Yajur Veda· Yajurveda Saṁhitā
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अध्याय 39 / 40

Adhyāya 39

अध्याय 39

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पूर्ण अध्याय पाठ13 श्लोक

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अध्याय ३९

श्लोक 1

स्वाहा॑ प्रा॒णेभ्य॒: साधि॑पतिकेभ्यः । पृ॒थि॒व्यै स्वाहा॒ ऽग्नये॒ स्वाहा॒ ऽन्तरि॑क्षाय॒ स्वाहा॑ वा॒यवे॒ स्वाहा॑ ।दि॒वे स्वाहा॒ सूर्या॑य॒ स्वाहा॑

svāhā prāṇebhya: sādhipatikebhyaḥ | pṛthivyai svāhā 'gnaye svāhā 'ntarikṣāya svāhā vāyave svāhā | dive svāhā sūryāya svāhā

हिन्दी अर्थ

हम अपने अन्तिमि समय (०) ५८० ४८) मनसहित प्राणो, अग्निसहित पृथिवी, वायुसहित अन्तरिक्ष तथा सूर्यसहित द्युलोक का धन्यवाद करते हुए इनसे विदा लै। १. दिग्भ्यः स्वाहा=इन दिशाओं के लिए मेँ धन्यवाद करता हूँ। इस "प्राची" ने मुल (प्रआञ्च) आगे बद्ने का पाठ पाया था तो "दक्षिण ने दाक्षिण्य का उपदेश दिया,

English

com The Texts of the White Yajurveda, tr. Ralph T.H. Griffith, [1899], BOOK THE THIRTY-NINTH. SVÂHÂ to the Vital Breathings with their Controlling Lord! To Earth Svâhâ! To Agni Svâhâ! To Firmament, Svâhâ! To Vâyu Svâhâ! To Sky Svâhâ! To Sûrya Svâhâ!

अध्याय ३९

श्लोक 2

दि॒ग्भ्यः स्वाहा॑ च॒न्द्राय॒ स्वाहा॒ नक्ष॑त्रेभ्य॒: स्वाहा॒ ऽद्भ्यः स्वाहा॒ वरु॑णाय॒ स्वाहा॑ ।नाभ्यै॒ स्वाहा॑ पू॒ताय॒ स्वाहा॑

digbhyaḥ svāhā candrāya svāhā nakṣatrebhya: svāhā 'dbhyaḥ svāhā varuṇāya svāhā | nābhyai svāhā pūtāya svāhā

हिन्दी अर्थ

आज जीवन के इस अन्तिम दिन मै सव देवों सेव शरीर की नाभि व शोधक अगो से विदाई लेता ह सप्तर्षियो-डइद््रियो से चिदा १. वाचे स्वाहा=मै इस वाणी के लिए शुभ शब्द कहता दूँ इसी के द्वारा जीवन भर

English

To the Quarters Svâhâ! To the Moon Svâhâ! To the Stars Svâhâ! To the Waters Svâhâ! To Varuna Svâhâ! To the Navel Svâhâ! To the Purified Svâhâ!

अध्याय ३९

श्लोक 3

वा॒चे स्वाहा॑ प्रा॒णाय॒ स्वाहा॑ प्रा॒णाय॒ स्वाहा॑ । चक्षु॑षे॒ स्वाहा॒ चक्षु॑षे॒ स्वाहा॒ श्रोत्रा॑य॒ स्वाहा॒श्रोत्रा॑य॒ स्वाहा॑

vāce svāhā prāṇāya svāhā prāṇāya svāhā | cakṣuṣe svāhā cakṣuṣe svāhā śrotrāya svāhā śrotrāya svāhā

हिन्दी अर्थ

मेरा जीवन उत्तम संकल्पोँवाला, सत्यमय, स्वस्थ, सात्विक अन्न का सेवन करनेवाला तथा यश ओर श्री से युक्त हो। सूचना-'श्री' का अर्थं धन भी होता हे। मै अपने जीवन में उचित च आवश्यक धन को प्राप्त करनेवाला बनूं। धन का अभाव मेरी परेशानी का कारण न बने।

English

To Speech Svâhâ! To Breath Svâhâ! To Breath Svâhâ! To Sight Svâhâ! To Sight Svâhâ! To Hearing Svâhâ! To Hearing Svâhâ!

अध्याय ३९

श्लोक 4

मन॑स॒: काम॒माकू॑तिं वा॒चः स॒त्यम॑शीय ।प॒शू॒नाᳪ रू॒पमन्न॑स्य॒ रसो॒ यश॒: श्रीः श्र॑यतां॒ मयि॒ स्वाहा॑

manasa: kāmamākūtiṃ vācaḥ satyamaśīya | paśūnā rūpamannasya raso yaśa: śrīḥ śrayatāṃ mayi svāhā

हिन्दी अर्थ

आसुरी सम्पत्तिवाले ' उग्रस्वभाव के, लोक- भयंकर, अज्ञानी, ओरों को कम्पित करनेवाले, दूसरों को कुचलनेवाले, उनपर आक्रमण करनेवाले व विक्षिप्त-खे' होते है। अग्निशहद्येनाशनिंहदयाग्रेणं पशुपतिं कृत्स्नहदयेन भवं यक्ना। शर्वं मत॑स्ताभ्यामीशानं मन्युनां महादेवमं॑न्तः पष्व्यिनोग्रं देवं व॑निष्टुनां

English

The wish and purpose of the mind and truth of speech may I obtain. Bestowed on me be cattle's form, swept taste of food, and fame and grace. Svâhâ!

अध्याय ३९

श्लोक 5

प्र॒जाप॑तिः सम्भ्रि॒यमा॑णः स॒म्राट् सम्भृ॑तो वैश्वदे॒वः स॑ᳪस॒न्नो घ॒र्मः प्रवृ॑क्त॒स्तेज॒ उद्य॑त आश्वि॒नः पय॑स्यानी॒यमा॑ने पौ॒ष्णो वि॑ष्य॒न्दमा॑ने मारु॒तः क्लथ॑न् ।मै॒त्रः शर॑सि सन्ता॒य्यमा॑ने वाय॒व्यो॒ ह्रि॒यमा॑ण आग्ने॒यो हू॒यमा॑नो॒ वाग्घु॒तः

prajāpatiḥ sambhriyamāṇaḥ samrāṭ sambhṛto vaiśvadevaḥ sasanno gharmaḥ pravṛktasteja udyata āśvinaḥ payasyānīyamāne pauṣṇo viṣyandamāne mārutaḥ klathan | maitraḥ śarasi santāyyamāne vāyavyo hriyamāṇa āgneyo hūyamāno vāgghutaḥ

हिन्दी अर्थ

हम कुशलतापूर्वक व्यवहार करते हुए तथा स्वास्थ्य व दीर्घं जीवन के नियमों का पालन करते हृए् अपने जीवन को सुखमय बना स्वास्थ्य के लिए उत्तम अदनीय ( भक्ष्य) अज्र का सेवन लोहिताय स्वाहा मेदोभ्यः स्वाहा मेदोभ्यः स्वाह। । मासेभ्यः स्वाहां माश्छसेभ्यः

English

Prajâpati while in preparation; Samrâj when prepared; All-Gods’ when seated; Gharma when heated with fire; Splendour when lifted up; the Asvins’ while milk is poured in; Pûshan's when the butter trickles down it; the Maruts’ when the milk is clotting; Mitra's when the milk's skin is spreading; Vâyu's when it is carried off; Agni's while offered as oblation; Vâk when it has been offered.

अध्याय ३९

श्लोक 6

स॒वि॒ता प्र॑थ॒मेऽह॑न्न॒ग्निर्द्वि॒तीये॑ वा॒युस्तृ॒तीय॑ आदि॒त्यश्च॑तु॒र्थे च॒न्द्रमा॑: पञ्च॒म ऋ॒तुः ष॒ष्ठे म॒रुत॑: सप्त॒मे बृह॒स्पति॑रष्ट॒मे ।मि॒त्रो न॑व॒मे वरु॑णो दश॒म इन्द्र॑ एकाद॒शे विश्वे॑ दे॒वा द्वा॑द॒शे

savitā prathame'hannagnirdvitīye vāyustṛtīya ādityaścaturthe candramā: pañcama ṛtuḥ ṣaṣṭhe maruta: saptame bṛhaspatiraṣṭame | mitro navame varuṇo daśama indra ekādaśe viśve devā dvādaśe

हिन्दी अर्थ

सात्विक अन्न का सेवन हमारे जीवन में प्रयत्तशीलता व पवित्रता का संचार तप॑से स्वाहा तप्य ते स्वाहा तप्यमानाय स्वाहा तप्ताय स्वाह घर्माय स्वाहा । १. जिस प्रकार पिछले मन्त्र में पवित्रता के विषय मे कहा गया है उसी प्रकार प्रस्तुत करते है कि (९) तप कौ रुचि (२) तप में लगना (३) तप को अपना स्वभाव बना लेना

English

Savitar on the first day; Agni on the second; Vâyu on the third; Âditya (the Sun) on the fourth; Chandramâs (the Moon) on the fifth; Ritu on the sixth; the Maruts on the seventh; Brihaspati on the eighth; Mitra on the ninth; Varuna on the tenth; Indra on the eleventh; the All-Gods on the twelfth.

अध्याय ३९

श्लोक 7

उ॒ग्रश्च॑ भी॒मश्च॒ ध्वा॒न्तश्च॒ धुनि॑श्च ।सा॒स॒ह्वाँश्चा॑भियु॒ग्वा च॑ वि॒क्षिप॒: स्वाहा॑

ugraśca bhīmaśca dhvāntaśca dhuniśca | sāsahvā~ścābhiyugvā ca vikṣipa: svāhā

हिन्दी अर्थ

हम उत्तम कर्म करनेवाले वने, जिससे हमारा अगला जन्म उत्तम हो। हैवीसंपत्-युक्त ज्ञान के दृष्टिकोण सरे उत्तम जन्म विश्वेदेवा द्वांदरो॥ ६॥ पिछले मन्त्र मे उत्तम कर्मो व गुणों के दृष्टिकोण से जन्म का विचार हआ है। प्रस्तुत

English

Fierce; Terrible; The Resonant; The Roarer; Victorious; Assailant; and Dispeller. Svâhâ.

अध्याय ३९

श्लोक 8

अ॒ग्निᳪ हृद॑येना॒शनि॑ᳪ हृदया॒ग्रेण॑ पशु॒पतिं॑ कृत्स्न॒हृद॑येन भ॒वं य॒क्ना ।श॒र्वं मत॑स्नाभ्या॒मीशा॑नं म॒न्युना॑ महादे॒वम॑न्तःपर्श॒व्येनो॒ग्रं दे॒वं व॑नि॒ष्ठुना॑ वसिष्ठ॒हनुः॒ शिङ्गी॑नि को॒श्याभ्या॑म्

agni hṛdayenāśani hṛdayāgreṇa paśupatiṃ kṛtsnahṛdayena bhavaṃ yaknā | śarvaṃ matasnābhyāmīśānaṃ manyunā mahādevamantaḥparśavyenograṃ devaṃ vaniṣṭhunā vasiṣṭhahanuḥ śiṅgīni kośyābhyām

हिन्दी अर्थ

जीवन को आनन्दमय नाने के लिए उपर्युक्त नौ वाते ध्यान देने योग्य हँ १. हदय मे उत्साह २. हृदयाग्र में दीप्ति ३. पूर्णहदय मे प्रभु-ध्यान ४. जिगर में पर्जन्य की तरह दानवृत्ति ५. गुर्दो में जल £. मन्यु से आदित्य॒ ७. आमाशय के ठीक होने से प्रसन्नता ८. अति मे कृमिसंहारक शक्ति तथा ९. कोश्यों (८७॥५।९३) मे प्रजननशक्ि व

English

Agni with the heart; Lightning with the heart's point; Pasupati with the whole heart; Bhava with the liver. Sarva with the two cardiac bones; îsâna with Passion; Mahâdeva with the intercostal flesh; the Fierce God with the rectum; Vasishtha-hanuh, Singis with two lumps of flesh near the heart.

अध्याय ३९

श्लोक 9

उ॒ग्रँल्लोहि॑तेन मि॒त्रᳪ सौ॑व्रत्येन रु॒द्रं दौर्व्र॑त्ये॒नेन्द्रं॑ प्रक्री॒डेन॑ म॒रुतो॒ बले॑न सा॒ध्यान् प्र॒मुदा॑ ।भ॒वस्य॒ कण्ठ्य॑ᳪ रु॒द्रस्या॑न्तः पा॒र्श्व्यं म॑हादे॒वस्य॒ यकृ॑च्छ॒र्वस्य॑ वनि॒ष्ठुः प॑शु॒पते॑: पुरी॒तत्

ugra~llohitena mitra sauvratyena rudraṃ daurvratyenendraṃ prakrīḍena maruto balena sādhyān pramudā | bhavasya kaṇṭhya rudrasyāntaḥ pārśvyaṃ mahādevasya yakṛccharvasya vaniṣṭhuḥ paśupate: purītat

हिन्दी अर्थ

भोजन के विषय मे यह ध्यान रखा जाए कि वह लोमों से लेकर वीर्य तक शरीर की सब धातुओं के लिए हितकर हो तथा कोष्ठबद्धता को पैदा करनेवाला न हो। स्वाहां । शुचे स्वाहा शोच॑ ते स्वाहा शोच॑मानाय॒ स्वाहा शोकाय स्वाह॥ ९९॥ जा भोजन स्वास्थ्य के लिए हितकर हो वहाँ भोजन एेसा होना चाहिए जो मनुष्य को

English

The Fierce with blood; Mitra with obedience, Rudra with disobedience; Indra with pastime; the Maruts with strength; the Sâdhyas with enjoyment. Bhava's is what is on the throat; Rudra's what is between the ribs; Mahâdeva's is the liver; Sarva's the rectum; Pasupati's the pericardium.

अध्याय ३९

श्लोक 10

लोम॑भ्य॒: स्वाहा॒ लोम॑भ्य॒: स्वाहा॑ त्व॒चे स्वाहा॑ त्व॒चे स्वाहा॒ लोहि॑ताय॒ स्वाहा॒ लोहि॑ताय॒ स्वाहा॒ मेदो॑भ्य॒: स्वाहा॒ मेदो॑भ्य॒: स्वाहा॑ ।मा॒ᳪसेभ्य॒: स्वाहा॑ मा॒ᳪसेभ्य॒: स्वाहा॒ स्नाव॑भ्य॒: स्वाहा॒ स्नाव॑भ्य॒: स्वाहा॒ ऽस्थभ्य॒: स्वाहा॒ स्थभ्य॒: स्वाहा॑ म॒ज्जभ्य॒: स्वाहा॑ म॒ज्जभ्य॒: स्वाहा॑ ।रेत॑से॒ स्वाहा॑ पा॒यवे॒ स्वाहा॑

lomabhya: svāhā lomabhya: svāhā tvace svāhā tvace svāhā lohitāya svāhā lohitāya svāhā medobhya: svāhā medobhya: svāhā | māsebhya: svāhā māsebhya: svāhā snāvabhya: svāhā snāvabhya: svāhā 'sthabhya: svāhā sthabhya: svāhā majjabhya: svāhā majjabhya: svāhā | retase svāhā pāyave svāhā

हिन्दी अर्थ

भोजन एेसा हो जो मुञ्धे तपस्वी बनाए, शक्तिशाली बनाए, पापों के लिए मै प्रायश्चित्त की वृत्तिवाला बनं ओर अन्त मे भोजन को मैं ओषध सम यमाय स्वाहान्त॑काय स्वाहा मृत्यवे स्वाह।। ब्रह्म॑णे स्वाहां ब्रह्महत्यायै स्वाहा विश्वेभ्यो देवेभ्यः स्वाहा द्यावापुथिवीभ्याश्शस्वाह।।। ९३

English

To the hair Svâhâ! To the hair Svâhâ! To the skin Svâhâ! To the skin Svâhâ! To the blood Svâhâ! To the blood Svâhâ! To the fats Svâhâ! To the fats Svâhâ! To the fleshy parts Svâhâ! To the fleshy parts Svâhâ! To the sinews Svâhâ! To the sinews Svâhâ! Svâhâ to the bones! Svâhâ to the bones! To the marrows Svâhâ! To the marrows Svâhâ! To the seed Svâhâ! To the anus Svâhâ!

अध्याय ३९

श्लोक 11

आ॒या॒साय॒ स्वाहा॑ प्राया॒साय॒ स्वाहा॑ संया॒साय॒ स्वाहा॑ विया॒साय॒ स्वाहो॑द्या॒साय॒ स्वाहा॑ ।शु॒चे स्वाहा॒ शोच॑ते॒ स्वाहा॒ शोच॑मानाय॒ स्वाहा॒ शोका॑य॒ स्वाहा॑

āyāsāya svāhā prāyāsāya svāhā saṃyāsāya svāhā viyāsāya svāhodyāsāya svāhā | śuce svāhā śocate svāhā śocamānāya svāhā śokāya svāhā

हिन्दी अर्थ

आचार्य विद्यार्थी को ज्ञान देता है, सद्गुणों से अलंकृत करता है तथा अव्यसनी बनाकर स्वस्थ शरीरवाला बनाता है। इत्येकोनच्त्वारिछोऽध्यायः।1

English

To Effort Svâhâ! To Exertion Svâhâ! To Endeavour Svâhâ! To Viyâsa Svâhâ! To Attempt Svâhâ!

अध्याय ३९

श्लोक 12

तप॑से॒ स्वाहा॒ तप्य॑ते॒ स्वाहा॒ तप्य॑मानाय॒ स्वाहा॑ त॒प्ताय॒ स्वाहा॑ घ॒र्माय॒ स्वाहा॑ ।निष्कृ॑त्यै॒ स्वाहा॒ प्राय॑श्चित्त्यै॒ स्वाहा॑ भेष॒जाय॒ स्वाहा॑

tapase svāhā tapyate svāhā tapyamānāya svāhā taptāya svāhā gharmāya svāhā | niṣkṛtyai svāhā prāyaścittyai svāhā bheṣajāya svāhā

हिन्दी अर्थ

आचार्य विद्यार्थी को ज्ञान देता है, सद्गुणों से अलंकृत करता है तथा अव्यसनी बनाकर स्वस्थ शरीरवाला बनाता है। इत्येकोनच्त्वारिछोऽध्यायः।1

English

To Grief Svâhâ! To the Grieving Svâhâ! To the Sorrowing Svâhâ! To Sorrow Svâhâ! To Heat Svâhâ! To him who grows hot Svâhâ! To him who is being heated Svâhâ! To him who has been heated Svâhâ! To Gharma Svâhâ! To Atonement Svâhâ! To Expiation Svâhâ! To Remedy Svâhâ!

अध्याय ३९

श्लोक 13

य॒माय॒ स्वाहा ऽन्त॑काय॒ स्वाहा॑ मृ॒त्यवे॒ स्वाहा॒ ब्रह्म॑णे॒ स्वाहा॑ ब्रह्मह॒त्यायै॒ स्वाहा॒ विश्वे॑भ्यो दे॒वेभ्य॒: स्वाहा॒ द्यावा॑पृथि॒वीभ्या॒ᳪ स्वाहा॑

yamāya svāhā 'ntakāya svāhā mṛtyave svāhā brahmaṇe svāhā brahmahatyāyai svāhā viśvebhyo devebhya: svāhā dyāvāpṛthivībhyā svāhā

हिन्दी अर्थ

आचार्य विद्यार्थी को ज्ञान देता है, सद्गुणों से अलंकृत करता है तथा अव्यसनी बनाकर स्वस्थ शरीरवाला बनाता है। इत्येकोनच्त्वारिछोऽध्यायः।1

English

To Yama Svâhâ! To the Finisher Svâhâ! To Death Svâhâ! To the Priesthood Svâhâ! To Brâhmanicide Svâhâ! To the All-Gods Svâhâ! To Heaven and Earth Svâhâ!

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Yajur Veda — Chapter 39
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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