Brahma Purana· Brahma Purāṇa
17
अध्याय 17 / 246

Adhyaya 17

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अध्याय १७

श्लोक 1

यत् तु सत्राजिते कृष्णो मणिरत्नं स्यमन्तकम् ददाव् अहारयद् बभ्रुर् भोजेन शतधन्वना

yat tu satrājite kṛṣṇo maṇiratnaṃ syamantakam dadāv ahārayad babhrur bhojena śatadhanvanā

हिन्दी अर्थ

» भगवान् सूर्यकी महिमा »

English

Babhru Akrura got the excellent jewel Syamantaka which Kryna had handed over to Satrajit, stolen through Satadhanvan of the Bhoja family.

अध्याय १७

श्लोक 2

सदा हि प्रार्थयाम् आस सत्यभामाम् अनिन्दिताम् अक्रूरो ऽन्तरम् अन्विष्यन् मणिं चैव स्यमन्तकम्

sadā hi prārthayām āsa satyabhāmām aninditām akrūro 'ntaram anviṣyan maṇiṃ caiva syamantakam

हिन्दी अर्थ

चाहिए ? कैसे उसे अक्षय स्वर्गकी प्रापि होगी? पिता और गुरु हैं ।

English

Akrura had sought Satyabhama the uncensured lady. He was waiting for an opportunity to seize Syamantaka jewel.

अध्याय १७

श्लोक 3

सत्राजितं ततो हत्वा शतधन्वा महाबलः रात्रौ तं मणिम् आदाय ततो ऽक्रूराय दत्तवान्

satrājitaṃ tato hatvā śatadhanvā mahābalaḥ rātrau taṃ maṇim ādāya tato 'krūrāya dattavān

हिन्दी अर्थ

किस उपायसे वह उत्तम मोक्षका भागी होगा तथा वह किस साधनका अनुष्ठान करे, जिससे स्वर्गमें जानेपर उसे पुनः नीचे न गिरना पड़े? ब्रह्माजी बोले--द्विजवरो ! भगवान् सूर्य उदय

English

The mighty Satadhanva killed Satrajit at night, took away the jewel and banded it over to Akrura.

अध्याय १७

श्लोक 4

अक्रूरस् तु तदा विप्रा रत्नम् आदाय चोत्तमम् समयं कारयां चक्रे नावेद्यो ऽहं त्वयेत्य् उत

akrūras tu tadā viprā ratnam ādāya cottamam samayaṃ kārayāṃ cakre nāvedyo 'haṃ tvayety uta

हिन्दी अर्थ

होते ही अपनी किरणोंसे संसारका अन्धकार दूर कर देते हें । अत: उनसे बढ़कर दूसरा कोई देवता नहीं है। वे आदि-अन्तसे रहित, सनातन पुरुष एवं अविनाशी हैं तथा अपनी किरणोंसे प्रचण्ड

English

After performing the obsequies and offering libations of water to the P&ndavas who were (supposed to have been)burned, Hari engaged S&tyaki for the condolence rites for the Pandavas.

अध्याय १७

श्लोक 5

वयम् अभ्युत्प्रपत्स्यामः कृष्णेन त्वां प्रधर्षितम् ममाद्य द्वारका सर्वा वशे तिष्ठत्य् असंशयम्

vayam abhyutprapatsyāmaḥ kṛṣṇena tvāṃ pradharṣitam mamādya dvārakā sarvā vaśe tiṣṭhaty asaṃśayam

हिन्दी अर्थ

रूप धारणकर तीनों लोकोंको ताप देते हैं । सम्पूर्ण

English

SrikiTfu then, hastened to Dvaraka and spoke to Bala- rama, his elder brother.

अध्याय १७

श्लोक 6

हते पितरि दुःखार्ता सत्यभामा मनस्विनी प्रययौ रथम् आरुह्य नगरं वारणावतम्

hate pitari duḥkhārtā satyabhāmā manasvinī prayayau ratham āruhya nagaraṃ vāraṇāvatam

हिन्दी अर्थ

सम्पूर्ण जगतूके स्वामी, साक्षी तथा पालक हें । ये ही बारम्बार जीवोंकी सृष्टि और संहार करते हैं तथा ये ही अपनी किरणोंसे प्रकाशित होते, तपते

English

"1 excuse you because you happen to be my brother. Goodbye I am going to leave you for ever. I have nothing to do with you» nor with Dvirakl, nor with the VrQis".

अध्याय १७

श्लोक 7

सत्यभामा तु तद् वृत्तं भोजस्य शतधन्वनः भर्तुर् निवेद्य दुःखार्ता पार्श्वस्थाश्रूण्य् अवर्तयत्

satyabhāmā tu tad vṛttaṃ bhojasya śatadhanvanaḥ bhartur nivedya duḥkhārtā pārśvasthāśrūṇy avartayat

हिन्दी अर्थ

प्रकारको प्रजाओंकी सृष्टि करके अपनेको बारह रूपोंमें विभक्त करके आदित्यरूपसे प्रकट होते हैं । इन्द्र, धाता, पर्जन्य, त्वष्टा, पूषा, अर्यमा, भग, विवस्वान्, विष्णु, अंशुमान्, वरुण और मित्र--

English

Then Rama, the suppressor of foes, entered Mithila where he was honoured by the king with coveted gifts.

अध्याय १७

श्लोक 8

पाण्डवानां च दग्धानां हरिः कृत्वोदकक्रियाम् कुल्यार्थे चापि पाण्डूनां न्ययोजयत सात्यकिम्

pāṇḍavānāṃ ca dagdhānāṃ hariḥ kṛtvodakakriyām kulyārthe cāpi pāṇḍūnāṃ nyayojayata sātyakim

हिन्दी अर्थ

इन बारह मूर्तियोंद्रारा परमात्मा सूर्यने सम्पूर्ण जगत्को व्याप्त कर रखा है । भगवान् आदित्यकी जो प्रथम मूर्ति है, उसका नाम इन्द्र है। वह देवराजके पदपर प्रतिष्ठित है । वह देवशत्रुओंका नाश करनेवाली

English

In the meantime Babhru Aknira the most excellent one among the intelligent persons performed many sacrifices unrestrictedly.

अध्याय १७

श्लोक 9

ततस् त्वरितम् आगम्य द्वारकां मधुसूदनः पूर्वजं हलिनं श्रीमान् इदं वचनम् अब्रवीत्

tatas tvaritam āgamya dvārakāṃ madhusūdanaḥ pūrvajaṃ halinaṃ śrīmān idaṃ vacanam abravīt

हिन्दी अर्थ

मूर्ति है । भगवानके दूसरे विग्रहका नाम धाता है, जो प्रजापतिके पदपर स्थित हो नाना प्रकारके प्रजावर्गको सृष्टि करते हें । सूर्यदेवको तीसरी मूर्ति पर्जन्यके नामसे विख्यात है, जो बादलोंमें स्थित

English

For obtaining Syamantaka, the excessively famous son of G&ndin donned the coat of mail in the form of initiation as a protective means.

अध्याय १७

श्लोक 10

हतः प्रसेनः सिंहेन सत्राजिच् छतधन्वना स्यमन्तकस् तु मद्नामी तस्य प्रभुर् अहं विभो

hataḥ prasenaḥ siṃhena satrājic chatadhanvanā syamantakas tu madnāmī tasya prabhur ahaṃ vibho

हिन्दी अर्थ

और वर्षा करते हैं। ये धाता, विधाता, सम्पूर्ण हो अपनी किरणोंद्वारा वर्षा करती है। उनके भूतोंके आदि कारण और सब जीवोंको उत्पन्न चतुर्थ विग्रहको त्वष्टा कहते हैं। त्वष्टा सम्पूर्ण करनेवाले हें । ये कभी क्षीण नहीं होते। इनका वनस्पतियों और ओषधियोंमें स्थित रहते हँ । उनकी मण्डल सदा अक्षय बना रहता है । ये पितरोंके पाँचवीं मूर्ति पूषाके नामसे प्रसिद्ध है, जो अन्नमें

English

For sixty years the virtuous soul displayed jewels and other preciotis stones in the sacrifice alone.

अध्याय १७

श्लोक 11

तद् आरोह रथं शीघ्रं भोजं हत्वा महारथम् स्यमन्तको महाबाहो अस्माकं स भविष्यति

tad āroha rathaṃ śīghraṃ bhojaṃ hatvā mahāratham syamantako mahābāho asmākaṃ sa bhaviṣyati

हिन्दी अर्थ

भी पिता और देवताओंके भी देवता हैं । इनका स्थित हो सर्वदा प्रजाजनोंकी पुष्टि करती है। स्थान धुव माना गया है, जहाँसे फिर नीचे नहीं सूर्यकी जो छठी मूर्ति है, उसका नाम अर्यमा गिरना पड़ता। सृष्टिके समय सम्पूर्ण जगत् सूर्यसे बताया गया है। वह वायुके सहारे सम्पूर्ण देवताओंमें ही उत्पन्न होता है और प्रलयके समय अत्यन्त स्थित रहती है। भानुका सातवाँ विग्रह भगके

English

The sacrifices of that noble soul are known as Akrura- Dainty food and monetary gifts were distributed in all

अध्याय १७

श्लोक 12

ततः प्रववृते युद्धं तुमुलं भोजकृष्णयोः शतधन्वा ततो ऽक्रूरं सर्वतोदिशम् ऐक्षत

tataḥ pravavṛte yuddhaṃ tumulaṃ bhojakṛṣṇayoḥ śatadhanvā tato 'krūraṃ sarvatodiśam aikṣata

हिन्दी अर्थ

तेजस्वी भगवान् भास्करमें ही उसका लय होता नामसे विख्यात है। वह ऐश्वर्य तथा देहधारियोंके है। असंख्य योगिजन अपने कलेवरका परित्याग शरीरोंमें स्थित होता है । सूर्यदेवकी आठवीं मूर्ति करके वायुस्वरूप हो तेजोराशि भगवान् सूर्यमें ही विवस्वान् कहलाती है, वह आग्निमें स्थित हो प्रवेश करते हैं। राजा जनक आदि गृहस्थ योगी, जीवोंके खाये हुए अन्नको पचाती है। उनकी नवीं

English

Then a tumultuous battle began between Bhoja (Shatadhanva) and Krishna. Shatadhanva then looked for Akrura on every side.

अध्याय १७

श्लोक 13

संरब्धौ ताव् उभौ तत्र दृष्ट्वा भोजजनार्दनौ शक्तो ऽपि शापाद् धार्दिक्यम् अक्रूरो नान्वपद्यत

saṃrabdhau tāv ubhau tatra dṛṣṭvā bhojajanārdanau śakto 'pi śāpād dhārdikyam akrūro nānvapadyata

हिन्दी अर्थ

वालखिल्य आदि ब्रह्मवादी महर्षि, व्यास आदि मूर्ति विष्णुके नामसे विख्यात है, जो सदा देवशत्रुओंका वानप्रस्थ ऋषि तथा कितने ही संन्यासी योगका नाश करनेके लिये अवतार लेती है। सूर्यकी आश्रय ले सूर्यमण्डलमें प्रवेश कर चुके हैं। व्यासपुत्र दसवीं मूर्तिका नाम अंशुमान् है, जो वायुमें प्रतिष्ठित श्रीमान् शुकदेवजी भी योगधर्म प्राप्त करनेके अनन्तर होकर समस्त प्रजाको आनन्द प्रदान करती है।

English

Seeing those two, Bhoja and Janardana, enraged there, Akrura, though able, because of a curse did not support Hardikya (Kritavarman).

अध्याय १७

श्लोक 14

अपयाने ततो बुद्धिं भोजश् चक्रे भयार्दितः योजनानां शतं साग्रं हृदया प्रत्यपद्यत

apayāne tato buddhiṃ bhojaś cakre bhayārditaḥ yojanānāṃ śataṃ sāgraṃ hṛdayā pratyapadyata

हिन्दी अर्थ

सूर्यकी किरणोंमें पहुँचकर ही मोक्षपदमें स्थित सूर्यका ग्यारहवाँ स्वरूप वरुणके नामसे प्रसिद्ध हुए। इसलिये आप सब लोग सदा भगवान् सूर्यकी है, जो सदा जलमें स्थित होकर प्रजाका पोषण आराधना करें; क्‍योंकि वे सम्पूर्ण जगत्के माता, करता है। भानुके बारहवें विग्रहका नाम मित्र है,

English

Then Bhoja, afflicted with fear, decided to flee; he went more than a hundred yojanas on (the mare) Hridaya.

अध्याय १७

श्लोक 15

विख्याता हृदया नाम शतयोजनगामिनी भोजस्य वडवा विप्रा यया कृष्णम् अयोधयत्

vikhyātā hṛdayā nāma śatayojanagāminī bhojasya vaḍavā viprā yayā kṛṣṇam ayodhayat

हिन्दी अर्थ

७० » संक्षिप्त ब्रहापुराण

English

Hridaya, famed, was Bhoja's mare, Brahmins, who covers a hundred yojanas, by whom he fought Krishna.

अध्याय १७

श्लोक 16

क्षीणां जवेन हृदयाम् अध्वनः शतयोजने दृष्ट्वा रथस्य स्वां वृद्धिं शतधन्वानम् अर्दयत्

kṣīṇāṃ javena hṛdayām adhvanaḥ śatayojane dṛṣṭvā rathasya svāṃ vṛddhiṃ śatadhanvānam ardayat

हिन्दी अर्थ

जिसने सम्पूर्ण लोकोंका हित करनेके लिये चन्द्र महिमाका गान किया जाता है। आप अजन्मा, नदीके तटपर स्थित होकर तपस्या की । परमात्मा सनातन, धाता तथा उत्तम अधिष्ठान हैं। भूत, सूर्यदेवने इन बारह मूर्तियोंके द्वारा सम्पूर्ण जगतूको भविष्य और वर्तमान--सब कुछ आपपें ही प्रतिष्ठित व्याप्त कर रखा है । इसलिये भक्त पुरुषोंको उचित है। गृहस्थ आदि चारों आश्रम प्रतिदिन आपका

English

Seeing Hridaya exhausted by speed at a hundred yojanas of the road, and his chariot's growth (reach), Krishna pressed Shatadhanva.

अध्याय १७

श्लोक 17

ततस् तस्या हतायास् तु श्रमात् खेदाच् च भो द्विजाः खम् उत्पेतुर् अथ प्राणाः कृष्णो रामम् अथाब्रवीत्

tatas tasyā hatāyās tu śramāt khedāc ca bho dvijāḥ kham utpetur atha prāṇāḥ kṛṣṇo rāmam athābravīt

हिन्दी अर्थ

है कि वे भगवान् सूर्यम मन लगाकर पूर्वोक्त ही यजन करते हैं। आप ही सबके पिता, माता बारह मूर्तियोंमें उनका ध्यान और नमस्कार करें। और सनातन देवता हैं। फिर भी आप किस इस प्रकार मनुष्य बारह आदित्योंको नमस्कार देवता अथवा पितरकी आराधना करते हैं, यह करके उनके नामोंका प्रतिदिन पाठ और श्रवण हमारी समझमें नहीं आता।'

English

Then, from fatigue and distress, her life-breath rose to the sky when she was killed, Brahmins; then Krishna said to Rama:

अध्याय १७

श्लोक 18

तिष्ठेह त्वं महाबाहो दृष्टदोषा हया मया पद्भ्यां गत्वा हरिष्यामि मणिरत्नं स्यमन्तकम्

tiṣṭheha tvaṃ mahābāho dṛṣṭadoṣā hayā mayā padbhyāṃ gatvā hariṣyāmi maṇiratnaṃ syamantakam

हिन्दी अर्थ

करनेसे सूर्यलोकमें प्रतिष्ठित होता है। मित्रने कहा-- ब्रह्मन्! यह परम गोपनीय सनातन मुनियोंने पूछा--यदि ये सूर्य सनातन आदिदेव रहस्य कहने योग्य तो नहीं है; परंतु आप भक्त हैं तो इन्होंने वर पानेको इच्छासे प्राकृत मनुष्योंकी हैं, इसलिये आपके सामने मैं उसका यथावत् भाँति तपस्या क्यों की? वर्णन करता हूँ। वह जो सूक्ष्म, अविज्ञेय, अव्यक्त,

English

"Stay here, mighty-armed one; I have seen the mare's fault. I shall go on foot and take the jewel Syamantaka."

अध्याय १७

श्लोक 19

पद्भ्याम् एव ततो गत्वा शतधन्वानम् अच्युतः मिथिलाम् अभितो विप्रा जघान परमास्त्रवित्

padbhyām eva tato gatvā śatadhanvānam acyutaḥ mithilām abhito viprā jaghāna paramāstravit

हिन्दी अर्थ

ब्रह्माजी बोले ब्राह्मणो! यह सूर्यका परम गोपनीय रहस्य है। पूर्वकालमें मित्र देवताने महात्मा नारदको जो बात बतलायी थी, वही मैं तुम लोगोंसे कहता हूँ। एक समयकी बात है, अपनी

English

Going on foot, Achyuta, supreme knower of weapons, killed Shatadhanva near Mithila, Brahmins.

अध्याय १७

श्लोक 20

स्यमन्तकं च नापश्यद् धत्वा भोजं महाबलम् निवृत्तं चाब्रवीत् कृष्णं मणिं देहीति लाङ्गली

syamantakaṃ ca nāpaśyad dhatvā bhojaṃ mahābalam nivṛttaṃ cābravīt kṛṣṇaṃ maṇiṃ dehīti lāṅgalī

हिन्दी अर्थ

इन्द्रियोंको वशमें रखनेवाले महायोगी नारदजी मेरुगिरिके शिखरसे गन्धमादन नामक पर्वतपर उतरे और सम्पूर्ण लोकोंमें विचरते हुए उस स्थानपर आये, जहाँ मित्र देवता तपस्या करते थे। उन्हें

English

Having killed the mighty Bhoja he did not see the Syamantaka; Langali said to the returned Krishna, "Give the jewel."

अध्याय १७

श्लोक 21

नास्तीति कृष्णश् चोवाच ततो रामो रुषान्वितः धिक्शब्दपूर्वम् असकृत् प्रत्युवाच जनार्दनम्

nāstīti kṛṣṇaś covāca tato rāmo ruṣānvitaḥ dhikśabdapūrvam asakṛt pratyuvāca janārdanam

हिन्दी अर्थ

तपस्यामें संलग्न देख नारदजीके मनमें कौतूहल हुआ। वे सोचने लगे, 'जो अक्षय, अविकारी,

English

"There is none," said Krishna; then Rama, filled with anger, repeatedly answered Janardana with reproaches.

अध्याय १७

श्लोक 22

भ्रातृत्वान् मर्षयाम्य् एष स्वस्ति ते ऽस्तु व्रजाम्य् अहम् कृत्यं न मे द्वारकया न त्वया न च वृष्णिभिः

bhrātṛtvān marṣayāmy eṣa svasti te 'stu vrajāmy aham kṛtyaṃ na me dvārakayā na tvayā na ca vṛṣṇibhiḥ

हिन्दी अर्थ

अचल, ध्रुव, इन्द्रियरहित, इन्द्रियोंके विषयोंसे रहित तथा सम्पूर्ण भूतोंसे पृथक् है, वही समस्त जीवोंका अन्तरात्मा है; उसीको क्षेत्रज्ञ भी कहते हैं। वह तीनों गुणोंसे भिन्न पुरुष कहा गया है, उसीका

English

"Because of brotherhood I forgive this. Farewell, I go. I have nothing to do with Dvaraka, with you, or with the Vrishnis."

अध्याय १७

श्लोक 23

प्रविवेश ततो रामो मिथिलाम् अरिमर्दनः सर्वकामैर् उपहृतैर् मिथिलेनाभिपूजितः

praviveśa tato rāmo mithilām arimardanaḥ sarvakāmair upahṛtair mithilenābhipūjitaḥ

हिन्दी अर्थ

नाम भगवान् हिरण्यगर्भ है। वह सम्पूर्ण विश्वका आत्मा, शर्व (संहारकारी) और अक्षर (अविनाशी) माना गया है। उसने इस एकात्मक त्रिलोकोको अपने आत्माके द्वारा धारण कर रखा है। वह

English

Then Rama, the crusher of foes, entered Mithila and was honoured by the king of Mithila with all desired things.

अध्याय १७

श्लोक 24

एतस्मिन्न् एव काले तु बभ्रुर् मतिमतां वरः नानारूपान् क्रतून् सर्वान् आजहार निरर्गलान्

etasminn eva kāle tu babhrur matimatāṃ varaḥ nānārūpān kratūn sarvān ājahāra nirargalān

हिन्दी अर्थ

स्वयं शरीरसे रहित है, किंतु समस्त शरीरोंमें निवास करता है। शरीरमें रहते हुए भी वह उसके कर्मासे

English

At that very time Babhru, best of the wise, performed all kinds of sacrifices without restraint.

अध्याय १७

श्लोक 25

दीक्षामयं स कवचं रक्षार्थं प्रविवेश ह स्यमन्तककृते प्राज्ञो गान्दीपुत्रो महायशाः

dīkṣāmayaṃ sa kavacaṃ rakṣārthaṃ praviveśa ha syamantakakṛte prājño gāndīputro mahāyaśāḥ

हिन्दी अर्थ

व्यक्ताव्यक्त॑स्वरूप और सनातन पुरुष हैं, जिन लिप्त नहीं होता। वह मेरा, तुम्हारा तथा अन्य महात्माने तीनों लोकोंको धारण कर रखा है, जो जितने भी देहधारी हैं, उनका भी आत्मा है। सब देवताओंके पिता एवं परोंसे भी पर हैं, वे सबका साक्षी है, कोई भी उसका ग्रहण नहीं कर किन देवताओं अथवा पितरोंका यजन करते रहे सकता। वह सगुण, निर्गुण, विश्वरूप तथा ज्ञानगम्य

English

The wise, greatly famed son of Gandini entered a coat of mail made of initiation for protection, for the sake of the Syamantaka.

अध्याय १७

श्लोक 26

अथ रत्नानि चान्यानि धनानि विविधानि च षष्टिं वर्षाणि धर्मात्मा यज्ञेष्व् एव न्ययोजयत्

atha ratnāni cānyāni dhanāni vividhāni ca ṣaṣṭiṃ varṣāṇi dharmātmā yajñeṣv eva nyayojayat

हिन्दी अर्थ

हैं और करेंगे ?' इस प्रकार मन-ही-मन विचार माना गया है। उसके सब ओर हाथ-पैर हैं, सब करके नारदजी मित्र देवतासे बोले--' भगवन्! ओर नेत्र, सिर और मुख हैं तथा सब ओर कान अङ्गोपाङ्गोंसहित सम्पूर्ण वेदों एवं पुराणोंमें आपको हैं, वह संसारमें सबको व्याप्त करके स्थित है।

English

Then the righteous-souled one devoted other jewels and various wealth to sacrifices for sixty years.

अध्याय १७

श्लोक 27

अक्रूरयज्ञा इति ते ख्यातास् तस्य महात्मनः बह्वन्नदक्षिणाः सर्वे सर्वकामप्रदायिनः

akrūrayajñā iti te khyātās tasya mahātmanaḥ bahvannadakṣiṇāḥ sarve sarvakāmapradāyinaḥ

हिन्दी अर्थ

वसन्नपि शरीरेषु न स लिप्येत कर्मभिः। ममान्तरात्मा तव च ये चान्ये देहसंस्थिताः ॥ सर्वेषां साक्षिभूतोऽसौ न ग्राह्यः केनचित् क्वचित्। सगुणो निर्गुणो विश्वो ज्ञानगम्यो ह्यसौ स्मृतः ॥ सर्वतः पाणिपादान्तः सर्वतोऽक्षिशिरोमुखः। सर्वतः श्रुतिमाँल्लोके सर्वमावृत्य तिष्ठति॥

English

They are famed as the Akrura sacrifices of that great-souled one, all with much food and fees, granting all desires.

अध्याय १७

श्लोक 28

अथ दुर्योधनो राजा गत्वा स मिथिलां प्रभुः गदाशिक्षां ततो दिव्यां बलदेवाद् अवाप्तवान्

atha duryodhano rājā gatvā sa mithilāṃ prabhuḥ gadāśikṣāṃ tato divyāṃ baladevād avāptavān

हिन्दी अर्थ

भगवान् सूर्यकी महिमा ७१

English

Then King Duryodhana, the lord, went to Mithila and obtained from Baladeva divine instruction in the mace.

अध्याय १७

श्लोक 29

संप्रसाद्य ततो रामो वृष्ण्यन्धकमहारथैः आनीतो द्वारकाम् एव कृष्णेन च महात्मना

saṃprasādya tato rāmo vṛṣṇyandhakamahārathaiḥ ānīto dvārakām eva kṛṣṇena ca mahātmanā

हिन्दी अर्थ

सम्पूर्ण मस्तक उसके मस्तक, सम्पूर्ण भुजाएँ उसकी उसीकी पूजा होती है। उससे बढ्कर दूसरा भुजा, सम्पूर्ण पैर उसके पैर, सम्पूर्ण नेत्र उसके कोई देवता या पितर नहीं है । उसका ज्ञान अपने नेत्र एवं सम्पूर्ण नासिकाएँ उसकी नासिका हैं । आत्माके द्वारा होता है । अत: मैं उसी सर्वात्माका वह स्वेच्छाचारी है और अकेला ही सम्पूर्ण क्षेत्रमे पूजन करता हूँ । देवर्षे! स्वर्गमें भी जो जीव उस

English

Then Rama, appeased, was brought to Dvaraka by the great Vrishni-Andhaka chariot-warriors and the great-souled Krishna.

अध्याय १७

श्लोक 30

अक्रूरश् चान्धकैः सार्धम् आयातः पुरुषर्षभः हत्वा सत्राजितं सुप्तं सहबन्धुं महाबलः

akrūraś cāndhakaiḥ sārdham āyātaḥ puruṣarṣabhaḥ hatvā satrājitaṃ suptaṃ sahabandhuṃ mahābalaḥ

हिन्दी अर्थ

सुखपूर्वक विचरता है । यहाँ जितने शरीर हैं, वे परमेश्वरको नमस्कार करते हैं, वे उसीके द्वारा सभी क्षेत्र कहलाते हैं । उन सबको वह योगात्मा दिये हुए अभीष्ट गतिको प्राप्त होते हैं। देवता और जानता है, इसलिये क्षेत्रज्ञ कहलाता है। अव्यक्त अपने-अपने आश्रमोंमें स्थित मनुष्य भक्तिपूर्वक पुरमें शयन करता है, अत: उसे पुरुष कहते हैं। सबके आदिभूत उस परमात्माका पूजा करते हैं

English

And Akrura, bull among men, mighty, came with the Andhakas, having killed Satrajit asleep along with his kin.

अध्याय १७

श्लोक 31

ज्ञातिभेदभयात् कृष्णस् तम् उपेक्षितवांस् तदा अपयाते तदाक्रूरे नावर्षत् पाकशासनः

jñātibhedabhayāt kṛṣṇas tam upekṣitavāṃs tadā apayāte tadākrūre nāvarṣat pākaśāsanaḥ

हिन्दी अर्थ

विश्वका अर्थ है बहुविध; वह परमात्मा सर्वत्र और वे उन्हें सदूति प्रदान करते हैं । वे सर्वात्मा, बतलाया जाता हे, इसलिये बहुविधरूप होनेके सर्वगत और निर्गुण कहलाते हैं। मैं भगवान् सूर्यको कारण वह विश्वरूप माना गया है। एकमात्र वही ऐसा मानकर अपने ज्ञानके अनुसार उनका पूजन महान् है और एकमात्र वही पुरुष कहलाता है; करता हूँ। नारदजी! यह गोपनीय उपदेश मैंने

English

For fear of division among kin, Krishna then ignored him. When Akrura had left, Indra did not rain.

अध्याय १७

श्लोक 32

अनावृष्ट्या तदा राष्ट्रम् अभवद् बहुधा कृशम् ततः प्रसादयाम् आसुर् अक्रूरं कुकुरान्धकाः

anāvṛṣṭyā tadā rāṣṭram abhavad bahudhā kṛśam tataḥ prasādayām āsur akrūraṃ kukurāndhakāḥ

हिन्दी अर्थ

अतः वह एकमात्र सनातन परमात्मा ही महापुरुष अपनी भक्तिके कारण आपको बतलाया है । आपने नाम धारण करता है। वह परमात्मा स्वयं ही भी इस उत्तम रहस्यको भलीभाँति समझ लिया अपने-आपको सौ, हजार, लाख और करोड़ों देवता, मुनि और पुराण-सभी उस परमात्माको रूपॉमें प्रकट कर लेता है। जैसे आकाशसे गिरा वरदायक मानते हैं और इसी भावसे सब लोग

English

Through lack of rain the kingdom became much weakened; then the Kukuras and Andhakas appeased Akrura.

अध्याय १७

श्लोक 33

पुनर् द्वारवतीं प्राप्ते तस्मिन् दानपतौ ततः प्रववर्ष सहस्राक्षः कक्षे जलनिधेस् तदा

punar dvāravatīṃ prāpte tasmin dānapatau tataḥ pravavarṣa sahasrākṣaḥ kakṣe jalanidhes tadā

हिन्दी अर्थ

हुआ जल भूमिके रसविशेषसे दूसरे स्वादका हो भगवान् दिवाकरका पूजन करते हैं ।

English

When that lord of gifts had returned to Dvaravati, the thousand-eyed one then rained at the ocean's side.

अध्याय १७

श्लोक 34

कन्यां च वासुदेवाय स्वसारं शीलसंमताम् अक्रूरः प्रददौ धीमान् प्रीत्यर्थं मुनिसत्तमाः

kanyāṃ ca vāsudevāya svasāraṃ śīlasaṃmatām akrūraḥ pradadau dhīmān prītyarthaṃ munisattamāḥ

हिन्दी अर्थ

जाता है, उसी प्रकार गुणमय रसके सम्पर्कसे वह ब्रह्माजी कहते हैं--इस प्रकार मित्र देवताने परात्मा अनेक रूप प्रतीत होने लगता है। जैसे पूर्वकालमें नारदजीको यह उपदेश दिया था। एक ही वायु समस्त शरीरोंमें पाँच रूपॉंमें स्थित भानुके उपदेशको मैंने भी आपलोगोंसे कह है, उसी प्रकार आत्माको भी एकता और अनेकता सुनाया। जो सूर्यका भक्त न हो, उसे इसका

English

Akrura, the wise, gave a maiden, his well-regarded sister, to Vasudeva for affection, best of sages.

अध्याय १७

श्लोक 35

अथ विज्ञाय योगेन कृष्णो बभ्रुगतं मणिम् सभामध्यगतः प्राह तम् अक्रूरं जनार्दनः

atha vijñāya yogena kṛṣṇo babhrugataṃ maṇim sabhāmadhyagataḥ prāha tam akrūraṃ janārdanaḥ

हिन्दी अर्थ

मानी गयी है। जैसे अग्नि दूसरे स्थानको विशेषतासे उपदेश नहीं देना चाहिए। जो मनुष्य प्रतिदिन अन्य नाम धारण करती है, उसी प्रकार वह परमात्मा इस प्रसंगको सुनाता और जो सुनता है, वह ब्रह्मा आदिके रूपॉमें भिन्न-भिन्न नाम धारण करता निःसंदेह भगवान् सूर्यमें प्रवेश करता है। है। जैसे एक दीप हजारों दीपोंको प्रकट करता आरम्भसे ही इस कथाको सुनकर रोगी मनुष्य

English

Then Krishna, knowing by yoga that the jewel was with Babhru, said to Akrura in the middle of the assembly:

अध्याय १७

श्लोक 36

यत् तद् रत्नं मणिवरं तव हस्तगतं विभो तत् प्रयच्छ च मानार्ह मयि मानार्यकं कृथाः

yat tad ratnaṃ maṇivaraṃ tava hastagataṃ vibho tat prayaccha ca mānārha mayi mānāryakaṃ kṛthāḥ

हिन्दी अर्थ

है, वैसे ही वह एक ही परमात्मा हजारों रूपोंको रोगसे मुक्त हो जाता है और जिज्ञासुको उत्तम उत्पन्न करता है। संसारमें जो चराचर भूत हैं, वे ज्ञान एवं अभीष्ट गतिकी प्राप्ति होती है। नित्य नहीं हैं; परंतु वह परमात्मा अक्षय, अप्रमेय मुनियो! जो इसका पाठ करता है, वह जिस- तथा सर्वव्यापी कहा जाता है। वह ब्रह्म सदसत्स्वरूप जिस वस्तुकी कामना करता है, उसे निश्चय ही

English

"That excellent jewel which is in your hand, lord — give it, honoured one, and do not treat me dishonourably.

अध्याय १७

श्लोक 37

षष्टिवर्षगते काले यो रोषो ऽभून् ममानघ स संरूढो ऽसकृत् प्राप्तस् ततः कालात्ययो महान्

ṣaṣṭivarṣagate kāle yo roṣo 'bhūn mamānagha sa saṃrūḍho 'sakṛt prāptas tataḥ kālātyayo mahān

हिन्दी अर्थ

है। लोकमें देवकार्य तथा पितृकार्ये अवसरपर प्राप्त कर लेता है।

English

The anger that arose in me after sixty years, sinless one, has grown and repeatedly come, and a great delay has passed."

अध्याय १७

श्लोक 38

स ततः कृष्णवचनात् सर्वसात्वतसंसदि प्रददौ तं मणिं बभ्रुर् अक्लेशेन महामतिः

sa tataḥ kṛṣṇavacanāt sarvasātvatasaṃsadi pradadau taṃ maṇiṃ babhrur akleśena mahāmatiḥ

हिन्दी अर्थ

सूर्यकी महिमा तथा अदितिके गर्भसे उनके अवतारका वर्णन ब्रह्माजी कहते हैं-- भगवान् सूर्य सबके आत्मा, हैं। इस प्रकार यहाँ एक ही सूर्यके चौबीस नाम

English

Then at Krishna's word, in the assembly of all the Satvatas, the great-minded Babhru gave that jewel without difficulty.

अध्याय १७

श्लोक 39

ततस् तम् आर्जवात् प्राप्तं बभ्रोर् हस्ताद् अरिंदमः ददौ हृष्टमनाः कृष्णस् तं मणिं बभ्रवे पुनः

tatas tam ārjavāt prāptaṃ babhror hastād ariṃdamaḥ dadau hṛṣṭamanāḥ kṛṣṇas taṃ maṇiṃ babhrave punaḥ

हिन्दी अर्थ

सम्पूर्ण लोकोंके ईश्वर, देवताओंके भी देवता और प्रजापति हैं। वे ही तीनों लोकोंकी जड़ हैं, परम

English

Then Krishna, subduer of foes, glad-minded, gave that jewel, received in honesty from Babhru's hand, back to Babhru.

अध्याय १७

श्लोक 40

स कृष्णहस्तात् संप्राप्तं मणिरत्नं स्यमन्तकम् आबध्य गान्दिनीपुत्रो विरराजांशुमान् इव

sa kṛṣṇahastāt saṃprāptaṃ maṇiratnaṃ syamantakam ābadhya gāndinīputro virarājāṃśumān iva

हिन्दी अर्थ

सूर्यके पास ही पहुँचती है। सूर्यसे वृष्टि होती, वृष्टिसे अन्न पैदा होता और अन्नसे प्रजा जीवन- निर्वाह करती है। क्षण, मुहूर्त, दिन, रात, पक्ष, मास, संवत्सर, ऋतु और युग--इनकी काल-

English

Gandini's son, wearing the jewel Syamantaka received from Krishna's hand, shone like the sun.

स्रोत: https://gretil.sub.uni-goettingen.de/gretil/corpustei/transformations/plaintext/sa_brahmapurANa-1-246.txt · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Brahma Purana — Chapter 17
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.