Yajur Veda· Yajurveda Saṁhitā
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अध्याय 23 / 40

Adhyāya 23

अध्याय 23

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अध्याय २३

श्लोक 1

हि॒र॒ण्य॒ग॒र्भः सम॑वर्त॒ताग्रे॑ भू॒तस्य॑ जा॒तः पति॒रेक॑ आसीत् ।स दा॑धार पृथि॒वीं द्यामु॒तेमां कस्मै॑ दे॒वाय॑ ह॒विषा॑ विधेम

hiraṇyagarbhaḥ samavartatāgre bhūtasya jātaḥ patireka āsīt | sa dādhāra pṛthivīṃ dyāmutemāṃ kasmai devāya haviṣā vidhema

हिन्दी अर्थ

प्रभु सदा से है, वे सवके रक्षक है। त्रिलोकी का धारणा कर रहे है। उनको उपासना त्यागपूर्वक उपभोग से, हवि के द्वारा हौ होती हे। सूर्यः महिमा संम्बभूव तस्यै ते महिम्ने प्रजाप॑तये स्वाहां देवेभ्य॑ः।।२॥ १. है प्रभो! आप उपयामगृहीतः असि=विवाह के हारा गृहीत होते ै। जैसे उत्तम

English

com The Texts of the White Yajurveda, tr. Ralph T.H. Griffith, [1899], BOOK THE TWENTY-THIRD. IN the beginning rose Hiranyagarbha, etc:

अध्याय २३

श्लोक 2

उ॒प॒या॒मगृ॑हीतोऽसि प्र॒जाप॑तये त्वा॒ जुष्टं॑ गृह्णाम्ये॒ष ते॒ योनि॒: सूर्य॑स्ते महि॒मा ।यस्तेऽह॑न्त्संवत्स॒रे म॑हि॒मा स॑म्ब॒भूव॒ यस्ते॑ वा॒याव॒न्तरि॑क्षे महि॒मा स॑म्ब॒भूव॒ यस्ते॑ दि॒वि सूर्ये॑ महि॒मा स॑म्ब॒भूव॒ तस्मै॑ ते महि॒म्ने प्र॒जाप॑तये॒ स्वाहा॑ दे॒वेभ्य॑:

upayāmagṛhīto'si prajāpataye tvā juṣṭaṃ gṛhṇāmyeṣa te yoni: sūryaste mahimā | yaste'hantsaṃvatsare mahimā sambabhūva yaste vāyāvantarikṣe mahimā sambabhūva yaste divi sūrye mahimā sambabhūva tasmai te mahimne prajāpataye svāhā devebhya:

हिन्दी अर्थ

प्रभु कौ अनन्यभक्ति हमे प्रभु- दर्शन करानैवाली हो। हम सूर्य मे प्रभु की महिमा को देखते हए सूर्यं के समान तेजस्वी बनें। इस तेजस्विता की प्राप्ति के लिए यऽ ईरोऽअस्य द्विपद्श्चतुंष्यद: कस्मै देवाय॑ हविषां विधेम।।२॥ १. यः=जो प्रभु प्राणतः =प्राण धारण करनेवाले तथा निमिषत--सदा आंखों को चन्द

English

Taken upon a base art thou. I take thee welcome to Prajâpati. This is thy place: Sûrya thy majesty. The majesty that has accrued to thee in the day, in a year, that majesty which has accrued in the wind, in the firmament, to that majesty of thine, to Prajâpati, to the Gods, All-hail!

अध्याय २३

श्लोक 3

यः प्रा॑ण॒तो नि॑मिष॒तो म॑हि॒त्वैक॒ इद्राजा॒ जग॑तो ब॒भूव॑ ।य ईशे॑ अ॒स्य द्वि॒पद॒श्चतु॑ष्पदः॒ कस्मै॑ दे॒वाय॑ ह॒विषा॑ विधेम

yaḥ prāṇato nimiṣato mahitvaika idrājā jagato babhūva | ya īśe asya dvipadaścatuṣpadaḥ kasmai devāya haviṣā vidhema

हिन्दी अर्थ

प्रभु द्वारा पशु-पक्षियों में प्राप्त करायी गई उस-उस प्रवीणता को हम भी प्राप्त करने का प्रयत्न करे। इसके लिए प्रभु का उपासन करे, प्रभु के उपासन कै लि् चन्द्र में प्रभु-दर्खन नक्षत्रेषु चनद्रम॑सि महिमा सम्बभूव तस्म ते महिम्ने प्रजाप॑तये देवेभ्यः स्वाह।।४॥

English

Who, by his, grandeur hath become sole Ruler of all the. moving world that breathes and slumbers; He who is Sovran of these men and cattle—what God shall we adore with our oblation?

अध्याय २३

श्लोक 4

उ॒प॒या॒मगृ॑हीतोऽसि प्र॒जाप॑तये त्वा॒ जुष्टं॑ गृह्णाम्ये॒ष ते॒ योनि॑श्च॒न्द्रमा॑स्ते महि॒मा ।यस्ते॒ रात्रौ॑ संवत्स॒रे म॑हि॒मा स॑म्ब॒भूव॒ यस्ते॑ पृथि॒व्याम॒ग्नौ म॑हि॒मा स॑म्ब॒भूव॒ यस्ते॒ नक्ष॑त्रेषु च॒न्द्रम॑सि महि॒मा स॑म्ब॒भूव॒ तस्मै॑ ते महि॒म्ने प्र॒जाप॑तये दे॒वेभ्य॒: स्वाहा॑

upayāmagṛhīto'si prajāpataye tvā juṣṭaṃ gṛhṇāmyeṣa te yoniścandramāste mahimā | yaste rātrau saṃvatsare mahimā sambabhūva yaste pṛthivyāmagnau mahimā sambabhūva yaste nakṣatreṣu candramasi mahimā sambabhūva tasmai te mahimne prajāpataye devebhya: svāhā

हिन्दी अर्थ

हम इन्द्रियाश्वों को रथ में जोतेँ ओर जीवनयात्रा को पूर्णकर प्रभु के पास पहचे। षिः प्रजापत्तिः। देवता-डइन्द्रः। छन्दः निचृद्बृहती। स्वरः-मध्यमः। १. इनच्द्रिसरूप घोडे विषयों मे जा भरकते हे, उनको न भरकने देने के लिए आवश्यक है-यत्-कि वातः=( वा गतौ=अत् गतौ) आत्मा अपः=कर्मो को अगनीगन् प्राप्त हो।

English

Taken upon a base art thou. I take thee welcome to Prajâpati, This is thy place: the Moon thy majesty. Thy majesty that has accrued to thee by night, in a year, thy majesty that has accrued in the earth, in Agni, in the stars and in the Moon, to that majesty of thine, to Prajâpati and to the Gods, All-hail!

अध्याय २३

श्लोक 5

यु॒ञ्जन्ति॑ ब्र॒ध्नम॑रु॒षं चर॑न्तं॒ परि॑ त॒स्थुष॑: ।रोच॑न्ते रोच॒ना दि॒वि

yuñjanti bradhnamaruṣaṃ carantaṃ pari tasthuṣa: | rocante rocanā divi

हिन्दी अर्थ

जीवात्मा वात=वायु क्रियाशील है। क्रियाशीलता से यह अपने इस शरीर को प्रभु का प्रिय बनाये रखता है। इस क्रियाशीलता के मार्ग से हमे इन्द्रियाश्वों को विषयों से व्यावृत्त करके आत्मतत्व का दर्न करना चाहिए। जाग॑तेन छन्द॑सा । भूर्भुवः स्वुर्लाजी २॥ ञ्छाची ३॥ न्यव्ये गव्य॑ऽ एतदन्नं मत्त देवाऽ

English

They who stand round hills as he moves harness the bright, the ruddy Steed: The lights are shining in the sky.

अध्याय २३

श्लोक 6

यु॒ञ्जन्त्य॑स्य॒ काम्या॒ हरी॒ विप॑क्षसा॒ रथे॑ ।शोणा॑ धृ॒ष्णू नृ॒साह॑सा

yuñjantyasya kāmyā harī vipakṣasā rathe | śoṇā dhṛṣṇū nṛsāhasā

हिन्दी अर्थ

हममे ' प्रजारक्षण, काम-कोध-लोभ-निवारण व लोकहित' कौ प्रबल कामना हो। इससे हम स्वस्थ, सज्ञान व सुखी जनेगे। हम ‹ धान, सत्तु, जौ व दही ' आदि पदार्थो ऋषि :-प्रजापतिः। देवता-जिज्ञासुः। छन्दः-निचृदत्सष्टिः। स्वर ः-गान्धारः। कः स्विदेकाकी च॑रति कऽडं स्विज्जायते पुन॑ः।

English

On both sides to the car they yoke the two. Bay Coursers dear to him, Bold; tawny, bearers of the Chief.

अध्याय २३

श्लोक 7

यद्वातो॑ अ॒पो अ॑गनीगन्प्रि॒यामिन्द्र॑स्य त॒न्व॒म् ।ए॒तᳪ स्तो॑तर॒नेन॑ प॒था पुन॒रश्व॒माव॑र्तयासि नः

yadvāto apo aganīganpriyāmindrasya tanvam | eta stotaranena pathā punaraśvamāvartayāsi naḥ

हिन्दी अर्थ

हमें सूर्य की भांति अपराश्रित रूप में विचरना है, अपने कार्य स्वयं करने ्ै। मन के विकास से अपने विकास को सिद्ध करना है। अपनी वाणी को अग्नि के समान ओजस्वी बनाकर सर्वत्र उत्साह का सल्चार करना है ओर इस शरीररूप पृथिवी में सोम का वपन करते हए इसे महत्त्वपूर्ण आवपन बनाना हे।

English

When, swift as wind, the Horse has reached the form that Indra loves, the flood, Again, O singer, by this path bring thou our Courser hitherward.

अध्याय २३

श्लोक 8

वस॑वस्त्वाञ्जन्तु गाय॒त्रेण॒ छन्द॑सा रु॒द्रास्त्वा॑ञ्जन्तु॒ त्रैष्टु॑भेन॒ छन्द॑सा ऽऽदि॒त्यास्त्वा॑ञ्जन्तु॒ जाग॑तेन॒ छन्द॑सा ।भूर्भुव॒: स्वर्ला॒जी३ञ्छा॒ची३न्यव्ये॒ गव्य॑ ए॒तदन्न॑मत्त देवा ए॒तदन्न॑मद्धि प्रजापते

vasavastvāñjantu gāyatreṇa chandasā rudrāstvāñjantu traiṣṭubhena chandasā ''dityāstvāñjantu jāgatena chandasā | bhūrbhuva: svarlājī3ñchācī3nyavye gavya etadannamatta devā etadannamaddhi prajāpate

हिन्दी अर्थ

सर्वाधिक ध्यान हमें मस्तिष्क का करना है। साधना के द्वारा निरन्तर वृद्धि का यत्न करना है। अपने को आधि-व्याधियों से बचाकर श्रीसम्पन्न होना है तथा प्रभुस्मरण के द्वारा इन शरीरो के परिग्रह से ऊपर उठना ठे। वायुष्ट्वां पचतैरंवत्वसिंतम्री वश्छागैरन्यग्रोधंर्चमसेः श॑ल्मलिर्वृद्छया ।

English

Let the Vasus anoint thee with Gâyatrî metre. Let the Rudras anoint thee with Trishtup metre. Let the Âdityas anoint thee with Jagatî metre. Earth! Ether! Heaven! O Gods, eat this food, parched grains and groats in the product of barley and in the product of cows: eat this food, Prajâpati.

अध्याय २३

श्लोक 9

कः स्वि॑देका॒की च॑रति॒ क उ॑ स्विज्जायते॒ पुन॑: ।किᳪ स्वि॑द्धि॒मस्य॑ भेष॒जं किम्वा॒वप॑नं म॒हत्

kaḥ svidekākī carati ka u svijjāyate puna: | ki sviddhimasya bheṣajaṃ kimvāvapanaṃ mahat

हिन्दी अर्थ

रथ ओर घोडों (शरीर व इन्द्रियो) को वश में करके क्रियाशीलता से अपनी 5 को बाकर हम ब्रह्मा बनते है ओर सोम की रक्षा से आगे ओर आगे चलनेवाले बनते १. गतमन्त्र के “ सोमपुरोगव ' से कहते हें कि है वाजिन् क्रियाशील व शक्तिशालिन् तू स्वयम्-अपने आप तन्वम्-शरीर कौ कल्पयस्व=शक्तिशाली वना। तू ओरोंकाध्यानन

English

Who moveth single and alone? Who is brought forth to life again? What is the remedy of cold, or what the great receptacle?

अध्याय २३

श्लोक 10

सूर्य॑ एका॒की च॑रति च॒न्द्रमा॑ जायते॒ पुन॑: ।अ॒ग्निर्हि॒मस्य॑ भेष॒जं भूमि॑रा॒वप॑नं म॒हत्

sūrya ekākī carati candramā jāyate puna: | agnirhimasya bheṣajaṃ bhūmirāvapanaṃ mahat

हिन्दी अर्थ

हम ओरों की ओर न देखते हए तथा ओरों पर आश्रित न होते हुए अपने शरीर को शक्तिशाली बना, यज्ञशील बनें, प्रभु के उपासक होँ। हम यह विश्वास रव्खे कि हमारे महत्त्व को कोई दूसरा नष्ट नदीं कर सकता। स्वयं हम ही गृलती से नष्ट कर ऋषि:-प्रजापत्तिः। देवता--सविता। छन्दः-जगती। स्वरः निषादः।

English

The Sun moves single and alone. The Moon is brought to life again, Fire is the remedy of cold; Earth is the great receptacle.

अध्याय २३

श्लोक 11

का स्वि॑दासीत्पू॒र्वचि॑त्ति॒: किᳪ स्वि॑दासीद् बृ॒हद्वय॑: ।का स्वि॑दासीत्पिलिप्पि॒ला का स्वि॑दासीत्पिशङ्गि॒ला

kā svidāsītpūrvacitti: ki svidāsīd bṛhadvaya: | kā svidāsītpilippilā kā svidāsītpiśaṅgilā

हिन्दी अर्थ

देवयान-मार्ग से चलते हुए हम व्याधियों से मृत्यु को प्राप्त न हों ओर काम-क्रोध-लोभादि आधियों से हिसित न हो। अग्निः पशुरांसीत्तेनांयजन्त सऽ एतं लोकम॑जयद्यस्तिंन्नग्निः स त लोको भ॑विष्यति स ते लोको भ॑विष्यति तं जेष्यसि पिवैताऽअपः। सूर्य: पशुरांसीत्तेनांयजन्त सऽ एतं

English

What was the antecedent thought? What was the bird of mighty size? The slippery matron, who was she? Who was the reddish-coloured one?

अध्याय २३

श्लोक 12

द्यौरा॑सीत्पू॒र्वचि॑त्ति॒रश्व॑ आसीद् बृ॒हद्वय॑: ।अवि॑रासीत्पिलिप्पि॒ला रात्रि॑रासीत्पिशङ्गि॒ला

dyaurāsītpūrvacittiraśva āsīd bṛhadvaya: | avirāsītpilippilā rātrirāsītpiśaṅgilā

हिन्दी अर्थ

हम प्राण, अपान व व्यान की प्रतिपादिका ज्ञानवाणियो का ग्रहण करे। इन ज्ञानवाणियों को प्राप्त करने पर हमें संसार का कोई प्रलोभन हरा नहीं सकता। ज्ञानानुसार कमो मे व्याप्त होनेवाला पुरुष कल्याणकारिणी लक्ष्मी को प्राप्त करके आराम से रहता हे। १. गतमन्त्र कौ अम्बा=मातृवत् हितकारिणी ऋग्वाणी से गाणानां गणपतिम्

English

Heaven was the antecedent thought. The Courser was the mighty bird. The slippery matron was the earth, Night was the reddish-coloured one.

अध्याय २३

श्लोक 13

वा॒युष्ट्वा॑ पच॒तैर॑व॒त्वसि॑तग्रीव॒श्छागै॑र्न्य॒ग्रोध॑श्चम॒सैः श॑ल्म॒लिर्वृद्ध्या॑ ।ए॒ष स्य रा॒थ्यो वृषा॑ प॒ड्भिश्च॒तुर्भि॒रेद॑गन्ब्र॒ह्मा कृ॑ष्णश्च नोऽवतु॒ नमो॒ऽग्नये॑

vāyuṣṭvā pacatairavatvasitagrīvaśchāgairnyagrodhaścamasaiḥ śalmalirvṛddhyā | eṣa sya rāthyo vṛṣā paḍbhiścaturbhiredaganbrahmā kṛṣṇaśca no'vatu namo'gnaye

हिन्दी अर्थ

- गणपति प्रभु का उपासक मैं ज्ञानेन्द्रिय आदि गणों का पति होँ। प्रियपति प्रभु का उपासक मैं सबका प्रिय बनं निधिपति का उपासक स्ञाननिधि का पति वनूं। आपको मैः अपना निवासक जानुं। सारे संसार को गर्भं में धारण करनेवाले आपकी ओर चलू। आप ही ब्रह्माण्डजननी प्रकृति को गति देते हो, सुञो भी उत्तम गति प्राप्त कराइए।

English

Vâyu help thee with cooked viands! Blackneck with goats; Nyagrodha with cups; Salmali with increase; this Stallion here, good for the chariot—let him verily come with his four feet. Brahmâkrishna help us! Obeisance to Agni!

अध्याय २३

श्लोक 14

सᳪशि॑तो र॒श्मिना॒ रथ॒: सᳪशि॑तो र॒श्मिना॒ हय॑: ।सᳪशि॑तो अ॒प्स्व॒प्सु॒जा ब्र॒ह्मा सोम॑पुरोगवः

saśito raśminā ratha: saśito raśminā haya: | saśito apsvapsujā brahmā somapurogavaḥ

हिन्दी अर्थ

सम्पूर्णं प्रजा कृषि में प्रवृत्त होकर राष्ट को दुष्काल आदि से बचाती है। जहाँ इस कार्य से (क) शक्तिशाली बनती है, (शकुन्तिका), (ख) पेश्वर्य को बाती है (गभ=भग), (ग) वहाँ प्रसंगवश बुराइयों से बची रहती है। राजा इसी उदेश्य से प्रजा मे राष्ट्रीय भावना को जागरित करता है। प्रजा भी राजा से प्रचारित किये जानैवाले ज्ञान को

English

The car is fitted with the rein, the steed is fitted with the rein. Fitted in waters, water-born, is Brahmâ following Soma's lead.

अध्याय २३

श्लोक 15

स्व॒यं वा॑जिँस्त॒न्वं॒ कल्पयस्व स्व॒यं य॑जस्व स्व॒यं जु॑षस्व ।म॒हि॒मा ते॒ऽन्येन॒ न स॒न्नशे॑

svayaṃ vāji~stanvaṃ kalpayasva svayaṃ yajasva svayaṃ juṣasva | mahimā te'nyena na sannaśe

हिन्दी अर्थ

सवब पुरुषों का जीवन कृषि-प्रधान हो। वे अपने आचरण को एेसा उत्तम रक्यें कि राजा को उन्हें कुक कहना ही न पड, तभी राजा राज्य के विशिष्ट कार्यभार को स्तय-दण्ड (चोरी का नाछा) १. राष्ट मे प्रजा माता है जो राष्ट का निर्माण करती है ओौर राजा पिता है जिसका

English

Steed, from thy body, of thyself, sacrifice and accept thyself. Thy greatness can be gained by none but thee.

अध्याय २३

श्लोक 16

न वा उ॑ ए॒तन्म्रि॑यसे॒ न रि॑ष्यसि दे॒वाँ२ इदे॑षि प॒थिभि॑: सु॒गेभि॑: ।यत्रास॑ते सु॒कृतो॒ यत्र॒ ते य॒युस्तत्र॑ त्वा दे॒वः स॑वि॒ता द॑धातु

na vā u etanmriyase na riṣyasi devā~2 ideṣi pathibhi: sugebhi: | yatrāsate sukṛto yatra te yayustatra tvā devaḥ savitā dadhātu

हिन्दी अर्थ

राजा ओर प्रजा राष्ट कार्यो को एक क्रीड्क की वृत्ति से निभाते है राजा विशिष्ट राज्यभार को अपने कन्थे पर लेता है ओर बडी संयत वाणीवाला होता है। ९, गतसमन्त्रं में राजा त प्रजा को राष्ट के माता-पिता के रूप में चित्रित किया है प्रस्तुत मन्त्र मेँ राजा के लिए कहते है कि है राजन् गिरौ भारं हरन् इव=पर्वत पर भार

English

No, here thou diest not, thou art not injured: only by fair paths to the Gods thou guest, May Savitar the God in that world place thee where dwell the pious, whether they have journeyed.

अध्याय २३

श्लोक 17

अ॒ग्निः प॒शुरा॑सी॒त्तेना॑यजन्त॒ स ए॒तँल्लो॒कम॑जय॒द्यस्मि॑न्न॒ग्निः स ते॑ लो॒को भ॑विष्यति॒ तं जे॑ष्यसि॒ पिबै॒ता अ॒पः ।वा॒युः प॒शुरा॑सी॒त्तेना॑यजन्त॒ स ए॒तँल्लो॒कम॑जय॒द्यस्मि॑न्वा॒युः स ते॑ लो॒को भ॑विष्यति॒ तं जे॑ष्यसि॒ पिबै॒ता अ॒पः ।सूर्य॑: प॒शुरा॑सी॒त्तेना॑यजन्त॒ स ए॒तँल्लो॒कम॑जय॒द्यस्मि॒न्त्सूर्य॒: स ते॑ लो॒को भ॑विष्यति॒ तं जे॑ष्यसि॒ पिबै॒ता अ॒पः

agniḥ paśurāsīttenāyajanta sa eta~llokamajayadyasminnagniḥ sa te loko bhaviṣyati taṃ jeṣyasi pibaitā apaḥ | vāyuḥ paśurāsīttenāyajanta sa eta~llokamajayadyasminvāyuḥ sa te loko bhaviṣyati taṃ jeṣyasi pibaitā apaḥ | sūrya: paśurāsīttenāyajanta sa eta~llokamajayadyasmintsūrya: sa te loko bhaviṣyati taṃ jeṣyasi pibaitā apaḥ

हिन्दी अर्थ

राजा के तीन मौलिक कर्तव्य हैँ (क) प्रजा की स्थिति को उन्नत करना, उसमे शिक्षा आदि का प्रसार करना, (ख) इसके श्री का विकास करना व (ग) आर्य ओर दस्युओं को अलग-अलग जानना। १. पिले मन्त्र मेँ प्रजा के प्रति राजकर््तव्य का उल्लेख किया है। प्रस्तुत मन्त्र मे उन्हीं

English

Agni was the victim. With him they sacrificed. He won this world in which Agni is. This shall become thy world. This shalt thou win. Drink these waters. Vâyu was the victim. With him they sacrificed. He won this world in which Vâyu is. This shall become, etc., as above. Sûrya was the victim, etc, He won the world in which Sûrya is. This shall become, etc.

अध्याय २३

श्लोक 18

प्रा॒णाय॒ स्वाहा॑ ऽपा॒नाय॒ स्वाहा॑ व्या॒नाय॒ स्वाहा॑ ।अम्बे॒ अम्बि॒केऽम्बा॑लिके॒ न मा॑ नयति॒ कश्च॒न ।सस॑स्त्यश्व॒कः सुभ॑द्रिकां काम्पीलवा॒सिनी॑म्

prāṇāya svāhā 'pānāya svāhā vyānāya svāhā | ambe ambike'mbālike na mā nayati kaścana | sasastyaśvakaḥ subhadrikāṃ kāmpīlavāsinīm

हिन्दी अर्थ

प्रजा के तीन कर््तव्यये है -१. वह राजा को उन्नत स्थिति में स्थापित करे। उसकौ आज्ञा का पालन करे। २. कर देकर राजा कौ श्री का वर्धन करे, जिससे राजा उस श्री करे द्वारा उत्तम कार्यो को करता हुआ राष्ट को सुन्दर बना पाए। ३. शान्त क्रियाशीलता कै द्वार प्रजा अपने जीवन से अशुभ भावनाओं को एेसे दूर करे जेखे अन्न से भूसे को

English

To vital breath, Hail! To out-breathing, Hail! To diffusive breath, Hail! Ambâ! Ambikâ! Ambâlikâ! No one is taking me away. The sorry horse will lie beside another, as Subhadrâ, the dweller in Kâmpila.

अध्याय २३

श्लोक 19

ग॒णानां॑ त्वा ग॒णप॑तिᳪ हवामहे प्रि॒याणां॑ त्वा प्रि॒यप॑तिᳪ हवामहे नि॒धीनां॑ त्वा॑ निधि॒पति॑ᳪ हवामहे वसो मम ।आहम॑जानि गर्भ॒धमा त्वम॑जासि गर्भ॒धम्

gaṇānāṃ tvā gaṇapati havāmahe priyāṇāṃ tvā priyapati havāmahe nidhīnāṃ tvā nidhipati havāmahe vaso mama | āhamajāni garbhadhamā tvamajāsi garbhadham

हिन्दी अर्थ

जन राजा को विद्वान् लोग व्याप्त करते है तभी राजसभा प्रजा की सेवा कर १. यत्-जब हरिणः =राष्ट्, अर्थात् राष्ट का अधिकारी राजा यवम्तप्रजा को (विड् वे यवो राष्ट हरिणः-श० ९३।२।९।८) अत्ति-खाने लगता है तब वह पुष्टम्-पोषणवाली को, राष्ट कौ उन्नति को पशु=(पशुम्-प्रजा वै पशवः-श०९।४।६।९१७) प्रजा को न

English

Thee we invoke, troop-lord of troops, Thee we invoke, the loved ones’ lord. Thee, lord of treasures, we invoke. My precious wealth! . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . .

अध्याय २३

श्लोक 20

ता उ॒भौ च॒तुर॑: प॒दः सं॒प्रसा॑रयाव स्व॒र्गे लो॒के प्रोर्णु॑वाथां॒ वृषा॑ वा॒जी रे॑तो॒धा रेतो॑ दधातु

tā ubhau catura: padaḥ saṃprasārayāva svarge loke prorṇuvāthāṃ vṛṣā vājī retodhā reto dadhātu

हिन्दी अर्थ

जेसे एक दासी अपने स्वामी का उपभोग करती हुई वंशवृद्धि की कामनावाली नहीं होती, उसी प्रकार एक विलासी वृत्तिवाला राजा प्रजा को अत्यधिक कर आदि द्वारा खाता हुआ प्रजा-पोषण को महत्त्व नहीं देता। पोषण क्री भावना का जभाव

English

They, made of silver, gold, and lead, are used as helpers in the work.

अध्याय २३

श्लोक 21

उत्स॑क्थ्या॒ अव॑ गु॒दं धे॑हि॒ सम॒ञ्जिं चा॑रया वृषन् ।य स्त्री॒णां जी॑व॒भोज॑नः

utsakthyā ava gudaṃ dhehi samañjiṃ cārayā vṛṣan | ya strīṇāṃ jīvabhojanaḥ

हिन्दी अर्थ

राजा विलासी हो जाएु तो वह उस श्र व्यक्ति के समान होता है जो एक स्वामिनी का प्रेमी बनकर वंशवृद्धि के विचार को कोई महत्त्व नहीं देता। दधिक्राव्णोऽअकारिषं जिष्णोरश्वस्य वाजिनंः। सुरभि नो मुखां करत्प्र णऽआयुंश्षि तारिषत्॥।३२॥

English

What then?

अध्याय २३

श्लोक 22

य॒कास॒कौ श॑कुन्ति॒काऽऽहल॒गिति॒ वञ्च॑ति ।आह॑न्ति ग॒भे पसो॒ निग॑ल्गलीति॒ धार॑का

yakāsakau śakuntikā''halagiti vañcati | āhanti gabhe paso nigalgalīti dhārakā

हिन्दी अर्थ

विविध वाणियों के उपदेश उपदेशो से त्वा=तुज्े शम्यन्तु=शान्त कररे। ये "महानाम्नी ' ऋचा महान् प्रभु करे नामों का स्मरण कराने के कारण ' महानाम्नी ' कहलाती है। प्रभु नाम-स्मरण से मनुष्य में ये शक्ति उत्पन्न करती है, अतः "शक्वर्यः' नामवाली भी हो जाती है। इनका उपदेश यही है कि “उस

English

As men whose fields are full of barley, etc., as in X.

अध्याय २३

श्लोक 23

य॒को॒ऽस॒कौ श॑कुन्त॒क आ॒हल॒गिति॒ वञ्च॑ति ।विव॑क्षत इव ते॒ मुख॒मध्व॑र्यो॒ मा न॒स्त्वम॒भि भा॑षथाः

yako'sakau śakuntaka āhalagiti vañcati | vivakṣata iva te mukhamadhvaryo mā nastvamabhi bhāṣathāḥ

हिन्दी अर्थ

राजसभा के सभ्य मन को वशीभूत करने के दृष्टिकोण से रिक्त समयमे उपासना- मन्त्रों का संग्रह करे। दिशार्पँं (पत्न्यो) “आगे बदन" आदि उपदेशों से हमारे जीवनो में शान्ति स्थापित करे। नोट-'लोम' शब्द का अर्थ "लूञ् छेदने ' से यदि छेदन किया जाए तौ पूर्वाद्धिं का अर्थं

English

Who flays thee?

अध्याय २३

श्लोक 24

मा॒ता च॑ ते पि॒ता च॒ तेऽग्रं॑ वृ॒क्षस्य॑ रोहतः ।प्रति॑ला॒मीति॑ ते पि॒ता ग॒भे मु॒ष्टिम॑तᳪसयत्

mātā ca te pitā ca te'graṃ vṛkṣasya rohataḥ | pratilāmīti te pitā gabhe muṣṭimatasayat

हिन्दी अर्थ

गृहिणी उत्तम गुण-कर्म व स्वभाव से घर को स्वर्ग बनानेवाली होती है। १. गतमन्त्र के अनुसार घर के शान्त वातावरण में ही मनुष्य आध्यात्मिक दृष्टि से उन्नति कर सकता है। घर स्वर्ग बनेगा तो वहो देवों का निवास तो होगा ही। ये दिव्य को चित्=निश्चय से यथा=जेसे अनुपूर्वम्क्रमशः एक ओर से वियूय कुच-कुक अलग

English

Who dissects thee?

अध्याय २३

श्लोक 25

मा॒ता च॑ ते पि॒ता च॒ तेऽग्रे॑ वृ॒क्षस्य॑ क्रीडतः ।विव॑क्षत इव ते॒ मुखं॒ ब्रह्म॒न्मा त्वं व॑दो ब॒हु

mātā ca te pitā ca te'gre vṛkṣasya krīḍataḥ | vivakṣata iva te mukhaṃ brahmanmā tvaṃ vado bahu

हिन्दी अर्थ

अपने भक्त को प्रभु वासनाओं सखे विच्छिन्न करते है। उसको विशिष्ट अनुशासन करके शान्त अद्भोवाला करते े। ये क्रान्तदर्शी प्रभु ही वस्तुतः हमें शान्ति का १. गतमन्त्र के अनुसार प्रभु कौ अनुकूलता होने पर ब्रह्माण्ड के सभी देवों की अनुकूलता हो जाती है। उसी का वर्णन करते हुए कहते है ऋतवः वसन्त आदि ऋतु

English

Who prepares thy limbs for sacrifice?

अध्याय २३

श्लोक 26

ऊ॒र्ध्वमे॑ना॒मुच्छ्रा॑पय गि॒रौ भा॒रᳪ हर॑न्निव ।अथा॑स्यै॒ मध्य॑मेधताᳪ शी॒ते वाते॑ पु॒नन्नि॑व

ūrdhvamenāmucchrāpaya girau bhāra haranniva | athāsyai madhyamedhatā śīte vāte punanniva

हिन्दी अर्थ

प्रभुभक्त के लिए सब ऋतुर्णं अनुकूल व सुन्दर होती हैं। वे उसके पर्व-पर्व को शान्त करनेवाली होती है। इन ऋतुओं से सूचित उपदेश को भक्त ग्रहण करता है ओर ये ऋतुर्णँ नीरोगता के कारण सम्पूर्णं वर्षं की अक्षीण तेजस्विता से तथा कर्मो से इसके जीवन को शान्त बनाती हे।

English

Well be it with thine upper parts, well be it with the parts below!

अध्याय २३

श्लोक 27

ऊ॒र्ध्वमे॑न॒मुच्छ्र॑यताद्गि॒रौ भा॒रᳪ हर॑न्निव ।अथा॑स्य॒ मध्य॑मेजतु शी॒ते वाते॑ पु॒नन्नि॑व

ūrdhvamenamucchrayatādgirau bhāra haranniva | athāsya madhyamejatu śīte vāte punanniva

हिन्दी अर्थ

थोडे-से भी दोष को दूर करनेवाले हों जनुकरूत् सङ्क ( सत्सङ्ग 2) हैव्याऽअध्वर्यवस्त्वाच्छ्य॑न्तु वि च॑ शासतु। १. हैव्याः= (देवस्य इमे) उस प्रभु के भक्त पुरुष अध्वर्यवः=( अध्वरं कामयमानाः)

English

Who moveth singly?

अध्याय २३

श्लोक 28

यद॑स्या अᳪहु॒भेद्या॑: कृ॒धु स्थू॒लमु॒पात॑सत् ।मु॒ष्काविद॑स्या एजतो गोश॒फे श॑कु॒लावि॑व

yadasyā ahubhedyā: kṛdhu sthūlamupātasat | muṣkāvidasyā ejato gośaphe śakulāviva

हिन्दी अर्थ

हमें "हैव्य अध्वर्यु'=भक्त, यज्ञशील लोगों का सम्पर्कं प्राप्त हो। हमारी सूर्य॑स्ते नक्ष॑त्रैः सह लोकं करणोतु साधुया।॥।४३॥ १. ते=तेरा द्यौः द्युलोक, पृथिवी पृथिवीलोक , अन्तरिक्षम् अन्तरिक्षलोक तथा इस अन्तरिक्षलोक में चलनेवाली वायुः वायु ते छिद्रम् -तेरे शरीर में होनेवाले दोषमात्र को

English

What lustre is like Sûrya's light?

अध्याय २३

श्लोक 29

यद्दे॒वासो॑ ल॒लाम॑गुं॒ प्र वि॑ष्टी॒मिन॒मावि॑षुः ।स॒क्थ्ना दे॑दिश्यते॒ नारी॑ स॒त्यस्या॑क्षि॒भुवो॒ यथा॑

yaddevāso lalāmaguṃ pra viṣṭīminamāviṣuḥ | sakthnā dediśyate nārī satyasyākṣibhuvo yathā

हिन्दी अर्थ

बाह्य द्युलोक आदि की अनुकूलता से हमारे पर, अव्र सब गात्र तथा अस्थि व मज्जा तथा सम्पूर्ण शरीर रोगों करे उपद्रव से रहित व शान्त हो। कः स्विदेकाकी चरति कऽ डं स्विज्जायते पुन॑ः। सूर्य'ऽ एकाकी च॑रति चन्द्रमा जायते पुन॑ः।

English

What lake is equal to the Sea?

अध्याय २३

श्लोक 30

यद्ध॑रि॒णो यव॒मत्ति॒ न पु॒ष्टं प॒शु मन्य॑ते ।शू॒द्रा यदर्य॑जारा॒ न पोषा॑य धनायति

yaddhariṇo yavamatti na puṣṭaṃ paśu manyate | śūdrā yadaryajārā na poṣāya dhanāyati

हिन्दी अर्थ

हम अपराश्चित होकर विचरेगे तो सूर्य की भाँति चमकेगे। मन को विकसित करके अपने विकास को सा्धेगे। वाणी से उत्साह का सञ्चार करेगे तो शरीर एवं पृथिवी को बीज-( वीर्य) -वपन का स्थान बनाते हए ज्ञान व दिव्य गुणों के अंकुरों को प्रादुर्भूत १. स्वित्-भला सूर्यसमम्=सूर्य के समान ज्योतिः प्रकाश किम्=क्या हे? इस प्रश्न

English

What is more spacious than the Earth?

अध्याय २३

श्लोक 31

यद्ध॑रि॒णो यव॒मत्ति॒ न पु॒ष्टं ब॒हु मन्य॑ते ।शू॒द्रो यदर्या॑यै जा॒रो न पोष॒मनु॑ मन्यते

yaddhariṇo yavamatti na puṣṭaṃ bahu manyate | śūdro yadaryāyai jāro na poṣamanu manyate

हिन्दी अर्थ

हम मस्तिष्क को ध्येय वसुओं में सबसे ऊपर रक्खें। सबसे अधिक हमे इसी का ध्यान करना हे। कर्मो में सदा व्याप्त रहकर हम वर्धनशील हो। आधि-व्याधियो से अपने को बचाते हए हम स्निग्ध शरीर. आर्द्र हदय व शोभन मस्तिष्कवाले हो। हम इस बात को न भूलें कि हमारे जीवन मे भी महानिद्रा कौ रात्रि आनी है, जिसमें ये सब भौतिक

English

Brahma is lustre like the Sea.

अध्याय २३

श्लोक 32

द॒धि॒क्राव्णो॑ अकारिषं जि॒ष्णोरश्व॑स्य वा॒जिन॑: ।सु॒र॒भि नो॒ मुखा॑ कर॒त्प्र ण॒ आयू॑ᳪषि तारिषत्

dadhikrāvṇo akāriṣaṃ jiṣṇoraśvasya vājina: | surabhi no mukhā karatpra ṇa āyūṣi tāriṣat

हिन्दी अर्थ

प्रलयकाल के समय ये सब कार्यपदार्थं कारणप्रकृति मे चले जार्पगे, जीव प्रभु की गोद मे सो जार्पँगे। "फिर जन्म न हो' इसके लिए चादिए कि क्रियाशीलता से कामादि शत्रुओं का हम शोषण कर देः ओर अहिंसक बनकर सदा व्यापक कर्मो मे लगे रहे, स्वार्थ से सदा ऊपर उठे रहं ।

English

Now have I glorified with praise strong Dadhikrâvan, conquering steed, Sweet may he make our mouths: may he prolong the days we have to live.

अध्याय २३

श्लोक 33

गा॒य॒त्री त्रि॒ष्टुब्जग॑त्यनु॒ष्टुप्प॒ङ्क्त्या स॒ह ।बृ॒ह॒त्युष्णिहा॑ क॒कुप्सू॒चीभि॑: शम्यन्तु त्वा

gāyatrī triṣṭubjagatyanuṣṭuppaṅktyā saha | bṛhatyuṣṇihā kakupsūcībhi: śamyantu tvā

हिन्दी अर्थ

यज्ञ के आधार अत्र दे। वे अस्सी प्रकार के है, अतः होम भी अस्सीदे। हमारी ज्ञानेन्धियोँ मन ओर बुद्धि सब मिलकर यज्ञो को ऋतु के अनुसार करनेवाले हो। कोऽस्य वेद् भुव॑नस्य नाभिं को द्यावा॑पृथिवीऽअन्तरिक्षम् । कः सूर्यस्य वेद बृहतो जनित्रं को कैद चन्द्रम॑सं यतोजाः ।।५९॥

English

Gâyatrî, Trishtup, Jagatî, and Pankti with Anushtup joined, Brihatî, Kakup, Ushnihâ pacify thee with needle-points!

अध्याय २३

श्लोक 34

द्विप॑दा॒ याश्चतु॑ष्पदा॒स्त्रिप॑दा॒ याश्च॒ षट्प॑दाः ।विच्छ॑न्दा॒ याश्च॒ सच्छ॑न्दाः सू॒चीभि॑: शम्यन्तु त्वा

dvipadā yāścatuṣpadāstripadā yāśca ṣaṭpadāḥ | vicchandā yāśca sacchandāḥ sūcībhi: śamyantu tvā

हिन्दी अर्थ

इस भुवन का बन्धन कहँ है ? द्युलोक, पृथिवीलोक व अन्तरिक्षलोकं क्या है, महान् सूर्य का जन्म कैसे हुआ तथा चन्द्रमा कहाँ से हुआ ठै? ये सव बाते एकमात्र सर्वव्यापक प्रभु के ही ज्ञान का विषय दे। ऋषिः- प्रजापतिः। देवता--समाधाता। छन्द:-विराय्त्रिष्टुप्। स्वरः-थैवतः।

English

Two-footed, those that have four feet, those with three feet and those with five, Metteless, with one metre; these pacify thee with needle-points!

अध्याय २३

श्लोक 35

म॒हाना॑म्न्यो रे॒वत्यो॒ विश्वा॒ आशा॑: प्र॒भूव॑रीः ।मैघी॑र्वि॒द्युतो॒ वाच॑: सू॒चीभि॑: शम्यन्तु त्वा

mahānāmnyo revatyo viśvā āśā: prabhūvarīḥ | maighīrvidyuto vāca: sūcībhi: śamyantu tvā

हिन्दी अर्थ

वे प्रभु "सुभू, स्वयम्भू व प्रथम है। अणुसमुद्र कै अन्दर भी विद्यमान इसमें गर्भं का धारण करते है ओर संसार के सव पदार्थं उत्पन्न हो जाते है। सोम की महिमा सरे प्रभु-मेल होता यक्षत्प्रजाप॑तिसोम॑स्य महिम्नः। जुषतां पिव॑तु सोमःहोतर्यजं।। ६४॥

English

May Mahânâmnîs, Revatîs, all far-spread Regions of the sky, Voices, and lightnings from the cloud pacify thee with needle-points!

अध्याय २३

श्लोक 36

नार्य॑स्ते॒ पत्न्यो॒ लोम॒ विचि॑न्वन्तु मनी॒षया॑ ।दे॒वानां॒ पत्न्यो॒ दिश॑: सू॒चीभि॑: शम्यन्तु त्वा

nāryaste patnyo loma vicinvantu manīṣayā | devānāṃ patnyo diśa: sūcībhi: śamyantu tvā

हिन्दी अर्थ

प्रभु-प्राप्ति के लिए यही मार्ग है कि मनुष्य (क) त्याग की वृत्तिवाला बने तथा (ख) सोम का शरीर में ही रक्षण करनेवाला हो। यत्कामास्ते जुहुमस्तन्नोऽअस्तु वयश््स्यांम॒ पत॑यो रयीणाम् ६५५॥ १. सोम की रक्षा से प्रभु-सम्पर्क करनेवाला आराधना करता है कि है प्रजापते-सव

English

May married dames of human birth skilfully separate thy hair: The Regions, Consorts of the Gods, pacify thee with needle-points!

अध्याय २३

श्लोक 37

र॒ज॒ता हरि॑णी॒: सीसा॒ युजो॑ युज्यन्ते॒ कर्म॑भिः ।अश्व॑स्य वा॒जिन॑स्त्व॒चि सिमा॑: शम्यन्तु॒ शम्य॑न्तीः

rajatā hariṇī: sīsā yujo yujyante karmabhiḥ | aśvasya vājinastvaci simā: śamyantu śamyantīḥ

हिन्दी अर्थ

प्रभु ही सवमें विद्यमान है। है प्रभो! समवृत्ति बनकर हम धन के कभी दास न बन र इसके दास बनकर ही हम हीनमार्ग पर जाते हैँ ओर मांसादि भोजन मेँ प्रवृत्त

English

As lines on the strong Courser's skin may they console and give thee rest.

अध्याय २३

श्लोक 38

कु॒विद॒ङ्ग यव॑मन्तो॒ यव॑ञ्चि॒द्यथा॒ दान्त्य॑नुपू॒र्वं वि॒यूय॑ ।इ॒हेहै॑षां कृणुहि॒ भोज॑नानि॒ ये ब॒र्हिषो॒ नम॑ उक्तिं॒ यज॑न्ति

kuvidaṅga yavamanto yavañcidyathā dāntyanupūrvaṃ viyūya | ihehaiṣāṃ kṛṇuhi bhojanāni ye barhiṣo nama uktiṃ yajanti

हिन्दी अर्थ

प्रभु का ग्रहण अनन्यभाव से प्रभु का भजन करने पर होता हे। चन्द्रमा में प्रभु-दर्शन करते हए हम सचमुच अपने मनो को चन्द्रमा के समान शीतल, ज्योत्स्नावान् नारं, आह्ादमय बनाँ। इस आह्ादमयता के लिए हम स्वार्थं से ऊपर उठे। षिः प्रजापतिः) देवता-परमेवरः। छन्दः-गायत्री। स्वरः--षडजः।।

English

What then? As men whose fields are full of barley reap the ripe corn, removing it in order, So bring the food of these men, bring it hither, who pay the Sacred Grass their spoken homage.

अध्याय २३

श्लोक 39

कस्त्वा छ्य॑ति॒ कस्त्वा॒ विशा॑स्ति॒ कस्ते॒ गात्रा॑णि शम्यति ।क उ॑ ते शमि॒ता क॒विः

kastvā chyati kastvā viśāsti kaste gātrāṇi śamyati | ka u te śamitā kaviḥ

हिन्दी अर्थ

उपासना द्वारा प्रभु को अपने साथ जोड़ना ही योग हे। वे प्रभु महान् है, आरोचमान है, चारों ओर स्थित पदार्थो में विद्यमान हैँ, उसी प्रभु कौ शक्ति सेद्यलोक में युञ्जन्त्य॑स्य काम्या हरी विपक्षसा रथे । शोणा धृष्णु नृवाहसा ।॥।६॥ ६. ये उपासक लोग रथे=शरीररूप रथ में हरी-जानेन्रिय व कर्मन्दरियरूप घखोडौं को

English

Who is the Sage that slaughters thee?

अध्याय २३

श्लोक 40

ऋ॒तव॑स्त ऋतु॒था पर्व॑ शमि॒तारो॒ वि शा॑सतु ।सं॒व॒त्स॒रस्य॒ तेज॑सा श॒मीभि॑: शम्यन्तु त्वा

ṛtavasta ṛtuthā parva śamitāro vi śāsatu | saṃvatsarasya tejasā śamībhi: śamyantu tvā

हिन्दी अर्थ

- सर्वाधिक ध्यान हमें मस्तिष्क का करना है। साधना के द्वारा निरन्तर वृद्धि का यत्न करना है। अपने को आधि-व्याधियों से बचाकर श्रीसम्पन्न होना है तथा प्रभुस्मरण के द्वारा इन शरीरो के परिग्रह से ऊपर उठना ठे। वायुष्ट्वां पचतैरंवत्वसिंतम्री वश्छागैरन्यग्रोधंर्चमसेः श॑ल्मलिर्वृद्छया ।

English

In due time let the seasons as thy Slaughterers divide thy joints, And with the splendour of the Year sacrifice thee with holy rites.

अध्याय २३

श्लोक 41

अ॒र्ध॒मा॒साः परू॑ᳪषि ते॒ मासा॒ आ च्छ्य॑न्तु॒ शम्य॑न्तः ।अ॒हो॒रा॒त्राणि॑ म॒रुतो॒ विलि॑ष्टᳪ सूदयन्तु ते

ardhamāsāḥ parūṣi te māsā ā cchyantu śamyantaḥ | ahorātrāṇi maruto viliṣṭa sūdayantu te

हिन्दी अर्थ

प्राणों द्वारा भोजन के ठीक परिपाक से हम रोगों से बचे रहें। विषयों से अवद्ध रहकर हम उन्नति के विघ्नो का छेदन-भेदन करें। नम्रता से चलते हुए् उत्रति को प्राप्त करके हम सत्य, यश व श्री को धारण करे। गतिशीलता में आनन्द हमारी वृद्धि का कारण बने। हम उत्तम शरीर-रथवाले व शक्तिशाली बनकर धर्मार्थकाममोक्ष चारों का

English

Let the Half-months and let the Months, while sacrificing, flay thy limbs: Let Day and Night and Maruts mend each fault in sacrificing thee.

अध्याय २३

श्लोक 42

दैव्या॑ अध्व॒र्यव॒स्त्वा च्छ्य॑न्तु॒ वि च॑ शासतु ।गात्रा॑णि पर्व॒शस्ते॒ सिमा॑: कृण्वन्तु॒ शम्य॑न्तीः

daivyā adhvaryavastvā cchyantu vi ca śāsatu | gātrāṇi parvaśaste simā: kṛṇvantu śamyantīḥ

हिन्दी अर्थ

देववृत्तिवाले लोग अग्नि-वायु-सूर्य' आदि देवों (प्राकृतिक शक्तियो) का ज्ञान प्राप्त करते है। इनके ज्ञान को अपने यन्त्रादि में विनियुक्त करते हे। अपने हितसाधनो मे इन्दे विनियुक्त करते हुए वे इनपर विजय प्राप्त करते हेँ। ये सब प्राकृतिक शक्तियाँ देवों के लिए हितकर हो जाती है।

English

Let the divine Adhvaryus flay thy body and dissect thy frame, And let the sacrificing lines prepare thy members joint by joint,

अध्याय २३

श्लोक 43

द्यौ॑स्ते पृथि॒व्यन्तरि॑क्षं वा॒युश्छि॒द्रं पृ॑णातु ते ।सूर्य॑स्ते॒ नक्ष॑त्रैः स॒ह लो॒कं कृ॑णोतु साधु॒या

dyauste pṛthivyantarikṣaṃ vāyuśchidraṃ pṛṇātu te | sūryaste nakṣatraiḥ saha lokaṃ kṛṇotu sādhuyā

हिन्दी अर्थ

प्रभु से मिलकर भै, प्रभुकृपा से ! धर्मार्थकाममोक्ष" इन चारों पुरुषार्थो को सिद्ध करूं। अपने को स्वर्गलोक में स्थापित करूं। ' वृषा, वाजी, रेतोधा" प्रभु राजा व प्रजा में रेतस् का आधान करं, अर्थात् प्रभु राजा व प्रजा को शक्तिशाली ना्ँ। ऋषि ः-प्रजापतिः। देवता-न्यायाधीशः। छन्दः- भुरिग्गायत्री। स्वरः-षडजः।

English

May Sky, Earth, Air, and Wind supply each failing and defect of thine: May Sûrya with the Stars of heaven duly prepare a world for thee.

अध्याय २३

श्लोक 44

शं ते॒ परे॑भ्यो॒ गात्रे॑भ्य॒: शम॒स्त्वव॑रेभ्यः ।शम॒स्थभ्यो॑ म॒ज्जभ्य॒: शम्व॑स्तु त॒न्वै तव॑

śaṃ te parebhyo gātrebhya: śamastvavarebhyaḥ | śamasthabhyo majjabhya: śamvastu tanvai tava

हिन्दी अर्थ

राजा राष्ट मेँ व्यभिचार को रोकने के लिए विलासी. पुरुष को उलटा लरकवा दे तथा राष्ट में व्यभिचार की हानियों व संयम के लाभों करे ज्ञान का प्रचार करवाए, जिससे लोगों की मनोवृत्ति मे परिवर्तन किया जा सके। यकासकौ शं कुस्तिकाहलगिति वञ्च॑ति।

English

Well he it with thy bones and with thy marrow and with all thy frame!

अध्याय २३

श्लोक 45

कः स्वि॑देका॒की च॑रति॒ क उ॑ स्विज्जायते॒ पुन॑: ।किᳪ स्वि॑द्धि॒मस्य॑ भेष॒जं किम्वा॒वप॑नं म॒हत्

kaḥ svidekākī carati ka u svijjāyate puna: | ki sviddhimasya bheṣajaṃ kimvāvapanaṃ mahat

हिन्दी अर्थ

राष्ट कौ माता 'प्रजा' है तो पिता "राजा है। ये दोनों मिलकर राष्ट्वृक्ष कौ श्री का वर्धन करते है। राजा राष्ट में से चोरी को कम्मित कर दूर भगा देता हे। ९. है राष्ट्वृक्ष! ते माता च-तेरा निर्माण करनेवाली यह प्रजा, पिता च ते=-ओर तेरा रक्षण करनेवाला यह राजा वृक्षस्य अग्ेतडस राष्ट्वृक्ष के अग्रभाग मे क्रीडतः एक क्रौडक

English

etc., as in verse 9.

अध्याय २३

श्लोक 46

सूर्य॑ एका॒की च॑रति च॒न्द्रमा॑ जायते॒ पुन॑: ।अ॒ग्निर्हि॒मस्य॑ भेष॒जं भूमि॑रा॒वप॑नं म॒हत्

sūrya ekākī carati candramā jāyate puna: | agnirhimasya bheṣajaṃ bhūmirāvapanaṃ mahat

हिन्दी अर्थ

राजा राष्ट मे दण्ड-व्यवस्था को इस प्रकार सुव्यवस्थित रक्खे कि चोर व डाकू दण्ड-भय से कम्पित होकर इस मार्ग को ही छोड् दे। रषिः प्रजापतिः। देवता- विद्धांसः। छन्दः-अनुष्टुप्। स्वरः-गान्धारः। यदेवासों ललामगुं प्र विष्टीमिनमाविंषुः।

English

The Sun moves singly, etc., as in verse 10.

अध्याय २३

श्लोक 47

किᳪ स्वि॒त्सूर्य॑समं॒ ज्योति॒: किᳪ स॑मु॒द्रस॑म॒ᳪ सर॑: ।किᳪ स्वि॑त्पृथि॒व्यै वर्षी॑य॒: कस्य॒ मात्रा॒ न वि॑द्यते

ki svitsūryasamaṃ jyoti: ki samudrasama sara: | ki svitpṛthivyai varṣīya: kasya mātrā na vidyate

हिन्दी अर्थ

दधिक्राव्ण-जिष्णु-अआश्व व वाजी ' पुरुष के मुख से कोई अपशब्द उच्चारित नहीं होता ओर इसे दीर्घजीवन प्राप्त होता है। १. गायत्रीछन्द “गयः प्राणास्तान् तत्रे = प्राणशक्ति कौ रक्षा करना' इस सूचीभिः =सूचना से त्वा शम्यन्तु=तुञ्चे शान्त कररे। गायत्री छन्द का तुञ्े यही उपदेश है कि तु प्राणशक्ति कौ

English

What thing is that which naught can mete?

अध्याय २३

श्लोक 48

ब्रह्म॒ सूर्य॑समं॒ ज्योति॒र्द्यौः स॑मु॒द्रस॑म॒ᳪ सर॑: ।इन्द्र॑: पृथिव्यै॒ वर्षी॑या॒न् गोस्तु मात्रा॒ न वि॑द्यते

brahma sūryasamaṃ jyotirdyauḥ samudrasama sara: | indra: pṛthivyai varṣīyān gostu mātrā na vidyate

हिन्दी अर्थ

- गृहिणी उत्तम गुण-कर्म व स्वभाव से घर को स्वर्ग बनानेवाली होती है। १. गतमन्त्र के अनुसार घर के शान्त वातावरण में ही मनुष्य आध्यात्मिक दृष्टि से उन्नति कर सकता है। घर स्वर्ग बनेगा तो वहो देवों का निवास तो होगा ही। ये दिव्य को चित्=निश्चय से यथा=जेसे अनुपूर्वम्क्रमशः एक ओर से वियूय कुच-कुक अलग

English

Heaven is a flood to match the Sea. Indra is vaster than the Earth. Beyond all measure is the Cow.

अध्याय २३

श्लोक 49

पृ॒च्छामि॑ त्वा चि॒तये॑ देवसख॒ यदि॒ त्वमत्र॒ मन॑सा ज॒गन्थ॑ ।येषु॒ विष्णु॑स्त्रि॒षु प॒देष्वेष्ट॒स्तेषु॒ विश्वं॒ भुव॑न॒मा वि॑वेशा

pṛcchāmi tvā citaye devasakha yadi tvamatra manasā jagantha | yeṣu viṣṇustriṣu padeṣveṣṭasteṣu viśvaṃ bhuvanamā viveśā

हिन्दी अर्थ

एक-एक कोश को चिन्तनपूर्वक अलग करते हुए हम आत्मरूप को देख पाते है। इस आत्मरूप का दर्शन तभी होगा जब हम हदय को वासनाशून्य बनारणँगे। हृदय की पवित्रता प्रभु करे प्रति नमन से होगी। प्रभु-दर्छक के प्रति प्रभु

English

Friend of the Gods, I ask, for information, if thou in spirit hast obtained the knowledge, Hath Vishnu this whole Universe pervaded in the three steps wherein the God is worshipped?

अध्याय २३

श्लोक 50

अपि॒ तेषु॑ त्रि॒षु प॒देष्व॑स्मि॒ येषु॒ विश्वं॒ भुव॑नमा वि॒वेश॑ ।स॒द्यः पर्ये॑मि पृथि॒वीमु॒त द्यामेके॒नाङ्गे॑न दि॒वो अ॒स्य पृ॒ष्ठम्

api teṣu triṣu padeṣvasmi yeṣu viśvaṃ bhuvanamā viveśa | sadyaḥ paryemi pṛthivīmuta dyāmekenāṅgena divo asya pṛṣṭham

हिन्दी अर्थ

अनुकूल होकर हमारे शरीरों को निर्दोष करें तथा हमारी दुष्टिशक्ति को उत्तम करके हमारे संसार को सुन्दर बनार्। रषिः प्रजापतिः। देवता-राजा। छन्द ः-उष्णिक््। स्वरः-ऋषभः। ९. वाह्य संसार कौ अनुकूलता होने पर यह शरीररूप छोटा पिण्ड भी बड़ा स्वस्थ

English

I also am in those three steps of Vishnu wherewith this Universe he permeated. The earth and heaven I circle in a moment and this heaven's summit with a single organ.

अध्याय २३

श्लोक 51

केष्व॒न्तः पुरु॑ष॒ आ वि॑वेश॒ कान्य॒न्तः पुरु॑षे॒ अर्पि॑तानि ।ए॒तद्ब्र॑ह्म॒न्नुप॑ वल्हामसि त्वा॒ किᳪ स्वि॑न्न॒: प्रति॑ वोचा॒स्यत्र॑

keṣvantaḥ puruṣa ā viveśa kānyantaḥ puruṣe arpitāni | etadbrahmannupa valhāmasi tvā ki svinna: prati vocāsyatra

हिन्दी अर्थ

प्रभु सूर्यं के समान ज्योतिर्मय है। हमे भी ज्योतिर्मय बनकर प्रभु-जेसा बनना टे। मेष्यो से अन्तरिक्षीय समुद्र बना है। हमे भी वीर्यरूप जलो की ऊर्ध्वगति कर द्युलोकरूप मस्तिष्क मे ज्ञानजल को भरना है। ऋतम्भरा प्रज्ञा का विकास करना है। हम असुरो के संहार करनेवाले इन्द्र॒ बनकर इस शरीर मे सुखों की वर्षा कर सकते है। जितना भी अधिक

English

What are the things which Purusha hath entered? What things hath Purusha contained within him? This riddle we propound to thee, O Brahman. Why dost thou give no answer to my question?

अध्याय २३

श्लोक 52

प॒ञ्चस्व॒न्तः पुरु॑ष॒ आ वि॑वेश॒ तान्य॒न्तः पुरु॑षे॒ अर्पि॑तानि ।ए॒तत्त्वात्र॑ प्रतिमन्वा॒नो अ॑स्मि॒ न मा॒यया॑ भव॒स्युत्त॑रो॒ मत्

pañcasvantaḥ puruṣa ā viveśa tānyantaḥ puruṣe arpitāni | etattvātra pratimanvāno asmi na māyayā bhavasyuttaro mat

हिन्दी अर्थ

हम पचो के अन्द्र प्रविष्ट व॒ अन्तः प्रविष्ट होकर र्पोचों का धारण करनेवाले आत्मस्वरूप का मनन करनेवाले वनें। सूचना- यहो प्रश्नोत्तर मेँ ज्ञानविषयक्र स्वस्थ स्पर्धा द्रष्टव्य हे। उदराता का ललकारना व ब्रह्मा का चैलेज्ज को स्वीकार करना सचमुच अभिनयात्मक है। एेसी ज्ञान- चर्चां ही

English

Within five things hath Purusha found entrance; these Purusha hath within himself connected. This is the thought which I return in answer. Thou art not my superior in wisdom.

अध्याय २३

श्लोक 53

का स्वि॑दासीत्पू॒र्वचि॑त्ति॒: किᳪ स्वि॑दासीद् बृ॒हद्वय॑: ।का स्वि॑दासीत्पिलिप्पि॒ला का स्वि॑दासीत्पिशङ्गि॒ला

kā svidāsītpūrvacitti: ki svidāsīd bṛhadvaya: | kā svidāsītpilippilā kā svidāsītpiśaṅgilā

हिन्दी अर्थ

हम पचो के अन्द्र प्रविष्ट व॒ अन्तः प्रविष्ट होकर र्पोचों का धारण करनेवाले आत्मस्वरूप का मनन करनेवाले वनें। सूचना- यहो प्रश्नोत्तर मेँ ज्ञानविषयक्र स्वस्थ स्पर्धा द्रष्टव्य हे। उदराता का ललकारना व ब्रह्मा का चैलेज्ज को स्वीकार करना सचमुच अभिनयात्मक है। एेसी ज्ञान- चर्चां ही

English

What was the antecedent thought? etc., as in verse 11.

अध्याय २३

श्लोक 54

द्यौ॑रासीत्पू॒र्वचि॑त्ति॒रश्व॑ आसीद् बृ॒हद्वय॑: ।अवि॑रासीत्पिलिप्पि॒ला रात्रि॑रासीत्पिशङ्गि॒ला

dyaurāsītpūrvacittiraśva āsīd bṛhadvaya: | avirāsītpilippilā rātrirāsītpiśaṅgilā

हिन्दी अर्थ

हम पचो के अन्द्र प्रविष्ट व॒ अन्तः प्रविष्ट होकर र्पोचों का धारण करनेवाले आत्मस्वरूप का मनन करनेवाले वनें। सूचना- यहो प्रश्नोत्तर मेँ ज्ञानविषयक्र स्वस्थ स्पर्धा द्रष्टव्य हे। उदराता का ललकारना व ब्रह्मा का चैलेज्ज को स्वीकार करना सचमुच अभिनयात्मक है। एेसी ज्ञान- चर्चां ही

English

Heaven was the antecedent thought, etc., as in 12.

अध्याय २३

श्लोक 55

का ई॑मरे पिशङ्गि॒ला का ईं॑ कुरुपिशङ्गि॒ला ।क ई॑मा॒स्कन्द॑मर्षति॒ क ईं॒ पन्थां॒ वि स॑र्पति

kā īmare piśaṅgilā kā īṃ kurupiśaṅgilā | ka īmāskandamarṣati ka īṃ panthāṃ vi sarpati

हिन्दी अर्थ

हम पचो के अन्द्र प्रविष्ट व॒ अन्तः प्रविष्ट होकर र्पोचों का धारण करनेवाले आत्मस्वरूप का मनन करनेवाले वनें। सूचना- यहो प्रश्नोत्तर मेँ ज्ञानविषयक्र स्वस्थ स्पर्धा द्रष्टव्य हे। उदराता का ललकारना व ब्रह्मा का चैलेज्ज को स्वीकार करना सचमुच अभिनयात्मक है। एेसी ज्ञान- चर्चां ही

English

Who, tell me, is the yellowish she? Who is the darkly- yellowish? Who moves with rapid spring and bound? Who glides and winds along the path?

अध्याय २३

श्लोक 56

अ॒जारे॑ पिशङ्गि॒ला श्वा॒वित्कु॑रुपिशङ्गि॒ला ।श॒श आ॒स्कन्द॑मर्ष॒त्यहि॒: पन्थां॒ वि स॑र्पति

ajāre piśaṅgilā śvāvitkurupiśaṅgilā | śaśa āskandamarṣatyahi: panthāṃ vi sarpati

हिन्दी अर्थ

हम पचो के अन्द्र प्रविष्ट व॒ अन्तः प्रविष्ट होकर र्पोचों का धारण करनेवाले आत्मस्वरूप का मनन करनेवाले वनें। सूचना- यहो प्रश्नोत्तर मेँ ज्ञानविषयक्र स्वस्थ स्पर्धा द्रष्टव्य हे। उदराता का ललकारना व ब्रह्मा का चैलेज्ज को स्वीकार करना सचमुच अभिनयात्मक है। एेसी ज्ञान- चर्चां ही

English

The she-goat, Sir, is yellowish, dark-yellowish is the porcupine. The hare moves swift with leap and bound: the snake creeps winding on the path.

अध्याय २३

श्लोक 57

कत्य॑स्य वि॒ष्ठाः कत्य॒क्षरा॑णि॒ कति॒ होमा॑सः कति॒धा समि॑द्धः ।य॒ज्ञस्य॑ त्वा वि॒दथा॑ पृच्छ॒मत्र॒ कति॒ होता॑र ऋतु॒शो य॑जन्ति

katyasya viṣṭhāḥ katyakṣarāṇi kati homāsaḥ katidhā samiddhaḥ | yajñasya tvā vidathā pṛcchamatra kati hotāra ṛtuśo yajanti

हिन्दी अर्थ

हम पचो के अन्द्र प्रविष्ट व॒ अन्तः प्रविष्ट होकर र्पोचों का धारण करनेवाले आत्मस्वरूप का मनन करनेवाले वनें। सूचना- यहो प्रश्नोत्तर मेँ ज्ञानविषयक्र स्वस्थ स्पर्धा द्रष्टव्य हे। उदराता का ललकारना व ब्रह्मा का चैलेज्ज को स्वीकार करना सचमुच अभिनयात्मक है। एेसी ज्ञान- चर्चां ही

English

How many different forms hath this, how many syllables, burnt-oblations, brands for kindling? Here, of the rites of sacrifice I ask thee. How many Hotars in due season worship?

अध्याय २३

श्लोक 58

षड॑स्य वि॒ष्ठाः श॒तम॒क्षरा॑ण्यशी॒तिर्होमा॑: स॒मिधो॑ ह ति॒स्रः ।य॒ज्ञस्य॑ ते वि॒दथा॒ प्र ब्र॑वीमि स॒प्त होता॑र ऋतु॒शो य॑जन्ति

ṣaḍasya viṣṭhāḥ śatamakṣarāṇyaśītirhomā: samidho ha tisraḥ | yajñasya te vidathā pra bravīmi sapta hotāra ṛtuśo yajanti

हिन्दी अर्थ

हम पचो के अन्द्र प्रविष्ट व॒ अन्तः प्रविष्ट होकर र्पोचों का धारण करनेवाले आत्मस्वरूप का मनन करनेवाले वनें। सूचना- यहो प्रश्नोत्तर मेँ ज्ञानविषयक्र स्वस्थ स्पर्धा द्रष्टव्य हे। उदराता का ललकारना व ब्रह्मा का चैलेज्ज को स्वीकार करना सचमुच अभिनयात्मक है। एेसी ज्ञान- चर्चां ही

English

Sixfold its form, its syllables a hundred, eighty burnt-offerings, just three brands for kindling. To thee I tell the rites of sacrificing. Seven Hotars worship in appointed season.

अध्याय २३

श्लोक 59

को अ॒स्य वे॑द॒ भुव॑नस्य॒ नाभिं॒ को द्यावा॑पृथि॒वी अ॒न्तरि॑क्षम् ।कः सूर्य॑स्य वेद बृह॒तो ज॒नित्रं॒ को वे॑द च॒न्द्रम॑सं यतो॒जाः

ko asya veda bhuvanasya nābhiṃ ko dyāvāpṛthivī antarikṣam | kaḥ sūryasya veda bṛhato janitraṃ ko veda candramasaṃ yatojāḥ

हिन्दी अर्थ

हम पचो के अन्द्र प्रविष्ट व॒ अन्तः प्रविष्ट होकर र्पोचों का धारण करनेवाले आत्मस्वरूप का मनन करनेवाले वनें। सूचना- यहो प्रश्नोत्तर मेँ ज्ञानविषयक्र स्वस्थ स्पर्धा द्रष्टव्य हे। उदराता का ललकारना व ब्रह्मा का चैलेज्ज को स्वीकार करना सचमुच अभिनयात्मक है। एेसी ज्ञान- चर्चां ही

English

Who knoweth the heaven, the earth, and the wide air between them? Who knows the birthplace of the mighty Sûrya? Who knows the Moon, whence he was generated?

अध्याय २३

श्लोक 60

वेदा॒हम॒स्य भुव॑नस्य॒ नाभिं॒ वेद॒ द्यावा॑पृथि॒वी अ॒न्तरि॑क्षम् ।वेद॒ सूर्य॑स्य बृह॒तो ज॒नित्र॒मथो॑ वेद च॒न्द्रम॑सं यतो॒जाः

vedāhamasya bhuvanasya nābhiṃ veda dyāvāpṛthivī antarikṣam | veda sūryasya bṛhato janitramatho veda candramasaṃ yatojāḥ

हिन्दी अर्थ

हम पचो के अन्द्र प्रविष्ट व॒ अन्तः प्रविष्ट होकर र्पोचों का धारण करनेवाले आत्मस्वरूप का मनन करनेवाले वनें। सूचना- यहो प्रश्नोत्तर मेँ ज्ञानविषयक्र स्वस्थ स्पर्धा द्रष्टव्य हे। उदराता का ललकारना व ब्रह्मा का चैलेज्ज को स्वीकार करना सचमुच अभिनयात्मक है। एेसी ज्ञान- चर्चां ही

English

I know the centre of the world about us. I know heaven, earth, and the wide air between them. I know the birthplace of the mighty Sûrya. I know the Moon, whence he was generated.

अध्याय २३

श्लोक 61

पृ॒च्छामि॑ त्वा॒ पर॒मन्तं॑ पृथि॒व्याः पृ॒च्छामि॒ यत्र॒ भुव॑नस्य॒ नाभि॑: ।पृ॒च्छामि॑ त्वा॒ वृष्णो॒ अश्व॑स्य॒ रेत॑: पृ॒च्छामि॑ वा॒चः प॑र॒मं व्यो॑म

pṛcchāmi tvā paramantaṃ pṛthivyāḥ pṛcchāmi yatra bhuvanasya nābhi: | pṛcchāmi tvā vṛṣṇo aśvasya reta: pṛcchāmi vācaḥ paramaṃ vyoma

हिन्दी अर्थ

हम पचो के अन्द्र प्रविष्ट व॒ अन्तः प्रविष्ट होकर र्पोचों का धारण करनेवाले आत्मस्वरूप का मनन करनेवाले वनें। सूचना- यहो प्रश्नोत्तर मेँ ज्ञानविषयक्र स्वस्थ स्पर्धा द्रष्टव्य हे। उदराता का ललकारना व ब्रह्मा का चैलेज्ज को स्वीकार करना सचमुच अभिनयात्मक है। एेसी ज्ञान- चर्चां ही

English

I ask thee of the earth's extremest limit, where is the centre of the world, I ask thee. I ask thee of the Stallion's genial humour, I ask of highest heaven where Speech abideth.

अध्याय २३

श्लोक 62

इ॒यं वेदि॒: परो॒ अन्त॑: पृथि॒व्या अ॒यं य॒ज्ञो भुव॑नस्य॒ नाभि॑: ।अ॒यᳪ सोमो॒ वृष्णो॒ अश्व॑स्य॒ रेतो॑ ब्र॒ह्मायं वा॒चः प॑र॒मं व्यो॑म

iyaṃ vedi: paro anta: pṛthivyā ayaṃ yajño bhuvanasya nābhi: | aya somo vṛṣṇo aśvasya reto brahmāyaṃ vācaḥ paramaṃ vyoma

हिन्दी अर्थ

हम पचो के अन्द्र प्रविष्ट व॒ अन्तः प्रविष्ट होकर र्पोचों का धारण करनेवाले आत्मस्वरूप का मनन करनेवाले वनें। सूचना- यहो प्रश्नोत्तर मेँ ज्ञानविषयक्र स्वस्थ स्पर्धा द्रष्टव्य हे। उदराता का ललकारना व ब्रह्मा का चैलेज्ज को स्वीकार करना सचमुच अभिनयात्मक है। एेसी ज्ञान- चर्चां ही

English

This altar is the earth's extremest limit; this sacrifice of ours is the world's centre. This Soma is the Stallion's genial humour, this Brahman highest heaven where Speech abideth.

अध्याय २३

श्लोक 63

सु॒भूः स्व॑य॒म्भूः प्र॑थ॒मोऽन्तर्म॑ह॒त्य॒र्ण॒वे ।द॒धे ह॒ गर्भ॑मृ॒त्वियं॒ यतो॑ जा॒तः प्र॒जाप॑तिः

subhūḥ svayambhūḥ prathamo'ntarmahatyarṇave | dadhe ha garbhamṛtviyaṃ yato jātaḥ prajāpatiḥ

हिन्दी अर्थ

हम पचो के अन्द्र प्रविष्ट व॒ अन्तः प्रविष्ट होकर र्पोचों का धारण करनेवाले आत्मस्वरूप का मनन करनेवाले वनें। सूचना- यहो प्रश्नोत्तर मेँ ज्ञानविषयक्र स्वस्थ स्पर्धा द्रष्टव्य हे। उदराता का ललकारना व ब्रह्मा का चैलेज्ज को स्वीकार करना सचमुच अभिनयात्मक है। एेसी ज्ञान- चर्चां ही

English

The Strong, the Self-existent One, the First, within the mighty flood Laid down the timely embryo from which Prajâpati was born.

अध्याय २३

श्लोक 64

होता॑ यक्षत्प्र॒जाप॑ति॒ᳪ सोम॑स्य महि॒म्नः ।जु॒षतां॒ पिब॑तु॒ सोम॒ᳪ होत॒र्यज॑

hotā yakṣatprajāpati somasya mahimnaḥ | juṣatāṃ pibatu soma hotaryaja

हिन्दी अर्थ

हम पचो के अन्द्र प्रविष्ट व॒ अन्तः प्रविष्ट होकर र्पोचों का धारण करनेवाले आत्मस्वरूप का मनन करनेवाले वनें। सूचना- यहो प्रश्नोत्तर मेँ ज्ञानविषयक्र स्वस्थ स्पर्धा द्रष्टव्य हे। उदराता का ललकारना व ब्रह्मा का चैलेज्ज को स्वीकार करना सचमुच अभिनयात्मक है। एेसी ज्ञान- चर्चां ही

English

Let the Hotar sacrifice to Prajâpati from the Mahiman-Soma. Let him accept. Let him drink the Soma. Hotar, sacrifice.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Yajur Veda — Chapter 23
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

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पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

Numbering follows the imported source and may differ from other editions.