Yajur Veda· Yajurveda Saṁhitā
18
अध्याय 18 / 40

Adhyāya 18

अध्याय 18

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अध्याय १८

श्लोक 1

वाज॑श्च मे प्रस॒वश्च॑ मे॒ प्रय॑तिश्च मे॒ प्रसि॑तिश्च मे धी॒तिश्च॑ मे॒ क्रतु॑श्च मे॒ स्वर॑श्च मे॒ श्लोक॑श्च मे श्र॒वश्च॑ मे॒ श्रुति॑श्च मे॒ ज्योति॑श्च मे॒ स्व॒श्च मे य॒ज्ञेन॑ कल्पन्ताम्

vājaśca me prasavaśca me prayatiśca me prasitiśca me dhītiśca me kratuśca me svaraśca me ślokaśca me śravaśca me śrutiśca me jyotiśca me svaśca me yajñena kalpantām

हिन्दी अर्थ

यज्ञेननप्रभु-सम्पर्क द्वारा यज्ञ मे=मेरे लिए कल्पन्ताम् सम्पन्न हों। १. पिछले मन्त्र की समाप्ति ‹ स्वः'=सुख पर हई हे। उस सुख के लिए सब इन्द्रियों व शरीर का ठीक होना आवश्यक है। सुख का अर्थ ही सु+ख=इन्दरियो का उत्तम होना है , अतः इन्द्रियों की उत्तमता व स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करते हुए कहते है कि प्राणश्च

English

com The Texts of the White Yajurveda, tr. Ralph T.H. Griffith, [1899], MAY my strength and my gain, and my inclination and my influence, and my thought and my mental power, and my praise and my fame, and my renown and my light, and my heaven prosper by sacrifice.

अध्याय १८

श्लोक 2

प्रा॒णश्च॑ मेऽपा॒नश्च॑ मे व्या॒नश्च॒ मेऽसु॑श्च मे चि॒त्तं च॑ म॒ आधी॑तं च मे॒ वाक् च॑ मे॒ मन॑श्च मे॒ चक्षु॑श्च मे॒ श्रोत्रं॑ च मे॒ दक्ष॑श्च मे॒ बलं॑ च मे य॒ज्ञेन॑ कल्पन्ताम्

prāṇaśca me'pānaśca me vyānaśca me'suśca me cittaṃ ca ma ādhītaṃ ca me vāk ca me manaśca me cakṣuśca me śrotraṃ ca me dakṣaśca me balaṃ ca me yajñena kalpantām

हिन्दी अर्थ

मै प्राण से लेकर बल तक सब वस्तुओं को यज्ञ से सम्पन्न करनेवाला वनँ । ऋषि; देवाः। देवता- प्रजापतिः। छन्दः स्वराडतिशक्वरी। स्वरः-धैवतः॥ मे ऽस्थीनि च मे परूषि च मे शरीराणि च मऽआयुंश्च मे जरा च॑ मे यज्ञेन॑ १. पिछला मन्त्र "बल" पर समाप्त किया धा। उसी बल का विस्तार प्रस्तुत मन्त्र मे

English

May my breathing and my out-breathing, and my through-breathing and my vital spirit, and my thought and my reflection, and my voice and my mind, and my eye and my ear, and my ability and my strength prosper by sacrifice.

अध्याय १८

श्लोक 3

ओज॑श्च मे॒ सह॑श्च म आ॒त्मा च॑ मे त॒नूश्च॑ मे॒ शर्म॑ च मे॒ वर्म॑ च॒ मेऽङ्गा॑नि च॒ मेऽस्थी॑नि च मे॒ परू॑ᳪषि च मे॒ शरी॑राणि च म॒ आयु॑श्च मे ज॒रा च॑ मे य॒ज्ञेन॑ कल्पन्ताम्

ojaśca me sahaśca ma ātmā ca me tanūśca me śarma ca me varma ca me'ṅgāni ca me'sthīni ca me parūṣi ca me śarīrāṇi ca ma āyuśca me jarā ca me yajñena kalpantām

हिन्दी अर्थ

मे ओजस्वी बनं वृद्धावस्था तक युवक के समान शक्तिसम्पन्न वना रहू। च॑ मे वृद्धिश्च मे यज्ञेन कल्पन्ताम्।। ४॥ छ १. गतमन्त्र के अनुसार जीवन को सशक्त बनाकर ज्यैष्ठयं च मेमं ज्येष्टत्व का सम्पादन करनेवाला बनं ओर इसी ज्येष्ठता- सम्पादन के लिए आधिपत्यं च मेमेरा

English

May my energy and my force, and my self and my body, and my shelter and my shield, and my limbs and my bones, and my joints and my members, and my life and my old age prosper by sacrifice.

अध्याय १८

श्लोक 4

ज्यै॑ष्ठ्यं च मे॒ आधि॑पत्यं च मे म॒न्युश्च॑ मे॒ भाम॑श्च॒ मेऽम॑श्च॒ मेऽम्भ॑श्च मे जे॒मा च॑ मे महि॒मा च॑ मे वरि॒मा च॑ मे प्रथि॒मा च॑ मे वर्षि॒मा च॑ मे द्राघि॒मा च॑ मे वृ॒द्धं च॑ मे॒ वृद्धि॑श्च मे य॒ज्ञेन॑ कल्पन्ताम्

jyaiṣṭhyaṃ ca me ādhipatyaṃ ca me manyuśca me bhāmaśca me'maśca me'mbhaśca me jemā ca me mahimā ca me varimā ca me prathimā ca me varṣimā ca me drāghimā ca me vṛddhaṃ ca me vṛddhiśca me yajñena kalpantām

हिन्दी अर्थ

मै सत्य व श्रद्धादि से अपने को परिपूर्ण करूं। च मेऽभ॑यं च मे सुखं च॑ मे शय॑नं च मे सूषाश्च मे सुदिनं च मे यज्ञेन कल्पन्ताम्॥।६॥ १. गतमन्त्र की समाप्ति ' सुकृतम्' पर थी। ' सुकृतम्' कौ ही व्याख्या प्रस्तुत मन्त्र मेँ “ऋत ' शब्द से हई है। ऋतं च मे=मेरे जीवन में ऋत" हो। ऋत वही है जो ठीक =1९11

English

May my preminence and my overlordship, and my wrath and my angry passion, and my violence and my impetuosity, and my victorious power and my greatness, and my breadth and my width, and my height and my length, and my increase and my improvement prosper by sacrifice.

अध्याय १८

श्लोक 5

स॒त्यं च॑ मे श्र॒द्धा च॑ मे॒ जग॑च्च मे॒ धनं॑ च मे॒ विश्वं॑ च मे॒ मह॑श्च मे क्री॒डा च॑ मे॒ मोद॑श्च मे जा॒तं च॑ मे जनि॒ष्यमा॑णं च मे सू॒क्तं च॑ मे सुकृ॒तं च॑ मे य॒ज्ञेन॑ कल्पन्ताम्

satyaṃ ca me śraddhā ca me jagacca me dhanaṃ ca me viśvaṃ ca me mahaśca me krīḍā ca me modaśca me jātaṃ ca me janiṣyamāṇaṃ ca me sūktaṃ ca me sukṛtaṃ ca me yajñena kalpantām

हिन्दी अर्थ

हम इन्द्रियाश्वों का नियमन करके उनको मन मे धारण करें, जिससे अपने शं च॑ मे मय॑र्च मे प्रियं च॑ मेऽनुकामश्च मे काम॑श्च मे सौमनसश्च मे भग॑श्च मे द्रविणं च ये भद्रं च॑ मे श्रेय॑श्च मे वसींयश्च मे यश॑श्च मे यज्ञेन॑ कल्पन्ताम् ॥८॥ १. पिछले मन्त्र के अन्तिम वाक्य के अनुसार कृषि करते हुए तथा कृषि मे आनेवाले

English

May my truth and my faith, and my cattle and my wealth, and my goods and my pleasure, and my play and my enjoyment, and my children and my future children, and my hymn and my pious act prosper by sacrifice.

अध्याय १८

श्लोक 6

ऋ॒तं च॑ मेऽमृतं॑ च मे ऽय॒क्ष्मं च॒ मे ऽना॑मयच्च मे जी॒वातु॑श्च मे दीर्घायु॒त्वं च॑ मेऽनमि॒त्रं च॒ मे ऽभ॑यं च मे सु॒खं च॑ मे॒ शय॑नं च मे सू॒षाश्च॑ मे सु॒दिनं॑ च मे य॒ज्ञेन॑ कल्पन्ताम्

ṛtaṃ ca me'mṛtaṃ ca me 'yakṣmaṃ ca me 'nāmayacca me jīvātuśca me dīrghāyutvaṃ ca me'namitraṃ ca me 'bhayaṃ ca me sukhaṃ ca me śayanaṃ ca me sūṣāśca me sudinaṃ ca me yajñena kalpantām

हिन्दी अर्थ

मुञ्ञे इस लोक व परलोक का कल्याण प्राप्त हो। मुञ्े आवश्यक धन की कमीन हो ओर मुद्ध प्रसन्न मन व यश का लाभ हो। मेरी वाणी उत्तम, दुःख के परिहाणवाली तथा सत्य हो। २. इस शक्ति व मधुरवाणी कौ प्राप्ति के लिए पयः च मेमं दूध का प्रयोग करूं ओर रसः च मे-फलों के रस का सेवन

English

May my religious rite and my immortality, and my freedom from consumption and my freedom from disease, and my life and my longevity, and my freedom from enemies and my freedom from danger, and my happiness and my lying down, and my fair dawn and my fair day prosper by sacrifice.

अध्याय १८

श्लोक 7

य॒न्ता च॑ मे ध॒र्ता च॑ मे॒ क्षेम॑श्च मे॒ धृति॑श्च मे॒ विश्वं॑ च मे॒ मह॑श्च मे सं॒विच्च॑ मे॒ ज्ञात्रं॑ च मे॒ सूश्च॑ मे प्र॒सूशच॒॑ मे॒ सीरं॑ च मे॒ लय॑श्च मे य॒ज्ञेन॑ कल्पन्ताम्

yantā ca me dhartā ca me kṣemaśca me dhṛtiśca me viśvaṃ ca me mahaśca me saṃvicca me jñātraṃ ca me sūśca me prasūśaca me sīraṃ ca me layaśca me yajñena kalpantām

हिन्दी अर्थ

में प्राणशक्ति-सम्पन्न होऊं ओर सूनृतवाणी का प्रयोग करूं। रयिश्च मे राय॑श्च मे पुष्टं च॑ मे पुष्टिश्च मे विभु च॑मेप्रभुच॑पमे पूर्ण च॑ मे पूर्णत॑रं च मे कुय॑वं च मेऽक्षितं च मेऽन्न' च मेऽक्षुच्च मे यज्ञेन कल्पन्ताम् ॥९०॥ १. गततमन्त्र का प्रारम्भ “ऊर्क् '=प्राणशक्ति कौ प्रार्थना से हुजा धा, प्रस्तुत मन्त्र "रयि!

English

May my controller and my supporter, and my security and my firmness, and my goods and my pleasure, and my knowledge and my understanding, and my begetting and my propagation, and my plough and my harrow prosper by sacrifice.

अध्याय १८

श्लोक 8

शं च॑ मे॒ मय॑श्च मे प्रि॒यं च॑ मेऽनुका॒मश्च॑ मे॒ काम॑श्च मे सौमन॒सश्च॑ मे॒ भग॑श्च मे॒ द्रवि॑णं च मे भ॒द्रं च॑ मे॒ श्रेय॑श्च मे॒ वसी॑यश्च मे॒ यश॑श्च मे य॒ज्ञेन॑ कल्पन्ताम्

śaṃ ca me mayaśca me priyaṃ ca me'nukāmaśca me kāmaśca me saumanasaśca me bhagaśca me draviṇaṃ ca me bhadraṃ ca me śreyaśca me vasīyaśca me yaśaśca me yajñena kalpantām

हिन्दी अर्थ

मुङ्में रयिशक्ति हो तथा दान देने योग्य धन हो, मुद्ध धन व शरीर का पोषण प्राप्त हो। मै अन्न का सेवन करू ओर भूखा न रह जाऊँ। चित्तं च॑ मे वेद्य च मे भूतं च॑ मे भविष्यच्च मे सुगं च॑ मे सुपथं च मऽऋद्धंऽ च मऽ ऋद्धिश्च मे क्लृप्तं च॑ मे क्लुप्तिंश्च मे मतिश्च मे सुमतिश्च मे यज्ञेन

English

May my welfare and my comfort, and what I hold dear and what I desire, and my love and my gratification, and my enjoyment and my substance, and my happiness and my felicity, and my higher bliss and my fame prosper by sacrifice.

अध्याय १८

श्लोक 9

ऊर्क् च॑ मे सू॒नृता॑ च मे॒ पय॑श्च मे॒ रस॑श्च मे घृ॒तं च॑ मे॒ मधु॑ च मे॒ सग्धि॑श्च मे॒ सपी॑तिश्च मे कृ॒षिश्च॑ मे॒ वृष्टि॑श्च मे॒ जैत्रं॑ च म॒ औद्भि॑द्यं च मे य॒ज्ञेन॑ कल्पन्ताम्

ūrk ca me sūnṛtā ca me payaśca me rasaśca me ghṛtaṃ ca me madhu ca me sagdhiśca me sapītiśca me kṛṣiśca me vṛṣṭiśca me jaitraṃ ca ma audbhidyaṃ ca me yajñena kalpantām

हिन्दी अर्थ

मेरा प्राप्त ज्ञान सुरक्षित हो ओर ज्ञातव्य को मै जाननेवाला बनूँ। म इस जीवन मे मति व सुमति का सम्पादन कर सरकँ। प्रियङ्खवश्च मे ऽण॑वश्च मे श्यामाकाश्च मे नीवाराश्च मे गोधूमाश्च मे मसूरार्च १. गतमन्त्र कौ समाप्ति “मति व सुमति" पर हुई भी। उस “मति व सुमति" का

English

May my vigour and my pleasantness, and my milk and my sap, and my butter and my honey, and my meal in company and my drinking in company, and my ploughing and my husbandry, and my superiority and my preminence prosper by sacrifice.

अध्याय १८

श्लोक 10

र॒यिश्च॑ मे॒ राय॑श्च मे पु॒ष्टं च॑ मे॒ पुष्टि॑श्च मे वि॒भु च॑ मे प्र॒भु च॑ मे पू॒र्णं च॑ मे पू॒र्णत॑रं च मे॒ कुय॑वं च॒ मेऽक्षि॑तं च॒ मेऽन्नं॑ च॒ मेऽक्षु॑च्च मे य॒ज्ञेन॑ कल्पन्ताम्

rayiśca me rāyaśca me puṣṭaṃ ca me puṣṭiśca me vibhu ca me prabhu ca me pūrṇaṃ ca me pūrṇataraṃ ca me kuyavaṃ ca me'kṣitaṃ ca me'nnaṃ ca me'kṣucca me yajñena kalpantām

हिन्दी अर्थ

ऋषि;- देवाः। देवता-रत्नवान्धनवानात्मा। छन्दः भुरिगतिशक्वरी। स्वर :-धैवतः। अश्मा च मे मृत्तिका च मे गिरयश्च मे पर्व॑ताश्च मे सिक॑ताश्च मे वनस्पत॑यश्च मे दिर्ण्यं च मेऽय॑श्च मे श्यामं च॑ मे लोहञ्च॑ मे सीसं चमे त्रपु च मे यज्ञेन १. गतमन्त्र मे विविध सेवनीय वनस्पतियों का उल्लेख था। प्रस्तुत मन्त्र में उन

English

May my wealth and my property, and my prosperity and my growth, and my pervading power and my lordship, and my abundance and my greater abundance, and my bad harvest and my unwasted crop, and my food and my satiety prosper by sacrifice.

अध्याय १८

श्लोक 11

वि॒त्तं च॑ मे॒ वेद्यं॑ च मे भू॒तं च॑ मे भवि॒ष्यच्च॑ मे सु॒गं च॑ मे सुप॒थ्यं॒ च म ऋ॒द्धं च॑ म॒ ऋद्धि॑श्च मे क्लृ॒प्तं च॑ मे॒ क्लृप्ति॑श्च मे म॒तिश्च॑ मे सुम॒तिश्च॑ मे य॒ज्ञेन॑ कल्पन्ताम्

vittaṃ ca me vedyaṃ ca me bhūtaṃ ca me bhaviṣyacca me sugaṃ ca me supathyaṃ ca ma ṛddhaṃ ca ma ṛddhiśca me klṛptaṃ ca me klṛptiśca me matiśca me sumatiśca me yajñena kalpantām

हिन्दी अर्थ

प्रभु कौ उपासना मुद्ध "सब भूमियों, वनस्पतियों व धातुओं" का सदुपयोग अग्निश्च मऽआपंश्च मे वीरुधश्च म॒ऽओष॑धयश्च मे कृष्टपच्याश्च॑ मे ऽ कृष्टपच्यार्च १. गतमन्त्र मेँ विविध भूप्रदेशो व धातुओं का वर्णन हआ हेै। प्रस्तुत मन्त्र मै अग्नि आदि अन्य जीवनोपयोगी तत्त्वो का प्रतिपादन करते हुए कहते है कि अग्निः च

English

May my gain and my future gain, and what I have and what I shall have, and my good road and my good path, and my success and my succeeding, and my achievement and my contrivance, and my thought and my good counsel prosper by sacrifice.

अध्याय १८

श्लोक 12

व्री॒हय॑श्च मे॒ यवा॑श्च मे॒ माषा॑श्च मे॒ तिला॑श्च मे मु॒द्राश्च॑ मे॒ खल्वा॑श्च मे प्रि॒यङ्ग॑वश्च॒ मेऽण॑वश्च मे श्या॒माका॑श्च मे नी॒वारा॑श्च मे गो॒धूमा॑श्च मे म॒सूरा॑श्च मे य॒ज्ञेन॑ कल्पन्ताम्

vrīhayaśca me yavāśca me māṣāśca me tilāśca me mudrāśca me khalvāśca me priyaṅgavaśca me'ṇavaśca me śyāmākāśca me nīvārāśca me godhūmāśca me masūrāśca me yajñena kalpantām

हिन्दी अर्थ

इस पृथिवी पर होनैवाले अग्नि, जलादि तततव, बेल, ओषधियोँ, ग्राम्य व वसुं च मे वसतिश्च मे कर्म" च मे शक्तिश्च मेऽर्थश्च मऽ एम॑श्च मऽडत्या च॑ मे गतिश्च मे यज्ञेन कल्पन्ताम् ॥ ९५॥ १९. गतमन्त्र की समाप्ति पर माता-पिता से प्राप्त धन व अपने कमाये हए धन का

English

May my rice-plants and my barley, and my beans and my sesamum, and my kidney-beans and my vetches, and my millet and my Panicum Milliaceum, and my Panicum Frumentaceum and my wild rice, and my wheat and my lentils prosper by sacrifice.

अध्याय १८

श्लोक 13

अश्मा॑ च मे॒ मृत्ति॑का च मे गि॒रय॑श्च मे॒ पर्व॑ताश्च मे॒ सिक॑ताश्च मे॒ वन॒स्पत॑यश्च मे॒ हिर॑ण्यं च॒ मेऽय॑श्च मे श्या॒मं च॑ मे लो॒हं च॑ मे॒ सीसं॑ च मे॒ त्रपु॑ च मे य॒ज्ञेन॑ कल्पन्ताम्

aśmā ca me mṛttikā ca me girayaśca me parvatāśca me sikatāśca me vanaspatayaśca me hiraṇyaṃ ca me'yaśca me śyāmaṃ ca me lohaṃ ca me sīsaṃ ca me trapu ca me yajñena kalpantām

हिन्दी अर्थ

प्रभुकृपा से मुद्ध वसु व वसति की प्राप्ति हो। कर्मो द्वारा मेँ शक्तिसम्पत्न बनू। मेरे कार्य निष्प्रयोजन न हो जीवन निरुदेश्य न हो। मैं उदेश्य की ओर चलँ ओर उसे प्राप्त अग्निश्च मऽ इन्द्र॑श्च मे सोम॑श्च मऽ इन्द्र॑श्च मे सविता च॑ म॒ऽडन्द्र॑श्च मे सर॑स्वती च मऽडन्द्रश्च मे पूषा च॑ मऽडइन्द्र्॑च मे बृहस्पतिश्च म॒ऽइन्द्र॑श्च मे यज्ञेन

English

May my stone and my clay, and my hills and my mountains, and my pebbles and my trees, and my gold and my bronze, and my copper and my iron, and my lead and my tin prosper by sacrifice.

अध्याय १८

श्लोक 14

अ॒ग्निश्च॑ म॒ आप॑श्च मे वी॒रुध॑श्च म॒ ओष॑धयश्च मे कृष्टप॒च्याश्च॑ मेऽकृष्टप॒च्याश्च॑ मे ग्रा॒म्याश्च॑ मे प॒शव॑ आर॒ण्याश्च॑ मे वि॒त्तं च॑ मे॒ वित्ति॑श्च मे भू॒तं च॑ मे॒ भूति॑श्च मे य॒ज्ञेन॑ कल्पन्ताम्

agniśca ma āpaśca me vīrudhaśca ma oṣadhayaśca me kṛṣṭapacyāśca me'kṛṣṭapacyāśca me grāmyāśca me paśava āraṇyāśca me vittaṃ ca me vittiśca me bhūtaṃ ca me bhūtiśca me yajñena kalpantām

हिन्दी अर्थ

मेरा जीवन- लक्ष्य ' आगे बना, सौम्य बनना, उत्पादनात्मक कार्यो से एश्वर्य प्राप्त करना, प्रशस्त बोधवाला होना, शरीर का ठीक पोषण करना व ऊँचे-से-ऊँचा जानी मऽ इन्द्र॑श्च मे मरुतश्च मऽ इन्द्र॑श्च मे विश्वै च मे देवाऽ इन्द्रश्च मे यज्ञेन॑ १. मित्रः च मे=मु्मे स्नेह कौ भावना हो। प्रेम के मै पास होऊं। २. वरुणः च

English

May my fire and my water, and my creepers and my plants, and lily plants with culture-ripened fruit and my plants with fruit ripened without culture, and my domestic animals and my wild animals, and my substance and my future substance, and my belongings and my power be produced by sacrifice.

अध्याय १८

श्लोक 15

वसु॑ च मे वस॒तिश्च॑ मे॒ कर्म॑ च मे॒ शक्ति॑श्च॒ मे ऽर्थ॑श्च म॒ एम॑श्च म इ॒त्या च॑ मे॒ गति॑श्च मे य॒ज्ञेन॑ कल्पन्ताम्

vasu ca me vasatiśca me karma ca me śaktiśca me 'rthaśca ma emaśca ma ityā ca me gatiśca me yajñena kalpantām

हिन्दी अर्थ

मरे जीवन का लक्ष्य "स्नेह, हेष- निवारण, धारण, निर्माण तथा प्राण-साधना द्वारा देवी सम्पत्ति का अर्जन" हो, परन्तु यह सव होगा तो तभी जव कि इन्द्रः च मेतु में इन्द्रत्व होगा, अर्थात् मेँ जितेन्द्रिय बनूँंगा। मऽदन्दरंश्च मे नक्ष॑त्राणि च म॒ऽडन्द्र॑श्च मे दिश॑श्च मऽडद्र॑श्च मे यज्ञन॑ कल्पन्ताम् ॥ ९८॥

English

May my treasure and my dwelling, and my religious service and my ability to perform it, and my object and my course, and my way and my going prosper by sacrifice.

अध्याय १८

श्लोक 16

अ॒ग्निश्च॑ म॒ इन्द्र॑श्च मे॒ सोम॑श्च म॒ इन्द्र॑श्च मे सवि॒ता च॑ म॒ इन्द्र॑श्च मे॒ सर॑स्वती च म॒ इन्द्र॑श्च मे पू॒षा च॑ म॒ इन्द्र॑श्च मे॒ बृह॒स्पति॑श्च म॒ इन्द्र॑श्च मे य॒ज्ञेन॑ कल्पन्ताम्

agniśca ma indraśca me somaśca ma indraśca me savitā ca ma indraśca me sarasvatī ca ma indraśca me pūṣā ca ma indraśca me bṛhaspatiśca ma indraśca me yajñena kalpantām

हिन्दी अर्थ

में शरीर की शक्तियों का विस्तार कं, मध्यमार्ग में (+. मस्तिष्क को प्रकाशमय करं, षट्क -सम्पत्ति को प्राप्त करं, निरन्तर क्रियाशील होऊं दिशाओं के उपदेश को ग्रहण कर “आगे बदँ, नम्र बना रहू। मे मन्थी च॑ मे यज्ञेन कल्पन्ताम् ॥९९॥ र

English

May my Agni and my Indra, and my Soma and my Indra, and my Savitar and my Indra, and my Sarasvatî and my Indra, and my Pûshan and my Indra prosper by sacrifice.

अध्याय १८

श्लोक 17

मि॒त्रश्च॑ म॒ इन्द्र॑श्च मे॒ वरु॑णश्च म॒ इन्द्र॑श्च मे धा॒ता च॑ म॒ इन्द्र॑श्च मे॒ त्वष्टा॑ च म॒ इन्द्र॑श्च मे म॒रुत॑श्च म॒ इन्द्र॑श्च मे॒ विश्वे॑ च मे दे॒वा इन्द्र॑श्च मे य॒ज्ञेन॑ कल्पन्ताम्

mitraśca ma indraśca me varuṇaśca ma indraśca me dhātā ca ma indraśca me tvaṣṭā ca ma indraśca me marutaśca ma indraśca me viśve ca me devā indraśca me yajñena kalpantām

हिन्दी अर्थ

मै अपने जीवन में सूर्य व चन्द्रतत्व का समन्वय करनेवाल बनं। दवं नहीं, अधिपति बनूं। प्रभु की उपासना से ज्ञानवाला वनँ ओर मन मेँ इन्द्रियों का नियमन करूं। इन्द्र व प्राणशक्ति का विकास करके प्रेम के पास वद्वेषसे दूर होने का प्रयत्न करं। साथ ही कार्यो को कल-कल पर न टालता हआ प्रत्येक कर्तव्य के लिए सदा उद्यत रह।

English

May my Mitra and my Indra, and my Varuna and my Indra, and my Dhâtar and my Indra, and my Maruts and my Indra, and my All-Gods and my Indra prosper by sacrifice.

अध्याय १८

श्लोक 18

पृ॒थि॒वी च॑ म॒ इन्द्र॑श्च॒ मेऽन्तरि॑क्षं च म॒ इन्द्र॑श्च मे॒ द्यौश्च॑ म॒ इन्द्र॑श्च मे॒ समा॑श्च म॒ इन्द्र॑श्च मे॒ नक्ष॑त्राणि च म॒ इन्द्र॑श्च मे॒ दिश॑श्च म॒ इन्द्र॑श्च मे य॒ज्ञेन॑ कल्पन्ताम्

pṛthivī ca ma indraśca me'ntarikṣaṃ ca ma indraśca me dyauśca ma indraśca me samāśca ma indraśca me nakṣatrāṇi ca ma indraśca me diśaśca ma indraśca me yajñena kalpantām

हिन्दी अर्थ

मेरा जीवन मन्त्रवर्णित आग्रयण आदि यज्ञोवाला हो। मै आगे बदूं। आगे बद्ने के लिए ही इद्दरियाश्वों को सदा शरीर-रथ में जोते रक्खृँ, अर्थात् निरन्तर क्रियाशील स्त्ुचः+स्वगाक्रारः ( यज्ञपात्र ) च मे पूतभृच्च मऽआधवनीय॑श्च मे वेदिश्च मे बर्हिश्च मे ऽवभृथश्च॑ मे स्वगाकारश्च

English

May my earth and my Indra, and my Air and my Indra, and my Sky and my Indra, and my Half-months and my Indra, and my Lunar Mansions and my Indra, and my Sky-regions and my Indra prosper by sacrifice.

अध्याय १८

श्लोक 19

अ॒ᳪशुश्च॑ मे र॒श्मिश्च॒ मेऽदा॑भ्यश्च॒ मेऽधि॑पतिश्च म उपा॒ᳪशुश्च॑ मेऽन्तर्या॒मश्च॑ म ऐन्द्रवाय॒वश्च॑ मे मैत्रावरु॒णश्च॑ म आश्वि॒नश्च॑ मे प्रतिप्र॒स्थान॑श्च मे शु॒क्रश्च॑ मे म॒न्थी च॑ मे य॒ज्ञेन॑ कल्पन्ताम्

aśuśca me raśmiśca me'dābhyaśca me'dhipatiśca ma upāśuśca me'ntaryāmaśca ma aindravāyavaśca me maitrāvaruṇaśca ma āśvinaśca me pratiprasthānaśca me śukraśca me manthī ca me yajñena kalpantām

हिन्दी अर्थ

मेरे ये सब पदार्थ होम कौ क्रिया करने से समर्थ हों। यज्ञ आदि उत्तम कर्मो में इन पदार्थो की नियुक्ति सेमे प्रभु-प्राप्ति के लिए समर्थं बनू। अग्निश्च मे घर्मश्च मेऽर्कश्च मे सूर्यश्च मे प्राणश्च मे ऽवमेधण्च मे पृथिवी च १. अग्निः च मे=मेरे जीवन के अन्दर अग्नि हो, घर्मः च मेम शक्ति कौ

English

May my Amsu and my Rasmi, and my Adhipati and my Upâmsu, and my Antaryâma and my Aindra-Vâyava, and my Maitrâ-Varuna, and my Âsvina and my Pratiprasthâna, and my Sukra and my Manthin proper by sacrifice.

अध्याय १८

श्लोक 20

आ॒ग्र॒या॒णश्च॑ मे वैश्वदे॒वश्च॑ मे ध्रु॒वश्च॑ मे वैश्वान॒रश्च॑ म ऐन्द्रा॒ग्नश्च॑ मे म॒हावै॑श्वदेश्च मे मरुत्व॒तीया॑श्च मे॒ निष्के॑वल्यश्च मे सावि॒त्रश्च॑ मे सारस्व॒तश्च॑ मे पात्नीव॒तश्च॑ मे हारियोज॒नश्च॑ मे य॒ज्ञेन॑ कल्पन्ताम्

āgrayāṇaśca me vaiśvadevaśca me dhruvaśca me vaiśvānaraśca ma aindrāgnaśca me mahāvaiśvadeśca me marutvatīyāśca me niṣkevalyaśca me sāvitraśca me sārasvataśca me pātnīvataśca me hāriyojanaśca me yajñena kalpantām

हिन्दी अर्थ

तेतीस देवों का अपनाना ही मेरा प्रभु-स्तवन होतादे। येही मेरे स्तोम हो जाते है ओर शतपथ ९।३।३।२ के “एतद्यजमाना सर्वान् कामानाप्त्वा युग्भिः स्तोमैः से विषम संख्याओ में चलनेवाले स्तोमो से इस लोक मे सब वाज्छनीय पदार्थो को प्राप्त करके स्वर्ग को प्राप्त करं।

English

May my Âgrayana and my Vaisvadeva, and my Dhruvâ and my Vaisvânara, and my Aindrâgna and my Mahâvaisvadeva, and my Marutvatîya and my Nishkevalya, and my Sâvitra and my Sârasvata, and my Pâtnîvata and my Hâriyojana prosper by sacrifice.

अध्याय १८

श्लोक 21

स्रुच॑श्च मे चम॒साश्च॑ मे वाय॒व्या॒नि च मे द्रोणकल॒शश्च॑ मे॒ ग्रावा॑णश्च मेऽधि॒षव॑णे च मे पूत॒भृच्च॑ म आधव॒नीय॑श्च मे॒ वेदि॑श्च मे ब॒र्हिश्च॑ मेऽवभृ॒तश्च॑ मे स्वगाका॒रश्च॑ मे य॒ज्ञेन॑ कल्पन्ताम्

srucaśca me camasāśca me vāyavyāni ca me droṇakalaśaśca me grāvāṇaśca me'dhiṣavaṇe ca me pūtabhṛcca ma ādhavanīyaśca me vediśca me barhiśca me'vabhṛtaśca me svagākāraśca me yajñena kalpantām

हिन्दी अर्थ

२४ वर्षो को यज्ञ से सम्पन्न करके मै "वसु" बनं। छत्तीस वर्षो को यज्ञ से क्लृप्त करके मैं "रुद्र ' बनू ओर अड्तालीस वर्षो को यज्ञ से सम्पन्न करके मै आदित्य बन १. मन्त्र संख्या २४ तथा २५ मेँ ३३ देवों के धारण व अड्तालीस वर्षो तक गुणों व शक्ति का आदान करते हुए " आदित्य ' बनने का उल्लेख धथा। यह सब तभी सम्भव टै जब

English

May my ladles and my cups, and my Vâyu, vessels and my Soma reservoirs, and my pressing-stones and my two press-boards, and my Pûtabhrit and my Âdhavanîya, and my altar and altar-grass, and my Avabhritha and my cries of Good-speed prosper by sacrifice.

अध्याय १८

श्लोक 22

अ॒ग्निश्च॑ मे घ॒र्मश्च॑ मे॒ऽर्कश्च॑ मे॒ सूर्य॑श्च मे प्रा॒णश्च॑ मेऽश्वमे॒धश्च॑ मे पृथि॒वी च॒ मेऽदि॑तिश्च मे॒ दिति॑श्च मे॒ द्यौश्च॑ मे॒ऽङ्गुल॑य॒: शक्व॑रयो॒ दिश॑श्च मे य॒ज्ञेन॑ कल्पन्ताम्

agniśca me gharmaśca me'rkaśca me sūryaśca me prāṇaśca me'śvamedhaśca me pṛthivī ca me'ditiśca me ditiśca me dyauśca me'ṅgulaya: śakvarayo diśaśca me yajñena kalpantām

हिन्दी अर्थ

हमारे पास डद साल कौ उमर से सादे तीन साल तक की उमर के बेल १. ( पष्ठ वर्षचतुष्कं वहति इति) पष्ठवाट् च मे=चार साल का बेल मेरा हो पष्ठौही च मे=ओर इसी प्रकार चार साला गौ मुञ्चे प्राप्त हो। २. उक्षा च मे=वीर्य-सेचन मे समर्थ वृषभ मेरे पास हो ओर वेहत् च मेगर्भधारिनी गौ भी मुञ्चे यज्ञ के हेतु समर्थ करे। ४.

English

May my Agni and my charms, and my Arka and my Sûrya, and my Prâna and my Asvamedha, and my Prithivî and my Aditi, and my Diti and my Sky, and my fingers, powers, and sky-regions prosper by sacrifice.

अध्याय १८

श्लोक 23

व्र॒तं च॑ म ऋ॒तव॑श्च मे॒ तप॑श्च मे संवत्स॒रश्च॑ मेऽहोरा॒त्रे ऊ॑र्वष्ठी॒वे बृ॑हद्रथन्त॒रे च॑ मे य॒ज्ञेन॑ कल्पन्ताम्

vrataṃ ca ma ṛtavaśca me tapaśca me saṃvatsaraśca me'horātre ūrvaṣṭhīve bṛhadrathantare ca me yajñena kalpantām

हिन्दी अर्थ

मेरा सम्पूर्ण वर्षं यज्ञमय बीते। मेँ प्रभु का उपासक बनकर बल व प्राणशक्ति को प्राप्त करू, आनन्द की वर्षा का अनुभव करू तथा प्रजाओं का अधिपति वनू। क्आयु्॑यज्ेन॑ कल्पतां प्राणो यज्ेन॑ कल्पतां चक्षुर्यज्ञेन कल्पता श्रोत्र यज्ञेन॑ कल्पतां वाग्यज्ञेन कल्पतां मनो यज्ञेन॑ कल्पतामात्मा य॒ज्ञेन॑ कल्पतां ब्रह्मा य॒ज्ञेन॑ कल्पतां

English

May my vow and my seasons, and my austere devotion, and my day and night, thighs and knees, and two Great Rathantaras prosper by sacrifice.

अध्याय १८

श्लोक 24

एका॑ च मे ति॒स्रश्च॑ मे ति॒स्रश्च॑ मे॒ पञ्च॑ च मे॒ पञ्च॑ च मे स॒प्त च॑ मे स॒प्त च॑ मे॒ नव॑ च मे॒ नव॑ च म॒ एका॑दश च म॒ एका॑दश च मे॒ त्रयो॑दश च मे॒ त्रयो॑दश च मे॒ पञ्च॑दश च मे॒ पञ्च॑दश च मे स॒प्तद॑श च मे स॒प्तद॑श च मे॒ नव॑दश च मे॒ नव॑दश च म॒ एक॑विᳪशतिश्च म॒ एक॑विᳪशतिश्च मे॒ त्रयो॑विᳪशतिश्च मे॒ त्रयो॑विᳪशतिश्च मे॒ पञ्च॑विᳪशतिश्च मे॒ पञ्च॑विᳪशतिश्च मे स॒प्तवि॑ᳪशतिश्च मे स॒प्तवि॑ᳪशतिश्च मे॒ नव॑विᳪशतिश्च मे॒ नव॑विᳪशतिश्च म॒ एक॑त्रिᳪशच्च म॒ एक॑त्रिᳪशच्च मे॒ त्रय॑स्त्रिᳪशच्च मे य॒ज्ञेन॑ कल्पन्ताम्

ekā ca me tisraśca me tisraśca me pañca ca me pañca ca me sapta ca me sapta ca me nava ca me nava ca ma ekādaśa ca ma ekādaśa ca me trayodaśa ca me trayodaśa ca me pañcadaśa ca me pañcadaśa ca me saptadaśa ca me saptadaśa ca me navadaśa ca me navadaśa ca ma ekaviśatiśca ma ekaviśatiśca me trayoviśatiśca me trayoviśatiśca me pañcaviśatiśca me pañcaviśatiśca me saptaviśatiśca me saptaviśatiśca me navaviśatiśca me navaviśatiśca ma ekatriśacca ma ekatriśacca me trayastriśacca me yajñena kalpantām

हिन्दी अर्थ

यहाँ २९वें मन्त्र पर ११५ कर्म (वाज मेरा हो? प्रसव मेरा हो आदि) समाप्त होते है। जिस वाज से इन वाक्यों का प्रारम्भ हुआ था उसी वाज का उपयोग अगले मन्त्र वाज॑स्य नु प्र॑सवे मातर" महीमदितिं नाम॒ वच॑सा करामहे । यस्यामिदं विश्वं भुव॑नमाविवेश तस्यौ नो देवः सविता धर्म' साविषत् ।॥३०॥

English

May me One and my Three, and my Three and my Five, and my Five and my Seven (and similarly up to thirty-three) prosper by sacrifice.

अध्याय १८

श्लोक 25

चत॑स्रश्च मे॒ऽष्टौ च॑ मे॒ऽष्टौ च॑ मे॒ द्वाद॑श च मे॒ द्वाद॑श च मे॒ षोड॑श च मे॒ षोड॑श च मे विᳪश॒तिश्च॑ मे विᳪशतिश्च॑ मे॒ चतु॑र्विᳪशतिश्च मे॒ चतु॑र्विᳪश॒तिश्च॑ मे॒ऽष्टावि॑ᳪशतिश्च मे॒ऽष्टावि॑ᳪशतिश्च मे॒ द्वात्रि॑ᳪशच्च मे॒ द्वात्रि॑ᳪशच्च मे॒ षट्त्रि॑ᳪशच्च मे॒ षट्त्रि॑ᳪशच्च मे चत्वारि॒ᳪशच्च॑ मे चत्वारि॒ᳪशच्च॑ मे॒ चतु॑श्चत्वारिᳪशच्च मे॒ चतु॑श्चत्वारिᳪशच्च मे॒ऽष्टाच॑त्वारिᳪशच्च मे य॒ज्ञेन॑ कल्पन्ताम्

catasraśca me'ṣṭau ca me'ṣṭau ca me dvādaśa ca me dvādaśa ca me ṣoḍaśa ca me ṣoḍaśa ca me viśatiśca me viśatiśca me caturviśatiśca me caturviśatiśca me'ṣṭāviśatiśca me'ṣṭāviśatiśca me dvātriśacca me dvātriśacca me ṣaṭtriśacca me ṣaṭtriśacca me catvāriśacca me catvāriśacca me catuścatvāriśacca me catuścatvāriśacca me'ṣṭācatvāriśacca me yajñena kalpantām

हिन्दी अर्थ

१. हम शक्तिसम्पन्न वने, उचित णेश्वर्य को कमानेवाले बनें। शक्ति के द्वारा यदि हम मातृभूमि को राजनैतिक दासता से मुक्त करें तो एेश्वर्यवृद्धि द्वारा इसे आर्थिक पराधीनता से भी मुक्त करे। हम मातृभूमि की स्वतन्त्रता के लिए वचनबद्ध होँ। २. हमारी मातृभूमि सभी का स्वागत करनेवाली हो। ३. इसमें रहते हुए प्रभुकृपा से हम धर्म कौ प्रवृत्तिवाले बने।

English

May my Four and my Eight and my Twelve (and similarly up to forty-eight) prosper by sacrifice

अध्याय १८

श्लोक 26

त्र्यवि॑श्च मे त्र्य॒वी च॑ मे दित्य॒वाट् च॑ मे दित्यौ॒ही च॑ मे पञ्चा॒विश्च॑ मे पञ्चा॒वी च॑ मे त्रिव॒त्सश्च॑ मे त्रिव॒त्सा च॑ मे तुर्य॒वाट् च॑ मे तुर्यौ॒ही च॑ मे य॒ज्ञेन॑ कल्पन्ताम्

tryaviśca me tryavī ca me dityavāṭ ca me dityauhī ca me pañcāviśca me pañcāvī ca me trivatsaśca me trivatsā ca me turyavāṭ ca me turyauhī ca me yajñena kalpantām

हिन्दी अर्थ

देवों की कृपा व रक्षण से हमें शक्ति व एेश्वर्य प्राप्त हो। इस शक्ति व एश्वर्य के द्वारा टम अपनी मातृभूमि कौ स्वतन्त्रता का साधन करे। १. नः=हमारा वाजः वल सप्त प्रदिशः=सात प्रकृष्ट दिशाओं को "पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण व भूः-भुवः-स्वः' इन सात लोकों मे रहनेवाले प्राणियों को वा=तथा

English

May my eighteen-months steer and my eighteen-months heifer, and my two-year bull and cow (and similarly up to four-year) prosper by sacrifice.

अध्याय १८

श्लोक 27

प॒ष्ठ॒वाट् च॑ मे पष्ठौ॒ही च॑ म उ॒क्षा च॑ मे व॒शा च॑ म ऋष॒भश्च॑ मे वे॒हच्च॑ मेऽन॒ड्वाँश्च॑ मे धे॒नुश्च॑ मे य॒ज्ञेन॑ कल्पन्ताम्

paṣṭhavāṭ ca me paṣṭhauhī ca ma ukṣā ca me vaśā ca ma ṛṣabhaśca me vehacca me'naḍvā~śca me dhenuśca me yajñena kalpantām

हिन्दी अर्थ

हमारी शक्ति व धन "सातो लोकों व चारों दिशाओं को तृप्तकरनेवाले हो। वाजो नोऽअद्य प्रसुवाति दानं वाजो देवाँ २।।ऽ ऋतुभिः कल्पयाति। १९. वाजः = शक्ति नः=हममें अद्य=आज दानम्=दान को प्रसुवाति (प्रेरयेत्) प्रेरित करे। शक्तिशाली व्यक्ति कृपणता को कायरता समञ्चता है, इसलिए वह देता है, लेने से वह

English

May my six-year bull and my six-year cow, and my bull and my barren cow, and my young bull and my calf-slipping cow, and my ox and my milch-cow prosper by sacrifice.

अध्याय १८

श्लोक 28

वाजा॑य॒ स्वाहा॑ प्रस॒वाय॒ स्वाहा॑ऽपि॒जाय॒ स्वाहा॒ क्रत॑वे॒ स्वाहा॒ वस॑वे॒ स्वाहा॑ऽह॒र्पत॑ये॒ स्वाहाऽह्ने॑ मु॒ग्धाय॒ स्वाहा॑ मु॒ग्धाय॑ वैनᳪशि॒नाय॒ स्वाहा॑ विन॒ᳪशिन॑ आन्त्याय॒नाय॒ स्वाहाऽऽन्त्या॑य भौव॒नाय॒ स्वाहा॒ भुव॑नस्य॒ पत॑ये॒ स्वाहाऽधि॑पतये॒ स्वाहा॑ प्र॒जाप॑तये॒ स्वाहा॑ ।इ॒यं ते॒ राण्मि॒त्राय॑ य॒न्ताऽसि॒ यम॑न ऊ॒र्जे त्वा॒ वृष्ट्यै॑ त्वा प्र॒जानां॒ त्वाऽऽधि॑पत्याय

vājāya svāhā prasavāya svāhā'pijāya svāhā kratave svāhā vasave svāhā'harpataye svāhā'hne mugdhāya svāhā mugdhāya vainaśināya svāhā vinaśina āntyāyanāya svāhā''ntyāya bhauvanāya svāhā bhuvanasya pataye svāhā'dhipataye svāhā prajāpataye svāhā | iyaṃ te rāṇmitrāya yantā'si yamana ūrje tvā vṛṣṭyai tvā prajānāṃ tvā''dhipatyāya

हिन्दी अर्थ

वाज के द्वारा शक्ति के परिणामस्वरूप मुञ्ञमें दान की वृत्ति हो, सब दिव्य गुणों का मुञ्में विकास हो। मेँ वीर बनू ओर विजयी होऊँ। वाजैः पुरस्तादुत म॑ध्य॒तो नो वाजो देवान् हविषां वर्द्धयाति। वाजो हि मा सर्व॑वीरं चकार सर्वाऽआशा वाज॑पतिर्भवेयम् ॥।३४॥।

English

To strength, Hail! To Gain, Hail! To After-born, Hail! To Power, Hail! To Vasu, Hail! To the Lord of Days, Hail! To the Failing Day, Hail! To the Failing Sprung from the Transitory, Hail! To the Transitory sprung from the Final, Hail! To the Final Mundane, Hail! To the Lord of the World, Hail! To the Sovran Lord, Hail! To Prajâpati, Hail! This is thy kingdom. Thou art a guiding controller for the friend. Thee for vigour, thee for rain, thee for the sovran lordship of creatures.

अध्याय १८

श्लोक 29

आयु॑र्य॒ज्ञेन॑ कल्पतां प्रा॒णो य॒ज्ञेन॑ कल्पतां॒ चक्षु॑र्य॒ज्ञेन॑ कल्पता॒ᳪ श्रोत्रं॑ य॒ज्ञेन॑ कल्पतां॒ वाग्य॒ज्ञेन॑ कल्पतां॒ मनो॑ य॒ज्ञेन॑ कल्पतामा॒त्मा य॒ज्ञेन॑ कल्पतां ब्र॒ह्मा य॒ज्ञेन॑ कल्पतां॒ ज्योति॑र्य॒ज्ञेन॑ कल्पता॒ᳪ स्व॒र्य॒ज्ञेन॑ कल्पतां पृ॒ष्ठं य॒ज्ञेन॑ कल्पतां य॒ज्ञो य॒ज्ञेन॑ कल्पताम् ।स्तोम॑श्च यजु॑श्च॒ ऋक् च॒ साम॑ च बृ॒हच्च॑ रथन्त॒रं च॑ ।स्व॑र्देवा अगन्मा॒मृता॑ अभूम प्र॒जाप॑तेः प्र॒जा अ॑भूम॒ वेट् स्वाहा॑

āyuryajñena kalpatāṃ prāṇo yajñena kalpatāṃ cakṣuryajñena kalpatā śrotraṃ yajñena kalpatāṃ vāgyajñena kalpatāṃ mano yajñena kalpatāmātmā yajñena kalpatāṃ brahmā yajñena kalpatāṃ jyotiryajñena kalpatā svaryajñena kalpatāṃ pṛṣṭhaṃ yajñena kalpatāṃ yajño yajñena kalpatām | stomaśca yajuśca ṛk ca sāma ca bṛhacca rathantaraṃ ca | svardevā aganmāmṛtā abhūma prajāpateḥ prajā abhūma veṭ svāhā

हिन्दी अर्थ

मै शक्ति से आगे बदँ, मध्य मार्ग में चलँ। मुञ्में त्याग के कारण सब दिव्य गुणों का विकास हो। मै वीर बन जाँ ओर सर्वदिग्विजय करनेवाला बनू ९. मेँ पृथिव्याः =इस पृथिवी के- परथिवीरूप शरीर के ङ्घ प्रत्यङ्गं के पयसा=आप्यायन (ओप्यायी वृद्धौ) से अथवा (पयःस) रस से मामु सं सृजामि=संसृष्ट करता हूं,

English

May life succeed through sacrifice. May life-breath thrive by sacrifice. May the eye thrive by sacrifice. May the ear thrive by sacrifice. May the voice thrive by sacrifice. May the mind thrive by sacrifice. May the self thrive by sacrifice. May Brahma thrive by sacrifice. May light succeed by sacrifice. May heaven succeed by sacrifice. May the hymn thrive by sacrifice. May sacrifice thrive by sacrifice; And laud and sacrificial text, and verse of praise and Sâma chant, The Brihat and Rathantara. Gods, we have gone to light. We have become the children of Prajâpati. We have become immortal.

अध्याय १८

श्लोक 30

वाज॑स्य॒ नु प्र॑स॒वे मा॒तरं॑ म॒हीमदि॑तिं॒ नाम॒ वच॑सा करामहे ।यस्या॑मि॒दं विश्वं॒ भुव॑नमावि॒वेश॒ तस्यां॑ नो दे॒वः स॑वि॒ता धर्म॑ साविषत्

vājasya nu prasave mātaraṃ mahīmaditiṃ nāma vacasā karāmahe | yasyāmidaṃ viśvaṃ bhuvanamāviveśa tasyāṃ no devaḥ savitā dharma sāviṣat

हिन्दी अर्थ

हम सम्पूर्ण शरीर का आप्यायन कररे। जलो व ओषधयो का प्रयोग करे ओर एक-एक अङ्क को शक्ति से युक्त बनाने के लिए यत्तशील हों। १. मेरे लिए पृथिव्याम्=पृथिवी में पयः= आप्यायन हो। ओषधीषु पृथिवी से उत्पन्न इन ओषधियों में आप्यायनकारी रस हो। २. पयः दिविइस द्युलोक में भी सूर्यरश्मियों के

English

In gain of wealth we celebrate, etc: = IX. 5.

अध्याय १८

श्लोक 31

विश्वे॑ अ॒द्य म॒रुतो॒ विश्व॑ ऊ॒ती विश्वे॑ भवन्त्व॒ग्नय॒: समि॑द्धाः ।विश्वे॑ नो दे॒वा अव॒साऽऽग॑मन्तु॒ विश्व॑मस्तु॒ द्रवि॑णं॒ वाजो॑ अ॒स्मे

viśve adya maruto viśva ūtī viśve bhavantvagnaya: samiddhāḥ | viśve no devā avasā''gamantu viśvamastu draviṇaṃ vājo asme

हिन्दी अर्थ

करनेवाली हों। अब इस आप्यायन ही आप्यायनवाले व्यक्ति का राज्याभिषेक करते हे देवस्य॑ त्वा सवितुः प्र॑सवे ऽज्विनोर्बाहरभ्या पूष्णो हस्ताभ्याम् । १. देवस्य सवितुः-सवब- कु देनेवाले दिव्य गुणों के पुञ्ज प्रभु के इस प्रसवे -उत्पत्न जगत् में अथवा प्रभु की प्रेरणा में त्वातुते अभिषिञ्चामि=अभिषिक्त करता हूं। तेरा

English

This day come all the Maruts, all to aid us! Let all the fires be thoroughly enkindled. May the All-Gods come hither with protection. May we possess all property and riches.

अध्याय १८

श्लोक 32

वाजो॑ नः स॒प्त प्र॒दिश॒श्चत॑स्रो वा परा॒वत॑: ।वाजो॑ नो॒ विश्वै॑र्दे॒वैर्धन॑सातावि॒हाव॑तु

vājo naḥ sapta pradiśaścatasro vā parāvata: | vājo no viśvairdevairdhanasātāvihāvatu

हिन्दी अर्थ

हम अपने जीवन में प्रभु-प्रेरणा मे चलें (प्रसवे), प्राणापान के प्रयत्न से आवश्यक सामग्री का अर्जन करे, पोषण के लिए ही वस्तुओं का ग्रहण कररे। हमारी वाणी विद्या के लिए हो। इन्द्ियादि के हम नियन्ता बने ओर यह नियन्त्रित्व, जितेन्द्रियता, आधिपत्य, साम्राज्य हमें अग्नि बनाये, हमारी उन्नति का कारण हो।

English

May our strength fill the regions seven, fill the four distant places full. Here may our riches guard us with the All-Gods in the gain of wealth.

अध्याय १८

श्लोक 33

वाजो॑ नो अ॒द्य प्र सु॑वाति॒ दानं॒ वाजो॑ दे॒वाँ२ ऋ॒तुभि॑: कल्पयाति ।वाजो॒ हि मा॒ सर्व॑वीरं ज॒जान॒ विश्वा॒ आशा॒ वाज॑पतिर्जयेयम्

vājo no adya pra suvāti dānaṃ vājo devā~2 ṛtubhi: kalpayāti | vājo hi mā sarvavīraṃ jajāna viśvā āśā vājapatirjayeyam

हिन्दी अर्थ

राजा प्रजा में मेल पैदा करे। सम्पूर्णं शान्ति के साधनों का प्रयोग करे। सूर्य की भाँति गतिशील व अन्धकार- विनाशक हो। राष्ट का धारण करे। इसके अध्यक्ष भी तेज केही त्रसरेणु हो-प्रजा में से अवगुणों को दूर करके गुणों का स्थापन करनेवाले हो। यह राजा हमारे ज्ञान व बल की रक्षा करे। इसे हम कर दे। यह कर का विनियोग प्रजाहित के

English

May strength to-day procure for us donations strength range the Gods together with the Seasons. Yea, strength hath made me rich in store of heroes. As lord of strength may I gain all the regions.

अध्याय १८

श्लोक 34

वाज॑: पु॒रस्ता॑दु॒त म॑ध्य॒तो नो॒ वाजो॑ दे॒वान् ह॒विषा॑ वर्धयाति ।वाजो॒ हि मा॒ सर्व॑वीरं च॒कार॒ सर्वा॒ आशा॒ वाज॑पतिर्भवेयम्

vāja: purastāduta madhyato no vājo devān haviṣā vardhayāti | vājo hi mā sarvavīraṃ cakāra sarvā āśā vājapatirbhaveyam

हिन्दी अर्थ

राजा प्रजा को उत्तम राज्य-व्यवस्था के द्वारा आनन्दित करता हुआ सच्चा प्रभु-स्तवन करता हे। सूर्य के समान ज्ञानरश्मियों को चारों ओर फलाता है। स्वयं आनन्दमय मनोवृत्तिवाला होता हुआ प्रजा को आनन्दित करता है। वेदवाणी के अनुसार राष्ट का धारण करता है। उसके अध्यक्ष लोग भी गतिशील, प्रजा-रक्षक व प्रकाश को चारों

English

Strength be before us, in the midst among us. May strength exalt the Gods with our oblation. Yea, strength hath made me rich in store of heroes. As lord of strength may I gain all the regions.

अध्याय १८

श्लोक 35

सं मा॑ सृजामि॒ पय॑सा पृथि॒व्याः सं मा॑ सृजाम्य॒द्भिरोष॑धीभिः ।सो॒ऽहं वाज॑ᳪ सनेयमग्ने

saṃ mā sṛjāmi payasā pṛthivyāḥ saṃ mā sṛjāmyadbhiroṣadhībhiḥ | so'haṃ vāja saneyamagne

हिन्दी अर्थ

राजा गतिशील, क्रियाशील हो। अध्यक्ष क्रियाशील हों। प्रजा को भी क्रियाशील बनाकर बल व प्राणशक्ति सम्पन्न करें भुज्युः सुपर्णो यज्ञो गन्धर्वस्तस्य दक्षिणाऽअप्छरसं स्तावा नाम। १. सम्राट् का पहला कर्तव्य भुय : शब्द से सूचित हो रहा े। ' भोजयते ' यह सबके

English

With milk of Prithivî do I unite me, unite myself with waters and with plants. As such may I gain strength, O Agni.

अध्याय १८

श्लोक 36

पय॑: पृथि॒व्यां पय॒ ओष॑धीषु॒ पयो॑ दि॒व्यन्तरि॑क्षे॒ पयो॑ धाः ।पय॑स्वतीः प्र॒दिश॑: सन्तु॒ मह्य॑म्

paya: pṛthivyāṃ paya oṣadhīṣu payo divyantarikṣe payo dhāḥ | payasvatīḥ pradiśa: santu mahyam

हिन्दी अर्थ

राष्ट मे कोई भूखा न मरे। राजा एेसी व्यवस्था करे कि प्रजा के जीवन में न्यूनतापं उत्पन्न न हों। अध्यक्ष कुशलता से कार्य करे। इतनी कुशलता से कि वे प्रजा मे प्रशंसित हो। १. सम्रार् का कर्त्तव्य एक शब्द में यह है कि वह प्रजापतिः प्रजा का पालक हो। प्रजा रक्षा कर उदेश्य से दही राजा ने उस-उस कार्य को करना है। २. विषशवकर्मा-यह राजा

English

Store milk in earth and milk in plants, milk in the sky and milk in air. Teeming with milk for me he all the regions.

अध्याय १८

श्लोक 37

दे॒वस्य॑ त्वा सवि॒तुः प्र॑स॒वेऽश्विनो॑र्बा॒हुभ्यां॑ पू॒ष्णो हस्ता॑भ्याम् ।सर॑स्वत्यै वा॒चो य॒न्तुर्य॒न्त्रेणा॒ग्नेः साम्रा॑ज्येना॒भिषि॑ञ्चामि

devasya tvā savituḥ prasave'śvinorbāhubhyāṃ pūṣṇo hastābhyām | sarasvatyai vāco yanturyantreṇāgneḥ sāmrājyenābhiṣiñcāmi

हिन्दी अर्थ

राजा अपना मूल कर्म" प्रजा-रक्षण' समञ्ञे। वह स्वयं सव कर्मो को करता हआ प्रजा में श्रम के आदर को बद्ाए्। १. भुवनस्य पते=घरों के स्वामिन् तथा प्रजापतेउन घरों में रहनेवाली प्रजाओं के रक्षक ! (क) यर्हौँ ' भुवनस्य पते" यह सम्बोधन स्पष्ट संकेत कर रहा है कि सब घरों का

English

Thee by the radiant Savitar's impulsion, with arms of Asvins, with the hands of Pûshan, Controlled by Vâk Sarasvatî's Controller, with Agni's sole dominion I besprinkle.

अध्याय १८

श्लोक 38

ऋ॒ता॒षाडृ॒तधा॑मा॒ऽग्निर्ग॑न्ध॒र्वस्तस्यौ॑षधयोऽप्स॒रसो॒ मुदो॒ नाम॑ ।स न॑ इ॒दं ब्रह्म॑ क्ष॒त्रं पा॑तु॒ तस्मै॒ स्वाहा॒ वाट् ताभ्य॒: स्वाहा॑

ṛtāṣāḍṛtadhāmā'gnirgandharvastasyauṣadhayo'psaraso mudo nāma | sa na idaṃ brahma kṣatraṃ pātu tasmai svāhā vāṭ tābhya: svāhā

हिन्दी अर्थ

राजा प्रत्येक प्रजावर्ग को स्वास्थ्य व वृद्धि के दृष्टिकोण से उत्तम घर प्राप्त सूचना- “यस्य ते उपरि गृहा वेह ' इस मन्त्रभाग कौ यह भी भावना है कि जिस तेरा परलोक व इहलोक दोनों ही स्थानों में घर है। प्रजा का हित करनेवाला राजा इहलोक में भी प्रशंसित होता है ओर परलोक में भी स्वर्गं को प्राप्त करनेवाला होता है। एेसे राजा के

English

Maintainer of Law, true by nature, Agni is the Gandharva. The plants are his Apsarases, namely Delights. May he protect this our Priesthood and Nobility. To him All-hail! Ave! To those All-hail!

अध्याय १८

श्लोक 39

स॒ᳪहि॒तो वि॒श्वसा॑मा॒ सूर्यो॑ गन्ध॒र्वस्तस्य॒ मरी॑चयोऽप्स॒रस॑ आ॒युवो॒ नाम॑ ।स न॑ इ॒दं ब्रह्म॑ क्ष॒त्रं पा॑तु॒ तस्मै॒ स्वाहा॒ वाट् ताभ्य॒: स्वाहा॑

sahito viśvasāmā sūryo gandharvastasya marīcayo'psarasa āyuvo nāma | sa na idaṃ brahma kṣatraṃ pātu tasmai svāhā vāṭ tābhya: svāhā

हिन्दी अर्थ

सुख प्रभु-प्राप्ति में हे। प्रभु- प्राप्ति 'समुद्र- नभस्वान् आरद्रदान्-मारुत- मरुतां गण-अवस्यू-दुवस्वान् व शम्भू तथा मयोभू को ही होती हे। १. शुनःशेप प्रभु की गतमन्त्र की प्रेरणा को सुनकर प्रार्थना करता है कि अग्ने हम सबको उन्नत करनेवाले प्रभो! याः=जो ते=तेरी सूर्ये सूर्य मे रुचः =दीप्तिर्योँ है, जो दीप्तियाँ

English

The Conjoined, Visvasâman, Sûrya is the Gandharva. His motes are his Apsarases, Swift-moving. May he protect, etc., as in 38.

अध्याय १८

श्लोक 40

सु॒षु॒म्णः सूर्य॑रश्मिश्च॒न्द्रमा॑ गन्ध॒र्वस्तस्य॒ नक्ष॑त्राण्यप्स॒रसो॑ भे॒कुर॑यो॒ नाम॑ ।स न॑ इ॒दं ब्रह्म॑ क्ष॒त्रं पा॑तु॒ तस्मै॒ स्वाहा॒ वाट् ताभ्य॒: स्वाहा॑

suṣumṇaḥ sūryaraśmiścandramā gandharvastasya nakṣatrāṇyapsaraso bhekurayo nāma | sa na idaṃ brahma kṣatraṃ pātu tasmai svāhā vāṭ tābhya: svāhā

हिन्दी अर्थ

(क) सूर्य के समान हमारा ज्ञान दीप्त हो। (ख) हम इस ज्ञान से परस्पर प्रीतिवाले हों ओर (ग) यह जान हमारी शक्तियों के विकास का कारण बने। या वों देवाः सूर्ये रुचो गोष्वश्वेषु या रुच॑ः। १. है देवाः=दिव्य गुणों से द्योतमान देवो! याः=जो वः=आपकी सूर्ये सूर्य में रुचः=

English

The Highly-Blessed, the Moon whose rays are like the Sun's, is the Gandharva. The Asterisms are his Apsarases, Luminous. May he protect, etc.

अध्याय १८

श्लोक 42

इ॒षि॒रो वि॒श्वव्य॑चा॒ वातो॑ गन्ध॒र्वस्तस्यापो॑ अप्स॒रस॒ ऊर्जो॒ नाम॑ ।स न॑ इ॒दं ब्रह्म॑ क्ष॒त्रं पा॑तु॒ तस्मै॒ स्वाहा॒ वाट् ताभ्य॒: स्वाहा॑ ।। ४ १ ।।भु॒ज्युः सु॑प॒र्णो य॒ज्ञो ग॑न्ध॒र्वतस्य॒ दक्षि॑णा अप्स॒रस॑ स्ता॒वा नाम॑ ।स न॑ इ॒दं ब्रह्म॑ क्ष॒त्रं पा॑तु॒ तस्मै॒ स्वाहा॒ वाट् ताभ्य॒: स्वाहा॑

iṣiro viśvavyacā vāto gandharvastasyāpo apsarasa ūrjo nāma | sa na idaṃ brahma kṣatraṃ pātu tasmai svāhā vāṭ tābhya: svāhā || 4 1 || bhujyuḥ suparṇo yajño gandharvatasya dakṣiṇā apsarasa stāvā nāma | sa na idaṃ brahma kṣatraṃ pātu tasmai svāhā vāṭ tābhya: svāhā

हिन्दी अर्थ

(क) बृहस्पति मुञ्चे सूर्य के समान ज्ञान से दीप्त करे। (ख) अग्नि कौ कृपा से मेँ उत्तम गौवों के सात्विक दुग्ध- प्रयोग से ज्ञान-ग्रहण-- पटु ज्ञानेद्दियोवाला बनं। (ग) इन्द्र के अनुग्रह से मै अश्वो द्वारा उचित व्यायाम करता हआ अपनी कर्मेन्द्रिय को सशक्त बनाञं। मेरे सब कार्य शक्तिशाली हों।

English

The Protecting, Strong-winged, Sacrifice is the Gandharva. Guerdons are his Apsarases , called Praisers. May he protect, etc.

अध्याय १८

श्लोक 43

प्र॒जाप॑तिर्वि॒श्वक॑र्मा॒ मनो॑ गन्ध॒र्वस्तस्य॑ ऋक्सा॒मान्य॑प्स॒रस॒ एष्ट॑यो॒ नाम॑ ।स न॑ इ॒दं ब्रह्म॑ क्ष॒त्रं पा॑तु॒ तस्मै॒ स्वाहा॒ वाट् ताभ्य॒: स्वाहा॑

prajāpatirviśvakarmā mano gandharvastasya ṛksāmānyapsarasa eṣṭayo nāma | sa na idaṃ brahma kṣatraṃ pātu tasmai svāhā vāṭ tābhya: svāhā

हिन्दी अर्थ

हममें ब्राह्यणो कौ ज्ञान दीप्ति हो। हम क्षत्रियो के बल कौ धारण करे, वेश्यो करौ सुसम्पत्तिवाले हों। शुद्र के श्रम को हम मान देनेवाले हो। १. शुनःशेप प्रभु से प्रार्थना करता है कि ब्रह्मणा वन्दमानः = ज्ञान से स्तुति करता हआ त्वा=आपसे तत्त् यासि=यह प्रार्थना करता हूँ कि नः=हमारे आयुः जीवन को मातमत

English

The Lord of Creatures, Omnific, Mind is the Gandharva. Richas and Sâmans are his Apsarases, called Wishings. May he protect, etc.

अध्याय १८

श्लोक 44

स नो॑ भुवनस्य पते प्रजापते॒ यस्य॑ त उ॒परि॑ गृ॒हा यस्य॑ वे॒ह ।अस्मै॒ ब्रह्म॑णेऽस्मै क्ष॒त्राय॒ महि॒ शर्म॑ यच्छ॒ स्वाहा॑

sa no bhuvanasya pate prajāpate yasya ta upari gṛhā yasya veha | asmai brahmaṇe'smai kṣatrāya mahi śarma yaccha svāhā

हिन्दी अर्थ

जो अपने मे ज्ञान, उपासना व कर्म का सुन्दर सामञ्जस्य स्थापित नही करता वह अपने जीवन को व्यर्थ में ही नष्ट करता हे। १९. गतमन्त्र में प्रभु से प्रार्थना कौ गई थी कि है प्रभो! हमारे जीवन को व्यर्थं नष्ट मत होने दीजिए। प्रस्तुत मन्त्र में प्रभु जीव से जीवन को सार्थक बनाने के लिए पाँच बातें

English

Lord of the World, Prajâpati, whose are the homes above and here, Give great protection unto these, the Priesthood and Nobility.

अध्याय १८

श्लोक 45

स॒मु॒द्रो॒ऽसि॒ नभ॑स्वाना॒र्द्रदा॑नुः श॒म्भूर्म॑यो॒भूर॒भि मा॑ वाहि॒ स्वाहा॑ ।मारु॒तो॒ऽसि म॒रुतां॑ ग॒णः श॒म्भूर्म॑यो॒भूर॒भि मा॑ वाहि॒ स्वाहा॑ऽव॒स्यूर॑सि॒ दुव॑स्वाञ्छ॒म्भूर्म॑यो॒भूर॒भि मा॑ वाहि॒ स्वाहा॑

samudro'si nabhasvānārdradānuḥ śambhūrmayobhūrabhi mā vāhi svāhā | māruto'si marutāṃ gaṇaḥ śambhūrmayobhūrabhi mā vāhi svāhā'vasyūrasi duvasvāñchambhūrmayobhūrabhi mā vāhi svāhā

हिन्दी अर्थ

(१) प्राणशक्ति की सफलता, (२) इन्द्रियों कौ रचनाकार्यवृत्ति, (३) मन की शुचिता, (४) मस्तिष्क की ज्योति तथा (५) उत्पादन द्वारा एेश्वर्य वृद्धि-जीवन कौ अग्निं युनज्मि शव॑सा घृतेन॑ दिव्यःसुं पर्णं वय॑सा वृहन्त॑म्। १. गतमन्त्र के अनुसार प्रभु से प्रेरणा को प्राप्त हुआ-हआ शुनःशेप निश्चय करता हे

English

Thou art the vapoury sea that giveth moisture. Blow on me, thou, healthful and blessing-laden. Thou art the Maruts’ own, the band of Maruts. Blow on me, etc. Seeker of aid art thou, receiving worship. Blow on me, etc.

अध्याय १८

श्लोक 46

यास्ते॑ अग्ने॒ सूर्ये॒ रुचो॒ दिव॑मात॒न्वन्ति॑ र॒श्मिभि॑: ।ताभि॑र्नो अ॒द्य सर्वा॑भी रु॒चे जना॑य नस्कृधि

yāste agne sūrye ruco divamātanvanti raśmibhi: | tābhirno adya sarvābhī ruce janāya naskṛdhi

हिन्दी अर्थ

-१. ठम क्रियाशीलता से शक्तिसम्पन्न बने ओर ई्प्यदि मलों को त्यागकर मन को दीप्त करे। २. इस प्रकार प्रभु का उपासन करते हए स्वर्गलोक को प्राप्त करें ओर ३. (अधि) उससे भी ऊपर उठकर मोक्षसुख का अनुभव करे। १. प्रभु शुनःशेप से कहते है कि इमौ =गतमन्त्र मेँ वर्णित ज्ञान की दीप्ति ओर बल

English

Thy lights, O Agni, in the Sun, etc., as in XIII. 22.

अध्याय १८

श्लोक 47

या वो॑ दे॒वाः सूर्ये॒ रुचो॒ गोष्वश्वे॑षु॒ या रुच॑: ।इन्द्रा॑ग्नी॒ ताभि॒: सर्वा॑भी॒ रुचं॑ नो धत्त बृहस्पते

yā vo devāḥ sūrye ruco goṣvaśveṣu yā ruca: | indrāgnī tābhi: sarvābhī rucaṃ no dhatta bṛhaspate

हिन्दी अर्थ

हम मस्तिष्क में ज्ञान व शरीर में बल को धारण करके राक्षसीवृत्तियों से दूर होते हुए ऊपर उठते हए उन लोकों को प्राप्त करं, जिनको पुण्यशील, तत्त्वज्ञानी ऋषि, विशाल-हदय मुनि तथा पूर्ण स्वस्थ दीर्घजीवी पुण्यात्मा प्राप्त किया करते हे। सोने के पंर्रवात्ना पश्चषी=“हिरण्यपश् शाक्कुन'

English

Lights of yours in the Sun, O Gods, etc., as in XIII. 23.

अध्याय १८

श्लोक 48

रुचं॑ नो धेहि ब्राह्म॒णेषु॒ रुच॒ᳪ राज॑सु नस्कृधि ।रुचं॒ विश्ये॑षु शू॒द्रेषु॒ मयि॑ धेहि रु॒चा रुच॑म्

rucaṃ no dhehi brāhmaṇeṣu ruca rājasu naskṛdhi | rucaṃ viśyeṣu śūdreṣu mayi dhehi rucā rucam

हिन्दी अर्थ

में “इन्दु, दक्ष, श्येन, ऋतावा, हिरण्यपक्षः, शकुन, भुरण्युः व महान्" बनकर चित्तवृत्ति को ध्रुव करता हआ हदय मेँ प्रभु के साथ स्थित होऊं। प्रभु का दर्शन करता हआ प्रभु के प्रति नतमस्तक होऊं ओर इस प्रकार अपने जीवन को चरितार्थं करूं। अव्यर्थ जीवनवाला मै वास्तविक सुख का निर्माण करं।

English

Give lustre to our holy priests, set lustre in our ruling chiefs Lustre to Vaisyas, Sûdras: give, through lustre; lustre unto me.

अध्याय १८

श्लोक 49

तत्त्वा॑ यामि॒ ब्रह्म॑णा॒ वन्द॑मान॒स्तदा शा॑स्ते॒ यज॑मानो ह॒विर्भि॑: ।अहे॑डमानो वरुणे॒ह बो॒ध्युरु॑शᳪस॒ मा न॒ आयु॒: प्र मो॑षीः

tattvā yāmi brahmaṇā vandamānastadā śāste yajamāno havirbhi: | aheḍamāno varuṇeha bodhyuruśasa mā na āyu: pra moṣīḥ

हिन्दी अर्थ

प्रभु की ओर चलनेवाला व्यक्ति १. ज्ञान के शिखर पर पहुंचने का प्रयत्न करता है। २. शरीर को व्रतो के बन्धन में बोँधता है। ३. जलो व ओषधियों के प्रयोग से शक्तिशाली बनता है। ४. पूर्ण जीवनवाला बनता है। ५. दुःखी पुरुषों का शरण होता हे। ६. हदय को विशाल बनाता है। ७. लोगों के लिए आदर्श बनकर विनीत बना रहता हे।

English

I ask this of thee with my prayer, adoring: thy worshipper asks this with his oblations. Varuna, stay thou here and be not angry: steal not our life from us, O thou Wide-Ruler.

अध्याय १८

श्लोक 50

स्व॒र्ण घ॒र्मः स्वाहा॑ स्वर्णार्कः स्वाहा॑ स्वर्ण शु॒क्रः स्वाहा स्वर्ण ज्योति॒: स्वाहा॒स्वर्ण सूर्य॒: स्वाहा॑

svarṇa gharmaḥ svāhā svarṇārkaḥ svāhā svarṇa śukraḥ svāhā svarṇa jyoti: svāhā svarṇa sūrya: svāhā

हिन्दी अर्थ

हम संसार मे गुणों की दृष्टि से अपना स्थान प्रमुख बना्णँ। प्रभु का उपासन करे। हमारा हदय प्रभु में हो. जीवन कर्मो मे। अङ्-प्रत्यङ्ख को हम शक्ति प्राप्त करा्। ज्ञान-समुद्र का अवगाहन करे। दीप्त मस्तिष्क , तृप्तिप्रद हदय व सशक्त शरीर से सभी को सुखी करते हए हम प्रभु को आराधित करे।

English

Heaven-like is Warmth, Hail! Heaven-like is Arka, Hail! Heaven-like is the Bright One, Hail! Heaven-like is Light, Hail! Heaven-like is Sûrya, Hail!

अध्याय १८

श्लोक 51

अ॒ग्निं यु॑नज्मि॒ शव॑सा घृ॒तेन॑ दि॒व्यᳪ सु॑प॒र्णं वय॑सा बृ॒हन्त॑म् ।तेन॑ व॒यं ग॑मेम ब्र॒ध्नस्य॑ वि॒ष्टप॒ᳪ स्वो रुहा॑णा॒ अधि॒ नाक॑मुत्त॒मम्

agniṃ yunajmi śavasā ghṛtena divya suparṇaṃ vayasā bṛhantam | tena vayaṃ gamema bradhnasya viṣṭapa svo ruhāṇā adhi nākamuttamam

हिन्दी अर्थ

हम जानी व स्वस्थ बनकर सदा यज्ञं को करनेवाले वबनें। हमारा चन यज्ञात्मक कर्मो में ही विनियुक्त हो। एेसा करने पर ही हम प्रभु को पार्णँगे। इष्टोऽअग्निराह॑तः पिपर्तु नऽ इष्टईहविः। स्वगेदं देवेभ्यो नम॑:॥५७॥ १. गालव प्रार्थना कहता है कि हमसे अग्निः इष्टः=यह अग्नि सदा किया जाए

English

I yoke with power and flowing butter Agni, divine, strong- pinioned, great with vital vigour. Through him may we approach the Bright One's station, ascending to the loftiest sky, to heaven.

अध्याय १८

श्लोक 52

इ॒मौ ते॑ प॒क्षाव॒जरौ॑ पत॒त्रिणौ॒ याभ्या॒ᳪ रक्षा॑ᳪस्यप॒हᳪस्य॑ग्ने ।ताभ्यां॑ पतेम सु॒कृता॑मु लो॒कं यत्र॒ ऋष॑यो ज॒ग्मुः प्र॑थम॒जाः पु॑रा॒णाः

imau te pakṣāvajarau patatriṇau yābhyā rakṣāsyapahasyagne | tābhyāṃ patema sukṛtāmu lokaṃ yatra ṛṣayo jagmuḥ prathamajāḥ purāṇāḥ

हिन्दी अर्थ

प्रभु ने जीव को सृष्टि के प्रारम्भ में ही यज्ञ को प्राप्त कराया हे। यह यज्ञ जीव के लिए सुख की निधि है। इसके अपनाने पर ही वह उस प्रभु को प्राप्त कर पाता है जो प्रभु सर्वत्र होते हए प्रसाद-युक्त मन मेही देखे जाते हे। एतं जानाथ परमे व्योंमन्देवाः सधस्था विद रूपमंस्य।

English

With these thy two ne’er-wasting feathered pinions wherewith thou drivest fiends away, O Agni, Let us fly to the regions of the pious whither have gone the first-born ancient Rishis.

अध्याय १८

श्लोक 53

इन्दु॒र्दक्ष॑: श्ये॒न ऋ॒तावा॒ हिर॑ण्यपक्षः शकु॒नो भु॑र॒ण्युः ।म॒हान्त्स॒धस्थे॑ ध्रु॒व आ निष॑त्तो॒ नम॑स्ते अस्तु॒ मा मा॑ हिᳪसीः

indurdakṣa: śyena ṛtāvā hiraṇyapakṣaḥ śakuno bhuraṇyuḥ | mahāntsadhasthe dhruva ā niṣatto namaste astu mā mā hisīḥ

हिन्दी अर्थ

प्रभु- प्राप्ति के लिए हम हदयाकाश को पवित्र बनाएं, यज्ञवेदि पर मिलकर वैठनेवाले देव बनें, देवयानमार्ग से चले ओर हमारा जीवन इष्टापूर्तमय हो। अस्मिन्त्सधस्थेऽअध्युत्त॑रस्मिन् विश्व देवा यज॑मानश्च सीदत ॥६९॥ १. पिछले मन्त्र के "इष्टापूर्त" का ही वर्णन करते हए कहते है कि अग्ने-अग्नि के

English

The Drop, the powerful, the falcon, righteous, impetuous bird borne on his golden pinions, Great, stedfast, settled in the habitation—to thee be reverence! Forbear to harm thee !

अध्याय १८

श्लोक 54

दि॒वो मू॒र्धाऽसि॑ पृथि॒व्या नाभि॒रूर्ग॒पामोष॑धीनाम् ।वि॒श्वायु॒: शर्म॑ स॒प्रथा॒ नम॑स्प॒थे

divo mūrdhā'si pṛthivyā nābhirūrgapāmoṣadhīnām | viśvāyu: śarma saprathā namaspathe

हिन्दी अर्थ

उदलुद्ध अग्नि मे हम सव मिलकर यज्ञिय पदार्थो कौ आहति देनेवाले हों। येन वहसि सहस्त्रं येनौगने सर्ववेदसम्। तेनेमं यज्ञ नो नय स्व्र्दवेषु गन्त॑वे।।६२॥ १. पिछले मन्त्र मेँ यह स्पष्ट है कि यजमान "इष्ट ' को करता है, तो अग्नि आपूर्त' को। अपने में पडे हुए पदार्थो को अग्नि छोटे-छोटे कणो में विभक्त करके सर्वत्र फला देता

English

Centre of earth, heaven's head art thou, essence of waters and of plants. Eternal, far spread refuge. Homage to the Path!

अध्याय १८

श्लोक 55

विश्व॑स्य मू॒र्धन्नधि॑ तिष्ठसि श्रि॒तः स॑मु॒द्रे ते॒ हृद॑यम॒प्स्वायु॑र॒पो द॑त्तोद॒धिं भि॑न्त ।दि॒वस्प॒र्जन्या॑द॒न्तरि॑क्षात्पृथि॒व्यास्ततो॑ नो॒ वृष्ट्या॑व

viśvasya mūrdhannadhi tiṣṭhasi śritaḥ samudre te hṛdayamapsvāyurapo dattodadhiṃ bhinta | divasparjanyādantarikṣātpṛthivyāstato no vṛṣṭyāva

हिन्दी अर्थ

(१९) अग्निहोत्र द्वारा हम अकेले न खाकर सहस का भरण करते हें। (२) इस अग्निहोत्र से अन्नादि की उत्पत्ति के द्वारा हमें सम्पूर्णं धन प्राप्त होता हे। (३) वायुशुद्धि व नीरोगता से हमारा जीवन सुखी होता है, हमारा गृहस्थ स्वर्गं बन जाता ह ८4) स्वार्थवृत्ति से ऊपर उठकर हम दिव्य गुणों को प्राप्त करते हे।

English

Attached thou standest at the head of all the world. Thy heart is in the sea, thy life is in the floods. Give water: cleave the reservoir. Help us with rain sent from the sky, Parjanya, firmament, or earth.

अध्याय १८

श्लोक 56

इ॒ष्टो य॒ज्ञो भृगु॑भिराशी॒र्दा वसु॑भिः ।तस्य॑ न इ॒ष्टस्य॑ प्री॒तस्य॒ द्रवि॑णे॒हा ग॑मेः

iṣṭo yajño bhṛgubhirāśīrdā vasubhiḥ | tasya na iṣṭasya prītasya draviṇehā gameḥ

हिन्दी अर्थ

हम यज्ञ के सब उपकरणों को ठीक-ठाक करके यज्ञशील बनें ओर दिव्य गुणों की वृद्धि करनेवाले बनकर घर को स्वर्ग बना पापँ। तद्न्निर्वैशवकर्मणः स्वर्देवेषु नो द धत्।। ६४॥। १. दिव्य गुणों का अपने में निर्माण करनेवाला ' विश्वकर्मा ' प्रस्तुत मन्त्रों का ऋषि ै।

English

By Bhrigus and by Vasus hath prayer-granting sacrifice been paid. Come, Wealth, into the house of him our dear, our well-beloved one.

अध्याय १८

श्लोक 57

इ॒ष्टो अ॒ग्निराहु॑तः पिपर्तु न इ॒ष्टᳪ ह॒विः ।स्व॒गेदं दे॒वेभ्यो॒ नम॑:

iṣṭo agnirāhutaḥ pipartu na iṣṭa haviḥ | svagedaṃ devebhyo nama:

हिन्दी अर्थ

हम “दत्त, परादान, पूर्तं व दक्षिणा के रूप मे दान देनेवाले हों ओर अपने जीवनो को सुखी व दिव्य गुणसम्पत्त बना पारणँ। यत्र धाराऽअन॑पेता मधोर्धृतस्य॑ च याः। तदग्निर्वश्वकर्मणः स्वर्देवेषु नो द धत्॥६५॥ १. यत्र-जवब मधोः मधुरादि गुणयुक्त सुगन्धित द्रव्यो की घृतस्य च ओर घृत की

English

May Agni, served with sacrifice and gifts, protect our offered food: This homage be Good-speed to Gods!

अध्याय १८

श्लोक 58

यदाकू॑तात्स॒मसु॑स्रोद्धृ॒दो वा॒ मन॑सो वा॒ सम्भृ॑तं॒ चक्षु॑षो वा ।तदनु॒ प्रेत॑ सु॒कृता॑मु लो॒कं यत्र॒ ऋष॑यो ज॒ग्मुः प्र॑थम॒जाः पु॑रा॒णाः

yadākūtātsamasusroddhṛdo vā manaso vā sambhṛtaṃ cakṣuṣo vā | tadanu preta sukṛtāmu lokaṃ yatra ṛṣayo jagmuḥ prathamajāḥ purāṇāḥ

हिन्दी अर्थ

जिस घर में निरन्तर मधुर हविर्द्रव्यं तथा घृत से यज्ञ चलते है, वँ स्वर्ग होता है, दिव्य गुणों की स्थापना होती है। सूचना- घृत कौ धाराँ अनेपत हों, अर्थात् यन्न निरन्तर चले। इसमे अवकाश न आ जाए्। इसे जरामर्यं सत्र समज्ञा जाए्। इससे तो तभी छुटकारा होगा जब हम अत्यन्त वृद्ध

English

That which hath flowed from purpose or from judgment, or gathered from the wind or from the vision, Follow ye to the region of the pious whither have gone the first-born ancient Rishis.

अध्याय १८

श्लोक 59

ए॒तᳪ स॑धस्थ॒ परि॑ ते ददामि॒ यमा॒वहा॑च्छेव॒धिं जा॒तवे॑दाः ।अ॒न्वा॒ग॒न्ता य॒ज्ञप॑तिर्वो॒ अत्र॒ तᳪ स्म॑ जानीत पर॒मे व्यो॑मन्

eta sadhastha pari te dadāmi yamāvahācchevadhiṃ jātavedāḥ | anvāgantā yajñapatirvo atra ta sma jānīta parame vyoman

हिन्दी अर्थ

मेैः “ अग्नि" बनू ओर अग्नि बनने के लिए हविः' होऊं। १. ऋचः नाम अस्मि विक्ान का अध्ययन करके “ऋचः' नामवाला मैं हू ऋग्वेद “विज्ञानवेद ' है। विज्ञान का उच्च अध्ययन करने के कारण "ऋच" अर्थात् विज्ञान ही मेरा नाम हो गया है। २. इस विस्ञान के अनुसार विविध यज्ञात्मक कर्मो मे जीवन का यापन

English

To thee I trust this man. Celestial Dwelling! treasure which Jâtavedas shall bring hither. After you will the Sacrificer follow. Here recognize him in the highest heaven.

अध्याय १८

श्लोक 60

ए॒तं जा॑नाथ पर॒मे व्यो॑म॒न् देवा॑: सधस्था वि॒द रू॒पम॑स्य ।यदा॒गच्छा॑त्प॒थिभि॑र्देव॒यानै॑रिष्टापू॒र्ते कृ॑णवाथा॒विर॑स्मै

etaṃ jānātha parame vyoman devā: sadhasthā vida rūpamasya | yadāgacchātpathibhirdevayānairiṣṭāpūrte kṛṇavāthāvirasmai

हिन्दी अर्थ

मेरे जीवन में ' ज्ञान-कर्म-उपासना' का समन्वय हो। मै लोकहित करनेवालों मेँ प्रमुख बनूं। लोगों को उत्तम प्रेरणा देकर उनके सुन्दर व दीर्घं जीवन का कारण बनं। सूचना- मनुष्य के लिए यँ पाञ्चजन्य ' शब्द का प्रयोग है। पाँचों ' अन्नमय, प्राणमय, मनोमय, विज्ञानमय व आनन्दमय" इन सब कोशो का (जन) विकास करने के कारण वह

English

Acknowledge him, ye Gods, in highest heaven. Ye who are present, know the shape he weareth. When he approacheth by the God-ward pathways, reveal to him the meed of pious actions.

अध्याय १८

श्लोक 61

उद्बु॑ध्यस्वाग्ने॒ प्रति॑ जागृहि॒ त्वमि॑ष्टापू॒र्ते सᳪ सृ॑जेथाम॒यं च॑ ।अ॒स्मिन्त्स॒धस्थे॒ अध्युत्त॑रस्मि॒न्विश्वे॑ देवा॒ यज॑मानाश्च सीदत

udbudhyasvāgne prati jāgṛhi tvamiṣṭāpūrte sa sṛjethāmayaṃ ca | asmintsadhasthe adhyuttarasminviśve devā yajamānāśca sīdata

हिन्दी अर्थ

हम निरन्तर प्रभु करे नाम का आवर्तन करे। इन्द्र के आवर्तन से इन्द्र बनें, जिससे कि (क) हम वृत्र का विनाश कर सके। (ख) क्रियाशीलता के द्वारा बल का सम्पादन करनेवाले हों तथा (ग) शत्रु-सेनाओं का पराभव कर पार्। १. गतमन्त्र के अनुसार जीव प्रभु के नाम का आवर्तन करते हए कहता है कि हे

English

Wake up, O Agni, etc., as in XV. 54.

अध्याय १८

श्लोक 62

येन॒ वह॑सि स॒हस्रं॒ येना॑ग्ने सर्ववेद॒सम् ।तेने॒मं य॒ज्ञं नो॑ नय॒ स्व॒र्दे॒वेषु॒ गन्त॑वे

yena vahasi sahasraṃ yenāgne sarvavedasam | tenemaṃ yajñaṃ no naya svardeveṣu gantave

हिन्दी अर्थ

प्रभु नाम-स्मरण से हमारी वासना हाथ-र्पाव से रहित होकर विनष्ट हो जाए। वासना हमारा हनन करनेवाली न हो, हमारे हदयक्षेत्र से उसकौ चहल-पहल दूर योऽअस्माँ२।।ऽअभिदासत्यध॑रं गमया तमं: ॥७०॥ १. गतमन्त्र का ऋषि इन्द्र कामक्रोधादि आसुरवृत्तियों का संहार करके सब पापों से

English

Convey our sacrifice to heaven, etc., as in XV. 55,

अध्याय १८

श्लोक 63

प्र॒स्त॒रेण॑ परि॒धिना॑ स्रु॒चा वेद्या॑ च ब॒र्हिषा॑ ।ऋ॒चेमं य॒ज्ञं नो॑ नय॒ स्व॒र्दे॒वेषु॒ गन्त॑वे

prastareṇa paridhinā srucā vedyā ca barhiṣā | ṛcemaṃ yajñaṃ no naya svardeveṣu gantave

हिन्दी अर्थ

हम वासनाओं को नष्ट करके उन्हें पूर्णरूप खे वशीभूत करके अपने शास ' सृकरसध्छाय॑ पविमिन्द्र तिग्मं वि शतरन्तादि वि मृधो नुदस्व ॥७९॥ १. गतमन्त्र का शास '=अपने पर शासन करनेवाला शत्रुओं पर विजय पाता है ओर (जय ' नामवाला होता हे। यह जय मुगः=( मृग अन्वेषणे) आत्मान्वेषण करनेवाला होता है।

English

With Darbha-bunch, with fencing-wood, with spoon, with altar, holy grass, With laud , lead this our sacrifice to go to heaven among the Gods.

अध्याय १८

श्लोक 64

यद्द॒त्तं यत्प॑रा॒दानं॒ यत्पू॒र्तं याश्च॒ दक्षि॑णाः ।तद॒ग्निर्वै॑श्वकर्म॒णः स्व॑र्दे॒वेषु॑ नो दधत्

yaddattaṃ yatparādānaṃ yatpūrtaṃ yāśca dakṣiṇāḥ | tadagnirvaiśvakarmaṇaḥ svardeveṣu no dadhat

हिन्दी अर्थ

कामादि शत्रुओं को जीतने के लिए आवश्यक है कि हम (क ) आत्मालोचन करें (मृगः), (ख) कल्पनाओंं में न उडत रहकर पृथिवी पर विचरनेवाले बनें ( कुचरः), (ग) "गिरिष्ठा" बनें वेदवाणी के अनुकूल चले, (घ) क्रियाशीलता में आनन्द लें (सकम्), (ङ) पवित्रता को ज्ञानदीप्त करे (पविं तिग्मम्)।

English

Our gifts, our charitable grants, our pious works, our fees to priests, May the Omnific's Agni set all this among the Gods in heaven.

अध्याय १८

श्लोक 65

यत्र॒ धारा॒ अन॑पेता॒ मधो॑र्घृ॒तस्य॑ च॒ याः ।तद॒ग्निर्वै॑श्वकर्म॒णः स्व॑दे॒र्वेषु॑ नो दधत्

yatra dhārā anapetā madhorghṛtasya ca yāḥ | tadagnirvaiśvakarmaṇaḥ svaderveṣu no dadhat

हिन्दी अर्थ

(क) हम सब प्राणियों के हित कौ भावना से कार्यो में प्रवृत्त हों। (ख) हममे आगे बने की प्रवृत्ति हो। (ग) प्रभु के उत्तम स्तवन में प्रवृत्त हों। पृष्टो दिवि पृष्टोऽअग्निः पुंथिव्यां पृष्टो विशुवाऽओष॑धीराविंवेश। वैश्वानरः सह॑सा पुष्टोऽअग्निः स नो दिवा स रिषस्पातु नक्त॑म्।।७३॥

English

There where all never-failing streams of honey and of butter flow, May Agni, Visvakarman's own, place us in heaven among the Gods.

अध्याय १८

श्लोक 66

अ॒ग्निर॑स्मि॒ जन्म॑ना जा॒तवे॑दा घृ॒तं मे॒ चक्षु॑र॒मृतं॑ म आ॒सन् ।अ॒र्कस्त्रि॒धातू॒ रज॑सो वि॒मानोऽज॑स्रो घ॒र्मो ह॒विर॑स्मि॒ नाम॑

agnirasmi janmanā jātavedā ghṛtaṃ me cakṣuramṛtaṃ ma āsan | arkastridhātū rajaso vimāno'jasro gharmo havirasmi nāma

हिन्दी अर्थ

हम प्रभु के जिज्ञासु भक्त बरनेगे तो धीमे-धीमे सर्वत्र हमें उस प्रभु कौ प्रभु-रक्षणा के चार त्नाभ अश्याम तं काममग्ने तवोतीऽअश्यामं रयिर॑यिवः सुवीरम्। १. गतमन्त्र की समाप्ति पर कहा था किवे प्रभु दिन-रात हमारी रक्षा करते हे। प्रस्तुत

English

Agni am who know by birth all creatures. Mine eye is butter, in my mouth is nectar. I am the triple light, the region's meter: exhaustless heat am I, named burnt oblation.

अध्याय १८

श्लोक 67

ऋचो॒ नामा॑स्मि॒ यजू॑ ᳪषि॒ नामा॑स्मि॒ सामा॑नि॒ नामा॑स्मि ।ये अ॒ग्नय॒: पाञ्च॑जन्या अ॒स्यां पृ॑थि॒व्यामधि॑ ।तेषा॑मसि॒ त्वमु॑त्त॒मः प्र नो॑ जी॒वात॑वे सुव

ṛco nāmāsmi yajū ṣi nāmāsmi sāmāni nāmāsmi | ye agnaya: pāñcajanyā asyāṃ pṛthivyāmadhi | teṣāmasi tvamuttamaḥ pra no jīvātave suva

हिन्दी अर्थ

(क) हम अपनी इच्छा को प्रभु की इच्छा मेंमिलादे। (ख) नम्रतासे प्रभु का उपासन करते हुए उत्कृष्ट कर्मो में हाथो को व्यापृत रक्खें। (ग) यजिष्ठ मन से अपने जीवन को देवों से सङ्गत करें, दिव्य गुणों से पूर्णं करे। (घ) प्रभु का अनन्य चिन्तन करते हए अपनी सब न्यूनताओं को दूर करके अपना उत्तम पूरण करे।

English

Praise-verses, sacrificial texts, and chanted hymns am I in name. Thou art the best of all the Fires among the fivefold race of man That burn upon this earth of ours. Speed thou us on to lengthened life.

अध्याय १८

श्लोक 68

वार्त्र॑हत्याय॒ शव॑से पृतना॒षाह्या॑य च ।इन्द्र॒ त्वाऽऽव॑र्तयामसि

vārtrahatyāya śavase pṛtanāṣāhyāya ca | indra tvā''vartayāmasi

हिन्दी अर्थ

हम 'अग्नि' आदि के उपासक बनकर अपनी तेजस्विता का रक्षण करे। ज्ञानियों से यज्ञ की प्रेरणा प्राप्त करके हम शुभ का साधन करे। १. गतमन्त्र का उत्कील ! तेजस्विता कौ रक्षा" व यज्लिय वृत्ति" के द्वारा प्रभु-प्राप्तिकी कामना करनेवाला होने से "उशनाः" नामवाला होता है। यह प्रभु कौ आराधना करता है कि

English

O Indra, for the strength that slays Vritra and conquers in the fight We torn thee hitherward to us.

अध्याय १८

श्लोक 69

स॒हदा॑नुं पुरुहूत क्षि॒यन्त॑मह॒स्तमि॑न्द्र॒ सं पि॑ण॒क् कुणा॑रुम् ।अ॒भि वृ॒त्रं वर्ध॑मानं॒ पिया॑रुम॒पाद॑मिन्द्र त॒वसा॑ जघन्थ

sahadānuṃ puruhūta kṣiyantamahastamindra saṃ piṇak kuṇārum | abhi vṛtraṃ vardhamānaṃ piyārumapādamindra tavasā jaghantha

हिन्दी अर्थ

प्रभु यविष्ठ है। दाश्वान् कौ रक्षा करते ह। हमें चाहिए कि ज्ञान व स्तुति वाणियों का ही उच्चारण करे ओर प्रभु के सुपुत्र बने। सूचना- इस अन्तिम मन्त्र मे उशनाः (प्रभु की प्राप्ति कौ कामनावाला) प्रभु का सुपुत्र बनना चाहता हे। प्रभु का सुपुत्र वही हो पाता है जो इस मानव-जीवन मेँ सोम कौ

English

Thou, Indra, much-invoked, didst crush to pieces, Kunâru, handless fiend who dwelt with Dânus. Thou with might, Indra, smotest dead the scorner, the footless Vritra as he waxed in vigour.

अध्याय १८

श्लोक 70

वि न॑ इन्द्र॒ मृधो॑ जहि नी॒चा य॑च्छ पृतन्य॒तः ।यो अ॒स्माँ२ अ॑भि॒दास॒त्यध॑रं गमया॒ तम॑:

vi na indra mṛdho jahi nīcā yaccha pṛtanyataḥ | yo asmā~2 abhidāsatyadharaṃ gamayā tama:

हिन्दी अर्थ

मे जीवन में ज्येष्ठता का सम्पादन करू। ज्ञानी व तेजस्वी बनू प्राणशक्ति-सम्पत्न व आत्मसन्तोषवाला होऊँ। विजय व महत्त्व को प्राप्त करूं, परिवार व सम्पत्ति से बदँ, दीर्घ जीवन व वंश विस्तारवाला होऊ। धन, विद्यादि गुणों से उत्कृष्ट बन्ं। सत्यं च॑ मे श्रद्धा च॑ मे जग॑च्च ये धनं च ये विश्वं च मे मह॑श्च मे क्रीडा च॑

English

O Indra, beat our foes away, etc. as in VIII. 44.

अध्याय १८

श्लोक 71

मृ॒गो न भी॒मः कु॑च॒रो गि॑रि॒ष्ठाः प॑रा॒वत॒ आ ज॑गन्था॒ पर॑स्याः ।सृ॒कᳪ स॒ᳪशाय॑ प॒विमि॑न्द्र ति॒ग्मं वि शत्रू॑न् ताढि॒ वि मृधो॑ नुदस्व

mṛgo na bhīmaḥ kucaro giriṣṭhāḥ parāvata ā jaganthā parasyāḥ | sṛka saśāya pavimindra tigmaṃ vi śatrūn tāḍhi vi mṛdho nudasva

हिन्दी अर्थ

मै ऋत के द्वारा अमृतत्व-अयक्ष्मत्व व अनामयत्व को सिद्ध करूं। मेरा जीवन पथ्य-सेवन से दीर्घायु तक चले। शत्रुता व भय से रहित होकर मै सुखी बनं एवं सुख की नींद सो सकूँ। मेरा प्रातःकाल उत्तम हो तथा सारा दिन सुन्दरता से व्यतीत हो। १. पिछले मन्त्र मेँ “सुदिन' पर समाप्ति हुई धी कि मेरा सारा दिन उत्तमता से बीते।

English

Like some dread wild beast roaming on the mountain thou hast approached us from the farthest distance. Whetting thy bolt and thy sharp blade, O Indra, crush thou the foes and scatter those who hate us.

अध्याय १८

श्लोक 72

वै॒श्वा॒न॒रो न॑ ऊ॒तय॒ आ प्र या॑तु परा॒वत॑: ।अ॒ग्निर्न॑: सुष्टु॒तीरुप॑

vaiśvānaro na ūtaya ā pra yātu parāvata: | agnirna: suṣṭutīrupa

हिन्दी अर्थ

- प्रभुकृपा से मुद्ध वसु व वसति की प्राप्ति हो। कर्मो द्वारा मेँ शक्तिसम्पत्न बनू। मेरे कार्य निष्प्रयोजन न हो जीवन निरुदेश्य न हो। मैं उदेश्य की ओर चलँ ओर उसे प्राप्त अग्निश्च मऽ इन्द्र॑श्च मे सोम॑श्च मऽ इन्द्र॑श्च मे सविता च॑ म॒ऽडन्द्र॑श्च मे सर॑स्वती च मऽडन्द्रश्च मे पूषा च॑ मऽडइन्द्र्॑च मे बृहस्पतिश्च म॒ऽइन्द्र॑श्च मे यज्ञेन : मेरे ये सब पदार्थ होम कौ क्रिया करने से समर्थ हों। यज्ञ आदि उत्तम कर्मो में इन पदार्थो की नियुक्ति सेमे प्रभु-प्राप्ति के लिए समर्थं बनू। अग्निश्च मे घर्मश्च मेऽर्कश्च मे सूर्यश्च मे प्राणश्च मे ऽवमेधण्च मे पृथिवी च १. अग्निः च मे=मेरे जीवन के अन्दर अग्नि हो, घर्मः च मेम शक्ति कौ

English

To aid us let Vaisvânara come from the distance far away: Come Agni, to our eulogies!

अध्याय १८

श्लोक 73

पृ॒ष्टो दि॒वि पृ॒ष्टो अ॒ग्निः पृ॑थि॒व्यां पृ॒ष्टो विश्वा॒ ओष॑धी॒रा वि॑वेश ।वै॒श्वा॒न॒रः सह॑सा पृ॒ष्टो अ॒ग्निः स नो॒ दिवा॒ स रि॒षस्पा॑तु॒ नक्त॑म्

pṛṣṭo divi pṛṣṭo agniḥ pṛthivyāṃ pṛṣṭo viśvā oṣadhīrā viveśa | vaiśvānaraḥ sahasā pṛṣṭo agniḥ sa no divā sa riṣaspātu naktam

हिन्दी अर्थ

प्रभुकृपा से मुञ्में आगे बने का उत्साह हो, उससे मेँ शक्तिसम्पन्न बना रहू। मुञ्में प्रभु -उपासन हो, उससे मुञ्चमें ज्ञान के सूर्य का उदय हो। मुञ्चमें प्राणशक्ति हो ओर वह राष्ट्-सेवा मे लगे। मेरे शरीर की शक्तियों का विस्तार हो ओर वहाँ रोगजनित खण्डन न हों। वासनाओं का खण्डन करके मैं ज्ञान के प्रकाशवाला वनूँ। उस ज्लान के अनुसार

English

Sought in the sky, sought on the earth, sought after, all plants that grow on ground hath Agni entered. May Agni, may Vaisvânara with vigour, sought for, by day and night from harm preserve us.

अध्याय १८

श्लोक 74

अ॒श्याम॒ तं काम॑मग्ने॒ तवो॒ती अ॒श्याम॑ र॒यिᳪ र॑यिवः सु॒वीर॑म् ।अ॒श्याम॒ वाज॑म॒भि वा॒जय॑न्तो॒ऽश्याम॑ द्यु॒म्नम॑जरा॒जरं॑ ते

aśyāma taṃ kāmamagne tavotī aśyāma rayi rayivaḥ suvīram | aśyāma vājamabhi vājayanto'śyāma dyumnamajarājaraṃ te

हिन्दी अर्थ

प्रभु की उपासना से मेँ व्रती, ऋतुओं के अनुसार नियमित जीवनवाला, वृद्धिशील तथा शरीर-रथ से जीवन-यात्रा को तीर्णं करनेवाला बनूं। कएकां च मे तिस्रश्च मे तिस्रश्च मे पञ्च॑ च मे पञ्च॑ च मे सप्त च॑ मे सप्त च॑ मे नव॑च मे नव॑ च मऽएकादश च मऽएकांदश च मे त्रयोदश चये त्रयोदश च गोरक्षा द्वारा गोदुग्ध को अपना मुख्य भोजन बनाकर मे सात्विक बनू, दिव्य गुणोवाला बनं। आदित्य बनकर जीवनयात्रा को पूर्णं करूं। १. प्रस्तुत मन्त्र मे वाजादि शब्दों से चैत्रादि मासों का उल्लेख करके कहते है कि उस-उस मास के लिए स्वाहा=-हम सम्यक् आहुति देते है-(क) वाजायचेत्र मास के

English

Help its that we may gain this wish, O Agni, gain riches, Wealthy One! with store of heroes. Desiring strength from thee may we be strengthened, and win, Eternal! thine eternal glory.

अध्याय १८

श्लोक 75

व॒यं ते॑ अ॒द्य र॑रि॒मा हि काम॑मुत्ता॒नह॑स्ता॒ नम॑सोप॒सद्य॑ ।यजि॑ष्ठेन॒ मन॑सा यक्षि दे॒वानस्रे॑धता॒ मन्म॑ना॒ विप्रो॑ अग्ने

vayaṃ te adya rarimā hi kāmamuttānahastā namasopasadya | yajiṣṭhena manasā yakṣi devānasredhatā manmanā vipro agne

हिन्दी अर्थ

राजा 'ऋताषाट्, ऋतधामा, अग्नि व गन्धर्व" हो। उसके अध्यक्ष ' ओषधि व मुद्' हो ये प्रजा करे ब्रह्यव क्षत्र कौ रक्षा करें। प्रजाँ राजा को कर दे। राजा उस करका प्रजाहित में ही विनियोग करे। प्रजाँ अप्सरो को कार्य मे सुविधा प्ुचाने का प्रयत्न करे। १. संहितः =( सन्दधाति) यह सम्राट् अपनी प्रजाओं में अधिक-से-अधिक मेल पैदा

English

Approaching with raised hands and adoration, we have this day fulfilled for thee thy longing. Worship the Gods with most devoted spirit as Priest with no unfriendly thought. O Agni.

अध्याय १८

श्लोक 76

धा॒म॒च्छद॒ग्निरिन्द्रो॑ ब्र॒ह्मा दे॒वो बृह॒स्पति॑: ।सचे॑तसो॒ विश्वे॑ दे॒वा य॒ज्ञं प्राव॑न्तु नः शु॒भे

dhāmacchadagnirindro brahmā devo bṛhaspati: | sacetaso viśve devā yajñaṃ prāvantu naḥ śubhe

हिन्दी अर्थ

- राष्ट मे कोई भूखा न मरे। राजा एेसी व्यवस्था करे कि प्रजा के जीवन में न्यूनतापं उत्पन्न न हों। अध्यक्ष कुशलता से कार्य करे। इतनी कुशलता से कि वे प्रजा मे प्रशंसित हो। १. सम्रार् का कर्त्तव्य एक शब्द में यह है कि वह प्रजापतिः प्रजा का पालक हो। प्रजा रक्षा कर उदेश्य से दही राजा ने उस-उस कार्य को करना है। २. विषशवकर्मा-यह राजा हम यज्ञशील बनकर 'स्व-गा' आत्मा कौ ओर चलनेवाले बनें। इस आत्मा की ओर चलते हुए हम उसी के छोटे रूप बरने। “गा ओर "लव ' नें। गालव बनकर हम दिव्य गुणों के धारण के लिए नम्र बनें। नम्रता ही दिव्य गुणों कौ जननी हे। इन दिव्य गुणों को पैदा करके ही हम महादेव को पार्णेगे।

English

Home-hider Agni, Indra, and Brahma, and bright Brihaspati— May the All Gods, one-minded, guard our sacrifice in happy place.

अध्याय १८

श्लोक 77

त्वं य॑विष्ठ दा॒शुषो॒ नॄँ: पा॑हि शृणु॒धी गिर॑: ।रक्षा॑ तो॒कमु॒त त्मना॑

tvaṃ yaviṣṭha dāśuṣo nṝ~: pāhi śṛṇudhī gira: | rakṣā tokamuta tmanā

हिन्दी अर्थ

प्रभुके रक्षण से हम १. अपनी इष्ट कामनाओं को सिद्ध करनेवाले बनें। २. वीरतायुक्त धन के स्वामी हों, ३. वासनाओंं के साथ संग्राम करके उनके विजय से शरीर में शक्ति व मस्तिष्क में ज्ञान को भरनेवाले हों, ४. हम उस अजर प्रभु की ज्ञान-ज्योति को अपनी इच्छा को प्रभु-इच्छामें

English

Guard thou the Sacrificer's men, O Youthfullest, etc., as in XIII. 52.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता · Identifier:

Yajur Veda — Chapter 18

यजुर्वेद

संस्कृत संस्करण · Sanskrit Edition:

Imported text; printed edition not recorded

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गणना पद्धति टिप्पणी · Numbering System:

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