Garuda Purana· Garuḍa Purāṇa
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अध्याय 11 / 317

Book 1 - Adhyaya 11

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अध्याय ११

श्लोक 1

इति श्रीगारुडे महापुराणे पूर्वखण्डे प्रथमांशाख्ये आचारकाण्डे लक्ष्म्यर्चननिरूपणं नाम दशमो ऽध्यायः श्रीगरुडमहापुराणम्- ११ हरिरुवाचं ।नवव्यूहार्चनं वक्ष्ये यदुक्तं कश्यपाय हि ।जीवमुत्क्षिप्य मूर्धन्यं नाभ्यां व्योम्निनिवेशयेत्

iti śrīgāruḍe mahāpurāṇe pūrvakhaṇḍe prathamāṃśākhye ācārakāṇḍe lakṣmyarcananirūpaṇaṃ nāma daśamo 'dhyāyaḥ śrīgaruḍamahāpurāṇam- 11 hariruvācaṃ / navavyūhārcanaṃ vakṣye yaduktaṃ kaśyapāya hi / jīvamutkṣipya mūrdhanyaṃ nābhyāṃ vyomniniveśayet

हिन्दी अर्थ

पूर्वादि दिशाओंमें भगवान् केशवके पास ही अवस्थित तदनन्तर वह साधक मण्डलके मध्य दिशाभेदके विमलादि शक्तियोंको अष्टदल-कमलपर विन्यस्त अनुसार पूर्वादि दिशाओंमें इन्द्रादि लोकपालोंको करके नवीं शक्तिको कर्णिकामें स्थापित करे। प्रतिष्ठित करे और उनके आयुधोंको भी स्थापित इस प्रकार ध्यान करके उस साधकको करे। उसके बाद विद्वान् साधकको ऊपरकी ओर

English

I shall now narrate the procedure of Mava-xyuhircoM which had been mentioned to Kaiyapa. Extricating the vital breath through the cerebral passage one should fix it in navel, in the sky.

अध्याय ११

श्लोक 2

ततोरमिति बीजेन दहेद्भूतात्मकं वपुः ।यमित्यनेन बीजेन तच्च सर्व विनाशयेत्

tatoramiti bījena dahedbhūtātmakaṃ vapuḥ / yamityanena bījena tacca sarva vināśayet

हिन्दी अर्थ

योगपीठकी विधिवत् पूजा करनी चाहिए । तत्पश्चात् ' ॐ ब्रह्मणे नमः' मन्त्रसे ब्रह्मा तथा नीचेकी ओर वह पुनः मनसे भगवान् विष्णुका अङ्गसहित' ३० अनन्ताय नमः' मन्त्रसे अनन्तदेवका न्यास आवाहनकर उस योगपीठमें उन्हें प्रतिष्ठित करे करना चाहिए। तदनन्तर पूर्वादि चारों दिशाओंमें अवस्थित चतुर्दल- इस प्रकार साधक सभी देवोंका न्यास एवं

English

Then with the mysdc bijxP ram the physical body shall be burnt. With the bijayam he should destroy all.

अध्याय ११

श्लोक 3

लमित्यनेन बीजेन प्लावयेत्सचराचरम् ।वमित्यनेन बीजेन चिन्तयेदमृतं ततः

lamityanena bījena plāvayetsacarācaram / vamityanena bījena cintayedamṛtaṃ tataḥ

हिन्दी अर्थ

कमलपर हृदयादिन्यास करना चाहिए। कमलके ध्यान करके उनकी पूजा करे और उनके सामने मध्यभागमें तथा कोणोंपर अस्त्रमन्त्रका न्यास करे। उनकी ही मुद्राका प्रदर्शन करे। अञ्जलिबद्ध होना अर्थात् उसके पूर्व दलमें ' हृदयाय नमः', दक्षिण प्रथम मुद्रा है। इसके प्रदर्शनसे शीघ्र ही देवसिद्धि दलमें "शिरसे स्वाहा', पश्चिम दलमें "शिखायै हो जाती है। दूसरी वन्दिनी मुद्रा है और तीसरी

English

With the bija lam all movable and incunovable beings should be deluged. With the bija bam he should ponder over the amria (the imperishable).

अध्याय ११

श्लोक 4

ततो बुद्वुदमध्ये तु पीतवासाश्चतुर्भुजः ।अहं मतस्तथात्मानं ध्यानेन परिचिन्तयेत्

tato budvudamadhye tu pītavāsāścaturbhujaḥ / ahaṃ matastathātmānaṃ dhyānena paricintayet

हिन्दी अर्थ

बषट्', उत्तर दलमें “कवचाय हुम्', मध्यमें ' नेत्रत्रयाय मुद्रा हृदयासक्ता है । इस मुद्रामें बायें हाथकी मुट्टीसे बौषट्' तथा कोणमें ' अस्त्राय फट्' कहकर न्यास दाहिने हाथके अँगूठेको बाँधकर बायें हाथके करना चाहिए। अँगूठेको ऊपर उठाये हुए हृदयभागसे संलग्न तत्पश्चात् पूर्वादि दिशाओंमें यथाक्रम सङ्कर्षण रखना चाहिए। व्यूह-पूजामें मूर्तिभेदसे इन तीन

English

Then, in the middle of the bubbles with the thought am yellow«clad, four*armed Viypu* he should contem¬ plate mentally.

अध्याय ११

श्लोक 5

मन्त्रन्यासं ततः कुर्यात्त्रिविधं करदेहयोः ।द्वादशाक्षरबीजेन उक्तबीजैरनन्तरम्

mantranyāsaṃ tataḥ kuryāttrividhaṃ karadehayoḥ / dvādaśākṣarabījena uktabījairanantaram

हिन्दी अर्थ

आदिके बीजमन्त्रोंको विन्यस्त करनेका विधान मुद्राओंको साधारण मुद्रा माना गया है। दोनों है। तदनन्तर वह पूर्व और पश्चिम दिशाके द्वारपर हाथोंमें अँगूठेसे कनिष्ठापर्यन्त तीन अँगुलियोंको ॐ वैनतेयाय नमः” कहकर वैनतेयको प्रतिष्ठित नवाकर क्रमशः उन्हें मुक्त करनेसे आठ मुद्राएँ करे। उसके बाद दक्षिण द्वारपर ' ॐ सुदर्शनाय बनती हैं ।

English

Afler fixing two mystic bas in the centre, he should place them ain on the aAga, He shoold place them in heart, head, tuft, vital limbs, mouth, eyes, stomach, back,

अध्याय ११

श्लोक 6

षडङ्गेन ततः कुर्यात्साक्षाद्येन हरिर्भवेत् ।दक्षिणाङ्गुष्ठमारभ्य मध्याङ्गुष्ठन्दले न्यसेत्

ṣaḍaṅgena tataḥ kuryātsākṣādyena harirbhavet / dakṣiṇāṅguṣṭhamārabhya madhyāṅguṣṭhandale nyaset

हिन्दी अर्थ

नमः ', ॐ सहस्त्राराय नमः' का उच्चारण करके दोनों हाथोंके अँगूठोंसे अपने-अपने हाथकी हजार अरोंवाले सुदर्शन चक्रकी वह स्थापना करे। मध्यमा, अनामिका तथा कनिष्ठा अँगुलियोंको तदनन्तर दक्षिण द्वारपर ' ॐ श्रियै नमः” मन्त्रसे नीचेकी ओर झुकाकर जो मुद्रा बनायी जाती है, श्रीका न्यास करके उत्तर द्वारपर ' ॐ लक्ष्म्यै नमः ' उसको नरसिंह-मुद्रा' कहते हैं। दाहिने हाथके

English

And contemplate on Vi$Qu, the lord of all, the supreme entity. He should place these mystic bijas in the fore* finger and other fingers.

अध्याय ११

श्लोक 7

मध्ये बीजद्वयं न्यस्य न्यसेदङ्गे ततः पुनः ।हृच्छिरसि शिखावर्ंमवक्क्राक्ष्युदहपृष्ठतः

madhye bījadvayaṃ nyasya nyasedaṅge tataḥ punaḥ / hṛcchirasi śikhāvarṃmavakkrākṣyudahapṛṣṭhataḥ

हिन्दी अर्थ

काण्ड पूजानुक्रम-निरूपण २९

English

Then on head, eyes, mouth, neck, heart, navel private part, knees and feet respectively.

अध्याय ११

श्लोक 8

बाह्वोश्च करयोर्जान्वोः पादयोश्चापि विन्यसेत् ।पद्माकारौ करौ कृत्वा मध्ये ऽङ्गुष्ठं निवेशयेत्

bāhvośca karayorjānvoḥ pādayoścāpi vinyaset / padmākārau karau kṛtvā madhye 'ṅguṣṭhaṃ niveśayet

हिन्दी अर्थ

ऊपर धीरे-धीरे घुमानेको ' वाराही मुद्रा' कहते अग्निवत् पीत एवं मधु पिङ्गल है। अर्थात् वासुदेव हैं। भगवान् वाराहको सदा ही यह प्रिय है । दोनों श्वेत, बलदेव अरुण, प्रद्युम्न हरिद्रावत् पीत, अनिरुद्ध मुद्ठियोंको उत्तान रखकर क्रमश: एक-एक अँगुली नील, नारायण श्याम, ब्रह्मा रक्ताभ, विष्णु मेघवत् सीधे खोलते हुए सभीको खोल दे। तदनन्तर उन श्याम, नरसिंह अग्निवत् पीत तथा वराहदेव मधु

English

The mtrabija should be placed in the middle of the hand» the same order is to be followed in aiganySsc. After placing the heart in the hearts the head should be placed on the head.

अध्याय ११

श्लोक 9

चिन्तयेत्तत्र सर्वेशं परं तत्त्वमनामयम् ।क्रमाच्चैतानि बीजानि तर्जन्यादिषु विन्य सेत्

cintayettatra sarveśaṃ paraṃ tattvamanāmayam / kramāccaitāni bījāni tarjanyādiṣu vinya set

हिन्दी अर्थ

सभी अँगुलियोंकी पुनः मुट्ठी बाँध ले। यह ' अङ्गमुद्रा' पिङ्गल वर्णकी तेजस्वी आभासे सुशोभित रहते हैं। कहलाती है। साधकको इन मुद्राओंका प्रदर्शन (३) कं टं पं शं' बीजमन्त्रसे गरुड, ' (ॐ) क्रमश: दसों दिक्पालोके लिये करना चाहिए। जं खं वं' बीजमन्त्रसे सुदर्शन , “(3) षंचंफंषं'

English

After placing the tuft on the tuft, the armour should be placed all over the bod/; the eyes should be placed over the eyes and the weapon in both the hands.

अध्याय ११

श्लोक 10

ततो मूर्धाक्षिवक्क्रेषु कण्ठे च हृदये तथा ।नाभौ गुह्ये तथा जान्वोः पादयोर्विन्यसेत्क्रमात्

tato mūrdhākṣivakkreṣu kaṇṭhe ca hṛdaye tathā / nābhau guhye tathā jānvoḥ pādayorvinyasetkramāt

हिन्दी अर्थ

भगवान् वासुदेव, बलराम, प्रद्युम्न तथा अनिरुद्ध बीजमन्त्रसे गदादेवी, ' (ॐ) वं ल॑ मं क्षं' बीजमन्त्रसे क्रमश: प्रथम, द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ देव- शङ्क, '(3) घं ढं भं हं’ बीजमन्त्रसे श्रीलक्ष्मी, स्थानके अधिकारी देव हैं। साधकको--'३» अं ' (३) गं जं बं शं' बीजमन्त्रसे पुष्टि, ' (३) घं वं' वासुदेवाय नमः ' मन्त्रसे वासुदेव, ' ॐ आं बलाय बीजमन्त्रसे वनमाला, '( ॐ ) दं सं' बीजमन्त्रसे श्रीवत्स

English

Binding all the quarters with that alone, he should begin the procest of worship. At first with concentration, he should think of the yogapifha, (the sacred seat) in the heart.

अध्याय ११

श्लोक 11

पाण्योः षडङ्गबीजानि न्यस्य काये ततो न्यसेत् ।अङ्गुष्ठादिकनिष्ठान्तं विन्यसेद्वीजपञ्चकम्

pāṇyoḥ ṣaḍaṅgabījāni nyasya kāye tato nyaset / aṅguṣṭhādikaniṣṭhāntaṃ vinyasedvījapañcakam

हिन्दी अर्थ

नमः मन्त्रसे बलराम, ॐ अं प्रद्युम्नाय नमः” और ' (३) छं डं पं यं' बीजमन्त्रसे कौस्तुभमणि युक्त

English

He should place virtue, knowledge, renunciation and prosperity in the quarters beginning with the south-east respectively and un-righteousness etc. in the quarters beginn¬ ing with the east.

अध्याय ११

श्लोक 12

करमध्ये नेत्रबीजमङ्गन्यासऽप्ययं क्रमः ।हृदये हृदयं न्यस्य शिरः शिरसि विन्यसेत्

karamadhye netrabījamaṅganyāsa'pyayaṃ kramaḥ / hṛdaye hṛdayaṃ nyasya śiraḥ śirasi vinyaset

हिन्दी अर्थ

उकार, तत्सत्, हुं, क्षौं तथा भूः-ये पाँच गरुड कमलके समान लाल, गदा कृष्णवर्ण, पुष्टि क्रमशः नारायण, ब्रह्मा, विष्णु, नरसिंह और शिरीष-पुष्परंगके समान आभासे समन्वित तथा लक्ष्मी महावराहभगवान्के बीजमन्त्र हैं, इसलिये साधक-- सुवर्ण-कान्तिसे सुशोभित हैं। शङ्क पूर्ण चन्द्रकी कान्तिके ' ॐ नारायणाय नमः' मन्त्रसे भगवान् नारायण, समान श्वेत और कौस्तुभमणि नवोदित अरुणके सदृश

English

Therefore he should place the infinite that had been well-covered by these, that identifies itself with them, that acts as the supporting seat and that is raised in the fore¬ part.

अध्याय ११

श्लोक 13

शिखायां तु शिखां न्यस्य कवचं सर्वतस्तनौ ।नेत्रं नेत्रे विधातव्यमस्त्रञ्च करयोर्द्वयोः

śikhāyāṃ tu śikhāṃ nyasya kavacaṃ sarvatastanau / netraṃ netre vidhātavyamastrañca karayordvayoḥ

हिन्दी अर्थ

ॐ तत्सद् ब्रह्मणे नमः' मन्त्रसे पद्मयोनि ब्रह्मा, वर्णवाला है । चक्र सहस्र सूर्योकी कान्तिके सदृश और ' ॐ हुँ विष्णवे नमः' मन्त्रसे विष्णु, ' ॐ क्षौं श्रीवत्स कुन्द पुष्पके समान श्वेत है। वनमाला पाँच नरसिंहाय नमः' मन्त्रसे नरसिंह तथा 3 भूः वर्णोसे युक्त पञ्चवर्णी और अनन्त भगवान् मेघकी महावराहाय नम: ' मन्त्रसे आदिवराहका पूजन करे भाँति श्याम वर्णका है। जिन अस्त्रोंके रंगोंका वर्णन

English

Then he should place the eight-fold powers of Keiava, i.e. Vimald and othm, resting in the quarters binn- ing with the east; and also the ninth power vested in the pericarp.

अध्याय ११

श्लोक 14

तेनैव च दिशो बद्धा पूजा विधिमथाचरेत् ।हृदये चिन्तयेत्पूर्वं योगपीठं समाहितः

tenaiva ca diśo baddhā pūjā vidhimathācaret / hṛdaye cintayetpūrvaṃ yogapīṭhaṃ samāhitaḥ

हिन्दी अर्थ

उपर्युक्त इन नौ देवताओं (वासुदेव, बलराम, यहाँ नहीं किया गया है, वे सभी विद्युत्- कान्तिके प्रद्युम्न, अनिरुद्ध, नारायण, ब्रह्मा, विष्णु, नरसिंह तथा समान हैं। (भगवान् विष्णुके इन समस्त अङ्गोंको) महावराह) (नवव्यूह)-का वर्ण क्रमशः श्वेत, अरुण, पुण्डरीकाक्ष' नामक विद्यासे अर्घ्य और पाद्यादि हरिद्रात् पीत, नील, श्यामल, लोहित, मेघवत् श्याम, समर्पित करने चाहिए। (अध्याय ११)

English

Contemplating thus and worshipping the

अध्याय ११

श्लोक 15

धर्म ज्ञनं च वैराग्यमैश्वर्यं च यथाक्रमम् ।आग्नेयादौ च पूर्वादावधर्मादींश्च विन्यसेत्

dharma jñanaṃ ca vairāgyamaiśvaryaṃ ca yathākramam / āgneyādau ca pūrvādāvadharmādīṃśca vinyaset

हिन्दी अर्थ

श्रीहरिने कहा- है रुद्र! देवके पूजनका जो शुद्धि करके ' ॐ नमः ' इस मन्त्रसे चतुर्भुज भगवान् क्रम है, उसके ज्ञानके लिये पूजाविधिके क्रमको विष्णुके रूपमें ही अपनेको मान ले। कहा जा रहा है। सर्वप्रथम साधकको 3७ नमः' तत्पश्चात् करन्यास तथा देहन्यास करे तदनन्तर

English

Then he should place the eye in the middle, the 1. Tlie tix bffiu for the aiz parts of the body.

अध्याय ११

श्लोक 16

एभिः परिच्छन्नतनुं पीठभूतं तदात्मकम् ।अनन्तं विन्सेत्पश्चात्पूर्वकायोन्नतं स्थितम्

ebhiḥ paricchannatanuṃ pīṭhabhūtaṃ tadātmakam / anantaṃ vinsetpaścātpūrvakāyonnataṃ sthitam

हिन्दी अर्थ

वह 'यं रं बं लम्' इन बीजमन्त्रोंके द्वारा शरीरको इन मन्त्रोंसे करे-

English

Uniting the hij of Sahkarsana and others with the east etc. in order, he should place Vainateya (garua) in the eastern and western doors.

अध्याय ११

श्लोक 17

ततो विद्यात्सरोजातं दलाष्टसमदिग्दलम् ।सिताब्जं शतपत्राढ्यं विप्रकीर्णोर्धकर्णिकम्

tato vidyātsarojātaṃ dalāṣṭasamadigdalam / sitābjaṃ śatapatrāḍhyaṃ viprakīrṇordhakarṇikam

हिन्दी अर्थ

9 िवाकाावहबाबजज्सपाणाणाकणणंाअां््ेगंमगस्ुकस्अअयंंक डड हाडाला य पड

English

He should then place the conch in the corners after placing the club in the northern door. The intelligent devotee should place 3Arhga*bow either on the right or on the left of the lord.

अध्याय ११

श्लोक 18

ध्यात्वा वेदादिना पश्चात्सूर्यसोमानलात्मनाम् ।मण्डलानि क्रमादेवमुपर्युपरि चिन्तयेत्

dhyātvā vedādinā paścātsūryasomānalātmanām / maṇḍalāni kramādevamuparyupari cintayet

हिन्दी अर्थ

“3७ अनन्ताय नम:। 3» धर्माय नमः। ( ॐ ) लं इन्द्राय सुराधिपतये ( नम: )। (३७) ॐ ज्ञानाय नम: । ३» वैराग्याय नमः । ३ॐ ऐश्वर्याय रं अग्नये तेजोऽधिपतये ( नमः )। ( 3७) यमाय नमः। 3७ अधर्माय नमः। ३ अज्ञानाय नमः । धर्माधिपतये (नमः )। (३) क्षं नेऋताय

English

Similarly, he should place the sword and the discus {ickra) on either side and thereafter the guardians of the quarters (Indra and others) in accordance with their respect- tive quarters etc.)

अध्याय ११

श्लोक 19

ततः पूर्वादिदिक्संस्थाः शक्तीः केशवगोचराः ।विमलाद्या न्यसेदष्टौ नवमीं कर्णिकागताम्

tataḥ pūrvādidiksaṃsthāḥ śaktīḥ keśavagocarāḥ / vimalādyā nyasedaṣṭau navamīṃ karṇikāgatām

हिन्दी अर्थ

३ पद्माय नमः। ३» आदित्यमण्डलाय नमः । जलाधिपतये (नमः )। (३2) यों वायवे ३ चन्द्रमण्डलाय नमः । ३ वह्निमण्डलाय नमः । प्राणाधिपतये (नमः )। (३) धां धनदाय ३ॐ विमलायै नमः। ३ उत्कर्षिण्यै नम: धनाधिपतये (नमः )। (३2) हां ईशानाय

English

In the same manner, he should place the weapons yqjra etc. Then he should contemplate Brahman above and Ananta below.

अध्याय ११

श्लोक 20

एवं ध्यात्वा समभ्यर्च्य योगपीठमनन्तरम् ।मनसावाह्य तत्रेशं हरिं शार्ङ्गं न्यसेत्पुनः

evaṃ dhyātvā samabhyarcya yogapīṭhamanantaram / manasāvāhya tatreśaṃ hariṃ śārṅgaṃ nyasetpunaḥ

हिन्दी अर्थ

नमः। 3» प्रह्मयै नमः। ३ सत्यायै नमः। इसके बाद क्रमशः पूर्वोक्त इन्द्र आदि दिक्पाल ३ ईशानायै नमः। ३ सर्वतोमुख्यै नमः। देवताओंके निम्न आयुधोंको प्रणाम करनेका 3» साङ्गोपाङ्काय हरेरासनाय नमः।' विधान है--

English

After contemplating and worshipping them, all mudrds (mystic signs) should be shown. The hrst mudrd is Afijali which propitiates the lord quickly.

अध्याय ११

श्लोक 21

हृदयादीनि पूर्वादिचतुर्दिग्दलयोगतः ।मध्ये नेत्रं तु कोणेषु अस्त्रमन्त्रं न्यसेत्ततः

hṛdayādīni pūrvādicaturdigdalayogataḥ / madhye netraṃ tu koṇeṣu astramantraṃ nyasettataḥ

हिन्दी अर्थ

इसके बाद साधक कर्णिकाके मध्यमें 'अं ( ३ ) वज्राय ( नमः )। ( ३ॐ ) शक्त्यै ( नमः )। वासुदेवाय नमः' कहकर भगवान् वासुदेवको ( 3७ ) दण्डाय ( नमः )। ( ॐ ) खड्गाय ( नमः )। नमस्कार करके निम्न मन्त्रोंसे हृदयादिन्यास करे- ( ३ ) पाशाय ( नमः )। ( ३४७ ) ध्वजाय ( नमः )।

English

With the use of the little finger (and other fingers) eight mudfAs are formed in order (five plus three). It should be borne in mind that the order is those of the eight bijas men¬ tioned before.

अध्याय ११

श्लोक 22

सङ्कर्षणादिबीजानि पूर्वादिक्रमयोगतः ।द्वारि पूर्वे परे चैव वैनतेयं तु विन्यसेत्

saṅkarṣaṇādibījāni pūrvādikramayogataḥ / dvāri pūrve pare caiva vainateyaṃ tu vinyaset

हिन्दी अर्थ

' आं हृदयाय नमः । ई शिरसे नमः । ऊँ शिखायै ( ३ ) गदायै ( नमः )। ( ३ ) त्रिशूलाय ( नमः )। नमः। ऐं कवचाय नमः । औं नेत्रत्रयाय नमः। अः: इसके बाद भगवान् अनन्त तथा ब्रह्मदेवको फट् अस्त्राय नमः।' इस मन्त्रसे प्रणाम करे

English

Bending the three fingers ending with the little finger, with the thumb and keeping both the hands bent down, Jarasirtihamudrd is formed.

अध्याय ११

श्लोक 23

सुदर्शनं सहस्रारं दक्षिणे द्वारि विन्यसेत् ।श्रियं दक्षिणतो न्यस्य लक्ष्मीमुत्तरतस्तथा

sudarśanaṃ sahasrāraṃ dakṣiṇe dvāri vinyaset / śriyaṃ dakṣiṇato nyasya lakṣmīmuttaratastathā

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर--' आं सङ्कर्षणाय नमः । अं प्रद्युम्नाय (३) लं अनन्ताय पातालाधिपतये ( नमः )। नमः। अः अनिरुद्धाय नमः। ३ अः नारायणाय ( ३» ) खं ब्रह्मणे सर्वलोकाधिपतये ( नमः )। नमः। ३» तत्सद्रह्मणे नमः। ३» हुं विष्णवे नमः। अब इसके बाद साधक भगवान् वासुदेवको क्षौं नरसिंहाय नमः । भूर्वराहाय नमः ।'--इन मन्त्रोंसे नमस्कार करनेके लिये द्वादशाक्षर-मन्त्रका प्रयोग

English

N&mes ofViinu, sUo of serpent 3 eia, SFD p. i6.

अध्याय ११

श्लोक 24

द्वार्यत्तरे गदां न्यस्य शङ्खं कोणेषु विन्यसेत् ।देवदक्षिणतः शार्ङ्गं वामे चैव सुधीर्न्यसेत्

dvāryattare gadāṃ nyasya śaṅkhaṃ koṇeṣu vinyaset / devadakṣiṇataḥ śārṅgaṃ vāme caiva sudhīrnyaset

हिन्दी अर्थ

संकर्षण आदि व्यूहदेवोंको नमस्कार करे। करे, साथ ही द्वादशाक्षर-मन्त्रके बीजमन्त्रों

English

of particulsr positions or intertwlniogt of the fmgen (24 in number)...Conoionly practised ia reUfious worship and supposed to possess an occult meaning and magical efficacy. Ibid.,

अध्याय ११

श्लोक 25

तद्वत्खङ्गं तथा चक्रं न्यसेत्पार्श्वद्वयोर्द्वयम् ।ततो ऽन्तर्लोकपालांश्च स्वदिग्भेदेन विन्यसेत्

tadvatkhaṅgaṃ tathā cakraṃ nyasetpārśvadvayordvayam / tato 'ntarlokapālāṃśca svadigbhedena vinyaset

हिन्दी अर्थ

तत्पश्चात् साधक निम्न मन्त्रोंसे भगवान् विष्णुके और दशाक्षर-मन्त्रके बीज-मन्त्रोंको इस प्रकार वाहन एवं आयुधादिको नमस्कार करे नमस्कार करे

English

Keeping (he left band raised up, whirl it slowly. This is the ninth one known as Vardha-mudrd.

अध्याय ११

श्लोक 26

वज्रादीन्यायुधान्येव तथैव विनिवेशयेत् ।ऊर्घ्वं ब्रिह्म तथानन्तमधश्च परिचिन्तयेत्

vajrādīnyāyudhānyeva tathaiva viniveśayet / ūrghvaṃ brihma tathānantamadhaśca paricintayet

हिन्दी अर्थ

“कं टं जं शं वैनतेयाय (नमः )। जं खं वं। (३ नमो भगवते वासुदेवाय नमः।'

English

Keeping both the fists raised up and straight, release them one by one and then again contract all. This is called Aiga-mudrd,

अध्याय ११

श्लोक 27

सर्वं ध्यात्वेति संपूज्य मुद्राः सन्दर्शयेत्ततः ।अञ्जलिः प्रथमा मुद्रा क्षिप्रं देवप्रसाधनी

sarvaṃ dhyātveti saṃpūjya mudrāḥ sandarśayettataḥ / añjaliḥ prathamā mudrā kṣipraṃ devaprasādhanī

हिन्दी अर्थ

तत्पश्चात् इन बीजमन्त्रोंसे इन्द्रादि दिक्पालोंको द्वादशाक्षर-मन्त्र-ॐ नमो भगवते वासुदेवाय, नमस्कार करना चाहिए। दशाक्षरमन्त्र-३ नमो नारायणाय नमः तथा

English

Keeping both the fists tight one after another the mudrds of the ten guardians of the quarters are formed in order.

अध्याय ११

श्लोक 28

वन्दनी हृदयासक्तात्सार्धं दक्षिणतोन्नता ।ऊर्धाङ्गुण्ठो वाममुष्टिर्दक्षिणाङ्गुष्ठबन्धनः

vandanī hṛdayāsaktātsārdhaṃ dakṣiṇatonnatā / ūrdhāṅguṇṭho vāmamuṣṭirdakṣiṇāṅguṣṭhabandhanaḥ

हिन्दी अर्थ

काण्ड पूजानुक्रम-निरूपण ३१

English

The first vowel, the seemd, the penultimate and the final signify Vasudeva, Bala, Kama, and Aniruddha in due order.

अध्याय ११

श्लोक 29

सव्यस्य तस्य चाङ्गुष्ठो यः स उद्धः प्रकीर्तितः ।तिस्रः साधारणा ह्येता मूर्तिभेदेन कल्पिताः

savyasya tasya cāṅguṣṭho yaḥ sa uddhaḥ prakīrtitaḥ / tisraḥ sādhāraṇā hyetā mūrtibhedena kalpitāḥ

हिन्दी अर्थ

अष्टाक्षरमन्त्र--३ पुरुषोत्तमाय नम:--इन तीन-तीन और दिक्पालोंको एक-एक आहुति

English

Orfif Tat Sal, Hurh, Kfaum these are the mantras for Nirayaija, Brahma, Viriu, (Kara-) simha and the lordly Boar.

अध्याय ११

श्लोक 30

कनिष्ठादिप्रमोकेण अष्टौ मुद्रा यथाक्रमम् ।अष्टानां पूर्वबीजानां क्रमशस्त्ववधारयेत्

kaniṣṭhādipramokeṇa aṣṭau mudrā yathākramam / aṣṭānāṃ pūrvabījānāṃ kramaśastvavadhārayet

हिन्दी अर्थ

पुण्डरीकाक्षको नमस्कार करे-- पुनः एकाग्रचित्त स्थित होकर पूर्णाहुति देनी चाहिए । नमस्ते पुण्डरीकाक्ष नमस्ते विश्वभावन। तदनन्तर वह साधक 'वाणीसे अतीत उस

English

In view of the difierent hues, the names are nine* fold—white, red, yellow, blue, black, purple, cloud-coloured, fire-coloured and honey-coloured.

अध्याय ११

श्लोक 31

अङ्गुष्ठेन कनिष्ठान्तं नामयित्वाङ्गुलित्रयम् ।मुद्रेयं नरसिंहस्य न्युब्जं कृत्वा करद्वयम्

aṅguṣṭhena kaniṣṭhāntaṃ nāmayitvāṅgulitrayam / mudreyaṃ narasiṃhasya nyubjaṃ kṛtvā karadvayam

हिन्दी अर्थ

सुब्रह्मण्य नमस्तेऽस्तु महापुरुष पूर्वज ॥ परमात्मा'में अपने आत्माको लीन करे और हे पुण्डरीकाक्ष ! (कमलनयन) आपको नमस्कार निम्नलिखित मन्त्रसे वासुदेव और उन सभी देवोंका है। है विश्वके कारणभूत! आपको मेरा प्रणाम है । विसर्जन करे- हे ब्रह्मण्यदेव! आपको नमस्कार है । है महापुरुष! 'गच्छ गच्छ परं स्थानं यत्र देवो निरञ्जनः॥

English

Karhf T<rh, Pert, Garuda; Jert, A'Aert, Fert— Sudariana; 5art, Cert, Phnrhy $ajh—Gadd (the divine club); Fart, Lert, Afart, Kfom —Conch;

अध्याय ११

श्लोक 32

सव्यहस्तं तथोत्तानं कृत्वोर्धं भ्रामयेच्छनैः ।नवमीयं स्मृता मुद्रा वराहाभिमता सदा

savyahastaṃ tathottānaṃ kṛtvordhaṃ bhrāmayecchanaiḥ / navamīyaṃ smṛtā mudrā varāhābhimatā sadā

हिन्दी अर्थ

हे पूर्वज! आपको मेरा प्रणाम है। गच्छन्तु देवताः सर्वाः स्वस्थानस्थितिहेतवे।' इस प्रकार भगवान् विष्णुको स्तुति करके है देवाधिदेव भगवान् वासुदेव! अब आप उस साधकको हवन करना चाहिए। तदनन्तर साधक अपने परम स्थानको प्राप्त करें, जहाँपर निर्मल (महापुरुषविद्या नामक) मन्त्रका विधिपूर्वक एक (प्रकाशस्वरूप) परम ब्रह्मका निवास है। अङ्गदेव,

English

Chanif pham,Bkarh Ham — 8r!; Cart, Jam Fam, <Safh —Pusftkd; Gharhj Vam~Vanamdld\ Darfi-Sam—&Twatsa\

अध्याय ११

श्लोक 33

मुष्टिद्वयमथोत्तानमृज्वैकैकेन मोचयेत् ।उत्कुञ्चयेत्सर्वमुक्ता अङ्गमुद्रेयमुच्यते

muṣṭidvayamathottānamṛjvaikaikena mocayet / utkuñcayetsarvamuktā aṅgamudreyamucyate

हिन्दी अर्थ

सौ आठ बार जप करके अर्घ्य प्रदान करे और सङ्कर्षणादि और इन्द्रादि दिक्पाल! आप सभी देव अपने- “जितं तेन' (यह स्तोत्र ही महापुरुषविद्या है) इसी अपने स्थानमें निवास करनेके लिये प्रस्थान करें!' स्तोत्रसे उन भगवान् नारायणको बारम्बार प्रणाम सुदर्शन, श्रीहरि, अच्युत, त्रिविक्रम, चतुर्भुज, करना चाहिए। वासुदेव, प्रद्युम्न, सङ्कर्षण और पुरुषसे युक्त देवोंका

English

Garuda resembles the lotus in colour, the club has a black form, the halo [Puffi) has the colour of iirla-flower; Lak;ml has a golden complexion.

अध्याय ११

श्लोक 34

मुष्टिद्वयमथो बद्धा एवमेवानुपूर्वशः ।दशानां लोकपालानां मुद्राश्च क्रमयोगतः

muṣṭidvayamatho baddhā evamevānupūrvaśaḥ / daśānāṃ lokapālānāṃ mudrāśca kramayogataḥ

हिन्दी अर्थ

तत्पश्चात् अग्निकी स्थापना करके साधक (एक जो समूह है उसे) नवव्यूह माना गया है। इसमें उस अग्निदेवको पूजा करनेके बाद हवन करे । दसवें परम तत्त्वका योग होनेसे यह दशात्मक कहा जाता अपने (यथाविहित) बीजमन्त्रसे देवाधिदेव भगवान् है। इसी नवव्यूहमें अनिरुद्ध तथा अनन्तका विष्णु तथा अङ्गमन्त्रोंके द्वारा अच्युतादि आङ्गिक संनिवेश होनेसे यह एकादश व्यूह द्वादशात्मक

English

The conch resembles the full-moon, Kaustubha has red hue, the discus has the brilliance of a thousand suns and Srlvatsa resembles white Aanifa-fiower.

अध्याय ११

श्लोक 35

सुरमाद्यं द्वितीयं च उपान्त्यञ्चान्त्यमेव च ।वासुदेवो बलः कामो ह्यनिरुद्धो यथाक्रमम्

suramādyaṃ dvitīyaṃ ca upāntyañcāntyameva ca / vāsudevo balaḥ kāmo hyaniruddho yathākramam

हिन्दी अर्थ

साधकको कुण्डमें ३कारके द्वारा तीन रेखाओंका अङ्कित चक्रोमें उस प्रधान देवकी पूजा करनेपर उल्लेखन करना चाहिए और उसके बाद यज्ञकुण्डकावह (साधकके) घर आदिकी रक्षा करता है। अभ्युक्षण करना चाहिए। तदनन्तर यथाविधि अतः निम्न मन्त्रोंसे चक्रादिकी पूजा करनी चाहिए भ्रामणपूर्वक हवनकुण्डमें अग्नि स्थापित करके उत्तम ३७ चक्राय स्वाहा। ॐ विचक्राय स्वाहा।

English

One should offer argkya and padya in accot dance viithPuta (kdkfavidyd.

अध्याय ११

श्लोक 36

प्रणवस्तत्सदित्येतद् हुं क्षैं भूरिति मन्त्रकाः ।नारायणस्तथा ब्रह्मा विष्णुः सिंहो वराहराट्

praṇavastatsadityetad huṃ kṣaiṃ bhūriti mantrakāḥ / nārāyaṇastathā brahmā viṣṇuḥ siṃho varāharāṭ

हिन्दी अर्थ

फल आदिसे सविधि उसकी पूजा करनी चाहिए। ॐ सुचक्राय स्वाहा। ॐ महाचक्राय स्वाहा। ॐ पहले साङ्गोपाङ्ग देव ब्रह्मका मनसे ध्यानकर असुरान्तकृत् हुं फट् । 3 हुँ सहस्त्रार हुँ फट्। मण्डलमें उन सभीको स्थापित करे। तदनन्तर वह उपर्युक्त मन्त्रोंसे की गयी पूजा द्वारकाचक्रकी साधक वासुदेव-मन्त्रसे एक सौ आठ बार आहुति पूजा कही जाती है। इस प्रकार सम्पन्न की गयी

English

One should offer argkya and padya in accot dance viithPuta (kdkfavidyd.

अध्याय ११

श्लोक 37

सितारुणहरिद्राभा नीलश्यामल्लोहिताः ।मेघाग्निमदुपिङ्गाभा वर्णतो नवनामकाः

sitāruṇaharidrābhā nīlaśyāmallohitāḥ / meghāgnimadupiṅgābhā varṇato navanāmakāḥ

हिन्दी अर्थ

दे। तत्पश्चात् वह सङ्कर्षण आदि देवोंके बीजमन्त्रसे चक्रकी पूजा 'घरमें' सब प्रकारसे रक्षा करनेवाली उन छः देवोंको भी पूजा करके अङ्ग देवताओंको। तथा मङ्गलदायिनी है । (अध्याय १२)

English

One should offer argkya and padya in accot dance viithPuta (kdkfavidyd.

अध्याय ११

श्लोक 38

कं टं पं शं गरुत्मान्स्याज्जं खं वं च सुदर्शनम् ।षं चं फं षं गदादेवी वं लं मं क्षं च शङ्खकम्

kaṃ ṭaṃ paṃ śaṃ garutmānsyājjaṃ khaṃ vaṃ ca sudarśanam / ṣaṃ caṃ phaṃ ṣaṃ gadādevī vaṃ laṃ maṃ kṣaṃ ca śaṅkhakam

हिन्दी अर्थ

' अभ्युक्षण’ जलके द्वारा पवित्र करनेकी एक शास्त्रीय विधि है।

English

One should offer argkya and padya in accot dance viithPuta (kdkfavidyd.

अध्याय ११

श्लोक 39

घं ढं भं हं भवेच्छ्रीश्च गं जं वं शं च पुष्टिका ।घं वं च वनमाला स्याच्छ्री वत्सं दं सं भवेत्

ghaṃ ḍhaṃ bhaṃ haṃ bhavecchrīśca gaṃ jaṃ vaṃ śaṃ ca puṣṭikā / ghaṃ vaṃ ca vanamālā syācchrī vatsaṃ daṃ saṃ bhavet

हिन्दी अर्थ

विष्णुपञ्जरस्तोत्र

English

One should offer argkya and padya in accot dance viithPuta (kdkfavidyd.

अध्याय ११

श्लोक 40

छं डं पं यं कौस्तुभः प्रोक्तश्चानन्तो ह्यहमेव च ।इत्यङ्गानियथायोगं देवदेवस्य वै दशा

chaṃ ḍaṃ paṃ yaṃ kaustubhaḥ proktaścānanto hyahameva ca / ityaṅgāniyathāyogaṃ devadevasya vai daśā

हिन्दी अर्थ

श्रीहरिने पुनः कहा है रुद्र! अब मैं विष्णुपञ्जर

English

One should offer argkya and padya in accot dance viithPuta (kdkfavidyd.

अध्याय ११

श्लोक 41

गरुडो ऽम्बुजसंकाशो गदा चैवासिताकृतिः ।पुष्टिः शिरीषपुष्पाभा लक्ष्मीः काञ्चनसन्निभा

garuḍo 'mbujasaṃkāśo gadā caivāsitākṛtiḥ / puṣṭiḥ śirīṣapuṣpābhā lakṣmīḥ kāñcanasannibhā

हिन्दी अर्थ

नामक स्तोत्र कहता हूँ। यह स्तोत्र (बड़ा ही) कल्याणकारी है उसे सुनें

English

One should offer argkya and padya in accot dance viithPuta (kdkfavidyd.

अध्याय ११

श्लोक 42

पूर्णचन्द्रनिभः शङ्खः कौस्तुभस्त्वरुणद्युतिः ।चक्रं सूर्यसहस्राभं श्रीवत्सः कुन्दसन्निभः

pūrṇacandranibhaḥ śaṅkhaḥ kaustubhastvaruṇadyutiḥ / cakraṃ sūryasahasrābhaṃ śrīvatsaḥ kundasannibhaḥ

हिन्दी अर्थ

दानवं रक्तबीजं च अन्यांश्च सुरकण्टकान्।

English

One should offer argkya and padya in accot dance viithPuta (kdkfavidyd.

अध्याय ११

श्लोक 43

पञ्चवर्णनिभा माला ह्यनन्तो मेघसन्निभः ।विद्युद्रूपाणि चास्त्राणि यानि नोक्तानि वर्णतः

pañcavarṇanibhā mālā hyananto meghasannibhaḥ / vidyudrūpāṇi cāstrāṇi yāni noktāni varṇataḥ

हिन्दी अर्थ

गदां कौमोदकों गृह्य पद्मनाभ नमोस्तु ते॥

English

One should offer argkya and padya in accot dance viithPuta (kdkfavidyd.

अध्याय ११

श्लोक 44

अर्घ्यपाद्यादि वै दद्यात्पुण्डरीकाक्षविद्यया

arghyapādyādi vai dadyātpuṇḍarīkākṣavidyayā

हिन्दी अर्थ

मुसलं शातनं गृह्य पुण्डरीकाक्ष रक्ष माम्॥

English

One should offer argkya and padya in accot dance viithPuta (kdkfavidyd.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_garuDapurANa.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Garuda Purana — Chapter 11
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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