अध्याय ९
श्लोक 1
इति श्रीवामनपुराणे अष्टमो ऽध्यायः ________________________________________________________________________ नारद उवाच ।नेत्रहीनः कथं राज्ये प्रह्लादेनान्धको मुने ।अभिषिक्तो जानतापि राजधर्मं सनातनम्
iti śrīvāmanapurāṇe aṣṭamo 'dhyāyaḥ ________________________________________________________________________ nārada uvāca / netrahīnaḥ kathaṃ rājye prahlādenāndhako mune / abhiṣikto jānatāpi rājadharmaṃ sanātanam
हिन्दी अर्थ
और हँसते हुए उस दण्डको बायें हाथसे पकड़ फिर अन्धक उसे लेकर घुमाने लगा और साथ ही वर्षाकालिक मेघके तुल्य वह महानाद करते हुए गर्जन करने लगा। अन्धकके द्वारा यम-दण्डसे प्रह्मदको सुरक्षित देखकर हैत्यों एवं दानवोंके सेनानायक प्रसन्न
English
Description of battle of demons and gods