अध्याय १६
श्लोक 1
________________________________________________________________________ पुलस्त्य उवाच ।ततः सुकेशिर्देवर्षे गत्वा स्वपुरमुत्तमम् ।सम्हूयाब्रवीत् सर्वान् राक्षसान् धार्मिकं वचः
________________________________________________________________________ pulastya uvāca / tataḥ sukeśirdevarṣe gatvā svapuramuttamam / samhūyābravīt sarvān rākṣasān dhārmikaṃ vacaḥ
हिन्दी अर्थ
स्थलों (जोड़ों) आदिमें मेरी रक्षा करें। देव! आपको नमस्कार है द्विजोत्तम! प्राचीन कालमें भगवान् शंकरने कात्यायनी (दुर्गा)-की रक्षाके लिये इस महान् विष्णुपञ्जरस्तोत्रको उस स्थानपर कहा था, जहाँ उन्होंने महिषासुर, नमर, रक्तबीज एवं अन्यान्य देव-
English
Description of Sleep of Gods & Austerities on Dvitiya and