त्वम॑स्या॒वप॑नी॒ जना॑ना॒मदि॑तिः काम॒दुघा॑ पप्रथा॒ना।यत् त॑ ऊ॒नं तत् त॒ आ पू॑रयाति प्र॒जाप॑तिः प्रथम॒जा ऋ॒तस्य॑

tvamasyāvapanī janānāmaditiḥ kāmadughā paprathānā| yat ta ūnaṃ tat ta ā pūrayāti prajāpatiḥ prathamajā ṛtasya

हिन्दी अर्थ

है । वर्षाकाल में सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना चाहिए । हे पृथिवी ! (थे) जो (ते) तेरे. (बहवः) बहुत (पन्थानः) मार्य है (जनायनाः) जिन पर जन् भ्राते जाते या चलते ह; जो (रथस्य) रथ के (भ्ननसः च) श्रौर बैल गाढं के (यातवे) जाने के लिये (वर्त्मा) मागेःहै, (जयेम) उस भागं पर हम विजय पा ले, उसे भ्रपने भरधीन करलं । (यत्) जो (शिवम्) -कल्याणकारी है (तेन) उस द्वारा (नः) हमे - (मृड) सुखी (१) पृथिवीं पर बहुत माग होने चाहिए मनुष्यो के. जाने भाने के लिये । (२) रथों . के.र्गे . अलग होने चाहिए । (इ) बेल गाड़ी के मूगं भी भ्रलंग होने चाहिए । (४) जनायन मागो पर भले. बुरे दोनो भकार के

English

Base of the seat and sheds, on whom the sacrificial stake is reared, On whom the Yajus-knowing priests recite their hymns and chant their psalms,

अध्याय १२

श्लोक 1.62

उ॒प॒स्थास्ते॑ अनमी॒वा अ॑य॒क्ष्मा अ॒स्मभ्यं॑ सन्तु पृथिवि॒ प्रसू॑ताः ।दी॒र्घं न॒ आयुः॑ प्रति॒बुध्य॑माना व॒यं तुभ्यं॑ बलि॒हृतः॑ स्याम

upasthāste anamīvā ayakṣmā asmabhyaṃ santu pṛthivi prasūtāḥ | dīrghaṃ na āyuḥ pratibudhyamānā vayaṃ tubhyaṃ balihṛtaḥ syāma

हिन्दी अर्थ

मनष्य मिल कर चल सकने चाहिए ॥ (५) भरपने मागो को सुरा. का “विजयः न पा. सके। (६) मागं चोरो डइकुर्भो से रहित होने चाहर्े । वराहेणं पृथिवी संविदाना सूंकराय॒ वि निरते गायं ४८॥ २५४ भथ्वेवेद-माष्य कां० १२। सु° १ (तितिश्चुः) सहन करने वाली (पृथिवी) पृथिवी, (वराहेण) मेष के साथ (संविदाना) एेकमत्य को प्राप्त हृरद, (सुकराय) उत्तम. किरणों वाले (मृगय) शोधक सूर्यं के लिये (वि जिहीते) विशेषतया गति कर रही है ।

English

And ministers are busied that Indra may drink the Soma juice; On whom the ancient Rishis, they who made the world, sang forth the cows,

अध्याय १२

श्लोक 1.63

भूमे॑ मात॒र्नि धे॑हि मा भ॒द्रया॒ सुप्र॑तिष्ठितम्।सं॒वि॒दा॒ना दि॒वा क॑वे श्रि॒यां मा॑ धेहि॒ भूत्या॑म्

bhūme mātarni dhehi mā bhadrayā supratiṣṭhitam| saṃvidānā divā kave śriyāṃ mā dhehi bhūtyām

हिन्दी अर्थ

(निचं १।१०१)। सुकराय = सु+उ+कर(4 7४9 ०1 ४, एज्भा1(माष्टे) देती है मेष को, भ्रौरं मेध जल देता है पृथिवी. को । मानो-ये दोनों इस सेषितुः था ,विजिहीते गच्छति (“ चपस्य" प्रष्टा, २।३।१४) इति कर्मणि चतुर्थी) । पृथिवी सूयं की भोर क्यो प्रयाण कर रही है-यह भ्रथे है पृथिवीगोलक, इस की माता है अन्तरिक्ष, जिसकी कि गोदी में यह्

English

Seven worshippers, by session, with their fervent zeal and sacrifice; May she, the Earth, assign to us the opulence for which we yearn,

अध्याय १२

श्लोक 2.1

१-५५ भृगुः।अग्निः, मन्त्रोक्ताः, २१-३३ मृत्युः।त्रिष्टुप्, २, ५, १२-२०, ३४-३६, ३८-४१- ४३, ५१, ५४ अनुष्टुप् (१६ ककुम्मती पराबृहती, १८ निचृत् ४० पुरस्तात् ककुम्मती), ३ आस्तारपङ्क्तिः, ६ भुरिगार्षी पङ्क्तिः, ७, ४५ जगती, ८, ४८-४९ भुरिक्, ९ अनुष्टुब्गर्भा विपरीतपादलक्ष्मा पङ्क्तिः, ३७ पुरस्ताद्बृहती, ४२ त्रिपदा एकावसाना भुरिगार्ची गायत्री, ४४ एकावसाना द्विपदाऽर्ची बृहती, ४६ एकावसाना द्विपदा साम्नी त्रिष्टुप्, ४७ पञ्चपदा बार्हतवैराजगर्भा जगती, ५० उपरिष्टाद्विराड् बृहती ५२ पुरस्ताद्विराड् बृहती, ५५ बृहतीगर्भा।न॒डमा रो॑ह॒ न ते॒ अत्र॑ लो॒क इ॒दं सीसं॑ भाग॒धेयं॑ त॒ एहि॑ ।यो गोषु॒ यक्ष्मः॒ पुरु॑षेषु॒ यक्ष्म॒स्तेन॒ त्वं सा॒कम॑ध॒राङ् परे॑हि

1-55 bhṛguḥ| agniḥ, mantroktāḥ, 21-33 mṛtyuḥ| triṣṭup, 2, 5, 12-20, 34-36, 38-41- 43, 51, 54 anuṣṭup (16 kakummatī parābṛhatī, 18 nicṛt 40 purastāt kakummatī), 3 āstārapaṅktiḥ, 6 bhurigārṣī paṅktiḥ, 7, 45 jagatī, 8, 48-49 bhurik, 9 anuṣṭubgarbhā viparītapādalakṣmā paṅktiḥ, 37 purastādbṛhatī, 42 tripadā ekāvasānā bhurigārcī gāyatrī, 44 ekāvasānā dvipadā'rcī bṛhatī, 46 ekāvasānā dvipadā sāmnī triṣṭup, 47 pañcapadā bārhatavairājagarbhā jagatī, 50 upariṣṭādvirāḍ bṛhatī 52 purastādvirāḍ bṛhatī, 55 bṛhatīgarbhā| naḍamā roha na te atra loka idaṃ sīsaṃ bhāgadheyaṃ ta ehi | yo goṣu yakṣmaḥ puruṣeṣu yakṣmastena tvaṃ sākamadharāṅ parehi

हिन्दी अर्थ

१. जो मसि की याचना करते या. भासु के लिये विचरते रहते ह। २५६ ्रयववेद-माप्य कां १२ ॥ सु° १ , (वयांसि) कोए (सं पतन्ति) संपात करते है । (यस्याम्) जिस में (मात- हई (दयते) गति करती षै, तथा (वातस्य) वायु के (प्रवाम, उपवाम्, भनु) परे-हटती भौर समीप-श्राती है ।

English

Whose castles are the work of Gods, and men wage war upon her plain The Lord of Life make Prithivī, who beareth all things in her womb, pleasant to us on every

अध्याय १२

श्लोक 2.2

अ॒घ॒शं॒स॒दुः॒शं॒साभ्यां॑ क॒रेणा॑नुक॒रेण॑ च ।यक्ष्मं॑ च॒ सर्वं॒ तेने॒तो मृ॒त्युं च॒ निर॑जामसि

aghaśaṃsaduḥśaṃsābhyāṃ kareṇānukareṇa ca | yakṣmaṃ ca sarvaṃ teneto mṛtyuṃ ca nirajāmasi

हिन्दी अर्थ

बोध भौर प्रतिबोध मानो जीवनमेंदोचछषिर्हैः जो कि सन्मां ददति है। कां० १२। सुऽ १. भ्रथर्वेवेद-माष्य । । 3. (मा) मुक को, (निषेहि) भरपनी निषि जानकर, धारित तया परिपुष्ट कर । (कवे) है वेद-काव्य की कवि ! (संविदाना) सम्यक् ज्ञान वाली तु (दिवा) प्रतिदिन (मा) मुे (शियाम्) शोमा .में तथा (मत्याम्) सम्पत्ति मँ (षेहि) स्थापित कर । - १. बैदिकं मावनानुसार राज्यकर” भूमिमाता की.सेवां तंया प्रजा कौ समर- सति के लिये है, राज्यकमेचारियों के भोगविलास के लिये नेह । २. कविपद कै संनिधान से मन्त म -पारमेरवरी माता को वर्णेन प्रतीत हीत । भवा भूमिष्ठ कवियीं के कारण, गौणस्म मे धरुमि को कविं कहा है ।

English

Pisāchas all, and Rākshasas, these keep thou, Earth! afar from us. To whom the winged bipeds fly together, birds of each various kind, the swans, the eagles;

अध्याय १२

श्लोक 2.3

निरि॒तो मृ॒त्युं निरृ॑तिं॒ निररा॑तिमजामसि ।यो नो॒ द्वेष्टि॒ तम॑द्ध्यग्ने अक्रव्या॒द् यमु॑ द्वि॒ष्मस्तमु॑ ते॒ प्र सु॑वामसि

nirito mṛtyuṃ nirṛtiṃ nirarātimajāmasi | yo no dveṣṭi tamaddhyagne akravyād yamu dviṣmastamu te pra suvāmasi

हिन्दी अर्थ

पयन् ) दूसरी जातवेदस् को देखती हुई भी (इमम्) इस (नः गृहम्) में (धर्मम्) दुध की बटलोही को (इन्धाम् ) गमम करती रहे । पितृयान मागं. उनका है जोकि सन्तानोत्पत्ति द्वारा मातापिता बनना चाहते रहते है तथा गृहस्थिरयो के लिये निदिचत यज्ञ होते रहृते हँ । इस मागं में

English

May Earth, may Prithivī bestow her benison, with milk, on me. Whom Visvakarman with oblation followed, when she was set in mid-air’s billowy ocean

अध्याय १२

श्लोक 2.4

यद्य॒ग्निः क्र॒व्याद् यदि॑ वा व्या॒घ्र इ॒मं गो॒ष्ठं प्र॑वि॒वेशान्यो॑काः ।तं माषा॑ज्यं कृ॒त्वा प्र हि॑णोमि दू॒रं स ग॑च्छत्वप्सु॒षदोऽप्य॒ग्नीन्

yadyagniḥ kravyād yadi vā vyāghra imaṃ goṣṭhaṃ praviveśānyokāḥ | taṃ māṣājyaṃ kṛtvā pra hiṇomi dūraṃ sa gacchatvapsuṣado'pyagnīn

हिन्दी अर्थ

(मृदद्वम्) धो डालो, (नडे) नड मे (मृडद्वम्) घो डालो, (चं संकसुके , श्रभिराम तथा रक्षक सूयं में धो डालो, (उपबहंणे ). तथा -उपबहंण में ददं रौर कमर का दर्द॑.मिटता ई" (वनौषधि चन्द्रोदय “सीस दीषक मे) - नडे = सीसभस्म नड पर तम्यार की जाती है, भतः 'शीर्ष॑क्ति रोग मेँ नदं नडं तथा सीस के दाहक होने के कारण नडाग्नि को मी संकुसक भ्रग्नि कषा

English

That deed is easily set right through thee: we kindle thee again. Again have the Ādityas, Rudras, Vasus, the Brāhman, bringer of good things, O Agni,

अध्याय १२

श्लोक 2.5

यत् त्वा॑ क्रु॒द्धाः प्र॑च॒क्रुर्म॒न्युना॒ पुरु॑षे मृ॒ते।सु॒कल्प॑मग्ने॒ तत् त्व॒या पुन॒स्त्वोद् दी॑पयामसि

yat tvā kruddhāḥ pracakrurmanyunā puruṣe mṛte| sukalpamagne tat tvayā punastvod dīpayāmasi

हिन्दी अर्थ

सके । वाजान् = वाजः भल्ननाम (निं २७) । , (येन्दते) बहरी. है । (भत्र). यदीं भर्थात् इस संगठन में ही (जहीत) २८२ । अथर्ववेदभ्माष्य १ कां०. १२ सु० २ छोड़ दो, त्याग दो (ये). जो किः (अधिकाः -असन्) -भकस्याणकारी कमं

English

Corpse-eating Agni we expel, the Agni who bewilders men, Him who is in our horses, in our heroes, cows, and goats, and sheep:

अध्याय १२

श्लोक 2.6

पुन॑स्त्वादि॒त्या रु॒द्रा वस॑वः॒ पुन॑र्ब्र॒ह्मा वसु॑नीतिरग्ने ।पुन॑स्त्वा॒ ब्रह्म॑ण॒स्पति॒राधा॑द् दीर्घायु॒त्वाय॑ श॒तशा॑रदाय

punastvādityā rudrā vasavaḥ punarbrahmā vasunītiragne | punastvā brahmaṇaspatirādhād dīrghāyutvāya śataśāradāya

हिन्दी अर्थ

कां 9. १२। सू २ ,. भरथर्वेवेद-माष्य 3 , २८५ भ्रायु्रो का दोषं करे । परन्तु इन दोनों विभागो को भ्रन्न का सेवन, हविः खूप मे, करना चाहिए । जीवन को यज्ञ समते हुए रसे भरत्न का सेवनं करते रहना चाहिए जिस से जीवन यन्न सफलता पुरक समाप्त हो । भ्रायुषा , करते हँ । इसलिये ऋग्वेद मेँ कहा हैकिः “यस्तं न वेद किमृचा करिष्यति . ने भी कहा है कि “ब्रह्य ईहवरो, वेदः, तत्त्वं, तपो बा" (उणाः ४। १४७) (पितरः) है पितरो ! (मर्त्येषु भमृतः) मरण घर्मा पदार्थो मं

English

assembly. Here I erect this rampart for the living: let none of these, none other, reach this limit.

अध्याय १२

श्लोक 2.7

यो अ॒ग्निः क्र॒व्यात् प्र॑वि॒वेश॑ नो गृ॒हमि॒मं पश्य॒न्नित॑रं जा॒तवे॑दसम्।तं ह॑रामि पितृय॒ज्ञाय॑ दू॒रं स घ॒र्ममि॑न्धां पर॒मे स॒धस्थे॑

yo agniḥ kravyāt praviveśa no gṛhamimaṃ paśyannitaraṃ jātavedasam| taṃ harāmi pitṛyajñāya dūraṃ sa gharmamindhāṃ parame sadhasthe

हिन्दी अर्थ

चाहिए । दक्षिण दिशा हास क्री; शक्ति के हास को, सूचितः करती । जसे जपे सूयं दक्षिण कीं भोर लता जीता है वैसे-वेसे उस की शक्ति का हास . मृतं हनि पर सभी को उसः की शवक्रिया ही प्रिय होती है । वेदवेत्ताभों भ्रपने-श्राप को भी -यही क्रिया प्रिय होती हैः+ : केःभमाव द्वारा -(पक्िणाति) उसे क्षीणं करती रहती है। ,

English

May they survive a hundred lengthened autumns, and may they bury Death beneath this mountain. Live your full lives and find age delightful, all of you striving, one behind the other.

अध्याय १२

श्लोक 2.8

क्र॒व्याद॑म॒ग्निं प्र हि॑णोमि दू॒रं य॒मरा॑ज्ञो गच्छतु रिप्रवा॒हः ।इ॒हायमित॑रो जा॒तवे॑दा दे॒वो दे॒वेभ्यो॑ ह॒व्यं व॑हतु प्रजा॒नन्

kravyādamagniṃ pra hiṇomi dūraṃ yamarājño gacchatu ripravāhaḥ | ihāyamitaro jātavedā devo devebhyo havyaṃ vahatu prajānan

हिन्दी अर्थ

.. भरनिराहितः; निर् +भाहिवः = हित भ्रग्नि कौ निकाल देना + भ्र + हमारे संमूख ही शवं का भक्षणं करं रही होती है । येह भवस्था , यकष्मरोग की ह यक्ष्म रोग श्नः-कमैःरौगी के मस को साता जाता है इस कषये कां° १२। सू०र२. भरथवेवेद-माष्य २०८७ भाई को यह -रोग हो जाय तो दायभाग में मिले उस के वुगने धनको भी ही पृथक्ः करने का यत्न करना चाहिए ।; मन्त्र में पिता की जायदाद के बटवारे मं ज्येष्ठ पुत्र को दो. भाग देने का, विधान किया है, मौर .भरन्यो को गया, तो उस का सवेस्व, उस के लिये न रहा । वनुते वन संभक्तौ ।

English

May Tvashtar, maker of fair things, be gracious, and lead your whole lives on to full existence.

अध्याय १२

श्लोक 2.9

क्र॒व्याद॑म॒ग्निमि॑षि॒तो ह॑रामि॒ जना॑न् दृं॒हन्तं॒ वज्रे॑ण मृ॒त्युम्।नि तं शा॑स्मि॒ गार्ह॑पत्येन वि॒द्वान् पि॑तृ॒णां लो॒केऽपि॑ भा॒गो अ॑स्तु

kravyādamagnimiṣito harāmi janān dṛṃhantaṃ vajreṇa mṛtyum| ni taṃ śāsmi gārhapatyena vidvān pitṛṇāṃ loke'pi bhāgo astu

हिन्दी अर्थ

वह (भयज्ञियः) यज्ञ करने योग्य नहीं रहता, (हतवर्चा; रवति) भौर कान्तिरदित; हौ जाता है, (एनेन ) इस हाराः (हविः) ल (न अत्तवे) नहीं खाया जात्रा-। वह. (कृष्याः, गोः, धनात्) कृषि कंनेःसे, गौ श्रौर धनं से नं यज्ञ करने मं दक्त होता, न -खा-पी सकता; कान्ति, रहित होः. जाता,. भ्रौर सम्पत्ति से भी वल्चित हो जाता है । = खुहैषये म बत्याति पयोः नीत्य ।

English

As the days follow days in close succession, as with the seasons duly come the seasons. As each successor fails not his foregoer, so constitute the lives of these, Ordainer! Gather your strength, my friends; the stream flows stony: acquit yourselves as men, and cross

अध्याय १२

श्लोक 2.10

क्र॒व्याद॑म॒ग्निं श॑शमा॒नमु॒क्थ्यं॑१ हि॑णोमि प॒थिभिः॑ पितृ॒याणैः॑ ।मा दे॑व॒यानैः॒ पुन॒रा गा॒ अत्रै॒वैधि॑ पि॒तृषु॑ जागृहि॒ त्वम्

kravyādamagniṃ śaśamānamukthyaṃ1 hiṇomi pathibhiḥ pitṛyāṇaiḥ | mā devayānaiḥ punarā gā atraivaidhi pitṛṣu jāgṛhi tvam

हिन्दी अर्थ

पृथिवी पर संपात करते है । इस प्रकार पृथिवी पक्षियों के लिये भी विराम मे मिले हए (विदिते) विहित हँ (सा) वहं (भुमिः पृथिवी) उत्पादिका ढकी हई, (भद्रया) मद्रबुद्धि के साथ (नः) हमे (भ्रियेः धामनि धामनि) भिय स्थानों मे (दातु) स्थापित करे॥ - न : इविकर त्था चमकीलो होता है .। परे-हटने भर समीप-भरने के अनुसार (भविः) श्रग्न की ज्वाला (वाति).€

English

side! May Earth the Goddess, she who bears her treasure stored up in many a place, gold, gems,

अध्याय १२

श्लोक 2.11

समि॑न्धते॒ संक॑सुकं स्व॒स्तये॑ शु॒द्धा भव॑न्तः॒ शुच॑यः पाव॒काः ।जहा॑ति रि॒प्रमत्येन॑ एति॒ समि॑द्धो अ॒ग्निः सु॒पुना॑ पुनाति

samindhate saṃkasukaṃ svastaye śuddhā bhavantaḥ śucayaḥ pāvakāḥ | jahāti ripramatyena eti samiddho agniḥ supunā punāti

हिन्दी अर्थ

अभिः सये भ्रापों पेषां विनं देवांश सं द॑दुः ॥५३॥ सर्य, जल तथा सब देवों ने (मेषाम्) मुके मेषा (संददुः) दी है । होने लगती, सूयं मौ चमकंने लगता, जल स्वच्छ हो जाता-इसं प्रकार सबं देवामिल.कर काय्षेत्र के लिये बुद्धि को भधिक विकसित कर देते है । भस्मि) संमुख भएका मै पराभावः.करता ह, (विस्वाषाट्) सब्र काम

English

and riches, Giver of opulence, grant great possessions to us bestowing them with love and favour.

अध्याय १२

श्लोक 2.12

दे॒वो अ॒ग्निः संक॑सुको दि॒वस्पृ॒ष्ठान्यारु॑हत्।मु॒च्यमा॑नो॒ निरेण॒सोऽमो॑ग॒स्मां अश॑स्त्याः

devo agniḥ saṃkasuko divaspṛṣṭhānyāruhat| mucyamāno nireṇaso'mogasmāṃ aśastyāḥ

हिन्दी अर्थ

शरद् ऋतुः म विजिगोषु राजा, विजययात्रां के" निमित्त; निज- शक्ति का भभिमानं करता है .1 ॥ ५ + (देवि) दिव्यगुणियों के निवास द्वारा दिव्यगुणवती है पृथिवी ! (व्यसपंः) विशेषतया सरकी है- (तदानीम्) तब (त्वा) तु .मं (सुभूतम्) चारो दिकशाभों के निवासियों को (श्रकल्पयथाः) तु ने सामथ्यंयूक्त निदिष्ट मागं से व्यापार होता रहा है, तब पृथिवी एेवयं वाली होती रही

English

Earth, bearing folk of many a varied language with divers rites as suits their dwelling-places, Pour, like a constant cow that never faileth, a thousand streams of treasure to enrich me!

अध्याय १२

श्लोक 2.13

अ॒स्मिन् व॒यं संक॑सुके अ॒ग्नौ रि॒प्राणि॑ मृज्महे ।अभू॑म य॒ज्ञियाः॑ शु॒द्धाः प्र ण॒ आयूं॑षि तारिषत्

asmin vayaṃ saṃkasuke agnau riprāṇi mṛjmahe | abhūma yajñiyāḥ śuddhāḥ pra ṇa āyūṃṣi tāriṣat

हिन्दी अर्थ

समान घटनाएं होती रहती है, इस मे प्रमाण है ““सुर्याचन््रमसौ धाता यथा- भरण्य, (ये संग्रामाः) जो ग्राम संगठन, (समितयः) तथा राजसभाए है (तेषु) उन में है पृथिवी ! (ते) तेरे सम्बन्ध मे (चाड वदेम) प्रशंसा वचन ग्राम । सभाः, समितयः लोकसभाए, तंथा राजसभाए 1. “समितयः” के कां १२। सुऽ भथवतेद-भाष्य २५९ ओषध्यो का संगम होता है, जसे कि राजाध्रों का समितिरमे, वह मेधावी “भिषक् कहा जाता दहै, जो किं रोग कीटाणुभ्रो भ्रौर रोगों का हनन भ्रौर विना करता ह । इस वर्णेन से प्रतीत होता हं किं समितयः का भ्रथं “राज- सभाए ह । जिस पृथिवी का शासन उत्तम हो, जिस से कि प्रत्येक पृथिवी

English

Thy snake, thy sharply stinging scorpion, lying concealed, be- wildered, chilled with cold of winter,

अध्याय १२

श्लोक 2.14

संक॑सुको॒ विक॑सुको निरृ॒थो यश्च॑ निस्व॒रः ।ते ते॒ यक्ष्मं॒ सवे॑दसो दू॒राद् दू॒रम॑नीनशन्

saṃkasuko vikasuko nirṛtho yaśca nisvaraḥ | te te yakṣmaṃ savedaso dūrād dūramanīnaśan

हिन्दी अर्थ

(यात्) जब से (श्रजायत) पेदा हुई है पृथिवी (तान् जनान्) उन जनों को (वि दुधुवे) विविध कालो में कम्पाती रही है, इव ) जंसे कि (भ्रदवः घोड़ा (रजः) धूली को कम्पाता है । (मन्द्रा) पृथिवी मस्दगति वाली है, भ्रोषधियों को (मुभिः) ग्रहण वयि हुई है । जय हतां है । “सत्यमेव. जयते", सत्य की ही विजय होती है । परक्षय, होता रहता है ताकि प्राणो मोक्ष के. लिये श्रग्रसर होति रहँ । पृथिवी पर शिक नदीं । रक्षिका होने के कारण ही प्राणियों के लिये पृथिवी वनस्पति-

English

The worm, O Prithivī, each thing that in the Rains revives and stirs, Creeping, forbear to creep on us! With all things gracious bless thou us.

अध्याय १२

श्लोक 2.15

यो नो॒ अश्वे॑षु वी॒रेषु॒ यो नो॒ गोष्व॑जा॒विषु॑ ।क्र॒व्यादं॒ निर्णु॑दामसि॒ यो अ॒ग्निर्ज॑न॒योप॑नः

yo no aśveṣu vīreṣu yo no goṣvajāviṣu | kravyādaṃ nirṇudāmasi yo agnirjanayopanaḥ

हिन्दी अर्थ

करना । भ्ररव जंसे शरीरलग्न धूली को, शरीर कम्पा कर, फाड़ फंकता है वैसे पृथिवी भ्रपने पर बसे भाततायिभ्रों को, भूचाल भ्रादि द्वारा फाड़ फंकती 'गगरषषोषरोरषयपिरषििकिरिकिकरकििन कावप गणयसि ममम करती रहती है । परन्तु उसं की गति हरे भ्रनुभूत बही होती, प्रतेः उसकी गति को मना भर्थात् मन्द कहा है। २६० भथववेद-माष्य का० १२। सु° १

English

Thy many ways on which the people travel, the road for car and wain to journey over, Thereon meet both the good and bad, that pathway may we attain without a foe or robber.

अध्याय १२

श्लोक 2.16

अन्ये॑भ्यस्त्वा॒ पुरु॑षेभ्यो॒ गोभ्यो॒ अश्वे॑भ्यस्त्वा ।निः क्र॒व्यादं॑ नुदामसि॒ यो अ॒ग्निर्जी॑वित॒योप॑नः

anyebhyastvā puruṣebhyo gobhyo aśvebhyastvā | niḥ kravyādaṃ nudāmasi yo agnirjīvitayopanaḥ

हिन्दी अर्थ

व्यक्तियों को (श्रव हन्मि) पि्ाड हैता हूं । (नी) +-हन् गतौ । मधुर बोलने, परन्तु छानवीन कर सदा सत्य बोलने से लोगो की दृष्टि में नीचा करता है । गुरुजन बच्चों को मघुरमाषी होने तथा सदा सत्य बोलने की शिक्षा दिया करर । वी) पृथिवी (मे) मु (अधि ब्रवीतु) भधिकार पूर्वकं सदपदेश किया करे, जंसेकि माता (पयसा सह) दुष पिलाने के साथ साथ शिशु को सदपदेश तो कीलालम् भरत्ननाम (निषं० २।७) । पृथिवी प्रर शान्ति, फुलवा- इया, भरशत भन्न, तथा जल हो .तो पृथिवी सुख टेती है। तथा बन्चों की, सदाचार-शिक्षा रिश्ुकाल से ही प्रारम्भ हो जानी चाहिए ।

English

With all things gracious bless thou us. Supporting both the foolish and the weighty she bears the death both of the good and evil.

अध्याय १२

श्लोक 2.17

यस्मि॑न् दे॒वा अमृ॑जत॒ यस्मि॑न् मनु॒ष्याऽ उ॒त।तस्मि॑न् घृत॒स्तावो॑ मृ॒ष्ट्वा त्वम॑ग्ने॒ दिवं॑ रुह

yasmin devā amṛjata yasmin manuṣyā' uta| tasmin ghṛtastāvo mṛṣṭvā tvamagne divaṃ ruha

हिन्दी अर्थ

कां° १२। सू° १ भववेद-भाष्य २६१ मौर त्राण योम्य पदार्थं (गुहा) पृथिवी की गुफा मे छिपा हृभा (निदितम्) रखा हृभा है, वह (मातुमदम्यः) पृथिवी माता सेः उत्पन्न सभी प्राणियों के (मोगे) मोग के निमित्त (ब्राविः भ्रभवत्) भोविभरूत भरा है।.. पृथिवी जब सूर्ये से पृथक् हुई तब यह चमकतीं वायुरूपा थी! शनः- वर्षा होती रही । इस से समूद्रमयी पृथिवी होती गई । “ततः समुद्रो भरणेवः”

English

In friendly concord with the boar, Earth opens herself for the wild swine that roams the forest.

अध्याय १२

श्लोक 2.18

समि॑द्धो अग्न आहुत॒ स नो॒ माभ्यप॑क्रमीः ।अत्रै॒व दी॑दिहि॒ द्यवि॒ ज्योक् च॒ सूर्यं॑ दृ॒शे

samiddho agna āhuta sa no mābhyapakramīḥ | atraiva dīdihi dyavi jyok ca sūryaṃ dṛśe

हिन्दी अर्थ

की सब सन्तानो का, भोजन, पालन-पोषण तथां त्राण कौ वस्तु्रों परं त्वम॑स्यावधैनी जनानामदितिः केमुदुघां परथाना । बीज बोने भौर कृषि काटने कीं, स्थली है; (भ्रदितिः) भखण्डरूपा तु (कामदुधा) प्रजाजनों कौ कामनाभ्रों को - पूर्णं करती है, . (पप्रथाना) भौर तेरा यदा कीं वृष्टि से विस्तार होता है । (यत).जो (ते) तेरी (ऊनम्) मुखिया होता हृभा, जनयिता है = २६२ भ्रथरवंवेद-माष्य का० १२।सु०१

English

All sylvan beasts of thine that love the woodlands, man-eaters,. forest-haunting, lions, tigers, Hyena, wolf, Misfortune, evil spirit, drive from us, chase the demons to a distance.

अध्याय १२

श्लोक 2.19

सीसे॑ मृड्ढ्वं न॒डे मृ॑ड्ढ्वम॒ग्नौ संक॑सुके च॒ यत्।अथो॒ अव्यां॑ रा॒मायां॑ शी॒र्षक्तिमु॑प॒बर्ह॑णे

sīse mṛḍḍhvaṃ naḍe mṛḍḍhvamagnau saṃkasuke ca yat| atho avyāṃ rāmāyāṃ śīrṣaktimupabarhaṇe

हिन्दी अर्थ

की उपजाऊ शक्ति में न्यूनता भ्रा जाती है। तथा बजर भूमयो मे उपजाऊ दाविति नहीं होती । इस न्यूनता को खाद तथा भ्रन्य उपायौ द्वारा राजा लोग पूरित करते रहँ । जल कान होना भी कृषिकमं मे बाधक होता है । है । इस न्यूनता की पूति राज्याधिकारियों को करनी चाहिए । ऋतस्य उदकनौम (निषं० १।१२) । तथा ऋतस्य नियमों का । प्रजा के लिये (पृथिवि ) है पृथिवो! (प्रसूताः) हम तेरे उत्पन्न कियिपृत्रहैं। (नः) हमारी वोध कौ प्राप्त हृए, (तुभ्यम) तेरे लिये, (बलिहृतः) राज्य-कर देने वाले पृथिवी के रोगुः रहित होने.पर पृथिवी के पूत्रो की भ्रायु बढ़ जाती

English

Gandharvas and Apsarases, Kimīdins, and malignant sprites,

अध्याय १२

श्लोक 2.20

सीसे॒ मलं॑ सादयि॒त्वा शी॑र्ष॒क्तिमु॑प॒बर्ह॑णे ।अव्या॒मसि॑क्न्यां मृ॒ष्ट्वा शु॒द्धा भ॑वत य॒ज्ञियाः॑

sīse malaṃ sādayitvā śīrṣaktimupabarhaṇe | avyāmasiknyāṃ mṛṣṭvā śuddhā bhavata yajñiyāḥ

हिन्दी अर्थ

पर रख कर सीस को भस्म.बना कर, उस का प्रयोग यक्ष्मरोग के निवारण. के लिये कथित किया है, गौरो भौर पुरुषो के यक्ष्मरोग के लिये सीसभस्म,.का प्रयोग कहा है (मन्त १) । इस उरा निर्मित सीसभस्म, यक्ष्म का निवारण करः ःरोगी के मांस णाथं “माषाज्य'' का कथन हृभा है । भाषाज्य का भ्रथं है ““उदरद भ्रौर चुतः । चृत, सम्भवतः भ्रजा (बकरी) के दुका घृत । प्रजा

English

On whom the Wind comes rushing, Mātarisvan, rousing the dust and causing trees to tremble, and flame pursues the blast. hither and thither;

अध्याय १२

श्लोक 2.21

परं॑ मृत्यो॒ अनु॒ परे॑हि॒ पन्थां॒ यस्त॑ ए॒ष इत॑रो देव॒याना॑त्।चक्षु॑ष्मते शृण्व॒ते ते॑ ब्रवीमी॒हेमे वी॒रा ब॒हवो॑ भवन्तु

paraṃ mṛtyo anu parehi panthāṃ yasta eṣa itaro devayānāt| cakṣuṣmate śṛṇvate te bravīmīheme vīrā bahavo bhavantu

हिन्दी अर्थ

दारा भ्रजाचुत म भी विद्यमान होते है (‰) ।. माषाज्य का भक्षण तथा इस की भ्राहूतियां देनी चाहिए, साथ ही जलनिष्ठ अग्निर्यो को शुधि तथा. भरागुवद्धि का वर्णेन हृभ्रा है । : सौर रषमियु हारा सिरददं की चिकित्सा (१९, २०).1 ७-१००-वुषो तक जीवित रहने के लिये "परिषि" का कथन (२३) । ८- भ्रदमन्वती भर्थात् संसारंरूपी पथरीली नदी से तैर कर पार होना

English

Earth, upon whom are settled, joined together, the night and day, the dusky and the ruddy, Prithivī compassed by the rain about her,

अध्याय १२

श्लोक 2.22

इ॒मे जी॒वा वि मृ॒तैराव॑वृत्र॒न्नभू॑द् भ॒द्रा दे॒वहु॑तिर्नो अ॒द्य।प्राञ्चो॑ अगाम नृ॒तये॒ हसा॑य सु॒वीरा॑सो वि॒दथ॒मा व॑देम

ime jīvā vi mṛtairāvavṛtrannabhūd bhadrā devahutirno adya| prāñco agāma nṛtaye hasāya suvīrāso vidathamā vadema

हिन्दी अर्थ

यामो दवारा ऋषियों ने मृत्यु को खदेडा (२९) का वर्णेन । ११-जलचिकित्सा दवारा रसि भ्रौर दुष्कृत के निवारण का (४०, ४१); १३--यकष्मनिवारण के साधनों का वणेनः--(१) भविङृष्णा, (२) सीस- भस्म, (६) चान्दी भ्रथवा सुवर्णं था दोनों, (४) पिसे उरद, (५) भररण्यानी सेवन, (६) जीं इषीका का होम, (७) तिल, (८) पिञ्ज भर्थात् तिलो के पीडन द्वारा तैल निकाल कर बची खली । (६) समीप देनी चाहिए, ताकि यज्ञोत्त्य घूम रोगी के फेफड मेँ जा सके ।

English

Happily may she stablish us in each delightful dwelling place. Heaven, Earth, the realm of Middle Air have granted me this ample room,

अध्याय १२

श्लोक 2.23

इ॒मं जी॒वेभ्यः॑ परि॒धिं द॑धामि॒ मैषां॒ नु गा॒दप॑रो॒ अर्थ॑मे॒तम्।श॒तं जीव॑न्तः श॒रदः॑ पुरू॒चीस्ति॒रो मृ॒त्युं द॑धतां॒ पर्व॑तेन

imaṃ jīvebhyaḥ paridhiṃ dadhāmi maiṣāṃ nu gādaparo arthametam| śataṃ jīvantaḥ śaradaḥ purūcīstiro mṛtyuṃ dadhatāṃ parvatena

हिन्दी अर्थ

ग्नि, जोकि चव्र का मांस खाती है, भौर यक्ष्म जीवित रोगी के मांस २६६ अथ्ववेद-भाष्य रक० १२ । सु०र ४२ त्रिपदा एकावसाना भुरिगार्ची गायत्री; ४४ एकावसाना द्विपवा भाच हे अग्नि! (नडम्) नड पर (भ्रा रोह) तु भ्रारोहण कर, (भरव) इस नड पर (ते). तेरा (लोकः न) घर नहीं, (इदं सीसम्) यहु सिक्का (ते) तेरा (भागवेयम्) माग है, (एहि) तु भ्रा । (यः) ह (गोषु यक्ष्मः) चाहिए । नड (२ ०९0) दलदलौ भूमि में पेदा होता है । सीस शीघ्र पिल जावा है.इसलिये तीतब्र ज्वाला न चाहिए, नड की भल्पकालिक भौर नमं

English

Agni, Sun, Waters, all the Gods have joined to give me mental power. I am victorious, I am called the lord superior on earth,

अध्याय १२

श्लोक 2.24

आ रो॑ह॒तायु॑र्ज॒रसं॑ वृणा॒ना अ॑नुपू॒र्वं यत॑माना॒ यति॒ स्थ।तान् व॒स्त्वष्टा॑ सु॒जनि॑मा स॒जोषाः॒ सर्व॒मायु॑र्नयतु॒ जीव॑नाय

ā rohatāyurjarasaṃ vṛṇānā anupūrvaṃ yatamānā yati stha| tān vastvaṣṭā sujanimā sajoṣāḥ sarvamāyurnayatu jīvanāya

हिन्दी अर्थ

नड पर भ्रग्नि देर तकं जलती न रहनी चाहिए, इसे “न ते -अथ लोकः” द्वारा सूचित किया है । मानो यकष्मकाभी निवारण हो जायगा । इ डरा सीममस्म की अद्भूत राक्ति कोः है! निरजामसि = निर् ‡-भरज (गतिक्षेपणयोः) । कां० १२।सु०२ प्रयर्ववेद-भाष्य २६७

English

Triumphant, all-o’erpowering the conqueror on every side There, when the Gods, O Goddess, named thee, spreading thy wide expanse as thou wast

अध्याय १२

श्लोक 2.25

यथाहा॑न्यनुपूर्वं भव॑न्ति॒ यथ॒र्तव॑ ऋ॒तुभि॒र्यन्ति॑ सा॒कम्।यथा॒ न पूर्व॒मप॑रो॒ जहा॑त्ये॒वा धा॑त॒रायूं॑षि कल्पयै॒षाम्

yathāhānyanupūrvaṃ bhavanti yathartava ṛtubhiryanti sākam| yathā na pūrvamaparo jahātyevā dhātarāyūṃṣi kalpayaiṣām

हिन्दी अर्थ

मौर बाहर से काला हो वह उत्तम होता है । सीसा क्षयरोग, वातविकार, के रोगो में लाभदायक होता है । यह जीवन-रवित्तव्ंक, जठराग्नि को परदीप्त करने वाला, बलवद्धं क होता है । इसे मन्दाग्नि मे पकाए" । सोंठ के ददं भ्रौर कमर का ददं मिटता है" । र की प्रदांसा से, (च भ्रनुकरेण करेण) (च) तथा तदनुरूप कर्मो के करने मृत्यु को, (निरजामसि) हम निगेत करते है, निकाल फकते ह । ।

English

broadening eastward, Then into thee passed many a charm and glory: thou madest for thyself the world’s four

अध्याय १२

श्लोक 2.26

अश्म॑न्वती रीयते॒ सं र॑भध्वं वी॒रय॑ध्वं॒ प्र त॑रता सखायः ।अत्रा॑ जहीत॒ ये अस॑न् दु॒रेवा॑ अनमी॒वानुत्त॑रेमा॒भि वाजा॑न्

aśmanvatī rīyate saṃ rabhadhvaṃ vīrayadhvaṃ pra taratā sakhāyaḥ | atrā jahīta ye asan durevā anamīvānuttaremābhi vājān

हिन्दी अर्थ

(इतः) इस शरौर से (मृत्युम्). अपमृत्यु को (निर्) हम निकाल भदान भावनाः को (निर् भ्रजामसि) निगंत करते तथा निकाल फैकते २९०. भग्रवेवेद-गाष्य कां० १२।सु०२. तरे भरति (भर सुवामसि) हम भेज देते है, पररित करे है ।

English

regions. In hamlets and in woodland, and in all assemblages on earth,

अध्याय १२

श्लोक 2.27

उत् ति॑ष्ठता॒ प्र त॑रता सखा॒योऽश्म॑न्वती न॒दी स्य॑न्दत इ॒यम्।अत्रा॑ जहीत॒ ये अस॒न्नशि॑वाः शि॒वान्त्स्यो॒नानुत्त॑रेमा॒भि वाजा॑न्

ut tiṣṭhatā pra taratā sakhāyo'śmanvatī nadī syandata iyam| atrā jahīta ye asannaśivāḥ śivāntsyonānuttaremābhi vājān

हिन्दी अर्थ

रोग को दुर करने मे ही सामान्य व्यक्ति का धनं लग जाता है, तो वह दान देने का सामर्थ्यं ही नहीं रखता । भौर धृतयुक्त या उवं भौर प्रजाघुत युक्त करके (दुरं प्रहिणोमि) दूर जर्लो में स्थित भ्रगिियो को मीषरप्तहो। ७१।६ के भनुसार भष. . भाज्य श्रौर शुक्रि (सोती) की - भ्राहूतियो काः. , ई । वेदो भें रोग के कीदागुभों को परि्ाष कहा है, अर्थात् प्रथित (मुस) कीः याचना करने बाले । भरच=याचने (भ्वादि) . .

English

In gatherings, meeting of the folk, we will speak glorious things of thee. As the horse scattereth the dust, the people who dwelt upon the land, at birth, she scattered,

अध्याय १२

श्लोक 2.28

वै॒श्व॒दे॒वीं वर्च॑स॒ आ र॑भध्वं शु॒द्धा भव॑न्तः॒ शुच॑यः पाव॒काः ।अ॒ति॒क्राम॑न्तो दुरि॒ता प॒दानि॑ श॒तं हिमाः॒ सर्व॑वीरा मदेम

vaiśvadevīṃ varcasa ā rabhadhvaṃ śuddhā bhavantaḥ śucayaḥ pāvakāḥ | atikrāmanto duritā padāni śataṃ himāḥ sarvavīrā madema

हिन्दी अर्थ

कां० १२। सुर र श्रयवेवेद-माष्य . २६६ ग्रथवेवेद में व्याघ्र पद गौणा्थंक मी है । यथा .(१२।२।४३) । तथा चेवाने (पुरषे मूते) पुरुष कें मर जाने पर, (मन्युना) रोष के कारण कर देते है, समाप्त कर देते है" (्रगने) है म्नि! (तत्) वह (त्वया)

English

Leader and head of all the world, delightful, the trees’ protectress and the plants’ upholder. Whate’er I say I speak with honey-sweetness, whatever I behold for that they love me.

अध्याय १२

श्लोक 2.29

उ॒दी॒चीनैः॑ प॒थिभि॑र्वायु॒मद्भि॑रति॒क्राम॒न्तोऽव॑रान् प॑रेभिः ।त्रिः स॒प्त कृत्व॒ ऋष॑यः॒ परे॑ता मृ॒त्युं प्रत्यौ॑हन् पद॒योप॑नेन

udīcīnaiḥ pathibhirvāyumadbhiratikrāmanto'varān parebhiḥ | triḥ sapta kṛtva ṛṣayaḥ paretā mṛtyuṃ pratyauhan padayopanena

हिन्दी अर्थ

धामिक हृत्य कयि जा कर गृहवासियों की रक्षा हो सके । परन्तु इन कर्मो मी यदि गृहवासी की मृत्यु हो जाती है तो भश्वद्धानु गृहवासी ऋ ढ होकर श्तश्यारदाय) दीयं भाय के लिये १०० वर्ष तुक जीवित रहते क्रे लिश । २७० भ्र्ववेद-माष्य कां० १२। सु° यदि प्रथमर्न्याधान, विधि के प्रतिकूल हरा है, जिस का परिणाम ताकि गृहवास्तियो की १०० वर्षो.की दीर्घायु हो सके ।

English

Dazzling, impetuous am I: others who fiercely stir I slay. Mild, gracious, sweetly odorous, milky, with nectar in her breast,

अध्याय १२

श्लोक 2.30

मृ॒त्योः प॒दं यो॒पय॑न्त॒ एत॒ द्राघी॑य॒ आयुः॑ प्रत॒रं दधा॑नाः ।आसी॑ना मृ॒त्युं नु॑दता स॒धस्थेऽथ॑ जी॒वासो॑ वि॒दथ॒मा व॑देम

mṛtyoḥ padaṃ yopayanta eta drāghīya āyuḥ prataraṃ dadhānāḥ | āsīnā mṛtyuṃ nudatā sadhasthe'tha jīvāso vidathamā vadema

हिन्दी अर्थ

का राज्य होता है-। सक्ति के क्षीण होते रहनेः के कारण इस -मागं के के पथिकं की १०० वर्षो से पिले ही मृत्यु हो जाने की सम्भावना रहती . इम्चान पर भधिकार जमाती है । सधस्थ का भ्रथं है “साथ-साथ बैठने करव्यादेमुषनि ्र हिणोमि दूरं यमरांहे गच्छ्तु रिप्रवाहः । शृहायमिक्ठरो जातवेदा देवो देवेभ्यो ह्यं व॑हतु भजानन् । ८॥ .

English

A useful vessel, hid, when, for enjoyment, she was made mani- fest to those with mothers. Thou art the vessel that containeth people, Aditi, granter of the wish, far-spreading.

अध्याय १२

श्लोक 2.31

इ॒मा नारी॑रविध॒वाः सु॒पत्नी॒राञ्ज॑नेन स॒र्पिषा॒ सं स्पृ॑शन्ताम्।अ॒न॒श्रवो॑ अनमी॒वाः सु॒रत्ना॒ आ रो॑हन्तु॒ जन॑यो॒ योनि॒मग्रे॑

imā nārīravidhavāḥ supatnīrāñjanena sarpiṣā saṃ spṛśantām| anaśravo anamīvāḥ suratnā ā rohantu janayo yonimagre

हिन्दी अर्थ

मज देवा ह (रिप्रवाहः) रिभ.. भति पापं का बहन करने वासी क्रव्याद् कां० १२1 सु०२ भरथववेद-माष्य २७१ (इह) यहां हमारे घर मे (श्रयम् इतरः जं तवेदाः) यह उस से भित यमराज्ञः=यमराजा की प्रजा दहै, गृहस्थजन । गृहस्थ पितृयाण मागे है जहां कि मूत्युएं होती रहती हैँ भौर पुनर्जन्म होते रहते है । भरत गृहस्थ मानो यमराजां के भ्रधीनदहै, उसकी प्रजाहै । गृहस्थमेखिकी

English

Prajāpati, the first-born Son of Order, supplieth thee with what- soe’er thou lackest. Let thy breasts, frec from sickness and Consumption, be.

अध्याय १२

श्लोक 2.32

व्याक॑रोमि ह॒विषा॒हमे॒तौ तौ ब्रह्म॑णा॒ व्य॑१हं क॑ल्पयामि ।स्व॒धां पि॒तृभ्यो॑ अ॒जरां॑ कृ॒णोमि॑ दी॒र्घेणायु॑षा॒ समि॒मान्त्सृ॑जामि

vyākaromi haviṣāhametau tau brahmaṇā vya1haṃ kalpayāmi | svadhāṃ pitṛbhyo ajarāṃ kṛṇomi dīrgheṇāyuṣā samimāntsṛjāmi

हिन्दी अर्थ

नितं शंसि गापत्येन विद्धान् पितृणां छोकेऽपिं मागो अ॑स्तु ।॥॥ . कषासित करता हं, (अपि-अपि च) तथा (पितृणाम् लोके) माता पिता दहन्तम् = मृत्यु शेन पर शरीर पत्थर समान निदचल हो जाता करवपाद॑मुभनि शंशषमानमुक्थ्यंडईं॑अ हिणोमि पथिभिः पितृयाणैः । मा देव्याः पुनराना अगत्रैवेषिं पितुं जागहि त्वम् ॥१०॥ हिणोमि) नै दूर करता हू! (पितृयाणैः पथिभिः) मातापिता जिन मार्गो प्र्

English

Prithivī, produced for our advantage. Through long-extended life wakeful and watching still may we be thy tributary servants.

अध्याय १२

श्लोक 2.33

यो नो॑ अ॒ग्निः पि॑तरो हृ॒त्स्व॑१न्तरा॑वि॒वेशा॒मृतो॒ मर्त्ये॑षु ।मय्य॒हं तं परि॑ गृह्णामि दे॒वं मा सो अ॒स्मान् द्वि॑क्षत॒ मा व॒यं तम्

yo no agniḥ pitaro hṛtsva1ntarāviveśāmṛto martyeṣu | mayyahaṃ taṃ pari gṛhṇāmi devaṃ mā so asmān dvikṣata mā vayaṃ tam

हिन्दी अर्थ

२७२ क भरयर्वेवेद-भाष्य . कां० १२। सू०२ भ्रागाः) न्रा, (प्रत्र एव) इस पितृमागे मं.ही (एषि) तु बनौ रह, बार, भ्राक्रमण करती है । - पुनः=देवयानमागियो की मृत्यु एक बार होती है, वार बार नही, क्योंकि वे चिरकाल के लिये मुक्त हो जाते ह । शक्च- छृडाती है (एनः भ्रत्येति) पापी रोगकीटाणु का श्रतिक्रमण करती, तथा

English

O Earth, my Mother, set thou me happily in a place secure. Of one accord with Heaven, O Sage, set me in glory and in wealth.

अध्याय १२

श्लोक 2.34

अ॒पा॒वृत्य॒ गार्ह॑पत्यात् क्र॒व्यादा॒ प्रेत॑ दक्षि॒णा।प्रि॒यं पि॒तृभ्य॑ आ॒त्मने॑ ब्र॒ह्मभ्यः॑ कृणुता प्रि॒यम्

apāvṛtya gārhapatyāt kravyādā preta dakṣiṇā| priyaṃ pitṛbhya ātmane brahmabhyaḥ kṛṇutā priyam

हिन्दी अर्थ

उत्पन्न हुए मलादि दूर जाते है । मृत्यु बड़ा चिक्षा गुरु" है, लिसे देख कर केई बार जीवन मेंसुधार होता है, भौर व्यक्तिरेस कर्मोकेकरनेसे उपरत हो जाता है जो कि यक्ष्म के उत्पादक हौ, भ्रौर शुंदधाचरणं वाला हो शां १२। सु०२ भ्रथर्ववेद-माष्य , २७३ देवो अभिः संकसुको दिवसपृषठन्यारत् ।

English

A funeral hymn, and deprecation of Agni the Consumer of corpses This is no place to hold thee; mount the Nāda: this lead is thine appointed share. Come hither.

अध्याय १२

श्लोक 2.35

द्वि॒भा॒ग॒ध॒नमा॒दाय॒ प्र क्षि॑णा॒त्यव॑र्त्या ।अ॒ग्निः पु॒त्रस्य॑ ज्ये॒ष्ठस्य॒ यः क्र॒व्यादनि॑राहितः

dvibhāgadhanamādāya pra kṣiṇātyavartyā | agniḥ putrasya jyeṣṭhasya yaḥ kravyādanirāhitaḥ

हिन्दी अर्थ

(देवः). देवंरूपी (संकयुकः अग्निः) संकसुकं भग्न, (दिवः पृष्टानि) भ्ररणा प्रद है, इस लिये इसे देव कहा है, साय ही शव को भस्मी भूत कर के, एव के.षरमें ही रहने पर जो घर कौ भ्रशुद्धि होती है उसे दूर कर देती पृथिवी पर जितनी भो भ्रग्नियां हँ उन का मूल स्नोत द्ूलोक.ही है । संकसुक भ्रगि का भी मूल स्नोत चुलोक ही है । इस लिये “इस.का वर्णन” दमद्छान मेँ नहीं दीखती, मानो वह निज कमं का सम्पादन कर निज खोत

English

Together with Consumption in the cattle, Consumption in our men, go henee, go southward. With this we chase and banish all consumptive malady and

अध्याय १२

श्लोक 2.36

यत् कृ॒षते॒ यद् व॑नु॒ते यच्च॑ व॒स्नेन॑ वि॒न्दते॑ ।सर्वं॒ मर्त्य॑स्य॒ तन्नास्ति॑ क्र॒व्याच्चेदनि॑राहितः

yat kṛṣate yad vanute yacca vasnena vindate | sarvaṃ martyasya tannāsti kravyāccedanirāhitaḥ

हिन्दी अर्थ

करता है (अथव ० १९।२७।३, १६।३२।४) + । श्जसिन् वयं संकंडुके अग्नो रिपभाणि सृज्महे 1 १. यकषयोग्ं हो कर यञ्ञियाग्नि भ यद्मरोगनालक' भरोषधि्ों की रातिं दे कर (मन्न ११ दीर्घायु को प्राप्त करना । २७४ भयवेद-माष्य कां० १२ 1 सु०.२ संकसको विक॑सुको निकैथः यञ्च॑ निस्व॒रः । भी वणित कियादहै, भौर भिन्न-भिघ्ल खूप्मेंमी।

English

Death, With sinner andamalicious man, with helper and with minister,

अध्याय १२

श्लोक 2.37

अ॒य॒ज्ञि॒यो ह॒तव॑र्चा भवति॒ नैने॑न ह॒विरत्त॑वे ।छि॒नत्ति॑ कृ॒ष्या गोर्धना॒द् यं क्र॒व्याद॑नु॒वर्त॑ते

ayajñiyo hatavarcā bhavati nainena havirattave | chinatti kṛṣyā gordhanād yaṃ kravyādanuvartate

हिन्दी अर्थ

हाय, भ्र गुलियो, लोम; नख भादि किसी भी शरीराङ्ग के विकार में यकम कां० १२।सु०२ भथरवेवेद-भाष्य २७५ (नः) हमारी (गोषु श्रजाविषु) गौभो-वकरियो-भेडो भ है, तथा (यः भग्निः) भग्नि सदृश यक्ष्मरोग॒ (जनयोपनः) जनों क व्याकुल कर देता है उस को (निः नुदामसि) हम निकाल फंकते है, (यः) जो तु किं (जीवित्तथो- पनः जीवितो को व्याकुल कर देता है।

English

Death and Misfortune we expel, Malignity we drive away. O Agni, thou who eatest not the corpse, eat him who hateth us: him whom we hate we send to

अध्याय १२

श्लोक 2.38

मुहु॒र्गृध्यैः॒ प्र व॑द॒त्यार्तिं मर्त्यो॒ नीत्य॑ ।क्र॒व्याद् यान॒ग्निर॑न्ति॒काद॑नुवि॒द्वान् वि॒ताव॑ति

muhurgṛdhyaiḥ pra vadatyārtiṃ martyo nītya | kravyād yānagnirantikādanuvidvān vitāvati

हिन्दी अर्थ

यिन् देषा असंजतु यरिमन् मनुष्या उतः (घृतस्तारवः) घृताहृतियौं दवारा परमेश्वर का स्तबन. करे वाले है रोगिन् ! हृ्रा (त्वम्) तु (दिवम्) . मोद भौर कान्तिः के रिखर पर (दह) २७६. , भ्रथ॑र्ववेद-माष्यः कां १२। सू०२ केरता है । दिव् =मोद, कान्ति. (धातुपाठ) 1

English

thee. If the corpse-eating Agni, or a tiger leaving his lair, hath entered this our homestead,

अध्याय १२

श्लोक 2.39

ग्राह्या॑ गृ॒हाः सं सृ॑ज्यन्ते स्त्रि॒या यन्म्रि॒यते॒ पतिः॑ ।ब्र॒ह्मैव वि॒द्वाने॒ष्यो॒३ यः क्र॒व्यादं॑ निरा॒दध॑त्

grāhyā gṛhāḥ saṃ sṛjyante striyā yanmriyate patiḥ | brahmaiva vidvāneṣyo3 yaḥ kravyādaṃ nirādadhat

हिन्दी अर्थ

मतं कर ! (वि) प्रतिदिन (भत्र) इस पृथिवी पर (एव) ही (दीदिहि) रदेनी चाहिए,--एेसा विधान है । सीसे शृद्द्वं नदे धृदटवभम्नो पकंसुके च यत् । . (यत् शीर्षवितिम्) जो शिरोवेदना है उस को (सीसे) सीसमस्ममें

English

With beans prepared in butter I expel him: far let him go to fires that lie in waters. When, angered that a man hath died, we in our wrath have banished thee,

अध्याय १२

श्लोक 2.40

यद् रि॒प्रं शम॑लं चकृ॒म यच्च॑ दुष्कृ॒तम्।आपो॑ मा॒ तस्मा॑च्छुम्भन्त्व॒ग्नेः संक॑सुकाच्च॒ यत्

yad ripraṃ śamalaṃ cakṛma yacca duṣkṛtam| āpo mā tasmācchumbhantvagneḥ saṃkasukācca yat

हिन्दी अर्थ

सीसभस्म द्वारा शिरोवेदना दूरे होती है। यथा “सोठके चूर्णं कां० १२। सु०२ : भथवेवेद-माष्य - २७७ प्रतत होता है। यह शव कामभो दहन करतोदहै तथा नड भौर सीख का वर्णन हूभाहै, जिसद्वाया किवृक्ष हरे होतेरहैः भ्रौर लतारूपी हरी मालाए धारण करते है । “श्रव्यां रामायाम्” “काली भेड् के दु मे" हसा अर्थं भी सम्भव है । परीक्षणों दारा यहे देखना चाहिए कि इस दूष

English

Again hath Brāhmanaspati disposed thee for long life lasting through a hundred autumns. 188

अध्याय १२

श्लोक 2.41

ता अ॑ध॒रादुदी॑ची॒राव॑वृत्रन् प्रजान॒तीः प॒थिभि॑र्देव॒यानैः॑ ।पर्व॑तस्य वृष॒भस्याधि॑ पृ॒ष्ठे नवा॑श्चरन्ति स॒रितः॑ पुरा॒णीः

tā adharādudīcīrāvavṛtran prajānatīḥ pathibhirdevayānaiḥ | parvatasya vṛṣabhasyādhi pṛṣṭhe navāścaranti saritaḥ purāṇīḥ

हिन्दी अर्थ

उपबहैणे--उपबहण का श्रथ प्रायः. सिरहाना भर्थात् तकिया होता है । इस का सामान्य भरभिप्राय यह हो सकता है.कि शिरोवेदना में तक्िये परसिररखकरसो जाभ्रोतो सोने से श्राराम मिल जायेगा । परन्तु इस देखे (श्रथवं ० ९।८।१,१०) । सिर के रोगो की निवृत्ति “उदित होते हृए होता है । यथा “सं ते शीष्णेः कपालानि हदयस्य च यो विधुः । उद्यान्ना- “कदयपस्य वीवहुण विरवञ्चं विवृहामि ते (भ्रथवं ० २।३३।७) 1 “कच्वप' भें “विवृहामि", “ववण, तथा “उपवहुणे में एक ही “वृह धातु का भरयोग हँ, जिस का श्रथ है-हिसा (चुरादि, स्वादिगण) । इस प्रकार

English

I sweep afar, for sacrifice to Fathers, corpse-eating Agni who hath come among us, Although he saw this other, Jātavedas: in loftiest space let him inflame the caldron.

अध्याय १२

श्लोक 2.42

अग्ने॑ अक्रव्या॒न्निः क्र॒व्यादं॑ नु॒दा दे॑व॒यज॑नं वह

agne akravyānniḥ kravyādaṃ nudā devayajanaṃ vaha

हिन्दी अर्थ

“उपवहेण का भ्रथं है हिसा करने वाली आदित्य की रदिम'; हिसा = १. रामा == कृष्णा, काली ! यथा ““भ्रधोरामः सावित्रः” इति पशुसमाम्नाये २७० भरधरवेवेद-माष्य कां १२।सू०२ रोगकी हिसा भर्थात् विनांश। इस प्रकार “रवि, भौर “कदयप” (मलम्) यक्षमरूपी मल को (सीसे) सीसमस्म मे (सादयित्वा)

English

I drive corpse-eating Agni to a distance: sin-laden let him go to Yamas vassals.

अध्याय १२

श्लोक 2.43

इ॒मं क्र॒व्यादा वि॑वेशा॒यं क्र॒व्याद॒मन्व॑गात्।व्या॒ग्रौ कृ॒त्वा ना॑ना॒नं तं ह॑रामि शिवाप॒रम्

imaṃ kravyādā viveśāyaṃ kravyādamanvagāt| vyāgrau kṛtvā nānānaṃ taṃ harāmi śivāparam

हिन्दी अर्थ

स्थापित करके भ्रथवा विश्ीणे करके, (चीष वतम्) ˆ शिरोवेदना को (उप- श्या के लिये देषो (मन्त्र १९) । पर् (परेहि) तु परे चली जा, (यः ते एषः) जो यह तेरा मागं ‹देवयानात् इतरः) देवो के मागे से भिन्न है 1 मानो (ते चक्षुष्मते शुण्वते) तुक देखते हृए तथा सुतेते हृए के प्रति (्रवीमि) मै कहता हृं । (इह) इस देवों के जीवन कै दो मागे ह--पितृयाण तथा देवयान । देवयान सत्यमय कर भृत्ुकीमार से बच जाते है -। “सत्यं वै देवाः, भनृतं

English

Here let this other, Jātavedas, carry oblation to the Deities, fore- knowing. I quickly sweep away corpse-eating Agni, Death, with his bolt potdepriving men of motion.

अध्याय १२

श्लोक 2.44

अ॒न्त॒र्धिर्दे॒वानां॑ परि॒धिर्म॑नु॒ष्याऽणाम॒ग्निर्गार्ह॑पत्य उ॒भया॑नन्त॒रा श्रि॒तः

antardhirdevānāṃ paridhirmanuṣyā'ṇāmagnirgārhapatya ubhayānantarā śritaḥ

हिन्दी अर्थ

ईमे जीवा वि पूतेराहत्रशमुदू मद्रा देवहतिनों शच । . गर्भनाद्ः, सुरापानम् पुन केऽनतोचम्' काण १२१ सु०र२ भथवेवेद-माष्य । २७६९ (इमे जीवाः) ये जीवितः मनुष्य, (मृतैः) मूर्तो से (वि) वियुक्त

English

From household fire, well-knowing, I divide him: so in the world of Fathers be his portion. Corpse-eating Agni, toil-worn, meet for praises, I send away bypaths used by the Fathers.

अध्याय १२

श्लोक 2.45

जी॒वाना॒मायुः॒ प्र ति॑र॒ त्वम॑ग्ने पितॄ॒णां लो॒कमपि॑ गच्छन्तु॒ ये मृ॒ताः ।सु॒गा॒र्ह॒प॒त्यो वि॒तप॒न्नरा॑तिमुषामु॑षां॒ श्रेय॑सीं धेह्य॒स्मै

jīvānāmāyuḥ pra tira tvamagne pitṝṇāṃ lokamapi gacchantu ye mṛtāḥ | sugārhapatyo vitapannarātimuṣāmuṣāṃ śreyasīṃ dhehyasmai

हिन्दी अर्थ

हमारी (देवहूतिः) परमेदवर देवर के भरति पुकार या प्राना (मद्रा) कल्याण- हेम बह है, (नृतये हसाय) नाचने भौर हंसी-खुशी के लिये । (सुवीरासः) देम) हम परस्पर ज्ञानचर्चा करं । - कल्याणे सुखे च । . विदथम् = विदथानि - वेदनानि ( ज्ञानानि.); यथा (जीवेभ्यः) जीवित मनुष्यों के लिये (इमं परिधिम्) . इस मर्यादा.को

English

Stay there; keep watch among the Fathers: come not again to us by ways whereon Gods travel.

अध्याय १२

श्लोक 2.46

सर्वा॑नग्ने॒ सह॑मानः स॒पत्ना॒नैषा॒मूर्जं॑ र॒यिम॒स्मासु॑ धेहि

sarvānagne sahamānaḥ sapatnānaiṣāmūrjaṃ rayimasmāsu dhehi

हिन्दी अर्थ

कर्मो से व्याप्त (शतं शरदः) सौ वषो तक (जीवन्तः)- जीवित रहते हृए (मत्युम्) मृत्यु कों (तिरः दधताम्) तिरोहित करो, रोके रखो (पवंतेन) नेसे कि पव॑त द्वारा पर्व॑त पारवती शत्र को रोका जाता है । वेद द्वारा जीव॑न के लिये जो मर्यादाएं उपदिष्टं. हुई है, उने भें २८० भथववेद-माष्य . कां० १२1 सु०२ उपदेश्च को, परिधि शूप मर्यादा रूप किया जाता है, तज गौ, भ्रव, पुरुष तथा भ्न्य पश्चु भी भपनी-भपनी पूणं भाय तक जीवित रहते है, क्योंकि वेदों

English

They being cleansed and bright, the purifiers, kindle Sankasuka for our well-being. Impurity leaveth us and sin departeth: lighted by the good cleanser Agni cleanseth.

अध्याय १२

श्लोक 2.47

इ॒ममिन्द्रं॒ वह्निं॒ पप्रि॑म॒न्वार॑भध्वं॒ स वो॒ निर्व॑क्षद् दुरि॒ताद॑व॒द्यात्।तेनाप॑ हत॒ शरु॑मा॒पत॑न्तं॒ तेन॑ रु॒द्रस्य॒ परि॑ पाता॒स्ताम्

imamindraṃ vahniṃ paprimanvārabhadhvaṃ sa vo nirvakṣad duritādavadyāt| tenāpa hata śarumāpatantaṃ tena rudrasya pari pātāstām

हिन्दी अर्थ

(यति स्थ) जितने तुम हो, (भ्रनुपुवंम्) एक -पीछे दुसरा,-ईइस रकार (यतमानाः) प्रयत्न करते हृए,-(जरसम् वृणानाः) भौर जरावंस्था .. चढ़ो ! (सुजनिमा) उत्तम मनुष्य-जीवन देना वाला, तथा (सजोषाः) तुम को, (जीवनाय) जीवित रहने के लिये, (स्वम् भ्रायुः) पूणं भयु तक (यथा) जसे (भ्रहानि) दिन भ्रौर रात (भूतपूर्वम्) एक के पीछे दूसरा, (भवन्ति) होते रहते है, (यथा) जसे (ऋतवः). ऋतुए (ऋतुभिः साकम्) भन्य ऋतुरभ्रो के साथ, एकं के पीछे दूसरी (यन्ति) चलती है,

English

Agni the God, the Breaker-up, hath mounted to the heights of heaven. Released from all transgression, he hath from the curse delivered us.

अध्याय १२

श्लोक 2.48

अ॒न॒ड्वाहं॑ प्ल॒वम॒न्वार॑भध्वं॒ स वो॒ निर्व॑क्षद् दुरि॒ताद॑व॒द्यात्।आ रो॑हत सवि॒तुर्नाव॑मे॒तां ष॒ड्भिरु॒र्वीभि॒रम॑तिं तरेम

anaḍvāhaṃ plavamanvārabhadhvaṃ sa vo nirvakṣad duritādavadyāt| ā rohata saviturnāvametāṃ ṣaḍbhirurvībhiramatiṃ tarema

हिन्दी अर्थ

(यथा) जसे (पूर्वम्) पुवं के दित कोयापू्वंकी ऋतु को (भरपरः) भगला दिन या भ्रगली ऋतु (न जहाति) नहीं छोडती, (एवा) -इसी प्रकारः (घातः) . है विधाता ! (एषाम्) इन प्रजाजनों की (भ्रागरूषि) भायुरभरों को (कल्पय) तू संयोजित कर, या साम््यंयुक्त कर.। . भरहामि = “्रहद्च कृष्णमहरज्जं नं च'' (ऋऽ ६।९।१) मे अहः को कां०-१२.।घु०२ भथवेवेद-भाष्य २८९१. (भ्रदमन्वती) पथरोली नदी (रीयते) बह रहीरहै, (सखायः) हे

English

On Agni here, the Breaker-up, we wipe impurities away. Cleansed, fit for sacrifice have we become: may he prolong our lives.

अध्याय १२

श्लोक 2.49

अ॒हो॒रा॒त्रे अन्वे॑षि॒ बिभ्र॑त् क्षे॒म्यस्तिष्ठ॑न् प्र॒तर॑णः सु॒वीरः॑ ।अना॑तुरान्त्सु॒मन॑सस्तल्प॒ बिभ्र॒ज्ज्योगे॒व नः॒ पुरु॑षगन्धिरेधि

ahorātre anveṣi bibhrat kṣemyastiṣṭhan prataraṇaḥ suvīraḥ | anāturāntsumanasastalpa bibhrajjyogeva naḥ puruṣagandhiredhi

हिन्दी अर्थ

समय या इसी जन्म मेँ (जहीत) छोड दो (ये भ्रसन् दुरेवाः) जो है दुःख- के (उत्तरेम) हम उत्तीणं हो जांय । हृश्मा है । इस मन्व.मे मी “भ्रनमीवांन्" दाराः रोग ..गहिकःहोने का िदेल -जन्य कष्टों वाला जीवः प्रीत हौता-है 1 ईसीं सियेकहा है किं हम: “"रोगनिंबारक संगठन" का निदश्च मिलता है जिसमें कि.मिल कर व्यक्ति भ्रण करे किं हम. इस संगठन मे,रोगो को दूर करने का सम्मिलित

English

The Breaker-up, the Burster, the Destroyer, and the Silent One, These have expelled Consumption far, far off from thee ānd all thou hast,

अध्याय १२

श्लोक 2.50

ते दे॒वेभ्य॒ आ वृ॑श्चन्ते पा॒पं जी॑वन्ति सर्व॒दा।क्र॒व्याद् यान॒ग्निर॑न्ति॒कादश्व॑ इवानु॒वप॑ते न॒डम्

te devebhya ā vṛścante pāpaṃ jīvanti sarvadā| kravyād yānagnirantikādaśva ivānuvapate naḍam

हिन्दी अर्थ

भन्न; भौषध, तथा कमं १ तरेम रोग के कष्टे सेः पा-हो जाये । (वचसे) शरीर की कान्ति-के लिये -(वैरवदेवीम्) वैर॑वदेवनाम "वाली -के"मल-से शुद्ध होते हए (पावकाः) पविक्र करने वाली, भ्रग्नि के सदृ कर (शतं हिमाः) सौ वषं (मदेम) हमं भोद-अमोद श्रनुभव करते रहे । भरकरणानुसार यह भरं सङ्जतं श्रती्तँ होता है । अथर्व ० ८।७।४ परव वनी अर्थात् वश्वदेवी "वीरे, धधि, .रोग. के विनाशन भँ

English

We drive thee forth to other folk, to alien cattle, alien steeds, Thee the corpse-eating Agni, thee the Agni who bewilders men,

अध्याय १२

श्लोक 2.51

येऽश्र॒द्धा ध॑नका॒म्या क्र॒व्यादा॑ स॒मास॑ते ।ते वा अ॒न्येषां॑ कु॒म्भीं प॒र्याद॑धति सर्व॒दा

ye'śraddhā dhanakāmyā kravyādā samāsate | te vā anyeṣāṃ kumbhīṃ paryādadhati sarvadā

हिन्दी अर्थ

खग्र है, भरर पुरषो को जीवन प्रदामे करती है † बे भोषधियां गरक्ष्म का विनाश करती है देखो (अथर्व ° ८।७।२-रअादि) । वीरषः = निर्; विविध रोगो को -भवरुद्ध करने वा; या रोगविरोधिनी भषधियां । पानि = (उदीषीनैः) उपर को चदृते हए, . (वोयुमद्धिः) वायू सम्बन्धी (परेभिः) परले या भैष्टं (पथिभिः) मागो द्वाराः. (भरवरान्) नीचे के"या भरथेष्ठ कां०-१२।भु०२. भयरवेवेद-भाष्य २८३. विजर्वप्रा्त करने का भी वर्णन है। ।

English

Whereon the Deities, whereon men too have purified themselves, Exalting fatness, cleanse thyself, Agni, therein and mount to heaven. O Agni, kindled and adored, turn not away to visit us.

अध्याय १२

श्लोक 2.52

प्रेव॑ पिपतिषति॒ मन॑सा॒ मुहु॒रा व॑र्तते॒ पुनः॑ ।क्र॒व्याद् यान॒ग्निर॑न्ति॒काद॑नुवि॒द्वान् वि॒ताव॑ति

preva pipatiṣati manasā muhurā vartate punaḥ | kravyād yānagnirantikādanuvidvān vitāvati

हिन्दी अर्थ

करना होता है +. इस प्रथं की, पुष्टि मे “्रासीनाः” पद श्रत् भासन लगा . कर, यह भाव विशेष. महत्वे का है, देखो मन्त्र (३०) । “्रच्छदन- मे इसे प्राणायाम को इक्कीस वार श्रथवा यथा सामथ्यं करना - चाहिए । स्पष्ट हो नाता; है । भरकालमृत्यु पर विजय सने के पक्ष मेँ “रेभिः. पथि- भिः” का भयं हैःेष्ठ योगमार्गं तथा त्याग मावना से जीवनयात्रा का मागं, जीवव यत्रा का मार्ग । उवीचीनः वायुमद्धिः . पथिभिः = “किसी सुखासन से बैठ कर.“ कोष्ठ स्थित वायु को नाभि से उटां कर दोनो नाधिकं पृरटो- हारा वमन की भान्ति एक् दम बाहर फक देना चाहिए". (“पातञ्जल योगप्रदीप",

English

Shine brightly even there in heaven, so that we long may see the Sun.

अध्याय १२

श्लोक 2.53

अविः॑ कृ॒ष्णा भा॑ग॒धेयं पशू॒नां सीसं॑ क्रव्या॒दपि॑ च॒न्द्रं त॑ आहुः ।माषाः॑ पि॒ष्टा भा॑ग॒धेयं॑ ते ह॒व्यम॑रण्या॒न्या गह्व॑रं सचस्व

aviḥ kṛṣṇā bhāgadheyaṃ paśūnāṃ sīsaṃ kravyādapi candraṃ ta āhuḥ | māṣāḥ piṣṭā bhāgadheyaṃ te havyamaraṇyānyā gahvaraṃ sacasva

हिन्दी अर्थ

योगः १।३४) । इस प्रकार नामि से उदी. वायु, जिस भागं से नासिका पुटों तक यहचती ई, भर्थात् नीचे से ऊपर की श्रोर जाती है, उसे “उबीचीनेः वायुमद्िः पथिभिः द्वारा निदिष्ट किया गया है । र . -अतिक्रामन्तः भरवरान् परेभिः प्राणायाम करते समय, नाभि से भर्थात् नी से. (अवरान्); वायु को ऊपर की श्रोर (परेभिः) वे जते (वषानः) षारणः करते हए (मृत्योः पदं बोपयन्तः भौर मूतयु"के पैर को २८४ थर्वेवेद-माष्य कां० १२.। सुर व्यामोहत करते हृए (एत) योगमा की भ्रोर भाभ्रो ) (सधस्थे) उपासना

English

Wipe all away on lead and reed, on Agni, him who breaketh up, Then on a black-hued sheep, and on a cushion pain that racks. the head, Wipe off pollution, lay it in the lead and in the black-hued sheep,

अध्याय १२

श्लोक 2.54

इ॒षीकां॒ जर॑तीमि॒ष्ट्वा ति॒ल्पिञ्जं॒ दण्ड॑नं न॒डम्।तमिन्द्र॑ इ॒ध्मं कृ॒त्वा य॒मस्या॒ग्निं नि॒राद॑धौ

iṣīkāṃ jaratīmiṣṭvā tilpiñjaṃ daṇḍanaṃ naḍam| tamindra idhmaṃ kṛtvā yamasyāgniṃ nirādadhau

हिन्दी अर्थ

लिये इकटूढे बैठते के स्थान में (भ्रासीनाः) योगासन में बैठ कर (मत्युम्) भ्रकालमृत्यु को (नुदता ). धकेलो, (्रथ ) तत्यदचात् (जीवासः) जीवितं रोगरहितः, (सुरत्ना) भराभरूषणों द्वारा सुभरषित, (जनयः) सन्तानोत्पादिका (भ्रारोहन्तु) चढ़ा करर, प्रवेश पाया करे । भारोन्तु = घर की तीव पृथिवीतल से.ऊची श्रौर सीडियों वाली हारा भ्रांखो का तथा सपिः द्वारा शरीर का स्पदं ।

English

And headache in the cushion; then be cleansed and fit to sacri- fice. Go onward, Death, pursue thy special pathway apart from that which Gods are wont to travel.

अध्याय १२

श्लोक 2.55

प्र॒त्यञ्च॑म॒र्कं प्र॑त्यर्पयि॒त्वा प्र॑वि॒द्वान् पन्थां॒ वि ह्याऽवि॒वेश॑ ।परा॒मीषा॒मसू॑न् दि॒देश॑ दी॒र्घेणायु॑षा॒ समि॒मान्त्सृ॑जामि

pratyañcamarkaṃ pratyarpayitvā pravidvān panthāṃ vi hyā'viveśa | parāmīṣāmasūn dideśa dīrgheṇāyuṣā samimāntsṛjāmi

हिन्दी अर्थ

व्याकरोमि इविषाहमेतो ब्रह्मणां व्य शद कंरपयामि 1 (एतौ) इन दो को, (हविषा) हविः की दृष्टि से (म्रहम्) मै (व्याक इन दो को विशेषतया समथित करता हं । भर्थात् (पितुभ्यः) पितरों के दीघं भरायु देने वाले (भ्रायुषा). भन्न के साध. (मृजामि) सम्बरदं करवा हं ।

English

To thee I say it who hast eyes and hearest: great grow the number of these men around us! Divided from the dead are these, the living: now is our calling on the Gods successful. We have gone forth for dancing and for laughter: may we with brave sons speak to the

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Atharva Veda — Chapter 12
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
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