अध्याय १०
श्लोक 1
सत्यव्रतस् तु भक्त्या च कृपया च प्रतिज्ञया विश्वामित्रकलत्रं तद् बभार विनये स्थितः
satyavratas tu bhaktyā ca kṛpayā ca pratijñayā viśvāmitrakalatraṃ tad babhāra vinaye sthitaḥ
हिन्दी अर्थ
राजा, खोटे सुहृदू-बन्धु, खोटे पुत्र तथा खोटी भार्याको दूरसे ही त्याग देना चाहिए'॥ ११९॥ खोटे मित्रमें प्रेम नहीं होता, कुभार्यासे सुख नहीं मिल सकता, कुपुत्रसे पिण्ड मिलना कठिन है और कुराजासे सत्य (न्याय)- की आशा नहीं की जा सकती है॥ १२०॥ कुमित्रपर भला विश्वास कैसे हो सकता है और कुदेशमें जीना भी सम्भव नहीं है। खोटे राजासे सर्वदा भय बना रहता है और कुपुत्रसे तो सब प्रकारसे दुःख ही मिलता है जो अधम मनुष्य अपराधीपर विश्वास करता है, वह अनाथ और दुर्बल मनुष्यकी भाँति चिरकालतक जीवित नहीं रह सकता॥ १२२॥ अविश्वासीका विश्वास न करे और विश्वासीपर भी अधिक विश्वास न करे; क्योंकि ऐसे लोगोंपर विश्वास करनेसे जो भय उत्पन्न होता है, वह जड़को भी काट डालता है॥ १२३ ॥ जो मनुष्य राजसेवकों तथा संकर जातियोंपर विश्वास करता है, वह मूढ़ चिरकालतक जीवित नहीं रह सकता
English
⁴⁰ _i. e._ They became mortal like other creatures who become subject to death in time.