Yajur Veda· Yajurveda Saṁhitā
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अध्याय 12 / 40

Adhyāya 12

अध्याय 12

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अध्याय १२

श्लोक 1

दृ॒शा॒नो रु॒क्म उ॒र्व्या व्य॑द्यौद् दु॒र्मर्ष॒मायु॑: श्रि॒ये रु॑चा॒नः ।अ॒ग्निर॒मृतो॑ अभव॒द्वयो॑भि॒र्यदे॑नं॒ द्यौरज॑नयत्सु॒रेता॑:

dṛśāno rukma urvyā vyadyaud durmarṣamāyu: śriye rucānaḥ | agniramṛto abhavadvayobhiryadenaṃ dyaurajanayatsuretā:

हिन्दी अर्थ

श्यावाश्व १. छन्दो को अपना कवच बनाता हे। २. क्रान्तदर्शी बनता है ३. सबका भला करता है। ४. स्वर्ग में स्थित होता है। ५. सबको उत्तम प्रेरणा देता हुआ निर्माणात्मक कार्यो को करता है। ६. श्रेय का ही वरण करता है। ६. जीवन कौ क्रियाओं में बड़ा व्यवस्थित होता हे।

English

repeated).

अध्याय १२

श्लोक 2

नक्तो॒षासा॒ सम॑नसा॒ विरू॑पे धा॒पये॑ते॒ शिशु॒मेक॑ᳪ समी॒ची ।द्यावा॒क्षामा॑ रु॒क्मो अ॒न्तर्वि भा॑ति दे॒वा अ॒ग्निं धा॑रयन्द्रविणो॒दाः

naktoṣāsā samanasā virūpe dhāpayete śiśumeka samīcī | dyāvākṣāmā rukmo antarvi bhāti devā agniṃ dhārayandraviṇodāḥ

हिन्दी अर्थ

“श्यावाश्व ' सदा पालनादि उत्तम कर्मो में लगा हुआ विशाल हदयवाला बनकर ज्योति को प्राप्त करता है ओर प्रभु के दर्शन कर पाता हे। १. श्यावाश्व के लिए ही कहते है कि तू विष्णोः (यज्ञो वै विष्णुः) यज्ञ के क्रमः असि=पराक्रमवाला प्रसिद्ध हे। तू यज्ञिय पगों को रखनेवाला है। सपल्नहा=शरीर मे अपना

English

Night and Dawn, different in hue, accordant, meeting together, suckle one same infant. Golden between the heaven and earth he shineth. The wealth-possessing Gods supported Agni.

अध्याय १२

श्लोक 3

विश्वा॑ रू॒पाणि॒ प्रति॑ मुञ्चते क॒विः प्रासा॑वीद्भ॒द्रं द्वि॒पदे॒ चतु॑ष्पदे ।वि नाक॑मख्यत्सवि॒ता वरे॒ण्योऽनु॑ प्र॒याण॑मु॒षसो॒ वि रा॑जति

viśvā rūpāṇi prati muñcate kaviḥ prāsāvīdbhadraṃ dvipade catuṣpade | vi nākamakhyatsavitā vareṇyo'nu prayāṇamuṣaso vi rājati

हिन्दी अर्थ

जीव के चार पग है १. रोगों को नष्ट करना। २. अभिमान को नष्ट करना। ३. अदान की भावना को नष्ट करना। ४. ओर शत्रुता में स्थित मन को निरुद्ध करना। शरीर को ठीक करना, मन को ठीक करना, मस्तिष्क को ठीक करना ओर अन्तःस्थित प्रभु के गत मन्त्र के अनुसार चार पगों को रखकर जो भी प्रभु का दर्शन करता है, वह

English

The Sapient One arrays himself in every form: for quadruped and biped he hath brought forth good. Excellent Savitar hath looked on heaven's high vault: he shineth after the outgoings of the Dawn.

अध्याय १२

श्लोक 4

सु॒प॒र्णो॒ऽसि ग॒रुत्माँ॑स्त्रि॒वृत्ते॒ शिरो॑ गाय॒त्रं चक्षु॑र्बृहद्रथन्त॒रे पक्षौ ।स्तोम॑ आ॒त्मा छन्दा॒ᳪस्यङ्गा॑नि॒ यजूँ॑ᳪषि॒ नाम॑ । साम॑ ते त॒नूर्वा॑मदे॒व्यं य॑ज्ञाय॒ज्ञियं॒ पुच्छं॒ धिष्ण्या॑: श॒पाः ।सु॒प॒र्णो॒ऽसि ग॒रुत्मा॒न्दिवं॑ गच्छ॒ स्व॑: पत

suparṇo'si garutmā~strivṛtte śiro gāyatraṃ cakṣurbṛhadrathantare pakṣau | stoma ātmā chandāsyaṅgāni yajū~ṣi nāma | sāma te tanūrvāmadevyaṃ yajñāyajñiyaṃ pucchaṃ dhiṣṇyā: śapāḥ | suparṇo'si garutmāndivaṃ gaccha sva: pata

हिन्दी अर्थ

१. हदयस्थ प्रभु निरन्तर प्रेरणा दे रहे है। यदि हम उस प्रेरणा को सुनें तो हमारा जीवन आनन्दमय हो जाता है। २. जीवन में सब शक्तियों का विकास होता हे। ३. सारा जीवन प्रकाशमय हो जाता है। ४. सारा संसार भी प्रकाशमय व उलञ्चनों से रहित गत मन्त्र के अनुसार प्रभु- दर्शन करनेवाला ' वत्सप्री' कहता है कि १. अग्नेहे

English

Thou art the goodly-pinioned Bird: thou hast the Trivrit for thy head. Gâyatra is thine eye, thy wings are Brihat and Rathantara. The hymn is self, the metres are his limbs, the formulas his name. The Vâmadevya Sâman is thy form, the Yajñâyajñiya thy tail, the fire-hearths are thy hooves. Thou art the goodly-pinioned Bird: go skyward, soar to heavenly light.

अध्याय १२

श्लोक 5

विष्णो॒: क्रमो॑ऽसि सपत्न॒हा गा॑य॒त्रं छन्द॒ आ रो॑ह पृथि॒वीमनु॒ वि क्र॑मस्व॒विष्णो॒: क्रमो॑ऽस्यभिमाति॒हा त्रै॑ष्टुभं॒ छन्द॒ आ रो॑हा॒न्तरि॑क्ष॒मनु॒ वि क्र॑मस्वविष्णो॒: क्रमो॑ऽस्यरातीय॒तो ह॒न्ता जाग॑तं॒ छन्द॒ आ रो॑ह॒ दिव॒मनु॒ वि क्र॑मस्वविष्णो॒: क्रमो॑ऽसि शत्रूय॒तो ह॒न्ताऽऽनु॑ष्टुभं॒ छन्द॒ आ रो॑ह॒ दिशोऽनु॒ वि क्र॑मस्व

viṣṇo: kramo'si sapatnahā gāyatraṃ chanda ā roha pṛthivīmanu vi kramasva viṣṇo: kramo'syabhimātihā traiṣṭubhaṃ chanda ā rohāntarikṣamanu vi kramasva viṣṇo: kramo'syarātīyato hantā jāgataṃ chanda ā roha divamanu vi kramasva viṣṇo: kramo'si śatrūyato hantā''nuṣṭubhaṃ chanda ā roha diśo'nu vi kramasva

हिन्दी अर्थ

प्रभो! मै आपको प्राप्त करूं ओर आपकी प्राप्ति से मुञ्ञे दीर्घं जीवन, द्वादस्णोऽध्यायः ३५8 यजुर्वेद भाष्यम् अधा पोष॑स्य पोषेण पुन॑र्नो नष्टमाकुधि पुन॑नों रयिमाकरुधि ॥८॥ १. टे अग्ने=अग्रेणी व अङ्किरः=अङ्ग-अङ्ग मे रस का सञ्चार करनेवाले प्रभो!

English

Thou art the riyal-slaying stride of Vishnu. Mount the Gâyatra metre: stride along the earth. Thou art the foe-destroying stride of Vishnu. Mount the Trishtup metre: stride along mid-air. Thou art the traitor-slaying stride of Vishnu. Mount the Jagatî metre: stride along the sky. Thou art the foeman-slaying stride of Vishnu. Mount Anushtup metre: stride along the Quarters.

अध्याय १२

श्लोक 6

अक्र॑न्दद॒ग्नि स्त॒नय॑न्निव॒ द्यौ॒: क्षामा॒ रेरि॑हद्वी॒रुध॑: सम॒ञ्जन् ।स॒द्यो ज॑ज्ञा॒नो वि हीमि॒द्धो अख्य॒दा रोद॑सी भा॒नुना॑ भात्य॒न्तः

akrandadagni stanayanniva dyau: kṣāmā rerihadvīrudha: samañjan | sadyo jajñāno vi hīmiddho akhyadā rodasī bhānunā bhātyantaḥ

हिन्दी अर्थ

हम उस धन को प्राप्त करे जिसका हम दान देनेवाले बनें ओर जिससे हम सभी का धारण करनेवाले बनें। सबके धारण की यह भावना ही हमें ' वत्सप्री ' बनाएगी। प्रभु हमारे धारणात्मक कर्मसे ही प्रीणित होगे। १. प्रजाओं का जीवन बहुत कुक राजा के जीवन पर निर्भर है। "यथा राजा तथा

English

repeated).

अध्याय १२

श्लोक 7

अग्ने॑ऽभ्यावर्तिन्न॒भि मा॒ नि व॑र्त॒स्वायु॑षा॒ वर्च॑सा प्र॒जया॒ धने॑न ।स॒न्या मे॒धया॑ र॒य्या पोषे॑ण

agne'bhyāvartinnabhi mā ni vartasvāyuṣā varcasā prajayā dhanena | sanyā medhayā rayyā poṣeṇa

हिन्दी अर्थ

हम तीनों बन्धनों से ऊपर उटे। आदित्य के व्रत में चलें ओर अदिति को अग्निर्भानुना रुश॑ता स्वद्गुऽआ जातो विश्वा सद्ांन्यप्राः ॥९३॥ १. गत मन्त्र के अनुसार तीनों बन्धनो को तैरकर अव यह “त्रित ' (त्रीन् तरति) बना है। इसका जीवन एेसा है- (२) यह उषसां बृहत् अग्रे=उषाकाल करे बहुत पहले ही

English

Return to me, thou still-returning Agni, with life, with lustre, progeny, and treasure, With profit, wisdom, riches, and abundance.

अध्याय १२

श्लोक 8

अग्ने॑ अङ्गिरः श॒तं ते॑ सन्त्वा॒वृत॑: स॒हस्रं॑ त उपा॒वृत॑: ।अधा॒ पोष॑स्य॒ पोषे॑ण॒ पुन॑र्नो न॒ष्टमा कृ॑धि॒ पुन॑र्नो र॒यिमा कृ॑धि

agne aṅgiraḥ śataṃ te santvāvṛta: sahasraṃ ta upāvṛta: | adhā poṣasya poṣeṇa punarno naṣṭamā kṛdhi punarno rayimā kṛdhi

हिन्दी अर्थ

प्रभु कौ महिमा द्युलोक के तारों में, शरीर की रचना में तथा जलो व समुद्रो मे सुव्यक्त है। उस प्रभु के ध्यान का प्रतिदिन अभ्यास करना आवश्यक हे। तृषिः- वत्सप्रीः। देवता--अग्निः। छन्दः-निचृदार्षीत्रिष्टुप्। स्वरः-धेवतः।। १. है अग्ने-सबके प्रकाशक प्रभो! ते= आपके त्रेधा तीन प्रकार से रखे गये त्रयाणि

English

A hundred, Agni Angiras! be thy ways, a thousand thy returns. With increment of increase bring thou back to us what we have lost. Again bring hitherward our wealth.

अध्याय १२

श्लोक 9

पुन॑रू॒र्जा नि व॑र्तस्व॒ पुन॑रग्न इ॒षाऽऽयु॑षा ।पुन॑र्नः पा॒ह्यᳪह॑सः

punarūrjā ni vartasva punaragna iṣā''yuṣā | punarnaḥ pāhyahasaḥ

हिन्दी अर्थ

-हम स्वार्थ से ऊपर उठकर प्रसादयुक्त मन मेँ प्रभु का दर्शन करे। प्रभु-दर्शन के लिए कर्मो मे लगे रहना तथा साथ ही ज्ञान के उषःकाल को अपने जीवन में लाना १. अग्निः=वह अग्रेणी परमात्मा अक्रन्दत्-पवित्र हदयोंँ में वेदवाणी का नाद करता हे। स्तनयन्निव दद्यौः=वह तो मेघ के समान गर्जना कर रहा हे, परन्तु दुभाग्यवश हम उस

English

Return again with nourishment; Agni, again with food and life. Again preserve us from distress.

अध्याय १२

श्लोक 10

स॒ह र॒य्या नि व॑र्त॒स्वाग्ने॒ पिन्व॑स्व॒ धार॑या ।वि॒श्वप्स्न्या॑ वि॒श्वत॒स्परि॑

saha rayyā ni vartasvāgne pinvasva dhārayā | viśvapsnyā viśvataspari

हिन्दी अर्थ

हम अपने जीवन को प्रकाशमय बनाकर संसार को प्रकाश देनेवाले बने ओर सभी को उत्तम निवासवाला व नीरोग बनाने का प्रयत्न कर। उशिक् पावको अरतिः सुमेधा मर्त्यष्वभ्निरमृतो नि धाचि । १. यह वत्सप्री :=प्रभु का प्यारा उशिक् = (वश्) सबका भला चाहनेवाला होता है,

English

repeated).

अध्याय १२

श्लोक 11

आ त्वा॑ऽहार्षम॒न्तर॑भूर्ध्रु॒वस्ति॒ष्ठावि॑चाचलिः ।विश॑स्त्वा॒ सर्वा॑ वाञ्छन्तु॒ मा त्वद्रा॒ष्ट्रमधि॑भ्रशत्

ā tvā'hārṣamantarabhūrdhruvastiṣṭhāvicācaliḥ | viśastvā sarvā vāñchantu mā tvadrāṣṭramadhibhraśat

हिन्दी अर्थ

हमें सभी के भले की कामना करनी चाहिए, अतः स्वयं विषयों से ऊपर उठकर ज्ञान का प्रसार करनेवाला होना चाहिए्। अग्निर मृतोऽअभवद्वयोंभिर्यदेनं द्यौरज॑नयत्सुरेताः । २५॥ १. दुश्ानः=यह वस्तुतत्व को देखता हे, बाह्य रूप से ही विचलित नहीं हो जाता--विषयों

English

I brought thee: thou hast entered in. Stand stedfast and immovable. Lot all the people long for thee. Let not thy kingship fall away.

अध्याय १२

श्लोक 12

उदु॑त्त॒मं व॑रुण॒ पाश॑म॒स्मदवा॑ध॒मं वि म॑ध्य॒मᳪ श्र॑थाय ।अथा॑ व॒यमा॑दित्य व्र॒ते तवाना॑गसो॒ अदि॑तये स्याम

uduttamaṃ varuṇa pāśamasmadavādhamaṃ vi madhyama śrathāya | athā vayamāditya vrate tavānāgaso aditaye syāma

हिन्दी अर्थ

संसार में हमें तत्त्वदर्शी बनकर विषयों में नहीं उलज्ञना। ज्ञानी, ब्रह्मचारी आचार्यो की कृपा से ही एेसा जीवन बनता हेै। गुरु का आदर, प्रभु की भक्ति यस्तैऽओद्य कृणवंद्रद्रशोचे ऽपृपं हैव घृतव॑न्तमग्ने।

English

Varuna, from the upmost bond release us, let down the lowest and remove the midmost. So in thy holy law may we made sinless belong to Aditi, O thou Âditya.

अध्याय १२

श्लोक 13

अग्रे॑ बृ॒हन्नु॒षसा॑मू॒र्ध्वो अ॑स्थान्निर्जग॒न्वान् तम॑सो॒ ज्योति॒षाऽऽगा॑त् ।अ॒ग्निर्भा॒नुना॒ रुश॑ता॒ स्वङ्ग॒ आ जा॒तो विश्वा॒ सद्मा॑न्यप्राः

agre bṛhannuṣasāmūrdhvo asthānnirjaganvān tamaso jyotiṣā''gāt | agnirbhānunā ruśatā svaṅga ā jāto viśvā sadmānyaprāḥ

हिन्दी अर्थ

-१. हम प्रभु का स्तवन करे। २. द्वेष से ऊपर उठें। ३. देवों से शक्ति प्राप्त करे। देवों से शक्ति प्राप्त करके हम द्वेष से ऊपर उठे। निर्ेष बनकर सभी का भला चाहना व करना ही सच्चा प्रभु-कीर्तन है। यही व्यक्ति वत्सप्री' है प्रभु का सच्चा प्यारा हे। १. पिछले मन्त्र कौ समाप्ति इस बात पर थी कि सब देव हमारे अङ्खोँ में अपनी-अपनी

English

High hath the Mighty risen before the Mornings, and come to us with light from out the darkness. Fair-shapen Agni with white-shining splendour hath filled at birth all human habitations.

अध्याय १२

श्लोक 14

ह॒ᳪसः शु॑चि॒षद्वसु॑रन्तरिक्ष॒सद्धोता॑ वेदि॒षदति॑थिर्दूरोण॒सत् ।नृ॒षद्व॑र॒सदृ॑त॒सद् व्योम॒सद॒ब्जा गो॒जा ऋ॑त॒जा अ॑द्रि॒जा ऋ॒तं बृ॒हत्

hasaḥ śuciṣadvasurantarikṣasaddhotā vediṣadatithirdūroṇasat | nṛṣadvarasadṛtasad vyomasadabjā gojā ṛtajā adrijā ṛtaṃ bṛhat

हिन्दी अर्थ

एक परिव्राजक प्रचारक को तपस्वी, ज्ञानी व प्रियदर्शन होना चाहिए। १. है अग्ने=अपने ज्ञानोपदेशों से सबको आगे ले-चलनेवाले “तापस '! त्वम्=तू ज्योतिष्मान् ञान की ज्योतिवाला बनकर शिवेभिः अर्चिभिः=कल्याणकर ज्ञान की ज्वालाओं से इत्=निश्चयपूर्वक प्रयाहि आगे बद्। वस्तुतः यह तापस अपनी ज्ञान-ज्वालाओं से प्रजाओं

English

Again let the Âdityas, Rudras, Yams, and Brahmans with their rites light thee, Wealth-bringer! Increase thy body with presented butter: effectual be the Sacrificer's wishes.

अध्याय १२

श्लोक 15

सीद॒ त्वं मा॒तुर॒स्या उ॒पस्थे॒ विश्वा॑न्यग्ने व॒युना॑नि वि॒द्वान् ।मै॑नां॒ तप॑सा॒ मार्चिषा॒ऽभि शो॑चीर॒न्तर॑स्याᳪ शु॒क्रज्यो॑ति॒र्वि भा॑हि

sīda tvaṃ māturasyā upasthe viśvānyagne vayunāni vidvān | maināṃ tapasā mārciṣā'bhi śocīrantarasyā śukrajyotirvi bhāhi

हिन्दी अर्थ

स्वयं ज्योतिर्मय अहिंसक वृत्तिवाले बनकर हम ज्ञान-प्रसार द्वारा लोककल्याण १. अग्निः=सब उन्नतियों के साधक, प्रकाश देनेवाले प्रभु स्तनयन् इव द्यौः = गर्जते हए मेघ के समान अक्रन्दत्-उच्च स्वर से वेदज्ञान का उच्चारण कर रहे है। २. जब हम द्वाद्णोऽध्यायः ३७० यजुरवेदश्राष्यम्

English

Knowing all holy ordinances, Agni, be seated in the lap of this thy mother. Do not with heat or glowing flame consume her: shine thou within her with refulgent lustre.

अध्याय १२

श्लोक 16

अ॒न्तर॑ग्ने रु॒चा त्वमु॒खायाः॒ सद॑ने॒ स्वे ।तस्या॒स्त्वᳪ हर॑सा॒ तप॒ञ्जात॑वेदः शि॒वो भ॑व

antaragne rucā tvamukhāyāḥ sadane sve | tasyāstva harasā tapañjātavedaḥ śivo bhava

हिन्दी अर्थ

प्रभु की वाणी के सुनने पर मनुष्य ज्लान-सूर्य से चमकता है, काम पर विजय पाता है, स्वस्थ, दिव्य गुणोवाला, निरन्तर क्रियाशील व सभी का कल्याण करनेवाला होता है। काम पर विजय पानेवाला यह ' वशिष्ट ' कहलाता है--वशियों में श्रेष्ठ। चसिष्ठ का स्वागत 1रद्द्वप्०ष

English

Within this Fire-pan with thy light, O Agni, in thy proper seat, Glowing with warmth, be gracious thou, O Jâtavedas, unto her.

अध्याय १२

श्लोक 17

शि॒वो भू॒त्वा मह्य॑मग्ने॒ अथो॑ सीद शि॒वस्त्वम् ।शि॒वा: कृ॒त्वा दिश॒: सर्वा॒: स्वं योनि॑मि॒हास॑दः

śivo bhūtvā mahyamagne atho sīda śivastvam | śivā: kṛtvā diśa: sarvā: svaṃ yonimihāsadaḥ

हिन्दी अर्थ

उत्तम वृत्तिवाली प्रजाओं का यह कर्त्तव्य है कि वे लोकदित में तत्पर, काम-विजयी वसिष्ठ का स्वागत करे। उसे सुविधाजनक स्थान पर ठहराषं। नम्रता से उसके उपदेश को सुने। उसे माता के समान अपने लिए हितकर समञ्घे। अप्स्त्रगने सधिष्टव सौष॑धीरनु रुध्यसे। गर्भे सञ्जायसे पुन॑ः ॥३६॥

English

Being propitious unto me, O Agni, sit propitiously. Having made all the regions blest, in thine own dwelling seat thyself.

अध्याय १२

श्लोक 18

दि॒वस्परि॑ प्रथ॒मं ज॑ज्ञे अ॒ग्निर॒स्मद् द्वि॒तीयं॒ परि॑ जा॒तवे॑दाः ।तृ॒तीय॑म॒प्सु नृ॒मणा॒ अज॑स्र॒मिन्धा॑न एनं जरते स्वा॒धीः

divaspari prathamaṃ jajñe agnirasmad dvitīyaṃ pari jātavedāḥ | tṛtīyamapsu nṛmaṇā ajasramindhāna enaṃ jarate svādhīḥ

हिन्दी अर्थ

आदर्श पुरुष वही है जो प्रजाओं के साथ ही रहता है, वानस्पत्तिक भोजन करता है। चार मास एकान्त में अपने को ज्ञान से भरकर फिर स्लान-प्रसार के लिए बाहर से बनता है, अतः यह विरूप=ओरों की अपेक्षा उत्कृष्ट रूपवाला-ज्ञान-प्रसार में रत व्यक्ति ओषधीनाम् ओषधियों का गर्भः असि-निगलनेवाला- खानेवाला है। यह वनस्पतीनाम्

English

First Agni sprang to life from out of heaven, the second time from us came Jâtavedas. Thirdly the Manly-souled was in the waters. The pious lauds and kindles him Eternal.

अध्याय १२

श्लोक 19

वि॒द्मा ते॑ अग्ने त्रे॒धा त्र॒याणि॑ वि॒द्मा ते॒ धाम॒ विभृ॑ता पुरु॒त्रा ।वि॒द्मा ते॒ नाम॑ पर॒मं गुहा॒ यद्वि॒द्मा तमुत्सं॒ यत॑ आज॒गन्थ॑

vidmā te agne tredhā trayāṇi vidmā te dhāma vibhṛtā purutrā | vidmā te nāma paramaṃ guhā yadvidmā tamutsaṃ yata ājagantha

हिन्दी अर्थ

एक आदर्श प्रचारक को शाकाहारी व विश्ववन्धुत्व की भावनावाला होना १. भस्मना=-( भस दीप्तौ, प्रदीपकं तेजः-द०) अपने ज्ञान के दीप्त तेज से योनिः = मूलस्थान ब्रह्म में प्रसद्य=स्थित होकर, अर्थात् प्रभु कौ उपासना करके है अग्ने=सनके लिए मार्गं दिखानेवाले विदन्! तू अपःप्रजाओं मेव कर्मो मे स्थित हो, अर्थात् तेरे दिन

English

Agni, we know thy three powers in three stations, we know thy forms in many a place divided. We know what name supreme thou hast in secret: we know the source from which thou hast proceeded.

अध्याय १२

श्लोक 20

स॒मु॒द्रे त्वा॑ नृ॒मणा॑ अ॒प्स्वन्तर्नृ॒चक्षा॑ ईधे दि॒वो अ॑ग्न॒ ऊध॑न् ।तृ॒तीये॑ त्वा॒ रज॑सि तस्थि॒वाᳪस॑म॒पामु॒पस्थे॑ महि॒षा अ॑वर्धन्

samudre tvā nṛmaṇā apsvantarnṛcakṣā īdhe divo agna ūdhan | tṛtīye tvā rajasi tasthivāsamapāmupasthe mahiṣā avardhan

हिन्दी अर्थ

विद्वान् अपने जीवन को सान-ज्योति से दीप्त करे। ब्रह्यदर्शन करता हआ वह ईशचिन्तन से दिन का आरम्भ करे. प्रजाओं में ज्ञान-प्रसार करता हआ उदार हदय बने ओर दिनावसान पर पुनः प्रभु का ध्यान करता हुआ रात्निशयन में चला जाए। यजुर्केदभाव्यम् ३७३ द्वादशोऽध्यायः

English

The Manly-souled lit thee in sea and waters, Man's Viewer lit thee in the breast of heaven. There as thou stoodest in the third high region the Bulls increased thee in the waters’ bosom.

अध्याय १२

श्लोक 21

अक्र॑न्दद॒ग्नि स्त॒नय॑न्निव॒ द्यौ: क्षामा॒ रेरि॑हद्वी॒रुध॑: सम॒ञ्जन् ।स॒द्यो ज॑ज्ञा॒नो वि हीमि॒द्धो अख्य॒दा रोद॑सी भा॒नुना॑ भात्य॒न्तः

akrandadagni stanayanniva dyau: kṣāmā rerihadvīrudha: samañjan | sadyo jajñāno vi hīmiddho akhyadā rodasī bhānunā bhātyantaḥ

हिन्दी अर्थ

- विद्वान् संन्यासी प्रजाओं में ज्ञान फैलाते हुए उनका अधिक-से-अधिक षिः-- वत्सप्रीः। देवत्ता-अग्निः। छन्दः- निचृदार्षीगायत्री। स्वरः-षड्जः।। शक्ति-लाभ व पाप से निवृत्ति १. पिले मन्त्रों में "विरूप" को प्रभु ने लोकहित के उद्देश्य से प्रजाओं में ज्ञान-प्रचार

English

repeated.)

अध्याय १२

श्लोक 22

श्री॒णामु॑दा॒रो ध॒रुणो॑ रयी॒णां म॑नी॒षाणां॒ प्रार्प॑ण॒: सोम॑गोपाः ।वसु॑: सू॒नुः सह॑सो अ॒प्सु राजा॒ वि भा॒त्यग्र॑ उ॒षसा॑मिधा॒नः

śrīṇāmudāro dharuṇo rayīṇāṃ manīṣāṇāṃ prārpaṇa: somagopāḥ | vasu: sūnuḥ sahaso apsu rājā vi bhātyagra uṣasāmidhānaḥ

हिन्दी अर्थ

-हम प्रभु से बल व प्राणशक्ति प्राप्त करे। प्रभु की प्रेरणा को सुने। दीर्घजीवनवाले हों। पाप से सदा बचे रहे। १. है अग्ने मार्गदर्शक प्रभो! आप हमें रय्या सह =धन के साथ निवर््तस्व-प्राप्त होओ। संसार-यात्रा को चलाने के लिए धन आवश्यक हे, परन्तु वह धन यदि प्रभु-स्मरण

English

The spring of glories and support of riches, rouser of thoughts and guardian of the Soma, Good Son of Strength, a King amid the waters, in forefront of the Dawns he shines enkindled.

अध्याय १२

श्लोक 23

विश्व॑स्य के॒तुर्भुव॑नस्य॒ गर्भ॒ आ रोद॑सी अपृणा॒ज्जाय॑मानः ।वी॒डुं चि॒दद्रि॑मभिनत् परा॒यञ्जना॒ यद॒ग्निमय॑जन्त॒ पञ्च॑

viśvasya keturbhuvanasya garbha ā rodasī apṛṇājjāyamānaḥ | vīḍuṃ cidadrimabhinat parāyañjanā yadagnimayajanta pañca

हिन्दी अर्थ

-हम प्रभु-कृपा से पर्याप्त धन प्राप्त करे, जिससे निर्भीकता से ज्ञान का प्रसार करनेवाले बन सके। एवं, आदर्श उपदेशक वही है जो १. सबल हे। २. प्रभु-प्रेरणा को सुननेवाला है। ३. दीर्घं जीवनवाला है। ४. पाप से बचा रहता है। ५. पर्याप्त धनवाला हे, जिससे पराधीन न हो जाए। ६. इसका धन भोगों मेँ विनियुक्त न होकर लोकहित के

English

Germ of the world, ensign of all creation, he sprang to life and filled the earth and heaven. Even the firm rock he cleft when passing over, when the Five Tribes brought sacrifice to Agni.

अध्याय १२

श्लोक 24

उ॒शिक्पा॑व॒को अ॑र॒तिः सु॑मे॒धा मर्त्ये॑ष्व॒ग्निर॒मृतो॒ नि धा॑यि ।इय॑र्ति धू॒मम॑रु॒षं भरि॑भ्र॒दुच्छु॒क्रेण॑ शो॒चिषा॒ द्यामिन॑क्षन्

uśikpāvako aratiḥ sumedhā martyeṣvagniramṛto ni dhāyi | iyarti dhūmamaruṣaṃ bharibhraducchukreṇa śociṣā dyāminakṣan

हिन्दी अर्थ

हे प्रभो! मुञ्े शक्ति दीजिए कि मेँ प्रजाओं के लिए अपने सर्वस्व कोदे सक, उनका प्रकृष्ट भरण करनेवाला बनं वे हिंसा भी करे तो भी मेँ उनमें आपका ही रूप देखने का प्रयलल कस्ं। युयोध्युस्मद् द्वेषा॑श्सि विश्वकर्मणे स्वाहा ॥।४३॥।

English

So among mortals was immortal Agni stablished as cleansing, wise, and eager envoy. He waves the red smoke that he lifts above him, striving to reach the heaven with radiant lustre.

अध्याय १२

श्लोक 25

दृ॒शा॒नो रु॒क्म उ॒र्व्या व्य॑द्यौद्दु॒र्मर्ष॒मायु॑: श्रि॒ये रु॑चा॒नः ।अ॒ग्निर॒मृतो॑ अभव॒द्वयो॑भि॒र्यदे॑नं द्यौरज॑नय॑त्सु॒रेता॑:

dṛśāno rukma urvyā vyadyauddurmarṣamāyu: śriye rucānaḥ | agniramṛto abhavadvayobhiryadenaṃ dyaurajanayatsuretā:

हिन्दी अर्थ

हम जीवन से वासनाओं को दूर भगा दें। नियमित जीवन से दही वासना दूर होती है। यह संसार संयमी पुरुष के लिए ही सुखद है। संज्ञान॑मसि कामधरणं मयि ते कामधरणं भूयात् । १. प्रभु गत मन्त्र के अनुसार वासनाओं को दूर करनेवाले सोमाहुति से कहते है कि

English

Far hath he shone, etc. (verse

अध्याय १२

श्लोक 26

यस्ते॑ अ॒द्य कृ॒णव॑द्भद्रशोचेऽपू॒पं दे॑व घृ॒तव॑न्तमग्ने ।प्र तं न॑य प्रत॒रं वस्यो॒ अच्छा॒भि सु॒म्नं दे॒वभ॑क्तं यविष्ठ

yaste adya kṛṇavadbhadraśoce'pūpaṃ deva ghṛtavantamagne | pra taṃ naya prataraṃ vasyo acchābhi sumnaṃ devabhaktaṃ yaviṣṭha

हिन्दी अर्थ

ज्ञानी बनो। प्रभु-प्राप्ति कौ कामना करो। ज्ञानी बनकर लोकसेवक बनो। अयःसोऽअग्निर्यस्मिन्त्सोममिन्द्रः सुतं दधे जठर वावशानः । सहस्रियं वाजमत्यं न सप्तिशससवान्त्सन्त्स्तुंयसरे जातवेद : ॥ ४७॥ १९. गत मन्त्र करे “ श्रयध्वम्'-' सेवा करो'- इस उपदेश को क्रिया में लानेवाला सोमाहुति

English

Whoso this day, O God whose flames are lovely, makes thee a cake, O Agni, mixed with butter, Lead thou and further him to higher fortune, to bliss bestowed by Gods, O thou Most Youthful.

अध्याय १२

श्लोक 27

आ तं भ॑ज सौश्रव॒सेष्व॑ग्न उ॒क्थ उ॑क्थ॒ आ भ॑ज श॒स्यमा॑ने ।प्रि॒यः सूर्ये॑ प्रि॒यो अ॒ग्ना भ॑वा॒त्युज्जा॒तेन॑ भि॒नद॒दुज्जनि॑त्वैः

ā taṃ bhaja sauśravaseṣvagna uktha uktha ā bhaja śasyamāne | priyaḥ sūrye priyo agnā bhavātyujjātena bhinadadujjanitvaiḥ

हिन्दी अर्थ

प्रभु-स्मरण से हम सोम को सुरक्षित करनेवाले बनें, आनन्दमय शक्ति को धारण करे। अन्नसेवी बनकर ज्ञानी बनें ओर स्तुत्य जीवनवाले बनें। १. पिछले मन्त्र के अनुसार अन्न भोजन से यह विश्वामित्र स्वस्थ शरीर व स्वस्थ मस्तिष्कवाला बनता है। उसी बात का ध्यान कराते हए प्रभु इस विश्वामित्र से कहते हे

English

Endow him, Agni, with a share of glory, at every, song of praise sung forth enrich him. Dear let him be to Sûrya, dear to Agni, preminent with son and children's children.

अध्याय १२

श्लोक 28

त्वाम॑ग्ने॒ यज॑माना॒ अनु॒ द्यून् विश्वा॒ वसु॑ दधिरे॒ वार्या॑णि ।त्वया॑ स॒ह द्रवि॑णमि॒च्छमा॑ना व्र॒जं गोम॑न्तमु॒शिजो॒ वि व॑व्रुः

tvāmagne yajamānā anu dyūn viśvā vasu dadhire vāryāṇi | tvayā saha draviṇamicchamānā vrajaṃ gomantamuśijo vi vavruḥ

हिन्दी अर्थ

-हम भी ' पुरीष्य-अग्नि-सजोषस्-यन्ञसेवी -अद्रुढ-अनमीव- इष व मही ' बनने का प्रयल करे। इन ८ गुणों का उपार्जन करके हम प्रभु-सम्पर्क के अधिकारी बनें। हमारे लिए ये ही योगमार्गं के आठ अङ्ग बन जा्। १. है अग्ने=प्रकाश प्रदान करनेवाले परमात्मन्! हवमानायइस पुकारनेवाले- प्रार्थना

English

While, Agni, day by day men pay thee worship they win themselves all treasures worth the wishing. Allied with thee, eager and craving riches, they have disclosed the stable filled with cattle.

अध्याय १२

श्लोक 29

अस्ता॑व्य॒ग्निर्न॒राᳪ सु॒शेवो॑ वैश्वान॒र ऋषि॑भि॒: सोम॑गोपाः ।अ॒द्वे॒षे द्यावा॑पृथि॒वी हु॑वेम॒ देवा॑ ध॒त्त र॒यिम॒स्मे सु॒वीर॑म्

astāvyagnirnarā suśevo vaiśvānara ṛṣibhi: somagopāḥ | adveṣe dyāvāpṛthivī huvema devā dhatta rayimasme suvīram

हिन्दी अर्थ

वेदज्ञान उत्तम कर्मो का प्रतिपादक है, ज्ञान-विज्ञान को बद्ानेवाला है तथा हमे क्रियाशील बनानेवाला है। इसे प्राप्त करने से हम शारीर, मानस व बौद्धिक उन्नति करते हए ' त्रिविक्रम" बनते है। १. अयम्=गत मन्त्र के अनुसार त्रिविध उन्नति करनेवाला ते योनिः तेरा उत्पत्ति- स्थान

English

Agni, man's gracious Friend, the Soma's keeper, Vaisvânara, hath been lauded by the Rishis. We will invoke benignant Earth and Heaven: ye Deities, give us wealth with hero children.

अध्याय १२

श्लोक 30

स॒मिधा॒ऽग्निं दु॑वस्यत घृ॒तैर्बो॑धय॒ताति॑थिम् ।आऽस्मि॑न् हव्या जु॑होतन

samidhā'gniṃ duvasyata ghṛtairbodhayatātithim | ā'smin havyā juhotana

हिन्दी अर्थ

पली सं्ञानवाली तथा स्वभाव के परिज्ञानवाली हो, प्रभु का स्मरण करनेवाली हो, जिससे शक्तिशाली बनी रहे। धुवता से रहनेवाली हो। घर की म्यदाओं का पालन करती हुई वह गृहस्थ कौ निरन्तर उन्नति का कारण बने। १. है पलि! तू लोकं पृण=लोक को तृप्त करनेवाली हो। च्छिद्रं पृण=दोष को दूर

English

Pay service unto Agni with your fuel, rouse your Guest with oil: In him present your offerings.

अध्याय १२

श्लोक 31

उदु॑ त्वा॒ विश्वे॑ दे॒वा अग्ने॒ भर॑न्तु॒ चित्ति॑भिः ।स नो॑ भव शि॒वस्त्वᳪ सु॒प्रती॑को वि॒भाव॑सुः

udu tvā viśve devā agne bharantu cittibhiḥ | sa no bhava śivastva supratīko vibhāvasuḥ

हिन्दी अर्थ

इस वासनामय जगत् में प्रभु का नाम-स्मरण ही हमे जेता बनाता है। उस प्रभु को ही हम अपना रथ जानें। वे प्रभु ही सत्पति हैँ, वाजपति है। प्रभु-सम्प्क से दही हमे शक्ति प्राप्त होती है। १. ' प्रभु का स्तवन.करते हए ये पति-पली क्या करे? ' प्रभु कहते है कि समितम्-सं

English

May all the Gods, O Agni, bear thee upward with their earnest thoughts: Not to be looked on, rich in light, be thou propitious unto us,

अध्याय १२

श्लोक 32

प्रेद॑ग्ने॒ ज्योति॑ष्मान् याहि शि॒वेभि॑र॒र्चिभि॒ष्ट्वम् ।बृ॒हद्भि॑र्भा॒नुभि॒र्भास॒न्मा हि॑ᳪसीस्त॒न्वा॒ प्र॒जाः

predagne jyotiṣmān yāhi śivebhirarcibhiṣṭvam | bṛhadbhirbhānubhirbhāsanmā hisīstanvā prajāḥ

हिन्दी अर्थ

“ मधुच्छन्दा "उत्तम इच्छाओंवाले पति-पल्ली १. मिलकर चलते है २. परस्पर प्रेमवाले होते है ३. शोभा देनेवाले कार्यो को ही करते है ४. उत्तम मनवाले होते हैँ ५. ८ का सेवन करते है अथवा प्रभु की प्रेरणा को सुनकर बल व प्राणशक्ति को धारण मनों, व्रतो व चित्तों की एकता

English

Agni, go forth resplendent, thou with thine auspicious flames of fire. Shining with mighty beams of light harm not my people with thy form.

अध्याय १२

श्लोक 33

अक्र॑न्दद॒ग्नि स्त॒नय॑न्निव॒ द्यौ: क्षामा॒ रेरि॑हद्वी॒रुध॑: सम॒ञ्जन् ।स॒द्यो ज॑ज्ञा॒नो वि हीमि॒द्धो अख्य॒दा रोद॑सी भा॒नुना॑ भात्य॒न्तः

akrandadagni stanayanniva dyau: kṣāmā rerihadvīrudha: samañjan | sadyo jajñāno vi hīmiddho akhyadā rodasī bhānunā bhātyantaḥ

हिन्दी अर्थ

पति-पलली के मन, त्रत व चित्त मिले हुए हों। पति “अग्नि व पुरीष्य' होता हुआ गृह-रक्षक बने। घर मेँ किसी को खान-पान मेँ कमी न रह जाए्। पिछले मन्त्र की भावना को ही विस्तार से कहते हैँ १. अग्ने=हे घर कौ उन्नति के साधक पुरुष! त्वम्-तू पुरीष्यः=पालन करनेवालों में उत्तम है। २. रयिमान्=-धनवाला हे।

English

Agni roared out, etc. (verse

अध्याय १२

श्लोक 34

प्र-प्रा॒यम॒ग्निर्भ॑र॒तस्य॑ शृण्वे॒ वि यत्सूर्यो॒ न रोच॑ते बृ॒हद्भाः ।अ॒भि यः पू॒रुं पृत॑नासु त॒स्थौ दी॒दाय दैव्यो॒ अति॑थिः शि॒वो न॑:

pra-prāyamagnirbharatasya śṛṇve vi yatsūryo na rocate bṛhadbhāḥ | abhi yaḥ pūruṃ pṛtanāsu tasthau dīdāya daivyo atithiḥ śivo na:

हिन्दी अर्थ

-गृह के मुखिया को "रयि व पुष्टिमान्" होना चाहिए, जिससे घर मे सर्वत्र मा यज्ञःहि'सिष्ट मा यज्ञप॑तिं जातवेदसौ शिवौ भ॑वतमद्य न॑: ॥६०॥ प्रभु कहते है कि १. भवतं नः=हे पति-पत्री तुम दोनों हमारे बनकर रहो। २. हमारे बनने का उपाय यह है कि तुम समनसौ=समान मनवाले होओ। तुम्हारी इच्छार्णँ एक-सी

English

Far famed is this the Bharata's own Agni: he shineth like the Sun with lofty splendour. He who hath vanquished Pûru in the battle, the heavenly Guest hath shone for us benignly.

अध्याय १२

श्लोक 35

आपो॑ देवी॒: प्रति॑ गृभ्णीत॒ भस्मै॒तत्स्यो॒ने कृ॑णुध्वᳪ सुर॒भा उ॑ लो॒के ।तस्मै॑ नमन्तां॒ जन॑यः सु॒पत्नी॑र्मा॒तेव॑ पु॒त्रं बि॑भृता॒प्स्वे॒नत्

āpo devī: prati gṛbhṇīta bhasmaitatsyone kṛṇudhva surabhā u loke | tasmai namantāṃ janayaḥ supatnīrmāteva putraṃ bibhṛtāpsvenat

हिन्दी अर्थ

प्रभु के वे ही बनते है जो पति-पती समान मनवाले, समान चित्तवाले, निर्दोष, यज्षशील, प्रभु के प्रति अपने को अर्पण करनेवाले, धन को उत्पन्न करनेवाले व पल्ी-पति एक-दूसरे का ध्यान करें तां विश्वैर्देवेकऋतुभिंः संविदानः प्रजापंतिर्विश्वकछौर्मा वि मुञ्चतु ।॥॥६९॥

English

Receive these ashes, ye celestial Waters, and lay them in a fair place full of fragrance. To him bow down the nobly-wedded Matrons! Bear this on waters as her son a mother.

अध्याय १२

श्लोक 36

अ॒प्स्व॒ग्ने॒ सधि॒ष्टव॒ सौष॑धी॒रनु॑ रुध्यसे ।गर्भे॒ सञ्जा॑यसे॒ पुन॑:

apsvagne sadhiṣṭava sauṣadhīranu rudhyase | garbhe sañjāyase puna:

हिन्दी अर्थ

प्रभु से दिये गये सब दण्ड सुधारात्मक है। “वे अवश्य आते ही हों' एेसी बात नहीं है। मनुष्य का आचरणदोष होने पर ही वह निकऋति से आक्रान्त होता है। नितऋति का पारा, नितऋति व भृति यं ते देवी निऋ"तिराबबन्ध पाश ग्रीवास्व॑विचृत्यम् । तं ते विष्याम्यायुंषो न

English

Agni, thy home is in the floods: into the plants thou forcest way, And as their child art born anew.

अध्याय १२

श्लोक 37

गर्भो॑ अ॒स्योष॑धीनां॒ गर्भो॒ वन॒स्पती॑नाम् ।गर्भो॒ विश्व॑स्य भू॒तस्याग्ने॒ गर्भो॑ अ॒पाम॑सि

garbho asyoṣadhīnāṃ garbho vanaspatīnām | garbho viśvasya bhūtasyāgne garbho apāmasi

हिन्दी अर्थ

कष्टों का पाश सुगतमा से नहीं टूटता। यह तो विषय-पाश के छिन्न होने से ही छिन्न होगा। विषय-निवृत्ति कष्ट- निवृत्ति का कारण हे। देवऽडव सविता सत्यधर्मेन्द्रो न त॑स्थौ समरे प॑थीनाम् ॥।६६॥ १. गत मन्त्र के अनुसार प्रभु से दी गई ' नित्र्ति '=कृच्छापत्ति भी जीव कौ ' भूति"

English

Thou art the offspring of the plants, thou art the offspring of the trees: The offspring thou of all that is, thou, Agni, art the Waters’ Child,

अध्याय १२

श्लोक 38

प्र॒सद्य॒ भस्म॑ना॒ योनि॑म॒पश्च॑ पृथि॒वीम॑ग्ने ।स॒ᳪसृज्य॑ मा॒तृभि॒ष्ट्वं ज्योति॑ष्मा॒न् पुन॒रा ऽस॑दः

prasadya bhasmanā yonimapaśca pṛthivīmagne | sasṛjya mātṛbhiṣṭvaṃ jyotiṣmān punarā 'sadaḥ

हिन्दी अर्थ

हम कवि बनकर कृषि कररे। यह कृषि हमें धीर बनाएगी ओर हमारा १. पिछले मन्त्र कौ कृषि का ही उल्लेख करते हुए कहते है कि-(१) सीरा युनक्त =हलों को जोतो। २. युगा वितनुध्वम्-जुओं का विस्तार करो। ३. इह कृते योनौ इस संस्कृत भूमिक्षेत्र में बीजम् वपत बीजों को बोवो। ३. गिरा=खेती-विषयक कर्मो की

English

With ashes having reached the womb, the waters, Agni and the earth, United with the mothers, thou blazing hast seated thee again.

अध्याय १२

श्लोक 39

पुन॑रा॒सद्य॒ सद॑नम॒पश्च॑ पृथि॒वीम॑ग्ने ।शेषे॑ मा॒तुर्यथो॒पस्थे॒ऽन्तर॑स्याᳪ शि॒वत॑मः

punarāsadya sadanamapaśca pṛthivīmagne | śeṣe māturyathopasthe'ntarasyā śivatamaḥ

हिन्दी अर्थ

-खेतों का सेचन मधुर जल से हो, ऋतुओं व वर्षा कौ वायुओं की अनुकूलता को हम हवि के द्वारा उपस्थित करने का प्रयत्न करे। एेसा होने पर अत्न सबल होगे ओर उनसे हमारा उत्तमता से आप्यायन होगा। १. हल कौ मूठ को लाङ्गल कहते हे। यह लाङ्कगलम्-हल कौ मूठ पवीरवत्=उत्तम

English

Seated again upon thy seat, the waters, Agni! and the earth, In her, thou, most auspicious One, liest as in a mother's lap 40,

अध्याय १२

श्लोक 40

पुन॑रू॒र्जा नि व॑र्तस्व॒ पुन॑रग्न इ॒षाऽऽयु॑षा ।पुन॑र्नः पा॒ह्यᳪह॑सः

punarūrjā ni vartasva punaragna iṣā''yuṣā | punarnaḥ pāhyahasaḥ

हिन्दी अर्थ

कृषि मे गौवें हें, भेडे है व घोडे है, अतः हम कृषि को ओर ध्यान दे। हमारा हल सुख से चलनेवाला व अन्नाभाव को समाप्त करनेवाला हो। काम॑ कामदुघे धुक्ष्व मित्राय वरुणाय च । १. गत मन्त्र के अनुसार कृषि के लिए उपयुक्त हुई यह भूमि हमारे सब कामों का

English

Return again, etc.

अध्याय १२

श्लोक 41

स॒ह र॒य्या नि व॑र्त॒स्वाग्ने॒ पिन्व॑स्व॒ धार॑या ।वि॒श्वप्स्न्या॑ वि॒श्वत॒स्परि॑

saha rayyā ni vartasvāgne pinvasva dhārayā | viśvapsnyā viśvataspari

हिन्दी अर्थ

-कृषि से उत्पन्न ओषधियों के सेवन से हम नीरोग बनते हुए अन्धकार से परे प्रकाश को प्राप्त होगे। १. है प्रभो! अब्द: वर्षं अयवोभिः=न विच्छिन्न होनेवाले काल-अवयवों से अथवा शुक्लपक्ष ओर कृष्णपक्ष से सजूः = संयुक्त हो। हमारे जीवन में यह काल विच्छिन्रावयव न

English

Agni, return, etc. (verses

अध्याय १२

श्लोक 42

बोधा॑ मे अ॒स्य वच॑सो यविष्ठ॒ मᳪहि॑ष्ठस्य॒ प्रभृ॑तस्य स्वधावः ।पीय॑ति त्वो॒ अनु॑ त्वो गृणाति व॒न्दारु॑ष्टे त॒न्वं॒ वन्दे अग्ने

bodhā me asya vacaso yaviṣṭha mahiṣṭhasya prabhṛtasya svadhāvaḥ | pīyati tvo anu tvo gṛṇāti vandāruṣṭe tanvaṃ vande agne

हिन्दी अर्थ

-ओषधियों के अनन्त स्थान व तेज है। शतशः इनके परिणाम रहै। विचारपूर्वक दी गई ओषधि्योँ रोगी को नीरोग करनेवाली होती है। का लक्ष्य करके मोदध्वम् आनन्दित होके वैद्य रोगियों से कहता है कि ये ओषधियाँ आपने फूलों व फलों से तुम्हें भी फूला-फला करनेवाली बनेगी। तुम्हारे शरीर भी निर्दोष होगे।

English

Mark this my speech, Divine One, thou Most Youthful, offered to thee by him who gives most freely: One hates thee, and another sings thy praises. I thine adorer laud thy form, O Agni.

अध्याय १२

श्लोक 43

स बो॑धि सू॒रिर्म॒घवा॒ वसु॑पते॒ वसु॑दावन् ।यु॒यो॒ध्यस्मद् द्वेषा॑ᳪसि वि॒श्वक॑र्मणे॒ स्वाहा॑

sa bodhi sūrirmaghavā vasupate vasudāvan | yuyodhyasmad dveṣāsi viśvakarmaṇe svāhā

हिन्दी अर्थ

ओषधिर्योँ रोगों को नष्ट करनेवाली है। ये तो है ही वीरुधविविध रोगों यचुर्वेदभाव्यम् ३९५ द्वादशोऽध्यायः कने रकनेवाली , ओर ओष=रोगदहन करने के कारण ओषधि हैं, परन्तु ये है सजित्वरी-साथ मिलकर जीतनेवाली। पथ्य ओर वैद्य इनके सहायक हो तभी ये रोगों को जीतती टे!

English

Be thou for us a liberal Prince, Giver and Lord of precious things. Drive those who hate us far away. To the Omnific One All-hail!

अध्याय १२

श्लोक 44

पुन॑स्त्वाऽऽदि॒त्या रु॒द्रा वस॑व॒: समि॑न्धतां॒ पुन॑र्ब्र॒ह्माणो॑ वसुनीथ य॒ज्ञैः ।घृ॒तेन॒ त्वं त॒न्वं॒ वर्धयस्व स॒त्याः स॑न्तु॒ यज॑मानस्य॒ कामा॑:

punastvā''dityā rudrā vasava: samindhatāṃ punarbrahmāṇo vasunītha yajñaiḥ | ghṛtena tvaṃ tanvaṃ vardhayasva satyāḥ santu yajamānasya kāmā:

हिन्दी अर्थ

योग्य वैद्य से उपयुक्त होती हुई ओषधियों कौ शक्तियाँ उसके रोगी में प्रकट होती दहै। ये रोगी को नीरोग बनाकर उसे घोडे, गौ, वस्त्र व उत्तम शरीर प्राप्त कराती हे। १. गत मन्त्र के अनुसार जब ओषधियों के शोषक बल उद्गत होते है तव रोग नष्ट हो जाते है। इसी बात को प्रस्तुत मन्त्र में कहते हैः कि ये ओषधि इष्कृतिः=(उपस्गैकदेशलोप

English

Go hence, depart, creep off in all directions, both ancient visitors and recent comers: Yama hath given a place on earth to rest in.

अध्याय १२

श्लोक 45

अपे॑त॒ वी॒त॒ वि च॑ सर्प॒तातो॒ येऽत्र॒ स्थ पु॑रा॒णा ये च॒ नूत॑नाः ।अदा॑द्य॒मो॒ऽव॒सानं॑ पृथि॒व्या अक्र॑न्नि॒मं पि॒तरो॑ लो॒कम॑स्मै

apeta vīta vi ca sarpatāto ye'tra stha purāṇā ye ca nūtanāḥ | adādyamo'vasānaṃ pṛthivyā akrannimaṃ pitaro lokamasmai

हिन्दी अर्थ

ओषधयो शरीर में प्रवेश करती हँ ओर रोगो को मार भगाती है। ओषधियाँ मानो चोर है जो रोगरूप गौ को हर लेती है अथवा ओषधियाँ मालिक है जो रोगरूप चोर यक्ष्म के आत्मा का नाश १. ' ओषधयो रोग को धमकाकर भगा देती हे", गत मन्त्र की इसी बात को ओर

English

This place for him the Fathers have provided.

अध्याय १२

श्लोक 46

सं॒ज्ञान॑मसि काम॒धर॑णं॒ मयि॑ ते काम॒धर॑णं भूयात् ।अ॒ग्नेर्भस्मा॑स्य॒ग्नेः पुरी॑षमसि॒ । चित॑ स्थ परि॒चित॑ ऊर्ध्व॒चित॑: श्रयध्वम्

saṃjñānamasi kāmadharaṇaṃ mayi te kāmadharaṇaṃ bhūyāt | agnerbhasmāsyagneḥ purīṣamasi | cita stha paricita ūrdhvacita: śrayadhvam

हिन्दी अर्थ

एक सद्वेद्य से दी गई उत्तम ओषधि रोगरूप शत्रु को इस प्रकार नष्ट कर देती है जैसे कि उग्र क्षत्रिय से प्रयुक्त अस्त्र शत्रु को मार डालता हे। तऋषिः-भिषग्। देवता- वैद्यः। छन्द :-विराडनुष्टुप्। स्वरः--गान्धारः।। वात-पित्त-कफ '-विकार-ध्वंस

English

Knowledge art thou: accomplishment of wishes. In me be the fulfilment of thy wishes. Thou art the ashes, thou the mould of Agni. Rankers are ye, rankers around. Rankers right upward, be ye fixed.

अध्याय १२

श्लोक 46-2

इन्द्रं॒ विश्वा॑ अवीवृधन्त्समु॒द्रव्य॑चसं॒ गिर॑: ।र॒थीत॑मᳪ र॒थीनां॒ वाजा॑ना॒ᳪ सत्प॑तिं॒ पति॑म्

indraṃ viśvā avīvṛdhantsamudravyacasaṃ gira: | rathītama rathīnāṃ vājānā satpatiṃ patim

हिन्दी अर्थ

- १. हमारे रोग वात-पित्त-कफविकारों व पीडाओं के साथ दूर हो जार्। २. ये चाष के साथ आकाश में उड जा्ँ। ओंधी के साथ दूर देश मे पहुंच जाएँ अरे मारे गये ' एेसा चिल्लाकर भाग चलें । ३. सात्त्विक आहार, दीर्घश्वास, व विषय-त्याग हमें रोगों ९. वैद्य गत मन्त्र में वर्णित ' वात-पित्त-कणफ़र' विकारो के दूरीकरण के लिए विविध

English

Knowledge art thou: accomplishment of wishes. In me be the fulfilment of thy wishes. Thou art the ashes, thou the mould of Agni. Rankers are ye, rankers around. Rankers right upward, be ye fixed.

अध्याय १२

श्लोक 47

अ॒यᳪ सो अ॒ग्निर्यस्मि॒न्त्सोम॒मिन्द्र॑: सु॒तं द॒धे ज॒ठरे॑ वावशा॒नः ।स॒ह॒स्रियं॒ वाज॒मत्यं॒ न सप्ति॑ᳪ सस॒वान्त्सन्त्स्तू॑यसे जातवेदः

aya so agniryasmintsomamindra: sutaṃ dadhe jaṭhare vāvaśānaḥ | sahasriyaṃ vājamatyaṃ na sapti sasavāntsantstūyase jātavedaḥ

हिन्दी अर्थ

पिछले मन्त्र में चार प्रकार की ओषधियों का वर्णन था। प्रस्तुत मन्त्र में चार प्रकार के रोगों का वर्णन है। सम्भवतः इन्हें यथासंख्य ले-सकना सम्भव हो। चारों ओषधिं चारों विकारो को दूर करे। यं जीवमश्नवामहै न स रिष्याति पूरुषः ॥९९॥

English

This is that Agni where the longing Indra took the pressed Soma deep within his body. Winner of spoils in thousands like a courser, with prayer art thou exalted, Jâtavedas.

अध्याय १२

श्लोक 48

अग्ने॒ यत्ते॑ दि॒वि वर्च॑: पृथि॒व्यां यदोष॑धीष्व॒प्स्वा य॑जत्र ।येना॒न्तरि॑क्षमु॒र्वा॑त॒तन्थ॑ त्वे॒षः स भा॒नुर॑र्ण॒वो नृ॒चक्षा॑:

agne yatte divi varca: pṛthivyāṃ yadoṣadhīṣvapsvā yajatra | yenāntarikṣamurvātatantha tveṣaḥ sa bhānurarṇavo nṛcakṣā:

हिन्दी अर्थ

ओषधि की विशेषता निम्न हेै। १. ये अपने सोम गुण से दीप्त हो, अर्थात् घबराहट को दूर करनेवाली होँं। २. शरीर की वृद्धि व अद्धो की ददता का कारण जनें। ३. बहुवीर्य हों रोग को ज्जट दूर करें। ४. रोगनिवारणरूप मनोरथ को पूरा करे। ओर ५. हदय पर इनका कोई कुप्रभाव न हो।

English

The splendour which is thine in heaven, O Agni, in earth, O Holy One, in plants, in waters, Wherewith thou hast o’erspread mid-air's broad region, that light is brilliant, billowy, man-surveying.

अध्याय १२

श्लोक 49

अग्ने॑ दि॒वो अर्ण॒मच्छा॑ जिगा॒स्यच्छा॑ दे॒वाँ२ ऊ॑चिषे॒ धिष्ण्या॒ ये ।या रो॑च॒ने प॒रस्ता॒त् सूर्य॑स्य॒ याश्चा॒वस्ता॑दुप॒तिष्ठ॑न्त॒ आप॑:

agne divo arṇamacchā jigāsyacchā devā~2 ūciṣe dhiṣṇyā ye | yā rocane parastāt sūryasya yāścāvastādupatiṣṭhanta āpa:

हिन्दी अर्थ

ओषधियों के परस्पर गुण-वीर्य-विपाक की अनुकूलता से ही दातव्य ओषधि के योग बनाने चादहिर। समीप व दूर की ओषधिर्यो १. ओषधियों को पुरुषविध करके सम्बोधन करता हुआ (वरुण ' कहता है कि हे

English

O Agni, to the flood of heaven thou mountest, thou tallest hither Gods, the thought-inspirers. The waters, those beyond the light of Sûrya, and those that are beneath it here, approach thee.

अध्याय १२

श्लोक 50

पु॒री॒ष्या॒सो अ॒ग्नय॑: प्राव॒णेभि॑: स॒जोष॑सः ।जु॒षन्तां॑ य॒ज्ञम॒द्रुहो॑ऽनमी॒वा इषो॑ म॒हीः

purīṣyāso agnaya: prāvaṇebhi: sajoṣasaḥ | juṣantāṃ yajñamadruho'namīvā iṣo mahīḥ

हिन्दी अर्थ

हम ओषधियों के मूल को नष्ट न करे। हम सव नीरोग हो। ओषधियों की ओषधिराज से बातचीत ९. सोम ' ओषधियों का राजा माना जाता हे। यहाँ काव्यमय भाषा में उन ओषधियों को चेतन मानकर ओषधियों कौ ओषधिराज-सोम से वार्तालाप का उल्लेख करते है कि

English

May the Purîshya Agnis in accord with those that spring from floods, May they, benevolent, accept the sacrifice, full, wholesome draughts.

अध्याय १२

श्लोक 51

इडा॑मग्ने पुरु॒दᳪस॑ᳪ स॒निं गोः श॑श्वत्त॒मᳪ हव॑मानाय साध ।स्यान्न॑: सू॒नुस्तन॑यो वि॒जावाग्ने॒ सा ते॑ सुम॒तिर्भू॑त्व॒स्मे

iḍāmagne purudasa saniṃ goḥ śaśvattama havamānāya sādha | syānna: sūnustanayo vijāvāgne sā te sumatirbhūtvasme

हिन्दी अर्थ

वैद्य का विद्वान् व आस्तिक होना आवश्यक हे। एेसा ही वैद्य ओषध-प्रयोग से रोगी को नीरोग कर पाएगा। १. पिछले मन्त्र का ब्राह्मणच ज्ञानी, आस्तिक वैद्य उस-उस ओषधि को हाथ मे लेता हे ओर कहता है कि तू बलासस्य=( बलम् अस्यति) बल को क्षीण करनेवाले क्षयरोग कौ

English

As holy food, Agni, to thine invoker give wealth in cattle, lasting, rich in marvels. To us be born a son and spreading offspring. Agni, be this thy gracious will to us-ward.

अध्याय १२

श्लोक 52

अ॒यं ते॒ योनि॑रृ॒त्वियो॒ यतो॑ जा॒तो अरो॑चथाः ।तं जा॒नन्न॑ग्न॒ आ रो॒हाथा॑ नो वर्धया र॒यिम्

ayaṃ te yonirṛtviyo yato jāto arocathāḥ | taṃ jānannagna ā rohāthā no vardhayā rayim

हिन्दी अर्थ

वेद्य ' भूमिवि्लानवित् व ज्ञानी हो, शान्त व व्यवस्थित जीवनवाला हो। ऋऋषिः-वरुणः। देवता-ओषधिः। छन्दः- विराडनुष्टुप्। स्वरः गान्धार :।। १. है ओषधे दोषों का दहन करनेवाली (उष दाहे) ओषधे! मे=मेरे अरातीः=शत्नुभूत रोगों को सहस्वत तू पराभूत कर। इन्हे मेरे शरीर पर आधिपत्य न जमाने दे। २. पृतनायतः =

English

This is thine ordered place of birth whence, sprung to life, thou shonest forth. Knowing this, Agni, mount on high and cause our riches to increase.

अध्याय १२

श्लोक 53

चिद॑सि॒ तया॑ दे॒वत॑याऽङ्गिर॒स्वद् ध्रु॒वा सी॑द प॑रि॒चिद॑सि॒ तया॑ दे॒वत॑याऽङ्गिर॒स्वद् ध्रु॒वा सी॑द

cidasi tayā devatayā'ṅgirasvad dhruvā sīda paricidasi tayā devatayā'ṅgirasvad dhruvā sīda

हिन्दी अर्थ

१. दे ओषधे=रोगदाहक ओषध! त्वम् = तू-उत्तमा असिउस-उस रोग को नष्ट करने में सर्वोत्तम हे। २. वृक्षाः=शाल-ताल-तमाल-वर आदि वृक्ष तव=तेरे उपस्तयः समीप संहत होकर विद्यमान है। “ उपस्त्यायन्ति' वे वृक्ष तुम्हारे उपकार के लिए ओर उपद्रव के निराकरण के लिए समीप ही संहत होकर ठहरे है। ३. (क) इसी प्रकार य:=जो अस्मान्

English

Ranker art thou: Angiras-like sit steady with that Deity. Ranker-round art thou: Angiras-like sit steady with that Deity.

अध्याय १२

श्लोक 54

लो॒कं पृ॑ण छि॒द्रं पृ॒णाथो॑ सीद ध्रु॒वा त्वम् ।इ॒न्द्रा॒ग्नी त्वा॒ बृह॒स्पति॑र॒स्मिन् योना॑वसीषदन्

lokaṃ pṛṇa chidraṃ pṛṇātho sīda dhruvā tvam | indrāgnī tvā bṛhaspatirasmin yonāvasīṣadan

हिन्दी अर्थ

यल्िय अन्नं का सेवन हमें पवित्र करेगा। यचुर्वेदभाष्यम् ४०९ द्वादशोऽध्यायः यज्ञ के लाभ “अन्नाभाव तथा रोग का विनाश) आ मा गोषु वित्वा तनूषु जहामि सेदिमनिराममीं वाम् ॥। ९०५

English

Fill up the room, supply the void, then settle steady in thy place. Indr-Âgni and Brihaspati have set thee down in this abode.

अध्याय १२

श्लोक 55

ता अ॑स्य॒ सूद॑दोहस॒: सोम॑ श्रीणन्ति॒ पृश्न॑यः ।जन्म॑न्दे॒वानां॒ विश॑स्त्रि॒ष्वा रो॑च॒ने दि॒वः

tā asya sūdadohasa: soma śrīṇanti pṛśnayaḥ | janmandevānāṃ viśastriṣvā rocane divaḥ

हिन्दी अर्थ

प्रभु ज्ञान देते हैँ वही यशस्वी बल प्राप्त कराते है। सव प्रभु कीही महिमा है हमारा जीवन भी उस प्रभु कीही कृषा से है। हम प्रभु के प्रति अपना अर्पण करनेवाले बनें ओर इस प्रकार उन्नत होकर अभिमान से फिर अवनत न हो जार्े। १. गत मन्त्र के अनुसार कोई मनुष्य खूब उन्नति करता है। ' अग्नि" बनता है, आमे

English

The dappled kine who stream with milk prepare his draught of Soma juice— Clans in the birthplace of the Gods, in the three luminous realms of heaven.

अध्याय १२

श्लोक 57

समि॑तᳪ सं क॑ल्पेथा॒ᳪ संप्रि॑यौ रोचि॒ष्णू सु॑मन॒स्यमा॑नौ ।इष॒मूर्ज॑म॒भि सं॒वसा॑नौ

samita saṃ kalpethā saṃpriyau rociṣṇū sumanasyamānau | iṣamūrjamabhi saṃvasānau

हिन्दी अर्थ

हम प्रभु- स्तुति व ध्यान से अपने हदयों में प्रभु कौ प्रतिष्ठा करे, तव १. हम अक्षीणशक्ति बनेगे। २. हमारा ज्ञान बद्ेगा। ३. हम एक-से बहुत हो जार्णेगे अथवा प्रशंसात्मक कर्मो को ही करेगे। ४. ज्ञान के द्वारा अपने को वासनाओं के आक्रमण से सुरक्षित कर पारगे तथा ५. हमारे जीवनो मे सब वस्तुं सुन्दर ही -सुन्दर होगी।

English

Combine ye two and harmonize together, dear to each other, brilliant, friendly-minded, Abiding in one place for food and vigour.

अध्याय १२

श्लोक 58

सं वां॒ मना॑ᳪसि॒ सं व्र॒ता समु॑ चि॒त्तान्याक॑रम् ।अग्ने॑ पुरीष्याधि॒पा भ॑व॒ त्वं न॒ इष॒मूर्जं॒ यज॑मानाय धेहि

saṃ vāṃ manāsi saṃ vratā samu cittānyākaram | agne purīṣyādhipā bhava tvaṃ na iṣamūrjaṃ yajamānāya dhehi

हिन्दी अर्थ

-१. दुग्ध-सेवन हममे वाजो, बलों तथा वीर्य को धारण करता है। २. गोदुग्ध से शक्ति प्राप्त करके हम निरभिमान बने रहते है। ३. हमारी सर्वतोमुखी उन्नति होती हे। ४. हम अमृतत्व को प्राप्त करते ठेै। ५. हमारे मस्तिष्क की ज्ञानाग्नि तीव्र होती है ओर हम उत्तम ज्ञानों को प्राप्त करके प्रभु के उपासक बनते है।

English

Together have I brought your minds, your ordinances, and your thoughts. Be thou our Sovran Lord, Agni Purîshya; give food and vigour to the Sacrificer.

अध्याय १२

श्लोक 59

अग्ने॒ त्वं पु॑री॒ष्यो॒ रयि॒मान् पु॑ष्टि॒माँ२ अ॑सि ।शि॒वाः कृ॒त्वा दिश॒: सर्वा॒: स्वं योनि॑मि॒हाऽस॑दः

agne tvaṃ purīṣyo rayimān puṣṭimā~2 asi | śivāḥ kṛtvā diśa: sarvā: svaṃ yonimihā'sadaḥ

हिन्दी अर्थ

-सज्जन लोग ' यम-नियमों' को अपनाकर प्रभु-प्राप्ति के लिए अग्रसर होते अग्निः प्रियेषु धाम॑सु कामो भूतस्य भव्य॑स्य । सम्राडेको विरांजति ॥ १९१७॥ १. गत मन्त्र का विरूप' आराधक प्रभु को सारे संसार के रक्षक के रूपमे देखता हे, अतः वह ' प्रजापति ' हो जाता है। प्रजापति के रूप में यह प्रभु को देख रहा है। २. यह

English

Thou art Purîshya Agni, thou art wealthy, thou art prosperous. Having made all the regions blest, here seat thee in thine own abode.

अध्याय १२

श्लोक 60

भव॑तं न॒: सम॑नसौ॒ सचे॑तसावरे॒पसौ॑ ।मा य॒ज्ञᳪ हि॑ᳪसिष्टं॒ मा य॒ज्ञप॑तिं जातवेदसौ शि॒वौ भ॑वतम॒द्य न॑:

bhavataṃ na: samanasau sacetasāvarepasau | mā yajña hisiṣṭaṃ mā yajñapatiṃ jātavedasau śivau bhavatamadya na:

हिन्दी अर्थ

वे प्रभु अग्नि हें, प्रिय तेज को प्राप्त करनेवाले है, भूत-भव्य के सम्रार् हें, अद्वितीय है ओर प्रजापति हैँ सूर्य चन्द्रादि उसी के अनुशासन मे गति कर रहे हेै।

English

Be ye one-minded unto us, both of one thought, free from deceit. Harm not the sacrifice, harm not the Patron of the sacrifice. Be gracious unto us to-day, ye knowers of all things that be.

अध्याय १२

श्लोक 61

मा॒तेव॑ पु॒त्रं पृ॑थि॒वी पु॑री॒ष्य॒म॒ग्निᳪ स्वे योना॑वभारु॒खा ।तां विश्वै॑र्दे॒वैरृ॒तुभि॑: संविदा॒नः प्र॒जाप॑तिर्वि॒श्वक॑र्मा॒ वि मु॑ञ्चतु

māteva putraṃ pṛthivī purīṣyamagni sve yonāvabhārukhā | tāṃ viśvairdevairṛtubhi: saṃvidānaḥ prajāpatirviśvakarmā vi muñcatu

हिन्दी अर्थ

हम उत्तम अन्न के सेवन से उत्तम जीवनवाले बने। द्यावाक्षामा रुक्मोऽअन्तर्विभा॑ति देवाऽअग्निं धारयन् द्रविणोदाः ।॥ २॥ १. पिच्छले मन्त्र मे जीवन निर्माण करनेवाले आचार्य का उल्लेख था। प्रस्तुत मन्त्र में "माता-पिता' का प्रतिपादन है। "माता-पिता" नक्तोषासा=रात्रि व दिन के समान है

English

Even as a mother bears her son, Earth, Ukhâ hath borne within her womb Purîshya Agni. Maker of all, accordant with the All-Gods and Seasons, may Prajâpati release her.

अध्याय १२

श्लोक 62

असु॑न्वन्त॒मय॑जमानमिच्छ स्ते॒नस्ये॒त्यामन्वि॑हि॒ तस्क॑रस्य ।अ॒न्यम॒स्मदि॑च्छ॒ सा त॑ इ॒त्या नमो॑ देवि निरृते॒ तुभ्य॑मस्तु

asunvantamayajamānamiccha stenasyetyāmanvihi taskarasya | anyamasmadiccha sā ta ityā namo devi nirṛte tubhyamastu

हिन्दी अर्थ

माता-पिता व आचार्य बालक के जीवन को बडा सुन्दर बनाते है। माता-पिता इसे स्वास्थ्य धन ' प्राप्त कराते है तो आचार्य ' ज्लान-धन '। इन धनो को प्राप्त करके यह सचमुच कुत्स" होता है-रोगों व पापों कौ हिंसा करनेवाला। श्यावाश्व का विर्वरूप प्रतिमोचन

English

Seek him who pours not, offers not oblation; follow the going of the thief and robber. This is thy way; leave us and seek some other. To thee, O Goddess Nirriti, be homage.

अध्याय १२

श्लोक 63

नम॒: सु ते॑ निरृते तिग्मतेजोऽय॒स्मयं॒ वि चृ॑ता ब॒न्धमे॒तम् ।य॒मेन॒ त्वं य॒म्या सं॑विदा॒नोत्त॒मे ना॒के अधि॑ रोहयैनम्

nama: su te nirṛte tigmatejo'yasmayaṃ vi cṛtā bandhametam | yamena tvaṃ yamyā saṃvidānottame nāke adhi rohayainam

हिन्दी अर्थ

जीवन के एक-एक वर्ष मे, जीवन के एक-एक क्षण में प्रभु की समीपता को अनुभव करते हुए हम अपनी विनष्ट शक्ति को फिर से प्राप्त करें ओर धन प्राप्त करके १. है अग्ने=हमे आगे ले-चलनेवाले प्रभो! आपके आवर्तनों से- उपासन व ध्यान से आप हमें पुनः =फिर ऊर्जा=बल ओर प्राणशक्ति के साथ निवर््तस्वचप्राप्त होओ। आपके

English

To thee, sharp-pointed Nirriti, full homage! Loose and detach this iron bond that binds him. Unanimous with Yama and with Yamî to the sublimest vault of heaven uplift him.

अध्याय १२

श्लोक 64

यस्या॑स्ते घोर आ॒सञ्जु॒होम्ये॒षां ब॒न्धाना॑मव॒सर्ज॑नाय ।यां त्वा॒ जनो॒ भूमि॒रिति॑ प्र॒मन्द॑ते॒ निरृ॑तिं त्वा॒ऽहं परि॑वेद वि॒श्वत॑:

yasyāste ghora āsañjuhomyeṣāṃ bandhānāmavasarjanāya | yāṃ tvā jano bhūmiriti pramandate nirṛtiṃ tvā'haṃ pariveda viśvata:

हिन्दी अर्थ

प्रभु-कृपा से हम बल व प्राणशक्ति का लाभ करे। उत्कृष्ट प्रेरणा को प्राप्त कर ऊँचे जीवनवाले बनें। पापों से बचे रहे। ९. है अग्ने=प्रकाशमय प्रभो! रय्या सह त्दान देने योग्य घन के साथ निवर्तस्व हमें निश्चय से प्राप्त होओो। २. विश्वतस्परि सर्वतः सबकी रक्षा करनेवाली तथा विषवप्स््या

English

Thou, Awful One, thou in whose mouth I offer for the unloosing of these binding fetters, Whom people hail as Earth with their glad voices, as Nirriti in every place I know thee.

अध्याय १२

श्लोक 65

यं ते॑ दे॒वी निरृ॑तिराब॒बन्ध॒ पाशं॑ ग्री॒वास्व॑विचृ॒त्यम् ।तं ते॒ वि ष्या॒म्यायु॑षो॒ न मध्या॒दथै॒तं पि॒तुम॑द्धि॒ प्रसू॑तः । नमो॒ भूत्यै॒ येदं च॒कार॑

yaṃ te devī nirṛtirābabandha pāśaṃ grīvāsvavicṛtyam | taṃ te vi ṣyāmyāyuṣo na madhyādathaitaṃ pitumaddhi prasūtaḥ | namo bhūtyai yedaṃ cakāra

हिन्दी अर्थ

राजा चुना जाकर ध्ुवता से राज्य-कार्यो को करनेवाला हो। उसका कोई भी कार्य राज्य की अवनति का कारण न बने। उसके अहितकर कार्य ही उसे गदी से उत्तम राज्य में प्रजाः अपने जीवनो को उत्तम बना पाती है। वे सब व्यसनों के बन्धनो से ऊपर होती हैँ ओर इस प्रकार अपने जीवनों को सुखमय बना सकने के कारण

English

The binding noose which Nirriti the Goddess hath fastened on thy neck that none may loose it, I loose for thee as from the midst of Âyus. Sped forward now, eat thou the food we offer: To Fortune, her who hath done this, be homage.

अध्याय १२

श्लोक 66

नि॒वेश॑नः स॒ङ्गम॑नो॒ वसू॑नां॒ विश्वा॑ रू॒पाऽभि च॑ष्टे॒ शची॑भिः ।दे॒व इ॑व सवि॒ता स॒त्यध॒र्मेन्द्रो॒ न त॑स्थौ सम॒रे प॑थी॒नाम्

niveśanaḥ saṅgamano vasūnāṃ viśvā rūpā'bhi caṣṭe śacībhiḥ | deva iva savitā satyadharmendro na tasthau samare pathīnām

हिन्दी अर्थ

सर्वतोमुखी विकास, ओरों के घरों को भी अपना घर समञ्जना' यह त्रित के जीवन कौ हश्सः शुंचिषद्वसुरन्तरिश्षसन््ोतां वेदिषदतिंधिर्दुरोणासत् । १. वे प्रभु हंसः = (हन्ति पाप्मानं) पाप को नष्ट करते है । शुचिषत् पवित्र हदय में निवास करनेवाले हे। २. वसु :=सबको बसानेवाले है अन्तरिक्षसत् मध्यममार्गं में चलनेवाले

English

Establisher, the gatherer of treasures, he looks with might on every form and figure. Like Savitar the God whose laws are constant, like Indra, he hath stood where meet the pathways.

अध्याय १२

श्लोक 67

सीरा॑ युञ्जन्ति क॒वयो॑ यु॒गा वि त॑न्वते॒ पृथ॑क् ।धीरा॑ दे॒वेषु॑ सुम्न॒या

sīrā yuñjanti kavayo yugā vi tanvate pṛthak | dhīrā deveṣu sumnayā

हिन्दी अर्थ

मेरा जीवन वेदमय हो। वेदमाता का मै सुपुत्र बनूं। उसी के गोद मैं मेरा पालन व पोषण हो। मै अपनी तपस्या व ज्ञान से इसे प्रसन्न करनेवाला होऊ। तस्यास्त्वःहस्सा तपञ्जातंवेदः शिवो भ॑व ॥ ९६॥ १. है अग्नेउत्नतिशील त्रित! तू अन्तः=अपने दयाकाश में रुचा-ज्ञान की दीप्ति

English

Wise, through desire of bliss with Gods, the skilful bind the traces fast, and lay the yokes on either side.

अध्याय १२

श्लोक 68

यु॒नक्त॒ सीरा॒ वि यु॒गा त॑नुध्वं कृ॒ते योनौ॑ वपते॒ह बीज॑म् ।गि॒रा च॑ श्रु॒ष्टिः सभ॑रा॒ अस॑न्नो॒ नेदी॑य॒ इत्सृ॒ण्य॒: प॒क्वमेया॑त्

yunakta sīrā vi yugā tanudhvaṃ kṛte yonau vapateha bījam | girā ca śruṣṭiḥ sabharā asanno nedīya itsṛṇya: pakvameyāt

हिन्दी अर्थ

हे प्रभो! में ज्ञान. यज्ञ, स्वास्थ्य व धन प्राप्त करके कल्याणरूप बनू १. प्रभु त्रित से कहते है है अग्ने-उन्नतिशील त्रित (त्रीन् तरति=तीनों बन्धनो को तैर जानेवाले) शिवः भूत्वा=सबके लिए कल्याणकर होकर शिवः-कल्याणस्वरूप त्वम्तू अथ=अव उ=निश्चय से मह्यम्-मेरे लिए सीद =स्थित हो। इस अर्थ में निम्न बातें स्पष्ट

English

Lay on the yokes and fasten well the traces; formed is the furrow sow the seed within it. Through song may we find hearing fraught with plenty: near to the ripened grain approach the sickle.

अध्याय १२

श्लोक 69

शु॒नᳪ सु फाला॒ वि कृ॑षन्तु॒ भूमि॑ᳪ शु॒नं की॒नाशा॑ अ॒भि य॑न्तु वा॒हैः ।शुना॑सीरा ह॒विषा॒ तोश॑माना सुपिप्प॒ला ओष॑धीः कर्तना॒स्मै

śuna su phālā vi kṛṣantu bhūmi śunaṃ kīnāśā abhi yantu vāhaiḥ | śunāsīrā haviṣā tośamānā supippalā oṣadhīḥ kartanāsmai

हिन्दी अर्थ

त्रित सबका भला करता हुआ “शिव ' बनने का प्रयत्न करता है। ओरों को शिव बनाये विना हम शिव नहीं बन सकते। द्युलोक में, शरीर में, जलो में दिवस्परि प्रथमं जंज्ञेऽअग्निर स्मद् द्वितीयं परि जातवेंदाः।

English

Happily let the shares turn up the ploughland, happily go the ploughers with the oxen! Suna and Sîra, pleased with our oblation, cause ye our plants to bear abundant fruitage.

अध्याय १२

श्लोक 70

घृ॒तेन॒ सीता॒ मधु॑ना॒ सम॑ज्यतां॒ विश्वै॑र्दे॒वैरनु॑मता म॒रुद्भि॑: ।ऊर्ज॑स्वती॒ पय॑सा॒ पिन्व॑माना॒स्मान्त्सी॑ते॒ पय॑सा॒ऽभ्या व॑वृत्स्व

ghṛtena sītā madhunā samajyatāṃ viśvairdevairanumatā marudbhi: | ūrjasvatī payasā pinvamānāsmāntsīte payasā'bhyā vavṛtsva

हिन्दी अर्थ

हम अग्नि, विद्युत् व सूर्य" में प्रभु की दीप्ति को देखें। सर्वत्र उसी के तेज के प्रसार का अनुभव करें। बुद्धि के द्वारा हम प्रभु की कृतियों को देख, उसके यश को जानें ओर योग द्वारा उस ज्ञान के स्रोत को प्रवाहित कर सके जो हमें परमात्मा का १. है अग्ने=प्रकाशस्वरूप प्रभो! नृमणाः (नृषु मनो यस्य) मनुष्यों के हित की

English

Approved by Visvedevas and by Maruts, balmed be the furrow with sweet-flavoured fatness. Succulent, teeming with thy milky treasure, turn hitherward to us with milk, O Furrow.

अध्याय १२

श्लोक 71

लाङ्ग॑लं॒ पवी॑रवत्सु॒शेव॑ᳪ सोम॒पित्स॑रु ।तदुद्व॑पति॒ गामविं॑ प्रफ॒र्व्यं॒ च॒ पीव॑रीं प्र॒स्थाव॑द्रथ॒वाह॑णम्

lāṅgalaṃ pavīravatsuśeva somapitsaru | tadudvapati gāmaviṃ prapharvyaṃ ca pīvarīṃ prasthāvadrathavāhaṇam

हिन्दी अर्थ

वत्सप्री के जीवन का गुणाष्टक यह है दान, टृस्टीशिप की भावना, ज्ञान, वीर्यरक्षा, शक्ति व उत्तम निवास, नियमितता, दीप्ति तथा प्रभु-स्मरण। विश्व॑स्य केतुर्भुव॑नस्य गर्भंऽआ रोद॑सीऽअपृणाज्जाय॑मानः । १. यह वत्सप्रीःचप्रभु को अपने कर्मो से प्रीणित करनेवाला व्यक्ति विश्वस्य-सबका

English

The year together with the darksome fortnights; Dawn with the ruddy-coloured cows about her; the Asvins with their wonderful achievements; the Sun together with his dappled Courser; Vaisvânara with Idâ and with butter. Svâhâ!

अध्याय १२

श्लोक 72

कामं॑ कामदुघे धुक्ष्व मि॒त्राय॒ वरु॑णाय च ।इन्द्रा॑या॒श्विभ्यां॑ पू॒ष्णे प्र॒जाभ्य॒ ओष॑धीभ्यः

kāmaṃ kāmadughe dhukṣva mitrāya varuṇāya ca | indrāyāśvibhyāṃ pūṣṇe prajābhya oṣadhībhyaḥ

हिन्दी अर्थ

जिस आचार्य ने हमें वह ज्ञान प्राप्त कराया, जिससे हमारा जीवन निर्मल हो गया, उस आचार्य के चरणों में हमें यथाशक्ति भेट देनी चाहिए ओर सदा प्रभु का स्तवन करनेवाला बनना चाहिपए्। आ तं भ॑ज सौश्रवसेष्व॑गनऽउक्थऽ उक्थऽआआभ॑ज शस्यमाने ।

English

Milk out their wish, O Wishing-Cow, to Mitra and to Varuna, To Indra, to the Asvins, to Pûshan, to people and to plants.

अध्याय १२

श्लोक 73

वि मु॑च्यध्वमघ्न्या देवयाना॒ अग॑न्म॒ तम॑सस्पा॒रम॒स्य ।ज्योति॑रापाम

vi mucyadhvamaghnyā devayānā aganma tamasaspāramasya |jyotirāpāma

हिन्दी अर्थ

गुरु का आद्र व प्रभु-भक्तिवाले पुरुष के जीवन में १. लान का सूर्य चमकता है २. इसकी जीवनी-शक्ति बनी रहती है तथा ३. इसका वंश उज्ज्वल होता हे। यजुर्केदभाष्यम् ३६७ द्वादशोऽध्यायः विष्णु+लक्ष्मी, नकि केवल लक्ष्मी

English

Be loosed, inviolable, Godward-farers! We have attained the limit of this darkness: we have won the light.

अध्याय १२

श्लोक 74

स॒जूरब्दो॒ अय॑वोभिः स॒जूरु॒षा अरु॑णीभिः ।स॒जोष॑साव॒श्विना॒ दᳪसो॑भिः स॒जूः सूर॒ एत॑शेन स॒जूर्वै॑श्वान॒र इड॑या घृ॒तेन॒ स्वाहा॑

sajūrabdo ayavobhiḥ sajūruṣā aruṇībhiḥ | sajoṣasāvaśvinā dasobhiḥ sajūḥ sūra etaśena sajūrvaiśvānara iḍayā ghṛtena svāhā

हिन्दी अर्थ

नित्याभियुक्त पुरुष वसुओं-जीवन-धारण के लिए आवश्यक वस्तुओं को प्राप्त करता हे, क्योंकि यह लक्ष्मी को प्रभु के साथ ही चाहता है, अतः पापों में नहीं फैसता। अद्धेषे द्यावापृथिवी हवेम॒ देवां धत्त रयिमस्मे सुवीर॑म् ।॥ २९॥ वत्सप्री' कहता है कि १. ऋषिभिः तत्तवद्रष्टा लोगों से अग्निः=वह अग्रेणी प्रभु

English

Ye, Mothers, have a hundred homes, yea, and a thousand are your growths.

अध्याय १२

श्लोक 75

या ओष॑धी॒: पूर्वा॑ जा॒ता दे॒वेभ्य॑स्त्रियु॒गं पु॒रा ।मनै॒ नु ब॒भ्रूणा॑म॒हᳪ श॒तं धामा॑नि स॒प्त च॑

yā oṣadhī: pūrvā jātā devebhyastriyugaṃ purā | manai nu babhrūṇāmaha śataṃ dhāmāni sapta ca

हिन्दी अर्थ

१. ज्ान-दीप्ति से हम प्रभु की परिचर्या करे। २. नैर्मल्य से प्रभु के प्रकाश को देखें। ३. प्रभु-दर्शन करते हृए् सदा देकर खार्प-यक्षशेष का सेवन करे। उद्! त्वा विश्व देवाऽअग्ने भर॑न्तु चित्तिंभिः। स नो भव शिवस्त्वःसुप्रतीको विभावसुः ॥३९॥

English

Herbs that sprang up in time of old, three ages earlier than the Gods,— Of these, whose hue is brown, will I declare the hundred powers and seven.

अध्याय १२

श्लोक 76

श॒तं वो॑ अम्ब॒ धामा॑नि स॒हस्र॑मु॒त वो॒ रुह॑: ।अधा॑ शतक्रत्वो यू॒यमि॒मं मे॑ अग॒दं कृ॑त

śataṃ vo amba dhāmāni sahasramuta vo ruha: | adhā śatakratvo yūyamimaṃ me agadaṃ kṛta

हिन्दी अर्थ

हम उस प्रभु की वाणी को सुन, हममे विविध शक्तियों का विकास होगा अभि यः पूरू पृत॑नासु तस्थौ दीदाय हैव्योऽअत्तिंथिः शिवो न॑ः ॥३४॥ ९. पिछले मन्त्र में प्रभु की मेघ- गर्जना का उल्लेख भा। भरतस्य सारे ब्रह्माण्ड का भरण करनेवाले प्रभु की इस गर्जना को अयं अग्निः=यह उन्नतिशील जीव शृण्वे सुनता

English

Do ye who have a thousand powers free this my patient from disease.

अध्याय १२

श्लोक 77

ओष॑धी॒: प्रति॑ मोदध्वं॒ पुष्प॑वतीः प्र॒सूव॑रीः ।अश्वा॑ इव स॒जित्व॑रीर्वी॒रुध॑: पारयि॒ष्ण्व॒:

oṣadhī: prati modadhvaṃ puṣpavatīḥ prasūvarīḥ | aśvā iva sajitvarīrvīrudha: pārayiṣṇva:

हिन्दी अर्थ

प्रचारक ने स्वयं ज्ञानी, प्रभु-प्रेरणा को सुननेवाला, यज्ञ कौ वृत्तिवाला' बनना है। स्ानैश्वर्य प्राप्त करके ज्ञानैश्वर्यं को देनेवाला बनना है। प्रजाओं में सेद्ेष को दूर करके प्रेम का प्रसार ही इसका मुख्य ध्येय होना चाहिए्। हमारे सब कर्म लोकदहित के लिए पुन॑स्त्वा ऽऽदित्या सद्रा वस॑वः समिंन्धतां पुनं्ब्रह्याणो वसुनीथ यज्ञैः ।

English

Be glad and joyful in the Plants, both blossoming and bearing fruit, Plants that will lead us to success like mares who conquer in the race.

अध्याय १२

श्लोक 78

ओष॑धी॒रिति॑ मातर॒स्तद्वो॑ देवी॒रुप॑ ब्रुवे ।स॒नेय॒मश्वं॒ गां वास॑ आ॒त्मानं॒ तव॑ पूरुष

oṣadhīriti mātarastadvo devīrupa bruve | saneyamaśvaṃ gāṃ vāsa ātmānaṃ tava pūruṣa

हिन्दी अर्थ

१. ज्ानीपुरुष ज्ञानियों के सम्पर्क में आकर अपने ज्ञान को सदा बदाये, २. घृत आदि सात्त्विक वस्तुओं के प्रयोग से अपने शरीर व जीवन की वृद्धि करनेवाला हो तथा ३. यह कभी असत्य कामनाओं को करनेवाला न हो। १. गत मन्त्र की समाप्ति सत्याः सन्तु........कामाः' पर थी। हमारी इच्छार्णँ सत्य हों,

English

Plants, by this name I speak to you, Mothers, to you the Goddesses: Steed, cow, and garment may I win, win back thy very self, O man.

अध्याय १२

श्लोक 79

अ॒श्व॒त्थे वो॑ नि॒षद॑नं प॒र्णे वो॑ वस॒तिष्कृ॒ता ।गो॒भाज॒ इत्किला॑सथ॒ यत्स॒नव॑थ॒ पूरु॑षम्

aśvatthe vo niṣadanaṃ parṇe vo vasatiṣkṛtā | gobhāja itkilāsatha yatsanavatha pūruṣam

हिन्दी अर्थ

वनस्पतियों व जलो का सेवन मनुष्य के शरीर व मस्तिष्क दोनों को तेजस्वी बनाता है, उनके हृदयो को भी विशाल बनाता है। यह सात्विक भोजन वह दीप्ति देनेवाला है जो दीप्ति हमारे शरीर को तेजस्वी, क्रियामय व लोकहित-परायण बनाती हे। १. है अग्ने=प्रजाओं की उन्नति के साधक स्ानिन्! तू दिवः अर्णम्-मस्तिष्क के

English

The Holy Fig tree is your home, your mansion is the Parna tree: Winners of cattle shall ye be if ye regain for me this man.

अध्याय १२

श्लोक 80

यत्रौ॑षधीः स॒मग्म॑त॒ राजा॑न॒: समि॑ताविव ।विप्र॒: स उ॑च्यते भि॒षग्र॑क्षो॒हामी॑व॒चात॑नः

yatrauṣadhīḥ samagmata rājāna: samitāviva | vipra: sa ucyate bhiṣagrakṣohāmīvacātanaḥ

हिन्दी अर्थ

हमारा हदय प्रभु करे प्रकाशवाला हो। प्रभु का ज्ञान हमारे जीवनों को उन्नत करे। स्वयं उन्नत होकर हम ओरों कौ ज्ञान-सम्पत्ति को भी बढार्णँ। चिदसि तया देवतयाङ्गिरस्वद् श्चुवा सीद । परिचिद॑सि तयां देवत॑याङ्धिर स्वद् श्चुवा सीद ॥५३॥

English

He who hath store of Herbs at hand like Kings amid a crowd of men,— Physician is that sage's name, fiend-slayer, chaser of disease.

अध्याय १२

श्लोक 81

अ॒श्वा॒व॒तीᳪ सो॑माव॒तीमू॒र्जय॑न्ती॒मुदो॑जसम् ।आऽवि॑त्सि॒ सर्वा॒ ओष॑धीर॒स्मा अ॑रि॒ष्टता॑तये

aśvāvatī somāvatīmūrjayantīmudojasam | ā'vitsi sarvā oṣadhīrasmā ariṣṭatātaye

हिन्दी अर्थ

१. पल्ली घर में सभी को उत्तम भोजनादि व व्यवहार से तृप्त करनेवाली हो। २. दोषों का उद्घाटन न करती फिरे। ३. जितेन्द्रिय हो। ४. उन्नति कौ भावनावाली हो। तथा ५. ऊँचे-से-ऊँचे ज्ञान को प्राप्त करे। जन्मन्देवानां विशस्त्रिष्वा रोचने दिवः ॥५५॥

English

Herbs rich in Soma, rich in steeds, in nourishment in strengthening power, All these have I provided here, that this man may be whole again.

अध्याय १२

श्लोक 82

उच्छुष्मा॒ ओष॑धीनां॒ गावो॑ गो॒ष्ठादि॑वेरते ।धन॑ᳪ सनि॒ष्यन्ती॑नामा॒त्मानं॒ तव॑ पूरुष

ucchuṣmā oṣadhīnāṃ gāvo goṣṭhādiverate | dhana saniṣyantīnāmātmānaṃ tava pūruṣa

हिन्दी अर्थ

पली ने घर के कार्यो के साथ ज्ञान की ज्योति को प्रज्वलित करने का प्रयलल करना है। पल्ली पकाये, दृध दुहे ओर पदे। दिव्य सन्तानो के जन्म देने का यही उपाय है कि शरीर, मन व बुद्धि के विकास की ओर ध्यान दिया जाए्। मस्तिष्करूप द्युलोक को द्राद्ोऽध्यायः ३८२ यजुर्केदभाष्यम्

English

The healing virtues of the Plants stream forth like cattle from the stall,— Plants that shall win me store of wealth, and save thy vital breath, O man.

अध्याय १२

श्लोक 83

इ॒ष्कृ॑ति॒र्नाम॑ वो मा॒ताऽथो॑ यू॒यᳪ स्थ॒ निष्कृ॑तीः ।सी॒राः प॑त॒त्रिणी॑ स्थन॒ यदा॒मय॑ति॒ निष्कृ॑थ

iṣkṛtirnāma vo mātā'tho yūya stha niṣkṛtīḥ | sīrāḥ patatriṇī sthana yadāmayati niṣkṛtha

हिन्दी अर्थ

-“ मधुच्छन्दा "उत्तम इच्छाओंवाले पति-पल्ली १. मिलकर चलते है २. परस्पर प्रेमवाले होते है ३. शोभा देनेवाले कार्यो को ही करते है ४. उत्तम मनवाले होते हैँ ५. ८ का सेवन करते है अथवा प्रभु की प्रेरणा को सुनकर बल व प्राणशक्ति को धारण मनों, व्रतो व चित्तों की एकता

English

Reliever is your mother's name, and hence Restorers are ye called. Rivers are ye with wings that fly: keep far whatever brings disease.

अध्याय १२

श्लोक 84

अति॒ विश्वा॑: परि॒ष्ठा स्ते॒न इ॑व व्र॒जम॑क्रमुः ।ओष॑धी॒: प्राचु॑च्यवु॒र्यत्किं च॑ त॒न्वो रप॑:

ati viśvā: pariṣṭhā stena iva vrajamakramuḥ | oṣadhī: prācucyavuryatkiṃ ca tanvo rapa:

हिन्दी अर्थ

पती पति कौ आवश्यकताओं का पूर्ण ध्यान करे। पति स्वस्थ रहता हुआ ओर उचित धनार्जन करता हुआ पत्री पर घर की चिन्ता का भार न पड़ने दे। असुन्वन्तमय॑जमानमिच्छ स्तेनस्येत्यामन्विंहि तस्करस्य । अन्यमस्मदिच्छ सा त॑ऽ इत्या नमो देवि निऋते तुभ्य॑मस्तु ।।६२॥

English

Over all fences have they passed, as steals a thief into the fold. The Plants have driven from the frame whatever malady was there.

अध्याय १२

श्लोक 85

यदि॒मा वा॒जय॑न्न॒हमोष॑धी॒र्हस्त॑ आद॒धे ।आ॒त्मा यक्ष्म॑स्य नश्यति पु॒रा जी॑व॒गृभो॑ यथा

yadimā vājayannahamoṣadhīrhasta ādadhe | ātmā yakṣmasya naśyati purā jīvagṛbho yathā

हिन्दी अर्थ

दुर्गति के भागी वे होते है जो प्रभु का ध्यान नहीं करते, यज्ञशील नहीं होते, चोरी व डाका जिनका पेशा बन जाता हे। यमेन त्वं यम्या स॑विदानोत्तमे नाकोऽअधिं रोहयैनम् ॥६३॥ १. है त्तिग्मतेजः = तीव्र तेजवाली निकऋते-आपत्ते! हम ते= तेरे लिए सु=उत्तमता से

English

When, bringing back the vanished strength, I hold these herbs within my hand, The spirit of disease departs ere he can seize upon the life.

अध्याय १२

श्लोक 86

यस्यौ॑षधीः प्र॒सर्प॒थाङ्ग॑मङ्गं॒ परु॑ष्परुः ।ततो॒ यक्ष्मं॒ वि बा॑धध्व उ॒ग्रो म॑ध्यम॒शीरि॑व

yasyauṣadhīḥ prasarpathāṅgamaṅgaṃ paruṣparuḥ | tato yakṣmaṃ vi bādhadhva ugro madhyamaśīriva

हिन्दी अर्थ

प्रभु के दण्ड भी आदरणीय है। वे हमें विषयों के लोह-समान दुद बन्धनं से भी मुक्त करते हेँं। विषयों से मुक्त होकर संयमी जीवनवाले बनकर ही हम स्वर्ग के कष्ट का उदेश्य- बन्धावसर्जन यां त्वा जनो भूमिरिति प्रमन्द॑ते निऋतिं त्वाहं परि वेद विषशुवत॑ः ॥६४॥।

English

He through whose frame, O Plants, ye creep member by member, joint by joint, From him ye drive away disease like some strong arbiter of strife.

अध्याय १२

श्लोक 87

सा॒कं य॑क्ष्म॒ प्र प॑त॒ चाषे॑ण किकिदी॒विना॑ ।सा॒कं वात॑स्य॒ ध्राज्या॑ सा॒कं न॑श्य नि॒हाक॑या

sākaṃ yakṣma pra pata cāṣeṇa kikidīvinā | sākaṃ vātasya dhrājyā sākaṃ naśya nihākayā

हिन्दी अर्थ

हम सभी संसार को अपनी "यैं" मे समाविष्ट करनेवाले बनें। कामक्रोधादि को जीते ओर अपने पिता प्रभु के अनुरूप होने का प्रयल करे। सीरा युञ्जन्ति कवयो युगा वित॑न्वते पृथ॑क्। धीरां देवेषु सुम्नया ॥॥६७॥ ९. गत मन्त्र में प्रजञापूर्वक कर्मो से धनों के अर्जन का उल्लेख है। सबसे अधिक

English

Fly, Spirit of Disease, begone, with the blue jay and kingfisher. Fly, with the wind's impetuous speed, vanish together with the storm.

अध्याय १२

श्लोक 88

अ॒न्या वो॑ अ॒न्याम॑वत्व॒न्यान्यस्या॒ उपा॑वत ।ताः सर्वा॑: संविदा॒ना इ॒दं मे॒ प्राव॑ता॒ वच॑:

anyā vo anyāmavatvanyānyasyā upāvata | tāḥ sarvā: saṃvidānā idaṃ me prāvatā vaca:

हिन्दी अर्थ

खेती ज्लानपूर्वक करनी है। पौष्टिक अन्न ही उपजाने है। ' विश्वावसु" बनने ृषिः-कुमारहारितः। देवता- कृषीवलाः। छन्द :- त्रिष्टुप्। स्वरः-धैवतः।। शुनर्सु फाला वि कृषन्तु भूमिद्शुनं कीनाशांऽञओभि य॑न्तु वाहैः। शुनासीरा हविषा तोश॑माना सुपिप्पलाऽओष॑धीः कर््तनास्मे ।॥६९॥

English

Help every one the other, lend assistance each of you to each, All of you be accordant, give furtherance to this speech of mine.

अध्याय १२

श्लोक 89

याः फ॒लिनी॒र्या अ॑फ॒ला अ॑पु॒ष्पा याश्च॑ पु॒ष्पिणी॑: ।बृह॒स्पति॑प्रसूता॒स्ता नो॑ मुञ्च॒न्त्वᳪह॑सः

yāḥ phalinīryā aphalā apuṣpā yāśca puṣpiṇī: | bṛhaspatiprasūtāstā no muñcantvahasaḥ

हिन्दी अर्थ

हमारे हल सुफाल हों। हम बलों का उत्साह-वर्धन करे। अग्निहोत्र में उत्तम हवि दे। ये हवि तथा वायु ओर सूर्य हमारी कृषि को उत्तम फलवाला करे। घृतेन सीता मधुना सम॑ज्यतां विश्वै्देवैरनुंमता मरुद्धिंः । १. सीता=लाङ्गलपद्धति, हल कौ रेखा मधुना घृतेन=मधुर जल से समज्यताम्-ससिक्त

English

Let fruitful Plants, and fruitless, those that blossom, and the blossomless, Urged onward by Brihaspati, release us from our pain and grief;

अध्याय १२

श्लोक 90

मु॒ञ्चन्तु॑ मा शप॒थ्यादथो॑ वरु॒ण्या॒दु॒त ।अथो॑ य॒मस्य॒ पड्वी॑शा॒त्सर्व॑स्माद्देवकिल्बि॒षात्

muñcantu mā śapathyādatho varuṇyāduta | atho yamasya paḍvīśātsarvasmāddevakilbiṣāt

हिन्दी अर्थ

कृषि-कार्य मे ' स्नेह है, देष का अभाव है, एश्वर्य ओर प्राणापानशक्ति है तथा सव अद्धो का पोषण व सब शक्तियों का विकास है।' कृषि के द्वारा यह भूमि अन्धकार से प्रकाश की ओर वि मुंच्यध्वमघ्न्या देवयानाऽअग॑न्म तम॑सस्पारमस्य । ज्योतिंरापाम ॥७३॥

English

Release me from the curse's plague and woe that comes from Varuna; Free me from Yama's fetter, from sin and offence against the Gods.

अध्याय १२

श्लोक 91

अ॒व॒पत॑न्तीरवदन्दि॒व ओष॑धय॒स्परि॑ ।यं जी॒वम॒श्नवा॑महै॒ न स रि॑ष्याति॒ पूरु॑षः

avapatantīravadandiva oṣadhayaspari | yaṃ jīvamaśnavāmahai na sa riṣyāti pūruṣaḥ

हिन्दी अर्थ

ओषध्यो हमारी कमियों का फिर से पूरण करनेवाली हैँ। ये वसन्त, वर्षा व शरद् से कुक पहले प्रयोग में लानी चादिर्णं। उग्र व अङ्ग का ध्यान करके ही इनका व्रादखोऽध्यायः ३९४ यजुर्वेद भाव्यम् १- ओषधि्यां मातृतुल्य हित करनेवाली हँ, अतः कहते हैं कि अम्बे मातृभूत

English

What time, descending from the sky, the Plants flew earthward, thus they spake: No evil shall befall the man whom while he liveth we pervade.

अध्याय १२

श्लोक 92

या ओष॑धी॒: सोम॑राज्ञीर्ब॒ह्वीः श॒तवि॑चक्षणाः ।तासा॑मसि॒ त्वमु॑त्त॒मारं॒ कामा॑य॒ शᳪ हृ॒दे

yā oṣadhī: somarājñīrbahvīḥ śatavicakṣaṇāḥ | tāsāmasi tvamuttamāraṃ kāmāya śa hṛde

हिन्दी अर्थ

ये ओषधिययाँ माता है, देवी हैँ। इनकी कृपा से, अर्थात् इनके प्रयोग से स्वस्थ होकर हम घोड़ों, गौवों व वस्त्रों को पाते हँ। इनक शक्ति से हमारा शरीर हमारा ही बना रहता हे, अन्यथा इसपर रोगों का अधिकार हो जाता है। अश्वत्थ पर्ण में निवास

English

Of all the many Plants whose King is Soma, Plants of hundred forms, Thou art the Plant most excellent, prompt to the wish, sweet to the heart.

अध्याय १२

श्लोक 93

या ओष॑धी॒: सोम॑राज्ञी॒र्विष्ठि॑ताः पृथि॒वीमनु॑ ।बृह॒स्पति॑प्रसूता अस्यै॒ संद॑त्त वी॒र्य॒म्

yā oṣadhī: somarājñīrviṣṭhitāḥ pṛthivīmanu | bṛhaspatiprasūtā asyai saṃdatta vīryam

हिन्दी अर्थ

अग्निहोत्रादि यजो के होने पर वृष्टि-जल से उत्पन्न ओषधियाँ सचमुच पुरुष का उत्तम कल्याण करती है। १. गत मन्त्र कौ दिव्य ओषधियों के प्रयोक्ता वैद्य का लक्षण कहते है कि यत्र-जिस पुरुष में ओषधीः ओषधिययोँ समग्मत=व्याधियों के जीतने के लिए इस प्रकार इकट्ढी

English

O all ye various Herbs whose King is Soma, that o’erspread the earth, Urged onward by Brihaspati, combine your virtue in this Plant.

अध्याय १२

श्लोक 94

याश्चे॒दमु॑पशृ॒ण्वन्ति॒ याश्च॑ दू॒रं परा॑गताः ।सर्वा॑: सं॒गत्य॑ वीरुधोऽस्यै॒ संद॑त्त वी॒र्य॒म्

yāścedamupaśṛṇvanti yāśca dūraṃ parāgatāḥ | sarvā: saṃgatya vīrudho'syai saṃdatta vīryam

हिन्दी अर्थ

उत्तम वेद्य वह है जो ओषधियोँं के द्वारा रोगरूप शत्रुओं से युद्ध करके रोगो का नाश करता है ओर रोगी के शरीर मे आ गर्ह कमियों को दूर कर देता हेै। १. गत मन्त्र का वैद्य कहता है कि मै अश्वावतीम्-शक्ति देनेवाली ( अश्व ' शब्द् शक्ति का प्रतीक है), जो ओषधि मनुष्य को शक्ति-सम्पन्न बनाती है, उसको आवित्सि-अच्छी

English

All Plants that hear this speech, and those that have departed far away, Come all assembled and confer your healing power upon this Herb.

अध्याय १२

श्लोक 95

मा वो॑ रिषत् खनि॒ता यस्मै॑ चा॒हं खना॑मि वः ।द्वि॒पाच्चतु॑ष्पाद॒स्माक॒ᳪ सर्व॑मस्त्वनातु॒रम्

mā vo riṣat khanitā yasmai cāhaṃ khanāmi vaḥ | dvipāccatuṣpādasmāka sarvamastvanāturam

हिन्दी अर्थ

वेद्य सब ओषधियों को जाने ओर उनके ठीक प्रयोग से रोगी को सुखी १. पिचछले मन्त्र में वर्णित चार प्रकार की ओषधिरयाँ जब यथायथ वैद्य से प्रयुक्त होती है तब ओषधीनाम्=-इन ओषधियों के शुष्माः =रोग-शोषक बल उत् ईरते-इस प्रकार बाहर प्रकट होते है, इव =जैसे गावः गोष्ठात्-गोवें गोष्ठ से बाहर निकलकर प्रकट होती

English

Unharmed be he who digs you up, unharmed the man for whom I dig: And let no malady attack biped or quadruped of ours.

अध्याय १२

श्लोक 96

ओष॑धय॒: सम॑वदन्त॒ सोमे॑न स॒ह राज्ञा॑ ।यस्मै॑ कृ॒णोति॑ ब्राह्म॒णस्तᳪ रा॑जन् पारयामसि

oṣadhaya: samavadanta somena saha rājñā | yasmai kṛṇoti brāhmaṇasta rājan pārayāmasi

हिन्दी अर्थ

उत्तम भूमि में उत्पन्न ओषधिर्योँ रोग को नष्ट करनेवाली होती है। इसी से इन्हें ' निष्कृति" नाम दिया गया हे। ओषधि की गुणवत्ता के लिए उसके साथ पथ्य का रोग-हरण ( ज्चरचोरणा ), रोगरूप चोर का पलायन १. पिक्छले मन्त्र कौ ही भावना को कि ये ओषधि्याँ रोगों को निकाल देती हे,

English

With Soma as their Sovran Lord the Plants hold colloquy and say: O King, we save from death the man whose cure a Brâhman undertakes.

अध्याय १२

श्लोक 97

ना॒श॒यि॒त्री ब॒लास॒स्यार्श॑स उप॒चिता॑मसि ।अथो॑ श॒तस्य॒ यक्ष्मा॑णां पाका॒रोर॑सि॒ नाश॑नी

nāśayitrī balāsasyārśasa upacitāmasi | atho śatasya yakṣmāṇāṃ pākārorasi nāśanī

हिन्दी अर्थ

सद्वैद्य आया, उसने ओषध हाथ मेँ पकड़ी ओर रोगी का रोग भागा। सहैद्य वही है जो रोगी की आत्मा को जिलाकर रोग कौ आत्मा को मार देता है। १. वैद्य ओषधियों को सम्बोधित करके कहता है कि ओषधीः=हे ओषधियो! तुम यस्य=जिस रोगी के अङ्ग अङ्क अङ्क -अङ्ख मे परुष्परुः ओर पर्व -पर्व में प्रसर्पथजाती

English

Most excellent of all art thou, O Plant: thy vassals are the trees. Let him be subject to our power, the man who seeks to injure us.

अध्याय १२

श्लोक 98

त्वां ग॑न्ध॒र्वा अ॑खनँ॒स्त्वामिन्द्र॒स्त्वां बृह॒स्पति॑: ।त्वामो॑षधे॒ सोमो॒ राजा॑ वि॒द्वान् यक्ष्मा॑दमुच्यत

tvāṃ gandharvā akhana~stvāmindrastvāṃ bṛhaspati: | tvāmoṣadhe somo rājā vidvān yakṣmādamucyata

हिन्दी अर्थ

युक्ति से मिलाई हुई ओषधि्योँ रोगों को नष्ट करती है। एक-दूसरे के प्रभाव को वे समावस्था में ले-आती है। उनकी उग्रता रोग को समाप्त करती हुई भी रोगी करे लिए घातक नहीं रह जाती। ऋृषिः- भिषक्) देवत्ा- वेद्याः। छन्दः- विराडनुष्टुप्। स्वरः- गान्धार ः।।

English

Banisher of catarrh art thou, of tumours and of hemorrhoids; Thou banished Pâkâru and Consumption in a hundred forms.

अध्याय १२

श्लोक 99

सह॑स्व मे॒ अरा॑ती॒: सह॑स्व पृतनाय॒तः ।सह॑स्व॒ सर्वं॑ पा॒प्मान॒ᳪ सह॑मानास्योषधे

sahasva me arātī: sahasva pṛtanāyataḥ | sahasva sarvaṃ pāpmāna sahamānāsyoṣadhe

हिन्दी अर्थ

अथो यमस्य पडवींशात्सर्व'स्माद् देवकिल्विषात्।। ९०॥ १. उपर्युक्त मन्त्र में वर्णित ओषध्यो मा= मुञ्चे शपथ्यात्-क्रोध में आक्रोश (शप आक्रोशे) के कारण उत्पन्न हो जानेवाले पत्तिक विकारो रक्त दबाब (४।००५ -8507€) आदि से मुञ्चन्तु=मुक्त करे। पित्त विकारवाले को ही क्रोध अधिक होता है ओर उस क्रोध

English

Thee did Gandharvas dig from earth, thee Indra and Brihaspati. King Soma, knowing thee, O Plant, from his Consumption was made free.

अध्याय १२

श्लोक 100

दी॒र्घायु॑स्त ओषधे खनि॒ता यस्मै॑ च त्वा॒ खना॑म्य॒हम् ।अथो॒ त्वं दी॒र्घायु॑र्भू॒त्वा श॒तव॑ल्शा॒ विरो॑हतात्

dīrghāyusta oṣadhe khanitā yasmai ca tvā khanāmyaham | atho tvaṃ dīrghāyurbhūtvā śatavalśā virohatāt

हिन्दी अर्थ

ओषधियँ दिव्य है। वृष्टिजल से इनका उत्पादन हुआ है। ये यदि जीवित पुरुष तक पंच जारण तो फिर उसे जाने नहीं देती, उसे जिला ही देती हेै। तासांमसि त्वमुंत्तमार कामाय शदे ॥९२॥ १. ' वरुण! (वेद्य) रोग का निदान करके ओषधि का चुनाव (वरण) करता हआ

English

Conquer mine enemies, the men who challenge me do thou subdue. Conquer thou all unhappiness: victorious art thou, O Plant.

अध्याय १२

श्लोक 101

त्वमु॑त्त॒मास्यो॑षधे॒ तव॑ वृ॒क्षा उप॑स्तयः ।उप॑स्तिरस्तु॒ सोऽस्माकं॒ यो अ॒स्माँ२ अ॑भि॒दास॑ति

tvamuttamāsyoṣadhe tava vṛkṣā upastayaḥ | upastirastu so'smākaṃ yo asmā~2 abhidāsati

हिन्दी अर्थ

समीप व दूर स्थित सब ओषधि्योँ मिलकर इस रोगिणी स्त्री को शक्ति द्रादखोऽध्यायः अ. युर्वेदभाष्यम् १. है ओषधियो! (क) वः=आपका खनिता=खोदनेवाला मा रिषत्-मत हिंसित हो, अर्थात् तुम्हारे खोदने मे खोदनेवाले को इस प्रकार की चोट आदि न आए जो अन्ततः

English

Long-lived be he who digs thee, Plant, and he for whom I dig thee up. So mayst thou also, grown long-lived, rise upward with a hundred shoots.

अध्याय १२

श्लोक 102

मा मा॑ हिᳪसीज्जनि॒ता यः पृ॑थि॒व्या यो वा॒ दिव॑ᳪ स॒त्यध॑र्मा॒ व्यान॑ट् ।यश्चा॒पश्च॒न्द्राः प्र॑थ॒मो ज॒जान॒ कस्मै॑ दे॒वाय॑ ह॒विषा॑ विधेम

mā mā hisījjanitā yaḥ pṛthivyā yo vā diva satyadharmā vyānaṭ | yaścāpaścandrāḥ prathamo jajāna kasmai devāya haviṣā vidhema

हिन्दी अर्थ

उस-उस रोग के नाश करनेवाली ओषध को जानकर हम उस-उस रोग से मुक्त होने का प्रयलल करे। ९. है ओषधे! त्वाम्=तुञ्धे गन्धर्वाः गन्धर्वो ने अखनन्-खोदा है, इष्ट-कार्य की सिद्धि के लिए भूमि से प्राप्त किया हे। २. त्वाम् तुजे इन्द्रः=इन्द्र ने खोदा है। त्वाम् तुज

English

Most excellent of all art thou, O Plant; thy vassals are the trees. Let him be subject to our power, the man who seeks to injure us.

अध्याय १२

श्लोक 103

अ॒भ्या व॑र्तस्व पृथिवि य॒ज्ञेन॒ पय॑सा स॒ह ।व॒पां ते॑ अ॒ग्निरि॑षि॒तो अ॑रोहत्

abhyā vartasva pṛthivi yajñena payasā saha | vapāṃ te agniriṣito arohat

हिन्दी अर्थ

ओषध्यो शत्रुरूप रोगों को नष्ट करती है, उनपर आक्रमण करनेवाली सूचना- सम्भवतः “ अराति" शब्द बहुत न फौलनेवाले रोगों के लिए प्रयुक्त हुआ है ओर परतनायतः-फैलनेवाले (10५११८७) रोगों के लिए आया हे। दीर्घायुंस्तऽओषधे खनिता यस्मै च त्वा खनाम्यहम् ।

English

May he not harm me who is earth's begetter, nor he whose laws are faithful, sky's pervades; Nor he who first begot the lucid waters. To Ka the God let us present oblation.

अध्याय १२

श्लोक 104

अग्ने॒ यत्ते॑ शु॒क्रं यच्च॒न्द्रं यत्पू॒तं यच्च॑ य॒ज्ञिय॑म् ।तद्दे॒वेभ्यो॑ भरामसि

agne yatte śukraṃ yaccandraṃ yatpūtaṃ yacca yajñiyam | taddevebhyo bharāmasi

हिन्दी अर्थ

आओषधिर्याँ रोग-निवारण करनेवाली हैँ, परन्तु हमे विरोधी से कभी ओषध नहीं लेनी चाहिए, हितचिन्तक से ही ओषध का ग्रहण करे। सूचना- यहाँ मन्त्र के उत्तरार्धं में एेसा संकेत स्पष्ट है कि विरोधी व्यक्ति से ली गई ओषध गुणकारी न होकर हमारी समाप्ति ही कर देगी। हम सदा ओषध उसी वैद्य से

English

Turn thyself hitherward, O Earth, to us with sacrifice and milk. Thy covering skin Agni, urged forth, hath mounted.

अध्याय १२

श्लोक 105

इष॒मूर्ज॑म॒हमि॒त आद॑मृ॒तस्य॒ योनिं॑ महि॒षस्य॒ धारा॑म् ।आ मा॒ गोषु॑ विश॒त्वा त॒नूषु॒ जहा॑मि से॒दिमनि॑रा॒ममी॑वाम्

iṣamūrjamahamita ādamṛtasya yoniṃ mahiṣasya dhārām | ā mā goṣu viśatvā tanūṣu jahāmi sedimanirāmamīvām

हिन्दी अर्थ

वे प्रभु पृथिवी, द्युलोक, जल व चन्द्रादि के निर्माता हैं ये सब लोक हमारे कल्याण के लिए है। कल्याण तभी होगा जब हम दानपूर्वक खानेवाले बनें। एेसा बनने में ही सच्ची प्रभु-पूजा है। यज्ञ व पुथिवी की उत्पादन-शाक्ति

English

All, Agni, that in thee is bright, pure, cleansed, and meet for sacrifice, That do we bring unto the Gods.

अध्याय १२

श्लोक 106

अग्ने॒ तव॒ श्रवो॒ वयो॒ महि॑ भ्राजन्ते अ॒र्चयो॑ विभावसो ।बृह॑द्भानो॒ शव॑सा॒ वाज॑मु॒क्थ्यं दधा॑सि दा॒शुषे॑ कवे

agne tava śravo vayo mahi bhrājante arcayo vibhāvaso | bṛhadbhāno śavasā vājamukthyaṃ dadhāsi dāśuṣe kave

हिन्दी अर्थ

हम यज्ञ करे, बादल पृथिवी को सीचंगे ओर इस प्रकार यह यज्ञाग्नि पृथिवी की उत्पादनशक्ति को बद्धा देगी। अग्ने यत्ते शुक्रं यच्चन्द्रं यत्पूतं यच्च॑ यज्ञियम् । तदेवेभ्यो भरामसि ॥ १०४॥ १९. गत मन्त्र मेँ कहा है कि अग्नि पृथिवी की उत्पादनशक्ति को बदा देता है।

English

I from this place have fed on strength and vigour, the womb of holy Law, stream of the mighty. In cows let it possess me and in bodies. I quit decline and lack of food, and sickness.

अध्याय १२

श्लोक 107

पा॒व॒कव॑र्चाः शु॒क्रव॑र्चा॒ अनू॑नवर्चा॒ उदि॑यर्षि भा॒नुना॑ ।पु॒त्रो मा॒तरा॑ वि॒चर॒न्नुपा॑वसि पृ॒णक्षि॒ रोद॑सी उ॒भे

pāvakavarcāḥ śukravarcā anūnavarcā udiyarṣi bhānunā | putro mātarā vicarannupāvasi pṛṇakṣi rodasī ubhe

हिन्दी अर्थ

१. यज्ञ से वह अन्न-रस प्राप्त होता है जो ९. हमारे जीवन को व्यवस्थित = ऋतवाला करता है , २. यह हमें पूज्य प्रभु के प्रति ज्ुकाववाला करता है तथा उसकौ वाणी को समञ्जन के योग्य बनता है, ३. इससे हमारी इन्द्रिय -शक्तियों का विकास होता है ओर ५. हमारे शरीर अविकृत होते हे। ५. इन यज्ञो से हमारे घरों में अन्नाभाव दूर होता है ओर

English

Agni, life-power and fame are thine: thy fires blaze mightily, thou rich in wealth of beams! Sage, passing bright, thou givest to the worshipper, with strength, the food that merits laud.

अध्याय १२

श्लोक 108

ऊर्जो॑ नपाज्जातवेदः सुश॒स्तिभि॒र्मन्द॑स्व धी॒तिभि॑र्हि॒तः ।त्वे इष॒: सन्द॑धु॒र्भूरि॑वर्पसश्चि॒त्रोत॑यो वा॒मजा॑ताः

ūrjo napājjātavedaḥ suśastibhirmandasva dhītibhirhitaḥ | tve iṣa: sandadhurbhūrivarpasaścitrotayo vāmajātāḥ

हिन्दी अर्थ

पावकाग्नि के जीवन में माता-पिता कौ सेवा का प्रमुख स्थान हे। इसी क द्वारा वह प्रभु की सच्ची उपासना करता है , स्वस्थ शरीरवाला बनता है ओर उज्ज्वल रषिः पावकाग्निः। देवता-अग्निः। छन्द :-- निचृत्पङ्किः। स्वरः पञ्चमः।। पावकाग्नि का प्रभु-स्तवन

English

With brilliant, purifying sheen, with perfect sheen thou liftest up thyself in light. Thou, visiting both thy Mothers, aidest them as Son: thou joinest close the earth and heaven.

अध्याय १२

श्लोक 109

इ॒र॒ज्यन्न॑ग्ने प्रथयस्व ज॒न्तुभि॑र॒स्मे रायो॑ अमर्त्य ।स द॑र्श॒तस्य॒ वपु॑षो॒ वि रा॑जसि पृ॒णक्षि॑ सान॒सिं क्रतु॑म्

irajyannagne prathayasva jantubhirasme rāyo amartya | sa darśatasya vapuṣo vi rājasi pṛṇakṣi sānasiṃ kratum

हिन्दी अर्थ

हम अपने ईश्वर हों। प्राणिहित के उदेश्य से धनों का विनियोग करे। हमारे शरीर सुन्दर हों। उनमें “उपासना, प्रज्ञान व कर्म" का समुच्चय हो। इष्करत्तारमध्वरस्य प्रचेतसं क्षय॑न्तशराध॑सो म॒हः । १. पावकाग्नि प्रभु से प्रार्थना करता है कि-आप दधासि=धारण व पोषण करते हो।

English

O Jâtavedas, Son of Strength, rejoice thyself, gracious, in our fair hymns and songs. In thee are treasured various forms of strengthening food, born nobly and of wondrous help.

अध्याय १२

श्लोक 110

इ॒ष्क॒र्तार॑मध्व॒रस्य॒ प्रचे॑तसं॒ क्षय॑न्त॒ᳪ राध॑सो म॒हः ।रा॒तिं वा॒मस्य॑ सु॒भगां॑ म॒हीमिषं॒ दधा॑सि सान॒सिᳪ र॒यिम्

iṣkartāramadhvarasya pracetasaṃ kṣayanta rādhaso mahaḥ | rātiṃ vāmasya subhagāṃ mahīmiṣaṃ dadhāsi sānasi rayim

हिन्दी अर्थ

प्रभु ' यज्ञशील-ज्ञानी-सफलता के साधनाभूत धन के धारण करनेवाले, बल व प्रकाश के पुञ्ज ओर उत्तम वस्तुओं के दाता' का धारण करते है। इस पुरुष को प्रभु उत्तम एेश्वर्य के प्रापक तथा पूजा की वृत्ति के जनक" अन्न को देते हें तथा वह धन देते है जिसका वह दान करता है, जिसे बोँटकर खाता है।

English

Agni, spread forth, as Ruler, over living things: give wealth to us, Immortal God. Thou shinest out from beauty fair to look upon: thou leadest us to conquering power.

अध्याय १२

श्लोक 111

ऋ॒तावा॑नं महि॒षं वि॒श्वद॑र्शतम॒ग्निᳪ सु॒म्नाय॑ दधिरे पु॒रो जना॑: ।श्रुत्क॑र्णᳪ स॒प्रथ॑स्तमं त्वा गि॒रा दै॑व्यं॒ मानु॑षा यु॒गा

ṛtāvānaṃ mahiṣaṃ viśvadarśatamagni sumnāya dadhire puro janā: | śrutkarṇa saprathastamaṃ tvā girā daivyaṃ mānuṣā yugā

हिन्दी अर्थ

प्रभुशक्ति मनुष्य का वर्धन करनेवाली होती है। उसे सौम्य व सशक्त करती है। यह ज्ञानी बनकर त्यागशील होता है। १. है मेरे आराधक! तेतु पयांसि=दूध सम् यन्तु=उत्तमता से प्राप्त हों, अर्थात् तू गौ इत्यादि पशुओं के पालन के द्वारा उत्तम दूध प्राप्त करनेवाला बन। २. उ=ओर इस

English

To him, the wise, who orders sacrifice, who hath great riches under his control, Thou givest blest award of good, and plenteous food, givest him wealth that conquers all.

अध्याय १२

श्लोक 112

आ प्या॑यस्व॒ समे॑तु ते वि॒श्वत॑: सोम॒ वृष्ण्य॑म् ।भवा॒ वाज॑स्य सङ्ग॒थे

ā pyāyasva sametu te viśvata: soma vṛṣṇyam | bhavā vājasya saṅgathe

हिन्दी अर्थ

प्रभु अत्यन्त आनन्दमय हैँ, शान्त व शक्ति-सम्पन्न हे, अत्यन्त विस्तारवाले हैं, सभी के मित्रहै। मै भी ज्ञान प्राप्त करके एेसा ही बनने का प्रयल कर्ूं। अग्ने त्वां कामया गिरा ॥९९५५॥ १. पिछले मन्त्र की बातों को अपने जीवन में लाने के लिए "गोतम ' अपनी शक्ति

English

The men have set before them for their welfare Agni, strong, visible to all, the Holy. Thee, Godlike One, with ears to hear, most famous, men's generations magnify with praise-songs.

अध्याय १२

श्लोक 113

सं ते॒ पया॑ᳪसि॒ समु॑ यन्तु॒ वाजा॒: सं वृष्ण्या॑न्यभिमाति॒षाह॑: ।आ॒प्याय॑मानो अ॒मृता॑य सोम दि॒वि श्रवा॑ᳪस्युत्त॒मानि॑ धिष्व

saṃ te payāsi samu yantu vājā: saṃ vṛṣṇyānyabhimātiṣāha: | āpyāyamāno amṛtāya soma divi śravāsyuttamāni dhiṣva

हिन्दी अर्थ

में प्रभु का प्रिय बनूं। मेरा जीवन प्रभु का प्रतिपादन करनेवाला हो। मेँ मोक्ष की रट न लगाकर ज्ञान-प्राप्ति के लिए प्रभु को चादहूं। मेरा जान बद्देगा। यह सान ही तुभ्यं ताऽअंद्खिरस्तम् विश्वाः सुश्चितयः पृथ॑क् । अग्ने कामाय येमिरे ॥९९६॥ १. पिछले मन्त्र का अवत्सार प्रभु से ज्ञान प्राप्त करके विशिष्ट रूपवाला, ज्लान-ज्योति

English

Soma, wax great. From every side may vigorous powers unite in thee. Be in the gathering-place of strength.

अध्याय १२

श्लोक 114

आ प्या॑यस्व मदिन्तम॒ सोम॒ विश्वे॑भिर॒ᳪशुभि॑: ।भवा॑ नः स॒प्रथ॑स्तम॒: सखा॑ वृ॒धे

ā pyāyasva madintama soma viśvebhiraśubhi: | bhavā naḥ saprathastama: sakhā vṛdhe

हिन्दी अर्थ

में प्रभु का प्रिय बनूं। मेरा जीवन प्रभु का प्रतिपादन करनेवाला हो। मेँ मोक्ष की रट न लगाकर ज्ञान-प्राप्ति के लिए प्रभु को चादहूं। मेरा जान बद्देगा। यह सान ही तुभ्यं ताऽअंद्खिरस्तम् विश्वाः सुश्चितयः पृथ॑क् । अग्ने कामाय येमिरे ॥९९६॥ १. पिछले मन्त्र का अवत्सार प्रभु से ज्ञान प्राप्त करके विशिष्ट रूपवाला, ज्लान-ज्योति

English

In thee be juicy nutriments united, and power and mighty foe-subduing vigour. Waxing to immortality, O Soma, win highest glory for thyself in heaven.

अध्याय १२

श्लोक 115

आ ते॑ व॒त्सो मनो॑ यमत्पर॒माच्चि॑त्स॒धस्था॑त् ।अग्ने॒ त्वाङ्का॑मया गि॒रा

ā te vatso mano yamatparamāccitsadhasthāt | agne tvāṅkāmayā girā

हिन्दी अर्थ

में प्रभु का प्रिय बनूं। मेरा जीवन प्रभु का प्रतिपादन करनेवाला हो। मेँ मोक्ष की रट न लगाकर ज्ञान-प्राप्ति के लिए प्रभु को चादहूं। मेरा जान बद्देगा। यह सान ही तुभ्यं ताऽअंद्खिरस्तम् विश्वाः सुश्चितयः पृथ॑क् । अग्ने कामाय येमिरे ॥९९६॥ १. पिछले मन्त्र का अवत्सार प्रभु से ज्ञान प्राप्त करके विशिष्ट रूपवाला, ज्लान-ज्योति

English

Wax, O most gladdening Soma, great through all thy filaments, and be A friend of most illustrious fame to prosper us.

अध्याय १२

श्लोक 116

तुभ्यं॒ ता अ॑ङ्गिरस्तम॒ विश्वा॑: सुक्षि॒तय॒: पृथ॑क् ।अग्ने॒ कामा॑य येमिरे

tubhyaṃ tā aṅgirastama viśvā: sukṣitaya: pṛthak | agne kāmāya yemire

हिन्दी अर्थ

में प्रभु का प्रिय बनूं। मेरा जीवन प्रभु का प्रतिपादन करनेवाला हो। मेँ मोक्ष की रट न लगाकर ज्ञान-प्राप्ति के लिए प्रभु को चादहूं। मेरा जान बद्देगा। यह सान ही तुभ्यं ताऽअंद्खिरस्तम् विश्वाः सुश्चितयः पृथ॑क् । अग्ने कामाय येमिरे ॥९९६॥ १. पिछले मन्त्र का अवत्सार प्रभु से ज्ञान प्राप्त करके विशिष्ट रूपवाला, ज्लान-ज्योति

English

May Vatsa draw thy mind away, even from thy loftiest dwelling-place, Agni, with song that yearns for thee.

अध्याय १२

श्लोक 117

अ॒ग्निः प्रि॒येषु॒ धाम॑सु॒ कामो॑ भू॒तस्य॒ भव्य॑स्य ।स॒म्राडेको॒ वि रा॑जति

agniḥ priyeṣu dhāmasu kāmo bhūtasya bhavyasya | samrāḍeko vi rājati

हिन्दी अर्थ

में प्रभु का प्रिय बनूं। मेरा जीवन प्रभु का प्रतिपादन करनेवाला हो। मेँ मोक्ष की रट न लगाकर ज्ञान-प्राप्ति के लिए प्रभु को चादहूं। मेरा जान बद्देगा। यह सान ही तुभ्यं ताऽअंद्खिरस्तम् विश्वाः सुश्चितयः पृथ॑क् । अग्ने कामाय येमिरे ॥९९६॥ १. पिछले मन्त्र का अवत्सार प्रभु से ज्ञान प्राप्त करके विशिष्ट रूपवाला, ज्लान-ज्योति

English

Agni, best Angiras, to thee all people who have pleasant homes Apart have turned to gain their wish.

स्रोत: bhavykhatri/DharmicData · प्राप्त 3/6/2026

शास्त्रीय प्रामाणिकता एवं पारदर्शकताSources & Interpretation

स्रोत, संस्करण एवं व्याख्या वर्गीकरण

धर्म ग्रंथ पर मूल शास्त्र, पारंपरिक भाष्य और आधुनिक व्याख्या को पूर्णतः पृथक रखा जाता है ताकि पाठक को किसी भी व्याख्या के शास्त्र होने का भ्रम न हो।

सामग्री वर्गीकरण संकेत (Epistemic Content Labels)

६ स्तरिय प्रमाण व्यवस्था
मूल पाठOriginal text

अपौरुषेय / प्रामाणिक शास्त्र (Primary Canonical Scripture)

मूल संस्कृत, प्राकृत अथवा अवधी श्लोक/मंत्र। यह सर्वोच्च प्रमाण (प्रस्थान) है। इस पाठ में किसी भी आधुनिक व्याख्याकार का हस्तक्षेप नहीं है।

शाब्दिक अनुवादLiteral translation

पदार्थ व अन्वय (Direct Grammatical & Word-for-Word Meaning)

व्याकरणसम्मत प्रत्यक्ष शब्दार्थ (अन्वय)। बिना किसी दार्शनिक संप्रदाय के पूर्वाग्रह के, संस्कृत शब्दों का सटीक भाषांतर।

पारंपरिक भाष्यTraditional commentary

आचार्य परंपरा व टीका (Classical Lineage Commentary)

प्राचीन आचार्य परंपरा (यथा शंकराचार्य, रामानुजाचार्य, मध्वाचार्य, श्रीधर स्वामी) द्वारा विरचित शास्त्रीय भाष्य व टीकाएं।

सरल व्याख्याSimple explanation

भावार्थ व सुबोध प्रबोधन (Accessible Pedagogical Exposition)

आधुनिक जिज्ञासुओं के लिए सरल भाषा में भावार्थ। यह मूल मंत्र नहीं, बल्कि पाठ को सुगम बनाने हेतु संपादकीय व्याख्या है।

आधुनिक चिंतनModern reflection

समसामयिक विमर्श व अनुप्रयोग (Contemporary Application & Analysis)

दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक समरूपताओं पर आधुनिक चिंतन। यह मूल शास्त्र का अंग नहीं है और इसे शास्त्रोक्त सिद्धांत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

शोध टिप्पणीResearch note

पांडुलिपि एवं ऐतिहासिक शोध (Critical Apparatus & Manuscript Research)

पांडुलिपि विविधताएं, पाठ-भेद (variant readings), छंद रचना, और ऐतिहासिक व तुलनात्मक भाषावैज्ञानिक शोध। यह शास्त्र का मूल संदेश बदलने हेतु नहीं, बल्कि पाठ की प्रामाणिकता परखने के लिए है।

पहचानकर्ता:Yajur Veda — Chapter 12
संस्कृत संस्करण:Imported text; printed edition not recorded

Digitised text taken from the archive linked below. It has not been collated against a printed edition by this site.

पुरालेखागार / स्रोत:Open Sanskrit text archives (see the source link)
गणना पद्धति:

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