Markandeya Purana· Mārkaṇḍeya Purāṇa
26
अध्याय 26 / 90

Adhyaya 26

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अध्याय २६

श्लोक 1

इति श्रीमार्कण्डेयपुराणे मदालसोपाख्याने पञ्चविंशो ऽध्यायः षड्विंशो ऽध्यायः जड उवाच वर्धमानं सुतं सा तु राजपत्नी दिने दिने ।तमुल्लापादिना बोधमनयन्निर्ममात्मकम्

iti śrīmārkaṇḍeyapurāṇe madālasopākhyāne pañcaviṃśo 'dhyāyaḥ ṣaḍviṃśo 'dhyāyaḥ jaḍa uvāca vardhamānaṃ sutaṃ sā tu rājapatnī dine dine / tamullāpādinā bodhamanayannirmamātmakam

हिन्दी अर्थ

माहेय, सारस्वत, काश्मीर, सुराष्ट्र, आवन्त्य और अर्बुद--ये अपरान्त-प्रदेश हैं। अब विन्ध्यनिवासियोंके देश बतलाये जाते हैं। सरज, करूष, केरल, उत्कल, उत्तमर्ण, दशार्ण, भोज्य, किष्किन्धक, तोशल, कोसल, त्रैपुर, वैदिश, तुम्बुर, तुम्बुल, पट, नैषध, अन्नज, तुष्टिकार, वीरहोत्र और अवन्ति--ये सभी जनपद विन्ध्याचलकी घाटियोंमें बसे हैं।

English

fresh must be avoided, my royal son, because of the changes that occur in flour, vegetables, sugarcane and milk; and meat long stale must be avoided, because of the changej that occurs in it.

अध्याय २६

श्लोक 2

यथायथं बलं लेभे यथा लेभे मतिं पितुः ।तथा तथात्मबोधञ्च सो ऽवापन्मातृभाषितैः

yathāyathaṃ balaṃ lebhe yathā lebhe matiṃ pituḥ / tathā tathātmabodhañca so 'vāpanmātṛbhāṣitaiḥ

हिन्दी अर्थ

अब पर्वतीय देशोंका वर्णन किया जाता है--नीहार, हंसमार्ग, कुरु, गुर्गण, खस, कुन्तप्रावरण, ऊर्ण, दार्व, कृत्रक, त्रिगर्त, मालव, किरात और तामस। ये पर्वतोंके आश्रयमें बसे हैं। इतने देशोंसे परिपूर्ण यह भारतवर्ष है। इसमें चारों दिशाओंके देशोंकी स्थिति है। इसमें सत्ययुग, त्रेता, द्वापर और कलि--इन चारों युगोंकी व्यवस्था है। भारतवर्षके दक्षिण,

English

appease him when angry. He should not listen to abn when others utter it.

अध्याय २६

श्लोक 3

इत्थं तया स तनयो जन्मप्रभृति बोधितः ।चकार न मतिं प्राज्ञो गार्हस्थ्यं प्रति निर्ममः

itthaṃ tayā sa tanayo janmaprabhṛti bodhitaḥ / cakāra na matiṃ prājño gārhasthyaṃ prati nirmamaḥ

हिन्दी अर्थ

पश्चिम तथा पूर्वमें महासागर है और उत्तरकी ओर धनुषकी प्रत्यज्चाके समान हिमालय पर्वतकी स्थिति है। यह भारतवर्ष सब प्रकारकी उन्नतिका बीज है। यहाँ शुभकर्म करनेसे ब्रह्मपद, इन्द्रपद, देवलोक और मरुद्गणोंका स्थान भी मिलता है। इसी प्रकार यहाँ निन्दित कर्म करनेसे मनुष्यको मृग, पशु, सर्प तथा स्थावरोंकी योनि भी मिल सकती है। ब्रह्मन्! इस

English

to one who is ill with pain, to his superior in learning, to pregnant woman, to a man labouring under a burden, to younger man, to the dumb, blind and deaf, to a drunken maj

अध्याय २६

श्लोक 4

द्वितीयो ऽस्याः सुतो जज्ञे तस्य नामाकरोत्पिता ।सुबाहुरयमित्युक्ते सा जाहस मदालसा

dvitīyo 'syāḥ suto jajñe tasya nāmākarotpitā / subāhurayamityukte sā jāhasa madālasā

हिन्दी अर्थ

जगत्में भारतवर्षके सिवा दूसरा कोई देश कर्मभूमि नहीं है। ब्रह्मर्ष! देवताओंके मनमें भी सदा यह अभिलाषा रहा करती है कि “हम देवयोनिसे भ्रष्ट होनेपर भारतवर्षमें मनुष्यके रूपमें उत्पन्न हों।। उनका कहना है कि “भारतवर्षके मनुष्य वह कार्य कर सकते हैं, जो

English

and to a mad man, to a prostitute, to an enemy, to a child m to an outcaste.

अध्याय २६

श्लोक 5

तमप्येवं यथापूर्वं बालमुल्लापनादिना ।प्राह बाल्यात् स च प्राप तथा बोधं माहमतिः

tamapyevaṃ yathāpūrvaṃ bālamullāpanādinā / prāha bālyāt sa ca prāpa tathā bodhaṃ māhamatiḥ

हिन्दी अर्थ

बँधकर अपने कर्मोकी ख्याति--अपनी कीर्ति फैलानेको उत्सुक रहते हैं और लेशमात्र सांसारिक सुखके प्रलोभनमें पड़कर नित्य अक्षय सुखकी प्राप्तिके लिये कोई भी कर्म नहीं

English

temple, and a fig-tree standing on a sacred spot, and a plao where four roads meet, his superior in learning, a guru ant a god.

अध्याय २६

श्लोक 6

तृतीयं तनयं जातं स राजा शत्रुमर्दनम् ।यदाह तेन सा सुभ्रुर्जहासातिचिरं पुनः

tṛtīyaṃ tanayaṃ jātaṃ sa rājā śatrumardanam / yadāha tena sā subhrurjahāsāticiraṃ punaḥ

हिन्दी अर्थ

+ इसीको शिशुमार चक्र भी कहते हैं।

English

" He should avoid the sacred thread, an ornament, and t!ie water-pot on the fourteenth, eighth and fifteenth days of tlie

अध्याय २६

श्लोक 7

तथैव सो ऽपि तन्वङ्ग्या बालत्वादवबोधितः ।क्रियाश्चकार निष्कामो न किञ्चिदुपकारकम्

tathaiva so 'pi tanvaṅgyā bālatvādavabodhitaḥ / kriyāścakāra niṣkāmo na kiñcidupakārakam

हिन्दी अर्थ

भारतवर्षमें भगवान् कूर्मकी स्थितिका वर्णन

English

moon and at its four changes. Ho should also eschew ruli- bing his body with oil, and sexual intercourse with his wife, on those days.

अध्याय २६

श्लोक 8

चतुर्थस्य सुतस्याथ चिकीर्षुर्नाम भूमिपः ।ददर्श तां शुभाचारामीषद्धासां मदालसाम् ।तामाह राजा हसतीं किञ्चित् कौतूहलान्वितः

caturthasya sutasyātha cikīrṣurnāma bhūmipaḥ / dadarśa tāṃ śubhācārāmīṣaddhāsāṃ madālasām / tāmāha rājā hasatīṃ kiñcit kautūhalānvitaḥ

हिन्दी अर्थ

क्रौष्टकिने कहा--भगवन! आपने मुझसे भारतवर्षका भलीभाँति वर्णन किया तथा वहाँकी नदियों, पर्वतों और जनपदोंको भी बतलाया। इसके पहले आपने यह कहा था कि भारतवर्षमें भगवान् श्रीहरि कूर्मरूपसे निवास करते हैं, सो उनकी स्थिति कहाँ और किस प्रकार है, यह सब सुननेकी मेरी इच्छा हो रही है। कूर्मरूपी भगवान् जनार्दन किस रूपमें

English

extended: nor should he throw out both his feet; nor shoalii be press one foot on the other.

अध्याय २६

श्लोक 9

राजोवाच क्रियमाणे ऽसकृन्नाम्नि कथ्यतां हास्यकारणम् ।विक्रान्तश्च सुबाहुश्च तथान्यः शत्रुमर्दनः

rājovāca kriyamāṇe 'sakṛnnāmni kathyatāṃ hāsyakāraṇam / vikrāntaśca subāhuśca tathānyaḥ śatrumardanaḥ

हिन्दी अर्थ

स्थित हैं, उनसे मनुष्योंके शुभ-अशुभकी सूचना कैसे मिलती है? भगवान् कूर्मका मुख कैसा है? और उनके चरण कौन हैं? ये सारी बातें बताइये।

English

sons, or those in calamity, the deformed, or magicians, or tho« who have limbs deficient or superfluous.

अध्याय २६

श्लोक 10

शोभनानीति नामानि मया मन्ये कृतानि वै ।योग्यानि क्षत्रबन्धूनां शौर्याटोपयुतानि च

śobhanānīti nāmāni mayā manye kṛtāni vai / yogyāni kṣatrabandhūnāṃ śauryāṭopayutāni ca

हिन्दी अर्थ

मार्कण्डेयजी बोले--ब्रह्मन! कूर्मरूपधारी भगवान् श्रीहरि नौ भेदोंसे युक्त इस भारतवर्षको आक्रान्त करके स्थित हैं। उनका मुख पूर्व दिशाकी ओर है। उनके चारों ओर नौ भागोंमें विभक्त होकर सम्पूर्ण नक्षत्र और देश स्थित हैं। उन्हें बतलाता हूँ, सुनो। वेदि,

English

" Likewise the wise man should not draw his seat toward him and sit down.

अध्याय २६

श्लोक 11

असन्त्येतानि चेद्भद्रे ! यदि ते मनसि स्थितम् ।तदस्य क्रियतां नाम चतुर्थस्य सुतस्य मे

asantyetāni cedbhadre ! yadi te manasi sthitam / tadasya kriyatāṃ nāma caturthasya sutasya me

हिन्दी अर्थ

शूरसेन, माथुर, धर्मारण्य, ज्योतिषिक, गौरग्रीव, गुडाश्मक, उद्वेहक, पाज्चाल, सड़केत, कंक, मारुत, कालकोटि, पाखण्ड, पारियात्रनिवासी, कापिज्जल, कुरुबाहा, उदुम्बर तथा गजाह्नय (हस्तिनापुर आदि)-के मनुष्य भगवान् कूर्मके मध्यभाग (कटिप्रदेश)-में स्थित हैं। कृत्तिका, रोहिणी और मृगशिरा--ये तीन नक्षत्र उक्त स्थानके निवासियोंके लिये शुभाशुभके

English

He must have his food evening and morning, after doing « verence to his guests.

अध्याय २६

श्लोक 12

मदालसौवाच मयाज्ञा भवतः कार्या महाराज ! यथात्थ माम् ।तथा नाम करिष्यामि चतुर्थस्य सुतस्य ते

madālasauvāca mayājñā bhavataḥ kāryā mahārāja ! yathāttha mām / tathā nāma kariṣyāmi caturthasya sutasya te

हिन्दी अर्थ

सूचक होते हैं। वृषध्वज, अज्जन, जम्बू, मानवाचल, शूर्पकर्ण, व्याप्रमुख, खर्मक, कर्वटाशन, चन्द्रेश्व, खश, मगध, मैथिल, पौण्ड्र, वदनदन्तुर, प्राग्ज्योतिष, लौहित्य, सामुद्र, पुरुषादक, पूर्णोत्कट, भद्रगौर, उदयगिरि, काशी, मेखल, मुष्ट, ताम्रनलिप्त, एकपादप, वर्धभान और कोसल--ये देश कूर्मभगवानके मुखभागमें स्थित हैं। आर्द्रा, पुनर्वसु और पुष्य

English

should always wash his teeth, my child.

अध्याय २६

श्लोक 13

अलर्क इति धर्मज्ञः ख्यातिं लोके प्रयास्यति ।कनीयानेष ते पुत्रो मतिमांश्च भविष्यति

alarka iti dharmajñaḥ khyātiṃ loke prayāsyati / kanīyāneṣa te putro matimāṃśca bhaviṣyati

हिन्दी अर्थ

--ये तीन नक्षत्र भी उनके मुखरमें हैं।

English

should always wash his teeth, my child.

अध्याय २६

श्लोक 14

तच्छ्रुत्वा नाम पुत्रस्य कृतं मात्रा महीपतिः ।अलर्क इत्यसम्बद्धं प्रहस्येदमथाब्रवीत्

tacchrutvā nāma putrasya kṛtaṃ mātrā mahīpatiḥ / alarka ityasambaddhaṃ prahasyedamathābravīt

हिन्दी अर्थ

अब कूर्मभगवानके दक्षिण चरणमें जो देश हैं, उनके नाम सुनो--कलिड़ (उड़ीसा), वड़ (बंगाल), जठर, कोसल, मूषिक, चेदि, ऊर्ध्वकर्ण, मत्स्य, अन्ध्र, विन्ध्यवासी, विदर्भ (बरार), नारिकेल, धर्मद्वीप, ऐलिक, व्याघ्रग्रीव, महाग्रीव, त्रैपुर, श्मश्रुधारी, कैष्किन्ध्य, हेमकूट, निषध, कटकस्थल, दशार्ण, हारिक, नग्न, निषाद, काक्वलालक, पर्ण तथा शबर।

English

should always wash his teeth, my child.

अध्याय २६

श्लोक 15

राजोवाच भवत्या यदिदं नाम मत्पुत्रस्य कृतं शुभे ।किमीदृशमसम्बद्धमर्थः को ऽस्य मदालसे

rājovāca bhavatyā yadidaṃ nāma matputrasya kṛtaṃ śubhe / kimīdṛśamasambaddhamarthaḥ ko 'sya madālase

हिन्दी अर्थ

ये देश भगवान् कूर्मके पूर्व-दक्षिण दिशावाले चरणमें स्थित हैं। आश्लेषा, मघा और पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र भी वहीं हैं। लड़का, कालाजिन, शैलिक, निकट, महेन्द्र, मलय और दर्दुर पर्वतोंके पास बसे हुए जनपद, कर्कोटक वनमें रहनेवाले लोग तथा भृगुकच्छ, कोड्कण, सम्पूर्ण आभीर-प्रदेश, वेण्या नदीके तटपर बसे हुए देश, अवन्ति, दासपुर,

English

should always wash his teeth, my child.

अध्याय २६

श्लोक 16

मदालसोवाच कल्पनेयं महाराज ! कृता सा व्यावहारिको ।त्वत्कृतानां तथा नाम्नां शृणु भूप ! निरर्थताम्

madālasovāca kalpaneyaṃ mahārāja ! kṛtā sā vyāvahāriko / tvatkṛtānāṃ tathā nāmnāṃ śṛṇu bhūpa ! nirarthatām

हिन्दी अर्थ

आकारी, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गोनर्द, चित्रकूट, चोल, कोलगिरि, क्रौज्चद्वीप, जटाधर, कावेरीके तटवर्ती देश, ऋष्यमूक पर्वतपर बसे हुए प्रदेश, नासिक, शड्ख, शुक्ति आदि तथा वैदूर्य पर्वतके समीपवर्ती देश, वारिचर कोल, चर्मपट्ट, गयबाहा, कृष्णाद्वीपवासी, सूर्याद्रि और कुमुदाद्रिके निवासी, औखा वन, दिशिक, कर्मनायक, दक्षिण, कौरुष, ऋषिक,

English

should always wash his teeth, my child.

अध्याय २६

श्लोक 17

वदन्ति पुरुषाः प्राज्ञा व्यापिनं पुरुषं यतः ।क्रान्तिश्च गतिरुद्दिष्टा देशाद्देशान्तरन्तु या

vadanti puruṣāḥ prājñā vyāpinaṃ puruṣaṃ yataḥ / krāntiśca gatiruddiṣṭā deśāddeśāntarantu yā

हिन्दी अर्थ

तापसाश्रम, ऋषभ, सिंहल, काज्चीनिवासी, त्रिलिड़, कुज्जरदरी तथा कच्छमें रहनेवाले लोग और ताम्रवर्णी नदीके तटवर्ती देश--ये भगवान् कूर्मकी दायीं कुक्षिमें स्थित हैं। उत्तरा- फाल्गुनी, हस्त तथा चित्रा--ये तीन नक्षत्र भी वहीं हैं।

English

should always wash his teeth, my child.

अध्याय २६

श्लोक 18

सर्वगो न प्रयातीति व्यापी देहेश्वरो यतः ।ततो विक्रान्तसंज्ञेयं मता मम निरर्थिका

sarvago na prayātīti vyāpī deheśvaro yataḥ / tato vikrāntasaṃjñeyaṃ matā mama nirarthikā

हिन्दी अर्थ

काम्बोज, पह्नव, वडवामुख, सिन्धु, सौवीर, आनर्त, वनितामुख, द्रावण, शूद्र, कर्ण, प्राधेय, बर्बर, किरात, पारद, पाण्ड्य, पारशव, कल, धूर्तक, हैमगिरिक, सिन्धु, कालक, वैरत, सौराष्ट्र, दरद, द्राविड, महार्णव--ये देश कूर्मभगवानके दक्षिण चरणमें स्थित हैं। स्वाती, विशाखा और अनुराधा नक्षत्र भी वहीं हैं। मणिमेघ, क्षुराद्रि, खठ्जन, अस्तगिरि,

English

should always wash his teeth, my child.

अध्याय २६

श्लोक 19

सुबाहुरिति या संज्ञा कृतान्यस्य सुतस्य ते ।निरर्था साप्यमूर्तत्वात् पुरुषस्य महीपते

subāhuriti yā saṃjñā kṛtānyasya sutasya te / nirarthā sāpyamūrtatvāt puruṣasya mahīpate

हिन्दी अर्थ

अपरान्तिक, हैहय, शान्तिक, विप्रशस्तक, कोडकण, पजञ्चनद, वमन, अवर, तारक्षुर, अड्भतक, शर्कर, शाल्मवेश्मक, गुरुस्वर, फाल्गुनक, वेणुमतीनिवासी, फाल्गुलुक, घोर, गुरुह, चकल, एकेक्षण, वाजिकेश, दीर्घग्रीव, सुचूलिक तथा अश्वकेश--ये देश भगवान् कच्छपके पुच्छभागमें स्थित हैं। वहीं ज्येष्ठा, मूल और पूर्वाषाढा नक्षत्र भी हैं। माण्डव्य,

English

should always wash his teeth, my child.

अध्याय २६

श्लोक 20

पुत्रस्य यद् कृतं नाम तृतीयस्यारिमर्दनः ।मन्ये तदप्यसम्बद्धं शृणु चाप्यत्र कारणम्

putrasya yad kṛtaṃ nāma tṛtīyasyārimardanaḥ / manye tadapyasambaddhaṃ śṛṇu cāpyatra kāraṇam

हिन्दी अर्थ

बलावस्थ, धर्मबद्ध, उलूक तथा उरुकर्मनिवासी मनुष्य भगवान् कूर्मके बायें चरणमें स्थित हैं। उत्तराषाढा, श्रवण और धनिष्ठाकी भी वहीं स्थिति है। कैलास, हिमवान्, धनुष्मान्,

English

should always wash his teeth, my child.

अध्याय २६

श्लोक 21

एक एव शरीरेषु सर्वेषु पुरुषो यदा ।तदास्य राजन् ! क शत्रुः को वा मित्रमिहेष्यते

eka eva śarīreṣu sarveṣu puruṣo yadā / tadāsya rājan ! ka śatruḥ ko vā mitramiheṣyate

हिन्दी अर्थ

अग्नीज्य, अर्दन, अश्वमुख, चिबिड़, केशधारी, दासेरक, वाटधान, शवधान, पुष्कल, अधम,

English

should always wash his teeth, my child.

अध्याय २६

श्लोक 22

भूतैर्भूतानि मृद्यन्ते अमूर्तो मृद्यते कथम् ।क्रोधादीनां पृथग्भावात् कल्पनेयं निरर्थिका

bhūtairbhūtāni mṛdyante amūrto mṛdyate katham / krodhādīnāṃ pṛthagbhāvāt kalpaneyaṃ nirarthikā

हिन्दी अर्थ

कोहलक, माण्डव्य, भूतियुवक, शातक, हेमतारक, यशोमत्य, गान्धार, स्वर, सागरराशि, यौधेय, दासमेय, राजन्य, श्यामक तथा क्षेमधूर्त--ये कूर्मभगवान्की बायीं दुक्षिमें हैं। शतभिष, पूर्वाभाद्रपदा और उत्तराभाद्रपदा-ये तीन नक्षत्र भी वहीं हैं। किन्नरराज्य, पशुपाल, कीचक, काश्मीरक, अभिसारजन, दरय, अज्गण, कुरट, अन्नदारक, एकपाद,

English

should always wash his teeth, my child.

अध्याय २६

श्लोक 23

यदि संव्यवहारार्थमसन्नाम प्रकल्प्यते ।नाम्नि कस्मादलर्काख्ये नैरर्थ्यं भवतो मतम्

yadi saṃvyavahārārthamasannāma prakalpyate / nāmni kasmādalarkākhye nairarthyaṃ bhavato matam

हिन्दी अर्थ

कच्छपभगवानके पूर्व-उत्तरवाले चरणके आश्रित हैं। रेवती, अश्विनी और भरणी भी वहीं

English

should always wash his teeth, my child.

अध्याय २६

श्लोक 24

जड उवाच एवमुक्तस्तया साधु महीष्या स महीपतिः ।तथेत्याह महाबुद्धिर्दयितां तथ्यवादिनीम्

jaḍa uvāca evamuktastayā sādhu mahīṣyā sa mahīpatiḥ / tathetyāha mahābuddhirdayitāṃ tathyavādinīm

हिन्दी अर्थ

विप्रवर! उक्त देशोंमें क्रमश: ये ही नक्षत्र ऐसे हैं, जिनके कारण मनुष्योंको पीड़ा होती है अर्थात् जब इनके साथ दुष्ट ग्रहोंका योग होता है तो ये उनसे प्रभावित होकर प्रजाको वष्ट देते हैं और उत्तम ग्रहोंके योग होनेपर ये वहाँके मनुष्योंको अभ्युदयकी प्राप्ति कराते हैं। जिस नक्षत्रराशिका जो ग्रह स्वामी है, उसीके अशुभ भावमें रहनेपर उस देशके लोगोंको

English

should always wash his teeth, my child.

अध्याय २६

श्लोक 25

तञ्चापि सा सुतं सुभ्रूर्यथा पूर्वसुतांस्तथा ।प्रोवाच बोधजननं तामुवाच स पार्थिवः

tañcāpi sā sutaṃ subhrūryathā pūrvasutāṃstathā / provāca bodhajananaṃ tāmuvāca sa pārthivaḥ

हिन्दी अर्थ

कष्ट होता है और वही ग्रह जब उच्च स्थानमें होता है तो शुभ फलोंकी प्राप्ति होती है। नक्षत्रों और ग्रहोंसे होनेवाला शुभाशुभ फल साधारणतया सब देशोंमें सभी मनुष्योंको प्राप्त होता है। यदि अपने नक्षत्र खराब हों अथवा जन्मके समय ग्रह अशुभ स्थानोंमें पड़े हों तो मनुष्यको कष्ट भोगना पड़ता है। यह बात प्रत्येकके लिये सामान्य रूपसे लागू होती है। इसी

English

should always wash his teeth, my child.

अध्याय २६

श्लोक 26

करोषि किमिदं मूढे ! ममाभावाय सन्ततेः ।दुष्टावबोधदानेन यथापूर्वं सुतेषु मे

karoṣi kimidaṃ mūḍhe ! mamābhāvāya santateḥ / duṣṭāvabodhadānena yathāpūrvaṃ suteṣu me

हिन्दी अर्थ

प्रकार यदि नक्षत्र और ग्रह अच्छे पड़े हों तो उसका फल शुभ होता है। पुण्यात्मा मनुष्यके

English

should always wash his teeth, my child.

अध्याय २६

श्लोक 27

यदि ते मत्प्रियं कार्यं यदि ग्राह्यं वचो मम ।तदेनं तनयं मार्गे प्रवृत्तेः सन्नियोजय

yadi te matpriyaṃ kāryaṃ yadi grāhyaṃ vaco mama / tadenaṃ tanayaṃ mārge pravṛtteḥ sanniyojaya

हिन्दी अर्थ

ग्रह यदि अशुभ स्थानोंमें हों तो उन्हें द्रव्य, गोष्ठ, भृत्य, सुहृद, पुत्र एवं भार्याकी भी हानि उठानी पड़ती है। यदि पुण्य थोड़ा है तो अपने शरीरपर भी भय आ सकता है और जिन्होंने अधिक मात्रामें पाप-ही-पाप किये हैं, उन्हें तो सर्वत्र ही द्रव्य आदि तथा शरीर--सभीकी हानि उठानी पड़ती है। जो सर्वथा निष्पाप हैं, उन्हें ग्रह आदिसे कभी कहीं भी भय नहीं है।

English

should always wash his teeth, my child.

अध्याय २६

श्लोक 28

कर्ममार्गः समुच्छेदं नैवं देवि ! गमिष्यति ।पितृपिण्डनिवृत्तिश्च नैवं साध्वि ! भविष्यति

karmamārgaḥ samucchedaṃ naivaṃ devi ! gamiṣyati / pitṛpiṇḍanivṛttiśca naivaṃ sādhvi ! bhaviṣyati

हिन्दी अर्थ

नक्षत्र और ग्रहसे प्राप्त शुभाशुभ फलको मनुष्य कभी तो अकेले भोगता है और कभी- कभी साधारणतया सम्पूर्ण दिशा, देश, जन-समुदाय, राजा अथवा पुत्रके साथ भोगता है। जब ग्रह दूषित नहीं होते तो मनुष्य परस्पर अपनी रक्षा करते हैं और ग्रहोंके दूषित हो जानेपर उन्हें शुभ फलोंसे वज्चित होना पड़ता है। यहाँ कूर्मभगवानके विग्रहमें जो

English

should always wash his teeth, my child.

अध्याय २६

श्लोक 29

पितरो देवलोकस्थास्तथा तिर्यक्त्वमागताः ।तद्वन्मनुष्यतां याता भूतवर्गे च संस्थिताः

pitaro devalokasthāstathā tiryaktvamāgatāḥ / tadvanmanuṣyatāṃ yātā bhūtavarge ca saṃsthitāḥ

हिन्दी अर्थ

नक्षत्रोंकी स्थिति बतायी गयी है, वे नक्षत्र उन-उन देशोंके लिये सामान्य रूपसे शुभ या अशुभ होते हैं। अतः बुद्धिमान् पुरुषको उचित है कि अपने देश-नक्षत्र तथा ग्रहजनित पीडाको उपस्थित देख उसकी विधिपूर्वक शान्ति करे। साथ ही लोकवादोंका भी शमन करे। आकाशसे देवताओं तथा हैत्य आदिके जो शत्रु पृथ्वीपर गिरते हैं, उन्हें लोकमें

English

should always wash his teeth, my child.

अध्याय २६

श्लोक 30

सपुण्यानसपुण्यांश्च क्षुत्क्षामान् तृट्परिप्लुतान् ।पिण्डोदकप्रदानेन नरः कर्मण्यवस्थितः

sapuṇyānasapuṇyāṃśca kṣutkṣāmān tṛṭpariplutān / piṇḍodakapradānena naraḥ karmaṇyavasthitaḥ

हिन्दी अर्थ

“लोकवाद'” कहा गया है। विद्वान् पुरुष उन सबकी शान्ति करे, लोकवादोंकी कभी भी उपेक्षा न करे; क्योंकि उनकी शान्ति करनेसे ही उनके द्वारा प्राप्त होनेवाले भयका निवारण होता है। लोकवादों और ग्रहोंके अनुकूल होनेपर शुभ फलका उदय एवं पापका नाश होता है तथा प्रतिकूल होनेपर वे बुद्धि एवं धन आदिका भी नाश कर डालते हैं। अत: उनकी

English

should always wash his teeth, my child.

अध्याय २६

श्लोक 31

सदाप्यायते सुभ्रु ! तद्वद्देवातिथोनपि ।देवैर्मनुष्यैः पितृभिः प्रेतैर्भूतैः सगुह्यकैः

sadāpyāyate subhru ! tadvaddevātithonapi / devairmanuṣyaiḥ pitṛbhiḥ pretairbhūtaiḥ saguhyakaiḥ

हिन्दी अर्थ

शान्तिके लिये द्रोहका त्याग तथा उपवास करे। देवस्थानों तथा देववृक्षोंकोी प्रणाम करना भी उत्तम माना गया है। जप, होम, दान और स्नान करे तथा क्रोधको त्याग दे। विद्वान् पुरुष किसीसे भी द्रोह न करे। सब प्राणियोंके प्रति मित्रभाव रखे। दुर्वचन न कहे और बढ़- बढ़कर बातें न बनावे।

English

should always wash his teeth, my child.

अध्याय २६

श्लोक 32

वयोभिः कृमिकीटैश्च नर एवोपजीव्यते ।तस्मात् तन्वड्गि ! पुत्रं यत्कार्यं क्षत्रयोनिभिः

vayobhiḥ kṛmikīṭaiśca nara evopajīvyate / tasmāt tanvaḍgi ! putraṃ yatkāryaṃ kṣatrayonibhiḥ

हिन्दी अर्थ

इस प्रकार मैंने भारतवर्षमें स्थित भगवान् कूर्मके स्वरूपका वर्णन किया। वे अचिन्त्यात्मा नारायण हैं, उन्हींमें सम्पूर्ण जगत्की स्थिति है। उन्हींमें सम्पूर्ण देवता और नक्षत्र-मण्डल हैं। उन्हींके भीतर अग्नि, पृथ्वी और सोम हैं। मेष आदि तीन राशियाँ भगवान् कूर्मके मध्यभाग (कटिप्रदेश) में हैं। मिथुन और कर्क मुखमें स्थित हैं। पूर्व और दक्षिणवाले

English

should always wash his teeth, my child.

अध्याय २६

श्लोक 33

ऐहिकामुष्मिकफलं तत् सम्यक् प्रतिपादय

aihikāmuṣmikaphalaṃ tat samyak pratipādaya

हिन्दी अर्थ

चरणमें कर्क तथा सिंह हैं। सिंह, कन्या और तुला--ये तीन राशियाँ उनकी कदुक्षिमें हैं। तुला और वृश्चिक दक्षिण-पश्चिमवाले चरणमें हैं। पृष्ठभागमें वृश्चिक और धन स्थित हैं, वायव्यकोणवाले चरणमें धन, मकर और कुम्भ हैं। उत्तर कुक्षिमें कुम्भ और मीनकी स्थिति है तथा ईशानकोणवाले चरणमें मीन और मेष राशि हैं। ब्रह्मन! भगवान् कूर्मके श्रीविग्रहमें

English

should always wash his teeth, my child.

अध्याय २६

श्लोक 34

जड उवाच तेनैवमुक्ता सा भर्त्रा वरनारी मदालसा ।अलर्कं नाम तनयमुवाचोल्लापवादिनी

jaḍa uvāca tenaivamuktā sā bhartrā varanārī madālasā / alarkaṃ nāma tanayamuvācollāpavādinī

हिन्दी अर्थ

सम्पूर्ण देश स्थित हैं, उन देशोंमें नक्षत्र हैं, नक्षत्रोंमें राशियाँ हैं और राशियोंमें ग्रहोंकी स्थिति है। अतः ग्रह-नक्षत्रोंमें पीड़ा होनेपर देशोंमें भी पीड़ा होती है, ऐसा जानना चाहिए और इसकी शान्तिके लिये विधिवत् स्नान करके दान-होम आदिका अनुष्ठान करना चाहिए।

English

should always wash his teeth, my child.

अध्याय २६

श्लोक 35

पुत्र वर्धस्व मद्भर्तुर्मनो नन्दय कर्मभिः ।मित्राणामुपकाराय दुर्हृदां नाशनाय च

putra vardhasva madbharturmano nandaya karmabhiḥ / mitrāṇāmupakārāya durhṛdāṃ nāśanāya ca

हिन्दी अर्थ

मार्कण्डेयजी कहते हैं--मुने! इस प्रकार मैंने भारतवर्षका यथावत् वर्णन किया। इस देशमें ही सत्ययुग, त्रेता, द्वापरप और कलियुग--इन चार युगों तथा चार वर्णोकी व्यवस्था है। अब शैलराज देवकूटके पूर्व जो भद्राश्ववर्ष है, उसका वर्णन सुनो। वहाँ श्वेतपर्ण, नील, पर्वतश्रेष्ठ शैवाल, कौरञ्ज तथा पर्णशालाग्र--ये पाँच कुलपर्वत हैं। इनसे उत्पन्न हुए और

English

should always wash his teeth, my child.

अध्याय २६

श्लोक 36

धन्यो ऽसि रे यो वसुधामशत्रुर् एकश्चिरं पालयितासि पुत्र ।तत्पालनादस्तु सुखोपभोगो धर्मात् फलं प्राप्स्यसि चामरत्वम्

dhanyo 'si re yo vasudhāmaśatrur ekaściraṃ pālayitāsi putra / tatpālanādastu sukhopabhogo dharmāt phalaṃ prāpsyasi cāmaratvam

हिन्दी अर्थ

भी बहुतेरे छोटे-छोटे पर्वत हैं। उनसे लगे हुए अनेक प्रकारके हजारों जनपद है, जिनके नाम कुमुदसंकाश, शुद्धसलानु और सुमड्ल आदि हैं। सीता, शड्खावती, भद्रा तथा चक्रावर्ता आदि वहाँकी नदियाँ हैं, जिनके पाट बहुत विस्तृत हैं। उनका जल बहुत ठंडा होता है। भद्राश्ववर्षक सभी मनुष्य शड़ख तथा शुद्ध सुवर्णके समान कान्तिमान् होते हैं।

English

should always wash his teeth, my child.

अध्याय २६

श्लोक 37

धरामरान् पर्वसु तर्पयेथाः समीहितं बन्धुषु पूरयेथाः ।हितं परस्मै हृदि चिन्तयेथाः मनः परस्त्रीषु निवर्तयेथाः

dharāmarān parvasu tarpayethāḥ samīhitaṃ bandhuṣu pūrayethāḥ / hitaṃ parasmai hṛdi cintayethāḥ manaḥ parastrīṣu nivartayethāḥ

हिन्दी अर्थ

उन्हें दिव्य पुरुषोंका संग प्राप्त होता है। वे बड़े पुण्यात्मा होते हैं। उनमें उत्तम-मध्यमका भेद नहीं होता, सब समान ही देखे जाते हैं। वे स्‍्वभावत: सहनशीलता आदि आठ गुणोंसे युक्त होते हैं। वहाँ चार भुजाधारी भगवान् विष्णु हयग्रीवरूपसे विराजमान रहते हैं। वे मस्तक, हृदय, लिड्र, चरण, हाथ और तीन नेत्रोंसे सुशोभित हैं। उन जगदीश्वरके अड़ोंमें भी

English

should always wash his teeth, my child.

अध्याय २६

श्लोक 38

यज्ञौरनेकैर्विबुधानजस्त्रम् अर्थैर्द्विजान् प्रीणय संश्रितांश्च ।स्त्रियश्च कामैरतुलैश्चिराय युद्धैश्चारींस्तोषयितासि वीर

yajñauranekairvibudhānajastram arthairdvijān prīṇaya saṃśritāṃśca / striyaśca kāmairatulaiścirāya yuddhaiścārīṃstoṣayitāsi vīra

हिन्दी अर्थ

पूर्ववत् देशोंकी स्थिति जाननी चाहिए।

English

should always wash his teeth, my child.

अध्याय २६

श्लोक 39

बालो मनो नन्दय बान्धवानां गुरोस्तथाज्ञानकरणैः कुमारः ।स्त्रीणां युवा सत्कुलभूषणानां वृद्धो वने वत्स ! वनेचराणाम्

bālo mano nandaya bāndhavānāṃ gurostathājñānakaraṇaiḥ kumāraḥ / strīṇāṃ yuvā satkulabhūṣaṇānāṃ vṛddho vane vatsa ! vanecarāṇām

हिन्दी अर्थ

अब उससे पश्चिममें स्थित केतुमालवर्षका वर्णन सुनो। वहाँ विशाल, कम्बल, कृष्ण, जयन्त, हरिपर्वत, विशोक और वर्धमान--ये सात कुल-पर्वत हैं। इनके सिवा और भी बहुत-से पर्वत हैं जहाँ लोग निवास करते हैं। उस देशमें मौलि, महाकाय, शाकपोत, करम्भक तथा अड्गुल आदि सैकड़ों जनपद हैं। वहाँके लोग वड्धक्षुश्यामा, स्वकम्बला,

English

appease him when angry. He should not listen to abn when others utter it.

अध्याय २६

श्लोक 40

राज्यं कुर्वन् सुहृदो नन्दयेथाः साधून् रक्षंस्तात ! यज्ञैर्यजेथाः ।दुष्टान्निघ्रन् वैरिणश्चाजिमध्ये गोविप्रार्थे वत्स ! मृत्युं व्रजेथाः

rājyaṃ kurvan suhṛdo nandayethāḥ sādhūn rakṣaṃstāta ! yajñairyajethāḥ / duṣṭānnighran vairiṇaścājimadhye goviprārthe vatsa ! mṛtyuṃ vrajethāḥ

हिन्दी अर्थ

अमोघा, कामिनी श्यामा तथा अन्यान्य सहस्रों नदियोंके जल पीते हैं। उस देशमें भगवान् श्रीहरि वराहरूपसे विराजमान हैं। वे अपने हाथ, पैर, मुख, हृदय, पीठ, पँसली आदि अड़ोंमें बहुत-से देश एवं तीन-तीन नक्षत्र पूर्ववत् धारण करते हैं। वे नक्षत्र भी पहलेकी ही भाँति उन-उन देशोंके लिये शुभाशुभसूचक होते हैं।

English

to one who is ill with pain, to his superior in learning, to pregnant woman, to a man labouring under a burden, to younger man, to the dumb, blind and deaf, to a drunken maj

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_mArkaNDeyapurANa1-93.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता · Identifier:

Markandeya Purana — Chapter 26

मार्कण्डेयपुराण

संस्कृत संस्करण · Sanskrit Edition:

Imported text; printed edition not recorded

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प्रकाशक अथवा पुरालेखागार · Archive:

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गणना पद्धति टिप्पणी · Numbering System:

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