Yajur Veda· Yajurveda Saṁhitā
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अध्याय 20 / 40

Adhyāya 20

अध्याय 20

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पूर्ण अध्याय पाठ89 श्लोक

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अध्याय २०

श्लोक 1

क्ष॒त्रस्य॒ योनि॑रसि क्ष॒त्रस्य॒ नाभि॑रसि ।मा त्वा॑ हिᳪसी॒न्मा मा॑ हिᳪसीः

kṣatrasya yonirasi kṣatrasya nābhirasi | mā tvā hisīnmā mā hisīḥ

हिन्दी अर्थ

हम बल के उत्पत्ति-स्थान व बल का केन्द्र बनने का प्रयत्न करे। यह बल का केन्द्र बनना हमें रोगो मे फंसने से बचाए्। इसी उदेश्य से हम प्रभु का सदा स्मरण करे। १. गतमन्त्र का क्षत्र का केन्द्र" बननेवाला व्यक्ति निषसाद निश्चय से व नम्रता कै साथ सिंहासन पर बैठता है। २. धृतव्रतः यह त्रत का धारण करता है। ' प्रजारक्षण' ही

English

com The Texts of the White Yajurveda, tr. Ralph T.H. Griffith, [1899], BIRTH PLACE of princely power art thou: centre art thou of princely power. Harm not thyself: do me no harm.

अध्याय २०

श्लोक 2

नि ष॑साद घृ॒तव्र॑तो॒ वरु॑णः प॒स्त्यास्वा ।साम्रा॑ज्याय सु॒क्रतु॑: ।मृ॒त्योः पा॑हि वि॒द्योत्पा॑हि

ni ṣasāda ghṛtavrato varuṇaḥ pastyāsvā | sāmrājyāya sukratu: | mṛtyoḥ pāhi vidyotpāhi

हिन्दी अर्थ

प्रजारक्षण के व्रत को लेकर राजा गदी पर बेठे। वह प्रज्ञापूर्वक कर्म करनेवाला हो। राष्ट को रोगों से होनेवाली मृत्यु से बचाए तथा विद्युत्पतन आदि आधिहैविक आपत्तियों से भी बचाए। देवस्य त्वा सवितुः प्र॑स॒व ऽश्विनोर्बाहभ्यौ पूष्णो हस्ताभ्याम् ।

English

Varuna, Law's maintainer, hath sat down, etc., as in X. 27. Save me from death. Save me from lightning.

अध्याय २०

श्लोक 3

दे॒वस्य॑ त्वा सवि॒तुः प्र॑स॒वेऽश्विनो॑र्बा॒हुभ्यां॑ पू॒ष्णो हस्ता॑भ्याम् ।अ॒श्विनोर्भैष॑ज्येन॒ तेज॑से ब्रह्मवर्च॒साया॒भि षि॑ञ्चामि॒ सर॑स्वत्यै॒ भैष॑ज्येन वी॒र्या॒या॒न्नाद्या॑या॒भि षि॑ञ्चा॒मीन्द्र॑स्येन्द्रि॒येण॒ बला॑य श्रियै॒ यश॑से॒ऽभि षि॑ञ्चामि

devasya tvā savituḥ prasave'śvinorbāhubhyāṃ pūṣṇo hastābhyām | aśvinorbhaiṣajyena tejase brahmavarcasāyābhi ṣiñcāmi sarasvatyai bhaiṣajyena vīryāyānnādyāyābhi ṣiñcāmīndrasyendriyeṇa balāya śriyai yaśase'bhi ṣiñcāmi

हिन्दी अर्थ

अभिषेक के योग्य राजा वह है जो-(क) परमेश्वर की अनुज्ञा में चलता हे, (ख) अपने प्राणापान के प्रयत्न से अपनी आवश्यकताएं पूर्ण करता है, (ग) पोषण से अधिक वस्तु का ग्रहण नहीं करता, (घ) प्राणापान के शक्तिवर्धन से तेजस्वी व ब्रह्मवर्चस्वी वना है, (ङ) ज्ञान से अपने को पवित्र करके वीर्यसम्पन्न तथा प्रज्वलित

English

Thee, by the radiant Savitar's impulsion, with arms of Asvins, with the hands of Pûshan, With leech-craft of the Asvins, I besprinkle for splendour, for the lustre of a Brâhman; With leech-craft of Sarasvatî, besprinkle for manly vigour and for food to feed thee; Besprinkle thee, by special power of Indra, for strength of body and for fame and glory.

अध्याय २०

श्लोक 4

को॑ऽसि कत॒मो॒ऽसि॒ कस्मै॑ त्वा॒ काय॑ त्वा ।सुश्लो॑क॒ सुम॑ङ्गल॒ सत्य॑राजन्

ko'si katamo'si kasmai tvā kāya tvā | suśloka sumaṅgala satyarājan

हिन्दी अर्थ

राजा स्वयं प्रसन्नता के स्वभाववाला हो, प्रजा को प्रसन्न करनेवाला हो। इसी कारण उसका अभिषेक किया गया है। वह उत्तम शासन के कारण यशस्वी बने, प्रजा का मङ्गल करे ओर सत्य से चमक उठे, सत्य से ही सबका शासन करे। शिरो मे श्रीर्यशो मुखं त्विषिः केशांश्च श्मश्रुणि ।

English

Thou art Ka. Noblest Ka art thou. Thee for the state and rank of Ka. Sumangala! Susloka! Satyarâjan!

अध्याय २०

श्लोक 5

शिरो॑ मे॒ श्रीर्यशो॒ मुखं॒ त्विषि॒: केशा॑श्च॒ श्मश्रू॑णि ।राजा॑ मे प्रा॒णो अ॒मृत॑ᳪ स॒म्राट् चक्षु॑र्वि॒राट् श्रोत्र॑म्

śiro me śrīryaśo mukhaṃ tviṣi: keśāśca śmaśrūṇi | rājā me prāṇo amṛta samrāṭ cakṣurvirāṭ śrotram

हिन्दी अर्थ

राजा ब्रत लेता है कि मै (क) बल व इन्द्रिय-शक्ति को ही अपनी भुजा समञ्खंगा। (ख) कर्म व कर्मजनित शक्ति को हाथ समञ्खंगा तथा (ग) आत्मिक बल व क्षात्रबल को ही उरःस्थनीय मानँगा। १. गतमन्त्र के व्रतो के अनुसार अपने जीवन का सुन्दर परिपाक करके राष्ट के प्रति

English

My head be grace, my mouth be fame, my hair and beard be brilliant sheen! My breath be King and deathlessness, mine eye Sole Lord, mine ear the Prince!

अध्याय २०

श्लोक 6

जि॒ह्वा मे॑ भ॒द्रं वाङ्महो॒ मनो॑ म॒न्युः स्व॒राड् भाम॑: ।मोदा॑: प्रमो॒दा अ॒ङ्गुली॒रङ्गा॑नि मि॒त्रं मे॒ सह॑:

jihvā me bhadraṃ vāṅmaho mano manyuḥ svarāḍ bhāma: | modā: pramodā aṅgulīraṅgāni mitraṃ me saha:

हिन्दी अर्थ

प्रजा राष्ट्-शरीर के विविध अङ्ग है। राष्ट स्वयं इस शरीर की रीदढ की हड्डी है। राजा प्रजा को अपने शरीर के अङ्कं के समान समञ्जता है। जङ्घ॑भ्यां पद्धयां धर्मो"ऽस्मि विशि राजा प्रतिष्ठितः २॥ १. राजा ही कहता है कि चित्तम् स्मृति- प्रभु का स्मरण, अपने कर्तव्य का स्मरण

English

My tongue be bliss, my voice be might, my mind be wrath, my rage self-lord! Joys be my fingers, and delight my members, conquering strength my friend!

अध्याय २०

श्लोक 7

बा॒हू मे॒ बल॑मिन्द्रि॒यᳪ हस्तौ॑ मे॒ कर्म॑ वी॒र्य॒म् ।आ॒त्मा क्ष॒त्रमुरो॒ मम॑

bāhū me balamindriya hastau me karma vīryam | ātmā kṣatramuro mama

हिन्दी अर्थ

राजा अपने जीवन में 'चित्त-विज्ञान-अचिति (पूजा), भसत् (प्रकाश), आनन्द-नन्द-भग तथा सौभाग्य" का समन्वय करके अपने धन व श्रम से प्रजा का धारक लने ओर प्रजा के जीवन को व्यवस्थित व दीप्त बनाए। द्यावापृथिव्योः प्रतिं तिष्ठामि यज्ञे ॥९०॥

English

Let my two arms be Indra's power, my hands be deed of manly might, my soul and breast be princely rule! neck

अध्याय २०

श्लोक 8

पृ॒ष्ठीर्मे॑ रा॒ष्ट्रमु॒दर॒मᳪसौ॑ ग्री॒वाश्च॒ श्रोणी॑ ।ऊ॒रू अ॑र॒त्नी जानु॑नी॒ विशो॒ मेऽङ्गा॑नि स॒र्वत॑:

pṛṣṭhīrme rāṣṭramudaramasau grīvāśca śroṇī | ūrū aratnī jānunī viśo me'ṅgāni sarvata:

हिन्दी अर्थ

मै "क्षत्र-राष्टर्-अश्व-गौ-प्रत्यङ्क- चित्त. प्राण पुष्ट, द्यावापृथिवी व यज्ञ मे प्रतिष्ठित होॐँ। यै " वश्यविश्व, पशुमान्, आधिव्यधिरहित- श्रीमान् व यज्ञकर्ता" बनू। त्रया देवाऽएकादश त्रयस्िश्शाः सुराध॑सः। चुहस्पतिंपुरोहिता देवस्य॑ सवितुः सवे । देवा देवैरवन्तु मा ।९९॥

English

My ribs be royal government, my belly, shoulders, neck, and hips, Thighs, elbows, knees, the people, yea, my members universally!

अध्याय २०

श्लोक 9

नाभि॑र्मे चि॒त्तं वि॒ज्ञानं॑ पा॒युर्मेऽप॑चितिर्भ॒सत् । आ॒न॒न्द॒न॒न्दावा॒ण्डौ मे॒ भग॒: सौभा॑ग्यं॒ पस॑: ।जङ्घा॑भ्यां प॒द्भ्यां धर्मो॑ऽस्मि वि॒शि राजा॒ प्रति॑ष्ठितः

nābhirme cittaṃ vijñānaṃ pāyurme'pacitirbhasat | ānandanandāvāṇḍau me bhaga: saubhāgyaṃ pasa: | jaṅghābhyāṃ padbhyāṃ dharmo'smi viśi rājā pratiṣṭhitaḥ

हिन्दी अर्थ

तेतीस देव मेरे लिए सुराधस् हों, ये मेरी रक्षा करे। वषट कारैर्व'षट्काराऽ आद्टुतिथिरांतयो मे कामान्त्समंर्धयन्तु भूः स्वाह।। १२॥ १. गतमन्त्र के प्रथमाः प्रथम स्थान में स्थित परृथिवीस्थ ग्यारह देव द्वितीयैः द्वितीय स्थान में स्थित अन्तरिक्षस्थ ग्यारह देवों के साथ मे=मेरे कामान्-इष्टो को समर्धयन्तु-समृद्ध

English

My navel intellect, etc., etc. ... ... ... ... Duty am I in legs and feet, established King among the folk.

अध्याय २०

श्लोक 11

प्रति॑ क्ष॒त्रे प्रति॑ तिष्ठामि रा॒ष्ट्रे प्रत्यश्वे॑षु॒ प्रति॑ तिष्ठामि॒ गोषु॑ ।प्रत्यङ्गे॑षु॒ प्रति॑ तिष्ठाम्या॒त्मन् प्रति॑ प्रा॒णेषु॒ प्रति॑ तिष्ठामि पु॒ष्टे प्रति॒ द्यावा॑पृथि॒व्योः प्रति॑ तिष्ठामि य॒ज्ञे।। १ ०।।त्र॒या दे॒वा एका॑दश त्रयस्त्रि॒ᳪशाः सु॒राध॑सः ।बृह॒स्पति॑पुरोहिता दे॒वस्य॑ सवि॒तुः स॒वे । दे॒वा दे॒वैर॑वन्तु मा

prati kṣatre prati tiṣṭhāmi rāṣṭre pratyaśveṣu prati tiṣṭhāmi goṣu | pratyaṅgeṣu prati tiṣṭhāmyātman prati prāṇeṣu prati tiṣṭhāmi puṣṭe prati dyāvāpṛthivyoḥ prati tiṣṭhāmi yajñe|| 1 0|| trayā devā ekādaśa trayastriśāḥ surādhasaḥ | bṛhaspatipurohitā devasya savituḥ save | devā devairavantu mā

हिन्दी अर्थ

मेरा जीवन देवों की कृपा से समृद्ध-काम हो। मैं स्वस्थ बनू, प्रभु के प्रति १. मम लोमानि प्रयत्तिः=मेरे बाल प्रकृष्ट यत्नवाले है। (मम लोमस्वपि प्रयत्नः) मेरे एक-एक लोम मेँ प्रयत्न कौ भावना है। २. मे त्वक् =मेरी त्वचा आनत्तिः= नम्रता है तथा आगतिः = क्रियाशीलता हे। नतिः= नम्रता आनतिः=सब दुष्टिकोणों से नम्रता। आ-गतिः=

English

May Deities, eleven threes, the three and thirty bounteous Ones Whose House-Priest is Brihaspati, by impulse of bright Savitar, the Gods protect me with the Gods.

अध्याय २०

श्लोक 12

प्र॒थ॒मा द्वि॒तीयै॑र्द्वि॒तीया॑स्तृ॒तीयै॑स्तृ॒तीया॑: स॒त्येन॑ स॒त्यं य॒ज्ञेन॑ य॒ज्ञो यजु॑र्भि॒र्यजू॑ᳪषि॒ साम॑भि॒: सामा॑न्यृ॒ग्भिरृच॑: पुरोऽनुवा॒क्या॒भिः पुरोऽनुवा॒क्या॒ या॒ज्या॒भिर्या॒ज्या॒ वषट्का॒रैर्व॑षट्का॒रा आहु॑तिभि॒राहु॑तयो मे॒ कामा॒न्त्सम॑र्धयन्तु॒ भूः स्वाहा॑

prathamā dvitīyairdvitīyāstṛtīyaistṛtīyā: satyena satyaṃ yajñena yajño yajurbhiryajūṣi sāmabhi: sāmānyṛgbhirṛca: puro'nuvākyābhiḥ puro'nuvākyā yājyābhiryājyā vaṣaṭkārairvaṣaṭkārā āhutibhirāhutayo me kāmāntsamardhayantu bhūḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

मेरे जीवन में प्रयत्न (प्रयति), नम्रता (आनति), क्रियाशीलता (आगति) आचार्यो के समीप नम्रता से उपस्थान (उपनति)-ये सब बातें है। परिणामतः मेँ वसुओं को यदवा देवहेडनं देवांसश्चकमा वयम् । अग्निर्मा तस्मादेन॑सो विश्वान्मुञ्चत्वः हं सः।। ९४॥।

English

May the first Gods with the second, the second with the third, the third with Truth, Truth with Sacrifice, Sacrifice with sacrificial texts, sacrificial texts with Sâmans, Sâmans with praise-verses, praise-verses with fore and after-sentences. fore-sentences with inviting-texts, inviting-texts with Vashat-calls, Vashat calls with oblations, and oblations, fulfil my desires, Earth! All-hail!

अध्याय २०

श्लोक 13

लोमा॑नि॒ प्रय॑ति॒र्मम॒ त्वङ्म॒ आन॑ति॒राग॑तिः ।मा॒ᳪसं म॒ उप॑नति॒र्वस्वस्थि॑ म॒ज्जा म॒ आन॑तिः

lomāni prayatirmama tvaṅma ānatirāgatiḥ | māsaṃ ma upanatirvasvasthi majjā ma ānatiḥ

हिन्दी अर्थ

मेरे अन्दर आगे बने कौ भावना हो, यह भावना मुद्ध मार्गभ्रष्ट होने से बचाए ओर मैं पाप व कष्टों से बचा रहू। १. यदि =यदि दिवा=दिन में ओर यदि=अथवा नक्तम्=रात्रि मे वयम्-हम एनांसि =पापों को चकृम=कर बैठते हैँ तौ २. वायुः=अन्तरिक्षस्थ देवों का मुखिया वायु मा=मुञ्ध

English

My hair is effort and attempt, my skin is reverence and approach. My flesh is inclination, wealth my bone, my marrow reverence.

अध्याय २०

श्लोक 14

यद्दे॑वा देव॒हेड॑नं॒ देवा॑सश्चकृ॒मा व॒यम् ।अ॒ग्निर्मा॒ तस्मा॒देन॑सो॒ विश्वा॑न्मुञ्च॒त्वᳪह॑सः

yaddevā devaheḍanaṃ devāsaścakṛmā vayam | agnirmā tasmādenaso viśvānmuñcatvahasaḥ

हिन्दी अर्थ

हम ग्राम ओर सभा आदि के विषय में हो जानेवाले अपराधों से बचने का अव॑ देवैर्दवकृतमेनो ऽयक्ष्यव मर््यर्म्त्य'कृतं पुरुराव्णो देव रिषस्पांहि ॥ १८॥ १. है वरूण हमें सब पापों से बचानेवाले प्रभो! आपके आदेश के अनुसार यत्-जो आपः=सब भोगों को प्राप्त करानेवाली हे, अतएव प्राप्त करने योग्य हैँ, अघ्न्या: इति-न

English

Gods, Deities, whatever fault of ours have stirred the wrath of Gods, May Agni set me free from that iniquity and all distress.

अध्याय २०

श्लोक 15

यदि॒ दिवा॒ यदि॒ नक्त॒मेना॑ᳪसि चकृ॒मा व॒यम् ।वा॒युर्मा॒ तस्मा॒देन॑सो॒ विश्वा॑न्मुञ्च॒त्वᳪह॑सः

yadi divā yadi naktamenāsi cakṛmā vayam | vāyurmā tasmādenaso viśvānmuñcatvahasaḥ

हिन्दी अर्थ

हम गोहत्या करके गोमांस भक्षण करने के स्थान में गोरक्षण द्वारा गोदुग्धरूप अमृत का सेवन करे, जिससे हमारे जीवन शान्त, यज्ञात्मक, क्रियामय हों। हम देवों क विषय में पाप न करें, न ही मनुष्यों के विषय मे। सूचना- देवकृतं एन देवताओं के विषय में पाप यही है कि हम शरीरस्थ देवांश के

English

If in the day-time or at night we have committed acts of sin, May Vâyu set me free from that iniquity and all distress.

अध्याय २०

श्लोक 16

यदि॒ जाग्र॒द्यदि॒ स्वप्न॒ एना॑ᳪसि चकृ॒मा व॒यम् ।सूर्यो॑ मा॒ तस्मा॒देन॑सो॒ विश्वा॑न्मुञ्च॒त्वᳪह॑सः

yadi jāgradyadi svapna enāsi cakṛmā vayam | sūryo mā tasmādenaso viśvānmuñcatvahasaḥ

हिन्दी अर्थ

सात्विक वानस्पत्िक भोजन हमें नीरोग बनाए। केवल शरीर मेँ ही नहीं, मन में भी। प्रभु का हम स्मरण करे, सदा कर्मनिष्ठ हों। किसी से द्वेष न करे। कर्मो के द्वारा पवित्रता १. इव=जैसे द्ुपदात्=पादुका=खडाओं से मुमुचानः = ( मुच्यमानः) चछूटता हआ पुरुष

English

If when awake or in our sleep we have committed acts of sin, May Sûrya set me free from that iniquity and all distress.

अध्याय २०

श्लोक 17

यद्ग्रामे॒ यदर॑ण्ये॒ यत्स॒भायां॒ यदि॑न्द्रि॒ये ।यच्छू॒द्रे यदर्ये॒ यदेन॑श्चकृ॒मा व॒यं यदेक॒स्याधि॒ धर्म॑णि॒ तस्या॑व॒यज॑नमसि

yadgrāme yadaraṇye yatsabhāyāṃ yadindriye | yacchūdre yadarye yadenaścakṛmā vayaṃ yadekasyādhi dharmaṇi tasyāvayajanamasi

हिन्दी अर्थ

कर्मशीलता, आप्त पुरुषों का सङ्खं , सर्वव्यापक प्रभु का स्मरण मुञ्धे पवित्र उद्वयं तम॑सस्परि स्तु: पश्य॑न्तऽउत्त॑रम्। देवं देवत्रा सूर्यमग॑न्म ज्योतिरुत्तमम् ॥२९॥ १. "गतमन्त्र के अनुसार उत्तरोत्तर पवित्र होते हए हम प्रभु को प्राप्त होते हें ' इस बात को प्रस्तुत मन्त्र में इस प्रकार कहते हैँ कि वयम्-हम उत्-उत्कृष्ट तमसः तमोबहुल

English

Each fault in village or in wild, company or corporeal sense, Each sinful act that we have done to Sûdra or Arya, or to either's disadvantage, e’en of that sin thou art the expiation.

अध्याय २०

श्लोक 18

यदापो॑ अ॒घ्न्या इति॒ वरु॒णेति॒ शपा॑महे॒ ततो॑ वरुण नो मुञ्च । अव॑भृथ निचुम्पुण निचे॒रुर॑सि निचुम्पु॒णः ।अव॑ दे॒वैर्दे॒वकृ॑त॒मेनो॑ऽय॒क्ष्यव॒ मर्त्यै॒र्मर्त्य॑कृतं पुरु॒राव्णो॑ देव रि॒षस्पा॑हि

yadāpo aghnyā iti varuṇeti śapāmahe tato varuṇa no muñca | avabhṛtha nicumpuṇa nicerurasi nicumpuṇaḥ | ava devairdevakṛtameno'yakṣyava martyairmartyakṛtaṃ pururāvṇo deva riṣaspāhi

हिन्दी अर्थ

प्रकृति उत्कृष्ट है, परन्तु उसमें आसक्त न होकर उसका ठीक प्रयोग करते हए हम आत्मस्वरूप का दर्शन करे। अधिकाधिक पवित्र होते हए प्रभु को प्राप्त करे। १. गतमन्त्र के ' प्रभु-मिलन' के लिए अद्य=आज ही से मैने आपः अनु अचारिषम्-कर्मो का व आप्त पुरुषों का अनुसरण किया हे। मैने सब प्रकार के आलस्य कौ भावना को परे

English

Waters, Inviolable ones, etc. Said to be repeated from VI. 22. O ever-moving Cleansing Bath, etc. Repeated from III. 48.

अध्याय २०

श्लोक 19

स॑मु॒द्रे ते॒ हृद॑यम॒प्स्वन्तः सं त्वा॑ विश॒न्त्वोष॑धीरु॒ताप॑: ।सु॒मि॒त्रि॒या न॒ आप॒ ओष॑धयः सन्तु दुर्मित्रि॒यास्तस्मै॑ सन्तु॒ योऽस्मान्द्वेष्टि॒ यं च॑ व॒यं द्वि॒ष्मः

samudre te hṛdayamapsvantaḥ saṃ tvā viśantvoṣadhīrutāpa: | sumitriyā na āpa oṣadhayaḥ santu durmitriyāstasmai santu yo'smāndveṣṭi yaṃ ca vayaṃ dviṣmaḥ

हिन्दी अर्थ

हम क्रियाशीलता व आप्तपुरुषों के सद्धं से रसरूप परमात्मा से मेल कर सके। उन्नत होते हए प्रभु को प्राप्त करे। वे प्रभु हमें “शक्ति, उत्तम सन्तान व धन' दे। वैशवानरज्योतिर्भूयासं विभून्कामान्व्यश्नवै भूः स्वाह ।। २३॥ १. गतमन्त्र के अनुसार उस रसमय प्रभु से अपना सम्पर्क बनानेवाला व्यक्ति प्रभु से

English

Thy heart is in the flood, etc. Repeated from VIII. 25. To us let Waters, etc. Repeated from VI. 22.

अध्याय २०

श्लोक 20

द्रु॒प॒दादि॑व मुमुचा॒नः स्वि॒न्नः स्ना॒तो मला॑दिव ।पू॒तं प॒वित्रे॑णे॒वाज्य॒माप॑: शुन्धन्तु मैन॑सः

drupadādiva mumucānaḥ svinnaḥ snāto malādiva | pūtaṃ pavitreṇevājyamāpa: śundhantu mainasaḥ

हिन्दी अर्थ

व्यवस्थित क्रियाओंवाला बनू प्रभु के तेजोंऽश को प्राप्त करूं। उदारमना बनू। प्राणशक्तिसम्पन्न होकर समर्पण की वृत्तिवाला होऊं। १. ठे अग्ने-सारे संसार के सञ्चालक प्रभो! व्रतपतेत्रतों का पालन करनेवाले प्रभो! त्वयि आपकी प्राप्ति के निमित्त समिधम्-ज्ञान की दीप्ति को अभ्यादधामितमें धारण

English

As one unfastened from a stake, or cleansed by bathing after toil, As butter which the sieve hath purged, let water clean me from my sin.

अध्याय २०

श्लोक 21

उद्व॒यं तम॑स॒स्परि॒ स्व: पश्य॑न्त॒ उत्त॑रम् ।दे॒वं दे॑व॒त्रा सूर्य॒मग॑न्म॒ ज्योति॑रुत्त॒मम्

udvayaṃ tamasaspari sva: paśyanta uttaram | devaṃ devatrā sūryamaganma jyotiruttamam

हिन्दी अर्थ

९. प्रभु- प्राप्ति के निमित्त मं अपने में ज्ञानदीषप्ति को धारण करं २. व्रत ओर श्रद्धा को धारण करनेवाला वनँं। ३. निष्कामभाव से व्रतो का श्रद्धापूर्वकं पालन मेरे हदय को प्रभु के प्रकाश से पूर्णं करेगा। तं लोकं पुण्यं प्रज्ञैवं यत्र॑ देवाः सहाग्निना ॥ २५५॥

English

Looking upon the loftier light above the darkness we have come To Sûrya, God among the Gods, the light that is most excellent.

अध्याय २०

श्लोक 22

अ॒पो अ॒द्यान्व॑चारिष॒ᳪ रसे॑न॒ सम॑सृक्ष्महि ।पय॑स्वानग्न॒ आऽग॑मं॒ तं मा॒ सᳪ सृ॑ज॒ वर्च॑सा प्र॒जया॑ च॒ धने॑न च

apo adyānvacāriṣa rasena samasṛkṣmahi | payasvānagna ā'gamaṃ taṃ mā sa sṛja varcasā prajayā ca dhanena ca

हिन्दी अर्थ

पुण्यलोक वही है जहाँ (क) ज्ञान के साथ बल का भी विकास हे। (ख) जहाँ मन्त्रिवर्ग व ज्ञानीवर्ग राजा के साथ एेकमत्यवाला होकर राष्ट कौ उन्नति में तत्पर हे। ध मिलकर राष्ट मे शिक्षणालयों कौ स्थापना करते हैँ, व्यायामशालाओं का निर्माण करते १. गतमन्त्र के पुण्यलोक का ही वर्णन करते हए कहते है कि यत्र=-जहाँ इन्द्रः च

English

The waters I this day have sought, and to their essence have we come. Agni, come hither rich in milk, splendour and brilliancy bestow on me, and progeny and wealth.

अध्याय २०

श्लोक 23

एधो॑ऽस्येधिषी॒महि॑ स॒मिद॑सि॒ तेजो॑ऽसि॒ तेजो॒ मयि॑ धेहि ।स॒माव॑वर्ति पृथि॒वी समु॒षाः समु॒ सूर्य॑: । समु॒ विश्व॑मि॒दं जग॑त् ।वै॒श्वा॒न॒रज्यो॑तिर्भूयासं वि॒भून् कामा॒न् व्य॒श्नवै॒ भूः स्वाहा॑

edho'syedhiṣīmahi samidasi tejo'si tejo mayi dhehi | samāvavarti pṛthivī samuṣāḥ samu sūrya: | samu viśvamidaṃ jagat | vaiśvānarajyotirbhūyāsaṃ vibhūn kāmān vyaśnavai bhūḥ svāhā

हिन्दी अर्थ

पुण्यलोक में ' इन्द्र॒ ओर वायु! का स्थापन होता है, अर्थात् वरहो के निवासी सबल व सन्ञान होते है। इनमें कोई निर्बल व मूर्खं नहीं होता। अन्नाभाव से कोई मरता नही। १. गतमन्त्र में वर्णित पुण्यलोकं के निवासियों के लिए ही कहते है कि अंशुना ज्ञान की किरण के साथ ते-तेरी अंशु=ज्ञान कौ किरण पृच्यताम् संपृक्त हो , अर्थात् तेरा

English

A brand art thou: fain would we thrive. Fuel art thou and splendour: give me splendour. Earth comes again, the Dawn, the Sun. This Universe all comes again. May I possess Vaisvânara's light, may I attain my vast desires. Earth! All-hail!

अध्याय २०

श्लोक 24

अ॒भ्या द॑धामि स॒मिध॒मग्ने॑ व्रतपते॒ त्वयि॑ ।व्र॒तं च॑ श्र॒द्धां चोपै॑मी॒न्धे त्वा॑ दीक्षि॒तो अ॒हम्

abhyā dadhāmi samidhamagne vratapate tvayi | vrataṃ ca śraddhāṃ copaimīndhe tvā dīkṣito aham

हिन्दी अर्थ

हमारा ज्ञान अविच्छिन्न हो, शरीर सुदृढ हो। प्रभु-स्मरण के द्वारा हम अपने सोम की रक्षा करे, न क्षरित हुआ-हुआ यह सोम हमारे जीवन मे उल्लास देनेवाला हो। १. गतमन्त्र के अनुसार सोम कौ रक्षा करनेवाले व्यक्ति इस सोम को सिञ्चन्ति-शरीर में ही सिक्त करते हैँ, परिषिञ्चन्ति-शरीर के अद्ध - प्रत्यङ्गं मे इसे सिक्त करने के लिए

English

O Agni, Master of the Vow, on thee I lay the kindling- stick. To the fast-vow and faith I come. I, consecrated, kindle thee.

अध्याय २०

श्लोक 25

यत्र॒ ब्रह्म॑ च क्ष॒त्रं च॑ स॒म्यञ्चो॒ चर॑तः स॒ह ।तँल्लो॒कं पुण्यं॒ प्रज्ञे॑षं॒ यत्र॑ दे॒वाः स॒हाग्निना॑

yatra brahma ca kṣatraṃ ca samyañco carataḥ saha | ta~llokaṃ puṇyaṃ prajñeṣaṃ yatra devāḥ sahāgninā

हिन्दी अर्थ

हम सोम को शरीर में सुरक्षित करे, अङ्क प्रत्यज्ख मे व्यापक रक्खें, उसकी ऊर्ध्वगति करे। इससे हम अपने जीवनो को पवित्र बना्ेँ। ज्ञान की दीप्ति व शरीर का ठीक पोषण होने पर जो एक विशेष उल्लास प्राप्त होता है, उसे प्राप्त कर लेने पर हम अपने लिए कह सकैगे कि "तू आज उस आनन्दमय अनिर्वचनीय महिमावाले प्रभु का हो गया

English

Fain would I know that holy world where Deities with Agni dwell, Where priestly rank and princely power together in accordance move.

अध्याय २०

श्लोक 26

यत्रेन्द्र॑श्च वा॒युश्च॑ स॒म्यञ्चो॒ चर॑तः स॒ह ।तँल्लो॒कं पुण्यं॒ प्रज्ञे॑षं॒ यत्र॑ से॒दिर्न वि॒द्यते॑

yatrendraśca vāyuśca samyañco carataḥ saha | ta~llokaṃ puṇyaṃ prajñeṣaṃ yatra sedirna vidyate

हिन्दी अर्थ

हम प्रभु का गायन कररे। यह गायन (क) हमारा वर्धन करेगा, (ख) वासनाओं को विनष्ट करेगा, (ग) हम ऋत का अपने में वर्धन करनेवाले होंगे ओर (घ) हममे वह ज्ञान-ज्योति उत्पन्न होगी, जो हमें दिव्य बनाएगी, सदा जागरणशील- सावधान रक्खेगी तथा हमें प्रभुरूप लक्ष्य -स्थान पर प्ंचाएगी।

English

Fain would I know that holy world where want and languor are unknown, Where in complete accordance move Indra and Vâyu side by side

अध्याय २०

श्लोक 27

अ॒ᳪशुना॑ ते अ॒ᳪशुः पृ॑च्यतां॒ परु॑षा॒ परु॑: ।ग॒न्धस्ते॒ सोम॑मवतु॒ मदा॑य॒ रसो॒ अच्यु॑तः

aśunā te aśuḥ pṛcyatāṃ paruṣā paru: | gandhaste somamavatu madāya raso acyutaḥ

हिन्दी अर्थ

शरीर में सोम कौ उत्पत्ति इसीलिए की गई है कि (क) शरीर पाषाणतुल्य दृ हा तथा (ख) मनुष्य ज्ञानदीप्त होकर पवित्र जीवनवाला बने ओर (ग) अन्त मं यह प्रभु को प्राप्त कर सकर। यो भूतानामधिंपतिर्यस्िल्लोकाऽअधिं ्चिताः।

English

Let thy shoot be united with his tendril, joint combine with joint. Imperishable sap for joy, thine odour be the Soma's guard!

अध्याय २०

श्लोक 28

सि॒ञ्चन्ति॒ परि॑ षिञ्च॒न्त्युत्सि॑ञ्चन्ति पु॒नन्ति॑ च ।सुरा॑यै ब॒भ्र्वै॒ मदे॑ कि॒न्त्वो व॑दति कि॒न्त्वः

siñcanti pari ṣiñcantyutsiñcanti punanti ca | surāyai babhrvai made kintvo vadati kintvaḥ

हिन्दी अर्थ

प्रभु का अपने में धारण करने का अभिप्राय है कि (क) हम पृथिवी आदि भूतों के पूर्णं अधिपति बनते हए स्वस्थ बनें, (ख) हम सब लोकों के शरणस्थान बने, (ग) अपनी इन्द्रियों के ईश बनें, ओर (घ) विशाल-से-विशाल हदयवाले हो। सूचना- “मयि गृह्णामि त्वामहम्" का शब्दार्थ इस रूप में भी है कि मै आपको अन्दर

English

They pour it out, they sprinkle it, they scatter it, they make it pure. In the brown Surâ's ecstasy he says What art thou? What art thou?

अध्याय २०

श्लोक 29

धा॒नाव॑न्तं कर॒म्भिण॑मपू॒पव॑न्तमु॒क्थिन॑म् ।इन्द्र॑ प्रा॒तर्जु॑षस्व नः

dhānāvantaṃ karambhiṇamapūpavantamukthinam | indra prātarjuṣasva naḥ

हिन्दी अर्थ

जवब हम प्रभु को अपने मे धारण कर पाते हैँ तब (क) प्राणापान सुरक्षित होकर हमारे शरीर का बल बदता है, (ख) चक्षुः-श्रोत्र की रक्षा लेकर हमारा ज्ञान बढता हे. (ग) हमारी वाणी प्रभुनाम-स्मरण से सब दोषों से निवृत्त हो जाती है, हम शुभी शब्दों को बोलते हे, (घ) प्रभु में हमारा मन एेसा विलीन हो जाता है कि अपने आप दही

English

Indra, at morn accept our cake accompanied with grain and groats, with wheaten bread and hymns of praise.

अध्याय २०

श्लोक 30

बृ॒हदिन्द्रा॑य गायत॒ मरु॑तो वृत्र॒हन्त॑मम् ।येन॒ ज्योति॒रज॑नयन्नृता॒वृधो॑ दे॒वं दे॒वाय॒ जागृ॑वि

bṛhadindrāya gāyata maruto vṛtrahantamam | yena jyotirajanayannṛtāvṛdho devaṃ devāya jāgṛvi

हिन्दी अर्थ

उपहूत प्रभु के हम उपहूत बनें ओर सोमरक्षण के द्वारा प्राणापान कौ शक्ति, ज्ञान व इन्द्रशक्ति का वर्धन करें तथा शरीर व मन को नीरोग बना पार्ं। समिंद्धऽ इन्द्र॑ऽ उषसामनींके पुरोरुचा पूर्वकृद्रावृधानः। त्रिभिर्देवैस्तरिःशता वच्र॑बाहुर्जघानं वृत्रं वि दुरो ववार।।३६॥

English

To Indra sing the lofty hymn, Maruts? that slayeth Vritra best, Whereby the Holy Ones created for the God the radiant light that never dies.

अध्याय २०

श्लोक 31

अध्व॑र्यो॒ अद्रि॑भिः सु॒तᳪ सोमं॑ प॒वित्र॒ आ न॑य ।पु॒ना॒हीन्द्रा॑य॒ पात॑वे

adhvaryo adribhiḥ suta somaṃ pavitra ā naya | punāhīndrāya pātave

हिन्दी अर्थ

प्रभु का उपासक (उपहूत) स्वाध्याय द्वारा ज्ञानसमिद्ध बनता है। उन्नति करता हुआ सब देवों को अपने में धारण करता है, क्रियाशील जीवन के द्वारा वासना से ऊपर उठता है ओर मोक्ष के चारों द्वारो को अपने लिए खोलता हुआ “शान्त, विचारशील, नराशश्खः प्रति शूरो सिमानस्तनूनपात्प्रतिं यज्ञस्य धाम।

English

Adhvaryu, on the straining cloth pour thou the Soma pressed with stones: Purify it for Indra's drink.

अध्याय २०

श्लोक 32

यो भू॒ताना॒मधि॑पति॒र्यस्मिँ॑ल्लो॒का अधि॑ श्रि॒ताः ।य ईशे॑ मह॒तो म॒हाँस्तेन॑ गृह्णामि॒ त्वाम॒हं मयि॑ गृह्णामि॒ त्वाम॒हम्

yo bhūtānāmadhipatiryasmi~llokā adhi śritāḥ | ya īśe mahato mahā~stena gṛhṇāmi tvāmahaṃ mayi gṛhṇāmi tvāmaham

हिन्दी अर्थ

हम प्रभु को अपने मे धारण करनेवाले बनें, उसकी ज्ञानवाणियों से जीवन में सदगुणौं के बीज बोर्णं। माधुर्यवाले हो। सदा आह्ादमय, यज्ञशील व प्रचेता बने। ईडितो देवैर्हसिवांँ २।ऽअभिष्टिराजुद्धानो हविषा शर््ःमानः। पुरन्दरो गोत्रभिद्त्र॑बाहुरायातु यज्ञमुप॑ नो जुषाणः।। ३८॥

English

The Sovran Lord of living things, he upon whom the worlds depend, Mighty, the mighty's King—by him I take thee, take thee on myself.

अध्याय २०

श्लोक 33

उ॒प॒या॒मगृ॑हीतोऽस्य॒श्विभ्यां॑ त्वा॒ सर॑स्वत्यै॒ त्वेन्द्रा॑य त्वा सु॒त्राम्ण॑ ए॒ष ते॒ योनि॑र॒श्विभ्यां॑ त्वा॒ सर॑स्वत्यै॒ त्वेन्द्रा॑य त्वा सु॒त्राम्णे॑

upayāmagṛhīto'syaśvibhyāṃ tvā sarasvatyai tvendrāya tvā sutrāmṇa eṣa te yoniraśvibhyāṃ tvā sarasvatyai tvendrāya tvā sutrāmṇe

हिन्दी अर्थ

उपासना से दिव्य गुणों को प्राप्त करते हए हम यज्ञमय जीवनवाले हों। इससे हमारी शक्ति बदेगी ओर अन्ततः हम प्रभु को प्राप्त करेगे। १. जुषाणः गतमन्त्र के अन्तिम शब्दों के अनुसार यज्ञो का सेवन करता हआ २. हरिवान् प्रशस्त इच्दरियोवाला २. नः=हमारा अर्थात् प्रभु का भक्त ४. इन्द्रः=असुरों का संहार

English

Taken upon a base art thou. Thee for the Asvins. This is thy home, etc.

अध्याय २०

श्लोक 34

प्रा॒ण॒पा मे॑ अपान॒पाश्च॑क्षु॒ष्पाः श्रो॑त्र॒पाश्च॑ मे ।वाचो॑ मे वि॒श्वभे॑षजो॒ मन॑सोऽसि वि॒लाय॑कः

prāṇapā me apānapāścakṣuṣpāḥ śrotrapāśca me | vāco me viśvabheṣajo manaso'si vilāyakaḥ

हिन्दी अर्थ

मनुष्य (क) यज्ञो का सेवन करे (ख) उत्तम इद्दरियोवाला बने (ग) प्रभु का होकर संसार में विचरे (घ) जितेन्द्रिय बने (ङ) उदार हो (च) सदा प्रीतियुक्तं हो। एेसा बनकर यह अपने हदय को, इस विशाल पृथिवी का स्मरण करते हए (क) विशाल बनाये (ख) विशालता के द्वारा सुखमय बनाए (ग) गुणों का आदान व उत्तम निवास कौ

English

Guard of my breath and outward breath, the guardian of mine eye and ear, All-healer of my voice, thou. art the mollifier of my mind.

अध्याय २०

श्लोक 35

अ॒श्विन॑कृतस्य ते॒ सर॑स्वतिकृत॒स्येन्द्रे॑ण सु॒त्राम्णा॑ कृ॒तस्य॑ ।उप॑हूत॒ उप॑हूतस्य भक्षयामि

aśvinakṛtasya te sarasvatikṛtasyendreṇa sutrāmṇā kṛtasya | upahūta upahūtasya bhakṣayāmi

हिन्दी अर्थ

को पवित्र बनानेवाले है। इनके अपना-अपना कार्य ठीक रूप से करने पर हम शारीरिक दुष्टि से स्वस्थ त सुन्दर बनते है ओर आत्मिक बल व वीरता को प्राप्त करते हे सूचना-' कवष्यः' !कु शब्दे" से बनकर मुख के कार्य का संकेत करता हं “ धावमानाः ' धाव् शुद्धौ ' से बनकर पायु के कार्य का, 'जनयः' उपस्थ करे कार्य का संकेत

English

Invited I feed upon thee invited, Whom Asvins, whom Sarasvatî, whom Indra, Good Protector, made.

अध्याय २०

श्लोक 36

समि॑द्ध॒ इन्द्र॑ उ॒षसा॒मनी॑के पुरो॒रुचा॑ पूर्व॒कृद्वा॑वृधा॒नः ।त्रि॒भिर्दे॒वैस्त्रि॒ᳪशता॒ वज्र॑बाहुर्ज॒घान॑ वृ॒त्रं वि दुरो॑ ववार

samiddha indra uṣasāmanīke purorucā pūrvakṛdvāvṛdhānaḥ | tribhirdevaistriśatā vajrabāhurjaghāna vṛtraṃ vi duro vavāra

हिन्दी अर्थ

(क) हम प्रभु का अपने में पूरण करें, जिससे हमारा वर्धन हो ओर हमारी आसुर वृत्तियों का संहार हो, (ख) यज्ञतन्तु को विच्छिन्न न करने क द्वारा हम प्रभु का उपासन करे, (ग) प्रभु-उपासन से हम प्रभु की भति दीप्त हो उठे, प्रभु की दीप्ति से हैव्या मिमाना मनुषः पुस्त्रा होताराविन्द्र प्रथमा सुवाचा ।

English

Kindred in forefront of the Mornings, Indra with forward light, long-active, waxing mighty, With three-and thirty Gods, the Thunder-wielder, smote. Vritra dead and threw the portals open.

अध्याय २०

श्लोक 37

नरा॒शᳪस॒: प्रति॒ शूरो॒ मिमा॑न॒स्तनू॒नपा॒त्प्रति॑ य॒ज्ञस्य॒ धाम॑ ।गोभि॑र्व॒पावा॒न् मधु॑ना सम॒ञ्जन् हिर॑ण्यैश्च॒न्द्री य॑जति॒ प्रचे॑ताः

narāśasa: prati śūro mimānastanūnapātprati yajñasya dhāma | gobhirvapāvān madhunā samañjan hiraṇyaiścandrī yajati pracetāḥ

हिन्दी अर्थ

हम प्रभु के बने, सब क्रियाओं को मापकर करें, अतिमेन जार्पे, ज्ञान से अपना जरण करे, होता बनें, प्रभु का अपने में विस्तार करें, उत्तम वाणीवाले हों. माधुर्य के साथ ५५ के अग्रभाग में स्थित हों, उस ज्ञान को प्राप्त करें, जो हमारी अग्रगति का साधन तिस्रो देवीः ( ज्ञान-श्रद्धा-वाणी )

English

Son of Himself, the Praise of Men, the hero, measuring out the sacrificial stations, Rich in bulls’ fat, anointing with sweet butter, wise, bright with gauds of gold, he sacrificeth.

अध्याय २०

श्लोक 38

ई॒डि॒तो दे॒वैर्हरि॑वाँ२ अभि॒ष्टिरा॒जुह्वा॑नो ह॒विषा॒ शर्ध॑मानः ।पु॒र॒न्द॒रो गो॑त॒भिद्वज्र॑बाहु॒रा या॑तु य॒ज्ञमुप॑ नो जुषा॒णः

īḍito devairharivā~2 abhiṣṭirājuhvāno haviṣā śardhamānaḥ | purandaro gotabhidvajrabāhurā yātu yajñamupa no juṣāṇaḥ

हिन्दी अर्थ

हमारे जीवन मे ज्ञान कौ अधिदेवता ' सरस्वती ' यज्ञिय भावनाओं को जन्म देकर यज्ञ का विकास करे, "श्रद्धा" (इडा) दिव्य गुणों को जन्म दे, तथा भारती ' (वाणी ) सदा उस प्रभु में त्वरा से गतिवाली हो, अर्थात् प्रभु करे नाम का जप करनेवाली हो। त्वष्टा दधच्छरष्ममिनद्राय वृष्णो ऽपाको ऽचिष्टुर्यशसे पुरूणि।।

English

Lauded by Gods, Lord of Bay Steeds, the Helper, showing his greatness. worshipped with oblations. Fort-render, Cowpen-cleaver, Thunder-wielder, may he approach our sacrifice rejoicing

अध्याय २०

श्लोक 39

जु॒षा॒णो ब॒र्हिर्हरि॑वान् न॒ इन्द्र॑: प्रा॒चीन॑ᳪ सीदत् प्र॒दिशा॑ पृथि॒व्याः ।उ॒रु॒प्रथा॒: प्रथ॑मानᳪ स्यो॒नमा॑दि॒त्यैर॒क्तं वसु॑भिः स॒जोषा॑:

juṣāṇo barhirharivān na indra: prācīna sīdat pradiśā pṛthivyāḥ | uruprathā: prathamāna syonamādityairaktaṃ vasubhiḥ sajoṣā:

हिन्दी अर्थ

प्रभु के उपासन से बल प्राप्त होता हे। हम यशस्वी कार्यौ को करनेवाले बनते हैँ ओर हम दिव्य गुणों से अपने जीवन को समलंकृत कर पाते हे। वनस्पतिरव॑सृष्टो न पाशौस्त्मन्यां समञ्जज्छमिता न देवः। इन्द्र॑स्य हव्यर्जठर' प्रणान: स्वदाति यज्ञं मधुना घृतेन ॥ ४५५॥

English

May Indra, Lord of Bays, sit by direction eastward on earth, accepting our oblation, And sacred grass, fair, far-spread, widely-stretching, anointed by Âdityas and by Vasus.

अध्याय २०

श्लोक 40

इन्द्रं॒ दुर॑: कव॒ष्यो धाव॑माना॒ वृषा॑णं यन्तु॒ जन॑यः सु॒पत्नी॑: ।द्वारो॑ दे॒वीर॒भितो॒ वि श्र॑यन्ताᳪ सु॒वीरा॑ वी॒रं प्रथ॑माना॒ महो॑भिः

indraṃ dura: kavaṣyo dhāvamānā vṛṣāṇaṃ yantu janayaḥ supatnī: | dvāro devīrabhito vi śrayantā suvīrā vīraṃ prathamānā mahobhiḥ

हिन्दी अर्थ

हमारे भोजन वानस्पतिक हव्य पदार्थ हों, हम मधु व घृत आदि का प्रयोग कर। इस प्रकार हमारा जीवन यज्ञरूप होगा, माधुर्यमय होगा। स्तोकानामिन्दुं प्रति शूरऽडइन्द्रौ वृषायमाणो वृषभस्तुराषाट् । घुतप्रषा मन॑सा मोद॑माना: स्वाहा देवाऽअमृतां मादयन्ताम् ॥४६॥

English

To the strong Indra go the sounding Portals, dames with a goodly husband, swiftly moving! Well-manned, divine, wide be the Doors thrown open, expanding in their greatness fir the Hero!

अध्याय २०

श्लोक 41

उ॒षासा॒नक्ता॑ बृह॒ती बृ॒हन्तं॒ पय॑स्वती सु॒दुघे॒ शूर॒मिन्द्र॑म् ।तन्तुं॑ त॒तं पेश॑सा सं॒वय॑न्ती दे॒वानां॑ दे॒वं य॑जतः सुरु॒क्मे

uṣāsānaktā bṛhatī bṛhantaṃ payasvatī sudughe śūramindram | tantuṃ tataṃ peśasā saṃvayantī devānāṃ devaṃ yajataḥ surukme

हिन्दी अर्थ

प्रजा का रक्षण करनेवाला यह राजा अपने उत्तम कार्यो से प्रजा से स्तुत हो, शूर हो, वृद्धिशील हो, इसकी सेना धी प्रथम श्रेणी को, अर्थात् उत्तम शिक्षित हो। जहाँ यह ज्ञान के प्रकाशवाला हो, वहो शत्रु पराजयक्षम बल से भी सम्पन्न हो। इस प्रकार स्वयं सुन्दर दिव्य गुणोवाला “ वामदेव" बनकर यह प्रजाओं को भी "वामदेव" बनाने के लिए

English

Dawn and Night, lofty, sapful, richly-yielding, fair-showing, as they weave with varied colour The long-extended thread in concert, worship the God of Gods, the lofty Hero Indra.

अध्याय २०

श्लोक 42

दैव्या॒ मिमा॑ना॒ मनु॑षः पुरु॒त्रा होता॑रा॒विन्द्रं॑ प्रथ॒मा सु॒वाचा॑ ।मू॒र्धन् य॒ज्ञस्य॒ मधु॑ना॒ दधा॑ना प्रा॒चीनं॒ ज्योति॑र्ह॒विषा॑ वृधातः

daivyā mimānā manuṣaḥ purutrā hotārāvindraṃ prathamā suvācā | mūrdhan yajñasya madhunā dadhānā prācīnaṃ jyotirhaviṣā vṛdhātaḥ

हिन्दी अर्थ

राजा दूर हो या समीप हो, प्रजा के रक्षण के लिए उस-उस स्थान पर पहँचे। प्रजा की अभिलाषाओं को सिद्ध करनेवाला हो। शक्रुओं का आक्रमण होने पर शक्तिशाली सैन्यो के साथ स्वयं अस्त्र-शस्त्र धारण करके शत्रु का संहार करे। सूचना -' संग ओर समत्' निघण्टु मे दोनों हौ संग्राम के नाम ह। एकवचन मे होता

English

The two first pleasant-voiced celestial Hotars, arranging rites for man in sundry places, At head of sacrifice stablishing Indra, increase the eastern light with sweet oblation.

अध्याय २०

श्लोक 43

ति॒स्रो दे॒वीर्ह॒विषा॒ वर्ध॑माना॒ इन्द्रं॑ जुषा॒णा जन॑यो॒ न पत्नी॑: ।अच्छि॑न्नं॒ तन्तुं॒ पय॑सा॒ सर॑स्व॒तीडा॑ दे॒वी भार॑ती वि॒श्वतू॑र्तिः

tisro devīrhaviṣā vardhamānā indraṃ juṣāṇā janayo na patnī: | acchinnaṃ tantuṃ payasā sarasvatīḍā devī bhāratī viśvatūrtiḥ

हिन्दी अर्थ

राजा के कर्तव्य है कि सेना के अङ्खभूत घोडे आदि को सुशिक्षित करे। अवसर आने पर शत्रु पर आक्रमण करे। प्रजा का रक्षण करे, उसे उचित धन प्राप्त कराए। युद्ध मे शस्त्रास्त्र से सुसज्जित होकर उपस्थित हो। जातारमिन्द्र॑मवितारमिन्द्रच्हवेहवे सुहवध्शूरमिन्द्र॑म् ।

English

Thriving by sacrifice may the three Bright Ones, taking delight like wedded dames in Indra, Sarasvatî, Idâ, Bhâratî all-surpassing, with milk preserve our sacred thread unbroken.

अध्याय २०

श्लोक 44

त्वष्टा॒ दध॒च्छुष्म॒मिन्द्रा॑य॒ वृष्णेऽपा॒कोऽचि॑ष्टुर्य॒शसे॑ पु॒रूणि॑ ।वृषा॒ यज॒न्वृष॑णं॒ भूरि॑रेता मू॒र्धन् य॒ज्ञस्य॒ सम॑नक्तु दे॒वान्

tvaṣṭā dadhacchuṣmamindrāya vṛṣṇe'pāko'ciṣṭuryaśase purūṇi | vṛṣā yajanvṛṣaṇaṃ bhūriretā mūrdhan yajñasya samanaktu devān

हिन्दी अर्थ

राजा राष्ट की उत्तमता से रक्षा करे ओर प्रजा के कल्याण की साधना करं। इन्द्रः सुत्रामा स्वर्वँ२।ऽअवोंभिः सुमृडीको भ॑वतु विश्ववेदाः। १. इन्द्रः शत्रुओं का विद्रावण करनेवाला ओर इस प्रकार सुत्रामा=बहत उत्तमता से राष्ट कौ रक्षा करनेवाला २. स्ववान् आत्मतत्ववाला, अर्थात् आत्मप्रवण, भोगवृत्ति से दूर

English

May Tvashtar coming frail afar, the active, give strength and plenty to strong glorious Indra, And strong, prolific, worshipping, the Mighty at sacrifice's head give the Gods honour.

अध्याय २०

श्लोक 45

वन॒स्पति॒रव॑सृष्टो॒ न पाशै॒स्त्मन्या॑ सम॒ञ्जञ्छ॑मि॒ता न दे॒वः ।इन्द्र॑स्य ह॒व्यैर्ज॒ठरं॑ पृणा॒नः स्वदा॑ति य॒ज्ञं मधु॑ना घृ॒तेन॑

vanaspatiravasṛṣṭo na pāśaistmanyā samañjañchamitā na devaḥ | indrasya havyairjaṭharaṃ pṛṇānaḥ svadāti yajñaṃ madhunā ghṛtena

हिन्दी अर्थ

राष्ट् में राजा इस बात का पूरा ध्यान करे कि प्रजा में धर्म, जाति व विरादरी आदि किसी भी आधार को लेकर परस्पर द्वेष व लडाई कौ भावना उत्पतन्त न हो। राष्ट में पारस्परिक द्वेष से दिलों में डर (दहशत) न बना रहे। तस्य॑ वयः संमतौ यज्ञियस्यापि भद्रे सौमनसे स्याम ।

English

Let the divine Stake, like an Immolator, bind, as one ordered, to himself the victim, And, filling Indra's belly with ablations, season the sacrifice with sweets and butter.

अध्याय २०

श्लोक 46

स्तो॒काना॒मिन्दुं॒ प्रति॒ शूर॒ इन्द्रो॑ वृषा॒यमा॑णो वृष॒भस्तु॑रा॒षाट् ।घृ॒त॒प्रुषा॒ मन॑सा॒ मोद॑माना॒: स्वाहा॑ दे॒वा अ॒मृता॑ मादयन्ताम्

stokānāminduṃ prati śūra indro vṛṣāyamāṇo vṛṣabhasturāṣāṭ | ghṛtapruṣā manasā modamānā: svāhā devā amṛtā mādayantām

हिन्दी अर्थ

राजा सुमति व सौमनसवाला हो। वह हमसे द्वेष को दूर करे। मात्वा के चिन्नि य॑मन्विं न पाशिनोऽति धन्वैव तोँर।5 इहि ॥५३॥ १. पिले मन्त्र में शत्रुओं को समाप्त कर देनेवाले गर्ग ' (निगल जानेवाले) राजा का उल्लेख था। जब यह राजा उत्तम व्यवस्था के द्वारा प्रजामेंसे द्वेष को दूर कर देता है ओर

English

Indra the Bull, swift conqueror, wildly rushing bull-like to meet the Indu of the droppings— Delighting in a mind that scatters fatness, let the immortal Gods rejoice in Svâhâ.

अध्याय २०

श्लोक 47

आ या॒त्विन्द्रोऽव॑स॒ उप॑ न इ॒ह स्तु॒तः स॑ध॒मद॑स्तु॒ शूर॑: ।वा॒वृ॒धा॒नस्तवि॑षी॒र्यस्य॑ पू॒र्वीर्द्यौर्न क्ष॒त्रम॒भिभू॑ति॒ पुष्या॑त्

ā yātvindro'vasa upa na iha stutaḥ sadhamadastu śūra: | vāvṛdhānastaviṣīryasya pūrvīrdyaurna kṣatramabhibhūti puṣyāt

हिन्दी अर्थ

हमारे इन्द्रियरूप घोडे ' सदा प्रसन्न, गतिशील व प्रभु का स्मरण करनेवाले' हों तभी हम जीवनयात्रा में किन्हीं भी विषयों से बद्ध न होकर प्रभु को पानेवाले होँगे। एवेदिन्द्रं वृष॑णं वच्र॑बाहः वसिंष्ठासोऽअभ्यर्चन्त्यकः। १. एव इत्-गतमन्त्रों के अनुसार निश्चय से इन्द्रम्=शकत्रुओं का विद्रावण करनेवाले

English

May Indra come to us for our protection, here, lauded Hero, be our feast-companion. May he whose powers are many, waxen mighty, cherish, like Dyaus, the sovran sway of princes.

अध्याय २०

श्लोक 48

आ न॒ इन्द्रो॑ दू॒रादा न॑ आ॒साद॑भिष्टि॒कृदव॑से यासदु॒ग्रः ।ओजि॑ष्ठेभिर्नृ॒पति॒र्वज्र॑बाहुः स॒ङ्गे स॒मत्सु॑ तु॒र्वणि॑: पृत॒न्यून्

ā na indro dūrādā na āsādabhiṣṭikṛdavase yāsadugraḥ | ojiṣṭhebhirnṛpatirvajrabāhuḥ saṅge samatsu turvaṇi: pṛtanyūn

हिन्दी अर्थ

एक आदर्श जीवनवाले पुरुष के शरीर में प्राणापान होते है ओर विद्याभ्यास से ५.१ ज्ञान उसे मधुर व शक्तिसम्पन्न बनाता है। यह सुमार्ग से उत्तम धनों का अर्जन १. सरस्वती=ज्ान कौ अधिदेवता इन्द्राय जितेन्द्रिय पुरुष के लिए इन्दुम्-सोम को, (इन्द् 10 ७८ ०५ या इन्द् परमैश्वर्यं ) शक्ति व ज्ञानरूप परमैश्वर्यं के कारणभूत इस

English

From near or far away may mighty Indra, giver of succour, come for our protection, Lord of men, armed with thunder, with the Strongest, slaying his foes in conflict, in the battles.

अध्याय २०

श्लोक 49

आ न॒ इन्द्रो॒ हरि॑भिर्या॒त्वच्छा॑र्वाची॒नोऽव॑से॒ राध॑से च ।तिष्ठा॑ति व॒ज्री म॒घवा॑ विर॒प्शीमं य॒ज्ञमनु॑ नो॒ वाज॑सातौ

ā na indro haribhiryātvacchārvācīno'vase rādhase ca | tiṣṭhāti vajrī maghavā virapśīmaṃ yajñamanu no vājasātau

हिन्दी अर्थ

१. जान का उपासक पुरुष सोम की रक्षा के द्वारा शक्तिसम्पत्न बनता है। २. यज्ियवृत्ति को धारण कर, अपनी आवश्यकतापँ न बाकर, दान देता है ३. प्राणापान इसके ५ वनते हे, ४. मात्रा मे किया गया मधु का प्रयोग इनके लिए सर्वोत्तम ओषध बन जाता १. आजुह्धाना=( आह्वयन्त) प्रभु का आह्वान (पुकार) करती हुई सरस्वती ज्ञान की

English

May Indra come to us with Tawny Coursers, inclined to us, to favour and enrich us. May Maghavan, loud-voiced and wielding thunder, stand by us at this sacrifice, in combat.

अध्याय २०

श्लोक 50

त्रा॒तार॒मिन्द्र॑मवि॒तार॒मिन्द्र॒ᳪ हवे॑ – हवे सु॒हव॒ᳪ शूर॒मिन्द्र॑म् ।ह्वया॑मि श॒क्रं पु॑रुहू॒तमिन्द्र॑ᳪ स्व॒स्ति नो॑ म॒घवा॑ धा॒त्विन्द्र॑:

trātāramindramavitāramindra have – have suhava śūramindram | hvayāmi śakraṃ puruhūtamindra svasti no maghavā dhātvindra:

हिन्दी अर्थ

हमारी सरस्वती प्रभु को पुकारती हुई हो, ज्ञान उपासना से जुड़ा हो तथा हमारी प्राणाशक्ति के साथ श्रद्धा का मेल हो। हम उन्नत शक्तिवाले बने, श्रद्धा से युक्त हो। १. अश्विना ये प्राणापान नमुचेः=( न+ मुचि) न परित्याग करनेवाले के, अर्थात् अपव्यय न करनेवाले के सुतम्=उत्पत्न हुए-हए सोमम्-सोम को परिस्रुता=शरीर मे चारो

English

Indra the Rescuer, Indra the Helper, Hero who listens at each invocation, Sakra I call, Indra invoked of many. May Indra, Bounteous Lord, prosper and bless us.

अध्याय २०

श्लोक 51

इन्द्र॑: सु॒त्रामा॒ स्ववाँ॒२ अवो॑भिः सुमृडी॒को भ॑वतु वि॒श्ववे॑दाः ।बाध॑तां॒ द्वेषो॒ अभ॑यं कृणोतु सु॒वीर्य॑स्य॒ पत॑यः स्याम

indra: sutrāmā svavā~2 avobhiḥ sumṛḍīko bhavatu viśvavedāḥ | bādhatāṃ dveṣo abhayaṃ kṛṇotu suvīryasya patayaḥ syāma

हिन्दी अर्थ

हम प्राणसाधना से सोम का शरीर में ही व्यापन करें, वरहो यह ज्लानाग्नि के ईधन के रूप में व्ययित हो ओर इस प्रकार यह सोम उस सोमपान करनेवाले की रोगों से इन्द्रो न रोद॑सीऽ उभे दुहे कामान्त्सर॑स्वती ॥।६०॥ १. अश्विभ्याम्=प्राणापान के द्वारा, अर्थात् प्राणापान की साधना से दुरःत्शरीर के

English

May helpful Indra as our Good Protector, Lord of all treasures, favour us with succour, Baffle our foes and give us rest and safety, and may we be the lords of hero vigour.

अध्याय २०

श्लोक 52

तस्य॑ व॒यᳪ सु॑म॒तौ य॒ज्ञिय॒स्यापि॑ भ॒द्रे सौ॑मन॒से स्या॑म ।स सु॒त्रामा॒ स्ववाँ॒२ इन्द्रो॑ अ॒स्मे आ॒राच्चि॒द् द्वेष॑: सनु॒तर्यु॑योतु

tasya vaya sumatau yajñiyasyāpi bhadre saumanase syāma | sa sutrāmā svavā~2 indro asme ārāccid dveṣa: sanutaryuyotu

हिन्दी अर्थ

हमारे जीवनों को बड़ा व्यवस्थित करनेवाले हों। हम शरीर व मस्तिष्क दोनों का उचित पूरण करें तथा ज्ञान द्वारा सब इष्ट कामनाओं को सिद्ध करे। १. अश्विना=प्राणापान इन्द्रम्-इद्द्रियों करे विजेता पुरुप को उषासानक्तम्-उषःकाल मं तथा रात्रि मं. अर्थात् रात्रि के आरम्भ से रात्रि क अन्त तक तथा दिवा-सायम्=दिन

English

May we enjoy the grace of him the Holy, yea, may we dwell in his auspicious favour. May helpful Indra as our Good Preserver drive from us even from afar, our foemen.

अध्याय २०

श्लोक 53

आ म॒न्द्रैरि॑न्द्र॒ हरि॑भिर्या॒हि म॒यूर॑रोमभिः ।मा त्वा॒ के चि॒न्नि य॑म॒न् विं ना पा॒शिनोऽति॒ धन्वे॑व॒ ताँ२ इ॑हि

ā mandrairindra haribhiryāhi mayūraromabhiḥ | mā tvā ke cinni yaman viṃ nā pāśino'ti dhanveva tā~2 ihi

हिन्दी अर्थ

प्राणापान तथा ज्ञान से हमें इन्द्रियों की शक्ति व सौन्दर्य प्राप्त हो। क्षत्र व ब्रह्म दोनों सङ्गत होकर हमारे जीवन को सुन्दर-द्ी- सुन्दर वनार। हैव्या होतारा भिषजा पातमिन्द्रः-स्चासुते ॥६२॥ १. है अश्विनाप्राणापानो! आप दिवादिन में नः=हमारी पातम्-रक्षा कीजिए,

English

Come hither, Indra, with Bay Steeds, joyous, with tails like peacock plumes, Let no men check thy course as fowlers stay the bird: pass o’er them as o’er desert lands.

अध्याय २०

श्लोक 54

ए॒वेदिन्द्रं॒ वृष॑णं॒ वज्र॑बाहुं॒ वसि॑ष्ठासो अ॒भ्य॒र्चन्त्य॒र्कैः ।स न॑ स्तु॒तो वी॒रव॑द्धातु॒ गोम॑द्यू॒यं पा॑त स्व॒स्तिभि॒: सदा॑ नः

evedindraṃ vṛṣaṇaṃ vajrabāhuṃ vasiṣṭhāso abhyarcantyarkaiḥ | sa na stuto vīravaddhātu gomadyūyaṃ pāta svastibhi: sadā naḥ

हिन्दी अर्थ

प्राणापान हमारी दिनरात रक्षा करते है। सरस्वती हमारे अन्धकार को दूर करती है। इन सबकी कृपा से हम नीरोग बन व दिव्य गुणों को प्राप्त कर देव=परमात्मा १. तिस्रः तीनों सरस्वती ज्लान की अधिदेवता, भारत्ी=वाणी तथा इडाश्रद्धा त्रेधा =जो तीन प्रकार से अवस्थित है, ' सरस्वती ' द्युलोक मे, “इडा' (श्रद्धा) अन्तरिक्षलोक में तथा

English

Verily the Vasishthas hymn with praises Indra the mighty One whose arm wields thunder. Praised, may he guard our wealth in men and cattle. Ye Gods, preserve us evermore with blessings.

अध्याय २०

श्लोक 55

समि॑द्धो अ॒ग्निर॑श्विना त॒प्तो घ॒र्मो वि॒राट् सु॒तः ।दु॒हे धे॒नुः सर॑स्वती॒ सोम॑ᳪ शु॒क्रमि॒हेन्द्रि॒यम्

samiddho agniraśvinā tapto gharmo virāṭ sutaḥ | duhe dhenuḥ sarasvatī soma śukramihendriyam

हिन्दी अर्थ

सोम मनुष्य को तीव्र बुद्धि व उल्लासमय जीवनवाला बनाता हे। यह शरीर मे ही सुरक्षित रहे ', इसके लिए आवश्यक है कि हम स्वाध्यायशील हों, प्राणापान के अभ्यासी हों, वही वाणी बोले जो क्रोधशुन्य हो तथा हदय में श्रद्धा कौ भावना से १. गतमन्त्र में सोम के शरीर में परिखुत होने पर बुद्धि कौ तीव्रता व हदय मे उल्लास

English

Fire hath been kindled, Asvins Twain! the Gharma warmed, the Radiant pressed, Here the Milch-Cow Sarasvatî hath poured bright Soma, Indra's own.

अध्याय २०

श्लोक 56

त॒नू॒पा भि॒षजा॑ सु॒तेऽश्विनो॒भा सर॑स्वती ।मध्वा॒ रजा॑ᳪसीन्द्रि॒यमिन्द्रा॑य प॒थिभि॑र्वहान्

tanūpā bhiṣajā sute'śvinobhā sarasvatī | madhvā rajāsīndriyamindrāya pathibhirvahān

हिन्दी अर्थ

सोमी ऋतु के अनुसार आचरण करता हे, जितेन्द्रिय बनता हे, जानी व तीव्र गतिवाला होता हे, प्राणापान कौ साधना से परमात्मा के साथ अपना सम्बन्ध जोडता है। १. अश्विना=प्राणापान गोभिः न=(नश्चार्थे -म०) जानेन्दियों के साथ अथवा ज्ञान की वाणियों के साथ सोमम्-सोम को समधातम्-धारण करते ह। २. परिस्रुता=सोम के

English

When Soma flows Sarasvatî and both the Asvins, Leeches and Body-guards, bear to Indra strength by passage through the realms of air.

अध्याय २०

श्लोक 57

इन्द्रा॒येन्दु॒ᳪ सर॑स्वती॒ नरा॒शᳪसे॑न न॒ग्नहु॑म् ।अधा॑ताम॒श्विना॒ मधु॑ भेष॒जं भि॒षजा॑ सु॒ते

indrāyendu sarasvatī narāśasena nagnahum | adhātāmaśvinā madhu bheṣajaṃ bhiṣajā sute

हिन्दी अर्थ

हम सोमरक्षा द्वारा अपने जीवन को ज्लानसम्पन्न, प्रसन्नता से युक्त मनवाला १. अश्िविनातप्राणापान तथा सरस्वती=ज्लानाधिदेवता नमुचेः =(न- मुचि, धर्ममत्यजत) धर्म को, अपने धारणात्मक कर्म को न छोड्नेवाले प्रभु के धियाध्यान व ज्ञान के द्वारा हविः =त्यागपूर्वक अदन की भावना को ओर इन्द्रियम्=इन्द्रियों कौ शक्ति को तथा शुक्रम्=

English

When Soma flowed the Asvins Twain, the Leeches, brought sweet medicine, With Men's Desire Sarasvatî for Indra, Soma, Nagnahu.

अध्याय २०

श्लोक 58

आ॒जुह्वा॑ना॒ सर॑स्व॒तीन्द्रा॑येन्द्रि॒याणि॑ वी॒र्य॒म् ।इडा॑भिर॒श्विना॒विष॒ᳪ समूर्ज॒ᳪ सᳪ र॒यिं द॑धुः

ājuhvānā sarasvatīndrāyendriyāṇi vīryam | iḍābhiraśvināviṣa samūrja sa rayiṃ dadhuḥ

हिन्दी अर्थ

हम प्राणायाम व स्वाध्याय के द्वारा आश्विनीदेवों व सरस्वती कौ आराधना करे, जिससे हमारा जीवन ‹ हवि-इन्द्रिय-शुक्र-वसु व मघ' से सुशोभित हो। १. यम्-जिस इन्द्रम्-इन्द्र को अश्विना-प्राणापान व सरस्वती = ज्ञानाधिदेवता हवि= दानपूर्वक अदन के द्वारा अवर्धयन् बढ़ाते है सः=वह इन्द्र॒ आसुरे=उस प्राणशक्ति के

English

Worshipped, Sarasvatî bestowed on Indra, senses, manly power. The Asvins, through oblations paid, combined food, energy, and wealth.

अध्याय २०

श्लोक 59

अ॒श्विना॒ नमु॑चेः सु॒तᳪ सोम॑ᳪ शु॒क्रं प॑रि॒स्रुता॑ ।सर॑स्वती॒ तमा ऽभ॑रद्ब॒र्हिषेन्द्रा॑य॒ पात॑वे

aśvinā namuceḥ suta soma śukraṃ parisrutā | sarasvatī tamā 'bharadbarhiṣendrāya pātave

हिन्दी अर्थ

हमारी प्राणासाधना व स्वाध्याय अविच्छिन्न रूप से चलें, हममे हवि व यज्ञ की वृत्ति हो, हम प्रभु के उपासक बनें ओर बल व एेश्वर्य को प्राप्त करे। दधानाऽअभ्यनूषत हविषां यज्ञऽ इद्धियैः।।६९॥ १. गतमन्त्र के यं इन्द्रम्' शब्द का प्रस्तुत मन्त्र में ' तं इन्द्रम्" से उल्लेख करते है।

English

The Asvins brought from Namuchi pressed Soma bright with foaming juice. Sarasvatî with sacred grass brought that to Indra for his drink.

अध्याय २०

श्लोक 60

क॒व॒ष्यो न॒ व्यच॑स्वतीर॒श्विभ्यां॒ न दुरो॒ दिश॑: ।इन्द्रो॒ न रोद॑सी उ॒भे दु॒हे का॒मान्त्सर॑स्वती

kavaṣyo na vyacasvatīraśvibhyāṃ na duro diśa: | indro na rodasī ubhe duhe kāmāntsarasvatī

हिन्दी अर्थ

हवि व इच्द्रिय-शक्तियों से हमारा जीवन स्तुत्य बने। १. ये=जो सविता निर्माण की देवता, वरुणः च=देषनिवारण की देवता तथा भगः =( भज सेवायाम्) उपासना की वृत्ति इन्द्रे-जितेन्द्रिय पुरुष में इद्द्रियम्-वीर्य को, इन्द्ियशक्ति को दधुः=धारण करते हैँ तो २. सः=वह इन्द्र सुत्रामा=( सु+त्रा) बड़ी उत्तमता से अपना त्राण

English

Sarasvatî and Indra with the Asvins Twain milked out desires From heaven and earth, the regions, the resounding and expansive doors.

अध्याय २०

श्लोक 61

उ॒षासा॒नक्त॑मश्विना॒ दिवेन्द्र॑ सा॒यमि॑न्द्रियैः ।स॒ञ्जा॒ना॒ने सु॒पेश॑सा॒ सम॑ञ्जाते॒ सर॑स्वत्या

uṣāsānaktamaśvinā divendra sāyamindriyaiḥ | sañjānāne supeśasā samañjāte sarasvatyā

हिन्दी अर्थ

सविता, वरुण व भग की कृपा से हम ' सुत्रामा, हविष्पति व प्रभुसेवी ' बने। १. सवितानिर्माण की देवता तथा वरुणः =द्वेषनिवारण कौ देवता यजमानाय यक्शील दाशुषे=दाश्वान् के लिए, देनेवाले के लिए दधत्-धारण करते है, अर्थात् यदि हम निर्माण के कार्यो में लगे रहते है ओर ईर्ष्या-द्वेष की भावना से ऊपर उठ जाते है तो हमारा जीवन

English

Ye Asvins, Dawn and Night, by day and in the evening, fair of hue, Accordant, with Sarasvatî, deck Indra with surpassing powers.

अध्याय २०

श्लोक 62

पा॒तं नो॑ अश्विना॒ दिवा॑ पा॒हि नक्त॑ᳪ सरस्वति ।दैव्या॑ होतारा भिषजा पा॒तमिन्द्र॒ᳪ सचा॑ सु॒ते

pātaṃ no aśvinā divā pāhi nakta sarasvati | daivyā hotārā bhiṣajā pātamindra sacā sute

हिन्दी अर्थ

निर्माणात्मक कार्यो में लगना व ईर्घ्या-द्वेष से ऊपर उठना मनुष्य को यन्ञशील व दाश्वान् (दान देनेवाला) बनाते है। अपना त्राण करनेवाला जितेद्दरिय पुरुष “वसु, बल व इन्द्रिय" को प्रभु से प्राप्त करता है। सुत्रामा यश॑सा बलं दधाना यज्ञमांशत ॥७२॥

English

Guard us, O Asvins, through the day, guards us by night, Sarasvatî. Celestial Hotars, Leeches! both guard Indra when the juice is pressed.

अध्याय २०

श्लोक 63

ति॒स्रस्त्रे॒धा सर॑स्वत्य॒श्विना॒ भार॒तीडा॑ ।ती॒व्रं प॑रि॒स्रुता॒ सोम॒मिन्द्रा॑य सुषुवु॒र्मद॑म्

tisrastredhā sarasvatyaśvinā bhāratīḍā | tīvraṃ parisrutā somamindrāya suṣuvurmadam

हिन्दी अर्थ

हम द्वेष से ऊपर उठे ओर बल व इच्दियशक्तिसम्पन्न हों। प्रभु-स्मरणपूर्वक निर्माण के कार्यो में लगे रहं ओर श्रीसम्पन्न बनें। सुत्रामा=अपने को रोगादि से बचानेवाला पुरुष यशस्वी बल के लाभ के लिए जीवन को सदा कर्मो में व्याप्त रखता हे। १. अश्विनाप्राणापान गोधिः ानेन्दरियों के द्वारा अथवा वेदवाणियों के द्वारा इन्द्रियम् बल

English

The Asvins, and the Three, apart, Sarasvatî, Idâ, Bhâratî, As drink to gladden Indra, poured strong Soma with the foaming juice.

अध्याय २०

श्लोक 64

अ॒श्विना॑ भेष॒जं मधु॑ भेष॒जं न॒: सर॑स्वती ।इन्द्रे॒ त्वष्टा॒ यश॒: श्रिय॑ᳪ रू॒पᳪ-रू॑पमधुः सु॒ते

aśvinā bheṣajaṃ madhu bheṣajaṃ na: sarasvatī | indre tvaṣṭā yaśa: śriya rūpa-rūpamadhuḥ sute

हिन्दी अर्थ

प्राणायाम से हमारी इद्दि्यँ निर्दोष बन बद्टी हुई शक्तिवाली होती है ओर ज्ञान- प्राप्ति से हमारी यज्लियवृत्ति का विकास होता है, हम हविरूप हो जाते है। सर॑स्वती हविष्यतीन्द्र कर्मसु नोऽ वत ।॥७२॥ १. ता=पिले मन्त्र में बारम्बार उल्लिखित अश्विनीदेव नासत्या=(न असत्यो ) असत्य

English

The Asvins, our Sarasvatî, and Tvashtar, when the juice was shed, Gave Indra balm, yea, mead as balm, glory and fame and many a shape.

अध्याय २०

श्लोक 65

ऋ॒तु॒थेन्द्रो॒ वन॒स्पति॑: शशमा॒नः प॑रि॒स्रुता॑ ।की॒लाल॑म॒श्विभ्यां॒ मधु॑ दु॒हे धे॒नुः सर॑स्वती

ṛtuthendro vanaspati: śaśamānaḥ parisrutā | kīlālamaśvibhyāṃ madhu duhe dhenuḥ sarasvatī

हिन्दी अर्थ

जव हम उत्तमता से कर्मों मे लगेंगे तब प्राणापान हमारे वैद्य होगे। हमें ये नीरोग रखेंगे तथा ज्ञान हममे उत्तमता का पूरण करेगा। हम वासना को नष्ट कर यज्ञशील विपिपानाः सर॑स्वतीन्द्रं कर्मस्वावत ॥७६॥ १. अश्विना=हे अश्विनीदेवो! युवम्=तुम दोनों तथा सरस्वति ज्ञानाधिदेवते! नमुचौ =अपने

English

Praising with foaming liquor at due times, Indra, Vanaspatî , Sarasvatî as cow gave forth sweet beverage with the Asvins Twain.

अध्याय २०

श्लोक 66

गोभि॒र्न सोम॑मश्विना॒ मास॑रेण परि॒स्रुता॑ ।सम॑धात॒ᳪ सर॑स्वत्या॒ स्वाहेन्द्रे॑ सु॒तं मधु॑

gobhirna somamaśvinā māsareṇa parisrutā | samadhāta sarasvatyā svāhendre sutaṃ madhu

हिन्दी अर्थ

हम सदा प्रभु के साथ रहे। किसी भी कर्मको करते हए प्रभु को भूलन जाणँ। संसार के सब व्यवहारो को क्रीडारूप मे ले, क्रियाशील वनें। पुत्रमिव पितरावश्विनोभेन्द्रावथुः काव्यै्द सनांभिः। १. है इन्द्र-जितेद्दिय पुरुष! पितरौ पुत्रम् इव=जेसे माता-पिता पुत्र को रक्षित करते

English

Asvins, to Indra ye with cows, with Mâsara and foaming drink Gave, with Sarasvatî—All hail!—the pressed-out Soma juice and mead.

अध्याय २०

श्लोक 67

अ॒श्विना॑ ह॒विरि॑न्द्रि॒यं नमु॑चेर्धि॒या सर॑स्वती ।आ शु॒क्रमा॑सु॒राद्वसु॑ म॒घमिन्द्रा॑य जभ्रिरे

aśvinā havirindriyaṃ namucerdhiyā sarasvatī | ā śukramāsurādvasu maghamindrāya jabhrire

हिन्दी अर्थ

१. प्राणापान हमारी इस प्रकार रक्षा करते हैँ जैसे माता-पिता पुत्र कौ। प्राणसाधना करने पर मनुष्य कवियों की दृष्टि प्राप्त करता है, उत्तम कर्मो मेँ व्यापृत होता है। २. इस प्राणसाधना से सोम (वीर्य) का रक्षण होने पर ज्ञानाधिदेवता हमारे जीवन को प्रजञापूर्वक कर्मो से उपसेवित करती ह ओर हम पापशून्य एेश्वर्यवाले बनते है)

English

The Asvins and Sarasvatî by wit from fiendish Namuchi Brought unto Indra sacred food, strength, brilliant treasure, ample wealth.

अध्याय २०

श्लोक 68

यम॒श्विना॒ सर॑स्वती ह॒विषेन्द्र॒मव॑र्धयन् ।स बि॑भेद व॒लं म॒घं नमु॑चावासु॒रे सचा॑

yamaśvinā sarasvatī haviṣendramavardhayan | sa bibheda valaṃ maghaṃ namucāvāsure sacā

हिन्दी अर्थ

अग्निहोत्र से १. रोग दूर होते है। २. रुधिर शुद्ध होता हे। ३. सोम कौ रक्षा होती है। ४. बुद्धि शुद्ध होती हे। १. है अग्ने-अग्निकुण्ड में आहत अग्ने! ते आस्ये तेरे मुख में हविः अहावि मुज्ञ से घृत की आहति दी जाती हे। स्रुचि इव घृत्तम्-जेसे चम्मच में घी तथा चम्वि इव

English

That Indra, strong through sacrifice by Asvins and Sarasvatî, Cleft Vala through to win him wealth, with Namuchi of Asura birth.

अध्याय २०

श्लोक 69

तमिन्द्रं॑ प॒शव॒: सचा॒श्विनो॒भा सर॑स्वती ।दधा॑ना अ॒भ्य॒नूषत ह॒विषा॑ य॒ज्ञ इ॑न्द्रि॒यैः

tamindraṃ paśava: sacāśvinobhā sarasvatī | dadhānā abhyanūṣata haviṣā yajña indriyaiḥ

हिन्दी अर्थ

सतत होम के तीन लाभ हैँ-१. समय पर वर्षा होने से अन्नादि के ठीक उत्पादन से धन की वृद्धि २. वायुशुद्धि व कृमिसंहार द्वारा नीरोगता से शक्ति कौ वृद्धि ३- तथा त्याग-भावना के वर्धन से यश कौ वृद्धि। १. इस विदर्भं ऋषि के प्रकरण को समाप्त करते हुए कहते है कि घरों में यज्ञादि

English

Supporting him in sacrifice with sacred food and mighty powers, Sarasvatî, both Asvins and the cattle hymned that Indra's praise.

अध्याय २०

श्लोक 70

य इन्द्र॑ इन्द्रि॒यं द॒धुः स॑वि॒ता वरु॑णो॒ भग॑: ।स सु॒त्रामा॑ ह॒विष्प॑ति॒र्यज॑मानाय सश्चत

ya indra indriyaṃ dadhuḥ savitā varuṇo bhaga: | sa sutrāmā haviṣpatiryajamānāya saścata

हिन्दी अर्थ

(क) प्राणापान की साधना हमें ' तेजस्विता व चक्षु" प्रदान करेगी, (ख) सरस्वती की आराधना से हमारा जीवन उत्कृष्ट वीर्यवान् होगा तथा (ग) प्रभु का उपासन हमे "वेदवाणी, बल व जीवन-यात्रा के लिए आवश्यक धन' प्राप्त कराएगा। गोम॑दू षु णांसत्याश्वावद्यातमश्विना । वत्ती स्रा नुपाय्य॑म् ।॥८९॥

English

Indra whom Bhaga, Savitar, and Varuna supplied with power, Lord of the sacrifice, may he, Good Guardian, love the worshipper.

अध्याय २०

श्लोक 71

स॒वि॒ता वरु॑णो दध॒द्यज॑मानाय दा॒शुषे॑ ।आद॑त्त॒ नमु॑चे॒र्वसु॑ सु॒त्रामा॒ बल॑मिन्द्रि॒यम्

savitā varuṇo dadhadyajamānāya dāśuṣe | ādatta namucervasu sutrāmā balamindriyam

हिन्दी अर्थ

राष्टरपति व सेनापति का कर्तव्य है कि राष्ट की आन्तर व बाह्य शत्रुओं से रक्षा करे ओर राष्ट को अनाधृष्ट बनारपे। १. ता अश्विना=-उल्लिखित प्रकार से राष्ट का निर्माण व रक्षण करनेवाले सभाव सेना के ईश राजाओ (शासको)! नः=हम सबके लिए रयिम्-धन व रेश्वर्य को

English

Savitar, Varuna bestow gifts on the liberal offerer, Strength, power and treasure which the Good Protector took from Namuchi!

अध्याय २०

श्लोक 72

वरु॑णः क्ष॒त्रमि॑न्द्रि॒यं भगे॑न सवि॒ता श्रिय॑म् ।सु॒त्रामा॒ यश॑सा॒ बलं॒ दधा॑ना य॒ज्ञमा॑शत

varuṇaḥ kṣatramindriyaṃ bhagena savitā śriyam | sutrāmā yaśasā balaṃ dadhānā yajñamāśata

हिन्दी अर्थ

राजा इस बात का ध्यान करे कि प्रजा मे कोई भी निर्धन न हो। साथ ही धन को ही साध्य बनाकर कोई ज्ञान व उपासना को विलुप्त भीन कर दे। एेसा व्यक्ति राष्ट के लिए हानिकर होता हे। पावका नः सर॑स्वती वाजैभिर्वाजिनीवती । यज्ञं वष्टु धियाव॑सुः॥८४॥

English

Varuna giving sway and power, Savitar grace with happiness, The Good Protector giving strength with fame, obtained the sacrifice.

अध्याय २०

श्लोक 73

अ॒श्विना॒ गोभि॑रिन्द्रि॒यमश्वे॑भिर्वी॒र्यं बल॑म् ।ह॒विषेन्द्र॒ᳪ सर॑स्वती॒ यज॑मानमवर्धयन्

aśvinā gobhirindriyamaśvebhirvīryaṃ balam | haviṣendra sarasvatī yajamānamavardhayan

हिन्दी अर्थ

सरस्वती, अर्थात् ज्ञान हमारे जीवनों को पवित्र करता है। हमे पौष्टिक अन्नो को प्राप्त कराता है। बुद्धिपूर्वकं कर्म करते हुए हम धनो को प्राप्त करते हैँ, यज्ञादि उत्तम कर्मो मे उसका विनियोग करते है। चोदयित्री सूनृतानां चेत॑न्ती सुमतीनाम् । यज्ञं द॑धे सर॑स्वती॥॥८५॥

English

With cows the Asvins, mighty power, with horses manly vigour, strength, With sacred food Sarasvatî, made Indra, Sacrificer, strong.

अध्याय २०

श्लोक 74

ता नास॑त्या सु॒पेश॑सा॒ हिर॑ण्यवर्तनी॒ नरा॑ ।सर॑स्वती ह॒विष्म॒तीन्द्र॒ कर्म॑सु नोऽवत

tā nāsatyā supeśasā hiraṇyavartanī narā | sarasvatī haviṣmatīndra karmasu no'vata

हिन्दी अर्थ

सरस्वती (क) हमारी वाणियों को सूनृत बनाती हे, (ख) हमारे मनों व मस्तिष्को में सुमति को जन्म देती हे, (ग) हमारे जीवन को यज्ञरूप कर देती है। महोऽअर्णाः सर॑स्वती प्र चेतयति केतुना । धियो विश्वा वि र।जति।।८६॥ १. यह सरस्वती वेदवाणी महो अर्णः=एक महान् जल है। जिस प्रकार समुद्र का

English

May those Nâsatyas, fair of form, the Men who ride on paths of gold, Oblation-rich Sarasvatî, thou, Indra! help us in our rites.

अध्याय २०

श्लोक 75

ता भि॒षजा॑ सु॒कर्म॑णा॒ सा सु॒दुघा॒ सर॑स्वती ।स वृ॑त्र॒हा श॒तक्र॑तु॒रिन्द्रा॑य दधुरिन्द्रि॒यम्

tā bhiṣajā sukarmaṇā sā sudughā sarasvatī | sa vṛtrahā śatakraturindrāya dadhurindriyam

हिन्दी अर्थ

वेद ज्ञान का महान् समुद्र हे। यह प्रकाश से हमें प्रकृष्ट चेतनावाला बना देता है। इसमें सब सत्यविद्याओं का प्रकाश हुआ हे। प्रभु-प्राप्ति की प्रत्न कामना १. वेदज्ञान की प्राप्ति की कामनावाला गत्तमन्त्र का "मधुच्छन्दा" प्रस्तुत मन्त्र में

English

Those Leeches righteous in their deeds, She, rich in milk, Sarasvatî, That Vritra-Mayer hundred-powered, invested Indra with his might.

अध्याय २०

श्लोक 76

यु॒वᳪ सु॒राम॑मश्विना॒ नमु॑चावासु॒रे सचा॑ ।वि॒पि॒पा॒नाः सर॑स्व॒तीन्द्रं॒ कर्म॑स्वावत

yuva surāmamaśvinā namucāvāsure sacā | vipipānāḥ sarasvatīndraṃ karmasvāvata

हिन्दी अर्थ

' मधुच्छन्दा ' =मधुर इच्छावाला वह है जो प्रभु को प्राप्त करना चाहता हे। इसी उदेश्य से यह सोमकणों की रक्षा करता हे, अपनी बुद्धि को तीत्र नाता हे, शक्तियों प्रभु-प्राप्ति के र्पौच उपाय १. प्रभु अपनी कामना करनेवाले जीवात्मा से कहते है कि इन्द्र=ठे जितेन्द्रिय पुरुष!

English

Ye Asvins and Sarasvatî, joint drinkers of the Sara draught, In Namuchi of Asura birth, give aid to Indra in his deeds.

अध्याय २०

श्लोक 77

पु॒त्रमि॑व पि॒तरा॑व॒श्विनो॒भेन्द्रा॒वथु॒: काव्यै॑र्द॒ᳪसना॑भिः ।यत्सु॒रामं॒ व्यपि॑ब॒: शची॑भि॒: सर॑स्वती त्वा मघवन्नभिष्णक्

putramiva pitarāvaśvinobhendrāvathu: kāvyairdasanābhiḥ |yatsurāmaṃ vyapiba: śacībhi: sarasvatī tvā maghavannabhiṣṇak

हिन्दी अर्थ

प्रभु-प्राप्ति के लिए आवश्यक है कि १. हम शीघ्रता से कार्यो मेँ व्यापन वाले हों। २. सदा स्तवन करते हए प्रशस्त इन्द्रियाश्ववाले बनें। ३. सोम के उत्पादन के लिए सात्विक अन्न का सेवन करे। १. सरस्वत्या ज्ञानाधिदेवता के साथ सजोषसा=समान प्रीतिवाले अश्विना अश्वीदेव

English

As parents aid a son, etc., as in X. 34.

अध्याय २०

श्लोक 78

यस्मि॒न्नश्वा॑स ऋष॒भास॑ उ॒क्षणो॑ व॒शा मे॒षा अ॑वसृ॒ष्टास॒ आहु॑ताः ।की॒ला॒ल॒पे सोम॑पृष्ठाय वे॒धसे॑ हृ॒दा म॒तिं ज॑नय॒ चारु॑म॒ग्नये॑

yasminnaśvāsa ṛṣabhāsa ukṣaṇo vaśā meṣā avasṛṣṭāsa āhutāḥ | kīlālape somapṛṣṭhāya vedhase hṛdā matiṃ janaya cārumagnaye

हिन्दी अर्थ

ज्ञान-प्राप्ति के लिए चलनेवाला स्वाध्याय व प्राणापान कौ साधना के लिए होनेवाला प्राणायाम हमें सोम की रक्षा के लिए समर्थं बनाता है। इस प्रकार यह बीसर्वाँ अध्याय ' मधुच्छन्दा" के मन्त्रं पर समाप्त होता है। सबसे मधुर इच्छा यही है कि मैं स्वाध्याय व प्राणायाम के द्वारा सोम का पान करनेवाला चनूं। इस

English

He in whom horses, bulls, oxen, and barren cows, and rams, when duly set apart, are offered up, To Agni, Soma-sprinkled, drinker of sweet juice, Disposer, with thy heart bring forth a pleasant hymn.

अध्याय २०

श्लोक 79

अहा॑व्यग्ने ह॒विरा॒स्ये॒ ते स्रु॒ची॒व घृ॒तं च॒म्वी॒व॒ सोम॑: ।वा॒ज॒सनि॑ᳪ र॒यिम॒स्मे सु॒वीरं॑ प्रश॒स्तं धे॑हि य॒शसं॑ बृ॒हन्त॑म्

ahāvyagne havirāsye te srucīva ghṛtaṃ camvīva soma: | vājasani rayimasme suvīraṃ praśastaṃ dhehi yaśasaṃ bṛhantam

हिन्दी अर्थ

राजा के त्रत है-(क) मै मस्तिष्क में पवित्र विचारो को धारण करूंगा, (ख) मेरा मुख यशस्वी शब्दोँवाला हो, (ग) मेरी इन्द्र्यो , मन व बुद्धि सब-के-सवब दीप्त व ज्ञान की रङ्मियोँवाले हो, (घ) प्राण मेरी दीप्ति व अमरता का कारण हो, (ङ) चक्षु सम्रार् हो ओर (च) कान विराट् हो-एेसा मेँ प्रयत्न करूगा।

English

Within thy mouth is poured the offering, Agni, as Soma into cup, oil into ladle. Vouchsafe us wealth, strength-winning, blest with heroes, wealth lofty, praised by men, and full of splendour.

अध्याय २०

श्लोक 80

अ॒श्विना॒ तेज॑सा॒ चक्षु॑: प्रा॒णेन॒ सर॑स्वती वी॒र्य॒म् ।वा॒चेन्द्रो॒ बले॒नेन्द्रा॑य दधुरिन्द्रि॒यम्

aśvinā tejasā cakṣu: prāṇena sarasvatī vīryam | vācendro balenendrāya dadhurindriyam

हिन्दी अर्थ

मेरा तेज निमित्तान्तर निरपेक्ष होगा। ५. अंगुलियों ओर अद्ध क्रियाओं में व्याप्त रहकर आनन्द का अनुभव करेगे। ६. सहनशक्ति मेरी मित्र होगी। वाह् मे बल॑मिद्धियश्टस्तौ मे कर्म" वीर्यम् । आत्मा क्षत्रमुरो मम॑ ।७॥ १. बलम्=शरीर का बल तथा इन्द्रियम्-एक एक इन्द्रिय की शक्ति ही मे बाह्=मेरी

English

The Asvins gave, with lustre, sight, Sarasvatî manly strength with breath. Indra with voice and might gave Indra vigorous power.

अध्याय २०

श्लोक 81

गोम॑दू॒ षु णा॑सत्या॒श्वा॑वद्यातमश्विना ।व॒र्ती रु॑द्रा नृ॒पाय्य॑म्

gomadū ṣu ṇāsatyāśvāvadyātamaśvinā | vartī rudrā nṛpāyyam

हिन्दी अर्थ

सूर्य से सरण व गति की प्रेरणा लेकर मेँ अपने जाग्रत् व स्वप्न-दोनों को निष्पाप व कल्याणकर वनाऊँ। सूचना- मन्त्र संख्या १४, १५ व १६ में "अग्नि, वायु व सूर्य' से पापमोचन कौ प्रार्थना की गई है। " अग्नि" शब्द “अगि गतौ" से बनता है, तो वायु “वा गतौ ' से ओर सूर्य “सृ गतौ'

English

With kine, Nâsatyas! and with steeds, come, Asvins, Rudras! to the house, the sure protector of its men;

अध्याय २०

श्लोक 82

न यत्परो॒ नान्त॑र आद॒धर्ष॑द्वृषण्वसू ।दु॒:शᳪसो॒ मर्त्यो॑ रि॒पुः

na yatparo nāntara ādadharṣadvṛṣaṇvasū | du:śaso martyo ripuḥ

हिन्दी अर्थ

- पुण्यलोक में ' इन्द्र॒ ओर वायु! का स्थापन होता है, अर्थात् वरहो के निवासी सबल व सन्ञान होते है। इनमें कोई निर्बल व मूर्खं नहीं होता। अन्नाभाव से कोई मरता नही। १. गतमन्त्र में वर्णित पुण्यलोकं के निवासियों के लिए ही कहते है कि अंशुना ज्ञान की किरण के साथ ते-तेरी अंशु=ज्ञान कौ किरण पृच्यताम् संपृक्त हो , अर्थात् तेरा

English

Such, wealthy Gods! as none afar or standing near to us may harm, yea, no malicious mortal foe.

अध्याय २०

श्लोक 83

ता न॒ आ वो॑ढमश्विना र॒यिं पि॒शङ्ग॑संदृशम् ।धिष्ण्या॑ वरिवो॒विद॑म्

tā na ā voḍhamaśvinā rayiṃ piśaṅgasaṃdṛśam | dhiṣṇyā varivovidam

हिन्दी अर्थ

प्रभु का प्रिय वह होता है जो-(क) ध्यानवाला होता हे, (खः) दान देता है, (ग) इन्द्रियों को शुद्ध रखता है, तथा (घ) सदा प्रभु-नाम स्मरण करनेवाला बनता है। येन ज्योतिरज॑नयन्रृतावृधो देवं देवाय जागुंवि ॥३०॥ १. पिछले मन्त्र की समाप्ति "प्रभु-स्तवन करनेवाला" बनने से हुई शथी। उसी

English

Do ye, O longed-for Asvins, lead us on to wealth of varied form, wealth that shall bring us room and rest.

अध्याय २०

श्लोक 84

पा॒व॒का न॒: सर॑स्वती॒ वाजे॑भिर्वा॒जिनी॑वती ।य॒ज्ञं व॑ष्टु धि॒याव॑सुः

pāvakā na: sarasvatī vājebhirvājinīvatī | yajñaṃ vaṣṭu dhiyāvasuḥ

हिन्दी अर्थ

उपासना व यम-नियमों के पालन से हम परमात्मा का अपने में ग्रहण करे, जिससे हमारी प्राणापानशक्ति की वृद्धि हो, ज्ञान का प्रकाश प्राप्त हो, हमारी आत्मशक्ति का विकास हो तथा हम उत्तमता से अपना त्राण कर सके-आधि-व्याधियों से बच सके। १. गतमन्त्र के अनुसार उपासना व यम-नियमों के पालन से प्रभु का अपने में ग्रहण

English

Wealthy in spoil, enriched with hymns, may pure Sarasvatî desire with eager love our sacrifice. S5 She who awakens sounds of joy, inspires our hymns, Sarasvatî, she hath allowed our sacrifice.

अध्याय २०

श्लोक 85

चो॒द॒यि॒त्री सू॒नृता॑नां॒ चेत॑न्ती सुमती॒नाम् ।य॒ज्ञं द॑धे॒ सर॑स्वती

codayitrī sūnṛtānāṃ cetantī sumatīnām | yajñaṃ dadhe sarasvatī

हिन्दी अर्थ

राजा प्रजा की रक्षा करे। प्रजा राजा को अन्नभाग दे। प्रशंसित राजा हमारे राष्ट को वीरोवाला तथा गौवोवाला बनाये। सब मन्त्री आदि राष्ट कौ स्थिति को उत्तम समिंद्धोऽअग्निरछ्विना तप्तो घर्मो विराट् सुतः। १. है अश्विनौतगुणों व कर्मो में व्याप्त होनेवाले स्त्री - पुरुषो! घर को अच्छा बनाने

English

Sarasvatî, the mighty flood, she with her light illuminates, she brightens every pious thought.

अध्याय २०

श्लोक 86

म॒हो अर्ण॒: सर॑स्वती॒ प्र चे॑तयति के॒तुना॑ ।धियो॒ विश्वा॒ वि रा॑जति

maho arṇa: sarasvatī pra cetayati ketunā | dhiyo viśvā vi rājati

हिन्दी अर्थ

आदर्श घर मे पति-पत्नी सदा कर्मव्यापृत रहते हे, घर में अग्निहोत्र होता हे, तपस्या, प्राणशक्ति, ज्ञानदीप्ति व निर्माणात्मक कार्य वहाँ विद्यमान होते है। गोवों ओर ज्ञान का दोहन होता है। अन्त मे सौम्यता के साथ वर्ह वीरता होती है तभा सब इच्िर्योँ ठीक मध्वा रजाश््सीद्धियमिन्द्रंय पथिभिंर्वहान् ।५६॥

English

She who awakens sounds of joy, inspires our hymns, Sarasvatî, she hath allowed our sacrifice.

अध्याय २०

श्लोक 87

इन्द्रा या॑हि चित्रभानो सु॒ता इ॒मे त्वा॒यव॑: ।अण्वी॑भि॒स्तना॑ पू॒तास॑:

indrā yāhi citrabhāno sutā ime tvāyava: | aṇvībhistanā pūtāsa:

हिन्दी अर्थ

प्राणापान तथा ज्ञान हमारे रोगों के ओषध होते हेँ। प्रभुकृपा से हमारा जीवन यश, श्री व रूपसम्पन्न होता हे। कीलाल॑मण्विभ्यां मध॑ दुहे धेनुः सस्स्वती ॥६५॥ १. ‹ पिछले मन्त्र के अनुसार अपने मे सोम का उत्पादन करनेवाला इन्द्र कैसा चनता प्राण हमें सत्य- सुन्दर प्रकाशमय व उन्नत बना्णँ। ज्ञान हममे त्याग कौ भावना भरे। कर्मशील बनकर हम प्रभु की कृपा के पात्र बनें। अरेषिः-विदर्भिः। देवता-अश्विसरस्वतीन्द्राः। छन्द:-अनुष्टुप्। स्वरः गान्धारः॥ ता भिषजां सुकर्मणा सा सुदुघा सर॑स्वती ।

English

O Indra, marvellously bright, come, these libations long for thee, thus by fine fingers purified.

अध्याय २०

श्लोक 88

इन्द्रा या॑हि धि॒येषि॒तो विप्र॑जूतः सु॒ताव॑तः ।उप॒ ब्रह्मा॑णि वा॒घत॑:

indrā yāhi dhiyeṣito viprajūtaḥ sutāvataḥ | upa brahmāṇi vāghata:

हिन्दी अर्थ

राष्ट गौवोवाला हो, अश्वोँवाला हो, उसमें रक्षा का प्रबन्ध उत्तम हो, किसी प्रकार का भय न हो। राष्ट के अध्यक्ष कार्यव्यापृत, असत्य व्यवहार न करनेवाले व शत्रुओं के रोदक बलवाले हो। एेसे राष्ट मेँ ही सम्भव है कि ' गृत्समद" बनें (गृणाति माद्यति) प्रभ का स्तवन करें ओर प्रसन्न रहे।

English

Urged by the holy singer, sped by song, come, Indra, to the prayers of the libation-pouring priest.

अध्याय २०

श्लोक 89

इन्द्रा या॑हि॒ तूतु॑जान॒ उप॒ ब्रह्मा॑णि हरिवः ।सु॒ते द॑धिष्व न॒श्चन॑:

indrā yāhi tūtujāna upa brahmāṇi harivaḥ | sute dadhiṣva naścana:

हिन्दी अर्थ

- सरस्वती, अर्थात् ज्ञान हमारे जीवनों को पवित्र करता है। हमे पौष्टिक अन्नो को प्राप्त कराता है। बुद्धिपूर्वकं कर्म करते हुए हम धनो को प्राप्त करते हैँ, यज्ञादि उत्तम कर्मो मे उसका विनियोग करते है। चोदयित्री सूनृतानां चेत॑न्ती सुमतीनाम् । यज्ञं द॑धे सर॑स्वती॥॥८५॥ -' मधुच्छन्दा ' =मधुर इच्छावाला वह है जो प्रभु को प्राप्त करना चाहता हे। इसी उदेश्य से यह सोमकणों की रक्षा करता हे, अपनी बुद्धि को तीत्र नाता हे, शक्तियों प्रभु-प्राप्ति के र्पौच उपाय १. प्रभु अपनी कामना करनेवाले जीवात्मा से कहते है कि इन्द्र=ठे जितेन्द्रिय पुरुष!

English

Approach, O Indra, hasting thee, Lord of Bay Horses, to the prayer: in our libations take delight.

अध्याय २०

श्लोक 90

अ॒श्विना॑ पिबतां॒ मधु॒ सर॑स्वत्या स॒जोष॑सा ।इन्द्र॑: सु॒त्रामा॑ वृत्र॒हा जु॒षन्ता॑ᳪ सो॒म्यं मधु॑

aśvinā pibatāṃ madhu sarasvatyā sajoṣasā | indra: sutrāmā vṛtrahā juṣantā somyaṃ madhu

हिन्दी अर्थ

प्रभु-प्राप्ति के लिए आवश्यक है कि १. हम बुद्धिपूर्वक कर्म करे। २. सदा मेघावियों व ज्ञानियो का सङ्ग करे। उन्हीं से कर्मो के लिए प्रेरणा प्राप्त करे। ३. यज्ञो के करनेवाले बनें। ४. मेधावी हों। ५५. प्रभु स्तवन कौ वृत्तिवाले बने। १. गतमन्त्र के ही विषय को आगे बाते हए कहते है कि इन्द्र-हे आलस्यादि शत्रुओं

English

Accordant with Sarasvatî let the two Asvins drink the meath, May Indra, Vritra-slayer, Good Guardian, accept the Soma meath.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Yajur Veda — Chapter 20
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

Digitised text taken from the archive linked below. It has not been collated against a printed edition by this site.

पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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