Atharva Veda· Atharvaveda Saṁhitā
13
अध्याय 13 / 20

Kanda 13

काण्ड 13

188 श्लोकWhatsApp

पूर्ण अध्याय पाठ188 श्लोक

श्लोक पर जाएं:

अध्याय १३

श्लोक 1.1

अध्यात्म-प्रकरणम्।१-६० ब्रह्मा।अध्यात्मं, रोहितादित्यदैवत्यम्, (३ मरुतः, २८-३१ अग्नीः, ३१ बहुदेवताः)।त्रिष्टुप्; ३-५, ९, १२, १५ जगती (१५ अतिजागतगर्भा परा); ८ भुरिक्, १७ पञ्चपदा ककुम्मती जगती; १३ अतिशाक्वरगर्भाऽतिजगती; १४ त्रिपदा पुरः परशाक्वरा विपरीतपादलक्ष्मा पङ्क्तिः; १८-१९ पञ्चपदा ककुम्मत्यतिजगती (१८ परशाक्वरा भुरिक्, १९ परातिजागता) ; २१ आर्षी निचृद्गायत्री; २२-२३, २७ प्रकृता; २६ विराट् परोष्णिक्; २८-३० (२८ भुरिक्), ३२, ३९-४०, ४५-५६, ५८ अनुष्टुप्; (५२, ५५ पथ्यापङ्क्तिः, ५५ ककुम्मती बृहतीगर्भा,) ; ३१ पञ्चपदा ककुम्मती शाक्वरगर्भा जगती; ३५ उपरिष्टाद्बृहती; ३६ निचृन्महाबृहती; ३७ परशाक्वरा विराडतिजगती; ४२ विराड् जगती; ४३ विराण्महाबृहती, ४४ परोष्णिक्, ५७ ककुम्मती; ५९-६० गायत्री।उ॒देहि॑ वाजि॒न् यो अ॒प्स्व॑१न्तरि॒दं रा॒ष्ट्रं प्र वि॑श सू॒नृता॑वत्।यो रोहि॑तो॒ विश्व॑मि॒दं ज॒जान॒ स त्वा॑ रा॒ष्ट्राय॒ सुभृ॑तं बिभर्तु

adhyātma-prakaraṇam| 1-60 brahmā| adhyātmaṃ, rohitādityadaivatyam, (3 marutaḥ, 28-31 agnīḥ, 31 bahudevatāḥ)| triṣṭup; 3-5, 9, 12, 15 jagatī (15 atijāgatagarbhā parā); 8 bhurik, 17 pañcapadā kakummatī jagatī; 13 atiśākvaragarbhā'tijagatī; 14 tripadā puraḥ paraśākvarā viparītapādalakṣmā paṅktiḥ; 18-19 pañcapadā kakummatyatijagatī (18 paraśākvarā bhurik, 19 parātijāgatā) ; 21 ārṣī nicṛdgāyatrī; 22-23, 27 prakṛtā; 26 virāṭ paroṣṇik; 28-30 (28 bhurik), 32, 39-40, 45-56, 58 anuṣṭup; (52, 55 pathyāpaṅktiḥ, 55 kakummatī bṛhatīgarbhā,) ; 31 pañcapadā kakummatī śākvaragarbhā jagatī; 35 upariṣṭādbṛhatī; 36 nicṛnmahābṛhatī; 37 paraśākvarā virāḍatijagatī; 42 virāḍ jagatī; 43 virāṇmahābṛhatī, 44 paroṣṇik, 57 kakummatī; 59-60 gāyatrī| udehi vājin yo apsva1ntaridaṃ rāṣṭraṃ pra viśa sūnṛtāvat| yo rohito viśvamidaṃ jajāna sa tvā rāṣṭrāya subhṛtaṃ bibhartu

हिन्दी अर्थ

, रोहित को ऋषि भी कहा है, “रोहितेन ऋषिणा भृतम्” (मन्त्र ५५) मरौर द्यावा पृथिवी की उत्पत्ति जिस रोहित द्वारा हुई है वहं परमेदवर ही हो सकता . है । भरतः “रोदिति द्वारा परमेदवराथं के ग्रहण मे . “विकच भ्रारोह"' हारा प्रजाग्नों पर भ्रधिकार (२) । “मरुतो. (संनि- कों) हारा शत्रुर का विनाश्च (३) । राष्ट का वर्णेन (४, ५)। भे जागरूक र्ना- इस हारा राजा का वर्णन निःसंदिग्ध है। भ्रारोह पद (२), तथा रोहितः शुणवत्” (३) इारा राजा को रोदित कहा है । (मन्त (१३) “सामित्यं रोहयतु" दवारा राजा निज

English

The glorification of Rohita, a form of Fire and of the Sun Rise, Mighty One, who liest in the waters, and enter this thy fair and glorious kingdom.

अध्याय १३

श्लोक 1.2

उद् वाज॒ आ ग॒न् यो अ॒प्स्व॑१न्तर्विश॒ आ रो॑ह॒ त्वद्यो॑नयो॒ याः ।सोमं॒ दधा॑नो॒ऽप ओष॑धी॒र्गाश्च॑तुष्पदो द्वि॒पद॒ आ वे॑शये॒ह

ud vāja ā gan yo apsva1ntarviśa ā roha tvadyonayo yāḥ | somaṃ dadhāno'pa oṣadhīrgāścatuṣpado dvipada ā veśayeha

हिन्दी अर्थ

(तासाम्) उन रोहो, प्ररोहो तथा भारोहो के (पयसा) फलों दारा, तथा (ब्रह्मणा) वेद ज्ञान तथा परमेदवर की कपा. द्वारा, (वावृषानः) बढता जो समुसरति्या, उल्नतियां तथा समृद्धिया है, जिन की कीति भानो यौः भौर भरन्तरिक्ष. मे फली हद है, उन के फलो तथा परिणामो दारा तु स्वयं बढ़ को रक्षा भौर समृद्धि के लिगे सदा जागरूक रहना । “्रखहः” श्रादि दवारा विकास द्वारा रूपित क्रिया है । .. व 3 भा तु. (रोहितस्य) सर्वोपरि भच्द़ परमेदवर की (विशि) प्रजा भे बथा

English

The tribes thy heat produced have followed hither the Calf and Gāyatri, the strain that lauds him.

अध्याय १३

श्लोक 1.3

यू॒यमु॒ग्रा म॑रुतः पृश्निमातर॒ इन्द्रे॑ण यु॒जा प्र मृ॑णीत॒ शत्रू॑न्।आ वो॒ रोहि॑तः शृणवत् सुदानवस्त्रिष॒प्तासो॑ मरुतः स्वादुसंमुदः

yūyamugrā marutaḥ pṛśnimātara indreṇa yujā pra mṛṇīta śatrūn| ā vo rohitaḥ śṛṇavat sudānavastriṣaptāso marutaḥ svādusaṃmudaḥ

हिन्दी अर्थ

निष) घरों मे या स्व्रीयोनियों मे (प्रजाः) सन्तानं (जनय) पेदा कर । शिक्षा दारा मन की प्रसन्नता तथा मन का मननरील होना चाहिए घर-घर मे दूष भ्रादि के लिये गौए हो, भौर गृहस्थी संतानो से विहीन परिं त्वा धात् घिता देवो अभिरवंधैसा भित्रावरंणावमि तवा तेरी रक्ना-परिधि बने, या सबभ्रोर से तेरा रक्षक भ्रौर पोषक बने परि

English

Even here our friend be Prāna: Parameshthin, may Rohita vouchsafe the life and splendour. Breed, O Vāchaspati, joy and understanding, kine i n our stall and children in our consorts.

अध्याय १३

श्लोक 1.4

रुहो॑ रुरोह॒ रोहि॑त॒ आ रु॑रोह॒ गर्भो॒ जनी॑नां ज॒नुषा॑मु॒पस्थ॑म्।ताभिः॒ संर॑ब्ध॒मन्व॑विन्द॒न् षडु॒र्वीर्गा॒तुं प्र॒पश्य॑न्नि॒ह रा॒ष्ट्रमाहाः॑

ruho ruroha rohita ā ruroha garbho janīnāṃ januṣāmupastham| tābhiḥ saṃrabdhamanvavindan ṣaḍurvīrgātuṃ prapaśyanniha rāṣṭramāhāḥ

हिन्दी अर्थ

वचर हारा (भ्रवाचीनान्) नीचे गिरे हभ . को (भ्रव जहि) नीचे.गिरी . (भरगनेः) क्षात्रान्ति के (तेजोभिः) तेजो दवारा, (्रादिषि) भ्रपनी भधीनता , मनैः तेजोभिः =भ्रथवा भ्ागनेयास्वो के तेजों द्वारा । हे बडी सेना के पति ! (उत्पिपानम्) जो कि अतिलोभो या उच्छोषणकारी इसी श्रकार देखो (यजु° १७।४०), इस मन्व मे यह कहा है कि बृहस्पति

English

Both kindling and inflamed, adored with butter and enhanced thereby. May conquering Agni, conqueror of all, destroy mine enemies.

अध्याय १३

श्लोक 1.5

आ ते॑ रा॒ष्ट्रमि॒ह रोहि॑तोऽहार्षी॒द् व्याऽस्थ॒न्मृधो॒ अभ॑यं ते अभूत्।तस्मै॑ ते॒ द्यावा॑पृथि॒वी रे॒वती॑भिः॒ कामं॑ दुहातामि॒ह शक्व॑रीभिः

ā te rāṣṭramiha rohito'hārṣīd vyā'sthanmṛdho abhayaṃ te abhūt| tasmai te dyāvāpṛthivī revatībhiḥ kāmaṃ duhātāmiha śakvarībhiḥ

हिन्दी अर्थ

कं० १३। यु०१ .. भरथर्ववेद-माष्य ४११ पद अब केवल प्राकृतिक छृतिरयो का वणंन करते है तब मी उनमें कतु त्वर्म इस मन्त्र मे वराया है कि “अपुवेब्रह्म हारा वेदवाणियां रेषित होती है, भौर उसी की भ्रोर चली जाती है । बह वेदवाणी किंसी ही समाधिस्थ व्यक्तिं भे वेदवाणी के जप भ्रौर तदनुरूपु . जीवन द्वारा,-निज वतप शूपी ब्रह्म को प्रकट करती है, सवं साक्मरण मानुष यूय भ नहीं । गौ भर्थात् वेदवाणी ( एकपदी ) एक पाद बाली, (द्विपदी) वरो पादो वाली (सा) वह (चतुष्पदी ) चार पादों वाली, (भ्रष्टापदीं ) ्राठ पादो .. पूवक वणेन करती है, (तस्याः भिं) स भेदवाणीः से (समुद्राः) नाना करणे (स्वादि), भरभिव्यक्त. करती है 1. .

English

A glorious sight to beasts and men, thou goest glorious to the regions and mid-regions. On earth’s, on Aditi’s bosom, bright with glory. Fain would I equal Savitar in beauty.

अध्याय १३

श्लोक 1.6

रोहि॑तो॒ द्यावा॑पृथि॒वी ज॑जान॒ तत्र॒ तन्तुं॑ परमे॒ष्ठी त॑तान ।तत्र॑ शिश्रिये॒ऽज एक॑पा॒दोऽदृं॑ह॒द् द्यावा॑पृथि॒वी बले॑न

rohito dyāvāpṛthivī jajāna tatra tantuṃ parameṣṭhī tatāna | tatra śiśriye'ja ekapādo'dṛṃhad dyāvāpṛthivī balena

हिन्दी अर्थ

करता है, (तुस्य ते) उस तेरी भ्रविद्यारूपी (मूलम्) जड़ को ओ (वृदचामि) (न करवः) न करे भ्रंपितु परब्रह्म को भपना भाश्चय करे । म परमेदवर को सूर्यं कहा है । मेहति मिह सेचने । हिन्दी मे"भेह'' शब्द है जो कि “मिह” घातु से व्युत्य्न है, जिस का भथ है -वर्षा करना, या मे बरसना । मेष शब्द भी “मिह” धातु का रूप है जिस का भ्रथं है “बादल । मेष जल की वर्षा करता है । दस प्रकार “मेहति” का अर्थं “मूत्र करना" ही तस्य॑ दृश्रामि ते मू नच्छरायां करवोऽपरम् ॥५७॥

English

sacrificed. Rohita’s Agni-his who found heaven’s light-is kindled with the prayer.

अध्याय १३

श्लोक 1.7

रोहि॑तो॒ द्यावा॑पृथि॒वी अ॑दृंह॒त् तेन॒ स्वऽ स्तभि॒तं तेन॒ नाकः॑ ।तेना॒न्तरि॑क्षं॒ विमि॑ता॒ रजां॑सि॒ तेन॑ दे॒वा अ॒मृत॒मन्व॑विन्दन्

rohito dyāvāpṛthivī adṛṃhat tena sva' stabhitaṃ tena nākaḥ | tenāntarikṣaṃ vimitā rajāṃsi tena devā amṛtamanvavindan

हिन्दी अर्थ

सत्यथ से ( वयम् ) हम (मा) न (प्र गाम) दुर हौ, भौर (मा) न सोमिनःन्=सोम = वीये, जो सन्तानोतयादक है; षु प्रसवे (श्रथरवं० तारा श्रादि में (भ्रातः) फला हृभरा है । (तम्) उस को, (भहूततम्) , जिस में कि हम ने भ्रात्म-सम्प॑ंणरूपी भाहुतियां दी ई--(भ्ीमहि) हम

English

Waxing by prayer, adored with prayer, by prayer enkindled, sacrificed. One is deposited in Truth, one kindled in the waters: both

अध्याय १३

श्लोक 1.8

वि रोहि॑तो अमृशद् वि॒श्वरू॑पं समाकुर्वा॒णः प्र॒रुहो॒ रुह॑श्च ।दिवं॑ रू॒ढ्वा म॑ह॒ता म॑हि॒म्ना सं ते॑ रा॒ष्ट्रम॑नक्तु॒ पय॑सा घृ॒तेन॑

vi rohito amṛśad viśvarūpaṃ samākurvāṇaḥ praruho ruhaśca | divaṃ rūḍhvā mahatā mahimnā saṃ te rāṣṭramanaktu payasā ghṛtena

हिन्दी अर्थ

४२२९ अथ्वेतेद-माष्य कां० १३।सु०२ “रोहितादित्य कहा है । इस का भ्रिप्राय यह है कि इस सूक्त साथ-साथ जानना चाहिए, जे फि “योऽसावदित्ये पुरुषः सोऽसावहु् । त खं ब्रह्म" (यरजु० ४०।१७), तथा १३।२।१ से ज्ञात होता है 1 ३ -भरतिः = ब्रह्य (१३) । अत्तिनामक परमेदवर द्वारा सूयं की चुलोक ४५ परमेरवर भक्त की प्रार्थना को सुनता है (४४, ४५) ।

English

Agnis of Rohita who found the light are set aflame with prayer. That decked by Wind, and that prepared by Indra Brāhman- aspati,

अध्याय १३

श्लोक 1.9

यास्ते॒ रुहः॑ प्र॒रुहो॒ यास्त॑ आ॒रुहो॒ याभि॑रापृ॒णासि॒ दिव॑म॒न्तरि॑क्षम्।तासां॒ ब्रह्म॑णा॒ पय॑सा ववृधा॒नो वि॒शि रा॒ष्ट्रे जा॑गृहि॒ रोहि॑तस्य

yāste ruhaḥ praruho yāsta āruho yābhirāpṛṇāsi divamantarikṣam| tāsāṃ brahmaṇā payasā vavṛdhāno viśi rāṣṭre jāgṛhi rohitasya

हिन्दी अर्थ

७ परमेदवर का मुख्यरूप मे, तथा सुय का गौणरूप में वर्णन (३ १-४६) । उद॑स्य केतबोँदिवि शुक्रा भ्राज॑न्त रते । कां १३1 सु २ अथवेवेद-भाष्य ५२३ दयूलोक मे. (उद् ईरते) उदित हुई है

English

Agnis of Rohita who found light, prayer-enkindled, sacrificed. Rohita made the earth to be his altar, heaven his Dakshinā.

अध्याय १३

श्लोक 1.10

यस्ते॒ विश॒स्तप॑सः संबभू॒वुर्व॒त्सं गा॑य॒त्रीमनु॒ ता इ॒हागुः॑ ।तास्त्वा वि॑शन्तु॒ मन॑सा शि॒वेन॒ संमा॑ता व॒त्सो अ॒भ्येऽतु॒ रोहि॑तः

yaste viśastapasaḥ saṃbabhūvurvatsaṃ gāyatrīmanu tā ihāguḥ | tāstvā viśantu manasā śivena saṃmātā vatso abhye'tu rohitaḥ

हिन्दी अर्थ

, समिति के सदस्यो की सहायता द्वारा उन्नति की प्रा्थेना परमेदवर से कृरता है । इस सबसे प्रतीत होता है कि १३।१ मे राष्ट्र का तथा राजा कभी वर्णेन हृभ्रा है, भौर राजा को रोहिते भी कहा है । अन्त्र २४ मे रोहित पद के दो भथं दर्शाएए है, ( १)श्रोषधियों का रोहन (बीजजन्म तथा प्रादुर्भाव) करने वाला या चूलोक में रूढ हृभरा । . १३।१ सूक्त को रोहितादित्यपरक तथा भष्यात्म भी कहा है.। रोहितं वह् रोहितः (परमेश्वर) राष्ट की सेवा के लिये उत्तम भरण-पोषण पूवक तु परिपुष्ट करे । तथा "धा ते राष्टमिह रोहितोऽ्हार्षोद्"" (५), भर्थात् रोहित परमेश्वर इख पृथिवी परर तेरे लिये राष्ट या

English

Let Rohita who made this All uphold thee carefully nurtured for supreme dominion. The strength that was in waters hath ascended. Mount o’er the tribes which thou hast

अध्याय १३

श्लोक 1.11

ऊ॒र्ध्वो रोहि॑तो॒ अधि॒ नाके॑ अस्था॒द् विश्वा॑ रू॒पाणि॑ ज॒नय॒न् युवा॑ क॒विः ।ति॒ग्मेना॒ग्निर्ज्योति॑षा॒ वि भा॑ति तृ॒तीये॑ चक्रे॒ रज॑सि प्रि॒याणि॑

ūrdhvo rohito adhi nāke asthād viśvā rūpāṇi janayan yuvā kaviḥ | tigmenāgnirjyotiṣā vi bhāti tṛtīye cakre rajasi priyāṇi

हिन्दी अर्थ

सूर्यं (रादित्य) के संम्बन्व मेभी कहादहै किं “यो रोहितो रौर सूयं के सब भोर विच्मान है, इन दोनों मे व्याप्त या इन दोनों कोषधेरेहृए है । इस प्रकार सूये. के वर्णेन मे भी. भष्यात्म भावना शबृहुस्पति” शब्द द्वारा सेनापति, का भी वणेन हुभ्रा है । परमेदवर का वर्णेन “भूर्य” पद द्वारा भी हृश्रा है (३९, ४१५) ।

English

generated. Creating Soma, waters, plants and cattle, bring hitherward both quadrupeds and bipeds.

अध्याय १३

श्लोक 1.12

स॒हस्र॑शृङ्गो वृष॒भो जा॒तवे॑दा घृ॒ताहु॑तः॒ सोम॑पृष्ठः सु॒वीरः॑ ।मा मा॑ हासीन्नाथि॒तो नेत् त्वा॒ जहा॑नि गोपो॒षं च॑ मे वीरपो॒षं च॑ धेहि

sahasraśṛṅgo vṛṣabho jātavedā ghṛtāhutaḥ somapṛṣṭhaḥ suvīraḥ | mā mā hāsīnnāthito net tvā jahāni gopoṣaṃ ca me vīrapoṣaṃ ca dhehi

हिन्दी अर्थ

परिधिखूप मे, भ्रूमि को वदिप मे, पवतो को यूपद्प मे, वर्षा भ्रादि को भ्राज्यख्प भ्रादि मे वणित किया है। इल .. श्यरवेदेव-माष्य कौ० १२1०१ , ३१ अग्निः; १ बहुदेवत्या) निष्ट: ३-५, ९, १२, १५. नगती . (१५. (वाजिन्) है बलशालिन् ! (उदेहि) उठभ्रा, (यः) जोत्ुकि

English

Ye Maruts, strong and mighty, sons of Prisni, with Indra for ally crush down our foemen. Let Rohita, ye bounteous givers, hear you, thrice-seven Maruts who delight in sweetness!

अध्याय १३

श्लोक 1.13

रोहि॑तो य॒ज्ञस्य॑ जनि॒ता मुखं॑ च॒ रोहि॑ताय वा॒चा श्रोत्रे॑ण॒ मन॑सा जुहोमि ।रोहि॑तं दे॒वा य॑न्ति सुमन॒स्यमा॑नाः॒ स मा॒ रोहैः॑ सामि॒त्यै रो॑हयतु

rohito yajñasya janitā mukhaṃ ca rohitāya vācā śrotreṇa manasā juhomi | rohitaṃ devā yanti sumanasyamānāḥ sa mā rohaiḥ sāmityai rohayatu

हिन्दी अर्थ

कर । (यः). जिस (रोहितः) सर्वा ने (इदम् विश्वम्) इस विव को (जजान) पेदा किया है (सः) वह (त्वा). तुके (राष्ट्राय) रष्टर की सेका . के लिये .(सुमृतम्) उत्तम मंरण-पोषण पुवंक (बिमतुं ) परिपुष्ट करे। तीनों का मिला-जुला वणेन हभ है ॥ रोहित पद के ३ भर. (१) जन्मदाता जन्म देता, उनं का प्रादुर्भाव. करता, तथा राजरसिहासन पर भरारूद होता है । सूयं .

English

Up to the lap of births, to lofty places, hath Rohita, the germ of Dames, ascended. Conjoined with these he found the six realms: seeing his way in front here he received the

अध्याय १३

श्लोक 1.14

रोहि॑तो य॒ज्ञं व्यदधाद् वि॒श्वक॑र्मणे॒ तस्मा॒त् तेजां॒स्युप॑ मे॒मान्यागुः॑ ।वो॒चेयं॑ ते॒ नाभिं॒ भुव॑न॒स्याधि॑ म॒ज्मनि॑

rohito yajñaṃ vyadadhād viśvakarmaṇe tasmāt tejāṃsyupa memānyāguḥ | voceyaṃ te nābhiṃ bhuvanasyādhi majmani

हिन्दी अर्थ

कां० १३ सुर १ भथर्ेवेद-मोष्य . ई८९ भिषेकार्थं जलस्नान का वणेन है । रोहितः. रुह बीजजन्मनि प्रादु्मवि च, जो. संसार को जन्म देना भौर उसे प्रादुभरं त करता, वह सर्वाधिरूढ् परमेदवर । तु से नवजन्म.धारण करना दहै,या जिनकी तु योनिरूप दहै 1 (सोमम्, ग्रोषधीः, श्रपः, दधानः) सोम, भ्रोषधियो, जलं को धारण करतां. हभ्रा. तू, (इह) इस राष्टर मे (गाः) गौरो; (चतुष्पदः) भरन्य चौपायों तथा.

English

kingship. For thee hath Rohita obtained dominion, scattered thine ene- mies, become thy safeguard.

अध्याय १३

श्लोक 1.15

आ त्वा॑ रुरोह बृह॒त्यू३त प॒ङ्क्तिरा क॒कुब् वर्च॑सा जातवेदः ।आ त्वा॑ रुरोहोष्णिहाक्ष॒रो व॑षट्का॒र आ त्वा॑ रुरोह॒ रोहि॑तो॒ रेत॑सा स॒ह

ā tvā ruroha bṛhatyū3ta paṅktirā kakub varcasā jātavedaḥ | ā tvā rurohoṣṇihākṣaro vaṣaṭkāra ā tvā ruroha rohito retasā saha

हिन्दी अर्थ

भ्नादि की परिपुष्टि करता हभ्रा . (पृदिनिमातरः) भूमि को माता मानने वाले (उग्राः मश्तः) है शुर वीर संनिको ! (यूयम्) तुम (इन्द्र ण युजा) सेनापति के सहयोग द्वारां (शत्रून् प्र मृणीत) शत्रुम का नाद करो । (सुदानवः) सुगमता से विना करने वाले वीरो !. (रोहितः) सिहासनारूढ़ राजा . (वः बणवत्) तुम्हारी तकलीफों भौर कष्टो को सूने । (मरुतः) मारने वाले -शुरवीरो ! तुम गरतीति वा सुदानवः=सु +दो (भ्वखण्डने) +-नु । . स्वादु संमुदः-= सैनिकों के भोजन स्वादिष्ट होने चाहिए ।

English

So by the potent Sakvaris let Heaven and Earth be milked to- yield thee all thy wishes. Rohita gave the Earth and Heavens their being. There Para- meshthin held the cord extended.

अध्याय १३

श्लोक 1.16

अ॒यं व॑स्ते॒ गर्भं॑ पृथि॒व्या दिवं॑ वस्ते॒ऽयम॒न्तरि॑क्षम्।अ॒यं ब्र॒ध्नस्य॑ वि॒ष्टपि॒ स्वर्लो॒कान् व्याऽनशे

ayaṃ vaste garbhaṃ pṛthivyā divaṃ vaste'yamantarikṣam| ayaṃ bradhnasya viṣṭapi svarlokān vyā'naśe

हिन्दी अर्थ

३९० भरथर्ववेद-माष्य . कां० १३। सु° १ (रोहितः) उन्नति केरे वाला राजां (खटः) .राष्टर की समुन्नतियों पर (रुरोह) चढ़ा है, (भ्रा रुरोह) भारूढ हृ है । (जनीनाम्) जन्म दात्री भजा ने (भनु भविन्दन्) भनुकूल रूप मँ स्वीकार कर लिया है । (गातुम्) कर लिया । इह = पृथिवी मे । ६ दिशाए पूवं, परिचम, उत्तर तथा दक्षिण गर्भं पुत्र कहा है५-दोनो कथन ठीक है, इन मेँ परस्पर विरोध नहीं ।

English

Thereon reposeth Aja Ekapāda. He with his might hath stab- lished Earth and Heaven. Rohita firmly stablished Earth and Heaven: by him was ether fixt by him the welkin.

अध्याय १३

श्लोक 1.17

वाच॑स्पते पृथि॒वी नः॑ स्यो॒ना स्यो॒ना योनि॒स्तल्पा॑ नः सु॒शेवा॑ ।इ॒हैव प्रा॒णः स॒ख्ये नो॑ अस्तु॒ तं त्वा॑ परमेष्ठि॒न् पर्य॒ग्निरायु॑षा॒ वर्च॑सा दधातु

vācaspate pṛthivī naḥ syonā syonā yonistalpā naḥ suśevā | ihaiva prāṇaḥ sakhye no astu taṃ tvā parameṣṭhin paryagnirāyuṣā varcasā dadhātu

हिन्दी अर्थ

तस ते थावापृथिवी रेवतीभिः कामं दु्ायामिह श्रकरीभिः ॥५॥ हे राजन्! (रोषितः) सर्वोपरि श्रारढः परमेदवर (दह) इस कां० १३1 सुऽ १ भ्रथ्वेवेदन्माष्य पृथिवी को (जजान). पैदा किया है, (परमेष्ठी) परमस्थान मेँ स्थित को (ततान) ताना है, फंलाया है । (तत्र) उन. युलोक-पृथिवी तथा सूतरा-

English

He measured out mid air and all the regions: by him the Gods found life that lasts for ever. Arranging shoots, springs, Rohita considered this Universe in all its forms and phases.

अध्याय १३

श्लोक 1.18

वाच॑स्पत ऋ॒तवः॒ पञ्च॒ ये नौ॑ वैश्वकर्म॒णाः परि॒ ये सं॑बभू॒वुः ।इ॒हैव प्रा॒णः स॒ख्ये नो॑ अस्तु॒ तं त्वा॑ परमेष्ठि॒न् परि॒ रोहि॑त॒ आयु॑षा॒ वर्च॑सा दधातु

vācaspata ṛtavaḥ pañca ye nau vaiśvakarmaṇāḥ pari ye saṃbabhūvuḥ | ihaiva prāṇaḥ sakhye no astu taṃ tvā parameṣṭhin pari rohita āyuṣā varcasā dadhātu

हिन्दी अर्थ

भ्राश्चय पाया हृभा है, उसने (बलेन) निज बल हारा (द्यावापृथिवी) दयूलोक भ्रौर पथिवी को (भ्रदु'हत्) सुदुढ् किया है । व परमेष्वर का अन्म नहीं होता । वह शरीरधारण नहीं करता । एकपादः = तेनान्तरिशं विता रजासि तेनं देवा अशतमन्व॑विन्दन् ।।७॥ को (स्तभितम्) थामा हृभा है, (तेन) उसने (नाकः) 4८ को थामा. (विमिता विमितानि) मपि हए. (तेन) उस द्वारा भर्थात्. उसकी कृपा से (देवाः) दिव्यकोटि के लोग ॒(भरमृतम्) भ्रमृत-परमेदवर या मोक्ष को (अन्वविन्दन्) पाएै।

English

May he, gone up to heaven with mighty glory, anoint thy sov- ranty with milk and fatness. Thy risings up, thy mountings and ascensions wherewith thou fillest heaven and air’s mid region—

अध्याय १३

श्लोक 1.19

वाच॑स्पते सौमन॒सं मन॑श्च गो॒ष्ठे नो॒ गा ज॒नय॒ योनि॑षु प्र॒जाः ।इ॒हैव प्रा॒णः स॒ख्ये नो॑ अस्तु॒ तं त्वा॑ परमेष्ठि॒न् पर्य॒हमायु॑षा॒ वर्च॑सा दधातु

vācaspate saumanasaṃ manaśca goṣṭhe no gā janaya yoniṣu prajāḥ | ihaiva prāṇaḥ sakhye no astu taṃ tvā parameṣṭhin paryahamāyuṣā varcasā dadhātu

हिन्दी अर्थ

दिवं रूढवा संहता म॑हिम्ना से तं दा्रमृनचछु पय॑सा -घृतेनं ॥८॥ करते न ४ आरूढ परमेदवर ने, (विदवरूपम्) -विश्व ३६३ ¦ भयवेवेद-भाष्य का०.१३। सु°श तथा उक्त श्रकुरके जो भावी रूप होते है वे “हः” है ! इन शब्दों द्वारा केर विर्व का स्वशूप क्या होना है -इस मर विचार किया । इसे उपनिषदों मे“सोऽ कामयत” “स पेश्षत” इन शन्दों द्वारा निदिष्ट किया है । पुथिवी पर जो प्रकारा, ताप तथा जल प्रते ह वे चूलोक से भ्राते ह । मानो चुलोक पर भारूढ् परमेदवर, इन्हे प्रेषित.कर रहा है । इन्दो के कारण पृथिवी पर दूष

English

By prayer for these, by milk of these, increasing, in Rohita’s kingdom watch, among his people.

अध्याय १३

श्लोक 1.20

परि॑ त्वा धात् सवि॒ता दे॒वो अ॒ग्निर्वर्च॑सा मि॒त्रावरु॑णाव॒भि त्वा॑ ।सर्वा॒ अरा॑तीरव॒क्राम॒न्नेही॒दं रा॒ष्ट्रम॑करः सु॒नृता॑वत्

pari tvā dhāt savitā devo agnirvarcasā mitrāvaruṇāvabhi tvā | sarvā arātīravakrāmannehīdaṃ rāṣṭramakaraḥ sunṛtāvat

हिन्दी अर्थ

इसी प्रकार परमेश्वर को माता, पितो, बन्धु प्रादि भीं कहा है। कां० १३। सु° १ भ्रथरवंवेद-भाष्य ३९३ (ते) तैरी (यः विधाः) जो प्रजाएं (तपसः) तपोमय जीवन से (सं भ्रचु) गायश्री भौर उस के वत्स" परमेदवर को भ्रनुकूलता मे हो कर (इह) जाए (शिवेन मनसा) शिव संकल्पी मन के साथ (त्वा) तुभ (विशन्तु)

English

With friendly heart let them approach to serve thee, and the Calf Rohita come with his mother.

अध्याय १३

श्लोक 1.21

यं त्वा॒ पृष॑ती॒ रथे॒ प्रष्टि॒र्वह॑ति रोहित ।शु॒भा या॑सि रि॒णन्न॒पः

yaṃ tvā pṛṣatī rathe praṣṭirvahati rohita | śubhā yāsi riṇannapaḥ

हिन्दी अर्थ

प्रजाश्रों के जीवन तपोमय. होने चाहिए (भ्रथवं० १२।१।१) । गायत्री में परमेदवर का वणेन है । गायत्री. के.जप द्वारा परमेइवर प्रकट सांनिध्य मे गौ इष देती है, इसी भ्रकार वत्सरूपो परंमेदवर के साँनिष्य में हमा तो मानो गायत्रो का जप सफल नहीं हुभ्रा । प्रजाभं के जीवन, गायती भौर 'उस के वत्स के भ्रनुकूल होने चाहिए, प्रतिकूल नहीं । परमेरवर श्रौर उसः की माता गायत्री को राजा श्रौर प्रजाएु सदा श्रपने संमुख रखे, ताकि प्रजाए शिवसंकल्पी हो सके + ५ तिममेनाभिन्योतिंवा वि माति तृतीयं चके रज॑सि परियाणि ५,११॥ १. देदमन््रो का वणेन निराले ढंग का है । यहां परमेश्वर कोगायत्री का

English

Erected, Rohita hath reached the welkin, wise, young, creating every form and figure. Agni, refulgent with his heightened lustre, in the third realm hath brought us joy and

अध्याय १३

श्लोक 1.22

अनु॑व्रता॒ रोहि॑णी॒ रोहि॑तस्य सू॒रिः सु॒वर्णा॑ बृह॒ती सु॒वर्चाः॑ ।तया॒ वाजा॑न् वि॒श्वरू॑पां जयेम॒ तया॒ विश्वाः॒ पृत॑ना अ॒भि ष्या॑म

anuvratā rohiṇī rohitasya sūriḥ suvarṇā bṛhatī suvarcāḥ | tayā vājān viśvarūpāṃ jayema tayā viśvāḥ pṛtanā abhi ṣyāma

हिन्दी अर्थ

वत्स कहा है (भयवं० ४।३९।९ मे भअग्निवासी -परमेरवर को “ऋषीणां पुत्रः” कहा है, भर्थात् ऋषि नोग परमेदवर के लिये एसा स्नेह रखते हँ जँसाकि माता-पिता पतर के भरति स्नेह रखते है तथा थो गायत्या भभिपतिरमूव'" - (अयव ० ४।२५।६) ऊध्वं) संसार की सवना से उपर उटा हृभरा (रोहितः) सर्वोपरि है । (विवा रूपाणि) सब रूपो, श्राकृतियों को (जनयन्) जन्म देता भा (यवा कविः) सदा युवा तथा वेदकाव्यौ का कवि, तथा (अग्निः) अग्निवत् , चमकता है । (तृतीये रजसि) तीसरे द्युलोक मेँ (प्रियाणि) भिय लगने वाने नक्षत्रों भौर तारागणो.को (चक्र ) उस ने निमित कियादहै।

English

gladness. Thousand-horned Bull, may Jātavedas, worshipped with butter, balmed with Soma, rich in

अध्याय १३

श्लोक 1.23

इ॒दं सदो॒ रोहि॑णी॒ रोहि॑तस्या॒सौ पन्थाः॒ पृष॑ती॒ येन॒ याति॑ ।तां ग॑न्ध॒र्वाः क॒श्यपा॒ उन्न॑यन्ति॒ तां र॑क्षन्ति क॒वयोऽप्र॑मादम्

idaṃ sado rohiṇī rohitasyāsau panthāḥ pṛṣatī yena yāti | tāṃ gandharvāḥ kaśyapā unnayanti tāṃ rakṣanti kavayo'pramādam

हिन्दी अर्थ

:) हजारो जाज्व॑ल्यमा ों यै के सदर (सहस्रबुङ्खः) हजारों न किरणों वाले सूये के तथा उन मे विद्यमान, (चुताहृतः) घृत की आहृतियों द्वार सत्त, (सघोम- भ्रदाता परमेरवर है । (नाधितः) प्राथित हृद्या परमेश्वर (मो मा) मरेन पुरषो की पुष्टि (मे) मुकं (षेहि) दे। त रो्ितं देवा य॑न्ति सुमनस्यमाना स मा रोः सामित्यै रोहतु ॥१३॥

English

heroes, Besought, ne’er quit me; may I ne’er forsake thee. Give me abundant men and herds of cattle.

अध्याय १३

श्लोक 1.24

सूर्य॒स्याश्वा॒ हर॑यः केतु॒मन्तः॒ सदा॑ वहन्त्य॒मृताः॑ सु॒खं रथ॑म्।घृ॒त॒पावा॒ रोहि॑तो॒ भ्राज॑मानो॒ दिवं॑ दे॒वः पृष॑ती॒मा वि॑वेश

sūryasyāśvā harayaḥ ketumantaḥ sadā vahantyamṛtāḥ sukhaṃ ratham| ghṛtapāvā rohito bhrājamāno divaṃ devaḥ pṛṣatīmā viveśa

हिन्दी अर्थ

भाः (च) तथा (मुखम्) उपदेष्टा है, (रोहिताय) सर्वोपरि भ्रारूढ परमेदवर के भ्रति (वाचा) स्तुति वचनो द्वारा, (धोत्रेणः मनसा) भवण कां० १३। सू १ 'अथववेद-माष्य ३९५ ग्रौर मनन द्वारा, (जुहोमि) मै भपने प्राप को समंपित करता हूं । (देवाः) होते हँ । (खः) वह परमेद्वर (सामित्येः) राजसभा के सदस्यों के साथ (मा) मूक राजा को (रोहः) उन्नतियो द्वारा (रोहयतु) समुचत करे 1

English

Rohita is the sire and mouth of worship: to him with voice, ear, heart I pay oblation. To Rohita come Gods with joyful spirit. May he by risings raise me till I join him.

अध्याय १३

श्लोक 1.25

यो रोहि॑तो वृष॒भस्ति॒ग्मशृ॑ङ्गः॒ पर्य॒ग्निं परि॒ सूर्यं॑ ब॒भूव॑ ।यो वि॑ष्ट॒भ्नाति॑ पृथि॒वीं दिवं॑ च॒ तस्मा॑द् दे॒वा अधि॒ सृष्टीः॑ सृजन्ते

yo rohito vṛṣabhastigmaśṛṅgaḥ paryagniṃ pari sūryaṃ babhūva | yo viṣṭabhnāti pṛthivīṃ divaṃ ca tasmād devā adhi sṛṣṭīḥ sṛjante

हिन्दी अर्थ

सभा) के सदस्य राजव (भ्रथवं ° १२।१।५६) । समूह से (मा) मू राजा को (इमानि तेजांसि) ये राष्ट्रिय तेज (उपागुः) परमेदवर नें संसार-यज्ञ विधिपू्वेक रचा है । शिल्पी लोग संसार की विधिपूवक रचनाश्रों को देख कर विविध रचनाएु' करते ह । राष्ट्र के नगरों, मकानों रादि का निर्माण कर हिल्पी राष्ट की सुन्दर रूप देते है । संसार की. रचनाप्रों भे; केन्रूप शक्ति, परमेरवर की है । मन्मनि मज्मना बलनाम (निषं० २।९) नाभिम् =शरीर मे नाभि केन्द्ररूप है । माताके पेट शिशुका पालन नाभिनाल द्वारा होता है सांसारिक शक्तियो मे परमेश्वर की शक्ति नाभिखूप है । आ त्वा ररोहोष्णिहाक्षरो व॑षटकार आ त्वा सूरो रोहितो रेत॑सा सह॥

English

Rohita ordered sacrifice for Visvakarman: thence have I obta- ined this strength and energy. May I proclaim thee as my kin over the greatness of the world.

अध्याय १३

श्लोक 1.26

रोहि॑तो॒ दिव॒मारु॑हन्मह॒तः पर्य॑र्ण॒वात्।सर्वा॑ रुरोह॒ रोहि॑तो॒ रुहः॑

rohito divamāruhanmahataḥ paryarṇavāt| sarvā ruroha rohito ruhaḥ

हिन्दी अर्थ

२९६ ¦ भथर्वेवेद-माष्य कां १२। सू° १ परमेरवर (रेतसा सह) निज शक्ति के साथ (त्वा) तुक पर (श्रा रुरोह) राजा को सम्बोधित करके कहा है.किहै राजन् ! राष्टरमेजो. वेदिक छन्दों मे निदिष्ट विधियां दवारा तुने राष्टर्ासन करना है । ये वेदिक वैदिकं छन्दो मे उपदिष्ट निदेश तुमे मागं ददन. कराएगे 1 यही नही,

English

On thee have mounted Brihatī and Pankti. and Kakup with great splendour, Jātavedas! The cry of Vashat with the voice uplifted and Rohita with seed on thee have mounted.

अध्याय १३

श्लोक 1.27

वि मि॑मीष्व॒ पय॑स्वतीं घृ॒ताचीं॑ दे॒वानां॑ धे॒नुरन॑पस्पृगे॒षा।इन्द्रः॒ सोमं॑ पिबतु॒ क्षेमो॑ अस्त्व॒ग्निः प्र स्तौ॑तु॒ वि मृधो॑ नुदस्व

vi mimīṣva payasvatīṃ ghṛtācīṃ devānāṃ dhenuranapaspṛgeṣā| indraḥ somaṃ pibatu kṣemo astvagniḥ pra stautu vi mṛdho nudasva

हिन्दी अर्थ

भ्रपितु यह भी जान किं सर्वाधिरोही परमेदवर भी निज शक्ति समेत तुफ पर सवार है । इसलिये परमेश्वर निदिष्ट मागं से राष्टू-का चासन करना, £ उन्हीं छन्दो का निदेश मन्व मँ क्रिया.गया है + . ग (अयम्) यह रोहित परमेश्वर (पृथिव्य ग्म) परथिवी. केः -. १ इस द्वारा यह दर्शाया है कि मन्वपादों रमे "अभरवंस्या का. नियमं ॥ -

English

He goes into the womb of earth, he robes himself in heaven and air. He on the Bright One’s station hath reached heavenly light and all the worlds.

अध्याय १३

श्लोक 1.28

समि॑द्धो अ॒ग्निः स॑मिधा॒नो घृ॒तवृ॑द्धो घृ॒ताहु॑तः ।अ॒भी॒षाड् वि॑श्वा॒षाड॒ग्निः स॒पत्ना॑न् हन्तु॒ ये मम॑

samiddho agniḥ samidhāno ghṛtavṛddho ghṛtāhutaḥ | abhīṣāḍ viśvāṣāḍagniḥ sapatnān hantu ye mama

हिन्दी अर्थ

भरावस्यक है, लवु-गुर मा्ारभो का नियम भ्रावश्यक नहीं । कां० १३। सु° १ भथर्वेवेद-माष्य ३९७ मान लोकों में (व्यानशे) व्याप्तं है । । पुथिवी. (नः) हरमे (स्योना) सुखकारी हो, (योनिः) घर (स्योना) सुख- कर हो, (तल्पा) पलंग (नः), इमे (सुशेवा) उत्तम सुखदायी हो । (इहं तुफ को, (भ्राग्रुषा) दीषं तथा. नीरोग श्रायु के साथ, तथा (वचंसा) तेज के

English

To us, Vāchaspati, may Earth be pleasant, pleasant our dwelling, pleasant be our couches. Even here may Prāna be our friend: may Agni, O Parameshthin give thee life and splendour.

अध्याय १३

श्लोक 1.29

हन्त्वे॑ना॒न् प्र द॑ह॒त्वरि॒र्यो नः॑ पृत॒न्यति॑ ।क्र॒व्यादा॒ग्निना॑ व॒यं स॒पत्ना॒न् प्र द॑हामसि

hantvenān pra dahatvariryo naḥ pṛtanyati | kravyādāgninā vayaṃ sapatnān pra dahāmasi

हिन्दी अर्थ

शिक्षा इस प्रकार की हनो चाहिए जिस से किं जीवन सुखीहो सके, गृह जीवने तथा रात्री मे रयन सुखकर हो; जीवन में प्राण हरमे सुख- या शिकाध्यक 1: (वररवकमेगाः) . विवः ॐ. कर्ता दास रतीं (ये) जो स विरत.करुए हैः. (३); जोकि (नौ) हम दोनो भजा वुः र ध राजवरग-को (षरि.सूः-बश्रवुः) षेरे हई. है, - वे ३९८ भ्रथरववेद-माष्य कां० १३ । सुऽ म १७ “श्रगिनि", ओर १८ मे “रोहित'' पद, परमेश्वरा्थक है । पञ्च = पचि विस्तारे । विस्तृतं या हेमन्त ्रौर शिशिर को एक ऋतु मान कर, पांच ऋतुए कही ह । भरथवा ऋतवः नः स्रख्ये सन्तु ।

English

And those, Vāchaspati, our own five seasons, sacred to Visva- karman their creator. 200

अध्याय १३

श्लोक 1.30

अ॒वा॒चीना॒नव॑ ज॒हीन्द्र॒ वज्रे॑ण बाहु॒मान्।अधा॑ स॒पत्ना॒न् माम॒कान॒ग्नेस्तेजो॑भि॒रादि॑षि

avācīnānava jahīndra vajreṇa bāhumān| adhā sapatnān māmakānagnestejobhirādiṣi

हिन्दी अर्थ

कां० १३। सुऽ भरथववेद-माष्य ३९९ मित्रावरुणो ; मित्रः == राजा को “मित्रव्ंन कहा है (अ्रथवं० ४।८।२,६), भ्रथं में “वरुण” गुप्तचरों का भरधिकारी प्रतोत होता है। सूनृतावत् = यं त्वा पृषती रथे प्रषिवहेति रोहित । (रोहितः) है सिहासनारूढ़ राजन् ! (यम् त्वा) जिस तुक को

English

Even here may Prāna be our friend: may Agni, O Parameshthin, give thee life and splendour. With splendour let God Savitar, and Agni, with splendour

अध्याय १३

श्लोक 1.31

अग्ने॑ स॒पत्ना॒नध॑रान् पादया॒स्मद् व्य॒थया॑ सजा॒तमु॒त्पिपा॑नं बृहस्पते ।इन्द्रा॑ग्नी॒ मित्रा॑वरुणा॒वध॑रे पद्यन्ता॒मप्र॑तिमन्यूयमानाः

agne sapatnānadharān pādayāsmad vyathayā sajātamutpipānaṃ bṛhaspate | indrāgnī mitrāvaruṇāvadhare padyantāmapratimanyūyamānāḥ

हिन्दी अर्थ

(पृषती ) चित्तकबरी (प्रष्टिः) घोड़ी (रथे) रथ में (वहति) वहन करती है, वह तु (श्रपः रिणन्) जल का विमोचन. करता हुश्रा, (शुभा) शोमा से -युक्त हृभा (यासि). राष्ट्र मे जाता है । १. (रोहित) है बीजों के उत्पादक ! तथा. बीजाङ्कररों का प्रादुमवि करने. वाले राजन् ¡ यं त्वा) निस तुम को (पृषती) मुमि को सींचने वाली नहर के सदृश दीघ्र गामिनी (अष्टिः) घोड़ी (रथे) रथ में (वहति) ले चलती है, भ्रौर तु पृषती = पृषु सेचने । लुप्तोपमावाचक न्द । बीजों के उत्पादन भ्रौर बीजाङ कुरो के उत्पादन के वर्णेन के कारण पृषती है सीचने वासी नहर । पषतियों का सम्बन्ध मानसून वायु्रों के साथ है । यथा “पृषत्यो मरताम्" (निषं० १।१५) । ४७०. अयवेवेद-भाष्य कां०.१३। सु० १. राषटरो्ति के लिये योजनाए (79०००।३). कौ जाती ह । हृषि

English

Mitra, Varuna invest thee. Treading down all Malignities, come hither. Pleasant and’ glorious hast thou made this

अध्याय १३

श्लोक 1.32

उ॒द्यंस्त्वं दे॑व सूर्य स॒पत्ना॒नव॑ मे जहि ।अवै॑ना॒नश्म॑ना जहि॒ ते य॑न्त्वध॒मं तमः॑

udyaṃstvaṃ deva sūrya sapatnānava me jahi | avainānaśmanā jahi te yantvadhamaṃ tamaḥ

हिन्दी अर्थ

है । राजा इस का विमोचन करता है । रिणन् =रि गतौ । रोहितस्य ) सिहासनरूढ् राजा के ( भ्रनुव्रता ) भरनुकूल कमो वली हो । रूपाम् ) तथा नानारूपं वाली भरुमि को (जयेम) जीतं, (तया) उस प्रजा द्वारा (विदवाः पृतनाः) सभी सेना का -(्रमि स्याम) पराभव करर । - शरुरिः= सु प्रेरणे । प्रजा प्र रणाए' देती है राजा को भवा सूरि; = विदृषी । व्रतम् कर्मनाम (निषं० २।१) । वाजः बलनाम .(निघं २।६)।

English

kingdom. Rohita, car-borne by a speckled leader, thou, pouring water,. goest on in triumph.

अध्याय १३

श्लोक 1.33

व॒त्सो वि॒राजो॑ वृष॒भो म॑ती॒नामा रु॑रोह शु॒क्रपृ॑ष्ठो॒ऽन्तरि॑क्षम्।घृ॒तेना॒र्कम॒भ्यऽर्चन्ति व॒त्सं ब्रह्म॒ सन्तं॒ ब्रह्म॑णा वर्धयन्ति

vatso virājo vṛṣabho matīnāmā ruroha śukrapṛṣṭho'ntarikṣam| ghṛtenārkamabhya'rcanti vatsaṃ brahma santaṃ brahmaṇā vardhayanti

हिन्दी अर्थ

( रोहिणी ) समुन्नतिश्षील प्रजा है। (इदम् सदः) यह सिहासन श्रौर वह मागे है (येन) जिस मागं दवारा (पषती) सीचने वाली नहर (याति) जाती है । (ताम्) उस नहर को (गन्धर्वाः) पृथिवी के - धारकः करते हँ (कवयः) वेदकाग्य के विद्धान् । . ¶ स्वयं भ्रारोहण करने वाली है । राजा का स्थान है राजर्सिहासन, जिस पर भ्रारूढृ. होकर उस ने शासने करना है । प्रजा के जल के लिये तथां कृषि की उन्नति के लिये राज्याधिकारी नहर ्रौर उस के मार्गं की रक्षा

English

Golden, refulgent, lofty is the Lady, Rohinī, Rohita’s devoted Consort.

अध्याय १३

श्लोक 1.34

दिवं॑ च॒ रो॑ह पृथि॒वीं च॑ रोह रा॒ष्ट्रं च॒ रोह॒ द्रवि॑णं च रोह ।प्र॒जां च॒ रोहा॒मृतं॑ च रोह॒ रोहि॑तेन त॒न्वं॑१ सं स्पृ॑शस्व

divaṃ ca roha pṛthivīṃ ca roha rāṣṭraṃ ca roha draviṇaṃ ca roha | prajāṃ ca rohāmṛtaṃ ca roha rohitena tanvaṃ1 saṃ spṛśasva

हिन्दी अर्थ

कां० १३। सु° १ भ्रथवंवेद-माष्य ४०१ घृतपावा रोतो राजंमानो दिर देवः एृष॑तीमा विवेश ॥२४॥ (हरयः) भन्धकार का हरण करने वलि, (केतुमन्तः) रोग॒हटाने का वहन सुख पूर्वेक कर रही है । (घृतपावा) जल का पन करने वाला, (भ्राजमानः) प्रदीप्त हूभ्रा, (रोहितः देवः) भरोषधियों का रोहन करने वाला या चुलोकं पर भरारूढ़ हभ सूये-देव, (पृषतीम्') नक्षत्रों भौर तारा

English

Through her may we win various spoil and booty, through her be conquerors in every battle. Rohita’s seat is Rohinī before us: that is the path the speckled

अध्याय १३

श्लोक 1.35

ये दे॒वा रा॑ष्ट्रभृतो॒ऽभितो॒ यन्ति॒ सूर्य॑म्।तैष्टे॒ रोहि॑तः संविदा॒नो रा॒ष्ट्रं द॑धातु सुमन॒स्यमा॑नः

ye devā rāṣṭrabhṛto'bhito yanti sūryam| taiṣṭe rohitaḥ saṃvidāno rāṣṭraṃ dadhātu sumanasyamānaḥ

हिन्दी अर्थ

हरयः हृञ् हरणे । केतु कित निवासे, रोगापनयने च, भर्थात् चिकित्सक रूप । तथा केतुः भरजञानाम (निष ० ३।९) । भ्रमृताः=भरमृतम् समन्वय की दृष्टि से “पृषती” दवारा भका गङ्गा का ग्रहण करना चाहिए । सुवं ४०२ भ्रथ्ववेद-माष्य कां० १३। सु° १ तथा (सूयं परि) सूर्यं के सब शरोर (बभूव) विद्यमान है, भर्थात् इन दोनों मे व्याप्तहैया इन दोनोंकोषेरे हुए है। (यः) जो (पृथिवीम् दिवं च)

English

Mare pursueth. Kasyapas and Gandharvas lead her upward, and heavenly sages ever watch and guard her,

अध्याय १३

श्लोक 1.36

उत् त्वा॑ य॒ज्ञा ब्रह्म॑पूता वहन्त्यध्व॒गतो॒ हर॑यस्त्वा वहन्ति ।ति॒रः स॑मु॒द्रमति॑ रोचसेऽर्ण॒वम्

ut tvā yajñā brahmapūtā vahantyadhvagato harayastvā vahanti | tiraḥ samudramati rocase'rṇavam

हिन्दी अर्थ

की सृष्टियां (सृजन्ते) रचते है । नहीं । देव लोग परमेश्वरीय .रचनाश्रों को देख कर निज रचनाएँ रचते है । . (महतः ्र्णवात् परि) महासमूद्र से, (रोहितः) सर्वोपरि आरूढ परमेदवर, (दिवम् भ्रारहत्) दयूलोक पर भ्रारोहण कयि हुए है । (रोहितः) यलोक तक तथा द्युलोक की भी सब ऊचाइयों मे व्याप्त है । वि मिंमीष्व पय॑स्वतीं घृताचीं देवानां धेनुरनंपसपृगेषा ।

English

Sūrya’s bay steeds refulgent and immortal draw the light-rolling. chariot on for ever. Drinker of fatness, Rohita, resplendent, hath entered into various-coloured heaven,

अध्याय १३

श्लोक 1.37

रोहि॑ते॒ द्यावा॑पृथि॒वी अधि॑ श्रि॒ते व॑सु॒जिति॑ गो॒जिति॑ संधना॒जिति॑ ।स॒हस्रं॒ यस्य॒ जनि॑मानि स॒प्त च॑ वो॒चेयं॑ ते॒ नाभिं॒ भुव॑न॒स्याधि॑ म॒ज्मनि॑

rohite dyāvāpṛthivī adhi śrite vasujiti gojiti saṃdhanājiti | sahasraṃ yasya janimāni sapta ca voceyaṃ te nābhiṃ bhuvanasyādhi majmani

हिन्दी अर्थ

भूमि को (विमिमीष्व) ठीक प्रकारसे भाप, (एषा) यह राज्य भूमि वतु) पान करे भ्रौर कराये, (क्षेमः भस्तु) ताकिं सब का कुदाल हो, (रग्निः) (मृषः) दानु सग्रामकरारियो को. (विनुदस्व) घकेलने का प्रबन्ध कर । देवानाम् = दिवु क्रीड़ाविलिगीषाबव्यवहार-.”.. । भरतः देव == पदां । “सोमो दुग्बाभिरकाः”' (ऋ० ९।१०७।९), तथा “सोमो बुग्वास्यः

English

Rohita, Bull whose horns are sharply pointed, superior of Agni and of Sūrya, He who supports the sundered earth and heaven,—from him the

अध्याय १३

श्लोक 1.38

य॒शा या॑सि प्र॒दिशो॑ दिश॑श्च य॒शाः प॑शू॒नामु॒त च॑र्षणी॒नाम्।य॒शाः पृ॑थि॒व्या अदि॑त्या उ॒पस्थे॒ऽहं भू॑यासं सवि॒तेव॒ चारुः॑

yaśā yāsi pradiśo diśaśca yaśāḥ paśūnāmuta carṣaṇīnām| yaśāḥ pṛthivyā adityā upasthe'haṃ bhūyāsaṃ saviteva cāruḥ

हिन्दी अर्थ

कां० १३ । सुऽ १ भरथर्ववेद-माष्य ४०३ क्षरति” (निरुक्त ५।१।३), भर्थात् दही गई गौरो से सोम शरत होता (धृताहृतः) धृत कौ आहति को प्राप्त, (घृतवृद्धः) धृत द्वारा बद हनन करे, (ये मम) जो किमेरेरहै। (नः पृतन्यति) हम पर सेना दारा भ्राक्रमण करतादहै उसे (प्र दहतु)

English

Gods effect their own creations. Rohita rose to heaven from mighty ocean, Rohita rose and clomb all steeps and rises.

अध्याय १३

श्लोक 1.39

अ॒मुत्र॒ सन्नि॒ह वे॑त्थे॒तः संस्तानि॑ पश्यसि ।इ॒तः प॑श्यन्ति रोच॒नं दि॒वि सूर्यं॑ विप॒श्चित॑म्

amutra sanniha vetthetaḥ saṃstāni paśyasi | itaḥ paśyanti rocanaṃ divi sūryaṃ vipaścitam

हिन्दी अर्थ

होती, भ्रौर हृदय से उठती है” ॥१॥ “क भ्रायु (जीवन) के जिये, सम्यक् -तपाने को मुख से उठता हृभ्रा केता है ॥२॥ “श्षचधिय दारा श्राान की गई इस भ्रमि की समिषा. भ्रात्मसमर्पण को जो जानता है वह मृत्यु के लिये शटि मागं यढ पर भ्रपना चरण नहीं रखता” ॥३॥ “4्वारों भोर से षेरने वाले शत्रु इस का हतन तथा भ्राक्रमणकारि्थो पर करौष । र । ४०४ श्रयवेवेद-माष्य को० १३। सु° १ अधां सपत्नान् मामकानगेस्तेजोंधिरादिंषि ॥३०॥

English

Prepare the Milky One who teems with fatness: she is the Gods’ never-reluctant milch-cow. Indra drink Soma: ours be peace and safety. Let Agni lead the laud, and chase our foemen.

अध्याय १३

श्लोक 1.40

दे॒वो दे॒वान् म॑र्चयस्य॒न्तश्च॑रस्यर्ण॒वे।स॒मा॒नम॒ग्निमि॑न्धते॒ तं वि॑दुः क॒वयः॒ परे॑

devo devān marcayasyantaścarasyarṇave| samānamagnimindhate taṃ viduḥ kavayaḥ pare

हिन्दी अर्थ

सेनाके दक्षिणमेहो कर सेना के साथ चले। उत्पिपानम् =उत्+-पा - (पीना) +कानच् = अरति खाउ-पीठः, भर्थात् लोभी ।. भ्रथवा. “भतिकर" भादि द्वारा प्रजा को रक्तपान करने वाला । भथवा “उत्+-पे (शोषणे) + कां १३। सु° १ भ्रथवंवेद-माष्य ४०४ रदिमसमूह हारा दात्रुभो के विनाश्च का वर्णेन है । , ह सूर्यं सदृश स्वप्रकाशी परमेष्वरदेव । तु मेरे हृदय भें उदित होता हुमा मेरे काम-करोधादि शत्रो का' हनन कर, मेरे जीवन भें व्याप्ति दारा उन का हनन कर, उन का हनन. कर जो कि. नीच तमोमयी वृत्ति के

English

Let him smite down in death and burn the foeman who attacketh me. Our adversaries we consume through Agni the Carnivorous.

अध्याय १३

श्लोक 1.41

अ॒वः परे॑ण प॒र ए॒नाव॑रेण प॒दा व॒त्सं बिब्र॑ती॒ गौरुद॑स्थात्।सा क॒द्रीची॒ कं स्वि॒दर्धं॒ परा॑गा॒त् क्वऽस्वित् सूते न॒हि यू॒थे अ॒स्मिन्

avaḥ pareṇa para enāvareṇa padā vatsaṃ bibratī gaurudasthāt| sā kadrīcī kaṃ svidardhaṃ parāgāt kva'svit sūte nahi yūthe asmin

हिन्दी अर्थ

(विराजः) विविध कृतिं मे प्रदीप्त हो रदी प्रकृति का (वत्सः) १. भथवां “सूयं सदृश राष्ट को भ्रकारित करने वति है. खन्राट् ! तु उदय ४०६ भ्रथर्वेवेद-माष्य कां १३ । सू० १ समग्र जड भौर प्राणी जगत् मे चमक रही तथा विराजमान हो रहीं है। परमेदवर इस का वत्सरूप है । प्राकृतिक तियो इरा इन के कर्ता का ग्रनुमानरूपी ज्ञान हमे होता है ।. योगियो कौ समाधि में परमेश्वर का

English

Beat them down, Indra, with thy bolt, beat them down, mighty with thine arm. I through the energy and force of Agni have secured my foes.

अध्याय १३

श्लोक 1.42

एक॑पदी द्वि॒पदी॒ सा चतु॑ष्पद्य॒ष्टाप॑दी॒ नव॑पदी बभू॒वुषी॑ ।स॒हस्रा॑क्षरा॒ भुव॑नस्य प॒ङ्क्तिस्तस्याः॑ समु॒द्रा अधि॒ वि क्ष॑रन्ति

ekapadī dvipadī sā catuṣpadyaṣṭāpadī navapadī babhūvuṣī | sahasrākṣarā bhuvanasya paṅktistasyāḥ samudrā adhi vi kṣaranti

हिन्दी अर्थ

है । क्योंकिं वह प्रकृति दारा प्रकट होता है । वृषभः वेदो दारा परमेदवर मान कर, इस पीठ पर सवार हृभ्रा गति केर रहा है । घृतेन = जैसे घृतादि पदाथा द्वारा शिशु की सेवा, तथा प्रशंसावचनों द्वारा उस की प्रशंसा. या हे राजन् ! या सच्राट् ! तु (दिवं च रोह) निज कीति की वृष्टि से यलोक तक (रोह) श्रा रोहण कर, (पृथिवीं च रोह) भौर समग्र पृथिवी पर भ्रारोहण कर, भर्थात् तेरे सुशासन कौ कीत्ति चयुलोकं तथा पृथिवी पर (श्रमृतं च रोह) भ्रमृत होने की भोर श्रारोहण.कर, (रोहितेन) सर्वोपरि

English

Cast down our foes beneath our feet, O Agni. Brihaspati, oppress our rebel kinsman. Low let them fall, O Indra-Agni. Mitra-Varuna, powerless to show their anger.

अध्याय १३

श्लोक 1.43

आ॒रोह॒न् द्याम॒मृतः॒ प्राव॑ मे॒ वचः॑ ।उत् त्वा॑ य॒ज्ञा ब्रह्म॑पूता वहन्त्यध्व॒गतो॒ हर॑यस्त्वा वहन्ति

ārohan dyāmamṛtaḥ prāva me vacaḥ | ut tvā yajñā brahmapūtā vahantyadhvagato harayastvā vahanti

हिन्दी अर्थ

कां० १२। सुऽ १ भथर्ववेद-माष्य ४०७ सुशासन करना कि जगत् का शासक मेरे शासन मे मेरे शरीर, मन भ्रौरः बुद्धि प्रेरणा दे रहा है, भौर उसी की प्रेरणा दवारा म शासन कर रहा ह । ये देवा रा्रतोऽभितो यन्ति सूर्यम् ।

English

Ascending up on high, O God. O Sūrya, drive my foes away. Yea, beat them backward with the stone: to deepest darkness let them go.

अध्याय १३

श्लोक 1.44

वेद॒ तत् ते अमर्त्य॒ यत् त॑ आ॒क्रम॑णं दि॒वि।यत् ते॑ स॒धस्थं॑ पर॒मे व्योऽमन्

veda tat te amartya yat ta ākramaṇaṃ divi| yat te sadhasthaṃ parame vyo'man

हिन्दी अर्थ

(राष्टरमृतः) राष्ट का मरण-पोषण करने वाले (ये) जो (देवाः) देवकोटि के शासक श्रधिकारी, (सूर्यम् भरभितः) सूये समाने निमंल कीति देवाः = राष्ट के शासक देवकोटि के व्यक्ति होने चाहिए । राष्टरा- बना हूं । वह निज भधिकारियो के साथ एेकमत्य को प्राप्त हूभ्रा भौर उन से ज्ञान प्राप्त करके शासन करे । तिरः सेमुद्रमति रोचसेऽणेवम् ॥२६॥ इस प्रकार तू (भ्ष्वगतः) भवसि सन्मागेंगामी बनता है, (हरयः)

English

Calf of Virāj, the Bull of prayers and worship, whitebacked, he hath gone up to air’s mid region. Singing, they hymn the Calf, with gifts of butter: him who is

अध्याय १३

श्लोक 1.45

सूर्यो॒ द्यां सूर्यः॑ पृथि॒वीं सूर्य॒ आपोऽति॑ पश्यति ।सूर्यो॑ भू॒तस्यैकं॒ चक्षु॒रा रु॑रोह॒ दिवं॑ म॒हीम्

sūryo dyāṃ sūryaḥ pṛthivīṃ sūrya āpo'ti paśyati | sūryo bhūtasyaikaṃ cakṣurā ruroha divaṃ mahīm

हिन्दी अर्थ

(ञ्रति रोचसे) भरति कीतिमान् हो जातादहै। तेरी कीति समूद्र पारके प्रदेशो मे भी फल जाती है। गणो का रहण कर लेता है, वैसे. परभेवर के साथ सस्पच दवारा निज को परमेष्वरीय णो का पहन करने वाला-कर “ ) (वसुजिति) वसुश्रौ पर विजय पाए हुए, (गोजिति) पृथिवी पर विजय पाए हुए, (संधनाजिति) समग्र धनो पर विजयं पाए 'हृए (रोहिते

English

Brahma they exalt with Brahma. Rise up to earth, rise up to heaven above it; rise up to opulence, rise up to kingship.

अध्याय १३

श्लोक 1.46

उ॒र्वीरा॑सन् परि॒धयो॒ वेदि॒र्भूमि॑रकल्पत ।तत्रै॒ताव॒ग्नी आध॑त्त हि॒मं घ्रं॒सं च॒ रोहि॑तः

urvīrāsan paridhayo vedirbhūmirakalpata | tatraitāvagnī ādhatta himaṃ ghraṃsaṃ ca rohitaḥ

हिन्दी अर्थ

लेक (धिते) आश्य पाए हए ! (यस्य) जिस परमेदवर के (सहस्रम्) जगत् के (मञ्मनि प्रधि) बलों में है" (वोचेयम्) यह म कहं । -संसार के बलोंकाकेनदरहै) इष कैनदरसे संसार के सब बल प्रसूत हए है । ग्रवान्तर दिशाभमों मे (च) तथा (दिशः) मुख्य दिशा मेँ (यासि) जाता वारमेदवरी माता की गोद में स्थित हृभा तु (यशाः) यरस्वी होकर भ्राता

English

Rise up to offspring, rise to life immortal; rise, and with Rohita unite thy body. With all the Gods who circle round the Sun, upholding royal sway,

अध्याय १३

श्लोक 1.47

हि॒मं घ्रं॒सं चा॒धाय॒ यूपा॑न् कृ॒त्वा पर्व॑तान्।व॒र्षाज्या॑व॒ग्नी ई॑जाते॒ रोहि॑तस्य स्व॒र्विदः॑

himaṃ ghraṃsaṃ cādhāya yūpān kṛtvā parvatān| varṣājyāvagnī ījāte rohitasya svarvidaḥ

हिन्दी अर्थ

(सविता इव) सूयं के सदृश (चारः) सब. के लिये सुन्दरं या रुचिकरं कां० १३। भु० १ अर्ववेद-माष्य ४०९ तु (इह) इस पृथिवी लोकं मेँ विद्यमान पदाथ को (वैतत्य) जानता है (इतः सन्) भौर इस पृथिवी में होता हृभ्रा तु तानि) उन श्लोक के -इस पृथिवी से (रोचनम्) टचिकर या रोचक श्रौर (विपदिचतम्) तुभ मेषावी को (परयन्ति) देल पाति हः जंसे क्रि (दिवि सूर्यम्) चुलोक मे सूयं को यहां से देखते । मन्त्रं के प्रथमां माग में परमेदवर की व्यापकता का निदे दिया है, जोकि दुर होता हृभ्रा यहां के पदार्थो जो जानता भ्रौर यहां होता हभ

English

With all of these may Rohita accordant, give sovranty to thee with friendly spirit. Cleansed by prayer, sacrifices bear thee upward: bay coursers, ever travelling, convey thee.

अध्याय १३

श्लोक 1.48

स्व॒र्विदो॒ रोहि॑तस्य॒ ब्रह्म॑णा॒ग्निः समि॑ध्यते ।तस्मा॑द् घ्रं॒सस्तस्मा॑द्धि॒मस्तस्मा॑द् य॒ज्ञोऽजायत

svarvido rohitasya brahmaṇāgniḥ samidhyate | tasmād ghraṃsastasmāddhimastasmād yajño'jāyata

हिन्दी अर्थ

व्रिपरचितम् पद भी सूयं का सुचक नहीं हो सकता । विपदिचत् का अर्थं है मेषावी (निषं० -३।१५) । सूर्यः मेषावी नहीं । परमेदवैर तो मेधावी है। ; : (देवः) हुं परभे्रवरदेव (देत्रान्) दिव्य-तत्वो. काः (मचय)... ४१० भ्रथवेवेद-भाष्य कां० १३। सु०१ भणेवे अन्त; = हृदय-समुद्रं मे । वेदों मेँ हृदय को भी समुद्रः कह है । यथा वैसे हृदय-समुद्र से स्तुतिवाणियों की लहरर उठती है । . मन्व मे “अर्णेव"

English

Thy light shines over sea and billowy ocean. Rohita, conqueror of cows and riches and gathered spoil, is heaven’s and earth’s upholder.

अध्याय १३

श्लोक 1.49

ब्रह्म॑णा॒ग्नी वा॑वृधा॒नौ ब्रह्म॑वृद्धौ॒ ब्रह्मा॑हुतौ ।ब्रह्मे॑द्धाव॒ग्नी ई॑जाते॒ रोहि॑तस्य स्व॒र्विदः॑

brahmaṇāgnī vāvṛdhānau brahmavṛddhau brahmāhutau | brahmeddhāvagnī ījāte rohitasya svarvidaḥ

हिन्दी अर्थ

मी भरणेव है जलीय-समुद्र है 1 परमेश्वर इस हदय-समूद्र मे विचरता हृश्रा योगि-ध्यानिगरो को सदपदेश देता भ्रौर उन का प्रेरक होता है! परे कवयः रूपी गौ (कवस्वित) किस मे (सूते) निज वत्स को जन्म“ देती है ? । परन्तु वह (स्मिन्). इस' गूथ मानुष संव मे (नहि) निश्चय से नहीं - मन्तरनिष्ठ पदसमृह परण्रहय का वणन करत हुए भी, उस, के भ्रवर

English

Over earth’s greatness would I tell my kinship with thee who hast a thousand births and seven.

अध्याय १३

श्लोक 1.50

स॒त्ये अ॒न्यः स॒माहि॑तो॒ऽप्स्व॑१न्यः समि॑ध्यते ।ब्रह्मे॑द्धाव॒ग्नी ई॑जाते॒ रोहि॑तस्य स्व॒र्विदः॑

satye anyaḥ samāhito'psva1nyaḥ samidhyate | brahmeddhāvagnī ījāte rohitasya svarvidaḥ

हिन्दी अर्थ

न दोर्तो के मेलःका ही नाम छै वृत ४१२ .भथर्वेवेद-भाष्य कां० १३। सु १ पुरी केनौ द्वारो मे जिस का पदन्यास है, तथा हजारों नक्षीण होने वाले .. तारो वाली, तथा भूवन का विस्तार करने वाली या उसे भरभिन्यक्त करने वाली या उसे भमिव्यक्त करने वाली पारमेदवरी-माता है। उस माता से वेदरूप ज्ञान .समुद्र प्रवाहित होते है । यजुर्वेद में कहा टै “पावोऽस्य विवा भुतानि" (३१।३), तथा “पादोऽस्येहाभवत्पुनः" ( ३१।४ ), भर्थात् “सब भूतमौतिक जगत इस

English

Thou, yonder, knowest all things here, when here thou knowest what is there. From here men see the sphere of light, Sūrya profoundly wise in heaven.

अध्याय १३

श्लोक 1.51

यं वातः॑ परि॒ शुम्भ॑ति॒ यं वेन्द्रो॒ ब्रह्म॑ण॒स्पतिः॑ ।ब्रह्मे॑द्धाव॒ग्नी ई॑जाते॒ रोहि॑तस्य स्व॒र्विदः॑

yaṃ vātaḥ pari śumbhati yaṃ vendro brahmaṇaspatiḥ | brahmeddhāvagnī ījāte rohitasya svarvidaḥ

हिन्दी अर्थ

तथा नौ दवार=भरष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पुरयोध्या” (्रथवं० १०।२।३१; मे स्थित सहस्नार-चक्र पर भ्रारोहण करता हुभरा (मे वचः) मेरे वैचन की “भ्रष्यगतः'' पद हरयः का विशेषण होगा, कि एसे यज्ञमार्गं के भनुगामी अगिजन । हरयः मनुष्यनाम (निषं० ३।३) । १. कां० १३। सू०श भथववेद-माष्य ४१६ को (वेद) यँ जानता हूं । तथ (ते) तेरे उस (सधस्थम्) साथ बैठने

English

A God, thou injurest the Gods: thou movest in the ocean’s depth. 201

अध्याय १३

श्लोक 1.52

वेदिं॒ भूमिं॑ कल्पयि॒त्वा दिवं॑ कृ॒त्वा दक्षि॑णाम्।घ्रं॒सं तद॒ग्निं कृ॒त्वा च॒कार॒ विश्व॑मात्म॒न्वद् व॒र्षेणाज्ये॑न॒ रोहि॑तः

vediṃ bhūmiṃ kalpayitvā divaṃ kṛtvā dakṣiṇām| ghraṃsaṃ tadagniṃ kṛtvā cakāra viśvamātmanvad varṣeṇājyena rohitaḥ

हिन्दी अर्थ

हंदयाकाद्च “सधस्थ” है । इस मे जीवात्मा तथा परमेश्वर साय बैठते है । दयूल)के पर (भ्रा रुरोह) भाषूढ् हुमा है । ४. मे भार्ढ् हृभराहृभरा है । उरवीरासन् परिषयो वेदिभूभिरकल्पयत् । . बनाया । (तत्र) उसे वेदि मे उस ने (एतौ) इनं दो (भरनी) श्ग्नर्यो कां (शंषत्ते) भाधान किया, (हिमम् घसं च) शीत को भ्रौर गमं ङी ।

English

Men kindle common Agni: him only the higher sages know. Beneath the upper realm, above this lower, bearing her Calf at foot, the Cow hath risen

अध्याय १३

श्लोक 1.53

व॒र्षमाज्यं॑ घ्रं॒सो अ॒ग्निर्वेदि॒र्भूमि॑रकल्पत ।तत्रै॒वान् पर्व॑तान॒ग्निर्गी॒र्भिरू॒र्ध्वाँ अ॑कल्पयत्

varṣamājyaṃ ghraṃso agnirvedirbhūmirakalpata | tatraivān parvatānagnirgīrbhirūrdhvā~ akalpayat

हिन्दी अर्थ

४१४ भ्रथर्ववेद-भाष्य कां० १३। सु० १ वेदिकोधेरने केलिये उसके चारो प्रोरंषेरा शलते परिषि कहते है! भूमि को परमेदवर मे वेदि कल्पित किया, भौर उस के किया जातठाहै। भूमिखूपी वेदिमें परमेश्वरने दो भ्रग्नियों का भ्राधानं पृथिवी मे होता है । धस: भ्रहर्नामि,! निधं ० १।९) । दिनं का निर्माण सूयं द्वारा होता है, भतः घ्र सपद सूयं का उपलक्षक है , (ईजाते) ससार यज्ञ को,रचु रही है ।

English

Whitherward, to what place hath she departed? Where doth she calve? Not in this herd of cattle.

अध्याय १३

श्लोक 1.54

गी॒र्भिरू॒र्ध्वान् क॑ल्पयि॒त्वा रोहि॑तो॒ भूमि॑मब्रवीत्।त्वयी॒दं सर्वं॑ जायतां॒ यद् भू॒तं यच्च॑ भा॒व्यऽम्

gīrbhirūrdhvān kalpayitvā rohito bhūmimabravīt| tvayīdaṃ sarvaṃ jāyatāṃ yad bhūtaṃ yacca bhāvya'm

हिन्दी अर्थ

कां० १३. सू° १ भ्रथववेद-माष्य ४१५ भेद से एक ही चेतन-ततत्व के दो नाम दर्शाए दहै, येकम है भारोहण भौर बहोदधावुग्नी ईजाते रोहितस्य स्वदिंहैः ।४९॥ (ईजाते) संसार यज्ञ कों रचा रही है.।

English

She hath become one-footed or two-footed, four-footed, or eight-footed or nine-footed, This universe’s thousand-syllabled Pankti Oceans flow forth from her in all directions.

अध्याय १३

श्लोक 1.55

स य॒ज्ञः प्र॑थ॒मो भू॒तो भव्यो॑ अजायत ।तस्मा॑द्ध जज्ञ इ॒दं सर्वं॒ यत् किं चे॒दं वि॒रोच॑ते॒ रोहि॑तेन॒ ऋषि॒णाभृ॑तम्

sa yajñaḥ prathamo bhūto bhavyo ajāyata | tasmāddha jajña idaṃ sarvaṃ yat kiṃ cedaṃ virocate rohitena ṛṣiṇābhṛtam

हिन्दी अर्थ

सुरऽ उदितो वि भाति कस्मे देवाय हविषा . ब्रिधेम'" (यजु° २२।७), कस्मै ४१६ . अथेवेद-माष्य कां १३। सुण १ स्वविद् रोहित के (४७) (ईजाते) संसार यज्ञ को रचाती है । वातः या भ्रमिप्राय यह कि सांसारिक जीवन को, यदि यज्ञ-भावनाभ्रौं से .जीवन निमाया जाय, तो इस यज्ञ के फलरूप मे हैवी जीवन प्राप्त होता है

English

Rising to heaven, immortal, hear my calling. Cleansed by prayer, sacrifices bear thee upward. Bay coursers, ever on the road, convey thee.

अध्याय १३

श्लोक 1.56

यश्च॒ गां प॒दा स्फु॒रति॑ प्र॒त्यङ् सूर्यं॑ च॒ मेह॑ति ।तस्य॑ वृश्चामि ते॒ मूलं॒ न च्छा॒यां क॑र॒वोऽप॑रम्

yaśca gāṃ padā sphurati pratyaṅ sūryaṃ ca mehati | tasya vṛścāmi te mūlaṃ na cchāyāṃ karavo'param

हिन्दी अर्थ

दक्षिणारूप है । हैवी जीवन को “दिवम्"” का है । यज्ञ के लिये तीन वस्तुए" . गार्हपत्य भ्रौर सूयं का ही वणेन हृभ्रा है । वषेमाज्यं प्र॑सो श्ग्निवेदिूमिंरकसपत । सूर्यं हृभा भ्रग्नि, (भूमिः वेदिः) भूमि हुई वेदि । (तत्र) उस भूभिमें ऊचा (्रकत्पयत्) रचायाबनायाहै।

English

This, O Immortal One, I know of thee, thy progress to the sky thy dwelling-place in loftiest heaven.

अध्याय १३

श्लोक 1.57

यो मा॑भिच्छा॒यम॒त्येषि॒ मां चा॒ग्निं चा॑न्त॒रा।तस्य॑ वृश्चामि ते॒ मूलं॒ न च्छा॒यां क॑र॒वोऽप॑रम्

yo mābhicchāyamatyeṣi māṃ cāgniṃ cāntarā| tasya vṛścāmi te mūlaṃ na cchāyāṃ karavo'param

हिन्दी अर्थ

चाहिए (४७), जो कि पवंतरूप हैँ (४७) .। इन यूपो के प्रतिनिधिरूप मे “गीभिः" द्वारा सूचित किया है । दृढावस्था वाली पृथिव्री पर, स्थिर हो गई, साथ ही इन लहरो के उत्थान भ्राकषेण होने पर जलीय लहर शब्द करती हई उत्थान भरौर पतन करती भे यूपछेदन, गूपनिर्माण तथा यूपस्थापन के लिये मन्त्र रूपी वाणि के उनच्चारण)किये जाते हँ तब यज्ञ सफल होवे ह; इस लिये वतंमान प्रतिपाचं

English

Beyond the sky, beyond the Earth looks Sūrya, and beyond the floods. The single eye of all that is; to mighty heaven hath he arisen.

अध्याय १३

श्लोक 1.58

यो अ॒द्य दे॑व सूर्य॒ त्वां च॒ मां चा॑न्त॒राय॑ति ।दु॒ष्वप्न्यं॒ तस्मिं॒छम॑लं दुरि॒तानि॑ च मृज्महे

yo adya deva sūrya tvāṃ ca māṃ cāntarāyati | duṣvapnyaṃ tasmiṃchamalaṃ duritāni ca mṛjmahe

हिन्दी अर्थ

भूमि को (अन्रवीत्) बोला कि (त्वथि) तुम में (ददं सवम्) यह सव ४१८ र श्रथवेवेद-माप्य काज १३। सू०-१ ए मन्त्र कविता हेली का है, परमेदवर, वास्तव मे, भूमि को बोलता रूप मे, (इदं सर्वं जज्ञे) यह सब पदा हुभ्रा है, (यत् कि च इदं विरोचते) जो कुच्छ कि यहु विविध प्रकार चमक रहा है, जो किं (रोहितेन ऋषिणा)

English

The earth was made his altar, and the wide expanses were the fence. There Rohita established both these Agnis, fervent heat and cold.

अध्याय १३

श्लोक 1.59

मा प्र गा॑म प॒थो व॒यं मा य॒ज्ञादि॑न्द्र सो॒मिनः॑ ।मान्त स्थु॑र्नो॒ अरा॑तयः

mā pra gāma patho vayaṃ mā yajñādindra sominaḥ | mānta sthurno arātayaḥ

हिन्दी अर्थ

धारित तथा परिपृष्ट कियादहै। . र. तस्यं शामि ते मूढं न च्छायां करवोऽ परम् ॥५६॥ . प्रसिद्धाथेः-- “जो गौकोपेर से टुकरताहै, मौर सूयं के सम्मुख मूत्र करता है, उस तेरी जड को मै काट देता ह, ' ताकि भ्रपर जगत् को विशेषाथंः--“जो (पदा) निज ज्ञान द्वारा (गाम्) वेदवाणी कौ का° १३। पुऽ १ -भथववेद-माष्य ४१९.

English

He stablished heat and cold, he made the mountains sacrificial posts. Then both the Agnis, Rohita’s who found celestial light, with rain for molten butter,

अध्याय १३

श्लोक 1.60

यो य॒ज्ञस्य॑ प्र॒साध॑न॒स्तन्तु॑र्दे॒वेष्वात॑तः ।तमाहु॑तमशीमहि

yo yajñasya prasādhanastanturdeveṣvātataḥ | tamāhutamaśīmahi

हिन्दी अर्थ

ते). उस तेरी (मूलम्) जडं को, भर्थात् जड़ सहित तुमे, (वृश्वामि) चै यो अर्देवद्यैतवां च मां बान्तराय॑ - (देव भूय) है सूयं सम प्रकारित परमेरेवर-देव !. (यः) जो (भ्र) (दुरितानि च) ्रौर दुष्कर्म को (मृज्महे) हम धो डालते ह, शुद्ध. कर व्यक्ति शुद्ध नहीं होता -तो फिर उस के लिये विनाश दण्ड ही विहित है ।

English

From him the heat, from him the cold, from him the sacrifice was born. Both Agins-Rohita’s who found the light of heaven—made strong by prayer,

अध्याय १३

श्लोक 2.1

अध्यात्मम्।१-४६ ब्रह्म।अध्यात्मं, रोहितादित्यदैवत्यम्।त्रिष्टुप्; १, १२-१५, ३९-४१ अनुष्टुप्; २-३,८,४३ जगती; १० आस्तारपङ्क्तिः; ११ बृहतीगर्भा; १६-२४ आर्षी गायत्री; २५ ककुम्मत्यास्तारपङ्क्तिः; २६पुरोद्व्यतिजागता भुरिग्जगती; २७ विराड् जगती; २९ बार्हतगर्भाऽनुष्टुप्; ३० पञ्चपदोष्णिग्बृहतीगर्भाऽतिजगती; ३४ आर्षी पङ्क्तिः; ३७ पञ्चपदा विराड्-गर्भा जगता; ४४-४५ जगती (४४ चतुष्पदा पुरःशाक्वरा भुरिक्; ४५ अतिजागतगर्भा)।उद॑स्य के॒तवो॑ दि॒वि शु॒क्रा भ्राज॑न्त ईरते ।आ॒दि॒त्यस्य॑ नृ॒चक्ष॑सा॒ महि॑व्रतस्य मी॒ढुषः॑

adhyātmam| 1-46 brahma| adhyātmaṃ, rohitādityadaivatyam| triṣṭup; 1, 12-15, 39-41 anuṣṭup; 2-3,8,43 jagatī; 10 āstārapaṅktiḥ; 11 bṛhatīgarbhā; 16-24 ārṣī gāyatrī; 25 kakummatyāstārapaṅktiḥ; 26purodvyatijāgatā bhurigjagatī; 27 virāḍ jagatī; 29 bārhatagarbhā'nuṣṭup; 30 pañcapadoṣṇigbṛhatīgarbhā'tijagatī; 34 ārṣī paṅktiḥ; 37 pañcapadā virāḍ-garbhā jagatā; 44-45 jagatī (44 catuṣpadā puraḥśākvarā bhurik; 45 atijāgatagarbhā)| udasya ketavo divi śukrā bhrājanta īrate | ādityasya nṛcakṣasā mahivratasya mīḍhuṣaḥ

हिन्दी अर्थ

केतुः प्र्ञानाम (निषं० ३१९) । नृचक्षसः सूरयश्च म कवितामय वर्णन है । परमेदवर पश्च मेँ वास्तविक वर्णन है । परमेदवर सब के उपकारः के लिये उन पर दुष्ट रखता, भ्रौर शुभाशुम कर्मो का निरीक्षण करता है । देखो काण्ड १३।४ (१) । ११); तथा (१३।४(२) ।६१) । भादित्य = परमेखवर भी, “तदेवाग्निस्तदादित्यः (यजु० ३२।१) । दिवि उदीरते

English

Then heat he took for Agni, and with rain for molten butter he created every living thing. The earth became an altar, heat was Agni, and the butter rain.

अध्याय १३

श्लोक 2.2

दि॒शां प्र॒ज्ञानां॑ स्व॒रय॑न्तम॒र्चिषा॑ सुप॒क्षमा॒शुं प॒तय॑न्तमर्ण॒वे।स्तवा॑म सूर्यं॒ भुव॑नस्य गो॒पां यो र॒श्मिभि॒र्दिश॑ आ॒भाति॒ सर्वाः॑

diśāṃ prajñānāṃ svarayantamarciṣā supakṣamāśuṃ patayantamarṇave| stavāma sūryaṃ bhuvanasya gopāṃ yo raśmibhirdiśa ābhāti sarvāḥ

हिन्दी अर्थ

के कारण ही सूर्यादि सव फंदाथं भपने-अपने कार्यो मे व्यापृत है, जड प्रकृति उभा संमुदरौ कतना वि भांसि सर्वरछोकान् वरियुभांज॑मानः ॥१०॥ „ (उच्न्) उदित होता हृभरा (रदमीन्) रदिमरयो को (श्रा तनुषे) - फलाता है, (विद्वा रूपाणि) सब रूपों को (पुष्यसि) तु. पुष्ट ४-४। ६, दोनो समुद्रो को (विभाति) तु प्रकाशित करता है, (आजमानः) प्रदीप्त

English

202 regions,

अध्याय १३

श्लोक 2.3

यत् प्राङ् प्र॒त्यङ् स्व॒धया॒ यासि॒ शीभं॒ नाना॑रूपे॒ अह॑नी॒ कर्षि॑ मा॒यया॑ ।तदा॑दित्य॒ महि॒ तत् ते॒ महि॒ श्रवो॒ यदेको॒ विश्वं॒ परि॒ भूम॒ जाय॑से

yat prāṅ pratyaṅ svadhayā yāsi śībhaṃ nānārūpe ahanī karṣi māyayā | tadāditya mahi tat te mahi śravo yadeko viśvaṃ pari bhūma jāyase

हिन्दी अर्थ

करते है, भोर करई उद्यमशील होते हृए मीं सफलता प्राप्त नहीं करते । यह . सफलता के भभिलाषी तो होते हीर, भ्रतःवेभी कपा दुष्टि - चाहते ह । भुरण्यति गरतिकर्मा (निषं० २।१४) ! षि यामरषि रभ॑स्पृथ्वहर्मिमांनो अक्तुभिः । . (वे) है सवं ! (अक्तुभिः) रतिया समेत रः) दिनों को. को देखता हमा, (खाम्) धुलोक मं, (रजः, पृथु) विस्तृत भअरन्तरिश्न लोक मे (वि एषि) विविष रूपौ तु्राताहै।

English

He hath looked round on all the worlds, the Hero, the son of Aditi, Celestial Eagle.

अध्याय १३

श्लोक 2.4

वि॒प॒श्चितं॑ त॒रणिं॒ भ्राज॑मानं॒ वह॑न्ति॒ यं ह॒रितः॑ स॒प्त ब॒ह्वीः ।स्रु॒ताद् यमत्त्रि॒र्दिव॑मुन्नि॒नाय॒ तं त्वा॑ पश्यन्ति परि॒यान्त॑मा॒जिम्

vipaścitaṃ taraṇiṃ bhrājamānaṃ vahanti yaṃ haritaḥ sapta bahvīḥ | srutād yamattrirdivamunnināya taṃ tvā paśyanti pariyāntamājim

हिन्दी अर्थ

इभो, तथा (शवसा) व (भधितिष्ठम्) उख का भविष्ठाता होती वणन है । “विपरिचत्” शब्द ंरमेदव॑र भं चंरिताथं -हौता ह, सूयं पिण्ड म . है । वेदानुसार परमेषवर-गुरुष, सूयं मे, भ्रषिष्ठातुरूप से. वणित ह (यजु . सवर-पूरष का मिला -जुना वर्णन भी होता । इसी प्रकार सूक्त के भावी

English

Thou goest to the hosts of Gods, thou comest hither to mankind, Hither, all light to behold. With that same eye of thine wherewith thou seest, brilliant

अध्याय १३

श्लोक 2.5

मा त्वा॑ दभन् परि॒यान्त॑मा॒जिं स्व॒स्ति दु॒र्गां अति॑ याहि॒ शीभ॑म्।दिवं॑ च सूर्य पृथि॒वीं च॑ दे॒वी म॑होरा॒त्रे वि॒मिमा॑नो॒ यदेषि॑

mā tvā dabhan pariyāntamājiṃ svasti durgāṃ ati yāhi śībham| divaṃ ca sūrya pṛthivīṃ ca devī mahorātre vimimāno yadeṣi

हिन्दी अर्थ

कां० १३। षु०२ भ्रथवेवेद-माष्य ४४३ . की भरोर सपरिवारश्यूयं गति कर रहा है, भ्रौर यह ४७८ तारा पृथिवी से २६ प्रकाश-वषों की दूरी षर है । एक “्रकाश-वषे==५,८८०१००० भ्रभिप्रायदहै कि प्रका की किरणे एक वषं मे जितना माग वलती है। हंसः 116 ण्ल०© 8० एश 2 (ब्राष्टे) धात्वथं की

English

When he, unwearied, fain to go, hath mounted his bays, he makes two colours, brightly shining. Rising with banners, conquering the regions, thou sendest light through all the floods, Āditya.

अध्याय १३

श्लोक 2.6

स्व॒स्ति ते॑ सूर्य च॒रसे॒ रथा॑य॒ येनो॒भावन्तौ॑ परि॒यासि॑ स॒द्यः ।यं ते॒ वह॑न्ति ह॒रितो॒ वहि॑ष्ठाः श॒तमश्वा॒ यदि॑ वा स॒प्त ब॒ह्वीः

svasti te sūrya carase rathāya yenobhāvantau pariyāsi sadyaḥ | yaṃ te vahanti harito vahiṣṭhāḥ śatamaśvā yadi vā sapta bahvīḥ

हिन्दी अर्थ

है “रात्रि च तावतीमेव” । ब्राहय दिन-रात रूपी सगे भ्रौ र प्रलय, परमेदवर- प्रसीम-श्राकाक्ल मे । वेद में दिन-रात को परमेदवर के दो पादवं कहे है” यथा - “प्रहोरान्रे पादर्वे" (यजु० ३१।२२) 1 परमेदवर का. वणेन जब पक्षी रूप में रोहितः कारो अभवत् रोहितो ओं भजापंतिः । (रोहितः) सर्वोपरि. भ्ारूढु (करालः भ्रभवत्) कालखूप हरा, सूयं भी दिन-रात के द्वारा काल की रचना करता है, परमेश्वर तोः कालकाभी काल है “ज्ञः कालकालो गुणी सवं विद्यः (देता ० उप० भऽ

English

Verily, Sūrya, thou art great: truly, Āditya, thou art great. Great is thy grandeur, Mighty One: thou, O Āditya, thou art great.

अध्याय १३

श्लोक 2.7

सु॒खं सूर्य॒ रथ॑मंशु॒मन्तं॑ स्यो॒नं सु॒वह्नि॒मधि॑ तिष्ठ वा॒जिन॑म्।यं ते॒ वह॑न्ति ह॒रितो॒ वहि॑ष्ठाः श॒तमश्वा॒ यदि॑ वा स॒प्त ब॒ह्वीः

sukhaṃ sūrya rathamaṃśumantaṃ syonaṃ suvahnimadhi tiṣṭha vājinam| yaṃ te vahanti harito vahiṣṭhāḥ śatamaśvā yadi vā sapta bahvīḥ

हिन्दी अर्थ

ण्ठ अयवेवेद-माष्य कां० १३। सु २ रक्षक है “ता रापः स प्रजापतिः (यजु° ३२।१) । सूये के उदयास्त ऋतु स्तम् (अथव १३।४८७)।४०) । सूयं अकाश देता है, प्रमेदवर ने भकाक्च॑मय द्यूलोक रचा है 1। रोहितो खोको अभवद् रोहितोऽत्य॑तपद् दिय । रोहित ने (दिवम्). चृलोक को (मरत्यतपत्) भ्रति तपाया । (रोहितः)

English

In heaven, O Bird, and in mid-air thou shinest: thou shinest on the earth and in the waters. Thou hast pervaded both the seas with splendour: a God art thou, O God, light-winner, mighty.

अध्याय १३

श्लोक 2.8

स॒प्त सूर्यो॑ ह॒रितो॑ यात॑वे॒ रथे॒ हिर॑ण्यत्वचसो बृह॒तीर॑युक्त ।अमो॑चि शु॒क्रो रज॑सः प॒रस्ता॑द् वि॒धूय॑ दे॒वस्तमो॒ दिव॒मारु॑हत्

sapta sūryo harito yātave rathe hiraṇyatvacaso bṛhatīrayukta | amoci śukro rajasaḥ parastād vidhūya devastamo divamāruhat

हिन्दी अर्थ

समुद्र में (सं चरत्) संचार करता है विचरतादहै। ; लोकः=सूयं से फट कर सौर लोक (परिवार) बना है, मानो सूयं ५५. होती है । परमेदवर तो भ्रमि, समुद्र मे निज व्याप्ति से संचार कर (दिवः अविपतिः रोहितः) चयलोक का भ्रधिपति भर्थात् स्वामी रोहित (सर्वाः विषः) सब विप्रो में (समचरत्) संबार करता है . श्यः तो निज रद्मियों ढारा दिशार्भो मे विचरता है,वह भी सीमित-

English

Soaring in mid-course hither from the distance, fleet and ins- pired, the Bird that flies above us,

अध्याय १३

श्लोक 2.9

उत् के॒तुना॑ बृह॒ता दे॒व आग॒न्नपा॑वृ॒क् तमो॒ऽभि ज्योति॑रश्रैत्।दि॒व्यः सु॑प॒र्णः स वी॒रो व्यऽख्य॒ददि॑तेः पु॒त्रो भुव॑नानि॒ विश्वा॑

ut ketunā bṛhatā deva āgannapāvṛk tamo'bhi jyotiraśrait| divyaḥ suparṇaḥ sa vīro vya'khyadaditeḥ putro bhuvanāni viśvā

हिन्दी अर्थ

को भ्रतिक्रान्त कर के भी विचरता है । दिवः, दिवम् सूयं चुलोक का एक कां १३। सु०२ भथवेवेद-भाष्य ४६१ उन के (भ्रमि) अभिमुख भर्थात् संमुख (विभाति) विशेषतया चमकता है । प्राणियों की चेतना के .कांरण चेतनावान् है, परमेदवर स्वतः चेतनावान् है ॥ वातमायाः = सूयं कौ रदिमयां जब वायु में श्राती है तब भरन्वेरियां भ्राती, मेघ बनते, वर्षा होती, इन्द्रधनुष दीखता, उषाएे. चमकती इस प्रकायं

English

With might advancing Vishnu manifested, he conquers all that moves with radiant banner: Brilliant, observant, mighty Lord, an Eagle illuming both the spheres and air between them. Day and the Night, clad in the robes of Sūrya, spread forth more widely all his hero powers.

अध्याय १३

श्लोक 2.10

उ॒द्यन् र॒श्मीना त॑नुषे॒ विश्वा॑ रु॒पाणि॑ पुष्यसि ।उ॒भा स॑मु॒द्रौ क्रतु॑ना॒ वि भा॑सि॒ सर्वां॑ल्लो॒कान् प॑रि॒भूर्भ्राज॑मानः

udyan raśmīnā tanuṣe viśvā rupāṇi puṣyasi | ubhā samudrau kratunā vi bhāsi sarvāṃllokān paribhūrbhrājamānaḥ

हिन्दी अर्थ

रहा है “योऽघावादित्ये पुरषः सोऽसावहम् । धोडेम् लं बरह्म" (यजु ° ४०। हित करते हए, (सुपक्षम्) मानो सुदृढ पलो वाले पक्षी के सदृश (श्रणेवे) , दिच्ाभोंको (भा माति) प्रकारित करता है । ४२४ : भ्रथर्ववेद-माष्य कां १३ । सु०र

English

There Agni made, by song and hymn, these mountains rise and stand erect. Then, having made the hills stand up, Rohita spake to Earth, and said:

अध्याय १३

श्लोक 2.11

पू॒र्वा॒प॒रं च॑रतो मा॒ययै॒तौ शिशू॒ क्रीड॑न्तौ॒ परि॑ यातोऽर्ण॒वम्।विश्वा॒न्यो भुव॑ना वि॒चष्टे॑ हैर॒ण्यैर॒न्यं ह॒रितो॑ वहन्ति

pūrvāparaṃ carato māyayaitau śiśū krīḍantau pari yāto'rṇavam| viśvānyo bhuvanā vicaṣṭe hairaṇyairanyaṃ harito vahanti

हिन्दी अर्थ

सम्बन्धी पदार्थो को प्रकाित करते हए.“ । तदादित्य महि तत् ते महि श्रवो यदेको विश्वं परि भूम जाय॑से ॥र॥ शीघ्र (यासि) तु जाता है, भौर (नौनारूपे) भिन्न-भिन्न रूपों वाले (ब्रहनी) महि) वह् महाकमं है,. (तत्) तथा वहू (ते) तेरा (महि) महा (यशः) यशस्वी कमं है (यत्) जो किं (एकः) भकेला (विदवं भुम परि) समग्र मुवन म (जायसे) तु प्रकट होताहै। नहीं होते, केवल भ्रादित्य ही भाकाशमे होता हुभ्रा दिन को प्रकट कर

English

In thee let every thing be born, what is and what is yet to be. This sacrifice, the first of all, the past, the present, had its birth.

अध्याय १३

श्लोक 2.12

दि॒वि त्वात्त्रि॑रधारय॒त् सूर्या॒ मासा॑य॒ कर्त॑वे ।स ए॑षि॒ सुधृ॑त॒स्तप॒न् विश्वा॑ भू॒ताव॒चाक॑शत्

divi tvāttriradhārayat sūryā māsāya kartave | sa eṣi sudhṛtastapan viśvā bhūtāvacākaśat

हिन्दी अर्थ

तारागण नाना ज्योतियां प्रकट होती हैँ । जिस (भ्राजमानम्) चमकते हए, (विपदिचतम्) मेधावी परमेश्वर दवारा (तरणिम्) रात्रि के भ्रन्धकार नदसे तैराने वाले सू्य॑॑को को, (परयन्ति) देखते है । भाजौ संग्रामनाम (निषं० २।१७) । काण १३। चु०्रे भवर्ववेद-माष्य- ४२५

English

From that arose this universe, yea, all this world of brightness, brought by Rohita the heavenly Sage.

अध्याय १३

श्लोक 2.13

उ॒भावन्तौ॒ सम॑र्षसि व॒त्सः सं॑मा॒तरा॑विव ।न॒न्वे॒३तदि॒तः पु॒रा ब्रह्म॑ दे॒वा अ॒मी वि॑दुः

ubhāvantau samarṣasi vatsaḥ saṃmātarāviva | nanve3taditaḥ purā brahma devā amī viduḥ

हिन्दी अर्थ

चयने) । चिनी हुई वस्तु स्वयं गति नहीं करतो, वह निश्चल होती है । (सूर्यं) श्रपने एक पेर को उखाडइता नही, जमाए रखता है । तरणिम् = वह् नौकारूप है जो कि प्रत्यक्षत चू-समुद्रमे तरतो हई, पुवं से परिचम तक जाती दीखती है। इसे ले जाने वाले सप्तरंगी महाबली सात भ्रष्व है, सूयं की शुत्र रिम, सात रगो वाली ७ किरणों के परस्पर मिश्वण द्वारा कि बह मानो संग्राम मे जाता है-भ्रन्धकार के साथः युद्ध करने के लिये। भध्यात्मखूप हृभाः है । भत्विः (१३।२।१२; ३६; तथा १३।३।१५) । दिं च सूये पृथिवी चं देवीमंशरात्रे विमिमानो यदेषिं ॥५॥

English

If thou should kick a cow, or by indecent act offend the Sun, Thy root I sever; nevermore mayst thou cast shadow on the ground.

अध्याय १३

श्लोक 2.14

यत् स॑मु॒द्रमनु॑ श्रि॒तं तत् सि॑षासति॒ सूर्यः॑ ।अध्वा॑स्य॒ वित॑तो म॒हान् पूर्व॒श्चाप॑रश्च॒ यः

yat samudramanu śritaṃ tat siṣāsati sūryaḥ | adhvāsya vitato mahān pūrvaścāparaśca yaḥ

हिन्दी अर्थ

१. वेदान्त (१।२)९) । परमेश्वर को “भ्न्नाद” भी कहा है (भयव ४२६ भथव्रवेद-भाष्य को० १३ सूऽ२ मानः) दूलोक को, प्रौर दिव्य पृथिवी लोक को (एषि) तु भ्रातादहै, दिन भ्रौर रात को मापता हुश्रा । स्वस्ति तं सूर्य चरसे रथाय येनोभावन्तौ परिथापि सथः ।

English

Thou who, between the fire and me, passest across the line of shade. Thy root I sever: nevermore mayst thou cast shadow on the ground.

अध्याय १३

श्लोक 2.15

तं समा॑प्नोति जू॒तिभि॒स्ततो॒ नाप॑ चिकित्सति ।तेना॒मृत॑स्य भ॒क्षं दे॒वानां॒ नाव॑ रुन्धते

taṃ samāpnoti jūtibhistato nāpa cikitsati | tenāmṛtasya bhakṣaṃ devānāṃ nāva rundhate

हिन्दी अर्थ

(सूयं) है सूयं ! (चरसे) चलने के निमित्त (ते रथाय) तेरे रथ एक.दिन मेँ जाता है । (ते) तेरे (यम्) जिस रथ को (हरितः). जलाहरण करने वाले, (वहिष्ठाः) तेज ले जाने वाले (चतम् भरदवाः) सेकड़ों रदिम- किरण रूपी घोडियां (वहन्ति) .डोए लिये जाती है । । 1तं2० (नील के पौधा से निकले रङ्गं वाली), ४1011 (गनी) । इन किरणे मिश्चित होकर अश्वरूपी शुभ्र (सुफंद ) रदिम की जननियां होती है ।

English

Whoe’er he be who, Sūrya, God! comes between thee and me to-day, On him we wipe away ill-dream, and troubles, and impurity.

अध्याय १३

श्लोक 2.16

उदु॒ त्यं जा॒तवे॑दसं दे॒वं व॑हन्ति के॒तवः॑ ।दृ॒शे विश्वा॑य॒ सूर्य॑म्

udu tyaṃ jātavedasaṃ devaṃ vahanti ketavaḥ | dṛśe viśvāya sūryam

हिन्दी अर्थ

१. “सूर्ते रथाय" म सूं भौर सूर्यं के रथ का वर्णेन हृभ्राहै। इससे पकती । श्रयवा “तदेजति तन्नेजति" (यजु० ४०।४) दारा समाधान जानना चाहिए । कां०.१२।सु०२ भयवेवेद-माष्य २७ दायक, (सुवह्भिम्) उत्तमता से वहन करने वाले, (वाजिनम्) गतिवाले

English

Let us not, Indra, leave the path, the Soma-presser’s sacrifice. Let not malignities dwell with us.

अध्याय १३

श्लोक 2.17

अप॒ त्ये ता॒यवो॑ यथा॒ नक्ष॑त्रा यन्त्य॒क्तुभिः॑ ।सूरा॑य वि॒श्वच॑क्षसे

apa tye tāyavo yathā nakṣatrā yantyaktubhiḥ | sūrāya viśvacakṣase

हिन्दी अर्थ

देखो मन्त्र ६ कां उत्तराधं । । . अमोचि शुक्रो रजः परस्ताद् विधूय देवस्तमो दिव भासदं ॥८॥ , (सूय) सूयं ने (यातवे) चलने के लिये, . (रथे) रथ म, (हिरण्यश त्वचसः) सुवणंसमान चमकीलो, (बृहतीः) भौर महाबलो, (सप्त : हरितः) सात किरणों को (भ्रयुक्ष) जोता है । (रजसः) भन्तरिक्ष-लोक के

English

May we obtain, completely wrought, the thread spun out tc reach the Gods, That perfecteth our sacrifice.

अध्याय १३

श्लोक 2.18

अदृ॑श्रन्नस्य के॒तवो॒ वि र॒श्मयो॒ जनाँ अनु॑ ।भ्राज॑न्तो अ॒ग्नयो॑ यथा

adṛśrannasya ketavo vi raśmayo janā~ anu | bhrājanto agnayo yathā

हिन्दी अर्थ

से मक्त हो गया ह, (देवः) चमकीला सूयं (तमः विधूय). तम को हटा कर उत् केतुना बृहता देव आगभर्पाृकूतमोऽमि ज्योपिरभेत् । (बृहता केतुना). बडे प्रकाश के साथ (देवः) सूरयेदेव (उद् भ्रागन्) उदित हृशा है, (तमः भ्रपावृक्) उस ने भन्वकार को हटाया है, (ज्योतिः वतमानः वीर या प्र रक दिति के पृत्र ने, (विश्वा भुवनानि) संब भुवनो

English

The glorification of the Sun as Āditya, Sūrya and Rohita Radiant, refulgent in the sky are reared the banners of his light,

अध्याय १३

श्लोक 2.19

त॒रणि॑र्वि॒श्वद॑र्शतो ज्योति॒ष्कृद॑सि सूर्य ।विश्व॒मा भा॑सि रोचन

taraṇirviśvadarśato jyotiṣkṛdasi sūrya | viśvamā bhāsi rocana

हिन्दी अर्थ

को (व्यख्यत्) प्रकाित किया है । . । वाले पक्षी के समान ्राक्राश मे उडता हरा । भदितिः == “भ्रदितिः प्रदीना देवमाता (निरुक्त ४।४।२३), भ्रकृति या पारमेश्वरी भाता । वीरः = वीर . व्यापृत हो जाते ह, . भतः.सुयं मानो उन का प्ररक है । केतुना = निषं० के अनुसार “केतुः परजञानाम ३१९)। इख अथं मे .“परमेद्वर.की प्रज्ञा केदार ४२८ अथर्ववेद -माष्य कां १३। सु०२

English

Āditya’s, who beholdeth man, mighty in act and bountiful. Let us laud him, the whole world’s Herdsman, Sūrya, who with his rays illumines all the

अध्याय १३

श्लोक 2.20

प्र॒त्यङ् दे॒वानां॒ विशः॑ प्र॒त्यङ्ङुदे॑षि॒ मानु॑षीः ।प्र॒त्यङ् विश्वं॒ स्वर्दृ॒शे

pratyaṅ devānāṃ viśaḥ pratyaṅṅudeṣi mānuṣīḥ | pratyaṅ viśvaṃ svardṛśe

हिन्दी अर्थ

अ (न लोकान्) सब लोकोंको प्रक द्रारा (परिधरुः) षेर रात्रि मे अन्धकार के कारण वस्तुभों के रूम प्रकट नहीं होते, सूयं के उदित होते प्रकट हो जाते है, यहे रूपों का पोषण है । कतुना ; क्रतुः कर्म भरभि" (ऋ० १०।९८।५), भर्थात् “उसने उत्तर समद्र; (मेष) से अधर .. है । निखक्त मे इस पर लिखा है कि “अरन्तरिसोबंद्धं मेषम्“ (१०।३।३ २) । सूये श्रौर चांद (मायया) परमेद्वर की प्रज्ञा हारा दूसरे के भ्रागे पीछे (चरतः) विचरते है, (शिशु) दोनों ५८

English

Mark of the quarters, brightening them with lustre, swift, mighty-pinioned, flying in the ocean.

अध्याय १३

श्लोक 2.21

येना॑ पावक॒ चक्ष॑सा भुर॒ण्यन्तं॒ जनाँ॒ अनु॑ ।त्वं व॑रुण॒ पश्य॑सि

yenā pāvaka cakṣasā bhuraṇyantaṃ janā~ anu | tvaṃ varuṇa paśyasi

हिन्दी अर्थ

चारो भोर जाते ह । (भरन्यः) एक अर्थात् सूयं (विद्वा मुवना) सव भुवनो उरुशः चमकीले नक्ष्वो दवारा निविष्ट मागे से. (हरिवः) सूर्यं की रषिियां रूपी भदव, (वहन्ति) ढोते है मार्यं पर चलते । कार १३। युर र भथवेवेद-माष्य ¢ , २९ मन््रमे पूणिमाके चांद भौरसूरयेखूपोदो शिणशुर्भोकीक्रीडाका वणेन हृभ्रा है । पूणिमा से भरतिरिषत्त भवस्थां मँ वांद पृष्टधामयो (ऋ०.

English

From west to east thou speedest freely, making by magic day and night of diverse colours. This is Āditya, thy transcendent glory, that thou alone art born through all creation.

अध्याय १३

श्लोक 2.22

वि द्यामे॑षि॒ रज॑स्पृ॒थ्वह॒र्मिमा॑नो अ॒क्तुभिः॑ ।पश्य॒न् जन्मा॑नि सूर्य

vi dyāmeṣi rajaspṛthvaharmimāno aktubhiḥ | paśyan janmāni sūrya

हिन्दी अर्थ

एक-दूसरे के भागे-पीछे एक दूसरे को पकड़ने की मानो क्रीड़ा कर रहे ह । इस क्रीड़ा में परमेश्वरीय माता की प्रक्षा सहायिका. है । मायया; माया (सूयं) है सुँ (मासाय कत्तं वे) सौर श्रौर चान्व मास के निर्भाण के - लिये, (अत्रिः) परमेश्वर ने (त्वा) तुभे (दिवि) बचुलोक भ (भ्रा नीचे की भोर प्रकाशित करता हृश्रा भाता है । 1

English

Victorious, inspired, and brightly shining, whom seven strong tawny-coloured coursers carry, Whom Atri lifted from the flood to heaven, thus men behold thee as thy course thou runnest.

अध्याय १३

श्लोक 2.23

स॒प्त त्वा॑ ह॒रितो॒ रथे॒ वह॑न्ति देव सूर्य ।शो॒चिष्के॑शं विचक्ष॒णम्

sapta tvā harito rathe vahanti deva sūrya | śociṣkeśaṃ vicakṣaṇam

हिन्दी अर्थ

-सौरमास तथा चान्द्मास । सौरमास की रचना तो १२ राणियों ओ सुय के पड़ने पर पूणिमा, भष्टमीः तथा -प्रमावास्या लक्षित होती है, भौर इषवे हेतु है । वेद मे दोनो प्रकार. के मास भ्िप्रेत है । इसी लिये इन के दिनो भ समम्य के लिये ३० दिनो का, मलमास तथां . भरविमास्च (णानच्थान - ण्य) का वर्णन वेदों मे दुभा है, (मर्व १३१८). + ,. जन्ये तदितः पुरा ब्रह्म॑ देवा भी विदुः ।१२॥

English

Let them not snare thee speeding on thy journey: pass safely, swiftly places hard to traverse, While measuring out the day and night thou movest—O Sūrya, even Heaven and Earth the

अध्याय १३

श्लोक 2.24

अयु॑क्त स॒प्त शु॒न्ध्युवः॒ सूरो॒ रथ॑स्य न॒प्त्यः ।ताभि॑र्याति॒ स्वयु॑क्तिभिः

ayukta sapta śundhyuvaḥ sūro rathasya naptyaḥ | tābhiryāti svayuktibhiḥ

हिन्दी अर्थ

मे पितरौ की तरह मातरौ प्रयोग हृभ्रा है । मे भ्राधित है (तत्) उसे (सूर्यः) सुं (सिषासति) देना चाहता है -या नु है । (भरस्य) इस सूय का (भष्वा) मागे (महान्) महान् है, (यः) जो (पूरवः च रपरः च विततः) पूवं भौर परिचिम मे फला हमरा है । समुद्रम् =भरन्तरिक्ष "या मेवमेँ जल का वासहै जिसे कि सूयं देता है । सूर्यं निज तापः दवारा पार्थिव जलं का वाष्पीकेरण करके, जल को .. होता है । पुरा छिद 0०8; 19 ध5 08६ 1805 (भ्रष्टे) भ्रषवा सूयं सूयं को विदान् श्रह्म जानते रहे है -यह प्रथं समना बाहिये । यथा ““योऽतावा-

English

Goddess. Hail to thy rapid car whereon, O Sūrya, thou circlest in a moment both the limits,

अध्याय १३

श्लोक 2.25

रोहि॑तो॒ दिव॒मारु॑ह॒त् तप॑सा तप॒स्वी।स योनि॒मैति॒ स उ॑ जायते॒ पुनः॒ स दे॒वाना॒मधि॑पतिर्बभूव

rohito divamāruhat tapasā tapasvī| sa yonimaiti sa u jāyate punaḥ sa devānāmadhipatirbabhūva

हिन्दी अर्थ

हभ है । प्रतः वतमान मन्व मे भी सूं को गौणरूप मे ब्रह्म कहा है -तथा. बृहदा अन्तरिक्ष म पटुवाता भौर वर्षा ऋतु भें हमे पुनः दे देता है ।. समुद्र के लिप तेनास्य गकं देवानां नावं रुन्धते ॥१५॥ , (तम्) उख माग को शूं (जूतिभिः) वेगो से (समाप्नोति) समाप्त करता है, (ततः) उस मागं से वह (भप चिकित्ति, न्) टलता . नही या उस मागं को वह् विस्मृत नहीं करता । (तेन) उस ह्वारा (देवानाम्) देवों

English

Whirled by thy bay steeds, best of all at drawing, thy hundred horses or seven goodly coursers!

अध्याय १३

श्लोक 2.26

यो वि॒श्वच॑र्षणिरु॒त वि॒श्वतो॑मुखो॒ यो वि॒श्वत॑स्पाणिरु॒त वि॒श्वत॑स्पृथः ।सं बा॒हुभ्यां॒ भर॑ति॒ सं पत॑त्रै॒र्द्यावा॑पृथि॒वी ज॒नय॑न् दे॒व एकः॑

yo viśvacarṣaṇiruta viśvatomukho yo viśvataspāṇiruta viśvataspṛthaḥ | saṃ bāhubhyāṃ bharati saṃ patatrairdyāvāpṛthivī janayan deva ekaḥ

हिन्दी अर्थ

म तसिल् । जूतिभिः वेगो से । बहुवचन द्वारा यह सूचित किया है कि सूरे प्रतिदिन वेग से श्रपने मागं फो इसं लिये समाप्त करता है ताकि वर्षा ऋतु ्रादि देवों को भ्रमृत भर्थात् जल का पान करा सके ।. यह जल देवरो का उदुत्य जातवदस देवं वहन्ति केतव । . (देवम्) चोतभान् (यम्) सूयं कोः (विरवाय दु) -खब.को "दशानि के लिये, (उद् उ वहन्ति). ऊपर भाकाश्च या द्युलोकं मेँ चला रही ह । . सुराय विश्वचक्षसे .॥१७॥ . . . .

English

Mount thy strong car, O Sūrya, lightly rolling, drawn by good steeds, propitious, brightly gleaming,

अध्याय १३

श्लोक 2.27

एक॑पा॒द् द्विप॑दो॒ भूयो॒ वि च॑क्रमे॒ द्विपा॒त् त्रिपा॑दम॒भ्येऽति प॒श्चात्।द्विपा॑द्ध॒ षट्प॑दो॒ भूयो॒ वि च॑क्रमे॒ त एक॑पदस्त॒न्वं॑१ समा॑सते

ekapād dvipado bhūyo vi cakrame dvipāt tripādamabhye'ti paścāt| dvipāddha ṣaṭpado bhūyo vi cakrame ta ekapadastanvaṃ1 samāsate

हिन्दी अर्थ

४६२ ४ भ्रथदनेद-माघ्य कां० १३। सु०२ अदुंभजनस्य केतवो तरि रश्मयो जनाँ अवं । (भरस्य) इख सूयं की (केतवः) भ्ज्ञापक (रदमयः) रदिमयां, (जनान् भनु) जनों मे, (वि भदश्न्) विशेषतया दृष्टिं गोचर हई हैः (यथा) जं

English

Whirled by thy bays, most excellent at drawing, thy hundred horses or seven goodly coursers. Sūrya hath harnessed to his car to draw him seven stately bay steeds gay with wolden

अध्याय १३

श्लोक 2.28

अत॑न्द्रो या॒स्यन् ह॒रितो॒ यदास्था॒द् द्वे रू॒पे कृ॑णुते॒ रोच॑मानः ।के॒तु॒मानु॒द्यन्त्सह॑मानो॒ रजां॑सि॒ विश्वा॑ आदित्य प्र॒वतो॒ वि भा॑सि

atandro yāsyan harito yadāsthād dve rūpe kṛṇute rocamānaḥ | ketumānudyantsahamāno rajāṃsi viśvā āditya pravato vi bhāsi

हिन्दी अर्थ

्ातःकाल होते सूयं की ररिमा दृष्टि गोचर होती है, चसे कि. आतःकाल भें पाकशालां भें भ्रग्नियां दृष्टि गोचर होती है । सूयक रदिभियां पदार्थो का ज्ञान कराती है, भ्रतः ये केतवः है, भज्ञापक है । (सूये) है सूर्यं !' (तरणिः) रत्नि के भ्रन्धकारः सै तैराने वाला, वाला (भ्रसि) तु है (रोचनं) है इचिकर तथा -सुन्वर (विदवम् . आभासि) सब को तु चमकाता है । भौर मानुष. प्रजा के (्रत्यड,) संमुख (उदेषि) तु उदित. होता है।

English

housings. The Bright One started from the distant region: dispelling gloom the God hath climbed the

अध्याय १३

श्लोक 2.29

बण्म॒हां अ॑सि सूर्य॒ बडा॑दित्य म॒हां अ॑सि ।म॒हांस्ते॑ मह॒तो म॑हि॒मा त्वमा॑दित्य म॒हां अ॑सि

baṇmahāṃ asi sūrya baḍāditya mahāṃ asi | mahāṃste mahato mahimā tvamāditya mahāṃ asi

हिन्दी अर्थ

‰ शूं को त्रवयोनपु्च होते जान कर, सभि ऊ एप होते जान कर, सभि के साय बोर प्रौर नन कां. १३।-सु४ २ अ्थववेद-आाष्य ४३३ (पावक वरण) है पवित्र करने वाले शेष्ठ सूये! (येना चक्षसा) जिस को (त्वं पदयसि) तु देखता है । उसं कृपा दृष्टि से भुकं भी देख ।

English

heavens. With lofty banner hath the God gone upward, and introduced the light, expelling darkness.

अध्याय १३

श्लोक 2.30

रोच॑से दि॒वि रोच॑से अ॒न्तरि॑क्षे॒ पत॑ङ्ग पृथि॒व्यां रोच॑से॒ रोच॑से अ॒प्स्व॑१न्तः ।उ॒भा स॑मु॒द्रौ रुच्या॒ व्याऽपिथ दे॒वो दे॑वासि महि॒षः स्व॒र्जित्

rocase divi rocase antarikṣe pataṅga pṛthivyāṃ rocase rocase apsva1ntaḥ | ubhā samudrau rucyā vyā'pitha devo devāsi mahiṣaḥ svarjit

हिन्दी अर्थ

ऋषु-तु मे कर्म-मेद से सुं विविष सूपो वाला है । पृथु = प्रथ विस्तारे । मिमानः सूर दिन के समय मानो दिनों को मापत्रा ह, नीर . -इस लिये धक्तुभिः ये बहुवचन है । “रहः” मे एकवचन भरहर्जाति कृत है । भदयनू =वेदों भे सूर्ये कों “न्रशुः"" जका है । चक्षुः का कमं है देखना । श्रतः . १.. "रासि वे लोकाः” (निरुक्त ४।३।१९), स्नः पदर (१९) ।

English

Rising, thou spreadest out thy rays, thou nourishest all shapes and forms. Thou with thy power illumest both the oceans, encompassing all spheres with thy refulgence.

अध्याय १३

श्लोक 2.31

अ॒र्वाङ् प॒रस्ता॒त् प्रय॑तो व्य॒ध्व आ॒शुर्वि॑प॒श्चित् प॒तय॑न् पत॒ङ्गः ।विष्णु॒र्विचि॑त्तः॒ शव॑साधि॒तिष्ठ॒न् प्र के॒तुना॑ सहते॒ विश्व॒मेज॑त्

arvāṅ parastāt prayato vyadhva āśurvipaścit patayan pataṅgaḥ | viṣṇurvicittaḥ śavasādhitiṣṭhan pra ketunā sahate viśvamejat

हिन्दी अर्थ

सप्त लौ. हरित रषे वहन्ति हैव ययं । शोचिष्केशं विचक्षणम् ॥२ २॥ । (देव व) ह चान सूयं! (स हैरतः) होत करर -(शौचि- तुके रथे वहन्ति) रथ. वहन करती है । : पिण्ड में भेद दर्शाया है । यह भेद वैकल्िक है, कविता रूप मेँ है 1 केशम् जो' किं ईन्द्र अनुष में दृ ष्टगोचर होती है ।

English

Moving by magic power to east and westward, these two young creatures, sporting, circle ocean.

अध्याय १३

श्लोक 2.32

चि॒त्रश्चि॑कि॒त्वान् म॑हि॒षः सु॑प॒र्ण आ॑रो॒चय॒न् रोद॑सी अ॒न्तरि॑क्षम्।अ॒हो॒रा॒त्रे परि॒ सूर्यं॒ वसा॑ने॒ प्रास्य॒ विश्वा॑ तिरतो वी॒र्याऽणि

citraścikitvān mahiṣaḥ suparṇa ārocayan rodasī antarikṣam| ahorātre pari sūryaṃ vasāne prāsya viśvā tirato vīryā'ṇi

हिन्दी अर्थ

मौर बुद्धि-ये सात, शरीर ' रथं मँ, धवित्र या -काशंमर्यीं , किरणों वाले, यादि. को परमेश्वर स्वयं शरी रं-रथ भे जोतता है, वे सात पवित्र हई, शरीर--रथ का पत्तन नहीं होने देती । । स योनिभेति म्र उं नायतेः पुनः श्च देवानामिपतिर्वभूषं ॥२१॥ (तपसा) उपासक-के-तप के द्वारा, (तपस्वी) जान. ङ्प, तप. वाला.

English

One of the pair beholds all living creatures: with wheels of gold the bay steeds bear the other. Atri established thee in heaven. O Surya, to create the month.

अध्याय १३

श्लोक 2.33

ति॒ग्मो वि॒भ्राज॑न् त॒न्वं॑१ शिशा॑नोऽरंग॒मासः॑ प्र॒वतो॒ ररा॑णः ।ज्योति॑ष्मान् प॒क्षी म॑हि॒षो व॑यो॒धा विश्वा॒ आस्था॑त् प्र॒दिशः॒ कल्प॑मानः

tigmo vibhrājan tanvaṃ1 śiśāno'raṃgamāsaḥ pravato rarāṇaḥ | jyotiṣmān pakṣī mahiṣo vayodhā viśvā āsthāt pradiśaḥ kalpamānaḥ

हिन्दी अर्थ

सहला रचक्र रूपी धर मे (एति) भ्राता है, (सः उ) वह् निदचय से (पुनः) है । (तपस्वी = “यस्य ज्ञानमयं तपः” ) (मुण्डक उप० १।६) ! योनि गृह नाम (निषं० ३।४) । देवानाम् = दिब्रयकोटि के योगिजन, तथा चोतमान सहार चक्र में ्रकट हो जाता है । सहस्परचक्त प्ररमेदवर का मानो घर अन जाता है । मोगी जब-जब समरधिस्थ हो कर प्ररमेशवर मे ष्यान लगाता है" तव-तब उसने परमेदवर का प्रत्यक्ष हो जाता है । इसे “पुनः जायते” दारा ्रकट किया है + ठे योगी को क्रियाभों मौर कर्मों का भप्रिपति-परमेदवर तपा हृभ्रा; योनिम् =बुलोक तथा जगद्चोतरि परमेदवर ्रथवा प्रकृति; पुनः जायते बार-बार उदित होता है, या प्रतिकल्प में प्रदा होता है सं बाहुभ्यां भरति सं पतत्ैावाएयिवी जनर्यन् देव एकः ।२६॥ (यः) जो परमेदवर (विर्वचंषंणिः) विदव का दरष्टा, (विर्वतो मुखः) स भ्रोर मूखःवाला,. (विदवतस्पाणि) सब भ्रोर हाथो 8 व्यवहार वाला, (बिदवतस्यृथः) सव श्रोर विस्तार वाला है, -वह (एकः देवः) एक देवं (पतत्रैः) परमाणु दवारा (द्यावा पृथिवी) द्युलोक भ्रौर पृथिवी लोक को

English

So on thou goest, firmly held, heating, beholding all that is. As the Calf both his parents so thou joinest both the distant bounds,

अध्याय १३

श्लोक 2.34

चि॒त्रं दे॒वानां॑ के॒तुरनी॑कं॒ ज्योति॑ष्मान् प्र॒दिशः॒ सूर्य॑ उ॒द्यन्।दि॒वा॒क॒रोऽति॑ द्यु॒म्नैस्तमां॑सि॒ विश्वा॑तारीद् दुरि॒तानि॑ शु॒क्रः

citraṃ devānāṃ keturanīkaṃ jyotiṣmān pradiśaḥ sūrya udyan| divākaro'ti dyumnaistamāṃsi viśvātārīd duritāni śukraḥ

हिन्दी अर्थ

दुलोक .तथा पृथिवी लोक का.सम्यक् भरण-पोषण करता है । के मूखसरूप होकर, उसकी महिमा का वर्णनं करती द। =प्रथ द्ूलोक भ्रौर पुथिवी को भ्रनावृत करना । लोक (त्रिपाद्मभि) तीन लोकों को भरभिमुख कर (परचात्) उन के . पीषे-

English

Surely the Gods up yonder knew this sacred mystery long ago. Sūrya is eager to obtain all wealth that lies along the sea,

अध्याय १३

श्लोक 2.35

चि॒त्रं दे॒वाना॒मुद॑गा॒दनी॑कं॒ चक्षु॑र्मि॒त्रस्य॒ वरु॑णस्या॒ग्नेः ।आप्रा॒द् द्यावा॑पृथि॒वी अ॒न्तरि॑क्षं॒ सूर्य॑ आ॒त्मा जग॑तस्त॒स्थुष॑श्च

citraṃ devānāmudagādanīkaṃ cakṣurmitrasya varuṇasyāgneḥ | āprād dyāvāpṛthivī antarikṣaṃ sūrya ātmā jagatastasthuṣaśca

हिन्दी अर्थ

व्यापी है । (ते) वे सब (एक पदः) एक पद परमेदवर के (तन्वम्) स्वरूप या विस्तार मे (समासते) समा जाते है, या सम्यक्तया स्थित है । पुथिवी प्र है, इसलिये अलोक भौर पृथिवी लोक भिल कर ६ऋतुप्रों पुथिवी कौ वणेन है । मन्त्र २७ में परमेरवर भौर कयं जगत् की सपक्ष ¦ व्याप्तिका वर्णेन हूभ्रा है ।

English

Great is the course spread out for him, his eastward and his westward path. He finishes his race with speed and never turns his thought aside,

अध्याय १३

श्लोक 2.36

उ॒च्चा पत॑न्तमरु॒णं सु॑प॒र्णं मध्ये॑ दि॒वस्त॒रणिं॒ भ्राज॑मानम्।पश्या॑म त्वा सवि॒तारं॒ यमा॒हुरज॑स्रं॒ ज्योति॒र्यदवि॑न्द॒दत्त्रिः॑

uccā patantamaruṇaṃ suparṇaṃ madhye divastaraṇiṃ bhrājamānam| paśyāma tvā savitāraṃ yamāhurajasraṃ jyotiryadavindadattriḥ

हिन्दी अर्थ

केतुमानुबन्त्हंमानो रजांसि विश्वा आदित्य भवतो पि मासि ॥२.८॥ का० १३। सु०२ भथववेद-माष्य ४३७. . दिन भौर रात्रि का (कृणुते) निर्माण करता है । - (भादित्य) है रादित्य . रजांसि ) सब लोकों को (सहमानः) पराभूत करता हृभा, (प्रवतः) गहरी खायो को (वि भासि) तू विशेषतया प्रकाशित करता है ।

English

Thereby he keeps not from the Gods enjoyment of the Drink of Life. His heralds bear him up aloft, the God who knoweth all that live,

अध्याय १३

श्लोक 2.37

दि॒वस्पृ॒ष्ठे धाव॑मानं सुप॒र्णमदि॑त्याः पु॒त्रं ना॒थका॑म॒ उप॑ यामि भी॒तः ।स नः॑ सूर्य॒ प्र ति॑र दी॒र्घमायु॒र्मा रि॑षाम सुम॒तौ ते॑ स्याम

divaspṛṣṭhe dhāvamānaṃ suparṇamadityāḥ putraṃ nāthakāma upa yāmi bhītaḥ | sa naḥ sūrya pra tira dīrghamāyurmā riṣāma sumatau te syāma

हिन्दी अर्थ

हरितः =सू्यै की रदिमयाँ पीत वणँ की कहौ जाती ह । दरे रूपे करता है । सहमानः सूय उदित होता हृभ्रा द्युलोक के सभी लोक-लोका- कर देता है । प्रवतः खादयां, दरं भौर घाटियां । यथा “यस्यासुद्वत (भसि) तु ै। (ते महतः) तुक महान् की (महिमा महान्) महिमा इन दो पदों हारा प्रकृत परमेदवर भौर सूयेपिण्ड-- इन दोनों का संयुक्त

English

Sūrya, that all may look on him. The Constellations pass away, like thieves, departing in the night.

अध्याय १३

श्लोक 2.38

स॒ह॒स्रा॒ह्ण्यं विय॑तावस्य प॒क्षौ हरे॑र्हं॒सस्य॒ पत॑तः स्व॒र्गम्।स दे॒वान्त्सर्वा॒नुर॑स्युप॒दद्य॑ सं॒पश्य॑न् याति॒ भुव॑नानि॒ विश्वा॑

sahasrāhṇyaṃ viyatāvasya pakṣau harerhaṃsasya patataḥ svargam| sa devāntsarvānurasyupadadya saṃpaśyan yāti bhuvanāni viśvā

हिन्दी अर्थ

के मी दहै (भ्रथर्व० १३।४(१)) ५; तथा (यजु° ३२१) ।: (पतङ्ग) है पक्षी के सदृश उदड्ने वाले ! (दिवि) द्युलोके ४३८. भथरवेवेद-भाष्य कार १३।य०२. खमु से रीषतः द्राशा (वयापिगर) हु वयप हो रहा है, ।. (दव).

English

Before the all-beholding Sun. His herald rays are seen afar refulgent o’er the world of men, Like flames of fire that burn and blaze.

अध्याय १३

श्लोक 2.39

रोहि॑तः का॒लो अ॑भव॒द् रोहि॒तोऽग्रे॑ प्र॒जाप॑तिः ।रोहि॑तो य॒ज्ञानां॒ मुखं॒ रोहि॑तः॒ स्व॑१राभ॑रत्

rohitaḥ kālo abhavad rohito'gre prajāpatiḥ | rohito yajñānāṃ mukhaṃ rohitaḥ sva1rābharat

हिन्दी अर्थ

भ्राता तथा उड कर मानो चलां जाता । समाधिं मे परमेर्वर हृदय मे मानो “द्वा सुपणो सयुजा सखाया” (परयर्वे ° ६।९।२२) मे परमेश्वर को सुपर्णा विपर्यासः (केशी १४.की द १२।३।२६), भ्रथवां स्वः= चुलोक तथा सुखं विशेषं । मन्तरं का सवार॑स्यं परमात्म-विधयकं है । .. मे वतमान उपासकं “मे, पैतङ्गैः). पक्षी के सदृ. (परस्तीत्) परेसे (भर्वाड ) ठेषायेक की भोर भ्रचुः पतथन) दीध्र भानो उड करं भरावा

English

Swift and all-beautiful art thou, O Sūrya, maker of the light, Illuming all the radiant realm.

अध्याय १३

श्लोक 2.40

रोहि॑तो लो॒को अ॑भव॒द् रोहि॒तोऽत्य॑तप॒द् दिव॑म्।रोहि॑तो र॒श्मिभि॒र्भूमिं॑ समु॒द्रमनु॒ सं च॑रत्

rohito loko abhavad rohito'tyatapad divam| rohito raśmibhirbhūmiṃ samudramanu saṃ carat

हिन्दी अर्थ

. भर्त्र भें .भी जानना चाहिए । मनर भें परमेश्वर परक श्रयं ; किया है सूयं भँ“्यध्ये" का मरं है “मागं हुत प्राकाचच म॑” (सुपंणः). सुपालक -सूयं पिण्ड , या सूं पिण्ड का. भ्ष्ठिता-गुरुष, (रोदसी, भ्रकाशित करता हृभा वतंमान है । (सूर परि वसाने) सूयं के भराश्चय पर मे) । चेतना .घमं है. चेतन का । अतः. इस द्वारा सूयं पिण्ड के अधिष्ठाता -को सूचित किया जातय है ।. कित रोगापनयते रथं म सूयं को भी निर्दिष्ट

English

Varuna. The active one among mankind,

अध्याय १३

श्लोक 2.41

सर्वा॒ दिशः॒ सम॑चर॒द् रोहि॒तोऽधि॑पतिर्दि॒वः ।दिवं॑ समु॒द्रमाद् भूमिं॒ सर्वं॑ भू॒तं वि र॑क्षति

sarvā diśaḥ samacarad rohito'dhipatirdivaḥ | divaṃ samudramād bhūmiṃ sarvaṃ bhūtaṃ vi rakṣati

हिन्दी अर्थ

सूयं के साथ है-भतः सन्त मे सूयपिण्ड का भी निदंश हूभ्रा है 1 1 जसे होता है,इसी प्रकारं इस सुक्त मे भरधिष्ठेय-सूयेपिषण्ड के गुणधरमों का भारोप है । “ब्रहोरा्रे सयं परिवसाने" का शाब्दिक श्रं है “सूर्यं रूपी भोढनीं को दरी तक पहुचे हृभो को भ्रदीप्त. करने वाला, (भवतः. गहरे शरदे . तक

English

Traversing sky and wide mid-air, thou metest with thy beams our days, Sun, seeing all things that have life.

अध्याय १३

श्लोक 2.42

आ॒रोह॑न्छु॒क्रो बृ॑ह॒तीरत॑न्द्रो॒ द्वे रू॒पे कृ॑णुते॒ रोच॑मानः ।चि॒त्रश्चि॑कि॒त्वान् म॑हि॒षो वात॑माया॒ याव॑तो लो॒कान॒भि यद् वि॒भाति॑

ārohanchukro bṛhatīratandro dve rūpe kṛṇute rocamānaḥ | citraścikitvān mahiṣo vātamāyā yāvato lokānabhi yad vibhāti

हिन्दी अर्थ

षह्मी के सदुः प्रका में उढ़नेः वालप,:(महिषः) ,महान्,.(वमरोाः). भन्न . -भौर श्राय को परिपृष्ट .करने-याला विष्वा. प्रदिशः) संब .दिषशाभों भौर . ४४० भशर्ववेद-माष्य कां० १३। सु०२ गहरे या दर तक फले हए प्रदेवो तक .सू्यपिण्ड प्रपनी रदिमयों द्वारा पटूुचता - हमरा, उदित होता हरा (दिवाकरः) दिन का निर्माण कृरता है, (बुम्नेः) इमा, (शुक्रः) चमकीला सूयं (विश्वा दुरिता) सब दष्परिणार्मो को (भ्रतारीत्) दुर करता है । ३

English

Seven bay steeds harnessed to thy car bear thee, O thou far- seeing One, God, Sūrya, with the radiant hair.

अध्याय १३

श्लोक 2.43

अ॒भ्य॑१न्यदे॑ति॒ पर्य॒न्यद॑स्यतेऽहोरा॒त्राभ्यां॑ महि॒षः कल्प॑मानः ।सूर्यं॑ व॒यं रज॑सि क्षि॒यन्तं॑ गातु॒विदं॑ हवामहे॒ नाध॑मानाः

abhya1nyadeti paryanyadasyate'horātrābhyāṃ mahiṣaḥ kalpamānaḥ | sūryaṃ vayaṃ rajasi kṣiyantaṃ gātuvidaṃ havāmahe nādhamānāḥ

हिन्दी अर्थ

(चित्रम्) दूमूत, (देवानाम्, भनीकम्) ्योतमान रदिमयो का समूह भाणिका (तस्थूषदच) तश्रा स्थावरो का । ५ गिनि । परनेदङर परक मुख्यां है, इष मे यह -मीः भम्राण हैकि-सूर्को त्रिलोकी मे .भतपुरः माना है, पूर्वं विज. भरकाशच द्वाद. त्रिलोकी यं भरदर .

English

Sūrya, hath yoked the pure bright seven, the daughters of the car, with these, His own dear team, he travelleth. Devout, aflame with fervent heat, Rohita hath gone up to heaven.

अध्याय १३

श्लोक 2.44

पृ॒थि॒वी॒प्रो म॑हि॒षो नाध॑मानस्य गा॒तुरद॑ब्धचक्षुः॒ परि॒ विश्वं॑ ब॒भूव॑ ।विश्वं॑ सं॒पश्य॑न्त्सुवि॒दत्रो॒ यज॑त्र इ॒दं शृ॑णोतु॒ यद॒हं ब्रवी॑मि

pṛthivīpro mahiṣo nādhamānasya gāturadabdhacakṣuḥ pari viśvaṃ babhūva | viśvaṃ saṃpaśyantsuvidatro yajatra idaṃ śṛṇotu yadahaṃ bravīmi

हिन्दी अर्थ

कां० १३२। सु०२ प्रथववेद-भाष्य ४४१ रदिमसमूहरूप है । परमेदवर दयाकाश म उदित होता है । चुलोक के मच्य मे चमकते हए, (तरणिम्) नौकाख्पं में तैरते हए, (त्वा सवि है, इसलिये इते भ्नरवर ज्योतिः का. है । (नाय कामः) उस नाथ की कामना वाला मैः- (भीतः) सांसारिक कामादि शतु से डरा हृभरा । (उपयाभि)श्षरणागत होता हं । (सूयं) है सूयं सदश

English

He is re-born, returning to his birthplace, and hath become the Gods’ imperial ruler.

अध्याय १३

श्लोक 2.45

पर्य॑स्य महि॒मा पृ॑थि॒वीं स॑मु॒द्रं ज्योति॑षा वि॒भ्राज॒न् परि॒ द्याम॒न्तरि॑क्षम्।सर्वं॑ सं॒पश्य॑न्त्सुवि॒दत्रो॒ यज॑त्र इ॒दं शृ॑णोतु॒ यद॒हं ब्रवी॑मि

paryasya mahimā pṛthivīṃ samudraṃ jyotiṣā vibhrājan pari dyāmantarikṣam| sarvaṃ saṃpaśyantsuvidatro yajatra idaṃ śṛṇotu yadahaṃ bravīmi

हिन्दी अर्थ

१. ज्योतियं ३ है । यथा. “श्रीणि ण्योती' षि स्ते घ थोडी - (यजु०. ४४२ भथवेवेद-माष्य कां० १३।सु०२ प्रदान कर, (ते सुमतौ स्याम) तेरी सुमति में हम ररे, (मा रिषाम) इस मे गति करता, तथा उपाक्क को विशुद्ध करता है । घावमानम् = धावु गति शुदधयोः । उपासक को कामादि से विशुद्ध करने मे जो परमेष्वर की एेच्छिक

English

Dear unto all men, facing all directions, with hands and palms on every side extended, He, the sole God, engendering earth and heaven, beareth them with his wings and arms together.

अध्याय १३

श्लोक 2.46

अबो॑ध्य॒ग्निः स॒मिधा॒ जना॑नां॒ प्रति॑ धे॒नुमि॑वाय॒तीमु॒षास॑म्।य॒ह्वा इ॑व॒ प्र व॒यामु॒ज्जिहा॑नाः॒ प्र भा॒नवः॑ सिस्रते॒ नाक॒मच्छ॑

abodhyagniḥ samidhā janānāṃ prati dhenumivāyatīmuṣāsam| yahvā iva pra vayāmujjihānāḥ pra bhānavaḥ sisrate nākamaccha

हिन्दी अर्थ

कारापा कर दीर्घायु की प्राथंना करता है । मन्त में परमेदवर के भकधिष्ठान रूपी सूरयपिण्ड का भी व्णंन हरा है, परन्तु “नाथकामः” भ्रौर “सुमतौ सूयं के (पक्षौ) दोनों पंख, (सहलराह्कथम्) हजारो दिनों से (वियतो) मार्गवर्तीं सब भुवनो को (याति) पहुंचता है। । दिनो से उड़ता. जा रहा है, का. नदीं जा सकता । वतंमान काल के पाद्चात्य ज्योतिषी कहते है किं उत्तर दिशा मे एक तारा है

English

The single-footed hath outstepped the biped, the biped overtakes the triple-footed. The biped hath outstridden the six-footed: these sit around the single-footed’s body.

अध्याय १३

श्लोक 3.1

अध्यात्मम्।१-२६ ब्रह्मा।अध्यात्मम्, रोहितादित्यदैवत्म्।त्रिष्टुप्; १ चतुरवसानाऽष्टपदाऽकृतिः; २-४ त्र्यव॰ षट्-पदा (२-३ अष्टिः, २ भुरिक् ४ अतिशाक्वरगर्भा धृतिः) ; ५-७ चतुर॰ सप्तपदा (५-६ शाक्वरातिशाक्वरगर्भा प्रकृतिः; ७ अनुष्टुब्गर्भाऽतिधृतिः) ; ८ त्र्यव॰ षट्प॰ अत्यष्टिः; ९-१९ चतुरव॰ (९-१२, १५, १७ सप्तपदा भुरिगतिधृतिः; १५ निचृत्, १७ कृतिः, १३-१४,१६,१८-१९ अष्टपदा (१३-१४ विकृतिः, १६, १८-१९ आकृतिः, १९ भुरिक्) ; २०, २२ त्र्यव॰ षट्प॰ अत्यष्टिः; २१, २३-२५ चतुरव॰ अष्टपदा (२४ सप्तपदा कृतिः, २३,२५ विकृतिः)।य इ॒मे द्यावा॑पृथि॒वी ज॒जान॒ यो द्रापिं॑ कृ॒त्वा भुव॑नानि॒ वस्ते॑ ।यस्मि॑न् क्षि॒यन्ति॑ प्र॒दिशः॒ षडु॒र्वीर्याः प॑त॒ङ्गो अनु॑ वि॒चाक॑शीति॒ तस्य॑ दे॒वस्य॑।क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ ।उद् वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न्

adhyātmam| 1-26 brahmā| adhyātmam, rohitādityadaivatm| triṣṭup; 1 caturavasānā'ṣṭapadā'kṛtiḥ; 2-4 tryava॰ ṣaṭ-padā (2-3 aṣṭiḥ, 2 bhurik 4 atiśākvaragarbhā dhṛtiḥ) ; 5-7 catura॰ saptapadā (5-6 śākvarātiśākvaragarbhā prakṛtiḥ; 7 anuṣṭubgarbhā'tidhṛtiḥ) ; 8 tryava॰ ṣaṭpa॰ atyaṣṭiḥ; 9-19 caturava॰ (9-12, 15, 17 saptapadā bhurigatidhṛtiḥ; 15 nicṛt, 17 kṛtiḥ, 13-14,16,18-19 aṣṭapadā (13-14 vikṛtiḥ, 16, 18-19 ākṛtiḥ, 19 bhurik) ; 20, 22 tryava॰ ṣaṭpa॰ atyaṣṭiḥ; 21, 23-25 caturava॰ aṣṭapadā (24 saptapadā kṛtiḥ, 23,25 vikṛtiḥ)| ya ime dyāvāpṛthivī jajāna yo drāpiṃ kṛtvā bhuvanāni vaste | yasmin kṣiyanti pradiśaḥ ṣaḍurvīryāḥ pataṅgo anu vicākaśīti tasya devasya| kruddhasyaitadāgo ya evaṃ vidvāṃsaṃ brāhmaṇaṃ jināti | ud vepaya rohita pra kṣiṇīhi brahmajyasya prati muñca pāśān

हिन्दी अर्थ

„का सूयं परमेश्वर उदित होता है तब सूर्यपिण्डः ओ निष्परम हो जाता है (कल्पमानः) -काल का निर्माण करता हरा, (भरन्यत् भरमि) पृथिवी के एक पादवं के संमूख (एति) भ्राता है, भ्रौर (न्यत्) दूखरा पादवं (परि उद- स्यते) लगभग या पुणेतया उत्किप्त कर दिया जाता है, छोड दिया.जाता है । परन्तु (नाधमानाः वयम् याचना करते हए हम (रजसि) रञ्जक. सूर्यम् = सूये पद परमेदवर का वाचकं है (ग्रथरवं ° १३।४(१)।१५) पिण्ड पेरोंद्वारा चलने का मागं दशति है। (पृथिवीप्रः) पृथिवी को धन-घान्यादिभ्से मरपूर करने वाला, (महिषः) महान् (नाधमानस्य) याचना करने वाले का (गातुः) मादेक,

English

Flaming and radiant, strengthening his body, bestowing floods that promptly come to meet us,

अध्याय १३

श्लोक 3.2

यस्मा॒द् वाता॑ ऋतु॒था पव॑न्ते॒ यस्मा॑त् समु॒द्रा अधि॑ वि॒क्षर॑न्ति॒ तस्य॑ दे॒वस्य॑।क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ ।उद् वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न्

yasmād vātā ṛtuthā pavante yasmāt samudrā adhi vikṣaranti tasya devasya| kruddhasyaitadāgo ya evaṃ vidvāṃsaṃ brāhmaṇaṃ jināti | ud vepaya rohita pra kṣiṇīhi brahmajyasya prati muñca pāśān

हिन्दी अर्थ

३६०० भरशो मे बांटा जाता है। सम्भवतः इन भ्रंशो की दृष्टि से संवत्सर , के ३६० सौर दिन माने हों । चान्द्रवषं ३५४ दिनों का होता है । पप मे ३६०-३५४६ दिनों का भ्रन्तर प्रतिवषं हो. जाता है । ३० विनो के मल मास या अधिमास के लिये ५ वषं श्रपेक्षित है, ६०८५२३० दिन । १७।६।१५) । इस प्रकार वेदिकं ३६० दिनो के सौरवषं रौर ३४५४ दिनों

English

colours, While through all worlds that are he sends his lustre, radiant, observant, mighty, wind approacher. One form comes on, the other is reverted: to day and night the

अध्याय १३

श्लोक 3.3

यो मा॒रय॑ति प्रा॒णय॑ति॒ यस्मा॑त् प्रा॒णन्ति॒ भुव॑नानि॒ विश्वा॒ तस्य॑ दे॒वस्य॑।क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ ।उद् वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न्

yo mārayati prāṇayati yasmāt prāṇanti bhuvanāni viśvā tasya devasya| kruddhasyaitadāgo ya evaṃ vidvāṃsaṃ brāhmaṇaṃ jināti | ud vepaya rohita pra kṣiṇīhi brahmajyasya prati muñca pāśān

हिन्दी अर्थ

उदित होता हृभा. (मित्रः भवति) भित्र होता है। (सः) वह् (घव्तिा बरलोक को (तपति) तपाता है । (तस्य देवस्य“ पाशान्) पवत् (मनर १).1 कां० १३। सु०३ भथववेद-माष्य ४५७ वरुणः ्रियते, वृतो वा; मनर १२ के भनुसार वरा-गया रोहित

English

Brāhman who hath gained this knowledge Agitate him, O Rohita; destroy him: entangle in thy snares the Brāman’s tyrant.

अध्याय १३

श्लोक 3.4

यः प्रा॒णेन॒ द्यावा॑पृथि॒वी त॒र्पय॑त्यपा॒नेन॑ समु॒द्रस्य॑ ज॒ठरं॒ यः पिप॑र्ति॒ तस्य॑ दे॒वस्य॑ क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ ।उद् वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न्

yaḥ prāṇena dyāvāpṛthivī tarpayatyapānena samudrasya jaṭharaṃ yaḥ piparti tasya devasya kruddhasyaitadāgo ya evaṃ vidvāṃsaṃ brāhmaṇaṃ jināti | ud vepaya rohita pra kṣiṇīhi brahmajyasya prati muñca pāśān

हिन्दी अर्थ

वेरुण के साथ पाशो का वर्णन होता है यथा “ये ते पाशा वरुण सप्त सप्त. व्याख्येय मन्त्रो भ भो पाशो का वणन है, जिनमे फ ऋडहृभा परमेरवर परमेश्वर का वर्णेन करते हुए यह दर्शाया है कि करद हुए परमेश्वर के नाना पार है जो कि सुदुढ़ तथा घातक है, ताकि ब्रह्मवेत्ता को हानिं पहुंचाने. का कोई साहस न कर सके । करना; सविता का कामहै प्रेरणाएः देना (ष प्रेरणे); इन्द्रः का कामहै है कि सायंकाल की उपासना से, सायं काल की श्रभ्निमें तदधिष्ठातृूप परमेदवराग्नि" का ध्यान करते हुए निजमलो को दग्धं कर देने की-भरा्थना परमेदवर से करनी चाहिए, शारीरिक कृचेष्टाए, इन्द्रियों की अपवित्रता तथा चञ्चलता, मन के भ्रशिव संकल्प,-ये सब मलरूप ह ।

English

He from whom winds blow pure in ordered season, from whom the seas flow forth in all directions,

अध्याय १३

श्लोक 3.5

यस्मि॑न् विराट् प॑रमे॒ष्ठी प्र॒जाप॑तिर॒ग्निर्वै॑श्वान॒रः स॒ह प॒ङ्क्त्या श्रि॒तः ।यः पर॑स्य प्रा॒णं प॑र॒मस्य॒ तेज॑ आद॒दे तस्य॑ दे॒वस्य॑।क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ ।उद् वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न्

yasmin virāṭ parameṣṭhī prajāpatiragnirvaiśvānaraḥ saha paṅktyā śritaḥ | yaḥ parasya prāṇaṃ paramasya teja ādade tasya devasya| kruddhasyaitadāgo ya evaṃ vidvāṃsaṃ brāhmaṇaṃ jināti | ud vepaya rohita pra kṣiṇīhi brahmajyasya prati muñca pāśān

हिन्दी अर्थ

रातः काल की उपासना मे, उदित होते हए मित्रनामक सूयं मे स्थित परमेरवर को सवंमित्र जान कर, उख से सव॑भूत-मेतरी के सद्गुण की प्राथेना करनी चाहिए । भिन्रभ्रादिना्ों वाते परमेश्वर की सत्ता जाननी चाहिए 4 रय भ्रथवं वेद-माष्य कां १३। सु०३ की प्रत्येक शअरवस्थाभें, चिलम परमेश्वर को धारण करते हुए" दिनके

English

This God, etc. He who takes life away, he who bestows it; from whom comes breath to every living creature,

अध्याय १३

श्लोक 3.6

यस्मि॒न् षडु॒र्वीः पञ्च॒ दिशो॒ अधि॑ श्रि॒ताश्चत॑स्र॒ आपो॑ य॒ज्ञस्य॒ त्रयो॒ऽक्षराः॑ ।यो अ॑न्त॒रा रोद॑सी क्रु॒द्धश्चक्षु॒षैक्ष॑त॒ तस्य॑ दे॒वस्य॑ ।क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ ।उद् वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न्

yasmin ṣaḍurvīḥ pañca diśo adhi śritāścatasra āpo yajñasya trayo'kṣarāḥ | yo antarā rodasī kruddhaścakṣuṣaikṣata tasya devasya | kruddhasyaitadāgo ya evaṃ vidvāṃsaṃ brāhmaṇaṃ jināti | ud vepaya rohita pra kṣiṇīhi brahmajyasya prati muñca pāśān

हिन्दी अर्थ

त्मिक बनाने के लिये इस आराश्नम को स्वीकार किया हैः-दिन के भिन्न भिन्न कालो मे, उपासना में बैठना, लाभकारी ही होगा । “स्वरं की श्रोर उडते हृए, प्रलयकाल मे सृष्टि का हरण करने वाले हृभरा सब मृवनों तक जाता है । उस ऋ. देव के लिये वहं भपराधी है जो श्रौर वेदवेत्ता को हानि पहुंचाने वाले पर फन्दे डाल । मन्त्रं १४ का पुनः कथन यहु जताने के लिये किया गयाहैकि सृष्टि का कर्ता प्नौर भपहरत्ता जिस पर कुपित हो जाय तो वह इस के कोप

English

This God, etc. Who with the breath he draws sates earth and heaven, with expiration fills the ocean’s belly,

अध्याय १३

श्लोक 3.7

यो अ॑न्ना॒दो अन्न॑पतिर्ब॒भूव॒ ब्रह्म॑ण॒स्पति॑रु॒त यः ।भू॒तो भ॑वि॒ष्यद् भुव॑नस्य॒ यस्पति॒स्तस्य॑ दे॒वस्य॑ ।क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ ।उद् वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न्

yo annādo annapatirbabhūva brahmaṇaspatiruta yaḥ | bhūto bhaviṣyad bhuvanasya yaspatistasya devasya | kruddhasyaitadāgo ya evaṃ vidvāṃsaṃ brāhmaṇaṃ jināti | ud vepaya rohita pra kṣiṇīhi brahmajyasya prati muñca pāśān

हिन्दी अर्थ

(१३।३।१४, तथा १३।३।१) क आघार पर किया है । - अयं स देवो अप्स्व शन्तः सदसतंमूकः पुरुश्षाको अलिः । य दं विश्वं सव॑नं जजान । वस्य॑ देवस्य... “" "पाशान ॥११॥ . कां १३1 सु०३ भ्रथववेद-माष्य ४५९ (मयं सः देवः) वह् वह देव जो कि (श्रप्सु भरन्तः) जलो के भीतर ३, (क्हलरगूलः) हजारो का मूलकारण है, (पुरुखाकः) महाकव्तिराली है"

English

This God, etc. In whom Virāj, Prajāpati, Parameshthin, Agni Vaisvānara abide with Pankti, He who hath taken to himself the breathing of the Supreme, the vigour of the Highest,

अध्याय १३

श्लोक 3.8

अ॒हो॒रा॒त्रैर्विमि॑तं त्रिं॒शद॑ङ्गं त्रयोद॒शं मासं॒ यो नि॒र्मिमी॑ते॒ तस्य॑ दे॒वस्य॑ ।क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ ।उद् वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न्

ahorātrairvimitaṃ triṃśadaṅgaṃ trayodaśaṃ māsaṃ yo nirmimīte tasya devasya | kruddhasyaitadāgo ya evaṃ vidvāṃsaṃ brāhmaṇaṃ jināti | ud vepaya rohita pra kṣiṇīhi brahmajyasya prati muñca pāśān

हिन्दी अर्थ

शुकं व॑हन्ति हरयो रघुष्यदो देवं दिवि वचैरा भ्राजमानम् । तस्यं देवस्यं "": ""“पार्ान् ॥१६॥ (पररः) रदिमं समूह ढारा (विभाति) प्रदीप्त होता है । ( तस्य देवस्य “ वहन्ति = वह॒ प्रापणे । सूये का हमारे साथ सम्बन्ध उसकी काभी वर्णन जानना चाहिए । “कद्ध” परमेदवरही हो सकता है, सूये

English

This God, etc. On whom rest six expenses and five regions, four waters, and three syllables of worship,

अध्याय १३

श्लोक 3.9

कृ॒ष्णं नि॒यानं॒ हर॑यः सुप॒र्णा अ॒पो वसा॑ना॒ दिव॒मुत् पत॑न्ति ।त आव॑वृत्र॒न्त्सद॑नादृ॒तस्य॒ तस्य॑ दे॒वस्य॑ ।क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ ।उद् वेपय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न्

kṛṣṇaṃ niyānaṃ harayaḥ suparṇā apo vasānā divamut patanti | ta āvavṛtrantsadanādṛtasya tasya devasya | kruddhasyaitadāgo ya evaṃ vidvāṃsaṃ brāhmaṇaṃ jināti | ud vepaya rohita pra kṣiṇīhi brahmajyasya prati muñca pāśān

हिन्दी अर्थ

साथ बार-बार कथन का अभिप्राय है कि जिन मन्त्रो मे सूरयं-पिण्ड का वणन प्रतत होता है, उन मेँ उख के भरधिष्ठाता पररमेदवर काभी वर्णन समका ४६० भथवंषेद-माष्य कां० १३ । ०.३ : समवतत" (यजु° २१।१३) । शुक्रम् शुचिर् पुतिमावे । हरयः मनुष्य- नाम (निषं० २।३) । वहन्ति वह प्रापणे । तन्वः=तनु विस्तारे । पटरैः समुहैः । सुवणं; = “हृदययुण्डरीके धारयतो या बुद्धिवंवित्,- नानारूप वाली होती है” । ये उत्तमवरणो वाले भ्रकाशसमरह, हृदयकाल में योगी को भ्रकट होते है । इन भका समूहं द्वारा इन मे मानो परमेखवर की ज्योति चमकती - है, जैसे कि वह चान्द, सूयं, तथा तारागणों मे चमक रही. है ।.इन ज्योततियों के प्रकट होने पर, चित्त ्रषिकाधिक स्थिरता को

English

He who hath looked between both spheres in anger, This God, etc. He who, consuming food, became its master, the Lord of Prayer, the Regent of Devotion,

अध्याय १३

श्लोक 3.10

यत् ते॑ च॒न्द्रं क॑श्यप रोच॒नाव॒द् यत् सं॑हि॒तं पु॑ष्क॒लं चि॒त्रभा॑नु।यस्मि॒न्त्सूर्या॒ आर्पि॑ताः स॒प्त सा॒कं तस्य॑ दे॒वस्य॑ ।क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ ।उद् वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न्

yat te candraṃ kaśyapa rocanāvad yat saṃhitaṃ puṣkalaṃ citrabhānu| yasmintsūryā ārpitāḥ sapta sākaṃ tasya devasya | kruddhasyaitadāgo ya evaṃ vidvāṃsaṃ brāhmaṇaṃ jināti | ud vepaya rohita pra kṣiṇīhi brahmajyasya prati muñca pāśān

हिन्दी अर्थ

(इदं शृणोतु) इस वचनं को सुने (य्) जिते (श्रं ज्रवीमि) नै कहता हं । (भ्रस्य ) इस की (महिमा) महिमा (पृथिवीं, समुद्र, परि) पृथिवी यज्ञ का रचयिता परमेदवर हस वचन को सुनें जिते मँ कहता हं । शुणोतु प्रार्थी के कथन को परमेदवद तो सुन सकता है, सूर्यं पिण्ड नहीं, देखो मन्त्र (४४) । .

English

He, luminous, winged, mighty, strength-bestower, hath mounted all the regions as he forms them. Bright presence of the Gods, the luminous herald Sūrya hath mounted the celestial regions.

अध्याय १३

श्लोक 3.11

बृ॒हदे॑न॒मनु॑ वस्ते पु॒रस्ता॑द् रथंत॒रं प्रति॑ गृह्णाति प॒श्चात्।ज्योति॒र्वसा॑ने॒ सद॒मप्र॑मा॒दं तस्य॑ दे॒वस्य॑।क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ ।उद् वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न्

bṛhadenamanu vaste purastād rathaṃtaraṃ prati gṛhṇāti paścāt| jyotirvasāne sadamapramādaṃ tasya devasya| kruddhasyaitadāgo ya evaṃ vidvāṃsaṃ brāhmaṇaṃ jināti | ud vepaya rohita pra kṣiṇīhi brahmajyasya prati muñca pāśān

हिन्दी अर्थ

हई उषा को लक्ष्य कर के (जनानाम्) जनों कम्, रच्छ) नाक की भोर (सिक्ते) प्रसृत हई है, फली है, (इव) जसे है" वेसे उपासना मे परमेदवराग्नि के प्रबोधक का विधान मनर हभा है । उपासना मेँ समिधा के लिए कहा है “त्रिः सप्त समिषः कताः” (यजु9 ये तीन सप्तक है, जो किं उपासंना में समिधाए हँ । उपासना मँ इन तीन सप्तको को परमेदवरापित कर, परमेश्वर मे चित्त गाड़ कर, परमेइवराग्नि को .उद्बुद्ध करना चाहिए । धेनुम् =दुघार गौ जब भ्राती है तो उसे चारा तथा परमेश्वराग्नि को, यथोचित् समिघाएं भेट की जाती है ! समर्पण

English

Day’s maker, he hath shone away the darkness, and radiant, passed o’er places hard to traverse.

अध्याय १३

श्लोक 3.12

बृ॒हद॒न्यतः॑ प॒क्ष आसी॑द् रथंत॒रम॒न्यतः॒ सब॑ले स॒ध्रीची॑ ।यद् रोहि॑त॒मज॑नयन्त दे॒वास्तस्य॑ दे॒वस्य॑।क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ ।उद् वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न्

bṛhadanyataḥ pakṣa āsīd rathaṃtaramanyataḥ sabale sadhrīcī | yad rohitamajanayanta devāstasya devasya| kruddhasyaitadāgo ya evaṃ vidvāṃsaṃ brāhmaṇaṃ jināti | ud vepaya rohita pra kṣiṇīhi brahmajyasya prati muñca pāśān

हिन्दी अर्थ

हो सकता । इसलिये तीन सप्तकं क्रे साथः मन भ्रौर अहङ्कार की गणना १०।७।३९) । इस मन्व म “बलि हरन्ति” द्वारा समर्पण का वणेन हुभरा , दवारा (अग्निः) भरगनि (भ्रबोधि) प्रबुद्ध हुई है । (भानवः) रदिमियां (ना- . हानि पहुंच ता है वह परमेश्वर के लिये पापी है, भ्रपराधीः है" उसे

English

He hath gone up on high, the Gods’ bright presence, the eye of Mitra, Varuna and Agni. The soul of all that moveth not or moveth, Sūrya hath filled the earth and air and heaven,

अध्याय १३

श्लोक 3.13

स वरु॑णः सा॒यम॒ग्निर्भ॑वति॒ स मि॒त्रो भ॑वति प्रा॒तरु॒द्यन्।स स॑वि॒ता भू॒त्वान्तरि॑क्षेण याति॒ स इन्द्रो॑ भू॒त्वा त॑पति मध्य॒तो दिवं॒ तस्य॑ दे॒वस्य॑।क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ ।उद् वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न्

sa varuṇaḥ sāyamagnirbhavati sa mitro bhavati prātarudyan| sa savitā bhūtvāntarikṣeṇa yāti sa indro bhūtvā tapati madhyato divaṃ tasya devasya| kruddhasyaitadāgo ya evaṃ vidvāṃsaṃ brāhmaṇaṃ jināti | ud vepaya rohita pra kṣiṇīhi brahmajyasya prati muñca pāśān

हिन्दी अर्थ

परमेश्वर तथा सूयं का भी वर्णेन सर्वत्र हुमा है । तीस दिनों के तेरहवे मास का,--जिते किं मलमास तथा भ्रधिभास भी कहते हैः-जर्णनहृप्राहै (८) 4 “प्त सूर्याः” का वैशानिक स्वरूप (१०) 4 हजार दिनों से हंस के उडते रहने का भ्रमिप्राय (१४) । का वणेन साक्ञात् तथा परम्परया करता हैः।

English

High in the midst of heaven may we behold thee whom men call Savitar, the bright red Eagle,

अध्याय १३

श्लोक 3.14

स॒ह॒स्रा॒ह्ण्यं विय॑तावस्य प॒क्षौ हरे॑र्हं॒सस्य॒ पत॑तः स्व॒र्गम्।स दे॒वान्त्सर्वा॒नुर॑स्युप॒दद्य॑ सं॒पश्य॑न् याति॒ भुव॑नानि॒ विश्वा॒ तस्य॑ दे॒वस्य॑।क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ ।उद् वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न्

sahasrāhṇyaṃ viyatāvasya pakṣau harerhaṃsasya patataḥ svargam| sa devāntsarvānurasyupadadya saṃpaśyan yāti bhuvanāni viśvā tasya devasya| kruddhasyaitadāgo ya evaṃ vidvāṃsaṃ brāhmaṇaṃ jināti | ud vepaya rohita pra kṣiṇīhi brahmajyasya prati muñca pāśān

हिन्दी अर्थ

कां० १३। पु०३ भववेद-माष्य ४४६ पेदा किये, (यः) जो (भूवनानि) भुवनो को (दरापि कृत्वा) वस्त्र कर के ६ दिष्छाएं हँ (याः) जिन्हें कि (पतङ्गः) मानो वह पक्षी -समान उड़ता (जिनाति) हानि पहुचाता है । (रोहित). हे. सिहासनारूढ़ राजन् 1 (उद्-

English

Soaring and speeding on thy way, refulgent, unwasting light which Atri erst discovered. Him, Son of Aditi, an Eagle hasting along heaven’s height, I supplicate in terror, As such prolong our lengthened life, O Sūrya: may we, unha- rmed, enjoy thy gracious

अध्याय १३

श्लोक 3.15

अ॒यं स दे॒वो अ॒प्स्व॑१न्तः स॒हस्र॑मूलः पुरु॒शाको॒ अत्त्रिः॑ ।य इ॒दं विश्वं॒ भुव॑नं ज॒जान॒ तस्य॑ दे॒वस्य॑ ।क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ ।उद् वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न्

ayaṃ sa devo apsva1ntaḥ sahasramūlaḥ puruśāko attriḥ | ya idaṃ viśvaṃ bhuvanaṃ jajāna tasya devasya | kruddhasyaitadāgo ya evaṃ vidvāṃsaṃ brāhmaṇaṃ jināti | ud vepaya rohita pra kṣiṇīhi brahmajyasya prati muñca pāśān

हिन्दी अर्थ

(यस्मात्) जिस परमेदवर से (वाताः) वायुं (ऋतुथा) ऋत्व- समुदा पाथिव चार्यो-पमुद्र पृथिवी से अन्तरिक्ष. की भोर, तया तस्य॑ देवस्य“ “ "पान्नान् ।॥४॥ पृथिवी लोक को, (तरपेयति) तृप्त करता है, (भ्रपानेन) भ्रपान हारा है । यह हि समुद्रके पेट का पालना।

English

favour. This gold-hued Hansa’s wings, soaring to heaven, spread o’er a thousand days’ continued

अध्याय १३

श्लोक 3.16

शु॒क्रं व॑हन्ति॒ हर॑यो रघु॒ष्यदो॑ दे॒वं दि॒वि वर्च॑सा॒ भ्राज॑मानम्।यस्यो॒र्ध्वा दिवं॑ त॒न्व॑१स्तप॑न्त्य॒र्वाङ् सु॒वर्णैः॑ पट॒रैर्वि भा॑ति॒ तस्य॑ दे॒वस्य॑ ।क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ ।उद् वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न्

śukraṃ vahanti harayo raghuṣyado devaṃ divi varcasā bhrājamānam| yasyordhvā divaṃ tanva1stapantyarvāṅ suvarṇaiḥ paṭarairvi bhāti tasya devasya | kruddhasyaitadāgo ya evaṃ vidvāṃsaṃ brāhmaṇaṃ jināti | ud vepaya rohita pra kṣiṇīhi brahmajyasya prati muñca pāśān

हिन्दी अर्थ

(यः) जो परमेदवर (मारयति) मारता है, (प्राणयति) जो जीवन (समूदरस्य जठरम्) समूद्र क पेट को (पिपति) पालित करता है । (तस्य “कान डाईभाक्सादड” ((00,) को, भपानरूप मे, स्याग देते ह । यद भ्रपानवायु । समूद्र-बल भें विलीन होती रहती है, रौर समुद्रस्य पौषो के लिये भोजनरूप हो जौती कां० १३ । सु ३ भयर्ववेद-मास्य "भ्ण

English

journey Supporting all the Gods upon his bosom, he goes his way behold- ing every creature. Rohita, in primeval days Prajāpati, was, after, Time, Mouth of all sacrifices, he, Rohita,

अध्याय १३

श्लोक 3.17

येना॑दि॒त्यान् ह॒रितः॑ स॒म्वह॑न्ति॒ येन॑ य॒ज्ञेन॑ ब॒हवो॒ यन्ति॑ प्रजा॒नन्तः॑ ।यदेकं॒ ज्योति॑र्बहु॒धा वि॒भाति॒ तस्य॑ दे॒वस्य॑ ।क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ ।उद् वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न्

yenādityān haritaḥ samvahanti yena yajñena bahavo yanti prajānantaḥ | yadekaṃ jyotirbahudhā vibhāti tasya devasya | kruddhasyaitadāgo ya evaṃ vidvāṃsaṃ brāhmaṇaṃ jināti | ud vepaya rohita pra kṣiṇīhi brahmajyasya prati muñca pāśān

हिन्दी अर्थ

्राण देकर भ्रजा की रशनाः करने वाली वायु, (वेरवानरः ग्रग्निः) मौर पाक- कमं कँ द्वारा सब नर-नारियो का हितकारी पाथिव भग्न, (पडःत्या चह) दुलोक कै (प्राणं तेजः) तेजरूपी प्राण को (भ्राददे) प्रलयकाल में छीन , तीन लोकों के तीन देवता हैः (१) परमेष्टी विराद्= सूयं, (२) प्रकार शेष दो देवताभरों के “मक्ति सहचारो" गण भी दर्चाएर्है।येै

English

brought celestial light. He, Rohita, became the world: Rohita gave the heaven its heat.

अध्याय १३

श्लोक 3.18

स॒प्त यु॑ञ्जन्ति॒ रथ॒मेक॑चक्र॒मेको॒ अश्वो॑ वहति स॒प्तना॑मा ।त्रि॒नाभि॑ च॒क्रम॒जर॑मन॒र्वं यत्रे॒मा विश्वा॒ भुव॒नाधि॑ त॒स्थुस्तस्य॑ दे॒वस्य॑ ।क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ ।उद् वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न्

sapta yuñjanti rathamekacakrameko aśvo vahati saptanāmā | trinābhi cakramajaramanarvaṃ yatremā viśvā bhuvanādhi tasthustasya devasya | kruddhasyaitadāgo ya evaṃ vidvāṃsaṃ brāhmaṇaṃ jināti | ud vepaya rohita pra kṣiṇīhi brahmajyasya prati muñca pāśān

हिन्दी अर्थ

परस्य = इस वारा सूर्य का कथन हूभ्रा है । इस के प्राणभूंत तेज को षरमेदवर का है, सूये का नहीं । विराट् =वि + राजु (दीप्तौ) । परेमस्य =परमषद जलीय समूद्र प्राधित रहै । (यः) जो (द्धः) मानो दढ होकर (रोदसी तथा (यः) जो ब्रह्मणस्पतिः) वेदों का स्वामी, (बभव) भा है (यः)जो .

English

Rohita with his beams of light travelled along the earth and sea. 204 To all the regions Rohita came, the imperial Lord of heaven.

अध्याय १३

श्लोक 3.19

अ॒ष्ट॒धा यु॒क्तो व॑हति॒ वह्नि॑रु॒ग्रः पि॒ता दे॒वानां॑ जनि॒ता म॑ती॒नाम्।ऋ॒तस्य॒ तन्तुं॒ मन॑सा मि॒मानः॒ सर्वा॒ दिशः॑ पवते मात॒रिश्वा॒ तस्य॑ दे॒वस्य॑ ।क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ ।उद् वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न्

aṣṭadhā yukto vahati vahnirugraḥ pitā devānāṃ janitā matīnām| ṛtasya tantuṃ manasā mimānaḥ sarvā diśaḥ pavate mātariśvā tasya devasya | kruddhasyaitadāgo ya evaṃ vidvāṃsaṃ brāhmaṇaṃ jināti | ud vepaya rohita pra kṣiṇīhi brahmajyasya prati muñca pāśān

हिन्दी अर्थ

फा पदार्थं दाल भ्रादिहै उसे कौन वास्तव मे जानता है; जहां कि वह है, भ्रोदन या भातरूप है, भ्रौर जड पदार्थो की ती गिनती है क्या है ? वह परमे- इवर समग्र चराचर का पति है भन्नपति है, भौर साथी ज्ञानमय वेदोंका समाधि भे इस. परमेदवर के भ्रानन्द रस-लूपी श्रत का भास्वादन करते हैँ । तस्य॑ देवस्यं “ ““"पाशांन्- ॥८॥ ७ सौरमास वेद मेँ ३० दिनों का मानादहै, श्रौर वषं ३६० दिनों

English

He watches over ocean, heaven, and earth and all existing things. Mounting the lofty ones, he, bright, unwearied, splendidly shining, makes two separate

अध्याय १३

श्लोक 3.20

सं॒यञ्चं॒ तन्तुं॑ प्र॒दिशोऽनु॒ सर्वा॑ अ॒न्तर्गा॑य॒त्र्याम॒मृत॑स्य॒ गर्भे॒ तस्य॑ दे॒वस्य॑ ।क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ ।उद् वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न्

saṃyañcaṃ tantuṃ pradiśo'nu sarvā antargāyatryāmamṛtasya garbhe tasya devasya | kruddhasyaitadāgo ya evaṃ vidvāṃsaṃ brāhmaṇaṃ jināti | ud vepaya rohita pra kṣiṇīhi brahmajyasya prati muñca pāśān

हिन्दी अर्थ

मास या अ्रधिमास भरथवा त्रयोदश मास्त पड़ता है । वैदिक ३६० दिनों. के सौरवषं श्रौर वर्तमान कंलेण्डर के ३६६ दिनो हिसाब से पड़ता है । प्रति ५ वर्षो के पर्चात् ३० दिनो का एकं मास इस - हिसाब में भी पूर्ववत् है । कंनेण्डर सौर वषं के दिन=३६५ दिन, ५ चण्टे (हरयः) जल का हरण करने वाली, (सुपर्णाः) पक्षियों के सदुश नम्) मीचे के मागे को प्राप्त कर, (रपौ वसानाः ) भ्रौरजलको धारण

English

Strong One shapes and fits him. With humble prayer for aid we call on Sūrya, who knows the way, whose home is in the

अध्याय १३

श्लोक 3.21

नि॒म्रुच॑स्ति॒स्रो व्युषो॑ ह ति॒स्रस्त्रीणि॒ रजां॑सि॒ दिवो॑ अ॒ङ्ग ति॒स्रः ।वि॒द्मा ते॑ अग्ने त्रे॒धा ज॒नित्रं॑ त्रे॒धा दे॒वानां॑ जनि॑मानि विद्म॒ तस्य॑ दे॒वस्य॑ ।क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ ।उद् वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न्

nimrucastisro vyuṣo ha tisrastrīṇi rajāṃsi divo aṅga tisraḥ | vidmā te agne tredhā janitraṃ tredhā devānāṃ janimāni vidma tasya devasya | kruddhasyaitadāgo ya evaṃ vidvāṃsaṃ brāhmaṇaṃ jināti | ud vepaya rohita pra kṣiṇīhi brahmajyasya prati muñca pāśān

हिन्दी अर्थ

कर (दिवम्) युलोक-की श्रोर (उत्पतन्ति) उड़ जाती है । ।ते) वे किरणे १. पारस्कर गृह्यसूत्र ३।२।२ मे हसी क्रम से ‰ नाम पठितं है (भरथववेद, ४५४ भरथवरवेद-माष्य कां० १३। सु९ ३ कृष्णं नियानम् =सूयं से नीचे की भोर भाता हृभरा नीलाम्बर का ..

English

region. The suppliant’s way, filling the earth, the Mighty circleth the world with eye that none deceiveth.

अध्याय १३

श्लोक 3.22

वि य और्णो॑त् पृथि॒वीं जाय॑मान॒ आ स॑मु॒द्रमदधाद॒न्तरि॑क्षे॒ तस्य॑ दे॒वस्य॑ ।क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ उद् वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न्

vi ya aurṇot pṛthivīṃ jāyamāna ā samudramadadhādantarikṣe tasya devasya | kruddhasyaitadāgo ya evaṃ vidvāṃsaṃ brāhmaṇaṃ jināti ud vepaya rohita pra kṣiṇīhi brahmajyasya prati muñca pāśān

हिन्दी अर्थ

काला मामं । ऋतस्य जलस्य (निघं० ११२) । ऋत का सदन मेव या चांदी के सदु (रोचनावद्) रुचिकारक चाद है ८४ £ ९4 परस्पर मिल कर (्रापितोः) समपित हृए हृए है (तस्य देवस्य ““ मने गुण भदक पदो रां दो भमिषेयों को चित किय ्। का वर्णेन किया है । “यत् पद के दोबारा पठन दवारा सूर्यमण्डल को सूचित किया है जिस की किं किरणे. पुष्टिदायक प्ररं चित्र विचित्र है।

English

May he, all-seeing, well-disposed and holy, give ear and listen to the word I utter. Blazing with light his majesty hath compassed ocean and earth and heaven and air’s mid region.

अध्याय १३

श्लोक 3.23

त्वम॑ग्ने॒ क्रतु॑भिः के॒तुभि॑र्हि॒तो॒३र्कः समि॑द्ध॒ उद॑रोचथा दि॒वि।किम॒भ्याऽर्चन् म॒रुतः॒ पृश्नि॑मातरो॒ यद् रोहि॑त॒मज॑नयन्त दे॒वास्तस्य॑ दे॒वस्य॑।क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ ।उद् वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न्

tvamagne kratubhiḥ ketubhirhito3rkaḥ samiddha udarocathā divi| kimabhyā'rcan marutaḥ pṛśnimātaro yad rohitamajanayanta devāstasya devasya| kruddhasyaitadāgo ya evaṃ vidvāṃsaṃ brāhmaṇaṃ jināti | ud vepaya rohita pra kṣiṇīhi brahmajyasya prati muñca pāśān

हिन्दी अर्थ

कोई लाल, कोई सन्तरिया; कोई पीला, कोई हरा, कोई नीला भाकाशीय रंगवाला, कोई दण्डिगो के पौषे से निकले नील वर्णं केः सदृश, भौर कोई बैशनी वरणेवाला है । ये सन मिलकर परमेदवर मे ्राश्चय पाए हए है । मन्व : उपनिषदो भे भी वभेद के भ्राषार पर सूर्यो का वैविष्यं दर्शाया है । यथा- कां० १३ । सू ३ अथर्वेवेद-माध्य १५१ विरेषः-- “सप्त सूयः के सम्बन्ध में यह जानना भआावदयक है कि रूप है, स्वतःभकाशी है । इन सब का विभाजन (198५०९१०)

English

May he, all-seeing, well-disposed and holy, give ear and listen to the word I utter. Agni is weakened by the people’s fuel to meet the Dawn who cometh like a milch-cow, Like young trees shooting up on high their branches, his flames are mounting to the vault of

अध्याय १३

श्लोक 3.24

य आ॑त्म॒दा ब॑ल॒दा यस्य॒ विश्व॑ उ॒पास॑ते प्र॒शिषं॒ यस्य॑ दे॒वाः ।यो॒३स्येशे॑ द्वि॒पदो॒ यश्चतु॑ष्पद॒स्तस्य॑ दे॒वस्य॑ ।क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ ।उद् वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न्

ya ātmadā baladā yasya viśva upāsate praśiṣaṃ yasya devāḥ | yo3syeśe dvipado yaścatuṣpadastasya devasya | kruddhasyaitadāgo ya evaṃ vidvāṃsaṃ brāhmaṇaṃ jināti | ud vepaya rohita pra kṣiṇīhi brahmajyasya prati muñca pāśān

हिन्दी अर्थ

तथा कतिपय ये सूर्यं एेसे मी ह, जो कि मूल भूत रंगो के मिश्रण दवारा उत्पन्न इन्द्र धनुष् (२४7 209) मे ये सात. रगया वणं दुष्टि गोचर होते है तथा एश मे से सूरये की किरणो के गुजरने षर भी । (पूरस्तात्) पिले (बृहत्) बड़ा चूलोक (एनम्) इस परमेदवर को (अनु) भनुकल तथा (वस्ते) वस्त्र रूपमे धारण करता हे, (पदचात्) पीछे यह पैदा दुभा था तो यहं तारा न्वताश-४ला०क्र था, परु वतेमान मे भ्रति शुक्ल

English

heaven. A glorification of Rohita. with a malediction on the man who wrongs a Brāhman

अध्याय १३

श्लोक 3.25

एक॑पा॒द् द्विप॑दो॒ भूयो॒ वि च॑क्रमे॒ द्विपा॒त् त्रिपा॑दम॒भ्येऽति प॒श्चात्।चतु॑ष्पाच्चक्रे॒ द्विप॑दामभिस्व॒रे सं॒पश्य॑न् प॒ङ्क्तिमु॑प॒तिष्ठमान॒स्तस्य॑ दे॒वस्य॑ ।क्रु॒द्धस्यै॒तदागो॒ य ए॒वं वि॒द्वांसं॑ ब्राह्म॒णं जि॒नाति॑ ।उद् वे॑पय रोहित॒ प्र क्षि॑णीहि ब्रह्म॒ज्यस्य॒ प्रति॑ मुञ्च॒ पाशा॑न्

ekapād dvipado bhūyo vi cakrame dvipāt tripādamabhye'ti paścāt| catuṣpāccakre dvipadāmabhisvare saṃpaśyan paṅktimupatiṣṭhamānastasya devasya | kruddhasyaitadāgo ya evaṃ vidvāṃsaṃ brāhmaṇaṃ jināti | ud vepaya rohita pra kṣiṇīhi brahmajyasya prati muñca pāśān

हिन्दी अर्थ

-- 0988 ? इनद्रबनुष् का नं० २ बण । ये कतिपय उदाहरण “एण ४५६ , भवेवेद-माष्य कां० १ ३ । भु०३ लिये चूलोक ने स्व-रक्षाथं परमेदवर को वस्त्र रूप में पहिले घारण किया । सूपमें इन दोनो लोकों की रकषाकररहाहै। .

English

He who engendered these, the earth and heaven, who made the worlds the mantle that he weareth, In whom abide the six wide-spreading regions through which the

अध्याय १३

श्लोक 3.26

कृ॒ष्णायाः॑ पु॒त्रो अर्जु॑नो॒ रात्र्या॑ व॒त्सोऽजायत ।स ह॒ द्यामधि॑ रोहति॒ रुहो॑ रुरोह॒ रोहि॑तः

kṛṣṇāyāḥ putro arjuno rātryā vatso'jāyata | sa ha dyāmadhi rohati ruho ruroha rohitaḥ

हिन्दी अर्थ

(देवाः) देवों ने (यद्) जब (रोहितम्) सर्वोपरि भ्रा परमेदवर दूसरी भोर का पक्ष (रथन्तरम्) रथन्तर सांभ गान था । (सबले) ये दोनो ची) साथ-साथ चर्ले, साथ-साथ गाए जांय । (तस्य देवस्य “"पाशान्) तस्य॑ देवस्वं" “ पाश्ांन् ॥१३॥ " (सः) वह (वरुणः) वरणोय या वरा-गया परमेदवंर (सायम्) खायं

English

Bird’s keen vision penetrateth, This God is wroth offended by the sinner who wrongs the

अध्याय १३

श्लोक 4.1

अध्यात्मम्।(१-१३ प्रथमः पर्यायः।) १-११ प्राजापत्याऽनुष्टुप्; १२ विराड् गायत्री; १३आसुरी उष्णिक्।स ए॑ति सवि॒ता स्वऽर्दि॒वस्पृ॒ष्ठेऽव॒चाक॑शत्

adhyātmam| (1-13 prathamaḥ paryāyaḥ|) 1-11 prājāpatyā'nuṣṭup; 12 virāḍ gāyatrī; 13āsurī uṣṇik| sa eti savitā sva'rdivaspṛṣṭhe'vacākaśat

हिन्दी अर्थ

या न वालो को समाधिलाम तथा समाधि का फलं बीघ्र प्राप्त हो येनांदविलयान इरितंः सं वहन्ति येन गहनं बहवो यन्ति भरनानन्तैः। यदेकं ज्योतिंबहषा विमति । तस्यं देवस्य“ “ पाशान् ॥१७॥ (येन) जिस परमेदवर की सहायता द्वारा (हरितः ) अन्धकारका का वहन करती ह (येन यज्ञेन) जिस यजनीय परमेरवर की सहायता

English

The world’s Lord, present and to be hereafter, This God, etc.

अध्याय १३

श्लोक 4.2

र॒श्मिभि॒र्नभ॒ आभृ॑तं महे॒न्द्र ए॒त्यावृ॑तः

raśmibhirnabha ābhṛtaṃ mahendra etyāvṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

वैदिक ज्ञानो का पिता तथा जनयिताहै। पटकाकारण है, सांसारिक नियर्मो तथा वेदिक ज्ञानोँका कारण है। मिमानः = वायु मानो व्यापक परमेद्वर के परिमाण को नापनेके लिये सब दिशा मे. गति कर रही ह । जैसे कि कहाहै कि “क्व प्रेप्सन् पवते मातरिद्वा” (श्रथवं० १०।७।४, भर्थात् कहां जाना चाहती हई रायु गति केर रही है । उत्तर में कहा है किं “स्कम्भ रूप परमेश्वर की १.. परमेद्वर को योगसाधर्न इरा ्षरीर-रथ भं जोतना । २. मानो परमेश्वर की लम्बाई, चौडाई, ऊजां नापने के लिये चारो तथा ऊर्द-दिक्ा मे वायु यति करवा है । । न

English

This God, etc. In front the Brihat-Sāman is his mantle, and from behind Rathantara enfolds him,

अध्याय १३

श्लोक 4.3

स धा॒ता स वि॑ध॒र्ता स वा॒युर्नभ॒ उच्छ्रि॑तम्।र॒श्मिभि॒र्नभ॒ आभृ॑तं महे॒न्द्र ए॒त्यावृ॑तः

sa dhātā sa vidhartā sa vāyurnabha ucchritam| raśmibhirnabha ābhṛtaṃ mahendra etyāvṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

कार १३॥ सु० ३ भ्रथववेद-भाष्य ४६३ प्रेरक रूप. से विद्यमान , तन्तुम्) जगत के कारणीभूत परभेदवर को भिमानः सर्वा दिशः पवतेः मातरिरवा" (मन्त्र. १९), मापती हुई मुव । यस्मिन् वेद॑. निहिता विधव हासे नदर नाति तराणि मत्युम्” परमेदवर कोंगायत्रो का श्रधिपति कहा है विरा तं अग्न त्रेधा जनित्रं तरेधा देवानां जनिमानि विद्म । . तस्य देवस्वं“. पाशाच्॥२१॥ रि

English

Ever with care robing themselves in splendour. This God, etc.

अध्याय १३

श्लोक 4.4

सोऽर्य॒मा स वरु॑णः॒ स रु॒द्रः स म॑हादे॒वः।र॒श्मिभि॒र्नभ॒ आभृ॑तं महे॒न्द्र ए॒त्यावृ॑तः

so'ryamā sa varuṇaḥ sa rudraḥ sa mahādevaḥ| raśmibhirnabha ābhṛtaṃ mahendra etyāvṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

निश्चय से तीन है, (रजांसि) लोक (त्रीणि) तीन है, (भङ्ग) है ्रिय । (ते) तेरे (जनित्रम्) जन्मों को (विदूमा) हम जानते ह । (त्रेधा) तीन प्रकार के (देवानाम्) देवों के (जनिमानि) जन्मों को (विद्म) हम जानते षर सूरये के उदयास्त पर दिन-रात बराबर होते है, २१ माच तथा २३. सितम्बर कौ. वह चू भाग । (२( विषूवती रेखा के उत्तर का द्युभाग । (३) विषुवती रेखा के दक्षिणं का द्युभाग । इस प्रकार तीन चुभाग “दिवः

English

One of his wings was Brihat, and the other Rathantarr., vigorous with one same purpose, What time the Gods gave Rohita his being. This God, etc.

अध्याय १३

श्लोक 4.5

सो अ॒ग्निः स उ॒ सूर्यः॒ स उ॑ ए॒व म॑हाय॒मः।र॒श्मिभि॒र्नभ॒ आभृ॑तं महे॒न्द्र ए॒त्यावृ॑तः

so agniḥ sa u sūryaḥ sa u eva mahāyamaḥ| raśmibhirnabha ābhṛtaṃ mahendra etyāvṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

निभूचः व्युषः तिसः (१) सूर्यं का विषुवती रेखा पर उदयास्त होना, २१ माचं तथा २३ सितम्बर को; (२) सूयं काककं राशिपर उदयास्त होना २१ जून को; ककं राशि उत्तरायण की -मन्तिम सीमां है; . (३) सूयं करा मकर राशि पर उदयास्त होना २१ दिसम्बर को, मकर राशि क्षिणायन की भरन्तिम सौमा है । ईन तीन" स्थानों पर सूयं के उदयास्त के. भनुसार सूर्यास्त तथा उंषाए भी तीन प्रकार को हो जाती है । दिन-रात के बरावर होने, दिनों के बड़ होने, तथा रातो के बड़े होने भे सूर्यं के उदास्त अर्थात् विविव प्रकार की उषाए । जेष देवानां अन्मानि देवो के त्रिविध जन्म =सूयं तथा सूर्यं सदश

English

At evening he is Varuna and Agni, ascending in the morning he is Mitra. As Savitar, he moves through air’s mid region, as Indra warms- the heavens from the centre.

अध्याय १३

श्लोक 4.6

तं व॒त्सा उप॑ तिष्ठ॒न्त्येक॑शीर्षाणो यु॒ता दश॑ ।र॒श्मिभि॒र्नभ॒ आभृ॑तं महे॒न्द्र ए॒त्यावृ॑तः

taṃ vatsā upa tiṣṭhantyekaśīrṣāṇo yutā daśa | raśmibhirnabha ābhṛtaṃ mahendra etyāvṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

तस्व॑ देवस्वं" ˆ -पाश्चान् ॥२२॥ . (यः) जो सूयं (जायमानः) पदां होता हृभ्रा, (पृथिवीम्) पृथिवी । १, भादित्य के लिये दन तीन स्थानों को. “तीन बन्धन भी कष है। यथा यलोक के इन तीन स्थानों मर बन्वी हृ है। ˆ - .

English

This God, etc. This gold-hued Harisa’s wings, soaring to heaven spread o’er a thousand days’ continued journey.

अध्याय १३

श्लोक 4.7

प॒श्चात् प्राञ्च॒ आ त॑न्वन्ति॒ यदु॒देति॒ वि भा॑सति ।र॒श्मिभि॒र्नभ॒ आभृ॑तं महे॒न्द्र ए॒त्यावृ॑तः

paścāt prāñca ā tanvanti yadudeti vi bhāsati | raśmibhirnabha ābhṛtaṃ mahendra etyāvṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

कां० १३।सू०३ भथवंवेद-माष्य , ४६५ किमभ्याेनप्रुतः पूृ्िमातरो यद् रोहित॒मज॑नयन्त देवाः । तस्यं देवस्य -“ "पाशान् ॥२३॥ ॑ (उदरोचथाः) उदित हुग्रा चमकता है ' (यद्) जब (देवाः) दिव्य योगि- वे (पृदिनमातरः) भूमि माता से उत्पन्न हृए (मरुतः) मरणधर्मा मनुष्य तथा पूजा करे, भ्र्थात् तेरी ही स्तुति तथा पूजा करे ।

English

Supporting all the Gods upon his bosom, he goes his way behol- ding every creature. This God, etc.

अध्याय १३

श्लोक 4.8

तस्यै॒ष मारु॑तो ग॒णः स ए॑ति शि॒क्याकृ॑तः

tasyaiṣa māruto gaṇaḥ sa eti śikyākṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

य आत्मदा बलदा यस्य॒ विश्च ' उपासंते भुशिषं यस्य देवाः । (यः) जो परमेदवर (्रात्मदाः) भ्रात्मा का दाता, (बलदाः) भरौर बलों का दाता है, (विदे) सब (यस्य) जिसके (प्रशिषम्) उत्तम-शासन की (उपासते) उपासना करते है, (देवाः) देव (यस्य) जिसके प्रशासन की .. उपासना करते है, यां देव जिस कै भ्रषीन ह । (यः) जो (भरस्य द्विपदः) इस दोधाय-जगत् का, श्रौर (यः) जो इस (चतुष्पदः) चौपाए जगत् का जेल-न समस्ता हृभरा, जीवन को उन्नति भ्रौर मोक्ष का साघन जानकर सक जैसे परमेदवर की भाज्ञा के भरनुसार चलते है, वसे सब जंड् जगत् , परमेश्वर के उत्तम-श्चासन के प्रनुसार चलं रहा है ।

English

This is the God who dwells-within the waters, the thousand- rooted, many-powered Atri, He who brought all this world into existence. This God; etc.

अध्याय १३

श्लोक 4.9

र॒श्मिभि॒र्नभ॒ आभृ॑तं महे॒न्द्र ए॒त्यावृ॑तः

raśmibhirnabha ābhṛtaṃ mahendra etyāvṛtaḥ

हिन्दी अर्थ

, . (एकपाद्) एकपाद् पुरुषाथं वाला मनुष्य (भुयः) फिर (द्विपदः) दोपाद् पुरुषां वाले व्यक्तियों की भोर (विचक्रमे) विशेष पग बद़ाता है करता है एसे (द्विपदाम्) दो परग वाले मनुष्यों की (रमि स्वरे) पुकार कर उपासको की पंक्ति मँ (उपतिष्ठमानः) उपस्थित हो जाता है! (तस्य रदस्य देवस्य) उस. ऋद्ध देव के लिये (एतत्) यह (आगः) भपराष या कां० १३।सु० ३ अथववेद-भाष्य ४६७ परमेदवर सुनता है । एसे व्यवित को हानि पहुचाने वाले को राजा दण्ड दे,

English

With flying feet his tawny coursers carry the bright God through, the sky, aglow with splendour.

अध्याय १३

श्लोक 4.10

तस्ये॒मे नव॒ कोशा॑ विष्ट॒म्भा न॑व॒धा हि॒ताः

tasyeme nava kośā viṣṭambhā navadhā hitāḥ

हिन्दी अर्थ

ई । यद्) जो (एकं ज्योतिः) एक ज्योति (वहुधा) बहू प्रकार से (वि देवस्य-"““"" पाशान्), पवंवत् (मन्व १) । कां १३। सु०.३ भ्रथरववेव-माष्य ४६१ तस्य॑ देवस्य" "पाक्षांच् ॥१८॥

English

He who metes out the thirteenth month, constructed with days and nights, containing thirty members, This God, etc.

अध्याय १३

श्लोक 4.11

स प्र॒जाभ्यो॒ वि प॑श्यति॒ यच्च॑ प्रा॒णति॒ यच्च॒ न

sa prajābhyo vi paśyati yacca prāṇati yacca na

हिन्दी अर्थ

होने वाला (एकः भ्रव) एक दव (वहति) रथ को चलाता है ) (चक्रम्) रहित है, (यत्र) जिस चक्र भे (इमा विर्वा भुवना) ये सब भुवन (भरति भनवम् = भथवा विना प्राणी धोड़े का चक्र रथ। । एकचक्र रथ = सूर्ये । सूयं चक्राकार है, मोन है, श्रौर भकेला नहीं होते । सूर्य॑रथ का वहनं एक जातीय शुभ्रव वाली रर्मियां करती है जोकि सप्तरंगी सात रदिमयों मे फट कर परिणतो जाती तीन

English

Dark the descent; the strong-winged birds are golden: they fly aloft to heaven, enrobed in

अध्याय १३

श्लोक 4.12

तमि॒दं निग॑तं॒ सहः॒ स ए॒ष एक॑ एक॒वृदेक॑ ए॒व

tamidaṃ nigataṃ sahaḥ sa eṣa eka ekavṛdeka eva

हिन्दी अर्थ

ह । रथ के चक्र भपनी भ्रपनी रथ-नाभि के चारों प्नोर धूमते ह सूर्येखूपी चक्त, नाभिरूप तीन ऋतुर्भो के चारो भ्रोर मानो घूम रहा है सू्येके भ्राधार पर सब सौर-मुवन भरधिष्ठित है । “विर्वा भुवना” पद द्वारा को सूचित किया है, भर्थात् ०0० 0ठ श्लणंन6 को ॥ सार सुर्यं नहीं बलता, पितु पृथिवी चलती है । पृथिवी के चलने से सूयं चलता भरतीत होता है। भरतः पृथिवी.के माकी प्रण्डाङृति दर्शाई है। अथवा चिणानि ४६२ भ्रथर्वेवेद-माष्य का° १३। सु०र

English

waters. They have come hither from the seat of Order, This God, etc.

अध्याय १३

श्लोक 4.13

ए॒ते अ॑स्मिन् दे॒वा ए॑क॒वृतो॑ भवन्ति

ete asmin devā ekavṛto bhavanti

हिन्दी अर्थ

योगी के शरीर रथ का वहन करने लगत्प् है । वह (देवानाम्) ्योतमान सूर्यादि का (पिता) पिता है, भरौर (मतीनाम्) वैदिक ज्ञानो का (जनिता) कारणींभूत परमेश्वर को, (मनसा) मानो ज्ञानपु्व॑क (मिमानः) मापता (पवते) गति करता था बहता है । भ्रासानी से जोता नहीं जां सकता । परमेद्वर की -उग्रता पर, भ्राठ योगाङ्गं द्वारा काब्रू पाया जा सकता है । . वशीभूत परमेदवर सिद्ध-पुंखष के दारीरे-रथ कां वहन करने लंगता है । उस अवस्था मे सिद्ध-पुरुष के. जीवन. भ परमेदवर प्रेरक हो जाता है । परमेरवर सूर्यादि जड़-जगत् का तथा

English

What silver. Kasyapa, thou hast refulgent, what brightly-shining lotus-flower collected, Wherein are gathered seven Suns together,

अध्याय १३

श्लोक 5.14

अध्यात्मम्।१४ भुरिक्साम्नी त्रिष्टुप्, १५ आसुरी पङ्क्तिः, १६, १९ प्राजापत्याऽनुष्टुप्, १७-१८ आसुरी गायत्री।की॒र्तिश्च॒ यश॒श्चाम्भ॑श्च॒ नभ॑श्च ब्राह्मणवर्च॒सं चान्नं॑ चा॒न्नाद्यं॑ च

adhyātmam| 14 bhuriksāmnī triṣṭup, 15 āsurī paṅktiḥ, 16, 19 prājāpatyā'nuṣṭup, 17-18 āsurī gāyatrī| kīrtiśca yaśaścāmbhaśca nabhaśca brāhmaṇavarcasaṃ cānnaṃ cānnādyaṃ ca

हिन्दी अर्थ

लाल सूये (भ्रजायत) पैदा ह्ृभरा है । (सः ह) वह (चाम् भ्रधिरोहति) दलोक की ओर भ्रारोहण करता है, भौर (भजु नः) शुक्ल हो कर (रुहः) द्युलोक की ऊ चादयो तक (रुरोह) चढ़ गया है । इसी प्रकारं काली स्पी चुलोक की भोर भ्रारोहण करता है, भौर मस्तिष्क तक की ऊंचाई

English

Whose limbs uplifted fire and heat the heavens: hither he shines- with beams of golden colour. This God, etc.

अध्याय १३

श्लोक 5.15

य ए॒तं दे॒वमे॑क॒वृतं॒ वेद॑

ya etaṃ devamekavṛtaṃ veda

हिन्दी अर्थ

कृष्णायाः राच्याः = अजायत मे जन् धातु के प्रयोग के कारण रहा होता है तब बह लाल होताहै, जसे कि कविने कहा है किं “उदेति सविता ताञ्च: तान्न एवास्तमेति च । ताम्र लाल होता है । इस सूये को . परमेद्वर भी काली रात्रि से प्रकट होता है। रात्निकेकालमें उपासना के भ्रम्थास से परमेदवर प्रकट होता है । यथा “नाम नाम्ना जो- परमेदवर के नाम को बार-बार जपता हुभ्रा परमेश्वर का भ्राह्वान करता है, सूर्योदय से पूवं. तथा उषा से पूवं” । इसका भ्रनुमोदन निखक्तकार ने भी किया है, "पूरवः पुर्यो यजमानो वनीयान्” (ऋ० ५।७७।२) का प्रमाण . देते हृए ““ूव॑-पूवं काल के उपासक को .भधिक सफल कहा है" (निखक्त १२।३।५) ; तथा “ये रान्निमनुतिष्ठन्ति" (भरं ° १९।४८।५) में रात्रिम द भ्रथववेद-माष्यः कां १३। सु०३

English

He beside whom his bay steeds bear the Ādityas, by whom as sacrifice go many knowing. The sole light shining spread through various places.

अध्याय १३

श्लोक 5.16

न द्वि॒तीयो॒ न तृ॒तीय॑श्चतु॒र्थो नाप्यु॑च्यते।य ए॒तं दे॒वमे॑क॒वृतं॒ वेद॑

na dvitīyo na tṛtīyaścaturtho nāpyucyate| ya etaṃ devamekavṛtaṃ veda

हिन्दी अर्थ

भजु नः पृच्रःन्नसूयं तरद्ित हाता हरा लाल होता है, परन्तु परमेदवर करने वाला; पालन करने वाला दुःख से या जन्ममरण की परम्परारूपी ततः त्रायत इति वा” (निरुक्त २।३।११) । परमेश्वर मेँ पुत्र के ये सब गण नाम वाला पविष्ट होकर विचरता है, यह ऋषियों का पृत्रहै, उनकी हिसा से रक्षा करता है।

English

This God, etc. This seven make the one-wheeled chariot ready: bearing seven names the single courser draws it.

अध्याय १३

श्लोक 5.17

न प॑ञ्च॒मो न षष्ठः स॑प्त॒मो नाप्यु॑च्यते।य ए॒तं दे॒वमे॑क॒वृतं॒ वेद॑

na pañcamo na ṣaṣṭhaḥ saptamo nāpyucyate| ya etaṃ devamekavṛtaṃ veda

हिन्दी अर्थ

रोहति, रुहः रुरोह = परमेश्वर प्रथम हृदय में प्रकट होता है, तद- काँ १३ । सु०् भ्रथर्ववेद-भाष्य त ४६९ (४(१)।१,५) की दुष्टि से “रोहितादित्यदेवत्यम्” कह दिया हो 1 खण्डो मे हैर्शाया है, जिह कि “पर्याय कहते है । दसं भकार सूक्तं से ४५६ क्रमाद्धों दवारा दर्शाया है । ..

English

The wheel, three-naved, is sound and undecaying: thereon these worlds of life are all dependent.

अध्याय १३

श्लोक 5.18

नाष्ट॒मो न न॑व॒मो द॑श॒मो नाप्यु॑च्यते ।य ए॒तं दे॒वमे॑क॒वृतं॒ वेद॑

nāṣṭamo na navamo daśamo nāpyucyate | ya etaṃ devamekavṛtaṃ veda

हिन्दी अर्थ

लाया तमो भवति” (१२।२।१३), भर्थात्ः सविता के काल में चयुलोक का भन्धकारतोदुरहो जाता है, परन्तु नीचे पृथिवी पर अभी भन्ध- तमी चीने के चक्रं मं उस का भरकाच्च पहुचेगा । वाची १२ नामः.जिन मेँ सूर्यनाम भी पठित है (२-५) । सम्भवतः ४७० भरयर्वेवेद-भाष्य कां० १३ । सू०४

English

This God, etc. Eight times attached the potent Courser draws it, Sire of the Gods, father of hymns and praises.

अध्याय १३

श्लोक 5.19

स सर्व॑स्मै॒ वि प॑श्यति॒ यच्च॑ प्रा॒णति॒ यच्च॒ न ।य ए॒तं दे॒वमे॑क॒वृतं॒ वेद॑

sa sarvasmai vi paśyati yacca prāṇati yacca na | ya etaṃ devamekavṛtaṃ veda

हिन्दी अर्थ

यह् ही एक उपास्य है (४७-४६) । भ्रथं ही जानना चाहिए (२९-३०) । इन मे से मन्त्र ३८ मे सविता का जन्म ऋचाभ्रो से वर्लाया है । ऋचाभों से सवितु-परमेदवर के मन्त्र ४१-४२ मे प्रलयकाल का वणेन तीत होता है । मस्तिष्क की पीठ पर (एति) भ्राता है, भौर (भरव चाकरत्) नीचे कै

English

So Mātarisvan, measuring in spirit the thread of Order, purifies all regions. This God, etc.

अध्याय १३

श्लोक 5.20

तमि॒दं निग॑तं॒ सहः॒ स ए॒ष एक॑ एक॒वृदेक॑ ए॒व।य ए॒तं दे॒वमे॑क॒वृतं॒ वेद॑

tamidaṃ nigataṃ sahaḥ sa eṣa eka ekavṛdeka eva| ya etaṃ devamekavṛtaṃ veda

हिन्दी अर्थ

१०।७३२) ! भरव = नीचे । चाकरत्--चकासु दीप्तौ । भन्तर मे समाधिस्थ - पुरुष भें परमेद्वरीय भरकादा का . वर्णेन हभ है । परमेइवर जब मस्तिष्क के मन्तं मँ सूयं का वर्णन भी साथ-साथ जानना चाहिए । सूयं के (रदिमभिः) रमयां दारा (नमः) हृदयाका्च (भरागृतम्) मर

English

The thread that goes through all celestial quarters within the Gāyatri, womb of life eternal. This God, etc.

अध्याय १३

श्लोक 5.21

सर्वे॑ अस्मिन् दे॒वा ए॑क॒वृतो॑ भवन्ति ।य ए॒तं दे॒वमे॑क॒वृतं॒ वेद॑

sarve asmin devā ekavṛto bhavanti | ya etaṃ devamekavṛtaṃ veda

हिन्दी अर्थ

तब महेदवर के प्रकादा से हृदयाकाश्च भर जाता है (छान्द० उप० अर्याय (सः) वह सण्ता -भर्थात् प्रेरक परमेदवर (धाता) सब का धारण- पोषण करतां है, (सः) वह (विधर्ता) विधियो का विधान करता है, (सः) तम्) ऊपर के द्युलोक मे भी भ्राचधित है । (ररिमिभिः) देखो मन्व (२) । सो ऽमा स वर्णः स खरः स महादेवः । रदिमिभि० ॥॥ (खः) वह् सविता (अयमा) भ्रयेमा है, (घः) वह (वरुणः) वर्ण है, (खः) बह (खः) ख है, (सः) वह (महादेवः) बदा-दव है । (रदिमभिः)

English

There are the settings, three the upward risings, three are the- spaces, yea, and three the heavens.

अध्याय १३

श्लोक 6.22

अध्यात्मम्।२२,२४ भुरिक्प्राजापत्या त्रिष्टुप्, २३ आर्ची गायत्री, २५ एकपदाऽसुरी गायत्री, २६ आर्ची अनुष्टुप्, २७-२८ प्राजापत्याऽनुष्टुप्।ब्रह्म॑ च॒ तप॑श्च की॒र्तिश्च॒ यश॒श्चाम्भ॑श्च॒ नभ॑श्च ब्राह्मणवर्च॒सं चान्नं॑ चा॒न्नाद्यं॑ च ।य ए॒तं दे॒वमे॑क॒वृतं॒ वेद॑

adhyātmam| 22,24 bhurikprājāpatyā triṣṭup, 23 ārcī gāyatrī, 25 ekapadā'surī gāyatrī, 26 ārcī anuṣṭup, 27-28 prājāpatyā'nuṣṭup| brahma ca tapaśca kīrtiśca yaśaścāmbhaśca nabhaśca brāhmaṇavarcasaṃ cānnaṃ cānnādyaṃ ca | ya etaṃ devamekavṛtaṃ veda

हिन्दी अर्थ

सविता के भिन्न-मिन्न गुणकरमो की दष्टि से, भयमा भ्रादि नामहै। बहु सविता भग्नि है, बह ही सूये है, वह ही महायम है । (रषिभिः) ४७२ भरयर्ववेद-भाष्य काऽ १३ 1 सु०४ (एक दीर्षाणः) “एक जिन का "५ शिरोभूतं है एसे (दद्य) दस

English

We know thy triple place of birth, O Agni, we know the deities’’ triple generations. He who, as soon as born, laid broad earth open, and set the ocean in the air’s mid-region, This God, etc.

अध्याय १३

श्लोक 6.23

भू॒तं च॒ भव्यं॑ च श्र॒द्धा च॒ रुचि॑श्च स्व॒र्गश्च॑ स्व॒धा च॑।य ए॒तं दे॒वमे॑क॒वृतं॒ वेद॑

bhūtaṃ ca bhavyaṃ ca śraddhā ca ruciśca svargaśca svadhā ca| ya etaṃ devamekavṛtaṃ veda

हिन्दी अर्थ

(वत्साः) बच्चे, (युताः) परस्पर मिलकर, (तम्) उष पिता का (उप- तिष्ठन्ति) उपस्थान करते हैः पुजन करते हँ । (रदिमिभिः) देखो रिरोभूत मन । मन सहित ५ ज्ञानेन्द्रिय पुत्र रूप हो कर; निज . परमेश्वर सब जगत् का पिता होने से मन भौर १० इन्द्रियों का भी पिता विषयों को ग्रहण करती है, तथा निज शक्तियो को परमेश्वरारपित करती

English

Thou, Agni, kind with lights and mental powers, hast up in heaven shone as the Sun, 206

अध्याय १३

श्लोक 6.24

य ए॒तं दे॒वमे॑क॒वृतं॒ वेद॑

ya etaṃ devamekavṛtaṃ veda

हिन्दी अर्थ

सब को थामने वाले परमेरवर के प्रति, हाथो, पादो, वाणी, श्रोत तथा चक्षु दवारा सदा भेट देते है, भर्थात् निज शक्तियों को समर्पित कर उस का पूजन करते ह । इसी प्रकार मन सहित १० इन्द्रियां निजं पितृरूप सविता के सूर्यपशक्च मे “एक शीर्षाणः” जिन १० मसे एकचिरोभूत है -रेसा . नेपच्यून उल्का समूह (7611008), तथा चन्द्रमा” । इन मे से पुथिवी” . से मुखिया है । ये सब सूयं से उत्पन्न है, इसलिये सुर्यं के वत्स है । ये सूरय की परिक्रमाएं कर रहे है, मानो इस हारा सूर्॑-पिता का उपस्थान -कर रहे है । उल्का समूह किसी समय एक ग्रह (1४7०६) था-टेखा फाश्चात्य ज्योतिविद् मानते है । भरतः उल्का समूह मी ग्रहरूप. है । ।

English

enkindled. The Maruts, sons of Prisni, sang his praises what time the Gods gave Rohita his being. This God, etc.

अध्याय १३

श्लोक 6.25

स ए॒व मृ॒त्युः सो॒३ऽमृतं॒ सो॒३ऽभ्वं॑१ स रक्षः॑

sa eva mṛtyuḥ so3'mṛtaṃ so3'bhvaṃ1 sa rakṣaḥ

हिन्दी अर्थ

स्थेम नब कोशा विष्टम्मा नवधा हिताः ॥१०॥ पथाद् माञ्च आ त॑न्वन्ति यदुदेवि वि भांसति। रदविभि ०॥७॥ दौ जाती है" तब (यद्) जो चक्र (उदेति) खिलता है, वह् (वि भासति) चमक उठता है । (रदिमभिः) देखो मन्त्र २। को-डोडी की तरह खिल करः; प्रकाश देने लगते ह । (एषः मारतः गणः) यह वायुप्रो का समह॒ (तस्य) उ त सविता. का है ।. (सः) वह वायु समूह (शिक्याङृतः) छिक्के मँ घरी वस्तु के समान

English

Giver of breath, giver of strength and vigour, he whose com- mandment all the Gods acknowledge,

अध्याय १३

श्लोक 6.26

स रु॒द्रो व॑सु॒वनि॑र्वसु॒देये॑ नमोवा॒के व॑षट्का॒रोऽनु॒ संहि॑तः

sa rudro vasuvanirvasudeye namovāke vaṣaṭkāro'nu saṃhitaḥ

हिन्दी अर्थ

, (एति) गति करता है । सवितापरमेवर । मारुतोगणः प्राण, प्राप, समान, व्यान, उदान प्रादि गण । यहं दारीरल्पी छक्के मे घरा हुभ्रा शरीर मे गति करता है । परन्तु इस गण रदिमयों दवारा हृदयाकाश्च भर गया है, क्योंकि ढका हुश्रा महेदवर . दयाकाश मेँ भ्राया है । देखो (मन्व २)! ४७४ भ्रथरवेवेद-माष्य कां० १३। सुर ४

English

He who is Lord of this, of man and cattle, This God, etc. The single-footed hath outstepped the biped, the biped overtakes the triple-footed. The quadruped hath wrought when bipeds called him, standing and looking on the five

अध्याय १३

श्लोक 6.27

तस्ये॒मे सर्वे॑ या॒तव॒ उप॑ प्र॒शिष॑मासते

tasyeme sarve yātava upa praśiṣamāsate

हिन्दी अर्थ

(तस्य) उस सविता के (इभे) ये (नव) नौ (कोशाः) कोश हैः (विष्ट्म्भाः) जो कि सविता कोथमि हृए है, भौर (नवधा) नौ प्रकार से (हिताः) स्थापित कयि हँ । परमेदवर् के थामने के स्थान, (बृहदा० भ्राघार है । ये नवकोश सविता परमेदवर को थामे हए है भ्रौर नौ प्रकार (खः) वह सविता (भ्जाभ्यः) प्रजा के मले के लिये (वि परयति) १. जो परमेदवर जगदाधार है, दूलोक भ्रौर मू लोक कोथमे हृशहैः

English

collected. This God is wroth offended by the sinner that wrongs the

अध्याय १३

श्लोक 6.28

तस्या॒मू सर्वा॒ नक्ष॑त्रा॒ वशे॑ च॒न्द्रम॑सा स॒ह

tasyāmū sarvā nakṣatrā vaśe candramasā saha

हिन्दी अर्थ

९ कोश थामते है यह कथन यद्यपि संगत प्रतीत नहीं होता। तोभीइस का भरमिप्राय यह है कि संसार में कोई एेसा पदार्थ नही, सिवाय -इन नौ कोगों के समुह ध्यानी होकर परमेदवर के दछन पा सके । इस लिये ४ कोर्थो के समूह को सविता के “विष्टम्भाः" कहा है । अं “उल्का समूह” की गणना करनी चाहिए, जो कि मङ्गल भौर बृहस्पति के मध्य मं गति करते है, जोकि पादबात्य उयोतिषिरयो के भरनुसार प्रहरूप थे, भ्रौर किसी कारण दस ग्रह के फट जाने से भ्रव उल्काङूप (०6688) हो गए हैःजोकि राति भँ टूटने तारा के श्प मं कभी-कभी दुष्टिगोचर होते है । इन्दं उल्कापात कहते है 4.

English

Brāhman who hath gained this knowledge. Agitate him, O Rohita; destroy him: entangle in thy snares the Brāhman’s tyrant.

अध्याय १३

श्लोक 7.29

अध्यात्मम्।२९, ३३, ३९-४०, ४५ आसुरी गायत्री, ३०, ३२,३५-३६, ४२ प्राजापत्याऽनुष्टुप्, ३१ विराट् गायत्री, ३४ साम्नी उष्णिक्, ३७-३८ साम्नी उष्णिगनुष्टुप्, ४१ साम्नी बृहती, ४३ आर्षी गायत्री, ४४ साम्नी अनुष्टुप्।स वा अह्नो॑ऽजायत॒ तस्मा॒दह॑रजायत

adhyātmam| 29, 33, 39-40, 45 āsurī gāyatrī, 30, 32,35-36, 42 prājāpatyā'nuṣṭup, 31 virāṭ gāyatrī, 34 sāmnī uṣṇik, 37-38 sāmnī uṣṇiganuṣṭup, 41 sāmnī bṛhatī, 43 ārṣī gāyatrī, 44 sāmnī anuṣṭup| sa vā ahno'jāyata tasmādaharajāyata

हिन्दी अर्थ

कां १३।सु०४ भ्रथवंवेद-माष्य . ४७ (इदम्) यह (सहः) बलशाली जगत् (तम्) उस सविता म (नि- एक दहै, (एकवृत्) एक महाच्द्ति खूप विद्यमान है, (एक एव) एक हा है (देखो १३।४।(२)१६-१८) । - “तव् रे तदन्तिके" (यजु ४०।१) । = एते अस्मिन् देवा एकतो मवन्ति ॥१३॥ (एते) ये (देवाः) सव दिव्य -पदार्थ, (स्मिन्) इस सविता पर- मेरवर मे, (एक वृतः) भर्थात् इस एकं मे वतंमान (भवन्ति) होवे है 1

English

Born is the darksome Mother’s Son, the whitely shining Calf of Night.

अध्याय १३

श्लोक 7.30

स वै रात्र्या॑ अजायत॒ तस्मा॒द् रात्रि॑रजायत

sa vai rātryā ajāyata tasmād rātrirajāyata

हिन्दी अर्थ

(कीतिः च) उस के सम्बन्ध मे संकीतेन, (यशः च) उस का यश (भम्भः च) ज्ञान की दीप्ति, . (नभः च) उस. के पापकमा का हिसन, सौर परिवारमें सयं एक ही है । प्रौर सब ग्रह॒ इसी एक के .भराश्रय म एकवृतः ह । । ४७६ ( "+ भथर्वेवेद-माष्यः कां० १३। सुर 1 जो कि (एतम्) इस सविता क .(एकवृतम् देवम्) एकमात्र देव

English

He, Rohita, ascendeth up to heaven, hath mounted to the heights. A glorification of the Sun as the only Deity Down looking, on the ridge of sky Savitar goes to highest heaven.

अध्याय १३

श्लोक 7.31

स वा अ॒न्तरि॑क्षादजायत॒ तस्मा॑द॒न्तरि॑क्षमजायत

sa vā antarikṣādajāyata tasmādantarikṣamajāyata

हिन्दी अर्थ

है, उसे सब कुछ प्राप्त हो जाता है 1 प = 4 न दसरा, न तीसरा, भौर न -चौथा परमेश्वर कहा जाता है । (य ; न पांचवां, नछटा, भ्रौरन भी सातवां परमे्वर कंहा जाता है। न भ्राठवां, न नौवां श्रौर न भी दसवां यहं परमेद्वर का जाताः है । भ्रभिगप्राय २३-५का यहद कि परमेश्वर को जो एक मात्र देव

English

To misty cloud filled with his rays Mahendra goes encompassed round. Creator and Ordainer, he is Vāyu, he is lifted cloud.

अध्याय १३

श्लोक 7.32

स वै वा॒योर॑जायत॒ तस्मा॑द् वा॒युर॑जायत

sa vai vāyorajāyata tasmād vāyurajāyata

हिन्दी अर्थ

जानता है, उसं के लिये परमेश्वर. भरतिरिवत रौर कोई उपास्य नही । रूप है । परतः दस तक वणन हृभा है । 6... . .“ (सः) बह परभेदवर (सर्वस्म) सब के भले के -लिये - (वि प्यति) कां० १३। घुर ४ भ्रययेवेद-माष्य । ४७७.

English

Rudra, and Mahādeva, he is Aryaman and Varuna. Agni is he, and Siirya, he is verily Mahāyama. Calves, joined, stand close beside him, ten in number, with one single head.

अध्याय १३

श्लोक 7.33

स वै दि॒वोऽजायत॒ तस्मा॒द् द्यौरध्य॑जायत

sa vai divo'jāyata tasmād dyauradhyajāyata

हिन्दी अर्थ

तमिदं निगैतं सहः स पष एव एकेकं एव । य एतं ॥७,।(२०) (इदम्) यह (सहः) बलश्चाली जगत् (तम्) उस सविता मे (निग- है । (य एतम्) देखो मन्व (२) । गः . स्वँ अस्मिन् देवा एकतो मवन्ति । य फतं० ॥८॥ (२१) (से) सब (देवाः) दिव्य पदार्थ, (परस्मिन्) इस सविता मे (एक-

English

From west to east they bend their way: when he mounts up he shines afar. His are these banded Maruts: they move gathered close like porters’ thongs.

अध्याय १३

श्लोक 7.34

स वै दि॒ग्भ्योऽजायत॒ तस्मा॒द् दिशोऽजायन्त

sa vai digbhyo'jāyata tasmād diśo'jāyanta

हिन्दी अर्थ

बतः) भर्यात् इस एक भँ वतंमान (भवन्ति) हते द (य एतम्) देखो य एते देवमेकडृतं वेदं ॥॥ (२४) = (बहम च) वेद-वेदाथे. का.भान, (तपः च) तपोमय जीवन, (कीतः (नभः च) पापकम का हिसन, (ब्राहमण वचंसम् च) ब्रहवेत्ताभो का तेज, , परमेश्वर को (एकवृतम् देवम्) एकभात्र देव (वेद) ' जानता है । - .

English

To misty cloud filled with his rays Mahendra goes encompassed round, His are the nine supports, the casks set in nine several places here. He keeppeth watch o’er creatures, all that breatheth and that breatheth not.

अध्याय १३

श्लोक 7.35

स वै भूमे॑रजायत॒ तस्मा॒द् भूमि॑रजायत

sa vai bhūmerajāyata tasmād bhūmirajāyata

हिन्दी अर्थ

. (खः) व्ह सविता परमेदवर (एव) ही. (मूत्युः) मृत्यु है,. (खः) - परमेश्वर हीं मृत्युरूप से प्राणियों की मूस करता भौर भ्रमूत रूप करता है । वह दी सृष्टि -विना्क श्रौर सृष्टि रक्षक है। - स ददो ष॑सुवनिर्वसुदेरये नमो वाके पटर संहितः ।॥५॥ (२६) (सः) बह (खः) रौद्रङूम रलाने वाला है, (वसुदेये) सम्पत्तियां के प्रदान भे (वसुवनिः) सम्पत्तिर्यो का विभाग करने वाला, (नमोवाके). - (खः) पापौ को, उन के कमो क धनुर, रद्र मै, परमेषवर, ।

English

This conquering might hath entered him, He is the sole the simple One, the One alone. In him these Deities become simple and One

अध्याय १३

श्लोक 7.36

स वा अ॒ग्नेर॑जायत॒ तस्मा॑द॒ग्निर॑जायत

sa vā agnerajāyata tasmādagnirajāyata

हिन्दी अर्थ

उन खला करं, सुपथ मे प्रवत्तितै कर, उनं का. हित.करवा है † वसुवनिः = याम्) +-भद् (गतौ) +कारः =हिसा को विगत करने वाला भरनूसं हितः. , = कर्मानुसार सुज दुःख प्रदाने, करने से परमिर्वर सदा हित करता है । राष्ट; म न्यायाषीश दण्डविषान दवारा भजा का हितः दी. कते. ।;.;. वि... कपिः कृत संधब्दे=संकोतेनं। भूतं च म्यं चयथा परिणाम

English

Renown and glory, and force and cloud, the Brāhman’s splendour, and food, and nourishment, To him who knoweth this God as simple and one.

अध्याय १३

श्लोक 7.37

स वा अ॒द्भ्योऽजायत॒ तस्मा॒दापो॑ऽजायन्त

sa vā adbhyo'jāyata tasmādāpo'jāyanta

हिन्दी अर्थ

कां १३ ॥ सुर्य भयववंवेद-माष्य ४७९ . उस सविता परमेदवर.के (परिषम्) उत्तम-शासन की (उप भ्रासते) उपा- खना करते है, भर्थात् उस के भज्ञापालक है! । 2 नक्षत्रा एना (रविमागं भें वतमान) नक्षत्र । वेदानुखार, . “भभिजित्" । नको के लिये देखो (भयव ० १९।७,८ ) के मन्व । , (सखः) वहं सविता, भर्थात् भर रक परमेर्वर (वं) निर्य से (महः)

English

Neither second, nor third, nor yet fourth is he called; He is called neither fifth, nor sixth, nor yet seventh

अध्याय १३

श्लोक 7.38

स वा ऋ॒ग्भ्योऽजायत॒ तस्मा॒दृचो॑ऽजायन्त

sa vā ṛgbhyo'jāyata tasmādṛco'jāyanta

हिन्दी अर्थ

(भरहः) दिन (अजायत) पदा हुभाहै। वि दिन कायं ह, प्रतिदिनं नया दिन भ्राता ह । इल काये का कोई चेतन-कर्ता होना चाहिए, जैसे करि षट-पट . भ्रादि कार्यो के. कुम्हार भोर भ्रगले १० संख्या के मर्तो तक जाननी चाहिए । तवि (सः वै) वह निक्नय से (राच्या). रातिं से (भजायत) .्कट भा ह योक (तस्मात्) उतर से (रातनः) रानि. (भनायत) पैदा ईहै। , :

English

He is called neither eighth, nor ninth, nor yet tenth. He watcheth over creatures, all that breatheth and that breatheth not. This conquering might hath entered him. He is the sole, the simple One, the One alone,

अध्याय १३

श्लोक 7.39

स वै य॒ज्ञाद॑जायत॒ तस्मा॑द् य॒ज्ञोऽजायत

sa vai yajñādajāyata tasmād yajño'jāyata

हिन्दी अर्थ

४८० भ्रथर्ववेद-माष्य क्रां० १३ । सु०४ रथं है जन्म धारण करना। दिन भरौर राति भादि से सविता-परमेरवर का (सः वै) वह निर्य से (वायोः) वायु से (जायत) कट इरा है, क्योंकि (तस्मात्) उस से .(वाधुः) वायु (भ्रजायत) पदा हुई है । (सः वं) बहू निद्चथ से (दिवः) चुलोक से (प्रजायत) प्रकट हू्रा

English

In him these Deities become simple and One Devotion and Religious Fervour, and renown and glory, and force and cloud, the Brāhman’s

अध्याय १३

श्लोक 7.40

स य॒ज्ञस्तस्य॑ य॒ज्ञः स य॒ज्ञस्य॒ शिर॑स्कृ॒तम्

sa yajñastasya yajñaḥ sa yajñasya śiraskṛtam

हिन्दी अर्थ

. (सः व ) वह निदवय से. (दिग्य) दिक्षाप्रों से (्रजायतत) प्रकट हमा है, क्योंकि (तत्मात्)उस से (दिशः) दिशाए (अजायन्त) पैदा हुई है । सवे वूष्ं८नयह तस्मद् सूभिरजायव ॥७॥ (३५) . (खःवै) यह निश्वयसे (भ्रमेः) भूमि से (भ्रजायत) प्रकटं हृभरा है, क्योंकि (तस्मात्) उषसे (भुमिः) भूमि (भ्रजायत) पेद हरहि. वे (सः वै) वह निदचय से (श्रद्म्यः) जलो से. (्रजायत) प्रकट हमा

English

splendour, and food and nourishment. And past and future, and Faith and lustre, and heaven and sweet oblation, To him who knoweth this God as simple and One.

अध्याय १३

श्लोक 7.41

स स्त॑नयति॒ स वि द्यो॑तते॒ स उ॒ अश्मा॑नमस्यति

sa stanayati sa vi dyotate sa u aśmānamasyati

हिन्दी अर्थ

(खः स) वह निदचय से (ऋगम्यः) ऋचाभ्नो से ( श्रजायत ). प्रकट . भें-वेद प्रेरित क्रिये । साथ ही यह भो जानना चाहिए कि ऋवाभ्रो से सविता .५३ मन्व, इस सम्बन्ध मे निम्नरूप हैँ यथाः-- -. ध प्रजापति ने ३३ लोको का निर्माण किया। उनके प्रज्ञानके लिये उसने . १. भ्रथर्व० (११।७।५-१९) मे नाना, यञो तथा य्नागों का कयन हृभा है,

English

He, verily, is death, he is immortality, he is the monster, he is the fiend. He is Rudra, winner of wealth in the giving of wealth; in uttering homage he is the sacrificial

अध्याय १३

श्लोक 7.42

पा॒पाय॑ वा भ॒द्राय॑ वा पुरु॑षा॒यासु॑राय वा

pāpāya vā bhadrāya vā puruṣāyāsurāya vā

हिन्दी अर्थ

४८२ श्रयवेद-माष्य काऽ १३। सु ट ने इन्हें रचा है, ताकिं इन का यथावत् प्रयोग भौर उपयोग किया जा सके कल्पित किया गया है । . वेदों मे संसार को शरीररूप मान कर, भौर संसार के घटक रट रूप में तरणित क्रिया है । यथा भ्रथवं ० १०।७।१८-३४; तथा यजु ° ३१।११- १३) । संसार श्रौर परमेश्वर मे शरीर-शरीरिभाव का वर्णन यह् दशनि के लिये हुश्रा है ताकि यह अनुभव किया जा सके कि जसे भ्रस्मदादि

English

exclamation Vashat duly employed. All sorcerers on earth obey with reverence his high behest. All constellations yonder, with the Moon, are subject to his will.

अध्याय १३

श्लोक 7.43

यद् वा॑ कृ॒णोष्योष॑धी॒र्यद् वा॒ वर्ष॑सि भ॒द्रया॒ यद् वा॑ ज॒न्यमवी॑वृधः

yad vā kṛṇoṣyoṣadhīryad vā varṣasi bhadrayā yad vā janyamavīvṛdhaḥ

हिन्दी अर्थ

परेरणाभ्रों दारा सक्रिय. होते है, वसे संसार श्रौरं संसारावयव भी किस विभ परन्तु इस से कहीं यह न॒ सम लिया जाय कि परमेश्वर वस्तुतः (सः) वह सविता-परमेश्वर ( स्तनयति ) गर्ज॑ता है, (सः (श्रत्यति) फकता है,. बर्साता है । -कर,'-पह कहा है कि सविता ही गजन, चयोतन, भ्रौर भोले फंकने के कार्यं

English

He was brought forth from Day: and Day derives his origin. from him.

अध्याय १३

श्लोक 7.44

तावां॑स्ते मघवन् महि॒मोपो॑ ते त॒न्वः श॒तम्

tāvāṃste maghavan mahimopo te tanvaḥ śatam

हिन्दी अर्थ

मानुष शक्ति से बाह्य घटनाभो का प्रं रक परमेश्वर ही है॥ 1 कौर १३। सु०४ भरथवेद-भाष्य .. . ४३ (पापाय) पापी के लिये (वां) भौर (भद्राय) मद्रके लिये(वा) भ्रौर (पुरुषाय) पुरुष के लिये (वा) तथा (भ्रसुराय)ग्रसुर के लिये-- वहु गर्जन, मन्व मेँ प्रलय कालका वर्णेन है, जिस मे मले-बुरे, भरास्तिक- नास्तिक सब का संहार होता है। पुरुषाय=धुरि देहे वसति शेते वा।

English

He was brought forth from Night: and Night derives her origins from him. He was produced from Air: and Air derives its origin from him. He was produced from Wind: and Wind derives his origin from. him.

अध्याय १३

श्लोक 7.45

उपो॑ ते॒ बध्वे॒ बद्धा॑नि॒ यदि॒ वासि॒ न्यर्बुदम्

upo te badhve baddhāni yadi vāsi nyarbudam

हिन्दी अर्थ

. प्रलया्थं सब.का समुच्चय होला है । पाप-मद्र, भौर पुरुष-भरसुर परपस्र में (यद्वा) रौर जो (आौषधीः) भ्रोषधियों को - (कृणोषि) तु पैदा समदाय की (अ्रवीवघः) वृद्धि करता हैः- - मन्वरमेसृष्टिकीरक्षाका वर्णेन है। सब (ते महिमा) तेरी महिमा मात्र है, (उप उ) तथा (ते) तेरे कार्यो के

English

From Heaven was he produced: and Heaven derives his origin from him. He sprang from regions of the sky: from him the heavenly regions sprang.

अध्याय १३

श्लोक 8.46

अध्यात्मम्।४६ आसुरी गायत्री, ४७ यवमध्या गायत्री, ४८ साम्नी उष्णिक्, ४९ निचृत्साम्नी बृहती, ५० प्राजापत्याऽनुष्टुप्, ५१ विराड् गायत्री।भूया॒निन्द्रो॑ नमु॒राद् भूया॑निन्द्रासि मृ॒त्युभ्यः॑

adhyātmam| 46 āsurī gāyatrī, 47 yavamadhyā gāyatrī, 48 sāmnī uṣṇik, 49 nicṛtsāmnī bṛhatī, 50 prājāpatyā'nuṣṭup, 51 virāḍ gāyatrī| bhūyānindro namurād bhūyānindrāsi mṛtyubhyaḥ

हिन्दी अर्थ

ना (यदिवा) चाहे (नडम्) भरो विस्तार वाला (श्रधि)त्. है, "ज (ते) तेरे (बद्धे) बन्धन में (उप ऊ बद्धानि) न (५ ५ न्यबु दम् = का दसगुना । भद १०० मिलियन । मिलि- होकर उन्हें भ्रपने बन्न में. बावे हुए है । - इन्रः = इदि परमेदवये । भतः इवरः=-परमेरवर । सविता को इन्द्र

English

He is the offspring of the Earth: Earth hath her origin from him. He was produced from fire: and fire derives its origin from him. He is the waters’ offspring: and from him the waters were produced.

अध्याय १३

श्लोक 8.47

भूया॒नरा॑त्याः॒ शच्याः॒ पति॒स्त्वमि॑न्द्रासि वि॒भूः प्र॒भूरिति॒ त्वोपा॑स्महे व॒यम्

bhūyānarātyāḥ śacyāḥ patistvamindrāsi vibhūḥ prabhūriti tvopāsmahe vayam

हिन्दी अर्थ

(इद्र) है परमैशवये वाले ! (भरात्याः भयान्) भ्रदानी से बडा, हम (त्वा) तेरी (उपास्महे) उपासना करं है! न तथा परमदवयं का भी स्वामी है, भरतः दानी सेमांग न करते हए हम तेरी शरण भे श्रते है । ठर व्यापक, विभरूतियों वाला, तथा सवंशक्तिमान् है । भरतः हम तेरी ही उपासना करते है । (पश्यतः ) है सव दरष्टा परमेदवर ! (ते नमः भरस्तु) तुमे नमस्कार अभयेन यज्॑सा तेज॑सा आाह्मणवचेसेनं ॥४॥ (४९)

English

From holy verses was he born: from him the holy verses sprang. He is the son of sacrifice: and sacrifice was born from him.

अध्याय १३

श्लोक 8.48

नम॑स्ते अस्तु पश्यत॒ पश्य॑ मा पश्यत

namaste astu paśyata paśya mā paśyata

हिन्दी अर्थ

(सहः) बलवान तु है (इत्ति) इस प्रकार जानकर (वयम्) हम (त्वा उपा- स्महे) तेरी. उपासना करते है । ४ च १. “प् या स्पश्” वैदिक धातु है जिस का भरं है, देखना । “स्प” वद ५ भय्ववेद-माष्य काम १३। सू०.४ स्थान तु है (इति) इस प्रकार जानकर (वयम्) हम (त्वा) तेरी . (उपाः

English

Sacrifice, sacrifice’s Lord, he was made head of sacrifice. He thundereth, he lighteneth, he casteth down the thunder-stone For misery or happiness, for mortal man or Asura.

अध्याय १३

श्लोक 8.49

अ॒न्नाद्ये॑न॒ यश॑सा॒ तेज॑सा ब्राह्मणवर्च॒सेन॑

annādyena yaśasā tejasā brāhmaṇavarcasena

हिन्दी अर्थ

(ऋ० मा०.भूमिका, महषि दयानन्द) । सुभूमु वः=सम्भवतः सु (स्वः) + यह जानकर (वयम्) हम (त्वा) तेरी (उपास्महे) उपासना करते है । (भवद्वसुः) वसुर को पैदा करने वाला, (इवदरसुः) वसुरभों भे रेवव्ये स्थापित करने वाला, (संयद्वसुः) वसुभ्रों का संयमन करने वाला, (भराय. द्सुः) वसुप्रो में प्रयत्नशील, उन.मे गति.देने वाला, तु है (इति) यह जान कर (वयम्) हम (त्वा) तेरी (उपास्महे) उपासना करते है ।

English

Whether thou formest growing plants, or sendest rain for happiness, or hast increased the race of man,

अध्याय १३

श्लोक 8.50

अम्भो॒ अमो॒ महः॒ सह॒ इति॒ त्वोपा॑स्महे व॒यम्।नम॑स्ते॰ ।अ॒न्नाद्ये॑न॒॰

ambho amo mahaḥ saha iti tvopāsmahe vayam| namaste॰ | annādyena॰

हिन्दी अर्थ

द. प्रयत शील, भ्रथवा उन मँ गति के वाला-॥ . , कां०-१३। सू° ४ भ्रथवेवेद-माप्य . ८७. अन्नाचैन यश॑सा तेज॑सा ब्राह्मणवचेसेनं ।।५॥ (५६) (अन्नाघेन) खाद्य रन्न से, (यदसा) यश से, (तेजसा) तेज से,

English

Such is thy greatness, liberal Lord! A hundred bodily forms are thine. Millions are in thy million, or thou art a billion in thyself. Stronger than immortality is Indra: stronger thou than deaths;

अध्याय १३

श्लोक 8.51

अम्भो॑ अरु॒णं र॑ज॒तं रजः॒ सह॒ इति॒ त्वोपा॑स्महे व॒यम्।नम॑स्ते॰ ।अ॒न्नाद्ये॑न॒॰

ambho aruṇaṃ rajataṃ rajaḥ saha iti tvopāsmahe vayam| namaste॰ | annādyena॰

हिन्दी अर्थ

युक्त हमे करके, कृपादृष्टि से देख । ‹ १. ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका-सं"-युःमी" १००.०० - ' ५. ऋग्वेद की ऋक्संख्या- युधिष्ठिर मीमांसक ५.०० ७. माध्यन्दिनिपदपाठः (यजुरवेद-पदपाठ) २००.०० ११. अथर्ववेदीया बृहत्सर्वानुक्रमणिका- भूमिका तथा

English

Yea, stronger than Malignity art thou, O Indra, Lord of Might. Calling thee Master, Sovran Chief, we pay our reverence to thee.

अध्याय १३

श्लोक 9.52

अध्यात्मम्।५२-५३ प्राजापत्याऽनुष्टुप्, ५४ द्विपदार्षी गायत्री।उ॒रुः पृ॒थुः सु॒भूर्भुव॒ इति॒ त्वोपा॑स्महे व॒यम् ।नम॑स्ते॰ ।अ॒न्नाद्ये॑न॒॰

adhyātmam| 52-53 prājāpatyā'nuṣṭup, 54 dvipadārṣī gāyatrī| uruḥ pṛthuḥ subhūrbhuva iti tvopāsmahe vayam | namaste॰ | annādyena॰

हिन्दी अर्थ

१३. वैदिक-निषण्टु-संग्रह- डो" धर्मवीर १००.००. १४. वैदिक-सिद्धान्त-मीमांसा- युधिष्ठिर मीमांसक- वेदविषयकं सत्रह १६. वेद-श्रुति-आम्नाय-संज्ञामीमांसा- युधिष्ठिर मीमांसक . ५.०० २२. वैदिक वाङ्मय में प्रयुक्त विविध स्वरांकन

English

Worship to thee whom all behold! Regard me, thou whom all regard, With food, and fame, and vigour, with the splendour of a Brāhman’s rank

अध्याय १३

श्लोक 9.53

प्रथो॒ वरो॒ व्यचो॑ लो॒क इति॒ त्वोपा॑स्महे व॒यम्।नम॑स्ते॰ ।अ॒न्नाद्ये॑न॒॰

pratho varo vyaco loka iti tvopāsmahe vayam| namaste॰ | annādyena॰

हिन्दी अर्थ

प्रकार- युधिष्ठिर मीमांसक- ४ १२.०० लेखक- श्री देवेन्द्र कुमार कपूर। ५०.०० २४. चेदों का प्रहत तथा उनके प्रचार के उपाय- युधिष्ठिर मीमांसकः २५. देवापि ओर शान्तनु के वैदिक आख्यान का वास्तविक स्वरूप- २७. निरुक्तकार ओर वेद में इतिहास . ५.०० २९. वेद के आख्यानों का यथार्थं स्वरूप-

English

We pay thee reverence calling thee strength, power, and might, and conquering force. We pay thee reverence calling thee red power, the silvery expanse.

अध्याय १३

श्लोक 9.54

भव॑द्वसुरि॒दद्व॑सुः सं॒यद्व॑सुरा॒यद्व॑सु॒रिति॒ त्वोपा॑स्महे व॒यम्

bhavadvasuridadvasuḥ saṃyadvasurāyadvasuriti tvopāsmahe vayam

हिन्दी अर्थ

२०. कतिपय वैदिक शब्दों के अर्थो की मीमांसा- ५.०० ३३. छया वेद् मेँ आयो ओर आदिवासियों के युद्धो का वर्णन. है ?- ३४. उरु-ज्योतिः-वासुदेवशरण अग्रवाल ७०.०० ३५. वेदो की प्रामाणिकता-श्रीनिवास जी =, ४.०० २७. कात्यायन-गृह्यसूत्रम्- ( मूल ) ४०.००

English

We pay thee reverence calling thee vast, wide, the good, the universe. We pay thee reverence, calling thee extension, compass, width, and world. We pay thee reverence, calling thee rich, opulent in this and that, with wealth unceasing and

अध्याय १३

श्लोक 9.55

नम॑स्ते अस्तु पश्यत॒ पश्य॑ मा पश्यत

namaste astu paśyata paśya mā paśyata

हिन्दी अर्थ

४३. संस्कार-विधि-ऋषि दयानन्द कृत . ४ ३०.०० ४५. संस्कार-विधि-मण्डनम्- प॑ रामगोपाल- २०.००. ४६. वेदोक्त-संस्कारप्रकाश- पः बाला जी विदुलगावस्कर कृत मराठी का हिन्दी अनुवाद ३०.०० ५२. निघण्टु-निर्वचनम्- देवराजयज्वाकृत १५०.०० , ६३. माधवीया-धातुवृत्तिः-आचार्य सायण रचित धातुपाठ की

English

secure Worship to thee whom all behold! Regard me, thou whom all regard.

अध्याय १३

श्लोक 9.56

अ॒न्नाद्ये॑न॒ यश॑सा॒ तेज॑सा ब्राह्मणवर्च॒सेन॑

annādyena yaśasā tejasā brāhmaṇavarcasena

हिन्दी अर्थ

परिभाषाओं की प्रामाणिक व्याख्या- . , ६०.०० ६५. काशिका-वामनजयादित्य- सं- -विजयपाल विद्यावरिधि ५,००.०० जन्म-स्थान- मार्च, १८८९ ई» में वजीराबाद, पर नियुक्त तथा सन् १९४२ में वहाँ से सेवामुक्त हए। अनुसन्धान- सन् १९२२-२४ मे परोपकारिणी सभा अजमेर में। सन् १९५६-५७ आर्यं सार्वदेशिक वाटिका में साथ ही " वैदिक अनुसन्धान ' त्रैमासिक पत्रिका का सम्पादन भी। रहने के कारण आपको ४ स्वर्णपदक ओर एक रजतपदकं प्राप्त ह। “ - निधन- १०२ वर्षं की आयु मेँ ११ माच सन् १९९१।

English

With food, and fame, and vigour, with the splendour of a Brāhman’s rank. 208

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता · Identifier:

Atharva Veda — Chapter 13

अथर्ववेद

संस्कृत संस्करण · Sanskrit Edition:

Imported text; printed edition not recorded

Digitised text taken from the archive linked below. It has not been collated against a printed edition by this site.

प्रकाशक अथवा पुरालेखागार · Archive:

Open Sanskrit text archives (see the source link)

डिजिटल पुरालेख देखें
गणना पद्धति टिप्पणी · Numbering System:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.