Atharva Veda· Atharvaveda Saṁhitā
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अध्याय 10 / 20

Kanda 10

काण्ड 10

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पूर्ण अध्याय पाठ105 श्लोक

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अध्याय १०

श्लोक 8.1

ज्येष्ठब्रह्मवर्णनम्।१-४४ कुत्सः।आत्मा।त्रिष्टुप्, १ उपरिष्टाद्विराड्बृहती, २ बृहतीगर्भानुष्टुप्, ५ भुरिगनुष्टुप्, ६, १४, १९-२१, २३, २५, २९, ३१-३४, ३७-३८, ४१, ४३ अनुष्टुप्, ७ पराबृहती, १० अनुष्टुब्गर्भा, ११ जगती, १२ पुरोबृहती त्रिष्टुब्गर्भाऽऽर्षी पङ्क्तिः, १५, २७ भुरिग्बृहती, २२ पुर उष्णिक्, २६ द्व्युष्णिग्गर्भानुष्टुप्, ३० भुरिक्, ३९ बृहतीगर्भा, ४२ विराड् गायत्री।यो भू॒तं च॒ भव्यं॑ च॒ सर्वं॒ यश्चा॑धि॒तिष्ठ॑ति ।स्व॑१र्यस्य॑ च॒ केव॑लं॒ तस्मै॑ ज्ये॒ष्ठाय॒ ब्रह्म॑णे॒ नमः॑

jyeṣṭhabrahmavarṇanam| 1-44 kutsaḥ| ātmā| triṣṭup, 1 upariṣṭādvirāḍbṛhatī, 2 bṛhatīgarbhānuṣṭup, 5 bhuriganuṣṭup, 6, 14, 19-21, 23, 25, 29, 31-34, 37-38, 41, 43 anuṣṭup, 7 parābṛhatī, 10 anuṣṭubgarbhā, 11 jagatī, 12 purobṛhatī triṣṭubgarbhā''rṣī paṅktiḥ, 15, 27 bhurigbṛhatī, 22 pura uṣṇik, 26 dvyuṣṇiggarbhānuṣṭup, 30 bhurik, 39 bṛhatīgarbhā, 42 virāḍ gāyatrī| yo bhūtaṃ ca bhavyaṃ ca sarvaṃ yaścādhitiṣṭhati | sva1ryasya ca kevalaṃ tasmai jyeṣṭhāya brahmaṇe namaḥ

हिन्दी अर्थ

दोनो “स्वारौ, हैप रमेदवेरीय नियम् रा. स्वेममेव सुरण करती रहूती ˆ , (न विजानामि) जै यथा्थंूप भँ नहीं जानता कि (यतरा) उन दोनो मसे ही, इस संसार पट को निगल. जाता है । (पुमान्) परमेश्वर-पुदष ने ही नाचैती हुई कहा है । ऋगवेद १४।७२।६ में जगत् के सर्जन में दिव्य-रावि्तियों के नाचने का वर्णेन हुमा है ।यथा--. -- ९ , : ; . थव् देवा यतयो यथा भुवनान्यपिन्वत ॥ :

English

To whom the Deities with hands, with feet, and voice, and ear, and eye. Present unmeasured tribute in the measured hall of sacrifice? Darkness is chased away from him: he is exempt from all dist- ress.

अध्याय १०

श्लोक 8.2

स्क॒म्भेने॒मे विष्ट॑भिते॒ द्यौश्च॒ भूमि॑श्च तिष्ठतः ।स्क॒म्भ इ॒दं सर्व॑मात्म॒न्वद् यत् प्रा॒णन्नि॑मि॒षच्च॒ यत्

skambheneme viṣṭabhite dyauśca bhūmiśca tiṣṭhataḥ | skambha idaṃ sarvamātmanvad yat prāṇannimiṣacca yat

हिन्दी अर्थ

मः ५४ हो पकपाव् रथात् › भर केष हो शनिाद्” , तो परस्र विरोष कां° १०। सुऽ. । भथरवेवेद-माष्य . २४३ : (या) जो (पुरस्तात्) सामने (गुलयत) शुती हृ है (या च) भौर बो / (पदचात्) पीछे की भ्रोर (ग्रा) .जो (विदवतः) विव. म (युज्यते) अती (त्वा). तु (पृच्कामि) म-पुता हूं कि (सा) वह (ऋचाम्) वेदवाणियो मँ परतिपादित्र (कतमा) कौन सी है १.५. ,

English

Though manifest, it lies concealed in the vast place they call the old: Therein is firmly stationed all the moving, breathing universe.

अध्याय १०

श्लोक 8.3

ति॒स्रो ह॑ प्र॒जा अ॑त्या॒यमा॑य॒न् न्य॑१न्या अ॒र्कम॒भितो॑ऽविशन्त ।बृ॒हन् ह॑ तस्थौ॒ रज॑सो वि॒मानो॒ हरि॑तो॒ हरि॑णी॒रा वि॑वेश

tisro ha prajā atyāyamāyan nya1nyā arkamabhito'viśanta | bṛhan ha tasthau rajaso vimāno harito hariṇīrā viveśa

हिन्दी अर्थ

यो देवभुत्तरा्न्तसुपासाति सनेतिन॑भ ।२ रं का (श्र॑दत्) भक्षण.करे, पान कर । - - प्राकृतिक रन्न का बहुभक्षण उपासन भे उपकारी “लघुत्व” (वेता ० उप, कृते है (उत) तथाः (भ्रद्य) वतमान कालं. मँ वरह . (पूनणवेः) पुनः-पुन नया भी. (स्यात्) होता रहता है । जसे कि ( भ्रहोरात्रे) दिन शरीर रात भिन्न (ख्पयोः) कूपो मेँ या एकमदूसंरे के रूप मे :(परजंयेति ). पुनःपुनः प्रकट

English

Those who in recent times, midmost, or ancient, on all sides. greet the sage who knows the Veda, One and all, verily discuss Āditya, the second Agni, and the threefold Hansa.

अध्याय १०

श्लोक 8.4

द्वाद॑श प्र॒धय॑श्च॒क्रमेकं॒ त्रीणि॒ नभ्या॑नि॒ क उ॒ तच्चि॑केत ।तत्राह॑ता॒स्त्रीणि॑ श॒तानि॑ श॒ङ्कवः॑ ष॒ष्टिश्च॒ खीला॒ अवि॑चाचला॒ ये

dvādaśa pradhayaścakramekaṃ trīṇi nabhyāni ka u tacciketa | tatrāhatāstrīṇi śatāni śaṅkavaḥ ṣaṣṭiśca khīlā avicācalā ye

हिन्दी अर्थ

जलो क नेता वे देव (कतमे) कौन से १ हैष + 1 मुखं वाला शेर तथा पञ्नि व्यक्तीकरणं (भ्वादिः) । अथवा "क देवो दारा दिशां का ज्ञान होता है 1 जहा से सूर्योदय होता ह चह न्= है,जहां वह भस्त होता-है वह प्र्चिम दिशा है। जिधर षिः ५ उत्तर दिया है, उसके सामने की "५ दक्षिण.दिशाहै। इ री ०५७२५ वायु.तथा सूर --ये.तीन .देव ब्ञिय-भाहुतिय । को फलदायी ४५५ को णुदध करते, रोगरनगश करते, वरषा करते, तथा स्वास्थ्य प्रदान करते भानो ये ३ देव यज्ञियाहृति्यौ को भ्रतिमान प्रदान करते 1.1 १, श्नापः का भथं “यक्त” भी होताः हं 1 यथा (अथवृं° म इजा सया (भवर १०२ , ११।२।१ १) 3 भ्रतः ९५०८ भंयववेदभाष्य की५.१०१ सृण

English

As sole God dwelling in the mind, first born, he still is in the womb. Forth from the full he lifts the full, the full he sprinkles with the full.

अध्याय १०

श्लोक 8.5

इ॒दं स॑वित॒र्वि जा॑नीहि॒ षड् य॒मा एक॑ एक॒जः ।तस्मि॑न् हापि॒त्वमि॑छन्ते॒ य ए॑षा॒मेक॑ एक॒जः

idaṃ savitarvi jānīhi ṣaḍ yamā eka ekajaḥ | tasmin hāpitvamichante ya eṣāmeka ekajaḥ

हिन्दी अर्थ

त्मा वाला, जीवात्मा का सखा परमेरवर । ¦ भंथववंवेद-भष्यि का०.१०। सुऽ ठ अकामो धीरो शतः स्वयम रसेन त्तो नं कत॑श्चनोनः । . जरारहित, (युवानम्) सदा युवाः (तम एव) उस परभेदवर को ही म रहता है, काय को धारण नहीं करता) परभेरेवरज्ञं व्यक्तिं मृत्यु से . भयभीत नहीं होता, क्योक्रिःशरीर त्यागः के पचत् उसने परमेदवर के -भनन्द्रसःका पान करना है 4 । ।

English

Who gave command unto the wind that blowet! Who ranged the five united heavenly regions?

अध्याय १०

श्लोक 8.6

आ॒विः सन्निहि॑तं॒ गुहा॒ जर॒न्नाम॑ म॒हत् प॒दम्।तत्रे॒दं सर्व॒मार्पि॑त॒मेज॑त् प्रा॒णत् प्रति॑ष्ठितम्

āviḥ sannihitaṃ guhā jarannāma mahat padam| tatredaṃ sarvamārpitamejat prāṇat pratiṣṭhitam

हिन्दी अर्थ

के यज्ञिय भ्रङ्खो का वणेन (२,३) । (४)- शतौदना. माता के “शमितारः तथा पक्तार (५) सब लोकलोकान्तरों-में जाने की क्षमता, (६, १०). । प्रदान करने वाली पारमेश्वरी मातां लोक, अन्तरिक्ष, तथा भूमि के. देवों को क्षीर, सपिः, मधु प्रदान करती है (१२) ) । (८) पारमेश्वरी; माता . का, पक्षिरूप् मे, उपासक को हृदयःचक्र से. मानो उड़ा कर, सर्हल्ार चक्र.मे पहुचाना (२५) । ॥

English

Who were the Gods who cared not for oblations! Which of them brought the sacrificial waters? 165

अध्याय १०

श्लोक 8.7

एक॑चक्रं वर्तत॒ एक॑नेमि स॒हस्रा॑क्षरं॒ प्र पु॒रो नि प॒श्चा ।अ॒र्धेन॒ विश्वं॒ भुव॑नं ज॒जान॒ यद॑स्या॒र्धं क्व॑१तद् ब॑भूव

ekacakraṃ vartata ekanemi sahasrākṣaraṃ pra puro ni paścā | ardhena viśvaṃ bhuvanaṃ jajāna yadasyārdhaṃ kva1tad babhūva

हिन्दी अर्थ

त्रदान तथा भार्लीवाद की प्रार्थना । (२६, २७) । . . (भधायताम् ) पापकम चाहने वालों के ( ५ न मुखानि) मुखो को (श्रपि „ विचारो, कमो का हनन करने वाली है पारमेदवरी मातः! तु हो, तथा ( यजमानस्य) यजमान के लिये (गातुः) मार्गेख्पहो 1 सम्पण करता है, उसेतु हि पारमेश्वरी मातः ! मागं प्रदं करती है । उन पर प्रतिबन्ध लगा देना ताकि वे प्रापो का प्रचार न कर सकं । सपत्नेषु = पापकम, शतु हैँ । इन परतुहे मातः वज्र प्रहार कर

English

One God inhabiteth the earth we live on; another hath encom- passed air’s mid-region. One, the Supporter, takes the heaven and bears it: some keep- ing watch guard all the quarters

अध्याय १०

श्लोक 8.8

प॒ञ्च॒वा॒ही व॑ह॒त्यग्र॑मेषां॒ प्रष्ट॑यो यु॒क्ता अ॑नु॒संव॑हन्ति ।अया॑तमस्य ददृ॒शे न या॒तं परं॒ नेदी॒योऽव॑रं॒ दवी॑यः

pañcavāhī vahatyagrameṣāṃ praṣṭayo yuktā anusaṃvahanti | ayātamasya dadṛśe na yātaṃ paraṃ nedīyo'varaṃ davīyaḥ

हिन्दी अर्थ

शतौदना है पारभेद्वरी माता । वह सैकड़ों प्रकार के श्रोदन भोज्य रूप पाप विचारों तथा पापको का हनन करती है । “व्यन्सपले” (भ्रष्टा ; १. सायणावायं के ब्दो ; ४. खायणानायं के बमो क्त का माश मिमिमोग । यमा का० १०। सू०९ भरथरवेवेद-माष्य ३६५ है । इस प्रकार सुक्व ९ मे पारमेश्वरी माता का वणन शतौदना गौ के

English

safely. The man who knows the drawn-out string on which these crea- tures all are strung, The man who knows the thread’s thread, he may know the mighty Brāhmana.

अध्याय १०

श्लोक 8.9

ति॒र्यग्बि॑लश्चम॒स ऊ॒र्ध्वबु॑ध्न॒स्तस्मि॒न् यशो॒ निहि॑तं वि॒श्वरू॑पम्।तदा॑सत॒ ऋष॑यः स॒प्त सा॒कं ये अ॒स्य गो॒पा म॑ह॒तो ब॑भू॒वुः

tiryagbilaścamasa ūrdhvabudhnastasmin yaśo nihitaṃ viśvarūpam| tadāsata ṛṣayaḥ sapta sākaṃ ye asya gopā mahato babhūvuḥ

हिन्दी अर्थ

गौ मी सैकड़ों प्रकार के भोदन भादि भोज्य पदार्थं देती है । यथा-- विशेषण है । कयो “्रथो" द्वारा इस का वर्णेन पृथक् रूपं भरा . है । वेदिषटे च भवतु बिलोमानि यानि ते । हे पारमेदवरी मातः ! (वेदिः) यज्ञ की वेदि (ते) तेरा (चमं) चमड़ मेदवरी-माता का स्तवन होता है । इसलिये वेदि, बहिः रशना भौर प्रावा किमा जाताहै, भौर रस्सी द्वारागौ को बान्धा जाताहै। यज्ञँ सोम प्रोषधि को पीसने के लिये सिल-बट्टे की श्रावदय॑कता होती है । पीसने में बटटे को शिला पर भ्रागे-पीछे किया जाता है भौर इस रगड़ में भावाज होती है, मानो बट्टा स्तुति करता हु्रा नाचता है । रदना--?0118प6

English

I know the drawn-out string, the thread whereon these creatures all are strung. I know the thread’s thread also, thus I know the mighty Brah- ma na.

अध्याय १०

श्लोक 8.10

या पु॒रस्ता॑द् यु॒ज्यते॒ या च॑ प॒श्चाद् या वि॒श्वतो॑ यु॒ज्यते॒ या च॑ स॒र्वतः॑ ।यया॑ य॒ज्ञः प्राङ् ता॒यते॒ तां त्वा॑ पृछामि कत॒मा सर्चाम्

yā purastād yujyate yā ca paścād yā viśvato yujyate yā ca sarvataḥ | yayā yajñaḥ prāṅ tāyate tāṃ tvā pṛchāmi katamā sarcām

हिन्दी अर्थ

नाका वणेन सामिप्रायष्ै। ...- र '..-न.विजानामि- सर्जन गौर प्रलयन में कौन धवं का है भौर कौन सकता । सजन के लिये भरावश्यक है क्रि इसं से पूवं प्रलयन विद्यमान हो भौर प्रलयनःके लिये भ्रावश्यक है.कि इस से पूवं कोई सजंन हृभ्रा हो । भरर प्रलयन, विना किसी नियामक चेतन-तत्त्व के,स्वतः हो रहे है । इसलिये उद् गृणत्ति- गृणत्ति मे “गृ” काः प्रथं है निगलना । है" । तृतीय धाम है परमेदवर पहला धाम है प्राकृतिक जगत् । द्वितीय :

English

In him are all the lights, the three abiding in Prajāpati. 163

अध्याय १०

श्लोक 8.11

यदेज॑ति॒ पत॑ति॒ यच्च॒ तिष्ठ॑ति प्रा॒णदप्रा॑णन्निमि॒षच्च॒ यद् भुव॑त्।तद् दा॑धार पृथि॒वीं वि॒श्वरू॑पं॒ तत् सं॒भूय॑ भ॒वत्येक॑मे॒व

yadejati patati yacca tiṣṭhati prāṇadaprāṇannimiṣacca yad bhuvat| tad dādhāra pṛthivīṃ viśvarūpaṃ tat saṃbhūya bhavatyekameva

हिन्दी अर्थ

साध्याः सन्ति देवाः” 1 (यजुं० ३११६) ) अर्थात् “वै परमेदवरयाजी, , ॥॥ , (इमे) .इन (मयूखाः). ज्ञानरदिभयों. ते दिवम्) ज्योतिमंय नाक कां (उपतस्तभुः) थामा हुशरा है, इन ज्ञानरदिमर्यो ने (वातवे). बाना बनने के लिये (सामानि) साभगानों को (तसराणि) वेमा (चक्रुः) किया है । नाक भर्थात् मोक्ष॒पट के लिये “ज्ञान”. ह ताना. भौर उपासना हं “८इरकी"" नौर “सर” कहते है । यह बनने का उपकरण हं जिस द्वारा ताना म बाना बुना जाता है, पिरोया.जाता है । ज्ञानं के सम्बन्धमे कटाहैकि उपासना है “ध्येय के समीप बैठना” उप +भ्रासना, “सुभीप उपविष्ट नहीं कर लेता तब तक उसकी मुक्ति नहीं हो सकती । इस उपासना का साधन है “सामवेद के भक्तिगान' । ४ , =, ‡ काण्ड १० । सुक्त ७1 समाप्त

English

He verily who knows the Reed of Gold that stands amid the flood, is the mysterious Lord of Life. Singly the two young Maids of different colours approach the six-pegged warp in turns and

अध्याय १०

श्लोक 8.12

अ॒न॒न्तं वित॑तं पुरु॒त्रान॒न्तमन्त॑वच्चा॒ सम॑न्ते ।ते ना॑कपा॒लश्च॑रति विचि॒न्वन् वि॒द्वान् भू॒तमु॒त भव्य॑मस्य

anantaṃ vitataṃ purutrānantamantavaccā samante | te nākapālaścarati vicinvan vidvān bhūtamuta bhavyamasya

हिन्दी अर्थ

कर होने का कारण .२४) । परमेश्वर की सूक्ष्मता. (२५) । विश्वतोमुख जीवात्मा (२७, २८) । संसारवक्ष का सिञ्चन (२९) । श्रविनामक देवता सूरय ३६) देव काः काव्य (३२) ।; वेदवाणि्यो . का . उदृगमम भौर ३२३८ । भ्रथववेद-बाष्यं कां० १०। सु9 (1 शेष्ठ ब्रह्म के लिये (नमः) नमस्कार हो ।

English

weave it. The one draws out the threads, the other lays them: they break them not, they reach no end of

अध्याय १०

श्लोक 8.13

प्र॒जाप॑तिश्चरति॒ गर्भे॑ अ॒न्तरदृ॑श्यमानो बहु॒धा वि जा॑यते ।अ॒र्धेन॒ विश्वं॒ भुव॑नं ज॒जान॒ यद॑स्या॒र्धं क॑त॒मः स के॒तुः

prajāpatiścarati garbhe antaradṛśyamāno bahudhā vi jāyate | ardhena viśvaṃ bhuvanaṃ jajāna yadasyārdhaṃ katamaḥ sa ketuḥ

हिन्दी अर्थ

(निमिषत्) निभैषोन्मेषक्रिया कर रहाहै। दान्त नि विष्ट हुई है, भरपने-्पने स्थानों मे निवेश पाई हई है । (बृहन्) करता है (तस्थौ) स्थित है (हरितः) वह इन तौर्नो का हरण करता हभ्रा सूयं से भित्र है । ये.सुयं के भरभिमुल हए निज स्थानो: मेः निविष्ट । सूयं . १. सुं पूवं से परिम की भ्रोर गति करता भ्रा दीखता है, परन्तु है यह्

English

labour. Of these two, dancing round as ‘twere, I cannot distinguish whether ranks before the other. A Male in weaves this web, a Male divides it: a Male hath stretched it to the cope of heaven

अध्याय १०

श्लोक 8.14

ऊ॒र्ध्वं भर॑न्तमुद॒कं कु॒म्भेने॑वोदहा॒र्यऽम्।पश्य॑न्ति॒ सर्वे॒ चक्षु॑षा॒ न सर्वे॒ मन॑सा विदुः

ūrdhvaṃ bharantamudakaṃ kumbhenevodahārya'm| paśyanti sarve cakṣuṣā na sarve manasā viduḥ

हिन्दी अर्थ

कां०.१० । सु० प प्रथवेवेद-भाष्य ३३९ इन सक्सेबड़ाहै परिमाणे. महाकाय है, भौर तस्थौ" स्थित है गति- रहित है । यह निजस्थान में स्थित हृभा तीन प्रजाभ्रों काहरण किये हये इन का भ्रपह्रण किये हृए है । हरिणीः = दिच्लाएं ( ऋ० -८। १० १।१४ वेंकट- माधव ने “दिशः"” किया है । अथववेद मे “हूरितः के स्थान में “हरिणीः पाठ है, अतः वेक्कुटमाषव के अथं के अनुरूप हरिणीः का प्रथं दिद्याएं किया है । तथा हरितः' “दिङ्नाम"” (निषं० ११६) । रजः ज्योतिः (निख्क्त तत्राहैतासतरीणं शंताति शङ्व॑ः षष्टिश्च खीला अविचाचला ये ॥४॥ तीन (नभ्यानि) नाभि के हिस्से (क, उ तत्, चिकेत) कौन उसे जातता है ।

English

These pegs have buttressed up the sky. The Sāmans have turned them into shuttles for the weaving.

अध्याय १०

श्लोक 8.15

दू॒रे पू॒र्णेन॑ वसति दू॒र ऊ॒नेन॑ हीयते ।म॒हद् य॒क्षं भुव॑नस्य॒ मध्ये॒ तस्मै॑ ब॒लिं रा॑ष्ट्र॒भृतो॑ भरन्ति

dūre pūrṇena vasati dūra ūnena hīyate | mahad yakṣaṃ bhuvanasya madhye tasmai baliṃ rāṣṭrabhṛto bharanti

हिन्दी अर्थ

है, (षष्टिः, च . भौर साठ (खीलाः) कील है (ये) जो कि . (भ्रविचाचलाः) ब्रिचनितत नहीं होते स्थिर रहते है ।. . .पुद्टियां ( एला68) । वषं एक चक्र है, पहिया है, जिसकी परिषि १३ वषं के नम्य है । पहिए के "तीन नभ्य विचाराघोन हं । तीन सौ. भौर साठ शङ्कु श्रौर खील ह = वषै. के ३९० दिन । प्रत्येकं मास तीस दिनो के हिसाब से 1 पहिलेःकेः दण्डे जो नामि श्रौर परिधि मे लनो गहते हं उन्हे. भी सम्भ- वतः :३६० कहा -है। ये २६५दिल विचलितः नहीं होते, यह संख्या वक्षं के बाण्टा.जाता है । ३०० को चाककु, -भरौर् ६० को खील कह .है । एक ऋतु दो-मासौं की होती है, -भौर अत्येक्र भास ३५ दिनों का । सम्भवतः ऋतु के ्दियाह.कि "प्रजापति परमेरवर” उसे जानता है । यथा “कस्मै देवाय

English

Speculations on the Supreme Being and Cosmogonical and theological subjects Worship to loftiest Brahma, Lord of what hath been and what shall be, To him who rules the universe, and heavenly light is all his own!

अध्याय १०

श्लोक 8.16

यतः॒ सूर्यः॑ उ॒देत्यस्तं॒ यत्र॑ च॒ गच्छ॑ति ।तदे॒व म॑न्ये॒ऽहं ज्ये॒ष्ठं तदु॒ नात्ये॑ति॒ किं च॒न

yataḥ sūryaḥ udetyastaṃ yatra ca gacchati | tadeva manye'haṃ jyeṣṭhaṃ tadu nātyeti kiṃ cana

हिन्दी अर्थ

हविषा विषे“ भे"दो "अर्थे कयि जुति है, (१) कंस देवः के लि, (२) भजापति देव क तिये हवि द्वार हम रिवर करं । : ! . “ (सवितः) है सविता ! (इदम्) इसे (विजानीहि) तु जान कि षंड यमाः) ६ ह जगत् के निथामक नियन्ता (एकः) इन भ से एक ह (एकजः) लव होना (इच्छन्ते) चाहते है (यः) जो कि (एषाम्) इस मेँ से (एकः) जगत् के यम है नियामक है! ५ मूत है -आकाल, वायु, ग्नि, श्राप भ्रौर पृथिवी । इन कै परस्पर भेलः से भौतिक जगत् पेदा हृभा है । परमेश्वर इनः कौ नियामक है 1 विना चेतन नियाम के व्यवस्थित उत्पत्ति नही हौ वाीरभनिरगनेरापः अरदुभ्यः पृथिवी (तंतिरीय उप०) के श्रनुसार.ये ६ यम है, निंयार्मक ह १. श्रात्मां रौर ४ भूत । कायं भ्रपते उपादान कारणम (भररपित्व” श्रथति लीनं हना चाहते है वायु ˆ भादि ४ तत्त्व. एकजं नहीं । कीश एकज है, येह एकं परमेक्वंर से पदां हरा है, “तस्माद्वा एतस्मा- दीत्मनः" से पैदा हंभा है। वयु दौ ' सेःपैदां हई है, मूलंःकारण भात्मा से,

English

Upheld by Skambha’s power these two, the heaven and the earth, stand fast. Skambha is all this world of life, whatever breathes or shuts an. eye.

अध्याय १०

श्लोक 8.17

ये अ॒र्वाङ् मध्य॑ उ॒त वा॑ पुरा॒णं वेदं॑ वि॒द्वांस॑म॒भितो॒ वद॑न्ति ।आ॒दि॒त्यमे॒व ते परि॑ वदन्ति॒ सर्वे॑ अ॒ग्निं द्वि॒तीयं॑ त्रि॒वृतं॑ च हं॒सम्

ye arvāṅ madhya uta vā purāṇaṃ vedaṃ vidvāṃsamabhito vadanti | ādityameva te pari vadanti sarve agniṃ dvitīyaṃ trivṛtaṃ ca haṃsam

हिन्दी अर्थ

सेः श्रीकर तथावायुं से ईत्यांदि + इसलिए परथिवी कालय ' होता द भ्रापः मर रापः कौ लयः होता हेश मे; भ्रग्नि कां-लंयं होता है वायु मे; वाभू ङ लवं होत है पारो भ 1 ईस पर ४ तीं की -लय होता है एकज भर्ात् आकाश मे । परकश परकंल है । एकं भरतमा से वाः हाई । प्रास्य षिढान्तानसार भृति से भतत पवा हं ह। ह ह वयाप तत्व त ६० दिनों की होतीं है । मन्व मे “कं उ तच्िकेत" भे “कः” पद द्रधथेक' है । कः कौन, तथा कः प्रजापति परमेदवर । रतः यह भी सुचित्त कथः कां०-१०.। सुऽ ण भरयवेवेद-माष्यः =+ ५ ३४१ से मनुष्य म वैयवितिक बुद्धि पैदा हुई । यह ॒वैय्तिक वृ क भौर चित्तरूप मं विजत होकर चार रूपवाली हुई, लिसे ।क ५ व ्तुषटय कहत ह । “व्यापी. महत-ठतव! भौर न्दः करण चतुय एषा मूलप्रकृति ये ६ यम ह, जिन से जगत पदा हरा, भतः. मति से. पवा हृभौ

English

Three generations have gone by and vanished and others near have entered into sunlight. There stood on high he who metes out the region into green, plants hath passed the Golden coloured. One is the wheel, the tires are twelve in number, the naves are three What man hath

अध्याय १०

श्लोक 8.18

स॒ह॒स्रा॒ह्ण्यं विय॑तावस्य प॒क्षौ हरे॑र्हं॒सस्य॒ पत॑तः स्व॒र्गम्।स दे॒वान्त्सर्वा॒नुर॑स्युप॒दद्य॑ सं॒पश्य॑न् याति॒ भुव॑नानि॒ विश्वा॑

sahasrāhṇyaṃ viyatāvasya pakṣau harerhaṃsasya patataḥ svargam| sa devāntsarvānurasyupadadya saṃpaśyan yāti bhuvanāni viśvā

हिन्दी अर्थ

इस व्याख्याकार के श्रनुसार यम का भयं है जोड़ा. ॥ हद्दो मासो का । “एकज है मलमास, ४९०18 71077 व त इत्येकजः'" १ यहं मलमास भरकेला परेदा होता है, ऋतु के सदृश जड़ (सत्) सत् परमेश्वर (जरत्) पुरांण (नाभ) ना ५ ( न एल पीत है, वह (गुहा £ ४. ८५ ५८ भराविः) प्रकट होता है 4 : (तत) उस मे (इदम्, सवम्) यह स हमा (परविष्ठम्) स्यि है। .., „3. वि ) इजाररो.भरक्षों वलि है,(प एर); प, सामनेकी भरो

English

understood it? Three hundred spokes have thereupon been hammered, and sixty pins set firmly in their

अध्याय १०

श्लोक 8.19

स॒त्येनो॒र्ध्वस्त॑पति॒ ब्रह्म॑णा॒र्वाङ् वि प॑श्यति ।प्रा॒णेन॑ ति॒र्यङ् प्राण॑ति॒ यस्मि॑न् ज्ये॒ष्ठमधि॑ श्रि॒तम्

satyenordhvastapati brahmaṇārvāṅ vi paśyati | prāṇena tiryaṅ prāṇati yasmin jyeṣṭhamadhi śritam

हिन्दी अर्थ

परमेदवर । इस चक्रमे हजारो भक्ष, घुराएं ह, जिन परः कि सूर्यादि घूम भ्रौर पीठे की भ्रोर श्रसीम मात्रा में फला हृभरा है । जिधर भी मूख करर उस है, भौर प्रकृति .का कितना अंश भवशिष्ट है. जो किं उत्पादन से -रहित है, यह प्रन भी मन्व मै अभिप्रेत हो सकताहै 1: - का (वहति) वहन् करं रहा है1 (रष्टयः पुष्टयः) .पीछे लगे परक्चभरुत (य्ताः) परस्पर मिल , कर (भरन) परमेव कै -पोछठःपीछे, (संवडन्ति) परस्पर विं ही जायि ।-भष्वं ०. "प्रःकाःभथं हो “प्राघा) भौर - यञुवेद-के

English

places. Discern thou this, O Savitar. Six are the twins, one singly born. They claim relationship in that among them which is born alone.

अध्याय १०

श्लोक 8.20

यो वै ते वि॒द्याद॒रणी॒ याभ्यां॑ निर्म॒थ्यते॒ वसु॑ ।स वि॒द्वान् ज्ये॒ष्ठं म॑न्येत॒ स वि॑द्या॒द् ब्राह्म॑णं म॒हत्

yo vai te vidyādaraṇī yābhyāṃ nirmathyate vasu | sa vidvān jyeṣṭhaṃ manyeta sa vidyād brāhmaṇaṃ mahat

हिन्दी अर्थ

“सा पेदं स्त्रीलिङ्गो है, पारमेदवरी शक्ति या ४०५० क वर्णनं मन्म हृभ्रा है । “युज्यते दारा उस , को ; संसारःशकट भः “जता” , भौ गृहकाय मे, गृह मे मानो जुतीं रहती ह भौर -गृहस्थयन्ञ का विस्तार हैः (भ्राणत्ः) भौर जो भाणः रहित है (निमिषत् च) भौर. जो निभेषोन्मेष जगत्. को. (पृथिवीम्) आरौ पृथिवी को (दाधार) स्कमम परमेदर धारण किये हये दः। (तत्) कहे न (सं) इका होकर (मवतिरहो जाता. है

English

Up, eastward downward in the west, ‘it rolleth, with countless elements, one-wheeled, single fellied. With half it hath begotten all creation. Where hath the other half become unnoticed? In front of these the five-horsed car moves onward: side-horses, harnessed with the others

अध्याय १०

श्लोक 8.21

अ॒पादग्रे॒ सम॑भव॒त् सो अग्रे॒ स्व॑१राभ॑रत्।चतु॑ष्पाद् भू॒त्वा भोग्यः॒ सर्व॒माद॑त्त॒ भोज॑नम्

apādagre samabhavat so agre sva1rābharat| catuṣpād bhūtvā bhogyaḥ sarvamādatta bhojanam

हिन्दी अर्थ

एक प्रकृतिं्म दी हो जाता है, विषमरूपौ नहीं रहता 1 कां १०.सु० ठ भ्रथर्ववेद-भाष्य ३४४ अन्तके साथ संगत है। (ते) उन दोनों का, (नाकपालः) नाक-पालक् तारा-संख्या को दृष्टि से भ्रतन्त .: दयलोक, भौर सव॑त, समतल तथा पृथिवीलोक परिमाण की दृष्टि से सीमित है, भौर काल की दृष्टि से विना

English

draw it. No one hath seen its hither course untravelled; the height sees it more near, the depth more

अध्याय १०

श्लोक 8.22

भोग्यो॑ भव॒दथो॒ अन्न॑मदद् ब॒हु।यो दे॒वमु॑त्त॒राव॑न्तमु॒पासा॑तै सना॒तन॑म्

bhogyo bhavadatho annamadad bahu| yo devamuttarāvantamupāsātai sanātanam

हिन्दी अर्थ

कौ भलग-भलग.समय में चिना है, रचा है । वह ही इस. समग्र ब्रह्माण्ड फे भूत भौर भविष्यत्को जानता है, भौर कोई नहीं जानता 1 (चरति) विचर रहा हैः. (भरवुश्यमानः) न दीखता . हमरा. ब्रह (बहधा) बहत प्रकार से (त्रिं जायते) विविध रूपों मेँ प्रकट. होता है। . (भरन) भंश है (सः) बह (कतमः). भत्यनत धुधस्वरूपंै, (केतुः) ज्ञानस्वरूप है । ३४६ भ्रथर्ववेद-माष्यः कं०.१० (सुऽ कित् संज्ञाने यथा . “चिकेतं” । तंथां -“केतुः प्रज्ञानम” (निधं ० ३।६ ।

English

distant. The bowl with mouth inclined and bottom upward holds stored within it every form of glory. Thereon together sit the Seven Rishis who have become this mighty One’s protectors

अध्याय १०

श्लोक 8.23

स॒ना॒तन॑मेनमाहुरु॒ताद्य स्या॒त् पुन॑र्णवः ।अ॒हो॒रा॒त्रे प्र जा॑येते अ॒न्यो अ॒न्यस्य॑ रू॒पयोः॑

sanātanamenamāhurutādya syāt punarṇavaḥ | ahorātre pra jāyete anyo anyasya rūpayoḥ

हिन्दी अर्थ

-:. कर्यं मर॑न्तघ्दकं कम्मेनेबोदहाय य । उस के यथार्थं स्वङूप को (मनसा ) मनन पूवेक (न विदुः) नहीं जार्नते,. , -भआदि रूप कोः तोः सब्र जानते है, परन्तु सब (मनसा) मनन-पूरवंक उस कै यथार्थं स्वरूप कों (न विदुः) नहीं जनते । . जल ले जतिहुए को - भांख वारा उस के तात्कालिक उदहा्यैरूप को लोग - जानते है, ्रौर मनन या विचार पूरक उस के यथाथं स्वरूप को नहीं देखते, उस कै यथाथं शूप को केवल उस के सम्बन्धी ही ल्ानते है, वसे जगत् की

English

The Verse employed at opening and conclusion, the Verse employed in each and every portion;

अध्याय १०

श्लोक 8.24

श॒तं स॒हस्र॑म॒युतं॒ न्यऽर्बुदमसंख्ये॒यं स्वम॑स्मि॒न् निवि॑ष्टम्।तद॑स्य घ्नन्त्यभि॒पश्य॑त ए॒व तस्मा॑द् दे॒वो रो॑चत ए॒ष ए॒तत्

śataṃ sahasramayutaṃ nya'rbudamasaṃkhyeyaṃ svamasmin niviṣṭam| tadasya ghnantyabhipaśyata eva tasmād devo rocata eṣa etat

हिन्दी अर्थ

वे नीः जानते, केवल (मनसा) मनन.निदिष्यासन वाले कतिपय च्यानी ही सं स्वंश्प को जानते है । . : १. यथा ("त्रिपादष्वं उदेतपुरुषः पादोऽस्येहामवंत्पुनः” (यऽ ३१४ । ‡ , कां० १० सुऽ. ध भरथर्ववेद-माध्यः- ३४७. वसता है, (ऊनेन निधन ्र्थात् गरीब द्वारा. तो वहुः (दूरे) दूर (हीयते) भृतः) राष्टरधारी यां राष्ट काःभरण पोषण करने वाले राजा लोग (बलिम्) भेटं (भरन्ति) लाते है, समर्पित करते हः

English

That by which sacrifice proceedeth onward. I ask thee which is that of all the Verses. That which hath power of motion, that which flies, or stands, which breathes or breathes not, which, existing, shuts the eye

अध्याय १०

श्लोक 8.25

बाला॒देक॑मणीय॒स्कमु॒तैकं॒ नेव॑ दृश्यते ।ततः॒ परि॑ष्वजीयसी दे॒वता॒ सा मम॑ प्रि॒या

bālādekamaṇīyaskamutaikaṃ neva dṛśyate | tataḥ pariṣvajīyasī devatā sā mama priyā

हिन्दी अर्थ

रहते है प्रौर घन-धान्य से वञ्चित व्यित इस के उपाजन मे ही कालयापन तदेव . मन्येऽहं ज्येष्ठं तदु नात्येति, षिः चनं ॥१६॥ , (यतः) जहां से (सूयः) . सूयं (उदेति) उदित होता (च) भौर उससे बढ़कर कोर्द.पदार्थं नहीं-। . .. ये अर्वा पध्यं उत वाँ पुराणं वेदं विदरर्षमभिंतो वदन्ति । ३४८ : भथर्वेवेद-भाष्य कां० १० । सुरः वेत्ता-परमभेक्वर का (भ्रभितः) सब नोर (वदन्ति) कथन करते ह; (ते) वें

English

Wearing all forms that entity upholds the earth, and in its close consistence still is only one. The infinite to every side extended, the finite and the infinite around us,

अध्याय १०

श्लोक 8.26

इ॒यं क॑ल्या॒ण्य॑१जरा॒ मर्त्य॑स्या॒मृता॑ गृ॒हे।यस्मै॑ कृ॒ता शये॒ स यश्च॒कार॑ ज॒जार॒ सः

iyaṃ kalyāṇya1jarā martyasyāmṛtā gṛhe| yasmai kṛtā śaye sa yaścakāra jajāra saḥ

हिन्दी अर्थ

५ हंसम् ) हंस नाम वाले परमेद्वर का (परिवदन्ति) सब भ्रोर कंथवे परमेश्वर का नाम है । यथा "“हुंमः शुचिषद् वसुः“ (यजु० १०।९४५. . (स्वम्) स्वभ की भ्रोर (पततः) डते हए, (हरेः) . अपने साथ सौर- परिवार को हरते हए; (भ्रस्य) इस (हंसस्य) हंस सूयं के (पक्षौ) . मानो है,.फेले .रहते है । (सः) वह हंस (सर्वान्) सब (देवान्) देवों को (उरसि).

English

These twain Heaven’s Lord divides as he advances, knowing the past hereof and all the future Within the womb Prajāpati is moving: he, though unseen, is born in sundry places. He with one half engendered all creation. What sign is there to tell us of the other?

अध्याय १०

श्लोक 8.27

त्वं स्त्री त्वं पुमा॑नसि॒ त्वं कु॑मा॒र उ॒त वा॑ कुमा॒री॥ त्वं जी॒र्णो द॒ण्डेन॑ वञ्चसि॒ त्वं जा॒तो भ॑वसि वि॒श्वतो॑मुखः

tvaṃ strī tvaṃ pumānasi tvaṃ kumāra uta vā kumārī|| tvaṃ jīrṇo daṇḍena vañcasi tvaṃ jāto bhavasi viśvatomukhaḥ

हिन्दी अर्थ

को नतु हृ्ा (याति) जाता है। तथा देखो (श्रथवं० १३।२।३४८; मन्त्र १७ में हंस" नाम से परमेदवर का. वर्णन हुभ्रा है, जिस कौ भ्रतः सूयं रथ जिधर गति कर रहा है, उसमें स्थित हृए ब्रह्मपुरुष की इस रथ का उड़ान स्वगं कीः भोर कर रहा. है । मन्त्र मेँ “पततः” हारा प्रौर पक्षौ" द्वारा पक्षी रूपम सूरय॑रथ का वणंन हृश्रा है, जो कि भके में उह कां १० 1 सु० द. भथर्वैवेद-माष्य ३४९

English

All men behold him with the eye, but with the mind they know not him. Holding aloft the water as a water-bearer in her jar.

अध्याय १०

श्लोक 8.28

उ॒तैषां॑ पि॒तोत वा॑ पु॒त्र ए॑षामु॒तैषां॑ ज्ये॒ष्ठ उ॒त वा॑ कनि॒ष्ठः ।एको॑ ह दे॒वो मन॑सि॒ प्रवि॑ष्टः प्रथ॒मो जा॒तः स उ॒ गर्भे॑ अ॒न्तः

utaiṣāṃ pitota vā putra eṣāmutaiṣāṃ jyeṣṭha uta vā kaniṣṭhaḥ | eko ha devo manasi praviṣṭaḥ prathamo jātaḥ sa u garbhe antaḥ

हिन्दी अर्थ

चमकता है भ्रौर (भ्र्वाङ ) नीचे के भूमिष्ठ लोगों का (वि परयति) . विशेष मनुष्यो को (प्राणति) सजीव करता रहतां है चाल चलते हँ उन्दँ भी वह सदुपदेशो द्वारा प्राणशक्ति देकर सजीव करता दवारा ऊध्वंदिश्चा मे तप रहा है भ्रौर निज रदिमरयों द्वारा मानो नीचे मूमि को इस प्रकार मन्त्र १८,१९ मं ्राथिकं समन्वय हो जाता. है। .

English

With the full vase he dwells afar, is left far off what time it fails, 164 A mighty Being in creation’s centre: to him the rulers of the realms bring tribute.

अध्याय १०

श्लोक 8.29

पू॒र्णात् पू॒र्णमुद॑चति पू॒र्णं पू॒र्णेन॑ सिच्यते ।उ॒तो तद॒द्य वि॑द्याम॒ यत॒स्तत् प॑रिषि॒च्यते॑

pūrṇāt pūrṇamudacati pūrṇaṃ pūrṇena sicyate | uto tadadya vidyāma yatastat pariṣicyate

हिन्दी अर्थ

(यः) जो (वै) वास्तवं में (ते भरणी) उन दो भ्ररणियों कोः (वेद). मेरवर (निमेथ्यते) अग्नि की तेरह मथ ' करः निकालां जाति है, प्रकटः तरह, परमेष्वर-देव का दान. करे 1 रचना से पूवं चू कि उस का सृष्ठिहमो -एकपाद् भी-नहीं होताः;श्रत सुष्टि- रचनाः पुर्वं वह अपाद् होता है, पादरहित ह्लोेता है ।, उस समयः वहु: निज के वह. “भोग्य होता है ।;ऽपासक.उस.के भरानत्दस्वरूप का मोग करते.हँ । .

English

That, whence the Sun arises, that whither he goes to take his rest, That verily I hold supreme: naught in the world surpasses it.

अध्याय १०

श्लोक 8.30

ए॒षा स॒नत्नी॒ सन॑मे॒व जा॒तैषा पु॑रा॒णी परि॒ सर्वं॑ बभूव ।म॒ही दे॒व्यु॑१षसो॑ विभा॒ती सैके॑नैकेन मिष॒ता वि च॑ष्टे

eṣā sanatnī sanameva jātaiṣā purāṇī pari sarvaṃ babhūva | mahī devyu1ṣaso vibhātī saikenaikena miṣatā vi caṣṭe

हिन्दी अर्थ

अदान “करते ह, उसंःके पांस खनिंपान की सामग्री का भरतिद्ाग्र.हौ जाता है , (देखो २५२ भषवेवेदनमाष्य "को १०। सुरन :. . भूतकाल की सृष्टि मँ तथा वतमान काल. की सृष्टि (प्रथ), श्रौर ये भ्रनादि होते हए पुनःपुनः नए-नण प्रकट. होते है, इसी प्रकार परमेश्वर .के सनातन होते हृए भी बहू प्रतिपूष्टि नर्ए-नए शपो मेँ प्रकट होताः रहता है । श्रहोरात्रे यथा- च 8 - ऊः 1 श्रादि की सनातन सत्ता कही है, भौर ये पुनः पूनः नए-नए कपो मे भी प्रकट होते रहते है ।, , ल = + रूप में रचिकर होता है, प्रिय होता है । र परमेदवर भ्रसंस्यातत.धन.का स्वामी है । इस. स्वामी से पुषे बिना,

English

This gold-hued Haiisa’s wings, flying to heaven, spread o’er a thousand days’ continued journey.

अध्याय १०

श्लोक 8.31

अवि॒र्वै नाम॑ दे॒वत॒र्तेना॑स्ते॒ परी॑वृता ।तस्या॑ रू॒पेणे॒मे वृ॒क्षा हरि॑ता॒ हरि॑तस्रजः

avirvai nāma devatartenāste parīvṛtā | tasyā rūpeṇeme vṛkṣā haritā haritasrajaḥ

हिन्दी अर्थ

.लोग. इसके देखते-देखते इसके घन को हथियाते रहते है, तब भी परभेदवर ... इन्हे कृ कहता नहीं, भ्रतः इस रूप में परमेदवरं सब को प्रिय लगता है । ततः परिष्वजीयसी देवता सा ममं प्रिया ॥२५॥ ˆ. (पकम्) एक बलु जोकि (बालात्) बाल से (भगोयखम्) शम , (उत) तथा. (एकम्) .एक वस्तु. जो कर (न इव) न के .सृदृश् (दृष्यते) १. “देवो दानाद् वा” (निरुक्त ७।४।१५) 4 1.

English

Supporting all the Gods upon his bosom, he goes his way behol- ding every creature. By truth he blazes up aloft by Brahma, he looks down below: He breathes obliquely with his breath, he on whom what is. highest rests.

अध्याय १०

श्लोक 8.32

अन्ति॒ सन्तं॒ न ज॑हा॒त्यन्ति॒ सन्तं॒ न प॑श्यति ।दे॒वस्य॑ पश्य॒ काव्यं॒ न म॑मार॒ न जी॑र्यति

anti santaṃ na jahātyanti santaṃ na paśyati | devasya paśya kāvyaṃ na mamāra na jīryati

हिन्दी अर्थ

दीखती है व॑सी वह् (देवता) देवता है । वह देवता. (परिष्वजीयसी ) , सबको भ्रलिङ्गन किये हृए है, (ततः) इसलिये (सा) वह (मम श्रिया) मेरीप्यारीहैवः ˆ " च " ध य ारभेस्वरीं दिव्या भाता बाल से भी सूर्म है; तथाः वह “नके सदश्च दीखती है, भनु तो होती हैष्परन्तु दृष्टिगोचर नहीं होती । परंतु उसने „ यसमै कृता श्रये.स यवकारं जनार. सः. ॥२६॥ (इयम्) यह (कल्याणी ; करने . वाली दरेवता, . न्त. २५ (अजरा) जरारहित है, जीर्णं र. होती। (भमृता) यह भ्गरता देवता, (मत्येस्य) ५ मनुष्य के (गृहं) शरीर या हदयगृह मँ विद्यमान है। (कृता) वह कतिशर (यस्मे ) जिसके लिये (शये) मत्य शरीर या कमं करता है भौर ,(जजार) :जीणं होता रहता है । . है (त्वम्) तु (कुमारः) करंमार (उत वा) तथा (कुमारी) कमारी हो जाता है। त्म) तु . (जीर्णः) बू हौ जाता है (दण्डेन) तो दण्डके साथ मुखो .वाला (जातः सुवसि). जन्म लेताहै। .. ..

English

The sage who knows the kindling-sticks whence by attrition wealth is drawn, Will comprehend what is most high, will know the mighty

अध्याय १०

श्लोक 8.33

अ॒पू॒र्वेणे॑षि॒ता वाच॒स्ता व॑दन्ति यथाय॒थम्।वद॑न्ती॒र्यत्र गच्छ॑न्ति॒ तदा॑हु॒र्ब्राह्म॑णं म॒हत्

apūrveṇeṣitā vācastā vadanti yathāyatham| vadantīryatra gacchanti tadāhurbrāhmaṇaṃ mahat

हिन्दी अर्थ

किया है । मन्त्र २७ मेँ सरी “जीण: दारा जीवोत्मा के देह की जरावस्था भ्रा विद्रतोमूरख . होत्ता रहता है ५ ; यं सब -उघ.के कर्मो का फल है ्रधरवंवेदं-भाष्ये कां .१०५सू०२४ एको ह देवो मन॑सि विष्टः पथमो जातः स छ गभँ;अन्तः ॥२८॥ ए; (जत); वेधा एषस्); इनः को (पिता) पितम उत वौ) तथो (एताम्) न का (एषः) रवं (उत) तथाः (एषाम्) इनर्ः : (ज्येष्टः) बडा, (उतत वा)-तथा (कनिष्ठः) .छोदाः होता रहता है।:एकःदेव द् एक; टीःदेव पदा होता है, (सः उ वह ही-मरकर, शरीर त्याग कुर पुनः (गम् श्रन्तः) गभं के भीतर भरात् है।

English

Brāhmana. Footless at first was he produced, footless he brought celestial light. Four-footed grown, and meet for use, he seized each thing enjoyable.

अध्याय १०

श्लोक 8.34

यत्र॑ दे॒वाश्च॑ मनु॒ष्याऽश्चा॒रा नाभा॑विव श्रि॒ताः ।अ॒पां त्वा॒ पुष्पं॑ पृच्छामि॒ यत्र॒ तन्मा॒यया॑ हि॒तम्

yatra devāśca manuṣyā'ścārā nābhāviva śritāḥ | apāṃ tvā puṣpaṃ pṛcchāmi yatra tanmāyayā hitam

हिन्दी अर्थ

८ देवः जीवात्मा स्वंल्पंतः देव है 1 रः मने दारा जकड़ा होकर, देरव” ही कर गनास्पो मे जन्म तता रेता है .1 4. 2. स्क पूण ह शौर. जगत्-वृष" भीं है. भाणियं के सामूहिक -इस.मे इस दष्टं से कोई न्यूनता नदीं । परन्तु.हम यहं जानना चाहते ह कि "सब भोर” । जिज्ञासुभ्रों को सबः्रोर जगत्-वुक्ष हरा-्भरा -दीख रहा है, कही सी मुरकायो हाया ख्लां दृष्टिगोचरं नही “हो - रहा है, - इसलिये “परि” का.प्रयोगं “सिच्यते” के साथ हुंमा है1 भरी-हैष्युश्वसौ विभोतीं सेक्ेनेकेन -मिषति। वि चण्ट:३.5॥

English

Useful will he become, and then will he consume great store of food The man who humbly worshippeth the eternal and victorious

अध्याय १०

श्लोक 8.35

ये भि॒र्वात॑ इषि॒तः प्र॒वाति॒ ये दद॑न्ते॒ पञ्च॒ दिशः॑ स॒ध्रीचीः॑ ।य आहु॑तिम॒त्यम॑न्यन्त दे॒वा अ॒पां ने॒तारः॑ कत॒मे त आ॑सन्

ye bhirvāta iṣitaḥ pravāti ye dadante pañca diśaḥ sadhrīcīḥ | ya āhutimatyamanyanta devā apāṃ netāraḥ katame ta āsan

हिन्दी अर्थ

(एषा) यह (सनत्नी ) सनातनी (सनम् एव) सदा ही (जातो) धृष्टि मर प्रकट होती है (एषा) यह (पुराणी) पुराकाल से विद्यमान दहै, प्रनुदि कां०-१०।-सुभक् भरथववेद-माष्य् ३५४ है (सवंम्) सब को (परिबभूव). इसने सब.भ्रोर परे घेरा . हा हैः। (मही देवी ) यह महती देवी (उषसः) उषारभरो- को (विभातीः) दीप्त करती है, चमकाती है । (सा). वह (एकेन-एकेन) एक-एकं (मिषता) उन्मेषं द्वारा वरिरष्टे) विविधः जगत् को देख लेती है । ॑ भिषतां =श्रांखु"के उन्मेष दवारा । परिषिच्यते .(२९) श्रौर परिबभूव (३०) मे “पररि” कामाव हैः सब श्रोर .. :

English

God. Him too they call eternal; he may become new again to-day. Day and Night reproduce themselves, each from the form the other wears.

अध्याय १०

श्लोक 8.36

इ॒मामे॑षां पृथि॒वीं वस्त॒ एको॒ऽन्तरि॑क्षं॒ पर्ये॑को॑ बभूव ।दिव॑मेषां ददते॒ यो वि॑ध॒र्ता विश्वा॒ आशाः॒ प्रति॑ रक्ष॒न्त्येके॑

imāmeṣāṃ pṛthivīṃ vasta eko'ntarikṣaṃ paryeko babhūva | divameṣāṃ dadate yo vidhartā viśvā āśāḥ prati rakṣantyeke

हिन्दी अर्थ

बुक्ष (हरिताः) हरे हैँ (हरितस्रजः) भ्रौर हरी मालाभ्रों वाले है। भ्रविः= भरव रक्षणे. (म्बादिः) "रक्षौ करने वाला सूरय. । भविः 16 वृक्ष हरे होते ह.सूथं के प्रकरं द्वारा; तथा जलसेचनं (२९) 'द्वारा । इसे है, स्थिर है, वह चलता नहीं । “ है मेड । मेड जातिकीं -मादाको.तो भ्रवि कहते, भ्रौरनर को मेद। मन्त्रम भ्रवि द्वारा मेषरारि भी विशेषतया सुचित की हं । वसन्त छतु म सूयं भेषराि पर होता है, जबकि वनस्पति मे, नवधघंण का संचार होता ह भौर वृक्ष तथा लताएं

English

A hundred, thousand, myriad, yea a hundred million stores of wealth that passes count are laid in him.

अध्याय १०

श्लोक 8.37

यो वि॒द्यात् सूत्रं॒ वित॑तं॒ यस्मि॒न्नोताः॑ प्र॒जा इ॒माः ।सूत्रं॒ सूत्र॑स्य॒ यो वि॒द्याद् स वि॑द्या॒द् ब्राह्म॑णं म॒हत्

yo vidyāt sūtraṃ vitataṃ yasminnotāḥ prajā imāḥ | sūtraṃ sūtrasya yo vidyād sa vidyād brāhmaṇaṃ mahat

हिन्दी अर्थ

हो जाति है, त्रभीं -धिधिर तुः कोः: ““पतमढ" भी कते है प्रते ऊडने की ऋतुः। ३९६ , भयववेद-भाष्य का०.१०।सु० य . देवस्यं पश्य काव्यं न म॑मार न. जीति :॥३२॥. , (न ममार) देखने वाला न मरता है, (न् जीर्यति) भौर न जीणं होता है । भरतः उसके; केद्काव्य को देखना चाहिए, लिससे ज्ञात होगा करि इस के दशन

English

This wealth they kill as he looks on, and now this God shines bright therefrom. One is yet finer than a hair, one is not even visible. And hence the Deity who grasps with firmer hold is dear to me.

अध्याय १०

श्लोक 8.38

वेदा॒हं सूत्रं॒ वित॑तं॒ यस्मि॒न्नोताः॑ प्र॒जा इ॒माः ।सूत्रं॒ सूत्र॑स्या॒हं वे॒दाथो॒ यद् ब्राह्म॑णं म॒हत्

vedāhaṃ sūtraṃ vitataṃ yasminnotāḥ prajā imāḥ | sūtraṃ sūtrasyāhaṃ vedātho yad brāhmaṇaṃ mahat

हिन्दी अर्थ

पो ले कर, बार-बार मरने भौर जीं होने से उचे,छुटकारा मिल जाता - -(भ्रपूवेणः) प्रनादि परमेखर द्वारा (दषिताः). भेजी हू" (वाचः). वेदः वाणियां हं । (ताः) वे , वेदवाणियां (यथायथम्) तत्त्वो करो यथाथं रूप में (वदन्ति) प्रकट. करती है. । ..(वदन्तोः) प्रकट करती हई. (यन) . जहां है । परमेदेवरं इरः मनष्योपकाराथं भेजता हैँ । ये वस्तुः का यथां वणेन ., यत्रं देवाश्च मनुष्यां इचारा नामांविवं चिताः । “ यत्र) जिसमे (देवाः च) देव भौर मर्नुष्याः.. च) मनुष्य (धितः). भ्राश्चंय पाए हुए ह (इव) जेसे किं (भरा). भ्रा 8101९८8 (नाभौ) रथ की नामि मे भाशचयं पाते है । (भपाम् पुष्पम्) जलौ के उस पुष्पके

English

This fair one is untouched by age, immortal in a mortal’s house. He for whom she was made lies low, and he who formed her hath grown old.

अध्याय १०

श्लोक 8.39

यद॑न्त॒रा द्यावा॑पृथि॒वी अ॒ग्निरैत् प्र॒दह॑न् विश्वदा॒व्यः ।यत्राति॑ष्ठ॒न्नेक॑पत्नीः प॒रस्ता॒त् क्वेऽवासीन्मात॒रिश्वा॑ त॒दानी॑म्

yadantarā dyāvāpṛthivī agnirait pradahan viśvadāvyaḥ | yatrātiṣṭhannekapatnīḥ parastāt kve'vāsīnmātariśvā tadānīm

हिन्दी अर्थ

ब्रह्म (मायया) परा सित (हितम्) निरत है स्थितै! । देवाः सूर्यादि देव. (यजु° -१४।२०) । भर्पा अलो जाता है भर जलो भ हइ मला ४३ भ ष नि भला सित स्थित है । शरीर भ कई किमा भति तवि). है, यथा उवास प्रवास, रक्तं का. सं चार, भुक्तयान का ॥ ० निजपञा दरारा इन् करियाम कों करता चला द भरतः हदयं ब्रहम मया सहित स्थित है । माया परज्ञानाम (निषं ० ३।६ + ६ ति वः) था (ते) दां करते ह । (दवः) चो द (भान)

English

Thou art a woman, and a man; thou art a damsel and a boy. Grown old thou totterest with a staff, new-born thou lookest every way. Either the sire or son of these, the eldest or the youngest child.

अध्याय १०

श्लोक 8.40

अ॒प्स्वाऽसीन्मात॒रिश्वा॒ प्रवि॑ष्टः॒ प्रवि॑ष्टा दे॒वाः स॑लि॒लान्या॑सन्॥ बृ॒हन् ह॑ तस्थौ॒ रज॑सो वि॒मानः॒ पव॑मानो ह॒रित॒ आ वि॑वेश

apsvā'sīnmātariśvā praviṣṭaḥ praviṣṭā devāḥ salilānyāsan|| bṛhan ha tasthau rajaso vimānaḥ pavamāno harita ā viveśa

हिन्दी अर्थ

पृथिवीम् क षसं ह ५ दित करतौ 1 दती + = ज्रह्य को जानता हू 2 भ १ । । । ) ईस पृथिवी कोः (वस्ते) भ च्छ्यदितः करती. प्रोढती है, (एकः) १0 स 12 (एषाम्) इनं मेः), जो. (विधर्ता) . विविषुः सौरमण्डले को षारणं करता द है ुः(दिवम्) मरकाय था, विनः ; (ददते). शान करतां है, . (एक) थे तीनौं (विष्वाःभ्राशाः).सृ् शशरो की, (तुत्त) रका करते है । विद्यमान होकर, पृथिवी को- भाव्छाद्ित. करती है; ओर-शग्नः. पृथिवी कते गसं मेभ हैःकतः;पृथिवी दसकी रोनी है 4.यह ज्वाला मूखी पवतो, तथा ; जोगि स वतं रसिशोव का पाः !

English

Now also may we know the source from which the stream is sprinkled round. Brought forth in olden time, the everlasting, high over all that is was she, the Ancient. The mighty Goddess of the Morn, refulgent with one eye, looketh round with one that

अध्याय १०

श्लोक 8.41

उत्त॑रेणेव गाय॒त्रीम॒मृतेऽधि॒ वि च॑क्रमे ।साम्ना॒ ये साम॑ संवि॒दुर॒जस्तद् द॑दृशे॒ क्वऽ

uttareṇeva gāyatrīmamṛte'dhi vi cakrame | sāmnā ye sāma saṃvidurajastad dadṛśe kva'

हिन्दी अर्थ

:(ः)..जो (वितमः) विवि रूपों .प फते (सूत्रम्) सूत्र को बनी हई. -तथा, (यः) जो (सूतस्य सूतम) सुतर के सत्रं क (विद्यात्). वानव हए हः।;-अतिः वह.सतःका मी सूत्र है । भकृति तानास्प महै प्रर वेदा विततं ¢ ना कृमाः।; सतै चया वेदाथो, पू. माहे गहे ॥३८॥; : : (दम्) भै (वेद) जानता, (विततम्) विविध र्गौ पे ह कहा .सम्षवतः. (श्रासीत्)-शी+ आग्नि.अतीतर-होतीः 8, जो; किवं को , स्मसि कर देत है 1 एकपत्नी

English

winketh, Known by the name of Guardian Grace the Deity sits girt by

अध्याय १०

श्लोक 8.42

नि॒वेश॑नः सं॒गम॑नो॒ वसू॑नां दे॒व इ॑व सवि॒ता स॒त्यध॑र्मा ।इन्द्रो॒ न त॑स्थौ सम॒रे धना॑नाम्

niveśanaḥ saṃgamano vasūnāṃ deva iva savitā satyadharmā | indro na tasthau samare dhanānām

हिन्दी अर्थ

,- “भाप का ्ःबलः मानते पर. परलय का वर्णन मन्व ओ भप । हि जायेगा! भरापुः कायं है, भूल मं कायै की स्थिति असम्भव है । भरतः मानते है, भतः इदः स्थिव ; अलयकाल. मे. सम्भ॑व है । इतं संमय मात- प्ला सी्पातुरिवव परविष्टा देव संलयाय । ': (तस्थौ) स्थित था, (रजसो. विमानः -जुो.कि लोकों क. निर्माण श्राह मन्व मे, मन्त ३९ के अनुसारं “ "शर्य" का भे किध अतीतं “ ॑

English

Right. The trees have taken from her hue, green-garlanded, their robe of green. When he is near she leaves him not, she sees him not though he is near.

अध्याय १०

श्लोक 8.43

पु॒ण्डरी॑कं॒ नव॑द्वारं त्रि॒भिर्गु॒णेभि॒रावृ॑तम्।तस्मि॒न् यद् य॒क्षमा॑त्म॒न्वत् तद् वै ब्र॑ह्म॒विदो॑ विदुः

puṇḍarīkaṃ navadvāraṃ tribhirguṇebhirāvṛtam| tasmin yad yakṣamātmanvat tad vai brahmavido viduḥ

हिन्दी अर्थ

देव भी “सलिलानि” भ्रति “प्सु त भर्विष्ठ येः अतु. जहृदतरन 1 महान्-परमेकवर स्थितः थाः जो किः लोकों यू, तिर्मूणि , करता .है.बह् पुनः ' ततरेणेव गाययतीमपूतेऽधि विके ए 2 करम हुए था । (साम्ना) गायतरघामेगानै द्वारा, (ये) ज उपासकं (सामः शोन्तिसम्पत्न परमेद्धैर कौ (संविदः) व हैँ उन दारा (भजः) रहता है । “वरिपादस्यामृतं दिवि” (यजु ३१३) ॥ सांमगानों दारा, . मे जान लिया जाता है, परन्तु वह भरजन्मा केवल सामगानो दयार ्रत्यक्ष-

English

Behold the wisdom of the God; he hath not died, he grows not old. Voices that never were before emitted speak as fitteth them.

अध्याय १०

श्लोक 8.44

अ॒का॒मो धीरो॑ अ॒मृतः॑ स्वयं॒भू रसे॑न तृ॒प्तो न कुत॑श्च॒नोनः॑ ।तमे॒व वि॒द्वान् न बि॑भाय मृ॒त्योरा॒त्मानं॒ धीर॑म॒जरं॒ युवा॑नम्

akāmo dhīro amṛtaḥ svayaṃbhū rasena tṛpto na kutaścanonaḥ | tameva vidvān na bibhāya mṛtyorātmānaṃ dhīramajaraṃ yuvānam

हिन्दी अर्थ

: , किवेशनः संगमनो वसनां देव इव सविता सत्यम । . . कां० १० सुऽ भ्रथववंवेद-भाष्य ३६१ करता दहै, (वसुनाम्) भ्राठ वसुर म (संगमनः) परस्पर संगति या समन्वय करता हैः (देवः) वहं देव (सविता इव) सथं की तरह (सत्यवर्मा) सत्य नियमों का धारण करता है । तथा (नानाम्) षन-सम्बन्धी (समरे) युद्ध है । वह् समय पर उदयास्त होता, यथासमय ऋतु का निर्माण करता, नियमानुसार उत्तरायण तथा दक्षिणायन स्थितियां करता है । परमेश्वर के नियम मी सत्य है, सुदृढ है । तथा वह्, युद्ध मे सेनापति के संदृश जगत् मेँ दृढ़ स्थित है । । ४5 ज्ञानी (विदुः) जानते है । नव द्वारम् =२ भ्राखो के, २ नासिकाके, २ कानों के, १ भूख का, १ लिङ्खं का,१ गुदा का-= हार ।

English

Whither they go and speak, they say there is the mighty Brāh- mana. I ask thee where the waters’ flower by wondrous magic art was placed, Thereon the Gods and men are set as spokes are fastened in the nave.

अध्याय १०

श्लोक 9.1

शतौदना गौः।१-२७ अथर्वा।शतौदना।अनुष्टुप्, १ त्रिष्टुप्, १२ पथ्यापङ्क्तिः, २५ द्व्युष्णिग्गर्भाऽनुष्टुप्, २६ पञ्चपदा बृहत्यनुष्टुबुष्णिग्गर्भा जगती, २७ पञ्चपदातिजागतानुष्टब्गर्भा शक्वरी।अ॒घा॒य॒तामपि॑ नह्या॒ मुखा॑नि स॒पत्ने॑षु॒ वज्र॑मर्पयै॒तम्।इन्द्रे॑ण द॒त्ता प्र॑थ॒मा श॒तौद॑ना भ्रातृव्य॒घ्नी यज॑मानस्य गा॒तुः

śataudanā gauḥ| 1-27 atharvā| śataudanā| anuṣṭup, 1 triṣṭup, 12 pathyāpaṅktiḥ, 25 dvyuṣṇiggarbhā'nuṣṭup, 26 pañcapadā bṛhatyanuṣṭubuṣṇiggarbhā jagatī, 27 pañcapadātijāgatānuṣṭabgarbhā śakvarī| aghāyatāmapi nahyā mukhāni sapatneṣu vajramarpayaitam| indreṇa dattā prathamā śataudanā bhrātṛvyaghnī yajamānasya gātuḥ

हिन्दी अर्थ

वेदवाणी माजंनी होकर (संमाष्ट ) सम्थकृरूप मे तेरे स्वरूप का संभाजंनः करे. । इस प्रकार (शतौदने) सकड़ रोदन भ्रादि भोज्य पदार्थो वालो हे यं: श॒तोदरनां पर्चति कामतेण ष कते ।: . (यः) जो ध्यान यज्ञं करने वलि (शतौदनाम्) शतौदना. (पास्मे- रवरी माता को (पचति) परिपक्व करता है, - (सः) वह॒ (कामं प्रेण) वे कृपा करके.जाते है; प्रौर शिष्य की कामना को "पणं कर केः यथा स्थानः

English

When Agni passed between the earth and heaven devouring with his flame the all-consumer, Where dwelt afar the spouses of one husband, where at that moment, where was Mātarisvan? Into the floods had Mātarisvan entered, the deities had past in- to the waters.

अध्याय १०

श्लोक 9.2

वेदि॑ष्टे॒ चर्म॑ भवतु ब॒र्हिर्लोमा॑नि॒ यानि॑ ते ।ए॒षा त्वा॑ रश॒नाग्र॑भी॒द् ग्रावा॑ त्वै॒षोऽधि॑ नृत्यतु

vediṣṭe carma bhavatu barhirlomāni yāni te | eṣā tvā raśanāgrabhīd grāvā tvaiṣo'dhi nṛtyatu

हिन्दी अर्थ

यजत् शशा । "मतस्ने दो गुदे, जो कि मदकारी मूत्र को ल्ावित तथा ङृत् = मेषा (अथवं० ९।१२(७)।११ । गुदाः देवजनाः (भरथरवं० ९।१२(७)।१६) । ये ब्रह्माण्ड गौ के भ्रवयव ह । ३७४ भथरववेद-भाष्य कां० १०॥ सु०£ जो तेरी भज्जा, भ.भस्थि, जो मां, भौर जो लोहित रक्तः है,वे मज्जा श्ण, नालिका वालं 'हह्ियों मे का गदा । -दाता = पारमेक्वरी माता का दर्शन करा देने वाला । ५

English

Thine Immolators, Goddess! and the men who dress thee for the feast, all these will guard thee, Hundredfold Oblation!

अध्याय १०

श्लोक 9.3

बाला॑स्ते॒ प्रोक्ष॑णीः सन्तु जी॒ह्वा सं मा॑र्ष्ट्वघ्न्ये ।शु॒द्धा त्वं य॒ज्ञिया॑ भू॒त्वा दिवं॒ प्रेहि॑ शतौदने

bālāste prokṣaṇīḥ santu jīhvā saṃ mārṣṭvaghnye | śuddhā tvaṃ yajñiyā bhūtvā divaṃ prehi śataudane

हिन्दी अर्थ

रूपाय-जव ब्रह्म साक्षात् -भकंटं हौः जाता है. तव, छसं क सुप ङः चतेष-तथा र मो जानना चाहिए कि वेद म गोमा येष महत विमा,गमा,है । इस सिये वेदिक. सूतं म वण॑नय् देवता को गोसूम कां १९ ॥सु. १०. . अथर्वेवेद-भाष्य ३८१ म वित कर, उसके शफ भादि शङ्खो का मी. वणनीय् देवता के. सग्बन् मँ आओपचारिक् . वणन होता. है । देलो (भरथंवं 9 ९।१२।२५ ). जिसमे

English

Let both thy shoulders and thy hump, thy forelegs, and their lower parts, etc. Let neck and nape and shoulder-joints, thy ribs and inter-costal parts, etc. So let thy thighs and thy knee-bones, thy hinder quarters, and thy hips, etc.

अध्याय १०

श्लोक 9.4

यः श॒तौद॑नां॒ पच॑ति काम॒प्रेण॒ स क॑ल्पते ।प्री॒ता ह्यऽस्य॒र्त्विजः॒ सर्वे॒ यन्ति॑ यथाय॒थम्

yaḥ śataudanāṃ pacati kāmapreṇa sa kalpate | prītā hya'syartvijaḥ sarve yanti yathāyatham

हिन्दी अर्थ

(णः) - (सप्त) - खात -(भवतः). समीप के लोकों कोः .(विबात्) जघ्न, रौर (सप्ठ); सातं (परावतः) दुर के लोकों को (वियात) , जने, पारमेदवरी माता । सप्त परावतः है, भुः, भुवः, स्वः, महः, जनःतपः भ्रौय सत्यं लोक । भौर “सप्त प्रवतः है मतल, वितल, सतल,+ रसातल, तलातलः महातल, प्रौर पाताल । ये सातं पृथित्रीके ही सात विभाग । यज्ञ का (्थवं०१३।७.८४) ।१२ ४० । “प्रवतः श्र “परावतः” मिल कर चतुदश. मुवन होते है । जो व्यक्ति इन् भुवनो की : संख्या को ठीक भकार जात्गकर, गृह जानता है कि इन्दं वश मेँ करने वाली केवल पारमेदवरी. माता हैशभरौर वह ही इन काः शिरोख्प है, वह प्रात्तिक. प्रकृति. वाला

English

So let thy tail and all the hairs thereof, thine udder, and thy teats, etc. Let all thy legs, the refuse of thy feet, thy heelropes, and thy hooves.

अध्याय १०

श्लोक 9.5

स स्व॒र्गमा रो॑हति॒ यत्रा॒दस्त्रि॑दि॒वं दि॒वः ।अ॒पू॒पना॑भिं कृ॒त्वा यो ददा॑ति श॒तौद॑नाम्

sa svargamā rohati yatrādastridivaṃ divaḥ | apūpanābhiṃ kṛtvā yo dadāti śataudanām

हिन्दी अर्थ

पारवसी प्राता के दरशेन.क्रा भ्रधिकारी, नहः बनता ५.२ अहम्). व (सप्त भव॑तः) सात समीप लोको करो (वेद) जानेता ह, (सप्त परावृतः) सपरत र क लोकों ।को.(बेद), जानता हं, (रह् म, मातां की गोद मे लं से दे ह, भौर बह हं इन सब मे रिरोमणि हैः यह . ( मै, प्रतिग्रह करने वाला, जानता हं ।

English

Pour for the giver mingled curd, and flowing butter milk, and mead. Let all thy skin, Sataudanā! let every hair thou hast, O Cow, Pour for the giver mingled curd, and flowing butter, milk, and mead.

अध्याय १०

श्लोक 9.6

स तांल्लो॒कान्त्समा॑प्नोति॒ ये दि॒व्या ये च॒ पार्थि॑वाः ।हिर॑ण्यज्योतिषं कृ॒त्वा यो ददा॑ति श॒तौद॑नाम्

sa tāṃllokāntsamāpnoti ye divyā ye ca pārthivāḥ | hiraṇyajyotiṣaṃ kṛtvā yo dadāti śataudanām

हिन्दी अर्थ

है, उस (वशाम्) वशा का, (सहस्रधाराम् जोकि हजारो लोक-लोकान्तसों . (शतम्) सैकड़ों (कंसाः) कंस के बने कर्मनीयपोत्र (शतं दोग्धारः) सकडों वदा माता के दुग्ध को दोहने वाले, (श्तं गोप्तारः) सैकडों इस की रक्षा चर्या करते ह । (ते) वे (वशाम्) वशा माता को (एकधा )-एकश्रकार ति वा का वणेन गौके सममे मन्व मँ हभ है इसके" दषं के दौहेने के लिये कमनीय कंसपातरों के सदृश सैकड़ों कमनीयं हृदय हँ । सैकड़ों इस

English

Sprinkled with molten butter, let the two meal-cakes be sport for thee. Make them thy wings, O Goddess, and bear him who dresses thee to heaven.

अध्याय १०

श्लोक 9.7

ये ते॑ देवि शमि॒तारः॑ प॒क्तारो॒ ये च॑ ते॒ जनाः॑ ।ते त्वा॒ सर्वे॑ गोप्स्यन्ति॒ मैभ्यो॑ भैषीः शतौदने

ye te devi śamitāraḥ paktāro ye ca te janāḥ | te tvā sarve gopsyanti maibhyo bhaiṣīḥ śataudane

हिन्दी अर्थ

के रष के वोहने वले है । सैकड़ों इत के रक्षक ग्वाले ह, जो कि दस पृथिवी की पीठ.पर निवास करते है, परन्तु जो ¦ दिव्यगुणी जन इसके ही प्राय मेँ रहकर निज जीवनचर्या करते है वे पारमेद्वरी माता के स्वरूप का कथन के ष का कथन करते हं क्यौकर उन्होने पारमेरवरी माता का -साक्षात् कां० १५॥. सु १० -श्रथववेद-माष्य ३८३ य्रपदीराीरा “ स्वधाराणा मरदीटंका। ˆ (वशा). वद्या माता (देवी) जो किं दिव्यगणो वालीं . है वह, (ब्रह्मणा)

English

Each grain of rice in mortar or on pestle, all on the skin or in the winnowing-basket, Whatever purifying Mātarisvan, the Wind, hath sifted, let the Hotar Agni make of it an acceptable oblation.

अध्याय १०

श्लोक 9.8

वस॑वस्त्वा दक्षिण॒त उ॑त्त॒रान्म॒रुत॑स्त्वा ।आ॒दि॒त्याः प॒श्चाद् गो॑प्स्यन्ति॒ साग्नि॑ष्टो॒ममति॑ द्रव

vasavastvā dakṣiṇata uttarānmarutastvā | ādityāḥ paścād gopsyanti sāgniṣṭomamati drava

हिन्दी अर्थ

(श्प्येति) प्राप्तहोतीहै। ; . - . ध , ; .पारमेवरी माता उपासना तथा . ध्यानयोगरूपी कर्मो के कारण मानो स्वयं पैरों हारा, यज्ञ करने . वाले को पहुंच जाती. है । इरा है जल, दुध कहा है । परमेदवरीय माता, सात्त्विकं भर्त; जिस दवारा . “स्व का शवा (बक्रण). हो सके, प्राणदा है । महीलुका = महिलोका; (पैप्पलाद- शाला) +. महीलुका” मे “वर्णविकार हारा “श्रो” के स्थान भें उ“ 'हुभा होती है (योग-४५२९.) “भेषु भौर पर्जन्यः” पर्यायवाची हँ । पत्नी का भरं तु गृह की रक्षाकंरने वाली होन किं गृहवासियों की सांमी पत्नी । (वशे). सब जगत् को व्च मे करने वाली कमनीया है पारमेश्वरी हई स्तन ॥ !स्तन यतः गोमाता के ४ होते है, इसलिये ‹विचुतः मे बहुवचन .

English

In the priest’s hands I lay, in separate order, the sweet celestial Waters, dropping fatness.

अध्याय १०

श्लोक 9.9

दे॒वाः पि॒तरो॑ मनु॒ष्याऽ गन्धर्वाप्स॒रस॑श्च॒ ये।ते त्वा॒ सर्वे॑ गोप्स्यन्ति॒ साति॑रा॒त्रमति॑ द्रव

devāḥ pitaro manuṣyā' gandharvāpsarasaśca ye| te tvā sarve gopsyanti sātirātramati drava

हिन्दी अर्थ

विद्युत के कार मर ते वृ होती है । मन्त मे वामा को रप . अपरत से परयमा इवे भरष॑सा वशे . (वरे) है वृशांमांतः. (तवम्) तु. (भथमाः भ्रः) हिने जं्लौ का (षु) न् भरात् दान करती है, (भसः उराः) तलात् पभियो क .“ मल मँ उलि करम दाया है": (१) जेवों का भदान । (२) जरल

English

As here I sprinkle them may all my wishes be granted unto me in perfect fulness. May we have ample wealth in our posses- sion. A glorification of the sacred Cow as representing the radiant heavens

अध्याय १०

श्लोक 9.10

अ॒न्तरि॑क्षं॒ दिवं॒ भूमि॑मादि॒त्यान् म॒रुतो॒ दिशः॑ ।लो॒कान्त्स सर्वा॑नाप्नोति॒ यो ददा॑ति श॒तौद॑नाम्

antarikṣaṃ divaṃ bhūmimādityān maruto diśaḥ | lokāntsa sarvānāpnoti yo dadāti śataudanām

हिन्दी अर्थ

१. कामभ-यज्ञ (भ्रथवं ०. ११।९०) 1. : कर के, (शतौदनाम्) सैकड़ों भोदनादि भोज्य पदार्थं देने वाली पारमेश्वरी स्थान पर (भारोहति) भ्रारोहण करता है (यत्र) जहां कि. (दिवः). दिव् का (रदः) वह (त्रिदिवम्). त्रिदिव षूमहै। . भगो में विभक्त होता ह, जिन्हे कि त्रिदिव कहा है साथ बान्धे रखता है, रौर उसे शत्तौदना प्रदान -करता है, पारमेदवरी. माता

English

There stood the mighty measurer of the region: into the ver- dant plants went Pavamāna. Over the Gāyatri, above the immortal world he strode away.

अध्याय १०

श्लोक 9.11

घृ॒तं प्रो॒क्षन्ती॑ सु॒भगा॑ दे॒वी दे॒वान् ग॑मिष्यति ।प॒क्तार॑मघ्न्ये॒ मा हिं॑सी॒र्दिवं॒ प्रेहि॑ शतौदने

ghṛtaṃ prokṣantī subhagā devī devān gamiṣyati | paktāramaghnye mā hiṃsīrdivaṃ prehi śataudane

हिन्दी अर्थ

(शतौदनाम्) पारमेरवेरी-माता को . (हिरण्य ज्योतिषम्). हृदयरमणीय ज्योति.वाली . (कृत्वा ) करक (ददाति) शिष्य को प्रदान करता है । पारमेश्वरी माता का दन करा देता है, वह उच्च योग 1 (५ होने के कारण, भ्रव्याहित गतिसे, द्युलोक के लोक › तथा पृथिवी के विविध प्रदेशो मे, सशरीरं भा-जा सकता है, (देलो यजु9 ये तं देवि क्षमितारः पक्तारो ये च॑ ते जनाः। (देवि) है पारमेश्वरी मातुदेवते ! (ये जनाः) जो लन (ते शमितारः) तुमे शान्त करते दह, (ये च) भरौर जो (ते पक्तारः) तुमे परिपक्व करते है भैषीः) तू न भयभीत हो (शतौदने) है सैकड़ों श्रोदन आदि भोज्य पदाथों को देने वाली पारमेश्वरी मातः

English

Those who by Song discovered Song—where did the Unborn see that thing? Luller to rest, and gatherer-up of treasures, Savitar like a God whose laws are constant, hath stood like Indra in the war for riches.

अध्याय १०

श्लोक 9.12

ये दे॒वा दि॑वि॒षदो॑ अन्तरिक्ष॒सद॑श्च॒ ये ये चे॒मे भूम्या॒मधि॑ ।तेभ्य॒स्त्वं धु॑क्ष्व सर्व॒दा क्षी॒रं स॒र्पिरथो॒ मधु॑

ye devā diviṣado antarikṣasadaśca ye ye ceme bhūmyāmadhi | tebhyastvaṃ dhukṣva sarvadā kṣīraṃ sarpiratho madhu

हिन्दी अर्थ

शमितारः शान्त करने वले; तुक कूद हई को स्तुति-पा्थेना्रो सुखापन,. महामारियां श्रादि परिणाम ह उस के क्रोध के । पक्तारः = पकाने तब जनों दारा.इसको हत्या तथा श्रग्नि प॑र उसे.पकानां कंसे युक्तिसंगत है । मा षीः तु उपासकः, भ्रपात तथा कुपातरौ मेँ प्रवान करेगे इस का भय मत कर । एसे व्यक्तियों को, शतौदना का परिज्ञान, उपासक नहीं . देते । एसा ही संय, कविता मे विद्या के सम्बन्ध में भी प्रकट किया है । यथा कां १०। सू०€ भथवंवेद-भाष्य ३६९

English

Men versed in sacred knowledge know that living Being that abides. In the nine-portalled Lotus Flower, enclosed with triple bands and bonds.

अध्याय १०

श्लोक 9.13

यत् ते॒ शिरो॒ यत् ते॒ मुखं॒ यौ कर्णौ॒ ये च॑ ते॒ हनू॑ ।आ॒मिक्षां॑ दुह्रतां दा॒त्रे क्षी॒रं स॒र्पिरथो॒ मधु॑

yat te śiro yat te mukhaṃ yau karṇau ye ca te hanū | āmikṣāṃ duhratāṃ dātre kṣīraṃ sarpiratho madhu

हिन्दी अर्थ

(शरतिद्रव) अ्रतिक्रान्त कर जा । 9, भी दक्षिण भादि दिशाभरों के साथ किस प्रकार सम्बन्ध है-यह भी भनु- सन्धय है । पारमेरवरी-माता सा का वणन प्रकरणानुसार प्रतीत होता करके, तेरे नाम को सुरक्षित कर, जगत् से नास्तिकता का उच्छेद करेगे । खरी माता है । इस दारा प्रग्निष्टोम की हेयता प्रतीत होती है भौर पार

English

Desireless, firm, immortal, self-existent, contented with the es- sence, lacking nothing, Free from the fear of Death is he who knoweth that Soul cou- rageous, youthful, undecaying. The Sataudanā or Hundredfold Oblation

अध्याय १०

श्लोक 9.14

यौ त॒ ओष्ठौ॒ ये नासि॑के॒ ये शृङ्गे॒ ये च॒ तेऽक्षि॑णी ।आ॒मिक्षां॑ दुह्रतां दा॒त्रे क्षी॒रं स॒र्पिरथो॒ मधु॑

yau ta oṣṭhau ye nāsike ye śṛṅge ye ca te'kṣiṇī | āmikṣāṃ duhratāṃ dātre kṣīraṃ sarpiratho madhu

हिन्दी अर्थ

मनुष्य (ये गन्धर्वः) जो पंथिवो का धारण करनेवाले राजा लोग, (र दु सुरक्षित करेगे (सा) वह तु (अतिरात्रम्) भरतिरात्रं को (भतिदरवं) कानतं सर्ीनापयोति यौ ददाति शतोद॑नो् ॥१०॥ ३७० भरथवेवेद-भाष्य . कां९ १०॥ सु० ९ ," श्तं ओकन्ती संमग।. देवी देवान ग॑मिष्यतिः। (सुभगा) उत्तम. भगो. वाली (देवी ) पारमेदवरी मांतारूपी देवता (देवान्)

English

Binding the mouths of those who threaten mischief, against my rivals cast this bolt of thunder,

अध्याय १०

श्लोक 9.15

यत् ते क्लो॒मा यद्धृद॑यं पुरी॒तत् स॒हक॑ण्ठिका ।आ॒मिक्षां॑ दुह्रतां दा॒त्रे क्षी॒रं स॒र्पिरथो॒ मधु॑

yat te klomā yaddhṛdayaṃ purītat sahakaṇṭhikā | āmikṣāṃ duhratāṃ dātre kṣīraṃ sarpiratho madhu

हिन्दी अर्थ

करने वाजे को. (मा हिसीः) तुःनिज प्राश्य से वञ्चितः न. कर । (शतौदने) पारमेदवरी माता रातौदना है, सैको श्रकार के ग्रोदन श्रादि भौज्यं पवां देती है, भौर वृतादि सात्विक पदाथं भी देती है । वह .सुमगन है, धेष्ठ मृत्युः (यजु० २५।१३) । यह मृत्यु है “हिसा” । यथा “मा हसी" (मन्तः ये देवा दिविषदो अन्तरिक्षसदंश्च ये ये चेमे भम्यामधिं ।

English

Indra first gave the Hundredfold Oblation, welfare of him who worships, foe-destroying. Thy skin shall be the Altar; let thine hair become the Sacred Grass.

अध्याय १०

श्लोक 9.16

यत् ते॒ यकृ॒द् ये मत॑स्ने यदा॒न्त्रं याश्च॑ ते॒ गुदाः॑ ।आ॒मिक्षां॑ दुह्रतां दा॒त्रे क्षी॒रं स॒र्पिरथो॒ मधु॑

yat te yakṛd ye matasne yadāntraṃ yāśca te gudāḥ | āmikṣāṃ duhratāṃ dātre kṣīraṃ sarpiratho madhu

हिन्दी अर्थ

काठः १० सुऽ श्रथर्ववेद-माष्य ३७१ (ये) जो (हैवाः) देव (दिविषदः) चलोक मँ स्थितै येच) भ्रौरजो भ्रधि) भूमिम हैः (तेभ्यः) उन सब के लिये' (त्वम्) तरु है पारमेवरी मधु (धुक्ष्व). दोहन कर, भ्रदान-कर । पकाना हो जाने पर (मन्त्र ७), जबं वह शरीर से नं रही, तो वह् तिलोक- देती है, न शहद 1 श्रतः मतर मे पारमेदवरी माता का वर्ण॑न.ह । पररमेव्वरीं

English

This cord hath held thee firmly: let this pressing-stone dance round on thee: The holy water be thy hair: let thy tongue make thee clean, O

अध्याय १०

श्लोक 9.17

यस्ते॑ प्ला॒शिर्यो व॑नि॒ष्ठुर्यौ कु॒क्षी यच्च॒ चर्म॑ ते ।आ॒मिक्षां॑ दुह्रतां दा॒त्रे क्षी॒रं स॒र्पिरथो॒ मधु॑

yaste plāśiryo vaniṣṭhuryau kukṣī yacca carma te | āmikṣāṃ duhratāṃ dātre kṣīraṃ sarpiratho madhu

हिन्दी अर्थ

जल भीं वहो प्रदान करती है मौर शहद भी 1. „ + कर्णौ) जो दो कान, (यौ च) भरौर जो (ते) तेरे (हनूः) दो जबाड़े है वे प्राप्ति -वणित हुई है, इसका यह भरभिप्राय. प्रतीत होता हैकिंसब ताङ्खो का अनुपादेय है । दशतौदना हारा पारमेश्वरी माता का ग्रहण करने साथ-साथ दर्शाया जायेगा 1 भथ दशानि से पूर्वं दो बातो को ध्यान मेँ रना चाहिए ॥ नरी ५4४ ग र ॥ ग

English

Cow. Go, Hundredfold Oblation, made bright and adorable, to hea- ven. He who prepares the Hundredfold Oblation gains each wish thereby:

अध्याय १०

श्लोक 9.18

यत् ते॑ म॒ज्जा यदस्थि॒ यन्मां॒सं यच्च॒ लोहि॑तम्।आ॒मिक्षां॑ दुह्रतां दा॒त्रे क्षी॒रं स॒र्पिरथो॒ मधु॑

yat te majjā yadasthi yanmāṃsaṃ yacca lohitam| āmikṣāṃ duhratāṃ dātre kṣīraṃ sarpiratho madhu

हिन्दी अर्थ

(१) मारी गर्द, काटी गई, भ्रौर भरग्निपर भूनी गई भौर दिवूर्मे पटंची हुई शतौदना के जब ङ्ख ही न रहे (देखो मन॒ ७,४,११) तब वहं है । वेदिक दशनानूसार वेद में मन्त्ररचना बुद्धि पूरवंक हुई है,यथा “बुद्धिपूवा नहीं । विशेषतया तब जब कि वेदों को परमेदवरीय रचना माना जात्ता है । (२) मन्त १३-१४ मेँ -प्रतीयमान गोप्राणी तथा उसके शिरः भादि दर्शा दिया जायेगा । तथा यह -भी स्मरण रखना चाहिए कि १३-२४ मन्त्रो "नभृक्ं भी परमेरवर के नियमानुसार पारमेश्वरी माता द्वारादही

English

For all his ministering priests, contented, move as fitteth them. He rises up to heaven, ascends to younder third celestial height.

अध्याय १०

श्लोक 9.19

यौ ते॑ बा॒हू ये दो॒षणी॒ यावंसौ॒ या च॑ ते क॒कुत्।आ॒मिक्षां॑ दुह्रतां दा॒त्रे क्षी॒रं स॒र्पिरथो॒ मधु॑

yau te bāhū ye doṣaṇī yāvaṃsau yā ca te kakut| āmikṣāṃ duhratāṃ dātre kṣīraṃ sarpiratho madhu

हिन्दी अर्थ

यो त ओष्ठो ये नासिके ये शद्धे ये च तेऽ्षिणी । दोहन करर+प्रदान करे । ; , ˆ निासिके= वास प्रवास, यथा “नसोः प्राणः (भ्रथवं ° १६।६०।१)। यस्त कटोमा यदू हदयं पुरीतत् सहकंष्ठिका 1 , ‡ , कां० १०।सु० ९ भ्रथरवेवेद-भाष्य ३७३ का श्रभिप्रायहैत्रतानुकूल भोज्यपदा्थं । 8

English

Whoever gives the Hundredfold Oblation with the central cake. That man completely wins those worlds, both of the heavens and of the earth, Whoever pays the Hundredfold. Oblation with its golden light.

अध्याय १०

श्लोक 9.20

यास्ते॑ ग्री॒वा ये स्क॒न्धा याः पृ॒ष्टीर्याश्च॒ पर्श॑वः ।आ॒मिक्षां॑ दुह्रतां दा॒त्रे क्षी॒रं स॒र्पिरथो॒ मधु॑

yāste grīvā ye skandhā yāḥ pṛṣṭīryāśca parśavaḥ | āmikṣāṃ duhratāṃ dātre kṣīraṃ sarpiratho madhu

हिन्दी अर्थ

के श्रग्रभाग है, (यौ) जो (अंसौ) दो हंसलियां है, (यां च) . भ्रौर जो (ते (दुहताम्) दो्है भ्रदान करे । ध (ते) तेरी (माः ग्रीवाः). जो. गरदन को .भरस्थिरयां . या भ्रवयव है, (ये भ्रवयव है, (याः च परोवः) भौर जो छाती कीं प्रस्थियां ई वे (दत्रे) दाता के लिये भरामिक्षा, क्षीर, सपि: नौर मध (दहताम्) "दोहै प्रदानं करे । यामिका दतां दने धीरं . सपिरयो, मधुं ॥२१॥ . ... (ते) तेरे (यौ ऊरू). जो. -दो पट 188 है, -(अरष्टठीषन्त्रौ) घूटने है, (ये रोणी) जो -दो.चूतड़. अर्थात् कुले 1308 है, (या च)

English

Have no fear of them. The Vasus from the South will be thy guards, the Maruts from the North, Ādityas from the West; o’ertake and pass the Agnishtoma, thou!

अध्याय १०

श्लोक 9.21

यौ त॑ उ॒रू अ॑ष्ठी॒वन्तौ॒ ये श्रोणी॒ या च॑ ते भ॒सत्।आ॑मिक्षां॑ दुह्रतां दा॒त्रे क्षी॒रं स॒र्पिरथो॒ मधु॑

yau ta urū aṣṭhīvantau ye śroṇī yā ca te bhasat| āmikṣāṃ duhratāṃ dātre kṣīraṃ sarpiratho madhu

हिन्दी अर्थ

(ते) तेरी (यत् पुच्छम्) ची पहै, (ते) तेरे. (ये वालाः) पछ के वाल (यत् ऊँषः)- जो दुराशय है, (ते) तेरे (ये चः स्तनाः) जो स्तन है (दात्रे) दाता के. लिथे आमिक्षा; क्षीरःः-सपिः, ओर मधु . (दुहाम्) दोहै, प्रदान करे । ; दाता है पारमेदवरी-माता का ददन करनि वाला श्रष्यास्म गु । यास्ते. नद्धाः. याः कुष्ठिका -च्छरा येः च ते शफाः (ते) तेरी (याः) जो (जक्घाः)' जका है, (याः) जो (कुष्ठिकाः) कुष्ठिकए है, (ऋच्छरा): जो ऋच्छरांए ह, (ये च) भौर जो (ते) तेरे (चर्फाः) खर है, वे (दाते). दाता कै ःलिये -(भामिक्षाम्"“"“ ) भामिक्षा,. जङ्घाः चार टागो.की,. घुटनों से नीचे की, चार श्रधः शाखाएं ।: ३७६ । भथवेवेद-भाष्य कां० १०। सूर

English

The Gods, the Fathers, mortal men, Gandharvas, and Apsara- ses, All these will be the guards: o’ertake and pass the Atirātra, thou!

अध्याय १०

श्लोक 9.22

यत् ते॒ पुच्छं॒ ये ते॒ बाला॒ यदूधो॒ ये च॑ ते॒ स्तनाः॑ ।आ॒मिक्षां॑ दुह्रतां दा॒त्रे क्षी॒रं स॒र्पिरथो॒ मधु॑

yat te pucchaṃ ye te bālā yadūdho ye ca te stanāḥ | āmikṣāṃ duhratāṃ dātre kṣīraṃ sarpiratho madhu

हिन्दी अर्थ

भ्रवयव है जिन का किं सम्बन्ध शतौदना पारमेदवरी माता के साथ है । (शतौदने) है गतौदने ! (ते) -तेरा (यत् चमं) चमड़ा है, (भघ्नये) हे श्रहन्तव्ये ! (यानि लोमानि) जोलोमदहै, वे (दात्रे) दाता केलिये शतौदना = सैकड़ों प्रकार के भ्रोदन. भादि मोज्य पदां देने वाली की श्रचिष्ठात्री-- पारमेदवरी माता है! दाता=पारमेदवरी माताका दरशन करा देने वाला भध्यात्म गर । तौ पृक्तौ देवि कृत्वा सा पक्तारं दिवि वहं ॥२५॥

English

The man who pays the Hundredfold Oblation winneth all the worlds, Air, heaven, and earth, Ādityas, and Maruts, and regions of the sky. Sprinkling down fatness, to the Gods will the beneficent God- dess go.

अध्याय १०

श्लोक 9.23

यास्ते॒ जङ्घाः॒ याः कुष्ठि॑का ऋ॒च्छरा॒ ये च॑ ते श॒फाः ।आ॒मिक्षां॑ दुह्रतां दा॒त्रे क्षी॒रं स॒र्पिरथो॒ मधु॑

yāste jaṅghāḥ yāḥ kuṣṭhikā ṛccharā ye ca te śaphāḥ | āmikṣāṃ duhratāṃ dātre kṣīraṃ sarpiratho madhu

हिन्दी अर्थ

(ते) तेरे (क्रोदौ) दो करोड़, (राज्येन) घृत द्वारा (भ्रभिषारितौ) सीचे गए (पुरोडाशौ) दो पुरोडाश हों। (देवि) है देवि ! (तौ) उनदो पुरोडाशो को (पक्षौ) दो पंख (कृत्वा) कर के (पक्तारम्) पकाने वाले को (दिवम्) दिव् मे (वह) ले जाया पहुंचा। क्रोडौ छाती के वाम-दक्षिणपादवं । पुरोडाशौ=जौ या. तण्डुल की पीठी द्वारा, श्राग पर.पकाए, दो भट्रे । पुरोडशों की यज्ञाहुतियां दी पुरोडाश तर करि.गौ. बेल द्वाराःकृषिजन्य जौ तण्डुलो दवारा बनाया जाता कहाहैकिहेिगौ! तु दो पंखो वले पक्षीर्यहो करतु, यजमान कों स्वगं पहुंचा पारमेदवरी माता के पक्षम दौ पुरोडाश ह मस्तिष्क के दाए-बाएुं के दो खण्ड। इन्द हो भाताकरो छाती के वाम-दक्षिणके दो पादवं भौर ईन कां०.१५।सू०९ प्रंथववेद-भष्यं ३७७ मे लंगे दो प कदा. है । माता पक्षीखूपय होकर खपासकं को उस केःदिव्- है ) उपासक हदयचक्र मे विराजमानं थौ । किसी श्रष्यारम सूरं -की शंव नं थी कि कहे उपासक कों हदयं -चक्तं से उठाकर शीघ्रं संहस्रारचक्रं मे पहुंच दे । इसलिये भ्रष्यार्मगर मातां से प्राना करता है किं वह दस उपासक

English

Harm not thy dresser, Cow! To heaven, O Hundredfold Obla- tion, speed! From all the Gods enthroned in heaven, in air, from those who dwell on earth,

अध्याय १०

श्लोक 9.24

यत् ते॒ चर्म॑ शतौदने॒ यानि॒ लोमा॑न्यघ्न्ये ।आ॒मिक्षां॑ दुह्रतां दा॒त्रे क्षी॒रं स॒र्पिरथो॒ मधु॑

yat te carma śataudane yāni lomānyaghnye | āmikṣāṃ duhratāṃ dātre kṣīraṃ sarpiratho madhu

हिन्दी अर्थ

कीं शीघ्र सहस्ररिचक्रं मे पहुंचा दें ) उसवे एसे चपैणि थो वा दूपे तण्ड कणैः ' - मानः). बहत्री हुई (मातरिश्वा .वातः) ,भन्तरिश्ष मेँ: गति - करतेषिः हुई फैली हई वायुने ( माथः) मृथ- डाला है, : (त॒त्) उस सबं को (होवा; ग्रन्ति) मृगकछालं प॑र भोखलीः कोः-रखकरः, मुसलः दारी धान्य कौ कूटकरेतंण्डलं प्रप्त किया जाता है। इस कूटे घान्यं कौ छाज द्वया, -वहती वायु में छानं पकाकर सुहृत करती है । मानो यह भाव भ्रम्नि ने होता भर्थात् दाता बनकर प्रदान किया है । होता = ह दानादनयोः । भ्रादाने चेत्येके (जुहोत्यादिः) ।

English

Draw forth for evermore a stream of milk, of butter, and of mead. 166 Let thy head, let thy mouth, let both thine ears, and those two jaws of thine.

अध्याय १०

श्लोक 9.25

क्रो॒डौ ते॑ स्तां पुरो॒डाशा॒वाज्ये॑ना॒भिघा॑रितौ ।तौ प॒क्षौ दे॑वि कृ॒त्वा सा प॒क्तारं दिवं॑ वह

kroḍau te stāṃ puroḍāśāvājyenābhighāritau | tau pakṣau devi kṛtvā sā paktāraṃ divaṃ vaha

हिन्दी अर्थ

(देवीः) दिव्युणों - वाले .(मटूमतीः) मषुर, (धृत््वुतः) धृतस्रावौ कामना वाला, (इदम्). इस जल -को, यह (अहम्) (वः) तुम -बरहज्ञ के भौर हेम (रयीणाम्) योग विभुतियों के (पतयः स्याम) स्वामीं होःजाएं । , मिन्व-के प्रथमां मे भरन् दवारा संत्कार पाने के समय,. जंलपान. तथा मधुर होना चादिए, जो कि मानो धृतज्ञावी होता है, घृतवत् पौष्टिक'तथा चरता ईनः योग-गुरुओं द्वारा च्राहता है, भ्रौरं यदं भी चाहता है. कि भराश्चमः बरन जाएं । प्रकरणानुसार; कामना वाला व्यकवति, - सहस्रार-चक्र मेँ निज

English

Pour for the giver mingled curd, and flowing butter, milk, and mead. Let both thy lips, thy nostrils, both thy horns, and these two eyes of thine.

अध्याय १०

श्लोक 9.26

उ॒लूख॑ले॒ मुस॑ले॒ यश्च॒ चर्म॑णि यो वा॒ शूर्पे॑ तण्डु॒लः कणः॑ ।यं वा॒ वातो॑ मात॒रिश्वा॒ पव॑मानो म॒माथा॒ग्निष्टद्धोता॒ सुहु॑तं कृणोतु

ulūkhale musale yaśca carmaṇi yo vā śūrpe taṇḍulaḥ kaṇaḥ | yaṃ vā vāto mātariśvā pavamāno mamāthāgniṣṭaddhotā suhutaṃ kṛṇotu

हिन्दी अर्थ

, काण्ड १० । धुक्त-९ । सम्पूणं , - ,(बहा = जगत् को वल मे करने वाली पारमेदवरी माता) ;. .. (१) मन्त १-३४। वदा का वर्णन । सायणाचायं तथा विनियोगकारों के मतमें बराह चतुष्पाद् बन्ध्या गौ । . ( . (२) गौ के निर्देशकः वशा के दोहने तथा दुष को वंणेन :५,३१); स्तनो का वणंन (२०); गर्म: का वर्णन (२३); भान्ते, सिथया का भकार भरन्य वर्णन भ्रौपचारिकरहैः गौणहै। म १ ४13 रि 1 1 1६ (३) परन्तु इनसे.भतिरिक्त वेशा का ' वणेन, रायः नीया तथा कान्तिमयी पारमैदवंरी माता परक है । वरा के साथ समूद्र का वर्णन (१३); ऋचः 'भ्रौर सामानि का वर्णन (१ ४); द्यौः, पृथिवी;

English

Pour for the given, etc. Let heart and pericardium, let thy lungs with all the bronchial tubes, etc. Let liver, and let kidneys, let thine entrails, and the parts within, etc.

अध्याय १०

श्लोक 9.27

अ॒पो दे॒वी र्मधु॑मतीर्घृत॒श्चुतो॑ ब्र॒ह्मणां॒ हस्ते॑षु प्रपृ॒थक् सा॑दयामि ।यत् का॑म इ॒दम॑भिषि॒ञ्चामि॑ वो॒ऽहं तन्मे॒ सर्वं॒ सं प॑द्यतां व॒यं स्या॑म॒ पत॑यो रयी॒णाम्

apo devī rmadhumatīrghṛtaścuto brahmaṇāṃ hasteṣu prapṛthak sādayāmi | yat kāma idamabhiṣiñcāmi vo'haṃ tanme sarvaṃ saṃ padyatāṃ vayaṃ syāma patayo rayīṇām

हिन्दी अर्थ

सके रेतस् का चतुर्ष विभाजन (२९); वदा को चौः, पृथिवी, ' विष्णुः, प्रजापति कहना (३०); वशा को सवंरूप कहना (३४); तथा स कार नम॑स्ते जायंमानाये जातायां उत तै नमं । कुछ अयवेवेद-मास्य कां० १०। सु० १० (नमः) नमस्कार हो (उत जातायै) तथा प्रकट हो गई (ते) तेरे लिए (नमः) नमस्कार हौ । (बालेभ्यः). बालों के प्रति, (शफेम्यः) शफों के उस के भ्रकंटः होनेः कँ धुव -चिंह्ं जब प्रकट हो रहे होते हैँ तब उसे नमस्कार किया है । पूवं चिह्न है यथाभ-- = ५ 4 = 11 की संहारक शक्ति का प्रददांक दहै। यथा “शफेन इव श्रोते” (श्रथवं० २०।१३१।७) में कहा है कि परमेदवर तौ जिस का संहार चाहता है उसे ्रस्राती से उखेड़ फंकती. है ॥ तथा देखो मन्त (अथवं० २०।६३।५).

English

Let rectum and omentum, let thy belly’s hollows, and thy skin, etc. Let all thy marrow, every bone, let all thy flesh, and all thy blood, etc.

अध्याय १०

श्लोक 10.1

वशा गौः।१-३४ कश्यपः।वशा।अनुष्टुप्, १ ककुम्मती, ५ पञ्चपदा॰ स्कन्धोग्रीवी बृहती, ६, ८, १० विराट्, २३ बृहती, २४ उपरिष्टाद् बृहती, २६ आस्तारपङ्क्तिः, २७ शंकुमती, २९ त्रिपदा विराड् गायत्री, ३१ उष्णिग्गर्भा, ३२ विराट् पथ्याबृहती।नम॑स्ते॒ जाय॑मानायै जा॒ताया॑ उ॒त ते॒ नमः॑ ।बाले॑भ्यः श॒फेभ्यो॑ रू॒पाया॑घ्न्ये ते॒ नमः॑

vaśā gauḥ| 1-34 kaśyapaḥ| vaśā| anuṣṭup, 1 kakummatī, 5 pañcapadā॰ skandhogrīvī bṛhatī, 6, 8, 10 virāṭ, 23 bṛhatī, 24 upariṣṭād bṛhatī, 26 āstārapaṅktiḥ, 27 śaṃkumatī, 29 tripadā virāḍ gāyatrī, 31 uṣṇiggarbhā, 32 virāṭ pathyābṛhatī| namaste jāyamānāyai jātāyā uta te namaḥ | bālebhyaḥ śaphebhyo rūpāyāghnye te namaḥ

हिन्दी अर्थ

्ारा-भूमियो को उ॑पृजाऊ . नाना 1.( ३) राष्ट्र भावनां क जतं देकर रटस्यापितं करना । 0 राता हो वाने र पनं अजत क प्रन भौर ष मिल सकन 1 -सातविक भन षं सवथेषठंभलं है... - ब्रह समग्रः पृथिवी का.रजा होत्ता है ।..- ˆ कां० १०। सु° १० भयवेवेद-भाष्य ३८५ हो जाते. है, तब.भक्त, उपासना मे, भक्तिरस भरे निधं हरयो को चा भाताके अति भेट करते । इन्र ते भरभिभोय संराट् का है । वृथा “इन्वत सन्नाद वरुणश्च राजा” (य॑ज ९।३७) 1 ' राष्ट "का शासुक राजा होता है जोक्ति प्रजा वारा वरण किया जाता है, चना जाता है । रतः इसे वरण ::- „ तस्मात्ते इतरहा पय॑ः क्षीरं करदो ऽहरदशे ॥१०॥ .. =.

English

Worship to thee springing to life, and worship unto thee when born! Worship, O Cow, to thy tail-hair, and to thy hooves, and to thy form!

अध्याय १०

श्लोक 10.2

यो वि॒द्यात् स॒प्त प्र॒वतः॑ स॒प्त वि॒द्यात् प॑रा॒वतः॑ ।शिरो॑ य॒ज्ञस्य॒ यो वि॒द्यात् स व॒शां प्रति॑ गृह्णीयात्

yo vidyāt sapta pravataḥ sapta vidyāt parāvataḥ | śiro yajñasya yo vidyāt sa vaśāṃ prati gṛhṇīyāt

हिन्दी अर्थ

: ;: विद्व थति ब्रह्माण्ड है परारमेदवरो माता का शरीर । सूये इस शरीर इसकी इस गति को भ्रगली दो जचक्लाएं कटा है, भौर सूं जब उत्तंरायण-की भरन्तिमःसीमा से भूमष्पररेलाः की भोर वापिस लौट रहा होता है तव इसकी लौटती गति को दो भ्रगली सकिथयां कहा है इसी प्रकार सूयं जवं भूमष्य- रेखा से दक्षिण.की.भ्रोर गति करताहै तष इसकी इस गति को पिछली दो जज्खाएं कहा है; भौर सूयं ज॑बं दक्षिणायन कौं भन्तिम सीमा से शुम॑ष्थरेवा गहरमम्पाम्” द्वारां दो श्रगली : गतियो काः निदे कियां है । "मै"८. शक्तं नहीं हरा (ऋ० १।१०३।१०) । इसी भकार श्रादित्यरदिमर्यो प्रथमा बहुवचन । भरतः भ्रन्तो से थताः पैदा हए, सका श्रथं यह हभा कि मनुष्यों से मानुष-भङ्गं पैदा हुए, जो कि भन्न का भक्षण करते) .

English

Cow With Kalis and Gandharvas by her side hath stepped upon the sea. Come hither with the Wind, yea, come with every creature borne on wings.

अध्याय १०

श्लोक 10.3

वेदा॒हं स॒प्त प्र॒वतः॑ स॒प्त वे॑द परा॒वतः॑ ।शिरो॑ य॒ज्ञस्या॒हं वे॑द॒ सोमं॑ चास्यां विचक्ष॒णम्

vedāhaṃ sapta pravataḥ sapta veda parāvataḥ | śiro yajñasyāhaṃ veda somaṃ cāsyāṃ vicakṣaṇam

हिन्दी अर्थ

..: -कोग॑मजामकं इ ृतगे नि ॥ 1; : (एके) करई (एनाम्); दसः पारमेदवरी; वश्ना-मता से (सोमम्) सोम कां (दृह) दोदेन करते है, (एके). कर्द(ृतप) वृतसूप.मे इस वशा माता काऽ १० सू०.१० भ्रथर्वेवेद-मांष्यः-.: ०९ की उपासना करते हँ । (ये) जो योगिन्ननं (एवं विदुषे) इस प्रकार जानने दशन करा देते है, (ते) वे (दिवः) दिव् के (चरिदिवम्) त्रिदिव विभायको (गताः) पहुचे हृए होतेर्है। = ५५ ज सोम--सोमौषत् का रस । करई योगियौ को वशां का दषं भर्थात् उस कीं इच्छा-को पूणं करते रहतें है भौर इस मागे से विचलितं नहीं होते ।

English

He only joineth battle, yea, he who alone controlleth her. Now sacrifices have become victories, and the Cow their eye.

अध्याय १०

श्लोक 10.4

यया॒ द्यौर्यया॑ पृथि॒वी ययापो॑ गुपि॒ता इ॒माः।व॒शां स॒हस्र॑धारां॒ ब्रह्म॑णा॒च्छाव॑दामसि

yayā dyauryayā pṛthivī yayāpo gupitā imāḥ| vaśāṃ sahasradhārāṃ brahmaṇācchāvadāmasi

हिन्दी अर्थ

८.१६; बवैदिक-छन्दोमीमांस नन मी ०4 नया संस्करणः २००० १५. वेदिक-स्वर-मी्माता - नया संस्करण । य° भी० २५-०० १६. वेदो का महत्व तथा उनके प्रचार के उपाय; वेवाथं की विविध प्रभिया्रों कौ एेतिहासिक मीमांसा (संस्कृत-हिन्दी) - १६. निरक्तकार रौर वेद में इतिहास - +, ,, २-०० लेखक-श्वी पऽ. धर्मदेव जी निरुक्ताचायं । मूल्य २-०० . २१. वेदिक-जीवन--श्री विदवनाथं जी विद्यामाण्तंड द्वारा भरथः जी काव्यती्थं . लिखित वेदविषयंक चतुदंश-भवन, वसिष्ठ-नन्दिनी

English

The Cow is Heaven, the Cow is Earth, the Cow is Vishnu, Lord of Life. e The Sādhyas and the Vasus have drunk the out-pourings of the

अध्याय १०

श्लोक 10.5

श॒तं कं॒साः श॒तं दो॒ग्धारः॑ श॒तं गो॒प्तारो॒ अधि॑ पृ॒ष्ठे अ॑स्याः ।ये दे॒वास्तस्यां॑ प्रा॒णन्ति॒ ते व॒शां वि॑दुरेक॒धा

śataṃ kaṃsāḥ śataṃ dogdhāraḥ śataṃ goptāro adhi pṛṣṭhe asyāḥ | ye devāstasyāṃ prāṇanti te vaśāṃ vidurekadhā

हिन्दी अर्थ

पांच विशिष्ट निबन्ध है मूल्यं .६-५० २३. बदिक-पीयूव-धारा - लेखक--धी देवेग््रकुमार जी-कपुर । भावपुणं गीतो से युक्त । उत्तम जिल्द .१५-००; साधारण ः-१०-५० 1 लेखक-शी वेद्य रामगोपाल जौ शास्त्री । - मूल्य १००० २५. उरून्योति--डा० वासुदेवशरण श्रग्रवाल लिखित वेदविषंयक २६ वेव की प्रामाणिकता डाः श्रीनिवास शास्त्री । १-५०

English

Cow. 168 When these, Sādhyas and Vasus, have drunk the out-pourings of the Cow,

अध्याय १०

श्लोक 10.6

य॒ज्ञ॒प॒दीरा॑क्षीरा स्व॒धाप्रा॑णा म॒हीलु॑का ।व॒शा प॒र्जन्य॑पत्नी दे॒वाँ अप्ये॑ति॒ ब्रह्म॑णा

yajñapadīrākṣīrā svadhāprāṇā mahīlukā | vaśā parjanyapatnī devā~ apyeti brahmaṇā

हिन्दी अर्थ

२९ बरपू्णमास-पड्ति--पमीमसेनङत, माषा्थं सहित २५-०० शारं प्रद हमने इसे प्रथम बार छापा है । २०-०० दवारा मूल मराठी में लिखे गये म्रन्थका हिन्दी प्रनुवाद। इसीका गुजराती अनुवाद संशोधितं संस्कार.विधि.का भ्राघार बना । २०-०० सहित सोमयाग चातुर्मास्यं भौर वाजपेय याग का वर्णेन है । (दोनों ३७. भष्टाध्यायी- (मूल) शुद्ध संस्करण । , -३-५० ३९८ धातुपाठ-धात्वादिसुची सहित, शुद्ध सस्करण । ३-७०

English

They in the Bright One’s dwelling-place pay adoration to her milk. For Soma some have milked her: some worship the fatness she hath poured.

अध्याय १०

श्लोक 10.7

अनु॑ त्वा॒ग्निः प्रावि॑श॒दनु॒ सोमो॑ वशे त्वा ।ऊध॑स्ते भद्रे प॒र्जन्यो॑ वि॒द्युत॑स्ते॒ स्तना॑ वशे

anu tvāgniḥ prāviśadanu somo vaśe tvā | ūdhaste bhadre parjanyo vidyutaste stanā vaśe

हिन्दी अर्थ

. .. ४१. सस्करुत पठन-पाठन की. भ्रतुभूत सरलतम . विधि- लेखक - पन्थी 8907६ (78६ 80०1६) - यह् पस्तकं श्रीः पऽ सरलतम विधिः भाग १ का भग्रेजी भ्रनुवाददहै। भ्ग्रंजी. भाषा कै पालं विरचित पी» एंच० डी का महत्त्वपुणं शोषं-मबन्धं (संस्कृत )। सुन्दर छपाई उत्तम कांगज बया जिल्द सहित । भूल्य ५०-०० ४९. संसृत व्याकरण नँ गणपाठ की परम्परा भ्रौर भ्राचा्यं वाणिनि लेखक --डा० कपिलदेव शास्त्री एम०ए० । सजिल्द १५-०० „ ४०. सत्थाथभरकाक्ष ; (आयंसमाज-शताब्दी-संस्करण ) १३ परि-

English

They who have given a cow to him who hath this knowledge have gone up to the third region of the sky. He who hath given a Cow unto the Brāhmans winneth all the worlds.

अध्याय १०

श्लोक 10.8

अ॒पस्त्वं धु॑क्षे प्रथ॒मा उ॒र्वरा॒ अप॑रा वशे ।तृ॒तीयं॑ रा॒ष्ट्रं धु॒क्षेऽन्नं॑ क्षी॒रं व॑शे॒ त्वम्

apastvaṃ dhukṣe prathamā urvarā aparā vaśe | tṛtīyaṃ rāṣṭraṃ dhukṣe'nnaṃ kṣīraṃ vaśe tvam

हिन्दी अर्थ

° :- १. ऋषि दयानन्द के दासत्राथं भरर प्रवचनं -दसमे पौराणिक विद्वानों तथा ईसाई मुसलमानों के साथ हुए ऋं०द० के शास्वायं तथा कां संग्रह है । उत्तम कागज, कपड़े की जिद, मूल्य ३०५०० ५२. ऋषि दयानन्द सरस्वती के पन्थो का इतिहास -लेखंक -- युधिष्ठिर मीमांसक । नया परिशोधित परिवधित संस्करणं ।४०-०० . . ४५३. ऋषिं दयानन्द के भ्नेक पनर.रौर विज्ञापन -- इस बार इसमें गये ह । इस बार यह सग्रह चार भागो मे.छपा है । प्रथंमदो भागोंमें ऽद के पत्र भ्रौर विज्ञापन अदि संगृहीतं ह । तीसरे भौर चौथ माग मेँ विविधं व्यनितर्यो दवारा ऋ ०० को भेजे गये पत्रो का संग्रह

English

For Right is firmly set in her devotion, and religious zeal. Both Gods and mortal men depend for life and being on the

अध्याय १०

श्लोक 10.9

यदा॑दि॒त्यैर्हू॒यमा॑नो॒पाति॑ष्ठ ऋतवरि ।इन्द्रः॑ स॒हस्रं॒ पात्रा॒न्त्सोमं॑ त्वापाययद् वशे

yadādityairhūyamānopātiṣṭha ṛtavari | indraḥ sahasraṃ pātrāntsomaṃ tvāpāyayad vaśe

हिन्दी अर्थ

जन्म-स्थान- मार्च, १८८९ ई° में वजीराबाद्, गुजरांवाला (पाकिस्तान) में। गुजरांवाला मेँ तथा बाद में स्नातक (सन् १९१४) तक गुरुकुल कांगड़ी मे। पद पर नियुक्त तथा सन् १९४२ मं वहाँ से सेवामुक्त हए। ध १ अनुसन्धान- सन् १९२३-२४ मेँ परोपकारिणी सभा अजमेर मे। सन् १९५६ ५७ आर्य सार्वदेशिक वाटिका मे साथ ही “वैदिक अनुसन्धान ' त्रैमासिक पत्रिका का सम्पादन भी। 0 अन्य लेखनः- ९. खापवेद् का आध्यातििक भाष्य। ५. हैदिक गृहस्थाश्रम, ६. दाल सत्याथ-प्रकाश। लाल ऋण्वेदादिभाष्यधूषिका। रहने के कारण आपको ४ स्वर्णपदक ओर एक रजतपदक प्राप्त हुआ। निधन १०३ वर्ष की आयु में ११९ मार्च. सन् १९९१।

English

Cow. She hath become this universe: all that the Sun surveys is she. 169

अध्याय १०

श्लोक 10.10

यद॒नूचीन्द्र॒मैरात् त्व॑ ऋष॒भोऽह्वयत्।तस्मा॑त् ते वृत्र॒हा पयः॑ क्षी॒रं क्रु॒द्धोऽहरद् वशे

yadanūcīndramairāt tva ṛṣabho'hvayat| tasmāt te vṛtrahā payaḥ kṣīraṃ kruddho'harad vaśe

हिन्दी अर्थ

:.“ १. सक्ा् भिलं कर एकरद को दूते ह (भवं, २,५१) । इ जना भी कहते हँ भयर ° २०।२१६.).। दमे एकवृष; मी का हैः (भयव ० .२।२२।६७) ३८६ भरथर्ववेद-माधष्य कां० १० सु° १० कृद हो गया तो उस ने (तस्मात्) उस क्रोषके कारण (ते) तेरे (पयः क्षीरम्) पेय-दुगध को (वशे) है वशा मातः ! (श्रहरत्) भपहूत कर दिया, साभ्नाज्य से हटा दिया ॥१०॥ मती पारमेदवरी माता का जब भ्राह्ान करता है, तब वक्षा का राज्य उस सान्नाज्य पापकमा से रहित हो जाता है। परन्तु कारणवकद, सम्भवतः

English

The man who knows the Seven Floods, who knows the seven distances, Who knows the head of sacrifice, he may receive the holy Cow. I know the Seven Water-floods, I know the seven distances,

अध्याय १०

श्लोक 10.11

यत् ते॑ क्रु॒द्धो धन॑पति॒रा क्षी॒रमह॑रद् वशे ।इ॒दं तद॒द्य नाक॑स्त्रि॒षु पात्रे॑षु रक्षति

yat te kruddho dhanapatirā kṣīramaharad vaśe | idaṃ tadadya nākastriṣu pātreṣu rakṣati

हिन्दी अर्थ

परमेदवरीय शासन विलुप्त हो जाता है, क्योंकि धनाजंनखूपी प्रेयमागं शब्द घमं, सदाचार भ्रौर मोक्षभावना का द्योतक है। इन भावनाभोंका परित्याग, क्षीरापहरण है । ५ । “नाकः” के दो श्रभिप्राय प्रतीतं होते है । (१) वह स्थानविशेष जहां कि सिद्धयोगी मुक्त हो कर विचरते हैँ । यथा शति ह नाकं महिमानः सचन्त का० १० । सु० १० भथववेद-माष्य ३८७ भथवा “नाकः नाकाभिलाषी “भ्रथर्वा" (मन्व १२) । इस भ्रं में है “भक्तिर” ५ हदय की भावनाभ्रों को, मस्तिष्क कै विचारोंको, तथा शरीर के कमो को भक्तिरस द्वारा रसीले बनाना, यह है तीन पारमे सुरक्षित रखता है, जब तक फि उस का शरीर छृटत। नहीं ।

English

I know the head of sacrifice, and Soma shining bright in her. Hitherward we invite with prayer the Cow who pours a thou- sand streams,

अध्याय १०

श्लोक 10.12

त्रि॒षु पात्रे॑षु॒ तं सोम॒मा दे॒व्यऽहरद् व॒शा।अथ॑र्वा॒ यत्र॑ दीक्षि॒तो ब॒र्हिष्यास्त॑ हिर॒ण्यये॑

triṣu pātreṣu taṃ somamā devya'harad vaśā| atharvā yatra dīkṣito barhiṣyāsta hiraṇyaye

हिन्दी अर्थ

शिष्ठ पत्रेषु तं सोममा देव्य हरटशा । (देवी वदा) दिव्या वशामाता पारमेदवरी माता चिष पात्रे तीन-पात्रौ मेके (तम्, सोमम्) उस .भवितिःरस को (८ ५ भु रही होती है, देलो (भथवं १०।२।३१-३३) । (वश) जगत् कोः वश भें करने वाली कान्तिमती पारमेश्वरी जब (कलिरभिः) संगीत कला के विज्ञ (गन्धवेः) गानङदलों के (सह्) ह निरचय से (सोमेन) भक्तिरस से (सम् भगतं) संगत हौ जाती है (उ). तथा (सर्वेण ) सब (पदता) गेय-वैदिक्ष पदों वाले गायको के पः

English

By whom the heaven, by whom the earth, by whom these waters are preserved. Upon her back there are a hundred keepers, a hundred metal bowls, a hundred milkers. The Deities who breathe in her all separately know the Cow.

अध्याय १०

श्लोक 10.13

सं हि सोमे॒नाग॑त॒ समु॒ सर्वे॑ण प॒द्वता॑ ।व॒शा स॑मु॒द्रमध्य॑ष्ठाद् गन्धर्वैः क॒लिभिः॑ स॒ह

saṃ hi somenāgata samu sarveṇa padvatā | vaśā samudramadhyaṣṭhād gandharvaiḥ kalibhiḥ saha

हिन्दी अर्थ

, - हृद्य में पारभेक्वरी माता जब भरधिष्ठित हो जाती है, भ्रौर जब्र मक्तिगान करनेः वाले भक्त “निष्ठ” हो जाते ह, तब 4 ० ॐ रस के प्राथ जी संगत हो जाती है, भौर.वैदिक पदों के गाने वालो के साय हो जाता है 1 “पदरता' देखो “ऋचः सामानि बिभ्रती (मन्त १४) .4 ::: ,(हि) निदचय से वशा (वातेन) वायुः के. साथः (सम् रगत). संगत हृद हई है, (उ) तथाः (सवैः) संब (पतत्रिभिः) -उडने वाले पक्षिया केः साथः (सम्) संगत हह-हंई है । (वगा) वशाः. माता (समुद्रे). हदगु-समुत्र मैः (ऋचः सामानि) ऋच्यधिरूढसामगानों को (बिभ्रती . प्राप्त केर (भर भनु- त्यत्) प्रकष॑ूप में नाचतीहै। ¦ . ; वशा माता (हि) निदचय सें (सूर्येण) सूं के साथ (सम् रगत संगतं हरई-हुई है,(उ) तथा (सर्वेण ) सब (चक्षुषा) चक्षुः समूह के साथ (सम्) दायी ज्योतिर्यो पर दृष्टिपात .करती है, भौर (बिन्रती) उन कां भैरण-

English

Her foot is sacrifice, her milk libation, Svadhā her breath, Mahï- lukā the mighty: To the God goes with prayer the Cow who hath Parjanya for her lord.

अध्याय १०

श्लोक 10.14

सं हि वाते॒नाग॑त॒ समु॒ सर्वैः॑ पत॒त्रिभिः॑ ।व॒शा स॑मु॒द्रे प्रानृ॑त्य॒दृचः॒ सामा॑नि॒ बिभ्र॑ती

saṃ hi vātenāgata samu sarvaiḥ patatribhiḥ | vaśā samudre prānṛtyadṛcaḥ sāmāni bibhratī

हिन्दी अर्थ

श्यमुतः. (बृह्दी० उप० ३१२३) । इस" भकारे सवै प्राणियों के चक्षु के कां० १० सुः १5 प्रथवेवेद-भाष्य ३८६ जो (हिरण्येन). हिरप्ययहदये दवारा (भ्मीवृता).चिरी हई तु (तिष्ठ). भूमि मे, ज॑से शत्रु कौ भोर उछलतः हृभ्रा-जाता है, वंसे धद्ावान् उपासक पभरास्त) स्थितं हो जाताहै। :: . नपृषासेना मे जबः भक्ति भरे. :सामगान गाए जाति हँ! तब हदय मे तीन का संगम हो रहा होता है । ( १)उपास्या वदा माता.का, (९) संगीत

English

Agni hath entered into thee; Soma, O Cow, hath entered thee. Thine udder is Parjanya, O blest Cow; the lightnings are thy teats. Thou pourest out the Waters first, and corn-lands afterward,

अध्याय १०

श्लोक 10.15

सं हि सूर्ये॒णाग॑त॒ समु॒ सर्वे॑ण॒ चक्षु॑षा ।व॒शा स॑मु॒द्रमत्य॑ख्यद् भ॒द्रा ज्योतीं॑षि॒ बिभ्र॑ती

saṃ hi sūryeṇāgata samu sarveṇa cakṣuṣā | vaśā samudramatyakhyad bhadrā jyotīṃṣi bibhratī

हिन्दी अर्थ

होता है मन । जैसे सामूहिक संगीतं मे संगीतज्ञ'व्यक्ति हाथो द्वारा संगीत का निदश्च करता है, वैसे भ्रधर्वां कीं ात्मचेतनां मनक लियेः संगीत मं निदे ३९० अथरवेद-माष्य कां० १०। सू १० हे स्वा ! (वशा) वशा (तव) तेरी (माता) माता है। (वशायाः) वशा से (चित्तम्) चित्त (अजायत) पदा हभ है । वदा==सब को वद्य भ रखने वाली कान्तिमयी पारमेश्वरी भाता । है । वसे चारों वणं वच्चा माता हारा सृष्ट है। -

English

O Cow. Thirdly thou pourest princely sway. O Cow, thou pourest food and milk.

अध्याय १०

श्लोक 10.16

अ॒भीवृ॑ता॒ हिर॑ण्येन॒ यदति॑ष्ठ ऋतावरि ।अश्वः॑ समु॒द्रो भू॒त्वाध्य॑स्कन्दद् वशे त्वा

abhīvṛtā hiraṇyena yadatiṣṭha ṛtāvari | aśvaḥ samudro bhūtvādhyaskandad vaśe tvā

हिन्दी अर्थ

वेशा माता है स्वधा की । “स्वधा भ्ननननाम” (निधं २।७) । यह . भ्रायुघम् = योग॒ साधना मे कई “भ्रन्तराय' होते है (योग १।३०) 1 १३० दवारा ईन अन्तरायो काश्मभावहो जाती है (योग १।२९) ।. पारमेदवरी माता इन श्रन्तरांय-रूपौ शत्रुभों का विनाश ॒ करती है, “योग ततुस्तयै ज॑श्िषि वशे ततो होतांऽजायत ॥१९॥ होना, वीयं का रक्त मेँ हौ विलीन रहना, उस का भरः पतन न होने देना

English

When, Holy One, thou camest nigh invited by the Ādityas’ call, Indra gave thee to drink, O cow, a thousand bowls of Soma juice. The Bull, what time thou followedst the way of Indra, summon- ed thee:

अध्याय १०

श्लोक 10.17

तद् भ॒द्राः सम॑गच्छन्त व॒शा देष्ट्र्यथो॑ स्व॒धा।अथ॑र्वा॒ यत्र॑ दीक्षि॒तो ब॒र्हिष्यास्त॑ हिर॒ण्यये॑

tad bhadrāḥ samagacchanta vaśā deṣṭryatho svadhā| atharvā yatra dīkṣito barhiṣyāsta hiraṇyaye

हिन्दी अर्थ

समाधिभ्रजञापूरवंक इतरेषाम्” (योग १।२०) मे, वीयं को प्रसंपरज्ञात समाधि (वशे) है सबं को वश्च मेँ रखने वाली कान्तिमती पारमेदवरी मातः कां० १०। सु° १० भ्रथववेद-भाष्य मानसिक बल पेदा हृभा । (पाजस्यात्) भौर बल के लिये हितकर भ्रन्न से स्तनो से (रष्मयः) ज्ञानरदिमियां पदा हुई । पति का मूख कहा है, इस मुखं का कथन मन्त्र २० मे “श्रास्नः" दारा हुमा

English

Thence the Fiend-slayer, angered, took thy water and thy milk away. O Cow, the milk which in his wrath the Lord of Riches took from thee,

अध्याय १०

श्लोक 10.18

व॒शा मा॒ता रा॑ज॒न्यऽस्य व॒शा मा॒ता स्व॑धे॒ तव॑ ।व॒शाया॑ य॒ज्ञ आयु॑धं॒ तत॑श्चि॒त्तम॑जायत

vaśā mātā rājanya'sya vaśā mātā svadhe tava | vaśāyā yajña āyudhaṃ tataścittamajāyata

हिन्दी अर्थ

नहीं किया-जा सकता । शारीरिक भौर मानसिक निरबलता से, च्यानके लिये, स्थिर-आसन भी सम्भव नहीं हो सकता । 4. चार वेदों से ज्ञान रदिमयां प्रकट होतो है । चतुष्पातूपशुरूपी-गौ के स्तनौ से दूध पैदा होता है रमयां नही । ऋ० १०।७.१।५ में वेदवाणी को घेन . (कशे) है वशा ! (तव) तेरी (र्माम्या्) श्रगली दरो जाप (उदरात् प्रधि) तथा पेट से (वीरुषः) विरोहंणं करने वाली लताएं तथा वेनस्पतियां (जज्ञिरे) पैदा है; . व

English

That same the vault of heaven now preserveth in three reser- voirs. The Cow Celestial received that Soma in three vessels, where.

अध्याय १०

श्लोक 10.19

ऊ॒र्ध्वो बि॒न्दुरुद॑चर॒द् ब्रह्म॑णः॒ ककु॑दा॒दधि॑ ।तत॒स्त्वं ज॑ज्ञिषे वशे॒ ततो॒ होता॑जायत

ūrdhvo bindurudacarad brahmaṇaḥ kakudādadhi | tatastvaṃ jajñiṣe vaśe tato hotājāyata

हिन्दी अर्थ

"मै" कहा है । ईम का भ्रथे है गतिं का साधन । ईर गतौ (चुरादिः) भक् (उणा० ११४५) । चटनी से निचली श्रोरं वैरो तक्र के. दोः मागो ्े ऊपर की मोर कटिभागः तंक के.दो भागों को -“सक्िथभ्याम् क्रा समिथिधरो दारा “रयन्” -ग्र्थातु-चन्नना - पेद. होता है. गौ के चनेमें का०..१०.1 सु०.१९ भ्रवेवेद-माष्य ३९३ पिले.दो प्रगली.टा्े ही उती है, . तत्पद्वात् पीठे की दो टागें रागे को बढती है । न्तो से “श्रता भरात् खाने वाले बचिया -बछ्डं पैदा होते है। भ्रौर उ्दरंके गोबर से भर्थात् .लादरूप से, लताए-वनस्पतियां पैदा भ मे “श्रयन” कां प्रयोग भ्रथवेवेद में हृ है । यथा “धुनर्वसु सुनृता चा उत्तरायण की भ्रन्तिम. सीमा 80 80180९6 । इसी प्रकार मकर

English

Atharvan, consecrated, sate upon the Sacred Grass of gold. Come hither with the Soma, come with every footed thing; the

अध्याय १०

श्लोक 10.20

आ॒स्नस्ते॒ गाथा॑ अभवन्नु॒ष्णिहा॑भ्यो॒ बलं॑ वशे ।पा॒ज॒स्याऽज्जज्ञे य॒ज्ञ स्तने॑भ्यो र॒श्मय॒स्तव॑

āsnaste gāthā abhavannuṣṇihābhyo balaṃ vaśe | pājasyā'jjajñe yajña stanebhyo raśmayastava

हिन्दी अर्थ

, उदरादधि.वीरुबः उदर से. -विरोहण करते वाली लताएुं प्रौर वन- होता है, शरोर उदक से विरोहण.करने वालो लताएटं प्रौर॒वनस्पतियां पदा होती है । इस भरभिप्राय से “उद्रादधि वीङ्षः" कम है 4: - -- . . ::, (वे) है पारमेष्वरीमातः † (यद्) जो त वरुणस्य ) मेष के (उदरम्) तेतृल को-(घवेत्) जानतांहै। . “ : वरणस्य, वरख्ण-है जलो का अधिपतिः ॥ यथा "वरणोऽपामषिपतिः" (भ्रथवं० ५।२४।४) 1 निक्त. के भनुसार वरुण है मेधाधिपतिः (१०।१। ३.४) -बषेतु अं मेषादि के. नियन्त्रण के लिये पारमेदवरी माता मानो, वृरुण करे उदर मे पविष्ट होती है ॥ रह्मा है चतुरवेदविद् वेदाध्यापक । वहः वेदाः ध्यापन के लि; वैदिकी माता" प्ररेदवरी माता का, उच्चस्वैर मे वरदरो-

English

Laden with holy verse and song the Cow hath leapt into the sea. Come with the Sun, come hitherward with every creature that hath eyes,

अध्याय १०

श्लोक 10.21

ई॒र्माभ्या॒मय॑नं जा॒तं सक्थि॑भ्यां च वशे॒ तव॑ ।आ॒न्त्रेभ्यो॑ जज्ञिरे अ॒त्रा उ॒दरा॒दधि॑ वी॒रुधः॑

īrmābhyāmayanaṃ jātaṃ sakthibhyāṃ ca vaśe tava | āntrebhyo jajñire atrā udarādadhi vīrudhaḥ

हिन्दी अर्थ

च्वरारणः करता हा प्रानो; भ्राह्लान करता है, उसकी सहायता चाहता है। बस्तं नवेद किमृचा -करिष्यत्ि” (ऋ० १।१६४।३६). तथा “सर्वेवेदा हो सके । मन्त्र मँ वर्षा-ऋतु को वेदाष्यापन-काल सूचित किया है ! (ताम्) उसे (भ्राहुः) कहते है फ (वशा इति) यह वो वशा है, जो कि (ससूव हि) परसूता हो ही ग है ।. प्र॑जातिणुः (ब्रह्मभिः चतुवंदवेत्तां (मन्व २२). ही, (भस्याः). इस वधा का (बन्धुः) बन्ु है 4 . कीं ही भू-मण्डल पर किसीं महापुरुष को पेदा करती है जो छि परम्परा से (५ सामाजिक रूढियों मं भामूलचूल परिवतेन करने का सामथ्यं रवाः हो । मन्वोक्त चिशुं के तत्सामयिक लर्ण को देख कंर, उसे एक भावी

English

Bearing auspicious lights with her the Cow hath looked across the sea. When, covered round about with gold, thou stoodest there, O Holy One,

अध्याय १०

श्लोक 10.22

यदु॒दरं॒ वरु॑णस्यानु॒प्रावि॑शथा वशे ।तत॑स्त्वा ब्र॒ह्मोद॑ह्वय॒त् स हि ने॒त्रमवे॒त् तव॑

yadudaraṃ varuṇasyānuprāviśathā vaśe | tatastvā brahmodahvayat sa hi netramavet tava

हिन्दी अर्थ

महापुखषः सभश्ू.कर तत्सामर्यिंक जनता वबरा जती है करि “यह कहीं (एकः) वहं एक मंहापूरष (२३) (युषः) राजस् भ्रौरे तामस योदधाभाों कै साथ (सं भुजति) संसगं करतां है, भिङता है, -(थः , एकः जो एकं किं (भरस्थाः) इस पारमेश्वरी वशाः माता को (वरी) निज वेयं मे विप्रे होता वाली नौकाएं (यंश्ाः) नानाविध यंजञकमं (भ्रभवन्) होते है, भौर (तरं साम्) तैराने वाली नौका्रो की (चक्षुः) भांख धर्थोत् संचालिका (वधा) पारमेदवरीः वा माताः रभवत् होतीहहै। : त, हां है । वह् “जायमान (२३) शिशु ही, जिस ने कि. बलदालीं बन् करः वंदा माता को निज व्ल मे किया होता दहै, प्रजाजन- के राजस-व्रामस.

English

The ocean turned into a horse and mounted on thy back, O Cow,

अध्याय १०

श्लोक 10.23

सर्वे॒ गर्भा॑दवेपन्त॒ जाय॑मानादसू॒स्वः ।स॒सूव॒ हि तामा॒हुव॒शेति॒ ब्रह्म॑भिः क्लृप्तः स ह्यऽस्या॒ बन्धुः॑

sarve garbhādavepanta jāyamānādasūsvaḥ | sasūva hi tāmāhuvaśeti brahmabhiḥ klṛptaḥ sa hya'syā bandhuḥ

हिन्दी अर्थ

व्रिचारों भौर कर्मो के साथ -युद्ध करता है, भ्रौर पारमेदवरी वदा माता.उस की सहायता करती है । यह शक्तिशाली महापुरुष -यज्ञकर्मो का प्रचारः कर, प्रतिग्रह करती है, उसे स्वीकार करती है, (वशा) वशा माता. (सूयम्) सुय विद्या के साथ प्रविष्ट हृभ्राुमा ४ 41 ध की १८ पुऽ १८: ..- भ्रथर्व्ेद-माष्य ३९७.

English

Then came and met the Blessed Ones, Deshtri, the Cow, and Svadhā, where Atharvan, consecrated. sate upon the Sacred Grass of gold.

अध्याय १०

श्लोक 10.24

युध॒ एकः॒ सं सृ॑जति॒ यो अ॑स्या॒ एक॒ इद् व॒शी।तरां॑सि य॒ज्ञा अ॑भव॒न् तर॑सां॒ चक्षु॑रभवद् व॒शा

yudha ekaḥ saṃ sṛjati yo asyā eka id vaśī| tarāṃsi yajñā abhavan tarasāṃ cakṣurabhavad vaśā

हिन्दी अर्थ

वरोद सर्वममवन् देवा मनुष्या असुराः पितर ऋषयः ॥२६॥ (वशाम्) पारमेश्वरी वशाः माता कोः (एव) ही (ग्रमृतम्,. भराहुः) अमृत कहते है, (वशाम् ) वशाः की .(ृत्युम्, उपासते) उपासना. मृत्यु नाम से.मी करते हँ । (इदम्, सर्वम्) यह सबं (वंशा भवत्) वलारूम हमा है, (देवाः-.) देवं. मनुष्य, भरसुर, पितर मरौर ऋषि । पारमे्वरी वशा माता ही ्रमृतसूपा हैःजिस के प्राश्य को प्राप्त करं मुक्तार्माएं अमृत होती है, चिरकाल तक श्रमृत-सुख का भोग करती है । यहु वदा ही मृत्यु है । मृत्यु कोई पृथक्. देवता नहीं ।. वशा मातां ही मुमुुभों (यः) जो (एवम्) इस प्रकार. (विचत्) जाने. (सः). वंह (वदाम्) पारमेवरी वशामाता.का (भतिगृह्णीयात् ) अ्रहम करे, (तथौ हि). तब हीं स्कावट, (दात्रे) दाता के लिये (दुहे) फलप्रद होता है ।... . . मनम वसा के ग्रहीता ध्रौर दताके लिये निर्देश दिवाहैःक्रि-जो मन्तं २९६ में कथित वशा के स्वरूपं कौ जने वह ही वला सम्बन्धी सपद. कँ ग्रहण कै योभ्यं हे; भौर वें हीं वंशा सम्बन्धी उपदेशा देने का - भरधिकार

English

The Kshatriya’s mother is the Cow, thy mother, Svadhā! is the Cow.

अध्याय १०

श्लोक 10.25

व॒शा य॒ज्ञं प्रत्य॑गृह्णाद् व॒शा सूर्य॑मधारयत्।व॒शाया॑म॒न्तर॑विशदोद॒नो ब्र॒ह्मणा॑ स॒ह

vaśā yajñaṃ pratyagṛhṇād vaśā sūryamadhārayat| vaśāyāmantaraviśadodano brahmaṇā saha

हिन्दी अर्थ

१६.मनतर मे कत्ता. रौर उसकी-कृति मेँ भ्रभेद दर्शाया है जैसे कि कहा है “मात्मा कहता है. मेद-केवल नामों काः ह +पिता ऋर्चा हं भौर पृत्र कृति हं ॥ . , हँ, दस उनमें व्याप्तेः भरात् देव श्रादिरम 1 १५. इंश्ण भरयरवेद-माष्य कां० १० । सू° १० पारं वद्या माता तथो केवसल्य या मोक्ष .1. - :

English

Sacrifice is the weapon of the Cow: the thought arose from, her. From Brahma’s summit there went forth a drop that mounted up on high: From that wast thou produced, O Cow, from that the Hotar sprang to life.

अध्याय १०

श्लोक 10.26

व॒शामे॒वामृत॑माहुर्व॒शां मृ॒त्युमुपा॑सते ।व॒शेदं सर्व॑मभवद् दे॒वा म॑नु॒ष्या॒३ असु॑राः पि॒तर॒ ऋष॑यः

vaśāmevāmṛtamāhurvaśāṃ mṛtyumupāsate | vaśedaṃ sarvamabhavad devā manuṣyā3 asurāḥ pitara ṛṣayaḥ

हिन्दी अर्थ

होती हैः - (तासाम्) उन तीन मेँ (या) जो वाणी (मध्ये) मध्य मे (राजति) गरदा जिसका प्ण दुष्कर है कलिल है । ६६ जिह्वाः "जिह्वा वाङ्नाम” (निषं १।११ ) उपासक के भूल र्मे. वरुण-सम्बन्धौ तीन. काणियां होत्री ह 1. (१). स्तुतिवाणी. . (२) -उपासना, हारा, उपासना होती है सामगानवाणी द्रा, भ्र प्रीथंना-होती है यज- उपासना की वाणी या सामगानकी वाणीं । ऋक् श्रौर सामकां परस्पर

English

Forth from thy mouth the Gāthās came, from thy neck’s nape sprang strength, O Cow. Sacrifice from thy flanks was born, and rays of sunlight from. thy teats,

अध्याय १०

श्लोक 10.27

य ए॒वं वि॒द्यात् स व॒शां प्रति॑ गृह्णीयात्।तथा॑ हि य॒ज्ञः सर्व॑पाद् दु॒हे दा॒त्रेऽन॑पस्फुरन्

ya evaṃ vidyāt sa vaśāṃ prati gṛhṇīyāt| tathā hi yajñaḥ sarvapād duhe dātre'napasphuran

हिन्दी अर्थ

है भारय भौर सामं है धिते । इसी प्रकार अथववेद के विकाम भ . पत्ति, वषु को ऋक्, श्रौरं अरपने-प्राप को साम कहकर ( १४।२।७१; पतिः स्तु्तिवाणी, उपफसनावाणो,. तथा - परा्थेनावाणी या सामवाणी, इस प्रकारः मध्य मेँ विराजमान होती है 1--तीनों कणियां क्शाका. वर्णन करती हैँ ॥ रती ह । उपान कां रथं है “समीप बेठना”। वशां क तयक न होते

English

From thy fore-quarters and thy thighs motion was generated, Cow! Food from thine entrails was produced, and from thy belly came the plants.

अध्याय १०

श्लोक 10.28

ति॒स्रो जि॒ह्वा वरु॑णस्या॒न्तर्दी॑द्यत्या॒सनि॑ ।तासां॒ या मध्ये॒ राज॑ति॒ सा व॒शा दु॑ष्प्रति॒ग्रहा॑

tisro jihvā varuṇasyāntardīdyatyāsani | tāsāṃ yā madhye rājati sā vaśā duṣpratigrahā

हिन्दी अर्थ

ए उसके “समीप बैठना” घम्मव नहं हौ सकता । इसलिए मध्यवतीवाणी को वा कट है"यतः यह. वाणीं वंशा कीं परत्यक्षं कराःदेतीःहै । “इसलिए तिकटिन है । वरणस्य; वरगः--परमेदघर भ्रथवं ० ४।१६।१-६) । सवतो कौ चरण करता है, या भक्तों द्वा राःजिखका वरण किया जाता. (वशायाः) पारमेश्वरी वशा माता की (रेतः) उत्पादक शक्ति (चतुर्धा) “्रमृतत्वस्येशानः” दारां भरमृत-जगत् का, तथा “यदन्नेनाति रोहति दवारा पराणि-जगत् का वणेन हृभ्रा है । तथो यजु (३१।१४,१४०१६ ) मँ यजञकमं - वक्षा पारमेदवरी वशां मातां (दौः) चुलोक है, (वशा) वशा.माता (पृथिवी) पृथिवो है, (वशा). वंशा मातां (विष्णुः) किरणो से व्याप्त. सूयं ह, भौर प्रजापति है (वलाग्राः) बदा. मूता के (दुग्धम् ) दूध. को. (भपि-

English

When into Varuna’s belly thou hadst found a passage for thy- self, The Brāhman called thee thence, for he knew how to guide and lead thee forth.

अध्याय १०

श्लोक 10.29

च॒तु॒र्धा रेतो॑ अभवद् व॒शायाः॑ ।आप॒स्तुरी॑यम॒मृतं॒ तुरी॑यं य॒ज्ञस्तुरी॑यं प॒शव॒स्तुरी॑यम्

caturdhā reto abhavad vaśāyāḥ | āpasturīyamamṛtaṃ turīyaṃ yajñasturīyaṃ paśavasturīyam

हिन्दी अर्थ

४४६ = -अथर्वेवेदनमाष्य कां ११ । सूर १९ करि नाक धर्थात् मोक्षामृतरसर का पान करती है (यजु० ३१।१६)। श्रसवः रां मांता-के (पयः). दग के (उप) समीप (भासते) उपविष्ट रहते है 1. “ कशा का ्रभिप्राय है पारमेदवरी माता । दुग है.भानन्द रस । साध्य ३२।१०) । घाम तोन है (१) प्राकृतिकं जगत् 4 (२) जीवात्माभ्र , निज

English

All trembled at the babe that came from him who brings not to the birth. He hath produced her—thus they cried—He is a cow, and formed by spells, he hath become skin to her.

अध्याय १०

श्लोक 10.30

व॒शा द्यौर्व॒शा पृ॑थि॒वी व॒शा विष्णुः॑ प्र॒जाप॑तिः ।व॒शाया॑ दु॒ग्धम॑पिबन्त्सा॒ध्या वस॑वश्च॒ ये

vaśā dyaurvaśā pṛthivī vaśā viṣṇuḥ prajāpatiḥ | vaśāyā dugdhamapibantsādhyā vasavaśca ye

हिन्दी अर्थ

को पारमेश्वरी वशा मातां का-दरनं करां सक्ते है । के योगी “दिवु” योतमान होता है । म॑स्तिष्करूपी दिव् के तीन विभाग होते है, (१) बृहत्- मस्तिष्क । हसे (+धछणाणा कहते ह । यह दो भागो मे बटां होदा है । इन ' भागो को मस्तिष्क-गोलाधं कहते हैँ (०४741 प्ता च€8) ॥ ये दोनों दाएं प्रौर बाणं रोर रहते ह । दाएं गोलाधं को शी वाण 7066, श्रौरं बाएं गोलाघं को 1.91 लणशूाल€ कहते हैँ 1 इन दो ४०९ । भथवेवेद-माप्य कां ०। सु० १० वशा माता का पणं प्रकाद्यं होता है। "टचे हए महायोगी इस प्रक मेँ स्थित होकर भ्रानन्दर॑स भे लीन होजतिषै॥ : " श्वरी वशा माता काः देन करा, कर, योगी सर्वान् लोकान् . सव भरौरं चक्ति प्रदान करती है जिस द्वारा योगी सब लोकों भँ जा सकंता है.1

English

The Cow hath welcomed sacrifice: the Cow hath held the Sun in place. Together with the prayer the mess of rice hath passed into the Cow.

अध्याय १०

श्लोक 10.31

व॒शाया॑ दु॒ग्धं पी॒त्वा सा॒ध्या वस॑वश्च॒ ये ।ते वै ब्र॒ध्नस्य॑ वि॒ष्टपि॑ पयो॑ अस्या॒ उपा॑सते

vaśāyā dugdhaṃ pītvā sādhyā vasavaśca ye | te vai bradhnasya viṣṭapi payo asyā upāsate

हिन्दी अर्थ

व॒शां देवा उप जीवन्ति वशां मनुष्या उव । ,. वेदं स्वममवत् यात् सयो विपति ॥९५॥ रूपं हृभा है, (यावत्) जितने पर (सूर्यः) सुये (वि परयति) दृष्टिपात वका भ्रभवत् = इस सब की उत्पत्ति तथा धारण पारमेदवरी माता का० १०. सु० १०. भयव्वेद-माष्य ˆ : .. .- ४०२ (वशाम्) पारमेश्वरी वशा भाता के. भ्राश्रय जीवित है । (वा) पारे (यावत्) जहां तक (सूरः विंपक्यति) सूयं देता है, चमकता है। . . :

English

They call the Cow immortal life, pay homage to the Cow as Death.

अध्याय १०

श्लोक 10.32

सोम॑मेना॒मेके॑ दुह्रे घृ॒तमेक॒ उपा॑सते ।य ए॒वं वि॒दुषे॑ व॒शां द॒दुस्ते ग॒तास्त्रि॑दि॒वं दि॒वः

somamenāmeke duhre ghṛtameka upāsate | ya evaṃ viduṣe vaśāṃ daduste gatāstridivaṃ divaḥ

हिन्दी अर्थ

:..., . ॥ दसवां. काण्ड सुममूरणे ॥ - करं.रहा है । सन् १९७३ से 'द्रस्ट .“रामलालं कपुर दस्ट बहालगदढ़" के सहयोगं से स्वयं पना दिक गरन्थो के प्रकादाने कँ कायं कर रहा हं + भरभी तक निम्नलिखित ग्न्य प्रका होः चुके है--; ? ˆ . - छापीटै। इयको पढ़े विना. ऋर् दर कां वेदभाष्यं सममे नहीं भरा सकता। की १०-११ सुचियां दी गई ह । प्रथम भाग ३५-००; द्वितीय भाग ३०-००; ततीय रहे है) । ९-१० वां काण्ड ४०.००; ११.१३ काण्ड ३०-००; १४.१७ काण्ड २४-००; १४-१९. काण्ड २०-००; २० वां काण्ड २०-००।

English

She hath become this universe, Fathers, and Rishis, hath become the Gods, and men, and Asuras. The man who hath this knowledge may receive the Cow with. welcoming.

अध्याय १०

श्लोक 10.33

ब्रा॒ह्म॒णेभ्यो॑ व॒शां द॒त्त्वा सर्वां॑ल्लो॒कान्त्सम॑श्नुते ।ऋ॒तं ह्य॒ऽस्या॒मार्पि॑त॒मपि॒ ब्रह्माथो तपः॑

brāhmaṇebhyo vaśāṃ dattvā sarvāṃllokāntsamaśnute | ṛtaṃ hya'syāmārpitamapi brahmātho tapaḥ

हिन्दी अर्थ

४. उणादिकोचा- ० द० कृत संस्कृत व्याख्या तथा पं० युधिष्ठिर मीमांसक , लिखित शतदः रिप्पणियों भौर विविध १२ सुचियों के सहित । पक्की जिल्द १२-०० १: यजर्वेदभाष्य-विवरण--ऋषि दयानन्दकृत भाष्य पर प ३. तैत्तिरीय संहिता-पदपाठः-- ५० वषे से दुर्लभ प्रत्य का पन .४ ऋण्वेदादिभाष्य-मूमिका -पं० युधिष्ठिर मीर्मासक ढा सम्पादित एवं तदः टिप्पणियो से युक्तं । साधारण जिल्द २५.००, पुरे कपड़े की ३०-००; सुनहरी ३५-०.० । . ऋग्वेदादिमाष्यभूमिका-परिदिष्ट - भूमिका परः किए. गये.

English

So for the giver willingly doth perfect sacrifice pour milk. Within the mouth of Varuna three tongues are glittering with light.

अध्याय १०

श्लोक 10.34

व॒शां दे॒वा उप॑ जीवन्ति व॒शां म॑नु॒ष्याऽउ॒त।व॒शेदं सर्व॑मभव॒द् याव॒त् सूर्यो॑ वि॒पश्य॑ति

vaśāṃ devā upa jīvanti vaśāṃ manuṣyā'uta| vaśedaṃ sarvamabhavad yāvat sūryo vipaśyati

हिन्दी अर्थ

पमौ र् सुन्दर संस्करण । मूल्य ००० . , छ. वैदिक-साहित्य-्ौदासिनो -स्व० श्री पं वागीश्वर वकारः विरचित संस्कत दीका.सहित ।. टीका का.पूरा.पाट प्रथम बार छपा कार-श्री डा० विजयपाल जी विद्यांवारिधि । उत्तम संस्करण 3 ८-१२. वेदसंज्ञा-मीमांसा-- युधिष्ठिरे मीमांसकं १-०.४ः

English

That which shines midmost of them is this Cow most difficult to hold. Four-parted was the Cow’s prolific humour. One-fourth is Water, one-fourth life eternal, one-fourth is sacri- fice, one-fourth are cattle.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Atharva Veda — Chapter 10
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
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