अध्याय १०६
श्लोक 6.9.1
॥ यथा सोम्य मधु मधुकृतो निस्तिष्ठन्ति नानात्ययानां वृक्षाणाँरसान्समवहारमेकताँरसं गमयन्ति
|| yathA somya madhu madhukR^ito nistiShThanti nAnAtyayAnAM vR^ikShANA{\m+}rasAnsamavahAramekatA{\m+}rasaM gamayanti
हिन्दी अर्थ
उस पुरुषके बन्धनको खोखकर जैसे कोर कहे कि “गान्धार देश इस दिशामे हे, अतः इसी दिशाको जा, तो वह बुद्धिमान् ओर समदा पुरुष एक प्रामसे दूसरा ग्राम पूता हआ गान्धारे ही पर्व तस्य यथामिनहनं यथा बन्धनं उस ॒पुरुषके अभिनदन-- अष्ुच्य मुक्त्वा कारुणिकः बन्धनको खोलकर निस प्रकार कंविदेतां दिशणत्तरतो गन्धारा को कृपा पुरुष कदे क इस कर्मोक्रा फरोपभोग॒ अवदय होना हे इसलिये छोदे हुए वाणक्रे समान “उसे सत्री प्रा्िमे तभीतक्र
English
'As the bees , my son, make honey by collecting the juices of distant trees, and reduce the juice into one form,